Fantasy इच्छाधारी देव - Page 30 - SexBaba
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Fantasy इच्छाधारी देव

भाई आपका विचार अच्छा है लेकिन तिलिस्मी वाला चेप्टर अगले अपडेट में hi ख़तम हो जायेगा. और आपको लम्बा इंतजार भी नहीं करना पड़ता . लेकिन ये स्फोरम hi बंद हुआ तो हम क्या करे. है बंद से यद् आया हम सोच hi रहे थे की किसी से पूछे क्या आप बता सकते है के स्फोरम इतने दिन बंद क्यों हो गया था? एनीवे स्फोरम ों हुआ है तो अपडेट के लिए कोई इंतजार नहीं करना padega.thanks फॉर योर रिव्यु.
 
थैंक भाई फॉर योर रिव्यु. लेकिन आपके रिव्यु में मए कुछ करेक्शंस करना चाहता हु . एक तो ये के मन्नू की टांग तोड़ी नहीं बल्कि काटी गयी है, दूसरी बात ये के देव गाँव तो आ गया है लेकिन आप पाठको के लिए अभी उसमे एक अपडेट की देर है क्यों के आप लोगो के हिसाब से तो अभी देव तिलिस्म से निकला hi नहीं है न, तो पहले तो हमें वापस तिलिस्म hi चलना है और देव को लेकर आना है. वो भी अगले अपडेट में.
 
मए आप सभी रीडर्स से कहना चाहता हु के आप लोगो के कमैंट्स देख कर लग रहा है के स्फोरम आप लोगो के पास चालू hi था जब के हमारे पास स्फोरम पिछले लग भाग एक हफ्ते से बंद था न हमारे घर पे सिस्टम पे चालू हो रहा था न ऑफिस के सिस्टम पे और न hi मोबाइल में, यहाँ तक के ये क्यों हुआ हम भी नहीं जानते लेकिन इस बार जो अपडेट लेट हुआ है उसका रीज़न यही है. बूत कल आप लोगो को अपडेट मिल जायेगा.
 
अपडेट – 168

त्रिकाल – धन्यवाद् देव, पूनम. आज आप लोगो की वजह से मुझे इस कैद से मुक्ति मिली.

इतना कह कर उसने अपने हाथ को ऊपर उठाया और कुछ मंत्र पढ़ने लगा. तो ऊपर हवा में एक सुनहरे रंग का बहोत बड़ा हिरा नजर आने लगा जिसके दो सफ़ेद पंख भी थे. और उस में से बहोत अद्भुत प्रकाश निकल रहा था. और वो धीरे धीरे नीचे आने लगा. उसकी रौशनी से पूरा कमरा भर गया था.

ये थी स्वर्ण मणि

त्रिकाल - पूनम देव के बाजु में कड़ी हो जाओ और देव तुम पूनम का हाथ अपने हाथ में इस तरह लो जैसे कन्यादान के समय दूल्हा दुल्हन का हाथ अपने हाथ पे रखवाता है.

देव ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और पूनम ने उसके खुले हाथ पे अपना हाथ रख दिया. इधर त्रिकाल ने कुछ मंत्र पढ़ के स्वर्ण मणि को इशारा किया. स्वर्ण मणि हवा में तैरती हुई आगे बढ़ी और देव और पूनम के हाथ पे आके बैठ गयी. दोनों को बहोत तेज ठंडक का अहसास हुआ और पूरा शरीर एक अजीब स्फूर्ति से भर गया. मन में खुशियों की लहार दौड़ने लगी.

त्रिकाल ने आकर देव के कण में कुछ कहा और फिर पूनम के कण में भी कहा.

त्रिकाल – अब जब भी तुम दोनों इस तरह हाथ मिला के ये मंत्र पढोगे स्वर्ण मणि तुमलोगो के हाथ में आ जाएगी और फिर तुम जो चाहोगे वो होगा. बड़ी से बड़ी ताक़त इसके होते तुम दोनों का कुछ नहीं बिगड़ पायेगी. इसकी सहायता से तुम मुर्दे में भी जान दाल सकते हो. लेकिन उसकी कुछ अलग विधि भी है. जान तो आ जाएगी लेकिन उसे जीवित अवस्था में खड़ा करने का रास्ता कुछ अलग है. यदि कभी कोई ऐसी परिस्थिति हुई तो मुझे यद् करना देव मए आ जाउगा. इसी मंत्र को दुबारा पढ़ने से ये मणि तुम दोनों के अंदर समां जाएगी , इस मणि का उपयोग तुम दोनों में से कोई एक अकेला भी कर सकता है. लेकिन साथ में करने से इसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी. अकेले करने से इसकी शक्ति सीमित होगी . हलाकि उसका सामना भी कोई नहीं कर पायेगा. अब तुम लोग जाना चाहो तो जा सकते हो.

तभी एक बार फिर पूनम के होठ हिलने लगे. अब मेरा भी कोई काम नहीं रहा तो मए भी जा रहा हु पूनम मए तुमसे और बाकि सबसे विदा लेने आया था.

रूद्र – तूने किया hi क्या?, और तू था hi कब? जो जाने की इजाजत मांग रहा है?

शंकर – पहली बात मए यहाँ तुम्हारे या किसी और के लिए नहीं आया था न hi यहाँ अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवाने आया था. मए तो सिर्फ पूनम की खातिर आया था उसे बचने. लेकिन जब मुझे लगा की उसे कोई खतरा नहीं त्रिकाल से , और वो खुद तुम्हारी परदे के पीछे से सहायता कर रहा है तो फिर मए भी पीछे हो गया था. अब चलता हु पूनम अपना ध्यान रखना. लेकिन हम लोग जल्द hi मिलेंगे मुझे भविष्य नजर आ रहा है और उस समय मए तुम सब से sa-shareer मिलुंगा तब शायद रूद्र को मुझसे कोई शिकायत नहीं रहेगी.

इतना कह कर पूनम के होठ हिलना बंद हो गए और वो नार्मल हो गयी.

नीलम - दीदी वो शंकर चला गया.

पूनम - है मुझे पता है मैने सुना उसने जो भी कहा यहाँ पे. वो सच बोल रहा था. हम सब भविष्य में फिर एक होने वाले है किन्ही अजीब से हालातो में. इस बार से कही ज्यादा खतरनाक रास्तो पर. तब वो हमारे साथ होगा.

त्रिकाल - क्या अब मए तुम लोगो को तुम्हारी दुनिया में भेज दू?

देव – एक मिनट क्या मए फ़कीर बाबा से बात कर सकता हु?

त्रिकाल – है क्यों नहीं तुम्हारी पूरी शक्तिया तुम्हरे पास है बिलकुल कर सकते हो.

देव एक तरफ हो गया और आँखे बंद कर के फ़कीर बाबा को यद् किया. तो उसकी आँखों के आगे फ़कीर बाबा का चेहरा आ गया.

देव मन hi मन बात करने लगा – प्रणाम बाबा

फब – जीते रहो देव.

देव – हमने स्वर्ण मणि हासिल कर ली है बाबा अब क्या आदेश है आपका?

फब – मुझे ख़ुशी है देव के तुम लोग अपने मकसद में कामयाब हुए. मुझे मेरी शक्तियों से ये सुचना मिल चुकी है मए तुम्हारा hi इंतजार कर रहा था…..

देव – बाबा त्रिकाल का कहना है के हम जहा चाहे वो हमें तुरंत भेज देगा. तो अब आपका क्या आदेश है?

फब – तुरंत वापस आओ देव और अपने गाँव पहुँचो वह बहोत कुछ हुआ है. जो तुम्हे मए अभी नहीं बता सकता.

देव – बाबा सब ठीक है न?

फब – जानने से बेहतर है यहाँ आ जाओ और खुद देखो, तुम्हारी धरती के समय के हिसाब से तुम 6 महीने से ज्यादा वक़्त बहार बिता चुके हो. इतने में बहोत कुछ बदल गया है.

देव – लेकिन बाबा आपने कहा था के हमें कही और भी जाना है. तो फिर आप वापस क्यों बुला रहे है?

फब – वह बाद में चले जाना उससे जरुरी अभी दूसरी बाटे है तुम लोग तुरंत गाँव पहुँचो अब मए चलता हु.

देव ने आँखे खोली लेकिन उसके चेहरे की चिंता देख के बाकि सब भी परेशां हो गए.

रूद्र – क्या हुआ देव क्या कहा फकी बाबा ने?

देव – कुछ उलझी हुई बाते की है उन्होंने. मुझे समझ नहीं आया कुछ भी. लेकिन उनका कहना है के बिना देर किये गाँव पहुँचो.

रूद्र – तो फिर सब भूल जाओ और गाँव चलो.

देव – है यही सही है. अभी हमें जाने में भी समय लगेगा.

त्रिकाल – कोई समय नहीं लगेगा देव तुम सब एक दूजे का हाथ पकड़ लो मए तुम लोगो को तुरंत तुम्हारी धरती पे वापस भेज देता हु.

देव – धन्यवाद त्रिकाल.

त्रिकाल – देव जाने से पहले तुमसे मए कुछ कहना चाहता हु. हलाकि तुम्हारे पास अपनी खुद ी कई साडी अद्भुत शक्तिया है और बी तो स्वर्ण मणि भी है तुम्हे किसी की सहायता की जरुरत नहीं है, लेकिन अगर कभी भविष्य में तुम्हे लगे के मए तुम्हरे किसी काम आ सकता हु तो स्वर्ण मणि को हाथ में लेकर मुझे यद् करना ये मेरे पास भी रही है तो मुझसे जुड़ चुकी है . तुम्हारे याद करते hi मए तुम्हारे सामने आ जाउगा. और मेरी समस्त शक्तिया भी तुम्हारी सहायता के लिए हाजिर रहेगी.

देव – ठीक है त्रिकाल मए यद् rakhuga.dhanyavaad.

फिर सबने एक दूजे का हाथ पकड़ा और त्रिकाल ने कुछ मंत्र पद के उनकी तरफ हाथ बढ़ाया और सभी वह से धुआँ बन के उड़ गए. और थोड़ी देर के बाद जब उन्होंने आँखे हखोली तो खुद को गाँव की सरहद पे पाया.

देव – मुझे बेचैनी हो रही है रूद्र कुछ गड़बड़ है.

देव ने आँखे बंद की – शलाका…………

दो मिनट के अंदर शलाका देव के सामने आ गयी खून से लथपथ. वो उस समय फार्म हाउस पे hi थी देव की आवाज़ सुन के तुरंत उसके पास आ गयी.

शलाका को इस हालत में देख कर सब चौंक गए.

पूनम – क्या हुआ शलाका तुम ऐसी हालत में?

शलाका – बाते बाद में पहले सब मेरे साथ चलो . शलाका ने आंखे बंद की और सभी वह से अदृश्य हो कर फार्म हाउस पे पहुंचे. वह के हालत देख कर सब चौंक गए. शलाका ने उन्हें फार्म हाउस में बहार hi विज़िबल किया. वो लोग बहार से अंदर आने लगे और कदम कदम पे लाशे देख कर देव और रूद्र की आँखों में शोले नाचने लगे वही हाल नीलम और पूनम का भी था.
 
थैंक्स फॉर योर रिव्यु भाई , देव और पूनम ताक़तवर तो बन गए लेकिन उसकी कीमत जो उन्हें भरनी पड़ी है उसका रिएक्शन क्या होगा ये अभी सुस्पेंस है. और साथ hi यहाँ ये भी एक बात आती है के क्या इनकी ताक़त सच में अघोरी से ऊपर हुई है या उसके बराबर या अब भी अघोरी hi उनसे एक कदम आगे है? क्या उसके गुरु ने ये नहीं देखा ये नहीं सोचा के स्वर्ण मणि अगर देव को मिल गयी तो क्या होगा? क्या उसने अपनी तरफ से कोई तयारी की है या यु hi देव को स्वर्ण मैनी मिल जाने से वो पीछे हैट जायेगे? सवाल ख़तम नहीं हुए है माय फ्रेंड अभी बहोत कुछ होना है. लेकिन है इस तिलिस्म का सफर तो अभी ख़तम हो hi गया....... पर क्या सच में ख़तम हो गया तिलिस्म? वो कौन सी जगह है जहा फब ने स्वर्ण मणि मिलने के बाद देव को जाने की बात कही थी. सोचिये... मिलते है अगले अपडेट में.
 
अपडेट - 169

वह के हालत देख कर सब चौंक गए. शलाका ने उन्हें फार्म हाउस में बहार hi विज़िबल kiya.Wo लोग बहार से अंदर आने लगे और कदम कदम पे लाशे देख कर देव और रूद्र की आँखों में शोले नाचने लगे वही हाल नीलम और पूनम का भी था.

अब आगे ……….

जब अंदर का हल देखा तो देव दौड़ कर अपने माँ बाप के पास पंहुचा उसने अपने अंदर उमड़ते गुस्से को काबू किया और बहोत धीरे से शलाका की तरफ देख कर………………

देव – नाम?

शलाका – ठाकुर.

देव ने शलाका की आँखों में देखा, शलाका सब कुछ बताती चली गयी, पूरी बात सुन कर देव और रूद्र के चेहरे भभकने लगे.

रूद्र – उस ठाकुर की इतनी मजाल नहीं होती अगर उसे उस अघोरी की मदद नहीं मिलती.

पूनम – बन्दर को मुकुट पहना देने से वो राजा नहीं बन जाता रूद्र, अघोरी ने उसे ताकते तो दी लेकिन ठाकुर को उनका इस्तेमाल करना नहीं आया. वार्ना वो बहोत कुछ कर जाता. मए अब तक वो सब देख चुकी हु जो ठाकुर ने इस फार्म हाउस पे आ कर किया. यहाँ आकर सबसे पहले उसने शराब पि फिर एक औरत का बलात्कार किया. फिर अपने बेटे के साथ मिलकर हमारे खिलाफ षड़यंत्र रचा. और अंजाम ये हुआ. यदि वो अपनी ऐयाशियों पे ध्यान न देकर सही प्लानिंग पे ध्यान देता तो वो हमारे घर के और कई लोगो को मार सकता था. लेकिन वो यहाँ ऐयाशियों में डूबा रहा और कुछ न कर सका वक़्त उसके हाथो से निकल गया. और फ़कीर बाबा ने सबको सुरक्षित करवा दिया महाराज भैरव सिंह और महारज सुमंत देव के जरिये.

देव ने अपनी माँ के सर पे हाथ फेरा अब तक वो बिकुल ठीक हो चुकी थी. उनके कपडे तो शलाका पहले hi सही कर चुकी थी. लेकिन देव ने आंखे बदन कर के हर चीज को एक फिल्म की तरह देखा . और सब कुछ समझ गया.

देव और रूद्र बहार गए जहा विठल की लाश पड़ी थी.

रूद्र का क्रोध शांत होने का नाम नहीं ले रहा था. उसने एक हाथ ऊपर किया और आसमान में चील और कौए मंडराने लगे रूद्र ने इशारा लाश की तरफ किया सरे चील कौए लाश पर झपट पड़े और लैश को नोच नोच के खाने लगे. कुछ चील थोड़ी दूर पड़ी मन्नू की तंग पे झपटी और उसे भी नोच नोच के खाने लगे.

रूद्र – ठाकुर तेरे और तेरे बेटे को भी ऐसे hi चील कौओ के आगे न डाला तो रूद्र नाम नहीं मेरा.

फिर देव और रूद्र वापस आते है.

पूनम - देव चलो घर चलते है.

देव – है चलो, गुरुम सब कुछ पहले जैसा कर दो. नागार्जुन को भी बोल दो वो नयी बिल्डिंग को सामान्य कर दे लेकिन शील्ड कवर रखे. हवेली वालो को वापस हवेली पंहुचा के शील्ड कवर कर दो. उसके बाद तुम सब बेसमेंट में आ जाना. अभी हम घर जा रहे है.

गुरुम- - ठीक है देवा हम लोग मिलते है बेसमेंट में.

सावित्री को अभी होश नहीं आया था. वो सदमे में थी. देव सावित्री को गॉड में उठा लेता है और रूद्र दन को फिर सभी लोग वह से अदृश्य हो के अपने बंगले पे आते hae.dev अपने माँ बाबू जी को उनके कमरे में लिटा देता है.

पूनम – देव माँ को होश क्यों नहीं आ रहा है.

देव – वो सदमे में है हलाकि अब वो बिलकुल ठीक है. लेकिन इनके दिमाग से वो सब निकलना पड़ेगा.

देवा माँ के सर पे हाथ रख देता है. और उनके चेहरे को देखने लगता है जहा अब टेंशन की कोई लकीर नहीं थी.

देव – अब जब माँ होश में आएगी तो उन्हें यही लगेगा के उनका एक्सीडेंट हुआ था जिसमे पिता जी की हालत ज्यादा ख़राब है. उन्हें कोई चोट नहीं आयी. वो बुरे हालत अब उन्हें यद् नहीं रहेंगे. और पिताजी को भी बस एक्सीडेंट hi यद् रहेगा.

पूनम – लेकिन बाबू जी ठीक क्यों नहीं हो रहे है.

देव – पूनम बाबू जी पे ठाकुर ने अपनी शक्तियों से भी हमला किया है. जिस वजह से वो ऐसे ठीक नहीं हो रहे है. मए फ़कीर बाबा से बात करुगा. अभी इन्हे आराम करने देते है.

पूनम - है ठीक है. मए बाकि सबको बुलवा लेती हु. पिताजी महाराज से कह कर.

थोड़ी देर में सभी लोग अपने अपने कमरों में आ जाते है सब लोग अब तक सो hi रहे थे. हलाकि वह वो लोग उठे थे एक दूसरे से बाते भी किट hi वो लोग परेशां भी थे लेकिन अब उन्हें भी सब सपना hi लगेगा. जब उठेंगे.

उधर गुफा में अघोरी बेचैनी से टहल रहा था.

कनिका - क्या हुआ महाराज आप आज परेशां क्यों है.

अघोरी - कनिका मैने आज देव के परिवार पे उस ठाकुर और उसके शहरी दोस्तों के साथ मिल के हमला करवाया. क्यों की उस समय देव, रूद्र, पूनम और नीलम यहाँ नहीं थे. मैने ये जानने के लिए हमला करवाया था के जो यहाँ है वो कितने सक्षम है क्यों की उनकी ताक़त का अंदाज़ा मुझे होने पर मए उन्हें समाप्त कर सकता था. मए कोई भी काम इस बार अँधेरे में नहीं करना चाहता.

कनिका – तो हमला तो करवा दिया न आपने फिर परेशां क्यों है?

अघोरी - परेशां इसीलिए हु क्यों के देवा ने अपनी सेना बहोत मजबूत बनायीं है इस बार. न तो मए उनमे से किसी का कुछ बिगड़ पाया न hi देव के परिवार को उठा पाया. वो सब बेहद साधना और खतरनाक साबित हुए. और ये मेरे लिए कोई शुभ संकेत नहीं है .

कनिका – तो अब क्या सोचा है आपने?

अघोरी - वही तो समझ में नहीं आ रहा है.

कनिका – अगर आप कहे तो मए कुछ सुझाव दू आपको?

अघोरी – बोलो क्या कहना चाहती हो?

कनिका – आप कुछ समय पहले जीन लोक गए थे न वह से कोई सहायता क्यों नहीं ले लेते.

अघोरी - जीन बादशाह देव का दुश्मन नहीं है वो बस गुरुदेव के किसी अहसान टेल दबा हुआ है जिस वजह से मेरा साथ देने को तैयार है तो मए उसका इस्तेमाल तब करुगा जब मेरे पास दूसरा कोई विकल्प नहीं रह जायेगा. तब मए खुद और जीन दशाह देव पे दोनों तरफ से हमला करेंगे. लेकिन उससे पहले मए चाहता हु. की इन लोगो को सबक सिखाया जाये यदि मैने hi इन्हे संभल िया तो फिर किसी जीन विन्न बादशाह की जरुरत नहीं होगी.

कनिका - तो अपनी ताक़तों के साथ आपने ठाकुर को भेजा उसे फिर से भेजो

अघोरी - कनिका ताकते होने का मतलब ये नहीं होता के वो व्यक्ति ताक़तवर हो गया उन ताक़तों का सही इस्तेमाल कैसे किया जाये ये सीखने में बहोत समय लगता है. यु hi ताकते उधर लेकर अगर हर कोई जीतने लगता तो मुझे इतना इंतजार नहीं करना पड़ता इस देव जैसे सपोलो को तो मए उनकी माँ के भोसड़े में hi मसल देता. इसी तरह ठाकुर के पास मेरी ताकते तो थी लेकिन उसका इस्तेमाल उसे नहीं आता था. जिस वजह से उसकी हार हुई. वैसे भी वो साला बहोत बड़ा चुटिया hi है बेकार मैने उस पर इतना समय ख़राब किया.

कनिका – तो फिर तो आप पिशाच सेना का सहारा लीजिये और उन पर हमला कर दीजिये देव और रूद्र तो बच जायेगे ये हम जानते है वो पिशाच सेना उनका कुछ नहीं बिगड़ पायेगी पर संभवतः बाकि लोगो को मर के आपका आधा काम कर दे.

अघोरी की आँखों में चमक आ गयी

अघोरी - अरे वाह कनिका तूने तो मेरी समस्या हल कर दी ये मुझे पहले क्यों नहीं सुझा के मए पिशाच सेना का इस्तेमाल करू . यही करना उचित होगा. तूने सच में मुझे खुश कर दिया.

कनिका - तो फिर चलिए न बिस्तर पे. आप भी मुझे खुश कर दीजिये कब से मेरी योनि सूखी पड़ी है आप के इंतजार में.
 
थैंक्स यू वैरी मच लीओन बीआरओ. फॉर योर लवली रिव्यु अस ऑलवेज. अघोरी पिशाच सेना को बुलाएगा hi क्यों की उसे भी तो आगे बढ़ना है पर वो उसकी कितनी मदद कर पायेगी ये तो वक़्त बताएगा.

ताक़त का सही इस्तेमाल करते हर किसी से नहीं बनता. ये बात हम आम टूर पर अपनी नार्मल लाइफ में भी देखते है. चाहे वो किसी भी छेत्र में हो. किसी का बॉस अपनी ताक़त का सही इस्तेमाल नहीं करता तो कही कोई पोलिसवाले hi गलत करता हुआ नजर आता है कही कोई राजनेता तो कही कोई और. ये हर तरफ hi है. पर जिसने अपनी ताक़त का सही इस्तेमाल किया उसकी बुलंदी को कोई छू भी नहीं सकता ये भी दीखता है. एनीवे मिलते है नेक्स्ट अपडेट में.
 
भाई आपके रिव्यु के लिए धन्यवाद, है ये सही है के सभी बचे हुए नजर आ रहे है लेकिन क्या सच में सभी बच गए या ये घटना देव की लाइफ में उथल पुथल मचा देगी? क्या सच में सब बच गए hae?aapko आगे पता चल hi जायेगा. जो अब तक नहीं हुआ वो हो भी सकता है और वो भी इसी हमले के कारन, क्या? ....आगे देखेंगे. अघोरी का छटपटाना भी उचित hi है हलाकि उसने तो सिर्फ एक रिस्क लिया था ठाकुर के कंधे पे बन्दूक रख कर. यकीन तो उसे भी नहीं था के ठाकुर कुछ कर पायेगा. लेकिन ठाकुर जो कर गया या उसकी आड़ में जो हो गया वो भी काम खतरनाक नहीं है देव की लाइफ के लिए. ऐसा क्या हुआ ? पता चल जायेगा. और रही बात पिशाच सेना की तो देव की लाइफ में वैसे भी दुशमन बहोत है एक और सही क्या फर्क पड़ता है. है न?
 
अपडेट – 170

कनिका - तो फिर चलिए न बिस्तर पे. आप भी मुझे खुश कर दीजिये कब से मेरी योनि सूखी पड़ी है आप के इंतजार में.

अब आगे……

अघोरी ने उसे हवस भाई नजरो से देखा और उसके कंधे से जो बाल उसकी चूचियों को ढके हुए थे उन्हें उसने पीछे किया फिर अपना लंगोट एक झटके में उतर फेंका और कनिका की चूचिया पकड़ के मरोड़ने लगा जिससे कनिका भी मदहोश होने लगी और अघोरी का लुंड भी खड़ा होने लगा तभी अघोरी का ध्यान नीचे गया कोई उसका लुंड पकड़ के चूस रहा था. अघोरी ने देखा ये मनिका है. तो वो मनिका के मुँह में धक्के मरने लगा और कनिका की चूचिया दबा दबा के पीने लगा.

फिर तीनो बिस्तर पे गए और हवस का नंगा नाच शुरू हो गया.

इधर देवा के घर में कोई दो घंटे बाद सब उठते है.

दिया – देव ये आज क्या हो रहा है पायल भी सो रही है. ये भी आज खेत नहीं गए. माँ बाबू जी भी सो रहे है.

देव - अरे भाभी कुछ नहीं थकन होगी. लेकिन एक बुरी खबर है.

दिया – कैसी बुरी खबर?

देव - जब आप लोग सो रहे थे तब माँ बाबू जी मंदिर गए थे रस्ते में उनकी गाड़ी का ब्रेक फ़ैल हो गया और उनका एक एक्सीडेंट हो गया.

दिया - क्या??? हे भगवन और मए सोती रही मुझे किसी ने इस काबिल भी नहीं समझा के ऐसी बात होने पे भी उठा दे.

देव – अरे भाभी सब ठीक है मुझे पता चला तो मए वह पंहुचा और उन्हें हॉस्पिटल से अभी लाया हु. आराम कर रहे है. बाबू जी की तबियत ज्यादा ख़राब है लेकिन चिंता की कोई बात नहीं

दिया – और माँ कैसी है?

देव – माँ ठीक है बस आराम कर रही है.

पायल - भैया अभी तो मए इसी घर में हु मुझे अभी से इतना पराया कर दिया आप लोगो ने के माँ बाबू जी का एक्सीडेंट हो गया और आपने बताना भी जरुरी नहीं समझा?

देवा – अरे गुड़िया नाराज क्यों होती हो, मैने तो भाभी को भी नहीं बताया, न hi भैया को. मए नहीं चाहता था तुम लोग परेशां हो, और देखो हॉस्पिटल से छुट्टी भी तुरंत मिल गयी. यानि सब ठीक है न. अब तू रो मत और जा जा कर देख ले माँ बाबू जी को

इतना सुनते hi दिया और पायल दौड़ती हुई अंदर जाती है और माँ बाबू जी को देखने लगती है जो अभी सो रहे थे.

वो दोनों बहार आ जाती है और फिर रोने लगती है.

देव – तुम दोनों रो मत. कुछ नहीं हुआ. सब ठीक है. जाओ जाकर आराम करो.

फिर दिया और पायल चली जाती है अपने अपने कमरे में और देव चला जाता है बेसमेंट में. जहा सभी मौजूद थे. गुरुम, नागार्जुन, चन्नो, शलाका, रजनी, नीलम, रूद्र, देव और पूनम.

लेकिन सब की गार्डन झुकी हुई थी कोई कुछ कह नहीं प् रहा था.

देव – तो आज की इस घटना से क्या समझ में आया आप सबको?

गुरुम – हमें माफ़ कर दो देव हम शर्मिंदा है के हमारे होते ये सब हो गया. हमे बिलकुल अंदाजा नहीं था ये सब होने का.

चन्नो – है भैया हमें पता hi नहीं चला उन्होंने सब कुछ इतना अचानक किया हम लोग तो बस निश्चिन्त थे. के हमने हर जगह को सुरक्षित किया हुआ है तो कुछ नहीं हो सकता.

रूद्र – फिर भी हुआ. और काफी खतरनाक तरीके से हुआ.

नागार्जुन - हमें हमारी गलती का अहसास है. हम मानते है के हमसे बहोत बड़ी चूक हुई है.

देव - सबसे पहले तो तुम लोग सब अपने मन से ये गिलटी की फीलिंग को निकल दो. जो हुआ अच्छा नहीं हुआ. लेकिन हम में से कोई भी भगवन नहीं है. अगर हम सामने वालो का इतना नुकसान कर सकते है तो वो लोग भी काम शातिर तो है नहीं. इसीलिए जो हुआ. वो होना hi था. बस इसमें तुम सब की गलती नहीं है. उसके भी तीन कारन है.

कारन 1 – उन लोगो के पास उस वक़्त तीन तरह की पावर्स थी. एक हमसे दुश्मनी की आग जो ठाकुर और मन्नू के दिलो में थी, कारन 2,- लेटेस्ट टेक्निक की पावर जो विठल ने दी, 3रद- मायावी शक्तियों की पावर जो अघोरी ने दी. इसके विपरीत तुम लोगो के पास जो था वो सब नुकसान करने वाला hi था. 1) ओवर कॉन्फिडेंस 2) निश्चिंतता यानि रएलेक्सशन 3) और सबसे अहम् उन्हें इस बात का पता था की हम चारो यहाँ नहीं है. मन लो तुम सब सतर्क भी होते तो भी वो हमले में कामयाब होते क्यों की उस हालत में अघोरी भी सामने आता और तुम लोगो की ताकते फ्रीज़ कर देता. तुम लोग कुछ नहीं कर पते. अघोरी नहीं आया उसका रीज़न ये है क्यों की उसे पता चल गया के हम लोग वापस इस गाँव में आने hi वाले है उसके अपने सोर्सेज है. उसे मेरे आने का इंतजार तो था hi लेकिन वो चाहता था की हमारे पूरे परिवार को बंदी बना के मुझसे वो स्वर्ण मणि हासिल कर सके लेकिन हमारे बड़ो ने हमारे परिवारों को पहले hi सुरक्षित कर दिया जिससे उसकी योजना फ़ैल हो गयी. भड़ास निकलने के लिए उन्होंने माँ बाबू जी को किडनैप किया लेकिन उनके डैम पे वो हमसे स्वर्ण मणि नहीं ले पता इसीसलिए वो सामने नहीं आया. क्यों की उसके पास हमारे लोग ज्यादा होते तो अलग अलग जगह पे रख के मुझे उलझा सकता था. हम सब को डाइवर्ट कर सकता था. वो उसके पास थे नहीं. इसीलिए तुम लोग गिलटी फील मत करो.

रजनी - लेकिन देव ऐसे तो वो ऐसा hi हमला फिर कर सकता है न.

नहीं कर सकता अब वो ऐसा दुबारा, उसके पास ये आखरी मौका था. अब मेरे पास स्वर्ण मणि है. मेरे किसी भी साथी के बारे में वो सोचेगा भी तो मए कही भी राहु ये मणि उस का काल बन के सामने आ जाएगी. जिसे वो छू भी नहीं पायेगा और कोशिश करेगा तो जल के भस्म हो जायेगा.

देव - अब ये बताओ के……………..

सब देव के चुप हो जाने पर उसे देखने लगे तो देव सामने देख रहा था अब जब सबने देव की आँखों का पीछा किया तो देखा सामने दिया कड़ी थी वो हैरत के मरे सब को देख रही थी

देव – अरे भाभी आप वह क्यों कड़ी है आइये न हमारे साथ बैठिये.

दिया - ये सब क्या है देव ? कैसी बाटे कर रहे थे तुम लोग? लेटेस्ट टेक्निक, मायावी शक्तिया, मन्नू, ठाकुर अघोरी? ये सब क्या है देव मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा क्या तुम मुझे बताओगे या मए सब को यहाँ ले औ?

देव ने सब की तरफ देखा और अंत में पूनम की तरफ तो पूनम ने हां में गार्डन हिला दी.

देव उठकर आगे बढ़ा और दिया का हाथ पकड़ कर उसे अपने सामने एक कुरी पर बैठा दिया और पलटकर…..

देव – बेसमेंट को साउंड प्रूफ करो यहाँ की बाटे बहार नहीं जनि चाहिए.

नागार्जुन उठ कर बहार गया तब तक सब चुप बैठे थे. उसके वापस आने पर देव ने उसकी तरफ देखा.

नागार्जुन - दोने .

देव – भाभी आप को याद है कुछ दिन पहले जब हमारी सगाई थी तब आपने मुझसे कुछ पुछा था और मैने आपसे कहा था के वक़्त आने पर मए आपको सब बताउगा .

दिया - है तुमने कहा था लेकिन अब तक कुछ बताया नहीं. लेकिन वो बाद में देखेंगे. जो अभी मैने सुना वो सब क्या है मेरा तो दिमाग hi घूम रहा है. उस बारे में पहले बताओ.

देवा – भाही हर बात एक दूजे से जुडी हुई है. कुछ भी अलग नहीं. तो आपको मए पहले सबका परिचय दे देता हु.

दिया सब का परिचय? तू क्या मुझे पागल समझता है यहाँ कौन है जिसे मए नहीं जानती?

देवा – यहाँ कोई भी ऐसा नहीं जिसे आप जानती हो. और जिन्हे जानती हो वो सब झूठ है. एक भ्रम जो हमने hi फैलाया है. इन सब का सही परिचय सही पहचान मए अब आपसे करवाऊंगा. खुद से भी मिलवाऊंगा. लेकिन उससे पहले आपको मुझसे एक वादा करना होगा के जो भी मए कहुगा उसे आप किसी को बताने की कोशिश नहीं करेगी. सही वक़्त आने पर मए खुद सबको बताउगा.

दिया – ठीक है देवा. मए वचन देती हु…………….
 
अपडेट – 171

दिया – ठीक है देवा. मए वचन देती हु…………….

मए किसी से कुछ नहीं कहुगी जब तक तुम खुद नहीं बता देते सब को. लेकिन ये क्या मजाक है तू अपना परिचय मुझसे करवाएगा? क्या मए तुझे भी नहीं जानती?

देवा – नहीं, आप मुझे पूरी तरह नहीं जानती अब जानेगी………….

….तो सबसे पहले. हमारी नयी साथी चन्नो, यु तो ये ठाकुर के घर में काम करने वाले एक मजदुर की बीवी थी, लेकिन बाद में मेरी बहन बानी और अब गुरुम की होने वाली जीवन साथी. हमारी टीम की सबसे नयी, छोटी, लेकिन बेहद खतरनाक साथी. कई साडी अलौकिक शक्तियों की मालिक.

ये है गुरुम कभी ये अंडरवर्ल्ड का एक नामचीन अपराधी हुआ करता था, लेकिन जिसके उसूल आम इंसानो से कही अधिक मजबूत है एक भरोसेमंद साथी, दोस्त, भाई, और चन्नो का होनेवाला जीवन साथी. ये हमारी टीम का दूसरा साथी hae.iske पास भी कई साडी दिव्या शक्तिया है कुछ तो ऐसी शक्तिया है जो चन्नो के पास भी अब तक नहीं है.

ये है नागार्जुन यहाँ से हजारो मील दूर अनजान जगह पे बने नाग लोक का रहने वाला मायावी शक्तियों का मालिक एक खतरनाक जहरीला और गजब का फुर्तीला नाग. लेकिन मेरा दोस्त और हमारी इस टीम का साथी. इसकी चुस्ती फुर्ती का नमूना एक बार आप देख भी चुकी है , जब ठाकुर ने हमला करवाया था आप पर और पायल पर.

अब इनसे मिलिए, ये है शलाका नाग लोक से कुछ दूर बसी हुई तिलिस्म नगरी की छोटी राजमकुमारी. कई तिलिस्मी शक्तियों की जानकर बहोत जायदा बहादुर नागार्जुन की प्रेमिका और उसकी होने वाली बीवी. हमारी टीम की साथी. इसकी एक विशेषता और है वो भी बताता हु.

इनसे मिलिए ये है मेरा भाई जैसा जिगरी दोस्त रूद्र नागलोक का hi वासी है. ये एक बेहद खतरनाक महाकाय, बेहद विषैला इच्छाधारी और मणिधारी नाग है साथ hi लड़ाई की हर कला में माहिर, शूरवीर, बहादुर, फौलाद सा जिस्म है इसका. लेकिन दिमाग बच्चो जैसा मासूम, प्यार करता है तो जान लुटा देता है. लेकिन अगर कोई मुझे या इसके प्यार को तकलीफ दे तो उसकी जिंदगी जहन्नुम बनाने से पहले ये मुझसे भी नहीं पूछेगा. मौत की घाटी में भी ये बिना सोचे मेरे लिए कूद सकता है. ताक़तवर इतना की लोहे की सलाख को भी रुमाल की तरह कलाई पे लपेट सकता है. हम दोनों दोस्त एक बार मेरी गलती से बिछड़ गए थे लेकिन सिर्फ दुबारा मुझसे मिलने की खातिर इसने सेकड़ो साल की तपस्या की है. अपनी प्रेमिका और मंगेतर नीलम के साथ होने के बावजूद भी इसने शादी नहीं की क्यों की इसी ने एक बार कहा था हम सबकी शादी एक साथ एक hi मंडप में होगी. इस गधे ने उस बात को पूरा करने के लिए मेरा सेकड़ो सालो तक इंतजार किया और नीलम के साथ शादी नहीं की. ये भी इसकी प्रेम दीवानी इसे छोड़ न पायी और इसने भी उतना hi लम्बा इंतजार किया है अपने प्यार को पाने के लिए. ये मेरा दोस्त , मेरा भाई और हमारी टीम का अहम् हिस्सा है इस के बिना मए भी कुछ नहीं.

दिया तो हैरत के मरे मूर्ति सी बन गयी थी उसे देवा की बाटे किसी किताब की कहानी जैसी hi लग रही थी वो मुँह फाडे बस देव को टकटकी लगाए देखे जा रही थी और उस की बातो पर यकीन करने की कोशिश कर रही थी. जो कही से भी यकीन के लायक नहीं लग रही थी लेकिन देवा बोल रहा था तो यकीन न करने का कोई कारन भी नहीं था उसके पास.

देवा - ये नीलम है ये भी नागलोक की वासी है ये भोली भली खूबसूरत सी दिखने वाली लड़की कई मायावी शक्तियों की मालिक एक इच्छाधारी और बेहद खतरानक mani-dhari नागिन है, रूद्र का प्यार है ये, और रूद्र इसकी जान, जब रूद्र मुझसे बिछड़ गया और ग़मगीन हो गया तो मुझसे मिलने की खातिर तपस्या में लीं होने लगा तब ये भी इसके प्यार की मरी इसके साथ उसी तपस्या में बैठ गयी और सेकड़ो सालो की तपस्या में चली गयी अपनी जिंदगी के सेकड़ो साल इसने अपने प्यार की ख़ुशी के लिए लगा दिए. ऐसी है ये. रूद्र की मंगेतर और जल्दी hi उसकी होने वाली बीवी.

ये है रजनी अगर इसे ध्यान से देखो तो ये बाबू जी के दोस्त सुन्दर लाल जी की पत्नी है लेकिन वो इसका hi छाया रूप है जो कई सालो से इसीलिए उनके साथ थी क्यों की उसके जरिये ये बाबू जी और बाबू जी के जरिये मुझसे संपर्क बना सके क्यों की ये कही दूसरी दुनिया में कैद थी इसीलिए ये मुझसे सीधे टूर पे नहीं मिल सकती थी. और जब ये उस छाया रूप में आयी तब तो मए पैदा भी नहीं हुआ था बाबू जी के घर में. ये भी मायावी शक्तियों की जानकर है. और हमारी टीम की सदस्य भी.

अब मिलिए इनसे ये है तिलिस्म नगरी की बड़ी राजकुमारी पूनम तिलिस्मी नगरी में इनके बराबर तिलिस्म किसी को नहीं आता स्वयं इनके पिताजी को भी नहीं. राजकुमारी पूनम यानि मेरा सदियों का प्यार. जिसने मेरे लिए अपनी जान गवई और फिर से मेरे लिए जनम लिया. मुझे पाने के लिए. अभी मैने शलाका की एक विशेषता की बात कही थी. तो वो विशेषता ये है के शलाका और पूनम तिलिस्म नगरी में सगी बहने है. यानि दोनों hi तिलिस्म नगरी की राजकुमारिया है.

और सबसे आखिर में मए यानि आपका देवा……….

रूद्र – रुक बे कितना बोलेगा थकता नहीं है क्या? तेरा परिचय मए दुगा. है तो भाभी असल में ये है तो देवा सिंह hi आपका देवा, दीनानाथ और सावित्री जी का बीटा ये बात पूरी तरह सच है. लेकिन उतना hi सच ये भी है के ये नागलोक का एक इच्छाधारी, मणि धरी, स्वर्ण मणि धरी, मायावी शक्तियों का जानकर, एक खतरनाक योद्धा, पूनम का सदियों का प्यार, रूद्र का सदियों से बिछड़ा हुआ बचपोगं का दोस्त, महाराज भैरव सिंह और महारानी नीलमणि का एकलौता प्रिय पुत्र युवराज देव सिंह एक महा नाग, इच्छाधारी है ये.

दिया को ये साडी बाते सुन कर चक्कर आने लगे तो उसने वही दीवार का सहारा ले लिया और अपना सर पकड़ लिया.

थोड़ी देर के बाद जब उसने आँखे खोली तो सब अपनी अपनी नगरी की वेश भूषा में उसके सामने खड़े थे. सिर्फ गुरुम और चन्नो hi सामान्य कपड़ो में थे.

ये सब देख कर दिया की आँखों से आंसू निकलने लगे. उसने हाथ जोड़ दिए और देवा के पैरो में बैठ गयी

दिया - मए नहीं जानती आप लोग कौन हो लेकिन प्लीज मेरे देवा को वापस लौटा दो हम लोग उसके बिना मर जायेगे. वो कहा है. कही आपने हमारे देवा को मर तो नहीं दिया मुझे उसे देखना है.

देवा तुरंत अपने सामान्य रूप में आ गया और दिया को कंधो से पकड़ के उठा दिया.

देवा – भाभी ये आप क्या कर रही है मए hi आपका देवा हु.

दिया - नहीं राजकुमार मेरा देवा तो बहोत सीधा सदा है उसका इन सब बातो से कोई मतलब नहीं उसे वापस कर दीजिये प्लीज मए आपके हाथ जोड़ती हु.

देवा - भाभी आप क्या बोल रही है कोई दूसरा देवा है hi नहीं मए hi आपका देवा हु. यद् है जब आप शादी कर के आयी थी तो मए hi आपका हाथ पकड़ के आपको घर के अंदर तक लाया था. और फिर आपने प्यार से मेरा गाल सहलाया था तो मए शर्मा के भाग गया था.

दिया - है मुझे यद् है. लेकिन ये सब तुम कैसे जानते हो?

देवा – अरे यार मए हु तो मुझे hi नहीं पता होगा क्या? मए कह रहा हु न जो रूद्र ने मेरे बारे में बताया वो सब तो सच है hi लेकिन ये भी सच है की मए hi आपका देवा हु. और ये पूनम भले hi तिलिस्म नगरी की राजकुमारी है लेकिन यही असली पूनम भी है. पद्मा काकी की बेटी. असल में हम दोनों का पुनर्जन्म हुआ है. रुको मए आपको सब कुछ शुरू से बताता हु फिर आप सब समझ जाएगी. आपको याद है. मए पहले कैसा था इसी ज्योति ठाकुर ने मुझे चांटा मार दिया था और मए कुछ नहीं कर पाया था. उसी दिन मुझे फ़कीर बाबा मिले वो कौन है आगे पता चल जायेगा आपको. उन्होंने मुझसे बात की फिर मए और माँ मां के घर गए थे. बस जिस दिन हम लौट रहे थे उसी दिन से साडी शुरुआत हुई. मेरे अंदर नयी ताक़त फ़कीर बाबा ने जगाई. मुझे साधना में बैठ कर पूरी शक्तिया जगाने के लिए कहा और फिर…………….

देवा दिया को सब बताता चला गया. और साडी बात सुन कर दिया की आँखों से आंसू निकल पड़े. वो बिना कुछ सोचे देवा के सीने से लग गयी. और आंसू बहाने लगी वह मौजूद सबकी आँखे भर आयी थी.

देवा ने दिया को शांत करवाया. – बस भाभी यही है मेरी कहानी.

दिया - तो इसका मतलब पिछले करीब 7 महीनो से तुम तिलिस्मी चक्र में थे और साथ में ये पूनम, रूद्र, और नीलम, रजनी भी?

रजनी - भाभी मए तो वही कैद थी जब देवा आया तभी तो मुझे वह से मुक्ति मिली है तो मए भी वही से इनके साथ हो गयी.

दिया – मतलब मेरा देव सचमुच का राजकुमार है. मए बहोत खुश हु तेरे लिए देव और भाग्यसहली है तेरे माता पिता जिनके घर में तूने जनम लिया. भाग्यशाली है ये पूनम जिसका तू सुहाग बनने जा रहा है. भाग्यसहली होगा वो बच्चा जिसकी रगो में तेरा खून होगा.

पूनम – फिर तो आपकी कोख में पल रहा बच्चा भी भाग्यवान hi है न भाभी. क्यों की उसमे भी तो वही खून है जो देव की रगो में है.

दिया ने चौंक कर पूनम की तरफ देखा और उसकी नजरे झुक गयी और झुकी नजरो से hi उसने कहा

दिया - क्या मतलब पूनम ............?
 
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