Incest बरसात की रात,,,(Completed) - Page 13 - SexBaba
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Incest बरसात की रात,,,(Completed)

Raghu ka jaandaar lund jise dekhkar uski maa ki boor pighal rahi thi

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रात को सोते समय कजरी की हालत खराब हो रही थी दिन में खाना खाते समय जिस तरह का नजारा रघु ने अपनी मां को दिखाया था उसे देखकर उसका तन बदन तुझको देखा रहा था,,, उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि एक मर्द का लंड कितना मोटा तकड़ा होता है,,, वाकई में पैसे भी अपने बेटे के मुसल पर पूरी तरह से फिदा हो चुकी थी,,,हालांकि उसके मन में अपने बेटे को लेकर इस तरह के ख्याल जब भी आते थे तब तो हम वाला ग्लानि से भर जाती थी उसे अपने ऊपर गुस्सा भी आता था और बार बार कसम खाकर अपने बेटे की तरफ,, उसके प्रति गंदे विचार मैं नहीं लाती थी लेकिन क्या करें नजरों के साथ-साथ जरूरत और जवानी दोनों का कसूर था जो कि बार-बार कजरी का ध्यान अपने बेटे पर चला जाता था,,, और अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को याद करके ना जाने कितनी बार उसकी बुर पसीज ऊठती थी,,,। वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसका आकर्षण उसके ही सगे बेटे के प्रति हो जाएगा,,,अगर किसी के प्रति उसका आकर्षण बढ़ता तो शायद उसके मन में इतनी ग्लानी नहीं होती लेकिनअपने ही बेटे के बारे में अपने मन में गंदे विचार लाकर उसे दुख तो बहुत होता था लेकिन मजबूर हो जाती है क्योंकि जिस तरह के ख्याल उसके मन में अपने बेटे को लेकर आ रहे थे उससे उसके तन बदन में जिस तरह की हलचल होती थी उसे महसूस करके उसका तन बदन आनंद भीबोर हो जाता था यह अलग बात थी कि उसकी प्यास दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी,,,, इसलिए तो वह रात को छत पर सोते समय अपने हाथों से ही अपने खरबूजे को हल्के हल्के दबा रही थी,, साथ ही ,,,रह रह कर अपना एक हाथ अपनी दोनों टांगों के बीच में जाकर अपनी मखमली रोटी की तरह फुली हुई बुर को दबा दे रही,,,जब जब अपने ही हाथों से अपनी फुली हुई बुर को दबाती थी तब तब उसका मन मचल उठता था उसके बदन में अजीब सी ऐंठन होने लगती थी,,,लेकिन फिर भी उसकी यह हरकत ऊसके बेटे और उसकी बेटी की नजरों में ना आ जाए इसलिए अपना मन मार कर जैसे तैसे करके वह नींद की आगोश में चली गई,,,।

दूसरी तरफ शालू के तन बदन में आग लगी हुई थी वह अपने भाई से फिर से एकाकार होना चाहती थी,,, जिस दिन से उसका भाई गया था उस दिन से उसकी प्यास को ज्यादा ही भड़कने लगी थी,,, बिरजू के साथ,, शारीरिक संबंध बनाते समय उसकी आंखों के सामने सरेआम उसकी नाकामी को देख कर उसे इस बात का आभास हो गया था कि उसकी गर्म जवानी को उसका भाई ही ठंडा कर सकता है,,,। खाना खाने के बाद वह भी छत पर आ गई जहां पर एक कोने पर उसका भाई सो रहा था,,,शालू एक नजर अपनी मां के ऊपर डाली तो वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो रही थी वह निश्चिंत हो गई,,, और सीधे अपने भाई के पास चली गई,, शालू से रहा नहीं जा रहा था उसकी बुर में आग लगी हुई थीजिस तरह कि वह संस्कारी और सीधी-सादी लड़की थी अपने भाई के संगत में आते ही एक बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद से वह संस्कारी से बेशर्म लड़की बन गई अब दीन रात‌ ऊसे सिर्फ अपने भाई के लंड की जरूरत रहती थी,,, अपने भाई के करीब पहुंचते ही वह बैठ गई और सीधे तोलिए के अंदर हाथ डाल कर अपने भाई के लंड को पकड़ ली जो कि अभी पूरी तरह से,,, खड़ा नहीं था,,, रघु की नींद तुरंत खुल गई लेकिन सामने अपनी बड़ी बहन को देखकर उसके होठों पर मुस्कान आ गई,,,।

हरामी कितना तड़पा रहा है तू,,, सुबह से आया है लेकिन मेरी तरफ जरा भी ध्यान नहीं दिया,,।(लंड को जोर से अपनी हथेली मे कसते हुए बोली जिसकी वजह से रघु के मुंह से दर्द भरी आह निकल गई,,,)

आहहहह,,, दीदी तुम्हारे लिए तो गया था मैं,,,

क्या करने के लिए,,,,(अपने भाई के लंड को ऊपर नीचे करके मुठीयाते हुए बोली,,)

सससहहहह आहहहहहह,,, दीदी तुम्हारी शादी की बात करने के लिए,,,।

तो हुई कि नहीं,,,,

हुई ना दीदी बड़ी मालकिन से,,,,

वो मान गई,,,,,(लंड को हिलाते हुए)

मानेंगी कैसे नहीं वह बहुत अच्छी है,,,

(अपने छोटे भाई के बाद सुनकर शालू मन ही मन खुश हो रही थी,,, लेकिन इस समय तो अपने भाई के लंड को पकड़ कर उसके बदन में उन्माद चढ रहा था,,, उसका जोश बढ़ रहा था उसकी आंखों में नशा छा रहा था,,, इसलिए वह अपने दोनों हाथों का सहारा लेकर अपनी कमीज को ऊपर करके उसे निकालते हुए बोली,,,।)

क्या मुझसे भी ज्यादा अच्छी है,,,,(कमीज निकलते ही शालू की दोनों नारंगी हवा में उछलने लगी जिस पर नजर पड़ते ही रघु की हालत खराब होने लगी और वह अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहन की दोनों चूचियों को अपने हाथ में भरकर दबाते हुए बोला,,,)

नहीं तुमसे अच्छी नहीं है,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी बहन को उसकी चूची पकड़कर ही अपनी तरफ खींचा जिससे शालू दर्द से कराह उठी लेकिन जिस तरह से उसका भाई उसकी चूचियों को दबा रहा था दर्द से ज्यादा उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी और काफी दिन हो गए थे मर्दाना हाथों को अपने जिस्म कोई स्पर्श कराएं इसलिए वह पूरी तरह से मचल उठी,,, रघु अपनी बहन को अपनी बाहों में भर लिया था और साथ ही उसकी एक चूची को अपने मुंह में भर कर पीना भी शुरू कर दिया था पल भर में ही शालू के मुंह से उन मादक सिसकारियां निकलने लगी,,, अपनी बहन की चूची को पीते हुए अपना दोनों हाथ नीचे की तरफ से जाकर रघु अपनी बहन की सलवार की डोरी खोलने लगा,,, जिस तरह से रघु पूर्ति दिखाता हुआ अपनी बहन के बदन से खेल रहा था ऐसा लग रहा था कि सालों से ज्यादा उतावला रघू है,,, पल भर में ही रख लो अपनी बहन को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया वह अपने भाई की बाहों में एकदम नंगी थी,,।दोनों पूरी तरह से जोश से भरे हुए थे इस समय दोनों को अपनी मां का भी डर नहीं लग रहा था कि कहीं उसकी नींद खुल गई और वह दोनों को इस तरह से निर्वस्त्र अवस्था में देख ली तो क्या होगा,,, दोनों जवानी के नशे में खोए हुए थे,,,, शालू अपने भाई को अपनी बुर से चटाना चाहती थी इसलिए वह बिना अपने भाई को आगाह किए सीधा अपनी गोल-गोल गांड को अपने भाई के मुंह पर रख दी,,,शालू की यही हरकत से पता चल रहा था कि जवानी के जोश में पवित्र रिश्ते भी इस तरह से तार तार हो जाते हैं क्योंकि सालु की आंखों में इस समय बिल्कुल भी शर्म नहीं थी वह बेशर्म हो चुकी थी,,,रघु को मालूम था उसे क्या करना है इसलिए वह अपना दोनों हाथों से अपनी बहन की बड़ी बड़ी गांड को थाम कर अपनी जीभ अपनी बहन की बुर में डाल कर चाटना शुरू कर दिया,,, रघु की यह हरकत सालु की जान लिए जा रही थी उसका बदन अकड़ रहा था,,, और देखते ही देखते पलभर में ही शालू झड़ने लगी और उसका छोटा भाई अपनी बहन की बुर में से निकले मदन रस को अमृत रस समझकर सारा का सारा गटगटा गया,,,। रघु की यह हरकत शालू को बहुत प्यारी लगती थी,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे आज पूरा मोर्चा शालु ही संभालेगी,,, इसलिए तो वह बिना कुछ बोले अपने दोनों घुटनों को मोड़कर अपने भाई के कमर के इर्द-गिर्द रखकर और एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने भाई के खड़े लंड को पकड़ लिया और उसके लंड का मोटा छुपाना धीरे-धीरे अपनी गांड को नीचे की तरफ लाकर अपनी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रखने लगी,,, शालू की इस अद्भुत हरकत की वजह से रघु के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,, और देखते ही देखते शालू अपनी गांड का वजन अपने भाई के लंड पर रख कर उसे धीरे-धीरे अपनी गुलाबी बुर के अंदर ले ली,,,, अद्भुत अदम्य और जवानी का जोर से खाते में शालू अपने भाई के लंबे मोटे तगड़े लंड को अपनी गुलामी पुर के छोटे से छेद में पूरी तरह से ले चुकी थी एक तरह से अपने भाई के लंड को अपनी बुरनुमा गुफा में छुपा ली थी,,,, रघु का लंड भी अपनी बहन की बुर के अंदर जाकर राहत महसूस कर रहा था,,,। शालू पूरा जोर लगा कर अपने भाई के लंड पर अपनी बुर पटक रही थी,,, दोनों का मजा आ रहा था रघु को और ज्यादा कुछ करने की जरूरत बिल्कुल भी जान नहीं पड रही थी वह केवल अपना दोनों हाथ उठाकर अपनी बहन के दोनों संतरो को पकड़कर उन्हें दबा रहा था,,,, शालू मस्त हो जा रही थी जवानी का सुख क्या होता है उसे पूरी तरह से अपने भाई से नीचोड़ लेना चाहती थी,,,, और थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ आपने लगे क्योंकि दोनों चरम सुख को प्राप्त कर चुके थे,,,,

अपने भाई से चुदवाने के बाद शालू कपड़े पहन कर उसके बगल में ही सो गई और सुबह अपनी मा के उठने से पहले ही उठ गई,,,। रघु भी उठ कर सीधे लाला के घर जाने लगा क्योंकि वह पूछना चाहता था कि कहीं तांगा से आना जाना तो नहीं है क्योंकि एक तरह से लाला ने उसे नौकरी पर रख लिया था,,,,

लाला की बहू कोमल नहाने के लिए गुशल खाने में गई हुई थी,,, नही लेने के बाद उसे पता चला कि वह कपड़े लेकर गुशलखाने में आई ही नहीं थी,, इसलिए वह अपने भी के कपड़ों को वापस से अपने बदन से लपेट ली लेकिन कपड़े गीले होने की वजह से उसके बदन से एकदम से चिपक गए और उसके नितंबों का उभार सही मायने में सही आकार सहित नजर आने लगा,,,, और वह उसी तरह से गीले कपड़ों में ही गुशल खाने से बाहर आ गई,,,, लेकिन तभी लाला का उधर आना हुआ और वह दरवाजे पर पहुंचते ही अपनी बहू के भीगे बदन और उनके कपड़ों में उसके गोलाकार नितंबों को देखकर उसकी आंखों में बसना की चमक नजर आने लगी अपनी बहू के खूबसूरत भीगे नितंबों को देखकर उसके लंड बरकत होने लगी उसकी धोती में सुरसुराहट होने लगी,,,, उससे रहा नहीं गया वह पुरी तरह से वासना में अंधा हो गया और तुरंत दरवाजा बंद करके उस पर कड़ी लगा लिया दरवाजा बंद होने की आवाज सुनते ही उसकी बहू कोमल की नजर दरवाजे पर पड़ी तो वहां पर वह अपने ससुर को देखकर घबरा गई,,,

बाबूजी आप यहां,,,,(गीले वस्त्रों में से झांक रहे अपने कोमल अंगों को छुपाते हुए वह बोली,,,)

हां बहू तुम्हारी खूबसूरत जवानी देख कर मुझसे रहा नहीं किया और मैं इधर आ गया,,,

(अपने ससुर के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर को एकदम से आश्चर्य में पड़ गई और घबराते हुए बोली,,)

यह क्या कह रही बाबू जी इस तरह की बातें आपको शोभा नहीं देती,,,,।(उसी तरह से अपने अंगों को छुपाते हुए वह बोली)

बहू तुम्हारी गर्म जवानी देख कर मैं बहकगया हूं आओ मेरी बाहों में आ जाओ,,,( इतना कहते हुए लाला अपनी बाहों को अपनी बाहों में लेने की चेष्टा करने लगा तो उसकी बहू घबरा कर उसे धक्का देने लगी,,,)

भगवान के लिए ऐसा मत करिए आप मेरे पिता समान है इस तरह की गंदी हरकत करके पवित्र रिश्ते को लांछन मत लगाइए,,,।

कैसा पवित्र रिश्ता बाबू तुम एक औरत हो और एक मर्द अच्छी तरह से जानता हूं तुम्हें एक मर्द की आवश्यकता है और मेरा बेटा वह कमी कभी पूरा नहीं कर सकता यह बात तो भी अच्छी तरह से जानती हो और मैं भी अच्छी तरह से जानता हूं वह मंदबुद्धि का है तभी तो तुम्हें छोड़कर ना जाने कहां भटक रहा है,,, तुम्हें जवानी की आग में इस तरह से तड़पता हुआ मैं नहीं देख सकता,,,।(ऐसा कहते हुए वह एक बार फिर से अपने बाबू के करीब जाने लगा और इस बार बार नहीं बहू का दोनों हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे अपने सीने से लगा लिया ऐसा करने से लाला की छाती पर कोमल के नरम नरम सूची एकदम से दसवीं लगी जिसे अपनी छाती पर महसूस कर के लाला एकदम से मगन हो गया एकदम से मस्त हो गया मदहोश होने लगा और तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अपनी बहू की गोल-गोल बड़ी बड़ी गांड को दबाना शुरू कर दिया लाला की बहू एकदम से घबरा गए और उसे छोड़ देने की दुहाई देने लगी लेकिन लाल आप कहां मानने वाला था वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था वासना में चूर हो चुका था मदहोशी और उत्तेजना उसके सर पर सवार हो चुकी थी धोती के अंदर उसका लंड खड़ा होने लगा था,,, लेकिन फिर भी उसकी बहू पूरा जोर लगा कर उसकी कैद से आजाद होना चाहती थी,,, और इस बार बार लाला को धक्का देने में सफल भी हो गई लेकिन दूर झटकते हुए लाला के हाथों में उसकी बहू की साड़ी आ गई और एक झटके में ही वह साड़ी खींचती चली गई और लाला की बहू कॉल को उसी जगह पर घूमने लगी और पल भर में ही उसके बदन पर से उसकी गीली साड़ी भी उतर गई वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,, लाला की बहू अपने नंगे बदन को छुपाने की भरपूर कोशिश करने लगी लेकिन क्या छुपा पाती चूचियों पर हाथ रखती तो जांघों के बीच के पतली दरार नजर आने लगती थी और पतली दरार पर हाथ रखती तो ऊपर के दोनों खरबूजे हवा में लहरा उठते थे,,,लाला तो अपनी खूबसूरत बहू के नंगे जिस्म को देखकर बावला हो गया उसके होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी,,,।

छोड़ दो बाबू जी भगवान के लिए छोड़ दो मैं कहीं भी किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाऊंगी,,,।

ऐसा कभी नहीं होगा बहु यह राज सिर्फ मेरे और तुम्हारे बीच ही रहेगा,,,।(ऐसा कहते हो हमें इतना ना फिर से आगे बढ़ने,,, लाला की बहू एकदम से घबरा गई थी उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अपने ससुर के सामने अपने आप को एकदम नंगी होता हुआ देखकर वह एकदम शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी ,,, और अपनी बहू का नंगा बदन देखकर लाला का दिल एक बार फिर से जवान होने लगा वह आगे बढ़ कर उसे फिर से एक बार अपनी बाहों में ले लिया और पूरी तरह से मस्त हो गया इस बार क्योंकि वह अपनी नंगी बहू को अपनी बाहों में लिया था बरसों के बाद में किसी औरत को एकदम नंगी करके अपनी बाहों में ले रहा था हालांकि वह कई औरतों के साथ शारीरिक संबंध बना चुका था लेकिन पूरी तरह से नंगी करके बहुत कम औरतों को चोदा था,,,लाला की बहू घबरा चुकी थी उसे लगने लगा था कि अाज ऊसकी इज्जत उसके ससुर के हाथों नहीं बच पाएगी,,, वह जोर से चिल्लाना चाहती थी अपनी इज्जत बचाने की गुहार लगाना चाहती थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी,,,।

लालाजी,,,, मे‌ रघू,,,,
 
रघु की आवाज सुनते ही लाला की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई,,, उसकी बहू कोमल अभी भी संपूर्ण रूप से नंगी उसकी बाहों में थी,,, जो कि रघू की आवाज सुनते ही उसके चेहरे पर खुशी के भाव प्रकट होने लगे,,,। लाला की हालत खराब हो जाएगी दरवाजे के अंदर लाला अपनी बहू के साथ मुंह काला करने के फिराक में था,,, इसीलिए तो उसे एकदम नंगी अपनी बाहों में भर लिया था और दरवाजे के बाहर रघू,,, आकर खड़ा हो गया था उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि दरवाजे के पीछे एक ससुर अपनी बहू की इज्जत लूटने के लिए पूरी तरह से उतारू हो चुका है,,, वह तो लाला के पास काम की वजह से ही आया था और शायद भगवान कोमल की इज्जत बचाना चाहते थे तभी तो रघु को एन मौके पर भेज दिए थे,,,,, कमरे के अंदर पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था लाला कभी अपनी बहू की तरफ तो कभी दरवाजे की तरफ देख रहा था दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी और कोमल अंदर ही अंदर खुश हो रही थी और भगवान से प्रार्थना करते हुए ऐसे धन्यवाद दे रही थी कि सही मौके पर उसने रघू को भेज दिया था,,, लाला को समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करें उसके तो खड़े लंड पर हथोड़ा पड़ गया था,,,

अंदर से आवाज नाता देख कर रखो फिर से दरवाजे की सीट के नहीं पकड़ कर उसे बजाते हुए बोला,,,,।

लाला कोई है क्या छोटी बहू,,,,,

(इतना सुनते ही कोमल जोर से चिल्लाने के लिए जैसे ही अपना मुंह खोलने को हुई लाला जोर से उसका मुंह अपने हाथ से दबाते हुए उसे चुप कर दिया,,,। और उसे धमकी देता हुआ बोला,,,,।)

खबरदार जो तूने मुंह से एक शब्द भी निकाले तो,,,, तुम मुझे अच्छी तरह से जानती नहीं मैं जितना सीधा दिखता हूं इतना सीधा हुं नहीं,,,, देख मैं जा रहा हूं दरवाजा खोलने यहां जो कुछ भी हुआ अगर तुम्हें एक शब्द भी इसे बताई तो तुम दोनों की लाश ढूंढने पर भी नहीं मिलेगी,,, मेरे आदमी तुम दोनों को मार कर ऐसी जगह दफन करेंगे की तुम दोनों की लाश ढूंढने पर भी नहीं मिलेगी,,,, समझ रही है ना मैं क्या कह रहा हूं,,,,।(अपने ससुर की बात सुनकर कोमल एकदम से घबरा गई थी क्योंकि वह उसका मुंह बंद करने के साथ-साथ उसका गला भी जोर से दबाए हुए था जिससे उसकी सांस घुट रही थी,,, और वह अपने ससुर की बात मानते हैं हां मैं से हिला दे क्योंकि अपने ससुर की हरकत को देख कर उसे अंदाजा हो गया था कि वह किस कदर तक नीचे गिर सकता है वह जो बोल रहा है वह कर भी सकता है इसलिए वह खामोश रहना ही उचित समझी,,,)

देख अंदर की बात बाहर नहीं जानी चाहिए अगर गई तो तेरी खेर नहीं और तेरे साथ साथ इस रघू को कुछ भी बताई तो यह भी मारा जाएगा,,,,(इतना सुनकर कोमल हां में सिर हिला दी वह पूरी तरह से घबरा चुकी थी,,,) देख अब अंदर जा और कपड़े पहन ले लेकिन बाहर बिल्कुल भी मत आना,,,(इतना कहते हुए लालाअपनी बहू को अपनी पकड़ से आजाद करने लगा लेकिन अभी तक उसके नंगे बदन की गर्माहट को अपने बदन में महसूस करके वह पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था,,,इसलिए उसे अपनी बाहों के कैद से आजाद करते हुए अपना एक हाथ उसकी तनी हुई चूची पर रख कर जोर से दबाते हुए बोला,,,।)

सससससस,,,,मस्त चुची है रे तेरी,,, तुझसे तो मैं बाद में निपटुंगा,,,, जा अंदर चली जा,,,,(इतना सुनते ही उसकी बहू अपनी गीली साड़ी उठाई और अंदर जाने लगी,,, लाला एक नजर अपनी बहू पर मारा जो किउसकी बहू अभी भी पूरी तरह से नग्न अवस्था में थी वह अपने बदन को ढकने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की थी शायद वह पूरी तरह से सदमे में थी इसलिए उसी तरह से अपने कमरे की तरफ जा रही थी और लाला उसके गोलाकार नितंबों की थिरकन को देखकर मदमस्त होता हुआ अपनी नजरों को सेंक रहा था,,। जैसे ही लाला की बहू कमरे में गई वह दरवाजा बंद कर ली,,,

लालाजी हो कि नहीं,,,,।

हां आया रुक जा,,,,(लाला को रघु पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था अगर उसकी जगह कोई और होता तो शायद उसकी हड्डी पसली एक करवा देता लेकिन ऐसा हुआ रघु के साथ नहीं कर सकता था क्योंकि कजरी पर उसका दिल आ गया था और लाला को ऐसा लगता था कि वह उसके बेटे के जरिए ही उसकी मां तक पहुंच सकता है,,,। इतना कहने के साथ ही लाला दरवाजा खोल दिया,,,, और रघु दरवाजा खुलते ही अंदर चकर पकर देखने लगा,,, उसकी नजरें लाला की बहू कोमल को ढूंढ रही थी लेकिन वह कहीं नजर नहीं आ रही थी तो रघु बोला,,,।)

लाला जी इतनी देर क्यों लगा दी दरवाजा खोलने में कब से खड़ा हूं,,,,।

कुछ नहीं बस खाना खा रहा था इसलिए देर हो गई,,,।

कोई बात नहीं मैं पूछ रहा था कि कहीं जाना है,,,।

हां हां जाना तो है मेरे समधी प्रताप सिंह के घर मेरी बेटी से मिलने जाना है,,,।

ठीक है मैं तैयार हूं मैं तांगा निकालता हूं,,,(इतना कहकर रघु तांगा निकालने के लिए चला गया उसे भी प्रताप सिंह के घर जाने का बहाना मिल गया था क्योंकि वह उसकी बीवी से मिलना चाहता था थोड़ी ही देर में तांगा लेकर रघु और लाला दोनों निकल पड़े,,,,,,, दूसरी तरफ लाला की बहू कमरे में बैठी सिसक सिसक कर रो रही थी उसे अपनी किस्मत पर गुस्सा आ रहा था इतनी खूबसूरत होने के बावजूद भी उसे नकारा पति मिला था जो कि मंदबुद्धि का था तभी तो उसे छोड़कर ना जाने कहां भटक रहा था वह कहां पर था इसका भी कोई अंदाजा नहीं था ना तो उसे और ना ही उसके बाप को तभी तो मौके का फायदा उठाकर उसका ससुर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहता था कोमल कभी भी अपने मन में यह नहीं सोचते कि उसकी जिंदगी में ऐसा भी पल आएगा जब उसका भी बाप समान ससुर उसकी इज्जत लूटने पर उतारू हो जाएगा,, वह तो भला हो रघु का जो इन मौके पर आकर उसकी इज्जत बचा लिया था भले ही इस बात का पता रघु को नहीं था लेकिन फिर भी उसका सही समय पर वहां पहुंच जाना कोमल की इज्जत बचा ले गया था,,,, कोमल को शर्मिंदगी महसूस हो रही थी वह अपनी नजरों में गिरी जा रहीवह अपने ससुर की बहुत इज्जत करती थी उसे बाप समान का दर्जा देती थी लेकिन आज उसकी आंखों के सामने अपने आप को एकदम नंगी पाकर वह बेहद शर्मिंदगी महसूस कर रही थी उससे भी ज्यादा गुस्सा उसे अब अपने ससुर पर आ रहा था जो कि उसकी लाचारी का पूरा फायदा उठाना चाहता था और उसके नंगे बदन को अपनी बाहों में लेकर अपनी मनमानी करना चाहता था,,, यही सोचकर वह रोती रही और कब सो गई उसे पता नहीं चला,,,।

दूसरी तरफ रघु तांगा लेकर प्रताप सिंह के घर पहुंच चुका था,,,,प्रताप सिंह अपने समिति लाला को देखते ही उसका स्वागत करने के लिए खुद खड़े हो गए और उसे आदर पूर्वक घर में लेकर आए,,, रघु तांगा में रखा हुआ मिठाई और पके हुए आम की टोकरी उठा लिया और हवेली के अंदर चला गया,,, अंदर पहुंचते ही उसे सबसे पहले राधा नजर आई लाला की बेटी जोकि बला की खूबसूरत थी जमीदार की बीवी से राधा का कद कुछ लंबा ही था और भरा हुआ बदन होने की वजह से वह काफी खूबसूरत लग रही थी,,,, राधा को देखते ही रघू उसे नमस्ते किया,,, रघू को देखते ही राधा के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, और वह बोली,,,।

तुम यहां कैसे,,,,।

मैं यहां आपके पिताजी के साथ आया हूं,,, और यह लो मिठाईयां और पके हुए आम,,,(पके हुए आम कहते हुए रबर की नजर अपने आप ही राधा के दोनों गोलाईयों पर चली गई,,, जो कि खरबूजे के आकार में बेहद खूबसूरत नजर आ रहे थे,,, राधा की भी पैनी नजर रघु की तीखी नजरों को भांप गई थी,,। और उसकी नजरों से सिहर उठी थी,,, लेकिन राधा अपने पिताजी क्या आने की खबर सुनकर बिना कुछ लिए तुरंत भागी,,, पर जैसे ही मेहमान खाने मैं पहुंची वैसे ही तुरंत लंबा सा घूंघट डाल दी क्योंकि उसके ससुर भी वहीं बैठे थे,,, वह बहुत खुश थी और अपने पिताजी के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद ली,,,, अपने बाप के लिए राधा के मन में बहुत इच्छा थी लेकिन उसे क्या मालूम था कि जिसे वह इतना इज्जत दे रही है वह खुद उसके लिए उम्र की अपनी खुद की सगी बहू की इज्जत लूटने पर आमदा हो चुका है,,,, लाला भी अपनी बेटी को देखकर खुश हुआ और ऊसे आशीर्वाद दिया,,, पीछे पीछे रघु भी वही पहुंच चुका था,,,,। रघु दरवाजे पर खड़ा था और राधा अपने पिताजी का आशीर्वाद लेकर वापस लौट रही थी तभी प्रताप सिंह अपनी बहू राधा पर नजर घुमाते हुए लाला से बोला,,,।

सब कुछ सही हो गया है लाला जी बस अब छोटे लड़के बिरजू की किसी अच्छी लड़की से शादी हो जाए बस तब समझ लो कि गंगा नहा लिया,,,,।

पर इसमें क्या हर्ज है समधी जी,,, मेरी नजर में एक लड़की है बहुत ही सुशील और खूबसूरत बहुत गरीब घर में आ जाएगी तो समझ लो चार चांद लग जाएगा,,,।

अरे वाह लाला जी तुमने तो क्या खबर सुनाइ है मैं तो खामखां खा परेशान हो रहा था,,,, तो कब चले लड़की देखने,,,,।

अभी कुछ दिन के लिए रुक जाइए फिर मैं खुद ही आपको ले चलूंगा और मेरा विश्वास है कि आप उसे देखते ही हां कह देंगे,,,।

बस बस लाला जी यही तो चाहिए मुझे,,,,

(इतना कह कर दो ना खुश हो गए और आपस में बातचीत का दौर आगे बढ़ाते रहें लेकिन उन दोनों की बात सुनकर रघु परेशान हो गया था,,,, वह तुरंत हाथ में लिया हुआ तेरा राधा को थाना ते हुए मालकिन के कमरे की तरफ जाने लगा तो राधा उसे पीछे से आवाज देते हुए बोली,,,।)

अरे कहां जा रहे हो ऐ लड़के सुनो तो,,,,

अभी आता हूं छोटी मालकिन,,,,,(इतना कहते हुए रघु आगे बढ़ गया हूं सीधा जाकर जमीदार की बीवी के कमरे के आगे खड़ा हो गया दरवाजा खुला हुआ था इसलिए उसे दस्तक देने की जरूरत नहीं पड़ी और वो धीरे से दरवाजा खोल कर कमरे में दाखिल हो गया और कमरे में,,आईने के सामने जमीदार की बीवी बैठकर अपने बालों को संवार रही थी,,,और आईने में रघू को देखते ही वह खुश हो गई और अपनी जगह से खड़ी होते हुए रघू की तरफ देख कर बोली,,,।)

अरे रघू तुम,,, तुम्हें देख कर मैं कितनी खुश हूं यह शायद तुम नहीं समझ पाओगे,,,।

लेकिन मैं खुश नहीं हूं मालकिन,,,

क्यों ऐसा क्यों बोल रहा है,,,,(जमीदार की बीवी रघु की तरफ धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए)

क्यों ना कमी,,,, मैं तो अपना वादा निभा रहा हूं जो तुमसे किसी न किसी बहाने मिलने के लिए चला आया हूं लेकिन शायद आप अपना वादा भूल गई हो,,,

कैसा वादा,,,, ? (जमीदार की बीवी कुछ याद करते हुए बोली,,)

देखी ना मालकिन मैं कहता था ना कि आप अपना वादा भूल गई हो,,, मेरी बहन की शादी का वादा,,,

अरे रघु बस इतनी सी बात मुझे याद है बस उचित समय मिलते ही मैं उनसे शादी की बात करूंगी अभी समय नहीं मिल पाया है,,,,।

लेकिन मालकिन जब तक समय मिलेगा तब तक देर हो चुकी होगी,,,(रघु गुस्से में बोला)

देर हो चुकी होगी मैं कुछ समझी नहीं,,,।

लालाजी से मालिक बिरजू के लिए किसी लड़की को ढूंढने की बात कर रहे थे और लालाजी की नजर में कोई लड़की है,,, और कुछ दिनों बाद मालिक लाला के साथ मिलकर उस लड़की को देखने जाएंगे,,,,।

अरे तुम चिंता क्यों करते हो मैं हूं ना आ जाइए मुझसे बात करूंगी करना चाहिए क्योंकि वह मेरी बात बिल्कुल भी नहीं टालेंगे,,,,।

देखिए मालकिन मुझे आप पर पूरा भरोसा है लेकिन समय रहते अगर बात कर लोगी तो ठीक रहेगा वरना मैं यहां कभी नहीं आऊंगा,,,,

अरे रघु तू तो खामखा नाराज हो रहा है,,, मुझ पर भरोसा है जैसा तू चाहता है वैसा ही होगा,,, बस मुझ पर यकीन रख,,,।

(जमीदार की बीवी की बात सुनकर रघु को कुछ राहत महसूस हुई और जमीदार की बीवी रघु की उपस्थिति में अपने तन बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही थी ना जाने कि उसकी टांगों के बीच हलचल सी होने लगी,,,, वह रघू के साथ संभोग करना चाहती थी,,, इसलिए धीरे से आगे बढ़ी और दरवाजे के दोनों पल्लो को बंद करके हल्की सी सीटकनी लगा दी,,,,जमीदार की बीवी को इस तरह से दरवाजा बंद करता देख कर रघू को समझ में आ गया कि आगे क्या होने वाला है,,, पजामे के अंदर रघू का लंड भी धीरे-धीरे खड़ा होने लगा,,,, और जैसे ही दरवाजा बंद हुआ जमीदार की बीवी अपने कंधे पर से अपने साड़ी का पल्लू पकड़ कर नीचे गिरा दी जिससे उसकी भारी-भरकम छातियां एकदम तनकर ऊजागर हो गई,,, यह देखकर रघू की आंखों में चमक आ गई,,, और वो खुद आगे बढ़कर जमीदार की बीवी को अपनी बाहों में भर लिया,,,,

औहहहह,,, रघू,,,तुझसे अलग हुए अभी 2 दिन भी नहीं हुआ है लेकिन ऐसा लग रहा है कि 2 महीना बीत गया है,,,।

मुझे भी ऐसा ही लग रहा है मालकिन,,,,,ओहहहहह मालकिन,,,,(इतना कहने के साथ ही रघु,,, ब्लाउज के ऊपर से ही जमीदार की बीवी की चूची को दबाना शुरू कर दिया,,, जमीदार की बीवी भी पागल हुए जा रही थी,,,।

ऐसे नहीं रघू ब्लाउज के बटन खोल लेने दे तब और मजा आएगा,,,(इतना कहने के साथ ही जमीदार की बीवी खुद ही अपने हाथ से अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,,और पल भर में ही बात ने ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपनी खरबूजे जैसी चूची को एकदम आजाद कर दी,,,अपनी आंखों के सामने एक बार फिर से जमीदार की बीवी की नंगी चूची देख कर रखो पागल हो गया और दोनों हाथों में दोनों चूचियों को पकड़ कर बारी-बारी से उसे पीना शुरू कर दिया,,,, दूसरी तरफ जमीदार की बहू राधा रघु जिस तरह से जल्द बाजी में भागता हुआ गया था उसे दाल में कुछ काला लग रहा था,,, इसलिए वह भी पीछे पीछे अपनी सास के कमरे तक पहुंच चुकी थी अंदर उसे उसी दिन की तरह आवाजें आ रही थी,,, लेकिन आज की आवाज थोड़ा अलग थी,,, चूड़ियों की खनक कुछ ज्यादा ही आ रही थी,,, राधा अपनी शंका को पूरी तरह से साबित कर रख लेना चाहती थी इसलिए दरवाजे से कान लगाकर अंदर की बात सुन रही थी तभी उसके कान में जो आवाज गई उसे सुनकर वो एकदम से दंग रह गई उसकी टांगों के बीच हलचल बढ़ने लगी,,, वह आवाज रघु की थी जो उसकी सास की दोनों चुचियों को जोर जोर से दबा काम हुआ उसकी तारीफ कर रहा था,,,।

वाह मार्केट मैंने आज तक तुम्हारी जैसी बड़ी बड़ी और गोल चुचिया नहीं देखा,,,,

तो देर क्यों कर रहा है जोर जोर से दबा और इसे मुंह में भर कर पी,,,,

(अपनी सांस की आवाज सुनते ही उसके तो होश उड़ गए उसे समझते देर नहीं लगी कि जिस तरह की वह शंका का कर रही थी वह बिल्कुल सत प्रतिशत सच था,,,, और वह तुरंत दरवाजे को थोड़ा सा धक्का दि तो दरवाजा एकदम से खुल गया,,, जैसे ही दरवाजा खोला जमीदार की बीवी और रघू के तो होश उड़ गए,,, साथ ही कमरे के अंदर का नजारा देखकर राधा की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि उसकी आंखों में जो देखा वह कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी,,, उसकी सास अपने दोनों हाथ को रघु के सर पर रखी हुई थी और रघू अपने एक हाथ में उसके साथ की एक चुची को लेकर दबा रहा था और दूसरी चूची को मुंह में भर कर पी रहा था,,,। यह नजारा राधा के लिए बेहद मादकता और उत्तेजना से भरा हुआ था वह फटी आंखों से यह देखती रह गई,,,। उसके तो होश उड़ गए थे पर उसकी सास भी पूरी तरह से चौक गई थी उसे तो समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें रघु ज्यों का त्यों जडवंत बन गया था,,। राधा खुद शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी और वह जल्दी से खुद ही दरवाजा बंद करके वहां से चलती बनी,,,।

जैसे ही दरवाजा बंद करूंगा वैसे ही जैसे दोनों को होश आया हो,,,

अब क्या होगा रघु,,, अगर यह मेरे पति को सब बता देगी तो मेरी और तुम्हारी खैर नहीं होगी,,,।

(रघु पहली नजर में राधा की प्यासी नजर को भाप गया था इसलिए जमीदार की बीवी को दिलासा देते हुए बोला)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो जो होगा देखा जाएगा लेकिन मुझे इस समय जाने दो,,,

(जमीदार की बीवी के पास उसे रोकने का कोई कारण भी नहीं था इसलिए वह बिना रोके उसी जाने दी रघु कमरे से बाहर निकल कर राधा के पीछे पीछे हो लिया,,,)
 
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