Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

hotaks

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हयान - एक इंसान या शैतान

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Update..No..1..



(डिस्क्लेमर)

यह कहानी एक काल्पनिक कहानी है, कहानी के सभी पात्र और उनके नाम काल्पनिक है और इसका किसी भी विशेष धर्म या जाती से कोई सम्बन्ध नहीं है,

यह कहानी किसी भी व्यक्ति के निजी ज़िन्दगी से प्रेरित नहीं है है

यह पूरी तरह से एक काल्पनिक रचना है,

यदि किसी जीवित या मृत व्यक्ति से समानता पायी जाती है तो यह मात्र एक संयोग होगा...!!



""'इंसान अपनी मर्ज़ी क खिलाफ दुनिया में आता है ..और अपनी खुवाहिश क खिलाफ यहां से चला जाता है.

बचपन में फरिश्ता ..जवानो में शैतान

और बुढ़ापे में बेवक़ूफ़ समझा जाता है..

ग़रीब है तो फज़ूल है

अमीर है तो मग़रूर है

खैरात करता है तो शोहरत का भूका भी है..

मज़हब परास्त है तो मक्कार है

मज़हब से दूर है तो गुणहगार है

दुनिया में आता है

तो हर कोई उसे चूमना चाहता है

दुनिया से जाने क बाद हर कोई उस से जान छुड़ाना चाहता है..!!'""'



जैसे ही हमारे जीवन में बुराईरूपी अंधेरे का आगमन होता है, विवेकरूपी दीया प्रस्थान कर जाता है।

बुराई अपना खेल खेलती है, मानव को दानव तक बना देती है। बुराई में एक विशेषता होती है, जब वह कमजोर होने लगती है, तब वह अधिक आक्रामक हो जाती है। यही समय है, जब थोड़े धैर्य के साथ उसका मुकाबला किया जाए इस दौरान हमें उस सुहानी सुबह के बारे में सोचना चाहिए, जो उस अंधेरी बुराई के ठीक पीछे उजाले के रूप में होती है।

मनुष्य की यह प्रवृत्ति है कि उसे बुराई जल्द आकर्षित और प्रभावित करती हैं। दूसरी ओर अच्छाई में चकाचौंध करने वाली कोई चीज नहीं होती, यह सदैव निर्लिप्त होती है। जब तक कमरे में उजाला है, तब तक हमें अंधेरे का भान ही नहीं होता। जैसे ही लाइट गई, अंधेरा पसरा कि हम फडफड़ाने लगते हैं। तब हम उजाले का महत्व समझने लगते हैं।

""बुराई हमेशा शक्तिशाली नहीं रह पाती, उसके कमजोर होते ही अच्छाई का आगमन है और उसी दानव को महात्मा तक बना देती है।

मेरा मानना है कि अच्छाई को कई दानव भी सच्चे ह्रदय से स्वीकार करे, तो उसे महात्मा बनने में देर नहीं लगेगी।

आप क्या सोचते हैं....??""

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इंडेक्स



Hello फ्रेंड्स!!
फर्स्ट टाइम मई कोई स्टोरी लिखने जा रहा हु,

मुझे ज्यादा जानकारी नहीं की किस टाइप स्टोरी पोस्ट की जाती hai....fir भी मई अपने जज़्बातों को आप तक पहुंचना चाहता हु..

सो फ्रेंड्स मेरा साथ दे और मेरा हौसला बढ़ाये...

मेरी गलतियों को मुझे बताये ताकि मई एक अच्छी कहानी आप तक पहुंचा सकू.

सो प्लीज सपोर्ट माय स्टोरी

ी होप आप सब को ये कहानी जरूर पसंद आएगी

__________________________________________


इंडेक्स





♡ फॅमिली इंट्रोडक्शन ♡

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अपडेट- 2

करोडो साल पहले ब्रम्हांड नहीं था, सिर्फ अंधकार था.

अचानक एक बिंदु की उत्पत्ति हुयी,

फिर उसके अंदर भयानक परिवर्तन होने लगे और इस बिंदु के अंदर हुआ एक भयंकर विस्फोट जिससे ब्रम्हांड का निर्माण हुआ.

इस ब्रम्हांड के अंदर मुख्यतः दो प्रकार की शक्ति का जैम हुआ...

1. सकारात्मक शक्ति जिसे हम ईश्वरीय शक्ति और दिव्या शक्ति कहते है.

2. नकारात्मक शक्ति जिसे हम शैतानी शक्ति के नाम से जानते है.

दोनों का Apni-Apni जगह पर अलग महत्त्व है,

एहि डॉन शक्तियां आत्मा और दुरात्मा के रूप में Alag-alag जगह पर वास करती है.

जो कुछ भी अस्तित्व में है उन सब में ईश्वर विद्यमान है..

ईश्वर किसी पर निर्भर नहीं वो सर्वशक्तिमान है.

नकारात्मक शक्ति को मैंने वाले को शैतान कहते है.

जिसे हम इस कहानी में इब्लीस के नाम से पुकारेंगे.

वैसे शैतान भी पहले ईश्वर को मैंने वाले था,

शैतान बनने से पहले इब्लीस ईश्वर का प्रिय एंजेल था,

ईश्वर ने इब्लीस को सबसे ज्यादा पावर दी थी क्युकी वो ईश्वर को सबसे ज्यादा मंटा था हमेसा ईश्वर की भक्ति में लीं रहता था,

जिससे खुश होकर ईश्वर लार्ड ऑफ़ एंजेल बना दिया,

इब्लीस सबसे ताक़तवर असीम शक्तियों का मालिक और बहुत चालक और शांत स्वाभाव का था,

जिसके कारन उसे सभी प्रकार अधिकार प्राप्त थे,

ईश्वर ने धरती लोक का निर्माण किया वह रहने के Jeev-Jantu और प्राणी का निर्माण किया,

जब धरती पर मनुस्य पैदा हुए तो उन्हें इब्लीस से भी ज्यादा ऊँचा दर्जा दिया गया,

इंसानो को इतनी ज्यादा ऊँचा दर्ज़ा इब्लीस को पसंद नहीं आया,

जिसके कारन इब्लीस ने ईश्वर के किये गए फैसले पर बगावत कर दी,

जिसका परिणाम ये हुआ की ईश्वर ने इब्लीस को स्वर्ग से निकल दिया,

स्वर्ग से निकले जाने के बाद इब्लीस को बहुत गुस्सा आया,

किन्तु वह शांत रहा,

दृढ निश्चय किया की जिस इंसानो के लिए मुझे ईश्वर ने खुद से अलग कर दिया है,

वो उनको बर्बाद कर देगा,

ईश्वर ने जिस भी उद्देस्य से इंसान का निर्माण किया वो उन्हें उस कर्म से भटकायेगा,

स्वर्ग से निकले जाने के बाद इब्लीस ने खुद की एक दुनिया बनायीं,

और अपनी शक्ति के डैम विशाल दानव सेना का निर्माण किया जिनका सिर्फ एक hi उद्देस्य था, इंसान के दिल में लालच, हवस, क्रोध, बेईमानी, बुराई पैदा करना,

लार्ड ऑफ़ एंजेल से बदलकर अब वो डेविल एंजेल बन गया,

अब ईश्वर छह कर भी उसे खुद नष्ट नहीं कर सकते थे क्युकी अब इब्लीस खुद ईश्वर की आधी शक्ति का मालिक बन गया था,

और आज भी शैतान इंसानो को ईश्वर से दूर करने की कोशिश करता रहता है और अपनी दुश्मनी निभाता है,

ताकि उसके saath-saath हम भी नरक में जाए. 'शैतान इंसानो का खुला दुश्मन बन गया'.

शैतान के पास इतनी बेशुमार काली- शैतानी ताकत है की वो इंसानो के dil-dimaag में bure-bure ख्याल डालता है. बुरे कामो के लिए दिल को तैयार करता है.

अच्छे काम करने से इंसान को रोकता है. इंसान के ब्लड साथ बेहटा है.


इब्लीस खुद को सही साबित करने के लिए चलें चलने लगा,

हर तरफ अंधकार hi अंधकार फैला रखा था,

पुरे ब्रम्हांड में केवल अपना वर्चस्व साबित करने में लग गया,

जब इब्लीस का मन इंसानो को सताने न भरा तो वो और दुनिया में भी अपना साम्राज्य का विस्तार करने लगा...


Dhire-dhire शैतान( इब्लीस ) की पावर और बढ़ती गयी और उसने पिशाच लोक पर हमला बोल दिया

जो की सबसे काम ताकतवर थे और पिसाच लोक को अपने शैतानी ताक़त से अपने बस में कर लिया साडी शैतानी सेना ने पिसाच सेना को अपना गुलाम बना लिया और स्त्रियों को अपनी हवस का शिकार बनाकर शैतानी सेना का बिस्तर करने.

इब्लीस का का कहर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था जिसपर कोई लगाम नहीं था......
 
अपडेट-3 धरती लोक

हिमालय की खूबसूरती को शब्दों में बयां करना मुश्किल है. हिमालय की वादियां इतनी मनमोहक है, जो किसी को भी दीवाना बना सकती हैं. यहां देश-विदेश से टूरिस्ट आते हैं. लेकिन एक ऐसी जगहभी है जिसका नाम माणा है.

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माणा गांव बद्रीनाथ से तीन किमी आगे समुद्र तल से 18,000 फुट की ऊँचाई पर बसा है. माणा, भारत-तिब्बत सीमा सुरक्षा बल का बेस है.


माणा गाँव में कई देखने लायक जगह हैं. गाँव से गणेश गुफा और व्यास गुफा नजर आती है. व्यास गुफा के बारे में कहा जाता है कि इसी जगह वेदव्यास ने पुराणों की रचना की और वेदों को चार भागों में बाँटा था.

व्यास गुफा और गणेश गुफा यहाँ होने से इस पौराणिक कथा को सिद्ध करते हैं कि महाभारत और पुराणों का लेखन करते समय व्यासजी ने बोला और गणेशजी ने लिखा था.

गुफा में एंट्री करते ही एक छोटी सी शिला नजर आती है. इस शिला पर प्राकृत भाषा में वेदों का अर्थ लिखा है.

इसके पास भीमपुल है. इसी पुल की मदद से पांडव अलकापुरी गए थे. अब भी कुछ लोग इस स्थान को स्वर्ग जाने का रास्ता मानकर छुपकर चले जाते हैं.

इसी रास्ते पर वसुधारा पाँच किमी की दूरी पर है. इस जगह तक पैदल पहुंचा जा सकता है. यह झरना 400 फीट ऊँचाई से गिरता है.ऐसा कहा जाता है कि इस पानी की बूँदें पापियों के तन पर नहीं पड़तीं.


घूमने के अलावा यह जगह अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियों के लिए भी मशहूर है.

माणा गाँव की आबादी चार सौ के करीब है. गांव में सिर्फ 60 घर हैं. घर को बनाने में लकड़ी और पत्थर का इस्तेमाल किया गया है. यहां के मकान भूकम्प के झटकों को झेल सकते हैं. मकानों में ऊपर की मंजिल में घर के लोग और पशुओं को नीचे रखा जाता है.

इसी गांव की रहने वाली थी हमारी

मीरा ( उम्र-19)....

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कोरे कंगना कवारे सवारे कलाई

जिसकी रूह की महक से

ये वादियाँ गुनगुनाई

घनेरी ज़ुल्फों की लहर

जैसे गंगा की आरती

मदहोश फ़िज़ाए भी

जिसके रूप को सवांरती,
 
मीरा की माँ का नाम रचना देवी(45) है जिसने मीरा को पाल-पोसके बड़ा किया,

मीरा 5 साल की थी, जब उसके पिता दुष्यन्त का निधन हो गया था,

गांव से 10 किम दूर एक गांव है जिसका नाम सोनपुर है,

सोनपुर छह महीने तक बर्फ से ही ढका रहता है. सर्दियां शुरु होने से पहले यहां रहने वाले निवासी

माणा गांव को चले आते है...

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हिमालय की गॉड में बसा बहुत hi सुन्दर एक गांव जिसका नाम सोनपुर है,

चारो और से Unchi-unchi पहाड़ियों से घिरा हुआ है. गगनचुम्बी पेड़ और पर्वत गांव की शोभा को और बढ़ाते है जिससे वह का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है.

पर्वतों के तलछट में बसा यह गांव भारत के नक्से में भी नहीं दीखता.

क्युकी kul-milakar सिर्फ 25 (मिटटी और लकड़ी से बने) घर होंगे जिनमे 40 परिवार रहते हैं, कुल आबादी सिर्फ 250 के करीब होगी

इस गांव के निवासी या तो शिकारी है या फिर किसान जो की सिर्फ अपना पेट भरने के लिए पारवती इलाकों में खेती करते है.

इनको बहार की दुनिया कोई मतलब hi नहीं.

आज भी यहाँ जड़ी- बूटियों से इलाज़ और मशाल से रोशनी की जाती है,

आधुनिकता का तो naamo-nishaan भी नहीं है.

गांव से बहार जाने का सिर्फ एक hi रास्ता जो की एक सुरंग से होकर 50 कम घने जंगल को पार करके कच्ची सड़को से मिलती है

और उन कच्ची सड़को से 150कम दूर स्टेट हाईवे है जो की देहरादून सिटी को जाता है.

जितना देखने में खूबसूरत गांव है उससे भी ज्यादा दयालु और nek-dil गांव में रहने वाले रहने वाले निवासी है.

कबीर Son(Age-22),

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देखने में Sudol-Mazboot शरीर, शिकार करने में माहिर, सबकी मदद करने वाला मेहनती नौज़वाना है,

जो की सोनपुर मुखियां भुवन Son(Age-60) का पुत्र है जो पेशे से शिकारी भी है.

भुवन सोन के पूर्वजों ने hi यहाँ रहने वाले कबीले को बसाया और गांव का नाम सोनपुर रखा.

माता आरती सोन की गंभीर बीमारी के चलते 7 साल पहले मृत्यु हो गयी,

जब कबीर 15 साल का बालक था,

पिता भुवन ने Hi छोटी उम्र से hi कबीर को शिकार करना शिखाया,


शिकार, खेती, कसरत, और पहाड़ी इलाकों में Roj-marra के कामों से कबीर मज़बूत शरीर का खूबसूरत नौजवान बन गया,

जिसे देखकर गांव की छोरियां आहें भर्ती है, अच्छे गन के कारन सबका साथी है, और मददगार भी.....

सर्दी आने को सिर्फ एक सप्ताह hi बाकी रह गया hai....Sonpur के निवासी एक बार फिर मन गांव जाने के लिए तैयार है.

जहाँ लोगो के रहने के लिए मन गांव के निवासी पहले से hi कुछ घर और खलियें खाली कर देते है....

 
अपडेट - 4 शैतान( इब्लीस )

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पिशाच लोक पर हमले के बाद,

इब्लीस का कहर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था जिसपर कोई लगाम नहीं था......

अब आगे....

बल्ला,

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पिसाच लोक महारनी बल्ला, को देखकर इब्लीस का मन भी सम्भोग करने का हुआ

क्युकी शैतान भी अपने उत्तराधिकारी लालसा हुयी..

इब्लीस और बल्ला के शैतानी सम्भोग से पैदा हुआ... शैतान पुत्र गेरयों (इब्लीस सोन)

गेरयों

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इब्लीस और गेरयों ने मिलकर सरे लोकों पर आतंक का खुनी खेल खेला,

धरती, जिन लोक, पारी लोक,

सम्पूर्ण ब्रम्हांड में Trahi-trahi मचा dali....Har तरफ बस खून की नदिया, Chheekh-Pukaar का आलम बना रहा,

पुरे ब्रम्हांड ने शैतानी राज्य का प्रकोप और अंधकार hi अंधकार छ गया....

एंजेल क्वीन एलिज़ाबेथ और जिन लोक के बादशाह Jinn-e-Gulpham कयूट

दोनों ने मिलकर Apni-Apni शक्तियों से जीन लोक और पारी लोक दोनों लोक अंदरि हिस्सों से एक Pul(bridge) के माध्यम से जोड़ दिया जिससे की दोनों दुनिया Aana-Jaana बना रहे,

और दोनों लोक को सुरक्षित रखने के लिए

एलिज़ाबेथ और कयूट ने अपनी सम्पूर्ण शक्तियों से एक सुरक्षा कवच तैयार किया,

ताकि दुबारा शैतानो का हमला न हो सके,

और डॉन लोक सुरक्षित रहे,

किन्तु इस प्रक्रिया में महारानी एलिज़ाबेथ की सम्पूर्ण शक्तिया ख़त्म हो गयी,

जिसके फलस्वरूप एलिज़ाबेथ एक आम इंसान बन गयी,

और खुद की शक्तियों को वापस पाने के लिए धरती लोक जाने का निश्चय किया ईश्वर की पूजा और भक्ति के लिए,

एलिज़ाबेथ ने खुद की दुनिया को तो बचा लिया किन्तु खुद को न बचा सकीय


क्युकी गेरयों को हर पल की खबर थी,

एलिज़ाबेथ की इसी गलती का फायदा उठाकर गेरयों ने एंजेल क्वीन एलिज़ाबेथ को अपने गिरफ्त में ले लिया,

एलिज़ाबेथ

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एलिज़ाबेथ के सौंदर्य और कामुक रूप को देखकर गेरयों का खुदपर काबू न रहा,

(नोट- अब एलिज़ाबेथ एक आम इंसान है, कोई एंजेल नहीं, मनुस्य योनि में आ गयी,

क्युकी अपनी संपूर्ण ऊर्जा सुरक्षा कवच बनाने में ख़त्म कर दी )

गेरयों ने एंजेल क्वीन के नाजुक कोमल बदन को अपने शैतानी पंजो से राउंड डाला, और कामुक यौवन को अपनी हवस का शिकार बना डाला,

गेरयों का वीर्य जब क्वीन के अंदर पहुंचा तो अचानक गेरयों को तेज़ झटका लगा और बहुत दूर जा गिरा,

एलिज़ाबेथ के बॉडी के चारो और एक तेज़ सफ़ेद रौशनी फ़ैल गयी,

और जब रौशनी काम हुयी तो वह एलिज़ाबेथ नहीं थी.....

शैतान इब्लीस जो ध्यान में बैठा था अचानक उसकी आँखे खुल गयी,

गुस्से से इब्लीस की आँखों से अंगारे निकलने लगे...

ध्यान में बैठने की जगह के Aas-Paas पहरा दे रहे सभी सेना को जलाकर रख कर दिया,

Har-Taraf बस आग hi आग दिख रही थी,

इब्लीस क्रोध में जोर से दाहररा गर्योंन्नणं !!!!!

 
Hello एवरीवन अब तक मैंने 4 अपडेट दे दिए है...

स्टोरी का प्लाट भी रेडी हो गया..

अब आप लोग सपोर्ट कीजिये

और बताये मेरी खामियों को ,

स्टोरी करैक्टर के बारे में भी सुग्गेस्ट कीजियेगा

थैंक यू सो मच !!! कीप सपोर्टिंग
 
सोनपुर के निवासी एक बार फिर मन गांव जाने के लिए तैयार है.

अब आगे...

अपडेट - 5 (ा ब्यूटीफुल इंसिडेंट)


माणा गांव पहुंचकर सभी सोनपुर वासियों ने अपना-अपना डेरा अपने

मन-मुताबिक जगहों पर

सभी ने मिल-जुलकर प्रेम-भाव से जमा लिया,

क्योंकि ज्यादा जगह घेरना ठीक नहीं था सर्दी के मौसम में.

कबीर और उसके पिता जी ने भी एक अच्छी साफ-सुथरी झोपड़ी में अपना सामान और बिस्तर लगा दिया,

अब काम तो कुछ था नहीं

कबीर ने सोंचा चलो थोड़ा गांव भी देख लिया जाए..

वैसे गांव तो ज्यादा बड़ा था नहीं...

घूमते-घूमते गांव के बाहर निकल आया,

जहां नदी की कल-कल मधुर ध्वनि हो रही थी,

कबीर नदी की तरफ बढ़ गया,

नदी का जल एकदम स्वच्छ-शीतल नजर आ रहा था,

सूरज की लालिमा से नदी की शोभा और बढ़ती जा रही थी,

शाम का वक़्त था आसमान में लालिमा छाई हुई थी

यह एक इशारा था कि सूरज डूबने वाला है,

कबीर ने झुककर पानी को अपनी चुल्लू में लिया मुँह में भर लिया,

ज्यों ही पानी उगलने के लिए दूसरी तरफ को मुँह घुमाया..

पानी मुँह को रह गया था न अंदर जा रहा था न ही बाहर को,

एक बेजान पत्थर की मूरत की तरह एक-टक दाहिनी ओर बस घूरता रह गया....

हाँ एक खूबसूरत कन्या को जो न जाने किन खयालों में खोई हुई पेड़ के नीचे बैठी थी...

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15 मीन तक घूरते रहने बाद अचानक हलचल सी हुई और कबीर का ध्यान टूटा,

धीरे-धीरे कदमो के साथ उसी तरफ बढ़ता चला गया,

करीब जाकर देखा तो एक बहुत ही खूबसूरत लड़की जैसे कोई खूबसूरत ख्वाब....

अपने ही खयालों में बैठे मुस्करा रही थी,

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कबीर के करीब आने की आहट से उस लड़की का भी ध्यान टूट गया,

धीरे से पलकें उठाकर कबीर की तरफ देखा,

बस क्या दोनों की आंखें मिलने की देर थी

दोनो एक-दूजे की आंखों में खो गए.........

कबीर का ध्यान तब टूटा

जब कोई दूर से चिल्लाया...

अरे क्या हुआ भैया कहाँ खड़े हो इतने अंधेरे में,

कबीर खयालों की दुनिया से हक़ीक़त में आ गया तब जाकर अहसास हुआ कि शाम ढल चुकी है,

बेचैन दिल के साथ इधर-उधर

देखने लगा,

अरे लड़की...वो लड़की

तुमने देखा क्या यहाँ....??

आदमी-क्या हुआ भाई कुछ खो गया क्या..?

कबीर- कुछ नहीं, मैं चलता हूँ, अंधेरा काफी हो गया,

और कबीर गुम-सुम सा वापस आ गया अपनी झोपड़ी पर

लेकिन उसका दिल शायद वहीं नदी किनारे रह गया.....

भोजन करके लेट गया....बेचैन होकर,

कल फिर मिलने की आशा लेकर,....

लेकिन यहाँ नींद किसे आ रही थी....

वहीं दूसरी तरफ......

वो लड़की को जब अहसास हुआ कि शाम ढलने वाली है तो उसने कई - बार कबीर को आवाज दी लेकिन कोई प्रतिक्रिया न होने पर अपने घर को चली आयी,

लेकिन दिल उसका भी रुकने को था लेकिन अंधेरा होने के डर से चली गयी,

जब घर पहुंची तो माँ के वही सवाल-जवाब जवान छोकडी होके दिन भर बाहर रहती,

न खुद का खयाल रहता है ना ही मेरा,

घर में मन नही लगता

देख कहती हूँ सुधर जा वरना तेरा ब्याह कर दूंगी फिर रहना एक कोठरी में दुबक के,

लड़की- अरे माई इतना क्यों परेशान होती है आ तो गयी न, अंधेरा होने से पहले,

देख माई तू न ब्याह की धमकी न दिया कर,

न तेरा कोई है मेरे सिवा और न ही मेरा कोई तेरे सिवा,

इसलिए मैं कहीं नही जाने वाली,

माई जल्दी से खाना लगा भूख लगी है, मुझे सोना भी तो है,

दोनो मां-बेटी खाना खाकर एक ही बिस्तर में लेट गए

लड़की को फिर से उस लड़के के बारे में ख़याल आने लगे

लड़की- अजीब था, कुछ बोला ही नहीं, नाम भी नही बताया...??

पहले तो कभी नही देखा...कौन था..??

कितना प्यारा था..??

धत्त पगली... मुझे क्या..?

फिर भी नाम-पता मालूम हो जाता तो ठीक रहता...

कसके अपनी मां को गले लगा लिया,

बड़ा प्यार आ रहा है अपनी माँ पर, किसके खयालों में खोई है बेटी मीरा..!!

क्या माई तु भी न हद करती है.... सोने दो मुझे...!!

"पहले हे पल मैं दिल हार गया था,

हर बार समझाया था अपने मैं को

फिर भी हर बार उसी से प्यार किया था,

खुद से ज्यादा होने लगा था उसका

न जाने दिल ने क्या ज़िद ले रखी थी,

जब मुझे वो एक खूबसूरत सी लड़की दिखी थी

लगा ऐसा की भगवन ने शायद मेरी प्रेम खानी भी लिखी थी,

जब मुघे वो एक खूबसूरत सी लड़की दिखी थी...!!"

और कबीर सपनों की हसीन-वादियों में सो गया...

आज के लिए बस इतना hi,

कीप सपोर्टिंग

थैंक यू सो मच!!


 
सोनपुर के निवासी एक बार फिर मन गांव जाने के लिए तैयार है.

अब Aage...(in हिंगलिश)

अपडेट - 5 (ा ब्यूटीफुल इंसिडेंट)




माना गांव पहुंचकर सभी सोनपुर वासियों ने apana-apana डेरा अपने

man-mutaabik जगहों पर

सभी ने mil-julakar prem-bhaav से जमा लिया,

क्योंकि ज्यादा जगह घेरना ठीक नहीं था सर्दी के मौसम में.

कबीर और उसके पिता जी ने भी एक अच्छी saaph-sutharee झोपड़ी में अपना सामान और बिस्तर लगा दिया,

अब काम तो कुछ था नहीं

कबीर ने सोंचा चलो थोड़ा गाँव भी देख लिया जाए..

वैसे गाँव तो ज्यादा बड़ा था नहीं...

ghoomate-ghoomate गाँव के बाहर निकल आया,

जहां नदी की kal-kal मधुर ध्वनि हो रही थी,

कबीर नदी की तरफ
बढ़ गया,

नदी का जल एकदम स्वच्छ शीतल नजर आ रहा था,

सूरज की लालिमा से नदी की शोभा और बढ़ती जा रही थी,

शाम का वक़्त था आसमान में लालिमा छाई हुई थी

यह एक इशारा था की सूरज डूबने वाला है,

कबीर ने झुककर पानी को अपनी चुल्लू में लिया मुंह में भर लिया,

ज्यों ही पानी उगलने के लिए दूसरी तरफ को मुंह घुमाया..

पानी मुंह को रह गया था न अंदर जा रहा था न ही बाहर को,

एक बेजान पत्थर की मूरत की तरह ek-tak दाहिने और बस घूरता रह गया....

हाँ एक ख़ूबसूरत कन्या को जो न जाने किन ख्यालों में खोई हुई पेड़ के नीचे बैठी थी...

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15 मं तक घ्हूर्ते रहने के बाद अचानक हलचल सी हुई और कबीर का ध्यान टूटा,

dheere-dheere कदमो के साथ उसी तरफ बढ़ता चला गया,

करीब जाकर देखा तो एक बहुत ही ख़ूबसूरत लड़की जैसे कोइ ख़ूबसूरत ख्वाब....

अपने ही ख्यालों में बैठे मुस्करा रही थी,

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कबीर के करीब आने की आहात से उस लड़की का भी ध्यान टूट गया,

धीरे से पलकें उठाकर कबीर की तरफ देखा,

बस क्या दोनों की आँखें मिलाने की देर थी

दोनों ek-dooje की आँखों में खो गए .........

कबीर का ध्यान तब टूटा

जब कोइ दूर से चिल्लाया ...

अरे क्या हुआ भैय्या कहाँ खड़े हो इतने अँधेरे में,

कबीर ख्यालों की दुनिया से हकीकत में आ गया तब जाकर अहसास हुआ की शाम ढल चुकी है,

बेचैन दिल के साथ idhar-udhar

देखने लगा,

अरे लड़की ... वो लड़की

तुमने देखा क्या यहाँ .... ??

aadamee-kya हुआ भाई कुछ खो गया है क्या ..?

कबीर- कुछ नहीं, मैं चलता हूँ, अँधेरा काफी हो गया,

और कबीर gum-sum सा वापस आ गया अपनी झोपडी पर

लेकिन उसका दिल शायद वहीं नदी के किनारे रह गया .....

भोजन करके लेट गया .... बेचैन होकर,

कल फिर मिलाने वाली आशा के बारे में,….

लेकिन यहां नींद किसे आ रही थी ....

वहीं दूसरी और ......

वो लड़की को जब अहसास हुआ की शाम ढलने वाली है तो उसने कई - बार कबीर को आवाज दी लेकिन कोइ प्रतिक्रिया न होने पर अपने घर को चली आयी,

लेकिन दिल उसका भी रुकने को था लेकिन अँधेरा होने के दर से चली गयी,

जब घर पहुँची तो माँ के वही savaal-javaab जवान छोकड़ी होक दिन भर बाहर रहती हैं,

न खुद का ख़याल रहता है न ही मेरा है,

घर में मन नहीं लगता

देख कहती हूँ सुधर जा वर्ण ब्याह कर दूंगी फिर रहना एक कोठारी में दुबक के,

लड़की - अरे माँ इतना परेशान क्यों होती है आ तो गयी न, अंधेरा होने से पहले,

देख माँ तू न ब्याह की धमकी न दिया कर,

न तेरा है कोई मेर इ शिव और न ही मेरा कोइ तेरे शिव,

इसलिए मैं कहीं नहीं जा रही हूँ,

माँ जल्दी से खाना लगा भूख लगी है, मुझे सोना भी है,

दोनों Maa-betee खाना खाकर एक ही बिस्तर में लेट गए

लड़की को फिर से उस लडके के बारे में ख़याल आने लगे

लड़की - अजीब था, कुछ बोलै ही नहीं, नाम भी नहीं बताया ... ??

पहले तो कभी नहीं देखा ...

कौन था .. ??

कितना प्यारा था..??

धत्त पगली ... मुझे क्या ..?

फिर भी naam-pata मालूम हो जाता तो ठीक रहता ...

कसके अपनी माँ को गले से लगा लिया,

बड़ा प्यार आ रहा है अपनी माँ पर, किसके ख्यालों में खोये है बेटी मीरा .. !!

क्या माँ तू भी न हद करती है .... सोने दो न मुझे ... !!

"पहले हे पल मैं दिल हार गया था,

हर बार समझाया था अपने मैं को

फिर भी हर बार उसी से प्यार किया था,

खुद से ज्यादा होने लगा था उसका

न जाने दिल ने क्या ज़िद ले रखी थी,

जब मुझे वो एक खूबसूरत सी लड़की दिखी थी

लगा ऐसा की भगवन ने शायद मेरी प्रेम खानी भी लिखी थी,

जब मुघे वो एक खूबसूरत सी लड़की दिखी थी...!!"


एहि सब दिल में सोंचते हुए

कबीर सपनो की हसीं वादियों में सो गया....

आज के लिए बस इतना hi,

थैंक यू सो मच!!


स्टे तुनेड कीप सपोर्टिंग गिव योर बेस्ट रिव्यु,

वेटिंग फॉर योर सुग्गेस्टियन्स...??
 
ी क्नोव बापजी,

आप कहना बिलकुल सही है...1 एंड 2 ंद अपडेट रियल है क्युकी मुझे इंसान और शैतान के जन्म को दिखाना था....,

इसलिए रियलिटी दिल्हाई....

3रद अपडेट से ये स्टोरी बिलकुल भी रियल बेसेस पर नहीं है...

10तह अपडेट के बाद पूरा क्लियर हो जायेगा...

अभी मई थोड़ा सस्पेंस बनाने की कोसिस कर रहा...

थैंक्स फॉर योर वैल्युएबल एडवाइस बाप जी...

नेक्स्ट अपडेट से आपको कोई अनिराशा न होगी

ये मेरा प्रॉमिस है

थैंक्स फॉर कमेंट

एंड सपोर्ट
 
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