Erotica Ek se jee nh bhara to aur b sahi - Page 2 - SexBaba
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Erotica Ek se jee nh bhara to aur b sahi

कल सुबह अपडेट पोस्ट होगा तब तक आपका सपोर्ट बना रहे ....... सुग्गेस्टियन्स अलवय अवेटेड..
 


लेकिन कहते है न रही को उसकी उसकी मंज़िल मिल hi जाती hai….aur जमील को बी ऐसी जगह याद आगयी थी और उसके चेहरे पे ख़ुशी आगयी थी……

कुछ hi देर में उसने देखा की मीणा उससे करीब आके कुछ दूर खड़े हुए उसे कुछ इशारो से पूछ रही hai..aur जमील मीणा का इशारा समजे वो मीणा को इशारे में बताया की उसका फॉलो kare…waise तो मीणा क दिमाग में हज़ारो सवाल एक साथ पैदा हो गए the..lekin इन सब सवालो क बावजूद बी वो जमील का पीछा करने से अपने आप को रोक नह पायी और जमील क पीछे पीछे चलने लगी…

कुछ दूर hi चल पायी थी की उसने देखा की इ रास्ता तो मेरे घर क तरफ hi निकलता hai…kaha ले जारा है Jamil…lagta hai..yaha मेले में कार पार्किंग की जगह नह इसलिए मैं रोड क आस पास कही पार्क किया hoga…jaha से मेरे घर का रास्ता बी निकलता hai…lekin वह मई उसके कार में कैसे baithu…koi देख बी सकता hai…darasal मीणा को लगा था की जमील उसे अपने कार में कही लेके जाने वाला hai…aur उसने अपने मैं में चल रही बात को जान ने क लिए जमील को फिर से फ़ोन लगाया हो उससे आगे कुछ दुरी पर चल रहा था…

शायद जमील को इस बात का अंदाज़ा होगया था की मीणा क मैं में क्या चल रहा है और एक बार पीछे मुद क मीणा की तरफ देखा और कॉल रिसीव करते हुए bola..bas दो मिनट मीणा हम नज़दीक hi hai…us जगह से….

लेकिन जमील का इ जवाब मीणा को और सोचने पर मजबूर किया और फिर puchi…kounsi जगह और आपकी कार कहा है …

जमील मीणा क बेताब भरे सवाल को सुन्न क थोड़ा हस्ते हुए बोलै इस वक़्त कार पे जाना और हमारा वक़्त बर्बाद करना एक hi न meena…tum बस मेरा पीछा करो …

मीणा को कुछ समाज में नह आरा था और वो अपने कदम को पीछे बी हटाना नह चाहती thi…aur वो जमील से बोली पर कॉल मत kaato…on hi रहने दो…

जमील- ठीक है….

और फिर कुछ देर दोनों चले तो मीणा ने देखा की जमील उसके घर क सामने वाली खली पड़ी कॉलोनी क और चल पड़ा तो मीणा को कुछ कुछ समाज आया हो न हो जमील मुझे उसी कॉलोनी क पास ले जा रहा है जो बंजर पड़ी हुई hai…..meena जानती थी की ो कॉलोनी पूरी खली पड़ी हुई है पिछले एक दो साल से और रात क वक़्त वह कोई आता जाता बी nh…par मीणा क लिए सोचने वाली बात थी की वो कॉलोनी उसके घर से सामने से कुछ hi दुरी पर hai…aur किसी आस पडोसी की नज़र उसपर पड़गयी to…wo जमील से बोली कही आप मुझे इस कॉलोनी क पास तो लेके नह जा रहे हो…

जमील- सही पहचान लिया हम वही जा रहे है…

मीणा- नह जमील जी आप जानते hi हो वह से मेरा घर कितना नज़दीक hai..aur कही किसी आस पडोसी की नज़र हम पर पड़ी to…meena ने अपने डर को बयां करते हुए जमील से पूछा..

जमील- अरे नह मीणा इस अँधेरे में वह कोई नह देख सकता जब मई सुबह सुबह hi वह खड़ा होकर तुम्हारे घर आता था तब hi मैंने इ सब गौर किया हुआ hai…tum डरो mat…bas दो मिनट और…

मीणा कुछ नह boli…use पता था आज वो जिंदगी में पहली बार ऐसा रिस्क ले रही hai..jiska एक कदम बी किसी और को पता चला तो बी उसकी बानी बनायीं जिंदगी की खुशियों को उझड़ सकती है… और वो किसी को मुँह दिखने लायक बी नह rahegi…par वो जमील को मन बी नह कर पा रही thi…na जाने क्यू मीणा को जमील से ऐसा लगाव हो गया था की वो ऐसा रिस्क बी लेना छह रही thi…aur वो अपने आप को खुद तस्सल्ली देते हुए boli…us कॉलोनी क पास तो पूरा अँधेरा hi चाय रहता hai…to उस अँधेरे में मुझे कौन पहचान लेगा और किसी ने मुझे देख बी लिया तो बोलूंगी की घर जाने क लिए यही तो शॉर्टकट hai…aur वो जमील क पीछा करते हुए आगे बढ़ाने लगी…

जमील और उसके बीच करीब 30-35 मीटर की दुरी मेन्टेन की हुई thi..aur बिचाने कोई देख बी लेता तो मीणा पे शक करने की कोई गुंजाइश hi नह कड़ी होती thi….aur कुछ hi देर में जमील रुक गया और चारो तरफ नज़र दौड़के देखा और मीणा से bola..yaha ठीक hai…aajavo…

मीणा ने एक बार अपने चारो तरफ देखा तो उस कॉलोनी क पास अँधेरे क सिवा कुछ भी नज़र नह आरा tha…aur अब उसे बी लगा की सेफ है तो वो फ़ोन काट di..jo कुछ देर पहले से दोनों की बीच स्टार्ट hi था और आवश्यकता पड़ने पर hi बात हो रही थी…

कुछ hi देर में मीणा और जमील एक दूसरे क आमने सामने खड़े होगये the…aur दोनों कुछ देर चुप रहकर आस पास चल रही गतिविधि पे नज़र दौड़ने lage..aur जब दोनों को इस बात से ख़ुशी हुई की उन्हें किसी ने अब तक नह देखा और नहीं कोई डिस्टर्ब करनेवाला है तो उनकी करीबी और बधाई और जमील ने मीणा का शोल्डर पे हाथ डेल मीणा को अपने नज़दीक किया तो मीणा बिना किसी विरोध क उसके जिस्म से चिपक कर कड़ी हुई और boli…itni बी क्या ुर्गेनस्य thi…jo मुझे ऐसा रिस्क लेने ले मजबूर kiye…kal सुबह तक का वेट नह कर सकते थे क्या…

जमील- तुम हो hi इतनी खूबसूरत जिसे हर दिन हर पल मिलने का दिल करता hai…jamil ने मीणा की तारीफ करते हुए इसलिए बोलै था की वो जनता था मीणा अपनी तारीफ क शौकीन hai…aur आज वही तारीफ मीणा को जमील क और करीब ला सकती है..

मीणा अपनी तारीफ सुनकर मुस्कुराते हुए जमील को देखि और बोली बस बी करो झूटी तारीफ़ करते हुए थक नह हस्ते हो kya…isse पहले यहाँ कोई आ न जाए, जो बोलना है जल्दी hi बोलो.

जमील- अभी तो शाम की शुरुआत हुई hai…is पल का थोड़ा मजे तो उठाये…

मीणा उसे टोकते हुए मजा और ऐसे खुले आम सड़क पे प्ल्ज़ नह जमील जी मुझे यहाँ ज्यादा वक़्त बिताना खतरे से खली नह लगता….

जमील- मीणा को कास क अपने और और खिंच ते हुए मीणा को सामने की और इशारा करते हुए बोलै उस घर में चलेंगे जो बिलकुल खली hai…waha हमे कोई देख नह सकता..

मीणा ने मोबाइल में hi टाइम देखा तो 8 बजने में अभी बी 10 मिनट काम the..use लगा अभी बी मेरे पास आधे घंटे से ज्यादा वक़्त hai..aur इतना वक़्त ऐसे खुले सुनसान रस्ते में बिताने से तो ाचा है की उसी घर में जमील क साथ chale…aur वो अपनी सहमति देने की कोशिश करते हुए जमील को देख मुस्कुरायी बोली पर वह बहुत गंधा होगा na..kareeb एक दो साल से वो घर बंजर पड़ा हुआ है…

तब जमील बोलै गंधा तो hoga…par मई किस लिए hu…apni रानी क लिए साफ़ करदूंगा कहते हुए इस बार जमील ने मीणा क पीछे से हाथ दाल क उसके कमर को पकड़ अपनी बहो में लेते हुए बोलै तो फिर चले..

पहली बार किसी मर्द ने मीणा को इस तरह बहो में बहे डालके पकड़ा हुआ tha…use याद बी नह आरहा था की कभी तो उसके पति ने उसे इस कदर बहो में लेके प्यार करने की उम्मीद जताई थी… पर आज एक गैर मर्द की हरकत ने उसकी दबी उम्मीद को जगाया tha…wo जानती thi..jamil का जो हाथ उसके कमर पर है वो किसी बी वक़्त उसके नाज़ुक मुलायम गांड तक पहुंच सकता है और जिसे चुने का अधिकार सिर्फ उसके पति को hai…in सब बातो क बावजूद बी वो जमील क प्यार भरे बर्ताव से इतनी इम्प्रेस होगयी थी की मीणा जमील क हाथ थामे उसके कंधे पे अपना सर रखने से अपने आप को रोक नह paayi..aur जमील से कदम मिलते हुए इस रूम की तरफ निकल पड़ी..

दोनों इस तरह आगे बाद रहे थे की जैसे नयी नयी शादीशुदा जोड़ी अपने काम क्रीड़ा को अंजाम देने बैडरूम की तरफ बाद रही ho..dono को चेहरे पे एक मुस्कान थी जो अपनी अपनी खुशिया बयां कर रही thi…jamil मीणा पर अपनी जीत की ख़ुशी से मुस्कुरा रहा तो मीणा जमील क प्यार भरे बर्ताव से अपने चेहरे पे मुस्कान लाने से रोक नह पायी थी….

जैसे जैसे वो कुछ कदम hi चले थे जमील अपनी हरकत पर आगया था और उसने मीणा क कमर से अपने हाथ को निचे सरका कर चलते वक़्त मटक रही मीणा की गांड क एक खुल्हे पर रख hi diya..tha…meena क गांड का स्पर्श हाथो में महसूस करते हुए hi जमील क लुंड की हलचल बढ़ने लग गयी thi…wo सोचने laga..kitni कर्तव्य है मीणा की गांड क khule..aur उभरे हुए बी …और रुई से बी मुलायम वह इसे तो चुने में hi इतना मजा आरा तो इसे नंगा करके चूमने में तो मजा hi मजा है…

लेकिन मीणा ने पहले hi अंदाज़ा लगाया हुआ था की जमील क हाथ उसके नाज़ुक अंग को छू सकता hai…isliye वो बिना कुछ बोले hi जमील को देख कर शरमाते हुए अपनी नज़र झुकाये जमील क हाथ को आगे बढ़ाने से रोक नह पायी…

चारो तरफ अँधेरा होने क वजह से दोनों को एक दूसरे का चेहरा बी ठीक से नह दिख रहा था फिर बी मीणा क जिस्म में बढ़ती गर्मी और घेरि सासो से जमील समाज गया tha…meena बी एन्जॉय कर रही hai..aur वो मैं में hi बोलै चल जमील अब लाटरी लग गयी है teri..bas इसे अंदर ले जा और उतर दे इसके kapde…..aur मजे कर…

नह नह जमील अब जल्दबाज़ी में कोई गलत कोई ऐसा कदम नह uthana….jise मीणा को बुरा lage..aur वो नाराज़ हो जाए और तुम फिर से शुरुवात से कोशिश करना pade…aur जमील ज्यादा कुछ हरकत न करते हुए बस मीणा की गांड को साडी ऊपर से धीरे से सवारने laga…aur कुछ कदम आगे बढ़ते hi उसे रोकना hi पड़ा क्यू की दोनों अब उस घर क ठीक सामने खड़े थे जिसके अंदर जाने क लिए टूटफूटा दरवाजे को बी खोलना tha…pehle तो जमील ने एक hi हाथ से कोशिश Kiya…lekin बहुत साल से बंद होने क कारन और एक दो बरसात क मौसम झेलने क वजह दरवाजा कुछ टाइट होगया tha..aur जमील का एक हाथ क प्रेशर से खुल नह रहा तो जमील को अपना दूसरा हाथ बी इस्तेमाल करना पड़ा जो इस वक़्त मीणा की गांड क उभर का नाप ले रहा tha….aur कुछ आधे एक मिनट क मेहनत क बाद जमील दरवाजा खोलने में कामयाब हुआ tha…aur दोनों साथ में hi अंदर चलेगये…

उस बंजर पड़े घर में जाते hi..meena को गन्दगी की बदबू आने लगी और वो जमील से बोली बहुत गंधा है yaha…dekho कितनी बदबू आ रही है. गन्दगी की बदबू जमील क नको तक बी पहुंच गयी थी पर जमील को इस वक़्त इससे ाचा कोई प्लेस नह और tha…jo वो मीणा को lechale..aur वो मीणा से बोलै है बदबू तो आरही hai..aur जमील ने अपने मोबाइल की रौशनी में रूम क चारो तरफ dekha…dono ने पाया की काफी गाँधी जगह है और उस जगह की हालत देख कर दोनों की समझने में देर नह लगी की पिछले क हिस्से में देवर गिरने क वजह से कुछ फालतू कुत्ते और सुवरो जैसे जानवरो ने अपना ठिकाना बनाया हुआ है. मीणा और जमील दोनों को लगा ऐसी जगह पे अपना काम करने क लिए कोई ऐसी जगह hi नह बची है इ देख कर दोनों का मैं कुछ देर क लिए मायूस होगया tha..tabhi जमील ने पीछे मुद क देखा तो और एक रूक का दरवाजा पाया और वो मीणा से बोलै शायद इ रूम ठीक होगा क्यू की इसकी कुण्डी लगी हुई hai…e बार देख लेते है…

एक तो वक़्त बिता जा रहा था और ऊपर से रूम में फैली बदबू से परेशां मीणा जमील से बोली पहले वो काम karo..aapko बी ऐसी hi जगह मिली thi..dusri कोई जगह नह मिली kya…meena नाराज़गी जताते हुए बोली..

मीणा की नाराजगी जमील को जाइज़ लगी थी फिर बी वो मीणा को प्यार भरे नज़रो से देखा और रूम को खोलने की कोशिश करने laga…is रूम की बी कुण्डी बी टाइट होने क वजह से खुल नह रही thi…tab मीणा को सामने क रस्ते पे रोशनी सी नज़र आयी और उसे समझने में देर नह लगी की कोई बाइक उसी रस्ते से गुजर रही hai…aur वो तुरंत जाके सामने का दरवाजा बंद कर्ली और वापिस आके ठीक जमील क पीछे कड़ी hogayi…jo अभी बी कुण्डी खोलने की कोशिश कर रहा था और अँधेरे क वजह से उसे सही तरीके से दिख नह रहा tha…aur जमील की परेशानी जान कर मीणा ने अपने मोबाइल की टोर्च ों करके जमील को मदत करने की कोशिश ki….aur उन दोनों क कुछ देर क प्रयास क बाद दरवाजे की कुण्डी खुल चुकी thi..aur दोनों क चेहरे पे एक ख़ुशी सी च गयी thi..aur दरवाजा खुलते hi दोनों एक साथ hi रूम क अंदर chalegaye..to पाया की रूम थोड़ा बहुत ठीक hai..bahar से बपर जमीं पर काफी धूल जमी हुए hai…lekin ख़ुशी की बात इ थी की इस रूम में उतनी बदबू नह थी जितनी बहार हॉल में आ रही thi…jamil मोबाइल की टोर्च की रोशनी में रूम का मुआवना कर रहा तो मीणा ने आपने आप को ठीक उसके पीछे कड़ी पायी वो बी उसके खंडो का सहारा लेते hue…meena अपनी इस हरकत से खुद शॉकेड thi…wo एक गैर मर्द क साथ कड़ी थी जैसे वो अपने पति क साथ कड़ी ho…wo तुरंत जमील से दूर हुई पर उसका दिल इस बात पे सोचने पे मजबूर होगया था की वो एक गैर मर्द क इतने करीब कैसे aagayi…aur इस अँधेरे घर में उसके साथ क्या करने आयी hai…meena अपनी सोच में खोयी hi थी की जमील ने आवाज़ दी जरा इ मोबाइल पकड़ो मीणा…

जमील की आवाज़ सुनते hi मीणा अपने सोच से बहार आयी और जमील क मोबाइल को हाथ में लेके उसे रोशनी दिखा ते हुए boli…yaha तो इतनी धूल जमी हुई है की एक मिनट बैठोगे तो बी पुरे कपडे गांधी हो jayenge…aapko बी यहाँ जगह मिली thi….meena जमील को छेड़ते हुए boli….jamil मीणा को देखते हुए bola…bas इ हमारी पहले प्यार की मिलान की निशानी हमे याद बी तो रहना chahiye…bas थोड़ा साथ दो उसके बाद देखो तुम कैसी कैसी जगह पे ले जाकर प्यार करता hu…kehkar वो एक कोने में वल्ल्बोआर्द में पड़े कुछ न्यूज़ पेपर को इकट्ठा करके जमीं पर बिछाने laga…aur मीणा बस देखती rahi…use समाज में नह आरा था कैसे रियेक्ट kare…ek तो उसे समाज में नह आरहा था जमील कैसे मिलान की निशानी की कह रहा hai..kahi जमील क मैं में आज मेरे साथ कुछ गलत करने का मैं तो नह…

नह नह जमील ऐसा नह कर सकता उसने तो मुझसे वडा किया हुआ है वो मेरी मर्ज़ी क बगैर कुछ नह karnewala..use बस मेरे साथ कुछ देर अकेले में बिताने में मजा आता hai..meena खुद अपने आप को तसल्ली देने लगी thi….par कही न कही अब मीणा का जिस्म बी अनजान सी गर्मी महसूस करने लगा tha..uske रोम रोम खड़े हो गए the…ek ुंचही अहसास को pakar…pata नह उसे कुछ ऐसा फीलिंग होने लगा था ki..wo आज एक ऐसी दुनिया में कदम रखने वाली है जहा उसे हर तरीके से ख़ुशी मिलने वाली hai….meena यही सोचते हुए अपने मोबाइल की रौशनी में रूम का मुआवना करते हुए जमील से बोली जो इस वक़्त पेपर्स को जमीं पर सजाने लगा था…

लगता है पहले बैडरूम tha…jo लोग यहाँ रहते थे.

जमील तब तक जितना उन्हें जरुरत होगी उतना पेपर्स जमीं बिछा कर लो hogaya…humara बी बीएड ready…chalo हम बी इसे अब हमारा बैडरूम बना लेते है ..कहते हुए जमील दरवाजा बंद करते हुए मीणा क बगल में आके खड़ा होकर बोलै क्या मेरी जान आज मेरे साथ इ बीएड पे चलने की कष्ट करेगी…

एक गैर मर्द मीणा को बीएड पर आने की दावत दे रहा tha..aur मीणा अछि तरह जानती थी किसी बी मर्द क साथ बीएड पे जाने का मतलब क्या होता है चाहे वो बीएड जमीन पे कागज से बी बना व न ho…..aur इ जानते हुए बी मीणा अपनी कदम आगे बढ़ने से रोक नह पायी और जमील क साथ देते हुए वो दो कदम आगे बड़के किसी मूर्ति की तरह बिना कुछ बोले hi कड़ी रही तो जमील ने मीणा क शोल्डर पर हाथ रख क बैठने को कहा और खुद बी मीणा क साथ बैठ gayi.to जमील बोलै देखो इतना बड़ा बीएड है की दोनों एक साथ लेट बी सकते है....

एक गैर मर्द क साथ ऐसी अँधेरी जगह पे वो बी उसके साथ चिपक बैठी मीणा अपने जिस्म में बाद रही गर्मी को महसूस करने लगी thi…wo खुद हैरान थी की वो क्यू गरम हो रही hai…aur अपनी कम्पटी आवाज़ में जमील से puchi…hum यहाँ इस तरह ……क्यू??? मीणा कुछ आगे बोलने hi वाली थी जमील मीणा क जांघो पे अपना सर रख क सोगया और गुनगुनाने लगा

अंध्रेरी रात हो

मेरा यार मेरे साथ हो…

कैसे न करू उसका दीदार

जब यार का चेहरा

चाँद से बी रोशन हो…..

मीणा जमील क मुँह से अपने लिए शायरी सुन कर कुछ ऐसा फील करने लगी जैसे वो सिर्फ जमील की हो ..और जमील क माथे पे अपना सर घूमते हुए boli…achi शायरी कर लेते हो आप..

जमील मीणा क दूसरी नाज़ुक कलाई को अपने कठोर हाथो में लेते हुए बोलै तुम हो hi इतनी खूबसूरत की किसी उनपद क मुँह से बी शायरी निकल जाए….

मीणा ने पहली बार जमील क ऊँगली से अपनी ऊँगली मिलकर कलाई को थमा था ..जो मीणा क लिए एक नया अनुभव tha…tabi जमील ने बोलै जानती हो मीणा कल से मैंने तुम कितना मिस kiya…aur तुम हो मुझे एक फ़ोन करने क लायक बी नह समझती…

जमील की बात सुनकर मीणा जमील क गलो की हलके से थप्पड़ मरते हुए boli…kaise फ़ोन करती वो घर में hi थे न…

जमील- है पता hai…mai अछि तरह जनता हु तुम मुझे दूर hi करना चाहती ho…jamil ने इ बात मज़ाक में तो कहा tha…par कल तक यही सोच चल रही थी.. …..और मीणा इस बात से कुछ शॉकेड thi…use लगा इ जमील को कैसे पता chala……lekin इस वक़्त वो जमील को समजने क मूड में नह थी सो वो जमील से बोली अरे नह आप गलत सोच रहे हो.. अगर ऐसा होता तो मई आपके कहने पर यया थोड़ी aati….meena अपनी नियत को जस्टिफाई करते हुए बोली…

इस बीच जमील को मीणा की जिस्म की खुसबू ने पागल कर दिया था ऊपर से मीणा की नाभि बी ठीक उसके कानो से चिपकी हुई thi….aur मीणा की नरम नरम जांघो ने तो उसे पागल hi बना दिया tha…use अब शरारत सूजी और मीणा ने बोलै मुझे आज ब्रेक फ़ास्ट क्यू नह दी…?

मीणा जमील का मतलब समाज नह पायी उसे लगा जमील ने बी आज उसे ऐसे मिस किया होगा जैसे उसने सुबह मिस किया था जमील को और वो प्यार से जमील क सर को सहलाते हुए boli…ok बाबा सॉरी कल दुगना ब्रेकफास्ट dungi…ok..

लेकिन जमील ने कुछ और hi सोचा हुआ tha…wo मुद गया और मीणा की साडी को पेट से सरकते हुए बोलै पर मुझे आज का ब्रेकफास्ट बी करना hai…do na..kehte हुए जमील मीणा क पेट को साडी क ऊपर से hi चूमने लगा to…meena न अपने पेट से साडी को हटा लिया tha…ab पूरा नंगा पेट जमील क चेहरे पर चिपक बैठा था और जमील पागलो की तरह उस पर चुम्बन की बारिश करने लगा…

और इधर शायद मीणा खुद नह जानती थी की वो जमील क एक hi बात पर बिना विरोध किये कैसे मान gayi….aur अपने पेट पे हो रही चुम्बन का मजा लेने lagi…agar बात इतने को hi रुकने वाली नह thi…jamil मीणा का कोई विरोध न पाकर अपनी जुबान से मीणा क पेट और नाभि पर फेरने लगा जिससे जमील की थूक मीणा क पेट और नाभि पर जमने लगी और मीणा नशे में चूर चूर होने लगी…

अह्हह्ह्ह्ह जम्मीिलललल कककककक क्या क्क्क्कर रहे होओओओओ चुड़ो न ..अह्ह्ह्हह्हह ुह्ह्ह्हह्ह उम्म्म्मन यह बस भी करो आआआससीईई…

इस बार जमील ने मीणा क कमर को अपने हाथो से लपेट कर पेट क बल मीणा की जांघो पे सो गया ..इस वजह वो आसानी से मीणा क जिस्म क हर हिस्से में अपने हाथ फेर सकता tha…aur मीणा की साडी में छुपी हुई छूट तो अब ठीक उसके मुँह क सामने thi…jiska एसएस जमील को पागल बना रहा tha..jis औरत को वो पाने क लिए करीब 10- 15 दिन से मेहनत कर रहा tha…aaj वो उसीके बहो में अपने आप को खो जाने लगा tha…wahi मीणा बी कुछ देर क लिए भूल गयी थी की वो एक शादीशुदा घरेलु औरत hai…..wo बस जमील क हरकत को बिना रोके अपने जिस्म में जमील क चुम्बन और चाटने क वजह हो रही गुदगुदी क साथ बढ़ती गर्मी क ाऊसाह का मजा लेने लगी थी….

पुरे रूम में मीणा की हलकी सी अह्ह्ह्हह्हह इहह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह ुह्ह्ह्हह्हह्म्मणन्न haaa…jjjjaaaammmiilllll जीई आआब्बब्ब बाससस भी kkkkarrro……ahhhhhh मास्स्टट्ट्ट्ट haaaa…rrrruuuukkoooo ना प्प्ललललज़्ज़ सिसकारी गूंज रही thi..mahol को और न मादक बना रहा थी…

मीणा जस्मिल रुकने को तो बोल रही थी पर वो नह चाहती थी जमील ruke….wo इस पल को ख़तम hi नह करना जो छह रही उसे जो सुख मिल रहा tha…shayad वो खुद बी नह जानती thi…ki इ कैसा मीठा अनुभव है…. उसकी गर्मी और बाद गयी जब जमील ने मीणा की छूट पर अपने होतो से दस्तक देने शुरू कर दी इसे मीणा को एसएस हुआ की उसके गुलाबी छूट में कुछ हलचल सी उभर रागी hai..…waise तो जमील क हॉट और मीणा क छूट क बीच साडी घागरा और चड्डी का पर्दा था फिर बी जमील क होतो को वो अपनी नंगी छूट पर एसएस करने लगी thi…ek गैर मर्द उसके जिस्म क सबसे खास गुप्त अंग को चुने की कोशिश कर रहा tha..e गलत जानते हुए बी मीणा उसे रोकने की बजाय जमील क सर में हाथ फेरते हुए और निचे दबा कर उसे जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही thi…jamil मीणा की छूट को ऐसे सूंघ रहा था जैसे उसके हाथ कोई कीमती खुसभुदार फूल मिल गया हो और साथ hi साथ मीणा क जांघो को दबाते हुए मेर्न्स की छूट और कभी नाभि को प्यार से चूमने चाटने laga…dono एक अलग दुनिया में hi खोने जा रहे the…is वक़्त उनको वक़्त की कोई परवा बी नह thi…meena सब कुछ भूल कर अपनी छूट में बढ़रही हलचल जमील क होतो क मिलान से शांत करने क पूरी कोशिश कर रही thi..aur अपने कम्पटी आवाज़ में सिर्फ एक hi नाम बार बार ले रही थी अह्हह्ह्ह्ह जमील ji….mahhhh उह्ह्ह जमील जीईईई ुह्ह्ह्ह कक्कूउहचछहः हीईई ममममममम बायसस्स्स धीरे se..haaaa…..

इधर मीणा अपने धुन ने एक गैर मर्द क साथ अपनी जिस्म की गर्मी मिठाने की कगार पर कड़ी वक़्त की परवा नह कर रही थी तो उधर मीणा क पति को वक़्त की परवा thi…aur जब 8.25 तक बी उसकी बीवी घर वापिस नह आयी तो उसने अपनी बीवी को कॉल लगा hi डाला…

इधर एक अलग दुनिया में सैर कर रहे मीणा और जमील को मीणा की मोबाइल की रिंग ने हक़ीक़त में आने को मजबूर किया tha…ek hi झटके में दोनों अलग हो गए और एक दूसरे को देखने lage…jaise किसीने उन्हें अब नींद से जगाया ho…hosh सँभालते हुए मीणा ने अपना मोबिल देखा तो उसके होश hi उड़ गए the…ek तो 8.30 बजने hi वाले थे ऊपर से उसके जिस्म जिसका झकदार सिर्फ उसका पति है जिसका कॉल इस वक़्त उसके मोबाइल में बज रहा tha…wahi जिस्म पर आज एक गैर मर्द को वो हक़ जयते दे रही hai……meena को समाज नह आरहा था वो कॉल उठाये या nh…q की कही सारे सवाल उसके दिमाग में खड़े हुए the…kahi पति को पता तो नह चला मई मेले में नह hu…kahi वो मुझे ढूंढते हुए यहाँ तो नह aaye…ya कही पति मुझे ढूंढते हुए मेले में नह aaye…aur सहेलियों ने उसे बता तो नह दिया मई कब का निकल चुकी हु.. इ सब सोच कर मीणा दिमाग में वासना का नशा उतारकर डर फ़ैलगया tha…aur उसने अपने मैं में उठे सारे सवालो को एक साथ जमील क सामने बयां कर दिया जो इस वक़्त उसके बगल में बैठे उसे hi वासना की नज़र से देख रहा tha..…is बीच पति का कॉल बी कट होगया था…

तब जमील मीणा को तस्सल्ली देते हुए बोलै ऐसा कुछ बी नह मीणा बस तुम पहले रिलैक्स हो जावो और अपने पति को फ़ोन करो ..और ऐसे बात करो की जैसे कुछ हुआ hi nh…baaki मई हु संभल lunga…..pehle रिलैक्स हो जावो…

जमील की बात सुनकर मीणा ने अपने बढ़ती तेज सासो पर काबू पाने की कोशिश ki…aur कुछ देर चुप रही और जब वो थोड़ी रिलैक्स हुई तो उसने अपने पति को फ़ोन lagaya…aur hello कहा…

पति- hello मीणा ख़तम नह हुआ क्या तुम सहेलियों का मेले का मजा….

पति की बात सुनकर मीणा रहत की सास ली और सोची शुक्र hai..meri सोच गलत thi..pati तो घर में hi hai…par उसे अब बी डर था कही पति मेरी सचाई जानने क लिए तो ऐसा नह कह raha…aur वो boli…ha वो मई बस निकल hi रही thi..ate वक़्त वो संजना मिल गयी उससे बात कर रही thi..meena ने हड़बड़ाहट में अपने किसी सहेली का नाम ले लिया tha…jise वो खुद बी नह जानती thi…bas उसे किसी बी तरह इस वक़्त से निपट लेना था…

पति- ठीक है तो तुम अब आ रही हो न…

मीणा- बस निकल hi रही hu…q आपको कही जाना है क्या..

पति- है मीणा वो जमील भाई क साथ आज thoda…tum सामजी न…

मीणा- है बस मई 10 मीन्स में aayi…kehte हुए मीणा फ़ोन काट दी और मैं में hi boli…ab आपको कैसे बतावु मेरे पतिदेव क आपके जमील भाई क hi बाहोंमे मई हु.. हेहेहे और जमील को देखने लगी जो अभी बी मीणा को प्यास भरी निगाहो से देख रहा tha..aur मीणा को अछि तरह पता चल गया था इ कैसी प्यास hai..lekin वो कुछ नह कर सकती थी और मायूस चेहरा बना क नज़रे ज़ुका ली

इधर जमील समाज गया tha…aaj का खेल ख़तम हो चूका hai…uska मैं तो नह हो रहा की वो मीणा से अलग हो पर वक़्त और हालत को नज़र रखते हुए उन्हें आज क लिए जुड़ा हो न hi tha….aur वो उठ क खड़ा होगया तो मीणा बी बिना कुछ बोले कड़ी hogayi…..uski ख़ामोशी साफ़ बयां कर रही थी की वो बी वक़्त क हाथो मजबूर hai…kuch hi देर वो अपने कपडे ठीक कर ली और बहार जाने को रेडी होगयी तो जमील ने मीणा से बोलै एक बात पुछु मीणा…

मीणा- है पूछो न…

जमील- सच बोलो तुम बी मजा आरहा था न…

अब मीणा एक गैर मर्द को कैसे मुँह खोलकर बताती उसे बी इ सब ाचा लग रहा tha…aur वो बी रुकना नह छह रही thi…wo बिना कुछ बोले hi चुप हो गयी…

जमील मीणा की ख़ामोशी को अछि तरह पद चूका tha..aur वो मीणा को फिर छेड़ते हुआ पूछा बोलो न चुप क्यू हो…

मीणा अपनी ख़ुशी को छुपाते हुए boli…muje पता NH….ab चलो देर हो जाएगी…

जमील- है है क्या ऐडा है मेरी हुस्न की पारी की झूट बी ठीक से बोलने नह आता…

दोनों अभी बी एक दूसरे से चुपके हुए बहार की तरफ निकल रहे the…aur वैसे hi कदम बढ़ाते हुए बहार रस्ते तक आ गए the..aur दोनों अलग हो gaye…meena जाने hi लगी तो जमील ने मीणा से पूछा एक आखरी बात बोलो हम कब करेंगे मीणा….?

जमील क इस बात ने मीणा क बढ़ते कदम पे रोक लगा दिया tha…wo अच्छीतरह समाज चुकी थी जमील क्या करने की बात कर रहा hai…use समझने में देर नह लगी थी की जमील ने उसे आज डायरेक्ट चुदाई क लिए प्रोपोज़ किया hai…aur इ बात एक पतिव्रता क लिए गलत hai..aur एक संस्कारी औरत कभी ऐसा नह कर sakti…janate हुए बी वो जमील को मन नह करना चाहती thi…wo बस जमील को देख मुस्कुराते हुए boli…pagal हो ..आप कुछ बी बोलते ho…mai chali…bye…aur मीणा ने अपने कदम तेजी से अपने घर की तरफ badadi…..q की वो जानती thi…aur कुछ देर रूकती तो जमील और कुछ न कुछ bolta…meena को घर पहुंच ने में कुछ 5 hi मिनट लगे the…par इन 5 मिनट में वो 500 से ज्यादा बार जमील क वो आखरी बात को मैं में दौरा चुकी thi….aur उसे इस बात की ख़ुशी थी की जमील ने चुदाई क लिए बी उसे प्रोपोज़ किया बल्कि कोई जबरदस्ती नह ki…use जमील की इ ऐडा बहुत hi भा गयी थी…

जब वो घर आयी तो देखा की उसका पति बहार जाने क लिए तैयार बैठा hai…aur जैसे hi मीणा आयी तो वो मीणा से पूछा कैसा था मेला?

अब मीणा कैसे बताती वो कौनसे मेले में खो गयी thi…wo बस मुस्कुराते हुए बोली बस ाचा tha….aur वो बात को बदलते हुए बोली वैसे आपको मेरे वजह से लेट हुआ होगा न….

पति- है थोड़ा तो हुआ पर चलता hai…ha मई भूल hi गया था मुझे जमील भाई को फ़ोन लगाना है…

जमील का नाम पति क मुँह से निकलते hi मीणा क चेहरे पे मुस्कान च gayi….aur वो बिना कुछ बोले hi ..अंदर gayi…aur जब तक वो कपडे बदल कर बहार आती उसका pati…bahar जाने क लिए अपने बाइक पे रेडी था….
 
जमील का नाम पति क मुँह से निकलते hi मीणा क चेहरे पे मुस्कान च gayi….aur वो बिना कुछ बोले hi ..अंदर gayi…aur जब तक वो कपडे बदल कर बहार आती उसका pati…bahar जाने क लिए अपने बाइक पे रेडी था….

अब आगे….

मीणा बहार आके पति को देखने लगी लेकिन उसका पति बिना पीछे मुद क देखे hi वह से चला गया tha…aaj पहली बार था जो इस तरह उसका पति उसके बहार आने का इंतज़ार किये बिना hi चला गया tha..e बात मीणा की दिल को थोड़ी खायी thi…par आज वो इस मूड में नह थी की वो इसके बारे में soche…aur दरवाजा बंद करते हुए अंदर aayi..aur वो बाथरूम जाके फ्रेश होकर सीधे किचन में चली गयी thi…q की उसे रात क लिए डिनर की बी थोड़ी बहुत तैयारी करनी थी जो वो मेले में जाने से पहले आधी तैयारी की हुई thi…….usne घडी देखि तो रात क ,,9 बजने आये the…wo एक घेरि सास से अपने जिस्म को हल्का करते हुए किचन में काम में निपट गयी..

लेकिन आज उसका मैं कुछ चंचल हो गया tha…dinner रेडी करते वक़्त बी वो जमील क खयालो में खोयी हुई thi…use शाम का हर वाकया अपने आँखों क सामने घटता नज़र आ रहा tha…aur उसके चेहरे पे मुस्कान और जिस्म में एक लहार सी ुभल ने का अहसास दिला रही थी…

वो खुद यकीं नह कर पा रही thi…wo एक गैर मर्द क साथ एक बंजर पड़े घर में क्या करने गयी thi…..wo अछि तरह जानती थी एक पतिव्रता औरत ऐसे किसी गैर मर्द क साथ कभी नह जा सकती वो बी अँधेरे में जहा उनके सिवा कोई और न ho..…aur उसके मैं में सवाल खड़ा होने लगा था की वो पतिव्रता है या nh..uska संस्कार इस बात को गलत तेहरा ने की गवई देने लगा tha…..par मीणा को जो आज अपने जिस्म में बाद रही हलचल क सामने वो गवई बी बेकार सी लग रही thi..wo अपने आप से hi सवाल करने lagi…kya मिला है मुझे इतने साल पतिव्रता पैन निभाने ka..kya दिया है मुझे इस संस्कार ne…akelapan…ya gulami…jo पति बचे और परिवार क लिए karu…..pati क मर्ज़ी क कपडे पह्नु, पति क मर्ज़ी क खाना खा lu…pati क मर्ज़ी से दिन gujaru…aur तो और पति क मर्ज़ी हो तो hi उनके साथ बीएड पे नंगी हो jaavu…wo बी आधा नंगी कभी एक दिन फुर्सत से मेरे जिस्म को प्यार बी नह किये मैं किया तो अपनी जरुरत पूरी karli…kabhi इ नह सोचा की मई कितनी प्यासी हर दिन उनके प्यार क लिए तड़प थी हु.. …एक दिन चैन से सो बी नह sakti…subh उठु पति क लिए नाश्ता बनाने से शुरुवात रात सोने तक सिर्फ पति और परिवार क लिए hi दिन gujaru…kitne साल हुए मई अपने पति क साथ कही बहार घूमने फिरने jaakar….shayad औरत होने की यही सजा hai…seema में बंधी रहना…… लेकिन क्या पति होने का कोई फ़र्ज़ nh?…unhe बी तो औरत की इछाओ का ध्यान रखना chahiye…din में नह तो काम से काम रात में तो अपने पत्नी क साथ बैठकर 4 मीठी बाते करना बी तो chahiye….aaj बी देखो माना मई मेले में गयी thi…aur माना मुझे थोड़ी बहुत देर बी hui..par थोड़ी देर रुक क थोड़ा तो प्यार से बात karte…par उनको तो दारू की बोतल चढ़ाने की जल्दी thi…bina बोले hi चले गए ….जब मर्द अपनी ख़ुशी क लिए दोस्तों क साथ मजे कर सकता है तो औरत क्यू नह कर सकती…

है मैंने कोई गलत नह किया hai..jaise मेरे पति को अपना वक़्त दोस्तों क साथ बिताने ाचा लगता है वैसे मैंने कुछ देर जमील जी क साथ बिताया इसमें क्या गलत है अँधेरे में hi सही पर हमारे बीच कुछ गलत तो नह हुआ na…meena अपने आप को तसल्ली देने लगी थी….

अँधेरा का फयदा उठाने की तो जमील जी ने बिलकुल कोशिश नह ki…kitne प्यार से पेश आये वो मेरे saath..aur तो और मुझे कितने नाम से पुकारे wo…Rani, जान, हुस्न की pari……..sach hi टी कहते है जमील जी जब पहले मेरे पीछे लगे हुआ tha…mashooka बनके रखेंगे muje…aur अपनी बात बी रख ली….

मई उनके करीब अँधेरी सुनसान जगह पे अकेली होने पर बी उन्होंने मेरे साथ जबरदस्ती बी नह की और न मुझे इसका एसएस तक नह होने diya..…jab बी मई उन्हें आगे बढ़ाने से रोकती हु वो बिना कोई सवाल किये रुक जाते hai….aur आज बी उनके पास ऐसा मौका था की वो चाहे मेरे साथ कुछ बी कर सकते थे पर nh…unhone तो कुछ बी नह kiya….kitna ख्याल रखते है mera…aur इसके बदले वो मेरी पेट और नाभि से कुछ देर छेद चढ़ कर्मा चाहते है तो इसमें गलत क्या hai…muje बी तो मजा आता hai..aaj तो मुझे इतना मजा आरा है था की मैं खुद उस गांधी पेपर्स पर लेट कर अपना पूरा नंगा पेट जमील जी को सौपना छह रही thi…kaash पति फ़ोन करके मजा ख़राब न karte…….kitna सुकून मिल रहा था muje…unke होतो में तो जादू hi है कितने प्यार से अपने होतो को मेरे नाभि पे चलते hai..jaise कठोरी से मक्कन निकल रहे होतो से..13-14 साल की शादीशुदा जिंदगी मेरे पति ने कभी बी मेरे नाभि से इतना प्यार नह किया ha..jitna जमील ने आज और पिछले एक दो दिन में किया है…

सच बात तो इ है की जमील जी hi वो मर्द है जिसनहोने मेरी खूबसूरती को पहचाना जिसंहिंरे मेरी जिस्म में एक नयी उमंग jagayi…kaise दूर करू उस इंसान ko…nh नह मई जमील जी को दूर करने की बात को सोचूंगी बी नह…..

पर समाज क नज़र से हम दोनों का रिश्ता गलत hi होगा na…par हम थोड़ी पुरे समाज क सामने …एक दूसरे को प्यार jatayenge….savadhani तो बरसनी hi hogi…e बात जमील जी बी अछि तरह समझते hai…wo कभी ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे मुझे समाज क सामने सर झुकना पड़े….

मीणा गेहृ सोच में डूबी हुई थी पर उसके मैं में जमील क खिलाफ एक बी शब्द नह निकल रहे the…aur इस बात से वो खुद एक्सेप्ट कर ली की वो जमील क प्रति कुछ ज्यादा hi आकर्षित हो गयी है…

ओह्ह्ह्ह होऊ जमील जी इ कैसा जादू किया आपने mujpar…pata नहीं आपकी सोच मुझे कहा कहा ले jayegi….ohhh है ले जाएगी क्या जरूर ले जायेंगे shayad…aur उसे वो बात याद आयी शाम को जब वो दोनों रूम क अंदर गए the…aur मीणा ने उसे छेड़ते हुए कहा tha..dusri जगह नह मिली kya….tab जमील में जवाब में जो कहा था हमारी मिलान की निशानी …….उसके बाद देखो तुम कहा कहा ले जाता हु….

इसका मतलब जमील जी मुझे बहार बी ले जाना चाहता hai…kitna प्यारा hai…par मई उनके साथ जावूँगी बी कैसे? और बी चांस उनके साथ गयी तो कहा? कोई देख बी सकता hai…nh nh…muje यकीं है अगर ऐसा मौका मिलेगा तो जमील जी मुझे ऐसी जगह ले जायेगा जहा हमे कोई नह पहचान पायेगा और खास कर क muje…iska मतलब तो कही दूर hi hoga…par इतना दूर मतलब कही मुझे उनके साथ रुकना पड़े तो वो बी रात क liye…ek hi रूम me…kya जमील जी हम दोनों लिए अलग बीएड लगवाडेंगे ….नह मुझे तो ऐसा नह lagta..jo आदमी मुझे एक गाँधी जगह पर पेपर्स बिचके मुझे बीएड पे आने का प्यार भरा इनविटेशन दे सकते है वो आदमी ऐसे खास मौके पे अलग बीएड कैसे लगवा सकता है… इसका मतलब मई और जमील जी एक साथ एक hi बीएड पे वो बी पूरी रात वो बी एक दूसरे क bahome….e बात सोचते hi मीणा क नस नस में खून का संचार तेज बढ़ाने लगा और उसकी निघ्त्य क अंदर कमर क निचे कुछ ुंचही गुड्डूड़ी सी होने लगी thi..meena को समझने में देर नह लगी thi..is गुदगुदी क पीछे का rahasya.,.aur उसकी आंखे शर्म और लज़्ज़ा क मरे मदहोशी में बंद होगये….

मीणा फिर से अपने आप को तसल्ली देते हुए.. ची मई इ क्या सोच रही hu…Jamil जी ऐसा कुछ नह करना चाहते…. अगर उन्हें मेरे साथ करना hi होता तो आज वो मौका हाथ से जाने नह dete….ek बार फिर से मीणा क दिल ने जमील की वाककट की थी…

सच बात तो इ थी की इ मीणा की दबी हुई हवस थी जो धीरे धीरे जग रही thi…aur जमील क साथ हमबिस्तर होने क लिए सपने सजा रही thi….aur मीणा की चेहरे पे इस वक़्त छायी हुई हलकी सी मुस्कान इ सब होना पसंद कर रही थी. . .और मीणा बी इस बात को कुछ हद तक जान गयी thi..par एक औरत जिसने आज तक अपने पति क सिवा किसी गैर मर्द क साथ गलत करने का सोचा बी न हो वो इतनी आसानी ने कैसे मान लेती की उसकी हवस एक पराये मर्द क लिए जाग रही hai…wo फिर से अपने आप को सँभालते हुए मई बी न कहा से कहा पहुंच गयी….

पर उसके दिल में अब बी एक सवाल दस्तक दे रही thi…ki क्या जमील जी मेरे साथ वो सब करना चाहते है जो एक पति पत्नी क बीच hi होता hai….nh नह जमील जी ऐसे नह hai…agar वो ऐसे नह है तो हम करेंगे? इसका मतलब क्या है.. क्या करने की बात कर रहे थे वो…

मीणा अछि तरह जानती थी की जमील आज शाम कुछ देर पहले की कही हुई बात "हम कब करेंगे…" पर मीणा का दिल अब बी जमील को गलत न ठहरा ने क लिए इस बात क खिलाफ साबुत ढूंढने की कोशिश करने में लगी thi…aur काफी देर सोचने क बाद बी जिसका कोई साबुत न मिला to…e जमील जी बी na..kaise कैसे मज़ाक करते है जैसे मई कोई 18 साल की लड़की hu…wo इ अछि तरह जानते hai…mai एक शादीशुदा महिला hu…sach में वो पागल है…

Par..par…par….kya कोई शादीशुदा औरत बी इ सब कर सकती hai?…q नह कर sakti..wo बी तो एक औरत hi है.. उसके दिल में बी कई सारे सपने सजे हुए होते hai…aise कितने की महिला है जिनके पति क अलावा किसी और क साथ बी रिश्ते जुड़े हुए hai…iska मतलब क्या जमील जी मुझे उसी तरह क महिला ो में एक समझते hai…nh नह वो बिलकुल ऐसा नह सोच sakte..kuch पल क लिए मान बी सकती हु जमील जी मेरे साथ वो सब कुछ करना चाहते होंगे जो समाज क नज़र में गलत hai…par वो मेरे बारे में ऐसा घिलौना ख्याल कभी नह रख सकते की मई ऐसी वैसी hu..…agar ऐसा होता तो वो मुझसे प्यार का दवा कभी नह करते..

लेकिन जमील जी ने खुले आम जब मुझे चुदाई क प्रोपोज़ किया तो मैंने उन्हें न में जवाब क्यू नह diya…q उनकी बात पे मुझे गुस्सा नह aaya…muje तो उन्हें उसी वक़्त साफ़ मन करके आना चाहिए tha..par मैंने क्यू नह मन नह kiya….kahi मेरे जिस्म को बी इ बात अछि तो नह lagi…..wo मेरे नाभि से खेल कर hi मुझे इतनी ख़ुशी दे ते है तो सोचो अगर वो मेरे पुरे जिस्म क साथ खेलेंगे to….kitna मजा देंगे…. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जामिल ji…aap तो मुझे पागल बना रहे ho…..pata नह मई क्यू ऐसी गाँधी बात कैसे सोच रही hu…lekin एक बात तो सच hai..Jamil जी जब मुझे बहो में लेते है तो एक अलग hi मजा आता hai..ek नशा सा च जाता है जिस्म में और जी करता है उनके बाहोंमे खोटी hi rahu…iska मतलब कही इ तो नह की मई बी जमील क साथ हमबिस्तर होना पसंद कर रही hu..q न करू कितनी ख़ुशी मिलती है मुझे उनके साथ और उनका हथियार बी तो कितना कड़क है लम्बा mota……kisi लोहे की रोड की tarah…aaj बी मेरी नजर अँधेरे में बी उनके हथियार को ढूडने की कोशिश कर रही thi..aur शायद पति का फ़ोन नह आता और कुछ वक़्त होता तो शायद जमील जी अपने हथियार को मेरे हाथो में दे देते और puchte…isse प्यार करोगे या nafrat??….nh नह कितनी गाँधी हो गयी हु mai…mai एक पतिव्रता hu…muje पति क अलावा किसी क बहो की आवश्यकता nh…sorry जमील जी ..मई आपके साथ वो सब कुछ करना नह चाहती जो मेरे संस्कार क खिलाफ ho..mai मेरी मर्यादा का सीमा तोड़ नह sakti…..mere लिए मेरे पति hi सब कुछ hai…mai ऐसा कोई काम नह कर सकती जिससे मेरे पति क इज्जत पे दाग लग जाए…

मीणा इ सब बात सोच कर अपने बहक रहे कदम को रोकना तो छह रही thi…par उसका मैं उसका जिस्म जमील क साथ अपने कदम मिलाने क लिए तैयार बी हो रहा tha….lekin अपने कदम को उसके संस्कार क रोकने पर मायूसी बी हुई थी जो उसके चेहरे पर साफ़ नज़र आ रही thi…use लग रहा था जैसे उसकी साड़ी खुशियां एक पल में hi छीन ली गयी हो…

उदास मीणा की नज़र घडी पे पड़ी तो वो चौक गयी थी 10 बजने वाले the..aur उसका पति किसी बी वक़्त आके डिनर क लिए पूछ सकता tha…wo कुछ देर क लिए सब कुछ भूल कर डिनर को रेडी करने lagi….wo डिनर बनाने की आखरी स्टेज पे तो थी पर उसके चेहरे पे अब बी उदासी छायी हुई thi…tab उसे दूर बेल्ल की आवाज़ सुनाई दी तो वो बहार जाके पति क लिए दरवाज़ा बी ओपन करदी तो शराब की बदबू उसके नाको से होते हुए उसके शरीर क भीतर संचार करने लगी और वो मुँह मोड़ क पति से boli..chi..kitni शराब पी कर आये हो आप पुरे घर में शराब की बदबू फ़ैल रही hai….aur वो बिना दरवाज़ा बंद किये hi गुस्सा दिखते हुए अंदर चालीगयी..

मीणा ने अपने दिल में बसी उदासी को गुस्सा का रूप देकर अपने पति पे निकल लिया था.. …और उसका पति बी मीणा क गुस्से को जाइज़ समाज कर चुप रहा और अपने हाथो में थमी हुई एक पॉकेट को अंदर किचन में डाइनिंग टेबल पर रख कर कपडे बदल कर फ्रेश होने क लिए बाथरूम चला गया..

बाथरूम से बहार आने तक बी मीणा ने उस पॉकेट को नह देखा हुआ देख कर उसका पति डाइनिंग टेबल पे बैठगया और बोलै अरे मीणा इ तुम्हारे लिए चिकन टिक्का ले आया tha…chalo दोनों बैठ क एक साथ कहते hai..meena का पति अपने ृति हुई पत्नी को मानाने की कोशिश करते हुए बोलै…

सच बात तो इ थी की मीणा उसके पति पर गुस्सा नह थी वो जानती थी की उसका पति कभी कभी hi ड्रिंक्स लेता है वो बी लिमिटेड. पर उसकी उदासी ने उसे उसके पति पे गुस्सा करने में मजबूर कियस हुआ tha..wo अपने गुस्से को थूक कर पति से पूछी आज इ अचानक चिकन टिक्का कैसे? अगर आप कहते तो मई इ सब घर में hi बना देती न…

पति- है पर कभी कभी बहार का टास्ते कर लेना chahiye..ho सकता hai…ghar से बी अछि हो….

पति ने इ बात खाने क बारे में तो कही थी पर इ बात मीणा क दिमाग पर असर कर गयी thi..wo मैं hi मैं boli..ha मेरे पतिदेव मुझे बी तो बहार का hi खाना पसंद आया hai..par आपके वजह से मई खा नह पा रही hu..par पता नहीं आगे क्या होगा…

क्या सोच रही हो मीणा खाना लगा दो na…pati क आवाज़ ने मीणा क सोच पर रोक लगा दी thi…aur वो दो प्लेट में खाना परोसकर पति क सामने बैठ गयी और चिकन ठिक्क का पैकेट खोलते हुए पति से puchi…aaj आपको मुझपे इतना प्यार कैसे आया जो मेरे लिए चिकन ठिक्क ले आये …मीणा ने छेड़ते हुए पति से पूछा…

Pati-tum तो ऐसी बात कर रही हो जैसे मई तुम्हारे लिए कभी कुछ लाया hi नह…

Meena-are ऐसी बात नह मेरे पास जो कुछ बी है वो सब आप hi की तो दें hai…mai इ खाने की बात कर रही hu…e कहते हुए मीणा ने अपने पति क सम्मान बढ़ाने की कोशिश की thi…jise सुनकर उसका पति बी खुश हुआ

पति - दरअसल इ मैंने नह लिया…

मीणा को पता चल गया था की होना हो इ जमील जी का hi खेल hai..q की उसका पति तो आज जमील क साथ hi पार्टी में गया tha…aur वो अनजान बने अपने पति से puchi…aapne नह लिया तो क्या होटल वालो ने आपको गिफ्ट Diya…meena गलती से बी जमील का नाम अपने पति क पहले अपने जुबान पर लेना chahti..wo अपने आप को एक अनजान मासूम साबित करने जा रही thi..aur अपनी नज़रो में उत्सुकता भरे पति को देखने लगी

पति - होटल वाले क्यू denge…e तो जमील भाई ने खास तुम्हारे लिए भेजा है..

मीणा एक पल क लिए चौक गयी और सोचने लगी अब जमील जी इ क्या कर रहे hai…unki ऐसी हरकत से पति को मुझपर शक हुआ to…apne मैं में चल रही सोच को जाहिर न करते hue..meena पति से पूछी- मेरे लिए क्यू? मीणा ने ऐसा पूछा था जैसे उसे जमील क साथ कोई लेना देना hi नह…

पति- अरे बाबा इसमें चौकाने की क्या बात hai…wo बस हम दोनों ने एक प्लेट लिया था ड्रिंक्स क saath..hume ाचा लगा तो जमील भाई ने और एक प्लेट पार्सल आर्डर किया और कहा भाभी जी हाथ का खाना चक चूका hu…lekin मैंने भाभी को अभीतक कुछ बी नह diya…aur हम लोग तो पार्टी क बहाने यहाँ वह अपने मैं पसंद कहते hi रहते hai…par भाभी ज्यादा बहार नह जाती है न ऐसे होटल वगैरा me…to आज भाभी क लिए कुछ तो बनता hi है…

मीणा पति की बात सुनकर एक अलग hi दुनिया में अपने आप को फिर से जमील क साथ खोना छह रही थी पर उसका पति सामने होने क वजह से वो चुप rahi..…wo मैं में hi बोली थैंक यू जमील जी कहते हुए मीणा ने एक चिकन लेग पीेछे को मुँह दाल कर अह्ह्ह्हह मस्त है…

पति- है बहुत टेस्टी है…

मीणा- आप ठीक कह रहे थे कभी कभी बहार का बी खाना टास्ते करना chahiye..ek अलग hi टास्ते होता है…

पति - हम्म्म्म

लेकिन मीणा का पति जान नह पाया था मीणा क्या टास्ते करने की बात कर रही hai…wo बस शराब क आधे नशे में खाने में मग्न tha..aage बैठी मीणा चिकन टिक्का को इस तरह खा रही थी जैसे वो जमील क जिस्म को काट काट क घायल कर रही हो….

कुछ देर की ख़ामोशी क बाद मीणा अपने पति को छेड़ते हुए boli…Dekho आपके दोस्त जमील जी बी मेरा ख्याल रखने लगे है ab.hehehe…unhe मेरी तरफ से थैंक्स बोल देना…

पति- मई कोई पोस्टमैन हु kya…agar थैंक्स कहना है तो तुम खुद hi बोलो जब कभी बी वो आएंगे…

मीणा- मैं में hi है मेरे पतिदेव सिर्फ थैंक्स नह मई उन्हें स्पेशल थैंक्स बोलूंगी वो बी मेरी अंदाज़ में वो बी कल सुभे आपके काम पर जाते hi…. हेहही

बात करते करते दोनों मिया बीवी ने खाना ख़तम करदिया tha…aur रूटीन की तरह उसका पति हाथ साफ़ करके बैडरूम में चला गया सोने क लिए तो मीणा किचन साफ़ करके वो बी बैडरूम चालीगयी अपने पति क साथ हमबिस्तर होने ko…lekin जैसे hi उसने देखा उसका पति खर्राटे लेते हुए सो चूका hai…meena को कुछ सज़ा और वो हॉल में आके बैठी और पहले टीवी ों की ताकि पति को कोई शक न ho..aur अपना फ़ोन उठाकर जमील की मश्ग ki…thank यू…

वह जमील बी खाना खखर सोने की तैयारी कर रहा tha…aaj उसके लिए खास दिन tha…isliye आज कुछ ज्यादा hi खुश tha…q की आज उसके कहने पर मीणा जो उसके साथ आयी thi….wo जान गया था की मीणा अब उसकी हो चुकी hai…aur वो पिछले 4-4½ महीने अपने जिस्म में ुभल रही काम वासना को जल्द hi मीणा क जिस्म में उतारने क लिए बेकाबू होताहै tha…wo जनता tha…uske साथ बहुत बार कलपद हो चूका hai…par उसकी वजह तो वो खुद बी tha…usne hi मीणा पर अपना चाप छोड़ने क लिए मीणा का विश्वास जितने क लिए अपने आप पर काबू पाया हुआ tha…aur उसका नतीजा आज मीणा उसके साथ ऐसी जगह पे आयी थी जहा पे एक संस्कारी पतिव्रता औरत आने क बारे में सोच बी नह sakti..jamil अपनी जीत की ख़ुशी में hi था की उसके मोबाइल में मीणा क मश्ग देख कर वो अपनी ख़ुशी को संभल नह पाया और तुरंत रिप्लाई Kiya…kis बात क लिए थैंक्स

मीणा- वो चिकन ठिक्क भेजा था न आपने…

जमील- ाचा लगा…

मीणा- हम्म्म्म टेस्टी था…

जमील- पर तुम्हारे नाभि में जो टास्ते hai…usse काम hi है..

मीणा- शरमाते hue…chup करो…

जमील- सच मीणा तुम्हारे जिस्म में वो जादू hai..jo मुझे बार बार तुम्हारे करीब ला रहा है…

मीणा- अब बस बी करो कितनी तारीफ़ करते हो meri..thak नह जाते क्या?

Jamil-mera बस चले तो आज पूरी रात तुम बहो में भरके तुम्हारी तारीफ़ hi करता राहु..

अब मीणा को बी जमील क साथ चाट करने में मजा सा आने लगा tha..uska बी जमील को छेड़ने का मैं किया tha..wo अपने चेहरे पे एक हलकी सी मुस्कान लाते हुए

Meena-acha शायद आप भूल गए रात में मेरे पति बी होते hai..unke सामने मुझे कैसे बाहोंमे लोगे हेहेहे

जमील- है वही तो प्रॉब्लम hai…par मुझे यकीं hai..meri हुस्न की पारी मेरे लिए एक बार तो ऐसा मौका जरूर banayegi..q मौका बसनावोगी न…?

जमील ने मीणा की छेड़छाड़ को मीणा क लिए hi एक सवाल बना दिया था…

मीणा अपनी hi बातो में फास चुकी thi..lekin सच बात तो इ थी की मीणा ने बी इ बात कुछ देर पहले hi सोची हुई thi…aur उसका दिल रोमांचित हो utha..aur वो जमील को क बात सवाल को अपने जवाब में सहमति जताते hue…ha बोलने hi वाली थी तो उसे कुछ लगा और उसने अपने जवाब को बदल दिया

मीणा- आप बी न कुछ बी सोचते हो…

लेकिन मीणा क दिल का एक कोना कही न कही उस हद तक सोच रहा अगर ऐसा मौका कभी उसे मिल गया तो… उस रात मई जमील जी क बहो में खो जाती शायद उनके प्यार भरे बातो se…lekin छह कर बी वो इ सब कुछ कर नह सकती थी ..और उसने बात को बदलने की कोशिश करते हुए boli…waise आप बहुत बड़े बदमाश ho….kya जरुरत thi..pati क हाथो चिकन भेज ने ki…kahi उन्हें हम पर शक हो जाता तो…

जमील- अरे ऐसा कुछ नह hoga…yakin करो मुझपर..

मीणा- यकीं तो करती हु इसलिए तो आपके साथ इतनी खुलमिल गति hu...par इ बात आज hi पहली और आखरी बार ok…muje और रिस्क लेना नह hai…waise आलरेडी तुम सुबह ब्रेकफास्ट खिलने का रिस्क तो ले चुकी hu…pata है कितना डर लगता है मुझे…

जमील बी जनता था हर दिन सुबह मीणा क घर जाना इतना आसान नह जितना वो समझता है पर उसे अपनी मंज़िल पाने क लिए फिलहाल इ रिस्क लेना hi tha…aur वो मीणा से बोलै

जमील- है मीणा पता है मुझे पर मई इसका सलूशन जल्द से ढूंढने की कोशिश करूँगा..

मीणा- कैसा सलूशन?

जमील कुछ सोचते हुए bola..bas सोचूंगा तो कोई न कोई रास्ता मिल hi जायेगा जिससे तुम्हारा पति बी शक नह कर payega…aur हमारे मिलान में कोई बढ़ा बी नह आएगी..

मीणा- हम्म मई बी तो यही चाहती हु…

जमील- पर एक बात तुम मेरे साथ चाट कर रही ho…is वक़्त तुम्हारे पति पूछेंगे तो क्या बोलोगी

मीणा- नह वो सो चुके है…

जमील- और तुम नह सोई क्यू?

मीणा - नह बस सोने hi जा रही थी सोचा आपको एक थैंक्स बोल दू…

Jamil-tere पारी इतने जल्द hi सोते है क्या…?

जमील का पूछने का मकसद अलग hi tha…darasal जमील को लगा था मीणा और उसके पति का प्रोग्राम अभीतक शुरू नह हुआ है ..पर मीणा समाज नह पायी और वो जवाब देते हुए boli…wo जल्द hi सो जाते है…

जमील को इ बात कुछ इंटरेस्टिंग लगी और वो सचाई जानने क लिए थोड़ा उत्सुक होगया था पर उसे यकीं था मीणा डायरेक्टली पूछेगी तो जवाब नह देगी तो वो इंदिरेक्ट्ली pucha…har दिन इतने जल्द hi सोते है kya…jamil क इरादे से बेखबर मीणा जमील को सब बताते चली

मीणा- है दरअसल वो 10 या 10.30 तक hi सो जाते हेट आज hi थोड़ा लेट हुआ उन्हें..

जमील- और तुम?

मीणा- मई सब क्लीन करके सोने तक रात क 11 बजाते hai..aur कभी मई बी जल्द hi सो जाती हु…

अब जमील क चेहरे पे एक कातिल से मुस्कान से भर गया tha…baat को आगे बढ़ाते हुए वो पूछा …तो आज क्यू नह soyi..mind नह आयी क्या…

अब मीणा क्या जवाब देती …सच बात तो इ थी की जमील क खयालो ने उसकी आज की नींद hi चीन ली thi…wo बस जवाब देते हुए बोली नह ..बस थोड़ी देर में सो जावूँगी…

जमील- ाचा मुझे लगा की आज मेरी जान को आज मेरी याद आगयी….

मीणा- हम्म्म्म ऐसा कुछ नह hai…meena अपने बात को जस्टिफाई करने की कोशिश करते हुए boli…aur उसकी नज़र दीवार पे तिकी घडी पे पड़ी तो 11.45 बज चुके the…tab उसे ख्याल आया की उसे सुबह उठाना hai…aur पति क लिए टिफ़िन ब्रेकफास्ट बनाना hai…to वो जमील को मश्ग ki…acha जमील जी मुझे बी नींद आ रही है ..मई सोने जा रही हु….

लेकिन जमील क मैं में अब बी शरारत जग रही thi…aur उसे कुछ सज़ा और उसने तुरंत टाइप Kiya…janti हो मीणा सोने से पहले एक काम करेंगे न तो नींद बहुत अछि आती है…

मीणा को इ मश्ग कुछ इंटरेस्टिंग लाग्स और वो पूछी कौनसी…??

उधर से तुरंत मश्ग aaya…lekin मेरा कहना तुम ाचा नह लगेगा…

मीणा कुछ सोच में पड़गयी लेकिन उसे कुछ सुजस नह ..वो मश्ग टाइप की "अरे नह बाबा मई क्यू बुरा मानूंगी जब तुम मेरे अचे क लिए hi बोल रहे हो" बोलो न…

जमील- सोच लो मीणा तुम बुरा तो नह मानोगी न…

मीणा को लगा जमील उसे जानबूजकर सत्ता रहा hai…aur वो बोली अब बोलो बी या ऐसे hi पहेलियाँ बनाते रहोगे…

जमील- ठीक है तो सुनो………… …………. सोने से पहले एक बार सुसु जरूर कर lena…..sukun की नींद आएगी…. हेहेहे

जमील का मश्ग पढ़कर मीणा की हसी फैट गयी और वो रुकने का नाम hi नहीं ले rahi..thi….use क्या जवाब देना hi समाज नह आरहा tha..wo बस हस्ते rahi…haste rahi…aur कुछ सोच कर टाइप ki…thatttt pagal…good नाईट

लेकिन मीणा की हसी ने उसके पति को निद्रालोक से जगा दिया था….

अरे मीणा क्यू अकेली में है रही हो इतनी रात में सोना नह kya..tv बंद करके सोने आवो..

पति क आवाज़ ने मीणा क हसी पर थोड़ी रोक लगा दी थी ..और वो टीवी बंद करके हस्ते हुए बैडरूम में आयी तो उसके पति ने pucha…q इतना है रही हो ….वो बी ऐसे वक़्त पे…

मीणा क्या जवाब deti…wo बस पति से इतना बोली की टीवी में जोके ाचा लगा tha…jise देख हसी आगयी…

पति- ठीक है अब सो जावो…

मीणा- हम्म्म

और वो पति क बगल में दूसरी तरफ मुँह करके नींद क अघोष में chaligayi…par नींद में बी उसके चेहरे पर वही मुस्कान छायी हुई थी …

कुछ hi देर में मीणा ग़हरी नींद में तो खो गयी थी पर उसे थोड़ा बी अंदाज़ा नह था की जमील क साथ वो कितने घुल मिल गयी hai….aage जाके इसका अंजाम क्या होने वाला है….

और वह जमील मीणा क साथ कुछ देर से चल रही चाट से समाज गया था की मीणा और उसके पति क बीच डेली कांटेक्ट नह hota…aur वो अंदाज़ा बी लगा चूका था शायद काम hi होता है इसका मतलब मीणा की प्यास कुछ काम hi भुजती hai…agar मई सही हु तो मीणा एक नयी नवेली दुल्हन से काम नह …फिर तो मजा आएगा मीणा को भोगने me…aur वो अपनी मैं में कल क लिए प्रोग्राम बनाते हुए सो गया…

अब दूसरा दिन मीणा और जमील क जिंदगी में क्या रंग लाया इ जानने क लिए बने रहे… . और कमैंट्स जरूर करे…
 
अब आगे

अगला दिन मंडे

मीणा रोज़ाना की तरह सुबह सुबह अलार्म की आवाज़ से उठ गयी thi…lekin आज उठाते वक़्त बी उसके चेहरे से मुस्कान गायब नह हुई thi…meena आज ज्यादा hi खुश नज़र आरही thi..ek पल वो बैठकर अपने पति पर नज़र दौड़ाई तो वो अब बी सो रहा tha…meena बीएड पे hi बैठ गयी और अपनी आंखे बंद किये कल उसके साथ बाईट हुए हर एक वाक्य को याद करने lagi….ek तेज़ ख़ुशी की लहार उसके जिस्म में सञ्चालन करता हुआ महसूस करके उसके चेहरे की खूबसूरती और बी बाद गयी thi..wo सीधे बाथरूम जाके नहाने lagi…jab से जमील सुबह आने लगा था मीणा ने अपने रूटीन में थोड़ा बदलाव किया हुआ tha…usse पहले वो ..सब काम निपट कर पति क ऑफिस जाने क बाद नाहा लिया करती थी. …पर अब वो सुबह उठ कर पहले नाहा लिया करती thi..uske बाद hi रूटीन काम में व्यस्त होती थी…

नाहा कर जब मीणा बहार आयी तो उसे लगा आज कुछ ऐसे कपडे पह्नु जिसे देख कर जमील जी खुश हो jaaye….par पति ने पूछ लिया तो क्या जवाब दूंगी.. .और मुझे सजा हुआ देख कर जमील जी बी क्या सोचेंगे की मई आज स्पेशली उनके लिए hi तैयार हुई hu…nh नह इ सब ठीक नह rahega…lekin जमील जी क लिए आज मुझे कुछ तो करना hi होगा क्या karu….tab उसे याद आया की कुछ hi दिन पहले उसने एक निघ्त्य खरीदी हुई hai…jo उसके जिस्म को बिलकुल टाइट फिटिंग होने क वजह से उसे पहना ठीक नह समाज कर कप्बोर्ड में hi राखी हुई hai…ha वही पहन ले थी hu….jamil जी मुझे उस टाइट निघ्त्य में देख क खुश बी होजाएंगे और उन्हें पता बी नह चलेगा ki…maine उनके लिए hi ऐसी निघ्त्य पहनी हुई hai….lekin उस निघ्त्य में से तो मेरे जिस्म की उभर साफ़ नज़र आती है, क्या मेरा इस तरह किसी गैर मर्द क सामने जाना ठीक rahega……ha इ तो hai…par मई थोड़ी पुरे बाजार में ऐसी जाने वाली hu…sirf जमील जी क सामने hi तो जाना चाहती हु …इसमें बुराई क्या है जब मई जमील क साथ बहो में बहे डालके चल सकती hu…unhe अपने जांघो पर सोने दे सकती hu…to ऐसी निघ्त्य उनके सामने पहन ने में क्या बुराई hai..par pati?…agar उन्हें पसंद नह आयी to?…..ha उन्हें बी तो मई निराश नह कर सकती हरगिज़ nh…akhir मेरे जीवन साथी है वो… ठीक है एक बार पहन क तो देखती hu…aur अगर उन्हें पसंद न आये तो urardungi…aur मीणा नहाने क बाद अपने बैडरूम गयी और कप्बोर्ड से उस निघ्त्य क साथ अपने सारे पहने वाले कपडे निकले और फिर बाथरूम जाके कपडे बदलने lagi…darasal नहाने क बाद बी मीणा न वही निघ्त्य पहनी थी ..जो उसने कल पहनी हुई थी…

कुछ देर बाद मीणा एक टाइट मैरून रंग की निघ्त्य पहने हुए बहार aayi..meena उस निघ्त्य में बाला की खूबसूरत लग रही thi…uske जिस्म क हर एक अंग निघ्त्य क ऊपर से hi दर्शा रहे the…uske भीगे हुए बदन से निघ्त्य और बी चिपकने से नज़ारे को और बी सेक्सी बना दिया tha….nighty को छाती क पास 3 बटन्स थे जिसे खुलने पर शायद उसके बड़े बड़े बूब्स पुरे नज़र आजाये. इस वक़्त तीनो बटन डालने क वजह से मीणा क बूब्स उस निघ्त्य में कैद अपनी मोटापन और घेहरायी को साफ़ दर्शा रहे the.uski भरी भरकम नितम्ब तो आज अपना संपूर्ण सौन्दर्यता को दिखने क लिए और बी उत्तेजित लग रहे the…kulmilakar कहे तो आज इसवक्त कोई 60-70 साल का बुड्ढा बी उसे देखता तो अपने लुंड को मसलने से नह रोक paata….itni मस्त और सेक्सी लग रही थी मीणा…

खैर मीणा को अब इस बात पे कोई ज्यादा दिलचस्पी नह thi……q की वो अपनी tàarif जमील से सुन्ना चाहती thi…aur ब्रेकफास्ट बनाने में बिजी होगयी..

कुछ एक घंटे क म्हणत क बाद मीणा ने रोज़ाना की तरह पति क लिए टिफ़िन और सब क लिए ब्रेकफास्ट बी रेडी kiya…aur तब तक उसका पति उठकर रेडी होकर ब्रेकफास्ट क लिए डाइनिंग टेबल पर बैठ gaya..aur मीणा ने अपने पति को ब्रेकफास्ट सर्वे किया और उनके बीच इधर उधर की बाते होने लगी….

लेकिन मीणा गौर कर रही थी की उसका पति को आज मीणा में कुछ बी अलग नह दिख रहा hai….wo कुछ बोले बिना hi ब्रेकफास्ट कर रहा hai..is बात से मीणा को थोड़ा गुस्सा बी aaya…kaisa पति hai..aaj मैंने इतनी टाइट फिटिंग निघ्त्य पहनी हुई hai..kam से काम कैसा लग रहा है इ तो बोल सकते the…acha नह लगा तो काम से काम इ बी तो batate…thik नह लग रहा hai…aur मीणा से रुका नह गया और वो अपने पति को पूछ hi liya….suno…maine कुछ दिन पहले इ निघ्त्य ली thi…kaisi लगती है mujpe…muje तो बहुत टाइट लगती hai…meena में जानबूजकर टाइट लगनेवाली बात बताई थी..

दरअसल मीणा क पति ने किचन में आते hi मीणा को ऐसी टाइट निघ्त्य पहने हुए देख लिया tha…use इ बी लगा था शायद मीणा ने नयी नयी निघ्त्य ली hai….aur उसने अपनी बीवी की उभरे हुए जिस्म को उस निघ्त्य से साफ़ दर्शाता हुआ बी देख लिया था जो उसे पसंद नह आया था.. पर वो सुबह सुबह मीणा को कुछ बी बोलकर नाराज़ नह करना चाहता था …..वो इस बारे में उससे शाम को घर आते hi बात करने वाला tha…par जब उसकी बीवी ने hi उसे इस बारे में पूछ लिया तो उसे मुँह खोलना hi पड़ा..

है मीणा अछि तो लगती hai..par मुझे लगता है ..इ निघ्त्य काफी टाइट है …और शायद तुम नह दिख रहा hai..isme तुम्हारे जिस्म क हर एक करवट देखने वाले को साफ़ नज़र आ jayegi..…..tum सामजी न मई क्या कहना छह रहा हु ..मीणा क पति ने अपने मैं की बात मीणा को बताने की कोशिश की थी..

मीणा अपने पति क मुँह से इ बात सुनकर खुश हुई थी …क्यू की उसे लगा जमील मुझे ऐसे देख लेगा तो क्या karega….kitna खुश hoga…..par वो इ बात पति क सामने हरगिज़ जाहिर होने नह दी और boli….sorry मुझे पता नह चला. .. रुको मई अब hi चेंज करके आती हु कहते हुए जाने का नाटक करने लगी तो उसका पति उसे रोकते हुए.. नह मीणा अब रहने do…ab जब पहन hi चुकी ho…to आज क दिन रहने दो….

मीणा अपने कदम को रोक कर पति को देख कर एक मुस्कान पास kardi….aur जब तक उसका पति ब्रेकफास्ट करता मीणा अंदर बैडरूम में जाके एक दुपट्टा अपने निघ्त्य पर ोड क आयी छाती से होकर कमर तक बाँध kar..jisse उसके जिस्म की करवट कुछ हद तक चुप सी गयी थी दुपट्टे क आड़ me…jise देख कर उसका पति बी खुश होगया tha…lekin उसका पति नह जनता था की इस दुपट्टे की वैलिडिटी उसके ऑफिस क लिए निकलने तक hi hai…uske बाद जमील क लिए इ दुपट्टा उतर hi jayega…wo इस बात से अनजान आज उसकी बीवी क्या रंग लाने वाली hai…bekhabar ऑफिस क लिए निकल gaya…aur मीणा उसे रोज़ाना की तरह गेट तक छोड़ क उसके जाने क बाद घर में आके सोफे पे बैठ गयी. अब मीणा क चेहरे पर एक ख़ुशी थी जिसे वो खुद बयां नह कर सकती thi..use जमील क साथ वक़्त बिताने की उत्सुकता उसके चेहरे पे साफ़ नज़र आ रही थी.. …अब उसे उस दुपट्टे से घुटन सी महसूस हो रही थी ..वो बैडरूम में चालीगयी और अपने आप को आयने क सामने निहत्ते हुए उस दुपट्टे को अपने से अलग करके बीएड पे फेक दी..

अपने संगेमरमर जैसा गोरा चमकता हुआ बदन को एक टाइट निघ्त्य में देख कर वो एक पल क लिए खुद sharmayi…apne जिस्म की एक एक अंग क उभर और गहरायी निघ्त्य से दर्शाते हुए देख कर मैं में hi boli…aao जमील ji….meri तारीफ़ करने का बहुत शौक है न आपको …तो करलो आज मई बी देखती hu..aaj कितनी तारीफ़ करते हो meri….lekin उसे तब याद आया की उसने आज जमील को सुबह मश्ग hi नह किया hai….wo पति क साथ निघ्त्य क बारे में बात करने क बिजी होने क karan…jamil को मश्ग करके सिग्नल देना भूल गयी thi…aur उसने तुरंत अपना मोबाइल liya…aur मश्ग टाइप की "वो निकल चुके hai..aap आ सकते हो…"

उधर से तुरंत जमील का मश्ग आया बस 5 मिनट में आया….

और मीणा फिर से बहार हॉल में जाके जमील का इंतज़ार करते हुए सोफे पे बैठ गयी…

उधर जमील आज सुबह hi जाग गया tha…q की उसके लिए आज कुछ स्पेशल दिन tha..usne मीणा क दिल को तो जीत लिया tha..aur वो आज मीणा की जिस्म पर अपना पूरा हक़ बनके आज पूरी तरह से मीणा को अपना बनाना चाहता tha…jisme कुछ हद तक वो कामयाब बी tha….usne जो काम वासना की बीज मीणा की दिल में उगने की कोशिश की thi…usme वो थोड़ा बहुत कामयाब hi tha..par आज उसने उस बीज से उगे फूल को खाने की थान ली thi…aur मीणा का मश्ग पाते hi वो रूम से निकल pada…meena का घर और जमील क रूम क बीच करीब 1 कम की पैदल दुरी थी जो वो 15 मीन्स में तय कर सकता था.. और इ कुछ दिन से उसका रूटीन tha..aur वो 8.30 क पहले मीणा क घर पहुंच जाता tha…par आज मीणा का मश्ग लेट आया हुआ था और उसके रूम क निकलने क वक़्त hi ठीक 8.20 बज चुके the…wo जल्दबाज़ी में अपने कदम बड़ा hi रहा था की जमील भाई जमील bhai…kisi को उसे पुकारने की आवाज़ सुनकर जमील वही खड़ा हुआ और पीछे मुद क देखा to..uske वही लफंगे दोस्तों में एक उसके करीब भागते हुए आता देख कर जमील मैं में hi बोलै अब ये कहा टपक गया पहले hi देर हो चुकी hai..ab इसे क्या बोलू…..

सामने आते hi वो दोस्त बोलै- अरे जमील bhai…aaj कल आप मिलते hi नह हो..

जमील- है थोड़ा काम में बिजी हु…

दोस्त - ऐसा बी क्या काम भाई जो दोस्तों को भूल जाए…

जमील- अरे मई कहा भुला hu..bas वक़्त की कमी है थोड़ी…

दोस्त- ाचा bhai…par आप आज सुबह सुबह कही बहार जा रहे हो क्या?

जमील हरगिज़ नह चाहता था की उसके दोस्त को या किसी को उसके और मीणा क बारे में पता chale..so वो सचाई को छुपाते hue..are नह भाई बस थोड़ा फ्रेश होक एक कॉफ़ी पिने hi आया था उतने में तुम मिलगये…

दोस्त- तो फिर चलो न bhai…coffee पिटे पिटे बात karenge…waise आपके साथ माहौल जमा क बहुत दिन हो गए…

जमील को उस दोस्त पे तो ऐसा गुस्सा आ रहा था की खिंच क दो थप्पड़ जड़ de…par उसका ऐसा करना माहौल बिगड़ बी सकता था और उसका फ्रेश मूड ख़राब बी हो सकता था जो वो आज होने देना नह चाहता tha..…wo अपनी बातो में खुद फास गया था और बिना कोई सवाल क वो सामने वाले रेस्टोरेंट में उसके दोस्त क साथ चला gaya…tab उसके दोस्त ने दो बटेर डोसा आर्डर किया तो जमील ने सिर्फ एक hi लाने को कहा तो उस दोस्त ने पूछा क्यू भाई आप ब्रेकफास्ट नह करोगे …अब जमील क्या बता था की आज कल वो स्पेशल ब्रेकफास्ट करने लगा hai..wo अपने चेहरे पे एक कातिल मुस्कान लाते हुए बोलै बारे नह वो कल रात डिनर थोड़ा ज्यादा होगया tha…mai बाद में खेलूंगा..

कुछ 5 मीन्स क बाद वेटर एक बटर डोसा ले आया तो जमील ने दो कॉफ़ी बी आर्डर kardi…wo जल्द से जल्द इस ब्रेकफास्ट और कॉफ़ी का प्रोग्राम ख़तम करके मीणा क पास जाना छह रहा tha…aur कुछ 15 मीन्स में इ प्रोग्राम बी ख़तम हुआ tha..jamil ने घडी देखि तो 9 बजने वाले the…wo किसी बी तरह उस दोस्त से अब पीछा छुड़ाना छह रहा था पर उसके दिमाग में कोई ऐसा रास्ता बी न समाज आ रहा tha….lekin उसे कुछ न कुछ तो करना hi tha…aur वो कुछ 5 मीन्स उस दोस्त क साथ इधर उधर की बाते किया और bola…are भाई मई चलता hu..meri नींद अब बी पूरी नह हुई hai..sham को मिलते है….

लेकिन उस दोस्त क ने फिर से सवाल खड़ा kardiya…e क्या भाई …और सोने जा रहे हो चलो न कही घूमने फिरने जाते hai..waise मुझे बी आज कोई खास काम नह..

जमील- अबे साले तुम लोगो को कब काम होता hai…lekin मुझे आज सोना hai..mera मूड नह कही जाने ka..aur मुझे कुछ जरुरी काम से दोपहर को बहार बी जाना hai…aisa करते है संडे को मई बी फ्री हु उस दिन चाहे तो जा सकते है.. जमील ने अपनी नाराज़गी को इंदिरेक्ट्ली जाहिर करते हुए बोलै

दोस्त - ठीक है भाई जैसे आपकी मर्ज़ी

जमील- ठीक है तो फिर मई चला सोने कहते हुए वो वापिस अपने लॉज की तरफ निकल पड़ा और कुछ देर वही लॉज में चुप कर निचे की तरफ हो रही गतिविधियों पर नज़र रखने लगा और जब उसे यकीं हुआ की उसका वो फालतू दोस्त वह से जा चूका है तो वो निचे आकर अपने कदम को मीणा क घर क तरफ बढ़ाने लगा..

दूसरी तरफ मीणा जमील क इंतज़ार में एक अलग hi धुन में खोयी हुई thi…lekin उसके दिमाग में बी हज़ारो सवाल खड़े हो रहे the…par उसमे जग रही उसकी वासना उसके मैं में उठ रहे सब सवालो को खरच कर रही thi…use इस वक़्त जमील क अलावा कोई बात में रूचि नह दिख रही थी …वो जानती थी वो एक पतिव्रता होते हुए एक गैर क साथ इस कदर नज़दीकिया बड़के उसके पतिव्रता को ठोस पहुंचने की कोशिश कर रही hai…par उसे जमील क साथ जो मजा ख़ुशी मिलती hai..use वो इंकार बी नह कर सकती thi..aaj वो खुद छह रही थी की जमील उसके जिस्म की तारीफ़ करते हुए उसे कुछ देर अपने बहो में ले… उसके कानो को जमील क मुँह से अपनी tàarif सुनने की ीचा जग रही thi..aaj वो खुद छह रही थी की उसके खूबसूरत बदन को जमील अपने आँखों में कैद कर le…aur उसकी तारीफ़ क फूल बांड de…uski नज़र सिर्फ और सिर्फ घडी पर तिकी हुई thi..jaise जैसे घडी में काटा अपनी जगह बदल रहा था वैसे वैसे मीणा की सासे तेज़ होने लगी thi…aur जब 9 बजने पर hi जमील नह आया तो मीणा सोचने पर मजबूर हो gayi…jamil जी अब तक क्यू नह आये..

जमील जी तो 8-30 क पहले hi हाज़िर होते the.....Kahi कुछ गड़बड़ तो नह हुई… कही उन्हें किसी ने देख तो नह liya…kahi पति को पता तो नह चला और वो जमील जी को रेंज हाथ पकड़ तो नह लिए आते वक़्त…

कहते है न इंसान जब पहली बार गलती करने जाता है तब वो खुद अपनी गलती से घबराया हुआ होता hai..aur उसका दिमाग अनजाने सोच को जन्म देता hai..jo सच न होकर सिर्फ काल्पनिक होते है अब मीणा की हालत बी वैसे hi thi..uske दिमाग में अब ऐसे खयालो ने जन्म लेना शुरू करदिया था.... और डर क मरे मीणा क माथे पे पसीना निकल चूका tha..aur इस डर और अनजाने खयालातों क बावजूद उसकी सुंदरता में कोई कमी नह लग रही उसके माथे पे ुघे पसीने की बुँदे किसी चमकते हुए मोती जी तरह मीणा क चेहरे की शोभा और बड़ा रही the.par दर क वजह से कुछ देर क लिए उसका जिस्म ठंडा पड़गया tha..shayad मेरे लेट मश्ग की वजह से उन्हें लेट हुआ hoga…meena अपने डर को शांत करने की कोशिश करते हुए अपने आप को तसल्ली देने क कोशिश ki..kuch देर क बाद उसने कुछ सोचा और जमील को कॉल किया तो मीणा का कॉल अपनी मोबाइल देख कर जमील बी एक पल सोचने लगा की कही कोई ऑटो नह गया मीणा क ghar..aur मीणा मुझे आने से मन करने क लिए तो कॉल नह कर रही hai….nh नह ऐसा नह होगा अगर ऐसा होता तो शायद मीणा को पहले hi पता होता और वो मुझे मश्ग करके आने नह kehti…shayad लेट होने क वजह फ़ोन की hogi…aur उसने कॉल रिसीव करके "hello" कहा

Meena-hello कहा हो आप और इतनी देर क्यू लगा रहे ho…meena ने अपने डर और जमील क इंतज़ार की एक साथ बताने की कोशिश करते हुए बोलै..

जमील का अंदाज़ा सही था और वो मीणा को छेड़ते हुए बोलै अरे आ रहा हु jaan..bas थोड़ा इंतज़ार करो उसके बाद तुम और मई एक दूसरे क बहो me…hehehe

एक गैर मीणा जान, रानी, यार हुस्न की पारी, माशूका जैसे शब्दों से उसे सम्भोदित कर रहा था और ऊपर से बहो में लेने की बात कर रहा tha…e सब गलत है जानते हुए बी मीणा को जमील की इ ऐडा अछि लग रही thi..aur वो जमील से boli…aapko बी न हर वक़्त मज़ाक hi सुजाता hai..jaldi आवो ब्रेकफास्ट ठंडा हो जायेगा. मीणा ने अपने इंतज़ार को ब्रेकफास्ट क बहाने से झहीर किया था..

जमील- जब ब्रेकफास्ट बनाने वाली इतनी हॉट हो तो ब्रेकफास्ट की क्या मजाल जो ठंडा हो जाये और अगर हो बी गया तो हम है न गरम करने क लिए हम दोनों प्यार से गरम करेंगे हेहेहे..

जमील क बातो का मतलब मीणा अछि तरह जान गयी थी और वो बात को बदलने की कोशिश करते हुए बोली वैसे इस वक़्त कहा हो आप

जमील- मेडिकल शॉप में

मीणा- मेडिकल शॉप में क्यू,, क्या हुआ आपको आपकी तबियत तो ठीक है न.. मीणा ने जमील क लिए अपना ख्याल जताते हुए बोलै था..

जमील- अरे बाबा मई बिलकुल ठीक हु…

मीणा- तो मेडिकल शॉप में क्यू,,

जमील- मेडिकल शॉप में सिर्फ दवाई hi नह मिलती और बी बहुत कुछ मिलता hai…hehehe

मीणा को कुछ समाज नह आया और वो बोली मुझे आपकी इ पहेली समाज नहीं आती आप आजवो उसके बाद बात करते है…

जमील- सिर्फ बात hi करेंगे या प्यार बी? जमील ने अपनी हवस को बातो में झहीर करने की कोशिश की थी..

मीणा- आप बी na…pehle आजवो…

Jamil-matlab प्यार करने बी डौगी…

मीणा- हम्म्म्म

जमील- दो मिंट में आया और फ़ोन काट दिया…

दरअसल जमील ने आज मीणा क साथ चुदाई करने की थान hi ली thi..aur उसे यकीं बी था की मीणा आज जरूर मान बी जाएगी पर उसे डर था की कही कंडोम क बिना मीणा चुदाई करने से पीछे हैट गयी to….ek बाज़ारू औरत बी बिना कंडोम क छोड़ना पसंद नह करती है तो मीणा जैसे सुशिल औरत कैसे एक पराये लुंड से बिना कंडोम क लेना पसंद karegi..isliye वो आतेवक़्त कंडोम खरीदने क लिए मेडिकल शॉप गया हुआ था…

और इधर मीणा जानती थी जमील किश प्यार क बारे में बात कर रहा है और वो खुद हैरान thi…ek गैर मर्द उसके पाक जिस्म पे अपनी होतो की मोहर लगाना छह रहा है और वो उसे रोके बिना उसे अपनी सम्मति दे रही hai…ek अनजाने मुस्कान को अपने चेहरे पे लाते हुए मीणा मैं hi मैं बोली इ जमील जी को बी पता नह मेरे पेट और नाभि में ऐसा क्या दिखा है जो हर वक़्त इसके पीछे hi पड़े रहते hai…par मुझे बी उनका ऐसा मेरे पेट और नाभि को चूमना ाचा लगता hai..kitna सुख मिलता है मुझे उस वक़्त हआ सच में जादू है जमील जी क होतो me..e सोचते हुए मीणा क जिस्म में एक ुंचही मीठी सी लहार दौड़ गयी जिसके चलते वो अपने कोमल हाथ को अपने पेट पर फेरने से अपने आप को रोक नह पायी..

खैर कुछ hi देर में इंतज़ार क घडी ख़तम हो गयी thi…kuch 10 में जमील मीणा क घर आ गया tha..aur अपने घर क गेट खुलने की आवाज़ से मीणा क धड़कते दिल को रहत मिली thi..wo सोफे से उठकर जमील क स्वागत क लिए आगे badi…aur जैसे जमील दरवाजे तक आया तो वो एक पल क स्टूबड hogaya..apne सामने कड़ी मीणा क जिस्म क एक एक अंग क उभर जो निघ्त्य पहने हुएब्ब साफ़ नज़र आ रहे थे और मीणा क चेहरे पे सजी एक मादक मुस्कान को देख कर उसका लुंड पंत में hi सलामी देने लगा वो बिना पलके झुकाये एक जुट होकर मीणा को ऊपर से निचे तक निहारने लगा tha…usne खयालो में बी नह सोचा था की मीणा आज ऐसी सेक्सी निघ्त्य पहने हुए उसके सामने कड़ी hogi…aur शायद मीणा ने बी, कल शाम उस बंजर पड़े घर में जमील क साथ हुई कुछ देर क जिस्म की टकराहट ने मीणा क जिस्म में अलग hi उमंग जाग उठी thi..wo जमील क प्रति कुछ ज्यादा hi आकर्षित हुई थी. और शायद इसी उमंग क चलते मीणा ने आज ऐसी निघ्त्य पहन ली थी..

अपने आप को इस तरह बिना पलके झुकाये देख रहे जमील को देख कर मीणा शर्मा गयी थी उसे जमील क आँखों में वासना नज़र बी आगयी थी और शर्माहट क मरे वो अपनी नज़ारे झुकाये पाँव की ऊँगली को ज़मीं पर खरोच ने लगी…

लेकिन किसी न किसी को तो बात आगे बदनी hi thi…q की ज्यादा देर दरवाजे क सामने खड़े रहकर एक दूसरे क लिए प्यार जाताना खतरे से खली नह tha…raste पे चलने वाले उसके आस पडोसी की नज़र किसी बी वक़्त दो प्रेमी पर पद सकती थी…

सो मीणा अपनी ख़ामोशी तोड़ते हुए boli..bahar hi खड़े रहोगे क्या अंदर नह आवोगे?

जमील अपनी होश सँभालते हुए अंदर आते hue…are मेरी जान हम तो कब से तैयार है अंदर आने को.. पर तुम …..

जमील आगे बोलने hi वाला था मीणा जमील क डबल मीनिंग की बातो का मतलब समाज कर उसे रोकते हुए बोली बस bas….ab आवो अंदर इससे पहले कोई हम दोनों एक साथ देख न le…aur और थोड़ा पीछे हैट क अंदर आ रहे जमील को रास्ता बनायीं..

अंदर आते hi जमील ने मीणा क कलाई को पकड़ लिया और उसे बगल वाले दीवार क सहारे खड़ा करदिया . अचानक हुए इस हरकत से मीणा एक पल क लिए सहम सी गयी और उसने देखा की उसकी तेज चल रही सासो क वजह उसकी बूब्स ऊपर निचे हो रहे है और जमील की नज़र उसपर तिकी हुई देख कर वो अपनी इज्जत छुपाने की कोशिश करते हुए ऐसे क्या देख रहे हो पहली बार देख रहे हो क्या और शर्म क मरे क मुद क दीवार की तरफ मुँह करके कड़ी hogayi..jisse मीणा की मोती चौड़ी नितंब जमील क सामने निघ्त्य में कैद अपनी मोटापन और गोलाई को साफ़ दर्शनी लगी thi…jamil अपनी जिंदगी में कही औरतो को नंगा देख चूका tha..par आज जो मीणा उसे कपडे क ऊपर से hi दिखा रही थी उससे जमील को यकीं हो गया था की मीणा उन सब औरतो से बहुत खूबसूरत और सेक्सी बी है उसकी चॉइस गलत nh....aur मीणा क गांड जो इस वक़्त मीणा क कदम ऊपर निचे होने क वजह से मटकती हुई जैसी दिख रही थी, जिसे देख कर जमील पंत में खड़े लुंड को उसपर दबाने से अपने आप को रोक नह paaya…aur बोलै देखा तो बहुत बार hai..par आज जितनी हॉट और सेक्सी दिख रही हो शायद पहले कभी नह देखा

जमील मीणा क कमर पर हाथ डेल हुए मीणा की गांड पर अपने लुंड को दस्तक ऐसे दे रहा था जैसे वो पीछे खड़े हो कर मीणा की गांड बजा रहा ho..aur मीणा इस उत्क्रिस्ट अनुभव को अपने जिस्म पर पाकर गरम होने लगी थी और उसके मुँह से ुह्ह्ह्हह्हह्म्मणन्न की नशीली सिसकारी निकल पड़ी जो उसकी मजे लेने की संकेत दे रही thi....tabhi उसे अपने कानो में गरम ससो क एसएस हुआ तो उसकी जिस्म की गर्मी ने बढ़ने की रफ़्तार पकड़ ली thi..use समझने में देर नह लगी की इ जमील क सासो क झंकार है जो उसके कानो से होते हुए उसके जिस्म क नस नस तक हलचल मचा रही hai….wo इस पल को रोकना नह चाहती थी इ जानते हुए बी इ गैर मर्द उसके जिस्म क नाज़ुक अंग पर अपने हथियार से सलामी दे रहा है.. पर मीणा नह चाहती थी जमील क लिए उसके दिल में बड़ी हुई आकर्षण और अपने जिस्म की तड़प को वो जमील क सामने इस तरह जाहिर kare..aur वो जमील को रोकते हुए बोली बस करो na…aate hi शुरू hogaye…chod दो न.. ahhhhhhhhh…aaapp बब्बीी नाआ……..

लेकिन जमील क हाथ आज उसकी स्वप्न सुंदरी लगी thi…wo इतनी आसानी से कैसे छोड़ देता वो मीणा क कमर पर से अपने हाथ को मीणा क जांघो तक सवारते हुए मीणा क गोर गाल पर एक प्यार की पप्पी देते हुए बोलै आज इतनी खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो की आज रोको hi मत मुझे प्ल्ज़… आज मई तुम बहुत प्यार करना चाहता हु..

मीणा बी तो यही छह रही thi…par उसका संस्कार उसे इस तरह एक गैर मर्द क साथ आगे बढ़ाने से कही कही रोक ने की कोशिश कर रहा tha..wo पहली बार अपने संस्कार क सामने अपने आप को कमज़ोर पाकर अपने संस्कार से कुछ नाराज़ सी हुई थी और बोली अब बस बी karo…kitna प्यार करोगे..?

जमील मीणा क बंधे ज़ुल्फो को खोलकर उसकी खुसबू सूंघते hue..ahhh हहहह क्या खुस्भू hai….kaise छोड़ दू मीणा बस थोड़ा साथ दो न मजा आरहा है

..सच बात तो इ थी की मीणा बी इस पल को बड़े मस्ती में एन्जॉय कर रही thi..e जानते हुए बी की एक गैर मर्द उसके जिस्म क एक एक अंग पर अपना हक़ ज़माने लगा hai..wo बी अपने आप को रोक नह पा रही thi..use बी लग रहा था जमील का साथ देकर इस पल को यादगार banalu..uske पास वक़्त की कोई कमी नह थी क्यू न ब्रेकफास्ट होने क बाद जमील क साथ आगे badu..aur कुछ सोची और बोली अब बस बी करो जमील ji…pehle ब्रेकफास्ट तो करले बहुत जोरो की भूक लगी hai…uske बाद करेंगे na…mai बी साट्ठह डुङ्गीई छोडोऊ न अह्ह्ह्ह क्याआ कर राहीये होऊ दूऊऊरररर हाअट्टूओ ना मीणा ने अपनी बढ़ते कामवासना में कंपते हुए अपनी मैं की ीचा बोली दी थी..…

उफ्फ्फ इ क्या बोल बैठी mai…maine तो सीधे जमील जी को मेरे मैं की बात batadi….haaa अब जमील जी क्या करनेवाले ……अह्ह्ह अह्ह्ह्हह मीणा मैं hi बोली और अपने आंखे बंद किये अपने शर्म और लज़्ज़त को एक साथ छुपाने की कोशिश ki..lekin जमील मीणा क बातो का मतलब अछि तरह समाज गया tha…meena ने उसे कही बी रोकने की कोशिश नह की thi…bas ब्रेकफास्ट होने तक जिस्म क इस खेल को कुछ देर क लिए रोकना चाहती है तो क्यू न कुछ देर क लिए रुक न जावु और उसके बाद मीणा क साथ मिलने पर आज तो मजा hi aayega…aur वो मीणा को पलटकर उसके दोनों तरफ अपने हाथ दीवार को टीकाकार मीणा को hi प्यासी नज़र से देखने लगा जो इस वक़्त शर्म क मरे अपनी नज़र झुकाये कड़ी थी….

जमील मीणा की चेहरे को हलके से ऊपर करते हुए पूछा क्या सच में तुम बी मेरा साथ डौगी…

मीणा का जवाब तो है hi था फिर बी वो अपनी रज़ामंदी को छुपाने की कोशिश करते हुए boli..aap तो ऐसे कह रहे हो की मैंने आपका कभी साथ hi नह diya..chodo मुझे …मुझे आपसे बात नह karni…meena ने अपनी प्यार भरी नाराजगी जताने की कोशिश की…

मीणा की इस ऐडा पे जमील और बी खुश होगया tha…wo मीणा क निघ्त्य से बहार झांकी हुई मीणा की नंगी भुजाओ को सवारते हुए बोलै

..मैंने कब कहा तुमने साथ नह diya…pehli बार तुम साथ दे hi रही थी पर पता नह अचानक तुम क्या हुआ मुझे रोक di…aur कल तो तुम साथ दे hi रही thi…par बीच में तेरे पति का फ़ोन Agaya…kash तेरे पति का फ़ोन न आता और वक़्त की कोई पाबंधी नह होती तो कल की शाम हमारा काम अधूरा नह होता…

मीणा बी अच्छीतरह जानती थी पहली बार वो अपने संस्कार क हाथो मजबूर होकर जमील को प्यार का वास्ता दे कर आगे बढ़ने से रोकी थी और शायद कल उसके पति क फ़ोन ने उसे रोकने पर मजबूर किया था..

वर्ण वो जमील को आगे बढ़ाने से रोक नह पाती क्यू की कल वो बी जमील क प्रति कुछ ज्यादा hi आकर्षित हुई hai…wo जमील से दूर जाने की कोशिश करते हुए boli…aapse से बातो में जितना मुश्किल hi hai…chalo मेरी hi galti…ab प्यारे बचे की तरह ब्रेकफास्ट बी तो karlo..kehte हुए वो जमील क हाथ को दीवार से हटाकर किचन की तरफ जानेलगी…

जमील वही दीवार क सहारे खड़े होकर अपने सामने गांड मटकती हुए जाते मीणा को देख कर मैं hi मैं खुश होकर बोलै खिडिया जाल पूरी तरह फास चुकी hai…aur वो मीणा को आवाज़ देते हुए bola…jaate जाते इ तो बता की आज हमे कोई डिस्टर्ब नह karega…hehehe

मीणा उसे मुद क देख कर शरमाते हुए बोली शायद nhhhhh…ab आवोगे या और बी सवाल है आपके..,. hehehe..meena ने बड़े नज़ाकत से कहा था..

मीणा एक पतिव्रता तो थी इसका मतलब इ नह की उसे डबल मीनिंग बातो का मतलब पता न chale..wo अछि तरह जानती थी जमील उसे क्या बोलने की कोशिश कर रहा hai..wo इ अछि तरह समाज चुकी थी जमील किस अधूरे काम को पूरा करने की बात कर रहा tha…aur उसका अंजाम क्या hoga…lekin मीणा की वासना जिसे अब तक मीणा ने काबू पा रखा हुआ था, जमील ने उसकी उस वासना को छेड़कर जगाने की कोशिश की thi…aur उस वासना क चलते मीणा क मैं बी बहक गया tha..uske कदम पिसलने क लिए तैयार खड़े the..apni पति से न बहुजनेवाली जिस्म की प्यास को एक गैर मर्द से भुजने की चाहत जग उठी thi….yahi वजह थी जो को इस काम में साथ देने की बी बात बोल चुकी थी..

मीणा किचन रूम में आतेवक़्त अपने जांघो क बीच थोड़ी चिपचिपाहट महसूस करने लगी thi…use समझने में देर नह लगी थी की उसकी छूट आज फिर से काम रास की बुँदे टपक चुकी hai…aur क्यू न tapakti…kuch hi देर पहले तो एक अनजाने हथियार ने उसके मोठे सुडौल मुलायम गांड क साथ खेला हुआ tha…jis हथियार का एक झलक वो दो दिन पहले सिर्फ एक बार hi देख चुकी hai..wo बी कुछ hi देर क liye..meena अब सोचने लगी अगर मेरे पीछे खड़ा वो हथियार मेरी योनि में से पानी टपका ने की हरकत कर सकता hai…to एक बार उसे आगे से क्यू न महसूस karu…sach बात तो इ थी की मीणा की जिस्म की चाहत बढ़ते जा रही thi…wo न चाहते हुए बी एक गैर मर्द क साथ नज़दीकिया बढ़ाने की सोच जगा रही थी…

मीणा किचन में जाके ब्रेकफास्ट को फिर से गरम करने लगी और तब तक जमील बी किचन में आ चूका था…

आगे किचन में क्या हुआ मीणा की जिंदगी किस हद तक बदल गयी इ जानने क लिए बने रहे अंत तक ...कहानी अछि लगी तो कमैंट्स जरूर करे.. धन्यवाद्
 
सॉरी फ्रेंड्स वक़्त की कमी क वजह से अपडेट नह दे paaya...kal संडे अपडेट पोस्ट होगा..... वेट एंड एन्जॉय...
 
अब आगे

किचन में आते hi जमील किचन स्टैंड पे बैठ गया और मीणा को प्यासी नज़र से देखते हुए पूछा

..सच बोलो मीणा आज तुमने जानबूजकर मेरे लिए hi इ निघ्त्य पहनी होना..

अब मीणा क्या जवाब देती वास्तव में तो यही सच tha…par एक गैर क सामने वो खुल क कैसे बताती किसके लिए आज उसने इ रूप धारण किया हुआ hai…wo इंकार करते हुए boli..nh बाबा ऐसा तो नह है बस मैं किया तो पहन लिया..

पर मीणा क चेहरे का एक्सप्रेशन साफ़ बता रहा था की वो झूट बोल रही hai..aur सामने बैठे जमील ने मीणा की इस एक्सप्रेशन को अछि तरह पद लिया tha..jamil को बी मीणा क इस निघ्त्य क बारे में सचाई ज़माने की उत्सुकता बधाई thi…q की उसे लगा अगर मीणा ने आज इ निघ्त्य सिर्फ उसीके लिए hi पहनी है तो मीणा क जिस्म को भोगने से आज खुद मीणा बी नह रोक sakti…par वो जनता था मीणा इस सच को इतनी आसानी से नह manegi..bas बातो में फसकर hi सच बहार निकल सकता hai..aur बोलै ाचा तुम्हारा मैं किया तो पहन लिया पर ऐसे निघ्त्य में देख कर तुम्हारे पति ने कुछ कहा नह…

मीणा- अपने चेहरे पे हसी लाते हुए पूछे na…q नह पूछते…

जमील मीणा को छेड़ने क अंदाज़ में बोलै तो फिर आज वो बी मेरे जैसा खुश होगया होगा..!!!

मीणा - अरे नह उन्हें कहा पसंद aaya…aur मीणा में अपने पति क साथ हुई निघ्त्य क बात को दुपट्टा पहने तक जमील को बताई…

जमील ने तुरंत सवाल किया तो अब दुपट्टा क्यू नह?

मीणा- अरे उसमे मई थोड़ी उनकंफर्टबले फील कर रही थी सो उनके जाते hi निकल दी…

जमील कहा चुप रहने वाला tha…use तो उसका जवाब मिल गया था पर इस बात को वो मीणा क मुँह से सुन्ना छह रहा tha…par तुम्हारे पति ने तो कहा था की इस निघ्त्य में तेरी जिस्म क उभर नज़र आते hai…aur इ जानते हुए बी तेरा पति जाने क बाद मई आनेवाला हु तुमने दुपट्टा निकल दिया?

अब मीणा क्या जवाब deti…uska टाइट निघ्त्य पहने क पीछे छुपा हुआ थोड़ा बहुत सच जमील क सामने आगया tha…fir बी वो अपने बात को रखने की कोशिश करते हुए boli..woooo….pata नह …शायद मई भूल गयी थी….

जमील- भूल गयी थी या तुम्हारे इस खूबसूरत मुलायम फूल जैसे बदन को मेरा देखना पसंद hai…jamil ने इस बार जानबूजकर कर मीणा की जिस्म की तारीफ़ करते हुए बोलै था ताकि मीणा उसकी तारीफ़ सुनकर और ज्यादा खुश हो जाए और उसके मैं की करने दे…

मीणा का बी यही हाल था एक तरफ जमील उसकी सचाई को बातो में फसकर जान गया था और दूसरी तरफ उसके जिस्म की तारीफ़ बी कर रहा tha..jise असल में आज सुबह उसके पति को करना चाहिए tha..meena मैं hi मैं खुश तो हो रही थी पर जमील क सवाल क जवाब वो दे बी नह सकती थी मीणा मुस्कुराती हुई चुप रही और इस बीच उसकी कॉफ़ी बी बन गयी थी और उसने दो कप कॉफ़ी और दो प्लेट ब्रेकफास्ट को रेडी बी करलिया था और उन्हें टेबल रखते हुए जमील से बोली चलो ब्रेकफास्ट करलेते hai..aur दोनों आकर ब्रेकफास्ट क लिए बैठ gaye…lekin ब्रेकफास्ट करते हुए बी आज जमील ने अपनी छेडछाडी नह रोकी thi..wo टेबल क निचे से अपने एक पाँव को मीणा की निघ्त्य क अंदर गुस्सा कर निघ्त्य को घागरे क साथ ऊपर करने की कोशिश करता तो मीणा उसे अपने पैरो से दूर करने की कोशिश karti..aur जमील को देख muskurati..kuch 5 मिनट तक ऐसा hi chala…lekin हद तो तब हुई जब जमील ने मीणा की निघ्त्य को उसके घुटनो तक उठाया और मीणा को अपनी जांघो को छुपाने क लिए अपने हाथों से जमील क बढ़ते पेअर को रोकना pada…tab जमील में मौके का फयदा उठाकर मीणा क झांघो को छूटे हुए उसके हाथ को pakadliya…ek गैर मर्द का हाथो का स्पर्श अपने मोठे मुलायम झांघो पर होते hi मीणा एक पल क लिए विचलित तो हुई पर उसे ाचा बी लगा tha..aur जमील को रोकने की कोशिश करते हुए boli..ab बस बी करो आप ऐसे hi करते रहोगे तो मई खावूँगी कैसे छोड़ दो न…

जमील तो आज फुल मूड में आया tha..wo मीणा की मुलायम गोर जांघो से कैसे अपना हाथ hatata…wo अपने हाथ हटाए बिना bola…chod दूंगा पहले मेरी बात का जवाब तो do…hehehe

मीणा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कौनसा sawal….nikalo न हाथ मुझे शर्म आ रही है…

जमील- तो जवाब दो न…

अब मीणा क पास कोई चारा नह था उसे अपनी टैंगो को और नंगी होने देना नह था वो बी इस वक़्त तो बिलकुल बी नहीं और हार मानते हुए boli…ha मैंने इ निघ्त्य सिर्फ आपके लिए hi पहनी है..

मीणा का जवाब सुनकर जमील ने बी अपनी बात रखते हुए अपने हाथ निकल लिया तो मीणा ने अपनी निघ्त्य ठीक कर्ली और बोली बड़े बदमाश ho…aap…akhir मेरे मुँह से सच उगलवा hi liya…hehehe कहते हुए मीणा ब्रेकफास्ट करने लगी तो जमील अपनी इस बदमाशी पे खुश tha…aur वो अपनी ख़ुशी झहीर करते हुए bola..abhi तो बदमाशी शुरू हुई hai..meri rani…hehehe

मीणा- फिर बदमाशी…

हाहाहा दोनों एक साथ हास्पदे और ब्रेकफास्ट करने लगे…

जमील ने तो मीणा क जगहों से हाथ निकल लिया था पर कुछ देर क इस खेल ने मीणा को सोचने पर मजबूर किया tha…wo सोचने lagi..kitna मस्ती करता है इ insaan…mere पति तो कभी मेरे साथ इस तरह मस्ती नह ki…jamil जी की ऐडा hi कुछ अलग hai…sach hi कहते थे जमील जी मेरी तन्हाई दूर karenge…jamil जी मेरे जिंदगी में आने क बाद मई कितनी खुश हु ..ऐसे प्यार से मस्ती करते हुए मैंने अपने पति क साथ कभी कुछ बी नह खाया…. मेरे पति क पास तो मौका hi मौका hai..par उन्होंने मुझे एक दिन बी …नह नह मई इ क्या सोच रही hu…fir बी काश जमील जी मुझे शादी से पहले मिल jaate…aur इ बात सोचते सोचते वो गरम बी होने लगी thi..pata नह उसे कुछ लगा और उसने अपने प्लेट से एक निवाला जमील को अपने हाथो से खिलने लगी.

जमील मीणा क इस प्यार भरे बर्ताव से अपनी ख़ुशी को समेत नह पाया उसे अब पूरा यकीं होगया था की मीणा अब उसकी हो चुकी hai…aur उसने सोचा जब लोहा गरम hi तो हथोड़ा मरने का सही वक़्त hai…aur उसने इसी बात की शुरुआत करते हुए ब्रेकफास्ट खिला रहे मीणा क कलाई को पकड़ लिया और उसकी एक ऊँगली को मुँह में लेके चूसने laga…pehle तो मीणा को लगा जमील फिर से बदमाशी करने पे तुला hai…lekin जमील मीणा की एक एक ऊँगली को बारी में अपने मुँह में भरकर चूसने लगा तो मीणा की बी वासना भड़कने से नह रुकी और वो अपनी कलाई को हल्का छोड़ कर जमील का साथ देने lagi…uska मैं तो कह रहा था इ गलत hai..par उसके जिस्म में बढ़रही गर्मी को इ सब पसंद आरा tha…wo छह कर बी जमील को रोक नह पा रही thi…aur शर्म क मरे फिर से नज़ारे zukayi…aur तिरछी नज़र से जमील को hi देखने lagi…use ऐसा लग रहा था जैसे उसे जमील कुछ संजना छह रहा hai…par मीणा क लिए इ सब एक नया अनुभव था इसलिए वो जमील क इशारे को समाज नह paayi…aur इस नए अनुभव क चलते मीणा लाख कोशिश क बावजूद अपनी ऊँगली को जमील क मुँह से हटाना नह छह रही thi..jamil की इ हरकत से उसके जिस्म में गर्मी बढ़ती जा रही थी उसकी सासे तेज चलने लगी thi…uska मैं इस पल आनंद उठाना छह रहा tha..aur वो अपने आंखे बंद किये जमील क साथ देने लगी thi…lekin जमील जब उसकी ऊँगली से आगे उसकी कलाई से आगे बड़ा तो मीणा अपनी शर्म की हद पार कर चुकी और वो अपनी बढ़ती उत्तेजना पे काबू पाने की कोशिश करते हुए जमील से अपना हाथ छुड़ाकर उससे दूर किचन स्टैंड क पास जाकर पलट कर रुक गयी और जोरो की सासे लेने hi लगी थी उसे अपने कमर पर किसी मर्द क कठोर हाथो का एसएस hua..to उसकी खुलती हुई आंखे इस पल से आनंदित फिर से बंद होगये the…dhire धीरे वो हाथ उसके पेट से होते हुए उसकी नाभि तक आके रुक गए the..ab मीणा एक बार फिर जमील क बहो में कैद थी..

*

मीणा मान hi मेमन सोच रही थी इ क्या होगया है मुझे क्यू मुझे जमील जी क बहो में वो सुख मिलता है जो मैंने कभी अपने पति क बहो में नह paaya…q मई जमील जी को रोक नह पाती हु इ जानते हुए बी वो एक गैर मर्द hai….ahhhh मुझे लग रहा है की आज मई जमील क बहो में इसी तरह खो jaavu…meena पिछले 4- 5 दिनों में कही बार इसतरह जमील क बहो में समां चुकी thi..par आज उसकी उत्तेजना कुछ ज्यादा hi बाद रही thi.q की जमील ने मीणा की ऊँगली पर जो अपना कमल दिखाया था उसके चलते मीणा कुछ ज्यादा hi उत्तेजित लग रही थी..

वही मीणा क बदन से आ रही मादक खुस्भु जमील को मदहोश कर रहा थी और उसके खड़े लुंड को और बी शाक्त बना रहा था. जमील अपनी किस्मत पर मुस्कुराता हुआ मीणा को और अपने करीब खिंच लिया तो इस बार जमील का लुंड फिर से मीणा की मोती गांड पर चुबने एक बार फिर से अपने गांड की दरार पर जमील क लुंड का एसएस पाते hi मीणा कैद पंछी की तरह फरफराने lagi…aur न चाहते हुए बी शह्ह्ह्हह्ह ुह्ह्ह्हह्हह्म्मणन्न जैसी मादक सिसकारी मीणा क मुँह से निकलते देख जमील धीरे से अपने लुंड को आगे पीछे करने लगा और अपनी होतो को मीणा क एक खड़े पर टिका कर बोलै सच कहु मीणा तुम बहो में लेके ऐसा लगता है की जन्नत की पारी को अपना बना रहा hu…kya खूब है तुम्हारा इ जिस्म बहुत मजा आता है और ख़ुशी बी उससे dugni….jamil मीणा की उत्तेजना को बढ़ाने की कोशिश करते हुए bola..aur मीणा का बी वही हाल था सो जमील की बात काम करगयी थी और वो अपने चेहरे थोड़ा पीछे करते हुए जमील को देख मुस्कुरायी और अपने कंधो पर भीकरें ज़ुल्फो को एक साथ हटके दूसरी तरफ करके अपने नंगी गार्डन और पीठ को साफ़ kardi..isse जमील क सामने अब मीणा की नंगी गार्डन साफ़ नज़र आ रही थी और जमील ने देर न करते हुए अपनी ज़ुबान को मीणा क नंगे जिस्म पर चलना शुरू करदिया tha….ek तरफ जमील का चाटना और अपने पेट पर जमील क हाथो से सवर्ण ऊपर से पीछे जमील का तना हुआ लुंड मीणा को असीम आनंद सागर में टहला रहा तो वही हाल जमील का बी tha..aaj मीणा का कोई विरोध न पाकर वो और बी उत्तेजित हो उठा tha..meena अपनी ज़ुल्फो को बरी बरी में इधर उधर करते हुए अपनी पूरी सहमति जमील क लिए जाहिर कर रही thi..dono अब एक नयी दुनिया में कदम रखने तैयार हो रहे the…dono को परवा बी नह थी अब वो इस वक़्त कहा hai…aur शायद मीणा तो भूल hi गयी थी की वो इस वक़्त एक गैर मर्द क बहो में है वो बी अपने hi घर में जिसका दरवाज़ा बी खुला hai..jamil का लुंड अब इतना कड़क होगया था की मीणा ऊपर से कपडे होते हुए बी अपने गांड की दरार पर उसकी गर्मी को महसूस कर रही थी…

पिछले एक घंटे में इ दूसरी बार मीणा अपनी गांड पर जमील क लुंड को झेल रही thi…par इस बार पिछली बार से ज्यादा गरम और कड़क लुंड अपनी गांड पे महसूस करके और बी उत्तेजित होगयी थी और उसकी इस बढ़ती उत्तेजना ने फिर से उसे जमील क लुंड क बारे में सोचने पर मजबूर किया tha..wo अपनी आंखे बंद किये कितना मोटा और लम्बा है जमील जी का हथियार मेरे पति का इसका आधा बी नह hoga….e हथियार मेरे कपडे क ऊपर hi इतना मुझे मजा दे सकता है तो बिना कपड़ो क अगर मई जमील क साथ राहु to….ahhhhh ……मीणा आगे कुछ सोच hi रही थी की तभी उसे जमील का एक हाथ अपने मांगे गले को सवरता हुआ निचे उतरता हुआ नज़र आता aaya..aur कुछ hi देर में वो हाथ उसके निघ्त्य क भीतर जाने की तैयारी करते हुए देख मीणा सहम gayii..q की इस वक़्त वो अपने नंगे छाती को जमील क लिए सौपने तैयार नह thi..wo जमील क बढ़ते हुए हाथ को रोकते हुए उसे न में इशारा करते हुए अपने गार्डन हिलायी तो जमील मीणा को देख कर एक कातिल मुस्कान पास करते हुए अपने बढ़ते हाथ को रोका और कुछ सोच कर मीणा क नाभि पर अपनी ऊँगली फेरते हुए मीणा को इशारे में पूछा यहाँ…??

मीणा बी तो कबसे यही छह रही थी की जमील उसकी नाभि से खेले और वो बिना कोई विरोध किये जिमील को है में इशारा कर बैठ thi..shayad वो नह जानती thi..aaj उसका इ इशारा उसकी पवित्रता को भांग करनेवाला है..…

मीणा का इशारा पाते hi जमील मीणा क पेट पे चल रहे अपने हाथो को निचे की और ले जाने लगा tha..jamil एक हाथ से मीणा की निघ्त्य को ऊपर कर रहा था और दूसरे हाथ को जानबूजकर मीणा क छूट की और ले जाने लगा tha…meena बी जान गयी थी की जमील इ सब जानबूजकर कर रहा hai..par आज जमील को रोकना नह छह रही thi…aaj जो उसके जिस्म को सुख मिल रहा रहा था शायद उसे पहले कभी नह मिला tha…wo सबकुछ जानते हुए बी आज एक अनजान की तरह जमील क साथ देने लगी thi..dekhte hi देखते मीणा की पाँव नंगे होने लगे the…aisa लग रहा था की एक संगेमरमर की मूर्ति से कोई पर्दा हटा रहा ho..ek गैर मर्द क सामने नंगे हो रहे अपने पाँव को देख कर मीणा शर्म से लाल होगयी थी और उसकी सासे तेज होने लगी थी…. इस बीच मीणा की निघ्त्य घुटनो तक आ चुकी थी मीणा दूसरी बार एक गैर मर्द क सामने घुटनो तक नंगी कड़ी thi…sharam और लज़्ज़त मीणा क राग राग में दौड़कर उसकी आँखे मदहोशी में बंद होने लगे the…jism में एक अलग hi कम्पन पैदा होने lagatha…is माधोसी में बी मीणा नंगा होने से बचने क लिए थोड़ा झुक गयी और जमील क हाथ को घुटनो पर hi रोक कर अपने निघ्त्य से घागरे को अलग करने की कोशिश करने लगी लेकिन झुकने क वजह से मीणा की गांड अपने पुरे आकर में आगयी और जमील इस खूबसूरत नज़ारे को अपनी आँखों में भरते हुए मैं में hi बोलै वहहह क्या कमाल की गांड hai..aaj तो मजा hi aayega…chalo मीणा को बी इस मजे से रंग देता हु और उसने अपने तने हुए लुंड को जोरो से आगे बढ़ाते हुए धक्का मारा तो मीणा इस धक्के को अपनी गांड पर झेल नह पायी और अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुह्ह्ह्हह्ह की सिसकारी लेते हुए एक कदम आगे hogayi…to उसे और एक झटका लगा tha…jamil का जो हाथ मीणा की छूट से थोड़ा hi ऊपर था वो मीणा क आगे बढ़ाने से ठीक मीणा की छूट निघ्त्य क ऊपर से hi जमील क पकड़ में आगयी thi..jamil को जिस चीज़ की छह थी वो बिना मांगे hi उसके हाथो में समायी हुई thi..meena किसी सैंडविच की तरह

जमील क बहो में अपने आप को महसूस करने लगी थी एक तरफ जमील का लुंड उसकी गांड क खबर ले रहा तो अब आगे से जमील का हाथ उसकी छूट की गर्मी बढ़ाने ने क लिए तैयार खड़ा हुआ tha....pehli बार एक गैर मर्द मीणा क खास गुप्त अंग पर अपना हक़ ज़माने की कोशिश कर रहा tha.,meena क लिए इ पल किसी रोमांच से काम नह tha..aur वो इसी अघोष में आकर जमील क उस हाथ की बी पकड़ ली जो इस वक़्त मीणा की छूट को अपने ऊँगली से खरोच रहा tha…ab मीणा क दोनों हाथ बिजी होगये थे एक हाथ जमील को निघ्त्य उठाने की कोशिश करते हुए रोकने की कोशिश कर रहा तो दूसरा हाथ अपनी नाज़ुक छूट को जमील क हाथो बचने की कोशिश कर रहा था.. लेकिन इस बीच मीणा की निघ्त्य घुटनो क ऊपर तक आगयी थी इस वजह से मीणा क आंधी नंगी जांघो को ठंडी हवा का अनुभव होने लगा tha..aur उसके गरम जिस्म को थोड़ा ठंडक पहुंचने में मदत कर रहा tha…meena का मैं तो कर रहा था की वो अपनी निघ्त्य खुद उतारकर इस रोमांचित पल को और बी उत्तेजना से भर दे लेकिन एक पतिव्रता औरत इ कैसे कर सकती thi..uska बचा हुआ संस्कार अब बी उसे कहने की कोशिश कर रहा था की मीणा इ सब अब hi रोक de…warna जमील तुजे आज कही का नह chodega..lekin मीणा की हवस आज अपनी सीमा पर कदम रख चुकी thi..aur इसी क चलते मीणा पहली बार अपने संस्कार को भूल कर जिस्म क इस खेल में एक गैर मर्द का साथ देना hi ठीक सामजी thi…lekin मीणा जानती थी की जमील उसे नंगा करने में तुला हुआ है और कुछ देर में शायद पूरी नंगी बी हो जाए और वो छह कर बी जमील को रोक नह सकती hai…lekin वक़्त को तो ताल सकती hai…aur वो मुद क प्यार से जमील को देखते हुए …घाघरा छहहुड्ड ड्डू नाहा मुउउउउज्ज्ज्हे शहाराम आए राहहहहहिं है मीणा अपनी कम्पटी आवाज़ में विनंती करते हुए बोली..

जमील आज मीणा को बहो में लेकर अपनी किस्मत पर खुश tha…jis पारी को पाने क लिए उसने अपने रातो की नींद ख़राब की थी आज वही पारी उसे अपने कपडे उतर ने से रोक रही है वो बी बड़े प्यार से बिना किसी विरोध किये उसके चेहरे पर नहीं कोई गुस्सा या दबाव या मजबूरी की झलक बी नह दिख रही. …उसे समझने में देर नह लगी थी की मीणा आज इतनी गरम हो चुकी है की उसके कहने पर वो कुछ hi देर में अपनी टंगे बी खोल degi…to क्यू न मुर्गी को पहले दाने डालके और बी अपने करीब karlu…aur वो मीणा क घागरे को निघ्त्य से अलग करके छोड़ कर सिर्फ निघ्त्य hi ऊपर करते हुए bola…ab और क्या शर्माना मेरी जान प्यार में इ तो कॉमन hi hai..meena एक पतिव्रता औरत थी और वो पहली बार एक गैर मर्द क साथ इस हद तक पहुंच चुकी थी जिस हद तक सिर्फ एक पति पत्नी hi जा सकते hai..isliye शर्माना उसका लिए जहीज़ tha…tab उसे लगा की उसकी निघ्त्य कमर से ऊपर होक उसके पेट तक पहुंच चुकी है और जमील क हाथ अपने नंगे पेट पर महसूस करके मीणा और बी शर्मा गयी और एक बार जमील की तरफ देख कर मुस्कुरायी लेकिन दूसरे hi पल मीणा को क्या लगा पता नह उसने अपने हाथो को पीछे करके जमील क सर को पकड़ लिया जिसके चलते जमील मीणा क गालो से और चिपक गया और मीणा क गलो क साथ मीणा क नंगे गार्डन पर चुम्मे की बारिश करने लगा tha…meena को आज जमील की हर हरकत अछि लग रही thi..aur वो इस बात से ज्यादा उत्सुक थी की कुछ hi देर में जमील उसकी नाभि पर अपने होतो का कमाल दिखानेवाला है जो उसे एक अलग hi ख़ुशी देती है..

लेकिन जमील ने कुछ और hi सोचा हुआ tha…wo एक तरफ मीणा क गलो को अपने थूक और लार से भरते हुए मीणा की गर्मी बड़ा रहा था और उसका एक हाथ इस वक़्त मीणा की नाभि में ऊँगली करते हुए मीणा को मजा देने में लगा tha..aur इस दुगनी मजे को मीणा अपने दिल दिमाग और जिस्म में उतरने में खोयी हुई thi…meena को इस तरह बेफिक्र होकर अपनी बाहोंमे समता हुआ देख जमील की हिम्मत बाद गयी thi…aur उसे कुछ सज़ा और वो मीणा को नाभि में जोरो से ऊँगली फिरने लगा और दूसरे हाथ को मीणा क कमर पर आगे पीछे दये बाए घूमने laga…aur मौका पाकर उसने मीणा की घागरे की नाडा को खोल दिया.. तो अपनी hi मदहोशी में खोयी मीणा होश में ऐसे आयी जैसे किसी ने उस पर ठंडा पानी बरसा दिया ho..aur जमील से दूर हटाने की कोशिश करते हुए कमर से निचे सरक रहे अपने घागरे को पकड़ कर जमील से boli…e क्या कर रहे हो जमील ji..plz nh…chod दो na…ahhhh ह्ह्हह्ह पलज़्ज़ज़्ज़ज़…

जमील मीणा क हाथ को घागरे से अलग करने की कोशिश करते हुए नह

..मीणा आज मत roko…is खूबसूरत नज़ारे को देखने कब से मेरा दिल तड़प रहा है…

जमील की इस प्यार भरे रिक्वेस्ट से मीणा पिगल सी गयी thi..uska बी मैं कर रहा था की वो अपने घागरे को अपने जिस्म से अलग करके जमील क बहो में अपने आप को समां कर इस पल का मजा उठा le…par मीणा का संस्कार मीणा क लिए बाधा बानी हुई कड़ी thi..meena जानती थी मर्द क सामने नंगी होने का मतलब उससे चुदाई क निमंत्रण dena…jo वो अब तक बी नह सोची हुई thi…usne बस सोचा था की वो जमील क साथ ऊपर ऊपर से hi जिस्म का खेल खेलेगी लेकिन जो कुछ बी होरहा था वो उसके सोच क बहार hi हो रहा tha…aur वो अपनी कोशिश जारी रखते हुए जमील को देखते हुए boli…plz जमील जी ..इ सब nh…muje ाचा नह दिख रहा इ सब.. प्ल्ज़ छोड़ दो न..

मीणा ने इस बात को इतनी नज़ाकत से कहा था की मीणा का विरोध कही बी नह दिख रहा tha..jise बहुत खूबी से समजे जमील बिना कुछ बोले hi मीणा क घागरे से अपना हाथ निकल लिया तो मीणा रहत की सास लेते हुए अपने घागरे की नाड़े को बांधने अपना दूसरा हाथ बड़ा hi रही थी की जमील ने मीणा को पलट कर अपने बहो में लिया और मीणा क माथे पर प्यार से चुम लिया तो मीणा जमील क इस प्यार भरे हरकत से जमील को एक पल देखते hi रह गयी उसे समाज में नह आरहा था जमील क इस प्यार भरे हरकत पर कैसे रियेक्ट kare..wo कुछ देर क लिए अपने घागरे की नाडा को बांधना भूल कर जमील को hi देखने लगी thi…kisi बी औरत क लिए हमेशा hi ीचा होती है की उसे प्यार करनेवाला उसके माथे पे चुम कर प्यार को jataye..chahe कोई बी हो अपने माथे पर चुम्बन पाके खुश हो जाती और उसे सामने खड़े मर्द में अपनापन दिखाई देता है वैसे hi अब मीणा को बी जमील में अपनापन नज़र आया tha..halaki जमील ने इ अनजाने में किया tha…par जमील क अनजाने में छोड़ा हुआ तीर मीणा क दिल पे असर करगया था..

वही दूसरी तरफ अपने तरफ प्यार भरे नज़रो से देख रहे मीणा को देख कर जमील ख़ुशी से पागल हो गया tha..kuch देर दोनों एक दूसरे को hi देखते रह गए थे तब मीणा ने देखा की जमील की नज़र उसकी गुलाबी होतो पर तिकी हुई hai…aur उसके हॉट न चाहते हुए बी सुख कर अपने प्यास को बयां करने लगे the..uska गाला बी होतो क साथ देते हुए सुख ने लगा tha..apne गले और होतो पे अचानक आयी इस बदलाव से मीणा खुद हैरान होगयी thi..aur वो अपनी वासना को छुपाने की कोशिश करते हुए नज़ारे झुककर अपने घागरे क नदी को फिर से बांधने hi लगी थी की जमील ने मीणा क कमर से होते हुए अपने हाथ को आगे बड़के मीणा को कास क अपने बहो में लिया और मीणा क होतो को चूमने लगा.. अचानक हुई इस हरकत से मीणा अपने आप को बचने क लिए थोड़ी पीछे होगयी और अपने होतो को एक कर्ली ताकि जमील उसके होतो क रास चूस न paaye..ummmm न्नायना की इशारा करता हुए मीणा अपने होतो को जमील से अलग करने की कोशिश करते हुए अपना सर घूमने लगी thi..lekin जमील क मजबूत हाथो से मीणा अपने आप को आज़ाद नह करपायी thi..ek तरफ जमील क हाथ उसके पीठ पर चल रहे थे और दूसरी तरह जमील क हॉट मीणा क होतो क आस पास अपनी थूक गदा रहे the..pehle hi जमील क हरकतों से गरम हुई मीणा ने बी अपना हथियार दाल दिए और अपने होतो को जमील क लिए खोलने lagi…kuch hi देर में आलम इ था की जमील मीणा की रसबेरी होतो को बड़े प्यार से चूमने लगा tha..aur मीणा अपनी आंखे बंद किये अपने होतो को चुसवा रही thi..ab उसका शरीर पूरी तरह से जमील क वाश में हो रहा tha..meena का जो हाथ उसके घागरे को निचे गिरने से रोक रहा था उस हाथ का पकड़ अब घागरे पर कमजोर पड़गया tha..meena को बी होतो की चुसाई में मजा लेते हुए देख जमील ने अपने हाथ को मीणा क घागरे में गुस्साते हुए मीणा क हाथो को घागरे को छोड़ने का इशारा किया तो मीणा ने इस बार बिना कोई विरोध किये अपने हाथो से घागरे को आज़ाद करदिया तो मीणा का घागरा कुछ hi सेकंड्स में hi मीणा क पायलो पर गिर चूका था और मीणा की मोती मुलायम गोरी गोरी जंघे पूरी तरह से नंगी कड़ी हो gayi..kamar क निचे कपडे क नाम पर मीणा की नील रंग की चड्डी hi बची हुई thi..uski निघ्त्य आलरेडी पेट तक हो चुकी थी…

अपने आप को इस कदर एक गैर मर्द क सामने नंगा हुए देख मीणा और बी शर्मा गयी और अपनी शर्म छुपाते हुए वो अपने आंखे बंद किये जमील क बहो में बहे डाली जमील को होतो से अपने होतो को चिपक di..ab दोनों तरफ से होतो की चुसाई क शुरुवात हो चुकी thi…pure किचन में चाप चाप पूछ पूछ की आवाज़ गूंजने लगी thi….dono एक दूसरे पर हावी होने लगे थे जैसे जनम जनम से एक दूसरे क होतो क प्यासे ho…jamil तो इस खेल में माहिर था hi पर आज मीणा इस खेल में जमील पर हावी होते हुए नज़र आ रही थी इस वजह से जमील ने मीणा पर अपनी पकड़ बी ढीली कर दी थी अब उसके हाथ बिना कोई रूकावट क मीणा की चड्डी क ऊपर चलते चलते मीणा की गांड को बी धीरे से मसलने लगे the….meena की मोती नितंब जमील क हाथो में समां नह पा रहे the…itni मोती चौड़ी गांड को जमील ने कभी नह भोगा था .,लेकिन आज मीणा की मोती गांड उसे जो सुख दे रही thi…jisse उसने कभी कल्पना बी नह की thi…jis औरत क खूबसूरत चेहरा और मटकती गांड को देख कर वो पहली नज़र में hi पागल हुआ था आज वही चेहरे क होतो का रास वो जी भर क पी रहा tha…aaj उसी मटकती हुई गांड को वो मसलने जा रहा था…

वही मीणा का बी यही हाल tha…shadi क 14 साल में बी उसका पति उसे जो सुख नह दे पाया था आज वो सुख उसे एक गैर मर्द क बाहोंमे में मिल रहा tha…uske पति ने कभी बी मीणा की होतो को इस कदर चूसा था और नहीं उसके बड़ी नितम्बो से खेला tha…meena इस ख़ुशी से पागल हो गयी थी और वो बिना कोई रूकावट क जमील क साथ देने लगी थी.. दोनों करीब 5 मीन्स तक बिना रुके एक दूसरे क होतो को चूसते रहे लेकिन तब मीणा थोड़ी होश में आयी और उसे लगा की वो पतिव्रता की हद पार कर रही hai…aur वो जमील से अलग होकर किचन स्टैंड क सहारा लेके छपते हुए निचे देखने lagi…achanak बीच ने इस तरह किश टूटने से जमील बी होश में आया और उसे समझने में देर नह लगी की मीणा फिर से भावनावो में बहक रही hai…e उसके लिए अछि निशानी नह thi…wo जल्द से जल्द फिर से मीणा पर अपना काबू पाना चाहता था तो वो देर न करते हुए मीणा क पास गया और मीणा क झुके हुए चेहरे को ऊपर करते हुए बोलै क्या हुआ मीणा ऐसे अचानक बीच में क्यू रुक गयी…

मीणा कुछ देर बिना कोई जवाब दिए चुप रही और फिर अपने बढ़ती सासो की संभल ने की कोशिश करते हुए बोली …नहह जमील जी इ सब ठीक नह hai…e सब गलत hai…mai इ सब नह कर सकती …जो कुछ बी हुआ उसे यही पे रोक देते है.. plzzzzzzz…meena ने अपनी दुविधा को जमील क सामने बताने की कोशिश की थी..

जमील को किसी तरह मीणा को पाना hi tha…aur वो जनता था आज क जैसा मौका दुबारा नह मिल सकता है क्यू की अगर वो आज मीणा को भावना ो में बहकने में छोड़ देगा तो शायद इसके बाद मीणा हर कदम सोच समाज कर रखेगी और जमील अपने मंज़िल में कभी कामयाब नह हो payega…wo कुछ सोचा और बोलै ठीक hai….magar तुम मुझे नह अपने आप को रोक रही ho…apne इस सेक्सी बदन क साथ नाइंसाफी कर रही ho..tumare इस खूबसूरत जिस्म को जो सुख चाहिए उसे तुम देने से अपने आप को रोक रही हो शायद इसलिए की मई तुम पसंद नह hu..isliye अब मेरा यहाँ रुकना ठीक NH..mai चलता hu..aur मुझे माफ़ करना मैंने तो तुम अपना समाज क तुम ख़ुशी देने की कोशिश की thi..shayad मई hi गलत tha..kehte हुए जमील अपने भिखरे कपडे को ठीक करके जाने की एक्टिंग करने लगा.. दरअसल जमील ने अँधेरे में तीर मारा हुआ tha..wo जनता था की मीणा को इमोशनल करके की उसे भावना ो में बहकने से रोक सकता hai…aur जमील का तीर अँधेरे में बी काम कर चूका tha..meena तुरंत मुड़ी और जाने की एक्टिंग कर रहे जमील क हाथो को थम कर बोली मैंने ऐसा तो नह कहा की आप मुझे पसंद नह हो..

जमील अपने बढ़ते कदम को रोकते हुए तुम्हारी बातो का मतलब तो यही था और अगर तुम मुझे सच में पसंद करती थी तो किश बीच में तोड़ क अलग नह होती..

मीणा बी जमील क बातो से अब इमोशनल होने लगी ी thi…waise पहले बी वो इसी दुविधा में थी की वो जमील क साथ आगे बड़े या नह ..और इस दुविधा क जवाब ढूढने hi वो जमील से अलग हुई thi…par अब जमील क इमोशनल भरी बातो से कुछ हद तक उसने सोच बी लिया की वो जमील को निराश नह karegi….aur जमील की एक हरकत उसके दिल को छू गयी thi…ki जब बीच में जमील से अलग हो कर किचन स्टैंड क पास मुद क रुकी तो जमील क पास मौका होते हुए बी उसने मीणा क साथ कोई जबरदस्ती नह की thi..is बात से मीणा जमील पे और बी फ़िदा होगयी thi..wo सोचने लगी अगर ऐसा मौका किसी और क हाथ होता तो शायद वो मुझसे जबरदस्ती करने से नह रोकता पर जमील जी मेरे बीच में हटाने पर बी मेरे साथ प्यार से hi पेश आरहे hai…lekin मैंने अब तक जो बी जमील क साथ किया वो एक पतिव्रता होने क नाते मुझे नह करना चाहिए tha..mere इस पाक जिस्म पर सिर्फ मेरे पति का hi अधिकार hai…par जमील क बहो में मुझे वो सुख मिलता है जो मेरा पति क साथ बी नह मिलता क्या karu……..wo कुछ सोच कर boli..nh जमील जी बात ऐसी नह है आप मुझे बहुत अचे लगते ho..aur आपका साथ b…par मई मई मजबूर hu..mai एक शादीशुदा hu..aur शादीशुदा औरत क लिए किसी गैर की बहो क बारे में सोचना बी पाप होता hai..plz संजो न आप..

जमील वही चेयर पे बैठ गया और bola..nh मीणा तुम झूट बोल रही ho…agar तुम मई पसंद होता तो तुम बीच में रूकती hi nh…aur रही बात शादीशुदा होने की क्या शादीशुदा औरत को मजे करने का कोई हक़ nh.,..kya शादीशुदा औरत अपनी मैं से कुछ बी नह कर sakti…jamil ने इ बात कहते हुए मीणा की दबी हुई ीचा को भड़का ने की कोशिश की थी..

जमील क बातो का कोई जवाब दिए मीणा चुप hi कड़ी rahi…ab बी दोनों की सासे एक दूसरे क जिस्म को ठंडक पहुचाये उतनी hi दुरी एक दूसरे में थी फिर बी एक दूसरे क बीच कोई जिस्म की हलचल नह थी..

मीणा की ख़ामोशी जमील क साफ़ इशारा कर रही थी की वो फिर से गरमी को अपनाना च रही hai…aur जमील मौके का फयदा उठाते हुए बोलै कुछ पल क लिए सब कुछ भूल जावो मीणा और इस पल का मजे lo..agar फिर बी तुम लगता है की मई गलत हु तो मई यहाँ एक पल बी नह रुकूंगा सोच लो…

एक तरफ जमील क इमोशनल करने वाली बाते दूसरी तरफ जिस्म को मिल रही अनगीनत ख़ुशी से मीणा फिर से जमील क तरफ होगयी और वो बिना कुछ सोचे hi जमील क बहो में अपने आप को सूप दी और फिर से दोनों क होठ एक दूसरे क होतो से मिल गए इस बार मीणा ने जमील क सर की जगह उसकी पीठ को अपने हाथो का सहारा दिया था इस वजह से पहली बार मीणा क दूध जमील क सीने से चिपक गए the..jiske मधुर एसएस जमील बहुत मजे से अनुभव करने लगा tha..dono अब कुछ देर क लिए सब कुछ भूल कर फिर से एक दूसरे की होतो की चुसाई में मग्न हो रहे थे… मीणा क हाथ जमील क पीठ पर चलते हुए उसे और बी अपने छाती पर कास क पकड़ने क लिए बेताब हो रहे थे जिसे अछि तरह समजे जमील ने मीणा की निघ्त्य को फिर से ऊपर किया और मीणा ने इस बार उसे कोई विरोध न करते हुए जमील क होतो को चूसते रही देखते hi देखते मीणा की निघ्त्य मीणा क कमर क तक आकर उसकी मोती मुलायम जंघे फिर से एक गौर मर्द क सामने नंगे हो गए the..udhar जमील मीणा का कोई विरोध न पाकर अपने एक हाथ को मीणा क निघ्त्य में घुसा दिया और उसके नंगे पेट पर चलने लगा जिससे मीणा पूरी तरह अपने जिस्म में गर्मी महसूस करने lagi…aur इस बढ़ते गर्मी क सामने उसे याद बी नहीं रहा की वो एक शादीशुदा दो बचो की माँ hai…bina इस ख्याल क वो जमील को अपने होतो से रसपान करा रही thi..tabhi जमील ने मीणा की गांड पर जोर डालते हुए अपने कमर से चिपक लिए तो जमील का पंत में तना हुआ लुंड को मीणा अपने नाभि क आस पास महसूस करके वो और बी उत्तेजना से जमील क होतो को कास क चूसने लगी और अपनी ख़ुशी को जमील क सामने जाहिर ki…lekin जमील इतने से कहा संतुष्ट होता जब उसने देखा की उसका लुंड मीणा की नाभि से टकरा रहा है और वो सीधे खड़े मीणा की छूट को निशाना नह बना सकता तो वो थोड़ा ख़म गया और फिर से अपने कमर को हलके से आगे करके पीछे से मीणा की गांड पर जोर डाला तो उसका निशाना इस वक़्त सही जगह पर लग गया था..

आगे क्या हुआ इ जानने क लिए बने रहे अंत tak...aur कहानी अछि लगी तो अपने भरे कमैंट्स से अपने इस दोस्त को प्रोत्साहित करे... धन्यवाद्
 
लेकिन जमील इतने से कहा संतुष्ट होता जब उसने देखा की उसका लुंड मीणा की नाभि से टकरा रहा है और वो सीधे खड़े मीणा की छूट को निशाना नह बना सकता तो वो थोड़ा ख़म गया और फिर से अपने कमर को हलके से आगे करके पीछे से मीणा की गांड पर जोर डाला तो उसका निशाना इस वक़्त सही जगह पर लग गया tha..jamil का तना हुआ लुंड का एसएस अपने छूट पे होते hi मीणा की सिसकिया निकल पड़ी और वो जमील को hi देखने lagi..jamil मीणा को देख एक कातिल मुस्कान देते हुए अपने कमर को धीरे से आगे पीछे करने लगा तो मीणा अब अपनी छूट क ऊपर धक्के खाने लगी और न चाहते हुए बी उसकी टंगे इस मजे को लेने क लिए खुलने लगी thi..Is मीठे एसएस से मीणा धीरे धीरे अपना होश गवा रही थी और वो बी अपना कमर हिलने लगी thi…dono एक पल बी एक दूसरे से नज़र हटा नह रहे the…ab आलम इ था की मीणा और जमील एक दूसरे को देख रहे थे और मीणा ने सहारे क लिए अपने एक हाथ को जमील क पीठ को लपट लिया था तो दूसरा हाथ जमील क उस हाथ को पकड़ा हुआ था जिस हाथ से वो मीणा की गांड पर जोर देर रहा था…

जमील जान गया था की अब मीणा बी मजा ले रही है और उसने कुछ सोचा और अपने होतो को फिर से मीणा क होतो क करीब लाया तो मीणा इस बार बिना कोई ज़िज़ेक अपने होतो को खोल दी और इस बार तो दोनों ने चुम्बन में हद hi पार कर दी थी दोनों बारी बारी में एक दूसरे क होतो को चूसते हुए अपने जीव को बी एक दूसरे क मुँह में पास करते हुए चूसने लगे the…kareeb 5 मीन्स चले इस हरकत से मीणा पूरी तरह से गरम हो चुकी thi…niche लुंड की टकराहट ने मीणा की छूट पानी छोड़ रही थी तो मीणा को लग रहा था उसकी छूट खुद बी खुद फूल रही hai…aur उसकी छूट का छेद में एक अजीब सी मीठी खुजाण हो रही thi..meena अछि तरह जान गयी थी इ खुजली का मतलब क्या hai…aur वो जमील को ऐसे देखने लगी जैसे आँखों से hi पूछ रही हो आगे क्या करना है…

जमील मीणा की मैं की बात शायद जंगया था और वो मीणा को इस बार अपने से अलग करके मीणा की भुजा ो पर अपना हाथ क मीणा से प्यार भरी भाषा में pucha..meena आज हम करेंगे क्या?

जमील की मुँह से इ बात सुनते hi मीणा एक कदम और पीछे हैट गयी और नज़ारे झुकाये कड़ी हो gayi…q की वो खुद डेसिओं नह ले पा रही थी की क्या kare..ek तरफ उसे अपने पति की याद आकर उसका संस्कार उसका जवाब मांग रहा तो दूसरी तरफ पहली बार उसे बिना सेक्स किये hi इतना मजा आरा था की शायद पहले कभी न मिला ho…aaj जितनी वो बिना चुदाई क hi गरम हुई थी शायद वो अपने पति क साथ चुदाई क वक़्त बी नह होती thi..fir बी वो अपने संस्कार को बचने की आखिरी कोशिश करते हुए boli…nh जमील जी इ सब गलत है मई इ हक़ मेरे पति से चीन कर गैर मर्द को देना नह चाहती कहते हुए मीणा वही नज़ारे झुकाये कड़ी रही…

लेकिन जमील बड़ा खिलाडी tha..wo मीणा की मानसिकता तो अछि तरह समाज चूका tha..wo अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए bola….itne आगे बढ़कर बीच रोकना अगर तुम ठीक लगता है तो मई कुछ नह kahunga…q की मई तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती बिलकुल नह करना चाहता क्यू की मुझे तुम दिल से chahiye…so एक बात सच बता सकती हो क्या..

मीणा वही खड़े जमील को एक बार देखि और फिर निचे नज़ारे झुकाये हुए बोली पूछो…

जमील मीणा क चेहरे पर अपनी एक ऊँगली फेरते हुए बोलै तो सच बोलो इतनी देर हम दोनों क बीच में जो कुछ बी हुआ उसमे तुम मजा नह आया???

मीणा क्या जवाब देती सच बात तो इ थी की जमील की हरकतों क वजह से hi आज वो पहली बार इतनी गरम हुई थी की इतनी गर्मी क ऐसाह उसने पहले कभी अपने जिस्म में नह किया tha…wo जमील की बात को नकार बी नहीं पा रही thi…so वो बिना कुछ बोले hi चुप रही निचे ज़मीन को देखते हुए..

मीणा की ख़ामोशी जमील क लिए आगे बढ़ाने की हौसला देने लगी thi…aur वो बात को आगे बढ़ाते हुए bola..tumari ख़ामोशी साफ़ साफ़ बता रही है की तुम बी खूब मजा आया तो socho..jab मई तुम्हारे प्राइवेट पार्ट्स को बिना छुए hi इतनी मजा दे सकता हु तो सोच लो जब मई तुम्हारा इ खूबसूरत मुलायम नंगे बदन को चुकार तुम कितना मजा दे सकता hu…just इमेजिन करो उस वक़्त तुम कितना सुख और आनंद का अनुभव करोगी..

मीणा खड़े खड़े जमील की बात सुनकर सोचने लगी सच hi तो कह रहे है जमील ji…ab तक जमील जी ने मुझे ठीक से अपने हाथो से चुवा बी nh…wo सिर्फ ऊपर ऊपर से मुझे प्यार कर रहे hai..mere ूरोज़ उनके सीने से दबे होने पर बी उन्होंने हाथ नह लगाया और मई कमर क निचे नंगी होने पर बी उन्होंने मेरी चड्डी में हाथ डालने की या मेरी छूट को अपने हाथो से नह छुआ. बिना हाथ लगाए hi वो मुझे इतना गरम कर सकते है तो अगर उनकी ऊँगली मेरी नाज़ुक जिस्म पर चलने लगी to….ahhhhh ुह्ह्हह्ह सोच कर hi दिल रोमांच हो रहा hai..aur वो फिर से नज़ारे उठाकर जमील को देख एक शर्माहट भरी मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए अपने मैं में बाद रही उत्तेजना को जाहिर करने की कोशिश करने लगी जिसे भली भाटी पहचान जमील मीणा को इमोशनल करने की तरीके से bola..dekho मीणा अब बी तुम मेरी बात का कोई जवाब नह देना चाहती हो इसका मतलब तुम आधे अधूरे खेल से hi संतुष्ट हो पर मई नह hu…aur अब बी मई यहाँ रुक जावु तो मई आपने आप पर काबू नह पा सकता hu..q की तुम्हारा इ खूबसूरत जिस्म मुझे पागल बना रहा है और हो मेरी नियत ख़राब हो सकती hai…aur वो मीणा से थोड़ा दूर होक फिर से जाने की एक्ट करने लगा तो इस बार मीणा अपने आप को रोक नह paayi,ek तो पिछले एक दो घंटे से वो जमील की गर्मी को अपने जिस्म में महसूस करके हद से ज्यादा गरम हो चुकी थी और ऊपर से जमील की प्यार भरी इमोशनल बातो से उसमे सही गलत सोचने की क्षमता बी नह बची थी वो जमील क बहो में अपना सीना रख कर जमील क पीठ पर अपने हाथ फेरते हुए अपनी तेज़ सासो को काबू में पाने की कोशिश करते हुए बोली …ह्ह्ह्ह जमील जी मात्तत्त jaaavoooo…plz..manati हु

..मुझे भीईईई मजा aaya…..plz….mat जावो मुझे आआपपपका साथ ाछः लगता है ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह मीणा अपनी भड़कती वासना क नशे में खोयी जमील को अपना सबकुछ देने मैं hi मैं तैयार होगयी थी..

जमील अपनी जीत पर मुस्कुराता हुआ अपने साइन से लिपटी हुई मीणा की सर में प्यार से हाथ फेरते हुए बोलै नह जावूंगा मेरी जान तुम्हारा इस हसीं बदन से दूर जाने का मेरा बी मैं नह hai..Balki आज मई तुम बहुत प्यार करना चाहता हु कहते हुए जमील ने मीणा क माथे पर एक प्यार भरा चुम्बन दिया तो मीणा इस चुम्बन से पूरी तरह पागल हो गयी और जमील को और कास क बहो में पकड़ ली और boli…jamil जी इ गलत तो नह न..???

हालत की नज़ाकत तो देखो एक पतिव्रता औरत एक गलत इंसान क साथ गलत काम करने जा रही thi…e जानते हुए बी इ सब एक धोका है जिस्म का मोह hai….wo उसी गलत आदमी से सही गलत का जवाब उम्मीद लगाए बैठी थी..

मीणा की इस बात को जमील कैसे गलत बोल सकता tha…use तो यही चाहिए था की मीणा सब कुछ भूल कर अपने कामुक जिस्म को उसके हवाले kare…aur इसी जिस्म से अपनी प्यास भुजने क लिए तो वो पिछले 15-20 दिनों से मीणा क पीछे लगा हुआ था और जब सोने की चिड़िया उसके हाथ लग hi गयी तो उसे ऐसे कैसे जाने deta..wo मीणा क गलो को हलके से चूमते हुए बोलै नह मेरी जान कुछ बी गलत nh..jab दो प्रेमी अपने मैं से एक दूसरे से अपनी प्यास बहुजन चाहते है तो कुछ बी गलत नह होता बस तुम और कुछ मत socho…bas प्यार करो और मजे lo….ahhh मेरी जान कहते हुए जमील मीणा क चेहरे पर चुम्बन की बारिश करने लगा तो मीणा अपने चेहरे को जमील क लिए खुल्ला छोड़ दी जैसे जो चाहे करलो मई रोकूंगी नह….

कुछ देर चुम्बन क बाद जमील मीणा की निघ्त्य को फिर से उठाने लगा. मीणा जानती थी इस बार उसकी निघ्त्य उसके पुरे जिस्म से उतारकर निचे पर्श पर गिरनेवाली hai..aur उसे ख्याल बी था की बहार का दरवाज़ा खुला hai..aur कोई गलती से आ गया तो कपडे वापिस पहना बहुत मुश्किल hai…so वो अपने डर को झहीर करर्ते हुए शर्म क मरे जमील को देखते हुए बोली मुझे डर लग रहा है जमील जी…. अह्ह्ह्हह..

लेकिन जमील मीणा की डर की वजह कुछ अलग सोच बैठा और मीणा क इ हाथ को अपने लुंड क ऊपर रखने की कोशिश करने लगा तो मीणा शर्म क मरे अपनी हाथ पीछे कर्ली तब जमील मीणा पे ज्यादा जोर न देते हुए बोलै डरने की कोई बात नह मेरी जान हम आराम से मजे लेकर करेंगे तुम बी बहुत मजा आएगा कहते हुए उसने इस बार मीणा क एक हाथ को जबरदस्ती अपने पंत में खड़े लुंड पर रकते हुए बोलै देखो मीणा मेरा इ लुंड तुम प्यार करने क लिए कितना तरस रहा hai..pyaar करने डौगी न..? जमील ने सवाल भरे नज़रिये से मीणा को देखते हुए कहा था..

पहली बार लुंड शब्द सुन कर मीणा शर्म से पिगल hi गयी थी और जब अपने नाज़ुक कलाई यो पर जमील क लुंड का एसएस पाकर मीणा मैं hi मैं सोचने लगी कितना मोटा और कड़क हथियार है जमील जी का. ..सच में बहुत कमल क मर्द है जमील जी तो ..मीणा अपने आप को रोक नहीं पायी और अपनी नाज़ुक कलाईको को जमील क पंत पर hi सवारते हुए शर्माके अपना सर हिलाते हुए हां में इशारा की तो जमील मीणा की निघ्त्य जो कमर तक तिकी हुई थी उसे और ऊपर करते हुए बोलै अब और मत रोको मीणा मुझे कब से तुम्हारे नंगे जिस्म क दीदार करने मेरी आंखे तरस रही है…

अब मीणा ने बी निघ्त्य पर से अपना हाथ हटा दिया था और वो जमील को देखते हुए धीरे से बोली जमील जी दरवाजा खुल्ला hai…koi aajayega…e कहते हुए मीणा ने साफ़ जाहिर करदिया था की अब उसे कोई और डिस्टर्बेंस नह चाहिए

मीणा की बात सुनते hi जमील मीणा से थोड़ा अलग हुआ और बोलै है जान अब दरवाजा बंद तो करना hi पड़ेगा और वो दरवाजा बंद करने निकल hi रहा था तो मीणा उसे रोकते हुए बोली नह जमील जी आप यही रुको मई बंद करके आती हु कहते हुए मीणा हलके पाँव बहार दरवाजे की तरफ निकल पड़ी तो जमील वही खड़े खड़े मीणा की मटकती गांड को देख कर खुश हो रहा था..

मीणा दरवाजे क पास जाकर पहले एक बार बहार की तरफ नज़र डाली और फिर दरवाजा बंद किये अपना पीठ दरवाजे पे ठीके कड़ी होकर अपने आंखे बंद किये सोचने लगी…

मीणा पहली बार किसी गैर मर्द क मौजूदगी में घर का दरवाजा बंद कर रही थी इ उसके लिए कोई एडवेंचर से काम नह tha..e बात अलग थी की जमील पिछले 6-7 दिन से उसके पति क गैर हज़ारी में उसके घर आता था पर आज तक मीणा ने उसके आने क बाद दरवाजा बंद करके गोपनीयता बनाये रखने की गुस्ताखी नह की thi..ya जमील ने बी कभी इसकी कोशिश की thi…par आज माहौल कुछ ऐसा बनगया था की मीणा खुद छह रही थी की जमील और उसकी privacy(gopaniyata) किसी को पता न chale..wo धीरे से आंखे खोली अपने कदम फिर किचन की तरफ बढ़ाने लगी thi..aage होने वाली उनके खेल की कल्पना कर क hi मीणा क जिस्म कंपनी लगा tha…uske चेहरे की रंगत hi बदल गयी शर्म और लज़्ज़त क मरे उसके हॉट सूखने लगे थे वासना क नशे में उसके आंखे लाल लाल होगये the..wo छह कर बी अपने पिसलते हुए अपने कदम को रोकना नह छह रही थी और वो जब किचन क दरवाजे तक पहुंची तो जमील से आंखे मिलके वो शर्माके झुक गयी और अपनी शर्म छुपाने की कोशिश करते हुए वो दौड़ क जमील क बहो में सिमट कर जमील क साइन पर अपना सर रख di..taaki शर्म से भरे उसके चेहरे को जमील न डेक सखे..

किचन में खड़ा जमील मीणा की हर गतिविधियों को बारीकी से देख रहा tha..aur उसे समझने में देर नह लगी थी मीणा पूरी तरह से शर्मा गयी और मीणा क जिस्म का पूरा मजा लेना है तो मीणा को पहले बेशरम बनाना padega…aur वो बी जनता था की एक पतिव्रता औरत इतनी आसानी से बेशरम नह बन सकती hai..uske लिए कई मुललाटे करने पड़ते है और प्यार और सेक्स को बड़े इम्तिहान से एक साथ जोड़ना पड़ता hai…aur वो इस नेक काम को पहली मुलाकात से hi शुरू करना चाहता tha…to वो मीणा की चेहरे को अपने उंगलियों से ऊपर करते हुए bola..ab दरवाजा बंद हो चूका है मेरी जान …क्या मई अब मेरी फूल जैसी मेहबूबा का छूट छोड़ सकता हु…

इ बात नह थी की मीणा पहली बार लुंड छूट चुदाई सुन रही thi..isse पहले बी वो ऐसे गंदे शब्दों को सुन चुकी thi.par आज पहली बार कोई मर्द उसके लिए ऐसे शब्द इस्तेमाल करते देख मीणा को कुछ अजीब सा लग रहा tha..is वक़्त जमील क मुँह से निकले गंदे शब्द बी उसके कानो में सुर बन क बज रहे the..aur वो बिना जवाब दिए hi जमील को प्यासी नज़रो से देखते हुए चुप रह gayi…lekin जमील को किसी बी तरह मीणा को बेशरम बनाना था तो वो अपनी बात को जोर देते हुए बोलै बोलो न मीणा क्या मई तुम्हारे छूट को मेरे लुंड से प्यार कर सकता हु…

मीणा को बी अब कुछ कुछ समाज आया था की जमील एक hi बात पे क्यू जोर दे रहा hai…par मीणा ने अपने लाइफ में कभी बी ऐसे शब्दों को अपने जुबान पे गलती से बी नह लाया tha..par आज एक गैर मर्द उसे ऐसे शब्दों का प्रयोग करने इंदिरेक्ट्ली उत्सुकता रहा tha…par मीणा को आज इ बात बुरी लगने की वजह अछि लग रही thi…aur वो जानती थी अगर अब बी चुप रहूंगी तो जमील फिर से जोर देगा और न चाहते हुए बी उसके जुबान पे ऐसे गांधी शब्द निकल hi जायेंगे तो वो जमील को देख मुस्कुराते हुए अपने कांपते आवाज़ में boli..ha करो नाहा जमील जीई हआ करो na……plz और कुछ मत puchoooooo..aur वो जमील का मुँह बंद रखने की कोशिश करते हुए जमील क काळा होतो को चूसने lagi..ab जमील बी जोश में आगया था और वो बी मीणा क किश का जवाब मीणा को अपने बहो में कास क पकड़ क देने laga…dono क जिस्म फिर से एक बार ऐसे चिपक गए थे की हवा क जौका बी उनके शरीर क बीच से गुजरना चाहे तो बी दोनों की अनुमति मांग le…dono एक दूसरे क होतो को चूसने में ऐसे खोगये थे की उनको इस वक़्त दुनिया की कोई परवा नह thi…aur इस वक़्त शायद मीणा का पति बी सामने आके खड़ा होता तो मीणा शायद किश नह todati….itni मजे से मीणा अपनी होतो को जमील क होतो को सूप कर अपनी ख़ुशी मन रही थी..

मीणा की मोठे बूब्स जमील क साइन से चिपकने की वजह से उसकी आधे से ज्यादा बूब्स निघ्त्य से बहार निकल कर आये थे जिसे किश करते करते जमील अपने आँखों में कैद कर रहा था और इस नज़ारे को देख कर उसका लुंड और बी शाक्त हो रहा था जिसका एसएस मीणा अपनी निघ्त्य क ऊपर से hi अपने छूट पर कर रही thi..meena इस मधुर एसएस से और बी उत्तेजित होकर अपनी कमर को हिलने लगी थी और लुंड को अपनी छूट पर चुबता हुआ महसूस करके नशीली अह्ह्ह्हह्हह की सिसकारी लेते हुए जमील क होश को और बढ़ाने लगी thi..ab जमील बी अपने आप को रोक नह पाया और इस बार उसने अपने हाथो से मीणा क दोनों बूब्स को एक साथ दोनों हाथो से दबोच लिया तो मीणा किश तोड़ते हुए अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जमील जी…. धीरे….. अह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह मार hi डोज kya…m.sisak padi..lekin जमील को मीणा की बूब्स को मसलते hi समाज गया था की काफी मोठे और अब बी उतने hi तंदुरुस्त है जितने एक नए नवेली दुल्हन क होते hsi…jamil ने ऐसे टाइट कैसे हुए बूब्स क स्वाद आज तक नह चका tha…aaj तक जितने बी औरत उसे मिले थे उनमे में किसी का बी इतने बड़े बूब्स नह the…aur कुछ औरतो क थे बी मगर वो निचे जोल पड़े हुए the…lekin मीणा की बूब्स को मसलते hi जमील जो मजा मिल रहा था वो खुद बी बयां नह कर सकता tha…aur जब मीणा किश तोड़ क सिसकने लगी तो जमील ने मीणा की गार्डन से होते हुए मीणा क गले पर और मीणा की बूब्स पर अपने होतो को तक दिया था और निघ्त्य क ऊपर से hi मीणा की बूब्स को किश करने लगा और मीणा जमील क बालो को हलके से सवारते हुए जमील का साथ देने lagi..nashili अह्ह्ह्हह्हह ुह्ह्ह्हह्ह की आवाज़ निकलते hue…kuch hi देर में मीणा की निघ्त्य ऊपर छाती क पास जमील क थूक से गीली हो गयी थी और छूट से कामर्स की बुँदे टपकने क वजह से निचे मीणा की चड्डी में गीलापन महसूस होने लगा tha…is बढ़ती उत्तेजना से मीणा अब बिना चुदाई क रुकना नह चाहती thi..wo प्यासी नज़र से जमील को देख रही थी जो इस वक़्त उसके बूब्स को मसलते हुए उसपर किश कर क कपडे क ऊपर hi अपने मुँह में भरना छह रहा tha..meena से रुका नह जा रहा tha…aur वो जमील को खुल क बोल बी नह पा रही थी की जल्द से जल्द चुदाई करके उसकी प्यास को bhujade…isliye वो फिर से जमील क खड़े लुंड को अपने हाथो से पंत क ऊपर से ऐसे सवारने लगी जिसे जमील समाज जाए की वो लुंड लेने तड़प रही है ..और जमील क पीछे उसके शर्ट में हाथ डेल जमील क नंगी पथ को सवारते हुए अपनी बढ़ती उत्तेजना को शांत करने की इशारा छोड़ ने लगी..

अब जमील बी जान गया था की उसकी बुलबुल पूरी गरम होकर छुड़वाने क लिए तड़प रही hai…par जमील को आज कोई जल्दबाज़ी नह thi..aur उसे मीणा की नंगे जिस्म को चाट चाट कर उसका स्वाद चकना tha…isliye वो मीणा को नंगी करने क लिए छाती पर चूमना छोड़ क मीणा निघ्त्य क बटन्स खोलने लगा..

मीणा पहली बार अपने पति क अलावा किसी गैर मर्द क सामने नंगी होने जा रही थी वो बी किचन में जो अब तक उसके पति ने सोचा बी नह होगा इ सोच कर hi एक्सिटमेंट से उसके आंखे शर्म से लाल हो गयी thi…aur वो जमील क हाथ पकड़ जमील को अपने निघ्त्य क बटन्स खोलने में मदत करने लगी और उसकी नज़र पर्श पर पड़े अपने घागरे को देख इस कामुक माहौल से चुदाई क लिए उसकी उत्सुकता बढ़ाने lagi..par उसे लगा किचन जैसे पवित्र स्थान पर चुदाई करना ठीक नह रहेगा और वो कुछ सोच कर जमील से बोली ..जमील ji..mmmmm सब कुछ यही करोगे क्या…..???

जमील क लिए बैडरूम क्या और किचन क्या? उसे बस चुदाई से मतलब था वो वो सवाल भरे अंदाज़ में पूछा क्यू मीणा क्या हुआ..??

मीणा अपनी कंपते हुए आवाज़ में …….कऊछहह नहहह बस्सस यहाँ ह्ह्हह्ह याहा ख़ूऊलल्ले में मुअज्ज्जे शहहहारआममम ाराहहीइ हाइइइइ बेड़ड़ड़ड़ड़ूऊम meeee……pppllllzzzzz

जमील को बी बात सही लगी और वो मीणा को किश करते हुए …हां चलो मेरी जान इस नेक काम को तुम्हारे बैडरूम में hi अंजाम देते हाउ …. और दोनों एक दूसरे को चूमते हुए बैडरूम की तरफ निकल pade…aur जैसे hi बैडरूम पहुंचे तो मीणा ने बैडरूम का दरवाजा अदा करलिया और शरमाते हुए जमील को देखने लगी..

मीणा पहली बार एक गैर मर्द क साथ अपने बैडरूम में थी और वो जानती थी की कुछ hi देर में वो निर्वस्त्र होक उस बीएड पर एक गैर मर्द क बाहोंमे सोने वाली है जिस बीएड पे सिर्फ उसका पति hi उसके साथ ऐसी हरकत करने की ख्षमता रखता है ..पर आज उकसा तद्विरुद्दा होने जा रहा था और वासना क नशे में मीणा सब कुछ भूल कर उस गैर मर्द को अपनी निघ्त्य उतारते हुए देख रही thi..aur जब निघ्त्य उसके शोल्डर तक पहुंची तो मीणा ने अपने हाथ ऊपर करलिए थे ताकि उसकी निघ्त्य आसानी से उतर जाए.

अब मीणा क जिस्म पर कपडे क नाम पे एक नील रंग की चड्डी जो उसकी नाज़ुक छूट को ढकी हुई थी और काळा रंग की ब्रा जिसमे उसके तंदुरुस्त बूब्स छुपाने की कोशिश कर रहे थे, ब्रा में कैद मीणा क बूब्स आधे से ज्यादा मीणा क बूब्स बहार झाँक रहे थे और इस कामुक नज़ारे को देख जमील अपनी ख़ुशी समेत नह पा रहा था और उसने एक बार अपने लुंड को मसल hi दिया

जमील को लुंड मसलता हुआ देख मीणा शर्म से पानी पानी होगयी और अपने आप को इस आधी नंगी नग्न अवस्ता को जमील क हवस भरी निगाहो से बचने क लिए बीएड पे लेट कर पूरी चादर ोड ली और जमील को देखने लगी जो इस वक़्त मीणा को देख मुस्कुराते हुए अपने कपडे उतर रहा था.. मीणा एक गैर मर्द को पहली बार अपने सामने नंगा होते देख रोमांचित हो रही thi..aaj जमील क साथ बैठ रहे हर एक पल में मीणा क लिए नयापन दिख रहा tha…usne आज तक अपने पति को बी अपने सामने नंगे होते हुए नह देखा tha…wo याद करने की कोशिश करने लगी कभी तो उसके और पति क बीच कभी ऐसा मौका आकर गुजर गया ho…lekin उसके दिमाग ऐसे याद को खोजने की कोशिश ने नाकामयाब raha..meena सोच में खोयी थी तब उसने देखा जमील अपने पंत शर्ट उतर क सिर्फ अंडरवियर पे है और उसका लुंड अंडरवेअर में बी तम्बू बनाये खड़ा है जो कुछ hi देर में अपना नग्न रूप धारण करके उसकी छूट में बढ़रही खुजली को मिठाने वाला है और इतने लम्बे लुंड को देख कर रोमांच क साथ हिकरण बी होगयी और वो कुछ सोच hi पाती जमील मीणा क बगल में लेट गया और मीणा क चद्दर में गुस्स गया तो मीणा अपने सोच से बहार आते हुए जमील को बाहोंमे ली और फिर दोनों नंगे जिस्म चद्दर क अंदर एक दूसरे की घर्षण करने लगे फिर से दोनों एक दूसरे क रसपान में लग गए the…room बंद होने की वजह से दोनों की होतो की चुसाई की चाप chap…srrrr की आवाज़ पुरे रूम में गूंज कर एक मधुर संगीत सा लग रहा tha…aur देखते hi देखते जमील ने पीछे हाथ डालकर मीणा क ब्रा का हुक खोल दिया तो.. मीणा ने अपनी ब्रा को शोल्डर से अलग करदिया. दोनों का जिस्म चादर में ढकने की वजह मीणा को अपनी ब्रा उतरने में उतनी शर्म नह आयी thi..dono का सर उतना hi चद्दर से बहार था जो इस वक़्त होतो की चुसाई में बिजी tha…ab मीणा ऊपर से पूरी नंगी thi..Is वजह से जमील अपने नंगे साइन पे मीणा की बूब्स की गर्मी को महसूस करके इस पल का आनंद ले रहा tha…aur मीणा का बी यही हाल tha…jindagi में पहली बार उसके दूध एक हट्टे काटते मर्द के सीने क बीच सैंडविच की तरह मसल रहे थे उसे इ अनुभव अलग hi मजे में डूबा रहा था…

मीणा की बूब्स की गर्मी को जमील सहन नह कर पा रहा था वो मीणा से किश तोड़के चादर क भीतर चलागया और मीणा क एक बूब्स को मुँह में लेके चूसने लगा और साथ hi साथ दूसरे बूब्स को अपने हाथ से मसलने लगा बड़े जोरो से जैसे परोठे बनाने क लिए आता मसल रहा हो..

मीणा जमील क इस तेज प्रहार को अपने स्थान पर सह नयी पायी और तेज अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह की सिसकारी लेते हुए बोली अह्हह्ह्ह्ह जमील जीईई dhiiire…dard हुओटाआ हीी हा पलज़्ज़ज़ धिइरे अह्ह्ह्ह

लेकिन जमील क हाथो आज वो चीज़ लगी थी जिसे वो सपने में नह सोच पाया tha…wo बी अपनी उत्सुकता दिखते हुए bola..nh मीणा मत रोको मुझे मैंने जिंदगी में कभी तुम्हारे माखन जैसे गोर और कड़क बूब्स नह देखे आज मुझे इन्हे जी भर क मसल क चूसने दो कहते हुए वो मीणा की निप्पल को काटते हुए फिर से मीणा एक बूब्स को मसलने लगा ..अपनी बूब्स की तारीफ सुनकर मीणा खुश हुई thi…ab उसने जमील को रोकने की बजाय इस मीठे दर्द को hi सहना ठीक समजा और वो जस्मिल का साथ देने लगी उसके बालो में अपना हाथ फेरते hue..lekin जमील रुकने का नाम hi नह ले रहा था तो मीणा का एक साइड का दूध जो जमील मसल रहा था उसमे बहुत दर्द फील होने लगा to..meena अपनी कम्पटी आवाज़ में boli..plz जमील जी आराम से करूओ नाआ ….plz…baari बारी में karoooo….ek hi माटट दबाजवू plZ….meena ने अपना दर्द काम करने क लिए जमील को एक एक्सपेरिएंस्ड की तरह बताया..

अब जमील बी समाज गया था मीणा दर्द को सहन नह कर पा रही है क्यू की पिछले 5-6 मिनट से बिना रुके एक बूब्स चूस रहा था तो दूसरे बूब्स को पूरी ताकत से मसल रहा tha…jamil जैसे हट्टे काटते मर्द क हाथो को इस तरह सहन करना किसी बी औरक लिए काफी दर्दनाक hi था…

सिचुएशन की नाज़ुकता को समझते हुए जमील ने मीणा को सीधा लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया और वो मीणा की उस बूब्स को मसलने लगा जिसे कुछ देर पहले वो चूस रहा था और दूसरे बूब्स को मुँह में भरते हुए चूसने laga..to मीणा का दर्द पहले से काम होगया tha…par अब परेशानी इ थी क जमील 90 कग से ज्यादा वजन को अपने 65 कग जिस्म पर झेल नहीं प् रही thi…pura शरीर दबाने क वजह से उसकी सासे अटक ने लगी तो जमील अपने हाथ को मोड़ कर बिस्टेर का सहारा लिया और मीणा की परेशानी को दूर किया..

अब मीणा बी पूरी तरह कम्फर्टेबले हो गयी थी अब वो बिना किसी परेशानी या दर्द क जमील को अपने दूध को बारी बारी से चुसवाने लगी thi..dono मस्त मजे में नशीली आवाज़ करते हुए एक दूसरे में खो गए the…meena अब पूरी तरह गरम हो चुकी thi…uski छूट हद से ज्यादा पानी छोड़ चुकी thi..aur दोनों की बढ़ती गर्मी और चादर ोडने क वजह से दोनों का पसीना निकल गया tha..jise एक दूसरे की जिस्म चिपकने क वजह से एक अजीब सी आवाज़ आ रही thi…shayad दोनों क लिए अब चद्दर क भीतर घुटन सी हो रही thi…aur मीणा ने अपनी गरम जिस्म को हवा देने की कोशिश करते हुए चद्दर को कमर तक निचे करदिया इस वजह से मीणा का नंगा जिस्म खिड़की से आ रही सूरज की रोशनी में चमक ने लगा था और इस सूंदर नज़ारे को देख जमील का जोश और बाद गया और मीणा क माथे पर एक प्यारा सा चुम्मा देकर ऐसे नज़ारा दिखने क लिए मीणा को धन्यवाद कहा..

जमील कभी मीणा क होतो को चुस्त तो कभी मीणा क निप्पल काटता तो कभी दोनों बूब्स को एक साथ मसल deta..aur मीणा खूब मजे से सिसकारी लेती ..और जमील ने अब अपने लुंड को बी हरकत में लाया और वो मीणा पर इसतरह लेट गया की उसका लुंड ठीक मीणा की छूट पर हमला बोल दे और वो मीणा क इ हाथ को ऊपर किये उसकी खख को चाटने लगा और फिर दूसरा हाथ…

मीणा ने काफी दिनों से अपने बाल साफ़ नह किये the…sach बात तो इ थी की मीणा महीने में एक बार डेट होने क बाद hi सब बाल साफ़ करलेती थी तो उसका डेट होक करीब 20 दिन होगये थे इस वजह से उसके छूट और आर्मपिट पर करीब आधे इंच क बाल उगे हुए the…aur इस वजह से काफी पसीना मीणा क खाक में जमा हुआ था जिसे जमील बहुत प्यार से चाट रहा था और साथ hi साथ अपने कमर को ऊपर निचे करके मीणा की छूट पर धक्के देने लगा था…

मीणा बी इस नए अनुभव क चलते कुछ नया फील कर रही thi…Jamil क इस हरकत से उसे आर्मपिट में गुदगुदी हो रही थी तो निचे जमील क लुंड क प्रेशर अपनी छूट पे पाकर वो अपने आप को रोक नह पायी और जमील से बोल बैठी….. जमील jiiiii……haaaaa आआब्बब बस भठी कारूओ मुज्झे कुछः होओओओ राह haiii….daaal बी दोऊ नाहा plzzzzzzz…..uyyyy मा ….अह्ह्ह्ह ह्ह्हह्ह वहा महः कहते हुए अपने खाक को चाटने से जमील को रोकने की कोशिश करने lagi.meena ने पहली बार किसी मर्द को छोड़ने क लिए खुला आमंत्रण दिया था उसने अपने पति को बी कभी इतना खुल क नह कहा था …पर आज वो जमील क लिए इतना फ़िदा होंगे थी की उसने अपनी मर्यादा की सीमा लाँघ दी थी..

जमील मीणा की बात सुन ख़ुशी ख़ुशी पूछा मज़ा ारः है न मीणा…

मीणा फिर से कम्पटी आवाज़ में boli…haaaa जमीलल जीईई bahuut….ab दाल बी दो…. पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ हम्म्म्म

अब जमील का बी लुंड इतना तन चूका था की उसे बी अब चुदाई करना hi ठीक लगा पर वो उसके पहले और बी कुछ करना चाहता था तो वो मीणा को छेड़ते हुए बोलै डाल्डुन्गा मेरी जान पर उसके लिए तुम्हारी चड्डी बी तो उतरना चाहिए…

जमील ने जानबूजकर इ बात की थी ताकि मीणा और सडके हो जाए और मस्ती में chude….aur जमील की इ बात काम करगयी थी और मीणा फिर से अपने कंपते आवाज़ में boli….utar दो न जमील ji..meena ने अपनी शर्म हाय छोड़ते हुए एक बेशरम की तरह बोलै और वो खुद हैरान थी वो इतनी बेशरम कैसे होगयी..

लेकिन जमील को मीणा को सडके होता देख कर मजा आरा है tha…aur वो मीणा को और सडके करते हुए bola…ise तुम hi उतरो न और बी मजा आएगा कहते हुए वो निचे आगया और मीणा की बूब्स को चूसते हुए अपने एक हाथ को मीणा की चड्डी में डालकर मीणा की छूट को सहलाने लगा…

मीणा अब पूरी तरह अपना होश गवा चुकी thi…use इस खेल में मजा दूंगा होने का एसएस होने लगा था और वो उम्म्म्म हहह ुह्ह्ह्हह्ह उम्म्म्मन जमील जीईई हआ बस और कुछहहह मत्तत्त करूओ बस्स्स डालल दोओओओ प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़

लेकिन जमील रुकने की बजाय अपने एक ऊँगली को मीणा की छूट में दाल क आगे पीछे करने लगा तो मीणा न न का इशारा करते हुए अपना सर इधर उधर करने लगी और उत्तेजना से जमील क बालो की अपने मुट्ठी में लेकर पूरी ताकत से भींच ली तो जमील दर्द मरे सिसक utha…lekin उसे इसमें बी बहुत आनंद आ रहा tha…aur वो अपनी ऊँगली को तेज़ी से मीणा की छूट में आगे पीछे करने लगा तो मीणा खुद हैरान हो गयी थी जिस आदमी की ऊँगली बी उसके छूट में इतनी कमल कर सकती है तो लुंड क्या कमल karega…e सोच कर वो और उत्तेजित होगयी और अपनी छूट में जमील का लुंड लेने क लिए तड़पने lagi..aur सिसकारी भरते हुए बोली ह्ह्ह्ह जमिलल्ल जीई ऊंगलीईई ह्ह्हह्ह्ह्ह वोओओओ कारूओ जिससीईए करने se…aurrr बी माजा आता हैईईई प्ल्ज़ करूऊ ना तडपाआवोओओओ मत्तत्त करूओ basss…..ahhhhh कहते हुए मीणा ने अपनी गांड उठके चड्डी को जांघो तक उतर दिया था..

अब मीणा की छूट और भरी भरकम गांड पूरी नंगी हो चुकी थी और जमील अपने पलके झुकाये इस खूबसूरत नज़ारे को अपने आँखों में कैद करने laga…jis चीज़ ने उसके रातो की नींद हराम कर दी थी आज वही चीज़ उसके अन्नको क सामने पूरी नंगी thi..jamil तुरंत मीणा क पैरो क बीच बैठ गया और मीणा की चड्डी को पैरो से अलग करके बिस्टेर पर फेक क छूट पर हलके से हाथ फेरते हुए बिना पलके झुकाये देखने laga..gore मोठे जांघो क बीच वह क्या नज़ारा छुपा हुआ था जिसे देखने क लिए उसे दोनों आँखे काफी नहीं लग रहे the…aadhe इंच से ज्यादा उगे हुए बालो क बीच एक लम्बी सी दरार और उस दरार क ठीक बीच में एक छोटा सा ched…jiske दाने अभी बी ठीक से बहार नहीं ए थे अंदर hi अंदर डाब क रहने से छूट काफी फूली हुई लग रही thi…jaise किसी 18 साल की लड़की की बिंछूड़ी छूट की tarah…aur मीणा की पानी छोड़ने क वजह वो गीलापन उसके झाटो पे किसी मोती की छोटी छोटी बुँदे क तरह छूट को और बी आकर्षित बना रही थी जिसे देख जमील क मुँह में पानी आने लगा था..

अपने गुप्त अंग को इस तरह निहत्ते देख मीणा शर्म से पिगल गयी और अपनी इज्जत को छुपाने की कोशिश करते हुए मीणा ने दोनों हाथ से अपनी छूट को धक् ली और boli…plz जमील जी ऐसे मत dekho..muje शर्म आती है..

जमील मीणा क हाथो को हलके से चूमा और उसे छूट से अलग करते हुए ठीक अपने चेहरे को मीणा क छूट क करीब लेकर मीणा को देखने लगा जो इस वक़्त शर्म क मरे जमील से नज़ारे चुराने की कोशिश कर रही thi…aur आखिर शर्म क मरे अपनी आंखे hi बंद कर ली तो जमील मीणा की छूट क इतने करीब आगया था की उसकी तेज़ चल रही सासे मीणा को अपने झाटो पर एसएस होने लगी और उसके छूट पर कुछ हलचल होने का एसएस होते hi मीणा ने अपने आँखे खोली तो जमील को अपनी छूट को सूंघते हुए डेक वो अपने आप को रोक न पायी और फिर अपनी छूट को जमील क नज़र से छुपाने क लिए अपने हाथ को आगे बढ़ाने लगी तो इस बार जमील ने उसके हाथ को बीच में hi रोक लिया और देर न करते हुए मीणा की छूट को चुम hi liya…to मीणा अपनी सुक्ष्कारी रोक नह पायी अह्ह्ह्हह जमील जीईईई क्या काररर रहे hooooo..shhhhh ह्ह्हह्ह जमील जीईई इ साबबबबब ह्ह्हह्ह प्ल्ज़

लेकिन जमील अब कुछ सुनाने का मूड में नह था वो मीणा की छूट को मुँह में भरे चूसने लगा और मीणा की छेद में अपनी जुबान घुसाने की नाकामयाब कोशिश करने लगा….

जमील की इस हलचल से मीणा और बी गरम हो गयी thi..usne आज तक छूट चुसाई का मजा नह लिया था उसे थोड़ा ऑक्वर्ड सा लगा और वो जमील को रोकने की कोशिश करते हुए सिसकारी लेते हुए boli…nhhh जामिलल जीई वहा ह्ह्हह्ह पलज़्ज़ज़ इ गंधा हैईईई.. पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ हतोऊ…

लेकिन जमील को मीणा क बातो से कोई फरक नह पड़ा था आज उसके हाथ ऐसी मलाई लगी थी जिसे लाखो रुपये देकर बी खरीद नह sakte….aur वो मस्त मजे में मीणा की छूट क छेद को अपनी ऊँगली से अलग करके अपना जीव पूरा अंदर तक घुसाने की कोशिश करने लगा था और साथ hi साथ एक ऊँगली को मीणा क छूट को छोड़ने laga…jamil क एक साथ दुगनी हरकत से मीणा को बी अब मजा आने लगा था और शर्म बी और वो अपनी शर्म छुपाने क लिए फिर से चद्दर को अपने कमर तक ोड ली तो अपने छूट से खेल रहे हिलते हुए जमील क सर को वो चादर क ऊपर से देखने lagi…aur अपने दोनों हाथो को चद्दर क अंदर डालके जमील क बालो को प्यार से सवारते हुए अपनी उत्तेजना और ख़ुशी को एक साथ झहीर करने लगी…

जमील मीणा की छूट को ऐसे चाट रहा था जैसे बिल्ली दूध क कठोर में से दूध पी रही हो और मीणा उसके सर को ऐसे सेहला रही थी की किसी पाली हुई बिल्ली को उसकी मालकिन प्यार से दूध पीला रही हो.

मीणा को छूट चुसाई का कभी अनुभव नह हुआ tha…uske पति और उसके बीच पहले से hi नार्मल सा सेक्स होता था ..पर उसने जरूर सुनाता की चुदाई क वक़्त दोनों पार्टनर्स एक दूसरे क गुप्त अंग की चुसाई करते है और मजे लेते hai….meena इस कही सुनी बातो को खुद एक्सपीरियंस कर रही thi…wo काफी एक्सीटेंड होगयी thi…aur जमील क सर को छूट पर दबोच कर उसकी जीव को अपने छेद में और बी घेहरायी तक महसूस करना छह रही thi…udhar जमील बी बहुत खुश tha…jaise मीणा क लिए सब कुछ नया अनुभव था वैसे आज जमील क लिए बी tha..aaj तक उसे किसी औरत से इतनी मजा नह मिला था जितना आज मीणा से मिल रहा tha…wo अपनी किस्मत पर गर्व महसूस कर रहा था की उसे मीणा जैसी खूबसूरत और सेक्सी फिगर वाली मिली…

उधर मीणा अपनी बर्दाश्त की हद पर कर चुकी thi…jamil क जीव ने उसके छूट की चाटते हुए उसके रोम रोम में सनसनी मचा दी thi..uske छूट से कामर्स की बुँदे बहुत तेजी से गिरने लगे थे जिसे जमील बड़े प्यार से अपने जहाँ में उतर रहा tha…wo अब आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो गयी thi..use लगा की वो कुछ hi देर में उसका सबर का बंद टूट जायेगा और वो जमील क सर को अपने छूट से अलग करते हुए boli…baasss करूऊओ जामिलललल jiiiii..ab मुझसे ऑर्डर बर्दाश्त तट तट नह होगा…. पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ करूऊऊओ ना ह्ह्ह्ह ताऊ मइईईई पाआगालललल हो javungi…mmm …दाल तो आपका हाथियार और वोओओओ करूऊ जिसके लिए हम एक साथ बीएड पे नंगे hai…meena अपनी मर्यादा को भूल कर वासना क नशे में बोल बैठी..

अब जमील का बी यही हाल tha…uska लुंड तन कर सलामी दे रहा tha…kayi महीने चुदाई न करने क वजह से उसका कामर्स जो जमा हुआ था वो बहार आने क लिए अंदर hi अंदर ज्वालामुखी की तरह ुभल रहा tha…aur वो छोत से उतरा और अपनी चड्डी को उतर दिया तो मीणा जमील क मोठे और लम्बे कड़क लुंड को देख कर एक पल क लिए डर hi gayi..wo सोचने लगी इतना मोटा हथियार मई ले पावुंगी या nh…par दूसरी तरफ ऐसे कड़क लुंड को देख कर उसे ख़ुशी बी हुई थी और न चाहते हुए बी उसने अपने थूक को निगल कर अपनी ख़ुशी का एसएस किया tha…uska बी मैं कर रहा था की जमील क लुंड को अपने हाथो में लेकर आगे पीछे करे ..पर अब वो इतनी गरम हो चुकी थी ki..iswaqt उसे यही लुंड की जरुरत अपने हाथो से ज्यादा अपने छूट में ज्यादा thi…par उसे और एक डर खाने लगा tha..kisi अनजान मर्द क साथ बिना प्रोटेक्शन क आगे बढ़ना ठीक rahega…kahi मई प्रेग्नेंट हो गयी to…jamil जी कुछ गड़बड़ तो नह होगी na..meena ने अपने डर को बताते हुए जमील से पूछा..

जमील को पहले से hi इस बात का अंदाज़ा की मीणा अगर छोड़ने रेडी होगयी तो इ सवाल जरूर करेगी इसलिए hi तो वो सुबह आते वक़्त hi कंडोम जो ले आया tha…wo अपनी निचे गिरे हुए पंत को उठाकर उसमे से कंडोम क पैकेट को निकल कर मीणा को दिखते हुए बोलै अब लगता है कोई गड़बड़ होगी.. हहै

मीणा जमील को देख शर्मायी तब जमील में उस पैक से एक कंडोम निकला और उसे मीणा को दिखते हुए पूछा pehnavogi?…meena शर्म से नज़ारे झुकाये हुए न न में इशारा की तो जमील हस्ते हुए कंडोम को खोलकर अपने लुंड को पहनाने लगा और मीणा बस उसे एक बेशरम की तरह देखते rahi…jamil ने अपने लुंड को एक बार मीणा सामने hi हिलाया और बोलै चल डार्लिंग अब हमारा असली खेल की शुरुआत करते है केखे वो फिर से बीएड पे आगया तो मीणा सीधे लेट गयी और अपने टैंगो को चौड़ा karke..Jamil क लिए अपने टैंगो क बीच जगह बना di..ab जमील ठीक मीणा क जांघो क बीच अपने घुटने मोड हुए बैठा था और अपने लुंड को हाथ में लिए दूसरे हाथ से मीणा क छूट क छेद से बाल अलग करके लुंड क लिए रास्ता बनाने लगा..

मीणा बी अब बेसब्री से इसी का इंतज़ार में थी की कब जमील का लुंड उसके छूट में प्रवेश karega..lekin जमील को अब बी अपने छूट क साथ छेड़छाड़ करते देख मीणा थोड़ी उठी और जमील क लुंड को पकड़ कर छेद पे रक्ते हुए अपनी कमर को उठाकर लुंड को लेने की कोशिश करने लगी…

मीणा की इ तड़प देख जमील मैं hi मैं बोलै साली पहले तो इतना नखरे कर रही थी की किसी मर्द क हवा तक से दूर भगति hai..par आज खुद मेरे लुंड को अपने छूट का रास्ता दिखा कर चुदाई क लिए तड़प rahi..chalo ाचा hi है इसकी यही तड़प मेरे लिए ाचा है और वो अपना पोजीशन सेट करके एक जोर का धक्का देते हुए मीणा क ऊपर Agaya…to दर्द क मरे मीणा की अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की आवाज़ निकल padi…lund बड़ी मुश्किल से मीणा की छेद को चीरते हुए थोड़ा अंदर की तरफ गया हुआ tha…hi जमील ने मीणा क ऊपर आते मीणा क हाथो को अपने हाथो में पकड़े hi दूसरा जोर का झटका दिया तो मीणा की छूट जमील क सुपडे को निगल चुकी thi…aur इ मीणा क बर्दाश्त क बहार था वो दर्द क मरे चीक padi..uske आँखों से ासु निकल गए और उसका मुँह खुल्ला कस खुला hi tha…dard क मरे मीणा का शरीर कंपनी लगा और वो जमील को रिक्वेस्ट करते हुए बोली प्ललललज़्ज़ज़्ज़ज़ जमील जीईईई धीरीईए डालूओ ायप्पक्का बहुत्त मोटाआ hai…plzzzzzzz…

जमील क मोठे लुंड क सामने अचे अचे एक्सपेरिएंस्ड औरत बी झुक गए तो मीणा जैसी काम चूड़ी पतिव्रता औरत कैसे झेल paati…Jamil इस बात को अछि तरह समझता था इसलिए वो बिना कोई हरकत किये कुछ पल चुप रहा और मीणा क खुले होतो को प्यार से चूमने laga..jisse मीणा थोड़ी रिलैक्स फील करने लगी तो जमील ने मौका पाकर तीसरा झटका अपनी पूरी ताकत लगाके मारा तो ..

मीणा फिर से दर्द क मरे थरथराने लगी और उसकी चिक निकलने से बच गयी थी क्यू की जमील ने वक़्त की नज़ाकत को देख कर फिर से मीणा क होतो को अपने होतो में दबोच लिया tha..lund मीणा की छूट को पूरी तरह चीरकर उसके बच्चेदानी से टकरा गया tha..is वजह से जमील बहुत खुश था आखिरकार उसने वो मंज़िल प् hi ली thi..jise पाना उसका सपना tha….par इस वक़्त वो बिना कोई हरकत किये चुप tha…wahi दर्द क मरे मीणा की जान निकल रही thi..wo दर्द क मरे उसके ासु रुकने का नाम नह ले रहे the..wo फिर जमील से विनंती करते हुए boli…plz जमील ji..thoda dhire….bahut दर्द हो रहा hai…ahhh प्ल्ज़ संजो न…

जमील मीणा की दर्द को अच्छीतरह समाज गया था और वो मीणा क दर्द को काम करने की कोशिश करते हुए बोलै बस मीणा होगया .कुछ देर अपने आप को सम्भालो और रिलैक्स हो जावो उसके बाद मजा hi मजा hai..kehte हुए फिर से इ मीणा क होतो को चूमने लगा साथ hi साथ मीणा क बूब्स को इसबार हलके से दबाने laga….meena कुछ नह बोली और बस जमील क हॉट चुसाई में साथ देने lagi…kuch देर में उसे अपना दर्द बी काम होते नज़र आया तो वो अपनी कमर को धीरे से हिलने लगी तो जमील समाज गया था की उसकी बुलबुल फिर से हवा में उड़ने तैयार होगयी है और वो बी मीणा का साथ देते हुए हलके से अपने कमर को ऊपर निचे करने लगा तो मीणा को अब थोड़ा दर्द तो होरहा था पर इस दर्द में बी उसे एक अलग hi मजा आने लगा tha..aur जमील क हर धक्के पर उसकी अह्ह्ह्हह की नशीली सिसकारी निकलने लगी thi..jo जमील का जोश और बढ़ाने क लिए मदत कर रही थी और जमील ने अपने धक्के की रफ़्तार को थोड़ी बददि thi..to मीणा बी अब पुरे मजे से लुंड को छूट में लेने लगी थी और ख़ुशी क मरे अह्ह्ह जमील जी ऐसे hi करते राहूऊओ अह्ह्ह्ह ाचा लग रहा hai…ummmmn जमील हूँ नननननाहीई

वही जमील मीणा की नशीली सिसकारी से और बी जोश में आते हुए जोरदार धक्के से मीणा की छूट को पेलने लगा …अब रूम में जमील क तेज़ सासो क आवाज क साथ मीणा की अह्ह्ह उम्म्म्म ससष्ठ की मधुर आवाज़ किसी संगीत की तरह बज रही थी .वही जमील पहली बार इतनी टाइट छूट में अपना लुंड फसाये हुए पहली बार टाइट छूट की मजा ले रहा था. और वो अपनी ख़ुशी को रोक नह पाया वो बी ख़ुशी क मरे बोलै …क्या मस्त छूट है मीणा तुम्हारी ऐसा लग रहा है की किसी नयी नवेली दुल्हन क साथ सुहाग रात मन रहा hu..bahut सेक्सी हो तुम मीणा मजा आरा है …कहते हुए उसने अपने धक्के की जारी रखा ..अब मीणा बी अपनी तारीफ सुनकर खुश होगयी थी चाहे तारीफ गाँधी बी क्यू न हो ….वो जमील को बाहोंमे में लेकर पूरी सिद्दत से छुड़वाने लगी थी. दोनों अब बिना किसी डर क बिना किसी बात क परवा किये एक दूसरे क बहो में खो कर चुदाई में मग्न the…lekin कुछ देर क बाद मीणा का जिस्म उखाड़ने लगा उसकी आंखे मदहोशी में बंद होने लगे the..meena क हाथ जमील क पीठ से हैट क बिस्टेर को मुठी में भींच ने लगे the..meena की सब्र का बंद टूटने hi वाला tha..jise महसूस किये जमील बी समाज गया था अब मीणा अब जड़ने वाली है और वो अपना लुंड बहार निकला तो पछ्ह्ह्हह्ह की आवाज़ ने माहौल को और बी गर्म करदिया tha..aur कुछ hi देर में मीणा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह की लम्बी सिसकारी लेते हुए अपनी छूट को हल्का करने लगी मीणा की छूट से अब सफ़ेद रंग की जहर निकल रही थी जिसे जमील अपने आँखों से देख यकीं नह कर पा रहा tha..aur जैसे hi जहर का बहाना बंद होगया तो मीणा जमील को देख कर शर्म क मरे नज़ारे चुराने लगी..

लेकिन जमील क लिए मीणा क इ काम रास किसी अमृत से काम नह tha…wo तुरंत मीणा क छूट पर अपनी जीव को को फेरते हुए कामर्स का स्वाद छकाने laga…ek अजीब hi मिठास और नमकीन से भरे स्वाद जमील को और बी उत्तेजित कर रही थी वही अपने रास को चकते देख जमील क प्रति और ज्यादा आकर्षित और प्रेम भाव से देखते हुए बोली नह जमील ji…e नह इ गंधा है…. प्ल्ज़ ह्ह्हह्ह

जमील मीणा की इस बात का जवाब देते हुए बोलै नह मीणा इ गंधा नह इ हम दोनों क मिलान का पहला प्रेमरस hai.aur इसका स्वाद किसी अमृत से काम नह कहते हुए जमील फिर से मीणा क ऊपर आगया और मीणा क होतो को चूसने लगा तो मीणा को अब जमील क होतो से अजीब से खुशबु क साथ इ अलग hi टास्ते लगाने लगा था .उसे समझने में देर नह लगी की वो आज पहली बार उसकी छूट का रास चक रही और इ सोच कर वो फिर से गरम होगयी थी.. और वो कुछ सोच hi रही थी की जमील का लुंड फिर से एक बार छूट की छेद को चीरते हुए पूरी तरह समां चूका tha…is बार मीणा की छूट पूरी गीली होने क वजह से मीणा को ज्यादा दर्द नह हुआ वो पुरे मजे से जमील क लुंड को निगल चुकी thi..aur फिर से दोनों एक दूसरे में खो कर चुदाई का मजा लुटाने लगे the…par इस बार पोजीशन कुछ अलग था मीणा ने अपने टैंगो को हवा में फैला क मोड़ लिए तो तो जमील बी अपने टैंगो को मीणा की जांघो क निचे सरका कर मीणा की हवा में फैले पेअर को सपोर्ट देरहे the…dono एक दूसरे को चुम रहे थे चाट रहे the…aur चुदाई का लुफ्त पुरे मजे से ले रहे थे दोनों ने एक दूसरे को अपनी पूरी ताकत लगाके कस क जकड़ा हुआ tha…do no कुछ देर क लिए होश खो बैठे the…aur मीणा तो पहली बार एक लम्बी चुदाई का मजे अपने धुत में hi ले रही thi…dono एक दूसरे से अलग होने का नाम बी नह ले रहे थे इस बीच मीणा फिर से एक बार झड़ी thi…is बार जमील रुकने क बजाय अपने रफ़्तार और बढ़ाकर अपने लुंड को मीणा की छूट में पेलने लगा tha..is वजह से मीणा क जांघो से जमील क जंघे एक दूसरे से टकराते hi थप थप की आवाज़ पुरे रूम में गूंज रही थी जिसे मीणा चुदाई क वक़्त पहली बार सुन रही thi…aur जमील क गोते हर धक्के क साथ मीणा की नंगी गांड पर दस्तक देते हुए मीणा को एक अलग hi मजा दे रहा the…Jamil की हर धक्के क साथ मीणा का जिस्म हिलने लगा tha..wo पहली बार ऐसे महसूस कर रही थी जैसे हवा में तैर रही ho…kareeb 20-25 मीन्स क ताबड़तोड़ चुदाई क बाद जमील अपने आप को रोक नह पाया, पिछले 3 - 4 महीने से ुभल रही ज्वालामुखी को भरखास्त करते हुए छपने लगा तो मीणा बी अपनी उत्तेजना को रोक नह पायी और दोनों एक साथ झड़ने lage…condom क होते हुए बी मीणा जमील क लुंड से उगल रही गरम वीर्य को अपने छूट में महसूस करने लगी thi…jab लुंड से पूरा वीर्य डिस्चार्ज होते hi जमील अपनी ख़ुशी को समेत हम्पटी हुए मीणा क बगल में सो गया..
 
दोनों का जिस्म अब पसीने से भरा हुआ tha..aur एक दूसरे से अलग होते hi..aadhe खुली खिड़की से आ रही हवा ने दोनों क जिस्म को ठंडक पहुंचने की कोशिश की थी…

मीणा करीब आधे घंटे से ज्यादा जमील क नंगे जिस्म क निचे दबी हुई थी वो बी पूरी nangi..pehli बार वो इतनी देर तक किसी मर्द क निचे लेती हुई thi…aur जब जमील उससे अलग हुआ तो मीणा सोचने lagi..kaise मई जमील जी क भरी भरकम जिस्म को आधे घंटे से ज्यादा अपने ऊपर झेल baithi…kya मई वही पतिव्रता मीणा hu..jo शादी से लेकर अब तक अपनी पति की अलावा किसी गैर मर्द का ख्याल बी अपने दिमाग में आने नह दिया था..

मीणा एक तरफ अपनी तेज़ सासो पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी और दूसरी तरफ उसके सामने उसके पति का चेहरा नज़र आने लगा …और न चाहते हुए बी उसके आँखों से ासु टपकने लगे जो रुकने का नाम hi नह ले रहे the…use अपने किये पे पछतावा होने लगा tha..meena फिर से भावनाओ में बहक गयी थी और सोचने लगी की कैसे वो जमील क बातो में आगयी और अपने पाक जिस्म को अपवित्र कर बैठी..

मीणा की आँखों में असू देख कर जमील समाज गया था की मीणा को अपने किये पर पछतावा हुआ है और वो भावना में बहक गयी hai..jo जमील नह चाहता tha…aaj वो मीणा को पुरे दिन छोड़ने का मूड में tha..use लगा की अगर मीणा फिर से भावनाओ में बहक गयी तो उसके पुरे दिन की चुदाई का प्लान एक सपना hi बन जायेगा और वो मीणा को मानाने की कोशिश करते हुए फिर से मीणा को बहो में लेते हुए बोलै क्या हुआ मेरी jaan..aaj ऐसे ख़ुशी क मौके पर ासु क्यू बहा रहे ho..aaj तो हमारे मिलान की ख़ुशी माननी चाहिए…

फिर से अपने नंगे जिस्म पर जमील का हाथ पड़ते hi मीणा को गुस्सा आगया था और वो जमील क हाथो को दूर करते हुए boli…bas करो आपका इ प्यार का khel..aur चले जावो यहाँ से मीणा ने गुस्से में लाल होते हुए बोलै और वह से उठकर निचे जमीं पे पड़ी निघ्त्य को उठके पहने lagi..uske पास चड्डी और ब्रा पहन ने का न वक़्त नह tha..wo जल्द से जल्द अपने नंगे जिस्म को जमील की नज़र से धक् लेना चाहती थी. मीणा क इस गुस्से से भरे बर्ताव से जमील पीछे हैट गया और फिर मीणा को मानते हुए bola..ab गुस्सा थूक बी दो मीणा आज से हम एक नए रिश्ते का शुरुवात कर चुके hai…aur इस रिश्ते को एन्जॉय करो..

मीणा- गुस्से से लाल होते हुए चुप रहो …अपनी इस गाँधी जुबान से मेरा नाम मत lo..mai तुम्हारी रखेल नह हु जो आप क साथ ऐसे नाज़ायज़ रिश्ते का मजा लू…

जमील- मीणा को संभल ने की कोशिश करते हुए बोलै अरे कैसी बात कर रही हो मीणा तुम मेरी जान हो…

जमील क मुँह से जान शब्द सुन क मीणा और बी गुस्सा हो गयी थी और उसे लगा की जमील फिर से बातो में फसा कर उसकी जिस्म को भोगना छह रहा है और वो जमील की तरफ ऊँगली दिखते हुए बोली बस बस बहुत होगया आपका इ खेल ….आपके बातो में आकर मैंने मेरे पति क साथ धोका Kiya..dubara मुझे ऐसे बुलाने की कोशिश बी मत करो और अपना मुँह तक नह दिखाना muje…aaj जो आपने मेरे साथ किया उससे मुझे तुम्हारे चेहरे से बी नफरत सी होने लगी hai…meri hi गलती है की मई आपके मीठे मीठे बातो में आ बैठी और आज इ उन्होनी कर baithi..kehte हुए मीणा जोरो से रोने लगी…

मीणा को इस तरह रोटा देख जमील फिर से मीणा क नैकिक आया और मीणा को बहो में लेने की कोशिश करने लगा तो मीणा उससे दूर हुई और बोली ख़बरदार अगर आपने फिर से अपने इस गांधी हाथो से मुझे चुने की कोशिश कर दी to…kehte हुए मीणा निचे पड़े हुए जमील क कपडे को उठाकर जमील क मुँह पर मरते हुए boli…ise पहनो और निकलो यहाँ से मुझे नह चाहिए आपकी dosti….aapka इ झूठा प्यार जिसमे हवस hi भरा ho….agar मुझे पहले hi पता होता की आपके प्यार क पीछे हवस भरा है तो शायद मई आपसे बात बी नह karti…aur मीणा फिर से रोने लगी…

दरअसल मीणा इस सच से बी वाकिफ थी की जो कुछ बी हुवा उसमे उसकी बी गलती hai…par अपना जिस्म एक गैर मर्द क हाथो लुटाने पर उसे जो गुस्सा आया था उससे वो सब इलज़ाम जमील पर hi लगाकर उसे दूर करना चाह रही thi..meena क गुस्से भरे बर्ताव से जमील समाज गया था की आज उसका काम अधूरा पड़गया और इस वक़्त मीणा को कुछ समझना बी ठीक नह और वो अपने कपडे पहन ने लगा तो मीणा दूसरी तरफ मुँह करके कड़ी hogayi..meena निघ्त्य क अंदर पूरी नंगी थी उसकी चड्डी और ब्रा वही बिस्टेर पर पड़े हुए थे और घागरा तो पहले hi जमील ने किचन में hi उतरा हुआ था.. कुछ देर पहले हुई दमदार चुदाई क वजह से उसके जिस्म में पसीना अभी बी जमा हुआ था और इस पसीने क चलते मीणा की निघ्त्य बी भीगी होकर उसके नंगे शरीर को चिपक कर मीणा की मोती गांड क कुलो क बीच एक लम्बी दरार सी दिख रही thi..jo इस गुस्से से भरे माहौल में बी एक कामुकता को प्रदर्शित कर रहा थी जिसे देख कर जमील का मैं तो हो रहा था की मीणा को फिर से दबोच कर गांड hi मार du…par जमील जनता था की इससे माहौल और बी बिगड़ सकता hai…aur कही न कही उसे यकीं बी था की मीणा का गुस्सा उतारते hi वो फिर से मीणा पर अपना काबू पा lega..q की कुछ देर पहले चुदाई क वक़्त जो मीणा ने जमील का भरपूर साथ दिया था उससे यही लगता था की मीणा पहली बार ऐसे दमदार चुदाई का अनुभव लिया है और अपना गुस्सा उतारते hi वो फिर से चुदाई क लिए तड़प uthegi…lekin फिर बी वो मीणा को मानाने की आखरी कोशिश करते हुए bola…dekho मीणा नहीं मैंने और नहीं तुमने कोई गलत किया hai..hum दोनों ने वही किया जो एक दूसरे को पसंद tha..ek दूसरे की जरुरत थी…

जमील आगे कुछ बोलने hi वाला था तो मीणा उसे गुस्से से रोकते हुए boli..band करो अपनी bakwas…e मेरी जरुरत नह थी बल्कि आप की थी जिसका शिकार मई hogayi…itne अचे केयरिंग पति क साथ धोखा कर baithi…aur आपको मेरी जरुरत क बारे में सोचने की कोई आवश्यकता nh…meri जरुरत पूरी करने क लिए मेरे पति है मेरे पास मुझे तुम जैसे हवसी आदमी की जरुरत nhi..nikal जावो यहाँ से और दुबारा मेरे घर की तरफ मुँह उठके बी मत देखना…

जमील पहली बार इस तरह की बाते एक औरत क मुँह से सुन रहा था मीणा की जगह शायद कोई और कहता तो जमील आज उसके हड्डी तोड़ तोड़ क कुसुम्बर बना deta…par मीणा क जिस्म से उसे इतना सुख मिलता की उसने आज तक ऐसी मस्त माल को कभी नह ठोकता और वो चाहता था की मीणा क जिस्म क हर एक अंग को वो चूस चूस कर मजा ले जितना हो सके उतना मीणा क साथ प्यार भरे बर्ताव करे ताकि अब बी मीणा यही समजे की जमील उससे प्यार करता hai..aur जो कुछ बी हुआ वो बस प्यार का hi हिस्सा समजे …इसलिए वो बिना कुछ बोले बैडरूम से बहार निकला तो मीणा बैडरूम क दरवाजे तक आके कड़ी होगयी थी .

तब जमील ने मैं दूर खोला और bola..dekho मीणा इ तुम मुझे नह आपने आप क साथ नाइंसाफी कर रही ho..aur मई चाहता तो तुम्हारे हर सवाल का जवाब तुम्हारे hi जबान से दे सकता था पर मई तुमसे प्यार करता hu…isliye अब बी कहता हु अगर तुम मेरी फिर से जरुरत लगी तो मुझे बिना कोई संकोच किये कॉल करना bye..

मीणा बी जमील को फिर से भला बुरा सुनना छह रही थी पर दरवाजा खुला होने से बहार रास्ते पे आते जाते लोगो को देख कर बिना कुछ बोले hi चुप होगयी और जमील क जाते hi मीणा बहार गयी ताकि किसी पडोसी ने जमील को देख तो नह liya..aur तसल्ली होने क बाद वो अंदर आके दरवजा बंद किये फुट फुट कर रोने lagi..e क्या कर बैठी mai….mere इतने अचे केयरिंग पति क साथ dhoka..ab कैसे मुँह दिखाउंगी unko…kya कहूँगी की आपकी प्यारी बीवी एक धोकेबाज़ hai..ek गैर मर्द क निचे लेट चुकी है …सॉरी मेरे patidev…mai बहक गयी थी उस कमीने जमील क बातो me…fir बी गलती मेरी hi hai…aap जो बी सजा डोज मुझे मंज़ूर hai…bas मुझे आपसे दूर मत करना मई आपसे बहुत प्यार करती hu..mai वडा करती हु आपसे मई दुबारा ऐसी गलती नह karungi..plz माफ़ करदेना मेरे patidev…meena अपने हाथ जोड़कर माफ़ी की फरियाद करने lagi...aur कुछ देर तक वो बहार सोफे पर बैठे hi रोने लगी. काम से काम आधे घंटे तक मीणा वही पे बैठकर क्या क्या सोच कर रोई शायद उसे खुद बी नह पता. उसे अपनी इस गलती पर जो पछतावा हो रहा था उसका प्रायश्चित करने क लिए कोई रास्ता बी उसे नज़र नह आरहा tha..wo छह कर बी इस बात को अपने पति या किसी और को बोलकर अपना मैं हल्का बी नह कर सकती थी..

इन सब की जड़ वो जमील को hi तेहरा रही थी और जमील क लिए उसके दिल में नफरत की आग पैदा हो गयी thi…aur वो कुछ सोच कर बैडरूम आयी और बिस्टेर पे पड़े अपने चड्डी और निघ्त्य को उठाने hi लगी थी तो उसकी नज़र बीएड पे बिछाई बेडशीट पे पड़ी तो वो एक पल क लिए चौक गयी थी ..क्या इ मीणा तुम्हारा काम रास है.. वो बी इतना सारा की बेडशीट pe..darasal मीणा ने देखा था की बेडशीट क एक हिस्सा पूरा भीगा हुआ है और उसपर अब बी गाड़ा पानी क जैसा कुछ चिपचिपाहट सी चीज़ जमी हुई hai….meena सोच में पड़गयी थी उस नज़ारे को देख कर और अपने आप से बोलने लगी क्या मीणा इतनी प्यासी थी तुम जो इतनी कामर्स अपनी योनि से निकल दी… कही जमील जी ने कंडोम तो नह निकला था बीच में और मुझे पता नह chala…nh नह जमील जी ने तो मेरे सामने कंडोम निकल कर डस्ट बिन में डाला था और वो एक बार डस्टबिन में देखि तो वीर्य से भरा कंडोम डस्टबिन में hi पड़ा हुआ पाकर उसे यकीं हो गया था हो न हो इ मेरी योनि से निकल हुआ hi कामर्स hai..lekin मई मेरे पति क साथ कितने की बार चुद चुकी हु पर आज तक मेरा इतना सारा काम रास नह निकला tha…nahi कभी ऐसे मैंने बेडशीट को गंधा किया था पर आज kaise…tab उसे याद आता है की वो जमील क साथ चुदाई क वक़्त 3 बार झाड़ चुकी thi..ek पल फिर वो शर्म से आंखे बंद करलेती है और फिर गुस्से से बेडशीट को निकल कर उसे वाशिंग मशीन में दाल देती है धोने क लिए और निर्वस्त्र हुए अपने कपडे को लेकर बाथरूम में जाकर अपनी निघ्त्य बी उतारकर फेक नंगी होकर नहाने लगती है..

पानी क बुँदे हलके हलके मीणा क शरीर पे पड़ते hi मीणा को कुछ ाचा लगाने लगा tha..aur जैसे hi पानी क बुँदे उसके नाज़ुक योनि तक पहुंच थे है तो उसकी छूट में जलन सी होने लगती hai…pehli बार मीणा ऐसे जलन को अपनी छूट पर महसूस कर रही थी वो जलन को मिठाने क लिए हलके से अपनी उंगलियों को छूट पे फेरती है तो छूट क पाकले ऊँगली को छूटे hi मीणा की जलन और बढ़गयी थी और मीणा क मुँह से अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह की आवाज़ निकल पड़ी उसे समझने में देर नह लगी की इ कुछ देर पहले जमील क मोठे लुंड क घर्षण उसकी नाज़ुक छूट झेलने की वजह से हुई है…. मीणा ने शर्माहट क मरे फिर से अपनी आंखे बंद करलिए the…lekin कुछ hi पल में वो अपने आप पर काबू पाते हुए अपने जिस्म को रगड़ रगड़ कर नहाने लगी ताकि जमील की कोई निशान उसके जिस्म पर न बचे शायद मीणा भूल hi गयी थी की जमील ने सिर्फ उसके जिस्म को नह चुवा है बल्कि उसके दिल को बी छू लिया hai..is बात से अनजान मीणा अपने जिस्म से जमील क छुए हर एक अंग को धोने में लगी हुई thi…kuch देर क इस कसरत क बाद वो एक टॉवल अपने दूध से होते हुए कमर तक लपेट कर बैडरूम में आयी और ड्रेसिंग टेबल क सामने रुक क अपने जिस्म को निहारने लगी ताकि जमील क कोई निशान उसके जिस्म पे बची है या nh…aur जब उसे लगा की सब कुछ ठीक है तो उसने कप्बोर्ड से अपने कपडे निकले और उसे पहन कर फिर से बाथरूम गयी और जमील क साथ काम क्रीड़ा क वक़्त पहने हुए हर एक कपडे यानी ब्रा, चड्डी घागरा और निघ्त्य को एक साथ समेत कर एक थैली में डाली और मैं में hi boli..aaj क बाद मई इ कपडे कभी नह pehnungi…jamil की याद दिलानेवाली कोई बी चीज़ मुझे नह chahiye..ise मई बहार फेकडूंगी शाम को अँधेरा होते hi…aur उस थैली को वही एक कोने में रख कर फिर वापिस किचन में आयी तो उसकी नज़र टेबल पर पड़ी जहा अब बी दोनों प्लेट में थोड़ा बहुत ब्रेकफास्ट बचा हुआ tha..jise देख मीणा आंखे फिर से नाम होगयी thi..kaise मई एक गैर मर्द क साथ बैठ कर डेली ब्रेकफास्ट करने लगी thi…chi मीणा ललाट है तुजपार इतने अचे पति से झूट बोलकर तू एक गैर मर्द क साथ आज कल ब्रेकफास्ट करती thi…aur उसके आंखे फिर से ासु बहाने लगे the…meena को कुछ बी समाज नह आरहा tha..wo कैसे एक गैर मर्द क साथ इतनी खुल मिलगई और उसे अपना जिस्म सूप baithi…rote रट hi मीणा ने सरे बर्तन साफ़ किये उसे अब कुछ बी करने का मैं बी नह हो रहा था वो अपने आँखों में ासु भरे hi आकर बिना बेडशीट क बीएड पे लेट gayi….aur अपने आंखे बंद किये सोने की कोशिश करने लगी लेकिन जैसे hi उसने आँखे बंद किये तो उसके आँखों क सामने फिर से कुछ देर पहले का नज़ारा आगया tha..kaise वो जमील क बहो पूरी नंगी होकर करवट लेते हुए ऊपर निचे हो रही थी ..कैसे जमील उसके ऊपर चढ़ क उसकी नाज़ुक छूट को छोड़ रहा tha…kaise और वो बिना जमील को रोके अपनी कमर उछाल उछाल कर उसका साथ दे रही थी वो बी इसी बीएड पे जिस पर इस वक़्त सोई हुई hai…e सब याद आते hi मीणा एक बात तो मान गयी थी की वो बी जमील क साथ दे रही थी और वो अपने आप को कोसते हुए boli..e जानते हुए बी जमील मेरी जिस्म की वो चीज़ लूटने लगा है जिसे एक शादीशुदा औरत अपने पति को hi देना चाहती hai…q मैंने उस वक़्त जमील जी को नह roka..q मई उसे अपने जिस्म क हर हिस्से पर अपना कब्ज़ा पाने दे रही thi…jis बीएड पे सिर्फ मेरे पति hi मेरे साथ सो सकते है उस बीएड पे मैंने एक गैर मर्द को कैसे …….ची ची मई पापी hu…mai बेवफा hu…aur वो बीएड से उठी ताकि उस बीएड पे जमील क साथ हुई कुछ देर पहले की घटना उसे याद आकर तंग न करे और बहार जाकर सोफे पे लेट gayi…aur सोचने लगी आज जो कुछ बी हुआ वो गलत hi नह बल्कि एक घनघोर पाप बी hai…par इस घाटी हुई घटना को मई किसी को बोल बी नह सकती और अब पछताने का बी कोई फयदा नह बेहतर यही होगा की सब कुछ भूल कर फिर से मेरे पति क साथ खुश rahu…aur अपने पति को खुश राखु जो हमारे लिए इतनी म्हणत करते hai…is बात को सोचकर उसने अपने मैं को पत्तर बना लिया था जिससे कुछ देर क लिए उसके ासु गिरना रुक गए the.jab वो थोड़ा नार्मल हुई तो उसका पूरा बदन अब दर्द का एहसास करने लगा जो कुछ देर पहले आँखों में ासु भरे वो दर्द का एसएस नह कर पा रही थी

.उसकी कमर में पहली बार दर्द लग रहा था जो एक दमदार चुदाई क बाद का मीठा दर्द होता है हर महिला क लिए.. मीणा जानती thi…pehli बार उसकी इस कदर दमदार चुदाई क वजह से आज पहली बार उसकी कमर में दर्द की वजह बन गयी hai..aur इस दर्द क मरे उसे थकावट होने लगी थी ..उसके आँखे बंद होने लगी thi…aur वो कुछ hi देर में सोफे पे hi नींद क अघोष में चालीगयी थी..

वही दूसरी तरफ जमील आज बहुत खुश tha.jis औरत को पाने क लिए उसने प्यार का नाटक खेला था आज वो काम कर गया tha…meena की छूट छोड़ने का उसका सपना आज हकीकत में बदल गया tha..jis गांड को देख कर hi उसका लुंड हरकत पे आ जाता था आज उसी गांड को वो जी भर क मसल चूका tha..meena क होतो क रास को उसने किसी प्यासे भेड़िये की तरह चूसा tha…aur उसके लिए सबसे ख़ुशी की बात इ थी की इस काम क्रीड़ा में मीणा बी उसका साथ देने की कोशिश की thi..e बात अलग थी की जब चुदाई का नशा उतरा तो मीणा भावनाओ में बहक गयी thi…aur पूरा दिन मीणा की छूट छोड़ने की उसके सपने पर पानी फिर गया tha…par वो जनता tha..ek पतिव्रता औरत किसी गैर मर्द क साथ पहली बार सम्भोग करने पर इस तरह भहानाओ में बहक जाना सहज hai..chudayi की दौरान मीणा की उत्सुकता उत्तेजना को देख वो इ बी समाज गया था की मीणा सेक्स की प्यासी है और यही प्यास फिर से मीणा को उसके पास आने क लिए मजबूर karegi…meena की टाइट छूट चीरने की वजह से आज पहली बार जमील का लुंड बी घायल महसूस कर रहा इ तो ाचा हुआ था की उसने कंडोम पहना हुआ था वर्ण आज जमील क लुंड की खैर नह थी.. उसे बी अपने लुंड पे जलन सी महसूस हो रही thi…aaj तक जमील कई औरत को अपने बिस्टेर पर लेता चूका था पर पर पहली बार उसके लुंड इस तरह घायल महसूस कर वो समाज गया था मीणा की छूट में वो डैम है जो बाकी क औरतो में नह thi…wo ख़ुशी ख़ुशी अपने रूम में आकर सोगया तो उसे याद आया की उसने कंडोम क पैकेट मीणा क घर में hi भूल आया hai…aur हो सकता hai..meena अपसेट होने क वजह से उसपर ध्यान न दे और बात किसी और को पता चले खास कर मीणा क पति को, ..जो जमील बिलकुल नह चाहता tha..q की वो जनता था बात किसी और को पता चलना और मीणा को हमेशा क लिए खो देना एक hi बात hai….ab वो वापस लौट क मीणा क घर बी नह जा सकता था की इस नाज़ुक मौके पर मीणा उसे देख कर और चीड़ jayegi…usne सोचा फ़ोन karlu…lekin वो जनता था मीणा उसका फ़ोन रिसीव बी नह करेगी और कुछ सोच कर एक कातिल मुस्कान अपने होतो पे लाते हुए मीणा को मश्ग Kiya.."mai तुम्हारे घर में कुछ चीज़ भूल आया हु सके तो उसे संभल क रख देना अगली बार क लिए अगर तुम चहु to…nh तो किसी कचरे क डब्बे में फेक dena…taaki किसी को पता न चले" और वो इंतिहान से सोगया.. अपने आगे का प्लान बनाते hue…uska दिल इतने से नह भरा tha..uske और बी कुछ क्वाशिष बचे हुए थे जो वो मीणा क जिस्म क साथ पूरा करना चाहता था.

यहाँ पर मीणा एक गहरी नींद सो चुकी thi…aur जब उसकी नींद टूटी तो दोपहर क 3 बज चुके the..ek गहरी नींद ने उसके बदन दर्द को कुछ हद तक हल्का करदिया tha..wo एक अंगड़ाई लेते हुए उठी और एक नज़र हॉल में इधर उधर डाली और फिर उसके आँखों में सामने वो दृश्य आया कैसे वो सुबह क वक़्त जमील क बहो में बहे डेल हॉल से होते हुए बैडरूम में गयी thi..aur उसके बाद बैडरूम में जो हुआ वो याद आते hi उसकी आंखे फिर से नाम पड़गयी और वो फिर से फुट फुट क रोने lagi..e क्या कर बैठी mai..apne पति क साथ बेवफाई करने से पहले मैंने क्यू नह सोचा, क्यू मई वासना क चलते अंधी हो गयी थी एक गैर मर्द मेरी इज्जत को मजे से लूट रहा था और उसे रोके बगैर उसका साथ दे रही thi…aur सम्भोग कर baithi…sorry मेरे पतिदेव मैंने बहुत बड़ी गलती की है मैंने आपके विश्वास को तोडा hai…par शायद इसमें आपकी बी गलती hai..agar आप काम में व्यस्त न होकर मेरे तरफ बी ध्यान dete….aur मेरी जिस्म की ख्वाहिश को पूरी करते तो शायद मई इ कदम नह uthati…fir बी गलती मेरी hi hai…muje hi समझना न चाहिए tha…aap जो इतनी म्हणत करते है वो मेरे और बचो क भलाई क लिए hi hai…sorry मेरे पतिदेव मुझे आपसे कोई शिकायत नह hai…par मई जो गलती मुझसे हुई है उसे वापिस सही तो नह कर सकती पर इसके बाद ऐसी गलती न हो इ जरूर ख्याल rakhungi…bas आप बी थोड़ा मेरी जरूरतों पर काम से काम थोड़ा सा तो ध्यान दे प्ल्ज़….

मीणा अपने पति क साथ फिर से वफादार होने की थान तो रही थी साथ hi साथ वो इ बात बी अछि तरह जान गयी thi…aaj जो कुछ बी हुआ है वो उसके पति से न भुजानेवाली प्यास क कारन की वजह से हुआ hai…aur इसमें जमील क साथ साथ उसकी बी गलती hai..par वो अपने आप को इस गलती को बचने क लिए जमील को hi दोषी तेहरा रही थी….

कुछ देर रोने क बाद मीणा अपनी ासु पोछते हुए अपने मोबाइल पे ध्यान दी तो उसका रोना अब गुस्से में बदल चूका tha..q की उसे अपने मोबिल क नोटिफिकेशन में जमील का मश्ग दिख गया tha…wo मैं में hi boli..muje मीठी बातो में फसकर मुझसे पाप करवाया और मुझे मश्ग कर रहा hai….kamina कही का कितना बेशरम इंसान hai..…lagta है इ ऐसा नह सुधरेगा इसे तो ाचा सबक सीखना hi पड़ेगा और वो कुछ सोची और जमील को फ़ोन करने क लिए उसका नंबर डायल की.. फिर उसे लगा की ऐसे कमीने आदमी क मुँह लगने से ाचा है की चुप hi rahu….taaki इ खुद बी खुद बेइज्जत होकर मेरा पीछा छोड़ de…aur वो उसके भेजे हुए मश्ग को पड़ने लगी.

मश्ग पड़ते hi मीणा सोचने लगी जमील जी ऐसी कौनसी चीज़ छोड़के गए है जो अगली बार काम आने की बात कर रहे hai…aur मीणा को ज्यादा सोचने की जरुरत नह पड़ी और वो उठ कर बैडरूम आयी और ड्रेसिंग टेबल पे देखि तो वह पर उसे कंडोम का पैकेट नज़र आया मीणा न चाहते हुए बी उस कंडोम पैकेट को खोल क देखि तो उसमे और बी दी कंडोम बचे हुए the…wo गुस्से से लाल होगयी और मैं में hi बोली कितना कमीना hai..ek बार से जी नह भरा इसका जो दुबारा आने की बात कर रहा hai…jaise मई कोई खिलौना हु उसके liye…himmat तो देखो uski..jamil जी आप सिर्फ कमीने hi नह बल्कि उससे बी बढ़कर ho….mai hi पागल thi..aapke इस कमीनेपन को समाज नह paayi..aur वो सोचने लगी अब इस कंडोम्स का क्या करू और वो Sochi..yahi सही rahega…aur फिर मैं hi बोली ठीक है जमील जी आप क कहने पर मई इ कंडोम किसी सेफ जगह पर hi रखती हु ताकि अगली बार जब आप आवोगे तो इसे आपके मुँह पर mardungi…aap ने मेरा प्यार देखा है न अब इसके बाद मुझे देखो मई क्या करती hu…..meena मैं में तो अपने आप को स्ट्रांग बनाना छह रही थी पर असल में वो नह thi..q की मीणा का मैं माँ की तरह था जो थोड़ा प्यार जताने पर बी पिगल जाए, पर वो अपने पति और परिवार से बहुत प्यार करती thi..aur दुबारा ऐसी घिलौना काम नहीं करना चाहती थी इसलिए वो अपने मैं को जितना हो सके उतना कठोर करना छह रही thi…wo सुब्बार्ड खोल क उस कंडोम पैकेट को ऐसी जगह रख दी जहा किसी की नज़र न पड़े खास कर उसके पति ka..use अछि तरह पता था उसका पति सुब्बार्ड से एक छोटी सी चीज़ बी लेना है तो मीणा को hi आवाज़ देता hai..isliye उसे वो जगह सबसे सेफ लगी thi…aur तब उसे याद आया की और बी एक कंडोम बचा हुआ है जिसे इस वक़्त उसे बहार फेकना hi होगा और वो छोत क बगल में रखे डस्टबिन में नज़र डालती है तो उसे वो कंडोम नज़र आता है जिसमे अभी तक थोड़ा बहुत वीर्य जमा हुआ tha..meena का मैं तो कर रहा था एक बार उस कंडोम को उठके देखे जिसने कुछ देर पहले उसकी छूट में हमला मोल दिया tha…par वो ग्रीन की वजह से उसे उठाये बिना hi अपने चेहरे पे एक हलकी मुस्कान लाते हुए सोचने lagi…condom!!!!!! मतलब जमील जी का वीर्य…..??? मतलब जमील जी मुजमे पूरी तरह से समां नह पाए जैसे एक पति पत्नी समां जाते hai…iska मतलब मई जमील से नह बल्कि किसी रबर से चुद गयी hu…aur मेरी छूट ने जमील का कामर्स नह liya…e तो अछि hi बात हुई वर्ण मई कही का नह rehti….aur वो डस्टबिन को उठाकर बहार जाके कचरे क डब्बे में फेक आयी और डस्टबिन को सही जगह रख क अपने हाथ धोकर फिर से बैडरूम आयी और एक नया बेडशीट लेके बीएड पे बिछाकर एक बार बैडरूम की विखशाना karli…wo नह चाहती थी की जमील और उसके बीच क कोई बी निशान वह पर बचे रहे. जब उसे तसल्ली हुई तो वो किचेन में जाके अपने लिए कुछ बनाने की सोची लेकिन आज उसकी भूक पूरी तरह मीट चुकी थी उसे कुछ खाने का मैं बी नह कर रहा tha…wo फिर वापिस आयी और फिर से सोफे पे लेट कर कभी रोने लगी तो कभी अपने आप को तसल्ली देने लगी की जो कुछ बी हुआ वो एक हादसा tha..use भूल कर एक नयी ज़िन्दगी की शुरुआत करना hi बेहतर hai..waise बी मैंने गलत तो किया है पर मेरे और जमील जी क बीच कंडोम होने क वजह से जमील जी को वो सुख दे नह पायी जो सिर्फ मेरे पति का अधिकार hai…maine अब बी कुछ हद तक मेरे पति क अधिकार को बर्खरार रखा है..

मीणा जानती थी की चाहे कंडोम से चूड़े या बिना कंडोम क, चुदाई तो चुदाई hi होती hai…aur इसे उसके पति क अलावा किसी और क साथ करना बहुत बड़ा गुनाह hai…samaj के hi नह किसी बी नज़रिये से इसे गलत hi ठहराया जाता hai…par मीणा इन सब विचारो क बावजूद बी अपने आप को निर्दोष साबित करने क लिए प्रयास कर रही थी ..और वो जमील को मैं hi मैं थैंक्स बोल रही थी की काम से काम जमील जी ने ऐसे घटिया काम करने से पहले कंडोम लगाना जरुरी समजा….

खैर शाम तक कुछ खास नह हुआ मीणा कभी सब बात याद करके रोटी तो कभी अपने आप को तसल्ली देने की कोशिश karti…aise hi वक़्त गुजर चूका tha…sham हो गयी थी और मीणा अब भी सोफे पे बैठी हुई thi…subh जमील क साथ आधा नाश्ता करने क बाद नहीं उसने कुछ खाया था और नहीं एक बून्द पानी बी पिया हुआ tha…use बस इंतज़ार था तो उसके पति ka..wo जानती थी आज जो काम उसने किया हुआ hai..use मैं में भरे उसके पति का सामना करना उसके लिए कितना मुश्किल hai…par वो इससे भाग बी नह सकती थी…

करीब 7.30 बजे गेट की आवाज़ आते hi मीणा को पता चल गया था की उसका पति आगया और इस बात को सोच कर उसका दिल जोरो से धड़कने लगा tha..uski आंखे फिर से नाम पड़गयी और ासु टपकने लगे the…meena जानती थी इस वक़्त उसके आँखों में ासु देख कर उसके पति को किसी उन्होनी का एसएस होक वो उससे हज़ारो सवाल कर बैठेंगे जिसका जवाब मीणा छह कर बी दे नह sakti.isliye वो अपनी ासु पोछते हुए दरवाजे क पास आकर अपने चेहरे पर बनावटी मुस्कान लायी नज़ारे zukali..aparadhi भवंस महसूस कर रहे मीणा को अपने पति से नज़ारे मिलाने का बी धैर्य नह था और पति अंदर आते hi वो किचन में chaligayi..taki कुछ देर क लिए तो सही पति क नज़र से बच जाए..

लेकिन मीणा क पति को थोड़ा अंदाज़ा हो गया था की मीणा कुछ उदास सी hai…aur वो अपना बैग रूम में रख कर मीणा क पास आया और पूछा क्या बात है मीणा आज कुछ उदास लग रही हो क्या बात है.?

पति क इस सवाल ने मीणा क दिल में डर का माहौल पैदा कर दिया tha…wo कुछ सोची और boli..aisa कुछ नह बस थोड़ा सर दर्द…

पति मीणा का ख्याल रकने की कोशिश करते हुए बोलै दर्द बहुत है तो डॉ क पास चले क्या…?

पति की इ बात सुनकर मीणा मैं hi मैं टूट चुकी थी ..कितना केयरिंग है मेरा पति और मई पापी उस कमीने क चक्कर में aagayi…wo फिर से एक बनावटी मुस्कान लाये पति से बोली अरे नह उतना बी दर्द नह अब बस थोड़ा काम hai…kuch देर में पूरा काम हो जायेगा आप फ्रेश हो जावो तब तक मई कॉफ़ी बनती हु आपके लिए..

पति - तुम सच कह रही हो na…agar कुछ ज्यादा काम हो तो bolo…hum हॉस्पिटल होक आएंगे..

मीणा अरे नह इसकी कोई जरुरत नह मई ठीक hu..aap चिंता मत karo…agar शाम तक ठीक नह हुआ तो कल हॉस्पिटल जावूँगी.. .मीणा अपनी गलती को छुपाने की कोशिश करते हुए बोली तो उसका पति बाथरूम गया फ्रेश होने क लिए और मीणा किचन में उसके लिए कॉफ़ी बनाने लगी..

पति क बाथरूम में जाते hi मीणा फिर से एक गहरी सोच में डगायी की कैसे वो एक शरीफ नेक बेहद hi केयरिंग पति क साथ बेवफाई कर baithi…use फिर से अपने आप पर घृणा होने लगी पर इस वक़्त वो रो बी नह सकती थी अपने दुःख को मैं में hi दबायी पति क लिए कॉफ़ी रेडी की और जब उसका पति फ्रेश होक बहार हॉल में बैठा तो उसके सामने कॉफ़ी रख क फिर से किचन में aagayi..darasal हमेशा मीणा पति को कॉफ़ी देकर उसके बगल में बैठ थी और उसके साथ बात karti…par आज मीणा अपने पति से नज़ारे बी मिला नह पा रही thi…is वजह से वो कॉफ़ी पति क सामने रख कर सीधे अंदर किचन में आयी थी ताकि पति से नज़ारे छुपा सके..

लेकिन मीणा को पति को अंदाज़ा होगया था की या तो मीणा को सच में बहुत सर दर्द है या वो किसी बात पे उदास hai…par उसे इ अंदाज़ा बिलकुल बी नह था की उसकी प्यारी बीवी कुछ दिनों से उसके ऑफिस जाते hi पीछे क्या गुल खिला रही थी और उसका नतीजा आज क्या निकल चूका hai..wo बिना कोई गलत बात को दिमाग में न लाते हुए याद करने की कोशिश करने लगा कही उसने कोई गलत बात तो नह की मीणा क साथ या किसी ने उसे कुछ कहा तो नह …यही सोचते सोचते वो कॉफ़ी का गट पीने लगा और कुछ देर बाद उसकी कॉफ़ी बी ख़तम होगयी thi…aur मीणा कॉफ़ी का मग उठाने आयी तो उसके पति ने उसे बैठने को कहा तो मीणा एक पल क डर सी गयी कही पति को कुछ पता तो नह chala…uska पसीना निकलने लगा अगर पति को पता चला हो तो क्या जवाब दू…..

लेकिन तभी उसके पति की आवाज़ आयी कहा खो गयी मीणा बैठो na..lagta है आज तुम्हारे सर में बहुत दर्द है…

मीणा- अरे नह बस थोड़ा सा hai…kam हो जायेगा कहते हुए वो अपनी नज़ारे झुकाये पति क बगल में कुछ दुरी पर बैठ गयी तो उसका पति मीणा की कलाई को थमते हुए bola..lagta है मीणा तुम सर दर्द से ज्यादा कुछ बात खायी जा रही hai..jisse तुम आज उदास हो..

पति इस बात से मीणा क पाँव की निचे की जमीन फिसल जाने का ऐसाह हुआ और उसे लगा उसकी चोरी पकडिगायी तो नह gai?…apni चोरी छुपाने की कोशिश करते अपने चेहरे पे एक बनावटी मुस्कान लाते हुए बोली नह ऐसा कुछ नह..

पति- पति हु तुम्हारा तुम्हारे साथ लगभग 15 साल गुजर चूका hu…aur अपनी प्यारी पत्नी का चेहरा देख कर hi समाज जाता hu….sach कहो तुम मेरे सुबह तुम्हारी पहनी हुई निघ्त्य पर ऐतराज़ जाताना बुरा लगा न…

पति की इ बात सुनते hi मीणा की जान में जान आगयी thi…aur इस बार वो निडर होक मुस्कुराते हुए boli..aap बी न कुछ बी सोच थे ho..bhala ऐसी छोटी बात क लिए मई क्यू बुरा maanu…aur वैसे बी आपने तो ठीक hi कहा था न….

पति- तो मेरी प्यारी बीवी का चेहरा आज इतना उदास क्यू है..

मीणा- आप यकीं करो सच में मेरे सर में सुबह से दर्द है.. वो कल रात देर से सोई थी na…aur सुबह बी जल्द hi उठ गयी थी.. शायद नींद पूरी न होने क वजह से सर दर्द कर रहा hoga…meena अपनी सफाई देते हुए बोली और उसके पति को बी कुछ हद तक सही लगा और वो बोलै है शायद हो सकता hai…to आज जल्द hi सो जाना ठीक hai…mai आते वक़्त मेडिकल से टैब्स लेकर आता हु तुम्हारे लिए…

मीणा अब क्या जवाब देती उसे दवाई की नह बल्कि उसके पति क प्यार की जरुरत hai..wo एक मुस्कान पति को देते हुए कॉफ़ी का मग लेके किचन में चालीगयी और कुछ देर बाद उसका पति बी बहार चला gaya…halaki मीणा का मैं तो हो रहा था की वो अपने पति को आज जाने न दे ..पर वो जानती thi…aaj अगर उसके कहने पर पति रुक गया तो फिर से सवाल जवाब शुरू हो जायेंगे और गलती से बी उसके मुँह से जमील की बात निकल न pade…isliye वो अपने पति को बिना रोके उसके जाते hi किचन में आकर रात क डिनर क लिए तैयारी करने लगी साथ hi साथ उसके लिए पति का प्यार देख कर रट रट अपने मैं को हल्का करने लगी…

उसके बाद उस दिन कुछ खास नह hua…dono मिया बीवी डिनर करके सो Gaye..sote वक़्त मीणा ने तैय किया की वो आज नींद नह आने पर बी कुछ नह सोचेगी और जल्द से जल्द सोने की कोशिश करेगी ताकि कल का सूरज की रोशनी क साथ एक नयी सुबह हो जिसमे न कोई उदासी हो न कोई पछतावा हो और नहीं जमील जी क साथ बीते वक़्त की yaade…wo एक बार गहरी नींद में सोये हुए पति को देख अपने असू गिरते हुए मैं hi मैं पति से माफ़ी मांगने की कोशिश करते हुए बोली सॉरी जी मई उस कमीने जमील क बातो में आकर गलत कर baithi…ho सके तो प्ल्ज़ मुझे माफ़ kardena…aur वो फिर दूसरी तरफ मुँह करके सोने की कोशिश करने lagi…ankhe बंद करते hi फिर से मीणा क सामने वही सोच आने लगी जो जमील क साथ उसने आज सुबह किया हुआ था फिर से उसे जमील पर और अपने आप पर बी गुस्सा आने लगा था और उसने उसने तैय किया की वो उसे एक माणूस घडी समझकर भूलने की कोशिश karegi…aur उसने अपनी सोच को किसी और जगह बदल ने की कोशिश ki…aur वो कुछ hi देर में एक ग़हरी नींद क में सगाई…

दूसरे दिन सुबह सुबह मीणा की नींद खुली और वो सब कुछ भूल कर रोज़ाना की तरह अपने काम में लग gayi….pehle उसने नाहा लिया फिर एक साधारण सी निघ्त्य पहन ली घागरा और बाकी इनर गारमेंट्स क saath…aur वो पति क लिए टिफ़िन और ब्रेकफास्ट बनाने ने में बिजी हो gayi…thodi देर बाद उसका पति अपने सही वक़्त पे उठगया और पहले फ्रेश होने बाथरूम चला gaya..aur जब तक वो फ्रेश होक आता मीणा ने उसके लिए ब्रेकफास्ट रेडी करके टेबल पे रख दिया…

मीणा का पति बी रेडी होकर ब्रेकफास्ट क लिए बैठगया और मीणा से पूछा ाचा मीणा तुम्हारा सर दर्द कैसा है अब..

मीणा हस्ते हुए बोली बिलकुल ठीक कोई प्रॉब्लम नह…

पति- इ तो अछि बात हुई chalo..aur है तुम थोड़ा काम काम किया karo…bekar में इधर उधर की काम को ऐडा लेती हो तो सर दर्द नह होगा तो क्या होगा..

इस दर्द क बहाने क पीछे का राज़ तो सिर्फ मीणा hi जानती थी और वो बिना कुछ बोले हम्म्म्म में जवाब दे बैठी. पति सामने बैठे ब्रेकफास्ट कर रहा था और इधर उधर की बाते कर रहा था और मीणा उसे सुन रही थी और कुछ जवाब बी दे रही thi…par वो भूल गयी thi…aaj उसे बी पति क साथ ब्रेकफास्ट करना चाहिए था… जब इ ख्याल आया तो वक़्त बिट चूका tha..uska पति ब्रेकफास्ट फिनिश करके हाथ धोने बेसिन क पास आगया tha..wo मैं hi मैं सोच ने लगी …इ कैसा बदलाव आगया मुजमे की मई भूल गयी हम पति पत्नी हमेशा एक साथ hi हमेशा ब्रेकफास्ट लंच डिनर करते hai…..tab उसे फिर से जमील की याद aayi…kaise जमील उसकी जिंदगी में आने क बाद वो जमील क साथ ब्रेकफास्ट करने की आदत दाल baithi…e सोच कर उसका मैं फिर से उदास हो गया tha…par पति सामने होने क वजह से उसने अपने उदासी पर काबू पाकर अपने चेहरे पे मुस्कान लेन की कोशिश की थी….

कुछ hi देर में मीणा का पति अपने ऑफिस जाने क लिए निकल पड़ा तो मीणा का आज उन्हें ऑफिस जाने से रोकने का मैं कर रहा tha..wo चाहती थी आज पूरा दिन वो अपने पति क साथ gujare..par वो छह कर बी उसे रोक नह सकती थी क्यू की वो जानती थी अगर ऐसा किया तो उसके पति जरूर समजेगा की कुछ तो बात hai..aur बात की घेहरायी तक जाने की कोशिश करेगा जो मीणा बिलकुल नह चाहती थी और वो ऑफिस जाते हुए पति को तब तक देखि जब तक वो उसकी नज़र से दूर न ho…aur वो वापिस अंदर आके दरवजा बंद किये सोफे पे बैठ gayi…aur अपने आंखे बंद कर ली ….

आज पहली बार मीणा को थोड़ा अकेलापन फील होने लगा tha…e जानते हुए बी वो कई सालो से सुबह का इस वक़्त अकेली hi होती thi…tab उसे याद आया की पिछले 6-7 दिन से जमील उसके अकेलेपन का साथीदार बना हुआ tha..aur जमील की याद आते hi वो अपने सोच को वही रोकते हुए किचन में आयी और अपने लिए ब्रेकफास्ट को परोसकर खाने की कोशिश करने lagi…lekin आज उसे ब्रेकफास्ट में बी कोई स्वाद नह लगा रहा tha.jiske स्वाद की तारीफ़ कुछ hi देर पहले उसके पति ने किया हुआ था..

मीणा बिना मैं क अपनी सुबह की भूक मिठाने क लिए ब्रेकफास्ट करने लगी thi..tab उसे याद आया की कल जमील उसके साथ ब्रेकफास्ट करते वक़्त कैसे उसकी निघ्त्य क अंदर अपना पाँव घुसके नंगे पेअर से होते हुए जांघो तक चुने की कोशिश कर रहा tha..e सोच मीणा क दिमाग में चलते hi मीणा ने तुरंत आगे फैले अपने पाँव को पीछे कर्ली जैसे इस वक़्त बी उसके सामने जमील बैठा हो और वही हरकत दौरा रहा ho..meena अपनी हरकत से खुद ताजूब हुई और न चाहते हुए बी उसका चेहरे पे शर्म से भरी मुस्कान च गयी. ..

कुछ hi देर में मीणा ने जितनी उसकी भूक थी उसे बी काम ब्रेकफास्ट किया और बेसिन में बर्तन साफ़ करने लगी और उस वक़्त बी उसे जमील की याद आयी कैसे जमील उसे बेसिन में बर्तन साफ़ करते वक़्त बी पीछे से अपने बहो में लेने की चेष्टा करता tha..wo छह कर बी जमील क हरकतों को याद करने से अपने आप को रोक नह पा रही thi,usne अपने मोबाइल में टाइम देखा तो 8.30 बज चुके the..aur उसे याद आया की जमील जी का तो यही वक़्त है आने ka…kya जमील जी आज फिर आएंगे. . . नह नह कैसे आएंगे मैंने तो उन्हें कल इतना बुरा भला कहा है की जब तक मई होक न उन्हें बुलवू वो नह आएंगे pakka…fir बी उसके मैं में बेचैनी सी चा गयी थी और वो अपनी बेचैनी दूर करने क लिए बहार गयी और गेट क पास रुक क चारो तरफ नज़र दौड़ने लगी लेकिन कही बी जमील का साया तक उसे नज़र नह आया. फिर उसने उस कॉलोनी की तरफ नज़र डाली जहा जमील चुप क बैठ ता tha…par वह बी कुछ नह मिला तो मीणा फिर से वापिस अंदर आयी और मैं hi मैं बोली चलो ाचा hi hua..kamine से पीछा तो छूट Gaya..meena अपने मैं को तस्सल्ली देने क लिए तो इ बात कह रही थी पर शायद इस वक़्त जमील आता बी तो वो उसे कुछ बोल नह पाती..

मीणा ने तैय तो किया था की जमील क साथ बीती हर पल को वो एक माणूस घडी समाज कर भूल जाएगी पर सच बात तो इ थी की मीणा पहले से hi एक कामुक औरत thi..par उसे अपने माँ बाप से मिले अचे संकर क वजह से उसने अपनी कामुकता पर काबू पा लिया हुआ tha..aur शादी क बाद बी अपनी मैं की ीचा पूरी न होने पर बी उसने डर और इज्जत क मरे अपने कदम गलती से बी फिसलने नह दिए the…ek केयरिंग और बहुत प्यार करने वाला पति उसे मिलने पर उसने अपनी वासना को दबा क रखना hi ठीक समजा tha…par जमील ने मीणा की दुखती नस को दबाया था ..इस वजह से मीणा की वो दबी हुई वासना फिर से नींद से जग गयी thi..jis ख़ुशी को त्याग कर मीणा ने अपने संसार को संभाला था आज वही ख़ुशी उसे अपना ने की चिर चिर कर कह रही रही थी अब मुझे अपनावो meena…muje अपना ने में जो maja,khushi है उतनी ख़ुशी दुनिया की किसी चीज़ में नह मिलेगी.

लेकिन वो इतने सालो से अपनाये हुए संस्कार को कैसे छोड़ deti…jisne उसे ाचा naam,ghar परिवार दिया हुआ hai…aaj मीणा क पास सब कुछ tha…ek ाचा घर ाचा pati..ek ख़ुशी सी जिंदगी बिताने की लिए जितना चाहिए उतना धन दौलत घडी सब कुछ उसे उसके अचे संस्कार वजह से hi तो मिला था…

आज वो खुद इस दुविधा में थी की अपने संस्कार क साथ जाए या अपनी जगी हुई वासना क साथ …

लेकिन बहुत सोचने क बाद मीणा का संस्कार उसकी वास्सना पर भरी पड़गया था. उसने जमील को भूल जाना hi ठीक समजा था..

वही दूसरी तरफ जमील आज सुबह सुबह उठ क hi तैयार tha…aur वो बार बार अपनी नज़र घडी पर hi दौड़ा रहा tha…use अब बी यकीं था की मीणा का गुस्सा उतारते hi मीणा फिर से उसकी हो jayegi..lekin जब 9 बजे तक बी मीणा का कोई फ़ोन या मश्ग नह आया तो उसे लगा शायद मीणा का गुस्सा उतरा नह …मई hi जाकर उसे सरप्राइज देता hu..aur उसे मानाने की कोशिश करता हु ..लेकिन क्या मेरे जाने से मीणा मान jayegi?…agar नह मानी तो? …कल की तरह और भड़क गयी तो? मेरे तो लेने क देने पद jayenge….shayad मैंने hi जल्द बाज़ी Kiya…kal उसे बिना चोदे तड़पने देता तो शायद मीणा इतना मुझसे नाराज़ नह hoti..aur आज सही मौका hota…jamil अपनी कल की हरकत पर खुद नाराज़ हो गया tha…use ऐसा लगाने लगा कही मीणा उसके हाथ से निकल तो नह gayi…wo बी अब ग़हरी सोच में दुब गया tha…lekin कही न कही जमील उम्मीद अब बी खयाम थी की ..मीणा जैसे कल चुदाई का मजे ले रही थी उससे यही लगता है क मीणा क मैं में बी ीचा hai…aur जमील ने सोचा अगर मीणा सच में चुदाई से खुश थी तो वो जरूर अपना गुस्सा उतारते hi अपनी ीचा किसी न किसी बहाने जाहिर करेगी और फिलहाल बेहतर यही होगा की वो चुप चाप सही वक़्त का इंतज़ार करे…

आगे क्या हुआ क्या मीणा अपने संस्कार क चलते जमील से सच में दूर होगयी या उसकी वासना ने फिर से उसे जमील क करीब laaya..e जानने क लिए बने रहे मेरे साथ...
 
जमील ने सोचा अगर मीणा सच में चुदाई से खुश थी तो वो जरूर अपना गुस्सा उतारते hi अपनी ीचा किसी न किसी बहाने जाहिर करेगी और फिलहाल बेहतर यही होगा की वो चुप चाप सही वक़्त का इंतज़ार करे…

आगे

दोपहर तक मीणा का वक़्त सोचने में चला गया tha…aur वो इसी सोच में डूबी अपने लिए दोपहर का खाना बनाकर लंच बी करलिया और वो रोज़ाना की तरह फिर से दोपहर को सो गयी thi..ab बी जमील क साथ बाईट उस्क्स वक़्त उसे अपने दिल पर भोज hi लग रहा tha..aur वो इस भोज को किसी तरह थोड़ा तो हल्का करना चाहती thi..bahut सोचने का बाद उसे लगा मैंने जमील क साथ जो बी किया शायद मेरी जिस्म की प्यास भुजने क लिए kiya..aur इ प्यास को क्यू न मई अपने पति से hi भुजने की कोशिश न karu…maana की अब वो इस मटर में ज्यादा इंटरेस्टेड नह है पर हो सकता है मेरे सजने सवारने से उनमे बी जोश aajaye..aur मुझे संतुष्ट kare..pura तो नह काम से काम थोड़ा तो sahi…nh नह आज मई उन्हें इतना प्यार दूंगी की वो जोश में आके मेरी इस जरुरत को बी पूरी karde..ha यही ाचा रहेगा इससे मेरी गलती बी सुधर सकती है..

मीणा तुरंत उठी और घडी देखि तो दोपहर क 4 बजनेवाले the…ab उसे बहुत कुछ करना था जिससे वो अपने पति को खुश karde…uthate hi वो पहले नज़दीक क चिकन दुकान पे गयी और चिकन लेके घर आकर उसे साफ़ करके मसाला लगाके फ्रिज में रख दी और किचन में रात क खाने की तैयारी करने lagi..aur शाम क 6.30 बजे क पहले hi वो डिनर की साड़ी तैयारी करके नहाने चली gayi..wo आज कुछ ऐसा करना चाहती थी जिसे देख उसका पति अपने आप को रोक न पाए और उसे बहो में भरके खूब प्यार kare…nahakar फ्रेश होकर उसने आज निघ्त्य की जगह एक टाइट लाल रंग की लेग्गिंग्स पहन लिया साथ में उसके ऊपर एक क्रीम कलर का टॉप..

मीणा इस कपडे में सच में क़यामत भ रही thi.is वक़्त कोई उसे देखता तो अपना लुंड मसलने से अपने आप को नह rokata…meena अपने होतो को हलके से लिपस्टिक का टच दिया था इसलिए उसके गुलाबी हॉट और बी रसीले लग रहे थे स्ट्रॉबेरी की tarah…aur कुछ hi देर में मीणा का पति काम से लौटा तो अपनी खूबसूरत बीवी को देख वो बी खुश होता हुआ pucha…is वक़्त कहा जानेवाली हो मैडम ji…meena क पति ने मज़ाकि अंदाज़ में सवाल किया तो मीणा बी हस्ते हुए बोली कही पे नह…

पति- तो फिर इ सजना सवर्ण वो बी इस वक़्त? उसके पति ने सवाल भरे नज़रिये से पूछा और अंदर आके अपना बैग रखा और मीणा की तरफ देखने लगा

मीणा एक मुस्कान देते हुए क्यू? मई अपने पति क ख़ुशी क लिए पहन नह सकती क्या?

पति- अरे मेरी जान मई तो चाहता हु तुम हर दिन ऐसे hi खुश raho…kehte हुए वो वाशरूम चला गया फ्रेश होने तो मीणा अपनी मकसद में कामयाब होती देख कर किचन में चालीगयी कॉफ़ी बनाने क लिए..

कुछ देर बाद मीणा कॉफ़ी लेके बहार आयी और कॉफ़ी पति को देकर उसके बगल में बैठ gayi..bagal में बैठा उसका पति मीणा क जिस्म से आरही परफ्यूम की खुशबु सूंघते हुए bola…lagta है आज बहुत खुश ho…jara हमे बी इस ख़ुशी का वजह बता देते तो हम बी थोड़े खुश हो जाते hehehe..meena क पति ने टोंट मरते हुए कहा…

तो मीणा बी उसी अंदाज़ में boli..ha मई बहुत खुश हु जबसे आपसे शादी हुई hai…aur कभी कभी लगता है अपने प्यारे पति को हमेशा मेरे साथ hi rakhu…kaam पे बी जाने न दू..

पति- ाचा तो घर कैसे चलेगा और बचो की पढ़ाई का खर्चा कौन करेगा हाहाहाहा

मीणा- बस उतना बी सेल्फिश नह हु जो सिर्फ मेरे बारे में sochu..mai जानती हु आप इतनी म्हणत मेरे और बचो क भलाई क लिए तो करते हो ..तो क्यू न मई बी मेरे प्यारे पति को कभी कभी ऐसे खुश करने की कोशिश karu..meena ने बहुत नजूज तरीके से सिचुएशन पर नज़र रखते हुए बोलै

तब तक उसके पति की कॉफ़ी बी ख़तम हो गयी th..aur वो बोलै तुम तो मेरी जान हो और तुमसे मज हमेशा खुश hu..chahe तुम किसी बी तरह रहो…

मीणा उठ क कॉफ़ी क मग को अंदर किचन में रखने गयी और तब तक उसका पति अपने कपडे पहन कर बहार जाने क लिए रेडी हुआ था. मीणा अपने पति को देखते हुए boli..ek बात बोलू बुरा तो नह मानोगे…

पति- भला तुम्हारी बात को मई क्यू बुरा मानु बोलो मीणा क्या बात है..

मीणा- अगर आप ड्रिंक्स करने जा रहे है तो प्लस आज यही पे बैठ क ड्रिंक्स करो na…mai आपके लिए गरमा गरम खबब बांडुंगी..

मीणा का पति कुछ सोचा उसे लगा की मीणा क दिल को दुखाना ठीक नह होगा और वो बी मीणा की बात मानते हुए मज़ाकि अंदाज़ में बोलै सिर्फ खबब hi डौगी या और कुछ बी हेहही

पति की बात सुनकर मीणा बहुत खुश हुई थी उसे लगा वो अपने मकसद में कामयाब हो गयी और उसे पति क मुँह से ऐसी बात सुनकर शर्म बी आयी और वो शरमाते हुए boli..wo तो सिर्फ आपका hi है जब चाहे ले सकते हो…

मीणा की बात सुनकर पति बोलै चलो तो फिर कहते हुए वो अपने कपडे बदलने को खड़ा हुआ तो मीणा को लगा उसका पति अब hi …उसके साथ सेक्स करना छह रहा है और वो शर्माके बोली ab…waqt तो देखो…

मीणा क बात सुन क पति हस्ते हुए बोलै अरे बाबा वो नह मेरा मतलब मई कपडे बदलता हु तब तक तुम मेरे लिए खबब बनावो…..

पति क इस बात से मीणा थोड़ी निराश तो हुई पर उसके लिए ख़ुशी की बात थी की उसका पति उसके कहना मान गया था वो ख़ुशी ख़ुशी किचन आयी और खबब बनाने लगी साथ में डिनर बी बनाने लगी जिसकी तैयारी उसने पहले की कर राखी thi…kuch आधे घंटे में गरमा गरम खबब तैयार होते hi उसने पति को प्लेट में सर्वे करके दी और किचन में आके डिनर रेडी करने lagi…saath hi साथ उनके बीच थोड़ी इधर उधर की बाते बी होने लगी..

उधर जमील का बुरा हाल था ..न तो आज उसे मीणा का कोई मश्ग आया था और नहीं उसके पति ने जमील से आज बात की थी और नहीं उसे आज वो मिला था जिसका इंतज़ार जमील बेसब्री से कर रहा था. वो बी अब सोच में पड़गया था न जाने उसके मैं में बी अजीब ख्याल आने लगे the…kahi मीणा सच में तो मुझसे दूर तो नह Hui…kahi हम दोनों की बात उसके पति को पता चल तो नह gayi..kya वजह हो सकती है कल से दोनों की कोई खबर बी नह muje….meena का पति कल शाम को बी जब बहार गया था तो तब उसे अपना एक पुराण दोस्त मिल गया tha..aur उसके साथ बात करते करते hi वक़्त बीत गया tha…aur वो बिना जमील से मिले या बात किये घर वापिस आया tha…aur इस बात से जमील अनजान tha…isliye उसके मैं में ऐसे ख्याल आने लगे थे..

लेकिन जमील को इस बात से कोई फरक नह पड़ता था की मीणा का पति आज उससे नह मिला उसे बस मीणा क बारे में जानने क लिए उसके पति क साथ आज वक़्त गुजरना tha..jiske लिए वो सुबह से बेक़रार tha…aur उसने सिचुएशन की सचाई जानने क लिए कुछ सोच कर मीणा क पति को कॉल कर hi दिया

इधर मीणा का पति खबब क साथ पेग का मजा ले रहा था वो बी अपनी खूबसूरत बीवी क बगल में बैठ कर तो उसके मोबिल क रिंग ने उसके मजे को थोड़ा भांग कर दिया था और वो मोबाइल स्क्रीन पे देख कर ओह्ह्ह्ह जमील भाई …लगता है आज इनका बी ड्रिंक्स का प्लान था मेरे saath..aur वो फ़ोन रिसीव करके hello बोलै..

पति क मुँह से जमील का नाम सुनते hi मीणा थोड़ी उनकंफर्टबले फील करने लगी और मैं में hi बोली इ कमीना तो मुझे पाने क लिए हमेशा मेरे पति क पीछे hi पड़ा रहता hai…aaj ाचा मौका hai..mai कैसे बी करके पति को समजा दूंगी की जमील जी दूर रहे और वो वही नज़ारे झुकाये बैठी पति क बातो पर hi ध्यान देने लगी thi..kuch देर क बातो से मीणा को अंदाज़ा लगा की अब उसका पति जमील को घर आने की दावत देने वाला है तो मीणा ने उसे न न में इशारा किया जिसे देख उसके पति को लगा की इस वक़्त जमील का आना मीणा को ाचा नह लग रहा है और वो अपनी बात को बदल कर दूसरी बात करने लगा.

दरअसल जमील और मीणा क पति क बीच पिछले दो दिन से न मिलने की वजह से जमील ने मीणा क पति को बार में पार्टी क बहाने बुलाने की कोशिश की thi…aur जब मीणा का पति सच बताके जमील को उसके घर ड्रिंक्स क लिए इन्विते hi करनेवाला tha…meena ने उसे न न में इशारा किया था..

कुछ 5 मीन्स में जमील और मीणा क पति क बीच बात ख़तम होक कॉल कट गया था तो मीणा का पति मीणा को देखते हुए bola..q मन करदिया अगर वो आते तो तुम्हारे हाथ क बने खबब खा कर खुश होते…

मीणा मैं में hi बोली अब आप को कैसे batàvu की आपके दोस्त जमील जी ने मेरा क्या क्या खाया हुआ hai…isiliye तो मई जमील जी को हम दोनों से दूर करना चाहती हु ..और वो अपने मैं में चल रही hi बातो को वही दबाते हुए boli..hum दोनों की बीच आपके जमील भाई को बुलाना मुझे ाचा नह laga…so मन किया…

इ बात मीणा ने तब कही थी जब उसका पति ड्रिंक्स का घुट ले रहा था इसलिए उसके पति सिर्फ आपके जमील भाई क बदले सिर्फ जमील भाई hi सुनाता मीणा क मुँह से और वो सोचने लगा कितनी प्यारी है मेरी मीणा हमेशा हेयर मर्दो को अपना भाई hi मानती hai..aur उसे मीणा पर गर्व महसूस होने लगा था की उसको ऐसी शरीफ संस्कारी बीवी मिली hai..aur वो अब बिना कुछ बोले चुप बाकी बचे अपने ड्रिंक्स को धीरे धीरे लेने लगा था…

पर जब जमील का नाम उसके पति क मुँह से आया तो माहौल में थोड़ा बदलाव आया tha..jiska असर मीणा पे पड़गया tha..aur वो अपने पति से बोली आप ड्रिंक ख़तम करो तब तक मई डिनर लगाती हु कह कर वो किचन में आयी और एक ग़हरी सास लेते हुए अपने आप से hi सवाल जवाब करने lagi…kaise बतावु पति को जमील जी की नियत ठीक nh..wo हाथ धोकर मेरे पीछे पड़े हुए है…

अगर उन्होंने पूछा तो तुम कैसे पता तो क्या जवाब दूंगी mai..kis मुँह से बतावुंगी की मई उनके साथ बिस्टेर बात चुकी hu…kis मुँह लेके कहूँगी की जमील जी मेरे हर एक गुप्त अंग क साथ खेल चुके hai…kaise बतावुंगी की जमील जी क हथियार को खुद मैंने अपनी योनि पर रख क उन्हें आगे बढ़ाने का निहोता खुद मैंने hi दिया tha…aur इ सोचते hi मीणा फिर से थोड़ी उदास होगयी अपने किये को सोच कर और वो कुछ सोचने hi वाली थी तब उसे लगा की उसका पति ड्रिंक्स ख़तम करके अंदर किचन में hi आरहा है डिनर क लिए तो मीणा ने आपने आप को फिर संभाला और मैं hi मैं boli..itne अचे मौके पर जमील जैसे कमीने की याद करके मूड ख़राब करना ठीक नह जो हुआ वो गुजरा हुआ पल hai..isse ाचा यही होगा की आज पति से वो सुख पाने की कोशिश करू जिसकी जरुरत मेरी जिस्म को hai…aur मेरे पति बी आज मूड में hi hai..maja करने इससे ाचा क्या chahiye…aur वो डिनर सर्वे करने लगी प्लेट में दोनों क liye..aur दोनों एक साथ डिनर करने लगते hai..ek दूसरे से हसी मज़ाक करते हुए…

कुछ देर बाद दोनों डिनर फिनिश कर चुके थे अब दोनों को बस इंतज़ार था तो वो बैडरूम जाने का और वो वक़्त बी आगया था मीणा बहुत खुश thi…aur वो अपना काम जल्द से निपट कर अपने पति का साथ देने बैडरूम चालीगयी और वो जैसे hi बैडरूम पहुंची उसके पति ने उसे खिंच क बहो में लिया और रूम का लाइट ऑफ kardiya…meena बी अपने पति क इस हरकत से खुश होगयी थी ..और बिना किसी विरोध क अपने पति क बहो में samagayi..lekin कुछ एक मिनट बी नह हुआ था उसे अपने पति क बहो में समाये उसके पति ने उसे लेग्गिंग्स उतरने को kaha..to मीणा को निराशा हो गयी थी वो चाहती थी की आज उसका पति उसके जिस्म क साथ खूब खेले और उसे इतना गरम करे की वो खुद छोड़ना चाहे.. वो अपनी कामुकता को पति क सामने जाहिर बी नह कर सकती थी इसलिए ावो निराश मैं से अपना लेग्गिंग्स उतरने लगी चड्डी क saath..aur मैं में hi बोली सॉरी मेरे पतिदेव आज मुझे आपसे बहुत प्यार की उम्मीद thi….khair छोड़ो आपके लिए इ बी सही पर आप मुझे आज इतना छोड़ो की मेरा जिस्म कम्प uthe…aur मेरी तड़प हमेशा क लिए मीठ jaaye..meena कुछ सोच hi रही थी की उसे एसएस हुआ की उसका पति उस पर चढ़ चूका है और उसकी छूट क छेद पर अपना हथियार को रख चूका hai..aur देखते hi देखते वो हथियार शांति से उसकी योनि में प्रवेश कर चूका hai…ab मीणा इ बी अपने आप को पोजीशन में लाया हलके धक्के अपनी योनि में महसूस करने लगी न कोई सिसकारी या न कोई आवाज़ क साथ. उसकी साड़ी उम्मीद पर पानी फेर गया tha…wo बस अपने पति क निचे लेती हुई thi..aur पति को खुश कर रही थी ..पहली बार उसे अपने पति क साथ थोड़ा बी मजा नह ारः tha…use ऐसा लग रहा था जितना उसकी योनि में हथियार को समां जाना चाहिए उससे आधा बी समां नह पा रहा है.. वो नाकाम कोशिश बकरते हुए अपनी कमर को उठाने लगी ताकि पति का हथियार पूरा अपनी योनि में समां le…par उसकी इ कोशिश बी नाकामयाब रही और आखिर उसने अपनी उम्मीद खो दी थी…,

कुछ 5-6 मिनट क खेल ख़तम होते hi उसका पति डिस्चार्ज हुआ और मीणा से पूछा खुश??

अब मीणा क्या जवाब देती और वो पति क मैं रखने क लिए boli…ha bahut..aur वो अपने चेहरे पे उदासी बनके मुँह मोड़ ली जो जीरो बल्ब की रोशनी क वजह से उसके पति को पता बी नहीं चला और वो मीणा से अलग होकर सोते हुए बोलै चल मीणा अब सो जाते hai..aur वो अपने कपडे ठीक करके सो गया तो यहाँ मीणा ने बी अपना लेग्गिंग्स और चड्डी को पाँव से ऊपर करके पहन लिया और निराश हो कर दूसरी तरफ मुँह करके सोने लगी…

लेकिन आज उसे नींद आने वाली hi नह थी. …आज उसके पुरे किये पे पानी फेर गया tha…uski उम्मीद कुचल चुकी थी. जो सुख वो अपने पति से लेकर अपनी वफादारी को कायम रखना च रही thi…aaj उस सुख का नामो निशान बी उसे नसीब नह हुआ tha…wo मैं hi मैं टूट चुकी thi….use पहली बार कामक्रीड़ा क बाद अपने पति पे गुस्सा आया था ..पहली बार उसे ऐसा लग रहा था की उसकी जिस्म की प्यास पति से बहुजन नामुमकिन hai…aur वो एक पार पति सोते हुए पति को देख कर मैं hi मैं बोली सॉरी मेरे पतिदेव आप मुझे खुश नह कर सकते, आपके हथियार से ाचा तो जमील जी क ऊँगली ने मेरी योनि में कमल दिखाया tha..ab मीणा सामने न चाहते हुए बी जमील क साथ खेले काम क्रीड़ा की एक एक हसीं पल याद आने लगे थे ..कैसे जमील क साथ उसने 2 से बी ज्यादा घंटे जिस्म क जिस्म क मधुर टकराहट करते bitaye…na चाहते हुए उसके सामने उसदिन का हर एक लम्हा घूमने लगा और वो फ्लैशबैक में चालीगयी

कैसे उस दिन जमील थोड़ा लेट hi आया था और मीणा एक सेक्सी टाइट निघ्त्य में उसका इंतज़ार कर रही thi…aur जमील क आने क बाद दोनों में कैसे प्यार का अंकुर खिल gaya…wo मीठी baate…kaise जमील ब्रेकफास्ट करते वक़्त उसके पाँव से खिलवाड़ करते उसके नंगे जांघो तक पहुंच gaya….fir उसके बाद पहली बार उनके होतो का प्यार भरा Milan….fir बीएड पे दोनों कैसे मांगे हुए और उसके बाद जो कमल जमील ने मीणा को dikhaya…e सब सोच कर hi मीणा गरम होने लगी सच में जमील जी पास वो कला है वो अछि तरह जानते है औरत को गरम कैसे किया जाता है. मई बी कितनी गरम होगयी थी उस दिन अगर आज वो मेरे साथ इस वक़्त होते तो शायद अब बी उनका जाथियार मेरे योनि में होता.. अह्ह्ह्हह्हह ..सोच कर hi जिस्म खिल उठ रहा है. जिसे एक माणूस घडी समाज कर मीणा भूलना छह रही थी आज वही घडी उसे अपने लाइफ की अविस्मरणीय घटना लग रही थी और न चाहते हुए उसके जिस्म में गर्मी का एसएस होने लगा, योनि क पाकलोबक बीच खुजली सी होने लगी और उस खुजली को ेनाने क लिए उसे अपने ऊँगली का सहारा लेना पड़ा tha.…lekin उसका संस्कार ने उसे फिर जवाब diya…e क्या मीणा जिस आदमी को तुम भूलना छह रही थी उसीको याद करने की गलती कर रही हो..

अब मीणा का मैं खुद सवाल जवाब करने लगा tha…q न याद Karu..jab मेरे पति मेरे उम्मीद को कुचल कर मुझे प्यासी छोड़कर मेरी बिना कोई परवा किये सो गए hai…kya उनका कर्त्तव्य नह अपनी बीवी की तमन्ना को पूरी karde…kya सिर्फ धन दौलत hi इंसान की खुशियोका सहारा hai…nh nh…dhan दौलत से बढ़कर और बी बहुत कुछ है और वो है मैं की ख़ुशी. मन की मैंने जमील जी क साथ सम्भोग करके सबसे बड़ी गलती की hai..par आज पति की उनका हक़ लौटकर उस गलती को सुधर ने कोशिश बी तो की थी आज. पर मेरे पति ने क्या किया वो उस हक़ को अपना ने क बदले उसे अधूरा hi छोड़ diya..jab मेरे पति मुझे वो सुख नह दे पा रहे है तो मई क्यू न याद करू जमील जी क साथ बाईट उस हसीं पल की..

नह मीणा इ सब गलत है किसी गैर मर्द क साथ जिस्मानी रिश्ते रखना तो दूर उसके बारे में सोचना बी पाप होता hai…samaj इसे एक नाज़ायज़ रिश्ता तेहरा था है…

क्या गलत और क्या sahi..agar इ गलत कहला था है तो आज जो मेरे उम्मीद पर पानी फेर गया वो सही hai…kya गलत किया था maine..pati क लिए अचे कपडे pehni…acha खाना बनाया उन्हें खूब प्यार देने का सोची लेकिन मुझे मिला kya..wahi tadap…kya एक प्यासी औरत को तड़पना समाज क नज़रिये सा गलत नह…

फिर बी मीणा जमील जी एक गैर मर्द है.. उनके साथ दोस्ती कुछ हद तक ठीक हो सकती है पर उनके साथ दोस्ती का हद पार करना ठीक नह hai…jamil तुम्हारा गलत इस्तेमाल कर रहा hai…soch लो..

क्या गलत कर रहे है जमील ji…kuch बी तो नह किया उन्होंने तो. मुझे वो सुख देने की कोशिश की है जिस सुख से मई हमेशा वंचित rahi..kya एक औरत को उसका हक़ देना गलत hai…waise उस दिन जो कुछ बी हुआ उसका बराबर की साथीदार मई बी थी.. उन्होंने कोई जोर जबरदस्ती मेरे साथ तो नह किया tha…muje निर्वस्त्र करने से पहले बी उन्होंने मुझसे hi पूछा tha…aur उन्होंने मेरे कहने क बाद hi तो अपना हथियार मेरे छूट में समां दिया tha…to वो अकेले कैसे गलत हो सकते है..

मई hi पागल थी सुख का सागर मेरे पास होते हुए बी उसका एक बून्द पानी पीकर भावनाओ में बहक गयी और नजाने उन्हें क्या क्या बोल बैठी और वो मुझे बिना कुछ बोले चले गए इसलिए की वो मुझसे प्यार करते hai..aur प्यार में गलती हो hi जाती hai…aur वही गलती हम दोनों क बीच उस दिन हो gayi…lekin इसे गलत तो नह ठहराया jaata..lekin मई hi पागल thi…jamil को अपनी बात रखने की मौका बी नह diya….kitna बुरा लगा होगा उन्हें उस दिन..

मीणा को अब जमील से माफ़ी मांगने का मैं कर रहा tha..aur उसका हाथ अपनी मोबाइल की तरफ बढ़ाने laga…aur मोबाइल हाथ में लेके उसने एक बार फिर से मुद क अपने पति को देखा जो इस वक़्त बिना इस खबर क गहरी नींद सो रहा था मीणा एक पल उसे देखते रही और फिर अपना मोबाइल में सॉरी टाइप करके जमील को सेंड की और मोबाइल रख कर अपने आंखे बंद किये सोने की कोशिश कर्म lagi..apni अधूरी प्यास पर काबू पाने की कोशिश करते हुए..

वही दूसरी तरफ जमील आज अपनी मैं की बात न होने पर थोड़ा बेचैन सा होगया tha…use जो आज मीणा की खबर लेनी थी वो बी नसीब हो नहीं पायी thi..aur अपनी मैं में चल रही बेचैनी को दूर करने क आज उसने एक दो पेग ज्यादा hi लगा दिए थे और जब तक वो रात डिनर करके रूम में आता तो रात क 10.45 बज चुके the..aur उसे कपडे बदल क फ्रेश हो क सोने तक 11 बज गए the..wo वही बिस्टेर पे पड़ा मीणा क बारे में hi सोच रहा tha…kaise मीणा को फिर से manavu…aur तभी उसके मोबिल में मीणा का मश्ग देख कर वो खुश हो गया था.. मीणा क सॉरी ने उसके लिए रास्ता खुद बी खुद खोल दिया tha..uske दिमाग क तरंग फिर से बजने लगे जो कुछ देर से बेचैन the…usne तुरंत मश्ग का रिप्लाई देना socha…par उसे लगा nh…ab मेरी बुलबुल फिर से उड़ने तैयार hi है तो इस वक़्त जल्दबाज़ी करने ठीक NH…aur वो बिना कोई मश्ग किये सुकून की नींद सोगया था..

इधर मीणा बी जमील क कोई रिप्लाई न देख कर सामजी लगता है नाराज़ है mujse..aur मुझे अछि तरह पता है उनकी नाराज़गी को कैसे दूर किया जा सकता है और वो बी अपनी चेहरे पे एक हलकी मुस्कान लाते हुए सो गयी…

लेकिन अगले क दिन उसकी जिंदगी में क्या रंग लाएगा शायद इ बात मीणा, जमील या बगल में सोया मीणा का पति बी नह जनता tha.par सचाई यही थी की आज मीणा फिर से जमील क प्रति आकर्षित हो गयी थी और इसका जिम्मेदार कही न कही मीणा का पति बी था.. काश वो आज मीणा क मैं की ीचा को अछि तरह पढ़कर थोड़ा और प्रयास करता तो शायद मीणा अपने कदम फिर से फिसलने से रोक paati..khair जो होना था वो हो चूका था अब बस देखना है आगे क्या होगा..

दूसरे दिन सुबह सुबह मीणा क नींद खुली और मीणा आज पुरे जोश में thi…use जल्द से जल्द जल्द से जल्द अपना काम निपट कर जमील से माफ़ी मांगनी थी जिसकी तैयारी वो मैं में hi कर रही thi…usne बहुत कुछ सोचा हुआ था जो आज वो जमील को बताना छह रही thi…wo फ्रेश होकर पति क टिफ़िन और ब्रेकफास्ट की तैयारी कर hi रही थी की उसका मोबिल रिंग होने laga….pehle तो उसे लगा की जमील का hi कॉल होगा जो इसका सॉरी का मश्ग पढ़कर किया होगा, और फिर उसने सोचा नह नह जमील जी इतने सुबह पति क होते हुए फ़ोन नह कर सकते और उसने अपना मोबिल को देखा तो उसकी सास का फ़ोन tha..meena सोच में पड़गयी इतनी सुबह सुबह सास का फ़ोन सब कुछ ठीक तो है न और वो बिना वक़्त गवाए फ़ोन रिसीव करके hello बोली..

उधर से सास का जवाब आया hello मीणा बीटा कैसी ho…subh सुबह तो मैंने नह जगाया तुम

मीणा- मई ठीक हु माजी आप सुबह सुबह कैसे सब कुछ ठीक तो है न..

सास- है ठीक है beta..chinta की कोई बात nh..darasal मैंने फ़ोन इसलिए किया था की आज मई वह आ रही हु वो खेत क सिलसिले में कुछ बात करनी है तेरे पति se…Tera पति तो है न?

सास आने की बात से मीणा एक तरफ खुश बी हुई थी और दूसरी तरफ उसको थोड़ा बुरा बी लगा tha..q की उसको आज जमील से बी बात करनी थी जो सास क रहने से नह हो सकती thi…wo सास को मन बी नह कर सकती thi..aur बोली है है न माजी

सास- ठीक है बीटा तो मई कुछ hi देर में निकलती हु और शाम को तेरे पति से बात बी कर लेती हु ..

मीणा- ठीक है माजी मई उन्हें बताती हो उनको..

और दोनों क बीच फ़ोन काट gaya…aur अब मीणा ग़हरी सोच में पड़गयी thi..lekin उसे याद आया की माजी अब निकलेगी तो बी उसे बस पकड़ कर आने तक दोपहर क 11.30 से 12 तब पहुंच जाएगी मतलब मेरे पास पर्याप्त समय hai..pati क जाते hi जमील जी से बात करने और वो आ भी गए तो उन्हें सास आने से पहले वापिस भेज सकती हु…

कुछ hi देर में सब कुछ मीणा क हिसाब से hi हो रहा था और उनसे पति को सास क आने की खबर बी दे दी thi…bas उसे अब पति का ऑफिस जाने का इंतज़ार था और वो वक़्त बी आगया था जो मीणा छह रही थी और उसका पति ब्रेकफास्ट करने क बाद और टिफ़िन और बैग लेके ऑफिस जाने क लिए घर से बहार निकल पड़ा और वो जब अपनी बाइक लेकर कंपाउंड से बहार आया तो न जाने कहा से जमील की आवाज़ सुनाई दी तो मीणा àुर उसके पति ने एक साथ आवाज़ की तरफ ध्यान दिया तो मीणा की आंखे चमक उठी thi…jise वो फ़ोन करके माफ़ी मांग कर बुलाना छह रही थी .वो खुद अब उसके सामने उसके पति क साथ खड़े हो कर बात कर रहा tha…aur मीणा उसे पलके चुराए देख रही thi..jamil को देख कर hi उसके जिस्म में सनसनी मच गयी थी उसके रोम रोम खड़े हो गए थे उसका मैं उल्लसित हो रहा tha..wo मैं में hi बोलने लगी इ वही मर्द है जिसने दो दिन पहले उसे बहो में लेके जिंदगी का वो सुख दिया था जिससे वो वंचित thi..uska जिस्म गर्म होने लगा tha..uske आंखे को क सामने नशा सा चने लगा…

वही सामने खड़ा जमील तिरछी नज़र से मीणा को देख रहा था और मीणा क चेहरे पर कोई गुस्सा या नाराज़गी का भावना न देख कर उसे लगा उसका प्लान कामयाब हो गया hai…lekin इस वक़्त वो मीणा क पति क सामने कोई गलत हरकत नह करना चाहता था और उसके पति से बात करने लगा…

मीणा का पति - अरे जमील bhai…aap सुबह सुबह यहाँ क्या बात है..

जमील- वो बस ऐसे hi थोड़ा वजन काम करने की कोशिश करने क लिए सुबह सुबह वाकिंग कर रहा था उतने में आप दिखे सोचा बात karlu…lagta है मैंने आपको जाते वक़्त डिस्टर्ब किया जमील एक वफादार दोस्त की तरह मीणा क पति से बोलै..

मीणा का पति- अरे नह भाई जान वैसे 5 मं देर होने से कोई पहाड़ तो गिर नह jayega..muje बी ाचा लगा आपसे मिलके वो बी सुबह सुबह..

लेकिन मीणा का पति नह जनता था की पहाड़ तो गिर चूका है उसके पीछे गेट क पास रुकी उसकी बीवी िस्वाहाः से और उसकी बीवी की सास फूल रही hai…us पहाड़ को खेलने की ख़ुशी से…

फिर उसका पति बोलै जमील भाई अब ाही गए तो चलो ब्रेकफास्ट बी यही करलो कहते हुए वो अपने बाइक से उतरने लगा तो जमील उसे रोकते हुए अरे नह भाई बेकार में भाभी को तकलीफ क्यू? अपना तो उसूल है होटल में खाना लॉज में सोना हहै hehe…kehte हुए वो मीणा को देखने लगा तो मीणा मैं में hi उसे देखते हुए बोली ऐसे बोल रहे है ki..maine कभी इन्हे ब्रेकफास्ट दिया hi nhi..sach में कमीने नह बदमाश है जमील ji…lekin इस बार मीणा ने गुस्से से नह बड़े प्यार से इ शब्द जमील क लिए अपने मैं में hi इस्तेमाल किया the..par जमील वह कुछ और सोच कर hi मीणा क पति को मन करतेबहुए हुए कह रहा था की नह भाई आप को ऑफिस जाने देर हो जाएगी.

जमील का इ रवैया देख मीणा समाज गयी थी की जमील क्या चाहता है और वो जमील को देख कर अपने सर को अंदर की तरफ घूमते हुए अंदर आने का इशारा किया तो जमील क चेहरे पर चमक आगयी और वो मीणा क पति से बोलै आप बी न बेकार में तकलीफ ले रहे ho…kehte हुए मीणा क पति क साथ घर में आने laga…aur मीणा इन दोनों से पहले hi घर में आगयी थी…

मीणा क कहने पर अब जमील तो आगया था पर मीणा क लिए समस्या इ थी की जमील क साथ उसका पति बी है ..और पति क होते वो जमील से ज्यादा बात नह कर सकती अपनी मैं की बात बी बता नह सकती जो उसने जमील क लिए सोच रखा hai…tab उसके दिमाग में एक आईडिया आया और वो अंदर किचन में जमील क लिए फ्रेश नाश्ता बनाने क लिए तैयारी करने lagi..tab मीणा का पति अंदर आया और मीणा से बोलै मीणा जमील भाई क लिए नाश्ता तैयार है न…

मीणा अपने पति को करीब बुलाकर boli..aap बी न बिना मुझसे पूछे जमील भाई को ब्रेकफास्ट क लिए बुला लिया एक बार मुझे पूछ लिया होता!!

मीणा का पति समाज गया की मीणा ने सिर्फ उन्दोनो क लिए hi ब्रेकफास्ट बनाया था और वो मीणा से बोलै अरे मई इ तो भूल hi गया tha….par अब बुला hi लिया है तो कुछ तो banavo…par थोड़ा जल्दी मुझे ऑफिस क लिए देर हो रही है

मीणा- आप टेंशन क्यू लेते हो मई बस 15-20 मीन्स में उनके लिए ब्रेकफास्ट फ़ास्ट तैयार करती हु तब तक आप उनसे बाते करो …

जब मीणा का पति बहार गया तो मीणा मैं hi मैं मुस्कुराने lagi…sach बात तो इ थी की मीणा हमेशा ज्यादा hi ब्रेकफास्ट बनती thi..aur आज बी उसने ज्यादा hi बनाया tha…aur मीणा ने जानबूजकर ब्रेकफास्ट को ख़तम होने का बहाना बनाया था ताकि उसके पति को ऑफिस जाने क लिए देर होजाये और वो जमील और मीणा को अकेला छोड़कर ऑफिस क लिए निकल जाए…

दूसरी तरफ जमील बी आज जानबूजकर मीणा क पति क होते hi मीणा क घर क तरफ आया था क्यू की आज वो मीणा की दिल से उसके पति का डर निकलना चाहता tha…aur कुछ हद तक वो कामयाब बी हुआ tha…q की जब रात को मीणा का मश्ग आया था तब hi वो अंदाज़ा लगा चूका था की मीणा ने बहुत सोच समाज कर hi उससे सॉरी बोलै हुआ hai…isliye जमील मीणा को पहले बेफिक्र बना न छह रहा था..

उधर हॉल में बैठे जमील और मीणा क पति क बीच इधर उधर की बाते तो हो रही थी पर मीणा क पति का ध्यान सिर्फ घडी पर थी आलरेडी 15 मीन्स हो चुके the..aur उसे अपने ऑफिस क लिए देरी हो रही thi…aur वो उठ क फिर किचन में जाके मीणा से पूछा रेडी हुआ की नह…

मीणा बोली बस और थोड़ी देर आलू पाक रहे hai…bas 15 मीन्स aur..meena जानबूजकर अपने काम को बड़े सावधानी से कर रही thi…aur उसका पति ऑफिस की निकलने क लिए बेसबर हो रहा tha…aur आखिर वही हुआ जो मीणा ने चाहा tha..meena क पति लेट होता देख वो बोलै तुम एक काम करो.. ब्रेकफास्ट रेडी होने क बाद जमील भाई को दे देना मुझे बहुत देर हो रहा है मुझे अब निकलना hi होगा…

मीणा मैं hi मैं खुश थी फिर बी वो शराफत का नाटक करते हुए boli..par मई आप जाते hi……..unhe कैसे…..

मीणा कहने में हड़बड़ा hi रही थी तो जमील मीणा की बात समाज कर bola…are वो अनजान थोड़ी hai…bahut अचे है wo…tum बेफिक्र रहो…

मीणा कुछ नह बोली बस हम्म्म में सर हिलायी..

मीणा का पति बहार आया और जमील से बोलै… जमील भाई मुझे ऑफिस क लिए थोड़ी देर हो रही hai…aap ब्रेकफास्ट करलो मई निकलता हु….

लेकिन जमील ने बी मीणा की तरह झूट मूत की आपत्ति जताई तो मीणा क पति ने बी जमील को samjaya…aur वो ऑफिस लिए निकल पड़ा…

पति क जाते hi दोनों प्रेमी आज़ाद होगये the…ab उन्हें कुछ देर क लिए रोकनेवाला या टोकने वाले कोई नह the…bas अब उनका hi राज्य tha…sirf राजा और रानी न कोई सैफई न कोई पहरेदार ….जमील बहार hi बैठा मीणा का इंतज़ार कर रहा था तो मीणा अंदर किचन में जमील क लिए अब जल्दबाज़ी में ब्रेकफास्ट करने लगी thi…us दिन दोनों क बीच हुए थोड़े बहुत मतभेद से दोनों चुप चाप अपनी जगह पर the…lekin आखिरकार किसी को तो शुरुवात करनी hi थी…

कुछ 5 मीन्स में hi मीणा गरमा गरम नाश्ता प्लेट में परोसकर बहार आयी और जमील क सामने टीपोय प रख di…aaj मीणा ने जमील को अंदर बुलाके डाइनिंग टेबल पर ब्रेकफास्ट देने की हिम्मत नह की थी क्यू की उसे लगा था की अगर बिचाने किसी बहाने से उसका पति वापस आया तो ..वो गलत न सोच बैठे…

नाश्ता अपने सामने आते hi जमील मीणा को देख कर पूछा कैसे हो…

मीणा उसे कुछ दूर दीवार क सहारे कड़ी कड़ी boli…thik हु आप कैसे हो..

जमील- बस हुई संजो की आज कुछ ठीक हुए मैडम जी…

जमील क मुँह से मैडम शब्द सुनते hi मीणा को थोड़ा अजीब सा लगा पर उसे लगा की शायद गलती से निकल गया hoga…tab उसने नोटिस किया की जमील ने अभीतक ब्रेकफास्ट का एक निवाला बी नह खाया है तो वो जमील से boli…aap खा क्यू नह रहे हो…

जमील बोलै बस ऐसे hi, हुई संजो मैडम की अकेले ब्रेकफास्ट करने की आदत नह संजो…

फिर से जमील क मुँह से मैडम शब्द सुनते hi मीणा जांगयि thi…jamil उसी को टोंट मार रहा है… और उससे अब बी नाराज़ है. वो जमील की नाराज़गी को दूर करने की कोशिश करते हुए boli..ab इ क्या मैडम लगा रखे ho….plz ऐसे मत बोलो न ाचा नह lagta..,meena विनती भरे नज़र से जमील को देखते हुए बोली..

जमील बी जंगया था की मीणा को अपने गलती का एसएस हुआ hai…ab वो मीणा को और बी छेड़ने की नज़र से bola…kya करू मैडम हम कमीने जो ठहरे ..किसी को अचे नह lagte….aur आप ने hi तो कहा था आपका नाम हमारी गंध जुबान पे न लू..

जमील की इ बात सुनकर मीणा खुद अपने आप से शर्मिंदा हो गयी की उसने उस आदमी का दिल दुखाया जो उसके साथ हमेशा प्यार से पेश आया और वो थोड़ा उदास चेहरा बना कर बोली अब माफ़ बी कार्डो na…kal रात से आपकी माफ़ी का इंतज़ार कर रही हु..

मीणा क चेहरे पर छायी उदासी को देख कर जमील को लगा अब इस नाराज़गी क नाटक को अंजाम देना hi ठीक रहेगा और और वो जोरो से हसने लगा हाहाहा ः हाहाहाहा

जमील को इस तरह हस्ते देख मीणा को आश्चर्य हुआ और वो जमील से puchi..ab इसमें हॅसनेवाली क्या बात है…

जमील फिर से हस्ते हुए बोलै अरे मेरी डार्लिंग तुमने कैसे सोच लिया की मई तुमसे नाराज़ hu…mai तो मजाक कर रहा था हाहाहाहाहा..

मीणा आंखे बंद किये एक ग़हरी सास ली और जमील को देख मुँह मोड़ते हुए बोली चल हटो बदमाश कही के मुझे नह करनी आपसे बात…

तब जमील बोलै अब होगया न चलो आजवो और मुझे अपने हाथो से ब्रेकफास्ट karavo…kal बी नह खिलाया तुमने…

मीणा फिर मुँह मोड़ते हुए बोली नह आना मुझे आपके पास और नह खिलाना आपको…

जमील समाज गया अब मीणा नाटक कर रही है और वो बोलै अब आ बी जावो मेरी जान कब से तरस रहे है तुम्हारे हाथो का स्वाद छकाने….

जमील की इस बात से मीणा अपने आप को रोक नह पायी और अपने चेहरे पे मुस्कान लाते हुए जमील क सामने बैठ कर अपने हाथो से निवाला बनाकर जमील क मुँह में Dali…to वही हुआ जो मीणा ने सोचा tha..jamil ब्रेकफास्ट क साथ साथ ब्रेकफास्ट खिला रहे मीणा क हाथ का ऊँगली बी छकाने लगा और मीणा बिना कोई विरोध किये उसे बस मुस्कुराते देखने lagi..kuch देर दोनों एक दूसरे को बस ऐसे hi देखते रहे तब जमील ने ब्रेकफास्ट करना छोड़ दिया और मीणा क दोनों कलाई को अपने दोनों हाथो में थमा लिया और उसे अपने करीब करने लगा तो मीणा उसे रोकते हुए बोली नह जमील जी वो अबतक ऑफिस नह पहुंचे होंगे वापिस बी आसक्ति है कहते हुए मीणा ने अपने डर को जमील को बताने की कोशिश की थी…

पर जमील अब वक़्त को जाय नह करना चाहता था वो जल्द से जल्द मीणा को गरम करके उसके छूट में अपना लुंड पेल कर अपनी हवस की मीथेन छह रहा tha..wo बिना मीणा क हाथ चोदे bola..nh आएंगे मेरी जान अगर उन्हें आना hi होता तो वो हम दोनों को अकेला छोड़ क नह jaata..tumare पति को हम दोनों पर यकीं hai…tum बेफिक्र होकर प्यार से मेरा साथ दो..

जमील की बात मीणा को बी सही लगी थी और वो अपनी कुर्सी से उठकर जमील क बगल में बैठ गयी तो जमील तुरंत उसे अपने अपने बहो में लेके चूमने laga..aur मीणा बिना किसी विरोध क उसके आलिंगन में अपना साथ देकर जमील क पीठ पर अपना हाथ फेरते हुए जमील क चुम्बन का मजा लेने लगी thi..kuch hi देर मीणा का चेहरा जमील क थूक से भर गया tha..jamil उसे चूमते चूमते अपनी जीव से मीणा की हसीं चेहरे को अपने हाथ में भरे बड़े प्यार से चाट बी रहा tha…aur मीणा क वासना को भड़का रहा था…

मीणा फिर से गरम होने lagi…kal रात पति से न बहुजनेवाली प्यास को वो अब जमील से भुजवाने जा रही thi…jo प्यार वो अपने पति को देना छह रही थी वही प्यार आज वो जमील को देना छह रही थी और इस सोच से उसके हॉट खुलने लगे थे और वो प्यासी नज़र से जमील को देखते हुए जमील क चेहरे को अपने हाथो में समाकर उसके होतो से अपने हॉट मिला baithi,.jis हॉट पर उसने कल लिपस्टिक लगा कर अपने पति को समर्पित करने का सोचा tha…dono एक दूसरे क होतो क प्यास भुजने में लग गए the…dono एक दूसरे क चेहरे को हाथ में थमाए आंखे बंद किये फ्रेंच किश का मजे लूटने लगे the…dono कुछ देर लिए भूल गए थे की दरवाजा खुला है और उसके बगल क सोफे पर बैठ कर hi एक दूसरे में सामगाये hai…dono में से कोई बी रोकना ñह चाहता tha…dono अपने जिस्म को उस हद तक गरम करना छह रहे the..jis हद से वो बिना शर्माए एक दूसरे क कपडे उतर कर नंगे हो jaaye…kuch 10 मं तक ऐसा hi चला रहा था की मीणा क मोबिल में बज रही रिंगटोन ने दोनों को अलग होने पर मजबूर किया tha…dono क आँखों में संतुष्टि की भावना नजर आ रही thi..meena जमील से दूर होकर अपना मोबाइल पे स्क्रीन पे देखि तो उसका पति का फ़ोन था जिसे वो जमील को दिखाते हुए रिसीव करते हुए hello बोली..

उधर से पति की आवाज़ आयी hello मीणा जमील जी को ब्रेकफास्ट दी क्या??

मीणा- मैं hi मैं मुस्कुराते हुए बोली है वही तो कर रहे है वो…

पति- ठीक hai…actually जमील भाई को मेरी तरफ से सॉरी कहना मई उन्हें बुलाकर बीच में hi आया और तुम बी तकलीफ हुई होगी न…

Meena-nh ऐसी कोई बात nh..waise आप ऑफिस पहुंच गए…

पति- नह बस 5 मीन्स की दुरी पर hu…socha ऑफिस पहुंचने से पहले एक बार पूछ lu..thik है तो फिर रखता हु जमील भाई से कहना शाम को मिलते है…

मीणा- ठीक है बोलूंगी कहते हुए मीणा ने फ़ोन काट दिया और जमील क सामने ऐसे कड़ी रही मानो की इ कह रही हो अब उसे किसी बात का डर नह जो चाहे कर सकते हो..

और जमील बी इ बात जानकर अपने जगह से खड़ा हुआ और ठीक मीणा क सामने आकर खड़ा हुआ और मीणा क निघ्त्य क बटन्स को खोलने लगा तो मीणा उसे रोकते हुए boli….ek बात बोलू जमील जी…

कुछ देर क अपने हाथ पर काबू रखते हुए जमील बोलै है बोलो न..

मीणा- जमील से थोड़ी दूर होकर फिर से सोफे पे बैठ कर जमील को अपने बगल में बैठने का इशारा करते हुए बोली… जमील जी इ जो हम कर रहे न इ बिलकुल गलत है धोका hai..par आप मुझे बहुत अचे लगते ho..pata नह क्यू लाख कोशिश क करने क बावजूद बी मई आपको भूल नह पा रही hu…isliye सब कुछ गलत होते हुए बी मई अपने आप को आपको समर्पित करने से अपने आप को रोक नह पाती….

मीणा आगे बोलने hi वाली थी जमील मीणा क जांघो पर हाथ फेरते हुए बोलै इसका मतलब तुम ऐसा तो नह लग रहा की मई तुमसे जबरदस्ती कर रहा हु..

नह जमील जी मुझे कभी ऐसा नह लगा बल्कि मुझे बी बहुत ाचा लगता है जब आप मेरे जिस्म से खेलते ho…bahut सुख मिलता है मुझे मीणा अपने झांघो पे चल रहे जमील क हाथो को अपने हाथो का सहारा देते हुए बोली..

जमील कुछ समाज नह पा रहा था और वो बात की सचाई जानने की कोशिश करते हुए मीणा से पूछा तो फिर प्रॉब्लम क्या है…?

मीणा एक ग़हरी सास लेते हुए बोली मुझे बस दर लगता है की हम दोनों का इ रिश्ता किसी को पता न chale….aur मुझे डर है आपको डेली आते वक़्त कोई देख न le..aur मई आपसे मिलने की जिस्मानी सुख से वंचित न हो jaavu….isliye मई चाहती हु अगर हम दोनों महीने या 15 दिन को एक बार मिले तो शायद हमे इस बात का ज्यादा डर नह rahega…aap समजे न मई क्या कहना छह रही हु..

मीणा की बात में सचाई तो थी पर जमील क लिए इ बहुत मुश्किल था..15 दिन तक वो अपने आप को मीणा क जिस्म से अलग नह रुक सकता tha…fir बी उसे लगा इस वक़्त मीणा की बात को मानाने में hi होशियारी hai…aur वो मीणा को बहो में लेते हुए bola….ok मेरी जान तुम्हारे लिए इ बी सही पर उस वक़्त मुझे नह रोकेगी na…jamil छेड़छाड़ भरे अंदाज़ में मीणा से बोलै तो मीणा बी उसके बहो को अपने बहो का सहारा देते हुए जमील क गालो को चूमते हुए boli..aap की यही बात तो मुझे अछि लगाती hai..aap बहुत अचे ho..aur जमील को प्यार भरी निगाहो से देखने लगी.

मीणा की दिल में तो जमील क लिए जगह बन गयी थी पर आज जमील भूका नह रह सकता tha..uska लुंड पंत में hi तन चूका tha…aur वो बी मीणा क आँखों में आंखे डालते हुए bola..aaj बड़ी उम्मीद लेके आया हु, क्या मेरी उम्मीद को प्यार का सहारा मिलेगा या मुझे 15 दिन और इंतज़ार करना padega…hehehe

मीणा ने तो पहले hi तैय किया हुआ था की आज वो जमील को समजायेगी और उसके बाद वो बी अपनी कल रात की अधूरी प्यास को जमील से भुजा लेगी और वो जमील क गालो पर हलके से मरते हुए शर्मा कर boli..agar मई न कहु तो बी आप बिना करे जावोगे kya….aur अपनी शर्म छुपाने की कोशिश करते हुए जमील से दूर होकर दरवाजे क पास कड़ी होकर बोली बस 5 मीन्स आयी और घर क बहार गेट तक चली gayi…jamil अपनी किस्मत पर फिर से खुश होते हुए मीणा क नखरे देख कर खुश होगया…

कुछ दो तीन मीन्स में मीन्स वापिस अंदर आयी और दरवाजा बंद करके जमील को देखे हुए टीपोय से अपना मोबिल उठके अपने पति को कॉल ki..pati क कॉल रिसीव करते hi मीणा hello बोलने hi वाली थी उधर से उसका पति बोल पड़ा जमील भाई ब्रेकफास्ट करके चले गए क्या…

मीणा जमील को देखते हुए है वो चलेगये यही बताने आपको कॉल किया..

पति- ाचा हुआ तुमने मेरी बात रख li..waise उन्हें बी तुम्हारे हाथ का खाना ाचा hi लगा hoga…sham को मुझे बताएँगे जरूर देख लेना..

अब मीणा क्या जवाब deti..ki जमील जी को वो कौनसा ब्रेकफास्ट खिलाना चाहती hai..wo बस अपने चेहरे पर एक मुस्कराहट लेट हुए फिर से जमील को देखते हुए पति से boli..ok तो फिर मई रखती hu..bahut काम पड़ा है muje..aur है शाम को थोड़ा जल्द hi आना माजी आ रही है याद है न.

पति- है बाबा याद hai..par तुम बी थोड़ा काम काम hi किया करो वर्ण परसो क जैसे फिर सर दर्द न करे..

मीणा मैं hi मैं बोली सर दर्द की दवा तो मेरे सामने hi hai…aur आज वो दवा लेते hi सर दर्द हमेशा क लिए गायब hoga…hahah और पति को bye कहते हुए फ़ोन काट दी और जमील को देखने लगी जो उसे इस वक़्त सवाल भरे नज़रो से देख रहा था और मीणा को समझने में देर नह लगी की जमील क्या पूछना छह रहा है और वो जमील क बहो में जाते हुए boli..jamil जी वो दरअसल मेरी सास आ रही है aaj….kehte हुए अब मीणा जमील को कास क पकड़ते हुए अपनी बढ़ती उत्सुकता को जाहिर करने की कोशिश की…

जमील को तो बिन पूछे उसके सवाल का जवाब मिल गया था पर उसके दिमाग में इस बात से फिर से कही सारे सवाल खड़े हो गए थे और वो अपने बहो में समायी मीणा क चेहरे को ऊपर लेते हुए पूछा कब आ रही है और कितने दिन रुकने वाली hai..par मीणा को इस वक़्त किसी सवाल जवाब में कोई रूचि नह thi..use बस अपनी अधूरी प्यास को भुजनि थी वो बी सास आने क पहले और वो जमील से boli…sab कुछ अब hi पूछ क टाइम वास्ते मत करो ….बस इतना सोच लो की सास क आने से पहले हमे सब खेल ख़तम करना है और वो जमील क होतो से अपने हॉट मिलके चूसने लगी तो जमील बी देर न करते हुए मीणा क होतो को चूसने laga…dono एक बार फिर अपनी अलग दुनिया में प्रवेश कर चुके थे और कुछ hi देर में जमील ने मीणा की निघ्त्य को उठाने की कोशिश करते हुए उठाया तो मीणा उसे रोकते हुए अह्ह्ह्ह जमील जी क्या कर रहे ho…yaha नह बीएड रूम में चलो na…aur वो जमील से दूर होकर बैडरूम में चालीगयी तो जमील बी उसके पीछे बैडरूम आया तो मीणा ने दरवाजा बंद करके कोंडी लगायी और जमील क हाथ को अपने जगहों पर रखते हुए जमील को प्यासी नज़र से देखने लगी जैसे कह रही हो अब आप मेरे कपडे उतर दो मुझे कोई ऐतराज़ nh…aur जमील बी बात को अछि तरह समाज कर मीणा की निघ्त्य को घागरे क साथ ऊपर करके उसे बीएड पे लिटाया. मीणा अब बीएड पे आधी नंगी लेती हुई thi..aur जमील उसके मोठे मुलायम जांघो को सवारते हुए प्यार से चुम रहा था साथ hi साथ निघ्त्य को पूरा ऊपर करने की कोशिश कर रहा tha..aur देखते hi देखते मीणा की निघ्त्य कमर को पार करके उसके पेट को नंगा कर चुकी thi..aur जमील उसके नंगे पेट को एक हल्का सा चूमा देते हुए निघ्त्य को और ऊपर करके मीणा क उभरे ढूढ तक लाके ठीक मीणा क बगल में सो कर निघ्त्य को मीणा से अलग करने की कोशिश करने लगा और मीणा उसका साथ देते हुए अपनी छाती को उठायी तो जमील मीणा क उभरे हुए स्तन को देख कर पागल हो गया और वो निघ्त्य को छोड़ मीणा क स्तन को hi आंखे फाड़े देखने लगा वो मैं hi मैं खुश हुआ जिसे देख मीणा बी शर्मा गयी और जमील से puchi…aiiiseee क्या देखह राही होऊ..

जमील मीणा क ब्रा क ऊपर से hi एक बूब्स को चूमा देते हुए बोलै क्या चीज़ हो तुम मीणा कितने फुर्सत से तुम बनाया hoga…wahhh दरअसल आज मई तुम्हारे पति को शुक्रिया कहना चाहता hu…wahhhh क्या चीज़ देखने का मौका दिया usne…lajawaab…kehte हुए जमील एक स्तन को धीरे से सवारने लगा तो दूसरे को ब्रा क ऊपर से चूमने laga..meena क लिए अनुभव बहुत मीठा था पर मीणा को इससे बी ज्यादा की जरुरत थी वो जमील क हाथ और होतो को àपने नंगे स्तन पर जल्द से जल्द लेना चाहती थी …सो वो जमील को डेक शर्मा कर नशीली आवाज़ में बोली …आह्ह्ह्हह जमील जीई ह्ह्ह्ह एस्ससे मात्तत्त न्यूऊओ नननांगा प्यार करूओ अह्ह्ह्ह plz…kallll राआत सीई ताडडडडआप राहहीइ huuu…kehte हुए मीणा ने अपने आप को जल्द से जल्द माँगा करने को जमील को समजने की कोशिश की साथ hi साथ अपने पति से न भुजने वाली प्यास को बी झहीर की..

मीणा ने वासना क नशे में तो अपनी अधूरी प्यास को जमील क सामने जाहिर करके जमील क प्रति अपना प्यार को दर्शाया था पर इस बात का अंदाज़ा जमील ने रात को hi लगाया हुआ था…

जब रात उसे मीणा का सॉरी मश्ग आया tha..tab hi उसे लगा था की हो न हो मीणा की प्यास भुजी nh…agar भुजती तो इस वक़्त रात को सॉरी कहने की जरुरत नह samajti…aur मीणा को सॉरी कहना hi था तो वो आज सुबह भी कह सकती थी …पर उसकी प्यास आज न भुजने से उसे निराशा हुई है और मेरी याद आकर उसने सॉरी बोलै है. इ उसने कल रात को hi अंदाज़ा लगा या tha..aur आज जब मीणा ने उसे 15 या महीने में एक बार मिलने की बात कही थी तो उसे उसका अंदाज़ा सही साबित होते हुए नज़र आया tha…is बात को मीणा से पूछने क लिए बेकरार था और अब मीणा खुल क बोल hi चुकी है की वो रात से प्यासी है तो जमील अपने आप को रोक नह पाया और मीणा से bola..ek बात पुछु मीणा..

मीणा उसे प्यासी नज़र से देखते हुए boli..ab पूछना जरुरी है kya…baad में नह पूछ sakte..meena अपनी बढ़ती वासना को विराम न देने की कोशिश करते हुए जवाब दिया…

मीणा क इस जवाब से जमील समाज गया था की मीणा को अब चुदाई से ज्यादा किसी चीज़ में इंटरेस्ट नह फिर बी वो एक कोशिश करते हुए bola…bas एक आखरी बात उसके बाद सिर्फ pyaar…kehte हुए उसने मीणा क बूब्स को जोरो से दबाया तो मीणा की अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की चिक निकल पड़ी और अपनी तेज़ सासो पे काबू रखते हुए boli….dddhhhhiiuree क्काररूआ naaa…maaiii थूवोड्दिईए भहागीय जा राहहीइ हुऊ..

जमील फिर से एक बार मीणा को देकते हुए बोलै बस इतना बतादो मेरी जान की कल रात से तुम प्यासी क्यू हो…

जमील की बात सुनकर मीणा एक पल चौक गयी उसे समाज में नह आरहा था क्या जवाब दे और वो अपनी सचाई छुपाने की कोशिश करते हुए इ क्या जमील ji…plz किसी और दिन बतावुंगी na…plzzzzz अब ककककाआरेंगीए न मीणा चुदाई क लिए अपनी उत्सुकता दिखते हुए बिली

जमील मीणा की आँखों में सेक्स क लिए बढ़ती नशा का रूप देख कर पागल हो गया tha…use अपने आप पर गर्व होने लगा tha…wo और बी उत्तेजित होते हुए बोलै बोलो न मेरी जान हो सकता है तुम्हारी प्यास की वजह जान कर तुम्हारी वो प्यास को हमेशा भुजने ने कामयाब हो jaavu…bolo न मेरी जान..

मीणा बी जंगायी थी की जमील सच जानते हुए बी उसके मुँह से सुन्ना छह रहा है. एक तो वो कल रत से hi सेक्स की भुकी थी और उस प्यास को सिर्फ जमील hi भुजा सकता इस बात से अच्छीतरह वाकिफ thi..upar से उसकी सास आनेवाली thi..isliye वो बिना वक़्त बर्बाद किये जल्द से जल्द अपनी जिस्म की गर्मी को शांत करना छह रही थी.. इसलिए वो जमील को सच बताने से अपने आप को रोक नह पायी और कल रात उसके पति क साथ सेक्स की घटना को बारे में बोल baithi..kaise पति ने उसे प्यासी hi छोड़ दिया और फिर जमील की याद aayi…meena ने बहुत शार्ट में इ सब सिर्फ एक दो मिनट में hi जमील को बताया और शर्म क मरे अपना चेहरा दूसरी तरफ कर्ली..

शार्ट में hi सही पर जमील मीणा की बातो से पूरी घेहरायी जान चुकता. जमील अपनी ख़ुशी को समां नह पाया अब उसे अपनी किस्मत पे hi यकीन नहीं हो रहा था की एक पतिव्रता संस्कारी औरत अपने पति क चुदाई से न खुश होकर उससे अपनी प्यास बहुजन चाहती hai…isse ज्यादा गर्व की बात उसके लिए क्या hoti…aur वो अपने जोश को न सँभालते हुए मीणा क होतो पे एक प्यार भरा चुम्बन देते हुए bola…koi बात नह मेरी जान इसके बाद तुम फ़िक्र करने की कोई बात nh…mai तुम कभी प्यासी नह रहने दूंगा …मीणा इ बात सुनकर खुश हो hi रही थी तो जमील बोलै हिज़ड़ा है तुम्हारा pati…apni खूबसूरत बीवी की जरुरत बी नह समझता निकम्मा, न मर्द कही का..

जैसे जमील क मुँह से अपने पति क लिए गांधी गालिया निकलने लगी वैसे वैसे मीणा की वासना उतरती हुई आंखे नम्म होने लगी और वो जमील को दूर करते हुए फुट फुट कर रोने लगी …

अचानक माहौल में हसी, खिलखिलाने क आवाज़ क बदले रोने की आवाज़ सुनने लगी thi…jamil को पहले तो कुछ समाज में नह आया पर दिमाग पर जोर देने से उसे पता चल गया था क्या बात hai…aur वो मीणा को फिर से बाहोंमे में लेने की कोशिश करते हुए बोलै सॉरी मीणा मेरा वो मतलब नह था…

पर मीणा उसकी बात सुनने की मूड में नह थी.. वो अपने आप को कुसूरवार समाज कर अपने अन्नको से ासु बहते hi rahi..aur जमील उसे मीणा मीणा कह कर संभल ने की कोशिश कर रहा था…

पहली बार मीणा ने किसी क मुँह से अपने पति क लिए ऐसे घिलौने शब्द सुने the..jis आदमी क नाम बी लोग ीझत से लेते थे आज उसी आदमी को किसी ने ऐसे गांधी शब्द से सम्भोदित किया हुआ tha…aur मीणा को लगा रहा था उसी क वजह से आज उसके पति को नामर्द कहा gaya..use आपने आप पर ग्रीन होने लगी thi..aur वो अपने कपडे ठीक करते हुए जमील से बोली आप प्ल्ज़ जावो यहाँ से मुझे कुछ नह करना आपके saath..lekin जमील अब बी मूड में hi था वो फिर से मीणा को मानाने की कोशिश करते हुए बोलै सॉरी मीणा मेरा इ मतलब नह था तुम समजा करो न plz…lekin मीणा का मूड अब पूरा ख़राब हो गया था अब वो इस अवस्था में नह थी की जमील को काम क्रीड़ा में साथ de..aur वो बोली प्ल्ज़ जमील जी मेरा अब मूड नह है किसी चीज़ में बेहतर है आप चले jaavo..aur हो सके तो मुझे भूलने की कोशिश karo…mai नह चाहती की जो शख्स मेरे पति को ऐसे गांधी शब्द से सम्भोदित करता है उसके साथ कोई सम्बन्ध raje…aap प्ल्ज़ चले जावो..

लेकिन जमील अपने हरकत से बाज़ नह आ रहा था और वो मीणा को मानाने की कोशिश करते हुए उसे फिर से बीएड पे लेटने लगा तो इस बार मीणा जमील की तरफ गुस्सा होते हुए boli…aap ऐसे नह मानोगे न …आपको बस मेरे जिस्म से मतलब है न तो चलो चङो मेरे ऊपर और करलो अपनी manmaani..kehte हुए बेडपे लेट गयी और अपनी निघ्त्य ऊपर उठाते हुए boli….jo चाहे करलो पर एक बात याद रख लो की अब मई आपके साथ नह हु ..चलो आवो करो muje…aur अपनी हवस को भुजा लो..

जमील का मैं तो कर रहा था की वो मीणा पे चढ़ क अपने लुंड को मीणा की छूट में पेल दे पर उसे लगा उसने जो शब्द मीणा क पति क लिए इस्तेमाल किये है शायद एक चालू औरत बी अपने पति खिलाफ ौसे शब्द लसहँ नह कर sakti,aise में मीणा जैसी पतिव्रता औरत कैसे सहन कर सकती है और वो मीणा की निघ्त्य को निचे करते हुए बोलै सॉरी मीणा मैंने अनजाने अपना होश खो कर ऐसा कहा हो सके तो मुझे माफ़ कार्डो और वो कुछ बोले बिना hi बैडरूम का कुण्डी खोल कर बहार आया और मैं दरवाजा खोल क अपने आप को कोसते हुए चला gaya..meena बीएड पे पड़ी पड़ी hi अपने ासु गिरते हुए अपने किये पे पछताने लगी…

सच बात तो इ थी की मीणा बी नह चाहती थी की जमील चला जाए पर इसवक्त उसे जमील पे नह अपने आप पर गुस्सा आ रहा tha..wo सोचने पर मजबूर थी की क्यू वो इतनी कमज़ोर पड़गयी की उसे एक गैर मर्द से अपनी जिस्म की प्यास भुजने की जरुरत padi…aur वो सोचते सोचते hi बहार आकर जमील को देखने की कोशिश करने लगी पर जब तक वो बहार आती जमील उसके आँखों से दूर हो चूका था..,

आगे बहुत कुछ होनेवाला है बहुत कुछ बदलाव बी आनेवाला है और नए चेहरे बी आनेवाले hai...bas वेट एंड watch...and रिप्लाई विथ योर लोवबले कमैंट्स व्हिच विल इन्स्पीरेस में तो व्रिठे मोरे एंड मोरे थैंक यू
 
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