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Update 089 -
इसी तरह उन लोगों पर नजर रखते और अपने दोस्तों के साथ कॉलेज में मस्ती करते हुए 6 महिने बीत गए थे। एक दिन जब मैं, श्रेया और कबीर श्रेया के घर के पास बाली चाय की टपरी पर सिगरेट पी रहे थे तो कबीर ने बातों ही बातों में मुझे फिर से प्रपोज कर दिया। कबीर की बात सुनकर मैं हंसते हुए बोली
अमृता- लगता है कि तुम नहीं सुधरोगे कबीर…
कबीर- बिल्कुल भी नहीं…
अमृता- अरे यार मैं कितनी बार तुम्हें मना कर चुकी हूँ। फिर भी तुम बार बार मुझे प्रपोज क्यों करते रहते हो।
कबीर- मना करना तुम्हारी मर्जी है… और तुम्हें मनाने की कोशिश करना मेरी जिम्मेदारी। तुम जब तक हाँ नहीं बोल देती मैं कोशिश करता रहूँगा।
अमृता- मैं यहाँ पर बस एक साल का डिप्लोमा कोर्स करने आई हूँ। जिसके 6 महिने तो पहले ही निकल चुके हैं और अगले 6 महिनों बाद मैं कानपुर छोडकर हमेशा के लिए चली जाऊँगी। फिर तुम भला क्या करोगे
मेरी बात सुनकर कबीर चिढते हुए बोला
कबीर- यह तो गलत बात है ना अमृता…..
अमृता- शायद तुम्हारे लिए गलत होगी.. पर मेरे लिए एकदम सही है…..
कबीर- अगर ऐसा है तो मैं तुम्हारे घर पर आकर तुम्हें प्रपोज करूँगा, तुम जहाँ जहाँ जाओगी मैं वहां वहाँ जाकर तुम्हें प्रपोज करता रहूँगा। चाहे इस काम में मेरी सारी जिंदगी ही क्यों ना निकल जाऐ, लेकिन मैं अपनी कोशिश करता रहूँगा।
अमृता- क्यों फालतू में डायलॉग बाजी कर रहे हो…. मेरा इस सब में कोई इंट्रेस्ट नहीं है। तुम अपने लिए कोई दूसरी लडकी क्यों नहीं देख लेते। मेरे पीछे पडकर आखिर में तुम्हारा दिल ही टूटेगा।
कबीर- अपने इस जन्म में तो मैं तुम्हारे अलावा किसी दूसरी लडकी के बारे में सोच भी नहीं सकता।
अमृता- तो क्या सारी जिंदगी कुंवारे रहने का इरादा है….
कबीर- अगर तुम नहीं मानी तो फिर यही करना पडेगा
अमृता- ओह कम ऑन कबीर…. वी प्रैक्टिकल…. मेरे बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो मैं किसी को भी नहीं बता सकती। इसलिए तुम्हारे भले के लिए कह रही हूँ कि मेरा पीछा छोड दो।
कबीर- मुझे कुछ भी नहीं जानना तुम्हारे बारे में…. तुम जैसी भी हो मुझे पसंद हो।
अमृता- तुम बस पत्थऱ पर अपना सर मार रहे हो… मुझ पर तुम्हारी इन बातों का कोई असर नहीं होने बाला।
कबीर- पर क्यों…. आखिर मुझमें कमी क्या है….
अमृता- कोई कमी नहीं है…. इनफेक्ट मैं अब तक की अपनी जिंदगी में जितने भी लडकों से भी मिली हूँ, तुम उन सब में बेस्ट हो।
मेरी बात सुनकर अब तक खामोश बैठी श्रेया भी कबीर का सपोर्ट करते हुए बोली
श्रेया- अगर ऐसी बात है तो एक बार कबीर को मौका देकर तो देखो….
अमृता- नहीं दे सकती बाबा…..
श्रेया- पर क्यों…….
श्रेया की बात सुनकर मैंने मन ही मन सोचा
“अब मैं तुम लोगों को कैसे बताऊँ कि मैं और कबीर सगे भाई बहन है, तो फिल भला मैं कबीर का लव प्रपोजल कैसे एक्सेप्ट कर सकती हूँ”
लेकिन मैं यह बात श्रेया और कबीर से नहीं बोल सकती थी। इसलिए मैं उन दोनों को टालते हुए बोली
अमृता- क्योंकि मेरे अंदर कई सारी कमियाँ हैं…. सच कहूँ तो कबीर हर लडकी की बेस्ट च्वाईस है, लेकिन मैं उसके लायक नहीं हूँ।
श्रेया- क्या बकवास कर रही हो…. तुम्हारे अंदर भला कोई कमी कैसे हो सकती है… मैं इतने दिनों से तुम्हें जानती हूँ, मुझे तो आज तक तुम्हारे अंदर कोई कमी दिखाई नहीं दी।
अमृता- वो इसलिए मेरी जान क्योंकि तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो और फिर मेरे बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो अभी तुम नहीं जानती हो।
कबीर- मुझे नहीं जानना कुछ भी… तुम जैसी भी हो मुझे पसंद हो….
अमृता- यार कबीर समझो ना…. मैं तुम्हारे बारे में बैसा कुछ नहीं सोचती हूँ….
कबीर- तो एक बार सोच कर देखो तो सही….
अमृता- नहीं सोच सकती…….
कबीर- पर क्यों…..
अमृता- क्योंकि जब से मैंने तुम्हारी बहन के बारे में तुमसे सुना है और जब से उसकी फोटो देखी है, तब से मुझे ऐसा महसूस होता है तुम मुझे अपनी बहन की नजर से देखते हो और सच कहूँ तो मेरे अंदर भी तुम्हारे लिए अपने भाई जैसी फीलिंग है।
कबीर- ओह कम ऑन अमृता….. निशा दीदी एक अलग इंशान थी और तुम अलग इंशान हो….. तुम दोनों का बस चेहरा मिलता जुलता है। इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम मेरी बहन ही बन जाओगी।
अमृता- और अगर मैं सच में तुम्हारी बहन होती तो
कबीर- तो भी मैं तुम्हें प्रपोज कर देता…..
अमृता- क्या बकवास कर रहे हो तुम…. कोई भाई भला अपनी बहन को कैसे प्रपोज कर सकता है।
कबीर- आखिर तुम किस जमाने में जी रही हो अमृता… आज कल यह सब बहुत कॉमन हो गया है। तुम न्यूज बगैरह नहीं देखती हो क्या….. आऐ दिन कहीं ना कहीं भाई बहन के आपस में लव अफेयर या शादी की न्यूज आती रहती है।
तभी श्रेया बोली
श्रेया- हाँ कबीर सही बोल रहा है…. तुम नेट पर एडल्ट स्टोरी बाली कोई भी साईट खोलकर देख लो, उनपर इंसिस्ट लव रिलेशन की ढेरों कहानी मिल जाऐंगी। धीरे धीरे इंसिस्ट रिलेशन हमारे देश में भी कॉमन हो रहा है, और फिर तुम्हारे और कबीर बीच तो ऐसा कोई रिलेशन है भी नहीं….
श्रेया की बात सुनकर मैं थोडा चिढते हुए बोली
अमृता- तुम कुछ ज्यादा ही लुच्ची नहीं होती जा रही हो…. अब तो तुम ऑनलाईन साईट पर एडल्ट स्टोली भी पढने लगी हो…. लगता है हरीश अंकल से बोलकर तुम्हारी जल्द से जल्द शादी करवानी पडेगी… बर्ना पता नहीं कब तू अपना मूँह काला करवाकर आ जाओ….
मेरी बात सुनकर श्रेया चिढते हुए बोली
श्रेया- अरे चुपकर मेरी माँ…. अब तुम दोनों के बीच मैं कहाँ से आ गई….. पहले अपना मैटर सॉल्ब कर फिर मेरी शादी की चिंता करना….. बैसे भी तुझे तो पता ही है कि मैंने अपना लाईफ पार्टनर पहले ही चुन लिया है…. अब तेरी बारी है…. तू अच्छी तरह से सोच ले कि तुझे कबीर के साथ अपनी जिंदगी बितानी है या किसी और के साथ……..
श्रेया और कबीर की बातें सुनकर एक पल के लिए तो मैं सकते की हालत में पहुँच गई थी। हाँलाकि मुझे भी पता था कि आज कल इंसिस्ट रिलेशन कॉमन हो गया है। लेकिन मेरा दिल इस बात की गवाही नहीं दे रहा था। तभी मेरे मन में ख्याल आया
“यार बोल तो सही रहे हैं दोनों…. आज कल इंसिस्ट रिलेशन तो कॉफी कॉमन है, बैसे भी यह सच तो केवल मुझे पता है ना कि कवीर और मैं सगे भाई बहन है, दुनिया की नजरों में तो कबीर की बहन यानि निशा तो कब की मर चुकी है और अब मैं अमृता बन गई हूँ, अब जब किसी को इस बारे में कुछ पता ही नहीं चलेगा तो कोई मुझे जज भी नहीं करेगा”
तभी मेरे मन में एक दूसरा ख्याल आया
“अरे यार दुनिया को नहीं पता है, लेकिन तू तो सच जानती है, क्या तू अपने ही भाई के साथ फिजीकल रिलेशन बना सकती है, क्या तेरा दिल गवाही देगा अपने भाई के साथ वो सब करने का”
मेरे मन में यह ख्याल आते ही अगले पल ही मेरे मन ने उसका जबाब भी दे दिया
“अरे यार जब मैं भोपाल में रंडी बनकर अनजान लोगों के साथ सैक्स कर सकती हूँ तो फिर कबीर तो मेरा भाई है, उसके साथ फिजीकल रिलेशन बनाने में क्या प्राब्लम है, तूने तो श्रेया के पिता हरीश अंकल के साथ भी सेक्स किया हुआ है, लेकिन श्रेया तेरी अब भी बेस्ट फ्रेंड है, इसके अलावा तूने अपने से कम उम्र के कई लडकों के साथ सारी सारी राते सेक्स किया है, यहाँ तक की गनपत और जफर के आदमियों ने भी तुझे कुतिया बनाकर तेरा रेप किया हुआ है और तो और तूने चलती बस में, चलती ट्रेन में यहाँ तक की पार्क में भी चुदाई करवाई है, जब यह सब करने में तुझे कुछ गलत नहीं लगा तो भला कबीर के साथ रिलेशनशिप रखने में इतना नखरे क्यों दिखा रही है।”
“हाँ यह बात तो सही है… जब सारी दुनिया इंसिस्ट सेक्स कर रही है तो मुझे भी इसके बारे में सोचने की कोई जरूरत नहीं है, और फिर आज नहीं तो कल मुझे अपना लाईफ पार्टनर चुनना ही है तो, क्यों ना मैं कबीर को ही अपना लाईफ पार्टनर बना लूँ, मैं कबीर को बचपन से जानती भी हूँ, वो एक अच्छा और ईमानदार लडका है, इसलिए वो मुझे कभी धोखा नहीं देगा, साथ ही साथ कबीर के साथ रिलेशनशिप में आने के बाद मैं अपने पिता और भाई के साथ एक बार फिर रह सकूँगी, बस इस बार मेरा किरदार बेटी और बहन की जगह, बहू और पत्नि का होगा।”
“हाँ यार यही सही होगा….. जब भगवान मुझे एक बार फिर अपने परिवार के साथ रहने का मौका दे रहे हैं, तो मुझे इस मौके को ठुकराना नहीं चाहिए, मैं कबीर के साथ अपनी नई जिंदगी शुरू करके हमेशा खुश रहूँगी और मुझे कभी उन लोगों की फिक्र करने की जरूरत भी नहीं पडेगी”
“लेकिन फिर तेरे सीक्रेट ऐजेंट बाले काम का क्या होगा, तू जानती तो है ना कि इस काम के सिलसिले में तुझे दूसरे मर्दों के साथ भी रिलेशन बनाने पड सकते हैं”
“तो फिर अभी मैं कौन सी शरीफ हूं, मैंने अब तक पता नहीं कितने मर्दों की सबारी की है, तो क्या मुझे अपनी जिंदगी नए शिरे से शुरू करने का कोई अधिकार नहीं है, क्या मुझे प्यार करने और खुश रहने का कोई हक नहीं है”
“जो बीत गया सो बीत गया, पर अब तू एक सीक्रेट ऐजेंट है, और सीक्रेट एजेंट बनने के बाद तू कबीर के साथ अपना रिश्ता कैसे निभा पाऐगी, ना तो तू एक अच्छी एजेंट बन पाऐगी और ना ही अच्छी पत्नि”
“नहीं नहीं मैं सब मैनेज कर लूँगी….”
“लेकिन अगर कभी कबीर को मेरी सीक्रेट ऐजेंट बाली आईडेंटिटी पता चल गई, या उसने मुझे किसी और मर्द के साथ रिलेशन बनाते देख लिया तो फिर मैं क्या करूँगी”
“करना क्या है…. एक बार फिर अपनी पहचान बदलकर नए शिरे से फिर से जिंदगी शुरू कर लेना, अब तो तू इस काम में एक्सपर्ट भी हो गई है”
“तो फिर क्या करूँ…. कबीर को हाँ बोल दूँ….. बेचारा कितने दिनों से मेरी हाँ सुनने का इंतजार कर रहा है”
“नहीं नहीं अभी नहीं…. पहले उसे अपने सीक्रेट ऐजेंट होने बाली बात बताकर देखते हैं, अगर वो तुम्हारा सारा सच जानने के बाद भी तुम्हारे साथ अपना रिलेशन रखना चाहता है तो फिर उसे हाँ कर देना”
“पर मैं उसे अपने सीक्रेट ऐंजेट होने के बारे में कैसे बता सकती हूँ, अगर उसने मेरा यह राज सबके सामने खोल दिया तो”
“नहीं वो एक समझदार और भरोसेमंद लडका है, हाँ यह हो सकता है कि वो तेरा राज जानने के बाद तुझसे दूरी बना ले, लेकिन वो तेरा राज किसी को नहीं बताऐगा।”
“हाँ यार इतना भरोसा तो मैं उसपर कर ही सकती हूँ।… तो फिर ठीक है अभी मैं उससे सोचने के लिए कुछ समय माँग लेती हूँ और फिर मौका देखकर उसे अपना सच बता दूँगी। अगर वो तब भी मेरा साथ देगा तो मैं उसे अपना लाईफ पार्टनर बना लूँगी”
मुझे पता ही नहीं चला कि कब कबीर के बारे में सोचते सोचते मेरा चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया था। वहीँ दूसरी तरह श्रेया और कबीर काफी देर से मुझे अपने ही ख्यालों में गुम देखकर काफी ज्यादा हैरान थे। आखिरकार श्रेया ने मुझे झंझोरकर हिलाते हुए कहा
श्रेया- अरे यार अमृता किन ख्यालों में खो गई… और तू इतना ब्लस क्यों कर रही है
श्रेया के यूँ झंझोडने पर मैं अपने होश में बापिस आई और अपनी शर्माहट को छिपाने की कोशिश करते हुए बोली
अमृता- अरे कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही….
कबीर- तो फिर बताओ ना क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी
अमृता- देखो कबीर तुम एक अच्छे लडके हो, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे कुछ ठीक नहीं लगा रहा है…. अगर आगे चलकर कुछ प्राब्लम हुई तो फिर मैं क्या करूँगी…
कबीर- प्राब्लम…. कैसी प्राब्लम…
अमृता- मैंने तुम्हें क्लासरूम में सबके सामने थप्पड मारा था, अगर फ्यूचर में तुमने मुझसे उस बात को लेकर बदला लिया, या मुझे ताना मारा तो फिर मैं क्या करूँगी। मैं एक ऐसी लडकी हूँ जो आसानी से किसी से अपना रिलेशन नहीं बनाती है। लेकिन एक बार अगर कमिटमेंट कर दिया तो फिर सारी जिंदगी निभाती हूँ। अगर फ्यूचर में हमारे बीच कोई मिस अंडरस्टेंडिंग हुई, या झगडा हुआ तो मैं वो सब बरदास्त नहीं कर पाऊँगी।
मेरी बात सुनकर कबीर मुझे समझाते हुए बोला
कबीर- ऐसा कुछ भी नहीं होगा अमृता, ट्रस्ट मी…. हमारे बीच कभी कोई झगडा नहीं होगा, मैं अपनी दीदी की कसम खाता हूँ कि मैं तुम्हें कभी कोई दुख नहीं पहुँचने दूँगा, और रही बात उस दिन क्लासरूम बाली घटना की, तो उसे तो मैं कबका भूल गया था, आज अगर तुम उसका जिक्र नहीं करती तो मुझे वो बात याद भी नहीं आती, बैसे भी उसमें मेरी ही गलती थी, पहले मैंने तुम्हारे साथ गलत हरकत की थी, तुमने तो बस मेरी उस हरकत पर रिऐक्ट किया था, तो भला मैं उस बात का बदला तुमसे क्यों लूँगा
तभी श्रेया भी मुझे समझाते हुए बोली
श्रेया- ओह कम ऑन अमृता अब मान भी जाओ…. कबीर ने जितनी मेहनत तुम्हें अपना बनाने के लिए की है, उतने में तो भगवान भी उससे खुश हो जाते।
श्रेया की बात सुनकर मैं सोचने का नाटक करते हुए बोली
अमृता- उम्म तो ठीक है… लेकिन मुझे इस बारे में सोचने के लिए कुछ समय चाहिए….. और जब तक मैं कोई फैसला नहीं कर लेती, तब तक कबीर मेरे साथ फिजीकल होने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं करेगा और ना ही इसके बारे में किसी से कुछ कहेगा। अगर मंजूर हो तो बोलो… बर्ना रहने देते हैं
मेरी बात सुनकर कबीर तुरंत बोल पडा
कबीर- म मुझे मंजूर है…..
कबीर के इतने फास्ट रिऐक्शन को देखकर श्रेया उसे टोकते हुए बोली
श्रेया- अरे……. तुम तो कुछ ज्यादा ही उताबले दिख रहे हो….. शायद तुमने अमृता की बात को ठीक से समझा नहीं है। फिजीकल से उसका मतलब बैडरूम में बिस्तर के ऊपर होने बाले क्रिया कलाप से नहीं है। बल्कि वो चाहती है कि जब तक वो दिल से तुम्हें एक्सेप्ट ना कर ले, तब तक तुम उसे छूने या किस करने की कोई कोशिश नहीं करोगे और ना ही इस बारे में अपने किसी दोस्त को बताओगे।
श्रेया की बात सुनकर कबीर चिढते हुए बोला
कबीर- तुमने क्या मुझे पागल समझ रखा है….. मैं पहले ही यह बात समझ गया था….
श्रेया- तो फिर तुम्हें उसकी शर्त मंजूर है…
कबीर- हाँ हाँ बिल्कुल…. बैसे भी मेरे पास हाँ कहने के अलावा कोई दूसरा रास्ता है क्या….
कबीर की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली
अमृता- हाँ है ना…. तुम मुझसे मना कर सकते हो
कबीर- कोई जरूरत नहीं है मना करने की….. बैसे भी तुम्हारे रिजेक्शन से अच्छा तो यही है कि मैं तुम्हारे हाँ कहने का इंतजार करूँ…. कम से कम तुम्हें अपना बनाने की एक उम्मीद तो है मेरे पास, अब जब मैंने इतने दिनों तक इंतजार किया है तो कुछ दिन और सही……
कबीर का जबाब सुनकर मेरी और श्रेया की हंसी छूट गई… क्योंकि हम दोनों को कबीर से इसी तरह के जबाब की उम्मीद थी।
कहानी जारी है.............
इसी तरह उन लोगों पर नजर रखते और अपने दोस्तों के साथ कॉलेज में मस्ती करते हुए 6 महिने बीत गए थे। एक दिन जब मैं, श्रेया और कबीर श्रेया के घर के पास बाली चाय की टपरी पर सिगरेट पी रहे थे तो कबीर ने बातों ही बातों में मुझे फिर से प्रपोज कर दिया। कबीर की बात सुनकर मैं हंसते हुए बोली
अमृता- लगता है कि तुम नहीं सुधरोगे कबीर…
कबीर- बिल्कुल भी नहीं…
अमृता- अरे यार मैं कितनी बार तुम्हें मना कर चुकी हूँ। फिर भी तुम बार बार मुझे प्रपोज क्यों करते रहते हो।
कबीर- मना करना तुम्हारी मर्जी है… और तुम्हें मनाने की कोशिश करना मेरी जिम्मेदारी। तुम जब तक हाँ नहीं बोल देती मैं कोशिश करता रहूँगा।
अमृता- मैं यहाँ पर बस एक साल का डिप्लोमा कोर्स करने आई हूँ। जिसके 6 महिने तो पहले ही निकल चुके हैं और अगले 6 महिनों बाद मैं कानपुर छोडकर हमेशा के लिए चली जाऊँगी। फिर तुम भला क्या करोगे
मेरी बात सुनकर कबीर चिढते हुए बोला
कबीर- यह तो गलत बात है ना अमृता…..
अमृता- शायद तुम्हारे लिए गलत होगी.. पर मेरे लिए एकदम सही है…..
कबीर- अगर ऐसा है तो मैं तुम्हारे घर पर आकर तुम्हें प्रपोज करूँगा, तुम जहाँ जहाँ जाओगी मैं वहां वहाँ जाकर तुम्हें प्रपोज करता रहूँगा। चाहे इस काम में मेरी सारी जिंदगी ही क्यों ना निकल जाऐ, लेकिन मैं अपनी कोशिश करता रहूँगा।
अमृता- क्यों फालतू में डायलॉग बाजी कर रहे हो…. मेरा इस सब में कोई इंट्रेस्ट नहीं है। तुम अपने लिए कोई दूसरी लडकी क्यों नहीं देख लेते। मेरे पीछे पडकर आखिर में तुम्हारा दिल ही टूटेगा।
कबीर- अपने इस जन्म में तो मैं तुम्हारे अलावा किसी दूसरी लडकी के बारे में सोच भी नहीं सकता।
अमृता- तो क्या सारी जिंदगी कुंवारे रहने का इरादा है….
कबीर- अगर तुम नहीं मानी तो फिर यही करना पडेगा
अमृता- ओह कम ऑन कबीर…. वी प्रैक्टिकल…. मेरे बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो मैं किसी को भी नहीं बता सकती। इसलिए तुम्हारे भले के लिए कह रही हूँ कि मेरा पीछा छोड दो।
कबीर- मुझे कुछ भी नहीं जानना तुम्हारे बारे में…. तुम जैसी भी हो मुझे पसंद हो।
अमृता- तुम बस पत्थऱ पर अपना सर मार रहे हो… मुझ पर तुम्हारी इन बातों का कोई असर नहीं होने बाला।
कबीर- पर क्यों…. आखिर मुझमें कमी क्या है….
अमृता- कोई कमी नहीं है…. इनफेक्ट मैं अब तक की अपनी जिंदगी में जितने भी लडकों से भी मिली हूँ, तुम उन सब में बेस्ट हो।
मेरी बात सुनकर अब तक खामोश बैठी श्रेया भी कबीर का सपोर्ट करते हुए बोली
श्रेया- अगर ऐसी बात है तो एक बार कबीर को मौका देकर तो देखो….
अमृता- नहीं दे सकती बाबा…..
श्रेया- पर क्यों…….
श्रेया की बात सुनकर मैंने मन ही मन सोचा
“अब मैं तुम लोगों को कैसे बताऊँ कि मैं और कबीर सगे भाई बहन है, तो फिल भला मैं कबीर का लव प्रपोजल कैसे एक्सेप्ट कर सकती हूँ”
लेकिन मैं यह बात श्रेया और कबीर से नहीं बोल सकती थी। इसलिए मैं उन दोनों को टालते हुए बोली
अमृता- क्योंकि मेरे अंदर कई सारी कमियाँ हैं…. सच कहूँ तो कबीर हर लडकी की बेस्ट च्वाईस है, लेकिन मैं उसके लायक नहीं हूँ।
श्रेया- क्या बकवास कर रही हो…. तुम्हारे अंदर भला कोई कमी कैसे हो सकती है… मैं इतने दिनों से तुम्हें जानती हूँ, मुझे तो आज तक तुम्हारे अंदर कोई कमी दिखाई नहीं दी।
अमृता- वो इसलिए मेरी जान क्योंकि तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो और फिर मेरे बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो अभी तुम नहीं जानती हो।
कबीर- मुझे नहीं जानना कुछ भी… तुम जैसी भी हो मुझे पसंद हो….
अमृता- यार कबीर समझो ना…. मैं तुम्हारे बारे में बैसा कुछ नहीं सोचती हूँ….
कबीर- तो एक बार सोच कर देखो तो सही….
अमृता- नहीं सोच सकती…….
कबीर- पर क्यों…..
अमृता- क्योंकि जब से मैंने तुम्हारी बहन के बारे में तुमसे सुना है और जब से उसकी फोटो देखी है, तब से मुझे ऐसा महसूस होता है तुम मुझे अपनी बहन की नजर से देखते हो और सच कहूँ तो मेरे अंदर भी तुम्हारे लिए अपने भाई जैसी फीलिंग है।
कबीर- ओह कम ऑन अमृता….. निशा दीदी एक अलग इंशान थी और तुम अलग इंशान हो….. तुम दोनों का बस चेहरा मिलता जुलता है। इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम मेरी बहन ही बन जाओगी।
अमृता- और अगर मैं सच में तुम्हारी बहन होती तो
कबीर- तो भी मैं तुम्हें प्रपोज कर देता…..
अमृता- क्या बकवास कर रहे हो तुम…. कोई भाई भला अपनी बहन को कैसे प्रपोज कर सकता है।
कबीर- आखिर तुम किस जमाने में जी रही हो अमृता… आज कल यह सब बहुत कॉमन हो गया है। तुम न्यूज बगैरह नहीं देखती हो क्या….. आऐ दिन कहीं ना कहीं भाई बहन के आपस में लव अफेयर या शादी की न्यूज आती रहती है।
तभी श्रेया बोली
श्रेया- हाँ कबीर सही बोल रहा है…. तुम नेट पर एडल्ट स्टोरी बाली कोई भी साईट खोलकर देख लो, उनपर इंसिस्ट लव रिलेशन की ढेरों कहानी मिल जाऐंगी। धीरे धीरे इंसिस्ट रिलेशन हमारे देश में भी कॉमन हो रहा है, और फिर तुम्हारे और कबीर बीच तो ऐसा कोई रिलेशन है भी नहीं….
श्रेया की बात सुनकर मैं थोडा चिढते हुए बोली
अमृता- तुम कुछ ज्यादा ही लुच्ची नहीं होती जा रही हो…. अब तो तुम ऑनलाईन साईट पर एडल्ट स्टोली भी पढने लगी हो…. लगता है हरीश अंकल से बोलकर तुम्हारी जल्द से जल्द शादी करवानी पडेगी… बर्ना पता नहीं कब तू अपना मूँह काला करवाकर आ जाओ….
मेरी बात सुनकर श्रेया चिढते हुए बोली
श्रेया- अरे चुपकर मेरी माँ…. अब तुम दोनों के बीच मैं कहाँ से आ गई….. पहले अपना मैटर सॉल्ब कर फिर मेरी शादी की चिंता करना….. बैसे भी तुझे तो पता ही है कि मैंने अपना लाईफ पार्टनर पहले ही चुन लिया है…. अब तेरी बारी है…. तू अच्छी तरह से सोच ले कि तुझे कबीर के साथ अपनी जिंदगी बितानी है या किसी और के साथ……..
श्रेया और कबीर की बातें सुनकर एक पल के लिए तो मैं सकते की हालत में पहुँच गई थी। हाँलाकि मुझे भी पता था कि आज कल इंसिस्ट रिलेशन कॉमन हो गया है। लेकिन मेरा दिल इस बात की गवाही नहीं दे रहा था। तभी मेरे मन में ख्याल आया
“यार बोल तो सही रहे हैं दोनों…. आज कल इंसिस्ट रिलेशन तो कॉफी कॉमन है, बैसे भी यह सच तो केवल मुझे पता है ना कि कवीर और मैं सगे भाई बहन है, दुनिया की नजरों में तो कबीर की बहन यानि निशा तो कब की मर चुकी है और अब मैं अमृता बन गई हूँ, अब जब किसी को इस बारे में कुछ पता ही नहीं चलेगा तो कोई मुझे जज भी नहीं करेगा”
तभी मेरे मन में एक दूसरा ख्याल आया
“अरे यार दुनिया को नहीं पता है, लेकिन तू तो सच जानती है, क्या तू अपने ही भाई के साथ फिजीकल रिलेशन बना सकती है, क्या तेरा दिल गवाही देगा अपने भाई के साथ वो सब करने का”
मेरे मन में यह ख्याल आते ही अगले पल ही मेरे मन ने उसका जबाब भी दे दिया
“अरे यार जब मैं भोपाल में रंडी बनकर अनजान लोगों के साथ सैक्स कर सकती हूँ तो फिर कबीर तो मेरा भाई है, उसके साथ फिजीकल रिलेशन बनाने में क्या प्राब्लम है, तूने तो श्रेया के पिता हरीश अंकल के साथ भी सेक्स किया हुआ है, लेकिन श्रेया तेरी अब भी बेस्ट फ्रेंड है, इसके अलावा तूने अपने से कम उम्र के कई लडकों के साथ सारी सारी राते सेक्स किया है, यहाँ तक की गनपत और जफर के आदमियों ने भी तुझे कुतिया बनाकर तेरा रेप किया हुआ है और तो और तूने चलती बस में, चलती ट्रेन में यहाँ तक की पार्क में भी चुदाई करवाई है, जब यह सब करने में तुझे कुछ गलत नहीं लगा तो भला कबीर के साथ रिलेशनशिप रखने में इतना नखरे क्यों दिखा रही है।”
“हाँ यह बात तो सही है… जब सारी दुनिया इंसिस्ट सेक्स कर रही है तो मुझे भी इसके बारे में सोचने की कोई जरूरत नहीं है, और फिर आज नहीं तो कल मुझे अपना लाईफ पार्टनर चुनना ही है तो, क्यों ना मैं कबीर को ही अपना लाईफ पार्टनर बना लूँ, मैं कबीर को बचपन से जानती भी हूँ, वो एक अच्छा और ईमानदार लडका है, इसलिए वो मुझे कभी धोखा नहीं देगा, साथ ही साथ कबीर के साथ रिलेशनशिप में आने के बाद मैं अपने पिता और भाई के साथ एक बार फिर रह सकूँगी, बस इस बार मेरा किरदार बेटी और बहन की जगह, बहू और पत्नि का होगा।”
“हाँ यार यही सही होगा….. जब भगवान मुझे एक बार फिर अपने परिवार के साथ रहने का मौका दे रहे हैं, तो मुझे इस मौके को ठुकराना नहीं चाहिए, मैं कबीर के साथ अपनी नई जिंदगी शुरू करके हमेशा खुश रहूँगी और मुझे कभी उन लोगों की फिक्र करने की जरूरत भी नहीं पडेगी”
“लेकिन फिर तेरे सीक्रेट ऐजेंट बाले काम का क्या होगा, तू जानती तो है ना कि इस काम के सिलसिले में तुझे दूसरे मर्दों के साथ भी रिलेशन बनाने पड सकते हैं”
“तो फिर अभी मैं कौन सी शरीफ हूं, मैंने अब तक पता नहीं कितने मर्दों की सबारी की है, तो क्या मुझे अपनी जिंदगी नए शिरे से शुरू करने का कोई अधिकार नहीं है, क्या मुझे प्यार करने और खुश रहने का कोई हक नहीं है”
“जो बीत गया सो बीत गया, पर अब तू एक सीक्रेट ऐजेंट है, और सीक्रेट एजेंट बनने के बाद तू कबीर के साथ अपना रिश्ता कैसे निभा पाऐगी, ना तो तू एक अच्छी एजेंट बन पाऐगी और ना ही अच्छी पत्नि”
“नहीं नहीं मैं सब मैनेज कर लूँगी….”
“लेकिन अगर कभी कबीर को मेरी सीक्रेट ऐजेंट बाली आईडेंटिटी पता चल गई, या उसने मुझे किसी और मर्द के साथ रिलेशन बनाते देख लिया तो फिर मैं क्या करूँगी”
“करना क्या है…. एक बार फिर अपनी पहचान बदलकर नए शिरे से फिर से जिंदगी शुरू कर लेना, अब तो तू इस काम में एक्सपर्ट भी हो गई है”
“तो फिर क्या करूँ…. कबीर को हाँ बोल दूँ….. बेचारा कितने दिनों से मेरी हाँ सुनने का इंतजार कर रहा है”
“नहीं नहीं अभी नहीं…. पहले उसे अपने सीक्रेट ऐजेंट होने बाली बात बताकर देखते हैं, अगर वो तुम्हारा सारा सच जानने के बाद भी तुम्हारे साथ अपना रिलेशन रखना चाहता है तो फिर उसे हाँ कर देना”
“पर मैं उसे अपने सीक्रेट ऐंजेट होने के बारे में कैसे बता सकती हूँ, अगर उसने मेरा यह राज सबके सामने खोल दिया तो”
“नहीं वो एक समझदार और भरोसेमंद लडका है, हाँ यह हो सकता है कि वो तेरा राज जानने के बाद तुझसे दूरी बना ले, लेकिन वो तेरा राज किसी को नहीं बताऐगा।”
“हाँ यार इतना भरोसा तो मैं उसपर कर ही सकती हूँ।… तो फिर ठीक है अभी मैं उससे सोचने के लिए कुछ समय माँग लेती हूँ और फिर मौका देखकर उसे अपना सच बता दूँगी। अगर वो तब भी मेरा साथ देगा तो मैं उसे अपना लाईफ पार्टनर बना लूँगी”
मुझे पता ही नहीं चला कि कब कबीर के बारे में सोचते सोचते मेरा चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया था। वहीँ दूसरी तरह श्रेया और कबीर काफी देर से मुझे अपने ही ख्यालों में गुम देखकर काफी ज्यादा हैरान थे। आखिरकार श्रेया ने मुझे झंझोरकर हिलाते हुए कहा
श्रेया- अरे यार अमृता किन ख्यालों में खो गई… और तू इतना ब्लस क्यों कर रही है
श्रेया के यूँ झंझोडने पर मैं अपने होश में बापिस आई और अपनी शर्माहट को छिपाने की कोशिश करते हुए बोली
अमृता- अरे कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही….
कबीर- तो फिर बताओ ना क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी
अमृता- देखो कबीर तुम एक अच्छे लडके हो, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे कुछ ठीक नहीं लगा रहा है…. अगर आगे चलकर कुछ प्राब्लम हुई तो फिर मैं क्या करूँगी…
कबीर- प्राब्लम…. कैसी प्राब्लम…
अमृता- मैंने तुम्हें क्लासरूम में सबके सामने थप्पड मारा था, अगर फ्यूचर में तुमने मुझसे उस बात को लेकर बदला लिया, या मुझे ताना मारा तो फिर मैं क्या करूँगी। मैं एक ऐसी लडकी हूँ जो आसानी से किसी से अपना रिलेशन नहीं बनाती है। लेकिन एक बार अगर कमिटमेंट कर दिया तो फिर सारी जिंदगी निभाती हूँ। अगर फ्यूचर में हमारे बीच कोई मिस अंडरस्टेंडिंग हुई, या झगडा हुआ तो मैं वो सब बरदास्त नहीं कर पाऊँगी।
मेरी बात सुनकर कबीर मुझे समझाते हुए बोला
कबीर- ऐसा कुछ भी नहीं होगा अमृता, ट्रस्ट मी…. हमारे बीच कभी कोई झगडा नहीं होगा, मैं अपनी दीदी की कसम खाता हूँ कि मैं तुम्हें कभी कोई दुख नहीं पहुँचने दूँगा, और रही बात उस दिन क्लासरूम बाली घटना की, तो उसे तो मैं कबका भूल गया था, आज अगर तुम उसका जिक्र नहीं करती तो मुझे वो बात याद भी नहीं आती, बैसे भी उसमें मेरी ही गलती थी, पहले मैंने तुम्हारे साथ गलत हरकत की थी, तुमने तो बस मेरी उस हरकत पर रिऐक्ट किया था, तो भला मैं उस बात का बदला तुमसे क्यों लूँगा
तभी श्रेया भी मुझे समझाते हुए बोली
श्रेया- ओह कम ऑन अमृता अब मान भी जाओ…. कबीर ने जितनी मेहनत तुम्हें अपना बनाने के लिए की है, उतने में तो भगवान भी उससे खुश हो जाते।
श्रेया की बात सुनकर मैं सोचने का नाटक करते हुए बोली
अमृता- उम्म तो ठीक है… लेकिन मुझे इस बारे में सोचने के लिए कुछ समय चाहिए….. और जब तक मैं कोई फैसला नहीं कर लेती, तब तक कबीर मेरे साथ फिजीकल होने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं करेगा और ना ही इसके बारे में किसी से कुछ कहेगा। अगर मंजूर हो तो बोलो… बर्ना रहने देते हैं
मेरी बात सुनकर कबीर तुरंत बोल पडा
कबीर- म मुझे मंजूर है…..
कबीर के इतने फास्ट रिऐक्शन को देखकर श्रेया उसे टोकते हुए बोली
श्रेया- अरे……. तुम तो कुछ ज्यादा ही उताबले दिख रहे हो….. शायद तुमने अमृता की बात को ठीक से समझा नहीं है। फिजीकल से उसका मतलब बैडरूम में बिस्तर के ऊपर होने बाले क्रिया कलाप से नहीं है। बल्कि वो चाहती है कि जब तक वो दिल से तुम्हें एक्सेप्ट ना कर ले, तब तक तुम उसे छूने या किस करने की कोई कोशिश नहीं करोगे और ना ही इस बारे में अपने किसी दोस्त को बताओगे।
श्रेया की बात सुनकर कबीर चिढते हुए बोला
कबीर- तुमने क्या मुझे पागल समझ रखा है….. मैं पहले ही यह बात समझ गया था….
श्रेया- तो फिर तुम्हें उसकी शर्त मंजूर है…
कबीर- हाँ हाँ बिल्कुल…. बैसे भी मेरे पास हाँ कहने के अलावा कोई दूसरा रास्ता है क्या….
कबीर की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली
अमृता- हाँ है ना…. तुम मुझसे मना कर सकते हो
कबीर- कोई जरूरत नहीं है मना करने की….. बैसे भी तुम्हारे रिजेक्शन से अच्छा तो यही है कि मैं तुम्हारे हाँ कहने का इंतजार करूँ…. कम से कम तुम्हें अपना बनाने की एक उम्मीद तो है मेरे पास, अब जब मैंने इतने दिनों तक इंतजार किया है तो कुछ दिन और सही……
कबीर का जबाब सुनकर मेरी और श्रेया की हंसी छूट गई… क्योंकि हम दोनों को कबीर से इसी तरह के जबाब की उम्मीद थी।
कहानी जारी है.............