Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 19 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

200.gif
 
बहुत बहुत शुक्रिया, आभार...... शत प्रतिशत सही कहा है, forbidden fruit का मजा ही अलग है 😜

200.gif
 
लास्ट सीन लिख रहा हूँ डियर

200.gif
 
फिर प्रीति बाय कहकर चली गई. पूरे पंद्रह मिनट बाद मैंने भी होटल का बिल अदा किया और वापिस वहीं चला गया जहाँ से आए थे... ....।

करीब आधे घंटे बाद मै भी मैरिज हाल में पहुँच गया, इधर उधर ढूढ़ने के बाद मुझे अपनी बीवी कुसुम शादी के टेंट (शामियाने) की लगी पर्दे के पीछे जाती हुयी दिखाई दी। वहा उसका वही मुझसे शादी के पहले का प्रेमी दिनेश खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा था। मै भी उसके पीछे पीछे टेंट के पर्दे के दूसरे तरफ छिप कर खड़ा हो कर उनकी बातें सुनने लगा।

“मुझे यकीन नही था की तुम्हे भी उस रात की बात याद होगी ,तुम्हारे आंखों में आये हुए आंसू ने सब बता दिया ..”

“वो बात अब पुरानी हो चुकी है दिनेश,अब मैं शादी शुदा हु ..”

“हा जानता हु लेकिन तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार अब भी है …”

कुसुम ने इसका कोई जबाब नही दिया ।

“क्या हुआ ..मैं अब समझ सकता हु की प्यार तो तब भी था लेकिन तुमने कभी उजागर ही होने नही दिया ..”

“ दिनेश ये सब बाते छोड़ो ना अब इन सबसे क्या मिलेगा..”

“अभी तुम्हारे पति अरुण कहा है ..”

“ अपने किसी दोस्त से मिलने गये है ..”

“ कुसुम चलो ऊपर होटल के कमरे में चलते हैं..”

“नही कोई जरूरत नहीं ..”

Pls कुसुम बस एक बार चलो ना मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है....!

“तुम पागल हो गए हो क्या , वैसे भी शादी की भीड़ से बाहर आकर बात करना पड़ रही है ..”

कुसुम की आवाज में चिंता तो थी लेकिन वो थोड़ी रूवासी जरूर थी ,वो हल्के हल्के सिसक रही थी ,

“हा तुम ही कहती हो ना की मैं पागल हु ,इतने दिनों के बाद तुम्हे देखकर कोई पागल नही होगा ..”

दिनेश की आवाज में भारीपन तो था लेकिन बेहद ही गमगीन आवाज थी,

थोड़ी देर तक कोई कुछ नही बोला

“याद है कुसुम वो रात जब हम दोनो एक होते होते अधूरे रह गए थे..”

कुसुम ने कुछ भी नही कहा,

"वही ये बात सुनकर मेरी हालत खराब हो गई थी ,ये बात कुसुम ने मुझसे हमेशा से ही छिपाई थी ,

“ दिनेश प्लीज् वो एक गलती थी ,शायद हम बेहक गये थे ..”

“ बहके तो थे कुसुम लेकिन तुमने सच ही कहा था उस दिन की तुम मुझसे प्यार करती हो ..”

“ दिनेश तुमने आजतक कभी इस बात को नही छेड़ा तो अब क्यो, मैं तो तैयार थी ना तुमसे शादी करने के लिए,लेकिन तुमने क्या कहा था कि हमारा रिश्ता मामा भांजी का है और परिवार, रिश्ते की मर्यादा तो तुम्हे निभानी थी,........ अब मैं अपने पति से प्यार करती हु,बेहद प्यार ...आज तक तुम मेरे जीवन में दखल नही दिया लेकिन आज ….” कुसुम सिसकने लगी।

कुसुम मुझे माफ कर दो ,मैं आज भी तुम्हारे जीवन में दखल नही देना चाहता ..लेकिन मैं बस उस बात से बहक गया था,मैं नही चाहता की अरुण को हमारे बारे में पता चले,लेकिन मैं आज भी तुम्हे बेहद प्यार करता हु कुसुम,और मैं जानता हु की दिल के किसी कोने में तुम भी मुझसे मोहोब्बत करती हो …”

कुसुम थोड़ी देर तक चुप ही रही.

हा दिनेश करती थी तुमसे प्यार और करती भी हु,और प्यार कोई ऐसी चीज तो नही जो मर जाएगी ,लेकिन तुम्हारे अलावा मैं अपने पति से भी बेहद प्यार करती हु,और मुझे आशा है की तुम मेरे शादी शुदा जीवन में अब दखल नही दोगे..”

कुसुम का स्वर और भाव दोनो ही स्पष्ट थे ..वो दृढ़ थी ..कही ना कही मुझे उसपर गर्व हो रहा था और खुद पर घमंड ..

“नही दखल दूंगा,शायद इसीलिए आज तक तुमसे दूर ही रहा क्योकि अगर तुम्हारे पास आता तो फिर से बहक जाता,सोचा था की अब सब कुछ ठीक हो गया होगा,फिर से हम पहले की तरह रहने लगेंगे.. लेकिन ... मुझे माफ कर दो कुसुम शायद मुझे यंहा से चले जाना चाहिए तुम्हारे जीवन से दूर हमेशा के लिए..”

दिनेश रो पड़ा था ..

“दिनेश ..”इस बार कुसुम चिल्लाई थी ..

“तुम फिर से मुझसे दूर जाना चाहते हो …???अच्छा चले जाओ,लेकिन मेरी खुसी इसी में है की तुम मेरे पास रहो,मेरे सबसे अच्छे दोस्त बनकर ..”

दोनो ही कुछ नही बोले..

“दोस्त..हा वो तो जीवन भर रहूंगा लेकिन ….लेकिन अगर मैं बहक गया तो ,अगर हम दोनो ही बहक गए तो ..”

कुसुम हल्के से हँसी

“मुझे तुमपर और खुद पर पूरा भरोसा है दिनेश,मैं तुम्हे और खुद को रोक सकती हु,ताकि हमारी मर्यादाओं का उल्लंघन ना हो..”

फिर से एक खामोशी सी छा गई..

“सच में तुम बड़ी बड़ी बाते करने लगी हो कुसुम,”इस बार दिनेश हंसा और साथ ही कुसुम भी

“अगर कुछ हुआ ना तो तुम जानो ,मैं यही रुक रहा हु ..” दिनेश की आवाज में एक चहक थी,

“थैंक्स मेरे कमीने..लेकिन एक बात बता,तू ने मुझे यहाँ टेंट के पीछे बस ये ही बातें करने के लिए बुलाया था..”

दिनेश हंसा

“सोचा था तू मान जाएगी तो तेरी किस ले के जाऊंगा “

“बहुत कमीना है तू ,अभी तो प्यार की बात कर रहा था ..”

फिर से दोनो ही हंसे

“ओके चल मै अब चलती हू ये (अरुण) भी वापस आ गये होंगे और मुझे औरतो के झुंड में ढूढ़ रहे होंगे..”

“बाय लव यू ऊऊमाआआ “ दिनेश की बात से कुसुम जोरो से हँसी

“बाय लव यू कमीने और वरमाला देखकर ही घर जाना ” कुसुम ने हल्के से कहा …… और वो वापस औरतो के झुंड में शामिल हो गयी।

दोनो की बात सुनकर मेरे दिल में कुसुम और दिनेश के लिए इज्जत और भी बढ़ गई थी ,सच में मैं कुसुम और दिनेश के बारे में ऐसा नही सोच पा रहा था जैसा की मैं किसी दूसरे मर्द के साथ कुसुम के बारे में सोचता,उन दोनो में एक प्यार था अपनत्व था,दोस्ती थी जो बेहद ही गहरी थी ,साथ पाने की चाह थी लेकिन हवस नही ,मैं कुछ डिसाइड नही कर पा रहा था की क्या करू,मैंने एक गहरी सांस छोड़ी और अब मै अपना अगला शिकार अपनी छोटी साली जूली को ढूढने लगा।

नोवेम्बर की गुलाबी सर्दी का मौसम वैसे ही खुशगवार होता है, पर आज मुझे ज्यादा ही खुशगवार लग रहा था, मैं जूली से ढेर सारी बातें करना चाहता था। मुझे पता था कि समय बहुत कम है कुछ घंटो बाद या यू कहे आज शादी होने के जाने के बाद जूली ससुराल चली जायेगी। और मै अपनी साली जूली की चूत पर अपने लंड का ठप्पा लगाने से चूक जाऊंगा।

साली को ढूँढते ढूढते मेरी नजर मेरी प्यारी बेटी रिंकी पर पड़ी, रिंकी दो तीन लड़कियों के साथ खड़ी गप्पे लगा रही थी। जब उसकी नजर मुझ पर पड़ी तो उसके चेहरे पर नूर आ गया। वो खुशी से खिल गयी लेकिन मेरे पास नही आई। मै उससे ज्यादा खुश था।

मेरी लड़की (बेटी) सच में सुंदर है. माथे पर चमकती हुई लाल रंग की बिंदी...... छरहरा नाजुक बदन था, लाल रंग की हल्की कढ़ाई वाली साड़ी पहनी थी। पतली स्टैप वाला और स्लीवलेस ब्लाउज़ पहने थी. हाथों में एक एक फ़ैशन वाला कॉपर का कंगन था और एक स्लिम गोल्ड वाच थी. गोरे पैरों में ऊंची ऐड़ी के सैंडल थे. छरहरा बदन था, एकदम स्लिम, ऊंचाई कुसुम (उसकी मम्मी) से तीन चार इंच कम थी. चेहरा काफ़ी कुछ कुसुम (उसकी मम्मी) जैसा था, काफ़ी कुछ क्या, बहुत कुछ.. ...!

बस बदन कुसुम (उसकी मम्मी) के मुकाबले एकदम स्लिम था, कुसुम (उसकी मम्मी) अच्छी खासी मांसल है, मोटी नहीं पर जहां मांस होना चाहिये वहां उसका एवरेज से ज्यादा ही मांस है. वजन थोड़ा ज्यादा होता और ऊंची होती तो एकदम कुसुम (उसकी मम्मी) की जुड़वां लगती. हल्का मेकप किया था और होंठों पर हल्की गुलाबी लिपस्टिक थी. आंचल में से छोटे छोटे पर तन कर खड़े उरोजों का उभार अंदर से झांकता दूधिया नव यौवन जैसे मुझे पुकार रहा था।

मैं खुद बहुत अधीर था। पर खुद पर काबू रखना बहुत जरूरी था। मैं कुसुम (उसकी मम्मी) से बहुत प्यार करता था। उसकी निगाह में गुनाहगार नहीं बनना चाहता था। और मैं यह भी नहीं चाहता था कि कहीं से भी रिंकी को ये महसूस हो कि मैं सिर्फ उसके यौवन का दीवाना हूँ इस सबके बावजूद भी मैं दिल के हाथों मजबूर था। दिमाग तो से बस बेटी को भोगने का एक ही काम कर रहा था।

पर मेरे साथ एक समस्या यह भी थी कि मेरी इमेज अपनी बेटी की नजरों में पत्नी-भक्त (जोरू का गुलाम) की थी और मैं उस के सामने अपनी छवि खराब नहीं करना चाहता था, और वास्तव में मुझे शायद कुसुम से अधिक प्यार किसी से नहीं था। पर यह भी सत्य है कि रिंकी को सामने पाकर मैं उसकी अद्वीतीय सुन्दरता पर आसक्त था। इसी अंर्तद्वन्द्व में मैं हल्के हल्के रिंकी की ओर कदम बढा रहा था।

आखिर में मै रिंकी के पास पहुँच ही गया, वो अब उन लड़कियों से थोड़ी दूर हट कर खड़ी हो गयी, मैने उससे कहा बहुत सुंदर लग रही हो। ये सुनकर वो शर्मा गयी। डीजे पर गाना बज रहा था "" हवा हवा ऐ हवा, एक बार मिला दे.... आज किसी के चेहरे का नूर खिल गया, बिछड़ा हुआ आज कोई उसको मिल गया "" ......... ह्म्म ह्म्म

“थोड़ी देर मेरे पास बैठो ना रिंकी मैं तुमको साड़ी में देखना चाहता था।” मैंने तुमको आज तक साड़ी में नहीं देखा है,

“तो देख तो लिया, दोपहर से साड़ी में ही तो हूँ।”

अब मैं तो कोई जवाब ही नहीं दे पाया उसको, मैंने कहा- “पर तब सिर्फ तुम पर ध्यान नहीं था ना, अगर बुरा ना मानो तो थोड़ी देर मेरे पास ऐसे ही रहो, साड़ी में।”

मेरे इतना बोलते ही वो मेरे एकदम सामने आकर खड़ी हो गई और बोली, “लो जी भर कर देख लो।”

उसके दोनों गुब्बारे एकदम तने हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे ही पुकार रहे थे कि मेरे पापा आकर हमसे खेलो।

मैं भी खड़ा हुआ और उसके बिल्कुल सामने पहुँच गया। मैंने कहा, “रिंकी तू तो मम्मी से भी ज्यादा खुबसूरत हो?”

वो हंसने लगी और बोली- पापा ऐसा कुछ नहीं है सब आपकी आंखों का धोखा है।

तब तक मैं उसके एकदम सामने खड़ा था, एकदम नजदीक ! मैने उसकी गोरी गोरी बाजुओं पर अपनी उंगलियाँ फेरी।

“उईईई…” वो एकदम सिहर उठी।

मैं बोला “क्या हुआ?”

रिंकी ने कहा, “मीठी मीठी गुदगुदी होती है।”

मैंने पूछा- अच्छी नहीं लगी क्या? तो उसने एकदम मेरी ओर मुस्कुरा कर देखा पर मुझे अपनी ओर देखकर आँखें लज्जा से नीची कर ली।

‘हाय रे…’ उसकी यह कातिल अदा ही मेरी जान निकालने के लिये काफी थी। आज पहली बार मुझे लगा कि शायद मैं ही बुद्धू था, जो "जूली की मूली" खाने के चक्कर में अपनी हसीं बेटी को छोड़ भटक रहा हूँ और सोचा कि कोशिश करके देखते हैं क्या पता आज रात रिंकी के साथ ही बात बन ही जाये। मैंने फैसला किया कि कुछ सधे हुए तरीके से प्रयास करूँगा ताकि यदि बात ना भी बने तो बिगड़े तो बिल्कुल भी नहीं।

और मै उस को कुछ कदम की दूरी पर ले जा कर बोला।

रिंकी अभी यहाँ कुछ काम है क्या...??

काम तो कुछ नही है..." उसने जबाब दिया।

तो चलो ना ऊपर होटल के रूम में चलते हैं, मैने फिर अगली चाल चली।

क्यो..?? यही रहो ना सभी लोग तो है यहाँ, रूम में क्या करेगे....वैसे भी अभी बारात आने वाली है, मम्मी बेवजह हंगामा करेगी... उसने जबाब दिया।

मेरे को गुस्सा आ रहा था मैने उससे मुहं मोड़ लिया मेरा दिमाग़ ख़राब हो रहा था। मैं उसके पास से दूर चला गया और दुखी आत्मा जैसी शक्ल बनाकर उसे देखने लगा दूर से। वो मुझे देख रही थी. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था. सोचने लगा साली किस्मत ही ख़राब है।

तभी किसी ने मेरी पीठ पर हाथ मारा, मैंने मुड़ कर देखा तो चुस्त पंजाबी सूट में मेरे पीछे प्रीति खड़ी मुस्कुरा रही थी। मैं उसके गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों को देखकर वहीं जड़वत हो गया।

तभी प्रीति बोली, “जीजा जी, आपके साथ खड़ी लड़की (रिंकी) आपकी बिटिया है, ऐसे मत घूरो, घर जा कर घूर लेना, आसपास खड़े लोग आप दोनों को लैला मजनू समझ कर घूर रहे है ”

मैंने एक बार फिर से खुद को नियंत्रित करने की कोशिश की और बिना कुछ भी बोले अपनी बीवी कुसुम की तरफ चल दिया।

प्रीति भी मेरे पीछे-पीछे चलती हुई बोली, “लगता है जीजाजी नाराज हैं मुझसे कोई बात भी नहीं कर रहे।”

अब मैं उस को क्या बताता कि दोपहर में होटल की चुदाई के बाद उसको दोबारा देखकर मैं अपने होशोहवास खो चुका हूँ, हम इसे एक बुरा हादसा मान कर भूल सकते थे और अपनी असल ज़िंदगी की ओर लौट सकते थे, मगर असलियत में यह कोई हादशा नही था. हम ने इसे स्वैच्छा से किया था इसमे कोई शक नही था. मगर प्रीति ने इस समस्या से निजात पाने का आसान तरीका चुना. वो ऐसे दिखावा कर रही है जैसे कुछ हुआ ही नही था. जो भी पछतावा था जो शरम थी वो सिर्फ़ और सिर्फ मेरी चंचलता और शरारत की वेजह से मुझे लग रही थी.

फिर भी मैंने बात को सम्भालने की कोशिश करते हुए बोला, “ऐसा नहीं है साली जी, दरअसल कुसुम मेरा बेसब्री से इंतजार कर रही है ।

”प्रीति बोली, “जीजाजी, इसीलिये तो मैं आपकी फैन हूँ क्योंकि आप बीवी और बेटी दोनों का ही बहुत ध्यान रखते हैं मेरे हिसाब से आप नम्बर 1 पति हो इस दुनिया के।”आप किस तरह मेरी बहन कुसुम का पूरा पूरा ख्याल रखते हो, उनकी हर विश पूरी करते हो, उन्हें किसी तरह की कोई कमी महसूस होने देते. वो बहुत खुश है आपके साथ. परिवार में सब आपकी तारीफ करते नहीं थकते..

मैं चरित्रहीन मर्द बोला की साली साहिबा जी, वो तो हर पति का कर्तव्य है और वैसे भी सेक्सी धर्म पत्नी की सेवा नहीं करेंगे तो मेवा कैसे मिलेगा. मेरे इस जवाब से वो थोड़ी शरमा गई.

“हाँ तो आज रात में साली साहिबा का क्या क्या प्रोग्राम है?”

“हम तो आपके डिस्पोजल पर हैं जो प्रोग्राम आप बना देंगे, वही हमारा प्रोग्राम होगा।”

“पक्का?”

“हाँ जी !”

“देख लो बाद में कहीं मुकर मत जाना अपनी बात से?”

“अरे जीजाजी, मुझे पता है आप कभी मेरा बुरा नहीं करेंगे और आप तो मेरे ड्रीम ब्वा्य हो, मैं आपकी हर बात मानती हूँ।”

मैंने सोचा कि लगे हाथ मैं भी कुछ अरमान निकाल लूँ, मैंने कहा, “यार तुम भी मेरी ड्रीम गर्ल हो ! पर पहले क्यों नहीं मिली। नहीं तो आज कुसुम की जगह तुम ही मेरे साथ होती मेरी ड्रीम गर्ल !”

‘हा..हा..हा..हा..’ वो हंसने लगी और मुस्कुराते हुए बोली, “लगता है आज आपकी सारी हरकतें कुसुम को बतानी पड़ेंगी, और मेरी बेटी रिंकी की तरफ आँखों से इशारा करते हुए बोली वैसे भी आप इधर उधर बहुत ताकते हो।”

प्रीति की आँखों के इशारे का अर्थ मुझे समझ आ रहा था....!

“हर इंसान अपनी जरूरत को ताकता है साली जी, मैं अपनी जरूरत को ताकता हूँ और आप अपनी।” यह बोलकर मैं मुस्कुराते हुए रिंकी ओर देखने लगा।

इसी तरह हंसते, बात करते हम लोग कुसुम के पास आ गये।

तभी कुसुम बोली- क्या बात बहुत खुश लग रहे हो दोनों, क्या हुआ?

प्रीति ने कहा, “ये जीजा जी मुझे आधी से पूरी घरवाली बनाने के मूड़ में है....???

मैं भी कुसुम को छेड़ने के मूड में था, मैंने कहा “देख लो, तुमको पता है मुझे हमेशा ही तुम्हारी जरूरत पड़ती है , ऐसा ना हो कहीं गलती से मेरा हाथ तुम्हारी जगह तुम्हारी बहन पर चला जाये।” और वैसे भी साली तो आधी घरवाली होती है।”

कुसुम भी नेहले पर देहला देते हुए बोली

“यह बात तो सही है।” लेकिन प्रोफेसर अरुण कुमार ....." कहीं आधी के चक्कर में से पूरी भी हाथ से ना निकल जाये।”

कुसुम का जवाब मेरे लिए मुश्किल पैदा करने वाला था ।

“मतलब क्या तुम्हारा “

मैंने अपना पल्ला झड़ते हुए कहा.

“क्यो?? मर्द साली को घरवाली बनाये तो चलता है और अगर औरत देवर को दूसरा वर बनाये तो बर्दाश्त नही होता है,

अब मैं बुरी तरह से झेंप गया था।

कुसुम के चहरे में एक व्यंगात्मक मुस्कान थी और व्यंगात्मक मुस्कान देती हुयी वो प्रीति के साथ होटल की लॉबी में चली गयी।

जारी है......
 
शुक्रिया सर जी, इस पार्ट का title " वेफायी या बेहहायि " है और प्रोफेसर अरुण उसी दिशा में चल रहे है..... आपने लिखा कि कुसुम को पता चला तो वो अरुण के नक्शे कदम पर चलने लगेगी... इस बात पर मै मुंशी प्रेम चंद की एक लाइन लिखना चाहता हूँ

" पत्नी से अधिक, पति के चरित्र का ज्ञान और किसी को नही होता "

इसी तरह आशीर्वाद देते रहिये... धन्यवाद
 
कुसुम के चहरे में एक व्यंगात्मक मुस्कान थी और व्यंगात्मक मुस्कान देती हुयी वो प्रीति के साथ होटल की लॉबी में चली गयी।

अब उसे क्या हुआ?” थोड़ी दूरी पर खड़ी रिंकी का उदास और चिंतित चेहरा देखकर मैने सोचा. "सच तो ये था कि रिंकी ने अपने पापा को प्रीति मौसी के साथ आपसी व्यवहार को देखकर उसे महसूस हुआ कि प्रीति मौसी उसके पापा के बहुत ही ‘क़रीब’ है."

"शादी की दावत पूरे शबाब पर चल रही थी, पर हमेशा चहकने वाली रिंकी का मन पार्टी में नहीं लग रहा था. उसे अपने पापा पर बहुत ग़ुस्सा आ रहा था और मम्मी पर दया आ रही थी. कहीं पापा ने आज रात प्रीति मौसी के साथ ........?"

""उसने मन ही मन ठान लिया कि अब वो पापा से खुद के बारे में खुल के बात करेगी. लेकिन साथ ही उसे इस बात का भी डर लग रहा था कि मम्मी को पता चलेगा तो? मम्मी की हालत कैसी हो जाएगी? मम्मी-पापा में दूरियां बढ़ जाएंगी. वे लोगों के सामने बेचारे बन जाएंगे. सोचते-सोचते उसे चक्कर-सा आने लगा.....।

शाम हो चुकी थी, बारात आने का समय हो गया और सभी मेहमान लोग अपने अपने कमरे में तैयार होने के लिए चले गए......!

"पापा के पास कोई और शर्ट पैंट नहीं है क्या ? सुबह से देख रही हूं यही एक जोड़ी कपड़े लटकाए दिन भर से फंक्शन में घूम रहे हैं ।" मुझे चेक की शर्ट पहनते हुए देख रिंकी अपनी जुल्फो को सवारते हुए कुसुम को शिकायत सुनाने लगी ।

"क्या हुआ किसी ने पापा पर कमेंट कर दिया क्या ?" अपनी साड़ी का पल्लू में पिन लगाते हुए कुसुम ने कहा ।

"और नहीं तो क्या । पापा का नाम ही चेक शर्ट वाले अंकल रख दिया है सबने । और ना जाने क्या क्या रहे हैं ।" वो एकदम से रुनवासि हो गयी । मानों अभी रो देगी ।

"किसी के बोलने से क्या होता है । बच्चे तो ऐसे ही कहते हैं । तू खुद अपनी सहेलियों के पापा को किस नाम से बुलाती है याद है तुझे ।" वो समझ गयी कि मम्मी को खुद के सजने सवरने में ज्यादा इंट्रेस्ट है और पापा की कोई खास अहमियत नहीं, इसीलिए चुपचाप अपने होंठों पर लिपिस्टक लगा कर फाइनल टच देने लगी ।

मै भले ही रिंकी का सौतेला बाप हू लेकिन

बाप के कानों तक हर बात पहुंच जाती है । मेरा जानना ज़रूरी भी था कि मेरी बेटी मेरी ड्रेसिंग के बारे में क्या सोचती है । मै उसकी हर बात सुनकर बस मुस्कुरा रहा था। इंसान अगर समझदार है तो वो कभी भी छोटी छोटी बातों पर प्रतिक्रिया नहीं देता । ऐसा भी नहीं कि मुझे फर्क नहीं पड़ता । पड़ता भी है मगर मै बता नहीं सकता । ऐसी ही शिकायतों के साथ मै अपनी बीवी कुसुम और रिंकी के साथ नीचे होटल के दरवाजे पर बारात के स्वागत के लिए अपने ससुर, साले और साढ़ू के साथ एक कतार में खड़ा हो गया।

सामने से घोड़ी पर आते हुए दुल्हे को देख कर मुझे अपना अतीत याद आने लगा। मुझे सेहरा बंधा हुआ था, बारात लड़की वालों के दरवाजे पर खड़ी थी, मिलनी हो रही थी, प्रवेश द्वार पर मेरी निगाह गई तो गहरे नीले रंग के स्लीवलेस सूट में शायद गोरा कहना उचित नहीं होगा, इसीलिये दूधिया रंग बोल रहा हूँ, तो बिल्कुल दूधिया रंग के चेहरे वाली सुन्दरी पर मेरी निगाह जाकर टिक गई उसके सूट की किनारी पर सुनहरा गोटा लगा था।

पूरे सूट पर रंगबिरंगे फूलों का डिजाइन, कानों में मैचिंग बड़े-बड़े झुमके, बहुत खूबसूरत लहराते हुए बाल, और इन सबसे अलग उसके बिल्कुल गुलाबी होंठ, जैसे खुद गुलाब की पंखु‍‍डि़याँ ही वहाँ आकर बैठ गई हों, कहर ढा रही थीं। वहाँ बहुत सारी लड़कियों का झुंड था, सभी दरवाजे पर मेरा वैलकम करने के लिये खड़ी थी परन्तु मेरी निगाह रह-रह कर उस एक अप्सरा के चेहरे पर ही जा रही थी वो पास खड़ी लड़कियों से बीच-बीच में बात करके मुस्कुरा रही थी। मैं तल्लीनता से सिर्फ उसी के खूबसूरत चेहरे को निहार रहा था और उसके चेहरे में बची उस खूबसूरती को ढूंढने की कोशिश कर रहा था।’

तभी अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे किसी ने धक्का दिया हो। मैं अपने अतीत के स्वप्न से जागा तो मेरी पत्नी कुसुम के हाथ में सफेद मोतियों की माला थी और मुझे जोर जोर से हिलाकर बता रही थी कि आने वाले सब बारातियों का मोतियों की माला पहना के स्वागत करना है , अब मैं उसको क्या बताता कि जो बीते हुए अतीत का दिव्य-स्वप्न मैं देख रहा था वो मेरे कितने करीब आने वाला था !

मैने कुसुम के हाथों से माला ले ली और उससे मजाकिया लहजे में पूछा कि , सिर्फ आदमियों को पहनानी है .. या औरतों को भी ?

पांच सेकंड खामोशी के बाद कुसुम घूरते हुए बोली " , पूरी शादी बिना क्लेश के निपटी है , 4 घंटे बचे है, कोई कांड मत कर देना ! सीधे सीधे आदमियों को माला पेहनाओ और औरतों को नमस्ते करो !! "

मैंने मोतियों की माला हाथ में ली और एक एक करके बारातियों को पेहनाना शुरू किया। अब मैं बारातियों के साथ इधर उधर की बातें करके खुद को सामान्य करने की कोशिश कर रहा था।

जब बारात आ गई और जय माला का कार्यक्रम हो गया तो हम सब लोग खाना की प्लेट हाथों में लेने लगे, मेरी बेटी ने रिंकी मेरे हाथ से प्लेट ले कर बोली आप बैठिये पापा मै परोस कर लाती हू..... मैने उससे सख्ती से कहा था कि दो रोटिया ही लाना!

जब वो खाने की प्लेट सजा कर लायी तो तीन रोटिया थी... दो रोटिया मेरी भूख थी, तीसरी उसका "प्यार" था या " अतिक्रमण" पता नही....????

खाना खाने के बाद सभी सिर्फ फैमिली के लोग दूल्हा दुल्हन (जूली और नया साढू) डी जे स्टेज पर डांस करने लगे. मेरी साली जूली जो कि लहँगा चोली में थीं और वो बहुत हॉट लग रही थीं. जूली की चूचियां और कूल्हे उछल उछल कर सबके दिलों पर, क्या बूढ़े क्या जवान, कहर ढा रहे थे.

माहौल बेहद रोमांटिक था। DJ फ्लोर में मंद रोशनी थी और हम डांस फ्लोर पर डांस कर रहे थे। मैंने शराब् का प्याला लेकर एक रोमांटिक गाने " छलकाए जाम, आपके होंठो के नाम "" पर कुसुम के साथ डांस भी किया था। डांस के बाद वह बहुत अच्छा महसूस कर रही थी। चूंकि डांस फ्लोर पर इस गाने पर डांस के दौरान मेरे साढ़ू (प्रीति के पति) भी थे, मेरे साढ़ू (प्रीति के पति) ने कुसुम के कूल्हे और स्तन पर छुआ था लेकिन उसने इसे नजरअंदाज कर दिया।

मेरी बीवी कुसुम वो काले रंग की साड़ी, सेक्सी ब्लाउज पहने हुई थी और उसने बहुत अच्छा मेकअप किया हुआ था.

उसने गहरे रंग का चेरी रेड लिपस्टिक लगाई हुई थी. वो किसी अप्सरा से कम नहीं दिख रही थी.

अचानक मैंने देखा कि कि DJ वाले ने म्यूजिक चेंज किया और एक बेहद सेक्सी गाना

"एक तो कम ज़िन्दगानी"

डीजे पर बजने लगा और मेरी बेटी रिंकी उस गाने की बीट पकड़ कर नाचने लगी। रिंकी को अपनी मम्मी से नाचने की कला विरासत में मिली थी। अब तो मेरा बुरा हाल होने लगा।

इस गाने पर नाचते हुए रिंकी बेहद कामुक मूव्स कर रही थी जो कि उस भद्दे गाने की बोल से मिल रहे थे- जैसे अपने चूतड़ों को ज़ोर ज़ोर से हिलाना। चूचियों को उठा उठा कर हिलाना। होंठों को रगड़ना, आंखे मारना।

मै खुश भी था और हैरान भी अपनी प्यारी रिंकी बेटी का ये रूप देखकर।

थोड़ी देर बाद गाना बंद हो गया और मैने ताली बजाई। रिंकी ने हंसकर हाथ के इशारे से धन्यवाद किया। काफी देर के बाद वो भी डांस करने आई, अर्थात मेरी बड़ी साली प्रीति देवी क्या क़यामत लग रही थी, वो नीले रंग की साड़ी में और ब्लाउज तो काफी खुला था जिस कारण उसके मम्मों की गहराई बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी. प्रीति के मम्मों को देख कर तो मुझे पता नहीं क्या हुआ जो मैं उन्हें ही ललचाई नजरों से देख रहा था.

प्रीति मुस्कुराते हुए बोली- जीजू, क्या हुआ? एकदम से मैं चरित्रहीन मर्द बोला की कुछ नहीं कुछ नहीं. सब नाच रहे थे, मैं भी नाच रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान बेटी और सालियों पर था. मैं नाचते हुए उन्हें देख रहा था और वो दोनों मेरी पत्नी के साथ नाचने में मगन थी.

आधे घंटे के बाद मेरी सेक्सी धर्म पत्नी मेरे पास आई और साइड में ले गई जहाँ रिंकी उल्टियाँ कर रही थी. मैंने भी पूछा- क्या हुआ? वो बोली की घबराहट के कारण ऐसा हुआ है पापा.

रिंकी ने कहा- पापा मुझे तो आप कमरे में छोड़ आओ, मेरी तबियत बिगड़ रही है. उसकी समस्या का समाधान करने के लिए मुझे 15 मिनट के लिए अपने कमरे में जाना पड़ा। इसलिए मैंने कुसुम को नृत्य का आनंद लेने के लिए कहा और कहा कि मैं कुछ समय में वहां वापस आ जाऊंगा।

मेरी पत्नी ने कहा- आप इसे हॉस्पिटल दिखा कर इसे कमरे पर छोड़ आओ. मैंने कहा- ठीक है. फिर वो वहाँ से चली गई.

उसके जाने के बाद मेरी सेक्सी माल मेरी बेटी रिंकी ने कहा- पापा, मुझे हॉस्पिटल नहीं जाना, आप मुझे सीधा होटल के रूम पर छोड़ दो. मैंने कहा- ठीक है, चलो मै उसको लेकर रूम में पहुँचा. उसको पानी पिला कर लिटाया मेरी जवान और सेक्सी बेटी के पास आकर बैठा और बोला- अब कैसा फील हो रहा है? वो बोली- अब ठीक है.

मैंने उस से पूछा- क्या हुआ था जो तुम उलटियाँ कर रही थी कहीं पेट में कुछ गड़बड़ तो नहीं है?

रिंकी बोली- प्लीज पापा मम्मी को मत बताना वो कुछ सहेलियों के साथ मैने थोड़ी सी बियर पी ली थी। ऐसा कह कर मेरी सेक्सी माल लड़की जोर जोर से रोने लगी. मैंने खेद जताते हुए उसे चुप कराया और अपना सांस संभालते हुए बोला- तुम तो छोटी हो, तुम्हे तो कंट्रोल करना चाहिए था।

“नहीं पापा, मैं छोटी नहीं हूँ। 19 साल ही हो चुकी हूँ और सब समझती हूँ।” बाप को समझाते हुए बिटिया (पापा की परी ) बोली- ह्म्म ह्म्म

रिंकी के मुँह से ऐसी बातें सुन के मुझ को थोड़ा अचम्भा हुआ। और गालिब का एक शेर याद आ गया...

"दिल ऐसे मुल्तला हुआ तेरे मलाल मे

जुल्फे सफेद हो गयी बस 19 साल में"

फिर अपने आंसू पोंछते हुए रिंकी उठी और बेड पर चढ़कर मेरी गोद में बैठ गयी। रिंकी आँखें बंद किये इंतेज़ार कर रही थी बाप के होंठ चूसने का! लेकिन जल्दी ही रिंकी समझ गयी कि पापा को तड़प बढ़ाने में ज्यादा आनंद आता है।

रिंकी ने मेरे बालों में हाथ फिराया और अपने होंठों को पापा के हवाले कर दिया।

अपनी बेटी रिंकी के होंठों का रस चूसते हुए मैने बीच बीच में उसके चूचे दबाने चालू कर दिए।

बेटी को कुछ जल्दी थी या फिर बाप की इच्छा का सम्मान करते हुए रिंकी ने हाथ बढ़ा कर अपनी टॉप निकाल दी और अपने 34 के सुडौल चूचे आज़ाद कर दिये।

मैने भी झटपट अपनी शर्ट उतार फेंकी और खुश होता हुआ बोला- बेटा तेरी मम्मी के चूचे भी बिल्कुल ऐसे ही है। मैने अपनी बेटी के कड़क स्तनों को दबाया, सूंघा, चाटा, फिर बोला- और खुशबू भी तेरी मम्मी जैसी ही है।

“हा हा हा … हाँ पापा मालूम है। मैं बिल्कुल मम्मी जैसी हूँ इसीलिए नीचे से मुझे कुछ चुभ भी रहा है।” इतना कहकर रिंकी ने हँसते हुए मेरा सिर अपने चूचों में छुपा लिया।

मैने रिंकी को अपनी गोद में उठाया और बेड पर पटक दिया, उसके सामने घुटनों पर खड़ा हो गया।

“रुक तुझे दिखाता हूँ क्या चुभ रहा है। तेरी मम्मी को भी बहुत चुभता है ये!” इतना कहते हुए मैने पेंट और कच्छा एक साथ ही खोल कर निकाल फेंके।

पैंट उतरते ही मेरे नंगे जिस्म के साथ लोहे जैसा फौलादी लंड सलामी देने लगा।

रिंकी ने इतने करीब से पापा का लौड़ा पहली बार देखा था। अब कोई डर या शर्म जैसी बात भी नहीं थी इसलिए रिंकी उठ कर बैठ गयी और लन्ड को नजदीक से निहारने लगी।

“ऐसे क्या देख रही है रिंकी, हाथ में पकड़। अब तेरा गुलाम है ये!” कहकर मैने रिंकी का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया।

पापा के लंड की तनी हुई नसों पर हाथ फिरा कर रिंकी बहुत खुश थी। उसने दूसरा हाथ भी इस्तेमाल किया और मेरी गोटिया पकड़ ली।

मै एक लंबी आह भरता हुआ बोला- बिल्कुल अपनी मम्मी की तरह लंड से पहले गोटियां कब्ज़े में करती है … ओऊऊऊ!

अभी मै अपनी बात खत्म भी नहीं कर पाया था कि रिंकी ने पापा के सुपारे पर जीभ फिरा दी।

मेरी जान गोटियों में आ गयी जो मेरी बेटी के नाज़ुक हाथों में थी। रिंकी ने गोटियों को सहलाते हुए लंड चूसने की कोशिश की।

लेकिन मेरा लन्ड ज्यादा बड़ा होने की वजह से वो पूरा मुँह में नहीं ले पा रही थी।

उसने लंड छोड़ गोटियों को मुँह में लिया और चूसने लगी, लंड को हाथों से लगातार सहलाती जा रही थी। रिंकी कभी गोटियों को चूसती तो कभी लंड का टोपा गालों में दबा लेती। मेरे लौड़े की सर्विस लगातार हो रही थी।

वैसे भी मै अपनी बेटी का इस कदर दीवाना था कि रिंकी के गुलाबी होंठों पर लंड छुआने के ख्याल भर से झड़ जाता।

यहाँ भी मै "टीन पोर्न " को ज़्यादा देर संभाल नहीं पाया। बेटी के होंठों ने बाप के जिस्म में इस कदर गर्मी बढ़ाई की मै अपना आपा खो कर रिंकी के मुँह में धक्के मारने लगा।

मैने दोनों हाथों से रिंकी के बाल पकड़ लिए और पूरी ताकत से उसके गले तक लंड पेलने लगा। 8-10 तगड़े झटके देने के बाद मैने पूरी ताकत से लंड गले में उतार दिया।

मेरे लंड से निकली गर्म मलाई सीधा रिंकी के पेट में जा रही थी। रिंकी की आँखें चढ़ चुकी थी, सांस रुक गयी थी.

लेकिन मुझ को कोई होश नहीं था; मै आँखें बंद कर के रुक रुक के तब तक धक्के देता रहा जब तक आखिरी बूंद तक माल रिंकी के पेट में नहीं पहुँच गया।

झड़ने के बाद जैसे ही मैने अपनी पकड़ ढीली की, रिंकी ने पूरी ताकत से मुझे पीछे धकेला और खांसते हुए बेड पर गिर गयी।

मैने देखा कि उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, वो लंबे लंबे सांस लेने की कोशिश कर रही थी साथ ही खांस भी रही थी। अब मुझ को अहसास हुआ कि अपने मज़े के चक्कर में मैने रिंकी को बहुत दर्द दिया है।

मै रिंकी के सामने बैठ कर उसे समझने लगा और माफी मांगने लगा। मैने उसके आंसू पोंछे और पीठ सहलाई। करीब 5 मिनट में जाकर रिंकी की हालत नार्मल हुई।

अब रिंकी मुझ पर गुस्सा करने लगी। मै रिंकी को मनाने के चक्कर में हाथ बढ़ाता और रिंकी मेरा हाथ झटक देती।

रिंकी मुझे छूने ही नहीं दे रही थी, खूब गुस्सा कर रही थी- अपने मज़े के चक्कर में किसी की जान निकल दोगे क्या पापा आप? अरे आपकी बेटी हूँ, कोई बाज़ारू रंडी नहीं। इतनी बुरी तरह कोई करता है क्या? मम्मी के साथ भी ऐसे ही करते है क्या आप?

मैने समझाया- बेटा तेरी मम्मी का मुंह बड़ा है और वो पूरा लंड अंदर तक आसानी से ले लेती है। इसलिए कभी दिक्कत नहीं हुई। तू तो जानती है कि तुझे सामने देख के मुझे तेरी मम्मी याद आ जाती है। बस उसी के ख्यालों में खो गया और भूल गया कि तुझे परेशानी हो रही है। मुझे माफ़ कर दे बेटी!

रिंकी कुछ नहीं बोली बस मुँह बनाये बैठी रही।

और तभी दरवाजे की घंटी बजी. हम दोनों के दिल की धडकन भी बढ़ गई. इस वक्त कौन आ गया. रिंकी जल्दी से डर के कारण अपनी नंगी छातियो को अपने हाथों से छिपाये वाश रूम में घुस गयी.... मै कुसुम से तो कह कर आया था दस पंद्रह मिनिट में वापस आता हू वो आराम से डांस करे.... मैने जल्दी जल्दी जल्दी बिना चड्डी के पेंट पेहनते हुए बड़बड़ाया ।

लगातार चार पांच बार डोर बैल बजने के करीब दो मिनिट के बाद मैने दरवाजा खोला तो वहां पर मेरी सास खड़ी हुई थी.

कैसी तबियत है रिंकी की?? क्या हुआ उसे??

इससे पहले मै कुछ जबाब दे पाता सासु ने अन्दर आ के मुझे देखा. मेरा लंड पेंट में से साफ़ दिख रहा था अन्दर अंडरवेर ना होने की वजाह से. वो मुझे अजीब नजरो से देख रही थी. जिसकी वजह से मैं उनका अभिवादन करते हुए मैं उन्हें बातचीत में शामिल करने की कोशिश कर रहा था।

मैने सासु को बताया कि रिंकी का पेट खराब है और वॉशरूम का इस्तेमाल करने के लिए गयी। उनकी नजरे बिस्तर पर पड़ी सिलवटों, तकिये के ऊपर रखी ब्रा और जमीन पर पड़ी मेरी चड्डी पर टिकी थी। मै जानबूजकर वाश रूम के दरवाजे पर चला गया और रिंकी का नाम लेते हुए बोला बेटा कितना वक्त लागेगा, तेरी नानी आई है तेरी तबियत खराब की खबर सुनकर....!

मैने दोबारा से नजर घुमा कर सासु की तरफ देखा मैं एकदम से डर गया मैंने देखा उनके हाथ में रिंकी का ब्रा था। वह मुझे लगातार घूरे जा रही थी। यह सब देखकर मैं चौंक गया। मै मन ही मन रिंकी को कोसने लगा कि वो इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकती है, ब्रा हाथ में लेकर वाश रूम के अंदर नही जा सकती थी।

और फिर वाश रूम का दरवाजा खुला और रिंकी अपने बड़े बड़े चूचे को अपने छोटे छोटे हाथों से ढक कर बाहर आई......

सासु की जगह कोई और औरत होती तो क्रोध का ज्वालामुखी बन जाती. अपनी सगी बेटी की, जवान बेटी की नंगी छातिया देख कर कर कलेजा फट जाता उस का. लेकिन सासु के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ. वह पत्थर का बुत बनी सामने नजरें झुकाए शांत खड़ी नातिनि को टुकुरटुकुर निहारती रही. उन की सांसों में तेजी और गरमी जरूर आई. आंखें भी क्रोध से चहकीं, लेकिन क्रोध होंठों के रास्ते लावा बन कर निकलने के बजाय आंखों के रास्ते आंसू बन कर बहा.

सासु और रिंकी के बीच सन्नाटा छाया था. आंसू दोनों की आंखों में थे. फर्क था तो सिर्फ इतना कि रिंकी के आंसुओं में दर्द था, दयनीयता थी, मजबूरी थी, जबकि सासु के आंसुओं में क्रोध और घृणा के मिलेजुले भाव थे.

पलभर की चुप्पी के बाद खामोशी सासु ने ही तोड़ी. वह साड़ी के पल्लू से आंसू पोंछ कर गहरी सांस लेते हुए गंभीर स्वर में बोली, ‘' शाबाश बिटिया तू तो अपनी सगी मम्मी की ही सौत बन गई. मुझे शक तो था, पर मैं यह सोचने की हिम्मत नहीं जुटा सकी कि ऐसा भी हो सकता है.’’

नानी की बात सुन कर रिंकी खुद पर काबू नहीं रख सकी. आंसुओं के साथ उस का गला भी रुंध गया. फफक कर रोते हुए

सासु का सिर चकरा रहा था. पैरों पर खड़े रहना मुश्किल हो गया तो वह दीवार का सहारा ले कर वहीं बैठ गई.

शादी वाले होटल के कमरे में मरघट सा सन्नाटा छाया रहा. सासु मुझे लगातार घूरे जा रही थी। मुझे इतना डर लग रहा था कि वह मेरे साथ या रिंकी के साथ कुछ न कुछ जरूर करेगी। लेकिन इसका उलट हुआ। उन्होंने मुझसे शांति से पूछा, 'इस बारे में कौन जानता है? मैंने कहा कोई नहीं। उन्होंने ब्रा को जमीन पर फेंक दिया।

अपने गुस्से को काबू कर मुझे धमकी (चेतावनी) देते हुए उन्होंने अपनी उंगलियों को दिखाते हुए कहा 'मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटी जूली की शादी इन सब चीजों से प्रभावित हो। किसी को भी इस बारे में पता नहीं चलना चाहिए। मुझे परवाह नहीं है कि आप किस के साथ क्या कर रहे हो, लेकिन एक परिवार के रूप में हमारी प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगनी चाहिए। वरना, इसका अंजाम बहुत बुरा होगा।'

जारी है...... ✍️
 
Back
Top