Incest बरसात की रात,,,(Completed) - Page 16 - SexBaba
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Incest बरसात की रात,,,(Completed)

रघु जमीदार की बीवी और उसकी बहू राधा तीनों जमीदार के सामने खड़े थे जहां पर जमीदार बैठकर हुक्का गुड गुडा रहा था,,, तीनों में से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी शादी की बात करने के लिए जमीदार की बीवी जमीदार के गुस्से से अच्छी तरह से वाकिफ थी,,, राधा एकदम होने के नाते अपने ससुर के मिजाज को अच्छी तरह से पहचानती थी इसलिए कुछ बोल नहीं पा रही थी,,, अपनी बीवी और अपनी बहू के साथ रघु को देखकर जमीदार को थोड़ी हैरानी हुई इसलिए वह बोला,,,।

क्या बात है,,,, इस तरह से तुम (रघु की तरफ नजरों से इशारा करते हुए) हमारी बीवी और बहू के साथ खड़े हो क्या कोई जरूरी बात है,,,(इतना कहने के साथ ही जमीदार फिर से हुक्का मुंह में लेकर गुडगुडाने लगा,,,)

हां मालिक बहुत जरूरी काम है,,,,

क्या काम है बताओ,,,,

छोटा मुंह बड़ी बात लेकिन कहना बहुत जरूरी है,,,

पहेलियां मत बुझाओ सीधे-सीधे कहो जो कहना चाहते हो,,,,(जमीदार गुस्से में बोला,,, जमीदार के लहजे को देख कर रघु भी सहम गया,, आखिरकार वो कर भी क्या सकता था जमीदार की ताकत को अच्छी तरह से पहचानता था जिसके आगे वह कुछ भी नहीं था,,, फिर भी हिम्मत इकट्ठा करते हुए बोला,,,)

मालिक में शादी की बात करने आया था,,,

किसकी शादी की बात,,,(जमीदार फिर से तेज लहजे में बोला)

वववव,,,वो,,,, छोटे मालिक की बिरजू की,,,,

बिरजू की शादी की बात करने के लिए तुम आए हो,,, औकात देखे हो अपनी,,,,

ममममम,,,, मालिक औकात की बात नहीं है प्यार मोहब्बत की बात है,,,,(घबराते हुए रघु बोला)

प्यार मोहब्बत,,,,मैं कुछ समझा नहीं मैं पहले भी कह चुका हूं कि पहेलियां मत बुझाओ सीधे-सीधे कहो,,,,

छोटे मालिक बिरजू मेरी बड़ी बहन सालु से प्यार करते हैं,,,

(इतना सुनते ही जमीदार जोर-जोर से ठहाके मार के हंसने लगा,,,, उसको हंसता हुआ देखकर तीनों एक दूसरे के चेहरे को देखने लगे,,,,)

प्यार मोहब्बत करते हैं तो क्या हुआ,,,,

मेरा मतलब है कि मालिक छोटे मालिक मेरी बड़ी बहन से शादी करना चाहते हैं और शालू भी छोटे मालिक बिरजू से प्यार करती है और शादी करना चाहती हैं,,,,

खामोश,,,, अपनी औकात में रहो,,,, मत भूलो तुम्हारी औकात दो कौड़ी की भी नहीं है,,,

मैं जानता हूं मालिक हमारे और आप में जमीन आसमान का फर्क है लेकिन प्यार मोहब्बत उच्च नीच भेदभाव दौलत शोहरत देखकर तो नहीं की जाती यह तो बस हो जाती है और वैसा ही हुआ है बिरजू जो कि इस घर के वारिश है मेरी बहन से प्यार करते हैं,,,

रघु,,,, तुम अपनी हद में रहो बार-बार प्यार मोहब्बत का नाम देकर ,,,, जमीन और आसमान को मिलाने की कोशिश मत करो,,,, शादी की बात सोचना भी नहीं,,,,

नहीं नहीं मालिक ऐसा मत करिए,,,(ऐसा कहते हुए रघु हाथ जोड़कर अपना एक कदम आगे बढ़ा दिया) हम बर्बाद हो जाएंगे आप तो दयालु हैं,,, छोटे-बड़े में आप बिल्कुल भी फर्क नहीं करते,,, इसे शादी से छोटे मालिक की खुशी जुड़ी हुई है,,,.

छोटे मालिक की खुशी किस से जुड़ी है यह फैसला करने वाले तुम कौन होते हो,,,,, जरूरी तो नहीं कि प्यार मोहब्बत हो जाए तो शादी भी हो जाए,,,, नजरों का दोष है नया खुन है,,, तुम्हारी बहन से नजरें लड़ गई होगी या यूं कह लो कि तुम्हारी बहन ही हमारे बेटे को अपने प्रेम जाल में फसाई है,,,

नहीं नहीं मालिक ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,,

देखो मैं कुछ नहीं सुनना चाहता हमारे बेटे की शादी तुम्हारी बहन के साथ बिल्कुल भी नहीं होगी मैं उसके लिए लड़की ढूंढ लिया हूं और उसी के साथ शादी होगी यह हम वचन देकर आए हैं,,, और हमारा वचन पत्थर की लकीर है,,,।

ऐसा मत कहिए मालिक,,,, कुछ तो रहम करिए,,, आप ही सोचो मेरी बहन का क्या होगा,,,।

यह हम क्यों सोचें रघु,,, देखो अब मैं ज्यादा कुछ सुनना नहीं चाहता मैं तुम्हारी बहन से अपने बेटे की शादी बिल्कुल भी नहीं करा सकता,,,, इससे पहले कि मैं अपने आदमियों को बुलवाकर तुम्हें धक्के देकर बाहर निकलवा दूं तुम चले जाओ यहां से,,,

(रघु कुछ भी कर सकने की स्थिति में नजर नहीं आ रहा था सबसे ज्यादा उसे अपने परिवार की बदनामी की डर लगी हुई थी और इस तरह से रघु की बेज्जती जमीदार की बीवी से बर्दाश्त नहीं हुई थी और ना ही राधा से,,, जमीदार की बीबी बीच बचाव करते हुए बोली,,,)

सुनिए ऐसा क्यों कर रहे हैं आप,,,, हमारा बेटा बिरजू इसकी बहन शालू से प्यार करता है और शादी करना चाहता है,,,, आप कर दोनों की शादी करवा देंगे तो दोनों जिंदगी भर खुश रहेंगे और यह परिवार भी हंसता खेलता रहेगा,,,।

तुम भी ईसकी बातों में आ गई,,, यह छोटे लोग हैं हमेशा बड़े लोगों को फसाने के नए-नए षड्यंत्र रचते रहते हैं,,,।

नहीं नहीं रघु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,,

जी बाबू जी माजी सच कह रही है रघु बहुत सीधा लड़का है,,,(राधा बीच बचाव करते हुए बोली)

चुप,,, हरामजादी,,,, तेरी इतनी हिम्मत हो गई कि तू हमारे सामने बोल रही है,,, अभी तक इस घर को एक बच्चा तक नहीं दे सकी और बीच में बोलकर इस घर की बहू होने का फर्ज निभा रही है पहले इस घर को एक चिराग दें तब बोलने का अधिकार होगा तुझे,,,,(राधा को इस तरह से बीच में बोलता हुआ देखकर जमीदार एकदम गुस्से में आ गया था क्योंकि आज तक रहा था उसके सामने एक शब्द तक नहीं बोल पाई थी और आज बहुत बड़े फैसले पर बहस करने के लिए अपना मुंह खोल दीजिए इसलिए जमीदार का गुस्सा उस पर फूट पड़ा यह सच था कि राधा अभी तक मां नहीं बन पाई थी और इस घर को वारिश नहीं दे पाई थी,,,अपने ससुर किस तरह की कड़वी बात सुन कर रहा था एकदम सही मीठी उसे इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि उसके ससुर इस तरह से गिरे शब्दों में उससे बात करेंगे वह पूरी तरह से आश्चर्य में पड़ गई थी,,, जमीदार की बीवी भी हैरान थी,,, इसलिए राधा का बचाव करते हुए बोली।)

यह आप क्या कह रहे हैं राधा हमारी बहू है और एक बहू से इस तरह से बात की जाती है क्या हो गया है आपको,,,, गलती हमारे बेटे ने की और उसका गुस्सा तुम हम पर निकाल रहे हो,,,,

हमारा बेटा कौन सा हमारा बेटा जब से तुझ से शादी करके तुझे इस घर में लाया हूं तू एक भी बच्चे को जन्म दे कभी मां बन पाई तब कैसे हुआ तेरा बच्चा हो गया,,, वह मेरा बेटा है,,, तू कभी मां नहीं बन सकती इस घर को इस हवेली को एक औलाद नहीं दे सकती तुम दोनों एक जैसी हो,,, लोकसमाज और इज्जत की बात ना होती तो हम तुम दोनों को धक्का मार कर घर से निकाल देते,,, तुम दोनों इस हवेली में रहने के लायक नहीं हो,,,,

(जमीदार के मुंह से आ जाऊंगा रे बरस रहे थे आज ऐसा पहली बार हो रहा था कि जमीदार अपने आपे में बिल्कुल भी नहीं था और अनाप-शनाप बक रहा था,,, उसका यह रोग जमीदार की बीवी और उसके पाव राधा के साथ-साथ रघु भी पहली बार देख रहा था क्योंकि जब भी वह जमीदार को देखता था तो हमेशा हंसते हुए प्रसन्न होकर भी और दूसरों की मदद करते हुए देखा था इसलिए तीनों को आश्चर्य हो रहा था कि यह कैसे हो गया जमीदार पूरी तरह से गुस्से में आग बबूला था,,,, फिर भी जमीदार की बीवी से शांत करने की कोशिश करते हुए बोली,,)

आज आप शराब तो नहीं पी लिए हैं,,, यह किस तरह की बातें कर रहे हैं,,,, मैं इस घर को चिराग नहीं दे पाई क्या मैं मां नहीं बन पाई,,, कभी यह सवाल अपने आपसे किए है,,, मैं इसे घर में अपनी मर्जी से नहीं आई थी आपने मेरे बाबूजी को बहला-फुसलाकर मुझसे शादी करके इस घर में लाए हैं,,, आप में ही ताकत नहीं है बाप बनने की,,, बूढ़े हो गए हैं आप,,,बुढ़े,,,,जैसे जैसे उम्र हो रही है वैसे वैसे आपकी बुद्धि काम नहीं कर रही है,,,,अरे वीर जी उसकी बहन से प्यार करता है उससे शादी करना चाहता है और जानते हैं आपके बिरजू ने क्या किया है,,, उसकी बड़ी बहन को पेट से कर दिया है,,,, वह मा बनने वाली हैं,,, अगर यह शादी नहीं हुई तो वह मर जाएगी उसके घरवालों की बदनामी हो जाएगी,,,।

हरामजादी मुझसे जबान लडाती है,,,(ऐसा कहते हुए जमीदार कुर्सी पर से उठा और अपनी बीवी को घर पर जोरदार तमाचा मार दिया जिससे वह अपने आप को संभाल नहीं पाई और नीचे गिर गई,,, रघु और राधा तुरंत उसकी और बढै और उसे संभाल कर उठाने लगे,,,, राधा के साथ साथ रघु भी घबरा गया था,,, जमीदार से इस तरह की उम्मीद तीनों को नहीं थी जमीदार की बीवी को दोनों ने संभाल कर खड़ी किया जमीदार की बीवी भी एकदम गुस्से में थी,,,।

यह शादी होकर रहेगी मैं देखती हूं कि यह शादी कैसे नहीं होती है,,,(जिस तरह से जमीदार की बीवी रघु का पक्ष ले रही थी रघु को थोड़ी बहुत आशा की किरण नजर आ रही थी उसे उम्मीद थी कि अगर बड़ी मालकिन के हाथों में सब कुछ हुआ तो यह शादी जरूर हो जाएगी,,, लेकिन जमीदार का डर भी उसे था क्योंकि जमीदार के हाथों में सत्ता थी ताकत थी सब कुछ उसके हाथों में था,,,)

यह सादी हरगीज नहीं होगी,,, ना जाने किस का पाप अपने पेट में लेकर घूम रही है,,, कुछ नहीं मिला तो बिरजू का ही नाम लगा दिया,,, तेरी बहन को इतना ही जवानी का जोश है तो कहीं और जाकर मुंह मार लेना चाहिए था,,,(जमीदार की बातें सुनकर रघु को गुस्सा आ रहा था,,, अपनी बहन की हालत का जिम्मेदार वह खुद था इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले वह घबरा रहा था,,, और घबराते हुए बोला,,,।)

वह पाप नहीं है मालीक प्रेम मोहब्बत का परिणाम है ईस घर का चिराग है,,, जो आपके आंगन में खेलने के लिए उत्सुक हैं,,, ऐसे मुंह मत फेरीए मालिक,,, अपना लीजिए मेरी बहन को अपनी बहू के रूप में,,,।

रघु,,,,,, तु शायद हमें ठीक से नहीं जानता,,, अगर जानता होता तो हमारे सामने इतनी बड़ी बड़ी बात बोलने की हिम्मत ना करता मैं तुझे साफ शब्दों में कह दे रहा हूं कि तेरी बहन की शादी इस घर में बिल्कुल भी नहीं हो सकती हां मैं इतना जरूर कर सकता हूं कि तेरी बहन की शादी की सारी मदद कर सकता हूं,,,,

लेकिन मालिक ऐसे में उसे अपनाएगा कौन,,, और वह बिरजू से प्यार करती है और उसके बिना जी नहीं सकती वह मर जाएगी मालिक,,,,

मर जाए इससे हमें कोई परवाह नहीं है,,,,, आइंदा अपनी बहन के साथ मेरे बेटे का नाम जोड़ने की हिम्मत मत करना और हां अगर कुछ भी ऐसी वैसी बात गांव में फैली तो तू और तेरा परिवार खुद बदनाम हो जाएगा तेरी बहन खुद बदनाम हो जाएगी क्योंकि लोग तेरी नहीं मेरी सुनेंगे,,,, तेरी बहन के पेट में किसका बच्चा है यह गांव वाले नहीं जानते हमारे एक ईसारे की देरी रहेगी और सब कुछ बर्बाद हो जाएगा,,,,,

नहीं मालिक ऐसा मत करिए,,,

हरिया,,,,, भोला,,,,,, मोहन कहां मर गए सब के सब,,,

(इतना कहना था कि पांच छः मुस्टडे हाथ में लट्ठ लिए हाजिर हो गए,,, इन सब को देख कर रघु घबरा गया,,,)

इस रघु के बच्चे को उठाकर बाहर फेंक दो और ज्यादा चु चा करे तो,,, मार मार के इसके हाथ पैर तोड़ कर इसी नहर में बहा दो,,,(इतना सुनकर रघु के साथ-साथ जमीदार की बीवी राधा भी घबरा गई,,, वो लोग तुरंत रघु को पकड़कर घर के बाहर गए गए और उसे जोर से दूर फेंक दीए,,, रघु के हाथों में चोट लग गई,,, रघु की आंखों से आंसू निकलने लगे,,, वह बेहाल हो चुका अपनी स्थिति पर रो रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था की अपनी बहन की ऐसी हालत करने में उसी का हाथ है ,,, चारों तरफ से अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था कहीं राह दिखाई दे रही थी,,, उसे लगने लगा था कि अपनी बर्बादी का फैसला हुआ खुद अपने हाथों से ही लिख चुका है,,, वह रोते हुए अपने घर की तरफ चला गया,,,।

वह तेरा रात को अपने घर पर लौटा जब उसकी बहन शालू और उसकी मां सो चुके थे,,,

दूसरी तरफ हवेली में जमीदार अभी भी पूरी तरह से गुस्से में था और वह शराब पी रहा था,,, जमीदार की बीवी अपने कमरे में अपनी किस्मत को रो रही थी,,, जमीदार की बातें सुनकर वह गुस्से में थी,,, जिस तरह से वह अपमानित हुई थी वह अपने अपमान का बदला लेना चाहती थी,,, रघुवर उसकी प्रोग्राम था के सामने उसके पति ने उस पर मार्तत्व का सवाल उठाया था एक तरह से उसे बांझ कह दिया था,, यह बात उसे अंदर तक कचोट रही थी,,, वह इतने गुस्से में थी कि उसका बस चलता तो वह खंजर को जमीदार के सीने में घोंप देती,,, लेकिन एक औरत होने के नाते उसमें इतनी ताकत नहीं थी,,,, वह अपने अपमान का बदला लेना चाहती थी उसी के बारे में सोच रही थी कि तुरंत दरवाजा भडाक की आवाज के साथ खुला,,,

हरामजादी,,,,, मादरचोद,,,,,,, मुझ पर इल्जाम लगाती है कि मैं बाप नहीं बन सकता,,, मुझमें ताकत नहीं है,,, रंडी साली कुत्तिया आज मैं तुझे अपनी ताकत दिखाता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही जमीदार अपनी बीवी के बाल को पकड़कर जोर से खींचते हुए अपनी बाहों में भर लिया,,, वह छुडाने की पूरी कोशिश करती रही लेकिन छुड़ा नहीं पाई,,, जमीदार शराब के नशे में पूरी तरह से गुस्से में था और अपनी मर्दानगी दिखाने पर आतुर हो चुका था,,, पूरा जबरदस्ती अपनी बीवी के ब्लाउज खोलने की जगह उसे दोनों हाथों से पकड़कर फाड़ दिया ब्लाउज के बटन टूट कर फर्श पर बिखर गए,,,, यह सब राधा दरवाजे की ओट के पीछे खड़ी हो कर देख रही थी जो कि अभी अभी आई थी और वह भी अपनी सास को सांत्वना देने के लिए लेकिन अंदर का नजारा कुछ और ही चल रहा था,,, ब्लाउज के पढ़ते ही उसकी दोनों खरबूजे जैसी चूचियां,,, उछल कर बाहर आ गई,,, उन चुचियों से प्यार करने की जगह जमीदार उस पर अपना गुस्सा उतारा था और उसे अपने दोनों हाथों में भर कर जोर जोर से दबा रहा था वह इतनी जोर से दबा रहा था कि जमीदार की बीवी दर्द से चिल्ला उठ रही थी,,,उसकी दर्द भरी आवाज सुनकर राधा का मन पिघल रहा था वह छुड़ाने के लिए अंदर जाना चाहती थी लेकिन उसे डर लग रहा था कि किसी तरह से उसके ससुर ने अपमानित किया था इस बात का डर था कि कहीं जो है उसकी सास के साथ कर रहे हैं कहीं उसके साथ भी ना करने लगे क्योंकि वह पूरी तरह से नशे में था,,,, अगले ही पल जमीदार अपनी बीवी को बिस्तर पर घोड़ी बना दिया और तुरंत उसकी सारी पकड़कर उठाते हुए उसे कमर तक कर दिया,,, गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड देखकर जमीदार उस पर जोर जोर से तमाचा मारने लगा देखते ही देखते उसकी गोरी गोरी गांड लाल टमाटर की तरह हो गई,,, यह सब राधा से देखा नहीं जा रहा था,,, अगले ही पल जमीदार अपनी धोती खोल दिया और नंगा होकर अपने लंड को अपनी बीवी की बुर में डाल कर,,, चोदना शुरू कर दिया लेकिन 5 6 धक्के में ही जमीदार जमीन चाट गया उसका पानी निकल चुका था,,,यह देखकर राधा को यकीन हो गया कि उसकी सांसे जो कुछ भी कह रही थी वह एकदम सच कह रही थी राधा वहां से अपने कमरे में चली गई,,,

जमीदार बिस्तर पर पसर गया था बेसुध होकर धोती नीचे जमीन पर बिखरी पड़ी थी,,,, और उसकी बीवी कुछ देर तक उसी तरह से घोड़ी बने रोती रही अपने कपड़ों को भी दोस्त करने की कोशिश नहीं की वो जानती थी कि दरवाजा खुला हुआ है लेकिन आज उसे किसी बात की फिक्र नहीं थी उसे अपने आप पर अपनी किस्मत पर और अपने अपमान पर रोना आ रहा था उसका बदला लेना चाहती थी,,, इसलिए दूसरे दिन रघु से मिलने की ठान ली,,,।
 
रघु का दिमाग काम करना बंद कर दिया था,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें जिस तरह से जमीदार ने उसकी बेज्जती किया था उससे वह अंदर ही अंदर क्रोध से जल रहा था वह जमीदार से बदला लेना चाहता था,, लेकिन उससे भी पहले जरूरी था अपनी बड़ी बहन की शादी और वह भी जमीदार के ही घर में,,, रघु बेशक जमीदार के आगे कमजोर था क्योंकि वह अकेले जमीदार से लड़ नहीं सकता था लेकिन फिर भी वह अपने आप पर आ जाता तो जमीदार को धूल चटा सकता था लेकिन ऐसा करने से हो सकता था की बाजी पूरी तरह से जमीदार के हाथ में चली जाए क्योंकि उसकी बहन गर्भवती है यह बात उसे भी पता चल चुकी थी और अपने ऊपर किसी भी खतरे को भांप कर,, जमीदार उसकी बहन को बदनाम कर सकता था और ऐसा रघु बिल्कुल भी नहीं चाहता था,,,

जमीदार के घर पर क्या हुआ इस बारे में उसने अभी तक अपनी मां से बिल्कुल भी बात नहीं किया था वह अपनी मां को किसी भी हाल में चिंता में नहीं डालना चाहता था,,,रघु किसी भी तरह से अपनी बहन की शादी बिरजू से करवाना चाहता था वो भी इसलिए नहीं की बिरजू और सालु एक दूसरे से प्यार करते थे बल्कि इसलिए कि शालू गर्भवती हो चुकी थी ऐसे में बिरजू से शादी करवाने में ही उसकी और उसके खानदान की भलाई थी क्योंकि शालू बिरजू के साथ शारीरिक संबंध बना चुकी थी,,, लेकिन जमीदार ने मुश्किल पैदा कर दिया था,,, वह किसी भी हाल में यह शादी होने नहीं देना चाहता था,,,, रघु जमीदार के गुस्से को देख चुका था जिस तरह से वह अपनी बीवी को तमाचा मार कर और उसे भला बुरा बोल कर अपनी बहू तक को नहीं छोड़ा इस बात से रघु समझ गया था कि जमीदार शालू की शादी अपने बेटे बिरजू से करने के लिए कभी तैयार नहीं होगा,,,।

जमीदार की बीवी और उसकी बहू रघु से मिलने के लिए उसके पास पहुंच गए लेकिन जब घर के भी उसके घर पर नहीं गई क्योंकि वह जानती थी कि उसका उसके घर पर जाना यह बात जमीदार को पता चल सकती है,,, इसलिए रघु के खेतों में ही मुलाकात करना उचित समझकर,,, जमीदार की बीवी रघु को खेत में बुला ली,,,,,, रघु भी खबर मिलते ही खेत पर पहुंच गया,,,,

रघु के खेत में बीचोबीच घास फूस की झोपड़ी बनी हुई थी और नीम का पेड़ लगा हुआ था जिसके छाया मे जमीदार की बीवी और उसकी बहू राधा बैठी हुई थी,,,, वहां पर पहुंचते ही,,,

क्या बात है बड़ी मालकीन,,,, इधर खेतों में एकाएक क्यों बुला ली,,,(कोई और समय होता तो रघु को ऐसा ही लगता कि चौकीदार की बीवी चुदवाने के लिए खेत में बुला रही है,,, लेकिन अभी हालात बिल्कुल भी ऐसे नहीं थे कि शारीरिक संबंध बनाया जाए क्योंकि,, जमीदार ने अपनी बीवी का बुरी तरह से अपमान किया था और मारा भी था,,। ऐसे में बिल्कुल भी नहीं था कि जमीदार की बीवी खेतों में रघु से शारीरिक संबंध बनाने के उद्देश्य से आई हो,,)

रघु कल जो कुछ भी हुआ उसकी मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी,,,

मुझे भी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी जिस तरह से बाबूजी ने मेरा अपमान किया है मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगी,,, मैं मां नहीं बन सकती इसका जिम्मेदार उनका ही बेटा है इसमें मेरा क्या कसूर है,,,(इतना कहते हुए राधा की आंखों में आंसू भर आए)

सब ठीक हो जाएगा बहु तुम चिंता मत करो,,,, रघु तुमने तो देख ही लिया क्योंकि वह बिल्कुल भी मानने वाले नहीं हैं,,, हम लोगों ने बहुत कोशिश की लेकिन परिणाम कुछ भी नहीं निकल पाया बेइज्जती हुई सो अलग,,,।

लेकिन मालकीन अब ,,, अब हमारा क्या होगा हम लोग तो कहीं के नहीं रह जाएंगे,,,, शालू के पेट में बिरजू का बच्चा पड़ रहा है आज नहीं तो कल यह जमाने को पता चल जाएगा फिर सोचो क्या होगा आप लोगों का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा,,,, लेकिन हम लोग कहीं के नहीं रह जाएंगे,,,। शालू की शादी जमीदार बिरजू से कभी नहीं होने देगा,,।

होने देगा और ऐसा होकर रहेगा लेकिन इसमें मुझे तुम्हारी मदद चाहिए अगर मेरी मदद करने का हौसला रखते हो तो अपनी माथे से यह कलंक भी मिटा सकते हो वरना कुछ नहीं हो पाएगा,,,

मैं कुछ भी करने को तैयार हूं मालकिन,,,,,

देखो बिरजू यह इतना आसान नहीं है जितना कि कहने में लग रहा है मैं जमीदार को रास्ते से हटाने की बात कर रही हूं,,,।

क्या,,,,?(रघु एकदम से चौक ते हुए बोला जमीदार की बीवी की बात सुनकर उसकी बहू राधा भी चौक गई)

हां जो तूम सुन रहे हो,, मैं बिल्कुल सच कह रही हु ऐसा ही करना होगा तभी जाकर सालु कि शादी बिरजू से हो पाएगी और उसके माथे का कलंक भी मिट पाएगा वरना सब कुछ अनर्थ हो जाएगा रघु,,, फैसला तुम्हारे हाथों में है,,,।

बडी मालकिन जरा ठीक से सोच लो अपने सिंदूर का सौदा कर रही हो,,,

मैं उसे अब अपना पति बिल्कुल भी नहीं मानती,,जब वह मुझे अपनी पत्नी नहीं मानता नहीं मुझे इज्जत देता है ना मेरी बात मानता है और ना मुझे फैसला करने का हक है तो मैं किस रिश्ते से उसकी पत्नी हूं वापस मुझे अपनी जरूरत पूरी करने के लिए रखा है,,,

लेकिन ऐसा करने में खतरा है,,, कहीं हम पकड़े गए तो,,,

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मैं तुम्हें सब बताती हूं कैसे कर रहा है लेकिन तुम्हें पीछे नहीं हटना है अगर ऐसा हुआ तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा तुम्हारे बहन का भविष्य तुम्हारे हाथों में है,,,,

मैं पीछे नहीं हटूंगा मालकिन मुझे भी अपने अपमान का बदला लेना है जमीदार ने मेरी बहुत बेज्जती की,,,,

हां तो तुम्हें वैसा ही करना होगा जैसा मैं कहती हूं तुम्हारा बदला भी पूरा हो जाएगा मेरा भी और तुम्हारी बहन की शादी में मेरे घर में हो जाएगी वह राज करेगी राज,,,,

हां रघु मां जी ठीक कह रही है,,, और तो और तुम्हारी बहन की शादी हो हमारे घर में हो जाने से तुम्हारा आना जाना भी बराबर बना रहेगा और जमीदार के ना रहने पर तो किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी,,,,

(रघु को सास बहू दोनों की बातें उचित लग रही थी सबसे ज्यादा जरूरी बात थी शालू की शादी और जिस तरह से मालकिन कह रही थी उसी तरह से ठाकुर को ठिकाने लगा देने के बाद उसकी बहन की शादी धाम धूम से उस घर में हो जाएगी,,,, कुछ देर सोचने के बाद रघु बोला,,,)

ठीक है मैं तैयार हूं लेकिन करना कब है,,,?

कल ही एकदम सुबह जब सूरज निकलता है उसके पहले ही क्योंकि उस समय जमींदार टहलने के लिएखेतों की तरफ जाती है और उस समय उनके साथ कोई भी आदमी नहीं होता वह बिल्कुल अकेले होते हैं,,, और वही मौका एकदम ठीक है अंधेरे का फायदा उठाकर तुम जमीदार को मार सकते हो,,,,

ठीक है मालकिन,,,आप जिस तरह से कह रही है अगर वैसा ही हुआ तो समझ लो काम हो जाएगा,,,

वैसा ही होगा रघु,,,, अच्छा अब हम चलते हैं,,, अगर किसी को यह भनक भी लग गई कि हम दोनों ईधर आए हैं तो गजब हो जाएगा,,,(इतना कहकर बड़ी मालकिन और उसकी बहू दोनों चली गई रघु सोच में पड़ गया था की बड़ी मालकिन ऊससे हत्या करने के लिए कह रही थी,,, जिसके बारे में वह सोच भी नहीं सकता था लेकिन उसके पास कोई रास्ता भी नहीं था जान से ज्यादा इज्जत प्यारी होती है इज्जत के लिए इंसान कुछ भी करने को तैयार हो जाता है रघु के सामने भी बस यही एक रास्ता नजर आ रहा था क्योंकि रघु अच्छी तरह से समझ गया था कि जमीदार के जीते जी उसकी बड़ी बहन उस घर की बहू कभी नहीं बन सकती और अगर ऐसा नहीं हो पाया तो ,,,, उसकी बहन शालू का हाथ समाज नहीं थाम पाएगा,,, और इसका जिम्मेदार भी वह खुद था इसलिए उसे ही रास्ता निकालना था काफी सोच विचार करने के बाद आखिरकार वह ऐसी निष्कर्ष पर पहुंचा की बड़ी मालकिन जो कह रही है उसी में सबकी भलाई है,,,,

दूसरे दिन सूरज निकलने से पहले ही रघु किसी को बिना कुछ बताए घर से निकल गया,,, ,,, फैसला तो कर चुका था लेकिन उसके मन में डर भी लग रहा था क्योंकि आज तक उसने किसी से भी मारपीट नहीं किया और यहां तो सीधे-सीधे जान लेने की बात आ चुकी थी,,,, और जिस कशमकश में रघु फंसा हुआ था वहां पर सिर्फ दो ही चीज नजर आती थी या तो जान लेना या फिर जान देना,,,,,,,,।

आखिरकार रघु उस जगह पर छुप गया जहां से जमीदार टहलने के लिए निकला करता था अभी भी चारों तरफ अंधेरा था सूरज निकलने में समय था वह बेसब्री से जमीदार का इंतजार करने लगा,,,, हाथ में एक मोटा लट्ठ लिए रघु वहीं खेतों के अंदर बैठा रहा,,,,थोड़ी ही देर बाद किसी के चहलकदमी की आवाज उसके कानों में पड़ी,,, वह नजर उठाकर उस दिशा में देखा तो उसे जमीदार दिखाई दिया,,,, उसे थोड़ी बहुत घबराहट होने लगी उसकी रगों में खून का दौरा तेज हो गया,,,, जमीदार निश्चिंत होकर रोज की तरह बड़े आराम से चहल कदमी करता हुआ आ रहा था,,, हाथ में लकड़ी की छड़ थी,,,,,, जैसे ही जमीदार रघु के एकदम करीब से गुजरा रघु मौका देख कर एकदम से खेतों में से बाहर आया और जमीदार के ऊपर लट्ठ बरसाना शुरू कर दिया,,, और तब तक बरसाता रहा जब तक कि जमीदार नीचे गिर नहीं गया,,, नीचे गिरने के बाद भी रघु उसके ऊपर लट्ठ बरसाता रहा,,,। मौका देख कर रघु वहां से भाग गया किसी ने भी उसे आते जाते ना उसे मारते हुए देखा,,,।

सुबह हुई तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया,,, गांव के दो चार आदमी जमींदार को वैध के पास ले गए,,, जमीदार की सांसे अभी चल रही थी हवेली में खबर मिलते ही रोना-धोना शुरू हो गया,,, जमीदार की बीवी और बहूअच्छी तरह से जानती थी लेकिन फिर भी रोने का नाटक करने लगी,,,,

पूरा गांव शोक मग्न हो गया,, किसी को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि इस तरह का हादसा हो जाएगा,,, थोड़ी देर में सारे रिश्तेदार नाती इकट्ठा होने लगे तरह तरह की बातें बनाने लगे,,, सब को लगने लगा कि जरूर है जमीदार के किसी दुश्मन का काम है तो कोई कहता है कि चोर ऊच्चको का काम था,,,,,,जमीदार की बीवी और उसकी बहू दोनों खुश नजर आ रहे थे लेकिन अपनी खुशी अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने दे रहे थे,,। राधा के पिताजी लाला भी वहां पहुंच गया,,,, जिस तरह की हालत जमीदार की हो चुकी थी किसी को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह बच पाएगा,,,

तकरीबन 10 दिन तक वेद ने जमीदार का इलाज किया,,, सांसे चल रही थी,,,,, जैसे-जैसे जमीदार का इलाज बढ़ता जा रहा था रघु और जमीदार की बीवी और बहू तीनों की हालत खराब होती जा रही थी उन तीनों को इस बात का डर था कि कहीं जमीदार बच गया तो उनके किए कराए पर पानी फिर जाएगा हालांकि इस बात से पूरी तरह से निश्चिंत थे कि होश में आ जाने के बाद भी जमीदार यह नहीं बता सकता कि उस पर किसने हमला किया है,,,,।

फिर भी तीनों की हालत खराब थी तीनों आपस में बातें करने लगे थे कि अगर जमीदार बच गया तो क्या होगा,,,

लेकिन जमीदार की बीवी जैसे कि मन में ठान चुकी थी कि अगर जमीदार बच भी जाएगा तो उस पर दोबारा हमला करेंगे,,,,

तकरीबन 15 दिन गुजर जाने के बाद जमीदार ने अपनी आंखे खोला,,, जमीदार की बीवी वहीं पास में खड़ी थी,,, जमीदार बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन बोल नहीं पा रहा था हाथ की हरकत करना चाह रहा था लेकिन कर नही पा रहा था,,, जल्द ही वेद को समझ में आ गया कि जमीदार देख तो सकता है लेकिन बोल नहीं पाएगा ना तो हाथ को हिला पाएगा ना पैर को,,,। जैसे ही यह बात वैद जमीदार की बीवी को बताया,,, जमीदार की बीवी खुश हो गई ,,, राधा को इस बात की खबर पडते ही वह खुशी से झूम उठी,,,, जहां पूरा गांव रिश्तेदार सदमे में थी वही तीन लोग बेहद खुश थे ,,जमीदार की बीवी जमीदार की बहू और रघु,,,,। तीनों के मन की हो चुकी थी,,,।

महीना गुजर गया रिश्तेदारों का आना जाना हवेली में कम होने लगा जमीदार को उनके ही कमरे में,,, एक बिस्तर पर लिटाया गया,,,, और उनकी सेवा चाकरी करने के लिए नौकर को भी काम पर लगा दिया गया,,,।

शाम के वक्त जमीदार की बीवी जमीदार के कमरे में गई उसे दूध पिलाने का समय हो रहा था जमीदार की गिलास उठा कर जमीदार के होठों पर लगाकर धीरे-धीरे दूध को मुंह में डालने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,

देख लिया ना मनमानी करने का अंजाम अगर मेरी बात मान ली होती तो आज क्लास से नहीं बल्कि मुंह लगाकर दूध पी रहे होते,,, और वह भी मेरा,,, चलो कोई बात नहीं,,, तुम तो शालू को इस घर की बहू बनाने से रहे,,, लेकिन जमीदार साहब,,, शालू इसी घर की बहू बनेगी मैं शादी कराऊंगी बिरजू की सालु से,,, अब देखती हूं कौन रोकता है,,,

(इतना सुनते ही जमीदार के चेहरे पर गुस्से का भाव साफ नजर आने लगा,,, वह क्रोधित हो गया था और दूध के गिलास से अपना मुंह दूसरी तरफ हटा लिया,,, यह देख कर जमीदार की बीवी बोली,,,।

वाह रे मेरे जमीदार साहब रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया,,,, लेकिन यह तो शुरुआत है अभी से भी बड़ा झटका मैं तुम्हें दूंगी इसी कमरे में,,,,,,,।
 
,, रघु बहुत खुश था,, रघु क्या जमीदार की बीवी और राधा भी बेहद खुश थी, और होती भी कैसे नहीं आखिरकार उनके मन की जो हो चुकी थी,,, रघु के तो रास्ते का सबसे बड़ा कांटा दूर हो चुका था,, अब वह अपनी बहन की शादी बिरजू से बिना रोक टोक से करा सकता था,,,,,,।

कजरी जिसकी भावनाए मचलने लगी थी अपने ही बेटे के मर्दाना अंग को अपने अंदर लेने के लिए,,,,, वह अपनी भावनाओं पर काबू कर सकने में अब असमर्थ होती जा रही थी आखिरकार सबसे पहले वह एक औरत थी जिसकी को जरूर देखें कुछ इच्छाएं थी जो कि बरसों से उसके अंदर ही कभी रह गई थी लेकिन अब धीरे-धीरे वह बाहर आना शुरू हो गई थी,,,

ऐसे ही एक दिन कजरी नहा कर अपने कमरे के अंदर पेटीकोट और ब्लाउज पहन रही थी पेटिकोट तो पहन चुकी थी लेकिन ब्लाउज पहनने के बाद उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसकी ब्लाउज के दो बटन टूट चुके हैं,, और वह उसी तरह से ब्लाउज को पहने हुए ही सुई और डोरा ढुढने लगी,,, शालू और रघु दोनों घर पर नहीं थे वह अकेली ही थी,,, थोड़ी देर में उसे सुई और डोरा दोनों मिल गया,,, वह डोरे को सुई के छेद में डालने लगी,,, लेकिन छोटे से छेद मैं डोरा जा नहीं रहा था,,,, वह परेशान होने लगी,, ब्लाउज के बटन अभी भी पूरी तरह से खुले हुए थे उसकी दोनों चूचियां खरबूजे की तरह लटकी हुई थी,,, लेकिन दोनों में लटकन बिल्कुल भी नहीं एकदम कड़क और गोल थी,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि अगर शालू होती तो सुई में धागा डालकर ब्लाउज के बटन लगा दी होती,,,जब काफी देर तक कोशिश करने के बाद भी सुई के अंदर धागा नहीं गया तो वहां परेशान होकर अपने ब्लाउज को निकालने की सोचने लगी कि तभी अंदर वाले कमरे में जहां पर कजरी सुई में धागा डाल रही थी वहां पहुंच गया एकाएक रघु के इस तरह से कमरे के अंदर आ जाने की वजह से वो एकदम से सक पका गई और अपनी दोनों चूचियों को छुपाने की कोशिश करने लगी,,,, इस समय ना जाने क्यों कजरी को शर्म आने लगी थी जो कि रात को छत पर अपने ही बेटे से अपनी मालिश करवाने के बहाने उसे अपनी बुर के दर्शन करा रही थी,,।

रघु अंदर वाले कमरे में आते ही अपनी तेज नजरों से देख लिया था कि उसकी मां सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी और ब्लाउज पूरी तरह से खुला हुआ था उसमें एक भी बटन लगे हुए नहीं थे,,,, रघु की नजर एक झलक भर अपनी मां की दोनों नंगी चूचियों पर भी पड़ चुकी थी यह देख कर रघु के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, लेकिन अपने खुले हुए ब्लाउज में से झांक रही अपनी दोनों चूचियों को छुपाने की कोशिश करते हुए उसके हाथ से सुई और धागा तूने छूट कर नीचे गिर गया था,,, जिसे नीचे छुपा कर रघु उठाते हुए बोला,,,

क्या हुआ मां क्या सिलाई कर रही थी,,,

अरे कुछ नहीं बेटा ब्लाउज के बटन लगा रही थी लेकिन सुई में धागा जा ही नहीं रहा,,,

रुको मैं सुई में धागा डाल देता हूं,,,

तू सुई में धागा डाल लेगा,,,

तो क्या इस काम में मै माहिर हूं,,,, कितना भी छोटा छेद हो मैं अपनी सूझबूझ से उस में धागा डाल ही देता हूं,,,।(रघु दो अर्थ वाला शब्द बोल रहा था,,, और कजरी भी अपने बेटे के इस दो अर्थ वाले शब्द को सुनकर रोमांचित हो उठी,,, वह अपने मन में ही कल्पना करने लगी की,,, उसके बेटे का हथियार कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है और बरसों से उसकी बुर में लंड नहीं गया इसलिए उसका छेद काफी छोटा और शंकरा हो चुका था उसके बेटे के कहने के मुताबिक कैसा भी छेद हो वह बड़े आराम से डाल देगा,, यह, ख्याल मन में आते ही वह पूरी तरह से गदगद हो गई,,, रघु पल भर में धागा में थूक लगाकर सुई में डाल दिया यह देख कर कजरी और ज्यादा रोमांचित हो उठी क्योंकि जिस तरह से वह धागे में थूक लगाकर उसे डाल रहा था,,,,, कजरी कल्पना करने की इसी तरह से वह अपने लंड पर थूक लगाकर उसकी बुर में डालेगा,,,, इस तरह की अश्लील कामोत्तेजक ख्याल की वजह से कजरी की हालत खराब होती जा रही थी,,,,, रघु सुई में धागा डाल चुका था,,, और सुई में धागा डालने के बाद बोला,,,।

लाओ में बटन लगा देता हूं कहां है क्लाउज,,,,

(रघु के मुंह से इतना सुनते ही कचरी एकदम से सन्न रह गई,,,।)

नहीं नहीं तू ला दे इधर मैं खुद लगा लूंगी,,,।

नहीं मां मुझे लगाने दो ना मैं लगा लेता हूं,,,(रघुजानबूझकर बटन लगाने के लिए बोल रहा था क्योंकि वह जानता था कि जो ब्लाउज उसकी मां बहन नहीं है उसी ब्लाउज का बटन टूटा हुआ है वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या करने देती है,,,)

अरे रघु तू रहने दे मैं लगा दूंगी बस धागा नहीं जा रहा था जो तूने डाल दिया है अब मैं आराम से लगा लूंगी,,,।

नहीं मा ऐसा क्यों कर रही हो,,,, लाओ ना में लगा देता हूं,,, कहां है ब्लाउज,,,?(रघु जानबूझकर इधर उधर नजर घुमाते हुए बोला,,,)

तो ऐसे नहीं मानेगा,,,,

इसमें मानने वाली क्या बात है,,,,

ले यह रहा ब्लाउज इसमें लगाना है बटन,,,,(कजरी एकदम से अपने ब्लाउज के दोनों छोर को पकड़ते हुए बोली और ऐसा करने से इसकी ब्लाउज के दोनों छोर थोड़ा खुल गया था जिससे रघु को अपनी मां की दोनों चूचियां एकदम साफ नजर आने लगी थी,,, कजरी को ऐसा था कि रघु शर्मा जाएगा और सुई धागा वही छोड़कर चला जाएगा लेकिन वह अपनी मां की हरकत पर एक टक ब्लाउज में हीं देखता रह गया,,, कजरी को इस तरह से रघु का अपनी चूचियों को देखना अच्छा भी लग रहा था,,,।

लाओ इसमें कौन सी बड़ी बात है अभी बटन लगा देता हूं,,, कहां है बटन,,,(रघु एकदम से सहज होता हुआ बोला,,,)

ओ रहा उस डिब्बे में,,,,(आंख से इशारा करते हुए कजरी बोली,,, रघु तुरंत उस डिब्बे की तरफ गया और उसमें से दो बटन निकालकर अपनी मां के पास आ गया,,,)

अभी लगा देता हू,,,,(इतना कहकर वह ब्लाउज में बटन लगाने की तैयारी करने लगा कजरी से कुछ भी बोला नहीं जा रहा था अपने बेटे की हरकत पर पूरी तरह से हैरान थी उसकी आंखों में उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं नजर आ रही थी,,, कजरी भी टस से मस नहीं हो रही थी हालांकि उसे शर्म आ रही थी लेकिन न जाने कौन सा आकर्षण था कि वह ना तो खुद वहां से जा रही थी और ना ही अपने बेटे को ऐसा करने से रोक पा रही थी,,, रघु की आंखों में अपनी चुचियों को देखकर एक अद्भुत चमक कजरी को नजर आ रही थी,,,, रघु अपनी मां की चूचियों को ही देख रहा था,,। एकदम गोलाकार खरबूजे की तरह कड़क,,, जिसे देख कर रखो के मुंह में पानी आ रहा था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि,,, बटन लगाने के बहाने वह अपनी मां की चूचियों को छू सकता है और इसीलिए उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी,,,उसका दिल जोरो से धड़कने लगा जब वह एक हाथ से अपनी मां के ब्लाउज को छोड़ पकड़ कर उस पर बटन लगाना शुरू कर दिया,,, बार-बार जानबूझकर रघु की उंगलियों का स्पर्श चुचियों पर हो जा रहा था,,, जिसकी वजह से रघु के साथ-साथ कजरी के तन बदन में हलचल सी मच जा रही थी,,,। कजरी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी वो कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी ब्लाउज का बटन उसका बेटा अपने हाथों से लगाएगा वो भी ब्लाउज पहने हुए ही,,, रघु बार-बार जानबूझकर अपनी मां की चुचियों को स्पर्श कर दे रहा था ,, चुचियों कि गर्माहट उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर को बढ़ावा दे रही थी,,। रघु का मन बहक रहा था वह अपनी मां की चूचियां अपनी हथेली में पकड़कर दबाना चाहता था उसे चूमना चाहता था लेकिन ऐसा कर सकने की स्थितिऔर हिम्मत उसके में बिल्कुल भी नहीं थी हालांकि उसकी जगह कोई और औरतहोती तो वह अब तक चूचियों को अपने हाथ में पकड़ कर उसे दबाने के साथ-साथ उसे पीने का भी सुख ले लिया होता,,, लेकिन बार-बार वह अपनी मां की चूचियों को छू ले रहा था हल्का सा स्पर्श भी रघु के तन बदन में उत्तेजना भर दे रहा था,,, देखते ही देखते पजामे के अंदर उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,, जिसका एहसास कजरी को अपनी दोनों टांगों के बीच बराबर होने लगा था नीचे देखने की हिम्मत उसके में बिल्कुल भी नहीं थी वह भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी लेकिन फिर भी हिम्मत करके वह नीचे की तरफ अपनी नजर दौड़ाई तो एकदम हैरान रह गई,,, रघु के पजामे में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जो कि सीधा खड़ा होकर पेटिकोट के ऊपर से ही उसकी पुर के ऊपर ठोकर लगा रहा था,,,पल भर में ही इस नजारे को देखकर और उसे महसूस करके कजरी की सांसे तेज चलने लगी,,,रघु धीरे-धीरे एक बटन लगा चुका था और दूसरा बटन लगा रहा था रघु यही सोच रहा था कि यह समय यहीं रुक जाए क्योंकि इस पल में उसे बेहद सुख की अनुभूति हो रही थी क्योंकि भले ही वह अपनी मां की चुदाई नहीं कर रहा था लेकिन चुदाई से भी अत्यधिक सुख उसे प्राप्त हो रहा था,,,,।

मां बेटे दोनों की हालत खराब थी अंदर वाले कमरे में रखो अपनी मां के ब्लाउज के बटन लगाते हुए उसकी चुचियों को छोड़ने का स्पर्श करने का आनंद ले रहा था हालांकि वह पूरी तरह से खुलकर अपनी हथेली में अपनी मां की चुचियों को नहीं पकड़ पा रहा था लेकिन फिर भी हल्का-हल्का स्पर्श उसे जवानी का जोश बढ़ाने में मदद कर रहा था,,,

जब-जब रघु की हथेली का स्पर्श कजरी को अपनी गोलाईयों पर होता वह पूरी तरह से गर्म हो जाती ,,,

रघु को इस बात का एहसास था कि पजामे में बना तंबू उसकी मां की बुर पर ठोकर मार रहा है और यह देखकर रघु भी अपने कदम पीछे नहीं ले रहा था बल्कि बार हल्का-हल्का अपनी कमर को आगे की तरफ ठैल रहा था जिससे कजरी को इस बात का डर लग रहा था कि कहीं पेटिकोट के ऊपर से ही उसके बेटे का लंड उसकी बुर के मुख्य द्वार में प्रवेश न कर जाए,,,उत्तेजना के मारे कजरी की सांसे गहरी चल रही थी और गहरी सांसे चलने की वजह से उसकी दोनों चूचियां ऊपर नीचे उठ बैठ रही थी जिसकी वजह से बड़े आराम से कचरी की चूत में उसके बेटे के हाथ पर स्पर्श हो रही थी,,,

देखते-देखते रघु अपनी मां के ब्लाउज में दोनों बटन लगा दिया,,,, और सुई से धागे का गिठान लेते हुए बोला,,,

देख लो मा एकदम अच्छे से लगा दिया हुंं,,,, अब यह बिल्कुल भी टूटने वाला नहीं है,,,(रघु की बात सुनकर प्रतिमा बस हां में सिर हिला रही थी बोल सकने की हिम्मत उसके में बिल्कुल भी नहीं थी,,, और वह अपनी मां की ऐसी खामोशी को उसकी संमती समझ रहा था,,, इसलिए सुई धागा को एक तरफ रखते हुए वह बोला,,,।)

रुको मैं तुम्हारे ब्लाउज का बटन लगा देता, हूं,,,,

(इस पर भी कजरी उसे रोक नहीं पाए वह भी अपने बेटे के स्पर्श का आनंद लेना चाहती थी,, वह मूर्ति बनी देखती रह गई और रघु,,,,,अपनी मां के ब्लाउज के ऊपर वाला बटन काम करने लगा देते वह अपनी मां के ब्लाउज के ऊपर के दो बटन बंद कर चुका था वह जानबूझकर ऊपर के ही बटन को पहले बंद कर रहा था ताकि वह नीचे वाला बटन बंद करते समय अपनी मां की चूची को हाथ से पकड़ सके और ऐसा ही हुआ आखरी दो बटन लगाते समय वहा अपनी मां की बाइ चुची को अपने हाथ से पकड़ कर उसे ब्लाउज के कटोरे में डालने लगा,,, यह हरकत कजरी के लिए जानलेवा साबित हो रही थी ऊपर हाथ की हरकत और नीचे लंड की ठोकर उसे पूरी तरह से ध्वस्त कर रही थी,,,। उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और बहना शुरू कर दी थी,,, कजरी अपनी सांसो को दूर से नहीं कर पा रही थी,,, तभी रघु अपनी मां की दांई चुची को पकड़ लिया और उससे ब्लाउज के कटोरे में डालने लगा लेकिन इस बार रघु पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वह अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पा रहा था और इसीलिए वह उस सूची को ब्लाउज के कटोरे में डालते हुए वह जोर-जोर से चूची को दबा रहा था छोड़ रहा था,,, ऐसा बार-बार कर रहा था जिससे कजरी पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी और कटोरे में आखिरी मौके में डालते समय वह कस के अपनी मां की चूची को दबा दिया पूरी तरह से उत्तेजित अवस्था में रघु ने यह हरकत किया था जिससे कजरी के मुंह से उत्तेजना भरी सिसकारी फुट पड़ी,,,।

सससहहहहहह,,,आहहहहहहहह,,,,

(अपनी मां के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुन कर रखो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था अपनी मां की खामोशी को देखकर उसे इतना तो समझ में आ गया था कि उसकी हरकत उसकी मां को अच्छी लग रही है और वह इससे ज्यादा बढ़ना चाहता था,,, वह अपनी मां के ब्लाउज के आखिरी बटन को लगा रहा था,,,, कजरी अपने मन में सोच रही थी कि उसका बेटा कुछ और हरकत करें और रघु भी अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल रहा था,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आज अपनी मां को चोदने का पूरा मन बना चुका है,,, क्योंकि इतना तो वह अच्छी तरह से जानता था कि उसके लंड की हरकत उसकी मां अच्छी तरह से समझ रही है और कुछ बोल नहीं रही है इसका मतलब साफ था कि अगर वह पेटिकोट उठाकर अपनी मां की बुर में लंड डाल देगा तो भी ऊसकी मां को कोई भी एतराज नहीं होगा,,,, और शायद दोनों मां बेटे के मन में यही चल रहा था,,, क्योंकि मौका दोनों के पक्ष में था इसने घर पर चालू नहीं थी और दोनों अंदर वाले कमरे में थे और दोनों काफी उत्तेजित भी हो चुके थे कजरी की बुर से पानी लगातार बह रहा था जिससे पेटिकोट के आगे वाला भाग गीला हो चुका था जिसका आभास रघु को अच्छी तरह हो रहा था वह साफ देख पा रहा था कि उसकी हरकत की वजह से उसकी मां गीली हो चुकी थी जोकि एक तरह से कजरी की तरफ से संपूर्ण सहमति का इशारा था,,,। रघु अपनी मां की आंखों में देखने के लिए कजरी की नजर भी रघु की नजरों से टकरा गई कुछ सेकंड तक दोनों एक दूसरे की आंखों में देखते रहे और कजरी ने शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे कर दी,,, उसका इस तरह से शर्माना रघु की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाने लगारघु अपने मन में यही सोच रहा था कि ऐसा मौका उसे फिर पता नहीं कब मिलेगा इसलिए वह इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहता था पर वह अपनी मां की पेटीकोट को कमर तक उठाने की सोच ही रहा था कि बाहर बर्तन के खनकने की आवाज आने लगी,, मां बेटे दोनों समझ गए कि सालु घर पर आ चुकी हैं,,,, रंग में भंग पड़ चुका था किसी भी वक्त अंदर वाले कमरे में आ सकती थी इसलिए समय गवाएं बिना रघु वहां से जाने को हुआ और जाते-जाते,,, अपनी मां की चुचियों की तरफ देखते हुए बोला,,,।

तुम बहुत खूबसूरत हो मां,,,,,

(इतना कहते हुए वह कमरे से बाहर चला गया कजरी प्यासी नजरों से अपने बेटे को कमरे से बाहर जाते हुए देखते रह गई,,,शालू घर पर आ चुकी है इस बात को अभी अच्छी तरह से जानती थी इसलिए साड़ी पहनने लगी लेकिन साड़ी पहनने से पहले अपने पेटिकोट के आगे वाले भाग पर डाली तो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और अपने गीले पन के एहसास से वह पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो गई,,,।
 
मुझे यह कहानी लिखने में बहुत ही मजा आया,,, हर कहानी में नायक का किरदार कुछ अलग ही होता है इसमें भी दूसरी कहानी की तरह रघु का किरदार सबसे दिलचस्प था,,, रघु का किरदार पढ़कर बहुत से लोगों को रघु से जलन भी होती होगी क्योंकि वाकई में रघु कि किस्मत भी जोरों पर ही चल रही है ,,,

जमीदार की खूबसूरत बीवी के साथ चुदाई का अद्भुत खेल खेलने को मिला जो कि अभी जारी ही है,,, उसके खूबसूरत बड़ी-बड़ी गांड जिसके बारे में सोच कर ही बहुत लोगों का पानी निकल जाता है उसके खूबसूरत है जिस्म से रघु अपनी प्यास बुझाता आ रहा था,,,

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ललिया भरे हुए जिस्म की मालकिन जिस के खूबसूरत अंगों से मदन रस हमेशा टपकता रहता है,,, रघु उसके भी खूबसूरत बदन के साथ अपने जिस्म की आग को बुझा चुका है,,,, इस इस कहानी में धीरे-धीरे छोटे से लेकर बड़े घर की औरतें तक उसके नीचे आ चुकी थी,,,, जिसमें

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लाला की बहू कोमल भी बहुत जल्दी रघु के साथ हमबिस्तर होने के कगार पर थी,,,, पाठक गण को सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा उत्सुकता है कजरी को लेकर,,,

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जो कि एक तरह से इस कहानी की मुख्य किरदार है,,, पाठक गण इसी इंतजार में है कि कब रघु अपनी मां कजरी की दोनों टांगे फैलाकर उसकी चुदाई करे,,, लेकिन लेकिन अब जल्द ही कहानी की मुख्य किरदार कजरी अपने बेटे के साथ संभोग रत होगी,,,

और सभी पाठक गण को उस पल का बेसब्री से इंतजार भी है,,,

आप लोगों को यह कहानी बेहद पसंद आई है आगे भी इस कहानी को और भी ज्यादा बेहतर बनाने की कोशिश करूंगा,,,

कजरी के साथ रघु के मधुर मिलन का इंतजार किस-किस को है,,, कमेंट में जरूर बताना

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कजरी का दिल जोरों से धड़क रहा था,,, पहली बार उसके बेटे ने उसकी खूबसूरती की तारीफ किया था,,, कजरी अपने मन में सोचने लगी कि क्या देख कर रहा उसकी खूबसूरती की तारीफ किया,,,, कहीं उसकी चूचियों को देखकर तो नहीं,,, हां ऐसा हो सकता है पहली बार वह चुचियों को देख रहा था उसे छू रहा था उसे दबा रहा था शायद इसीलिए उसे खूबसूरती का एहसास हुआ हो कजरी अपने मन में यह सब बातें सोचने लगी वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी आखिरकार बरसो के बाद किसी मर्द का हाथ जो उसकी चुचियों पर पड़ा था,,, जिस तरह से रघु चुचियों के बारी बारी से पकड़कर ब्लाउज के कटोरे में डाला था चुचियों पर उसकी हथेली की पकड़ और उसका कसाव देखकर कजरी इतना तो समझ गई थी कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वाकई में उसकी चूचियां एक मर्दाना हाथों में जाएंगी,,, इस बात को सोच कर ही उसका बदन सिहरने लगा,,,।

प्रताप सिंह अपने कमरे में लेटे हुए था,,,, सिरहाने उसकी बीवी पंखा हिला कर उसे हवा दे रही थी,,, और पैर के लग लाला बैठा हुआ था,,, प्रताप सिंह की हालत पर उसे तरस आ रहा था लाला के सामने प्रताप सिंह की बीवी भी अफसोस जता रही थी,,, लेकिन यह सिर्फ ऊपरी मन से था अंदर से तो वह बहुत खुश थे क्योंकि ,,, अब सारा कारभार उसके हाथों में आ चुका था,,,,,,,

बसंती जी कब पूरी तरह से ठीक होते हैं यह कोई नहीं कह सकता क्योंकि वैध जी भी यही कह रहे थे कि,,,,,,,(इतना कहकर लाला चुप हो गया,,)

क्या कह रहे थे वेद जी,,,,(तेज निगाहों से जमीदार की बीवी लाला की तरफ देखते हुए बोली,,)

यही कि अब जमीदार साहब की तबीयत में सुधार अगर होगा तो हो जाएगा और नहीं हुआ तो बिल्कुल भी नहीं होगा,,,

यह तो हम भी जानते हैं समधी जी,,,, हमें तो यकीन नहीं हो रहा है कि इनके साथ ऐसा कुछ हो जाएगा ना जाने कौन इनका ऐसा दुश्मन बन गया था कि उनकी जान लेने पर उतारू हो चुका था,,,, यह तो भगवान की कृपा है की जान बच गई,,,।

मैं भी यही कहना चाह रहा था,,,,, आखिरकार कब तक ऐसे बैठे रहने से काम चलेगा मैं यह कह रहा था कि समधी जी बिरजू की शादी एक जगह पर तय करके आए थे अगर शादी की तारीख पक्की हो जाती तो,,,,

नहीं नहीं,,, हमें तो यह बिल्कुल भी नहीं पता,,,, इन्होंने हमें कभी भी इस बारे में कोई भी बात नहीं की तो हम कैसे मान ले,,,,

(इतना सुनते ही जमीदार की आंखें चोडी हो गई,,, भोपाल कुछ पा नहीं रहा था लेकिन अपने गुस्से को जाकर कर सकता था और अपनी बीवी की यह बात पर उसे बहुत गुस्सा आया था,,,)

मेरी बात का यकीन करिए मैं और समधी जी खुद लड़की देख कर आए हैं,,,,

देखिए समधी जी आप क्या कह रहे हैं इस बारे में हमें बिल्कुल भी खबर नहीं,, है,,,, और रही बात हमारे बेटे बिरजू की शादी की तो उसके लिए हमने एक सुंदर सी लड़की देख रखी जिससे बिरजू भी प्यार करता है,,, बिरजू की शादी उसी लड़की से होगी यह हमने तय कर चुके हैं,,,।

नहीं नहीं ऐसा मत कहिए हमने उस लड़की की मां को जबान देकर आए हैं,,,,

देखिए समधी जी,,, इस बारे में हम और कोई बात नहीं सुनना चाहते,,,, फैसला हम कर चुके हैं,,, बिरजू की शादी वही होगी जहां वह चाहता है,,,,

लेकिन समधीन जी,,,,

बस करिए समधी जी,,,, आपकी बात सुनकर देख रहे हैं ईनके माथे पर पसीना आ रहा है ईनकी तबीयत खराब हो रही है,,,,,, आइंदा शादी की बात मत करिएगा,,,,(लाला के सामने सिर्फ दिखावा करते हुए जमीदार की बीवी जमीदार के सर पर हाथ फेरने लगी,,, लाला समझ गया कि अब दाल गलने वाली नहीं है,,, क्योंकि उसे भी साफ नजर आ रहा था कि उसके समधिन का मिजाज बदल चुका था,,,, अगर जमीदार की तबीयत सही होती तो आज ऐसा कुछ भी नहीं होता,,, कुछ देर तक कमरे में खामोशी छाई रही कमरे में लाना की बेटी राधा भी खड़ी थी लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी,,,और उसके बोलने लायक कुछ था कि नहीं क्योंकि उसके साथ जो भी कह रही थी उसमें ही उसकी भी भलाई थी,,,, लाला समझ गया कि,,, अब कुछ नहीं हो सकता इसलिए वहां से गुस्से में खड़ा हो गया और कमरे से बाहर निकलने लगा तो उसकी बेटी राधा की उसके पीछे पीछे के दरवाजे तक छोड़ने के लिए आई,,,,लाला राधा से की शादी के बारे में बात करने के लिए बोला तो राधा ने साफ इंकार कर दी,,,,।

नहीं बाबू जी मैं कुछ नहीं कह सकती आप तो जानते हैं कि फैसला लेने का अधिकार ससुर जी के हाथ में था और आप उनकी हालत ठीक नहीं है और ऐसे में मां जी के हाथ में सब कुछ है,,,,

तुम अगर समझा देती बेटी तो शायद वो मान जाती,,,,

ठीक है पिताजी कहते हैं तो मैं जरूर बात करूंगी लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि कुछ नहीं होने वाला,,,।

(लाला निराश होकर जा चुका था,,, राधा खुश थी,,,,, भले ही उसके बाप की बात का कोई मतलब ना निकला हो शादी के लिए किया गया वादा टूट गया हो,,,, लेकिन जिस्म की चाहत के आगे सब कुछ बेकार है यह राधा की खुशी देखकर अच्छी तरह से समझा जा सकता था,,,, जमीदार की बीवी जमीदार के पास बैठे हुए थे और जमीदार के बाल को सहलाते हुए बोली,,,)

देख लिया ना,,,जमीदार साहब वक्त बदलते देर नहीं लगती कल तक सब कुछ तुम्हारे हाथ में था हमारी बात की आपके आगे कोई दरकार नहीं होती थी लेकिन अब सब कुछ बदल चुका है आप सब कुछ हमारे हाथ में है,,, इसका नमूना तो अभी-अभी देख ही चुके हो,,,(इतना सुनते ही जमीदार एकदम क्रोधित हो क्या उसके चेहरे पर आवेश के भाव साफ नजर आने लगी लेकिन वह कुछ नहीं कर सकता जमीदार की बेबसी को देख कर जमीदार की बीवी बोली)

तेवर दिखाने की कोई जरूरत नहीं है जमीदार साहब,,,, रस्सी जल चुकी है,,,, अब कोई काम की नहीं,,,, देख लिया ना औरत की ताकत,,,,जब बात औरत के स्वाभिमान की आती है तो यही अंजाम होता है,,,।(इतना कह रही थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुआ और जमीदार की बीवी के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए अपनी बहू राधा से बोली,,,)

जाओ बहु,,, दरवाजा खोल दो रघु आया होगा,,,,(जमीदार के चेहरे की तरफ देखते हुए वह बोली,,,,) हम बोले थे ना जमीदार साहब इसी कमरे में तुम को सबसे बड़ा झटका दूंगी समय आ गया है,,,, अरे जाओ बहु दरवाजा तो खोल दो,,,,(एक कोने में खड़ी राधा तुरंत गई और दरवाजा खोल दी सामने रखो ही था जिसे कुछ देर पहले जमीदार की बीवी ने हीं बुलवाई थी,,,,, रघु कमरे में प्रवेश करता हुआ बोला,,)

क्या बात है बड़ी मालकिन कोई जरूरी काम था क्या,,,?

अरे अब तुमसे जरूरी काम नहीं होगा तो किससे होगा,,, अब तो तुम्हारा इस घर में आना जाना होता ही रहेगा,,,

अरे मालकिन सब आपकी मेहरबानी है,,,,

हमारी नहीं सब ऊपर वाले की मेहरबानी है और थोड़ा बहुत हमारे जमींदार साहब की,,,, न ये अपनी जिद पर अड़े रहते,,, और ना ही हमारे स्वाभिमान को ललकारते,,, तो सब कुछ ठीक ही चलता रहता जमींदार साहब की यह हालत नहीं होती,,,(जमीदार की बीवी सिरहाने बैठे बैठे ही जमीदार के बाल में उंगली फिरते हुए बोली,,, रघु को देखकर जमीदार को समझ नहीं पा रहा था वापस टकटकी लगाए रघु को देखे जा रहा था और अपनी बीवी की बात के ताने-बाने को बुनकर किसी निष्कर्ष पर निकलने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था,,इतना तो वह जानता ही था कि बिरजू की शादी रखो की बहन के साथ करने के लिए ही उसकी बीवी और वह खुद उसे मनाने के लिए आए थे लेकिन इसी कमरे में बड़े झटके वाली बात को वह समझ नहीं पा रहा था,,,, जमीदार की बीवी ही बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,,)

जमींदार साहब आप लाख कोशिश कर लिए लेकिन कुछ हुआ नहीं,,,,रघु की बहन भी इस घर की बहू बनेगी अब यह तय है और आज ही शादी की तारीख में की होगी,,,, यह तो था हमारी बात ना मानने का नतीजा और अब हमारे स्वाभिमान हमारे स्त्रीत्व को जो तुमने गाली दिए हो,,,, उसका परिवार तो हम तुमसे आज ही लेकर रहेंगे,,,, क्या कहे थे,,,, की इस घर को हम चिराग नहीं दे पाए मां नहीं बन पाए इसमें किसकी गलती है,,,,,, तुम्हारी गलती सिर्फ तुम्हारी मेरी जिंदगी खराब करने वाले तुम हो अपनी हवस मिटाने के लिए ना अपनी उम्र का लिहाज किए और मेरी उम्र का ख्याल बस ले आए अपने घर में बीवी बनाकर,,, दम है तुम्हारे में शुरू होते नहीं हो कि खत्म हो जाते हो,,,, खुद के लंड में ताकत नहीं है और दूसरे को ईल्जाम लगाते हो,,,,(जमीदार अपनी बीवी की बात को सुनते जा रहा था वहां खड़ा रघु और राधा भी उसकी बात को सुन रहे थे और समझ भी रहे थे,,,, जमीदार बेबस था लाचार था वरनाइस तरह की गंदी बातें अपनी बीवी को मुंह से सुनना उसे कभी भी गवारा नहीं होता खास करके दूसरे के सामने लेकिन कर भी क्या सकता था सुनने के सिवा उसके पास और कोई चारा नहीं था,,,,)

क्या कह रहे थे मैं मां नहीं बन सकती तो सुन लो जमींदार साहब,,,, मै मा बनूंगी,,,, लेकिन जानते हो किसके बच्चे की,,,(इतना कहने के साथ ही बिस्तर पर से वह खड़ी हो गई और रघु का हाथ पकड़ते हुए बोली) रघु के ईसके बच्चे की मां बनुंगी,,,,(इतना सुनते ही जमीदार के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उसकी जिंदगी में इंसान पल भी आएगा जब वह इतना तिरस्कृत होगा और वह भी अपने ही बीवी के आगे और उसकी बीवी खुद उसे तिरस्कृत करेगी उसका अपमान करें और गांव के ही लड़के के साथ रंगरेलियां मनाने की बात करेगी और उसके बच्चे की मां बनने की यह प्रताप सिंह के लिए डूब मरने वाली बात थी या फिर मार देने वाली बात थी लेकिन ना वह डूब कर मर सकता था ना ही मार सकता था दोनों ही सूरत में वह पूरी तरह से लाचार था,,,, सिर्फ गुस्सा कर सकता था अपने नथुनों से,,, जोर-जोर से सांसे ले सकता था,,,, उसकी हालत देखकर जमीदार की बीवी खुश होने लगी और हंसते हुए बोली,,,)

क्या हुआ जमींदार साहब होश उड़ गए,,,, यह तो शुरुआत है अभी बहुत कुछ देखना बाकी है आपको,,, देखना मैं आपकी जिंदगी नरक से भी बदतर कर दूंगी औरत की ताकत का अंदाजा तुम्हें बिल्कुल भी नहीं है,,,,। और हां एक बात और,,,,,,,, ये,,,(राधा की तरफ उंगली से इशारा करते हुए)

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इसे भी गाली दे रहे थे ना,,,, कि यह भी अभी तक मां नहीं बन पाई,,, तो इसमें भी तुम्हारे ही लड़के का दोष है,,, तुम्हारे खानदान में दोष,,, है,,, औरत की इच्छा पूरी करने की ताकत तुम्हारे खानदान में बिल्कुल भी नहीं है,,,, और यह भी रघु के ही बच्चे की मां बनेगी इस हवेली को चिराग देगी,,,(इतना सुनकर जमीदार की हालत और खराब हो गई उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसे अपने आप पर परेशानी लगा किसकी आंखों के सामने उसके घर में अनर्थ होने जा रहा था,,,, रघु और राधा दोनों खुश नजर आ रहे थे रघु तो खुश ही था आखिरकार सब कुछ सही जो हो रहा था उसकी बड़ी बहन इस घर में बहू बनकर आने वाली थी और उसके लिए इस घर में इस खानदान में,,तीन तीन बुर का जुगाड़ हो चुका था एक बड़ी मालकिन,,,,, राधा,,, और उसकी खुद की बड़ी बहन शालू,,,, सब कुछ सही हो जाने पर वह ईस घर में आकर तीनों को बारी-बारी से चोद सकता था,,,। अब सही समय आ गया था जमीदार की आंखों के सामने अपनी जवानी का जलवा दिखाने का इसलिए जमीदार की बीवी जमींदार की आंखों के सामने अपने कंधे पर से साड़ी का पल्लू पकड़ कर नीचे गिर आते हुए अपनी भारी भरकम छाती को रघु के सामने उजागर करते हुए बोली,,,,

आ जाओ रघु अब देर किस बात की है,,,,

(रघु तो बड़ी मालकिन की ब्लाउज में कैद उसकी बड़ी बड़ी छातियों को देखकर,,, एकदम लालच से भर गया उसके लिए भी आज का दिन कुछ अद्भुत और अलग ही था क्योंकि वह एक औरत को उसके ही पति की आंखों के सामने चोदने वाला था,,, और कोई मामूली औरत को नहीं गांव के बड़े जमीदार की बीवी को चोदने वाला था,,, इस बात का एहसास रघु को पूरी तरह से उत्तेजित कर लिया वह समझ गया था कि अब इस हवेली में नंगा नाच होने वाला है,,, वह तुरंत आगे बढ़ा और जमीदार की आंखों के सामने राधा की आंखों के सामने जमीदार की बीवी और राधा की सास को अपनी गोद में उठा लिया,,,, जमीदार की बीवी इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी वो एकदम से घबरा गई लेकिन उसे रघु के ऊपर पूरा भरोसा था उसकी ताकत पर पूरा भरोसा था रघु जमीदार की खूबसूरत बीवी को अपनी गोद में उठा लिया था यह देखकर राधा भी स्तब्ध रह गई थी और जमीदार की तो हालत खराब हो गई थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसके घर की इज्जत उसकी बीवी की इज्जत लूटने जा रही थी,,, रघु जमीदार की बीवी को गोद में उठाकर उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसके लाल-लाल होठों के रस को पीना शुरू कर दिया,,।

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क्रमशः
 
रघु जमीदार की बीवी को अपनी गोद में उठाए हुए था,, और उत्तेजना में आकर,, उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,, बिस्तर पर लाचार पड़ा जमीदार अपनी फटी आंखों से इस नजारे को देखकर क्रोधित हुआ जा रहा था,,, लेकिन कुछ भी उसके हाथ में नहीं था वह सिर्फ क्रोध कर सकता था और इसके अलावा कुछ भी कर सकने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं था,,, दूसरी तरफ रघु की उत्तेजना का ठिकाना ना था क्योंकि जिंदगी में पहली बार हुआ किसी पति के सामने उसकी पत्नी के साथ रंगरेलियां मनाने जा रहा था और उसकी शुरुआत वह बड़े घर की मालकिन को अपनी गोद में उठाकर उसके होंठ को चूसते हुए कर चुका था,,, जमीदार की बीवी भी रघु का साथ देते हुए अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ करके उत्तेजना मैं आकर रघु के बाल में अपनी उंगली फेरने लगी,, दोनों का चुंबन एकदम प्रगाढ़ होता जा रहा था,, दोनों एकदम से भूल गए कि कमरे में जमीदार के साथ राधा के खड़ी है,,,राधा रघु की ताकत पर पूरी तरह से आफरीन हो चुकी थी जिस तरह से वह भारी भरकम जमीदार की बीवी को बड़े आराम से अपनी गोद में उठाकर उसके लाल-लाल होठों के रस को चुस रहा है उसे देखते हुए राधा की दोनों टांगों के बीच के गुलाबी छेद में से पानी रिसने लगा,,,,,,वह खुद रघु की मर्दाना ताकत को आजमा चुकी थी और उससे संपूर्ण रूप से संतुष्ट भी थी लेकिन जिस अंदाज में उसने उसकी सास को अपनी गोद में उठाया था उसे देखकर पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,,,,

दोनों बारी बारी से एक दूसरे के होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने का आनंद लूट रहे थे दोनों के मुंह से निकल रही लार एक दूसरे के मुंह में घुल जा रही थी,,, और यह देख कर राधा की बुर से भी लार टपकने लगा था,,,, जमीदार लाचार था,,,हालात के हाथों बेबस था,,,

जमीदार की आंखों में खून उतर आया क्योंकि उसकी बीवी को उठाया हुआ था उसके हाथ उसकी बीवी की उभरी हुई गांड पर थी,, जिस का सहारा लेकर वहां अपने हाथ में उसकी बीवी को उठाया था,,, अब तक जमींदार अपनी बीवी पर अपना हक समझता था और ऐसा था भी लेकिन धीरे-धीरे हालात बदल गए थे,,,,,, कुछ देर तक यह नजारा ऐसा ही चलता रहा रघु जमीदार की आंखों के सामने उसकी बीवी के लाल लाल होठों का रस पीकर मस्त हो चुका था,,, वो धीरे से जमीदार की बीवी को नीचे जमीन पर उतारा जमीदार की बीवी अपने पति की तरफ टोन भरी नजर से देखने लगी,,, और मुस्कुराते हुए एक बार फिर से वह खुद रघु को अपनी बाहों में भर कर उसके होठों को चूसने लगी,,, रघु भी कम कमीना नहीं था वह जानता था कि अब जमीदार किसी काम का नहीं है और सब कुछ उसकी बीवी के हाथ में ही तो वह जमीदार को और चलाने के लिए उत्तेजना मैं आकर उसकी बीवी को अपनी बांहों में भरते हुए अपने दोनों हाथेलीयो को उसकी चिकनी पीठ से नीचे की तरफ ले जाते हुए अपनी हथेली को उसकी कमर के नीचे उसके नितंबों के उभार पर लाकर उसे दोनों हथेलियों में दबोच लिया,,,,,, गांड के उभार पर का मांस मानो वह अपनी हथेलियों में भरकर नोच लेना चाहता हो,,,,,, रघु कि इस उत्तेजना भरी हरकत के कारण जमीदार की बीवी की हालत खराब हो गई और उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी फुट पड़ी,,, कोरिया देखकर जमीदार की हालत खराब होने लगी उसकी आंखों में लाल डोले ऊपस आए थे,,, वो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे यह दिन भी देखना पड़ेगा,,, जिसकी नजर उठा कर देखने की औकात नहीं कि आज वह लौंडा उसकी बीवी के बदन से खेल रहा था,,,, ,,,

ओहहहहहह,,,मालकिन तुम्हारी गांड मुझे बहुत पसंद है बहुत अच्छी लगती है इसे खेलने में मुझे बहुत मजा आता है,,,,(रघु जानबूझकर यह बात एकदम उत्तेजित स्वर में और जमीदार की बीवी की गांड को उसकी आंखों के सामने मसलते हुए बोला रघु की बात सुनकर जमीदार का क्रोध बढ़ने लगा वह बार-बार अपने पैरों को अपने हाथों को हिलाने की कोशिश करता था लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था,,,, रघु की बात सुनकर जमीदार की बीवी बोली)

मैं अब पूरी तरह से तुम्हारी हूं रघु ,,,जैसा जी चाहे वैसा मेरे बदन से मेरे साथ कर सकते हो,,,,

ओहहहह,,, मालकिन तुम बहुत अच्छी हो,,,,(और इतना कहने के साथ ही जमीदार को और जलाने के लिए वह अपनी बाहों में लिए हुए ही जमीदार की बीवी को ठीक इस तरह से खड़ा हो गया की जमीदार की बीवी की पीठ जमीदार के सामने आ गए और वह जमीदार की बीवी की साड़ी को उसकी आंखों के सामने ही ऊपर की तरफ उठाने लगा,, और वह भी एक झटके के साथ नहीं आहिस्ता आहिस्ता धीरे-धीरे वह जमीदार को एकदम नीचा दिखाते हुए,,, उसकी बीवी की साड़ी को वह ऊपर की तरफ उठाने लगा,,, इस हरकत को अंजाम देते हुए रघु जमीदार की आंखों में देख रहा था वह देखना चाहता था कि अपनी बीवी कोई साल में देख कर उस पर क्या बीतती है,,,, राधा की भी सांसे तेज चलने लगी थी वह भी रघु की इस हरकत का अंजाम देखना चाहती थी मंजिल पर पहुंचने की खुशी देखना चाहती थी,,,, रघु पूरी तरह से बदहवास हो चुका था एक औरत जोकि जिस औरत के साथ वो खेल रहा था उसकी बहु थी और एक ऊसका पति एकदम लाचार था,,, इतना लाचार की कुछ कर नहीं पा रहा था और ना ही मुंह से ही उसे रुकने के लिए बोल रहा था,,,, और रघु इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठाते हुए और अपने अपमान का बदला लेते हुए जमीदार की बीवी की साड़ी को धीरे-धीरे करके एकदम ऊपर उठा दिया कमर के ऊपर जिससे जमीदार की बीवी की नंगी मोटी मोटी गदराई गांड जमीदार की आंखों के सामने चमकने लगी,,, ओर रघु जमीदार की बीवी की नंगी गांड को अपने हाथ में भरकर जोर जोर से मसलने लगा,,, जिसकी वजह से जमीदार की बीवी के मुख्य गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,,।

सससहहहह,,,आहहहहहह,,,,, रघु क्या कर रहा है,,,(एकदम मादक स्वर में बोली,,,)

तुम्हारी खूबसूरत गांड से खेल रहा हूं मालकिन,,,,

क्यों तुझे मेरी गांड ज्यादा पसंद है क्या,,,?

बहुत पसंद है मालकिन,,,,, इतना कि मैं बता नहीं ,,,,

देखो ना मालकिन मालिक देख रहे हैं,,,,(रघु जमीदार की बीवी की गांड पर चपत लगाते हुए बोला,,,।

आहहहह,,,रे ,,,, क्या कर रहा है,,,,,, जमीदार देख रहे तो देखने दो और देखने के सिवा कर भी क्या सकते हैं,,,,,,

(अपनी बीवी के मुंह से इस तरह की बात सुनकर जमीदार और गुस्से में आ गया और जोर-जोर से अपने नथुनों में से सांस अंदर बाहर करने लगा,,। रघु जानता था की जमीदार को बहुत गुस्सा आ रहा है इसलिए रखो जानबूझकर उसे और गुस्सा दिलाने के लिए अपनी उंगली को उसकी बीवी की गांड की फांकों के बीच डालने लगा,,, और जमीदार को सुनाते हुए बोला,,)

ओहहहह,,, मालकिन तुम्हारी खूबसूरत गांड देखकर आज तो मेरा मन तुम्हारी गांड मारने को कर रहा है,,,,(इतना कहते हुए रघु अपनी बीच वाली उंगली को जमीदार की बीवी की गांड के भूरे रंग के छेद में घुसाने ा लगा,,,, छोटे से छेद में रघु की उंगली को घुसता हुआ महसूस करते ही वह एकदम से उछल पड़ी,,,,)

आहहहहह,,, रघु,,,, क्या कर रहा है,,,, अभी उस जगह नहीं,,,,

तो कब मालकीन,,,,(रघु उस छोटे से छेद कर अपनी उंगली को हल्के हल्के घुमाते हुए बोला,,,।)

जब समय आएगा तो पीछे वाला भी ले लेना,,, आज तो मेरी बुर में आग लगी है इसे बुझाना जरूरी है,,,।(अपनी सास के मुंह से,, इस तरह की खुली गंदी बातें सुनकर राधा एकदम हैरान थी लेकिन उसकी बातों से उसे मजा भी आ रहा था दूसरी तरफ जमीदार की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी उसकी सांस ऊपर नीचे हो रही थी मानो कि अभी दिल का दौरा पड़ जाएगा,,,, जमीदार भले कुछ कर सकने की स्थिति में नहीं था लेकिन वह अपने मन में सोच रहा थाअपनी बीवी की बेवफाई के बारे में जिस तरह की खुली बातें अभी इस समय वह अपने से आधी उम्र के छोकरे के साथ कर रही थी,,, उस तरह की बातें उसने आज तक उससे नहीं की यह सब सोचकर जमीदार अपने आप को और ज्यादा लाचार महसूस करने लगा,,, रघु जानबूझकर ऊसे और गुस्सा दिलाना चाहता था,,, इसलिए जमीदार की बीवी को थोड़ा सा झुका कर उसी तरह से अपनी बाहों में दिए हुए ही वह अपने दोनों हाथों से जमीदार की बीवी की गांड की दोनों फांकों को पकड़कर उस छोटे से पूरे रंग के छेद को जमीदार को दिखाते हुए बोला,,,।)

ठीक से देख लीजिए मालिक अपनी बीवी की खूबसूरत गांड के इस छोटे से छेद को,,, देखना एक दिन तुम्हारी आंखों के सामने ही,, तुम्हारी बीवी मतलब की मालकिन की गांड के छेद में अपना लंड डालकर मालकिन की गांड मारूंगा,,,,

(रघु के यह गंदे शब्द उसकी बीवी के लिए जमीदार के सीने में शुल की तरह चुभ रहे थे,,, और कोई वक्त होता तो रघु इस तरह की बातें करने की हिम्मत कदापि नहीं करता और खुद जमीदार ‌ स्थिति में ना होता तो इतना सुन कर रघु उसकी आंखों के सामने इस तरह से खड़ा नहीं रह पाता,,,। ,,, लेकिन कर भी क्या सकता था उसकी आंखों के सामने उसकी बीवी की इज्जत उसके घर के नौकर के बराबर का लड़का लूट रहा था मजे ले रहा था लेकिन वह कुछ नहीं कर पा रहा था,,, बस गुस्से में आकर थोड़ी-थोड़ी देर पर अपना मुंह फेर ले रहा था ताकि,,, अपने खानदान मान मर्यादा का मुंह काला होते हुए वह देख ना पाए,,,,,, लेकिन ज्यादा देर तक वह इस नजारे को अनदेखा कर नहीं पा रहा था,,, जमीदार की पूरा मामला अब समझ में आ रहा था कि किस लिए उसकी बीवी शालू को इस घर की बहू बनाने पर उतारू थी जिस तरह से रघु उसके बदन से बेझिझक खेल रहा था,,, यह खेल आज का नहीं था बल्कि ना जाने कब से यह सिलसिला शुरू था,,, थोड़ा और ज्यादा दिमाग पर जोर देने पर उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी गलती थी जो उसने रघु के साथ उसकी बीवी को मायके जाने दिया हो ना हो रघु के साथ मायके जाने के दरमियान ही इन तीनों के बीच इस तरह के रिश्ते पनपना शुरू हो गए जो कि आज उसके खुद के लिए नासूर बन चुका था,,,, रघु पूरी मस्ती में था जोश से भरा हुआ,,, जमीदार की बीवी भी मस्ती में आ चुकी थी रघु जोर-जोर से उसकी गोरी गोरी गांड पर चपत लगाता हुआ उसकी गांड से खेल रहा था,,,वह भी जानता था कि राधा भी वही खड़ी होकर इस नजारे का आनंद ले रही है इसलिए वह जमीदार की बीवी की गांड को उसकी आंखों के सामने करते हुए जिस तरह से जमीदार के सामने झुका कर उसकी गांड के भूरे रंग के छेद को दिखा रहा था उसी तरह से राधा को भी जमीदार की बीवी की गांड के भूरे रंग के छेद को दिखाते हुए बोला,,,,।)

छोटी मालकिन देख रही हो तुम्हारी सास कितनी खूबसूरत है और तुम्हारी सास की गांड कितनी खूबसूरत है बड़ी-बड़ी देख कर ही लंड खड़ा हो जाता है,,,, तुम्हारी भी गांड बहुत खूबसूरत है छोटी मालकिन देखना एक दिन तुम दोनों की एक साथ गांड मारूंगा,,,

( इतना सुनते ही रहता है एकदम से शर्मा गई और शर्मा कर बोली,,,)

धत्,,,,, (और इतना कहते हैं शर्मा कर और मुस्कुरा कर वहां से अपने कमरे की तरफ भाग खड़ी हुई)

यह तो शर्मा कर भाग गई मालकिन,,,,।

उसका भी मन कर रहा होगा,,,, लेकिन सब की उपस्थिति में शर्मा रही है,,,, चल जाने दे उसकी जवानी से बाद में करना पहले मेरी गर्म जवानी को ठंडा कर,,,,।

(इतना सुनना था की रघु जमीदार के बीवी के ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,, जमीदार से यह देखा नहीं जा रहा था वह खड़ा नहीं हो पा रहा था लेकिन फिर भी खड़े होने की कोशिश कर रहा था जो कि बिल्कुल नाकाम थी,,,पर देखते ही देखते रखो जमीदार की आंखों के सामने ही उसकी बीवी के ब्लाउज के सारे बटन खोल कर उसकी खरबूजे चुचियों को बाहर निकाल दिया

लाजवाब
 
बहुत ही गरमा गरम दृश्य शुरू हो चुका था जमीदार की हवेली में नंगा नाच होने वाला था जिसका मुक प्रेक्षक बना जमीदार सब कुछ देख रहा था,,,,, रघु,,, बेहद मस्तीखोर हो चुका था गांव की औरतों ने उसे वासना के इस खेल में एकदम मजा हुआ खिलाड़ी बना दी थी,,, और जिसका अनुभव रघु को बराबर प्राप्त हो रहा था,,, रघुजमीदार की बीवी की आंखों के सामने उसके ब्लाउज के सारे बटन खोल कर उसकी बड़ी बड़ी चूची को बाहर निकाल लिया था जिसे देखकर जमीदार बौखला गया था,,,, रघु जानबूझकर जमीदार को ही दिखाते हुए जमीदार की बीवी के पीछे खड़ा कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसकी दोनों चूचियों को पके हुए आम की तरह अपने हाथ में भरकर दबाना शुरू कर दिया,,,,,

ससससहहहहह,,,आहहहहहहहह,,, रघु,,,,,,,,आहहहहहहहहह,,,,,

(जमीदार की बीवी कीमत भरी आवाज कमरे में गूंजने लगी आवाज जमीदार की हालत को और ज्यादा खराब कर रही थी वह गुस्सा से भर चुका था लेकिन कुछ भी नहीं कर पा रहा था,,,,,)

आहीस्ता ,,,, से दबाना रघु,,,,,

मालकिन तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर मन काबू में नहीं देता और इसे धीरे-धीरे दबाने में नहीं बल्कि जोर-जोर से मसलने में ही मजा मिलता है,,,,। क्यों मालीक ठीक कहा ना,,,।(रघु कुटिल मुस्कान होठों के लिए जमीदार की तरफ देखते हुए बोला,,, जमीदार रघु पर पूरी तरह से क्रोधित था,,यह बात रघु जमीदार के चेहरे के हाव भाव से अच्छी तरह से समझ रहा था,,,लेकिन रघु यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि जमीदार से अब कुछ होने वाला नहीं है और इस हवेली में अब जिसकी कही सुनी जाती थी वह पूरी तरह से उसके बस में है अगर बस में ना होती तो इतना बड़ा कदम ना उठाती,,, अपने ही हाथों से अपना सुहाग मिटाने की हिम्मत ना करती,,,।

हवेली की मालकिन की सबसे बड़ी कमजोरी रघु के हाथ लग चुकी थी और रघु भी अपनी बड़ी मालकिन की कमजोरी को अच्छी तरह से समझता था तभी तो आज वह अपनी बड़ी मालकिन के कमरे में उसके पति के सामने ही उसके खूबसूरत बदन से खेल रहा था,,, रघु जोर-जोर से चूचियां मसल रहा था,,,। देखते ही देखते रघु एक पति के सामने उसकी पत्नी की चूचियों को दबा दबा कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,,,,,,, जमीदार की बीवी गरम सिसकारी से पूरे कमरे में शोर मचा रही थी लेकिन इस इस कार्य को केवल राधा सुन पा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि बंद कमरे के अंदर क्या हो रहा है और उस गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर खुद ही मस्त होकर अपनी चुचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़कर ब्लाउज के ऊपर से ही अपने आप को गर्म करने की कोशिश कर रही थी,,,,। रघु औरतों के जिस्म से अच्छी तरह से खेलना जानता था,,,औरत के जिस्म में उसकी उत्तेजना का केंद्र बिंदु क्या है यदि रघु अच्छी तरह से जानता था इसीलिए तो रह रह कर जमीदार की बीवी उछल पड़ती है क्योंकि वह साड़ी के ऊपर से जमीदार की बीवी की बुर को अपनी हथेली में दबोच ले रहा था,,,,ईस हरकत की वजह से जमींदार की बीवी और ज्यादा गर्म हो जा रही थी,,।,, और रघु को औरतों की बड़ी-बड़ी चूचियां पीने का बेहद शौक था और इस समय जमीन पर आरिफ की बीवी की लाजवाब सूचना उसके दोनों हाथों में थी इसलिए उसके मुंह में पानी आना लाजमी था,,,,जमीदार की बीवी गरमा गरम सिसकारी की आवाज लगातार अपने मुंह से निकाल रही थी,,,, देखते ही देखते रघुअपनी बड़ी मालकिन की चूची को दशहरी आम की तरह अपने मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया,,,,,

सससहहहहहह,,,आहहहहहह,,, रघु,,,,,ऊममममममम,,,,

(शायद जमीदार की बीवी को अपनी चूची पिलवाने में ज्यादा मजा आता था इसलिए रघु की इस हरकत की वजह से उसके बदन की कामाग्नि एकदम से भड़क उठी,,,रखो जमीदार की बीवी की चूची को बारी-बारी से अपने मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया और जमीदार की बीपी उत्तेजना के मारे अपना एक हाथ नीचे की तरफ लाकर उसे रघु की पजामे में डाल दिया और उसके खड़े लंड को पकड़ के दबाना शुरू कर दी,,,,, यह सब जमीनदार देख रहा था उसका खून खोल रहा था,,, क्योंकि जिस तरह की हरकत उसकी बीवी रघु के साथ कर रही थी उस तरह की हरकत उसने कभी भी उसके साथ नहीं की थी,,,,,,,। जमीदार के मन में ढेर सारी बातें चल रही थी इस समय के नजारे को देखकर अंदर ही अंदर आग बबूला हो रहा था उसके खानदान की इज्जत हवेली की मान मर्यादा सब कुछ तार-तार हो रही थी और वह भी उसकी आंखों के सामने जो कि उसे देखा नहीं जा रहा था लेकिन फिर भी वह देख रहा था इस समय के नजारे ने उसके अंदर क्रोध की ज्वाला को और ज्यादा बढ़ा दिया क्योंकि जिस पर अब तक वह पूरा अपना हक समझता था,,,,ऊसी जिस्म की सबसे खूबसूरत चुची,,, गांव के जवान लड़की के हाथों में थी जिसे वह अपने मुंह में भर कर पी रहा था,,, और उसकी खूबसूरत बीवी जिसे देख कर उसे कभी नहीं लगा था कि वह उसे इतना बड़ा धोखा देगी उसका हाथ,,, बेशर्म औरतों की तरह एक पराए जवान लड़के के पर जाने के अंदर था और उसके लंड को पकड़ कर दबा रही थी यह सब नजारा जमीदार के लिए बेहद घातक था अगर वह संपूर्ण स्वस्थ होता तो अब तक रघु के जिस्म में जान नहीं होती,,,, अपनी लाचारी पर उसे रोना आ रहा था,,,,, और उसकी आंखों के सामने ही रघु उसके घर की इज्जत को तार-तार कर रहा था,,,, रघु दोनों हाथों से अपनी मालकिन की सूचियों को पकड़कर दबाते हुए उसके मुंह में भरकर पी रहा था उत्तेजना के मारे जमीदार की बीवी की चूची की निप्पल एकदम कड़क हो कर खड़ी हो गई थी,,, और इस समय बंदूक की गोली की तरह नजर आ रही थी और वाकई में औरत की चूचियां और उसकी निप्पल किसी,,, बंदूक से कम नहीं होती दोनों ही जान ले लेती है,,, जमीदार की बीवी कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसकी जिंदगी में ऐसा कोई पल आएगा जब वह अपने यहां तो अपने पति को धोखा देगी उसे मरवाने की साजिश रची थी और उसकी आंखों के सामने ही अपने बदन की प्यास बुझाएगी,,, यह सब पहले बिल्कुल भी नहीं था शायद रघु से मुलाकात ना होती तो जमीदार की बीवी इस तरह से बेशर्म ना होती और हवेली में वासना का नंगा नाच ना हो रहा होता,,,,।

मालकिन,,,, तुम्हारी चूचियां मुझे दशहरी आम की तरह लगती हैं एकदम मीठी शहद की तरह,,,,

तो पी जा मुंह में भर कर मना किसने किया है,,,,,

ओहहहहह,,,,, मालकिन तुम बहुत खूबसूरत औरत हो,,, ना जाने कैसे ईस बूढ़े इंसान के पल्ले पड़ गई,,,(जमीदार की तरफ कटाक्ष भरी नजरों से देखते हुए रघु बोला)

मेरी किस्मत खराब थी,,, पहले भी तो मैं तुझे बता चुकी हूं अगर मेरे बाबूजी पैसों की कर्जदार ना होते तो आज मैं भी किसी जवान हाथों में होती,,,।

अभी भी तो जवान हाथों में हो,,, मालकिन,,,,

हां सो तो है,,,, तभी तो अपनी जवानी का मजा लूट रही हु,,,,

ओहहहहहह,,,, मालकिन,,,,(इतना कहने के साथ ही रघु एक बार फिर से दोनों चुचियों को हाथ में भरकर उसे मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया यह देखकर जमीदार की बीवी मद भरी आवाज में बोली,,,)

दशहरी आम पर ही ध्यान देते रहोगे या,,,, लहसुन के बारे में सोचोगे,,,,(लहसुन से जमीदार की बीवी का इशारा अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार से था जो कि रघु अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए अपने दोनों हाथों से जमीदार की बीवी की शाडी खोलने लगा,,,,,और देखते ही देखते रहो जमीदार की बीवी की साड़ी उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया इस समय जमीदार की बीवी पेटीकोट और ब्लाउज में थी जो कि ब्लाउज पूरी तरह से खुला हुआ था और उसमें से उसके दशहरी आम एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई थी,,,, एक बार फिर रघु जमीदार की बीवी के पीछे चला गया और उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया,,,, जमीदार सब कुछ अपनी आंखों से देख रहा था उसकी बीवी रघु की बाहों में थी,,,, रघु अपना कमीनापन दिखाते हुए जमीदार की तरफ देखते हूए बोला,,,।

अब देखो मालिक मैं कैसे तुम्हारी आंखों के सामने तुम्हारी बीवी के कपड़े उतारकर उसे नंगी करता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही रघु उसके पेटीकोट की डोरी को पकड़कर खींच दिया और पलक झपकते ही जो पेटीकोट उसके बेशकीमती खजाने को छुपाए हुए थी वही पेटीकोट सरररररररर करकेउसके कदमों में गिर गई और उसके बेशकीमती खजाने पर संपूर्ण रूप से उजागर कर दी,,,, जमीदार की बीवी अपने ही कमरे में अपने ही पति की आंखों के सामने एक डेढ़ जवान लड़के के हाथों से नंगी हो चुकी थी उसकी मोटी मोटी चिकनी केले के सामान मदहोश कर देने वाली जांघ नजर आ रही थी,,,, जिस की चिकनाहट पर दुनिया का हर मर्द फिसल जाए,,,, रघु जमीदार की बीवी की दोनों जनों को अपनी हथेली में पकड़कर दबाते हुए बोला,,,।

देखिए मालिक आपकी बीवी कितनी खूबसूरत है,,,, आपकी बीवी का नंगा पूरा बदन कितना खूबसूरत लग रहा है,,,, और सबसे ज्यादा खूबसूरत और हसीन है आपकी बीवी की बुर,,,(अपनी हथेली को जमीदार की बीवी की बुर पर रखते हुए बोला,,,, यह देखकर जमीदार की सांसे ऊपर नीचे होने लगी अगर इस समय वह बोल भी पाता तो ना जाने कितनी गंदी गंदी गालियां रघु और अपनी बीवी को दे चुका होता,,,, लेकिन सब कुछ उसके हाथ से बाहर निकल चुका था,,,, रघु बेशर्मी दिखाते हए और अपनी हथेली को उसकी बीवी की बुर पर जोर जोर से रगडते हुए बोला,,,)

देखिए मालिक आपकी बीवी की बुर कितना पानी छोड़ रही है,,,, जानते हो आपकी बीवी को इस समय क्या चाहिए,,,, मेरा लंड,,,, जो कि आपकी बीवी की बुर की गहराई नापने के लिए तड़प रहा है,,,,

लाओ,,, दिखा दूं जमींदार साहब को तुम्हारा लंड,,, जिसे देखकर शायद जमींदार होश में आ जाए ,,,, और तुम्हारी मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर उन्हें इस बात का एहसास हो कि,,, तुम्हारे लंड़के आगे ईनका लंड बच्चा है,,,, जिसके बलबूते पर अपनी मर्दानगी साबित करना चाहते थे,,,,(और इतना कहने के साथ ही जमीदार की बीवी घुटनों के बल बैठ गई और अपने दोनों हाथों से रघु के पजामे के दोनों छोर को पकड़ कर एक झटके से नीचे घुटनों तक सरका दी,,, देखते ही देखते रघु का मोटा तगड़ा लंबा लंड हवा में लहराने लगा,,,। जमीदार की नजर जैसे ही उसके लंड पर पड़ी उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वाकई में रघ6 का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था,,, यह बात जमीदार अपने मन में सोच रहा था,,,, जमीदार की आंखों के सामने ही जमीदार की बीवी,,, रघु के लहराते हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ ली यह देखकर जमीदार कि सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,,,,, यह नजारा जमीदार से देखा नहीं जा रहा था लेकिन वह अपने बीवी की बेशर्मी को देखना चाह रहा था जो कि अब तक सती सावित्री बन कर इस हवेली की शोभा बढ़ा रही थी,,।

देख रहे हो जमींदार साहब,,, इसको कहते हैं लंड मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड,,,(जमीदार की बीवी रघु के लंड को पकड़ कर उसे हिलाते हुए अपने पति को दिखाते हुए बोली) है तुम्हारा ऐसा इसका आधा भी नहीं है और चलते हो अपनी मर्दाना ताकत दिखाने,,,, मुझे मजबूर समझ कर मेरी जिंदगी तबाह कर के यहां बीवी बना कर लाए थे,,, सच कहूं तो जमींदार साहब तुमसे शादी करने के बाद आज तक में शरीर सुख से वंचित नहीं मुझे पता ही नहीं चला कि चुदाई का असली सुख क्या होता है वह तो रघु मिल गया अगर यह मुझे मेरे मायके ना पहुंचाता,, तो शायद में चुदाई के असली सुख से वंचित रह जाती,,,,।(अपनी बीवी के मुंह से यह बात सुनते ही जमीदार का शक सही साबित हुआ वह अपने मन में पहले ही शंका कर चुका था कि मायके भेजते समय ही इन दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हुआ है,,,। जमीदार की बीवीरघु के मोटे तगड़े लंड को जानबूझकर जोर-जोर से हिलाते हुए जमीदार को दिखा रही थी और उसे जला भी रही थी,,,।) देखना जब यह मेरी बुर में जाएगा तो गजब ढाएगा,,,(जमीदार की बीवी की एक बड़े घर की मालकिन की बेशर्मी भरी बातें सुनकर रघु भी अचंभित और जमीदार तो तिल तिल मर रहा था,,,। और मरता भी कैसे नहीं,,,किसी की बीवी उसकी आंखों के सामने ही अपने यार से अय्याशी करेगी तो ईस बात के लिए तो मार देने वाली या तो मर जाने वाली बात होती,,,,,। गुस्से से फूले नहीं समा रहा था जमीदार,,,, अभी उसकी आंखों ने जो देखा उसे देखकर उसके दिल का दौरा पड़ते पडते रह गया,,,,उसकी बीवी उसकी आंखों के सामने ही एक नौजवान गांव के लड़के के खड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,। यह देख पाना जमीदार के लिए मुश्किल हुआ जा रहा था लेकिन वह भी अपनी आंखों से अपनी बीवी की बेशर्मी देखने के लिए मजबूर हो गया था आज तक उसकी बीवी ने उसके साथ इस तरह की हरकत कभी नहीं की थी अपनी तरफ से उसे संतुष्ट करने की किसी भी प्रकार की कोशिश को अंजाम तक नहीं देती इसलिए या देखकर जमीदार की आंखों में खून उतर आया,,,, देखते ही देखते जमीदार की बीवी रघु के मोटे लंबे लंड को पूरा का पूरा अपने गले तक उतार ली और रघु भी बेशर्मी की हद पार करते हुए जमीदार की बीवी के बाल को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दिया मानो कि जैसे उसका लंड उसके मुंह में नहीं बल्की उसकी बुर में हो,,, मजा दोनों को बहुत आ रहा था और जिस तरह का माहौल बना हुआ था उससे उन दोनों की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी क्योंकि दोनों पहली बार किसी के सामने इस तरह से संभोग क्रीड़ा का आनंद ले रहे थे हालांकि यह अभी संभोग क्रीडा बिल्कुल भी नहीं था लेकिन संभोग से पहले होने वाली उत्तेजनात्मक हरकत थी जिसका दोनों भरपूर मजा ले रहे थे,,,,, रघु जमीदार की तरफ देखते हुए अपनी कमर आगे पीछे करके हीला रहा था,,,, दोनों को मजा आ रहा था लेकिन जमींदार की हालत खराब हो रही थी,,, वो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी आंखों के सामने ही उसकी बीवी बेशर्मी पन की सारी हदें पार कर जाएगी,,,, जमीदार की बीवी जानबूझकर अपने पति के सामने इस तरह की हरकत कर रही थी वह रघु के साथ मिलकर अपने पति को नीचा दिखाना चाहती थी,,,, कुछ देर तक मुखमैथुन का आनंद लेने के बाद जमीदार की बीवी अपने मुंह में से लंड को बाहर निकाल दी जो की पूरी तरह से उसके थुक में सना हुआ था,,,, अपनी उखडती हुई सांसो को दुरुस्त करने के बाद जमीदार की बीवी खड़ी हुई है जमीदार से बोली,,,।

देखा इसे कहते हैं लंड और तुम्हारा देखूं तो,,,,(इतना कहने के साथ ही वह जमीदार की तरफ आगे बढ़ी,,, और जमीदार के पजामे का नाडा खोलने लगी,,, जमीदार समझ गया कि वह क्या करना चाहती है वह उसे रोकना चाहता था उसे ऐसा करने से मना करना चाहता हूं लेकिन कुछ भी उसके बस में नहीं था वह अपना शरीर बिल्कुल भी हिला नहीं पा रहा था और रघु अपने लंड को हाथ में पकड़ कर वह भी जमीदार के बिस्तर के करीब आ गया उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी जमीदार की बीवी भी मुस्कुरा रही थी मानो कि जैसे जमीदार को चिढा रहे हो,,,, अपने चेहरे के हाव-भाव को बदलते हुए जमीदार अपना क्रोध प्रकट कर रहा था जमीदार के बीवी उसके चेहरे के बदलते अभाव को देखकर समझ रही थी कि किस तरह की हरकत करने जा रही है ऐसा करने से वह रोकना चाह रहा है,,,, इसलिए तो उसे और भी ज्यादा मजा आ रहा था देखते ही देखते जमीदार की बीवी अपने ही पति का पजामा जोर से खींचते हुए घुटनों तक कर दी,,,,,,, और अपने पति के छोटे से सिकुड़े हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे ही लाकर खड़ा करने की कोशिश करते हुए बोली,,,,।

ईसी पर तुम्हें इतना घमंड था ना,,,

अरे मालकिन आपके पति का तो बहुत छोटा है एकदम बच्चे जैसा,,, आपको तो बिल्कुल भी मजा नहीं आता होगा,,,।

सच कह रहे हो तुम रखो मुझे बिल्कुल भी मजा नहीं आता था तुमसे मिलने के बाद ही मुझे पता चला की चुदाई का असली सुख क्या होता है,,,, वरना यह छोटा सा नुनु मेरी बुर में कब घुस कर बाहर निकल जाता था पता ही नहीं चलता था,,,,(इतना कहकर वह हंसने लगी और साथ में रघु भी हंसने लगा,,, था,,, जमीदार अपनी ही नजरों में गिरता चला जा रहा था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर उसे चुल्लू भर पानी मिलता तो उसमें नाक रगड़ रगड़ कर मर जाता,,,। जमीदार की बीवी की बात सुनकर रघु बोला,,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन मेरा लंड है ना तुम्हारे पूरे मैं मस्ती की लहर पैदा कर देगा अभी देखना मैं कैसे अपने लंड को तुम्हारी बुर में डालकर तुम्हारी चुदाई करता हूं एक दम मस्त हो जाओगी,,,

(रघु की बात सुनकर जमीदार का खून खोलने लगा था लेकिन कर कुछ नहीं सकता था यदि वह अच्छी तरह से जानता था उसकी आंखों के सामने एक लड़का उसकी बीवी को भी चोदने की बात कर रहा था और वह कुछ नहीं कर पा रहा तो इससे बड़ी लाचारी की बात और क्या हो सकती थी,,,)

देर किस बात की है मेरे राजा मेरी बुर तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही है,,,,(जमीदार की बीवी एकदम मादक स्वर में पूरी वह भी एक दम मस्त हो चुकी थी और रघु के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प रही थी,,,। दूसरी तरफ कमरे में जिस तरह का दृश्य छोड़कर राधा अपने कमरे में गई थी,,, उससे अपने कमरे में ठहरा नहीं जा रहा था इसलिए वह अपने कमरे से बाहर निकल कर वापस अपनी सास के कमरे का दरवाजा खोलकर दरवाजे पर ही खड़ी होकर चोरी-छिपे अंदर का दृश्य देखने लगी जो कि बेहद कामोत्तेजना से भरा हुआ था,,,)

रुक जाओ मालकिन तुम्हारी बुर की मलाई तो चाट लु,,, इससे मेरे लंड को और ज्यादा ताकत मिलती है,,,(इतना कहने के साथ ही रघु खुदजमीदार की बीवी की एक टांग पकड़ कर बिस्तर पर रख दिया और एक टांग नीचे जमीन पर ही रहने दिया और खुद घुटनों के बल बैठकर जमीदार की आंखों के सामने ही बेहद नजदीक से उसकी ही बीवी की दुर्घटना शुरू कर दिया यह नजारा जमीदार के लिए जानलेवा साबित हो रहा था उसकी सांसें उखड़ रही थी,,,, वह कभी रघु को देखता तो कभी अपनी बीवी की तरफ जो कि बुर चटवाने की वजह से पूरी तरह से मस्त नजर आ रही थी,,,,जमीदार अपने हाथ-पांव हिलाने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था दूसरी तरफ दरवाजे पर खड़ी होकर राधा इस नजारे का आनंद ले रही थी और अपने ही हाथों से ब्लाउज के ऊपर से अपनी चूची को मसल रही थी और अपने मन में सोच रही थी कि ना जाने उसका नंबर कब आएगा,,,, देखते ही देखते रघु ने जमीदार की बीवी के बदन में सुरसुराहट पैदा कर दिया,,,,अब दोनों से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था जमीदार की बीवी उसी स्थिति में खड़ी थी और रघु आसन बदलना नहीं चाहता था क्योंकि जिस तरह से वह खड़ी थी इस आसन से उसकी चुदाई करने पर जमीदार एकदम साफ साफ अपनी बीवी की बुर में उसके लंड को अंदर बाहर होता हुआ देख सकता था,,,, और शायद जमीदार की बीवी भी यही चाहती थी इसलिए वह खुद अपनी स्थिति को बदली नहीं और वैसे ही खड़ी रही,,,, रघु खड़ा होकर अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रख दिया और हल्के से अपनी कमर को आगे बढ़ाते हुए कहा,,,,।

मालकिन संभालना,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो रघु आने दो,,,,।

(और इतना ही कहना था कि रघु अपने दोनों हाथों से जमीदार की बीवी की चिकनी कमर थाम लिया,,,। और एक ही धक्के में पूरा का पूरा लंड उसकी गुलाबी गुफा में डाल दिया,,,,, जमीदार की बीवी के मुंह से हल्की सी आह निकली जो कि इस बात का सबूत था कि,,, रघु का मोटा तगड़ा लंड एक झटके में ही ऊसके बच्चेदानी से टकरा गया था,,,, रघु शुरू से ही आहिस्ता आहिस्ता नहीं बल्कि तेज झटके लगाते हुए जमीदार की बीवी को चोदना शुरू कर दिया उसकी ताकत और रफ्तार देखकर जमीदार खुद दंग रह गया था उसे रघु से जलन हो रही थी,,,,और वह भी साफ-साफ देख पा रहा था कि उसका मोटा तगड़ा देंगे उसकी विधि की बुर में बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था,,, जिसे देखकर जमीदार को इस बात का एहसास हो गया कि यह दोनों काफी समय से चुदाई करते आ रहे हैं तभी तो उसके मोटे तगड़े लेने के लिए उसकी बीवी की बुर में सांचा नुमा जगह बन गई थी,,,,।

आहहहहह,,,आहहहहह७,,,,, रघु,,,,, मेरे राजा ऐसे ही,,आहहहहहह,,,, और जोर से मेरे राजा,,,,।

चिंता मत करो मेरी रानी आज तुम्हें खूब पानी पिलाऊंगा,,,,,

(यह नजारा देखकर जमीदार गुस्से से फूले नहीं समा रहा था और दूसरी तरफ दरवाजे पर खड़ी राधा की हालत खराब हो रही थी और वह खुद ही अपनी साडी को कमर तक उठाकर अपनी उंगली को अपनी बुर में डालकर अंदर बाहर कर रही थी,,,,जमीदार बार-बार अपनी नजर को खेल ले रहा था लेकिन अपनी बीवी की गर्म सिसकारी की आवाज उसे उस नजारे को देखने के लिए मजबूर कर रही थी,,,,जमीदार अपने मन में यही सोच रहा था कि जिस तरह से रख उसकी चुदाई कर रहा है वाकई में उसने कभी भी इस तरह का दम नहीं दिखाया था और तो और उसे इस बात का अहसास था कि रघु की तरह मोटा तगड़ा लंबा लंड उसके पास नहीं था,,, कुछ देर तक इसी स्थिति में चुदाई करने के बाद जमीदार की बीवी खुद उसे अपनी स्थिति बदलने के लिए बोल कर उसे अपना लंड निकालने के लिए बोली और जैसे ही रघु ने अपने लंड को बाहर निकाला,,,, जमीदार की बीवी,,पलंग पर घुटनों के बल बैठ गई और अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में लहरा दी यह देखकर रघु समझ गया कि उसे क्या करना है,,। रघु पीछे आकर इसकी बड़ी बड़ी गांड पर दो-चार चपत लगा दिया और देखते ही देखते उसकी गोरी गोरी गांड टमाटर की तरह लाल हो गई,,,, जमीदार ने भी कभी इस तरह की हरकत नहीं किया था और देखते ही देखते रहते हो उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर,,, एक बार फिर से अपने लंड को उसकी बुर में डाल कर चोदना शुरू कर दिया,,, वहां दूसरी तरफ राधा अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी उंगली को अपनी बुर में डाल रही थी,,,,, जमीदार की हालत खराब थी,,,,

तकरीबन इसी स्थिति में 35 मिनट तक लगातार रघु जमीदार की बीवी की चुदाई करता रहा और ढेर सारा पानी उसकी बुर में डाल दिया,,, और उसे पीछे से पकड़ कर हांफने लगा,,,,,, थोड़ी देर बाद में बड़ा जमीदार की बीवी के ऊपर से उठा और अपने पजामे को पहनने लगा जमीदार की बीवी भी अपने नंगे बदन पर पेटिकोट डालकर उसकी डोरी को बांधते हुए बोली,,,,,

देखना जमीदार साहब बहुत ही जल्द इस घर का वारिश मिलेगा,,, अब तो समझ ही गए होंगे की किस की औलाद मिलने वाली है,,,,,(इतना सुनते ही जमीदार और ज्यादा क्रोधित हो गया लेकिन कर भी क्या सकता था दूसरी तरफ अपने ब्लाउज के बटन को बंद करते हुए वह बोली)

हा रघु आज से पांचवे दिन ही बिरजू की शादी तुम्हारी बहन सालु से होगी और वह भी मंदिर में,,,, क्योंकि जमीदार साहब की ऐसी हालत को देखकर धाम धुमसे शादी करना ठीक नहीं है,,,,(इतना सुनते ही रघु खुशी से उछल पड़ा,,,उससे अपनी खुशी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और वह खुशी के मारे एक बार फिर से जमीदार की बीवी को उठा लिया,,,)

अरे अरे क्या कर रहे हो गिर जाऊंगी,,,,

नहीं हीरो की मालकिन मुझ पर भरोसा नहीं है क्या,,,,(और ऐसा कहते हुए जमीदार की बीवी को उसी तरह से उठाए हुए ही गोल गोल घूमने लगा,,,, दरवाजे पर खड़ी राधा भी खुशी से झूम उठी,,, रघु ने जैसे ही जमीदार की बीवी को नीचे जमीन पर खड़ी किया वैसे ही उसकी नजर राधा पड़ गई और उसे देखकर रघु से बोली,,,)

रघु आज तो मैं यहीं रुकना है जाना नहीं है,,, देख रहे हो राधा को,,, कितनी गर्म हो गई इसकी भी गर्मी तुम्हें ही उतारना है और इस हवेली को एक साथ दो-दो चिराग देना है,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन छोटी मालकिन को भी मैं एकदम मस्त कर दूंगा,,,,

जमीदार अपने घर में वासना का नंगा नाच देख पाने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था,,, वह मर जाना चाहता था लेकिन मौत भी उसे नसीब नहीं थी शायद अपनी आंखों के सामने ही इस हवेली में अपने ही घर की औरतों का नंगा नाच देखने के लिए वह जिंदा था,,,,

रघु पूरी रात उसी हवेली मे रुका और बारी बारी से बड़ी मालकिन और छोटी मालकिन की चुदाई करता रहा,,,,।
 
रघु ने जब अपनी मां से शादी का दिन तय हो गया यह बताया तो उसकी मां खुशी से झूम उठे शालू के कानों में यह खबर पडते ही वह खुशी से फूले नहीं समा रही थी,,, आखिरकार घर की इज्जत जो बच चुकी थी,,,। कजरी तो खुशी के मारे अपने बेटे को गले लगा ली थी,,,।

ओहहहह ,,,, रघु बेटा मैं बता नहीं सकती कि मैं आज कितना खुश हूं,,, तुने तो अपने बाप का फर्ज निभाया है,, जो काम एक बात तो करना चाहिए था वह तूने किया है मुझे तुझ पर गर्व है बेटा,,,,,(कजरी कस के गले लगते हुए बोली कजरी के ऐसा करने पर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां सीधे रघु की छातियों पर चुभने लगी,,,रघु को अपनी मां की चूचियों की चुभन बेहद ऊन्मादक लग रही थी ,,। वह भी कहां पीछे हटने वाला था,, भाभी मौके का फायदा उठाते हैं अपनी मां को उसी तरह से अपनी बाहों में भर लिया और अपनी हथेली को उसकी चिकनी पीठ पर फिराते हुए नीचे की तरफ ले जाने लगा अपने बेटे की हरकत का एहसास कजरी को अच्छी तरह से हुआ था लेकिन कुछ दिनों से जिस तरह की उन्मादक स्थिति वह से हो गुजर रही थी,,, और वह भी किसी दूसरे की वजह से नहीं बल्कि खुद के सगे बेटे की वजह से इसलिए अपने बेटे की यह हरकत उसे अच्छी लग रही थी,,। कजरीको यह भी पता था कि जिस तरह से अपनी बेटी को गले लगा कर रखी हुई है उसकी चूची जरूर उसकी छातियों पर अपना असर दिखा रही होगी इसलिए वह और कस के अपने बेटे को अपनी छाती से लगा ली थी,,, रघु उन्मादक स्थिति में मदहोश हुआ जा रहा था,,,वह अपनी हथेलियों को धीरे धीरे अपनी मां की चिकनी कमर को नीचे की तरफ नितंबों के उभार पर ले आया अपने बेटे की हथेली को अपने नितंबों पर महसूस करते ही उसके संपूर्ण बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,। देखते ही देखते दोनों काफी उत्तेजित हो गए और रघु अपनी मां की तरबूज जैसी गांड को दोनों हाथों में भरकर दबाना शुरू कर दिया,,,,कजरी अपने बेटे को अपनी बाहों की कैद से आजाद नहीं करना चाहती थी और ना ही रघु अपनी मां की बाहों की कैद से आजाद होना चाहता था,,,,,, रघु अपने बस में बिल्कुल भी नहीं था और वह वासना के अधीन होकर अपनी मां के खूबसूरत बदन को अपनी बाहों में लेकर इतना मदमस्त हो गया कि अपनी मां की गर्दन पर अपने होठों से चुंबन लेने लगा,,, कजरी की सांसे ऊपर नीचे होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी लेकिन फिर भी अपने काबू में थी वह जानती थी उन दोनों के बीच के पवित्र रिश्ते को जितना हो सकता था वह इस रिश्ते को तार-तार होने से बचाना चाहती थी लेकिन बदन की चाह उसकी प्यास के आगे वह भी बेबस थी,,,,,,, जिस तरह से रघुअपनी मां को बाहों में लेकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में भर भर कर दबा रहा था और उसके गर्दन पर चुंबन ले रहा था और उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज नहीं जता रही थी यह देखकर रघु को लगने लगा कि आज जरूर वह अपनी मां को चोद पाएगा,,,, लेकिन तभी बाहर वाले कमरे से आवाज आई,,,।

मां खाना लग गया आ कर खा लो,,,,,

(शालू की आवाज सुनते ही दोनों की मदमस्त भरी तंद्रा भंग हुई उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि शालू घर पर ही है ,,,कुछ देर की खामोशी को देखकर उन दोनों को ऐसा ही लगा था कि चालू अपनी शादी की बात सुनकर शरमा गई है और चली गई है,,,, दोनों एक दूसरे से अलग है ऐसा लग रहा था कि जैसे उन्हें अपनी गलती का पछतावा हो रहा है दोनों एक-दूसरे से नजरें नहीं मिला पा रहे थे,,,, दोनों नजरों को झुकाए हुए ही बाहर आ गए और खाना खाने लगे लेकिन अंदर ही अंदर तीनों बहुत खुश थे,,,,।)

बेटी तेरे तो भाग्य खुल गए अब तो हवेली में रहेगी जांच करेगी,,,,(इतना सुनकर शालू शर्मा गई,,,, और रघु अपनी मां का साथ देते हुए बोला)

हां मां ,,, दीदी तो अब महल में रहेंगी,,,, रानी बनकर,,,, मां सच में जमीदार की हवेली बहुत खूबसूरत है,,, अपनी दीदी की तो किस्मत बदल गई।

हां रघु तो सच कह रहा हूं लेकिन जो कुछ भी हुआ है सब तेरी बदौलत ही हुआ है,,,,

अरे सब भगवान की कृपा है और बड़ी मालकिन की अगर वह ना होती तो शायद,,,,,,(इतना कहकर वो खामोश हो गया,,, और खाना खाने लगा)

वह सब तो ठीक है लेकिन इतनी जल्दी हम बंदोबस्त कैसे कर पाएंगे,,,।

हमें कुछ नहीं करना है मां,,,,सारा इंतजाम बड़ी मालकिन की तरफ से हमें बस सालु को दुल्हन बनाकर मंदिर तक ले जाना,,,, कोई धाम धुम से शादी नहीं करना है,,, जमीदार की तबीयत की वजह से,,, वैसे भी मम्मी हमारी इज्जत बच गई हमारे खानदान की,,,,,,(शालू की तरफ देखते हुए बोला तो रघु की बात सुनकर शालू का सर शर्मिंदगी से नीचे छूट गया वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि किसकी बदौलत पेट से है,,, सब किया धरा रघु का था उसके साथ जिस्मानी संबंध बनाकर उसे शादी से पहले ही पेट से कर दिया था यह बात कजरी नहीं जानती थी,,,, कजरी को यही बताया गया था कि जमीदार के लड़के बिरजू के द्वारा वह पेट से हुई है और तब जाकर रघु ने यह सारा खेल रचा था और अच्छी तरह से पार भी कर दिया था आज शालू की शादी जमीदार के लड़के बिरजू से तय हो चुकी थी,,, दोनों के सर से बहुत बड़ा बोझ हटने वाला था,,, तीनों खाना खाकर अपने अपने काम पर लग गए,,,, शादी का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा था वैसे वैसे कजरी रघु और शालू तीनों की चिंता बढ़ती जा रही थी,,, कजरी की चिंता इसलिए की शालू उसकी बेटी की शादी करने के बाद वह अपने ससुराल चली जाएगी घर सुना सुना हो जाएगा और रघु की चिंता है इसलिए कि सालु के जाने के बाद जब भी उसे चोदने का मन करेगा तो जुगाड़ नहीं हो पाएगा लेकिन चिंता में भी खुशी इस बात की थी कि उसकी की गई गलती बिरजू के सर मढ दी गई थी जोकि अच्छे तरीके से पार होने वाली थी,,,

देखते ही देखते रघु और कजरी ने सारे गांव में नेवता बांट दी,,, पूरे गांव वाले हैरान इस बात से थे कि शालू की शादी जमीदार के घर केसे तय हो गई,,, जिसका जवाब ना तो कजरी दे रही थी और ना ही रघु बस भगवान की कृपा है कहकर आगे बढ़ जा रहा था देखते ही देखते शादी की सारी तैयारियां हो गई,,, रघु लाला की बहू कोमल को भी शादी में आने का न्योता देना चाहता था इसलिए शादी के 1 दिन पहले ही उसके घर की तरफ निकल गया,,,, जहां पर लाला शराब के नशे में एकदम धुत,,, था,,, उसका अपमान हुआ था और तो और जिस लड़की की शादी तय करना चाहता था उस लड़की की ना उसकी बेज्जती करके गई थी क्योंकि वह जानकारी थी कि अब यह शादी होने वाली नहीं है अब तक वहां अपनी लड़की की शादी के बदौलत ही लाला को अपना जिस्म परोसती आ रही थी,,,, और वह लाला को कभी अपना गंदा मुंह मत दिखाना यह कह कर गई थी,,,। लाला अपमान की आग में जल रहा था वह बदला लेना चाहता था वह जानता था कि रघु की वजह से ही उसके द्वारा की गई शादी अब टल गई थी,,,लेकिन वह यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि जमीदार की इस तरह की हालत की बदौलत,,, ही जमीदार की बीवी अपनी मनमानी करने पर तुल चुकी थी क्योंकि वह जानते थे कि जमींदार ना तो बोल सकती हैं और ना ही कुछ कर सकते हैं इसलिए यह शादी पूरी तरह से उसकी मनमानी का ही नतीजा था,,, लाला बोतल मुंह में लगा कर घूंट भर भर कर पी रहा था,,, तभी उसकी बहू कोमल उस से खाना पूछने के लिए आई तो गुस्से में अपमान सहन करके और नशे में अपनी खूबसूरत बहू को देखते ही उसकी आंखों में वासना के लाल डोरे नजर आने लगे,,, उसे रहने की और वहां आगे बढ़कर अपनी बहू को मेरे को अपनी बाहों में भर कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने लगा कोमल एकदम से सकपका गई,,, लाला के मुंह से शराब की तेज बदबू आ रही थी जो कि कोमल के बर्दाश्त के बाहर थे अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी लेकिन लाला पूरी जान लगा कर उसे अपनी बाहों में पकड़े हुए था,,,, कोमल घबरा गई थी क्योंकि उसे आज लगने लगा था कि आज वह अपनी इज्जत नहीं बचा पाएगी,,,, देखते ही देखते लाला अपनी धोती उतार कर फेंक दिया कोमल यह देखते ही रोने लगी,,, नशे में धुत लाला अपनी बहू कोमल के ब्लाउज को दोनों हाथों से पकड़ कर चीर दिया,,, तड़ तड़ करके उसके ब्लाउज के सारे बटन टूट कर जमीन पर बिखर गए और उसका ब्लाउज खुल गया लाला अपनी बहू कोमल की खूबसूरत संतरे जैसे चुचियों को देखकर एकदम पागल हो गया उसकी आंखों में हवस के बादल साफ नजर आने लगे,,, लाला जबरदस्ती अपनी कोई कि दोनों चूचियों को अपने हथेली में पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,, और कोमल उसे छोड़ देने की विनती की जा रही थी,,,।

यह क्या कर रहे हो बाबू जी मुझे छोड़ दीजिए मैं तुम्हारी बेटी समान हूं,,,,

कैसे छोड़ दु मेरी रानी तुम बहुत खूबसूरत हो और मैं यह भी जानता हूं कि प्यासी भी बहुत हो,,, आज मैं तुझे चोदकर तेरी और मेरी हम दोनों की प्यास बुझाऊंगा,,,,, आजा मेरी जान,,,,( ऐसा कहते हुए लाला जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबा रहा था कोमल को आज अपनी इज्जत तार-तार होती हुई नजर आ रही थी,,,,,वह चिल्लाना चाह रही थी लेकिन डर के मारे उसके मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी वह एकदम सदमे में थी डरी हुई सहमी हूई जिसका लाला भरपूर फायदा उठा रहा था,,, लाला अपनी बहुत कोमल की साड़ी खोलना शुरू कर दिया,,, देखते ही देखते कमल की साड़ी उतार कर नीचे जमीन पर गिर गई और वह अपने ससुर के सामने पेटीकोट में आ गई,,, लाला की आंखों में अपनी बहू की मदमस्त जवानी देख कर वासना की चमक उपसने लगी थी,,, लाला उसे पीछे से अपनी बाहों में भर कर उसके गोलाकार नितंबों के उधार पर अपने लंगोट में खड़े लंड को रगड़ रहा था उसे अनुभव बेहद उत्तेजना पूर्ण लग रहा था लाला को मजा आ रहा है और कोमल बेबस थी रो रही थी लाला की हालत पल पल खराब होती जा रही थीनशे में होने के बावजूद भी एक औरत के जिस्म को भोगने के लिए उसके बदन में ताकत आ गई थी,,, लाला अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर कोमल की पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा तो कोमल उसे रोकने कीआखिरी कोशिश करते हुए उसका हाथ पकड़ ली और तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,।

लालाजी,,,, कहां हो लाला जी दरवाजा खोलिए,,,,,

(रघु की आवाज को कोमल अच्छी तरह से पहचानती थी और उसकी आवाज सुनते ही उसकी आंखों में चमक आ गई,,,, लेकिन लाला की हालत खराब हो गई उसके किए कराए पर पानी फिरता नजर आने लगा और कुछ बोला नहीं वह खामोश रहा,,, लेकिन आशा की आखिरी उम्मीद सामने नजर आती हुई देखकर कोमल से रहा नहीं गया और वह जोर जोर से चिल्लाने लगी,,,।)

रघु मुझे बचाओ,,,, मुझे बचाओ रघु,,,।

(इतना सुनते ही रखो को समझते देर नहीं लगी कि अंदर क्या हो रहा है उसका खून खोलने लगा,,,,, कुछ देर तक वह उसी तरह से दरवाजा पीटता रहा लेकिन अंदर से कोई खोलने वाला नहीं था क्योंकि कोमल लाला की गिरफ्त में थी और लाला उसके साथ मनमानी करने पर उतारू हो चुका था इसके पेटीकोट की दूरी ना खुलने पर वह पेटीकोट को पकड़ कर ऊपर की तरफ आ रहा था जिसे कोमल बार-बार पकड़कर नीचे कर दे रही थी,,,, कोमल अच्छी तरह से जानती थी कि ज्यादा देर तक होगा अपने ससुर का मुकाबला नहीं कर सकती थी इसलिए वह फिर से जोर-जोर से चिल्ला के लिए बोली)

मुझे बचा लो रघु यह हैवान मेरी इज्जत लूटना चाहता है,,,,।

चला जा हरामजादे ,,, यहां से चला जा वरना तेरी लाश भी गांव वालों को नहीं मिलेगी,,,,(इतना सुनते ही रघु एकदम पागल हो गया और गुस्से में बोला,,,)

साले मादरचोद मुझे धमकी देता है,,,,(इतना कहने के साथ ही दरवाजे पर दो बार जोर-जोर से एकदम ताकत लगाकर लात मारा दरवाजे की कड़ी एकदम से टूट गई और दरवाजा खुल गया और वह कमरे के अंदर आ गया और अंदर आते ही जो नजारा उसने देखा उसके होश उड़ गए लाला अपनी बहू कोमल को अपनी बाहों में दबोचे हुए था उसके ब्लाउज के सारे बटन टूटे हुए थे उसकी दोनों चूचियों एकदम साफ नजर आ रही थी और वह सिर्फ पेटीकोट में थी जिसे लाना ऊपर करने की कोशिश कर रहा था यह देखकर रघु एकदम से गुस्से से तिलमिला उठा,,,और आगे बढ़कर कोमल को लाला की चुंगल से छुडाकर लाला को पीटना शुरू कर दिया रघु के मजबूत हाथ लाला पर पडते ही लाला को नशा काफूर हो गया,,,, वह चारों खाने चित हो कर वहीं ढेर हो गया,,,, वह मरा नहीं था बेहोश हो गया था,,,, लाला को बेहोश देखकर कोमल के जान में जान आई और वह दौड़ कर रघु के गले लग गई वह रो रही थी,,,, लेकिन जिस अवस्था में वह थी उसकी नंगी चूचियां रघु के सी ने पर रगड़ खाने लगी,,, पल भर में ही रघु को उत्तेजना का एहसास होने लगा,,, लेकिन दिल ही दिल में व कोमल से प्यार करने लगा था कोई और मौका होता तो शायद गांव को मिल की चुदाई कर देता लेकिन इसलिए को मिलकर जिस्म के साथ खेलने का मतलब था कि उसकी नजर से भी गिर जाना इसलिए वह उसे सांत्वना देते हुए उसकी नंगी पीठ पर अपनी हथेली फिराते हुए उसे शांत करने लगा,,, और उसके ऊपर नीचे गिरी साड़ी डाल कर उसके नंगे बदन को ढक दिया,,,।

तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है कोमल मैं हूं ना,,,

आज तो मैं लुट गई थी रघु अगर तुम वक्त करना आते तो मैं तुम्हें मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाती,,,

ऐसा कभी नहीं होगा कोमल,,,,,और हां मैं तो तुम्हें यहां नेवता देने आया था अच्छा हुआ ठीक समय पर आ गया,,,

कैसा नेवता,,,,,

कल मेरी दीदी की शादी है जमीदार के लड़के के साथ मंदिर में जरूर आ जाना,,,,

क्या सच कह रहे हैं रघु,,,

हां मैं सच कह रहा हूं कल समय पर आ जाना,,,,

मैं जरूर आऊंगी रघु,,,,, तुम्हारे बिना मुझसे एक पल भी रहा नहीं जाता,,,,

(कोमल की बात सुन कर रघु उसकी तरफ ध्यान से देखने लगा,,, और मुस्कुराते हुए उसे वापस गले लगा लिया,,,,)

मुझे छोड़कर मत जाओ रघु,,,,

मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जा रहा हूं कोमल मैं यही हूं,,, मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं,,,

(इतना सुनते ही कोमल की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे और वह रघु को हसरत भरी निगाहों से देखने लगी और बोली)

मैं भी तुमसे प्यार करने लगी हु रघु,,,, बहुत प्यार करती हूं,,,,।

प्यार करती हो तो मुझ पर भरोसा रखो,,, मैं तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होने दूंगा,,,,, अभी मुझे जाना होगा बहुत काम है,,,(इतना कहते हुए रघु कोमल के होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करने लगा कोमल भी उसका साथ देने लगी कुछ देर तक दोनों इसी तरह से एक दूसरे के होंठों के रस को पीते रहे और फिर वहां से चला गया,,,,,, शादी के 1 दिन पहले रात को कजरी गहरी नींद में सो रही थी और रघु छत पर लेटा अपनी बहन शालू का इंतजार कर रहा था,,, थोड़ी ही देर में शालू के पायल की आवाज आने लगी और रघु का लंड अंगड़ाई लेने लगा,,,)
 
कजरी चैन की नींद सो रही थी,,, रघु की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह जानता था कि कल शादी करके उसकी बहन अपने ससुराल चली जाएगी हालांकि उधर वह उससे मिल सकता था लेकिन ससुराल में उसकी चुदाई करने का मौका उसे मिलेगा कि नहीं यह निश्चित नहीं था इसलिए आज की रात वह पूरी तरह से संतुष्ट हो जाना चाहता था,,, शायद शालू के मन में भी यही चल रहा था,,, शालू भी जानती थी कि शादी के बाद वह ससुराल चली जाऊंगी और लंड के मुकाबले में बिरजू उसके भाई के सामने कुछ भी नहीं था जो मजा उसे अपनी भाभी से छुपा कर मिलता था वह बिरजू से नहीं मिल पाया था बिरजू उसे संपूर्ण रूप से संतुष्ट करने में नाकामयाब साबित हुआ था,,, अगर अपने शारीरिक जरूरतों की बात होती तो शायद शालु भी बिरजू से शादी करने के लिए इंकार कर देती लेकिन मामला उलझ चुका था वह पेट से थी,, और अपनी ऐसी पाप को छुपाने के लिए वह भी अपनी शारीरिक जरूरतों को एक तरफ रख कर इस शादी के लिए तैयार हो चुकी थी,,,रघु के साथ चुदाई का मजा लूट कर वो पूरी तरह से प्यासी हो चुकी थी,,, अपने भाई से चुदवाए बिना उसका भी मन नहीं मानता था,,,,

Shalu apni kurti utarte huye

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रघु छत पर लेटा हुआ अपनी बहन की पायल की आवाज सुनते ही उत्तेजित होने लगा,,, उसके बदन पर केवल तोलिया लिपटा हुआ था,, और तोलिए के अंदर धीरे धीरे उसका लंड अपना मुंह उठा रहा था शालू पर नजर पड़ते ही उसके होठों पर मुस्कान तेरने लगी,,, वह एक नजर अपनी मां के ऊपर डाली जो कि निश्चिंत होकर चैन की नींद सो रही थी और फिर धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए रघु के पास आ गई जो कि जाग रहा था,,। शालू वहीं पर बैठ गई,,, शालू को देखते हुए रघु उसी तरह से लेटे हुए ही बोला,,,।

अब तो खुश हो ना दीदी,,,

खुश क्यों नहीं होंऊगी,,, तूने जो मेरा हाल किया था अगर सब कुछ सही नहीं होता तो शायद मैं मर जाती,,,।

नहीं नहीं दीदी ऐसा भला मै होने देता,,,,

तेरी वजह से हुआ भी तो था,,,,

क्या तुम्हें मजा नहीं आया दीदी,,,,(रघु के इस बात पर सालु कुछ नहीं बोली,,) अब तो शादी करके तुम अपने ससुराल चली जाओगी वहां रोज बिरजू तुम्हारी चुदाई करेगा,,,,

लेकिन तेरे जैसा मजा नहीं दे पाएगा,,,(शालू उदास होते हुए बोली अपनी अतृप्त संतुष्टि की पूर्ति ना होने का एहसास उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था,,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं हूं ना,,, मैं वहां पर हमेशा आता जाता रहूंगा,,,,

आते जाते रहोगे लेकिन क्या हमें मौका मिल पाएगा और किसी ने देख लिया तो,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं होगा दीदी,,, वैसे भी बिरजू एकदम बुद्धू है तुम तो उसे आराम से संभाल लोगी,,,,,

हां कह तो तू सच ही रहा है,,, लेकिन घर छोड़कर जाने का मन नहीं कर रहा है,,,।

अरे वह तो जाना ही पड़ेगा दुनिया का दस्तूर है शादी करके ससुराल में अपना घर बसाना पड़ता है नहीं तो क्या जिंदगी भर यहां रह कर अपने भैया से चुदवाती रहोगी,,,,।

बहुत हारामी हो गया है तु,,,,

तुम्हारी बदौलत दीदी,,,, वरना मैं तो बिल्कुल नकारा था कुछ भी पता नहीं चलता था लेकिन तुम्हारे खूबसूरत बदन ने,,(एक हाथ में कमीज के ऊपर से ही शालू की चूची पकड़कर दबाते हुए,,) मुझे एकदम समझदार बना दिया है,,,।

चल रहने दे तुम मर्दों को बस यही आता है,,,,

और वैसे भी औरतें मर्दों की इसी हरकत से खुश रहती हैं,,,,( तोलियों को एक तरफ करते हुए अपने खाने नंबर को अपने हाथ में पकड़ लिया यह देखकर सालु की बुर में बुलबुलाहट होने लगी,,,) क्यों सही कहा ना दीदी,,,,

हां तू सच कह रहा है,,,,(इतना कहते हुए सालु भीअपना हाथ बढ़ा कर अपने भाई के लंड को पकड़ ली और उत्तेजना के मारे ऊसे दबाने लगी,)

ससससहहहहह,,,, दीदी तुम्हारी यही अदा मुझे बहुत अच्छी लगती है,,,, लंड को तुम बहुत अच्छी तरह से पकड़ कर दबाती हो,,,ससससहहहहह आहहहहहहहहहहह,,,(इतना सुनते ही शालू और जोर से अपने भाई के लंड को दबाने लगी किसी से रघु के मुंह से सिसकारी की आवाज निकल पड़ी,,,,)

दीदी बहुत दिन हो गए हैं,,, तुमने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर नहीं चुसी,,,,,

मा जाग जाएगी,,,,,(अपने भाई के लंड को मुट्ठी आते हुए बोली)

नहीं जागेगी दीदी,,,,,

नहीं मुझे डर लगता है,,,,

डर कैसा दीदी,,,, पहली बार थोड़ी ना हूं बहुत बार तुम्हारी ले चुका हूं छत पर,,,,

फिर भी ना जाने क्यों मुझे डर लगता है अगर मा ने देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,, चल नीचे कमरे में चलते हैं,,,,

हां यह सही है,,,,

(इतना कहने के साथ ही रघु उठ खड़ा हुआ और अपने तालियों को कमर से लपेट ते हुए बोला,,,)

चलो दीदी कमरे में ही मजा आएगा तुम लालटेन उठा लो,,,

(शालू लालटेन उठाकर धीरे-धीरे सीढ़ियां उतरने लगे लेकिन उसे जोरो की पिशाब लगी हुई थी इसलिए सीढ़ियां उतरकर वहां लालटेन को रघु के हाथ में पकड़ाते हुए बोली,,)

ले रघू इसे पकड़,,,,

अब क्या हुआ दीदी,,,

अरे मुझे जोरो की पिशाब लगी है पेशाब तो कर लेने दे,,,

वाहहहहहह,,,, दीदी अब तो मजा आ जाएगा तुम्हें पेशाब करते हुए देखने में बहुत मजा आएगा बड़ी बड़ी बड़ी गांड देखने में बहुत मजा आएगा,,,,।

चल पागल कहीं का बडा आया गांड देखने ऐसा लग रहा है कि जैसे कभी देखा ही नहीं,,,,

सब कुछ देख चुका हूं दीदी लेकिन पेशाब करते हुए देखने में जो मजा है वह किसी चीज में नहीं,,,,

चल अब थोड़ा दूर खड़े रह मुझे पेशाब करना है,,,

कर लो ना दीदी चारों तरफ अंधेरा है कोई देख थोड़ी ना रहा है और देखना चाहेगा तो भी उसे कुछ दिखेगा नहीं,,,

तू तो है ना देखने वाला,,,,

मुझसे कैसी शर्म दीदी मैं तो तुम्हारा सब कुछ देख चुका हूं और ले भी चुका हूं,,,,

बड़ा निकम्मा हो गया है तू,,,,(इतना कहते हुए शालू दो कदम आगे बढ़ गई और सलवार की डोरी खोलने लगी,,, अपने छोटे भाई के साथ चुदाई का सुख भोग कर,,, वह पूरी तरह से खुल गई थी,,, वरना अपने भाई के साथ शारीरिक संबंध बनाने से पहले शालू बेहद सीधी सादी और संस्कारी लड़की थी उसके लिए यह सब बातें सोचना भी पाप था वह किसी के सामने इस तरह से खुले शब्दों में पेशाब करने वाली बात कहती भी नहीं कि भले ही वह उसकी सहेली क्यों ना हो लेकिन शालू जानती थी कि रघुउसका सबसे बड़ा राजदार था और साथी भी जिसके साथ वह सब कुछ कर सकती थी इसलिए उसकी शर्म एकदम से दूर हो चुकी थी,,, तभी तो बहुत बेझिझक,,, बाद में भाई से पेशाब करने वाली बात कह रही थी अंदर ही अंदर वह भी यही चाहती थी कि उसका भाई उसे पेशाब करते हुए देखे उसकी बुर से निकल रही सीटी की आवाज को अपने कानों से सुनकर एकदम मस्त हो जाए,,,, रखो दो कदम की दूरी पर लालटेन लिए खड़ा था लालटेन की रोशनी में जहां पर शालू खड़ी थी वहां तक का दृश्य एकदम साफ नजर आ रहा था बाकी एकदम अंधेरा ही अंधेरा था,,,, शालू अपने सलवार की दूरी खोज की थी और अपनी सलवार को नीचे घुटनों तक करके वहीं बैठ गई वह जानती थी कि उसका भाई पीछे से खड़ा उसको देख रहा है,,,परेशानी उसकी नजरें उसकी गोलाकार गांड पर टिकी होंगी यह भी वह जानती थी,,, लेकिन अपने भाई के सामने उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं आ रही थी वह बेशर्म बन चुकी थी और बेशर्म बनने में औरतों को कुछ ज्यादा ही मजा आता है और यही सुख शालू भी भोग रही थी,,,, देखते ही देखते रघु के कानों में अपनी बहन की बुरी में से निकल रही सिटी की मधुर आवाज गूंजने लगी ,वह पूरी तरह से मस्त हो गया बदहवास हो गया मदहोश हो गया अपनी बहन का यह कामुक रूप देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,, उसका लंड खड़ा होकर तोलिए से बाहर आ गया जिसे वो खुद छिपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था वह तो अपनी बहन की गोलाकार गांड की आकर्षण में और उसकी बुर की मधुर आवाज में खो चुका था देखते ही देखते शालू मुत्र क्रिया को समाप्त करके खड़ी हो गई है अपनी सलवार की डोरी बांधने लगी लेकिन रखवा के बर्तन उसे ऐसा करने से रोक दिया और उसकी सलवार की डोरी को खुद पकड़कर उसे कमरे के अंदर की तरफ ले जाने लगा सालु भी निश्चिंत होकर अपने भाई के साथ कमरे के अंदर जाने लगी,,,।

दोनों के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी शालू समझ गई थी कि उसे पेशाब करते वक्त पर उसका भाई अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं है और ऐसा ही हुआ कमरे के अंदर पहुंचते ही वह कमरे का पर्दा खींच दिया दरवाजा तो था नहीं इसलिए पर्दे का ही दरवाजा बनाया था और लालटेन को दीवाल में लगी एक कील से लटका दिया कमरे के अंदर पीली रोशनी फैल गई रघु अभी भी अपनी बहन की सलवार की डोरी अपने हाथ में पकड़े हुए था और उस दूरी को खींचकर वह अपनी बहन को अपनी बाहों में भर लिया अपनी बहन को बाहों में पढ़ते ही उसके हाथ से सलवार की डोरी टूट गई और सलवार एकदम से शालू के कदमों में जा गिरी और कमर के नीचे से एकदम नंगी हो गई और रघु बदहवास होकर अपनी बहन की तरबुज जैसी गोल गोल गांड अपने दोनों हाथ से पकड़कर जोर जोर से दबाते हुए उसके लाल लाल होठों को पीना शुरू कर दिया,,,, देखते ही देखते दोनों उत्तेजित हो गए शालू भी अपने भाई का साथ देते मैं अपने मुंह को खोल दिया और दोनों एक दूसरे की जीभ को चाटना शुरू कर दिए,,,

देखते ही देखते रघु अपने हाथों सेअपनी बहन की कमीज को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाने लगा और उसकी बहन भी उसका साथ देते अपने दोनों हाथों को ऊपर उठा दी और देखते-देखते रघु अपनी बहन की कमीज उतार फेंका और शालू खुद अपने पैरों से अपने पैरों में फंसी सलवार को पैरों का सहारा लेकर उतार कर नीचे फेंक दी शालू अपने भाई की बाहों में पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और वहां एक हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने भाई के टावल को खींच कर नीचे जमीन पर खेती दोनों कमरे के अंदर संपूर्ण रूप से नंगे हो गए,,,।

ओहहहहहह,,,, दीदी मेरी प्यारी दीदी कल तुम्हारी शादी है और आज की रात में तुम्हारे साथ सुहागरात मना रहा हूं,,,,

हां मेरे राजा,,,, सुहागरात मनाने का असली हकदार तू ही है तभी तो नहीं आज के बाद तुझे नीचे लेकर आई हूं ताकि आज की रात में खुलकर तेरे साथ चुदाई का मजा ले सकु,,,

ओहहहहह दीदी तुम कितनी अच्छी हो अपने भाई का इतना ख्याल रखती हो,,,,

अपने भाई का ख्याल में नहीं रखुंगी तो कौन रखेगा,,,,,

ओहहहहह,,,,दीदी (इतना कहने के साथ ही रघु अपनी बहन की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और अपने भाई की इस हरकत से शालू एकदम से मदहोश हो गई और वह अपने भाई का सर पकड़ कर अपनी चूची पर जोर जोर से दबाने लगी,,,,,रेखा के नीचे की तरफ ले जाकर अपने भाई के खड़े लंड को पकड़कर उसे अपनी बुर की गुलाबी दरार पर रगड़ना शुरु कर दी,,,

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दोनों मदहोश में जा रहे थे अपने अपने तरीके से दोनों एक दूसरे के बदन से आनंद ले रहे थे,,,, कुछ देर तक इसी तरह से रघु अपनी बहन की दोनों चूचियों को पीकर मजा लेता रहा,,,। और अब वह अपनी बहन को चोदना चाहता था,,, और अपने लंड को पकड़ कर अपनी बहन की बुरके गुलाबी छेद पर र रगडते हुए बोला,,,।)

दीदी,,,, बिरजू से चुदवाते समय मेरे लंड की याद आएगी ना तुम्हें,,,

बहुत आएगी मेरे भैया,,, क्योंकि बिरजू का लंड तेरे जितना मोटा और लंबा नहीं है,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो दीदी मैं बराबर पहुंचता रहूंगा तुम्हें चोदने के लिए,,,।

(दोनों कमरे के बीचो बीच खड़े होकर ही काम क्रीड़ा कर रहे थे तूने एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे रघु तड़प रहा था अपनी बहन को चोदने के लिए इसलिए वह अपनी बहन से बोला,,,)

खटिया पर चला दी थी मैं तुम्हें आज जी भर के चोदना चाहता हूं,,,,

चोद लेना मेरे राजा,,, लेकिन पहले मैं तेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती हु,,,,

ओहहहहहह,,, दीदी,,,,,,(इतना कहने के साथ ही रघु अपनी बहन के दोनों कंधों को पकड़कर नीचे की तरफ दबाव बनाने लगा और शालू देखते ही देखते अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपने भाई के खड़े लंड को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी,,, रघु की तो हालत खराब हो रही थी शालू बड़े अच्छे से उसके लंड की चुसाई कर रही थी,,, शालू अपनी बहन के लंड को चूसने में माहिर हो चुकी थी उसे अच्छी तरह से पता था कि कैसे लंड को चूस कर मर्द को मस्त किया जाता है और यही सच भी था रघु पूरी तरह से अपनी बहन का गुलाम हो चुका था उसे अपने बहन की जीभ अपने लंड पर बड़े अच्छे से महसूस होती थी,,,। सालुअपने भाई के लंबे लंड को गले तक नीचे उतारकर उसे चूसने का आनंद ले रही थी उसकी सांस अटक जा रही थी लेकिन लंड चूसने के आनंद को वह बिल्कुल भी जाने नहीं देना चाहती थी,,,,,, रघु धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया अपने भाई की यह हरकत शालू को और अच्छी लगती थी,,,। कुछ देर तक दोनों इसी अवस्था में आनंद लेते रहे उत्तेजना के मारे रघु को लग रहा था कहीं उसके लंड से लावा ना फूट पड़े,,, इसलिए वह,,, अपने लंड को अपनी बहन के मुंह से बाहर निकाल लिया,,,, उसकी सांसे बड़ी भारी चल रही थी,,,, रघु अपनी बहन को आश्वस्त करते हुए बोला,,,।

Raghu shalu ki chudai karta hua

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अब मेरी बारी दीदी और इतना कहने के साथ ही वह,,अपनी बहन की बाहों को पकड़कर उसे ऊपर की तरफ उठाते हुए खुद नीचे घुटनों के बल बैठ गया शालू को समझते देर नहीं लगी कि उसका भाई क्या करना चाहता है इसलिए वह तुरंत खड़ी हुई और अपने घुटनों को मोड़कर उसे अपने भाई के कंधे पर रख ली जिससे उसकी गुलाबी बुर ठीक उसके मुंह के सामने आ गई जिससे रघु को उसकी बुर चाटने में बिल्कुल भी दिक्कत नहीं पेश आ रही थी और वह अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपनी बहन की बुर को लपा लप चाटने लगा,,,, दोनों एक दूसरे में पूरी तरह से खो चुके थे लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था दरवाजे पर पर्दा लगा हुआ था इतनी रात को किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए दोनों निश्चिंत थे लेकिन दूसरी तरफ छत पर अचानक कजरी की नींद खुल गई और वह उठ कर बैठ गई पास में पडे लौटे को उठाकर वह पानी पीने लगी,,, और‌वह छत पर चारों तरफ छत पर नजर दौड़ाई तो वह हैरान रह गई छत पर रघु और शालू दोनों नहीं थे,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी रात हो गई और वह दोनों छत पर नहीं आए लेकिन उसे याद आया कि जब वह छत पर आई थी तब रघु छत पर सो रहा था ऐसा कजरी को लग रहा था जबकि वह जाग रहा था इसलिए वह हैरान हो गई कि आखिरकार इतनी रात को दोनों कहां है गर्मी में दोनों नीचे सोने से रहे लेकिन फिर भी वह बेचैन हो गई परेशान हो गई और वह धीरे-धीरे सीढ़ियां उतर कर नीचे की तरफ आने लगी,,,।

दूसरी तरफ कमरे में एक दूसरे के अंगों से खेलने का घमासान मचा हुआ थारखो पागलों की तरह अपनी बहन की बुर को चाट रहा था मानो कि जैसे कटोरे में भरी खीर को चाट रहा हो,,, हालांकि की की मलाई से कहीं अत्यधिक आनंदित और पोस्टिक बुर की मलाई होती है इसे चाटने में जो सुख मर्दों को मिलता है और जिस तरह से तृप्ति का एहसास औरतों को होता है ऐसा पूरे जगत में किसी भी कार्य को करने से नहीं होता,,,, रघु के ईस तरह की बुर चटाई से शालू एकदम आनंदित हो उठी थी,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अभी भी वह अपने घुटनों को मोड़कर अपने भाई के कंधे पर रखी हुई थी और अपने दोनों हाथों से उसके बाल को पकड़कर जोर जोर से अपनी बुर पर रगड रही थी,,,।

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कजरी सीड़िया नीचे उतर चुकी थी,,, जैसे ही कमरे के पास पहुंची पर्दा लगा होने के बावजूद भी अंदर लालटेन की रोशनी का एहसास उसे हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सब क्या हो रहा है जैसे ही वह कमरे के पास पहुंची तो अंदर से गरम सिसकारी की आवाज उसे सुनाई देने लगी इस आवाज से वह भलीभांति वाकिफ थी एक औरत होने के नाते औरत के मुंह से निकल रही गरमा गरम सिसकारी की आवाज को अच्छी तरह से पहचानती थी,,।इस तरह की आवाज सुनकर उसके होश उड़ गए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस तरह की आवाज उसके घर से कैसे आ रही है उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और छत पर से शालू और रघु के गायब होने की वजह से उसके मन में जिस तरह की कल्पना हो रही थी उसे सोच कर उसके पांव लड़खड़ा रहे थे,,,, आखिरकार धड़कते दिल के साथ वह अपने दिल को मजबूत कर के आगे बढ़ते हुएकांपते हाथों से पर्दे को थोड़ा सा हटा कर अंदर की तरफ देखी तो अंदर के नजारे को देखकर उसके होश उड़ गए उसके पास वही जमीन पर एकदम से गड गए और उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,। जिस तरह के नजारे को अपनी आंखों से देखी थी उसे डर था कि कहीं उसे दिल का दौरा ना पड़ जाए,,,वास्तव में मां के लिए इस तरह का नजारा देखना किसी सदमे से कम नहीं था कि कमरे के अंदर उसका छोटा बेटा अपनी बड़ी बहन की बुर चाट रहा है और दोनों मजे ले रहे हो,,, कजरी को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था उसका मन कर रहा था कि कमरे के अंदर जाकर दोनों को जी भर कर पीटे इस तरह की गंदी हरकत करने के लिए दोनों को सजा दे,,,लेकिन कमरे में जाने की हिम्मत उसकी बिल्कुल भी नहीं हो रही थी वह बस दरवाजे पर खड़ी होकर पर्दे को थोड़ा सा हटा कर अंदर के तेरे को देख रही थी अंदर का कामुक दृश्य इतना उत्तेजना से भरा हुआ था कि 5 मिनट भी बीते नहीं होंगे कि न जाने कजरी को क्या होने लगा वह उस कामोत्तेजना से भरे हुए नजारे मे वह पूरी तरह से आकर्षित होने लगी,,, कजरी को गुस्सा आ रहा था क्रोध से भरी जा रही थी लेकिन कमरे के अंदर के गरमा गरम नजारे में कुछ ऐसा कर सकती वह कुछ कर नहीं पा रही थी,,,

सससहहहह ,,,आहहहहहह,,,, मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है मुझे तेरी जीभ मुझे पागल कर देगी,,,, सच में बुर चटवाने में कितना मजा आता है,,,,(अपनी बेटी के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर कजरी एकदम से हैरान हो गई लेकिन उसकी यह बात की बुर चटवाने में बहुत मजा आता है इससे उसके मन में दबी हसरत जागने लगी,,, इस नजारे को देखकर उससे गुस्सा भी आ रहा था लेकिन ना जाने क्यों उसे मन के किसी कोने में अच्छा भी लग रहा था क्योंकि वर्षो से वह प्यासी थी अपनी इच्छाओं को अपनी भावनाओं को अपने मन में दफन कर चुकी थी अपनी बेटी की गरमा गरम बातें और उसकी हरकत उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा करने लगी थी उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसके बेटे की जीभ उसकी बेटी की बुर में बड़े आराम से अंदर बाहर हो रही थी शादीशुदा जिंदगी में उसके पति ने कभी भी इस तरह की हरकत इसके साथ नहीं की थी इसलिए कजरी को इस बात का अहसास तक नहीं था कि औरतों की बुर भी चाटी जाती है,,,। इसलिए कजरी के संपूर्ण वजूद को हिला के रख दिया था पल भर में ही कजरी को अपनी बुर गीली होती हुई महसूस होने लगी,,,।

कमरे के अंदर के नजारे को देखकर जो गुस्से में तिलमिला उठी थी उसका गुस्सा वासना की आग में जलकर काफूर हो चुका था अब कजरी धीरे धीरे अंदर चल रहे दृश्य का आनंद लेने लगी,,, एक मां के लिए ईस नजारे को देखना बेहद शर्मनाक था लेकिन कजरी के मन में इस तरह की हलचल हो रही थी कजरी को खुद समझ में नहीं आ रहा था,,,, रघु अपनी बहन की पतली कमर को पकड़कर उसकी बुर को चाट रहा था,,,,, कजरी को अपने बेटे से ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,,,लेकिन एक बात से वह भी इंकार नहीं कर सकती थी कि उसके बच्चे बड़े हो गए थे जवान हो गए थे और जिस तरह का बदलाव रघु के अंदर ऐसे देखने को मिल रहा था खास करके उसके खुद के साथ उसे समझ जाना चाहिए था कि उसका बेटा जवान हो गया है,,,,लेकिन इस समय ना जाने क्यों इतना होने के बावजूद भी अपने बच्चों की इतनी गंदी हरकत का वह आनंद ले रही थी,,, इसकी एक ही वजह थी कि वह खुद प्यासी थी,,,।

इसलिए सामने का नजारा देखकर वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी लालटेन की रोशनी में ऊसे सब कुछ साफ नजर आ रहा था आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था,,,रघु बार बार कट उसकी कमर पर दोनों हाथ रखकर दबाता तो कभी उसकी गोलाकार गांड को अपने दोनों हथेली में भर लेता,,, यह सब नजारा कजरी के लिए अद्भुत और मादकता से भरा हुआ था,,,।

Raghu or shalu

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आहहहह,,,, रघु अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,, मेरी बुर में आग लगी है मेरे राजा मुझे तेरा लंड चाहिए जल्दी से मेरी चुदाई कर मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।

(अपनी बेटी के मुंह से यह बात सुनकर कजरी एकदम स्तब्ध रह गई उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी हो सुन रही है उसकी बेटी कह रही है उसे उम्मीद ही नहीं थी कि उसकी बेटी इतनी गंदी बात कहेगी,,,, वह हैरान थी लेकिन उत्सुक भी थी थोड़ी देर बाद रघु खड़ा हुआ और अपनी बहन को तुरंत अपनी गोद में उठा लिया दोनों एकदम नंगे थे,,, कजरी की नजर अपने बेटे के खड़े लंड पर पड़ी जो कि इस समय सालु को गोद में उठाने की वजह से उसका लंड उसकी पीठ पर रगड़ खा रहा था,,,, कजरी का दिमाग काम करना बंद कर दिया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसका बेटा और उसकी बेटी दोनों काम क्रीडा में मग्न हो गए थे उन्हें इस बात का आभास तक नहीं था कि दरवाजे पर खड़ी ऊन दोनों की मां उनकी बेशर्मी भरी हरकत को देख रही है,,,,।

चलो मेरी रानी खटिया हम दोनों का इंतजार कर रहा है चलो आज तुम्हारी जमकर चुदाई करता हूं,,,,(इतना कहते हुए रघु उसे खटिया पर लेटा दिया कजरी के लिए यह नजारा अद्भुत होता जा रहा था उसने कभी अपनी आंखों से इस तरह के नजारे को नहीं देखी थी और देखी भी तो,,, अपने ही बच्चों को,,,, रघु पूरा जवान हो चुका था एक औरत को संतुष्ट करने लायक उसके पास मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड कजरी को नजर आ रहा था,,, कजरी इस बात के हिसाब से और ज्यादा उत्तेजित हो गई कि उसका बेटा अपनी ही बहन को गोद में उठाकर खटिया पर लेटा कर क्या करने वाला है इसलिए उससे यह नजारा बर्दाश्त नहीं हुआ और वह अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी ही हथेली से अपनी गरम बुर को ठंडा करने की कोशिश करने लगी,,, रघु दुनिया से बेखबर मान मर्यादा को तार-तार करते हुए अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच आ गया और उसे अपनी बाहों में भरकर अपने रहने की उसकी बुर में एक झटके में पूरा का पूरा पेल दिया,,, बस हल्की सी आहहह सालु के मुंह से निकली और उसके बाद रघु की कमर रफ्तार के साथ ऊपर नीचे होने लगी कजरी की हालत खराब हुई जा रही थी वह अपनी उंगली को अपनी बुर में डालकर अंतर बार कर रही थी ना जाने क्यों उसका मन कर रहा था कि कमरे में चली जाए और अपनी बेटी शालू को हटाकर खुद उसकी जगह लेट जाएं क्योंकि सालु से ज्यादा वो खुद प्यासी थी,,, रघु की नंगी पीठ पर सालु की हथेली इधर से उधर घूम रही थी,,, जो की कजरी के लिए शायद एक सबक थी रिश्ते नाते मान मर्यादा सब अपनी जगह,,, और शरीर की भूख एक जगह,,,, शरीर की जरूरत पूरी करने के लिए उसकी बड़ी बेटी शालू और उसका छोटा बेटा रघु काम क्रीड़ा में पूरी तरह से तल्लीन हो चुके थे,,,। पूरे कमरे में गर्म सिसकारी की आवाज गूंज रही थी कजरी अपने बदन की जरूरत के कारण अपने तन की प्यास के आगे लाचार थीवह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को तार-तार होते हुए अपनी नजरों से देख कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी बल्कि उस नजारे को देखकर वो खुद गर्म हो चुकी थी,,,। यह चुदाई लगभग आधे घंटे तक चलती रही,,,जो खुद अपनी उंगली से ही 2 बार झड़ चुकी थी लेकिन लड़कों का पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा था यह देखकर कजरी खुद हैरान थी कजरी अपने कानों से सालों की बात सुन चुकी थी कि वह इस दौरान दो बार झड़ चुकी थी लेकिन रखो उसी तरह से टिका हुआ था तकरीबन आधे घंटे बाद उसका भी पानी निकल गया अपने बेटे के मर्दाना ताकत को देखकर कजरी बेहाल हो गई थी न जाने क्यों अपने बेटे के प्रति इस समय और ज्यादा आकर्षित हो चुकी थी वह ज्यादा देर तक वहां खड़ी नहीं रही और वापस छत के ऊपर आ गई लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी कल शादी थी और वह अपने बच्चों के सामने इस जिक्र को छेडकर,,, माहौल को खराब नहीं करना चाहती थी छत पर उसके जाने के बाद तकरीबन 2 घंटे के बाद है दोनों वापस छत पर आए तेरी समझ गई कि इन 2 घंटों में वह दोनों ना जाने कितनी बार संभोग रत हुए होंगे,,,,। धीरे-धीरे कजरी की भी आंख लग गई,,,,, दूसरे दिन उठते ही वह शादी की तैयारी में जुट गई,,,।
 
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