Update..No..66*
MeGa..UpDaTe
Abb..Takk...
अब तक आपने पढ़ा हयान अपनी फॅमिली से मिलने हॉस्पिटल जाता है..
जहाँ अन्य बेहोशी की हालत में थी..
आदिगुरु से मिलने को कहकर वापस चेयरमैन के फार्महाउस आ जाता है..
जहाँ वह क़त्ल - इ - आम मचता है....
लास्ट में पता चलता है की चेयरमैन एक बार फिर बचकर भाग चूका है....!!
Abb..Aage...
मैं - देखो मैंने तुम्हारी हर एक शर्त को मान लिया है...
जैसा तुम चाहते हो वैसा करने की आज़ादी भी दी है...
क्या तुम मेरी एक बात मानोगे....??
(मैं तो तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ,
ये भी कोई पूछने की बात है, कहो क्या चाहते हो...??)
मैं - मैं चाहता हु की...
मेरी फॅमिली मेंबर के सामने तुम एकदम खामोश रहो...
मैं नहीं चाहता की तुम्हारी किसी भी हरकत से मुझे उनके सामने शर्मिंदा होना पड़े...
सभी मुझे Be-inteha प्यार करते है,
और मैं भी सबकी इज्जत करता हु...
सो मेरी मान मर्यादा का ख्याल रखना.....!!
कुछ देर यूँही ख़ामोशी छायी रही...
(मन में - ः ः एक शैतान से ऐसी उम्मीद रखना.. कितनी बड़ी बेवकूफी है,
मेरा तो जन्म hi तुम्हें बुरे रस्ते पर ले जाने के लिए हुआ है...
और मेरा पहला कदम तुम्हारी इज्जत को ख़ाक में मिलाना है...)
मैं - क्या हुआ किश सोंच में पद गए....
क्या तुम्हें यह शर्त मंजूर नहीं.....
(कुछ नहीं, अब तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया है,
मेरे लिए तो यह बहुत छोटा सा काम है..
मैं खुद को शांत रखूँगा)
मैं - बहुत बहुत शुक्रिया दोस्त..
मुझे तुमसे एहि उम्मीद थी...
(मन में - शुक्रिया तो मैं ऐडा Karunga....Ek दिन,
शरीर तुम्हारा होगा.... दिमाग मेरा...
बहुत मज़ा आएगा...
....ः ः)
मैं - क्या हुआ दोस्त इतने खामोश क्यों हो गए....
अभी तो घर पहुंचने में वक़्त है....
(कुछ नहीं, वो क्या है शिकार करने के बाद मुझे आराम करना पसंद है..)
मैं - हम्म ! अच्छा ये बताओ....
मैं तुम्हें किश नाम से पुकारूँ....??
(शैतान, मास्क मन, नकाब पॉश, खुनी दरिंदा.... मेरे कई नाम है.. जो पसंद हो, उसी नाम से बुला लो..)
मैं - ये सब नाम बेकार....
इनसे बुराई की बू आती है..
हम्म याद आया तुम्हें वो रिंगटोन बहुत पसंद है न.... Hello हनी बन्नी...
तो आज से तुम्हारा नाम हनी ! होगा...!!
(हहह एक शैतान का नाम हनी...
जरा सा भी सुईठे नहीं करता...)
मैं - इसी लिए तो हनी ! ठीक रहेगा...
ऐसा लगेगा जैसे कोई अपनी मेहबूबा को बुला रहा हो....
(ः हां नीस जोके बीआरओ ! चलो ठीक है फिर एहि नाम सही)
ऐसे hi मैं खुद के अंदर छिपे शख्श से बात करते हुए घर पहुँच गया....!!
मेरी कार को देखते hi तुरंत गेट कीपर ने दरवाज़ा खोला....
बहुत दिनों के बाद आना हुआ था कबीरा पैलेस में....
बहुत hi ख़ूबसूरत नज़ारा लग रहा था....
इस वक़्त सुबह के 7 बज रहे थे....
चिड़ियों की Chah-Chahat, सूरज की की किरणे घर की सोभा को और बढ़ा रही थी....
गेट खुला हुआ था मैं सीधा हॉल में जा पहुंचा,
जहाँ Mom-Dad पूजा में बैठे हुए थे...
मैं भी जाकर लार्ड को नमन करके शीश झुका कर जैसे hi बैठने को हुआ....
मुझे एक झटका लगा और मैं पीछे जा गिरा.....
मैं और हनी मन hi मन बातें करने लगे....
(हनी - क्या कर रहा है..
क्यों मुझे मारने में लगा है.....
तू इतना न समझ कैसे हो सकता है...)
मैं - क्यों क्या हुआ....??
(हनी - तू सच में बेवक़ूफ़ है...
या फिर दिखावा करता है...
क्या कभी गॉड के सामने किसी शैतान की उपस्थिति देखि है..)
मैं - पर मैं शैतान नहीं....
(हनी - तू नहीं तो क्या हुआ...
मैं तो हूँ...!!
तू मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता...
जब तक मैं तुझ में समाया हु)
मैं - लेकिन मैं तो डेली पूजा करता हु...
और आगे भी करूँगा....
अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम है तो खुद को अंतर्ध्यान कर लो....
(हनी - ऐसा पॉसिबल नहीं...
एक शौतन के किये यह बहुत दुखदयी है..)
मैं - ठीक है अच्छा...
मैं इसका कोई हल खोजता हु...
तब तक वेट कर....
वैसे तू बुराई का रास्ता छोड़ क्यों नहीं देता...??
जैसा मैं कहता हु वैसा कर...??
(हनी - मैं बुरा कहा हु..
मैं तो बस जालिम हु...
जुल्म करने वालों के लिए....)
मैं - अगर बुरा नहीं तो... फिर ईश्वर से डरता क्यों है..??
वैसे आज एक तेरी कमजोरी पता चल गयी...
इससे मुझे बहुत फायदा होगा....!!
(हनी - ज्यादा बक बक मत कर...
वर्ण मेरा दिमाग खिसका तो तेरी लंका लगनी तय है...)
तभी माँ मेरे पास आ गयी और मुझे होने सीने से लगा लिया...
मैंने भी उन्हें G.M.wish किया....
माँ - आ गया मेरा बचा....
कैसा है तू...??
जा डैड के साथ पूजा में बैठ जा....
मैं - ठीक हु माँ..
नहीं माँ, अभी नहीं,
Naha-dhokar पूजा करूँगा....
माँ - चल ठीक है..
ाचा आ जा तिलक लगवा ले....
मैं हिचकते हुए माँ के सामने थोड़ा झुक गया.....
जैसे hi माँ ने तिलक लगाया....
मेरी हलकी सी चीख निकल गयी...
माँ - क्या हुआ बीटा....
अभी तुम्हारी दर्द से सिसकी निकली...
कही चोट लगी है क्या...??
मैं - नहीं माँ, मैं ठीक हु...
मैंने तो कोई आवाज़ नहीं की....
माँ - ये मुझे आज हुआ क्या है...
अभी कुछ देर पहले ऐसे लगा...
की जैसे तू मेरे करीब आया था...
फिर तेरे दर्द में होने की आवाज़ आयी...
मैं - आप भी न माँ..
कुछ भी सोचती हो... इतनी भी फ़िक़र मत किया करो...
अब मैं बड़ा हो गया....
माँ - बचे चाहे जितने भी बड़े हो जाये..
एक माँ के लिए, बचे हमेशा बचे hi होते हैं...
मैं - Okay Okay..
मैं ठीक हु...
अब मुझे जाने दो फ्रेश भी होना है....
माँ - ठीक है...
जल्दी से फ्रेश होकर आ मैं ब्रेकफास्ट लगाती हु...
Okay माँ ! बस 10 मं में आता हु...
इतना कहकर मैं अपने रूम की तरफ चल दिया....
जैसे hi मैंने रूम का दूर खोला.....
(हनी - ओह्ह माय गॉड ! क्या मस्त आइटम है बे....??
माँ कसम सुबह सुबह अप्सरा के दर्शन हो गए....)
मैं - चुप बे...
आगे कुछ भी मत बोलना....
वर्ण तुझे बहुत महंगा पड़ेगा...??.
दरअसल सामने जिन ! मिरर के सामने बाल बना रही थी...
जुल्फें बिखरी हुयी..
हल्का गीला बदन...
जैसे अभी अभी नाहा कर आयी हो..
पिंक ड्रेस में बहुत hi ख़ूबसूरत लग रही थी....
एक पल के लिए मेरी भी आँखें उस पर ठहर सी गयी थी.....
तभी जिन ! पलटी और मुझे गेट पर खड़ा हुआ देख,
मेरे तरफ भाग कर आयी....
और मुझे हुग कर लिया....
(हनी - िस्सशहठ मारा डाला रे....)
जिन - गुड मॉर्निंग हयान !
तुम कब आये....??
क्या हुआ कहीं चोट लगी है क्या.....??
(हनी - कुछ देर पहले तक तो नहीं लगी थी... लेकिन अभी अभी पूरा सीना छलनी कर दिया...)
जिन - तुम ने कुछ कहा क्या....??
मैं - नहीं तो...
मैं तो उस वक़्त hi आ गया था,
जब तुम अपने हुश्न के जलवे उस आइना के सामने बिखेर रही थी....
आज तो बिलकुल क़यामत लग रही हो..
मेरी जंगली बिल्ली...
(हनी - वह रे... तुम करो तो चमत्कार...
हम करे तो बलात्कार..)
मुझे अजीब निगाह से देखते हुए....
जिन - कुछ बदले बदले से लग रहे हो...
सच बताओ सब ठीक है न...??
मैं - हम्म सब ठीक है...
अच्छा ये बताओ..
बाथरूम में कौन है..??
मुझे भी फ्रेश होना है....
जिन - महारानी जी नाहा रही है...
अभी टाइम लगेगा..
दूसरे रूम में चले जाओ...
तभी माँ की आवाज़ आयी जो नाश्ते के लिए बुला रही....
मैं - ठीक है जिन ! तुम जाओ मैं अभी आता हु.....
अच्छा ये दुपट्टा दाल लो..
वर्ण आज सब घायल हो जायेंगे.....
जिन - धत्त पगलू..
इतना कहकर शरमाते हुए जिन भाग गयी...
जैसे hi जिन बहार निकली वैसे hi अन्य! ने बाथरूम का दूर खोला....
शायद उसे मेरे आने का अहसास हो चूका था...
जैसे hi मेरी अन्य! पर नजर पड़ी..
धम्म.. अह्ह्ह्ह...
दूर हटो मुझसे....
मैं दूर जा गिरा और दीवार से जा टकराया...
मेरे पूरे शरीर में आग लग गयी....
मैंने एक बार फिर से अपना रौद्र रूप धारण कर लिया.....
तभी इमरजेंसी फायर वाटर पंप से पानी मुझ पर गिरने लगा....
लेकिन मेरे शरीर के आग को न बुझा पायी....
अन्य! तो यह सब देख कर एकदम घबरा गयी...
घबराहट में जोरर से चिल्लाने लगी...
ये तो अच्छा था की रूम साउंड प्रूफ था,
वर्ण अभी सब के सब इकठ्ठा हो जाने थे....
अन्य ! को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे....
मेरे पास आने को हुयी मैंने उसे तेज़्ज़ धक्का देकर खुद से दूर कर दिया....
अन्य! भी दिवार से जा टकराई...
दर्द से चीखते हुए...
मैं - बाथरूम के अंदर जाओ.....
अन्य ! तुरंत हद बड़ाहट में बाथरूम में चली गयी....
और दूर लॉक कर लिया....
(हनी - साले चूतिये..
तू तो मेरा अस्तित्व hi मिटाना चाहता है...??
बताया क्यों नहीं बाथरूम में अन्य है...)
तभी अन्य....
चिंता भाव से चिल्लाते हुए...
अन्य - हय्यू ! ये सब क्या है....
तू ठीक तो है न....??
मैं अब संभल चूक था....
मैं - है अब सब ठीक है...
जब तक मैं न कहूं आप बहार मत आना....
अन्य - ठीक है नहीं आउंगी...
पहले तू ये बता..
ये सब है क्या....??
मैं - सब बताऊंगा...
थोड़ा वक़्त दें मुझे....
(जवाब दे बे....
क्यों कर रहा मेरे साथ ऐसा...
पहले मंदिर..
फिर अन्य.... होल्डर ऑफ़ वाइट एनर्जी...)
मैं - तूने मुझे कुछ भी नहीं बताया....
मैं तो इन सब बातों से अनजान था....
तेरी वजह से मुझे भी दर्द सहना पद रहा....
अपनी अन्य ! को धक्का देना पड़ा....
चोंट लग गयी होगी उनको....
(हनी - तुझे उसके चोंट की पड़ी है...
यहाँ मेरा अस्तित्व दांव पे लगा था....
क्या तुझे उस बुढऊ ाफिगुरु ने कुछ बताया नहीं क्या...??)
मैं - इज्जत से नाम लो उनका... मुर्ख !
नहीं उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया..
बस इतना कहा की जो हो रहा hai....Hone दो...
(हनी - इस बुढऊ की तो..
पिछवाड़े में बोम दाल दूंगा...
एक बार मिले तो )
मैं - बस एक और भी अपशब्द कहा उनके बारें में तो...
मैं बीच में hi रुक गया...
अचानक रूम में रौशनी फ़ैल गयी...
तभी एक पल के लिए समय चक्र फिर से रुक गया....
"कहो पुत्र कैसे याद किया...??""
(हनी - बहार आने दे Mujhe.....Nikaal मुझे बहार....
नहीं छोडूंगा....
इसकी तो...)
मैं - प्रणाम गुरुवार !
आदिगुरु - आखिरकार मिल hi गया koi....Tumhari भी टक्कर का..
तो कैसा रही पहली मुलाकात ...??
हनी - बहुत बड़ा गेम खेल गया तू बुढऊ...
नहीं छोडूंगा तुझे...
आदिगुरु - कल भी मुर्ख था... आज भी मुर्ख है....
मैंने तुझे एक नया जीवन दिया...
क़ैद से मुक्ति दिलाई...
और तू है की मुझे हीबुरा कह रहा....??
हनी - इसमें भी तेरा कोई फायदा होगा..
जो तूने मुझे हयान के शरीर से मुक्ति दिलाई....
और मुझे शिक्षा देने के लिए अपने पास क़ैद कर रखा..
वो तो अच्छा हुआ मैं मौका देख कर भाग निकला....
मैं दोनों की बातें ख़ामोशी से सुनने लगा...
और बातों को समझने की कोशिश करने लगा...
आदिगुरु - अगर तू वहां से भागता नहीं..
तो शायद आज वाइट एनर्जी का सामना करने से डरता नहीं...??
मुझसे अब खामोश न रहा गया...
मैं - गुरुवार ! क्या आप विस्तार से बताएँगे..
की ये सब किश बारे में है...??
आदिगुरु - याद है वो दिन..
जब मैं तुम्हें सोनपुर से अपने गृह ले गया था...
तभी मैंने तुम्हारे शरीर से वो लाल धागा तोड़ कर इस्को आजाद करके खुद के पास क़ैद कर लिया था..
ताकि इसे शिक्षा दे सकू...
और इस मुर्ख को भविष्य के लिए तैयार कर सकूँ...
जब उसके आने का समय होगा....??
जिससे तुम्हारा दूसरा अंश भी मज़बूत हो सके...
लेकिन यह मुझे hi धोका देकर भाग गया....
तभी मैंने दूसरा रास्ता चुना....
और वापस तुम्हारे शरीर में समाहित कर दिया....
मैं - कौन आएगा...
किस्सके लिए हम दोनों को तैयार कर रहे....??
आदिगुरु - अभी उसके बारे में जानने का समय नहीं आया...
बस इतना जान लो एक तूफ़ान आने वाला है..
जो सम्पूयर्ण मानव जाती का विनाश कर देगा...!!
हनी - बस बस एहि वजह थी मेरे भागने की...
कभी कोई पूरी बात नहीं बताया...
बस अँधेरे में रख कर मुझसे अपना काम निकलवाने की सोंच रहा..
मैं - गुरुवार ! मुझे आपकी बातों पर पूरा यक़ीन है..
कुछ तो वजह जरूर होगी ऐसा करने की..
लेकिन अब मैं मुसीबत में फंस चूका हु..
इसकी वजह से मेरा जीना दूभर हो जायेगा...
कोई तो राष्ट बताये,
जिसके जरिये मैं इसे कण्ट्रोल कर सकू..
वर्ण यह शैतान मुझे भी अपनी तरह बना देगा.....
हनी - ऐसा करने की सोचना भी मत...
वर्ण इसका अंजाम बहित बुरा होगा....??
आदिगुरु - और जो तुम सोंच Rahe....Uska क्या...??
मैं - कैसी सोंच गुरुवार...
आदिगुरु - यह तुम पर काबू पाना चाहता...
तुम्हारे जरिये अपने काळा कारनामों को पूरा करना चाहता है...
कुछ समय पहले भी इसने क़त्ल इ आम मचाया था..
मेरी शक्तियों के डैम पर...
वो तो अच्छा हुआ..
एक शक्ति रहित आत्मा बन गया...
जिसकी वजह मेरी शर्त मैंने को तैयार हो गया...!!
गुरुवार की बातें सुनकर मैं एक डैम शॉक हो गया....
मैं - मेरा hi अंश होकर मेरे hi खिलाफ जाने की जाल सजी कर रहा....
क्यों कर रहे ऐसा...??
आदिगुरु - अब ये नहीं बोलेगा...
मैं - बास बहुत हुआ मुझे उपाय बताये...
आदिगुरु - उपाय तुम्हें खुद खोजना होगा...
मैं क्रिया बता सकता हु..
जिसके जरिये ये कुछ हद्द तक अपनी मनमानी नहीं कर पायेगा...
वैसे भी अन्य के सामने आते hi अब यह खुद बखुद कण्ट्रोल में आ जायेगा...
मैं - बहुत बहुत धन्यवाद गुरुवार ! आपने मेरी परेशानी hi ख़त्म कर दी....
आदिगुरु - ख़त्म नहीं..
कुछ हद्द तक काम की है..
परेशानियां तो अब आणि शुरू होगी...
जितनी जल्दी हो सके इस पर काबू पाओ....
और अपने कर्मों की तरफ अग्रसर हो..!!
मैं -जैसा आप कहें गुरुवार!
आदिगुरु - इसे अपने सीने में मॉल लो..
महाकाल का आर्शीवाद है इसमें..
इससे तुम्हें मंदिर और अन्य के सामने जाने में कठिनाई नहीं होगी..
अब मुझे जाना होगा...
मैंने आगे बढ़कर गुरुवार के पेअर छुए और आशीर्वाद लिया...
इसी के साथ गुरुवार गायब हो गए..
उनके जाते hi समय चक्र भी शुरू हो गया...!!
हनी - देख भाई.. मई तेरा hi अंश hi भला तेरे खिलाफ षड़यंत्र कैसे रच सकता hi...Jubki तेरे जीवन से hi मेरा जीवन भी जुड़ चूका है...
वो बुढऊ हमेशा दो तरफा बातें करता है..
हर बार एक नया बहाना और कारन खोज लता है...!!
मैं - तुम्हारी बात सही भी हो सकती है...
लेकिन बातें कभी झूटी नहीं होती....
उन्होंने हमेशा सबका भला चाहा है...
मुझे उनकी बातों पर पूरा यक़ीन है..
चाहे कारन जितने भी बदले...
लेकिन मेरा विश्वाश कभी नहीं बदलेगा....!!
हनी कुछ बोलने वाला था की....
तभी अन्य ! चिल्लाई...
अन्य - इतनी देर क्यों लग रही..
बता न क्या बात है,
वर्ण मैं बहार आ रही हु....
मैं - बस 1 मं और उसके बाद आप बहार आ जाना...
अन्य - Okay... ओनली 1 मं..
मैं गुरुवार के द्वारा दी गयी राख को अपने हाथ में लेकर मलने के लिए होता हु की....
हनी - ऐसा मत करो...
अभी वक़्त है मेरी बात ओर यक़ीन करो....
मैं - मुझे तुम्हारी बात पर यक़ीन है,
मैं ये तुम्हारे भले के लिए कर रहा..
वर्ण हम दोनों अन्य का सामना नहीं कर पाएंगे...
इतना बोलकर मैं राख को अपने सीने में मलने लगता हु...
मेरे ऐसा करते hi...
मेरे सीने में एक तेज़्ज़ दत्ड़ उठने लगता है...
मैं खुद का आंतुलान खो बैठता हु....
जमीन में गिर्र पड़ता हु
और वही लेते लेते दर्द से तड़पने लगता हु......
मैं और हनी दर्द में चीखने लगते है...
मेरी चीख सुन कर अन्य ! से और बर्दाश्त नहीं होता...
वह दरवाज़ा खोलकर बहार आ जाती है....
मुझे देख कर एक डैम हैरान परेशां हो जाती है....??
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आज कलिये बस इतना hi..
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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना dhyan....Aapka दोएत हयान..!!