Fantasy इच्छाधारी देव - Page 26 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

जे बात बिंदु. ऐसा तो अपन कर hi सकता है. ये सही है के टेंशन के बीच थोड़ा रोमांस मिल जाये तो सफर मजेदार हो जायेगा. हलाकि ऐसा कुछ तिलिस्म में सोचा नहीं था. करने को. एक रजनी के साथ सेक्स सन भी हम देना तो नहीं चाहते थे पर कहानी hi ऐसे मुद गयी तो देना पड़ा लेकिन सेक्स न सही रोमांस तो दाल hi सकते है तुम्हारी बात सही है ी फुल्ली एग्री विथ यू. जल्द hi कुछ सन ऐड कर देंगे. थैंक्स फॉर सुग्गेस्टिव.
 
थैंक यू वैरी मच नैना जी फॉर योर रिएक्शन, & योर अमेजिंग रिव्यु लिखे ऑलवेज. आपने सही कहा मार्गदर्शक की जरुरत इंसान को जिंदगी के हर मोड़ पर पड़ती है और यही भूमिका रही शंकर की क्यों की कहते है जहा दिमाग की जरुरत होती है वह ताक़त काम नहीं आती. लेकिन कई बार न दिमाग काम करता है न ताक़त तब जरुरत होती है एक सच्चे मर्दर्शक की. यही भूमिका कई बार फ़कीर बाबा ने भी निभाई है देव के लिए और इस बार मुश्किल में शंकर काम आया जिसकी यद् तक नहीं थी पूनम को न शंकर का ध्यान इस तरफ था. पर एक बार बुलाने पर वह मदद के लिए आ गया. और sa-sharir न होने के बावजूद वनकु के इरादों को नाकामयाब किया.

शंकर ने देव की दूसरी समस्या नहीं सुलझाई लेकिन उन्हें वही महत्वपूर्ण बात फिर से यद् दिला गया एकता वाली. यदि ये एकता किसी भी तरह टूटी तो त्रिकाल अपने मंसूबो में कामयाब हो जायेगा. नेक्स्ट अपडेट कही न कही इस अपडेट की बातो को पूरा करता हुआ दिखेगा. भले hi अभी समझ में न आये. लेकिन इन थे एन्ड समझ में आ जायेगा के तिलिस्म का कोई अपडेट बेकार नहीं था. बल्कि हर कड़ी एक दूजे से जुडी हुई थी. ध्यान से देखने पे आने वाले अपडेट में hi समझ में आ जायेगा. क्यों की अब घटनाये भी तेजी से होगी और अंजाम भी जल्द hi सामने आ जायेगा. थैंक्स ओनेस अगेन सी यू सून. टिल थें वेट एंड वाच
 
अपडेट- 153

इस बार उन्हें कुछ नहीं होता वो करीब तीन घंटे तक आगे बढ़ते रहे और जांगले ख़तम होने को आ गया सामने hi हरियाली नजर ा रही थी. पर जैसे hi जांगले ख़तम हुआ इन सब की बुद्धि hi चक्र गयी सामने का नजारा देख कर. क्यों की सामने जो था उसकी तो उन में से किसी ने कल्पना तक न की थी.

अब आगे…….

क्यों की इन्हे जो हरियाली सामने नजर आ रही थी. सिर्फ वो हरियाली hi वह नहीं थी जांगले ख़तम होते hi उन्होंने देखा के सामने जहा हरियाली है वह पर कुछ घोड़े खड़े है और उस पर कुछ आदमी बैठ है. सब के हाथ में लेटेस्ट बंदूके थी. उनकी बंदूके जिस शख्स की कनपटी पे लगी थी वो थे देव के माँ और बाबू जी. उनकी लेफ्ट साइड रेगिस्तान नजर आ रहा था ये शामे वही रेगिस्तान लग रहा था जिससे इन्होने प्रवेश किया था. वह अन्टू के पीछे गुरुम और चन्नो बंधे हुए थे और ुण्ठ उन्हें घसीट रहे थे उन दोनों की हालत बहोर ख़राब हो चुकी थी. दोनों का पूरा बदन उन्ही के खून में रंगा हुआ था. चन्नो तो शायद बेहोश हो चुकी थी और गुरुम होश में था लेकिन दर्द के मरे वो भी कराह रहा था. और उसकी भी आंखे किसी भी पल बंद होने को थी.

उन उठो पे भी कुछ लोग बैठे थे जो इन सब को देख कर रुक गए और हसने लगे. तभी रूद्र ने देव को इशारा किया तो राइट साइड महाराज भैरव सिंह और महाराज सुमंत देव को कुछ लोग घेर के खड़े थे जिनके हाथ में तलवारे थी. दोनों hi महाराज बुरी तरह तलवारो से घायल हुए दिख रहे थे. और इस समय वो दोनों hi निहत्थे उन तलवारो के घेरे में घायल खड़े उम्मीद से देव की तरफ देख रहे थे.

इधर इन सबकी आँखों में अंगारे नाचने लगते है देव, रूद्र, नीलम सभी भयानक क्रोध में आ जाते है. और सब अलग अलग दिशा में जाने hi लगते है उन्हें बचने की तभी पूनम की आवाज़ आती है.

पूनम – रुक जाओ………. सब अपनी अपनी जगह पे. कोई कदम मत बढ़ाना?

वह पे सब अपनी अपनी जगह से इन्हे मदद के लिए बुला रहे थे.

देव – क्या बकवास है पूनम हमारे अपने मुसीबत में है तुम हमें रोक रही हो? क्या आज तुम्हे अपनी शक्तियों पे या मुझ पर भरोसा नहीं रहा? कैसे तुम हमारे बड़ो को इस तरह असहाय और लचर देह सकती हो? सबकी छोडो क्या तुम्हे अपने पिता श्री की पीड़ा भी नजर नहीं आ रही है? नहीं पूनम आज मए नहीं रुकुंगा. इतना कह के देव फिर से आगे बढ़ने लगता है. दूसरी तरफ रूद्र बढ़ रहा था और रेगिस्तान की तरफ नीलम बढ़ रही थी.

पूनम चीख कर - ये तिलिस्म है देव………. रुक जाओ…… ये गलती मत करो तुम सब समझ क्यों नहीं रहे हो……. ये चल है त्रिकाल की……………

पूनम की बात सुन के सब को होश आ जाता है और सभी के कदम रुक जाते है.

रजनी - देव पूनम सही कह रही है. ये त्रिकाल का तिलिस्म है यहाँ ये सब होना या दिखना नार्मल है अपने अपनों को मुसीबत में देख कर तुम सब विचलित मत हो. ये त्रिकाल की चल hi है.

रजनी की बात सुन कर सब अपने कदम वापस खिंच लेते है.

एक तरफ देव के बाबू जी उसे बुला रहे थे. दूसरी तरफ महाराज बीएस और सड़ को वो लोग तलवारो से घायल कर रहे थे तो वो भी चीख कर देव और पूनम को मदद के लिए बुला रहे थे. तीसरी तरफ गुरुम और चन्नो लहू लुहान हो चुके थे और देव को आवाज़ दे रहे थे .

देव – मुझसे ये सब देखा नहीं जा रहा पूनम अगर ये तिलिस्म न हुआ , अगर ये सब सच हुआ तो मए खुद को माफ़ नहीं कर पाउगा. क्यों की मेरी hi आँखों के सामने मेरे अपने टिल टिल कर मर रहे है मए उनके सामने खड़ा हु उन्हें बचा सकता हु . लेकिन मए यहाँ तुम्हारी बात मन कर चुप चाप खड़ा हु.

पूनम गौर से तीनो जगहों को देख रही थी. बेचैन वो भी हो रही थी लेकिन उसे समझ में आ रहा था के ये सब तिलिस्म का मायाजाल है.

पूनम – देव ये हमे लिए तीन तरफ़ा मुसीबत में फसे लोग नहीं है बल्कि तीन रस्ते है हमें किसी एक में जाना होगा क्यों के रास्ता तो कोई एक hi सही होगा.

रूद्र – लेकिन भाभी यहाँ हर तरफ हमारे लोग मुसीबत में दिख रहे है क्यों न हम अलग अलग जाये

देव – नहीं हम जहा भी जायेगे साथ hi जायेगे अलग नहीं होना है ये सही नहीं होगा.

नीलम - देव भैया सही कह रहे है. हमें एक जगह hi एक साथ जाना होगा. और मुझे लग रहा है के हमें सामने hi जाना चाहिए. क्यों की यहाँ सारा खेल दिमाग का है. तो अगर सोचा जाये तो साफ पता चलता है. के यदि ऐसी बुरी स्थिति में कोई आ सकता है तो वो देव भैया के माँ और बाबूजी hi. क्यों के महाराज सड़ और बीएस तो खुद शक्तिशाली है. त्रियकल का बस उन पर नहीं चल सकता उन्हें वश में करते करते उसकी बहोत सी शक्ति व्यर्थ हो जाएगी . गुरुम और चन्नो के पास भी ताकते आ गयी है. तो उन्हें यहाँ इस हालत में ला पाना इतना आसान नहीं है. उसमे भी त्रिकाल को अपनी बहोत सी शक्ति उन पर खर्च करनी होगी. इन लोगो को बेबस नहीं किया जा सकता और इनके पास अपनी रक्षा करने की शक्तिया है. लेकिन माँ बाबू जी के पास ऐसा कुछ नहीं. तो अगर ये सच हुआ भी तो उन्हें hi बचाना उचित होगा.

पूनम – बिलकुल ठीक मए नीलम से सहमत हु. इसे अपनी की मुसीबत न मन कर अगर तीन दरवाजो के रूप में देखा जाये तो फिर उस नजरिये से hi देख लो गर्म अउ चन्नो लहू लुहान है यानि मरने की कगार पर, इधर दोनों महाराज भी तलवारो के साये में खड़े है यानि फुल खतरा वो भी लहूलुहान hi है. लेकिन सामने माँ और बाबू जइब हेल hi खतरे में नजर आ रहे है बंदूकों किन ok पर है लेकिन वो अब तक सुरक्षित क्यों है उनके जिसमे पे कही कोई खरोच नहींहै और वो जहा खड़े है वह भरपूर हरियाली है यानि प्रगति उन्नति. बाकि दोनों तरफ मौत का नंगा नाच और यहाँ जिंदगी. ये भी एक इशारा hi है सही रास्ता होने का इसीलिए हमें सामने hi जाना चाहिए. हरियाली की तरफ. बाकि जो लोग सामने नजर आ रहे है वो नजर का धोखा hi है.

देव – मन के तुम लोग सही हो लेकिन अगर तुम लोग गलत निकले तो?

सब चुप रह गए. किसी के पास कोई जवाब नहीं था. काफी देर हो गयी तीनो तरफ से चीख पुकार जारी थी और ये लोग सामने खड़े हो कर बस उसी तरफ देख रहे थे कुछ कर नहीं रहे थे. देव बरी बरी से तीनो तरफ देख रहा था अचानक उसकी आँखों में चमक उभर आयी.

देव – चलो सामने चलते है

रूद्र – किसी और तरफ क्यों नहीं?

देव - बाद में बताउगा अब चलो सामने .

सरे लोग एक साथ उस हरियाली वाले रस्ते की तरफ बढ़ते है जैसे hi वो लोग आगे बढ़ते है और सरे इस मैदान की तरफ आ जाते है जहा देव के माँ बाबू जी पे कुछ लोग हथियार तन कर खड़े थे. लेकिन अब हर तरफ सिर्फ हरा भरा मैदान hi था न वह कोई गुंडे थे न देव के माँ बाबू जी.

पूनम – मैने कहा था न देव सब तिलिस्म है? लेकिन अपनी भावनाओ पे काबू रखना मुश्किल होता है यदि हम कही और गए होते तो पता नहीं क्या हो जाता. देखो यहाँ पे माँ बाबू जी है hi नहीं.

देव – है मए समझ गया था. इसीलिए आगे बढ़ने को कहा

रूद्र – वाह मेरे समझदार. कैसे समझा तू अब बता जरा. पहले तो मैदाने जुंग में कूदने जा रहा था न?

देव – दोनों महाराज दुरी तरह घायल थे जितनी देर हमने लगायी सोचने में और जीतनेय वो घायल थे इतनी देर में तो उन्हें प्राण त्याग देने चाहिए थे लेकिन वो उसी हालत में थे. रेगिस्तान में गुरुम और चन्नो का जो रूप था वो भी बदलता नजर नहीं आ रहा था वो लोग एक hi बात रिपीट कर रहे थे बार बार जैसे की कोई GIF की इमेज होती hae.ya कोई विडिओ लूप. बार बार शामे रिपीट. वही हालत यहाँ भी थे. गुंडे खड़े थे और माँ बाबू जी चिल्ला रहे थे लेकिन गुंडे उन्हें देख भी नहीं रहे थे बस हमारी तरफ देख कर हसे जा रहे थे अगर सब असली होता तो वो लोग हमें देखते hi माँ बाबू जी को गोली मर के भागने लगते. लेकिन उन्हें देख के एक पल को भी नहीं लगा के उन्हें वह से जाने की कोई जल्दी है. वो लोग तो बस शान से खड़े थे. अबे यार देव एंड टीम सामने हो तो अचे अच्छा की पेण्ट गीली हो जाये ये सेल टटपुँजिये दन्त दिखा रहे थे उनकी यही ओवर होशियारी से मए समाजः गया के सब नकली hi है. और मैने इसी तरफ आने का सोचा क्यों की मुझे भी नीलम की थ्योरी सही लगी थी. इस तरफ आने वाली.

रूद्र – वाह भाई वाह क्या दिमाग उसे किया है. बढ़िया है.

रजनी - पूनम न रोकती तो सब बिछड़ गए होते और इस बार त्रिकाल का यही प्लान था के हम सब अलग अलग हो जाये क्यों की वो समझ गया है के हमें एक साथ तोडना उसके बस में नहीं अलग हो कर हम जल्दी मरेंगे.

देव – इसीलिए तो मैने कहा के जहा जायेगे साथ जाएग अकेले नहीं.

पूनम - हम लोगो ने तिलिस्म का एक और टाला तोड़ दिया है देव. ये सब त्रिकाल के टेल hi है जो हम दोनों के ग्रहो के एक होने की वजह से आसानी से टूट रहे है. वार्ना कोई और इन सरे टालो को पार नहीं कर पता. यहाँ तक के हम में से कोई एक भी आता तो उसके लिए मुश्किलें ज्यादा होती. और अब तक शायद वो मर चूका होता. अब हम लोग शायद स्वर्ण मणि से ज्यादा दूर नहीं और नहीं अब ये त्रिकाल का तिलिस्म लम्बा चलने वाला है इस त्रिकाल की ये लंका जाने का टाइम आने hi वाला है.

देव – इसीलिए फ़कीर बाबा ने इतना इंतजार किया था. हम दोनों के साथ होने का. अब सब समझ में आता जा रहा है.

रूद्र – है भाई तुम सही कह रहे हो हम दोनों को भी जब फब ने साधना से उठाया था और तुम्हारे गाँव की तरफ रावण किया था तो कहा था के हमें जिस मकसद को पूरा करने जाना है वो खतरों से भरा हुआ है और उसमे हम चारो का साथ रहना और साथ होना जरुरी है. और कल शंकर ने भी यही कहा था के एक दूसरे का साथ कभी मत छोड़ना बल्कि एक दूजे पे यकीन रखना.

वो लोग आगे बढ़ते hi जा रहे थे फ़िलहाल उनके रस्ते में कोई रुकावट नजर नहीं आ रही थी लेकिन सभी उस सुहाने मौसम में फैले किसी भी अनजान खतरे के लिए पूरी तरह तैयार थे और अपना हर कदम फूंक फूंक कर hi रख रहे थे.

रूद्र – हम लोग जितनी सावधानी से चल रहे है साला खतरा भी उतनी hi स्मार्टनेस के साथ आ जाता है कभी पैरो से जमीन खसक जाती है तो कभी पैर hi जमीन से उठ जाते है कभी भीख देना भरी पद जाता है तो कभी खा पी के पैर पसर के आराम से सो जाने पर भी कुछ नहीं होता.

रजनी - यही तिलिस्म है जितनी देर तुम सावधान रहोगे खतरा उतना दूर रहेगा जहा एक पल को भी तुम्हारी सावधानी हटी और खतरा तुम्हारे सर पे होगा ये यद् रखना. और जरुरी नहीं के हर बार खतरा अचानक आये कई बार तो तुम देख भी पाओगे के संकट सामने है लेकिन कर कुछ नहीं पाओगे वो बिंदास भी आ सकता है तुम्हारी आँखों के सामने एक चैलेंज के रूप में

नीलम – आ गया चैलेंज बन कर अब इससे कैसे निपटोगे महारथी. अपन सब की तो चटनी बन जनि है न कोई दिमाग काम करेगा न ताक़त………

रूद्र – क्या बोलै

नीलम - वो देखो सामने इसे कहते है संकट………..
 
फ्रेंड्स आने वाले अपडेट के बाद कुछ चेंज है कहानी में ी होप यू गाए लिखे आईटी. क्यों की यहाँ घूमते हुए बहोत समय हो गया तो थोड़ा सा तिलिस्म के बहार की दुनिया पे नजर मरना तो बनता है. क्यों की इन लोगो का सफर यही ख़तम कर देना मतलब कहानी का खून करने के सामान होगा और चेंज इसीलिए क्यों की ये सब थोड़ा और आगे जाकर दिखाना था लेकिन अभी लग रहा है के यहाँ पर भी बहोत से लोग कुछ चेंज चाहते है कुछ दूसरे चरक्टेर्स पे भी ध्यान देने की जरुरत है सो गाइस कुछ देर के लिए इस तिलिस्म से निकल कर बहार झांकना भी जरुरी हो गया है. क्यों की इस चेंज की वजह से बहोत कुछ बदल जायेगा कहानी में. वो क्या चेंज होगा ये आने वाले अपडेट के बाद जो अपडेट आएगा उसमे आप लोगो को पता चल hi जायेगा. सो गाइस अभी एक और अपडेट आएगा तिलिस्म का उसके बाद कुछ तिलिस्म से बहार और फिर वापस तिलिस्म में. लेकिन अब ये तिलिस्म भी जल्दी hi ख़तम हो जायेगा और बीच बीच में बहार के दर्शन भी होते रहेंगे.
 
नैन जी सबसे पहले तो आपका बहोत बहोत धन्यवाद इतनी बेहतरीन रिव्यु के लिए

आपने सही कहा के त्रिकाल ने देव की टीम की दुखती राग पर हाथ रखा लेकिन उसमे उसकी भी क्या गलती है देव एंड टीम उसके हाथ आ hi नहीं रही है न. नगरी में उसने छल किया, तो देव ने अपने दिमाग से उसे मात दे दी बल्कि उसके द्वारा नियुक्त किये गए राजा को hi फंसा दिया साथ hi रजनी को भी निकल लाया, और अब तक रजनी मरने से बची हुई है शायद अकेली होती तो निपट गयी होती, फिर उसने छल से रूद्र को मरना चाहा धरती गायब हो गयी लेकिन पूनम ने उसे बचाया, फिर वनकु और ऐसे hi अब तक वो अपने हर इरादों में नाकामयाब होता रहा कही उसने दिमाग लगाया तो कही ताक़त. लेकिन हर बार किसी न किसी की मदद से सब बचते रहे. कही देव ने बचाया कही पूनम ने कही रजनी ने.,

उसे भी यही समझ आ रहा है के इनकी एकता को तोडा जाये यानि इन्हे अलग किया जाये. और उसी वजह से त्रिकाल ने अभी भ्रम जाल का सहारा लिया था उसने देव के किसी फॅमिली मेंबर का सहारा नहीं लिया उसने किसी को मजबूर नहीं किया किसी पर कोई अत्याचार नहीं किया बस एक भ्रम जाल फैला कर सब को दिखाया गया. ये सब तो उस भ्रम जाल में फंस भी गए थे जो की असल में कुछ था hi नहीं. न वह दोनों महाराज थे न गुरुम चन्नो न hi माँ बाबूजी. सब कुछ सिर्फ भ्रम hi था. अब इतना तो हक़ बनता है न आखिर विलन है यार. कही तो हरामीपन दिखायेगा hi न. लेकिन वो पूरा गलत तब हो जाता जब वो सच मच किसी को पकड़ लता और देव को मजबूर करता लेकिन उसने किसी को नहीं पकड़ा सिर्फ देव और उसके साथियो की आँखों के आगे भ्रम फैला दिया. लेकिन जैसा की आप सबने देखा की अपनी सूझ बुझ से देव एंड पार्टी फिर बच hi गए न सिर्फ सूझबूझ बल्कि एक दूजे का कहना मानना भी यहाँ दिखाया गया जो की बेहद जरुरी है . उन्होंने एक दूजे का कहना मन वो भी ऐसे हालत में जब देव की आँखों के आगे उसके प्रियजन मरने की कगार पर थे या दीखता है एक विश्वास के अगर कोई रुकने को कह रहा है तो कई बार रुकना बेहतर होता है जोश में आगे बढ़ने की अपेक्षा.

कहानी की और इस अपडेट के हर सन की तारीफ के लिए आपका धन्यवाद उम्मीद करते है के आने वाले अपडेट भी आपको ऐसी hi ख़ुशी देने में कामयाब हो. जैसा के हमने अभी ऊपर मश्ग दिया है के अब वक़्त आ गया है थोड़ा सा तिलिस्म से बहार घूमने का तो जल्दी hi चलते है
 
वैरी नॉइस , सुपेरेब और बहोत hi फाडू डेफिनिशन दी है आपने नैना जी. क्यों की जब कोई रीडर इतनी बारीकी से स्टोरी को पढ़कर अपने विचार देता है तो जिन दूसरे रीडर्स का घ्यान विशेष पॉइंट्स पे नहीं गया होता वो भी ध्यान देने लगते है. जो की एक राइटर के लिए अच्छा होता है क्यों की हमने जैसा लिखा वैसा hi सामने वाले ने पढ़ा और समझा इससे बेहतर और क्या होगा. सो थिस इस थे कूल वे एंड वैरी नीस थैंक यू ओनेस अगेन.
 
अपडेट - 154

तभी उनके सामने 2-3 फिट के अजीब जानवर आ गए जो हिघ्त में तो बन्दर के बराबर थे लेकिन बहोत hi तेज और नुकीले उनके दन्त थे. पूँछ भी लम्बी थी. और अंत में नुकीली वो हजारो लाखो की संख्या में थे. यानि छह कर भी इनसे पर नहीं प् सकते थे. उनके इतनी बड़ी संख्या के बाद क्या है अभी नजर hi नहीं आ रहा था यु अचानक इतनी विशाल सेना देख कर सब टेंशन में आ गए के अब क्या होगा.

रजनी – अब ये क्या नयी मुसीबत है?

पूनम - त्रिकाल का एक और हथियार है ये. ये सब hi नरभक्षी जीव है हम सबका सफाया चुटकियो में कर देंगे. हम कितने भी ताक़तवर हो लेकिन इनके सामूहिक हमले से खुद को नहीं बचा पाएंगे. ये हमें नोच के खा जायेगे और वो भी कुछ hi सेकण्ड्स में. जब तक 100 को मरेंगे हजार हम पर चढ़ जायेगे.

पूनम की ये बात सुन के सब के ठन्डे पसीने निकल गए

देव - लेकिन ये आगे क्यों नहीं बढ़ रहे है? अब तक तो इनका हमला हम पर हो जाना था.

रजनी - वो इसीलिए देव क्यों की जहा हम खड़े है ये उनका छेत्र नहीं है लेकिन हमारा रास्ता कुछ hi कदम पर समाप्त हो जायेगा और हमारे कदम इनके छेत्र की धरती पर होंगे तब ये हमला करेंगे.

रूद्र – अरे वह तब तो हम इन्हे यही से मर सकते है अपनी शक्तियों से क्यों के ये लोग तो आगे आएंगे नहीं फिर क्या फरक पड़ता है इनकी संख्या कितनी भी क्यों न हो.

रजनी - नहीं रूद्र जिस तरह ये हम पर हमला नहीं कर सकते उसी तरह यहाँ से इनका हम भी कुछ नहीं बिगड़ सकते. उन्हें मारने के लिए भी हमें उनकी जमीन पे जाना होगा. ये तिलिस्म का नियम है.

रूद्र - ohhhhh…..sala तिलिस्म…. तिलिस्म….. तिलिस्म….. इस की माँ का…….. पागल कर दिया है इस त्रिकाल ने. मुझे मिल जाये तो उसके पिछवाड़े को लाल किला बन दुगा.

रूद्र – एक मिनट ेक्मिनट ये हमला तो तब hi करेंगे न जब हम इनकी जमीन पे कदम राकगी तो हम कदम रखे hi क्यों? हम यही रुकते है न?

नीलम - अरे यार किस से पला पद गया? निकालो इनको तिलिस्म से, गाँव भेजो कोई वापस इनको.

रूद्र – ोये……. क्या बक रही है?

नीलम - अरे और क्या कहु ? यहाँ कितनी देर खड़े रहेंगे यही खड़े रहने को आये क्या हम लोग? और क्या गारंटी है के हमें यही टिका हुआ देख कर त्रिकाल पीछे से कोई धक्का नहीं लगवा देगा. उस हालत में हम बिना लाडे hi मरे जायेगे.

रूद्र – है यार मेरा तो दिमाग hi काम नहीं कर रहा है तू शनि हो गयी है यहाँ आकर माँ बहोत खुश होगी ऐसे शनि बहु पा कर

देव जो पूरे हालत पे गौर कर रहा था.

देव – हर समस्या अपने समाधान के साथ पैदा होती है पूनम, दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान न हो. इसीलिए इस समस्या का नहीं इससे बचने का तरीका सोचो.

पूनम – नहीं देव ये पॉसिबल नहीं लग रहा.

कुछ देर के सोचने के बाद अचानक

पूनम - है हम में से तुम hi एक हो जिसकी स्पीड समय से भी तेज जा सकती है. अपनी स्पीड से इनका मुकाबला करने की कोशिश करो लेकिन वो सिर्फ कोशिश होगी क्यों की इनकी संख्या अनंत है. मुझे नहीं लगता के स्पीड भी कुशः कर पायेगी. इस समूह को सामूहिक रूप से hi ख़तम किया जा सकता है. इस समय रजनी में भी काम पावर नहीं है. वो तिलिस्मी नगरी की महारानी रह चुकी है तो यहाँ तो इसके पास भी बहोत ताक़त है hi. ये उस जगह पहुंच कर इनके निकक्ने के मार्ग को रोक सकती है. जिससे इनकी संख्या बढ़ती न जाये. क्यों की तुमने इन्हे मरना शुरू भी किया तो वह से बढ़ती हुई संख्या तुम्हे किसी न क्सिसि समय थका देगी और वो पल तुम्हारी hi नहीं हम सबकी जिंदगी का आखरी पल होगा. इसीलिए रजनी इनके निकलने की जगह पे जाकर इन्हे और बढ़ने से रोकेगी. और तुम इन्हे ख़तम करने की कोशिश करो.

रुद्र – पर समूह में तो हम भी हमला कर सकते है न जैसे अभी आपने कहा इन्हे समूह से hi मिटाया जा सकता है.

पूनम – है वो तो है. इसीलिए हम सब कोशिश करेंगे.

देव - उसकी जरुरत नहीं है. हम में से कोई कोशिश नहीं करेगा. हम सब बस खड़े हो कर देखेंगे और जरुरत पड़ने पे hi दखल देंगे. इन्हे मिटाएगा कोई और. रजनी तुम टेलिपोर्ट हो कर वह तक जाओ इतना कर लोगी न

रजनी - है देव वह तक मए अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर सकती हु यहाँ कोई रुकावट नहीं है. मए वह मिलती हु. तुम सब इन्हे निपटा के आओ

अगर तुम्हे लगता है शंकर मिटाएगा तो भूल जाओ वो इस समय कही और व्यस्त है. रजनी के जाने के बाद पूनम बोली

देव - तुम मेरी होने वाली बीवी हो तो भला मए तुम्हे शंकर के भरोसे कैसे छोड़ सकता हु जानेमन. देखो हमें कौन बचाएगा.

इतना कह कर देव अपनी शर्ट उतरने लगता है और रूद्र को देखता है रूद्र भी देव को hi देख रहा था. तभी उसके भी दिमाग की घंटी बजती है और वो मुस्करा के अपनी शर्ट खोलने लगता है.

नीलम - अरे ये तुम लोग नंगे क्यों होने लगे?

रूद्र – बस मूड हो रहा है.

नीलम – धत्त…….

पूनम बड़े धायण से देव और रूद्र को देख रही थी. इतने में दोनों अपनी शर्ट खोल के खड़े हो गए

देव – शेर खान………………………………..

रूद्र – ड्रेगों…………………………………….

पालक झपकते hi देव की पीठ से शेरखान कूड़ा और रूद्र की पीठ से ड्रेगों और दोनों आकर उनके सामने खड़े हो गए. तभी एक झटके में नीलम और पूनम के हाथ अपने आप सीधे हुए और उनमे से भी शेरनी और लेडी ड्रेगों कूद के बहार आयी और अपने पार्टनर्स के साथ कड़ी हो गयी.

अब ये चारो इन चारो को देख रहे थे. देव ने अपने दोनों हाथ धीरे धीरे नीचे से ऊपर उठाने चालू किये रूद्र ने भी ऐसा hi किया तो चारो जानवर अपना आकर बढ़ाने लगे. और देखते hi देखते दैत्याकार हो गए. दो सफ़ेद शेरो का जोड़ा और दो लाल काळा ड्रेगों का जोड़ा उनकी मौजूदगी hi दहशत बढ़ने के लिए काफी थी. एक बार तो नीलम और पूजनम के भी पसीने छूटने लगे. तभी देव और रूद्र ने पीछे की तरफ ऊँगली उठायी तो चारो जानवर पलट के पीछे देखने लगे. जहा दूर तक किसी समंदर की तरह वो छोटे नरभक्षी खड़े इन सबको देख रहे थे.

देव ने चिल्ला कर कहा - शेरखान हमला……………………

रूद्र – ड्रेगों अटैक…………………………………

इनका आदेश मिलते hi. दोनों शेर और शेरनी आगे बढ़ते है और उन्हें बढ़ता देख के वो नरभक्षी भी आगे बढ़ते है और इनपर कूद पड़ते है लेकिन शेर खान पे जैसे hi उन्होंने जम्प लेने की कोशिश की शेर खान और उसकी पार्टनर ने उन्हें अपने पंजो में दबोचना और चीरना चालू कर दिया. कोई उन्हें छू भी नहीं प् रहा था. इतनी गजब की स्पीड. कई नरभक्षी तो बस इनके पैरो टेल hi कुचले जा रहे थे. चारो तरफ उनका खून हवा में उड़ने लगा. तभी ऊपर से जैसे हेलीकाप्टर की आवाज आने लगी जब देव एंड पार्टी ने ऊपर देखा तो ऊपर दोनों ड्रेगों एक दूसरे के अपोजिट उड़ रह इ थे. और ऊपर से आग बरसा के नरभक्षियों को जला रहे थे. उनकी आगे इतनी भीषण थी के एक बार में hi 100-150 नरभक्षी आग में झुलसने लगे. इसी बीच वो लोग उड़ते हुए नीची उड़न भरते और अपने दोनों विशाल पंजो में भी कई नरभक्षी पकड़ लेते और उन्हें अपने मुँह में दाल लेते जो मुँह में जाते hi राख हो रहे थे.

यहाँ नीचे शेर खान और और शेरनी ने सामने का मैदान खली करना शुरू किया तो ड्रेगों आधे के बाद से शुरू हो कर आगे बढ़ने लगे. सबसे लास्ट में रजनी कड़ी थी. वो ऐसी जगह पे पहुंच गयी थी जहा से थोड़ी hi दूरी पे नरभक्षियों ने जम्में में कई होल बना रखे थे और वही से वो निकल रहे थे. रजनी ने उससे पहले एक लम्बी लकीर खिंच दी नरभक्षी निकल तो रहे थे. लेकिन उस रेखा को पर नहीं कर पर रहे थे. जिससे उनका और ज्यादा निकलना बंद हो गया था जब तक निकले हुए आगे नहीं बढ़ते दूसरे नए नहीं निकल सकते थे.

उधर शेरखान और शेरनी अपने हिस्से के नरभक्षी तेजी से ख़तम करते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे. और वही ड्रेगों भी अपना काम बहोत अचे से करते हुए अपने हिस्से के नरभक्षी निपटाए चले जा रहे थे. कोई आधे घंटे में दूर तक बस मॉस के लॉथड और खून की नदी hi नजर आ रही थी. और जहा से ड्रेगों का एरिया था वह से बस रख hi रख एक भी मास का टुकड़ा नहीं एक बूँद भी खून नहीं. रूद्र , देव, पूनम और नीलम अब तक रजनी के पास पहुंच चुके थे. जहा पे कई सरे नरभक्षी रजनी द्वारा खींची रेखा के उस तरफ खड़े आगे बढ़ने की कोशिश में कूद रहे थे. इन पर शेर खान और शेरनी ने हमला कर दिया ुर मिंटो में सबको निपटा दिया वही ड्रेगन्स ने उन बिलो को निशाना बनाया जहा से नए नरभक्षी निकल सकते थे. उन्होंने ऊपर जाकर वह से अपने मुँह से आग उगलना शुरू किया और दो तरफ से आग पड़ने से पूरे एरिया की जमीन में आग लगने लगी माहौल में गर्मी बढ़ने लगी. और गर्मी इतनी तेज हो गयी के जमीन के अंदर जो उन नरभक्षियों का निकलने का सोर्स था उसे तक ड्रेगन्स ने जला दिया. और फिर अपनी आग बंद कर के थोड़ी देर ऊपर hi उड़ते रहे और नीचे नजर भी रख रहे थे का कही और से तो नहीं निकल रहे है . लेकिन जब थोड़ी देर तक कुछ नहीं हुआ तो दोनों ड्रेगन्स नीचे आ गए और शेर और शेरनी के साथ आ कर खड़े हो गए. चारो फिर से इन चारो के सामने खड़े थे.

देव – धन्यवाद् दोस्तों. आज तुम सबने हमारी मदद की . अब आप लोग भी जाकर आराम से मिल लीजिये बहोत दिनों बाद आप लोगो को मिलने का मौका मिला है.

देव की बाटे सुन कर रूद्र पूनम और नीलम के होठो पे मुस्कान आ गयी और इधर इन चारो ने पलट के देखा सामने hi पेड़ो का घाना झुरमुट था. तो चारो उस तरफ चले गए. तभी

रौद्र – ड्रेगों , शेरखान..

ड्रेगों और शेरखान फुर्ती से पालते जैसे कोई खतरा आ रहा हो.

रूद्र – अबे घबराते क्यों हो मैने तो ये याद दिलाने के लिए आवाज लगाई के पेड़ो के पीछे बस मिल लेना. बाकि सुहागरात हम चारो की एक साथ होगी, सालो कोई गड़बड़ मत करना वार्ना बहोत मरुँगा तुम दोनों को समझ गए?

शेर खान और ड्रेगोने ने मज़बूरी में गार्डन झुका कर..- समझ गए रूद्र. हम यद् रखेंगे.

रूद्र – अबे तुम लोग भी बोल सकते हो क्या?

ड्रेगों - है हम बोल सकते है आपकी भाषा अब हम जाये भाई? बहोत दिन हो गए है मिले हुए.

रूद्र – जा बे जा रो मत मए कहा रोक रहा हु. जल्दी आना.

चारो फुर्ती से पेड़ो के पीछे चले गए.

तिलिस्मी चक्र में घूमना तो बहोत हुआ अब चलते है गाँव की तरफ या फिर हम अघोरी के पास भी चल सकते है तो फिर कहा चले? चलिए पहले अपने अघोरी से मिल लेते है. आखिर उसका पता लगाना भी तो हमारा hi काम है न क्यों की देव तो यहाँ बिजी है. और वह उसकी खबर किसी ने ली नहीं अब तक. तो चलिए फिर मिल ले अघोरी से………….
 
अपडेट – 155

अघोरी अपनी गुफा के आखरी कोने में बैठा अपनी साधना में लीं था. वो जब से जीन बादशाह से मिल के आया था वापस आ कर अपनी तपस्या में hi लीं हो गया था क्यों की उस के बस में hi नहीं था के वो स्वर्ण मणि के लिए जा सके. वो अपनी शक्तियों को बढ़ाने में hi लगा हुआ था. जिसमे वो काफी हद तक सफल हुआ था. तभी वह अघोरी का गुरु आता है.

गढ़ - अघोरी उठो

अघोरी हाथ जोड़ कर आँखे खोल देता है– कैसे आना हुआ गुरुदेव?

गढ़ – तुम तो यहाँ अपनी साधना में हो बहार पता है क्या हो रहा है या बस यही करते रहने का इरादा है ?

अघोरी – अरे हुआ क्या? क्यों इतना परेशां हो रहे है आप?

गढ़ – वो लोग स्वर्ण मणि लेने के लिए जा चुके है और अब तक तो उनके विफल होने के कोई संकेत नहीं मिले इसका मतलब वो निरंतर आगे बढ़ रहे है और जितना समय उन्हें गए हुए हो गया है उस हिसाब से वो तो काफी आगे बढ़ चुके होंगे.

अघोरी – बस इतनी सी बात ये तो मुझे भी पता है. के रूद्र और नीलम जा चुके है स्वर्ण मणि के लिए और उनके साथ कोई अदृश्य ताक़त भी है जो के मुझे नजर नहीं आ रही है.

गढ़ – मुर्ख वो कोई अदृश्य ताक़त नहीं है जनता है वो कौन है?

अघोरी - अरे होगी कोई ताक़त. मेरी झांट भी नहीं उखड सकती वो.

गढ़ – तुम सच में महा मुर्ख hi हो. अरे झांट क्या उसने तो तेरी गांड मार hi ली थी जब तूने रूद्र पे हमला किया था. भूल गया कैसे तुझे धुल छठा दी थी उसने और रूद्र hi नहीं उस साली नीलम को भी वो ले गया. तुझे जानने का मन नहीं हुआ के ऐसी कौन सी ताक़त है?

अघोरी – वही जानने के लिए मए साधना में बैठा था. क्यों के उसकी गांड तो अब मए मरुँगा hi. वो मुझे नहीं जनता.

गढ़ –वो भी तुझे जनता है और तू भी उसे जनता है. वार्ना वो तुम पर अदृश्य हो कर हमला नहीं करता उस वक़्त.

गढ़ – पर गुरु देव आप इतना बौखला क्यों रहे है रूद्र को स्वर्ण मणि कभी नहीं मिल सकती क्यों की वो तो त्रिकाल की सुरक्षा में है और त्रिकाल ने वह का तिलिस्म देव और पूनम के नाम से बंधा है. वही देव और पूनम जिन्हे मए मर चूका हु. उस तक रूद्र पहुंच भी जाये तो भी स्वर्ण मणि हासिल नहीं कर पायेगा. चाहे उसके साथ कोई भी ताक़त क्यों न हो . देखना वो त्रिकाल के पैर छू कर वापस आ जायेगे अपनी जान की भीख मांग कर. लेकिन उनकी जान फिर भी नहीं बचेगी. क्यों के यहाँ उन्हें मए मर डालूगा.

गढ़ – अघोरी, जिस देव और पूनम की तू बात कर रहा है. वो दोनों मरे hi नहीं थे. बस उनका शरीर नष्ट हुआ था. और उनकी आत्मा को किसी ने अपने पास सुरक्षित कर लिया था और उन्हें बेहद शक्तिशाली बना दिया और अब वो लोग न सिर्फ जनम ले चुके है बल्कि उन्हें सब याद भी आ गया है. वही दोनों है इस वक़्त रूद्र और नीलम के साथ और बेवक़ूफ़ स्वर्ण मणि का तिलिस्म उन्ही के नाम से है तो वो भला क्यों त्रिकाल के पैर पकड़ के वापस आएंगे? मुझे तो लगता है वो स्वर्ण मणि ले कर आएंगे.

अघोरी के माथे पे भी अब पसीना आ गया.

ये आप क्या कह रहे है गुरुदेव? वो…. वो …….. कैसे जिन्दा हो सकते है ? अघोरी बोलै

क्या देव और पूनम सच में वापस आ चुके है ?

है………

लेकिन कब?

जब तू यहाँ नीलम को पकड़ने के लिए जल बिछा रहा था तेरे दुश्मन तैयार हो रहे थे. और ठीक उस वक़्त वो तैयार हो चुके थे जब रूद्र को यहाँ आना था. उन्ही की सहायता से रूद्र और नीलम बच गए थे. वो अदृश्य ताक़त कोई और नहीं देव और पूनम hi थे.

अघोरी के सरे रोम छिद्र खुल गए और वो पसीने से भीग गया.

इसका मतलब अब रूद्र और नीलम इच्छाधारी और मणिधारी बन चुके है. साथ hi वो महा नाग, इच्छाधारी देव और तिलिस्म की रानी पूनम भी उनके साथ है. अघोरी ने घबरा के बोलै

गढ़ – क्यों अब गांड किस की फैट रही है?

अघोरी - गुरुदेव अगर ये बात तुम्हारी जगह किसी और ने कही होती तो मए अभी उसकी गांड में हाथ दाल के मुँह से निकल देता. मए यहाँ व्यस्त था. लेकिन तुम तो नहीं . तुमने उन्हें रोका क्यों नहीं . तुम भी तो नहीं जान पाए के देव और पूनम वापस आ गए है. तुमने hi क्या उखड लिया? अघोरी की आंखे क्रोध से जलने लगी.

गढ़ – मए मंटा हु के मए उन्हें वक़्त रहते नहीं पहचान पाया लेकिन मैने ये उखाड़ा के वक़्त से पहले पता लगा लिया के कोई ताक़त है जो हम लोगो के खिलाफ सर उठाने वाली है. इसीलिए तुझे तैयार कर दिया. होशियार कर दिया. और आज तू उस समय से कही ज्यादा ताक़तवर बन चूका है. अगर आज देव पूनम, रूद्र, नीलम पहले से ज्यादा ताक़तवर बन कर तेरे सामने आने को तैयार हो चुके है तो टब hi उन्हें बराबर की टक्कर देने लायक हो चुक्का है मेरी वजह se.Varna तू कर क्या रहा था इस कनिका और मनिका की बुर में hi घुसा हुआ था न? जब देखो इन्हे hi पेलता रहता था. रोज इन्हे पेलता रत भर और सुबह तक इन्हे कुंवारा कर देता और काम hi क्या कर रहा तहत ु. तू तो उन लोगो के मरने की ख़ुशी hi मन रहा थान ा केस लो तक. कोई काम कोई साधना कर रहा था क्या उस वक़्त? नहीं न. ये मेरी कोशिशों का hi फल है के तू आज इतना सक्षम हो गया है. के जीन बादशाह ने तेरी मदद करने को है बोलै है. वार्ना कोई गली का कुत्ता भी तुहे नहीं पूछता आज. समझा, इसीलिए बाप को मत सीखा.

अघोरी – देखो गुरुदेव इस तरह एक दूजे को कोसने से हमें कुछ नहीं मिलेगा. मए बस उस नीलम को छोड़ना चाहता हु और उसकी छूट से निकलने वाले पहले कुंवारे लहू से अमरता की सिद्धि प्राप्त करना चाहता हु. उसके लिए क्या करे अब ये बताओ.

गढ़ – इतनी बुरी खबरों के बाद अब भी मेरे पास तेरे लिए दो खबरे है एक अच्छी एक बुरी बोल क्या सुन्ना है पहले?

अघोरी – पहले बुरी hi सुनाओ क्यों मूड की माँ बहन तो हुई पड़ी है थोड़ी और सही. उसके बाद अच्छी सुना देना.

गढ़ – तो बुरी खबर ये है के देव ने यहाँ अपने जैसे hi चार शक्तिशाली योद्धा और तैयार किये है जिनमे एक है उसकी होने वाली साली shalaka,halaki वो पहले से hi कई साडी खतरनाक शक्तियों की मालकिन है. और देव के साथ भी पहले से hi थी लेकिन इस जनम में भी वो देव के साथ मिल कर चल रही है, दूसरा उसका नागलोक का मित्र नागार्जुन उसका भी कुछ ऐसा hi है, तीसरा गुरुम जो मुंबई नमक शहर का एक मामूली गुंडा था लेकिन अब वो खुद भी मायावी बन चूका है. और बेहद खतरनाक भी देव की दी हुई शक्तियों के आधार पर. और चौथी चन्नो नाम की एक गांव की लड़की जो यु तो ठाकुर की रखैल थी लेकिन ठाकुर तो ठहरा नामर्द. उससे कुछ हुआ नहीं उल्टा उस छन्नो को वक़्त के चलता साथ मिल गया देव का और अब वो उस गुरुम की होने वाली धर्म पत्नी है. और एक मायावी भी बन चुकी है. ये दोनों साधारण इंसान थे लेकिन इन्हे देव ने असाधारण शक्तिया दे कर इस काबिल बना दिया है के ये तुझे मात भले hi न दे सके लेकिन तुझे और तेरी सेना को रोकने का भरपूर डैम रखते है.

अघोरी - ये तो बहोत बुरी खबर है . देव और पूनम के लौट आने से भी बुरी . और कुछ ?

गढ़ – नहीं अब कोई बुरी खबर नहीं अब अच्छी खबर है .

अघोरी - और वो क्या है?

गढ़ - देव, पूनम, रूद्र, और नीलम यहाँ नहीं है और देव का धरती लोक का परिवार यहाँ अकेला है तू उन्हें अपने कब्जे में कर सकता है उन्हें मार सकता है जिससे देव और उसके साथी बौखला जायेगे उनकी बौखलाहट का फायदा उठा कर देव को उलझाया जा सकता है. ये दिमाग का खेल होगा. और इसी चक्रव्यूह में फंसा कर देव को मारा जा सकता है, न भी मार पाए तो इस बार उसकी आत्मा को hi कैद कर के रखा जा सकता है जिससे की सेकड़ो सालो का सुनहरा वक़्त तुझे मिल जायेगा. तू अपनी मनमानी कर के भगवन भी बन सकता है.

अघोरी – बात तो आपकी सही है लेकिन अब क्या मए ऐसे टुच्चे काम करू एक अघोरी हो कर मामूली इंसानो को अगवा करने और उनका खून करने जैसे मामूली काम करू?

गढ़ – अरे तू मत कर लेकिन कोई है जो ये काम करेगा उसे अपनी शक्ति का कुछ अंश दे दे.

अघोरी - और वो कौन है?

गढ़ – वो बीमार जो तेरी इस गुफा में है. वो hi है यहाँ का ठाकुर दुर्जन सिंह. जिसे देव ने hi इस अवस्था में पहुंचाया है. उसे बर्बाद किया है. उसके घर की हर औरत को पेट से किया है. उसके एक बेटे को अपाहिज किया है और एक को जेल भिजवाया है. हलाकि अब वो भी बहार है.

तू देवा के परिवार पे हमला कर. और वो भी दोहरा. एक तरफ से ठाकुर को उनकी मौत बना के भेज दूसरी तरफ ठाकुर के छोटे बेटे को यहाँ बुला और उसके द्वारा हमले करवा दे. देवा के यहाँ के साथी संभल नहीं पाएंगे. और अगर वो इन सब पे भरी पड़ने लगे तो देवा के साथियो पे अपनी पिशाची सेना से हमला करवा देना. वो उसे सँभालने में लग जायेगे और तेरा ये काम हो जायेगा जब तक रूद्र और देव लौटेंगे तिलिस्म से तब तक उनका संसार उजाड़ चूका होगा.

अघोरी - मुझे एक बात यद् आयी

गढ़ – बोल

अघोरी - देव का परिवार है तो पूनम आसमान से तो टपकी नहीं होगी उसे पैदा करने वाली बुर कहा है यानि उसका परिवार?

गढ़ – अब तू समझदारी से बात कर रहा है. तो सुन पूनम का यहाँ का बाप मर चूका है. उसकी माँ भाई और भाभी है. वो भी देव के घर के पास hi रहते है.

अघोरी - तो इस बार देव और पूनम नहीं उनके परिवार हमारे निशाने पे है जो हमारे सामने तिनको के सामान है और उन्हें मए उखड दुगा उनके गम में जब देव डूबा होगा तो देव का सर धड़ से अलग कर के उसकी आत्मा को कैद करुगा रूद्र भी मरेगा और उनके मरने के बाद नीलम और पूनम बनेगी मेरी रंडी. हहहहहहहहहहहह.
 
ये गढ़ यु तो अघोरी का गुरु है जिसने उसे तब सहारा दिया था जब वो तिलिस्म नगरी की लड़ाई में देव के हाथो मरने की हालत तक पहुंच चूका था. उसी ने अघोरी को संभाला और वापस उसे खड़ा किया. और इस काबिल बना दिए के वो किसी से भी टकराने का हौसला कर सके. लेकिन इस गढ़ का इंट्रो बस इतना सा नहीं है ये तो हुआ इसका अघोरी के साथ कनेक्शन लेकिन असल में ये खुद कहा पाया जाता है और क्यों ये चाहता है देव का खत्म ये अपने आप में एक राज है और यकीन मनो जब ये राज खुलेगा तो बड़ा मजा आएगा. और इसका लक्ष्य भी बहोत बड़ा और सबसे अलग है. वो गुरु है अघोरी का तो उसने अब तक जो किया है वो अघोरी को तो बताएगा नहीं. लेकिन वक़्त आने पे आप सब रीडर्स को जरूर पता चल जायेगा और हो सकता है अघोरी को पता hi न चले और वो सुस्पेंस में hi देव के हाथो मारा जाये ये हम भी नहीं जानते के गढ़ का पूरा राज अघोरी जान पायेगा या नहीं. रही बात गढ़ के अंत की तो वो अभी दूर है क्यों की अभी तो अघोरी की hi कहानी चल रही है अब देखते है आप लोग इस कहानी को कहा तक ले जाते है. कोशिश यही रहेगी के सब कुछ इसी part में निपट जाये. अबकी आप सब के हाथ में है. अन्य वे थैंक यू फॉर रिव्यु
 
बिलाल भाई देरी के लिए क्षमा चाहते है लेकिन इस समय बिकुल समय नहीं मिल प् रहा है क्यों की आप भी समझ सकते है के ये समय गस्त रिटर्न्स का है और वर्क लोड इतना ज्यादा है के अपडेट छोडो रपल्य देने के लिए नहीं आ प् रहे है नाईट में 2 बजे तक काम करना पद रहा है अपने ऑफिस में बैठ कर. वार्ना हमारे क्लीअन्ट्स नाराज होंगे तो हमारे रोजगार पे असर आएगा. लेकिन डोंट वोर्री शायद कल तक अपडेट दे पाएंगे हम इंतजार के लिए शुक्रिया भाई एंड सॉरी अगेन.
 
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