Incest बरसात की रात,,,(Completed) - Page 19 - SexBaba
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Incest बरसात की रात,,,(Completed)

आखिरकार हलवाई की बीवी रघु के संभोग गाथा की पहली नायिका जो थी,, जिसने सर्वप्रथम उसे एक औरत के खूबसूरत जिस्म के हर कोने से उसके हर एक अंग से वाकिफ कराई थी,,, संभोग की परिभाषा को रघु के साथ मिलकर सार्थक करके दिखाई थी,,, रघु ने जिंदगी में पहली बारहलवाई की बीवी के साथ संभोग की शुरुआत करके उसके एहसास से पूर्ण रूप से अवगत हुआ था,,, इसीलिए वह हलवाई की बीवी के एहसान को जिंदगी में कभी भी भुला नहीं सकता था,,,,

हलवाई की बीवी की नजर जैसे ही रघू पर पड़ी उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और साथ ही तन बदन में उन मादकता बढ़ने लगी,,,, हलवाई की बीवी रघु से चुदवाने के बाद अभी तक उस तरह की तृप्ति का एहसास नहीं महसूस कर पाई थी इसलिए रघु की याद उसे बहुत सताती थी,,, इसलिए तो आज रघू को इतने दिनों बाद देख कर वो खुशी से फूली नहीं समा रही थी,,,, और एकदम से खुश होते हुए बोली,,,।

आज बड़े दिनों बाद याद आई रे तुझे यहां की,,,(कढ़ाई में समोसे तलते हुए बोली,,,)

ऐसी बात नहीं है चाची,,, याद तो तुम्हारी रोज ही आती थी,,,(हलवाई की बीवी की खुली हुई दोनों टांगों के बीच झांकते हुए बोला,,,हलवाई की बीवी रघु की नजरों को अच्छी तरह से भांप गई थी और इसीलिए मुस्कुराते हुए बोली,,,)

मुझे तो बिल्कुल भी नहीं लगता कि तुझे मेरी याद आती होगी,,,

सच कह रहा हूं चाची,, वैसे भी तुम भूलने वाली चीज बिल्कुल भी नहीं हो,,, हां इस बात के लिए माफी मांगता हूं कि इधर आ नहीं सका और शादी में तुम्हारे वहां आने के बावजूद भी मैं तुमसे मिल नहीं पाया क्योंकि काम ही बहुत ज्यादा था तुम तो अच्छी तरह से जानती हो कि बहन की शादी थी कितना दौड धुप करना पड़ता है,,,

हां बात तो सही है,,,, लेकिन फिर भी तुझसे मैं नाराज हूं,,,

किसलिए,,,,,?

मेरे साथ साथ तु ,( अपने चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली कर लेने के बाद हलवाई की बीपी चूल्हे के अगल-बगल अपनी दोनों टांगों को फैलाए हुए थी और उसे रघु की तरफ करके दोनों टांगों को खोलकर बड़े अच्छे से,, अपनी बुर के दर्शन कराते हुए) इसे भी भुल गया,,,

(रघु तो हलवाई की बीवी की मादक अदा और उसकी बालों से भरी हुई बुर को देखकर एकदम से मदहोश हो गया,,, उसे पुराने दिन याद आ गए जब वह पहली बार नजर भर कर हलवाई की बीवी की बुर को देखा था हाथ में लालटेन दिए हुए उसे पेशाब कराते हुए देखा था,,, सब कुछ किसी फिल्म की तरह उसकी आंखों के सामने चलने लगा मोटी होने के बावजूद भी हलवाई की बीवी की मादकता और आकर्षण बरकरार थी,,, खड़े-खड़े किसी का भी पानी निकालने के लिए उसकी जवानी सक्षम थी,,,, रघु आंखें फाड़े उसकी खुली दोनों टांगों के बीच उसकी साड़ी के अंदर झांक रहा था,,,रघु की हालत को देखकर हलवाई की बीवी मंद मंद मुस्कुराने लगी और वापस से अपनी टांग दूसरी तरफ करते हुए बोली,,,।)

क्यों सच कह रही हूं ना,,,

नहीं चाची ऐसी बिल्कुल भी कोई बात नहीं है,,,, समय नहीं मिल पा रहा था खेती का काम ऊपर से शादी ब्याह उसी में ही उलझ कर रह गया,,,

तो आज कैसे फुर्सत मिल गई,,,,

अब तो बस फुर्सत ही फुर्सत है,,,,,,,, मैं समोसे और जलेबी लेने आया था,,,

चल अच्छा हुआ इसी बहाने तुझे मेरी याद तो आई,,, समोसे जलेबी नहीं खाने का होता तो याद भी नहीं आती,,, तू बिल्कुल बुद्धू तुझे दुनिया की सबसे बेशकीमती रसमलाई खिलाती हूं फिर भी तुम समोसे और जलेबी पर जान दिए हुए हैं,,,,

चाची तुम्हारी रसमलाई उसका स्वाद अभी तक मेरी जुबान पर है,,,,(रघु गहरी सांस लेते हुए बोला,,,)

चखेगा फिर से रसमलाई,,,,,

चाची नेकी और पूछ पूछ,,,,, बिल्कुल चखुंगा,,,,,(रघु एकदम से मदहोश होता हुआ बोला,,, उसकी बात सुनकर हलवाई की बीवी मुस्कुराने लगी और उसकी बुर में खुजली बढ़ने लगी,,, वह जल्द से जल्द पुराने दिनों की तरह आज भी रघु के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प उठी,,, और रघु कढ़ाई में समोसे गलती हुई हलवाई की बीवी को बड़े गौर से देख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां छोटी सी ब्लाउज में ठीक से समा नहीं पा रही थी,,,, जो कि कढ़ाई मैं समोसे को चलते हुए पानी भरे गुब्बारे की तरह मिल रही थी जिसे देख कर रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, बहुत खूबसूरत गदराए और हुस्न की मलिका उसकी झोली में थी फिर भी वह अभी भी दूसरी औरतों को देखकर लाल टपकारा था यही हर मर्दों की फितरत होती है मौका मिलने पर वह मौका कभी नहीं छोड़ते भले ही उनके बिस्तर में दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत क्यो ना हो,,, और रघु की भी यही इच्छा हो रही थी,,, हालांकि वह हलवाई की बीवी की जमकर चुदाई कर चुका था आज कई दिनों बाद उससे मुलाकात होते ही और उसकी मादक अदाओं को देखकर,,, रघु का लंड हलवाई की बीवी को देखकर खड़ा होने लगा था,,,,,,, हलवाई की बीवी अपने मन में रघु से चुदवाने का योजना बना रही थी,,,, इसलिए थोड़ा समय बीत जाने का इंतजार कर रही थी और वह इसी योजना के तहत रघु से बोली,,,,।)

रघु तेरे चाचा जी पास वाले गांव नहीं गए हैं इसलिए थोड़ी मेरी मदद कर दे,,,,।

बोलो चाची तुम्हारी मदद करने के लिए तो मैं हमेशा तैयार हूं,,, करना क्या है बोलो,,,,,।

(हलवाई की बीवी की टांग खोलकर बुर दिखाने वाली अदा को देखकर रघु का लंड पजामे में खड़ा हो चुका था,,, और उसकी पजामे को देखकर हलवाई की बीवी मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, और मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

जा जरा पीछे जाकर लकड़िया ला दे तो चूल्हा बुझने वाला है,,,।

ठीक है चाची में अभी जाकर लेकर आता हूं,,,,,,

(इतना कहकर रघु पीछे की तरफ चल दिया जहां पर ढेर सारी सुखी कोई लकड़िया रखी रहती है हलवाई की बीवी उसे जाते हुए देखती रही उसे साफ महसूस हो रहा था कि रघु से बात करके पुराने दिनों को याद करके उसकी बुर पसीजने लगी थी,,,,,, वह खुश होकर पूड़ी बेलने लगी ताकि और समोसे तैयार कर सके दूसरी तरफ रघू घर के पीछे की तरफ जैसे ही पहुंचा तो हेड पंप के पास का दृश्य देखकर उसकी आंखें चौड़ी हो गई,,,, वहां पर रघु की तरफ पीठ किए हुए एक लड़की बैठी हुई थी और यह लड़की वही लड़की थी जिसे रघू पहली बार इसी जगह पर मिला था और वह बर्तन साफ कर रही थी,,, काफी दिन बीत चुके थे इसलिए उसका नाम तक याद नहीं था लेकिन उसकी गोरी गोरी गांड देखकर उसके होश उड़ गए थे,,,, लड़की हेड पंप के पास बैठकर पेशाब कर रही थी,,, रघु एकदम से स्थिर खडा हो गया,,,,,,, गांव के किनारे हलवाई की दुकान होने की वजह से यहां पर हमेशा शांति रहती थी और इसीलिए ही,,, उसकी बुर से निकल रही सीटी की आवाज सीधे रघु के कानों में मिश्री की तरह घुल रही थी,,,,,, रघू तो उसे देखता ही रह गया,,,,, रघु को सिर्फ उसकी नंगी गांड ही नजर आ रही थी,,,, यह दृश्य रघु को पूरी तरह से मदहोश कर देने के लिए काफी था,,,, फिर पंप के अगल बगल जामफल के पेड़ लगे हुए थे जिससे वहां पूरी तरह से छाया थी,,,, अपने आप ही रघू का हाथ पजामे के ऊपर से लंड को दबाने लगा,,,,,,,, गोलाकार जवान गांड रघु के होश उड़ा रही थी,,,,,, पल भर में ही रघू उस लड़की की गांड से हलवाई की बीवी की गांड की तुलना करने लगा,,,, रघु समझ गया था कि यह हलवाई की लड़की है,,,,अपने मन में ही सोच रहा था कि एक तरफ मां की बड़ी-बड़ी मदमस्त कर देने वाली गांड दूसरी तरफ बेटी की 4 बोतलों के नशा से भरपूर जवान गांड,,, दोनों अपने आप में बेमिसाल है एक दूसरे से तुलना करना उन दोनों की खूबसूरती और उनके खूबसूरत अंगों की तोहीन करने के बराबर थी,,,। रघु अपने मन में ही सोचने लगा कि दोनों मां बेटी की गांड अपने आप में लाजवाब थी,,, रघु अपने मन में यही सोच रहा था कि तभी वहां लड़की पेशाब करके तुरंत खड़ी हुई और अपनी सलवार को कमर तक खींच कर सलवार की डोरी बांधने के लिए रघु की तरफ घूमी तो रघू को अपनी आंखों के सामने देखती हो पूरी तरह से चौक गई,,,उसके पीछे कोई लड़का खड़ा होगा इस बात का उसे अंदाजा भी नहीं था इसलिए पूरी तरह से खबर आ चुकी थी और तुरंत रघु की तरफ पीठ करके खड़ी हो गई और अपनी सलवार की डोरी बांधने लगी और अपनी सलवार की डोरी बांधते बांधते बोली,,,।
 
वह लड़की एकदम से हतप्रभ हो गई थी ,,, हैरान थी अपनी आंखों के सामने उसी लड़के को देखकर,,,,,, जो कुछ महीने पहले इसी तरह से उसे नहाते हुए देख रहा था उस दिन की बात याद आते ही और अभी जिस अवस्था में वह उसे देख रहा था इसको लेकर,,, उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया,,,।

तुम्हें कुछ समझ में आता है कि नहीं,,,(सलवार की डोरी को बांधकर कुर्ती को नीचे करते हुए,,,)

मैंने क्या किया,,,?

तुम सच में दुस्ट हो,,, चोरी-छिपे देख भी रहे हो और कहते हो कि मैंने क्या किया,,,?(दोनों हाथ को कमर पर रखते हुए गुस्से में बोली,,,)

पर मैंने देखा क्या कुछ भी तो नहीं देखा,,,,(रघु मासूम बनता हुआ बोला)

मैं सब जानती हूं कि क्या देखे हो,,,, तुम्हें शर्म नहीं आती यह सब करते हुए,,,,

पर क्या करते हुए बताओ गी,,,,

अब मैं तुम्हें कैसे समझाऊं तुम्हारे जैसा चलाकर दुष्ट इंसान मैंने आज तक नहीं देखी,,,,

देखो तुम क्या कह रही हो यह तो मैं बिल्कुल भी नहीं जानता लेकिन मुझे भला-बुरा बिल्कुल भी मत कहो मैंने कुछ किया नहीं हूं,,,,

(रघु की बात सुनते ही वह और ज्यादा गुस्से में आ गई क्योंकि वह जानती थी कि उसने उसे क्या करते हुए देखा है और फिर भी बड़े आसानी से पलट जा रहा है)

एक बार नहीं हजार बार कहुंगी,,,, और तुम यहां आते क्यों हो समोसे जलेबी खाना है तो आगे से चला जाया करो,,, मैं अभी जाकर मां को बताती हूं,,,,(इतना कहते हुए वक्त गुस्से में आकर उसके पास से गुजरने के बाद ही थी कि वह उसकी बांह पकड़कर उसे रोकते हुए बोला)

क्या कहोगी जाकर,,,,?

यही कि तुम पीछे क्यों आते हो और अभी अभी तुमने मुझे किस हालात में देखे हो,,,,

पीछे क्यों आते हो तो मैं तुम्हें बता दूं कि,,, मैं अपनी मर्जी से पीछे नहीं आया,,, तुम्हारी मां ने मुझे सूखी हुई लकड़िया लाने के लिए यहां भेजी है और मेरी किस्मत देखो इतनी तेज की तुम्हें मुतते हुए देख लिया,,,(रघु मुतने वाली बातइतना सहज होकर और बेशर्मी भरी हंसी लेकर बोला था कि वह और ज्यादा क्रोधित हो गई और वैसे भी उसके मुंह से अपने लिए मुतने वाला शब्द सुनकर वह एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई,,,उसी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह इस तरह के शब्दों का प्रयोग करेगा और वह भी उसके सामने,,, एकदम से आग बबूला होते हुए बोली,,)

कितनी बेशरम हो तुम इतनी बिल्कुल भी शर्म नहीं आती है कि लड़की से किस तरह से बात किया जाता है,,,,

मुझे अच्छी तरह से मालूम है क्योंकि लड़की से औरत से किस तरह से बात किया जाता है लेकिन मैं तो सिर्फ सच्चाई बता रहा था कि यहां पर आने पर मैंने क्या देखा और अगर तुम्हारी मां पूछेगी तो उन्हें भी मैं यही कहूंगा कि मैं यहां आकर क्या देखा और वैसे भी मैंने कोई गलती नहीं किया मेरी आंखों के सामने ठीक सामने तुम्हारी नंगी गांड थी जब तुम सलवार नीचे करके मुत रही थी,,,,,,,(रखो उस लड़की से बातें करते रहो बार-बार उसकी छातियों की तरफ देख रहा था जोकि कुर्ती में से उसके अमरुद बाहर को झांक रहे थे,,, और उसकी नजरों को हलवाई की लड़की अच्छी तरह से समझ रही थी,,,, रघू की नजरों की वजह से और उसकी बातों की वजह से उसे शर्म आ रही थी,,, हलवाई की लड़की को समझते देर नहीं लगी की रघू बेहद बेशर्म किस्म का लड़का था,,, उससे बात करने की और ज्यादा हिम्मत उसमें नहीं थी,,,। प्रभात चित्र से समझ गई थी कि अगर वह अपनी मां से इस बारे में बात करेगी तो वह बिल्कुल बेशर्म की तरह उसकी मां के सामने भी वही करेगा तो उसके सामने कह रहा है इसलिए वह बात को आगे बढ़ाना नहीं चाहती थी और पैर पटक कर चली गई,,, रघु उसे जाते हुए देखता रह गया,,, हलवाई की लड़की होने के बावजूद भी उसके बदन पर चर्बी का असर बिल्कुल भी देखने को नहीं मिल रहा था बहुत ही खूबसूरत बदन था उस लड़की का,,,

रघु की नजर में उसके डोलते हुए नितंब बस गए थे,,, जो कि एकदम कसे हुए थे,,, हलवाई की लड़की की गांड देखकर रघु के मुंह में पानी आ गया था,,,,। रघु मन मसोसकर रह गया और फिर सूखी लकड़ियों को इकट्ठा करके,,, हलवाई की बीवी के पास आ गया और सूखे में लकड़ियों को उसके करीब रखते हुए बोला,,।

लो ले आया सूखी लकड़ियां,,,

बहुत अच्छा किया रघू तुने,,,,(वह मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

अब चाची जल्दी से गरमा गरम समोसे और जलेबियां तोल दो,,,,

क्यों आज तुझे रसमलाई नहीं खाना है क्या,,,,(नजरों को मादक अदाओं से घुमाते हुए बोली)

खाना तो है चाची,,, लेकिन तुम्हारी बिटिया यही है,,,,

तु उसकी चिंता मत कर,,, मैं सब संभाल लूंगी,,,,(वह चक्र पकड़ ताकते हुए बोली)

बहुत हिम्मत वाली हो गई हो चाची तुम,,,, अगर किसी दिन चाचा को पता चल गया तो तुम्हारी खैर नहीं,,,।

पता चलता है तो चलने दो खुद से तो कुछ उखडता नहीं है,,,

चाचा के साथ मजा नहीं आता क्या चाची,,,,।

उनसे मजा मिलता तो तेरे से कहती क्या,,,, औरत को आदमी से ज्यादा कुछ नहीं चाहिए रहता है दो वक्त की रोटी और रात को पलंग तोड़ चुदाई बस इससे ज्यादा और क्या चाहिए लेकिन यहां तो दोनों की मुसीबत है काम करते-करते थक जाओ सुबह से शाम तक और रात को बस खटिया में पड़े पड़े अंगड़ाई लेते रहो,,,,।

अरे चाची चाचा कुछ नहीं करते तो तुम्ही चढ जाया करो चाचा पर,,,,

मैं जिस दिन चढ़ गई ना प्राण पखेरू सब उड़ जाएंगे और वैसे भी तेरे चाचा में इतना दम नहीं है चढ़ तो जाऊं,,, लेकिन वह मुआ ईतना थका रहता है कि,,, उसका खड़ा नहीं हो पाता,,,,।

ओहहहहह,,, चाची तब तो सच में तुम्हें हमेशा के लिए मेरे जैसे लौंडे की जरूरत पडती ही रहेगी,,, लगता है अब तुम्हारी सेवा का जिम्मा मुझे ही लेना पड़ेगा,,,,,।

तो ले लेना इतना सोचता क्यों है,,,(सूखी हुई लकड़ी को चूल्हे में डालते हुए बोली,,,,,,)

चलो कोई बात नहीं यह जिम्मेदारी तो मुझे जिंदगी भर के लिए मंजूर है,,,, मैं जिंदगी भर तुम्हारी बुर में लंड डालना चाहता हूं,,,,

(मेरे मुंह से इतना सुनते ही वह अपने होठों पर उंगली रख कर मुझे चुप रहने का इशारा करते हुए अपने चारों तरफ देखने लगी और बोली)

पागल हो गया गया कोई सुन लेगा तो,,,,

कोई नहीं सुनेगा चाची,,, एक काम करो ना चाची,,,,

बोल,,,,,

एक बार फिर अपनी टांग खोल कर अपनी रसमलाई दिखा दो,,,,

(रघु की बात सुनते ही हलवाई की बीवी मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

तू सच में बुद्धू है मैं तुझे पूरी रसमलाई का कटोरा दे रही हूं और तू सिर्फ उसे देखना चाहता है,,,,।

क्या करूं चाची इस समय मेरा देखने का बहुत मन कर रहा है,,,,,,(रघु पजामे के ऊपर से अपने खड़े लंड को मसलते हुए बोला और हलवाई की बीवी उसकी ईस हरकत को देखकर उत्तेजित होने लगी,,,, रघु की हरकत से उसके गोरे गाल पर शर्म की लाली साफ नजर आ रही थी,,,,, वह धीरे से बोली,,,)

चल अंदर तुझे अच्छे से दिखाती हुं,,,,

लेकिन तुम्हारी बेटी,,,,

तो उसकी चिंता बिल्कुल भी मत कर,,,,

लेकिन तुम्हारा चूल्हा जल रहा है,,,,।

यहां पुरी भट्टी सुलग रही है और तुझे चूल्हे की पड़ी है,,,।

(वह दोनों हाथों से अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी बुर की तरफ इशारा करते हुए बोली, रघू को उसकी यह हरकत बेहद लुभावनी लगी और वह धीरे से बोला,,,)

लेकिन तुम्हारी बेटी,,,।

मैं कह रही हूं ना तु उसकी चिंता मत कर,,, मैं सब संभाल लूंगी बस तू बोल चलता है कि नहीं अंदर,,,,

चाची तुम्हारी बुर चोदने के लिए भला कौन इनकार कर सकता है,,,,,,,

(रघु की बात सुनते ही हलवाई की बीवी के होंठों पर मुस्कान तैरने लगी,,, पर मुस्कुराते हुए अपनी बेटी को आवाज देते हुए बोली,,,।)

साधना और साधना ईधर आ तो,,,,(पूडी को बेलते हुए बोली,,,, अब जाकर रघु को उसका नाम पता चला साधना नाम सुनते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी अपने मन में ही बोला,,, वाह क्या नाम है जैसा नाम है वैसी खूबसूरती,,,, वह अपने मन में यही सोच रहा था कि तभी वह लगभग दौड़ते हुए वहां आकर हाजिर हो गई,,, उसकी नजर रघु पर पडते ही वह नाक सिकोड़ने लगी,,, तभी उसकी मां बोली,,,)

बेटी जरा यह समोसे कर देना तो और जलेबीया भी छान देना,,, तब तक नहीं रघु से हिसाब किताब कर लु,,, इसकी बहन की शादी का हिसाब किताब अभी करना बाकी है,,,।

(इतना कहते हुए वह अपनी जगह से खड़ी हुई ,,,साड़ी जांघो तक चढ़ी हुई थी इसलिए उसके खडी होते ही,,, साड़ी उसके कदम तक नीचे आ गई लेकिन जांघों से नीचे आने के दौरान इतने बीच में रघु को उसकी मोटी मोटी नंगी जांघों के दर्शन हो गए हालांकि वह इस दिल को भी देख चुका था लेकिन उत्तेजना के लिए औरतों के किसी भी अंग का बस झलक भर पा जाना ही काफी होता है,,,, इसलिए रघु जल्द से जल्द उसकी बुर में लंड डालने के लिए तड़प उठा,,, वह अपनी साड़ी को झाड़ते हुए नीचे उतर आई और उसकी बेटी साधना उसकी जगह पर जाकर बैठ गई,,, रघु का मन कर रहा था कि हलवाई की बेटी को नजर भर कर देखता ही रह जाए क्योंकि गजब की कशिश उसके चेहरे पर नजर आ रही थी,,,, और वह गुस्से मे रघू की तरफ देख भी नहीं रही थी,,,,

हलवाई की बीवी अपनी बड़ी बड़ी गांड मटकाते हुए घर के अंदर जाने लगी और,, पीछे पीछे लार टपकाते हुए रघू एक नजर उसकी बेटी साधना पर मारते हुए घर के अंदर घुस गया,,,, हलवाई की बीवी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी इस बात को सोचकर ही कि अब उसकी बुर में वही मोटा तगड़ा लंड फिर से जाने वाला है जिसे अपनी बुर में महसूस कर के वह पानी पानी हो जाती थी,,,। रघु के पास गांव के सबसे हसीन और खूबसूरत जवान औरत उसकी मां अब उसकी बाहों में थी जिसके साथ अब वह जब चाहे तब कुछ भी कर सकता था,,, लेकिन मर्दों की फितरत में अक्सर यही होता है कि मौका मिलते हैं किसी गैर औरत की बाहों में जाने से बिल्कुल भी नहीं कतराते,,, लेकिन इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता था कि हलवाई की बीवी ही उसकी जिंदगी में पहली औरत थी जिसने उसे चुदाई के अद्भुत सुख से वाकिफ कराई थी,,, जिसने रघू को अपनी दूर के दर्शन करा कर एक औरत की बुर की संरचना क्या होती है उससे वाकिफ कराई थी,,, सही मायने में हलवाई की बीवी संभोग विषय की उसकी अध्यापिका थी और वह उसका छात्र तो गुरु दक्षिणा तो बनती ही थी,,,। इसीलिए तो वहां यहां पर आया था अपनी मां को खुश करने के लिए समोसे और जलेबी लेने के लिए लेकिन हलवाई की बीवी की तड़प देखकर वह उसकी कामाग्नि को शांत करने के लिए उसके

पीछे पीछे घर में घुस गया था,,,

हलवाई की बीवी के मदमस्त खूबसूरत मक्खन जैसे बदन की खूबसूरती से अच्छी तरह से वाकिफ था इसलिए घर में घुसते उसे अपनी बाहों में लेकर उसके लाल लाल होठों पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया,,,,,। हलवाई की बीवी जो कि पहले से ही गीली हो रही थी वह पूरी तरह से मदमस्त हो गई मदहोश हो गई और वह कसके रघु को अपनी बाहों में भर ले जिससे उसकी बड़ी बड़ी चूचीया उसकी छातियों पर नगाड़े की तरह बजने लगी,,, दोनों की सांसें एकदम तेज चलने लगी,,,, हलवाई की बीवी की बुर में आग लगी हुई थी जिस शांत करना बेहद जरूरी था,,,।

ओहहहहह,,,, रघू मेरी बुर में आग लगी हुई है,,, इसे शांत कर रघू मेरी रसमलाई को चाट,,,,ओहहहहह रघू,,,,,।(ऐसा कहते हुए वह खुद अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,,और देखते ही देखते वह अपने हाथों से अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर कमर के नीचे एकदम नंगी हो गई,,,,रघु को इस बात का अहसास नहीं था कि वह खुद अपने हाथों से अपनी साड़ी को कमर तक उठाया था लेकिन जैसे ही हो अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर साड़ी के ऊपर से ही उसकी फूली हुई बुर को टटोलना चाहा तो उसके हथेली में उसकी नंगी बुर आ गई और वह पूरी तरह से की गई थी एकदम चिपचिपी,,, रघू जैसे ही अपनी नजरों को नीचे किया तो नीचे की तरफ देखकर दंग रह गया,,,,,, एक औरत की प्यास इस कदर बढ़ जाती है इस बात का एहसास रखो को अच्छी तरह से मालूम था और उसी तरह से हलवाई की बीवी भी पूरी तरह से प्यासी हो चुकी थी,,, तन की प्यास औरतों को किसी भी हद तक जाने के लिए मजबूर कर देती है ठीक वैसा ही हलवाई की बीवी के साथ भी हो रहा था वह रघू से चुदवाना चाहती थी काफी दिनों बाद रघु को देखते ही उसकी दोनों टांगों के बीच हलचल होना शुरू हो गया था और अपनी बेटी की उपस्थिति में भी वह घर के अंदर रघु को ले जाकर अपने जिस्म की प्यास को बुझाने में लगी हुई थी,,, नंगी बुर हथेली में आते ही रघु पूरी तरह से मदहोश हो गया,,, वह जोर-जोर से उसकी बुर को मसलने लगा उसकी गर्माहट उसे अपनी हथेली में महसूस हो रही थी जिसका सीधा असर उसके लंड पर पड़ रहा था,,,,,,

रघु के इस तरह से बुर को रगड़े जाने की वजह से हलवाई की बीवी एकदम से चुदवासी हो गई और बार-बार रघू से बुर चाटने की गुजारिश कर रही थी,,,, रघु भी मचल रहा था,, इसलिए उसकी तरफ देखते ही वह खुद अपने घुटनों के बल बैठ गया और हलवाई की बीवी मदमस्त अदा बिखेरते हुए अपनी एक टांग उठा कर खटिया पर रख दी जिससे रघु को थोड़ी और जगह मिल गई और वह हलवाई की बीवी की मक्खन जैसी चिकनी जांघों को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने प्यासे होठों को उसकी मचलती बुर पर रख दिया,,,,।

सहहहहहह आहहहहहह,,,, रघू,,,,,,,

(काफी दिनों बाद एक जवान लड़के की प्यासी होठों को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर महसूस करते ही,,,, हलवाई की बीवी अपनी उत्तेजना को दबा नहीं पाई और उसके मुंह से गर्म सिसकारी फुट पड़ी,,,, उसकी गर्म सिसकारी में एक तडप थी एक कशिश थी,,,, अपने पति से की गई बेवफाई थी,,, एक औरत का अधिकार था,,, एक गूंज थी उन मर्दों के खिलाफ जो उन्हें जब चाहे अपनी मर्जी से इस्तेमाल करते हैं उनसे अपनी शारीरिक भूख मिटा कर करवट लेकर सो जाते हैं,,, उन्ही सब का जवाब थी हलवाई की बीवी,,,,, जोकी मस्ती के साथ अद्भुत गर्म सिसकारी की आवाज निकालते हुए एक जवान लड़के से अपनी बुर चटवा रही थी,,,,,, अपनी मां की बुर का स्वाद चखने के बाद,,, अद्भुत और स्वादिष्ट एहसास उसे किसी और की बुर में नहीं मिलता लेकिन हलवाई के बीवी की बात कुछ और थी इसीलिए तो वह जितना हो सकता था उसने जीभ को उसकी बुर की गहराई में डालकर उसमें से मलाई चाट रहा था,,,,,,,।

ओहहहहह रघू मेरे राजा ऐसे ही पूरी जीभ डालकर चाट,,,आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है बहुत मजा तेरा बड़ी बेसब्री से कई दिनों से इंतजार कर रही थी,,,सहहहहह,,आहहहहहहह,,,, आज मिला है ,,,,,मस्त कर दे मुझे,,,,,,

(हलवाई की तरह की बातें करते हुए रघु का हौसला बना रही थी और रघू उसकी बातों को सुनकर पूरे गर्मजोशी के साथ मदहोशी में उसकी बुर ऐसे चाट रहा था मानो कि जैसे उसके सामने मीठी खीर की कटोरी भरी पड़ी हो,,,,, कुछ देर तक रखो उसी तरह से हलवाई की बीवी की बुर चाटता रहा इस दौरान वह एक बार झड़ चुकी थी,,,, पजामे में रघु का मुसल ओखली में घुसने के लिए तैयार था,,,, रघू खड़ा हुआ और उसके खड़े होते हैं बिना किसी ईसारे के मानो हलवाई की बीवी को क्या करना है वह जानती हो,,, इसलिए वह खटिया के पाटी पर बैठ गई अपनी भारी-भरकम शरीर के कारण नीचे अच्छी तरह से बेठ पाना उसके लिए मुनासिब नहीं था,,,, पजामे में बने तंबू को देखकर उसके मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आना शुरू हो गया,,,, सब कुछ ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पहली बार रघू के साथ यह उन्मादक पल विता रही हो,,, अपने उत्तेजना के मारे सूखते गले के नीचे थूक को निगलते हुएअपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर उसके पजामे को एक झटके से घुटनों तक खींच दी,,,।

आहहहहह,,,, अद्भुत अतुल बेहद उत्तेजना से भरा हुआ नजारा एक बार फिर उसकी आंखों के सामने घूमने लगा रघु का मतवाला आजाद लंड हवा में लहराने लगा,,,, उसकी अकड़ किसी पहाड़ की तरह थी जिसके सामने दुनिया की किसी भी औरत की बुर की ताकत टकरा कर घुटने टेक दे,,,,, रघु का बेलगाम लंड हवा में लहरा रहा था जिसे हलवाई की बीवी अपना हाथ आगे बढाकर उसे हवा में ही लपक ली,,,,,,, और उस पर काबू पाने के लिए उसे सीधे अपने मुंह में भर ली,,,। एकदम अंदर गले तक और तब तक जब तक उसकी सांस अटकने ना लग गई फिर बाहर ऐसा वह बार-बार कर रही थी,,,, हालांकि लंड चूसने की कारीगरी उसे रघु ने अपना लंड चुसवा कर ही सिखाया था इसमें वह पूरी तरह से पारंगत हो चुकी थी और इस समय रघु को पूरी तरह से अपने वश में कर रही थी,,, रघु तो पूरी तरह से मस्त हो चुका था जिस तरह से वह उसके लंड को चूस रही थी,,, उसे डर था कि कहीं उसका पानी उसके मुंह में ना छुट जाए,,,, इसलिए मैं तुरंत अपनी कमर को पीछे लेते हुए अपने लंड को उसके मुंह से बाहर निकाल लिया,,, हलवाई की बीवी की सांसे गहरी चल रही थी,,,, दोनों पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे श्री वालों की बीवी अपने गुलाबी बुर के अंदर रघु के मोटे तगड़े लंड को लेने के लिए तैयार हो चुकी थी,,,, रघु अपने लंड को हिलाते हुए गहरी सांस लेते हुए बोला,,,।

अब बोलो चाची क्या करु,,,?

(दूसरी तरफ उसकी बेटी साधना समोसे कल चुकी थी लेकिन जलेबी कितना करना है या उसे नहीं मालूम था इसलिए वह पूछने के लिए चूल्हे पर से हटी और सीधा घर के दरवाजे पर पहुंच गए आवाज दे नहीं पा रही थी कि अंदर से आती आवाज उसके कानों में पड़ने लगी जो कि हिसाब किताब के बारे में बिल्कुल भी नहीं थी,,,)

अब तो अच्छी तरह से जानता है रखो तुझे क्या करना है तेरा यह पहली बार नहीं है जो मुझे सिखा ना पड़े तेरे मोटे तगड़े लंड को देखकर मेरी बुर में आग लगी हुई है,,,।

(लंड और बुर सब्द कानों में पड़ते हैं साधना के कान खड़े हो गए उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसके कानों में क्या शब्द पड़ेंगे और वह भी घर के अंदर से जहां पर उसकी मां एक गैर जवान लड़के के साथ अंदर थी,,,, साथी ना समझ गई कि अंदर जरूर कुछ गड़बड़ चल रही है अब सुनने से नहीं बल्कि देखने से ही पता चलेगा कि अंदर क्या हो रहा है इसलिए वह दरवाजे में से अंदर की तरफ झांकने लगी दरवाजा के कांच के टुकड़ों से बना हुआ है एक लकड़ी का दरवाजा था जिसमें से अंदर झांकना कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन अंदर जैसे ही उसकी निगाहें सीधे उसकी मां पर और उस लड़के पर पड़ी तो उसके होश उड़ गए उसकी मां खटिया के पाटी पर बैठी हुई थी उसकी साड़ी कमर तक थी हल्की हल्की उसकी बड़ी बड़ी गांड साधना को नजर आ रहे थे लेकिन उस लड़के पर नजर पड़ते उसके होश उड़ गए थे क्योंकि नजारा ही कुछ ऐसा था और साधना के लिए तो यह पहली बार था उसने आज तक एक जवान लंड़ को अपनी आंखों से कभी नहीं देखी थी और ना ही उसकी कल्पना की थी,,,,उसकी आंखों के सामने जो था वह सब कुछ हकीकत था कोई सपना बिल्कुल भी नहीं था,,,। रखो जिस तरह से उसे अपने हाथ में लेकर ऊपर नीचे करके हीला रहा था उसे देखकर साधना की कंपकंपी छूट गई,,,, तभी उसके कानों में जो सुनाई दिया उसे सुनकर उसके होश उड़ गए,,,।

मेरी रानी तुम्हारी बुर में जाने के लिए मेरा लंड तड़प रहा है,,,,

मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है मेरे राजा,,,,तेरे लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तो मैं न जाने कब से तड़प रही हूं,,,, बस अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है डाल दे जल्दी से अपनी लंड को मेरी बुर में,,,,(इतना कहने के साथ ही हलवाई की बीवी खड़ी हुई और उसी तरह से अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए ही पकड़े हुए वह घूम कर अपनी गांड को रघु के सामने परोस दी और झुक कर खटिया के पाटी को पकड़ ली,,, यह सब नजारा साधना के लिए अद्भुत था कभी ना देखा हुआ नजारा देखकर साधना की हालत खराब होने लगी उसकी टांगों के बीच कपकपी होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें घर के अंदर चुदवाने की तैयारी कर रही थी,,, और मैं बाहर खड़ी दरवाजे के छेद मे से देख रही थी,,,,इन सब से अनजान होने के बावजूद भी उसे इतना तो पता चल ही रहा था कि एक औरत अपने कपड़े उतार कर एक मर्द के साथ क्या करवाती हैं,,,इसलिए वह हैरान थी उसे अपनी मां से इस तरह की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उस लड़के को देख कर उसे गुस्सा भी आ रहा था जो कि अपने मोटे तगड़े लंड को हाथ में पकड़ कर हिला रहा था और साधना यह भी जानती थी कि कुछ ही पल में वह लड़का अपने लंड को उसकी मां की बुर में डाल देगा जिसे साफ जुबान में चुदाई कहते हैं,,,।

अपनी मां को ऐसा करने से रोकना चाहती थी उस लड़के को वहां से भगाना चाहती थीलेकिन ना जाने उस नजारे में कैसी कशिश थी कि साधना चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी इसमें उसका बिल्कुल भी दोष नहीं था,,,यह उम्र ही कुछ ऐसी होती है कि आंखें यही सब देखने के लिए भटकती रहतीं हैं,,, मन मचलता रहता हूं और उम्र के मुनासिब ही घर के अंदर का नजारा बना हुआ था देखते ही देखते रघू साधना की मां के पीछे आ गया और जोर से उसकी गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड पर चपत लगाते हुए मजा ले रहा था,,, लेकिन साधना एकदम हैरान थी क्योंकि वह लड़का बड़े जोरों से उसकी मां की गांड पर चपत लगा रहा था और उसकी मां दर्द से कराहने की जगह अजीब अजीब सी आवाज निकाल रही थी,,,,

साधना का दिल जोरों से धड़क रहा था वह बार-बार अपने पीछे की तरफ देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन कोई भी वहां मौजूद नहीं था क्योंकि हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था और बरसात का मौसम होने की वजह से वहां पर किसी के आने की आशंका भी नहीं थी,,,

देखते ही देखते रघु अपने हाथ में लंड लेकर ठीक है उसकी मां के पीछे आ गया और नीचे की तरफ हल्के से कमर झुकाकर अपने लंड को उसकी मां की बुर में डाल दिया जैसे जैसे लेडीस की मां की बुर में जा रहा था वैसे वैसे उसकी मां के चेहरे के हावभाव बदलते जा रहे थे,,,, साधना की हालत पर पल खराब होती जा रही थी,,, अपनी आंखों के सामने अपनी मां को एक जवान लड़के से चुदवाते हुए देख रही थी,,, उसे बड़ा अजीब लग रहा था पल भर में उसे इस बात का एहसास होगा कि उसकी मां उसके पिताजी को धोखा दे रही है लेकिन क्यों दे रही है इस सवाल का जवाब शायद जानने के लिए वह अभी पूरी तरह से परिपक्व नहीं थी,,,,,,

आहहहहह आहहहहह,,,,ओहहहह मेरे राजा,,,,,आहहहहहह,,,,

साधना को एकदम साफ उसकी मां की आवाज सुनाई दे रही थी,,, इस तरह की आवाज साधना के लिए बिल्कुल नई थी बेहद अजीब थीलेकिन ना जाने क्यों इस तरह की आवाज सुनकर साधना के तन बदन में भी कुछ कुछ होने लगा था उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की उस जगह में से कुछ रिसता हुआ महसूस हो रहा था,,,। यह सब कुछ उसके लिए नया था उसे साफ दिखाई दे रहा था कि वह जवान लड़का उसकी मां के पीछे उसकी कमर था हमें अपनी कमर को आगे पीछे करके ही मारा था जिसका मतलब वह अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए तो उसकी भी खुद की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, साधना को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां को मजा आ रहा है और वह लड़का अपने दोनों हाथ को उसकी कमर पर से हटा कर आगे की तरफ लाकर अपने हाथों से उसकी मां के ब्लाउज के बटन खोलने लगा और उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को बाहर निकालकर उसे दबाते हुए अपनी कमर को जोर-जोर से हीलाना शुरू कर दिया,,,,,,, रघु जोर जोर से धक्के लगा रहा था और हर धक्के के साथ उसकी मां की हालत खराब हो जा रही थी लेकिन मजा दोगुना आ रहा था,,, यह सब नजारा साधना के बर्दाश्त के बाहर था,,,, लेकिन फिर भी वह अपनी आंख दरवाजे से लगाए खड़ी थी,,,, उसे अच्छी तरह से समझ में आ गया था कि उसकी मां कौन से हिसाब की बात कर रही थी,,,,उसे अपनी मां पर गुस्सा भी आ रहा था लेकिन उसने चेहरे को देखकर उत्तेजना भी बढ़ रही थी और इस तरह की उत्तेजना का अनुभव वह अपने बदन में पहली बार कर रही थी,,,,

उसकी मां की गरम सिसकारी की आवाज तेज होने लगी रघु को एहसास हो गया कि वह चढ़ने वाली है इसलिए अपने को को तेज कर दिया नहीं बाहर खड़ी साधना को बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था कि उसकी मां की सिसकारी की आवाज तेज क्यो हो गई,,,, जितनी तीव्रता से रफ्तार के साथ रखो कमर हिला रहा था उसे देखकर साधना हैरान थी क्योंकि आज तक उसने अपनी आंखों से चुदाई नहीं देखी थी यह पहला मौका था जब अपनी आंखों से चुदाई देख रही थी और वह भी अपनी मां की,,,, क्रोध उतेजना का मिलाजुला असर साधना के चेहरे पर दिखाई दे रहा था,,।

आखिरकार कुछ धक्के के बाद दोनों एक साथ झड़ गए यह नजारा यह कामलीला खत्म होने का एहसास साधना को तब हुआ जब उसकी मां अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगी और वह तुरंत उस जगह को छोड़कर वापस चूल्हे के पास बैठ गई और बिना कुछ पूछे अपने मन से ही जलेबी छान में लगी,,, थोड़ी देर बाद दोनों घर से बाहर निकल गई और ऐसा बर्ताव करने लगे कि जैसे अंदर कुछ हुआ ही ना हो,,,, रघु जलेबी और समोसे लेकर अपने घर की तरफ चला गया,,,।
 
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साधना रघू को अपनी आंखों से बड़े आराम से जाते हुए देखती रही उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि जो कुछ देर पहले उसकी आंखों ने देखा था वह सच है या एक सपना लेकिन वास्तविकता यही थी कि जो कुछ भी उसकी आंखों ने देखा था सब कुछ सच था,,,, आज से अपनी मां का नया रूप देखने को मिला था,, वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी मां इस कदर नीचे गिर जाएगी कि गांव के जवान लड़के के साथ चुदवाएगी,,,, ऐसा क्यों हुआ क्या कमी पड़ गई जो उसकी मां को इस तरह के कदम उठाने पड़े यह साधना के समझ के बाहर की बात थी,,,,। लेकिन वह हैरान थी बार-बार अपनी मां के मासूम चेहरे को देख रही थी और उस मासूम चेहरे के पीछे छुपी एक अय्याश औरत को,,,,साधना अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर उसके पिताजी को यह बात मालूम पड़ेगी तो वह क्या सोचेंगे उन पर क्या गुजरेगी,,,,,,, उसे जो कुछ भी उसकी मां ने की थी उस बारे में सोच कर बुरा भी लग रहा था लेकिन ना जाने क्यों कि उसने पहली बार अपनी आंखों से एक पूरे चुदाई के प्रसंग को अपनी आंखों से देखी थी और वह भी अपनी ही मां की किसी के गैर जवान लड़के के साथ वह बिल्कुल अद्भुत था उसके लिए उसने अपनी आंखों से कभी भी इस तरह के दृश्य को ना तो देखी थी ना ही इस तरह के ब्रिज के बारे में कभी कल्पना ही की थी,,, इसलिए अभी भी उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी ना चाहते हुए भी उसके दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार में मुनमुनाहट सी हो रही थी,,,,अपनी मां के खूबसूरत मासूम चेहरे को देख कर उसे कुछ देर पहले घर के अंदर का वह दृश्य याद आ रहा था जब वह जवान लड़का उसकी मां के पीछे खड़े होकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगा रहा था उसके हर एक धक्के के साथ उसकी मां के मुंह से अजीब अजीब सी आवाजें निकल रही थी और चेहरे के हाव भाव बदलते नजर आ रहे थे,,,,,,साधना को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां का चेहरा एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था,,,, और जिस तरह से वह लड़का अपना दोनों हाथ आगे की तरफ लाकर अपने हाथों से ही उसकी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल कर उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबा रहा था वह प्रसंग याद करके साधना की गर्म जवानी से भरी हुई कसी बुर पिघलने लगी थी,,,,। अपने आप ही उसकी सांसे गहरी होने लगी थी,,,, जब उसकी मां की नजर साधना पर पड़ी तो उसे किसी ख्यालों में खोया हुआ पाकर वह बोली,,,।

क्या हुआ कहां खोई है,,,?

कककक, कुछ नहीं,,,,,

अंधेरा होने वाला है जाकर सारे सामान को समेट कर रख दे,,,।

ठीक है,,,( और इतना कह कर वह उसी पल को याद करके सारे सामान को समेटने लगी,,, दूसरी तरफ रघु बहुत खुश था,,, उसे उम्मीद नहीं थी कि समोसे और जलेबियां खरीदते खरीदते उसे रसमलाई का स्वाद भी चखने को मिल जाएगा,,,,,,, जब वह घर पहुंचा तो अंधेरा हो चुका था,,,,,, आज उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था,,,, आज वह अपनी मां को अपना लंड चूसवाना चाहता था,,,वह देखना चाहता था कि उसकी मां किस तरह से उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चुस्ती है,,,,,, सबके साथ जितनी भी औरतों के साथ उसने संभोग किया था उसकी चुदाई किया था उन सब को उसने अपना लंड चुसवाया था,,,,,, इसीलिए वह अपनी मां के साथ भी इस अनुभव का आनंद लेना चाहता था,,,। जब वह घर पर पहुंचा तो देखा कि रामु उसकी मां से बात कर रहा था,,,।

अरे रामू तु,,, बड़े दिनों बाद,,,,

ऐसा क्यों कह रहा है,,, जैसे कि मैं बहुत दूर रहता हूं,,,,

वो बात नहीं है,,,, काफी दिन हो गए हम दोनों एक साथ कहीं मिलते नहीं है घूमते नहीं है वरना हम दोनों का तो बिना एक दूसरे के दिन ही नहीं गुजरता था,,,।

हां यार रघु सच कह रहा है तू,,,,

(रघु यह बात अच्छी तरह से जानता था कि रामू उससे क्यों दूरियां बनाने लगा था जब से उसने इस बात का पता चला था कि रघु तूफान वाली रात को उसकी मां की जमकर चुदाई किया था और चुदाई में उसकी मां को भी बहुत मजा आया था तब से वह रघू से पहले की तरह बात नहीं करता था उसके मन में,, रघु और उसकी मां के बीच हुए शारीरिक संबंध को लेकर एक टीस थी,,, वह गुस्सा करता था,,, लेकिन वह इस बात को भी नजरअंदाज नहीं कर पा रहा था कि उसकी ही वजह से वह भी जिंदगी में पहली बार जुदाई के सुख से वाकिफ हुआ था और वह भी अपनी मां को ही चोदकर जोकि रघु के ही बदौलत क्योंकि वह उसकी मां और रघु के बीच के संबंध को जान गया था,,,,,, इस बारे में वह अपनी मां से बात भी किया था,,, और उसकी मां ना चाहते हुए भी अपने ही बेटे के साथ चुदवाने लगी,,,,,,,)लेकिन क्यों नहीं मिलते हैं यह बात भी तो अच्छी तरह से जानता है,,,,

क्यों नहीं मिलते हो तुम दोनों मुझे भी तो बताओ,,,,(रामू की बात सुनते ही कजरी बीच में बोल पड़ी,,,।)

अरे कुछ नहीं चाची अब पहले जैसा समय नहीं रहता ना,,, सारा दिन काम में उलझे रहते हैं,,,

अच्छा तुम दोनों बातें करो मैं गाय और बकरियों को देखकर आती हुं,,,(इतना कहकर कजरी खड़ी हुई और घर के पीछे की तरफ जाने लगी जहां पर गाय और भैंस बकरीया बांधती थी ,,। कजरी के जाते ही रघू बोल पड़ा,,,)

क्यों रे रामू क्यों नहीं मिलता मुझसे बता तो,,, तेरी मां को मैंने चोदा था इसलिए ना,,,,,,,,,

(रघु की बात सुनकर रामू कुछ नहीं बोलातो रघु जानबूझकर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

इसीलिए नाराज है ना तू,,,,

, छोड तु ऊन बातों को,,,,,,

अच्छा जाने दे वह सब बातें मैं नहीं करता,,,,,,, लेकिन सच बताऊं तो तेरी मां मजा बहुत देती है,,, जवान लड़की जितना मजा नहीं देती उतना मजा तेरी मां से मिलता है,,,

(रघु उसे चिढ़ाने के लिए यह सब बोल रहा था लेकिन सच्चाई भी इसमें उतनी ही थी जितना कि वह बोल रहा था,,, और यह बात है रामू भी अच्छी तरह से जानता था क्योंकि वह भी अपनी मां को चोदता था,,।)

देख रघू यह सब गंदी बातें मुझसे मत किया कर,,, मुझे अच्छा नहीं लगता,,,।

अच्छा बच्चु,,, अपनी मां को सोच करते हुए अपनी बहन को पेशाब करते हुएदेखना अच्छा लगता है और बातें करना खराब लगता है भूल गया सब कुछ मेरे साथ मिलकर तू अपनी मां को खेतों में नहीं देख रहा था उठाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड के दीखाते हुए सोच कर रही थी,,,

अब नहीं करता ना,,,,

चल अच्छा जाने दे,,,, ये सब बातें करके कोई फायदा नहीं है,,,, हम दोनों को फिर से पहले की तरह ही रहना चाहिए,,,

मैं तो अभी भी पहले की तरह ही रहना चाहता हूं रघु लेकिन तू नहीं बदला,,,।

क्या मतलब कि मैं नहीं बदला,,,,

तू अभी भी मेरे मां को चोदता है,,,,

क्या बात कर रहा है पागल हो गया क्या,,,,?

पागल नहीं हो गया हूं लेकिन मैं सच कह रहा हूं जो मैं अपनी आंखों से देखा हूं वही बता रहा हूं,,,,।

क्या देखा तु अपनी आंखों से,,,,

यही कि तू खेता में मेरी मां को चोद रहा था,,,,

(राहुल की बात सुनते ही रघु थोड़ा सा सक पका गया क्योंकि उसकी चोरी पकड़ी गई थी,,,,वो कुछ बोल सकने की स्थिति में नहीं था फिर भी बोला,,,)

यार इसमे अब मेरी कोई गलती नहीं है चाची है ही इतनी खूबसूरत कि मुझसे रहा नहीं जाता और उस दिन भी ऐसा ही हुआ था,,,,।

जो कुछ भी हो रहा है रघू गलत हो रहा है,,,, तू ही सोच अगर मैं तेरी मां की चुदाई करु तो,,,

(रामू की बात सुनते ही रघु एकदम गुस्से में आ गया वह अपनी मुट्ठी को जोर से भींच कर अपने आप को शांत करने लगा क्योंकि वह जानता था कि गलती उसकी भी है,,, रघु बोला कुछ नहीं,,,,)

तुझे कैसा लगेगा रघू बोल,,,,।

मुझे क्या,,,, मुझे कुछ नहीं लगेगा औरतों को अगर जरूरत पड़ती है तो उन्हें रोक नहीं सकते उस तरह से तू भी अपनी मां को रोक नहीं सकता क्योंकि उन्हें भी जरूरत है,,,, अगर उनकी जरूरत घर में ही पूरी हो जाए तो शायद उनको मेरी जरूरत ना पड़े,,,,।

(रघु की बात सुनकर रामू उसकी बात से पूरी तरह से सहमत था,,,, जब इस तरह के हालात दोनों के बीच बिल्कुल भी नहीं थे तब दोनों दिन भर औरतों की ताका झांकी में ही लगे रहते थे रामू खुद अपनी मां को चोदना चाहता था तभी तो रघु जब भी उसकी मां के बारे में उसकी बहन के बारे में,,, एकदम गंदी बातें करता था तोरामू को बहुत अच्छा लगता था उसे उत्तेजना का अनुभव होता था,,,, रामू यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि उसके द्वारा उसकी मां की चुदाई के कारण ही उसे खुद अपनी मां को चोदने का मौका और सौभाग्य प्राप्त हुआ था और साथ ही खेतों में जब वह उसकी मां की चुदाई कर रहा था तो उसकी बहन ने अपनी आंखों से देख ली थी जो कि पूरी तरह से उत्तेजित होकर खुद अपने भाई से चुदवाई पर इस तरह से रामू को अपनी मां के साथ साथ अपनी बहन को भी चोदने का मौका मिल गया,,,,,,, वरना अब तक वह सिर्फ हाथ से हिला कर ही काम चला रहा था,,,, रघु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) क्यो क्या हुआ,,,? तू खुद अपनी मां को चोदना चाहता था मुझे पूरा यकीन तो तेरी हरकतों को देखकर यह बात को तु झुठला नहीं सकता,,,, सच कहूं तो तुझे भी इसने बहुत मजा आएगा तू अपनी मां को चोद सकता है,,,( रखो यह बात नहीं जानता था कि रामू खुद अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया है इसलिए वह उसे अपनी मां को चोदने का आसान तरीका बता रहा था,,,,)

यह तो कैसी बातें कर रहा है रघू,,,, मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकता,,,

क्यों नहीं कर सकता मैं तेरा दोस्त हूं मुझसे कुछ भी छुपाने की जरूरत नहीं है और ना ही कुछ छुपा हुआ है,,,, भूल गया हम दोनों साथ में मिलकर तेरी दोनों बहनों की मस्त गोरी गोरी गांड देखकर मुट्ठ मारते थे,,,,जब कभी भी मैं तेरी मां के बारे में गंदी बातें करता था तो सबसे पहले तेरा लंड खड़ा हो जाता था,,,,, और याद है तुझे रात को तेरी मां जब मैदान में सोच करने गई थी तो हम दोनों चोरी-छिपे झाड़ी के पीछे बैठकर तेरी मां को देख रही थी उस समय सबसे पहले तेरी मां की नंगी गांड देखकर तेरा खड़ा हुआ था,,, उसकी नंगी गांड देखकर हम दोनों साथ में हीलाना शुरू किए थे,,,,, और, तु सबसे पहले झड़ गया था,,,,,, याद है कि नहीं,,, और ऐसा क्यों हुआ था तुझे पता है ना,,,, क्योंकि तू अपनी मां को चोदना चाहता था,,,,।

(रघु की बातों को सुनकर रामू कुछ बोल नहीं रहा था और बोलता भी कैसे सब कुछ सच जो था,,,, रामू रघु से बोलना चालना इसलिए बंद किया था कि वह उसकी मां की चुदाई करता था,,, पर इस बात को लेकर रामू को जलन होती थी कि उसकी मां रघु से क्यों चुदवाती है,,,, क्योंकि रामु अपने आप को उसकी खुद की मां को चोदने का अधिकारी समझता था,,,।)

अब बोलेगा कुछ नहीं मुझे सब पता है क्योंकि जो कुछ भी मैं कह रहा हूं सब सच है,,,, मैं तो यही कहूंगा कि मेरा ही सही मेरी और तेरी मां की करतूतों के बारे में उसे बातें करके खुद भी उसकी चुदाई कर मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मां तुझसे भी चुदवाएगी ,,,। बोल कोशिश करेगा कि नहीं अगर ऐसा नहीं करेगा तो तेरी मां बार-बार मेरे पास आती रहेगी,,,,।

चल छोड़ इन बातों को,,,,,,, मुझे जोरों की भूख लगी है मैं जा रहा हूं,,,,।

(रामू कुछ भी हो अपनी हकीकत को किसी और को बताना नहीं चाहता था वह नहीं चाहता था कि उसके और उसकी मां के बीच जो कुछ भी चल रहा है इस बारे में किसी और को पता चले जैसा कि रघु खुद अपनी मां के एवज में यही चाहता था,,,, रामू वहां से चला गया और रघू मुस्कुराते हुए घर में प्रवेश किया तब तक थोड़ी देर में उसकी मां भी आ चुकी थी,,,,रघु अपने हाथ में लिए हुए समोसे और जलेबीयो के पड़ीके को,,, अपनी मां के हाथों में पकड़ाते हुए बोला,,,।)

यह लो मां समोसे और जलेबीया,,,,

अरे तू यह किस लिए ले आया खाना तो बना चुकी हुं,,,(कजरी उन पड़ीको को हाथ में लेते हुए बोली,,,)

अरे मां जलेबियां खिलाकर तुम्हारी रसमलाई जो चाटना हैं,,,।

(अपने बेटे की बात सुनते ही कजरी एकदम से शर्मा गई उसे इस बात का एहसास हो गया था कि रघु अब बात करते समय भी अब शर्माता नहीं है,,, कजरीअच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा किसी बारे में बोला है लेकिन फिर भी वह अनजान बनते हुए बोली,,,)

रसमलाई मैं कुछ समझी नहीं,,,

अरे मां तुम्हारी बुर की मलाई,,, अपनी जीभ से चाटना,, है,(इतना कहते हुए रघु,, अपनी जीभ को बाहर निकाल कर बुर चाटने की अदाकारी करते हुए बोला,,, और कजरी अपने बेटे की हरकत को देखकर पूरी तरह से पानी पानी हो गई और वह बोली,,,)

बाप रे कितना शैतान हो गया है तु थोड़ा तो शर्म कर,,,,

वह कहते हैं ना मां जिसने किया शर्म उसके फूटे करम तो ऐसा ही कुछ है अगर मैं शर्म किया होता तो तुम्हारी रसमलाई जैसी बुर चोदने को ना मिलती,,,,

बात तो तू ठीक ही कह रहा है,,, लेकिन थोड़ी बहुत तो शर्म किया कर आखिरकार में तेरी मां हूं,,,,।

वह तो मैं अब घर के बाहर लेकिन इस चारदीवारी में तो तुम एक खूबसूरत औरत हो जिसकी मैं जब चाहु तब दोनों टांगे फैलाकर ले सकता हूं,,,।

धत्त,,,, शैतान चल जल्दी से हाथ धो ले मैं तेरे लिए खाना निकालती हूं,,,,

(इतना कहकरमुस्कुराते हुए कजरी खाना निकालने के लिए चली गई और रघु हाथ धोने के लिए थोड़ी ही देर में दोनों मां बेटी खाना खाकर और समोसे और जलेबीयो का चटकारा लेते हुए खड़े हो गए,,, दोनों सोने की तैयारी करने लगे,,, हाथ में लालटेन उठाए रघू बोला,,,)

क्यों मा मुतने चलोगी,,?

नहीं आज मुझे लगी नहीं है,,, तू ही जाकर हिलाते हुए मुत ले,,,

भगवान ने मुझे हीलाने वाला औजार दिया है तो हिला कर ही मुतुंगना,,, और तुम्हें सिटी मारने वाला जब तुम पेशाब करती हो तो तुम्हारी बुर से बहुत तेज सीटी की आवाज निकलती है,,,

(रघु की इस तरह की बातें सुनकर कजरी की हालत खराब हो रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा इतने खुले शब्दों में उससे यह सब कहेगा,,, लेकिन फिर भी कजरी को मजा आ रहा था उसकी आंखों में खुमारी छा रही थी,,,, रघु की बातें उसकी बुर गीली कर रही थी,,, )

अच्छा जा मुत के आ,,,(कजरी शरमाते हुए बोली और रघु हंसते हुए बाहर चला गया और थोड़ी ही देर में पेशाब करके वापस आ गया,,,हालांकि कजरी को भी पेशाब लगी थी लेकिन इतने जोरो से नहीं लगी थी कि जाना पड़े,,, रघू बिस्तर समेटने लगा तो कजरी बोली,,,)

कहां,,,?

छत पर और कहां,,,?

देख नहीं रहे हो बाहर बादल है कभी भी पानी बरस सकता है,,,,

तो,,,

तो क्या यही कमरे में,,,,

(कजरी खुलकर मज़ा लेना चाहती थी इसलिए अंदर ही सोना चाहती थी और अपनी मां की बात सुनकर रघु भी पूरी तरह से मस्तीया गया,,, और मुस्कुराते हुए शरारती अंदाज में बोला,,,)

लगता है आज तुम्हारा भी लेने का बहुत मन कर रहा है,,,

धत्त,,,,जाकर पहले दरवाजा बंद करके आ,,,( कजरी भी शरमाते हुए बोली अपनी मां की बात सुनते ही रखो तुरंत गया और अपने हाथों से बनाए हुए दरवाजे को बंद करते हुए अपने मन में सोचने लगा कि ईस दरवाजे की वजह से अब वह उसकी मां खुलकर कभी भी चुदाई का मजा लूट सकते हैं,,,, दरवाजा बंद करते समय रघु के मन में लड्डू फूट रहे थे और दूसरी तरफ कजरी की बुर पानी छोड़ रही थी क्योंकि वह जानते थे कि अब खटिया में एक बार फिर से घमासान चुदाई होने वाली,,, है,,,।)
 
रघु दरवाजा बंद करके एकदम अंदर वाले कमरे में पहुंचा तो दंग रह गया उसकी मां कजरी खुद ही अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी खटिया पर लेटी हुई थी,,,, लालटेन मद्धम रोशनी में जल रही थी,,,। जिस के उजाले में रघु को सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,, रघु तो अपनी मां के नंगे बदन को देखकर एक बार फिर से पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया,,, रघु भले ही अपनी मां की जमकर चुदाई कर चुका था उसके नंगे बदन को देख चुका था अपने हाथों से उसके हर एक अंग को छूकर स्पर्श करके महसुस करके देख चुका था लेकिन कजरी का खूबसूरत बदन इतने बेहतरीन तरीके से तराशा हुआ था कि उसे बार बार नंगी देखने के बावजूद भी मन नहीं भरता था,,,,रघु बड़े गौर से अपनी मां को देख रहा था वह खटिया पर पीठ के बल लेटी हुई थी और अपने बेटे की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी लेकिन रघू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी,,, पल भर में ही उसके पैजामा मे तंबू बन गया,,, कजरी को साफ नजर आ रहा था उसकी आंखों के सामने उसके पहचानी का आगे वाला भाग उठता जा रहा था,,, और जब रघु का लंड पजामे में अपनी औकात में आ गया तो कजरी को ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई खूंटा गड़ा हो,,,, अपने बेटे के खूंटे को देख कर बोली ,,,।

बाप रे तेरा तो देखकर ही खड़ा हो गया,,,,

खटिया पर नंगी लेटोगी तो मेरा तो क्या किसी का भी खड़ा हो जाएगा,,,,

तो उतार दे अपने कपड़े,,,,,

उतारना ही पड़ेगा मां,,, तुम्हारी मदमस्त जवानी से खेलने के लिए मुझे कपड़े उतार कर नंगा होना पड़ेगा,,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने कपड़े उतारने लगे और अपने बेटे को कपड़े उतारता हुआ देखकर कजरी के तन बदन में हलचल सी मचने लगी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच,,,,, वह अपनी हथेली को अपनी बुरर पर रखकर उसे मसलते हुए बोली,,,)

दरवाजा तो बंद कर दिया है ना,,,,

Raghu or uski ma Kajri

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बिल्कुल मेरी जान,,,,(इतना कहने के साथ ही अपने पर जाने को भी बार उतार फेंका और उसकी आंखों के सामने एकदम नंगा खड़ा हो गया अपने बेटे के लहराते हुए लंड को देखकर कजरी की बुर कुलबुला रही थी,,, और अपने बेटे के मुंह से अपने लिए जान शब्द सुनकर उसके तन बदन में उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी चिकोटि काटने लगी,,,जिंदगी में पहली बार किसी ने उसे जान कहकर बुलाया था और वह भी उसका खुद का सगा बेटा,,,उसे जान शब्द अपने बेटे के मुंह से सुनकर अच्छा भी लग रहा था लेकिन हैरान भी थी,,, क्योंकि वह उसकी मां थी और वह उसका बेटा था लेकिन फिर भी अपने मन में सोचने लगी कि एक बार अपने बेटे के लिए अपनी दोनों टांगे खोल देने पर दोनों के बीच का रिश्ता बदल गया है अब वह उसका बेटा बिल्कुल भी नहीं रह गया अब वह पूरा मर्द था और वह एक औरत मां बेटे का रिश्ता दोनों के बीच खत्म हो चुका था,,,,, और मन ही मन कजरी इस रिश्ते से बेहद खुश थी शालू जब तक अपने ससुराल नहीं गई थी तो कचरिया की सोच कर हैरान और परेशान हो जाती थी कि अकेले और कैसे रहता हूं कि घर में लेकिन अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बना लेने के बाद अपने मन में यही सोच रही थी कि अच्छा हुआ की सालु अपने ससुराल चली गई उसके और उसके बेटे के बीच में तीसरा कोई भी नहीं था वह जब चाहे तब अपनी शारीरिक भूख अपने बेटे से मिटा सकती थी,,,,,,

RRaghu or uski ma Kajri

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रघु कि नजर अपनी मां की चूचियों पर थी जोकि पानी भरे गुब्बारे की तरह छातीयो पर लहरा रही थी,,,,जब तक रघु ने अपनी मां को पूरी तरह से नंगी नहीं देखा था तब तक उसके आकर्षण का केंद्र बिंदु केवल उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड थी जो की साड़ी में लिपटी हुई होती थी लेकिन जब से वह अपनी मां को नंगी देख चुका था उसे भोग चुका था तब से उसकी मां की खूबसूरत बदन में ऐसा कोई भी अंग नहीं था जो उसके आकर्षण का केंद्र बिंदु में अपनी मां की खूबसूरत बदन के हर एक अंग को देखकर उसकी उत्तेजना बढ़ जाती थी,,,,इस समय उसे अपनी मां की चूची दशहरी आम की तरह लग रहे थे जिसमें मीठा रस भरा हुआ था और उसे चखने के लिए उसे जोर जोर से दबाना लाजिमी था,,, लेकिन उसकी प्राथमिकता इस समय अपने लंड को उसकी मां के मुंह में डालकर उसे चुसवाना था,,, क्योंकि बड़ी बात बिल्कुल भी नहीं थी ऐसे हालात में लेकिन फिर भी रुको थोड़ा सब्र से काम लेना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां हो सकता है उसके लंड को मुंह में ना लें,,,, इसलिए वो पहले अपनी मां को गरम करना चाहता था क्योंकि उत्तेजना में दुनिया की कोई भी औरत संतुष्टि पाने के लिए कुछ भी कर सकती हैं,,,, इसलिए रघु अपने लंड को जोर-जोर से हिलाते हुए अपनी मां को ललचा रहा था,,,, और उसकी मां अपने बेटे के लंड को देखकर ललच भी रही थी,,,,। इसलिए वह बोली,,,।

अब वहां खड़ा ही रहेगा कि यहां आएगा भी,,,।

(कजरी की बातों में अपने बेटे को पानी की उत्सुकता साफ झलक रही थी इसलिए तो रघू अपनी मां की बात सुनकर बोला,,,)

ओहहह,,,, मेरी रानी को बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा है,,,।

(अपने बेटे के मुंह रानी शब्द सुनते ही कजरी एकदम से शर्मा गई और शर्माते हुए बोली,,,)

तू रानी मत कहा कर,,,,

क्यों,,,,?(अपने लैंड को हिलाते हुए)

क्योंकि मुझे शर्म आती है रानी कह कर तो तेरे पिताजी ने भी आज तक मुझे नहीं बुलाया था,,,,

लेकिन मैं तो बुलाऊंगा क्योंकि तुम मेरी रानी हो मेरी जान मेरी सब कुछ हो,,,,

हरामी में तेरी मां हूं,,,

तो क्या हुआ एक बार तुम्हारी बुर में लंड डालने के बाद हम दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता बिल्कुल भी नहीं रह गया हम दोनों के बीच केवल मर्द और औरत का रिश्ता है,,, तुम खूबसूरत हो जवान हो,,,, मुझे अपना प्रेमी ही समझ लो,,,,,(ऐसा कहते हुए वह खटिया पर बैठ गया,,,अपने बेटे की मधुर बातों को सुनकर कजरी शर्मा रही थी शर्म से पानी पानी हुए जा रहे थे उसे अपने बेटे की बातों का असर अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी बुर में होता हुआ महसूस हो रहा था जोकि धीरे-धीरे गीली होने लगी थी,,, रघु को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां उसकी बातों से एकदम से शर्मा रही है रघु अपनी मां की शर्म देखकर और ज्यादा उत्तेजित हो जाता था उसे रहने की और वह अपने होंठों को नीचे की तरफ लाकर अपनी मां के होठ पर रख दिया और उसे चूमना शुरू कर दिया,,,,,, अपने होठों पर अपने बेटे के होंठों का स्पर्श पाते ही,,, कजरी उत्तेजना से गदगद हो गई,,, और वह अपने बेटे का साथ देते हुएअपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी दोनों के जीभ एक दूसरे के मुंह के अंदर बाहर हो रही थी दोनों एक दूसरे के जीभ को चाट कर मजा ले रहे थे,,,,,, कजरी की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,,

रघु भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था अपना एक नीचे की तरफ लाकर अपनी मां की दोनों टांगों के बीच उसकी बुर पर रख दिया और उसकी गीली बुर में अपनी उंगली डालकर अंदर-बाहर करने लगा,,, कजरी की हालत अपने बेटे की उंगली से ही खराब होने लगी,,,, उसका पूरा बदन कसमसाने लगा,,, रघु की उंगली कजरी की पुर में बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रही थी कजरी उत्तेजना के मारे खटिया पर ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए रगड़ रही थी,,। रघुअपनी मां के होठों पर से अपने होठों को हटाकर उसकी दोनों टांगों के बीच देखने लगा जिसने उसकी उंगली बड़ी तेजी से अंदर बाहर हो रही है और वह से अपनी मां की चूची को पकड़कर जोर-जोर से दबाते हुए बोला,,,,।

आहहहहह,,,, मेरी जान तेरी बुर तो बहुत पानी छोड़ रही है,,,रे जी मैं तो आ रहा है कि खा जाऊं,,,(रघु जोर-जोर से अपनी मां की बुर में उंगली करते हुए बोला,,,)

तो खा जाना रे रोका किसने है,,,(कजरी भी एकदम मदहोश होते हुए बोली,,,, रघु अपनी उत्तेजना को दबा नहीं पाया था और अपनी मां से से बातें कर रहा था कि जैसे किसी और औरत की बुर में उंगली कर रहा है लेकिन जहां तक संभोग में सुख और संतुष्टि की बात आती है तो हर इंसान ही करता है औरत और मर्द चुदाई के दौरान खुलकर गंदी गंदी बातें करके एक दूसरे को गाली देकर बातें करते हैं तो चुदाई का मजा और ज्यादा बढ़ जाता हैयह बात शायद पहली अच्छी तरह से जानती थी इसीलिए अपने बेटे का साथ देते हुए उसी भाषा में बात कर रही थी,,,।)

सच कह रहा हूं मेरी रानी तेरी बुर की मलाई जीभ से चाटने का मन कर रहा है,,,।

तो चाटना मादरचोद मैं भी तड़प रही हूं अपनी मलाई तुझे खिलाने के लिए,,,,।

मादरचोद बोलती है रंडी,,,,(अपनी मां की चूची को और दम लगाकर दबाते हुए बोला और इस तरह से जोर से दबाने की वजह से कजरी के मुंह से आह निकल गई)

आहहहहह,,,, मादरचोद नहीं है तो और क्या है तू अपनी मां को चोदता है तो मादरचोद ही हुआ ना तू भोसड़ी के,,,

हां शाली में हूं मादरचोद लेकिन तू भी छिनार है,,,,आहहहहह बहुत मजा देती है तू,,,,आहहहहहह मन कर रहा है कि घुस जाऊं भोसडै में,,,,

तो घुस जाना मादरचोद,,,, वहीं से तो तू निकला है और उसी में फिर से घुस जा,,,,,आहहहहहह,,, लगता है बिना चोदे ही पानी निकाल देगा मादरचोद,,,,,।

तेरी बुर में पानी की कमी नहीं है मेरी रानी मेरी छम्मक छल्लो तेरी बुर में से पानी की नदियां बह रही है,,, और यह सब कुछ तेरे लंड का करा कराया है,,,, भोसड़ी के तेरा लंड कितना बड़ा है ऐसा लगता है जैसे गधे का लंड है,,,

गधे का लंड ही तो तेरी बुर में जा रहा है मजा नहीं आ रहा है क्या तुझे,,,,(एक साथ अपनी दोनों उंगलियों को अपनी मां की बुर में डालते हुए बोला,,,)

मजा तो बहुत आ रहा है कभी तो तेरे आने से पहले अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर तेरा इंतजार कर रही थी,,,,

मेरे लंड से इतना प्यार है तो ले लेना मुंह में चुस के देख कितना मजा आता है,,,, एकदम गन्ने का मिठास मिलेगा तुझे,,,,।

तो ला डाल दे मेरे मुंह में मैं भी आ जाना मुंह में डालकर तेरे लंड को देखु तो सही कैसा लगता है,,,।

बहुत मजा आएगा रानी बहुत मजा इतना मजा की तू मेरे लंड को मुंह से बाहर नहीं निकालेगी,,,,,(अपरा को बिल्कुल भी देरी नहीं करना चाहता था क्योंकि उसकी मां पूरी तरह से उत्तेजित हो रही थी और उत्तेजना अवस्था में उसके मुंह में लेने की बात कर रही थी,,, इसलिए वह अपनी मां की छाती के ऊपर अपनी दोनों टांगों को घुटनों से मोड़कर खड़ा हो गया और अपनी फ्रेंड को हाथ से हीलाते हुए उसके सुपाड़े को अपनी मां के होठों पर रखकर उसे रगड़ने लगा,,,,, कजरी के लिए यह बिल्कुल नया था,,, क्योंकि आज तक कुछ नहीं अपने पति के लंड को मुंह में नहीं गई थी उसे लंड को मुंह में लेना बहुत घिनौना लगता था,,, रघू बड़ी मस्ती के साथ अपने लंड को अपनी मां के होठों पर रगज रहा था और कजरी अपने होठों को बंद कर ली थी लंड को मुंह में लेने वाली बात को वह उत्तेजना में बोली थी,,,। उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा सच में ऐसा करेगा लेकिन रघु को तो बहुत मजा आ रहा था बार-बार वह अपनी लंड के सुपाड़े को जबरदस्ती अपनी मां के होंठों के बीच घुसेडना चाहता था लेकिन उसकी मां जबरदस्ती अपने होठों को बंद किए हुए थी,,,।

हाय मेरी रानी अब और मत तड़पा मेरा लंड तड़प रहा है तेरे मुंह में जाने के लिए,,,

ऊमममम,,, मुझसे नहीं होगा मैंने कभी इसे अपने मुंह में नहीं ली,,,,

तो एक बार इसे अपने मुंह में ले कर देख मेरी जान बहुत मजा आएगा,,,,, खोल अपने गुलाबी होंठों को और जाने दे मेरे लंड को उसके अंदर,,,,,आहहहहह मेरी रानी खोल,,,,,(ऐसा कहते हुए रघुअपने लंड कैसे पानी को जबरदस्ती अपनी मां के होठों के बीच ले जाने लगा लेकिन इस बारकजरी विरोध ना करते हुए अपने बेटे का साथ देने लगी और अपनी गुलाबी होठों को धीरे से खोल दी और जैसे ही उसके होठों के पट खुले वैसे ही रघु जल्दबाजी दिखाते हुए अपने लंड को उसके मुंह में ठूंस दिया,,,,,,,।

आहहहहह मेरी रानी आप अपनी जीभ को उस पर गोल गोल घुमाओ देखो बहुत मजा आएगा,,,।

और कजरी भी आज्ञाकारी बेटे की बात मानते हुए उसी तरह से करने के लिए जैसा कि रघु बता रहा था थोड़ी देर में कजरी को मजा आने लगा उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि लंड चाटने में इतना मजा आता है,,,।

कजरी को पहली बार में ही इतना मज़ा आने लगा था लेकिन रखो तो जैसे स्वर्ग में उड़ रहा हूं उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी मां इतने अच्छे से उसके लंड की चटाई करेगी,,,,कुछ ही देर में रघु के मुंह से गर्म सिसकारी फूटने लगी जैसा कि अब तक उसकी मां के मुंह से फुट रही थी,,,,।

सहहहहहह,,,आहहहहहह,,, मेरी रानी,,,,ओहहहह,,, मेरी कजरी रानी बहुत मजा आ रहा है ऐसे ही,,,,(और ऐसा कहते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करके अपनी मां के मुंह को ही चोदना शुरू कर दिया,,,,कजरी मजे लेकर अपने बेटे के लंड को चाट रही थी मुंह में लेकर चूस रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, यह बात रघु कोई अच्छी तरह सेसमझ में आ रही थी कि उसकी मां को मजा आ रहा है रघु अपना एक हाथ पीछे की तरफ लाकर फिर से अपनी मां की बुर में उंगली डाल दिया और उसे अंदर-बाहर करने लगा कजरी का मजा बढने लगा था लेकिन रघू इस मजे को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था,,,। इसलिए अपनी मां के मुंह से अपनी लंड को वापस खींच कर अपने आसन को बदल दिया,,, कजरी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन जब उसे पूरी तरह से अपने बेटे की हरकत के बारे में मालूम होगा तो वह उत्तेजना से और खुशी से गदगद हो गई,,,, क्योंकि रघू अपनी मां के ऊपर था,,, और कजरी नीचे लेकिन एक दूसरे का अंग एक दूसरे के मुंह में था,,,कजरिया राम से अपने बेटे का लैंड को मुंह में लेकर चूस रही थी और रघु अपनी मां के बुर में जीभ डालकर चाट रहा था दोनों को एक साथ सुख मिल रहा था,,,,

लालटेन की पीली रोशनी बंद कमरे के अंदर दोनों मां बेटे एक दूसरे के अंगों से भरपूर सुख प्राप्त कर रहे थे,,,, कजरी बार-बार पानी छोड़ रही थी जो कि उसकी बुर की गवाही दे रही थी कि उसे लंड चाहिए था,,,, रघु मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था,,, कई औरतों के संगत में आकर औरतों की जरूरत को बड़े अच्छे तरह से जानता था,,,। कुछ देर तक और अपनी मां की बुर चाटने के बाद वह खड़ा हुआपर अपनी मां की तरफ देखने लगा चौकी उत्तेजना में पूरी तरह से लाल हो चुकी थी उसके होंठों से लार चु रही थी,,,,,, यही मौका सबसे खास होता है क्योंकि उसकी मां पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और उत्तेजना में औरतों की चुदाई औरतों को ज्यादा आनंद देती है,,,,

रघु समय ना गंवाते हुए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया,,, और अपनी मां की बुर में एक झटके में अपना पूरा लंड डाल दिया और दोनों हाथों से अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां पकड़कर उसे दबाते हुए अपने लंड को उसकी बुर में अंदर-बाहर करने लगा,,,। वह अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था और बाहर बारिश गिरना शुरू हो गई थी,,,,रघु के धक्कों की वजह से खटिया चरमरा रही थी कजरी को इस बात का डर था कि कहीं खटिया टूट ना जाए,,,।

आहहहहह आहहहहह आहहहहह हरामी मादरर्चोद और जोर से चोद ,,,आहहहहहह,,,, लेकिन संभाल के कई खटिया टूट ना जाए,,,।

टूट गई तो क्या हुआ मेरी जान,,, मेरी रंडी बुरचोदी,,,, तेरी बुर चोदने के लिए तो मैं पलंग भी तोड़,,दु,,,,(ऐसा कहते हुए रघु जोर जोर से धक्के लगाने लगा,,,, साथ ही बार-बार अपनी मा की चुची को बारी बारी से मुंह में लेकर पी भी रहा था,,, कजरी अपनी बेटी की जबर्दस्त प्रहार की वजह से आहत भी हो रही थी लेकिन मजा भी बता रहा था,,,,)

आहहहहह आहहहहह,,,, हरामजादे कितना दम है रे तेरे में,,,,आहहहहहहहहह,,,,,, सारी ताकत मेरी बुर पर ही निकाल रहा है क्या,,,,(कजरी मस्ती भरे स्वर में बोली)

तो क्या मेरी रंडी,,,, तेरी बुर में ही मुझे अपनी सारी ताकत लगाना है,,,, तभी तो तू मेरे लंड़ की दीवानी होगी,,,।

अब हो तो गई हूं तेरे लंड को बिना मुझे मजा नहीं आता,,, क्या मस्त लंड है तेरा मादरचोद अपनी मां को चोदता है,,,,आहहहहहह,,, रंडी बना दिया है तूने मुझे,,,

और तूने मुझे मादरचोद बना दी है बुर चोदी,,,,,

दोनों मां-बेटे एक दूसरे को गाली गलौज के साथ बात करते हुए चुदाई का परम आनंद लूट रहे थे,,, ऐसा सुख कजरी में कभी जिंदगी में प्राप्त नहीं की थी और ना ही रघु ने,,, कई औरतों के साथ चुदाई का खेल खेलने के बावजूद भी जो मजा उसे अपनी मां के साथ आ रहा था वैसा मजा उसे किसी के साथ नही आया था,,,

फच्च फच्च की आवाज कजरी कीबुर से लगातार आ रही थी,,,, कचरी की ओखली में उसका बेटा लगातार अपना मुसल मार रहा था,,,, जबरदस्त आनंद की पराकाष्ठा को दोनों प्राप्त कर रहे थे घर के बाहर बारिश तेज हो चुकी थी और इधर रघु अपनी मां की बुर में पानी की बौछार करने वाला था,,,ईस बार का सावन कजरी के लिए बहुत खास था क्योंकि वर्षों से उसकी सूखी जमीन पर सावन की फुहार नहीं पड़ी थी लेकिन सावन के शुरू होते ही उसकी सूखी जमीन पर सावन की फुहार मानो अपनी कृपा बरसा रही हो,,, उसकी सूखी जमीन सावन की फुहार से एकदम गीली चली थी,,,,।

देखते ही देखते कजरी की सांसे बड़ी तेज चलने लगी,,, रघु समझ गया और अपने दोनों हाथ के नीचे से डालकर अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया और अपने सीने से लगाकर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाने लगा,,, थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ झड़ गए,,,दरवाजा लग जाने की वजह से दोनों निश्चिंत होकर उसी तरह से सो गए रघु का लंड अभी भी उसकी मां की बुर,,, बाहर पक्षियों के चहकने की आवाज से कजरी की नींद खुली तो,, उसका बेटा उसके ऊपर ही सोया हुआ था कजरी को अपने बेटे पर बहुत प्यार आ रहा था और वह उसके बारे में उंगली डालकर सहलाने लगी,,,,रघु की नींद खुल गई और नींद खुलते ही वह अपने होंठों को अपनी मां के होठों पर रखकर चुंबन करने लगा,,,, थोड़ी देर बाद वह अपने बेटे से बोली,,,।

Raghu or Kajri

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रघु मुझे एक बात सच सच बताना,,, शालू के पेट में किसका बच्चा है,,,,?
 
अपनी मां का सवाल सुनते हो रघु एकदम से चौंक उठा उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसकी मां इस तरह का सवाल पूछ बैठेगी,,, लेकिन यह सवाल उसकी मां के मन में आया कैसे इस बारे में वह पूरी तरह से अनजान और परेशान भी था,,, फिर भी निश्चिंत होकर वह अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए बोला,,।

कैसी बातें कर रही हो मां बिरजू का और किसका,,,, और यह बात तो तुमने ही मुझे बताई थी,,,,,,।

लेकिन मुझे विश्वास नहीं होता की शालू ऐसा कर सकती है,,,।

सब कुछ तुम्हारे सामने ही तो था मां,,,( वह अभी भी पूरी तरह से नंगा अपनी मंकी मां पर लेटा हुआ था लेकिन ऐसा कहते हुए वह अपनी मां के ऊपर से उठने लगा और खटिया के पाटी पर बैठ गया,,,)

नहीं नहीं सब कुछ मेरी आंखों के सामने नहीं था यह तो मेरी आंखों के सामने बात नहीं लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है,,,।

कैसी बातें कर रही हो मां,,,,,, क्या हो गया है तुम्हें आज बहकी बहकी बातें कर रही हो,,,,(रघु अपनी मां से नजरे चुराता हुआ बोला,,, उसके मन में शंका हो रही थी कि कहीं उसकी मां को कुछ पता तो नहीं चल गया इसलिए वह इस समय अपनी मां से कतरा रहा था लेकिन कजरी सब कुछ जानती थी वह बस अपने बेटे के मुंह से सुनना चाहती थी,,,)

बहकी बहकी बातें नहीं कर रही हूं लेकिन मैं तेरे मुंह से सच सुनना चाहती हूं,,,, तुम दोनों भाई बहन मिलकर मुझे क्या पट्टी पढ़ा गई मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है लेकिन कुछ तो हुआ है,,, ,,,(कजरी भी खटिया पर बैठते हुए अपने बदन पर चादर डालते हुए बोली,,,)

अब क्या बताऊं बिरजू और शालू दोनों एक दूसरे को प्यार करते थे और दोनों के बीच कब क्या हो गया पता ही नहीं चला,,,

चल यह बात तो मैं मानती हूं,,, कि उन दोनों में प्यार था और वह दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे,,,,,, लेकिन रघू मैं तेरी मां हूं तुम दोनों की मां हु मुझे इतना तो पता चलता ही है कि मेरे पीठ पीछे मेरे बच्चे क्या गुल खिला रहे हैं,,,,(रघु की आंखों में झांकते हुए बोली रघु एकदम से सकपका गया,,, उसे समझते देर नहीं लगी कि उसकी मां को पता चल गया है कि उसके और उसकी बहन के बीच में कुछ चल रहा है,,,, फिर भी बात को घुमाते हुए वह बोला,,,)

क्या बात तुम भी बे मतलब की बातें कर रही हो,,,

बेमतलब की नहीं बेटा मैं सच कह रही हुं,,,, क्योंकि मैंने तुम दोनों को छत पर चुदाई करते हुए देख ली थी,,,,(अपनी मां की बात सुनते ही रघु की आंखें चौड़ी हो गई क्योंकि वह अभी तक ही समझ रहा था कि उन दोनों के बीच के रिश्ते के बारे में किसी को कानों कान खबर नहीं थी लेकिन अपनी मां की बात सुनकर रघु दिन से हैरान हो गया था,,,बात को बदलने के लिए उसके पास कोई भी बहाना नहीं था क्योंकि जो कुछ भी उसकी मां कह रही थी वह बिल्कुल सच था,,,, कजरी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली ,,,,)

लेकिन उस समय में कुछ नहीं बोली क्योंकि बहुत बड़ी जो हमारे सर पर भी पता थी वह माथे से दूर होने वाली थी और सिर्फ तेरी वजह से इसलिए मैं खामोश रही लेकिन आज मैं तुझसे यह कह रही हूं,,,,,,(रघु के पास बोलने के लिए कुछ भी नहीं था बस शर्म से अपना सर नीचे झुकाए खटिया के पाटी पर बैठा था,,,) अब इंकार करने से कोई फायदा नहीं मैं अपनी आंखों से देखी थी तू अपनी बड़ी बहन को चोद रहा था और वह भी खूब मजे ले रही थी,,,,, लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आता कि सालु इतनी समझदार और भोली भाली होने के बावजूद ऐसे कदम क्यों उठा ली,,, (रघु शर्म से नजरे झुकाए बैठा हुआ था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले,,,यह बात कजरी भी अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से उन दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया उसी तरह से उन दोनों भाई-बहन के बीच की सारी संबंध स्थापित हो गया होगा इसमें कुछ गलत कजरी को बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा था क्योंकि वह खुद मां होने के बावजूद भी अपनी बेटे के साथ ही चुदाई का भरपूर आनंद लूट रही थी,,,।)

तू कुछ बताएगा भी कि ईसी तरह से खामोश बैठा रहेगा,,,

मममम,,, मैं क्या बोलूं कुछ समझ में नहीं आ रहा,,,,

जो कुछ भी हुआ वह सब मुझे बता दे मैं तुझे मारने पीटने वाली या तुझे भला बुरा कहने वाली नहीं हूं क्योंकि अब हम तीनों एक ही कश्ती पर सवार, है,,,।(इतना कहने के साथ ही कचरी अपने बदन पर डाले हुए चादर को हटा दी और एक बार फिर से निर्वस्त्र हो गई क्योंकि वह रघु को यह बताना चाहती थी कि अब उसे शर्म करने की कोई भी आवश्यकता नहीं है,,,खास करके तब जब एक बेटा खुद अपनी मां के साथ शारीरिक संबंध बना देता है और एक मां खुद अपने बेटे से संतुष्ट होती है,,,। चादर के हटते ही रघु की नजर अपनी मां की छातियों पर चली गई जो कि सुबह-सुबह और भी ज्यादा खूबसूरत और उत्तेजक नजर आ रही थी,,,, कचरी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

शालू के पेट में तेरा ही बच्चा है ना,,,,

(अपनी मां का यह सवाल सुन कर रखो अपनी मां की आंखों में देखने लगा लेकिन उसे अपनी मां की आंखों में जरा भी गुस्सा क्रोध नजर नहीं आ रहा था बल्कि सच जानने की उत्सुकता नजर आ रही थी और जैसा कि उसकी मां ने बताया कि वह तीनों एक ही कश्ती पर सवार है तो रघू को इस बात से थोड़ी हिम्मत मिलने लगी,,,, वह भी अपनी मां को सब सच बताने का ठान लिया था और अपनी मां का यह सवाल सुनते ही बोला,,,,)

तुम ठीक कह रही हो मां,,,, दीदी के पेट में मेरा ही बच्चा है,,,।

(यह सुनते ही कजरी का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया हालांकि उसे पूरी तरह से शक हो चुका था कि उसकी बेटी के पेट में उसके ही बेटे का बच्चा है,,,,)

लेकिन यह सब हुआ कैसे क्योंकि शालु जैसी लड़की सच कहूं तो मुझे यकीन नहीं हो रहा है,,,,

मुझे भी यकीन नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी हुआ था,,, वहीं सच था,,, मैं अंदर कमरे में इसी कमरे में सोया हुआ था,,, और सुबह सुबह शालू मुझे जगाने के लिए आई थी,,,, तुम तो जानती हो मा कि मैं तोलिया लपेट कर सकता हूं नींद में इधर-उधर तोलिया हो गया था,,,, और मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था मैं गहरी नींद में था शालू मुझे जगाने आई और उसकी नजर मेरे लंड पर पड़ गई,,,, और वह ना जाने क्यों बिना कुछ सोचे समझे मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ ली और हीलाने लगी,,,, मेरी नींद खुली तो मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था वह मुझे नहीं देख पाई थी कि मैं जाग गया हूं मैं उसी तरह से आंखें बंद कर लिया क्योंकि तुम तो अच्छी तरह से जानती हो मां की उस तरह का पल एक जवान लड़के के लिए कैसा होता है,,,।

(अपने बेटे की बातें सुनकर और वह भी अपनी बेटी के बारे में उसकी गंदी हरकत के बारे में सुनकर ही कजरी के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी क्योंकि वह शालू को कभी भी गंदा काम करते हुए सोची नहीं थी और अपने बेटे के मुंह से सुनकर यह पहली मर्तबा था जब वह सालु के बारे में पूरी तरह से कल्पना कर रही थी की उस दिन क्या क्या हुआ होगा कैसा लग रहा होगा रघु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

वह मेरा लंड हीलाना शुरू कर दी थी मुझे अच्छा लग रहा था,,, मैं देखना चाहता था कि वह और क्या करती है और तभी बाहर किसी की आवाज आई और वो तुरंत भाग खड़ी हुई,,,, इसी तरह से दूसरे दिन भी हुआ लेकिन मेरी हालत एकदम खराब हो गई मुझसे रहा नहीं गया और मैं दीदी का हाथ पकड़ लिया और उसके बाद वह सब कुछ हो गया जो नहीं होना चाहिए था,,,। और यह सिलसिला रोज का हो क्या एक तरह से कहूं तो दीदी मेरे लंड की दीवानी हो गई थी बिना मेरे लंड को अपनी बुर में लिए उनका मन नहीं मानता था,,,,(रघु बिना रुके बोले जा रहा था साथ ही अपनी बहन के बारे में और खुद के बारे में इतनी गंदी बात बताते हुए उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी साथ ही अपनी मां की नंगी चूची को देखकर उसकी उत्तेजना और पढ़ रही थी और वहां अपना हाथ आगे बढ़ाकर एक हाथ से अपनी मां की चूची को दबा भी रहा था और बात को आगे भी बढ़ा रहा था,,,) हम दोनों रोज चुदाई करते हैं छत पर तुम्हारे सो जाने के बाद हमें हमेशा दीदी के पास चला जाता था और दीदी की जमकर चुदाई करता था और ऐसे ही किसी दिन तुम्हारी नजर हम दोनों पर पड़ गई होगी,,,,।

हां रात को मेरी नींद खुल गई थी तो तुम दोनों पर मेरी नजर पड़ गई थी लेकिन तब तक तो शालू पेट से हो चुकी थी मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि तुम दोनों ने मिलकर अपनी गलती उस बिरजू के मत्थे क्यों चढ़ दीए और कैसे,,,,,,,(कजरी को अपने बेटे के हाथों से स्तन मर्दन कराना अच्छा लग रहा था,,,कजरी के मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी आगे की कहानी सुनने के लिए क्योंकि मैं जानना चाहती थी कि साल और उसका बेटा मिलकर कैसे अपनी करनी को दूसरे के मत्थे की लकीर बना दिए थे,,,,रघु जवाब देता हुआ बोला लेकिन अपनी मां की चूची दबाते दबाते उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होने लगा था और कजरी की भी नजर अपने बेटे के दोनों टांगों के बीच झूलते हुए उस लंड पर पड़ चुकी थी जो कि रात भर उसकी बुर के अंदर शरण लिए हुए था,,,, और उसे देख कर उसकी बुर कुलबुलाने लगी थी,,,)

मैं अच्छी तरह से जानता था कि बिरजू सालु से प्यार करता है और उसके साथ हीविवाह करना चाहता है चालू नहीं बताई थी कि उसके साथ वह चुदाई का सुख प्राप्त करना चाहता था लेकिन सालु आगे बढ़ने नहीं देना चाहती थी,,,।

फिर क्या हुआ,,,?(इस बार कजरी से रहा नहीं गया और वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर रघु के लंड को अपने हाथ में पकड़ लि और उसे हिलाना शुरू कर दी,,,, जिससे रघु की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी।)

फिर क्या था हम दोनों ने षड्यंत्र रचाया,,,, बिरजू को फंसाने का क्योंकि वह पहले से ही शालु पर मरता था और वह आलू को चोदना भी चाहता था और इसी का फायदा उठाकर मैं दीदी को सारी पट्टी पढ़ा दिया और पट्टी पढ़ाने के बादशालू से बोला कि वह आम वाले बगीचे में उसे बुलाया और वहां पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और ऐसा ही हुआ शालू बिरजू को आम वाले बगीचे में बुलाई और उसके साथ चुदवाई,,,, उस बेचारे को तो मालूम ही नहीं था कि उसके चोदने से पहले ही शालू पेट से हो चुकी है और शालू यह बात जानती थी कि वह इस मामले में पूरी तरह से गिरते हुए उसे समय का बिल्कुल भी भाग नहीं होता और इसी का फायदा उठाते हुए मैंने बड़ी मालकिन से इस बारे में बात किया था और तब जाकर शालू की शादी बिरजू से हुई,,,।

अपने बेटे की बात सुनते ही आश्चर्य और खुशी से कजरी की आंखें चोडी हो गई,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह रखो को क्या बोले उसे डांटे फटकारे मारे या भला बुरा कहे,,, क्योंकि जो कुछ भी हुआ था उसमें रघु की गलती सरासर थी लेकिन एक बड़ी समस्या से निकालकर चालू की अच्छे घर में विवाह भी उसी ने ही संपन्न करवाया था,,,, अगर कजरी अपने बेटे के साथ शारीरिक संबंध बनाकर उसे से चुदवाने का हनन देना लूट रही होती तो शायद अपनी बेटी और अपनी बेटी के पीछे सारी संबंध को लेकर कजरी बवाल मचा चुकी होती या तो फिर उसे दिल का दौरा पड़ चुका होता लेकिन अब वह इस रिश्ते से खुश थी ,,,,

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बाप रे मेरी पीठ पीछे तुम दोनों ने इतना बड़ा षड्यंत्र रचा दिया और मुझे इसकी भनक तक नहीं लगी वह तो अच्छा हुआ था कि मैं रात को छत पर तुम दोनों की कामलीला को अपनी आंखों से देख चुकी थी वरना मुझे जिंदगी में कभी भी पता नहीं चलता कि मेरे ही घर में मेरे बेटे और बेटी आपस में चुदाई का मजा लूट रहे है,,,।

जैसे कि हम दोनों,,,(रघु अपना दूसरा हाथ भी अपनी मां की चूची पर रख कर दबातें हुए बोला,,, और रघु ने इतनी मस्ती भरी अदा सेअपनी मां की चूची दबाया था कि उसके मुंह से गर्म सिसकारी फुट पड़ी,,,, और अपनी मां की उत्तेजना का रघु पूरी तरह से फायदा उठा देना चाहता था वह नहीं चाहता था कि उसके और उसकी बहन के बीच 4 दिसंबर को लेकर उसकी मां उसे भला-बुरा का है इससे पहले वह अपनी मां को पूरी तरह से अपनी आगोश में ले लेना चाहता था ताकि वह भी सब कुछ भूल कर उन दोनों के रिश्ते पर अपनी सम्मति की मुहर लगा दे,,,, और इसीलिए रघू तुरंत अपनी मां पर झुकता हुआ अपने होठों को उसके होठों पर रखकर उसके लाल-लाल होठों को चूसना शुरू कर दिया और खटिए पर चित लिटा दिया उसकी दोनों टांगों के बीच आकर अपने खड़े लंड को हाथ से पकड़ कर उसे अच्छी तरह से अपनी मां की गुलाबी बुर्के गुलाबी छेद पर लगाकर हल्का सा धक्का मारा और उसका लंड फिर से कजरी की बुर में समा गया,,,, हल्की सी आह की आवाज के साथकजरी ने अपने बेटे के लंड को अपनी बुर की गहराई में समा लेने के लिए आमंत्रण दिया,,, और फिर क्या था एक बार फिर से रघु अपनी मां की बुर में समा गया था,,,उसकी दोनों बड़ी बड़ी चूची को अपने हाथों में पकड़ कर वह अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था,,,, पर एक बार फिर से कजरी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड की आगोश में अपनी जवानी को समेट कर उसे सौंप चुकी थी,,, और गर्म सिसकारी लेते हुए चुदाई का मजा लूट रही थी,,,,

थोड़ी देर बाद दोनों शांत हो गए सुबह हो चुकी थी लोग अपने अपने खेतों पर जा रहे थे इसलिए कजरी अपने ऊपर से अपने बेटे को हटाते हुए बोली,,,,।

चल हट अब उठ जा घर का काम भी करना है खेतों में भी जाना है,,, शालू अपने ससुराल में है इसलिए मुझे ही ढेर सारा काम करना पड़ता है,,,,।

तुम कहो तो मा,, मै शालु को कुछ दिनों के लिए ले आऊ,,,।

क्यों क्या करने के लिए उसकी चुदाई करने के लिए,,,

अरे नहीं मा,,,(रघु अपनी मां के ऊपर से उठता हुआ बोला,,) पहली बार है ना शालू के बिना यह घर अच्छा नहीं लगता,,,(नीचे जमीन पर गिरी अपने पजामे को उठाकर पांव में डालते हुए बोला,,, कजरी भी खटिया के नीचे गिरी अपनी साड़ी को नीचे छुपकर उठाते हुए बोली,,,)

क्या मालकिन उसे आने के लिए राजी होंगी,,,।

यह सब तुम मुझ पर छोड़ दो तुमसे इजाजत तो मैं इस रविवार को ही जाकर ले जाऊंगा,,,

ठीक है जैसी तेरी मर्जी वैसे भी उसके बिना अच्छा तो नहीं लगता लेकिन उसके आ जाने पर हम दोनों के बीच यह मधुर मिलन नहीं हो पाएगा,,,,।

कैसे नहीं हो पाएगा मां,,,,,(पजामा पहन कर फिर से खटिया के पाटी पर बैठता हुआ बोला)

पागल हो गया क्या शालू की मौजूदगी में मैं तेरे लिए अपनी टांगे खोलने वाली नहीं हूं,,,,(खटिया पर बैठे-बैठे ही अपने पेटिकोट को उठाकर अपनी पांव में डालकर उसे अपनी कमर की तरफ खींचते हुए बोली,,,)

तुम अकेले अपनी दोनों टांगे नहीं खोल सकती लेकिन सोचो अगर तुम दोनों मिलकर अपनी दोनों टांगे मेरे लिए खोलो तो,,,

(अपने बेटे की बात सुनते ही कजरी एकदम से सन्न रह गई ,,)

क्या पागल हो गया है क्या शालू और मैं दोनों एक साथ,,, तू सच में पागल हो गया है,,( खटिया से नीचे उतरकर अपने पेटीकोट की डोरी को बांधते हुए बोली)

अरे हो सकता है क्यो नहीं हो सकता क्या तुम दोनों की चुदाई में एक साथ नहीं कर सकता,,,, मेरे लंड में बहुत दम है मेरा लंड एक साथ तुम दोनों मां बेटी की बुर में जाकर तुम दोनों का पानी निकाल सकता है,,,।

चल रहने दे अपने लंड की बढ़ाई करने के लिए,,,,(साड़ी को अपनी कमर से बांधते हुए बोली,,,,)

अरे मां जरा तुम भी सोचो कितना मजा आएगा,,, हम तीनों एक साथ एकदम नंगे तुम भी नंगी दीदी भी और मैं भी,,, मैं कभी तुम्हारी बुर चाट रहा हूं तो कभी दीदी की कभी तुम्हारे मुंह से गर्म सिसकारी निकल रही है तो कभी दीदी के और कभी तो मेरा लंड चाट रही हो तो कभी दीदी और वह भी एक दूसरे के सामने कितना मजा आएगा सोचो चल मेरा लंड तुम्हारी बुर से निकलकर दीदी की बुर में जाएगा एक साथ हम तीनों कितना मजई आएगा मां जरा सोचो,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर कजरी खुद कल्पनाओ कि दुनिया में खोने लगी जैसा जैसा रघु बता रहा था वैसा वैसा वह अपने मन में कल्पना कर रही थी उसके तन बदन में अजीब सी हलचल के साथ-साथ ऊलझन भी हो रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी बेटी के सामने अपने कपड़े कैसे उतार पाएगी,,,। हालांकि अपनी बेटी की बात सुनकर उसके भी मन में अपनी बेटी की मौजूदगी में अपने कपड़े उतार कर अपने ही बेटे के साथ चुदाई का सुख भोगने के लिए उत्सुकता बढ़ती जा रही थी लेकिन अपने मुंह से खुलकर कुछ बोल नहीं पा रही थी इसलिए वह बोली,,,)

तेरी मर्जी में जो आए वह कर,,,,(इतना कहकर वह कमरे से बाहर जाने लगी तो रखो खुश होता हुआ बोला)

तो ठीक है मैं ऐसी रविवार को दीदी को लेने के लिए जा रहा हूं,,,,।

(कजरी यह सोचकर ही मदहोश हुए जा रही थी कि,,,कितना बजे आएगा जब उसका बेटा और उसकी बेटी और वह खुद नंगी होकर एक दूसरे के साथ मजा लेंगे,,,, देखते-देखते रविवार का दिन आ गया और बड़े सवेरे ही रघु तैयार होकर जमीदार के घर पहुंच गया,,, जमीदार की बीवी रघु को देखते ही एकदम खुश हो गई,,, और उसका आवभगत करते हुए बोली,,,,)

आओ रघू तुम्हारा इंतजार में हमेशा करती रहती हूं लेकिन तुम हो की यहां का रास्ता ही भूल गए हो,,

नहीं मालकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,,, मैं तो रोज ही यहां आना चाहता हूं लेकिन अब यह मेरी दीदी का ससुराल है इसलिए थोड़ा सबर करता हूं,,,,

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हर यह तुम्हारा ही घर है यहां जब चाहो तब आ सकते हो कोई पाबंदी नहीं है,,,,

जमीदार कैसे हैं,,,(पलंग पर लेटे हुए जमीदार की तरफ देखते हुए बोला,,,)

जैसा छोड़ कर गए थे वैसे ही है,,,,

(रघु को देखते ही जमीदार की आंखें तन गई उसका गुस्सा बढ़ गया आखिर बढ़ता भी कि नहीं उसकी हालत का जिम्मेदार भी तो वही था उसकी आंखों के सामने ही उसकी औरत की चुदाई करता था,,,, एक नजर जमीदार के ऊपर डाल कर वह मालकिन से बोला,,,।)

बड़ी मालकिन बुरा ना मानो तो एक बात कहूं,,,।

कहो रघु इसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है,,,।

पहली बार सालु घर से इतना दूर गई है,,, मतलब कि यह उसका ही घर है लेकिन मां बहुत परेशान रहती है मैं सोच रहा था कि कुछ दिनों के लिए चालू कर घर ले जाता तो मां को थोड़ी शांति मिल जाती और मैं वापस आकर छोड़ जाऊंगा,,,,।

क्यों नहीं रघू मैं समझ सकती हूं,,,, लेकिन जो आग मेरे अंदर लगी है शायद तुम नहीं समझ पा रहे हो,,,, अपनी बहन को तुम ले जा सकते हो लेकिन उससे पहले मेरी आग बुझाना होगा,,,,(रघु कुछ कह पाता इससे पहले ही जमीदार की बीवी अपनी साड़ी कमर तक उठा दी और रघु के सामने अपनी नंगी बुर परोश,,,दी,,, रघु बड़ी मालकिन की कमजोरी अच्छी तरह से जानता था,,,, और वह जमीदार की आंखों के सामने ही आगे बढ़ा और जमीदार की बीवी को अपनी बाहों में भर कर के लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसके लाल-लाल होठों को चूसना शुरू कर दिया जमीदार अपनी आंखों से देख कर पागल हुआ जा रहा था लेकिन कुछ भी कर नहीं पा रहा था,,, और देखते ही देखते रघु अपनी बहन के सास की चुचियों से खेलता हुआ,,, उसे जमीदार के पलंग पर ही झुका दिया उसकी साड़ी कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड पर जोर से चपत लगाते हुए अपने मुसल को जमीदार की बीवी की ओखली में डाल दिया,,,, जमीदार के कमरे में जमीदार की बीवी की गरम सिसकारी बुझने लगी जिसे सुनकर जमीदार गुस्से से भरता चला जा रहा था,,। लेकिन कुछ कर नहीं पा रहा था जमीदार की बीवी को कितना मजा मिल रहा है उसके चेहरे को देख कर ही पता चल रहा था और रघु भी कस कस के धक्के लगा रहा था उसी समय जमीदार की दूध पीने का समय हो रहा था,,, और दूध पिलाने का जिम्मा शालू का था इसलिए वह रोज की तरह गिलास लेकर जमीदार की कमरे की तरफ आगे बढ़ रही थी और जैसे ही दरवाजे पर पहुंची उसे कमरे में से अजीब अजीब लेकिन जानी पहचानी आवाज सुनाई देने लगी उस आवाज को सुनकर वह एकदम से चौक गई,,,, जमीदार की बीवी अपनी जवानी का जोश ठंडा करने के चक्कर में दरवाजा बंद करना भूल गई थी दरवाजा थोड़ा सा खुला था और जब शालू थोड़े से खुले दरवाजे में अंदर की तरफ झांककर देखी तो दंग रह गई,,,

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उसकी सास अपने पति के सामने पलंग के ऊपर झुकी हुई थी और गांड उपर की तरफ उठाई हुई थी और चुदवा रही थी,,, लेकिन किस से लेकिन यह उसे साफ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन ध्यान से देखने पर उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई क्योंकि उसे साफ नजर आ रहा था कि उसकी सांस के पीछे उसका भाई रघु खड़ा था जोकि उसकी सास को चोद रहा था शालू वहां खड़ी नहीं रह सकी और वापस रसोई घर की तरफ चली गई,,,, थोड़ी देर बाद लौटी तो सब कुछ शांत हो चुका था,,,लेकिन यह खबर सुनते ही की रघू उसे लेने आया है तो वह खुश हो गई,,, सब से आशीर्वाद लेकर चालू अपने घर की तरफ निकल गई लेकिन उसकी सास नहीं रघु को तांगा ले जाने के लिए बोली और रघु तांगे में अपनी बहन को बैठा कर अपने घर की तरफ ले जाने लगा ,,,, शालू को समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी बड़ी हवेली की मालकिन उसके भाई से क्यों चुदवा रही थी,,,। यही जानने के लिए वह बोली,,,।

क्यों रे अंदर क्या हो रहा था,,,

कहां,,,?

बाबूजी के कमरे में उनकी आंखों के सामने ही,,,,।

अच्छा तो तुझे पता चल गया,,,,(रघु हंसते हुए बोला)

हंस मत यह सब कैसे हो गया मुझे बता,,,

अरे यह सब बहुत पहले से चल रहा है तुझे याद है ना मैं मालकिन को उनके मायके लेकर गया था वही रास्ते में ही हम दोनों के बीच जुदाई का खेल शुरू हो गया,,, तू तो जानती ही है कि तेरी सांस कितनी जवान है और तेरे बाबूजी तेरे ससुर बूढ़े हो चुके हैं और अब तो बिस्तर ही पकड़ लिए है,,,, जवान औरतों की अपनी ख्वाहिश होती है खास करके चुदवाने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हो रही थी तो रास्ते में ही मेरे लंड से चुदवाना शुरू कर दी,,,, और यह सिलसिला अभी तक जारी है,,,,।

बाप रे मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है वह सभ्यता की मूरत इतनी शालीनता से रहती है इतनी संस्कारों वाली है,,,वह ऐसी होंगी उनके बारे में तो मैं सपने में भी कभी नहीं सोच सकती थी,,,,

अरे दीदी तू नहीं जानती जो सीधी सादी होती हैं खास करके उन में ही जवानी की आग भरी होती है,,, तेरी जेठानी राधा वह क्या कम है,,,

क्या मतलब,,,?(आश्चर्य जताते हुए शालू बोली)

मतलब यही कि तेरी जेठानी भी मेरे लंड का स्वाद अच्छा हो चुकी है,,,,।

क्या,,,?

तो क्या दोनों की चुदाई करने के बाद ही तो तेरा उस घर में जाने का रास्ता साफ हुआ है,,, क्योंकि उन दोनों की सबसे बड़ी कमजोरी है मेरा लंड,,, जब तक मेरा लंड समय-समय पर उन दोनों की बुर में ज्यादा रहेगा तब तक तो उस घर में रानी की तरह राज करेगी इसलिए मुझे समय समय पर उन दोनों की सेवा करनी ही पड़ेगी,,,।

(तांगा अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता चला जा रहा था और साथ में एक के बाद एक राज पर से पर्दा खुलता चला जा रहा था,,,)

और यह भी सुन तेरे बाद ही तेरी जिठानी और तेरी सास दोनों मां बनेंगी जिसका बाप मैं ही हूं,,,,,

(शालू की तो आंखें आश्चर्य से चोडा होती चली जा रही थी,,उसे तो अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी अपनी आंखों से देखी थी वह बिल्कुल सच था और जो कुछ भी रघु कह रहा था वह सच होने वाला था,,,)

बाप रे इतना कुछ हो गया और मुझे पता नहीं चला,,,।

अरे दीदी बहुत कुछ बदल गया है घर चलोगी तो सब पता चल जाएगा,,,,।

(इतना कहने के साथ ही रघु और जोर से तांगा हांकने लगा,,,)
 
रघु सालु को कुछ ही देर में घर पर लेकर आ गया शालू को देखते हुए उसकी मां बहुत खुश हुई,,,, कजरी अपने मन में सोच रही थी कि भले ही उसकी बेटी कैसी भी हो लेकिन उसके लिए थी तो उसके जिगर का टुकड़ा है इसलिए तो उसके दूर रहने पर उसका मन कचोट रहा था लेकिन उसे अपनी आंखों के सामने देखते ही वह फिर से खुश हो चुकी थी और उसे गले लगा कर रोने लगी थी,,,,। शालू के मायके वापस लौटने की खबर सुनते ही उसकी सहेलियां भी उससे मिलने के लिए आ गई और हाल-चाल पूछने के बाद वापस अपने अपने घर लौट गई,,,

शालू के मन में अभी भी ससुराल वाला दृश्य घूम रहा था जहां पर उसकी सास अपने कमरे में अपने ही पति की आंखों के सामने उसके भाई का लंड अपनी बुर में ले रही थी,,, शालू ने जो कुछ भी अपनी आंखों से देखी थी वह उसके लिए बेहद अजीब था,,,क्योंकि बहुत अच्छी तरह से जानती थी कि उसके परिवार में और जमीदार के परिवार में जमीन आसमान का फर्क था तो उसकी किस्मत अच्छी थी कि जमीदार की परिवार की बहू बन चुकी थी लेकिन यह बात उससे अभी भी हजम नहीं हो रही थी,,, कि जमींदार की बीवी उसके भाई के साथ शारीरिक संबंध बनाती है,,, क्योंकि वह बड़े घर की बहू थी मालकिन थी,,,, लेकिन जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से देखी थी उसे झुठलाया भी नहीं जा सकता था,,और उसके भाई ने भी तो खुद ही बताया था कि जब उसके मायके ले जा रहा था तभी यह संबंध स्थापित हुआ था,,,, शालू अपनी भाई की बातों पर गौर कर रही थी पर अच्छी तरह से इन बातों को समझ रही थी क्योंकि जो कुछ भी उसके भाई ने बताया था वह बिल्कुल सच ही था क्योंकि उसकी सास अभी भी पूरी तरह से जवान थी और उसके ससुर बूढ़े और बिस्तर पकड़ लिया था ऐसे में औरतों का अरमान उनकी खुशियां भी मायने रखती है,,,,और इसीलिए जमीदार की बीवी और बड़े घर की बहू होने के बावजूद भी वह रघु के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी खुशी पूरी कर रही है,,, और इस कार्य में उसकी जेठानी राधा भी शामिल थी,,,,वह अपने मन में सोचने लगी कि उसका भाई सच ही कह रहा था कि वह दोनों उसके लंड की दीवानी हो चुकी हैं जैसे कि वह खुद हो चुकी थी और अभी भी है,,, एक बार रघु का लंड कोई भी औरत अपनी बुर में ले ले तो दोबारा लिए बिना उसका मन नहीं मानता और यही सब कुछ हो गया था इस बात पर वह खुद मुस्कुरा दी,,, और घर के काम में हाथ बटाने लगी,,, उसकी मां खेतों पर जा चुकी थी,,, रघु इधर-उधर घूम कर मटरगश्ती कर रहा था सॉरी इस बात से अनजान थे कि उसकी और उसके भाई के बीच की हकीकत को उसकी मां अच्छी तरह से जान चुकी थी और रघु से कबूल भी करवा ली थी,,, इसलिए वहइस संबंध में पूरी तरह से निश्चित की और अपने भाई का ही इंतजार कर रही थी क्योंकि शादी के बाद बिरजू उसे रोज चोदता तो था लेकिन उसे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता था,,,,दिन-रात बिरजू के साथ होने के बावजूद भी वहां अपने भाई का ही सपना देखती रहती थी और आज अपने घर पर पहुंचने के बाद वह अपनी इच्छा पूरी कर लेना चाहती थी,,,, घर का सारा काम करने के बाद वह,,, घर में चारपाई पर लेट कर आराम कर रही थी कि तभी उसका ध्यान आगे के द्वार पर लगे दरवाजे पर गया तो उसे थोड़ा अजीब लगा और वह अपने मन में सोचने लगी ईतने वर्षों में तो कभी भी दरवाजा नहीं लगा था तो उसके जाने के बाद ही दरवाजा क्यों लग गया इसका जवाब शायद उसे नहीं मिल पा रहा था,,,,।

थोड़ी देर बाद रघु घर पर वापस आ गया और सीधा अंदर के कमरे में पहुंच गया जहां पर,,, शालू साड़ी पहने लेटी हुई थी,,,, विवाह के बाद शालू की मदमस्त जवानी और ज्यादा उफान मार रही थी,,, जिसका अंदाजा रघू उसके ब्लाउज के उठाव को देखकर ही लगा लिया था,,,,,, वह जानता था कि कभी भी अपनी बहन की चुदाई कर सकता था इसलिए इत्मीनान से उसके खूबसूरत यौवन को खटिया के पास खड़ा होकर देखता रह गया,,,, जरा सी आहट मिलते ही सालु की नींद खुल गई तो उसकी नजर रघू पर पड़ी जो कि उसे ही घूर रहा था,,,।

ऐसे क्या देख रहा है कभी देखा नहीं क्या,,,

देखा तो बहुत बार हो और वह भी बिना कपड़ों के लेकिन विवाह के बाद आज पहली बार देख रहा हूं तू तो और ज्यादा खूबसूरत लग रही है,,,,(पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसलते हुए बोला,,,) लगता है जीजा दिन रात तेरी ले रहा है,,,,।

ओ मुआ लेता तो है लेकिन तेरे जितना मजा नहीं दे पाता,,,

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क्यों मेरा लंड ज्यादा मजा देता है क्या,,,?( पजामें को नीचे सरका कर अपने लंड को बाहर निकाल कर हिलाते हुए बोला,,,)

बहुत ज्यादा तभी तो झट से तेरे साथ चलने के लिए तैयार हो गई,,,,,,,,

और सच कहूं तो मैं भी तुझे इसीलिए यहां लेकर आया हूं,,,(इतना कहने के साथ ही रघु खटिया पर बैठ गयाऔर अपना एक हाथ आगे जाकर ब्लाउज के ऊपर से ही सालु की चूची को दबाते हुए बोला,,,)

वाह,,,,, दीदी शादी के बाद तेरा दूध और बड़ा हो गया है,,, मुझे दिखा मैं देखना चाहता हूं,,,।

अपने हाथों से ही खोल कर देख ले,,,,

(इतना सुनते ही रघू अपने दोनों हाथों से शालू के ब्लाउज के बटन खोलने लगा तो उसे रोकते हुए शालू बोली,,,)

अभी नहीं बाद में अभी रहने दे मां आ गई तो,,,

तो क्या हुआ मा आ गई तो,,, वह भी हम दोनों के साथ मजा लेगी,,,(ब्लाउज का पहला बटन खोलते हुए बोला,,,)

धत्त,,,,कैसी बात कर रहा है तुझे शर्म नहीं आ रही है मां के बारे में ऐसी बात कर रहा है,,,।

तो क्या हुआ,,,,, तू भी तो मेरी बहन है हम दोनों के बीच में सब कुछ हुआ ना जरूरत के मुताबिक,,,,,,,,

कुछ भी हो लेकिन तु मां के बारे में यह सब गंदी बातें मत कर मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है,,,,,,

लेकिन मुझे तो पसंद है ना,,,(ब्लाउज के दूसरे बटन पर हाथ रखते हुए) देखी नही है मां की गांड कितनी खूबसूरत लगती है एकदम बड़ी बड़ी तेरे से भी बड़ी है,,, मेरा तो अब देखते ही खडा हो जाता है,,,,।

तू सच में पागल हो गया क्या,,,,

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पागल नहीं दीवाना हो गया मां की मदमस्त गांड का,,, मेरा तो मन करता है कि मां को नंगी करके उनकी बड़ी बड़ी गांड को अपने हाथों में लेकर जोर जोर से दबाऊ,,,(शालू के ब्लाउज का दूसरा बटन भी खोलते हुए,,,)

सच में रघु तू पागल होता जा रहा है मां के बारे में इस तरह की बातें नहीं करते,,,।

बहन के बारे में भी तो नहीं किया जाता लेकिन देखो मैं तुम्हारा ब्लाउज के बटन खोल रहा हूं,,,।

मेरी बात कुछ और है,,,

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क्या कुछ और है,,, तेरे पास चूची नहीं है कि बुर नहीं है,,,,,

रघु तू समझ नहीं रहा है,,,, मां के बारे में ऐसी बातें करना गंदी बात है,,,,।

मैं तो सब कुछ समझ रहा हूं लेकिन तू नहीं समझ रही है,,, तू ही बता जमीदार की बीवी के बारे में तु कभी सोची थी लेकिन उनकी भी कुछ जरूरते थी,,, भुख थी जिस्म की भूख,,,, जो कि तू तो अच्छी तरह से जानती है कि,,, जमीदार साहब बूढ़े हो चुके हैं और मालकिन जवानी के जोश से भरी और मालकिन की उफान मारती जवानी को संभाल पाना जमीदार के बस में बिल्कुल भी नहीं था,,, उन्हें एक मुस्टंडा नौजवान लड़का चाहिए था,,, और सही समय पर मैं मिल गया,,,, वैसे भी मा भी जमीदार की बीवी की तरह जवान है जवानी के जोश से भरी हुई है,,, तुझे नहीं लगता कि उन्हें भी जरूरत पड़ती होगी,,, और सही कहु तो मा की बुर को भी मेरे लंड की जरूरत है,,,।

धत्त,,,,, तू पागल हो गया तू अच्छे बुरे सही गलत का फैसला नहीं कर पा रहा है,,,।

देख दीदी इसमें सही क्या है गलत क्या है यह मैं नहीं जानता लेकिन मैं इतना चाहता हूं कि मां बहुत खूबसूरत है मा की गांड बहुत खूबसूरत है मा की बुर,,,आहहहहहह,,, उसमें से तो अमृत की धारा हहती होगी,,,(रघु अपनी बहन के ब्लाउज का अंतिम बटन भी खोलते हुए बोला,,, अब उसकी बहन की चुचीया रघु की आंखों के सामने नंगी थी शादी के बाद उसकी चूचियां और भी ज्यादा निखर गई थी,,

जिसे देख कर रघू कि मुंह में पानी आ रहा था ,,। रघु से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथों में अपनी बहन की दोनों चूचियों को पकड़ के दबाना शुरू कर दिया रघु की हरकत से शालू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी,,,, उसके तन बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी,,,,।

सहहहहह आहहहहहहहहह,,,,।

मजा आ रहा है ना दीदी,,,,इसी तरह से मां को भी मजा आएगा जब उनकी दोनों नंगी चूचियों को मैं अपने हाथों को पकड़कर दबाऊंगा,,,,।

आहहहहहह,,,,, मां के साथ यह सब अच्छा नहीं लगेगा,,,,।

क्यों नहीं अच्छा लगेगा,,, सब कुछ अच्छा लगेगा जब में मा की चूची को मुंह में भरकर पीऊंगा तो उनके तन बदन में लहर उठने लगेगी,,,। जैसे तुम्हारी पुर से पानी निकलता है वैसे मां की बुर से भी पानी निकलने लगेगा,,,,।(शालू की दोनों चुचियों को जोर-जोर से दबाते हुए रघु बोला रघु की हरकत और उसकी गंदी बातों की वजह से और वह भी अपनी मां के बारे में यह सुनकर शालू के तन बदन में अजीब सी हलचल सी होने लगी थी उसे अपने भाई की बातें अपनी मां के बारे में गंदी बातें करते हुए अच्छा लगने लगा था,,,, इसलिए वह भी सिसकारी लेते हुए बोली,,,।)

सहहहह आहहहहहह,,,,, तो क्या तु मां को चोदना चाहता है,,,,

हां दीदी मैं तो ना जाने कब से मां को चोदने का सपना देख रहा हूं,,, उनकी बड़ी बड़ी गांड,,,,आहहहहह बहुत मजा देगी,,,, मां की बुर में जब मेरा मोटा लंड जाएगा तो देखना वो कैसे मस्त हो जाएगी,,,।

(यह बात सुनते ही शालू की बुर में खुजली होने लगी अपने मन में कल्पना करने लगी कि कैसे उसकी मां उसके भाई से चुदवाएगी,,,शालू को पूरा यकीन था कि एक बार अपने बेटे का लंड अपनी बुर में लेने के बाद उसकी मां अपने बेटे की दीवानी हो जाएगी,,,, यह कल्पना करके शालू की बुर पानी छोड़ने लगी,,,,)

क्या ऐसा हो पाएगा,,,,

जरूर हो पाएगा मेरी रानी जब तुम मेरे नीचे आ गई तो क्या मां नहीं आएगी,,,,, फिर देखना हम तीनों एक साथ चुदाई का मजा लेंगे,,,,मैं मा की बुर चाटुगा और मा तुम्हारी बुर चाटेगी देखना मजा आ जाएगा,,,,।

ओहहहहह,,,,, रघू,,,, तु तो मुझे पागल कर देगा,,,,,

ओहहहहह दीदी,,,,,( इतना कहने के साथ ही रघु अपनी बहन की चूची को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया,,, शालू की हालत खराब होने लगी टांगों के बीच की हलचल बढने लगी,,,। और रघु अपनी बहन के साड़ी को ऊपर कमर की तरफ उठाने लगाजानता था कि उसकी मां की आने का समय हो गया है लेकिन सालु मदहोशी में पूरी तरह से भूल चुकी थी,, रघू, अपनी मां को दिखाना चाहता था,,,, शालू की चुदाई करते हुए,,,, और ऐसा ही हुआ रघु अपनी बहन की साड़ी कमर तक उठाकर उसकी दोनों टांगों को फैला दिया और उसकी दोनों टांगों के बीच आकर उसकी चिकनी जांघों को अपनी जांघों पर रख कर अपने मोटे लंड को अपनी बहन की बुर में डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया,,,। शालू एकदम मस्त हो गई बिरजू का लंड उसकी बुर में जाता जरूर था लेकिन इतना मजा नहीं देता था जितना उसे अपने भाई के लंड से आता था,,,, शालू पूरी तरह से मस्त हो गई और रघु उसकी मस्ती को और ज्यादा बढ़ाने के लिए उसकी चूची को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया,,,,,,,

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और तभी कजरी खेतों का काम पूरा करके वापस घर पर लौट आई और सीधा अंदर वाले कमरे के द्वार पर पहुंचकर अंदर से आ रही गर्म सिसकारी की आवाज सुनते ही,,, उसके कान खड़े हो गए,,,,दरवाजे पर लगे परदे को धीरे से हटाकर अंदर की तरफ देखी तो दंग रह गई,,, रघु अपनी बड़ी बहन के ऊपर लेटा हुआ था और उसका लंड उसकी बुर में था,,,, यह देखते ही पल भर में ही कजरी की बुर पानी छोड़ने लगी,,,,,,, वह तुरंत कमरे के अंदर दाखिल होकर कटनी के पास दोनों हाथों को कमर पर रख कर बोली,,,,।

यह क्या हो रहा है,,,?

(इतना सुनते ही शालू कि तो सिटी पट्टी गुम हो गई,,,चुदवाने के चक्कर में वह भूल गई थी कि उसकी मां कभी भी घर पर वापस आ सकती हैं,,,। शालू की तो हालत खराब हो गई शालू घबरा गई थी लेकिन रघू उत्तेजना की परम शिखर पर पहुंच गया था,, उसकी कमर बड़ी तेजी से चल रही थी उसकी उत्तेजना इस अहसास से और ज्यादा बढ़ गई थी कि वह अपनी मां की मौजूदगी में अपनी बहन को चोद‌ रहा था,,,, शालू घबरा गई थी क्योंकि जिस हाल में उसकी मां ने उन दोनों को देख ली थी शायद इस बारे में सालु ने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,, इसलिए वह शर्म से पानी पानी हो रही थी,,, वह रघू को अपने ऊपर से उठाने की कोशिश कर रही थी लेकिन रघूयह जानते हुए भी कि उसकी मां उसकी पास खड़ी होकर उन दोनों को देख रही है फिर भी वह अपनी कमर को जोर-जोर से हीलाते हुए अपनी मां के सामने ही अपनी बड़ी बहन की चूची को मुंह में भरकर पी रहा था,,,,।

रघु,,,, मां आ गई,, है,,, रघू,,,,

(लेकिन रघु रुकने का नाम नहीं ले रहा था,,, वह जल्द से जल्द अपना पानी अपनी बहन की बुर में डाल देना चाहता था,,,, इसलिए अपनी बहन की बात को अनसुना करते हुए वह धक्के लगाता रहा,,, और शालु उसे अपने ऊपर से हटाने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन वह हट नहीं रहा था तो वह जोर से धक्का लगाई और इस बार रघू खटिया पर से नीचे गिर गया और अपनी आंखों के सामने अपनी मां को देखकर वह जानबूझकर डरने का नाटक करने लगा और वहां से अपने कपड़े लेकर भाग खड़ा हुआ लेकिन अंदर वाले कमरे से निकलकर बाहर वाले कमरे में जाकर कोने में खड़ा हो गया था शालू तुरंत शालू तुरंत कमर तक उठी हुई अपनी साड़ी को नीचे की तरफ कर दी और अपनी ब्लाउज के बटन बंद करने लगी तो कजरी गुस्से में बोली,,,।

यह सब क्या हो रहा है सालु,,,,

(शालू क्या बोले उसे तो कुछ सूझ नहीं रहा था आज उसकी चोरी पकड़ी गई थी वह शर्मिंदा हो गई थी और रोने लगी,,,, लेकिन कजरी जानबूझकर उसे डराने की कोशिश कर रही थी और सालु डर के मारे रोए जा रही थी,,,, और बाहर वाले कमरे में खड़ा होकर रघु हंस रहा था,,,,, शालू के मुंह से एक भी शब्द फूट नहीं रहे थे वह बस रो रही थी आंखों को नीचे झुकाएवह अपने आप को ही कोश रही थी कि बेवजह वह अपने ससुराल से यहां आ गई,,,, कजरी कुछ देर तक खड़ी रहकर शालू को डराती रही धमकाती रही उसे भला-बुरा कहती रही,,,, वह अपने दोनों हाथ से चेहरे को ढक कर रो रही थी और यही मौका रघु को ठीक लग रहा था वह वापस अंदर वाले कमरे में आ गया और,,,, अपनी मां के पीछे खड़ा होकर अपनी बहन से बोला,,,।

रो मत इधर देखो दीदी,,,(शालू फिर भी रोए जा रही थी) अरे मैं कह रहा हूं रो मत तुमने कोई पाप नहीं किया है एक बार यहां तो देखो दीदी,,,,।

(बार-बार मनाने पर शालू रोते हुए ऊपर की तरफ नजर उठाकर रघु की तरफ देखने लगी जो कि ठीक है उसकी मां के पीछे खड़ा था और वह भी बिल्कुल नंगा सालु को थोड़ी हैरानी हुई,,,, तो उसकी यह शंका भी दूर करते हुए रघू बोला,,,)

अब ध्यान से देखना दीदी,,,(और इतना कहने के साथ ही वह धीरे से नीचे की तरफ झुका और पीछे से ही अपनी मां की साड़ी को नीचे से पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठाने लगा यह देखकर शालू की आंखें हैरानी से फटी जा रही थी,,,,और देखते ही देखते रखो अपनी बहन को दिखाते हुए अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया और उसकी नंगी बुर नंगी टांगे मोटी मोटी जांघें सब कुछ सालु की आंखों के सामने चमकने लगी,,,शालू को तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था,,,। वह बस आंखें फाड़े देखी जा रही थी,,,, रघू अपनी मां के ठीक पीछे खड़ा होकर मुस्कुराए जा रहा था और बोला,,,।

मैं बोला था ना दीदी घर पर चलो,,,(इतना कहते हुए अपना एक हाथ अपनी मां की बुर पर रखकर उसे ज़ोर से अपनी मुट्ठी में भींचते हुए) बहुत कुछ बदल गया है,,,,.

(शालू को अभी भी अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था वह आंखें फाड़े बस देखे जा रही थी,,।
 
शालू की आंखें आश्चर्य से फटी की फटी रह गई थी उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था और होता भी कैसे उसकी आंखों के सामने उसका छोटा भाई अपनी मां की बुर को मुट्ठी में दबोचे हुए थे और उसकी इस हरकत पर उसकी मां उसे डांटने के वजाय,,, खुश हो रही थी,,,,,,, शालू के लिए नजारा बेहद आश्चर्य से भरा हुआ था लेकिन पूरी तरह से मादकता से भरा हुआ था,,, जो कुछ भी हो रहा था वह सब शालू के सोच के परे था,,, और रघु और ज्यादा बेशर्मी दिखाते हुए अपनी बहन शालू की आंखों के सामने ही अपनी मां की बुर में एक उंगली डालकर उसे अंदर-बाहर करने लगा,,,,,,,, शालू की आंखें फटी की फटी रह गई थी और अपने बेटे की हरकत पर कजरी के तन बदन में,,, अपनी ही बेटी के सामने बुर में उंगली करने की वजह से वह काफी उत्तेजित हो गई थी,,,।

देख दीदी,,, मैं कहता था ना बहुत कुछ बदल गया है,,, देख ध्यान से देख मां की बुर में मेरी उंगली कितने आराम से जा रही है,,।,,,

(रघु एकदम खुले शब्दों में बोल रहा था और शालू अपनी खुली आंखों से पूरी सच्चाई देख रही थी उसकी शादी के बाद वाकई में सब कुछ बदल गया था रिश्तो के मायने भी बदल चुके थे,,,, शालू एकदम साहब देख पा रही थी कि उसके भाई की उंगली उसकी मां की बुर में बड़े आराम से अंदर बाहर हो रही थी,,, जिसे देख कर उसे अजीब तो लग रहा था लेकिन काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था शालू कुछ बोल नहीं पा रही थी,,,।)

आहहहहह क्या कर रहा है रे तु,,,, अब बाहर निकाल,,,।

(अपनी मां के मुंह से बाहर निकालने वाली बात सुनकर शालु स्तब्ध रह गई,,,,, 4 दिनों में वह अपनी मां का बदला हुआ रूप देख रही थी,,, उसे अभी भी अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि वह अपनी मां को संस्कारों में ढली हुई एक नारी के रूप में देखती आ रही थी कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि उसे अपनी आंखों से अपनी मां का यह रंडीपन वाला रूप देखने को मिलेगा,,,,, शालू को अच्छी तरह से दिखाई दे रहा था कि रघु की उंगली की वजह से उसकी मा कसमसा जा रही थी और अपनी कमर को दाएं बाएं घुमा दे रही थी,,,,,, अपनी मां की बात सुनकर रघू बोला,,,)

अभी थोड़ा और मा ,,,,मजा आ रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी दूसरी ऊंगली भी बुर में डाल दिया,,, यह देखकर शालू की आंखें चमक खा गई रघु का लंड पूरी तरह से खड़ा था जो कि पीछे खड़े होने की वजह से उसकी मां की गांड पर रखा जा रहा था जिससे कजरी की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी,,,दो अलीपुर में जाने की वजह से कजरी की आंखें उत्तेजना में बंद होने लगी उसके चेहरे का हाव भाव बदलने लगा,,, कजरी के गोरे मुखड़े पर उत्तेजना की लाली छाने लगी थी,,, शालू अपनी मां के चेहरे को उत्तेजना में दमकता हुआ देख रही थी,,,।)

क्यों दीदी कैसा लग रहा है,,?

यह सब क्या हो रहा है रघु मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है तुम दोनों,,,,।

क्यों क्या हुआ तुम दोनों भी तो वही करते हो तुम दोनों की चुदाई में अपनी आंखों से छत पर देख चुकी थी लेकिन उस समय कुछ बोली नहीं,,,,

(अपनी मां की बात सुनते ही शालू एकदम से चौंक उठी,,,)

मुझे तुम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ उससे कोई एतराज नहीं है क्योंकि मैं भी खुद उसी कश्ती में सवार हूं जिसमें तुम दोनों में हम दोनों की जरूरत है एक औरत होने के नाते तो यह बात अच्छी तरह से जानती है अगर तेरे बदन में हो जरूरत ना होती तो तुम अपने भाई के साथ चुदवाती नही और उसके बच्चे की मां नहीं बनती,,

यह क्या कह रही हो मां,,,,?(बच्चे वाली बात सुनते ही शालू चौक ते हुए बोली,,,)

चल चौकने की जरूरत नहीं है मुझे सब मालूम है,,,, मुझे उसी दिन से शंका हो रही थी जिस दिन अपनी आंखों से तुझे अपने भाई से चुदवाते हुए देखी थी,,,,,,,

(बाकी बातें सुनकर शालू कभी रघु की तरह देखती तो कभी अपनी मां की तरफ शालू के चेहरे पर उड़ती हवाईयो को देखकर रघु बोला,,,)

मां को सब पता है सालू,,,,,अब हम तीनों में किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं है हमें बस मजा लूटना है जिंदगी का मजा,,,,(इतना कहते हुए रघु अपना दूसरा हाथ ब्लाउज के ऊपर सही अपनी मां के चूची पर रखकर दबाने लगा,,,)

आऊच्च ,,,, क्या कर रहा है अभी रहने दे,,, बाद में हम तीनों मज़ा लूटेंगे,,,,

( इतना सुनते ही रघू अपनी मां की बुर में से अपनी ऊंगली को बाहर निकाल दिया,,, और उस ऊंगली में लगी अपनी मां की मदद रस को जमीन पर टपकाते हुए उसे अपनी बहन को दिखाते हुए बोला,,)

देख रही है दीदी मां कितना पानी छोड़ती है,,,( यह देखकर कजरी शरमाते हुए बोली)

धत्त,,,, पागल हो गया है तू,,, चलो तुम दोनों हाथ मुंह धोकर आओ मैं खाना निकालती हूं,,,,(इतना कहकर कजरी बाहर चली गई रघु का लंड अभी भी उसके पजामे से बाहर था और झूल रहा था,,,, वह उसी तरह से अपने लंड को बिना हाथ लगाए झुलाते हुए अपनी बहन के ठीक सामने लेकर गया और बोला,,,)

देखी ना दीदी ने क्या कहा था ना सब कुछ बदल गया है अब बस जिंदगी के मजे लो इसीलिए मैं तुम्हें तुम्हारे ससुराल से यहां रह कर आया हूं कि कुछ दिन यहां पर जिंदगी का और अत्यधिक मजा लूट लो,,,

(शालू अभी भी आंखें पानी कभी रघु की तरफ तो कभी उसके लंड की तरफ देख रही थी,,, )

चल हटा ईसे सब इसी की वजह से हुआ है,,,(शालू अपने हाथ से रघु के लंड को बड़े प्यार से एक चपत मारते हुए बोली और खटिया से उठकर अपने कपड़ों को दुरुस्त करके मुस्कुराते हुए बाहर चली गई,,,, और रघु उसे जाते हुए देखता रह गया,,,।

तीनों के बीच घमासान चुदाई होने वाली थी जिसको लेकर तीनों का उत्साह बढ़ता जा रहा था और उत्सुकता चरम सीमा पर थी,,, रघु बिल्कुल भी शर्म नहीं कर रहा था वह पूरा का पूरा बेशर्म बन चुका था क्योंकि यह बात अच्छी तरह से जानता था कि अगर जिंदगी का असली मजा लेना है तो बेशर्म बनना पड़ेगा,,,, शालू को अच्छी तरह से समझ में आ गया था कि क्या होने वाला है,,,, ,,, और उस पल को लेकर वहां अपने अंदर शर्म महसूस कर रही थी और यह सोच कर परेशान हो रही थी कि अपनी मां की आंखों के सामने ही अपने सारे कपड़े उतार कर कैसे नंगी होगी कैसे अपनी मां के सामने अपने भाई का लंड अपनी बुर में लेगी,,,,,,, यह सोचकर ही उसकी बुर पसीज रही थी,,,।

और इस बात को लेकर कजरी भी हैरान थी कि सब कुछ कैसे होगा,,, हालांकि थोड़ी बहुत अच्छा झलक वह अपनी बेटी को दिखा चुकी थी जब उसका बेटा अपने हाथों से उसकी साड़ी कमर तक उठाकर उसकी बुर में उंगली पेल रहा था,,,।

सोनू तो उस पल के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहा था क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसे क्या करना है और वह बड़े अच्छे से कर लेगा इसका उसे पूरा विश्वास था,,,,लेकिन इस बात को लेकर उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि वह एक साथ अपनी मां और बहन दोनों की चुदाई करेगा उसकी आंखों के सामने दो दो औरतें एकदम नंगी होंगी जिनके नाजुक बदन से वह जी भर कर खेलेगा,,, वह अपने मन में यह सोच कर पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था कि आज उसके सर पर दो दो औरतों को खुश करने की जिम्मेदारी आ पड़ी थी,,,, उन दोनों औरतों को पूरी तरह से संतुष्ट करना था और उसे अपने लगने पर पूरा भरोसा था,,,।

जैसे तैसे करके दिन का समय बीत गया और शाम ढलने लगी शालू रसोई में अपनी मां की मदद करने लगी,,,,,,, और रघू टहलते हुए रामू के घर पहुंच गया,,,,,, जहां पर उसकी दोनों बहने खाना बना रही थी लेकिन रामू और ललिया का अता पता नहीं था,,,, रघु ने ललिया के बारे में पूछा तो रानी उसे बताई कि उसका भाई राम और उसकी मां दोनों तबेले में गाय को चारा देने के लिए गई है जोकि घर के पीछे ही था,,,, रामू की साथ में ही है बात जानते ही रघु का मन बैठ गया क्योंकि वहां चाहता था कि एक साथ अपनी बहन और अपनी मां की चुदाई करने से पहले अपने लंड की वर्जिस ललिया की रसीली बुर से कर लेना चाहता था,,,। लेकिन फिर भी मन में एक आस लेकर वह घर के पीछे बने तबेले की तरफ जाने लगा जो कि उसके तबेले से सटा हुआ ही था,,,,,

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हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था लेकिन अभी भी सब कुछ साफ नजर आ रहा था रघु घर के पीछे खड़ा होकर चारों तरफ दौड़ाने लगा लेकिन दोनों मां-बेटे कहीं नजर नहीं आ रहे थे,,,, वह सोचा कि तभी लेकर आखिरी छोड़कर हो सकते हैं इसलिए व धीरे-धीरे आगे की तरफ बढ़ने लगा,,,, आखिर में पहुंचने पर भी रामु और ललीया उसे कहीं नजर नहीं आ रहे थे,,,, इसलिए वह सोचा कि हो सकता है दोनों कहीं और गए हो,,,इसलिए वापस आने के लिए जैसे ही कदम पीछे दिया था कि तभी उसे चूड़ियों की खनक ने की आवाज सुनाई दी जो कि तबेले की दीवार के पीछे से आ रही थी वह वहीं रुक गया,,,, और आवाज की दिशा में देखने लगा जो कि तबेले के ठीक पीछे से ही आ रही थी,,,, वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा,,, धीरे-धीरे उसे पीछे की आवाज सुनाई देने लगी थी,,,, जिसे सुनते ही उसे पूरा यकीन हो गया कि तबेले के दीवाल की पीछे रामू और उसकी मां ही है,,,, लेकिन दोनों के बीच की हो रही बात को सुनकर उसके कान के साथ-साथ उसका लंड भी खड़ा हो गया,,,,।

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अरे मां क्या कर रही है थोड़ा नीचे तो झुको,,,

अरे झुक रही हु थोड़ा सब्र तो कर,,,,,

क्या करूं तेरी गांड देखकर सब्र नहीं होता,,,,। रघु के साथ तो मचलती रहती है चुदवाने के लिए मेरे साथ ही नखरा करती है,,,।

तु ठीक से कर ही नहीं पाता,,, मैं कहती हूं कि सीधे-सीधे मेरे ऊपर आकर कर ले लेकिन तुझे तो पीछे से लेना है,,,।

रघु को तो बहुत पीछे से देती हो,,, और मेरे साथ नखरा दिखाती हो,,,

उसका तो पीछे से भी बड़े आराम से अंदर तक चला जाता है,,,,

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(दीवार के पीछे से आ रही बातों को सुनकर रघु का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,, उसे समझ में आ गया कि उसकी तरह रामु भी अपनी मां को चोद रहा है,,,, और उसकी मां बात ही बात मेंउसकी पढ़ाई कर रही थी जो कि लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक था उसे विश्वास हो गया था कि अपनी मां और बहन को एक साथ चोदने से पहले उसे ललिया की तरफ से मानसिक ताकत प्राप्त हो चुकी थी,,,, वह अभी का लगा कर सो ही रहा था कि तभी उसके कानों में रामू की बात सुनाई दी,,,।)

बस बस हो गया मा,,,, जा रहा है थोड़ा सा बस नीचे हो जाओ,,,, हां बस ऐसे ही,,,, देखो चला गया ना,,,,आहहह आहहहह आहहहहहह,,,,,

(रघु के कानों में केवल रामू कि ही आह की आवाज सुनाई दे रही थी उसकी मां की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी,,,, जिससे रघु समझ गया कि रामू से चुदवाने में उसकी मां को जरा भी मजा नहीं आ रहा था,,,, और रघु इस खेल में कूदना चाहता था इसलिए तुरंत दीवार के पीछे जाकर खड़ा हो गया,,,, रघु को देखते ही ललिया और रामु के होश उड़ गए,,,,,,, रामू और ललिया दोनों घबरा चुके थे,,,,,,रामू के लिए घर ले लिया की जगह कोई और औरत होती तो शायद वह इतना ना घबराता ललिया के लिए भी उसके पीछे खड़ा लड़का उसका बेटा ना होता तो उसे भी उस शायद रघु के सामने कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन दोनों मां बेटे थे इसलिए तुम दोनों के बीच के बारे में आज रखो को पता चल गया था अपनी आंखों से देख लिया था इसलिए दोनों एकदम से घबरा गए थे,,,।)

यह क्या हो रहा है रामू,,, तू तो अपनी मां को ही चोदने में मस्त हो गया,,,, और क्या चाची मुझे कही होती तो मैं आ जाता अपने ही बेटे से चुदवाने की क्या जरूरत थी,,,।(रघु ललिया की बड़ी-बड़ी और गोरी गांड पर हाथ फेरते हुए बोला,,,, ललिया एकदम से खड़ी हो गई,,,)

देख रघू तु किसी से कुछ भी मत बताना,,,,,,

हां यार तुझे अपनी दोस्ती की कसम अगर किसी को कुछ भी बताया तो,,,,,,,,

जो कुछ भी हो रहा है ना रघू यह सब तेरी वजह से ही हो रहा है,,,,(ललिया अपनी साड़ी को नीचे करते हुए बोली,,)

मेरी वजह से,,, मेरी वजह से क्यों,,,?

क्योंकि रामू जान गया था कि,,, तु मुझे चोदता है,,,,,, और रामू किसी को कुछ भी ना कहे इस एवज में अपना मुंह बंद रखने के लिए उसने भी,,,,,,( इतना क्या कर ले लिया खामोश हो गई रघु समझ चुका था सारा मामला और रामू की तरफ देखते हुए बोला,,,)

ओहहह बच्चु उस दिन जब मैं बोला कि अपनी मां को चोदा कर तो मुझ पर बिगड़ उठा और अभी यहां पर खुली जगह पर ही अपनी मां की चुदाई कर रहा है,,,।

देख रघू मैं तेरे हाथ जोड़ता हूं इस बारे में किसी को कुछ भी मत बताना,,,

नहीं बताऊंगा,,,, लेकिन मेरा मन इस‌ समय तेरी मां को चोदने को कर रहा है,,,। अगर मेरा मुंह बंद रखना है तो,,,।

(रामू समझ गया था कि अपना मुंह बंद करने के एवज में रघु अपनी मनमानी करके ही रहेगा,,, वह अपने मन में सोचने लगा कि पहले भी तो वह उसकी मां की चुदाई करते आ रहा है,,, तो अभी कर लेगा तो इसमें क्या बिगड़ जाएगा,,,, ऐसा करके वह अपना मुंह बंद है तो रखेगा वरना इस बारे में अगर किसी को पता चल गया तो और आप मच जाएगा,,,,,,,,,, इसलिए वह हां में सिर हिला दिया इस बात के लिए अपनी मां से पूछना जरूरी नहीं समझा क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां भी उसके लंड की दीवानी थी,,,। रघु खुश हो गयाक्योंकि रात में अपनी मां बहन दोनों के साथ घमासान चुदाई के पहले वह अपने लंड की ताकत को आजमाना चाहता था जो कि अब वह अच्छी तरह से आजमा सकता था,,,। वह तुरंत ललिया के पीछे खड़ा हो गया और उसे झुकने के लिए बोला ललिया बिना देर लगाए झुक गई और अपनी बड़ी बड़ी गांड को ऊपर की तरफ कर दी,,,, रघू अपने ही हाथों से उसकी साड़ी को उठाकर कमर तक कर दिया,,,दीवार के पीछे खड़े होकर ही उन दोनों मां-बेटे की बातें सुनकर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,, जो कि रामू की मां की बुर में जाने के लिए तैयार था,,,, और उसकी पुर में धीरे-धीरे अपने लंड को डालते हुए रामु से बोला,,,,)

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देख रामु ऐसे डाला जाता है पीछे से,,,,( और इतना कहने के साथ ही रखो अपना पूरा लंड रामू की मां की बुर में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया,,, थोड़ी ही देर में ललीया की गरम सिसकारी गुजने लगी,,, रामू भी अपनी मां की मादक आवाज को सुनकर हैरान था,,, क्योंकि जब भी वह अपनी मां की चुदाई करता था तब उसके मुंह से आवाज निकलती थी उसके बाद के मुंह से एक भी शब्द नहीं निकलता था पहले रामु इस बात को समझ नहीं पा रहा था लेकिन आज समझ गया था और हैरान भी था रघू की ताकत को देखकर,,,,,रघु ठाप पर ठाप लगाए जा रहा था,,,। बिना रुके,, रघु रामू की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था मानो कि उसे कह रहा हो कि देख ऐसे करते हैं पीछे से चुदाई,,,। रामू अपनी मां की तरफ भी देख रहा था जिसे बहुत मजा आ रहा था,,,, तकरीबन 15 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद दोनों का पानी निकल गया लेकिन इस दौरान अपनी मां की चुदाई देख कर ही रामु का पानी निकल गया था,,,,।

रघु अपने पजामे को ऊपर करता हुआ बोला,,,।

देख रहा हूं तो बिल्कुल भी चिंता मत कर यह राजा राजा ही रहेगा बस मुझे समय-समय पर तेरी मां की लेना पड़ेगा जिसमे तुझे अब कोई भी एतराज होना नहीं चाहिए,,,।

(अगर आज रघु ने अपनी आंखों से सब कुछ देख लिया ना होता तो रामू से कभी भी इजाजत नहीं देता लेकिन उसकी मजबूरी थी इसलिए हम इसे हिला दिया और रघु जाते-जाते ब्लाउज के ऊपर से ही ललिया की चूची को दबाते हुए बोला,,,।)

हाय मेरी रानी बहुत मजा देती है,,,।

(इतना कहकर वह हंसते हुए वहां से चला,,गया,,, घर पर पहुंचने पर थोड़ी देर बाद खाना भी तैयार हो गया था जिसे तीनों ने मिलकर साथ साथ खा लिए और थोड़ी देर बाहर बैठकर बात करने के बाद तीनों अंदर कमरे में जाने लगे तो कजरी रघु से बोली,,,।)

दरवाजा बंद कर लेना,,,,

हा मा तुम दोनों चलो मैं बंद करके आता हूं,,,।

अब शालू अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसके जाने के तुरंत बाद ही द्वार पर दरवाजा लगाने की जरूरत क्यों पड़ गई,,,।
 
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