Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 18 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

ही गाइस !

अपडेट लिखना शुरू कर दिया है...


कम्पलीट होते hi पोस्ट कर दूंगा...

वैसे मेरा डेली अपडेट देने का कोई इरादा नहीं था...

बूत शाहब की िक्षा थी की डेली अपडेट दूँ..

सो आज फिर से अपडेट आएगा...

लेकिन मैंने भी शर्त राखी थी... डेली अपडेट तब hi आएगा जब रीडर्स के कमैंट्स और लाइक्स ज्यादा आएंगे....

सो आज अपडेट देकर तरय करूँगा...

अगर शर्त पूरी हुयी तो डेली अपडेट आते रहेंगे वर्ण .... नहीं..!!

यदि मैं डबल म्हणत करूँगा तो आप सभी को भी करनी होगी...!!

थैंक्स !!
 
Update..No..60*

MeGa..UpDaTe

Abb...Takk...

डैड - भाग्यवान ! एक निवाला हमें भी मिल जाता तो बहुत महेरबानी होती....

माँ - नहीं मिलेगा...

मैं तो ज़ालिम माँ हु न..

खुद के हाथ से खा लो...

ऐसे hi हंसी मजाक करते हुए डिनर फिनिश हुआ...


अब वक़्त था अपने प्लान को अंजाम देने का....??

Abb..Aage...

मैं - हम्म तो सबने डिनर कर लिया...

पैकिंग भी हो चुकी है...

तो अब वक़्त है सैर पर चलने का....

माँ - बीटा हम सब कहाँ जा रहे है...??

तू कुछ बता क्यों नहीं रहा...??

मैं - सब पैट चल जायेगा कुछ देर में...

जैन अंकल की तरफ इशारा करते हुए...

मैं - अंकल ! सभी मेंबर को ग्रुप्स में बाँट कर अलग अलग गाड़ियों में ले जाईये...

हर एक गाड़ी में एक सीनियर मेंबर और 3 गार्ड्स विथ वेपन्स होना जरुरी है..

बाकी सब आपको पता है...

जैन अंकल - कब निकलना है...??

मैं - बस 30 मं में... बेसमेंट के रस्ते के जरिये से...

घर को अच्छी तरह से सील्ड कर दिया जाये,

यहाँ पर अब कोई नहीं रुकेगा..!!

माँ - कुछ गड़बड़ तो नहीं है न...??

डैड - तुम भी न हर एक बात पर घबराने लगती हो...

सब ठीक है..

नानी - पर मुझे घबराहट हो रही है...

ऐसा लग रहा है जैसे कुछ बहुत बुरा होने वाला है..??

मैं - ऐसा कुछ नहीं होने वाला...

ये बस आपके मन का वहम है,

नानी - पर मुझे लग रहा है.. जैसे तू सबसे कुछ छिपा रहा है...

Main(Muskurate हुए) - अरे मेरी नानी अम्मा !

आप तो पहले खुद घबराते हो...

फिर अपनी बातों से दूसरों को भी परेशां करने लगते हो...

डैड - है माँ जी.. हयान सही कह रहा है सब ठीक है...,

Any(muskurate हुए) - पक्का न...

मैं - हम्म.. प्ल्ज़ अब आप फिर से मत शुरू हो जाना..

अन्य - Okay ! लेकिन पहले तू मेरे साथ चल तुझसे बहुत इम्पोर्टेन्ट बात करनी है...??

मैं - मुझे लगा था..

ऐसा कुछ कहने वाले हो आप..??

चलिए महारानी साहिबा! ले चलें जहाँ आपका दिल चाहे...

अन्य - ज्यादा नौटंकी मत कर.. चुपचाप मेरे पीछे आ जा...

मैं - जो हुक्म आपका..!!

जिन - मैं भी साथ चालू..??

अन्य - No ! It's कॉन्फिडेंटिअल टॉक्स..!!

मैं - Okay ! अब चलेंगे भी या यही पर रुकने का इरादा है..

मेरे पास वक़्त नहीं है..??

अन्य - है है चलो..

मैंने कब रोका है...

मैं अन्य के साथ ऊपर छत पर आ गया...

मैं - कुछ ख़ास बात थी क्या...

कहो क्या कहना है...??

अन्य - देख तू मुझे चाहे बता या न बता..

मुझे हर एक बात की जानकारी हो जाती है...

अब आगे जो भी तू करने जा रहा है.. वैसा करने से मैं तुझे रोकूंगी नहीं...

बस इतना ख्याल रखना की कुछ ऐसा मत कर देना जिससे तुम्हें बाद में पछताना पड़े..

अपने जीवन का उद्देश्य याद रखना,

तुम्हारा जन्म केवल मानव जाती के कल्याण के लिए हुआ है...??

मैं - कुछ भी नहीं भूला मैं..

मुझे अब सही गलत की समझ है...!!

और भी कुछ है या बस इतनी सी बात बताने के लिए मुझे यहाँ बुलाया है...??

अन्य - क्या तुम मुझे दिखा सकते हो..??

मैं भी एक बार उससे मिलना चाहती हु..!!

मैं - No ! अभी सही वक़्त नहीं आया...

अभी वो मेरे बस में नहीं... आज़ाद है..!!

हम्म तो ये बात थी जो मुझे अकेले में बुलाने की..!!

अन्य - युप्प! बूत एक और बात थी...??

मैं - अच्छा ! तो फिर वो क्या है...??

अन्य! आगे बढ़ते हुए बिलकुल मेरे सामने कड़ी हो गयी..

और अपने पंजों के बल उचकते हुए.. मेरे मैथ पर एक किश जड़ दी..

अन्य - अपना ख्याल रखना..!!

मैं (मुस्कुराते हुए) - Okay ! अब मैं जॉन..??

Any(udaas होते हुए) - नहीं मत जाओ..

तुम भी हमारे साथ चलो...

अन्य! को अपने सीने से लगते हुए...

मैं - फिर से वही बात लेकर मत बैठो...

हम इस ओर काफी देर बहस कर चुके है..

मुझे अकेले hi जाना होगा...

और तुम्हें सबके साथ जाना होगा..!!..

अन्य - Okay ! बूत प्रॉमिस करो सही सलामत और जल्दी वापस आओगे..

अन्य! को हुग करते हुए उसके दाएं गाल पर एक किश किया,

फिर उसके आँखों में देखते हुए...

मैं - प्रॉमिस !

बस इतना कह कर मैं वापस मुद गया...

और तेज़ी से निचे की ओर चल दिया....

जैन अंकल को सबको लेकर जाने का बोलकर

अब आप सभी लोग जाएं...

मैं 30 मं बाद आऊंगा..

मुझे आदिगुरु से मिलना है...

__________________________


वहीँ दूसरी तरफ....

अब तक आपने पढ़ा...

चेयरमैन अपने ख़ास आदमी प्रोफेसर रोबर्ट के साथ फार्महाउस में बने सीक्रेट रूम की तरफ चल देता है....

जहाँ सामने बीएड में लेते साक्ष को देख कर शॉक हो जाता है...

फिर मुस्कुराने लगता है...

चेयरमैन - मैं तुमसे बहुत खुश hu..Robert !

तुमने बहुत अच्छा काम किया है....

रोबर्ट - ये तो करना hi था.. क्युकी आपकी जान का जो सवाल था...

वैसे मैं बता दू यह फर्स्ट क्लास केटेगरी का म्युटेंट है,

इसकी गैंस बहुत दुर्लभ प्रजाति की है....

यह दिखने में भले hi आपकी hu-Bahu कॉपी है..

बूत रियल्टी में में यह आपसे 1000 गुना ताक़तवर है..

इसका सामने टिक पाना बहुत मुश्किल है..!!

चेयरमैन - तुमने मेरी उम्मीद से भी अच्छा काम किया है...

चेयरमैन ख़ुशी से झूमने लगता है....

ख़ुशी से चिल्लाते हुए....

चेयरमैन - अब मुझे कोई नहीं रोक sakta...Koi भी नहीं..!!

रोबर्ट - सर लेकिन इसकी कमजोरी है...

इसकी फुल पावर उसे करने के लिए प्रत्येक 30 मं एनर्जी दोसे इंजेक्ट करना होगा...

वर्ण यह अपनी कैपेसिटी से 25% एनर्जी उसे करके hi दुश्मन का सामना कर सकेगा...

चेयरमैन - यह तो बहुत दिक्कत की बात है..

बूत कोई नहीं 30 मं में hi मेरा मकसद पूरा हो जायेगा.. !!

रोबर्ट - सर ! हमें कितने टाइम तक निकलना होगा....

क्या मुझे भी जाना होगा..??

चेयरमैन - नहीं तुम नहीं जा रहे ....

तुम तो मेरी रिसर्च सेंटर का फ्यूचर हो..

तुम मेरे साथ रात 11 बजे की फ्लाइट से लंदन चल रहे....

मेरी जगह यह सब देख लेगा..,.

वैसे भी यह मेरी hi सोंच से बना है...!!

रोबर्ट - हम्म सर ! यह आपके दिमाग की सोंच के हिसाब से hi चलेगा..!!

चेयरमैन - तो अब अपने प्लान पर अमल किया जाये..

अब वक़्त आ गया है इसे एक्टवाटे करो....

सभी आदमियों को एक जगह इकठ्ठा करो...??

______________________________________


चलिए हम वापस हयान की तरफ चलते है....

मैंने अपने प्लान के मुताबिक सबको समझा बुझा कर बताई हुयी जगह पर रवाना कर दिया....

अब मैं अकेला hi घर में बचा था...

कुछ बची कुछ पैकिंग करने के बाद घर को अच्छी तरह से सील्ड कर दिया..

सरे सिक्योरिटी सेंसर और सेवेलिअन्स ों कर दिए...

सारा काम फिनिश करने के बाद मैं बाथरूम में घुश गया और फ्रेश होकर बहार निकला...

और अपने रूम में जाकर ध्यान मुद्रा में बैठ गया...

आदिगुरु - क्या तुम तैयार हो..??

मैं - प्रणाम गुरुवार ! जी मैं बिलकुल तैयार हु !!

आदिगुरु - विजयी भाव पुत्र! मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारी रक्षा करेगा..!!

मैं - धन्यवाद् गुरुवार! अब मुझे आज्ञा दे अपने मार्ग की ओर प्रस्थान करने के लिए....

आदिगुरु महाराज ने मुझे कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए....

फिर मेरे सर पर अपना हाथ फेरा,

जिससे उनके हाथ से एक ब्लैक कलर की रौशनी पुंज मेरे अंदर समां गया...

और कुछ पल के लिए मेरी आखें बंद हो गयी...

रौशनी के प्रवेश करते hi मेरे मस्तिष्क में कुछ धुंधली सी तश्वीरें उभरने लगी...

ऐसा लग रहा था की जैसे भविष्य की झलक हो...

ऐसा होने वाला है...??

जब मैंने अपनी आखें खोली तब तक गुरुवार जा चुके थे...

मैं मन hi मन गुरुवार ! का शुक्रिया. ऐडा करने लगा...

मैं भी अपनी जगह ज़े उठ खड़ा हुआ

और अपने रूम में लगे बड़े से मिरर के सामने खड़ा हो गया....

जैसा गुरुवार ने बताया था वही क्रिया दर्पण के सामने दोहराने लगा...

मेरे ऐसा करने से मिरर पर एक आकृति उभर कर सामने आने लगी....

आकृति ने अपना संपूर्ण रूप ले लिया.....

""मैंने सोंचा नहीं था हम दोनों की इतनी जल्दी मुलाकात होगी...""

मैं - उम्मीद तो मुझे भी न थी की तुम hi होंगे....

कभी तो अपना मास्क उतर कर सामने आया करो....

हम्म अभी जो दर्पण में चित्र उभर कर सामने आया वो मास्क मन का था...

मास्क मन - इतनी बेक़रारी भी अच्छी नहीं...

वो वक़्त भी जल्द आएगा...

लेकिन जिस दिन मेरा नक़ाब उतरा उस दिन तुम्हें बहुत तकलीफ होगी...

मैं - छोडो भी इन बातों को,

हमेशा तकलीफ देने वाली hi बातें करते हो..

जिस कार्य के लिए हम दोनों आमने सामने आये है पहले उससे निपट लिया जाये....

मास्क मन - शुरुआत तुमने की..

वैसे सच हमेशा तकलीफ डे होता है..!!

मैं भी बहुत बेकरार हु शिकार करने को...

बहुत दिन से कोई शिकार न किया...

मैं - अपनी बेक़रारी पर कुछ देर काबू रखो...

कुछ सुलझी - अनसुलझी बातों का सिलसिला ख़तम करते हुए,

हम दोनों बेसमेंट के रस्ते से सोनपुर के बहार बने बेस पर आ गए...

और सीधा एक रूम में जा घुसे जहाँ गाड़ियां पार्क थी...

मैं - अपने मन मुताबिक गाड़ी चुन लो..

हहह हाहाहा

हस्ते हुए..

मास्क मन - अच्छा मजाक करते हो..

मैं एक Soul(Immoral) हु मुझे किसी व्हीकल की जरुरत....

वैसे तुम कह रहे हो तो बाइक ले चलता हु.....


मैं - Okay ! तुम्हें जैसा ठीक लगे...

मैंने साइड में पार्क कार पर पड़े परदे को उठाया....


मास्क मन - वाओ ! काफी अच्छी पसंद रखते हो...

मैंने अपनी 1959स की ओल्ड मॉडिफाइड विंटेज केयर चुनी...

जो की डैड ने मुझे 18तह बर्थडे पर लंदन से मंगवाया था... मेरे कहने पर..

यह एक मॉडिफाइड मॉडर्न गैजेट, वेपन्स और टेक्नोलॉजी से लॉस कार थी..

जिसे मैं, जैन अंकल और एक फॉरेन तकनीशियन ने मॉडिफाइड किया था....

मुस्कुराते हुए...

मास्क मन (मन में) - अभी तो तुम्हारी है लेकिन कुछ वक़्त बाद मेरी होगी....??

मैं - अब चलने का इरादा भी है या फिर यही खड़े खड़े मुस्कुराने का....

हम दोनों अपनी अपनी व्हीकल्स में बहार आ गए....

मैं गार्ड्स को बेस और घर दोनों की देख भल करने का इंस्ट्रक्शंस देकर अपने रस्ते निकल गया....

अभी हम कुछ दूर hi गए थे की एक चौराहे पर....

मास्क मन - बस एहि पर रुक जाओ...

और इंतेज़रर करो शुभ घडी आने का...!!

मैं - हम्म लगता है.. कहते की घंटी बच चुकी है...??

शोर - शराबा मचना शुरू हप गया है..!!


आज के लिए बस इतना hi...

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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan...Aapka दोस्त हयान..!!


थैंक्स !?!

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हम्म सही कहा...

सबसे अच्छा रिव्यु इन्ही का होता है...

कुछ खास रीडर्स की वजह से hi मैं स्टोरी ओर ध्यान दे रहा....

वर्ण कब का बंद कर दिया होता....

क्युकी शुरू शुरू में बहुत से रीडर्स ने कंटिन्यू सुप्पोर्टस किया....

फिर धीरे धीरे गायन होते गए....

अब किसी से बार बार रेवुएस्ट करना भी भीख मांगने जैसे लगता है...

हम्म वरिटेरस को रीडर्स से बस सपोर्ट की hi तो उम्मीद होती है...

जब वो न मिले तो मनोबल गिरने लगता है...

बूत मेरे कुछ खास रीडर भी है जो डेली कमेंट करके मेरा हौसला बढ़ाते...

लिखने के लिए प्रेरित कोफ्ते...

मैं शुक्रगुज़ार हु अपने रीडर्स कम्.



थैंक्स यू आल !!
 
बहुत hi बढ़िया.... और सोंच विचार वला रिव्यु दिया है आपने....



मैं तो समझता था की मुझे hi बताना पड़ेगा..

मास्क मन उर्फ़ हनी का मकसद...

लेकिन वो कहते न समझदार को इशारा काफी होता है...

वो हैं आप... इशारों को तुरंत समझ गए...

बहुत बहित शुक्रिया... समझदारी वाला रिव्यु देने के लिए....

बस ऐसे hi साथ बने रहे..



थैंक्स भाई..!!
 
मास्क मन शायद फ्यूचर की बात कर रहा...

जो की हयान ने दृढ निश्चय भी किया था की मैं ऐसा कभी होने नहीं दूंगा....

क्या होने वाला है वो तो आगे hi पता चलेगा....

बहुत बहुत शुक्रिया ... शाहब..

हमेशा की तरह शानदार. और सभी पॉइंट्स को क्लियर करते हुए . रिव्यु के लिए...

थैंक्स भाई जी....

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड शानदार सुप्पोर्टस...

बस ऐसे hi हमेशा साथ बनाये रखना...


थैंक्स....!!
 
बस भाई जी....

कोशिश कर रहा हु बेहतर लिखने की...

अब इसे शब्दों जाल कहें या फिर.... लिखने की कला..

हम्म Bhai..Mask मन और हयान एक साथ आ गए...

दुश्मन को मिटने के लिए और आगे का रास्ता साफ़ करने के लिए...

देखिये क्या होता है...??

साथ बने रहे....



थैंक्स भाई जी...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड एक्सीलेंट, फैंटास्टिक सुप्पोर्टस...

नेक्स्ट कुछ समय में आ जायेगा...


एडिटिंग करना बाकी है..
 
ही गाइस ! नेक्स्ट अपडेट 10:00 पं बजे तक आ जायेगा...

पहले मैं डेली अपडेट देता था सो रीडर्स का सपोर्ट भी अच्छा मिलता था और कमैंट्स भी खूब आते थे...

सुग्गेस्ट भी करते थे...


बूत अब कुछ रीडर्स नाराज़ होकर चले गए... न तो कमेंट करते न hi जाने का रीज़न बताते...

मेरी उनसे रिक्वेस्ट है की जाने क रीज़न बताएं...

अगर कोई खामियां रह जाती हो तो सुग्गेस्ट करे...

ताकि मैं अपनी गलतियों को सुधर सकूँ...

और बेहतर लिख सकूँ


मुझे उम्मीद है की आप सभी अपना बहमूल्य सुझाव देंगे...

थैंक्स..!!
 
Update..No..61*

MeGa..UpDaTe

Abb..Takk...

रोबर्ट - हम्म सर ! यह आपके दिमाग की सोंच के हिसाब से hi चलेगा..!!

चेयरमैन - तो अब अपने प्लान पर अमल किया जाये..

अब वक़्त आ गया है..

इसे एक्टिवटे करो....


सभी आदमियों को एक जगह इकठ्ठा करो...??

Abb..Aage...

रोबर्ट चेयरमैन के डुप्लीकेट को एक्टिवटे कर देता है...

और उसे वही लैब में रुकने को कहकर वापस ग्राउंड में आ जाता है जहाँ सभी आदमी अपने हथियार के साथ खड़े थे...

चेयरमैन - तुम्हारे यहाँ आने मकसद तुम्हें पता है,

यह लड़ाई किसी बदले की भावना की लड़ाई नहीं है..

बल्कि अपनी, इज्जत और साख को बचने के लिए लड़ी जाएगी...

मेरे दुश्मन की वजह से मुझे अपने बॉस के सामने शर्मिंदा होना पड़ा...

हमारे बुसिनेस्स को नुकसान उठाना पड़ा,

इनकी वजह से न जाने कितने साथियों की जान भी गावनि पड़ी...

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा...

अब हमारे पास टारगेट की लोकेशन है,

और एक मौका भी है खुद की सत्ता को अंडरवर्ल्ड में कायम रखने का...

तेज़्ज़ आवाज़ में...

क्या तुम सभी मेरा साथ डोज...??

सभी एक साथ जोरर से चिल्लाये....

हम आपके साथ है.. आपके लिए अपनी जान भी दे देंगे...

चेयरमैन - बहुत बढियाँ साथियों !

मुझे भी तुम सब से एहि उम्मीद थी....

चलो तबाह कर दें अपने दुश्मनो को....

बस आदेश मिलने की देरी थी..

सभी ग्रुप बनाकर गाड़ियों में बैठ गए...

चेयरमैन और रोबर्ट वापस लैब में आ जाते है...

चेयरमैन - अब तक तो तुम्हें सब पता चल चूका होगा की तुम्हें क्या करना है...??

एक भी शख्श ज़िंदा नहीं बचना चाहिए,

चाहे बचा हो बूढ़ा...

हर एक के खात्मे के बाद hi मेरे दिल जको सुकून मिलेगा और मेरा गया हुआ रुतबा भी वापस आएगा..!!

चेयरमैन2 - आपको फिक्र करने की जरुरत नहीं...

जैसा आपने कहा है वैसा hi होगा...

मैंने अपने दुश्मन की हर एक हरकत से वाक़िफ़ हूँ..

शायद इसी काम के लिए मेरा निर्माण भी हुआ है...

कोई नहीं बचेगा...

बस जो भी मैं कहूं वैसा hi किया जाये.....

चेयरमैन - ठीक है आगे से अब सब तुम्हारे हाथों में है,

मैं भी अब वापस जा रहा हु...

चेयरमैन2 - कुछ देर रुक कर जाना..

आपके लिए एक सरप्राइज रेडी हो रहा होगा...??

चेयरमैन - Okay....

मुझे इंतेज़रर रहेगा... ??

रोबर्ट और चेयरमैन अपनी कार में बैठ कर एयरपोर्ट के लिए रवाना हो जाते है...

और इधर चेयरमैन2 अपने काफिले को लेकर फुल स्पीड में अपनी टारगेट की ओर निकल जाता है....

___________________________

चलिए अब चलते हैं...

हयान की तरफ...

रात के 11:20 बज रहे थे...

सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था...

ऐसा लगा रहा था की जैसे सबको खबर हो गयी है की आज सड़कों पर खून की होली खेली जनि है,

जिसके डर से सभी अपने अपने घरों में छिप कर बैठे हैं....

इस वक़्त मैं और मास्क मन देहरादून - मन मार्ग हाईवे के बीच रोड में आसान किये बैठे थे...

आगरा कोई हमें इस पोजीशन में देख लेता तो एहि कहता की दोनों पागल हो गए है....

ख़ुदकुशी करने के लिए बैठे है.... या फिर मजाक

मैं - बहुत देर हो गया अभी तक कोई नहीं आया...

तुमने तो कहा था बस 10 मं में आते होंगे 20 मं से ऊपर हो गया....

मास्क मन - मुझे तो उनके आहात सुनाई पद रही है जल्द hi हम आमने सामने होंगे...

मास्क मन का बस इतना hi कहना था की दूर से गाड़ियों का काफिला आता हुआ दिखा...

मास्क मन - लो नाम लिया शैतान हाज़िर...

बहुत लम्बी उम्र है शायद,

लेकिन बेवजह मौत के मुँह की तरफ खींचे चले आ रहे हैं....

लगभग 35, 40 गाड़ियां सामने से आती दिखी...

हमें ऐसे बीच रोड में बैठा देख कर सभी गाड़िया आकर रुक गयी...

तभी पहली गाड़ी से एक बड़ा उतरा...

आदमी - मरने का इतना hi शौक है तो खुद को गोली मार लो...

इस तरह बीच सड़क पर ख़ुदकुशी करने के लिए क्यों बैठे हो....??

मैं - गोली में वो मज़ा कहाँ,

जो बीच राह में काट कर मरने का है...

सॉरी ! ी मैं बीच राह में अपने दुश्मनो को मारने का है...!!

आदमी - कौन हो तुम लोग..

ये क्या बकवास बातें लगा राखी है...

हमारा रास्ता छोडो...

मास्क मन - जिससे मिलने तुम सभी बेकरार हो...

हम वही है,

जिनको तबाह करने के लिए इतने दूर जा रहे...

लेकिन हमारी रहम दिली तो देखो...

हम खुद आ गए तुमसे मिलने....

मास्क मन की बातें सुनकर वह आदमी जोरर जोरर से हसने लगा...

और जोरर से चिल्लाया..

आदमी - साथियों जरा बहार तो आना,

देखो तो दो नमूने आये है खेल दिखने...

हमारे स्वागत के लिए...

आदमी के इतना कहते hi...

एक साथ सभी गाड़ियों को दरवाज़े खुलने शुरू हो गए..

30 सेक् के लिए बस खत खत, का शोर होता रहा...

इस वक़्त हमारे सामने लगभग 250+ हथियार बंद गुंडों का काफिला हमारे करीब आता हुआ दिखा....

मैं तो हैरान हो गया इतने सरे लोगों को देख कर...

मैं सोंच में पद गया ऐसी भी क्या दुश्मनी थी मेरी फॅमिली से...

जो चाँद लोगों को मरने के लिए इतने लोगों को आना पड़ा..

अभी मैं सोंच hi रहा था की...

अपने सामने खड़े शख्श को देख कर मेरा खून खौलने लगा....

मैं - आखिर कर मुलाक़ात हो hi गयी तुमसे....

मैं भी बहुत बेकरार था उस शक्श से मिलने के लिए जिसने,

मेरे डैड को मरने की साज़िश की थी....

चेयरमैन2 - वो साज़िश नहीं थी.. बचे !!

बल्कि कोशिश थी लेकिन बदकिस्मती से तुम्हारा बाप बच गया....

लेकिन आज नहीं !

मैं - वो तो वक़्त बताएगा... कौन बचता है... कौन नहीं....??

वैसे मुझे तो साडी फौज नामर्दों की लगती है,

जो कुछ लोगों को मरने के लिए पूरा गैंग भगा चला आया है...

चेयरमैन2 - मैं तो समझा था तू नादाँ बचा है,

जो की गलत फैसले के कारन यहाँ मौत का सामना करने चला आया है...

लेकिन मैं हैरान हु की,

तुम दो लोग.. एक छोटा बचा...

तो दूसरा भद्दी शकल वाला जोकर...

जो की अपना चैहरा छिपाये बैठा है,

हमारा क्या बिगाड़ लोगे....

मुझे तो तुम दोनों पर तराश आ रही है...

मास्क मन अपनी जगह से उठते हुए हमारे करीब आ गया...

मास्क मन - Muh-Chodi करने से कभी बचे नहीं पैदा होते...

इस लिए गटर जैसे मुँह का ढक्कन बंद कर और जिस काम के किये तू यहाँ आया वो काम कर...

मेरे पास वैसे भी वक़्त काम है....

अभी एक शिकार पर और जाना है....??

सॉरी सॉरी ! जाना नहीं है,

शायद वो भी आ hi रहा है...??

क्यों मैंने सही क़ज़ा न...!!

मुझे तो कुछ समझ न आया... की मास्क मन क्या कहना चाहता है...

मास्क मन की बातों से चेयरमैन2 थोड़ा सा हैरान और परेशां हो गया....

गुस्से से एक डैम ताम तमा उठा...

गुस्से से चिल्लाते हुए...

चेयरमैन2 - तेरी इतनी मजाल की तूने मुझे ललकारा....

अब देख मैं तेरा क्या हाल करता हु...

ऐसी मौत दूंगा की तुझे अपने यहाँ आने के फैसले पर रोना आएगा.....

मास्क मन - सुन बे चूतिये !

मैंने तुझसे पहले भी कहा है,

बकचोदी मत कर सीधे पॉइंट पर आ लेकिन तू तब से बस बक बक कुए जा रहा है...

पाक गया हु मैं ये भाषण सुन कर...

पहले तेरे चमचे का..

अब तेरा....

लगता है खेल की शुरुआत मुझे hi करनी पड़ेगी....??

मास्क मन आगे बढ़ने hi वला था की...

मैं दोनों के बीच में आते हुए...

1मं रुको...

अपने गुस्से को शांत रखो.. इसे लड़ाई के वक़्त इस्तेमाल करना..

बस मुझे मेरे सवालों का जवाब दे दो...

चेयरमैन2 - है पूछ ले बचे तू भी..

मरने से पहले आखिरी िक्षा भी पूरी कर ले...

मैं - यार तुमने सच hi कहा है..

बहुत ज्यादा बाद बोलै है ये...!!

इससे तो कुछ पूछना hi बेकार है...

तुम hi बता दो...

ये दुशरा शिकार कौन है आ रहा है...??

मास्क मन - शाबर रखो...

खुद hi जान जाओगे....

मैं - ठीक है फिर...

बातें ख़त्म हुयी आ जाओ मैदान में...

मेरा इतना hi कहने की देरी थी की...

सभी गुंडे आकर हम दोनों को चरों तरफ से घेर कर खड़े हो गए....

मैं - लो भाई आ गया वो पल जिसका तुम्हें बेसब्री से इंतज़ार था,

करो शिकार जी भर के...

मास्क मन ने अपने मियाँ से एक Cham-chamati तलवार निकाल ली,

हवा में तलवार को लहराते हुए बोलै..

खेल शुरू किया जाये..

अब आएगा मज़ा....??

मेरी तरफ देखते हुए...

मास्क मन - तुम नहीं लाये कोई हथियार...

खली हाथ hi चले आये...??

मैं - मुझे किसी हथियार की जरुरत नहीं...

मैं खुद एक हथियार हु...

मैं एक अहिंसा वाड़ी इंसान हु,

मुझे Khoon-Kharaba पसंद नहीं..

और नहीं किसी की जान लेना....

मेरी बात सुनकर मास्क मन जोरर जोरर से हसने लगा...

है ः अहिंसावादी !!

तो क्या यहाँ सब से हाथ पायी करने आये हो...??

मैं - मुझे सिर्फ इन सभी को हराना है..

वो मैं बिना हथियार के भी कर सकता...

मेरा मकसद है इन सभी भटके हुए लोगों को सही राह दिखाना...

न की मौत देना !!

मास्क मन - ठीक है ठीक है.. अहिंसावादी जी..!!

आप अपने रस्ते चलिए और मुझे मेरे रस्ते...

है अगर हथियार की जरुरत पड़े तो मांग लेना...

मैं - हम्म जब जरुरत होगी देख लेंगे....

अभी हम फाइट शुरू hi करने वाले थे की....

अचानक मेरे दिल में दर्द उठने लगा...

और मैं वही जमीन पर गिर्र कर तड़पने लगा....

मेरे दिमाग में कुछ धुंधली धुंधली सी तस्वीर दिखने लगी....

अभी मैं तड़प hi रहा था की मेरी नजर चेयरमैन2 पर पड़ी जो खड़े मुस्कुरा रहा था....

चेयरमैन2 - खुद को बहुत होशियार समझते हो न...

लेकिन मुझसे ज्यादा नहीं हो..

जहाँ से तुम्हारी सोंच ख़त्म होती है वह से मैं सोचना शुरू करता हु...

तुम्हें क्या लगा था की प्लान तुमने बनाया है...

नहीं, मैंने...

मुझे तुम्हारी हर एक कमजोरी का राज़ पता है...

तुमसे ज्यादा तो वो मुखौटे वाला शख्श चालक दीखता है...

उसकी बातों में गहराई और राज़ छुपे हुए हैं....

चेयरमैन2 की बातें सुनकर मेरा सर एक डैम चक्र सा गया...

मैं खुद को कण्ट्रोल करते हुए उसकी आखों में देखने लगा....

उसकी आँखों में देखते hi मुझे सारा खेल समझ आ गया...

मैं दर्द में तड़पते हुए चिल्ला उठा..... अनंनीय!!

बस इतना hi कह पाया और बेहोश हो गया....

मेरी यह हालत देख कर सभी गुंडे मुझपर हसने लगे...

गुंडा - बॉस ये तो मार खाने से पहले hi बेहोश हो गया...

मैं तो कहता हु दोनों को गोली मारो...

और हम चलते हैं अपने टारगेट की तरफ....

चेयरमैन2 - चुप पे बुड़बक... जब बातों की समझ न हो तो बीच में नहीं बोलै करते...

हमें कही नहीं जाना...

वो खुद hi आ रहे हैं...


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आज के लिए बस इतना hi...

उम्मीद करता हु आप सभी को अपडेट पसंद आ रहे होंगे..

कोई कमी रह जाती हो तो सुग्गेस्ट करें... खामिया बताएं...

थैंक्स फॉर सुप्पोर्टस..!!


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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रेविएवस का रखना ध्यान.... आपका दोस्त हयान !!
 
भाई जी माफ़ कीजियेगा ...

फाइट सन अभी आया कहा है...

मैं तो हयान की पावर एबिलिटी, कन्वर्सेशन, प्लानिंग... ेट्स दिखने की कोशिश कर रहा...

अभी तो मौका आया है हयान को परखने का...


मास्क मन की डिटेल्स भी तो दे रहा हु...

उसकी सोंच और उसके फ्यूचर प्लानिंग को भी तो दर्शा रहा हु...

ये जरुरी था क्युकी मास्क मन और हयान का करैक्टर सस्पेंस बना हुआ है... खुलकर सामने नहीं आया है...

फॅमिली मेंबर की बॉन्डिंग.. विश्वास और इमोशन भी तो दिखा रहा हु.. जो की अब तक नहीं दिखा पाया था...

फिर भी अगर लम्बा खिंच रहा है तो मैं काम शब्दों में भी सन को ख़त्म कर सकता हु...

लेकिन फिर सभी, प्यार, गुस्से, बदला, और डिटेल्स से महरूम रह जायेंगे...

बाकी आप सबकी मर्जी...

थैंक्स फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड एक्सीलेंट सुप्पोर्टस...

बस ऐसे Hi साथ बनाये रहे...


थैंक्स फॉर योर वैल्युएबल सुग्गेस्टिव !!
 
वेलकम सर जी...

इन माय थ्रेड....

आखिरकार आप आ hi गए.. लोवकफोन ने आपको भी कुछ फ्री टाइम दे दिया..

बहुत ख़ुशी हुयी आपको देख कर...

थैंक्स फॉर रीडिंग एंड कमैंट्स ों माय थ्रेड...

मैं आपसे एक अच्छे रिव्यु की चषहता रखता हु.... जिसमें मेरे स्योरी के वीक पॉइंट्स और कमियों को दर्शाया गया हो..!



थैंक्स !!
 
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