- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 123,856
Update..No..72*
MeGa..UpDaTe
Abb..Takk..
अब तक सभी ने पढ़ा की हयान ग्रुप्स की कॉलेज लाइफ स्टार्ट हो चुकी थी....
पहले hi दिन कॉलेज में हयान को एक शॉक लगता है...
एक वैम्पायर लेडी के रूप में...
जो की हनी की ब्लैक पावर को महसूस कर के हयान तक पहुंची थी...
लेकिन उससे ज्यादा तगड़ा झटका नरकिस्सा को लगता है....
हयान के अंदर छुपी वाइट एनर्जी को महसूस कर....
वहीँ दूसरी तरफ नरकिस्सा, बुमलीन और सक्कूबी से हयान के रियल फेस की सचाई बताती है..
जिसे सुनकर सभी परेशां हो जाते हैं..
सक्कूबी - तो फिर आप hi Batao.....Hamein क्या करना चाहिए....??
काफी देर कुछ सोचते हुए...
बुमलीन - एक बार फिर से उसका सामना करना होगा.....??
Abb...Aage...
""ये क्या कह रहे हो आप... फिर से उसका सामना करना होगा""
""किस में इतनी पावर है जो उस का सामना कर सके"" नरकिस्सा बोली ""
बुमलीन - तुम्हें hi करना होगा सामना....
एक बार फिर से....
नार्कीससा - क्या...?? मैं...
नहीं ये नहीं हो सकता...
अनजाने ने मैं ये गलती कर सकती हु..
लेकिन सब जान्ने के बाद भी मैं ऐसा कदम कभी नहीं उठा सकती....
बुमलीन - बेवक़ूफ़ मत बनो.....
तुम्हारे शिव और कोई नहीं जा सकता उसके सामने...
क्युकी तुम्हारे शिव बाकि सबकी पहचान छिपी हुयी है...
इस्सलिये सिर्फ तुम्हे Hi जाना होगा....!!
नरकिस्सा - मुझे माफ़ कीजियेगा....
लेकिन मैं तैयार नहीं हु आपकी इस बात से......
आपके इस फैसले से मेरी जान भी जा सकती है.....
और जान सबको प्यारी होती है...!!
बुमलीन - मैंने कब कहा की तुम उससे फाइट करो......
तुम्हें बस वही करना है...
जो अब तक करती चली आयी हो....
जाओ और उसके अंदर छिपे शैतान को जगाओ...
और उस पर काबू पाओ...
वो शैतान भविष्य में बहुत कारगर होगा....!!
नरकिस्सा - शायद आपने मेरी बात को ठीक से समझा नहीं...
उसके अंदर छिपी ब्लैक पावर.... बहुत ज्यादा होकर भी, वाइट पावर के कारन,
उनका अस्तित्व न के बराबर है...
उसने अपनी इक्षाओं पर काबू प् लिया है...
उस पर काबू पाना मेरे बस में नहीं....
बुमलीन - सब समझता हु मैं....
लेकिन तुम नहीं समझ प् रही भविष्य के खतरे को...
शायद ये वही है....
जिसके बारे में कस्सदेया मालिक बात कर रहे थे....
अगर ये वही है तो...
फिर हमें यह करना hi होगा....
वर्ण इसका अंजाम बहुत बुरा हो सकता है...
अगर कस्सदेया मालिक को पता चला की सब जानकर भी हम अनजान बने रहे तो....
शायद की हम इस साक्ष से बच जाये....
लेकिन कस्सदेया मालिक के जुल्म से नहीं....
काफी देर बहस के बाद......
अंत में जीत बुमलीन की हुयी.....
और नार्कीससा को उसकी बात माननी पड़ी.....
क्युकी कोई और राह नहीं बची थी....
नरकिस्सा - ठीक है....
मैं तैयार हु....
क्या आप दोनों मेरी मदद के लिए आओगे. .यदि कोई खतरा हुआ तो.....
बुमलीन - नहीं हम में से कोई नहीं आएगा....
वर्ण उसे हमारी मौजूदगी का अहसास हो जायेगा....
यह काम तुम्हें अकेले hi करना होगा....!!
नरकिस्सा - ठीक है फिरर...
मैं चाहती हु की आप मेरी संपूर्ण ऊर्जा को आजाद कर दें...
यदि मुझे कोई खतरा हुआ तो..
जाते जाते उसके अस्तित्व को भी खतरे में दाल सकू....
बुमलीन - ठीक hai....Jaisa तुम कहो....
अब जाओ और उसका सामना करने के लिए रेडी हो जाओ.....
_____________________________
हयान की तरफ......
कॉलेज स्टार्ट किये हुए.. पूरा एक हफ्ता बीत चूका था...
सब कुछ नार्मल चल रहा था...
मीडिआ के सामने सभी टॉप स्कोरर स्टूडेंट्स का सम्मान भी हुआ....
हमारे गार्डियन के तौर पर खुद प. मम गायत्री जी मीडिआ के सामने आयी...
हालाँकि सब हमारे पेरेंट्स के बारे में जानना चाहते थे....
लेकिन P.Mam ने ऐसा नहीं होने दिया....
सब कुछ ठीक चल रहा था....
लेकिन अभी तक मेरी मुलाक़ात उस लेडी से दुबारा नहीं हो पायी थी...
मुझे बहुत बेसब्री से इंतज़ार था उससे एक और मुलाक़ात का...
मैं भी अब रेडी था आमना सामना करने के लिए....
दिल में एहि अरमान लिए आज एक बार फिर कॉलेज आया था...
की शायद आज फिर मुलाक़ात हो जाये....
पर शायद आज भी उससे मिल पाना संभव नहीं था....
क्युकी लास्ट पीरियड चल रहा था....
और कॉलेज ख़त्म होने में कुछ hi समय बचा था....
लेकिन उसकी कोई खबर नहीं थी....
मैं जिन और अन्य के साथ फिजिक्स की क्लास अटेंड कर रहा था की तभी P.Mam का बुलावा आया....
बीच क्लास से उठकर मुझे उनके ऑफिस जाना पड़ा.....
जैसे Hi मैं क्लास से बहार आया.....
अन्य! से दूरी के कारन
मुझे उसकी मौजूदगी महसूस होने लगी.....
मैं - दोस्त... अपनी एटम बम से मिलने का वक़्त आ चूका है....
"अगर कोई प्रॉब्लम न हो मम ! तो मैं इनसे अकेले में थोड़ा कुछ बात करना चाहूंगा""
P.Mam - Okay No प्रॉब्लम...
तुम दोनों अपना इशू ख़त्म करो...
मुझे अपने कॉलेज में अनजान लोग पसंद नहीं...
इन्होने तुमसे मुलाक़ात की रिक्वेस्ट ki.....So मैंने आने दिया...
वर्ण मैं अपने कॉलेज में घुसने भी न देती....
वैसे भी इनकी वजह से कॉलेज का माहौल ख़राब होने के असर दिख रहे...
मैं कॉलेज के डिसिप्लिन से कोई समझौता नहीं कर सकती....
लेडी - मैं माफ़ी चाहूंगी....
मेरी वजह से आपको प्रॉब्लम हो रही...
बूत ये लास्ट बार है...
मैं वापस नहीं आउंगी.....
P.Mam - Okay.... तुम दोनों के पास 30 मं है..
उसके बाद कॉलेज बंद हो जायेगा....
इतना बोलकर P.Mam ऑफिस से बहार चली गयी...
मुस्कुराते हुए...
मैं - कैसी हो मिस नरकिस्सा...
मुझे तो लगा था अब तुमसे कभी सामना होगा hi नहीं...
लेकिन एक बार फिर हम दोनों आमने सामने है....
कहो क्या कहना चाहती हो....??
नरकिस्सा - बहुत खूब...
हम्म तो तुम्हारे अंदर पहचानने की शक्ति भी है...
लेकिन एक बात समझ न आयी...
""तुम हो कौन...??""
""एक इंसान या फिर शैतान""
मैं - इसी सवाल के जवाब की तो मुझे भी तलाश है....
लेकिन अभी तक इसके जवाब से वंचित हु...
मैं बस इतना कहूंगा मैं तुम्हारी सोंच से परे हु..
मेरे बारे में जाने से अच्छा है की अपने आने का कारन बताओ.....??
नरकिस्सा - दिखने में तो एक बचे जैसे हो...
लेकिन हो बेमिसाल....
मैं भी सीधे मुद्दे पे आती हु...
"" एक सौदा करना है...
सौदा ऐसा जो अमरता प्रदान करे..""
मैं - मैंने पहले कहा है..
मेरे बारे में तुम नहीं जानती...
शायद इसी लिए ऐसे सौदे बजी कर रही हो....
मैं मोह माया से परे हु...
तेज़्ज़ आवाज़ में...
"" क्यों आयी हो यहाँ...""
मेरी आवाज़ से नरकिस्सा कम्पनी लगी...
डरते हुए...
नाटकीसा - मैं एक काली शक्ति की पुजारन हु...
मुझे तुम में काली शक्ति की अपार ऊर्जा महसूस हुयी तो..
मैं तुम्हारी ओर खींची चली आयी....
लेकिन तुम्हारे करीब आकर तुम्हारी वास्तविकता से रूबरू हुयी...
मैं सिर्फ इतना चाहती हु...
की तुम मुझे अपना गुलाम बना लो...
हम दोनों मिलकर इस संसार पर राज करेंगे.....
अचानक रूम का टेम्परेचर बढ़ने लगा....
""ढोंग करती है साली....
मेरी शक्तियों को हासिल कर खुद अमर होना चाहती है....
ऊपर से गुलाम बनने का नाटक करती है...""
बहुत ख्वाहिश थी न मुझसे मिलने की लो मैं तुम्हारे सामने हु...
बता किसने भेजा है तुझे... वर्ण अभी जलाकर ख़ाक कर दूंगा....""
हनी ने नरकिस्सा का गाला पकड़ लिया...
और अपनी आग की लपटों से उसे तकलीफ देने लगा.....
अह्ह्ह ूण ुघठ खस्ते हुए....
नरकिस्सा - आखिर क्या हो तुम...??
मैं सच कह रही...
मैं तुम्हारा भला चाहती हु...??
हनी - भला.. वो भी तू..
ः छः....
तुझ में इतनी शक्ति भी नहीं की तू मेरे सामने टिक सके...
क्या सोंच कर आयी हो...
क्या इतना आसान है..
मुझे अपने बस में करना....??
नरकिस्सा - मैं सच कह रही हु..
मैं तुम्हारी शक्तियां hi महसूस करके तुम तक आयी हु...
वर्ण मेरा और वाइट एनर्जी का क्या रिलेशन....??
""शांत हो जा भाई....
यह सच कह रही है...
यह तुमसे hi मिलने आयी है...
बस इसे ये नहीं पता की तुम हो कौन...??
एक शैतान होकर भी ईश्वर की उपासना करने Wale.....Shaitan...!!
हनी - तू तो चुप hi बैठ यह मेरे लिए आयी है...
तो मैं भी इससे अपने hi तरीके से निपटूंगा...
मैं - ठीक है भाई... तुझे जो करना है कर मैं कुछ नहीं बोलूंगा.....
मैं एक डैम खामोश हो गया.....
हनी - मैं एक लास्ट बार पूछूंगा....
तुझे किसने भेजा है..
तुम्हारे यहाँ आने का मकसद क्या है....??
नरकिस्सा - मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी...
यहाँ आकर....
प्ल्ज़. मुझे माफ़ कर दो... मुझे जाने दो....
हनी - यह मेरे सवाल का जवाब नहीं....
तुम्हें आजादी तभी मिलेगी जब तुम सच बताओगी....
नरकिस्सा - जो सच था मैंने बता दिया....
बास मुझे जाने दो....
बार बार नरकिस्सा के इंकार से हनी झल्ला उठा...
अपने हाथों की पकड़ मजबूत कर दी...
जिससे नरकिस्सा दर्द से तड़पने लगी.....
""अब सच बोलेगी.... या फिर अभी भी इंकार करेगी....??""
हाथों की पकड़ बहुत ज्यादा मजबूत थी....
नरकिस्सा कुछ भी बोल नहीं ोा रही थी....
मुझसे यह सब देखा न गया...
मैंने हनी को फिर से अपने काबू पर ले लिया....
जिससे नरकिस्सा आजाद हो गयी....
और तुरंत गायब हो गयी.....
तभी लास्ट पीरियड एन्ड होने की बेल्ल भी बज गयी.....
मैं भी तुरंत ऑफिस से निकल कर अपनी क्लास की तरफ चल दिया....
जहाँ मुझे जिन और अन्य ! क्लास के बहार खड़े मिल गए....
मैं दोनों के साथ ग्राउंड पर आ गया..
अन्य - क्या हुआ हय्यू ! एवरीथिंग इस Okay !
P.Mam ने क्यों बुलाया था....??
मैं - कोई ख़ास बात नहीं थी...
बास किसी से मिलवाना था...
अन्य - अच्छा किस्से मुलाक़ात करने में इतना वक़्त लगा दिया...
मैं - एक इतर इंस्टिट्यूट के प्रोफेसर आये हुए the.....Bas उन्ही से मिलाने के लिए बुलाया tha...(*Jhoot)
जिन - क्या तुम दोनों यही बातों पर लगे Rahoge...Ya फिर आज के प्लान के बारे में भी कुछ सोंचा है....??
मैं - सॉरी, मैं तो भूल hi गया था....
अंकित और सृजल कहाँ है....??
माहि दी - वो देखो... दोनों गेट पर खड़े हमारे आने का वेट कर रहे हैं....
मैं - तो चलिए देर किश बात की है...
हम सब दादू! के साथ कार में मॉल पहुँच गए...
मैं - आप सब अंदर चलो, मैं थोड़ी देर में आता हु.....
मुझे और दादू को छोड़कर बाकी सब मॉल के अंदर चले गए....
मैं - दादू ! क्या सब कुछ रेडी है.. या अभी कुछ बाकि रह गया है....??
दादू - जी बाबा ! जैसा आपने कहने कहा था...
ठीक वैसे hi मैंने डेकोरेट करवा दिया है...
मैं - थैंक्स दादू! आप सच में बहुत अच्छे हो...
आपने उस दिन की बात डैड से न बताकर बहुत अच्छा किया था...??
दादू - थैंक्स की बात नहीं है हयान बाबा !
दरअसल बेबी ने मुझसे ऐसा करने की रिक्वेस्ट की थी...
इस्सलिये मैंने बात छिपा दी...
लेकिन क्या यह सही होगा...
अगर आगे कोई प्रॉब्लम हुयी तो....??
मैं - मेरे ख्याल से अगर कोई इशू हुआ भी तो आप, रघु और निशाम मिलकर उसको हैंडल कर लोगे...
मुझे आप पर पूरा यक़ीन है...
अच्छा दादू ! मुझे जाना होगा.... टाइम हो गया है...
दादू - ठीक है बाबा आप एन्जॉय करो....
मैं बहार यहीं वेट करता हु....
मैं भी वह से सीधा मॉल के अंदर चल दिया....
सबको खोजने लगा....
मुझे सब एक साथ आइस क्रीम पार्लर के सामने खड़े दिख गए....
जहाँ सभी मेरे आने का वेट कर रहे थे....
माहि दी - कितना वक़्त लगते हो....
एक तो बिन बताये सबको यहाँ लेकर आये...
अब खुद hi गायब हो....
मैं - अरे मेरी बड़की दीदी... थोड़ा सब्र रखो.. सब पता चल जायेगा.....
चलो सब मेरे साथ चलो....
.
सब मेरे पीछे पीछे चल दिए....
"ये लो हम आ गए""
मैं एक मॉल में बने एक रूम के बहार आकर रुक गया.....
मैं - सृजल अब तुम्हारी बारी....
ओपन थे दूर.....
मेरे ऐसा कहने से सृजल मुझको अजीब तरीके से देखने लगी..
जैसे पूछना चाहती हो मैं hi क्यों.....??
वहीँ अंकित उसे देख कर मुस्कुराने लगा....
मैं - अब खोलो भी कितना वक़्त लगाओगी....??
सृजल ने झिझकते हुए दरवाज़ा खोला....
अनादर रूम में चरों तरफ अँधेरा पसरा हुआ था....
सृजल पलट कर फिर से हमारी तरफ देखने लगी.....
मैं - अंदर चलो तो सही... डरो मत....
हम सब भी तो साथ हैं ...
सृजल ने जैसे Hi पहला कदम रखा...
अचानक रूम रौशनी से जगमगा उठा...
और म्यूजिक बजने लगा....
"" हैप्पी बिरथ डे तो यू ""
म्यूजिक और रूम का डेकोरेशन देख कर समझ में आया की यहाँ बर्थडे ओर्गनइजे किया गया है...
वो भी सृजल का.....
सब एक एक करके सृजल को उसके जन्म दिन की मुबारक बाद देने लगे....
सृजल - तुम्हें कैसे पता... की आज मेरा बर्थडे है....??
मैं - मुझे क्या... माहि दी को छोड़कर बाकी सबको पता है.....
आज तुम्हारा बर्थडे है...
इसीलिए आज हम यहाँ तुम्हारा बर्थडे सेलिब्रेट करने आये हैं....
सृजल - बूत तुम सबको बताया किसने....??
मैं मुस्कुराते हुए... अंकित की तरफ देखने लगा....
सृजल तुरंत समझ गयी... अंकित ने hi सबको बताया है....
सृजल - इसका मतलब तुम्हें याद था...
वही तो मैं सोंचू तुमने मुझे अब तक ऐश क्यों नहीं किया....
अंकित - मैंने सोंचा इस बार थोड़ा अलग तरीके से तुम्हें विश करू....
सो Maine,Hayaan और अन्य ने मिलकर ये सरप्राइज प्लान किया....
वैसे कैसा लगा हमारा सरप्राइज....??
सृजल अंकित को हुग करते हुए....
सृजल - यह मेरा अब तक सब्सड अच्छा बर्थडे प्लान है...
बहजत अच्छा लगा....
थैंक यू वैरी मच अंकित....
हमेशा की तरह मेरा बर्थडे याद रखने के लिए....
मैं - वह ! म्हणत हम करे....
और वह वही उसे दी जाये....
थिस इस नॉट फारे.....
काश हमें भी कोई हुग करने वाला होता....??
सृजल - ओह्ह बेचारा ! तुम्हें भी हुग चाहिए.....
सृजल आगे बढ़ने वाली थी की.... अन्य! बीच में आ गयी....
अन्य - आजा मेरे पास... मैं तुझे हुग देती हु....
अन्य ने आगे बढ़कर मुझे अपने गले से लगा लिया....
और कान में धीरे से कहा...
"" थोड़ा नौटंकी काम किया कर...
और गर्ल्स से तो दूर hi रहना..""
अन्य ! की बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठा....
मैं - चलो चलो.. जल्दी से केक काटो....
और हमें अपने हाथों से खिलाओ....
सृजल ने केक कट किया...
सबको अपने हाथों से बरी बड़ी खिलाया....
हम सब ने भी सृजल को थोड़ा खिलाया... थोड़ा उसके गलों में लगाया....
सबने मिलकर काफी देर मस्ती की...
पार्टी ख़त्म होने के बाद....
सृजल - अच्छा सब मेरी बात गौर से सुनो....
बर्थडे सेलिब्रेशन अभी ख़त्म नहीं हुआ....
तुम सब इन्वितेद हो...
शाम 7 बजे मेरे घर में.... पार्टी है..
मेरे डैड की तरफ से....
सो तुम सबको अपने फॅमिली और पेरेंट्स के साथ जरूर आना है....
है एक बात और.... जब तक तुम सब आ नहीं जाते.. मैं केक नहीं कट करुँगी...
मैं - अच्छा ठीक है....
शाम को मिलते हैं..
अब हमें जाना होगा....
सृजल अंकित के साथ बाइक में बैठकर
अपने घर को रवाना हो गयी....
हम भी अपने घर के लिए निकल गए...
दुपहर के 3 बज रहे थे....
माँ डैड और मौसा मौसी अभी तक नहीं आये थे ऑफिस से,
हम सब अपने रूम में जाकर फ्रेश हुए....
और रेस्ट करने लगे...
क्युकी लंच तो करना नहीं था....
सबका वैसे भी पेट भरा हुआ था....
मैंने भी सोंचा कुछ देर सो लिया जाये...
वैसे भी आज कल रात जो सोने को नहीं मिल रहा...
हनी की वजह से....
साला खुद तो दिन भर चैन से सोता है.....
और रात में मुझे परेशां करता है...
सोने नहीं देता....
जब से रात में चस्का लगा है... शिकार करने का....
जब से हनी मेरे अंदर समाया था...
तब से मेरे बेहेवियर में काफी चंगेस आये थे....
जो की मेरे आलावा सब नोट कर रहे थे.....
बात बात पे गुस्सा करना..
लड़कियों की तरफ अट्रैक्शन.. ेट्स..
ऐसा लग रहा था की जैसे हनी मुझ ओर हावी होता जा रहा है....
खैर मैं अपनी सोंच को यहीं विराम देते हुए सो गया....
अभी सोये हुए कुछ hi समय हुआ था....
मेरे रूम का दूर नॉक हुआ.....
जिससे नेरी आँख खुल गयी....
मैंने उठकर दरवाजा खोला... बहार नाम कड़ी थी...
माँ - लगता है जनाब की नींद बीच में hi ख़राब कर दी..
मैं - नहीं माँ..
मैंने तो पिछले 3हरष से सो रहा हु...
माँ - Okay... अच्छा जाओ फ्रेश होकर आओ...
कॉफ़ी रेडी है....
मैं - बस दो मं में आया.....
मैं तुरंत फ्रेश होकर... हॉल पे पहुँच गया....
जहाँ सभी चाय और कफ की चुस्कियां बात करते हुए ले रहे थे.....
मैं भी सबके साथ जा बैठा....
डैड - हम्म बीटा जी....
आज बर्थडे पार्टी पर जाने का प्लान है....
मैं समझ गया मेरे आने से पहले hi शायद अन्य ने डैड को सब बता दिया है....
मैं - हम्म डैड जाना तो पड़ेगा.....
शर्त hi ऐसी राखी है....
डैड - ठीक है चले जाओ.... बिट हम गुआर्डिन में से कली नहीं Jayega.....Tumhare साथ.....
मैं - मैं पहले से hi यह समझ गया था....
कोई नहीं डैड.. हम दादू के साथ चले जायेंगे....
वैसे डैड! काईन अंकल और रिया मौसी लैब तक दिल्ली से वापस आएंगे....??
डैड ,- अब बुसिनेस्स सेट िप करने में टाइम तो लगेगा hi...
या तो वो दोनों आ जाते.... या फिर हम सब...
किसी न किसो कल तो रुकना hi पड़ेगा.....
बीच में टोकते हुए.....
माँ - मेरे ख्याल से अगर तुम सबको पार्टी में जाना है तो...
जाकर रेडी हो जाना हो जाना चहिये....
वर्ण लेट हो जाओगे....
6:30 आलरेडी हो चूका है......
मैं - अच्छा चलो.. सब रेडी हो जाओ....
हम 15मं में निकलेंगे.....
हम सब फटाफट रेडी हो गए....
मैंने लाइट पिंक कलर की शर्ट और क्रीम कलर का ट्राउज़र्स पहन रख था....
जबकि जिन नेवी ब्लू शर्ट और डार्क ब्लू जीन्स.....
वहीँ अन्य! ने ग्रीन और येलो कलर का सलवार सुईठे पहना हुआ था....
तभी मेरी नजर माहि दी पर पड़ी....
वो तो सबसे अलग hi दिख रही थी....
ऐसा लग रहा था की जैसे किसी मैरिज फंक्शन में जा रही हो...
माहि दी ने पिंक एंड लाइट रेड का मिक्सचर वाला राजस्थानी सुईठे पहना हुआ था....
वही अखिल भाई... भी फुल सुईठे बूट में थे....
सब एक से बढ़कर एक लग रहे थे.....
वो कहते है न... जो खूबसूरती सादगी मशीन होती है.... वह चणक धानक में कहाँ.... वैसा hi कुछ हाल अन्य! का था....
नार्मल ड्रेस में भी क़यामत की ऐडा थी...
मैं अन्य! के रूप रंग में खोया हुआ था की....
अन्य! ने मेरे आखों के सामने चुटकी बजायी....
""क्या हुआ हय्यू! कहाँ खो गए....
यही रुकने का इरादा है क्या...??""
""काश की मैं वक़्त को रोक पता....
कुछ पल हसीं के युहीं बिता देता...""
मैं - है है चलो...
मैं तो कबसे सबके आने का वेट कर रहा हु....
अन्य! मेरी बात सुनकर मुस्कुरा उठी....
अन्य - हम्म देख रही hi... कब से वेट कर रहे हो....
हम सब जाकर गाड़ी में बैठ गए....
दादू ने कार बढ़ा दी...
हमारे पीछे एक गाडी में रघु और निशाम भी सिक्योरिटी के लिए साथ चल दिए.....
कुछ hi मिनट्स में हमारी गाडी.... घंटा घर के पास बने आलीशान महल जैसे घर ""श्रीवास्तव कुञ्ज"" के सामने हमारी गाड़ी रुकी.....
गेट पर सिक्योरिटी काफी टाइट थी....
हमारी कार की स्कैनर के जरिये चेकिंग हुयी....
हमने अपना इंट्रो दिया...
कुछ hi देर में मैं गेट ओपन हुआ...
कार गेट ने एंटर कर गयी....
पूरा घर रौशनी से जगमगा रहा था....
देखने में बहुत बड़े रईस का घर लग रहा था....
अंदर जाकर हमें इस चमक धमक और रुतबे का कारन पता चला....
क्युकी सृजल, मला. रणधीर श्रीवास्तव की एकलौती बेटी थी.....
सृजल की माँ की डेथ कई साल पहले हो चुकी थी....
रणधीर श्रीवास्तव का एक मात्रा सहारा सृजल hi थी....
िस्सकिये वह उसे बहित प्यार करता tha......Har एक ख्वाहिश पूरी करता था....
पूरा हॉल क Khacha-khach भरा हुआ था.....
काफी लोगों को इन्विते किया गया था....
हम सब वहीँ साइड में खड़े....
सृजल के आने वेट कर रहे थे....
तभी हॉल की लाइट्स ऑफ हो गयी...
म्यूजिक की धुन बजने लगी...
तभी फ्लैशलाइट जाकर एक जगह पर जाकर रुक गयी....
रेड फ्रॉक में एक खूबसूरत लड़की.... साथ में, थ्री पीेछे सुईठे पहने... एक लड़का....
दोनों हलके हलके क़दमों के साथ स्टेज के पास रखे केक की तरफ बढ़ने लगे....
1...2...3....4...5...
कैंडल्स बुझ गयी..... केक कटा...
पहला निवाला हमारे दोस्त अंकित सर को....
दूसरा निवाला मला सर को....
हम सब दूर खड़े... ये सब देख रहे थे....
पास जाने की हिम्मत न हो रही थी...
एक तरफ कह रही थी...
तुम सबके के बिना केक कट नहीं करुँगी.... दूसरी तरफ यहाँ का यह हाल....
थोड़ा शॉकिंग लग रहा था....
और आलोट साहब का यूँ साथ होना...
एक इशारा दे रहा था.....
मैं अपनी सोंच में गम था की....
तभी माइक की आवाज़ सुनकर मेरा ध्यान स्टेज की तरफ...
मला सर - जी है आपने सही सुना.....
आज के खूबसूरत दिन पर...
मैं अपनी बेटी की इंगेजमेंट अपने दोस्त A.C.P. नवीन मिश्रा के बेटे आलोट मिश्रा से फिक्स करता hi....
आज का दिन मेरे लिए डबल ख़ुशी का दिन है....
सो Let's एन्जॉय पार्टी....
आज तो शॉक के ऊपर शॉक लग रहे थे....
एक तरफ सृजल के पापा मला..
अंकित के पापा ैप...
वहीँ दूसरी तरफ बर्थडे सेलिब्रेशन के जगह इंगेजमेंट का अनाउंसमेंट....
दोनों ने तो हमें अपने बारे में कुछ बताया hi नहीं...
न hi इस सरप्राइज के बारे में....
सबका हाल मेरे जैसे hi था.....
खैर हम सब बातों को दरकिनार कर....
पार्टी एन्जॉय करने लगे... आपस में मिलकर.....
अभी हम आइस क्रीम का लुत्फ़ उठा रहे थे....
की तभी सृजल की आवाज़ हमारे कानो में पड़ी.....
""ी रिपीट, "हयान, अन्य, जिन, अखिल और माहि जहाँ भी स्टेज पर तशरीफ़ लाएं...""
देर लगी.... लेकिन आखिरकार हमारी याद आ Hi गयी....
आइसक्रीम को बीच में hi छोड़कर हमने अपना रुख स्टेज की तरफ कर दिया....
हम सबने बरी बरी से दोनों को कोंग्रटुलते किया....
सृजल - मैं तुम सबका कब से वेट कर रही हु.....
बूत तुम सब न जाने कहाँ गम थे....
अन्य - हम तो बहुत पहले hi यहाँ आ गए थे....
बूत यहाँ सब अनजान थे... सो हम सब दूर से hi एन्जॉय कर रहे थे.....
सृजल - मन मैं बिजी थी...
बूत तुम सब तो फ्री थे....
मेरे पास तो आ hi सकते थे.....
अन्य - It's ok.. अब तो आ गए न...
सब छोड़...
पहले अपने दूल्हे राजा से तो मिलवा दे....
सृजल एकदम से शर्मा गयी....
सृजल - अच्छा सब मेरे साथ चलो...
मैं तुम्हें अपनी फॅमिली से इंट्रोडस करवाती हो....
सबसे पहले Srijal's डैड...
फिर Ankit's डैड...
और Ankit's माँ... प्रभा मिश्रा....
सबसे एक एक करके हम मिले...
सृजल ने.... हमें कॉलेज फ्रेंड्स और तोप्पेर्स कहकर सबसे इंट्रोडस किया....
सब हमसे मिलकर बहुत खुश हुए...
सृजल और अंकित को अपने साथ लेकर... हम पार्टी एन्जॉय करने लगे...
थोड़ा डांस.. थोड़ा सॉफ्ट ड्रिंक्स...
जब थोड़ा थक गए...
तो हम सब सृजल और अंकित को घेरकर बैठ गए....
अन्य - सृजल अब बता न यार.. ये सब कैसे हुआ....??
सृजल - अभी रहने दे...
कल कॉलेज में सब समझ दूंगी....
बिट प्रॉमिस करो.. सब
कॉलेज में इंगेजमेंट की न्यूज़ नहीं फैलनी चाहिए....
मैं - नहीं फैलेगी...
लेकिन दूल्हे राजा हमारे हाथों से नहीं बचने वाले...
इतनी बड़ी बात.. हमसे छिपाई....
तुम से तो कल hi ठीक से मुलाक़ात होगी.....
हम सब काफी देर बैठे हंसी मजाक करते रहे....
पार्टी ख़त्म होते होते... रात के 10:15 हो गया....
तभी दादू की मिस कॉल आयी....
मैं - अच्छा तो अब हम इजाज़त चाहेंगे....
वक़्त भी काफी हो गया है....
अब हमें चलना चाहिए....
हम फिर से बरी दोनों कपल्स से मिले... उन्हें मुबारक बाद दी...
कल कॉलेज में मिलने को कहकर....
वापस अपनी कार्स की तरफ चल दिए.....
अभी हम कार्स के पास पहुंचे hi थे की....
अचानक जोरर से बदल गरज़ उठा....
और तेज़ हवा बहाने लगी....
अचानक मौसम एकदम सुहाना हो गया.....
""वाओ ! कितना खुशनुमा मौसम है....
चलो न पैदल चलते है, घुमते huye..."",Any बोली....
जिन - मन तो मेरा भी कर रहा है.....
बूत क्या हम ऐसे जा सकते हैं.... पैदल... वो भी इतनी दूर....
दादू - नहीं.. कोई नहीं कहीं जा सकता...
ऐसे पैदल....
मैं - दादू ! क्यों न मैं ड्राइव करूँ कार...??
दादू - बाबा ! रात काफी हो गयी है....
सून सां रास्ता है .
ऐसे आपका ड्राइव करना ठीक नहीं रहेगा....??
मैं - दादू, तभी तो कह रहा हु ड्राइव करने को...
क्यूंकि रास्ता कजली है....!!
देखो न मौसम भी कितना अच्छा है....
ऐसे मौसम में गिलास खोलकर कार ड्राइव करने का अपना Hi मज़ा होता है....
दादू - मैं ऐसा नहीं कर सकता...
सर का आर्डर है....
अगर आपको हवा hi खानी है तो कार की छत ओपन कर देता हु..
आप खड़े होकर मौसम का लुत्फ़ उठा सकते है.......
मुझे भी दादू, की बात ठीक लगी....
मैं - Okay No प्रॉब्लम ! ये भी मस्त आईडिया है....
मैं कार की छत खोलकर बहार की ठंडी हवा का आनंद लेने लगा....
मेरी देखा देखि में अन्य भी आकर मेरे साथ खड़ी हो गयी....
और जावा में हाथ लहराते हुए....
जोरर जोरर से उह्हू ुहुओ चिल्लाने लगी....
हम दोनों को ऐसा करते देख... सबके चेहरे में मुस्कान फ़ैल गयी....
तभी जिन निचे से मेरे पेट में Gud-gudi करने लगी...
जिसके कारन मुझसे खड़ा न रहा गया....
मैं हँसते हुए निचे बैठ गया.....
और जिन! की छोटी को पकड़ के खींच ने लगा....
जिससे वह दर्द में चिल्लाने लगी...
""कोई मुझे बचाओ... इस बाँदा से...""
तभी अचानक.... एक जोरर का झटका लगा...
अन्य! धम्म से निचे आकर मेरे ऊपर गिर्र गयी.....
और दर्द से कराहने लगी....
आज कलिये बस इतना hi..
-----
--------
-----------
लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
MeGa..UpDaTe
Abb..Takk..
अब तक सभी ने पढ़ा की हयान ग्रुप्स की कॉलेज लाइफ स्टार्ट हो चुकी थी....
पहले hi दिन कॉलेज में हयान को एक शॉक लगता है...
एक वैम्पायर लेडी के रूप में...
जो की हनी की ब्लैक पावर को महसूस कर के हयान तक पहुंची थी...
लेकिन उससे ज्यादा तगड़ा झटका नरकिस्सा को लगता है....
हयान के अंदर छुपी वाइट एनर्जी को महसूस कर....
वहीँ दूसरी तरफ नरकिस्सा, बुमलीन और सक्कूबी से हयान के रियल फेस की सचाई बताती है..
जिसे सुनकर सभी परेशां हो जाते हैं..
सक्कूबी - तो फिर आप hi Batao.....Hamein क्या करना चाहिए....??
काफी देर कुछ सोचते हुए...
बुमलीन - एक बार फिर से उसका सामना करना होगा.....??
Abb...Aage...
""ये क्या कह रहे हो आप... फिर से उसका सामना करना होगा""
""किस में इतनी पावर है जो उस का सामना कर सके"" नरकिस्सा बोली ""
बुमलीन - तुम्हें hi करना होगा सामना....
एक बार फिर से....
नार्कीससा - क्या...?? मैं...
नहीं ये नहीं हो सकता...
अनजाने ने मैं ये गलती कर सकती हु..
लेकिन सब जान्ने के बाद भी मैं ऐसा कदम कभी नहीं उठा सकती....
बुमलीन - बेवक़ूफ़ मत बनो.....
तुम्हारे शिव और कोई नहीं जा सकता उसके सामने...
क्युकी तुम्हारे शिव बाकि सबकी पहचान छिपी हुयी है...
इस्सलिये सिर्फ तुम्हे Hi जाना होगा....!!
नरकिस्सा - मुझे माफ़ कीजियेगा....
लेकिन मैं तैयार नहीं हु आपकी इस बात से......
आपके इस फैसले से मेरी जान भी जा सकती है.....
और जान सबको प्यारी होती है...!!
बुमलीन - मैंने कब कहा की तुम उससे फाइट करो......
तुम्हें बस वही करना है...
जो अब तक करती चली आयी हो....
जाओ और उसके अंदर छिपे शैतान को जगाओ...
और उस पर काबू पाओ...
वो शैतान भविष्य में बहुत कारगर होगा....!!
नरकिस्सा - शायद आपने मेरी बात को ठीक से समझा नहीं...
उसके अंदर छिपी ब्लैक पावर.... बहुत ज्यादा होकर भी, वाइट पावर के कारन,
उनका अस्तित्व न के बराबर है...
उसने अपनी इक्षाओं पर काबू प् लिया है...
उस पर काबू पाना मेरे बस में नहीं....
बुमलीन - सब समझता हु मैं....
लेकिन तुम नहीं समझ प् रही भविष्य के खतरे को...
शायद ये वही है....
जिसके बारे में कस्सदेया मालिक बात कर रहे थे....
अगर ये वही है तो...
फिर हमें यह करना hi होगा....
वर्ण इसका अंजाम बहुत बुरा हो सकता है...
अगर कस्सदेया मालिक को पता चला की सब जानकर भी हम अनजान बने रहे तो....
शायद की हम इस साक्ष से बच जाये....
लेकिन कस्सदेया मालिक के जुल्म से नहीं....
काफी देर बहस के बाद......
अंत में जीत बुमलीन की हुयी.....
और नार्कीससा को उसकी बात माननी पड़ी.....
क्युकी कोई और राह नहीं बची थी....
नरकिस्सा - ठीक है....
मैं तैयार हु....
क्या आप दोनों मेरी मदद के लिए आओगे. .यदि कोई खतरा हुआ तो.....
बुमलीन - नहीं हम में से कोई नहीं आएगा....
वर्ण उसे हमारी मौजूदगी का अहसास हो जायेगा....
यह काम तुम्हें अकेले hi करना होगा....!!
नरकिस्सा - ठीक है फिरर...
मैं चाहती हु की आप मेरी संपूर्ण ऊर्जा को आजाद कर दें...
यदि मुझे कोई खतरा हुआ तो..
जाते जाते उसके अस्तित्व को भी खतरे में दाल सकू....
बुमलीन - ठीक hai....Jaisa तुम कहो....
अब जाओ और उसका सामना करने के लिए रेडी हो जाओ.....
_____________________________
हयान की तरफ......
कॉलेज स्टार्ट किये हुए.. पूरा एक हफ्ता बीत चूका था...
सब कुछ नार्मल चल रहा था...
मीडिआ के सामने सभी टॉप स्कोरर स्टूडेंट्स का सम्मान भी हुआ....
हमारे गार्डियन के तौर पर खुद प. मम गायत्री जी मीडिआ के सामने आयी...
हालाँकि सब हमारे पेरेंट्स के बारे में जानना चाहते थे....
लेकिन P.Mam ने ऐसा नहीं होने दिया....
सब कुछ ठीक चल रहा था....
लेकिन अभी तक मेरी मुलाक़ात उस लेडी से दुबारा नहीं हो पायी थी...
मुझे बहुत बेसब्री से इंतज़ार था उससे एक और मुलाक़ात का...
मैं भी अब रेडी था आमना सामना करने के लिए....
दिल में एहि अरमान लिए आज एक बार फिर कॉलेज आया था...
की शायद आज फिर मुलाक़ात हो जाये....
पर शायद आज भी उससे मिल पाना संभव नहीं था....
क्युकी लास्ट पीरियड चल रहा था....
और कॉलेज ख़त्म होने में कुछ hi समय बचा था....
लेकिन उसकी कोई खबर नहीं थी....
मैं जिन और अन्य के साथ फिजिक्स की क्लास अटेंड कर रहा था की तभी P.Mam का बुलावा आया....
बीच क्लास से उठकर मुझे उनके ऑफिस जाना पड़ा.....
जैसे Hi मैं क्लास से बहार आया.....
अन्य! से दूरी के कारन
मुझे उसकी मौजूदगी महसूस होने लगी.....
मैं - दोस्त... अपनी एटम बम से मिलने का वक़्त आ चूका है....
"अगर कोई प्रॉब्लम न हो मम ! तो मैं इनसे अकेले में थोड़ा कुछ बात करना चाहूंगा""
P.Mam - Okay No प्रॉब्लम...
तुम दोनों अपना इशू ख़त्म करो...
मुझे अपने कॉलेज में अनजान लोग पसंद नहीं...
इन्होने तुमसे मुलाक़ात की रिक्वेस्ट ki.....So मैंने आने दिया...
वर्ण मैं अपने कॉलेज में घुसने भी न देती....
वैसे भी इनकी वजह से कॉलेज का माहौल ख़राब होने के असर दिख रहे...
मैं कॉलेज के डिसिप्लिन से कोई समझौता नहीं कर सकती....
लेडी - मैं माफ़ी चाहूंगी....
मेरी वजह से आपको प्रॉब्लम हो रही...
बूत ये लास्ट बार है...
मैं वापस नहीं आउंगी.....
P.Mam - Okay.... तुम दोनों के पास 30 मं है..
उसके बाद कॉलेज बंद हो जायेगा....
इतना बोलकर P.Mam ऑफिस से बहार चली गयी...
मुस्कुराते हुए...
मैं - कैसी हो मिस नरकिस्सा...
मुझे तो लगा था अब तुमसे कभी सामना होगा hi नहीं...
लेकिन एक बार फिर हम दोनों आमने सामने है....
कहो क्या कहना चाहती हो....??
नरकिस्सा - बहुत खूब...
हम्म तो तुम्हारे अंदर पहचानने की शक्ति भी है...
लेकिन एक बात समझ न आयी...
""तुम हो कौन...??""
""एक इंसान या फिर शैतान""
मैं - इसी सवाल के जवाब की तो मुझे भी तलाश है....
लेकिन अभी तक इसके जवाब से वंचित हु...
मैं बस इतना कहूंगा मैं तुम्हारी सोंच से परे हु..
मेरे बारे में जाने से अच्छा है की अपने आने का कारन बताओ.....??
नरकिस्सा - दिखने में तो एक बचे जैसे हो...
लेकिन हो बेमिसाल....
मैं भी सीधे मुद्दे पे आती हु...
"" एक सौदा करना है...
सौदा ऐसा जो अमरता प्रदान करे..""
मैं - मैंने पहले कहा है..
मेरे बारे में तुम नहीं जानती...
शायद इसी लिए ऐसे सौदे बजी कर रही हो....
मैं मोह माया से परे हु...
तेज़्ज़ आवाज़ में...
"" क्यों आयी हो यहाँ...""
मेरी आवाज़ से नरकिस्सा कम्पनी लगी...
डरते हुए...
नाटकीसा - मैं एक काली शक्ति की पुजारन हु...
मुझे तुम में काली शक्ति की अपार ऊर्जा महसूस हुयी तो..
मैं तुम्हारी ओर खींची चली आयी....
लेकिन तुम्हारे करीब आकर तुम्हारी वास्तविकता से रूबरू हुयी...
मैं सिर्फ इतना चाहती हु...
की तुम मुझे अपना गुलाम बना लो...
हम दोनों मिलकर इस संसार पर राज करेंगे.....
अचानक रूम का टेम्परेचर बढ़ने लगा....
""ढोंग करती है साली....
मेरी शक्तियों को हासिल कर खुद अमर होना चाहती है....
ऊपर से गुलाम बनने का नाटक करती है...""
बहुत ख्वाहिश थी न मुझसे मिलने की लो मैं तुम्हारे सामने हु...
बता किसने भेजा है तुझे... वर्ण अभी जलाकर ख़ाक कर दूंगा....""
हनी ने नरकिस्सा का गाला पकड़ लिया...
और अपनी आग की लपटों से उसे तकलीफ देने लगा.....
अह्ह्ह ूण ुघठ खस्ते हुए....
नरकिस्सा - आखिर क्या हो तुम...??
मैं सच कह रही...
मैं तुम्हारा भला चाहती हु...??
हनी - भला.. वो भी तू..
ः छः....
तुझ में इतनी शक्ति भी नहीं की तू मेरे सामने टिक सके...
क्या सोंच कर आयी हो...
क्या इतना आसान है..
मुझे अपने बस में करना....??
नरकिस्सा - मैं सच कह रही हु..
मैं तुम्हारी शक्तियां hi महसूस करके तुम तक आयी हु...
वर्ण मेरा और वाइट एनर्जी का क्या रिलेशन....??
""शांत हो जा भाई....
यह सच कह रही है...
यह तुमसे hi मिलने आयी है...
बस इसे ये नहीं पता की तुम हो कौन...??
एक शैतान होकर भी ईश्वर की उपासना करने Wale.....Shaitan...!!
हनी - तू तो चुप hi बैठ यह मेरे लिए आयी है...
तो मैं भी इससे अपने hi तरीके से निपटूंगा...
मैं - ठीक है भाई... तुझे जो करना है कर मैं कुछ नहीं बोलूंगा.....
मैं एक डैम खामोश हो गया.....
हनी - मैं एक लास्ट बार पूछूंगा....
तुझे किसने भेजा है..
तुम्हारे यहाँ आने का मकसद क्या है....??
नरकिस्सा - मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी...
यहाँ आकर....
प्ल्ज़. मुझे माफ़ कर दो... मुझे जाने दो....
हनी - यह मेरे सवाल का जवाब नहीं....
तुम्हें आजादी तभी मिलेगी जब तुम सच बताओगी....
नरकिस्सा - जो सच था मैंने बता दिया....
बास मुझे जाने दो....
बार बार नरकिस्सा के इंकार से हनी झल्ला उठा...
अपने हाथों की पकड़ मजबूत कर दी...
जिससे नरकिस्सा दर्द से तड़पने लगी.....
""अब सच बोलेगी.... या फिर अभी भी इंकार करेगी....??""
हाथों की पकड़ बहुत ज्यादा मजबूत थी....
नरकिस्सा कुछ भी बोल नहीं ोा रही थी....
मुझसे यह सब देखा न गया...
मैंने हनी को फिर से अपने काबू पर ले लिया....
जिससे नरकिस्सा आजाद हो गयी....
और तुरंत गायब हो गयी.....
तभी लास्ट पीरियड एन्ड होने की बेल्ल भी बज गयी.....
मैं भी तुरंत ऑफिस से निकल कर अपनी क्लास की तरफ चल दिया....
जहाँ मुझे जिन और अन्य ! क्लास के बहार खड़े मिल गए....
मैं दोनों के साथ ग्राउंड पर आ गया..
अन्य - क्या हुआ हय्यू ! एवरीथिंग इस Okay !
P.Mam ने क्यों बुलाया था....??
मैं - कोई ख़ास बात नहीं थी...
बास किसी से मिलवाना था...
अन्य - अच्छा किस्से मुलाक़ात करने में इतना वक़्त लगा दिया...
मैं - एक इतर इंस्टिट्यूट के प्रोफेसर आये हुए the.....Bas उन्ही से मिलाने के लिए बुलाया tha...(*Jhoot)
जिन - क्या तुम दोनों यही बातों पर लगे Rahoge...Ya फिर आज के प्लान के बारे में भी कुछ सोंचा है....??
मैं - सॉरी, मैं तो भूल hi गया था....
अंकित और सृजल कहाँ है....??
माहि दी - वो देखो... दोनों गेट पर खड़े हमारे आने का वेट कर रहे हैं....
मैं - तो चलिए देर किश बात की है...
हम सब दादू! के साथ कार में मॉल पहुँच गए...
मैं - आप सब अंदर चलो, मैं थोड़ी देर में आता हु.....
मुझे और दादू को छोड़कर बाकी सब मॉल के अंदर चले गए....
मैं - दादू ! क्या सब कुछ रेडी है.. या अभी कुछ बाकि रह गया है....??
दादू - जी बाबा ! जैसा आपने कहने कहा था...
ठीक वैसे hi मैंने डेकोरेट करवा दिया है...
मैं - थैंक्स दादू! आप सच में बहुत अच्छे हो...
आपने उस दिन की बात डैड से न बताकर बहुत अच्छा किया था...??
दादू - थैंक्स की बात नहीं है हयान बाबा !
दरअसल बेबी ने मुझसे ऐसा करने की रिक्वेस्ट की थी...
इस्सलिये मैंने बात छिपा दी...
लेकिन क्या यह सही होगा...
अगर आगे कोई प्रॉब्लम हुयी तो....??
मैं - मेरे ख्याल से अगर कोई इशू हुआ भी तो आप, रघु और निशाम मिलकर उसको हैंडल कर लोगे...
मुझे आप पर पूरा यक़ीन है...
अच्छा दादू ! मुझे जाना होगा.... टाइम हो गया है...
दादू - ठीक है बाबा आप एन्जॉय करो....
मैं बहार यहीं वेट करता हु....
मैं भी वह से सीधा मॉल के अंदर चल दिया....
सबको खोजने लगा....
मुझे सब एक साथ आइस क्रीम पार्लर के सामने खड़े दिख गए....
जहाँ सभी मेरे आने का वेट कर रहे थे....
माहि दी - कितना वक़्त लगते हो....
एक तो बिन बताये सबको यहाँ लेकर आये...
अब खुद hi गायब हो....
मैं - अरे मेरी बड़की दीदी... थोड़ा सब्र रखो.. सब पता चल जायेगा.....
चलो सब मेरे साथ चलो....
.
सब मेरे पीछे पीछे चल दिए....
"ये लो हम आ गए""
मैं एक मॉल में बने एक रूम के बहार आकर रुक गया.....
मैं - सृजल अब तुम्हारी बारी....
ओपन थे दूर.....
मेरे ऐसा कहने से सृजल मुझको अजीब तरीके से देखने लगी..
जैसे पूछना चाहती हो मैं hi क्यों.....??
वहीँ अंकित उसे देख कर मुस्कुराने लगा....
मैं - अब खोलो भी कितना वक़्त लगाओगी....??
सृजल ने झिझकते हुए दरवाज़ा खोला....
अनादर रूम में चरों तरफ अँधेरा पसरा हुआ था....
सृजल पलट कर फिर से हमारी तरफ देखने लगी.....
मैं - अंदर चलो तो सही... डरो मत....
हम सब भी तो साथ हैं ...
सृजल ने जैसे Hi पहला कदम रखा...
अचानक रूम रौशनी से जगमगा उठा...
और म्यूजिक बजने लगा....
"" हैप्पी बिरथ डे तो यू ""
म्यूजिक और रूम का डेकोरेशन देख कर समझ में आया की यहाँ बर्थडे ओर्गनइजे किया गया है...
वो भी सृजल का.....
सब एक एक करके सृजल को उसके जन्म दिन की मुबारक बाद देने लगे....
सृजल - तुम्हें कैसे पता... की आज मेरा बर्थडे है....??
मैं - मुझे क्या... माहि दी को छोड़कर बाकी सबको पता है.....
आज तुम्हारा बर्थडे है...
इसीलिए आज हम यहाँ तुम्हारा बर्थडे सेलिब्रेट करने आये हैं....
सृजल - बूत तुम सबको बताया किसने....??
मैं मुस्कुराते हुए... अंकित की तरफ देखने लगा....
सृजल तुरंत समझ गयी... अंकित ने hi सबको बताया है....
सृजल - इसका मतलब तुम्हें याद था...
वही तो मैं सोंचू तुमने मुझे अब तक ऐश क्यों नहीं किया....
अंकित - मैंने सोंचा इस बार थोड़ा अलग तरीके से तुम्हें विश करू....
सो Maine,Hayaan और अन्य ने मिलकर ये सरप्राइज प्लान किया....
वैसे कैसा लगा हमारा सरप्राइज....??
सृजल अंकित को हुग करते हुए....
सृजल - यह मेरा अब तक सब्सड अच्छा बर्थडे प्लान है...
बहजत अच्छा लगा....
थैंक यू वैरी मच अंकित....
हमेशा की तरह मेरा बर्थडे याद रखने के लिए....
मैं - वह ! म्हणत हम करे....
और वह वही उसे दी जाये....
थिस इस नॉट फारे.....
काश हमें भी कोई हुग करने वाला होता....??
सृजल - ओह्ह बेचारा ! तुम्हें भी हुग चाहिए.....
सृजल आगे बढ़ने वाली थी की.... अन्य! बीच में आ गयी....
अन्य - आजा मेरे पास... मैं तुझे हुग देती हु....
अन्य ने आगे बढ़कर मुझे अपने गले से लगा लिया....
और कान में धीरे से कहा...
"" थोड़ा नौटंकी काम किया कर...
और गर्ल्स से तो दूर hi रहना..""
अन्य ! की बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठा....
मैं - चलो चलो.. जल्दी से केक काटो....
और हमें अपने हाथों से खिलाओ....
सृजल ने केक कट किया...
सबको अपने हाथों से बरी बड़ी खिलाया....
हम सब ने भी सृजल को थोड़ा खिलाया... थोड़ा उसके गलों में लगाया....
सबने मिलकर काफी देर मस्ती की...
पार्टी ख़त्म होने के बाद....
सृजल - अच्छा सब मेरी बात गौर से सुनो....
बर्थडे सेलिब्रेशन अभी ख़त्म नहीं हुआ....
तुम सब इन्वितेद हो...
शाम 7 बजे मेरे घर में.... पार्टी है..
मेरे डैड की तरफ से....
सो तुम सबको अपने फॅमिली और पेरेंट्स के साथ जरूर आना है....
है एक बात और.... जब तक तुम सब आ नहीं जाते.. मैं केक नहीं कट करुँगी...
मैं - अच्छा ठीक है....
शाम को मिलते हैं..
अब हमें जाना होगा....
सृजल अंकित के साथ बाइक में बैठकर
अपने घर को रवाना हो गयी....
हम भी अपने घर के लिए निकल गए...
दुपहर के 3 बज रहे थे....
माँ डैड और मौसा मौसी अभी तक नहीं आये थे ऑफिस से,
हम सब अपने रूम में जाकर फ्रेश हुए....
और रेस्ट करने लगे...
क्युकी लंच तो करना नहीं था....
सबका वैसे भी पेट भरा हुआ था....
मैंने भी सोंचा कुछ देर सो लिया जाये...
वैसे भी आज कल रात जो सोने को नहीं मिल रहा...
हनी की वजह से....
साला खुद तो दिन भर चैन से सोता है.....
और रात में मुझे परेशां करता है...
सोने नहीं देता....
जब से रात में चस्का लगा है... शिकार करने का....
जब से हनी मेरे अंदर समाया था...
तब से मेरे बेहेवियर में काफी चंगेस आये थे....
जो की मेरे आलावा सब नोट कर रहे थे.....
बात बात पे गुस्सा करना..
लड़कियों की तरफ अट्रैक्शन.. ेट्स..
ऐसा लग रहा था की जैसे हनी मुझ ओर हावी होता जा रहा है....
खैर मैं अपनी सोंच को यहीं विराम देते हुए सो गया....
अभी सोये हुए कुछ hi समय हुआ था....
मेरे रूम का दूर नॉक हुआ.....
जिससे नेरी आँख खुल गयी....
मैंने उठकर दरवाजा खोला... बहार नाम कड़ी थी...
माँ - लगता है जनाब की नींद बीच में hi ख़राब कर दी..
मैं - नहीं माँ..
मैंने तो पिछले 3हरष से सो रहा हु...
माँ - Okay... अच्छा जाओ फ्रेश होकर आओ...
कॉफ़ी रेडी है....
मैं - बस दो मं में आया.....
मैं तुरंत फ्रेश होकर... हॉल पे पहुँच गया....
जहाँ सभी चाय और कफ की चुस्कियां बात करते हुए ले रहे थे.....
मैं भी सबके साथ जा बैठा....
डैड - हम्म बीटा जी....
आज बर्थडे पार्टी पर जाने का प्लान है....
मैं समझ गया मेरे आने से पहले hi शायद अन्य ने डैड को सब बता दिया है....
मैं - हम्म डैड जाना तो पड़ेगा.....
शर्त hi ऐसी राखी है....
डैड - ठीक है चले जाओ.... बिट हम गुआर्डिन में से कली नहीं Jayega.....Tumhare साथ.....
मैं - मैं पहले से hi यह समझ गया था....
कोई नहीं डैड.. हम दादू के साथ चले जायेंगे....
वैसे डैड! काईन अंकल और रिया मौसी लैब तक दिल्ली से वापस आएंगे....??
डैड ,- अब बुसिनेस्स सेट िप करने में टाइम तो लगेगा hi...
या तो वो दोनों आ जाते.... या फिर हम सब...
किसी न किसो कल तो रुकना hi पड़ेगा.....
बीच में टोकते हुए.....
माँ - मेरे ख्याल से अगर तुम सबको पार्टी में जाना है तो...
जाकर रेडी हो जाना हो जाना चहिये....
वर्ण लेट हो जाओगे....
6:30 आलरेडी हो चूका है......
मैं - अच्छा चलो.. सब रेडी हो जाओ....
हम 15मं में निकलेंगे.....
हम सब फटाफट रेडी हो गए....
मैंने लाइट पिंक कलर की शर्ट और क्रीम कलर का ट्राउज़र्स पहन रख था....
जबकि जिन नेवी ब्लू शर्ट और डार्क ब्लू जीन्स.....
वहीँ अन्य! ने ग्रीन और येलो कलर का सलवार सुईठे पहना हुआ था....
तभी मेरी नजर माहि दी पर पड़ी....
वो तो सबसे अलग hi दिख रही थी....
ऐसा लग रहा था की जैसे किसी मैरिज फंक्शन में जा रही हो...
माहि दी ने पिंक एंड लाइट रेड का मिक्सचर वाला राजस्थानी सुईठे पहना हुआ था....
वही अखिल भाई... भी फुल सुईठे बूट में थे....
सब एक से बढ़कर एक लग रहे थे.....
वो कहते है न... जो खूबसूरती सादगी मशीन होती है.... वह चणक धानक में कहाँ.... वैसा hi कुछ हाल अन्य! का था....
नार्मल ड्रेस में भी क़यामत की ऐडा थी...
मैं अन्य! के रूप रंग में खोया हुआ था की....
अन्य! ने मेरे आखों के सामने चुटकी बजायी....
""क्या हुआ हय्यू! कहाँ खो गए....
यही रुकने का इरादा है क्या...??""
""काश की मैं वक़्त को रोक पता....
कुछ पल हसीं के युहीं बिता देता...""
मैं - है है चलो...
मैं तो कबसे सबके आने का वेट कर रहा हु....
अन्य! मेरी बात सुनकर मुस्कुरा उठी....
अन्य - हम्म देख रही hi... कब से वेट कर रहे हो....
हम सब जाकर गाड़ी में बैठ गए....
दादू ने कार बढ़ा दी...
हमारे पीछे एक गाडी में रघु और निशाम भी सिक्योरिटी के लिए साथ चल दिए.....
कुछ hi मिनट्स में हमारी गाडी.... घंटा घर के पास बने आलीशान महल जैसे घर ""श्रीवास्तव कुञ्ज"" के सामने हमारी गाड़ी रुकी.....
गेट पर सिक्योरिटी काफी टाइट थी....
हमारी कार की स्कैनर के जरिये चेकिंग हुयी....
हमने अपना इंट्रो दिया...
कुछ hi देर में मैं गेट ओपन हुआ...
कार गेट ने एंटर कर गयी....
पूरा घर रौशनी से जगमगा रहा था....
देखने में बहुत बड़े रईस का घर लग रहा था....
अंदर जाकर हमें इस चमक धमक और रुतबे का कारन पता चला....
क्युकी सृजल, मला. रणधीर श्रीवास्तव की एकलौती बेटी थी.....
सृजल की माँ की डेथ कई साल पहले हो चुकी थी....
रणधीर श्रीवास्तव का एक मात्रा सहारा सृजल hi थी....
िस्सकिये वह उसे बहित प्यार करता tha......Har एक ख्वाहिश पूरी करता था....
पूरा हॉल क Khacha-khach भरा हुआ था.....
काफी लोगों को इन्विते किया गया था....
हम सब वहीँ साइड में खड़े....
सृजल के आने वेट कर रहे थे....
तभी हॉल की लाइट्स ऑफ हो गयी...
म्यूजिक की धुन बजने लगी...
तभी फ्लैशलाइट जाकर एक जगह पर जाकर रुक गयी....
रेड फ्रॉक में एक खूबसूरत लड़की.... साथ में, थ्री पीेछे सुईठे पहने... एक लड़का....
दोनों हलके हलके क़दमों के साथ स्टेज के पास रखे केक की तरफ बढ़ने लगे....
1...2...3....4...5...
कैंडल्स बुझ गयी..... केक कटा...
पहला निवाला हमारे दोस्त अंकित सर को....
दूसरा निवाला मला सर को....
हम सब दूर खड़े... ये सब देख रहे थे....
पास जाने की हिम्मत न हो रही थी...
एक तरफ कह रही थी...
तुम सबके के बिना केक कट नहीं करुँगी.... दूसरी तरफ यहाँ का यह हाल....
थोड़ा शॉकिंग लग रहा था....
और आलोट साहब का यूँ साथ होना...
एक इशारा दे रहा था.....
मैं अपनी सोंच में गम था की....
तभी माइक की आवाज़ सुनकर मेरा ध्यान स्टेज की तरफ...
मला सर - जी है आपने सही सुना.....
आज के खूबसूरत दिन पर...
मैं अपनी बेटी की इंगेजमेंट अपने दोस्त A.C.P. नवीन मिश्रा के बेटे आलोट मिश्रा से फिक्स करता hi....
आज का दिन मेरे लिए डबल ख़ुशी का दिन है....
सो Let's एन्जॉय पार्टी....
आज तो शॉक के ऊपर शॉक लग रहे थे....
एक तरफ सृजल के पापा मला..
अंकित के पापा ैप...
वहीँ दूसरी तरफ बर्थडे सेलिब्रेशन के जगह इंगेजमेंट का अनाउंसमेंट....
दोनों ने तो हमें अपने बारे में कुछ बताया hi नहीं...
न hi इस सरप्राइज के बारे में....
सबका हाल मेरे जैसे hi था.....
खैर हम सब बातों को दरकिनार कर....
पार्टी एन्जॉय करने लगे... आपस में मिलकर.....
अभी हम आइस क्रीम का लुत्फ़ उठा रहे थे....
की तभी सृजल की आवाज़ हमारे कानो में पड़ी.....
""ी रिपीट, "हयान, अन्य, जिन, अखिल और माहि जहाँ भी स्टेज पर तशरीफ़ लाएं...""
देर लगी.... लेकिन आखिरकार हमारी याद आ Hi गयी....
आइसक्रीम को बीच में hi छोड़कर हमने अपना रुख स्टेज की तरफ कर दिया....
हम सबने बरी बरी से दोनों को कोंग्रटुलते किया....
सृजल - मैं तुम सबका कब से वेट कर रही हु.....
बूत तुम सब न जाने कहाँ गम थे....
अन्य - हम तो बहुत पहले hi यहाँ आ गए थे....
बूत यहाँ सब अनजान थे... सो हम सब दूर से hi एन्जॉय कर रहे थे.....
सृजल - मन मैं बिजी थी...
बूत तुम सब तो फ्री थे....
मेरे पास तो आ hi सकते थे.....
अन्य - It's ok.. अब तो आ गए न...
सब छोड़...
पहले अपने दूल्हे राजा से तो मिलवा दे....
सृजल एकदम से शर्मा गयी....
सृजल - अच्छा सब मेरे साथ चलो...
मैं तुम्हें अपनी फॅमिली से इंट्रोडस करवाती हो....
सबसे पहले Srijal's डैड...
फिर Ankit's डैड...
और Ankit's माँ... प्रभा मिश्रा....
सबसे एक एक करके हम मिले...
सृजल ने.... हमें कॉलेज फ्रेंड्स और तोप्पेर्स कहकर सबसे इंट्रोडस किया....
सब हमसे मिलकर बहुत खुश हुए...
सृजल और अंकित को अपने साथ लेकर... हम पार्टी एन्जॉय करने लगे...
थोड़ा डांस.. थोड़ा सॉफ्ट ड्रिंक्स...
जब थोड़ा थक गए...
तो हम सब सृजल और अंकित को घेरकर बैठ गए....
अन्य - सृजल अब बता न यार.. ये सब कैसे हुआ....??
सृजल - अभी रहने दे...
कल कॉलेज में सब समझ दूंगी....
बिट प्रॉमिस करो.. सब
कॉलेज में इंगेजमेंट की न्यूज़ नहीं फैलनी चाहिए....
मैं - नहीं फैलेगी...
लेकिन दूल्हे राजा हमारे हाथों से नहीं बचने वाले...
इतनी बड़ी बात.. हमसे छिपाई....
तुम से तो कल hi ठीक से मुलाक़ात होगी.....
हम सब काफी देर बैठे हंसी मजाक करते रहे....
पार्टी ख़त्म होते होते... रात के 10:15 हो गया....
तभी दादू की मिस कॉल आयी....
मैं - अच्छा तो अब हम इजाज़त चाहेंगे....
वक़्त भी काफी हो गया है....
अब हमें चलना चाहिए....
हम फिर से बरी दोनों कपल्स से मिले... उन्हें मुबारक बाद दी...
कल कॉलेज में मिलने को कहकर....
वापस अपनी कार्स की तरफ चल दिए.....
अभी हम कार्स के पास पहुंचे hi थे की....
अचानक जोरर से बदल गरज़ उठा....
और तेज़ हवा बहाने लगी....
अचानक मौसम एकदम सुहाना हो गया.....
""वाओ ! कितना खुशनुमा मौसम है....
चलो न पैदल चलते है, घुमते huye..."",Any बोली....
जिन - मन तो मेरा भी कर रहा है.....
बूत क्या हम ऐसे जा सकते हैं.... पैदल... वो भी इतनी दूर....
दादू - नहीं.. कोई नहीं कहीं जा सकता...
ऐसे पैदल....
मैं - दादू ! क्यों न मैं ड्राइव करूँ कार...??
दादू - बाबा ! रात काफी हो गयी है....
सून सां रास्ता है .
ऐसे आपका ड्राइव करना ठीक नहीं रहेगा....??
मैं - दादू, तभी तो कह रहा हु ड्राइव करने को...
क्यूंकि रास्ता कजली है....!!
देखो न मौसम भी कितना अच्छा है....
ऐसे मौसम में गिलास खोलकर कार ड्राइव करने का अपना Hi मज़ा होता है....
दादू - मैं ऐसा नहीं कर सकता...
सर का आर्डर है....
अगर आपको हवा hi खानी है तो कार की छत ओपन कर देता हु..
आप खड़े होकर मौसम का लुत्फ़ उठा सकते है.......
मुझे भी दादू, की बात ठीक लगी....
मैं - Okay No प्रॉब्लम ! ये भी मस्त आईडिया है....
मैं कार की छत खोलकर बहार की ठंडी हवा का आनंद लेने लगा....
मेरी देखा देखि में अन्य भी आकर मेरे साथ खड़ी हो गयी....
और जावा में हाथ लहराते हुए....
जोरर जोरर से उह्हू ुहुओ चिल्लाने लगी....
हम दोनों को ऐसा करते देख... सबके चेहरे में मुस्कान फ़ैल गयी....
तभी जिन निचे से मेरे पेट में Gud-gudi करने लगी...
जिसके कारन मुझसे खड़ा न रहा गया....
मैं हँसते हुए निचे बैठ गया.....
और जिन! की छोटी को पकड़ के खींच ने लगा....
जिससे वह दर्द में चिल्लाने लगी...
""कोई मुझे बचाओ... इस बाँदा से...""
तभी अचानक.... एक जोरर का झटका लगा...
अन्य! धम्म से निचे आकर मेरे ऊपर गिर्र गयी.....
और दर्द से कराहने लगी....
आज कलिये बस इतना hi..
-----
--------
-----------
लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!