Update..No..76*
MeGa..UpDaTe
Abb...Aage...
""पुत्र! सबक सीखना उचित है.. किन्तु इसके लिए शक्तियों का प्रयोग अनुचित है...
शायद तुम भूल रहे हो की... तुम्हारा जन्म केवल मानव कल्याण के लिए हुआ है....
भटके हुए को सही राह दिखने के लिए....
किन्तु आज जो भी तुमने किया है वो सही नहीं है...!!""
हनी - ले भाई.. आ गया.. बुढऊ ! ज्ञान पेलने....
बस इनकी hi कमी thi.....Aao तुम भी मज़ा लूट लो....!!
मैं - प्रणाम गुरुवार ! मेरा ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था....
मैं थोड़ा जज्बाती हो गया था...
किन्तु अब ऐसा कभी नहीं होगा....!!
गुरुवार - पुत्र! एक बात सदैव याद रखना...
""अहंकार में तीनो गए
धन, वैभव और वंश
यकीं न आये
तो देख लो
रावण, कौरव और कंस...""
इस्सलिये कभी खुद की शक्तियों पर अहंकार मत करना....
क्यूंकि जो शक्तियां मानव कल्याण के लिए दी जा सकती है....
उसे अहंकार वश चीन भी जा सकता है....
मैं - कोटि कोटि धन्यवाद् गुरुवार! एक बार फिर से मेरा मार्गदर्शन करने के लिए....
मैं शीघ्र hi अपनी की हुयी गलती को सुधर लूंगा.....
गुरुवार - सदैव कल्याण हो पुत्र !!
इतना कहकर गुरुवार! अंतर्ध्यान हो गए....
हनी - तू बेवक़ूफ़ तो नहीं....
तुझे अंदाज़ा भी है तू कितनी बड़ी गलती करने जा रहा है...??
मैं - मैं गलती करने नहीं... सुधरने जा रहा हु...
मैं बेवक़ूफ़ nahi....Rahamdil हु..!!
हनी - रहम दिल... ः Hahahaha....Achha वर्ड है...
लेकिन मेरी भी बात याद रखना ""एक दिन तेरी यह Raham-Dili तेरी जान ले लेगी....!!""
इस्सलिये मेरी बात मान.. सांप को ऐसे छोड़ने की भूल मत कर.... उसे कुचल देना hi बेहतर होगा...
वैसे भी वह इस दुनिये में जीवित रहने योग्य नहीं है.... उसका रोम रोम बुराई से लिप्त है....
मैं - भलाई करना मेरा कर्त्तव्य है.... अगर इसमें मेरी जान भी जाती है... तो मुझे कोई परवाह नहीं....
और है अब अगर तेरी बकवास ख़त्म हो गयी हो... तो मुझे जाने दे... और भी जरूरी काम है....
हनी - तू कर जो भी करना है...
अब समझदारों को और क्या समझाना....
इतने देर में दादू भी आ गए और साथ में अनवर अली भी.....
अनवर अली - कहा है मेरे बचे, दोनों ठीक तो है...
मुझे उनके पास ले चलो.....
मैं - चाचा! वो दोनों ठीक है...
उन्हें कुछ नहीं हुआ... बस चाँद मामूली खरोंच आयी है....
चलिए मैं आपको उनके पास ले चलता हु....
मैं उनको लेकर रूम आ गया....
जहाँ आफरीन और बिलाल बेहोशी के आलम में लेते हुए थे....
सामने अपने बच्चों की हालत देखकर...
अनवर चाचा भागकर दोनों के पास पहुंचे...
और सीने से लगकर रोने लगे.....
दरअशल आफरीन की कंडीशन तो पहले से hi तजिक थी....
बूत बिलाल को अंदुरुनी और बाहरी, बहित ज्यादा चोन आयो थी....
जिससे उसके बदन में हर जगह घाव बन गए थे....
जिसे देखकर अनवर चाचा एकदम घबरा गए....
और दोनों से लिपटकर बेतहाशा रोने लगे.....
इतने में डॉ. और नर्स आ गए.....
डॉ - यह क्या कर रहे हो....
पेशेंट्स से दूर रहिये....
आप सभी लोग बहार चले हमें ट्रीटमेंट करने दे....
मैं, अनवर चाचा को लेकर रूम के बहार आ गया.....
रट हुए....
अनवर चाचा - तुमने तो कहा था बस मामूली खरोंच है....??
किसने किया मेरे बच्चों का यह हाल.....
मैं उसे जिन्दा नहो छोडूंगा.....
कौन थे वो लोग....
मैं - जब मैं वहां पहुंचा था तो कुछ गुंडे आपके बेटे को पीट रहे थे....
और ये सब क्यों कर रहे थे इसका जवाब तो दोनों के होश में आने के बाद hi मिल सकता है.....??
अनवर चाचा - बहुत बहुत शुक्रिया बीटा ! दोनों को बचने के लिए और हॉस्पिटल लेन के लिए.....
बस मेरा एक और काम कर दो....
मुझे उन गुंडों की पहचान बता दो.... बाकी मैं सब देख लूंगा.....
मैं - चाचा जी... हम तो बस वहां से गुज़र रहे थे..
मुझे उनके बारे में कुछ नहीं पता...
मैं तो यह भी नहीं जनता था की यह दोनों आपके बचे हैं....
वो तो हॉस्पिटल आकर पता चला....
अनवर चाचा - थैंक्स बीटा ! इंसानियत दिखने लिए.....
मैं तो तुम्हारा शुक्रगुज़ार हु...
आज तुमने मेरे दिल के टुकड़ो की रक्षा की है...
अभी हम बा कर रहे थे की तभी रूम का दूर खुला.....
डॉ. भर आते हुए....
डॉ - इम्पॉसिबल ! It's मिराक्लेस....
ऐसा कैसे हो सकता है....??
घबराते हुए.....
अनवर चाचा - क्या हुआ डॉ. साहब, सब ठीक तो है न...
मेरा बचा ठीक तो हो जायेगा न....??
डॉ. - ठीक हो जायेगा...
या फिर ठीक हो गया है...
जब इसे एडमिट किया गया था तब इसकी हालत बहुत नाजुक थी...
जान बचाना मुश्किल लग रहा था....
बूत अब जब मैंने दुबारा चेक उप किया...
मेरे तो होश hi उड़द गए....
भीतरी जख्म तो जैसे गायब hi हो गए... अब तो बस ऐसे hi छोटी मोती खरोंच रह गयी हैं....
वो भी जल्द भर जाएँगी....
अनवर चाचा - खुदा का लाख लाख शुक्र है... मेरा बीटा सही सलामत है.....
मैं - हम्म सही कहा चाचा जी...
वो कैसे कैसे खेल खेल दे... किसी को क्या पता.....??
कुछ चीज़े हमारी समझ से परे होती हैं....!!
मैं - डॉ. साहब, आप इन दोनों को डिस्चार्ज कब तक करेंगे.....??
डॉ. - वैसे तो सब नार्मल है अब...
आप मिस. आफरीन को घर ले जा सकते है....
बूत Inhein(Bilal) अभी यही रुकना होगा..
जब तक की कम्पलीट ट्रीटमेंट हो नहीं जाता....
काउंटर पर जाकर फॉर्मेलिटी पूरी कर लें....
मैं - चाचा ! आप जाकर आफरीन को घर छोड़ aaye....Tab तक मैं और दादू, बिलाल के पास रुके हैं....
अनवर चाचा - हम्म ठीक है बीटा... एहि ठीक रहेगा...
सभी फॉर्मेलिटी कम्पलीट होने के बाद....
अनवर चाचा आफरीन को लेकर घर के लिए रवाना हो गए....
मैं भी दादू! को हॉस्पिटल में रुकने को कहकर फाइव सेंस गार्डन की तरफ रवाना हो गया....
जहाँ इस वक़्त अफरा - तफरी का माहौल था...
दरअशल इस वक़्त जहाँ सभी गुंडे स्टेचू बने खड़े थे...
वहां चरों तरफ भीड़ इकठ्ठा हो गयी थी....
उनके फॅमिली मेंबर्स और डीआरएस. उनको तजिक करने की कोशिश कर रहे थे....
चूँकि उन गुंडों की पहचान बहुत ऊपर तक थी इस्सलिये उनकी सुरक्षा के लिए वहां पर पुलिस का कड़ा पहरा हो रखा था....
इन, 7, 8 गुंडों का जो ग्रुप लीडर (सुलेमान - 27) था वो अंडरवर्ल्ड से मिला हुआ था,
उसका भाई हैदराबाद में मिनिस्टर होने के साथ साथ माफिया से भी जुड़ा हुआ था...
उसके बारे में यह सब मुझे सुलेमान को छूने के बाद पता चला था....
एक बात और अनवर अली, सुलेमान के रिलेटिव थे....
जो की रिश्तों में उसके मां लगते थे...
हालाँकि सुलेमान और उसके भाई के काले कामों की वजह से अनवर चाचा ने उनसे रिश्ता तोड़ लिया था....
और उनसे दूरियां बना ली....
लेकिन सुलेमान जो की आफरीन का कजिन लगता था...
उसका दिल आफरीन पर आ गया था....
जिसके चलते वह पीछा करते हुए... देहरादून तक आ पहुंचा था.....
दरअशल जब मैं मेरी फॅमिली देहरादून शिफ्ट हुए थे, तब आफरीन और बिलाल अपने वकील के साथ, हैदराबाद गए हुए थे,
अपनी पुश्तैनी जमीन को बेचने जो की उनके दादा ने, उन दोनों के नाम कर राखी थी....
वहीँ पहली बार आफरीन पर सुलेमान की गन्दी नजर पड़ी थी...
तब से वह उसके पीछे पद गया था....!!
मैंने अपनी कार वही साइड में रोक दी...
और अपने लेफ्ट हैंड को सभी गुंडों की तरफ करके उनपर ग्रीन छोड़ दी...
जैसे Hi रेज़ उन पर पड़ी...
.""मुझे बचाओ... कोई तो बचाओ इस शैतान से....""
दर्द में चीखते हुए, सभी एक एक करके जमीन पर गीध पड़े...
और दर्द से तड़पने लगे....
अचानक से ऐसा होता देख वहां पर कौतुहल मचने लगा...
फटाफट सबको एम्बुलेंस में डाला गया, और हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गए....
मैं भी अपनी कार में बैठ कर हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गया.....
बदकिस्मती से एम्बुलेंस और मेरी कार दोनों ल सिटी हॉस्पिटल में जाकर रुकी....
अभी मैं कार से बहार निकल hi रहा था की तभी....
साईरन बजाते हुए.....
एक वाइट मेरसेदेज़ आकर रुकी...
फुल वाइट सुईठे बूट में एक शख्श बहार निकला....
जिसे चारो तरफ से सिक्योरिटी गार्ड्स घेरकर खड़े हो गए....
मैंने एक नजर ऊपर से लेकर निचे तक डाली...
मुझे पहचानने में जरा सा भी वक़्त न लगा.....
अकरम सिख - 39 मिनिस्टर ऑफ़ हैदराबाद, सुलेमान सिख का बड़ा भाई......!!
मैं उसे इग्नोर कर इमरजेंसी वार्ड आ गया....
जहाँ दादू, के साथ अनवर चाचा और ज़ीनत चची रूम के बहार खड़े हुए थे.....
अनवर चाचा - आ गए बीटा....
मेरे साथ चलो, फॉर्म पर सिग्न कर दो...
बिलाल को डिस्कार्गेड करने की परमिशन मिल गयी है.....
बाकि का ट्रीटमेंट्स घर पर hi होगा....
मैं - हम्म चलिए,
मैं उनके साथ साथ काउंटर पर आ गया.......
जहाँ इस वक़्त अकरम सिख खड़े स्टाफ को कुछ इंस्ट्रक्शन दे रहे थे....
जैसे Hi अनवर चाचा की निगाह, अकरम पर पड़ी.....
तुरंत hi अपना चेहरा घुमा लिया....
और दूसरी तरफ मुद गए.... और एक साइड में आकर खड़े हो गए....
मैं - क्या हुआ चाचा...
आप इतने घबराये हुए क्यों हैं.....
हमें तो मैं काउंटर पर जाना था Na.....Fir यहाँ इस तरफ क्यों....??
अनवर चाचा - बीटा.. मैं जिस बुराई से बचकर भागता फिर रहा हु.. आज वो मेरी आँखों के सामने कड़ी है....
मैं नहीं चाहता की उसका साया भी मुझपर पड़े इस्सलिये मैं इस तरफ चला आया......
देखो तो वह गया क्या....??
अनजान बने हुए.....
मैं - कौन चाचा जी....
आप किश बारे में बात कर रहे हैं....??
अनवर चाचा - वहां सामने काउंटर पर देखो....
सफ़ेद चादर पर लिप्त हुआ, एक कला नाग दिखेगा......??.
मैं - पर वहां तो कोई नहीं है... चाचा जी..
सिवाय स्टाफ मेंबर के...
अनवर चाचा - क्या अभी तो वही पर था....
चलो जल्दी चलो, इससे पहले की उसकी नजर मुझपर पड़े...
हमें तुरंत यहाँ से चले जाना चाहिए.....!!
हमने काउंटर पर जाकर फॉर्म पर सिग्न किया....
और डिस्कार्गेड पेपर लेकर
अनवर चाचा के पीछे पीछे इमरजेंसी रूम की तरफ भगा....
अनवर चाचा - ज़ीनत ! हमें यहाँ से तुरंत निकलना होगा....
अकरम इस हॉस्पिटल में आ चूका है...??
शॉक होते हुए
ज़ीनत चची - क्या अकरम ! और Yahan.....Wo भला यहाँ क्यों aayega....Shayad आपको धोखा हुआ होगा...??
अनवर चाचा - मैं उस सपोले को कभी नहीं भूल सकता...
वह अकरम hi है....
हमें तुरंत यहाँ से जाना होगा.......??
अनवर चाचा और दादू, बिलाल को व्हील चेयर में बैठकर बहार ले जाने लगे...
मैं भी उनके पीछे चल दिया....
अभी हम रूम से बहार Hi निकले थे की.....
स्ट्रेचर पर लेते हुए सख्श को देख कर ज़ीनत चची के कदम वही पर रुक गए....
इस वक़्त सुलेमान को स्ट्रेचर पर लिटाकर ओप्रशन थिएटर की तरफ ले जा रहे थे....
अनवर चाचा - इसे क्या हुआ...??
ये यहाँ कैसे....??
इसका मतलब अकरम इसके लिए यहाँ आया है.....??
ज़ीनत चची - हैं तो भाई भाई na....Isne भी जरूर कोई कांड किया होगा ..
जिसकी वजह से आज इसकी यह हालत हुयी...
हमें इनसे kya....Chaliye जल्दी गाड़ी की तरफ...
इससे पहले की अकरम भी यहाँ आ जाये.
बिलाल को लेकर हम चारो लोग वन में बैठ गए....
मैंने अपनी कार वही हॉस्पिटल में Hi छोड़ दी....
दादू वन को चला रहे थे, मैं तीनो के साथ पीछे बैठा हुआ था....
सब किसी गहरी में सोंच में दुबे हुए...
एकदम खामोश से बैठे हुए थे.....
मुझसे यह चुप्पी बर्दाश्त न हुयी....
मैं - आप दोनों उस इंसान से इतना डरते क्यों हो....??
आखिर कौन है वो....??
मेरी इस बात से ज़ीनत चची की ानकजों में आंसू आ गए.....
अनवर चाचा - वो इंसान नहीं एक जल्लाद है...
वह इंसान कहलाने लायक Nahi.....Ek कातिल है कातिल..... खून किया है उसने नेरे विश्वाश का... मेरी जान से प्यारी बेटी का....!!
इतना बोलकर अनवर चाचा की भी आँखें भी भर Aayi.....Unki आँखों से लग रहा था. .जैसे कोई पुराण जख्म किसी ने कुरेद दिया हो...
मैं - क्या खून...??
वो भी आपकी बेटी का.....
अनवर चाचा - है मेरी बेटी का.....
सिर्फ खून hi नहीं, बलात्कार किया है उसने... अपने मुँह बोली बहन ka.....Wah एक राक्षस है राक्षस.....
इतना बोलकर अनवर चाचा और ज़ीनत चची...
जोरर जोरर से रोने लगे....
मैं उन्हें आईने से लगाकर तसल्ली देने लगा....
.जैसे hi मैंने अपना हाथ उनके सर ओर रखा.....
अनवर चाचा के अंदर मौजूद सभी यादें मेरे सामने खुलकर बहार आ गयी.....
ऐसा भयंकर मंजर देख कर मेरी आँखें गुस्से से व्क्डम लाल हो गयी...
अपने आप hi मेरी आखें भी छलक पड़ी ....
अनवर चाचा की बेटी के साथ ऐसा दुर्व्यवहार देख कर. ...
""कैसे बर्दाश्त किया होगा अनवर चाचा ने..
कितना दुखदायी होता होगा.... एक बाप के नज़रों के सामने उसकी बेटी का बलात्कार होना...""
आज के लिए बस इतना hi..
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लाइक्स, कमैंट्स, रिव्यु और वोट्स का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!