Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 4 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

सबसे पहले तो आपका बहुत आभार,

पाठकों का हीरो से ज्यादा कुसुम को पसंद करने का कारण शायद वो कुसुम के रूप में अपनी लुगाई या होने वाली लुगाई की कल्पना करने लगते है, थोड़ी जिद्दी, थोड़ी चुलबुली, थोड़ी नखरे वाली, थोड़ी गुस्से वाली, थोड़ी जिम्मेदारियों को निभाने वाली, गरीबी में घर की स्थिति को संभालने वाली, पति पर हुकुम झाड़ने वाली, मन में जो है, मुह पर बोलने वाली, दिल की साफ, अंध विश्वास, ना मानेने वाली, पूजा पाठ इक लिमिट में करने वाली एक शब्द में कहु तो एक मिडिल क्लास भारतीय पत्नी।

मेरे हिसाब से ये कहानी किसी उपन्यास की तरह नही है, जिसमे -- कोठिया, हवेलिया, प्यासी औरतों, तेज तूफां, अंधेरी रातें, दिया, और सालों पुराने किस्से टाइप लिखा हो।

(M clearly bol sakta hu ki kusum ko kisi or ke sath dikhana aapko bhari pad sakta h writter mahuday/ mahudaya

Pr mujhe lagta h aapne pichle update m bas readers ko tease hi kiya h

Hame pata hota h kisse ched chad krni h or kisse nahi))

मैने कुछ नही किया है, कहानी एक सूत्र में चल रही है, family function है जो हो रहा है वो संयोग से हो रहा है, जिसे अगर रियल लाइफ की भाषा में बोले तो सोच से परे.... और आगे भी होगा वो भी वक्त, हालात तय करेंगे।

आपके यहाँ की ब्रज भाषा भी बहुत अंदर से गुदगुदाती है..... "काये सही कह रहे"

आखिर में आप सभी लोग बस कहानी से जुड़े रहे और अपना प्यार देते रहे।
 
बहुत बहुत आभार, शुक्रिया

देर से आये आप दुरुस्त आये.... आने वाला अगला update आपके शब्दो की राह देख रहा था।

इस बार भी आपने अपने जादुई शब्दो से मुझे लिखने की एक नई उर्जा मिली है इसके लिए भी बहुत बहुत धन्यवाद। एक सटीक निष्पछ विशेलेशन के लिए भी आभार।

आखिर में जो हास्य भरी लाइन

""अरूण का विहेवियर एक काॅमन मैन की तरह का ही है। हर दूसरी , तीसरी , चौथी , दसवीं लड़की उसे अपनी पत्नि से भी खुबसूरत लग रही है और उनके साथ वो फ्लर्ट भी कर रहा है लेकिन उसकी पत्नि को कोई स्पर्श कर ले तो वो परेशान हो उठता है।""

इसे पढ़कर हसी रुक नही रही है।

हाहा हाहा हाहा

ऐसे ही हँसाते रहिये, गुदगुदाते रहिये और अपने शब्द से लिखने का होंसला देते रहिये।
 
तो वो मुस्कुरा कर बोली- काफी बदमाश लगते हैं? खैर, अभी आप और कुसुम यहाँ मत बैठो चलो मेरे साथ जूली से मिलवाती हू।

अब मुझे लगा कि मामला पट सकता है।

सगाई की रस्म खत्म होने के बाद लड़के को कपड़े बदल कर वापस दूसरी किसी रस्म के लिए तैयार होना था, तो वो अपने रूम में चला गया.

सगाई तो हो गई थी लेकिन आज जब से मैंने जूली को देखा था मेरा तो कही दिल भी नहीं लग रहा था हर वक़्त मेरी नज़र के सामने सिर्फ जूली का चेहरा ही दिखाई दे रहा था। मै भी जूली से अकेले में बात करने की सोच रहा था और जब प्रीति ने मुझे और कुसुम को साथ चलकर जूली से मिलवाने की बात कही तो मै तुरंत राजी हो गया।

पर मुझे डर भी था मुझे जूली देखकर पता नही कैसा react करेगी। मै

हिम्मत करके जूली जिस कमरे में थी वहा पहुँच गया। कमरे में जूली के साथ उसकी सहेली और मेरी सास भी थी। जूली का उदास चेहरा देखकर मै समझ गया वो इस सगाई या रिश्ते से खुश नही है।

हमें दरवाजे पर खड़ा देख मेरी सास ने हमें अंदर बुला लिया। जूली मुझे तिरछी नजरों से देख कर मुस्कुरा भी रही थी और शरमा भी रही थी। मेरा तो दिल बाग़ बाग़ हो गया।

मैने थोड़ी इधर उधर की बातें की और जूली को मोबाइल पर message भेजकर ऊपर छत पर आने का इशारा किया। और कमरे से निकलकर छत पर चला गया।

थोड़ी देर बाद जूली छत पर आ गयी।

मैने जूली को देखा और हस्ते हुए कहा जूली कैसी है। वो बोली अभी तक जिंदा हू,

मैने कहा ऐसा क्यो कह रही हो।

जूली मुझसे बोली अब क्यो मुझे बुलाया है

मैने जूली से कहा कुछ पूछना था, वो बोली इतना सब होने के बाद अब भी कुछ पूछना बांकी रह गया है।

उसके tone मे एक गुस्सा, बेबसी थी

मैने कहा तुम उस गंजे से शादी अपनी मर्जी से कर रही हो या जबरदस्ती से, वो बोली ये जानकर आप क्या करेंगे।

मैने कहा क्या मेरा ये अधिकार भी नही है तुमसे पूछने का।

जूली बोली मीठी मीठी बातें बनाना कोई आपसे सीखे। मुझे जूली के जवाब में एक ताना सा लगा। तो मैने पूछा अरे साली साहिबा कुछ भी मत बोलो

वो बोली आज आप बड़ा अपना अधिकार जता रहे हो। इतने दिन से एक बार भी फोन करके पूछा जूली मर गयी या जिंदा है।

हम तो यहाँ आपकी याद में अपने खून से ढेर सारी चिठ्ठिया लिखते रहे और सोचते रहे जब आप आएँगे तो दिखायेंगे।

मैने कहा तुम मुझे इतना बुरा भला क्यो कह रही हो। मै तो हमेशा से तुम्हे पसंद करता आया हू, तुम्हारे हर सुख दुख में मै तुम्हारे साथ हू, तुम मुझे ही इस तरह ताना मारोगी ये मैने कभी नही सोचा था।

मुझे बस ये जानना है कि तुम इस रिश्ते से खुश हो या नही

जूली मेरी बात सुनकर रोते हुए कहने लगी उस दिन मै होटल में क्या पकड़ी गयी तब से मम्मी, प्रीति दीदी, कुसुम दीदी, रिंकू मुझे बात बात पर ताना देकर बुरा भला कहते है जैसे मैने कोई बहुत बड़ा पाप या गुनाह किया था।

ये सच है मुझसे गलती हुयी थी और उसके लिए मैने सबसे माफी भी मांग ली। फिर भी सब मुझे मेरे charecter को लेकर कुछ ना कुछ कहते है।

पर मै ये सब सहन करती रही, बस आपके लिए, आपके मुझ पर किये गये भरोसे और विश्वास के लिए लेकिन जीजू आप तो बड़े छिपे रुस्तम निकले मै तो बस आपके साथ रोमांटिक सपने देखती रही

पर आपने तो हकीकत मे पूरा गाना ही गा लिया और वो भी अपनी बेटी रिंकी के साथ।

मै जूली के मुह से रिंकी का नाम सुनकर shok हो गया और मैने जूली से हकलाते हुए कहा ज ज जूली क्या बक रही है कोनसा गाना तुम्हारा दिमाग खराब है। जूली बोली दिमाग और दिल तो उसी दिन से खराब है जब थाने में से निकलने के बाद मै तो सुसाइड करने वाली थी पर आपने सबके सामने अपने सीने से लगाया था और मेरा हाथ अपने हाथो में लेकर कहा था कि मै कभी तेरा साथ नही छोडुगा। और मुझे दोबारा से नयी जिंदगी दी, मैने उसी दिन से अपनी जिंदगी आपके के नाम कर दी है।

मैने तो आपके साथ कितने हसीन सपने देखने शुरू कर दिये थे पर आपने इस तरह मेरे सपने तोड़े तो रहा नही गया मुझसे।

बस अपना कसूर जानने के लिए आपसे मिलने यहाँ आई हू कि मुझमे ऐसी क्या कमी थी जो उस दिन आपने मेरे हाथ रोक दिये थे।

मैने अपना माथे का पसीना पोन्छा और बोला जूली तुम क्या कह रही हो मुझे कुछ समझ नही आ रहा है।

जूली ने मुझे रिंकी के साथ दिमापुर स्टेशन के पास वाले पार्क में रात में जो इंस्टा वीडियो बनाये थे वो दिखाने लगी, और बोली देखे इन वीडियो में कोनसी जवानी की कहानी लिखी गई है और दूसरे में होंठो को चूमने की हसरत पूरी हो रही है।

मैने हस्ते हुए कहा क्या जूली तुम भी ये वीडियो वो रिंकी जिद कर रही थी तो मै मना नही कर पाया। रिंकी वैसे भी छोटी बच्ची है।

जूली बोली रिंकी बच्ची है की चची ये आपसे से बेहतर मै जानती हू, मै रिंकी की मौसी हू उसकी बचपन से लेकर जवानी तक का रूप देखा है मैने।

जब मैने आपके वीडियो देखे।और उसी रात को प्रीति दीदी ने पापा को उस गंजे का फोटो भेजा तो मै समझ गयी जिससे मैने प्यार किया वो दिल में है, किस्मत में नही है

और उस गंजे से शादी करने के लिए हा कर दी।

जूली बात करते हुए रोने लगी।

मैने उसके करीब जाकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- जूली, हुआ क्या?

‘कुछ नहीं जीजाजी! होना क्या है, बस किस्मत में जो लिखा है वही होना है।

‘ऐसी बात नहीं है!’ मैं उसके कंधे से हाथ उसकी पीठ पर फेरते हुए बोला-

वो खड़ी हुई और मुझसे लिपट गई, उसकी छाती का दबाव जब मेरी छाती पर पड़ा, मैं तो पागल होने लगा।

अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसकी पीठ पर कसते हुए मेरा हाथ जब उसके ब्लाऊज़ के ऊपर उसके जिस्म पर लगा, उसने खुद को और कस लिया, वो और रोने लगी।

मैंने अपने होंठ उसकी गर्दन पर टिका दिए- चुप हो जाओ जूली! मैं हूँ ना!

मेरे होंठों की छुअन से वो कसमसा सी गई, मानो करंट का झटका लगा हो!

लेकिन उसने मुझे और कस लिया मेरा हाथ पीठ से अब नीचे बढ़ने लगा, उसके पेट पर चला गया, साड़ी के ऊपर से उसकी गांड पर हाथ फेरा- बस चुप हो जाओ जूली! आओ बैठो!

बस चुप! रोना बंद करो!

बहुत दुखी हूँ मैं!

वो अपना चेहरा मेरे सीने में छुपाकर रोने लगी।

मैंने उसको बाँहों में कस लिया उसकी गर्दन पर चूम लिया, मैं बहक रहा था। वो इतने करीब आती जा रही थी,

उसने अपना हाथ मेरे सीने पर रख दिया, सहलाने लगी।

मैंने उसके गले में बाहें डाल दी उसके कान के नीचे अपने होंठ रख दिए, यह औरत का रिमोट कण्ट्रोल होता है, मैंने कुसुम और रिंकी पर ये रिमोट चला चुका हूँ।

उसके मुख से हल्की सी सिसकी निकली और आंखें बंद होने लगी।

मैं अब होंठ रगड़ने के साथ सांसें लेकर उसको मदहोश करने लगा।

उसने अब अपनी टांग मेरी जांघ पर टिका दी- क्या हुआ जीजू? रुक क्यूँ गए?

उसने अब हाथ टीशर्ट के नीचे से मेरी छाती पर रखा, वहाँ के बाल सहलाने लगी-

मैने पीछे से उसको बाँहों में भर लिया, उसकी पीठ पर चुंबन जड़ दिया, वो सिसक उठी।

मेरा हाथ उसके चिकने सपाट पेट पर रेंगने लगा। एक हाथ उसके ब्लाऊज़ के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाने लगा।

मैंने उसका पल्लू पकड़ा, वो घूमने लगी। जूली साड़ी , पेटीकोट-ब्लाऊज़ में कयामत लग रही थी।

मैंने उसको अपनी और घुमाया उसके होंठ चूम लिए। मेरी बांह उसकी कमर पर चली गई, वहाँ से झटका देकर उसको अपने साथ चिपका लिया और बोला- जूली, तुम बहुत खूबसूरत दिख रही हो!

उसने मुझे दुबारा कस लिया-

इतने में जूली के मोबाइल पर उसके होने वाले पति का यानि मेरे साडू का फ़ोन आया। उसने उठा लिया और दोनों बातें करने लगे, आवाज़ साफ़ बाहर तक सुनाई दे रही थी- कहा हो? मैं लेने आता हूँ।

नही मै आती हू।

मुझे जूली का उसके होने वाले पति से बात करना अच्छा नही लग रहा था, मुझे जलन हो रही थी, मुझे ऐसा लग रहा था मेरी सबसे कीमती चीज मुझसे छिनति जा रही है।

मेरी अपनी हालत को देखकर को देखकर पुराना गाना याद आने लगा।

"" भवरे ने खिलाया फूल,

फूल को ले गया राजकुमार ""

जूली अपने होने वाले पति से बात करती जा रही थी, और मेरे पिछवाडे में आग बढ़ती जा रही थी। मेरी बर्दाश्त की हद खतम हो गयी थी। मेरा खड़ा लंड भी मुरझा गया था और मेरी पूरी वासना अब गुस्से में बदलने लगी। अंततः मैने जूली के हाथ से फोन छिनकर काट दिया।

और आग उगलते हुए शब्दो में जूली से कहा कि तुम उस गंजे से शादी के लिए मना कर दो।

जूली ने पूछा ठीक है लेकिन सब लोग पूछेंगे कि मै मना क्यो कर रही हू तो क्या जबाब दूँगी।

सच तो ये था कि मेरे पास जूली के इस सवाल कोई जबाब नही था।

मैने अटकते हुए कहा कोई भी बहाना बना देना, कह देना कि मुझे लड़का पसंद नही है, वो गंजा है।

जूली बोली अरुण जीजू मेरे पापा ने मुझसे दस बार पूछकर लड़के के गंजा होने की बात बताकर मेरी हामी और मर्जी से ही मेरी सगाई हुई है।

मुझे जूली के इस बात का जवाब भी समझ नही आ रहा था।

जूली मेरे करीब आई और मेरे हाथो को अपने हाथ में थामकर बोली जीजू अब कुछ नही हो सकता है और जो हो रहा है उसको होने दो।

मेरी हालत हारे हुए जुआरी की तरह हो गयी थी।

लेकिन एक कहावत है ना

"" मरता क्या ना करता ""

तो मैने अपने शब्दो का आखिरी तीर जूली के ऊपर चलाया--

मै जूली से गुस्से में बोला ठीक है तुम मना नही कर सकती है तो मै ही उस गंजे को फोन करके बोल देता हूँ कि तुम जिस लड़की जूली से शादी कर रहे हो, वो होटल में अपने प्रेमी के साथ नंगी पकड़ी गयी थी।

ये सुनकर जूली की आँखों में आँसू रुक गये और वो ताली बजाकर जोर जोर से हसने लगी। उसकी तालियों की आवाज और हँसी में अजीब सी खिसियाहट थी।

वो बोली वाह अरुण वाह अब दिखा दिया अपना असली चेहरा, आ गये अपनी औकात पर, और कितना जहर भरा हुआ है वो भी बोल दो। तुम भी सबकी तरह ही निकले मै तो तुम्हे भगवान की तरह पूजती थी और तुम भी प्रीति, और कुसुम की जबान बोलने लगे।

""हमने जरा सी बेवफायी क्या कर दी तो तुम बदचलनी और बेहयाई पर आ गये।""

मैने कहा ना जीजाजी, ना जीजू सीधा अरुण बोल रही है।

जूली-- गाली तो तुम्हे दे नही सकती, प्यार जो करती हू।

मुझे लगा शायद मैने बहुत गलत बोल दिया।

मै उसके साथ अपनी आँखों में आँसू भर कर माफी मांगता हुआ।

मै बोला -- जूली मेरा वो मतलब नही था, मै तो बस तुम्हारी शादी रोकना चाहता हूँ, इसलिए ऐसा बोला। जरा सोचो इसके अलावा कोई और रास्ता मुझे समझ नही आ रहा है।

मेरी आँखों के आँसू देखकर जूली थोड़ी देर शांत हो गयी।

और दो मिनिट बाद बोली चलो मै अपनी शादी रोक देती हू फिर क्या होगा। तुम मुझसे शादी करोगे, अपनाओगे मुझे,?

मै फिर फस गया, मेरे पास अब इस सवाल का भी जबाब नही था। मै शांत हो गया।

मेरी खामोशी देखकर जूली बोली अरुण तुम मेरे साथ कोनसा रिश्ता बनाना चाहते हो।

मै-- क्या मतलब है तुम्हारा।

जूली-- किस रिश्ते से मुझ पर तुम ये अपना हक जता रहे हो।

कौन बनना चाहते हो तुम मेरे

""पति, प्यार, यार या दलाल ""

मै अटकते हुए वो ज ज जूली।

वो गुस्से वाली हसी हसने लगी और बोली Mr अरुण kind your information --

जिसके साथ मेरी सगाई हुयी है उसे मैने अपने बारे में सब सच बता दिया है, मै कब कैसे और कहा किसके साथ नंगी पकड़ी गयी थी।

मै चलती हू

अरुण जी गुड बाय,

खाना जरूर खा कर जाना

खाने का menu तुम्हारी पसंद का बनवाया है ।

मै शांत होकर उसे जाता हुआ देख रहा था।

तभी वो रुकी और बोली एक बात और मेरा होने वाला पति ये भी जानता है कि मै आपसे प्यार करती हूँ। हाय मेरी किस्मत!

पर आज कोसती हूँ उस दिन को जिस दिन से मुझे आपसे मोहब्बत शुरु हुयी थी।

मुझे समझ नही आ रहा था ये सब कैसे हो गया, मुझसे क्या गलत हो गया ???

जारी है......
 
जूली के बारे सोचते हुए आधा घंटा हो गया था और मुझे समझ आ गया था मेरी बिना बात सुने, और ज्यादा बोलने की वजह से मेरी प्यारी साली जूली जो मुझसे रात दिन चुदने को तैयार थी वो हाथ से निकल गयी।

मुझे अपनी पत्नी कुसुम की याद आने लगी कुसुम सच कहती है मुझे हर समय मास्टरी झाड़ने की गंदी आदत है।

मैने कुसुम को फोन लगाया, वो बोली अरे कहा है आप मैने कहा बस यही छत पर हू तुम कहा हो तो वो बोली मै नीचे जूली और प्रीति के साथ हू। आप भी नीचे आ जाए खाना शुरू हो गया है और funtion खतम होने वाला है। मैने कहा बस पांच मिनिट में आता हू।

मुझे ना ही खाना खाने की भूख थी और ना ही जूली से नजर मिलाने की हिम्मत। इसलिए मै छत पर बैठा रहा।

थोड़ी देर में प्रीति आई और बोली- आप ऊपर आकर क्यों बैठ गए?

मैंने मुँह फुला कर कहा- आपको तो हमारी कोई फ़िक्र है नहीं ! इसलिए क्या करें ? आप जाईये और अपना काम कीजिये !

इतना कहते ही उसका मुँह उतर गया, वो मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- जीजाजी, आप तो नाराज हो गए ! अब आप जैसा कहेंगे, मैं वैसा ही करूंगी !

मैंने कहा- वो तो हमने देख लिया ! हम तो सिर्फ आपको प्यार करना चाहते थे, लेकिन आपने मेरा मूड ही ख़राब कर दिया है, क्या यह सब आपको अच्छा नहीं लगता है?

वो एकदम मेरे पास आई और मेरे गले में बांहें डाल कर बोली- सॉरी जीजाजी ! मुझे अच्छा तो लगता है लेकिन डर भी लगता है कि कुछ हो गया तो या फिर दीदी को पता लग गया तो क्या होगा?

मैं बोला- जीजा और साली तो ऐसे मौके की तलाश में रहते हैं ! और एक तुम हो कि भाव खा रही हो?

तो वो बोली- सॉरी बाबा ! गलती हो गई !

यह कह कर उसने एक vodhka का पाउआ निकाल लिया और बोली चलो एक एक जाम हो जाये।

मैने कहा तुम भी कमाल करती हो।

वो बोली

आपकी पत्नी की बड़ी बहन हूँ! उससे दो कदम आगे हुंगी!

मै--- बस, अब सब भूल जाओ! अपने हाथ से एक पैग बनाओ।

वो पैग बना लाई, मैंने कहा- एक बात कहूँ? लगता नहीं है कि तेरी 18 साल की बेटी होगी।

उसने पैग पकड़ा दिया और खुद का पी लिया, मुझे लगा अब उसको और नहीं पीने दूंगा, वरना वो पी के टुन्न हो जायेगी और मेरा मूड खराब होगा।

मै प्रीति के चेहरे की तरफ देख रहा था वो एक एक sip. लेकर बड़े इतमिनान से और स्वाद के साथ पी रही थी। और आसमां की तरफ देख रही थी।

उसकी नजर मुझ पर पड़ी तो बोली ऐसे क्या देख रहे हो, कभी किसी लड़की को पीते हुए नही देखा क्या।

मै -- नही देखा और ना ही पी है।

वो हसने लगी हाहाहा

मैं--- प्रीति डॉक्टर साहब को पता है तुम पीती हो,

वो बोली जीजू उन्होंने ने ही तो मुझे पीना शिखाया है। उनका मानना दोस्तो के साथ पीना से अच्छा है अपनी पत्नी के साथ पियो और पत्नी को भी एक अच्छी दोस्त मानना चाहिए।

मुझे नशा होने लगा, और मैने प्रीति के ड्रेस के ऊपर से ही उसके दूध दबा दिये और उसको पकड़ कर अपनी गोदी में बैठाने लगा मेरा लंड मेरे पैंट मे सीधा तन कर खड़ा हो गया था।

जैसे ही प्रीति को मैने गोदी में बैठाया उसकी शॉर्ट ड्रेस ऊँची हो गयी और प्रीति की नंगी गांड पतली सी पैंटी में दिखने लगी। वो जैसे ही बैठी तो उछल पड़ी शायद उसकी गांड में मेरे खड़े लंड का आभास हो गया था।

वो मुझसे दूर होकर खड़ी हो गयी और बोली

क्या जीजू आप बार बार शक्ति कपूर क्यो बन जाते है।

मुझे ये सुनकर हसी आ गयी हाहाहा हाहाहा

मै बोला क्यो क्या हुआ।

प्रीति-- जीजू आप बार बार हरकत ही ऐसे करते है मै अभी बस यह चाहती हूँ हम यहाँ बैठकर एंजॉय करे आप अपनी सुनाओ मै अपनी कहु।

मै सोच में पड़ गया और मै समझ गया आज का दिन ही खराब है सालियों की चूत इतनी आसानी से नही मिलती है। जितना मुझे लगा था। एक काम करता हूँ पहले इसे पिला कर टुन्न करता हूँ फिर उसके साथ try करता हूँ।

प्रीति बोली जीजू किस सोच में पड़ गये।

मै-- कुछ नही बस, एक पेग और बनाओ।

हमने एक पेग और पीने लगे।

मैने पीते हुए प्रीति से पूछा तुम अपनी और डॉक्टर साहब की लव स्टोरी बताओ।

प्रीति--- जोर से हस्ती हुयी hahahaha

जीजू आप भी क्या पूछ रहे है। पर आपने पूछ ही लिया है तो बताती हूँ। आज दारू जो भी बोलेगी सच बोलेगी।

प्रीति नशे में टुन्न हो रही थी।

प्रीति---- जीजू मेरी लव स्टोरी नही fuck story. थी जो धोखे से शादी में बदल गयी। Acchually सभी कामचोर लड़किया जो ज्यादा मेहनत नही करना चाहती है वो अपनी नौकरी को बचाने के लिए अपने सीनियर से कुछ ज्यादा ही फ्रैंक हो जाती है। और बाद में सेक्स भी करने लगती है।

मै भी हॉस्पिटल में नाइट शिफ्ट में काम करने की परेशानी से बचने के लिए एक चूतिया डॉक्टर की तलाश मे थी। किस्मत से आपके डॉक्टर साढू हॉस्पिटल में ट्रांसफर हो कर आ गये। उनका हाल ही में डिवोर्स हुआ था और दिलजले आशिक की तरह रहते थे।

मै ये समझ गयी और धीरे धीरे उनके करीब जाकर उनको अपने जाल में फसा लिया और वो एक md डॉक्टर होकर मुझ जैसी नर्स के ऐसे दीवाने हुए कि मेरे साथ शादी से पहले पांच बार सेक्स के मजे लेने के बाबजूद भी मुझे एक दिन शादी के लिए प्रपोज कर दिया।

इधर पापा ने मेरे लिए भी एक रिश्ता फिक्स कर दिया था। मैने पापा के पसंद के लड़के और डॉक्टर साहब को आपस में compare किया तो डॉक्टर is best for me. बस उनकी उमर ज्यादा थी. पर मै उनके साथ पांच बार सेक्स करने के बाद ये समझ गयी थी कि वो ज्यादा उम्र के होकर भी फिट है और फिर my thought age is not waarior in sex.

मेरी और डॉक्टर साहब की life फुल मस्ती में चल रही थी और मैने एक बेटी को जनम दिया। बेटी जैसे जैसे बड़ी हो रही थी डॉक्टर साहब की सेक्स करने में रुचि कम हो रही थी शायद उनकी उम्र की वजह से।और मेरे कपड़े भी छोटे होते जा रहे थे, मेरी सेक्स इच्छा बढ़ती जा रही थी। फिर एक दिन मै डॉक्टर साहब के साथ शराब पी रही थी तो हमारा झगडा हो गया और मेरे मुह से निकल गया कि आप का इंजेक्शन खराब हो गया है और मेरे किसी भी काम का नही है।

तो डॉक्टर साहब समझ गये और उन्होंने सेक्स से पहले कुछ दवाई खानी शुरु कर दी

मैने पूछा प्रीति उन गोलियों के नाम क्या है।

प्रीति हसने लगी हाहाहा हाहाहा

क्या जीजू आपका भी इंजेक्शन काम नही कर रहा है क्या।

ये सुनकर मेरा नशा उतर गया मैने उसके हाथ अपने ढीले लंड पर रख दिया और बोला साली साहिबा खुद चेक कर लो।

प्रीति अपना हाथ हटाते बोली क्या जीजू आपकी मुझसे भी खूबसूरत बीवी है सच कहु तो आज तो कुसुम दीदी को देखकर मेरा मन भी गंदा हो गया काश में लड़का होती तो आपकी बीवी के साथ सेक्स कर लेती।

एक आप है जो मेरे पीछे पड़े है। मै बस दिखने में हॉट और सेक्सी हु अंदर से पूरी ढीली हो चुकी हू। आपके साढू डॉक्टर साहब ने गोली खा खा कर हर तरफ से इंजेक्शन लगा कर पूरा जिस्म ढीला कर दिया है।

मै--- ओह्ह ऐसी कौन सी गोलिया है जो बुड्ढे साढू की तुम इतनी तारीफ कर रही हो।

मैने फिर पूछा प्रीति उन गोलियों के नाम क्या है।

प्रीति बोली जीजू मुझे आम खाने से मतलब रहता है और मै गुठलिया नही गिनती। हा वो गोली कभी गुलाबी, नीली, हरि, लाल रंग की होती है।

मै प्रीति की बातो से समझ गया ये नही देने वाली, इसका तो डॉक्टर पूरा ख्याल रख रहा है, इससे जूली की बात करता हूँ शायद ये कुछ हेल्प कर दे।

मैने कहा प्रीति जूली की शादी कब की है तो वो बोली next month है। जीजू आपका और जूली के बीच कुछ झगडा हुआ था क्या।

मै-- नही तो, क्यो ऐसे क्यो पूछ रही हो।

प्रीति---- जूली आपका नाम सुनकर चिड़ जाती है ।

मै--- पता नही जूली मुझसे क्यो गुस्सा है, तुम मेरी उससे बात करवा दो।

प्रीति--- क्या जीजू आप जूली मूली के पीछे पड़े हो आपको तो सब पता है उसके charecter के बारे में। आप तो अपनी बीवी पर ध्यान दो जल्दी से दो तीन बच्चे पैदा करो अभी आप दोनों की उम्र 35 के आसपास है, अगर देर कर दी तो फिर test tube babby करना पड़ेगा। हाहाहा हाहाहा

चलो अब नीचे कुछ खाते है और डांस करते है।

हम नीचे आ गये, कुसुम ने मुझे प्रीति को एक साथ सीढ़ियों से उतरते हुए देखा तो गुस्से में घूरने लगी। मै उसके पास जाकर खड़ा हो गया।

कुसुम हाथ से पीने का इशारा करते हुए बोली हो गयी पार्टी, अब कुछ खाना है,

मै बोला नही नाचना है और मैं कुसुम का हाथ पकड़कर dj पर चढ़ गया। हम डांस करने लगे

तभी प्रीति जूली और उसके होने वाले पति को भी पकड़कर ले आई। (जूली का होने वाला पति प्रीति का कजिन देवर है)

हम सब एक साथ डांस करने लगे,

मेरी अपने होने वाले साढू की बीवी यानि मेरी साली जूली, से फिर नजरे मिली।

मैंने उसे देखा और देखता ही रह गया। क्या क़यामत थी!

जूली का रंग गोरा, शराबी आँखें, मस्त उभार, चिकना बदन, जब से हम मिले, जूली मेरी तरफ और मैं उसकी ही तरफ देखते रहे।

हम सब एक साथ DJ पर नाच रहे थे, मैं जूली के पास जाकर उसके साथ जाकर नाचने लगा, पर उसने मेरे साथ नाचने के लिए कोई आपत्ति नहीं दिखाई और भीड़ में हम दोनों नाचने लगे। मैं उसके इतना करीब आ गया कि वो मेरी सांसों को और मैं उसकी सांसों को महसूस कर रहे थे।

बहुत ही रोमांटिक गाना बज रहा था।

मै गाने के बोल जानबूजकर थोड़ा जोर से जूली की तरफ देखते हुए गाने लगा।

"" दो बोल कह के तो हम तो हारे है,

हम तुम्हारे है, तुम हमारे हो, ""

कमाल तो तब हो गया गाने की अगली female वाली लाइन जूली मुझे देखकर जोर से गाने लगी।

""कुछ भी ना कह के तो, हम भी हारे है

हम तुम्हारे है, तुम हमारे हो, """

प्रीति और कुसुम भी साथ साथ नाच रहे थे,

मै नाचते हुए कुसुम पर भी नजर रखे हुए था,

मेरी आँखों में नशा और जूली की गालों पर लाली छाती रही।

मैने जूली से कहा- साली जी आप बहुत ही ज्यादा सुंदर हो, आज मैं धन्य हो गया जो आप जैसी खूबसूरत लड़की के साथ नाचने का मौका मिला। आज तक मैं किसी भी इतनी सुंदर लड़की के साथ डांस नहीं किया है ।

जूली ने कहा- क्या आप मुझे फिर से मस्का लगा कर लाइन मार रहे हो?

मैने कहा- कुछ भी समझ लो, पर मैंने जो दिल में था वो कह दिया!

जूली मेरी बीवी कुसुम और प्रीति की ओर इशारा करते हुए मुझसे कहने लगी- सच कह रहे हो..

मेरी दीदियों ने तो कभी भी मेरी इतनी तारीफ़ नहीं की!

मैने कहा- सच में, मैं बिलकुल सच बोल रहा हूँ!

जूली--- ये बात आप कुसुम दीदी के सामने बोल सकते है।

मै--- हा।

नाचते हुए मै और जूली एक-दूसरे के और करीब आते रहे। हम काफी देर तक ऐसे ही नाचते रहे और एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे।

तभी मैने मौका देख कर कहा- जूली, मुझे तुमसे प्यार हो गया है!

जूली ने आगे से कोई जवाब न दिया और वो डांस करते हुए मुझसे दूर चली गई और कुसुम और प्रीति के पास पहुँच गई।

मुझे डर लगने लगा कहीं वो मेरी कहीं हुई सारी बातें कुसुम को न बता दे!

वो कुसुम के पास जा कर मेरी तरफ देख कर कुछ बात कर रही थी, मेरे दिल में और घबराहट होने लगी।

कुसुम ने मुझे आवाज दे कर अपने पास बुलाया।

मैं उसके पास जाने लगा और मेरे माथे पर पसीने छूट रहे थे, मैं डरता-डरता कुसुम के पास गया।

कुसुम ने मुझे कहा- अरे आप अकेले क्यो खड़े है जाकर अपने नये साढू को भी थोड़ा डांस करवाओ,

तब जाकर मेरी साँस में साँस आई।

मै कुसुम को मना नही कर पाया पर जाने से झिझक रहा था।

तभी

प्रीति बोलि कुसुम सही बोल रही है मै लेकर आती हू अपने देवर को।

थोड़े समय बाद जूली का होने वाला पति प्रीति और कुसुम के पास आकर उन दोनों के साथ में नाचने लगा, भीड़ के बहाने से मेरा साढू कुसुम के बदन को आगे से छूता रहा। कुसुम ने भी कोई विरोध नहीं किया और वो उसके साथ नाचती रही।

कुसुम भी जूली के होने वाले पति और प्रीति के साथ नाच रही थी. कुसुम 35 साल की शादी शुदा औरत जरूर है. पर है वो जबरदस्त कंटाप माल. कुसुम ने गुलाबी कलर की नेट वाली साड़ी पहनी हुई थी, जिसमे उसका गोरा बदन बहुत खिल रहा था. टाइट ब्लाउज में कैद दूध से भरे हुए बड़े बड़े स्तन क़यामत लग रही थी. ब्लाउज काफी डीप थी, जिससे काफी क्लीवेज दिख रहा था.

प्रीति और कुसुम दोनों ही डांस के नशे में थे, मेरा साढू कुसुम के साथ डांस करने लगा. और डांस के बहाने कुसुम के जवान बदन को ताड़ रहा था.. कुसुम की गोरी कमर गुलाबी साड़ी में मस्त लग रही थी..

ब्लॉउज़ और साड़ी के बीच कुसुम की नाभि और कमर की खूबसूरती कई गुना बढ़ा चुकी थी। नाभि भी भला खूबसूरत लग सकती है? मैने तो सोचा तक नहीं था। पर आज जैसे कुसुम की नाभि दिख रही थी, उसकी खूबसूरती देखने लायक थी।

कुसुम की गोल गहरी सेक्सी नाभि, कमाल लग रही थी।

कुसुम ने साड़ी बहुत निचे से बाँधी थी, एकदम अपनी बूर से ऊपर. साड़ी में कसी हुई कुसुम की भारी भरकम चुत्तड़ और नितंब बहुत ही सेक्सी लग रही थी. कुसुम हर बीट के साथ अपनी गांड मटका रही थी..

गाना भी क्या खूब बज रहा था--

"" सारे लड़को की कर दो शादी,

बस एक को कुँवारा रखना,

बस एक को कुँवारा रखना"""

कुसुम की साड़ी का पल्लू पूरा बार बार नीचे गिर रहा था, और उसके बड़े बड़े स्तन ब्लाउज से साफ़ दिख रहे थे. कुसुम की चूचियां बहुत ज्यादा बाउंस हो रही थी…

मेरा साढू कुसुम की भारी गांड पर अपना लंड रगड़ रगड़ कर नाच रहा था… रात के 11 बज चुके थे ।

अचानक कुसुम का बेलेन्स बिगड़ा तो उसने मेरे साढू को पकड़ लिया साढू का हाथ कुसुम की कमर पर था और दूसरा हाथ के नीचे कुसुम की चूचियां के साइड में था.. कुसुम गिरने से बच गयी।

ये दृश्य सबके सामने हो रहा था, मेरे डॉक्टर साढू ने मुझे व्यंग भरा कॉमेंट करते हुए हस्ते हुए कहा ।

"अरुण प्रोफेस्सर साहब सावधानी हटी दुर्घटना घटी। "

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मै बोला डॉक्टर साहब मै समझा नही।

वो फिर मेरी चुटकी लेते हुए हस्ते हुए बोले

"" सवारी को अपने सामान की सुरक्षा खुद करनी चाहिए ""

अब मै समझ गया था।

और

प्रोग्राम ठीक तरह से खत्म हो गया.. अब हम सब लोग थक गये थे..

और DJ बंद हो गया…

उसके बाद मुझे जूली के साथ बात करने का कोई मौका नहीं मिला और फंक्शन खत्म हो गया और लड़के वाले सब अपने-अपने घर वापिस चले गए। मेरी ससुराल में घर के लोग सास, ससुर, साला, और जूली ही बस रह गये। मेरी सास ने कहा अरुण बेटा कुसुम को आज रात यही छोड़ दो। कल रिंकू वापस ले आयेगा। वैसे भी अभी यहाँ बहुत काम है मुझ अकेले से ना हो पायेगा।

मै कुसुम को छोड़कर अपने घर की ओर चल दिया।

""हर इंसान दोहरी जिंदगी जीता है, घर में अलग और घर के बाहर अलग""

मेरी हालत भी वैसी ही थी, घर के अंदर मुझे अपनी बेटी रिंकी के सवालों के जवाब जो देने थे।

मै घर पहुँच गया, रिंकी दादा दादी के साथ बैठकर tv देख रही थी।

मै भी उनके पास जाकर बैठ गया, मेरी मम्मी को मैने बता दिया कि कुसुम कल आयेगी।

तभी रिंकी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा

दादी आपने वो फिल्म देखी है,

दादी--- कोनसी

रिंकी एक तंज सा ताना या कॉमेंट करते हुए बोली

"" जोरू का गुलाम """

जारी है.........
 
सुस्वागतम.... अभिनंदन.....

आपके rieviw के बिना update अधूरा सा रहता है, आपके रिव्यू update में चार चाँद लगा देते है।

""बड़ी साली के साथ उतना सहज नही होते जितना छोटी साली के साथ मर्द सहज हो जाते है।""

ये बात 💯 परसेंट सच है, ।

अंत में एक बार फिर बहुत बहुत आभार...

इसी तरह आप मेरी इक छोटी सी कहानी में अपने प्यारे rivew से चार चाँद लगाते रहिये।
 
Thanks.

Haa ye sach hai. Mei apni story copy kar yaha likh raha hu. Kyoki us wakt likhte samay bahut si galtiya ho gayi thi.

Isliye un galtiyo ko theek kar new virsion me yaha likh raha hu.

थोड़ा काम और ज्यादा सर्दी की वजह से lifestyle thodi slow हो गयी है. इसलिए update dene mein late हो जाता है।
 
अध्याय --- 9----

----------------- भूत सवार -----------------------

रिंकी एक तंज सा ताना या कॉमेंट करते हुए बोली

"" जोरू का गुलाम """

मै रिंकी का बोलने की style देखकर समझ गया कि ये गुस्से से भरी हुई है,

तभी उसकी दादी बोली रिंकी बेटी वो फिल्म तो मैने नही देखी पर उसी जैसी एक और फिल्म थी वो मैने देखी है उसका नाम मेरी जीभ पर है पर निकल नही रहा है।

रिंकी तपाक से बोली दादी मुझे याद आ गया, और मेरी तरफ देखकर चिढ़ा कर बोली

"" बेशर्म ""

मै समझ गया अब यहाँ बैठना ठीक नही रहेगा नही तो ये रिंकी और ना जाने क्या बोलना शुरू कर दे।

मै सब को गुड नाइट बोलकर अपने बेडरूम में जाने लगा, बेड रूम के अंदर जाने ही वाला था कि एक बार फिर बड़ी जोर से रिंकी की आवाज आई।

रिंकी के चेहरे पर एक शैतानी, शरारती (चिढ़ाने वाली) हंसी थी

दादी. .......ओ दादी

वो फिल्म देखी है

कोनसी

"" नौकर बीवी का ""

मैं रिंकी के से ताने को सुनकर गुस्से से भर गया, मेरे मुह से अचानक से निकल पड़ा, इसकी माँ की...........

और वापस घर से जाने लगा, मेरी मम्मी ने पूछा अरुण बेटा अब कहा जा रहा है।

मैने रिंकी की तरफ गुस्से से देखते हुए कहा नौकर अपनी मालकिन (बीवी) के पास जा रहा है।

रिंकी के चेहरे पर अपनी मम्मी ( कुसुम) की एक सौतन बनने वाली जैसी झलक साफ दिखाई देने लगी थी।

और मै सीधा बाइक स्टार्ट कर फूली स्पीड में ससुराल के दरवाजे पर खड़ा हो गया।

" एक ही शहर में ससुराल होने का फ़ायदा लड़की के साथ साथ लड़के को भी होता है, उसको भी दो घर का सुख मिलता है"",

अगर जरा सा भी झगडा हो जाये तो मेरी तरह अपनी ससुराल पहुँच जाता है।

मैने डोर बेल बजाई, और खड़े खड़े सोच रहा था, अंदर जाकर क्या बोलूँगा।

मेरे ससुर ने गेट खोला मुझे खड़ा देख मुस्कुरा कर बोले आओ बेटा अंदर आ जाओ। मै अंदर आ गया।

आप सभी को पता ही है, मेरे ससुर का घर बहुत छोटा है और मेरी ससुराल में एक ही रूम है जिसमें सभी एक साथ सोते है।

मै रूम के अंदर गया तो कुसुम ढीली सी मैक्सी पहने मेरी सास से बातें कर रही थी, कुसुम ने शायद ब्रा नही पहनी थी, क्योकि उसके बड़े बड़े स्तन मैक्सी में पपीते की तरह लटकते हुए साफ नजर आ रहे थे।

रिंकू कोने में लेटा हुआ था। और मेरी जान जूली मुझे नही दिखाई दे रही थी।

मुझे सामने खड़ा देख कुसुम शॉकड होते हुए हस्ती हुई बोली

आप कैसे टपक पड़े। हाहाहा हाहाहा हाहाहा।

मेरी सास कुसुम की पीठ पर एक थपकी मारते हुए बोली चुप कर तेरा पति है, एक सयानी जवान बेटी की अम्मा बन गयी पर लड़कपन नही गया।

मेरी सास मुझे बैठने का इशारा करते हुए बोली कुसुम ये तेरे अकेला का घर नही है, मेरे दामाद अरुण का भी है, और वो जब चाहे तब आ जा सकता है।

मै बोला कुसुम सुन लिया,

कुसुम बोली हा, पर ये बताओ वापस कैसे आ गये, मेरे साड़ी के पल्लू से बंधे हो जो एक रात भी अकेले नही रह पाये।

मै मन ही मन सोच रहा था जैसी माँ वैसी बेटी वहा रिंकी ने ताने मार कर चैन से रहने दिया और अब यहाँ उसकी मम्मी कुसुम ताने मार कर चैन से नही रहने देगी।

मै थोड़ा अकड़ दिखाते हुए बोला एक काम करता हूँ मै वापस चला जाता हूँ।

तो मेरे ससुर ने कहा कुसुम चुप अब कोई शैतानी नही।

मै बोला नही पापा बोलने दो उसको मेरी गलती है क्योकि मेरी बाइक पंचर हो गयी थी इसलिए मै अपना घर समझकर आ गया।

सास--- अरुण बेटा ये भी तेरा ही घर है, चल अब खाना खा ले।

मै-- नही वो मै खा चुका हू।

ससुर--- कुछ पी लो।

कुसुम-- और कितना पियेंगे पूरी बोतल तो आपके लाडले दामाद अपनी साली प्रीति के साथ डकार चुके है।

मै--- पापा एक बात बताओ आपने कुसुम को क्या खा कर पैदा किया था।

कुसुम--- धतूरा,

हाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

इसलिए तो मै पागल पैदा हुई हू।

ससुर--- कुसुम अब बस बहुत हो गया। रिंकू बेटा चल छत पर जाकर सो, यहाँ तेरे जीजाजी लेटेंगे।

मै--- नही पापा मै छत पर सो जाता हू, रिंकू को लेटे रहने दो।

कुसुम--- हा पापा आपका दामाद सही कह रहा है, वो छत पर ही comfortable रहेगा, और वैसे भी हमारा घर ट्रेन के जरनल डिब्बे जैसा है, जो पहले आ कर सीट पर लेटे या बैठे सीट उसकी होती है।

"" पहले आओ पहले पाओ ""

हाहाहा हाहाहा हाहाहा।

सास कुसुम को आँखे दिखाते हुए चुप कर घोड़ी।

मै--- मम्मी आप मुझे बिस्तर दे दीजिये मै छत पर ही लेटुंगा।

सास खड़ी होकर मुझे बिस्तर देने लगी,

ससुर--- रिंकू जा जीजाजी के साथ तू भी छत पर ही सो।

मै--- मम्मी जूली नही दिख रही है, वो कहा गयी है,

सास -- बेटा जूली का पेट खराब हो गया है, वो लैट्रिन मे है तीन चार बार जा चुकी है।

मै और रिंकू छत पर आ गये और अलग अलग बिस्तर बिछाकर सोने लगे।

पांच मिनिट बाद कुसुम दूध का ग्लास लेकर आ गयी और मुझसे बोली लो मम्मी के लला दूध पीलो।

मैने कहा इस दूध की मुझे जरूरत नही है, और कुसुम की मैक्सी में लटक रहे दूधों को दबाते हुए बोला मुझे ये पीना है।

कुसुम ने मेरे गालो पर प्यार से चांटा मारते हुए धीरे से बोली चुप ये दूध पियो और सो जाओ। और हस्ती हुयी चली गई।

हाहाहा हाहाहा।

मैने रिंकू की तरफ देखा वो करवट बदले हुए लेटा हुआ सो रहा था।

कुसुम से शादी के बाद आज पहली रात थी कि मै अपने बिस्तर पर अकेला लेटा था, बिस्तर का खालीपन मुझे अंदर से काट रहा था।

एक कहावत है

"" जब बीबी नही हो पास तो बिस्तर लगे उदास "" मुझे याद गयी,

मै करवट बदलते रहा पर नींद नही आ रही थी। मेरा सेक्स करने का मन कर रहा था तो मै कुसुम को याद करके अपनी आँख बंद कर के चादर ओढ़ कर चड्डी के अंदर हाथ डालकर लंड सहलाने लगा पर जैसे आँखे बंद करता तो मुझे जूली का चेहरा सामने आ जाता। मै जूली के बारे में जितना सोचता उतना ही मेरा लंड हुन्कार भरता।

मै जूली का नाम लेकर अपना लंड सेहलाता हुआ मन ही मन गाना गुनगुनाने लगा--

"" जूली जूली जूली तू लड़की नही मामूली "

मै जूली के साथ सेक्स कैसे किया जाये उसके बारे में सोचने लगा, मेरे दिमाग में जूली के बारे बहुत गंदे गंदे विचार आ रहे थे। मेरा मन कह रहा था की मेरे पास एक महिना है अगर मैने जूली की शादी के पहले उसकी ले ली तो शादी के बाद भी जूली मुझे बड़े प्यार से उछल उछल कर देगी।

जूली को उसके होने वाले पति से पहले मुझे अपना लंड का स्वाद देना है, क्योकि अगर उसके पति का लंड का स्वाद उसे मिल गया तो जूली भी प्रीति की तराह मुझे klpd कर देगी।

पर जूली को पटाया कैसे जाये कोई सही idea नही आ रहा था, मुझ पर जूली का ऐसा भूत सवार हो गया है की जूली जूली जूली सोचते हुए मेरी आँख लग गयी।

मै अपने कॉलेज की क्लास में बैठा था, और एक टॉपिक पर लेक्चर दे रहा था . मुझे आभास हो रहा था जैसे क्लास में सब स्टूडेंट अपने नोटस लेकर बैठे हुए हैं और काफी गहमा-गहमी का माहौल है।

लेकिन मुझे किसी का भी चेहरा साफ-साफ़ नहीं दिख रहा था. कुछ देर बाद इसी तरह जब आखिर सामने बैठी एक लड़की खड़ी हुई और उसने उठते हुए मुझसे हाथ मिलाया. मैने भी उठ कर हाथ आगे बढाया था लेकिन अब मेरे सामने स्टूडेंट की जगह मेरी बेटी रिंकी खड़ी थी और मुस्का रही थी, 'आई अग्री (मान जाना) पापा..!’

रिंकी ने कहा,

उसने एक छोटी सी काली ड्रेस पहन रखी थी. मैने नीचे देखा और पाया कि मै खुद नंगा खड़ा था और मेरा लंड खड़ा हो कर हिलोरे ले रहा था, तभी रिंकी ने हाथ बढ़ा कर मेरा लंड पकड़ लिया;

मेरी आँख खुल गई, मेरा हाथ पजामे के अन्दर लंड को थामे हुए था और मेरे दिल की धड़कनें बढ़ी हुईं थी. मै सपना देख रहा था,

मैने चारो तरफ तरफ देखा और पाया कि अभी भी अँधेरा था, मैने सिरहाने रखे फ़ोन में वक्त देखा. सुबह के ४ बजने वाले थे. मेरा लंड अभी भी मेरे हाथ में था।

मैने अपने साले रिंकू की तरफ देखा, वह पेट के बल लेटा सो रहा था.

मै अपनी लाचारगी पर तरस खाते हुए अपने साले रिंकू की उभरी हुई गांड देख रहा था .

मै लेटे-लेटे सोचने लगा।

'उफ़...अब तो मुझे मेरी बेटी रिंकी के सपने भी आने लगे हैं.

हे भगवान मुझ सदबुधि दो जिससे मेरे और मेरी बेटी के बीच बाप बेटी के रिश्तों की मर्यादा बनी रहे और कोई भी अनहोनी ना हो पाये।

मै बहुत ही असमंजस में था कि मै जब सोया तो अपनी साली जूली के बारे में सोच रहा था पर बेटी रिंकी सपने में कैसे आ गयी खैर सपना ही था और मै रिंकी को भूलकर जूली के बारे में सोचने लगा।

हाय जूली मेरी साली बड़ी जालिम है इसकी जवानी...पर कुछ होता दिखाई नहीं देता, इसके सिर पर तो शादी का भूत सवार है और मेरे लंड पर इसकी ठुकाई का. दोनों के बीच मेरे लंड की बैंड बजी रहती है. क्या करूँ समझ नहीं आता...आज से तीस दिन है, जूली की शादी के.'

'हर तरह से जूली को बहला चुका हूँ...पर आगे दीमाग में कोई तरकीब आ ही नहीं रही है...' कुछ पल इसी तरह फ्रस्टरेट होते रहने के बाद मेरे लंड ने एक जोरदार हिचकोला खाया. यकायक मेरे चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी, 'आह ये मैंने पहले क्यूँ नहीं सोचा...दीमाग नहीं...अब लंड की बारी है...'

मै ख़ुशी-ख़ुशी सो गया, आर या पार की लड़ाई का वक्त आ चुका था.

जारी है....
 
शुक्रिया आभार अभिनंदन

मेरे लिखे शब्दों के माध्यम से पाठक के चेहरे पर हँसी आ जाये, पाठक अंदर से हर्षोल्लास से भर जाये। मुझ जैसे छोटे से लेखक के लिए सबसे बड़ा पुरुष्कार है।

(लेक्चरर साहब की अच्छी खासी फजीहत हो रखी है।)

इस लाइन ने मुझे आपकी ओर से हंसी भरा return gift दिया है।

हाहा हाहा हाहा मेरी भी हंसी छूट पड़ी।

एक बार फिर आपको बहुत बहुत धन्यवाद, शुक्रिया।
 
'हर तरह से जूली को बहला चुका हूँ...पर आगे दीमाग में कोई तरकीब आ ही नहीं रही है...' कुछ पल इसी तरह फ्रस्टरेट होते रहने के बाद मेरे लंड ने एक जोरदार हिचकोला खाया. यकायक मेरे चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी, 'आह ये मैंने पहले क्यूँ नहीं सोचा...दीमाग नहीं...अब लंड की बारी है...'

मै ख़ुशी-ख़ुशी सो गया, आर या पार की लड़ाई का वक्त आ चुका था.

आज सूरज निकल आने के साथ ही मैने अपनी दिनचर्या के काम निपटाए । मैने मुहँ-अँधेरे आँख खुलने पर जो तरकीब सोची थी उसे इस्तेमाल करने की हिम्मत अभी तक नहीं हो रही थी. उस वक्त तो नींद में मैने फैसला कर लिया था लेकिन सुबह उठ जाने के बाद मेरे असमंजस और व्याकुलता बढ़ गए थे. एक मौका आ कर हाथ से निकल भी चुका था.

मैने मोबाइल में देखा सुबह की 6 बजने वाले थे, रिंकू अपने बिस्तर पर नही था। मैने छत से नीचे आंगन में झाँका तो जूली आंगन में खड़ी होकर पानी भर रही थी।

मै नीचे आ गया

गुड मॉर्निंग जूली

गुड मॉर्निंग जीजू

मैने पूछा सब लोग कहा गये है,

जूली--- रिंकू अखबार बाटने गया है। मेरे मम्मी पापा रोज की तरह टेहलते हुए मंदिर गये है और आपकी प्यारी wife कुसुम दीदी भी उनके साथ चली गई है।

मैने सेक्सी style में मुस्काते कहा तुम नही गयी।

जूली बोली मै भी जा रही हूँ।

मैने कहा हमें भी अपने ले चलो अपने साथ।

जूली--- वो हस्ती हुयी, सच्ची चलेंगे मेरे साथ सोच लो फिर मना मत करना,

मैने कहा तेरी कसम तुम्हारे साथ तो में नर्क में भी चलने के लिए तैयार हू।

जूली--- ज्यादा लंबी मत छोड़ो, अभी तो में हगने (लैट्रिन) जा रही हूँ आ जाओ अंदर।

जूली हस्ती हुई बाथरूम में घुस गयी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मै--- छि छि, हाहाहा हाहाहा हाहाहा।

जूली के बाथरूम में घुसने के बाद

मैने तेल की शीशी निकाली और बैठ गया. फिर मैने अपनी पेंट और अंडरवियर निकाल दिए व हाथों में तेल लेकर अपने काले लंड पर लगाने लगा लंड तो पहले से ही खड़ा था, अब तेल की मालिश से चमकने लगा था. एक दिन पहले ही नहाते वक़्त मैने अपने अंतरंग भाग पर से बाल (झांटे) भी साफ़ कर लिए थे, सो मेरे लंड के नीचे उनके अंडकोष भी साफ नज़र आ रहे थे.

कुछ देर अपने लंड को इसी तरह तेल पिलाने के बाद मैने उठ कर अलमारी में रखे एक्स्ट्रा तौलियों में से एक निकाल कर लपेट लिया . तेल की शीशी को भी यथास्थान रखने के बाद मै आंगन में कुर्सी पर जा बैठा और जूली के बाहर आने का इंतज़ार करने लगा.

जूली जब बाथरूम से बाहर आई तो मुझे (अपने जीजू को) कुर्सी पर बैठ अखबार देखते पाया. मै ऊपर तो शर्ट ही पहने हुए था लेकिन नीचे मैने एक टॉवल लपेट रखा था और पैर पर पैर रख कर बैठा था.

टॉवल बीच से ऊपर उठा हुआ था और मेरी टांगों के बीच मेरा लंड!' नज़र आ रहा था.

जूली की आँखों के आगे अँधेरा छाने लगा. जूली ने शायद अपनी सहेलियों के साथ गुपचुप खिखीयाते हुए एक दो पोर्न फ़िल्में देखीं होगी लेकिन असली लंड से उसका सामना पहली बार हुआ था और वह भी उसके जीजू का था. मेरे भीषण काले लंड को देख उसका बदन शरम और घबराहट से तपने लगा ।.

'बस अभी नहाता हूँ...' मैने जूली की तरफ एक नज़र देख कर कहा.

मेरा हाल भी जूली से कोई बेहतर नहीं था, दिल की धड़कने रेलगाड़ी सी दौड़ रहीं थी. लेकिन मैने अपनी पूरी इछाश्क्ति से अपने चेहरे के भाव नॉर्मल बनाए रखे थे. जूली के चेहरे का उड़ा रंग देख मैने झूठी आशंका व्यक्त की, 'क्या हुआ जूली?'

क...क...कुछ...कुछ नहीं..जीजू...’ जूली ने हकलाते हुए कहा और पलट कर किचिन की तरफ चल दी.

मै उसे जाते हुए देखते रहा, उसकी पीठ मेरे तरफ थी । मैं ने अपनी नज़रें अखबार पर गड़ा लीं, उसी वक्त जूली ने एक बार फिर मुझे पलट कर देखा. मै अपनी साली के सामने अपने आप को यूँ एक्सपोस (दिखाना) करने के बाद थोड़ा और बोल्ड हो गया। हालाँकि डर मुझे भी लग रहा था कि कहीं कुछ उल्टा रिएक्शन ना हो जाए ।

जूली!?' मैने पुकारा.

'ज...जी जीजू?' जूली ने थोड़ा सा मुहँ पीछे कर के पूछा. उसकी आवाज़ भर्रा रही थी.

'ये मेरा फ़ोन चार्ज में लगा दो जरा...' मैने अपना फ़ोन हाथ में ले उसकी तरफ बढ़ाया.

'जी...हाँ अभी...अभी लगाती हूँ..जीजू...’ जूली ने मेरी तरफ देखा और एक बार फिर से सिहर उठी.

थोड़ी हिम्मत कर जूली पलटी और बिना मेरी टांगों के बीच नज़र ले जाए मेरे पास आने लगी, मुझको हाथ में फ़ोन उठाए कुछ पल बीत चुके थे, जैसे ही मुझे जूली पास आती दिखी मैने फ़ोन अपने आगे रखे एक छोटे टेबल पर रख दिया था.

जूली की नज़र भी मेरे नीचे जाते हाथ के साथ नीची हो गईं, वह मुझसे चार फुट की दूरी पर खड़ी थी और उसने झुक कर फ़ोन उठाया, ना चाहते हुए भी उसकी नज़र एक बार फिर से मेरे चमकते लंड और आंडों पर जा टिकी. मै उत्तेजित तो था ही, जूली की नज़र कहाँ है इसका आभास मुझे कनखियों से हो गया था.

मैने अपने उत्तेजित हुए लंड की माश्पेशियाँ कसते हुए उसे एक हुलारा दिला दिया, जूली झट से उछल कर सीधी हुई और लघभग भागती हुई किचिन के पास जा कर मेरा फ़ोन चार्जर में लगाने की कोशिश करने लगी, उसके हाथ कांप रहे थे.

फोन चार्ज में लगाने के बाद जूली सीधी किचिन मे घुस गयी. उसे बुखार सा हो आया था,

मै किचिन के दरवाजे के पास छिपकर अंदर का नजारा देख रहा था, जूली किचिन में खड़ी खड़ी बड़बड़ा रहीं थी।

'ओह शिट ओह शिट ओह शिट!' जूली ने अपने दोनों हाथों से मुहँ ढंकते हुए , 'आइ सॉ जीजू ...ओह गॉड!' अपने जीजू के लंड की कल्पना करते ही जूली का बदन कांप उठा था. 'जीजू को रियलाईज़ भी नहीं हो रहा था कि...टॉवल ऊपर हो गया है...और उनका...हाय...ओह गॉड...हाओ कैन दिस हैपन?' जूली के दीमाग में भूचाल उठ रहा था. वह सरक कर किचिन में अपनी साइड पर हुई और गैस के लाइटर को बंद चालू कर रहीं थी।

जूली अपने पैर सिकोड़ कर बैठ गई. उसकी आँखे बंद हो गयी थी, शायद बार-बार उसके सामने मेरा लंड और आंड आ-जा रहे थे और उसका जिस्म शरम और ग्लानी (हालाँकि उसकी कोई गलती नहीं थी) की आग में तप रहा था.

जूली को एक और खौफ यह भी सता रहा था कि वह अब मुझसे नज़र कैसे मिला पाएगी?

और जब एक बार फिर से घर के दरवाज़े के खुलने की आहट हुई तो मेरा बेचैन दिल धौंकनी सा धड़कने लगा .

मै तुरंत बाथरूम मे घुस गया।

मुझे कुसुम, और सास ससुर की आवाज आ रही थी।

नहाते हुए मेरा भी मन अपने किए इस दुस्साहसी कृत्य से विचलित रहा था 'पता नहीं क्या सोच रही होगी...लंड ने तो खून जमा दिया उसका, कैसे उठ कर भागी थी साली...कहीं मैंने ज्यादा बड़ा कदम तो नहीं उठा लिया? अब तो पीछे हटने का भी कोई रास्ता नहीं है...कहीं उसे शक हो गया होगा तो..? की यह मैंने जान-बूझकर किया था...मारे जाएँगे फिर तो...

’अब मै भी अपने दुस्साहस को लेकर असमंजस में फंसते जा रहा था. लेकिन आखिर में मैने सोचा कि 'अब जब ओखली में सिर दे ही दिया है तो मूसलों का क्या डर...देखा जाएगा जो होगा, जो योजना बनाई थी उसे तो अब पूरा अंजाम देना ही है...’ और नहा कर बाहर आया।

मेरे अंदर अपनी साली जूली के जिस्म को भोगने का भूत जो सवार है।

जारी है।
 
धन्यवाद, आभार, शुक्रिया

कहानियों की घटनाओ की बारीकी से निष्पछ जाँच करने वाले आप जैसे reders को मेरा तहे दिल से 🙏🙏 नमन स्वीकार करे।

"महिलाओ को बेख्याली मे अपने लिंग का दर्शन करवा कर सेड्यूश करना मर्दों का बहुत पुराना फंडा हो गया।"😂😂😂

शायद इस लिंग दर्शन में मर्द की कमजोरी और हिम्मत दोनों ही झलकती है, मेरे हिसाब से ये कृत्य करने वाले मर्द मानसिक रूप से असंतुलित होते है। 😂😂

एक बार फिर आपका बहुत बहुत धन्यवाद, अभिनंदन।
 
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