Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 10 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest बैलगाड़ी,,,,,

इस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था और बाहर से दरवाजा बंद था इसलिए किसी भी तरह की दोनों को दिक्कत और चिंता नहीं थी इसलिए दोनों खुलकर मजा लेना चाहते थे,,,,दोनों ने पहले से ही अपनी वस्तु को उतारकर पूरी तरह से नग्न अवस्था में कमरे में मौजूद थे,,, अपनी बुआ की गांड मारने की खुशी राजू से बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह अपनी बुआ को खटिया पर पीठ के बल लेटाते हुएउसके ऊपर लेट गया और उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में लेकर उसके रस को पीना शुरू कर दिया,,,,। ऐसा नहीं था कि गांड मारने की उत्सुकता और खुशी केवल राजू को ही थी गुलाबी भी इस अनुभव से गुजर चुकी थी लेकिन उसे से बेहतर अनुभव को प्राप्त करना चाहती थी वह जानती थी कि उसके भैया से ज्यादा मजा उसे उसका भतीजा देगा,,, इसलिए तू आने वाली खुशी के बारे में सोच कर ही वह कसमसा रही थी,,,और अपने भतीजे का साथ देते हुए अपनी लाल-लाल होठों के द्वार को खोल दी थी जिसमें राजू अपनी प्यासी जी को डाल कर उसकी जीभ को चाट रहा था और उसकी लार को अपने गले में उतार रहा था,,,, गुलाबी पल भर में ही मदहोश होने लगी,,, राजू पूरी तरह से नंगा होकर अपनी नंगी बुआ पर लेटा हुआ था जिससे उसकी दोनों नारंगीया राजू की विशाल छातियों के नीचे दब रही थी,,, राजू को अपनी बुआ की चूचीयो की कड़क छुहारे जैसी निप्पल अपनी छातीयो में चुभ रहा था,,,,,, लेकिन यह चुभन राजू को बहुत आनंददायक लग रहा था,,,, राजू के तन में जोश बढ़ता जा रहा था,,,। राजू एक तरफ उसके लाल-लाल होठों का रस पी रहा था दूसरी तरफ से दोनों हाथों से उसकी दोनों नारंगी हो को दबा दबा कर उसका रस निकाल रहा था,,, गुलाबी को अपने भतीजे की यह हरकत बेहद रास आ रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था अपने भतीजे के साथ वैसे भी उसे संपूर्ण संतुष्टि का अहसास होता था,,,, लेकिन भतीजे की गैरमौजूदगी में उसे अपने तन की प्यास पर काबू नहीं हो पाता था जिससे वहां अपने बड़े भाई के साथ अपनी जवानी की गर्मी पिघलाने में लग जाती थी,,,।

Raghu ka lund



ओहहहह बुआ,,,, तुम्हारी चुचीया कितनी मस्त लगती है मन करता हैईसे मुंह में भर कर दिन रात पीता रहु,,,,

तो रोका किसने है रे दोनों हाथों से दबा दबा कर मुंह में लेकर पी और खींच खींच कर पी ,,( गुलाबी मदहोशी में कसमसाते हुए बोली,,,)

ओहहहह बुआ तुम्हारी यही अदा तो मुझे पागल कर देती है और इसी अदा के चलते ही मैं देखना हम दोनों के बीच पवित्र रिश्ता होने के बावजूद भी मैं तुम्हारी चुदाई करता हूं मैं भी सच कहूं तो तुमने मुझे बहुत कुछ सिखाई हो,,, वरना ऐसा अद्भुत सुख मुझे कहां मिलने वाला था,,,।

राजू तू नहीं जानता कि तेरे पास दोनों टांगों के बीच जो औजार है वो कितना जबरदस्त है,,, मैं सच कहती हूं तू अगर किसी भी औरत को अपना लंड दिखा देना तो वह तेरे आगे घुटने टेक दे तेरे से चुदवाने के लिए वह कभी भी तैयार हो जाए,,, जैसे कि मैं हो गई,,,, मैं सच कहती हूं राजू एक बार तू अपनी मां को अपना लंड दिखा दे फिर देख कैसे तू मादरचोद बन जाता है,,,, हम दोनों ने भैया के लंड़ को देखा है तेरे से आधा ही है लंबाई में भी और मोटाई में भी,,,,एक बार तेरा मोटा और लंबा लंड तेरी मां की बुर में चला गया तो समझ लो तेरी मां जिंदगी भर के लिए तेरी गुलाम हो जाएगी रात को पहले भैया के साथ चुदवाएगी लेकिन उनके सोने के तुरंत बाद वह तेरे कमरे में आ जाएगी,,,।

(गुलाबी तो इस बात का एहसास हो रहा था कि राजू के सामने उसकी मां का जिक्र छेढ़ने पर राजू के तन बदन में आग लग जाती थी उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जाती थी और वह जोर-जोर से उसकी चूची को दबा दबा कर पीने लग जा रहा था यही दर्शाता था कि वह भी अपनी मां को चोदना चाहता है,,,और अपने भतीजे की स्थिति को देखकर गुलाबी मन ही मन खुश होती थी कि इसकी आग अगर भड़का या जाए तो यह जरूर अपनी मां को चोदने की कोशिश करेगा और इसकी मा भीउसके लंड का दर्शन कर ली तो जरूर उसे अपनी बाहों में लेने के लिए तड़प उठेगी इस बात को गुलाबी अच्छी तरह से जानती थी और उसे पूरा विश्वास था कि जैसा वह सोच रही है वैसा ही होगा,,,,)

ओहहहह बुआ यह तुम कैसी बातें कर रही हो,,,,

क्यों तुझे मजा नहीं आ रहा है,,, बोल,,, तुझे मेरी कसम सच-सच बताना मुझसे शर्माने की जरूरत नहीं है,,,, हम दोनों साथ में तेरी मां को चुदवाते हुए देखेंगे उसके नंगे बदन को देखे है तू भी देखा है,,, और उस समय तेरी मां को नंगी देखने पर उसकी खूबसूरती मुझे बहुत अच्छी लगती थी जब एक लड़की होने पर मुझे तेरी मां की खूबसूरती इस कदर भाने लगी थी तो तू तो एक मर्द है और तू तो मेरे साथ मिलकर अपनी मां को एकदम नंगी देखा है और वह भी चुदवाते हुए भले ही तेरा बाप ही चोद रहा था लेकिन तेरी मां की बुर में जा तो रहा था एक मर्द का लंड ही ना,,,,(गुलाबी बोले जा रही थी और राजू अपने बुआ की बातों को सुनकर एकदम गरम हुए जा रहा था और वह सारी कसर अपनी बुआ की चूची पर उतार रहा था,,, उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुआ की दोनों टांगों के बीच जबरदस्ती घुसने का प्रयास कर रहा था जिसे गुलाबी अपनी दोनों टांगों को आपस में सटाकर उसके लिए एक दीवार सी बना दी थी वह राजू को तड़पाना चाहती थी अपनी बातों से अपने इरादों से और ऐसा हो भी रहा था राजू कुछ बोल नहीं रहा था बस अपनी बुआ की बातों का मजा लेते हुए अपनी बुआ के खूबसूरत बदन से खेल रहा था,,, गुलाबी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) वह सब देख कर मैं अच्छी तरह से जानती थी और मैं अपनी आंखों से देखी भी थी तेरा भी लंड खड़ा हो जा रहा था और तू सारी कसर मेरे पर उतारता था,,, सच-सच बताना राजू तेरी मां तो मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत है कपड़े उतारने के बाद तो स्वर्ग से उतरी और कोई अप्सरा नजर आती है भाभी,,,, तेरा मन भी करता है ना कि आपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर चोदे,,,(अपनी बुआ की है बात सुनकर राजू पूरी तरह से गर्म हो क्या और अपनी कमर को झटका मारकर अपने लंड को अपनी बुआ की दोनों टांगों के बीच के उस दरार में डालने की कोशिश करने लगा जो कि उसका लंड गुलाबी की चिकनी जांघों के बीच फंसा हुआ था,,, राजू का जोश और उसकी हरकत को देखकर गुलाबी मुस्कुराते हुए बोली,,,)

हाय मेरे राजा अपनी मां की बातें सुनकर कैसा गरम हो रहा है,,, अब तो मुझे पक्का यकीन हो गया कि तू भी अपनी मां को चोदना चाहता है,,,,)

ओहहहह बुआ भगवान के लिए ऐसी बातें मत करो,,,(मदहोशी में अपनी बुआ की चूचियों को दबाता हुआ अपनी आंखों को बंद करता हुआ बोला मानो कि जैसे वह कल्पना की दुनिया में खोने लगा हो और अपने नीचे लेटी हुई बुआ की जगह अपनी मां की कल्पना कर रहा हो,,,, राजू गोरी गोरी चूचियों को दबा दबा कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,, लंड लगातार जांघो को चीरकर बुर में घुसने का प्रयास कर रहा था,,,,,, लेकिन गुलाबी भी बड़ी तेज तर्रार थी वह भी राजू के लंड को अपनी जांघों के बीच फंसा कर रखी थी ना हीलने दे रही थी और ना ही बाहर निकलने दे रही थी,,,।राजू की हालत खराब होती जा रही थी उसके तन बदन में इतने दिनों की लहर बड़ी तेजी से उठ रही थी लंड की नसों में रक्त का प्रवाह बड़ी तेज गति से हो रहा था जिससे उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसका लंड कहीं फट ना जाए,,,, राजू जैसा कि उसकी बुआ कह रही थी उसका मन वास्तव में अपनी मां को चोदने को कर रहा था लेकिन वह अपने मन की बात अपनी बुआ को कैसे बता दें कि वह अपनी मां को चोदना चाहता है इसलिए वह खामोश था,,,, लेकिन अपनी बुआ की बातों की गर्मी अपने बदन में महसूस करके उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वह तुरंत अपनी बुआ को अपनी बाहों में लेकर उसे ऊपर की तरफ उठाते हुए और खुद पलटता हुआ बोला,,,)

आ मेरी रंडी बुआ,,,, आज तेरी हालत खराब कर दूंगा बहुत तुझे शौक है ना आज मैं तुझे अपनी मां बना कर चोदूंगा,,,

मुझे मां बनाकर चोदने का मजा नहीं आएगा जितना मजा तुझे अपनी खुद की मां को चोदने में आएगा,,,,।

साली रंडी बहुत बात करती है,,,(इतना कहने के साथ ही राजीव पलटकर पीठ के बल खटिया पर लेट गया और उसकी पूरा उसके ऊपर आ गई और उसके ऊपर आते ही राजू जोर से अपनी दोनों हथेलियों को अपनी बुआ की गोल-गोल गांड पर मारते हुए जितना हो सकता था उतना गांड को अपनी हथेली में लेकर दबाना शुरू कर दिया और इसके लिए आपको बार-बार दोहराने लगा जिससे गुलाबी को दर्द के मारे आह निकल जा रही थी और उसकी हर एक आह को सुनकर,,, राजू एकदम खुश होते हुए बोला,,,)

साली भोसड़ा चोदी,,, अब आया मजा मादरचोद,,,

मादरचोद तो तू बनेगा मेरे राजा अपनी मां को चोद कर,,,,।(गुलाबी एकदम मुस्कुराते हुए बोल रही थी और राजू उसके व्यवहार से और ज्यादा उत्तेजित हो जा रहा था वह बार-बार गुलाबी की गांड पर चपत लगा रहा था देखते ही देखते गुलाबी की गुलाबी गांड लाल हो गई,,,, राजू तुरंत उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,,और गुलाबी भी उसका साथ देने लगे गुलाबी खुद थोड़ी देर में अपनी चुची को बाहर निकाल कर दूसरी चूची मुंह में डाल देती थी,,, गुलाबी को भी अपनी चूची पिलाने में बहुत मजा आ रहा था,,,, कुछ देर तक यह क्रीड़ा इसी तरह चलती रही लेकिन राजू अपनी बुआ की खूबसूरत सुराख को देखना चाहता था इसलिए वह अपनी बुआ से बोला,,,)

अब पलट जा मेरी जान,,,

(गुलाबी को राजू की बात समझ में नहीं आई तो वह आश्चर्य जताते हुए बोली)

कैसे मैं समझी नहीं,,,

अरे मेरी गुलाबी रानी,,, अपनी गांड को मेरे मुंह पर रख दे और तू मेरा लंड अपने मुंह में ले,,, चल जल्दी कर तेरी गांड देखने का बहुत मन कर रहा है,,,

मादरचोद रोज तो देखता है फिर भी,,,,

हां रंडी तेरी गांड तो मैं रोज देखता हूं लेकिन तेरी गांड का छेद देखना है,,,, उस खूबसूरत छेद को चाटना है अब जल्दी कर मुझ से बर्दाश्त नहीं हो रहा है,,,,

हाय मेरे राजा कितना तड़प रहा है रूक तुझे दिखाती हु अपनी गांड,,,(और इतना कहने के साथ ही गुलाबी राजू के बताए अनुसार आगे पीछे होगी और अपनी बड़ी बड़ी गांड को राजू के मुंह पर रखते हुए बोली,,)

ले देख ले,,,, ध्यान से देखना,,,,(और इतना कहने के साथ ही खुद राजू के दोनों टांगों के बीच उसके खड़े लंड की तरफ झुकने लगी,,, राजू अपने दोनों हाथों से अपनी बुआ की गांड को थाम कर उसके उस खूबसूरत छेद की तरफ नजर गड़ाए हुए बोला,,)

वाह कितना खूबसूरत छेद है,,, कसम से मैंने आज तक ऐसा गुलाबी छेद नहीं देखा,,,,ऊफफफ मुझसे तो नहीं रहा जा रहा है,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने प्यासे होठों को अपनी बुआ के गांड के छेद पर रख कर उसे चाटने लगा,,, गुलाबी को राजु से इसी तरह की हरकत की उम्मीद थी इसलिए वह पूरी तरह से गनगना गई,,,,)

सहहहहहह आहहहहहहह,,,,,राजु,,,(गरम सिसकारी लेते हुएगुलाबी का इतना कहना था कि राजु अपने ही हाथ को नीचे की तरफ लाकर अपने लंड को पकड़ लिया और उसे हीलाते हुए गुलाबी के गुलाबी गाल पर मरने लगा,,,, मोटा तगड़ा लंबा लंड गाल पर पडते ही गुलाबी एकदम से चौंक गई और अपना मुंह खोल कर तुरंत उसे अपने मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दी,,,राजू मस्ती के साथ अपनी बुआ की गांड के छोटे से छेद को चाट रहा था,,,,,,, अब उसका पूरा ध्यान गुलाबी के छोटे से छेद पर केंद्रित हो चुका था,,,राजू को अपनी बुआ का वो छोटा सा छेद बेहद मनमोहक लग रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सारी दुनिया की खुशी उसके छोटे से छेद में समाई हुई है और वह अपनी जीभ से उसे पूरा का पूरा चट कर जाना चाहता हो,,,।बुर चाटने से भी ज्यादा मजा उसे आज अपनी बुआ की गांड चाटने में गई थी वह दोनों हाथों से अपनी बुआ की गोल गोल गांड को तरबूज की फांक की तरह अपने दोनों हाथों में थामे हुए था,,,,,,

राजू गहरी सांस लेते हुए अपनी जीभ की नोक को उस छोटे से छेद में डालने का प्रयास कर रहा था अद्भुत मादकता से भरी खुशबू गुलाबी की गांड से उठ गई थी जो कि राजू को पूरी तरह से मदहोश किए हुए थी,,,, और यही हाल गुलाबी का भी था गुलाब के हाथों में जैसे उसकी पसंदीदा चीज आ गई हो वह पूरी तरह से पागल होकर राजू के लंड की जड़ को अपने हाथों में पकड़ कर उसे बार-बार अपने मुंह में अंदर डाल रही थी बाहर निकाल रही थी ऐसा करने में उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी,,, वह खुद ही राजू के लंड को अपने गले के नीचे तक उतार ले रही थी और उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी लेकिन जो मजा उसे प्राप्त हो रहा था ऐसा शायद उसे पहले कभी प्राप्त नहीं हुआ था जिसकी एक ही वजह थी कि इस समय राजू उसकी गांड के छोटे से छेद को अपनी जीभ से चाट रहा था,,, गुलाबी के संपूर्ण बदन में झनझनाहट महसूस हो रही थी,,, बार-बार गुलाबी गहरी सांस लेकर छोड़ दे रही थी ऐसा करने से ही उसकी कमर के इर्द-गिर्द अद्भुत भूलना पिक्चर का नाम महसूस हो रहा था जिसे देखकर राजू कभी उसकी कमर थाम लेता तो कभी उसकी गांड को दबा दे रहा था,,,,।

खटिया पर दोनों एक दूसरे के अंगों को नोचने खसोटने में लगे हुए थे,,,,,, राजू नीचे था और उसकी बुआ ऊपर,,, दिन के उजाले में सब कुछ साफ में जा रहा था घर में ना तो हरियाली और ना ही मधु दोनों की गैरमौजूदगी में,,, बुआ भतीजे दोनों अपनी प्यास बुझाने में लगे हुए थे और एकदम नए तरीके से,,,,,,

अपनी बुआ की गांड के छोटे से छेद को चाटते हुए राजू अपने मन में यही सोच रहा था कि इतने से छोटे से छेद में उसका मोटा लंड जाएगा ठीक है लेकिन यही,,, परिस्थिति ठीक श्याम की मां के पक्ष में भी थी लेकिन राजू वहां भी अपनी सूझबूझ और प्रयास से श्याम की मां की गांड मारने में सफलता हासिल कर लिया था,,,,और वही सोच सोच और प्रयास इधर भी राजू को दिखाने की जरूरत थी और राजू दिखा भी रहा था इसलिए तो लंड के लिए जगह बनाते हुए वह अपनी एक उंगली को अपनी बुआ की गांड के छोटे से छेद में डाल कर उसे गोल गोल घुमा रहा था,,,, और उसकी इस हरकत से गुलाबी पूरी तरह से कसमसा जा रही थी,,,

,ऊमममममम,ऊमममममममम,,,,सहहहहहह आहहहहहहह,,,,,

(इस तरह की मादक आवाज लगातार गुलाबी के मुंह से आ रही थी अभी भी उसके मुंह में राजू का लंड घुसा हुआ था जिसे वह मलाई की तरह चाट रही थी,,, उत्तेजना और जोश में आकर रह-रहकर राजू अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रहा था,,,,,,, राजू पूरी मस्ती के साथ अपनी उंगली को अपनी बुआ की गांड के छोटे से छेद में अंदर बाहर करके उसे चोद रहा था राजू यह बात बिल्कुल भी नहीं जानता था कि उसकी बुआ गुलाबी उसके पिताजी के साथ शारीरिक संबंध बना चुकी है और गांड मराई का सुख भी प्राप्त कर चुकी है,,,, उसे तो यही लग रहा था कि उसकी बुआ केवल उसके साथ ही शारीरिक संबंध बनाती चली आ रही है और आज पहली बार उसके साथ गांड मरवाने का सुख भी प्राप्त करने जा रही है,,, अगर उसे इस बात का जरा भी आभास होता कि उसकी तरह ही दोनों भाई बहन ने भी यह अनैतिक रिश्ता पनप चुका है तो आप कब से अपना लंड गुलाबी की गांड में डाल दिया होता,,,,,,,,

अब सही समय आ गया था अपना जौहर दिखाने का,,, अपनी संपूर्ण कला का प्रदर्शन करने का,,,, इसलिए राजू उत्तेजना के मारे गुलाबी की गांड पर चपत लगाते हुए बोला,,,,।

बस मेरी जान अब तैयार हो जा तेरी गांड की सेवा करने का समय आ चुका है,,,,

हाय मेरे राजा मैं भी तो तैयार हूं,,, मैं भी देखना चाहती हूं कि तू मेरी गांड कैसे मारता है,,,,

ओहहह मेरी छम्मक छल्लो तेरी इसी अदा पे तो मैं तेरा दीवाना हो गया हूं,,,,, बस अब जल्दी से घोड़ी बन जाओ और अपनी गांड ऊपर की तरफ हवा में लहरा दे,,,,(राजू खटिया से नीचे उतरते हुए बोला,,,, और गुलाबी खटिया के नीचे खड़ी होकर राजू की तरफ देखकर अपनी गुलाबी बुर पर हथेली रखकर जोर से मसलते हुए बोली,,,)

सहहहहहह आराम से करना,,, कहीं मेरी गांड मत फाड देना,,,,

चिंता मत कर मेरी रानी एकदम आराम से करूंगा,,,,।

(राजू की बात मानते हुए गुलाबी खटिया पर घुटनों के बल बैठ गई और आगे की तरफ झुक कर अपनी गोल गोल गाल को हवा में उछाल दी अपनी बुआ की रसीली मद भरी गांड देखकर राजू के मुंह में पानी आ गया उसे रहने की और वह अपनी बुआ की गांड पर चुंबन कर लिया....)

राजू थोड़ा सरसों का तेल लगा देना ताकि आराम से जाए देख पहली बार है फाड मत देना,,,।

तू सही कह रही है मेरी जान सरसों का तेल लगा दूंगा तो बड़े आराम से जाएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही नंगा ही वह अपने कमरे से बाहर निकला और रसोई घर में जाकर सरसों के तेल को कटोरी में लेकर वापस कमरे में आ गया दरवाजा बंद करने की जरूरत उसी समय बिल्कुल भी नहीं थी,, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि इस समय कोई आने वाला नहीं है,,,,सरसों के तेल को कटोरी में लेकर तुरंत वो गुलाबी के पास आया और सरसों की तेल की धार को वह गुलाबी के गुलाबी छेद पर गिराने लगा,,,, सरसों के तेल की धार अपनी गांड के छेद पर एक धार में गिरने से वह कसमसाने लगी,,, उसके आनंद में बढ़ोतरी होने लगी लेकिन इतना तो वह जानती थी कि भले ही वह अपने बड़े भैया से गांड मारने का शुभ प्राप्त कर चुकी है और अनुभव भी ले चुकी है लेकिन उसकी यह खुशी उसका आनंद राजू के साथ तो बेशक पढ़ने वाली थी लेकिन आनंद प्राप्त करने से पहले उसे थोड़ा दर्द भी सह ना था क्योंकि वहां अपने भाई के लंड और भतीजे के लंड के बीच के फर्क को अच्छी तरह से समझती थी,,,।इसलिए गुलाबी गहरी सांस लेते हुए आने वाले कल का बेसब्री से इंतजार कर रही थी और पीछे की तरफ नजर घुमाकर राजू की हर एक हरकत को बड़ी बारीकी से देख रही थी बार-बार उसकी नजर राजू के चेहरे पर तो कभी उसके मोटे तगड़े लंड पर चला जा रहा था जो कि इस समय बड़ा ही भयानक रूप लेकर गांड में घुसने की खुशी व्यक्त कर रहा था,,,

राजू बहुत खुश नजर आ रहा था गांड मारने के अनुभव को वह पूरी तरह से अपनी बुआ पर आजमाना चाहता था और उसकी छोटे से गांड के छेद का मजा लेना चाहता था,,,, दोपहर के समय में अपनी मां और अपने पिताजी की गैरमौजूदगी में,,, राजू और गुलाबी इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा रहे थे,,। राजू कटोरी को नीचे जमीन पर रखकर थोड़ा बहुत तेज अपने लंड को भी पिलाने लगा,,,, पर उंगली में लगे थे उनको एक बार फिर से गुलाबी की गांड में डालकर गोल गोल घुमाने लगा,,,, उंगली डालने पर ही गुलाबी शिहर उठ रही थी,, जो कि उसे पूरी तरह से आनंदीत कर दे रही थी,,,।

अब राज्य तैयार था नए पराक्रम के लिए आज से अपनी बुआ की गांड प्राप्त हो चुकी थी लेकिन उस पर पूरी तरह से अपनी लंड का जादू चलाना था,,, राजू को पूरा विश्वास था कि वह अपनी बुआ पर एक बार फिर से काबू प्राप्त कर लेगा,,,,, गुलाबी की गांड हवा में लहरा रही थी पहली बार वह अपने भतीजे से गांड मराने का सुख प्राप्त करने जा रही थी,,,,हवा में अपनी बुआ की लहराती हुई गांड को देखकर राजू का लंड कुछ ज्यादा ही टनटना रहा था,,,। राजू खटिया पर दोनों पैर रखकर चढ गया,,, और अपने खड़े लंड को हाथ में लेकर गुलाबी की गोरी गोरी गांड के छोटे से 6 की तरफ बढ़ने लगा,,,, दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था दोनों अद्भुत इसमें थोड़ी बहुत रुकावट आनी ही थी,,,, लेकिन दोनों को ईन रुकावटो का बिल्कुल भी डर नहीं था,,, वह तो अपनी मंजिल पर पहुंचना चाहते थे इसलिए राजू देखते ही देखते अपने लंड कैसे पांडे को जो कि आलू बुखारा की तरह एकदम बढ़ा और गोल हो गया था उसे गुलाबी के छोटे से छेद पर रख दिया जोकि सरसों के तेल से लबालब लस लसा रहा था,,,,, जैसे ही राज्यों ने अपने सुपाड़े को छोटे से छेद पर रखा गुलाबी पूरी तरह से सिहर उठी,,,क्योंकि वह जानती थी कि थोड़ी ही देर में राजू का मोटा तगड़ा लंड उसकी गांड की गहराई में खो जाएगा,,,, देखते ही देखते राजू अपने खड़े लंड को हाथ में पकड़ कर सुपारी को उस छोटे से छेद में डालने की कोशिश करते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,,,,, गांड का सुरमई छेद छोटा था उसका रास्ता संकरा था लेकिन उसमें हरिया का लंड पूरी तरह से गोता लगा चुका था इसलिए गुलाबी को पूरा विश्वास था कि धीरे-धीरे वह अपने भतीजे के मोटे लंड को भी अपनी गांड की गहराई में उतार लेगी,,,।

ससहहहह आहहहहहह मैं कहती थी ना राजू तेरा बहुत मोटा है घुस नहीं पाएगा,,,

तू चिंता मत कर बुआ,,, तेरा छेद बहुत छोटा भले है लेकिन धीरे धीरे में इसमें अपना लंड डाल ही दूंगा,,,,।

(और इतना कहने के साथ ही पैसे प्रयास करते हुए वह अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा इस बार राजू का लंड हरकत में आते हुए धीरे-धीरे उस छोटे से खूबसूरत छेद में प्रवेश करने लगा देखते ही देखते राजू का सुपाड़ा आधा छेद में प्रवेश कर गया लेकिन इतने से ही गुलाबी की हालत खराब होने लगी उसके चेहरे पर दर्द के भाव साफ झलक रहे थे,,,,वह, गहरी गहरी सांस ले रही थी ,,, राजू गुलाबी की गांड को सहलाते हुए आगे बढ़ रहा था,,,,।)

बस बस दुआ थोड़ा सा और एक बार सुपाड़ा घुस गया तो फिर आराम से चला जाएगा,,,

आहहहह ,,, चला तो जाएगा रे लेकिन मेरी जान निकली जा रही है,,,,,

बस बस बुआ,,,,,, तुम्हारी गांड बहुत प्यारी है,,,, जी तो कर रहा है कि मैं खुद घुस जाऊं,,,

घुस जा रोका किसने है,,,,,

लंड लेने में तो रो रही हूं मुझे पूरा कैसे ले पाओगी,,,,

ले लूंगी क्योंकि मैं जानती हूं कि बाद में बहुत मजा आता है,,,,,

ओ मेरी प्यारी बुआ तुम्हारी यही अदा तो मुझे पागल बना देती है,,,,(राजू अपनी बुआ को बातों में उलझा ए हुए ही अपनी बुआ की गांड को दोनों हाथों से थामकर कचकचा कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला,,, और इस बार सरसों के तेल की चिकनाहट को पाकर राजू का मोटा तगड़ा लंड एक झटके में ही सुपाड़ा सहित आधा गुलाबी की गांड के छेद में समा गया,,,,, राजु को आधी सफलता प्राप्त हो चुकी थी लेकिन इस आधी सफलता को प्राप्त करने में गुलाबी की हालत खराब हो गई थी वह पसीने पसीने हो गई थी दर्द का हुआ सैलाब उसे अपनी कार के अंदर उठता हुआ महसूस हो रहा था कि उससे सहा नहीं जा रहा था,,, राजू का आधा लंड गांड में घुसते ही वह चिल्ला उठी,,,,।)

आहहहहह बहन चोद मादरचोद भोसड़ी के,,,,आहहहहहह,,,, निकाल हरामि तू तो मेरी जान ले लेगा बहुत दर्द कर रहा है,,,,ऊईईईईई, मां,,,, इसीलिए तुझे कहती थी कि इसके बारे में सोचना बंद कर दे,,,,।(गुलाबी दर्द से बिलबिला ते हुए बोल रही थी,,,,गुलाबी इस बात से हैरान थी कि वह अपने बड़े भाई के लंड को अपनी गांड में लेकर गांड के छेद का उद्घाटन करवा चुकी थी लेकिन फिर भी राजू का मोटा तगड़ा लंबा लंड छेद में जाकर इतना दर्द देगा उसे इस बात का आभास बिल्कुल भी नहीं था,,,, इसीलिए तो वह असहनीय दर्द से छटपटा रही थी और राजू उसकी पतली चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों से थाम कर,,, एकदम से रुक गया था मैं जानता था कि अब ज्यादा जोर लगाने पर उसकी बुआ की हालत खराब हो जाएगी और वह‌उसकी गांड मारने नहीं देगी,,,, इसलिए उसकी कमर पर थाने में ही वह उसे पुचकारते हुए बोला,,,।)

बस हुआ बस हो गया चिंता मत करो पूरा घुस गया है मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था तुम पूरा का पूरा अंदर ले लोगी,,,, लेकिन तुमने कमाल कर दि हो,,,(ऐसा कहते हुए राजू अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर अपनी बुआ के दोनों संतरो को पकड़ लियाऔर उसे धीरे-धीरे दबाना शुरू कर दिया वह जानता था कि उसकी बुआ की चूची दबाने में उसकी बुआ को बहुत सुख प्राप्त होता है,,,,,,,,राजू अपनी हरकत से अपनी बुआ का ध्यान दर्द से हटाना चाहता था उसके दर्द को खत्म करना चाहता था तभी वह आगे बढ़ने में कामयाब हो सकता था,,,, उसकी हरकत रंगला रही थी उसका सब अपना असर दिखा रहा था गुलाबी का दर्द कम हो रहा था वह अब आवाज नहीं कर रही थी और इसी का फायदा उठाते हुए राजू जितना घुसा था उतना ही लंड को अंदर बाहर करके उसकी गांड मारना शुरू कर दिया बहुत ही धीरे-धीरे राजू अपनी कमर को आगे पीछे कर रहा था,,,।राजू बड़े साहब तौर पर देख रहा था कि उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुआ की छोटे से छेद में बड़े आराम से अंदर बाहर होने लगा था लेकिन लंड की रगड़ उसे भी साफ महसूस हो रही थी गांड के छेद की अंदरूनी दीवारों को वह रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था और यही रगड़ राजू के आनंद में वृद्धि कर रही थी और गुलाबी के दर्द को आनंद में बदल रही थी थोड़ी ही देर में राजू का कमर आगे पीछे करके हिलाना गुलाबी को आनंद देने लगा वह मस्तीयाने लगी,,,,।

सहहहह आहहहहह राजु सच मेरे बहुत मजा आ रहा है मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी की गांड मरवाने में इतना मजा आता है,,,,ऊफफ,,,, तूने तो कमाल कर दिया,,, तभी भाभी भैया की इतनी दीवानी है,,,।

(राजू बड़ी मस्ती से आधी लंड से ही अपनी बुआ की गांड मारना शुरू कर दिया था लेकिन अभी उसका आधा लंड बाहर ही था जिसे वह जल्द से जल्द अपनी बुआ की गांड के जड़ तक डालना चाहता था,,,,)

मजा आ रहा है ना बुआ,,

बहुत रे,,,,

ओहहहह बुआ मुझे मालूम था जब मैं इतने आराम से ले ले रही थी तो तुम कैसे नहीं ले पाती,,,

आहहहह तेरी मां की तो बात ही कुछ और है रे,,, तेरी मां को रात को भैया के साथ एकदम छीनार हो जाती है,,,, देखता था ना तूने कैसे तेरी मां अपनी गांड पटक पटक कर भैया से चुदवाती थी,,,, इसे देखने में कैसे भोली भाली लगती है लेकिन दंड को देखते ही कैसे उसके मुंह में पानी आने लगता है,,,,

तू भी तो छिनार है मेरी रानी,,,, तू भी तो खुलकर मजा देती है गांव में तेरी मासूम चेहरे को देख कर कोई नहीं बता सकता कि तू अपने भतीजे से चुदवाती है,,, और बिना लंड लिए तुझे नींद नहीं आती,,,

हाय मेरे राजा मां के बारे में बोली तो कैसे बेटे को बुरा लग गया,,,

मुझे क्यों बुरा लगेगा मेरी रानी हम दोनों साथ में ही तो देखते थे मां की चुदाई,,,,

इसलिए तो कह रही हूं कि तेरी मा एकदम छिनार की तरह चुदवाती है,,,।

(गुलाबी के द्वारा अपनी मां को छिनार कहने पर राजू का जोश और ज्यादा बढ़ गया और वह इस बार आदमी बचे लंब को एक झटके में ही अपनी बुआ की गांड में उतार दिया,,, एक बार फिर से गुलाबी दर्द से बिलबिला उठी उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह अपने पूरे लंड से उसकी गांड मार रहा है लेकिन आधा लंड अभी बचा था,,,,)

ऊईईई मां ,,,, हरामजादे कितना बेरहम है रे तू,,,

अरे मेरी छिनार तेरी गांड मारने में कितना मजा आ रहा है देख तुझे भी कितना मजा देता हूं,,,( और इस बार,,, राजू रुका नहीं और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया बुरे में डाल लेने में और गांड में डालने में क्रिया एक ही होती है फर्क कसाव का होता है जुदाई में कसाव का महत्व बेहद प्रमुख रहता है अगर कसाव ना हो तो चुदाई में आनंद का मापदंड भी बेहद कम हो जाता है और यही कसाव बरकरार हो तो मजा दुगना हो जाता है और इसीलिए बुरके छेद के कसाव से गांड के छेद का कसाव बेहद सकरा रहता है इसीलिए तो दोनों को मजा आ रहा था,,,, अब राजू रुकने वाला नहीं था वह अपनी मोटर चालू कर चुका था,,,,, उसकी कमर अपने आप ही आगे पीछे हो रही थी राजू बार-बार गुलाबी की गांड पर चपत लगाता हुआ अपने लंड को उसके छोटे से छेद में अंदर बाहर कर रहा था जो कि वह अपनी आंखों से एकदम साफ साफ देख रहा था,, यह नजारा राजू के लिए भी बेहद लुभावना लग रहा था,,, खटिया से चरर मरर की आवाज आ रही थी,,,, खटिया के आवाज को सुनकर गुलाबी संदेह जताते हुए बोली,,,)

अरे मादरचोद धीरे धीरे कर कहीं खाट ना टूट जाए,,,

आज तो टूट जाने दो बुआ,,, लेकिन यह मजा कम नहीं होगा,,,,, क्या मस्त गांड है बुआ तेरी,,,ऊफफफ,,,,,,।

(गुलाबी के छोटे से छेद में राजू का मोटा तगड़ा लंड अब बड़ी सरपट से दौड़ रहा था बिल्कुल भी रुकावट पेश नहीं आ रही थी गुलाबी को अपनी गांड का छेद कुछ ज्यादा ही कसा हुआ महसूस हो रहा था जिसे अब राजू अपनी चुदाई से ढीला करने वाला था,,,गुलाबी को भी बहुत मजा आ रहा था पूरे कमरे में गुलाबी की गरम सिसकारियां गुंज रही थी जो कि इस समय उसे सुनने वाला उन दोनों के सिवा कोई नहीं था ,,,,फचच फचच और गर्म सिसकारियां माहौल को और ज्यादा गर्म कर रही थी,,,,,।

राजू की चुदाई लगातार जारी थी वह अपनी बुआ की गांड मारने में पूरी तरह से मजबूर हो गया था दोनों पसीने से तरबतर हो गए थे लेकिन यह आनंद की पराकाष्ठा कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी,,,,आखिरकार दोनों की सांसो की गति तेज होने लगी दोनों अपने चरम सुख के करीब बढ़ते चले जा रहे थे और देखते ही देखते हैं जबरजस्ते धक्के के साथ राजू अपना गर्म लावा अपनी बुआ की गांड में गिराना शुरू कर दिया,,,, और गुलाबी निढाल होकर तकिए को कसकर पकड़ ली,,,,,।

आखिरकार गुलाबी अपनी गांड के छोटे से सुराख को अपने भतीजे को सौंपकर प्रसन्न हो गई थी और राजू भी अपनी बुआ की गांड मार कर आनंद के सागर में गोते लगाने लगा था,,,, शाम ढलने तक एक बार फिर से गांड मराई का कार्यक्रम संपूर्ण हो चुका था,,,,, राजू ने गुलाबी की ऐसी गांड मारा था कि,,,गुलाबी ठीक से चल नहीं पा रही थी लेकिन जो आनंद राजू ने उसे दिया था वह आनंद शायद ही उसे कोई दे पाएगा इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था इसलिए वह राजू से पूरी तरह से खुश थी,,,।
 
राजू की संभोग गाथा दिन प्रतिदिन पुनरुत्थान पर पहुंच रही थी,,,राजू कभी सपने में भी नहीं देखा था कि पूरे गांव में सबसे बड़ा चुडक्कड़ वही निकलेगा जो गांव की हर एक औरत और एक हर एक लड़की की बुक में अपना लंडरुपी झंडा गाडता फिरेगा,,,, और ऐसा भी नहीं था कि राजू ही पहल करता हो,,, जब तक औरत राजू के दमदार लंड का दर्शन नहीं कर लेती तब तक राजू को ही अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में औरतों को विश्वास में लाना पड़ता था लेकिन जैसे ही औरतें राजू के दमदार लंड का दर्शन कर लेती थी उसके बाद राजू को कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि औरतें खुद मचल उठती थी राजू के मोटे दमदार को अपनी बुर की गहराई में लेने के लिए,,,,और एक बार राजू के साथ चुदाई कैसे प्राप्त कर लेने के बाद राजू को दोबारा उस औरत के दोनों टांगों के बीच जाने में दिक्कत नहीं होती थी क्योंकि औरतें खुद ही उसे अपनी दोनों टांगों के बीच लाने के लिए तड़प उठती थी,,,, ऐसे ही नए-नए किस्से रोज उसकी जिंदगी से जुड़ते जा रहे थे,,,,।



अपनी मां की गैरमौजूदगी रांजु ने अपनी बुआ के साथ गांड मराई का सुख भोग चुका था,,, और झुमरी की गैर हाजरी में श्याम के साथ मिलकर जिस तरह से उसने श्याम की मां की चुदाई का सुख प्राप्त किया था वह बेहद अद्भुत था और आज की रात भी एक बार फिर से तीनों के मिलन की रात थी,,,, आज भी राजू बहाना करके रात भर श्याम के घर रुका रह गया और रात भर श्याम के साथ मिलकर उसकी मां की जबरदस्त चुदाई का सुख प्राप्त किया,,,,, और यही कार्य गुलाबी रात भर अपने बड़े भाई के साथ करती रही,,,,,,।



सुबह उसे अपनी मां को लेने के लिए हवेली के लिए निकलना था इसलिए आज भी हरिया शाम तक घर पर ही अकेला गुलाबी के साथ समय व्यतीत करने वाला था इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी,,,, बेल गाड़ी लेकर राजू हवेली की तरफ जाने के लिए निकल गया था उसे इस बात की खुशी थी कि आते समय वह‌झुमरी को भी साथ लेकर आएगा लेकिन वह अपने मन में सोच रहा था कि जाते समय जिस तरह का हादसा और हरकत वह अपनी मां के साथ किया था और उसकी मां जिस तरह से खुलकर उसके साथ बातें करने लगी थी अगर ऐसा ही कुछ आगे बढ़ने लगा तो आते समय अकेलापन होने की वजह से वहां किस्मत साथ दे गई तो वह अपनी मां के साथ संभोग सुख प्राप्त करने का और उस अद्भुत सुख को प्राप्त करके अपने आप को खुशनसीब समझेगा लेकिन झुमरी को भी साथ लाने की लालच उसके मन में बस गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,,, यही सोचता हुआ वह कच्ची सड़क पर से बैलगाड़ी को हांकता हुआ चला जा रहा था कि पीछे से उसके कानों में आवाज सुनाई दी,,,।

Soni ki madmast jawani



ओ राजू,,,, अरे रुक तो,,,,,,

( राजू को यह आवाज भलीभांति परिचित लगी वह बैल की रस्सी को खींचते हुए बैल को रुकने का संकेत दे दिया था,, और पीछे नजर घुमा कर देखा तो दूर से सोनी चली आ रही थी,,,, हाथों में फलों की टोकरी लेकर,,,, साथ में अपनी मदमस्त अल्हड़ जवानी लेकर,,, ,,,,,राजू को साफ नजर आ रहा था की टोकरी में पके हुए आम रखे हुए थे जिसे वह अपनी कमर पर टोकरी को टीका कर उसकी और बढ़ती चली आ रही थी लेकिन राजू एक बात पर गौर कर रहा था कि टोकरी में रखे हुए फलों से ज्यादा उभार उसकी छातियों में था जोकि ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी बड़े साफ तौर पर अपना उभार दिखा रहे थे,,,। बड़े दिनों बाद वह सोनी को देखा था,, वैसे भी सोनी का मतलब खत्म हो चुका था राजू को प्राप्त करना ही उसके साथ संभोग सुख प्राप्त करना ही उसका मकसद था जो कि उसे प्राप्त हो चुका था,,, लेकिन कभी कबार वह राजु से मुलाकात कर लेती थी,,, क्योंकि राजू के लंड की मोटाई लंबाई का सांचा जो उसकी‌ बुर में बन चुका था,,,। राजू की नजर उसकी गोरे बदन पर ही थी हालांकि राजू सोनी के खूबसूरत जिस्म को भोग चुका था लेकिन मर्द तो आखिर मर्द होता है उसकी प्यास कहां बुझने वाली है,,,, सोनी बैलगाड़ी के करीब पहुंचकर बोली,,,।

अरे राजू तो बेल गाड़ी चलाने लगा मुझे तो अपनी आंखों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था,, कहां हो आजकल नजर नहीं आते,,



वो क्या है ना छोटी मालकिन आजकल बहुत व्यस्त रहने लगा हूं बैलगाड़ी जो चलाने लगा हुं,,।

हां वह तो देख ही रही हूं,,,, मुझे मेरे हवेली तक छोड़ दे,,,

कोई बात नहीं छोटी मालकिन मैं वहीं से जा रहा हूं तुम्हें छोड़कर भी चला जाऊंगा,,,

बहुत अच्छा,,, ले यह आन की टोकरी पकड़कर बैलगाड़ी में रख ले,,,(आम की टोकरी को राजू की तरफ आगे बढ़ाते हुए सोनी बोली तो राजू तुरंत हाथ बढ़ाकर आम की टोकरी को अपने हाथों में ले लिया और उसे बैलगाड़ी में रखते हुए बोला,,,))

छोटी मालकिन आम से ज्यादा बड़ी-बड़ी तो तुम्हारी चुचिया है,,,

तभी तुझे मेरी याद नहीं आती,,,(बैलगाड़ी में चढ़ते समय इतना बोलकर सोनी मुस्कुराने लगी)

याद तो बहुत आती है छोटी मलकिन तुम्हारा अंग अंग एकदम खरा सोना है,,, तुम्हारी चूचियां तो सच में लाजवाब है,,,।

चल झूठा लाजवाब होती तो इन्हें मसल ने के लिए जरूर मेरे पास चला आता,,,,

आने को तो मैं कभी भी आ सकता था छोटी मालकिन लेकिन क्या करूं बड़े मालिक का दर्जा लगा रहता है अगर उन्हें हम दोनों के बारे में पता चल गया तो आप तो अच्छी तरह जानती हो कि हम दोनों का क्या होगा तुम्हारा तो फिर भी कुछ नहीं होगा लेकिन मेरा क्या होगा यह तो भगवान ही जानता है,,,

इतना डरते हो बड़े भैया से,,,





नहीं करता तो नहीं हूं लेकिन तुम्हारी चुदाई करते हुए अगर तुम्हारे भैया देख लेंगे तब तो डरना हीं पड़ेगा ना,,,,,

क्यों डर लगता है,,,, हम दोनों को देख भी लिए तो क्या होगा,,,?

क्या बात करती हो छोटी मालकिन कोई भी भाई अगर अपनी बहन को एकदम नंगी किसी लड़के के साथ देखेगा तो उसके दिल पर क्या गुजरेगी वह तो आग बबूला हो जाएगा जब यह देखेगा कि उसकी बहन की बुर में जवान लड़के का नंबर पूरा घुसा हुआ है और वह उसकी बहन की चूची पकड़कर धक्के लगा रहा,,, है,,।

(राजू की यह बातें सुनकर सोनी एकदम गरम होने लगी और राजू की बात सुनकर बोली,,)

वाह राजू तेरी बात ही कुछ और है साला उदाहरण भी ऐसा देता है कि बुर से पानी निकल जाता है,,,,

तुम्हारा निकला क्या छोटी मालकिन,,?(बेल को हांकते हुए जिज्ञासा वस राजु बोला,,,)

Soni



अरे तो क्या साली चड्डी गीली हो गई,,,(साड़ी के ऊपर से ही अपनी चड्डी और उसकी यह हरकत राजू पीछे नजर घुमा कर देख लिया था जिससे पजामे के अंदर उसका लंड खड़ा होने लगा था,,,,)

हाय छोटी मालकिन तुम्हारी यही अदा तो पागल कर देती है,,,,

पर तूने जो बुर में आग लगा दिया है उसका क्या,,,?

बुझा लो,,,, वैसे छोटी मालकिन जो तुम साड़ी के अंदर पहनती हो ना चड्डी तुम पर बहुत अच्छी लगती है लेकिन गांव की कोई भी औरत चड्डी नहीं पहनती,,,,

क्यों तू गांव की सारी औरतों की साड़ी उठा उठा कर देखा है क्या,,,?

नहीं नहीं ऐसा शुभ अवसर मुझे मिला तो नहीं है लेकिन जानता जरूर हूं,,,, तुम जब सारे कपड़े उतार कर सिर्फ चड्डी में खड़ी रहती हो ना लंड की हालत खराब हो जाती है ऐसा लगता है कि लंड़ की वंश फट जाएगी,,,,

तुझे चड्डी में, मैं इतनी खूबसूरत लगती हुं,,,,

पूछो मत छोटी मालकिन चड्डी में तो तुम स्वर्ग से उतरी अप्सरा लगती हो,,,

(राजू की बात सुनकर सोनी मन ही मन बहुत खुश हो रही थी राजू पूरी तरह से उसका दीवाना हो चुका था काफी दिनों बाद मिल रहा था लेकिन फिर भी दीवानगी उसी हद की थी जैसे कि पहले,,,)

तो ले तुझे मेरी चड्डी ‌ईतनी अच्छी लगती है ना,,,, तो ले,,,(इतना कहने के साथ ही बैलगाड़ी में बैठे-बैठे ही वह साड़ी को अपनी जांघों तक खींच दीराजू पीछे पलट कर देखने लगा तो हक्का-बक्का रहेगा उसकी आंखों के सामने ही सोनी अपनी साड़ी को जांघों तक खींचकर अपनी गोल-गोल गांड को हल्के से उठाकर अपनी चड्डी को अंगुलियों का सहारा देकर उतारने लगी और देखते ही देखते राजू की आंखों के सामने ही उसकी मोटी मोटी चिकनी जांघों से होती हुई उसकी लाल रंग की चड्डी उसकी लंबी टांगों से होती हुई बाहर निकल गई राजू तो देखता ही रह गया और अपनी लाल रंग की चट्टी को अपने हाथ में लेकर अपनी साड़ी को ठीक करके,,, राजू के चेहरे पर चड्डी को फेंकते हुए बोली,,,) ले अपने पास रख लेना मेरी निशानी,,,मुझे पूरा यकीन है कि मेरी चड्डी देख देख कर तो बहुत तड़पेगा और तब तु मेरे पास जरूर आएगा,,,(सोनी ने बड़े प्यार से अपनी चडडी कोउतारकर राजू के चेहरे पर दे मारी थी राजू अपने चेहरे पर से सोने की लाल रंग की चड्डी को अपने हाथ में लेकरउसे नाक पर लगाकर उसकी खुशबू को अपने अंदर खींचने लगा,,, राजू की बातों से सोनी की बुर गीली होने लगी थी उसमें से नमकीन पानी निकलने लगा था जो कि चड्डी के आगे वाले भाग को पूरी तरह से गिला कर चुका था और उस गीलेपन में से सोनी की बुर‌की मादक खुशबू आ रही थी जिसे मां को के द्वारा अपने सीने में उतारते ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,, लंड की नसों में रक्त का प्रवाह बड़ी तेजी से होने लगा वह गहरी सांस लेकर चड्डी की मादक खुशबू को अपने अंदर उतारते हुए बोला,,,)

हाय इसमें से तो तुम्हारी बुर की खुशबू आ रही है बाप रे तुमने तो मेरा लंड खड़ा कर दी,,,,(राजू की बात सुनकर उसकी हालत को देखकर सोनी मन ही मन खुश होने लगी,,, और बोली,,,,)

और तूने जो मेरी बुर में आग लगा दिया है उसका क्या,,,तूं तो जल्दबाजी में लग रहा है,,,, वैसे तू जा कहा रहा था,,,

अरे वही पास वाले गांव में हवेली में शादी थी वही जा रहा हूं अपनी मां को लेने,,,,

अरे वही तो मेरे भैया भी गए हुए हैं और वह भी आज आने वाले हैं राजू हवेली में इस समय कोई नहीं है सही मौका है,,,,,

क्या सच में हवेली में कोई नहीं है,,,?(राजू भी खुश होता हुआ बोला)

अरे हां कोई भी नहीं है अपनी मां को लेने जाने से पहले तू मेरी प्यास बुझा दे राजू,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो छोटी मालकिन मेरा लंड भी बेकरार है तुम्हारी बुर में जाने के लिए,,,।

(इतना कहने के साथ ही राजू बैल को थोड़ा जोर से हांकने लगा,,, ताकि वहां जल्दी से पहुंच जाए,,,,सोनी की चड्डी अभी भी उसके एक हाथ में थी जिसे वह बार-बार अपनी नाक से लगा कर सुंघ ले रहा था यह देख कर सोनी के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगती थी,,, वाह राजू की हालत को देखते हुए बोली,,)

तुम यह चड्डी अपनी बुआ को दे देना नहीं तो अपनी मां को तुम्हारी मां तो वैसे भी बहुत खूबसूरत है उसकी गोरे बदन पर लाल रंग की चड्डी और ज्यादा खूबसूरत लगेगी,,,।

(सोनी की बात सुनकर कुछ देर के लिए तो राजू कल्पना की दुनिया में खोने लगा था और अपनी मां के बारे में कल्पना करने लगा था कि उसकी मां के लाल रंग की चड्डी पहन कर कैसी दिखेगी,,,, वहएकदम साफ तौर पर कल्पना कर पा रहा था कि उसकी मां पूरी तरह से नंगी होकर जब लाल रंग की चड्डी पहने की तो उसकी बड़ी बड़ी गांड चड्डी के अंदर और ज्यादा खूबसूरत लगेगी,,,, इस कल्पना से तो उसका लंड और ज्यादा टन टना गया,,,,,, लेकिन वह जानता था कि भले वह सोनी की चड्डी अपने साथ अपने घर पर ले कर चला जाए लेकिन वह अपनी मां को इतनी कीमती चड्डी क्या बोल कर देगा इतना तो मैं जानता ही था कि उसकी मां ने कभी चड्डी देखी भी नहीं होगी,,,, और अगर वह ले भी लेगी तो पूछेगी जरूर की लाया कहां से,,,, अब वह खरीद तो सकता नहीं था,,, और यह भी 7नहीं कह सकता था कि छोटी मालकिन ने उसे इनाम के तौर पर दी है,,, भला एक औरत जवान लड़के को अपनी चड्डी ईनाम के तौर पर क्यों देगी,,, इसीलिए राजू को सोनी की चड्डी अपने साथ ले जाना ठीक नहीं लग रहा था इसलिए वह बोला,,,)

नहीं नहीं छोटी मालकिनमैं तुम्हारी चड्डी अपने घर पर तो लेकर जा सकता हूं लेकिन अपनी मां को क्या बोल कर दूंगा,,,,,,

हां यह बात भी सही है,,,,, चलो कोई बात नहीं अपने पास रखे रहना जब मेरी याद आए तो मेरी चड्डी देख लेना,,,



यह तो और भी मुश्किल है मालकिन,,,

ऐसा क्यों,,,?

तुम्हारी चड्डी देखते ही मुझे तुम्हारी याद आने लगेगी तुम्हारी गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड तुम्हारी दूर,,,, नहीं नहीं तब तो मुझसे रहा नहीं जाएगा,,,,

अरे तब तो और भी अच्छा है तुझसे रहा नहीं जाएगा और तुझे मेरे पास आना ही पड़ेगा,,,,(उसका इतना कहना था कि बातों ही बातों में उसकी हवेली आ गई और वह बोली)

देख तो सही कितनी जल्दी हवेली आ गई,,, बस कर राजु जल्दी से चल अंदर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,(इतना कहने के साथ ही वह खुद ही बेल गाड़ी पर से नीचे उतर गई और हवेली के अंदर जाने लगे राजू की जल्दी से बैलगाड़ी को वही खड़ी करके सोनी के पीछे पीछे हवेली में जाने लगा,,,,
 
सोनी आगे आगे तरबूज जेसी गांड को मटकाते हुए हवेली में प्रवेश कर रही थी और पीछे राजू पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाता हुआ हवेली में प्रवेश कर रहा था,,,। राजू पहली बार लाला की हवेली में प्रवेश कर रहा था हवेली को अब तक उसने बाहर से ही देखा था अंदर से कैसा दिखता है इस बारे में उसने कभी अंदाजा भी नहीं लगाया था,,इसलिए उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी एक तो कुछ ही देर में वह अपने प्यासे लंड को सोनी की गोरी बुर में डालने वाला था और हवेली अंदर से कैसी नजर आती है यह देखने वाला था,,,।

आओ राजु तुम पहली बार हवेली में आ रहे हो ना,,,(हवेली के अंदर प्रवेश करते हुए सोनी बोली)

हां छोटी मालकिन,,,बाहर से तो बहुत बार देखा था लेकिन अंदर से हवेली कैसी नजर आती है आज भी पहली बार देखने जा रहा हूं,,,( और इतना कहते हुए राजू हवेली में प्रवेश कर गया और अंदर पहुंचते ही हवेली की रौनक देखकर दंग रह गया,,, राजू गोल-गोल घूम कर हवेली को देख रहा था,,,)





बाप रे यह तो महल है छोटी मालकिन,,,, तुम इतने बड़े घर में रहती हो,,,

अब क्या करूं रहना पड़ता है,,,, जमीदार के घर जो पैदा हुए हुं,,,



सच में छोटी मालकिन तुम महारानी से कम नहीं हो,,,

और ईस महारानी के महाराजा तुम हो राजू,,,,

(सोनी राजू की तरफ मुस्कुराकर देखते हुए बोली राजू सोनी के कहने का मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था,, राजू भ6 मुस्कुरा दिया,,,, सोनी से दोनों की बीच की दूरी बर्दाश्त नहीं हो रही थी क्योंकि काफी समय हो गया था राजू से चुदवाए और इसमौके गांव अच्छी तरह से फायदा उठा लेना चाहती थी इसलिए बिना देर किए वह राजू से बोली,,,)

राजू मेरे कमरे में चलते हैं,,,, वहीं पर मुझे सुकून मिलेगा,,,,

कहां है तुम्हारा कमरा छोटी मालकिन,,,

यह सीढ़ियों से चढ़कर बाएं तरफ वाला कमरा मेरा है,,,,

तब तो वहां तक चलने की जहमत तुम्हें नहीं उठाना होगा,,

मतलब,,!(सोनी आश्चर्य जताते हुए बोली)



मतलब की,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू आगे बढ़ा और सोनी को तुरंत अपनी गोद में उठा लिया,,, सोनी तो एकदम घबरा गई,,,,उसे लगा कि राज्यों से नीचे गिरा देगा उसका वजन सह नहीं पाएगा लेकिन तभी उसे इस बात का एहसास हुआ कि यह राजू के लिए पहली बार नहीं था उसे गोद में उठाना वह आम के बगीचे में कहीं बाहर उसी गोद में उठाकर उसकी बुर में लंड डालकर अच्छे से चुदाई कर चुका है,, सोनी राजू के दमखम से अच्छी तरह से वाकिफ थी उसके बावजूद उन्हें बहुत दम था इसलिए सोनी मुस्कुराने लगी,,,,और राजू अपनी गोद में उठाए हुए उसे सीढ़ियां चढ़ने लगा,,,)

तुम्हें दिक्कत हो जाएगी राजू मुझे उतार दो मैं चलती हूं,,,

तुम मेरे लिए एकदम रुई के वजन के बराबर हो तुम जैसी खूबसूरत औरत को गोद में उठाना तो किस्मत की बात है और मैं अपनी इस किस्मत को खराब नहीं होने देना चाहता भला किसी का नसीब होगा जो महलों में रहने वाली महारानी को अपनी गोद में उठाकर उसके बिस्तर तक ले जाए और उसकी चुदाई करें,,,

बातों में तेरा कोई जवाब नहीं है राजू,,,, सच में मुझे भी तेरी गोद में बहुत अच्छे से सुकून मिलता है,,,,

तुम्हें मेरी गोद में सुकून मिलता है और मुझे तुम्हारी बुर में,,,,तुम नहीं जानती कि मेरा लैंड कितना तड़प रहा है तुम्हारी बुर में जाने के लिए,,,

खड़ा हो गया है क्या,,,!

तुम जैसी खूबसूरत औरत के करीब रहने पर भी अगर लगने खड़ा ना हो तो वह मर्द नहीं है,,,,तुम जब भी मेरे पास होती हो तो मेरा लंड बैठने का नाम ही नहीं लेता जब तक कि तुम्हारी बुर की शेर ना कर ले,,,

सच कहूं तो राजू मुझे भी तेरे लंड की आदत हो गई है जब तक तेरा लंड मेरी बुर की गहराई नापने लेता तब तक मुझे गहरी नींद नहीं आती मुझे चैन नहीं मिलता इतने दिनों से तो मेरे पास नहीं आया था मैं इतने दिन कैसे गुजारी हूं मैं ही जानती हूं,,,,,

तो पढ़ाना क्यों बंद कर दी पढ़ाना चालू रखना चाहिए था ना रोज हम दोनों की मुलाकात हो जाती पढ़ने के बहाने,,,



वह तो ठीक है लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि किसी को हम दोनों के बीच शक हो और तेरा दोस्त है ना शयामवह हमेशा मुझे शक की निगाह से देखता था क्योंकि मैं तेरे पर ज्यादा ध्यान देती थी ना इसके लिए,,,, इसलिए मुझे पढ़ाई बंद करना पड़ा और वैसे भी सच कहूं तो,,,, तुम लोगों को पढ़ाने का इरादा सिर्फ तेरे करीब आने के लिए था,,,

मेरे करीब,,,(राजू उसी तरह से धीरे-धीरे सोनी को गोद में उठाए हुए सीढ़ियां चढ़ता हुआ आश्चर्य जताते हुए बोला)

हां तेरे करीब,,, क्योंकि 1 दिन में चोरी-छिपे तेरे लंड को देख ली थीजब तुम हाथ में पकड़ कर हिला हिला कर अपने दोस्तों को दिखा रहा था उस दिन से मेरी नजर तेरे पर ही थी,,,,

ओहहहहह,,,, तो तुम्हें मेरा लंड पसंद आ गया था,,

अब करती भी क्या,,, तेरा लंड था ही इतना जानदार कि मुझसे रहा नहीं गया,,,,

हाय मेरी जान अब तो मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,(इतना कहते हुए राजू सीढ़ियां चढ़कर और सोनी से बोला)

कौन सा कमरा है मेरी रानी,,,,

वो,,(उंगली से दिखाते हुए) जिसका दरवाजा खुला हुआ है वही मेरा कमरा है,,,,

बस कर मेरी रानी आज तो तेरी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,

तो बना देना रे रोका किसने है,,,, मैं तो कब से यही चाहती हूं कि तू अपना लंड डाल डाल कर मेरे बुर का भोसड़ा बना दे,,,,

तो आज ऐसा ही होगा मेरी छोटी मालकिन,,, आज दिखाऊंगा की असली जुदाई क्या होती है अब तक तो चोरी छुपे बगीचे में ही चुदवाती आ रही थी,,, आज तुम्हारे कमरे में तुम्हारी जमकर चुदाई करूंगा,,,,।

(राजू की बातें सुनकर सोनी मुस्कुरा रही थी साथ ही उसकी बुर में खलबली मची हुई थी उसकी बातों से ऐसा ही लग रहा था कि आज उसकी प्यास पूरी तरह से बुझ जाएगी और इसकी खुशी में सोनी की बुर पानी पानी हुए जा रही थीउत्तेजना के मारे सोनी गहरी गहरी सांसे ले रही थी और राजू की गोद में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे होती हुई राजू को साफ नजर आ रही थी कमरे में प्रवेश करते ही राजू नरम नरम गद्दे पर सोनी को पटक दिया,,,, बिना देरी किए अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया,,, सोनी पीठ के बल लेटी हुई थी और हाथ का सहारा लेकर अपनी नजरों को राजू के नंगे बदन पर ऊपर से नीचे तक घुमा रही थी,,,। सोनी की आंखेंराजू के खड़े लंड को देखकर फटी की फटी रह गई थी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि आज राजू का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा नजर आ रहा थाराजू उत्तेजना के मारे अपने लंड को छुए बिना ही उसे ऊपर नीचे ठुनकि मार रहा था यह देखकर सोनी की हालत खराब होने लगीउसकी पूर्व में हलचल होने लगी ,,, उसे लगने लगा कि आज राजू उसकी जमकर चुदाई करने वाला है,,,, राजू के लंड की तरफ देखते हुए सोनी बोली,,,

राजू तेरा लंड आज कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा नहीं लग रहा है,,,



हां मेरी छोटी मालकिन आज कुछ ज्यादा ही मस्ती में आ गया है क्योंकि आज तुम्हारे हवेली में तुम्हारे कमरे में तुम्हारी चुदाई जो करने वाला है,,,,(इतना कहते हुए आगे बढ़ा और बड़े से पलंग पर अपना घुटना रखकर सोने की दोनों टांगों के बीच बैठता हुआ अपने दोनों हाथों से उसकी टांग को पकड़कर अपनी हथेली को ऊपर की तरफ ले जाने लगा जिससे उसकी साड़ी ऊपर की तरफ सरकने लगी,,,, सोनी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थीउसे अच्छी तरह से मालूम था कि समय ज्यादा नहीं है क्योंकि राजू को बगल वाले गांव में भी जाना था इसलिए वह कितना देर की है अपने हाथों से ही अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी और देखते ही देखते जब तक राजू उसकी मोटी चिकनी जांघों तक आता वह अपने हाथों से अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी और अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों को नंगी कर चुकी थी जिस पर राजू की नजर पड़ते उसके मुंह में पानी आने लगा,,,, राजू शायद सोनी को पूरी तरह से नंगी करने के मूड में बिल्कुल भी नहीं था इसलिए सोने की साड़ी को एकदम कमर तक उठा दिया था और उसकी चिकनी बुर को देखकर पानी-पानी हुआ जा रहा था साड़ी के नीचे सोनी की नंगी बुर को देखकरराजू को याद आया कि सोनी ने अपने हाथों से अपनी चड्डी उतार कर उसके मुंह पर दे मारी थी जिसे वह अपने पजामी के जेब में रख लिया था,,,, उत्तेजना के मारे अपनी हथेली को सोनी की बुर पर रखकर उसे जोर से अपनी हथेली में दबोच ते हुए बोला,,,,।

सहहहहहह आहहहहहहह मेरी रानी तुम्हारी बुर बहुत गर्म है और बहुत पानी छोड़ रही है,,,,

तू गरम में जो कर दिया है तो बुर की हालत तो खराब होगी ही होगी,,,,

चिंता मत कर मेरी रानी गर्म मैंने किया हूं तो ठंडा भी मै हीं करूंगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू बिल्कुल भी देर न करते हुए अपने पैसे होटल को सोने की दहकती हुई बुर पर रखकर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,काफी दिन हो गए थे सोनी को अपनी बुर पर मर्दाना होंठों का स्पर्श महसूस किए इसलिए जैसे ही राजू के होंठों का स्पर्श उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों कर हुआ उसे सही बिल्कुल भी सहन नहीं हुआ और वह अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर राजू के सिर पर रख दी और उसे जोर से अपनी बुर पर दबा दी,,, और एकदम से उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,।



सहहहह आहहहहहहहहह राजु मेरे राजा अब सब कुछ तेरे हाथ में ही है,,,,

राजू अच्छी तरह से जानता था कि औरतों को कैसे संतुष्ट किया जाता है उनके अंगों से कैसे खेला जाता है,,, इसलिए राजू को किसी के भी दिशानिर्देश की जरूरत बिल्कुल भी नहीं की वह औरतों को खुश करने में हर एक तरह से काबिले तारीफ था जिसकी सराहना खुद औरतें भी करती थी,,,, इसीलिए सोनी अपने आपको राजू के हाथों में सौंप चुकी थी,,,, राजू देखते ही देखते अपनी जीभ की नोक को जितना हो सकता था उतना उसके गुलाबी पत्तियों के बीच के गुलाबी छेद में अंदर की तरफ डालकर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया था,,,,, औरतों की बुर की मनाई भी अजीब नशा देती है जितना नशा शराब की 4 बोतलों में नहीं होता हम इतने में से केवल औरतों के बुर की नमकीन रस में होता है जिसे अपना जीभ लगाकर चाटने का मजा ही कुछ और होता है और उस नशे को राजू बखूबी अपने अंदर उतार रहा था जैसे-जैसे वह सोने की खूबसूरत चिकनी बुर की मलाई अपने अंदर उतारता वैसे-वैसे उसका जोश बढ़ता जा रहा था,,,,,,,।

सोनी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अपने बड़े भाई की गैर हाजिरी में वह राजू को अपनी हवेली लेकर आई थी सिर्फ चुदवाने के लिए,,, अगर इस बारे में उसके भाई को जरा भी भनक लग जाए तो शायद इसका अंजाम बहुत बुरा हो जिसके बारे में खुद सोनी भी कल्पना करके दहल उठती थी लेकिन क्या करें जवानी का जोश और बुर की गर्मी उसे सब कुछ जानते हुए भी इस तरह के कदम उठाने पर मजबूर कर दिया सोनी अपने ही कमरे में अपनी ही बिस्तर पर अर्धनग्न अवस्था में पीठ के बल लेटी हुई थी और गांव के जवान लड़के से अपनी बुर चटवा रही थी जिसमें दोनों को आनंद की परम अनुभूति हो रही थी,,,, सोनी की नंगी चूचियां उसकी उत्तेजना के साथ रह रहे कर उछल पड रही थी,,, बदन में अजीब सी कशमकश भरी हुई थी राजू की जीभ को अपनी बुर के अंदर महसूस करके सोनी का पूरा वजूद मचल उठ रहा था,,, उत्तेजना के मारे सोनी की ओर से कुछ ज्यादा ही पानी निकल रहा था,,, लेकिन क्या मजाल थी कि राजू मुंह से निकला हुआ नमकीन पानी की एक भी बूंद को नीचे बिस्तर पर गिरने से वह हर एक बूंद को अपनी जीभ लगाकर अपने गले के नीचे उतार लेना था मानो कि जैसे उसकी बुर से उसका मदन रस ना होकर अमृत की धार बह रही हो,,,, और जिसे अपने अंदर ग्रहण करके राजू को एक नया जीवन मिल रहा हो,,,।



राजू पूरी तरह से सोने की दोनों टांगों के बीच कब्जा जमाया हुआ था और सोनी उसका हौसला बढ़ाते हुए उसके बालों को अपने दोनों हथेली में कस के पकड़ कर उसके मुंह को बार-बार अपनी बुर पर दबा दें रही थी जोकि सोनी की तरफ से राजू के लिए पूरी तरह से खुला संदेश था कि वह उसके साथ जैसा चाहे वैसा मनमानी कर सकता है और इसी छूट को पाकर राजू एक साथ अपनी दो उंगली को उसकी पूर्व में डाल दिया था और उसे अंदर बाहर करके उसे और ज्यादा गर्म करने की कोशिश कर रहा था,,,, गुलाबी छेद में राजू की दो ऊंगली का प्रवेश सोनी के लिए असहनीय हो रहा था,,, क्योंकि वह उत्तेजना से मरी जा रही थी वह जल्द से जल्द अपनी बुर में राजू के लंड को महसूस करना चाहती थी उसके धक्के को महसूस करना चाहती थी,,,राजू तो जैसे उसे और ज्यादातर पाना चाहता था इसलिए एक हाथ की दो मिनी बुर में डाले हुए भी दूसरे हाथ के ऊपर की तरफ ले जाकर उसकी बड़ी बड़ी चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया था मानों जैसे उसके हाथों में सोनी की चूची नहीं बल्कि दशहरी आम आ गया हूं जो कि अभी अभी वह टोकरी में भरकर बैलगाड़ी में रखकर आया था और वह भी सोनी का ही दीया हुआ था,,,।चूची को जोर जोर से दबाने पर सोने की हालत और ज्यादा खराब होने लगी चारों तरफ से राजू अपनी हरकतों से सोनी को अपने काबू में अपने कब्जे में कर लिया था,,, राजू की हरकतों से सोनी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,, विक्रम सिसकारी लेते हुए बोली।

सहहहह आहहहहहहहहह,,, राजू तूने तो मुझे पागल कर दिया है रे,,, मेरी बुर तड़प रही है तेरे लड़ने के लिए,,,आहहहहह कितना जोर से दबाता है तु,,,,ऊहहहहहहह उंगली से ही मेरी बुर फाड़ देगा क्या,,,,,

सोने की गरमा गरम बातों को सुनकर राजू पूरी तरह से मदहोश हो जा रहा था लेकिन मुंह से अपना जवाब देने के बजाय वह अपनी हरकतों से उसके हर एक बात का जवाब दे रहा था,,,,,वह कभी सोनी की बाईं चूची तो कभी दांई चूची को एक हाथ से ही दबा दबा कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,,, सोनी की तड़प देखकरराजू समझ गया था कि लोहा पूरी तरह से खराब हो चुका है लेकिन अभी इस लोहे को थोड़ा और ज्यादा गर्म करने के उद्देश्य से राजू,,, सोनी की बुर पर से अपना पकड़ ढीला करते हुए उठा और सोनी के ऊपर लेट कर उसकी चूची को मुंह में लेकर दबाना शुरू कर दिया,,,अपने ऊपर राजू को लटका हुआ देखकर सोनी अपनी दोनों टांगों को खोल दी और ऐसा करने पर राजू का लंड सोनी की बुर की ऊपरी सतह पर रगड़ खाने लगा,,,,, सोनी पागल हुए जा रही थी मदहोशी में वह अपना सर दाएं बाएं पटक रही थी वह जल्द से जल्द चाहती थी कि राजू का लंड उसकी बुर के अंदर घुस जाए,,,, लेकिन राजू था कि उसे और ज्यादा तड़पा रहा था वह दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को पकड़ कर बारी-बारी से मुंह में लेकर चुस रहा था,,,, इससे सोनी की बेकरारी बढ़ती जा रही थी,,,,सोनी पूरी तरह से हैरान थी कि राजू औरतों को पूरी तरह से खुश करने का हुनर अच्छी तरह से जानता था वरना दूसरों की तरह बस धक्के मारकर साथ नहीं हो जाता था और उसकी ताकत से भी भलीभांति परिचित हो चुकी थी क्योंकि वह जानती थी कि इतने में तो दूसरा कोई होता तो पानी फेंक दिया होता जैसा कि खुद उसका बड़ा भाई,,,,

सोनी से सहा नहीं जा रहा था इसलिए अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर राजू के लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी गुलाबी बुर के छेद के मुहाने पर रख कर उसे अंदर डालने के लिए अपने दोनों हाथों को राजू के नितंबों पर रखकर उसे दबाने लगी,,,,,,,उसकी यह कोशिश रंग लाने लगी देखते ही देखते राजू का लंड उसकी चिकनी बुर के अंदर प्रवेश करना शुरू कर दिया,,,, और राजू भीअपने लंड को सोनी की बुर में जाने से बिल्कुल भी नहीं रोका क्योंकि वह सोने की तड़प को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था,, गरम आहें भरते हुए अपनी कोशिश को सफल होता देखकर सोनी राजू के नितंबों को कस के पकड़ कर उसे नीचे की तरफ दबाने लगी और देखते ही देखते राजू का अंदर ने पूरी तरह से सोनी की बुर की गहराई में खो गया,,,, राजू ने बुर में लंड प्रवेश करने के बावजूद भी अपनी कमर को बिल्कुल भी नहीं हीलाया और उसे तुरंत बाहर निकाल कर सोनी के खूबसूरत चेहरे को देखने लगा कि लंड के बाहर निकल जाने पर सोनी के चेहरे का हाव भाव कैसे बदलता है,,,राजू की यह हरकत बिल्कुल वैसी ही थी जैसे किसी बच्चे के हाथ से उसका पसंदीदा खिलौना छीन लिया गया हो तो ठीक वैसा ही सोनी का भी हावभाव था,,, सोनी के चेहरे पर लंड को बाहर निकालने की तरफ साफ नजर आ रही थी वह अपनी आंखों में दया भाव लिए हुए राजू की तरफ देख रही थी कि वह ऐसा क्यों किया,,,, सोनी की आंखों को पढ़कर राजू उसके मन की बात को जान लिया था और तुरंत उसके होठों पर अपने होंठ को रखकर उसके लाल लाल होठों का रसपान करने लगा और लगातार जानबूझकर अपने लंड को उसकी बुर के ऊपरी सतह पर रगड़ खाने दिया,,,,, जिससे सोनी पूरी तरह से मचल रही थी,,,,,,,।

कुछ देर तक उसके होठों का रसपान करने के बाद राजू खड़ा हुआ और घुटनों के बल बैठकर सोनी की बाहों को पकड़कर उसे बैठा दिया और उसके सर पर अपना हाथ रख कर उसे अपने खड़े लंड की तरफ खींचने लगा सोनी उसके सारे को अच्छी तरह से समझ गई थी और अगले ही पल राजु का‌ लंड उसके मुंह के अंदर थाजिसे वह चूसना शुरू कर दी थी लंड चूसने में भी सोनी को बहुत मजा आता था और खास करके राजू के क्योंकि सही मायने में सोचने लायक राजू का ही था जो कि मुंह में जाते ही पूरा मुंह भर जाता था,,,,,राजू पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगा हुआ अपनी आंखों को बंद करके हल्की-हल्की अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दिया,,,,,

सोनी की बुर में आग लगी हुई थीजिसे वह जल्द से जल्द राजू के लंड से निकले फुआरे से बुझाना चाहती थी,,,, राजू की अच्छी तरह से जानता था कि गर्म लोगों पर हथोड़ा कब मारना है,,,,,,इसलिए वह तुरंत स्थिति को काबू में रहते हुए अपने लंड को सोनी के मुंह में से बाहर निकाला,,, और उसे धक्का देकर पीठ के बल लेटा दीया,,, सोनी की बुर में हलचल होने लगी क्योंकि वह समझ गई कि अब राजू का लंड उसकी बुर की सैर करने वाला है,,,, राजू गहरी गहरी सांसे ले रहा था जिससे पता चला रहा था कि सोनी के साथ उसे कितना मजा आ रहा था,,, देखते ही देखते राजू सोनी की दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया,,,, राजू भाई जल्द से जल्द अपने लंड को सोनी की बुर में डाल देना चाहता था,,, क्योंकि गांव की औरतों को और हवेली की महारानी को चोदने में जमीन आसमान का फर्क था भले ही सभी औरतों के पास एक जेसीबी बोर होती है लेकिन हर एक औरत का चरित्र अलग-अलग होता है और मर्द हर एक औरत के चरित्र को लेकर उत्तेजित होता है और इस समय राजू के साथ भी ऐसा हो रहा था,,, वह महलों में रहने वाली सोनी को अपनी आंखों के सामने नंगी और उसे चोदने की खुशी में कुछ ज्यादा ही उत्तेजित और उत्तेजना का अनुभव महसूस कर रहा था ऐसा उत्तेजना उसे कभी-कभी महसूस होता था खास करके अपनी मां के साथ,,,।

राजू अपने दोनों हाथों से सोनी की चिकनी मोटी जांघों को पकड़कर फैलाते हुएअपने लिए अच्छी तरह से जगह बना लिया था और अपने लंड को उसके गुलाबी छेद पर रख कर एक करारा चक्कर में ही पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में उतार दिया था,,, काफी दिन हो गए थे राजू के लंड को अपनी बुर में लिए इसलिए सोनी को हल्का सा दर्द महसूस हुआ और उसके मुंह से आह निकल गई,,,,

क्या मेरी जान अभी भी दर्द करता है,,,

काफी दिन हो गए ना इसके लिए,,,

हाय मेरी रानी तेरी यही अदा तो मुझे पागल कर देती है,,, आज देखना में कैसे तेरी बुर का भोसड़ा बनाता हूं,,,

(इतना कहने के साथ राजू अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को धीरे-धीरे करके अंदर बाहर करना शुरू कर दिया राजू का लंड भले ही सोनी की बुर के अंदर अपना सांचा बना चुका था लेकिन फिर भी उसकी रगड़ और पकड़ बरकरार थी,,, जिसका मजा सोनी पूरी तरह से उठा रही थी राजू अपने दोनों हाथ आगे की तरफ लाकर उसके दोनों दशहरी आम को पकड़कर जोर-जोर से दबाता हुआ अपनी कमर हिला रहा था,,,, महलों की रानी को चोदने में राजू को अद्भुत सुखी की अनुभूति होती थी,,,, सोनी अपनी दोनों टांगें छितरा कर छिनार की तरह गांव के लड़के से चुदवा रही थी,, पूरे कमरे में फचच फचच की आवाज गूंजने लगी,,, साथ ही सोनी की गरम सिसकारियां और भी ज्यादा मादकता का रस घोल रही थी,,,,

राजू के हर एक धक्के के साथ उसका लंड सोने की बुर की गहराई नापते हुए उसके बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा था और जब जब राजू के लंड की ठोकर सोनी को अपने बच्चेदानी पर महसूस होती थी तब तक वह उछल पड़ती थी,,, राजू के धक्के इतने तेज थे कि भारी भरकम पलंग भी हचमचा जा रही थी,,,, और इसी दमखम की तो सोनी कायल थी,,, पूरे जोश के साथ सोनी राजू के हर एक धक्के का सामना कर रही थी,,,, दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे आखिरकार मेहनत भी उतनी कर रहे थे,,,।

राजू के हर धक्के के साथ सोनी की आह निकल जाती थी,,,जिसकी वजह से राजू का जोश और ज्यादा बढ़ जाता था और वह दुगनी ताकत के साथ लगातार धक्के पर धक्के पेल रहा था,,, सोनी इस दौरान एक बार झड़ चुकी थी लेकिन राजू अभी भी बरकरार था टिका हुआ था क्योंकि वह चुदाई के मामले में एक मजा हुआ खिलाड़ी था,,, जो कि अपना पूरा जोहर पलंग पर दिखा रहा था,,,तकरीबन 40 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद राजू की सांसे तेज होने लगी साथ ही सोनी की भी हालत खराब होने लगी थी,, क्योंकि वह दूसरी बार अपने पानी छोड़ने जा रही थी,,,दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी राजू उसे अपनी बाहों में ले लिया था अपनी कमर की ओर जोर से हिला रहा था सोनी भी अपनी बाहों को उसके गले के घेरे में डालकर उसकी चिकनी नंगी पीठ को सहला रही थी और उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाने के लिए अपने दोनों हाथों को एक बार फिर से उसके नितंबों पर रखकर दबोचने लगी थी,,जिससे राजू के तन बदन में और ज्यादा आग लगने लगी और वर्कर्स्मार्ट के धक्के मारने लगा और अगले ही पल वह अपना गरम लावा सोनी की बुर में गिराना शुरू कर दिया कि तभी बाहर हवेली के दरवाजे पर हलचल होने लगी सोनी को समझते देर नहीं लगी की उसका भाई आ गया है,,,अभी वह पहली पिचकारी ही अपने बच्चेदानी पर महसूस की थी कि सोनी घबराते हुए बोली,,।

राजू लगता है भैया आ गए,,,,
 
बाहर हो रही हलचल की आवाज को सुनकर सोनी को सफलता देर नहीं लगी थी की उसके भैया घर पर वापस आ चुके थे,, अभी-अभी वह पहली धार को ही अपने बच्चेदानी पर महसूस कर पाई थी कि उसे खतरे का अंदेशा हो गया था और वह राजू से उसके भैया के आने की खबर सुना दी,,, राजू जो कि अभी-अभी अपने लंड से पिचकारी की धार मारना शुरू ही किया था कि वह इतना सुनते हैं एकदम सब पका गया लेकिन वह सोनी को पूरी तरह से अपनी बाहों में कैद किए हुए था और झटके पर झटके मार रहा था इस नाजुक पल पर वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाया था और सोने की बात सुनने के बावजूद भी वह लगातार धकके पे धक्का पेलने लगा था जब तकवह पूरी तरह से झड़ नहीं गया तब तक वह अपने लंड को सोने की दोनों में से निकाला नहीं तब तक आहट तेज होने लगी थी,,,, चरम सुख प्राप्त कर लेने के बाद राजू अपने लंड को सोनी की गुलाबी बुर में से बाहर निकलता हुआ एकदम हडबढ़ाते हुए बोला ,,,,

अब क्या करें,,,,?



राजू आज तो हम दोनों फंस गए,,, भैया शाम तक लौटने वाले थे लेकिन जल्दी आ गए,,,(वह दोनों घबराकर अभी आपस में बात ही कर रहे थे कि लाला की आवाज दोनों के कानों में पड़ी)

सोनी कहां हो,,,, दरवाजा खुला छोड़ रखी हो,,,,।

अब क्या करें छोटी मालकीन ,,,, यहां तो इस कमरे में छुपने लायक एक भी जगह नहीं है पर कमरे से बाहर निकलने का मतलब है कि मौत को दावत देना,,,,



यही तो राजू मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें,,,(सोनी घबराहट में हाथ मलते हुए बोली,,,, और साथ में अपने नंगे बदन पर साड़ी लपेट रही थी,,, सोनी एकदम फुर्ती दिखाते हुए अपने ब्लाउज के बटन लगा रही थी राजू अपने कपड़े पहन चुका था,,,,लाला की आवाज कमरे के बेहद करीब होती जा रही थी जैसे-जैसे उसकी आवाज कमरे के करीब होती जा रही थी वैसे वैसे उन दोनों के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,,, लाला सोनी सोनी करता हुआ कमरे के बेहद करीब आता जा रहा था,,,, घबराहट के भाव दोनों के चेहरे पर साफ नजर आ रहे थे,,,,, खिड़की कूदकर राजू भाग भी नहीं सकता था क्योंकि दरवाजे पर ही उसकी बैलगाड़ी जो खड़ी थी और बैलगाड़ी को लाला अच्छी तरह से पहचानता था,,,,दोनों को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए,,,,, दोनों मिलकर कुछ देर पहले जमाने का मजा लूट रहे थे लेकिन दरवाजे पर उन दोनों की शामत आन पड़ी थी,,, लाला की आवाज करीब होती जा रही थी सोनी तो एकदम बुत बनकर खड़ी रह गई थी,,, उसे लगने लगा था कि आज उसे भगवान भी नहीं बचा सकते आज उन दोनों की चोरी पकड़ी जाएगी कितनी बदनामी होगी उसका भाई उसके बारे में क्या सोचेगा,,, केक जमीदार की बहन गांव के मामूली लड़के के साथ शारीरिक संबंध बनाती है और वो भी अपने घर पर बुलाकर,,,,,,,,, तभी दरवाजे पर लाला आकर खड़ा हो गया,,,,।



अरे सोनी,,,,(इतना कहते ही दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया और अपनी आंखों से जो देखा उसका उसे विश्वास नहीं हो रहा था,,,,सोनी दरवाजे की तरफ पीठ करके अपने दोनों हाथों को कमर पर रखकर किसी जमीदार की भांति खड़ी थी और अलमारी के नीचे झुक कर राजू कुछ कर रहा था उस लड़के को तो जमीदार पहचानता नहीं था लेकिन फिर भी अपनी बहन के कमरे में उस जवान लड़के को देख कर थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए लाला बोला,,,,)

यह,,, क्या हो रहा है,,,,?

(सोनी जानबूझकर अपने भाई की बात पर बिल्कुल भी ध्यान ना देते हुए राजू को निर्देश देते हुए बोली)

थोड़ा और नीचे झुक कर देखो राजू,,,, तुम्हारा हाथ वहां तक पहुंच जाएगा,,,,

(लाला को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि कमरे में क्या हो रहा है वह भी खड़े होकर देखने लगा तभी राजू अंदर से कान का बड़ा सा झुमका निकालते हुए सोने की तरफ घूमते हुए बोला,,,)

मिल गया छोटी मालकिन,,,(तभी वह लाला की तरफ देख कर) प्रणाम मालिक,,,,(राजू की बातें सुनकर जानबूझकर सोनी अपने भाई की तरफ आश्चर्य से देखते हुए बोली,,)

अरे भैया आप ,,,,आप कब आए,,,

अभी अभी आ रहा हूं,,,,, लेकिन यह लड़का यहां क्या कर रहा है,,,,



अरे भैया इसका नाम राजू भाई वह हरिया है ना उनका बेटा है मैं आम के बगीचे से आम लेकर आ रही थी तो यह रास्ते में बैलगाड़ी चलाता हुआ मिल गया धूप बहुत ‌थी तो मैं ईसकी बैलगाड़ी में यहां तक आ गई,,,,और मैं पहले से घर की सफाई कर रही थी और अलमारी के नीचे ढेर सारा कूड़ा करकट जमा हो गया था उसी को हटाने के लिए यहां पर लेकर आई तो जानते हैं क्या हुआ,,,?

क्या हुआ,,,?

अरे ओ मेरा कान का झुमका था ना बड़ा सा,,,(सोने की बात सुनकर लाला कुछ आश्चर्य से सोचते हुए) अरे भैया बताई तो थी कि कहीं मेरा झुमका गुम हो गया है ,,,मैं तो यही सोचती थी कि वह खो गया है लेकिन राजू जब आलमारी को हटा रहा था तो उसकी नजर झुमके पर पड़ गई ‌जोकि अलमारी के पीछे फंसा हुआ था,,, उसी ने मुझे निकाल कर दिया,,,,,,,

(लाला को लगने लगा था कि सोनी जो कुछ भी कह रही थी वह एकदम सच कह रही थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने नाटक ही कुछ इस तरह से दर्शाया गया था कि अविश्वास का तो बात ही नहीं पैदा हो रहा था,,, लाला राजु से खुश होते हुए बोला,,,)

बहुत अच्छा काम किए हो राजु,,,,

जी मालिक आप की दया है,,,,, अब इजाजत चाहता हूं,,,(इतना कहते हुए सोनी की तरफ देख कर बोला,,) छोटी मालकिन वो बैलगाड़ी में आम पडे थे,,,,)

उसे तुम अपना ईनाम समझकर रख लो राजू,,,।

(सोनी की बात से लाला भी सहमत हुआ और नमस्कार करके राजू वहां से चला गया हवेली से बाहर निकलते ही लाला सोनी को अपनी बाहों में कसने की कोशिश करने लगा तो सोनी उसे एक बहाने से हटाते हुए बोली)

थोड़ा सब्र करो भैया अभी धूल मिट्टी लगी है जाकर नहा कर आऊंगी तब,,,,

कोई बात नहीं तब तक मैं आराम कर लेता हूं इतनी दूर से आया हूं थोड़ी थकान आ गई है,,,





जी भैया आप आराम करो मैं नहा कर आती, हूं,,,।

(इतना कहते ही सोनी गुसल खाने की ओर चल दी वह बहुत खुश नजर आ रही थी क्योंकि बड़ी सफाई से उसने अपने भाई से संबंध बनाने से इंकार कर दी थी क्योंकि वह जानती थी अगर इस समय उसका भाई उसकी चुदाई करेगा तो उसको समझते देर नहीं लगेगी की कुछ देर पहले उसकी क्या राजनीति में कमरे में क्या हो रहा था,,,, और इस बात से भी पूरी तरह से प्रसन्न नजर आ रही थी कि राजू ने बड़ी चालाकी से सारा खेल बदल कर रख दिया था,,,लाला के कमरे में दाखिल होने से पहले ही राजू ने क्या करना है क्या कहना है सब कुछ सोनी को बता दिया था इसलिए तो उन दोनों का नाटक एकदम वास्तविक रूप लिए हुए था और दोनों अपनी चोरी से बच गए थे,,,,।

राजू बेल गाड़ी लेकर अपनी मां को लेने के लिए निकल गया था,,, लेकिन वहां झुमरी भी गई हुई थी झुमरी उसे बहुत खूबसूरत लगती थी और उसे पसंद भी थी जिससे वह मन ही मन में प्यार करने लगा था वह चाहता था कि वह आते समय झुमरी को भी अपने साथ लेकर आए ताकि कुछ देर तक वह झुमरी के साथ वक्त बिता सकें लेकिन एक लालच और थी उसके मन में कि अगर वह अकेले ही अपनी मां को लेकर आएगा तो हो सकता है कि सफर के दौरान उन दोनों के बीच कुछ मामला हो जाए क्योंकि उसकी मां भी खुलकर बातें कर रही थी,,,, इन सब बातों के बारे में सोचते हुए वह दूसरे गांव में हवेली पर पहुंच गया था जहां पर पहले से ही उसकी मां और गांव की कुछ औरतें तैयार थी साथ में चलने के लिए उन सब औरतों को देखकर राजू का मन उदास हो गया क्योंकि वह जानता था कि अब सफर के दौरान कुछ नहीं हो सकता बारी-बारी से सब लोग बेल गाड़ी में बैठ गई थी लेकिन झुमरी कहीं नजर नहीं आ रही थी तो वह अपनी मां से बोला,,,।



मां झुमरी भी आई थी ना वह कहां है आते समय उसकी मां बोली थी कि झुमरी को भी साथ लेकर आना,,,।

अरे हां झुमरी भी नहीं करी थी वह पानी पीने के लिए गई थी अब तक आई नहीं,,,(गांव की औरतों में से एक औरत ने राजू को बताते हुए बोली,,,)

कहां गई थी,,,?(आश्चर्य के साथ राजू बोला)

अरे मैं उसे हवेली के पीछे जाते हुए देखी थी,,,(तभी उनमें से एक औरत बोल पड़ी)

अच्छा तुम लोग बेल गाड़ी में बैठो मैं अभी उसे बुला कर लाता हूं,,,।(इतना कहने के साथ ही राजू भागता वह हवेली के पीछे जाने लगा,, राजू को ऐसा था कि झुमरी पानी पीने जाते सोच करने के लिए गई होगी इसलिए मैं जल्दबाजी में हवेली के पीछे जा रहा था कि ताकि उसे उसकी नंगी गांड की थोड़ी झलक मिल जाए,,, हवेली के आगे जितने भी सामियाना ताने गए थे सब हटाए जा रहे थे क्योंकि विवाह संपन्न हो चुका था लेकिन हवेली के पीछे सन्नाटा छाया हुआ था जंगली झाड़ियां चारों तरफ उगी हुई थी,,, कहीं भी कुंवा या हेडपंप नजर नहीं आ रहा था जिससे राज्य में अंदाजा लगा लिया था की हवेली के पीछे झुमरी पेशाब करने के लिए ही आईं थी,,,, राजू हवेली के पीछे पहुंचते ही चारों तरफ नजर घुमाकर देखने लगा लेकिन कहीं भी झुमरी नजर नहीं आ रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कहां चली गई अगर पेशाब करने आई होगी तो ज्यादा दूर तो गई नहीं होगी,,,,कुछ देर तक राजू भाई खड़ा होकर चारों तरफ देखता था लेकिन कहीं कुछ भी नजर नहीं आना था चारों तरफ दूर-दूर तक सन्नाटा नजर आ रहा था कभी सोचा कहीं और गई होगी और वह हवेली के आगे की तरफ जाने लगा कि तभी उसके कानों में जोर की चीख सुनाई दी,,,जोकि पास की झाड़ियों में से ही आ रही थी उसे समझते देर नहीं लगी कि मामला कुछ गड़बड़ है,,,, और भाई तुरंत पास में पड़ा मोटा सा डंडा उठा लिया और झाड़ियों की तरफ दौड़ लगा दिया जहां से चीखने की आवाज आई थी और उसे झाड़ियों के बीच जाकर जो उसने देखा उसके होश उड़ गए दो आदमी एक दोनों हाथ को पकड़ा था और दूसरा दोनों पैर को पकड़कर लगता है उसे झाड़ियों के और अंदर ले जा रहे थे,,,,



राजू को समझते देर नहीं लगी कि मामला क्या है वह पूरी तरह से क्रोध में आ गया था,,, और वहां पहुंचते ही सबसे पहले जिसने पैर पकड़ रखा था उसे मोटे डंडे से मारना शुरू कर दिया,,,, तीन चार डंडे में तो वह आदमी नीचे गिर पर ढेर हो गया और राजू का गुस्सा देखकर दूसरे वाले की हिम्मत जवाब देने लगी,,,,राजू को अपनी आंखों के सामने देखकर झुमरी को राहत महसूस होने लगी और वह रोने लगी अभी भी वह आदमी उसका हाथ पकड़े हुए था और राजू तुरंत पूर्ति दिखाता हुआ उसके दोनों हाथ ऊपर मोटा डंडा बरसाना शुरू कर दिया वह चिल्लाता हुआ वहीं गिर गया,,,राजू का बार इतना तेज था कि वह दोनों वहीं ढेर हो गए थे दर्द से बिलबिला रहे थे और उन दोनों की परवाह किए बिना ही राजू ठंडा वहीं फेंककर झुमरी कहां पकड़कर झाड़ियों में से बाहर आ गया वह शोर-शराबा नहीं करना चाहता था क्योंकि इससे झुमरी की इज्जत खराब होने बदनामी होने का डर था वह इस राज को दोनों के बीच ही रखना चाहता था झुमरी राजू के गले लग कर रोने लगी,,,,राजू पूरी तरह से उसे दिलासा देते हुए उसकी पीठ पर हाथ रखकर उसे सांत्वना देते हुए बोला,,।)



डरने की बात नहीं है जो मेरी मैं आ गया हूं ना अब कोई कुछ नहीं करेगा,,,,

(राजू के सीने से लगाकर झुमरी फूट-फूट कर रो रही थी राजू उसे चुप कराने की कोशिश कर रहा था)

झुमरी चुप हो जाओ अगर किसी ने देख लिया तो सारा मामला उसे समझ में आ जाएगा और तुम्हारी बदनामी हो जाएगी और मैं नहीं चाहता कि तुम बदनाम हो जाओ इसलिए चुप हो जाओ,,,।

(राजू की बात से झुमरी पूरी तरह से सहमत है इसलिए अपने आंसुओं को पोछने लगी,,, झुमरी तरह से शांत हो चुकी थी राजू उसे बोला कि चलकर हाथ मुंह धो लेना ताकि किसी को कुछ भी पता ना चले कि क्या हुआ था,,,,झुमरी ने ठीक वैसा ही किया हाथ मुंह धो कर एकदम तरोताजा होकर बैलगाड़ी के पास आई तब तक राजू बैलगाड़ी पर बैठकर कमान संभाल लिया था,,,,)



अरे झुमरी कहां समय लगा दी थी,,,

कहीं नहीं चाची पानी पीने गई थी,,,(और इतना कहने के साथ ही झुमरी पर गाड़ी पर बैठ गई और राजू खुशी-खुशी बैलगाड़ी को हांकता हुआ गांव की तरफ ले जाने लगा,,, अब उसके मन में अपनी मां के साथ का यह सफर अकेले ना गुजारने का कोई भी मलाल नहीं था,,,।
 
राजू घर पर पहुंच चुका था,,, आज उसने बदमाशों से बचाकर झुमरी के मन में अपने लिए एक खास जगह बना लिया था,,, रास्ते भर झुमरी तिरछी नजरों से राजू को देखते आ रही थी,,,राजू उसे अब और ज्यादा अच्छा लगने लगा था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि जिस लड़के को वह पसंद की है वह अच्छा तो है ही लेकिन उसमें दम भी है उसकी लाज बचाने का,,, और आज झुमरी अपनी आंखों से देख भी ली थी अगर वह सही समय पर ना आता तो शायद,,, उसकी इज्जत लूट गई होती जिसे वह संभाल कर सिर्फ अपने पति के लिए रखी थी और जिसके लिए रखी थी उसी ने आज उसकी इज्जत भी बचा ली थी क्योंकि मन ही मन झुमरी राजू से शादी के सपने देखने लगी थी,, लेकिन अब उसे लगने लगा था कि उसने अपने जीवनसाथी का सही चयन किया है,,,,,,,,,।

राजू बैल गाड़ी लेकर शाम को घर पहुंचा था,, तब तक गुलाबी और उसका बड़ा भाई मिलकर संभोग की चरम सुख को बार-बार प्राप्त कर रहे थे लेकिन उन लोगों के आने से पहले ही दोनों अपने-अपने काम में लग गए थे,,, घर पर जब राजु पहुंचा तो ना तो उसके पिताजी घर पर थे और ना ही गुलाबी ,,,,,गुलाबी खेत की तरफ गई हुई थी और हरिया गांव के नुक्कड़ पर चाय पान बीड़ी की दुकान पर बैठा हुआ था,,,,,,, हरिया अपने संगी साथी के साथ गपशप में लगा हुआ था और वीडीके कस खींच रहा था,,,,।

दूसरी तरफ घर पर पहुंचते ही मधु अपने कपड़े बदलने लगी क्योंकि शादी में गई हुई थी इसलिए नई साड़ी पहनी हुई थी,,, वह अपने कमरे में अपनी साड़ी को उतार कर रस्सी पर टांग की और अपने ब्लाउज की डोरी को खोलने की कोशिश करने लगी अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर डोरी खोलने में उसे काफी मशक्कत झेलनी पड़ रही थी और उससे डोरी खुल भी नहीं रही थी वैसे तो औपचारिक रूप से वह बटन वाला ब्लाउज ही पहनती थी लेकिन शादी ब्याह के लिए उसने अलग से ब्लाउज सिलवा कर रखी थी,,,, पहनते समय वह गुलाबी से उसकी डोरी बंधवाई थी लेकिन इस समय गुलाबी घर पर नहीं थी,,, और उसका हाथ पीछे की तरफ ठीक से नहीं पहुंच पा रहा था और अपनी मां की यह हरकत राजू चोरी-छिपे दरवाजे की ओट में खड़ा होकर देख रहा था वैसे तो उसे इस बात का इंतजार था कि कब उसकी मां अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाए,,,,बहुत बार बार अपनी मां को नंगी देख भी चुका था और चुदवाते हुए भी देख चुका था अपनी मां की पूरी में अपने पिताजी के लंड को अंदर बाहर होता हुआ देखा था और खुद अपनी मां को अपने पिताजी के लंड पर गांड उछाल उछाल कर पटकते हुए देखा था अपना दूध पिलाते हुए देखा था अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देख चुका था लेकिन फिर भी अपनी मां को नग्न अवस्था में देखने की यह प्यास उसकी बुझती ही नहीं थी वह जानता था कि समय घर पर ना तो उसकी बुआ है और ना ही उसके पिताजी इसलिए वह इत्मीनान से अपनी मां को अपने हाथों से नंगी होता हुआ देखना चाहता था मधु को तो इस बात का आभास तक नहीं था कि दरवाजे की ओट में छिपकर उसका बेटा उसे कपड़े उतारते हुए देख रहा है,,,,।

जिस तरह से उसकी मां अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ जाकर ब्लाउज की डोरी को पकड़कर खींचने की कोशिश कर रही थी उसे देखता हुआ राजू अपने मन में सोच रहा था कि अगर उसको यह मौका मिलता तो सुबह एक झटके में ब्लाउज की डोरी खोल कर उसे नंगी कर दिया होता,,,,एक तरफ राजू अपने मन में यह सोच भी रहा था और इस बात से गुस्सा भी हो रहा था कि उसकी मां ब्लाउज की डोरी नहीं खोल पा रही है क्योंकि जितनी हो तेरी कर रही थी उतनी और ज्यादा उत्सुकता राजू को अपनी मां को नंगी देखने के लिए बढ़ती जा रही थी,,,,,,।

राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि उसकी मां उसकी आंखों के सामने ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी उसका गदराया बदन राजू के तन बदन में आग लगा रहा था,,, कमर की पतली धारी मधु की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे वहीं दूसरी तरफ वही कमर की पतली धारी राजू के लंड की ऐठन बढ़ा रही थी,,,,, मधु की बड़ी बड़ी गांड पेटीकोट में भी नहीं समा रही थी एकदम कसी हुई पेटीकोट में राजू को अपनी मां की गांड बादलों के पीछे छुपा हुआ चांद नजर आ रहा था जिसे वह अपने हाथों में पकड़ कर देखना चाहता था अपनी हथेली में उतार लेना चाहता था,,,

राजू बार-बार दरवाजे की तरफ भी देख ले रहा था कि कहीं कोई आ ना जाए,,, क्योंकि उसे इस बात का डर भी था कि अगर कोई ने देख लिया तो क्या कहेगा,,,,,,।

अपनी मां के गदराए बदन को देखकर राजू का लंड खड़ा हो चुका था,,,, जिस तरह से बना अपनी साड़ी को उतार कर रस्सी पर टांगे कि उसे देखते हुए राजू समझ गया था कि उसकी मां अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होने वाली है और वह इस बात को भूल चुकी थी कि दरवाजा खुला है वरना बा दरवाजा बंद करना कभी नहीं भूलती इसी का फायदा उठाते हुए राजू दरवाजे की ओट के पीछे छुपा हुआ था,,,, मधु बार-बार अपने हाथ को जितना हो सकता था उतना पीछे की तरफ से जाकर ब्लाउज की डोरी को खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी उंगलियां गिठान तक नहीं पहुंच पा रही थी,,,, इस अद्भुत मादकता से भरे नजारे को देखकर राजू के मन में विचार आने लगा कि क्यों ना वह खुद ही कमरे में जाकर अपनी मां के ब्लाउज की डोरी खोल दे,,, क्योंकि सफर के दौरान दोनों के बीच काफी खुलापन आ रहा था जिसका आनंद खुद उसकी मां भी ले रही थी और तो और कुए के पीछे वह अपनी मां को पेशाब करते हुए भी देख चुका था और यह एहसास मधु को भी था कि उसका बेटा उसे पेशाब करते हुए देख लिया है उसकी नंगी बड़ी बड़ी गांड को अपनी आंखों से देख लिया है उस पर मधु के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,,,लेकिन इस बात की झिझक उसके मन में बिल्कुल भी नहीं थी कि उसका बेटा उसे पेशाब करते हुए देख लिया है बल्कि इस बात से उसे उत्तेजना का एहसास हो रहा था और वह इस बात के लिए अपने बेटे को कुछ भी नहीं कही थी इसी से राजू का मन आगे बढ़ रहा था,,,,





मधु पूरी कोशिश में लगी हुई थी लेकिन कामयाबी उसके हाथ नहीं लग रही थी हाथ पीछे की तरफ लाकर ब्लाउज की डोरी तक पहुंचने की कोशिश में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उछल रही थी मानो कि जैसे दो बड़े-बड़े खर्चे इसकी ब्लाउज में डाल दिए गए हैं और वह किसी भी पर उछल कर बाहर आ जाएंगे,,,, राजू की नजर अपनी मां की चोटियों के साथ-साथ उसके गदरीए जिस्म और पेटीकोट में कसी हुई उसकी गान्ड जो की हिलोरे मार रही थी उस पर टिकी हुई थी,,, थक हार कर अपनी नाकामयाब कोशिश के चलते मधु रोने जैसी हो गई थी,,,।

धत् तेरी की मुझे यह ब्लाउज पहनना ही नहीं चाहिए था एक तो यह गुलाबी पता नहीं कहां चली गई है,,, अब क्या करूं गुलाबी के आने तक का इंतजार करु तब तक तो बहुत देर हो जाएगी खाना बनाने का समय हो रहा है,,,।

(मधु अपने मन में यही सोच रही थी कि राजू कमरे में प्रवेश करने का अपना मन बना चुका था यह सोच कर कि जो भी होगा देखा जाएगा,,, क्योंकि अभी तक की अपनी हरकतों से जिस तरह से उसने अपनी मां को परेशान किया था उसे देखते हुए राजू समझ गया था कि अगर उसकी मां को एतराज जताना होता तो पहले ही उसे डांट चुकी होती फटकार चुकी होती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था क्योंकि राजू ने अपनी मां के साथ बहुत कुछ कर चुका था कुएं में से पानी निकालते समय गाय की डोरी खींचते समय उस समय तो राजू ने अपनी मां के साथ खुली छूट लेते हुए अपनी मां की बुर पर अपनी हथेली रगड़ दिया था,,,जिस बात का एहसास उसकी मां को भी था लेकिन उसने कुछ नहीं कही थी और सफर के दौरान भी दोनों के बीच बातों ही बातों में बहुत कुछ हुआ था लेकिन फिर भी उसकी मां एतराज नहीं जताई थी इसीलिए राजू को पिछली बातों के बारे में सोच कर हिम्मत बढ़ती जा रही थी,,,,, मधु कुछ और सोच पाती इससे पहले ही राजू कमरे में प्रवेश करते हुए एकदम से बोला,,,।

क्या हुआ मा तुमसे ब्लाउज की डोरी नहीं खोली जा रही है मैं खोल दूं क्या,,,,,,

(एकाएक राजू की आवाज सुनकर मधु एकदम से चौक गई थी क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था कितनी जल्दी कोई उसकी कमरे में आ जाएगा,, और खुद जिस हालत में थी उससे वह पूरी तरह से सकपका गई थी,,,उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसका बेटा कमरे में आ चुका है और वह केवल ब्लाउज और पेटीकोट में है साड़ी वह उतार चुकी थी,,,इसलिए वह अपने बेटे की आंखों के सामने इस हालत में खुद को देखकर शर्म से पानी पानी होने लगी,,,,राजू की बात सुनकर वह कुछ बोल पाती इससे पहले ही राजू खुद अपनी मां के ठीक पीछे पहुंच गया और अपनी मां की इजाजत पाए बिना ही अपनी मां की ब्लाउज की डोरी को दोनों हाथों से थाम लिया,,,, मधु की तो सांस ही अटक गई उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, मधु अर्धनग्न अवस्था में किस हालत में उसके पीछे उसका बेटा खड़ा था और उसकी ब्लाउज की डोरी को पकड़े हुए था,,,, ऐसे हालत में मां के तन बदन में कैसी हलचल होती है वह शायद मधु से बेहतर कोई नहीं जानता था,,,,।

पल भर में ही मधु की आंखों के सामने सफर के दौरान वाला दृश्य घूमने लगा जब रास्ते में कुंवा देखकर पानी पीने के लिए दोनों बैल गाड़ी से नीचे उतरे थे और उसी समय उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी थी और कोई के पीछे बड़े पत्थर के पीछे जाकर वहां पेशाब कर रही थी तभी राजू उसे ढूंढता हुआ वहां तक आ गया था और उसे पेशाब करता हुआ देख लिया था उसकी नंगी नंगी गोरी गोरी गांड को अपनी आंखों से देख लिया था उस समय के एहसास को मधु इस समय महसूस कर रही थी इस समय राजू उसके पीछे खड़ा होकर उसकी ब्लाउज की डोरी को अपने दोनों हाथों से थामे हुए था और मधु को ऐसा एहसास हो रहा था कि जैसे उसका बेटा फिर से उसे पेशाब करते हुए देखना है मैं तो एकदम शर्म से पानी-पानी हुए जा रही थी पल भर में उसके माथे पर पसीने की बूंदें उपसने लगू सांसो की गति तेज होने लगी,,,, उत्तेजना के मारे मधु का गला सूख रहा था वह इतनी शर्म से पानी-पानी हो जा रही थी कि अपनी नजर घुमाकर पीछे अपने बेटे की तरफ देखने भर की हिम्मत नहीं थी,,,और राजू ठीक उसके पीछे खड़ा था उसका लंड पूरी तरह से पैजामा में तनकर तंबू बनाया हुआ था,,, और राजू कैलेंडर और मधु की गांड से दोनों के बीच का फासला केवल चार अंगुल का था,,,अगर मधु कसमस आते हुए जरा सा भी अपने बदन में हलचल करती तो उसकी गांड ठीक राजू के लंड पर रगड़ खा जाती,,,।

राजू अपने हाथ में अपनी मां के ब्लाउज की डोरी पकड़े हुए था और उसे खींचने की तैयारी में था लेकिन उससे पहले वह अपनी नजरों को नीचे झुका कर पेटीकोट में कसी हुई अपनी मां की गांड की उधार को देख रहा था जिससे उसके लंड का फैसला केवल चार अंगुल था राजू का मन तो कर रहा था कि,, अपनी कमर को आगे धक्का देकर अपने लंड को पेटीकोट सहित अपनी मां की गांड में डाल दे,,,,,,कई औरतों के संगत में आकर उनकी खूबसूरत जिस्म को छोड़कर राजू औरत के हर एक एहसास से वाकिफ हो चुका था इस समय वह अपनी मां की गहरी चलती सांसो को देखकर समझ गया था कि उसकी मां के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही है,,,,राजू के मन में हो रहा था कि मौके का फायदा उठा लिया जाया करो किसी भी प्रकार की हरकत करेगा तो उससे उसकी मां को बेहद आनंद की अनुभूति होगी वह उत्तेजित हो जाएगी और दूसरी औरतों की तरह वह भी चुदवासी हो जाएगी,,,

राजू के हाथों में ब्लाउज की डोरी थी जिसे खींचने से ही डोरी खुल जाती है और ब्लाउज का कसाव बड़ी बड़ी चूचीयो से ढीला पड़ने लगता,,,और यही देखने के लिए राजू अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को एक दूसरे की विरुद्ध खींचने लगा और देखते ही देखते ब्लाउज की कसी हुई डोरी खुलने लगी,,, राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा और यही एहसास यही असर मधु के तन बदन में भी हो रहा था,,,वह कभी सोचा नहीं कि कृष्णा बेटा अपने हाथों से उसका ब्लाउज की डोरी को खोलेगा मधु को खुद इस बात का एहसास हो रहा था कि जैसे उसका बेटा उसके ब्लाउज की डोरी खोल कर उसे अपने हाथों से नंगी करने जा रहा है,,,यह एहसास ही उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल सा मचाया हुआ था,,, मधु की बुर से काम रस की बुंद अमृत की बूंद बन कर टपक रही थी,,,।

राजू के तन बदन में आग लगी हुई थी इतना अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव पहली बार कर रहा था राजू की कमर लप-लप आ रही थी आगे बढ़ने के लिए अपनी मां की गांड को स्पर्श करने के लिए,,, राजू अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ को देख रहा था जिस पर पसीने की बूंदें मोती के दाने की तरह फिसल रही थी,,,, मधु से राजू की लंबाई थोड़ी ज्यादा थी इसलिए उसे पीछे खड़े होने के बावजूद भी अपनी मां का ब्लाउज साफ नजर आ रहा था जिसमें से गहरी सांस के साथ उसकी उठती बैठती चूचियां उसे साफ नजर आ रही थी राजू अपनी मां की चूचियों को दोनों हाथ से पकड़ कर दबाना चाहता था,,,, उसे मुंह में लेकर उसका दूध पीना चाहता था,,,, लेकिन राजू अपने आप पर काबू किए हुए थे वह इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसकी हरकत का मजा उसकी मां भी ले रही थी वरना कब का ही वह डांट कर कमरे से बाहर निकाल दी होती,,,राजू अपनी मां के ब्लाउज की डोरी को खोल चुका था और डोरी को अलग अलग कर चुका था पीछे से ब्लाउज की डोरी खुलते ही उसकी मां की पीठ एकदम नंगी हो गई जिस पर राजू अपने होंठों का स्पर्श करना चाहता था,,,डोरी को दोनों हाथों में पकड़े हुए राजू अपनी मां की नंगी चिकिनी पीठ के बीच की गहरी दरार को देख रहा था जो कि उसके नितंबों के ऊपरी सतह तक पहुंच रही थी और नीचे एक बेहद अद्भुत कामदारी गड्ढा बनाए हुए थी जिसमें राजू का मन डुब जाने को कर रहा था,,,,,,दोनों के बीच काफी देर से किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हुई थी इसलिए राजू ही वार्तालाप की शुरुआत करते हुए अपनी मां से बोला,,,,।

कककक,कीतना कस के बांधी थी,,,,(इतना कहते हुए जो काम मधु को अपने हाथों से करना था राजू खुद अपने हाथों से करने लगा था इतना कहते हुए अपनी मां के ब्लाउज को उसके कंधे से नीचे की तरफ ले जाने लगा बेहद मादकता भरे अदा से मधु के तन बदन में आग लग रही थी खास करके उसकी बुर में,,, जिसमें से काम रस लगातार बहता चला जा रहा था,,,, राजू अपनी मां की खामोशी को उसकी तरफ से आमंत्रण समझ रहा था और हिम्मत करके वह एक कदम आगे बढ़ा जिससे पजामे में तना हुआ तंबू मधु की गांड के पीछे पीछे रगड़ खाने लगा,,,, राजू का लंड मधु अपनी गांड पर महसूस करते ही एकदम से सिहर उठी,,,,, राजू अपनी मां की प्रतिक्रिया देखना चाहता था इसलिए हल्के हल्के अपने लंड को उसकी गांड से सटा रहा था लेकिन जब उसे इस बात का एहसास हो गया कि उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज नहीं कर रही है बल्कि उसकी हरकत का मजा ले रही है तब उसकी हिम्मत बढ़ने लगी अब तक राजू अपनी मां के ब्लाउज को उसके हरदेव बहुत अकेला चुका था आगे से ब्लाउज सूचियों का साथ छोड़ते हुए पत्ता गोभी के पत्ते की तरह अलग होने लगा था कि अपनी चूचियों को नंगी होता देखकर शर्म के मारे मधु अपने दोनों हाथों को अपनी छाती से लगा ली और राजू को,,, ब्लाउज उतारने से मना कर रही थी लेकिन राजू औरतों के हिसाब से अच्छी तरह से वाकिफ हो गया था अपनी मां की कह रही चलती सांसो को हुआ अच्छी तरह से पहचान रहा था वह जानता था कि उसकी मां उत्तेजित हो रही है उसे मजा आ रहा है और अपने मन में पक्के तौर से कहने लगा कि जरूर उसकी मां की बुर से पानी निकल रहा होगा उसकी मां की बुर गीली हो रही होगी,,,, क्योंकि अब तक जितनी भी औरतों को चोदता आ रहा था वह जानता था कि उसकी हरकत की वजह से सबसे पहले उनकी बुर गीली होती थी,, अपनी मां की बुर गीली होने के अहसास से ही राजु पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,, वह ईस बार कमर को कुछ ज्यादा ही जोर से आगे की तरफ ठेला तो इस बार उसका लंड मधु की गांड के बीचो बीच धंसता हुआ महसूस हुआ,,, मधु एकदम से मस्त हो गई वह अपने बेटे को रोकना चाहती थी लेकिन एक अजीब सी मस्ती के सागर में वह हिलोरे मार रही थी इसलिए ना चाहते हुए भी उसकी हरकत का मजा ले रही थी,,,,।

राजू पूरी तरह से उत्तेजित होकर चुका था वह एकदम से चुदवासा हो चुका था ब्लाउज भी उसकी आधी चूची पर रुकी हुई थी इसलिए वहां उत्तेजित अवस्था में अपनी मां के बदन से एकदम से सट गया,,,, जऐसे ही मधु ने अपने बेटे को अपनी पीठ और गांड से एकदम से सटता हुआ महसूस की उत्तेजना के मारे उसके मुख से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,अपनी मां की उत्तेजित अवस्था का इससे बड़ा सबूत और क्या मिलने वाला था,,,,, राजू समझ गया कि उसकी मां चुदवासी हो रही है,,,इसलिए इस मौके का वह पूरी तरह से फायदा उठाना चाहता था वह अपनी मां के गर्दन पर अपने होंठ को रख कर,,, चुंबन करने लगा राजू अपनी हरकत से अपनी मां को पूरी तरह से विवश कर रहा था और साथ ही ब्लाउज को अलग करने लगा इस बार उसकी मां उसे रोक नहीं पाई और देखते ही देखते राजू अपने हाथों से अपनी मां का ब्लाउज उतारकर उसे कमर के ऊपर नंगी कर चुका था,,,, राजू लगातार अपने लंड का दबाव अपनी मां की गांड पर बनाया हुआ था जोकि पेटीकोट सहीत उसकी गांड की दरार में धंसा चला जा रहा थी,,,, इससे ही मधु को अपने बेटे के लैंड की ताकत का एहसास होने लगा था,,,, ब्लाउज के अलग होते ही राजू अपने आप पर सब्र नहीं कर पाया और जो कुछ वह अपनी कल्पना में करने की सोच रहा था वह तुरंत अपने हाथ को अपनी मां की चूची पर रख कर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और पल भर में उसे इस बात का अहसास हो गया कि अब तक गांव की जितनी भी औरतों की चूचियां उसके हाथ में आई थी सबसे जबरदस्त गोल गोल खरबूजे जैसी चूचियां उसकी मां की ही थी जिसे वह जोर-जोर से बता रहा था,,,मधु अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से कसमसा रही थी और उत्तेजना के चलते खुद ही अपने गांड को पीछे की तरफ अपने बेटे के लंड पर दबा रही थी,,,,।

राजू समझ गया था कि उसका काम बनने वाला है वह देखना चाहता था कि उसकी मां की बुर की ली हुई या नहीं इसलिए एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर पेटीकोट के ऊपर से अपनी मां की बुर वाली जगह पर दबाने लगा और तुरंत उसे अपनी मां की बुर के की गीलेपन का एहसास होने लगा पेटीकोट आगे से एकदम गीली हो चुकी थी,,,। राजू का लंड अपनी मां की बुर गीली होता हुआ देखकर और भी ज्यादा कड़क हो गया,,,,।

दोनों की गहरी सांसे पूरे कमरे में शोर मचा रही थी दोनों को इस बात का अहसास तक नहीं था कि हरिया और गुलाबी में से कोई भी घर में आ सकता है राजू इस मौके का पूरा फायदा उठाते हो अपनी मां की पेटीकोट को ऊपर की तरफ उठाने लगा और कमर तक उठाकर अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर रख दिया,,, बुर क्या थी भट्टी की तरह तप रही थी जिसे ठंडा करने के लिए लंड का फुआरा चाहिए था,,,, मधु उत्तेजित अवस्था में कसमसाते हुए अपनी बड़ी बड़ी गांड को पजामे में तने हुए अपनी बेटे के लंड पर गोल गोल घुमा कर रगड़ने लगी,,,,अपनी मां की हरकत को देखकर राजू पूरी तरह से चुदवासी हुआ जा रहा था और इसी समय अपनी मां की बुर में लंड डालकर चोदने का इरादा बना लिया था,,, और इसीलिए वहां अपनी मां की पेटीकोट की डोरी को पकड़कर खींचने ही वाला था कि बाहर बाल्टी के रखने की आवाज सुनाई थी वैसे ही तुरंत राजू बिना देर की अपनी मां को उसी अवस्था में छोड़कर उसके कमरे से बाहर निकल गया और,,, मधु को भी यह एहसास होते ही वह तुरंत दूसरे ब्लाउज को लेकर पहनाने लगी और,,,, दरवाजे की तरफ देखी तो राजु जा चुका था,,, जल्द ही मधु दूसरी साड़ी पहनकर अपने आपको व्यवस्थित कर लेती और कमरे से जैसे बाहर आई वैसे ही गुलाबी पानी से भरी बाल्टी लाकर वही रखते हुए बोली,,।

तुम कब आई भाभी,,,

अभी कुछ ही देर हुआ है,,,,,।

(इतना कहने के साथ ही खाना बनाने की तैयारी में लग गई और भगवान से प्रार्थना करने लगी की अच्छा हुआ गुलाबी के देखने से पहले ही सब कुछ ठीक हो गया था)
 
पल भर में ही दोनों मां बेटे की अरमान पर पानी फिर गया था,,,,राजू तो खुशी से पागल हुआ जा रहा था जब उसे अपनी मां की ब्लाउज उतारने और उसकी बुक पर हाथ रखने का मौका मिला,,, कुछ ही पल में राजू ने अपनी मां के साथ अपने मन की कर लीया था,,,,, हालांकि राजू मंजिल तक तो नहीं पहुंच पाया था लेकिन सफर का मजा बराबर लिया था,,,, राजू ने अपनी हरकतों से अपनी मां को पूरी तरह से चुदवासी कर दिया थाअगर इन मौके पर उसकी बुआ ना आ जाती तो शायद आज अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उद्घाटन कर दिया होता,,,, अपनी मां की पानी टपकाती बुर को देखकर राजू इतना तो समझ ही गया था कि उसकी मां भी चुदवाना चाहती है,,,, इसीलिए तो राजू की हिम्मत बढ़ती जा रही थी,,,,,,राजू ने अब तक अपनी बाहों में ढेर सारी औरतों को ले चुका था उनके अंगों से खेल चुका था लेकिन जिस तरह का सुख और उन्माद का अनुभव उसे अपनी मां के साथ प्राप्त हुआ था ऐसा अनुभव से अब तक किसी भी औरत के साथ प्राप्त नहीं हुआ था,,,। अपनी मां की बुर की गर्मी को अभी तक वह अपने बदन में महसूस कर रहा था अपनी मां का ब्लाउज उतारने के बाद अपने हाथों में उसकी चूची लेकर जिस तरह से वह दबा रहा था,, ऐसा लग रहा था कि अपनी मां की चूची का सारा रस निचोड़ डालेगा,,,, बार-बार अपने लंड को अपनी मां की गांड पर धंसा रहा था जोकि राजू को यह सुख भी चुदाई से कहीं अधिक आनंद दे रहा था,,,राजू को इस बात की खुशी थी कि उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज नहीं जता रही थी और ना ही उसे आगे बढ़ने से रोक रही थी बल्कि वह खुद उसका साथ दे रही थी,,,,,, राजू अपनी मां को नहीं चोद पाया था इस बात का दुख उसे बराबर था लेकिन इस बात की खुशी भी थी कि ऐन मौके पर अपनी मां को कमरे में छोड़कर कमरे से बाहर निकल गया था करना आज गजब हो जाता वैसे तो गुलाबी के देखे जाने पर भी कोई दिक्कत की बात नहीं थी गुलाबी को समझाना राजू के लिए कोई मुश्किल काम नहीं था लेकिन राजू अपनी मां को अपनी बुआ की नजरों में गिरने नहीं देना चाहता था हालांकि गुलाबी नहीं कई बाहर चुदवाते समय उसे उसकी मां को चोदने की सलाह दे चुकी थी,, उसके अंगों के बारे में बोलकर उसे उत्तेजित करने का प्रयास कर चुकी थी इसलिए गुलाबी के देखे जाने पर भी राजू को किसी बात की दिक्कत नहीं थी क्योंकि गुलाबी खुद परिवार के ईस कुंए में में डुबकी लगा चुकी थी,,,। लेकिन गुलाबी अगर देख लेती तो शायद उसकी मां खुद की नजरों में गिर जाती,,,,,,,।

मधु का मन खाना बनाने में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार वह अपनी नियत से फिसल कैसे गई,,,, अपने मन में ही सोच रही थी कि वह कभी सपने में नहीं सोची थी कि उसका बेटा उसके साथ इस तरह की हरकत करेगा,,, जिसका अंदेशा वह पहले भी अपनी हरकतों से देता आ रहा था,,, बार-बार किसी ना किसी बहाने उसके बदन से सट जाना उसके अंगों को घूरना और तो और अनजाने में जब उसके ऊपर गिरी थी तो जानबूझकर अपनी हथेली को उसकी बुर पर रखकर किस तरह से मसल दिया था,,, उस समय जिस तरह का एहसास उसके तन बदन में हुआ था वही एहसास उस पल को याद करते हैं मधु को अभी अपने बदन में महसूस हो रहा था,,,, और तो और सफर के दौरान चूहे के पीछे छिपकर जयपुर पेशाब कर रही थी तो एक बहाने से उसे देखने के लिए कैसे आ गया था और अपनी आंखों से उसे पेशाब करता हुआ देख भी लिया था,,,,,,। इन सब बातों को याद करके मधु को अपने तन बदन में उत्तेजना का एहसास तो हो ही रहा था लेकिन उसे अपनी गलती का एहसास भी हो रहा था,,, अच्छी तरह से जानती थी कि अपने बेटे को पहली बार में ही डांट फटकार लगाकर उसे रोक देना चाहिए था ताकि वह इतनी आगे ना बढ़ पाता लेकिन उसकी चुप्पी धीरे-धीरे राजू का हौसला बढ़ा रही थी और नतीजन आज मधु अपने ही बेटे से चुदते चुदते रह गई थी,,,,,,,मधु को अपनी गलतियों का एहसास बराबर हो रहा था लेकिन वह इस बात से भी इनकार नहीं कर पा रही थी कि अपनी बेटी की मौजूदगी में ना जाने उसे क्या हो जाता है,,, बाप ने बेटी को रोकना तो चाहती हैं लेकिन उसकी हरकतों का असर ना जाने क्यों उसके बदन में उत्तेजना जगाने लगता है जिसके चलते वह अपने बेटे को चाह कर भी नहीं रोक पाती है,,,,, रोटियां बेलते समय मधु अपने आप से ही बात करते हुए अपने मन में बोल रही थी कि,,,।

मुझे क्या मालूम था कि दरवाजा खुला हुआ है वरना मैं दरवाजा खुला नहीं छोड़ती,,, और वह मुआ भी छुपकर मुझे ही देख रहा था मुझे ब्लाउज की डोरी खोलते हुए देख रहा था और जब नहीं खोल पाई तो कैसे खुद अंदर आ गया,,, वह इतने करीब आ गया था कि मैं उसे रोक नहीं पाए काश उसे रोक लेती तो शायद इस तरह की नौबत कभी नहीं आती लेकिन क्या करूं उसकी मौजूदगी मेरी तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी खासकर के ठीक मेरे पीछे खड़े होना,,,, जिस तरह से वह मेरी डोरी पकड़ा हुआ था न जाने कि मुझे इस बात का एहसास हो रहा था कि वह मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी करने जा रहा है अपने ही बेटे के बारे में इस तरह से सोचना गलत था लेकिन उस समय कुछ समझ में नहीं आ रहा था मेरी हालत एकदम खराब होती जा रही थी,,,( मधु खाना बनाते समय अपने आप से भी बात किए जा रही थी मानो कि जैसे किसी के आगे अपनी गलतियों को कबूल कर रही हो,,,वह तो अच्छा हुआ कि खाना बनाते समय उसके पास कोई भी नहीं था वरना उसे देखकर ऐसा ही लगता कि शायद उसकी तबीयत खराब है,,,) जैसे ही उसने मेरे ब्लाउज की डोरी को खींचकर खोला ना जाने क्यों मेरी बुर में हलचल होने लगी वह अपने आप ही गीली होने लगी,,, मुझे ऐसा ही लगा था कि ब्लाउज की डोरी खोलने के बाद वह कमरे से बाहर चला जाएगा ,,, लेकिन शायद मेरी खूबसूरत बदन का आकर्षण उसे बाहर जाने से रोक रहा था,,,डोरी के खुल जाने के बाद मेरी नंगी चिकनी पीठ उसकी आंखों के सामने थी शायद उसे देख कर उसकी हालत खराब हो रही थी,,, मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मेरा बेटा होने के बावजूद भी होगा मेरी खूबसूरती के पीछे पड़ा है और तो और मेरे साथ गलत संबंध बनाना चाहता है,,,, मुझे उसे ब्लाउज की डोरी खोलने ही नहीं देना चाहिए था,,लेकिन मैं कर भी क्या सकती थी वह तो एकाएक मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया और मैं कुछ बोल पाती इससे पहले ही ब्लाउज की डोरी को खोल भी दिया,,, थोड़ी देर में मुझे मेरी गांड पर जो कठोर चीज चुभती हुई महसूस हुई उससे तो मैं पागल होने लगी,,, मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि मेरी वजह से मेरे बेटे का लैंड खड़ा हो जाएगा और वह अपनी पूरी औकात नहीं था वरना मेरी गांड पर चुभता नहीं शायद वह जानबूझकर ही मेरी गांड पर अपने लंड का दबाव बना रहा था मुझे एहसास करवा रहा था,,,, और उसकी हिम्मत तो देखो मैं कुछ बोली नहीं तो खुद ही मेरे ब्लाउज को अपने हाथों से उतारकर मुझे नंगी करने लगा,,,, मुझे तो होश भी नहीं था क्योंकि मेरा पूरा वजूद ना जाने क्यों उसके ख्वाबों में हो चला था,,,,वह तो मुझे तब एहसास हुआ जब ब्लाउज मेरी आधी चुचियों से नीचे आ गई और मैं उसे रोकना चाहिए लेकिन अपनी हरकत से वह मुझे विवस कर दिया और देखते ही देखते अपने हाथों से मेरा ब्लाउज उतार कर ऊपर से मुझे नंगी कर दिया यह एहसास है एक मां के लिए बेहद अजीब और ना चाहते हुए भी बेहद उन्माद कारी होता है कि एक मा का ब्लाउज खुद बेटा ही अपने हाथों से उतारे इतने तक तो ठीक थामेरी हालत तब और ज्यादा खराब हो गई क्या हुआ अपने ही हाथों से मेरी चूची पकड़कर दबाना शुरू कर दिया उसकी हिम्मत की तो मैं दाद देना चाहूंगी,,,, कि बिना मेरा इरादा जाने वह नहीं चूचियों से खेल रहा था और वह भी पीछे से मुझे अपनी बाहों में लेकर,,,,हो सकता है कि उसे इस बात का एहसास हो गया हो कि मुझे यह सब कुछ अच्छा लग रहा है वरना वह इतना आगे नहीं बढता,,, वह जिस तरह सेअपने लंड का दबाव मेरी गांड पर बना रहा था मुझे तो डर था कि कहीं पेटीकोट सहित वह अपने लंड को मेरी गांड में ना डाल दे,,,। उसके लंड की ताकत को तो मै समझ गई थी कमजोर लंड के बस में बिल्कुल भी नहीं था इस तरह से गांड पर ठोकर मारना और वह भी पजामें होने के बावजूद भी,,,,,

(रोटी को तवे पर रखते हुए) इतने से भी कहां मानने वाला था ना मैं तो कभी सोची भी नहीं थी कि मेरा बेटा मेरे साथ इस तरह की हरकत करेगा हालांकि पहले भी वह मेरी बुर पर अपनी हथेली रख चुका था जोकि अनजाने में तो बिल्कुल भी नहीं हुआ था लेकिन जानबूझकर की गई हरकत को भी उस समय अनजाने में ही समझ लेना ठीक था लेकिन आज की हरकत तो जानबूझकर ही थी मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपनी हरकतों को आगे बढ़ाते हुए मेरी बुर पर अपनी हथेली रख लेगा,,,, मैं तो हैरान इस बात से हूं कि मैं उसे रोक क्यों नहीं पाई ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए था वह तो मेरी पेटीकोट भी उतारना चाहता था मेरी पेटीकोट की डोरी को खोलना चाहता था वह तो अच्छा हुआ इन मौके पर गुलाबी आ गई वरना मैं उसे उस हालत में बिल्कुल भी रोक नहीं पाती और अपनी गलती के कारण मां बेटे के रिश्ते को तार-तार करने में उसकी सहायता कर दी होती,,,,,।(मधु इन सब बातों को सोच कर एकदम हैरान थी उसे इस बात का अहसास अच्छी तरह से ताके उसे उसके बेटे को रोकना चाहिए था ना कि आगे बढ़ने में उसकी मदद करने देना चाहिए था,,, वह तो भोला है जवानी की दौड़ मैं है ऐसे में जवान लड़कों का मन इधर-उधर भटकता ही है,,, लेकिन उसे काबू में रखना चाहिए था अब ऐसी गलती कभी नहीं करेंगी,, अपने बेटे को इस तरह की हरकत करने से वह रोकेगी उसे समझाएंगी,,,।

अरे भाभी क्या सोच रही हो तुम्हारी तबीयत तो ठीक है,,,।

(गुलाबी की आवाज कानों में पढ़ते ही मधु की तंद्रा भंग हुई तो वह शक पकाते हुए गुलाबी की तरफ देखने लगी और हक लाते हुए बोली,,,,)

ककक,,, कुछ नहीं वो क्या है ना कि सफर के दौरान थकावट महसूस हो रही है इसलिए नींद आ रही है,,,

तो रहने दो मैं बना देती हूं,,,

नहीं नहीं बना लूंगी तू अपना काम कर,,,,

(इतना कहकर मत लो फिर से खाना बनाने में लग गई,,, दूसरी तरफ हरिया चाय पान की दुकान पर बैठकर,,, अपने अनसुलझे सवाल का जवाब ढूंढ रहा था,,, वह बीड़ी का कश खींचते हुए वहीं पर बैठे गांव के ही दो-तीन आवारा लोगों से बोला,,,)

यार तुम लोगों से एक बात कहूं किसी को कहोगे तो नहीं,,,

कैसी बातें करते हो यार हरिया तुम्हारी बात भला हम किसी से क्यों कहेंगे,,,

क्या बताऊं यार बात ही कुछ ऐसी है,,,

बताओ तो क्या बात है,,,,

यार एक बार में ब्याज के पैसे देने के लिए लाला की हवेली पर गया था,,

तो क्या हुआ,,,?(उनमें से एक बीड़ी का कष्ट लगाते हुए बोला)

अरे पहले सुन तो,,,, मैं उसकी हवेली पर गया और दरवाजे पर कोई नहीं था इसलिए सीधे अंदर चला गया दरवाजा भी खुला था और मैंने जो अपनी आंखों से देखा हूं आज भी एक एक दृश्य मुझे एकदम अच्छे से याद है,,,।

ऐसा क्या देख लिया था हरिया भाई जो एक एक दृश्य तुम्हें आज भी याद है,,,

नजारा ही कुछ ऐसा था यार कि बताता हूं तो भी तन बदन में अजीब सा होने लगता है,,,,

(हरिया की बातें बीड़ी पानवाला भी कान लगाकर सुन रहा था दिन भर उसका काम ही आई थी गांव भर की बातों की कानाफूसी सुनना,,)

अरे बताओगे भी या पहेलियां ही बुझते रहोगे,,,

बता रहा हूं,,,,(इधर उधर नजर दौड़ा कर देखने के बाद) लेकिन कोई किसी को बताना नहीं,,,

फिर वही यार कब से तो कह रहे हैं किसी को नहीं बताएंगे,,,

यार मैंने हवेली में देखा कि लाला एकदम नंगा पलंग के नीचे खड़ा था और एक खूबसूरत जवान औरत एकदम नंगी एकदम गोरी बदन क्या था एकदम मक्खन मलाई,,, वह घुटने के बल झुकी हुई थी पलंग के ऊपर और लाला उसके पीछे खड़ा होकर उसकी गोरी गोरी गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपना लंड उसकी बुर में पेल रहा था,,,।

(इतना सुनते ही उन लोगों की धोती में हलचल होने लगी)

क्या बात कर रहे हो हरिया,,,

मैं जो कुछ भी कह रहा हूं एकदम सच कह रहा हूं,,,

लेकिन वह औरत ही कौन,?(उनमें से एक उस औरत के बारे में जानने की गरज से बोला)

अरे वही तो नहीं मालूम यार,,,,

कैसी बातें कर रहे हो सब कुछ देखे हो यह नहीं देखे कि वह औरत कौन थी,,?

हां यार सच कह रहा हूं,,(बीड़ी का कस खींचते हुए) वह औरत पूरी तरह से नंगी थी और एकदम को और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अगल-बगल के 20 गांव तक मैंने आज तक ऐसी खूबसूरत और गोरी औरत नहीं देखा,,,,,,उसकी सूरत देखने की मैंने बहुत कोशिश किया लेकिन उसके घने बाल से पूरी तरह से उसका चेहरा ढका हुआ था कसम से वह नजारा जब भी याद करता हूं तो तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगती है,,,

लाला की बीवी होगी,,,(उनमें से एक बोला)

नहीं रे लाला की बीवी नहीं है,,,(उनका दूसरा साथी बोला)

मुझे जहां तक इतना मालूम है कि,,, हवेली में लाला के साथ उसकी बहन रहती है,,, कहीं लाला अपनी,,,बहन,,

धत् कैसी बातें कर रहा है,,,(हरिया उसे बीच में ही रोकते हुए बोला,,) कोई अपनी बहन को,,,, नहीं नहीं,,,,

तो तुम ही बताओ हरिया गांव में अगल-बगल के 20 गांव में कितने इस तरह की खूबसूरत औरत को नहीं देखा है और जिस तरह से तुम बता रहे हो हम लोगों ने भी नहीं देखा है और ऐसी खूबसूरती और गोरा बदन केवल लाला की बहन का ही है,,,(उनमें से एक समझाते हुए बोला)

नहीं नहीं फिर भी ऐसा नहीं हो सकता भाई बहन के बीच इस तरह का,,, नहीं बिल्कुल भी नहीं,,।

(हरिया भाई-बहन के बीच के सारे संबंध को मानने से इंकार कर रहा था,,, और भाई ऐसा जानबूझकर कर रहा था वह तो खुद ही अपनी बहन की चुदाई कर चुका था और उसे चोदता आ रहा था,,, उसकी बात सुनकर हरिया भी सोचने पर मजबूर हो गया कि क्या जैसा वह कह रहा है वैसा मुमकिन है फिर अपने मन में सोचने लगा कि अगर उसके और उसकी बहन के बीच इस तरह का रिश्ता बन सकता है तो लाला और उसकी बहन के बीच क्यों नहीं बन सकता आखिरकार दोनों अकेले ही तो है दोनों की अपनी अपनी जरूरतें हैं,,, यह सोचकर हरिया हैरान हो गया,,,,इसके आगे किसी ने कुछ भी नहीं कहा तो थोड़ी देर हरिया वहीं रुक आ रहा और उसके बाद अंधेरा होने पर वापस घर की ओर चल दिया वहीं दूसरी तरफ राजू पूरा गांव घूमते घूमते,,,, सोच करने के लिए खेतों की तरफ जाने लगा तो,,, उसने देखा कि आगे-आगे कमला चाची की बहू चली जा रही है,,, उसे देखते ही राजू के पजामे में हरकत होने लगी उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह भी कमला चाची की बहू के पीछे पीछे चल दिया,,,।
 
शाम ढल चुकी थी वातावरण में अंधेरा का प्रवाह बढ़ता जा रहा था चारों तरफ अंधेरा छा रहा था ऐसे में गांव की औरतें सोच करने के लिए नदी के किनारे जंगली झाड़ियों वाली जगह पर जाती थी,,,अनजाने में ही राजू की नजर कमला चाची की बहू पर पड़ गई थी जो कि सोच करने के लिए ही उसी दिशा में जा रही थी राजू अपने चारों तरफ नजर घुमा कर देखने के बाद,,, बड़ी तसल्ली के साथ कमला चाची की बहू के पीछे पीछे जाने लगा,,,,,, बड़े दिनों बाद वह कमला चाची की बहू की मुलाकात करने के लिए जा रहा था नवी नवेली दुल्हन की बुर चोद कर वह भी अपने आप को बड़ा भाग्यशाली समझता था,,,,,,कमला चाची के साथ-साथ कमला चाची की बहू की चुदाई कर लेने के बाद राजू पूरी तरह से उस परिवार में खुल चुका था हालांकि अभी तक राजू को इस बात का पता नहीं था कि कमला चाची की बहू,,, उसके और कमला चाची के बीच के संबंध के बारे में जानती हैं,,,।

राजू अपनी ही दोनों में कमला चाची की बहू के पीछे पीछे जाने लगा क्योंकि वह कमला चाची की बहू को मैदान में ही चोदने का इरादा बना चुका था और वैसे भी कमला चाची की बहू उसे इनकार करने वाली नहीं थी क्योंकि राजू ने उसे जो सुख दिया था वह सुख उसके पति ने अभी तक उसे नहीं दे पाया था,,,,,,, गांव से थोड़ा दूर निकलने के बाद चारों तरफ नजर घुमाकर देख लेने के बाद जब राजू को तसल्ली हो गई कि कोई भी देख नहीं रहा है तो वह चलते-चलते पीछे से आवाज लगाता हुआ बोला,,,।

कहां जा रही हो भाभी,,,

(पीछे से आई आवाज को सुनकर पहले तो कमला चाची की बात एकदम से चौंक गई लेकिन पीछे नजर घुमाकर देखने के बाद जब उसे तसल्ली हो गई कि उसे आवाज लगाने वाला और कोई नहीं राजू है तो उसकी जान में जान आई और उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,राजू के साथ चुड़वा लेने के बाद वह भी राजू के साथ थोड़ी बेशर्म बन चुकी थी इसलिए चलते हुए ही हाथ में लिया हुआ लोटा राजू को दिखाते हुए बोली,,,)

देख नहीं रही हो बबुआ कहां जा रही हूं,,,

देख तो रहा हूं भाभी,,,

तुम्हें भी साथ साथ चलना है क्या,,?

तभी तो तुम्हारे पीछे पीछे आया हूं,,,

ओहहह तो यह बात है मतलब काफी देर से मेरा पीछा कर रहे हो,,,,

हां इसी इंतजार में कि कब गांव वालों की नजरों से दूर तुम्हें अपनी बाहों में भरकर तुम्हें ढेर सारा प्यार करूं,,,(इतना कहते हुए राजू कमला चाची की बहू के एकदम बगल में आ गया और उसकी उभरी हुई गांड पर हाथ रख दिया अपनी गांड पर राजू का हाथ महसूस करते ही कमला चाची की बहु‌ उतेजना से सिहर उठी,,,)

ससहहहह आहबहह क्या करते हो बबुआ कोई देख लेगा तो,,,,

कोई नहीं देख रहा है भाभी तभी तो तुम्हारी गांड पर हाथ रखा हूं,,,, मेरे समाज के उंच नीच को अच्छी तरह से जानता हूं मुझे तुम्हारी इज्जत का उतना ही ख्याल है जितना कि तुम्हें,,,,,,

हां जानती हूं तुम्हें मेरी इज्जत का बहुत ख्याल है तभी मेरी इज्जत अपने हाथों से लूट चुके हो,,,

उसे लूटना थोड़ी कहते हैं भाभी,,,

तो किसे कहते हैं,,,

वह तो तुम अपनी मर्जी से अपनी बुर मुझे दे दी थी अगर वही तुम्हारी बुर में जबरदस्ती से लेता तो उसे लूटना कहते ,,।

(राजू के मुंह से बुरा शब्द सुनकर कमला चाची की बहू की दोनों टांगों के बीच चींटीया रंगने लगी,,,कमलेश आशिकी प्रभु अपने चारों तरफ नजर घुमा कर देख रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है क्योंकि इस तरह से अगर किसी की नजर उन दोनों पर पड़ गई तो गांव में बदनामी हो जाएगी इसलिए कमला चाची की बहू मन होने के बावजूद भी इस समय उस से पीछा छुड़ाने के उद्देश्य से बोली,,,)

चलो बबुआ कोई बात नहीं हम दोनों की मर्जी थी सो हो गया लेकिन यहां मेरा पीछा क्यों कर रहे हो कोई देख लेगा तो बदनामी हो जाएगी,,,,।(ऊंची नीची पगडंडी पर संभालकर पैर रखते हुए कमला चाची की बहु बोली ,,)

कोई नहीं देख रहा है भाभी तुम खामखा डरती हो मैं तो आज तुम्हें सोच करते हुए देखना चाहता हूं,,,।

हाय दैया यह कौन सा शौक तुने पाल लिया है,,,

क्या हुआ भाई इसमें कौन सी बुरी बात है,,,

अरे भला एक औरत को सोच करते हुए कोई देखता है क्या,,?

तब तो तुम एकदम बुद्धू हो भाभी,,, तुम पर कोई भी नहीं जानती हम जैसे जवान लड़के हम जैसे ही क्या बूढ़े लोग भी तुम औरतों को पेशाब करते हुए सोच करते हुए देखने के लिए तड़पते रहते हैं,,,।

चल रहने दे,,,

हां भाभी मैं सच कह रहा हूं तुम नहीं जानती हम लड़कों को तो सबसे ज्यादा मजा तुम औरतों को सोच करते हुए देखने में ही बहुत मजा आता है,,, सच कह रहा हूं भाभी जब तुम औरतें सोच करने के लिए अपनी साड़ी कमर तक उठाती हो तो कमर के नीचे तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड देखकर ही हम लोगों का लंड खड़ा हो जाता है,,,।

(राजू की बातें सुनकर कमला चाची की बहु उतेजीत हुई जा रही थी और अपने चारों तरफ देख भी ले रही थी,,,,)

क्या,,,? तुम लड़के इतने हरामि हो,,,

इसे हरामीपन थोड़ी कहते हैं भाभी,,,यह तो हम लोगों का तुम लोगों के प्रति आकर्षण दीवानगी है जो तुम्हारे नंगे बदन को देखने के लिए इस कदर तड़पते रहते हैं कि तुम्हें सोच करते हुए देखने के लिए दूर-दूर तक तुम्हारे पीछे-पीछे चले आते हैं,,।

(राजू की बातें सुनकर कमला चाची के पापा को बहुत मजा आने लगा था आज पहली बार वह औरतों का सोच करने के प्रति लड़कों के सोचने के रवैया को देख रही थी और समझ रही थी वरना उसे इस बात का अहसास तक नहीं था कि औरतो को सौच करते हुए देखने मैं कितना मजा आता है,,, कमला चाची की बहू के मन में है उत्सुकता भी था कि फिर उसके बाद वह लोग क्या करते हैं इसलिए वह बोली,,)

उसके बाद तुम लोग क्या करते हो,,,

भाभी कसम से उसके बाद तो पूछो मत अगर किसी का जुगाड़ होता है तो वह जाकर अपना खाना लेने उसकी बुर में डालकर अपनी सारी गर्मी निकाल देता है और अगर उसके पास से जुगाड़ नहीं है तो अपने हाथ से हिला हिला कर अपना पानी निकाल लेता है,,,।

बाप रे,,(उत्तेजना के मारे अपने सुखते हुए गले को थुक से गिरा करते हुए,,) तुम लड़के इतने ज्यादा गर्म हो जाते हो,,,

तो क्या भाभी पूछो मत तुमसे बात करते हो मैं तुम्हें सोच करते हुए सिर्फ कल्पना करके ही देखो मेरा लंड कितना खड़ा हो गया है,,,(कमला चाची की बहू का हाथ झट से पकड़ कर अपने पजामे के ऊपर से ही लंड पर रखते हुए,,) पकड़ो ठीक से,,,,।

(राजू की हरकत से कमला चाची पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी पजामे के ऊपर से ही राज्यों के खड़े लंड को महसूस करते ही कमरा चाची की बहू की बुर से मदन रस की बूंद टपक पड़ी और वह अपनी हथेली में पजामे के ऊपर से ही राजू के लंड को जोर से पकड़ कर तुरंत छोड़ दी,,,काफी दिन हो गए थे राजू के लंड को अपनी बुर में लिए हुए इसलिए उसका मन पूरी तरह से मचल उठा था चुदवाने के लिए,,,)

बाप रे राजू,,, तेरा तो एकदम खड़ा हो गया है बबुआ,,,

क्या करूं भाभी तुम्हारी जैसी जवान औरत इतने करीब खड़ी हो और वह भी सोच करने के लिए जा रही हो तो भला मेरे जैसी जवान लड़के का क्या हाल होगा,,,।



(राजू की बातें सुनकर कमला चाची की बहू मन ही मन मुस्कुरा रही थी और उत्तेजित भी हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वहां क्या करें अंधेरे का फायदा उठाने का उसका मन भी कर रहा था लेकिन किसी के देखे जाने का डर भी उसे सता रहा था,,राजू के खड़े लंड को अपनी हथेली में दबाकर वह अपनी बुर की प्यास को और ज्यादा बढ़ा दी थी,,,,कमला चाची की बहू उस स्थान पर पहुंच चुकी थी जहां पर रोज बार सोच किया करती थी चारों तरफ छोटी-छोटी जंगली झाड़िया थी जिसकी आड़ में बैठकर वह सोच करती थी और किसी के भी देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था,,,, वहां पर पहुंचकर कमला चाची की बहू हाथ में लोटा लिए खड़ी हो गई थी,,,, राजू कमला चाची की बहू की बुर का स्वाद ले चुका था फिर भी इस अवस्था में देखकर राजू का लंड अपनी औकात में आ चुका था अगर उसकी जगह कोई और लड़का होता तो शायद इस हालत में देखकर जबकि वह सिर्फ हाथ में लोटा लेकर खड़ी थी और इस अवस्था में देखकर कोई भी मर्द कल्पना करते हुए अपने हाथों से ही हीला कर पानी निकाल देता,,,,,।

कमला चाची की बहू जहां पर खड़ी थी वही 2 फुट की दूरी पर राजू ठीक उसके सामने खड़ा था उसके पैजामा में तंबू बना हुआ था जिसे कमला चाची की बहू अंधेरा होने के बावजूद भी बड़े आराम से देख पा रही थी क्योंकि आसमान में तारे छिटके हुए थे हो चांदनी रात थी,,,, कमला चाची की बहू की बुर पानी पानी हो रही थी वह अभी भी बार-बार अपने चारों तरफ देख ले रही थी उसे शर्म महसूस हो रही थी राजू के सामने वह कैसे बैठकर सोच करेगी इस बारे में सोच कर ही परेशान हो रही थी,,,।)





क्या हुआ भाभी बैठो ना,,,मैं आज तुम्हारा एक नया रूप देखना चाहता हूं मैंने आज तक किसी औरत को इस अवस्था में नहीं देखा,,,,

अभी अभी तो तू बोल रहा था कि हम औरतों को शौच करते हुए देखकर तुम्हें बहुत मजा आता है,,,

हां यह बात सच है भाभी लेकिन मैंने आज तक नहीं देखा हूं यह तो मेरा दोस्त बता रहा था,,,, इसीलिए तो एक नहीं अनुभव के लिए मैं तुम्हारे पास आया हूं,,,।

राजू पागल मत बन बबुआ ,,, तेरे सामने में कैसे,,,,

अरे कोई बात नहीं भाभी हो जाएगा तुम बैठो तो सही,,,।

(कमला चाची की बहू का भी मन कर रहा था लेकिन उसे शर्म महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी राजू की बात मानते हैं वह अपनी चारों तरफ नजर घुमाकर देखी नहीं कहीं कोई नजर नहीं आ रहा था इसलिए वह राजू से बोली,,)

देख राजू तु थोड़ा दूर बैठना,,, मेरे एकदम करीब मत आ जाना मुझे शर्म आ रही है,,,



क्या भाभी तुम भी मेरे से तो शर्म करने की तुम्हें कोई भी जरूरत नहीं है क्योंकि मैं तुम्हारी बुर में अपना लंड डालकर चोदा चुका हूं,,,।

(राजू एकदम बेशर्मी भरे शब्दों में बोला और उसके यही बेशर्मी भरे शब्दों को सुनकर कमला चाची की बहू शर्म से पानी-पानी हुई जा रही थी इसलिए बिना कुछ बोले अपनी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगी और चारों तरफ नजर घुमाकर देखने भी लगी,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था शाम के समय ही वह अपनी मां को चोदते चोदते रह गया था इसलिए उस पल की गर्मी अभी भी उसके बदन में बरकरार थी,,, राजू की नजर कमला चाची कि दोनों टांगों के बीच भी टिकी हुई थी वह सिर्फ साड़ी के उठने का इंतजार कर रहा था और कमला चाची की तो हो राजू की आंखों के सामने साड़ी उठाने में शर्म तो महसूस कर रही थी लेकिन आनंदित भी हुए जा रही थी क्योंकि पहले भी वह खुलकर राजू से चुदवा चुकी थी,,, कमला चाची की बहू घुटनों तक अपनी साड़ी को उठा चुकी थी और राजूकमला चाची की बहू की आंखों के सामने ही अपनी पहचानो को घुटनों तक खींच कर अपने लंड को पकड़ कर हिलाता हुआ नीचे बैठ गया था यह राजू ने जानबूझकर कमला चाची की बहू को खुलने के लिए किया था औरराजू की यह हरकत कमला चाची की बहू पर पूरा असर कर रही थी वह तुरंत अपनी साड़ी को कमर तक उठाती और राजू की आंखों के सामने चांदनी रात में उसकी हल्की-हल्की बालो से भरी हुई बुर नजर आने लगी,,, जिसे देखकर राजू गरम आहे भरने लगा,,, और कमला चाची की बहू झाड़ियों के पीछे राजू की आंखों के ठीक सामने बैठ गई,,,,।

आहहहह आहहह भाभी क्या मस्त नजारा है मैं तो कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह का नजारा देखने में इतना मजा आता होगा तभी मेरे दोस्त लोग पागल हुए रहते हैं,,,।

(राजू का इतना कहना था कि कमला चाची की बहू मुतने लगीऔर उसके गुलाबी छेद में से मधुर संगीत की धारा टूटने लगी जो कि राजू के कानों में पहुंचते ही राजू पूरी तरह से मस्त होने लगा,,,, कमला चाची की बहू की पेशाब की धारा की तारीफ करते हुए राजू बोला,,,)

वाह वाह भाभी,,, कमाल हो गया जैसा मैंने सोच रखा था उससे भी कहीं ज्यादा मदमस्त कर देने वाला यह नजारा है तुम्हारी बुर से कितनी मस्त मधुर आवाज आ रही है,,, मैं तो सुनकर ही पागल हुआ जा रहा हूं ,,, देखो मेरे लंड की हालत क्या हो रही है,,,(अपने हाथ को अपनी दोनों टांगों के बीच निकालकर अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला कमला चाची की बहू की नजर उसकी दोनों टांगों के बीच खड़े लंड पर गई तो वह एकदम से सिहर उठी,,, उसकी बुर फुदक रही थी,,और उसकी फुदकती हुई बुर से पेशाब की धारा फुट रही थी,,,,जो कि तकरीबन 1 मीटर तक की दूरी तक जा रही थी और जहां पर गिर रही थी वहां से पेशाब की बूंदे झटक कर राजू के पैरों के साथ-साथ उसकी कुछ बूंदें राजू के लंड पर भी कह रही थी जिसे से राजू का लंड और ज्यादा कड़क हुआ जा रहा था,,,, थोड़ी ही देर में शर्माते हुए कमला चाची की बहू सोच करने लगी राजू उसे देखता जा रहा था उसके मदमस्त काम हो तो रूप को देखकर पूरी तरह से मतवाला हुआ जा रहा था वह कमला चाची की बहू को चोदने के फिर हाथ में था वह इतना तो जानता ही था कि कमला चाची की बहू का मन भी इस समय वही कर रहा होगा जैसा कि उसका मन कर रहा है वरना वह इस तरह से उसकी आंखों के सामने बैठ कर सोच ना कर रही होती,,, कमला चाची की बहू शर्मा कर दूसरी तरफ नजर घुमा कर बैठी हुई थी,,,राजू अपनी चारों तरफ नजर घुमाकर अपनी जगह से खड़ा हुआ और धीरे-धीरे ठीक कमला चाची की बहू के सामने खड़ा हो गया और दोनों हाथों से उसका सर पकड़ कर अपने लंड के सुपाड़े को बिना हाथ से पकड़े उसकी गोरे गोरे गाल पर रगड़ने लगा,,,कमला चाची की बहू राजू की इस हरकत से एकदम से चौंक गई थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि राजू अपनी जगह से खड़ा होकर उसके करीब आ जाएगा और इस तरह की हरकत,,, करेगा,,, जिस दिन से राजू उसको चोदकर गया था उस दिन से उसकी बुर एकदम प्यासी थी बिना कोई प्रतिक्रिया दिए कमला चाची की बहुत तुरंत अपने लाल लाल होठों को खोल दी और राजू के अंडे को अपने मुंह में प्रवेश करा दी,,,, उत्तेजना के मारे राजू के मुंह से आह निकल गई,,, राजू पूरी तरह से मस्त हो गया कमला चाची की बहू झाड़ियों के पीछे थी इसलिए वह बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहे थे और राजू खड़ा होकर कमला चाची की बहू के मुंह में लंड पेल रहा था इसलिए उसके कमर के ऊपर वाला भाग झाड़ियों के पीछे होने के बावजूद भी नजर आ रहा था,,, लेकिन राजू पूरी तरह से निश्चिंत था,, क्योंकि वह जानता था कि यहां कोई आने वाला नहीं है,,,।



कमला चाची की बहू एकदम मस्त हुए जा रही थी राजू का लंड ईतना मोटा था कि उसका पूरा मुंह एकदम खुला का खुला था,,, जिसे कमला चाची की बहू अपना मुंह आगे पीछे करके उसे अंदर तक ले रही थी,,,,,, राजू पूरी तरह से मदहोश होकर अपनी कमर आगे पीछे करके उसके मुंह को ही चोद रहा था,,,।

ओहहहह भाभी,,,,आहहहहह कितना मस्त चुस्ती हो तुम मुझे एकदम मस्त करती हो भाभी आज मेरा लंड एकदम किस्मत वाला हो गया है कि तुम्हारे मुंह के अंदर है,,,आहहहहह ,,,,आहहहह भाभी ऐसे ही पूरा अंदर तक लो,,,आहहहहहहह,।

(कमला चाची की बहू अपने मुंह से कुछ बोल नहीं रही थी क्योंकि वह अपने मुंह में राजू के लंड को ली हुई थी लेकिन राजू की बातों का पूरा आनंद ले रही थी,,,कुछ देर तक राजू इसी तरह से अपने लंड को कमला चाची की बहू के मुंह में डालकर उसे लसा लसा करता रहा लेकिन अब समय आ गया था कमला चाची की बुर की गर्मी महसूस करने की इसलिए राजू अपने लंड को अमृताची की बहू के मुंह में से बाहर निकाल लिया,,, और उसकी आंखों के सामने ही अपने लंड को जोर-जोर से मुठीयाता हुआ बोला,,,।)

ओहहहह भाभी हम उसे बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा है मैं तुम्हारी बुर में डालना चाहता हूं भाभी,,, घोड़ी बन जाओ भाभी,,,

पागल मत बनो बबुआ कोई देख लेगा तो,,,

कोई नहीं देखेगा भाभी यहां कोई नहीं आने वाला,,,,।

(कमला चाची की बहू का भी मन बहुत तड़प रहा था राजू को अपनी बुर में लेने के लिए,,, इसलिए वह राजू की बात मानते हुए,,, बिना खड़ी हुए ही उसी तरह से घूम गई और तुरंत अपने घुटनों के बल होकर आगे की तरफ झुकते हुए अपनी कोहनी को नरम नरम मिट्टी पर रखते हुए बोली,,,)

देखना बाबू अगर कोई देख लेगा तो तेरी जिम्मेदारी होगी,,,

हां भाभी तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,(ठीक कमला चाची की बहू के पीछे घुटनों के बल बैठते हुए) बस अपनी गांड थोड़ा सा ऊपर उठा लो,,,(और इतना सुनते ही राजू की बात मानते हुए अपनी गोल-गोल गांड को थोड़ा सा ऊपर उठा ली,,)

बस भाभी बस अब देखना तुम्हें कितना मजा देता हूं,,,,

(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने लंड को कमला चाची की बहू की बुर जो कि पहले से ही एकदम गीली हो चुकी थी उसमें एक झटके में डाल दिया एक हल्की सी चीख कमला चाची की बहू के मुंह से निकली और फिर पूरा का पूरा लंड वह अपनी बुर की गहराई में ले ली एकदम से मस्त हो गई और राजू कमला चाची की बहू की गांड पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, राजू पहले धक्के से ही अपनी रफ्तार तेज कर दिया था क्योंकि वह काफी उत्तेजित हो चुका था,,, और कमला चाची की बहू हर धक्के के साथ मस्त हो जा रही थी,,,,,, वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक अनजान जवान लड़के से वह इस तरह से खुले मैदान में झाड़ियों के पीछे रात के समय चुदवाएगी,,,,, लेकिन इस तरह से छुप छुप कर चुदवाने में बहुत मजा आ रहा था इसलिए तो उसकी गरम सिसकारी उसके मुंह से निकल रही थी,,,, लेकिन उसकी गरमा गरम शिसकारी को उस खुले में सुनने वाला इस समय कोई नहीं था,,,,राजू कभी उसकी कमर पकड़ लेता तो कभी उसकी गांड दोनों हाथों से जगा देता तो कभी दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी खरबूजे को हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और इसी बीच में लगातार अपने धक्के लगाता ही जा रहा था ,,,राजू के साथ-साथ कमला चाची की बहू को भी अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था दोनों एकदम मस्त हुए जा रहे थे,,, राजू गहरी गहरी सांस लेता हुआ कमला चाची की बहु को चोद रहा था,,,।

वहीं दूसरी तरफ इस बात से पूरी तरह से अनजान करना चाहती उसी तरफ आ रही थी जहां पर झाड़ियों के पीछे उसकी बहू राजू से चुदवा रही थी कमला चाची पहले ही शौच करने के लिए आ जाती थी लेकिन आज बातों ही बातों में उन्हें देर हो गई थी वह उसी झाड़ियों की तरफ चली आ रही थी जो झाड़ियों के पीछे उसकी बहू एक जवान लड़के से अपना मुंह काला करवा रही थी जिसके साथ वह खुद अपने बदन की गर्मी उम्रदराज होने के बावजूद भी मिटा चुकी थी,,,, जैसे-जैसे कमला चाची और झाड़ियों के करीब आती जा रही थी वैसे वैसे उन्हें पायल और चूड़ियों की खनक ने की आवाज सुनाई दे रही थी और रह-रहकर हंसने की आवाज भी आ रही थी,,,अगर कोई और होता तो शायद भूत प्रेत के बारे में सोच कर वहां से भाग खड़ा होता है लेकिन कमला चाची उम्र दराज थी अनुभव से भरी हुई थी इसलिए वह धीरे-धीरे उस झाड़ियों के करीब आगे बढ़ रही थी,,,,,

कमला चाची के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि जिस तरह से वह झाड़ियों के बेहद करीब पहुंच चुकी थी झाड़ियों के पीछे से मर्दाना आवाज के साथ साथ औरत के हंसने और खीर खिलाने की आवाज भी आ रही थी और साथ ही गरमा गरम सिसकारी की आवाज भी आ रही थी एक उम्र दराज औरत होने के नाते कमला चाची इस तरह की आवाज को अच्छी तरह से पहचानते थे उन्हें समझते देर नहीं लगेगी झाड़ियों के पीछे चुदाई का खेल चल रहा है लेकिन यह कौन है यह जानने के लिए वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी,,,वह दोनों में से किसी की नजर कमला चाची पर ना पड़ जाए इसलिए वह अपनी जगह पर बैठ गई थी और धीरे-धीरे बैठे हुए ही आगे बढ़ रही थी,,,।

थोड़ी ही देर में कमला चाची साड़ी के एकदम पीछे पहुंच गई और अपनी नजर को पर की तरफ उठाकर देखने की कोशिश की तो उसे राजू नजर आ गया जिसे वह अंधेरे में भी पहचान ली उसे समझते देर नहीं लगी कि राजू किसी औरत के लिए रहा है लेकिन किसकी ले रहा है इस बारे में उसे बिल्कुल भी पता नहीं था राजू को इस तरह से चुदाई करता हुआ देखकर पहले तो कमला चाची की बुर में भी चींटीया रेंगने लगी,,,, वही राजू की बातें उसे और ज्यादा चुदवाती कर रही थी,,,।

ओहहह भाभी तुम्हारी बुर बहुत रसीली है पूरे गांव में ऐसी बुर किसी के पास नहीं है,,,,आहहहह बहुत गर्म है,,,

ओहहह बबुआ पूरे गांव की औरतों की चुदाई कर चुके हो क्या सब की बुर के बारे में जानते हो बबुआ,,,,आहहहहह,,,,

इस आवाज को सुनते हैं कमला चाची को झटका सा लगा क्योंकि यह आवाज कमला चाची की बहु से मिलती जुलती थी,,, कमला चाची अपने मन में सोचने के लगी,,,। यह तो मेरी बहू की आवाज है कहीं मेरी बाबू तो,,, नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता वह ऐसा नहीं कर सकती हो तो बहुत सीधी है,,, तभी जो बात उसके कानों में पड़ी उसे सुनते ही उसके होश उड़ गए,,,।

आहहहह आहहहहहह और जोर-जोर से चोद राजु आहहहह तेरा बहुत मोटा और लंबा है राजू मेरे पति का तो बहुत छोटा है और मुझे ठीक से चोद भी नहीं पाते जब से ब्याह करके आई हूं तब से प्यासी थी अच्छा मैं तो मिल गया कि मेरी जवानी की प्यास तुझसे बुझने लगी है,,, वरना मैं प्यासी ही रह जाती,,,

चिंता मत करो भाभी मैं हूं ना जिंदगी भर तुम्हारी बुर की प्यास बुझाता रहूंगा,,,,आहहहह आहहहह तुम्हारी गरम बुर,,,,

आहहहह आहहहहहह जल्दी-जल्दी कर राजु घर पर मा जी मेरा इंतजार कर रही होंगी काफी देर से मैं यहां आई हुं,,,,।

(कमला चाची के तो होश उड़ गए वह अपनी बहू की आवाज को पहचान गई थी,,, वह अपनी बहू को क्या समझ रही थी लेकिन क्या निकली अब उसका चेहरा देखने की भी जरूरत नहीं थी क्योंकि वहां पहचान गई थी अपनी बहू की आवाज को वह समझ गई थी कि राजू इन झाड़ियों के पीछे उसकी बहू की चुदाई कर रहा है,,,,, उसका मन तो कर रहा था कि उसी समय दोनों को रंगे हाथ पकड़ लेगा और राजू और अपनी बहू को दो-दो हाथ जमा दे लेकिन ऐसा करने से उसे कि इस बात का डर था कि कहीं राजू उसका राज भी उसकी बहू के आगे ना खोल दें इस डर से वह दबे पांव पीछे चली गई वह घर चली जाना चाहती थी लेकिन बिना सौच किए घर वापिस जाना मुमकिन नहीं था इसलिए वह दूसरी जगह पर झाड़ियों के पीछे जाकर बैठ गई,,, और कुछ देर बाद कमला चाची राजू और अपनी बहू को दोनों को गांव की तरफ जाते हुए देख रही थी,,,,वह अपने मन में ठान ली थी कि आज घर पर जाकर अपनी बहू की जमकर धुलाई करेगी,,,)
 
कमला चाची अपनी आंखों से अपनी बहन की कामलीला देखकर एकदम से आग बबूला हो गई थी,,,,कमला चाची अपनी बहू के बारे में करने की इस तरह की गंदी हरकत उसकी बहू करेगी कभी सोची नहीं थी लेकिन आज वह अपनी आंखों से अपनी बहू की कामलीला को देखकर क्रोधित हो गई थी और वह भी गांव के उसी लड़के के साथ जिसके साथ वह खुद संभोग सुख प्राप्त कर चुकी थी,,,राजू की जगह अगर कोई और लड़का होता तो शायद उसी समय दोनों को रंगे हाथ पकड़ कर दोनों के गाल लाल कर दी होती लेकिन राजू के साथ वह ऐसा नहीं कर सकती थी,,,।ऐसा करने पर राजू उसके साथ शारीरिक संबंध की बात भी बता देता और कमला चाची ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी लेकिन घर पर अपनी बहू को पाठ पढ़ाने का मन में ठान ली थी इसलिए थोड़ी ही दूरी पर जाकर सोच करने के लिए बैठ गई थी उसकी आंखों के सामने राजू और उसकी बहू दोनों घर की ओर जा रहे थे,,,कमला चाची को अपनी आंखों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी संस्कारी सीधी-सादी बहू इस कदर वासना की आग में अंधी हो जाएगी की अपने बदन की प्यास बुझाने के लिए सोच करने के बहाने अपने यार को खेत के खुले मैदान में बुलाकर चुदवाएगी,,,।कमला चाची रांची को सीधा साधा लड़का समझती थी वह यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि उसके जीवन में आने वाली पहली औरत सिर्फ वो ही थी जिसने उसे चोदना सिखाई थी लेकिन आज चोदना सीख कर उसके ही घर में डाका डाला था,,,, चुदाई के सब गुण सीख कर उसने उसकी ही बहू पर वही सारे गुण आजमाएं थे,,, कमला चाची अपने मन में वही दृश्य के बारे में सोच रही थी जब वह चोरी-छिपे उस दृश्य को देखी थी उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था राजु बड़े जोरों से धक्का लगा रहा था,,,इस बात को याद करके करना चाहिए अपने मन में यही सोच रही थी कि कहां से उसकी बहू की जगह कोई और औरत होती तो उसे आज कितनी ज्यादा संतुष्टि मिलती लेकिन अपनी बहू को राजू के साथ पाकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें घर की इज्जत इस तरह से बाहर मुंह मारती फिर रही है अगर गांव में किसी को इस बात की भनक भी लग गई थी उसकी इज्जत का क्या रह जाएगा,,,उसकी बहू को शक गंदी नजरों से देखेंगे और आए दिन उसके साथ गलत व्यवहार करेंगे और हो सकता है कि शायद उसकी बहू ही पूरे गांव में रंडी पन दिखाते फिरे,,,,इसलिए कमला चाची इस खेल को यहीं रोक देना चाहती थी इसलिए थोड़ी देर बाद घर पर पहुंची,,,।

घर का दरवाजा खोलकर अंदर जाकर हाथ मुंह धोने लगी सामने ही उसकी बहू खाना बना रही थी और अपनी सास को देखकर वहीं बैठे बैठे ही बोली,,,।

आज बहुत देर लगा दी मां जी,,,,कहां थी अब तक मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं,,,,(रोटियों को तवे पर रखते हुए बोली)

मैं भी तुझ से यही पूछना चाहती हूं कि तु इतनी देर से कहां थी,,(कमला चाची अपने गीले हाथ को अपनी ही साड़ी में पोछते हुए बोली,,)

अरे माजी में तो मैदान गई थी,,, वही देर हो गई,,,

(कमला चाची अपनी बहू के जवाब से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं थी वह जानती थी कि उसके सवाल का जवाब उसकी बहू इसी तरह से देखी इसलिए गुस्से में आकर कमला चाची बोली,,,)

मुझे कुछ भी छुपाने की जरूरत नहीं है मैं तेरी कामलीला को अपनी आंखों से देख चुकी हूं,,,।

(कामलीला शब्द सुनते ही कमला चाची की बहू के होश उड़ गए उसे आभास होने लगा कि कुछ गलत हुआ है फिर भी बात को बनाते हुए बोली)

ममम मैं कुछ समझी नहीं माजी तुम क्या कह रही हो,,,

इतनी भी भोली बनने की जरूरत नहीं है मैं अपनी आंखों से खेत में तुझे देख चुकी हूं कि कैसे अपनी साड़ी कमर तक उठाकर घोड़ी बनकर राजू से चुदवा रही थी,,,

(इस बार तो कमला चाची की बहू की हालत एकदम से खराब हो गई काटो तो खून नहीं वह ज्यों का त्यों एकदम से जम गई,,, उसकी चोरी पकड़ी गई थी अब वह क्या करें इस बारे में अपने मन में ही कोई उपाय ढूंढ रही थी लेकिन उसे कोई उपाय नजर नहीं आ रहा था फिर भी अपना बचाव करते हुए बोली,,)

यह क्या कह रही हो माजी,,, जो कुछ भी तुम कह रही हो मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है,,,

हरामजादी ,,,(इतना कहने के साथ ही गुस्से में कमला चाची आगे बढ़ी और अपनी बहू का बाल कसके अपनी मुट्ठी में पकड़ ली जिससे उसकी चीख निकल गई)मुझसे झूठ बोलती है,,, मैंने सब कुछ अपनी आंखों से देखी हूं तुझे बहुत जोर जोर से धक्के पसंद है ना,,,, हरामजादी मेरी इज्जत बनी बनाई इज्जत पानी में मिला रही है,,,

आहहह छोड़िए माजी है क्या कर रही है,,,आहहह,,, दुख रहा है,,,,

तुझे तो दर्द हो रहा है ना मेरा तो दिल टूट गया था जब तुझे अपनी आंखों से देखी थी,,,, हरामजादी,,,,

आहहह मां जी तुम किसी और को देखी होगी मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकती,,,।आहहह छोड़िए मुझे दर्द हो रहा है,,,

मैं भला तुझे नहीं पहचानती मैं तुम दोनों को अच्छी तरह से पहचान रही थी अजू का लंड जिसकी बुर में जा रहा था वह बुर तेरी ही थी और तू बड़े मजे ले ले कर उसे और जोर-जोर से पेलने के लिए बोल रही थी,,,।



आहहहहह मां जी छोड़ो,,,,(इतना कहने के साथ ही कमला चाची की बहू अपना बीच-बचाव करते हुए कसके अपनी सास का हाथ पकड़कर उसे झटक दी,,,, और कमला चाची की बहू समझ गई थी कि जब अपना बचाव करने के लिए कोई बहाना उसके पास नहीं बचा है वह रंगे हाथ पकड़ी गई थी बस उस समय उसकी सास ने कुछ भी नहीं किया था और वही कसर अब घर पर निकाल रही है इसलिए अपनी सास की बात मानते हुए कमला चाची की बहू गुस्से में बोली,,,)

हां हां मैं ही थी,,, में हीं राजू से चुदवा रही थी,,,तो तो इसमें गलत क्या कर रही थी,,,।

(अपनी बहू का जवाब सुनकर कमला चाची एकदम से सन रहेगा ही वह अपनी गलती को मान भी रही थी लेकिन एकदम अपनी छाती ठोक के किस लिए कमला चाची को गुस्सा आ गया और उसकी तरफ आगे बढ़ते हुए बोली,,,)

हरामजादी भोसड़ा चोदी एकदम छिनार हो गई है रुक अभी तुझे बताती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही जैसे पास में पड़ा डंडा हाथ में पकड़ कर अपनी बहू के पास जाने लगी वैसे ही कमला चाची की बहू एकदम गुस्से में आकर चिल्लाते हुए बोली)

बस माजी बस अगर एक कदम भी आगे बढ़ाई तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा अभी तक तुम मेरा सीधा-साधा रूप देख रही थी लेकिन अगर मैं अपने पर आ गई तो तुम्हें कहीं की नहीं छोडूंगी,,,,(अपनी बहू को गुस्से में देखकर कमला चाची एक पल के लिए घबरा गई और वहीं रुक गई और कमला चाची की बहू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

और तुम छिनार किसे कह रही हो पहले अपने अंदर झांक कर देखो कि तुम कितनी बड़ी छिनार हो,,,(अपनी बहू के मुंह से अपने लिए छिनार शब्द सुनकर कमला चाची कदम से सन्न रह गई उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी बहू इस तरह के शब्दों का प्रयोग उसके लिए करेंगी जिस तरह का प्रयोग वह उसके लिए कर रही थी,,, अपनी बहू की बातें सुनकर गुस्से में कमला चाची बोली)

क्या बोली हरामजादी मुझे छिनार कहती है गांव भर के लड़कों का ,,लंड अपनी बुर में लेकर चुदवा रही है,,,और मुझे छिनार कहती हैं,,,।

हां हां तुम छिनार हो,,,, अगर मैं हूं तो तुम भी हो और मुझसे भी बड़ी तो तुम हो,,, अगर आज बात खुल गई है तो मैं भी सारे राज खोल देना चाहती हूं,,,,

कैसा राज हरामजादी,,,(कमला चाची को अभी तक ऐसा ही लग रहा था कि उसके और राजू के बीच में जो कुछ भी चल रहा था वह किसी को भी पता नहीं है लेकिन वह यह बात से अंजान थी कि उसकी बहू खुद अपनी आंखों से उन दोनों की कामलीला को देख चुकी थी तभी तो उसका मन आगे बढ़ा था और वह भी अपनी सास की तरह ही राजू के साथ संभोग सुख ले रही थी,,,)

मैं सब कुछ जानती हूं ना जी तुम्हारे और राजु के बीच क्या चल रहा है,,,।

(इस बार अपनी बहू की बातें सुनकर कमला चाची एकदम से चौक गई,,,)



और यह मत समझना कि मैं तुम पर इल्जाम लगा रही हूं मैं जो भी कह रही हूं एकदम सच कह रही हूं और अभी अपनी आंखों देखी बात कह रही हूं मैं तुम्हें और राजू को तुम्हारे ही कमरे में देखी थी उस समय तुम दोनों बिना कपड़ों के एकदम नंगे थे और माजी तुम मुझे कह रही हो ना कि तुझे जोर जोर से धक्के पसंद है मुझसे भी ज्यादा मजा तो तुम ले रही थी राजू के साथ और वह भी एक दम नंगी होकर,,,,(अब कमला चाची के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं था वह एकदम से सनंन रह गई थी,,, वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,) मैं उस दिन जो कुछ भी अपनी आंखों से देखी मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी सांस एक जवान लड़की को अपने घर में बुलाकर इस तरह से चुदाई करवाएंगी और वह भी एक दम नंगी होकर,,उस दिन में तुम्हारा व रूप देखकर एकदम दंग रह गई थी मुझे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था लेकिन जिस तरह से तुम राज्यों से जोर जोर से धक्के लगाने के लिए बोल रही थी और राजू की पूरी तरह से मस्त होकर तुम्हें चोद रहा था उस दिन तुम दोनों की चुदाई देखकर ही मेरा मन आगे बढ़ने को कहा,,,,,। तुम्हें पता है मुझे राजु के पास जाने की जरूरत क्यों पड़ी तुम्हारे बेटे की वजह से माजी जरा सोचिए तुम बहू वाली होने के बावजूद भी एक उम्र दराज औरत होने के बावजूद भी अपने वतन की प्यास को दबा नहीं सकती और ऐसे में अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के साथ चुदवाकर अपनी प्यास बुझा रही हो तो सोचो मेरी तो अभी शुरुआत है मेरी नई-नई शादी हुई है तुम्हारे बेटे के साथ चुदाई क्या होती है यह तो मुझे पता ही नहीं था जो काम तुम्हारे बेटे को करना चाहिए था वही काम राजु कर रहा है,,, तुम्हें पता भी है तुम्हारे बेटे का लंड सिर्फ उंगली जितना ही है (अपने हाथ की उंगली दिखाते हुए)अगर अपनी आंखों से देख लोगी तो खुद ही शर्म से पानी पानी हो जाओगी,,,, मैं तो फिर भी इतने दिन तक सबर करके रही लेकिन तुम्हें देखने के बाद मुझे भी इच्छा होने लगी और मेरे भी सब्र का बांध टूट गया,,,

(अपनी बहू की बातों को सुनकर कमला चाची एक दिन टूट गई थी वह खटिया पर सर पर हाथ रख कर बैठ गई थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह शर्मिंदा होकर अपने ब हु की बातों को सुन रही थी,,)

क्रमशः
 
कमला चाची के पास अपने बचाव के लिए कोई शब्द नहीं थे और ना कोई बहाना क्योंकि जो कुछ भी इल्जाम कमला चाची की बहू उस पर लगा रही थी वह बेबुनियाद नहीं था वह उसका आंखों देखा सच था जिसकी वजह से वह डंके की चोट पर,, गांव की उसी लड़के के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी प्याज को बुझाने लगी थी जिस लड़के से उसकी सांस इस उम्र में भी चुदाई का सुख प्राप्त कर रही थी,,

कमला चाची को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि उसकी बहू ने आज उसके सामने ही उसके बेटे की हकीकत को भी अपने मुंह से उगल दी थी उसके बताए अनुसार उसके बेटे का लंड उंगली जितना था जिसमें बिल्कुल भी दम नहीं था,,,कमला चाची अपनी बहू की बात सुनकर यही सोच रही थी कि अगर उसके बताए अनुसार अगर यह बात सच है तो सच में उसके लिए डूब मरने जैसी बात होगी,, और वह अपने मन में सोचने लगी कि ऐसे हालात में तो वहां कभी भी दादी नहीं बन पाएगी,,,,,, कमला चाची से अपनी बहू की बातें सुनी नहीं जा रही थी और वही उसकी बहू एक-एक करके उसके कानों में जैसे बम फोड़ रही थी,,,।



मा जी वह तो मैं हूंकितने महीने हो गए फिर भी यहां पर टिकी हुई हो अगर मेरी जगह कोई और औरत होती तो वह कब का तुम्हारा घर छोड़कर हो तुम्हारे बेटे को छोड़कर चली गई होती,,,,मैं पहले कभी ऐसी नहीं थी और ना इस बारे में कभी सोचती थी जैसी भी थी तुम्हारी बेटी के साथ खुश थी भले ही वह मुझे किसी भी प्रकार की खुशी नहीं देता था लेकिन मेरे में बदलाव आया तो सिर्फ तुम्हारी वजह से अगर ना मैं अपनी आंखों से तुम्हारी कामलीला देखी होती और ना ही मेरे मन में भी एक आकांक्षा ने जन्म ली होती,,,,,,। मा जी तुम तो उम्र दराज हो दुनिया देखी हो,,,और इस उम्र में पहुंचने के बावजूद भी जब तुम्हें जवान लड़की का मोटा तगड़ा और लंबा लंबा लंड पसंद है तो सोचो मैं तो अभी पूरी तरह से जवान हूं मेरे तो खेलनेखाने के दिन है कब बोलो मैं कैसे तुम्हारे बेटे के छोटे से लंड से खुश होंऊगी,,, मुझे भी तो अरमान है मोटे तगड़े लंबे लंड का जैसा कि राजू के पास है,,,(आज कमला चाची की बहू एकदम बेशर्म होकर अपनी सास के सामने अपने मन की बात बता डाल रही थी और उसे सुनने में कमला चाची को जरा भी अतिशयोक्ति महसूस नहीं हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि जो कुछ भी वह कह रही है उसमें शत-प्रतिशत सच्चाई है,,, कमला चाची की बहू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) और जरा सोचो मां जी तुम राजू को राजू के साथ शारीरिक संबंध इसलिए बनाई थी कि उसका लैंड मोटा तगड़ा और लंबा है और वह मर्दानगी से भरा हुआ है और वही तुम्हें अच्छी तरह से शारीरिक सुख प्रदान करके तुम्हें तृप्त कर सकता है इसीलिए ना अगर उसके पास भी तुम्हारे बेटे जितना लंड होता और उसकी क्षमता ना के बराबर होती तो क्या तुम राजू के साथ इस तरह की कामलीला को अंजाम देती बिल्कुल भी नहीं देती तुम्हारा मन भी राजू के मोटे तगड़े लंड पर डोल गया था जैसा कि मेरा मुझे तो बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि उसका लंड कैसा है वह तो मैंने अपनी आंखों से तुम्हारी बुर में अंदर-बाहर होता हुआ देखी तब मुझे एहसास हुआ कि वाकई में उसके आगे तुम्हारा बेटा तो कुछ भी नहीं,,, है,,,।



अगर मैं राजू के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाऊंगी तो ध्यान रख लेना कि तुम कभी भी दादी नहीं बन पाओगी और ना मुझे कभी मां का सुख प्राप्त होगा और ना ही तुम्हारा बेटा बाप बन पाएगा पूरे गांव में थु थु हो जाएगी,,, दो तीन साल बीतने के बाद से ही तुम्हें एहसास होना शुरू हो जाएगा,,, जब गांव की औरतें तुमसे यह पूछेंगे कि तुम अभी तक दादी क्यों नहीं बन पाई तुम्हारी बहू के पांव भारी क्यों नहीं हो रहे हैं कहीं ऐसा तो नहीं तुम्हारे बेटे में कमी है,,, क्या उस समय तुम गांव की औरतों की यह बातें सुन पाओगी अपने बेटे की हो रही बदनामी को अपनी आंखों से देख पाओगी,,, बोलो मा जी बोलो,,,।

बस कर बहु बस कर,,,, मुझसे बिल्कुल भी सुना नहीं जा रहा है,,,(इतना कहकर कमला चाची रोने लगी,,, कमला चाची सुबह-सुबह कर रो रही थी उनकी बहू की कहीं हर एक बात उसके कानों में गूंज रही थी कमला चाची अपनी बहू की बातों पर विचार विमर्श कर रही थी अपने मन में ही वह सारी धारणाएं बना रही थीवह अपने मन में सोच भी रही थी कि उसकी बहू जो कुछ भी कह रही है वह बिल्कुल सच है,,, दो-तीन साल क्या 1 साल शादी के बाद से ही गांव की औरतें पूछना शुरू कर देंगी और ऐसे मेवा क्या जवाब देगी आखिरकार उसका भी तो मन है पोता पोती खिलाने का दादी बनने का,,,, कमला चाची अपने मन में यही सब सोच रही थी,,,,, अपनी बहू के बताए अनुसार कमला चाची अपनी बेटी के लंड के बारे में कल्पना करने लगे अगर वाकई में राजू के लंड के आगे उसके बेटे का लंड कुछ भी नहीं है तो वह कैसा होगा यह सोचकर ही वह हैरान हो गई,,, एक औरत होने के नाते औरत के मन की वास्तविकता को उसकी जरूरत को कमला चाची अच्छी तरह से समझती थी अगर वाकई में उसके बेटे का लंड उंगली के बराबर है तो वह किसी भी औरत को संतुष्ट करने के काबिल बिल्कुल भी नहीं है ऐसे आदमी के साथ औरत की जिंदगी नरक के समान हो जाती है इस बात का एहसास कमला चाची को अच्छी तरह से था,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि उसका बेटा उसकी बहू को बिल्कुल भी सुख और संतुष्टि प्रदान नहीं कर पाता होगा ऐसे में उसका बहक जाना लाजमी था,,,कमला चाची फिर अपने मन में यही सोचने लगी कि लेकिन जो कुछ भी हुआ उसकी जिम्मेदार वह खुद है वह अपनी प्यास बुझाने में इतनी मशहूर हो गई कि कमरे का दरवाजा या खिड़की बंद करना ही भूल गई वह यह भी भूल गई थी उसकी बहू किसी भी वक्त घर पर आ सकती है लेकिन राजू के मोटे तगड़े लंड से चोदने की प्यास के आगे वह सब कुछ भूल गए और उसकी बहू अपनी आंखों से सब कुछ देख ली,,, अगर वह अपनी आंखों से सब कुछ ना देखी होती तो शायद उसकी हिम्मत इतनी आगे ना बढ़ गई होती की वह शौच करने के बहाने राजू के साथ खुले खेत में चुदवाती ,,,,कमला चाची का पानी बनी में यही सब सोच भी रही थी और रो भी रही थी उसकी बहू खड़ी होकर अपनी सास को रोते हुए देख रही थी उसे अपनी सास पर दया रही थी वह भी जानती थी कि एक औरत होने के नाते उसकी भी कुछ जरूरते हैं,,,, वह धीरे से अपने सास के पास कहीं और उसके कदमों में बैठकर अपनी सास की दोनों टांगों को पकड़कर अपनी सास को समझाते हुए बोली,,,।



रहमत मा जी मैं जानती हूं जो कुछ भी होगा उसने तुम्हारी गलती बिल्कुल भी नहीं है एक औरत को जिस तरह से भूख लगती है खाने के लिए भोजन ग्रहण करने के लिए उसी तरह से एक औरत को धमकी भी भूख लगती है तन की भी प्यास लगती है जिसे मिटाने के लिए अपनी प्यास बुझाने के लिए उसे यह काम करना ही होता है,,,, घर में या घर के बाहर चोरी चुपके औरत के कदम डगमगा ही जाते हैं तुमने भी वही की इससे मुझे कोई एतराज नहीं है,,,, लेकिन तुम्हें भी मेरी जरूरतों के बारे में समझना चाहिए सोचो अगर तुम्हारा बेटा मुझे मां नहीं बना सका तो इसमें बदनामी किसकी है तुम्हारी और तुम्हारे बेटे की लेकिन अगर मैं राजू के साथ संबंध बना कर,,,पेट से हो गई और मां बनते ही तो इसमें तुम्हारा ही सर ऊंचा रहेगा और तुम्हारे बेटे की बदनामी भी नहीं होगी,,,और राजू के बारे में तो तुम अच्छी तरह से जानती हो भले ही औरतों के मामले में उसका नाड़ा ढीला है लेकिन वह‌ यह बात किसी को कहेगा नहीं,,,, जिससे हम दोनों का ही फायदा है,,,(कमला चाची की बहू चालाकी दिखाते हुए अपनी सास को आगे भी राजू के साथ संबंध बनाते हुए चुदाई का सुख प्राप्त करने का रास्ता खोज रहे थे और उसे ऐसा लग भी रहा था कि उसे शायद उसकी मंजिल मिल गई है,, उसकी सास की तरफ से उसे मायूस नहीं होना पड़ेगा वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि वह जानती थी कि उसकी सास भी राजू से चुदवाए बिना नहीं रह सकती ऐसे में सास बहू दोनों का काम होना लाजमी था,,,, अपने आंसुओं को पोछते हुए अपनी बहू की बात सुनकर कमला चाची बोली,,,)

क्या उसने तुम्हें बताया कि वह मेरे साथ भी संबंध बनाता है,,,



नहीं मा जी बिल्कुल भी नहीं उसनेतुम्हारे बारे में मुझसे कोई जिक्र भी नहीं किया है इसीलिए तो मैं कहती हूं कि उसके साथ यह रिश्ता कायम करने में हम दोनों का फायदा है और सुरक्षित भी है,,,।

फिर तेरे साथ राजू कैसे चालू हो गया,,,

माजी अब तुमसे क्या छुपाना अब हम दोनों एक दूसरे के राजदार बन चुके हैं इसलिए मैं तुमसे कुछ भी नहीं छुपाऊगी,, जब मैंने तुम्हें और राजू को तुम्हारा ही कमरे में देखी थी,,, तो तुम दोनों को पूरी तरह से नग्न अवस्था में देखकर पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया था लेकिन जिस तरह से तुम मजा ले रही थी तुम्हारे मुंह से आग्रह ऊहहहह की आवाज आ रही थी यह सब सुनकर मेरी हालत खराब होने लगी,,,मैं तुम दोनों को रंगे हाथ पकड़ लेना चाहती थी लेकिन राजू जिस तरह से धक्का लगा रहा था उसे देखकर तो मेरे होश उड़ गए उसी समय में अपने मन में ठान ली थी कि राजू के साथ संबंध बनाकर रहूंगी और इसके लिए मैंने,,,, धमकी देने का मन बना ली थी,,,

कैसी धमकी,,,

यही कि मैंने तुम दोनों को चुदाई करते हुए देख ली हूं और यह बात मैं उसकी मां से बता दूंगी,,,

फिर,,



फिर क्या मुझे ऐसा करने की जरूरत ही नहीं पड़ी वह तो खुद मेरी जवानी पर एकदम फिसल गया और मेरे साथ खुद ही आगे चलकर वह संबंध बना लिया,,,

खेत में तुम लेकर गई थी उसे,,,

नहीं मा जी मैं तो खेत में शौच करने के लिए जा रही थी वही मेरे पीछे पीछे आ गया और झाड़ियों के पीछे मेरे साथ चुदाई करने लगा,,,,।

देख सब कुछ तो ठीक है लेकिन इस बारे में गांव वालों को भनक नहीं लगनी चाहिए वरना हम लोगों की बदनामी हो जाएगी,,,,।

तुम बिल्कुल की चिंता मत करो मां जी मुझे अपनी इज्जत और परिवार की इज्जत का बहुत अच्छे से ख्याल है किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगेगी और हां तुम्हारे लिए मेरी तरफ से बिल्कुल छुट है मैं जानती हूं तुम्हें तेज धक्के पसंद है,,,(इतना कहकर कमला चाची की बहू हंसने लगी और कमला चाची भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए उसे इस बात की खुशी थी कि अच्छा हुआ कि यह राज उसकी बहू के सामने खुल गया और दोनों एक दूसरे के राजदार हो गए अब वह राजू के साथ जब चाहे तब संबंध बना सकती थी,,,)



दूसरी तरफ मधु के दिलों दिमाग पर उसका बेटा छाया हुआ था,,, उसकी कामुक हरकत की वजह से जिस तरह से वह पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उस पल को याद करके उसकी बुर से कभी भी पानी निकल जा रहा था,,,,इसमें मौजों की गलती बिल्कुल भी नहीं थी वह पल ही कुछ ऐसा था कि मधु पूरी तरह से अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं थी और वह अपने बेटे की आगोश में खोती चली जा रही थी,,,अगर ऐन मौके पर उसे होश ना आया होता तो शायद उसके बेटे का लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता और वह तब अपने बेटे को नहीं रोक पाती क्योंकि अपनी गदराई गांड पर वह अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस करके इतना तो समझ ही गई थी कि उसके बेटे का लंड,,,कुछ ज्यादा ही मोटा तगड़ा और लंबा है उसने अभी तक अपनी आंखों से देखी नहीं थी लेकिन उसका एहसास उसे अंदर तक झकझोर कर रख दिया था,,,, लेकिन एक मां होने के नाते उसे अपने बेटे की हरकत बिल्कुल भी पसंद नहीं थी अगर एक औरत होने के नाते वह अपने बेटे की हरकत के बारे में सोचती तो वह अपने बेटे की हरकत का पूरा आनंद लेते हुए उसे आगे बढ़ने की इजाजत दे देती लेकिन वह एक माथे और अपने बेटे को अपने ही साथ इस तरह के अनैतिक रिश्ते में आगे बढ़ने नहीं देना चाहती थी वह किसी भी तरह से अपने बेटे को समझाना चाहती थी,, पवित्र रिश्ता के बीच मर्यादा की डोरी को टूटने नहीं देना चाहती थी दोनों के बीच संस्कार की जो पतली परत थी उसमें छेद नहीं होने देना चाहती थीइसलिए अपना मन बना ली थी कि किसी भी तरह से अपने बेटे को समझ आएगी और इस तरह के पाप ना करने देने से उसे बचाएगी,,,, लेकिन घर पर अपने बेटे को इस बारे में समझाना मुमकिन नहीं था इसलिए वह उसे खेत में काम करने के बहाने ले जाना चाहती थी जहां पर वह उसके और उसके बेटे के बीच किस प्रकार का रिश्ता है उस बारे में भली-भांति समझाना चाहती थी,,,,।

इसलिए दूसरे दिन खेतों पर काम करने का बहाना देकर मधु राजू को अपने साथ खेतों पर ले गई,,,रास्ते भर दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी मधु अपने मन में यही सोच रही थी कि कैसे वह बात की शुरुआत करें आखिरकार वह एक औरत थी और वह अपने ही बेटे से एक औरत और मर्द के बीच के संबंध के बारे में कैसे बात कर सकती थी,,, लेकिन शुरुआत तो उसे करनी ही थी ,,, यही सब सोचते हुए मधु ऊंची नीची पगडंडियों से अपने खूबसूरत नाजुक पैरों को इधर-उधर रखकर आगे बढ़ती चली जा रही थी और उसके इस तरह से चलने से उसकी बड़ी-बड़ी गदराईगांड में जिस तरह की थकान हो रही थी उसे देखकर राजू के मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,, अपनी मां की मटकती हुई गांड देखकर राजू के होश उड़ रहे थेएक तो मधु की आदत ही थी कि वह साड़ी को अपनी कमर से कसकर बांध दी थी जिसकी वजह से कसी हुई साड़ी में उसकी बड़ी बड़ी गांड तरबूज की तरह बाहर निकल कर हाहाकार मचाती थी,,,राजू का मन तो कर रहा था कि वह आगे बढ़कर अपनी मां की गांड को दोनों हाथों से थाम ले और साड़ी ऊपर कर के अपना मुंह उसकी गांड की दरार में घुसा दे,,, उसे यकीन था कि उसकी मां उसे ऐसा करने से बिल्कुल भी नहीं रुकेगी क्योंकि शाम के वक्त दोनों के बीच जिस तरह का कामुकता भरा छेड़छाड़ हुआ था उसे देखते हुए राजू कीमत बढ़ने लगी थी उसे यकीन हो चला था कि उसकी मां उसे आगे बढ़ने से बिल्कुल भी नहीं रुकेगी क्योंकि वह जानता था कि अगर उसकी बुआ ना आई होती तो उसकी मां उसके लंड को अपनी बुर में लेने से इनकार नहीं करती और वहां अपनी मंजिल प्राप्त करके कामयाब हो जाता,,, लेकिन आज अपनी मंशा पूरी करने का इरादा बना चुका था,,,,आदमी की हिम्मत तब और ज्यादा बढ़ जाती है जब सामने वाला किसी भी प्रकार का प्रतिकार नहीं करता है और इस समय राजू के साथ भी यही हो रहा था,,, अपनी मां की खामोशी उसकी कर्म सांसो को उसकी तरफ से उसका निमंत्रण समझ कर आगे बढ़ना चाहता था इसलिए तो इस समय अपनी मां की मटकती भी गांड देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,, था पजामे में उसका लंड गदर मचाने को तैयार था,,,,। इस बात से बिल्कुल भी बेखबर मधु अपनी धुन में अपने बेटे को समझाने के लिए अपने मन में बहाना सोच रही थी,,,उसे इस बात का आभास बिल्कुल भी नहीं था कि उसका बेटा जो उसके ठीक पीछे चल रहा है उसकी गांड को देखकर उत्तेजित हो रहा है,,,,

अनजाने में ही चलते हुए उसकी नजर पीछे की तरफ गई तो अपने बेटे की नजरों को भांप कर उसकी दोनों टांगों के बीच सिहरन सी दौड़ गई,,,, वह अपने मन में सोचने लगी बाप रे इसे किस तरह से समझाऊंं,, और देखते ही देखते दोनों अपने खेतों में पहुंच गए,,,।
 
Back
Top