Update..No..62*
MeGa..UpDaTe
Abb..Takk...
गुंडा - बॉस ये तो मार खाने से पहले hi बेहोश हो गया...
मैं तो कहता हु दोनों को गोली मारो...
और हम चलते हैं अपने टारगेट की तरफ....
चेयरमैन2 - चुप पे बुड़बक... जब बातों की समझ न हो तो बीच में नहीं बोलै करते...
हमें कही नहीं जाना...
वो खुद hi आ रहे हैं...??
Abb..Aage...
मास्क मन - बुड़बक वो नहीं तू है...
शायद तुझे अंदाज़ा नहीं..
तुम लोगों ने क्या किया...??
तुम सबकी मौत आ रही है... जिसे तुम सब ने बुलाया है..??
चेयरमैन2 - एक तो पहले बेहोश हो गया है...
अब बचा है तू..
फिर भी इतना घमंड...,
तुझे अभी नहीं मरूंगा...??
मैं भी तो देखूं कौन है आ रहा है हम सबको मरने के लिए...??
मास्क मन - तुम सबकी िक्षा बहुत जल्द पूरी होगी..
मैं तो शिकार के इरादे से आया था..
लेकिन अब तुम सब पर दया आ रही है...
खास कर तुम पर चेयरमैन ॉर्फ डी6 के डुप्लीकेट....!!
अभी भी वक़्त है सब भाग जाओ...
वर्ण फिर मौका नहीं मिलेगा बचने को...??
चेयरमैन2 - ओह्ह तो तुम सब जानते हो, अच्छी बात है !!
आने दो...
लेकिन शायद तुम्हें अंदाज़ा नहीं कौन आ रहा है किसे लेकर...??
मास्क मन - न जाने किश चूतिये से पला पद गया है मेरा,
चुप रहना hi बेहतर है...!!
मास्क मन मुझे रोड के साइड ले जा कर लिटा देता है,
और खुद भी आने वाले पल का वेट करने लहता है...!!
हयान की तरफ देखते हुए...
मास्क मन - काश तुमने मेरी बात पहले मान ली होती...
तो शायद आज ये दिन न देखना पड़ता...,
पर तुम ठहरे अहिंसावादी.. सचाई की मिसाल बनना था तुम्हें...
अफ़सोस मेरी बात न मन कर तुमने अपनों को खो दिया....??
अब Misaal.Nahi मशाल जलना....??
बस एक डील hi तो करनी थी....??
मैं भी देखता हु कैसे निपटते हो इस हालात से मेरे बगैर....??
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आइये अब चलते है अन्य की तरफ...
आखिर क्या वजह थी...
हयान के बेहोश होने की...??
और मास्क मन के ऐसा कहने की....??
कबीर फॅमिली जैन के साथ देहरादून के लिए सोनपुर से निकल चुकी थी....
अभी वो देहरादून पहुंचने के करीब थे की कबीर ने जैन से गाड़ी रोकने को कहा....
कबीर - जैन ! अब तुम वापस जाओ..
यहाँ से हम सभी घर चले जायेंगे.....
वैसे भी इतनी सिक्योरिटी काफी है हमारे लिए...
तुम हयान के पीछे जाओ...
जैन - Okay सर ! मैं जा रहा हु...
बूत आप सभी होशियार रहना..
क्युकी हमें हयान ने सख्त निर्देश दिया थे की जैसा उसने कहा है वैसा hi हो...
कबीर - अब हमें डरने की जरुरत नहीं बस 10 कम hi तो बचा है...
कुछ देर बाद हम सब घर में आराम कर रहे होंगे...
आगे हम सब संभल लेंगे...
जैन को भी कबीर की बात सही लगी...
क्युकी चेयरमैन के प्लान के मुताबिक अटैक सोनपुर में होने वाला था...
इस्सलिये जैन चाँद गार्ड्स के साथ वापस हयान की तरफ चल दिया....
कबीर और उसके सभी फॅमिली मेंबर आने वाले खतरे से अनजान,
एक hi गाड़ी में इकठ्ठा कबीरा पैलेस की ओर चल दिए...
आगे पीछे दो गाड़ियां चल रही थी प्रोटेक्शन के लिए...
लजात्रा कभी चेतावनी देकर नहीं आता... अचानक hi पूरी दुनिया उलट - पलट देता है....
ऐसा hi कुछ इनके साथ हुआ...
अभी 5कम दूर hi गए थे की...
अचानक चरों तरफ से गोलियों की बौछार शुरू हो गयी...
अचानक हमले से सभी घबरा गए और डर के मरे गाड़ियां वही रोक दी...
और शायद एहि गलती कर दी....
की तभी किसी ने एक और फायर किया...
पहली गाडी में विस्फोट हुआ...
और गाड़ी के परखचे हवा में उड़ने लगे...
एहि गनीमत थी की पहली गाडी में सिर्फ सिक्योरिटी गार्ड्स थे कोई फॅमिली मेंबर नहीं था....
कबीर को यहाँ पर रुकना सेफ न लगा..
उसने तुरंत गाडी को फुल स्पीड में आगे बढ़ने को कहा....
लेकिन ज्यादा दूर न भाग सके क्युकी हर तरफ से गोलियों की बौछार होने लगी...
और उन्हें बीच सड़क में घेर लिया गया...
चरों तरफ गाड़ियां और बीच में फांसी कबीर की दो कार्स...
अच्छी बात ये थे की सिर्फ गोलीबारी की,
बुलेटप्रूफ गिलास होने की वजह से सब सेफ बच गए...
कली नुकसान नहीं हुआ...
अगर फिर से किसी ने बोम फेंका होता तो शायद कोई भी न बच पता....
गोलीबारी रुक चुकी थी...
तभी एक गाडी से दो लोग उतर कर कबीर की तरफ बढ़ गए...
"मैं टी समझता था की मेरा वार कभी खली नहीं जाता..
लेकिन तुम्हारी खुशनसीब तो dekho...Tum बच गए..""
"मर्डर के फिर से जिन्दा हो गए..""
सभी को बहार निकालो...
इशारा मिलते hi सभी गुंडे जबरदस्ती सबको गाडी से बहार निकाल लाये....
और सब को एक लाइन में खड़ा कर दिया...
सबके सामने बन्दूक तान कर खड़े हो गए....
कबीर को अब डर सताने लगा...
शायद उसने हयान की बात न मानकर बहुत बड़ी गलती कर दी...
पर अब पछताए क्या फायदा...??
कबीर - देखो तुम बहुत बड़ी गलती कर रहे हो...
हमारा रास्ता इस तरह रोक कर...
चेयरमैन - मैं कभी कोई गलती नहीं करता....
बस एक बार भूल हो गयी थी..
की तुमको मरने के बाद चेक करना भूल गया था...
लेकिन अब ऐसा दुबारा नहीं होगा.....
वैसे कुछ कमी सी लग रही है...
है याद आया... वो कहाँ हैं..
इस विरासत का चश्म - ो - चिराग !!
चेयरमैन हँसते हुए...
मैंने सुना था उसने मुझे मरने के लिए कोई प्लान बनाया था...??
चेयरमैन की बातें सुन कर अन्य को उस पर बहुत तेज़्ज़ गुस्सा आने लगा..
शायद पुराने जख्म फिर से हरे हो गए थे...
अन्य कुछ करने वाली थी की जिन! ने उसका हाथ पकड़ किया और शांत रहने का इशारा किया....
कबीर - वो जल्द hi आ रहा होगा तेरी मौत बन कर....??
कबीर की बात सुन कर चेयरमैन जोरर जोरर से हसने लगा...
चेयरमैन - वो क्या मुझे मरेगा...
जो खुद धीरे धीरे मौत की तरफ खिंचा चला जा रहा हो...
पहले उसका Hi इंतेज़ाम किया, फिर इधर आया हु....
चेयरमैन की बात सुन कर कबीर फॅमिली के माथे डर एयर घबराहट की लकीरें साफ़ दिखने लगी....
तभी... तेज़ आवाज़ में....
अन्य - अरे तुझ में कहाँ इतनी हिम्मत की तू उसे हाथ भी लगा सके...
उसे क्या तुझ में इतनी भी ताक़त नहीं की तू मेरा,
एक लड़की का सामना कर सके....
एक लड़की के द्वारा ऐसे ललकारे जाने से चेयरमैन को बेइज्जती महसूस होने लगी...
और वो गुस्से में अन्य की तरफ आगे बढ़ गया..
और जैसे hi उसने अन्य को छूने की कोशिश की अचानक तेज़्ज़ झटका लगा...
और बहुत दूर जा गिरा....
सभी गुंडे अन्य की तरफ मुँह फाड़े देख रहे थे..
समझने की कोशिश कर रहे थे की आखिर अचानक हुआ क्या....??
किसी शेरनी की तरह तेज़्ज़ दहाड़ मरते हुए अन्य... गरज़ उठी...
अन्य - तुझ पापी में इतनी शक्ति नहीं की तू मुझे छू भी सके...
सोंच जब तू मेरा बाल बांका नहीं कर सकता,
तो उसका सामना कैसे करेगा...??
और अगर सामना करने की हिम्मत होती तू खुद जाता उसका सामना करने न की अपने टट्टुओं को भेजता...
चेयरमैन कराहते हुए अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ...
और विस्मय भाव से अन्य देखने लगा....
चेयरमैन - मैं तो समझा था की तू कोई आम लड़की होगी....
जो एक भाई के लिए अपनी चिंता जाहिर कर रही...
लेकिन तू मुझे नहीं जानती मैं कौन हु..??
अन्य - तू जो भी हो मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता....
लेकिन मैंने अभी जो ट्रेलर दिखाया उससे बखूबी जान गया होगा की मैं कौन हूँ..!!
और अगर जान कर भी अगर तू गलती करना चाहता है तो फिर आ जा....
तुझे दिखती हु की मेरे सामने तेरी क्या औकात है...??
एक hi दिन में इतनी ज्यादा बेइज्जती शायद hi किसी ने की होगी चेयरमैन की...
फिर जब बात औकात की हो तो भला शक्ति में चूर शैतान कैसे सहन कर सकता है...
ऐसा hi चेयरमैन के साथ हुआ....
उसने अपनी आँखें बंद की और कुछ पढ़ने लगा....
फिर अन्य की तरफ अपनी ऊँगली का इशारा कर दिया....
एक एनर्जी बीम उसके हाथ से निकलती हुयी अन्य की तरफ जाने लगी....
तभी एक विस्फोट हुआ...
और हरा तरफ धुआं छ गया...
कबीर और मीरा उसकी तरफ भागते हुए एक साथ जोरर से चिल्लाये... अनय्या....
नानी अन्य के बिलकुल करीब कड़ी थी इस्सलिये वो भी उसकी तरफ भागी....
सामने का नजारा देख कर चेयरमैन जोरर जोरर से हसने लगा....
धुआं छटने लगा लेकिन ये क्या...
अन्य वहां पर नहीं थी.....
नानी चेयरमैन की तरफ भगति हुयी गयी और उसके मुँह पे एक जोररदर तमाचा जड़ दिया.....
चेयरमैन एकदम भायखला सा गया....
कलर पकड़ते हुए...
नानी - हरामजादे क्या किया तूने मेरी बेटी के साथ...
अगर उसे कुछ भी हुआ न, मैं तेरा मुँह नोच लुंगी...
खून पी जाउंगी तेरा...!!
चेयरमैन गुस्से से खीजते हुए....
हट बुढ़िया मुझसे दूर ! तेरी इतनी हिम्मत की तूने मुझे मारा...
अब देख मैं तेरे साथ क्या करता हु.....
चेयरमैन ने गुस्से से एक जोरर डर प्रहार नानी माँ के ऊपर किया....
जिससे उनका शरीर आग में झुलसने लगा...
और उड़ती हुयी हवा में उछाल गयीं......
लेकिन ये क्या नानी माँ हवा में ठहर गयी....
सामने का नजारा देख कर सबकी आँखें आश्चर्य से फट गयी...
क्युकी इस वक़्त अन्य अपने दोनों हाथों में नानी माँ को थामे कड़ी थी....
अन्य धीरे धीरे जमीन पर आ गयी...
और नानी माँ को गाड़ी के सीट पर जाकर लिटा दिया....
हील करने की कोशिश करने लगी...
बाकी सब भी नानी के माँ के को घेर कर खड़े हो गए...
इस वक़्त नानी माँ के शरीर काफी साडी छोटे आयी हुयी थी...
बॉडी जगह जगह से काट चुकी थी खून रिष रहा था.....
नानी माँ के यह हाल देख कर अन्य गुस्से चीख उठी...
बास ! बहुत हुआ... तुमने साडी सीमाएं लाँघ दी है....
अन्य आसमान की तरफ देखते हुए जोरर से दहाडी.....
ऐसा करते hi उसके हाथ में एक तलवार आ गयी....
एक बार पीछे मुड़कर अपनों की तरफ देखा फिरर गुस्से से किसी घायल शेरनी की तरह सभी गुंडों के बीच कूद पड़ी...
सबको गाजर मूली की तरह काटने लगी....
हर तरफ चीख पुकार गूंजने लगी...
किसी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी उसका सामना करने की....
सब अपनी जान बचने के लिए इधर उधर भागने लगे...
चेयरमैन चिल्लाते हुए...
भागो मत बाकियों को निशाना बनाओ...
उसकी फॅमिली पर अटैक करो.
.
सरे गुंडे कबीर फॅमिली की तरफ लपके....
लेकिन इस तरफ भी वही हाल था...
अभी तक शांति से खड़े तमाश देख रही जिन ने....
हथियार उठा लिया....
और किसो को भी आगे बढ़ने का मौका न दे रही थी....
जिन का साथ देने के लिए....
अखिल, माहि और गॉर्डस भी आगे आ गए...
एक तरफ अन्य सबको दौड़ा दौड़ा कर मार रही थी..
तो दूसरी तरफ जिन टीम किसी को भी अपनी फॅमिली तक पहुंचने नहीं दे रही थी....
चेयरमैन भी अपनी शक्तियों का पूरा इस्तेमाल कर रहा था लेकिन उसका कोई भी वार अन्य को नहीं रोक पाया.....
उसे अब्ब समझ आ गया था की अन्य को मार पाना उसके बस में नहीं...
इस्सलिये चेयरमैन ने भी फॅमिली को निशाना बनाना शुरू किया...
और कुछ मंत्र पढ़ने लगा....
और जैसे ऊँगली का इशारा करने को हुआ....
एक तलवार उड़ते हुए आयी और उसका पूरा हाथ धड़ से अलग कर गयी...
पूरे वातावरण में चेयरमैन की चीख गूँज उठी....
अन्य - इसी हाथ से इशारा करता है न....
अब करना ! क्या हुआ अब नहीं रही हिम्मत.....
चेयरमैन दर्द से छत पटाने लगा....
लेकिन कहते है न..
की कुत्ते की दम कभी सीढ़ी नहीं होती....
वैसा hi हाल चेयरमैन का भी था....
एक बार फिर से कोशिश करने लगा.....
जैसे hi दूसरा हाथ उठाने को हुआ..
अन्य ने दूसरा हाथ भी जड़ से अलग कर दिया......
चेयरमैन को वही अधमरा छोड़ छोर अन्य ने वापस रुख बाकी बचे गुंडों की तरफ किया....
और सबको उनके सही अंजाम तक पहुंचने लगी...
2 hi मं में सबको ख़त्म कर दिया....
अन्य वापस चेयरमैन की तरफ पलटी...
चेयरमैन फिर से ठीक हो चूका था...
हाथ भी वापस आ चुके थे....
चेयरमैन मुस्कुराते हुए....
तुमने मुझे तो हरा दिया...
लेकिन वो कैसे बचेगा.... अब तक तो वो ख़त्म हो चूका होगा.....
और उस बुढ़िया का भी अंत नज़दीक है..
मेरे इस वार से आज तक कोई नहीं बच पाया है.....
अभी तो मैं जा रहा हु लेकिन एक दिन वापस जरूर आऊंगा....
गुस्से से टिल मिलते हुए.....
अन्य - देख तूने मुझे क्या से क्या बना दिया...
मैं तुझे भी अब ज़िंदा नहीं छोडूंगी...
रुक बे कामिनी भागता कहाँ है...
अन्य उस पर वार करती इससे पहले hi चेयरमैन गायब हो गया.....
तभी अन्य को नानी माँ का ख्याल आया...
वो तुरंत उनकी तरफ भागी....
नानी माँ की हालत काफी ख़राब थी...
देखने से ऐसा लग रहा था की जैसे बस कुछ चाँद साँसे बची हो.....
अन्य आगे बढ़ते हुए.....
नानी के सर पर हाथ फेरने लगी...
और अपनी हीलिंग पावर से उनको ठीक करने की कोशिश करने लगी.....
धीरे धीरे जख्म भरने लगे....
नानी - रहने दे बेटी ! अब शायद मेरा समय पूरा हो चूका है....??
अन्य - नहीं नानी ! जब तक मैं ज़िंदा हु आपको कुछ नहीं होने दूंगी....
नानी - नहीं बेटी ! अब मैं नहीं रुकूंगी मेरा समय पूरा हुआ....
वो देख ऊपर वो मुझे लेने आयी है...
मुझे उसके पास जाने दे....
सब ऊपर की तरफ देखने लगे....
लेकिन किसी को कुछ नजर नहीं आया...
लेकिन जब वापस नानी की तरफ देख तो....
अन्य - नननहहहीईइं!
मीरा - माआआ!
एक साथ दो चीख गूँज उठी....
नानी माँ ! रचना देवी, स्वर्ग लोग को सिधार चुकी थी....
सब उनके शरीर से लिपट कर रोने लगा....
लेकिन कबीर सदमें में बैठा बाद बढ़ाये जा रहा था....
ये सब मेरी वजह से हुआ...
मुझे उसकी बात माननी चाहिए थी....??
आज के लिए बस इतना hi....
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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रेविएवस का रखना ध्यान.... आपका दोस्त हयान..!!