Incest कैसे कैसे परिवार - Page 8 - SexBaba
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Incest कैसे कैसे परिवार

पाठक मित्रों,

अगले भाग पर कार्य आरम्भ करना है आज से. तो जो पाठक अपनी राय या रूचि बताना चाहते हैं वो बता दें. अभी इस अध्याय के तीन या चार भाग शेष हैं. आप क्या पहले पढ़ना चाहेंगे वो बता सकते हैं.

सुजाता का घर:

जहाँ सामूहिक चुदाई का कार्यक्रम होना है.

स्मिता का घर:

जहाँ पति पत्नी का ही अंक है. कोई और नहीं है इनके बीच में आज.

नूतन और मेहुल:

जहाँ मेहुल एक और प्रौढ़ा की चुदाई का आनंद लेता है.

सुनीति का घर:

जहाँ महक अपनी भावी सास और ससुर के साथ संसर्गरत होती है.

तो देर न करें और अपने विचार रखें।
 
अंश भाई,

भाषा अपनी ही है. हिंदी।

हम लोग अपनी भाषा को इतना भ्र्ष्ट कर चुके हैं कि अब मूल भाषा लगभग गुम ही गई है.

हम में से कितने समय शब्द का उपयोग करते हैं?

अधिकतर टाइम या वक्त ही कहते हैं.

ये सच है कि ये एक सेक्स कथा है. परन्तु मैं अपनी मूल भाषा से हटकर नहीं लिखना चाहता था. सम्भव है कि इसी कारण कुछ पाठक भी कम हैं. परन्तु मैं स्वयं के साथ ये धोखा नहीं करना चाहता था.

मैं समाज को बदलने का प्रयास नहीं कर रहा, परन्तु स्वयं को अवश्य करना चाहता हूँ.

मुझे विश्वास है आप मेरी बात का अर्थ समझे होंगे और इस कहानी से जुड़े रहेंगे।

मैं आपका आभारी हूँ जो अपने ये बात कही, मैं भी कुछ समय से ये कहने के लिए आतुर था.

आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
 
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ससुराल की नयी दिशा चालीसवेँ अध्याय तक समाप्त हो जाएगी।

इसके बाद पिछली बार के समान मैं USC Story : मामी की ट्रेनिंग को लेकर आगे बढ़ाऊँगा।

परन्तु इसके पहले आप सबके अगर कुछ विचार उसके बारे में मिल जाते तो अच्छा होता।

अगर उसे आगे नहीं ले जाना है तो रहने दूँगा।

कैसे कैसे परिवार एक वृहद उपन्यास के समान चल रही है, और लगभग साठ अध्याय और बचे हैं. इस कहानी में एक दो अड़चनें हैं, उन्हें कैसे दूर किया जाये ये भी एक गहन चिंतन का विषय है.

अपने बहुमूल्य विचार अवश्य दें, लिखने का मन बनता है. मन बनता है तो समय भी निकलता है.
 
इतने दिनों में भी केवल और भाइयों ने कुछ कहने की आवश्यकता समझी।

ये कहना कि मैं निराश हूँ अतिश्योक्ति नहीं होगी।

अब चूँकि ओखली में सिर डाला है तो इस कहानी को समाप्त करने के बाद नई का विचार त्याग दिया है.

मेरा समय इतना भी व्यर्थ का नहीं है कि बिना किसी के चाहे हुए भी मैं आगे लिखता रहूँ।

इस कहानी के पहले मैं कुछ और अध्याय लिखना चाहता था, पर अब शीघ्र ही इसकी विदाई कर दूँगा।
 
इस अध्याय (आठवेँ परिवार) को मुझे इस पड़ाव पर लेकर छोड़ना पड़ा.

अभी स्नेहा, महक और स्नेहा की एक साथ चुदाई का खेल बीच में ही ठहर गया है. पर आश्वस्त रहिये, उनके बचने का कोई रास्ता नहीं है.

पर इस कहानी के अगले अध्याय मिश्रित होंगे। अर्थात कोई भी अध्याय किसी भी परिवार का हो सकता है, एक से अधिक का भी.

चूँकि अब हम इस यात्रा के सुखद अंत की ओर बढ़ने जा रहे हैं.

जो इस कहानी से विशेष प्रेम रखते हैं, उन्हें यही कहूंगा कि "पिक्चर अभी बाकी है."

कितने अध्याय और होंगे, ये अभी बताना सम्भव नहीं, क्योंकि हर पात्र के साथ न्याय करना होगा। कहानी का अंत होते होते भी पंद्रह से अधिक अध्याय बन ही जायेंगे।
 
कुछ मित्रों का इस यात्रा में विशेष योगदान रहा है.

मैं इस समय उनके नाम नहीं ले रहा, पर वो जानते हैं वो कौन हैं. उनके बिना ये कहानी मैं कब का अधूरी छोड़ देता।

आशा करूँगा कि आगे भी ये साथ बना रहेगा।

कहानी के धीमे आने का ये एक मुख्य कारण है. जब कोई भी सुझाव, समीक्षा या टिप्पणी नहीं मिलती तो निराशा से लिखने का मन नहीं करता।

आशा है, विश्वास नहीं कि आगे इसमें कोई सुधार होगा। पर सपने देखने का अधिकार तो मुझे है ही.
 
Some of the friends have been very supportive.

Will not name them, as they already know who they are, as others do too.

Without their constant support, I would have left this story unfinished long back.

I hope they will continue to support.

Story updates were slow as there were very few suggestions or comments. This is heart breaking for any writer.

I hope, though I do not believe, that this will change to better. But I can dream of it.
 
प्रिय पाठक मित्रों,

समय के अभाव के कारण मैंने ये निर्णय लिया है कि मैं "ससुराल की नई दिशा" को पहले समाप्त करना चाहूँगा।

तो अगले एक माह तक मैं उस कहानी पर ही ध्यान रखूँगा और इसे समाप्ति की ओर ले जाऊँगा।

तो मेरी यही विनती है कि मेरे इस निर्णय और प्रयास का समर्थन करें।

आशा है आप सबका साथ बना रहेगा।

मैंने किसी भी और कहानी को लिखने का विचार त्याग दिया है. जब ये दोनों समाप्त हो जाएँगी, तब सोचेंगे।
 
मैं अब ये कहानी और ससुराल की नई दिशा को यहीं समाप्त कर रहा हूँ.

इन दोनों कहानियों में अधिक पाठकों की रूचि नहीं है.

और अपने समय को यूँ ही व्यर्थ करने का मुझे कोई कारण नहीं दिखता।

अगर भविष्य में मैं कभी लौटा तो देखेंगे।

जिन बंधुयों ने मुझे प्रोत्साहन दिया, उनका आभार।

आपका धन्यवाद और स्नेहपूर्ण नमस्कार।
 
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