Apne Pyaare rishte - Page 15 - SexBaba
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Apne Pyaare rishte

अपडेट 127



जैसें :- में फिर से माफ़ी मांगता हु आका मेरे जल्दबाजी के कारण आपको कष्ट हो रहा है

में :- कोई बात नहीं गलती हो गयी अब उसे सुधारा नहीं जा सकता तोह उसे भुला दो अब आगे के बारे में सोचो

जैसें :- जी आका

में :- जेक मेरे टीम को बतादो की कमर कस्ले अभी मेहनत डबल करनी हैव

जैसें :- जी आका

इतना बोलके वह गायब हो गया और में भी आगे के बारे में सोचने लगा

वही दूसरी तरफ

नाना के कमरे में इस वक़्त नाना और नानी के साथ घर के सरे बड़े सदस्य भी मौजूद थे

अभी कोई कुछ और बोलता की तभी नानाजी का फ़ोन बजने लगा जब नानाजी ने फ़ोन उठाया तोह सिडल कॉल आया था और वह किसी और ने नहीं बल्कि दादाजी में किआ था

दादाजी :- बोल शेखर क्या हुआ जो तूने इतने अर्जेंट में कॉल करने को बोलै राज ठीक तोह है

नाना :- है शमशेर यहाँ सब कुछ ठीक है मेने तोह तुम्हे 2 खुश ख़बरों को बताने के लिए फ़ोन किआ था

दादीजी :- कोनसी खुश खबर

नानाजी :- पहली तो ये है की में नाना बनने वाला हूँ मेरे बेटे अरुण को बचा होने वाला है

दादाजी :- अरे ये तोह बहुत hi ाचा समाचार सुनाया तुमने

फिर उसके बाद मां और ममी ने वीडियो कॉल में hi दादाजी को प्रणाम किया और दादाजी ने भी उन्हें आशीर्वाद दिया

दादाजी :- और दूसरी खबर कोनसी है

नानाजी :- मेने फैसला किआ है की में अपना उत्तराधिकारी चूंकि इस आने वाली लाल चाँद (रक्त चाँद) की रात को उसकी ऑफिसियल अनाउंसमेंट और अपनी वसीहत भी लिखूंगा

नानाजी का फैसला सुन नानी छोड़ कर सब शॉकेड हो गए क्यूंकि किसी को पता नहीं था की नाना इतना बड़ा फैसला करेंगे

बी. मां :- पिताजी आप जो कराव सही hi करोगे लेकिन फिर भी आप को एक बार सोच लेना चाहिए क्यूंकि में अभी इतनी बड़ी जिम्मेदारी जो सम्हाल नहीं पाउँगा और शायद न hi छोटे सम्हाल पायेगा

नानाजी :- में कोनसा तुम्हे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे रहा हु मेने सोचा है की में राज को अपना उत्तराधिकारी बनाऊंगा

नानाजी की इस बात से तोह सबको बहुत बड़ा शॉक लगा जहा सब शॉकेड हो गए वही दादाजी किसी सोच में पद गए सब नानाजी के इस फैसले से शॉकेड तो थे लेकिन नाराज या दुखी कोई नहीं था सब खुश थे ममी तोह और भी ज्यादा खुश थी

वही जब नानाजी ने दादाजी को किसी गहन सोच में देखा तोह उन्होंने दादाजी को आवाज़ लगायी

नानाजी :- किस सोच में पद गए शमशेर

दादाजी :- में सोच रहा था की में भी अपना उत्तराधिकारी को अन्नोउंस कर दू

नानाजी (मुस्कुराते हुए) :- तोह तुम किसे चुन रहे हो अपने उत्तराधिकारी के रूप में

दादाजी :- मुझे चुनने की जरुरत नहीं है बल्कि पुरे शेरगढ़ ने पहले से hi अपने राजा को छन लिया है राज यानि ठाकुर राजवीर प्रताप सिंह

दादाजी की बात सुन कर सब खुश हो गए और समारोह की तैयारियां करने लगे और य तय हुआ की एक hi दिन राज को दोनों hi जगहों का उत्तराधिकारी चुन लिया जायेगा और उसका राजतिलक भी उसी दिन यानि लाल चाँद वाले रात को किआ जायेगा

वही दूसरी तरफ

इस वक़्त में अपने कमरे में बैठे हुए आगे के बारे में hi सोच रहा था की तभी मेरा फ़ोन बजने लगा जब मेने फ़ोन देखा तोह मेने जो अलार्म लगाया था वही बज रहा था

फिर मेने अपना फ़ोन स्विच ऑफ करके जैसें को याद किआ और तुरंत hi मेरे शरीर पर जैसें कस्टम बन प्रकट हो गया

तोह फिर में भी अपने भी अपने कमरे की खिड़की से निचे कूद गया और मेरे गिरने से पहले hi मेरे पीठ पर ड्रैगन के विंग्स आ गए जिनसे में उड़ते हुए अपने अड्डे पे मतलब जिस जगह मेने जैसें की मदद से कवच लगाया था उसी जंगल में पहुंच गया

मेरे उस कवच के पास आते hi वह कवच गायब हो गया और जब में उस कवच के अंदर गया तोह कवच पुनः पहले जैसा हो गया

वही जब में अंदर आ गया तोह जैसें भी कस्टम से निकल के मेरे सामने प्रकट हो गया और फिर में भी चलते हुए उस जंगल के मध्य में पहुंच गया जहा पहुंच कर में ध्यान में बैठ गया और मेरे साधु वाले रूप को याद करने लगा

जब में ध्यान में बैठा तोह जैसें भी उस जगह को सुधरने में लग गया उसने उस जगह पर पेड़ पौधों को गायब कर के उस जगह को पुरे मैदान के जैसे बना दिया जैसें ने जो कवच जंगल पैर लगाया था उसकी यही खासियत थी की कोई भी बहार से जंगल के अंदर क्या हो रहा है उसे नहीं देख पायेगा और नहीं सुन पायेगा और जैसें वह कुछ आईने भी लगा दिए जिससे मेरे सरे रूप मुझे एक एक आईने में देख सके

फिर जल्द hi साडी तैयारियां पूरी हो गयी जिसके बाद साधु ने मुझे पांच तत्वों के बारे में जानकारी दी

साधु :- राज जैसा मेने तुम्हे बताया की मनुष्य का शरीर 5 तत्वों से बना हुआ एक मास्स का ढांचा है जिसमे सप्त चक्रों के द्वारा प्राण डेल जाते है तुमने सप्त चक्रों पे काबू पके अपनी आत्मा को मजबूत बना लिया लेकिन उस आत्मा को सँभालने के लिए सरीर को भी मजबूत जो तुम पांच तत्वों के द्वारा बना पाओगे

पांच तत्वों का मतलब है अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये तत्त्व hi पांच तत्त्व है

तुमने अपने पृथ्वी तत्त्व और जल तत्त्व पर 50% प्रतिशत काबू प् लिया है तोह हम उन्ही दो तत्वों से शुरवात करते है

इतना बोलके साधु राज के सामने वाले आयने में आ गया अब दोनों भी एक दूसरे के सामने थे

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 128



साधु :- पांच तत्वों का मतलब है अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये तत्त्व hi पांच तत्त्व है

तुमने अपने पृथ्वी तत्त्व और जल तत्त्व पर 50% प्रतिशत काबू प् लिया है तोह हम उन्ही दो तत्वों से शुरवात करते है

इतना बोलके साधु राज के सामने वाले मिरर में आ गया अब दोनों भी एक दूसरे के सामने थे

साधु :- चलो राज अब ध्यान मुद्रा में बैठ कर अपने सप्त चक्रों को जागृत करो उसके बाद सप्त चक्रों की सप्त ऊर्जा को अपने अंदर महसूस करके उस ऊर्जा को अपने पुरे शरीर में फैलने दो जिसके बाद अपने ध्यान को अपने आस पास मौजूद पांच तत्वों पे केंद्रित करो और उस ऊर्जा को हर एक तत्त्व में बरी बरी से प्रवाहित करो जैसे जैसे तुम उस ऊर्जा को हर तत्त्व में प्रवाहित करोगे वैसे वैसे तुम्हे अपने अंदर तत्वों की ताकत को महसूस करोगे एक बात और ये तरीका पांच तत्वों को काबू करने का सबसे तेज़ सबसे सटीक और साथ में hi सबसे मुश्किल तरीका भी है इस तरीके में खुद पांच तत्त्व तुम्हे रोकने का प्रयास करंगे तोह याद रखना कुछ भी हो तुम्हे जब तक मैं न बोलू ध्यान तोडना नहीं है चाहे जितनी भी पीड़ा हो चाहे जितनी भी मुश्किलें आये रुकना मत

साधु की बाते सुन कर में एक्ससिटेड भी था और डरा हुआ भी था साथ में hi सर पे लटकने वाली समय की तलवार जब भी मेरा ध्यान समय पे जाता मेरे आखों के सामने वही सपना आता था उन लड़कियों की आवाजे मेरे कानों में गूंज उठती थी जिससे मेरे शरीर का रोम रोम गुस्से में जल उठता था

फिर मेने इन सब बातों को इग्नोर करके में वही जमीं पे बैठ के ध्यान लगाना शुरू किया और जैसा साधु ने मुझे जैसा बोलै में बिलकुल वैसा hi करने लगा सबसे पहले मेने अपनी कुण्डिनी शक्ति को जागृत कर सरे चक्रों को जागृत किया जिससे मेरे शरीर से एक अलौकिक सा प्रकाश निकलने लगा

उसके बाद में अपने सप्त चक्रों की ऊर्जा को कब महसूस करने लगा तोह मेने उस ऊर्जा को अपने आस पास की धरती में प्रवाहित करना शुरू कर दिया

जिससे मुझे मेरे शरीर में अत्यधिक भर का अनुभव होने लगा ऐसा लग रहा था की मेरा शरीर इतना भरी हो गया है की वह धीरे धीरे धरती में समां रहा है फिर कुछ देर ऐसे hi धरती के अंदर ऊर्जा को प्रवाहित करने के बाद मेने धीरे धीरे करके सरे तत्वों में अपनी ऊर्जा को प्रवाहित करना शुरू कर दिया

में जब भी किसी तत्त्व के अंदर ऊर्जा को प्रवाहित करता तोह मनो ऐसा प्रतीत होता की जैसे वह तत्त्व मुझे अपने अंदर समां रहा है जैसे जब में धरती में ऊर्जा को प्रवाहित कर रहा था तोह मुझे ऐसा लग रहा था की धरती मुझे जकड रही है और जब में अग्नि तत्त्व पर फोकस करता तब मेरे शरीर का रोम रोम जल रहा था ऐसे hi बाकि सब तत्वों के साथ भी ऐसा hi होता रहा

उसके बाद जब मेने पाचवे तत्त्व यानि आकाश पर ध्यान केंद्रित करने लगा तोह मुझे मेरे मस्तिष्क में अजीबो गरीब आवाजे सुनाई देने लगी जैसे की किसी वाक्यूमेड स्पेस से आती है लेकिन वह आवाज ज्यादा देर नहीं चली और जल्द hi मुझे अपने आस पास एक अजीब सी शांति महसूस हुई जो मेरे मन का फोकस काम करने की कोशिश कर रहा था लेकिन में अपना ध्यान लगाए जा रहा था

जल्द hi मुझे मेरे शरीर में अत्यधिक पीड़ा होने लगी ऐसा लग रहा था की मेरे शरीर में हर जगह ब्लास्ट हो रहे है अभी में अपनी पीड़ा को शांत करने का प्रयास करता उससे पहले hi मुझे उस पीड़ा का अनुभव होना बंद हो गया था और फिर मेरे कानों में एक आवाज सुनाई देने लगी जो थी तोह इंसानो जैसी लेकिन उस आवाज से मुझे मेरे मन में अत्यधिक शांति का एहसास हो रहा था

आवाज :- उठो राजवीर यहाँ कितनी भी कोशिश कर लो पंचा तत्वों को जागृत करने की प्रक्रिया नहीं कर पाओगे

उस आवाज को सुनकर मेने अपनी आखे खोली तोह में उस जंगल में न होक किसी अनजान जगह पर था में इस वक़्त किसी अजीब सी जगह पे था जहा मेरे और उस आदमी के सिवा कोई नहीं था

में :- (आदमी से) कोण है आप और में कहा हु

आदमी :- तुम इस वक़्त मेरे अंतर्मन में हो यहाँ मेरे आज्ञा के बगैर तुम कुछ नहीं कर कर सकते और में हूँ समस्त संसार के माया का धारक मेरे आज्ञा के बगैर कोई भी किसी भी प्रकार की माया नहीं कर सकता

में :- मुझे यहाँ क्यों बुलाया है मेने कोनसी माया की है

आदमी :- तुम तोह खुद चलती फिरती माया हो और अब तुम इस पुरे संसार की सबसे शक्तिशाली शक्ति पाने जा रहे हो तोह इसीलिए तुम्हे मेने यहाँ इसीलिए बुलाया है की में जान पाव की जो शक्तिया तुम बिना रुके बिना थके प् रहे हो क्या सच्ची में उन्हें सहन करने की ताकत रख पते हो या नहीं

में :- क्या करना होगा मुझे

मेरे इतना बोलते hi उस आदमी ने अपना हाथ ऊपर को उठाया और मेरे सामने एक धनुष और दो बाण आ गए

आदमी :- ज्यादा कुछ नहीं केवल इस धनुष को उठा कर इन दोनों बनो का इस्तेमाल करके लक्ष भेद करना है

उस आदमी के इतना बोलते hi मेरे सामने एक लाल गेंद आ गयी जो की अजीब तरीके से उछाल कूद कर रही थी

आदमी :- याद रहे राज तुम्हे इस उछलती कूदती गेंद को अपना निशाना बनाना है और तुम्हारे पास केवल 2 hi मौके है

फिर मेने आगे बढ़ कर वह धनुष को उठा लिया और एक तीर उठके उस गेंद पर निशाना लगाने लगा लेकिन जैसे hi मेने तीर को धनुष पर चढ़ाया तोह उस बॉल ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और फिर बिच में hi वह एक सेकंड के लिए स्लो होता था लेकिन अगले hi सेकंड वह फिर से अपनी स्पीड पकड़ लेता

में :- (मन में) जब ये स्लो होता है मुझे तभी इस पर निशाना लगाना होगा

इतना सोचके मेने धनुष की प्रत्यंचा खींच कर उस बॉल के स्लो होने का इंतज़ार करने लगा और जैसे hi वह गेंद स्लो हुई तोह मेने भी तुरंत अपना तीर छोड़ दिया लेकिन मेरा बाद लक वह तीर कुछ सेन्टीमीटर्स से चूक गया

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 129

Me :- (man me) jab ye slow hota hai mujhe tabhi is par nishana lagana hoga

Itna sochke mene dhanush ki pratyancha khich kar us ball ke slow hone ka intezaar karne laga aur jaise hi woh gend slow hui toh mene bhi turant apna tir chod diya lekin mera bad luck woh tir kuch centimeters se chuk gaya

Aadmi :- shabash raj itne najdik toh is gend ke koi bhi nahi pahuch paya hai lekin iska matlab ye nahi ki tum jit gaye ya me impressed ho gaya mene tumse bhi shreshth 2 mahan dhanurdhariyon ko dekha hai

Me :- mujhe aapko impresse karna bhi nahi hai me ye isiliye kar raha hoon taki me khud ke sawal ka jawab dhoondh pau

Aadmi :- acha kya sawal hai tumhara

Me :- wahi jo tumhara hai in shaktiyon ke liye me kabil hu ya nahi

Aadmi :- galat raj mera sawal hai kya tum in shaktiyon ko sahan karne yogya ho ya nahi

Uski baate mere sar ke uper se ja rahi thi toh mene use ignore kia aur nishana lagane laga me phir se apna tir chodne hi wala tha ki tabhi mere dimaag me ek idea aaya aur me us gend ko aur uske kudne ko observe karne laga aur jald hi mujhe uska tod bhi mil gaya

Jab woh gend speed me left to right kar raha tha tabhi mene apne tir ko aasman me chod diya jisse tir kuch dur jake wapas niche girne laga aur us tir ke thik niche woh gend thi jo ab slow ho gayi thi aur uper se niche slowly jump kar rahi thi aur isi ka fayda uthake mere tir ne us gend ko kaat diya

Jaise hi mere tir ne us gend ko kata waise hi us jagah par ek blast hua aur us blast se 5 tarah ki roshniyan nikalke mere sharir me jane lagi jisse mujhe mere sharir me aur mere aaspass ke watawaran me ek ajib sa judaw mahsoos hone laga

Aadmi :- mubarak ho rajveer aaj tumne apne panch mahabhooton ko bhi apne kabu me kar liya hai yaad rakhna raj ki ye pach mahabhooton ki shakti pure sansar me sarv shresth shaktiyon mese ek hai isse na kewal insaan balki devton ka bhi janm in panch mahabhooton se hi hua hai

Me :- lekin aapne ab tak bataya nahi ki aap kon hai aapka naam kya hai

Aadmi :- mera naam janna chahte ho tum ya mere yaha aane ke piche ka rahasya

Me :- jab se hum mile hai aapne kitni baate ki hai matlab yaha aane ke piche ka reason to aaj nahi toh kal pata chal hi jayega aap apna naam bataiye

Mere itna bolte hi us jagah har taraf ujala fail gaya woh ujala itna badh gaya tha ki us ujale se meri aakhe band ho gayi thi aur jab khuli toh shock se meri aakhe khuli ki khuli rah gayi mere samne wahi aadmi tha lekin uska aakar pahle se 100 guna bada tha aur ye ujala jo pure grah par faila hua tha woh bhi usi ke sarir se nikal raha tha

Aadmi :- mera naam ye toh bada hi mushkil sawal puch liya rajveer mere toh kai naam hai aur har koi mujhe alag alag naam se pukarte hai mere shatru ya mere se jalne wale mujhe chaliya (छलिया) ke naam se toh mere dost mujhe brijesh (बृजेश ) ya madhav (माधव) ke naam se pukarte hai jo mujhe jaante hai woh mujhe keshav (केशव ) ke naam se toh jo nahi jaante woh mujhe naya naam de dete hai ab tum batao tum mujhe kis naam se pukaroge

Unki baate sunkar aur unka roop dekhkar kab mere ghutne jamin se tik gaye aur mere hath ek dusre se jud gaye mujhe bhi pata nahi chala

Me :- aapka naam le saku itni meri haisiyat kaha prabhu aap toh swayam parambramha hai mujh murkh ke muh se kuch galat nikal gaya ho toh mujhe maaf karna

Meri baate sunke unke chehre par ek muskaan aa gayi aur unka aakar wapas pahle jaisa ho gaya

Prabhu :- utho raj shergarh aur suraj garh ke raja ko aise kisi ke saamne ghutno pe baithna shobha nahi deta

Me :- jab saamne swayam Bhagwaan ho toh ghutno pe baithna galat nahi hai prabhu

Prabhu :- ye baate toh baad me bhi hoti rahegi raj kya tum mere yaha aane ka karan nahi janoge

Me :- aapne apna virat roop dikha ke mere sare sawalo ko mita diya hai ab aap bas aagya dijiye ki mujhe karna kya hai

Prabhu :- tumhe is sansaar me panap rahi buri shaktiyon ka vinash karna hai kalyug hone ke wajah se koi bhi dev dharti pe nahi aa sakte isiliye sare devon ne apni shaktiyon ko milake dev punj ka nirmaan kiya hai jise pane ke liye sari kali shaktiya us dev punj ko pane ke liye kisi bhi had tak ja sakti hai aur usi punj ki raksha ki jimmedari uthane ke liye sare devon ne tumhe chuna hai ye baat toh tumhare guru ne bataya hi hai

Me :- ji lekin kya me such me in sari shaktiyon ke kabil hoon ya nahi

Prabhu :- agar tum kabil na hote toh tumhari mrutyu usi waqt ho jati jis waqt tum apne tri netra ko kabu karne ka prayas kar rahe the ek baat yaad rakhna jab tak tum khudko kabil na samjho tab tak koi dusra bhi tumhe kabil nahi samjhega

Me :- ji mujhe maaf karna prabhu ab me khud ke uper kabhi shaq nahi karunga waise kya me jaan sakta hoon woh do dhanurdhariyon ke baare me jo mujhse bhi uttam hai

Prabhu :- uttam raj tum aaj ke pariksha me uttirna hue aur un do dhanurdhariyon ke baare me toh sari duniya jaanti hai ek hai SURYA PUTRA KARN aur ek hai KAUNYEY ARJUN tum unse kam nahi ho me tumhare kaushal se bhi khush hu jis wajah se me tumhe 2 vardaan deta hu bolo raajveer kya chahiye tmhe

Me :- me kya maang sakta hoon prabhu pahle hi mere pass sab kuch hai

Prabhu :- (muskurate hue) nahi raj me kisi ko darshan deke uski pariksha lu aur uske uttirn hone par bina wardaan diye laut jau ye mera apmaan hoga aage tumhari marji

Me :- agar aisa hai toh aapke hathon se mrutyu bhi mujhe wardaan roop me swikaar hai aap jo bhi doge use me swikaar kar lunga

Prabhu :- thik hai phir me tumhe icha mrutyu ka wardaan deta hoon tumhari mrutyu kab kaha kaise aur kiske hatho se hogi ye swayam tum tay karoge aur saath hi dusre wardaan ke swaroop me tumhe apna sudarshan chakra aur sansaar ki sari mayaon gyan deta hoon

Unke itna bolte hi unke sharir se ek sunahari urja nikal ke mere sharir me sama gayi jisse mere sharir me mujhe atyadhik shakti ka anubhav hone laga

Me :- aapke dono wardaan mujhe swikaar hai aur me bhi aapko ye wachan deta hoon prabhu ki me aapke sudarshan chakra ko hamesha antim upay ke roop me hi istemaal karunga

Mere itna bolte hi us grah pe phir se ek baar prakash fail gaya aur jab prakash hata toh me usi jagah tha jaha me dhyan laga raha tha

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Aaj ke liye itna hi


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अपडेट 130



में :- आपके दोनों वरदान मुझे स्वीकार है और में भी आपको ये वचन देता हूँ प्रभु की में आपके सुदर्शन चक्र को हमेशा अंतिम उपाय के रूप में hi इस्तेमाल करूँगा

मेरे इतना बोलते hi उस गृह पे फिर से एक बार प्रकाश फ़ैल गया और जब प्रकाश हटा तोह में उसी जगह था जहा में ध्यान लगा रहा था

जब में अपने ध्यान से बहार निकला तोह देखा की मेर सरे रूप मुझे hi देख रहे थे

में :- ऐसे क्या देख रहे हो कुछ लगा है क्या चेहरे पे

साधु :- ऐसे न देखे तोह क्या करे हम 10 बजे इस जंगल में आये थे अभी सुबह के 6 बजने वाले है तुम लगभग 8 घंटों से ध्यान लगा रहे हो

साधु की बात सुन के मुझे भी जोरो का शॉक लगा लेकिन तुरंत hi मुझे ध्यान लगते वक़्त की बाते याद आ गयी मेने इन 8 घंटों में पांच तत्वों को काबू किया और सबसे खास स्वयं प्रभु नारायण के दर्शन किये और उनसे मिले वह 2 खास वरदान उन सब के सामने ये 8 घंटे तोह कुछ भी नहीं

में :- जरूरी था पांच तत्वों की काबू करने के लिए इतना समय तोह लगेगा hi न चलो अब घर चलते हैं

में इन सब को अभी कुछ भी बताना नहीं चाहता था में इन्हे सही समय आने पर सरप्राइज देना चाहता था

वही जैसे hi में अपने घर जाने के लिए उठा तोह तुरंत hi मुझे ऐसा लगा की कोई मेरे पेअर पकड़ रहा है जब मेने निचे देखा तोह पाया की मेरे शरीर पर धीरे धीरे मिटटी की परत सी चढ़ रही है जो की मुझे जकड रही थी जिसे देख में शॉकेड हो गया था

में :- जैसें ये क्या हो रहा है

जैसें :- मुझे भी कुछ पता नहीं है आका

जैसें की बात सुनने के बाद मेने फिर से अपने आखे बंद की और अपने त्रि नेत्र को जागृत कर इसके बारे में जानने लगा और इस में मैं सफल भी हुआ और जब मुझे इसके बारे में पता चला तोह मेरे चेहरे पे अचानक ख़ुशी और एक मुस्कान सी आ गयी जिसे देख जैसें और मेरे सभी रूप शॉकेड हो गए शुवाये एंजेल वाले रूप के

जैसें :- ये आका अचानक से मुस्कुराने क्यों लगे

एंजेल :- ये सफलता की मुस्कान है जैसें ये वह मुस्कान है जो जब किसी साधक के चेहरे पर आती है जब वह कोई साधना पूर्ण करता है और उसके बाफ उसे उस साधना के अथक परिश्रम का फल मिलता है

किंग :- लेकिन राज कोनसी साधना कर रहा था और कब

एंजेल :- साडी बाते मुझसे hi जान लोगे तोह राज से पूछने के लिए क्या बचेगा सबर करो

वही इस वक़्त मेरा पूरा शरीर उस पृथ्वी के परत में समां गया था और फिर वह परत धीरे धीरे मेरे शरीर के अंदर समां गयी

उसके मेरे शरीर में समाते hi मेरे शरीर के ऊपर अब जल की परत चढ़ने लगी थी उसने भी जब मेरे शरीर को पूरी तरह जकड लिया तोह वह मेरे शरीर में समां गयी ऐसे hi धीरे धीरे अग्नि वायु और आकाश की परत भी मेरे शरीर पर चढ़ कर मेरे अंदर समां गयी

और जब आखरी परत यानि की आकाश परत मेरे अंदर समां गयी तोह मेरे शरीर से एक सुनहरी रौशनी निकल के पुरे वातावरण में फ़ैल गयी जब वह रौशनी हटी तोह सब शॉकेड हो गए क्यूंकि इस वक़्त में काल के कस्टम में था

मेने जब अपने त्रि नेत्र को जागृत किया तब मुझे याद आया की काल ने कहा था की जब में सप्त चक्रों पे काबू करके पांच तत्वों को अपने अधीन कर लूंगा तोह मेरा कस्टम यानि काल के उत्तराधिकारी का कस्टम अपने आप मेरे शरीर पर आ जाएगी

एंजेल :- मुबारक हो राज तुम्हे आज तुम अपने 6 तह ऊर्जा स्त्रोत को भी प् गए

में :- (शॉकेड से) 6तह कैसे

मेरे सवाल पूछने के बाद एंजेल मेरे सरे रूप के तरफ मुस्कुराते हुए देखने लगा

किंग :- पहला त्रि नेत्र

योद्धा :- दूसरा तुम्हारे रूप

साधु :- तीसरे में जैसें और ड्रैगन आएंगे

तांत्रिक :- चौथे में सप्त चक्र

एंजेल :- और फिर पांच चक्र ये सब भी तोह तुम्हारे ऊर्जा के स्त्रोत है और इनसे तुम्हे कोई न कोई ऊर्जा जरूर मिली है

में :- ठीक है में समझ गया (अपने मन में) माफ़ करना मित्र 6तह नहीं 7तह ऊर्जा स्त्रोत

फिर हम सभी वह फिर से अपने घर में आ गए आज सब फिर से सूरज ग्रह जाने वाले थे तोह सब उसी की तयारी कर रहे थे मां ने अभी बस भी माँगा ली थी सब के लिए ममी को अब बाइक पे बैठने के लिए नाना और नानी ने मन कर दिया था जो की उनके हेल्थ के लिए सही भी था

फिर हम सब निकल पड़े सूरज ग्रह के तरफ जहा सब बस में थे तोह में अपने बाइक पे बैठ के आ रहा था और मॉर्निंग का समय होने से सरे रस्ते सुसान थे इसीलिए सब की सुरक्षा को देख सब ने कही भी बिच में बिना रुके चलने का प्लान बनाया था

जब में अपने बाइक से जा रहा था की तभी मुझे एक ढाबा दिखाई दिया जिसे देखकर मुझे याद आया की घर पहुंचने के बाद सब को भूक लगी होगी इसीलिए मेने सबके लिए ढाबे से खाना पैक करने का ख्याल आया तोह में चल पड़ा उस ढाबे की तरफ

जब में ढाबे में पंहुचा तोह सबसे पहले अपने लिए चाय का आर्डर दिया और बाकि सब के लिए कुछ न कुछ खाने को लिया अभी में एक टेबल पे बैठके चाय पि रहा था की तभी मेरे कानो में दो लोगों की आवाजे सुनाई देने लगी जो की वही मेरे से कुछ दुरी पे बैठे थे

आदमी 1 :- अरे भाई क्या कहना आज कल तोह घर से बहार निकलना भी मुश्किल हो गया है

आदमी 2 :- क्यों क्या हुआ भाई

आदमी 1:- अरे 1 हफ्ते में 20 लड़किया किडनैपेड हो गयी और पुलिस कुछ कर भी नहीं रही है और तोह और मीडिया भी इसकी कोई न्यूज़ कवर नहीं कर रही है

में अभी उन दोनों की बाते सुन hi रहा था की तभी उस ढाबे पे काम करने वाला लड़का आ जाता है और मुझे उन दोनों की बाते सुनते हुए देख लेता है

लड़का :- क्या बात है भाई आपका भी कोई घरवाले गायब है क्या

में :- नहीं तोह

लड़का :- तोह आप उन दोनों की बातें इतनी गौर से क्यों सुन रहे हो अपनी जान प्यारी नहीं है क्या

में :- मतलब

मेरी बात सुनके वह लड़का हड़बड़ा गया

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 131



आदमी 1 :- अरे भाई क्या कहना आज कल तोह घर से बहार निकलना भी मुश्किल हो गया है

आदमी 2 :- क्यों क्या हुआ भाई

आदमी 1:- अरे 1 हफ्ते में 20 लड़किया किडनैपेड हो गयी और पुलिस कुछ कर भी नहीं रही है और तोह और मीडिया भी इसकी कोई न्यूज़ कवर नहीं कर रही है

में अभी उन दोनों की बाते सुन hi रहा था की तभी उस ढाबे पे काम करने वाला लड़का आ जाता है और मुझे उन दोनों की बाते सुनते हुए देख लेता है

लड़का :- क्या बात है भाई आपका भी कोई घरवाले गायब है क्या

में :- नहीं तोह

लड़का :- तोह आप उन दोनों की बातें इतनी गौर से क्यों सुन रहे हो अपनी जान प्यारी नहीं है क्या

में :- मतलब

मेरी बात सुनके वह लड़का हड़बड़ा गया

लड़का (हड़बड़ाते हुए) :- नहीं कुछ नहीं सुनने में किसीका क्या बिगड़ेगा सुनो लेकिन पहले बिल दो

में :- अरे बिल तोह मिल जायेगा पहले जान प्यारी नहीं है क्या इस लाइन का मतलब बता

लड़का :- नहीं आप जरूर मुझे फसाओगे में नहीं बताने वाला

में :- (अपनी जेब से 2000 का नोट निकल के) नहीं फसाऊँगा बता

मेरे हाथ में 2000 का नोट देख के उसके आखों में चमक आ गयी थी

लड़का :- आज कल 2000 का छूटता कहा मिलेगा आप भी न

उसकी बात सुनके में मुस्कुराते हुए 500 की 5 नोट्स निकल के उसके जेब में दाल देता हु

में :- अब बोल

लड़का :- बोलने को क्या है यहाँ सभी जानते है अगर किसी केस को पुलिस और मीडिया सभी इग्नोर कर रहे है तोह इसका मतलब इन सब के पीछे कॅशे बाजार वाले उस्मान भाई का hi हाथ होगा

में :- ठीक है चल आज के लिए बहुत है (खाना देखते हुए) ये क्या सिर्फ वेग खाना कुछ नॉनवेज नहीं है क्या

लड़का :- आपने बोलै hi नहीं रुको अभी लेके आता हु

में :- तू रहने दे ये बता तू बोल रहा था की पास में hi कोई कॅशे बाजार है वह कहा है ये बता वही से कुछ ले लूंगा

मेरी बात सुनकर उस लड़के ने मुझे ऐसे देखा की जैसे कोई भूत देख लिया हो

फिर उस लड़के ने 1 और 500 की नोट लेके मुझे वह का रास्ता बता दिया फिर मेने वह सरे खाने के पैकेट्स वही टेबल पे रख के चल पड़ा कॅशे बाजार के तरफ

जब में वह पंहुचा तोह देखा की हर तरफ से चिकन और मटन की दुर्गन्ध आ रही थी में इस दुर्गन्ध को इग्नोर करके अंदर के तरफ चल पड़ा कुछ देर अंदर जाने के बाद अब दुकाने ख़तम हो गयी थी और घर शुरू हुए थे जो की सरे घर किसी चावल के तरह जुड़े हुए थे

जब में और अंदर जाने लगा तोह दो लोग आके मेरे सामने खड़े हो गए दोनों देखने से hi कॉमेडियन दिख रहे थे

आदमी 1 :- क्या किधर ये रिस्ट्रिक्टेड एरिया है जो भी खरीदना है बहार दुकान से करोड़ ले

में :- लेकिन मेने सुना था यहाँ एक दुकान है जहा वर्ल्ड बेस्ट घोषत मिलता है वह दुकान तोह कही दिखी hi नहीं ालको पता है क्या कहा है

आदमी 2 :- यहाँ सरे दुकाने वर्ल्ड बेस्ट है तुझे कोनसी चाहिए

में :- अरे वह क्या नाम था दुकान का (उन दोनों से) माफ़ कार्डो दुकान का नाम नहीं पता दुकान दार का पता है

आदमी 1 :- क्या नाम है

में :- उसका नाम उस्मान भाई है पता है उसकी दुकान कहा है

आदमी 1 :- ये सुबह सुबह चढ़के आया है क्या या तुझे तेरी जान प्यारी नहीं है

में :- (आदमी 1 के गाल पकड़ के) अरे मेरे चँगुलाल बता भी दो अकेले के लिए इतना बेस्ट घोषत छुपाये रखा है और सब को ये फ़िज़ूल का कबाड़ा बेच रहे हो

आदमी 1 :- (गुस्से में) कोण चँगुलाल बोल

में :- अरे तुम (आदमी 1 के गाल पकड़ के) चँगुलाल और तुम (आदमी 2 के गाल पकड़ के) मंगूलाल मेरे चंगु मांगू की जोड़ी हमेशा सलामत रहे अब बताओ कहा है (जोर से) उस्मान भाई

मेरी आवाज सुन के वह सभी का ध्यान मेरी और आ गया और फिर भीड़ में से एक सैंड दौड़ता हुआ मेरे और लपका लेकिन मेरे एक पंच में hi वह जितनी तेज़ी से आ रहा था उतने hi तेज़ी से पीछे को चला गया

ये देखते hi वह भीड़ से और भी कुछ सैंड मेरे तरफ चाकू और तलवार लेके दौड़े लेकिन फिर क्या हुआ होगा ये सब को पता hi होगा की कैसे उन सब को लात घुसे की मशीन में डालके धोके सूखा दिया

सो स्किप तो थे गुड part

में इस वक़्त 20 पहलवानो सॉरी 20 बेहोस पड़े पहलवानो के बिच खड़ा था और मुझे देख चंगु मांगू दोनों दर रहे थे

में :- अरे चंगु मांगू डरो मत बस मुझे टिन्गु तक पंहुचा दो में तुम्हे कुछ नहीं करूँगा घर जेक खाना भी पकाना है

चंगु :- (डरते हुए) अब ये टिन्गु कोण है

मांगू :- (वह भी दर रहा था) उस्मान भाई

में (मुस्कुराते हुए) :- तुम तोह समझदार निकले मांगू जरा अपने मोहल्ले वालों को भी समझाओ की जब दो मुर्ख लोग एक समझदार आदमी को किसी महामूर्ख के बारे में बता रहे हो तब बिच में पड़ना बाद मैनर्स होता है

मांगू :- जी टीचर जी

में :- चलो मेरे प्यारे स्टूडेंट्स बताओ की मेरा दुलारा टिन्गु कहा है

मांगू :- चलिए

फिर वह दोनों लेके मुझे एक घर के सामने लेके गए जहा बहार hi छोटे से आँगन में एक कुश्ती के आखाड़े जैसा स्ट्रक्चर बनाया हुआ था

वही उस आखाड़े के बिच में एक खत पर एक आदमी बैठा था जिसकी 2 लोग मालिश कर रहे थे और उसके आस पास 10 पहलवान लोग खड़े थे मतलब वही अपना टिन्गु तबै

टिन्गु :- ये अपने साथ किस बचे को लेके आये हो

चंगु :- ये बच्चा नहीं है टीचर है

में :- चलो चंगु मांगू मस्त लिम्बु पानी लेके आओ

फिर वह दोनों उस घर के अंदर जेक लिम्बु पानी बनाने लगे

जब वह लिम्बु पानी लेके आये तोह उनके आँख फटी की फटी रह गयी क्यूंकि सामने हाल hi ऐसा था में इस वक़्त उसी खत पे बैठा हुआ था और मेरे हाथ में मेरी तलवार थी जो की खून से पूरी सनी हुई थी और मेरे अगल बगल सब की सर कटे लाशे थी और मेरे सामने टिन्गु अपने घुटनो पे बैठा हुआ था और मेरी तलवार उसके गर्दन पे थी

टिन्गु (दर्द से कराहते हुए) :- में तुम्हे उन लड़कियों के बारे में कुछ नहीं बताने वाला

उसकी बात सुनने के बाद मेने तुरंत अपनी तलवार से उसका गाला काट दिया

में :- मुझे कुछ जानना भी नहीं है

फिर जब मेरी नज़र चंगु मांगू पे पड़ी तोह में चलते हुए उनके पास पंहुचा तोह दोनों डरे हुए थे

में :- खून देख के मेरा जी घबराने लगता है इसीलिए तुम्हे लिम्बु पानी बनाने बोलै (लिम्बु पानी पाइक) बड़ा मस्त बनाते हो यार अब बस अपने भगवन से दुआ करना मेरा फिर कभी लिम्बु पानी पिने का मन न करे

इतना बोलके में वह से निकल गया और फिर जल तत्वा के मदद से अपने शरीर पर लगा सारा खून गायब कर दिया और फिर में उस ढाबे में पहुंच गया और फिर वह से अपना सामन लेके निकल पड़ा घर के और

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 132



फिर जब मेरी नज़र चंगु मांगू पे पड़ी तोह में चलते हुए उनके पास पंहुचा तोह दोनों डरे हुए थे

में :- खून देख के मेरा जी घबराने लगता है इसीलिए तुम्हे लिम्बु पानी बनाने बोलै (लिम्बु पानी पाइक) बड़ा मस्त बनाते हो यार अब बस अपने भगवन से दुआ करना मेरा फिर कभी लिम्बु पानी पिने का मन न करे

इतना बोलके में वह से निकल गया और फिर जल तत्वा के मदद से अपने शरीर पर लगा सारा खून गायब कर दिया और फिर में उस ढाबे में पहुंच गया और फिर वह से अपना सामन लेके निकल पड़ा घर के और

फिर मेने जब अपनी घडी देखि तोह मुझे पता चला की मुझे बहुत देर हो गयी है अब तक वह सब तोह बहुत आगे निकल गए होंगे तोह मेने तुरंत जैसें को याद किया तोह तुरंत मेरे सामने एक पोर्टल खुल गया जिसके खुलते hi मेने फुल स्पीड में अपनी बाइक को उस पोर्टल के अंदर दौड़ा दी जिससे में अगले hi सेकंड नाना जी के हवेली के बहार था तोह मेने अपनी बाइक साइड में पार्क की अभी में अंदर जा hi रहा था की तभी मुझे बिल्ला ने पीछे से आवाज दी और जब में उसके पास पंहुचा तोह उसने मुझे बताया की घर में टाला लगा है फिर उसने मुझे घर की चाबी दे दी फिर जब में अंदर गया तोह घर को देख के ऐसा लग hi नहीं रहा था की कुछ दिनों से घर बंद था फिर मेने सारा खाना कीकतें में रख दिया उसके बाद में अपने कमरे में जेक फ्रेश हो गया और फिर ध्यान लगाने लगा जिससे में तुरंत hi अपने अंतर्मन के अंदर पहुंच गया जहा मेरे सरे रूप और जैसें ध्यान लगा रहे थे

में एक बात बता दो की जब प्रभु ने मुझे मायावी शक्तियों का ज्ञान दिया तोह में अपने अंतर्मन को भी अब काबू कर सकता था जिससे मेरे अंतर्मन में सब कुछ ठीक वैसा hi दीखता जैसे में चाहता जिस वजह से hi सबके सामने होते हुए भी किसी को भी मेरा सुदर्शन चक्र नहीं दिख रहा था

फिर में भी उनके बगल में बैठ गया और अपने त्रि नेत्र को जागृत करने लगा उसके बाद काल की दी हुई किताब से मंत्र पढ़ने लगा और इस बार भी पिछले बार की तरह hi में जो भी मंत्र पढता उसका अर्थ कार्य उसका शार्ट फॉर्म उसका टुटोरिअल और उसका तोड़ सब कुछ मुझे त्रि नेत्र बता रहा था और साथ hi अब प्रभु के वरदान के वजह से ये मेरे लिए और भी ज्यादा आसान हो गया था मुझे अब मंत्र पढ़ने की भी जरुरत नहीं थी बस एक बार देख कर hi वह मेरे दिमाग में चाप जाता था

फिर क्या था वैसे भी अंतर्मन में समय का बंधन नहीं था तोह मेने भी थान लिया की अब किताब को पूरा ख़तम करने के बाद hi उठूंगा

फिर में लग गया पुरे फोकस से किताब पढ़ने और जल्द hi मेने उस किताब का सारा ज्ञान मेरे त्रि नेत्र में समां लिया जिसके बाद वह किताब स्वयं hi उड़ते हुए मेरे त्रि नेत्र में समां गयी जिसके बाद मुझे मेरे पुरे शरीर में कुछ परिवर्तन सा महसूस हुआ जैसे की मेरे पुरे शरीर में जादुई शक्तियों का प्रवाह हो रहा हो

उसके बाद जब मेने अपना ध्यान तोडा तोह मेने देखा की मेरे सरे रूप मुझे hi देख रहे थे और जब उन्होंने ने जाना की मेने ध्यान तोड़ दिया है तोह एंजेल आगे बढ़ा

एंजेल :- मुबारक हो राज तुमने आज अपने ज्ञान को एक आम मनुष्य से बढ़के एक महँ ज्ञानी राजा और एक बेहटैं सर्वश्रेष्ठ जादूगर के स्टार तक बढ़ा लिया है अब आगे क्या करे

में :- बुरा मत मन्ना लेकिन मुबारक बाद के लिए हमारे पास वक़्त नहीं है (तांत्रिक से) तोह तांत्रिक तुमने बोलै था की तुम मुझे पांच तत्वों के तामसिक रूप को काबू करने के बारे में बताओगे

तांत्रिक :- में अभी भी वही बोल रहा हूँ लेकिन क्या तुम उस शक्ति को सहन कर पाओगे

में :- अब मुझे मेरे ऊपर पूरा भरोसा है की में कुछ भी कर सकता हूँ

तांत्रिक :- तोह याद करो जब तुम प्रथम बार अपने अंतर्मन में आये थे तब तुम्हे 2 रस्ते दिखे थे एक इस जगह का जहा हम खड़े हैं और एक वह अंधकार की गुफा याद आयी (अपडेट 50)

तांत्रिक के बोलने से मुझे उस गुफा का स्मरण हुआ

में ;- है याद आया लेकिन वह गुफा तोह मेरे अंदर की बुराई है मुझे याद है जब में उस गुफा के अंदर गया था तब मुझे क्या दिखा था

एंजेल :- जब तक तुम अपने बुराई से भागते रहोगे तब तक तुम कभी भी काबिल जादूगर नहीं बन पाओगे

योद्धा :- है राज एक योद्धा भी तभी योद्धा कहलाता है जब वह अपने अंदर के बुराई से लड़कर उसे हरा दे

में :- ठीक है फिर आज एक तरय और कर लेते हैं में फिर से एक बार उस गुफा के अंदर प्रवेश करूँगा देखते है क्या होता है

वही दूसरी तरफ

इस वक़्त एक कमरे में जो की किसी का पर्सनल गयम लग रहा था वह एक लड़की पुरे तरीके से पसीने से भीगी थी और उसके सामने एक कैमरा जैसा कुछ रखा था वह लड़की अपने पुरे ताकत से भाग रही थी और उसके भागने से वायु में जो कम्पन निर्माण हो रही थी वह इतनी भयानक थी की उस वजह से वह गयम में रखे हुए भरी डम्बल्स भी किसी पपरवेइट के निचे रखे पेपर के तरह फड़फड़ा रहे थे उड़ने के लिए

जैसे hi वह लड़की रुकी तोह उसकी ससे हलकी सी फूली हुई थी और फिर वह चलते हुए उस कैमरा के पास गयी जो की स्पीड मीटर था

लड़की :- (स्पीड मीटर देखते हुए) 500 km/hr स्पीड ठीक थक है लेकिन और बढ़िया चाहिए मुझे अभी और शक्तिया पानी है जिसके लिए मुझे और ज्यादा ताकतवर बनना है

तभी उसके सामने वाले आयने से आवाज आने लगी जो की उसका hi प्रतिबिम्ब था

प्रतिबिम्ब :- शक्तियों का घमंड और नशा दोनों भी ाचा लगता है लेकिन होता नहीं है वह तुम्हे बस कुछ पल की शांति देगा लेकिन फिर से तुम्हे किसी और शक्ति को पाने के लिए पागल कर देगा मेरी बात समझो लक्ष्मी जो शक्तिया तुम्हारे पास है उनसे तुम आम मनुष्यों का और किसी छोटे मोठे जादूगर को hi हरा सकती हो इसीलिए घमंड मत करो उन पर नहीं तोह जब तुम्हारा सामना किसी असली शक्ति से होगा तोह वह हार तुम्हारे घमंड के साथ तुम्हारे आत्मा विश्वास को भी ख़तम कर देगी

वह लड़की कोई और नहीं बल्कि अपने स्टोरी की मैं हीरोइन लक्ष्मी hi थी

लेकिन लक्ष्मी अपने प्रतिबिम्ब की बातें इग्नोर कर के फिर से अपने काम में लग गयी और इस बार वह वह रखे हर डम्बल्स उठाने लगी जिसका टोटल वेट 100कग के लगभग था

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आज के लिए इतना hi


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लेकिन लक्ष्मी अपने प्रतिबिम्ब की बातें इग्नोर कर के फिर से अपने काम में लग गयी और इस बार वह वह रखे हर डम्बल्स उठाने लगी जिसका टोटल वेट 100कग के लगभग था

वही दूसरी तरफ

इस वक़्त में अपने अंतर्मन से निकल गया था और फिर से अपने कमरे में था क्यूंकि अब जो काम मुझे करना है उसके लिए मुजबे सब शुरू से शुरू करना होगा मुझे फिर से एक बार ध्यान मुद्रा में बैठ के पूरी तरह से ध्यान में लीं होक hi मुझे उस चुनावी रस्ते पे जाना होगा जहा पहले मेने उजाले का साथ चुनता वही अब मुझे बुराई का रास्ता चुनना था जहा पहले मुझे इस सब के बारे में कुछ ज्ञान नहीं था वही अब मेने पांच तत्व, सप्त चक्र और जैसें जैसे कितने महँ और ताकतवर ऊर्जा स्त्रोतों पे काबू प् लिया था न जाने कितनी hi मायावी और सात्विक शक्तियों का ज्ञान मेने प् लिया था

ऐसे hi कुछ देर सोचने के बाद में अपने रूम से निकल के निचे हॉल में आके टीवी देखने लगा साथ hi में मेने मैजिक से पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक भी ले लिया था

अभी में टीवी देख रहा था की तभी बहार से किसी गाड़ी के रुकने की आवाज सुनाई देने लगी जिसे सुनके में समझ गया की बाकि सब भी आ गए होंगे तोह मेने तुरंत मैजिक से सब के लिए कोल्ड ड्रिंक माँगा ली और जो खाना लाया था उसे भी मैजिक से गरम कर दिया

वहु सब मुझे पहले से पंहुचा हुआ देख कर शॉकेड हो गए फिर सब अंदर आ गए जहा मेने सबको कोल्ड ड्रिंक दी

नाना :- बीटा राज तुम इतने जल्दी कैसे आ गए

में :- (नाना को आँख मारते हुए) मेरे बाइक में पंख लगे हुए है ननु आप के बस से 100 गुना तेज़ी से उड़कर आया

स्वाति :- सो फनी

सनिका :- (मौसी से) माँ कुछ खाने को दो न भूक लगी है

मौसी :- उठते हुए) है रीको अभी बनतु हु

में :- रुको एक मिनट बस आप लोग hi थक गए है क्या मौसी भी थकी होंगी तोह क्या उन्हें रेस्ट नहीं चाहिए

सनिका :- आपकी बात सही है भाई लेकिन फिर खाने का क्या

में :- में हूँ न डोंट वोर्री

इतना बोलके में वह से कीकतें में चला गया और मैजिक से सबके लिए गरमा गरम खाना थाली में परोस के दे दिया जिसे देख कर सबके मुँह में पानी आता हुआ क्लेअर्ल्य दिखाई दे रहा था फिर सब ने खाना खाया और उसके बाद फिर पुरे दिन कुछ खास नहीं हुआ हर दिन की तरह hi रात को सबने खाना खाया और उसके बाद सो गए

लेकिन मेरे आखों से नींद पूरी तरीके से गायब थी फिर जब मुझे यकीं हो गया की सब सो गए है तोह में तुरंत चाट पे चला गया और वह से जैसें को याद करके सीधा अपने अड्डे पर क्यूंकि अगर मुझे सब शुरू से करना था फिर से उसी चुनावी रस्ते पे पहुंचने के लिए

आज जब में ध्यान लगा रहा था तब मुझे कुछ अलग hi महसूस हो रहा था जब में पूरी तरह ध्यान मुद्रा में लेअन हो गया तोह में उसी पहली वाली जगह यानि उसी चुनावी रस्ते में पहुंच गया था

जो की दिखने में किसी अँधेरी गुफा जैसा दिख रहा था जहा मुझे दो रस्ते दिखाई दे रहे थे

जहा एक रस्ते में मुझे ऐसा लग रहा था की वह कुछ है hi नहीं वह रास्ता पूरी तरह अँधेरे में गम हो चूका था

जब में उस रस्ते के पास पंहुचा तोह मुझे मेरे मन में अनेको नकारत्मक विचार आते महसूस हुए जैसे मुझे जिसने मुझ से पन्गा का प्रयास किया उसकी बंद बजा देना जो कोई भी हर दिन मेरे सपने में आकर रक्त चाँद वाली रात को उन निर्दोष लड़कियों को मार के बलि चढ़ाता उसे पुरे ब्रमांड की सबसे बेरहम मौत देना फिर मुझे मीरा माँ, साक्षी, ममी और दीदी जिनसे भी मेरे शारीरिक सम्बन्ध बने थे उनके प्रति अपने मन में काम वासना से भरे हुए विचार आने लगे

फिर उसके बाद मुझे मेरी hi एक ऊँची मूर्ति दिखने लगी जिसे सब पूज रहे थे और उसके सामने अपने घुटने तक रहे थे. ये सब देख के जहा मुझे अजीब लग रहा था तोह मन में एक ख़ुशी की लहार भी दौड़ रही थी मेरे अंदर घमंड का स्वरुप मुझे उस मूर्ति में दिखाई दे रहा था और अंत में मुझे मेरा त्रि नेत्र दिखाई देने लगा जो की पूरी तरह से अग्नि में जुलस रहा था जैसे की अभी क्रोध में आके पुरे ब्रमांड का विनाश कर देगा

यहाँ का पूरा सन वैसे hi दिख रहा था जैसे पहले दिखाई दे रहा था मुझे अब आगे क्या हो सकता है क्या होगा और उससे में कैसे बच पाउँगा कुछ पता नहीं था क्यूंकि में पहले जब इस रस्ते पे आया था तोह में ज्यादा अंदर तक नहीं गया था जिस वजह से अभी सब कुछ नया hi लग रहा था

वही जब में उस रस्ते पे चलने लगा तोह सब कुछ शांत hi लैह रहा था जैसे किसी तूफान के आने से पहले की शांति हो लेकिन ये शांति ज्यादा देर टिकने वाली नहीं थी

जैसे में उस गुफा के अंदर जा रहा था मुझे कुछ अजीब महसूस हो रहा था जैसे अभी मेने कुछ hi कदम चले थे तोह मुझे बहोत से जानो की रोने की मुझसे मदद मांगने की आवाजे सुनाई देने लगी जिन्हे सुन कर मुझे फिरसे वही सपना याद आने लगा जिस वजह से मेरे सर में दर्द होने लगा और अगले hi क्षण मुझे फिर से वही मूर्ति वाला सन दिखने लगा लेकिन इस बार उस मूर्ति के सामने में भी खड़ा था और जो भी मेरे सामने नहीं झुका था उसे में अपने शक्ति से मार रहा था ये सन देख के जो कुछ कदम में चला था उतने hi कदम में पीछे हैट गया और

जैसे hi में उस अँधेरी गुफा से बहार आ गया मेरा सर दर्द अपने आप ख़तम हो गया और फिर जब भी में उस गुफा में देखता तोह मुझे वह मेरा hi त्रि नेत्र आग में झुलसता दिखाई देता

जिसे देख के मेरी यादे ताजा हो गयी और मुझे याद आ गया की इन्ही सब वजहों से में उस वक़्त इस रस्ते पे चने से भी दर गया था

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 134

जैसे hi में उस अँधेरी गुफा से बहार आ गया मेरा सर दर्द अपने आप ख़तम हो गया और फिर जब भी में उस गुफा में देखता तोह मुझे वह मेरा hi त्रि नेत्र आग में झुलसता दिखाई देता

जिसे देख के मेरी यादे ताजा हो गयी और मुझे याद आ गया की इन्ही सब वजहों से में उस वक़्त इस रस्ते पे चलने से भी दर गया था

लेकिन इस बार न में डरा हुआ था और न hi पीछे हटने वाला था में कुछ देर उस गुफा के अंदर ऐसे hi देखते रहा और फिर से गुफा के अंदर चलने लगा जैसे जैसे में अंदर की और जा रहा था वैसे वैसे hi वह सब मुझे फिर से दिख रहा था

सबसे पहले वही मूर्ति वाला सन खैर इस बार में उसे देखकर भी इग्नोर करके आगे बढ़ गया

जैसे hi में वह से आगे बढ़ा मेरे आखों के सामने से चित्र hi बदल गया और अबकी बार जो चित्र दिख रहा था उसे देख कर मेरा दिमाग hi हिल गया इस वक़्त मेरे सामने मेरे hi कमरे का व्यू आ रहा था जिसके अंदर में और दीदी सेक्स कर रहे थे उसे सेक्स बोलना गलत hi होगा क्यूंकि जो दृश्य देख रहे थे उसमे दीदी जोरो जोरो से रो रही थी दया की भीख मांग रही थी लेकिन में था की जो दीदी पे जरा भी दया किये बिना अपनी हवस शांत कर रहा था जिसे देख कर मुझे अब खुद से hi घिन्न आ रही थी

अभी में उसे इग्नोर करके आगे बढ़ता की तभी मेरे रूम का दूर ओपन हुआ और उसमे से 2 औरते अंदर आयी जो और कोई न होक मीरा माँ और ममी थी दोनों के शरीर पे एक कपडा भी नहीं था जैसे hi वह अंदर आयी वैसे hi में तुरंत दीदी को छोड़ कर मीरा माँ को पकड़ लिया और उन्हें भी उतने hi बेरहमी से भोगने लगा फिर ममी के साथ भी ऐसा hi हुआ

ये सब देख कर hi मुझे खुद से hi इतनी घिन्न आ रही थी की मुझे लग रहा था की अभी में अपना सर काट कर अलग कर दू उनकी चीखे मेरे कानो में चुभ रही थी लेकिन जैसे तैसे करके में अपने भावनाओं पर काबू प् के आगे बढ़ गया और वह से निकल गया

उसके बाद में चलते चलते किसी अँधेरे कमरे में पहुंच गया जहा मुझे न कुछ दिख रहा था और न hi कुछ सुनाई दे रहा था मुझे समझ नहीं आ रहा था की अब ये कैसा दृश्य है मेरे सामने अभी में यहाँ वह देख रहा था की तभी उस कमरे में उजाला हो गया और अब मुझे वह जगह साफ़ दिख रही थी ये वही जगह थी जो मेरे सपने में आ रही थी

जहा कुछ लोग मिलकर लड़कियों की बलि चढाने वाले थे इस जगह को देख कर मुझे आगे के दृश्य क्या होगा इसका अंदाजा तोह हो गया था और हुआ भी वैसे hi अचानक से मेरा शरीर अकड़ गया और में वही जमने लग गया था

जब में पूरा जैम गया उसके बाद वही हुआ जो की में पहले से hi जानता था सपने में इस दृश्य को देख चूका था लेकिन ये कुवह अलग था इसमें किसी भी लड़की को कोई भी नशीली दवाई नहीं दी गयी थी जिस वजह से उन सरे लड़कियों की चीखे उस जगह पर और साथ में hi मेरे दिमाग में भी गूंज रही थी

हर एक चीख मेरा कानों में गूंज रही थी ऐसा लग रहा था की हर चीख के साथ मेरे कानों में कोई गरम शिक्षा पिघला के दाल रहा है वह सन देख कर और चीखे सुन कर मेरा गुस्सा बढ़ता जा रहा था लेकिन गाइड की बात को याद करते हुए मेने अपने गुस्से पे काबू किया

जैसे hi मेने अपने गुस्से को काबू किया वैसे hi मेरा शरीर भी आजाद हो गया और वह से निकल गया अभी में चलते हुए सोच रहा था की ये सब आखिर हो क्या रहा है हर कुछ देर बाद मेरे सामने कोई न कोई दृश्य आ जाता जिनका मतलब और उद्देश्य दोनों से hi में अनजान था

अभी में आगे जा रहा था की तभी मेरे सामने फिर से एक दृश्य आ गया जिसमे पैसों के पहाड़ बने हुए थे हर तरफ पैसे सोना हिरे जवाहरात जी सब को देख कर एक बार मेरी भी आखे चौन्धया गयी और मुझे ऐसा लगने लगा की तुरंत जेक उस पुरे खजाने पर अपना हक़ जमा लू गोल्डन साइंस का बीएड बनाकर उसके ऊपर सो जाऊ और ये सब देखके कब मेरे कदम अपने आप उस धन के तरफ चल पड़े मुझे hi पता नहीं पड़ा

अभी में दो कदम चला hi था की तुरंत मुझे रीलीज़ हो गया की में अपने लक्ष्य से भटक रहा हु तोह में तुरंत पीछे हटके उसे इग्नोर कर के दूसरी तरफ चल पड़ा फिर अभी में आगे बढ़ hi रहा था की तभी अगला दृश्य देख कर मेरे कदम वही पे तहर गए

और मेरे मन में हल्का दर भी जनम लेने लग गया था सामने का दृश्य hi कुछ ऐसा था सामने साक्षात नर्क का अनुमान हो रहा था

जिसमे हर तरफ आग लगी हुई थी और हर आग से किसी न किसी के चीखने की आवाज सुनाई दे रही थी साथ में hi वह आग का दरिया भी था जिसमे लोगों को फेका जा रहा था और न मुझे फेकने वालों का चेहरा दिख रहा था और नहीं उनकी आवाज सुनाई दे रही थी बस कुछ सुनाई दे रहा था तोह वह थी दर्द सी बिलखते लोगों की दर्दभरी चीखे जिसे सुनके किसी के भी मन में दर पैदा हो जाये

लेकिन फिर भी हिम्मत करके उस सब को इग्नोर करके आगे बढ़ने लगा लेकिन आगे जाने का रास्ता भी वही सब के बिच में से जा रहा था में जैसे जैसे आगे बढ़ता जा रहा था वैसे hi मेरे कानो में चीखों की आवाज भी गूंजने लगी थी जो की मेरे हर बढ़ते कदम के साथ बढ़ने लगती है

हर बार वह आवाज मेरे अंदर दर का निर्माण कर रही थी लेकिन में भी उन आवाजों को इग्नोर करके उस दर को हिम्मत में बदल के में आगे बढ़ता जा रहा था और देखते hi देखते में उस जगह से भी निकल गया था और अब मेरे सामने मेरा त्रि नेत्र था जो की पूरी तरह से आग की लपटों में लिप्त हुआ था

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आज के लिए इतना hi


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हर बार वह आवाज मेरे अंदर दर का निर्माण कर रही थी लेकिन में भी उन आवाजों को इग्नोर करके उस दर को हिम्मत में बदल के में आगे बढ़ता जा रहा था और देखते hi देखते में उस जगह से भी निकल गया था और अब मेरे सामने मेरा त्रि नेत्र था जो की पूरी तरह से आग की लपटों में लिप्त हुआ था

अभी में उस त्रि नेत्र को देख hi रहा था की तभी उस जगह पर एक के बाद एक ब्लास्ट होने लगे जिनसे वह की जमीं भी अब हिलने लगी थी और तभी वह कुछ ब्लास्ट्स मेरे पास hi में हुए जिनसे बचने के लिए में यहाँ से वह कूदने लगा

लेकिन तुरंत hi वह ब्लास्ट और भी खतरनाक और तेज हो गए जिनसे में और भी तेज़ी से बचने लगा ऐसे hi कुछ देर यहाँ से वह कूदते हुए मुझे जब थोड़ा समय मिला तोह मेने तुरंत hi अपने विजयी धनुष का आव्हान कर दिया जिससे वह धनुष तुरंत मेरे हाथ में प्रकट हो गया

और जैसे hi वह मेरे हाथों में आया वैसे hi ब्लास्ट्स होना भी रुक गए और तुरंत hi जहा जहा आग लगी थी वह भी बुझ गयी अभी में आस पास के वातावरण में आये इंस्टैंस चंगेस से कन्फ्यूज्ड था की तभी

वह जो त्रि नेत्र था वह एक बड़े ब्लास्ट के साथ फैट गया और उससे जो धमाका हुआ उससे में भी दूर जेक गिर गया और जब में उठा तोह सामने का हाल देख कर में और भी ज्यादा शॉकेड हो गया क्यूंकि सामने मेरे जैसे hi देखने वाला एक और लड़का था

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जो की शायद मेरा hi रूप था जब हम दोनों की नज़रे एक दूसरे से टकराई तोह वह लड़का जहा खड़ा था वह से तुरंत कूद के मेरे सामने आ गया

लड़का :- तोह तुम हो इस शरीर के मालिक क्या नाम है तुम्हारा

में :- मेरा नाम है ठाकुर राजवीर प्रताप सिंह वैसे तुम कोण हो जो मेरे शरीर में hi रह कर मुझे नहीं जनता

लड़का :- ोहू इतना बड़ा नाम और रही बात मेरे नाम की तोह मेरा नाम बहुत hi छोटा है डेविल

उसके ये बोलते हुए उसके चेहरे की हैवानियत और आवाज में अहंकार एयर आखों में रक्त सब स्पष्ट रूप से दिख रहा था

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में :- ाचा तोह तुम मेरे डेविल वाले रूप हो यानि तुम मेरे अंदर के बुराई से जन्मे होंगे

डेविल :- कोई एक hi समय पे इतने बुद्धिमान और मुर्ख कैसे हो सकता है ये सच है की में तुम्हारा रूप हो डेविल वाला लेकिन में तुम्हारे बुराई से नहीं बल्कि तुम्हारे बुराई पे काबू पाने से जन्मा हु तुमने मुझे पाया नहीं है और न hi किसीने मुझे तुमको उपहार में दिया है मेने तुम्हे चुना है मेरे शक्तियों के धारक के रूप में तुम मेरे परीक्षा में सफल हुए तभी में तुम्हारे सामने आया

में :- मेरी परीक्षा कब ली तुमने कहा और कैसे

डेविल :- (मुस्कुराते हुए) जब से तुमने इस गुफा में प्रवेश किया है तब से hi में तुम्हारी कोई न कोई परीक्षा ले रहा हूँ

सर्व प्रथम घमंड की परीक्षा जिसमे मेने तुम्हे तुम्हारे शक्तियों के वजह से अगर तुम घमंडी बनते हुए दिखाया आम लोगों को मारते हुए या उस मूर्ति के सहारे लेकिन तुम अपने घमंड को इग्नोर करके आगे बढ़ने में सक्षम रहे

भले hi कुछ समय के लिए तुम्हारे अंदर अहंकार ने जनम लिया था लेकिन अहंकार को तुमने घमंड में बदलने नहीं दिया तोह

वही कामवासना की परीक्षा में भी तुम उत्तीर्ण हुए जहा काम वासना का वह घिनोना खेल देख कर तुम न तोह उत्साहित हुए और न hi तुम्हारे मन में कुछ गलत विचार आया

फिर बारी आती है तुम्हारे क्रोध की जिसे भी तुमने जित लिया फिर लालच, भय और आलस्य इन अवगुणों पर भी तुमने मात दे दी और

फिर बचे 2 अवगुण एक आता है पेटूपन और ईर्ष्या (जलन) जिनसे तोह तुम बचपन से hi कोसो दूर हो इसीलिए

जब तुमने इस संसार के 5 मुख्या पापों पे विजय प् ली तोह ुए पापों का सम्राट तुम्हारे रूप में जन्मा समझे मेरे मुर्ख ठाकुर राजवीर प्रताप सिंह

डेविल की बाते सुनके मेरे पैरों के निचे से जमीं hi खिसक गयी जिन दृश्यों को में अब तक अपने अंदर की बुराइयों का प्रतोरूप मन था वह hi मेरी अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा थी

में :- तुम मुझे राज कह सकते हो और अब क्या में जान सकता हु इस परीक्षा में पास होने के बाद मुझे क्या मिला है

डेविल :- है ज़रूर जैसा मेने कहा पापो का सम्राट हूँ में तोह मुझसे तुम्हे पापों पर नियंत्रण करने की ताकत मिलेगी

में :- पापों पर नियंत्रण करने की ताकत में कुछ समझा नहीं

डेविल :- तुम इस पुरे संसार में जिसे चाहो उसके अंदर पापों का सर्वनाश कर सकते हो या उसके अंदर पाप को फैला सकते हो किसी घमंडी का घमंड तोड़ के उसे विनम्र बना सकते हो या किसी योगी के अंदर क्रोध का प्रवाह करके उसे अति क्रोधी बना सकते हो समझे मेरे मुर्ख राज

में :- ये शक्ति तोह गलत है में कैसे किसी के भी अंदर अवगुणों का प्रवाह कर सकता हु

डेविल :- ोहू मेरे भोले राज तुमसे ये किसने कहा की कोई भी शक्ति गलत या सही है में तुम्हे एक उदहारण से समझाता हूँ जैसे तुम्हारा ये विजयी धनुष तुम्हे ये सवयं देवी माँ ने दिया है और अगर तुम उस धनुष से किसी निर्दोष के रक्षा के लिए तीर चलाओ या किसी निर्दोष के बलि के लिए तीर कभी तुम्हारा आदेश मानेगा खली नहीं जाने देगा तुम जिसे चाहो उसे जहा चाहो वह जैसे चाहो वैसे मारने के लिए इस धनुष का इस्तेमाल करने के लिए सक्षम हो तुम्हे कोई रोक नहीं सकता

वही जहा में डेविल की इस बात को सुनने के बाद गहरी चिंता में डूबा हुआ था की वही दूसरी तरफ दादाजी अपने घर से यानि शेर ग्रह से पुरे परिवार के साथ साथ हमारे कुछ फॅमिली फ्रेंड्स और गांव के कुछ विद्वान् पंडितों के साथ सूरज ग्रह के लिए निकल चुके थे तोह वही नाना ने सुबह hi बिल्ला से बोल के सूरज ग्रह के बीचो बिच में मेरे राज्याभिषेक की तैत्तरी करना आरम्भ कर दिया था जिसे देख के hi पुराने ज़माने की याद आ जाये बिलकुल वैसे hi अद्भुत तरीके से

वही लक्समी और उसके घरवाले भी सूरज ग्रह के तरफ चल पड़े थे लक्समी के डैड और मेरे डैड एक टाइप से बिज़नेस पार्टनर्स है कैसे वह बाद में पता चलेगा

अछि बाते बहुत सुन ली अब बारी है बुराई की

तोह वही मर. नेगेटिव के दोनों चमचों ने बलि की साडी तैयारियां कर दी थी उन्होंने अपने जादुई शक्तियों से एक सुरक्षा घेरा भी उस गोडावण के चारो तरफ बना दिया था जिससे कोई भी बिन बुलाये मेहमान न आये लेकिन कहते है न जब साली किस्मत hi हो गांडू तो क्या करे पाण्डु

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 136



अभी में डेविल से बात करके उसके साथ भी मेरे बाकि के रूपों सामान शक्तियों का सौदा करके में उस अँधेरी गुफा से निकल गया और जैसे hi में उस अँधेरी गुफा से निकला वैसे hi दोनों गुफाओं का नाश हो गया और फिर मेरे सम्पूर्ण अंतर्मन अब मेरे सामने खुल के आ गया था

पहले जो अंतर्मन था वह केवल वह उजाले वाली गुफा तक hi सिमित था लेकिन अब जब की दोनों गुफाओं का नाश हुआ तोह मेरा अंतर्मन जो उन दो गुफाओं में बता हुआ था वह भी अब एकजुट हो गया था जहा अब मेरे सभी रूप भी डेविल से मिल के उसे हमारे टीम में शामिल कर लिया था

तोह वही अब मेरी भी साडी चिंता मिट गयी थी अभी मुझे ये पूरा यकीं हो गया था की में कल रात को जो बलि दी जाने वाली थी उसे रोकने में जरूर यशस्वी रहूँगा फिर मेने अपना ध्यान तोडा तोह पता चला की अभी रात के 1 बज गया था मतलब ध्यान में मुझे 3 घंटे बिट चुके थे तोह फिर में भी अपने कमरे में जेक सो गया जिसके बाद मेरी नींद सीधा सुबह 6 बजे खुलती है

वही इस बिच में जब में नींद के आग़ोश में था तोह तभी मेरे रूम का दरवाजा खुलता है और मेरे रूम में कोई एंटर करता है जैसे hi वह एंटर करता है वैसे hi वह सख्स मेरे रूम का दूर लॉक कर देता है और धीरे धीरे चलते हुए मेरे पास आता है ये शख्स कोई और नहीं रीना दीदी hi थी

कुछ देर पहले अभी में ध्यान लगाकर अपने रूम में एंटर hi करता हूँ की तभी नानाजी के हवेली के बहार कुछ गाड़िया आके रूकती है वह गाड़ियों की स्पीड इतनी स्लो थी की उनके आने पर हलकी सी आवाज भी न हो जब वह गाड़िया रुकी ठीक उसी वक़्त हवेली का गेट भी खुलता है और उसमे से स. मां और बी. मां बहार निकल आते हैं उनके आते hi गाड़ियों के दरवाजे भी खुल जाते है और उन गाड़ियों में कोई और नहीं बल्कि दादाजी और मेरा बाकि परिवार hi था

जो आज मेरे सरप्राइज राज्याभिषेक के लिए और ममी के प्रेगनेंसी के सेलिब्रेशन के लिए जमा हुए थे उसके बाद दोनों मां सब को लेके हवेली के अंदर आते हैं जहा मुझे और ममी को छोड़कर बाकि सभी मौजूद थे

फिर सब लोगों ने कल की साडी प्लानिंग की और फिर सब आराम करने चले गए वही जब सब अपने कमरों में सोने चले गए तोह दीदी भी अपने कमरे में जेक फ्रेश हो गयी और फिर मौका देख के सीधा मेरे कमरे में घुस गयी

अब आगे

अभी दीदी मेरे पास आयी थी की तभी मेरी नींद भी खुल गयी और जब मेने दीदी को अपने पास देखा तोह पहले तोह शॉकेड हो गया लेकिन फिर जल्द hi खुद को संभल के मेने दीदी का हाथ पकड़ के अपने पास खींच लिया और उन्हें अपने बहो में भर लिया मुझे जगा देख दीदी भी शॉकेड हो गयी लेकिन जब मेने उन्हें अपने बहो में भर लिया तोह वह भी सब कुछ भूल के मेरे बाँहों में आ गयी

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दीदी :- तू अभी तक सोया नहीं

में :- (दीदी के गाल चूमते हुए) में तोह सो गया था लेकिन (दीदी के गर्दन को चूमते हुए) आपकी इस मन मोहक खुशबू ने साडी नींद उदा दी

मेरे ऐसे हरकतों से दीदी के अंदर की गर्मी जो इतने दिनों से रुकी हुई थी वह बढ़ने लगी थी जिसका पता मुझे उनकी फूलती हुई सासों से चल गया था और तभी मेरे मन में हलकी मस्ती करने का खाया आया तोह में फिर से दीदी के गर्दन को चूमने लगा और गर्दन को चूमते हुए उनके कान की लोन को भी चूसने लगा था

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दीदी :- क्या कर रहे हो भाई न जाने मेने कब से इस गर्मी को काबू में करके रखा था अब अगर तुम ने आग भड़कायी तो भुझनी भी पड़ेगी

में :- मेने क्या किया में तो बस मेरी दीदी को प्यार कर रहा हूँ

इतना बोलके में फिर से उनके कान को चूसने लगा

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दीदी :- अह्ह्ह में सब जानती हूँ तेरा प्यार अह्ह्ह भाई ऐसे hi बहुत तदपि हूँ तेरे इस प्यार के लिए

इतना बोलके वह तुरंत hi मेरे ऊपर चढ़ गयी और कपड़ों के ऊपर से hi अपनी छूट को मेरे लुंड के ऊपर घिसने लगी और मेरे होठों पे अपने होंठ रख के उन्हें चूमने लगी

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इस वक़्त हम दोनों ने भी लोअर और t-shirt पहने हुए थे

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वही जब दीदी अपनी छूट मेरे लुंड पे घिसने लगी तोह अब मेरे से भी काबू करना मुश्किल हो रहा था और ऐसे में न जाने कब हम दोनों के हाथ किश करते हुए कब एक दूसरे के t-shirt को निकलने लगे जब दीदी ने मेरा t-shirt निकला तोह मेरी बॉडी देख के वह एक दम शॉकेड हो गयी

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क्यूंकि में जब अपने घर से निकला था तब की बॉडी और अब की बॉडी में बहुत डिफरेंस था जैसे जैसे में अपनी शक्तिया बढ़ा रहा था आइए वैसे hi मेरी बॉडी और भी मजबूत और अट्रैक्टिव हो रही थी जिसे देख कर दीदी मेरे होठों को छोड़ के मेरे साइन को चूमने लगी थी

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वही जब मेने दीदी को देखा तोह दीदी ने ब्रा नहीं पहनी थी जिससे उनकी चूचिया अब मेरे सामने थी

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जिसे देख मेरे हाथ उनके चूचियों पे चले गए और उन्हें दबाने लगे

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दीदी :- अह्ह्ह भाई और जोर से दबाओ इन्हे बहुत तकलीफ देते है मुझे इन्हे अह्ह्ह्हह मसल मसल के सजा दो

दीदी की ऐसे बाटे सुनके अब मेरे से भी कण्ट्रोल नहीं हुआ और इस बार में उनके ऊपर चढ़के उनके चुके चूसने लगा जिससे दीदी और भी पागल हो गयी थी वही में अब चूचियों को चूसते हुए धीरे धीरे निचे बढ़ने लगा

फिर दीदी के पेट से होते हुए उनकी नाभि को भी चूसने लगा दीदी तोह कुछ बोल hi नहीं रही थी वह तोह बस सिसकिया ले रही थी वही में नाभि को चूसते हुए अब धीरे से उनके लोअर को भी निचे कर दिया

जब मेने दीदी का लोअर निकला तोह देखा की दीदी में अभी पंतय भी नहीं पहनी थी जिससे उनकी कमसिन सी छूट अब खुल के मेरे सामने आ गयी थी जिसे देख कर में पागल हो रहा था दीदी छूट पर एक भी बाल नहीं था शायद वह आज पूरी तयारी से hi आयी थी

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वही दीदी की बिना बालों वाली छूट देखके मेरे से भी कण्ट्रोल नहीं हुआ और मेने तुरंत hi उसे चुम लिया जैसे hi मेने दीदी की छूट को चूमना स्टार्ट कर दिया तोह दीदी की सिसकिया और भी तेज़ हो गयी थी जिन्हे सुन के मेरे लुंड झटके मारने लगा

जिससे कब मेरे होठ दीदी के छूट पे जा लगे मुझे भी पता नहीं चला और फिर में दीदी के छूट को अपने मुँह में भर के उसे किसी भूखे की तरह चूसने लगा

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अभी मेने दीदी की छूट चूसना शुरू किया hi ता की दीदी तुरंत झाड़ गयी दीदी के काम रास को भी में पि गया और अब न मेरे से सबर हो रहा था न दीदी से

दीदी :- अह्ह्ह भाई अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा है पलासी अब मुझे अपने मुसल से छोड़ डालो पलासी राज

फिर मेने भी अपना लोअर उतर के अपने लुंड को दीदी के मुँह के पास कर दिया जिसका इशारा समझ कर दीदी ने उसे तुरंत hi अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी

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और जब मेरा लुंड दीदी के थूक से पूरा गिला हो गया तोह मेने उसे दीदी के मुँह से निकल के दीदी के छूट में घुसा दिया जिससे दीदी की हलकी चीख निकल गयी

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लेकिन वह चीख बहार निकलती उससे पहले hi मेने अपने होठो को दीदी के होठो पे रख के उस चीख को दबा दिया जिसके बाद में शुरू में हलके हलके ढकों से दीदी को छोड़ने लगा और जब मेरा लुंड दीदी के छूट में फिट हो गया तोह दीदी ने किश तोड़ते हुए बोली

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दीदी :- भाई अब और इंतज़ार नहीं कर सकती तेज़ी से ढके मार अह्ह्ह्हह ऐसे hi अह्ह्ह हां भाई और तेज़

दीदी की बात सुनने के बाद में भी और तेज़ धक्के मार ने लगा जिससे वह और भी ज्यादा तेज़ी से सिसकिया लेने लगी

लेकिन उनकी साडी सिसकियों को मेने अपने मुँह में भर लिया और फिर ऐसे 1 घंटे तक धक्के लगाने के बाद दीदी अब तक 5 बार झाड़ गयी थी और अब मेरा भज होने वाला था इसीलिए मेने अपने ढकों को और तेज़ कर दिया और फिर में दीदी के छूट में hi झाड़ गया और लुंड को छूट से निकाल के वही साइड में ढेर हो गया

फिर ऐसे hi पूरी रात 2 बार और दीदी की चुदाई करने के बाद हम दोनों थक गए थे और फिर वैसे hi नंगे एक दूसरे से चिपक कर सोऊ गए

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आज के लिए इतना hi


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