Fantasy इच्छाधारी देव - Page 27 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

अपडेट - 156

अघोरी - तो इस बार देव और पूनम नहीं उनके परिवार हमारे निशाने पे है जो हमारे सामने तिनको के सामान है और उन्हें मए उखड दुगा उनके गम में जब देव डूबा होगा तो देव का सर धड़ से अलग कर के उसकी आत्मा को कैद करुगा रूद्र भी मरेगा और उनके मरने के बाद नीलम और पूनम बनेगी मेरी रंडी. हहहहहहहहहहहह.

गढ़ – एक आखरी बात देव, पूनम, रूद्र और नीलम इन सब के प्रतिरूप (क्लोन ) यहाँ मौजूद है. उन्होंने अपनी गैर मोजुदगी छुपाने के लिए अपने घरवालों को धोखे में रखने के लिए ये प्रतिरूप रखे है. जिनमे उनकी hi शक्तिया है. तू अपनी शक्तियों से उन प्रतिरूपो की शक्तिया कैद कर ले. और उनके घरवालों के सामने उन्हें मार दे इससे उनके घरवालों के हौसले टूट जायेगे और वो जल्दी काबू में आएंगे.

अघोरी - जो आज्ञा गुरुदेव अब ऐसा hi होगा.

यहाँ तिलिस्मी चक्र में देव और रूद्र अघोरी की इस खतरनाक साजिश से अनजान थे. और आगे बढ़ते जा रहे the.unke मित्र शेर और ड्रेगों वापस अपनी अपनी जगह पे जा चुके थे. इतने में ये लोग भी आराम कर चुके थे. और पिछले 3 घंटे से चले जा रहे थे. कही धुप थी तो कही छाँव कही पथरीली जमीन तो कही उबड़ खाबड़ तो कही एक डैम नरम घांस. ये लोग चलते hi जा रहे थे के तभी इन्हे दूर से एक आदमी दौड़ता हुआ आता नजर आया.

रूद्र – ये कौन है जो इस तरफ भगा चला आ रहा है अब तक के सफर में हमें कोई सामने से आता तो दिखा नहीं ये कौन है. लगता है त्रिकाल का सताया हुआ है या उसी का कोई जाल ?

देव – आने दो पास सब पता चल जायेगा उसी से.

लेकिन जब सामने वाला दौड़ता हुआ उन के पास आया तो उसे देख के सब का दिमाग hi ख़राब हो गया और रूद्र तो सर पकड़ के hi बैठ गया उकडू. और उसे जलती आँखों से दक्खने लगा. क्यों की वो कोई और नहीं बल्कि खतरा था. जो इनके सामने पहुंच कर अपने घुटनो पे हाथ रख कर हांफ रहा था और गहरी गहरी सांसे ले रहा था.

रूद्र – अबे इतना भाग क्यों रहा है कोई तेरी इज्जत लूटने को पीछे पड़ा है क्या? और चल भाग hi रहा है तो यहाँ क्यों रुक गया थोड़ा और दौड़ ले ता की तेरी साँस अटक जाये और तुझसे हमारा पिंड छूटे.

खतरा – ये बात ठीक नहीं रूद्र मए तो तुम लोगो को बचने के लिए तेजी से दौड़ता आ रहा हु और तू है के मुझे hi ऐसा बोलता है.

रूद्र – सेल अब तक तूने खूब बचाया है न हमें. जो अब बचाएगा . चल देव हमें इसकी बात नहीं सुन्नी.

सब आगे बढ़ने लगे. खतरा भी उन्हें आवाज़े देता उनके पीछे आ रहा था.

खतरा – अरे सुनो तो मेरी बात वार्ना पछताओगे.

रजनी - अब तक तुम्हरी बातो ने hi हमें भटकाया है खतरा. अब बाज आ जा अपनी हरकतों से.

खतरा – तू मेरा हाथ थम ले मए अभी बाज आ जाउगा. फिर तेरे शिव किसी से बात hi नहीं करुगा.

रजनी ने घूर के देखा. खतरा दन्त फाडे उसे देखने लगा.

रजनी – सपने भी वही देखने चाहिए जितनी औकात हो.

खतरा – मए देवा से भी ज्यादा काबिल हु रजनी तू समझ नहीं रही है मए चहु तो फिर से तुझे उसी नगरी की महारानी बना सकता हु कहा इन लोगो के साथ ठोकरे कहती फिर रही है.

रजनी - ओह्ह्ह अच्छा तू देव से बेहतर है वो भला कैसे?

खतरा – क्या देव तुझे महारानी बना सकता है? क्या वो तुझे इन खतरों से बचा सकता है? क्या वो तुझे त्रिकाल के कहर से बचा पायेगा? लेकिन ये सब मए कर सकता हु. और फिर भला मुझ में कमी hi क्या है अच्छा खासा जवान मर्द हु तुझे हर तरह से खुश रख सकता हु.

रजनी अभी कुछ बोलने hi वाली थी के वो सब एक दोराहे पे पहुंच गए दो रस्ते थे वह दये और बाये. दोनों hi बिलकुल एक जैसे रत्ती भर का फरक नहीं. एक तरफ जहा पेड़ था दूसरी तरफ भी वही पे पेड़ था. ऐसा लग रहा था के आईने में देख रहे है.

देव और रूद्र की आंखे मिली लेकिन कुछ समझ नहीं प् रहे थे.

पूनम – ये तिलिस्म है देव एक रास्ता सही है दूसरा गलत. यानि एक में हम फ़िलहाल सुरक्षित है दूसरे में कदम रखते hi खतरा है.

रूद्र – भाभी अब तक हर रास्ता ऐसा hi तो मिला है इसमें क्या नयी बात है?

पूनम - देखो हम तिलिस्मी चक्र में है. इसीलिए खतरा तो हर तरफ hi है कोई भी ऐसा रास्ता नहीं मिलेगा जो सीधा हमें स्वर्ण मणि तक ले जाये सुरक्षित . लेकिन बात है काम और ज्यादा की बस.

खतरा – तुम लोग तो मेरी बात hi नहीं सुनते हो मए यही बताने के लिए तो दौड़ा आया था के आगे तुम लोग फंस जाओगे वही रुक जाते और मेरी बात सुनते तो इस पूरे रस्ते में तय हो चूका होता की किस तरफ जाना है. अब यहाँ धुप में खड़े हो के भी क्या फायदा. चलो मए hi बता देता है. एक काम करो दायी तरफ चलो वह से सीधा रास्ता मिलेगा तुम्हारी मंजिल का.

देव – यानि उसमे खतरा नहीं है?

खतरा – मैने ये नहीं कहा है देव.

रूद्र – एक बात बता खतरा तू कमीना ज्यादा है या मक्कार?

खतरा – मए बस त्रिकाल का सेवक हु

रूद्र ने होठ भींच कर खतरा को देखा

देव – रहने दो ये हमें उलझाएगा hi इसकी बातो पे ध्यान मत दो.

नीलम - लेकिन हम लोग इतना सोच hi क्यों रहे है?

रूद्र – वो इसीलिए मेरी जान क्यों के हम इन रास्तो से अनजान है.

नीलम - अरे वही तो मए कह रही हु जब हमारे लिए दोनों hi रस्ते अनजान है तो सोचना कैसा और यहाँ तो आप कुछ पता भी नहीं कर पाएंगे दोनों hi एक सामान है रस्ते तो फिर किसी भी रस्ते पे आगे बढ़ लो. खतरा भी दोनों में hi होगा जैसे की पूनम ने अभी कहा.

पूनम – ी थिंक नीलम इस राइट. जब खतरा हर तरफ है hi तो बस आगे बढ़ो सोचना कैसा?

देवा चलो फिर बाये तरफ चलते है.

खतरा – अरे देव जब किसी भी तरफ जाना है तो दये जाओ बाये मत जाओ वह आग का दरिया है. तुम लोग भस्म हो जाओगे.

रूद्र – तू सेल झूठ hi बोलेगा हम जानते है.

खतरा – मए दोनों बाटे बोलता हु. एक सही एक गलत. न मए पूरा सच बोलता हु न झूठ लेकिन मेरी इस बात में सच है.

देव - चलो बाये तरफ चलते है.

खतरेरा उन्हें आवाज देता रहा लेकिन उन लोगो ने नहीं सुना और बाये तरफ वाले रस्ते पी आगे बढ़ गए. रस्ते में कोई बुराई नहीं थी साफ़ सुथरा रास्ता था. वो लोग मजे से चले जा रहे थे.

पूनम - देव उस नक़्शे में देखो न किस तरफ जाना है और कितना जाना है हमें.

देव – मैने रात में देखा था. उसी हिसाब से चल रहे है हम. लेकिन अभी मंजिल से दूर है पूनम.

तभी सब के कदम ठिठक गए क्यों के सामने का नजारा बेहद होलनाक था. जिन्दा नर्क की आग उनके सामने थी. एक सच मच का आग का दरिया था. जिसमे लावा बहता नजर आ रहा था. और चट्टानों के टुकड़े उस लावे में बहते नजर आ रहे थे. छोटे छोटे पठारों के रूप में. लेकिन इस नदी के इस किनारे से उस किनारे तक एक लकड़ी के पत्तो का पल भी बना हुआ था. वो काफी उचाई पे था जिससे आग वह तक नहीं पहुंच रही थी. पर उस पल का कोई भरोसा नहीं था दिखने में hi इतना कमजोर लग रहा था. के उस से होकर जाना मूर्खता hi साबित होती. लेकिन ये नदी भी पार कैसे हो?

तभी एक आवाज ने उन्हें अपनी तरफ आकर्षित किया

कहो तो मए पार लगा दू.

जब इन सबने उस तरफ देखा तो वह खतरा एक मछुआरे के भेस में लुंगी पहन के बैठा बीड़ी पी रहा था और और उसके पास hi एक बड़ी सी नाव पड़ी थी.

रूद्र – आ गया तू सेल और ये नव किस की चुराई?

खतरा – त्रिकाल ने भेजी है तुम लोगो के लिए मुझसे कहा बेचारे फंस गए है. तो नव में बिठा कर नदी पर करा दे. तो मए आ गया तुम सबकी मदद करने

रूद्र – अबे सेल ये आग की नदी है इसमें तेरी ये नव पापड़ की तरह सिक जाएगी. और हम सबका बन जायेगा कबाब.

खतरा – है यार ये तो मैने सोचा hi नहीं चलो लोहे की नाव ले के आता हु.

रूद्र – खतरा तू मरेगा मेरे हाथो से अबे लोहे की नव में ले जाकर हमें टलेगा क्या ?

खतरा – हम्म्म्म ये भी सही कहा यानि किसी नव में तुम लोग जा नहीं सकते पल की हालत ख़राब है. अगले महीने बनवाने का सोचा है त्रिकाल ने तब तक यही रुक जाओ मए झोपडी बनवा देता हु. अगले महीने जब पल बन जाये तो निकल पड़ना.

देव ने रूद्र का हाथ पकड़ के उसे शांत रहने को कहा और ध्यान से देखने लगा आग की नदी को.

देव – खतरा तू हमारा साथ क्यों नहीं छोड़ता?

खतरा – मए तो आपकी सेवा के लिए हु त्रिकाल का एक मामूली सेवक आपकी हर जरुरत पूरी करने के लिए हु. और आपको रास्ता दिखने के लिए.

रूद्र – रास्ता देखने के लिए या रस्ते से भटकने के लिए साला जब आता है नयी मुसीबत ले आता आहे. हमारी दुनिया में चल वह तुझे बीटा ऐसी भूल भुलैया में दाल दुगा के तेरा त्रिकाल भी नहीं निकल पायेगा तुझे.

देव रूद्र को हाथ के इशारे से चुप रहने को कहता है और – खतरा क्या तुम हमारे यहाँ रुकने का इंतजाम कर सकते हो? हम अब यही रुकेंगे और कल सुबह जायेगे.

खतरा – मए तो पहले hi कह रहा था के यही रुक जाओ महीना भर देखा रूद्र देव समझदार है तू बहोत उतावला है .
 
थैंक यू राज़ भाई फॉर योर लवली रिव्यु. भाई देव या खतरा कौन आगे होता है इस बार ये तो आने वाले अपडेट में पता चल hi जायेगा. दूसरी बात जो आपने कही के अघोरी कही कामयाब न हो जाये इसीलिए देव एंड टीम को स्वर्ण मणि का काम जल्दी निपटना पड़ेगा. तो वो जल्दी तो तब करे न जब उन्हें कुछ पता हो इन लोगो को तो अघोरी या उसके गुरु के प्लान का कुछ आईडिया hi नहीं है इसीलिए ये लोग अपनी स्पीड तो बढ़ा hi नहीं पाएंगे और अपने हिसाब से hi चलेंगे लेकिन क्या ये लोग सही समय पे अघोरी को रोक पाएंगे या कुछ घटना होने के बाद पहुचेगे क्या देव सब कुछ हर बैठेंगे सवाल बहोत से है और जावा सिर्फ एक और वो है आने वाले उपदटेस. सो आगे देखते है क्या होता है.
 
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आपने कहा के देव एंड टीम की वापसी अब जल्दी होनी चाहिए हम सहमत है इस बात से और यकीन मानिये सच में उनकी वापसी में अब कोई ज्यादा समय नहीं रह गया है. लेकिन कहते है के अवसर दुश्मन को भी मिलता है और ये वही अवसर है जिसका फायदा अघोरी और उसका गुरु उठाना चाहते है. और जब तक उन लोगो का पाप का घड़ा भरेगा नहीं तो फूटेगा भी नहीं. सो विललाइंस की एक्टिविटीज बढ़ गयी है और बहोत तेजी से वो लोग खतरनाक इरादों को अंजाम देने वाले है. ये सब सही है. लेकिन देव की बाकि टीम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता खास टूर पर जब शलाका जैसी हस्ती और नागार्जुन जैसा योद्धा वह मौजूद है. अब उन्हें भी अघोरी का गुरु रोक ले तो फिर दिक्कत होगी hi. पर वो सब फुतुर की बै है कौन क्या कर पता है.

रही बात खतरा जैसे प्राणी की तो उसका काम है भटकना और वो वही कर रहा है और अगर आप को यद् हो तो हम पहले भी कह चुके है के खतरा का हर मूव चौंकाने वाला होगा. आज एक बात और कह रहा हु के खतरा का लास्ट मूव ऐसा होगा जिसकी कल्पना तक न की होगी किसी ने. अब उसका वो लास्ट मूव क्या होगा सोचिये. वार्ना उपदटेस तो बता hi देंगे. हलाकि वो वक़्त अभी थोड़ा सा दूर है.

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अपडेट – 157

खतरा – मए तो पहले hi कह रहा था के यही रुक जाओ महीना भर. देखा रूद्र देव समझदार है तू बहोत उतावला है .

अब आगे……

रूद्र खा जाने वाली नजरो से खतरा को देखता है जो एक तरफ बढ़ गया था. और वह अपनी शक्तियों से दो झोपड़िया बना दी

रूद्र – ये क्या देव हमें यहाँ से जल्दी निकलना है तुम यहाँ रुकने की सोच रहे हो.

देव – रूद्र यहाँ की हर चीज़ में भेद है और इसे समझने के लिए समय चाहिए. जल्दी मुझे भी है यहाँ से निकलने की लेकिन बिना सोचे समझे यहाँ से नहीं निकल सकते.

रूद्र – देव एक रास्ता है यदि हम नदी के साथ साथ चले तो हो सकता है आगे जाकर हमें कही से इसे पर करने का रास्ता मिल जाये.

देव – समय की बर्बादी तो उसमे भी होगी न . तो यही बैठ कर क्यों न सोचा जाये.

रूद्र ने खतरा को देखा वो बनाई हुई झोपड़ियों के पास सुस्ता रहा था.

पूनम – देव है तो ये पूरा तिलिस्म hi लेकिन मए यहाँ अपनी शक्तिया इस्तेमाल नहीं कर प् रही हु. वार्ना ऐसी चीज़े हमें रोक नहीं पति

नीलम – त्रिकाल कर रहा है सब कुछ. हमारी शक्तियों को भी उसने hi बंधा है. लेकिन मैने महसूस किया है के कही कही हमारी शक्तिया जाग्रत हो जाती है.

देव – अब जब भी ऐसा हो मुझे बताना मए भी गौर करुगा अपनी शक्तियों पे.

सभी लोग झोपडी में अंदर चले जाते है और एक hi झोपडी में बैठे थे. के उन्हें उस झोपडी की खिड़की से खतरा जाता हुआ दीखता है. जो बिना पीछे देखे हाथ लहरा के टाटा कर रहा था.

रूद्र – उसे पता है के हम उसे hi देख रहे है. इसीलिए हाथ हिला रहा है. बहोत बड़ा कमीना है ye.aur मुझे इंतजार है बस उस एक मौके का जब मए इसके धड़े दन्त तोड़ सकू जो ये हमें दिखता रहता है. साला समझ में ये नहीं आ रहा है के हम लोग आज़ाद है या यहाँ बंदी.

देव – जाने दो उसे यार. खुद hi आएगा हमारे यहाँ से निकलने के पहले. उसकी शक्तिया बता देगी जब हम चलना शुरू करेंगे यहाँ से. रहा सवाल के हम लोग आज़ाद है या बंदी तो हम लोग यहाँ बंदी hi है जो यहाँ से निकल के दिखाना चाहते है त्रिकाल के तिलिस्म को तोड़ कर और ये टास्क हमने खुद जान बुझ कर लिया है या यु कह लो के ये टास्क हमारे लिए हम सब लोगो की सोच से भी पहले बना दिया गया था जिसे हम अभी निभा रहे है.

तभी देव नक्शा निकल के वह फैला देता है. जिस पर सभी झुक जाते है.

नीलम - देव भैया ये क्या आधा नक्शा मिटा हुआ है?

पूनम – जितना मिटा हुआ है उतना रास्ता हम पार कर चुके है. और शायद अब वह कुछ है भी नहीं. ये सब त्रिकाल की बनायीं चीज़े है लेकिन उसने ये नक्शा बनाया hi क्यों अगर वो चाहता है के कोई मणि तक न पहुंचे. तो हमें रास्ता क्यों बताया नक़्शे के द्वारा और अगर वो चाहता है हम पहुंचे तो हमें रोक क्यों रहा है.

देव मुस्करा के– अब मुझे सब समझ आता जा रहा है. त्रिकाल हमें नहीं रोक रहा है. असल में ये सब तिलिस्म उसने ऐसे लोगो के लिए बनाया है जो मणि की लालच में यहाँ तक पहुंच जाये वो इसी में उलझ के अपनी जान गँवा दे लेकिन उसे मालूम था के एक दिन हम यहाँ आएंगे इसीलिए उसने तिलिस्म हमारे नाम से बंधा है और ये नक्शा भी हमारे लिए hi बनाया गया है जिससे हम खतरों से जितना हो सके बचे………….

…………अब यही देख लो नक़्शे के हिसाब से हमें उस दूसरी दिशा में जाना था और हम आ गए है इस तरफ जहा ये आग का दरिया है. असल में हमें इस तरफ आना hi नहीं था. लेकिन तिलिस्म के नियम के हिसाब से हम अब वापस पलट नहीं सकते. क्यों की पीछे कुछ है hi नहीं. खतरा के बात अलग है क्यों की वो भी एक तरह से तिलिस्म के मायाजाल का हिस्सा hi है है ये अलग बात है के वो एक जीता जगता हिस्सा है. इसीलिए वो कही भी आ जा सकता है. लेकिन अगर हम पीछे होना चाहे तो हम एक कदम भी अब पीछे नहीं लौट पाएंगे ये हम वह जंगल में आजमा चुके है अगर याद हो तो. ( जब तिलिस्म स्टार्ट हुआ था तो एक दीवार आयी थी तब इन लोगो ने वापस जाने के लिए कदम उठाये थे और विफल हुए थे.)

रूद्र – यद् है भाई मैने hi तो पीछे जाने की कोशिश की थी. ऐसा लगा के सामने दीवार है जब की सामने कोई दीवार नहीं थी बल्कि वो रास्ता hi नजर आ रहा था जिससे हम होकर आगे आये थे.

देव – यही होगा. दिखेगा सब पर होगा कुछ नहीं. मतलब सरे रस्ते सिर्फ आगे बढ़ने के लिए है पीछे लौटने के लिए नहीं.

नीलम - लेकिन अभी समस्या ये नहीं है के हम पीछे नहीं हो प् रहे है समस्या ये है के आगे हम बढ़ नहीं प् रहे है और हम सब जानते है के पीछे रास्ता है hi नहीं उसका क्या करे?

रजनी – मेरे हिसाब से देव का यहाँ रुकने का फैसला सही था क्यों की इस पहेली का हल सोचने के लिए समय चाहिए तभी हम इस पहेली को सुलझा पाएंगे और आगे बढ़ पाएंगे क्यों की जैसा देव ने कहा हम इस तरफ आ कर गलती कर चुके है अब उसे कैसे सुधरे यही सोचना है जो की आसान तो होगा नहीं बस अपने अपने दिमाग दौड़ाओ शायद किसी को कुछ रास्ता मिल जाये.

काफी वक़्त हो गया था उन्हें इस नदी और तिलिस्म की बात पर चर्चा करते हुए लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. चारो वह रखा खाना खा चुके थे. और दिन भर की थकन तो थी hi.

देव – एक काम करते है कल सोचेंगे अभी आराम कर लो खाना तो हो hi गया है.

फिर रूद्र और नीलम बगल वाली झोपडी में चले जाते है और एक दूजे से लिपट के सो जाते है.

यहाँ देव भी लेट जाता है और पूनम उसकी छाती पे सर रख कर लेट जाती है उसे अपनी बहो में भर के. पास hi रजनी भी लेती हुई थी और वो भी देव के साथ सटी हुई थी.

पूनम – क्या सोच रहे हो देव?

देव – कुछ नहीं पूनम मए तो इस पल को महसूस कर रहा हु कितना अच्छा समय है न हम सब एक साथ है. तुम मेरी बहो में हो कोई डिस्टुरेब करने वाला नहीं कोई काम नहीं बस एक hi दिक्कत है के कदम कदम पे मौत है,

पूनम – ह्म्मम्म्म्म बात तो सही है. लेकिन जिंदगी जितनी भी है इस वक़्त तो हम साथ है न और मुझे पूरा यकीन है तुम पर. कोई न कोई रास्ता तो तुम निकल hi लोगे. और फिर जो होगा अच्छा होगा. फ़कीर बाबा ने हमें खतरे में यु hi नहीं भेजा है. दोनों नागरियो की जिम्मेदारियां और वह के लोगो की जान का सवाल है. वो भी अनंत कल तक. इसके बदले अगर हमें कुछ खतरों को पर करना है तो कोई बड़ी बात नहीं.

देव – यही तो बात है जिस वजह से हम यहाँ है मेरी जान . अब आओ और मुझे थोड़ा सुकून दो.

पूनम – मुझसे तो अभी नहीं मिलेगा सुकून. चाहो तो रजनी से ले लो मुझे कोई दिक्कत नहीं और वो भी मन नहीं करेगी. क्यों रजनी ?

रजनी - मए तो हु hi देव के लिए मेरे मन करने का तो प्रश्न hi नहीं है. आओ देव पूनम खुद कह रही है.

देव - देवियो मुझे माफ़ करो मेरा मतलब सुकून से hi था सेक्स से नहीं सो जाओ दोनों . और मुझे भी सोने दो. तुम दोनों में से किसी से भी मुझे अभी वो सुकून नहीं चाहिए पहले से थके हुए को और थका डौगी तुम लोग. तुम दोनों में से किसी की भी खाई को भरना आसान काम नहीं है.

पूनम – छ्हीी देव कैसी बाटे करते हो आप. (और शर्मा के देव के सीने में मुँह छुपा लेती है.)

रजनी और पूनम दोनों हंस पड़ती है एक तरफ रजनी और दूसरी तरफ पूनम थी बीच में देव सो रहा था. थोड़ी देर बाद इन तीनो को भी नींद आ जाती है.

आधी रत को करीब तीन बजे देव को पेशाब का ख्याल आता है और वो उठकर बहार आता है. बहार ठंडी हवा चल रही थी और कल कल करते पानी की आवाज़ बहोत मधुर संगीत जैसी लग रही थी, चांदनी अपने पूरे शबाब से बिखरी हुई थी, पूरी तरह सन्नाटा था वह ऊपर आसमान में टारे टिमटिमा रहे थे. देव बहार निकल कर एक भरपूर अंगड़ाई लेता है और एक किनारे खड़े हो कर पेशाब करने लगता है प्रेशर बहोत बना हुआ था जिससे उसे कुछ ज्यादा hi देर लगती है जब तक वो फ्री हो वो यहाँ वह देख रहा था तो उसकी नजर नदी की तरफ जाती है लेकिन अँधेरे की वजह से उसे नदी दूर से दिखाई नहीं दे रही थी तो वो नदी के पास जाता है. और नदी किनारे खड़े हो कर नदी को देखने लगता है. पास hi पेड़ की टहनी पड़ी हुई थी वो उसे यु hi उठा के नदी किनारे बैठ जाता है और रेट पे आकृतिया बनाना लगता है कुछ आदि टेडी आकृति बनाने के बाद भी उसे कोई हल नहीं मिल रहा था. न कोई रास्ता सूझ रहा था तो देव को गुस्सा आने लगता है वो टहनी को जमीन में पूरा धंसा देता है और फिर निकल के फिर से धंसा देता है. फिर आग की नदी में टहनी चलने लगता है और कुछ सोचने लगता है के कैसे इस नदी को पर किया जाये. देव गौर से उस बहती हुई आग को देख रहा था. वो देख तो नदी में hi रहा था लेकिन उसका दिमाग कही और सोच में चल रहा था. अचानक देव की आँखों में कुछ सोच कर चमक आ जाती है वो अपने हाथ की छड़ी दूसरे हाथ पे दो तीन बार मरते हुए मुस्कराने लगता है जैसे के कोई जुंग जीत ली हो और फिर वापस अपनी झोपड़ी में आ जाता है.

लेकिन इस बार वो पूनम को कास के अपनी बहो में भर लेता है और उसके होठो को भी चुम लेता है जिससे नींद में hi पूनम देव का साथ देने लगती है और दोनों एक दूजे के होठो को चूसने लगते है देव के हाथ पूनम की ठोस चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से मिलने लगते है .

पूनम भी सिसकारियां भरने लगती है. और देव को जोर से पकड़ लेती है और अपनी ताप्ती हुई छूट को देव के खड़े लुंड पे रगड़ने लगती है. देव कभी पूनम के होठो को चुस्त कभी उसके गलो को और कभी उसकी गार्डन को पूनम के जिस्म में भी गर्मी बढ़ती जा रही थी. उसकी साड़ी भी इस समय जांघो तक उठ चुकी थी. जिसे देव प्यार से सहला रहा था.

पूनम नींद से भरी आवाज़ में – सो जाओ मेरी जान इस तरह बेचैन मत हो अभी वक़्त नहीं आया हमारे मिलान का फिर पूनम देव के होठो को अपने होठो में लेकर एक बार चूस कर छोड़ देती है और देव भी पूनम को बहो में लिए सो जाता है. एक सुकून भरी नींद.
 
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खतरा के लिए रूद्र का ये हाई लेवल की नफरत होना जरुरी भी है क्यों की रूद्र बेहद गुस्सैल तो है hi ये तो अब तक आप सब जान hi गए होंगे. लेकिन इस वक़्त वो कुछ कर नहीं सकता खतरा का कुछ बिगड़ नहीं सकता इसीलिए उस पर रूद्र को क्रोध ज्यादा आ रहा है इन दोनों में क्या होगा क्या रूद्र को अपनी भड़ास निकलने का मौका मिलेगा खतरा पर या नहीं ये तो वक़्त hi बताएगा, क्या रूद्र खतरा को फोड़ेगा या उसे गले लगाएगा कुछ भी नामुमकिन नहीं है सब वक़्त पे है के कब क्या होता है.

नदी किनारे रुकना जैसे की आपने पढ़ा hi के देवा की फैसला था और उसके फैसले की खिलाफ जाने की किसी के पास कोई ठोस वजह नहीं थी इसीलिए सबको रुकना hi था. और खतरा का आना या जाना तो बस अब धुप छाँव की तरह hi हो गया है तो उसे तो आना hi है आखिर त्रिकाल ने इन सबकी जिम्मेदारी उसे hi तो सौंप राखी है न. आपकी सोच और सवाल अपनी जगह सही है के नक़्शे के मुताबिक न चल कर ये लोग उलटी दिशा में क्यों गए नक़्शे के हिसाब से चलते तो शायद अच्छा होता, इन्हे इस नदी का सामना न करना पड़ता, ये लोग मुसीबत में नहीं फास्ट. ेट्स. लेकिन फिर भी इन में से किसी का ध्यान नहीं गया नक़्शे की तरफ . अब इसका उल्टा सोचे तो ऐसा भी हो सकता है के यहाँ आना देव की hi सोच का नतीजा हो. ये इस उलटी तरफ आ कर क्या कर्ज ये आपको जल्द hi पता चल जायेगा. देव ने कुछ नजरअंदाज नहीं किया है इतना यकीन दिलाता हु. और रही इस episode में देव के खुश होने की बात तो वो तो बस नेक्स्ट अपडेट में पता चल hi जायेगा के देव रत को खुश क्यों हुआ. वेल थैंक्स अगेन फॉर योर लवली रिव्यु प्लीज स्टे तुनेड.
 
लीओन 32 थैंक यू वैरी मच फॉर यू लवली रिव्यु.

आपने बिलकुल सही कहा के देव वह रुक कर आगे की अपनी राण नीति बनाना चाहता है और साथ hi ये भी के उसे इस नदी वाली प्रॉब्लम का कुछ सलूशन मिल जाये.

अब उसे क्या मिल गया ये तो आ पको पता चल hi जायेगा. नेक्स्ट अपडेट में. और आप ये जान जायेगे के देव के खुश होने का क्या राज़ था.

जी है रजनी तो देव को अपना सुकून देने को तैयार hi है हर वक़्त पर अपना देव भी कोई ठरकी नहीं जो ऐसे माहौल में वो सेक्स में सुकून ढूंढे. वो ये भी जनता है के रजनी तो अभी अपना hi माल है आराम से एन्जॉय कर्ज. लेकिन फ़िलहाल उसका ध्यान पूरा का पूरा सिर्फ तिलिस्म से बहार निकलने में है इसीलिए वो सोने का बोल रहा था. और एक ऐसा इंसान जिसके ऊपर कोई जिम्मेदारी हो तो उसे रियल में भी ये सब अच्छा नहीं लगता. उसे अपनी जिम्मेदारी का अहसास हर पल रहता है और इधर देव तो ये समझ hi रहा आहे के हालत कितने खतरनाक है. सो no सेक्स हेरे. अन्य वे थैंक अगेन फॉर योर रिव्यु. सी यू सून विथ नेक्स्ट अपडेट.
 
अपडेट - 158

पूनम नींद से भरी आवाज़ में – सो जाओ मेरी जान इस तरह बेचैन मत हो अभी वक़्त नहीं आया हमारे मिलान का फिर पूनम देव के होठो को अपने होठो में लेकर एक बार चूस कर छोड़ देती है और देव भी पूनम को बहो में लिए सो जाता है. एक सुकून भरी नींद.

अब आगे.........

दूसरे दिन रूद्र की आवाज़ आती है तो देव की आँख खुलती है. वो देखता है के पूनम उठ चुकी थी लेकिन देव से लिपट के लेती हुई थी. उसकी एक टांग देव की कमर पे छड़ी थी. देव उसके चेहरे को पकड़ कर ऊपर करता है और दोनों hi एक मीठे से लिप किश में खो जाते है थोड़ी देर के बाद पूनम मुस्करा के अलग होती है तो देव उसके माथे को चुम कर खुद से अलग करता है.

देव – आजा रूद्र बहार से क्यों आवाज़ लगा रहा है.

रूद्र अंदर आता है. – यार वो खतरा को अच्छा कहु या कमीना समझ नहीं आ रहा.

देव मुस्कराते हुए – क्या हुआ ? अब क्या कर दिया सुबह सुबह उसने?

रूद्र – बहार निकल के देख उसने तो हमें यहाँ हमेशा के लिए रुकवाने का इंतजाम पक्का कर दिया है.

तीनो बहार आते है तो बहार रजनी और नीलम पहले से खड़े थे. और वो भी सामने देख रहे थे देव ने भी उधर देखा तो मुस्करा दिया.

रूद्र – भाई तू हंस रहा है?

देव – यार उसने तो लेडीज के नहाने का और हम सब के फ्रेश होने के लिए टेम्परेरी लेट बाथ hi बनाया है न उसमे परेशां क्यों होता है? क्या तुझे इन की जरुरत नहीं पड़नी ?

रूद्र – मजाक मत कर यार हमें क्या यहाँ और रुकना है जो ये सब बनाया उसने?

देव – नहीं रुकना यहाँ लेकिन फ्रेश तो होना hi है न इसमें बुराई भी क्या है चलो सब लोग फ्रेश हो के आओ फिर तैयार हो के चलते है. और है तुम लोगो ने देखा या नहीं लेकिन हमारी कॉटेज में उसने नए कपडे भी रखे है. हम सब के हिसाब से. नहाओ और नए कपडे पहन के तैयार हो जाओ तब तक वो भी आ जायेगा

रूद्र को कुछ समझ नहीं आया लेकिन वो देव की बात मन के बाथरूम में घुस गया और फ्रेश हो के नाहा लिया और तैयार हो गया ऐसे hi एक एक करके सब हो के आये अंत में देव गया जब वो बहार निकला तो सामने खतरा खड़ा था और टेबल पे गरमा गरम नाश्ता भी लगा था और सभी पास hi खड़े थे.

देव – अरे भाई खतरा ने इंतजाम किया है नाश्ते का, खड़े क्यों हो चलो नाश्ता करे फिर चलना भी है . क्यों खतरा?

खतरा – है मरने से पहले तैयार हो के नाश्ता करने में बुराई भी क्या है?

रूद्र ने उसे घुरा. लेकिन कहा कुछ नहीं.

खतरा – तू मुझे नहीं खा पायेगा नाश्ता खा . आजा बैठ जा

देव hi आगे बढ़ के नाश्ता उठता है और फिर सब नाश्ता ले लेते है.

रूद्र – क्यों बे कुर्सी नहीं लगायी हमारे लिए?

खतरा – हम इतना भी आराम नहीं देते के आदते बिगड़ जाये. चुप चाप खा लो और कूदो नदी में मरने के लिए. इंसानो को टालते हुए बहोत दिनों से नहीं देखा आज तो ये नजारा देख कर hi जाउगा मए. फिर तुम लोग ऊपर जाकर आराम करना और मए यहाँ एक लम्बी नींद लगा जब तक तुम लोग फिर वापस नहीं आ जाते. हलाकि उसमे बहोत समय लग जायेगा यहाँ की कुछ मरम्मत भी करनी है चलो जल्दी खाओ और मर जाओ.

खतरा भी अब रूद्र को hi देख रहा था और उसे गुस्से में देख कर मजे ले रहा था लेकिन देव ने इशारे से रूद्र को शांत रहने को कहा. तो रूद्र भी बिना कुछ कहे नाश्ता करने लगा.

सबने नाश्ता किया. और देव के साथ आकर खड़े हो गए जो नदी को देख रहा था.

देव – तो चले साथियो?

पूनम – लेकिन देव समस्या कहा सुलझी है वो तो वही है न अब तक. चले कैसे?

देव बिना जवाब दिया आगे बढ़ा तो रूद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया.

रूद्र – क्या करता है यार रुक जा कुछ सोचना पड़ेगा. ऐसे मत बढ़ो आगे. देख नहीं रहा आग की नदी है भयंकर शोले उठ रहे है आग लगी हुई है.

देव ने रूद्र को देख कर मुस्करा के अपना हाथ छुड़ाया और वही से एक पत्ता लेके नदी के पास गया और उसमे डुबाया और फिर खड़े हो कर अपना पैर नदी में रख दिया. सब की सांसे रुक गयी थी.

लेकिन देव मुस्करा रहा था. देव आग की नदी में खड़ा था. उसने पूनम को इशारा किया तो पूनम भी आ गई और उसके साथ hi रूद्र नीलम और रजनी भी आगे आ गए देव ने हाथ बढ़ाया तो पूनम ने देव का हाथ थम लिया फिर वो और बाकि सब भी नदी में आ गए. और तभी एक झटके में साडी नदी की आग गायब हो गयी और सबको साफ़ नीला पानी नजर आने लगा जो तेजी से कल कल करते हुए बाह रहा था.

सभी चौंक गए.

रूद्र – ये क्या है भाई?

देव – ये आग का दरिया सिर्फ आँखों का धोखा था. जो मुझे रत को hi समझ आ गया था. मए आधी रत को यहाँ आ कर बैठा था और नदी में टहनी मर रहा था साथ hi इस प्रॉब्लम से निकलने का हल भी सोच रहा था. तभी मेरा ध्यान अपने हाथ में पकड़ी हुई टहनी पे गया आग में डालने पर भी टहनी को कुछ नहीं हुआ. मैने उसे नदी से निकल के हाथ पे मारा तो मुझे ठंडी लगी और उसमे नाम भी थी. मए समझ गया के यहाँ आग नहीं पानी है. फिर मए चुप चाप जा के सो गया. और अभी हम सब इसी नदी में खड़े है. रूद्र झटके से पीछे मुदा तो अब वह खतरा नहीं था. न hi कोई कॉटेज न नाश्ते का सामान. वह अब खली मैदान था.

रूद्र – क्या तिल्सिम है यार? मन्ना पड़ेगा त्रिकाल को साला आग का दरिया सिर्फ सुना था उसने दिखा hi दिया और वो भी ऐसा की हिम्मत hi न हो आगे बढ़ने की ग्रेट. हमें भी हिला दिया यार.

नीलम - कोई जरुरत नहीं उसकी इतनी तारीफ करने की चुप चाप चलो आप.

देव – नहीं नीलम रूद्र सही कह रहा है और ये सच भी है आखिर परेशां तो हम सभी हुए थे न ये बात तो मानती हो तुम भी तो अगर हमारा दुश्मन कही हमसे आगे निकल गया तो उसकी तारीफ करने में बुराई भी क्या है बहोत सही चाल चली उसने और वो कामयाब रहा. कहते है बेवकूफ दोस्त से अकल्मन्द दुश्मन हमेशा बेहतर होता है. और वो मेरी भी पहली पान्ड रहे है और त्रिकाल उनमे से एक है.

रजनी - देव एक बात समझ नहीं आयी जब यहाँ ये आग का दरिया सिर्फ आँखों का धोखा था तो नक़्शे में ऐसा क्यों दिखाया गया के हमारे लिए ये नहीं बल्कि दूसरी तरफ वाला रास्ता सही था आखिर कल रत हमने यही देखा था न. तो क्या नक्शा भी गेम प्लान hi है?

देव - नहीं रजनी नक्शा अपनी जगह सही है अगर हम दूसरे रस्ते पे जाते तो हमें कोई दिक्कत नहीं आती और यहाँ भले hi भ्रमित करने के लिए hi सही लेकिन ये आग का दरिया तो आया hi न. वह कुछ नहीं आता साफ सुथरा रास्ता मिलता. और तुम लोगो को बता दू के इस रस्ते पे मुश्किल ख़तम नहीं हुई है उसका आना अभी बाकि है. और ये सब मए पहले hi नक्शा देख कर समझ चूका था.

रूद्र – तूने कब देखा नक्शा? और कैसी दिक्कते?

देव – इस रस्ते पे आने से पहले hi मए नक्शा देख चूका था और मन hi मन मैने इस चुनौती का सामना करने की थान ली थी एक कारन ये भी था इस तरफ आने का.

पूनम – हम सब जानते है आप कोई गलत फैसला नहीं करेंगे. लेकिन फिर भी साफ रास्ता छोड़ कर इस तरफ आने का कारन?

देव – समय मेरी जान समय. वो जो दूसरा रास्ता था वो काफी लम्बा था लेकिन मिलता वही जाकर जहा हम लोग अभी जा रहे है और ये रास्ता चुना इसीलिए क्यों के ये बहोत छोटा है उस के मुकाबले. तुम इसे शॉर्टकट hi कह सकती हो.

नीलम - लेकिन देव भैया अभी अपनी जिन मुश्किलों की बात की वो क्या है?

देव – बताता हु लेकिन उससे पहले एक बात कहना चाहुगा, हालत कैसे भी हो जाये कोई घबराएगा नहीं. चाहे कुछ भी हो जाये.

सभी - ok

देव – तो जो आगे की मुश्किल है वो ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…………………..

अभी उन्होंने आधी नदी hi पार की थी के अचानक नदी में बहाव तेज हो गया और बहोत सँभालने पर भी उनमे से कोई नहीं सम्भला सब एक तरफ तेजी से बहने लगे और नदी के बीचो बीच बने एक पानी की सुरंग में गिरते चले गए सब का बुरा हल था हर कोई सँभालने की कोशिश कर रहा था. लेकिन मौका किसी को नहीं मिला. और एक एक कर के सभी के होश गम होते चले गए. और सभी पानी में डूबते चले गए.

वही नदी किनारे खतरा फिर से नजर आने लगा जो एक पेड़ के पीछे से निकला और दोनों हाथ अपनी कमर पे रख के जोर जोर से हसने लगा.

खतरा - त्रिकाल से बड़ा कोई नहीं. आखिर कर त्रिकाल hi जीता त्रिकाल जीत गया. खुद को बहोत चालक समझते थे न तुम देव. हहहहहहहह. बधाई हो महँ त्रिकाल आप की जीत की बधाई हो. है है है है है है.

इधर तिलिस्म नगरी में फ़कीर बाबा ने महाराज भैरव सिंह को बुलवाया था. तो एक कमरे में महाराज भैरव सिंह फ़कीर बाबा और महाराज सुमंत देव तीनो बैठे थे.

बीएस – फ़कीर बाबा आपने हमें क्यों बुलवाया कोई विशेष कारन ?

फब – है महाराज मैने आपको यहाँ एक विशेष कारन से बुलवाया है. असल में इस वक़्त धरती पे देव और रूद्र नहीं है. न पूनम न नीलम वो सब इस वक़्त त्रिकाल के तिलिस्मी चक्र में व्यस्त है. वो आ नहीं सकते लेकिन एक खतरा देव और पूनम एक परिवार की तरफ बड़ी तेजी से बढ़ रहा है. यदि उसे न रोका गया तो अनर्थ हो जायेगा. और फिर देव या पूनम को संभालना मुश्किल .

सड़ – ऐसा क्या खतरा है बाबा हमें बताये

फब – वही बताने के लिए आप दोनों को इकठा किया है महाराज. असल में अघोरी और उसके गुरु ने बहोत नीच चल चलने का फैसला किया है. उनकी योजना है के……………………………….

और फ़कीर बाबा उन्हें अघोरी की योजना बताते है.
 
भाई सरे hi किरदार कहानी के लिए जरूरी है चाहे वो नेगेटिव हो या पॉजिटिव और आपको खतरा की भाषा शैली पसंद आयी उसके लिए धन्यवाद.

आपने सही कहा के अपने से पावरफुल की तारीफ करना अच्छी बात है यही देव की बातो से भी जाहिर हुआ. आखिर वो यु hi महानाग या शक्तिशाली नहीं है बल्कि उसमे कई सरे गन है. जो वक़्त वक़्त पे नजर आते है.

आगे की योजना जैसे की फाकरी बाबा ने दोनों महाराज के सामने रख hi दी है तो आप सब नेक्स्ट अपडेट में जान hi जायेगे के अघोरी के खिलाफ फब की क्या राण नीति है. सो वेट & वाच
 
नैना जी थैंक यू वैरी मच फॉर अमेजिंग रेवो. माफ़ी चाहते है के रपल्य देर से दे रहे है. ाक्टुअलय पिता जी के ऑपरेशन्स में उलझ गए थे. और इस वक़्त भी हॉस्पिटल में hi है हम

अब आप के रेवो की बात. बिलकुल ठीक एक इत्तेफ़ाक़ से देव को नदी का राज़ पता चला वार्ना कोई छू कर तो देखने की हिम्मत करता नहीं और वह पहुंचने वाला बस वह से आगे बढ़ने का सोचता hi रह जाता जिस वजह से किसी न किसी समय खतरा अपनी कोई चाल चल देता पर देव को बात समझ में आ गयी और ये लोग आगे बढ़ पाए

आपने शायद गौर नहीं किया नैना जी वो लोग नदी के बीच खड़े हो कर बाटे नहीं कर रहे थे न hi वो असावधान थे. बल्कि बाटे करते हुए आगे बढ़ रहे थे इसीलिए वो नदी के बीच तक पहुंच चुके थे वो सावधान भी थी लेकिन बहते पानी में या पानी के बहाव में आप सावधान कितने भी हो लेकिन बिना सहारे के खड़े नहीं रह सकते वही हुआ इन लोगो के साथ इसीलिए ये बहने लगे और वही पे बानी पानी की सुरंग में समां गए. आप सही है ये लोग इस ट्रैप से निकलेंगे तो जरूर पर कैसे?, और क्या ये खुद निकलेंगे या निकले जायेगे और अगर उन्हें निकला जायेगा तो कौन निकलेगा और कहा जा पहुंचेगा ये लोग? कही शॉर्टकट महंगा तो नहीं पद जायेगा?. सब पता चलेगा लेकिन थोड़ा देर से क्यों के अब तो गाँव जाने का टाइम भी आ रहा है वह क्या हो रहा है वो प्लानिंग भी देखनी है. तो बहोत कुछ होना है साथ बने rahiye.ones अगेन थैंक यू फॉर सपोर्ट
 
अपडेट – 159

फब – वही बताने के लिए आप दोनों को इकठा किया है महाराज. असल में अघोरी और उसके गुरु ने बहोत नीच चल चलने का फैसला किया है. उनकी योजना है के……………………………….

और फ़कीर बाबा उन्हें अघोरी की योजना बताते है.

अब आगे..........

सड़ – हम उन सब को समाप्त कर देंगे. उनकी कोई चल कामयाब नहीं होने देंगे.

बीएस – आपने ठीक कहा महाराज हमारे होते हमारे बच्चो को अब कोई परेशां नहीं कर पायेगा. बाबा आप बताये कब चलना है पृथ्वी लोक ?

फब – ये इतना आसान नहीं है महाराज. क्यों की उनका हमला तीन तरफ़ा होगा.

बीएस – क्यों न हम उन सबको अदृश्य कर के यहाँ ले आये.

फब – नामुमकिन है. वो अभी यहाँ के बारे में नहीं जानते और बिना देव के लाये वो यहाँ नहीं आ सकते वो साधारण इंसान है यहाँ की jal-wayu उन्हें तभी रास आएगी जब देव या पूनम उन्हें यहाँ लाये.

सड़ – तो फिर आप hi बताये की हम क्या करे ?

फब – एक रास्ता है. आप लोग उनके परिवार को सुरक्षा चक्र में रखते हुए अदृश्य कर दे. किन्तु आप ये काम चुप चाप करेंगे क्यों के यदि अघोरी को पता चला के आप लोग इसमें शामिल है तो वो यहाँ हमला करेगा और अभी यहाँ कोई नहीं जो दोनों नागरियो को संभल सके. एक शलाका और नागार्जुन hi है लेकिन वो भी धरती पर अघोरी का सामना करेंगे तो यहाँ का क्या होगा?

तो आप दोनों ये काम चुप चाप ख़तम कर के वापस अपनी अपनी नगरी में अपने कार्यो में व्यस्त हो जायेगे. मनो कुछ हुआ hi नहीं, या आपको तो कोई जानकारी hi नहीं. क्यों की जो अघोरी का गुरु है उसने यदि आप लोगो के पीछे अपने गुप्तचर लगाए भी तो उसे अहसास नहीं होना चाहिए के देव के उस परिवार के गायब होने में आप लोगो का हाथ है. इसीलिए ये सावधानिया जरुरी है महाराज.

एक और चिंता की बात है. आप इस वक़्त सिर्फ देव की बहन, भाभी, और पूनम की माता जी, उनकी बहु, और बेटे को hi सुरक्षित कर सकते है. इन पांचो के आलावा देव के माँ और पिताजी के नक्षत्र अभी अनुकूल नहीं है इसीलिए उन्हें नहीं लाया जा सकता. और जो सुरक्षा चक्र में होंगे उन के सामने आप नहीं आएंगे वो बस एक शून्य में रहेंगे. किसी को पता नहीं होगा की वो है कहा. वार्ना अघोरी का गुरु उनके मस्तिष्क को धुंध के पढ़ लेगा और वो सब जान जायेगा के उन्हें बचने वाले कौन है.

बीएस – ठीक है बाबा हम लोग कर लगे. आज hi हम ये कर देंगे और जिनको भी हम गायब करेंगे उनका प्रतिरूप रख देंगे जिससे अघोरी को पता चले भी तो बहोत देर से. और यदि कोई नुकसान हो भी तो उन प्रातृरूपो का नुकसान हो.

उधर मुंबई में .

मन्नू – विठल भाई यहाँ के दुश्मनो की तो अपन लोग ने गांड मर दी अब वक़्त आ गया है. के हमें गाँव जाना चाहिए. क्यों के कल रात मैने अजीब सपना देखा के मए कुछ लोगो को मार रहा हु और कोई बहोत बड़ी ताक़त मुझे सपोर्ट कर रही है. इसका मतलब अब वक़्त हमारा है. इसीलिए गाँव चलना है अब अपन को.

विठल - क्या रे मन्नू तू भी सपनो पे भरोसा करता है. देख तुझे चलना है तो मए अभी तैयार हु पर ये अन्धविश्वास वाली बाटे न छोड़ समझा.

मन्नू – कोई बात नहीं विठल भाई आप इन बातो को भूल जाओ बस मए कह रहा हु न चलो तो चलो, और अगर मूड न हो तो भी कोई वांडा नहीं मए अकेला जायेगा.

विठल – अबे वो सहने ज्यादा दिमाग मत चला समझा, एक रख के देगा अपन तेरी कनपटी के नीचे तो अकाल ठिकाने आ जायेगा तेरा , साला नौटंकी अपुन चलेगा न तेरे साथ क्या?

मन्नू हस्ते हु – मए जनता हु आप चलोगे. तो फिर तयारी करो कल hi निकलेंगे हम लोग.

विठल - ठीक है छोटे मए अपनी सेना तैयार करता हु. वह जा कर भौकाल मचाना है अपुन को और गाँव की ज्यादा से ज्यादा कड़क छूट मारनी है साली हर छूट झाटो से भरी हुई होगी मजा आएगा.

जंगल में अघोरी बेहोश ठाकुर के सामने खड़ा कुछ मंत्र पढ़ रहा था. थोड़ी देर में ठाकुर को होश आता है. और वो धीरे धीरे आँखे खोल कर चारो तरफ देखता है.

ठाकुर – आप कौन है बाबा ?

अघोरी – मए कोई बाबा नहीं अघोरी हु मए. तुझे नया जनम दिया है इस अघोरी ने वार्ना तेरे दुश्मन देव ने तो तुझे मार hi डाला था न यद् है या भूल गया?

ठाकुर की आंखे लाल होने लगती है. कैसे भूल सकता हु. इतनी बेइज्जती उसने मुझे भिखारी बना के मेरे hi गाँव से निकल दिया. मेरे घर की हर औरत को पेट से किया मए उसे जिन्दा नहीं छोड़ूगा.

अघोरी - मुर्ख इंसान तू उसकी झांट भी नहीं उखड पायेगा वो कोई मामूली इंसान नहीं है नाग लोक का राजकुमार है और उसकी वो माल लोंड़िया. पूनम नाम है न उसका? वो तिलिस्म नगरी की राजकुमारी है. उनके पास असीम शक्तिया है उनके सामने तू कुछ भी नहीं. जनता है रूद्र कौन है?

Rudra,dev का भाई जैसा दोस्त है. और साथ hi उसकी प्रेमिका नीलम भी. और रूद्र देव और नीलम तीनो hi महाशक्तिशाली इच्छाधारी नाग है. सेल वो फूंक मार दे तो तू दूसरे गृह में जा कर गिरेगा जनता है? बात करता है के जिन्दा नहीं छोड़ेगा. हुंह्ह. अब सुन तुझे उनसे बदला लेना है न?

ठाकुर जो अघोरी की बाटे सुन के पसीने पसीने हो चूका था - m..m..m… मए कैसे बदला ले सकता हु इतनी बड़ी ताक़तों से?

अघोरी - क्यों की उनसे बड़ी एक ताक़त और है और वो हु मए तेरे सामने. मए तेरी मदद करुगा. मए देव और पूनम को पहले भी मार चूका हु ये उनका दूसरा जनम है और इस बार भी उन्हें मए hi मरुँगा.

ठाकुर की हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी - लेकिन आप उसे कैसे मरेंगे और मए आपकी क्या मदद कर सकता हु. ?

अघोरी – मए तुझे पूरी तरह स्वस्थ कर दुगा. तेरा हर अंग लोहे के जैसा कर दुगा. तू पठार को भी मुठी में लेके उसका चुरा बना पायेगा. मर्दानगी इतनी की बुढ़िया को भी पेल दे तो चीखने के लिए मजबूर कर दे. बोल चाहिए तुझे ताक़त?

ठाकुर – अघोरी तुम महँ हो मुझ पर अपनी दया का हाथ रख दो तुम hi मेरे भगवन हो.

अघोरी – सेल कमीना है तू. मतलब के लिए मुझे अपना भगवन बना लिया अभी तूने मुझे पूरा जाना भी नहीं.

ठाकुर – जानना क्या है अघोरी? तू मुझे सब कुछ दे रहा है और देने वाला भगवन hi होता है न.

अघोरी – लेकिन मेरी एक शर्त है.

ठाकुर - मुझे सब मंजूर है

अघोरी - अबे जल्दबाजी की पैदाइश सुन तो ले पहले. गन्दी मिटटी के ढेर.

ठाकुर – बोलो?
 
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