Incest मजबूरी या जरूरत - Page 6 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

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मोहिनी के अरमानों के पर लग चुके थे,,, कॉलेज में उसका मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था रात में जो कुछ भी हुआ था और सुबह जो उसकी प्रतिक्रिया के रूप में हुआ था उसे याद करके मोहिनी इस समय भी अपनी चूत से काम रस निकलता हुआ महसूस कर रही थी,,,, मोहिनी अपने बदन में तरो ताजगी महसूस कर रही थीऐसा लग रहा था कि जैसे उसके भाई ने उसकी खूबसूरत बदन को किसी केद से आजाद कर दिया हो,,,,, मोहिनी कॉलेज में अपनी क्लास में बैठे-बैठे यही सोच रही थी कि वह अपने भाई के बारे में इससे पहले इस तरह की ख्यालात नहीं रखती थी उसे ऐसा ही लगता था कि उसका भाई बहुत सीधा है लेकिन रात को जिस तरह से उसने अपनी मर्दानगी दिखाया था उसे देखकर मोहिनी पानी पानी हो गई थी,,,, मोहिनी के जीवन का सर्वप्रथम लंड के दर्शन करना उसकी भाई के ही बदौलत मुमकिन हुआ था वरना उसने अब तक लंड के आकार के बारे में किसी भी प्रकार की धारणा नहीं बांधी थी,,, लंड इतना मोटा तगड़ा होता है और चूत में जाकर जिस तरह की खलबली मच आता है उसका एहसास मोहिनी को पहली बार हो रहा था,,,, मोहिनी के जीवन की यह बेहद यादगार रात थी जिसे वह कभी भी नहीं भूलने वाली थी,,,संजू ने उसे जिस प्रकार का अद्भुत सुख दिया था उसे सुख के बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी इतना तो जानती ही थी कि लड़कियां जिस तरह से अपने बॉयफ्रेंड से चुदवाने के लिए आतुर रहती है उसे देखते हुए मोहिनी चाहती थी कि चुदवाने में बहुत मजा आता है,,, लेकिन इतना आत्मिक सुख‌ भी मिलता होगा इसे तो वह अनुभव करने के बाद ही समझ पाई थी,,। वह बार-बार अपनी सहेली रोहिणी की तरफ देख रही थी और मन ही मन में उसे ढेर सारी दुआएं भी दे रही थी क्योंकि जो कुछ भी मुमकिन हुआ था यह सब कुछ उसके ही बदौलत हुआ था अगर वह फ्रॉक के नीचे चड्डी ना पहन कर अपनी चूत दिखा कर लड़कों को अपने बस में करने का हुनर के बारे में ना बताती तो शायद मोहिनी आज अपने भाई से संभोग सुख की अद्भुत लीला नहीं रच पाती,,, यह सब उसकी सहेली के ही बदौलत मुमकिन हुआ था,,, अपनी सहेली की युक्ति को वह अपने भाई पर आजमा कर बनी मन बहुत खुश हो चुकी थी और अपनी जवानी का मजा भी लुट रही थी,,, अपनी सहेली की बात ना मानते हुए अगर वह अपने भाई को अपनी चूत के दर्शन ना कराती तो शायद वह अब तक कुंवारी ही रहती,,,,,,,,कॉलेज में बैठे बैठे अपने भाई के लंड के बारे में सोच रही थी कि अब तक उसने कभी भी एक जवान लंड को अपनी आंखों से नहीं देखी थी और उसकी सही साइज के बारे में भी नहीं जानती थी अपने भाई के लंड को देखने के बाद सही मायने में उसे लंड के असली भूगोल के बारे में पता चला था,,,,,,, मोहिनी की आंखों के सामने बद्री से नजर आ रहा था जब उसका भाई अपने लंड को उसकी चूत में डाल कर जोर जोर से कमर हिलाता हुआ उसे चोद रहा था,,, मोहिनी उस दृश्य को याद करके पानी पानी हो रही थी,,,, उसे इस बात का एहसास हुआ था कि चूत में चाहे जितना मोटा लंड हो प्रवेश कर ही जाता है क्योंकि अपने भाई के लंड की मोटाई को देखकर उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि वह अपने भाई के मोटे लंड को अपनी चूत में आराम से ले ले कि थोड़ा बहुत दर्द सहना पड़ा था लेकिन उसके बाद वह बड़े आराम से अपने भाई की मोटे तगड़े लंड को अपनी चूत की गहराई तक ले रही थी,,,,। मोहिनी अपने ख्यालों में खोई हुई थी कि तभी रिसेस की घंटी बज गई,,,, और तब जाकर मोहिनी की तंद्रा भंग हुई,,,,।

कॉलेज की कैंटीन में रोहिणी और मोहिनी दोनों कोने वाली टेबल पर बैठई हुई थी,,, रोहिणी में ही दो दो समोसे और कोका कोला का ऑर्डर दे दी थी,,,, ऑर्डर आने में कुछ समय की देरी थी इसलिए रोहिणी मुस्कुराते मोहिनी की तरफ देख कर बोली,,,।

और सुना मोहिनी क्या चल रहा है,,,?

वही जो पहले चल रहा था,,,

पढ़ाई पढ़ाई और बस पढ़ाई,,,(पेपर पर अपने दोनों हाथ रखते हुए रोहिणी बोली)

तो क्या यही सब तो जरूरी है,,,

अरे मेरी जान माना यह सब जरूरी है लेकिन हम जिससे उम्र के दौर से गुजर रहे हैं उसमें बहुत कुछ जरूरी हो जाता है बॉयफ्रेंड मस्ती घूमना मूवी देखना और फिर चुदाई,,,,आहहह इस उमर में यह सब नहीं करोगी तो कब करोगी,,,,

(चुदाई शब्द सुनते ही मोहिनी की आंखों के सामने फिर से रात वाला तेरे से नजर आने लगा था)

मुझे यह सब नहीं करना,,, तू तो हम लोगों की हालत अच्छी तरह से जानती है अगर मैं यह सब करने लगी तो अपनी मां के सपने कैसे पूरे करूंगी,,,,

अरे यार वह तो सब लड़कियां करना चाहती हैं लेकिन उसके साथ भी तो कुछ जरूरी है तू इतनी खूबसूरत है कि तो उधर एक इशारा कर दे तो शायद 10 लड़के तेरे पीछे लार टपका ते घूमते रहेंगे,,,(रानी की इस बात से मोहिनी पूरी तरह से सहमत थी इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था कि वह बहुत खूबसूरत थी)

मुझे इन सब बातों में बिल्कुल भी मजा नहीं आता,,,

धत् तेरी की यह तो वही हो गया,,, भैंस के आगे बीन बजाना तुझे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ने वाला,,,मैं तो तुझे तेरी खूबसूरती का फायदा उठाने के लिए बोल रही थी तेरी जैसी अगर मैं खूबसूरत होती तो अब तक तो तहलका मचा दी होती,,,

तू भी पागल है रोहीणी,,,

नहीं यार मैं सच कह रही हूं,,,

(इतने में वेटर समोसे और कोल्ड ड्रिंक लेकर आ गया और टेबल पर रख कर चला गया और सोनी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) अरे शाली तेरे गोरे गोरे गाल कितना तेरी चूत भी एकदम गोरी होगी मक्खन मलाई,,,

अरे कुछ तो शर्म कर,,(अपने आजू-बाजू नजर डालते हुए) कोई सुन लेगा तो हम लोगों के बारे में क्या सोचेगा,,,,

यही सोचेगा कि हम दोनों प्यासी हैं और अपनी चूत में एक अच्छा सा मोटा तगड़ा लंड लेना चाहती है,,,

(रोहीणी की बात सुनते ही शर्म के मारे मोहिनी के गाल लाल हो गए और वह समोसा उठा कर खाने लगी,,,, रोहिणी भी हंसते हुए समोसा उठा ली और उसे खाना शुरु कर दी मोहिनी उसकी फ्रॉक के नीचे चड्डी ना पहनने वाली युक्ति के बारे में पूछना चाहती थी कि उसकी युक्ति काम कि,या नहीं,,, लेकिन पूछने से शर्मा रही थी फिर भी हिम्मत करके वह धीरे से बोली,,,)

अच्छा वह तेरी आइडिया का क्या हुआ कुछ बात आगे बढ़ी कि नहीं,,,

कौन सी वह चड्डी ना पहनने वाली,,,

(मोहिनी समोसे को दांत से काटते हुए हां में सिर हिला दी,)

अरे वह तो बहुत काम कर गई,,, पता है तुझे उसने मुझे शॉपिंग भी कराया इधर उधर खूब घुमाया और फिर गेस्ट हाउस ‌भी लेकर गया,,,

गेस्ट हाउस,,,? गेस्ट हाउस महीना जहां पर ऑफिस की मीटिंग होती है,,,,(मोहिनी आश्चर्य जताते हुए बोली)

तू सच में एकदम बुद्धू है,,, गेस्ट हाउस में मीटिंग थोड़ी ना होती है गेस्ट हाउस घंटे के हिसाब से किराए पर मिलता है जिसमें कमरा होता है नरम नरम बिस्तर होता है ऐसी होती है,,, और वहां पर लड़के लड़कियों को चोदने के लिए ले जाते है,,,।

(रोहिणी की यह बात सुनते ही मोहिनी की आंखों के सामने वह दृश्य नाचने लगा जब वह अपनी आंखों से अपने पापा को एक लड़की के साथ गेस्ट हाउस के अंदर जाते हुए देखी थी,,, पल भर के लिए मोहिनी की आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा वह रोहिणी की बात को अच्छी तरह से समझ रही थी लेकिन फिर भी वह यकीन नहीं कर पा रही थी इसलिए वह फिर से बोली,,,)

मैं तेरी बात समझ नहीं रही हूं गेस्ट हाउस मतलब वही ना जो वहां किताब की दुकान है उसी रास्ते में पडती है,,,।

हां हां वहां तीन-चार गेस्ट हाउस है और हमेशा देखने गेस्ट हाउस के बाहर लड़कियां खड़ी रहती है सज धज कर,,,

(अब मोहिनी को सब कुछ समझ में आ गया था कि उसके पापा गेस्ट हाउस में लड़की को लेकर गए थे मीटिंग के लिए नहीं बल्कि उसे चोदने के लिए उसे सारा माजरा समझ में आने लगा था क्योंकि उसके पापा उसकी मम्मी से कतराने लगे हैं,,,, घर में पैसे क्यों नहीं दे रहे हैं सारे पैसे उनकी अय्याशी में जो खर्च हो जा रहे हैं,,,, इसका मतलब उस दिन उसके भाई ने उससे झूठ बोला था उसे सब कुछ पता था लेकिन जानबूझकर वहां शायद उसे बताना नहीं चाहता था वहीं कुछ देर तक किसी ख्यालों में खोई हुई लगी तो और बड़ी उसका हाथ पकड़ कर बोली,,,)

क्या हुआ किसके याद में खो गई कहीं तुझे भी तो नहीं गेस्ट हाउस जाना है,,,

ना बाबा गेस्ट हाउस तुझे ही मुबारक मतलब तूने भी वहां पर जाकर सारे क्रिया कर्म कर ही ली,,,

हां यार लेकिन सच में बहुत मजा आया,,, उसका ज्यादा मोटा तो नहीं था लेकिन मेरी चूत की बैंड बजा दिया 3 घंटे के लिए लिया था लेकिन इन 3 घंटों में उसने मुझे कपड़े पहनने ही नहीं दिया,,,।

(रोहिणी के मुंह से ज्यादा मोटा ‌शबद सुनकर मोहीनी की आंखों के सामने उसके भाई का खड़ा लंड नजर आने लगा जो कि ज्यादा मोटा था,,, रोहिणी की बातों को सुनकर मोहिनी बोली,,)

छी,,, कितनी गंदी है तू,,

अरे मुझे गंदी कह रही है एक बार अपनी चूत में किसी का लंड डलवा लेना तब देखना दिन-रात बस लेने का ही मन करेगा,,,

चल मेरा नहीं करने वाला,,,,(इतने में ही रिसेस पूरी होने की बेल बज गई और दोनों जल्दी-जल्दी समोसा खाकर वापस लेक्चर अटेंड करने के लिए चले गए लेकिन मोहिनी का मन अब बिल्कुल भी नहीं लग रहा था अपने पापा के चरित्र को लेकर उसे बहुत गुस्सा आ रहा था अब तो कुछ ऐसा ही लगता था कि उसके पापा शराब के नशे में सब कुछ करते हैं लेकिन अब उनका असली चेहरा मोहिनी को नजर आ गया था वह अपनी मां को सब कुछ बता देना चाहती थी लेकिन एक बार अपने भाई से बात कर लेना चाहती थी कि उसने उसे झूठ क्यों बोला था,,,,)

शाम को जब वह घर पहुंची तो संजू घर पर नहीं था इस बात से उसे गुस्सा आने लगा था क्योंकि घर पर पहुंचते ही ना जाने क्यों उसकी चूत में खुजली होने लगी थी और वह अपने भाई के लंड को एक बार फिर से अपनी चूत में देना चाहती थी लेकिन उसका भाई घर पर मौजूद ही नहीं थाउसकी मां को आने में अभी 1 घंटे का समय था इतने समय में तो वहां दोनों पूरी मस्ती कर लेते,,,, मोहिनी हाथ मुंह धो कर फ्रेश हो गई और चाय बनाने का की चाय‌वह अपने लिए ही नहीं बल्कि संजू और अपनी मां के लिए भी बना रही थी ताकि वह दोनों के आने पर सिर्फ गर्म करके दे दे,,,,।

कुर्सी पर बैठकर मोहिनी चाय की चुस्की रह रही थी और अपने पापा के बारे में सोच रही थी कि उसके पापा इतने चरित्रहीन हो गए हैं कि घर में इतनी खूबसूरत बीवी को छोड़कर बाहर बाजारू औरतों के साथ संबंध बना रहे और पैसे लुटा रहे हैं,,,,वह इस बारे में अपनी मां से बात करना चाहती थी ताकि कैसे उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,,

इन्हीं सब के बारे में सोचते सोचते धीरे-धीरे समय गुजर गया और उसकी मां ऑफिस से घर पर आ आ गई लेकिन अभी भी संजू घर पर वापस नहीं आया था संजू के ऊपर मोहिनी को बहुत गुस्सा आ रहा था,,, आराधना घर पहुंच कर हाथ मुंह धो कर फ्रेश हो रही थी कि तभी संजू भी आ गया,,, उसे तिरछी नजर से गुस्से में देखते हुए बोली अच्छा हुआ तुम दोनों आ गए वरना मुझे फिर से चाय गरम करनी पड़ती,,,।

(संजू मोनी की तरफ देख कर मुस्कुराया लेकिन मोहिनी गुस्से में थी और वह बनाकर रसोई घर में चली गई संजु को उसकी यह हरकत समझ में नहीं आई,, वह हाथ मुंह धो कर फ्रेश होने लगा थोड़ी ही देर में मोहिनी ने दोबारा उन लोगों के साथ चाय पीने लगी,,,। और जब तक खाना खा कर दोनों अपने कमरे में नहीं चले गए तब तक मोहिनी को संजू से पूछने का समय नहीं मिला था,,,, संजू से पूछने के लिए उसका मन व्याकुल हो जा रहा था और उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,, और संजू था कि मोहिनी को अपने हाथों से नंगी करके उसकी चूत का रस पीना चाहता था इसलिए उसे अपनी बांहों में भरकर उसके होंठों पर चुंबन करने के लिए जैसे ही अपने होंठ को आगे बढ़ाया मोहिनी उसे रोते हुए बोली,,,।
 
जबसे मोहिनी अपनी सहेली रोशनी के मुंह से गेस्ट हाउस वाली बात सुनी थी और गेस्ट हाउस में क्या होता है इस बारे में जानी थी तब से उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था मैं अपने भाई से पूछना चाहती थी कि क्या उसके पापा भी गेस्ट हाउस में उस लड़की के साथ गंदा काम कर रहे थे और वह उससे हकीकत क्यों छुपाया था,,,।

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मोहिनी भी अपने भाई से साथ चुदवाना चाहती थी,,, जिसके लिए वह खुद व्याकुल हुए जा रही थी क्योंकि मोहिनी अभी अभी पूरी तरह से जवान हुई थी और उसके बदन की भी कुछ जरूरतें थी जिसे पूरा करना बेहद जरूरी था और अपने बदन की जरूरतों को पूरा करने का रास्ता मोहिनी को मिल चुका था,, और वह जब चाहे तब अपने बदन की प्यास बुझा सकती थी,,, लेकिन उससे पहले उसे अपने सवालों का जवाब चाहिए था,,,,।

रात के 11:15 बज रहे थे आराधना अपने कमरे में थी और संजू और मोहिनी एक कमरे में आराधना सो रही थी या जाग रही थी इस बारे में दोनों को पता नहीं था संजू व्याकुल था अपनी बहन को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों का रस पीते हुए उसके बदन से एक एक करके सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करने के लिए,,, और मोहिनी बेकरार थी अपने सवालों का जवाब पाने के लिए कमरे में ट्यूबलाइट अभी भी चल रही थी शायद अधेरे से ज्यादा उजाले में काम क्रीड़ा करने में ज्यादा मजा आ रहा था,,,क्योंकि उजाले में दोनों एक दूसरे के बदन को उनके अंगों को एकदम साफ-साफ देख सकते रहे और वैसे भी मोहिनी पहली बार ही चुदवाई थी और वह भी ट्यूबलाइट के उजाले में इसलिए अंधेरे का अनुभव मोहिनी को बिल्कुल भी नहीं था लेकिन संजू को अंधेरे का अनुभव बराबर था क्योंकि इसी कमरे में अंधेरा करके और अंधेरे का फायदा उठाते हुए उसकी मौसी संजू के साथ शारीरिक संबंध बनाई थी और संजू भी अंधेरे में ही उसके अंगों को छूकर स्पर्श करके मसलकर टटोलकर पूरा मजा लिया था,,, एक तरह से संजू को लड़के से मर्द बनाने में पूरा हाथ उसकी मौसी का ही था,,,,, संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि कुछ ही देर में वह अपनी खूबसूरत बहन को अपनी बाहों में लेने वाला है इसीलिए वह मोहिनी की तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए बोला,,,।

एक ही रात में मोहिनी तू तो एकदम बदल गई,,,

मतलब,,,(तिरछी नजर से संजू की तरफ देखते हुए)

मतलब कि तेरे बदन से अब एकदम मादक खुशबू आने लगी है जो कि मुझे पागल बना रही है,,,

पहले नहीं आती थी क्या,,,!

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पहले का तो मुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम लेकिन कल रात से तेरी खूबसूरती तेरी जवानी का रस मेरे होठों पर लग चुका है दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की मेरी नजर में तू ही है,,,,।

(मोहिनी अपने भाई की बात सुनकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और इस बात से हैरान भी थी कि एक ही रात में उसका फाइनल आवेदन किया था क्योंकि इस तरह से उसने कभी भी बात नहीं किया था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखों के सामने कोई मूवी का हीरो बैठा हो और वह उसके साथ फ्लर्ट कर रहा है,,,, मोहिनी का कोई बॉयफ्रेंड नहीं था इसलिए मोहिनी अपने भाई को ही इस समय अपना बॉयफ्रेंड समझ रही थी इसलिए उसकी बातें और भी ज्यादा अच्छी लग रही थी,,,)

मतलब भाई एक रात में मैं तुझे सबसे खूबसूरत लगने लगी,,

नहीं-नहीं मोहिनी ऐसी बात नहीं है तो सच में बहुत खूबसूरत है लेकिन मैंने पहले कभी तुझे उस नजरिए से देखा ही नहीं था कल रात को मुझे पता चला कि मेरी बहन कितनी खूबसूरत है और मैं कितना भाग्यशाली हूं,,, की बेशक तेरे कॉलेज की लड़की तेरे पीछे दीवाने बनकर घूमते होंगे तुझे पाने की चाह रखते होंगे और सच कहूं अगर बुरा ना माने तो,,,

मैं बुरा नहीं मानूंगी,,,

देख नाराज मत होना मैं एक लड़का होने की हैसियत से तुझे लड़कों की आदत बताना चाहता हूं,,,

कोई बात नहीं भाई हम दोनों में किसी भी प्रकार का राज नहीं है और ना ही शर्म है इसलिए तु बता,,,

देख मोहीनी तू बहुत खूबसूरत है जवानी से भरी हुई है एकदम गोरी चिट्टी इसलिए लड़के तुझे पाने के लिए पागल होंगे मुझे पूरा विश्वास है होते हैं कि नहीं,,,(इस सवाल का जवाब ‌वह अपनी बहन के मुंह से सुनना चाहता था,, और मोहिनी भी ज्यादा नखरा ना दिखाते हुए हां में सिर हिला दी उसका जवाब सुनकर संजू के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

और सच कहूं तो लड़के तेरी लेने के लिए तड़पते होंगे,,,

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लेने के लिए क्या लेने के लिए मैं कुछ समझी नहीं,,,(मोहिनी सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनते हुए बोली)

मेरा मतलब है कि लड़के तुझे चोदने के लिए तड़पते होंगे और सही बताऊं तो तुझे देखकर वह लोग अपने मन में कल्पना करते होंगे कि कपड़े उतार कर तो नंगी होती होगी तब कैसी नजर आती होगी,,,, यही सोचकर अपने हाथ से मुठ मार कर अपना पानी निकाल देते होंगे,,,।

(अपने भाई की इस तरह की गंदी बातें सुनकर मोहिनी के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसकी चूत से काम रस झरने लगा था,,, वह जानबूझकर बोली,,)

मुठ,,, यह क्या होता है,,,,?

मुझे नहीं मालूम,,,

नहीं तो मुझे इस शब्द के बारे में बिल्कुल भी नहीं मालूम मैं तो पहली बार तुम्हारे मुंह से सुन रही हूं,,,

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अरे मेरी बुद्धू बहन एकदम जवान हो गई है लेकिन यह सब जानती ही नहीं है तभी तो और मुझे तेरे साथ मजा आता है,,, रुक तुझे करके बताता हूं,,,,

(और इतना कहने के साथ ही बैठे-बैठे संजू अपनी पेंट की चैन खोलकर उसमें मोहिनी की आंखों के सामने ही अपना अंगूठा और उंगली डालकर अपने लंड को पकड़ कर उसे बाहर निकाल लिया और हवा में लहराते हुए उसपर अपनी हथेली रखकर ऊपर नीचे करते हुए मुठ मारने लगा और बोला,,,) देख इसे कहते हैं मुठ मारना और तेरे कॉलेज के लड़के तेरे बारे में सोचकर गंदी-गंदी कल्पना करके इसी तरह से हिला हिला कर अपना पानी निकाल देते हैं,,,।

(मोहिनी तो अपनी भाई की हरकत देखकर पूरी तरह से उत्तेजित होने लगी उसकी चुत एकदम गीली हो रही थी जिस अदा से उसके भाई ने उसकी आंखों के सामने अपने पेंट की चैन खोलकर उसने अपनी उंगलियां डालकर अपने लंड को पकड़ कर बाहर निकाला था और उसे अपने हाथ से हिलाना शुरू किया था उसे देखकर मोहिनी के तन बदन में आग लगने लगी थी वह एकदम उत्तेजित हो गई थी उसका मन कर रहा था कि इसमें अपनी सलवार की डोरी खोल कर अपनी चूत को उसके लंड पर रख दे,,, लेकिन किसी तरह से वह अपने आप को संभाल कर रखी हुई थी और अपने भाई की बात को सुनकर वह हैरान होते हुए बोली,,,)

बाप रे क्या सच में लड़के ऐसा करते हैं मेरे बारे में सोच कर,,,

तो क्या तू है ही इतनी खूबसूरत है कि तेरी चूत की कल्पना करके ना जाने कितनों का पानी निकल जाता होगा और इसीलिए तो मैं अपने आप को भाग्यशाली समझता हूं कि जिसके बारे में कॉलेज के लड़के कल्पना करके अपना पानी निकालते हैं उसी लड़की को मैं चोदता हूं उसकी चूत का रस पीता हूं उसकी चूची को मुंह में लेकर दबा दबा कर पीता हूं सोच अब मुझसे ज्यादा भाग्यशाली और कौन होगा,,,।

सच में भाई तू जैसा बता रहा है तब तो तू सच में भाग्यशाली है लेकिन यह सब तुझे कैसे पता क्या तू भी मेरे बारे में या किसी और के बारे में कल्पना करके अपने हाथ से हीलाता है मेरा मतलब है कि मुट्ठ मारता है,,,।

(अपनी बहन के इस सवाल पर संजू थोड़ा शक पका गया लेकिन फिर अपने मन में सोचा कि अब अपनी बहन से शर्म करने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि दोनों के बीच रिश्तो की डोरी टूट चुकी थी मर्यादा की दीवार गिर चुकी थी उन दोनों के बीच भाई-बहन का नहीं बल्कि मर्द और औरत का रिश्ता कायम हो चुका था इसलिए संजू बोला,,,)

आराधन कपडे उतार कर नंगी होने क बाद

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देख यह तो प्राकृतिक तौर पर है मैं अगर मुट्ठ मार कर अपना पानी नहीं निकाल लूंगा तो अपने आप ही किसी ना किसी बहाने निकल ही जाएगा और सच कहूं तो जैसा कि सब लड़कों को खूबसूरत लड़कियां खूबसूरत औरत पसंद है उसी तरह से मैं भी उन्हें देखता हूं और कभी-कभी मुझे भी यह सब करना पड़ता है,,, तुझे भी तो करना होता होगा तेरी भी चूत तो लंड मांगती होगी तब तू अपनी चूत में उंगली डालकर अपना पानी निकालती होगी सच बताना,,,।

(अपने भाई के सवाल को सुनकर मोहिनी भी हैरान हो गई थी लेकिन वह भी हिम्मत दिखाते हुए बोली)

नहीं मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है मैंने आज तक इस तरह की हरकत नहीं कि मेरा मन हमेशा पढ़ाई में हीं लगा रहता था मेरी सहेलियां इस तरह की बातें करती थी लेकिन मैं कभी उन लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देती थी,,,(मोहिनी अपने भाई को हकीकत बताना नहीं चाहती थी कि पहली बार अपने भाई के लंड को अनजाने में ही देख ली थी और तब से उसकी चूत में कंपनी मची हुई थी और वह जानबूझकर बिना चड्डी के फ्रॉक पहन कर उसे ललचा रही थी,,,,)

इसका मतलब है मम्मी के यहां सब कुछ तेरे साथ पहली बार हो रहा है,,,

तो क्या भाई अगर तू मेरी चूत अपनी जीभ से नहीं चाहता होता तो शायद यह सब कभी नहीं होता ना जाने उस समय मुझे क्या हो गया तू अपनी जीभ से मुझे पागल कर दिया था,,,, और ना चाहते हुए भी मुझे सब कुछ करना पडा,,,

(यह सब सुनकर संजु को मजा आ रहा था और संजू अपनी बहन की बातें सुनकर उसकी आंखों के सामने ही अपने खाली लंड को मुठिया रहा था जिसे मोहिनी बार-बार चोर नजरों से देख ले रही थी,,,उसका मन से अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर हिलाने को कर रहा था लेकिन वह पहले अपने भाई से अपने सवाल का जवाब सुनना चाहती थी,,,, माहौल पूरी तरह से गरमा चुका थासंजू अपने लैंड को हिलाते हुए अपने होठों को मोहिनी के होठों के करीब ले जाने लगा तो मोहिनी उसके होठों पर अपनी हथेली रखकर उससे बोली,,,।

पहले भाई मेरे सवाल का जवाब दो,,,

कैसा सवाल,,,!(संजू आश्चर्य से बोला)

गेस्ट हाउस के बारे में,,,

गेस्ट हाउस के बारे में लेकिन क्या,,,?

यही कि पापा उस लड़की को गेस्ट हाउस में लेकर क्या करने के लिए गए थे,,,

(मोहिनी का यह सवाल सुनकर संजू एकदम से सकपका गयालेकिन जिस तरह से वहां पूछ रही थी संजीव को शक हो गया था कि गेस्ट हाउस के बारे में उसकी बहन को पता चल गया है इसलिए संजू मोहिनी से बोला,,,)

क्या करेगी जानकर,,,,

नहीं मैं जानना चाहती हूं,,,,,,

देख मोहिनीमैं तुझे बताना तो नहीं चाहता था लेकिन तू जिद कर रही हो तो मैं तुझे बता देता हूं कि पापा उस लड़की को देखा उसमें लेकर क्या करने के लिए गए थे,,, गेस्ट हाउस मेघंटे के हिसाब से कमरा किराए पर मिलता है जहां पर लड़के आदमी औरतों को पैसे देकर ले जाते हैं और वहां पर उनकी चुदाई करते हैं,,,,

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तो क्या पापा भी,,,?(मोहिनी आश्चर्य जताते हुए बोली,,)

हां मोहिनी पापा भी उस लड़की को गेस्ट हाउस चोदने के लिए लेकर गए थे,,,

तो तू मुझे उसी दिन क्यों नहीं बताया,,,,,

तब मुझे लगता था कि तुझे यह सब बताने लायक नहीं है,,

तो आज क्यों बता रहा है,,,

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क्योंकि एक ही रात में मैं समझ गया हूं कि तुझे सब कुछ बताने लायक है,,,,,, क्योंकि तू औरत और मर्द के बीच के रिश्ते को अच्छी तरह से समझने लगी है,,,,

मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि पापा इस तरह की हरकत करेंगे,,,

मुझे भी यकीन नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी मैंने देखा और तूने देखी सब कुछ अपने आंखों से,,,,,तब जाकर मुझे इस बात का एहसास हुआ कि घर में पैसे क्यों नहीं आ रहे हैं क्योंकि पापा अपनी पूरी तनख्वाह इन्हीं सभी गंदे कामों में लुटा रहे हैं और इसीलिए उन्हें मम्मी की जरूरत महसूस नहीं होती ,, क्योंकि वह रोज-रोज नई-नई बाजारू औरतों और लड़कियों के साथ मजे जो लूट रहे हैं,,,

(संजू की बातों को सुनकर मोहिनी विचार मगन हो गई थी वह किसी सोच में डूबी हुई थी और वह थोड़ी देर बाद बोली,,)

हमें मम्मी को सब कुछ बता देना चाहिए,,,

नहीं मानी ऐसी गलती कभी मत करना,,, मम्मी अगर यह जान जाएगी तो उन्हें बहुत दुख होगा,,,

लेकिन भाई एक ना एक दिन तो उन्हें पता चल ही जाएगा,,,

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जब पता चलेगा तब देखेंगे,,,, आओ हम दोनों अपनी रात हसीन करते हैं,,,(और इतना कहने के साथ ही समझे मोहिनी को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों का रस पीना शुरु कर दिया मोहिनी भी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी पल भर में उसके तन बदन में उत्तेजना के रूप में लगी और वह अपने आप ही अपने भाई के लंड पकड़ कर हीलाना शुरू कर दी,,,अपने भाई के मोटे तगड़े लंड को पकड़ कर मोहिनी को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि वह इतने मोटे लंबे तगड़े लंड को बड़े आराम से अपनी चूत में ले ली थी,,, संजू पागलों की तरह अपने बैंक के लाल लाल होठों के रस को पी रहा था और कुर्ती के ऊपर से अपनी बहन की नारंगी को पकड़कर दबा रहा था,,,, दोनों की सांसें पल भर में एकदम तेज चलने लगी,,,, संजू अपने लंड को अपनी बहन के हाथों में महसूस करते ही और ज्यादा उत्तेजित होने लगा और वह अगले ही पलअपनी बहन की कुर्ती को दोनों हाथों से पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा और मोहिनी भी अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ कर दी ताकि वह बड़े आराम से उसकी कुर्ति को उतार सकें,,, देखते ही देखते संजू अपनी बहन की कुर्ती को उतारकर बदन में रख दिया,,, कुर्ती के उतरते हैं संजू की आंखों के सामने गुलाबी रंग की ब्रा में अपनी बहन की दोनों नौरंगिया नजर आने लगी जिसे संजू अपने दोनों हाथों से पकड़कर दबाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा,,,,।

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मोहिनी अपने भाई की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी और अपने भाई की हरकत का पूरा मजा लूट रही थी मोहिनी तो खुद चाहती थी कि जल्दी से जल्दी उसका भाई उसे अपने हाथों से नंगी करके उसे चोदें,,,,, संजू अपनी बहन की गर्दन को चुमते हुएऔर उसकी चुचियों को ब्रा के ऊपर से दबाते हुए अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लेकर आया और उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा और कुछ ही सेकंड में वह अपनी बहन की ब्रा के हुक को खोल दिया जिससे ब्रा का कसाव दोनों संतरो पर कमजोर पड़ने लगा,,, और मोहिनी खुद अपनी ब्रा को अपनी बाहों से उतार कर एक बगल में रख दी,,, संजू अपनी बहन की तली हुई चुचियों को देखकर एकदम मदहोश होने लगा और चुचियों की शोभा बढ़ा रहे छोटी-छोटी किसमिस के दाने को संजू अपने दोनों हाथों की उंगलियों से पकड़कर हल्के से दबाते हुए बोला,,,।

सहहहहह ,,,, मोहिनी तेरी चूचियां बहुत खूबसूरत है रे कपड़ों के ऊपर से पता ही नहीं चलता था कि अंदर ही अंदर तेरी चूचियां इतनी खूबसूरत हो गई है,,,,,

आहहहह भाई धीरे से तू तो पागल हो जाता है,,,

क्या करूं मैंने तेरी खूबसूरती मुझे मदहोश कर देती है,,, पर यह तेरी चुचियां,,,(और इतना कहने के साथ ही संजु मोहिनी की चूची को अपने मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया,,, मोहिनी के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी मोहिनी को भी अपने भाई को इस तरह से चूची पिलाना बहुत आनंददायक लग रहा था,,, वह मदहोश होते अपनी आंखों को बंद करके अपना एक हाथ अपने भाई के सर पर रख कर उसे अपनी चूची पर दबाने लगी अपनी बहन की मदहोशी देखकर समझो बारी-बारी से अपनी बहन की दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया मैंने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह इस तरह से अपने भाई को अपना दूध पी लाएगी हालांकि,,, उसमें से अभी दूध निकलने की गुंजाइश नहीं थी लेकिन फिर भी एहसास वही होता था,,,।

आराधना

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मोहिनी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी वह वापस अपनी भांग के लंड को पकड़ कर ही लाना शुरू कर दी थी और गहरी गहरी सांसे ले रही थी,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे पंखा फूल स्पीड में चलने के बावजूद भी दोनों के माथे से पसीने की बूंदें टपक रही थी यह बोल दे जवानी की गर्मी थी जो पसीना बनकर दोनों के बदन से निकल रही थी,,,, संजू अपनी बहन के मुंह में अपना लंड देना चाहता था और मोहिनी भी यही चाहती थी अपने भाई के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसना क्योंकि उसे भी अपने भाई की लंड को चूसने में मजा आता है,,,।

अपनी बहन की चुचियों से जी भर कर खेलने के बाद संजू अपनी बहन की चूची से अलग हुआ और गहरी सांस लेते अपनी बहन की तरफ देखने लगा और खड़ा होता हुआ अपनी बहन से बोला,,,।

मोहिनी से लेकर अपनी सलवार खोल कर नंगी हो जा मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है,,,,

(मोहिनी को ऐसा था कि उसका भाई अब उसे चोदना चाहता है इसलिए वह भी तुरंत खड़ी हुई और अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी,,,संजू जी यह देखकर और ज्यादा उत्तेजित हो जा रहा था कि उसकी बहन अपने हाथों से अपनी सलवार उतार कर अपनी चूत को उसके आगे परोसना चाहती है,,, इसी से संजु अंदाजा लगा रहा था कि उसकी बहन को चूत में लंड लेने की कितनी तड़प है देखते ही देखते मोहिनी अपने हाथ से ही अपनी सलवार उतार कर फेंक दे और अपने भाई की आंखों के सामने लाल रंग की पैंटी में खड़ी हो गई गोरे बदन पर लाल रंग की पैंटी और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में मोहिनी का खूबसूरत बदन और भी ज्यादा चमक रहा था,,,पल भर में ही संजू अपने कपड़े उतारकर एकदम नंगा हो गया था दोनों भाई बहन इस समय एक दूसरे की आंखों के सामने एकदम नंगे खड़े थे मोहिनी के बदन पर केवल एक छोटी सी चड्डी थी जिसे उतारने का सुख संजू अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहता था,,और अपनी बहन के सामने घुटनों के बल बैठ कर दोनों हाथों से अपनी बहन की छोटी सी चड्डी को पकड़कर नीचे की तरफ खींच लिया और उसकी पानी से तरबतर चूत पर अपनी प्यासे होठों को रख कर चाटना शुरू कर दिया,,,अपनी भाई की हरकत पर मोहिनी पूरी तरह से तिलमिला गई वह मदहोश होने लगी और कस के अपने भाई के बालों को अपनी मुट्ठी में भींच ली और उसके होठों को और भी ज्यादाअपनी चूत पर दबाने लगी और अपनी दोनों टांगों को खोलने की कोशिश करने लगे लेकिन उसके घुटनों में अभी भी उसकी चड्डी फांसी हुई थी जिसे वह अपने पैर का सहारा लेकर धीरे-धीरे उसे अपने पैर से निकालकर एकदम मस्त होकर अपनी दोनों टांगों को फैला दी संजू भी अपनी बहन की गोल-गोल गांड को अपने दोनों हथेली में दबाकर उसकी चूत को चाटने लगा,,,,,, लेकिन संजू इस मजा को और भी ज्यादा दुगना करना चाहता था इसलिए तुरंत पीठ के बल लेट गया और अपनी बहन को उसकी गांड को अपने मुंह पर रखने के लिए बोला उसकी बहन भी पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी इसलिए अपने भाई की बात मानते हुए अपने दोनों घुटनों को उसके कंधे के इर्द-गिर्द रखकर अपनी गोल को निकाल को अपने भाई के चेहरे पर रख दी और संजू जल्द ही अपनी बहन के गुलाबी छेद को ढूंढ कर उसमें जीभ डाल दिया,,,,मोहिनी के तन बदन में आग लगी हुई थी वह गहरी गहरी सांस ले रही थी नीचे से संजू उसे पूरी तरह से मस्त किए जा रहा था वह उत्तेजना से सरोबोर होती चली जा रही थी,,,,मोहिनी को इस बात का एहसास हो रहा था कि मंजिल से ज्यादा मजा सफर में आता है और यही उसके साथ भी हो रहा था मोहिनी जल्द से जल्द अपने भाई के लैंड को अपनी चूत में लेकर छुड़वाना चाहती थी लेकिन चूत में लंड डालने से पहले उसका भाई जिस तरह की हरकत कर रहा था उसमें तो और भी ज्यादा मजा आ रहा था उसकी आंखों के सामने दोनों टांगों के बीच छत की तरफ संजू का लंड हवा में लहरा रहा था जिसे मोहिनी अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपने हाथ में थाम ली थी और उसे हिलाना शुरू कर दी थी,,,।

अर्धना का मादक बदन

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संजू चाहता था कि इसी अवस्था में उसकी बहन भी उसके लंड को अपने मुंह में लेकर उसकी चूसाई करें और इसीलिए संजू उसकी पीठ पर हाथ रखकर उसे आगे की तरफ झुकने के लिए दबाव दे रहा था देखते ही देखते मोहिनी अपने भाई की बात मानते हुए झुकती चली गई और ठीक उसकी आंखों के सामने उसके भाई का लंड लहराने लगा जिसे वह अभी भी अपने हाथ में पकड़ी हुई थी और वह तुरंत अपने भाई का इशारा समझते हुए उसे अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चाटना शुरू कर दी दोनों भाई बहन एक दूसरे के रंगों से अत्यधिक आनंद लेने की कोशिश कर रहे थे दोनों को मज़ा भी आ रहा था मोहिनी के लिए यह आसन बिल्कुल नया था और मोहिनी पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,,।

संजू अपनी कमर को नीचे से उछाल रहा था जिससे संजू का लंड मोहिनी के गले तक चला जा रहा थाहालात बद से बदतर हुए चले जा रहे थे मोहिनी की चूत बार-बार काम रस छोड़ रही थी जिससे संजू का पूरा चेहरा काम रस से डूबा हुआ नजर आ रहा था,,,मोहिनी अब जल्द से जल्द अपनी चूत में अपने भाई के लंड को ले लेना चाहती थी,,,, इसीलिए वहअपनी गोल-गोल कांड को अपनी भाई के चेहरे पर जोर जोर से रगड़ रही थी यह दर्शा रहा था कि उसे अपनी चूत में लंड लेना है और यही सही मौका भी था संजू के लिए अपनी बहन की चुदाई करने का,,,सेंटर समझ गया था कि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका है और उस पर अपने लंड का हथोड़ा मारना जरूरी हो चुका था इसलिए,,, वह मोहिनी को अपने ऊपर से उठने का इशारा किया और मोहिनी भी समझ गई कि अब मंजिल पर पहुंचने का समय आ गया है इसलिए वह भी अपने भाई के ऊपर से एकदम से उठ गई और बगल में बैठ गई,,,, संजू उठते हुए अपने लंड को पकड़ कर बोला,,,।

मोहिनी तू बहुत मस्त चुस्ती है,,,देख मेरा लंड और भी ज्यादा ताकतवर हो गया है अब देखना तेरी चूत में कितनी आराम से अंदर बाहर होते हुए तेरी चूत का भोसड़ा बनाता है,,,।

ना भाई ऐसा बिल्कुल भी मत करना वरना शादी के बाद सुहागरात को मेरा पति मेरी चूत देखकर ही बेहोश हो जाएगा,,,,।

(इतना सुनते ही संजू मुस्कुरा दिया मोहिनी भी मुस्कुरा रही थी वह पीठ के बल लेट नहीं लगी और संजू अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच जगह बनाते हुए बोला)

तू चिंता मत कर मोहिनी तेरी चूत को और भी ज्यादा मस्त बना दूंगा ताकि सुहागरात को चेक तेरा पति तेरी चूत में डालें तो एकदम मस्त होकर पहले झटके में ही पानी फेंक दें,,,

यह क्या कह रहा है भाई तुम मुझे आशीर्वाद दे रहा है या शराब दे रहा है पहले झटके नहीं अगर का पानी निकल गया तो मैं क्या करूंगी मैं तो तड़पती रह जाऊंगी,,,

तू चिंता मत कर मैं हूं ना तेरी प्यास बुझाने के लिए,,,,

(इतना कहने के साथ ही समझो अपने लंड को अपनी बहन की गुलाबी चूत पर रख कर एक झटके में उसे अंदर डाल दिया जिससे मोहिनी के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई और संजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,, उत्तेजना के मारे मोहिनी का गला सूखने लगा,,, सूचियों का साइज नारंगी जितना था इसलिए छातियों पर जब जब धक्का लगता था तब वह हल्का सा लहरा उठता था,,, संजू को तुरंत अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी चूचियां याद आ गई जो कि उसकी हर एक धक्के पर पानी भरे गुब्बारे की तरह छतियो पर लौटने लगती थी,,,,। लेकिन मोहिनी की चुचियों में भी नशा भरा हुआ था जिसकी मदहोशी और खुमारी संजू की आंखों में साफ नजर आ रही थी,,, संजू का लंड चूत की अंदरूनी दीवारों पर रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था,,, और यही रगड़ मोहिनी को पागल बना रही थी उसे आनंदित कर रही थी यही एहसास उसे स्वर्ग का सुख प्रदान कर रही थी जिसके लिए वह ललाईत थी,, संजू का हर एक धक्का मोहिनी के तन बदन में अत्यधिक उत्तेजना का संचार कर रहा था,,,,,संजू गहरी गहरी सांस लेता हुआ अपनी बहन को चोद रहा था मोहिनी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसकी आंखें मदहोशी में बंद थी और वह मुंह से सांस लेते हुए अपने भाई से चुदवा रही थी,,,,,

ट्यूबलाइट की रोशनी में संजु को एकदम साफ नजर आ रहा था,, कि कैसे उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बहन की गुलाबी चुत में अंदर बाहर हो रहा है अपनी बहन की चूत में अपने लंड को अंदर बाहर होता हुआ देखकर संजू बोला,,,।

ओहहह मोहिनी तेरी चूत में देख कैसे मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा है,,, अपनी आंख और मोहिनी और देख अपनी आंखों से अपनी चुदाई होते हुए,,,, तू कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि मैं तेरी चूत में अपना लंड डालकर तेरी चुदाई करूंगा,,,

(संजू की मदमस्त बातों को सुनकर मोहिनी अपनी आंखों को खोलती और अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को थोड़ा उठाकर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच टीका दी,,, और अपनी आंखों से अद्भुत नजारे को देखने लगी अपनी चूत में अंदर-बाहर होते हुए अपने भाई के लंड को देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो गई और मदहोशी भरे स्वर में बोली,,,)

ओहहह मेरे भाई तू तो पूरा बहन चोर हो गया है,,,,आहहहह मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि मैं अपनी चूत में तेरे लंड को ले रही हूं,,,,आहहहहह आहहहहह जोर-जोर धक्के लगा,,,आहहहहह बहुत मजा आ रहा है भाई,,,,

सहहहहह आहहहहहहह,,,, सच में मोहीनी तेरी चूत मुझे बहुत अच्छी लगती है,,,,,आहहहहह बहुत प्यारी है तू,,,, तू भी बहुत प्यासी थी अच्छा हुआ तू मुझ से चुदवाने लगी वरना तू भी अपनी प्यास बुझाने के लिए बाहर कहीं मुंह मारती फिरती जैसा कि पापा,,,,

हां भाई ,,, मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि आप आ इस तरह की हरकत करते होंगे,,,

अरे मोहिनी,,,(जोर से धक्का लगाते हुए) तू नहीं जानती,,, मर्दों की फितरत यही होती है घर में इतनी खूबसूरत औरत होने के बावजूद भी पापा दूसरी औरतों के साथ गुलछर्रे उड़ा रहे हैं,,,

हां भाई,,,आहहहह धीरे से दबा,,,(संजू द्वारा जोर से चूची दबाने पर) मां कितनी खूबसूरत है फिर भी पापा बाहर मजे ले रहे है,,,।

हां मैंने देख मैं इस बात को समझता हूं तभी तो बाहर किसी और की चुदाई करने से अच्छा है मैं तेरी चुदाई कर रहा हूं,,,अगर मैं यही काम बाहर करता तो पैसे देने पड़ते अगर गर्लफ्रेंड होती तो उसको गिफ्ट लाकर देना पड़ता अलग से खर्चा लेकिन तेरे साथ चुदाई करने में बिल्कुल भी खर्चा नहीं है बस हम दोनों का मजा ही मजा है,,,।

हां भाई यह बात तो तू सही कह रहा है लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि हम दोनों का मन किया तो हम दोनों यह कर रहे हैं अगर मम्मी का भी तो मन करता होगा,,, वह क्या करती होगी,,,।

अब पता नहीं मम्मी दूसरी औरतों की तरह नहीं है मम्मी बहुत सीधी-सादी है इसलिए दूसरे मर्दों के बारे में सोचती नहीं होंगी लेकिन इतना तो मुझे पूरा यकीन है कि मम्मी का मन करता होगा तो वह अपनी उंगली से काम चला लेती होंगी,,,

उंगली से,,,(मोहिनी आश्चर्य से बोली,,,,चुदाई करते हुए अपनी मां का जिक्र आते ही संजू का जोश कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था वह अपनी बहन की चूत में जोर जोर से धक्के लगा रहा था और अपनी बहन को चोदते हुए बोला)

हारे,, उंगली से मम्मी अपनी गर्मी निकालने के लिए अपनी उंगली को अपनी चूत में डालकर हिलाती होगी,,,

यह क्या कह रहा है भाई,,,

हां मोहिनी,,(मोहिनी की चूची को दबाते हुए) सभी औरतें ऐसा ही करती हैं,,,

अगर कहीं मम्मी बाहर किसी और से संबंध बना ली तो,,,

नहीं नहीं नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता,,,

क्यों नहीं हो सकता भाई,,देख हम दोनों कभी सोचे थे कि इस तरह के संबंध हम दोनों के बीच बनेंगे लेकिन आज देख सब कुछ बदल गया है जरूरत के मुताबिक हम दोनों एक दूसरे का साथ दे रहे हैं,,,,

(अपनी बहन की बात सुनकर संजू का दिमाग घूम रहा था संजू के लिए यही मौका था जब अपने मन की बात हुआ है मोहिनी के सामने रखना चाहता था और वह भी एकदम अनजान बनता हुआ इसलिए वह जोश में भर कर अपनी बहन की चूत में जोर जोर से धक्के लगाते हुए बोला,,,)

मैं सोच रहा था मोहिनी कि जैसे कि मैं तो मेरी बहन है फिर भी मैं तेरी चुदाई कर रहा हूं तुझे भी जरूरत थी और मम्मी को भी जरूरत होगी अगर मैं मम्मी के साथ भी यही करु तो,,,

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता,,,

क्यों नहीं हो सकता हम दोनों के बीच तो हो गया ना,,,

नहीं संजू सोच कर हीं कितना गंदा लगता है,,,

हम दोनों के बीच में कुछ सोचकर गंदा ही लगता था ना लेकिन करने में कितना मजा आ रहा है,,,

मम्मी नहीं मानेगी,,,

अगर मम्मी की चूत में भी खुजली मचेगी तो जरुर मानेगी,,,

इसका मतलब है कि अब तु मम्मी को भी चोदेगा,,,

हां क्यों नहीं मम्मी को भी तो जरूरत पड़ती होगी पापा करो भैया तो तो देखे ही चुकी है बाहर मजा ले रहे हैं मम्मी की जरूरत कौन पूरी करेगा मुझे तो यह जिम्मेदारी लेना ही होगा,,, तुझे एतराज है क्या,,?

एतराज तो होना चाहिए लेकिन हम दोनों के बीच इस तरह का संबंध है एक न एक दिन मम्मी को पता चल ही जाएगा और हम दोनों के इस संबंध के बारे में मम्मी भी खामोश रहे इसलिए जरूरी है कि मम्मी के साथ भी तो संबंध बना ले तब हम तीनों मिलकर मजा लेंगे,,,

वाह मोहिनी तू तो एकदम चालाक हो गई रे,,, अपना राज भी राज बनाए रखना चाहती है,,,,

लेकिन यह सब होगा कैसे,,,?(मोहिनी अचरज भरे स्वर में बोली)

होगा जरूर होगा,,, लेकिन जब होगा तब देखा जाएगा अभी तो मैं अपने लंड को अपनी प्यारी बहन की चूत में डाल रहा हूं,,,,आहहहहह।

(दोनों पूरी तरह से मदहोश हो गए चुदाई के इस खेल में अपनी मां का जिक्र करते ही दोनों भाई बहन और ज्यादा उत्तेजना का अनुभव करने लगे थे,,, संजू अपनी बहन की चूत में धक्के पर धक्के लगा रहा था आप उसे और ज्यादा मजा आ रहा था और मोहिनी भी आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे देखते ही देखते दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी और कुछ ही धकको में दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,)
 
इसी तरह से दिन गुजरने लगे,,, संजू के तो हाथ में गुलाब जामुन लग गए थे वह रोज रात को अपना मुंह मीठा और खट्टा कर रहा था,,,, अपनी बहन की चूत का रस पीकर,, मोहिनी के बदन में और भी ज्यादा उठाव आने लगा था,,,मर्दाना हाथ मोहिनी के जिस्म पर पढ़ते ही उसका जिसमें फूल की तरह खीलने लगा था उसकी जवानी गदराने लगी थी,,, चुचीयों का उठाव और भी बेहतरीन होता जा रहा था गांड में चर्बी का भराव हो रहा था जिससे गांड का भूगोल पूरी तरह से बदलता हुआ नजर आ रहा था ऐसा लग रहा था कि मोहिनी के जिस्म पर बहार आ गई हो,,, और संजू इस मौसम का मजा रोज ले रहा था,,,, अपनी बहन की चूत पर पूरी तरह से कब्जा जमा देने के बाद उसकी नजर अपनी मां की दोनों टांगों के बीच थी असली सुख उसे अपनी मां की दोनों टांगों के बीच ही नजर आ रही थी,,, अपनी मौसी और अपनी बहन की जवानी का रस पीने के बाद,,, संजू अपनी मां की मदमस्त कर देने वाली जवानी का मधुर रस पीना चाहता था,,, जिसके बारे में वह अपनी मां के सामने अपनी मंशा भी बता चुका था लेकिन उसकी मां मां बेटे के पवित्र रिश्ते को तार-तार नहीं करना देना चाहती थी इसलिए अपनी भावनाओं पर अपनी उमंगों पर काबू कर के वह अपने बेटे को इनकार कर चुकी थी,,,,,,

लेकिन संजू अपने पिता की हरकत और अपनी मौसी की जरूरत और प्यास को देखकर इतना तो समझ ही गया था कि औरत और मर्द को समय-समय पर एक दूसरे की जरूरत पड़ती ही है और वह भी अपने बदन की प्यास बुझाने के लिए,,,,,,, इसलिए उसे इस बात का एहसास और विश्वास भी था की उसकी मां को भी एक मर्द की जरूरत कभी ना कभी तो पड़ेगी,,,ही,,,,,,, जैसे कि उसकी बहन और मौसी को पड़ी थी अगर औरतों को चुदवाने का शौक ना होता तो उसकी मौसी और उसकी बहन संजू के लिए अपनी दोनों टांगे ना खोल दी होती और यही पक्का विश्वास संजू को अपनी मंजिल तक पहुंचने का भरोसा दिला रहा था,,, और अपने बाप के रवैया और उसकी हरकत से संजीव पूरी तरह से वाकिफ हो चुका था इसलिए उसे पक्का यकीन था कि उसकी मां को भी चुदवाने की प्यास जरूर जागेगी आखिरकार उसकी मां अभी भी तो पूरी तरह से जवान ही थी जवानी की उमंग उसके बदन को भी चिकोटती होगी,,,,,,,।

आराधना अपना दर्द और अपनी व्याकुलता धीरे-धीरे अपने काम मैं व्यस्त रहकर भुलाने लगी,,,, अपने पति के रवैया से वह भी पूरी तरह से परेशान हो चुकी थी अब तो अशोक कभी कबार ही घर पर आता था ऐसा लगता था कि जैसे घर से उसका नाता ही टूट गया हो,,,, इसलिए आराधना जब ऑफिस पर नहीं होती थी तो घर पर अकेले पन में अपने आप को कोसती रहती थी,,,, ऐसा नहीं था कि अपने परिवारिक परेशानियों का दुख मोहिनी और संजू को बिल्कुल भी नहीं था उन दोनों को भी अपनी मां की और अपने परिवार की बहुत चिंता होती थी लेकिन दोनों ने अपनी चिंता को अपनी वासना की आग में जला दिया था दोनों एक दूसरे में खुश थे दोनों को बस रात होने का इंतजार रहता था जैसे ही खाना खाकर साफ सफाई करके आराधना अपने कमरे में जाति वैसे ही दोनों भाई बहन अपने कमरे में घुसते ही दरवाजे की सीट के नहीं बंद कर देते हैं और एक दूसरे के कपड़ों को अपने हाथों से उतार कर एक दूसरे के नंगे बदन से खेलना शुरू कर देते थे यह अब दोनों की दिनचर्या में शामिल हो चुका था,,,, संजू और मोहिनी दोनों आपस में इतना खुल चुके थे कि मानो कि जैसे वह दोनों भाई बहन ना होकर पति पत्नी हो,,,,अपनी मां की नजरों से छुप कर भी दोनों एक दूसरे के अंगों को पकड़ने और सहलाने का सुख प्राप्त कर ही लेते थे और इन दोनों की हरकतों पर अभी तक आराधना की नजर भी नहीं पढ़ी थी और ना ही उसे कभी इस बात का शक ही हुआ था कि संजू अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाता है जबकि उसे इस बात का एहसास होना चाहिए ताकि जब उसका बेटा एक मां होने के नाते उसके साथ भी शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा रखता था तो एक ही कमरे में वह अपनी बहन के साथ सोता था तो क्या अपनी बहन के साथ उसका मन नहीं करता होगा,,,,क्या हुआ रात को सोते समय अपनी बहन के साथ अपनी बहन के अंगों के साथ छेड़छाड़ नहीं करता होगा,,,, यह ख्याल आराधना के मन में कभी नहीं आया था,,,,,,, घर पर स्कूटी होने के नाते अब तो रविवार को दोनों भाई बहन घूमने निकल जाते थे और ऐसे घूमते थे कि मानों जैसे प्रेमी-प्रेमिका हो,,,, अपने बच्चों को देखकर आराधना अपने मन में इस बात से खुश हो जाती थी कि चलो उसकी जॉब के चलते उसके दोनों बच्चे खुश तो है पर उसे क्या मालूम था कि उसके दोनों बच्चे बच्चे नहीं रहे गए थे दोनों बड़े हो गए थे और आपस में मर्द और औरत का खेल खेलना शुरू कर दिए थे,,,,,,।

ऐसे ही एक दिन कॉलेज जाने के समय संजू नहा धोकर अपने कमरे में तैयार होकर अपने बाल को संवार रहा था तभी उसकी बहन मोहिनी बाथरूम से नहा धोकर बदन पर टावल लपेटकर अपनी मां की नजरों से बच कर सीधा अपने कमरे में घुस गई वह आज कपड़े बाथरुम में ले जाना भूल गई थी इसलिए इसी अवस्था में ही वह अपने कमरे में प्रवेश कर गई थी,,,और बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए अपने भाई की आंखों के सामने सुबह-सुबह ही अपने बदन से टावल हटाकर एक तरफ फेंक देी,, और नग्न अवस्था में ही अपने गीले बालों का जूड़ा खोलकर उसे दोनों हाथों में पकड़ कर जोर से दबाकर पानी को गाछते हुए संजू से बोली,,।

आज तो बाथरूम में कपड़े ले जाना ही खुल गई,,,,

(संजू जो कि बाल में कंघी कर रहा था वह अपनी बहन की तरफ देखा तो देखता ही रह गया उसकी आंखों के सामने उसकी बहन एकदम नंगी खड़ी थी,,, पूरी तरह से नंगी उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था ऐसा नहीं था कि संजू पहली बार अपनी बहन को नंगी देखना है लेकिन आज का माहौल कुछ और था सुबह का समय था और ऐसे में वहां अपनी बहन को कभी भी नग नाश्ता में देखा नहीं था लेकिन इस समय मोहिनी बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए सुबह-सुबह अपने बदन से टोवल को निकाल कर नीचे फेंक दी थीसंजू के मुंह में पानी आ गया वह अपनी बहन की चुचियों को देख रहा था जो कि इस समय संतरे के आकार से थोड़े बड़े हो चुके थे जिसके पीछे खुद संजू की मेहनत थी और उसकी मेहनत रंग ला रही थी अपनी बहन की मदमस्त कर देने वाली चुचियों पर नजर पड़ते ही वह बोला,)

वाह रे मोहिनी तेरी खूबसूरती तो बढ़ती जा रही है तेरी चुचिया कितनी बड़ी हो रही हैं,,,

यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है भाई तुम ही जोर जोर से दबा दबा कर पीते हो इसीलिए बड़ी हो रही है अरे मैं कितनी बार कहीं हूं कि मेरे होने वाले पति के लिए तो छोड़ दो,,,,

अरे पगली तुझे मैं तैयार करके तेरे ससुराल भेजूंगा ताकि जीजा जी को तेरे ऊपर ज्यादा मेहनत ना करना पड़े और पका हुआ फल खाने को मिले,,,,

हां हां,,,, अगर मेरे होने वाले पति देखो जरा भी शक हो गया ना कि पके हुए फल पर पहले से ही केमिकल लगा है तब तो हो मुझे घर से ही निकाल देगा,,,

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मेरी रानी,,,, भगवान से प्रार्थना करना कि तेरे पति का भी लंबा मोटा और ज्यादा देर तक टिकने वाला हो वरना तेरे बदन पर किया गया मेरा सारा मेहनत पानी में चला जाएगा और तुझे फिर से दौड़ कर मेरे पास ही आना पड़ेगा,,,

वह तो मैं तेरे पास ही आऊंगी भाई,,,, क्योंकि तेरे साथ मुझे बहुत मजा आता है,,,,(इतना कहते हुए मोहिनी अपने भाई की आंखों के सामने हीलाल रंग की पैंटी को अपने दोनों टांगों में डाल कर उसे ऊपर की तरफ चढाकर पहन ली,,, संजु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी नाश्ता करने से पहले वह अपनी बहन की चूत में से निकलने वाले रस को पीना चाहता था,,,, इसलिए वह अपनी बहन के करीब बढ़ने लगा और अपनी बहन की इजाजत लिए बिना ही अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपने दोनों हाथों से अपनी बहन की पेंटी को पकड़कर उसे नीचे सरकाने की कोशिश करने लगा तभी मोहिनी संजू के हाथ को पकड़कर हटाते हुए बोली,,,।

पागल हो गया क्या भाई कॉलेज जाने का समय हो रहा है किसी भी वक्त मम्मी इधर आ जाएगी मुझे कपड़े पहनने दे अगर मम्मी ने मुझे कमरे में इस हालत में देख लेना तो गजब हो जाएगा उसे हम दोनों के बीच क्या चल रहा है समझ में आ जाएगा फिर जो यह तो रोज रात को मेरी चुदाई करता है ना अब कर भी नहीं पाएगा क्योंकि फिर मम्मी मुझे अपने साथ सुलाने लगेगी,,,,,,

लेकिन तेरा नंगा जिस्म देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,

रुक उसका भी उपाय में करती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही मोहिनी जल्दी-जल्दी अपने बाकी के लिए भी कपड़े पहन कर तैयार हो गई,,,,)

क्या करेगी तु अपनी चूत दिखा कर तूने तो मेरा लंड खड़ा कर दी,,,अब,,,

अरे बताती हो ना भाई तू तो एकदम उतावला होता जा रहा है,,,,

(उत्तेजना के मारे संजू की हालत खराब हो रही थी गीले बदन में अपनी बहन के नंगे जिस्म को देखकर संजू की आंखों में वासना की चमक उभर आई थी,,,,इस बात का एहसास संजीव को अच्छी तरह से हो रहा था कि किसी भी नारी के नंगे बदन से जी भर कर खेलने के बाद भी उसे अलग अलग माहौल में लग्न अवस्था में देखा जाए तो मर्द पहले से भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव करता है और वही हालात इस समय संजू के थे,,, मोहिनी का नंगा बदन उसके जोश को दुगना कर रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि मोहिनी क्या करने वाली है संजू का तो मन इसी समय मोहिनी की चुदाई करने को लालायित था लेकिन मोहिनी के मन में कुछ और चल रहा था मोहिनी अपने गीले बालों को अपने हाथों से पकड़ कर उसका जुड़ा बना ली,,, और अपने भाई के सामने घुटनों के बल बैठकर उसके पेंट का बटन खोलने लगी संजू को समझते देर नहीं लगी किसकी बहन क्या करने वाली है,,,, अगले पल के बारे में सोच कर हीं संजू के तन बदन मेंसिहरन सी दौड़ने लगी और अगले ही पल मोहिनी अपनी उंगलियों का कमाल दिखाते हुए अपने भाई के लंड को बाहर निकाल ले वाकई में संजु का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था,,,यह देखकर मोहिनी को अपनी जवानी पर गर्व होने लगा कि वह किसी भी वक्त किसी भी मर्द का लंड खड़ा कर सकती हैं,,,,अपने भाई के खाने लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए मोहिनी बोली,,,।

बाप रे तू तो भाई एकदम तैयार हो गया है।

तो क्या मोहिनी बस सलवार खोल कर खड़ी हो जा 2 मिनट में सब कुछ हो जाएगा,,

और अगर मम्मी ने देख लिया ना तो काम तमाम भी हो जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही मोहिनी अपने लाल-लाल होठों को खोलकर अपने भाई के लंड को अपने मुंह में प्रवेश करा दी वह अपने भाई को ज्यादा बोलने का मौका नहीं देना चाहती थी और उसे लॉलीपॉप की तरह आगे पीछे करके चाटना शुरू कर दी यह अदा भी संजू को पूरी तरह से मदहोश किए जा रही थी संजू मदहोशी के आलम में अपनी आंखों को बंद कर लिया,,,,,,,एक तो जवानी से भरी हुई मोहिनी का भीगा बदन और भीगे बदन में से उठती उसकी मां तक खुशबू संजू को पूरी तरह से मदहोशी के आगोश में लिए जा रहा था,,,,, संजू के लिए इस समय यहां पर यह सुख स्वर्ग से भी ज्यादा आनंद ले रहा था इस पल के आगे संजू के लिए कुछ भी नहीं था आनंदमई पल उसने कभी नहीं दिया था,,,।

संजू का मोटा तगड़ा लंड मोहिनी के थुक के गीले पन को पाकर और भी ज्यादा टनटना गया था,,, मोहिनी को भी संजू का लंड अपने मुंह में फुलता हुआ महसूस हो रहा था,,,मोहिनी अपने भाई के लंड को मुंह में लेकर चूसते हुए उसके सुपाड़े के बारे में सोच रही थी,,,, बेकरी में कभी-कभार वह आते जाते सजा कर रखे गए क्रीम रोल को देखी थी जिसका मुंह एकदम संजू के लंड के सुपाड़े की तरह मोटा था,,, मोहिनी ने कभी बी बेकरी के उस क्रीम रोल को खाई नहीं थी उसका स्वाद नहीं लेती लेकिन इतना तो जानती थी कि,,, औरतों और लड़कियों के लिए मर्दों की क्रीम रोल से अच्छा और बेशकीमती दुनिया में और कोई क्रीम रोल नहीं है जिसे इस समय मोहिनी अपने मुंह में लेकर पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबकी चली जा रही थी,,,,, मोहिनी संपूर्ण रूप से अपने भाई के समुचे लंड को अपने गले की गहराई में उतार ले रही थी,,, यह मोहिनी की मोटे तगड़े लंड से गुस्ताखी थी जिसका खामियाजा उसे सांसो की गति में अवरोध के रूप में भुगतना पड़ रहा था,,,, मोहिनी की सांस अटक जा रही थी लेकिन लंड को चूसने में जो मजा आ रहा था उसके आगे यह तकलीफ बहुत छोटी सी थी मोहिनी खुद अपने मुंह को आगे पीछे करके संजू के लंड को अपने मुंह में ले रही थी अपने लाल-लाल होठों का छल्ला बनाकर अपने भाई को अपनी चूत का एहसास करा रही थी इस अहसास से संजू भी पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था,,,, जिस तरह से मोहिनी ने अपने होठों का कसाव अपने भाई के लंड पर बनाई हुई थी वह कसाव संजू को एकदम चूत की तरह मजा दे रहा था,,,,। सुबह-सुबह संजू आनंद के सागर में गोते लगा रहा था,,,।

अपने भाई के साथ जिस्मानी ताल्लुकात रखते रखते मोहिनी के अंदर संभोग को और भी ज्यादा रुचि कर बनाने के लिए एक रंडी पन का रवैया आ गया था जिसका वह अपने भाई पर पूरी तरह से आजमाइश कर दी थी और उस आजमाइश से संजु को मदहोश कर देने वाला सुख प्राप्त होता था,,,अपनी बहन के मुंह में लंड पेलते हुए संजू इस समय अपनी किस्मत पर गर्वित हो रहा था,,,अब वह धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके खिलाना शुरू कर दिया था एक तरह से संजू अपनी बहन के मुंह को उसकी चूत समझकर उसे चोद रहा था,,,, मोहिनी के द्वारा किए गए मुखमैथुन से संजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था,,,,,रसोई घर में उसकी मां उन दोनों के लिए नाश्ता तैयार कर रही थी उसे तो इस बात का आभास तक नहीं ताकि सुबह सुबह उसके दोनों बच्चे औरत और मर्द का खेल खेल रहे हैं,,,,,,

ओहहहहह मोहिनी तूने तो मुझे एकदम मस्त कर दी रे आहहहहह कसम से बहुत मजा आ रहा है,,,,ऊहहहहहह तेरी चूत से भी ज्यादा मजा तेरे मुंह में आ रहा है,,,,,आहहहहह तेरी जीभ अपना पूरा कमाल दिखा रही है,,,,आहहहहह मोहिनी तू बहुत मस्त है,,,,

(मोहिनी के मन में भी बहुत कुछ कहने को था लेकिन वहां मुंह में लंड लेने की वजह से कुछ भी बोल नहीं पा रही थी और अपने भाई को और ज्यादा मजा ले रही थी,,, अभी-अभी जिस पेंटी को मोहिनी ने पहनी थी वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,,, संजू घड़ी की तरफ देखा तो समय बहुत कम था वह अपनी कमर को रफ्तार से हिलाना शुरू कर दिया मानो कि जैसे वह उसकी चुदाई कर रहा हो,,,अपने भाई के तेजी धक्के से महीने को बिल्कुल भी ऐतराज नहीं था क्योंकि वह भी यही चाहती थी कि जल्द से जल्द वह अपने भाई का पानी निकाल दे,,,, देखते ही देखते संजू की सांसे तेजी से चलने लगी और वह अगले ही पल ,,,अपने लंड को बाहर खींचना चाहता था क्योंकि उसका पानी निकलने वाला था और इस बात का आभास मोहिनी को भी था लेकिन वह अपने भाई को कस के पकड़े रह गई और देखते ही देखते संजू की पिचकारी मोहिनी के गले में उतरने लगी,,, मोहिनी ने तब तक अपने भाई के लंड को बाहर नहीं निकाली जब तक की उसके लंड की हर एक बूंद को अपने गले के नीचे गटक ना ले गई,,,,,, अभी भी संजू का लंड मोहिनी के मुंह में था कि तभी रसोई घर में से आराधना की आवाज सुनाई दी लेकिन वह रसोई घर से बाहर आ रही थी वहउन दोनों के कमरे में ही आ रही थी उन दोनों को बुलाने के लिए क्योंकि नाश्ता तैयार हो चुका था,,,, अपनी मां के पायल और चूड़ियों की खनक की आवाज से उन दोनों को समझते थे नहीं लगेगी उनकी मां उनकी तरफ या रही है मोहिनी समय की नजाकत को समझते हुए,,,मोहिनी तुरंत अपने मुंह से अपने बॉयफ्रेंड को बाहर निकाल दी और वह तुरंत खड़ी होकर अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने लगी और अपने बाल को आईने में देखकर कंघी करने लगी,,,, जैसे ही उसकी मां दरवाजे पर पहुंची वैसे ही तुरंत संजू एक पल की भी देरी किए बिना ही दूसरी तरफ दरवाजे की तरफ मुंह करके खड़ा हो गया और तुरंत अपने कॉलेज का बैग उठाकर अपने घुटनों पर रखकर हल्के से झुक गया मानो कि जैसे कि वह बैग में से कुछ ढूंढ रहा है,,,, वह अपने लंड को अपने पेंट में डाल नहीं पाया था प्रिंट के बाहर अभी भी उसका लंड लटक रहा था जिस पर उसकी मां की नजर बिल्कुल भी नहीं पड़ी थी दरवाजे पर पहुंचकर आराधना को ऐसा ही लगा कि जैसे उसके दोनों बच्चे को ले जाने के लिए तैयार हो रहे हैं इसलिए वह बोली,,,,।

अभी तक तुम दोनों तैयार नहीं हुए,, जल्दी करो नाश्ता तैयार हो गया है,,,

बस 2 मिनट मम्मी,,,,

(और इतना कहने के साथ ही आराधना वापस रसोई घर की तरफ चली गई तब जाकर संजू की जान में जान आई और वहां मोहिनी की तरफ घूम कर बोला,,,)

देख मोहिनी लंड को पेंट में डालने का मौका तक नहीं मिला,,,

बाप रे तो कितना हरामी है भाई,,,(लंड की तरफ देखते हुए) अगर मम्मी देख लेती तो,,,

देख लेती तो अच्छा ही होता मेरे लंड की मोटाई और लंबाई देखकर मम्मी भी ईसे अपनी चूत में ले लेती,,,

(अपने भाई की बात सुनकर मोहिनी एकदम से गनगना गई और बोली,,)

धत्,,, भाई तू कितना गंदा बोलता है,,,

अरे गंदा नहीं सही बोलता हूं देखना अगर कोई और मजे लेने लगाना तो बदनामी हो जाएगी इसलिए मुझे ही ट्राई करना पड़ेगा,,,

तुझे तो मम्मी लात मार के बाहर निकाल देगी,,,

तूने मारी क्या मुझे लात बल्कि अपनी जरूरत के मुताबिक मेरे लिए अपनी दोनों टांग खोल दी,,,

(अपने भाई की यह बात सुनकर मोहिनी के गाल शर्म से लाल हो गए और वह संजू से बोली)

चल चल बात मत बना चल जल्दी से नाश्ता कर लेते हैं नहीं तो मम्मी फिर आ जाएगी,,,, और इसे (लंड की तरफ हाथ का इशारा करते हुए) अंदर तो कर ले,,,

अरे बाप रे मैं तो भूल ही गया,,,,( और इतना कहने के साथ ही संजू अपने लंड को वापस पेंट में डाल दिया कमरे से बाहर निकलते समय मोहिनी बोली,,,)

भाई तेरी वजह से मेरी पैंटी पूरी गीली हो गई,,,

अरे तो बदल लेना दूसरी पहन ले,,,

अब इतना समय नहीं है मेरे पास,,,(इतना कहने के साथ ही कमरे से बाहर निकल गई,,,, धीरे-धीरे समय गुजरता रहा और आराधना को जॉब करते 4 महीने का समय गुजर गया,,, अभी भी आराधना के जीवन में स्थिरता नहीं आई थी अशोक का रवैया उसी तरह से था अशोक घर पर आता जरूर था लेकिन घर पर रुकता नहीं था उसकी एक ही शर्त थी कि जब तक आराधना अपनी नौकरी नहीं छोड़ देती तब तक वह घर पर नहीं रुकेगा और आराधना जॉब छोड़ना नहीं चाहती थी क्योंकि इस जॉब से उसके परिवार की जरूरतें पूरी हो रही थी,,,, बात ज्यों की त्यों थी,,,, अशोक अपना अहंकार दिखा रहा था और आराधना अपनी जिंदगी की जरूरतें को प्राथमिकता दे रही थी जो कि जरूरी भी थी,,,

दूसरी तरफ साधना की चूत में खलबली मची हुई थी काफी दिनों से उसकी चूत में लंड नहीं किया था उसे संजू की याद आ रही थी और वह संजू के घर आराधना से मिलने के बहाने चल पड़ी थी लेकिन संजू के लिए एक अच्छी खासी थोड़ी बहुत आमदनी करने का प्रपोजल भी था,,,।
 
शनिवार के दिन शाम को साधना अपनी छोटी बहन आराधना के घर पहुंच गई,,, वह रात को रुकने के इरादे से ही घर पर आई थी,,,,,, क्योंकि महीनों गुजर गए थे उसने अपनी चूत में संजू के लंड को नहीं ली थी,,, अपनी चूत में‌वह संजू के लंड का सांचा बना चुकी थी,,, जबसे साधना संजू से चुदवाई थी तब से समझो उसके दिलो-दिमाग पर पूरी तरह से छा चुका था इस उम्र में भी संजू ने उसकी जमकर चुदाई किया था,,,,संजु पुरी थाना से जवान था और साधना एक उम्रदराज औरत थी लेकिन फिर भी अपने बदन का कसाव बरकरार रखे हुए थी,,,दो दो जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी चुदवाते समय जिस तरह से उसने संजू का साथ दी थी वह काबिले तारीफ थी,,,।

शाम ढलने लगी थी ,,, अंधेरा धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था,,, साधना अपनी छोटी बहन आराधना के घर पहुंचकर दरवाजे पर दस्तक दी,,,, मोहिनी जोकि अपनी मां के साथ खाना बनाने की तैयारी कर रही थी वह उठकर जाकर दरवाजा खोलने लगी,,, दरवाजा खोलते ही अपनी मौसी को देखते ही वहां एकदम खुश होते हुए जोर से बोली,,,।

अरे मौसी आप,,,,

(इतना सुनते ही संजू जो कि अपने कमरे में किताबों के पन्नों को पलट रहा था उसका लंड ठुनकी मारने लगा,,, वह तुरंत अपने कमरे से बाहर आकर देखा तो सच में दरवाजे पर मौसी करी थी साधना और संजू दोनों की मुझे आपस में टकराई और इशारों ही इशारों में कुछ बातें होने लगी,,,, संजू तुरंत आगे बढ़कर अपनी मौसी का हाथ पकड़ लिया और उसे अंदर की तरफ खींचते हुए बोला,,,)

आओ ना मौसी बाहर क्यों खड़ी हो,,,(अपनी मौसी का हाथ पकड़ने में भी उसे अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था ऐसा लग रहा था कि वह अपनी मौसी का केवल हाथ ही नहीं बल्कि उसके बदन को अपनी बाहों में भर रहा हो,,,,,,)

अरे आ रही हूं कितना उतावला हो जाता है तो,,,,

क्या करूं मौसी तुम जब भी आती हो मैं कितना खुश हो जाता हूं पता है,,,,(संजू के कहने का मतलब कुछ और था जो कि साधना उसके कहने का मतलब तो अच्छी तरह से समझ रही थी और हल्के हल्के मुस्कुराती रही थी इतने में रसोईघर से आराधना भी बाहर निकल कर आ गई और अपनी बड़ी बहन को देखकर खुश हो गई,,,)

अरे दीदी आप,,,,,,

क्यों नहीं आ सकती क्या,,,?

नहीं-नहीं दीदी आप ही का घर है जब मन करे तब आओ,,,

(मोहिनी जल्दी से अंदर से कुर्सी लेकर आ गई थी जिस पर साधना बैठते हुए बोली,,,)

मोहिनी जल्दी से एक गिलास पानी लेकर आ,,,

(मोहिनी झट से पानी लेने के लिए रसोई घर में चली गई,, कभी अपने साथ में लाई हुई थी के अंदर हाथ डालकर कुछ टटोलते हुए बोली,,,)

आज क्या बना रही है आराधना,,,

कुछ नहीं दीदी अभी कुछ सोची नहीं हूं,,,

चलो अच्छा ही है,,(थेली में से पनीर निकालते हुए,) मैं अपने साथ पनीर लेकर आई हूं आज पनीर की सब्जी पूरी और खीर बना दे,,,, तेरे घर आने का सबसे अच्छा बहाना यही रहता है,,,,

( अपनी बहन के हाथ में से पनीर का पैकेट लेते हुए आराधना बोली,,,)

अरे इसकी क्या जरूरत थी दीदी तुम तो मुझे शर्मिंदा कर रही हो,,,

अरे शर्मिंदा कैसा,,, यह भी तो मेरा अपना ही घर है,,,

इसमें कोई दो राय नहीं है दीदी,,,,

(तब तक मोहिनी पानी का गिलास लेकर आ गई और साथ में कुछ बिस्किट भी साधना मोहिनी के हाथ से पानी का गिलास लेकर एक बिस्किट लेकर खाने लगी और संजू की तरफ देखी तो उसकी नजरों को अपनी भारी भरकम चुचीयों की तरफ पाकर मन ही मन मुस्कुराने लगी,,,,,)

और संजू कैसा चल रहा है,,,

कुछ खास नहीं,,,,

पढ़ाई ठीक तो चल रही है ना,,,

हां पढ़ाई एकदम ठीक चल रही है,,(इतना कहते हुए अपनी मां और बहन दोनों की नजर से बचकर वह अपना एक हाथ अपने पेंट के आगे वाले भाग पर ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर ऊपर से ही दबा दिया यह वह साधना को दिखाने के लिए किया था,,, साधना संजू के इशारे को अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वह,,, अपनी साड़ी का पल्लू लेकर उसे हवा देते हुए बोली,,,)

अरे बहुत गर्मी है रे,,, जल्दी से मेरी गर्मी मिटा दे संजू पंखा चालू कर दे,,,,।

(संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मौसी कौनसी गर्मी मिटाने की बात कर रही है वह समझ गया था कि आज भी उसकी मौसी उससे चुदवाने के लिए आई थी और वह अपनी मौसी की बात सुनकर तुरंत स्विच ऑन कर दिया और पंखा चालू हो गया,,,, दोनों की डबल मीनिंग वाली बात को ना तो मोहिनी समझ पा रही थी और ना ही आराधना इसलिए दोनों को सहज ही लग रहा था,,,,)

अच्छा दीदी में जल्दी से खाना बना देती हूं,,,, आज तो रुकोगी ना,,,

हारे तभी तो आई हूं आज शनिवार है और कल रविवार छुट्टी का दिन आखिरकार मुझे भी तो अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक है,,,, वरना दिन भर घर का काम करते-करते तो जिंदगी गुजरते चली जा रही है,,,

(साधना की बात सुनकर आराधना अपने होठों पर नकली मुस्कान लाते हुए रसोई घर की तरफ जाने लगी और अपने मन में सोचने लगी कि उसकी दीदी जो कुछ भी कह रही थी एक दम सच कह रही थी,,,,,, आखिरकार हर एक इंसान को अपने लिए भी जीने का पूरा हक है,,, आराधना अपने आप को लेकर इस बात पर विचार विमर्श करने लगी कि आखिरकार वह कौन सी जिंदगी जी रही है अपने लिए तो वह जी ही नहीं रही है,,,। इतना सोचते हुए वह रसोई घर में पहुंच गई और खाना बनाने की तैयारी करने लगी,,, दूसरी तरफ संजू और मोहिनी दोनों अपनी मौसी के पास खड़े थे मोहिनी जो कि अभी तक अपनी मौसी के आने से खुश थी वही उसके दिमाग में तुरंत इस बात के लिए हैरानी हो गई कि उसकी मौसी के आने की वजह से अब हर रात को संजू से चुदवा नही पाएगी,,,, इसलिए मन ही मन वह दुखी होने लगी अब उसकी मौसी का घर पर आना उसे अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन कर भी क्या सकती थी अपने मन को वह यह सोच कर मना ले गई कि कौन सा मौसी बार-बार आती है एक ही रात की तो बात है और इतना विचार करके वह भी अपनी मां का हाथ बटीने लगी,,, मोहिनी और आराधना दोनों रसोई घर में खाना बना रहे थे बाहर कुर्सी पर साधना बैठी हुई थी और उसके पास संजू खड़ा था वह तो अपनी मां और अपनी बहन के जाने का इंतजार ही कर रहा था जैसे ही वह दोनों रसोई घर में खाना बनाने लगी वैसे ही संजीव तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से अपनी मौसी की चुची पकड़कर दबाने लगा,,,,।साधना संजू की इस हरकत के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इसलिए उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी और वह रसोई घर की तरफ चोर नजरों से देखते हुए धीरे से बोली,,,,।)

बाप रे कितना शैतान हो गया है तू छोड़ कोई देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,

कुछ गजब नहीं होगा मौसी और इतना कहने के साथ है कि नहीं खात ब्लाउज के अंदर डालकर ब्रा को अपनी उंगली से ऊपर की तरफ करके अपनी मौसी की नंगी चूची को पकड़कर दबा दिया,,,।

सहहहह ,,,,आहहहहह जरा भी सब्र नहीं है तुझे,,,

क्या करूं मौसी जब से तुम्हारी जवानी का रस मेरे होठों पर लगा है तब से यह प्यास बढ़ती ही जा रही है,,,

अरे वह तो ठीक है लेकिन हाथ निकाल अपना किसी ने देख लिया तो जानता है ना तु सब कुछ बंद हो जाएगा और बदनामी होगी सौ अलग,,,

मौसी तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी सहने के लिए तैयार हूं ऐसा कहते हो गए संजू अपना दूसरा हाथ भी अपनी मौसी के ब्लाउज में डाल दिया उसका बटन टूटते टूटते बचा,,,,

हाय दैया यह क्या कर रहा है रे मेरा ब्लाउज फाट डालेगा क्या निकाल अपना हाथ,,,,।

(संजू अपनी मौसी की बड़ी बड़ी चूचीयो का मजा लेना अच्छी तरह से जानता था और अपनी बहन की छोटी-छोटी नारंगी और अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चुचियों के बीच का अंतर अच्छी तरह से समझता था उसे अपनी मौसी की चूची दबाने में और ज्यादा मजा आता था,,,, इसलिए संजू जी भर कर अपनी मौसी की चूची दवा लेने के बाद अपने दोनों हाथों को वह ब्लाउज में से बाहर निकाल लिया,,, दोनों हाथ को ब्लाउज में डालने की वजह से ब्लाउज का बटन खींच सा गया था,,,, चूचियों को दबाते समय संजू का ध्यान ब्लाउज के बटन पर भी था वह जानता था कि अगर ऐसे हालात में ब्लाउज का बटन टूट गया तो गजब हो जाएगा,,,, इसलिए वह एकदम संभाल कर अपने दोनों हाथों को ब्लाउज में से बाहर निकाला था इतनी देर में साधना भी स्तन मर्दन का आनंद ले चुकी थी जिसकी वजह से दोनों टांगों के बीच की पत्नी दरार से मदन रस टपकने लगा था,,,,)

बाप रे तू तो मार ही डालेगा कोई देख लेता तो,,,,(अपने ब्लाउज को व्यवस्थित करते हुए)

कोई नहीं देखेगा मौसी मोहिनी और मम्मी दोनों खाना बना रही है अगर वह दोनों बाहर निकलेंगे भी तो इससे पहले आहट मिल जाएगी,,,,,,,,(संजू की बात से एक हद तक साधना भी सहमति थी लेकिन वह किसी भी प्रकार का खतरा मोल नहीं लेना चाहती थी खास करके ऐसे संबंधों के बीच,,,, साधना तो अपने मन को मना रही थी जोकिंग संजू की हरकत की वजह से वह भी बावली हो गई थी लेकिन संजू मानने को तैयार नहीं था वह अपनी मौसी का हाथ पकड़कर छठ से उसे अपने पेंट के आगे वाले भाग पर रख दिया जो की पूरी तरह से खड़ा हो चुका था साधना के तन बदन में उत्तेजना की लहर तूने लगी और वहां फिर से रसोई घर की तरफ देखते हुए पेंट के ऊपर से यह संजू के लंड को जोर से पकड़ कर दबा दी,,,,, संजू एकदम मदहोश हो गया और वहां अपनी मौसी से बोला,,,।

एक बार मुंह में ले लो ना मौसी,,,।

धत्,,, पागल है क्या रे,,,, कहां पर बैठा है कहां पर खड़ा है इतना भी तुझे समझ में नहीं आ रहा है,,,,, अभ6 नही रात को तब तक जाकर अपने हाथ से हिला कर पानी निकाल दें ताकि रात को देर तक टिका रहे,,,,

ओहहह मौसी वह तो मैं बिना पानी निकाले ही तुम्हें 1 घंटे तक तो आराम से चोद सकता हूं,,,

अरे पागल धीरे बोल तू तो मरवाएगा,,,,।

(इतना सुनते ही संजू अपने होठों पर उंगली रख कर चुप का इशारा करते ही बोला) सॉरी मौसी,,,,

अब तू अपना काम कर मै भी जाकर रसोई घर में तेरी मां की मदद करती हूं ,,,

ठीक है मौसी,,,,,,,

(इतना कहने के साथ ही संजू अपने कमरे में चला गया और पढ़ाई करने लगा लेकिन अब उसका मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था मौसी को चोदने की उत्सुकता उसके मन में बढ़ती जा रही थी,,,,, कुंवारी चूत के साथ परिपक्वता से भरी हुई चूत को चोदने का अलग ही मजा है,,,,,, संजु अपने मन में यह सोच रहा था किउसके लंड के धक्के की वजह से उसकी बहन की गरम सिसकारी तो छोटे ही थी लेकिन ज्यादा मजा उसे उम्र दराज औरत की चूत में धक्के लगा कर उसकी आहहह ऊहहहह सुनने में ज्यादा मजा आता था,,,,,, इसलिए तो संजू बेकरार था अपनी मौसी की गदराई जवानी को धक्का लगाने के लिए,,,,,, दूसरी तरफ साधना आराधना के साथ बैठकर इधर उधर की बातें कर रही थी और मोहिनी और उसकी मां खाना बना रही थी,,,,थोड़ी देर में खाना बनकर तैयार हो चुका था और सब एक साथ खाना खा रहे थे तभी साधना ने अशोक का जिक्र छेड़ दी,,,, तो आराधना बिना झिझक हकीकत बयां कर दी,,,, साधना को अपनी छोटी बहन की बात सुनकर बहुत दुख हुआ लेकिन वह कर भी क्या सकती थी,,,,साधना अपनी छोटी बहन आराधना की मजबूरी अच्छी तरह से समझती थी जॉब छोड़ देने से घर में फिर से तकलीफ हो सकती थी,,, इसलिए खाना खाते खाते आराधना जिस प्रपोजल को लेकर घर पर आई थी उसे बताते हुए बोली,,,।)

संजु तुम्हारे लिए एक बहुत ही अच्छा प्रपोजल लेकर आई हूं और तुम कर भी सकते हो,,,,।

(साधना की बात सुनते ही मोहिनी आराधना और संजू तीनों आश्चर्य से साधना की तरफ देखने लगी तो वहां उन तीनों की उत्सुकता को खत्म करते हुए बोली,,)

देखो,,, मनीषा कोचिंग क्लास शुरू करने जा रही है ज्यादा बड़े पैमाने पर नहीं बल्कि अभी कुछ ही बच्चों के साथ कोचिंग शुरू कर रही है लेकिन कोचिंग में एक सहभागी की जरूरत है जो अच्छे से बच्चों को पढ़ा सके,,,।

क्या बात है दीदी मनीषा कितनी बड़ी हो गई की कोचिंग शुरू करने जा रही है यह तो बहुत खुशी की बात है,,,

अरे इससे भी खुशी की बात यह है कि मनीषा ने संजू को भी साथ में कोचिंग कराने के लिए बोली है,,, संजू होशियार है पढ़ने में भी बहुत अच्छा है 10वीं और 12वीं के बच्चों को कोचिंग करानी है,,,, इससे संजू की आमदनी भी होने लगेगी और वह इस तरह से घर में तुम्हारी मदद भी कर सकेगा,,,,।

( मनीषा का जिक्र आते ही संजू की आंखों के सामने उस दिन वाला दृश्य नाचने लगा जब उसकी मौसी उसे लेकर मनीषा के कमरे में चली गई थी और मनीषा उस समय पढ़ाई कर रही थी लेकिन केवल एक टी-शर्ट और पेंटी में उस समय संजू मनीषा को पेंटिं में देखकर हक्का-बक्का रह गया थाउस समय संजू मनीषा के बारे में कुछ ज्यादा विचार नहीं किया था क्योंकि उसे तो मौसी को चोदने की जल्दबाजी थी,,,, संजू को अपनी मौसी का यह प्रपोजल बहुत ही अच्छा लग रहा था वो किसी भी तरह से अपनी मां की मदद करना चाहता था लेकिन कर नहीं पाता था,,,, तीनों की तरफ देखकर साधना बोली,,,)

क्या संजू तु तैयार है,,,,

हां हां क्यों नहीं,,,, यह तो बहुत अच्छी बात है,,,, इस तरह से संजू मनीषा का साथ भी दे देगा और घर चलाने में मदद भी कर सकेगा,,,,(संजू के कहने से पहले ही आराधना बोलने लगी जिसमें संजू की भी सहमति थी वह भी अपना मंतव्य रखते हुए बोला)

हां हां क्यों नहीं,,,, मैं तैयार हूं,,,

चलो तब ठीक है,,, सोमवार से कोचिंग क्लास शुरू करना है शाम को 6:00 से 8:00 तक,,,, यह समय ठीक रहेगा ना संजु,,,।

जी बिल्कुल मौसी एकदम सही समय है,,,

तो सोमवार को मेरे घर पहुंच जाना वहीं से तुझे मनीषा अपने साथ कोचिंग क्लास ले जाएगी जो कि ज्यादा दूर नहीं है बस दो-तीन मिनट का ही रास्ता है,,, मेरे घर से बिल्कुल करीब है,,,

( आराधना इस बात से खुश थी कि इस तरह से उसका बेटा घर चलाने में उसकी मदद कर सकेगा मनीषा भी खुश थी,,,, खाना खाने के बाद बर्तन मांज कर झाड़ू पोछा करके सब सोने की तैयारी करने लगे,,, अशोक घर पर जल्दी आता नहीं था इसलिए,,, आराधना ने साधना को अपने साथ सोने के लिए बोली थी और साधना इनकार नहीं कर पाई थी,,, संजू का भी मन मचल कर रहे गया था दोनों एक दूसरे की तरफ तरसी आंखों से देख रहे थे,,,, लेकिन साधना ने इसका भी उपाय ढूंढ ली थी,,, वह सबकी नजर बचाकर धीरे से संजू के कानून बात डाल दी थी की आराधना के सो जाने के बाद वह कमरे से बाहर आएगी और उसी वक्त तू भी चले आना,,, संजू भी अपनी मौसी की बात की हामी भर दिया था,,,,,,।

आराधना और साधना दोनों एक कमरे में जा चुकी थी और संजू अपने कमरे में प्रवेश करते ही तुरंत दरवाजे की सिटकनी लगाकर बंद कर दिया था और अपनी बहन के होठों का रस चूसते हुए उसके सलवार की डोरी को ढीली करने लगा था,,,, अगले ही पल संजू और मोहिनी दोनों निर्वस्त्र अवस्था में गहरी सांस लेते हुए एक दूसरे में सामान्य की पूरी कोशिश कर रहे थे संजू का हर एक पक्का मोहिनी अपनी प्रबल इच्छाशक्ति से झेल ले रही थी और अपने भाई का पूरा साथ दे रही थी,,,वह खुद ही अपने भाई के मुंह को अपनी चूची पर दबा दे रही थी ताकि वह अच्छे से उसकी चूची का स्तनपान कर सके संजू भी पूरे जोश के साथ धक्के लगाते हुए अपनी बहन की चूची से खेल रहा था और थोड़ी ही देर में दोनों की सांसें तेज चलने लगी और दोनों एक साथ झड़ गए,,, कुछ देर तक संजू उसी तरह से अपनी बहन के ऊपर लेटा रहा,, संभोग की असीम सुख प्राप्ति करने के बाद थोड़ी ही देर में मोहिनी गहरी नींद में सो गई संजीव से चलाने लगा था कि वह अपने कपड़े पहन सके और वह मौसी को अपने कमरे में लाकर जमकर रात भर चुदाई कर सकें लेकिन मोहिनी उठ ही नहीं रही थी,,, अपनी बहन के नंगे पन की स्थिति को देखकर समझो समझ गया था कि ऐसे हालात में मौसी को कमरे में लाना बिल्कुल भी उचित नहीं है,,,,, वह कमरे के बाहर ही मौसी की चुदाई करने का मन में ठान लिया था,,,,,, इसलिए वह अपनी मौसी के कमरे से बाहर निकलने का इंतजार करने लगा घड़ी की तरफ देखा तो 1:00 बज रहे थे,,, संजू खड़ा हुआ और ट्यूब लाइट बंद कर दिया कमरे में अंधेरा छा गया तभी बगल वाले कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज संजू के कानों में पड़ी तो उसके लंड में ठुनकी आना शुरू हो गया वह तुरंत अपने कमरे का दरवाजा खोल कर अपनी मां के कमरे की तरफ देखा तो,,, चोर कदमों से उसकी मौसी कमरे से बाहर निकल रही थी और धीरे से कमरे के दरवाजे बंद कर रही थी जोकि हल्का सा खुला हुआ ही था,,,,, साधना संजू के कमरे की तरफ आगे बढ़ी तो संजू को दरवाजे पर खड़ा देखकर एकदम खुश हो गई उसे इस बात की खुशी थी कि उसे चोदने का इंतजार संजू जागकर कर रहा था,,, उसे चोदने के लिए संजू की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी,,,,।

ओहहहह संजू तू जाग रहा है मुझे तो लगा कि तू सो गया होगा,,,(संजू को अपनी बांहों में भरते हुए साधना बोली संजू की पूरी तरह से उत्तेजित होता हुआ जवाब में साधना अपनी बाहों में कस के दबा ते हुए उसकी गर्दन पर अपने होठ रखते हुए बोला,,,)

ओहहहह मौसी तुम्हें चोदने की खुशी में मुझे नींद नहीं आ रही थी,,,।
 
संजू अपनी मौसी की गर्दन पर अपनी होठ रखकर चुम्मा नो की बारिश कर रहा था साधना संजू की अद्भुत चुंबन ओं की रफ्तार को देखकर पूरी तरह से उत्तेजित व जा रही थी वह अपनी बाहों में संजू को और कस के दबाई हुई थी जिससे उसकी दोनों खरबूजे जैसी चूचियां सीधे तौर पर संजू की छातियों में रगड़ खा रही थी जिससे संजू की उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी संजू का लंड तुरंत खड़ा हो चुका है अभी अभी वह अपनी बहन की चुदाई करके आया था लेकिन फिर भी अपनी मौसी की गदराई जवानी की खुशबू पाकर वह पुणे उत्तेजित हो गया था और लंड में फिर से जान आना शुरू हो गई थी देखते ही देखते संजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था जो कि सीधे साड़ी के ऊपर से ही साधना की चुत पर दस्तक दे रहा था,,,,,।

ओहहह संजु तू तो मुझे पागल कर देगा,,,

और तुमने जो मुझे पागल कर दी हो उसका क्या,,,, दिन रात में तुम्हारी चूत के बारे में सोचता रहता हूं,,,, इस उम्र में भी तुम्हारी चूत का कसाव एकदम बरकरार है,,,,।

हाय राजू तु कितना अच्छा बोलता है तेरी बातें सुनकर ही चूत से पानी टपकने लगता है,,,, यह तो तेरा बड़प्पन है मेरी चूत तो पहले जैसी ही है बस तेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है,,, देखना शादी की पहली रात को अपनी बीवी के साथ आराम से पेश आना कहीं ऐसा ना हो कि पहली रात में ही अपनी बीवी की चूत फाड़ दे,,,,,,,

ओहहह मोसी,,,, तुम्हारी जैसी कर्म करने वाली औरत मिल जाएगी तो पहली रात में उसकी चूत फाड़ दूंगा,,,,

क्या मैं तुझे गर्म कर देती हूं,,,

बहुत ज्यादा मोसी अब तो तुम्हारी मौजूदगी में ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,

हां तभी तो साड़ी फाड़ कर तेरा लंड मेरी चूत में घुसने की कोशिश कर रहा है,,,,

हाय मेरी मौसी तब यह पर्दा कैसा हटा दो सारे परदों को नंगी हो जाओ,,,,(संजू उसी तरह से अपनी मौसी की गर्दन को चुनते हुए और एक हाथ से उसकी चूची को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाते हुए बोला,,,)

सहहहहह आहहहहह संजू तो देर किस बात की है चल कमरे में,,,,

कमरे में नहीं जा सकते मौसी,,,

क्यों,,,?

क्योंकि मोहिनी अभी अभी सोई है वह पढ़ रही थी उसकी नींद खुल गई तो गजब हो जाएगा,,,

तब तो मजा नहीं आएगा मैं तो तेरे से आज पूरी तरह से नंगी होकर चुदवाने की सोच कर ही आई थी,,,,

मैं भी यही सोच रहा था बहुत सी कि आज रात भर कमरे में तुम्हारी नंगी करके लूंगा,,,, लेकिन मोहिनी आज सोई ही नहीं,,,, लेकिन कोई बात नहीं मोसी तुम्हें इधर भी मैं बहुत मजा दूंगा,,,,, रुको मैं तुम्हारे ब्लाउज के बटन खोलता हूं,,,,

(इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया,,, साधना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि कमरे में ना सही समझो कहीं भी उसे अद्भुत सुख देता है इस बात का एहसास उसने अपने घर पर सीढ़ियों पर ही संजू से चुदवा कर महसूस कर ली थी,,,। देखते ही देखते संजू बारी बारी से ब्लाउज के एक-एक बटन को खोलते हुए सारे बटन को खोल दिया था,,,, कमरे में से आ रही हल्की रोशनी में साधना का भजन एकदम साफ नजर आ रहा था ब्लाउज के अंदर वह लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी,,, समझो अपनी मौसी की भारी-भरकम छातियों को ब्रा में कैद देख कर बोला,,,)

मौसी तुम्हारी चूचियां किसी दिन ब्रा फाड़ कर बाहर आ जाएंगी,,,,

क्यों,,,?

देख नहीं रही हो कितनी बड़ी बड़ी है और तुम ब्रा इतनी छोटी सी पहनती हो,,,

छोटी ब्रा में मेरी चूचियां और ज्यादा आकर्षक लगती हैं,,,

हां मौसी यह बात तो है,,,, तभी तो तुम्हारी चूची को मुंह में लेकर पीने का मन करता है,,,

तो पीना रे मना किसने किया है,,,।

(इतना सुनते ही संजु साधना की ब्रा को पकड़कर ऊपर की तरफ कर दिया और उसकी खरबूजे जैसी चूचियां आजाद हो गई अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी चुचियों को देखकर एक लंबी सांस लेते हुए संजू अपने दोनों हाथों में अपनी मौसी की दोनों खरबूजा को पकड़ लिया और उन्हें जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, मानो कि जैसे उनका रस निचोड़ रहा हो,,, संजू का हाथ लगते ही साधना एकदम से गन गना गई,,,,,,,।)

सहहहह आहहहहह संजु,,,, मुंह में लेकर पी,,,,

(अपनी मौसी की आज्ञा का पालन करते हुए तुरंत अपनी मौसी की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,, दोनों वासना में पूरी तरह से लिप्त हो चुके थे,,,, एक तरफ मोहीनी अपने भाई से जमकर चुदवाने के बाद गहरी नींद में सो रही थी और वह भी पूरी निर्वस्त्र अवस्था में दूसरी तरफ आराधना सो रही थी उसे तो इस बात का एहसास तक नहीं था कि उसका जवान बेटा अपनी ही बहन की रोज चुदाई करता है और इस समय उसकी बड़ी बहन की जमकर चुदाई करने की तैयारी कर रहा है,,,,,,, रात के तकरीबन 2:00 बज रहे थे,,,, तभी बाहर से आ रही फुसफुस आहट की आवाज आराधना के कानों में पड़ी तो अचानक ही उसकी नींद खुल गई बगल में देखी तो उसकी बड़ी बहन बिस्तर पर नहीं थी और सोची बाथरूम गई होगी इसलिए गहरी नींद में होने के बावजूद भी वह उठ कर बैठ गई,,, लेकिन लगातार उसके कानों में फुसफुसाने की आवाज आ रही थी वह दीवार पर टांगी घड़ी की तरफ देखी थी 2:00 बज रहे थे,,,उसे थोड़ा अजीब लगा इसलिए वह धीरे से उठकर दरवाजे की तरफ जाकर देखना चाहती थी कि आखिरी आवाज किस तरह की आ रही थी और वो धीरे-धीरे दरवाजे की तरफ पहुंच गई दरवाजा खोलने की जरूरत नहीं देते और बाजा थोड़ा हल्का सा खुला हुआ था, और वह उसे थोड़े से खुले दरवाजे के बाहर देखने की कोशिश करने लगी तो हल्की हल्की रोशनी में धीरे-धीरे उसे सब कुछ साफ नजर आने लगा,,, लेकिन कुछ देर तक तो नींद में होने की वजह से उसे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन थोड़ी ही देर में उसकी आंखों के सामने जिस तरह का नजारा दिखाई दे रहा था उसे देखकर तो उसके होश उड़ गए,,,, वह अपनी आंखों को मींजने लगी कि कहीं वह कोई सपना तो नहीं देख रही है लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखें देख रही थी वह हकीकत थी,,,,उस नजारे को देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसकने लगी उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था आखिरकार इसमें उसका कोई दोष नहीं था कोई भी इस दृश्य को देखकर हक्का बक्का रह जाता खास करके जब उसे इस तरह की कोई उम्मीद ना,,, हो,,,,।

वह साफ तौर पर देख पा रही थी कि सामने जो दो शख्स खड़े थे एक उसकी बड़ी बहन थी और दूसरा उसका जवान बेटा था,,,,उसकी बड़ी बहन अस्त-व्यस्त कपड़ों में थी उसका ब्लाउज के बटन खुले हुए थे और ब्रा उपर की तरफ चढ़ाया हुआ था,,, और उसका जवान बेटा उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को मुंह में लेकर पी रहा था,,,मदहोशी और मादकता से भरा हुआ यह नजारा आराधना को होश में लाने के लिए काफी था उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या देख रही है,,, अपनी आंखों से देख रही थी कि उसका जवान बेटा उसकी बड़ी बहन की चूचियों को दबा दबा कर पी रहा था,,, और उसके हैरानी का कारण यह था कि उसकी बहन मजे लेकर संजू को अपना दूध पिला रही थी,,,,,। इस अकल्पनीय दृश्य को देखकर आराधना पूरी तरह से गुस्से में आ गई थी,,,, वह इसी समय दरवाजा खोल कर उन दोनों के पास जाकर अपने बेटे को दो तमाचा लगाना चाहती थी और अपनी बड़ी बहन को खरी-खोटी सुनाना चाहती थी लेकिन ना जाने क्यों उसके पैर वही जम चुके थे,,,,आराधना ने अपने जीवन में इस तरह के तेरे से को कभी अपनी आंखों से देखी नहीं थी ना ही इस तरह से हकीकत में और ना ही मोबाइल में इसलिए यह सब उसके लिए एकदम अद्भुत और आश्चर्यचकित कर देने वाला था,,,,अपने बेटे को देख कर उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह उसका वही बेटा है जिस पर उसे बेहद नाज हुआ करता था,,,, क्योंकि आराधना कभी सोची नहीं थी कि उसका बेटा इस कदर गिरी हुई हरकत करेगा और वह भी अपनी मौसी की नंगी चूचियों को मुंह में लेकर पिएगा और वह भी आधी रात को,,,, आराधना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार यह सब हो कैसे गया,,, आराधना से यह दृश्य देखा नहीं जा रहा थाउसका बेटा पागलों की तरह उसकी बड़ी बहन की चूची को दबा दबा कर पी रहा था और उसकी बड़ी बहन एकदम आनंदित होकर अपनी आंखों को बंद करके संजू की इस हरकत का मजा ले रही थी,,,,।यह देखकर आराधना के पैर थरथर कहां पर आए थे उसे खड़ा होना मुश्किल हो जा रहा था और तुरंत हिम्मत जुटाकर अपने कदमों को पीछे ले ली और बिस्तर पर आकर माथे पर हाथ रख कर बैठ गई,,,, और सोचने लगी कि यह सब क्या हो रहा है तभी उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसका बेटा जवान हो गया है उसे वह खुद उसके पति से बचाते हुए नग्न अवस्था में दो-तीन बार देख चुका है उसके संपूर्ण नंगे बदन को देख कर उसके बेटे में औरत के नंगे पानी के आकर्षण की चमक आराधना देख चुकी थी,,,, और उसे बरसात वाली शाम की बात याद आ गई जब बरसात में दोनों पूरी तरह से भीगकर घर पर पहुंचे थे और दोनों घर पर पहुंचते ही संजू उत्तेजित होता होगा उसे अपनी बाहों में भर लिया था उसके अंगों से खेलना शुरू कर दिया था वह तो अच्छा हुआ था कि उसी समय मोहिनी आ गई थी और दोनों के बीच की मर्यादा की डोरी टूटते टूटते रह गई थी और फिर रात के समय संजु ने फिर से वही हरकत दोहराने की कोशिश की थी,,, लेकिन ऐन मौके पर आराधना अपने आप को संभाल ली थी उसे बातों को याद करके आ रहा था ना समझ चुकी थी कि उसका बेटा अब मासुम तो बिल्कुल भी नहीं था ,,,, पिछले दिनों की कुछ बातों को याद करके आराधना को समझते देर नहीं लगी थी कि उसका बेटा औरतों की संगत का मजा लेना चाहता है,,,, वह पूरी तरह से जवान हो गया था,,,, लेकिन आराधना को यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बेटे और उसकी बड़ी बहन के बीच यह रिश्ता कब और कैसे स्थापित हो गया इसी को समझने की कोशिश कर रही है लेकिन उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था कुछ देर तक बिस्तर पर बैठे रहने के बाद उसे बिल्कुल भी चैन महसूस नहीं हो रहा था वह एकदम हैरान परेशान थी,,,,वह फिर से बिस्तर पर से खड़ी हुई और धीरे से आकर दरवाजे की ओट में खड़ी हो गई और बाहर के दृश्य को देखने लगी,,,, जो कि संजू अभी भी साधना की बड़ी-बड़ी चुचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था और उसकी बड़ी बहन मजे लेकर उससे यह काम और ज्यादा उकसा उकसा कर करवा रही थी,,,,।

आहहहहह संजू जोर जोर से दबा दबा कर पी,,,आहहहह रे बहुत मजा आ रहा है ऐसे ही संजू,, आहहहहह,,,,,

(अपनी बड़ी बहन की जोश भरी बातों को सुनकर आराधना एकदम से हैरान हो गई उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था उसकी बहन एकदम मजे ले रही थी और उसकी बात को मानते हुए संजू और भी ज्यादा जोर जोर से उसकी चूचियों को दबा रहा था और उसे मुंह में लेकर पी रहा था,,,, आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस दृश्य को देख या चली जाएं,,, दोनों के बीच की उम्र की सीमा का कोई मिलाप नहीं थाएक तरह से संजू उसके बेटे की उम्र का था लेकिन दोनों चीस जोशो खरोश के साथ एक दूसरे के बदन से आनंद ले रहे थे उसे देखकर आराधना पूरी तरह से हैरान थी,,,,)

ओहहहह मौसी तुम्हारी चुचियों में बहुत रस भरा हुआ है,,,, एकदम खरबूजा जैसी गोल-गोल है,,,,आहहहहह जब तक तुम्हारी चूची मुंह में लेकर पीता नहीं हूं तब तक मजा नहीं आता,,,।

(आराधना अपने बेटे की अश्लील बातें सुनकर एकदम हैरान थी और वह भी अपनी मौसी के लिए लेकिन जिस तरह की वह बातें कर रहा था उसे सुनकर आराधना को हैरानी हो रही थी और वह भी इस बात से की उसकी बातों से लग रहा था कि दोनों के बीच का संबंध काफी समय से चल रहा है,,,आराधना को अपनी बेटी की हरकत देखने में बहुत ही गंदा लग रहा था क्योंकि उसे अपने बेटे से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी आराधना अपनी नजरों को हटा नहीं रही थी,,,, संजू की बात का जवाब देते हुए साधना बोली,,,)

ओहहहह मेरे संजु तेरे लिए ही तो है मेरी चूचियांकसम से मेरे राजा तेरे मौसा जी के बाद से इस चुचियों पर सिर्फ तेरा ही हाथ लगाए और सच कहूं तो तेरे मौसा से ज्यादा मजा तु दे रहा है,,,,।

(अपनी बड़ी बहन और अपने जवान बेटे की अश्लील बातें सुनकर आराधना की दोनों टांगों के बीच हलचल सी होने लगी थी अपनी बड़ी बहन का चरित्र उसे समझ में नहीं आ रहा था घर परिवार वाली होने के बावजूद भी अपनी वासना की आग बुझाने के लिए वह अपने ही भतीजे का उपयोग कर रही थी,,,और उसे इस बात का भी डर नहीं था कि अगर उसका राज खुल गया तो क्या होगा,,,,, दरवाजे की ओट में आराधना अपने आप को छुपाए हुए थी,,,धीरे-धीरे वह अपने बेटे और अपनी बड़ी बहन के बीच के इस राज को समझने की कोशिश कर रही थी रात के 2:15 बज रहे थे और ऐसे में उसकी बड़ी बहन और उसका जवान बेटा एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे आराधना इस बात को समझ चुकी थी कि कमरे से बाहर मिलने का पहले से ही दोनों ही तय कर लिया था वरना इस समय तो गहरी नींद में उसका बेटा सो रहा था शायद एक औरत से सुख प्राप्त करने की व्याकुलता उसे जगा रही थी,,,,,, आराधना की चमक धीरे-धीरे उस मादक दृश्य को देखकर बढ़ती जा रही थी,,,, क्योंकि उसका जवान बेटा उसकी चूचियों को बिना पकड़े अपने मुंह में बारी-बारी से लेकर पी रहा था और अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,, था,,, शायद साड़ी के ऊपर से ही वह साधना के नंगे पन को टटोल रहा था,,,,,,)

तुम्हारी गांड बहुत बड़ी-बड़ी है मौसी बहुत ही आकर्षक लगती है,,, जब चलती हो ना तो ऐसी मटकती है कि देखकर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,,।

मैं तेरे लिए ही अपनी गांड मटका मटका कर चलती हूं ताकि तेरा खड़ा कर सकूं और तो फिर अपने खड़े लंड को मेरी चूत में डाल सकें,,,,

(आराधना तो हैरान थी दोनों की बातों को सुनकर आराधना को अपने कानों से सुनने के बावजूद भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी बड़ी बहन और उसका जवान बेटा इस तरह की गंदी बातें एक दूसरे से बिना शर्माए कर रहे हैं,,,आराधना जो कि अपनी बहन को बहुत अच्छी औरत समझती थी आज उसकी आंखों के सामने उसका सच नजर आ रहा था,,, वह अपनी आंखों से देख पा रही थी कि उसकी बड़ी बहन अपने बदन की प्यास बुझाने के लिए अपने ही भतीजे का सहारा ले रही है,,,,देखते ही देखते आराधना की आंखों के सामने उसका जवान बेटा उसकी बड़ी बहन की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा और अगले ही पल वह साड़ी को उठाकर साधना की कमर तक कर दिया जिससे कमर से नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो गई बस एक छोटी सी पेंटी उसके अनमोल खजाने को छुपाए हुए थी जिसे खुद वह संजू के हांथो लुटाने को तैयार थी,,, संजू और साधना को इस बात का अहसास तक नहीं था कि दरवाजे के पीछे खड़ी होकर आराधना यह सब दृश्य अपनी आंखों से देख रही है,,,,, देखते ही देखते संजुसाधना की पेंटिंग में अपना हाथ डालते हुए उसकी चूत को टटोलने लगा जो की चूत पूरी तरह से मदन से गीली हो चुकी थी,,, पेंटी भीग चुकी थी संजू अपनी मौसी की चूत की गर्माहट को अपनी हथेली पर महसूस कर रहा था और अपनी हथेली को उसकी फूली हुई चूत पर रगड़ रहा था,,, आराधना की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी इस दृश्य को देखते देखते वह गर्म होने लगी,,,, लाख चाहने के बाद भी वह अपनी नजरों को उस दृश्य से हटा नहीं पा रही थी,,,,, साधना की चूत पर अपनी हथेली को जोर-जोर से रगडते हुए संजू बोला,,,।)

हाय मौसी तुम तो एकदम गीली हो गई हो,,, और तुम्हारी चूत कितनी गर्म हो गई है,,,

(अपनी बेटे के मुंह से चूत और उसका गीलापन की बात सुनकर आराधना को इस बात का एहसास हुआ कि उसकी खुद की चड्डी गीली हो रही थी उस समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है जबकि वह इस दृश्य को मजे लेकर नहीं देख रही थी फिर ऐसा क्यों हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था शायद आराधना,,, जिंदगी की इस दौड़ में भूल चुकी थी कि वह भी एक औरत है जिसके कुछ अरमान है जरूरत है भले ही उसका दिमाग ने जिंदगी की जरूरतों को देखते हुए आराधना को उलझाए रखा लेकिन अपनी आंखों के सामने मादकता भरे दृश्य को देखकर उसके बदन की जरूरत मैं एक बार फिर से आराधना को उसके औरत होने का एहसास दिलाया था,,, और इसी एहसास के चलते उसकी खुद की चूत पानी छोड़ रही थी जिसकी वजह से उसकी चड्डी गीली हो रही थी इस अहसास से वह अजीब सी उलझन मैं पड़ गई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अपने बदन में हो रही गतिविधि को देख कर उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था कि जो दृश्य वह सामने देख रही अपनी आंखों से अपनी बहन और अपने जवान बेटे के बीच नाजायज संबंध के चलते उसे गुस्सा आना चाहिए था उसी तृषा को देखकर वह खुद उत्तेजित वह जा रही है अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही है,,,,, आराधना के बस में अब कुछ भी नहीं था वह लगातार अपनी आंखों को दरवाजे की ओर से बाहर कमरे में गडाए हुई थी,,, जहां पर पल पल मदहोशी बढ़ती जा रही थी,,, तभी आराधना के कानों ने कुछ ऐसा सुना जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की थी और उस शब्द को सुनकर उसके होश उड़ गए,,,,)

आहहहहह संजू तेरी हरकतों की वजह से मेरी चूत गीली हुई है और गर्म हो गई है जिसे ठंडा करना अब बस तेरे हाथ में है,,,, बस इसमें जीभ डाल कर चाट ले और ठंडी कर दे मेरी चूत को,,, संजू मेरे राजा,,,,,आहहहहहह ,,,,।

(संजू जोकि अभी भी अपनी मौसी की चूची को मन लगाकर पी रहा था और अपनी हथेली से उसकी चूत रगड़ रहा था अपनी मौसी की बात सुनते ही तुरंत वह अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी बेटी को घुटनों के बल बैठ ते देखते ही आराधना की सांसे तेजी से चलने लगी क्योंकि पल भर में उसे अंदाजा हो गया था कि अब क्या होने वाला है और उसके सोचने के मुताबिक है संजू बिना कुछ बोले,,, अपने घुटनों के बल बैठ गया,,,,साधना की सांसे इतनी तेजी से चल रही थी उतनी ही अधिक तेजी से आराधना की भी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह अकेलेपन के इंतजार में थी कि उसका बेटा क्या करने वाला है,,, उसे साफ साफ दिखाई दे रहा था कि उसका बेटा अपनी दोनों हथेलियों को साधना की बड़ी बड़ी गांड पर रखकर उसे जोर से दबाते हुए अपने प्यासे होठों को उसकी चूत पर रख दिया,,,, यह दृश्य देखते ही आराधना के तन बदन में आग लग गई,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है,,,, अपनी उखडती सांसो को दुरुस्त करके वह फिर से उसे दृश्य मैं अपना दिलो दिमाग लगा दी संजू पागलों की तरह जीभ निकाल निकाल कर साधना की चूत को चाट रहा था उसमें लब लबाकर मदन रस नीचे टपक रहा था जिसे संजू अपनी जीभ का सहारा देकर अपने गले के नीचे गटक रहा था वह अपनी मौसी की चूत से निकला एक बूंद भी नीचे जमीन पर गिरने नहीं देना चाहता था,,,, साधना पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी वह अपनी आंखों को बंद करके संजू के बाल को पकड़कर जोर से अपनी चूत पर दवाई हुई थी,,,, एक पल के लिए तो साधना की साड़ी कमर से नीचे गिर गई और संजू पूरी तरह से उसकी साड़ी के अंदर समा गया यह नजारा बेहद कामुकता से भरा हुआ थाऐसा लग रहा था कि साधना चोरी-छिपे एक जवान लड़के को अपनी साड़ी में घुसा कर अपनी चूत का स्वाद चखा रही है,,,,

आराधना के कानों में साधना की हल्की हल्की गर्म सिसकारी की आवाज सुनाई दे रही थी जो कि बयां कर रही थी कि उसे कितना मजा आ रहा है आज तक आराधना में इस तरह का आनंद नहीं ली थी इसलिए यह दृश्य को देखने में उसके तन बदन में अजीब सी खलबली मची हुई थी,,,,,अपनी आंखों से अपने बेटे की हरकत देखने पर भी उसे विश्वास नहीं हो रहा था जिसे वह अभी भी मासूम समझती थी वह पूरा मर्द हो चुका था और अपनी मर्दानगी से एक औरत की प्यास बुझाने में लगा था,,,,।

सहहहह आहहहहहहहहह,,,, संजू मेरे लाल पूरी जीभ डालकर चाट,,,,आहहहहहह कमरे में चलते तो और मजा आ जाता मैं पूरी नंगी होकर तुझे मजा देती,,,,, उस दिन की तरह,,,,,,।

(अपनी बड़ी बहन की यह बात सुनते ही आराधना में अंदाजा लगा ले कि उसकी बहन उस दिन वाली बात कर रही है जब उसके घर आई थी उसी रात को वह संजू के कमरे में सोई थी और उसी दिन सब कुछ हुआ था,,, आराधना का दिमाग चकरा रहा था,,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था कि पहले पहल किसने किया होगा उसके बेटे ने या उसकी बड़ी बहन ने,,,,, यह सब ख्याल दिमाग में आते ही वह किसी ख्यालों में खोने लगती तो वह कुछ देर के लिए अपने ख्यालों को एक तरफ करके वापस अपना सारा ध्यान उन दोनों पर केंद्रित कर दे रही थी,,,, अब आराधना को साफ नजर आ रहा था कि उसकी बड़ी बहन अपनी चूत को गोल-गोल घुमाते उसके बेटे के चेहरे पर रगड़ गई थी और उसका बेटा उसकी नंगी गांड को जोर जोर से दबा रहा था,,,,आराधना को अपनी बड़ी बहन के चेहरे को देख कर ही पता लग रहा था कि वह आनंद के सागर में डूब रही है,,,,आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा उसकी बड़ी बहन को इतना ज्यादा मजा दे रहा है कि साधना सब कुछ भूल चुकी है,,,, कुछ देर तक यह नजारा इसी तरह से चलता रहा,,,,, साधना संजू के बाल को पकड़कर उसके चेहरे को अपनी चूत से दूर करते हुए बोली)

हाय बस कर मेरे राजा दो बार तूने मेरा पानी निकाल दिया है,,,(अपनी बड़ी बहन की बात सुनकर आराधना को यह पता चला कि संजू ने अपनी हरकत से ही 2 बार उसकी बड़ी बहन को झाड़ चुका था यह आराधना के लिए सोचने वाली बात थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि चूत में बिना लंड डाले उसके बेटे ने उसकी बड़ी बहन का दो बार पानी कैसे निकाल दिया,,,, अगर कोई उसे किसी और से मैं यह बात कहता तो शायद उसे विश्वास नहीं होता लेकिन इस समय जो दृश्य अपनी आंखों से देख रही थी और अपनी बहन की बात को सुन रही थी उसे सुनकर आराधना के पास विश्वास करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था,,,) अब मेरी चूत की खुजली तू अपने लंड से मिटाएगा,,,,,आहहहह बहुत दिन हो गए हैं तेरे लंड को अपनी चूत में लिए,,,,,,।

चूत में लेने से पहले मौसी एक बार अपने मुंह में लेकर इसी और ज्यादा गर्म कर दो,,,(संजू खड़े होते हुए बोला और इसी के साथ ही वह अपनी पेंट उतारने लगा देखते ही देखते संजू अंडरवियर सहित अपने पेंट को अपने घुटनों तक खींच दिया था,,,, उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा,,,, यह अद्भुत अविस्मरणीय अकल्पनीय नजारा आराधना के लिए पहली बार था वह पहली बार अपने बेटे के लंड को अपनी आंखों से देख रही थी जो की हवा में लहरा रहा था,,, आराधना की तो आंखें खुली की खुली रह गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह हकीकत में देख रही है या कोई सपना है,,,, तुरंत ही आराधना अपने बेटे के लैंड की तुलना अपने पति से करने लगी जिसके आगे उसके पति का लंड कुछ भी नहीं था,,,, उत्तेजना और आश्चर्य के मारे आराधना का गला सूखने लगा वह अपने थुक से अपने गले को गिला करते हुए,,अपने बेटे के लंड को देख रही थी जो कि उसका बेटा अपने हाथ में लेकर उसे ऊपर नीचे करके खिला रहा था और हिलाते समय तो उसका लंड और भी ज्यादा हाहाकार मचा रहा था,,,, साधना संजू कै लंड को दो-तीन बार अपनी चूत में ले चुकी थीइसलिए बिना आश्चर्य के अपना हाथ आगे बढ़ाकर संजू के लंड को पकड़ ली और उसे मुठीयाते हुए बोली,,,,।

हाय मेरे राजा तेरे लंड को देख लेती हूं तो फिर से जवान हो जाती हूं,,,,

तुम अभी भी पूरी तरह से जवान हो मौसी तुम्हारी चूत एकदम टाइट है लगता ही नहीं कि मैं दो दो बच्चों की मां को चोद रहा हूं,,,,(ऐसा कहते हुए संजू अपना दोनों हाथ साधना के कंधों पर रखकर उसे नीचे की तरफ दबा रहा था बैठने के लिए और साधना भी संजू के इशारे को अच्छी तरह से समझ रही थी,,, वह भी तुरंत घुटनों के बल बैठ गई यह देखकर आराधना का दिल जोरो से धड़कने लगा उसका बेटा एकदम खुलकर गंदी बात कर रहा था उसकी चूत के बारे में बातें कर रहा था उसकी चूत की तारीफ कर रहा था आराधना को समझ में नहीं आ रहा था कि उसके जवान बेटे को,, 2 2 जवान बच्चों की मां की चूत एकदम टाइट लग रही थी,,,,लेकिन अगले ही पल उसे समझते देर नहीं लगी कि उसके बेटे का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है शायद इसीलिए साधना की चूत उसे टाइट लग रही है,,,फिर ना चाहते हुए भी अच्छा ना कि उसके मन में ख्याल आया कि जब साधना की चूत से भी टाइट लग रही है तो अगर वह मेरी चूत में डालेगा तो क्या होगा,,,, ऐसा मन में सोचते ही आराधना का दिल धक से करके रह गया,,,, वह अपने होंठों पर हाथ रखकर मानो कि जैसे अपने आप को ही चुप रहने का संकेत दे रही हो,,,,यह ख्याल उसके मन में अनजाने में ही आया था लेकिन इस ख्याल से उसके तन बदन में अद्भुत उत्तेजना का संचार हुआ था उसकी चूत से मदन रस की बूंद टपकने लगी थी,,,। एक गहरी सांस लेकर फिर से उस धीरे से पर ध्यान केंद्रित कर दी,,,।

साधना बेझिझक संजू के लंड को अपने गले तक लेकर चूस रही थी यह देखकर आराधना की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि आराधना ने आज तक इस तरह की हरकत अपने मन से कभी नहीं की थी उसके पति ने जबरदस्ती ही यह काम कभी कभार कराया था,,,,,, साधना बड़ी मस्ती के साथ संजू की लंड को चूस रही थी संजू पूरी तरह से मस्त होकर साधना के रेशमी बालों में उंगली डालकर उसके सर को सहलाते हुए अपनी कमर हिला रहा था,,,, आराधना के लिए यह दृश्य को देखना बेहद गंदा और संस्कार के खिलाफ था लेकिन इस दृश्य में ना जाने कैसा आकर्षण था कि वह अपने आप को उस दृश्य को देखने से रोक भी नहीं पा रही थी,,,आराधना अपने बेटे को देख रही थी उसके चेहरे को देख रही थी उसके बेटे के चेहरे पर संतुष्टि के भाव नजर आ रहे थे उसके मन में बिल्कुल भी गिलानी नहीं थी कि जिस औरत के मुंह में वह अपना लंड डाला है वह उसकी मौसी है उसकी मां की बड़ी बहन,,,,आराधना अपने मम्मी सोचने लगी थी क्या वासना की आग बुझाने में रिश्तो के कोई मायने नहीं होते,,,फिर अपने इसी सवाल का अपने आप ही जवाब देते हुए बोली नहीं होते शायद अगर ऐसा होता तो शायद जिस तरह का दृश्य अपनी आंखों से देख रही है ऐसा कभी नहीं होता,,,,।

ओहहह मौसी पूरा अंदर तक लो अभी तुम्हारी चूत में दंगल मचाएगा,,,,आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है मौसी एकदम चूत की तरह मजा दे रही हो,,,,आहहरहह आहहहहहह मौसी एकदम गजब,,,,।

(आराधना अपने बेटे की बात को सुनकर मदहोश में जा रही थी अपने आप ही उसकी हथेली साड़ी के ऊपर से ही चूत के ऊपर आ गई थी जिसे वह हल्के हल्के अपनी हथेली का दबाव दे रही थी,,,, कुछ देर तक यह दृश्य इसी तरह से चलता रहा पीछे मुड़कर दीवाल की तरफ आराधना देखी तो घड़ी में 3:00 बज रहे थे,,,, समय इतनी जल्दी-जल्दी बीत रहा था पता ही नहीं चल रहा था,,,,

थोड़ी देर बाद दोनों खड़े हो गए,,,

अब यहां पर कैसे लेगा संजु,,,,

(आराधना अपनी बहन की यह बात सुनकर हक्की बक्की रह गई क्योंकि वह अपनी बहन की बात के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी,,,,,)

दीवार के सहारे खड़ी हो जाओ मासी अपनी गांड बाहर निकाल कर पीछे से लूंगा मैं तुम्हारी,,,।

(दोनों की वार्तालाप इतनी गरमा गरम थी की आराधना ना चाहते हुए भी,,, मदहोशी के आलम में अपनी साड़ी को धीरे धीरे करके कमर तक उठा दिया और पैंटी के ऊपर से अपनी चूत पर अपनी हथेली रख दी,,,आराधना को साफ महसूस हो रहा था कि उत्तेजना की मारी उसकी चूत कचोरी की तरह फुल चुकी थी,,,,और आराधना की आंखों के सामने ही उसकी बहन संजू के कहे अनुसार दीवाल का सहारा लेकर खड़ी हो गई थी और अपनी गांड को बाहर की तरफ निकाली हुई थी उसकी साड़ी कमर तक चढ़ी हुई थी उसकी बड़ी बड़ी गांड आराधना को एकदम साफ नजर आ रही थी संजू अपनी मौसी की बड़ी बड़ी गांड देखकर एकदम मदहोश होता हुआ उस पर जोर से दो चपत लगा दिया गांड पर पड़ी चपत की आवाज इतनी जोर से थी कि साधना बोली,,,)

पागल हो गया है क्या रे आवाज सुनकर किसी की नींद खुल गई तो गजब हो जाएगा,,,

सॉरी मौसी तुम्हारी गांड है इतनी लाजवाब कि रहा नहीं गया,,,,।

चल अब शुरू हो जा मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।

(संजू बिल्कुल भी देर किए बिना ही अपने लंड को पकड़ कर एक कदम आगे बढ़ा और अपनी मौसी की गांड को पकड़कर थोड़ा सा ऊपर अपने हिसाब से कर लिया और उसके गुलाबी छेद में अपना लंड डालने लगा,,, साधना की चूत पहले से ही पानी पानी हो गई थी इसलिए बड़े आराम से लंड का सुपाड़ा प्रवेश कर गया यह देखकर आराधना भी हैरान थी वह समझ गई कि दोनों के बीच का ही बार चुदाई हो चुकी है,,,संजू का लंड साधना की चूत में गया और आराधना मदहोश होकर अपनी पेंटी में अपना हाथ डाल दी उसकी चूत भी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,, संजू अपने लंड को धीरे-धीरे पूरा का पूरा डाल कर,,, अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया,,, आराधना जिंदगी में पहली बार चुदाई देख रही थी और वह भी अपनी बड़ी बहन की जिसे उसका ही जवान बेटा चोद रहा था संजू की कमर हिलते हुए देखकर आराधना पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,वह कभी सोची भी नहीं थी कि उसका बेटा भी किसी औरत की चुदाई करेगा और मर्दों की तरह अपनी कमर आगे पीछे करके चुदाई करते हुए मजा लेगा,,, इसलिए यह दृश्य आराधना के लिए बेहद कामोतेजना से भरा हुआ था,,,,,।

सहहहहह आहहहहहह आहहहहह संजू मेरे बेटे जोर जोर से धक्का लगा,,, बहुत मजा आ रहा है रे,,,, तेरा लंड एकदम मुसल की तरह है,,,,आहहहहह।

तुम्हारी चूत भी एकदम मक्खन मलाई की तरह है मौसी,,, एकदम शट-शट जा रहा है,,, हाय तुम्हारी चूचियां,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ बढ़ाकर उसकी दोनों चूचियों को पकड़ते हुए,,) बहुत लाजवाब है मौसी इन्हें दबाने में पकड़ने में इतना मजा आता कि पूछो मत,,,,(ऐसा कहते हुए संतोष जोर-जोर से अपनी कमर आगे पीछे हिला रहा था आराधना तो यह देखकर पूरी तरह से बेताब हुए जा रही थी,,,उसकी उंगली कब उसकी चूत में प्रवेश करके उसे पता ही नहीं चला और वह अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगी,,,, अद्भुत नजारा बना हुआ था कमरे के बाहर और कमरे के अंदर कमरे के बाहर भतीजा और मौसी चुदाई में लगे हुए थे और अंदर कमरे में दरवाजे की ओट में छिप कर आराधना उत्तेजना से भरे दृश्य को देखकर अपनी चूत में उंगली अंदर बाहर कर रही थी,,,, आराधना को अपनी बहन की गर्म सिसकारियों की आवाज एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,, उस गरमा-गरम सिसकारियों की आवाज सुनकर आराधना का मन मचल रहा था,,,, अपनी चूत में उंगली करते हुए आराधना का भी मन गरम सिसकारियां निकालने को कर रहा था क्योंकि उसे भी बहुत मजा आ रहा था,,,

सामने का दृश्य और भी ज्यादा गरमा गरम हुआ जा रहा था उन दोनों की गरमा गरम बातें और दोनों की हरकतें एकदम जानलेवा लग रही थी आराधना के दिलों दिमाग पर यह दृश्य पूरी तरह से अपनी छाप छोड़ रहा था अपने भतीजे का साथ देते हुए साधना भी अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेल रही थी,,,चुदाई का अद्भुत दृश्य आराधना अपनी आंखों से देख रही थी उसे जब देखने में इतना मजा आ रहा था तो साधना को कितना मजा आ रहा होगा यही सोचकर वह हैरान थी,,,,, एक बार फिर से घड़ी की तरफ देखी तो 3:30 बज रहे थे ,,,, आराधना हैरान थी इस बात से की साधना की चुदाई करते आधा घंटे का समय बीत चुका था लेकिन उसके बेटे का पानी अभी तक नहीं निकला था जबकि वह अपना अनुभव देख रही थी महसूस कर रही थी उसके पति का जाते ही 2 मिनट में निकल जाता था,,,,आराधना को समझ में नहीं आ रहा था किसका बेटा आधा घंटा तक कैसे उसकी मौसी की चुदाई कर रहा है और तकरीबन डेढ़ 2 घंटा तो उसके जिस्म से खेलने में ही लग गया था,,,, इस बात का एहसास आराधना को और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था और वह बड़ी तेजी से अपनी चूत में उंगली अंदर बाहर कर रही थी,,,।

चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था सड़क पर किसी भी वाहन के आने-जाने की आवाज बिल्कुल भी सुनाई नहीं दे रही थी और ऐसे सन्नाटे भरी रात में केवल कमरे में साधना की हल्की हल्की गर्म सिसकारी की आवाज ही गुंज रही थी,,,,उत्तेजना और मदहोशी में अपनी ही उंगली से आराधना पानी छोड़ चुकी थी लेकिन अभी भी संजू बरकरार था आराधना को एकदम साफ नजर आ रहा था कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी बड़ी बहन की चूत में बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था अपने बेटे के लंड को अंदर बाहर होता हुआ देखकर रह रह कर आराधना का भी ईमान डोलने लग रहा था,,,,

तकरीबन 10 मिनट बाद साधना की गरम सिसकारी की आवाज तेज हो गई,,,, ऐसा लग रहा था कि वह अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच रही थी और यही हाल संजू का भी था,,,,

मैं झड़ने वाली हूं संजू,,,,आहहहहह मेरा होने वाला,,, है,,,आहहहहह,,,

चिंता मत करो मौसी मैं भी आने वाला हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही वह कसके साधना की कमर को पकड़ लिया और तेज रफ्तार से धक्के पर धक्के लगाने लगा,,,,)

आहहहहह मैं तो गई आहहहहहहह संजू मैं तो गई,,,,,।

(संजीव को अपनी मौसी की चूत का कसाव अपने लंड पर बढ़ता हुआ महसूस हुआ वह समझ गया की मौसी का पानी निकल रहा है और वह भी तेज धक्के लगाते हुए झडने लगा,,, संजू अपनी मौसी की चूत में पानी निकालते हुए उसकी पीठ पर सर रखकर हांफने लगा था,,, अब आराधना के लिए वहां खड़ा रहना उचित नहीं था इसलिए वह तुरंत बिस्तर पर आ कर लेट गई और अपने कपड़े को व्यवस्थित कर ली थोड़ी देर बाद साधना भी कमरे में आई और उसके बगल में बिना कुछ आवाज कीए लेट गई,,,।
 
मनीषा की खूबसूरती को संजू पहले दिन ही अपनी आंखों से भांप लिया था उसका दूध जैसा गोरा बदन पहले दिन से ही उसकी आंखों में बस गया था और वह भी पहली बार जिस अवस्था में होने जा रही थी उसे देखकर उसके लौड़े ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,, और वह भी संजू की किस्मत इतनी अच्छी थी कि वह पहली बार में ही मनीषा को केवल एक छोटी सी टीशर्ट और पेंटी में देखा था जिसमें मनीषा गजब की कयामत लग रही थी,,, वह तो उस दिन संजू अपनी मौसी को चोदने के इरादे से आया था इसलिए मनीषा के ऊपर ज्यादा ध्यान दिया नहीं था,,, उस दिन से आज जाकर उसे मौका मिला था मनीषा से मुलाकात करने का और अब तो उसकी किस्मत में चार चांद लग गया था क्योंकि वह मनीषा के साथ कोचिंग का क्लास जो शुरू करने जा रहा था इसी सिलसिले में वह‌मनीषा के घर आया था,,,।

संजू मनीषा के बिस्तर पर बैठा हुआ था और मनीषा कुर्सी पर बैठ कर पढ़ाई कर रही थी,,, मनीषा आज संजू को देख कर खुश नजर आ रही थी लेकिन यही मनीषा उस दिन संजू के ऊपर मन ही मन बहुत गुस्सा कर रही थी जब वह उसे पेंट और टीशर्ट में देखा था और अपनी मां पर भी उसे गुस्सा आया था कि किसी को भी उसके कमरे में ले कर चली आती है,,,,, दोनों बैठे हुए थे बिस्तर पर समझी और कुर्सी पर मनीषा बात की शुरुआत कैसे करनी है मनीषा को समझ में नहीं आ रहा था और संजू था कि तिरछी नजरों से मनीषा की खूबसूरती के मादक रस को अपनी आंखों से पी रहा था,,, संजू टी शर्ट में झांकती है उसकी गोलाईयों को तिरछी नजरों से देख कर मन ही मन खुश हो रहा था,,, उसे इतना तो समझ में आ ही गया था कि जब गोडाउन मैं बेहतरीन माल है तो शोरूम आले दर्जे का तो होगा ही होगा,,,, मनीषा ही बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।

और संजू क्या हाल है,,,(किताबों को एक तरफ रखते हुए बोली)

एकदम ठीक है मनीषा दीदी,,,

तुमको मम्मी ने तो सब कुछ बता ही दी होगी,,,

जी दीदी मौसी ने मुझे सब कुछ बता दि‌ है और मैं तैयार हूं इसीलिए तो बात करने के लिए आया था,,,

चलो इस बात की मुझे खुशी है कि तुम तैयार तो हो,,, पढ़ा तो लोगे ना,,,

जी हां दीदी पड़ा लूंगा और वैसे भी अगर नहीं समझ में आएगा तो तुम तो हो ना,,,

हां यह बात सही है जहां पर तुम्हारा काम फंसे वहां पर मुझसे पूछ लेना,,,

शुरू कब से करना है दीदी,,,

कल ही से शाम को,,,।(बालों के लटको अपनी नाजुक ऊगलियों से पकड़ कर उसे अपने कान के पीछे ले जाते हुए बोली और यही अदा,, संजू के तन बदन में आग लगा रही थी,,,)

जी दीदी में पहुंच जाऊंगा,,,,

(इतना सुनते ही मनीषा जोर जोर से हंसने लगी उसके हंसने की वजह को संजू समझ नहीं पा रहा था लेकिन हंसती हुई मनीषा स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से कम नहीं लग रही थी,,,)

क्या हुआ हंस क्यों रही हो,,,

अरे हंसु नहीं तो और क्या करूं,,,

क्यो,,,?(संजू आश्चर्य जताते हुए बोला)

अरे बुद्धू तुम्हें पता है कि कोचिंग क्लास कहां पर है,,,

नहीं तो,,,

तब कैसे पहुंच जाओगे बताओ,,,,

अरे हां,,,,, कहां पर है कोचिंग क्लास,,,,

अरे बताती हूं,,,, तुम्हें अभी ले चलती हूं थोड़ी देर रुको तो सही,,,,,।(इतना कहने के साथ फिर से हंसने लगी उसकी हंसी संजीव को बहुत ही मनमोहक लग रही थी और हंसते हुए उसके बदन के साथ-साथ उसके दोनों संतरे इस टीशर्ट में उछल रहे थे जिसे देखकर संजू के तन बदन में आग लग रही थी और उसे उछलता हुआ देखकर संजू समझ गया था कि मनीषा टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं पहनी है जोकि कभी-कभी उसकी दोनों चूचियों की कड़ी निप्पल टी-शर्ट में भाले की नोक की तरह उभर कर नजर आने लगती थी,,,,,, संजू तुरंत ही अपने मन में कल्पना करने लगा कि बिना टीशर्ट की मनीषा की चूचियां कैसी नजर आती होगी,,,, वह मन ही मन मनीषा की सूचियों की तुलना अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी चुचियों से करने लगा था जो कि वह जानता था कि मौसी की चूचियां फुटबॉल के साइज की थी और वही मनीषा की चूचियां टेनिस के गेंद से थोड़ी बड़ी बड़ी थी,,, थोड़ी देर में फिर से कमरे में सन्नाटा फैल गया,,, मनीषा अपने कमरे में एक जवान लड़के की उपस्थिति में थोड़ा असहज महसूस कर रही थी और वह भी इसलिए कि ईसी लड़के ने उस दिन उसे केवल टी शर्ट और पेंटी में देख लिया था,,, इसलिए संजू के सामने उसे थोड़ा अजीब लग रहा था,,, वह फिर से बात की शुरुआत करते हुए बोली,,,।)

तुम उस दिन आए थे ना संजू लेकिन मैं तुमसे बात नहीं कर पाई थी,,।

वो हां दीदी उस दिन,,, के लिए मैं थोड़ा शर्मिंदा हूं,,,

क्यों,,,?

वह उस दिन मौसी तुम्हारे कमरे में लेकर आ गई थी ना और तुम केवल पेंटी,,,,,

अरे हां कोई बात नहीं,,,(संजू के मुंह से पेंटी शब्द सुनते ही मनीषा के गोरे गोरे गाल शर्म के मारे लाल होने लगे) तुम जानबूझकर थोड़ी आए थे,,, कोई बात नहीं उस दिन के लिए मेरे मन में कोई गिला शिकवा नहीं है,,,

चलो तब तो ठीक है दीदी उसी वजह से मैं तुम्हारे से मिलने में थोड़ा सा घबरा रहा था कि तुम मुझे क्या बोलोगी क्या समझोगी,,,

अगर तुम्हारे लिए मेरे मन में गिला शिकवा होता तो मैं मम्मी से तुम्हारे लिए कोचिंग क्लास ज्वाइन करने के लिए नहीं कहलाती,,,,,,

(अभी दोनों बात ही कर रहे थे कि किचन में से आवाज आई,,,)

मनीषा चाय तैयार हो गई है,,, ले ले कर जा,,,

(अपनी मां की आवाज सुनते ही मनीषा बोली)

तुम यही बैठो मैं चाय लेकर आती हूं,,,,(इतना कह कर मनीषा कुर्सी पर से उठने वाली थी कि तुरंत संजू बिस्तर पर से उठा और अपना हाथ मनीषा के कंधे पर रखकर उसे हल्के से दबाते हुए उसे बैठने का इशारा करते हुए बोला,,,)

तुम बैठो दीदी मैं लेकर आता हूं,,,

अरे नहीं नहीं मैं लेकर आ रही हूं ना,,,

अरे दीदी मैं कोई मेहमान थोड़ी हूं जो मेरी मौसी का ही घर है ना इसलिए मेरी भी जिम्मेदारी बनती है और वैसे भी तुम मेरी बड़ी दीदी हो तुम मेरे लिए चाय लेकर आओ ही अच्छा थोड़ी लगता है,,, तुम बैठो मैं लेकर आता हूं,,,,।

( इतना कहने के साथ ही संजू मनीषा के कमरे से बाहर निकल गया और मनीषा उसे जाते हुए देखती रह गई,, जिस अदा से उसने उसके कंधे पर रखकर उसे बैठने का इशारा किया था मनीषा पूरी तरह से उसके इस अदा से कायल हो चुकी थी,,, मनीषा पहली बार संजू को गौर से देख रही थी एक जवान लड़की के लिए ऐसा खूबसूरत नौजवान लड़का ही उसका बॉयफ्रेंड बनने के लायक था ऐसा मन में ख्याल आते ही उसके तन बदन में अजीब सी झुर्झुरी सी फैल गई,,, मनीषा संजू के खूबसूरत मासूम चेहरे को देखकर उसके ऊपर मोहित हो चुकी थी वह कुर्सी पर बैठे बैठे मन ही मन मुस्कुरा रही थी और संजू था कि जानबूझकर मनीषा को ही बैठने के लिए बोल कर खुद चाय लेने के लिए गया था ताकि रसोई घर में जाकर वहां अपनी मौसी के साथ थोड़ी मस्ती कर सके,,,,,

मनीषा अपने कमरे में कुर्सी पर बैठकर संजू की मासूमियत के बारे में सोच रही थी वहीं दूसरी तरफ संजू किचन में पहुंच गया था मनीषा की मां के साथ मस्ती करने के लिए किचन में घुसने से पहले अपनी चारों तरफ नजर घुमाकर देखकर तसल्ली कर लेने के बाद वह रसोई घर में प्रवेश किया जहां पर उसकी मां दरवाजे की तरफ पीठ करके प्लेट में नाश्ता लगा रही थी और तुरंत संजू जाकर पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया,,, और अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चुचियों पर रखकर दबाने लगा एकाएक हुए इस हमले से साधना एकदम से चौंक गई लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसे बाहों में कसने वाला संजू है तो उसकी जान में जान आई लेकिन इस बात से वह घबरा गई कि कहीं कोई देख ना ले,,, इसलिए वह संजू की पकड़ से छूटने का प्रयास करते हुए बोली,,।

छोड़ संजू कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,

अरे मौसी तुम खामखा डरती हो कोई देखने वाला नहीं है मैं पूरी तसल्ली कर लेने के बाद ही तुम्हें इस तरह से पकड़ा हूं ,,,(संजू बोलते हुए लगातार साधना की चूचियों को दबा रहा था,, और अपनी मौसी के इजाजत के बिना ही वह जल्दबाजी दिखाते हुए अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोलने लगा था तो साधना उसका हाथ पकड़ते हुए बोली,,,)

पागल हो गया क्या संजू अरे कुछ तो सब्र कर अगर मनीषा ने देख ली तो हम दोनों का जीना मुश्किल हो जाएगा,,,

अरे कुछ नहीं होगा मौसी तुम खामखा कर रही हो,,,,

अरे सच में तू पागल हो गया है रात भर तो लिया है फिर भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,

क्या करूं मौसी तुम्हारे ये खूबसूरत बदन जब भी मेरे करीब रहता है तो मुझे चैन नहीं मिलता,,,(इतना कहते हुए संजू अपनी मौसी के ब्लाउज का एक बटन खोलने में कामयाब हो गया,,, इसलिए साधना उसके हाथ को पकड़कर हटाते हुए अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली,,)

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तू तो मुझे मरवाएगा,,,

मरवाएगा नहीं,,, बल्कि तुम्हारी मारूंगा,,,

किसी और समय मार लेना,,, अभी मैं तुझे कुछ नहीं करने दूंगी,,,

ऐसा गजब मत करो मौसी मेरा इस समय तुम्हें चोदने का बहुत मन कर रहा है,,,(साधना की गांड पर अपने लंड को धंसाते हुए बोला,,, संजू की हरकत से साधना के तन बदन में भी चुदास की लहर दौड़ रही थी उसकी भी चुत गीली होने लगी थी,,,, फिर भी अपने आप पर काबू रखते हुए वह बोली,,,)

नहीं अभी बिल्कुल भी नहीं,,, बाद में कर लेना,,,

नहीं मौसी ऐसा कसम मत करो,,,(इतना कहने के साथ ही संजू फुर्ति दिखाता हुआ आगे से अपनी मौसी की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए,,, उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसकी चुत को दबोचने लगा,,,,)

आहहह क्या कर रहा है रे,,,

अब तो मान जाओ मौसी तुम्हारी चुत भी पानी छोड़ रही है,,,

इस तरह की हरकत करेगा तो पानी तो छोड़ेगी ही,,, चल हट मनीषा किसी भी वक्त आ जाएगी बहुत देर हो गई है,,,

(संजू समझ गया था कि इस समय उसकी मौसी मानने वाली बिल्कुल भी नहीं है इसलिए अपने मन को ही मनाने के लिए वह बोला,,,)

अच्छा कोई बात नहीं मौसी चोदने ना सही लेकिन एक बार अपनी चुत को चाटने तो दो-चार से पहले तुम्हारी चुत का स्वाद मिल जाएगा तो मजा आ जाएगा,,,

अब देख संजू तेरी ये जीद अच्छी नहीं है हम दोनों का भंडा फुट सकता है,,,(साधना चिंता व्यक्त करते हुए बोली )

नहीं नहीं मौसी ऐसा कुछ भी नहीं होगा जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं होगा तुम्हें बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं है यहां कोई नहीं आने वाला और बस 2 मिनट का ही तो है,,,,,

तू सच में मुझे फंसा देगा,,,,

(अब साधना के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे क्योंकि राजू की हरकत की वजह से उसका भी मन करने लगा था लेकिन उसके पास इतना समय नहीं था कि संजू के लंड को अपनी चुत में ले सके,,, संजू अपनी मौसी के चेहरे के भाव को देखकर समझ गया था कि उसकी मौसी तैयार है इसलिए बिना कुछ बोले वह अपनी मौसी की साड़ी आगे से पकड़कर उसे एक झटके में ऊपर की तरफ उठा दिया और साधना खुद अपनी साड़ी को कमर तक पकड़ कर खड़ी हो गई और संजू एक बार दरवाजे की तरफ देखकर घुटनों के बल बैठ गया और अपने हाथों से अपनी मौसी की पेंटी को खींचकर घुटनों तक ले आया और इसके बाद अपने प्यासे होठों को अपनी मौसी की पनीआई चुत पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,, पल भर में ही साधना मदहोशी में सिहर उठी संजू की जीभ अपना कमाल दिखा रही थी,,, साधना की सांस अटकने लगी थी उसके पेट वाला भाग मादक तरीके से ऊपर नीचे हो रहा था और उत्तेजना के मारे उसकी चुत कचोरी की तरफ फूल गई थी,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि उसके पास समय ज्यादा नहीं है इसलिए जितना हो सकता था उतना जीभ को अपनी मौसी की चुत की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,

ओहहहह संजू तूने तो फिर से मेरे बदन में आग लगा दिया रे,,,,आह हहहहहहह,,,,ऊममममम,,,,,

(साधना मस्त होकर गरमा गरम सिसकारी लेना शुरू कर दी थी संजू का मन तो कर रहा था कि अभी इसी वक्त अपने लंड को निकालकर उसकी चुत में डालकर उसकी चुदाई कर दे,, लेकिन ऐसा करने का समय बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह अपनी जीभ से ही मजा ले रहा था,,, साधना की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि वह अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई थी कि तभी दरवाजा खुलने की आवाज आई और वह दोनों एकदम से सकपका गए,,,। कदमों की आहट किचन के करीब आ रही थी इसलिए दोनों के पास बिल्कुल भी समय नहीं था संजू तो तुरंत उठ कर खड़ा हो गया और कोने में रखी फ्रिज के पास जाकर फ्रिज खोलकर पानी की बोतल निकालने लगा,,, साधना के पास अपनी पेंटी को ऊपर करके पहनने का बिल्कुल भी समय नहीं था इसलिए वह कमर तक पकड़ी हुई अपनी साड़ी को तुरंत नीचे छोड़ दी और धीरे से नाश्ते की प्लेट के पास पहुंचकर नाश्ता लगाने का नाटक करने लगी तब तक,,, मनीषा वहां पर आ गई,,,।

क्या मम्मी कितनी देर लग गई,,,

वो हां,,,, कहना कि संजू को अदरक वाली चाय पसंद है और मैंने अदरक डाली नहीं थी इसलिए वापस अदरक डालकर पका रही थी,,,

हां दीदी बिना अदरक की चाय मुझे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती,,,(फ्रिज में से पानी की बोतल निकाल कर उसके ढक्कन को खोलते हुए वह बोला)

कोई बात नहीं लेकिन अब तो तैयार हो गई है ना जल्दी से मम्मी हम दोनों को चाय नाश्ता दे दो मुझे इसे कोचिंग क्लास भी दिखाने जाना है,,,

हां तैयार हो गया है,,,, मैं अभी लेकर आती हूं,,,

तुम तैयार कर दो मैं लेकर जाता हूं मौसी,,,।

(संजू की बात सुनकर मनीषा मुस्कुरा कर वापस अपने कमरे की तरफ चली गई और उसके जाते ही दोनों की जान में जान आई,,, साधना संजू की तरफ देखकर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

देख लिया ना अगर तेरी में मनमानी करने दी होती तो आज हम दोनों सच में पकड़े जाते,,,

चलो पकड़े तो नहीं गए ना लेकिन मौसी मजा बहुत आया तुम्हारी चुत बहुत नमकीन है,,,

धत्,,,, अब अपनी बकवास बंद कर और यह चाय नाश्ता लेकर जा,,,

जो आज्ञा मैडम जी,,,

(और इतना कहने के साथ ही संजू चाय का कप और नाश्ते की प्लेट लेकर मनीषा के कमरे में पहुंच गया थोड़ी देर में दोनों नाश्ता करके कोचिंग क्लास देखने के लिए निकल गए,,,)
 
संजू मनीषा के साथ कोचिंग , क्लास देखने के लिए स्कूटी पर बैठ कर चल दिया,,,, मनीषा स्कूटी चला रही थी और संजू पीछे बैठा हुआ था,,, घर से निकलने से पहले मनीषा कपड़े बदल ली थी,,,, एक टाइट चुस्त सलवार और हल्की सी पत्नी कुर्ती पहन ली थी और लाल रंग का दुपट्टा अपने गले में लपेट ली थी जिससे उसकी खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ गई थी,,, कसी हुई सलवार में उसकी मोटी मोटी जांघें अपना अलग कहर बरपा रही थी,,, कसी हुई सलवार में मनीषा की मोटी मोटी जांघों से संजू पूरी तरह से अवगत था,,,, क्योंकि पहले वह मनीषा को सिर्फ पेंटी में देख चुका था,,,।

मनीषा के पीछे बैठकर संजू को बहुत अच्छा लग रहा था,, क्योंकि बार-बार स्कुटी की रफ्तार के साथ साथ वह मनीषा के बदन से समझा रहा था और जब जब वह मनीषा के बदन से सट जाता तब तब उसके बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगती थी,,,,,,, एक बार तो इसी तरह से एकाएक ब्रेक लगने की वजह से अपने आप को संभालने की स्थिति में संजू का हाथ मनीषा की कमर पर चला गया था संजू की इस हरकत की वजह से मनीषा के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और वह तुरंत कसमसाने लगी,,, संजू तुरंत अपना हाथ पीछे हटा लिया,,, मनीषा भी अच्छी तरह से समझ रही थी कि अनजाने में ही संजू का हाथ उसकी कमर पर आ गया था लेकिन इतने से ही संजू के बदले में जो हलचल हुई थी उसे महसूस करके संजू का लंड खड़ा हो गया था,,,,,, मनीषा को भी संजू को इस तरह से अपने पीछे बैठाना अजीब सा लग रहा था क्योंकि आज से पहले उसने कभी भी पीछे किसी जवान लड़के को नहीं बिठाई थी वह हमेशा अकेले या अपनी सहेली को साथ बिठाकर इधर से उधर जाती थी लेकिन आज पहली मर्तबा वह किसी जवान लड़के को अपनी स्कूटी पर बैठा रही थी इसलिए उसके तन बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी और इस हलचल का कारण एक और था कि जिसे वह स्कूटी पर पीछे बिठा रखी थी उसने उसे अर्धनग्न अवस्था में देख चुका था,,,, जिंदगी के अनुभव से भले अभी तक मनीषा पूरी तरह से वाकिफ ना हो लेकिन,,,मर्दों की नजर से वह अच्छी तरह से वाकिफ है क्योंकि कॉलेज आते जाते समय उसे इस तरह की नजरें अपने बदन को पीछा करते हुए नजर आए जाती थी और इन सब की उसे आदत सी पड़ गई थी,,, लेकिन अपने खुद के कमरे में किसी गैर जवान लड़के की नजर अब तक उसके बदन के किसी अंग पर नहीं पड़ी थी लेकिन संजू ऐसा इकलौता शख्स था जो उसे केवल पेंटी में देख चुका था और जाहिर सी बात थी कि उसके गोरे बदन को उसकी मोटी चिकनी जांघों को संजू जरूर अपनी नजरों से देख कर मस्त हो गया होगा,,,,,,,।

उन दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी,,,, संजू बात की शुरुआत करता है इससे पहले ही कोचिंग क्लास आ चुका था,,,,।

आ गया अपना कोचिंग क्लास,,,,(इतना कहते हुए मनीषा पार्किंग में स्कुटी ले जाकर खड़ी कर दी और संजू कोचिंग कलास को देखते हुए स्कूटी से नीचे उतर गया तब तक मनीषा स्कूटी को पार्क में पार कर दी और चाबी को हाथ में लेकर उसके चलने को घुमाने लगी और बोली,,,)

अंदर चलो दिखाती हुं,,,,( इतना कहने के साथ ही,,, मनीषा आगे आगे चलने लगी और संजु पीछे पीछे किसी खूबसूरत औरत या लड़की के पीछे चलने का एक अपना अलग ही मजा होता है और वही मजा इस समय संजू उठा रहा था,,,, कसी हुई सलवार में मनीषा की उभरी हुई गांड मटक रही थी जिसे देखकर संजू का दिल जोरों से धड़क रहा था लंड की अकड़न बढ़ती जा रही थी,,,,,,, संजू का मन अपनी मौसी की लड़की की मदमस्त कर देने वाली गांड और उसकी मादक चाल को देख कर बहक रहा था उसका मन कर रहा था कि जिस तरह से वह मनीषा की मां,,,, की गांड से खेलता है उसी तरह से उसकी लड़की की भी गांड से खेलना शुरू कर दे उसकी गांड को दोनों हाथों में भरकर दबाना शुरू कर दें लेकिन अभी ऐसा करना बिल्कुल भी ठीक नहीं था,,,, लेकिन मनीषा के पीछे चलते चलते वहां भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि हे भगवान जैसे उसकी मां उसी से चुदवाई है उसी तरह से यह भी उससे चूदवाले तो मजा आ जाए,,,,। देखते ही देखते मनीषा सीढ़ी पर चढ़ना शुरू कर दी थी और सीढ़ियों पर एक एक कदम रखकर आगे बढ़ते हुए मनीषा की मदमस्त कर देने वाली गांड और ज्यादा उभर कर बाहर की तरफ निकल जा रही थी संजू उससे बस एक सीडी पीछे ही था मन तो कर रहा था कि अपना मुंह आगे बढ़ा कर उसकी गांड के बीचो बीच रखकर उसकी खुशबू को अपने तन बदन में उतार ले,,,, मनीषा की उभरी हुई कसी हुई कांड संजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,,,,,,।

थोड़ी ही देर में मनीषा अपने पर्स में से चाबी निकालकर कोचिंग क्लास के ताले को खोलने लगी और ताला खोलने के बाद दरवाजा खोल कर अंदर प्रवेश करने लगी,,,,,, अंदर पहुंचते ही संजू बोला,,,,

अभी तो इस कमरे की साफ सफाई करनी पड़ेगी,,,

हां संजू तुम सही कह रहे हो,,,, इस कमरे में अभी और सफाई की जरूरत है,,,,(कमर पर अपने दोनों हाथ रखकर मनीषा बोली और ऐसा करने पर उसकी दोनों नारंगिया कुर्ती में से बाहर की तरफ कुर्ती फाड़ कर बाहर आने के लिए मचलने लगी,,,, जिस पर नजर पड़ते ही संजू का मन ललचने लगा उसके मुंह में पानी आने लगा,,,।)

तो देर किस बात की है दीदी शुरू कर देते हैं,,,

तुम सफाई करोगे,,,(मनीषा उसी अदा से आश्चर्य जताते हुए संजू से बोली,,,)

तो क्या हुआ दीदी आज से तुम्हारी हर एक काम में मैं तुम्हारी मदद करूंगा,,,,।

(संजू की यह बात सुनकर मनीषा मनी मन खुश होने लगी उसके होठों पर मुस्कान आ गई और वह बोली,,)

तो चलो फिर औ रहा झाड़ू,,,(कोने में हाथ दिखाते हुए बोली,,,,, और संजू तुरंत आगे बढ़ा और कोने में पड़ी झाड़ू को ले लिया और झाड़ू लगाना शुरू कर दिया,,,, कमरे में 10 बेंच पड़ी हुई थी,,, जिसे खींचकर एक तरफ करने की मनीषा कोशिश कर रही थी लेकिन उससे हो नहीं रहा था तो संजू उससे बोला,,,)

तुमसे नहीं होगा दीदी बेंच काफी वजन धार है एक काम करो तुम झाड़ू लगाओ मैं एक तरफ कर देता हूं,,,,।

(मनीषा यह बात अच्छी तरह से समझ गई थी कि,, उससे बेंच खींची नहीं जाएगी इसलिए मुस्कुराते हुए वह संजू के हाथों से झाड़ू ले ली और खुद लगाने लगी झाड़ू लगाते समय मनीषा झुकी हुई थी जिससे उसकी गोलाकार गांड एक अलग आकर्षण जमा रही थी,, जिसे देखकर संजू की हालत खराब हो रही थी,,, बेंच को इधर-उधर करते समय संजू की नजर झाड़ू लगाती हुई मनीषा पर ही चली जा रही थी उसकी गोल-गोल गांड देखकर संजू के मन में मनीषा को लेकर ढेर सारी भावनाएं उमड़ रही थी जो,,, मनीषा को देखकर वहां मनीषा के साथ भी वही करना चाहता था जो मनीषा की मां के साथ हुआ करता रहा था मनीषा की मां तो बड़े आराम से खुद ही आगे बढ़ कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाई,,, लेकिन मनीषा के साथ यह कैसे होगा यह संजू के लिए,,,, सोचने का विषय था,,,, लेकिन संजु पूरी तरह से मनीषा की खूबसूरत बदन के प्रति आकर्षित हो चुका था,,,।,,,

संजू बड़े आराम से,, बड़ी-बड़ी वजनदार बेंच को इधर से उधर कर दे रहा था और उसकी ताकत को देखकर मनीषा हैरान हो रही थी संजू का व्यक्तित्व उसे भी लुभा रहा था खास करके उसका मासूम चेहरा,,,, ना जाने क्यों मनीषा अपने आप को संजू के प्रति आकर्षित होती हुई महसूस कर रही थी जैसा कि आज तक उसके साथ ऐसा कभी भी नहीं हुआ था,,,, कॉलेज में लड़कों से बात जरूर करती थी लेकिन केवल काम भर का,,, उससे ज्यादा उन लड़कों से मनीषा का किसी भी प्रकार के वास्ता नहीं रहा,,,, लेकिन संजू के प्रति ना जाने क्यों अपने आप को खींचता हुआ महसूस कर रही थी इस वजह से लगाते समय भी वह तिरछी नजरों से संजू को ही देख रही थी,,,,,,,।

दोनों के बीच पूरी तरह से खामोशी छाई हुई थी दोनों कमरे में अपना अपना काम कर रहे थे लेकिन दोनों का मन काम से ज्यादा एक दूसरे में लगा हुआ था मनीषा समझ नहीं पा रही थी कि पहली मुलाकात में यह कैसा आकर्षण है हालांकि संजू से दूसरी मुलाकात थी और पहली मुलाकात बेहद अजीबोगरीब तरीके से हुई थी जिसकी मनीषा ने और नआ तो संजू ने कभी कल्पना की थी,,,,,, संजू बेंच को इधर-उधर करते समय मनीषा को ही देख रहा था और मनीषा भी तिरछी नजर से संजू को देख रही थी लेकिन तभी मनीषा को इस बात का एहसास हुआ कि संजू की नजर उसके बदन पर किसी खास स्थान पर जमी हुई है जब वह उसकी नजरों का पीछा की तो वह एकदम से दंग रह गई उसे समझते देर नहीं लगी कि जिस तरह से वो झाड़ू लगाने के लिए झुकी हुई है संजू उसकी गांड पर ही अपनी नजरें जमाए हुए हैं,,,,, इस बात का एहसास होते ही मनीषा के तन बदन में झुरझुरी सी फेल गई,,,, पल भर में उसका दिल धक से करके रह गया,,, अब उसे समझ में नहीं आ रहा था कि संजू से नजरें कैसे मिलाए,,,,, उसके गाल शर्म से लाल हो गए,,,यह स्थिति किसी भी जवान लड़की या औरत के लिए बेहद अजीब और शर्मनाक होती है जब उसे इस बात का एहसास होता है कि कोई जवान मर्द उसके खूबसूरत अंग को उसकी गांड को नजर भर कर देख रहा है,,, दूसरी लड़कियों और औरतों की तरह मनीषा भी झाड़ू लगाते हुए यह बात अपने मन में सोच रही थी कि उसकी गांड देखकर संजू अपने मन में क्या सोच रहा होगा उसके मन में भी दूसरे लड़कों की तरह गलत विचार आ रहे होंगे,,,, और गलत विचार भी कैसे-कैसे,,,, विचारों के बारे में सोच कर ही ना जाने क्यों उसे अपनी दोनों टांगों के बीच कंपन सी महसूस होने लगी,,,,। वह अपने मन में सोच रही थी कि संजू उसकी गांड को देखकर उसकी गांड के बारे में क्या सोच रहा होगा दूसरे लड़कों की तरह वह भी तो नहीं उसे चोदने के बारे में सोच रहा होगा या तो फिर अपने मन में सोच रहा होगा कि बिना कपड़ों की व कैसी लगती होगी उसकी नंगी गोरी गोरी गांड कैसी दिखती होगी और तो और उसकी चुत पर बाल होंगे कि नहीं होंगे,,, अगर होंगे तो बालों वाली चुत कैसी नजर आती होगी,,, उस में लंड डालने में कैसा लगता होगा,,,, इन सब बातों को सोच कर ही मनीषा की चुत गीली होती हुई महसूस होने लगी तो अपने आप को असहज महसूस करने लगी,,,,,‌।

मनीषा बार-बार उसे तिरछी नजरों से देख रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि संजू काफी हैंडसम और गठीला बदन वाला लड़का है जरूर इस की गर्लफ्रेंड की होगी और वह चुदाई का मजा भी ले चुका होगा तभी तो कैसे प्यासी नजरों से उसकी गांड देख रहा था,,,,,,,,।

देखते ही देखते पूरे कमरे की सफाई हो चुकी थी,,,, भैंस को सही करते हुए अपने हाथ को झाड़ते हुए संजू बोला,,,।

हो गया दीदी,,,

हां संजू अच्छा हुआ तूने मेरा हाथ बटा लिया,,, वरना मुझे अकेले ही साफ सफाई करनी पड़ती,,,

अरे दीदी तुम अब बिल्कुल भी चिंता मत करो,,, तुम्हारा काम करने के लिए मैं आ गया हूं,,,,।

अच्छा हुआ संजू कि मुझे तू मिल गया कोचिंग का काम भी तो संभाल लेगा और इसी तरह से मेरा साथ भी देता रहेगा,,,, पहले तो मुझे लग रहा था कि तू कोचिंग क्लास ज्वाइन करने के लिए नहीं मानेगा,,,

अरे मानता कैसे नहीं दीदी,,, किसी गैर ने तो मुझे यह प्रपोजल दिया नहीं था जो इंकार कर देता यह प्रपोजल तो आपकी तरफ से था इसलिए इंकार करने का कोई कारण ही नहीं था और वैसे भी मुझे तो तुम्हारे साथ और अच्छा लगेगा पढ़ाने में,,,,,।

(संजू की बातें मनीषा को बहुत अच्छी लग रही थी लेकिन वह बार-बार उसकी नजरिए को भी देख रही थी उसकी नजर बार बार उसकी छातियों की शोभा बढ़ा रही गोलाई पर चली जा रही थी,,,,, संजू की इस हरकत की वजह से रह-रहकर मनीषा असहजता का अनुभव कर रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि जो चीज दिख नहीं रही है उसमें संजू को इतना मजा क्यों आ रहा है,,,, शायद इस बात से मनीषा अनजान थे कि मर्दों के लिए अंगों का कटाव ही उनकी उत्तेजना के लिए सर्वोपरि होता है कुर्ती में होने के बावजूद भी चुचियों की गोलाई का उठाव ही सुंदरता पर चार चांद लगाता है,,,, और वही आकर्षण मनीषा की छातियों का भी था कुर्ती में होने के बावजूद भी उसकी दोनों नारंगिया उभर कर अपना रस बिखेर रही थी,,,,,,, दोनों को कोचिंग क्लास में काफी समय२ हो गया था और इस दौरान मनीषा को बड़े जोरों की पेशाब भी लगी थी वह जानती थी कि अब पेशाब को रोक पाना मुमकिन बिल्कुल भी नहीं था अगर स्कूटी चलाएगी तो रास्ते में खड्डो पर स्कूटी का टायर को देने पर वह अपने पेशाब के प्रेशर को बर्दाश्त नहीं कर पाएगी और जरूर कुछ ना कुछ हो जाएगा और इस समय संजू के सामने बाथरूम में जाने भी उसे शर्म महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी उसे जाना जरूरी था इसलिए वह संजू से बोली,,,,।)

काफी समय हो गया है अब हमें चलना चाहिए,,,

ठीक है,,,,,,,(इतना कहकर वह बेंच पर से उठ कर खड़ा हो गया मनीषा सोच रही थी कि संजू को किसी भी तरह से क्लास से बाहर निकाले तो वह खुद बाथरूम में घुस जाए लेकिन ऐसा कहने से पहले ही वह अपनी पेशाब की तीव्रता पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई और तुरंत संजू की आंखों के सामने ही बाथरूम का दरवाजा खोल कर बाथरूम में प्रवेश कर गई,,,, जितनी जल्दबाजी दिखाते हुए मनीषा बाथरूम के अंदर प्रवेश की थी उसे देखते हुए संजू समझ गया था कि ईसे जोरों की पेशाब लगी है,,,,,, संजू वहां से हटा नहीं वही बेंच पर बैठा रह गया वहां से तकरीबन 5 फीट की दूरी पर ही बाथरूम था जिसमें मनीषा प्रवेश कर गई थी प्रवेश करते ही व जल्दबाजी में दरवाजे को लॉक करके तुरंत अपने सलवार की डोरी को खोलने लगी,,,, इतनी जल्दबाजी में मनीषा ने अपनी सलवार की डोरी खोलकर पेंटी सहित उसे घुटनों तक नीचे खींच दी थी कि मानो जैसे कि जल्दबाजी में किसी से चुदवाने जा रही है,,,,, और कुछ ही सेकंड में संजू के कानों में मनीषा के पेशाब करने की धार की सु मधुर आवाज सुनाई देने लगी और वह मधुर और मादकता भरी आवाज को सुनकर संजू का लंड तुरंत खड़ा हो गया,,,, पल भर में ही संजू की सबसे बड़ी तेजी से चलने लगी उसकी 5 फीट की दूरी पर ही एक नौजवान खूबसूरत लड़की पेशाब कर रही थी और उन दोनों के बीच केवल दरवाजे का ही पड़ता था संजू अपने मन में सोचने लगा कि काश यह दरवाजा ना होता तो आज वह अपनी आंखों से एक खूबसूरत लड़की को पेशाब करते हुए देख लेता उसकी नंगी गोरी गोरी गांड को अपनी आंखों से देख कर अपने आप को भाग्यशाली समझता,,,,,।

मनीषा को इतनी तीव्रता भरी पेशाब लगी थी कि बैठते ही उसकी गुलाबी छेद से पेशाब की धार सामने की दीवार पर पहुंचने लगी जिसे देखकर खुद मनीषा हैरान थी,,, पूरे बाथरूम में उसकी चुत से आ रही सीटी की आवाज गूंज रही थी,,, जिसे सुनकर वह खुद शर्मिंदगी का अहसास कर रही थी उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी पेशाब की सीटी की आवाज जरूर संजू के कानों में पड़ रही होगी,,, इस बात का एहसास होते ही शर्म के मारे मनीषा के गोरे-गोरे गाल टमाटर की तरह लाल हो गए,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि संजू क्या सोच रहा होगा कि कितनी जोर से मुतती है,,,। वह कर भी क्या सकती थी उसका क्या दुनिया में किसी का भी पेशाब की तीव्रता पर बिल्कुल भी काबू नहीं रह पाता,,,, इस समय मनीषा के लिए यह बेहद शर्मनाक स्थिति थी लेकिन यही स्थिति संजू के लिए बेहद कामुकता और मादकता भरी हुई थी इस पल को वह पूरी तरह से अपने आप में समा लेना चाहता था,,,, मनीषा की गुलाबी छेद से आ रही मधुर सीटी की आवाज में वह अपने आप को खोता हुआ महसूस कर रहा था,,,, संजू अपने मन में यही सोच रहा था कि उसके गुलाबी छेद से पेशाब की धार कैसे निकल रही होगी,,,,, चुत के भूगोल से संजू को उसकी मौसी और उसकी बहन अच्छी तरह से वाकिफ करा चुकी थी इसलिए चुत के बारे में कल्पना करना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी,,, लेकिन बाहर बेंच पर बैठा बैठा वह सोच रहा था कि मनीषा की चुत कैसी होगी बालों वाली होगी या एकदम चिकनी होगी क्या अपने आप को चुदवासी महसूस करके उसकी भी चुत कचोरी की तरह फुल जाती होगी,,,,,,, फिर वह खुद ही इस निष्कर्ष पर निकला कि मनीषा जैसी खूबसूरत जवान लड़की भला अपनी खूबसूरत चुत को बालों से क्यों ढक कर रखेगी,,, वह जरूर खुशबू वाली बीट क्रीम लगाकर अपनी चुत की सफाई करती होगी और चुत की सफाई करने के बाद उसकी गुलाबी चुत एकदम मक्खन की तरह नजर आती होगी,,,, संजू मनीषा की चुत के बारे में कल्पना करके पेंट के ऊपर से अपने लंड को दबा रहा था,,,।

थोड़ी ही देर में पानी के गिरने की आवाज आने लगी पानी के गिरने की आवाज सुनकर संजू समझ गया कि मुतने के बाद मनीषा पानी डाल रही है,,, और थोड़ी ही देर में बाथरूम का दरवाजा खुला और अपने दुपट्टे को सही करते हुए,, मनीषा बाथरूम से बाहर आ गई और दरवाजे को बंद कर दी,,,, अपनी चुत से आ रही सीटी की आवाज के कारण मनीषा संजू से नजर मिलाने से कतरा रही थी,,,, और जैसे ही वह बाथरूम से बाहर आई संजू के मुंह से अचानक ही निकल गया,,।

हो गया अब चले,,,,

(संजू का यह सहजता से पूछे जाने वाला प्रश्न मनीषा के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर गया उसके लिए संजू का यह सवाल शर्मिंदगी का अहसास दिला रहा था शर्म के मारे उसके गाल लाल हो चुके थे वह संजू से नजर मिला है बिना ही बोली,,)

हां चलो,,,।

(संजू जिस तरह से उससे पूछा था मनीषा समझ गई थी कि वह पेशाब करने के बारे में ही पूछ रहा था,,, ‌और वह शर्म के मारे रास्ते भर संजू से बात नहीं करी,,, अपने घर पर पहुंच कर संजू से बोली,,,)

कल समय पर पहुंच जाना अब तो कोई दिक्कत नहीं होगी ना पहुंचने में,,,

नहीं दीदी कोई दिक्कत नहीं होगी मैं पहुंच जाऊंगा,,,,।

(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी स्कूटी पर बैठ गया और स्टार्ट करके एक नजर मनीषा की तरफ देख कर मुस्कुराया और एक्सीलेटर देकर आगे बढ़ गया,,,, मनीषा उसे जाते हुए देखती रही अपने मन में सोचने लगी कि अगर संजू की जगह कोई और होता तो जरूर वह‌ बाथरूम से निकलने पर उस तरह का प्रश्न पूछने पर उसके गाल पर थप्पड़ लगा दी होती लेकिन वह तो शर्म के मारे संजू से नजर तक नहीं मिला पा रही थी न जाने उसे क्या हो गया था,,,,, कुछ ही घंटों के मुलाकात में संजू की बातों ने उसकी मासूमियत भरे चेहरे ने मनीषा के दिल में अजीब सा आकर्षण बना लिया था,,,, मनीषा गेट पर खड़ी खड़ी तब तक देखती रह गई जब तक कि संजु आंखों से ओझल नहीं हो गया,,,,।

संजू की रास्ते भर मनीषा के बारे में ही सोच रहा था मनीषा की खूबसूरती उसके बदन की बनावट उसकी मनचली जवानी संजू के मुंह में पानी ला रही थी बस वह धीरे-धीरे अपनी मंजिल पर पहुंचना चाहता था और उसकी मंजिल थी मनीषा की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार जो कि वहां बड़े आराम से उसकी मां की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को हासिल कर चुका था,,,, अपनी मौसी का चित्र उसके जीवन में आते ही किचन वाला दृश्य उसकी आंखों के सामने घूमने लगा,,,, अपनी हरकत पर संजु‌ को हंसी आ रही थी वह अपने मन में सोचने लगा कि वह धीरे-धीरे कितना हरामी होते जा रहा है कि किसी के होने ना होने का उसे बिल्कुल भी परवाह नहीं होता,,,, किचन में जिस तरह से उसने साधना को अपनी बाहों में भरकर अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ा था और जिस तरह से उसकी साड़ी कमर तक उठाकर उसकी खूबसूरत रसीली चुत को अपनी जीभ लगाकर चाटा था,,, उसे अपनी ही हिम्मत पर अपने आप को ही ‍ शाबाशी देने का मन कर रहा था लेकिन वह इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ था कि जिस तरह की उसने हिम्मत दिखाया था कभी-कभी उसके लिए मुसीबत का कारण भी बन सकती थी,,, अपने मन में यही सब सोचते सोचते वह कब अपने घर पर पहुंच गया उसे पता ही नहीं चला,,,।
 
सब कुछ सही चलने लगा था,,,, संजू सही समय पर कोचिंग क्लास पहुंच जाता था,,, धीरे-धीरे उसे भी मजा आने लगा था,,,,, मनीषा को लगता नहीं था कि संजू अच्छी तरह से पढ़ आ पाएगा लेकिन वह जिस तरह से पढ़ाना शुरू किया था उसे देखते हुए 5 स्टूडेंट से कोचिंग क्लास शुरू हुई थी देखते ही देखते 55 विद्यार्थी हो चुके थे,,,, संजू की मेहनत और लगन देखकर मनीषा बहुत प्रभावित हो रही थी,,,, लेकिन दूसरी तरफ संजू के घर में अब सामान्य कुछ भी नहीं था संजू अपनी बहन के साथ रोज रात को अपनी रात रंगीन कर रहा था,,, मोहिनी के बदन में भी जवानी पूरी तरह से छा चुकी थी उसके अंगों में उभार कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा था,,,,, मोहिनी अपने भाई से चुदवाए बिना बिल्कुल भी नहीं रहती थी,,, एक तरह से मोहिनी को अपने भाई के लंड का नशा हो चुका था जब तक उसकी मोटाई की रगड़ को वह अपनी चूत की अंदरूनी दीवारों पर महसूस नहीं करती थी तब तक उसे चैन नहीं मिलता था,,,, और यही हाल आराधना का हो चुका था हालांकि वह अभी तक इस सुख को प्राप्त नहीं कर पाई थी लेकिन जिस दिन से वह रात के समय अपनी बड़ी बहन को अपने बेटे के साथ चुदवाते देखी थी तब से उसके बदन में रह रहे कर ना जाने क्यों गलत भावनाएं उमड़ने लगी थी,,,, अपने बेटे के मजबूत जांघों की रगड़ अपनी बहन की मोटी जांघों पर वह अच्छी तरह से अपनी आंखों से देख पाई थी उसका जबरदस्त कमर हिला कर प्रहार करना सब कुछ आराधना के लिए अद्भुत,,, था,,,,,, अपनी बड़ी बहन की चुदाई देखकर वह पूरी तरह से बह चुकी थी और जिंदगी में पहली बार वह अपनी आंखों से किसी औरत को चुदवाते हुए देख रही थी और वह औरत को ही नहीं बल्कि उसकी बड़ी दीदी थी और उसको चोदने वाला कोई गैर मर्द नहीं उसका ही बेटा था,,,, आराधना अभी भी नहीं समझ पा रही थी कि आखिरकार वह इस रिश्ते को क्या नाम दें,,,,, मौसी और भतीजे में इस तरह के संबंध को वह पहली बार देख रही थी,,,,,।

आराधना

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एक तरफ उसे अपनी बड़ी दीदी और अपने बेटे की मेघनाथ हरकत की वजह से शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था वहीं दूसरी तरफ वह ना जाने क्यों अपने बेटे की दमदार मर्दाना ताकत की तरफ आकर्षित हुए जा रही थी,,,, बार-बार आराधना की आंखों के सामने अपनी बेटी का जोर जोर से कमर हिलाना और अपनी बड़ी बहन की हर धक्के के साथ गर्म सिसकारी के साथ आनंद की अनुभूति करना यह सब याद आ रहा था,,,, आराधना इस बात को भी अपने मन में सोच कर हैरान हो रही थी कि,,,, क्या उसके बेटे का लंड उसकी बहन की चूत की गहराई तक मतलब कि उसके बच्चेदानी तक पहुंच रहा होगा अपने इस सवाल का जवाब वह खुद से ही देते हुए अपने मन को दिलासा देते हुए समझाती थी कि जरूर पहुंच रहा होगा आखिरकार उसके बेटे का लंड जरूर से कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है और जिस तरह से उसकी बहन लंबी-लंबी सिसकारियां ले रही थी उसे जरूर बहुत मजा आता होगा,,,, आराधना अपने मन में यह बात सोच कर हैरान हो रही थी कि जब उसका बेटा एक उम्र दराज औरत को संतुष्टि का अहसास करा सकता है तो लड़कियों की तो हालत खराब कर देता होगा और कितनी देर तक करता है,,, इतनी देर तक की तो उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी अपने पति के साथ संभोग करते हुए 1 मिनट या 2 मिनट तो बहुत हो गया इतने में तो उसका पति ढेर हो जाता था तो उसे सुख और संतुष्टि कहां से प्रदान कर पाता इसलिए अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई को देखकर आराधना सोचने पर मजबूर हो गई थी और अपनी बहन को इस कामलीला में शामिल देख कर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि परिवारिक रिश्तो में इस तरह के रिश्ते क्या सच में पनपते हैं या सिर्फ उसके ही घर पर इस कामलीला का पाप लीला चल रहा है,,,, लेकिन जाते-जाते उसकी बड़ी दीदी ने जो उससे बात कही थी उसे याद करके वह भी सोचने पर मजबूर हो जाती थी कि सच में औरतों को अपने लिए भी जीना चाहिए अपनी जरूरतों का अपने सुख का ख्याल रखना चाहिए तो क्या अपनी जरूरत किसी गैर मर्द से जिस्मानी ताल्लुकात बनाना या उनसे संभोग करके पूरी तरह से तृप्त हो जाना है अगर अपनी बहन का उदाहरण देखे तो हां जो कुछ भी उसकी बहन कह रही थी वास्तविक जीवन में औरतों को अपना लेना चाहिए,,, तभी एक औरत का जीवन सफल कहलाता है और वैसे भी वह अपनी बहन की जिंदगी में कभी भी कोई परेशानी नहीं देखी थी वह अपनी मर्जी की मालकिन थी और अपने सुख के खातिर जीबी रही थी और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा भी कर रही थी इसलिए ना जाने क्यों आराधना को अपनी बड़ी दीदी के जीवन से कुछ सीख लेने की भावना जाग रही थी,,, लेकिन फिर भी वह अपनी बड़ी बहन की तरह हरकत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी उसके आगे संस्कार और शर्म की दीवार खड़ी नजर आती थी,,, जो कि उस दीवार को लांघना शायद आराधना के बस में बिल्कुल भी नहीं था,,,,, फिर भी जब कभी भी वह उस रात वाले दृश्य को याद करती थी तब तक उसकी निप्पल तन कर खड़ी हो जाती थी बार-बार अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव करने लगती थी,,,,

अरफना क सपने में संजू और आराधना

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महीना गुजर चुका था लेकिन अशोक घर पर नहीं आया था धीरे-धीरे आराधना भी अशोक की चिंता करना छोड़ दी थी क्योंकि वह समझ गई थी कि वह सुधरने वाला नहीं है और एक बार फिर से‌वह अपने पिछले जीवन में झांकना या जाना बिल्कुल भी नहीं चाहती थी वह जिस तरह से जीना शुरू की थी उसमें एक तरह से उसे आनंद आ रहा था क्योंकि रात को वह चैन की नींद सोती तो थी,,,, लेकिन एक दिक्कत हो रही थी रात को जरूर और चैन की नींद सोती थी लेकिन बिस्तर पर सारी रात भर करवटें बदलती रहती थी उसे भी ना जाने क्यों एक मर्द की जरूरत पड़ने लगी थी लेकिन फिर भी वह किसी तरह से अपने आप को संभाले हुई थी,,,,।

संजू कोचिंग क्लास 4:00 बजे घर से निकल जाया करता था और 5:00 बजे के बाद उसकी मां आती थी इसलिए संजू पैदल या तो रिक्शा करके कोचिंग क्लास बहुत जाता था,,,, उसे भी कोचिंग क्लास में आनंद आने लगा था रोज नए नए चेहरे और उन्हें पढ़ाने की धुन में वह सब कुछ भूल जाता था एक तरह से वह मनीषा का मन ही मन बहुत ज्यादा शुक्रिया अदा करता था जो उसे कोचिंग क्लास में सहभागी बनाकर उसके जीवन को सुधारने में लगी थी,,, ऐसे ही एक दिन कोचिंग क्लास जाने से पहले गर्मी के कारण संजू बाथरूम में घुस गया और बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं किया बाहर के दरवाजे पर भी चिटकिनी नहीं लगाया क्योंकि वह जानता था कि इस समय कोई आने वाला नहीं है और किसी के आने से पहले ही वह घर से चला जाता था,,,,,

इसलिए बाथरूम में घुसते ही निश्चित होकर अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो गया,,,, संजू का गठीला बदन औरतों के लिए आकर्षण का कारण बना रहता था,,,, कपड़े उतार कर नंगा होने के बाद औपचारिक रूप से उसके लंड में सनसनाहट हो रही थी और वह अपने आप ही एकदम से खड़ा हो गया था,,, अपनी मौसी और अपनी बहन की चुदाई करने की वजह से अब उसे मुठ मारने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती थी अगर मोहिनी उसका साथ ना देती तो शायद अपनी मौसी की याद में वह रोज हिला कर अपना काम चला लेता क्योंकि मौसी उसे रोज नहीं मिलती थी लेकिन मोहिनी रोज रात को उसे खुश कर देती थी इसलिए अपने खड़े लंड पर वह बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा था और अपने बदन पर साबुन लगाने लगा था,,,,,।

दूसरी तरफ ऑफिस से जल्दी छुट्टी होने की वजह से आज आराधना जल्दी ही घर पर लौट आई थी बाहर स्कूटी खड़ी करके दरवाजे की तरफ देखी तो दरवाजा खुला हुआ था वह समझ गई कि संजू घर पर आ चुका है इसलिए धीरे से दरवाजा खोल कर अंदर प्रवेश की उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने पर्स को एक तरफ रख कर वह बाथरूम की तरफ आगे कदम बढ़ाई,,,, तो देखी बाथरूम का दरवाजा हल्का खुला हुआ है,,,, उसे लगा कि बाथरूम में कोई नहीं है क्योंकि अगर बाथरूम में कोई होता तो बाथरूम का दरवाजा बंद होता है इसलिए वह निश्चिंत होकर दरवाजा को पकड़ कर खोल दी और जैसे ही दरवाजा खोल ही उसकी आंखों के सामने जो दृश्य नजर आया उसे देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसकी नजर सीधे अपने बेटे के खड़े लंड पर गई जो कि छत की तरफ मुंह उठाकर खड़ा था आज पहली बार आराधना अपने बेटे के लंड को बेहद करीब से देख रही थी,,, पल भर के लिए उसकी आंखें अपने बेटे के लंड पर जमी की जमी रह गई,,,, पहले तो संजू दरवाजा एकाएक खुलने पर एकदम से हड़बड़ा गया था लेकिन जब देखा कि बाहर उसकी मां खड़ी है तब वह एकदम बेशर्मी पर उतर आए और अपने बदन को बिल्कुल भी ढकने की कोशिश नहीं किया क्योंकि वह ताड़ लिया था कि उसकी मां उसके लंड को ही देख रही है,,,, और वह जानबूझकर अपनी मां को अपने लंड दिखाने लगा,,,,,।

खूबसूरत जवान औरत के लिए एक जवान लड़के का मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड हमेशा से उसकी कमजोरी और आकर्षण का केंद्र बिंदु रहा है और उससे आराधना बिल्कुल भी अछूता नहीं थी इसलिए अपने बेटे के दमदार लंड को अपनी आंखों से देख कर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह अपनी नजरों को हटा नहीं पा रही थी एक अजीब सा आकर्षण उसकी नजरों को लंड के आकर्षण में बांध कर रख दिया था,,,, तकरीबन आराधना ने इस दृश्य को केवल 15 सेकंड तक ही देखी थी लेकिन इन 15 सेकंड में हुआ है कि नहीं जिंदगी को जी चुकी थी पल भर में ही अपनी आंखों से वह तार चुकी थी कि उसके बेटे के लंड की मोटाई और लंबाई बेहद दमदार है पहले ही वह अपने बेटे के लंड की दमदार ताकत को अपनी बड़ी बहन की मदमस्त जवानी पर देख चुकी थी इसलिए उसे अपने बेटे की मर्दाना ताकत पर बिल्कुल भी साथ नहीं था,,,, लंड के इर्द-गिर्द झांठ के बाल साबुन का झाग लगा हुआ था जिससे उसका लंड और भी ज्यादा मनमोहक लग रहा था,,,, उत्तेजना के मारे आराधना का गला सूख चुका था और वह अपने सूखे हुए गले को ठीक से गिला करने की कोशिश करते हुए अपनी नजरों को ऊपर की तरफ ले गई तो उसकी चौड़ी छाती को देखकर आराधना की चूत से मदन रस की बूंद टपक गई,,,,, वह पहली बार अपने बेटे को पूरी तरह से नग्न अवस्था में देख रहे थे और पहली बार देखने के बाद उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि उसका बेटा मर्दाना ताकत से भरा हुआ एक जवान लड़का था जिसकी बाहों में आने के लिए औरत शायद इसीलिए मचल उठती होगी और यही हाल उसकी बड़ी दीदी का भी होगा,,,,,। अपनी मां की अपने लंड पर चिपकी हुई नजरों को देखकर संजू बहुत खुश हो रहा था और अपनी मां की आंखों के सामने बेशर्मी का उदाहरण देते हुए वह अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिलाने लगा उसे देखकर आराधना की दोनों टांगों के बीच बवंडर से उठने लगा था और तुरंत उसे होश आया कि वह क्या कर रही है और तुरंत अपने बेटे को सॉरी बोल कर वापस दरवाजा बंद करके अपने कमरे में चली गई,,,,।

साधना की लाजवाब चूचिय

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संजू का काम बन चुका था वह समझ गया था कि उसकी मां भी उसके लंड की दीवानी हो गई है,,,, क्योंकि जिस तरह से वह प्यासी नजरों से देख रही थी संजू को लगने लगा था कि उसकी मां भी प्यासी है,,, और औरत के ऐसी प्यासे पन का फायदा उठाना हर एक मर्द जानता था और संजू को भी मालूम था कि उसे क्या करना है कब करना है बस वह सही मौके के इंतजार में था,,,,, मुठ मारने का उसका बिल्कुल भी विचार नहीं था लेकिन अपनी मां को इस तरह से अपना लंड देखता हुआ पागल अपने आप ही उसका दिमाग घूमने लगा था उसके मन में कल्पनाओं का तूफान उम्र रहा था और संजू उन कल्पनाओं के जंगल में अपने सपनों की राजकुमारी को ढूंढ रहा था जो कि पहले से ही बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी एकदम नग्न अवस्था में संजू अपनी कल्पनाओं के घोड़े पर सवार होकर बिस्तर के करीब गया और घोड़े पर से कूद कर सीधे बिस्तर पर पहुंच गया अपनी मां के दोनों टांगों के बीच और बिना कुछ बोले ही अपने मोटे लंड को अपनी मां के गुलाबी छेद में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया इस तरह की कल्पना करके संजू पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था और थोड़ी ही देर में पानी का फव्वारा निकला और सामने की दीवार को गीला कर दिया थोड़ी देर में शांत होने के बाद वह दीवार पर गिरे अपने लावे को पानी डालकर साफ करने लगा और फिर रावल पहन कर बाथरूम के बाहर आ गया,,,, थोड़ी ही देर में संजू तैयार हो चुका था लेकिन दूसरी तरफ आराधना की हालत खराब हो चुकी थी वह अपने कमरे में बिस्तर पर बैठी हुई थी और अपने बेटे के बारे में सोच कर हैरान हो रही थी,,,,,,।

मम्मी मैं जा रहा हूं,,,,

(अपने बेटे की आवाज सुनकर वह एकदम से चौक गई अपने बेटे से बात करने में उसे शर्म आ रही थी मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी तो दोबारा संजू बोला)

क्या हुआ मम्मी सो गई क्या,,,?

नहीं थोड़ी थकान है तू जा,,,

ठीक है मम्मी मैं जा रहा हूं,,,,(और अपनी मां के कमरे की तरफ मुस्कुराता हुआ देखकर संजू घर से बाहर निकल गया लेकिन आज उसकी मां जल्दी आई थी इसलिए वापस कमरे में प्रवेश करता हुआ बोला,,,,)

मम्मी आज तुम जल्दी आ गई हो क्या मैं तुम्हारी स्कूटी ले जा सकता हूं,,,,।

(संजू आराधना के कमरे में पहुंच चुका था लेकिन आराधना को होश बिल्कुल भी नहीं था वह किसी ख्यालों में खोई हुई थी लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर जैसे कोई उसे नींद से जगाया हो एकदम से हड़बड़ाहट में बिस्तर से उठ कर खड़ी हो गई और हडबड्ते हुए बोली,,,)

कककक क्या,,,?

अरे मम्मी कहां खोई हुई हो मैं पूछ रहा हूं कि मैं क्या तुम्हारी स्कूटी ले जा सकता हूं,,,

हां हां ठीक है ले जा,,,, चाबी देख दीवार पर टंगी होगी,,,।

(इतना सुनते ही संजू एक नजर अपनी मां के ऊपर डाला तो मुस्कुराने लगा वह समझ गया था कि उसके मोटे खडे लंड न६ उसका काम कर दिया है और वह चाबी लेकर घर से बाहर आ गया और उसको की चालू करके कोचिंग क्लास की तरफ चल दिया,,,, रात को भी आराधना अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी ,,, उससे बात करने में कतरा रही थी,,,,,,,, खाना खाने के बाद अपना सारा काम करके आराधना अपने कमरे में चली गई और संजु अपने कमरे में मोहिनी के साथ,,, शाम को अपनी मां को बेहद करीब से अपना लंड दिखाने की वजह से अभी तक उसके बदन में उत्तेजना का संचार हो रहा था इसलिए कमरे में जाते ही वह मोहिनी के कपड़ों को उतारकर उसे नंगी कर दिया और दूसरी तरफ आराधना का दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह ना चाहते हुए भी बार-बार अपने बेटे के लंड के बारे में सोच रही थी,,,, और सोचते-सोचते उसे कब नींद आ गई उसे पता ही नहीं चला,,,,,।

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तकरीबन रात को 2:00 बजे उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे कोई उसके कमरे में है और धीरे से उसके बिस्तर पर बैठ गया उसकी आंख नहीं खुल रही थी लेकिन उसे महसूस हो रहा था देखते ही देखते उसे समझ में आने लगा कि कमरे में उसका बेटा है और वह धीरे-धीरे उसके ब्लाउज के बटन खोल रहा है आराधना उसे अपना ब्लाउज का बटन खोलने से मना कर रही थी लेकिन वह मान नहीं रहा था देखते ही देखते संजू अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोल कर उसकी नंगी चूची को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया था सोने से पहले आराधना अपनी ब्रा को उतार दी थी केवल ब्लाउज पहनी हुई थी अपनी मां की बड़ी-बड़ी चुचियों को दशहरी आम की तरह वह मुंह में लेकर पी रहा था उसकी मां उसे रोकने की बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन वह मान नहीं रहा था लेकिन संजू की इस हरकत की वजह से उसके बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा और उसे मजा आने लगा,,,, देखते ही देखते आराधना की गरम सिसकारियां कमरे में घुसने लगी और संजू अपनी मां की चूची को पूरी तरह से निचोड़ डालना चाहता था बड़ी बड़ी चूची अपने हाथ में आया हुआ देखकर संजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी संजू पागलों की तरह अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पी रहा था और आराधना उसका सर पकड़ कर जोर जोर से अपनी छाती पर दबा रही थी,,,,, देखते ही देखते संजू का हाथ उसकी साड़ी की गिठान पर पहुंच गया और उसे खोलकर साड़ी को अलग करने लगा,,,,, उत्तेजना के मारे आराधना का गला सूख रहा था लेकिन आराधना अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से आनंदित हो चुकी थी देखते ही देखते समझो अपनी मां की साड़ी को पूरी तरह से उसके बदन से अलग कर दिया और उसकी पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा पेटिकोट की डोरी खुलते ही आराधना अपने आप ही अपनी गांड को हवा में ऊपर की तरफ उठा देता कि उसका बेटा बड़े आराम से उसकी पेटीकोट को उतार सकें संजू स्फूर्ति दिखाते हुए अपनी मां की पेटीकोट को पेंटी सहित पकड़कर उसे एक झटके से उतार दिया और देखते ही देखते संजू की मां बिस्तर पर पुरी तरह से नंगी हो गई,,,,, और अगले ही पल अपने बेटे की जीत को अपनी चूत पर महसूस करते ही वह एकदम से गनगना गई यह पल आराधना के लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था आराधना इस पल में पूरी तरह से डूबती हुई अपने आपको महसूस करने लगी देखते ही देखते संजू ने अपनी जीभ से उसे पागल कर दिया,,,। देखते ही देखते आराधना पूरी तरह से मदहोश होने लगी और अपने आप ही अपने बेटे के लिए अपनी दोनों टांगों को खोल दी संजू अपने दोनों घुटनों के बल बैठकर अपनी मां की दोनों कमर तक अपना हाथ ले गया और उसे कस के पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसकी आदि गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया,,,, और देखते ही देखते संजू अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की गुलाबी छेद पर रख कर एक करारा धक्का मारा और एक ही धक्के में संजू का लंड सारी अड़चनों को पार करता हुआ सीधा आराधना की बच्चेदानी से जा टकराया आराधना की चीख निकल गई और संजू ताबड़तोड़ धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया आराधना पूरी तरह से मस्त हो गई और देखते ही देखते गरम आहें भरते हुए उसका पानी निकल गया और जैसे ही उसकी आंख खुली उसके होश उड़ गए,,, उसके ऊपर संजू नहीं बल्कि वह बिस्तर पर अकेली ही थी पसीने से लथपथ वह सपना देख रही थी सपने में वह अपने बेटे के साथ संभोग रत थी अपनी छाती की तरफ नजर दौड़ाई तो ब्लाउज ज्यों का त्यों था,,, उसका एक भी बटन खुला नहीं था,,,, कमर के नीचे के हालात कुछ ठीक नहीं थे साड़ी कमर तक चढ़ी हुई थी साड़ी के नीचे उसने चड्डी नहीं पहनी थी उसकी चूत पर उसकी खुद की हथेली रखी हुई थी और उसकी चूत से मदन रस भल भला कर बह रहा था,,,, उसे समझते देर नहीं लगेगी सपने में उसे स्वप्नदोष हुआ है,,,, लेकिन आज तक ऐसा उसके साथ कभी नहीं हुआ था इस तरह का एक बार और उसके साथ कॉलेज के दिन में हुआ था और तब से लेकर आज तक आज दूसरी बार नींद में उसका पानी निकल गया था वह हैरान थी अपनी हालत पर,,,, पूरा बदन पसीने से तरबतर हो चुका था,,, अभी भी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, वो बिस्तर पर से उठी और अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगी सोने से पहले ही वह अपनी पेंटि निकाल चुकी थी और सपने में,,, उसे ऐसा ही नजर आ रहा था कि उसका बेटा खुद अपने हाथों से उसकी पेटीकोट के साथ-साथ उसकी पेंटी भी निकाल चुका था,,,, अपनी सांसो को दुरुस्त करने के बाद वह एक गिलास ठंडा पानी पी और अपने आप को शांत करने की कोशिश करने लगी बिस्तर पर बैठकर वो सपने के बारे में सोचने लगी कि इतना गंदा सपना उसे क्यों दिखाई दिया कहीं सपने में आने वाले दिनों का संकेत तो नहीं है कहीं ऐसा तो नहीं वह खुद अपने बेटे के साथ संभोग सुख प्राप्त करेगी अपनी बेटे के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाएगी,,, दुनिया समाज की परवाह किए बिना मां बेटे के बीच के पवित्र बंधन को तोड़ कर वहां अपने बेटे के साथ एक औरत और मर्द का रिश्ता कायम रखेगी,,,, यह सब सोचकर वह हैरान हो जा रही थी और अपने आप को ही झूठी सांत्वना देते हुए समझा रही थी कि नहीं ऐसा वह कभी नहीं करेगी अपने बेटे के साथ इस तरह का गलत संबंध वह कभी नहीं बनाएगी,,,।

बिस्तर पर बैठ कर वह घड़ी की तरफ देखी तो 3:30 का समय हो रहा था वह एकदम से हैरान हो गई थी,,, एक बार फिर से वह‌ बिस्तर पर लेट कर सोने की कोशिश करने लगी लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी,,, वो सपने के बारे में सोचने लगी और एहसास करने लगी कि सपना कितना हकीकत की तरह था ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी अभी उसका बेटा उसके कमरे में आकर उसकी चुदाई करके वापस चला गया है,,,, सपने में अपने बेटे की हरकत के बारे में सोचकर शर्म से उसके गाल लाल हो चुके थे सब कुछ हकीकत सा लग रहा था उसका कमरे में आना धीरे से बिस्तर पर बैठना और धीरे-धीरे उसके ब्लाउज के बटन खोलना बटन खोलने के बाद उसकी चूचियों को जोर जोर से दबाना,,,, उसकी मजबूत बुझाओ और हथेलियों का दबाव अभी भी अपनी चुचियों पर साफ तौर पर महसूस कर पा रही थी सब कुछ हकीकत सा लग रहा था उसके रोकने के बावजूद भी उसके बेटे ने जिस तरह से जबरदस्ती दिखाते हुए चुचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू किया था उसके चलते नींद में भी उसके बदन में उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,, और धीरे-धीरे साड़ी खोलना फिर पेटीकोट की डोरी खोलना औरत और उसका साथ देते हुए उसका खुद का अपनी गांड ऊपर की तरफ उठाकर पेटिकोट के साथ-साथ पेंटि उतरवाने में उसकी मदद करना,,,, और जिस तरह से अपने प्यासे होठों को उसकी चूत पर रख कर चाटना शुरू किया था उस पर तो आराधना पूरी तरह से गदगद हो गई थी,,,,, सपने में अपने बेटे की हरकत का बिल्कुल भी विरोध ना करना आराधना को और ज्यादा शर्मसार कर रहा था,,,, और देखते ही देखते जिस तरह से उसके बेटे ने अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर उसकी कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा था और उसकी आधी गांड को अपनी जांघों पर रख दिया था उस पल को याद करके आराधना इस समय बेहद रोमांचित हो रही थी,,, और देखते ही देखते पहले ही प्रहार में अपने समूचे लंड को उसकी चूत में डालकर बच्चेदानी तक पहुंचा देना सब कुछ अद्भुत था,,, सपने के बारे में सोच कर एक बार फिर से आराधना की निप्पल तन गई थी सपना इतना हकीकत भी हो सकता है वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी,,,, सपने में आकर उसके बेटे ने उसका पानी निकाल गया था,,,। इस बात का एहसास में वह पूरी तरह से डूब चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका मन क्या कह रहा है उसका दिल क्या चाहता है उसका दिमाग क्या करवाना चाहता है इस सपने को लेकर आराधना पूरी तरह से हैरान थी उसे लगने लगा था कि यह सपना भविष्य का संकेत है कहीं ना कहीं उसके मन में भी अपने बेटे के साथ चुदवाने की आस बंधती जा रही है,,,, इसीलिए वह अपने आप को और भी ज्यादा बेचैन महसूस कर रही थी बिस्तर पर करवट बदलते बदलते कब उसकी आंख लग गई उसे पता नहीं चला,,,, सुबह जब आंख खुली तो मोहिनी उसे जगा रही थी काफी देर हो गई थी इसलिए झट से वह बिस्तर से उठ कर बैठ गई और अपने काम में लग गई,,,।
 
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