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हयान - एक इंसान या शैतान
Update..No..1..
(डिस्क्लेमर)
यह कहानी एक काल्पनिक कहानी है, कहानी के सभी पात्र और उनके नाम काल्पनिक है और इसका किसी भी विशेष धर्म या जाती से कोई सम्बन्ध नहीं है,
यह कहानी किसी भी व्यक्ति के निजी ज़िन्दगी से प्रेरित नहीं है है
यह पूरी तरह से एक काल्पनिक रचना है,
यदि किसी जीवित या मृत व्यक्ति से समानता पायी जाती है तो यह मात्र एक संयोग होगा...!!
""'इंसान अपनी मर्ज़ी क खिलाफ दुनिया में आता है ..और अपनी खुवाहिश क खिलाफ यहां से चला जाता है.
बचपन में फरिश्ता ..जवानो में शैतान
और बुढ़ापे में बेवक़ूफ़ समझा जाता है..
ग़रीब है तो फज़ूल है
अमीर है तो मग़रूर है
खैरात करता है तो शोहरत का भूका भी है..
मज़हब परास्त है तो मक्कार है
मज़हब से दूर है तो गुणहगार है
दुनिया में आता है
तो हर कोई उसे चूमना चाहता है
दुनिया से जाने क बाद हर कोई उस से जान छुड़ाना चाहता है..!!'""'
जैसे ही हमारे जीवन में बुराईरूपी अंधेरे का आगमन होता है, विवेकरूपी दीया प्रस्थान कर जाता है।
बुराई अपना खेल खेलती है, मानव को दानव तक बना देती है। बुराई में एक विशेषता होती है, जब वह कमजोर होने लगती है, तब वह अधिक आक्रामक हो जाती है। यही समय है, जब थोड़े धैर्य के साथ उसका मुकाबला किया जाए इस दौरान हमें उस सुहानी सुबह के बारे में सोचना चाहिए, जो उस अंधेरी बुराई के ठीक पीछे उजाले के रूप में होती है।
मनुष्य की यह प्रवृत्ति है कि उसे बुराई जल्द आकर्षित और प्रभावित करती हैं। दूसरी ओर अच्छाई में चकाचौंध करने वाली कोई चीज नहीं होती, यह सदैव निर्लिप्त होती है। जब तक कमरे में उजाला है, तब तक हमें अंधेरे का भान ही नहीं होता। जैसे ही लाइट गई, अंधेरा पसरा कि हम फडफड़ाने लगते हैं। तब हम उजाले का महत्व समझने लगते हैं।
""बुराई हमेशा शक्तिशाली नहीं रह पाती, उसके कमजोर होते ही अच्छाई का आगमन है और उसी दानव को महात्मा तक बना देती है।
मेरा मानना है कि अच्छाई को कई दानव भी सच्चे ह्रदय से स्वीकार करे, तो उसे महात्मा बनने में देर नहीं लगेगी।
आप क्या सोचते हैं....??""
Update..No..1..
(डिस्क्लेमर)
यह कहानी एक काल्पनिक कहानी है, कहानी के सभी पात्र और उनके नाम काल्पनिक है और इसका किसी भी विशेष धर्म या जाती से कोई सम्बन्ध नहीं है,
यह कहानी किसी भी व्यक्ति के निजी ज़िन्दगी से प्रेरित नहीं है है
यह पूरी तरह से एक काल्पनिक रचना है,
यदि किसी जीवित या मृत व्यक्ति से समानता पायी जाती है तो यह मात्र एक संयोग होगा...!!
""'इंसान अपनी मर्ज़ी क खिलाफ दुनिया में आता है ..और अपनी खुवाहिश क खिलाफ यहां से चला जाता है.
बचपन में फरिश्ता ..जवानो में शैतान
और बुढ़ापे में बेवक़ूफ़ समझा जाता है..
ग़रीब है तो फज़ूल है
अमीर है तो मग़रूर है
खैरात करता है तो शोहरत का भूका भी है..
मज़हब परास्त है तो मक्कार है
मज़हब से दूर है तो गुणहगार है
दुनिया में आता है
तो हर कोई उसे चूमना चाहता है
दुनिया से जाने क बाद हर कोई उस से जान छुड़ाना चाहता है..!!'""'
जैसे ही हमारे जीवन में बुराईरूपी अंधेरे का आगमन होता है, विवेकरूपी दीया प्रस्थान कर जाता है।
बुराई अपना खेल खेलती है, मानव को दानव तक बना देती है। बुराई में एक विशेषता होती है, जब वह कमजोर होने लगती है, तब वह अधिक आक्रामक हो जाती है। यही समय है, जब थोड़े धैर्य के साथ उसका मुकाबला किया जाए इस दौरान हमें उस सुहानी सुबह के बारे में सोचना चाहिए, जो उस अंधेरी बुराई के ठीक पीछे उजाले के रूप में होती है।
मनुष्य की यह प्रवृत्ति है कि उसे बुराई जल्द आकर्षित और प्रभावित करती हैं। दूसरी ओर अच्छाई में चकाचौंध करने वाली कोई चीज नहीं होती, यह सदैव निर्लिप्त होती है। जब तक कमरे में उजाला है, तब तक हमें अंधेरे का भान ही नहीं होता। जैसे ही लाइट गई, अंधेरा पसरा कि हम फडफड़ाने लगते हैं। तब हम उजाले का महत्व समझने लगते हैं।
""बुराई हमेशा शक्तिशाली नहीं रह पाती, उसके कमजोर होते ही अच्छाई का आगमन है और उसी दानव को महात्मा तक बना देती है।
मेरा मानना है कि अच्छाई को कई दानव भी सच्चे ह्रदय से स्वीकार करे, तो उसे महात्मा बनने में देर नहीं लगेगी।
आप क्या सोचते हैं....??""