Incest बरसात की रात,,,(Completed) - Page 4 - SexBaba
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Incest बरसात की रात,,,(Completed)

एक ही खटिया पर सोने की बात सुनकर रघु के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगी आज तक उसने कभी भी किसी औरत के साथ एक ही खटिया पर नहीं सोया था और आज किस्मत उस पर पूरी तरह से मेहरबान थी,,, कहते हैं ना जब भगवान एक दरवाजा बंद कर देता है तो 10 दरवाजे खोल भी देता है कुछ वैसा ही रघु के साथ हो रहा था रघु तो सिर्फ अपनी मां को झाड़ियों के बीच बैठकर पेशाब करते हुए देख रहा था और जिसकी वजह से उसकी मां उसे काफी डांट फटकार कर भगा दी थी उसी के एवज में हलवाई की बीवी उसे अपने खूबसूरत बदन का हर एक अंग बड़े अच्छे से दिखा दे रही थी। हलवाई की बीवी की संगत में उसे इस बात का एहसास होने लगा कि दुनिया में असली सूट औरत ही दे सकती है बाकी कोई नहीं,,, जिस तरह से हलवाई की बीवी उसकी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड दीखाते हुए घनी झाड़ियों में बैठकर पेशाब कर रही थी,,, रघु यह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसा भी उसके साथ होगा कि कोई औरत जानबूझकर उसे अपनी मस्त बड़ी बड़ी गांड दिखाएगी और उसकी आंखों के सामने पेशाब करेगी जबकि गांव की कोई भी औरत यह नहीं चाहती कि उसे सोच क्रिया करते हुए कोई देखें भले ही वह उसका पति या प्रेमी क्यों ना हो,,, और मर्दों की ख्वाहिश हमेशा से यही रहती है कि कहीं ना कहीं उसे पेशाब करते हुए औरत दिखाई दे दे ताकि वह उसकी बड़ी-बड़ी मदमस्त गोरी गांड को देखकर अपने मन को शांत कर सके,,, और इस मामले में रघु कि किस्मत बड़ी तेज थी,,,

रघु के कानो ने अभी-अभी ही एक ही खटिया पर दोनों के सोने की बात सुनकर ऐसा महसूस किया था कि जैसे उसके कानों में मध घोल दिया हो उसके तुरंत बाद जैसे ही उसकी नजर कोने में खड़ी हलवाई की बीवी कर गई तो उसके होश उड़ गए क्योंकि वह अपनी साड़ी अपनी कमर पर से छुड़ा रही थी,,,, उसकी बेहतरीन खूबसूरत पहाड़ी नुमा भारी भरकम छातियां बेपर्दा हो चुकी थी,,। अब तक रघु हलवाई की बीवी की मदमस्त जवानी के दर्शन उसके नितंबों को देखकर ही किया था उसकी भारी-भरकम विशालकाय छातियों पर पहली बार उसकी नजर पड़ी थी हालांकि इससे पहले वह दोनों चूचियों के बीच की गहरी लकीर को देखकर मस्त हो चुका था लेकिन पहली बार ही वह उसे खुले तौर पर देख रहा था,,,,,,,,। हलवाई की बीवी अपनी साड़ी उतार रही थी और रघु उसकी तरफ एकदम मदहोशी भरी निगाहों से देख रहा था छोटे से बलाउज में हलवाई की बीवी की भारी-भरकम खरबूजे जैसी चूची सामा नहीं पा रही थी ऐसा लग रहा था कि ब्लाउज का बटन दोनों चुचियों के भार से से अभी का अभी टूट जाएगा,,,। हलवाई की बीवी रघु से नजरें बचाकर पहले से ही अपने ब्लाउज के दो बटन को खोल चुकी थी जिससे उसकी आधी चूचियां कमरे के माहौल को और भी ज्यादा नशीली बना रही थी। रघु तो हलवाई की बीवी की मदमस्त मस्त जवानी के नशे में पूरी तरह से बहकने लगा था।

भाई की बीवी अपनी साड़ी उतार चुकी थी और उसे रस्सी पर डालते हुए बोली,,,

आज कुछ ज्यादा ही गर्मी लग रही है रघु,,,।

हां चाची मुझे भी ऐसा ही लग रहा है,,,। ( हलवाई की बीवी की नशीली जवानी देख कर रघु का पूरा वजूद गरमा चुका था उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी थी,,, हलवाई की बीवी भी इस तरह की हरकत अपनी जिंदगी में पहली बार ही कर रही थी वह भी कभी सपने में नहीं सोचा थी कि उसकी जिंदगी में ऐसा कौन आएगा कि वह अपने ही घर में किसी गैर जवान लड़के को शरण देकर उसके साथ संभोग सुख भोगने की कल्पना या ख्वाब देखे गी,,, और उसका यह ख्वाब हकीकत में बदलने वाला था,,, लेकिन इसके लिए अभी समय बाकी था लोहा धीरे-धीरे गरम हो रहा था बस हथोड़ा मारने की देरी थी,,, हलवाई की बीवी भी चोर नजरों से रघु की तरफ देख ले रही थी जब जब उसकी नजर उसके उठे हुए टॉवल पर जाती तब तक उसके बदन में हलचल सी होने लगती थी।

हलवाई की बीवी एक नई रोमांस के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर ली थी जिंदगी में पहली बार शादी के बाद वह अपने पति के साथ धोखा करने जा रही थी पति के घर पर ना होने का पूरा फायदा उठाना चाहती थी,,,। यह सब उसके मन में रघु से मिली तब तक नहीं था लेकिन धीरे-धीरे रघु के प्रति वह पूरी तरह से आकर्षित होने लगी और इतनी ज्यादा आकर्षित हो गई कि उसके साथ संभोग सुख भोगने के लिए अपने आपको तैयार कर ली,,,। पेटीकोट और ब्लाउज में हलवाई की बीवी एकदम क़यामत लग रही थी अपनी भारी-भरकम शरीर और बड़े बड़े दूध और तरबूज जैसे गोल-गोल नितंबों की वजह से उसमें एक अजीब प्रकार का आकर्षण था जिसके आकर्षण में रघु पूरी तरह से अपने आप को खोता हुआ महसूस कर रहा था,,,।

लालटेन की पीली रोशनी में पूरा कमरा नहाया हुआ था वैसे तो सोते समय हलवाई की बीवी लालटेन की लौ को एकदम कम कर देती थी ताकि कमरे में अंधेरा हो जाए क्योंकि उजाले में उसे नींद नहीं आती थी लेकिन आज की बात कुछ और थी वह आज लालटेन को अपनी पूरी लौ के साथ जला रही थी,,, आज की रात में कोई भी कसर बाकी रखना नहीं चाहती थी अपना हर एक अंग खुलकर और खोलकर रघु को दिखा देना चाहती थी जिसकी शुरुआत वह अपनी साड़ी को उतारकर और अपनी ब्लाउज के दो बटन खोल कर कर चुकी थी,,,। रघु की आंखों के सामने साड़ी उठाकर नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब करना तो पेशाब करने की औपचारिकता थी लेकिन ब्लाउज के दो बटन खोल कर और साड़ी उतार कर चुदाई के लिए वह धीरे-धीरे अपने आप को आगे बढ़ा रही थी,,,,,

दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी दोनों के दोनों जल्दी से खटिया पर जाना चाहते थे जिसकी शुरुआत हलवाई की बीवी आगे बढ़कर कि वह जाकर सीधा खटिया पर लेट गई वह पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी भरावदार उन्नत छातियां एकदम ऊपर की तरफ मुंह उठाए ब्लाउज में कैद थी,,, उत्तेजना के मारे हलवाई की बीवी बहुत ही गहरी गहरी सांस ले रही थी और बड़ी ही मादक नजरों से रघु की तरफ देख रही थी,,,, उत्तेजना के मारे रघु का गला सूखता जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना है वह अनुभवहीन था लेकिन मन में जिज्ञासा भरी हुई थी औरतों के अंगों से खेलने की कल्पना ने उसे अपने आप में ही प्रचुर मात्रा में अनुभव से भर दिया था वह प्यासी नजरों से हलवाई की बीवी को नजर भर कर देख रहा था उसकी उठती बैठती सांसो के साथ उसकी भारी-भरकम चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिससे रघु का कलेजा उत्तेजना के मारे मुंह को आ रहा था,,,। हलवाई की बीवी बेहद उत्सुक थी वह चाहती थी कि जल्द से जल्द आ रहा हूं उसके पास खटिया पर आ कर लेट जाए शादी के बाद से पहली बार वह किसी पराए मर्द के साथ लेटने जा रही थी,,,

आ जाओ रघु वहां क्यों खड़े हो,,,,( हलवाई की बीवी एकदम बाद अक्सर में बोलते हुए धीरे से अपनी एक काम को घुटनों से मोड़कर खड़ा कर दी जिससे उसकी पेटीकोट एकदम से उसकी नशीली चमकीली मोटी मोटी जांघों से होती हुई सीधे उसकी कमर पर जा गिरी पल भर में ही रहोगी आंखों के सामने हलवाई की बीवी की मोटी मोटी चिकनी नंगी जागे नजर आने लगी पृथ्वी को समझते देर नहीं लगी कि यह हरकत हलवाई की बीवी जानबूझकर की थी,,,,। रघु तो एकदम से होश खो बैठे उसकी इस हरकत की वजह से वह पूरा मदहोश हो चुका था आंखों में 4 बोतलों का नशा नजर आ रहा था वह तुरंत आगे बढ़ा और सीधा जाकर खटिया पर बैठ गया,,,,, जैसे ही रखो हलवाई की बीवी के बेहद करीब खटिया पर बैठा दोनों का बदन आपस में एकदम स्पर्श होने लगा दोनों के तन बदन में आग लग गई दोनों के मुंह से हल्की सी गर्म सिसकारी फूट पड़ी दोनों काम उत्तेजना के चरम सीमा पर पहुंच चुके थे जहां से वापस लौटना दोनों के लिए नामुमकिन था,,,,।

एक जवान मर्द को अपने बेहद करीब एक ही खटिया पर बैठे होने की वजह से हलवाई की बीवी के तन बदन में मस्ती की लहर उठ रही थी वह इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी वह बेशर्म की तरह अपनी नंगी चिकनी जांघ पर अपनी हथेली फेरते हुए रघु से बोली,,,।

बैठा क्यों है आजा लेट जा,,,,।

रघु बिना कुछ बोले खटिया पर लेट गया खटिया इतनी छोटी थी कि दोनों का बदन आपस में स्पर्श होने लगा,,, दोनों के बदन में पल भर में उत्तेजना भरी गर्माहट फैलने लगी,,,।

दोनों की सांसे उत्तेजना के मारे धुकनी की तरह चल रही थी,,,। रघु से रहा नहीं जा रहा था पहली बार बार किसी औरत के सामने एकदम सट कर लेटा हुआ था,,,। बार बार उसका गला सूखता चला जा रहा था और वह बार-बार धूप से अपने गले को गिला करने की नाकाम कोशिश कर रहा था तेज चलती सांसो की वजह से वह सहज नहीं हो पा रहा था और इस बात को अनुभवी हलवाई की बीवी समझ गई थी वह धीरे से रघु की तरफ करवट लेते हुए एक हाथ रघु की छातियों पर रखकर बोली,,,।

क्या हुआ रखो तुम्हें मेरे साथ सोने में अच्छा नहीं लग रहा है,,,।

( हलवाई की की बीवी के द्वारा धीरे-धीरे उसकी उंगलियों को परी नंगी चौड़ी छाती ऊपर महसूस करके रघु पागल हुआ जा रहा था वह सीधे पीठ के बल लेटा हुआ था जिसकी वजह से उसका लंड पूरी तरह से टॉवल में खड़ा था उसका मुंह उत्तेजना के मारे खुला का खुला रह गया था,,, अपनी तरफ करवट लेने की वजह से रघु को उसकी मोटी चिकनी जांगे बेहद मोटी लग रही थी,,, वह हड बढ़ाते हुए जवाब दीया,,,।)

चचचच ,,, चाची मुझे तुम्हारे साथ सोने में अच्छा तो बहुत लग रहा है लेकिन डर भी लग रहा है,,,।

डर कैसा मैं तुझे खा जाने वाली नहीं हूं,,,।

( रघु पूरे गांव में आवारा लड़कों के साथ ही घूमता था इसलिए उसे आवारागर्दी अच्छी तरह से मालूम थी और वह औरतों के मन में चल रहे भाव से अच्छी तरह से वाकिफ था वह हलवाई की बीवी के मन में क्या चल रहा है यह भी समझ गया था लेकिन यह उसका पहली बार था इसलिए घबराहट हो रही थी लेकिन जिस तरह से हलवाई की बीवी एकदम सहज भाव से उसे बातें कर रही थी और सब कुछ धीरे-धीरे खोल दी चली जा रही थी उसे देखते हुए रघु अपने आप से ही बातें करते हुए बोला यह क्या कर रहा है रघु यही सब तो तू चाहता था औरतों के साथ मस्ती करने की कल्पना में ही दिन रात खोया रहता था जब मौका ढूंढता था तब मौका तुझे नहीं मिलता था आज अपने आप से मौका मिल रहा है तो जो आंख क्यों चुरा रहा है कर दे जो तेरे मन में है हलवाई की बीवी पकवान से भरी हुई थाली है और उसे देखकर अगर मुंह चुरायेगा तो तो कभी भी अपना पेट नहीं भर पाएगा आज नहीं तो कभी नहीं,,,। यही सब सोचते हुए पल भर में ही रघु ने यह निर्णय कर लिया कि आज जो कुछ भी उसके साथ हुआ है उसे देखते हुए अगर आज वह हलवाई की बीवी को चोद नहीं पाया तो वह जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगा इसलिए वह मन में ठान लिया था कि आज की रात जमकर हलवाई की बीवी को चोदेगा और चुदाई के अध्याय में अपना खाता खोलेगा,,,। यही सोचकर वह जवाब देते हुए बोला,,,।)

मुझे तुमसे बिल्कुल भी डर नहीं लगता चाची,,,

फिर किस से डर लगता है,,,

तुम्हारी( इतना कहने के साथ ही रघु अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर हलवाई की बीवी की मोटे मोटे पेट के नीचे अपनी हथेली ले जाते हुए सीधा अपनी हथेली को उसकी गरम-गरम बुर पर रखते हुए उसे हल्के से दबाव देते हुए उसे रगड़ते हुए बोला,,,) इस बुर से,,,,,,

( जैसे ही रघु अपनी हथेली को हलवाई की बीवी की बुर पर रखा वैसे ही हलवाई की बीवी अपनी बुर पर रघु की हथेली को महसूस करते हैं एकदम से सिहर उठी और उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,।)

ससससहहहह,,,आहहहहह,,, रघु,,,,।

इस से डर लगता है चाची मुझे तुम्हारी बुर से,,,,( रघु एकदम बेशर्म की तरह हल्के हल्के हलवाई की बीवी की गुलाबी बुर को अपनी हथेली से रगड़ ते हुए बोला,,,, जिंदगी में उसका यह पहला मौका था जब वह अपने हाथ से किसी औरत की बुर को स्पर्श कर रहा था,,, उसे यह स्पर्श बेहद उन्माद से भरा हुआ और बेहद अद्भुत महसूस हुआ था जिंदगी में किसी भी चीज को छूने में इतना आनंद उसे नहीं आया था जितना आनंद उसे हलवाई की बीवी की गुलाबी रंग की बुर को छूने में आ रहा था,,, रघु को अपने अंदर कुछ पिघलता हुआ महसूस हो रहा था,,, रघु की हरकत की वजह से हलवाई की बीवी की हालत खराब होती जा रही थी क्योंकि रघु उसकी बुर को लगातार अपनी हथेली को जोर-जोर से रगड़ रहा था,,,,। पल भर में ही रघु के साथ-साथ हलवाई की बीवी मदहोश होने लगी,,,, वह लंबी सांसे लेते हुए वापस पीठ के बल हो गई लेकिन रघु अपनी हथेली को उसकी दोनों टांगों के बीच से बाहर नहीं खींच पाया उसे मजा आ रहा था,,,।

ओहहहह,,, रघु तुझे ईससे डर क्यों लगता है जबकि तेरे जैसे छोकरे तो इसके पीछे पड़े रहते हैं,,,,( रघु की हथेली की रगड़ को अपनी बुर पर महसूस करते हुए वहां मस्ती भरी आवाज में बोली,,,।)

मैं भी हमेशा से बुर के ही सपने देखा करता था लेकिन कभी हकीकत में उसे नजर भर कर देखा नहीं था और ना ही उसे स्पर्श किया था,,,,। तुम्हारे इतने करीब आकर मुझे ऐसा लग रहा था कि आज मेरी इच्छा पूरी हो जाएगी जिसके लिए मैं तड़पता था मुझे उस बुर के दर्शन जरूर हो जाएंगे,,,।( रघु होले होले से अपनी हथेली को हलवाई की बीवी की गुलाबी बुर पर मसलते हुए बोला,,,।)

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क्या तुम्हें पूरा यकीन था कि आज तुम्हारी इच्छा पूरी हो जाएगी,,,,( हलवाई की बीवी रघु की तरफ नजर घुमाते हुए बोली,,,।)

यकीन तो नहीं था लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा था,,,( वह रघु के मोटे खड़े लंड को जो कि अभी भी टावर के अंदर तंबू सा शकल लिए खड़ा था उसे देखते हुए बोली,,,।)

धीरे-धीरे दोनों को मजा आ रहा है पहली बार रहो किसी औरत की बुर को अपनी हथेली से मसल रहा था और सच पूछो तो उसे बुर मसलने में इतना ज्यादा आनंद आ रहा था कि वह बयां नहीं कर सकता था बुर की नरमाहट और गर्माहट दोनों काबिले तारीफ थी,,, औरत की बुर छूने में मर्दों को इतना आनंद आता है इस बात का पता रघु को आज ही चल रहा था,,,। हलवाई की बीवी आनंदित होकर अपना मदन रस धीरे-धीरे बुर में से बहा रही थी जिसकी वजह से रघु की हथेलियां गीली होने लगी थी,,,, उत्तेजना के मारे दोनों का गला सूखता चला जा रहा था आधी रात से ज्यादा का समय हो गया था ऐसे में पूरा गांव चैन के लिए सो रहा था लेकिन हलवाई की बीवी और रघु दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी दोनों एक ही खटिया पर सोते हुए एक दूसरे के अंगों से मजा ले रहे थे,, दोनों के बीच पूरी तरह से खामोशी छाई हुई थी बस दोनों की गरम सिस कारीयो की आवाज उस घर में गूंज रही थी,,,।

पेट के बल लेट होने की वजह से हलवाई की बीवी की भारी-भरकम साथिया उसकी सांसों की गति के साथ होले होले ऊपर नीचे हो रही थी जो कि बेहद मादकता का अनुभव करा रही थी यह सब देख कर रघु के तन बदन में नशा सा छाने लगा था हालांकि अभी तक बुर को स्पर्श करने के बावजूद भी वह अभी अपनी आंखों से बुर के दर्शन नहीं कर पाया था,,, रघु अब तक बुर के भूगोल से पूरी तरह से अनजान था अच्छे से अपनी हथेलियों से स्पर्श करने के बावजूद भी उसके आकार की प्रतीति उसे बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी उसमें से निकल रहे चिपचिपी पदार्थ से वह पूरी तरह से व्याकुल हुए जा रहा था,,,। उस स्थिति पर बाजार की वजह से वह अपनी आंखों से हलवाई की बीवी की बुर के दर्शन करना चाहता था वह अपने आप को धन्य करना चाहता था दिन-रात औरतों के बदन को भरने के बावजूद भी वह औरतों के बदन से उनके अंगों से पूरी तरह से वाकिफ नहीं था आज की रात उसके लिए औरतों के बदन के भूगोल को समझने की रात थी आज के दिन वह पूरी तरह से मर्द बनना चाहता था,,, वह साफ तौर पर देखता रहा था कि उसके द्वारा बुर को रगड़ने की वजह से हलवाई की बीवी के तन बदन में अजीब सी उत्तेजना खेल रही थी क्योंकि जब जब वह अपनी हथेली को जोर से उसकी बुर पर रगड़ता तब तब हलवाई की बीवी का बदन कसमसा ने लग रहा था बार-बार बाहर अपने गले को अपने ही थूक से गीला कर रही थी उसके चेहरे के हाव-भाव पूरी तरह से बदल चुके थे उत्तेजना के मारे उसका चेहरा सुर्ख लाल हो चुका था,,,,। और वह गहरी गहरी सांसे ले रही थी रघु को इतना तो पता चल ही गया था अब अगर वह उसके साथ कुछ भी करेगा तो वह उसका विरोध बिल्कुल भी नहीं करेगी क्योंकि वह खुद जा रही थी कि रघु सब कुछ उसके साथ करें इसलिए रघु की हिम्मत बढ़ती जा रही थी,,,।

इसलिए सांसो की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही बड़ी बड़ी चूची ऊपर उसका ध्यान पूरी तरह से केंद्रित हो चुका था ब्लाउज के अंदर के अनमोल खजाने को वह अपने हाथ में पकड़ कर उसे टटोलना चाहता था दबाना चाहता था उसके रस को रसगुल्ले की तरह अपने मुंह में भर कर निचोड़ना चाहता था,,,। रखो पूरी तरह से मदहोश हो चुका था औरत के अंगों के बारे में जानने की उत्सुकता है उसकी बढ़ती जा रही थी उसकी रसीली बुर के साथ वह बहुत देर से अपनी हथेली से खेल रहा था लेकिन अभी तक उसके दर्शन नहीं कर पाया था और अब जाकर उसका ध्यान पूरी तरह से हलवाई की बीवी की खरबूजे जैसी बड़ी बड़ी चूची पर केंद्रित हो चुकी थी इसलिए वह धीरे से उठ कर बैठ गया उसे यू उठ कर बैठता हुआ देखकर हलवाई की बीवी बोली,,,।

क्या हुआ रघु,,,,

कुछ नहीं चाची तुम्हारी चूचियां परेशान कर रही है,,,।

( रघु के मुंह से चूचियां शब्द सुनकर वो एकदम से मंत्रमुग्ध हो गई उसे उम्मीद नहीं थी कि रघु इतनी जल्दी ओर इतना खुलकर बोल देगा,,, रघु की बातों के साथ ही उसका ध्यान अपनी बड़ी बड़ी चूचियों की तरफ गई थी जोकि अपनी ब्लाउज के ऊपर के दो बटन को वह खुद अपने हाथों से ही खोल चुकी थी जिसकी वजह से लेटे होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह इधर-उधर बिखरने के लिए बेताब थी लेकिन ब्लाउज में कैसे होने की वजह से बेहद कम सीन लग रही थी रघु की बात सुनते ही उसके चेहरे पर शर्म की लालिमा के साथ-साथ होठों पर मुस्कुराहट भी तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

मेरी चूचियां तुझे इतनी परेशान कर रही है तो अपने हाथों से आजाद कर दे इन्हें,,,,( हलवाई की बीवी एकदम मादक स्वर में बोली साथ ही इन सब बातों के साथ वातावरण में हलवाई की बीवी की कलाई में ढेर सारी चूड़ियों की खनक की आवाज भी गूंज रही थी जिसकी वजह से वातावरण में मादकता का असर और ज्यादा फैलता चला जा रहा था,,। हलवाई की बीवी की तरफ से यह प्रस्ताव सुनते ही उत्तेजना के मारे रघु के रोंगटे के साथ-साथ उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया रघु अपनी जिंदगी में इस तरह का मादकता और उत्तेजना का अनुभव कभी नहीं किया था उसकी आंखों के सामने जवानी से भरपूर हलवाई की खटिया पर लेटी हुई थी रघु के दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी लेकिन आगे तो बढ़ना ही था एक औरत के द्वारा दिए गए प्रस्ताव को एक मर्द होने के नाते अगर वह पूरा नहीं करता तो एक औरत के सामने उसकी नजरों में वह गिर जाता उसकी मर्दानगी पर सवाल उठने खड़े हो जाते,,, लेकिन रघु के साथ ऐसा कुछ भी नहीं था वह तो मचल रहा था अपने हाथों से हलवाई की बीवी के ब्लाउज के बटन खोलने के लिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा दिया लेकिन जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत की ब्लाउज को उतारने जा रहा था उसके बटन को खोलने जा रहा था इसलिए लाजमी था कि उसके हाथों में कंपन हो रहा था और यह देखकर हलवाई की बीवी मन ही मन खुश हो रही थी,,,, रखो अपने कांपते हाथों से अपनी उंगलियों का सहारा लेकर जैसे ही अपने हाथ को ब्लाउज के बटन खोलने के लिए उसके ऊपर रखा,,, हलवाई की बीवी की बड़ी बड़ी चूचियों की नरमाहट ऊसे अपनी उंगलियों पर महसूस हुई ऐसा लग रहा था कि जैसे वह नरम नरम रूई पर अपने हाथ रख रहा हो,,, एक जबरदस्त सुखद एहसास पूरी तरह से रघु के तन बदन में फैल गया और यही हाल हलवाई की बीवी का भी हो रहा था,,, रघु की उंगलियों को अपनी मदमस्त चुचियों पर महसूस करके वह पूरी तरह से मस्त हो गई और उसकी बुर से मदन रस का रिसाव होने लगा,,,,। रघु हलवाई की बीवी की आंखों में आंखें डाल कर देते हुए उसके ब्लाउज के बाकी के बटन खोलना शुरू कर दिया लेकिन लगातार उसके हाथों में कंपन हो रहा था जिसे देखकर हलवाई की बीवी बोली,,।

लगता है तो पहली बार किसी औरत के कपड़े उतार रहा है,,

ऐसा ही समझ लो चाची मैं सच में जिंदगी में पहली बार किसी औरत के ब्लाउज के बटन खोल रहा हूं,,,।

और तुझे कैसा लग रहा है कि औरत के ब्लाउज के बटन खोलने में,,,

पूछो मत चाची पूरे बदन में शोले फूट रहे हैं मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या कर रहा हूं मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया है,,, मुझे आज ऐसा महसूस हो रहा है कि जिंदगी में औरतों के कपड़े उतारने से बेहतरीन काम और कोई नहीं है,,,( ऐसा कहते हुए रघु हलवाई की बीवी के बटन खोलने लगा,,, रघु की बातें सुनकर हलवाई की बीवी मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और वह उसे बड़े गौर से देख रही थी क्योंकि जैसे जैसे वह ब्लाउज के बटन खोलता जा रहा था वैसे वैसे उसके चेहरे के हाव भाव बदलते जा रहे थे देखते ही देखते रघु हलवाई की बीवी के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और जैसे ही ब्लाउज का आखरी बटन खुला हलवाई की बीवी की बड़ी बड़ी मस्त मस्त खरबूजे जैसी चूचियां एकदम से पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा गई हलवाई की बीवी की छातियां काफी बड़ी थी और ऊपर से उसकी दोनों मदमस्त चूचियां ऐसा लग रहा था कि तालाब में दो बत्तख छोड़ दिए गए हो और दोनों इधर उधर भाग रहे हो,,,, हलवाई की बीवी की लहराती हुई चुचियों को देखकर रघु के मुंह में पानी आ गया जिंदगी में पहली बार वह किसी औरत की चूची को इतने करीब से देख रहा था,,,। उत्तेजना के मारे रघु का गला सूख रहा था बड़ी बड़ी चूची को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी,,,, सांसे इतनी गहरी चल रही थी कि उसके नथूनों से निकल रही सांसो की गर्माहट सीधे हलवाई की बीवी के चेहरे तक पहुंच रही थी,,, रघु अपने पूरे होशो हवास को बैठा था एक बेहतरीन नजारा उसकी आंखों के सामने था जिसकी अब तक वह सिर्फ कल्पना ही करता रहा था,,, वह मन ही मन अपनी मां को ढेर सारी दुआएं दे रहा था कि उसकी वजह से ही उसकी जिंदगी में आज ऐसा पल आया था कि आधी रात के समय पर किसी खूबसूरत गैर औरत की खटिया पर बैठकर उसके ब्लाउज के बटन खोल कर उसकी चूचियों को देख रहा था,,। हलवाई की बीवी की तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध ना होता देखकर धीरे-धीरे रघु की हिम्मत बढ़ने लगी थी इसलिए वह हलवाई की बीवी की इजाजत पाए बिना ही अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ा कर उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसे चुचियों को समेटने लगा हलवाई की बीवी की चूचियां इतनी बड़ी थी कि उसके दोनों हथेली में ठीक से समा नहीं पा रही थी,,,, चूची को छूने पर कैसा महसूस होता है रघु को अब जाकर महसूस हुआ वह पागल हुआ जा रहा था,,,, उसकी चूचियों को हाथों में पकड़ने के बाद उसे इस बात का एहसास हुआ कि बाहर से कड़क दिखने वाली चूचियां वास्तव में रुई की तरह नरम होती है जिसे वह अपने हाथों में लेकर दबाना शुरू कर दिया था,,, उसकी चुचियों को दोनों हाथों से पकड़कर दबाने में रघु को इतना आनंद आ रहा था कि वह मस्ती में आकर अपनी आंखों को मुंद लिया,,,,

जिस तरह से रघु उसकी चूचियों को दबा रहा था हलवाई की बीवी को समझते देर नहीं लगी थी रघु काफी ताकतवर है वह बड़ी ताकत लगाकर उसकी दोनों चूचियों को दबा रहा था दबा क्या रहा था उबले हुए आलू की तरह मसल रहा था लेकिन उसके इस तरह से मसलने से हलवाई की बीवी की आनंद की पराकाष्ठा बढ़ती जा रही थी,,।

ओहहहह,,,, रघु कितना जोर जोर से दबा रहा है रे तू,,आहहहहह,,, मेरी तो जान ही निकली जा रही है,,,।

क्या करूं जाती जिंदगी में पहली बार किसी औरत की चूची को हाथ से पकड़ रहा हूं इसलिए मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,( रघु जोर-जोर से चूचियों को दबाता हुआ बोला,,)

तो क्या दवा दवा का जान निकाल लेगा क्या,,,

जान नहीं निकलेगी चाची मैं तो सुना हूं कि औरतों की चूचियों को जोर-जोर से जितना ज्यादा दबावों उतना ज्यादा मजा औरतों को आता है,,

हारे तुम्हें ठीक ही सुना है लेकिन तो कुछ ज्यादा ही जोर से दबा रहा है देख तूने मेरी चूची को दबा दबा कर एकदम टमाटर की तरह लाल कर दिया है,,,।( हलवाई के बीवी गर्म आहें भरते हुए बोली)

यह सब छोड़ो चाची बस मजे लो,,,( इतना कहने के साथ ही फिर से रघु जोर-जोर से हलवाई की बीवी की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया हलवाई की बीवी की चुचियों का कद इतना ज्यादा था कि उसकी हथेली में ठीक से आ नहीं पा रहा था तो वह रह रह कर एक ही चूची को दोनों हाथों से पकड़कर जोर जोर से दबा रहा था मानो किसी का गला घोट रहा हो लेकिन रघु की इस हरकत की वजह से हलवाई की बीवी का तन बदन एकदम मदहोश हुआ जा रहा था उसकी आंखों में खुमारी छाने लगी थी इसीलिए तो इस तरह से रगड़ रगड़ कर चूची को दबाने के बाद वह मस्ती में आकर आंखों को बंद कर ली थी,,

पहली बार औरतों की चूची हाथ में आते ही रघु के अरमान जागने लगे थे आज पूरी तरह से वह औरत के हर अंग से मजे लेने के इरादे से हलवाई की बीवी की चूचियों से खेल रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथों में चूची नहीं फुटबॉल आ गया हो,,,, धीरे धीरे हलवाई की बीवी पूरी तरह से स्तन मर्दन के कारण उत्तेजित हो चुकी थी और उत्तेजना में होने के कारण उसकी चूची की निप्पल एकदम कड़क होने लगी थी जिसका एहसास रघु को बराबर हो रहा था यह चूची में आए बदलाव को देखकर रघु उत्सुकता के साथ साथ उत्तेजना का भी अनुभव करने लगा उससे रहा नहीं गया चॉकलेट की शक्ल की कड़ी निप्पल को देखकर उसके मुंह में पानी आने लगा उसे मुंह में लेकर चूसना चाहता था इसलिए वह अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए अपने मुंह को चूची की तरफ आगे बढ़ाया और देखते ही देखते,,, पूरी निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,,, जैसे ही हलवाई की बीवी को यह एहसास हुआ कि उसकी निप्पल को रघु अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया है तो इस अहसास से ही वह पूरी तरह से गदगद हो गई उसके मुंह से हल्की सी गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,।

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ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,, रघु,,,,,,

( हलवाई की बीवी एकदम मस्ती भरे सिसकारी लेते हुए अपने दोनों हाथ को रघु के सर पर रख कर उसे हल्के से अपनी चूची पर दबाने लगी यह उसकी तरफ से ही सारा था कि पूरा मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दें और रघु ने वही किया क्योंकि उसकी भी ललक बढ़ती जा रही थी उसकी चूची को पूरी तरह से मुंह में लेकर चूसने की जितना हो सकता था उतना वह मुंह में भर कर उसकी चूची के निप्पल को चुची सहित चूसना शुरू कर दिया,,, पल भर में ही रघु के तन बदन में गर्माहट भर गई,,, जैसे जैसे वह औरतों के अंगों के बारे में समझता चला जा रहा था वैसे वैसे उनके साथ खेलने की युक्ति भी अपने आप ही उसके दिमाग में भर्ती चली जा रही थी उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि औरतों की हर अंग से अत्यधिक आनंद की अनुभूति होती है वह एक हाथ से चूची को दबाते हुए और दूसरे हाथ में चूची को भरकर उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था,,,। लेकिन हलवाई की बीवी की एक चूची से उसका मन नहीं भर रहा था वह कभी दाईं चूची को तो कभी भाई चूची को बारी-बारी से अपनी मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया हलवाई की बीवी रघु कि इसका मुख हरकत से पूरी तरह से काम उत्तेजित हो गई,,, उसके मुंह से लगातार गर्म सिसकारी की आवाज फूट रही थी साथ ही उसकी कलाई में ढेर सारी चूड़ियों की खनक से पूरा कमरा गूंज रहा था,,,।

बाहर ढेर सारे सीयारो का चिल्लाना जारी था लेकिन अपनी मादकता भरी सिसकारी और रघु की हरकतों की वजह से बदन में फैल रही उत्तेजना के कारण वह अब सब कुछ भूल चुकी थी,,,,, वह अपनी दोनों हथेली को रघु की नंगी पीठ पर ऊपर से नीचे घुमाते हुए उसके हौसले को बढ़ा रही थी,,, इस कशमकश में रघु केतन से उसका तो लिया कब छूट कर नीचे जमीन पर गिर गया उसे पता ही नहीं चला वह पूरी तरह से नंगा था उसका लंड अपनी औकात में आ चुका था,,, इधर-उधर हाथ घुमाते हुए हलवाई की बीवी की उत्सुकता बढ़ने लगी तो वह अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर जैसे ही रघु की टांगों के बीच अपना हाथ ले गई वैसे ही उसका खड़ा लंड उसके हाथ में आ गया और जैसे ही है उसका खड़ा मोटा तगड़ा लंबा लंड हलवाई की बीवी की नरम नरम हथेली में आया वह पूरी तरह से मस्त हो गई और उत्तेजना अवश्य जोर से रघु के लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर दबा दी,,,, इस तरह से दबाए जाने से रघु को अपने लंड में हल्के दर्द का एहसास हुआ तो वह उत्तेजना में आकर अपने दांत से हलवाई की बीवी की कड़ी निप्पल को हल्के से काट लिया और हलवाई की बीवी सिसक पड़ी,,,,।

हलवाई की बीवी के हाथों में उसकी मुंह मांगी मुराद आ गई थी जिंदगी में पहली बार हुआ इतने मोटे तगड़े लंड से मुखातिब हो रही थी भले ही वह अपनी जवानी के दिनों में ढेर सारी लंड को अपनी बुर में ले चुकी थी लेकिन रघु के लंड में जो बात थी उसे इस बात का एहसास हो गया कि वह बात किसी के लंड में नहीं थी इतना मोटा तगड़ा और लंबा लंड वह जिंदगी में पहली बार देख रही थी और उसे अपने हाथ में लेकर उससे खेल रही थी,,,

रघु पागल हुआ जा रहा था पहली बार उसका लंड किसी औरत के हाथ में जो आया था हलवाई की बीवी होले होले से रघु के लंड को मुठिया रही थी और इस क्रिया को एक औरत के हाथों होता देख और उसे महसूस करके रघु सातवें आसमान में उड़ने लगा था वह जोर-जोर से हलवाई की बीवी की दोनों चुचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर जोर-जोर से पीना शुरू कर दिया था हलवाई की बीवी की हालत पर फल खराब होती जा रही थी वह उत्तेजना के मारे अपना सर दाएं बाएं पटक रही थी और साथ ही रघु के लंड को जोर-जोर से अपनी मुट्ठी में दबा कर हिला रही थी उसे इस बात का आभास हो चुका था कि कुछ देर बाद उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में जाने वाला है और इस बात से वह बेहद खुश थी आज की रात उसके लिए बेहतरीन रात होने वाली थी अपनी पति की गैरमौजूदगी में जिस तरह का कदम उसने उठाई थी उससे उसकी शरीर की भूख मिटने वाली थी ऐसा उसे ज्ञात हो चुका था वरना अब तक अपने पति की की हरकतों से केवल वह गर्म होती थी उसे ठंडा करने की ताकत उसके पति में बिल्कुल भी नहीं थी,,,।

खटिया पर हलवाई की बीवी और रघु का घमासान मचा हुआ था दोनों एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे रघु पूरी तरह से नंगा था और हलवाई की बीवी के बदन पर अभी भी पेटीकोट बंधी हुई थी,,,। जिसे रघु अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी पेटीकोट की डोरी को खोलना शुरू कर दिया था और रघु की इस हरकत की वजह से हलवाई की बीवी को समझते देर नहीं लगी की ब्लाउज के बटन खोलने वाला रघु अब उसके पेटीकोट को खोलकर उसे पूरी तरह से नंगी कर देगा,,, और नंगी होने के अहसास से ही वह पूरी तरह से मस्त होने लगी उसके बदन में कसमसाहट होने लगी,,।

हलवाई की बीवी की दिल की धड़कन तेज हो गई रघु की एक-एक हरकत उसके तन बदन में आग लगा रही थी,,, संपूर्ण रूप से नंगी होकर हलवाई की बीवी बहुत ही कम बार चुदवाई थी अक्सर वह कपड़े पहने हुए हालत में ही चुदवाती आ रही थी ज्यादा से ज्यादा ब्लाउज के बटन खुल जाते थे लेकिन ब्लाउज पूरी तरह से बदन से अलग नहीं होता था और चोदने के लिए बस काम भर की जगह ,,,बस साड़ी को कमर तक उठाकर शुरू पड़ जाता था उसका आदमी,,,। और जवानी के दिनों में भी बहुत ही कम कार ही ऐसा मौका मिला था जब वह निश्चिंत होकर अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर चुदाई का आनंद ली थी वरना इतना समय ही नहीं मिलता था कहीं खेत में तो कहीं छत पर तो कहीं पेड़ के पीछे बस सलवार की डोरी खोल कर उसे जांघों तक नीचे गिरा कर थोड़ा सा झुक जाती थी,,, और चुदाई हो जाती थी,,,। लड़कों में भी इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि उसके सारे कपड़े उतार कर चुदाई का मजा ले क्योंकि उनके पास भी समय का अभाव होता था समय का अभाव का मतलब की यह डर की कोई देख ना ले इसलिए जल्दी काम खत्म करने के चक्कर में हलवाई की बीवी के संपूर्ण नंगे बदन के दर्शन भी नहीं कर पाते थे बस उसकी बुर में लंड पेल कर,,, और ज्यादा कुछ हुआ तो कुर्ती के ऊपर से दोनों नारंगीयो को दबाकर मजा ले लिए,,, लेकिन हलवाई की बीवी को एहसास हो गया कि रघु उनमें से बिल्कुल ही अलग है,,, क्योंकि वह उसके साथ एकदम इत्मीनान से आनंद ले रहा था और आनंद दे भी रहा था,,,।

चूचियों को तो पहले से ही वह दबा दबा कर एकदम लाल टमाटर की तरह कर दिया था,,, पहली बार हलवाई की बीवी को स्तन मर्दन में इतना ज्यादा आनंद की अनुभूति हो रही थी क्योंकि जिस शिद्दत से वह उसकी चुचियों पर डटा हुआ था उस तरह से आज तक उसके पति ने भी उसकी चुचियों से नहीं खेला था,,,।

रघु भी अपने आप को पूरी तरह से हलवाई की बीवी के हर एक अंग से खेल कर अपने आप को तृप्त कर लेना चाहता था इसलिए उसके हर एक अंग पर कुछ ज्यादा ही समय देते हुए उससे पूरा रस निचोड़ रहा था क्या करें रघु की कल्पना जो साकार होती नजर आ रही थी जिंदगी में पहली बार वह खरबूजे जैसी चुचियों को अपने हाथों में लेकर उससे खेल रहा था,,,।

लेकिन धीरे-धीरे हलवाई की बीवी के हालात पूरी तरह से बिगड़ते जा रहे थे लेकिन आनंद की परी काष्ठा बढ़ती जा रही थी क्योंकि अब रघु धीरे-धीरे करके उसकी पेटीकोट की डोरी को खोल चुका था,,, डोरी के खुलते ही नितंबों के घेराव के इर्द-गिर्द कसी हुई पेटीकोट एकदम ढीली हो गई,,, डोरी के खुलते ही रघु की भी हालत खराब होने लगी हलवाई की बीवी की मदमस्त भरी हुई जवानी की गर्मी उसके तन बदन से पसीने छुड़ा रही थी,,, हलवाई की बीवी इस बात से और ज्यादा खुश थी कि इस उम्र के दौरान भी वह जवान होते मर्दों के भी पसीने छुड़ाने में सक्षम थी,,, रह रह कर दोनों का गला उत्तेजना के मारे सूख जा रहा था और दोनों अपने थुक से अपने सूखे गले को गिला करने की कोशिश कर रहे थे,,, डोरी को खोल कर रखो हलवाई की बीवी के चेहरे की तरफ देखा तो वह उत्तेजना के मारे पूरी मदहोश हो चुकी थी उत्सुकता कामोत्तेजना और शर्म की लालिमा साफ उसके चेहरे पर झलक रही थी,,, लेकिन इन सब के दौरान भी उसके हाथ में रघु का लंड बरकरार था वह उत्तेजना के मारे जोर जोर से रघु के लंड को दबा रही थी,,, उसे भी आश्चर्य हो रहा था क्योंकि काफी देर से वह रघु के लंड से खेल रही थी लेकिन उसके लंड नहीं अभी तक पानी नहीं फेंका था वरना उसके पति का होता तो बस थोड़ा सा सहलाने पर ही पानी फेंक देता था,,, हलवाई की बीवी की पेटीकोट को उतारकर उसे नंगी करने के लिए रघु पूरी तरह से तैयार हो चुका था लेकिन इससे पहले वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर हलवाई की बीवी के खुले हुए ब्लाउज पर रखकर उसे उतारने की कोशिश करने लगा तो हलवाई की बीवी समझ गई कि रघु क्या करना चाहता है इसलिए खुद हल्के से थोड़ा सा ऊपर उठ गई और उसे अपना ब्लाउज अपनी दोनों बांहों में से निकलवाने में मदद करने लगी और देखते ही देखते रघु उसके दोनों बांहों में से उसके ब्लाउज को उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया कमर के ऊपर हलवाई की बीवी पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,, उसकी दोनों चूचियां ब्लाउज की कैद से संपूर्ण रूप से आजाद हो चुकी थी और अपने पंख फड़फड़ा ते हुए उन्नत पहाड़ियों की तरह छातियों की शोभा बढ़ा रही थी,,

उसकी गहरी नाभि बेहद खूबसूरत लग रही थी रघु उसकी गहरी नाभि को देखा कर उसे चुंबन लेने की अपनी लालसा और लालच को रोक नहीं पाया और धीरे से झुक कर उसकी नाभि पर अपने होंठ रख दिए,,, जैसे ही रखो उसकी नाभि ऊपर अपने प्यासे होंठ को रखा वैसे ही हलवाई की बीवी उत्तेजना के मारे सिहर उठी उसके मुंह से हल्की सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,

ससससहहहह,,,आहहहहहहह,, रघु,,,,,,ओहहहहहह,,,

हलवाई की बीवी का इतना कहना था कि रखो अपनी जीत को बाहर निकाल कर उसकी नाभि की गहराई में उतार कर उसे गोल गोल घुमा कर चाटने का आनंद लेने लगा इससे पहले रघु को इस तरह के ज्ञान का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था लेकिन धीरे-धीरे हलवाई की बीवी की संगत में वह अपने आप से ही सब कुछ सीखता चला जा रहा था हलवाई की बीवी रघु की इस हरकत से बेहद कामुक सिसकारियां लेने लगी जिंदगी में पहली बार किसी मर्द ने उसकी गहरी नाभि पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन किया था और उसमें अजीब डालकर उसे चाटने की एक अद्भुत प्रयास किया था जिससे हलवाई की बीवी पूरी तरह से काम विह्वल हो चुकी थी,,,, रघु को मजा आ रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और अपने दोनों हाथ एली को हलवाई की बीवी के कमर के इर्द गिर्द रखकर उसे जोर से दबाते हुए उसकी नाभि को चाटने का आनंद ले रहा था,,,। हलवाई की बीवी की हालत पर्पल खराब होती जा रही थी बार-बार उसकी बुरे से उत्तेजना के मारे मदन रस बह रहा था जिससे उसकी पेटीकोट नीचे की तरफ से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,,,।

ससससहहहह,,,आहहहहहहह, रघु में पागल हो जाऊंगी तू यह क्या कर रहा है मुझसे रहा नहीं जा रहा,,,आहहहहहहह,,,, रघु,,,,ऊमममममम,,,

हलवाई की बीवी की गर्म से इस कार्यों की वजह से रघु अपने तन बदन में और ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था लेकिन उसका भी लंड पूरी तरह से टन्नाया हुआ था,,, जो कि अभी भी हलवाई की बीवी के हाथ में ही था ना जाने कैसा आकर्षण था कि वहां रखो के मोटे तगड़े लंड को किसी भी हालत में छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं थी पहली बार हुआ इतनी देर तक किसी बंद को अपने हाथ में लेकर उससे खेल रही थी और ताज्जुब इस बात की थी कि अभी तक उसकी नरम नरम उंगलियों की गर्माहट पाकर भी उसका लंड अपना लावा पिलाया नहीं था बल्कि ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी नरम i8 उंगलियों का सहारा पाकर उसमें और ज्यादा मर्दाना जोश भरता चला जा रहा था,,,, कुछ देर तक रघु उसकी नाभि में ही डाटा रहा ऐसा लग रहा था कि जैसे वह नाभि के सहारे उसके पेट में उतर जाएगा उसका बस चलता तो वह अपनी लंड को उसकी नाभि में डालकर उसकी चुदाई कर देता क्योंकि वैसे भी हलवाई की बीवी के मोटे पेट के कारण उसकी नाभि की गहराई काफी गहरी थी,, रघु के लंड में रक्त का प्रवाह बड़ी तेजी से हो रहा था,,,। अब वह हलवाई की बीवी को पूरी तरह से नंगी करना चाहता था

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इसलिए वह अपने दोनों हाथों को उसकी पेटीकोट पर रखकर नीचे खींचने वाला था कि एक नजर हलवाई की बीवी की तरफ डाला वह उसे ही बड़ी उत्सुकता से देख रही थी और जैसे रघु की आंखों की भाषा व आंखों से ही पढ़ ली हो इस तरह से वह रघु के इशारे को समझते हुए अपनी भारी-भरकम गांड को हल्के से ऊपर की तरफ उठा दी,,, उसकी यह अदा पर रघु पूरी तरह से चारों खाने चित हो गया,,,, यही एक खास अदा होती है औरतों में अगर वह किसी मर्द के साथ संभोग नहीं करना चाहती है तो वह कभी भी उसे इस तरह से अपनी पेटीकोट या कपड़ा उतारने नहीं देगी लेकिन जब उस की हानि होगी तो खुद ब खुद उसकी बड़ी बड़ी गांड ऊपर की तरफ उठ जाएगी ताकि उसका साथी है उसका पेटीकोट या उसका कपड़ा उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर सके,,,। और हलवाई की बीवी पूरी तरह से तैयार थे इसलिए जैसे ही हो अपनी गांड उठा कर रखो का सहकार देने की कोशिश की है सही मौके का फायदा उठाकर रघु उसकी पेटिकोट को उसकी बड़ी बड़ी गांड से नीचे की तरफ खींच कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया,,,,।

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अब रघु की आंखों के सामने हलवाई की बीवी खटिया पर एकदम नंगी लेटी हुई थी,,, लेकिन एक अनजान लड़के के सामने वह पूरी तरह से सर में से गाड़ी जा रही थी वह बार-बार शर्म के मारे अपने चेहरे को इधर-उधर घुमा ले रही थी ना जाने क्यों इस समय वह रघु से आंखें मिलाने से कतरा रही थी,,,, उसका शर्माना रघु के कलेजे पर छुरियां चला रही थी जितना भी शर्म आ रही थी उतना ज्यादा उत्तेजना का अनुभव रघु अपने बदन में कर रहा था उसकी मोटी मोटी चिकनी जांघें लालटेन की पीली रोशनी में और ज्यादा चमक रही थी,,, हलवाई की बीवी के संपूर्ण नंगे बदन को देखकर रघु का दिल जोरों से धड़क रहा था जिंदगी में पहली बार में किसी औरत को एकदम नंगी देख रहा था हालांकि पहले भी वह औरतों के नंगी गांड और कभी कबार उनकी चुचियों के दर्शन कर चुका था लेकिन उसका यह पहला मौका था जब वह संपूर्ण रूप से एक औरत को नंगी देख रहा था,,,। पेटिकोट को उतारते समय हलवाई की बीवी के हाथ से रघु का लंड छूट गया था जिससे वो और ज्यादा तड़प उठी थी हलवाई की बीवी अपनी मोटी मोटी जागो को आपस में सटाकर अपने अनमोल खजाने को छुपाए हुए थी,,,, और वही देखने के लिए रघु के तन बदन में आग लगी हुई थी,,,, इस समय दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी क्योंकि दोनों की बातें केवल इशारों में ही हो रही थी,,,।

रघु अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर हलवाई की बीवी की मोटी मोटी जांघों पर हाथ रखते हुए उसे एक दूसरे से दूर करने की कोशिश करने लगा लेकिन हलवाई की बीवी शर्म के मारे कसके अपनी दोनों टांगों को आपस में सट आए हुए थे और घुटनों से मोड़ें हुए थी,,,,

यह क्या कर रही है चाची अपनी टांगे खोलो मुझे देखना है,,,।

क्या देखना है तुझे मुझे शर्म आ रही है ऐसे ही रहने दें,,,

शर्म किस बात की चाची मैंने अपने हाथों से ही तुम्हारे कपड़े उतार कर तुम्हें नंगी किया हूं और अब शर्म कैसी,,,

पता नहीं लेकिन ना जाने क्यों तेरे सामने मुझे शर्म आ रही है,,,।

यह शर्म भी जाती रहेगी चाची बस एक बार अपनी दोनों टांगों को खोल दो मुझे अपने अनमोल खजाने को देखने दो मैं अपनी नजरों से तुम्हारे खजाने को लूटना चाहता हूं,,,,

नजरों से लूटकर कुछ नहीं होगा ना मेरा ना तुम्हारा इसे लूटने के लिए तुम्हें अपना हाथ लगाना होगा,,,

( हलवाई की बीवी शर्मा भी रही थी और इशारों में ऐसे अपनी अंदरूनी अंगों को छूने की इजाजत भी दे रही थी,,।)

तो देर किस बात की है चाची खोलो अपनी टांगों को मैं अपने हाथ से नहीं बल्कि अपने होठों से टटोलकर तुम्हारी बुर को देखना चाहता हूं,,,।( इतना कहते हुए रघु एक बार फिर से अपनी दोनों हथेली को हलवाई की बीवी की नंगी जांघों पर रख दिया।)

ससससहहहह,,, रघु,,,,,, तेरे हाथों में जादू है रे,,,,

तो इस जादू को बढ़ जाने दो चाची,,, तुम नहीं जानती कि मैं तुम्हारी बुर को देखने के लिए कितने तड़प रहा हूं,,,

( रघु के मुंह से बुरे शब्द सुनते ही हलवाई की बीवी का पूरा बदन उत्तेजना के मारे कसमस आने लगा उसकी यह बात सुनते ही वह भी अपनी दोनों टांगों को खोल देना चाहती थी,,।)

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क्यों अभी तक किसी की बुर नहीं देखा क्या,,,।

तुम पहली औरत हो चाची जिसकी बुर और जिस के नंगे बदन को मैं आज मैं देख रहा हूं,,,, बस चाची अब मत तड़पाओ,,, खोल दो अपनी टांगों को और समा जाने दो मुझे अपनी टांगों के बीच में,,,,( इतना कहने के साथ ही जैसे ही रघु हलवाई की बीवी की मोटी मोटी टांगों को दोनों हाथों से पकड़ कर जोर लगाते हुए एक दूसरे से अलग करने की कोशिश किया वैसे ही हलवाई की विधि संपूर्ण रूप से अपनी इच्छा दर्शाते हुए अपनी दोनों टांगों को खोल दी और जैसे ही हलवाई की बीवी की दोनों टांगे खुली रघु उसकी टांगों के बीच के दृश्य को देखता ही रह गया लालटेन की पीली रोशनी में हलवाई की बीवी की रसीली बुर की गुलाबी फांकें बेहद साफ नजर आ रही थी,,,, एक चीज और उसकी नजर में आई थी जो कि उसे बेहद आश्चर्य कर गई थी उसे अब तक इस बात का अंदाजा नहीं था कि औरतों के गुप्त अंग पर भी बाल होते हैं जैसे कि उसके लड़के इर्द-गिर्द थे वह हलवाई की बीवी की बुर के ऊपर के घुंघराले रेशमी बालों को देखकर और ज्यादा उत्तेजित हो गया उससे रहा नहीं गया और अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे अपनी उंगलियों से छूने लगा रघु की इस हरकत पर हलवाई की बीवी एकदम से सिहर उठी,,,, ।

ओहहहह रघु,,,,, अब देख ले तेरी आंखों के सामने तुझे जो करना है कर ले,,,।

( हलवाई की बीवी की तरफ से यह कहना एकदम साफ इशारा था कि अब वह उसे चोदने के लिए कह रही थी,,, और आमतौर पर यही होता भी था उसके साथ जैसे ही वह थाने खोल दी थी उसका आदमी उस पर चढ़कर उसकी बुर में लंड डालकर बस दो-चार धक्के नहीं झड़ जाता था,, उसका आदमी क्या शादी के पहले जवानी के दिनों में जिसके लिए भी अपनी दोनों टांगे खोली थी वह सीधा उसकी बुर में लंड पेन देता था लेकिन शायद रघु उन मर्दों में से बिल्कुल भी नहीं था वह हलवाई की बीवी की बुर के आकार का पूरी तरह से मुआयना कर रहा था उसे बड़ा ही ताज्जुब और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था वह बड़े गौर से अपनी उंगलियों से टटोल टटोलकर उसकी बुर को उसकी रूपरेखा को देख रहा था उसमें से मदन रस का रिसाव बराबर हो रहा था जिससे उसकी उंगलियां गीली होती चली जा रही थी लंड में ऐसा महसूस हो रहा था कि उस की नसें फट जाएंगे इतना अत्यधिक वह उत्तेजना का अनुभव कर रहा था,,,,।

रघु की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी वह दोनों टांगों के बीच आ गया और धीरे से अपने चेहरे को उसकी बुर के करीब ले जाने लगा,,,। जैसे-जैसे उसका चेहरा हलवाई की बीवी की टांगों के बीच के एकदम करीब आता जा रहा था वैसे वैसे बउर से उठा रही मादक खुशबू उसके नथुने से होकर उसकी छातियों में भर रही थी एक अद्भुत एहसास उसके तन बदन में छा रहा था और देखते ही देखते उसके होंठ कब उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों पर स्पर्श कर गए यह ना तो रघु को पता चला और ना ही हलवाई की बीवी को जब इस बात का आभास हुआ तब काफी देर हो चुकी थी रघु भी बेहद ताज्जुब में था कि यह कैसे हो गया,,, उसके होंठ औरतों के उस अंग पर कैसे पहुंच गए जहां से वह पेशाब करती है लेकिन अब रखो मैं इतनी हिम्मत नहीं थी कि अपने होठों को उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों से जुदा कर सके क्योंकि उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी ना जाने यह कैसा सुख था जिसे वह महसूस तो कर रहा था लेकिन समझ नहीं पा रहा था,,,। देखते ही देखते उसके होंठों के बीच से उसकी जीभ बाहर निकल कर उसकी बुर में समा गई वह थोड़ी ही देर में अपनी जीभ से उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया एक अद्भुत सुख का अहसास हलवाई की बीवी को अपने आगोश में ले लिया वह समझ ही नहीं पा रही थी कि यह सब क्या हो रहा है,,, उसे तो आज तक उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बावजूद भी पता नहीं था कि औरतों की बुर चाटी भी जाती है और उसमें औरत को बेहद सुख की अनुभूति होती है,,,। हलवाई की बीवी पागल हुए जा रही थी लगातार उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फूट रही थी जो कि पूरे कमरे में गूंज रही थी,,,। उसकी गरम शिसकारियों की आवाज छोटा कमरा होने के नाते उसे बाहर भी जाती होगी लेकिन आधी रात के समय उसे सुनने वाला कोई नहीं था,,,। रघु तो पागल हुआ जा रहा था वह पूरी तरह से हलवाई की बीवी की रसीली बुर को चाट रहा था जो कि इस समय फुल कर एकदम कचोरी जैसी हो चुकी थी वह अपनी हथेली की उंगलियों को भी उस पर रगड़ रहा था लेकिन अभी तक उसे बउर के गुलाबी छेद के बारे में पता नहीं था,,, इतनी देर से हलवाई के बीवी के रंगों से खेलने के बावजूद भी उसे इस बात का पता अब तक नहीं चला था कि अपने लंड को औरत की बुर में कैसे डालते हैं,,, लेकिन इस बात का पता उसे जल्द ही चल गया क्योंकि वह हलवाई की बीवी की बुर को चाटने के साथ-साथ अपनी उंगलियों को उस पर रगड़ भी रहा था जिससे उसकी एक उंगली झट से उसकी बुर की गुलाबी छेद में उतर गई और वह उस समय एकदम से घबरा गया उसका दिल धक से कर गया लेकिन उसे इस बात का आभास हो गया कि इसी क्षेंद में लंड को डाला जाता है,,,

गुलाबी छेद के बारे में पता चलते ही रघु से अब बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था वह जल्द से जल्द अपने लंड को उसकी बुर के अंदर डालकर उसको चोदना चाहता था और यही हाल हलवाई की बीवी का भी था वह पागल हुए जा रही थी,,,। अपनी बुर के अंदर रघु की उंगली को महसूस करते ही उससे सब्र करना मुश्किल हुए जा रहा था और उत्तेजना बस रघु अपनी घुसी हुई उंगली को जोर-जोर से अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,,, हलवाई की बीवी के माथे से पसीना छूटने लगा बड़ी तेजी से रघु की उंगली उसकी बुर के अंदर बाहर हो रही थी वैसे तो लुगाई की बीवी के मोटे तगड़े शरीर के हिसाब से छोटी सी उंगली की कोई भी साथ नहीं थी लेकिन कई महीनों से उसकी बुर के अंदर अच्छी तरह से लंड प्रवेश नहीं किया था इसलिए लोगों की उंगली से भी उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,, रघु की हरकत की वजह से हलवाई की बीवी के मुख से लगातार गर्म सिसकारी की आवाज फूटने लगी,,,

ससससहहहह,,,आहहहहहहह,,,,ओहहहहहह, रघु,,,,, मेरे राजा तूने तो कमाल कर दिया है रे,,,। तेरी मुरली से जब इतना मजा आ रहा है तो जब तेरा लंड मेरी बुर में जाएगा तब कितना मजा आएगा,,,,।

ओहहहह, चाची यह क्या कह रही हो चाची,,,, तुम्हारी बातों से तो मुझे नशा चढ़ने लगा है,,,आहहहहहहह,,,,, चाची,,,,, बहुत गरम बुर है तुम्हारी,,,,,,

( हलवाई की बीवी के मुंह से इतनी गंदी बातें सुनकर हो पूरी तरह से मस्त हो चुका था और वह जोर-जोर से अपनी उंगली को चाची की बुर के अंदर बाहर कर रहा था देखते ही देखते वह अपनी दूसरी वाली को भी उसकी बुर के अंदर सरका दिया,,,, दूसरी उंगली के बुर में घुसते ही हलवाई की बीवी एकदम मदहोश होने लगी,,,, अब उसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था अब वह चाहती थी कि रघु अपनी उंगली बाहर निकाल कर इतना मोटा तो बड़ा लंड उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई कर दे और रघु भी यही चाह रहा था,,,। हलवाई की बीवी कुछ बोलती इससे पहले ही वह अपनी उंगली को बाहर निकाल कर कुछ पल के लिए गहरी गहरी सांसे लेने लगा,,,, दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था हलवाई की बीवी का तो पानी निकल चुका था लेकिन वह असली सुख के लिए तड़प रही थी और रघु अभी तक पूरी तरह से बरकरार था उसके लंड में उत्तेजना चिंगारियां फूट रही थी लेकिन अभी तक उसका ज्वाला फूटा नहीं था,,,, लेकिन अब वक्त आ गया था असली खेल का जो कि आज तक रघु ने नहीं खेला था,,,, रघु को शांत होता देखकर हलवाई की बीवी हल्के से अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा और फैला दी और अपने हाथों की कहानी का सहारा लेकर थोड़ा सा ऊपर उठी और अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच दौड़ाने लगी हलवाई की बीवी अपनी बुर का मुआयना कर रही थी वह देखना चाहती थी कि रघु की उंगली से चुदकर उसकी बुर का क्या हाल है,,,,, और अपनी बुर को देखते ही उसे एहसास हो गया कि उसकी बुर का बुरा हाल था,,, उत्तेजना और लंड की लालच में उसकी बुर फूल कर एकदम कचोरी जैसी हो गई थी,,,, रेशमी बालों के झुरमुट के बीच उसकी गुलाबी रंग की पत्तियां बेहद मोहक लग रही थी,,,, आज बरसों के बाद उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी बुर का आकर्षण अभी भी पहले की ही तरह है भले ही थोड़ा सा खुल गई हो तो क्या हुआ अभी भी उस में इतना जोश भरा हुआ है कि वह इस जवान लड़के को अपनी तरफ पूरी तरह से आकर्षित कर रही है,,,।

आज की रात हलवाई की बीवी कुछ ज्यादा ही बेशर्मी दिखा रही थी,,,, वह गहरी गहरी सांसे ले रही थी अपने बदन की उत्तेजना उससे दब नहीं रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,। हलवाई की बीवी की मदहोशी को देखकर रघु बोला,,,।

कैसा लगा चाची,,,,( रघु अपने खड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ कर हलवाई की बीवी को दिखा कर हिलाते हुए बोला,,,)

बहुत मजा आया लेकिन में चाहती हूं कि तू अपने इस,,( एक हाथ की उंगली से रघु टैलेंट की तरफ इशारा करते हुए और दूसरी हथेली को अपनी गुलाबी बुर पर रगड़ ते हुए,,) मोटे तगड़े लंड को मेरी बुर में डालकर मेरी चुदाई कर दे,,,,, रघु,,,,, मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,।

तुम मुझसे ही कहां रहा जा रहा है चाचा मैं तो तुम्हारी आज्ञा का इंतजार कर रहा था,,,,।

आज की रात तुझे मेरी तरफ से पूरी छूट है तू जो चाहे वह मेरे साथ कर सकता है,,,, बस मुझे मस्त कर दे मुझे तृप्त कर दे प्यासी मत छोड़ना अधूरी मत छोड़ना,,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो चाचा मेरा यह लंड तुम्हारी बुर में जाकर ऐसा गदर मचाएगा की तुम्हारी आंखें फटी की फटी रह जाएगी,,,, आज तुम्हारी बुर को चोद कर भोसड़ा बना दूंगा,,,,( रघु अपने टन टनाए हुए लंड को हिलाते हुए बोला,,,,।)

कहने और करने में बहुत फर्क होता है रघु मैंने अच्छे-अच्छे को बीच मझधार में डूबते हुए देखी हूं,,,,, मुझे नहीं लगता कि तू मेरी बुर की प्यास बुझा पाएगा,,,,,( हलवाई की बीपी लगातार रघु को उकसाने हुए अपने गुलाबी बुर को जोर जोर से मसल रही थी और यह देखकर और उसकी बातें सुनकर रघु का पाना चढ़ने लगा था,,,,, वह उसकी बातें सुनकर एकदम जोस से भर चुका था और वह खटिया पर से खड़ा हो गया और एक तरह से अपने लंड को अच्छी तरह से हलवाई की बीवी को दिखाते हुए बोला,,,।)

अगर आज चाची मैं तुम्हारी बुर का भोसड़ा ना बना दिया तो मैं कभी अपनी शक्ल तुम्हें नहीं दिखाऊंगा,,,,।

बोल मत कर के दिखा,,,,

यह बात है तो रुको आज मैं तुम्हें दिखा देता हूं कि यह रघु क्या चीज है,,,,।( इतना कहने के साथ ही रखो कटोरी में रखे हुए सरसों के तेल को अपनी हथेली पर गिरा कर उसे अच्छे से अपने लंड पर लगाकर मालिश करने लगा,,, रघु अक्सर अपने घर में सरसों के तेल से अपने लंड की मालिश किया करता था,,, तभी तो सरसों के तेल को पी पी कर उसका लंड एकदम मुसल की तरह हो गया था,,, आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था,,, केवल कुत्तों के भौंकने और सियार के चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी,,,, गांव में कजरी अपने बेटे रघु का इंतजार कर कर के थक हार कर सो गई उसे क्या पता था कि आज रघु घर से बाहर निकल कर हलवाई की बीवी के साथ अपनी मर्दानगी का खाता खुलवा रहा है,,,, और हलवाई की बीवी का आदमी दूर किसी गांव में नदी में पकोड़े छानने में व्यस्त था और उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि वह उधर शादी में पकौड़ी छान रहा है और उसकी बीवी घर में गैर मर्द से अपनी कचोरी पर चटनी गिरवानी के लिए आतुर है,,,,।

छोटे से कमरे का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था लालटेन की पीली रोशनी में हलवाई की बीवी का नंगा बदन पूरी तरह से नहाया हुआ था,,,,। रघु बड़े अच्छे से सरसों तेल से अपने लंड की मालिश कर रहा था जैसे कि एक सैनिक युद्ध के मैदान में जाने से पहले अपने बंधु को मैं तेल पानी देकर उसे एकदम दुरुस्त कर लेता है ताकि गोली ठीक समय पर फूटे,,,,,,

आप अपने लंड की मालिश करते करते सुबह कर दोगे या इधर भी आओगे मेरी बुर में आग लगी हुई है,,,,।

चिंता मत करो रानी तुम्हारी बुर की आग में ही बुलाऊंगा मुझे ऐसा लग रहा है कि आज मेरी मां ने मुझे घर से मेरा उद्धार करने के लिए ही निकाली थी साथ में तुम्हारा भी उद्धार मेरे ही लंड से होगा,,,

( हलवाई की बीवी रघु के मुंह से कितनी खुली बातें सुनकर एकदम मस्त होने लगी मदहोशी उसकी आंखों में छाने लगी वह पूरी तरह से नशे में हो गई थी उसकी बुर में आग लगी हुई थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी पुर में चीटियां रेंग रही हो वह जल्द से जल्द रघु के लंड को अपनी बुर में ले लेना चाहती थी वह उसकी मोटाई को अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर महसूस करना चाहती थी,,,। वह जिस तरह से अपनी हथेली से लगातार अपनी पुर की गुलाबी पत्तियों को मसल रही थी उसे देखते हुए रघु के सब्र का बांध टूटने लगा,,,, और वह अपने सरसों में सने हुए लंड को एक हाथ से हिलाते हुए सीधे खटिए पर बैठकर अपने लिए हलवाई की बीवी की मोटी मोटी जांघों के बीच जगह बनाने लगा,,, खटिया पर आते ही हलवाई की बीवी अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा और फैला दी,,,,। सही मायने में औरतों का यही रूप सबसे ज्यादा कामुक होता है उनकी यह हरकत बेहद कामाोतेजना और कामुकता से भरी होती है,,,, कितना मोहक और बेहद आकर्षक लगता है और कितना अतुल्य पल होता है जब एक औरत एक मर्द के लिए अपनी दोनों टांगों को खुद ब खुद खोलती है यह उसकी तरफ से पूरी तरह से समर्पण की स्वीकृति होती है,,,, और औरत का यही रूप देखने के लिए हर मर्द लालायित रहता है,,,, रघु को भी हलवाई की बीवी की यह अदा और हरकत बेहद मनमोहक और आकर्षक लगी थी,,,, और उसकी यही हरकत पर रघु का लंड अपना मुंह उठाकर उसकी मदमस्त जवानी को सलामी भर रहा था,,,,।

बिना अनुभव के बिना किसी दिशानिर्देश के रघु खटिया पर अपने घुटनों के बल होकर हलवाई की बीवी की दोनों टांगों को अपने हाथों से फैलाते हुए अपने लिए जगह बना लिया था आज तक उसे पता नहीं था कि औरत की बुर की अंदर कौन से स्थान पर रखकर अपने लंड को प्रवेश कराया जाता है लेकिन जैसे-जैसे हलवाई की बीवी के अंगों से खेलने के बाद पल बीतता जा रहा था वैसे वैसे उसका अनुभव बढ़ता जा रहा था और उसका दिमाग भी बहुत तेजी से चल रहा था,,,, रघु एक बार हलवाई की बीवी की बुर गुलाबी छेद के प्रवेश द्वार को अपनी उंगलियों से टटोलकर पूरी तरह से तसल्ली कर लेना चाहता था इसलिए एक बार फिर से वह अपनी अंगुली से उसकी गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों को टटोल ते हुए उस में उंगली डालकर अपनी सही दिशा पर ध्यान केंद्रित कर चुका था वह एक हाथ की उंगली से उसकी गुलाबी बुर की पत्तियों को टटोल ते हुए अपनी दूसरे हाथ में अपनी खड़े लंड को लेकर उसे धीरे से उसके सुपारी को उस गुलाबी छेद के ऊपर रख दिया,,,, जैसे ही हलवाई की बीवी को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती के ऊपर रघु के मोटे तगड़े गरम लंड का एहसास हुआ वह पूरी तरह से उत्तेजना में आकर सिहर उठी,,,,,आहहहहहहह रघु,,,,, उसके मुंह से गर्म सिसकारी के साथ रघु का नाम निकल गया,,,,,।

जिंदगी में पहली बार अपने लंड को किसी औरत की बुर के ऊपर रखकर रघु पूरी तरह से जोश में आ गया था उसकी उत्तेजना और प्रसन्नता समाए नहीं समा रही थी वो बेहद खुश था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आसमान में उड़ रहा हो उसे जन्नत का मज़ा मिलने लगा था लेकिन अभी तो उसका लंड केवल पुर के प्रवेश द्वार पर ही दस्तक दे रहा था अभी तो अंदर घुसकर पूरी तरह से तसल्ली करना बाकी था,,,। रघु को इतना तो पता ही था कि चोदने के लिए बुर के अंदर लंड डालना बेहद जरूरी होता है और बुर के अंदर लंड कैसे घुसता है ये भी वह जान चुका था,,, हालांकि अभी तक वह अपनी जिंदगी में किसी भी बुर के अंदर अपने लंड को डाला नहीं था लेकिन उसे एहसास हो गया था कि बुर के अंदर लंड को कैसे डाला जाता है,,,, हलवाई की बीवी अपने दोनों हाथों की कहानी का सहारा लेकर अपने गर्दन को ऊपर उठाकर अपनी नजरों को सीधा अपनी टांगों के बीच स्थिर किए हुए थी वह अपनी आंखों से देखना चाहती थी कि रघु क्या करता है अपनी बुर के ऊपर लेटे हुए लंड को देख कर उसे इस बात का एहसास हो गया था कि रखो का लंड को ज्यादा ही मोटा और लंबा है जो कि बड़े आराम से उसकी बुर के ऊपर रेशमी बालों के झुरमुट पर लेटा हुआ था,,,,, हलवाई की बीवी को अपनी रेशमी बालों के झुरमुट पर लेटे हुए रघु का लंड काले नाग की तरह लग रहा था जो कि उसकी गुलाबी बिल में जाने के लिए बेताब था,,,,।

रघु की सांसे बेहद गहरी चल रही थी उसका चौड़ा सीना लालटेन की रोशनी में बेहद मोहक लग रहा था उसकी चौड़ी छाती को देखकर हलवाई की बीवी समझ गई थी कि रघु पूरी तरह से मर्दाना ताकत से भरा हुआ जवान लड़का है जिसकी बाहों में अपने आप को छुपाकर वह चुदाई के मजे को भरपूर तरीके से लूटेगी।

रघु अपने हाथ में अपने खड़े लंड को पकड़ कर उसके सुपाड़े को जोर-जोर से हलवाई की बीवी की गुलाबी बुर पर पटकने लगा,,,,

आहहहहह,,, रघु,,,,, क्या कर रहा है मुझे चोट लग रही है,,,

( हलवाई की बीवी मस्ती के साथ गर्म आहे लेते हुए बोली,,,।)

सससससससहहहहह,,,चोट लग रही है चाची,,,,सससहहहह,,,,, बस इतने से ही तुम्हें चोट लग रही है जब मेरा मोटा लंड तुम्हारी बुर के छोटे से गुलाबी छेद में घुसेगा तब क्या होगा,,,,( रघु एकदम मस्ती में आकर बोला रघु की बात सुनकर हलवाई की बीवी को इस बात का एहसास हो गया था कि वाकई में रघु जो कह रहा था वह बिल्कुल सच था रघु के मोटे लंड की मुकाबले उसकी बुर का छेद छोटा था,,, क्योंकि उसके पति का लंड रघु के लंड से आधा ही था,,,,, लेकिन फिर भी वह रघु के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए बेताब थी,,,।)

कुछ नहीं होगा बस तू अपने लंड को मेरी बुर में डाल दें,,,,

( हलवाई की बीवी के उतावलापन को देखकर रघु से भी रहा नहीं गया और वह अपने लंड को कपड़े को अच्छी तरह से उसके गुलाबी छेद पर रखकर हल्के हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा पहले से ही हलवाई की बीवी की बुर से ढेर सारा नमकीन मदन रस बह रहा था जिसकी चिकनाहट पाकर उसका लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे उसकी बुर के अंदर प्रवेश करने लगा,,,। और जैसे-जैसे उसके मोटे लंड का छोटा टुकड़ा उसकी बुर के अंदर घुस रहा था वैसे वैसे हलवाई की बीवी के चेहरे पर दर्द की आवाज साफ नजर आ रही थी उसके चेहरे के हाव भाव पल पल बदलता हुआ नजर आ रहा था,,,, हलवाई की बीवी को इस बात का एहसास हो गया कि उसके सोचने के मुताबिक रघु के लंड का सुपाड़ा काफी मोटा है अब तो उसे दर्द भी होने लगा था लेकिन दर्द के बाद मिलने वाले अद्भुत सुख को महसूस करने के लिए वह इस दर्द को झेलने के लिए पूरी तरह से तैयार थी,,,, रघु अपने लंड को हलवाई की बीवी की बुर में डालने के प्रयास में जुटा हुआ था वह पूरा जोर लगा दे रहा था लेकिन उसके लंड का मोटा से बड़ा हलवाई की बीवी की बुर के गुलाबी से छोटे से छेद को भेद पाने में असमर्थ लग रहा था,,,। इसका एक कारण यह भी था कि रघु अनुभव ही न था अगर उसे औरत की बुर में लंड डालने का अनुभव होता तो अब तक वह उसकी बुर को फाड़ चुका होता है,,,। उसे लगने लगा कि उसका प्रयास सफल नहीं हो पाएगा तो वह वापस अपने लंड को उसकी बुर से बाहर खींच लिया और इस बार वह ढेर सारा थूक अपनी हथेली पर लेकर अपने लंड की सुपाड़े पर अच्छे से लगाने लगा,,, थूक लगाने से उसका लंड पूरी तरह से लिसलिशा हो गया,,, अब उसे पूरा यकीन हो गया कि इस बार उसका लंड पूरी तरह से अपना झंडा बुर में गाड़ कर ही आएगा,,,,

यह सब हलवाई की बीवी बड़ी उत्सुकता बस देख रही थी और बोली,,,

मैं कह रही थी ना कहने और करने में बहुत फर्क होता है,,, तुझसे भी नहीं होगा,,,,

आज तक कोई ऐसा काम नहीं है चाची जो मुझसे ना हुआ हो यह भी होगा और बराबर होगा,,,,( रघु अपने लंड पर अच्छे से थुक को लगाते हुए बोला। वह एक बार फिर से अपनी जगह लेते हुए अपने लंड की सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रख दिया,,,, इस बार रघु ने कोई भी गलती नहीं किया और देखते ही देखते उसके लंड का मोटा सुपाड़ा हलवाई की बीवी की बुर में प्रवेश करने लगा लेकिन हलवाई की बीवी का दर्द बरकरार था जिंदगी में पहली बार वह इतने मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में जो ले रही थी,,,, जैसे-जैसे उसका लंड का सुपाड़ा बुर की गुलाबी पत्तियों को चीरता हुआ अंदर धंस रहा था वैसे वैसे दर्द की रेखाएं हलवाई की बीवी के सुंदर चेहरे पर अपना असर दिखा रही थी,,,, रघु को काफी मेहनत लग रही थीं वह पसीने से तरबतर हो चुका था साथ ही दर्द के मारे हलवाई की बीवी अपने दातों को दबाए हुए थी,,,। रघु अभी तक थोड़ा एहतियात बरत रहा था लेकिन अब उसे लगने लगा था कि थोड़ा कठोर बंद दिखाना जरूरी है तभी वह अपनी मंजिल तक पहुंच सकेगा इसलिए वह अपने दोनों हाथों से हलवाई की बीवी की मांसल कमर को दबोच लिया और इस बार वह कचकच आ गए जबरदस्त धक्का लगाया और उस धक्के के साथ ही उसका मोटा तगड़ा लंड का मोटा सुपाड़ा सरकते हुए सीधे बुर के द्वार के भीतर प्रवेश कर गया,,,,, रघु चुदाई की पहली सीढ़ी को पार कर गया था लेकिन इस सीडी को पार करते हुए हलवाई की बीवी को बेहद दर्द भी दे रहा था वह दर्द से कराह उठी धक्का इतना जबरदस्त और तेज था कि फिर भाई की बीवी के मुंह से चीख निकल गई लेकिन उस चीज को उस सन्नाटे में उस वीराने में सुनने वाला इस समय कोई नहीं था,,,।

बाप रे बाप ओ मोरी दैया,,,,, मेरी तो जान निकल जाएगी,,, यह क्या किया रघु तूने,,,,,( इतना जबरदस्त दर्द हो रहा था कि हलवाई की भी एकदम से डर गई थी कहीं उसकी बुर फट जाएगी इसलिए वह गर्दन उठाकर अपनी बुर की तरफ देख रही थी हलवाई की बीवी का इस तरह से अपने बुर को आश्चर्य से देखना शायद रघु समझ गया था इसलिए वह उसकी कमर था में हुए ही बोला,,,)

चिंता मत करो चाची बुर फटी नहीं है अभी सलामत है,,,,।

आहहहहहहह,,,, हाय राम तूने तो मेरी हालत खराब कर दी रे मैं तो समझी कि मेरी बुर आज गई,,,,,आहहहहहहह,,,, मैं मर जाऊंगी बहुत दर्द कर रहा है निकाल ले तू इसे तेरा लैंड है कि मुसल है निकाल इसे ,,,,,

( हलवाई की बीवी दर्द से छटपटा रही थी वह जानती थी कि शुभम के लंड की मोटाई उसकी बुर की छेद से काफी बड़ा था इसलिए उसे इस तरह का दर्द हो रहा था,,,, लेकिन रघु पहली बार किसी औरत की बुर में अपना लंड मिल रहा था इसलिए उस में से निकालने की उसकी इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही थी,,,, वह अपने दोनों हाथ को आगे बढ़ाकर हलवाई की बीवी के दोनों खरबूजे को अपने हाथ में लेकर जोर-जोर से दबाते हुए बोला,,,।)

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नहीं चाची अब यह मुमकिन नहीं है,,,, मेरा मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है तुम्हारी बुर से अपने लंड को बाहर निकालने का अब तो मन कर रहा है कि तुम्हें ऐसा पेलु के जिंदगी भर याद रखो,,,,

हलवाई की बीवी की बुर में दर्द भी हो रहा था लेकिन ट्रकों की बातें सुनकर उसका हौसला भी बढ़ रहा था उसे एहसास हो रहा था कि रघु उसे सबसे अच्छा सुख देने वाला है उसे तृप्त कर देने वाला है इसलिए वह भले ऊपर से बोल रही थी कि अपने लंड को बाहर निकाल ले लेकिन अंदर से यही चाहती थी कि वह अपने लंड को बाहर ना निकालें,,,, ना जाने कैसे रघु पहली बार में ही औरतों के साथ कैसा व्यवहार उसके अंगों से कैसे खेला जाता है सब कुछ सीखता चला जा रहा था वह होले होले से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था जिससे स्तन मर्दन की वजह से एक बार फिर से हलवाई की बीवी के तन बदन में काम भावना जागृत होने लगी थी,,,,

ससससहहहह,,,आआहहहरह,,,, रघु,,,,,ओहहहहहह,,, मेरे राजा मजा आ रहा है बहुत मजा आ रहा है,,,,

हलवाई की बीवी की यह बातें सुनते ही रहो को लगने लगा कि अब आगे बढ़ना जरूरी है क्योंकि लोहा एक बार फिर से गर्म होने लगा था रघु का लंड टस से मस नहीं हो रहा था वह धीरे-धीरे सुपारी को ही अंदर बाहर करके हलवाई की बीवी को चोदना शुरू कर दिया अंदर की चिकनाहट पाकर उसका लंड धीरे धीरे अंदर की तरफ घुसता चला जा रहा था,,,। हलवाई की बीवी के चेहरे की रंगत एक बार फिर से फीकी पड़ने लगी क्योंकि जैसे जैसे रखूं करेंगे अंदर घुस रहा था वैसे वैसे फिर से उसे दर्द का एहसास हो रहा था,,,

काफी मशक्कत करने के बाद रघु आधे से ज्यादा लंड को हलवाई की बीवी की बुर में प्रवेश करा चुका था,,,, रघु के माथे से पसीने की बूंदें टपक रही थी जो कि हलवाई की बीवी के गोरे चिकने पेट पर गिर रही थी,,, अपने पेट पर गिरते हुए पसीने की बूंदों को देखकर हलवाई की बीवी को एहसास हो गया था कि उसकी चुदाई करना बच्चों का खेल नहीं था,,, वैसे भी उसका पेट काफी निकला हुआ था और जिस तरह से रघु उसे चोद रहा था उसकी बुर में लंड पर रहा था इस तरह से सामान्य तौर पर आम इंसान ही नहीं कर पाते क्योंकि इसके लिए लंबा मोटा तगड़ा लंड की जरूरत होती है और ऐसा अब तक हलवाई की बीवी ने किसी के पास नहीं देखी थी लेकिन रघु की बात अलग थी रघु का आधे से ज्यादा लंड उसकी बुर में घुस चुका था लेकिन हलवाई की बीवी को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे कोई गरम रोड उसकी बुर में पूरी तरह से घुस गया हो और उसमें बिल्कुल भी जगह नहीं बची थी अंदर लेने के लिए,,,, इसलिए तो हलवाई की बीवी आश्चर्य से बोली,,,

पूरा घुस गया क्या,,,?

नहीं चाची अभी थोड़ा बाकी है,,,,

कितना बाकी है रे मेरी बुर में तो जगह ही नहीं बची,,,( इतना कहकर वो फिर से अपनी गर्दन उठा कर अपनी टांगों के बीच की स्थिति का जायजा लेने के लिए अपनी नजर वहां पर दौड़ आने लगी तो उसे इस बात का एहसास हुआ कि शुभम का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में पूरी तरह से घुसा हुआ था और अभी भी लगभग 3 इंच जैसा बाकी था,,,,,)

बाप रे बाप तेरा लंड तो लगता है मेरी बुर फाड़ देगा मेरी बुर में करे लंड को लेने के लिए जगह नहीं बची है,,,

जगह तो बनाई जाती है चाची इतना कहने के साथ ही रघु एक बार फिर से हलवाई की बीवी की कमर को अपनी दोनों हथेलियों में कस के दबोच कर एक जबर्दस्त प्रहार किया और इस बार उसका लंड का सुपाड़ा बुर की अंदरूनी अड़चनों को चीरता हुआ सीधा जाकर उसके बच्चेदानी से टकरा गया,,,

आहहहहहहह,,,,, मर गई रे,,,,,( इतना कहने के साथ ही वह छटपटाने लगी जो दर्द से बिलबिला उठी थी उसे यह दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था अब वह सच में यही चाहती थी कि रघु अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाल ले,,,, रघु कहां मानने वाला था जवानी के जोश से भरा हुआ था पहली बार उसे चोदने के लिए मलाईदार बुर जो मिली थी वह अपने लिंग को उसकी बुर से निकालने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था बस थोड़ा सा ठहर गया था और पहले की ही तरह एक बार फिर से उसकी दोनों चूचियों को हाथ में पकड़ कर दबाते हुए इस बार उसे मुंह भर कर पीना शुरू कर दिया,,,, जिससे थोड़ी ही देर में एक बार फिर से हलवाई की बीवी को मजा आने लगा और उसके मुंह से हल्की हल्की सिसकारी की आवाज आने लगी ,,, रघु पूरी तरह से उसके ऊपर लेटा हुआ था और हलवाई की बीवी अपनी दोनों टांगों को छीतराए हुए थी,,, उसकी गरम सिसकारी की आवाज सुनकर रघु का हौसला बढ़ने लगा और वह हल्के हल्के अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया अब बड़े आराम से उसका लंड बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,,

पूरी तरह से आनंद में डूबकर हलवाई की बीवी रघु की नंगी पीठ पर अपने हाथ फेरने लगी उसे मजा आने लगा देखते ही देखते रघु की कमर जोर से ही ना शुरू कर दी,,,।

कमर को हिलाते होगे कब वह धक्के लगाने लगा या उसे पता ही नहीं चला उसके धक्के बढ़ने लगे वह बड़ी तेजी से हलवाई की बीवी की बुर में धक्के लगा रहा था और हर धक्के के साथ पूरी खटिया चरमराने लगी थी,,, चररर मरररर,,,चररर,,,मरररर,,,, की आवाज और गर्म सिसकारियों से पूरा घर गूंजने लगा,,,

ओहहहहहह,,, मेरी राजा बहुत मजा आ रहा है तेरा लंड सीधे मेरे बच्चेदानी पर ठोकर मार रहा,,,, और जोर जोर से धक्के लगा,,,आहहहहहहह,,,आहहहहहहह,,,,

( उसकी यह सब बातें सुनकर रघु का जोश बढ़ता जा रहा था और वह बड़ी तेजी से अपना कमर हिला रहा था हलवाई की बीवी के बच्चेदानी से टकराने वाली बातों से समझ में नहीं आई थी और ना ही वह कुछ जानना चाहता था लेकिन वह इतना जरूर जानता था कि अगर वह और जोर जोर से धक्के लगाएगा तो खटिया टूट जाएगी इसलिए वह शंका जताते हुए बोला,,,,।)

ओहहहहहह,,, चाची कहीं तुम्हें पेलने में तुम्हारी खटिया ना टूट जाए,,,,,

नहीं टूटेगी मेरे राजा शीशम की लकड़ी से जो बनवाई है तेरे हर धक्के को मेरे साथ साथ मेरी खटिया भी झेल जाएगी बस तो धक्के लगाता रे,,,,

( हलवाई की बीवी के मुंह से हौसला अफजाई वाली बात सुनकर रघु दुगने जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया वह बड़ी जोर जोर से हलवाई की बीवी की दोनों चूचियों को पकड़ कर मसल ता हुआ अपनी कमर हिला रहा था,,,ठप्प ठप्प,,, की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था हलवाई की बीवी की मोटी मोटी जांघों से जब जब रघु की जान रख रही थी तब तब उसमें से मधुर संगीत की आवाज गूंज रही थी साथ ही उसकी गरम सिसकारियां और उसकी चूड़ी की खनक पूरे माहौल को मादकता प्रदान कर रही थी,,,।

रघु पागल हुए जा रहा था आज उसे पता चला था कि जुदाई में कितना आनंद मिलता है जो दुनिया में कहीं नहीं मिलता वह हर धक्के के साथ हलवाई की बीवी की चुचियों को जोर से मसल दे रहा था जिससे उसकी आह निकल जा रही थी,,,,,

देखते ही देखते दोनों चरमसुख के करीब पहुंचने लगे हलवाई की बीवी की सिसकारियां तेज होती जा रही थी और रघु पागलों की तरह अपनी कमर हिला रहा था वह अपनी दोनों हाथों को हलवाई की बीवी के पेट के नीचे से लाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया वह उसे अपने सीने से लगा लिया उसकी निर्धन धर्म चूचियां उसके सीने पर ठोकर मारने लगी और इस बार रघु अपनी हिम्मत दिखाते हुए,,, अपने होठों को हलवाई की बीवी के गुलाबी रखते हुए होंठ पर रखकर उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया यह भी हलवाई की बीवी के लिए बिल्कुल नया था आज तक उसके होठों को उसके पति ने भी नहीं चुसा था,,, एक तरह से उसका आदमी इतनी खूबसूरत बेबी होने के बावजूद भी संभोग कला से बिल्कुल विमुख था,,, वहीं पर रघु पहली बार में ही औरतों को कैसे खुश किया जाता है इस कला में निपुण होने लगा था देखते ही देखते जिस तरह से रघु उसके गुलाबी होठों को चूस रहा था उसी तरह से वह भी रघु के होठों को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू कर दी थी यह उसके लिए पहला अनुभव था और बेहद आनंददायक था,,, उसे इस तरह के चुंबन में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और वह भी पागलों की तरह उसका साथ दे रही थी,,,,।

काम भावना के वशीभूत होकर हलवाई की बीवी पूरी तरह से मदहोश होकर रघु के पूरे तन पर अपना हाथ फेर रही थी,,,। देखते ही देखते चरम सुख के बेहद करीब पहुंचकर वह अपने दोनों हाथों से लोगों के नितंबों को पकड़कर उसे अपनी बुर पर दबाना शुरू कर दी,,,,

ओहहहहह,, रघु मेरे राजा ऐसे ही चोद ऐसे ही जोर जोर से धक्के लगा,,,आहहहहहहह,,,,,आहहहहहहह,,,,, फाड़ दे मेरी बुर को रघु मेरी बुर का भोसड़ा बना दे,,,,आहहहहह,,,आहहहहह,,, मेरा होने वाला है मेरा होने वाला है रघु,,,,,,,,ओहहहहहहह, रघु,,,,,आहहहहहहह,,,,

( इतना कहने के साथ ही हलवाई की बीवी चरम सुख के अंतिम क्षण में रघु के जबरदस्त धक्कों के आगे ठहर नहीं पाई और भल भला कर झड़ने लगी,,,,,)

ऊऊऊमममम,,,ऊमममममम,,,,,( इतना कहते हुए वह जोर से रघु को अपनी बाहों में कस ली,,, उसकी बुर से मदन रहने लगा था लेकिन अभी भी रघु बरकरार था,,, इसलिए वह हलवाई की बीवी के ऊपर से उठा और घुटनों के बल बराबर बैठ कर हलवाई की बीवी को कमर से पकड़ कर उसे अपनी जांघों पर खींच लिया,,,, और बिना रुके चुदाई करना शुरू कर दिया अब उसे खटिया टूटने का डर बिल्कुल भी नहीं था और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया और देखते ही देखते 10 15 धक्कों के बाद वह भी झड़ने लगा,,,, रघु कैलेंडर से निकले हुए गरम लावा को अपनी बुर के अंदरूनी दीवारों पर महसूस करके हलवाई की बीवी एकदम तृप्त होने लगे और एकदम से मस्त हो गई,,,,

झड़ने के बाद रघु हलवाई की बीवी के ऊपर ही लेटा रहा,,,,

वासना का तूफान शांत हो चुका था जिंदगी में पहली बार अद्भुत तृप्ति का अहसास से पूरी तरह से भर चुकी थी हलवाई की बीवी चुदाई का असली मजा उसे रघु के साथ आया था,,,, और रघु की जिंदगी में पहली बार हलवाई की बीवी की चुदाई करके इतना मस्त हो चुका था कि उस पर मदहोशी अभी तक छाई हुई थी उसे इस बात का एहसास हो गया कि औरत की चुदाई से ज्यादा सुख और कहीं नहीं मिलता वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था हलवाई की बीवी पूरी तरह से थक चुकी थी उसकी आंखों में नींद भरी हुई थी और वह सोने लगी थी लेकिन सूचियों की गर्माहट और रसीली बालू अलीपुर देखकर एक बार फिर से रघु गर्म होने लगा,,,,। खटिया पर लेटी हुई हलवाई की नंगी बीवी को देखकर उसका लंड खड़ा होने लगा और वह एक बार फिर से हलवाई की बीवी की टांगों के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी बुर के अंदर डालना शुरू कर दिया,,,।

हलवाई की बीवी पूरी तरह से नींद में थी लेकिन अपनी बुर के अंदर मोटा लंड प्रवेश करते ही उसकी नींद खुल गई और वह एक बार फिर से रघु को अपनी बाहों में ले ली,,, एक बार फिर से रघु की कमर चलने लगी एक बार फिर हलवाई की बीवी तृप्ति के एहसास में डूबने लगी सुबह होने तक रघु उसके तीन बार जमकर चुदाई कर चुका था और उजाला होने से पहले युवा उसके घर से बाहर निकल गया हलवाई की बीवी उसी तरह से निर्वस्त्र हालत खटिया पर बेसुध होकर होती रही,,, पंछियों की कलकलाहट की आवाज से जब उसकी नींद खुली तो अपनी हालत देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई कोई जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहनने लगी,,,।
 
रघु की जिंदगी की सबसे बेहतरीन रात गुजर चुकी थी,,,। आज की रात के बाद से उसकी जिंदगी की नई शुरुआत हो रही थी इस रात ने रघु को एकदम से बदल कर रख दिया था,,, उसके सोचने समझने का तरीका एकदम से बदल गया था,,,। जिंदगी में पहली बार वह औरत के बदन के हर एक पन्ने को अपने हाथ से एक-एक करके खोल कर उनका अध्ययन जो कर चुका था स्कूल की किताबों से शायद उसका कोई वास्ता नहीं था लेकिन औरत के जिस्मानी शब्दों को वह भली-भांति समझ गया था,,, रघु काफी खुश नजर आ रहा था वह अपने खेतों में इधर से उधर घूम रहा था,,, हालांकि अभी भी वह अपने घर नहीं गया था,,।

हलवाई की बीवी ने अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन और संतुष्टि भरी रात गुजारी थी,, जिसकी कसक अभी तक उसके बदन में महसूस हो रही थी,,। रघु के एक-एक जबरदस्त धक्के को याद करके मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,। उसने कभी जिंदगी में नहीं सोची थी कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर उसे इस तरह से एक अद्भुत सुख का अनुभव होगा,,,। रघु के साथ रात गुजारने का उसे बिल्कुल भी मलाल नहीं था,,। भले ही वह अपने पति को धोखा दे चुकी थी लेकिन जिंदगी का बेहतरीन सुख उसने प्राप्त की थी,,,।

कजरी काफी परेशान थी सुबह हो चुकी थी लेकिन रघु का कहीं भी अता पता नहीं था,,,। उसके मन में बहुत घबराहट हो रही थी सालों में बार-बार रघु के बारे में कजरी से पूछना चाहे लेकिन कजरी बात को टाल ले गई आखिरकार उसके पास शालू को बताने लायक बात ही नहीं थी बताती भी तो क्या बताती कि उसका भाई उसे पेशाब करते हुए देख रहा था सोच कर ही उसे बहुत बुरा लग रहा था अगर वह यह बात अपनी बड़ी बेटी शालू से बताती तो वह उसके बारे में क्या सोचते हैं इसलिए वह बात को आई गई कर गई,,,। रघु के प्रति वह काफी चिंतित नजर आ रही थी इसलिए उसे खेतों पर जाने की इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही थी लेकिन जानवरों के चारे के लिए घास तो लाना ही था। इसलिए इच्छा ना होने के बावजूद भी वह खेतों की तरफ निकल गई,,,

अरे कजरी कहां जा रही है घास करने रुक जा मैं भी आती हूं,,,,( कजरी जैसे ही ललिया के घर के सामने से गुजरी वैसे ही पीछे से ललिया उसे आवाज देकर रोकने लगे क्योंकि उसे भी घास काटने जाना था वह जल्दी से घर में से टोकरी और घास काटने का औजार लेकर निकल पड़ी,,,। कजरी रघु के बारे में ही सोच रही थी इसलिए ललिया के इस तरह से आवाज देने के बावजूद वह उस पर गौर नहीं की और चलती रही और ललिया लगभग भागते हुए कजरी के करीब पहुंच गई और हांफते हुए बोली,,,।)

क्या हुआ कजरी तुम्हारी आवाज सुने नहीं क्या मैं तेरा इंतजार कर रही थी और तू है की भागी चली जा रही है,,।

नहीं कुछ नहीं बस थोड़ा सा तबीयत ठीक नहीं है,,,।

अरे क्या हुआ तेरी तबीयत को,,,( कजरी के माथे पर अपना हाथ लगाकर,,,।) बुखार तो बिल्कुल भी नहीं है,,,।

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है ललिया बस थोड़ा सा सर दर्द कर रहा था,,,।

तो तुझे घर पर आराम करना चाहिए था ना शालू को भेज दी होती,,,।

कोई बात नहीं मैं कर लूंगी,,,।

अच्छा रामू कहां है आज सुबह से नजर नहीं आया रघु के साथ तो नहीं है,,,

( कजरी जानबूझकर रामू के बारे में पूछ रही थी ताकि अगर रघु उसके साथ हो तो पता चल सके,,,।)

नहीं रामू तो सो रहा है,,,।

चल कोई बात नहीं ,,,,(इतना कहकर कजरी अपने कदम खेतों की तरफ बड़ा ही चली जा रही थी और साथ में ललिया भी उसके साथ हो चली थी,,, कजरी का मन उदास था लेकिन मनके उदास होने के बावजूद भी वह अपनी चाल में उदास पन ला नहीं पा रही थीं,,,, उसकी चाल मतवाली थी,,, उसकी मतवाली चाल पर उसके मन के उदासपन का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ रहा था,,, कजरी के बदन का हर एक ऐसा निश्छल और चंचल था जिस पर किसी भी प्रकार का लगाम नहीं था इस तरह से कजरी की मद मस्त जवानी भरा संपूर्ण बदन बेलगाम था,, और शायद इसीलिए इस उम्र में भी कजरी के बदन के हर एक अंग से जवानी की मधुर धारा फूट पड़ती थी,,। यही कारण था कि इस समय आते जाते सबकी नजर कजरी की मद मस्त जवानी पर टिकी हुई थी,,, उसके नितंबों का उठाव और घेराव इतना जबरदस्त था कि ना चाहते हुए भी उस पर सब की नजर पड़ ही जाती थी और कजरी की चूचियां तो कमाल की थी मानो उच्च किस्म की बड़ी-बड़ी दशहरी आम उसके ब्लाउज में भर दी गई हो,,,, जिसे अपने हाथों में लेकर दबा दबा कर पीने का मन गांव के हर मर्द का करता था और उनका यह सपना भी था,,,,।

चिंताओं से घिरे होने के बावजूद भी कजरी की चाल में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आ रही थी,,, कच्ची सड़क पर चलते हुए वह दूर-दूर तक नजर घुमाकर रघु को ही तलाश कर रही थी,,। ललिया भी अपनी ही मस्ती में चली जा रही थी तभी उसका खेत आ गया और वह कच्ची सड़क से नीचे उतर गई,,, तकरीबन 20 30 कदम की दूरी पर कजरी का खेत था और वह भी कच्ची सड़क उतरकर अपने खेत में हरी हरी घास काटने के लिए उतर गई,,,,

वह टोकरी लेकर हरी हरी घास के बीच बैठ गई और घास काटने लगी लेकिन घास काटते समय भी वह अपनी नजरों को इधर-उधर दौड़ाकर रघु को देखने की कोशिश कर ले रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार रात भर से रघु गायब था कहां चला गया इस बारे में उसे बिल्कुल भी पता नहीं था,,,। वह अपने मन में सोचने लगी कि उसने अपने बेटे को इस तरह से डांट कर बहुत बड़ी गलती कर दी है कहीं कुछ हो गया तो वह अपनी ही नजरों में गिर जाएगी इस कल्पना से ही उसका दिल दहल उठा रहा था,,,। अपने मन को तसल्ली देते हुए अपने आप को ही बोल रही थी कि अगर वह देख भी लिया तो क्या हो गया,,,। इस तरह से तो कई लोग की नजर पड़ जाती होगी वह दुनिया में अकेला नहीं था जो अपनी मां को पेशाब करते हुए देख लिया था पैसे कहीं लड़के होंगे जो अपनी मां को जानबूझकर या अनजाने में पेशाब करते हुए देखे ही लेते होंगे या कपड़े पहनते हुए नहाते हुए किसी भी प्रकार से नग्न अवस्था में उनकी नजर पड़ी जाती होगी तो इसका मतलब यह तो नहीं कि अपने ही बेटे को इस तरह से डांट फटकार कर घर से निकाल दिया जाए,,,,। नहीं नहीं अब वह आ गया तो मैं उससे माफी मांग लूंगी और ऐसी गलती दोबारा मुझसे नहीं होगी यह भी कह कर उसे मना लूंगी आखिर वह मेरा राजा बेटा है उसी का तो सहारा है,,,। कजरी यही सब अपने आप से बातें करते हुए अपने मन को तसल्ली दे रही थी कि तभी रघु नदी की तरफ से उसे आता हुआ नजर आया,,,, और वह रघु को देखते ही खुश हो गई और जोर जोर से रखो को आवाज देने लगी,,,, रघु भी अपनी मां की आवाज को सुन रहा था वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके बिना नहीं रह सकती और वह भी अपनी मां के बिना नहीं रह सकता था आखिरकार गुस्सा कर कितने दिन वह दूर रह सकता है एक न एक दिन तो उसे लौटकर घर पर आना ही था,,,, लेकिन वह यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसकी मां उसे डांट फटकार कर दूर नहीं भगाई होती तो कल की रात वह हलवाई की बीवी के खूबसूरत बदन से खेलते हुए उसकी चुदाई नहीं कर पाता,,, आखिरकार उसे यह बात अच्छी तरह से समझ में आ रही थी कि मां की डांट फटकार भी बच्चे के लिए फायदेमंद होती है,,,। और यह देख भी लिया था कि उसकी मां की डांट फटकार उसके लिए आशीर्वाद साबित हुई थी वरना वह अपनी जवानी का खाता ना खुलवा चुका होता,,।

अभी भी कजरी उसे आवाज देकर बुला रही थी और रघु उसकी तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था लेकिन जैसे-जैसे अपनी मां की तरफ आगे बढ़ता चला जा रहा था वैसे वैसे उसके जेहन में बसा वह दृश्य उसके मन मस्तिष्क पर उधर ने लगा था,,,,। हलवाई की बीवी के साथ पहली बार संभोग सुख भोगने के बाद से उसका नजरिया हर औरत के लिए बदलने लगा था,,, वैसे तो पहले भी उसका यही हाल था लेकिन जब से वह हलवाई की बीवी के नंगे बदन को देखकर उसके नंगे बदन के हर एक अंग से खेल कर उसकी चुदाई किया था तब से अब हर औरत के प्रति उसका नजरिया बदलता जा रहा था इसलिए तो वह जैसे जैसे अपनी मां के करीब बढ़ता जा रहा था जैसे वैसे उसकी आंखों के सामने,,, उसकी मां की नंगी गांड और उसकी बुर में से निकलती हुई पेशाब की तेज धार नजर आने लगी थी और यह दृश्य उसके मन में उभरते ही उसके लंड का तनाव बढ़ना शुरू हो गया था,,, बार-बार वह अपने मन को दूसरी तरफ भटकाने की कोशिश कर रहा था लेकिन ऐसा उसके लिए शायद मुमकिन नहीं हो पा रहा था,,,, पहली बार में ही वह अपनी मां की नंगी गांड के आकर्षण में पूरी तरह से बंध चुका था।

वह धीरे-धीरे खेतों में खड़ी अपनी मां के करीब पहुंच गया और उसकी मां एक पल की भी देरी किए बिना उसे अपने गले से लगा ली,,,,,। पल पल भर में ही उसके पूरे चेहरे पर चुंबनों की बारिश कर दी,,, हलवाई की बीवी के नंगे बदन का मजा चख चुका रघु अपनी मां के इस तरह से चुंबन लेने पर पल भर में ही पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,,, एक पल के लिए तो उसके जी में आया कि वह भी अपनी मां को बाहों में लेकर उसे चुंबन से नहला दे और उसकी गदर आई जवानी को खेतों में लेटा कर निचोड़ ले,,,,। लेकिन अभी इतनी हिम्मत उसके में नहीं थी कि वह इस तरह की मनमानी अपनी मां के साथ कर सके वह बूत बना अपनी मां के चुंबन होता मजा ले रहा था और चुंबनो के बाद कजरी उसे अपने गले से अपने सीने से लगा ली,,,, कजरी के सीने से लगते ही रघु के तन बदन में शोले भड़क में लगे उसका पूरा वजूद उत्तेजना की लहर में कांप गया,,,, क्योंकि जिस तरह से कजरी ने उसे अपने सीने से भींचते हुए गले लगाई थी,,, उससे कजरी की भारी-भरकम चूचियां रघु के सीने से रगड़ खा रही थी और उसकी तनी हुई निप्पल उसके सीने में चुप रही थी जिसकी चुभन को वह अच्छी तरह से अपनी छातियों पर महसूस कर रहा था,,,, उत्तेजना के बारे में पूरी तरह से गनगना गया था,,,, पर अपनी मां की इस हरकत की वजह से उसे अपने पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा होता हुआ महसूस हो रहा था,,, और उसे यह भी साथ महसूस हो रहा था कि उसके भेजा मैंने उसका खड़ा लंड तंबू की शक्ल लेकर उसकी मां की टांगों के बीच ठीक उसकी बुर वाली जगह पर ठोकर मार रहा था,,,। उसे इस बात का पता तो नहीं था कि उसकी मां को उसके तंबू के कठोर पन का एहसास अपनी बुर पर हो रहा है कि नहीं लेकिन,,, इतने से ही रघु का पूरा वजूद हिल गया था उसका ईमान डोल ने लगा था,,,,। कजरी अभी भी रघु को अपने गले से लगाए उसे दुलार कर रही थी,,, व खेतों के बीचो बीच खड़ी थी लेकिन लंबी लंबी जंगली झाड़ियां होने की वजह से,, उन दोनों को कोई भी नहीं देख पा रहा था रघु तो एकदम मस्त हुआ जा रहा था वाशी तरह से समझ गया था कि औरत की चुदाई का सुख क्या होता है तभी तो वह अपनी मां के खूबसूरत बदन के आकर्षण में पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था उसे बराबर महसूस हो रहा था कि उसके पेंट में बना तंबू उसकी मां की टांग के बीच उसकी गुरु पर ही दस्तक दे रही है लेकिन अपने बेटे को दुलार करने में कजरी को शायद इस बात का अहसास तक नहीं हो पा रहा था कि उसके गुप्तांगों को उसके बेटे का गुप्त अंग स्पर्श कर रहा है एक तरह से कपड़ों के ऊपर से ही शुभम का मोटा तगड़ा लंड अपनी मां की कसी हुई बुर का चुंबन कर रहा था,,,,।

रघु पूरी तरह से उत्तेजना के आवेश में आ चुका था और वह भी अपने हाथ को अपनी मां की पीठ पर रखकर अपना प्यार दर्शा रहा था,,,,।

कहां चला गया था बेटा तू तुझे देखने के लिए मेरी आंखें तरस गई थी,,,( कजरी अपने बेटे को पाकर एकदम से रोते हुए बोली,,,।)

यही था मां तु मुझसे नाराज थी ना इसलिए,,,,( इतना कहते हुए रघु अपनी मां की पीठ पर अपनी हथेली को फेर रहा था,,,।)

अगर आज तो नहीं आता बेटा तुम्हें मर जाते मैं तुझसे बिछड़ना नहीं चाहते मैं तुझसे गुस्से में बोल गई थी इसका मतलब यह नहीं था कि तू मुझसे दूर चला जाए,,,,।

नहीं मम्मी कहीं नहीं जाऊंगा तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा,,,,( रघु पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था वह अपनी मां को बाहों में समाया हुआ था,,,, उसके तन बदन को उसकी मां की खूबसूरत बदन से उठती हुई मादक खुशबू बेहाल कर रही थी,,,,।)

मुझसे वादा कर रघु तु मुझे छोड़कर कभी नहीं जाएगा भले मैं तुझे कितना भी डाटु या मारु तुम मुझे छोड़कर कहीं नहीं जाएगा,,,,,( इतना कहते हुए कजरी लगातार रोए जा रही थी और दूसरी तरफ रघु पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा,,, था,,,)

मैं कहीं नहीं जाऊंगा मैं तुमसे वादा करता हूं कहीं नहीं जाऊंगा,,,,( इतना कहते हुए रघु पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और वह अपने दोनों हथेली को अपनी मां की चिकनी कमर से होता हुआ उसे नीचे की तरफ उसके नितंबों के उभार पर ले गया और उसे अपने हथेली में भरकर हल्के से दबाता हुआ अपनी तरफ खींच लिया जिससे इस बार उसके लंड की ठोकर कजरी को अपनी बुर की नर्म दीवारों पर एकदम बराबर महसूस हुई और वह एकदम से सकते में आ गई,,, रघु पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और अपनी मां को कहीं ना जाने का दिलासा देते हुए एक बार फिर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में लेकर उसे दबाता हुआ फिर से अपनी तरफ खींच लीया,,,। इस बार कजरी एकदम से घबरा गई क्योंकि अपनी दूर पर लगने वाली ठोकर को वह समझ नहीं पाई थी कि यह चुभन कैसा है,,, लेकिन दूसरी बार जब रघु ने उसके नितंबों को अपनी हथेली में दबोच ते हुए अपनी तरफ खींचा तब जाकर उसे साफ महसूस हुआ कि उसकी टांगों के बीच होने वाली चुभन किसी और चीज की नहीं बल्कि उसके बेटे के खड़े लंड की है,,,,। पल भर में ही कजरी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी शर्म के मारे उसका चेहरा लाल हो गया,,,, वह अपने आप को अपने बेटे की बाहों से अलग करते हुए बोली,,,।)

रघु तू पहले घर पर जाकर नहा ले और खाना खा ले कल से तू कुछ नहीं खाया नहीं है,,,।

नहीं मां मैं तुम्हारे साथ चलूंगा मैं भी कुछ देर यही काम कर लेता हूं,,,।

नहीं रघु तू मेरी बात मान पहले जाकर के अच्छे से नहा ले खाना खाकर फिर मेरे लिए भी तू खाना लेकर आ जाना तब तक मैं यही हुं।
 
रघु घर जाने के लिए तैयार हो गया,,, वैसे उसे भूख भी लगी थी,,,, वह घर की तरफ निकल गया आज पहली बार हुआ है अपनी मां के नितंबों पर हाथ लगाया था जिसकी गर्माहट का अहसास उसे अभी तक अपने हथेली के साथ-साथ संपूर्ण बदन में हो रहा था,,, और तो और पहली बार उसके पेंट में बना तंबू उसकी मां की टांगों के बीच की मखमली बुर के ऊपर ठोकर लगाई थी जिसकी वजह से वह अपने तन बदन में अत्याधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसे यह तो पता नहीं चला कि उसकी मां को इस बात का एहसास हुआ कि नहीं लेकिन इतने में ही उसे पूरी तरह से मस्ती छा गई थी,,,। इतना तो रखो समझ ही गया था कि हलवाई की बीवी की बड़ी-बड़ी गांड से उसकी मां की गांड छोटी ही थी,,, लेकिन बेहद भरावदार और सुडोल थी,,, एक खूबसूरत और भरे हुए बदन की औरत के पास जिस तरह की मदमस्त गांड होनी चाहिए थी ठीक वैसे ही गांड उसकी मां के पास थी जिसकी वजह से रघु पूरी तरह से लालायित हो गया था अपनी मां की नंगी गांड को देखने के लिए लेकिन शायद अब यह बिल्कुल मुमकिन नहीं था,,,। इतना उसके लिए काफी था कि आज गले मिलने के बहाने ही सही वह अपनी मां के नितंबों को साड़ी के ऊपर से स्पर्श तो कर पाया था,,, साथ ही उसकी नरम नरम खरबूजे जैसी चूचियों की चुभन को अपने सीने पर महसूस भी किया था,,,।

कजरी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि पल भर में ही यह क्या हो गया जिस तरह की चुभन वह अपनी मखमली बुर के ऊपर महसूस की थी क्या सच में उसके बेटे का लंड बेहद तगड़ा है,,,। क्या रघु ने अपनी हथेली को जानबूझकर उसकी गांड पर रखकर दबाया था या अनजाने में हो गया था,,, कजरी यही सब अपने मन में सोच रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि रघु की हरकत का क्या निष्कर्ष निकाला जाए,,। कजरी को अच्छा तो नहीं लग रहा था रघु के द्वारा इस तरह की हरकत करना लेकिन जो कुछ भी हुआ था ना जाने क्यों उसके तन बदन में आग सी लग गई थी,,,। वह अपने बेटे को दुलार करते हुए गले से तो लगाई थी लेकिन उसके बाद जिस तरह की हरकत रघु ने किया था वह उसे सोचने पर मजबूर कर गया था क्योंकि एक तरह से रघु उसे अपनी बाहों में भर लिया था और अपनी हथेली को उसके संपूर्ण बदन पर इधर से उधर घुमा भी रहा था और दुलार करते समय ना जाने कब उसकी हथेली उसकी बड़ी बड़ी गांड पर आ गई यह उसे पता भी नहीं चला लेकिन अगर यह सब अनजाने में हुआ तो रघु ने उसके नितंबों पर अपनी हथेली का दबाव बनाकर अपनी तरफ क्यों खींचा और तो और वह अपनी टांगों के बीच की चुभन को बराबर महसूस की थी और अच्छी तरह से समझ रही थी कि वह कठोर चीज उसकी मखमली द्वार पर ठोकर मारने वाली कौन सी चीज थी कजरी अच्छी तरह से जानती थी की साड़ी के ऊपर से भी एकदम बराबर अपनी ठोकर को महसूस कराने वाली चीज उसके बेटे का खड़ा लंड था,,, पर एक औरत होने के नाते वह यह बात भी अच्छी तरह से जानती थी कि एक मर्द का लंड कब और किस कारण से खड़ा होता है और यही बात समझ में नहीं पा रही थी कि क्या वाकई में उसका बेटा उसके गले लगते ही पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था जो उसका लैंड खड़ा हो गया और उसी उत्तेजना बसवा उसके नितंबों को पकड़कर अपनी तरफ खींचा था नहीं नहीं यह गलत है मेरा बेटा ऐसा नहीं हो सकता यह सब अनजाने में हुआ था,,, और कजरी अपने मन को झूठी दिलासा देते हुए उस और से अपना ध्यान हटाकर काम में लगा दी और वापस घास काटने लगी,,,

दूसरी तरफ रघु घर पर पहुंच चुका था उसे बहुत जोरों की भूख लगी थी,,,। नहाने से पहले वह खाना खा लेना चाहता था,,,। इसलिए वह अपनी बहन को ढूंढता हुआ अंदर के कमरे में जा पहुंचा,,, जहां पर कजरी अपने ही मस्ती में मगन होकर अपने गीले बालों को कंघी से सवार रही थी,,,। और दरवाजे पर पहुंच कर रघु के पांव वहीं के वहीं जम गए और वह अपनी बहन को आंख फाड़े देखता ही रह गया,,,, क्या करें सामने का नजारा ही कुछ इतना जबरदस्त और गर्म था कि वह अपनी नजरों को हटा नहीं पाया वैसे तो सालों के लिए बेहद औपचारिक ही था लेकिन जवान हो रहे रघु के लिए पूरी तरह से उत्तेजना से भर देने वाला दृश्य था क्योंकि अभी अभी शालू नहाकर घर में आई थी और सिर्फ अपने बदन पर कुर्ती ही पहन रखी थी बाकी नीचे सलवार नहीं पहनी थी नीचे से वह पूरी तरह से नंगी थी और कुर्ती भी उसकी कमर से बस 2 इंच तक ही आती थी जिससे शालू के समस्त नितंबों का भूगोल रघु की आंखों के सामने उजागर हो रहा था,,। क्योंकि शालू की पीठ रघु की तरफ थी रघु तो अपनी बहन की मदमस्त गोरी गोरी गांड और उसकी चिकनी लंबी टांगों को देखकर एकदम मस्त हो गया वह भी भूल गया कि उसकी आंखों के सामने कोई दूसरी लड़की नहीं बल्कि उसकी बड़ी बहन है,,,। लेकिन यह आखों को कहा पता चलता है कि सामने अर्धनग्न अवस्था में कौन है बस उसे तो अपने अंदर गर्माहट महसूस करने से ही मतलब रहता है और वही हो भी रहा था,,,।

हलवाई की बीवी की चुदाई के बाद उसे रघु का नजरिया एकदम से बदल गया था वरना वह इस तरह से आंख पानी अपनी बहन को अर्धनग्न अवस्था में नहीं देखता रहता बल्कि वहां से चला जाता,,। वैसे भी कुछ देर पहले ही वह अपनी मां के गले लग कर उसके नितंबों को अपनी हथेली में दबा दिया था जिसकी गर्माहट को वह अभी तक अपने तन बदन में महसूस कर रहा था। उस पल की सनसनाहट अभी तक उसके बदन से दूर हुई नहीं थी कि उसकी आंखों के सामने एक बार फिर से बेहद गर्म नजारा देखते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,।

आज पहली बार वह अपनी बहन को इस अवस्था में देख रहा था पूरा जाकर पता चला था कि उसकी बहन कितनी खूबसूरत और मादक जिस्म की मालकिन है,,,। अपनी बहन की गोरी गोरी गांड और उसकी बीच की गहरी फांक को देखकर पूरी तरह से मदहोश होने लगा,,,। उसकी चीन में तो आ रहा था कि कमरे में जाकर पीछे से अपनी बहन को अपनी बाहों में भर ले और अपना खड़ा लैंड उसकी मुंह में डालकर उसकी चुदाई कर दे क्योंकि एक बार हलवाई की बीवी की चुदाई करके उसे अब पता चल गया था कि औरत को कैसे चोदा जाता है और उन्हें कैसे खुश किया जाता है लेकिन अभी वह अपनी बहन के साथ यह नहीं कर सकता था हालांकि करने का मन करने लगा था,,,।

तभी अपनी ही मस्ती में बालों को संभाल रही सालू को इस बात का एहसास हुआ कि उसके पीछे कोई खड़ा है तो वह पीछे नजर घुमा कर देखी तो दरवाजे पर रघु खड़ा था और उसे देखते ही वह पूरी तरह से हड़बड़ा गई और अपने नंगे बदन को ढकने की कोशिश करने लगी,,, तभी बिस्तर पर से चादर को खींचकर व अपने नंगे तन को छुपा ली,,,,। अपनी बहन की हड़बड़ाहट देखकर रघु समझ गया कि ज्यादा देर तक खड़ा रहना ठीक नहीं है इसलिए वह वहां से वापस लौटते हुए बोला,,,।

दीदी जल्दी से खाना निकाल दो मैं नहा कर आता हूं और मां के लिए खाना भी ले जाना है,,,। ( इतना कह कर रघु नहाने के लिए चला गया और शालू जल्दी से अपनी सलवार ढूंढ कर उसे पहन ली,,,। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह भी पहली बार अपने छोटे भाई की आंखों के सामने इस अवस्था में खड़ी थी उसे इस बात का एहसास तो हो ही गया था कि जिस तरह से वह दरवाजे की तरफ पीठ करके अपने बालों को संभाल रही थी उसका भाई जरूर उसकी गोरी गोरी गांड को देख ही लिया होगा,,, और यह एहसास उसके तन बदन को पूरी तरह से झकझोर गया,,,। आईने में अपनी शक्ल को देखकर वह शरमा गई,,,। लेकिन तभी उसे वह पल याद आ गया जब वह अपने भाई को जगाने के लिए उसके कमरे में गई थी और उसका भाई बेसुध होकर सो रहा था जिसकी वजह से उसका लंड बाहर निकल कर पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और उसके खड़े मोटे तगड़े लंड को देखकर शालू के तन बदन में आग लग गई थी,,,,। उस पल के बारे में सोच कर शालू को ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके भाई ने उस दिन वाली बात का उससे बदला ले लिया हो उस दिन उसने उसके नंगे लंड को देखी थी और आज वह उसकी नंगी गांड को देख लिया था,,

थोड़ी ही देर में शालू रसोई के पास आकर अपने भाई के लिए खाना परोस कर वहीं बैठी रही और रघु नहाने के लिए लकड़ी के बने झुग्गी जैसे स्नानघर में घुस गया था अंदर पहले से ही दो बाल्टी पानी भर के रखा हुआ था,,। रात भर हलवाई की बीवी की चुदाई और सुबह अपनी मां के नितंबों का गर्माहट भरा स्पर्श और घर में अपनी बहन की मदमस्त नंगी गांड को देख कर रघु पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और स्नान घर में घुसते ही वह अपने सारे कपड़े उतार कर अपनी खड़े लंड पर साबुन लगा कर ऊसे हिलाना शुरू कर दिया था,,,,। और अपने लंड को हिलाते हुए रघु रात भर और अभी तक के सारे दृश्य के बारे में सोचने लगा था बार-बार उसकी आंखों के सामने हलवाई की बीवी का नंगा बदन उसकी मां की बड़ी-बड़ी नितंब और शालू की गोरी गोरी गाना नजर आ रही थी जिसमें कल्पना करते हुए बारी-बारी से अपना लंड पल रहा था काफी उत्तेजना का अनुभव करते हुए थोड़ी ही देर में रघु के लंड ने पानी का फव्वारा फेंक दिया,,,, अपनी गर्मी शांत करते हुए वह जल्दी से नहा कर स्नान घर से बाहर आ गया।

जल्दी से कपड़े पहन करवा खाने के लिए बैठ गया,,, और उसके खाना खाने के लिए बैठते ही शर्म के मारे शालू वहां से उठकर अंदर कमरे में चली गई,,,, अपने भाई के द्वारा अपनी नंगी गांड देखे जाने की वजह से उसके तन बदलने में तेज ना की लहर दौड़ रही थी शर्मिंदगी का अहसास तो हो ही रहा था लेकिन साथ में उत्तेजना की आगोश में वह अपने आप को पूरी तरह से डुबोती चली जा रही थी,,,।

थोड़ी ही देर में रघु ने खाना खा लिया और शालू को आवाज देते हुए बोला,,,।

दीदी जल्दी से मां के लिए खाना बांध दो मुझे खेतों पर जाना है,,,।

( इतना सुनते ही शालू अंदर से निकलकर बाहर रसोई के पास आई और अपनी मां के लिए रोटी सब्जी और प्याज काट कर रखने लगी,,, शालू अपने भाई से नजर नहीं मिला पा रही थी उसे बहुत ज्यादा शर्मिंदगी का अहसास हो रहा था लेकिन फिर भी वह अपनी मां के लिए खाना बांधते हुए रघु की तरफ देखे बिना ही बोली,,,,)

रात भर कहां गया था तुझे मालूम है मां कितनी परेशान हो रही थी,,,।

कहीं नहीं दीदी बस दोस्तों के साथ था,,,। ज्यादा रात हो गई तो उन्हीं के घर सो गया,,,,।

कहीं भी जाया कर तो मां को बता कर जाया कर,,, ले जल्दी से खेतों पर जाना वरना मां भूखी रह जाएगी,,,( रघु को खाने की पोटली थमाते हुए शालू बोली,,,)

ठीक है दीदी तुम चिंता मत करो मैं समय पर खेत पर पहुंच जाऊंगा,,,,( इतना कहते हुए रघु खाने की पोटली को हाथ में लेकर खड़ा हुआ और जाते-जाते बोला) दीदी कुछ देर पहले जो कुछ भी हुआ उसे मां से मत बताना मैं अनजाने में दरवाजे पर पहुंच गया था मुझे मालूम नहीं था कि तुम कपड़े नहीं पहनी हो,,,,( रघु के मुंह से यह बात सुनते ही वह एकदम से झेंप गई लेकिन फिर अपने आप को संभालते हुए बोली,,,)

मैं जानती हूं जो कुछ भी हुआ वह गलती से हुआ इस में तेरी कोई गलती नहीं है इसलिए तू जा मैं मां से कुछ नहीं कहूंगी,,,,( शालू की बात सुनते ही रखो मुस्कुराते हुए घर से बाहर चला गया और सालू वहीं खड़ी तब तक उसे देखती रही जब तक कि वह आंखों से ओझल नहीं हो गया,,, वह खड़ी खड़ी यही सोच रही थी कि क्या सच में यह सब अनजाने में हुआ था क्या रखूं सच में अनजाने में ही दरवाजे तक आ गया था लेकिन अगर अनजाने में हुआ था तो वह तुरंत चला क्यों नहीं किया खड़े होकर देख क्यों रहा था,,,। रघु कि मुझे अभी की बात सुनकर और कुछ देर पहले की हरकत को देख कर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या समझे क्या फैसला ले,,,, शालू भी यह सब अनजाने में हुआ होगा ऐसा झूठी दिलासा आपने आपको देकर काम में व्यस्त हो गई,,,। रघु कल रात से लेकर के अबतक के वाकए के बारे में सोचता हुआ चला जा रहा था,,,, उसे एहसास होने लगा था कि किस्मत उसके ऊपर पूरी तरह से मेहरबान हो चुकी थी,,,, कल रात से ही उसके साथ वह सब हो रहा था जिसके बारे में वह सिर्फ कल्पना ही कर पा रहा था,,, कल रात से क्यों दोपहर से ही जब से वह अपनी मां को पेशाब करते हुए देखा था तब से उसकी जिंदगी में सब कुछ बदलता चला जा रहा था अगर वह अपनी मां को पेशाब करते हुए ना देखता तो उसकी मां यह देख कर उस पर डांट फटकार ना लगाते और उस डांट फटकार को दिल पर ले कर रघु घर से दूर गांव के किनारे रात को नहीं रुकता और वहां रघु नहीं रुकता तो हलवाई की बीवी उसे घर में नहीं बुलाती और हलवाई की बीवी के साथ जिंदगी में पहली बार संभोग सुख का सुख नहीं भोग पाता,,,, फिर सुबह उसकी मां परेशान होकर उसे गले नहीं लगाती और ना ही फिर रघु अपनी मां के भारी-भरकम नितंबों को अपनी हथेली से स्पर्श कर पाता,,,, और ना ही वह घर पर खाना खाने के लिए जाता और ना ही किस्मत के जोर पर चलती वह अपनी खूबसूरत बहन की खूबसूरत गांड के दर्शन कर पाता यही सब सोचकर वह मस्त हुआ जा रहा था और अपनी किस्मत पर इठला भी रहा था,,,, लेकिन फिर भी वह अपने मन में यही सोच रहा था कि उसे बहुत सोच समझ कर आगे कदम बढ़ाना है कोई जल्दबाजी नहीं दिखानी है वरना कहीं खेत में जिस तरह से उसकी मां उसे गले लगाई थी और वह उसी का फायदा उठाते हुए उसके नितंबों को अपनी हथेली से स्पर्श करके अपनी तरफ खींच कर उसकी जवानी को अपने अंदर समाने की कोशिश किया था अगर फिर से वह गलती करेगा तो उसकी मां हो सकता है फिर से उसे घर से निकाल दे उस पर नाराज हो जाए ओर ऐसा रघु बिल्कुल भी नहीं चाहता था,,,।

थोड़ी ही देर में खाना लेकर रघु खेतों पर पहुंच गया उसकी मां अभी भी खेतों के बीच बैठकर बड़ी-बड़ी घास को काट रही थी सूरज एकदम सर पर तप रहा था,,,। और कजरी की नजर जैसे ही रघु पर पड़ी एक बार फिर से उसके तन बदन में हलचल होने लगी,,, क्योंकि रघु को देखते ही कुछ देर पहले का वाकया उसे याद आ गया,,,। शर्मिंदगी का अहसास उसे अंदर तक हो रहा था इसलिए वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी,,,। रघु भी अब थोड़ा सा अपनी मां से कन्नी काट रहा था क्योंकि वह अपनी मां को एहसास नहीं होने देना चाहता था कि जो कुछ भी हुआ था वह जानबूझकर हुआ था वह यही दिखाना चाहता था कि गले लगते समय जो भी हरकत उसकी तरफ से हुई थी वह अनजाने में हुई थी इसलिए वह एकदम सहज बना रहा,,,।

मां खाना खा लो नहीं तो खाना ठंडा हो जाएगा और धूप भी बहुत है थोड़ी देर आराम कर लो,,,,। ( इतना कहते हुए वह भी खेतों के बीचो बीच पहुंच गया जहां पर उसकी मां घास काट कर घास का ढेर लगा चुकी थी,,, कजरी भी थक चुकी थी इसलिए अपने बेटे की बात मानते हुए खाना खाने के लिए तैयार हो गई,,,, पास में ही खेतों मैं पानी जाने के लिए मेड बनाई गई थी उसमें से एक दम साफ पानी बह रहा था जिसमें कजरी हाथ धोकर पेड़ की छांव के नीचे आ गई,,,। खाली की पोटली रघु अपनी मां को थमा कर वहीं खड़ा हो गया और कजरी नीचे बैठकर खाने की पोटली खोलते हुए बोली,,,।

रघु जाकर ललिया को बुला दे तो पास में अपने खेतों में वह भी घास काट रही हैं अगर वह भी दो रोटी खा लेगी तो उसे भी थोड़ा सुकून मिल जाएगा,,,।

ठीक है मां मैं अभी बुला कर लाता हूं,,,,( इतना कहकर रघु पास वाले खेत में चला गया जहां पर ललिया भी घास काट रही थी,,,)

चाची चलो खाना खा लो मां बुला रही है,,,।

मैं अभी घर नहीं जाऊंगी रघु काम खत्म करने के बाद ही जाऊंगी,,,।

अरे घर नहीं जाना है मैं खाना लेकर आया हूं चलो खा लो,,,

यह तो तूने बहुत अच्छा काम किया मुझे भी बहुत जोरों की भूख लगी है,,।

तो चलो जल्दी चल कर खा लो,,,,

तू चल मैं आती हूं,,,

( रघु चला गया और उसके पीछे पीछे थोड़ी ही देर में ललिया भी वही पहुंच गई,,, तीनों आपके घने पेड़ के नीचे बैठे हुए थे और कजरी रोटी और सब्जी ललिया को भी दे रहे थे रघु घर से खाना खाकर आया था,,,, दोनों खाना खाने लगी तो रघु पानी लेने के लिए चला गया जो कि पास में ही हेडपंप बना हुआ था,,,,। गर्मी बड़े जोरों की पड़ रही थी फिर तुम के करीब पहुंचकर रघु हेंडपंप चलाकर पहले खुद पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लिया,,,, तो फिर बर्तन में पानी भरने लगा,,, पानी लेकर जब रघु पेड़ के नीचे पहुंचा दो ललिया निश्चिंत होकर रोटी सब्जी खा रही थी वह एक टांग मोड कर रिप्लाई फैलाकर बैठी हुई थी जिसकी वजह से उसकी साड़ी पेटीकोट सहित उसके घुटनों के ऊपर तक चढ गई थी,,,,। जिसकी वजह से उसकी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया साफ नजर आ रही थी पर यह देख कर रघु का मन ललिया के ऊपर डोलने लगा,,,। वह चोर नजरों से बार-बार ललिया की चिकनी टांग को देख ले रहा था,,, और ललिया काम में इतना मशगूल होकर घास की कटाई कर रही थी कि उसके ब्लाउज का एक बटन खुला हुआ है इसका उसे आभास तक नहीं था,,, जिसमें से उसकी गदराई चूचियां नजर आ रही थी,,,, जो देखते ही रघु एकदम से मस्त होने लगा लेकिन वह अपनी नजरें अपनी मां और ललिया दोनों से बचाकर चोरी-छिपे इस नजारे का आनंद ले रहा था,,,, घुटनों तक की खुली नंगी चिकनी टांग देखकर रखो मन में यही कल्पना कर रहा था कि ललिया के दलों के बीच भी हलवाई की बीवी की तरह रसीली बुर होगी,,, और यह ख्याल मन में आते ही रघु के पजामे में उसका लंड हिलोरे लेने लगा,,, लेकिन रघु नहीं चाहता था कि उसके पेंट में बना तंबू उसकी मां और ललिया देखें इसलिए वह वहीं पर बैठ गया,,,।

थोड़ी ही देर में दोनों खाना खा चुके थे धूप बड़ी तेज थी गर्मी का महीना होने की वजह से इस तरह की धूप में काम करना मुमकिन नहीं था,,,। इसलिए रघु उन दोनों से बोला,,,।

तुम दोनों खाना खा चुके हैं इसलिए आराम कर लो तो अच्छा होगा,,, और इस पेड़ के नीचे आराम करना ठीक रहेगा,,,।

तो सही कह रहा है रघु हम दोनों इतनी धूप में काम करके थक चुके हैं और खाना खाने के बाद आराम करना भी जरूरी है इसलिए हम दोनों यहीं आराम कर लेते हैं थोड़ी देर,,,। ( ललिया कजरी की तरफ देखते हुए बोली जिस में दोनों की सहमति थी इसलिए दोनों आराम करने लगे और रघु इधर-उधर घूमने लगा,,, इधर-उधर घूमते हुए थोड़ा दूर निकल गया तो उसे वहां रामू मिल गया और उसे देखते ही रामू बोला,,,।)

कल तू कहां चला गया था,,,, ना घर पर मैं खेतों में कहीं दिखा ही नहीं,,,,।

हां कल जरूरी काम था मुझे एक रिश्तेदार के घर जाना था इसलिए कल मैं घर पर नहीं मिला,,,। और बता क्या चल रहा है,,,। धीरे-धीरे तेरी बहने तो बहुत खूबसूरत होती जा रही है,,,,।

देख रघु तू ऐसी बातें मत किया कर मुझे गुस्सा आ जाता है,,,।

रामू तू पागल हो गया है मैं तो सिर्फ सच कहता हूं तुझे बुरा लग जाता है सच बताना क्या तेरी बहने खूबसूरत नहीं है,,,।

( रघु की यह बात सुनकर रामू कुछ बोल नहीं पाया,,,।) और तो और रामू तेरी बहन को तो छोड़ो तेरी मां कितनी खूबसूरत है अभी अभी देख कर आया हूं,,,।

क्या क्या क्या देख कर आया है रघु तो देख उल्टी-सीधी बातें मत किया करो वरना तेरी और मेरी दोस्ती टूट जाएगी,,,।

अरे पागल जो मैं कहता हूं वह सच कहता हूं अभी अभी देख कर आ रहा हूं तेरी मां और मेरी मां दोनों साथ बैठकर खाना खा रही थी,,,।

कहां खाना खा रही थी,,,?

अरे खेतों में मैं ही तो खाना लाया था दोनों के लिए,,,, सच यार रामू तेरी मां बेफिक्र होकर जिस तरह से एक टांग मोड़ कर बेफिक्र होकर खाना खा रही थी ना तेरी मां की साड़ी घुटनों तक चड़ गई थी जिसकी वजह से तेरी मा की चिकनी चिकनी टांगें मुझे नजर आ रही थी,,, मैं तो देख कर एक दम मस्त हो गया यार रामू मेरा तो मन कर रहा था कि तेरी मां की साड़ी कमर तक उठाकर दोनों टांगें फैलाकर अपना लंड तेरी मां की बुर में डालकर चोद दु,,, लेकिन पता नहीं तेरी मां तैयार होगी कि नहीं,,,, अच्छा तू बता रामू अगर में तेरी मां को चोद ना चाहु तो क्या तेरी मां मुझसे चुदवाएगी,,,

( रघु की बात सुनकर रामू कुछ बोल नहीं रहा था बस गुस्से में उसे देखता जा रहा था,,,।)

देख रहा हूं यह सब अच्छी बात नहीं है मैं अपनी मां से बता दूंगा,,,,।

यार तू नाराज क्यों होता है तू तो मेरा दोस्त है और दोस्त की मां पर इतना तो हक बनता ही है,,,। ( इतना कहते हुए रघु उसके कंधे पर हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर उसे मनाने की कोशिश करने लगा और रघु यह बात अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह की गंदी बातें भले ही वह उसकी मां के बारे में करता हूं यह सब बातें रामू को भी अच्छी लगती है तभी तो वह अपनी मां को अभी तक कुछ भी नहीं बताया अगर उसे बुरी लगती तो आप तक वह अपनी मां को सब कुछ बता भी दिया होता और उससे दोस्ती तोड़ दिया होता,,। रामू शांत हो गया था और रघु इधर उधर की बातें करने लगा था,,,, मज़ाक मजाक में रघु अपने मन की बात कह गया था यह बात सच है कि ललिया को लेकर रघु हमेशा कल्पना किया करता था और उसे चोदने का ख्वाब देखा करता था और आज उसकी नंगी चिकनी टांग देखकर उसका मन डोलने लगा था,,,,। इधर उधर की बात और खेतों में घूमते हुए धीरे-धीरे दिन गुजरने लगा और शाम होने लगी तो रघु को ख्याल आया कि उसे तो खेतों पर जाना है और वह तुरंत रामू को लेकर खेत पर पहुंच गया जहां पर अभी तक उसकी मां और ललिया दोनों आराम कर रही थी रघु जल्दी से उन दोनों को जगाया,,,। दोनों हड़बड़ाहट में उठी दोनों को देर हो चुकी थी लेकिन अभी शाम ढलने में कुछ वक्त बाकी था इसलिए दोनों फिर से खेत में उतर गई और घास काटने लगी इस बार रघु और रामू दोनों अपनी अपनी मां का हाथ बंटाने लगे,, थोड़ी ही देर में दोनों का काम निपट गया और अंधेरा होने लगा,,, रघु कटी हुई खास का ढेर सारा ढेर बना कर उसे माथे पर उठा लिया और खेतों से बाहर आ गया,,,, दोनों घर की तरफ जा रहे थे,,, लेकिन अभी भी ललिया का काम खत्म नहीं हुआ था,,,। अंधेरा हो रहा था और रघु के दिमाग में कुछ और चल रहा था वाह रामू जो कि अपनी मां के साथ उसका हाथ बटा रहा था उसे आवाज देकर बुलाया,,,,। रघु की आवाज सुनते ही रामू दौड़ता हुआ उसके पास आया और बोला,,।

क्या हुआ रघु,,,

लगता है चाची का काम अभी तक खत्म नहीं हुआ है एक काम कर तू यह घास का ढेर माथे पर रखकर मेरी मां के साथ घर पर चला जा मैं जल्दी से काम खत्म करके चाची के साथ आ जाता हूं,,,,,

हां रामू रघु ठीक कह रहा है तुझसे जल्दी नहीं हो पाएगा और रघु जल्दी जल्दी काम खत्म कर देगा,,,

( रघु अपने माथे पर का बोझा रामू के सर पर रख दिया और रामू कजरी के साथ घर की तरफ चला गया और रघु कच्ची सड़क से खेत में उतर गया,,,,,।)
 
रामू रघु का बोझ सर पर उठाकर कजरी के पीछे पीछे घर चला गया,,, रघु ललिया की मदद करने के लिए खेत में उतर गया,,,, ललिया जल्दी-जल्दी कटी हुई घास का ढेर बना रही थी,,,।

क्या हुआ चाची इतनी देर क्यों लगा दी,,,।

इसकी वजह से ही हुआ है ना तुम मुझे खाना खाने के लिए बुलाता और ना मैं खाना खा कर आराम करने बैठ गई और ना मेरी आंख लग जाती तो इतनी देर ना होती,,,।

अरे कोई बात नहीं चाची मैं आ गया हूं ना अब जल्दी हो जाएगा,,,।

अच्छा हुआ तू आ गया रघु अब जल्दी से घास का ढेर रस्सी से बांधकर मेरे सर पर रख दे,,,,।( ललिया एकदम सीधी खड़ी होते हुए और अपने दोनों हाथ को कमर पर रखकर बड़ी ही मादक अदा दिखाते हुए बोली हालांकि यह बिल्कुल उसके लिए सहज था उसने कोई जानबूझकर इस तरह की अदा नहीं दिखाई थी लेकिन रघु के देखने का रवैया पूरी तरह से बदल चुका था इसलिए ललिया के इस तरह से खड़े होने पर भी ऐसे ललिया के अंदर मादकता नजर आ रही थी,,, रघु घास के ढेर को रस्सी से बांधते बांधते ललिया के खूबसूरत यौवन का रस अपनी आंखों से पीने लगा,,,, ललिया की दोनों चूचियां कसे हुए ब्लाउज में और भी ज्यादा उछाल मार रहे थे,,,। उनको देखते ही रघु के मुंह में पानी आ गया,,,,,

रघु घास के ढेर के बोझ को रस्सी से अच्छी तरह से बांध चुका था,,,। वैसे तो इस बोझ को रघु को ही उठाना था लेकिन रघु के मन में कुछ और चल रहा था,,,। इसलिए वह घास के ढेर को उठाकर ललिया के सर पर रखने की तैयारी करने लगा और ललिया भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार थी वह अपने लिए जगह बना कर अच्छी तरह से खड़ी हो गई ताकि रघु आराम से उसके सर पर घास का ढेर रख सके,,, घास के बोझ को उठाकर रघु ललिया के सर पर रखने लगा,,, घास का ढेर कुछ ज्यादा ही था,,, रघु ललिया के ठीक सामने से उसके सर पर बोझ रखने लगा,,, वह बोझ उसके सर पर रखने के बहाने धीरे-धीरे ललिया के एकदम करीब आने लगा इतना करीब के देखते ही देखते ललिया की मदमस्त जवान चूचियां रघु के सीने से स्पर्श होने लगी,,, ललिया कीमत मस्त चूचियों की कड़ी निकल जैसे ही रघु के सीने में स्पर्श करते हुए चुभने लगी वैसे ही तुरंत रघु के तन बदन में आग लग गई उसका पूरा शरीर उत्तेजना के मारे गनगना गया,,,,, पल भर में ही रघु को लगने लगा कि जैसे वह उछल कर चांद को छू लिया हो,,, अद्भुत अहसास से वह पूरी तरह से भर गया,,,, पर यही हाल ललिया का भी होगा भोज उसके सर पर रखने के बहाने खरगोश के बेहद करीब आ गया था और उसे भी अपनी मदमस्त चूचियां रघु की चौड़ी छाती पर स्पर्श के साथ-साथ रगड़ होती हुई भी महसूस होने लगी थी,,,, ललिया के तन बदन में भी उत्तेजना का संचार होने लगा,,,। पल भर में ही उसे भी ना जाने क्या अपने तन बदन में हलचल महसूस होने लगी थी,,,,। रघु के इतने करीब होते हुए ललिया अपने आप को असहज महसूस करने लगी थी,,,। रघु अभी भी उसके माथे पर घास के बोझे को ठीक तरह से रखने की कोशिश कर रहा था,,,, और इसी कोशिश में वह ललिया के और ज्यादा करीब आ गया अब वह इतना ज्यादा करीब आ गया था कि उसके पजामे में बना तंबू देखते ही देखते ललिया की दोनों टांगों के बीच स्पर्श होने लगी,,,, और देखते ही देखते रघु के पजामे का तंबू लग जा की दोनों टांगों के बीच के मखमली द्वार पर ठोकर मारने लगा,,, ललिया तीन बच्चों की मां थी और अभी जवान बच्चे इसलिए उसे समझते देर नहीं लगेगी इसके दोनों टांगों के बीच की है ठोकर रघु के बदन के कौन से अंग की है पर यह एहसास ललिया को होते ही वह पूरी तरह से कसमसाने लगी और वह पूरी तरह से लाचार और असहज हो गई जिसकी वजह से वह अपने आप को संभाल नहीं पाई और पीछे की तरफ गिर गई साथ ही वह गिरते-गिरते अनजाने में ही अपने दोनों हाथ को रघु के कमर पर रखकर अपने आप को संभालने की कोशिश करते हुए उसको भी लेकर गिर गई,,,, रघु ठीक उसके दोनों टांगों के बीच गिरा हुआ था और ललिया उसके ठीक नीचे थी,,,। वह तो अच्छा हुआ था कि ललिया घास के ढेर पर गिरी थी वरना उसे चोट लग जाती,,,,

लेकिन ललिया के होश उड़ गए जब उसे साफ महसूस होने लगा कि शुभम का लंड जोकि पजामे में होने के बावजूद भी तंबू की तरह खड़ा था वह ठीक उसकी बुर के ऊपर ठोकर लगा रहा था रघु का लंड तो पजामे के अंदर था लेकिन गिरने की वजह से ललिया की साड़ी पूरी तरह से कमर के ऊपर चढ़ चुकी थी जिससे वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी हो गई थी और इस समय ललिया की नंगी बुर पर रघु के पजामे मैं बना तंबू पूरी तरह से छा चुका था,,,। रघु के लंड के कठोरपन को अपनी मखमली बुर के ऊपर महसूस करते ही ललिया एकदम से गनगना गई,,,, रघु को इस बात का एहसास हो गया था कि उसके लंड की ठोकर लगी या की नंगी बुर के ऊपर हो रही है इसलिए वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा था उसने जानबूझकर और अपनी कमर को हल्के से नीचे की तरफ दबा दिया जिससे इस बार रघु के पजामे के तंबू का घेराव ललिया की मखमली बुरके गुलाबी पत्तियों को हल्का सा खोल कर अंदर की तरफ जाने का प्रयास करने लगी,,। और ललिया को इसका एहसास हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बड़ी गर्मजोशी के साथ वह शुभम को अपने आप में समाने की इजाजत दे दे या उसे रोक दें इसी कशमकश में वह,,, दर्द के मारे कराह उठी,,,,

आहहहहह,,,,,,

क्या हुआ चाची तुम्हें चोट तो नहीं लगी,,,,

मेरे ऊपर गिरा पड़ा है और कहता है कि चोट नहीं लगी अच्छा हुआ कि मैं घास के ऊपर गिरी वरना आज तो तेरी वजह से मेरी कमर टूट जाती,,,

क्या चाहती मेरी वजह से तुमसे यह पूछा नहीं संभल रहा है है और तुम उसे उठाने की कोशिश कर रही हो तो गिरोगी ही,,,( रघु अभी भी बातें करता हुआ अपने कमर का दबाव ललिया कि दोनों टांगों के बीच उसकी मखमली बुर पर बनाया हुआ था,,,। सच पूछो तो रघु का मन ललिया के ऊपर से उठने का बिल्कुल भी नहीं कर रहा था उसका मन तो कर रहा था कि पैजामा थोड़ा नीचे करके अपने नंगे लंड को उसकी नंगी बुर में डालकर उसकी चुदाई कर दें लेकिन इस तरह से करना अभी उचित नहीं था,,,।)

चल अब उठेगा भी या इसी तरह से पड़ा रहेगा,,,,

हां चाची उठता हूं मुझे तो तुम्हारी फिक्र थी,,,,( रघु अच्छी तरह से जानता था कि कमर के नीचे से ललिया पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी इसलिए उसके मखमली बदन को स्पर्श करने के लालच को रोक नहीं सका,,, और उसने के बहाने वह ललिया की नंगी चिकनी जांघों को अपनी हथेली से स्पर्श करते हुए उठा जिस तरह से वह अपनी हथेली उसकी जांघों पर रखकर उसे हल्का सा दबाया था,,,, ललिया पूरी तरह से उत्तेजना में सिहर उठी थी उसका संपूर्ण बदन अपना वजूद होता हुआ महसूस कर रहा था,,,,। अपने मन के अरमान को पूरा करते हुए रखो ललिया के ऊपर से उठा तो लग जा झट से अपनी साड़ी को अपनी कमर के नीचे फेंक कर अपने नंगे जिस्म को ढक ली,,,, रघु उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ी किया,,,, पल भर में ही ललिया के लिए सब कुछ बदला बदला सा हो गया था,,,, शराबी पति की चुदाई का सुख ना के बराबर था और रघु के जवान लंड ने जिस तरह का स्पर्श कराकर उसे पूरी तरह से झकझोर दिया था उस तरह का एहसास उसके पति के द्वारा कभी नहीं उसे हुआ था,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूख गया था जिसे वह अपने थूक से गीला करने की कोशिश कर रही थी,,,। रघु भी समझ रहा था कि कुछ ज्यादा ही हो गया था,,,। इसलिए वह ज्यादा छूट छूट लेने की कोशिश नहीं कर रहा था कहीं लेने के देने न पड़ जाए यही सोचकर वह बोला,,,।

चाची तुम एक काम करो यह बोजा में ही उठाकर ले चलता हूं तुमसे नहीं होने वाला,,,,( और वहां पहुंचा उठाकर अपने सर पर रख लिया और आगे आगे चलने लगा क्योंकि उसका काम हो चुका था,,, ललिया की नंगी जांघों को अपनी हथेली से स्पर्श करके उसके तन बदन में आग लग गई थी और तो और उसके पिज्जा में बना तंबू का स्पर्श उसकी मखमली बुर के द्वार पर होते ही हलवाई की बीवी उसे याद आ गई थी,,,, जिस की चुदाई का अद्भुत सुख अभी तक उसके रगों में दौड़ रहा था,,,,। थोड़ी ही देर में रखो घर पर पहुंच गया और घास के ढेर को ललिया के घर पर रखकर अपने घर जाने ही वाला था कि उसे कुछ याद आ गया और वह रामू को आवाज देकर बुलाने लगा रामू जो कि घर के अंदर था वह बाहर आ गया और रघु उसे घर पर थोड़ी दूर ले जाकर उसे बोला,,,।

रामू जन्नत का नजारा देखना है,,,।( रामू अच्छी तरह से जानता था कि रघु किस बारे में बात कर रहा है,,, वह खुश होता हुआ बोला,,,।)

हां जरूर देखूंगा,,,।

तो जब मैं तुझे आवाज दूं तू जल्दी से आ जाना मैं तुझे ले चलूंगा जन्नत का नजारा दिखाने,,,

( इतना कह कर रखो अपने घर चला गया हाथ मुंह धोने के लिए और रामू अपने घर चला गया वह काफी उत्सुक था रघु के साथ जाने के लिए,,,,। रघु अपने घर से ललिया के उपर बराबर नजर रखे हुए था,,,, वह उसके मैदान जाने का इंतजार कर रहा था और थोड़ी देर बाद जब हैंडपंप चलने की आवाज आने लगी तो वह सकते में आ गया वह समझ गया कि अब ललिया सोच करने के लिए मैदान जाएगी और वह हैंडपंप पर डिब्बा भर रही थी,,,,। वह बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था क्योंकि ललिया से पहले उसे वहां पहुंचना था,,,, वह रामू को आवाज दिया रघु की आवाज सुनते ही रामू तुरंत घर से बाहर आ गया और बिना कुछ सोचे समझे सवाल किए रघु उसे जहां ले जाने लगा वह लगभग दौड़ते हुए वहां जाने लगा,,,।

थोड़ी ही देर में रघु रामू को झाड़ियों के पीछे लेकर गया,,

वह दोनों जाकर बैठ गए दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था रघु को अच्छी तरह से मालूम था कि वहां पर सोच करने के लिए कौन आने वाला है लेकिन इस बात का भाई रामू को बिल्कुल भी नहीं था उसे यही लग रहा था कि कोई औरत वहां पर आएगी लेकिन वह यह नहीं जानता था कि वह औरत कोई और नहीं बल्कि उसकी ही मां होगी,

थोड़ी ही देर में दोनों की उत्सुकता खत्म हो गई चांदनी रात होने की वजह से सब कुछ साफ नजर आ रहा था और रघु और रामू दोनों खली झाड़ियों के पीछे बैठे हुए थे जहां से सामने का खाली मैदान एकदम अच्छी तरह से नजर आ रहा था,,,, कुछ दिन का यह मेहनत का ही फल था जो रघु और रामू दोनों को प्राप्त होने वाला था रघु ने इस पर काफी मेहनत किया था वह शाम ढलने के बाद ले लिया कौन सी जगह मैदान जाती है इसके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लिया था,,,। तभी तो वह बड़े आत्मविश्वास से रामू का हाथ पकड़ कर उधर लाया था वह जानबूझकर रामू को अपने साथ लाया था क्योंकि वह रामू को उसकी मां की मदमस्त गोरी गोरी गांड दिखाना चाहता था,,,। और देखना चाहता था कि रामू अपनी ही आंखों से अपनी मां की मदमस्त गोरी गोरी गांड देखकर क्या करता है,,, क्योंकि रघु को इससे यह पता चलने वाला था कि अगर आगे वह है रामू की मां से शारीरिक संबंध बनाता है तो इसका असर रामू पर किस तरह से पड़ेगा अगर आज वह उठकर नाराज होकर वहां से चला जाएगा तो इसका मतलब साफ था कि उसकी मां के साथ चुदाई करने के बाद उसे एक अच्छा दोस्त खोना पड़ेगा और अगर अपनी मां की मस्त गांड देखकर रामू भी मस्त हो जाता है तो रघु के लिए उसका रास्ता एकदम साफ हो जाएगा इसके बाद वह रामू की मां से रामू की उपस्थिति में भी उसके साथ शारीरिक संबंध बना सकता है,,,।

थोड़ी देर में दोनों की उत्सुकता खत्म हो गई,,, क्योंकि हाथ में डब्बा लिए ललिया ठीक उन दोनों की आंखों के सामने खाली मैदान में जमीन पर नीचे डब्बा रखकर खड़ी हो गई,,, ललिया का चेहरा रघु और रामू दोनों के ठीक सामने था,,,।

ललिया चारों तरफ नजर घुमाकर जाकर पकड़ देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,, रामू अपनी आंखों के ठीक सामने अपनी मां को खड़ी देखकर एकदम मदहोश हो गया,,, उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था क्योंकि अब उसे इस बात का एहसास हुआ था कि रघु उसे यहां क्या दिखाने के लिए लाया था लेकिन रामू रघु की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रहा था वह आंखें फाड़े अपनी मां को भी देखे जा रहा था जो उसे से 5 मीटर की दूरी पर खुले मैदान में खड़ी थी और किसी भी वक्त अपनी साड़ी कमर तक उठाकर नीचे बैठने वाली थी,,,। रघु का भी दिल जोरों से धड़क रहा था।
 
गांव का मौसम बिल्कुल साफ था आसमान में तारे टिमटिम आ रहे थे चांद अपनी पूरी आभा बिखेरे पूरे गांव में अपनी चांदनी लूटा रहा था जिसकी वजह से गांव का हर एक कौन है इस समय लगभग लगभग एकदम साफ नजर आ रहा था लेकिन जहां पर ललिया खड़ी थी वह पूरा मैदान था लेकिन वह एक छोटे से पेड़ के नीचे खड़ी थी जिसके नीचे खड़ी होकर वह अपने आप को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कर रही थी जबकि यह उसकी सबसे बड़ी गलती थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि 2 जोड़ी आंखें उसके हर एक हरकत पर बड़ी बारीकी से नजर रखे हुए हैं,,।

रामू का दिल बड़ी जोरों से धड़क रहा था,,, क्योंकि जिंदगी में पहली बार हुआ अपनी मां की मदमस्त गांड को देखने जा रहा था हालांकि वह भी अपनी मां को नहाते कपड़े बदलते देख चुका था लेकिन संपूर्ण रूप से उसकी मदमस्त नितंबों के भूगोल से वाकिफ नहीं था,,, जो चाह रघु के अंदर थी वही चाह रामू के अंदर भी पनप रही थी रघु तो अपनी मां की मदमस्त गार्ड के भूगोल से पूरी तरह से वाकिफ हो चुका था पहले ही पल भर के लिए ही सही लेकिन उसे अपनी मां की नितंब रूपी चमकते चांद के दर्शन हो चुके थे और अब रामू की बारी थी,,,। रामू कुछ भी बोल नहीं रहा था रघु और रामू दोनों एकदम करीब बैठे हुए थे झाड़ियों के आड़ में जहां से वह लोग रामू की मां के संपूर्ण बदन का दीदार कर रहे थे लेकिन इस बात की भनक 5 मीटर की दूरी पर स्थित ललिया को बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी,,,। वैसे भी ललिया को सोच करने के लिए आने में देर हो चुकी थी क्योंकि खेतों में ही ज्यादा वक्त चला गया था वरना उसके साथ एक दो और थे और होती है खास करके रघु की खुद की मां लेकिन आज वो लोग जल्दी निपट गए थे इसलिए ललिया इधर-उधर चकर पकर देख रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,,, उसे भी मैदान पूरी तरह से खाली नजर आ रहा था इसलिए वह भी निश्चिंत हो गई थी,,, रघु धीरे से रामू के कान में बोला,,,।

अभी देखना तेरी मां कैसे अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड दिखाती है,,, तेरा लंड खड़ा ना हो जाए तो मेरा नाम बदल देना,,,,( रघु की बात सुनकर रामू बोल कुछ नहीं रहा था बस उसे थोड़ा बहुत बनावटी गुस्सा दिखाते हुए देख ले रहा था और जो कुछ भी रघु कह रहा था उसमें सच्चाई भी काफी थी क्योंकि अभी तो उसकी मां ने अपनी साड़ी को कमर तक उठाई भी नहीं थी और रामू के पजामे में हलचल होना शुरु हो गया था,,,। रघु की खुद की हालत खराब थी,,, क्योंकि उसने भी ब्लाउज में जागते हुए उसके दोनों कबूतरों को लगभग लगभग देखी लिया था और उसकी नंगी चिकनी टांगो को देखकर वैसे भी वह मस्त हो चुका था और जिस तरह से शाम ढलने के बाद उसकी मदद के बहाने एक तरह से उसके बदन से खेला था और उसकी नंगी बुर पर अपने पेंट में बने तंबू को धंसाया था वह सब रघु को पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर ले जा रहे थे,,,,, उसके पजामे में भी पूरी तरह से हलचल होना शुरू हो गया था,,, रामू और रघु दोनों अपनी नजरों को ललिया के ऊपर स्थिर किए हुए थे दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था और उस समय उस खाली मैदान में उन दोनों के दिल की धड़कन ही सुनाई दे रही थी बाकी चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,,।

ललिया पूरी तरह से तैयार थी अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर सोच के लिए बैठने के लिए,,, वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी को पकड़ ली थी और यह देखते ही रघु फिर से रामू के कान में फुसफुसाते हुए बोला,,,

देख देख देख रामु,,,,, अब उठेगा पर्दा और दिखेगा अद्भुत नजारा,,, तो खुद अपनी आंखों से अपनी मां की मदमस्त गोरी गोरी गांड देखेगा,,,,

ललिया चारों तरफ खड़ी होकर देखते हुए धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी जैसे जैसे वह साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी वैसे वैसे रघु के साथ-साथ रामू के दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी,,,, पर देखते ही देखते ललिया अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी,,, जैसे ही ललिया की साड़ी कमर तक आई वैसे ही रामू और रघु दोनों को अद्भुत खूबसूरत मादकता से भरी हुई बड़ी बड़ी गांड नजर आने लगी और गांड को देखते ही रघु के मुंह से वाह निकल गया गया,,,,। रामू तो पागलों की तरह अपनी मां की गांड को देखता ही रह गया,,,, पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था,,,। तीन-चार सेकंड रामू की मां खड़ी होकर अपनी मदमस्त गांड का प्रदर्शन करती रही और उसके बाद सोच करने के लिए नीचे बैठ गई,,,,, और उसके बैठते ही कुछ ही देर बाद ललिया की बुर में से सीटी की आवाज आने लगी वह मुत रही थी,,,, और उसकी बुर में से निकल रही सीटी की आवाज रामू और रघु दोनों के कानों में साफ सुनाई दे रही थी,,,। उस आवाज को सुनते ही रघु पूरी तरह से मस्त हो गया रामू की भी यही हालत थी,,,, ललिया को शायद बहुत जोरो की पिशाब लगी हुई थी तभी उसकी बुर में सीटी की आवाज कुछ ज्यादा ही जोर से निकल रही थी,,,,,, रघु रामू के कान में बोला,,,।

देख रामू तेरी मां तेरी आंखों के सामने मुत रही हैं,,,।

( अपनी मां को नंगी गांड दिखाते हुए और पेशाब करते हुए देखा कर रामू पूरी तरह से मस्त हो जा रहा था और इस तरह की रघु के मुंह से अपनी मां के लिए गंदी बातें सुनकर उसकी उत्तेजना का पारा और ज्यादा बढ़ता जा रहा था,,, रघु एकदम उत्तेजित हुआ जा रहा था उसे यह नजारा बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वह धीरे से अपने पर जाने को सरका कर वह भी उसी तरह से बैठ गया,,। रामू की नजर जब उसके ऊपर पड़ी तो वह दंग रह गया रामू उसके खड़े लंड को देख रहा था जिसे धीरे-धीरे रघु अपने हाथों से हिला रहा था,,, रघु की अपने हाथों से अपने लंड को हिलाते हुए रामू से बोला,,,।)

रामू तू मेरा दोस्त है इसलिए वरना इसी समय तेरी मां की दूर में अपना यह लंड डालकर उसकी चुदाई कर देता,,।

( रघु के मुंह से इस तरह की बात सुनकर रामू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था उसका भी मन कर रहा था अपना लंड बाहर निकालकर हीलाने के लिए,,, रघु रामू की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था क्योंकि वह भी इस तरह के हालात से गुजर चुका था इसलिए वह रामू से बोला,,,)

तू भी बाहर निकाल ले अपनी मां की गांड को देखते हुए हिलाने में बहुत मजा आएगा,,,,।

( रामू तो जैसे इसी पर का इंतजार कर रहा था वह भी धीरे से अपने पजामे को नीचे सरका कर अपने खड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,, रघु रामू को उकसा ते हुए धीरे से उसके कान में बोला,,,।)

रामू तेरा भी मन कर रहा है ना तेरी मां की बड़ी-बड़ी गांड को देखकर उसकी बुर में लंड डालने के लिए,,,,( रघु की बातें रामू को अंदर तक जला रहे थे कामाग्नि में वह पूरी तरह से तड़प रहा था भले ही उसकी मां के लिए रघु बेहद गंदे शब्दों का उपयोग कर रहा था लेकिन रामू को इसमें बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,)

रामू मेरा तो बहुत मन कर रहा है तेरी मां को चोदने के लिए जब से तेरी मां की गोल गोल गांड देखा हूं तब से मेरी हालत खराब हो गई है,,,,आहहहहह क्या मस्त गांड है तेरी मां की,,,

( रघु हर तरह से आनंद ले रहा था एक बेटे के लिए कोई भी अगर इस तरह की गंदी बातें करता है तो साधारण तौर पर हर बेटा गुस्से में आ जाता है और उसकी मां के प्रति गंदे शब्दों का प्रयोग करने वालों से झगड़ा कर लेता है लेकिन यहां पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं था यहां तो रघु कि हर गंदी बातें रामू को अच्छी लग रही थी रामू खुद प्यासी आंखों से अपनी मां की गांड देख रहा था उसकी मां उसकी आंखों के सामने सोच करने के लिए बैठी हुई थी,,,। रामू और रघु दोनों अपनी मस्ती में थे और इन सब से अनजान ललिया 5 मीटर की दूरी पर बैठकर सोच कर रही थी उसे क्या मालूम था कि उसके पीठ पीछे उसकी सबसे अच्छी सहेली का तरीका बेटा और उसका खुद का बेटा उसकी नंगी गांड को देखकर अपना लंड हिला रहे हैं,,,। रघु रामू को और ज्यादा उकसाने के लिए बेहद गंदे शब्दों का प्रयोग करते हुए बोला,,।)

कसम से रामू अगर तेरी मां एक रात के लिए मुझे मिल जाए ना तो तेरी मां की बुर में अपना मोटा लंड डालकर उसकी बुर का भोसड़ा बना दुं,,,आहहहहह भगवान ने कमाल का जिस्म दिया है तेरी मां को,,,,( ऐसा कहते हुए रघु जोर-जोर से अपने लंड को मुठिया रहा था,,, और रामू भी यही कर रहा था,,,, पति अपनी मां की गांड को देखकर जोर जोर से हिला रहा था,,,। )

आहहहहहहह,,,, रामू बहुत मजा आ रहा है काश तेरी मां अपनी दोनों टांगे फैलाकर मुझे चोदने देती तो बहुत मजा आ जाता,,,,,

( अपनी मां की मदमस्त कांड और रघु की गंदी बातें सुनकर रामू काफी उत्तेजित हो गया था और वह ज्यादा देर तक ठहर नहीं पाया और अपने लंड को हिलाते हुए पानी छोड़ दिया,,, लेकिन रघु अभी भी बरकरार था वह लगातार अपनी प्यारी आंखो से ललिया को सोच करता हुआ देख रहा था जो कि अब सोच कर के पानी में लाए डिब्बे से अपनी गांड धो रही थी और यह देख कर रघु और ज्यादा उत्तेजित होने लगा,,,, क्योंकि वह चाहता था कि ललिया की गोरी गोरी गांड देखते हुए उसका पानी निकले और वो जिस तरह से गांड धो रही थी वह वहां से चली जाने वाली थी इसलिए रघु जोर-जोर से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,, ललिया सोच करके खड़ी हो गई थी लेकिन अभी भी वह अपनी साड़ी को कमर तक उठाए खड़ी थी,,, शायद वहां नितंबों के लगे पानी की बूंदों को नीचे गिर जाने देना चाहती थी इसलिए अपनी बड़ी बड़ी गांड को हम से हिला कर पानी की बूंदों को नीचे गिराने लगी,,, और उसकी यह हरकत पर उसकी बड़ी बड़ी गांड पानी भरे गुब्बारों की तरह हवा में लहरा रहे थे और यह देखकर रघु के सब्र का बांध टूट पड़ा उसके डंडे से भी पानी का फव्वारा छूटने लगा,,,। रामू ऊसके लंड से निकलते हुए पानी को देख कर हैरान हो गया था,,,, क्योंकि उसके लंड से कुछ ज्यादा ही पानी निकल रहा था,,,,। देखते ही देखते राम और रघु दोनों की आंखों के सामने से ललिया वापस घर की तरफ चली गई,,,

दोनों झाड़ियों में से तेरे से खड़े हुए और रघु अपना पैजामा ऊपर करते हुए बोला,,,,।

यार मजा आ गया तेरी मां ने तो क्या मस्त नजारा दिखा दिया,,,,आहहहहहहह,,,,,

( रामू भी अपने पजामे को ऊपर करता हुआ बोला,,,।)

यार रघु तुझे कसम है मेरी दोस्ती की यहां जो कुछ भी हुआ यह बात तु किसी को मत बताना,,,,

पागल हो गया है तू भला मैं यह बात दूसरों को क्यों बताऊंगा यह बात तेरे और मेरे बीच रहेगी और आगे से भी इस तरह का नजारा तेरी मां के द्वारा देखने को मिलेगा,,, और हम दोनों तेरी मां की नंगी गांड को देखकर इसी तरह से मजा लेंगे,,, तुझे कोई एतराज तो नहीं है ना,,,

( रघु की बातें सुनकर रामू बोला कुछ नहीं बस शर्मिंदा होते हुए हां में सिर हिला दिया,,, क्योंकि इस तरह का नजारा देख कर उसे भी काफी आनंद आया था,,।)

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए एक दिन शालू की मुलाकात फिर से बिरजू से हो गई,,,। शालू खेतों पर अपनी मां को खाना देने जा रही थी और रास्ते में बिरजू मिल गया था,,,। बिरजू को आंखों के सामने देखते ही शालू एकदम खुश हो गई,,, और सवालों की झड़ी बरसाते हुए बिरजू से बोली,,।

बिरजू कहां चले गए थे तुम,,, उस दिन के बाद से तो तुम कहीं नजर ही नहीं आए ना मुझसे मिलने की एक भी बार भी कोशिश कीए,,,।

क्या करूं शालू शाम को घर गया तो पता चला कि मामा की तबीयत खराब हो गई है इसलिए मा को लेकर मामा के घर जाना पड़ा,,, आज सुबह ही वापस आया हूं,,।

अब कैसी तबीयत है मामा की,,,

अब तो बिल्कुल ठीक है,,,( दोनों एक पेड़ के नीचे खड़े होकर बातें कर रहे थे,,।)

वैसे बिरजू उस दिन तो हालत खराब हो गई थी अगर थोड़ी देर और वहां रूकती तो पकड़ी जाती है वैसे वह था कौन,,,?( शालू सवालिया अंदाज में बिरजू की तरफ देखते हुए बोली,,, शालू की यह बात सुनकर बिरजू के होठों पर मुस्कुराहट आ गई थी वह मुस्कुरा रहा था और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर शालू बोली,,,।)

तुम मुस्कुरा क्यों रहे हो क्या बात है,,,?

शालू अच्छा ही हुआ था कि तुम समय रहते हो वहां से निकल गई थी,,,।

ऐसा क्यों,,,?

क्योंकि वह दूसरा कोई नहीं बल्कि तुम्हारा भाई ही था थोड़ी देर और तुम्हारा रूकती तो तुम्हारा भाई भी तुम्हारे नंगे बदन को तुम्हारी नंगी गांड को देख लेता,,,,।

( बिरजू की बात सुनते ही सालु के तन बदन में घबराहट की लहर दौड़ गई,,,, वह हैरान होते हुए अपने दांतो तले उंगली दबा ली क्योंकि वाकई में बहुत बड़ी मुसीबत से बच गई थी अगर सच में उसका भाई उसे उस अवस्था में देख लेता तो गजब हो जाता,,,।)

बाप रे तब तो बाल-बाल बच गई,,, वरना मेरी मां मार-मार कर मेरी खाल उधेड़ लेती,,,।

वैसे शालू तुम्हारा भाई रघु तुम्हें पानी में से निकल कर भागते हुए देख लिया था तुम्हारी नंगी गांड दंगे जिसमें को देखकर यह वह मेरे पास आया था और मुझसे पूछ भी रहा था कि आंखीर यह सब माजरा क्या है,,,।

क्या तुम्हारे कहने का मतलब है कि मेरे भाई ने मेरे नंगे बदन को देख लिया था यह तो मेरे लिए शर्म से डूब मरने वाली बात है बिरजू यह सब तुम्हारी वजह से हुआ ना तुम जिद करते ना मैं अपने कपड़े उतार कर तालाब में जाती,,,।

( सालु बिरजू से नाराज होते हुए दूसरी तरफ मुंह फेर कर खड़ी हो गई,,,)

अरे नाराज क्यों होती हो,,,?

नाराज ना होऊ तो क्या होऊ तुम्हारी वजह से मेरे बारे में मेरे मन के बदन को देख लिया जो कि ऐसा कभी होने वाला नहीं था,,,

अरे तो उसे थोड़ी पता है कि तालाब में से जिस लड़की को नंगी निकल कर भागते हुए देखा था वह उसकी बहन है,,,।

वह पूछ रहा था और मैं उसे बोल दिया कि पास के गांव की लड़की है,,,

वह मान गया,,?( शालू आश्चर्य होते हुए बोली,,।)

अरे मानेगा कैसे नहीं उसने तुम्हारा चेहरा थोड़ी देखा था हां यह बात और है कि अगर तुम्हें पहले वह नंगी देखा होगा तो पहचान लेगा,,,,( बिरजू की बात सुनते हैं शालू अपने दोनों हाथों को कमर पर रखकर गुस्से से उसे देखने लगी,,,।)

अरे गुस्सा क्यों होती हो मैं तो मजाक कर रहा हूं,,,।

( बिरजू की बात सुनकर निश्चिंत होकर वह बिना कुछ बोले वहां से जाने लगी तो बिरजू उसे पीछे से आवाज देता हुआ बोला,,,।)

कल इसी समय मिलना आम की बगिया में,,,

( बिरजू की बात सुनकर सानू एक पल के लिए पीछे की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी,,, लेकिन रुकी नहीं और ना ही एक शब्द बोली तो बिरजू ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,।) मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा,,,।

( इतना सुनकर शालू लगभग भागते हुए खेतों की तरफ जाने लगे वह काफी खुश थी और बीरजु भी काफी प्रसन्न नजर आ रहा था,,।)
 
दूसरे दिन शालू ठीक समय पर आम की बगिया पर पहुंच गई,,, आपकी बगिया बिरजू का ही था,,, जहां पर एकदम नीरव शांति थी चारों तरफ हरियाली हे हरियाली और यहां पर दूसरा कोई आता भी नहीं था,,,, इसलिए बिरजू शालू को यहां मिलने के लिए बुलाया था वैसे तो पहले वह लोग नदी के किनारे झरने पर मिला करते थे लेकिन जिस दिन से वहां पर रघु पहुंच गया था तब से वह दोनों की मुलाकात हुई ही नहीं थी,,, और जब मुलाकात हुई तो बिरजू ने शालू को आम की बगिया पर ही बुलाया,,,, शालू का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी आम की बगिया पर उन दोनों के सिवा तीसरा कोई नहीं होगा क्योंकि यह गांव से थोड़ा दूर भी था और अभी आम पके नहीं थे बस अभी-अभी डालियों पर आम लगना शुरू हुए थे इसलिए यहां पर किसी के भी आने का डर नहीं था,,,।

शालू को थोड़ी घबराहट हो रही थी क्योंकि मन के कोने में उसे यह डर रहता था कि कहीं बिरजू उसके साथ उल्टा सीधा ना कर दे लेकिन उसे अपने आप पर थोड़ा विश्वास भी था कि उसके पैर नहीं डगमगाएंगे लेकिन कुछ दिनों से शालू का धैर्य ऐसा लगता कि कभी भी खो जाएगा,,,। और दोनों बार उसके छोटे भाई रघु की ही वजह से हुआ था,,,।

पहली बार तो वह पूरी तरह से अपना आपा खो देखो तो बची थी क्योंकि नजारा ही उसकी आंखों के सामने इस तरह का आ गया था कि वह चाहकर भी अपनी नजरों को हटा नहीं पा रही थी जब वह अपने भाई को जगाने गई थी,, और यह भी सच था की शालू जिंदगी में पहली बार किसी के लंड को अपनी आंखों से देख रही थी,,,, सभी अपने ही छोटे भाई रघु का,,,, उस दिन अपने भाई के लंड चोदने की तरह जिस तरह की कसम साहब उत्तेजना और रुक सकता उसके तन बदन में हलचल मचा रहा था उस तरह का एहसास उसे कभी नहीं हुआ था उस दिन उसका मन अपनी भाई की लंड को अपने हाथ में पकड़ने के लिए मचल उठा था बड़ी मुश्किल से वह अपने आप को संभाले हुए थी,,,।

और दूसरी बात अब जब वहां नहा कर कमरे में अपने बालों को सवार रही थी और उस वक्त वह केवल अपनी कुर्ती पहने हुए थे सलवार नहीं पहनी थी और कब उसका भाई दरवाजे पर आकर उसे ना जाने कब से निहार रहा था इस बात का उसे पता तक नहीं चला जब उसने पीछे मुड़कर देखें तो वह कमर के नीचे के अपने नंगे पन को छुपाने की अफरातफरी में पूरी तरह से शर्मिंदा हो गई थी लेकिन यह बात उसे अंदर तक उत्तेजित कर गई थी कि उसका भाई उसके नंगे बदन को अपनी फटी आंखों से देख रहा था,,,,।

आज आज भी जब वह बिरजू से आम की बगिया में मिलने आई थी तो उसके मन में वही सब बातें चल रही थी,,,।

शालू दूर से देखी तो बिरजू बड़े पत्थर भी छोटे से गड्ढे में भरे पानी में कंकड फेंक रहा था,,

शालू दबे कदमों से उसकी तरफ जाने लगी क्योंकि जिस तरह से वह निश्चिंत होकर पत्थर पर बैठकर गड्ढे में कंकड़ फेंक रहा था शालू ऊसे डराना चाहती थी,,, और धीरे-धीरे जाकर वह बिरजू के कान के पास जोर से चिल्लाई वाकई में बिरजू एकदम से डरकर चिल्ला उठा,,,,। और उसे डरा सहमा देखकर शालू जोर जोर से हंसने लगी उसकी हंसी नहीं समा रही थी और उसको हंसता हुआ देखकर बिरजू को तो थोड़ा गुस्सा आया लेकिन उसकी खूबसूरत चेहरे को देखकर उसका गुस्सा हवा में फुर्र हो गया,,,,।

क्या यार शालू तुम भी,,,।

बिरजू तुम तो बच्चों की तरह डर गए ,,,(शालू हंसते हुए बोली) तुम इतना खो गए कि तुम्हें मेरे आने का एहसास तक नहीं हुआ,,,।

हां तुम सच कह रही हो मैं एकदम से खो गया था लेकिन तुम्हारे ख्यालों में तुम्हारे बारे में सोच रहा था,,,।

मेरे बारे में क्यों,,,? ( शालू भी उस बड़े पत्थर पर बिरजू के करीब बैठते हुए बोली,,,।)

क्योंकि मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,।

क्या समझ में नहीं आ रहा है,,,( शालू इस बार शांत स्वर में बोली)

यही कि हम दोनों का क्या होगा सच कह रहा हूं शालू,,,( बिरजू उसके दोनों कमरों को पकड़कर उसकी तरफ देखते हुए बोला,,,।) तुम अगर मुझे नहीं मिली तो मैं मर जाऊंगा,,,,

ऐसा क्यों कह रहे हो,,,,( शालू तुरंत अपनी हथेली उसके होठों पर रखते हुए बोली)

पता नहीं पिताजी हम दोनों की शादी करने की मंजूरी देंगे या नहीं,,,,।

( फ्रिज की बात सुनकर शालू भी चिंतित हो गई और बोली,)

तुम्हें ऐसा क्यों लग रहा है बिरजू,,,,।

पता नहीं लेकिन ना जाने क्यों मन में डर जैसा लग रहा है,,,

( बिजी हो अपने मन में जिस वजह से डर का सैलाब उठा था उस बात को दबा ले गया क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी औकात और शालू की हालात में जमीन आसमान का फर्क था उसके पिताजी कभी नहीं चाहेंगे कि छोटे घर में उसकी शादी हो,,,।)

तुम चिंता मत करो फिर जो मैं हूं ना अगर तुम्हारे पिताजी दोनों की शादी की इजाजत नहीं भी देंगे तो मैं तुम्हें भगा ले जाऊंगी,,,

( यह सुनकर बिरजू उसकी तरफ देखकर हंसने लगा और उसको हंसता हुआ देखकर शालू बोली,,,।)

क्यों क्या हुआ हंस क्यों रहे हो,,,।

तुम मुझे भगा ले जाने की बात कर रहे हो तुम्हारे में इतनी हिम्मत है,,,।

बिरजू अब तुम ज्यादा बोल रहे हो मेरे में बहुत हिम्मत है,,,।

देखा हूं मैं तुम्हारी हिम्मत कपड़े उतारने के लिए बोलो तो कितना नाटक करती हो,,,।

वह बात अलग है,,, शादी से पहले मैं कुछ ऐसा वैसा नहीं करना चाहती,,,

क्यों नहीं करना चाहती,,,?

तुम सच में पागल हो ,, क्योंकि एक लड़की के लिए उसका इज्जत ही सबसे बड़ा गहना होता है और अगर तुम ही मेरे गहने को लूट लिए और उसके बाद मुझसे शादी करने से इंकार कर दिए तो मेरे पास बचेगा क्या,,,,? मैं तो बर्बाद हो जाऊंगी,,,।

सिर्फ कपड़े उतारने में कैसे बर्बाद हो जाओगी,,,

झरने के नीचे क्या हुआ यह तो तुम अच्छी तरह से जानते हो ना अगर सोचो मेरा भाई मेरा चेहरा देख लिया होता तो क्या होता,,,,

कुछ नहीं होता तुम्हारे खूबसूरत चेहरे हो तुम्हारे खूबसूरत नंगे बदन को देख कर तुम्हारा भाई भी तुम्हारी चुदाई कर देता,,,,

धत्,,,, यह कैसी बातें कर रहे हो तुम्हें शर्म नहीं आती मेरे भाई के बारे में इतनी गंदी बातें कर रहे हो क्या मैं तुमसे बात नहीं नहीं करती,,,,।( इतना कहकर शालू गुस्से में जाने लगे तो बिरजू दौड़ कर उसका हाथ पकड़ते हुए बोला,,,।)

अरे अरे सुनो तो तुम तो एकदम नाराज हो गई,,,

नाराज होने वाली बात ही कर रहे हो क्या कोई अपनी बहन को गंदी नजरों से देखता है जो तुम मेरे भाई के बारे में ऐसा कह रहे हो,,,,

मैं तो सिर्फ मजाक कर रहा था मेरी रानी,,,

मुझे ऐसा मजाक बिल्कुल भी पसंद नहीं है बिरजू,,,( ऐसा कहते हुए सालों अपने दोनों हाथ को बांधकर अपनी छाती पर रखते हो दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई,,,)

शालू शालू शालू मेरी जान मैं तो मजाक कर रहा था तुम्हारा दिल दुखाने का मेरा बिल्कुल भी ईरादा नहीं था,,,,( बिरजू को लगने लगा कि मजाक में क्या करने का कुछ ज्यादा ही बोल गया है इसलिए शालू के सामने कान पकड़ कर उठक बैठक करते हुए बोला,,,।)

मुझे माफ कर दो शालू आइंदा से ऐसी गलती नहीं होगी,,,,। मुझे क्या मालूम था कि मेरी शालू रानी नाराज हो जाएगी,,,।

नाराज क्यों ना होऊ अगर मैं भी कहूं की तुम भी अपनी मां को नंगी देखकर उसकी चुदाई कर दोगे तो तुम्हें क्या अच्छा लगेगा,,,,।

वाह सालु रानी तुम्हारे मुंह से चुदाई शब्द सुनकर मैं तो धन्य हो गया,,,।

( बिरजू की बात सुनते ही शालू को इस बात का एहसास हुआ कि अनजाने में उसके मुंह से गंदा शब्द निकल गया था इसलिए वह तुरंत अपने दांतो तले उंगली दबाते हुए बोली,,।)

ऊई,,,, मां,,,,, यह क्या हो गया नहीं नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए था,,,, हे भगवान यह मैंने क्या कर दी,,,,

( शालू को परेशान होता हुआ देखकर बिरजू हंसने लगा,,,। बस इतना हंस रहा था सालों इतना ज्यादा परेशान और गुस्सा हो रही थी,,, शालू गुस्से में और भी ज्यादा खूबसूरत लगती है इस बात का एहसास बिरजू को अब हो रहा था,,,, बिरजू काफी उत्तेजना का अनुभव करने लगा और शालू हे भगवान हे भगवान करके इधर-उधर घूम रहे थे वास्तव में उसके मुख्य से पहली बार इतना गंदा शब्द निकला था इसलिए वह अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी और बिरजू तुरंत उसके पास जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया,,, लेकिन फिर भी शालू अपने मन में ही बड़बड़ाए जा रही थी,,,, बिरजू को भी इस बात का एहसास हुआ कि शालू वाकई में काफी परेशान है इसलिए उसे शांत करने के लिए बोला,,,।)

कुछ नहीं हुआ शालू कुछ नहीं हुआ तुम गंदी लड़की नहीं हो तुम अच्छी लड़की हो बहुत अच्छी लड़की हो तुम जाने में तुम्हारे मुंह से ऐसी बात निकल गई,,,, तुम बहुत अच्छी लड़की हो,,,,,( बिरजू से कसके अपनी बाहों में लिया हुआ था लिया हुआ क्या था जिस तरह से वहां परेशान हो रही थी उसे देखते हुए फिर जो उसे पकड़े हुए था शालू इस समय बेहद खूबसूरत लग रही थी उसके बाल बिखर गए थे उसके बालों की लट उसकी गानों को छू रही थी,,,,)

मैं अच्छी हूं मैं अच्छी लड़की हूं,,,

हां शालू तुम बहुत अच्छी लगती हो बहुत अच्छी एकदम सीधी-सादी,,,,( ऐसा कहते हुए बिरजू के होंठ शालू के होठों से बेहद करीब आ गए,,,, जब इस बात का एहसास शालू को हुआ तो वह एकदम से शर्मसार हो गए उसका बदन शर्म के मारे कसमसाने लगा,,, लेकिन बिरजू शालू के लाल होठों को इतने करीब देखकर एकदम बदहवास मदहोश होने लगा और वह अपने आप को छोड़ा पाती इससे पहले ही अपने होंठ को शालू के होंठ पर रखकर उसके लाल होठों से मधुर रस को पीना शुरू कर दिया,,,, शुरू शुरू में शालू उसकी पकड़ से अपने आप को छुड़ाने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन थोड़ी ही देर में इस प्रगाढ़ चुंबन के असर मैं वह खुद मदहोश होने लगी,,,, और देखते ही देखते शालू भी बिरजू के होंठों को अपने होठों में भरकर चूसना ,,, शुरू कर दी,,,, देखते ही देखते दोनों मदहोश होने लगे बिरजू काफी उत्तेजित हो गया था इस समय आम की बगिया में किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए बिरजू की हिम्मत बढ़ने लगी थी और जिस तरह से वह उसके होठों को चूम कर उसका सरकार दे रही थी उसे देखते हुए बिरजू छोट लेना चाहता था इसलिए उसकी पीठ पर से अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ लाते लाते शालू के भरपूर जवान नितंबों पर अपनी दोनों हथेली रखकर उन्हें जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,,, शालू को इस बात का एहसास हो रहा था कि बिरजू उसके नितंबों को अपनी हथेली से मसल रहा है और उसे अच्छा भी लग रहा था सलवार के ऊपर से शालू की मदमस्त सुडोल करण को अपने हाथों से दबाने में बिरजू को बहुत आनंद आ रहा था दोनों का चुंबन और भी ज्यादा उत्तेजना से भरपूर होता जा रहा था,,,,, लेकिन तभी ना जाने क्या हुआ कि शालु तुरंत उसको धक्का देकर पीछे हट गई,,,, उसकी सांसे अभी भी बहुत गहरी चल रही थी लेकिन बिरजू से बिना कुछ बोले वह तुरंत वहां से भाग खड़ी हुई,,,, उत्तेजना के मारे हंसते हुए बिरजू भी उसे भागता हुआ बस देखता ही रह गया,,,, बिरजू से रोकने की कोशिश नहीं किया क्योंकि वह समझ गया था कि यह चुंबन और उसकी हरकत जो कुछ भी हुआ था वह अनजाने में हुआ था शालू से ज्यादा आगे बढ़ने नहीं देगी इस बात का एहसास बिरजू को अच्छी तरह से था लेकिन आज पहली बार बिरजू हिम्मत दिखाते हुए उसके होंठों को अपने होठों में लेकर चूस रहा था एक नशा सा उसके बदन में उतर चुका था उसकी नरम नरम नितंबों को दबाकर एक अतुल्य एहसास अपने अंदर भर लिया था,,,। जिसकी वजह से उसके पजामे में अच्छा खासा तंबू बन चुका था,,,। चुंबन से ज्यादा कुछ ना कर सकने का मलाल उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था,,,।
 
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