Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 2 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

एहि सब दिल में सोंचते हुए

कबीर सपनो की हसीं वादियों में सो गया....


अब Aage.....Update - 6 (मेगा अपडेट)

रात में नींद देरी से आने के कारण कबीर की नींद सुबह थोड़ी देर से खुली पिता जी ! के जगाने से,

सुबह के सारे जरूरी काम कबीर ने बड़ी ही फुर्ती से निपटा लिए,

दोपहर का खाना बांधकर

अपने दोस्त बंसी (उम्र- 24) के साथ जंगल की और शिकार के लिये दोनो साथी निकल गए

पिता जी की उम्र अब ढल चुकी थी तो,

वो बस अपने मित्रों के साथ हुक्का पीते या फिर चौपाल पे बैठके यहां-वहाँ की बातें करते.. अब तो उनके प्रतिदिन का यही काम बन गया था..!!

एक तो ठहरे गांव के मुखिया साथ में शिकारी तो उन्हें जंगल और जड़ी-बूटियों का काफी ज्ञान था

और पिता जी के ज्ञान से गांव वालों को काफी कुछ सीखने को मिलता था,

जिसके कारण वो कभी अकेले नही रहते थे पूरे दिन कोई न कोई साथ बतियाने के लिए बना ही रहता था..!!

ठहरो बंसी.....

issshs एकदम शांत शोर मत मचाना वरना भाग जाएगा....

कबीर- देखा न लगा तीर एकदम निशाने पर..

बंसी- हाँ यार आज फिर तू बाजी मार ले गया....चल कोई नहीं अगली बार मेरा तीर निशाने पर लगेगा,

कबीर- हाँ देखे है तेरे जैसे बहुत....बस हमेशा ढींगे मरते रहना तेरे से होगा कुछ भी नही..

बंसी- ठीक है महाराज !

अब प्रस्थान करें अपने महल की ओर क्योंकि इस हिरण से तो दो दिन का पर्याप्त भोजन हो जाएगा...

कबीर- हाँ सही कहा यार, वैसे भी शाम होने को कुछ ही वक़्त बचा है,

बंसी- तो चल फिर देर किस बात की

और फिर हम झोपड़ी की तरफ वापस चल दिये,

नदी के निकट पहुचते ही मैन बंसी को कह दिया तू चल मैं कुछ देर में आता हूँ

बंसी हिरन को लेकर वापस चला गया और मैं उसी पेड़ के छांव के नीचे हाथ-मुँह धोकर इंतेज़ार करने लगा.....

इंतेज़ार भी कितना मुश्किल होता है ना,

"किन लफ्जों में लिखूं मैं अपने इंतज़ार को तुम्हें,

बेजुबान है प्यार मेरा ढूंढता है ख़ामोशी से तुझे."


न जाने कितना वक्त बीत गया लेकिन उसकी खबर कुछ न थी,

मैं भी यूँही पेड़ से टेक लगाए बैठा रहा.....

वहीं दूसरी तरफ आज मीरा की आंखें भी देर से खुली

घर का सारा काम-काज जल्दी कर लिया था,

मीरा की भी चाहत थी मिलने जाने की....एक-बार फिर देखने की,

लेकिन माई का सख्त निर्देष था आज तू घर के बाहर कदम नही रखेगी,

माँ - बेटी मीरा सुन जरा,

ले ये भोजन और कुछ फल उस झोपड़ी में दे आ,

मीरा- ठीक है माई

मीरा- नमस्ते चाचा जी, माई ने भोजन और कुछ फल भेजें है, बोली है मुखिया जी को दे आ..

अब मैं तो किसी को पहचानती नहीं इसलिए आप ही दे देना, अब मैं चलती हूँ

भुवन सोन - इधर ले आ बिटिया मैं हूँ सोनपुर गांव का मुखिया..

भुवन सोन- बिटिया तुम्हारा नाम क्या है..?? किसने भेजा है..??

मीरा - दादा जी नमस्ते, मीरा नाम है मेरा, मेरी माँ रचना देवी ने भेजा है,

पिता जी का नाम दुष्यन्त है, वो अब नही रहें,

भुवन सोन - अच्छा तो तू दुष्यन्त की बेटी है घनिष्ट मित्र था मेरा ,

बड़ा अच्छा नाम है तुम्हारा,

जब तू छोटी थी तब मैं आया करता था तेरे घर दुष्यन्त से मिलने,

भुवन सोन - अच्छा बेटी तू जा कल मैं आऊंगा तेरे घर तेरी माई से मिलने दोपहर को बता देना ...

मीरा- ठीक है दादा जी मैं बता दूंगी माई से, अब मैं चलती हूँ, नमस्ते

भुवन सोन - जीती रहो बिटिया,

मीरा फुदकते - लहराते चल दी आज फिर नदी की ओर...

भुवन सोन - यार शंकर कितनी सुंदर बिटिया है ना, संस्कार भी अच्छे दिख रहे,

शंकर - हाँ यार भुवन बात तेरी सौ- टके की है, ऊपर से दुसयंत की बेटी है....

भुवन - यार शंकर कबीर के लिए किसी रहेगी,

अपनी ही बिटिया है कहे को पराये घर जाए

शंकर - जोड़ी तो अच्छी है

भुवन - कल रचना देवी से बात करता हूँ....

ये तो लगता है सो गया...पक्का ये भी सोनपुर का रहने वाला है.... देखने में तो सुंदर है...

पेड़ के पीछे छुपी मीरा डोर से कबीर को देखकर बुद्बुदा रही थी मन में ही

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जब काफी वक्त गुज़र गया और कबीर नहीं उठा

तो मीरा ने एक छोटे पत्थर को नदी में फेंक दिया और फिर तुरंत छिप गए पेड़ के पीछे,

कबीर का ध्यान तुरंत भंग हो गया, इधर-उधर खड़े होकर देखने लगा किन्तु वहां कोई न दिखाई दिया

कबीर वहीं खड़े बोलने लगा...

कल तो यंही पर मिली थी आज क्यों नहीं आयी...

और कितना इंतेज़ार करना होगा,

कमसेकम एकबार अपनी सूरत तो दिखा जाती,

कितनी सुंदर थी वो....

इधर मीरा ने जब कबीर के मुँह से अपने लिए ये बातें सुनी तो वो शर्माने लगी

मीरा- हे भगवान !! ये तो मेरा ही इंतेज़ार कर रहा है...

इसका मतलब ये भी मुझे पसंद करता है....

चली जाऊं क्या...?? न बाबा क्या पता कैसी नियत का हो...देखने में तो शरीफ लगता है.....क्या करूँ..??

आज नहीं..आज इंतेज़ार करवाया जाए...कल फिर आएगा तो मिल लूंगी... अभी मुझे घर जाना चाहिए वरना माई डाँटेगी.....

मीरा-पेड़ के पीछे से निकल कर सरपट दौड़ लगा दी...

ऐ लड़की सुनो जरा...

जरा रुको तो सही.....कबीर जोर से चिल्लाया

एकपल के लिए मीरा के पैर थम से गए.... लेकिन उस लड़के को अपनी ओर दौड़ लगते देख मीरा ने दौड़ लगा दी

और तबतक भगति रही जबतक कि वो लड़का आंखों से ओझल न हो गया....और घर पहुंच गई....

माँ - कहाँ से भागती आ रही है, तेरी सांसे क्यों उखड़ी है...

मीरा - अरे माई जरा ठहर तो सही...

खाना देकर वापस आ रही थी तो रमिया मिल गयी थी उसी के पास बैठके बतियाने लगी थी,

फिर अचानक तेरा ख़याल आया तो दौड़ लगा दी घर को..

माँ - कितनी बड़ी हो गयी लेकिन अकल पूरी बच्चों वाली,

मीरा- ठीक है माई, वो भुवन दादा से मिली, पिता जी और तेरे बारे में भी पूंछ रहे थे, कल दोपहर को मिलने आएंगे घर,

माँ - ठीक है, देख तू कल मत कहीं निकल जाना, घर में काम रहेगा,

जा हाथ-मुँह धोके आ खाना लगाती हूँ,

कबीर भी भगता हुआ घर झोपड़ी तक पहुंच गया,

कबीर - बड़ी तेज छोरी थी, न जाने कहाँ गायब हो गयी, सब कुछ छिप कर सुन रही थी, कल मिले तो फिर बताता हूँ,

बंसी - का हुआ भाई, काहे गधे के जैसे हांफ रहे हो,,, और कौन सी छोरी...??

कबीर ने फिर बंसी को कल से लेकर आज तक जो भी हुआ सब बताया,

बड़ी देर कर दी बेटा घर आने में, पिता जी बोले

कबीर- बस पिता जी गांव देख रहा था....काफी सुंदर है ना,,,

पिता जी - हाहाहा गांव बस सुंदर है ना कि और कुछ....चल आ खाना खा ले,

पिता जी - खाना खाते हुए....बेटा कल कहीं मत जाना एक मित्र के घर चलना है दुपहर को

तैयार रहना, और मुस्कुराने लगे....

मुझे थोड़ा अजीब लगा....मैं चुपचाप अपने खयालों की दुनियां में खो गया......

आज के लिए बस इतना hi,

थैंक यू सो मच!!

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एहि सब दिल में सोंचते हुए

कबीर सपनो की हसीं वादियों में सो गया....


अब Aage.....Update - 6 (मेगा अपडेट)

रात में नींद देरी से आने के कारन कबीर की आँख थोड़ी देर से खुली, पिता जी के जगाने पर...

सुबह के सारे जरुरी काम

कबीर ने बड़ी ही फुर्ती से निपटा लिए,

दोपहर का खाना बांधकर

अपने दोस्त बंसी (आगे- 24) के साथ जंगल की और शिकार के लिए दोनों साथी निकल गई

पीटा जी की उम्र अब ढल चुकी थी तो,

वो बस अपने मित्रों के साथ हुक्का पीते या फिर चौपाल पे बैठके yahaan-vahaan की बातें करते.. अब तो उनका प्रतिदिन का यही काम बन गया था..!!

एक तो ठहरे गाँव के मुखिया साथ में शिकारी तो उन्हें जंगल और jadee-bootiyon का काफी ज्ञान था

और पिता जी के ज्ञान से गाँव वालों को काफी कुछ सीखने को मिलता था,

जिसके कारन वो कभी अकेले नहीं रहते थे,

पूरे दिन कोई न कोई

साथ बतियाने के लिए बना ही रहता था..!!

ठहरो बंसी... िस्सश्स एकदम शांत शोर मत मचाना वरना भाग जाएगा....

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कबीर- देखा न लगा तीर एकदम निशाने पर..

बंसी- हाँ यार आज फिर तू बाजी मार ले gaya....chal कोइ नहीं अगली बार मेरा तीर निशाने पर लगेगा,

कबीर- हाँ देखे है तेरे जैसे bahut....bas हमेशा ढींगे मरते रहना तेरे से होगा कुछ भी नहीं..

बंसी- ठीक है महाराज !

अब प्रस्थान करें अपने महल की और क्योंकि इस हिरन से तो दो दिन का पर्याप्त भोजन हो जाएगा...

कबीर- हाँ सही कहा यार,

वैसे भी शाम होने को कुछ Hi वक़्त बचा है,

बंसी - तो चल फिर देर किस बात की

और फिर हम झोपडी की तरफ वापस चल दिए....

नदी के निकट पहुँचते hi मैंने बंसी से कहा तू चल,. मैं कुछ देर में आता हूँ...

बंसी हिरन को लेकर वापस चला गया...

और मैं उसी पेड़ की छाँव में Hath-Dho कर इंतज़ार करने लगा....

इंतज़ार भी कितना मुश्किल होता है...

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"किन लफ़्ज़ों में लिखूं अपने इंतज़ार को तुम्हें,

बेज़ुबान है प्यार मेरा, ढूंढ़ता है ख़ामोशी से तुझे..."

न जाने कितना वक़्त गुज़र गया लेकिन उसकी खबर कुछ न थी,

मई भी यूँही पेड़ से तक लगाए बैठा रहा,

वंही दूसरी तरफ, मीरा की आँखें भी सुबह देर से खुली,

घर का सारा kaam-kaz जल्दी कर लिए थे,

मीरा की भी चाहत थी देखने की उसे,

मिलने जाने की,

ले ये भोजन और कुछ फल उस झोपड़ी में दे आ,

मीरा- ठीक है मई

मीरा- नमस्ते चाचा जी, माँ ने भोजन और कुछ फल भेजें है, बोली है मुखिया जी को दे आ..

अब मैं तो किसी को पहचानते नहीं इसलिए आप ही दे देना, अब मैं चलती हूँ

भुवन सोन - इधर ले आ बिटिया मैं हूँ सोनपुर गाँव का मुखिया..

भुवन सोन- बिटिया तुम्हारा नाम क्या है..?? किसने भेजा है..??

मीरा - दादा जी नमस्ते, मीरा नाम है मेरा, मेरी माँ रचना देवी ने भेजा है,

पिता जी का नाम दुष्यंत है, वो अब नहीं रहें,

भुवन सोन - अच्छा तो तू दुष्यंत की बेटी है, प्रिय मित्र था मेरा,

बड़ा अच्छा नाम है तुम्हारा, मीरा,

जब तू छोटी थी, मई आया करता था, तेरे घर दुष्यंत से मिलने,

भुवन सोन - अच्छा बेटी तू जा, कल मैं आऊंगा तेरे घर , तेरी माई से माइन दुपहर में, बता देना

मीरा- ठीक है दादा जी , मैं बता दूंगी,

अब मई चलती हु नमस्ते!!

भुवन सोन - जीती रहो बिटिया,

मीरा फुदकते - लहराते चल दी आज फिर नदी की ओर....

भुवन - यार शंकर कितनी सुन्दर बिटिया है न, संस्कार भी अच्छे दिख रहे,

शंकर - है यार बात तो तेरी Sau-take की है, ऊपर से, अपनर दुष्यंत की बेटी है...

भुवन - कबीर के लिए कैसी रहेगी , अपनी hi बिटिया है, कहे को पराये घर जाएगी...

शंकर - अब की तूने पते की बात, जोड़ी भी तो अच्छी है,

भुवन - कल रचना देवी से बात करता हु,

ये तो सो gaya....Pakka ये भी सोनपुर का रहने वाला hai....Dekhne में तो सुन्दर है ,

पेड़ के पीछे छिपे मीरा, दूर से कबीर को देखकत Bud-buda रही थी....

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जब काफी वक़्त गुज़र गया और कबीर नहीं उठा,

तो मीरा ने एक छोटे से पत्थर को नदी में फेक दिया और फिर छिप गयी, पेड़ आड़ में...

पानी के हलचल से कबीर का ध्यान तुरंत भांग हो गया,.

इधर- उधर देखने लगा , परन्तु वहां कोई नहीं दिखाई दिया

कबीर वहीँ खड़े होकर बोलने लगा....

कल तो यहीं पर मिली थी, आज क्यों नहीं आयी,....

और कितना इंतज़ार करना पड़ेगा...

कमसेकम एकबार अपनी सूरत तो दिखा jaati....kitni सुन्दर थी वो

इधर मीरा ने कबीर की मुँह से अपने लिए ये बाते सुनी तो शर्माने लगी...

मीरा- हे भगवन !! ये तो मेरा hi इंतज़ार कर रहा है...

चली जॉन क्या..?? न बाबा क्या पता कैसी नियत को ho...Dikhne में तो शरीफ लगता hai..kya करू...??

आज nahin..aaj इंतज़ार करवाया jae...kal फिर आएगा तो मिल लूंगी... अभी मुझे घर जाना चाहिए वार्ना मई डाँटेगी.....

Meera-ped के पीछे से निकल कर सरपट दौड़ लगा दी...

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ए लड़की सुनो जरा...

जरा रुको तो sahee.....kabeer जोर से चिल्लाया

एकपल के लिए मीरा के पेअर थम से गए....

लेकिन उस लडके को अपनी और दौड़ लगते देख मीरा ने दौड़ लगा दी

और तबतक भगति रही जबतक की वो लड़का आँखों से ओझल न हो गया....

और घर पहुँच गयी....

माँ - कहाँ से भागते आ रही है, तेरी साँसे क्यों उखड़े है...

मीरा - अरे माँ जरा थार तो sahi...sans लेने दे

है, खाना देकर वापस आ रही थी तो रमिया मिल गयी थी, बस उसी के पास बैठ के बाते करने लगी थी...

फिर तेरा ध्यान आया तो घर के लिए दौड़ आयी

माँ- कितनी बड़ी हो गयी लेकिन बुद्धि पूरी बच्चों वाली...

मीरा ठीक है माँ, वो भुवन दादा से

मिली,

पिता जी और तेरे बारे में भी पूंछ रहे थे,

कल दोपहर को मिलाने आएँगे घर,

माँ - ठीक है,

देख तू कल मत कहीं जाना,

घर में काम रहेगा,

जा haath-munh धोके आ खाना लगती हूँ,

कबीर भी भागता हुआ घर झोपड़ी तक पहुँच गया,

कबीर - बड़ी तेज छोरी थी,

न जाने कहा गायब हो गयी,

सब कुछ छिपकर देख- सुन रही थी,

कल मिले तो, फर बताता हु,

बंसी - क्या हुआ भाई, कहे गधे के जैसे हांफ रहे ho,....Aur कौन सी छोरी..??

कबीर ने बंसी को कल से लेकर आज तक जो हुआ सब बता दिया..

बड़ी देर कर दी बीटा घर आने में, पिता जी बोले

कबीर - बस पिता जी गांव घूम रहा था, काफी सुन्दर है न....

पिता जी - हहहह गांव बस सुन्दर है na...ki कुछ और भी.....

चल खाना खा ले...,

पिता जी- खता कहते हुए, ..बीटा कल कही मत जाना, एक मित्र के घर चलना है दुपहर को,,

तैयार रहना,,, और मुस्कुराने लगे...

मुझे थोड़ा अजीब लगा...

मई चुपचाप बेचैनी आलम में चारपाई में लेट गया, और नींद आने इंतज़ार करने लगा...

आज के लिए बस इतना hi,

थैंक यू सो मच!!

स्टे तुनेड कीप सपोर्टिंग गिव योर बेस्ट रिव्यु,

वेटिंग फॉर योर सुग्गेस्टियन्स...??


 
Ab..tak...

तैयार रहना,,, और मुस्कुराने लगे...

मुझे थोड़ा अजीब लगा...

मई चुपचाप बेचैनी आलम में चारपाई में लेट गया, और नींद आने इंतज़ार करने लगा...

अपडेट - 7 ( ये इलू - इलू क्या है..?)

Ab.Aage.


खत - खत - खत,

मीरा ने दरवाजा खोला और सामने देखकर.....

अरे दादा जी आप हम बस आप hi का इन्तेजाररर कररर ररहे थे.... बोलते बोलते रुक गयी मीरा,

सामने खड़े सख्स को देखकर मीरा एक अचंभित हो गयी..

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कुछ ऐसी hi हालत कबीर की भी थी,

दोनों को ऐसा होने की जरा सी भी उम्मीद नहीं थी...

बिलकुल पगली है क्या मुँह फाड़े देख रही है,

दरवाजे से हटेगी भी या नहीं, अंदर तो आने de....Rachna देवी झल्ला कर बोली..

रचना देवी - नमस्ते भाई साहब आईये अंदर, आओ बीता यहाँ बैठो

कबीर- नमस्ते चची, थोड़ा घबराते हुए बोलै

रचना देवी - कितना बड़ा हो गया कबीर मई तो पहचान hi नहीं payi...kaise हो बीटा

कैसे हो भाई साहब..??

रचना और मीरा दोनों के सेवा- सत्कार में लग गए

खाना खाने के बाद, भुवन सोन बोले...

भुवन - रचना मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है..?? मीरा की तरफ देखते हुए बोले

रचना देवी - बोलिये भाई साहब, जा बेटी मीरा जा के गे को पानी दिखा दे...

भुवन - मई सीधे बात पे आता हु,

मुझे तेरी बेटी मीरा बहुत पसंद आयी है,

मई उसे अपने घर की बहु बना चाहता,

तू बता क्या कहती है..??

कबीर को जोरर का jhatka...dil hi दिल बहुत खुश हो gaya...najre झुके जमीन में गाड़ दी

रचना देवी - मुझे कोई परेशानी नहीं है भाई साहब, आप hi की बेटी है,

आप खुद मीरा से बात कर लो,

भुवन - जा कबीर मीरा को भेज,

कबीर - सुनिए !! आपको पिता जी बुला रहे hai...ghabrate हुए बोलै...

मीरा ने एक नजर कबीर पर डाली और अंदर चल दी...

देख बेटी मेरा कोई जोर नहीं तुझपर,

तू hi अपना फैसला बता दे..

भुवन- ठीक है बेटी मीरा, तू जेक कबीर से बात कर le....aur कुछ दिन में अपना फैसला बता देना...

रचना देवी - रुकिए न भाई साहब अभी तो आये हो..!!

भुवन - फिर किसी दिन Aaunga...ab तो आना- जाना लगा रहेगा...

कबीर - हक्क्लाते हुए,

तुम्हार्रा णाम क्क्क्य है..??

मीरा - सर निचे किये हुए huye...Ghahri साँस लेकर ममीरा नाम है..

.

कबीर - अच्छा नाम है..!!

उस दिन बिन बताये चली गयी थी...?

कल भी नहीं रुकी..??

मीरा - मई चलती माँ बुला रही है....

कबीर - थोड़ा रुको न...

आज फिर aaogi...Nadi किनारे...??

मीरा शर्मा कर भाग गयी..!!

बंसी - कबीर भाई,

बहुत मुस्कुरा रहे हो, वो क्या है जो तुम छुपा रहे हो,. हँसते हुए बोलै...

कबीर - ...........................""!!

बंसी - चौंक कर सच में कबीर !!

कबीर - है रे बंसी,

सर्दी ख़त्म होने के बाद hum-Dono की शादी होगी...!!

बंसी - खुश होकर ओह्ह्ह तेरी तो, मनचाहा मिल रहा बिना किसी परेशानी के...!!

पेड़ की आड़ में तक लगाए गुमसुम कड़ी थी, मेरे आने का अहसास भी नहीं हुआ...

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आज मुझसे पहले hi चली आयी,,,,,

जमीन को घूरते हुए Mand-mand मुश्कुरा रही थी...

उसका यह रूप देखकर मेरा दिल जोररो से धड़कने लगा....

न जाने क्या कशिश थी उसके चेहरे में मई उसकी ओर खिंचा चला gaya....Aur करीब जाकर उसके बगल में खड़ा हो गया....

सशशषस तभी मीरा ने एक सिसकी ली और अपने हाथ को छुड़ाया...

हुआ ये की जब मई करीब आया फिर भी मीरा का ध्यान न टूटा तो मैंने मीरा का हाथ पकड़ लिया था....

सच में तुम्हे भी पहली बार में देखते hi पसद आ गया था मई - कबीर बोलै

मीरा - धीरे से सर को है में हिलाया,

ऐसे hi प्यार भरी बाते होती रही,

नदी किनारे दोनों ek-duje की बाँहों में लिपटे हुए बातें कर रहे थे,

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अब तो मीरा और कबीर का दोनों का प्रतिदिन एहि काम हो गया था, नदी किनारे मिलना

सुबह नाश्ता, दुपहर को खाना देने झोपडी में मीरा hi जाती थी..

जिससदिन उसकी माँ जाती, मुँह फुला लेती,

रचना भी खुश होक जाने देती मीरा को...

दोनों का प्रेम परवान चढ़ता गया

6 महीने तो ऐसे गुज़र गए जैसे कल hi की बात हो दोनों के लिए...

कल कबीर को सोनपुर वापस जाना था..

मीरा - सुनो न,

कल तो तुम चले जाओगे, अब मई अकेले कैसे रहूंगी तुम्हारे बेगैरर..

कबीर - बस 2 हफ़्तों की तो बात है, तीसरे हफ्ते बारात दरवाजे पर hogi...fir हम दोनों एक साथ..

मीरा - धत्त,

एक बात बोलू कबीर, मई न माँ को अकेले यहाँ छोड़के नहीं जा sakti......udas होकर बोली

कबीर - तो क्या हुआ माँ को भी ले लेंगे, वैसे भी वो यहाँ अकेले क्या करेंगी...

मीरा - सच में,

कबीर के बाँहों में लिपटकर बोली, मई तुम्हें बहुत प्यार करती हु...

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कबीर - मई भी तुम्हे खुद से भी ज्यादा चाहता मीरा,

अच्छा अब घर चले, देखो अँधेरा भी होने वाला है, मीरा !! खड़े होकर बोली..

कबीर - जाने का तो मैं नहीं लेकिन जाना hi पड़ेगा,

वैसे भी, बंसी कहते फिरता है की

दिनभर यहीं पड़ा रहता है..

मीरा - हहहह माँ भी एहि कहती है, की मेरी नटखट बेटी अब बड़ी हो गयी,

और अब शर्माने भी लगी है...

दोनों एक- दूसरे का हाथ पकड़कर चल दिए घर की ओर......

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आज मीरा बहुत उदास थी,

चेहरा आज पूरा मुरझाया हुआ tha....Kabeer वापस जो जा रहा था अपने गांव,

कबीर ने एक बार मीरा की तरफ देखा और मुस्कुरा दिया,

फिर रचना देवी के पेअर छुवे,

नमस्ते बोलै और आगे बढ़ गया,

मीरा भी कुछ दूर तक साथ गयी....

कबीर जा चूका था....

मीरा भी वापस चल दी अपने घर की तरफ.....

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"जा रहे हो दूर मुझसे तुम

देखो मेरी जान लिए जा रहे हो...

कैसे रह पाओगे मुझसे दूर तुम

की मेरे अरमान लिए जा रहे हो...

न रह सकोगे तनहा तुम भी मेरे बिना

बेवजह hi ये गुनाह किये जा रहे हो...."



आज के लिए बस इतना hi,

थैंक यू सो मच!!

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Ab.tak...,,,

शैतान इब्लीस जो ध्यान में बैठा था अचानक उसकी आँखे खुल गयी,

इब्लीस क्रोध में जोरर से दाहररा गर्योंन्नणं !!!!!


Ab..Aage.....Update No. 8 ( उफ़ डेविल से मिस्टेक )

अब कबीर वापस गांव जाने देते है ताकि वो शादी की तयारी कर सके तब तक हम इब्लीस और गेरयों का हाल चल जान लेते है...

गेरयों का वीर्य जब क्वीन के अंदर पहुंचा तो अचानक गेरयों को तेज़ झटका लगा और बहुत दूर जा गिरा,

और बेहोश हो गया.....

जब गेरयों को होश aaya....To उसे उसके पिता इब्लीस की तेज़ दाहरर सुनाई di....Jo गेरयों को hi बुला रहे थे....

गेरयों जब अपने पिता के सामने उपस्तिथ हुआ तो...

इब्लीस ने गेरयों की गर्दन पकड़ li....aur वहीँ जमीन में जोरर से पटक दिया.....

आज पहली बार गेरयों ने अपने पिता का इतना भयानक रौद्र रूप देखा था...

आँखों से अंगारे निकल रहे the...krodh से,

अब गेरयों को भी अहसास हो गया था की उससे कोई बहुत बड़ी गलती हो गयी hai...jiske कारन उसका पिता इतना tam-tamaya हुआ है...

इब्लीस - अरे मूरख इतनी शक्तियों का मालिक होकर भी जरा सी बी बुद्धि नहीं है तेरे में...

तेरे अंदर मेरा खून दौड़ रहा hai...Shaitan का अँधेरे का बेताज बादशाह का,

तुझे पता है तेरे अंदर, पिसाच, जीन, मनष्य सबकी शक्तियां Samahi...Sabki छोड़ मेरी शक्तियां ब्लैक एनर्जी समाहित hai....fir तूने कैसे इतनी बड़ी भूल कर दी,

पारी लोक की महारानी से सम्भोग kiya...Jiske पास केवल वाइट एनर्जी है,

जो आजतक तेरे बाप ने भी नहीं किया और करने से डरता था, वो आज तूने कर डाला,

मुर्ख तुझे इसका अंजाम पता है क्या होगा...??

तूने पुरे शैतान लोक का भविष्य खतरे में दाल, खुद मेरा भी,

कहा गयी वो एंजेल क्वीन Elizabeth...Ebils बोलै,

गेरयों - अचानक उसके बॉडी को चारो अऊर सफ़ेद रोहणी फ़ैल गयी, मुझे तेज़ झटका लगा, मई बहुत दूर जा गिरा,

जब वापस गया तो वो वहां नहीं थी.....

इब्लीस - ले गए उसे एंजेल (फ़रिश्ते) उठाकर, और तू पड़े तमाशा देखता रहा,

तेरी एक गलती की सजा पूरी शैतान नगरी उसके मैंने वालों को भुगतनी पड़ेगी...

हवश में इतना अँधा हो गया था की मेरी दी हुयी ताक़त और ज्ञान का तुझे कोई होश न रहा...

ईश्वर को तो मेरी बस एक और गलती की देर थी,

जिसका उन्हें न जाने कितने समय से इंतज़ार था,

वो तो चाहते थे की हमसे कोई भूल हो और उसकी हमें सजा दें,

वो तूने आज कर दी जरर्योंन्नं, इब्लीस फुफकारते हुए बोलै बड़े hi कठोर लहज़े में..

अब जाकर गेरयों को भी अंदाजा हो गया था की डेविल का फ्यूचर अब खतरें में है,

गेरयों - डर से थर्राते हुए बोलै, अब मई क्या करू पिता जी..??

वो सब करने से पहले पूछा था kya..mujhse जो अब पूछ रहा है...?? इब्लीस दहाड़ते हुए बोलै..

इब्लीस - मई पहले वाइट एनर्जी का धारक था, और बाद में डेविल बना, मुझमे आज भी वाइट एनर्जी बाकी है,

लेकिन तू Geryon...Kewal ब्लैक एनर्जी का धारक है, तू केवल काली शक्ति का मालिक है,

तुझ पर hi तो पूरी शैतान प्रजाति का भविष्य टिका था,

तू जिससे भी चाहे तू वैसा करवा सकता tha..Apni काली शक्ति के दम पर

लेकिन मई वाइट और ब्लैक दोनों एनर्जी का उपासक हु, मई सिर्फ प्राणियों को बहका सकता हु बुरे कर्मो के लिए,

बाध्य नहीं कर सकता, वो उस प्राणी का फैसला होता है की वो क्या चुनेगा...?? अच्छा या बुरा..??

लेकिन तू किसी को बी बाध्य कर सकता है बुरे कर्मों के लिए

लेकिन तेरी इस भूल सबकुछ तहस- नहस कर दिया,

क्या सोचके मैंने तुझे बनाया tha....aur तूने क्या से क्या कर दिया...??

गेरयों - लेकिन अब मई क्या करू..??

कैसे सुधारू अपनी भूल को..??

इब्लीस - 3 दिन सिर्फ 3 दिन का वक़्त है तेरे पास,

किसी भी तरह करके उसे खोज और उसे बंदी बना ले अपनी शक्तियों के चक्रव्यूह में फांसकर उसे पटल लोक के अनंत गहरी खायी में छिपा दे,

और उसके ऊपर अपनी सम्पूर्ण शक्ति का कवच लगा दे जिससे की उसका Nam-o- निसान तक बाकी न रहे....

गेरयों - ठीक है पिता जी, मई उसे जरूर खोज लूंगा और कैसा भी कर लूंगा.. किन्तु..??

इब्लीस - क्या..??

गेरयों - आपने कहा सम्पूर्ण शक्ति का सुरक्षा कवच....??

इससे तो मेरी शक्तियां ख़त्म हो Jayengi..Mai तो एक इंसान बन jaunga..jo सिर्फ शैतान की उपासना करता है,

इब्लीस - इतना आसान नहीं है उसे पकड़ पाना, सायद उसे अब पकड़ने में hi तेरी सम्पूर्ण शक्ति नष्ट हो jaye...Kyuki अब तू उसे मार नहीं सकता..??

वर्ण तू भी मर जायेगा...

मेरा कहा गया ek-ek कथन सत्य है और ऐसा hoga...tu भी देखेगा इसका अंजाम

इब्लीस - अब तेरे किन्तु का जवाब,

शक्तियां एकबार ख़त्म हो गयी तो उनकी पुनः प्राप्ति की जा सकती है,

किन्तु मौत होने पर दुबारा नहीं जीवित किया जा सकता hai....Yah एक कटु सत्य..

गैरों - मार क्यों नहीं sakta...aisa क्यों..??

इब्लीस - तू मेरा अंश है, इतना Na-samajh कैसे हो सकता है...??

आज के लिए बस इतना hi,

थैंक यू सो मच!!

स्टे तुनेड कीप सपोर्टिंग गिव योर बेस्ट रिव्यु,
 
Ab..tak...

गैरों - मार क्यों नहीं sakta...aisa क्यों..??

इब्लीस - तू मेरा अंश है, इतना Na-samajh कैसे हो सकता है...??


Ab..Aage...Update No.9 (इब्लीस इस गॉन )

इब्लीस - एलिज़ाबेथ को तू जनता hi है न..?? वो क्या है..?

""एंजेल है, एंजेल क्वीन पुरे वाइट एनर्जी मालिकिन..."",

तेरा एलिज़ाबेथ के साथ सम्भोग करने से काफी कुछ बदल गया है,

वो अपनी शांति खो चुकी थी,

सुरक्षा कवच बनाने में,


लेकिन तेरी वजह से उसकी शक्तिया वापस आ गयी है,

पहले से भी ज्यादा पावरफुल,

लेकिन बात यही नहीं ख़त्म होती,

तेरे कारन उसकी शक्ति कुछ भयंकर बदलाव हुए है,

जो की मेरी समझ के परे है...

जिसका मुझे अंदेशा तो है,

लेकिन सच नहीं जान प् raha...koi ताक़त मुझे ुस्तक पहुँचने से रोक रही है,

अब वो मेरी पहुँच से बहार जा चुकी है,

शायद मई खुद नहीं समझना चाहता और क्यों नहीं..?? इसका मुझेबज्ञान नहीं,

तू खुद सोंच, जिसे मई नहीं

खोज प् रहा, भला तू क्या कर पायेगा...??

"" फिर भी मई तुझे कुछ दूंगा..??""

एक अंतिम बार,

अब उस एलिज़ाबेथ के गर्भ के अंदर,

1. गॉड पावर - पुरे वाइट ेनेगय

2. Eblis(Meri) की शक्ति- वाइट एंड ब्लैक मिक्स एनर्जी

3. एंजेल पावर - उसकी खुद की शक्ति

4. Geryon(teri)- पुरे ब्लैक एनर्जी,

(जीन + पिशाच + Man)+Jinse भी तूने सम्भोग किया सबकी पावर अब उसमे समाहित है,

(और तू कितना बड़ा हवसी है, मुझसे ज्यादा तुझे कौन जानेगा, अब कोई प्रजाति बची कहा है तुझसे, एंजेल को भी लपेटे में ले लिए)

अब तू hi बता मुर्ख तू उसे कैसे मार सकता है..

सम्पूर्ण अलौकिक शक्तियां तेरी राह पे आड़े आएगी,

तेरा उस तक पहुँच पाना असंभव है..!!

अब सायद तुझे तेरा अपराध ज्ञात हो गया हो,

की तूने क्या किया है..??

गेरयों - छमा करें पिता जी,

आज्ञा दें मुझे जाने की...,??

अभी नहीं,

इब्लीस - अब बिलकुल ध्यान से सुन्ना मेरी बात,

अब दुबारा नहीं समझाऊंगा...

जो भी मैंने तुझे कहा है जैसा भी करने ko...Agar तू असफल रहा तो,

जैसे मैंने एलिज़ाबेथ को क़ैद करने के लिए समझाया है,

असफल होने पर तुझ पर भी लागु होगा...

चौथे दिन एलिज़ाबेथ को या

फिर tujhe(Geryon) को,

पटल लोक के अनंत गहराई में सम्पूर्ण शक्ति के साथ क़ैद होना होगा...

वर्ण उस एलिज़ाबेथ का तो कुछ भी न होगा...

किन्तु तू पांचवे दिन सम्पूर्ण रूप से नष्ट हो जायेगा

और तेरे hi साथ तेरी सेना और तेरी डेविल पावर को मैंने वाले

संपूर्ण प्रजाति का अंत हो जायेगा...

इसलिए अगर खुद को और खुद की पावर को बचाना है तो या तो उसे कैद कर या फिर तू खुद क़ैद हो जा.....

समय आने पर एक बार फिर तू आजाद hoga...Kya पता उससे भी ज्यादा विकराल शक्ति लेकर....

गेरयों - जी पिता जी, धन्यवाद् !!

इब्लीस - अब से तेरा मेरा संपर्क ख़त्म आजीवन अनंत काल के लिए,

अब तू कभी भी मुझ तक नहीं पहुंच पायेगा,

खुद को जीवित रखना है तो मेरे बताये ek-ek पहलु पर गौर करना और हर एक बात का पालन करना....

एकबार गेरयों को गले lagaya..uske सर पे हाथ फेरा,

""उसे खोजने जाने से पहले ध्यान में बैठकर अपनी ऊर्जा को महसूस कर, मानसिक तरंगो के जरिये से ढूंढने की कोसिस कर तभी तू सफल होगा,,"" इब्लीस इतना बोलकर शांत हो गया,

इब्लीस भी ध्यान में बैठ gaya...Aur गायब हो गया हमेशा - हमेश के लिए...

.

.

.

.

आज के लिए बस इतना hi,

थैंक यू सो मच!!

स्टे तुनेड कीप सपोर्टिंग गिव योर बेस्ट रिव्यु,

 
Ab..takk...

बस 2 हफ़्तों की तो बात है, तीसरे हफ्ते बारात दरवाजे पर hogi...fir हम दोनों एक साथ..


अपडेट No.10 (सुपररूपडते)

(सुहागरात)

Ab..Aage...



"" सुहाग रात है घूँघट उठा रहा हूँ मैं

सिमट रही है तू शरमा के मेरी बाहों में ""



खुशबु, रौशनी, फूलों से पूरा कमरा जगमगा रहा था,

आज कमरे का मौसम बहुत सुहाना था,

Bheeni-bheeni खुशबु फैली हुयी थी,

मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर rahi...Jaise बार- बार मुझे खींच रही हो अपनी तरफ,

मई धड़कते दिल के साथ कमरे में प्रवेश किया,

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क्या खूब नज़ारा था...

""गुलाब के फूल से सजे बिस्तर में,

लाल सुर्ख जोड़ा पहने हुए, घूँघट ओढ़े खूबसूरत दुल्हन"", "'मीरा'"

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अपने हाथो को दोनों पेअर के घुटनो ऊपर रखे बैठी हुयी थी,. जैसे किसी के आहात का इंतज़ार कर रही हो....

मई भी जाके बीएड में मीरा के पास बैठ गया,

मीरा को घूँघट के ऊपर से निहारने लगा,

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और धीरे से उसके हाथों में अपने हाथ रख दिए,

वो थोड़ा सा घबरा गयी और हाथ पीछे कर लिए,

मीरा अचानक से कड़ी हो गयी,

और चलते हुए टेबल पास गयी,

मई थोड़ा घबराया हुआ भौचक्का देखता रहा, की अचानक से ये दूर क्यों भाग रही,

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ये लीजिये पहले दूध पी लीजिये, बीएस इतना बोल के शर्मा गयी,

और वापस आकर बैठ गयी....

तब जाकर मुझे तसल्ली हुयी,

कबीर - मीरा, थोड़ा सा तुम भी पियो न..??

मीरा - ..........

कबीर - अच्छा बस एक बार अपने होंठो से लगा लो,

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कबीर - धन्यवाद् !!

कबीर ने धीरे से घूँघट को उठाया,

जैसे कोई अप्सरा स्वर्ग लोक से उतर आयी हो,

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नजरें झुकी हुयी, सुर्ख होंठ,

गालों में लाली, बाला की खूबसूरती आज उत्तरी थी मीरा में, मई तो बीएस घूरते रह गया.....

मई तो उसे देखती hi पहली मुलाक़ात के हसीं वादियों में खो सा गया था,

""कितने तक पढ़ाई किये हो..??"", "मीरा बोली",

अचानक से मुझे होश आया..

कबीर - ये कैसा सवाल है..?? मुझे इसकी जरा सी भी उम्मीद न थी....

मीरा - पहले पूछना भूल गयी थी न,

सुना है सोनपुर के लोग पढ़ते नहीं....??

कबीर - है तुमने सही सुना है,

लेकिन मेरी बात अलग है मई सबके जैसा नहीं,

पिता जी ने मुझे, हिंदी पढ़ना सिखाया था,

और थोड़ी सी इंग्लिश के कुछ शब्द आते है, जो दूसरों से sun-sun के आने लगे,

समझ लो थोड़ा- बहुत पढ़ना आता है...,,

लेकिन ये सवाल क्यों...?? वो भी आज,

मीरा - और नहीं तो क्या..??

मई किसी अनपढ़ से थोड़े न ब्याह करती,,

अपने बच्चों को गंवार थोड़े न बनाना है,

""धत्त ये क्या बोल गयी मई, मीरा शर्मा गयी"",

कबीर - मीरा की बाटे सुनकर मुस्कुराने लगा,

अरे जान, पहले सुहागरात तो मानाने दो तभी तो बचे होंगे...??

और तब जाकर पढ़ा पाओगी अपने बच्चों को

तुम तो मेरी सुहागरात में hi मुझे पढ़ने लगी....

मीरा - शर्म से पानी -पानी हो गयी,

सॉरी !! जल्दबाजी में मिस्टेक हो गयी...

कबीर - क्या.??

तुम्हें इंग्लिश भी आती है, कहा से सीखा...

मीरा- गांव में विदेशी आते थे उन्ही लोगो से,.

अब आपको भी पढ़ाऊंगी और आपको एक मॉडर्न मन बना दूंगी...

कबीर - ठीक है मेरी जान,

पहले जिस काम क लिए हम यहाँ बैठे है वो कर लें...

वर्ण दुबारा ये रात लौट के न आएगी

मीरा - मैंने कब रोका hai...hadbada गयी,

""हे भगवान ये क्या बोल दिया"",

अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा liya..Meera ने

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मैंने धीरे से उसके हाथों हटाया,

और उसके चेहरे की मासूमियत का आनंद लेने लगा....

अब kahani.....Meera की जुबानी

मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर मेरे गाल पर किश किया और फिर मेरे बहुत नज़दीक आकर बैठ गए,.

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और बैठने के बाद नेरी आँखों को किश किया और कहने लगे,

इस दिन का वो तब से इंतज़ार कर रहे है जबसे की उन्होंने मुझे पहली बार देखा था.....

मेरे हाथों को अपने हाथ में लेकर बोले,

अगर मई थकी हुयी हु तो हम सो जाते है..??

मीरा - नहीं,

मैं ये पल सोकर गवाना नहीं चाहती...

इस रात की एक्ससिटेमेंट hi अलग होती है..

मैं अपनी सुहागरात को लेकर बड़ी उत्सुक थी और न जाने मेरे मन में क्या क्या चल रहा था....!!

हम दोनों एक दूसरे को किश करने लगे थे,

उन्होंने मेरे पीठ, कमर पर अपनी उँगलियाँ फेरनी शुरू कर दी थी,

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मेरे हाथ उनके कन्धों पर थे और उनको मई अपनी तरफ खींच रही थी,

मैंने महसूस किया की उनकी जीभ मेरे होंठों में से मेरे मुँह के अंदर जाना छह रही है,

मेरे होंठों को खोलते हुए जीभ मेरे मुँह में चली गयी,

और Ek-dusre का मधुर रसपान करने लगे,

कबीर के हाथ मेरे पल्लू में से होते हुए मेरी पीठ, कमर पर होते हुए मेरे स्तनों पर पहुँच gaye....mai जोरर से चिहुँक उठी अह्ह्ह उम्म्म

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आज मई पहली बार किसी के सामने बिना कपड़ो के होने वाली थी,

15साल की होने के बाद माँ ने भी नहीं देखा था,

आज एक पुरुष को पूर्ण नग्न देखने का मौका मिलने वाला है,

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कबीर ने मेरे पल्लू को मेरे कन्धों से हटाया,

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एक बार फिर मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और Ek-dusre की आँखों में देखने लगे और साथ hi कबीर ने मेरे ब्लाउज के हक़ खोलने शुरू कर दिए,

और फिर मेरे कन्धों पर से होते हुए उतर दिया....

अब मई ब्रा में थी, जिसमे मेरे स्तन बहार आने को बेकरार थे.

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फिर कबीर ने मेरी ब्रा का हक़ भी खोल दिया और मेरे स्तन पर से हटा दिया,

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मेरे निप्पल उत्तेजना से खड़े हो चुके थे,

कबीर के हाथों ने मेरे स्तनों को अपनी हथेलियों में भरा और और उन्हें किश करने लगे...

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कबीर ने मेरे स्तनों को सहलाना शुरू कर दिया,

हम दोनों की सांसें तेज़ चलने लगीं..

कबीर मेरे बूब्स के साथ खेलने लगे भींचने लगे,

मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा,

कबीर ने एक निप्पल को मुँह में रखा और उसे चूसने लगे,

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हे! bhagwan....bata नहीं सकती थी कितना मज़ा आने लगा,

मैंने अपना सर उत्तेजना और आनद के मरे पीछे को कर लिया....

पहली बार कोई मेरे साथ ऐसा कर रहा था,

तभी अचानक मेरे शरीर उत्तेजना वश अकड़ने लगा और एक जोर्डरर अह्ह्ह के साथ मई निढाल सी हो गयी...

मुझे मेरी पंतय में Geela-pan महसूस हुआ,

ये मेरा पहला ओरगासूम था,

कबीर ने अपने

हाथ निचे तक बढ़ाये और पेटीकोट नाद बकौल दिया,

और अपनी उँगलियों का स्पर्श योनि पर दिया,

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मेरे बदन में सिरहन सी दौड़ गयी,

पहले कमर पर फिर योनि पर मुँह रखके

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मेरे हिप्पस को पकड़ा और अपने चेहरे को मेरी योनि से सत्ता दिया और चूमने चाटने लगे,

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अपनी एक ऊँगली भी योनि में दाल दी और मेरी क्लाइटोरिस को रगड़ने लगे....

अह्ह्ह्ह ुहम्म एईई

मेरा बुरा हाल tha...mere मुँह से उहहं अह्ह्ह की आहें निकलने लगी,

मई, मेरी योनि पर किये जा रहे हमले का मज़ा लेने लगी...

हम दोनों आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो गए...

कबीर मेरी आँखों में देखने लगा जैसे इजाज़त मांग रहा हो आगे बढ़ने की,

मैंने कबीर के सीने में अपने हाथों को फिरना शुरू कर दिया,

मेरी जांघों को थोड़ा सा फैला दिया,

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मुझे अपनी योनि पर गर्म और मुलायम लिंग महसूस हुआ,

कबीर धीरे से अपना हथियार अंदर डालने लगा,

फिर वो थोड़ा सा पीछे हुए और अंदर की ओर बढे...

मई अपनी योनि के अंदर उस गहराई में हो रहे अनुभव मज़ा लेने लगी,

यहाँ तक की लिंग को अपने छूट के दीवारों में महसूस करने लगी,

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एकबार फिर जोरर का धक्का दिया,

मेरी आँख से आंसू निकल आये और मैं जोरर से चीख उठी,

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सायद मई अपना कौमार्य खो दी,

लिंग मेरे अंदर था,

कबीर रुक gaya....aur मुझे सहलाने लगा,

मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए,

एक हाथ मेरी गर्दन को तो दूसरा हाथ मेरे बूब्स को मसल रहे थे,

मेरे दर्द को मज़े में बदल दिया,

मैं अपने हिप्स को उठाकर आगे बढ़ने का संकेत दिया....,

जब जब लिंग मेरी योनि की गहराई तक जाता मेरे पुरे शरीर में San-Sanahat सी दौड़ जाती,

मैंने अपने नाखुनो को कबीर की पीठ में गाड़ने लगी,

और कबीर के हिप्स को एक हाथ से पकड़ के जोरर लगाने लगी,

""मई ज्यादा देर नहीं रुक sakta....mera पहली बार hai.."",Kabeer ने कहा.

"मेरे अंदर hi निकाल do...mai भी यही चाहती हूँ"", मैंने कहा.

कबीर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी,

मई भी अपनी हिप्स उठाकर पूरा साथ देने लगी,

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कबीर जोरर से हांफने लगा लगा,

मेरी सांसे गर्म होती गयी, अह्ह्ह्ह निकलती रही

और हम दोनों एक साथ छींक उठे अह्ह्ह्हह्हह!!!

और Hum-dono साथ में झाड़ गए,

वीर्य से मेरी योनि पूरी भर गयी,

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गहराई तक मिलने वाले सुख का आनंद की प्राप्ति हुयी,

पहली बार...

और हम दोनों निढाल हो गए,

और अपनी सांसों को कण्ट्रोल करने लगे...,

थोड़ी सी जान बची थी शरीर में,

Hum-dono बाथरूम गए,

कबीर ने प्यार की निशानी को साफ़ किया,

मीरा और कबीर एकदूसरे की बाँहों में सो गए......

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""वो मीठे - मीठे होंठ,

मादक सा जुल्फोंका साया,,

आंखोंसे रिस्ता काजल,

सुर्ख लाल पड़े हुए ‍गाल,,

चंडकी halki-halki ✨रौशनी में,"",

तेरे "इश्क़" को 'नमकीन" बनाये जा रही थी...!!""

आज के लिए बस इतना hi,

अच्छा लगा हो तो कमेंट करके अपनी रे दें,

कीप रीडिंग एंड सपोर्टिंग..!!

 
बहुत बहुत शुक्रिया आसिफ भाई !!

"तेरे इश्क़ में" मेरी फवौरीते में से 1 है,

मेरे थ्रेड्स में आपका स्वागत है,

थैंक्स फॉर रिव्यु,

मैंने सिर्फ इंसान और शैतान की पैदाइश को असली दिखा,

फिर आगे कहानी पूरी काल्पनिक हो गयी...

नेक्स्ट 2 अपडेट के बाद कोई रोले नहीं,

अगर मुझे कोई अच्छी सोंच मिली तो मई एडिट कर दूंगा

थैंक्स फॉर किंग
 
Abb..takk...

Hum-dono बाथरूम गए,

कबीर ने प्यार की निशानी को साफ़ किया,

मीरा और कबीर एकदूसरे की बाँहों में सो गए......

अपडेट No. 11 (Change-Life स्टाइल)

Abb..Aage...



चिड़ियाँ Chah-chaha रही थी, शोर मचा कर जैसे बता रही हो सुबह हो चुकी है,

सूरज की किरणों ने कबीर की आँखों में दस्तक दे दी,

जिससे कबीर की आँखे खुल गयी,

आँखें खोलते hi सबसे पहले कबीर की नज़र मीरा पर पड़ी,

जो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी,

उसका चेहरा सूरज की किरणों से और भी ज्यादा Khila-Khila सा लग रहा था,

कबीर को अपनी बाँहों में जकड़े हुए बड़ी hi मासूमियत से सो रही थी,

कबीर ने धीरे से मीरा की पलकों को चूम लिया अपने होठो से,

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फिर धीरे से उसके Surkh-Gulaab से लाल गाल को भी चूम लिया,

मीरा कश्मशा गयी और आँखें खोल दी,

कबीर को, खुद को घूरते हुए पाया जो मुस्कुराते हुए घूर रहा था,

मीरा - गुड मॉर्निंग !!

कबीर - ऐसे थोड़े न विश किया जाता हो,

मीरा - तो फिरर कैसे..??

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कबीर ने आगे बढ़कर,

मीरा के गुलाब की पंखुड़ी जैसे नरम और शहद जैसे मीठे होंठो को अपने होंठो में कैद कर लिया और चूसने लगा,

पहले मीरा थोड़ा लड़खड़ाई लेकिन फिर कबीर का साथ देने लगी, और दोनों इस ृषभरे आनद का मज़ा उठाने लगे,

जब दोनों की सांस फूल गयी तो अलग हुए,

कबीर - मेरी जान !!ऐसे किया जाता है,

मीरा - धत्त !! बेशरम कहीं के, और शर्मा गयी

नयी सुबह का आगाज़ दोनों एक दूसरे क होठो को चूमकर किया,

ऐसा hi प्यार भरा एक हफ्ता- गुज़र गया,

अब मीरा की माँ रचना देवी भी आकर एहि सबके साथ रहने लगी,

""आज कबीर और मीरा माना गांव जा रहे थे"", 'कैथरीन से मिलने,

कैथरीन एक ब्रिटिश प्रोफेसर थी, जो jagah-Jagah जाकर िंविरणोमेंट के बारे रेसेअर्चे करती थी,

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लेकिन पिछले 1 साल से माना गांव में hi रुकी हुयी है,

मीरा से अच्छी दोस्ती है, क्युकी मीरा और कैथरीन sath-sath aas-pas के जंगल में घूमने और प्रकृति की सौंदर्य को निहारने जाया करते थे !!

मीरा ने, कबीर और कैथरीन, दोनों को Ek-dusre का परिचय करवाया,

और अपने आने का कारन बताया,

पहलेतो कैथरीन ने मन किया,

लेकिन मीरा ने कहा वो जब तक यहाँ है तब तक तो हमें कुछ सीखा सकती है,

मीरा ने किसी भी तरह करके कैथरीन को टीचिंग के लिए राज़ी कर लिया,

घर के सारे काम से फारिग होकर,

कबीर और मीरा प्रतिदिन दुपहर में सोनपुर से माना गांव आते स्टडी के लिए,

और शाम को वापिस घर चले जाते,

अब तो दोनों का एहि रूटीन हो गया था,

कैथरीन, मीरा और कबीर को लैंग्वेज और कम्युनिकेशन सीखा रही थी,

और साथ में बेसिक बुसिनेस्स नॉलेज भी देती जा रही थी,

ऐसे hi दिन गुज़रते जा रहे थे, और मीरा और कबीर का प्यार भी समय के साथ और गहरा होता जा रहा था,

अब कबीर और मीरा की जिंदगी पूरी बदल चुकी थी,

इंग्लिश में अच्छा नॉलेज के karan..Life -स्टाइल भी चेंज होने लगी,

क्युकी कबीर और मीरा दोनों ट्रैवेलिंग एजेंट बन गए थे,


दोनों माना पॉइंट से फोरेइग्नेर्स को पिक करते और Tour-Guide करते,

पहाड़ी इलाकों में एडवेंचर प्लान करते,

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जिससे दोनों को फोरेनर से अच्छी खासी Moti-Rakam वसूल होती थी,

सब कुछ बढ़िया और khushi-Khushi चल रहा था

वंही अब तीनो की खूब अच्छी जमने लगी थी,

स्टडी करते,

Mauj-Masti, गांव की पहाड़ियों में जाकर एडवेंचर ट्रिप भी करते,

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लेकिन इस बीच बंसी थोड़ा door-door रहने लगा था, कबीर से,

क्युकी अब कबीर के पास वक़्त hi नहीं था,

बंसी के साथ समय बिताने के लिए,

शिकार पर जाने के लिए,

बीच के कुछ महीनो में मीरा, कबीर और बंसी सिर्फ तीन hi बार गायें होंगे शिकार पर,

पुरे एक साल हो गए थे दोनों को कैथरीन के पास आते हुए,

और 3मोनथस Tour-Guide करते हुए,

कैथरीन बहुत ज्यादा सुरप्रीसेड हुयी कबीर और मीरा की लर्निंग स्किल देखकर,

1 साल के काम समय में मीरा और कबीर की इंग्लिश में शानदार पकड़ हो गयी थी,

जितनी भी स्किल कैथरीन ने सिखाया सब पर दोनों पास होते गए,

कैथरीन का वीसा एक्सपिरे हो रहा था,

इस्सलिये उसे 2 दिन बाद वापस लंदन जाना पद रहा था,

इस खबर से तीनो को बहुत दुःख हुआ,

कबीर और मीरा, कैथरीन को सोनपुर लिवा लाये घूमने के लिए,

जिसे देखकर कैथरीन को बहुत हैरानी हुयी की ऐसी भी कोई जगह है यहाँ, और लोग भी रहते है,

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सोनपुर में मिलकर सबने कैथरीन को खूब घुमाया और पिकनिक भी की,..

अगले दिन सबसे मिलकर,

कैथरीन देहरादून के लिए रावण हो गयी,,,

Meera-Kabeer दोनों ने मिलकर खुद का एक बांग्ला बनाया लकड़ी और पत्थर का,

जिसमें बंसी ने बहुत मदद की,

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बंगले बहार एक बढ़िया सा बैठक बनाया गया,

अब तो पिता जी की ठाठ hi निराले हो गए थे,

जिसमे अब बैठके

पिता जी,

अब पूरा दिन दरबार लगाए बैठे रहते और मुखियागिरी झड़ते थे,

मीरा और कबीर की

शादी के 1.5 साल हो चुके थे,

अब तक तो मीरा को माँ बन जाना चाहिए था,

किन्तु कबीर अभी इस जिम्मेदारी बचना चाहता था,

वो अभी मीरा के साथ ऐसे hi प्यार भरे लम्हे गुज़ारना चाहता था,

डेली स्पॉट से फोरेनर को पिक करते और Jagah-Jagah घूमते रहते थे,

इस पर कबीर और मीरा ने अपनी बुसिनेस्स स्किल उसे की,

और फोरेइग्नेर्स को सीक्रेट एडवेंचर्स ट्रिप के बारे में बताते जिसकी कीमत बहुत ज्यादा वसूलते थे दोनों, इतर ट्रिप का 2.5गुना क्युकी इसमें खतरा रहता था,

और उन्हें सोनपुर के सीक्रेट एडवेंचर्स गाइड करते !!

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दोनों ने मिलकर खुद की एक अलग पहचान बना ली,

इन् 2 सैलून में कबीर और मीरा ने काफी Jama-Punji बना ली,

खुद के बुसिनेस्स प्लान से,

अलग -अलग देश से आये हुए डिफरेंट टाइप्स के के लोंगो के बीच पूरा दिन रहने के कारन इनका भी दुनिया देखने का नजरिया बदलता गया,

बहुत सी बातें सिल्हने और जानने को मिलती थी,

बुसिनेस्स को आगे बढ़ने के बहुत से आईडिया मिलने लगे,

कुछ ऐसा हुआ जिससे सब धरा का धरा रह गया....

दोनों की ज़िन्दगी बहुत hi अच्छी जा रही थी, कोई परेशानी नहीं थी,

लेकिन समय कब बदल जाये किसे क्या पता..??

ऐसे hi एक दुखद घटना कबीर के साथ हुयी जिससे वो पूरी तरह से टूट गया था....??

आज के लिए बस इतना Hi,

कमेंट कीजिये और बताएं कैसा लगा अपडेट...??



 
Abb..takk...

इब्लीस ध्यान में baitha...Aur गायब हो गया हमेशा - हमेश के लिए......

अपडेट No. 12

Abb....Aage....

इब्लीस का ऐसा करने का उद्देस्य खुद के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए था,

क्युकी इब्लीस को भविस्य की झलक दिख चुकी thi...bhala उससे कौन सी बात छुपी जो की खुद sarv-Shaktiman की छाया में रह चूका हो,

क्युकी वो,

इब्लीस और गॉड के बीच हुयी डील को नहीं तोड़ सकता था, गेरयों की हेल्प करके...

अगर इब्लीस खुद को गेरयों से अलग न करता तो,

भविस्य में फिर से ब्लैक एनर्जी को त्याग कर वाइट एनर्जी को अपनाना पड़ता,

खुद को फिर से गॉड की उपासना के लिए बाध्य होना पड़ता,

जो की इब्लीस को कभी गवारा नहीं,

जो पहले न किया भला वो फिर कैसे कर सकता है...

इब्लीस की लड़ाई बिलकुल हटके hai...wo किसी लड़ता nahi...Bas लड़ने के लिए बहकता....

"" इब्लीस तो एक विचार है बहुत बुरे पापों में लिपटे हुए विचार,.....

और विचार कभी नष्ट नहीं hote....bas बदल जाते हैं...""

""कैसे तोड़ दे खुद का घमंड अपने बेटे आगे,

और झुका दे अपना सर एक इंसान के आगे""


"""डर हमेशा आपको एक कैदी बना कर रखेगा,

जबकि खुले विचार आपको एक बादशाह बना कर रखेंगे!""",,Aur mai to Badshah hu Eblis muskuraya !!

×थे एन्ड×




इब्लीस के जाने के बाद गेरयों को अहसास हुआ क्यों उसके पिता ने एक अंतिम बार गले लगाया,

और सर पर हाथ फेरा,

गेरयों की आँखों से आंसू बाह रहे थे,

""पहली बार एक डेविल रोया था,

पहली बार दुःख का अहसास हुआ की दर्द क्या होता है,...""

जो की उसने अपने पिता के खो देने के बाद महसूस हुआ....

इब्लीस जाते - जाते गेरयों से अपनी तमाम यादें, ज्ञान, खुद से संपर्क की एनर्जी, सब कुछ ले गया,

अब गेरयों के पास कुछ बचा तो सिर्फ उसकी पावर थी,

या फिर इब्लीस का दिया हुआ अंतिम Margdarshan....Jispar अब गेरयों को अमल करना था और खुद का अस्तित्व बचाये रखना था...

गेरयों साड़ी dukh-dard को भूलकर एकबार बहुत जोरर से अपनी पूरी ताक़त दाहररा.,,, वहहहहहहाआ

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जिससे सम्पूर्ण शैतान लोक थर्रा उठा वह तो जैसे भूचाल आ गया था,

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इस दाहरर की गूँज सम्पूर्ण ब्रम्हांड में गयी और भूकंप के झटके महसूस हुए...

आज गेरयों को अपनी एक्चुअल पावर का अहसास हुआ की वो क्या चीज़ है....

गेरयों अब शांत हो gaya....aur ध्यान में बैठ गया एलिज़ाबेथ को ढूंढने लगा.....

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गेरयों के शांत होते hi एक्पाल के सम्पूर्ण ब्रम्हांड में सन्नाटा छ गया, हवा थम सी गयी,

न कोई shor...Na किसी प्रकार की हरकत जो जहा था सब उसी जगह एकदम रुक सा गया....

ये एक शांति थी या फिरर कोई भयावह तूफ़ान आने का संकेत......

अभी के लिए बस इतना hi,

बस यूँही साथ बने रहें.......

और मई सबको ले जाऊंगा एक नयी दुनिया में..... ख्वाबों के दुनिया !!
 
Abb...takk..

दोनों की ज़िन्दगी बहुत hi अच्छी जा रही थी, कोई परेशानी नहीं थी,

लेकिन समय कब बदल जाये किसे क्या पता..??

अपडेट No..13

Abb...Aage...


कबीर और मीरा दोनों सुकून की नींद सो रहे थे ,

बहार रोने की और शोर करने की आवाजें आ रही थी जिससे दोनों की आँखें खुल गयी,

बहार पदोष में दो बच्चों की मौत हो गयी थी,

खांसी और सांस रुकने के कारन,

कबीर और मीरा भी चल दिए उनके दुलह में,

बच्चों की माँ की बातें सुनकर....

कबीर को वह का हाल देखकर कुछ अजीब लगा,

तब कबीर का दिमाग में ख्याल आया कई दिनों से पिता जी को भी खांसी आ रही है,

बीमार भी दिख रहे है,

और एहि हाल पुरे गांव में है,

लेकिन पूछने पर हमेसा ऐसे hi मौसम बदलने की वजह से कहकर ताल देते थे,

आज दोनों काम पर नहीं गए,

कबीर पूरा दिन गांव घूमकर हालात का जायज़ा लेने लगा,

शाम को सब ने मिलकर

बचो का Antim-Sanskar किया गया,

कबीर ने शाम को पिता जी से कह कर सभी गांव वालों को इकठ्ठा करवाया,

कबीर - जैसा की आप सबको पता है गांव की आधे से ज्यादा लोगों को इस खांसी और साँस लेने की तकलीफ वाली बीमारी ने घेर रखा है,

जिनको भी ये समस्या है वो दाहिनी तरफ खड़े हो जाएं बाकी बाएं तरफ,....

दाहिने तरफ 110 के करीब जिसमें, बंसी और भुवन सोन भी थे,

और बाएं तरफ 145 लोग जिसमें मीरा, कबीर और रचना देवी थी,

कबीर - ये कोई छोटी बीमारी नहीं,

यह एक महामारी है जो बीमार के पास रहने से फैलती है,

मैंने आज पुरे गांव में घूमकर सबका हाल जाना है..

तुम सबको आधुनिक इलाज़ की जरुरत है,

यह बीमारी बढ़ चुकी है जो की अब सायद Jadi-Buti से न ठीक हो,

तुम सबको कल मेरे साथ शहर चलना होगा,. इलाज़ के लिए,

सबने जाने से मन कर दिया, बोले की हम बाहिरि इलाज़ नहीं करेंगे,

भुवन सोन ने भी साफ़ साफ़ मन कर दिया शहरी इलाज़ से,

मेरी बात को समझिये,

अगर ज़िंदा रहना है तो, मेरा कहना मान लीजिये


कबीर सबको Baar-Baar समझाता रहा,

किन्तु कोई भी राज़ी न हुआ,

बैठक समाप्त हो गयी सब apne-apne घर चले गए ..!!

रात में कबीर, मीरा सुनो,

कबीर - क्यों न ऐसा करें हम किसी डॉ. को शहर से यहाँ ले आएं...??

मीरा - आईडिया तो अच्छा है, लेकिन क्या डॉ. यहाँ आने के लिए राज़ी होगा,

कबीर - पैसा है तो सब कुछ है,

लेकिन मई तो कभी शहर गया नहीं,

मीरा - मई चलूंगी आपके साथ मई जा चुकी हु,

मेरी मौसी की बेटी वहां रहती है, उनसे भी मिल लेंगे,

कबीर - तो ठीक है कल सुबह जल्दी चलना है रेडी रहना,

दोनों एक दूसरे को बाँहों में भरके सो गए,



अगले दिन सुबह जल्दी कबीर और मीरा दोनों hi देहरादून के लिए निकल गए,

दुपहर में अपने साथ एक प्राइवेट डॉ. को मोती रकम देकर साथ ले आएं,

जो की आने में बहुत नाटक कर रहा था,

कबीर को मीरा के मौसी की बेटी से मिलने जाना अभी उचित न लगा,

कबीर और डॉ. ghar-ghar जाकर मरीज़ को देखने लगे,

डॉक्टर, कबीर से,

तुमने बहुत देर कर दी, इनको यह बीमारी पुरे 6 महीनो से है..

कबीर - शॉक होकर,

लेकिन डॉ. साहब ये तो मैंने सिर्फ 15 दिनों से गौर किया है,

मेरे पिता जी भी 15 दिन से hi बीमार दिख रहे है,

है खांसी आ रही थी काफी पहले से...

डॉक्टर - देखो कबीर,

यह एक वायरस है जो dhire-dhire फैलता है, और अचानक से अपना असर दिखता है,

ये Jadi-Butiyan कुछ हद्द तक तो रोके हुए थी वायरस को,

लेकिन फिर इनका असर जाते गया...

सबका check-up किया,

हो जाने के बाद बीमारी को La-ilaaz बता दिया,

डॉ. जितने भी सही पेशेंट थे उनको Anti-biotic इंजेक्शन दिया और दवाई दी...

जिससे की उन्हें भी यह बीमारी न फैले,

कबीर डॉक्टर को वापस छोड़ आया,

हर दिन कोई न कोई मरने लगा,

अब कबीर और मीरा घर में hi रहने लगे थे,

गांव में मातम छाया हुआ था...

एक दिन सब सुबह अपने काम में लगे थे, लेकिन पिता जी नहीं नजर आये,

रचना देवी - बेटी मीरा,

तेरे बाबू जी कहा है,

आज सुबह से नजर नहीं आये,

नाश्ता के लिए बुला ला,

मीरा, यूँही ऐसे बहार idhar-udhar खोजती रही

लेकिन कहीं नहीं नजर आये तो पिता जी के कमरे की तरफ बढ़ गयी,

कमरे में पहुँचते hi मीरा की जोरर से चीख निकल गयी !!

कबीर और रचना भागते हुए कमरे की तरफ बढ़ गए,

वह पहुंचे तो देखा मीरा रो रही थी,

कबीर के पिता भुवन अब इस दुनिया में नहीं रहे,

कबीर भी वहीँ खटिये के पास बैठके मीरा के गले लगकर रोने लगा...

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Dhire-Ganv वाले जमा होते गए,

सबने मिलकर भुवन सोन का antim-Sanskar किया,

भुवन सोन के जाने के बाद तो जैसे सब suna-suna सा लग रहा था,

दिनभर बहार बैठक में बैठके Hansi-mazak के ठहाके सुनाई पड़ते थे,

लेकिन आज तो पूरा सन्नाटा छाया हुआ था...

ऐसे hi दुःख भरे दिन गुज़र रहे थे...

भुवन सोन को गए अभी 2 hi दिन हुए थे की कबीर को एक और झटका लगा,

बंसी की मौत की खबर सुनके !!

कबीर तो जैसे एकदम टूट hi गया था,

हर रोज कोई न कोई मर रहा था,

पुरे गांव में मातम छाया हुआ था,

एक अंतिम संस्कार करके आते तो दूसरे की खबर आ जाती थी...

सबके दिल में एक डर सा माहौल पैदा हो गया था,

इतनी मौतें जो पहली बार देखि थी...

कबीर का मैं बिलकुल भी नहीं था गांव में रुकने का वो यहाँ भाग जाना चाहता था,

लेकिन इस हाल में गांव वालों को कैसे छोड़ के चला जाये....

अब तो गांव में भी कुल आबादी 180 के आसपास बची थी...

कबीर ऐसे hi एक पेड़ के निचे बैठा था,

तभी उसकी नजर एक 5 साल के बचे पर gayi..Jo खेल रहा था.

और अचानक खासी आने लगी और Khanste-Khanste वही पर गिर पड़ा.

कबीर दौड़ के उस बचे के पास गया,

लेकिन तब तक देर हो चुकी thi...bache ने दम तोड़ दिया...

कबीर ने बचे को गॉड में लिया और उसे निहारते हुए उसके घर की तरफ चल pada.....khoya हुआ कुछ सोंचते हुए....

अब सायद कबीर मज़बूर हो गया था उस मासूम बचे की हालत देख कर....

और एक बड़ा कदम उठाया...

अगली सुबह अचानक उठते के साथ hi मीरा और माँ जी से कह दिया की जल्दी से अपना सामान बांध लें,

वो आज अपना गांव छोड़ कर जा रहे है,

मई जा रहा हु गाड़ी का इंतेज़ाम करने दोपहर तक रेडी रहना...

मीरा और रचना ने बहुत समझाया लेकिन कबीर अपनी जिद में अडिग रहा....

मज़बूरन दोनों को कबीर की बात माननी पड़ी......

आज के लिए बस इतना hi,

कीप वाइटनिंग एंड सपोर्टिंग थैंक्स गाइस

 
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