Incest बरसात की रात,,,(Completed) - Page 6 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest बरसात की रात,,,(Completed)

लाला अपनी हवेली में कुर्सी पर हिसाब किताब करते हुए बैठा हुआ था,,, तभी दरवाजा खुला और दो आदमी लठ्ठ लिए कमरे के अंदर प्रवेश किए,,, उन्हें देखते ही लाला बहुत खुश हुआ,,, वह दोनों लाला से करीब 2 मीटर की दूरी पर खड़े होकर हाथ जोड़कर नमस्कार किया,,,

हरिया और भोला,,,, तुम दोनों को देखते ही तन बदन में एक अजीब सी ताकत आ जाती है,,, वैसे भी तुम दोनों ही मेरी ताकत हो,,,,, कहो आज कैसे आना हुआ । (लाला हिसाब किताब का खाता बगल में रखते हुए बोला,,। तभी हरिया लाला की तरफ आगे बढ़ा और उसके कान में कुछ कहने लगा,,, हरिया की बात सुनते ही लाला के चेहरे की चमक बढ़ गई,,,, अपने दाहिने तरफ के दरवाजे की तरफ देखते हुए लाला बोला,,,)

उसे सब समझा तो दिया है ना,,,

जी मालिक तभी तो आई है उसे पैसों की सख्त जरूरत है,,, ठीक है उसे भेजो,,, लेकिन इस बात की किसी को कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए,,,,

कभी ऐसा हुआ है मालिक,,,

ठीक है उसे भेजो,,,

( लाला की तरफ से इशारा पाते ही हरिया भोला की तरफ इशारा किया उस औरत को अंदर लाने के लिए,,, भोला इशारा पाते ही तुरंत कमरे के बाहर गया और कुछ ही देर में उस औरत को लेकर आया,,, लाला की नजर उस औरत पर पडते ही,,, उसकी धोती में हलचल होने लगा,,, गदराए जिस्म की उस औरत की उम्र तकरीबन 40 के करीब होगी,, औरत घूंघट में थी लेकिन बदन की बनावट लाजवाब की,, रंग थोड़ा सांवला था लेकिन बदन का उतार-चढ़ाव देखकर अच्छे अच्छों का मन डोल जाए,,,, लाला मन ही मन खुश होता हुआ बोला,,।)

क्या नाम है तुम्हारा,,,(दाहिने तरफ के बंद दरवाजे की तरफ देखता हुआ धीरे से बोला,,)

मीना,,,,

बहुत ही सुंदर नाम है तुम्हारा,,,

वैसे तुम मेरे पास क्यों आई हो,,,



मदद चाहिए मालिक, मुझे कुछ पैसों की सख्त जरूरत है मेरा लड़का बीमार है और उसके इलाज के लिए शहर जाना होगा,,,,

तुम पैसे लौटा दोगी,,,,

जी मालिक एक-एक पाई लौटा दूंगी,,,(नजरे झुकाए हुए ही वह औरत हाथ जोड़कर बोली।)

वैसे तो तुम मुझे वापस पैसे लौटा दोगी ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा है,,, लेकिन फिर भी मैं तुम्हें पैसे देने के लिए तैयार हूं,,, कितना चाहिए?

50रुपया मालिक,,,(वह औरत हाथ जोड़े हुए ही बोली)

कुछ ज्यादा मांग रही हो,,,,

मालिक आप बिल्कुल भी चिंता ना करें मैं एक एक पाई लौटा दूंगी,,,(उस औरत की हालत को देखकर लाला समझ गया था कि इसे पैसे की सख्त जरूरत है इसलिए वह हरिया की तरफ देखता हुआ बोला)

क्या कहते हो हरिया पैसे दे दु या रहने दुंं,,,,

दे दीजिए मालिक बिचारी दुखी हैंइसका लड़का बीमार है अगर आप मदद नहीं करेंगे तो कौन करेगा,,,

ठीक है हरिया तुम कहते हैं तो मैं दे देता हूं वैसे भी यह औरत मुझे भली दिख रही है,,, और तो ठीक है इसलिए का मदद करना मेरा फर्ज है,,( इतना कहते हुए लाला अपने पास में रखी हुई पैसे की संदूक को खोलते हुए बोला,,,)

पैसे मैं तुम्हें या नहीं कहीं और दूंगा,,, वैसे तुम्हें तो मालूम ही होगा कि तुम्हें क्या करना है,,,

(लाला की बात सुनकर वह औरत शर्मिंदा हो गई उसके मुंह से शब्द, नहीं फूट रहे थे वह केवल हां में सिर हिला रही थी उसका इशारा समझते हुए लाला मन ही मन बेहद प्रसन्न हुआ,,,)

चलो सब पता है तो कोई दिक्कत नहीं है हरिया तुम्हें मेरे पुराने घर पर ले आएगा अब से ठीक 1 घंटे बाद तुम मुझे वहीं मिलना मैं वहां तुम्हें पैसे दे दूंगा,,,,(इतना कहती बेला नाहरिया को आंख से इशारा करके उसे अपने पुराने घर पर ले जाने के लिए बोला,,)
 
लाला बहुत खुश नजर आ रहा था वैसे भी काफी दिन हो गए थे उसे नई तितली को पकड़े,,, और जब से उसने कजरी के दोनों मदमस्त छलकती जवानी को देखा था तबसे तो वह पागल हो गया था,,, कजरी को भौंकने की लालसा उसके मन में दिन-ब-दिन प्रज्वलित होती जा रही थी,,,कजरी के हाव भाव को देखकर वह समझ गया था कि कजरी को हासिल कर पाना इतना आसान नहीं है,,, रात दिन उसके दिलो-दिमाग में बस कजरी ही छाई हुई थी,,, कई दिनों से उसे अपनी गर्मी शांत करने का जुगाड़ नहीं मिल पा रहा था,,, कुछ दिनों तक वह अपने हाथ से हिला कर काम चलाता रहा,,, कजरी के मादक भराव दार मटकते हुए नितंबों को याद करके और कजरी की दोनों छलकती जवानी के हीलोरो को याद करके,,, अपने हाथ से ही कल्पना में कजरी के साथ संभोग आसन में लिप्त होकर वह अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करता आ रहा था,,, लेकिन कजरी उसके दिलो दिमाग से निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी,,,

पिछले साल ही वहां अपने बेटे का विवाह किया था और एक महीना ही हुआ था उसका होना आए,, बड़ी बेटी तो प्रताप सिंह के वहां बहू बनकर आराम की जिंदगी जी रही थी,,, घर में बहू क्या जाने के बाद से लाला संभाल संभाल कर कदम रखने लगा था वह नहीं चाहता था कि उसकी वासना की कहानी उसकी बहू को पता चले,,, वैसे अब तक उसके बेटे को भी लाला की करतूतों के बारे में जरा सा भी पता नहीं था,,, और लाला यही चाहता भी था हरिया और भोला दोनों लाला के बेहद वफादार साथी थे,,, और इस तरह का काम लाला इन्हीं से लेता था यह दोनों ही गांव में या दूरदराज से इस तरह की मजबूर औरतों को लेकर आते थे और उन्हें पैसे की मदद करके लाला अपनी वासना शांत करता था,,, और जब तक पैसे पूरी तरह से चुकता नहीं हो जाते थे तब तक लाला उस औरत के साथ अपनी मनमानी करता रहता था,,, और आज उसकी जाल में मीना फस चुकी थी,,,।

लाला अपने पुराने मकान पर जाने के लिए तैयार हो रहा था वह अपना धोती और कुर्ता पहनकर गीत गुनगुना रहा था कि तभी,,, दरवाजा खुला और अंदर से उसकी बहू हाथ में भोजन की थाली लिए उसके करीब आने लगी और बोली।

बाबुजी कहीं जा रहे हैं क्या भोजन तैयार हो चुका है,,,

बहू में आ कर खा लूंगा कहीं जरूरी काम से जा रहा हूं,,,

ठीक है बाबूजी,,,, आइएगा तो आवाज दीजिएगा,,,

ठीक है बहु तुम जाओ,,,,

(लाला का इतना कहना था कि लाला की बहू भोजन की थाली लिए वापस कमरे में जाने लगी और लाला उसकी गोलाकार नितंबों को जो की कसी हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही उभर कर नजर आ रही थी उसे देखते ही मन में गरम आहें भरने का और तब तक देखता रहा जब तक कि वह अंदर जाकर दरवाजा नहीं बंद कर ली,,,, लाला अपनी बहू की खूबसूरत चेहरे को तो ठीक से नहीं देख पाता था क्योंकि वह हमेशा घूंघट में ही रहती थी लेकिन,,, बाकी के अंगों को बाहर साड़ी के ऊपर से ही उनके आकार के बारे में पता लगा लेता था,,,, अपनी बहू की चूड़ियों की खनक पायल की छनक को सुनते ही उसके तन बदन में वासना की लहर दौड़ ने लगती थी वह काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगता था और इस समय भी वह अपनी बहू के गोलाकार नितंबों को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और सारी कसर पुराने घर पर मीना के ऊपर निकालने की मन में ठान लिया था,,,, वह तैयार होते होते अपनी बहू के बारे में सोच रहा था,,, जैसी खूबसूरत थी वैसा ही खूबसूरत नाम भी था कोमल अभी अभी शादी हुई थी इसलिए वह धीरे-धीरे फूल की तरह खीलना शुरू की थी,,, अपनी बहू को मन को देखते हैं उसे अपने बेटे के ऊपर गुस्सा आने लगता था क्योंकि ना जाने क्यों लाला को ऐसा लगता था कि उसका बेटा उसकी बहू को ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है,,,। दरवाजा बंद हो चुका था लेकिन धोती के अंदर हलचल मजा आ गया था,,, अपनी बहू की हाजिरी मैं लाला कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो जाता था,,अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए वह जल्द से जल्द अपने पुराने घर पर पहुंचना चाहता था इसलिए जल्दी ही घर से निकल गया,,

वहां पहुंचा तो पहले से ही हरिया भोला और वह औरत वहां पर मौजूद थे,,,, उस औरत पर नजर पड़ते ही लाला की धोती में हलचल मच ना शुरू हो गया,,,, लाला का यह पुराना घर आम के बागों के बीचो बीच था,,, यहां के आम बेहद स्वादिष्ट और मीठे होते हैं,,, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि यहां के आम को तोड़ सके जिसका कारण हरिया और भोला ही थे,,,जो कोई भूले से भी यहां के आम को तोड़ता था तो हरिया और भोला उसकी टांगे तोड़ देते थे,,,

चलो मीना अंदर चलो,,,(इतना सुनना था कि हरिया ने जल्दी से दरवाजा खोल दिया और मीना शर्माते हुए घर में प्रवेश कर गई,,, और लाला अपनी जेब में से 5 रु का नोट निकालकर हरिया को थमाते हुए बोला,,,)

तुम दोनों भी जाओ ऐश करो,,,

(इतना सुनते ही दोनों लाला को नमस्कार कर के वहां से चले गए और लाला जल्द से जल्द दरवाजे के अंदर प्रवेश कर गया,,, और दरवाजा को अंदर से बंद कर दिया,,, पुराना घर भी काफी बड़ा था जिसके एक कमरे में लाला और मीना दोनों खड़े थे लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए मीना की तरफ देखा तो वह बिस्तर के करीब खड़ी होकर दीवाल की तरफ देख रही थी तो लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए बोला,)

शरमाओ मत मीना इसे अपना ही घर समझो आराम से बैठ जाओ,,,

(लाला की बात सुनकर मीना शर्मा और डर के मारे बिस्तर पर बैठ गई और लाला कुंडी लगाकर मिला की तरफ घूम गया,,,और उसके करीब जाने लगा जैसे जैसे नाना मीना के करीब आता जा रहा था मीना के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी क्योंकि मीना को मालूम था कि नाना क्या करने वाला है और पैसे देने के एवज में उससे क्या चाहता है,,, लेकिन वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी मजबूर थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे,,, जो कि उसकी मदद लाला ही कर सकता था,,,)

देखो मीना मुझसे शर्मा ने कि या डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है अरे मैं तो पगली तुम लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहता हूं,,(ऐसा कहते हुए लाला मीना के एकदम करीब पहुंच गया,,, और दूसरी तरफ घर के पीछे रघु और उसका दोस्त खड़े थे और घर के पीछे लगे आम के पेड़ के ऊपर पके हुए आम को देखकर ललचा रहे थे,,,)

अरे यार रघु वो आम तो काफी ऊपर है,,, वहां तक तो मैं नहीं चढ पाऊंगा तुझे ही जाना होगा,,,

साले बहन चोद मुझे मालूम था तु ऐसा ही बोलेगा,,, ठीक है मैं चढ़ जाता हूं लेकिन तू बराबर निगरानी रखना कहीं कोई आ ना जाए,,

तू चिंता मत कर रघु,,,

(इतना सुनते ही रखो ऊपर पेड़ पर चढ़ने लगा.. और दूसरी तरफ कमरे के अंदर लाला साड़ी के ऊपर से ही उसके बड़े-बड़े चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,,,)

आहहहह,,, मालिक दुखता है,,,

दुखेगा तभी तो बाद में मजा आएगा,,,,(ऐसा कहते हुए लाला उसकी साड़ी को उसके कंधे पर से हटा कर एक तरफ कर दिया जिससे उसकी भारी-भरकम छाती लाला की आंखों के सामने अपना प्रदर्शन करने लगी कसी हुई ब्लाउज में मीना की भारी-भरकम चूचियां बड़ी मुश्किल से समा पा रही थी,,,)

अरे पगली तू एकदम पागल है क्या,,, देख तो सही तेरी चूची कैसे बाहर आने के लिए तड़प रही है और तू है कि उन्हें ब्लाउज में कैद करके रखी है,,,,(ऐसा कहते हुए लाला ब्लाउज के बटन खोलने लगा तो मीना बीच में बोल पड़ी,,)

मालिक क्या ऐसा नहीं हो सकता कि यह सब किए बिना ही आप मुझे पैसे उधार दे दे,,,

मीना तु सच में एकदम मूरख है,,, अरे भगवान कसम मैं तुझे 50 रुपए ऐसे ही दे दु और तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लुं,,, और बदले में मैं तेरे साथ अपना मुंह काला भी ना करु,,लेकिन तो शायद नहीं जानती कि पैसा कमाने में में कितना मेहनत किया है रात दिन एक कर के पसीना पाया हूं तब जाकर एक एक फूटी कौड़ी जमा करके यहां तक पहुंचा हूं,,(इस दौरान लाला लगातार उसे ब्लाउज के बटन खोल कर जा रहा था और आखरी बटन खोलते हुए बोला,,) मीना रानी रुपए के बदले में मैं शायद तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लु लेकिन पैसे कमाने में जो मेहनत लगी है उस मेहनत के बदले में मैं तुझसे हर जाना जरूर लूंगा,,,

(इतना कहने के साथ ही लाला मीणा के ब्लाउज के आखिरी बटन को भी खोल दिया और आखरी बटन खोलते ही मीना की भारी-भरकम गोलाकार चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह लहराने लगी,, और मीना की बड़ी बड़ी चूची को देखकर लाला की आंखों में चमक आ गई और उसके मुंह में पानी आ गया वह दोनों हाथ आगे बढ़ाकर नीना की चूचियों को दोनों हाथों में थाम लिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,, मीना अच्छी तरह से समझ गई थी कि लाला के आगे गिडगिडाने से कोई फायदा नहीं है,,, और मीना इसे किस्मत का खेल समझ कर सब कुछ सहने के लिए तैयार हो गया,,, लाला पागलों की तरह उसकी चूचियों से खेल रहा था,,,धीरे-धीरे करके उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूची को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया,,, लाला की कामुक हरकतों से मीना एकदम शर्म से गड़ी जा रही थी क्योंकि लाला अपनी उम्र का भी लिहाज नहीं कर रहा था,,, देखते ही देखते लाला मीना के ऊपर पूरी तरह से छा गया,,, एक तरफ लाला मीना की चूचियों से खेल रहा था और दूसरी तरफ रखो धीरे-धीरे पेड़ के ऊपर चढ रहा था,,,लाला मीणा की चुचियों से खेलता हुआ दूसरा हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसके पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा,,जब मीना को इस बात का आभासस हुआ तो अपना हाथ आगे बढ़ा कर लाला को रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,।

ऐसे मत खोलिए मालिक ऐसे ही कर लीजिए,,,

अरे मीना रानी तू बहुत भोली है,,,तू बहुत खूबसूरत है तेरे नंगे बदन को देखने के लिए ही तो मैं तुझे यहां लेकर आया हूं अगर उस तरह से करना होता तो तुझे वही घर के कोने में ले जाकर के साड़ी ऊपर कर के तुझे चोद ना दिया होता,,,

(इतना कहने के साथ लाला पेटिकोट की डोरी को भी खोल दिया और देखते ही देखते मीना बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई उसके सारे कपड़े बिस्तर के नीचे बिखरे पड़े थे,,, और लाला चुचियों से निपट कर उसकी दोनों टांगों के बीच छा गया था लाला पागलों की तरह उसकी मलाईदार बुर को चाट रहा था,,, बिना कब तक अपने आप को संभाल कर रखती अपनी अभिलाषा ऊपर कब तक काबू कर पाती लाला की कामुक हरकतों ने उसे मदहोश कर दिया था और देखते ही देखते लाला की बुर चटाई से मदहोश होने लगी उत्तेजित होने लगी लेकिन फिर भी अपनी उत्तेजना को वह अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने देना चाह रही थी,,, वह उसी तरह से बिस्तर पर पड़ी थी और लाला उसकी दोनों टांगों के बीच अपना असर दिखा रहा था,,, तभी लाला उसे बोला,,,

मीरा रानी अगर तुम्हें पैसे चाहिए तो तुम्हें भी मुझे प्यार करना होगा जैसा एक बीबी अपने पति को करती हो उस तरह से,,, अगर इसी तरह से पडे रहना है तो मैं तुम्हें पैसे बिल्कुल भी नहीं दूंगा,,,(इतना कहने के साथ ही फिर से लाला मीना की बुर चाटने लगा मीना मजबूर हो चुकी थी उत्तेजित थी लेकिन वह अपनी तरफ से ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहती थी जिससे वह अपनी नजरों में गिर जाए,,, लेकिन लाला ने उसे मजबूर कर दिया था इसलिए मजबूरी बस वह तेरी दोनों हाथ नीचे की कल्पना कर लाना क्योंकि को पकड़कर अपनी दूर पर दबाना शुरू कर दी,,,बिना की इस हरकत की वजह से लाला काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगा उसे मीना की बुर चाटने में बहुत मजा आ रहा था और साथ ही मीना की गरम सिसकारी की आवाज उसे और ज्यादा मदहोश कर रही थी,,,लाला इस बात से अनजान की इस आम के बगीचे में उसे कोई नहीं देख पाएगा वह मीना के साथ रंगरेलियां मनाने में व्यस्त था लेकिन वह नहीं जानता था कि,, आज उसका भांडा फूटने वाला है क्योंकि कमरे के ऊपर की खिड़की से लगे हुए आम की डाली तक रघु पहुंच चुका था,,, वह कमरे के अंदर लाला अपनी धोती खोल कर एकदम नंगा हो गया था इस उम्र में भी उसका लंड काफी मोटा तगड़ा और एकदम टाइट था,,

GIF-220613-064052.gif


जोकि देसी घी का कमान था लाला सोने से पहले अपने लिंग पर सरसों के तेल के नहीं बल्कि देसी घी की मालिश किया करता था और जी भर के हिलाया करता था उसी का नतीजा था कि अब तक लाला के लंड की ताकत बरकरार थी ,,, मीना चोर नजरों से लाला के नंगे खड़े लंड को देखी तो सिहर उठी,,, इस उम्र में भी लाला का लंड कुछ ज्यादा ही टाइट था,,, लाला अपने लंड को हिलाते हुएमीना की दोनों टांगों के बीच आ गया और देखते ही देखते उसकी गुलाबी बुरर के अंदर अपना लंड डाल दिया,,, जैसे ही लंड मीना की बुर के अंदर प्रवेश किया मीना के मुंह से आह निकल गई,,, जिस तरह का दर्द का अनुभव मीना की थी उस दर्द की उम्मीद मीना को बिल्कुल भी नहीं थी देखते ही देखते लाला उसे चोदना शुरू कर दियामीना मजबूर थी बेबस थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे इसलिए वह जिंदगी में पहली बार लाला जैसे इंसान के सामने अपने हाथ से लाए थे और जिसके एवज में उसे अपने साड़ी का पल्लू नीचे गिराना पड़ा था लेकिन,,, एक मजदूर और बेबस औरत होने से पहले वह एक सामान्य औरत थी इसलिए तो ना चाहते हुए भी लाला की चुदाई से मस्त होकर उसके मुंह से गरम सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,

GIF-220613-063724.gif


आम के पेड़ पर चढ़कर रघु पके हुए आम की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ही था कि उसके कानों में कमरे से आ रही गर्म से इस कार्य की आवाज पड़ गई,,, रघु उस आवाज को सुनकर एकदम हैरान हो गया क्योंकि आम के बगीचे पर वैसे भी हमेशा सन्नाटा छाया रहता था और इस तरह की आवाज आना संभव था हलवाई की बीवी की गरम सिसकारियों की आवाज उसे अब तक याद थी,,,इसीलिए उसके कान में जेसे ही इस तरह की आवाज पड़ी वह समझ गया कि कुछ गड़बड़ हो रहा है,,, वह खिड़की में अपनी नजरों को बढ़ाएं अंदर देखने की कोशिश करने लगा और थोड़ी ही देर में उसे अंदर का नजारा एकदम साफ नजर आने लगा,,, कमरे के बीचो बीच पड़ा बिस्तर और उस पर एकदम नंगी लेटी हुई औरत और औरत के बीच में खोया हुआ लाला उसे साफ नजर आने लगे उसे समझते देर नहीं लगी कि इस आम के बगीचे में क्या हो रहा है वह ध्यान से खिड़की से अंदर की तरफ देखने रहना लाला बड़े जोरों से अपनी कमर हिला रहा था और साथ ही उस औरत की दोनों बेटियों को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था,,,, मीना काफी उत्तेजित हो चुकी थी उसे उम्मीद नहीं थी कि लाला इस तरह की चुदाई करेगा,,, लाला का लंड बड़ी तेजी से मीना कि बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंदर का नजारा देखकर रघु भी काफी उत्तेजित हो गया,,,, उसे इस तरह से खिड़की के अंदर झांकता हुआ देखकर नीचे खड़ा उसका दोस्त ऊसे आवाज लगाने लगा तो वह उसे उंगली के इशारे से चुप रहने को कहा और वह शांत हो गया,,, आम तोड़ना भूलकर रघु खिड़की के अंदर का नजारा अपनी आंखों से देख कर मस्त होने लगा और यह देखकर भी हैरान था कि लाला इस उम्र में भी काफी तेजी से चुदाई कर रहा था,,,लाला आंखों को बंद करके बिना की जगह कजरी और अपनी बहू की कल्पना कर रहा था उसे काफी आनंद भी आ रहा था वह जोर-जोर से अपनी कमर आगे पीछे हीला रहा था,,,, थोड़ी ही देर में मीना के साथ-साथ लाला भी झड़ गया,,,

लाला और मीना अपने अपने कपड़े पहन लिए,,, और लाला मीना के हाथ में 50 रुपए थमाते हुए बोला,,,।

GIF-220613-093501.gif


जब भी तुझे पैसे की जरूरत हो बेझिजक मेरे पास चली आना,,,

ठीक है मालिक,,,(इतना कहकर मीणा लाला से पैसे लेकर कमरे से बाहर निकल गई और चारों तरफ नजर घुमा कर जल्दी-जल्दी आम के बगीचे से बाहर जाने लगी,,, लाला भी जाता है इससे पहले ही रघु आम तोड़ना भूल कर जल्दी से नीचे उतरा और आगे से दरवाजे पर पहुंच गया जहां पर लाला दरवाजा बंद करके ताला लगा रहा था,,,,।

क्या बात है लाला आज तो तुम्हारे चेहरे पर कुछ और ही चमक नजर आ रही है,,,

तू तू कौन है यहां मेरे आम के बगीचे में क्या कर रहा है तुझे आने से डर नहीं लगता,,,,

नहीं लाला मुझे कहीं भी आने से डर नहीं लगता,,,डरना तो तुम्हें चाहिए जो गांव की भोली भाली औरतों को उनकी मजबूरी का फायदा उठा कर उनके साथ शरीर संबंध बनाते हो,,

यह क्या बक रहा है तू और है कौन तू,,,, तू जो भी कह रहा है वह बिल्कुल झूठ है समझा,,,, और मेरे रास्ते के बीच में कभी मत आना वरना,,,

वरना क्या लाला,,,,, अगर तुम्हारी यह करतूत पूरे गांव वालों को बता दूं ना,,, तो गांव वाले मिलकर तुम्हारी बॉटी बोटी नोच डालेंगे,,,, और हां मैं कजरी का बेटा हूं रघु,,,,

(कजरी का नाम सुनते ही लाला की आंखों में चमक आ गई कुछ देर के लिए बस शांत होकर कुछ सोचने लगा और बोला)

अरे रघु तू अपनी कजरी का बेटा है पहले क्यों नहीं बताया,,, बेटा जो कुछ भी त8 देखा वह सब कुछ भूल जा,,, और हां आज से यह समझना कि है आम का बगीचा तेरा ही है जब मन करे जितना मन करें उतना आम तोड़कर तू खा सकता है,,,, मेरी तरफ से तुझे पूरी छूट है,,,,

(लाला की बात सुनते ही रघु एकदम खुश हो गया और खुश होता हुआ बोला,,,)

क्या कह रहे हो लाला।

मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं बेटा,,, आम का बगीचा समझ ले आज से तेरा ही है,,, और हां,,,(इतना कहकर लाला कुर्ते की जेब में अपना हाथ डालकर इधर-उधर टटोलते हुए,,,) कहां गई कहां गई,,,, हां यह रही,,,, ले बेटा यह दो रुपया पकड़,,, ओर जाकर एस कर,,,(रघु तुरंत लाला के हाथ में से 2 रुपए का सिक्का ले लिया,, और सिक्के को आगे पीछे घुमा कर देखते हुए बोला)

तुम मजाक तो नहीं कर रहे हो लाला,,,

अरे बेटा भगवान कसम मैं कभी झूठ नहीं बोलता वह तो तू कजरी का बेटा है इसके लिए मुझे तुझ पर प्यार आ रहा है बहुत मेहनत करती है बेचारी,,,,और हां बेटा इतना जरूर याद रखना कि जो कुछ भी तूने आज देखा है इस बारे में किसी को बताना नहीं और अगर नहीं बताएगा तो इसी तरह ऐस करता रहेगा,,, और बता दिया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,।

तुम चिंता मत करो लाला,,, यह राज मेरे सीने में दफन रहेगा हां लेकिन इस तरह से ही मुझ पर मेहरबान रहना अगर चला भी इधर उधर कुछ कीए तो तुम्हारा भांडा फोड़ दूंगा,,,,

खुश रहो बेटा,,,(इतना कहकर लाला वहां से चला गया और रघु कभी सिक्के की तरफ तो कभी लाला की तरफ देख ले रहा था,,, रघु के दोस्त को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब चल क्या रहा है,,, वह रघु से पूछने की कोशिश किया तो रघु सिर्फ इतना ही बोला,,)

तू आम खा,,, गुठलियों के बारे में सोचने का काम मेरा है,, और चल आज हलवाई की दुकान पर फिर से तेरा मुंह मीठा कराता हूं

सच में रघु

अरे मैं कभी झूठ बोलता हूं क्या,,,(इतना कह कर रघु अपने दोस्त के कंधे पर हाथ रखकर बगीचे से बाहर जाने लगा,,, और लाला आज बहुत खुश था भले ही रघु ने उसे गांव की औरतों की चुदाई करते हुए देख लिया था लेकिन वहां कजरी का बेटा था इस बात से उसे इस बात की तसल्ली हो गई थी कि रघु के द्वारा ही वह कजरी तक पहुंचेगा,,, यही सोचता हूं वाह-वाह अपने घर की तरफ चला गया।)
 
लाचार मीना पैसे के लिए पुराने घर में लाला का इंतजार करते हुए

1608685383-picsay.jpg


लाला के कमरे में शर्मा कर बिस्तर पर बैठी हुई मीना

1608685412-picsay.jpg


मीना लाला से बहुत शर्मा रही थी वह मजबूर थी और चाहती थी कि लाला उसके पुरे कपडे ना ऊतारकर उसे चोदे लेकिन लाला कहा मानने वाला था वह मीना के सारे कपड़े उतार कर एकदम

1608685328-picsay.jpg


नंगी कर दिया,,,

1609496467-picsay.jpg
 
Yyy

लाला बहुत खुश नजर आ रहा था वैसे भी काफी दिन हो गए थे उसे नई तितली को पकड़े,,, और जब से उसने कजरी के दोनों मदमस्त छलकती जवानी को देखा था तबसे तो वह पागल हो गया था,,, कजरी को भौंकने की लालसा उसके मन में दिन-ब-दिन प्रज्वलित होती जा रही थी,,,कजरी के हाव भाव को देखकर वह समझ गया था कि कजरी को हासिल कर पाना इतना आसान नहीं है,,, रात दिन उसके दिलो-दिमाग में बस कजरी ही छाई हुई थी,,, कई दिनों से उसे अपनी गर्मी शांत करने का जुगाड़ नहीं मिल पा रहा था,,, कुछ दिनों तक वह अपने हाथ से हिला कर काम चलाता रहा,,, कजरी के मादक भराव दार मटकते हुए नितंबों को याद करके और कजरी की दोनों छलकती जवानी के हीलोरो को याद करके,,, अपने हाथ से ही कल्पना में कजरी के साथ संभोग आसन में लिप्त होकर वह अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करता आ रहा था,,, लेकिन कजरी उसके दिलो दिमाग से निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी,,,

पिछले साल ही वहां अपने बेटे का विवाह किया था और एक महीना ही हुआ था उसका होना आए,, बड़ी बेटी तो प्रताप सिंह के वहां बहू बनकर आराम की जिंदगी जी रही थी,,, घर में बहू क्या जाने के बाद से लाला संभाल संभाल कर कदम रखने लगा था वह नहीं चाहता था कि उसकी वासना की कहानी उसकी बहू को पता चले,,, वैसे अब तक उसके बेटे को भी लाला की करतूतों के बारे में जरा सा भी पता नहीं था,,, और लाला यही चाहता भी था हरिया और भोला दोनों लाला के बेहद वफादार साथी थे,,, और इस तरह का काम लाला इन्हीं से लेता था यह दोनों ही गांव में या दूरदराज से इस तरह की मजबूर औरतों को लेकर आते थे और उन्हें पैसे की मदद करके लाला अपनी वासना शांत करता था,,, और जब तक पैसे पूरी तरह से चुकता नहीं हो जाते थे तब तक लाला उस औरत के साथ अपनी मनमानी करता रहता था,,, और आज उसकी जाल में मीना फस चुकी थी,,,।

लाला अपने पुराने मकान पर जाने के लिए तैयार हो रहा था वह अपना धोती और कुर्ता पहनकर गीत गुनगुना रहा था कि तभी,,, दरवाजा खुला और अंदर से उसकी बहू हाथ में भोजन की थाली लिए उसके करीब आने लगी और बोली।

बाबुजी कहीं जा रहे हैं क्या भोजन तैयार हो चुका है,,,

बहू में आ कर खा लूंगा कहीं जरूरी काम से जा रहा हूं,,,

ठीक है बाबूजी,,,, आइएगा तो आवाज दीजिएगा,,,

ठीक है बहु तुम जाओ,,,,

(लाला का इतना कहना था कि लाला की बहू भोजन की थाली लिए वापस कमरे में जाने लगी और लाला उसकी गोलाकार नितंबों को जो की कसी हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही उभर कर नजर आ रही थी उसे देखते ही मन में गरम आहें भरने का और तब तक देखता रहा जब तक कि वह अंदर जाकर दरवाजा नहीं बंद कर ली,,,, लाला अपनी बहू की खूबसूरत चेहरे को तो ठीक से नहीं देख पाता था क्योंकि वह हमेशा घूंघट में ही रहती थी लेकिन,,, बाकी के अंगों को बाहर साड़ी के ऊपर से ही उनके आकार के बारे में पता लगा लेता था,,,, अपनी बहू की चूड़ियों की खनक पायल की छनक को सुनते ही उसके तन बदन में वासना की लहर दौड़ ने लगती थी वह काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगता था और इस समय भी वह अपनी बहू के गोलाकार नितंबों को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और सारी कसर पुराने घर पर मीना के ऊपर निकालने की मन में ठान लिया था,,,, वह तैयार होते होते अपनी बहू के बारे में सोच रहा था,,, जैसी खूबसूरत थी वैसा ही खूबसूरत नाम भी था कोमल अभी अभी शादी हुई थी इसलिए वह धीरे-धीरे फूल की तरह खीलना शुरू की थी,,, अपनी बहू को मन को देखते हैं उसे अपने बेटे के ऊपर गुस्सा आने लगता था क्योंकि ना जाने क्यों लाला को ऐसा लगता था कि उसका बेटा उसकी बहू को ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है,,,। दरवाजा बंद हो चुका था लेकिन धोती के अंदर हलचल मजा आ गया था,,, अपनी बहू की हाजिरी मैं लाला कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो जाता था,,अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए वह जल्द से जल्द अपने पुराने घर पर पहुंचना चाहता था इसलिए जल्दी ही घर से निकल गया,,

वहां पहुंचा तो पहले से ही हरिया भोला और वह औरत वहां पर मौजूद थे,,,, उस औरत पर नजर पड़ते ही लाला की धोती में हलचल मच ना शुरू हो गया,,,, लाला का यह पुराना घर आम के बागों के बीचो बीच था,,, यहां के आम बेहद स्वादिष्ट और मीठे होते हैं,,, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि यहां के आम को तोड़ सके जिसका कारण हरिया और भोला ही थे,,,जो कोई भूले से भी यहां के आम को तोड़ता था तो हरिया और भोला उसकी टांगे तोड़ देते थे,,,

चलो मीना अंदर चलो,,,(इतना सुनना था कि हरिया ने जल्दी से दरवाजा खोल दिया और मीना शर्माते हुए घर में प्रवेश कर गई,,, और लाला अपनी जेब में से 5 रु का नोट निकालकर हरिया को थमाते हुए बोला,,,)

तुम दोनों भी जाओ ऐश करो,,,

(इतना सुनते ही दोनों लाला को नमस्कार कर के वहां से चले गए और लाला जल्द से जल्द दरवाजे के अंदर प्रवेश कर गया,,, और दरवाजा को अंदर से बंद कर दिया,,, पुराना घर भी काफी बड़ा था जिसके एक कमरे में लाला और मीना दोनों खड़े थे लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए मीना की तरफ देखा तो वह बिस्तर के करीब खड़ी होकर दीवाल की तरफ देख रही थी तो लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए बोला,)

शरमाओ मत मीना इसे अपना ही घर समझो आराम से बैठ जाओ,,,

(लाला की बात सुनकर मीना शर्मा और डर के मारे बिस्तर पर बैठ गई और लाला कुंडी लगाकर मिला की तरफ घूम गया,,,और उसके करीब जाने लगा जैसे जैसे नाना मीना के करीब आता जा रहा था मीना के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी क्योंकि मीना को मालूम था कि नाना क्या करने वाला है और पैसे देने के एवज में उससे क्या चाहता है,,, लेकिन वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी मजबूर थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे,,, जो कि उसकी मदद लाला ही कर सकता था,,,)

देखो मीना मुझसे शर्मा ने कि या डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है अरे मैं तो पगली तुम लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहता हूं,,(ऐसा कहते हुए लाला मीना के एकदम करीब पहुंच गया,,, और दूसरी तरफ घर के पीछे रघु और उसका दोस्त खड़े थे और घर के पीछे लगे आम के पेड़ के ऊपर पके हुए आम को देखकर ललचा रहे थे,,,)

अरे यार रघु वो आम तो काफी ऊपर है,,, वहां तक तो मैं नहीं चढ पाऊंगा तुझे ही जाना होगा,,,

साले बहन चोद मुझे मालूम था तु ऐसा ही बोलेगा,,, ठीक है मैं चढ़ जाता हूं लेकिन तू बराबर निगरानी रखना कहीं कोई आ ना जाए,,

तू चिंता मत कर रघु,,,

(इतना सुनते ही रखो ऊपर पेड़ पर चढ़ने लगा.. और दूसरी तरफ कमरे के अंदर लाला साड़ी के ऊपर से ही उसके बड़े-बड़े चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,,,)

आहहहह,,, मालिक दुखता है,,,

दुखेगा तभी तो बाद में मजा आएगा,,,,(ऐसा कहते हुए लाला उसकी साड़ी को उसके कंधे पर से हटा कर एक तरफ कर दिया जिससे उसकी भारी-भरकम छाती लाला की आंखों के सामने अपना प्रदर्शन करने लगी कसी हुई ब्लाउज में मीना की भारी-भरकम चूचियां बड़ी मुश्किल से समा पा रही थी,,,)

अरे पगली तू एकदम पागल है क्या,,, देख तो सही तेरी चूची कैसे बाहर आने के लिए तड़प रही है और तू है कि उन्हें ब्लाउज में कैद करके रखी है,,,,(ऐसा कहते हुए लाला ब्लाउज के बटन खोलने लगा तो मीना बीच में बोल पड़ी,,)

मालिक क्या ऐसा नहीं हो सकता कि यह सब किए बिना ही आप मुझे पैसे उधार दे दे,,,

मीना तु सच में एकदम मूरख है,,, अरे भगवान कसम मैं तुझे 50 रुपए ऐसे ही दे दु और तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लुं,,, और बदले में मैं तेरे साथ अपना मुंह काला भी ना करु,,लेकिन तो शायद नहीं जानती कि पैसा कमाने में में कितना मेहनत किया है रात दिन एक कर के पसीना पाया हूं तब जाकर एक एक फूटी कौड़ी जमा करके यहां तक पहुंचा हूं,,(इस दौरान लाला लगातार उसे ब्लाउज के बटन खोल कर जा रहा था और आखरी बटन खोलते हुए बोला,,) मीना रानी रुपए के बदले में मैं शायद तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लु लेकिन पैसे कमाने में जो मेहनत लगी है उस मेहनत के बदले में मैं तुझसे हर जाना जरूर लूंगा,,,

(इतना कहने के साथ ही लाला मीणा के ब्लाउज के आखिरी बटन को भी खोल दिया और आखरी बटन खोलते ही मीना की भारी-भरकम गोलाकार चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह लहराने लगी,, और मीना की बड़ी बड़ी चूची को देखकर लाला की आंखों में चमक आ गई और उसके मुंह में पानी आ गया वह दोनों हाथ आगे बढ़ाकर नीना की चूचियों को दोनों हाथों में थाम लिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,, मीना अच्छी तरह से समझ गई थी कि लाला के आगे गिडगिडाने से कोई फायदा नहीं है,,, और मीना इसे किस्मत का खेल समझ कर सब कुछ सहने के लिए तैयार हो गया,,, लाला पागलों की तरह उसकी चूचियों से खेल रहा था,,,धीरे-धीरे करके उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूची को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया,,, लाला की कामुक हरकतों से मीना एकदम शर्म से गड़ी जा रही थी क्योंकि लाला अपनी उम्र का भी लिहाज नहीं कर रहा था,,, देखते ही देखते लाला मीना के ऊपर पूरी तरह से छा गया,,, एक तरफ लाला मीना की चूचियों से खेल रहा था और दूसरी तरफ रखो धीरे-धीरे पेड़ के ऊपर चढ रहा था,,,लाला मीणा की चुचियों से खेलता हुआ दूसरा हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसके पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा,,जब मीना को इस बात का आभासस हुआ तो अपना हाथ आगे बढ़ा कर लाला को रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,।

ऐसे मत खोलिए मालिक ऐसे ही कर लीजिए,,,

अरे मीना रानी तू बहुत भोली है,,,तू बहुत खूबसूरत है तेरे नंगे बदन को देखने के लिए ही तो मैं तुझे यहां लेकर आया हूं अगर उस तरह से करना होता तो तुझे वही घर के कोने में ले जाकर के साड़ी ऊपर कर के तुझे चोद ना दिया होता,,,

(इतना कहने के साथ लाला पेटिकोट की डोरी को भी खोल दिया और देखते ही देखते मीना बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई उसके सारे कपड़े बिस्तर के नीचे बिखरे पड़े थे,,, और लाला चुचियों से निपट कर उसकी दोनों टांगों के बीच छा गया था लाला पागलों की तरह उसकी मलाईदार बुर को चाट रहा था,,, बिना कब तक अपने आप को संभाल कर रखती अपनी अभिलाषा ऊपर कब तक काबू कर पाती लाला की कामुक हरकतों ने उसे मदहोश कर दिया था और देखते ही देखते लाला की बुर चटाई से मदहोश होने लगी उत्तेजित होने लगी लेकिन फिर भी अपनी उत्तेजना को वह अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने देना चाह रही थी,,, वह उसी तरह से बिस्तर पर पड़ी थी और लाला उसकी दोनों टांगों के बीच अपना असर दिखा रहा था,,, तभी लाला उसे बोला,,,

मीरा रानी अगर तुम्हें पैसे चाहिए तो तुम्हें भी मुझे प्यार करना होगा जैसा एक बीबी अपने पति को करती हो उस तरह से,,, अगर इसी तरह से पडे रहना है तो मैं तुम्हें पैसे बिल्कुल भी नहीं दूंगा,,,(इतना कहने के साथ ही फिर से लाला मीना की बुर चाटने लगा मीना मजबूर हो चुकी थी उत्तेजित थी लेकिन वह अपनी तरफ से ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहती थी जिससे वह अपनी नजरों में गिर जाए,,, लेकिन लाला ने उसे मजबूर कर दिया था इसलिए मजबूरी बस वह तेरी दोनों हाथ नीचे की कल्पना कर लाना क्योंकि को पकड़कर अपनी दूर पर दबाना शुरू कर दी,,,बिना की इस हरकत की वजह से लाला काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगा उसे मीना की बुर चाटने में बहुत मजा आ रहा था और साथ ही मीना की गरम सिसकारी की आवाज उसे और ज्यादा मदहोश कर रही थी,,,लाला इस बात से अनजान की इस आम के बगीचे में उसे कोई नहीं देख पाएगा वह मीना के साथ रंगरेलियां मनाने में व्यस्त था लेकिन वह नहीं जानता था कि,, आज उसका भांडा फूटने वाला है क्योंकि कमरे के ऊपर की खिड़की से लगे हुए आम की डाली तक रघु पहुंच चुका था,,, वह कमरे के अंदर लाला अपनी धोती खोल कर एकदम नंगा हो गया था इस उम्र में भी उसका लंड काफी मोटा तगड़ा और एकदम टाइट था,, जोकि देसी घी का कमान था लाला सोने से पहले अपने लिंग पर सरसों के तेल के नहीं बल्कि देसी घी की मालिश किया करता था और जी भर के हिलाया करता था उसी का नतीजा था कि अब तक लाला के लंड की ताकत बरकरार थी ,,, मीना चोर नजरों से लाला के नंगे खड़े लंड को देखी तो सिहर उठी,,, इस उम्र में भी लाला का लंड कुछ ज्यादा ही टाइट था,,, लाला अपने लंड को हिलाते हुएमीना की दोनों टांगों के बीच आ गया और देखते ही देखते उसकी गुलाबी बुरर के अंदर अपना लंड डाल दिया,,, जैसे ही लंड मीना की बुर के अंदर प्रवेश किया मीना के मुंह से आह निकल गई,,, जिस तरह का दर्द का अनुभव मीना की थी उस दर्द की उम्मीद मीना को बिल्कुल भी नहीं थी देखते ही देखते लाला उसे चोदना शुरू कर दियामीना मजबूर थी बेबस थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे इसलिए वह जिंदगी में पहली बार लाला जैसे इंसान के सामने अपने हाथ से लाए थे और जिसके एवज में उसे अपने साड़ी का पल्लू नीचे गिराना पड़ा था लेकिन,,, एक मजदूर और बेबस औरत होने से पहले वह एक सामान्य औरत थी इसलिए तो ना चाहते हुए भी लाला की चुदाई से मस्त होकर उसके मुंह से गरम सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,

आम के पेड़ पर चढ़कर रघु पके हुए आम की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ही था कि उसके कानों में कमरे से आ रही गर्म से इस कार्य की आवाज पड़ गई,,, रघु उस आवाज को सुनकर एकदम हैरान हो गया क्योंकि आम के बगीचे पर वैसे भी हमेशा सन्नाटा छाया रहता था और इस तरह की आवाज आना संभव था हलवाई की बीवी की गरम सिसकारियों की आवाज उसे अब तक याद थी,,,इसीलिए उसके कान में जेसे ही इस तरह की आवाज पड़ी वह समझ गया कि कुछ गड़बड़ हो रहा है,,, वह खिड़की में अपनी नजरों को बढ़ाएं अंदर देखने की कोशिश करने लगा और थोड़ी ही देर में उसे अंदर का नजारा एकदम साफ नजर आने लगा,,, कमरे के बीचो बीच पड़ा बिस्तर और उस पर एकदम नंगी लेटी हुई औरत और औरत के बीच में खोया हुआ लाला उसे साफ नजर आने लगे उसे समझते देर नहीं लगी कि इस आम के बगीचे में क्या हो रहा है वह ध्यान से खिड़की से अंदर की तरफ देखने रहना लाला बड़े जोरों से अपनी कमर हिला रहा था और साथ ही उस औरत की दोनों बेटियों को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था,,,, मीना काफी उत्तेजित हो चुकी थी उसे उम्मीद नहीं थी कि लाला इस तरह की चुदाई करेगा,,, लाला का लंड बड़ी तेजी से मीना कि बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंदर का नजारा देखकर रघु भी काफी उत्तेजित हो गया,,,, उसे इस तरह से खिड़की के अंदर झांकता हुआ देखकर नीचे खड़ा उसका दोस्त ऊसे आवाज लगाने लगा तो वह उसे उंगली के इशारे से चुप रहने को कहा और वह शांत हो गया,,, आम तोड़ना भूलकर रघु खिड़की के अंदर का नजारा अपनी आंखों से देख कर मस्त होने लगा और यह देखकर भी हैरान था कि लाला इस उम्र में भी काफी तेजी से चुदाई कर रहा था,,,लाला आंखों को बंद करके बिना की जगह कजरी और अपनी बहू की कल्पना कर रहा था उसे काफी आनंद भी आ रहा था वह जोर-जोर से अपनी कमर आगे पीछे हीला रहा था,,,, थोड़ी ही देर में मीना के साथ-साथ लाला भी झड़ गया,,,

लाला और मीना अपने अपने कपड़े पहन लिए,,, और लाला मीना के हाथ में 50 रुपए थमाते हुए बोला,,,।

जब भी तुझे पैसे की जरूरत हो बेझिजक मेरे पास चली आना,,,

ठीक है मालिक,,,(इतना कहकर मीणा लाला से पैसे लेकर कमरे से बाहर निकल गई और चारों तरफ नजर घुमा कर जल्दी-जल्दी आम के बगीचे से बाहर जाने लगी,,, लाला भी जाता है इससे पहले ही रघु आम तोड़ना भूल कर जल्दी से नीचे उतरा और आगे से दरवाजे पर पहुंच गया जहां पर लाला दरवाजा बंद करके ताला लगा रहा था,,,,।

क्या बात है लाला आज तो तुम्हारे चेहरे पर कुछ और ही चमक नजर आ रही है,,,

तू तू कौन है यहां मेरे आम के बगीचे में क्या कर रहा है तुझे आने से डर नहीं लगता,,,,

नहीं लाला मुझे कहीं भी आने से डर नहीं लगता,,,डरना तो तुम्हें चाहिए जो गांव की भोली भाली औरतों को उनकी मजबूरी का फायदा उठा कर उनके साथ शरीर संबंध बनाते हो,,

यह क्या बक रहा है तू और है कौन तू,,,, तू जो भी कह रहा है वह बिल्कुल झूठ है समझा,,,, और मेरे रास्ते के बीच में कभी मत आना वरना,,,

वरना क्या लाला,,,,, अगर तुम्हारी यह करतूत पूरे गांव वालों को बता दूं ना,,, तो गांव वाले मिलकर तुम्हारी बॉटी बोटी नोच डालेंगे,,,, और हां मैं कजरी का बेटा हूं रघु,,,,

(कजरी का नाम सुनते ही लाला की आंखों में चमक आ गई कुछ देर के लिए बस शांत होकर कुछ सोचने लगा और बोला)

अरे रघु तू अपनी कजरी का बेटा है पहले क्यों नहीं बताया,,, बेटा जो कुछ भी त8 देखा वह सब कुछ भूल जा,,, और हां आज से यह समझना कि है आम का बगीचा तेरा ही है जब मन करे जितना मन करें उतना आम तोड़कर तू खा सकता है,,,, मेरी तरफ से तुझे पूरी छूट है,,,,

(लाला की बात सुनते ही रघु एकदम खुश हो गया और खुश होता हुआ बोला,,,)

क्या कह रहे हो लाला।

मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं बेटा,,, आम का बगीचा समझ ले आज से तेरा ही है,,, और हां,,,(इतना कहकर लाला कुर्ते की जेब में अपना हाथ डालकर इधर-उधर टटोलते हुए,,,) कहां गई कहां गई,,,, हां यह रही,,,, ले बेटा यह दो रुपया पकड़,,, ओर जाकर एस कर,,,(रघु तुरंत लाला के हाथ में से 2 रुपए का सिक्का ले लिया,, और सिक्के को आगे पीछे घुमा कर देखते हुए बोला)

तुम मजाक तो नहीं कर रहे हो लाला,,,

अरे बेटा भगवान कसम मैं कभी झूठ नहीं बोलता वह तो तू कजरी का बेटा है इसके लिए मुझे तुझ पर प्यार आ रहा है बहुत मेहनत करती है बेचारी,,,,और हां बेटा इतना जरूर याद रखना कि जो कुछ भी तूने आज देखा है इस बारे में किसी को बताना नहीं और अगर नहीं बताएगा तो इसी तरह ऐस करता रहेगा,,, और बता दिया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,।

तुम चिंता मत करो लाला,,, यह राज मेरे सीने में दफन रहेगा हां लेकिन इस तरह से ही मुझ पर मेहरबान रहना अगर चला भी इधर उधर कुछ कीए तो तुम्हारा भांडा फोड़ दूंगा,,,,

खुश रहो बेटा,,,(इतना कहकर लाला वहां से चला गया और रघु कभी सिक्के की तरफ तो कभी लाला की तरफ देख ले रहा था,,, रघु के दोस्त को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब चल क्या रहा है,,, वह रघु से पूछने की कोशिश किया तो रघु सिर्फ इतना ही बोला,,)

तू आम खा,,, गुठलियों के बारे में सोचने का काम मेरा है,, और चल आज हलवाई की दुकान पर फिर से तेरा मुंह मीठा कराता

लाला बहुत खुश नजर आ रहा था वैसे भी काफी दिन हो गए थे उसे नई तितली को पकड़े,,, और जब से उसने कजरी के दोनों मदमस्त छलकती जवानी को देखा था तबसे तो वह पागल हो गया था,,, कजरी को भौंकने की लालसा उसके मन में दिन-ब-दिन प्रज्वलित होती जा रही थी,,,कजरी के हाव भाव को देखकर वह समझ गया था कि कजरी को हासिल कर पाना इतना आसान नहीं है,,, रात दिन उसके दिलो-दिमाग में बस कजरी ही छाई हुई थी,,, कई दिनों से उसे अपनी गर्मी शांत करने का जुगाड़ नहीं मिल पा रहा था,,, कुछ दिनों तक वह अपने हाथ से हिला कर काम चलाता रहा,,, कजरी के मादक भराव दार मटकते हुए नितंबों को याद करके और कजरी की दोनों छलकती जवानी के हीलोरो को याद करके,,, अपने हाथ से ही कल्पना में कजरी के साथ संभोग आसन में लिप्त होकर वह अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करता आ रहा था,,, लेकिन कजरी उसके दिलो दिमाग से निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी,,,

पिछले साल ही वहां अपने बेटे का विवाह किया था और एक महीना ही हुआ था उसका होना आए,, बड़ी बेटी तो प्रताप सिंह के वहां बहू बनकर आराम की जिंदगी जी रही थी,,, घर में बहू क्या जाने के बाद से लाला संभाल संभाल कर कदम रखने लगा था वह नहीं चाहता था कि उसकी वासना की कहानी उसकी बहू को पता चले,,, वैसे अब तक उसके बेटे को भी लाला की करतूतों के बारे में जरा सा भी पता नहीं था,,, और लाला यही चाहता भी था हरिया और भोला दोनों लाला के बेहद वफादार साथी थे,,, और इस तरह का काम लाला इन्हीं से लेता था यह दोनों ही गांव में या दूरदराज से इस तरह की मजबूर औरतों को लेकर आते थे और उन्हें पैसे की मदद करके लाला अपनी वासना शांत करता था,,, और जब तक पैसे पूरी तरह से चुकता नहीं हो जाते थे तब तक लाला उस औरत के साथ अपनी मनमानी करता रहता था,,, और आज उसकी जाल में मीना फस चुकी थी,,,।

लाला अपने पुराने मकान पर जाने के लिए तैयार हो रहा था वह अपना धोती और कुर्ता पहनकर गीत गुनगुना रहा था कि तभी,,, दरवाजा खुला और अंदर से उसकी बहू हाथ में भोजन की थाली लिए उसके करीब आने लगी और बोली।

बाबुजी कहीं जा रहे हैं क्या भोजन तैयार हो चुका है,,,

बहू में आ कर खा लूंगा कहीं जरूरी काम से जा रहा हूं,,,

ठीक है बाबूजी,,,, आइएगा तो आवाज दीजिएगा,,,

ठीक है बहु तुम जाओ,,,,

(लाला का इतना कहना था कि लाला की बहू भोजन की थाली लिए वापस कमरे में जाने लगी और लाला उसकी गोलाकार नितंबों को जो की कसी हुई साड़ी में कुछ ज्यादा ही उभर कर नजर आ रही थी उसे देखते ही मन में गरम आहें भरने का और तब तक देखता रहा जब तक कि वह अंदर जाकर दरवाजा नहीं बंद कर ली,,,, लाला अपनी बहू की खूबसूरत चेहरे को तो ठीक से नहीं देख पाता था क्योंकि वह हमेशा घूंघट में ही रहती थी लेकिन,,, बाकी के अंगों को बाहर साड़ी के ऊपर से ही उनके आकार के बारे में पता लगा लेता था,,,, अपनी बहू की चूड़ियों की खनक पायल की छनक को सुनते ही उसके तन बदन में वासना की लहर दौड़ ने लगती थी वह काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगता था और इस समय भी वह अपनी बहू के गोलाकार नितंबों को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और सारी कसर पुराने घर पर मीना के ऊपर निकालने की मन में ठान लिया था,,,, वह तैयार होते होते अपनी बहू के बारे में सोच रहा था,,, जैसी खूबसूरत थी वैसा ही खूबसूरत नाम भी था कोमल अभी अभी शादी हुई थी इसलिए वह धीरे-धीरे फूल की तरह खीलना शुरू की थी,,, अपनी बहू को मन को देखते हैं उसे अपने बेटे के ऊपर गुस्सा आने लगता था क्योंकि ना जाने क्यों लाला को ऐसा लगता था कि उसका बेटा उसकी बहू को ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है,,,। दरवाजा बंद हो चुका था लेकिन धोती के अंदर हलचल मजा आ गया था,,, अपनी बहू की हाजिरी मैं लाला कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो जाता था,,अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए वह जल्द से जल्द अपने पुराने घर पर पहुंचना चाहता था इसलिए जल्दी ही घर से निकल गया,,

वहां पहुंचा तो पहले से ही हरिया भोला और वह औरत वहां पर मौजूद थे,,,, उस औरत पर नजर पड़ते ही लाला की धोती में हलचल मच ना शुरू हो गया,,,, लाला का यह पुराना घर आम के बागों के बीचो बीच था,,, यहां के आम बेहद स्वादिष्ट और मीठे होते हैं,,, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि यहां के आम को तोड़ सके जिसका कारण हरिया और भोला ही थे,,,जो कोई भूले से भी यहां के आम को तोड़ता था तो हरिया और भोला उसकी टांगे तोड़ देते थे,,,

चलो मीना अंदर चलो,,,(इतना सुनना था कि हरिया ने जल्दी से दरवाजा खोल दिया और मीना शर्माते हुए घर में प्रवेश कर गई,,, और लाला अपनी जेब में से 5 रु का नोट निकालकर हरिया को थमाते हुए बोला,,,)

तुम दोनों भी जाओ ऐश करो,,,

(इतना सुनते ही दोनों लाला को नमस्कार कर के वहां से चले गए और लाला जल्द से जल्द दरवाजे के अंदर प्रवेश कर गया,,, और दरवाजा को अंदर से बंद कर दिया,,, पुराना घर भी काफी बड़ा था जिसके एक कमरे में लाला और मीना दोनों खड़े थे लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए मीना की तरफ देखा तो वह बिस्तर के करीब खड़ी होकर दीवाल की तरफ देख रही थी तो लाला दरवाजे की कुंडी लगाते हुए बोला,)

शरमाओ मत मीना इसे अपना ही घर समझो आराम से बैठ जाओ,,,

(लाला की बात सुनकर मीना शर्मा और डर के मारे बिस्तर पर बैठ गई और लाला कुंडी लगाकर मिला की तरफ घूम गया,,,और उसके करीब जाने लगा जैसे जैसे नाना मीना के करीब आता जा रहा था मीना के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी क्योंकि मीना को मालूम था कि नाना क्या करने वाला है और पैसे देने के एवज में उससे क्या चाहता है,,, लेकिन वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी मजबूर थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे,,, जो कि उसकी मदद लाला ही कर सकता था,,,)

देखो मीना मुझसे शर्मा ने कि या डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है अरे मैं तो पगली तुम लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहता हूं,,(ऐसा कहते हुए लाला मीना के एकदम करीब पहुंच गया,,, और दूसरी तरफ घर के पीछे रघु और उसका दोस्त खड़े थे और घर के पीछे लगे आम के पेड़ के ऊपर पके हुए आम को देखकर ललचा रहे थे,,,)

अरे यार रघु वो आम तो काफी ऊपर है,,, वहां तक तो मैं नहीं चढ पाऊंगा तुझे ही जाना होगा,,,

साले बहन चोद मुझे मालूम था तु ऐसा ही बोलेगा,,, ठीक है मैं चढ़ जाता हूं लेकिन तू बराबर निगरानी रखना कहीं कोई आ ना जाए,,

तू चिंता मत कर रघु,,,

(इतना सुनते ही रखो ऊपर पेड़ पर चढ़ने लगा.. और दूसरी तरफ कमरे के अंदर लाला साड़ी के ऊपर से ही उसके बड़े-बड़े चूची को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,,,)

आहहहह,,, मालिक दुखता है,,,

दुखेगा तभी तो बाद में मजा आएगा,,,,(ऐसा कहते हुए लाला उसकी साड़ी को उसके कंधे पर से हटा कर एक तरफ कर दिया जिससे उसकी भारी-भरकम छाती लाला की आंखों के सामने अपना प्रदर्शन करने लगी कसी हुई ब्लाउज में मीना की भारी-भरकम चूचियां बड़ी मुश्किल से समा पा रही थी,,,)

अरे पगली तू एकदम पागल है क्या,,, देख तो सही तेरी चूची कैसे बाहर आने के लिए तड़प रही है और तू है कि उन्हें ब्लाउज में कैद करके रखी है,,,,(ऐसा कहते हुए लाला ब्लाउज के बटन खोलने लगा तो मीना बीच में बोल पड़ी,,)

मालिक क्या ऐसा नहीं हो सकता कि यह सब किए बिना ही आप मुझे पैसे उधार दे दे,,,

मीना तु सच में एकदम मूरख है,,, अरे भगवान कसम मैं तुझे 50 रुपए ऐसे ही दे दु और तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लुं,,, और बदले में मैं तेरे साथ अपना मुंह काला भी ना करु,,लेकिन तो शायद नहीं जानती कि पैसा कमाने में में कितना मेहनत किया है रात दिन एक कर के पसीना पाया हूं तब जाकर एक एक फूटी कौड़ी जमा करके यहां तक पहुंचा हूं,,(इस दौरान लाला लगातार उसे ब्लाउज के बटन खोल कर जा रहा था और आखरी बटन खोलते हुए बोला,,) मीना रानी रुपए के बदले में मैं शायद तुझसे एक फूटी कौड़ी भी ना लु लेकिन पैसे कमाने में जो मेहनत लगी है उस मेहनत के बदले में मैं तुझसे हर जाना जरूर लूंगा,,,

(इतना कहने के साथ ही लाला मीणा के ब्लाउज के आखिरी बटन को भी खोल दिया और आखरी बटन खोलते ही मीना की भारी-भरकम गोलाकार चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह लहराने लगी,, और मीना की बड़ी बड़ी चूची को देखकर लाला की आंखों में चमक आ गई और उसके मुंह में पानी आ गया वह दोनों हाथ आगे बढ़ाकर नीना की चूचियों को दोनों हाथों में थाम लिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,, मीना अच्छी तरह से समझ गई थी कि लाला के आगे गिडगिडाने से कोई फायदा नहीं है,,, और मीना इसे किस्मत का खेल समझ कर सब कुछ सहने के लिए तैयार हो गया,,, लाला पागलों की तरह उसकी चूचियों से खेल रहा था,,,धीरे-धीरे करके उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी चूची को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया,,, लाला की कामुक हरकतों से मीना एकदम शर्म से गड़ी जा रही थी क्योंकि लाला अपनी उम्र का भी लिहाज नहीं कर रहा था,,, देखते ही देखते लाला मीना के ऊपर पूरी तरह से छा गया,,, एक तरफ लाला मीना की चूचियों से खेल रहा था और दूसरी तरफ रखो धीरे-धीरे पेड़ के ऊपर चढ रहा था,,,लाला मीणा की चुचियों से खेलता हुआ दूसरा हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसके पेटीकोट की डोरी को खोलने लगा,,जब मीना को इस बात का आभासस हुआ तो अपना हाथ आगे बढ़ा कर लाला को रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,।

ऐसे मत खोलिए मालिक ऐसे ही कर लीजिए,,,

अरे मीना रानी तू बहुत भोली है,,,तू बहुत खूबसूरत है तेरे नंगे बदन को देखने के लिए ही तो मैं तुझे यहां लेकर आया हूं अगर उस तरह से करना होता तो तुझे वही घर के कोने में ले जाकर के साड़ी ऊपर कर के तुझे चोद ना दिया होता,,,

(इतना कहने के साथ लाला पेटिकोट की डोरी को भी खोल दिया और देखते ही देखते मीना बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई उसके सारे कपड़े बिस्तर के नीचे बिखरे पड़े थे,,, और लाला चुचियों से निपट कर उसकी दोनों टांगों के बीच छा गया था लाला पागलों की तरह उसकी मलाईदार बुर को चाट रहा था,,, बिना कब तक अपने आप को संभाल कर रखती अपनी अभिलाषा ऊपर कब तक काबू कर पाती लाला की कामुक हरकतों ने उसे मदहोश कर दिया था और देखते ही देखते लाला की बुर चटाई से मदहोश होने लगी उत्तेजित होने लगी लेकिन फिर भी अपनी उत्तेजना को वह अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने देना चाह रही थी,,, वह उसी तरह से बिस्तर पर पड़ी थी और लाला उसकी दोनों टांगों के बीच अपना असर दिखा रहा था,,, तभी लाला उसे बोला,,,

मीरा रानी अगर तुम्हें पैसे चाहिए तो तुम्हें भी मुझे प्यार करना होगा जैसा एक बीबी अपने पति को करती हो उस तरह से,,, अगर इसी तरह से पडे रहना है तो मैं तुम्हें पैसे बिल्कुल भी नहीं दूंगा,,,(इतना कहने के साथ ही फिर से लाला मीना की बुर चाटने लगा मीना मजबूर हो चुकी थी उत्तेजित थी लेकिन वह अपनी तरफ से ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहती थी जिससे वह अपनी नजरों में गिर जाए,,, लेकिन लाला ने उसे मजबूर कर दिया था इसलिए मजबूरी बस वह तेरी दोनों हाथ नीचे की कल्पना कर लाना क्योंकि को पकड़कर अपनी दूर पर दबाना शुरू कर दी,,,बिना की इस हरकत की वजह से लाला काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगा उसे मीना की बुर चाटने में बहुत मजा आ रहा था और साथ ही मीना की गरम सिसकारी की आवाज उसे और ज्यादा मदहोश कर रही थी,,,लाला इस बात से अनजान की इस आम के बगीचे में उसे कोई नहीं देख पाएगा वह मीना के साथ रंगरेलियां मनाने में व्यस्त था लेकिन वह नहीं जानता था कि,, आज उसका भांडा फूटने वाला है क्योंकि कमरे के ऊपर की खिड़की से लगे हुए आम की डाली तक रघु पहुंच चुका था,,, वह कमरे के अंदर लाला अपनी धोती खोल कर एकदम नंगा हो गया था इस उम्र में भी उसका लंड काफी मोटा तगड़ा और एकदम टाइट था,, जोकि देसी घी का कमान था लाला सोने से पहले अपने लिंग पर सरसों के तेल के नहीं बल्कि देसी घी की मालिश किया करता था और जी भर के हिलाया करता था उसी का नतीजा था कि अब तक लाला के लंड की ताकत बरकरार थी ,,, मीना चोर नजरों से लाला के नंगे खड़े लंड को देखी तो सिहर उठी,,, इस उम्र में भी लाला का लंड कुछ ज्यादा ही टाइट था,,, लाला अपने लंड को हिलाते हुएमीना की दोनों टांगों के बीच आ गया और देखते ही देखते उसकी गुलाबी बुरर के अंदर अपना लंड डाल दिया,,, जैसे ही लंड मीना की बुर के अंदर प्रवेश किया मीना के मुंह से आह निकल गई,,, जिस तरह का दर्द का अनुभव मीना की थी उस दर्द की उम्मीद मीना को बिल्कुल भी नहीं थी देखते ही देखते लाला उसे चोदना शुरू कर दियामीना मजबूर थी बेबस थी अपने बेटे के इलाज के लिए उसे पैसे चाहिए थे इसलिए वह जिंदगी में पहली बार लाला जैसे इंसान के सामने अपने हाथ से लाए थे और जिसके एवज में उसे अपने साड़ी का पल्लू नीचे गिराना पड़ा था लेकिन,,, एक मजदूर और बेबस औरत होने से पहले वह एक सामान्य औरत थी इसलिए तो ना चाहते हुए भी लाला की चुदाई से मस्त होकर उसके मुंह से गरम सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,

आम के पेड़ पर चढ़कर रघु पके हुए आम की तरफ अपना हाथ बढ़ाया ही था कि उसके कानों में कमरे से आ रही गर्म से इस कार्य की आवाज पड़ गई,,, रघु उस आवाज को सुनकर एकदम हैरान हो गया क्योंकि आम के बगीचे पर वैसे भी हमेशा सन्नाटा छाया रहता था और इस तरह की आवाज आना संभव था हलवाई की बीवी की गरम सिसकारियों की आवाज उसे अब तक याद थी,,,इसीलिए उसके कान में जेसे ही इस तरह की आवाज पड़ी वह समझ गया कि कुछ गड़बड़ हो रहा है,,, वह खिड़की में अपनी नजरों को बढ़ाएं अंदर देखने की कोशिश करने लगा और थोड़ी ही देर में उसे अंदर का नजारा एकदम साफ नजर आने लगा,,, कमरे के बीचो बीच पड़ा बिस्तर और उस पर एकदम नंगी लेटी हुई औरत और औरत के बीच में खोया हुआ लाला उसे साफ नजर आने लगे उसे समझते देर नहीं लगी कि इस आम के बगीचे में क्या हो रहा है वह ध्यान से खिड़की से अंदर की तरफ देखने रहना लाला बड़े जोरों से अपनी कमर हिला रहा था और साथ ही उस औरत की दोनों बेटियों को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था,,,, मीना काफी उत्तेजित हो चुकी थी उसे उम्मीद नहीं थी कि लाला इस तरह की चुदाई करेगा,,, लाला का लंड बड़ी तेजी से मीना कि बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, अंदर का नजारा देखकर रघु भी काफी उत्तेजित हो गया,,,, उसे इस तरह से खिड़की के अंदर झांकता हुआ देखकर नीचे खड़ा उसका दोस्त ऊसे आवाज लगाने लगा तो वह उसे उंगली के इशारे से चुप रहने को कहा और वह शांत हो गया,,, आम तोड़ना भूलकर रघु खिड़की के अंदर का नजारा अपनी आंखों से देख कर मस्त होने लगा और यह देखकर भी हैरान था कि लाला इस उम्र में भी काफी तेजी से चुदाई कर रहा था,,,लाला आंखों को बंद करके बिना की जगह कजरी और अपनी बहू की कल्पना कर रहा था उसे काफी आनंद भी आ रहा था वह जोर-जोर से अपनी कमर आगे पीछे हीला रहा था,,,, थोड़ी ही देर में मीना के साथ-साथ लाला भी झड़ गया,,,

लाला और मीना अपने अपने कपड़े पहन लिए,,, और लाला मीना के हाथ में 50 रुपए थमाते हुए बोला,,,।

जब भी तुझे पैसे की जरूरत हो बेझिजक मेरे पास चली आना,,,

ठीक है मालिक,,,(इतना कहकर मीणा लाला से पैसे लेकर कमरे से बाहर निकल गई और चारों तरफ नजर घुमा कर जल्दी-जल्दी आम के बगीचे से बाहर जाने लगी,,, लाला भी जाता है इससे पहले ही रघु आम तोड़ना भूल कर जल्दी से नीचे उतरा और आगे से दरवाजे पर पहुंच गया जहां पर लाला दरवाजा बंद करके ताला लगा रहा था,,,,।

क्या बात है लाला आज तो तुम्हारे चेहरे पर कुछ और ही चमक नजर आ रही है,,,

तू तू कौन है यहां मेरे आम के बगीचे में क्या कर रहा है तुझे आने से डर नहीं लगता,,,,

नहीं लाला मुझे कहीं भी आने से डर नहीं लगता,,,डरना तो तुम्हें चाहिए जो गांव की भोली भाली औरतों को उनकी मजबूरी का फायदा उठा कर उनके साथ शरीर संबंध बनाते हो,,

यह क्या बक रहा है तू और है कौन तू,,,, तू जो भी कह रहा है वह बिल्कुल झूठ है समझा,,,, और मेरे रास्ते के बीच में कभी मत आना वरना,,,

वरना क्या लाला,,,,, अगर तुम्हारी यह करतूत पूरे गांव वालों को बता दूं ना,,, तो गांव वाले मिलकर तुम्हारी बॉटी बोटी नोच डालेंगे,,,, और हां मैं कजरी का बेटा हूं रघु,,,,

(कजरी का नाम सुनते ही लाला की आंखों में चमक आ गई कुछ देर के लिए बस शांत होकर कुछ सोचने लगा और बोला)

अरे रघु तू अपनी कजरी का बेटा है पहले क्यों नहीं बताया,,, बेटा जो कुछ भी त8 देखा वह सब कुछ भूल जा,,, और हां आज से यह समझना कि है आम का बगीचा तेरा ही है जब मन करे जितना मन करें उतना आम तोड़कर तू खा सकता है,,,, मेरी तरफ से तुझे पूरी छूट है,,,,

(लाला की बात सुनते ही रघु एकदम खुश हो गया और खुश होता हुआ बोला,,,)

क्या कह रहे हो लाला।

मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं बेटा,,, आम का बगीचा समझ ले आज से तेरा ही है,,, और हां,,,(इतना कहकर लाला कुर्ते की जेब में अपना हाथ डालकर इधर-उधर टटोलते हुए,,,) कहां गई कहां गई,,,, हां यह रही,,,, ले बेटा यह दो रुपया पकड़,,, ओर जाकर एस कर,,,(रघु तुरंत लाला के हाथ में से 2 रुपए का सिक्का ले लिया,, और सिक्के को आगे पीछे घुमा कर देखते हुए बोला)

तुम मजाक तो नहीं कर रहे हो लाला,,,

अरे बेटा भगवान कसम मैं कभी झूठ नहीं बोलता वह तो तू कजरी का बेटा है इसके लिए मुझे तुझ पर प्यार आ रहा है बहुत मेहनत करती है बेचारी,,,,और हां बेटा इतना जरूर याद रखना कि जो कुछ भी तूने आज देखा है इस बारे में किसी को बताना नहीं और अगर नहीं बताएगा तो इसी तरह ऐस करता रहेगा,,, और बता दिया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,।

तुम चिंता मत करो लाला,,, यह राज मेरे सीने में दफन रहेगा हां लेकिन इस तरह से ही मुझ पर मेहरबान रहना अगर चला भी इधर उधर कुछ कीए तो तुम्हारा भांडा फोड़ दूंगा,,,,

खुश रहो बेटा,,,(इतना कहकर लाला वहां से चला गया और रघु कभी सिक्के की तरफ तो कभी लाला की तरफ देख ले रहा था,,, रघु के दोस्त को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह सब चल क्या रहा है,,, वह रघु से पूछने की कोशिश किया तो रघु सिर्फ इतना ही बोला,,)

तू आम खा,,, गुठलियों के बारे में सोचने का काम मेरा है,, और चल आज हलवाई की दुकान पर फिर से तेरा मुंह मीठा कराता हूं

सच में रघु

अरे मैं कभी झूठ बोलता हूं क्या,,,(इतना कह कर रघु अपने दोस्त के कंधे पर हाथ रखकर बगीचे से बाहर जाने लगा,,, और लाला आज बहुत खुश था भले ही रघु ने उसे गांव की औरतों की चुदाई करते हुए देख लिया था लेकिन वहां कजरी का बेटा था इस बात से उसे इस बात की तसल्ली हो गई थी कि रघु के द्वारा ही वह कजरी तक पहुंचेगा,,, यही सोचता हूं वाह-वाह अपने घर की तरफ चला गया।)

हूं

सच में रघु

Yyy

अरे मैं कभी झूठ बोलता हूं क्या,,,(इतना कह कर रघु अपने दोस्त के कंधे पर हाथ रखकर बगीचे से बाहर जाने लगा,,, और लाला आज बहुत खुश था भले ही रघु ने उसे गांव की औरतों की चुदाई करते हुए देख लिया था लेकिन वहां कजरी का बेटा था इस बात से उसे इस बात की तसल्ली हो गई थी कि रघु के द्वारा ही वह कजरी तक पहुंचेगा,,, यही सोचता हूं वाह-वाह अपने घर की तरफ चला गया।)

Kya baat hai
 
थोड़ी देर में रघु और रामू दोनों हलवाई की दुकान पर पहुंच गए,,, आज पहले की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही भीड़ भाड़ दुकान पर नजर आ रही थी,,, रघु का मन उदास हो क्या हलवाई की दुकान पर समोसे या जलेबी खाने नहीं बल्कि हलवाई की बीवी से मिलने आता था लेकिन आज चूल्हे पर उसका आदमी बैठा हुआ था जोकि ग्राहकों की भीड़ देखकर जल्दी-जल्दी जलेबीया छान रहा था,,, हलवाई की बीवी को वहां ना पाकर रघु की इच्छा वहां रुकने की भी नहीं हो रही थी,,, लेकिन गरमा गरम छनती हुई जलेबीया देखकर रामू के मुंह में पानी आ रहा था,,

यार रघु जलेबी की गरमा गरम खुशबू मेरी भूख और ज्यादा बढ़ा रही है,,,,

यार रुक तो सही ले रहा हूं जलेबी और साथ में समोसे भी लेकिन थोड़ा सब्र कर,,,(ऐसा कहते हुए रघु चारों तरफ नजर घुमाकर हलवाई की बीवी कोई ढूंढ रहा था और उसे चारों तरफ इस तरह से कुछ ढूंढता हुआ देखकर रामू बोला)

यार तु यहां किसको ढूंढ रहा है,,, जो काम करने के लिए इतना आए हैं वह काम शुरू करें,,,

या रामू तु कितना खा खा करता है,,, दिला रहा हूं ना पहले चाचाजी को जलेबी तो छानकर रखने दे,,,,(रघु रामु पर गुस्सा होता हुआ बोला,,,)

यार तू गुस्सा मत हो मैं तो बस गरमा गरम जलेबी देखकर अपनी लालच को रोक नहीं पा रहा हूं,,,, वैसे तु यहां किसको ढूंढ रहा है,,,

किसी को भी नहीं बस ऐसे ही रुक तुझे जलेबी और समोसे दीला देता हूं,,,

अरे चाचा जी जल्दी से एक पाव जलेबी और दो समोसे दे दो,,,, तू जाकर उधर बैठ में लेकर आता हूं,,,,

(रघु एक बहाने से उसे उधर से हटाते हुए बोला,,, और रामू बिना कोई झिझक के दूर जाकर बैठ गया उसे तो बस समोसे और जलेबी की ही पड़ी थी रघु जिस काम के लिए इधर आया था उस बारे में उसे बिल्कुल भी नहीं पता था,,,,)

और बेटा क्या हाल है,,,, घर पर सब कुशल मंगल है ना,,,

(हलवाई गरमा गरम जलेबी को कागज में रखकर तोलते हुए बोला,,,)

हां चाचा सब कुशल मंगल है आपकी कृपा है बस ऐसे ही अपनी कृपा हम पर बनाए रखना,,,(रघु खुले हुए दरवाजे में से अंदर की तरफ झांकते हुए बोला,,, लेकिन अंदर कमरे में भी कोई नजर नहीं आया,,)

अरे हमारी कहां सब भगवान की कृपा है और वैसे भी कुशल मंगल रहना ही चाहिए,,,,(जलेबी को कागज में तोलकर रघु की तरफ बढ़ाते हुए बोला,,,) और समोसे कितनी कर दु बेटा,,,,

दो समोसे बांध दीजिए चाचा,,,,

ठीक है बेटा यह लो,,,(इतना कहकर दूसरा कागज लेकर व गरमा गरम समोसे और हरी मिर्च तली हुई और प्याज के टुकड़े रखने लगा,,, और उसे रघु की तरफ बढ़ाते हुए बोला,,)

हमारी दुकान की जलेबी और समोसे तुम्हें हमेशा गर्म ही मिलेंगे,,,

जानता हूं चाचा तभी तो यहां बार-बार आता हूं,,,वैसे आज चाची जी नहीं दिख रही है कहीं गई है क्या,,,,? (रघु समोसे को बीच में से तोड़कर उसके टुकड़े को उठाकर खाते हुए बोला,,,)

अरे कहीं नहीं गई है घर के पीछे ही है सूखी लकड़ियां बीन रही है,,,, कब से गई है अभी तक नहीं आई,,,।

(हलवाई की बात सुनकर रघु को इस बात की तसल्ली तो ठीक है चलो हलवाई की बीवी इधर ही मौजूद है ज्यादा कुछ नहीं तो उसके दीदार तो हो जाएंगे,,, वैसे भी जब वह ऐसे ही सामान्य तौर पर चलती है तो उसकी बड़ी-बड़ी हिलती हुई गांड देखकर ही लंड अंगड़ाई लेने लगता है,,,, रघु यही अपने मन में सोचकर समोसे के टुकड़े का आनंद लेता हुआ रामू की तरफ जा रहा था कि तभी उसे हलवाई पीछे से आवाज देता हुआ बोला,,,)

अरे बेटा सुन तो,,,,

हां चाचा क्या हुआ,,,,(हलवाई की तरफ घूमता हुआ रघु बोला)

अरे जाकर देख तेरी चाची क्या कर रही है बहुत देर हो गई वैसे भी आज ग्राहकों की कुछ ज्यादा भीड़ है मैं जा नहीं सकता,,, जा जाकर थोड़ी मदद कर दें और सूखी हुई लकड़ियों को उठाने में उसकी मदद कर,,,

जी चाचा,,,

जा बेटा जा जल्दी जा,,,,(इतना कहकर वह दूसरे ग्राहक में व्यस्त हो गया,,, रघु की तो जैसे लॉटरी लग गई,,,,,,,आम की बगिया में लाला के द्वारा गांव की औरतों की जबरदस्त चुदाई देखकर ऐसे भी वह पूरी तरह से गर्मा चुका था,,, उस औरत की मोटी मोटी जाने को देखकर वह इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि उसकी भी इच्छा कर रही थी कि,,, लाला को हटाकर वो खुद इस औरत की चुदाई कर दे लेकिन ऐसा वह कर नहीं सकता था,,, इसलिए तो बस औरत की मोटी मोटी जान हो ने उसे हलवाई की बीवी की याद दिला दिया था,,,वैसे भी हलवाई की बीवी की जांघें उस औरत से काफी मोटी थी और कुछ ज्यादा ही गोरी थी। इसलिए तो वह लाला से 2 रुपए पाकर सीधे हलवाई की दुकान पर आ गया था,,,, हलवाई की बात सुनते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी इस बात से उसे काफी दिलासा मिला था कि,,,आज दुकान पर ग्राहकों की भीड़ कुछ ज्यादा ही थी और इससे हलवाई को बिल्कुल भी समय मिलने वाला नहीं था,,,,

रघु तुरंत समोसे और जलेबी लाकर अपने दोस्त रामू को थमा दिया और उसे वहीं बैठ कर खाने के लिए बोल कर जाने लगा तो रामू पीछे से आवाज देता हुआ बोला,,

अरे तू भी तो ले जा कहा रहा है,,,,?

तु यहीं बैठ कर खा मैं थोड़ी देर में आता हूं कहीं जाना नहीं,,,(इतना कह कर रघु तुरंत घर के पीछे पहुंच गया,,,उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि उसे मालूम था कि उसके ख्वाबों की मलिका के दीदार उसे बहुत ही जल्द होने वाला हैं,,,, रघु घर के पीछे खड़ा होकर के चारों तरफ नजर घुमाने लगा,,,उसे एक कोने पर लकड़ियों का ढेर दिखाई दे रहा था लेकिन वहां पर उसे हलवाई की बीवी नजर नहीं आ रही थी,,, उसे लगा कि कहीं हलवाई की बीवी लकड़ियों के ढेर के बीच में ना हो और इसी तसल्ली के लिए वह अपने कदम आगे बढ़ाने लगा,,,,तीन चार कदम आगे बढ़ाने के बाद वह जब लकड़ियों के ढेर से बनी हुई थी वालों के बीच में नजर आया तो उसे हलवाई की बीवी वहीं बैठी हुई नजर आ गई,,, हलवाई की बीवी की पीठ रघु की तरफ थी,,, हलवाई की बीवी बेटी हुई थी लेकिन आगे की तरफ झुकी हुई थी जिससे उसका पिछवाड़ा कुछ ज्यादा ही भारी-भरकम और घेराव दार लग रहा था,,,, रघु तो एकदम पागल हो गया क्योंकि जीस अदा से वह बैठी हुई थी,,,, उसकी गांड हल्की सी हवा में उठी हुई थी रघु को तो मानो जैसे उसकी दुनिया उसकी आंखों के सामने नजर आ रही थी अभी कुछ देर पहले ही उसने चुदाई के गरमा गरम दृश्य को देख कर आया था और उसकी छाप उसके दिल में बस गई थी,,,, रघु भी इस समय अपनी गर्मी शांत करना चाहता था जिस का जुगाड़ सिर्फ हलवाई की बीवी ही थी,,,हलवाई की बीवी धीरे-धीरे सूखी हुई लकड़िया बिन रही थी जिसकी वजह से उसकी भारी-भरकम गांड कुछ ज्यादा ही हवा में लहरा रही थी। रघु से रहा नहीं जा रहा पजामे में उसका लंड गदर मचाए हुए था,,,हलवाई की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर उसकी मदमस्त जवानी को सलाम करते हुए पजामे के अंदर ही रघु का लंड ऊपर नीचे हो रहा था,,,, रघु की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी हलवाई नहीं तो उसे उसकी बीवी की मदद करने के लिए भेजा था लेकिन रघु के मन में कुछ और चल रहा था,,, रघु की प्यासी निगाहें हलवाई की बीवी के कुएं नुमा चुतडो पर टिकी हुई थी,,, जिस दिन से वह हलवाई की बीवी से एक रत हुआ था,,, उस दिन से ना जाने जब भी वह औरतों की गांड देखता था उसे ना जाने क्या होने लगता है,,,,

उत्तेजना के मारे रघु का गला सूखता चला जा रहा था,,,हलवाई की बीवी ईस बात से अनजान की पीछे खड़ा होकर रघु उसकी मदमस्त जवानी को अपनी आंखों से पी रहा है वह सूखी लकड़ियां बीनने में ही व्यस्त थी,,,

हलवाई की बीवी की बड़ी बड़ी गांड देखकर रघु के सब्र का बांध बिल्कुल टूट गया,,,, वह धीरे से आगे बढ़ा एकदम दबे कदमों से ताकि उसके कदमों की आहट भी हलवाई की बीवी के कानों तक अपनी दस्तक ना दे सके,,,, और ऐसा हो भी रहा था,, वह हलवाई की बीवी के एकदम करीब जाकर धीरे से उसी के अवस्था में एकदम से बेठ गया जैसे की हलवाई की बीवी अपनी गांड उठाकर बैठी हुई थी,,, पजामें में पहले से ही उसका लंड पूरी तरह से तना हुआ था,,, हलवाई की बीवी इतनी व्यस्त थी और इतनी मांगने थी कि उसे इस बात का अहसास तक नहीं हुआ कि उसके पीछे रघु बैठा हुआ है और जो कि उससे एकदम से सटने में केवल चार पांच अंगुल का ही फासला रह गया है,,,, रघु के सांसो की गति तेज होती जा रही थी हलवाई की बीवी के बदन की खुशबू उसके नाकों तक पहुंचते ही उसके तन बदन में आग लगा रही थी,,, अब अपने आप को रोक पाना रघु के लिए बहुत मुश्किल हो गया था वह हलवाई की बीवी के बेहद करीब पहुंच गया था वह जिस तरह से बैठी हुई थी रघु भी उसी तरह से बैठा हुआ था,,,, तभी रघु ने अपनी कमर को पीछे की तरफ ले जाकर,,, जोर से आगे की तरफ दे मारा,,,और हाथ से पहचाने में तना हुआ उसका लंड सीधे जाकर हलवाई की बीवी की बड़ी बड़ी गांड से टकरा गया रघु के जबरदस्त धक्के को वह संभाल नहीं पाई और आगे की तरफ लुढ़कते हुए उसके मुंह से सिर्फ इतना ही निकला,,,

हाय दैया,,, मर गई रे,,,(इतना कहते हुए वह पीछे की तरफ देखी तो पीछे रघु था और तब तक रघु उसकी मोटी मोटी कमर को अपने दोनों हाथों में थाम लिया था,,) रघु तू,,,, हरामी को इतनी जोर से धकेल ता है क्या,,, और तु यहां क्या कर रहा है,,,,(इतना कहते हुए वह अपने आप को संभालने की कोशिश करती रही इस दौरान रघु लगातार उसकी कमर को थामे हुए कस कस के अपनी हथेली उसकी कमर पर दबाता रहा,,,)

तुम्हारी मदद करने आया हूं चाची,,,,

मेरी मदद वह किसलिए,,,,

चाचा ही भेजे हैं मुझे,,, की जा तेरी चाची लकड़िया लेने गई है उसकी मदद कर दें,,,(इतना कहते हुए रघु धीरे से अपना हाथ ऊपर की तरफ बढ़ाया और ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को दबाने लगा तो वह उसका हाथ झटकते हुए बोली,,,)

पागल हो गया क्या,,, कोई देख लिया तो क्या कहेगा,,,

चाची जान हम दोनों को देखने वाला कौन है जो कोई भी है वह तो घर के आगे,, है,,, यहां कोई नहीं आएगा चाची,,,(इतना कहते हुए रघु उसकी दोनों चूचियों पर हाथ रख दिया और ब्लाउज के ऊपर से उसे कब आने का आनंद ल लुटने लगा हलवाई की बीवी,,, उसी तरह से रघु की तरफ मुंह करके बैठी ही रह गई वह उठना चाहती थी लेकिन रघु की हरकतों ने उसके तन बदन में भी आग लगा दी थी,,, वैसे भी वह एक बार फिर से रघु के साथ एकाकार होना चाहती थी लेकिन उसे मौका ही नहीं मिल रहा था,,, वह भले ही रघु को किसी के द्वारा देखे जाने का डर दिखा रही थी लेकिन अंदर से वह यही चाह रही थी कि रघु अपनी हरकतों को जारी रखें,, क्योंकि जिस दिन से वह चोद कर गया है,,, उस दिन से ना जाने क्यों उसकी बुर में कुछ ज्यादा ही खुजली मची हुई थी,,, इस दौरान उसके पति ने भी उसके साथ एक भी बार संभोग नहीं किया था इसलिए उसके तन बदन में कुछ ज्यादा ही आग लगी हुई थी,,, रघु उसी तरह से ब्लाउज के ऊपर से ही उसके दोनों खरबूजा से खेलता रहा,,,, और उसे एक बार चुदवाने के लिए मनाता रहा,,, लेकिन हलवाई की बीवी डर रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं उसका पति उसे ढूंढता हुआ पीछे ना आ जाए,,)

क्या कहती हो चाचा ज्यादा कुछ नहीं करना होगा बस तुम्हें अपनी साड़ी ऊपर उठानी होगी वैसे भी मेरा लंड पूरी तरह से तैयार है तुम्हें चोदने के लिए यह देखो,(इतना कहते ही रघु अपने पहचाने को बैठे-बैठे ही नीचे की तरफ नहीं बल्कि सामने की तरफ खींच कर पजामे में टन टनाते हुए अपने लंड को दिखा दिया,,, हलवाई की बीवी आंखें फाड़े रघु के खड़े लंड को देखती रह गई जो की पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था काफी दिनों बाद वह फिर से रघु के लंड के दर्शन कर रही थी उसकी मनोकामना पूरी हो गई थी लेकिन अभी अभिलाषा बाकी थी उसे डर लग रहा था वह भी रघु के साथ चुदवाना चाहती थी,,,क्योंकि यह बात वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह का मौका इस समय उसके हाथ लगा है फिर पता नहीं ऐसा मौका हाथ लगे ना लगे और जब तक लगेगा तब तक ना जाने कितनी रातें रघु को याद करके करवटें बदलती रहेगी,,, इसलिए तो वह भी इस मौके का फायदा उठा लेना चाहती थी जैसा कि उस दिन रात को उठाई थी,,,। रघु का एक हाथ अभी भी हलवाई की बीवीकी चूचियों पर था और दूसरे हाथ से पजामे को खींचा हुआ था जो कि तुरंत उसे छोड़ दिया और पल भर में ही उसका खड़ा लंड दिखना बंद हो गया,,, हलवाई की बीवी अपने सूखे गले को अपने थूक से गीला करने के लिए थुक को गले में गटक गई,,, रघु एक बार फिर से उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथ में लेकर दबाने लगा क्योंकि अभी भी उसकी दोनों चूचियां ब्लाउज के अंदर कैद थी रघु भी जानता था कि इस समय उसके वस्त्र उतारना ठीक नहीं था,,, हलवाई की बीवी की आंखों में झांकते हुए,,, पजामे में बने अपने तंबू को दूसरे हाथ से पकड़ते हुए बोला,,

क्या कहती हो चाची एक बार फिर से हो जाए,,,,

(रघु की बात सुनकर हलवाई की बीवी की दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी अपने चारों तरफ देख रही थी कि कहीं कोई आ न जाए रघु के खड़े लंड को देखकर उसका मन बहकने लगा था,,और जिस तरह से उसने चोरी-छिपे आ कर जोर से धक्का लगाया था उसे धक्के से उसे बस रात वाले सारे धक्के याद आ गई थे,,,,,)

रघु तूने तो मुझे अजीब दुविधा में डाल दिया है तेरे चाचा जी या कोई और आ गया तो मैं तो बदनाम हो जाऊंगी,,,

कुछ नहीं होगा चाची बस तुम्हें एक बार कोशिश तो करो,,, एक बार फिर से तुम्हें स्वर्ग का आनंद देता हूं,,,,(इतना कहकर वह हलवाई की बीवी के साड़ी को ऊपर की तरफ सरकाने लगा,,,, हलवाई की बीवी ऊसे रोकते हुए बोली,,,)

नहीं नहीं रघु मुझे डर लग रहा है,,,

ऐसे डरोगी तो मेरी जान मजे कैसे लोगी,,,,

(रघु की बातें सुनकर उसका हौसला देखकर हलवाई की बीवी का भी मन बहुत कर रहा था इस मौके का फायदा उठा लेने के लिए लेकिन वह डर भी नहीं थी लेकिन फिर भी वह मन में सोच कर कि जो होगा देखा जाएगा वह अपनी जगह से खड़ी हो गई और, लकड़ी के ढेर से थोड़ा ऊपर अपना सिर उठाकर अपने घर की तरफ देखने लगी इस जगह से वह अपने घर के चारों तरफ की निगरानी रख सकती थी,,, अपनी ऐसी युक्ति पर वह मन ही मन प्रसन्न होने लगी,,,, और रघु से बोली।)

देख तू कहता है तो मैं तैयार हो जाती हूं लेकिन लेट कर नहीं खड़े-खड़े,,,

मेरी रानी जैसा तुम चाहो वैसा ही मैं करूंगा बस एक बार अपनी मदमस्त बड़ी-बड़ी बुर का दीदार करा दो,,,

(रघु की बात सुनते ही हलवाई की बीवी मुस्कुरा दी और लकड़ी के ढेर के ऊपर खड़ी होकर वह सामने की तरफ अपना मुंह कर दी जिससे वहां आने जाने वाले कोई भी अगर होगा तो उसे दिखाई दे देगा और वह अपने आप को संभाल लेगी,,,, घर की तरफ से सिर्फ हलवाई की बीवी का मुंह दिखाई दे रहा था बाकी गर्दन के नीचे का बदन लकड़ी के ढेर से ढका हुआ था सुबह लकड़ी के ढेर के पीछे बने गलियारे में खड़ी थी,,,, रघु अपनी तरफ हलवाई की बीवी की बड़ी-बड़ी कांड पाकर एकदम खुश हो गया और वह तुरंत उसकी साड़ी कमर तक उठा दिया,,,हलवाई की बीवी की नंगी गांड देखते ही उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी और वह जोर-जोर से हलवाई की बीवी की गांड पर चपत लगाते हुए बोला,,

सससहहहह आहहहह ,, मादरचोद क्या मस्त गांड है तेरी,,,इसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है बिल्कुल भी इसे खड़ा करने में मेहनत नहीं करनी पड़ती,,,,

जल्दी से डाल दो मेरी बुर में बकवास मत कर ज्यादा समय नहीं है हम दोनों के पास,,,,

डालता हूं मेरी रानी मैं जानता हूं तुम भी मेरे लंड के लिए तरस रही थी,,,,(रघु उसकी बड़ी-बड़ी गोरी गांड को दोनों हाथों में पकड़ कर जोर जोर से दबाते हुए बोला,,,हलवाई की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी थी जो कि पानी भरे गुब्बारों की तरह इधर-उधर हील रही थी,, इस समय हलवाई की बीवी की बड़ी बड़ी गांड रघु के आकर्षण का केंद्र बिंदु थी और उत्तेजना की भी,,,हलवाई की बीवी की साड़ी एकदम कमर तक उठी हुई थी जिससे उसकी बड़ी-बड़ी कोमल नरम नरम मदमस्त कर देने वाली गांड एकदम नंगी हो चुकी थी,,,, हलवाई की बीवी अपने पैरों के नीचे लकड़ी के दो चार बड़े बड़े टुकड़ों को रखकर उस पर पैर रखकर चढ़ी हुई थी जिससे वह लकड़ी के ढेर की ओट में छिप कर सामने की तरफ से आने-जाने वालों पर नजर रख सकती थी,,,अगर कोई सामने आ भी जाता तो केवल हलवाई की बीवी के चेहरे को ही देख पाता जिससे वहां यह नहीं अंदाजा लगा सकता था कि लकड़े के ढेर की ओट में छिप कर हलवाई की बीवी किसी जवान लड़के से चुदवा रही है,,,, इस तरह से हलवाई की बीवी अपनी रक्षा भी कर सकती थी और अपने आप को बदनामी से बचा भी सकती थी,,,

शाम ढल रही थी लेकिन अभी भी उजाला बरकरार था,,, जिस दिन से हलवाई की बीवी रघु के द्वारा संभोग के अद्भुत सुख को भोग चुकी थी उस दिन से वह दुबारा रघु के साथ संभोग रत होने की इच्छा बनाए हुए थे और आज अचानक ही उसे मौका मिल गया था रघु के साथ एकरत होने का,,,

हलवाई की बीवी कमर के नीचे से एकदम नंगी हो चुकी थी वह बार-बार पीछे की तरफ देख ले रही थी कि रघु क्या करता है लेकिन वह उसकी बड़ी-बड़ी गांड से खेलने में ही मस्त था,,, इसलिए वह बोली।

तू गांड से खेलता ही रहेगा कि कुछ करेगा भी,,, समय निकलता जा रहा है अगर देर हो गई तो तेरे चाचा जी इधर आ जाएंगे,,,

करता हूं चाची क्या करूं तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड देखकर मुझसे रहा नहीं जाता सबसे पहले इसे से खेलने का ही मन करता है,,,

बाद में कभी इत्मीनान से खेल लेना लेकिन अभी जो करना है जल्दी कर,, अगर कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,(वह चारों तरफ नजर घुमा कर देखते हुए बोली,,,)

तुम चिंता मत करो चाची एक बार डालने की आवश्यकता है उसके बाद सब काम अपने आप हो जाएगा,,, (इतना कहने के साथ ही रघु अपना पैजामा नीचे घुटनों तो खींच कर कर दिया,हलवाई की बीवी पीछे ही देख रही थी जैसे ही रघु का पजामा नीचे हुआ उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा,,, पर यह देखकर हलवाई की बीवी की सांसे अटक गई पलभर में ही उसे उस रात का सारे दृश्य नजर आने लगे जब रघु,, अपने मोटे तगड़े लंड को बड़ी शालीनता से और उसके बाद बड़ी बेरहमी से उसकी बुर में पेलता रहा,,, लेकिन रघु की बेरहमी में भी उसे आनंद ही आनंद प्राप्त हो रहा था एक बार फिर से उसी आनंद के एहसास में डूबने के लिए हलवाई की बीवी पूरी तरह से अपने आप को तैयार कर चुकी थी,,,लेकिन वह मन में भगवान से प्रार्थना भी कर रही थी कि जितनी देर तक यह काम चले इतनी देर तक वहां कोई ना आए,,,,,

रघु की आंखों के सामने हलवाई की बीवी की कचोरी जैसी फूली हुई बुर थी जिसमें से मदन रस टपक रहा था,,,ऐसे तो रखो की इच्छा हो रही थी कि अपनी प्यासे होठों को उसकी बुर से लगाकर उसके मदन रस को गले के नीचे गटक कर अपनी प्यास बुझा ले लेकिन अभी दूसरी ही प्यास बुझाना उचित था,,,,, रघु पूरी तरह से तैयार था अपने लंड को उसकी बुर में डालने के लिए,,,, इसलिए हलवाई की बीवी भी फ्री भारी-भरकम मखमली गांड को थोड़ा सा और पीछे की तरफ करके रघु के इस परम कार्य में उसका सहयोग करने लगी,,,लेकिन हलवाई की बीवी की यह कामुक हरकत रघु के तन बदन में पूरी तरह से आग की ज्वाला भड़का दी,,क्योंकि एक मर्द को औरत को चोदने में कभी ज्यादा मजा आता है जब औरत भी अपनी तरफ से इस तरह की कामुक हरकतों को अंजाम देते हुए पूरा का पूरा उस मर्द को सहयोग करें,,, और वही क्रिया इस समय हलवाई की बीवी कर रही थी,,,बस फिर क्या था रघु को और क्या चाहिए था रघु तो अपने एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर दूसरे हाथ से उसकी भारी भरकम कांड को पकड़कर थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठाया और जैसे ही उसकी गुलाबी बुर उसकी आंखों के सामने अपनी चमक दिखाने लगी वैसे ही अपने मोटे तगड़े लंड के मोटे सुपाड़े को उस चमक के गुलाबी सुराख पर रखकर हल्के से धक्का दे दिया,,,,,, उसकी रसीली बुर कुछ ज्यादा ही रस छोड़ रही थी,,, इसलिए थोड़े से ही प्रयास में शुभम का लंड बुर के अंदर की चिकनाहट पाकर जल्दी से अंदर की तरफ सरक गया,,,काफी दिनों बाद हलवाई की बीवी को एक बार फिर से रघु का मोटा तगड़ा लंड नसीब हो रहा था इसलिए बुर के अंदर घुसते ही उसके मुंह से हल्की सी कराहने की आवाज निकल गई, आहहहहह,,,,, रघु को इस तरह की आवाज सुनना बेहद पसंद था,,,इसलिए हलवाई की बीवी के मुंह से इस तरह की आवाज सुनते ही उसका जोश बढ़ने लगा उसका हौसला बढ़ने लगा अब रघु को किसी के भी द्वारा देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था वह बस हलवाई की बीवी कीमत मस्त जवानी में पूरी तरह से अपनी जवानी को भिगो देना चाहता था,,, इसलिए उसकी बड़ी बड़ी गांड को दोनों हाथों से थाम कर वह धक्के लगाना शुरू कर दिया हर धक्के के साथ हलवाई की बीवी के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फूट पड़ रही थी। अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी को पकड़े हुए थी ताकि रघु को इस की चुदाई करने में दिक्कत ना आ जाए,,,

शाम ढल रही थी हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था लेकिन इतना भी नहीं कि किसी के द्वारा देखा जा ना सके रामू अपनी धुन में गरमा गरम जलेबी और समोसे का लुफ्त उठा रहा था,, हलवाई लगातार जलेबी छानने में लगा हुआ था,, उसे जरा सी भी फुर्सत नहीं मिल रही थी और इसी फुर्सत ना मिलने का फायदा उसकी बीवी और रघु उठा रहे थे,,,।

आहहह आहहहहह ,,,, रघु मेरे राजा तूने कौन सी आदत डाल दिया है रे मुझमें,,,,आहहहह ,,,, जब तक तेरा लंड मेरी बुर में नहीं जाता,,आहहहह,,,आहहहहहह,(जब तक वह अपनी बात आगे बढ़ा पाती तब तक रघु जोर-जोर से दो चार धक्के लगा दिया) तब तक मुझे चैन नहीं मिलता,,,, तेरे से चुदवाकर मुझे इस बात का एहसास हुआ की चुदाई का सुख कितना महत्व रखता है औरत की जिंदगी में,,,,, बस ऐसे ही जोर जोर से धक्के लगा,,,

मेरी रानी समोसा और जलेबी खाना तो एक बहाना है सच कहूं तो मैं तुझे यहां चोदने के लिए ही आता हूं,,,,(रघु जोर-जोर से अपनी कमरिया ता हुआ बोला)

तो आज तुझे मेरा समोसा कैसा लग रहा है,,,, और उसमें से निकल रहा जलेबी का रस,,,,

बहुत अच्छा मेरी जान ऐसा स्वादिष्ट और गरमा गरम समोसा मैंने आज तक जिंदगी में कभी नहीं खाया,,, और तेरी जलेबी का रस तो आहहहह ,,,,हाअअअअअ,,,, गजब का स्वादिष्ट है,,, मेरा तो मन करता है कि तुम्हारी जलेबी के रस में पूरी तरह से डूब जाऊं,,,,

तो डूब जाना किसने रोका है,,,,(वह एकदम मादक स्वर में बोली)

डूब जाऊंगा रानी बस अपनी बुर को भोसड़ा बनाकर घुसा ले मुझे अपने अंदर,,,,

तो घुस जा ना रोका किसने हैं,,,वैसे भी अब तक मेरी बुर सही सलामत ही थी लेकिन तेरा मोटा तगड़ा लंड जरूर इसको भोसड़ा बना देगा,,,, मेरे राजा,,,,(हलवाई की बीवी उत्तेजना के मारे अपनी भारी-भरकम गांड को पीछे की तरफ से ठेलते हुए बोली,,,, रघु का जोशउसकी गरम-गरम बातें और उसकी कामुक हरकतों को देखकर और ज्यादा बढ़ने लगा,,,, रघु काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था इसलिए हलवाई की बीवीकी कमर को छोड़कर वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से ही दोनों खरबूजा को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,,,रघु उत्तेजना के मारे उसकी दोनों चूचियों को इतनी जोर जोर से मसल रहा था कि उसकी सिसकारी और तेज होती जा रही थी,,, रघु का हर एक धक्का हलवाई के बीवी को स्वर्ग का सुख दे रही थी लेकिन जब जब लोगों का जोरदार धक्का पड़ता तब तक उसकी भारी-भरकम नितंब पानी भरी गुब्बारों की तरह लहरा ऊठती थी मानो तालाब के शांत पानी में कोई कंकर फेंक दिया,,हो,,,

मजा दोनों को बराबर आ रहा था,,,हलवाई की बीवी तो हवा में उड़ रही थी क्योंकि रघु लगातार एक ही रफ्तार से उसे पेल रहा था,,, और बहुत देर तक एकदम ठहरा हुआ था जिसकी वजह से उसके आनंद में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही थी,,, रघु के धक्के इतनी तेज थी कि अगर हलवाई की बीवी सूखी हुई न करो के ढेर का सहारा लेकर ना खड़ी होती तो कब के जमीन पर गिर गई होती,,,,

दोनों की सांसें तेज चल रही थी,,,, दोनों एकदम चरम सुख के करीब पहुंच गए थे,,, रघु की कमर लगातार हील रही थी,,, हलवाई की बीवी की बड़ी बड़ी गांड में पीछे की तरफ बार-बार हील रही थी,,,रखो पीछे से उसको अपनी बाहों में भर लिया और जोर जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों का पानी एक साथ झड़ गया,,, रघु अपना लंड हलवाई की बीवी की बुर से तब तक नहीं निकाला जब तक उसके लंड की आखिरी बूंद तक उसकी बुर के अंदर नहीं निकल गई,, दोनों हांफ रहे थे,,, रघु अपना लंड हलवाई की बीवी की बुर से बाहर निकाल लीया था,,, और अपनी बुर के अंदर से लंड को बाहर निकलते ही हलवाई की बीवी अपनी दोनों टांगे चौड़ी करके कुछ देर तक खड़ी रही ताकि बुर के अंदर गिरा सारा माल बाहर निकल जाए,,

थोड़ी देर बाद दोनों कपड़े दुरुस्त करके सूखी हुई लकड़ियों का ढेर लेकर आगे हलवाई के लगा रहे हो रघु ढेर सारी शुभकामना परियों का ढेर उसके पास में रखते हुए बोला।

लो चाचा जी सारी सूखी लकड़ियां लेकर आ गया हूं,,,

जीते रहो बेटा बहुत अच्छे लड़के हो आया करो,,,

आता तो रहता हूं चाचा जी,,, क्या करूं मजबूरी है। (हलवाई की बीवी की तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए बोला,, हलवाई की बीवी भी रघु को देख कर मुस्कुरा रही थीं,,, तब तक रामू भी उसके पास आ गया,,, दोनों जाने को हुए तो हलवाई की बीवी गरमा गरम जलेबी उठाकर रघु की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,)

ले रघु मेरी तरफ से खा लेना,,,,( रघु भला कैसे इंकार कर सकता था इसलिए वह हाथ बढ़ाकर जलेबी को थामते हुए बोला) इससे ज्यादा गर्म तो समोसा था चाची,,,

चल कोई बात नहीं कभी और आना तो तुझे फिर से गरमा गरम समोसा खिला दुंगी,,,(वह मुस्कुराते हुए बोली और उसका जवाब सुनकर रघु भी मुस्कुराने लगा और फिर रघु और रामू दोनों गांव की तरफ चल दिए,,)
 
रघु हलवाई की बीवी की जमकर चुदाई कर चुका था लेकिन इस बारे में रामू को बिल्कुल भी भनक नहीं लगी थी वह तो खाने में मस्त था और रघु बजाने में,,, रघु अपनी जिंदगी से खुश था,,,उसे नहीं मालूम था कि हलवाई की खूबसूरत बीवी भले ही मोटी तगड़ी थी लेकिन थी बहुत ही कामुक,,

उसके झांसे में आ जाएगी और उसे अपना तन मन सब कुछ सौप देगी,,,,

रघु का दिन अच्छे से गुजर रहा था,,, ऐसे ही 1 दिन रामू और रघु दोनों खेतों में घूम रहे थे कि रामू बोला,,,

यार रघु 2 दिन बाद तो मेला है हमें मेला घूमने जाना है,, और पैसों का बंदोबस्त हम दोनों के पास बिल्कुल भी नहीं है क्या करेंगे मेला में,,, लगता इस बार का मेला फीका रह जाएगा,,,

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा मैं बंदोबस्त कर लूंगा बस तो मेले में चंदा और रानी दोनों को लेते आना उन दोनों के साथ मेला घूमने का मजा ही कुछ और है,,,।

देख रघु तु फिर शुरू हो गया,,, यही बात मुझे अच्छी नहीं लगती,,,

क्या अच्छी नहीं लगती सही तो कह रहा हूं मेला घूमने का मजा तभी आता है जब साथ में खूबसूरत लड़कियां और जब रानी और चंदा दोनों होंगी तो सोच कितना मजा आएगा मेले में मटकती हुई उन दोनों की गांड,,,आहहहहह कसम से दोनों की मदमस्त गांड मेरा लंड खड़ा कर देती है,,,।

रघु अगर ऐसा ही तो बातें करते रहा तो 1 दिन मैं तेरा साथ छोड़ दूंगा,,, मुझे यह सब बातें अच्छी नहीं लगती तुझे शर्म भी नहीं आती मेरी बहनों की बातें मेरे सामने और वो भी ईतनी गंदी गंदी बातें करता है,,,,

रामू तु समझ नहीं रहा है,,, मैं जानता हूं तेरी बहन लेकिन कितनी खूबसूरत है क्या तू नहीं जानता और वैसे भी तू मुझे यह सब बातें मत बता,,, मैदान के अंदर देखा था ना अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर तेरा लंड कैसे खड़ा हो गया था,,और कैसे तू अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर जोर-जोर से अपना लंड हिला कर पानी निकाल दिया था,,,

और हां बहनों की बात आते ही तू जो गुस्सा हो जाता है तो उस दिन तेरी दोनों बहने जब अपनी सलवार खोल कर गोल-गोल गांड दिखा रही थी तो क्यों अपनी नजरें घुमा नहीं लिया,,, आंखें फाड़ फाड़ कर क्यों देख रहा था,,, कुछ भी कह बेटा मजा तो तुझे भी आता है वरना तेरा लैंड खड़ा नहीं होता और ना ही पानी निकलता,,,

(राघु कि यह बात सुनकर रामू के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे क्योंकि जो कुछ भी रघु कह रहा था वह सच था,, रामू तुरंत बात को पलटते हुए बोला,,)

तु छोड़ ये सब बातें,,, तु सिर्फ इतना बता इंतजाम हो जाएगा की नहीं,,,

भोसड़ी के बोल तो ऐसे रहा है जैसे कि हमेशा तु इंतजाम करता है,,,

यार मैं तो सिर्फ ऐसे ही कह रहा था,,, वो क्या है ना तेरे बिना मेले में मजा भी नहीं आएगा,,, तू रहता है तो मजा आ जाती है,,,

चल चिंता मत कर मैं हूं ना सब इंतजाम हो जाएगा बस मेरी बात याद रखना,,,,(इतना कहकर इतना ते हुए रघु रामू की तरफ देखा तो रामू समझ गया कि वह क्या कहना चाह रहा है इसलिए वह झूठा गुस्सा दिखाते हुए बोला)

यार तू,,,,

(रामू की हालत देखकर रघु हंसने लगा,, दोनों इसी तरह से दिन भर घूमते रहे रघु अच्छी तरह से जानता था कि पैसों का इंतजाम कहां से होगा,,, मेले के एक दिन पहले रघु अकेला ही लाला की हवेली पर पहुंच गया,,, लाला झूले पर झूलते हुए हुक्का गुडगुडा रहा था,,, रघु लाला के पास पहुंचते ही बोला,,,)

क्या लाला सेठ,,, बड़े आराम से झूला झूल रहे हो,,,

(रघु को देखते ही लाला की आंखों में चमक आ गई रघु पर नजर पड़ते ही लाला की आंखों के सामने कजरी का चेहरा नजर आने लगा उसका खूबसूरत पत्नी मादकता भरी अंगड़ाई और भरे बदन के अंगो का कटाव लाला के दिल पर छुरिया चलाने लगा,,,, रघु को देखते हैं लाला को लगने लगा कि उसका बेटा ही कजरी तक पहुंचाएगा एक दिन जरूर कजरी उसके नीचे आएगी यही सोचकर लाला खुश होने लगा और खुश होते हुए बोला,,,)

और बेटा कैसे आना हुआ,,, पूरे गांव में बस तू ही एक लड़का है जो मुझे ईमानदार और सच्चा लगता है बाकी सब लड़के आवारा गर्दी में दिन गुजार रहे हैं,,,,

कहते तो ठीक ही हो लाला शेठ,,, हमारी मां ने ऐसे संस्कार ही नहीं दिए कि हम गांव घूम घूम कर आवारागर्दी करते रहैं,,

अरे हां,, बेटा,,, मैं तो अच्छी तरह से जानता हूं पूरे गांव में तुम्हारी मां की तरह सुंदर और सुशील औरत दूसरी कोई नहीं है,,, तभी तो तुम को देखकर मैं खुश होता हूं,,,, अच्छा और बताओ कैसे आना हुआ घर में सब कुछ खैरियत तो है ना,,,

सब कुशल मंगल है लाला,,,, बस यहां से गुजर रहा था तो सोचा आप के दर्शन करते चलु,,,

ऐसा क्यों कहते हो बेटा मैं भगवान थोड़े हूं,,,

लाला आप कुछ भी कहो गांव वालों के लिए तो आप भगवान ही है,,,,।

(रघु की बातें सुनकर लाला मन ही मन खुश भी हो रहा था,,,)

अब बस कर बेटा तू तो मुझे भगवान बना देता है मुझे इंसान ही रहने दें तो दूसरों की तकलीफ में देखकर खुद दुखी हो जाता है दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहता है,,,। अरे बहू,,, एक लोटा पानी लेकर आना,,, रघु आया है,,,

(रघु को यकीन नहीं हो रहा था कि लाला इतनी खातिरदारी करेगा रघु को यही लग रहा था आम के बगीचे में उसने जो लाला की कामलीला देख ली थी यह सब उसके ही वजह से लाल उसकी खातिरदारी कर रहा है लेकिन यह तो नहीं जानता था कि लाला के मन में कुछ और चल रहा है,, थोड़ी ही देर में लाला की बहू हाथ में लोटा नहीं कमरे से बाहर निकली,,, चेहरा पूरा घूंघट से ढका हुआ था,,, रघु तो 1:00 तक उसे देखता ही रह गया पहले उसके खूबसूरत चेहरा नजर नहीं आ रहा था लेकिन मांसल चिकना पेट और पतली कमर के साथ-साथ उसके खूबसूरत पैर जो कि बस पैरों की उंगलियां भर दिख रही थी यह सब देख कर रघु के तन बदन में मृदंग बजने लगा उसे समझते देर नहीं लगी कि लाला की बहू बहुत खूबसूरत है,,, हालांकि जो रखो के मन में चल रहा था वही लाला के मन में भी चल रहा था जब से लाला की बहू घर में आई थी तब से लाला अपनी बहू को देखकर ही अपनी आंखों को सेंक रहा था,,,, लाला अपनी बहू को इशारे में ही समझाते हुए रघु को लौटा थमाने के लिए बोला ,, साथ में लड्डू भी थे,,, रघु मुख प्रेक्षक बना खड़ा था तभी लाला की बहू उसे पानी से भरा हुआ लोटा के साथ-साथ लड्डू थमाने लगी,,, रघु हाथ बढ़ाकर उसके हाथों से पानी का लोटा और लड्डू लेने लगा तो उसकी नाजुक नरम उंगलियों से रघु की उंगलियां स्पर्श हो गई,,, इतने से ही रघु के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुटने लगी,, उसके तन बदन में कपकपी छाने लगी,,रघु को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि लाला की खूबसूरत बहू की उंगलियों का स्पर्श का शुख ऊसे मिलेगा,,, रघु उसके हाथों से पानी का लोटा और लड्डू दोनों थाम लिया और वह वापस कमरे में जाने लगी रुकू तिरछी नजरों से उसे ही देख रहा था मुझे वह दरवाजे पर पहुंची तब उसके पैरों से पायल अपने आप टूट कर नीचे गिर गई जिस पर शायद उसका ध्यान बिल्कुल भी नहीं था,,, रघु तुरंत आगे बढ़ा और पायल उठाकर आवाज देते हुए बोला,,,)

छोटी मालकिन रुकीए,, आप की पायल गिर गई है,,,

(इतना सुनकर लाला की बहू वापस पीछे मुड़ कर रघु की तरफ देखी तो उसके हाथों में उसकी पायल थी,,,अपनी पायल को देखकर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और मैं तुरंत आगे बढ़कर रघु के हाथ में से अपनी पायल को लेते हुए बोली,,,)

जी धन्यवाद,,,,

(इतना कहकर वह वापस कमरे में चली गई लेकिन अभी के लिए इतना ही बहुत था उसके मुंह से धन्यवाद शब्द सुनकर रघु अपने आपको किस्मत का तो नहीं समझने लगा था अब तक उसने उसके खूबसूरत चेहरे को नहीं देख पाया था लेकिन पायल लौटाते समय लाला कीबहू के चेहरे पर मुस्कुराहट और उसके मोतियों से चमकते चांद को देखकर रघु के तन बदन में जो उत्तेजना भरी हलचल हुई थी वह शायद शब्दों में बयां करना बेहद मुश्किल होगा,,, दरवाजा बंद होते ही जैसे रघु होश में आया हूं इस तरह से वापस लाला की तरफ आ गया,,, और लड्डू खा कर पानी पीने लगा तो लाला खुश होता हुआ बोला,,,)

मैं जानता था तुम एक सुंदर सुशील औरत की संतान हो लेकिन तुम इतने ईमानदार हो गई आज मुझे पता चला आज मैं तुम्हारी इमानदारी से बेहद खुश हूं,,( और इतना कहकर लाला अपनी जेब टटोलते हुए उसमें से 5 रुपए की नोट निकाल कर रघु की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोला,,।)

तुम्हारी ईमानदारी का इनाम,,,

नहीं नहीं लाला सेठ मैं पैसे का लालची नहीं हूं मेरी मां ने मुझे यह सब नहीं सिखाया है,,,(रघु जानबूझकर अपनी शेखी बघारते हु6 बोला जबकि वह पैसे के सिलसिले से नहीं लाला के घर आया था,,)

मैं जानता हूं बेटा यह पैसे इनाम ना सही बड़ों का आशीर्वाद समझ कर लेना और वैसे भी कल मेला है तुम्हें भी तो जाना होगा मेला घूमने अपनी बहन और अपनी मां के साथ,,,

जाना तो है लाला सेठ लेकिन पैसे लेते हुए मुझे अजीब सा लग रहा है,,

चलो अब रख भी लो,,,,

आप कहते हो तो रख लेता हूं लाला शेठ,,,(इतना कहकर रघु हाथ बढाकर लाला के हाथ से पैसे लेकर अपनी जेब में रख लिया और लाला से इजाजत मांग कर हवेली से बाहर चला गया,,, रघु के जाते ही लाला उत्तेजना में धोती में खड़े अपने लंड को हाथ से दबाते हुए अपनी बहू की गर्म जवानी के साथ-साथ कजरी के नितंबों के घेराव को याद करके मस्त होने लगा,,,, रघु भी पूरे रास्ते भर लाला की बहू के बारे में सोचता रहा उसकी खूबसूरती उसका भोलापन और बेहद मांसल और सुडौल नितंबों का घेराव जोकिं कसी हुई साड़ी में और ज्यादा कसी लग रही थी,,, लाला की बहू को देखकर रघु के पजामे में भी हलचल हुई थी लेकिन वह बड़ी मुश्किल से लाना के सामने अपने पजामें में बने तंबू को छिपाया हुआ था,,,,

आज पूरा गांव मेला घूमने के लिए पूरी तैयारी कर रहा था सुबह जल्दी से उठ कर नहाना धोना लगा हुआ था,,,रघु की बहन साडू नहा धोकर तैयार हो चुकी थी और खाना भी बना ली थी,,, कजरी भी नहा चुकी थी लेकिन वहां मेला घूमने नहीं जा रही थी,,, रघु तो बहुत खुश नजर आ रहा था चंदा और रानी दोनों के साथ मेला घूमने का उसे अपना अलग मजा दिखाई देता था वह भी तैयार हो चुका था,,,

शालू अपनी सहेलियों के साथ पहले ही मेला देखने के लिए जाने लगी थी और जाते-जाते अपने भाई लोगों को अपनी मां से पैसे ले लेने के लिए बोली थी,,, इसलिए रघु जल्दी से अपने घर में अपनी मां से पैसे लेने के लिए घुसा,,, कजरी नहा करकमरे में कपड़े बदलने के लिए गई थी और रघु जोर से आवाज करता हुआ अपनी मां को यहां वहां ढुंढता हुआ सीधे कमरे में घुसने से पहले ही इतनी जोर से अपनी मां को आवाज लगाया कि कजरी एकदम से चौक गई और उसके हाथ से ब्लाउज छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई,,, और रघु अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर एकदम हक्का-बक्का रह गया,,,।
 
दरवाजे पर ही रघु के पैर ठिठक गए थे,,, रघु की तेज आवाज सुनते ही कजरी के हाथों से उसका ब्लाउज जोंकी वह पहनने ही वाली थी वह छुट कर नीचे जमीन पर गिर गई थी,,, दोनों की आपस में नजरें टकराई,, कुछ पल के लिए सब कुछ थम सा गया एकदम स्थिर हो गया ऐसा लग रहा था मानो समय रुक गया हो,, दोनों मां बेटे एक दूसरे को देखें,, लेकिन इस अफरातफरी में क्या करना है दोनों को समझ में नहीं आ रहा था,,, रघु की जवान प्यासी नजरें उसकी मां की मदमस्त भरी हुई जवानी के केंद्र बिंदु रुपी दोनों खरबूजे पर टिक गई,,,,, रघु की तो सांसे अटक गई थी उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह अपने होशो हवास खो बैठा था करता भी क्या बिचारा आंखों के सामने जब इस तरह का बेहतरीन कामुक नजारा हो तो दुनिया का कोई भी मर्द अपने होशो हवास खो दें,,

रघु की सांसे तेज चलने लगी थी पलभर में ही उसके तन बदन में उत्तेजना की वो लहर दौड़ने लगी की,,, अगर उसकी डोर खींचकर अगर काबू में ना लिया जाए तो बेकाबू हो जाती है,,,

कजरी को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें नीचे जमीन पर गिरा हुआ ब्लाउज उठाकर अपना तन ढकने तक की सुध उसमें बिल्कुल नहीं थी,,,, वह भी एक तक अपने बेटे को देखे जा रही थी,,, रघु अपनी मां की दोनों गोलाइयों को देखकर मदहोश हुआ जा रहा था,,,बेहद करीब से अब तक उसने सिर्फ हलवाई की बीवी की चुचियों को भी देखा था उन्हें छू कर स्पर्श करके उन्हें मसल कर हर तरीके से उनका मजा ले जाता है लेकिन आज अपनी मां की चुचियों को बड़े ध्यान से और बड़े करीब से देख रहा था,,, पर उसे इस बात का ज्ञान हो रहा था कि हलवाई की बीवी की चुचियों में और ऊसकी मा की चुचियों में जमीन आसमान का फर्क था,,,,भले ही बेशक हलवाई के बीवी के चुचियों का आकार को ज्यादा बड़ा था लेकिन उसमे लचक थी,, लेकिन रघु की मां की चुचियों का आकार एकदम शुघड था,,,खूबसूरत औरत के पास जिस तरह की चूची होना चाहिए उसी तरह की चूची कजरी के पास थी,,, उनमें बिल्कुल भी लचक नहीं थी दोनों की दोनों एकदम तनी हुई थी,,, और उन दोनों के बीच में चॉकलेटी रंग की निप्पल किसमिस के दाने की तरह लग रही थी जोकि अगर उनसे खेला जाए तो उत्तेजना में आकर अपना रूप छुआरा बना लेती है,,,रघु की इच्छा हो रही थी कि वह अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर उनके आकार को अपनी हथेली में महसूस करें उसकी गर्माहट से अपने तन बदन को गर्म कर ले,, लेकिन ऐसा कर सकने की हिम्मत उसमें अभी नहीं थी वह केवल एक टक देखें ही जा रहा था,,,, तभी कजरी को इस बात का अहसास हुआ कि कुछ गलत हो रहा है,,इसलिए छत से नीचे झुकी और अपना ब्लाउज उठाकर उसे अपने दोनों चूचियों पर बिना पहने ही डाल दी,,, और अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेरते हुए बोली,,,।

क्या करता है रे धीरे से नहीं बोल सकता,,,,

अब मुझे क्या मालूम था ना कि तुम कपड़े बदल रही हो बल्कि तुम तो कब से नहाई हुई हो और अब जाकर कपड़े बदल रही हो ,,,(शुभम भी शर्म का पर्दा ओढकर दूसरी तरफ नजर फेर कर बोला)

हां मैं जानती हूं लेकिन क्या करूं ब्लाउज थोड़ा फटा हुआ था इसलिए उसे सील रही थी,,,,।

जब कोई बात नहीं मुझे कुछ पैसे दो मेले में चाट पकौड़ी समोसा भी खाना है,,,,।

अच्छा रुक मैं देती हूं,,,(इतना कहकर वह दीवार की तरफ मुंह करके अपना ब्लाउज पहनने लगे रघु से रहा नहीं जा रहा था वह अपनी नजर को चोरी से अपनी मां की तरफ घुमाते हुए देखने लगा तो उसकी नंगी चिकनी एकदम गोरी पीठ अपनी मांसलता लिए नजर आने लगी,,,, क्या देख कर रखो के मन में हो रहा था कि वह पीछे से जाकर अपनी मां को अपनी बाहों में भर ले लेकिन वह ऐसा सोच भर सकता था कर सकने की हिम्मत उसमें नहीं थी,,, अपने बेटे की आंखों के सामने ही दीवाल की तरफ मुंह करके कजरी अपना ब्लाउज पहन ली और आखरी बटन बंद करते हुए बोली,,,।

आराम से जाना और शालू का ख्याल रखना आते समय उसे साथ लेकर आना,,, समझ गया ना,,,(कजरी ब्लाउज का आखिरी बटन बंद करते हुए और अपने मुंह को दीवार की तरफ किए हुए ही बोली,,,।)

मा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,मैं शालू का अच्छे से ख्याल रखूंगा बस तुम जल्दी से पैसे दे दो मेरे सारे दोस्त जा चुके हैं,,,

हां दे रही हूं थोड़ा सब्र तो कर एकदम उतावला हो जाता है,,,।(साड़ी के पल्लू को अपने माथे पर डालते हुए बोली और बक्सा खोलकर उसमें से 2 रुपए निकाल कर देने लगी,, रघु झट से हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के हाथ से पैसा थाम लिया,,,)

देख तुझे अकेले का नहीं दे रही हूं शालू को भी इसमें से दे देना,,,(कजरी संदुक बंद करते हुए बोली,,,)

हां मैं दे दूंगा,,,, मैं अकेले के लिए थोड़ी ले रहा हूं,,,

(रघु जानबूझकर अपने चेहरे पर आई उत्तेजना को छुपा रहा था ऐसे बर्ताव कर रहा था जैसे कुछ हुआ ही नहीं जबकि अंदर उसके जबरदस्त हलचल मचा हुआ था,, ना चाहते हुए भी उसकी नजर अपनी मां के ब्लाउज पर चली जा रही थी,,, और शायद यह बात कजरी को ध्यान में नहीं आ रही थी क्योंकि वह रघु से नजरें मिला ही नहीं पा रही थी बस इधर उधर देख कर बातें कर रही थी,,,)

लेकिन देख मेले में तो जा रहा है लेकिन एक बार फिर तुझे कहती हूं चालू कर दिया रखना और शाम ढलने से पहले चले आना ऐसा नहीं कि अपने आवारा दोस्तों के साथ घूमता रह जाए और रात हो जाए,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मां मैं शाम ढलने से पहले आ जाऊंगा,,,,(इतना कह कर रघु मुस्कुरा दिया और बोला)

अब मैं जाऊं,,,,

तो तुझे रोका किसने है,,, जल्दी जा,,,(इतना कहकर नीचे गिरी हुई कंघी उठाने के लिए नीचे झुकी तो उसकी नजर रघु के पजामे पर पड़ी जो कि आगे की तरफ से उठा हुआ था,,, और मन में ही उसके मुंह से निकल गया शायद है या यह क्या है,,,, लेकिन वह अपने मन में आए शब्दों को होठों पर नहीं लाई और दूसरी तरफ मुंह करके अपने बालों को सवारने लगी,,,, और रघु भी कमरे से बाहर चला गया,,, कमरे से बाहर आने पर उसे इस बात का एहसास होगा कि उसके पजामे में तंबू बना हुआ है,,,पर वह मान नहीं अपने आप से बातें करते हुए बोला कि अच्छा हुआ कि इस पर मां की नजर नहीं पड़ी वरना क्या सोचती,,, रघु कुछ देर पहले के हादसे के बारे में सोचता हुआ मेले की तरफ जाने लगा उसके दिलो-दिमाग पर हलचल मची हुई थी,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां के कसे हुए चुचियों के दो जोड़े नजर आने लगते थे,,, रघु के लिए उसकी मां की दोनों चूचियां फड़फड़ाते हुए कबूतर थे,,, जीन्हे अब अपने हाथ में लेकर दुलार ने खेलने और दबाने का मन कर रहा था,,हलवाई की बीवी की चुचियों के साथ वह जी भरकर खेल चुका था और उसकी चूचियों से खेल कर ऊसे जो आनंद प्राप्त हुआ था अब वही आनंद वह अपनी मां की चुचियों के साथ लेना चाहता था वह देखना चाहता था कि हलवाई की बीवी की चुचियों में से और उसकी मां की चूची में से किस की चूची ज्यादा आनंद देती है,,, अब वह आतुर था अपनी मां के खूबसूरत जवान जिस्म से खेलने के लिए,,, लेकिन उसके मन में डर भी था,, वह इतनी जल्दी आगे बढ़ने से डर रहा था क्योंकि क्या पता सब कुछ अनजाने में हो रहा हो और उसे यह लग रहा हो कि उसकी मां यह सबकुछ जानबूझकर कर रही है,,, यही बात रघु के पल्ले नहीं पड़ रही थी कि यह जो कुछ भी कुछ दिनों से हो रहा है वह अनजाने में हो रहा है या जानबूझकर लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी।

वह अपने मन में यही मानकर तसल्ली कर ले रहा था कि मंजिल मिले ना मिले सफर का आनंद उसे पूरा मिल तो रहा है,,। वह भी गांव से बाहर निकला भी नहीं था कि तभी पीछे से उसे आवाज सुनाई दी जो कि उसके दोस्त रामू की मां ललिया की थी,,,रघु पीछे मुड़कर देखा तो ललिया जोर से भागी चली आ रही थी,,, रघु ललिया को देखते ही एकदम खुश हो गया,,, क्योंकि उसकी तरफ से वह पूरी तरह से आकर्षित था,, वह भी गदराए जिस्म की मालकिन थी,,, दूध की दुकान थी,,, उसके दोनों दूध रघु के आकर्षण का केंद्र था,,,रघु खड़े होकर उसी को देख रहा था और वजह से भागी चली आ रही थी उसके दोनों दूध ऊपर नीचे होके उछल रहे थे जो कि ब्लाउज में उसे साफ महसूस हो रहा था,,, वैसे भी रघु ललिया के जवान जिसमें का दर्शन कर चुका था,, उसे छूने में महसूस करने में जो आनंद ऊसे प्राप्त हुआ था,, उसके बारे में सोच कर इस समय भी उसके तन बदन में हलचल मच रही थी,,,। ललिया लगभग हफ्ते हुए उसके करीब आकर रुक गए,,, और रघु से बोली,,,।

अरे मुझे भी ले चल,,,सब लोग कब का निकल गए ऐसा लग रहा है कि तू और मैं बस हम दो रह गए हैं,,,

हां चाची मुझे भी ऐसा ही लग रहा है,,,(रघु ललिया से बातें करते हुए उसके भारी-भरकम साथियों की तरफ देख रहा था जो कि दौड़ने की वजह से हांफते हुए उसकी दोनों चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी और रघु की तेज नजरों को ललिया भी भांप गई थी,,, लेकिन बोली कुछ नहीं,,ना जाने क्यों रघु का इस तरह से उसकी चूचियों को घूर घूर कर देखना उसे अच्छा लग रहा था,,,, रघु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) अरे चाची थोड़ा सा आराम कर लो कितनी जोर जोर से यहां पर आई हो,, इतनी जोर जोर से हांफ रही हो कि तुम्हारा सब कुछ हील रहा है,,,

(रघु की बात सुनते ही ललिया एकदम से सन्न रह गई क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि रघु इस तरह की बात कर देगा,,, लेकिन उसे बोली कुछ नहीं,,, सिर्फ औपचारिक रूप से बोली,,)

अरे दौड़ती हुई आई हूं तो सांस तो चढेगी ही ना,,,,,

इसीलिए तो कह रहा हूं थोड़ा रुक जाओ फिर चलते हैं,,,।

अच्छा हुआ तू मिल गया वरना मुझे अकेले ही जाना पड़ता,,

चंदा और रानी रामू यह लोग कब गए,,,

सालु भी उन लोगों के साथ ही गई है,,,

चलो अच्छा हुआ कि सब चले गए,,,

ऐसा क्यों,,,?(ललिया रघु की तरफ आश्चर्य से देखते हुए बोली)

नहीं तो तुम्हारे साथ चलने का मौका नहीं मिलता,,,

(रघु की बातें सुनकर ललिया बोली कुछ नहीं लेकिन उसके कहने का मतलब हुआ अच्छी तरह से समझ रही थी उसे लगने लगा था कि रघु उसकी तरफ आकर्षित है,,, वैसे भी उस दिन शाम को जिस तरह से वह बोझा ढोने में उसकी मदद करते हुए उसके ऊपर गिरा था और उसके लंड की ठोकर ठीक उसकी बुर के ऊपर महसूस हुई थी,,,, उसके लंड की ठोकर की दस्तक को ललिया अभी तक अपनी बुर पर बराबर महसूस करती है,,,। तभी से वह रघु की तरफ आकर्षित होने लगी थी,,,लेकिन इतनी भी आकर्षित नहीं हुई थी कि वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए लालायित हो उठे ,,, थोड़ी देर वहां रुकने के बाद ललिया और रघु दोनों आगे बढ़ गए ,,रघु जानबूझकर लहंगा के पीछे चल रहा था ताकि उसके मटकते हुए नितंबों की भारी-भरकम गांड के दर्शन कर सकें,,, और इस बात का आभास ललिया को भी अच्छी तरह से हो रहा था और रघु की इस हरकत की वजह से उसका पूरा बदन कसमसा रहा था,,, लेकिन रघु कि सरकार की वजह से उसे ना जाने क्यों मजा भी आ रहा था,,,।

दूसरी तरफ कजरी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था वह खटिया पर बैठी हुई थी धीरे-धीरे अपने बालों में कंघी कर रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्यों हो जाता है,,, वह तो सिर्फ पैसे मांगने के लिए आया था और उसके हाथ से ही ब्लाउज छुट कर नीचे गिर गया था,,, कजरी मन में यही सोच रही थी कि उसकी खुद की ही गलती है,,, लेकिन फिर अपने मन में यह सोच रही थी कि रघु का फर्ज बनता है कि जब उसकी आंखों के सामने इस तरह का दृश्य दिखा था तब उसे अपनी नजरों को फेंक देना चाहिए था लेकिन वह ऐसा ना करके बस टकटकी बांधकर उसे ही देख रहा था,,,लेकिन फिर उसके मन में यही ख्याल आता था कि रघु जवान हो रहा है और इस उम्र में लड़के अक्सर बहक जाते हैं,,, रघु के साथ भी यही हुआ होगा,,,अनजाने में ही सही लेकिन उसके सामने एक औरत का जवान जिस्म नंगा नजर आ जा रहा है और वह भी किसी गैर औरत का नहीं बल्कि उसकी खुद की मां का,, ऐसे में भला एक बेटा क्या कर सकता है देखने के सिवा,,,

सब कुछ सोचने के बाद वह इसी नतीजे पर उतरी की इसमें उसके बेटे की गलती बिल्कुल भी नहीं थी,,ना तो उस दिन जब गुरुपड़प्पा ऊपर चढ़ा रही थी और ना ही आज दोनों में उसकी ही गलती थी,, पेटिकोट की डोरी कैसे खुल गई थी यह उसे भी पता नहीं चला था अपने बेटे के सामने पूरी तरह से नंगी हो गई थी यह अनजाने में हुआ था और आज भी उसका बेटा उसकी मदमस्त चुचियों के दर्शन कर गया था इसमें भी उसे अपनी ही गलती नजर आ रही थी,,, बस उसे एक चीज हैरान कर रही थी और वह थी बार-बार उसे नग्न अवस्था में देखकर उसके बेटे के पजामे के आगे वाला भाग का ऊंचा उठ जाना,,,,, और यह बात सोच कर उसके तन बदन में भी हलचल सी मच जा रही थी,,, इसी तरह की हलचल को कहा उस दिन बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और ना चाहते हुए भी अपनी बुर के अंदर अपनी उंगली डालकर अपनी गर्मी शांत कर ली थी,,, आज भी उसे वही हरकत दौहराने की इच्छा हो रही थी लेकिन वह बड़ी मुश्किल से अपने मन पर काबू कर गई,,,।

दूसरी तरफ ललियां हो रघु दोनों मेले में पहुंच चुके थे,, जहां पर पहले से ही रामू चंदा रानी और शालू मौजूद थे,,,। रघु अपने दोस्त रामू के साथ मिलकर मेले में खूब मजा किया सबको अपनी तरफ से जी भर कर जलेबी और समोसे खिलाना चाट पकौड़ी जो कुछ भी खाने की इच्छा हो रही थी खुद भी खाया और सब को खिलाया ज्यादातर वह ललिया की तरफ ध्यान दे रहा था,,, उसके मन में यही चल रहा था कि कुछ खाने के बदले ललिया उसे जरूर कुछ अद्भुत देगी जिससे वह जिंदगी का असली सुख प्राप्त करेगा,,, रघु बहुत खुश था वह मेरे में चारों तरफ घूम रहा था चारों तरफ मेले में लोग इकट्ठा हुए थे सभी के चेहरे पर खुशी थी,,, लड़कियां चूड़ी बिंदी लाली यही सब खरीदने में व्यस्त थी,, लड़के उन्हें ताडने में व्यस्त थे,,, इन सबसे अलग बग्गी में बैठकर पर्दे के ओट में से लाला की बहू रघु को ही देख रही थी क्योंकि एक ही मुलाकात में उसे लग रहा था कि इस मेले में वह सिर्फ रघु को ही जानती है जिसे वह ठीक से देखी भी नहीं थी लेकिन उसकी एक झलक जरूर पा ली थी,,, रघु को इस बात का आभास तक नहीं था कि,, बग्घी में लाला की बहू बेटी होगी,,, लाला की बहू की नजर रघु के ऊपर बराबर बनी हुई थी,, और जैसे ही रामू के साथ रघु उस बग्गी के करीब से गुजरा कि तभी बग्गी के अंदर बैठी लाला की बहू उसे आवाज लगाते हुए बोली,,,।
 
कजरी की मादक चुचीया

1610498677-picsay.jpg


और उसका गदराया बदन

1610498793-picsay.jpg
 
1610499092-picsay.jpg


रघु हलवाई की बीवी की पीछे से लेता हुआ
 
Back
Top