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जैसें :- में फिर से माफ़ी मांगता हु आका मेरे जल्दबाजी के कारण आपको कष्ट हो रहा है
में :- कोई बात नहीं गलती हो गयी अब उसे सुधारा नहीं जा सकता तोह उसे भुला दो अब आगे के बारे में सोचो
जैसें :- जी आका
में :- जेक मेरे टीम को बतादो की कमर कस्ले अभी मेहनत डबल करनी हैव
जैसें :- जी आका
इतना बोलके वह गायब हो गया और में भी आगे के बारे में सोचने लगा
वही दूसरी तरफ
नाना के कमरे में इस वक़्त नाना और नानी के साथ घर के सरे बड़े सदस्य भी मौजूद थे
अभी कोई कुछ और बोलता की तभी नानाजी का फ़ोन बजने लगा जब नानाजी ने फ़ोन उठाया तोह सिडल कॉल आया था और वह किसी और ने नहीं बल्कि दादाजी में किआ था
दादाजी :- बोल शेखर क्या हुआ जो तूने इतने अर्जेंट में कॉल करने को बोलै राज ठीक तोह है
नाना :- है शमशेर यहाँ सब कुछ ठीक है मेने तोह तुम्हे 2 खुश ख़बरों को बताने के लिए फ़ोन किआ था
दादीजी :- कोनसी खुश खबर
नानाजी :- पहली तो ये है की में नाना बनने वाला हूँ मेरे बेटे अरुण को बचा होने वाला है
दादाजी :- अरे ये तोह बहुत hi ाचा समाचार सुनाया तुमने
फिर उसके बाद मां और ममी ने वीडियो कॉल में hi दादाजी को प्रणाम किया और दादाजी ने भी उन्हें आशीर्वाद दिया
दादाजी :- और दूसरी खबर कोनसी है
नानाजी :- मेने फैसला किआ है की में अपना उत्तराधिकारी चूंकि इस आने वाली लाल चाँद (रक्त चाँद) की रात को उसकी ऑफिसियल अनाउंसमेंट और अपनी वसीहत भी लिखूंगा
नानाजी का फैसला सुन नानी छोड़ कर सब शॉकेड हो गए क्यूंकि किसी को पता नहीं था की नाना इतना बड़ा फैसला करेंगे
बी. मां :- पिताजी आप जो कराव सही hi करोगे लेकिन फिर भी आप को एक बार सोच लेना चाहिए क्यूंकि में अभी इतनी बड़ी जिम्मेदारी जो सम्हाल नहीं पाउँगा और शायद न hi छोटे सम्हाल पायेगा
नानाजी :- में कोनसा तुम्हे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे रहा हु मेने सोचा है की में राज को अपना उत्तराधिकारी बनाऊंगा
नानाजी की इस बात से तोह सबको बहुत बड़ा शॉक लगा जहा सब शॉकेड हो गए वही दादाजी किसी सोच में पद गए सब नानाजी के इस फैसले से शॉकेड तो थे लेकिन नाराज या दुखी कोई नहीं था सब खुश थे ममी तोह और भी ज्यादा खुश थी
वही जब नानाजी ने दादाजी को किसी गहन सोच में देखा तोह उन्होंने दादाजी को आवाज़ लगायी
नानाजी :- किस सोच में पद गए शमशेर
दादाजी :- में सोच रहा था की में भी अपना उत्तराधिकारी को अन्नोउंस कर दू
नानाजी (मुस्कुराते हुए) :- तोह तुम किसे चुन रहे हो अपने उत्तराधिकारी के रूप में
दादाजी :- मुझे चुनने की जरुरत नहीं है बल्कि पुरे शेरगढ़ ने पहले से hi अपने राजा को छन लिया है राज यानि ठाकुर राजवीर प्रताप सिंह
दादाजी की बात सुन कर सब खुश हो गए और समारोह की तैयारियां करने लगे और य तय हुआ की एक hi दिन राज को दोनों hi जगहों का उत्तराधिकारी चुन लिया जायेगा और उसका राजतिलक भी उसी दिन यानि लाल चाँद वाले रात को किआ जायेगा
वही दूसरी तरफ
इस वक़्त में अपने कमरे में बैठे हुए आगे के बारे में hi सोच रहा था की तभी मेरा फ़ोन बजने लगा जब मेने फ़ोन देखा तोह मेने जो अलार्म लगाया था वही बज रहा था
फिर मेने अपना फ़ोन स्विच ऑफ करके जैसें को याद किआ और तुरंत hi मेरे शरीर पर जैसें कस्टम बन प्रकट हो गया
तोह फिर में भी अपने भी अपने कमरे की खिड़की से निचे कूद गया और मेरे गिरने से पहले hi मेरे पीठ पर ड्रैगन के विंग्स आ गए जिनसे में उड़ते हुए अपने अड्डे पे मतलब जिस जगह मेने जैसें की मदद से कवच लगाया था उसी जंगल में पहुंच गया
मेरे उस कवच के पास आते hi वह कवच गायब हो गया और जब में उस कवच के अंदर गया तोह कवच पुनः पहले जैसा हो गया
वही जब में अंदर आ गया तोह जैसें भी कस्टम से निकल के मेरे सामने प्रकट हो गया और फिर में भी चलते हुए उस जंगल के मध्य में पहुंच गया जहा पहुंच कर में ध्यान में बैठ गया और मेरे साधु वाले रूप को याद करने लगा
जब में ध्यान में बैठा तोह जैसें भी उस जगह को सुधरने में लग गया उसने उस जगह पर पेड़ पौधों को गायब कर के उस जगह को पुरे मैदान के जैसे बना दिया जैसें ने जो कवच जंगल पैर लगाया था उसकी यही खासियत थी की कोई भी बहार से जंगल के अंदर क्या हो रहा है उसे नहीं देख पायेगा और नहीं सुन पायेगा और जैसें वह कुछ आईने भी लगा दिए जिससे मेरे सरे रूप मुझे एक एक आईने में देख सके
फिर जल्द hi साडी तैयारियां पूरी हो गयी जिसके बाद साधु ने मुझे पांच तत्वों के बारे में जानकारी दी
साधु :- राज जैसा मेने तुम्हे बताया की मनुष्य का शरीर 5 तत्वों से बना हुआ एक मास्स का ढांचा है जिसमे सप्त चक्रों के द्वारा प्राण डेल जाते है तुमने सप्त चक्रों पे काबू पके अपनी आत्मा को मजबूत बना लिया लेकिन उस आत्मा को सँभालने के लिए सरीर को भी मजबूत जो तुम पांच तत्वों के द्वारा बना पाओगे
पांच तत्वों का मतलब है अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये तत्त्व hi पांच तत्त्व है
तुमने अपने पृथ्वी तत्त्व और जल तत्त्व पर 50% प्रतिशत काबू प् लिया है तोह हम उन्ही दो तत्वों से शुरवात करते है
इतना बोलके साधु राज के सामने वाले आयने में आ गया अब दोनों भी एक दूसरे के सामने थे
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आज के लिए इतना hi
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जैसें :- में फिर से माफ़ी मांगता हु आका मेरे जल्दबाजी के कारण आपको कष्ट हो रहा है
में :- कोई बात नहीं गलती हो गयी अब उसे सुधारा नहीं जा सकता तोह उसे भुला दो अब आगे के बारे में सोचो
जैसें :- जी आका
में :- जेक मेरे टीम को बतादो की कमर कस्ले अभी मेहनत डबल करनी हैव
जैसें :- जी आका
इतना बोलके वह गायब हो गया और में भी आगे के बारे में सोचने लगा
वही दूसरी तरफ
नाना के कमरे में इस वक़्त नाना और नानी के साथ घर के सरे बड़े सदस्य भी मौजूद थे
अभी कोई कुछ और बोलता की तभी नानाजी का फ़ोन बजने लगा जब नानाजी ने फ़ोन उठाया तोह सिडल कॉल आया था और वह किसी और ने नहीं बल्कि दादाजी में किआ था
दादाजी :- बोल शेखर क्या हुआ जो तूने इतने अर्जेंट में कॉल करने को बोलै राज ठीक तोह है
नाना :- है शमशेर यहाँ सब कुछ ठीक है मेने तोह तुम्हे 2 खुश ख़बरों को बताने के लिए फ़ोन किआ था
दादीजी :- कोनसी खुश खबर
नानाजी :- पहली तो ये है की में नाना बनने वाला हूँ मेरे बेटे अरुण को बचा होने वाला है
दादाजी :- अरे ये तोह बहुत hi ाचा समाचार सुनाया तुमने
फिर उसके बाद मां और ममी ने वीडियो कॉल में hi दादाजी को प्रणाम किया और दादाजी ने भी उन्हें आशीर्वाद दिया
दादाजी :- और दूसरी खबर कोनसी है
नानाजी :- मेने फैसला किआ है की में अपना उत्तराधिकारी चूंकि इस आने वाली लाल चाँद (रक्त चाँद) की रात को उसकी ऑफिसियल अनाउंसमेंट और अपनी वसीहत भी लिखूंगा
नानाजी का फैसला सुन नानी छोड़ कर सब शॉकेड हो गए क्यूंकि किसी को पता नहीं था की नाना इतना बड़ा फैसला करेंगे
बी. मां :- पिताजी आप जो कराव सही hi करोगे लेकिन फिर भी आप को एक बार सोच लेना चाहिए क्यूंकि में अभी इतनी बड़ी जिम्मेदारी जो सम्हाल नहीं पाउँगा और शायद न hi छोटे सम्हाल पायेगा
नानाजी :- में कोनसा तुम्हे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे रहा हु मेने सोचा है की में राज को अपना उत्तराधिकारी बनाऊंगा
नानाजी की इस बात से तोह सबको बहुत बड़ा शॉक लगा जहा सब शॉकेड हो गए वही दादाजी किसी सोच में पद गए सब नानाजी के इस फैसले से शॉकेड तो थे लेकिन नाराज या दुखी कोई नहीं था सब खुश थे ममी तोह और भी ज्यादा खुश थी
वही जब नानाजी ने दादाजी को किसी गहन सोच में देखा तोह उन्होंने दादाजी को आवाज़ लगायी
नानाजी :- किस सोच में पद गए शमशेर
दादाजी :- में सोच रहा था की में भी अपना उत्तराधिकारी को अन्नोउंस कर दू
नानाजी (मुस्कुराते हुए) :- तोह तुम किसे चुन रहे हो अपने उत्तराधिकारी के रूप में
दादाजी :- मुझे चुनने की जरुरत नहीं है बल्कि पुरे शेरगढ़ ने पहले से hi अपने राजा को छन लिया है राज यानि ठाकुर राजवीर प्रताप सिंह
दादाजी की बात सुन कर सब खुश हो गए और समारोह की तैयारियां करने लगे और य तय हुआ की एक hi दिन राज को दोनों hi जगहों का उत्तराधिकारी चुन लिया जायेगा और उसका राजतिलक भी उसी दिन यानि लाल चाँद वाले रात को किआ जायेगा
वही दूसरी तरफ
इस वक़्त में अपने कमरे में बैठे हुए आगे के बारे में hi सोच रहा था की तभी मेरा फ़ोन बजने लगा जब मेने फ़ोन देखा तोह मेने जो अलार्म लगाया था वही बज रहा था
फिर मेने अपना फ़ोन स्विच ऑफ करके जैसें को याद किआ और तुरंत hi मेरे शरीर पर जैसें कस्टम बन प्रकट हो गया
तोह फिर में भी अपने भी अपने कमरे की खिड़की से निचे कूद गया और मेरे गिरने से पहले hi मेरे पीठ पर ड्रैगन के विंग्स आ गए जिनसे में उड़ते हुए अपने अड्डे पे मतलब जिस जगह मेने जैसें की मदद से कवच लगाया था उसी जंगल में पहुंच गया
मेरे उस कवच के पास आते hi वह कवच गायब हो गया और जब में उस कवच के अंदर गया तोह कवच पुनः पहले जैसा हो गया
वही जब में अंदर आ गया तोह जैसें भी कस्टम से निकल के मेरे सामने प्रकट हो गया और फिर में भी चलते हुए उस जंगल के मध्य में पहुंच गया जहा पहुंच कर में ध्यान में बैठ गया और मेरे साधु वाले रूप को याद करने लगा
जब में ध्यान में बैठा तोह जैसें भी उस जगह को सुधरने में लग गया उसने उस जगह पर पेड़ पौधों को गायब कर के उस जगह को पुरे मैदान के जैसे बना दिया जैसें ने जो कवच जंगल पैर लगाया था उसकी यही खासियत थी की कोई भी बहार से जंगल के अंदर क्या हो रहा है उसे नहीं देख पायेगा और नहीं सुन पायेगा और जैसें वह कुछ आईने भी लगा दिए जिससे मेरे सरे रूप मुझे एक एक आईने में देख सके
फिर जल्द hi साडी तैयारियां पूरी हो गयी जिसके बाद साधु ने मुझे पांच तत्वों के बारे में जानकारी दी
साधु :- राज जैसा मेने तुम्हे बताया की मनुष्य का शरीर 5 तत्वों से बना हुआ एक मास्स का ढांचा है जिसमे सप्त चक्रों के द्वारा प्राण डेल जाते है तुमने सप्त चक्रों पे काबू पके अपनी आत्मा को मजबूत बना लिया लेकिन उस आत्मा को सँभालने के लिए सरीर को भी मजबूत जो तुम पांच तत्वों के द्वारा बना पाओगे
पांच तत्वों का मतलब है अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये तत्त्व hi पांच तत्त्व है
तुमने अपने पृथ्वी तत्त्व और जल तत्त्व पर 50% प्रतिशत काबू प् लिया है तोह हम उन्ही दो तत्वों से शुरवात करते है
इतना बोलके साधु राज के सामने वाले आयने में आ गया अब दोनों भी एक दूसरे के सामने थे
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आज के लिए इतना hi
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