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जूली के पास पोहंचा तो जूली मुझे अपने केबिन में hi मिली.. जूली एक चेयर पर बैठी टेबल पर झुकी कुछ पेपर्स को रीड कर रही थी.. पूरा टेबल hi पेपर्स से भरा हुआ था..
लगता है जूली कल से बिजी है.. मेरे क़दमों की आहात से उसने सर्र उठा कर मुझे देखा, मुझपर नज़र पड़ते वो एक झटके में hi उठ कड़ी हुई.. और तेज़ क़दमों से चलती हुए मेरे पास आई और मेरे गले से लग गई.. मुझे अपनी बहन में लिए ज़ोर से भेंचा.. फिर मेरे गालों पर किश करने के बाद मेरे होंटो को अपने होंटो में लेकर किश करने लगी..
जूली अपने होंटो पर लगी लिपस्टिक को भूल क्र मुझे किश करने लगी..
जब जूली के होंटो का रंग मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर अच्छे से ट्रांसफर हो गया तो जूली ने मुझे छोड़ दिया....
जूली:- कोंग्रटुलतिओं विजय, तुमने अपना मिशन क बढ़िया से अंजाम दिया है.
मुझे बहुत ख़ुशी हुई है तुम्हे फिरसे अपने सामने पा कर...
मैं अपने होंटो को अपने एक हाथ की उलटी हथेली से साफ़ करते हुए बोलै..
विजय:- हाँ वो तो मैं देख hi रहा हों.. मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर तुम्हारी ख़ुशी क सारे रंग दिख रहे हाँ..
जूली ने जैसे hi मेरे चेहरे पर धयान धयान दिया.. तो ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगी.. और फिर केबिन में लगे मिरर के पास जा कर खुद को देखने लगी...
विजय:- अब खुद को क्यों देख रही हो, मेरे चेहरे को देख कर सबब समझ में ा तो रहा है..
julie:-(hasste हुए) वो तो कुछ ज़यादा hi समझ में आ रहा है.. मैं तो देख रही हों, लिपस्टिक के साथ तुम्हे किश करने क बाद मैं कैसी लगने लगी हों.
बहुत वक़्त क बाद मैंने ऐसे किसी को किश की है.. विजय ऐसे किश करने का भी अपना एक मज़ा है.. आओ देखो हम दोनों एक साथ आईने में कैसे दीखते हाँ..
मैं चलता हुआ जूली क पास पोहंचा और उसे पीछे से बहन में भर लिया.. मैंने अपनी चीन जूली क कंधे पर रख दी....
विजय:- जूली तुम ऐसे खुश रहने से कितनी पायरी लगने लगी हो ना.. ऐसे hi रहा करो हमेशा.. मैंने पहले तो कभी तुम्हे नहीं देखा.. पर तुम्हारे चेहरे पर ऐसे रंग बहुत hi भले लगते हाँ..
जूली ने अपना एक हाथ उठाया और मेरे गालों को सहलाने लगी..
जूली:- हाँ विजय, लाइफ तो मैं पहले भी जी रही थी, पारर लाइफ असल में कैसे जी जाती है, वो मुझे अब्ब तुम्हारे साथ रहने से पता चला है, पहले साँसे तो थीं.. मैं मर्ज़ी भी थी.. सेक्स की इन्तहा भी थी.. पर देखो तुमसे बास एक बार hi कुछ देर क लिए चूड़ी हों, पर अंदर अब्ब वो आग नै रही जो हुआ करती थी, अब्ब लाइफ जीने का मज़ा आने लगा है.. प्यार में सबब किया जाए, किसी की चाह दिल में होने लगे, तो सबब कुछ बहुत hi भला लगने लगता है... ये सबब कितना रोमांटिक लग रहा है, मेरे लाइफ में ऐसी मोमेंट्स पहले कभी नहीं आयी थीं.. जब से तुम मिले हो अंदर खिला खिला सा रहने लगा... अब्ब मई बहुत खुश हों.. और..................
जूली आगे कुछ कहती किसी के खांसी की आवाज़ आई
ukhuuu..ukhuuu..
आवाज़ सुन कर हमने उधर देखा तो फिरसे कबाब में हड्डी.. उदय था दूर पर और साथ में बाक़ी सबब भी थे..
उदय:- विजय तुम्हे भी बास मौका चाहिए रोमांस करने का, जूली को अकेला पाया नहीं और हो गए शुरू. कभी तो उस बेचारी को छोड़ दिया करो.. और जूली तुम... तुम्हे भी कुछ ज़यादा hi आग लगी हुई है.. न जगा देखती हो और न hi टाइम...
जूली:- उदय तू मेरे हाथो से मरेगा किसी दिन.. कमीने जब्ब देख लिया था, तो सबब कुछ देर क लिए वापिस क्यों नहीं लौट गए.. हर बार मज़ा किरकरा करना ज़रूरी है क्या.. थिस इस लास्ट वार्निंग फॉर यू...
जूली की बात पर जीतो और अनु हस्सन लगे..
उदय:- अरे अंग्रेजी मैडम, हमारे सामने अंग्रेजी मैट झाड़ो.. हम तो देसी बन्दे हाँ.. देसी hi बोलिये हमसे... विजय है ना, उसके साथ अंग्रेजी बोलो या फ्रेंच हमे फर्क नहीं padta..parr....
उदय आगे कुछ बोलता जूली ने अपने बालों से हेयर बंद उतार कर उदय की तरफ उछाल दिया.. जिसे उदय ने जम्प लगते हुए कैच कर लिया... जितनी देर में उदय ने हेयर बंद कैच किया, उतनी देर में जूली भी जिमनास्टिक का मुज़ाहिरा करते हुए अपने हाथो पैरों पर घूऊमटी हुई उदय के पास पोहंच गई. इस सबब में जूली को कुछ सेकण्ड्स hi लगे थे...
जूली ने उदय को चारा डालने क लिए हेयर बंद फेंका था, जिसे उदय स्टुपिड ने अपनी हीरोगिरी क चक्कर में कैच कर लिया था..
जूली ने उदय के पास पोहचते hi उदय को दोनों हाथो की मदद से कमर पार्स पकड़ते हुए हवा में hi उठा लिया.. जब्ब तक्क उदय कुछ समझ पाटा, जूली ने उसे दो चक्कर दिए और साइड में पड़े हुए सूफी पर पटक दिया...
केबिन अचानक से hi सबब क ज़ोरदार kah-kahon से गूँज उठा.. उदय सूफी पर गिरा तो था पारर उसे सबब कुछ समझ में नहीं आया था.. वो वही बैठा सर्र को घुमा कर सबब को देखने लगा... फिर अपने सर्र घुमा कर आईने की तरफ देखने लगा..
वो सोच रहा था, क जूली तो वहां थी, फिर वो मेरे पास कब्ब आई, और मैं सूफी पर कैसे आया.. फिर शायद वो स्लोमोशन में सबब अपने दमाग में रिवाइंड करने लगा, जब्ब उसे सबब समझ में आया तो
उदय:- देख लूंगा तुझे भी जूली की बच्ची, बहुत फुर्ती है ना तेरे में. तेरे इस नजूल से शरीर में..... मुझे भी एक मौका चाहिए, सब वसूल लोनागा.. फिर दिखाना अपने करतब..
जूली भी हमारे साथ hi हस्स रही थी.. हस्ते हस्ते वो चुप हुई अपने शर्ट को बारी बारी दोनों बाज़ो पार्स ऊपर खेंचा और
जूली:- बाद में क्यों, अभी आ जाओ मैदान में, अभी सबब हाँ तो कुछ खेल भी हो जाए... और कितना दुम्म है तुममे वो भी देख लेते han..kyun विजय तुम क्या कहते हो...
विजय:- हाँ हाँ, दो दिनों से गुंडों का खेल देख देख कर उक्त गया हों.. उदय को लड़ते हुए देखे भी कई दिन हो गए हाँ.. कुछ रंग बदलने चाहिए.. मेरी तरफ से तो ok hi है.. बाकी का पता नहीं.
राजा:- मेरी तरफ से भी ok hi समझो...
jeeto.anu:- हाँ उदय जूली को भी आज दिखा दो, हम भी किसी से कम् नहीं हाँ.. जीतो और अनु उदय को छेड़ रहे थे.. वर्ण सबब hi जानते थे.. जूली से मेरे शिव कोई नहीं लड़ सकता..
उदय:- नहीं, नहीं अभी मेरा मैं नहीं है.. जूली से मुकाबला फिर कभी सही.. अभी ब्रेकफास्ट किये कुछ hi देर हुई है तो खाने क बाद फोरि लड़ाई अच्छी बात तो नहीं है नाआआ.....
उदय भी दांत निकलता हुआ बोलै तो सबब एक बार फिरसे हस्सन लगे..
10 मिंट बाद तक ऐसे hi हंसी मज़ाक़ चलता रहा..
सबब hi फिर टेबल के गिर्द बैठ गए.. अब्ब सबब hi सीरियस the..maine और जूली ने अपने चेहरे पर लग लिपस्टिक साफ़ कर ली थी..
विजय:- जूली कल से कुछ किया है क्या, या अभी भी तैयारी में हो...
जूली:- नहीं विजय एक काम हुआ है.. बाकी का भी जारी है.. ये सबब जो टेबल पर पड़ा हुआ तुम देख रहे हो.. ये उसी से रिलेटेड है.. जूली ने टेबल पर लगी घंटी बजाई.. तो एक लड़का अंदर आया..
जूली:- मोहन, शेखर को भेजना..
शेखर अंदर आया, मैं चुप hi रहा, मैं देख रहा था, जूली क्या करने वाली hai..shekahr 24-25 आगे का लड़का था...
जूली:- शेखर वो चेयर यही ला कर उसपर बैठ जाओ..
शेखर चेयर ला कर हमारे पास hi बैठ गया...
जूली:- विजय ये शेखर है.. हमारे hi कण्ट्रोल रूम में है, तुमने देखा hi होगा, पर अभी तुमने इससे बात नहीं की होगी.... शेखर तो बी चांस hi हमें मिल गया था.. शेखर एक कमाल का इंसान भी है.. किसी हद्द तक्क हैकिंग की जान कारी भी रखता है... एक तो इस हवाले से ये हमारे काम का है.. दूसरी बात इसकी दीदी जिसकी अब्ब शादी हो चुकी है.. कभी वो किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती रही हाँ.. वहां भी उसे वही प्रोब्लेम्स हुई, जैसा तुमने ज़िक्र किया था.. शेखर की बहन का नाम शुष्मा है... तो शुष्मा को खुद से कुछ कर दिखने का बहुत जूनून था.. वो जब तक उस कंपनी में रही .. कंपनी को उसकी वजा से बहुत प्रॉफिट हुआ.. कंपनी के आर्डर बढ़ने लगे... अभी उस कंपनी ने इंडिया में नई नई काम शुरू किया था.. तो शुष्मा की वजा से उस कंपनी ने काफी तरक्की की.. पारर फिर कुछ लोगों से शुष्मा से बाद बिहैवे शुरू कर दिया जिस वजा से शुष्मा को कंपनी से रिजाइन करना पड़ा..
शुष्मा का सपना टूटा तो फिर उसने कभी किसी और कमपनी में जॉब के लिए नहीं सोचा... शेखर तक्क तब्ब कुछ करने लायक हो चूका था.. और फिर शुष्मा की शादी भी हो गई तो शुष्मा ने खुद को घरदारी में मसरूफ कर लिया.. शेखर से हुई बातों से मुझे उनसे मिलने की छह तुई तो मैंने शेखर से डिटेल में बात करि.. और आज उन्हें आने के लिए भी कह दिया था..
क्यों शेखर तुम्हारी दीदी आई हाँ आज..
शेखर:- जी मैडम.. वो आई हुई हाँ.. पारर वो जॉब के लिए खुद को तैयार नहीं पाती हाँ.. बास मेरे कहने पारर hi वो यहाँन तक्क आई हाँ..
विजय:- शेखर तुम अपनी दीदी को बुलाओ. मैं उससे बात करता हों..
शेखर उठ कर चला गया..
कुछ देर में hi शेखर अपनी बहन क साथ अंदर आ गया.. मैं दूर की तरफ hi देख रहा था.. शेखर की दीदी 30 के आस पास थी.. पर देखने में वो शेखर जितनी hi लग रही थीं... उनकी पर्सनालिटी देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा.. अपनेपनं की फीलिंग्स मुझे उन्हें देख कर आने लगी थीं..
शुष्मा का चेहरा माँ के चेहरे से 40% मिलता जुलता था.. कुछ कुछ माँ जैसे नैन नक्श थे... मैं उनकी रेस्पेक्ट में खड़ा हो गया.. तो मुझे देख कर बाकी भी सबब खड़े हो गए...
दोनों हमारे पास पोहंचे तो
शुष्मा:- hello एवरीवन...
सबब hi फिर बरी बरी hello हाय करने लगे...
मैं साइड में हुआ और
विजय:- दीदी आप मेरी चेयर पर बैठ जाएँ..
शुष्मा मुझे देखने लगीं..
शेखर:- दीदी ये यहाँ क बॉस विजय हाँ..
विजय:- नहीं दीदी मई यहाँ का बॉस नहीं हों.. आप मेरी दीदी क सम्मान हाँ तो आप भी यहाँ की बॉस हुई.. आप प्लीज बैठ जाएँ, ऐसे hi समझें जैसे हम सबब भी आपके शेखर हाँ.. किसी की नज़रों में आपको वैसा hi सबब कुछ दिखेगा.. जैसे आपको शेखर की नज़रों में दीखता है.. हम सबब दिल से आपका सम्मान करते हाँ.. प्लीज पहले आप बैठ जाइये...
शुष्मा की आँखों में नमी सी आने लगी मेरी बातें सुन कर.. उन्हों सोचा भी नहीं था, अचानक से hi उन्हें इतनी रेस्पेक्ट मिलेगी.. एक ऊँगली से अपनी नम्म आँखों को दबा कर ानुसों को बहार आने से रोकना छह रही थी..
बात थी रेस्पेक्ट की, जैसी वो कभी खुद क लिए छह रखती थी, शायद तब्ब कभी किसी ने उन्हें वो रेस्पेक्ट नहीं दी थी, जितनी वो डेसेर्वे करती थीं..
शुष्मा दीदी बैठ गए.. तो फिर सबब hi बारी बारी अपनी चेयर अपर बैठ गए थे.. शेखर ने मुझे अपनी चेयर दी और अपने लिए बहार से एक और चेयर ला कर बैठ गया..
मेरी चेयर शुष्मा दीदी क पास hi थी.. दीदी ने अपने दोनों हाथ टेबल पर रखे और सर्र झुका कर बैठ गई.. वो किसी गहरी सोच में थें..
मैंने एक नज़र सबब को देखा तो सबब hi सीरियस थे, शेखर को मैंने देखा तो उसकी आँखों में भी आंसू थे.... बहुत hi रेस्पेक्टेड पर्सनालिटी की मालिक थी सुषमा दीदी... बड़ा रोबदार चेहरा .. जैसे किसी राज घिरने से राल्टेड हों...
मैंने अपना एक हाथ दीदी के हाथो पर रख दिया, दीदी ने मुझे देखा उनकी आँखों में आंसू बहने लगे थे.... जो धीरे धीरे उनकी आँखों से बहते हुए नीचे आने लगे..
मैंने दीदी क हाथो की पुष्ट को सहलाया..
विजय:- दीदी मई समझता हों, आपके मैं में क्या कुछ चल रहा है. मई तो एक नज़र में hi आपको देख कर जान गया था.. दीदी दिल से रेस्पेक्ट मिले तो सहन करना मुश्किल होता है.. वर्ण आपके जैसी पर्सनालिटी की मालिक किसी अनजान के सामने तो अपनी आँखों को नम्म भी न होने दें.. आप तो फिर भी आंसू बहा रही हाँ.. बहुत दर्द झेले होंगे ना आपने.. सारे खवाब चकनाचूर जो हो गए थे आपके .. आप जैसे इतनी पायरी परसोलालित्य की मालिक के साथ बुरा बर्ताव किया गया था, वो सबब आपसे सहन नहीं हुआ तो आपने जॉब छोड़ दी..
आपके खवाब टूट गए हाँ ना didi..aapka भाई है आपके साथ.. आपको वो रेस्पेक्ट भी मिलेगी जो आप चाहती हाँ.. वो सारे खवाब भी आपके पुरे होंगे जो आपने कभी देखे थे.. मैं दूंगा हमेशा आपका साथ.. आपका भाई सिर्फ शेखर hi नहीं है.. हम सबब भी आपके शेखर जैसे hi हाँ..
शुष्मा दीदी ने मुझे देखा मेरे हाथो क नीचे से अपना एक हाथ निकला और मेरे हाथो क ऊपर रख दिया... शुष्मा दीदी मेरी आँखों में गौरसे देखने लगीं... कुछ देर देखती रहीं और फिर मेरे हाथ पर अपने हाथ का दबाओ बढ़ने लगी.. उन्हें शायद मेरी आँखों में मेरी बातों की सच्चाई दिख गई थी..
शुष्मा दीदी ने खुद पर कण्ट्रोल प् लिया था.. पुरे केबिन में hi ख़ामोशी छाई हुई थी.... शुष्मा दीदी मेरे हाथ को thap-thapane लगी..
शुष्मा:- भाई, क्या नाम है तुम्हारा..
विजय:- दीदी, विजय..
शुष्मा:- विजय इंसानो को पहचानने की बड़ी परख है मुझमे.. और मैं तुम्हे देख कर तुम्हारी नेचर के बारे में भी सबब जान गई हों.. हर तरह क लोगों से मैं मिली हों, तुम्हारे जैसे भी मुझे कई मिले हाँ अपनी लाइफ में.. पारर तुम जितना साफ़ दिल इंसान मुझे कभी नहीं मिला.. मुझे ख़ुशी है, मेरा भाई शेखर तुम सबब क बीच है.. मैं क सच्चे लोग कम् hi कही मिलते हाँ, और इतनी रेस्पेक्ट देने वाले तो बिलकुल भी नहीं मिलते.. पहली hi बार तो मिले हाँ हम. बिलवाजा कोई किसी को इतनी रेस्पेक्ट नहीं देता.. कोई न ग़र्ज़ तो तुम्हे भी मुझसे होगी विजय भाई, पारर जो भी तुम्हारी घरज़ है, वो किसी क लिए गलत नहीं हो सकती, तुम्हारी आँखों की चमक और कुशादा पेशानी मुझे बहुत कुछ समझा रही है भाई... तुम्हारे मोहन से निकला हुआ एक एक शब्द सच्चा है और वो सबब तुम्हारे दिल की आवाज़ है.. मुझे तुमसे मिलकर बोहत ख़ुशी हुई है मेरे भाई..
यही सबब तो एक नारी अपने सामने वाले से चाहती है.. मुझे पता होता क मुझे यहाँ इतनी रेस्पेक्ट, इतना प्यार मिलने वाला हिअ , तो मैं कब की दौड़ी दौड़ी चली आती..
मैं और शुष्मा दीदी सबब को हैरत से देखने लगे... ताली बजने वळून में उदय सबब से आएगी था..
उदय:- विजय हमें शुष्मा दीदी मिली है... दीदियां तो पहले hi बहुत सी हाँ.. पारर इस बार की मिली दीदी सबसे NO 1 हाँ.. क्यों जीतो तुम क्या बोलते हो..
जीतो:- एकदुम्म सही बोलै तू उदय.. दीदी सच में hi बहुत ग्रेट हाँ.. हमें भी दीदी को अपने बीच पा कर बहुत ख़ुशी हुई है..
अनु:- दीदी क आने से हमारी टीम और भी स्ट्रांग हो जाएगी...
राजा:- (शेखर के कंधे पर हाथ रखते हुए) शेखर तुम्हारा और तुम्हारी दीदी का सवागत है हमारी टीम में.. मैं भी इस सबब से बहुत खुश हों.. मेरे मोहन बोले अपनों में एक और का इज़ाफ़ा हुआ है.. दीदी मुझे भी अपना भाई hi समझना.. मैं बहुत कम् hi किसी को अपना मानता हों.. सबसे पहले ये (uday,jeeto,anu की और इशारा करते हुए) मुझे मिले.. पारर हमारा रिश्ता और दोस्ती इतनी पक्की नहीं थी, हम सड़क छाप आवारा थे.. फिर हमें विजय मिला तो हमारी ज़िन्दगी को भी एक दिशा मिल गई.. तब्ब से hi हम सब बदल गए.. फिर धीरे धीरे और भी हम में शामिल होने लगे.. लाइफ कुछ और खूबसूरत होने गई.. अब्ब आप दोनों क आने से इस खूबसूरत लाइफ को चार चाँद लग जाएगा... कभी भी आपको लगे क आपकी रेस्पेक्ट में कोई कमी आ रही है, तो विजय से कह दीजिये, विजय ने मिला तो मुझे मई हों यही पर, मुझे बता दीजिये, पर कभी भी कोई भी बात अपने दिल में मैट रखना..
राजा की बात से शेखर और शुष्मा दीदी बहुत खुश हुए..
शेखर:- थैंक्स जूली मुझे और दीदी को ऐसे माहौल देने क लिए.. एक hi दिन में हमारा तो सबब कुछ hi बदल गया.. कभी सोचा नै था.. ये तो एक चमत्कार hi हुआ है.. क्यों दीदी पहले कभी ऐसा हुआ है क्या.. हमने तो दुन्या से ऐसे बर्ताव की उम्मीद hi छोड़ दी थी..
दीदी:- हाँ भाई, दुन्या में अच्छे लोग भी हाँ, जो दिल से रेस्पेक्ट देते हाँ, और दिल से किसी को अपना मानते हाँ, पर हमारी लाइफ में भी कुछ ऐसे लोग आएंगे, इसका यकीन नहीं रहा था.. पारर भगवन भी तो है ना, वो अपने बन्दों का ख्याल तो रखेंगे hi...
जूली:- विजय मैं सबब क लिए कॉफ़ी बना कर लाती हों, आज आप सबब मेरे हाथ की कॉफ़ी टास्ते करें..
उदय:- और मेरे लिए कॉफ़ी कड़वी मैट बना कर लाना..
उदय की बात से शेखर और दीदी को छोड़ कर हम सबब हस्सन लगे..
जूली:- अच्छा किया तुमने बता दिया.. शेखर और शुष्मा क चक्कर में मई तो पहले वाला सबब भूल hi गई थी.. तो फ़िक्र मैट करो, तुम्हारे लिए कफ मई कुछ ज़ायदा hi स्पेशल ले कर आओगी...
जूली कॉफ़ी बनाने चली गई...
विजय:- लो उदय तुमने तो जूली को सब याद दिला दिया...... उदय को अपनी गलती का एहसास हुआ तो वो अपना सर्र खुजाने लगा.. बाकी उदय को देख कर हस्सन लगे..
दीदी और शिकार मुझे सवालिया नज़रों से देख रहे थे.. उन्हें इस बात की समझ नहीं आई थी.. तो मैंने जूली ने जैसे उदय को नीचे पटका था वो बता दिया.. दोनों भी हस्सन लगे..
जूली क आने क बाद सबने कॉफ़ी पि.... कुछ देर बातें हुई तो दीदी ने शेखर को उसका काम करने भेज दिया...
जिस काम क लिए शुष्मा दीदी की ज़रूरत थी, उसके रिलेटेड बातें होने लगीं, शुष्मा दीदी कई ऐसी लड़कियों को जानती थीं.. जो उन्ही की तरह से जॉब छोड़ चुकी थीं.. उन्हें इस सबब का एक्सपीरियंस भी बहुत था.. और नॉलेज भी.. शेखर किसी हद तक्क हैकिंग भी कर लेता था, दिल्ली में मौजूद कम्पनीज से डाटा चोरी कर सकता था.. हमें तो बास एम्प्लॉएंस की डिटेल hi चाहिए थी..
इस में ज़यादा प्रॉब्लम नहीं होने वाली थी, और आगे का सबब दीदी और जूली खुद देख लेती.. दीदी को मैंने अपने विचार खुल कर बता दिए थे.. मैं बिज़नेस क्यों करना छह रहा हों, और कैसे लोगों को खुद में शामिल करना चाहता हों, अनाथ लोगों को खुद में शामिल करना, ज़रूरत मंद स्टूडेंटन्स को खुद में शामिल करना और जॉब में उन्हें कैसी कैसी फैसिलिटीज, दी जानी chahiye.kaise पैकेजेस मैंने उनके सोच रखे हाँ.
कुछ दिन पहल मैंने जूली से जो भी डिसकस किया था.. वो सबब शुष्मा दीदी को बता दिया..
शुष्मा दीदी मेरी पूरी बात सुनकर हैरान रह गई...
दीदी:- विजय भाई, ये सबब तुमने सोचा है, हैरत है, पर कमाल भी है.. जैसा तुमने सोचा है, वैसा करना अगरचे मुश्किल तरीन और रिस्की है. पारर जैसे तुमने कहा क तुम ये सबब पैसा कमाने क लिए नहीं कर रहे हो, तो मैं तो फिर यही कहूँगी क ऐसा करके कोई भी बिज़नेस शुरू किया जाए.. उसे रातो रात तरक्की करने से कोई नहीं रोक सकता.. अक्सर कम्पनीज इसी लिए लिमिट में रहती हाँ, वो खुद के प्रोफिर को पहले सामने रखती हाँ.. पारर हम जो बिज़नेस शुरू करेंगे, उसमे वर्कर्स को हम पहले नंबर कर रखेंगे....
तो फिर वर्कर तो आटोमेटिक अपना बेस्ट देंगे.. वो भी जान जाएंगे, जितना बेस्ट देंगे , उसी हिसाब से उन्हें पेमेंट मिलेगी..
मैं एडवांस में hi तुम्हे कॉंग्रट्स कर देती हों.. नए होने वाले बिज़नेस की सक्सेस की..
विजय:- दीदी जो बिज़नेस शुरू हो रहा है, वो मेरा नहीं होगा, वो होगा सबब का, कोठे से लाइ गई लड़कियों और औरतों के बारे में मैं आपको बता दिया है.. आप उन्हें ज़िन्दगी में आगे बढ़ना सिखाएंगी.. जैसी लाइफ वो जीना छह रही हाँ, उन्हें उस सबब क बारे में गाइड करेंगी. इन जैसी और भी हमे कई मिलेंगी, हमने सभी को अपने साथ मिलाना है.... मैंने तो बास अपने विचार आपके और जूली के सामने रखे हाँ, करना तो आप सबब को hi है ....
दीदी:- हाँ भाई वो भी सही है.. पर शुरू तो तुम hi करोगे ना, और इस सबब को पूरी तरह से हैंडल भी तुम्ही करोगे.. बिज़नेस को शुरू करना कोई आसान काम तो है नहीं.. कई मुखालिफ खड़े हो जाते हाँ. फ्लॉप करने क लिए यदि छोटी का ज़ोर लगाना शुरू कर देते हाँ...
विजय:- हाँ वो सबब तो मैं देखूंगा hi.....
दीदी और जूली से 1 घंटा मीटिंग हुई. राजा गैंग भी कभी कोई बात कर लिया karti..warna वो अक्सर चुप hi रही... जूली भी ज़रूरत के हिसाब से hi बोल रही थी.. मेरे बाद जूली ने hi सबब दीदी के साथ मिल कर करना था..
फिर सबब चले गए..... केबिन में मई और दीदी अकेले hi रह गए..
विजय:- दीदी आपको पता है, आप बहुत ज़यादा खूबसूरत हाँ....
दीदी मेरी बात पर मुस्कुराने लगीं..
दीदी:- अपनी दीदी से फ़्लर्ट कर रहे हो...
विजय:- हाँ दीदी, इतना तो चलना hi चाहिए ना.. वर्ण जैसी आपकी पर्सनालिटी है.. सोच के hi डर लगता है.. क कही आप एक थप्पड़ hi न मार दें...
दीदी इस बार मेरी बात पर हस्सन लगीं..
दीदी:- नहीं भाई, मुझे तुम्हारे कैसे भी बात करने से कोई आपत्ति नहीं है, जो दिल के साफ़ हों, उनके साथ तो ऐसी बातें और भी ज़यादा मज़ा देती है, वो सबब दिल की सदा होती हाँ ना.. और मैं सिर्फ देखनी में hi ऐसी हों, मुझे ऐसा रंग ज़माने ने hi तो दिया है.. गन्दी नज़र डाली गई मुझपर, फिर मेरे खवाब तोड़ दिए गए.. वर्ण मैं बहुत hi हंस मुख हों.. मुझे भी अपनी लाइफ हंसी ख़ुशी जीने की बहुत चाह है... पारर लाइफ के बदलता रंग कभी एक रंग में रहने हु नहीं देते.. जैसी बातें तुम कर रहे हो.. कभी मई भी ऐसी hi थी.. ऐसी बातों से तो लाइफ जीने का मज़ा hi कुछ और है.. और आज सालो बाद मुझे फिर वही शुष्मा बनने का मौका मिल रहा है, जैसी में पहले हुआ करती थी... थैंक्स
भाई मुझे अपनों शामिल करने क लिए.. एक बार फिरसे मुझे इंसानो पर भरोसा दिलाने क लिए.. वर्ण मई अपनी लाइफ में hi बिजी हो गई थी..... एक साइलेंट लाइफ जी जी कर मैं भी उक्त गई थी...
विजय:- दीदी, अभी तो मैंने आपको असली रंग तो दिखाए hi नहीं हाँ.. अंदर पैलेस में पूरी एक लेडीज मण्डली है, जिससे मिल कर आप को बहुत ख़ुशी मिलेगी.. आपकी लाइफ का सारा अधूरापन मिंटो में hi ख़तम होकर रह जाएगा...
दीदी:- हाँ तुम्हे देख कर मुझे तुम्हारी बात का यकीन भी आ गया है..
विजय:- दीदी जीजा जी क्या करते हाँ..
दीदी के हस्बैंड का ज़िक्र आते hi दीदी एकदुम्म से hi चुप हो गईं...
विजय:- सॉरी दीदी मैंने कुछ गलत बोल दिया हो तो..
didi:-(chehra साइड में घुमा कर लम्बी सांस लेते हुए, ) नहीं कोई बात नहीं.. वो एक गारमेंट्स फैक्ट्री में असिस्टेंट मैनेजर हाँ.. कुछ और मैट पूछना, मई नहीं बता पाऊँगी... दीदी का चेहरा एकदुम्म से hi मुरझा गया था..
मैं खड़ा हुआ और दीदी को भी एक बाज़ो से पकड़ कर उठा कर खड़ा कर दिया. मैं तो बेशरम था hi,mujhe दीदी को उठाने में कैसी झिझक.. दीदी मुझे हैरत से देखने लगीं..
मैंने अपने दोनों हाथ दीदी के दोनों कंधो पर रख दिया.. दीदी की ऑंखें मारे हैरत के बड़ी बड़ी होने लगीं...
अचानक से hi मैंने दीदी को अपने गले से लगा लिया.. और उनकी पीठ को सहलाने लगा.. दीदी का शरीर बोहत गरम था.. उनकी आँखों में मुझे एक पियास दिख गई थी, इक अधूरा पत्र था दीदी की लाइफ.. उनके कहे बिना hi मैं किसी हद्द तक्क समझ चूका था.. पारर यहाँ मेरी फीलिंग्स दीदी को लेके दूसरी नहीं थीं..
दीदी भी कही न कही पियासी थीं.. मैं उनकी पियास तो बुझाने से रहा..
पारर मैं दीदी क मैं की पियास तो बुझा hi सकता था... मुझसे दीदी का दर्द सहन नहीं हुआ... एक तो दीदी की सूरत माँ से बहुत मिलती थी, दूसरा मैं तो था hi ऐसा, किसी के दर्द को अपना समझने वाला..
कोई मुझसे आत्ताच हो और वो दुखी रहे.. ये कैसे हो सकता था.. मैं दीदी की पीठ को सहलाने लगा.. दीदी क बदन में कपकपी सी होने लगी. दीदी जो मेरे गले लगते hi सटपटाने लगी थी.... दीदी अब्ब पूरा ज़ोर लगा कर मुझसे छूटने की कोशिश करने में लगी थी.. पर मैंने दीदी को नहीं छोड़ा... दीदी ने कुछ देर के लिए बाहर ज़ोर लगाया मुझसे छूटने क लिए.. पारर मैंने उन्हें नहीं छोड़ा.
मई कभी किसी को छोड़ने क लिए अपने गले से लगता hi कब्ब था.. जो एक बार मुझसे आत्ताच हो जाए.. वो मेरी फॅमिली का हिस्सा बन जाता था..
दीदी... विजय ये क्या कर रहे ho..chhodo mujhe..door खुला हुआ hai..koi देख लेगा.. शेखर आ जायेगा.. ये सही नहीं विजय... मैं कभी शेखर से भी ऐसे नहीं मिली.. भाई प्लीज मुझे छोडो.. मुझे बहुत अजीब लग रहा है.. ममममम..
मैं हमेशा मर्दों से दूर दूर hi रही हों... chh..chhhhoda दो भभ.. भाई..
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जूली के पास पोहंचा तो जूली मुझे अपने केबिन में hi मिली.. जूली एक चेयर पर बैठी टेबल पर झुकी कुछ पेपर्स को रीड कर रही थी.. पूरा टेबल hi पेपर्स से भरा हुआ था..
लगता है जूली कल से बिजी है.. मेरे क़दमों की आहात से उसने सर्र उठा कर मुझे देखा, मुझपर नज़र पड़ते वो एक झटके में hi उठ कड़ी हुई.. और तेज़ क़दमों से चलती हुए मेरे पास आई और मेरे गले से लग गई.. मुझे अपनी बहन में लिए ज़ोर से भेंचा.. फिर मेरे गालों पर किश करने के बाद मेरे होंटो को अपने होंटो में लेकर किश करने लगी..
जूली अपने होंटो पर लगी लिपस्टिक को भूल क्र मुझे किश करने लगी..
जब जूली के होंटो का रंग मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर अच्छे से ट्रांसफर हो गया तो जूली ने मुझे छोड़ दिया....
जूली:- कोंग्रटुलतिओं विजय, तुमने अपना मिशन क बढ़िया से अंजाम दिया है.
मुझे बहुत ख़ुशी हुई है तुम्हे फिरसे अपने सामने पा कर...
मैं अपने होंटो को अपने एक हाथ की उलटी हथेली से साफ़ करते हुए बोलै..
विजय:- हाँ वो तो मैं देख hi रहा हों.. मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर तुम्हारी ख़ुशी क सारे रंग दिख रहे हाँ..
जूली ने जैसे hi मेरे चेहरे पर धयान धयान दिया.. तो ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगी.. और फिर केबिन में लगे मिरर के पास जा कर खुद को देखने लगी...
विजय:- अब खुद को क्यों देख रही हो, मेरे चेहरे को देख कर सबब समझ में ा तो रहा है..
julie:-(hasste हुए) वो तो कुछ ज़यादा hi समझ में आ रहा है.. मैं तो देख रही हों, लिपस्टिक के साथ तुम्हे किश करने क बाद मैं कैसी लगने लगी हों.
बहुत वक़्त क बाद मैंने ऐसे किसी को किश की है.. विजय ऐसे किश करने का भी अपना एक मज़ा है.. आओ देखो हम दोनों एक साथ आईने में कैसे दीखते हाँ..
मैं चलता हुआ जूली क पास पोहंचा और उसे पीछे से बहन में भर लिया.. मैंने अपनी चीन जूली क कंधे पर रख दी....
विजय:- जूली तुम ऐसे खुश रहने से कितनी पायरी लगने लगी हो ना.. ऐसे hi रहा करो हमेशा.. मैंने पहले तो कभी तुम्हे नहीं देखा.. पर तुम्हारे चेहरे पर ऐसे रंग बहुत hi भले लगते हाँ..
जूली ने अपना एक हाथ उठाया और मेरे गालों को सहलाने लगी..
जूली:- हाँ विजय, लाइफ तो मैं पहले भी जी रही थी, पारर लाइफ असल में कैसे जी जाती है, वो मुझे अब्ब तुम्हारे साथ रहने से पता चला है, पहले साँसे तो थीं.. मैं मर्ज़ी भी थी.. सेक्स की इन्तहा भी थी.. पर देखो तुमसे बास एक बार hi कुछ देर क लिए चूड़ी हों, पर अंदर अब्ब वो आग नै रही जो हुआ करती थी, अब्ब लाइफ जीने का मज़ा आने लगा है.. प्यार में सबब किया जाए, किसी की चाह दिल में होने लगे, तो सबब कुछ बहुत hi भला लगने लगता है... ये सबब कितना रोमांटिक लग रहा है, मेरे लाइफ में ऐसी मोमेंट्स पहले कभी नहीं आयी थीं.. जब से तुम मिले हो अंदर खिला खिला सा रहने लगा... अब्ब मई बहुत खुश हों.. और..................
जूली आगे कुछ कहती किसी के खांसी की आवाज़ आई
ukhuuu..ukhuuu..
आवाज़ सुन कर हमने उधर देखा तो फिरसे कबाब में हड्डी.. उदय था दूर पर और साथ में बाक़ी सबब भी थे..
उदय:- विजय तुम्हे भी बास मौका चाहिए रोमांस करने का, जूली को अकेला पाया नहीं और हो गए शुरू. कभी तो उस बेचारी को छोड़ दिया करो.. और जूली तुम... तुम्हे भी कुछ ज़यादा hi आग लगी हुई है.. न जगा देखती हो और न hi टाइम...
जूली:- उदय तू मेरे हाथो से मरेगा किसी दिन.. कमीने जब्ब देख लिया था, तो सबब कुछ देर क लिए वापिस क्यों नहीं लौट गए.. हर बार मज़ा किरकरा करना ज़रूरी है क्या.. थिस इस लास्ट वार्निंग फॉर यू...
जूली की बात पर जीतो और अनु हस्सन लगे..
उदय:- अरे अंग्रेजी मैडम, हमारे सामने अंग्रेजी मैट झाड़ो.. हम तो देसी बन्दे हाँ.. देसी hi बोलिये हमसे... विजय है ना, उसके साथ अंग्रेजी बोलो या फ्रेंच हमे फर्क नहीं padta..parr....
उदय आगे कुछ बोलता जूली ने अपने बालों से हेयर बंद उतार कर उदय की तरफ उछाल दिया.. जिसे उदय ने जम्प लगते हुए कैच कर लिया... जितनी देर में उदय ने हेयर बंद कैच किया, उतनी देर में जूली भी जिमनास्टिक का मुज़ाहिरा करते हुए अपने हाथो पैरों पर घूऊमटी हुई उदय के पास पोहंच गई. इस सबब में जूली को कुछ सेकण्ड्स hi लगे थे...
जूली ने उदय को चारा डालने क लिए हेयर बंद फेंका था, जिसे उदय स्टुपिड ने अपनी हीरोगिरी क चक्कर में कैच कर लिया था..
जूली ने उदय के पास पोहचते hi उदय को दोनों हाथो की मदद से कमर पार्स पकड़ते हुए हवा में hi उठा लिया.. जब्ब तक्क उदय कुछ समझ पाटा, जूली ने उसे दो चक्कर दिए और साइड में पड़े हुए सूफी पर पटक दिया...
केबिन अचानक से hi सबब क ज़ोरदार kah-kahon से गूँज उठा.. उदय सूफी पर गिरा तो था पारर उसे सबब कुछ समझ में नहीं आया था.. वो वही बैठा सर्र को घुमा कर सबब को देखने लगा... फिर अपने सर्र घुमा कर आईने की तरफ देखने लगा..
वो सोच रहा था, क जूली तो वहां थी, फिर वो मेरे पास कब्ब आई, और मैं सूफी पर कैसे आया.. फिर शायद वो स्लोमोशन में सबब अपने दमाग में रिवाइंड करने लगा, जब्ब उसे सबब समझ में आया तो
उदय:- देख लूंगा तुझे भी जूली की बच्ची, बहुत फुर्ती है ना तेरे में. तेरे इस नजूल से शरीर में..... मुझे भी एक मौका चाहिए, सब वसूल लोनागा.. फिर दिखाना अपने करतब..
जूली भी हमारे साथ hi हस्स रही थी.. हस्ते हस्ते वो चुप हुई अपने शर्ट को बारी बारी दोनों बाज़ो पार्स ऊपर खेंचा और
जूली:- बाद में क्यों, अभी आ जाओ मैदान में, अभी सबब हाँ तो कुछ खेल भी हो जाए... और कितना दुम्म है तुममे वो भी देख लेते han..kyun विजय तुम क्या कहते हो...
विजय:- हाँ हाँ, दो दिनों से गुंडों का खेल देख देख कर उक्त गया हों.. उदय को लड़ते हुए देखे भी कई दिन हो गए हाँ.. कुछ रंग बदलने चाहिए.. मेरी तरफ से तो ok hi है.. बाकी का पता नहीं.
राजा:- मेरी तरफ से भी ok hi समझो...
jeeto.anu:- हाँ उदय जूली को भी आज दिखा दो, हम भी किसी से कम् नहीं हाँ.. जीतो और अनु उदय को छेड़ रहे थे.. वर्ण सबब hi जानते थे.. जूली से मेरे शिव कोई नहीं लड़ सकता..
उदय:- नहीं, नहीं अभी मेरा मैं नहीं है.. जूली से मुकाबला फिर कभी सही.. अभी ब्रेकफास्ट किये कुछ hi देर हुई है तो खाने क बाद फोरि लड़ाई अच्छी बात तो नहीं है नाआआ.....
उदय भी दांत निकलता हुआ बोलै तो सबब एक बार फिरसे हस्सन लगे..
10 मिंट बाद तक ऐसे hi हंसी मज़ाक़ चलता रहा..
सबब hi फिर टेबल के गिर्द बैठ गए.. अब्ब सबब hi सीरियस the..maine और जूली ने अपने चेहरे पर लग लिपस्टिक साफ़ कर ली थी..
विजय:- जूली कल से कुछ किया है क्या, या अभी भी तैयारी में हो...
जूली:- नहीं विजय एक काम हुआ है.. बाकी का भी जारी है.. ये सबब जो टेबल पर पड़ा हुआ तुम देख रहे हो.. ये उसी से रिलेटेड है.. जूली ने टेबल पर लगी घंटी बजाई.. तो एक लड़का अंदर आया..
जूली:- मोहन, शेखर को भेजना..
शेखर अंदर आया, मैं चुप hi रहा, मैं देख रहा था, जूली क्या करने वाली hai..shekahr 24-25 आगे का लड़का था...
जूली:- शेखर वो चेयर यही ला कर उसपर बैठ जाओ..
शेखर चेयर ला कर हमारे पास hi बैठ गया...
जूली:- विजय ये शेखर है.. हमारे hi कण्ट्रोल रूम में है, तुमने देखा hi होगा, पर अभी तुमने इससे बात नहीं की होगी.... शेखर तो बी चांस hi हमें मिल गया था.. शेखर एक कमाल का इंसान भी है.. किसी हद्द तक्क हैकिंग की जान कारी भी रखता है... एक तो इस हवाले से ये हमारे काम का है.. दूसरी बात इसकी दीदी जिसकी अब्ब शादी हो चुकी है.. कभी वो किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करती रही हाँ.. वहां भी उसे वही प्रोब्लेम्स हुई, जैसा तुमने ज़िक्र किया था.. शेखर की बहन का नाम शुष्मा है... तो शुष्मा को खुद से कुछ कर दिखने का बहुत जूनून था.. वो जब तक उस कंपनी में रही .. कंपनी को उसकी वजा से बहुत प्रॉफिट हुआ.. कंपनी के आर्डर बढ़ने लगे... अभी उस कंपनी ने इंडिया में नई नई काम शुरू किया था.. तो शुष्मा की वजा से उस कंपनी ने काफी तरक्की की.. पारर फिर कुछ लोगों से शुष्मा से बाद बिहैवे शुरू कर दिया जिस वजा से शुष्मा को कंपनी से रिजाइन करना पड़ा..
शुष्मा का सपना टूटा तो फिर उसने कभी किसी और कमपनी में जॉब के लिए नहीं सोचा... शेखर तक्क तब्ब कुछ करने लायक हो चूका था.. और फिर शुष्मा की शादी भी हो गई तो शुष्मा ने खुद को घरदारी में मसरूफ कर लिया.. शेखर से हुई बातों से मुझे उनसे मिलने की छह तुई तो मैंने शेखर से डिटेल में बात करि.. और आज उन्हें आने के लिए भी कह दिया था..
क्यों शेखर तुम्हारी दीदी आई हाँ आज..
शेखर:- जी मैडम.. वो आई हुई हाँ.. पारर वो जॉब के लिए खुद को तैयार नहीं पाती हाँ.. बास मेरे कहने पारर hi वो यहाँन तक्क आई हाँ..
विजय:- शेखर तुम अपनी दीदी को बुलाओ. मैं उससे बात करता हों..
शेखर उठ कर चला गया..
कुछ देर में hi शेखर अपनी बहन क साथ अंदर आ गया.. मैं दूर की तरफ hi देख रहा था.. शेखर की दीदी 30 के आस पास थी.. पर देखने में वो शेखर जितनी hi लग रही थीं... उनकी पर्सनालिटी देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा.. अपनेपनं की फीलिंग्स मुझे उन्हें देख कर आने लगी थीं..
शुष्मा का चेहरा माँ के चेहरे से 40% मिलता जुलता था.. कुछ कुछ माँ जैसे नैन नक्श थे... मैं उनकी रेस्पेक्ट में खड़ा हो गया.. तो मुझे देख कर बाकी भी सबब खड़े हो गए...
दोनों हमारे पास पोहंचे तो
शुष्मा:- hello एवरीवन...
सबब hi फिर बरी बरी hello हाय करने लगे...
मैं साइड में हुआ और
विजय:- दीदी आप मेरी चेयर पर बैठ जाएँ..
शुष्मा मुझे देखने लगीं..
शेखर:- दीदी ये यहाँ क बॉस विजय हाँ..
विजय:- नहीं दीदी मई यहाँ का बॉस नहीं हों.. आप मेरी दीदी क सम्मान हाँ तो आप भी यहाँ की बॉस हुई.. आप प्लीज बैठ जाएँ, ऐसे hi समझें जैसे हम सबब भी आपके शेखर हाँ.. किसी की नज़रों में आपको वैसा hi सबब कुछ दिखेगा.. जैसे आपको शेखर की नज़रों में दीखता है.. हम सबब दिल से आपका सम्मान करते हाँ.. प्लीज पहले आप बैठ जाइये...
शुष्मा की आँखों में नमी सी आने लगी मेरी बातें सुन कर.. उन्हों सोचा भी नहीं था, अचानक से hi उन्हें इतनी रेस्पेक्ट मिलेगी.. एक ऊँगली से अपनी नम्म आँखों को दबा कर ानुसों को बहार आने से रोकना छह रही थी..
बात थी रेस्पेक्ट की, जैसी वो कभी खुद क लिए छह रखती थी, शायद तब्ब कभी किसी ने उन्हें वो रेस्पेक्ट नहीं दी थी, जितनी वो डेसेर्वे करती थीं..
शुष्मा दीदी बैठ गए.. तो फिर सबब hi बारी बारी अपनी चेयर अपर बैठ गए थे.. शेखर ने मुझे अपनी चेयर दी और अपने लिए बहार से एक और चेयर ला कर बैठ गया..
मेरी चेयर शुष्मा दीदी क पास hi थी.. दीदी ने अपने दोनों हाथ टेबल पर रखे और सर्र झुका कर बैठ गई.. वो किसी गहरी सोच में थें..
मैंने एक नज़र सबब को देखा तो सबब hi सीरियस थे, शेखर को मैंने देखा तो उसकी आँखों में भी आंसू थे.... बहुत hi रेस्पेक्टेड पर्सनालिटी की मालिक थी सुषमा दीदी... बड़ा रोबदार चेहरा .. जैसे किसी राज घिरने से राल्टेड हों...
मैंने अपना एक हाथ दीदी के हाथो पर रख दिया, दीदी ने मुझे देखा उनकी आँखों में आंसू बहने लगे थे.... जो धीरे धीरे उनकी आँखों से बहते हुए नीचे आने लगे..
मैंने दीदी क हाथो की पुष्ट को सहलाया..
विजय:- दीदी मई समझता हों, आपके मैं में क्या कुछ चल रहा है. मई तो एक नज़र में hi आपको देख कर जान गया था.. दीदी दिल से रेस्पेक्ट मिले तो सहन करना मुश्किल होता है.. वर्ण आपके जैसी पर्सनालिटी की मालिक किसी अनजान के सामने तो अपनी आँखों को नम्म भी न होने दें.. आप तो फिर भी आंसू बहा रही हाँ.. बहुत दर्द झेले होंगे ना आपने.. सारे खवाब चकनाचूर जो हो गए थे आपके .. आप जैसे इतनी पायरी परसोलालित्य की मालिक के साथ बुरा बर्ताव किया गया था, वो सबब आपसे सहन नहीं हुआ तो आपने जॉब छोड़ दी..
आपके खवाब टूट गए हाँ ना didi..aapka भाई है आपके साथ.. आपको वो रेस्पेक्ट भी मिलेगी जो आप चाहती हाँ.. वो सारे खवाब भी आपके पुरे होंगे जो आपने कभी देखे थे.. मैं दूंगा हमेशा आपका साथ.. आपका भाई सिर्फ शेखर hi नहीं है.. हम सबब भी आपके शेखर जैसे hi हाँ..
शुष्मा दीदी ने मुझे देखा मेरे हाथो क नीचे से अपना एक हाथ निकला और मेरे हाथो क ऊपर रख दिया... शुष्मा दीदी मेरी आँखों में गौरसे देखने लगीं... कुछ देर देखती रहीं और फिर मेरे हाथ पर अपने हाथ का दबाओ बढ़ने लगी.. उन्हें शायद मेरी आँखों में मेरी बातों की सच्चाई दिख गई थी..
शुष्मा दीदी ने खुद पर कण्ट्रोल प् लिया था.. पुरे केबिन में hi ख़ामोशी छाई हुई थी.... शुष्मा दीदी मेरे हाथ को thap-thapane लगी..
शुष्मा:- भाई, क्या नाम है तुम्हारा..
विजय:- दीदी, विजय..
शुष्मा:- विजय इंसानो को पहचानने की बड़ी परख है मुझमे.. और मैं तुम्हे देख कर तुम्हारी नेचर के बारे में भी सबब जान गई हों.. हर तरह क लोगों से मैं मिली हों, तुम्हारे जैसे भी मुझे कई मिले हाँ अपनी लाइफ में.. पारर तुम जितना साफ़ दिल इंसान मुझे कभी नहीं मिला.. मुझे ख़ुशी है, मेरा भाई शेखर तुम सबब क बीच है.. मैं क सच्चे लोग कम् hi कही मिलते हाँ, और इतनी रेस्पेक्ट देने वाले तो बिलकुल भी नहीं मिलते.. पहली hi बार तो मिले हाँ हम. बिलवाजा कोई किसी को इतनी रेस्पेक्ट नहीं देता.. कोई न ग़र्ज़ तो तुम्हे भी मुझसे होगी विजय भाई, पारर जो भी तुम्हारी घरज़ है, वो किसी क लिए गलत नहीं हो सकती, तुम्हारी आँखों की चमक और कुशादा पेशानी मुझे बहुत कुछ समझा रही है भाई... तुम्हारे मोहन से निकला हुआ एक एक शब्द सच्चा है और वो सबब तुम्हारे दिल की आवाज़ है.. मुझे तुमसे मिलकर बोहत ख़ुशी हुई है मेरे भाई..
यही सबब तो एक नारी अपने सामने वाले से चाहती है.. मुझे पता होता क मुझे यहाँ इतनी रेस्पेक्ट, इतना प्यार मिलने वाला हिअ , तो मैं कब की दौड़ी दौड़ी चली आती..
मैं और शुष्मा दीदी सबब को हैरत से देखने लगे... ताली बजने वळून में उदय सबब से आएगी था..
उदय:- विजय हमें शुष्मा दीदी मिली है... दीदियां तो पहले hi बहुत सी हाँ.. पारर इस बार की मिली दीदी सबसे NO 1 हाँ.. क्यों जीतो तुम क्या बोलते हो..
जीतो:- एकदुम्म सही बोलै तू उदय.. दीदी सच में hi बहुत ग्रेट हाँ.. हमें भी दीदी को अपने बीच पा कर बहुत ख़ुशी हुई है..
अनु:- दीदी क आने से हमारी टीम और भी स्ट्रांग हो जाएगी...
राजा:- (शेखर के कंधे पर हाथ रखते हुए) शेखर तुम्हारा और तुम्हारी दीदी का सवागत है हमारी टीम में.. मैं भी इस सबब से बहुत खुश हों.. मेरे मोहन बोले अपनों में एक और का इज़ाफ़ा हुआ है.. दीदी मुझे भी अपना भाई hi समझना.. मैं बहुत कम् hi किसी को अपना मानता हों.. सबसे पहले ये (uday,jeeto,anu की और इशारा करते हुए) मुझे मिले.. पारर हमारा रिश्ता और दोस्ती इतनी पक्की नहीं थी, हम सड़क छाप आवारा थे.. फिर हमें विजय मिला तो हमारी ज़िन्दगी को भी एक दिशा मिल गई.. तब्ब से hi हम सब बदल गए.. फिर धीरे धीरे और भी हम में शामिल होने लगे.. लाइफ कुछ और खूबसूरत होने गई.. अब्ब आप दोनों क आने से इस खूबसूरत लाइफ को चार चाँद लग जाएगा... कभी भी आपको लगे क आपकी रेस्पेक्ट में कोई कमी आ रही है, तो विजय से कह दीजिये, विजय ने मिला तो मुझे मई हों यही पर, मुझे बता दीजिये, पर कभी भी कोई भी बात अपने दिल में मैट रखना..
राजा की बात से शेखर और शुष्मा दीदी बहुत खुश हुए..
शेखर:- थैंक्स जूली मुझे और दीदी को ऐसे माहौल देने क लिए.. एक hi दिन में हमारा तो सबब कुछ hi बदल गया.. कभी सोचा नै था.. ये तो एक चमत्कार hi हुआ है.. क्यों दीदी पहले कभी ऐसा हुआ है क्या.. हमने तो दुन्या से ऐसे बर्ताव की उम्मीद hi छोड़ दी थी..
दीदी:- हाँ भाई, दुन्या में अच्छे लोग भी हाँ, जो दिल से रेस्पेक्ट देते हाँ, और दिल से किसी को अपना मानते हाँ, पर हमारी लाइफ में भी कुछ ऐसे लोग आएंगे, इसका यकीन नहीं रहा था.. पारर भगवन भी तो है ना, वो अपने बन्दों का ख्याल तो रखेंगे hi...
जूली:- विजय मैं सबब क लिए कॉफ़ी बना कर लाती हों, आज आप सबब मेरे हाथ की कॉफ़ी टास्ते करें..
उदय:- और मेरे लिए कॉफ़ी कड़वी मैट बना कर लाना..
उदय की बात से शेखर और दीदी को छोड़ कर हम सबब हस्सन लगे..
जूली:- अच्छा किया तुमने बता दिया.. शेखर और शुष्मा क चक्कर में मई तो पहले वाला सबब भूल hi गई थी.. तो फ़िक्र मैट करो, तुम्हारे लिए कफ मई कुछ ज़ायदा hi स्पेशल ले कर आओगी...
जूली कॉफ़ी बनाने चली गई...
विजय:- लो उदय तुमने तो जूली को सब याद दिला दिया...... उदय को अपनी गलती का एहसास हुआ तो वो अपना सर्र खुजाने लगा.. बाकी उदय को देख कर हस्सन लगे..
दीदी और शिकार मुझे सवालिया नज़रों से देख रहे थे.. उन्हें इस बात की समझ नहीं आई थी.. तो मैंने जूली ने जैसे उदय को नीचे पटका था वो बता दिया.. दोनों भी हस्सन लगे..
जूली क आने क बाद सबने कॉफ़ी पि.... कुछ देर बातें हुई तो दीदी ने शेखर को उसका काम करने भेज दिया...
जिस काम क लिए शुष्मा दीदी की ज़रूरत थी, उसके रिलेटेड बातें होने लगीं, शुष्मा दीदी कई ऐसी लड़कियों को जानती थीं.. जो उन्ही की तरह से जॉब छोड़ चुकी थीं.. उन्हें इस सबब का एक्सपीरियंस भी बहुत था.. और नॉलेज भी.. शेखर किसी हद तक्क हैकिंग भी कर लेता था, दिल्ली में मौजूद कम्पनीज से डाटा चोरी कर सकता था.. हमें तो बास एम्प्लॉएंस की डिटेल hi चाहिए थी..
इस में ज़यादा प्रॉब्लम नहीं होने वाली थी, और आगे का सबब दीदी और जूली खुद देख लेती.. दीदी को मैंने अपने विचार खुल कर बता दिए थे.. मैं बिज़नेस क्यों करना छह रहा हों, और कैसे लोगों को खुद में शामिल करना चाहता हों, अनाथ लोगों को खुद में शामिल करना, ज़रूरत मंद स्टूडेंटन्स को खुद में शामिल करना और जॉब में उन्हें कैसी कैसी फैसिलिटीज, दी जानी chahiye.kaise पैकेजेस मैंने उनके सोच रखे हाँ.
कुछ दिन पहल मैंने जूली से जो भी डिसकस किया था.. वो सबब शुष्मा दीदी को बता दिया..
शुष्मा दीदी मेरी पूरी बात सुनकर हैरान रह गई...
दीदी:- विजय भाई, ये सबब तुमने सोचा है, हैरत है, पर कमाल भी है.. जैसा तुमने सोचा है, वैसा करना अगरचे मुश्किल तरीन और रिस्की है. पारर जैसे तुमने कहा क तुम ये सबब पैसा कमाने क लिए नहीं कर रहे हो, तो मैं तो फिर यही कहूँगी क ऐसा करके कोई भी बिज़नेस शुरू किया जाए.. उसे रातो रात तरक्की करने से कोई नहीं रोक सकता.. अक्सर कम्पनीज इसी लिए लिमिट में रहती हाँ, वो खुद के प्रोफिर को पहले सामने रखती हाँ.. पारर हम जो बिज़नेस शुरू करेंगे, उसमे वर्कर्स को हम पहले नंबर कर रखेंगे....
तो फिर वर्कर तो आटोमेटिक अपना बेस्ट देंगे.. वो भी जान जाएंगे, जितना बेस्ट देंगे , उसी हिसाब से उन्हें पेमेंट मिलेगी..
मैं एडवांस में hi तुम्हे कॉंग्रट्स कर देती हों.. नए होने वाले बिज़नेस की सक्सेस की..
विजय:- दीदी जो बिज़नेस शुरू हो रहा है, वो मेरा नहीं होगा, वो होगा सबब का, कोठे से लाइ गई लड़कियों और औरतों के बारे में मैं आपको बता दिया है.. आप उन्हें ज़िन्दगी में आगे बढ़ना सिखाएंगी.. जैसी लाइफ वो जीना छह रही हाँ, उन्हें उस सबब क बारे में गाइड करेंगी. इन जैसी और भी हमे कई मिलेंगी, हमने सभी को अपने साथ मिलाना है.... मैंने तो बास अपने विचार आपके और जूली के सामने रखे हाँ, करना तो आप सबब को hi है ....
दीदी:- हाँ भाई वो भी सही है.. पर शुरू तो तुम hi करोगे ना, और इस सबब को पूरी तरह से हैंडल भी तुम्ही करोगे.. बिज़नेस को शुरू करना कोई आसान काम तो है नहीं.. कई मुखालिफ खड़े हो जाते हाँ. फ्लॉप करने क लिए यदि छोटी का ज़ोर लगाना शुरू कर देते हाँ...
विजय:- हाँ वो सबब तो मैं देखूंगा hi.....
दीदी और जूली से 1 घंटा मीटिंग हुई. राजा गैंग भी कभी कोई बात कर लिया karti..warna वो अक्सर चुप hi रही... जूली भी ज़रूरत के हिसाब से hi बोल रही थी.. मेरे बाद जूली ने hi सबब दीदी के साथ मिल कर करना था..
फिर सबब चले गए..... केबिन में मई और दीदी अकेले hi रह गए..
विजय:- दीदी आपको पता है, आप बहुत ज़यादा खूबसूरत हाँ....
दीदी मेरी बात पर मुस्कुराने लगीं..
दीदी:- अपनी दीदी से फ़्लर्ट कर रहे हो...
विजय:- हाँ दीदी, इतना तो चलना hi चाहिए ना.. वर्ण जैसी आपकी पर्सनालिटी है.. सोच के hi डर लगता है.. क कही आप एक थप्पड़ hi न मार दें...
दीदी इस बार मेरी बात पर हस्सन लगीं..
दीदी:- नहीं भाई, मुझे तुम्हारे कैसे भी बात करने से कोई आपत्ति नहीं है, जो दिल के साफ़ हों, उनके साथ तो ऐसी बातें और भी ज़यादा मज़ा देती है, वो सबब दिल की सदा होती हाँ ना.. और मैं सिर्फ देखनी में hi ऐसी हों, मुझे ऐसा रंग ज़माने ने hi तो दिया है.. गन्दी नज़र डाली गई मुझपर, फिर मेरे खवाब तोड़ दिए गए.. वर्ण मैं बहुत hi हंस मुख हों.. मुझे भी अपनी लाइफ हंसी ख़ुशी जीने की बहुत चाह है... पारर लाइफ के बदलता रंग कभी एक रंग में रहने हु नहीं देते.. जैसी बातें तुम कर रहे हो.. कभी मई भी ऐसी hi थी.. ऐसी बातों से तो लाइफ जीने का मज़ा hi कुछ और है.. और आज सालो बाद मुझे फिर वही शुष्मा बनने का मौका मिल रहा है, जैसी में पहले हुआ करती थी... थैंक्स
भाई मुझे अपनों शामिल करने क लिए.. एक बार फिरसे मुझे इंसानो पर भरोसा दिलाने क लिए.. वर्ण मई अपनी लाइफ में hi बिजी हो गई थी..... एक साइलेंट लाइफ जी जी कर मैं भी उक्त गई थी...
विजय:- दीदी, अभी तो मैंने आपको असली रंग तो दिखाए hi नहीं हाँ.. अंदर पैलेस में पूरी एक लेडीज मण्डली है, जिससे मिल कर आप को बहुत ख़ुशी मिलेगी.. आपकी लाइफ का सारा अधूरापन मिंटो में hi ख़तम होकर रह जाएगा...
दीदी:- हाँ तुम्हे देख कर मुझे तुम्हारी बात का यकीन भी आ गया है..
विजय:- दीदी जीजा जी क्या करते हाँ..
दीदी के हस्बैंड का ज़िक्र आते hi दीदी एकदुम्म से hi चुप हो गईं...
विजय:- सॉरी दीदी मैंने कुछ गलत बोल दिया हो तो..
didi:-(chehra साइड में घुमा कर लम्बी सांस लेते हुए, ) नहीं कोई बात नहीं.. वो एक गारमेंट्स फैक्ट्री में असिस्टेंट मैनेजर हाँ.. कुछ और मैट पूछना, मई नहीं बता पाऊँगी... दीदी का चेहरा एकदुम्म से hi मुरझा गया था..
मैं खड़ा हुआ और दीदी को भी एक बाज़ो से पकड़ कर उठा कर खड़ा कर दिया. मैं तो बेशरम था hi,mujhe दीदी को उठाने में कैसी झिझक.. दीदी मुझे हैरत से देखने लगीं..
मैंने अपने दोनों हाथ दीदी के दोनों कंधो पर रख दिया.. दीदी की ऑंखें मारे हैरत के बड़ी बड़ी होने लगीं...
अचानक से hi मैंने दीदी को अपने गले से लगा लिया.. और उनकी पीठ को सहलाने लगा.. दीदी का शरीर बोहत गरम था.. उनकी आँखों में मुझे एक पियास दिख गई थी, इक अधूरा पत्र था दीदी की लाइफ.. उनके कहे बिना hi मैं किसी हद्द तक्क समझ चूका था.. पारर यहाँ मेरी फीलिंग्स दीदी को लेके दूसरी नहीं थीं..
दीदी भी कही न कही पियासी थीं.. मैं उनकी पियास तो बुझाने से रहा..
पारर मैं दीदी क मैं की पियास तो बुझा hi सकता था... मुझसे दीदी का दर्द सहन नहीं हुआ... एक तो दीदी की सूरत माँ से बहुत मिलती थी, दूसरा मैं तो था hi ऐसा, किसी के दर्द को अपना समझने वाला..
कोई मुझसे आत्ताच हो और वो दुखी रहे.. ये कैसे हो सकता था.. मैं दीदी की पीठ को सहलाने लगा.. दीदी क बदन में कपकपी सी होने लगी. दीदी जो मेरे गले लगते hi सटपटाने लगी थी.... दीदी अब्ब पूरा ज़ोर लगा कर मुझसे छूटने की कोशिश करने में लगी थी.. पर मैंने दीदी को नहीं छोड़ा... दीदी ने कुछ देर के लिए बाहर ज़ोर लगाया मुझसे छूटने क लिए.. पारर मैंने उन्हें नहीं छोड़ा.
मई कभी किसी को छोड़ने क लिए अपने गले से लगता hi कब्ब था.. जो एक बार मुझसे आत्ताच हो जाए.. वो मेरी फॅमिली का हिस्सा बन जाता था..
दीदी... विजय ये क्या कर रहे ho..chhodo mujhe..door खुला हुआ hai..koi देख लेगा.. शेखर आ जायेगा.. ये सही नहीं विजय... मैं कभी शेखर से भी ऐसे नहीं मिली.. भाई प्लीज मुझे छोडो.. मुझे बहुत अजीब लग रहा है.. ममममम..
मैं हमेशा मर्दों से दूर दूर hi रही हों... chh..chhhhoda दो भभ.. भाई..
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