Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम) - Page 11 - SexBaba
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Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

Update 089 -

इसी तरह उन लोगों पर नजर रखते और अपने दोस्तों के साथ कॉलेज में मस्ती करते हुए 6 महिने बीत गए थे। एक दिन जब मैं, श्रेया और कबीर श्रेया के घर के पास बाली चाय की टपरी पर सिगरेट पी रहे थे तो कबीर ने बातों ही बातों में मुझे फिर से प्रपोज कर दिया। कबीर की बात सुनकर मैं हंसते हुए बोली

अमृता- लगता है कि तुम नहीं सुधरोगे कबीर…

कबीर- बिल्कुल भी नहीं…

अमृता- अरे यार मैं कितनी बार तुम्हें मना कर चुकी हूँ। फिर भी तुम बार बार मुझे प्रपोज क्यों करते रहते हो।

कबीर- मना करना तुम्हारी मर्जी है… और तुम्हें मनाने की कोशिश करना मेरी जिम्मेदारी। तुम जब तक हाँ नहीं बोल देती मैं कोशिश करता रहूँगा।

अमृता- मैं यहाँ पर बस एक साल का डिप्लोमा कोर्स करने आई हूँ। जिसके 6 महिने तो पहले ही निकल चुके हैं और अगले 6 महिनों बाद मैं कानपुर छोडकर हमेशा के लिए चली जाऊँगी। फिर तुम भला क्या करोगे

मेरी बात सुनकर कबीर चिढते हुए बोला

कबीर- यह तो गलत बात है ना अमृता…..

अमृता- शायद तुम्हारे लिए गलत होगी.. पर मेरे लिए एकदम सही है…..

कबीर- अगर ऐसा है तो मैं तुम्हारे घर पर आकर तुम्हें प्रपोज करूँगा, तुम जहाँ जहाँ जाओगी मैं वहां वहाँ जाकर तुम्हें प्रपोज करता रहूँगा। चाहे इस काम में मेरी सारी जिंदगी ही क्यों ना निकल जाऐ, लेकिन मैं अपनी कोशिश करता रहूँगा।

अमृता- क्यों फालतू में डायलॉग बाजी कर रहे हो…. मेरा इस सब में कोई इंट्रेस्ट नहीं है। तुम अपने लिए कोई दूसरी लडकी क्यों नहीं देख लेते। मेरे पीछे पडकर आखिर में तुम्हारा दिल ही टूटेगा।

कबीर- अपने इस जन्म में तो मैं तुम्हारे अलावा किसी दूसरी लडकी के बारे में सोच भी नहीं सकता।

अमृता- तो क्या सारी जिंदगी कुंवारे रहने का इरादा है….

कबीर- अगर तुम नहीं मानी तो फिर यही करना पडेगा

अमृता- ओह कम ऑन कबीर…. वी प्रैक्टिकल…. मेरे बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो मैं किसी को भी नहीं बता सकती। इसलिए तुम्हारे भले के लिए कह रही हूँ कि मेरा पीछा छोड दो।

कबीर- मुझे कुछ भी नहीं जानना तुम्हारे बारे में…. तुम जैसी भी हो मुझे पसंद हो।

अमृता- तुम बस पत्थऱ पर अपना सर मार रहे हो… मुझ पर तुम्हारी इन बातों का कोई असर नहीं होने बाला।

कबीर- पर क्यों…. आखिर मुझमें कमी क्या है….

अमृता- कोई कमी नहीं है…. इनफेक्ट मैं अब तक की अपनी जिंदगी में जितने भी लडकों से भी मिली हूँ, तुम उन सब में बेस्ट हो।

मेरी बात सुनकर अब तक खामोश बैठी श्रेया भी कबीर का सपोर्ट करते हुए बोली

श्रेया- अगर ऐसी बात है तो एक बार कबीर को मौका देकर तो देखो….

अमृता- नहीं दे सकती बाबा…..

श्रेया- पर क्यों…….

श्रेया की बात सुनकर मैंने मन ही मन सोचा

“अब मैं तुम लोगों को कैसे बताऊँ कि मैं और कबीर सगे भाई बहन है, तो फिल भला मैं कबीर का लव प्रपोजल कैसे एक्सेप्ट कर सकती हूँ”

लेकिन मैं यह बात श्रेया और कबीर से नहीं बोल सकती थी। इसलिए मैं उन दोनों को टालते हुए बोली

अमृता- क्योंकि मेरे अंदर कई सारी कमियाँ हैं…. सच कहूँ तो कबीर हर लडकी की बेस्ट च्वाईस है, लेकिन मैं उसके लायक नहीं हूँ।

श्रेया- क्या बकवास कर रही हो…. तुम्हारे अंदर भला कोई कमी कैसे हो सकती है… मैं इतने दिनों से तुम्हें जानती हूँ, मुझे तो आज तक तुम्हारे अंदर कोई कमी दिखाई नहीं दी।

अमृता- वो इसलिए मेरी जान क्योंकि तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो और फिर मेरे बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो अभी तुम नहीं जानती हो।

कबीर- मुझे नहीं जानना कुछ भी… तुम जैसी भी हो मुझे पसंद हो….

अमृता- यार कबीर समझो ना…. मैं तुम्हारे बारे में बैसा कुछ नहीं सोचती हूँ….

कबीर- तो एक बार सोच कर देखो तो सही….

अमृता- नहीं सोच सकती…….

कबीर- पर क्यों…..

अमृता- क्योंकि जब से मैंने तुम्हारी बहन के बारे में तुमसे सुना है और जब से उसकी फोटो देखी है, तब से मुझे ऐसा महसूस होता है तुम मुझे अपनी बहन की नजर से देखते हो और सच कहूँ तो मेरे अंदर भी तुम्हारे लिए अपने भाई जैसी फीलिंग है।

कबीर- ओह कम ऑन अमृता….. निशा दीदी एक अलग इंशान थी और तुम अलग इंशान हो….. तुम दोनों का बस चेहरा मिलता जुलता है। इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम मेरी बहन ही बन जाओगी।

अमृता- और अगर मैं सच में तुम्हारी बहन होती तो

कबीर- तो भी मैं तुम्हें प्रपोज कर देता…..

अमृता- क्या बकवास कर रहे हो तुम…. कोई भाई भला अपनी बहन को कैसे प्रपोज कर सकता है।

कबीर- आखिर तुम किस जमाने में जी रही हो अमृता… आज कल यह सब बहुत कॉमन हो गया है। तुम न्यूज बगैरह नहीं देखती हो क्या….. आऐ दिन कहीं ना कहीं भाई बहन के आपस में लव अफेयर या शादी की न्यूज आती रहती है।

तभी श्रेया बोली

श्रेया- हाँ कबीर सही बोल रहा है…. तुम नेट पर एडल्ट स्टोरी बाली कोई भी साईट खोलकर देख लो, उनपर इंसिस्ट लव रिलेशन की ढेरों कहानी मिल जाऐंगी। धीरे धीरे इंसिस्ट रिलेशन हमारे देश में भी कॉमन हो रहा है, और फिर तुम्हारे और कबीर बीच तो ऐसा कोई रिलेशन है भी नहीं….

श्रेया की बात सुनकर मैं थोडा चिढते हुए बोली

अमृता- तुम कुछ ज्यादा ही लुच्ची नहीं होती जा रही हो…. अब तो तुम ऑनलाईन साईट पर एडल्ट स्टोली भी पढने लगी हो…. लगता है हरीश अंकल से बोलकर तुम्हारी जल्द से जल्द शादी करवानी पडेगी… बर्ना पता नहीं कब तू अपना मूँह काला करवाकर आ जाओ….

मेरी बात सुनकर श्रेया चिढते हुए बोली

श्रेया- अरे चुपकर मेरी माँ…. अब तुम दोनों के बीच मैं कहाँ से आ गई….. पहले अपना मैटर सॉल्ब कर फिर मेरी शादी की चिंता करना….. बैसे भी तुझे तो पता ही है कि मैंने अपना लाईफ पार्टनर पहले ही चुन लिया है…. अब तेरी बारी है…. तू अच्छी तरह से सोच ले कि तुझे कबीर के साथ अपनी जिंदगी बितानी है या किसी और के साथ……..

श्रेया और कबीर की बातें सुनकर एक पल के लिए तो मैं सकते की हालत में पहुँच गई थी। हाँलाकि मुझे भी पता था कि आज कल इंसिस्ट रिलेशन कॉमन हो गया है। लेकिन मेरा दिल इस बात की गवाही नहीं दे रहा था। तभी मेरे मन में ख्याल आया

“यार बोल तो सही रहे हैं दोनों…. आज कल इंसिस्ट रिलेशन तो कॉफी कॉमन है, बैसे भी यह सच तो केवल मुझे पता है ना कि कवीर और मैं सगे भाई बहन है, दुनिया की नजरों में तो कबीर की बहन यानि निशा तो कब की मर चुकी है और अब मैं अमृता बन गई हूँ, अब जब किसी को इस बारे में कुछ पता ही नहीं चलेगा तो कोई मुझे जज भी नहीं करेगा”

तभी मेरे मन में एक दूसरा ख्याल आया

“अरे यार दुनिया को नहीं पता है, लेकिन तू तो सच जानती है, क्या तू अपने ही भाई के साथ फिजीकल रिलेशन बना सकती है, क्या तेरा दिल गवाही देगा अपने भाई के साथ वो सब करने का”

मेरे मन में यह ख्याल आते ही अगले पल ही मेरे मन ने उसका जबाब भी दे दिया

“अरे यार जब मैं भोपाल में रंडी बनकर अनजान लोगों के साथ सैक्स कर सकती हूँ तो फिर कबीर तो मेरा भाई है, उसके साथ फिजीकल रिलेशन बनाने में क्या प्राब्लम है, तूने तो श्रेया के पिता हरीश अंकल के साथ भी सेक्स किया हुआ है, लेकिन श्रेया तेरी अब भी बेस्ट फ्रेंड है, इसके अलावा तूने अपने से कम उम्र के कई लडकों के साथ सारी सारी राते सेक्स किया है, यहाँ तक की गनपत और जफर के आदमियों ने भी तुझे कुतिया बनाकर तेरा रेप किया हुआ है और तो और तूने चलती बस में, चलती ट्रेन में यहाँ तक की पार्क में भी चुदाई करवाई है, जब यह सब करने में तुझे कुछ गलत नहीं लगा तो भला कबीर के साथ रिलेशनशिप रखने में इतना नखरे क्यों दिखा रही है।”

“हाँ यह बात तो सही है… जब सारी दुनिया इंसिस्ट सेक्स कर रही है तो मुझे भी इसके बारे में सोचने की कोई जरूरत नहीं है, और फिर आज नहीं तो कल मुझे अपना लाईफ पार्टनर चुनना ही है तो, क्यों ना मैं कबीर को ही अपना लाईफ पार्टनर बना लूँ, मैं कबीर को बचपन से जानती भी हूँ, वो एक अच्छा और ईमानदार लडका है, इसलिए वो मुझे कभी धोखा नहीं देगा, साथ ही साथ कबीर के साथ रिलेशनशिप में आने के बाद मैं अपने पिता और भाई के साथ एक बार फिर रह सकूँगी, बस इस बार मेरा किरदार बेटी और बहन की जगह, बहू और पत्नि का होगा।”

“हाँ यार यही सही होगा….. जब भगवान मुझे एक बार फिर अपने परिवार के साथ रहने का मौका दे रहे हैं, तो मुझे इस मौके को ठुकराना नहीं चाहिए, मैं कबीर के साथ अपनी नई जिंदगी शुरू करके हमेशा खुश रहूँगी और मुझे कभी उन लोगों की फिक्र करने की जरूरत भी नहीं पडेगी”

“लेकिन फिर तेरे सीक्रेट ऐजेंट बाले काम का क्या होगा, तू जानती तो है ना कि इस काम के सिलसिले में तुझे दूसरे मर्दों के साथ भी रिलेशन बनाने पड सकते हैं”

“तो फिर अभी मैं कौन सी शरीफ हूं, मैंने अब तक पता नहीं कितने मर्दों की सबारी की है, तो क्या मुझे अपनी जिंदगी नए शिरे से शुरू करने का कोई अधिकार नहीं है, क्या मुझे प्यार करने और खुश रहने का कोई हक नहीं है”

“जो बीत गया सो बीत गया, पर अब तू एक सीक्रेट ऐजेंट है, और सीक्रेट एजेंट बनने के बाद तू कबीर के साथ अपना रिश्ता कैसे निभा पाऐगी, ना तो तू एक अच्छी एजेंट बन पाऐगी और ना ही अच्छी पत्नि”

“नहीं नहीं मैं सब मैनेज कर लूँगी….”

“लेकिन अगर कभी कबीर को मेरी सीक्रेट ऐजेंट बाली आईडेंटिटी पता चल गई, या उसने मुझे किसी और मर्द के साथ रिलेशन बनाते देख लिया तो फिर मैं क्या करूँगी”

“करना क्या है…. एक बार फिर अपनी पहचान बदलकर नए शिरे से फिर से जिंदगी शुरू कर लेना, अब तो तू इस काम में एक्सपर्ट भी हो गई है”

“तो फिर क्या करूँ…. कबीर को हाँ बोल दूँ….. बेचारा कितने दिनों से मेरी हाँ सुनने का इंतजार कर रहा है”

“नहीं नहीं अभी नहीं…. पहले उसे अपने सीक्रेट ऐजेंट होने बाली बात बताकर देखते हैं, अगर वो तुम्हारा सारा सच जानने के बाद भी तुम्हारे साथ अपना रिलेशन रखना चाहता है तो फिर उसे हाँ कर देना”

“पर मैं उसे अपने सीक्रेट ऐंजेट होने के बारे में कैसे बता सकती हूँ, अगर उसने मेरा यह राज सबके सामने खोल दिया तो”

“नहीं वो एक समझदार और भरोसेमंद लडका है, हाँ यह हो सकता है कि वो तेरा राज जानने के बाद तुझसे दूरी बना ले, लेकिन वो तेरा राज किसी को नहीं बताऐगा।”

“हाँ यार इतना भरोसा तो मैं उसपर कर ही सकती हूँ।… तो फिर ठीक है अभी मैं उससे सोचने के लिए कुछ समय माँग लेती हूँ और फिर मौका देखकर उसे अपना सच बता दूँगी। अगर वो तब भी मेरा साथ देगा तो मैं उसे अपना लाईफ पार्टनर बना लूँगी”

मुझे पता ही नहीं चला कि कब कबीर के बारे में सोचते सोचते मेरा चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया था। वहीँ दूसरी तरह श्रेया और कबीर काफी देर से मुझे अपने ही ख्यालों में गुम देखकर काफी ज्यादा हैरान थे। आखिरकार श्रेया ने मुझे झंझोरकर हिलाते हुए कहा

श्रेया- अरे यार अमृता किन ख्यालों में खो गई… और तू इतना ब्लस क्यों कर रही है

श्रेया के यूँ झंझोडने पर मैं अपने होश में बापिस आई और अपनी शर्माहट को छिपाने की कोशिश करते हुए बोली

अमृता- अरे कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही….

कबीर- तो फिर बताओ ना क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी

अमृता- देखो कबीर तुम एक अच्छे लडके हो, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे कुछ ठीक नहीं लगा रहा है…. अगर आगे चलकर कुछ प्राब्लम हुई तो फिर मैं क्या करूँगी…

कबीर- प्राब्लम…. कैसी प्राब्लम…

अमृता- मैंने तुम्हें क्लासरूम में सबके सामने थप्पड मारा था, अगर फ्यूचर में तुमने मुझसे उस बात को लेकर बदला लिया, या मुझे ताना मारा तो फिर मैं क्या करूँगी। मैं एक ऐसी लडकी हूँ जो आसानी से किसी से अपना रिलेशन नहीं बनाती है। लेकिन एक बार अगर कमिटमेंट कर दिया तो फिर सारी जिंदगी निभाती हूँ। अगर फ्यूचर में हमारे बीच कोई मिस अंडरस्टेंडिंग हुई, या झगडा हुआ तो मैं वो सब बरदास्त नहीं कर पाऊँगी।

मेरी बात सुनकर कबीर मुझे समझाते हुए बोला

कबीर- ऐसा कुछ भी नहीं होगा अमृता, ट्रस्ट मी…. हमारे बीच कभी कोई झगडा नहीं होगा, मैं अपनी दीदी की कसम खाता हूँ कि मैं तुम्हें कभी कोई दुख नहीं पहुँचने दूँगा, और रही बात उस दिन क्लासरूम बाली घटना की, तो उसे तो मैं कबका भूल गया था, आज अगर तुम उसका जिक्र नहीं करती तो मुझे वो बात याद भी नहीं आती, बैसे भी उसमें मेरी ही गलती थी, पहले मैंने तुम्हारे साथ गलत हरकत की थी, तुमने तो बस मेरी उस हरकत पर रिऐक्ट किया था, तो भला मैं उस बात का बदला तुमसे क्यों लूँगा

तभी श्रेया भी मुझे समझाते हुए बोली

श्रेया- ओह कम ऑन अमृता अब मान भी जाओ…. कबीर ने जितनी मेहनत तुम्हें अपना बनाने के लिए की है, उतने में तो भगवान भी उससे खुश हो जाते।

श्रेया की बात सुनकर मैं सोचने का नाटक करते हुए बोली

अमृता- उम्म तो ठीक है… लेकिन मुझे इस बारे में सोचने के लिए कुछ समय चाहिए….. और जब तक मैं कोई फैसला नहीं कर लेती, तब तक कबीर मेरे साथ फिजीकल होने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं करेगा और ना ही इसके बारे में किसी से कुछ कहेगा। अगर मंजूर हो तो बोलो… बर्ना रहने देते हैं

मेरी बात सुनकर कबीर तुरंत बोल पडा

कबीर- म मुझे मंजूर है…..

कबीर के इतने फास्ट रिऐक्शन को देखकर श्रेया उसे टोकते हुए बोली

श्रेया- अरे……. तुम तो कुछ ज्यादा ही उताबले दिख रहे हो….. शायद तुमने अमृता की बात को ठीक से समझा नहीं है। फिजीकल से उसका मतलब बैडरूम में बिस्तर के ऊपर होने बाले क्रिया कलाप से नहीं है। बल्कि वो चाहती है कि जब तक वो दिल से तुम्हें एक्सेप्ट ना कर ले, तब तक तुम उसे छूने या किस करने की कोई कोशिश नहीं करोगे और ना ही इस बारे में अपने किसी दोस्त को बताओगे।

श्रेया की बात सुनकर कबीर चिढते हुए बोला

कबीर- तुमने क्या मुझे पागल समझ रखा है….. मैं पहले ही यह बात समझ गया था….

श्रेया- तो फिर तुम्हें उसकी शर्त मंजूर है…

कबीर- हाँ हाँ बिल्कुल…. बैसे भी मेरे पास हाँ कहने के अलावा कोई दूसरा रास्ता है क्या….

कबीर की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- हाँ है ना…. तुम मुझसे मना कर सकते हो

कबीर- कोई जरूरत नहीं है मना करने की….. बैसे भी तुम्हारे रिजेक्शन से अच्छा तो यही है कि मैं तुम्हारे हाँ कहने का इंतजार करूँ…. कम से कम तुम्हें अपना बनाने की एक उम्मीद तो है मेरे पास, अब जब मैंने इतने दिनों तक इंतजार किया है तो कुछ दिन और सही……

कबीर का जबाब सुनकर मेरी और श्रेया की हंसी छूट गई… क्योंकि हम दोनों को कबीर से इसी तरह के जबाब की उम्मीद थी।

कहानी जारी है.............
 
Update 090 -

कबीर की बात सुनकर श्रेया उसका मजाक उढाते हुए बोली

श्रेया- सही जा रहे हो बच्चू…. ऐसे ही चिकनी चुपडी बातें करते रहो… एक ना एक दिन अमृता तुझे हाँ बोल ही देगी और फिर तुम मेरे दोस्त से सीधे मेरे जीजू बन जाओगे

श्रेया की बात सुनकर मैंने गुस्से में उसे घूरते हुए कहा

अमृता- हो गया तेरा……

श्रेया- अरे अभी कहाँ मेरी जान, अभी तो तुमने इश्क के रास्ते पर अपना पहला कदम ही बडाया है। जैसे जैसे तुम उस रास्ते पर आगे बडोगी बैसे बैसे मैं भी……

श्रेया की बात पूरी होने से पहले ही मैंने उसे टोकते हुए कहा

अ्मृता- बस बस मेरी माँ अब चुप हो जा….. मैं अब जा रही हूँ….. मुझे कुछ जरूरी काम निपटाने हैं।

कबीर- अरे यार अमृता रुको ना… कुछ देर और बातें करते हैं ना…

अमृता- नहीं कबीर मुझे सच में कुछ जरूरी काम करना है… हम कल फिर यहीं मिलेंगे, तब तुम्हें जितना बटर लगाना हो लगाते रहना

इतना बोलकर मैंने श्रेया की तरफ आँंख मार दी, मेरी इस हरकत पर श्रेया खिलखिलाकर हंसते हुए बोली

श्रेया- ऐ सही है बॉस……. लगता है तुम भी हाँ बोलने से पहले मेरे कबीर जीजू के पूरे मजे लने के मूढ हो

अमृता- बकवास बंद करो… अभी मैंने उसे हाँ नहीं बोला है… तो फिर वो तेरा जीजू कैसे हो गया

श्रेया- अभी नहीं बोला है तो क्या हुआ, कुछ दिनों बाद तो तुम्हें हाँ बोलना ही है…..

अमृता- अच्छा… तुम्हें इतना यकीन है मुझपर…

श्रेया- तुम पर नहीं, कबीर पर यकीन है…. वो किसी ना किसी तरह से तुम्हें हाँ कहलवा ही लेगा……

अमृता- लेट्स सी…….

इतना बोलकर मैं अपनी कार में बैठकर वहाँ से चली गई। अगले दिन से मैं और कबीर पहले से भी ज्यादा एक दूसरे के करीब आ गए थे, अब श्रेया भी हम दोनों को अकेले में टाईम स्पेंड करने का पूरा मौका देने लगी थी, धीर धीरे एक दूसरे के साथ समय बिताने और एक दूसरे से ढेर सारी बातें करने के कारण मैं भी कबीर की तरफ धीरे धीरे अट्रैक्ट होने लगी थी, हैंडसम तो वो पहले ही था, ऊपर से वो अब मेरे लिए पहले से भी ज्यादा प्रोटेक्टिव और केयरिंग हो गया था, इसलिए मैं ना चाहते हुए भी उसकी तरफ खिंचती चली जा रही थी, आखिरकार मुझे भी इस बात का एहसास होने लगा था कि मैं भी उसे पसंद करने लगी हूँ और उसमें अपना लाईफ पार्टनर देखने लगी हूँ।

इसलिए कभी कभार जब कबीर हमारी शर्त को तोडकर मेरे गालों पर लाईट किस करके भाग जाता, तो मैं भी उसकी इन हरकतों का बुरा नहीं मानती थी, बल्कि उस वक्त तो मेरा चेहरा शर्म के कारण गुलाबी हो जाता था, श्रेया और कबीर भी मेरे अंदर आऐ इन बदलावों को महसूस करने लगे थे, इसलिए श्रेया अब खुलकर सबके सामने ही कबीर को जीजू कहकर बुलाने लगी थी, हाँलाकि मैंने अब तक कबीर से उसकी गर्लफ्रेंड बनने के लिए हाँ नहीं कहा था, लेकिन कबीर और श्रेया के साथ साथ मेरे सभी दोस्तों को पूरा यकीन था कि अब मैं भी दिल ही दिल में कबीर को पसंद करने लगी हूँ।

मुझे कबीर से सोचने का समय माँगे हुए भी करीब 2 महिने बीत गए थे और अब जब मैंने भी दिल ही दिल में कबीर को अपना लाईफ पार्टनर बनाने का फैसला कर लिया था, इसलिए आज जब मैं कॉलेज पहुँची तो मैंने मन ही मन तय कर लिया कि आज मैं कबीर को अपने सीक्रेट ऐजेंट होने के बारे में बता दूँगी। अगर मेरे बारे में सब कुछ जानने के बाद भी कबीर मुझे अपनाने के लिए तैयार होगा, तो मैं भी उसका लव प्रपोजल एक्सेप्ट कर लूँगी। लेकिन कॉलेज में दोस्तों को साथ होने के कारण मुझे कबीर से इस बारे में बात करने का कोई मौकी ही नहीं मिला।

आखिरकार मैंने कॉलेज खत्म होने के बाद चाय की टपरी पर कबीर से इस बारे में बात करने का तय किया। लेकिन कॉलेज खत्म होेने के बाद जैसे ही मैं श्रेया और कबीर के साथ कॉलेज से बाहर की तरफ जा रही थी, ठीक तभी मेरी नजर उन लडकों पर पडी जो फारूख उस्मान के कांटेक्ट में थे और जो आज एक साथ खडे होकर आपस में कुछ बातें कर रहे थे। पिछले 3-4 महिनोें में यह पहली बार था, जब मैं उन लडकों को आपस में एक साथ बात करते हुए देख रही थी। इसलिए उन्हें साथ देखकर तुरंत मेरा माथा ठनका, मैं समझ गई कि आज पक्का वो लोग या तो पव में इब्राहिम से मिलने बाले हैं या फिर जंगल में फारूख से मिलने जाऐंगे।

इसलिए मैं श्रेया और कबीर से बहाना बनाकर अपने घर के लिए निकल गई। क्योंकि मुझे आज रात के लिए तैयारी करनी थी। रात करीब 8:30 बजे मैं बाॉयज हास्टल के पास सडक किनारे अपनी कार में बॉयज हास्टल पर नजर रख रही थी। असल में मुझे नहीं पता था कि आज वो लडके पव जाने बाले हैं या जंगल में, इसलिए मैंने बॉयज हास्टल से ही उनका पीछा करने का फैसला किया था। रात करीब 9 बजे बॉयज हॉस्टल के पीछे की तरफ से 5 लडके बाहर आऐ और ऑटो पकडकर जंगल की तरफ जाने लगे। ऐ 5 लडके वही थे जिन्हें फारूख ने अपने मिशन के लिए चुना था। इसलिए मैं कुछ ज्यादा ही सतर्क थी। अब चूँकि मुझे उन लोगों के मीटिंग बाली लोकेशन पहले से ही पता थी।

इसलिए मैंने उस ऑटो को ओवरटेक किया और उन लोगों के जंगल में पहुँचने से पहले ही उस जगह पहुँच कर उन लडकों और फारूख उस्मान के आने का इंतजार करने लगी। आज मैं किसी भी कीमत पर फारूख के छिपने का ठिकाना पता करना चाहती थी, इसके अलावा मुझे उन लोगों के मिशन के बारे में भी जानना था। मुझे वहाँ पर ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पडा। करीब 10 मिनट बाद ही वो पाँचों लडके भी वहाँ आ गए और करीब 15 मिनट बाद फारूख भी वहाँ आ गया। आज फिर फारूख के साथ इब्राहिम और दो गनमैंन थे। वो पाँचों लडके आज फारूख से पर्सनली मिलक काफी खुश नजर आ रहे थे। फारूख ने उन पाँचों लडकों को एक के बाद एक गले लगाया और फिर बोला

फारूख- मेरे बच्चों तुम्हें तो याद ही होगा कि हमारी पिछली मुलाकात में मैने तुम लोगों को एक मिशन पर जाने के लिए कहा था।

फारूख की बात सुनकर एक लडका आगे आकर बोला

लडका- जी काजी सहाब…. हम तो कब से आपके हुकुम का इंतजार कर रहे थे। आपके कहने पर तो हम लोग अपनी जान देने के लिए भी तैयार हैं।

फारुख- नहीं मेरे बच्चों मुझे तुम लोगों की जान नहीं चाहिए, बल्कि हमें इस देश के हुकुमरानों की जान लेनी है। जो हम जैसे लोगों पर अत्याचार कर रहे हैं। अब समय आ गया है जब हम इस देश के हुकुमरानों, इस देश की पुलिस और आर्मी के खिलाफ जंग का ऐलान कर दें। लेकिन जंग बिना हथियारों के नहीं लडी जाती मेरे बच्चों। इसलिए मैंने अपने चाईना के दोस्तों की मदद से कुछ हथियार खरीदे हैं। जो इस जंग में तुम लोगों के काम आऐंगे। कल रात को वो सारे हथियार नेपाल वार्डर पार करके बलरामपुर आ जाऐंगे। इसलिए तुम लोगों को कल सुबह सुबह ही बलरामपुर के लिए निकलना होगा और वहाँ से तुम्हें वो हथियार लेकर यहाँ बापिस आना होगा। मैंने तुम लोगों का बलरामपुर जाने और वहाँ से हथियार लेकर यहाँ तक आने का पूरा इंतजाम कर दिया है। इब्राहिम मियाँ तुम लोगों के ड्राईवर बनकर तुम्हारे साथ जाऐंगे। इसलिए कल सुबह ठीक 10 बजे तुम लोग अपने कॉलेज के बाहर मैन रोड पर मिलना। बाकी की बातें इब्राहिम मियाँ तुम्हें रास्ते में समझा देंगे।

फारूख की बात सुनकर वही ल़डका फिर से बोला

लडका- हम समझ गए काजी सहाब….

फारूख- अगर हमारा यह मिशन फेल हो गया और तुम लोग किसी तरह पुलिस के हाथ लग गए तो तुम लोगों को पता ही है कि तुम्हें क्या करना है।

लडका- हाँ हमें पता है काजी सहाब…. हम मरते दम तक अपने साथियों और आपका नाम पुलिस को नहीं बताऐंगे।

फारुख- मुझे तुम लोगों से यही उम्मीद थी…. अब मैं चलता हूँ… तुम लोग भी अपने हॉस्टल जाकर आराम करो…. कल तुम्हें एक लम्बे सफर पर जाना है।

इतना बोलकर जैसे ही फारूख वहाँ से जाने लगा तो मैं भी झाडियों के पीछे अपने आपको छिपाते हुए तेजी से अपनी कार की तरफ भागी। करीब 10 मिनट बाद मैं एक निश्चित दूरी बनाकर फारूख की कार का पीछा कर रही थी। जैसा की मैंने उम्मीद की थी। इस बार भी फारूख मस्जिद बाले रास्ते की तरफ ही जा रहा था। लेकिन इस बार मैंने उनके पीछे पीछे मस्जिद तक जाने की जगह मस्जिद के पीछे बाले रास्ते पर जाने का फैसला किया। जैसा की मुझे उम्मीद थी। मस्जिद के ठीक पीछे एक काले रंग की एस.यू.वी. पहले से ही खडी हुई थी। मैंने उससे थोडी दूरी पर अपनी कार रोक दी और फारूख के वहाँ आने का इंतजार करने लगी।

करीब 15 मिनट बाद मस्जिद के पीछे बाले दरवाजे से करीब 25-30 साल के 4 लडके बाहर निकले। वो चारों लडके क्लीन शेब्ड थे और उन लोगों ने जींस टी-शर्ट पहनी हुई थी। साथ ही साथ दो लडकों ने अपनी पीठ पर बैगपैक भी टांग रखे थे। उन लडकों को मस्जिद से बाहर निकलता देख मैं बुरी तरह से हैरान रह गई थी। क्योंकि मैं तो वहाँ पर फारूख और उसके साथियों के बाहर आने का इंतजार कर रही थी। मैं अभी सकते की हालत में ही थी कि तभी एक लडका अचानक से चारों तरफ देखने लगा। जब मेरी नजर उस लडके के चेहरे पर पडी तो वो मेरे लिए पूरी तरह से अनजान था। पर पता नहीं कियों उसकी आँखे मुझे कुछ कुछ जानी पहचानी लग रहीं थीं।

लेकिन मैंने उसे इग्नोर कर दिया और अपनी कार में बैठकर फारूख और उसके साथियों के बाहर आने का इंतजार करने लगी। मेरे देखते ही देखते वो चारों लडके वहाँ से चले गए। मुझे वहाँ पर फारूख का इंतजार करते करते हुए करीब 1 घंटे से ज्यादा का समय हो गया था। लेकिन फारूख और उसके आदमी बाहर नहीं आऐ। आखिरकार एक बार फिर मैं मस्जिद की दीवार फांदकर अंदर जा पहुँची। लेकिन इस बार भी मुझे मस्जिद के अंदर कोई भी दिखाई नहीं दिया। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर फारूख और उसके साथी मस्जिद के अंदर आने के बाद गायब कहाँ हो जाते हैं। पूरी मस्जिद की अच्छी तरह से तलासी लेने के बाद आखिरकार मैं अपने घर बापिस लौट आई।

लेकिन घर पर बापिस आने के बाद भी मेरा मूढ पूरी तरह से खराब था, क्योंकि दो बार फारूख मेरे हाथ लगते लगते बचा था। रात के करीब 2 बज चुके थे, लेकिन नींद मेरी आंखों से कोसों दूर थी, मैं जब भी अपनी आँखें बंद करती तो फारूख और उसके साथियों के चेहरे मेरी आँखों के सामने आ जाते। तभी अचानक से मेरे माईंड में कुछ क्लिक हुआ, मैं तुरंत बिस्तर से उठकर बैठ गई और बगल बाले रूम में जा पहूँची, जिसे मैंने अपना ऑफिस बना रखा था। रूम के अंदर जाकर मैंने अपना लैपटॉप ऑन किया और उसमें फारूख उस्मान की पिक्चर ओपन करके उसे ध्यान से देखने लगी।

उस पिक्चर में फारूख के सिर के बाल और ढाडी पूरी तरह से सफेद थी, जिस कारण वो किसी 60-65 साल के बुढे आदमी की तरह दिख रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर कोई भी झुर्रियाँ बगैरह नहीं थीं, उसके चेहरे की स्किन किसी 25-30 साल के जबान लडके की तरह लग रही थी, कुछ देर और उस फोटो को ध्यान से देखने के बाद मुझे एहसास हुआ कि शायद फारूख ने अपने चेहरे पर नकली ढाडी लगा रखी है। इसलिए मैंने इमेज एडिटर साफ्टबेयर का यूज करके फारूख के चेहरे से ढाडी हटा दी और उसके सिर के बालों को भी छोटा करके काला कर दिया। अगले ही मेरे सामने जो चेहरा था वो उन्हीं चार लडकों में से एक था, जो मस्जिद के पीछे बाले रास्ते से बाहर निकले थे।

यह देखकर मैंने अपना सिर पकड लिया, क्योंकि फारूख और उसके साथी मेरे सामने ही मस्जिद से बाहर निकले थे, लेकिन मैंने उन्हें पहचाना तक नहीं, अब जब मुझे फारूख और उसके साथियों के गायब होने का राज पता चल चुका था, इसलिए मैंने बाकी तीन आतंकवादियों के चेहरों को भी एडिट करना शुरू कर दिया। अब मेरे लैपटॉप की स्क्रीन पर उन्हीं चार लडकों की पिक्चर थी जो मेरे सामने ही मस्जिद से बाहर निकलकर गए थे। हाँलाकि फारूख एक बार फिर मेरे हाथ से निकल गया था, लेकिन मेरे पास उसे पकडने का एक और मौका था, असल में कल इब्राहिम खान मेरे कॉलेज के 5 लडकों को लेकर बलरामपुर जा रहा था, जहाँ से वो लोग हथियारों की डिलेवरी लेकर बापिस कानपुर आने बाले थे।

इसलिए कल मेरे पास उन हथियारों की स्मगलिंग करने बाले लोगों के साथ साथ इब्राहिम को भी पकडने का एक सुनहरा मौका था। चूँकि कल का दिन मेरे लिए काफी ज्यादा थकाने बाला हो सकता था, ऊपर से वो लोग सुबह 10 बजे बलरामपुर के लिए निकलने बाले थे, जिस कारण मेरे पास रेस्ट करके अपने आप को रीफ्रेश करने का बहुत कम समय बचा था, इसलिए मैंने तुरंत अपना लैपटॉप बंद किया और कमरे को अच्छी तरह से लॉक करने के बाद सोने चली गई।

कहानी जारी है.........
 
Update 091 -

अगले दिन जब मैं सोकर उठी तो मैंने सबसे पहले रजीव सर को कॉल करके सारी सिचुऐशन बताई। मेरी बात सुनकर राजीव सर ने मुझसे सबाल किया

राजीब- तो अब तुम्हारा आगे का प्लान क्या है

अमृता- सर आज मैं इब्राहिम खान और उसके साथियों का पीछा करते हुए बलरामपुर जाने बाली हूँ। मैं वहाँ पर हथियारों की स्मगलिंग करने बाले गिरोह को खत्म करके इब्राहिम खान को जिंदा पकडना चाहती हूँ। ताकि मैं फारूख और बाकी आतंकवादियों के ठिकाने का पता कर सकूँ।

राजीव- हुम्म… ठीक है… लेकिन यह काम तुम अकेले नहीं कर पाओगी, तुम्हें इसके लिए जरूर बैकअप सपोर्ट की जरूरत होगी। इसलिए तुम अपने तरीके से उनका पीछा करो, तब तक मैं यहाँ से एन.एस.जी. कमांडो की एक स्पेशल टास्क फोर्स को एयर लिफ्ट करके बलरामपुर भेजता हूँ। जो तुम्हारे अंडर कमांड होगी।

अमृता- नहीं सर अभी उसकी कोई जरूरत नहीं है, मैं अकेले ही सब मैनेज कर लूँगी… आप बस मेरी बताई लोकेशन पर लोकल पुलिस टीम को भिजवा देना, ताकि वो हथियारों को जप्त कर सकें। अगर अभी हमने एन.एस.जी. को इसमें सामिल किया तो फारूख और उसके साथी अलर्ट हो जाऐंगे। लेकिन पुलिस टीम के वहाँ आने पर उन्हें लगेगा कि नॉर्मल पुलिस गस्त के दौरान वो लोग पकडे गए हैं।

राजीव- आर यू श्योर

अमृता- यस सर… आई एम श्योर… आप बस इतना ध्यान रखिए कि पुलिस टीम मीडिया को केवल उतना ही बताऐ जितना मैं उन्हें बताने के लिए कहूँ।

राजीव- ठीक है मैं अभी यू.पी. के डी.जी.पी. से इस बारे में बात करता हूँ।

इतना बोलकर राजीव सर ने फोन कट कर दिया। राजीव सर का फोन कट होने के बाद मैंने श्रेया को मैसेज करके बता दिया कि आज मैं किसी जरूरी काम से आऊट ऑफ सिटी जा रही हूँ। इसके बाद मैं अपनी तैयारी में लग गई। ठीक 10 बजे दो एस.यू.वी. हमारे कॉलेज के ठीक सामने हाईवे पर आकर खडी हो गई। उनमें से एक एस.यू.वी. इब्राहिम ड्राईव कर रहा था और दूसरी एस.यू.वी. वो आदमी ड्राईव कर रहा था जो मस्जिद के मैन गेट से फारूख की गाडी अपने साथ लेकर जाता है। जब पहली बार मैंने फारूख का पीछा किया था तो उस दिन मैंने उस आदमी को फारूख की गाडी अपने साथ ले जाते हुए देखा था। इसलिए अगले दिन मैंने उस आदमी के बारे में पूछताछ की थी।

तब मुझे पता चला कि उसका नाम शकील अहमद है जो कानपुर का छंटा हुआ बदमाश है। जब कई दिनों तक मुझे फारूख के बारे में कुछ भी पता नहीं चला, तो मैंने शकील को पकडकर फारूख के बारे में पता करने के बारे में सोचा था, लेकिन तब तक शकील अंडरग्राऊंड हो चुका था। लेकिन आज इब्राहिम के साथ साथ वो भी मेरे हाथ लग ही गया था। करीब 5 मिनट बाद ही मेरे कॉलेज के स्टूडेंट आकर उन दोनों एस.यू.वी. के अंदर बैठ गए और फिर वो लोग बलरामपुर जाने के लिए लखनऊ हाईवे की तरफ चल पडे। उन लोगों के कुछ दूर जाने के बाद मैंने भी उनका पीछा शुरू कर दिया था। बलरामपुर कानपुर से करीब 250 किलोमीटर दूर है।

इसलिए करीब 4-5 घंटे तक उनका पीछा करने के बाद हम लोग आखिरकार बलरामपुर पहुँच ही गए। वो लोग बलरामपुर सिटी क्रास करते हुए नेपाल भारत बार्डर के बीच बाले जंगल की तरफ जा रहे थे और मैं लगातार उनका पीछ कर रही थी। जंगल के पास पहुँचकर उन लोगों ने अपनी गाडियाँ झाडियों के पीछे छिपा दी और पैदल ही जंगल की तरफ चल पडे। मैं यह सब दूर से ही देख रही थी। इसलिए मैंने भी अपनी कार को जंगल के एकदम पास सुनसान जगह पर पार्क कर दी और फिर अपने चेहरे पर मास्क लगाकर, अपना बैगपैक उठाया और उन लोगों का पीछा करने लगी। जंगल के अंदर करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद वो लोग एक छोटे से मैदान में जा पहुँचे। जहाँ पहले से ही करीब 10 आदमी उनका इंतजार कर रहे थे।

जबकि मैं एक बडे पेड के पीछे छिपकर उन लोगो पर नजर रख रही थी। वो सभी लोग पिस्टल और रायफल से लैस थे और उनके बीचों बीच लकडियों के कुछ बाक्स रखे हुए थे। जैसे ही इब्राहिम अपने साथियों के साथ वहाँ पहुँचा तो स्मगलर टीम का लीडर उससे गले मिला और फिर उसने अपने पास रखे लडकियों के बॉक्स की तरफ इशारा किया। जिसे देखकर मैं समझ गई कि उन बॉक्स के अंदर जरूर हथियार होंगे। सारा माजरा समझने के बाद मैंन अपनी पिस्टल निकाली और उसपर साईलेंसर लगाने के बाद स्मगलर टीम पर निशाना लगाकर फायर करना शुरू कर दिया। साईलेंसर लगा होने के कारण उन लोगों को पता भी नहीं चला कि कब गोलियाँ आकर उनके साथियों के सिर के आर पार हो गई हैं।

करीब दो मिनट के अंदर ही आधे स्मगलर बेजान होकर जमीन पर पडे हुए थे। इस अचानक हुए हमले से वहाँ मौजूद बाकी लोगों ने अंधाधंद चारों तरफ गोलियाँ चलानी शुरू कर दी थी। जिसका फायदा उठाते हुए मैं एक एक करके उन सभी को अपना निशान बनाती जा रही थी। करीब 10 मिनट के अंदर ही इब्राहिम और मेरे कॉलेज के स्टूडेंट्स को छोडकर सभी लोग ढेर हो चुके थे। अचानक हुए इस हमले वो लोग बुरी तरह से डर गऐ थे, इसलिए वो अपनी जान बचाने के लिए जंगल की तरफ भागे। लेकिन तभी अचानक से मैं उसके सामने आकर खडी हो गई। इससे पहले वो लोग कुछ समझ पाते मैंने एक के बाद एक उन लोगों के घुटनों पर गोलियाँ चलाकर उन्हें अपाहिज बना दिया।

अब वो लोग चाहकर भी कहीं नहीं जा सकते थे। पैरों में गोलियाँ लगते ही वो सभी नीचे जमीन पर पडे दर्द से कराह रहे थे। उन सभी लोगों के नीचे गिरते ही मैंने अपनी पिस्टल को बापिस अपनी कमर में खुरसा और चहल कदमी करते हुए उनके पास जा पहुंची। सबसे पहले मैंने इब्राहिम और बाकी लोगों की तलासी ली, जब मुझे उनके पास कोई हथियार नहीं मिला तो मैंने अपने बैगपैक में से एक रस्सी निकाल कर अपने कॉलेज के पाँचों स्टूडेंट के हाथों को बांध दिया और उन्हें पेढ के सहारे बैठा दिया, ताकि वो लोग कोई भी गलत हरकत ना कर सकें। बैसे भी पैरों पर गोली लगी होने के कारण वो भाग नहीं सकते थे। इसके बाद मैं इब्राहिम के पास जा पहुँची, जिसका दर्द के कारण बुरा हाल था।

शायद इब्राहिम भी इसी पल का इंतजार कर रहा था, जैसे ही उसने मुझे अपने इतने नजदीक देखा तो उसने अपने पास पडी एक पिस्टल उठाकर मुझपर फायर कर दिया। लेकिन मैंने उसकी गोली को तुरंत चकमा दे दिया और फिर उसके हाथ पर एक किक मारकर उसकी पिस्टल को दूर उछाल दिया। अब इब्राहिम निहत्था मेरे सामने जमीन पर पडा हुआ था। इसलिए इब्राहिम के पास जाकर मैंने उसकी अच्छी तरह से तलासी ली। लेकिन मुझे उसके पास कोई दूसरा हथियार नहीं मिला। अच्छी तरह से तलासी लेने के बाद मैंने उससे सबाल किया

अमृता- क्या प्लान है तुम लोगों का… आखिर तुम इतने सारे हथियारों का करने क्या बाले हो

मेरे सबाल पर इब्राहिम बेहसीपन से हंसता हुआ बोला

इब्राहिम- मुझे मार दे लडकी… तुझे मुझसे कुछ भी पता नहीं चलेगा

मैंने इब्राहिम की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और उससे अगला सबाल किया

अमृता- फारूख और तुम्हारे बाकी साथी कहाँ हैं

मेरे साबल पर इब्राहिम गुस्से में चिढता हुआ बोला

इब्राहिम- तुझे सुनाई नहीं देता क्या बेबकूफ लडकी, मैने तुमसे पहले ही कहा है कि मुझसे तुम्हें कुछ भी पता नहीं चलेगा।

इब्राहिम की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- तो फिर ठीक है… अब मैं तुमसे कोई सबाल नहीं करूँगी… तुम खुद ही मुझे सब कुछ बताओगे।

इब्राहिम- ऐसा कभी नहीं होगा साली राण्ड….. तुम बहुत से बहुत मेरी जान ही तो ले सकती हो… लेकिन याद रखना कि मैं मौत से भी नहीं डरता हूँ

इब्राहिम की बात सुनकर गुस्सा होने की जगह मैं मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- अरे मियाँ मैं खुद भी तो तुम्हें मरने नहीं देना चाहती, तुम अगर मौत की भीख भी माँगोगे तो भी तुम्हें मौत नसीब नहीं होगी।

इतना बोलकर मैंने उसके नकली बाल और नकली ढाडी खींच कर निकाल दी और फिर अपने बैगपैक में से कुछ कीलें और एक हथोडी बाहर निकाली। मेरे हाथों में कीलें और हथोडी देखकर वो तुरंत समझ गया कि अब मैं उसके साथ क्या करने बाली हूँ। इसलिए वो डरते हुए जोर से चीखा

इब्राहिम- ऐ ऐ ऐ लडकी कहीं तु पागल तो नहीं हो गई है…. ऐ ऐ ऐ तुम मेरे साथ क्या करने बाली हो

इब्राहिम की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- कुछ भी तो नहीं… मैं तो बस यह देखना चाहती हूँ कि तुम कितना दर्द बरदास्त कर सकते हो…. मेरे पास तुम्हें दर्द देने के कई सारे रास्ते हैं।

इतना बोलकर मैंने उसे पीठ के बल लेटा दिया और उसके बाँऐ हाथ पर अपना पैर रख दिया। जिस कारण वो अपना हाथ हिला भी नहीं पा रहा था। तभी मैंने एक कील उसकी हथेली पर रखी और हथोडी से उसपर एक जोरदार बार किया। जिस कारण वह कील इब्राहिम की हथेली को चीरती हुई नीचे जमीन में जा धंसी। इसके साथ साथ इब्राहिम की एक जोरदार चीख उस जंगल में गूँज उठी

आआआआआआहहहहहहहहहहहहहहहहहहह

पर मैंने उसपर कोई ध्यान नहीं दिया और उसके दाऐँ हाथ की हथेली पर भी एक कील ठोक दी। एक बार फिर इब्राहिम की तेज चीख उस जंगल में गूंज उठी। पर मुझपर उसके चीखने चिल्लाने का कोई असर नहीं हो रहा था। लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि उसकी चीख सुनकर रेंजर या फिर आस पास के गाँव बाले वहाँ आ जाऐँ। इसलिए मैंने थोडी दूर पडे एक आदमी की शर्ट उतार कर जबरदस्ती इब्राहिम के मूँह के अंदर ठूंस दी, ताकि वो चीख ना सके। इसके बाद मैंने एक एक करके सारी कीलें इब्राहिम के दोनों हाथों और पैरों पर ठोक दीं। अब तक इब्राहिम की हालत काफी ज्यादा खराब हो गई थी। इसलिए मैंने उसके मूँह से कपडा निकाला और उससे सबाल किया

अमृता- क्यों इब्राहिम मियाँ मजा आ रहा है ना….

मेरा सबाल सुनते ही इब्राहिम गुस्से में चीखते हुए बोला

इब्राहिम- साली मादरजात कुतिया….. मैं तेरा खून पी जाऊँगा… साली राँड अगर मारना ही है तो एक बार में मेरी जान क्यों नहीं ले लेती, ऐसे क्यों तडपा रही है।

अमृता- तुम्हें तो पता ही है इब्राहिम मियाँ कि मुझे तुमसे कुछ जानना है। अगर तुम मेरे सबालों के जबाब दे दोगे तो मैं वादा करती हूँ कि तुम्हें आसान मौत दे दूँगी

इब्राहिम- नहीं कभी भी नहीं….

अमृता- तुम्हारी मर्जी….. अगर तुम्हेें यह दर्द इतना ही पसंद है तो मैं तुम्हें खुशी खुशी दर्द देने के लिए तैयार हूँ।

इतना बोलकर मैंने एक बार फिर से उसका मूँह बंद कर दिया और उसकी कमर पर जाकर बैठ गई। इससे पहले वो कुछ समझ पाता मैंने उसकी शर्ट के बटन खोलकर अपने चाकू से उसके सीने और पेट की स्किन को छीलना शुरू कर दिया। मेरे ऐसा करने से इब्राहिम को बहुत तेज दर्द हो रहा था, लेकिन मूँह बंद होने के कारण वो चीख भी नहीं पा रहा था। जब मैंने उसके सीने और पेट की अच्छी खासी स्किन निकाल दी तो फिर मैं अपने बैगपैक में से नमक मिर्च का पाऊडर निकाल कर उसके सीने और पेट पर मलने लगी। मेरे ऐसा करते ही इब्राहिम बुरी तरह से तडपने लगा, पर अब मुझे इब्राहिम को ऐसे तडपाने में बहुत मजा आ रहा था।

इब्राहिम को सबक सिखाने के बाद जब मैंने अपने कॉलेज के स्टूडेंट पर नजर डाली तो मैंने देखा कि उन सभी ने डर के कारण अपनी अपनी पेंट गीली कर दी है, चूँकि मैंने इस वक्त अपने चेहरे पर मास्क लगा रखा था, जिस कारण वो मुझे पहचान नहीं पाऐ, इसलिए मैं उन लडकों का मजाक उडाते हुए बोली

अमृता- बडा शौक था ना तुम लोगों को आतंकवादी बनने का, लो देख लो अपनी आँखों से कि आतंकवादी बनने का अंजाम क्या होता है। आगे चलकर तुम लोगों के साथ भी यही सब होने बाला है।

मेरी बात सुनकर एक लडका डर के कारण चीखते हुए बोला

लडका- नहीं नहीं दीदी नहीं… हमें नहीं बनना आतंकवादी…. हम तो बस इसके बहकाबे में आ गए थे…. प्लीज दीदी हमें माफ कर दो…. आज के बाद हम ऐसे किसी भी आदमी की बातों में नहीं आऐँगे।

तभी दूसरा लडका बोला

लडका2- हाँ दीदी हम कसम खाते हैं कि आज के बाद हम कभी कोई गलत काम नहीं करेंगे। हम बस मन लगाकर अपनी पढाई करेंगे, ताकि अपने अम्मी अब्बू का नाम रोशन कर सकें।

अमृता- अगर तुम फिर कभी कोई गलत काम ना करने का वादा करो और पुलिस के सामने सब कुछ सच सच बताने का वादा करो, तो मैं तुम्हें जान से नहीं मारूँगी। लेकिन कानून तुम्हें जो भी सजा देगा, उसे तुम्हें पूरा करना ही होगा।

मेरी बात सुनकर वो पाँचों एक साथ बोले

“हमें मंजूर है”

उन लोगों का जबाब सुनने के बाद मैंने फिर से इब्राहिम पर अपना ध्यान लगाया, जिसका दर्द और जलन से बुरा हाल हो चुका था और उसकी आँखों से लगातार आँशू बह रहे थे,

कहानी जारी है............
 
Update 092 -

करीब 10 मिनट इब्राहिम को तडपाने के बाद मैंने एक बार फिर उसके मूँह से कपडा निकाल कर उससे सबाल किया

अमृता- इब्राहिम मियाँ कैसे हाल चाल हैं… मजा आ रहा है या नहीं

नमक मिर्च के पाऊडर के कारण इब्राहिम का बुरा हाल हो चुका था और उसकी आँखों से लगातार आँशू बह रहे थे। इसलिए मेरा सबाल सुनकर इब्राहिम गुस्से में अपने दांत भींचते हुए गुर्राया

इब्राहिम- मुझे जान से मार दे लडकी…. बर्ना अगर मैं जिंदा बच गया तो तुझे जीते जी दो जख में भेज दूँगा

इब्राहिम की बात सुनकर मैं उसके ऊपर से उठकर कमर के पास नीचे जमीन पर बैठ गई और फिर मैंने पैंट के ऊपर से ही इब्राहिम के लण्ड को सहलाते हुए कहा

अमृता- लगता है इब्राहिम मियाँ की मर्दानगी कुछ ज्यादा ही उफान मार रही है। इसलिए पहले इसे ही शांत करना पडेगा।

मेरी बात सुनते ही डर के कारण इब्राहिम की आँखें फैल गईं थीं और वो लगभग गिडगिडाते हुए बोला

इब्राहिम- नहीं नहीं नही… तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकती

इब्राहिम की बात सुनकर मैं अपने खंजर को देखते हुए बोली

अमृता- क्यों नहीं कर सकती इब्राहिम मियाँ…. मैं तो इस काम में अब तक अच्छी खासी माहिर हो चुकी हूँ। माँ कसम तुम्हें बडा मजा आने बाला है…..

इतना बोलकर मैं जैसे ही उसके पेंट को खोलने लगी तो वो डर के कारण बुरी तरह चीखता हुआ बोला

इब्राहिम- नहीं नहीं नहीं रुको रूको मैं सब बताता हूँ…..

इब्राहिम की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए उससे कहा

अमृता- बस इतनी ही लिमिट थी तुम्हारी….. चलो कोई नहीं…. अब फटाफट शुरू हो जाओ…. बताओ आखिर तुम इतने सारे हथियारों का क्या करने बाले हो

इब्राहिम- वो वो हमने यहाँ कानपुर और आस पास के गाँव के कई सारे लडके लडकियों को अपना स्लीपर सेल्स बनाया है। हम लोग उनकी मदद से अलग अलग आर्मी बेस पर हमला करवाना चाहते थे। ताकि इस देश में हडकंप मच जाऐ और अपोजीशन तुम्हारे पी.एम. को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर सकें।

अमृता- इस सब में तुम्हारा क्या फायदा है

इब्राहिम- वो वो असल में अपोजीशन के कई बडे नेता पहले ही हमसे हाथ मिला चुके हैं। अगर पी.एम. इस्तीफा दे देंगे तो पूरी सरकार गिर जाऐगी और अपोजीशन पार्टी अपनी सरकार बना लेगी, जिसके बाद नई सरकार यहाँ की जेलों में बंद हमारे साथियों को छोड देगी।

अमृता- हुम्म तो यह प्लान है… कौन है वो नेता जिन्होंने तुम लोगों से हाथ मिलाया है।

इब्राहिम- मुझे नहीं पता…. इस बारे में केबल फारूख भाई जानते हैं।

अमृता- तो फिर बताओ कि फारूख और तुम्हारे बाकी साथियों का ठिकाना कहाँ है

इब्राहिम- नहीं पता

इब्राहिम की बात सुनकर मैं गुस्से में गुर्राते हुए बोली

अमृता- तुम ऐसे नहीं बताओगे, लगता है तुम्हारा पर्मानेंट इलाज करना ही होगा

इतना बोलकर मैं एक बार फिर उसका पेंट खोलने लगी तो इब्राहिम डर से चीखता हुआ बोला

इब्राहिम- मैं सच कह रहा हूँ मेरी माँ… मुझे नहीं पता… हम सभी लोग अपनी पहचान बदलकर आम लोगों के बीच रहते हैं। लेकिन हर शुक्रवार को हम सभी एक जगह इकट्ठा होकर अपने आगे के प्लान के बारे में डिस्कस करते हैं।

इब्राहिम की बात सुनकर मैंने उसका पैंट खोलना बंद कर दिया और उससे सबाल किया

अमृता- कहाँ पर

इब्राहिम- आगरा हाईवे पर कानपुर से 10 किलोमीटर दूर शकील भाई का एक फार्महाऊस है, हम सभी लोग हर शुक्रवार को शाम के ठीक 5 बजे वहीं पर इकट्ठे होते हैं। उसी फार्महाऊस के बेसमेंट में हमने अपने हथियार और दूसरे जरूरी सामान को छिपा रखा है। उस बेसमेंट में रखे कम्प्यूटर में तुम्हें हमारे सभी साथियों, अपोजीशन के नेताओं की जानकारी और सभी स्लीपर सेल्स की जानकारी के अलावा हमारे पूरे प्लान की जानकारी भी मिल जाऐगी। लेकिन उस बेसमेंट में जाना बिल्कुल भी आसान नहीं है। उस पूरे फार्महाऊस पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगे हुऐ हैं और बेसमेंट के दरवाजे पर भी बायोमैट्रिक लॉक लगा हुआ है। जो केवल फारूख भाई के फिंगरप्रिंट से ही खुलता है। अगर फारूख भाई के अलावा कोई दूसरा इंसान उस लॉक को खोलने की कोशिश करेगा तो फारूख भाई और हमारे सभी साथियों को तुरंत इसके बारे में पता चल जाऐगा।

अमृता- बस एक आखिरी सबाल….. तुम लोग यहाँ पर कुल कितने लोग हो

इब्राहिम- मुझे मिलाकर पूरे 24 हैं….

इब्राहिम के इतना बोलते ही मैंने अपने खंजर से उसके गले की नश काट दी, जिससे वो हमेशा हमेशा के लिए खामोश हो गया। इब्राहिम को जान से मारने के बाद मैंने बलरामपुर के एस.पी. को कॉल करके अपनी लोकेशन बता दी। असल में जब मैं इब्राहिम का पीछा कर रही थी, उस दौरान राजीव सर ने यू.पी. के डी.जी.पी. से बात करके पुलिस की एक स्पेशल टीम तैयार करने के लिए बोल दिया था। जिसे बलरामपुर के एस.पी. लीड कर रहे थे। सारी तैयारियाँ होने के बाद राजीव सर ने मुझे एस.पी. का नम्बर मैसेज कर दिया था। ताकि मैं जरूरत पडने पर उन्हें अपनी मदद के लिए बुला सकूँ।

मुझे ज्यादा इंतजार नहीं करना पडा। करीब 40-45 मिनट के अंदर ही पुलिस टीम वहाँ पहुँच गई थी। जिसके बाद पुलिस टीम ने सारे हथियार और लाशों को अपने कब्जे में ले लिया और मेरे कॉलेज के पाँचों स्टूडेंट को भी गिरफ्तार करके इलाज के लिए हॉस्पीटल भेज दिया। इसिलए मैं वहाँ से बापिस कानपुर के लिए निकल गई। एक बार फिर करीब 4-5 घंटे लगातार ड्राईब करने के बाद मैं रात करीब 11 बजे अपने घर बापिस लौट आई। सारा दिन भागदौड करने के कारण मैं कफी थकी हुई थी, इसलिए घर आकर मैंने सबसे पहले नहाया और फिर कपडे चेंज करने के बाद बीयर पीते हुए टी.बी. पर न्यूज देखने। न्यूज पर इस वक्त बलरामपुर पुलिस की लाईब मीडिया कानफ्रेंस चल रही थी।

जिसमें पुलिस द्वारा मुठभेड में 10 आर्मस् स्मगलर के मारे जाने और उनके 7 साथियों के घने जंगल में फरार होने के बारे में जानकारी दी गई थी। साथ ही साथ जप्त किए गए हथियारों के बारे में भी पूरी जानकारी दी गई थी। उस मीडिया कान्फ्रेंस को देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई, क्योंकि सब कुछ मेरे प्लान के हिसाब से ही चल रहा था। मुझे पूरा यकीन था कि फारूख और उसके साथियों ने भी जरूर इस न्यूज को देखा होगा और उन्हें लग रहा होगा कि इब्राहिम और बाकी के लोग किसी तरह पुलिस से बचकर भाग गए हैं। यानि जब तक इब्राहिम और बाकी के लोग फरार हैं, तब तक उनपर कोई खतरा नहीं है, और यही तो मैं भी चाहती थी।

न्यूज देखने के बाद मैंने खाना खाया और फिर अपने बेडरूम में सोने चली गई। मैं इस बात से पूरी तरह से अंजान थी कि एक अनजान साया खिडकी के बाहर से मुझपर नजर रख रहा है। अगले दिन जब मैं कॉलेज गई तो वहाँ पर सब कुछ नॉर्मल था। मेरे दोस्तों ने भी मेरे गायब होने के बारे में कोई सबाल नहीं किया। पर आज कबीर का बिहेबियर मेरे लिए कुछ बदला बदला सा लग रहा था। इसलिए जब कॉलेज खत्म होने के बाद मैं श्रेया और कबीर के साथ चाय की टपरी पर सुट्टा मारने चली गई, तो मैंने कबीर से इस बारे में सबाल किया, लेकिन कबीर ने बात को टाल दिया। चूँकि आज रात मुझे फार्महाऊस पर जाकर छानबीन करनी थी, इसलिए मैंने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया और सीधे अपने घर चली गई।

रात करीब 9 बजे मैं उस फार्महाऊस पर पहुँची जो पूरी तरह से सुनसान था। मैंने अपनी कार फार्म हाऊस से थोडी दूर पार्क कर दी थी। उस फार्महाऊस के बाहर एक बडा सा ताला लगा हुआ था। जिसका मतलब था कि इस वक्त फार्महाऊस के अंदर कोई भी नहीं है। इसलिए मैं फार्महाऊस के पीछे की तरफ से बाऊंड्रीबॉल पार करके अंदर दाखिल हो गई। फार्म हाऊस के अंदर पहुँचकर मैंने चारों तरफ अच्छी तरह से देखा कि कहीं कोई सिक्योरिटी गार्ड बगैरह तो वहाँ पर नहीं है। लेकिन उस फार्महाऊस पर मुझे एक चिडीया भी दिखाई नहीं दी। इसलिए मैं बिना किसी डर के उस फार्महाऊस की मैन बिल्डिंग के अंदर दाखिल हो गई, जो पूरी तरह से अंदेरे में डूबी हुई थी।

लेकिन अपनी स्पेशल पावर के कारण मुझे सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था। अंदर जाते ही मैंने पूरे फार्म हाऊस की तलासी शुरू कर दी, लेकिन वहाँ पर बस कुछ फर्नीचर और खाने पीने के सामान के अलावा कुछ भी नहीं था। थोडी बहुत छानवीन और करने के बाद आखिरकार मुझे बेसमेंट में जाने का रास्ता मिल ही गया। जैसा कि इब्राहिम ने मुझे बताया था उस बेसमेंट के बाहर एक बॉयोमैट्रिक लॉक लगा हुआ था। लेकिन उस बॉयोमैट्रिक लॉक को ब्रेक करना मेरे लिए बाऐँ हाथ का काम था। मैंने अपनी जैकेट से अपना मोबाईल फोन और एक यू.एस.वी. कैबिल निकाली, और अपने मोबाईल को उस कैबिल की हेल्प से बॉयोमैट्रिक डिबाईस से अटैच्ड कर दिया।

इसके बाद मैंने अपने मोबाईल में एक एप ओपन करके कुछ कोड टाईप किए। करीब 30 सेकेंड की प्रॉसेसिंग के बाद ही वो बॉयमैट्रिक डिवाईस अनलॉक्ड हो गई थी। जिसके बाद मैं तुरंत उस बेसमेंट के अंदर दाखिल हो गई, बेसमेंट के अंदर पहुँचते ही मैंने वहां की लाईट ऑन की तो मेरी नजर एक बडी सी स्क्रीन पर पडी। जिसपर उस फार्महाऊस का हर एक कोना दिखाई दे रहा था। यहाँ तक कि बेसमेंट भी उसमें दिखाई दे रहा था। जिसका एक ही मतलब था कि उस फार्महाऊस में कई सारे हिडन सी.सी.टी.बी. कैमरे लगे हुए हैं। इसलिए मैंने सबसे पहले सी.सी.टी.वी. डिबाईस में से हार्ड ड्राईब बाहर निकाल ली, ताकि घर जाकर मैं उस फार्महाऊस की पुरानी फुटेज चैक कर सकूँ।

साथ ही साथ फारूख को मेरे वहाँ आने के बारे में कुछ भी पता ना चले। सी.सी.टी.वी. कैमरे का काम तमाम करने के बाद मैं उस बेसमेंट की तलाशी लेने लगी। वो एक अच्छा खासा बडा हॉल था। जिसमें करीब 25-30 चेयर, कम्प्यूटर सिस्टम, हथियारों का ढेर जिसमें कुछ ऑटोमैटिक रायफल और कारतूस थे, कुछ देशी कट्टे, आर.डी.एक्स. बगैरह रखे हुए थे। इसके अलावा उस हॉल में लोहे की एक बडी से अल्मारी भी रखी हुई थी। जिसमें लॉक लगा हुआ था। मैंने सबसे पहले उस अल्मारी को ओपन करके चैक किया। उस अल्मारी में कई सारी फाईलें, मैप्स, पैनड्राईब, कैमरा और दूसरा सामान रखा हुआ था। इसलिए सबसे पहले मैंने उस अल्मारी में रखी फाईलों को एक एक करके चैक करना शुरू किया। उन फाईलों के अंदर हमारे देश की कई सारी खुफिया जानकारी थीं।

उन फाईलों और मैप को चैक करने के बाद मैंने कम्प्यूट सिस्टम ऑन किया जो पासवर्ड प्रोटेक्टेड था। लेकिन मेरे लिए उसे अनलॉक करना बच्चों का काम था। कम्प्यूटर सिस्टम ऑन होते ही मैंने एक एक करके उन पैनड्राईब को चैक करना शुरू कर दिया। उन पैन ड्राईब के अंदर उन सभी फाईलों और मैप्स की डिजीटल कॉपी थी। इसके अलावा मुझे एक पैन ड्राईब में नेशनल बैंक के एक अकाऊंट की डिटेल भी मिली थी, जिसमें करीब 20 करोड रूपये जमा थे। अब जब अपने मिशन को पूरा करते वक्त मेरे हाथ खजाना लग चुका था, तो मैं उसे कैसे छोड सकती थी। इसलिए मैंने उसी कम्प्यूटर सिस्टम पर उस बैंक आकाऊंट में लॉगइन किया और सारे पैसे अपने डिजीटल कैस कार्ड में ट्रांशफर कर लिए।

चूँकि डिजीटल कैस कार्ड का किसी भी बैंक के पास कोई रिकार्ड नहीं होता। इसलिए मेरे बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं चल सकता था। सारे पैसे ट्रांशफर करने के बाद मैंने उस बैंक डिटेल बाली पैन ड्राईब को टोड दिया। ताकि किसी को भी उसके अंदर स्टोर इन्फार्मेशन के बारे में पता ना चले। सारी पैन ड्राईब और अल्मारी का सारा सामान अच्छी तरह से चैक करने के बाद मैं उस कम्प्यूटर सिस्टम को अच्छी तरह से चैक करने लगी। उस कम्प्यूटर की हार्ड ड्राईव ढेर सारी इण्डियन मूबी और ब्लू फिल्म से भरी पडी थी। पूरी हार्ड ड्राईब को अच्छी तरह से चैक करने के बाद मेरी नजर एक फोल्डर पर जाकर अटक गई, जो पासवर्ड प्रोटेक्टेड था।

मैंने बिना देर किए उस फोल्डर को अनलॉक किया और उसे खोलकर देखने लगी। उस फोल्डर में करीब 200 से ज्यदा लडके लडकियों की पर्सनल डिटेल और उनके कान्टेक्ट नम्बर थे। यह सब देखकर तो एक पल के लिए मेरे दिल ने धडकना ही बंद कर दिया था। क्योंकि अब तक तो मुझे यही लग रहा था कि फारूख ने बस 50 कॉलेज स्टूडेंट को ही अपना सिलीपर सेल्स बनाया है। लेकिन अब उनकी संख्या बडकर 200 से ज्यादा पहुँच चुकी थी। अगर फारूख अपने प्लान में कामयाब हो गया तो ऐ 200 लडके लडकियाँ हमारे देश में तहलका मचा सकते थे। इसलिए मैंने बिना देर किए वो सारा डाटा अपनी पेन ड्राईब में सेव कर लिया और फिर उस फोल्डर को पर्मानेंट डिलीट करने के बाद उस कम्प्यूटर सिस्टम की हार्डडिस्ट को भी फार्मेट कर दिया।

ताकि उस कम्प्यूटर से किसी भी प्रकार का डाटा रिकवर ना हो सके। इसके बाद मैं उस बेसमेंट की अच्छी तरह से तलासी लेने लगी। लेकिन जब मुझे वहाँ पर कोई और जरूरी सामान नहीं मिला तो मैंने वहाँ रखे एक खाली बैग में सारी फाईल, मैप्स, पैनड्राईव, सी.सी.टी.वी. कैमरा की हार्डड्राईव और दूसरा जरूरी सामान ऱख लिया। इसके बाद मैंने उस बेसमेंट की लाईट ऑफ की और बेसमेंट से बाहर निकल गई। बेसमेंट को दोबारा लॉक करते वक्त मैंने उसका बॉयोमैट्रिक डाटा भी चेंज कर दिया था। ताकि फारूख उस बेसमेंट को ओपन ना कर सके। इसके बाद मैं उस बैग को अपने साथ लेकर फार्महाऊस से बाहर निकल गई। घर पहुंचकर मैंने सबसे पहले उस फार्महाऊस की सी.सी.टी.वी. फुटेज चैक की।

जैसा इब्राहिम ने मुझे बताया था, हर शुक्रवार को शाम के ठीक 5 बजे उस फार्महाऊस पर फारूख और उसके साथी आते थे और रात करीब 10-11 बजे उस फार्महाऊस से चले जाते थे। शुक्रवार के अलावा बाकी के 6 दिन वो फार्महाऊस पूरी तरह से सुनसान रहता था। चूँकि शुक्रवार आने में अभी दो दिन बाकी थे। लेकिन इन दो दिनों में मुझे सारी जरूरी तैयारियाँ पूरी करनी थी। इसलिए सारी फुटेज चैक करने के बाद मैं सोने चली गई। मैं इस बात से पूरी तरह से अंजान थी कि आज फिर कोई अंजान साया खिडकी के बाहर खडे होकर मुझपर नजर रख रहा है। जैसे ही मेरे बेडरूम की लाईट ऑफ हुई तो वो अनजान साया भी वहाँ से चला गया था।

कहानी जारी है............
 
Update 093 -

अगले दो दिन मेरे लिए पूरी तरह से नॉर्मल थे, इस दौरान बस एक ही बात मुझे खटक कही थी कि कबीर पिछले कुछ दिनों से मुझसे दूर दूर रह रहा था और अकेले में मुझसे बात करने से हिचकिचा रहा था। कबीर में आऐ इस बदलाव से मैं दिल ही दिल में बैचैन हो रही थी, क्योंकि अब मुझे भी कबीर के हमेशा मेरे साथ रहने और उसके द्वारा मेरे साथ छेडछाड करने की आदत सी हो गई थी, हाँलाकि मैंने कबीर को अपने बारे में सब कुछ सच सच बताने का फैसला पहले ही कर लिया था, पर फिलहाल मैं अपना पूरा ध्यान अपने मिशन पर लगाना चाहती थी, इसलिए मैंने मन ही मन तय किया की शुक्रवार को अपना मिशन पूरा करने के बाद मैं कबीर से इस बारे में बात करूँगी।

अगर मेरा पूरा सच जानने के बाद भी कबीर मेरे साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताने के लिए तैयार है तो मैं भी उसे अपने लाईफ पार्टनर के रूप में अपना लूँगी, बर्ना मैं भी उससे मूवऑन कर लूँगी और अपनी पढाई पूरी होेने से पहले ही कानपुर छोडकर चली जाऊँगी। शुक्रवार के दिन सुबह करीब 10 बजे राजीव सर ने मुझे कॉल करके बताया कि उन्होंने एन.एस.जी. कमांडो की एक स्पेशल टीम को एयरलिफ्ट करके कानपुर के लिए रवाना कर दिया है, जो करीब 2 घंटे बाद मुझे ज्वाईन करेगी। चूँकि एन.एस.जी. में मेरी रैंक पहले ही कैप्टन की है, इसलिए उस टीम को मुझे ही लीड करना था। इसके अलावा राजीव सर ने मुझे एस.पी. ऑफिस जाकर यू.पी. के डी.डी.पी. और कानपुर के एस.पी. से मुलाकात करके अपने ऑपरेशन के बारे में डिसकस करने के लिए भी बोल दिया था।

क्योंकि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान हमें पुलिस सपोर्ट की जरूरत पडने बाली थी। इसलिए राजीव सर का कॉल कट होने के बाद मैं अपनी तैयारी में लग गई। करीब 2 घंटे बाद मैं एस.पी. ऑफिस में यू.पी. के डी.जी.पी. और कानपुर एस.पी. के साथ बैठकर मीटिंग कर रही थी। हाँलाकि एन.एस.जी. कमांडो की स्पेशल टीम कानपुर आ चुकी थी, लेकिन मेरी अब तक उनसे कोई मुलाकात नहीं हुई थी। हमारी मीटिंग दोपहर करीब 2 बजे तक चली। मीटिंग खत्म होने के बाद जब मैं एन.एस.जी. कमाँडो की स्पेशल टीम से मिलने पहुँची तो उन्हें देखकर मैं हैरान रह गई।

वो सभी कमांडो मेरे ही बैच के थे और उनमें मेरे दोस्त साक्षी, पूर्वी, सोढी, बिक्रांत भी सामिल थे। अपने दोस्तों को वहाँ देखकर मैं बहुत खुश थी। इसलिए मैंने अपने सभी साथियों से हाथ मिलाया, और फिर एक अलग मीटिंग हॉल में जाकर उनसे अपने ऑपरेशन के बारे में डिसकस करने लगी। दोपहर करीब 3 बजे अपनी मीटिंग खत्म होेने के बाद जब हम लोग अपने ऑपरेशन के लिए जाने बाले थे, ठीक तभी पूर्वी ने एक ब्रीफकेस मुझे देते हुए कहा

पूर्वी- यह विकाश सर ने तुम्हारे लिए भेजा है,

मैंने पूर्वी से वो सूटकेस लेकर हैरानी से उसे खोलते हुए कहा

अमृता- क्या है इसमें

पूर्वी- तुम खुद ही देख लो

जब मैंने उस सूटकेस को खोला तो उसके अंदर मेरी एन.एस.जी. की यूनिफार्म, बुलैटप्रुफ जैकेट, एक रायफल और दूसरे जरूरी सामान रखे हुए थे। इससे पहले कि उस सामान को देखकर मैं कुछ कहती साक्षी ने कहा

साक्षी- विकाश सर चाहते हैं कि तुम इस मिशन को एन.एस.जी. कमांडो के रूप में लीड करो।

साक्षी की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए अपने दोस्तों से कहा

अमृता- इसे अपने साथ यहाँ लाने के लिए थैंक्स, मुझे बस 5 मिनट दो, मैं अभी चेंज करके आती हूँ।

इतना बोलकर मैं चैंजिग रूम की तरफ बड गई। करीब 5 मिनट बाद ही मैं अपने साथियों के सामने एन.एस.जी. कमांडो की यूनिफार्म में खडी हुई थी। मुझे अपनी यूनिफार्म में देखकर विक्रांत बोला

विक्रांत- अब लग रही हो ना तुम हममें से एक

तभी सोढी बीच में बोल पडा

सोढी- वो तो ठीक है… लेकिन ऑपेशन पूरा होेने के बाद पार्टी कौन देगा

सोढी की बात सुनकर साक्षी चिढते हुए बोली

साक्षी- लो यार यह फिर शुरू हो गया, बेबडा कहीं का

सोढी- ओऐ जी इसमें चिढने बाली क्या बात है…. यह तो हम पंजाबियों को खुशियाँ मनाने का तरीका है।

तभी मैं उन लोगों को शांत करते हुए बोली

अमृता- अरे यार बस करो तुम दोनों, हमेशा मियाँ बीबी की तरह लडते रहते हो, पार्टी मैं दे दूँगी अब खुश

सोढी- हाँ जी बहुत बहुत खुश हैं जी

अमृता- अब चलो भी य़ार

इतना बोलकर मैं उस रूम से बाहर निकल गई। शाम करीब 4 बजे हम लोग फारूख के अड्डे पर पहुँच गए और छिपकर उस फार्महाऊस पर नजर रखने लगे। हम जिन गाडिओं में वहाँ पर आऐ थे, उन्हें फार्म हाऊस से काफी दूर सुनसान इलाके में पार्क करवा दिया था। ताकि हमारी गाडियों को देखकर फारूख और उसके साथियों को कोई शक ना हो। शाम करीब 6 बजे तक फारूख और उसके सारे साथी उस फार्म हाऊस पर पहुँच चुके थे। इसलिए हमने उस फार्महाऊस को चारों तरफ से घेरकर अपना ऑपरेशन शुरू कर दिया। मैं पहले से ही जानती थी कि इस वक्त उन लोगों के पास ज्यादा हथियार नहीं होंगे।

क्योंकि उन लोगों के ज्यादातर हथियार बेसमेंट में रखे हुए थे, जिसका बायोमैट्रिक लॉक मैं पहले ही चेंज कर चुकी थी। इसलिए वो लोग उन हथियारों को नहीं ले सकते थे। ऑपेशन शुरू होते ही हम लोगों ने आसानी से उन सभी आतंकवादियों का शिकार करना शुरू कर दिया। करीब 1 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में फारूख को छोडकर बाकी सभी आतंकवादी मारे गए थे। फारूख केवल इसलिए जिंदा बच गया था क्योंकि उसने वक्त रहते हमारे सामने सरेंडर कर दिया था। हाँलाकि मेरा मन तो नहीं था उसे जिंदा छोडने का, पर हमें अपना प्रोटोकॉल भी पूरा करना था, इण्डियन आर्मी कभी भी आत्मसमर्पण करने बाले इंशान को गोली नहीं मारती है।

हमारे साथियों ने फारूख को घुटनों के बल बैठाकर उसके दोनों हाथों में हथकडी पहना दी थी, ताकि वो कोई गलत हरकत ना कर पाऐ। इसके बाद मैंने अपने फिंगरप्रिंट का यूज करके बेसमेंट खोला और अपने साथियों को बेसमेंट में रखा सारा सामान जप्त करने का आर्डर दे दिया। इसके बाद मैंने राजीव सर को ऑपरेशन कम्प्लीट होने के बारे में बता दिया और यू.पी. के डी.जी.पी. को भी ऑपरेशन कम्प्लीट होने की बात कंफर्म कर दी, ताकि वो पुलिस फोर्स भेजकर इस फार्महाऊस को सील कर सकें। इसके बाद मैं फारूख के पास गई तो फारूख मुझे देखकर हंसते हुए बोला

फारूख- हा हा हा तुम्हें क्या लगता है साली…. मेरे साथियों को जान से मार दिया और मुझे पकड लिया तो सब कुछ खत्म हो गया क्या… खेल अभी खत्म नहीं हुआ है….

फारूख की बात सुनकर मैंने उसे गुस्से में घूरा और बोली

अमृता- लगता है तुझसे अपनी हार बरदास्त नहीं हो रही है फारूख मियाँ…. तुझे क्या लगता है कि इब्राहिम और उसके साथी तुझे बचाने यहाँ आऐंगे, अबे इब्राहिम और शकील को तो मैंने उसी दिन बलरामपुर में जान से मार दिया था, और उन पाँचों कॉलेज स्टूडेंट को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन तुम लोगों को कोई शक ना हो, इसलिए उनके फरार होने के झूठी खबर फैलाई गई थी

मेरी बात सुनकर फारूख गुस्से में बिफरता हुआ बोला

फारूख- क्या बकवास कर रही हो तुम

अमृता- जो सच है वहीं बता रही हूँ… लेकिन अगर तुझे इसपर यकीन नहीं करना है तो तेरी मर्जी।

मेरी बात सुनकर फारूख ने मुझे कुछ देर तक गुस्से में घूरा और फिर अचानक से दोबारा हंसने हुए बोला

फारूख- हा हा हा अभी मेरा ट्रंप कार्ड बाकी है… तुम लोग मुझे ज्यादा देर तक अपनी कैद में नहीं रख पाओगे…..

अब चौंकने की बार मेरी थी, फारूख के कांफिडेंस को देखकर मुझे कुछ गडबड होने का शक हो रहा था, इसलिए मैंने फारूख से गुस्से में बोली

अमृता- किस की बात कर रहा है तू

फारूख- इतनी भी क्या जल्दी है मैडम…. जल्द ही तुम्हें पता चल जाऐगा…

आआआआआहहहहहहह

फारूख की बात पूरी होने से पहले ही मैंने उसके मूँह पर एक जोरदार पंच जड दिया और गुस्से में बिफरते हुए बोली

अमृता- साले तुझे पता है कि मैं यहाँ तक कैसे पहुँची, इब्राहिम ने मुझे तेरे इस अड्डे के बारे में बताया था, उसने तेरा हर एक राज, तेरे सारे प्लान के बारे में मुझे पहले ही बता दिया था। तुम लोगों के यहाँ आने से पहले ही मैं सारी सीक्रेट फाईल और पैनड्राईव यहाँ से गायब कर चुकी हूँ, यहाँ तक की तेरे स्लीपर सेल्स और तेरे साथियों का पूरा डाटा भी मैं तेरे कम्प्यूटर से निकाल चुकी हूँ। तो अब तुझे क्या लगता है कि मैं तेरे ट्रंप कार्ड के बारे में पता नहीं कर सकती हूँ क्या… अगर मैं अपनी पर आ गई तो तू खुद ही अपने उस ट्रंप कार्ड के बारे में मुझे बताने के लिए मजबूर हो जाऐगा।

मेरी बात सुनकर फारूख हैरान होते हुए बोला

फारूख- नहीं ऐ नहीं हो सकता… इब्राहिम मर जाऐगा लेकिन हमें कभी भी धोखा नहीं दे सकता

अमृता- हाँ शायद ऐसा ही कुछ वो भी बोल रहा था, लेकिन मेरा थोडा सा टार्चर भी वो बरदास्त नहीं कर पाया। तू जानना चाहता है कि मैंने उसके साथ क्या किया था

मेरी बात सुनकर फारूख ने नफरत से मुझे घूरा तो मैंने उसे लात मारकर नीचे जमीन पर गिरा दिया और उसके सीने पर अपना पैर रखकर मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- मैंन सबसे पहले उसके दोनों पैरों में गोली मारी, ताकि वो भाग ना सके, उसके बाद मैंने उसे जमीन पर लेटा दिया, ठीक बैसे ही जैसे इस वक्त तू लेटा हुआ है और उसके बाद मैंने उसके दोनों हाथों और दोनों पैरों में कुल 100 से भी ज्यादा कीलें ठोककर उसे जमीन से चिपका दिया। साला बहुत चीख रहा था इसलिए मैंने उसके मूँह में कपडा ठूंस दिया था। जिसके बाद मुझे पता ही नहीं चला कि उसको कितना दर्द हुआ होगा। उसके बाद मैने अपने खंजर से उसके सीने और पेट की खाल को छील कर उसपर नमक मिर्ची का पाऊडर मल दिया। साला ऐसे तडप रहा था जैसे किसी ने उसके ऊपर तेजाब डाल दिया हो। और फिर मैंने…….

इससे पहले मैं अपनी बात पूरी कर पाती फारूख गुस्से में चीखता हुआ बोला

फारूख- चुप हो जा साली मादरजात…. तू इंशान है या शैतान……

फारूख की बात सुनकर मैंने एक नजर अपने सभी साथियों पर डाली जो मेरी बात सुनकर सदमें की हालत में पहुँच गए थे, इसलिए शायद फारूख के मुझे गाली देने पर उन लोगों ने कोई रिऐक्ट नहीं किया था। फिर मैं फारूख में फारूख के एकदम नजदीक जाकर उसकी आँखों में आँखे डालकर बोली

अमृता- हाँ मैं शैतान हूँ फारूख मियां और अब तुम इस शैतान के हाथ लग चुके हो… तो बोलो क्या तुम्हें भी इब्राहिम बाला ट्रीटमेंट चाहिए या फिर तुम अपने ट्रंप कार्ड के बारे में मुझे बता रहे हो।

मेरी बात सुनकर फारूख ने नफरत से मुझे घूरते हुए कहा

फारूख- वो वो मैंने कानपुर यूनिवर्सिटी के अपने सभी स्लीपर सैल्स को यहाँ हुऐ हमले के बारे में पहले ही इंफार्म कर दिया है। कुछ ही देर में वो लोग पूरे बॉयज हॉस्टल को हॉस्टेज बनाकर मुझे छोडने की डिमांड करेंगे। बॉयज हॉस्टल के बाकी बच्चों को बचाने के लिए तुम लोग मुझे छोडने के लिए मजबूर हो जाओगे। उसके बाद मैं इण्डियन गवर्मेंट को उन बच्चों की रिहाई के बदले अपनी शर्तें मानने के लिए मजबूर कर दूँगा।

फारूख की बात सुनकर मैंने गुस्से में एक के बाद एक उसके चेहरे पर 4-5 पंच जड दिए और गुर्राते हुए बोली

अमृता- साले हरामजादे आ गया ना अपनी औकात पर… तेरे एक साथी को मैंने टार्चर क्या किया, तू मुझे शैतान बोलने लगा और अब जब तू सैकडों बच्चों को हास्टेज बनाने जा रहा है, वो कौन सा नेक काम है। दिल कर रहा है कि अभी के अभी तेरे टुकडे टुकडे करके कुत्तों को खिला दूँ।

मेरी बात खत्म होते ही मेरा फोन रिंग करने लगा, मैंने जैसे ही स्क्रीन पर नजर डाली तो वो कानपुर एस.पी. की कॉल थी। इसलिए मैंने तुरंत ही वो कॉल रिसीव कर ली। अगले ही पल दूसरी तरफ से आवाज आई

एस.पी.- मिस अमृता अभी अभी हमारे पास सूचना आई है कि कुछ आतंकवादियों ने कानपुर यूनिवर्सिटी के बॉयज हॉस्टल में रहने बाले सभी बच्चों को हॉस्टेज बना लिया है। वो लोग फारूख उस्मान को छोडने की डिमांड कर रहे हैं।

एस.पी. की बात सुनकर मैंने कहा

अमृता- ठीक है मैं अभी वहाँ पहुँचती हूँ

इतना बोलकर मैंने फोन कट कर दिया। अब तक पुलिस टीम भी उस फार्महाऊस पहुँच चुकी थी। मेरी टीम ने पुलिस फोर्स के साथ मिलकर उस फार्म हाऊस में जप्त किया सारा सामान सील करके अपनी गाडियों में लाद लिया और उन आंतकवादियों की लाशों को भी पोस्टमार्डम के लिए भेज दिया गया था। इसलिए उस फार्महाऊस को पुलिस टीम के हावाले करके मैं अपने साथियों के साथ फारूख को लेकर वहाँ से निकल गई।

कहानी जारी है..............
 
Update 094 -

जब तक मैं कानपुर यूनिवर्सिटी के बॉयज हॉस्टल पहुँची तब तक पुलिस फोर्स ने बॉयज हॉस्टल को चारों तरफ से घेर लिया था। मेेरे वहाँ पहुँचते ही एस.पी. सहाब मेरे पास आते हुए बोले

एस.पी.- मिस अमृता हमें अब तक पता नहीं चला है कि अंदर कुल कितने आतंकवादी हैं और उनके पास कौन कौन से हथियार हैं। हमारी टीम ने हॉस्टल के अंदर जाने की कोशिश की थी, लेकिन अंदर से फायरिंग होने लगी। जिसमें हमारे दो सिपाही घायल हो गए हैं।

अमृता- आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन लोगों के पास मेरे ख्याल से देशी कट्टे या पिस्टल से ज्यादा बडे हथियार नहीं होने चाहिए और रही बात उनकी संख्या की तो वो लोग करीब 15 हैं।

मेरी बात सुनकर एस.पी. हैरान होते हुए बोला

एस.पी.- आपको इस बारे मैं कैसे पता है

अमृता- क्योंकि वो कोई ट्रेंड आतंकवादी नहीं है, बल्कि वो लोग इसी हॉस्टल में रहने बाले स्टूडेंट हैं। असल में फारूख ने यहाँ कानपुर और उसके आस पास के ऐरिया में अपने कई सारे स्लीपर सेल्स बनाऐ हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी में उसके कुल 20 स्लीपर सेल्स थे, जिनमें से 5 स्लीपर सेल्स 3 दिन पहले बलरामपुर में हथियारों की स्मगलिंग करते वक्त पकडे गए हैं। इसलिए मैं जानती हूँ कि वो लोग 15 हैं और रही बात हथियारों की तो इन आतंकवादियों के ज्यादातर हथियार उस फार्महाऊस में ही रखे हुए थे। वहां पर हुए इनकाऊंटर के दौरान फारूख ने आनन फानन में यह सब प्लान किया है। जिस कारण मैंने अंदाजा लगाया है कि उनके पास कोई भी बडा हथियार नहीं होगा।

एस.पी.- ओह यह बात है… तो फिर अब आगे का क्या प्लान है

अमृता- आप पुलिस फोर्स को पीछे हटने के लिए बोल दीजिए। मेरे कुछ साथी फारूख को लेकर हॉस्टल के मैन गेट तक जाऐंगे। इस दौरान सभी लोगों का ध्यान फारूख पर होगा। उसी वक्त मैं अपने कुछ साथियों के साथ पीछे के रास्ते हॉस्टल के अंदर जाऊँगी और उन सभी स्लीपर सेल्स को न्यूट्रलाईज करने की कोशिश करूंगी।

एस.पी.- पर मेरी पुलिस टीम ने इस हास्टल के चारों तरफ अच्छी तरह से तलाशी ली है। मैन गेट के अलावा हास्टल के अंदर जाने का कोई और रास्ता नहीं है।

अमृता- एक सीक्रेट रास्ता है, एस.पी. सहाब, जो शायद आपकी पुलिस टीम की नजरों में आने से चूक गया है। असल में पीछे की तरफ बाऊंड्रीबॉल का एक हिस्सा टूटा हुआ है। जिसमें से कोई भी आसानी से अंदर बाहर जा सकता है। लेकिन उस टूटे हुए हिस्से के ठीक सामने कंटीला झाड लगा हुआ है। जिस कारण उसपर किसी की नजर नहीं जाती है। बॉयज हॉस्टल के कई लडके उसी रास्ते से रात में हॉस्टल के अंदर बाहर आते जाते हैं।

एस.पी.- अगर ऐसा है तो हमें उस रास्ते को जल्द ही बंद करवाना पडेगा

अमृता- वो तो है.. खैर यह बाद की बात है पहले आप हमारे लिए एक फ्लैश लाईट का इँतजाम कर दीजिए, जो हम फारूख के ऊपर डाल सकें। ताकि उसके साथी दूर से ही फारूख को पहचान जाऐं और उनका ध्यान भटक जाऐ।

एस.पी.- ठीक है मैं अभी इसका इंतजाम कर देता हूँ।

इतना बोलकर एस.पी. वहाँ से चला गया। एस.पी. के वहाँ से जाते ही मैंने अपने साथियों से कहा

अमृता- मैं सोढी और विक्रांत के साथ पीछे के रास्ते हॉस्टल के अंदर जाऊँगी और हमारे दो साथी पीछे के रास्ते पर नजर रखेंगे, ताकि कोई भी उस रास्ते से भाग ना पाऐ। हमारे बाकी की टीम पूर्वी और साक्षी के साथ हॉस्टल के मैन गेट पर फारूख को हॉस्टेज बनाकर रखेगी। अगर फारूख ने भागने की या फिर कुछ भी गडबड करने की गलती की तो उसे तुरंत गोली मार देना। अंदर जैसे ही सिचुऐशन हमारे कंट्रोल में आऐगी तो मैं तुम लोगों को अंदर आने के लिए बोल दूँगी।

मेरी बात खत्म होते ही मेरे सभी साथियों ने एक साथ कहा

“यह कैप्टन”

तभी मेरा टीम मेंबर पवन बंदूक की नोक पर एक लडके को मेरे पास लाते हुए बोला

पवन- कैप्टन यह लडका एस.पी. ऑफिस से ही हमारा पीछा कर रहा है,

जैसे ही मैंने उस लडके का चेहरा देखा तो मैं हैरान रह गई, क्योंकि वो कोई और नहीं बल्कि कबीर था। कबीर को वहां देखकर मैंने उससे सबाल किया

अमृता- आखिर तुम यहाँ कर क्या रहे हो…… और हमारा पीछा करने का क्या मतलब है।

मैंने और मेरी पूरी टीम ने इस वक्त अपना चेहरा ब्लैक मास्क से ढंक रखा था, जिस कारण कोई भी हमें पहचान नहीं सकता था। लेकिन कबीर मेरी आवाज सुनते ही तुरंत मुझे पहचानते हुए बोला

कबीर- अमृता ऐ ऐ तुम ही हो ना….. आखिर यहाँ पर चल क्या रहा है, और तुम आर्मी यूनिफार्म में क्यों हो।

इससे पहले मैं कबीर के सबालों का जबाब दे पाती सोढी ने कहा

सोढी- लगता है यह लडका भी उन आतंकवादियों का साथी है… गोली मार दो इसे

सोढी की बात सुनकर पवन ने जैसे ही अपनी रायफल के ट्रगर पर उंगली रखी तो मैं उसे रोकते हुए बोली

अमृता- नहीं रुको… कोई भी उसे नुकशान पहुँचाने के बारे में सोचना भी मत, अभी के अभी दूर हटो उससे… वो मेरा दोस्त है…. अगर किसी ने भी उसके साथ बदतमीजी की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

मेरी बात सुनते ही पवन ने अपनी गन नीचे कर ली और मुझसे सबाल किया

पवन- तो फिर अभी इसका क्या करना है कैप्टन…. क्या हम इसे ऐसे ही जाने देंगे….

अमृता- नहीं मुझे उससे कुछ सबाल करने हैं, फिलहाल इसे यहाँ से दूर एक सुरक्षित स्थान पर ले जाओ। ऑपरेशन खत्म होने के बाद मैं इससे बात करूँगी, और हाँ याद रहे इसके साथ कोई भी बदतमीजी नहीं होनी चाहिए।

मेरी बात सुनते ही पवन बिना कुछ कहे कबीर को अपने साथ ले गया।

कबीर और पवन के वहाँ से जाते ही मैं सोढी और विक्रांत के साथ हॉस्टल के पीछे की तरफ जाने लगी, हमारे साथ दो और कमांडो थे जो हॉस्टल के पीछे बाले रास्ते को बाहर से ब्लॉक करने बाले थे। मैं विक्रांत और सोढी के साथ पीछे बाले रास्ते से हॉस्टल के अंदर दाखिल हो गई। शायद उन लडकों ने उस रास्ते से किसी के अंदर आने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी, जिस कारण उन लोगों ने उस रास्ते को सिक्योर नहीं किया था। अंदर जाते ही हम लोग अलग अलग दिशा में आगे बढ गए और सामने आने बाले हर ट्रेरेरिस्ट को जख्मी करके हुए आगे बडने लगे।

हम लोगों ने किसी भी स्लीपर सेल को जान से मारने की कोशिश नहीं की थी, क्योंकि हम जानते थे कि वो लोग बस फारूख की बातों में आकर बहक गए है। करीब 20 मिनट तक चले इस ऑपरेशन में हमने सभी स्लीपर सेल्स को बुरी तरह से घायल करके सभी स्टूडेंट को छुडवा लिया था, आपरेशन खत्म होते ही मैंने एस.पी. को कॉल करके पुलिस टीम अंदर भेजने के लिए बोल दिया, ताकि वो लोग हॉस्टल को सिक्योर कर सकें और घायल स्टूडेंट्स को पुलिस सिक्योरिटी में हॉस्पीटल भेज सकें।

हॉस्टल को पूरी तरह से सिक्योर करने के बाद हम लोग फारूख और जप्त किया सारा सामान लेकर एस.पी. ऑफिस पहुँचें। जहाँ पर हमने जप्त किया सारा सामान एस.पी. ऑफिस के सिक्योर रूम में सुरक्षित रखवा दिया, क्योंकि अगले दिन मेरी टीम उस पूरे सामान को अपने साथ दिल्ली ले जाने बाली थी और फारूख को भी अपने साथ दिल्ली ले जाना था, लेकिन आज रात के लिए उसे कानपुर जेल में बंद कर दिया गया था। पुलिस टीम ने आज रात के लिए हमारी पूरी टीम के रुकने और खाने पीने का पूरा इंतजाम पहले ही कर दिया था। सारे कामों से फ्री होते होते रात के करीब 9 बज गए थे, तभी पवन कबीर को अपने साथ लाते हुए बोला

पवन- कैप्टन इसका क्या करना है

कबीर को वहाँ एस.पी. ऑफिस में देखकर मैंने झुंझलाते हुए अपना मास्क निकाल कर कहा

अमृता- अबे यार इसे वहीँ हॉस्टल में क्यों नहीं छोड दिया। इतनी रात हो गई है हॉस्टल का मैन गेट भी लॉक हो गया होगा और आज तो पुलिस टीम भी वहाँ पहरा दे रही है।

पवन- पर आपने तो कहा था कि आपको इससे कुछ पूछताछ करनी है

अमृता- ओह हाँ हाँ मैं तो भूल ही गई थी, चलो कोई नहीं इसे तुम मेरे पास ही छोड दो, आज मै इसे अपने साथ अपने घर ले जाती हूँ, वहीँ पर पूछताछ भी कर लूँगी और कल इसे बापिस हॉस्टल भी छोड दूँगी। तुम जाकर बाकी टीम मेंबर्स के साथ खाना खाकर रेस्ट करो… और हाँ साक्षी, पूर्वी, विक्रांत और सोढी को भी मैं अपने साथ ले जा रही हूँ। इसलिए आज रात टीम को तुम मैनेज कर लेना और अगर कोई भी प्राब्लम हो तो तुरंत मुझे कॉल कर देना।

पवन- ओके कैप्टन

इसके बाद मैंने अपने दोस्तों की तरफ देखते हुए कहा

अमृता- तो फिर चलें आज रात पार्टी करते हैं

सोढी- अरे हाँ हाँ चलो…. मैं तो कबसे इसी का इंतजार कर रहा था

अमृता- तो फिर ठीक है चलो चलते हैं

इसके बाद हम लोग एस.पी. ऑफिस से मेरे घर के लिए निकल गए, चूँकि मेरे दोस्त अपनी यूनिफार्म में थे और अपने साथ एक्सट्रा कपडे भी नहीं लाऐ थे, इसलिए हम लोग सबसे पहले एक मॉल में पहुँचे जहाँ मैंने अपने दोस्तों और कबीर के लिए नाईट बियर कपडे खऱीदे, हाँलाकि बस एक ही रात की बात थी, इसलिए पहले तो वो लोग कपडे लेने से मना कर रहे थे, लेकिन मेरे जिद करने पर बो लोग मान गए, इसके बाद हमने एक रेस्टोरेंट से अपने लिए खाना पैक करवाया और फिर बीयर की पूरी एक पेटी खरीद कर हम लोग मेरे घर पर आ गए। चूँकि मेरा घर अच्छा खासा बडा था, जिसमें मेरे दोस्तों के लिए पर्याप्त एक्स्ट्रा बेडरूम थे।

इसलिए घऱ पहुँचकर हम लोग सबसे पहले नहाकर फ्रेस हुए और फिर कपडे चेंज करने के बाद हॉल में इकट्ठा हो गए। हाँलाकि हमने जो बियर खरीदी थी, वो पहले से ही अच्छी खासी चिल्ड थी, लेकिन फिर भी घऱ पहुँचकर मैंने सारी बियर फ्रिज में रख दी थी। ताकि पार्टी शुरू होने से पहले ही वो गर्म ना हो जाऐ। इसलिए जब हमने पार्टी शुरू की तब तक बियर पहले से भी ज्यादा चिल्ड हो गई थी। हॉल में बैठकर अपने दोस्तों से बातें करने के दौराना मैंने कबीर का परिचय उन लोगों से करवा दिया था, इसलिए मेरे दोस्त कबीर के साथ भी दोस्तों की तरह ही बिहेब कर रहे थे, लेकिन कबीर गुमसुम बैठा बस हम लोगों की बातें सुन रहा था। अपने दोस्तों से कुछ देर बातें करने के बाद मैंने कबीर की तरफ देखते हुए उससे सबाल किया

अमृता- कबीर… तो फिर बताओ आखिर तुम हमारा पीछा क्यों कर रहे थे…..

मेरी बात सुनकर कबीर थोडे रूखेपन से बोला

कबीर- मैं बस तुम्हारा सच जानना चाहता था, मैं जानना चाहता था कि तुम आखिर हो कौन…… वो नटखट और चुलबुली सी लडकी जो मेरे साथ पढती है और जिसे मैं बेइतहाँ प्यार करता हूँ, वो असली अमृता है या फिर मेरे सामने इस वक्त जो बैठी है, वो असली अमृता है….

कबीर के रूखेपन से चिढते हुए मैंने कहा

अमृता- इस वक्त तुम्हारे सामने जो बैठी है वही असली अमृता चौहान है।

कबीर- लेकिन तुमने मुझे अपने इस सच के बारे में पहले क्यों नहीं बताया

कबीर की बात सुनकर मैंने एक नजर अपने साथियों की तरफ देखा जो अपना अपना सर झुकाकर अपनी हंसी रोकने की कोशिश कर रहे थे। अपने टीम मेंबर्स के ऐसे रिऐक्शन को देखकर मुझे काफी ज्यादा चिढ हो रही थी, इसलिए मैंने अपने दोस्तों से कहा

अमृता- एक्सक्यूज मी गाईज… तुम लोग पार्टी इंज़ॉय करो, तब तक मैं कबीर से अकेले में कुछ बातें करके आती हूँ।

इतना बोलकर मैंने गुस्से में कबीर का हाथ पकडा और उसे लगभग खींचते हुए घर के बाहर बाले गार्डन में ले आई और वहीँ दरवाजे के पास बाली सीढियों पर बैठते हुए गुस्से में कबीर से बोली

अमृता- मेरे दोस्तों के सामने तुम क्या बकवास कर रहे थे कबीर… आखिर मेरे दोस्तों के सामने ऐसी बातें करने की क्या जरूरत थी, पता नहीं क्या सोच रहे होंगे वो लोग मेरे बारे में,

मेरी बात सुनकर कबीर मेरे पास ही सीढियों पर बैठता हुआ बोला

कबीर- ऐसा मैंने क्या बोल दिया

कबीर की बात सुनकर मैं अपना सिर पकडते हुए बोली

अमृता- डफर मेरे दोस्तों के सामने मुझे प्यारी और चुलबील लडकी बोलने की क्या जरूरत थी, और तुम्हें बार बार सबके सामने अपना प्यार कन्फेस करने की यह कौन सी आदत है।

मेरी बात सुनकर कबीर थोडा हिचकिचात हुआ बोला

कबीर- वो वो तो बस फ्लो फ्लो में मेरे मूँह से निकल गय था बस

अमृता- तो फिर बताओ आखिर तुम मेरा पीछा क्यों कर रहे थे

कबीर- अभी अभी तो बताया कि मैं बस तुम्हारा सच जानना चाहता था

अमृता- अच्छा…. तो फिर कब से कर रहे हो तुम मेरा पीछा

कबीर- वो वो जिस दिन तुम बलरामपुर गई थी, उसी दिन से

कबीर की बात सुनकर मैं बुरी तरह से चौंक गई थी। क्योंकि इतने दिनों से मुझे इस बात का बिल्कुल भी शक नहीं हुआ था, कि कोई मेरा पीछा भी कर रहा है।

कहानी जारी है............
 
Update 095 -

कबीर की बात सुनकर मैंने गुस्से में उसे घूरा और झल्लाते हुए बोली

अमृता- व्हॉट….. आर यू सिक….. तुम बिना सोचे समझे मेरे पीछे पीछे बलरामपुर तक पहुँच गए थे, तुम्हें समझ भी आ रहा है कि यह सब तुम्हारे लिए कितना खतरनाक हो सकता था। वहाँ पर कई सारे क्रिमनल्स थे, अगर किसी की नजर तुमपर पड गई होती तो आज तुम या तो हॉस्पीटल में होते या इस धरती पर ही नहीं होते। अच्छा तो कैसे गए थे वहाँ पर… मेरा मतलब है कि कैब से या बस से…..

कबीर- बाईक से…

अमृता- तुम पागल हो क्या… कोई भला इतनी दूर बाईक से कैसे जा सकता है… बैसे क्या क्या देखा वहाँ पर तुमने

कबीर- सब कुछ… तुम्हारा क्रिमनल्स को मारना, हमारे कॉलेज स्टूडेंट को डराना और उस टैरेरिस्ट को टार्चर करना… सब कुछ देखा था मैंने

अमृता- तो फिर तुम तब से ही मेरा पीछा कर रहे हो

कबीर- हाँ……. यहाँ तक की मैं तुम्हारे घर के बाहर से बिंडो पर खडे होकर भी तुमपर नजर रख रहा था।

कबीर की बात सुनकर मैं झल्लाते हुए बोली

अमृता- आखिर यह सब करने की क्या जरूरत थी कबीर…. तुम समझ भी रहे हो कि यह सब तुम्हारे लिए कितना खतरनाक हो सकता था।

कबीर- और तुम्हारे लिए… क्या यह सब तुम्हारे लिए खतरनाक नहीं है….

अमृता- नहीं है… क्योंकि मैंने इसकी प्रॉपर ट्रेनिंग ली है…. अगर तुम्हें मेरे बारे में कुछ भी डाऊट था या कुछ भी जानना था तो डायरेक्ट मुझसे पूछ लेते मैं तुम्हें सब कुछ सच सच बता देती, बैसे भी मैं इस ऑपरेशन के पूरा होने के बाद खुद ही तुम्हें सब कुछ बताने बाली थी।

कबीर- आई एम सॉरी मैं तो बस तुम्हारा सच जानने की कोशिश कर रहा था

अमृता- तुम जानना चाहते हो ना मेरा सच, तो सुनो मैं एक एन.एस.जी. कमाँडो के साथ साथ आई.बी. की सीक्रेट ऐजेंट हूँ। हमें इंटेलीजेंट से खबर मिली थी कि कुछ बिदेशी आतंकवादी यहाँ कानपुर में छिपे हुऐ हैं। उनके बारे में ही पता करने के लिए मैं यहाँ एक सीक्रेट मिशन पर आई थी और आज मेरा वह मिशन पूरा हो गया है।

कबीर- तो तुमने यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई

कबीर की बात सुनकर मैं चिढते हुए बोली

अमृता- बेबकूफ हो क्या… कोई सीक्रेट ऐजेंट भला किसी को अपना सच बताता है क्या

कबीर- तो फिर अब क्यों बताया

अमृता- क्योंकि अब मुझे तुमपर इतना भरोसा तो है कि तुम मेरा यह राज किसी और को कभी नहीं बताओगे। और अगर मैं तुम्हें पहले ही इस बारे में बता देती तो भी क्या ही फर्क पडता… क्या मेरा सच जानने के बाद तुम्हें मुझसे प्यार नहीं होता

मेरी बात सुनकर कबीर अपनी नजरें चुराते हुए बोला

कबीर- मुझे नहीं पता… लेकिन अगर तुम मुझे अपना यह सच पहले बता देती तो हमारे रिश्ते के लिए ज्यादा बेहतर होता

कबीर की बात सुनकर मैंने गुस्से में उससे कहा

अमृता- मिस्टर कबीर शर्मा क्या मैंने तुमसे पहले ही नहीं कहा था कि मेरी जिंदगी के ऐसे कई राज हैं जो मैंने आजतक किसी को नहीं बताये। कहा था या नहीं

मेरी बात सुनकर कबीर अपना सिर झुकाते हुए बोला

कबीर- हाँ कहा था

अमृता- और क्या तुमने खुद मुझसे नहीं कहा था कि तुम्हें मेरे किसी भी राज को नहीं जानना है। मैं जैसी हूँ तुम बैसे ही मुझे प्यार करते हो और हमेशा करते रहोगे। इन्फेक्ट तुमने तो यहाँ तक कहा था कि तुम मेरे हर काम और हर फैसले को ना केवल सपोर्ट करोगे, बल्कि हर कदम पर मेरा साथ भी दोगे। कहाँ था या नहीं

कबीर- हाँ कहा था

अमृता- और क्या वो तुम नहीं थे जो खुद ही मेरे पीछे आऐ थे, मेरे बार बार मना करने और बार बार तुम्हें समझाने के बाद भी तुम मुझे लगातार प्रपोज करते रहे, और आज जब मेरे दिल में तुम्हारे लिए फीलिंग जाग गई हैं तो तुम मेरे ही दोस्तों के सामने इतना गंदा रिऐक्शन दे रहे हो।

कबीर- हाँ….… ब्हॉट… एक मिनट क्या कहा तुमने अभी… तुम्हारे दिल में भी मेरे लिए फीलिंग हैं

अमृता- हाँ हैं…. तो क्या हुआ…. जब कोई तुम्हारे जैसा हैण्डसम और केयरिंग लडका बार बार किसी लडकी को प्रपोज करेगा तो उस लडकी के मन में फीलिंग आना नैचुरल है।

कबीर- तो फिर तुमने इस बारे में मुझे बताया क्यों नहीं

अमृता- डफर… पिछले 4-5 दिनों से तुम्हें यही तो बताने की कोशिश तो कर रही थी, लेकिन तुम हो कि मुझसे दूर दूर भाग रहे थे। देखो मिस्टर कबीर मैं अपनी फीलिंग्स को लेकर पूरी तरह से क्लीयर हूँ कि मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ और मुझे इस बारे में दोबारा सोचने की कोई जरूरत भी नहीं है। लेकिन अब मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा सच जानने के बाद तुम अपनी फीलिंग्स को लेकर पूरी तरह से क्लीयर नहीं हो। मैं जो हूँ जैसी भी हूँ तुम्हारे सामने हूँ, मैं अपना यह काम कभी नहीं छोडने बाली, इसलिए तुम एक बार फिर से हमारे रिश्ते को लेकर अच्छी तरह से सोच लो। कहीं ऐसा ना हो की बाद में तुम्हें पछताना पडे।

इससे पहले मैं अपनी बात पूरी कर पाती अचानक से पूर्वी बाहर आते हुए बोली

पूर्वी- सॉरी गाईड…. वो क्या है ना कि हम लोगों ने अंदर दूसरा राऊंड शूरू कर दिया है और तुम लोगों की बियर भी खत्म हो गई थी, इसलिए मैं तुम लोगों के लिए बियर लाई हूँ।

इतना बोलकर पूर्वी ने मुझे और कबीर को बियर की कैन पकडाते हुए कहा

पूर्वी- बोथ ऑफ यू गाईज कैरी ऑन… हमें तुम लोगों की बातें सुनाई नहीं दे रही हैं। तुम लोग अपना अपना मैटर शार्ट आऊट कर सकते हो… तब तक हम तुम्हारा इंतजार करते हैं।

इतना बोलकर पूर्वी वहाँ से चली गई, पूर्वी के जाने के बाद मैंने अपनी बियर कैन को ओपन करके 2-3 बडे बडे शिप लिए और फिर सीरियर होते हुए बोली

अमृता- देखो कबीर मुझे नहीं पता कि मेरा सच जानने के बाद तुम मुझे एक्सेप्ट कर पाओगे या नहीं, लेकिन मेरा काम ही कुछ ऐसा है कि अपने मिशन को पूरा करने के लिए मुझे कई कई महिनों यहाँ तक की सालों तक भी तुमसे दूर रहना पड सकता है और हो सकता है कि अपने मिशन को पूरा करने के लिए मुझे मजबूरी में किसी गैरमर्द के साथ संबंध भी रखना पडे। ऐसी कंडीशन में हमारे बीच मिस अंडरस्टैंडिंग होना नैचूरल है। बस इसीलिए मैं आज तक तुम्हारे प्रपोजल को रिजेक्ट करती आई हूँ। क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि एक बार रिलेशनशिप में आगे बडने के बाद हमें बाद में पछताना पडे। अभी भी कुछ नहीं बिगडा है, तुम्हें मुझसे लाख गुना बेहतर लडकी मिल जाऐगी, और रही बात मेरी तो मैं भी जल्द ही अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल करना सीख जाऊँगी। इसलिए अच्छी तरह सोच समझकर ही कोई फैसला करना।

कबीर- क्या श्रेया को तुम्हारा सच पता है…

अमृता- नहीं…. अंदर हॉल में बैठे मेरे इन चारों दोस्तों और मेरे अंकल के अलावा अब बस तुम ही हो जो मेरा सच जानते हो। तुम्हें पता है मेरे इन चारों दोस्तों की कौन सी बात मुझे सबसे अच्छी लगती है। मैं बताती हूँ मेरे ऐ दोस्त मुझे कभी भी जज नहीं करते। मैं जो हूँ जैसी हूँ उसी रूप में मेरे दोस्तों ने मुझे अपनाया है। इसीलिए ऐ चारों मेरे दिल के बहुत करीब है। मैं तुम्हें यह सब बस इसलिए बता रही हूँ क्योंकि मुझे लगता था कि तुम भी मुझे कभी जज नहीं करोगे, लेकिन अब मुझे ऐसा लग रहा है कि शायद मैं गलत थी। खैर छोडो यह सब…. मैं कानपुर में तुम्हारे साथ बिताऐ गए पलों को अपने मिशन का हिस्सा समझकर भूलने की पूरी कोशिश करूँगी और तुम भी मेरे साथ बिताऐ पलों को अपने कॉलेज लाईफ कि हिस्सा समझकर भूल जाना। और हाँ अब जब मेरा मिशन पूरा हो गया है, इसलिए मैं कल कानपुर छोडकर दिल्ली बापिस जा रही हूँ। इसलिए हो सकता है कि आज हमारी आखिरी मुलाकात हो।

इतना बोलकर मैं उठ खडी हुई और अंदर हॉल में अपने दोस्तों के साथ बैठकर बातें करने लगी। वहीं कबीर बाहर सीढियों पर बैठकर काफी देर तक मेरी कही गई बातों के बारे में सोचता रहा। करीब आधे घंटे बाद वो बापिस अंदर आ गया। अब वो पूरी तरह से नॉर्मल था और मेरे दोस्तों के साथ हंसी मजाक करते हुए बातें कर रहा था। कुछ देर और ड्रिंक करने के बाद हम लोगों ने साथ में लंच किया और फिर सोने चले गए। अगले दिन मेरे और मेरे दोस्तों के जागने से पहले ही कबीर अपने हॉस्टल के लिए निकल गया था। चूँकि मैं और मेरे दोस्त देर रात तक पार्टी करते रहे थे इसलिए अगले दिन देर से हमारी आँख खुली। जब मैं जागी तो मैंने देखा कि मेरे मोबाईल पर कबीर का एक मैसेज डला हुआ है। जिसमें उसने अपने हॉस्टल बापिस जाने के बारे में मुझे बताया था।

उस मैसेज को पढने के बाद मैंने एक गहरी सांस ली, क्योंकि कबीर के ऐसे रिऐक्शन से मैं समझ गई थी कि मेरे बारे में सब कुछ जानने के बाद शायद कबीर अब मेरे साथ अपना रिलेशन आगे नहीं बडाना चाहता है। कुछ देर इस बारे में सोचने के बाद मैं नहाने और फ्रेस होने के लिए सीधे बाथरूम में घुस गई। जब मैं तैयार होकर हॉल में आई तो मैंने देखा कि पूर्वी और साक्षी सभी लोगों के लिए कॉफी और नाश्ता तैयार कर रही हैं जबकि विक्रांत और सोढी आपस में किसी बात को लेकर डिस्कस कर रहे हैं। मेरे वहाँ आते ही वो दोनों एकदम खामोश हो गए थे। उन्हें इस तरह खामोश होते देख मैंने उनसे सबाल किया

अमृता- अरे यार क्या हुआ… मेरे आते ही तुम लोग चुप क्यों हो गए….

सोढी- कुछ नहीं यार वो तो हम बस ऐसे ही

सोढी की बात सुनकर मैं उसे गुस्से में घूरते हुए बोली

अमृता- सच सच बोलो क्या बातें चल रहीं थी

सोढी- वो वो वो

अमृता- अरे यार बोलो भी ना

तभी विक्रांत बात को संभालते हुए बोला

विक्रांत- अरे यार कुछ नहीं… हम लोग बस कबीर के बारे में आपस में बातें कर रहे थे

विक्रांत की बात सुनकर मैं हैरान होते हुए बोली

अमृता- कौन सी बातें

सोढी- वो वो हमें लगता है कि शायद तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा है….. और कल रात तुम दोनों के बीच कोई झगडा हो गया है। तभी तो वो हमारे जागने से पहले ही आज सुबह सुबह ही यहाँ से चला गया।

सोढी की बात सुनकर मैं चिढते हुए बोली

अमृता- सब बकवास है…… हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है…. वो बस मेरा अच्छा दोस्त है। बैसे भी यहाँ अपना मिशन पूरे करते वक्त मुझे किसी ना किसी को तो अपना दोस्त बनाना ही था। वर्ना अकेले तो मैं कुछ ज्यादा ही बोर हो जाती।

विक्रांत- तो फिर वो कल रात इतना स्ट्रैंज बिहेब क्यों कर रहा था

अमृता- मतलब

विक्रांत- मतलब जब हम लोग उसे यहाँ पर लेकर आऐ थे, तब वो काफी डरा हुआ और परेशान दिखाई दे रहा था, तब तो हमें लगा था कि वो शायद कोई नॉर्मल स्टूडेंट है, लेकिन बाद में जब तुम दोनों ने बाहर जाकर आपस में बात की तो वो पूरी तरह से नॉर्मल हो गया और अंदर आने के बाद भी वो बार बार तुम्हें ही देख रहा था, इसलिए तब हमें लगा कि शायद तुम दोनों के बीच अफेयर चल रहा है। लेकिन उसका आज सुबह सुबह ही हमसे मिले बिना अचानक चले जाना हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है।

अमृता- अरे यार तुम लोग कुछ ज्यादा ही सोच रहे हो, कबीर उसी हॉस्टल में रहता है, जहाँ कल रात हमने ऑपरेशन किया था, इसलिए उसे अपने दोस्तों की फिक्र हो रही थी। बस इसीलिए वो सुबह जल्दी चला गया। जाने से पहले उसने मुझे मैसेज भी किया था और रही बात लव अफेयर की तो हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है।

सोढी- ओह तो यह बात है… हम लोग भी ना पता नहीं क्या क्या सोच रहे थे।

सोढी की बात खत्म होते ही साक्षी और पूर्वी सभी के लिए चाय नाश्ता ले आई थीं। नाश्ता करते वक्त मैंने अपने दोस्तों को बता दिया था कि मैं भी उनके साथ दिल्ली बापिस जा रही हूँ। मेरी बात सुनकर वो लोग काफी खुश थे, इसलिए नाश्ता करने के बाद मैं अपनी पैकिंग करने लगी। पूरी पैकिंग करने और अपने ऑफिस रूम को पूरी तरह से क्लीन करने के बाद मैंने अपना सामान और दोस्तों को बापिस से एस.पी. ऑफिस में छोडा दिया, क्योंकि एस.पी. आफिस के पास बाले ग्राऊंड में ही हमारा हैलीकॉप्टर पार्क था। एस.पी. ऑफिस पहुँचते ही मेरे दोस्त दिल्ली बापिस जाने की तैयारियों में लग गए।

अब जबकि मेरा कानपुर बापिस आने का कोई इरादा नहीं था, इसलिए मैंने अपने प्रापर्टी डीलर को घर की चाबियाँ बापिस कर दीं और अपनी कार को भी सेकेण्ड हैण्ड कार शोरूम पर रीसेल कर दिया। इसके बाद मैं एक कैब बुक करके बापिस एस.पी. ऑफिस के लिए निकल गई।

कहानी जारी है.............
 
Update 096 -

जब मैं एस.पी. ऑफिस जा रही थी तो एक पल के लिए मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना बापिस जाने से पहले एक बार श्रेया और अपने दोस्तों के साथ साथ कबीर से भी मिल लिया जाऐ। लेकिन फिर मैंने अपने इस ख्याल को मन से निकाल दिया। क्योंकि अगर मेरे दोस्तों ने मुझसे दिल्ली बापिस जाने का कारण पूछा तो मेरे पास उनके सबालों का कोई जबाब नहीं होगा।

और फिर कल बॉयज हॉस्टल में हुए हादशे के बाद आज अचानक मेरे कानपुर छोडकर जाने से उन लोगों को मुझ पर शक भी हो सकता था। इसलिए मैंने तय किया कि मैं अपने दोस्तों और कबीर से मिले बिना ही दिल्ली बापिस चली जाऊँगी और अगर बाद में उन लोगों ने मुझे कॉल करके इस बारे में पूछा तो मैं पर्सनल प्राब्लम का बहाना बना दूँगी। बैसे भी मैंने दो दिन पहले ही श्रेया और अपने दोस्तों को पर्सनल काम से बाहर जाने के बार में बताया था और कल मैं आपरेशन में बिजी होने के कारण कॉलेज भी नहीं गई थी। इसलिए उन लोगों को बाद में मुझपर कोई शक नहीं होगा।

रही बात कबीर की तो इतना तो मुझे उसपर यकीन था कि वो मेरा राज किसी को नहीं बताऐगा और अगर मैं बार बार कबीर से मिलने की कोशिश करूँगी तो शायद मैं बाद में उसके लिए अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल ना कर पाऊँ। यही सोचकर मैंने कबीर से भी ना मिलने का फैसला कर लिया था। जब तक मैं एस.पी. ऑफिस बापिस पहुँची तब तक मेरे टीम मेंबर्स ने दिल्ली बापिस जाने की पूरी तैयारी कर ली थी। मेरे वहाँ पहुँचे ही सबसे पहले मैंने एस.पी. सर से मुलाकात की, उसके बाद कल ऑपरेशन के दौरान जप्त किया गया सारा सामान और फारूख की कस्टडी लेने की फार्मेलिटी पूरी करने के बाद मैं अपने टीम मेंबर्स के साथ हैलीपैड की तरफ चल पडी।

इस दौरान मैं बार बार पीछे मुढकर देख रही थी, शायद मुझे अब भी कबीर के वहाँ आने की उम्मीद थी, हाँलाकि मैं इस बात को लेकर पूरी तरह से श्योर थी कि कबीर के मन में अब मेरे लिए कोई फीलिंग्स नहीं बची है, पर मेरे दिल का कोई कोना बार बार मुझे कबीर के प्यार पर भरोसा करने के लिए कह रहा था। लेकिन जब तक मैं हैलीपैड के पास पहुँची तब तक मेरा यह भरोसा भी टूटने लगा था, जिस कारण मेरी आँखों में पानी आ गया था और मेरा दिल भारी हो गया था, इसलिए अपनी आँखों में आऐ आँशुओं को अपने दोस्तों से छिपाने के लिए मैंने अपनी आँखों पर सन ग्लासेस लगा लिए और हैलीपैड पर खडे आर्मी हैलीकॉप्टर की तरफ तेजी से आगे बड गई।

वहाँ खडा आर्मी हैलीकॉप्टर अच्छा खासा बडा था, जिसमें करीब 30 लोगों के बैठने की पर्याप्त जगह थी। इसलिए उस हैलीकॉप्टर में हमारे सामान और फारूख उस्मान के साथ साथ मेरी पूरी टीम बैठ गई थी। अब बस मैं और मेरे दोस्त ही हैलीपैड पर खडे थे। मैंने आखिरी बार पीछे मुढकर देखा, पर मुझेे वहाँ पर कोई भी नजर नहीं आया, इसलिए मैं निराश होकर हैलीकॉप्टर के अंदर जाने लगी, लेकिन जैसे ही मैंने हैलीकॉप्टर की सीढी पर अपना पैर रखा ठीक तभी पूर्वी ने मेरा हाथ पकडकर मुझे रोकते हुए कहा

पूर्वी- अमृता वो आ गया है….

पूर्वी की बात सुनकर मैं जैसे ही पीछे की तरफ मुढी तो मैंने देखा कि कबीर अपनी बाईक को फुल स्पीड में भगाता हुआ हैलीपैड की तरफ ही आ रहा है। मैंने अब तक कि अपनी पूरी जिंदगी में इतनी खुशी कभी महसूस नहीं की थी, जितनी खुशी आज मुझे कबीर को वहाँ देखकर हो रही थी। कबीर को वहाँ देखकर मैं तेजी से उसकी तरफ भागी, तब तक कबीर भी हैलीपैड के नजदीक आ चुका था। इसलिए उसने अपनी बाईक को साईड स्टैण्ड पर खडा किया और भागकर मेरे पास आया, जैसे ही कबीर मेरे पास आया तो हम दोनों ही एक दूसरे की आँखों में खो गऐ। मुझे पता ही नहीं चला कि कब कबीर ने मुझे अपनी बाहों की गिरफ्त में ले लिया है। पता नहीं हम दोनों कब तक एक दूसरे को यूँ ही देखते रहे, मुझे होश तब आया जब मेरा मोबाईल रिंग करने लगा। होश में आते ही मैं कबीर से अलग हुई और बिना देखे ही कॉल रिसीव करके बोली

अमृता- हैलो कौन

दूसरी तरफ से पूर्वी ने हंसते हुए कहा

पूर्वी- कैप्टन अगर आप दोनों का रोमांश हो गया हो तो क्या हम चलें

पूर्वी की बात सुनकर मैंने चिढते हुए जबाब दिया

अमृता- बेट…. मुझे उससे कुछ बात करनी है…. और तुझे तो मैं बाद में देख लूँगी, कबाब में हड्डी कहीं की

इतना बोलकर मैंने पूर्वी का जबाब सुने बिना ही कॉल डिस्कनेक्ट कर दी और कबीर से सबाल किया

अमृता- तुम यहाँ क्या कर रहे हो….

मेरी बात सुनकर कबीर थोडा झिझकते हुए बोला

कबीर- वो वो वो मुझे तुमसे पूछना था कि तुम बापिस कब आओगी…

कबीर की बात सुनकर अचानक से मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया था, क्योंकि मुझे लगा था कि शायद कबीर यहाँ पर अपना प्यार कन्फेस करने आया होगा, लेकिन वो तो बस मेरे बापिस आने के बारे में पूछ रहा था। इसलिए मैंने गुस्से में उसे धक्का देते हुए कहा

अमृता- कभी नहीं….

इतना बोलकर मैं जैसे ही बापिस जाने के लिए पलटी तो कबीर ने पीछे से मेरा हाथ पकड लिया और एक झटके में मुझे फिर से अपनी बाहों में भरते हुए बोला

कबीर- अरे यार तुम अब तक नहीं समझी… मैं तो यहाँ पर बस तुम्हें यह बताने के लिए आया था कि मुझे तुम्हारी रियल आईडेंटिटी से कोई फर्क नहीं पडता, तुम जो हो जैसी हो मुझे पसंद हो… तुम जो चाहो अपनी जिंदगी में कर सकती हो, मुझे तुम्हारे एन.एस.जी. कमांडो या फिर आई.बी. ऐजेंट होने से कोई फर्क नहीं पडता है। मुझे कोई फर्क नहीं पडता है कि अपने मिशन को पूरा करने के लिए तुम क्या क्या करती हो, मैं बस इतना चाहता हूँ कि तुम जब भी मेरे पास रहो तो पूरी तरह से मेरी बनकर रहो।

कबीर की बात सुनकर मैं उसकी आँखों में आखें डालकर बोली

अमृता- कहीं तुम मजाक तो नहीं कर रहे हो कबीर

कबीर- मैंने तुमसे अभी अभी जो कुछ भी कहा… वो सब सच है.. और एक सच यह भी है कि मैं तुमसे बेइंतहां प्यार करता हूँ, इतना ज्यादा प्यार करता हूँ कि तुम्हारे बिना जिंदगी बिताने के बारे में सोच भी नहीं सकता। आई लव यू अमृता….. आई रियली लव यू….

कबीर की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली

अमृता- आई लव यू टू कबीर…. तुम नहीं जानते कि आज सुबह जब तुम अचनाक से घर छोडकर चले गए तो मुझे कैसा फील हो रहा था। ऐसा लगा रहा था कि किसी ने मेरा दिल बुरी तरह से मसल दिया हो। लेकिन तुम सुबह मुझसे मिले बिना अचानक क्यों चले गए थे।

कबीर- अरे बाबा तुम्हें मैसेज तो किया था ना मैंने… कल रात मेरे हॉस्टल में जो कुछ भी हुआ था, उसकी बजह से मुझे अपने दोस्तों की फिक्र हो रही थी, बस इसीलिए अपने दोस्तों को देखने हॉस्टल गया था।

अमृता- तो फिर तुम बापिस से मुझे मिलने क्यों नहीं आऐ…. और फिर अब जब मैं जाने बाली हूँ… तब जाकर आऐ हो…

कबीर- अरे बाबा… कल जो तुमने इतना बडा कांड किया है, उससे तुम्हारा नाम तो क्लीयर करना था ना मुझे

अमृता- मतलब

कबीर- मतलब यह मेरी जान कि कल कानपुर सिटी से बाहर 20 से ज्यादा विदेशी आतंकवादी एनकाऊंटर में मारे गए हैं, और फिर रात में कानपुर यूनिवर्सिटी के बॉयज हॉस्टल को भी आतंकवादियों ने हॉस्टेज बना लिया था, इससे पूरे कानपुर में सनसनी फैल गई है…. तुम्हें क्या लगता है… इस पूरे इंसीडेंट के बाद अचानक से तुम्हारे गायब होने पर क्या हमारे दोस्तों को तुम पर शक नहीं होगा, ऊपर से तुम हमारे किसी भी दोस्त से मिलकर भी नहीं आई हो। इसलिए मैं श्रेया और बाकी दोस्तों से मिलने गया था, ताकि इस पूरे इंसीडेंट के बारे में वो लोग क्या सोच रहे हैं, इस बारे में जान सकूँ, इस दौरान मैंने बातों ही बातों में उन लोगों से बोल दिया है कि तुम कल ही जरूरी काम से दिल्ली चली गई हो। जिस कारण वो लोग कम से कुम तुम पर तो कोई शक नहीं करेंगे।

अमृता- तो फिर तुम्हें कैसे पता चला कि मैं तुम्हें यहाँ मिलूंगी

कबीर- अरे यार अपने दोस्तों से मिलने के बाद जब मैं तुम्हारे घर पहूँचा, तो वहाँ पर लॉक लगा हुआ था और तुम्हारी कार भी गायब थी, ऊपर से कल मैं अपना फोन चार्ज नहीं कर पाया था, जिस कारण वो भी पूरी तरह से डेड पडा हुआ है। इसलिए मैं भागता हुआ एस.पी. ऑफिस आया, जहाँ पूछताछ करने के बाद मुझे पता चला कि तुम लोग दिल्ली बापिस जाने के लिए यहाँ हैलीपैड पर आऐ हो। इसलिए मैं सीधा यहाँ आ गया।

कबीर की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- हुम्म… तो यह बात है… लगता है जनाव ने अपनी गर्लफ्रेंड से गुडबाय बोलने के लिए कुछ ज्यादा ही भागदौड कर ली है… इसलिए तुम्हें इसका इनाम तो मिलना ही चाहिए

इतना बोलकर मैंने कबीर के गालों पर एक लाईट किस कर दिया, कबीर तो मेरी इस हरकत से बुरी तरह से हैरान रह गया, उसने तो कभी इस बात की उम्मीद ही नहीं की थी कि मैं इतनी बोल्ड भी हो सकती हूँ कि यहाँ अपने दोस्तों के सामने खुद उसके गालों पर किस कर लूँ। लेकिन जल्द ही कबीर ने अपने इमोशन पर कंट्रोल करके शरारती अंदाज में कहा

कबीर- इससे काम नहीं चलेगा

मैंने कबीर की आँखों में शरारत को देख लिया था, इसलिए मैं भी पूरे मजे लेते हुए बोली

अमृता- तो फिर क्या करना होगा मुझे

कबीर- मुझे लिप किस चाहिए…..

कबीर की बात सुनकर मैंने चिढते हुए कहा

अमृता- पागल हो क्या… यहाँ सब हमें देख रहे हैं….

कबीर- बस एक बार ना….. प्लीज प्लीज प्लीज…..

अमृता- अच्छा ठीक है… लेकिन बस एक लाईट किस करना

मेरे इतना कहते ही कबीर ने अपने होंठ मेरे होेंठों पर रख दिए और बेदर्दी से उन्हें चूमने लगा। कबीर के इस तरह किस करने से मेरे पूरे बदन में सनसनाहट दौडने लगी थी, हाँलाकि कबीर एक बार पहले भी मुझे किस कर चुका था, लेकिन वो किस कबीर ने मेरी मर्जी के बिना किया था, इसलिए उस किस को मैंने बिल्कुल भी इंजॉय नहीं किया था, लेकिन आज अपने ही सगे भाई को अपने बॉयफ्रेंड के रूप में किस करने वक्त मुझे प्यार का एक अलग ही एहसास हो रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे समय यहीं थम जाऐ और हम दोनों सारी जिंदगी एक दूसरे को यूँ ही प्यार करते रहें। हमारा बो किस कब लाईट से लॉग हो गया यह मुझे भी पता नहीं चला। हमें होश तब आया जब हमारे कानों में साक्षी की आवाज सुनाई दी

साक्षी- कैप्टन अमृता अगर आपका यह लैला मजनू का खेल खत्म हो गया हो तो क्या अब हम चलें…….

साक्षी की बात सुनक हम दोनों तुरंत एक दूसरे से अलग हुए, हम दोनों एक दूसरे को किस करते वक्त इस कदर खो गए थे कि हमें पता ही नहीं चला कब मेरे दोस्त हमारे एकदम पास आकर खडे हो गए हैं। अपने दोस्तों को यूँ घूरते हुए देखकर मुझे काफी ज्यादा ऑक्वर्ड फील हो रहा था, तभी मुझे विक्रांत की आवाज सुनाई दी

विक्रांत- किसी ने तो हमसे सुबह सुबह कहा था कि मैं और कबीर बस अच्छे दोस्त हैं, हमारे बीच ऐसा बैसा कुछ भी नहीं है। मुझे बस यह समझ नहीं आ रहा कि तुम दोनों की ऐसी कैसी दोस्ती है तो कुछ ही घंटों में किस तक पहुँच गई।

तभी साक्षी बीच में बोली

साक्षी- हाँ यार अगर तुम दोनों इसी रफ्तार से चले ना तो शाम तक तुम दोनोें के बच्चे भी पैदा हो जाऐंगे

अपने दोस्तों के कमेंट्स सुनकर मैं चिढते हुए बोली

अमृता- हो गया तुम लोगों का या कुछ और भी कहना है

साक्षी- हाँ हो गया…. अब तुम बताओ कि आखिर यह सब कबसे चल रहा है…. और तुम्हारी हमसे इतनी बडी बात छिपाने की हिम्मत कैसे हुई

अमृता- अरे यार ऐसा कुछ भी नहीं है, जैसा तुम लोग सोच रहे हो…. कल तक हम दोनों बस अच्छे दोस्त ही थे, हाँलाकि हम दोनों एक दूसरे को दिल ही दिल में पसंद करते थे, पर हमने अपना प्यार अभी तक एक दूसरे से कंफेस नहीं किया था, अभी अभी तो हम दोनों ने एक दूसरे से अपना प्यार कंफेस किया है और तुम लोग आ गए यहाँ पर कबाब ेमें ह़ड्डी बनने

मेरी बात सुनकर पूर्वी ने कहा

पूर्वी- ओऐ मैडम पूरे 15 मिनट से तुम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे हो…. अगर हम लोग यहाँ नहीं आते तो पता नहीं कब तक ऐसे ही एक दूसरे को किस करते रहते।

पूर्वी की बात सुनकर मैं और कबीर चौंकते एक साथ बोले

“व्हॉट…”

अमृता- क्या सच में हम लोग पिछले 15 मिनट से किस कर रहे हैं

पूर्वी- जी हाँ मैडम… और आपको यह भी बता दूँ कि तुम दोनों को यहाँ खडे होकर बातें करने में आधे घंटे से भी ज्यादा का समय हो गया है।

अमृता- ओह सॉरी सॉरी चलो चलते हैं…. बाय कबीर…

इतना बोलकर मैं जैसे ही जाने लगी तो कबीर ने एक बार फिर से पीछे से मेरा हाथ पकड लिया। हैलीपैड पर सबके सामने कबीर की इस हरकत से मेरा दिले जोर जोर से धडकने लगा था।

कहानी जारी है..........
 
Update 097 -

इससे पहले मैं कबीर से कुछ कहती, कबीर ने मुझसे सबाल किया

कबीर- तुमने अब तक मुझे नहीं बताया कि तुम कब बापिस आओगी

कबीर का सबाल सुनकर मैं उसकी तरफ पलटकर बोली

अमृता- लुक कबीर मेरा यहाँ कानपुर का मिशन पूरा हो चुका है, इसलिए मेरे पास यहाँ रुके रहने का कोई कारण नहीं है। ऊपर से मैंने अपना घर भी खाली कर दिया है और कार भी रीसेल कर दी है।

कबीर- और डिग्री…

अमृता- कबीर असल में मेरी एक और पहचान है जो मैंने तुम्हें अब तक नहीं बताई है…. असल में हैकिंग वल्ड में लोग मुझे ड्रैगन हार्ट के नाम से जानते हैं।

मेरी बात सुनकर कबीर हैरान होकर मुझे देखने लगा, कबीर को यूँ हैरान होते देख मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- अब तो तुम समझ ही गए होगे कि मुझे उस डिग्री की कोई जरूरत नहीं है, वो डिग्री तो बस मेरे यहाँ आने का बहाना था।

मेरी बात सुनकर कबीर अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल करते हुए बोला

कबीर- तो क्या इसका मतलब यह है कि तुम अब कभी भी यहाँ बापिस नहीं आओगी

कबीर की बात सुनकर मैंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा

अमृता- अब जब तक तुम यहाँ पर हो… तब तक मेरे पास भी यहाँ पर तुमसे मिलने आने के कई सारे बहाने हैं।

मेरी बात सुनकर साक्षी ने कहा

साक्षी- हाऊ रोमांटिक…

साक्षी की बात सुनकर मैंने गुस्से में उसे घूरा तो उसने तुरंत अपने मूँह पर उंगली रख ली। तभी कबीर ने एक बार फिर अपने प्यार को कंफेस करते हुए कहा

कबीर- आई लव यू अमृता

कबीर के यूँ मेरे दोस्तों के सामने ही मुझे प्रपोज करने के कारण मेरे गाल शर्म से गुलाबी हो गऐ थे, मैंने जैसे तैसे अपने आप को कंट्रोल करके उससे कहा

अमृता- लव यू टू कबीर

कबीर- बिल यू मैरी मी…. कम से कम शादि के बाद तो हम हमेशा साथ रह सकेंगे और तुम्हें बार बार मुझसे मिलने के लिए बहाने बनाने की जरूरत भी नहीं पडेगी

इससे पहले मैं कबीर की बात का कोई जबाब दे पाती विक्रांत बीच में अपनी टांग अडाता हुआ बोला

विक्रांत- अमा मियाँ क्या तुम्हें ऐसा नहीं लग रहा है कि तुम अपने प्यार की गाडी कुछ ज्यादा ही तेज चला रहे हो…. अभी अभी तो तुम दोनों ने अपने अपने प्यार को कंफेस किया है और तुम सीधे शादि के लिए प्रपोज करने लगे।

तभी सोढी बीच में आते हुए बोला

सोढी- बैसे भी हमारी कैप्टन को शादी के लिए प्रपोपज करने से कुछ नहीं होने बाला, तुम्हें पहले मेजर विकाश को मनाना होगा, अनकी परमीशन के बिना तुम दोनों का कुछ नहीं हो सकता है।

सोढी की बात सुनकर कबीर थोडा परेशान होते हुए बोला

कबीर- मेजर विकाश से बात करनी पडेेगी… पर क्यों….

कबीर को यूँ परेशान होता देख मैंने उसे समझाते हुए कहा

अमृता- अरे यार तुम इन लोगों की बातों पर ध्यान मत दो… ऐ लोग तो बस हमें ऐसे ही छेड रहे हैं औ कुछ नहीं

मेरी बात सुनकर कबीर थोडा रिलेक्स हुआ लेकिन वो अब भी कन्फ्यूज होते हुए बोला

कबीर- पर ऐ मेजर विकाश कौन हैं और मुझे तुमसे शादी करने के लिए उनसे परमीशन क्यों लेनी पडेगी

अमृता- वो मेरे अंकल हैं…. तुम्हें तो पता ही है कि मेरे मम्मी पापा की डेथ काफी पहले हो गई थी, इसलिए मेरी फैमली में एक मात्र मेरे अंकल ही हैं, जो मुझसे बहुत प्यार करते हैं। इसलिए अगर तुम्हें मुझसे शादी करनी है, तो मेरे अंकल से बात तो करनी ही होगी ना।

मेरी बात सुनकर कबीर को सारी बात समझ में आ गई, इसलिए वो भी मुस्कुराता हुआ बोला

कबीर- ओह… अच्छा तो यह बात है…. अरे कोई नहीं मैं अंकल से भी बात कर लूँगा

तभी विक्रांत एक बार फिर कबीर को परेशान करते हुए बोला

विक्रांत- एक बार और अच्छी तरह से सोच लो मियाँ….. पूरी आर्मी में मेजर विकाश का खौफ है…. आर्मी के बडे बडे सीनियर ऑफिसर भी मेजर विकाश से बात करने से डरते हैं।

विक्रांत की बात सुनकर मैं उसे डांटते हुए बोली

अमृता- शटअप विक्रांत…. क्यों फालतू में डरा रहे हो उसे….

विक्रांत- अरे यार मैंने क्या गलत बोला….

अमृता- अच्छा तो यह बात कल एन.एस.जी. हैडक्वाटर में अंकल के सामने बोल कर दिखाना… मैं आज ही घर जाकर उन्हें बता दूँगी कि तुम उनके बारे में क्या क्या बोल रहे थे।

मेरी बात सुनकर विक्रातं बुरी तरह से डरता हुआ बोला

विक्रांत- अरे पागल हो क्या…. मैं तो बस अपने होने बाले जीजाजी से थोडा सा मजाक कर रहा था दीदी…. तुम तो सीरियस हो गई……

विक्रांत की बात सुनकर मैं हंसते हुए बोली

अमृता- अब आऐ ना लाईन पर….

इसके बाद मैंने कबीर के गाल पर एक लाईट किस करते हुए कहा

अमृता- बाय कबीर…..

इतना बोलकर मैं अपने दोस्तों के साथ हैलीकॉप्टर की तरफ चल पडी। हमारे अंदर जाते ही पायलेट ने हैलीकॉप्टर स्टार्ट कर दिया और फिर देखते ही देखते हम कानपुर से दिल्ली की तरफ चल पडे। कबीर वहीँ हैलीपैड पर खडे होकर हमारे हैलीकॉप्टर को जाते हुए तब तक देखता रहा, जब तक की हमारा हैलीकॉप्टर उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गया। उसके बाद वो भी अपनी बाईक पर बैठकर वहाँ से चला गया। दिल्ली पहुँचकर मैं सबसे पहले एन.एस.जी. हैक्वाटर पहुँची जहाँ मैंने फारुख उस्मान और कानपुर में जप्त किए गए सारे हथियार अपने अंकल यानि मेजर विकाश को हैंड ओबर किए, इसके बाद मैं आई.बी. हैडक्वाटर के लिए निकल गई। जहाँ मैंने सभी स्लीपर सेल्स और देश के गद्दारों की इन्फार्मेशन के साथ साथ फार्महाऊस से जप्त की गई फाईल्स और पैनड्राईब को रजीव सर को हैंडओबर करके, उन्हें फारूख और उसके साथियों का पूरा प्लान बताया। आपरेशन की पूरी डिटेल लेने के बाद राजीव सर ने खुश होते हुए कहा

राजीव- बैरी गुड अमृता… हमने इस बात की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी कि हमारा यह मिशन इतना ज्यादा सक्शेसफुल रहेगा। बैसे उन लडकों का क्या हुआ जिन्होंने फारूख के कहने पर हॉस्टल के बच्चों को हॉस्टेज बनाया था

राजीव सर की बात सुनकर मैंने जबाब दिया

अमृता- सर आपरेशन के दौरान वो सभी घायल हो गए थे, मैंने इस बात का पूरा ध्यान रखा था कि किसी भी स्लीपर सेल्स की जान ना जाऐ। इसलिए हमने उसके हाथ पैरों में ही गोलियाँ चलाईँ थी, फिलहाल कानपुर के सिटी हॉस्पीटल में पुलिस कस्टडी के बीच उनका इलाज चल रहा है और बलरामपुर में जो 5 लडके फारूख के कहने पर हथियारों की डिलेवरी लेने गए थे, वो भी सही सलामत है, हाँलाकि पैर में गोली लगने के कारण वो लोग भी घायल हो गए थे, इसलिए उन लडकों को भी कानपुर सिटी हॉस्पीटल में इलाज के लिए लाया गया है। उन सभी के ठीक होने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाऐगा। मुझे पूरी उम्मीद है कि वो सभी अपना-अपना जुर्म कबुल कर लेंगे और फ्यूचर में ऐसा कोई गल काम नहीं करेंगे, बाकी के स्लीपर सेल्स की इनफर्मेशन मैं आपको पहले ही दे चुकी हूँ। उन्हें कैसे हैंडिल करना है यह अब आपकी जिम्मेदारी है।

राजीव- हूम्म ठीक है… मैं कल ही अपने सीनियर के साथ एन.एस.ए. और होम मिनिस्टर सर से मिलकर इस बारे में बात करूँगा।

अमृता- सर क्या मैं आपसे यह पूछ सकती हूँ कि हम अब फारूख के साथ क्या करने बाले हैं।

राजीव- तुम बताओ कि तुम उसके साथ क्या करना चाहती हो

अमृता- सर मेरे चाहने और ना चाहने से क्या फर्क पडता है

राजीव- फिर भी तुम बताओ तो सही कि तुम्हारे मन में क्या है

अमृता- सर मैं तो चाहती हूँ कि उसे तुरंत गोली मार दी जाऐ, क्यों बे बजह उसे कार्ट में पेश करना, जैसे ही हम उसे कोर्ट में पेश करेंगे तो कई सारे ह्मूमन राईट्स बाले सामने आकर उसके बचाव के लिए बडे से बडा बकील कोर्ट में खडा कर देंगे, उसके बाद सालों तक केस यूं ही चलता रहेगा और हम उसे कबाब और बिरयानी खिलाते रहेंगे, दूसरी तरफ फारूख दुशमन देश में हीरो बन जाऐगा,

राजीव- हुम्म.. बात तो सही है तुम्हारी… इसीलिए हम फारूख की गिरफ्तारी ऑफिसियली अनाऊंस नहीं कर रहे हैं।

राजीव सर की बात सुनकर मैं चौंकते हुए बोली

अमृता- सॉरी सर में मैं कुछ समझी नहीं… आखिर हम ऐसा क्यों कर रहे हैं….

राजीव- अरे भई कारण तो तुम पहले ही बता चुकी हो… हम नहीं चाहते कि एक बार फिर हम किसी आतंकवादी की आव-भगत करें और उसे दुशमन देश में हीरो बना दें। इसीलिए फारूख एन.एस.जी. की अनऑफिसियल कस्टडी में रहेगा। जहाँ उससे पुछताछ करके सारी जरूरी जानकारी इकट्ठी की जाऐगी और उसके बाद फारूख को बार्डर के पास लेजाकर उसका इन्काऊंटर कर दिया जाऐगा और दुनिया को बताया जाऐगा कि वो हमारे देश में घुसपैठ करने की कोशिश करते हुए मारा गया।

राजीव सर की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- जी सर मैं समझ गई…. तो फिर अब आगे के लिए मुझे क्या आर्डर है

राजीव- अरे भई अभी अभी तो तुम इतना बडा मिशन पूरा करके आई हो…. कुछ महिनों तक छुट्टियाँ इंजॉय करो… जब तुम्हारे लायक कोई नया मिशन होगा तो तुम्हें बता दूँगा।

अमृता- पर सर मैं तब तक क्या करूँगी….

राजीव- कानपुर बापिस जाकर अपनी डिग्री पूरी करो…. और एक आम लडकी की तरह अपनी जिंदगी बिताओ। अगर हम तुम्हें लागाातर मिशन पर भेजते रहे तो तुम दुनिया की नजरों में आ सकती हो। इसलिए तुम्हें पूरी तरह से एक नॉर्मल लडकी की लाईफ ही जीनी है। तुम हमारा तुरुप का इक्का हो, जिसे हम कुछ खास मिशन के लिए बचाकर रखना चाहते हैं।

राजीव सर की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- आर यू श्योर सर कि मैं का्नपुर बापिस जाकर अपनी डिग्री पूरी कर सकती हूँ।

राजीव- हाँ हाँ डेफिनेटली श्योर… बैसे भी अचानक तुम्हारे कानपुर से गायव होने पर लोगों को तुम पर शक हो सकता है।

राजीव सर की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- थैंक्यू सर….

इतना बोलकर मैं राजीव सर के ऑफिस से बाहर आकर अपने घर के लिए निकल गई जहाँ विकाश अंकल मेरा इंतजार कर रहे थे। घर पहुँचकर फ्रेश होने के बाद मैं विकाश अंकल से बातें करने लगी, इस दौरान मैंने विकाश अंकल को अपने मिशन के बारे में भी बताया। फिर हमने साथ में लंच किया और उसके बाद हम अपने अपने रूम में सोने चले गए। अपने रूम में आने के बाद मैं कबीर को कॉल करके उससे बातें करने लगी। मैं करीब 1 हफ्ते तक दिल्ली में विकाश अंकल के साथ ही रुकी, इस दौरान मैंने विकाश अंकल को कबीर के बारे में भी बता दिया था।

विकाश अंकल को मेरे और कबीर के रिलेशन से कोई प्राब्लम नहीं थी, लेकिन वो एक बार कबीर से मिलना चाहते थे। इसलिए मैंने अपनी डिग्री पूरी होने के बाद कबीर से उन्हें मिलाने का वादा किया। इस एक हफ्ते के दौरान मैं हर रात सोने से पहले कबीर से कुछ देर बात जरूर करती थी, जिस कारण धीरे धीरे हम दोनों के बीच एक दूसरे के लिए अफेक्शन बडता ही जा रहा था। आखिरकार एक हफ्ते बाद मैं दिल्ली से कानपुर के लिए रवाना हो गई। इस बार मैंने ट्रेन से जाने के स्थान पर अपनी कार से कानपुर जाने का फैसला किया था, जो मुझे विकाश अंकल ने गिफ्ट की थी।

चूँकि मैं कबीर और अपने दोस्तों को सरप्राईज देना चाहती थी, इसलिए मैंने कानपुर बापिस आने के बारे में उन लोगों को कुछ भी नहीं बताया था। कानपुर आकर मैंने अपने लिए एक होटल रूम बुक किया और अगले दिन जब मैं कॉलेज पहुँची तो कबीर के साथ साथ मेरे सभी दोस्त खुशी से उछल पडे, कुछ देर तक सभी दोस्तों से बातें करने के बाद हम लोग क्लास अटैंड करने चले गए, इस दौरान कबीर को मुझसे अकेले में बात करने का मौका ही नहीं मिला, मैं भी जानबूझकर उसके पास बाली चेहर पर नहीं बैठी थी, ताकि उसे थोडा परेशान कर सकूँ।

आखिरकार जब लंच टाईम में हमारे सारे दोस्त और क्लासमेट्स कैटीन की तरफ जाने लगे, तो कबीर ने मौका देखकर मेरा हाथ पकडकर मुझे क्लासरूम के बाहर जाने से रोक लिया, जैसे ही क्लासरूम खाली हुआ, तो कबीर मुझे अपनी बाहों में भरकर किस करने लगा। मैं भी पिछले एक हफ्ते से कबीर का साथ पाने के लिए तडप रही थी, इसलिए मैं भी कबीर का पूरा साथ दे रही थी। किस करने के दौरान कबीर अपने एक हाथ से मेरी गाँड सहला रहा था और दूसरे हाथ से मेरे बूब्स को सहला रहा था, जिस कारण मेरे शरीर में उत्तेजना बडती ही जा रही थी।

मैं अपनी अब तक की लाईफ में कई मर्दों से चुद चुकी थी, इसलिए कबीर की इन हरकतों से मेरा मन चुदने का करने लगा था, लेकिन मैं जैसे तैसे अपनी फीलिंग्स को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी, क्योंकि मैं हाइमेनोप्लास्टी करवाकर एक बार फिर वर्जिन हो गई थी और मैं चाहती थी कि मेरी यह वर्जिनिटी कबीर हमारी सुहागरात पर ही तोडे। ताकि उसे कभी भी मेरे कैरेक्टर पर कोई शक ना हो…. बैसे भी एक बडी बहन होने के नाते मैं चाहती थी कि मेरे छोटे भाई को भी अपनी सुहागरात पर एक वर्जिन लडकी को चोदने का पूरा मौका मिलना चाहिए।

कहानी जारी है..........
 
Update 098 -

खैर कुछ देर चले इस रोमांटिक पलों को आखिरकार श्रेया ने आकर भंग करते हुए कहा

श्रेया- ओह माई गॉड… यह सब मैं क्या देख रही हूँ… अमृता की बच्ची तूने कबीर को हाँ कब कहा…..

श्रेया की आवाज सुनकर मैं और कबीर तुरंत एक दूसरे से अलग हो गए। श्रेया के हमें इस तरह एक दूसरे को किस करते हुए देखने से मेरा चेहरा शर्म के कारण गुलाबी हो गआ था। जिसे देखकर श्रेया एक बार फिर बोली

श्रेया- ओह गॉड क्या मैं सपना देख रही हूँ…. अमृता तुम आज ब्लस कर रही हो… पर तुम दोनों के बीच यह सब आखिर कब हुआ।

मुझे यूँ शर्माते देख आखिरकार कबीर ने श्रेया की बात का जबाब देते हुए कहा

कबीर- एक हफ्ते पहले, जब अमृता अपने किसी पर्सनल काम से दिल्ली जा रही थी, तब हम दोनों ने दूसरे से अपने प्यार को कंफेस किया था।

श्रेया- तो इसका मतलब है कि अब तुम दोनों ऑफिसियली कपल हो…

अब तक मैं भी काफी हद तक संभल चुकी थी, इसलिए मैंने कहा

अमृता- हाँ…

श्रेया- ओह वॉव…. यह तो बहुत बडी न्यूज है… मैं तो चली सबको इस बारे में बताने के लिए… तब तक तुम दोनो चाहो तो अपना अधूरा काम कन्टीन्यू कर सकते हो

श्रेया के जाते ही मैंने हंसते हुए कहा

अमृता- पागल कहीं की….

तभी कबीर सीरियस होते हुए बोला

कबीर- बैसे अमृता तुम कितने दिनों के लिए यहाँ पर आई हो

कबीर की बात सुनकर मैंने शरारती अंदाज में उसे देखते हुए कहा

अमृता- पहले तुम बताओ कि तुम कितने दिनोें तक मुझे यहाँ रोकना चाहते हो

मेरी बात सुनकर कबीर मुझे अपनी बाहों में भरते हुए बोला

कबीर- मैं तो चाहता हूँ कि तुम सारी जिंदगी यूँ ही मेरे साथ रहो

अमृता- तो फिर ठीक है…. मैं अपनी सारी जिंदगी तुम्हारे साथ बिताने के लिए तैयार हूँ

मेरी बात सुनकर कबीर हैरान होते हुए बोला

कबीर- मतलब

अमृता- मतलब यह बुद्धूराम कि मैंने अंकल को तुम्हारे बारे में सब कुछ बता दिया है और वो तुमसे मिलना चाहते हैं।

मेरी बात सुनकर कबीर खुश होते हुए बोला

कबीर- क्या सच में… तो फिर हम कल ही दिल्ली जाकर तुम्हारे अंकल से मिल लेते हैंं। मैं अब जल्द से जल्द तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ। मुझसे तुम्हारी यह दूरी अब बरदास्त नहीं हो रही है।

अमृता- अरे यार ऐसी भी क्या जल्दी है…. अभी अभी तो हमारे प्यार की शुरूआत हुई है… कुछ दिन लव लाईफ इंजॉय करते हैं ना, और जब तुम्हारी डिग्री पूरी होगी तो मैं तुम्हें अंकल से भी मिलवा दूँगी।

कबीर- पर डिग्री पूरी होने में तो अभी पूरे 4 महिने बाकी हैं…. तब तक मैं तुमसे दूर कैसे रहूँगा… तुम तो 1-2 दिन यहाँ रुककर बापिस चली जाओगी….

अमृता- और अगर मैं कहूँ कि मैं दिल्ली बापिस नहीं जा रही हूँ तो….

कबीर- मतलब

अमृता- मतलब यह मेरी जान कि फिलहाल मेरे पास कोई मिशन नहीं है। इसलिए जब तक मुझे कोई दूसरा मिशन नहीं मिल जाता, तब तक मैं पूरी तरह से फ्री हूँ और एक नॉर्मल लडकी की तरह अपनी जिंदगी जी सकती हूँ। तो मैं सोच रही थी कि क्यों ना मैं भी अपनी डिग्री पूरी कर लूँ।

मेरी बात सुनकर कबीर खुश होते हुए बोला

कबीर- मतलब तुम अब दिल्ली बापिस नहीं जाओगी और हमारे साथ यहीं पर रहोगी

कबीर की बात सुनकर मैं चिढते हुए बोली

अमृता- क्यों तुम नहीं चाहते कि मैं यहाँ रुकूं

कबीर- आरे नहीं नहीं वो बात नहीं है…. वो तो बस तुम्हारे यहाँ रुकने की खुशी में मुझे समझ ही नही आ रहा है कि कैसे रियेक्ट करूँ।

अमृता- बस बस मैं सब समझ रही हूँ कि तुम्हारे मन में क्या है…. अब जल्दी से कैंटीन चलो, बर्ना हमारे सारे दोस्त यहीँ पर इकट्ठा हो जाऐंगे।

मेरी बात सुनकर कबीर एक बार फिर मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरी गांड को सहलाने लगा और मेरी गर्दन पर किस करते हुए बोला

कबीर- अरे पहले मीठा तो खा लूँ… उसके बाद लंच भी कर लेंगे

कबीर की बात सुनकर मैं उसके सीने पर प्यार से मुक्का मारते हुए बोली

अमृता- डफर मिठाई खाना खाने के बाद खाई जाती है… अब छोडो मुझे….

इतना बोलकर मैं कबीर को धक्का देकर अपने आप से अलग करने की कोशिश करने लगी तो कबीर ने भी मुझे छोड दिया, उसके बाद हम दोनों कैंटीन में अपने दोस्तों के पास जा पहुँचे, जो हमारे आने का इंतजार कर रहे थे, श्रेया ने अब तक उन लोगों को मेरे और कबीर के बारे में बता दिया, जिस कारण हमारे वहाँ पहुँचते ही वो सभी मुझे और कबीर को छेडने लगे, कबीर की हरकतों की बजह से मेरा चेहरा शर्म के कारण पहले से ही गुलाबी था, जो दोस्तों के छेडने पर और ज्यादा सुर्ख हो गया था। मैंने जैसे तैसे अपना लंच खत्म किया और फिर हम लोग लैब प्रैक्टिस के लिए चले गए। उसी शाम कॉलेज खत्म होने के बाद मैंने होटल से चैकआउट किया और श्रेया के साथ उसके घर पर शिफ्ट हो गई।

बैसे तो मेरा प्लान दोबारा से एक अलग घर किराऐ पर लेने का था, लेकिन कबीर के उताबलेपन को देखकर मैं समझ गई थी कि अगर मैं अकेले किसी घर में रही तो कबीर भी वहाँ पर आता जाता रहेगा और इस दौरान शादी से पहले ही हम दोनों के बीच किसी ना किसी दिन फिजीकल रिलेशन बन ही जाऐंगे, जो मैं बिल्कुल भी नहीं चाहती थी, मैं अपनी नई बर्जिनिटी कबीर को हमारी सुहागरात पर गिफ्ट करना चाहती थी, जिसके लिए मेरा उससे थोडा दूरी बनाकर रखना जरूरी था, बैसे भी मैंने पिछले 2 सालों से किसी भी मर्द के साथ चुदाई नहीं की थी, इसलिए मैं खुद भी चुदने के लिए उताबली थी।

ऊपर से कबीर का मुझे बार बार टीज करने से मैं अपना कंट्रोल खोने लगती थी। इसलिए श्रेया के साथ रहने से मैं इन सबसे बच सकती थी। श्रेया के साथ सिफ्ट होने के बाद से एक बार फिर मेरी कॉलेज लाईफ नॉर्मल हो गई थी, लेकिन इस बार मैं कबीर को अपने लाईफ पार्टनर के रूप में अपना चुकी थी, इसलिए मैं काफी ज्यादा खुश थी, हमें जब भी मौका मिलता तो हम एक दूसरे को प्यार करने लगते, धीरे धीरे हमारे अफेयर के बारे में पूरे कॉलेज को पता चल गया था, इसलिए जब भी कोई हमें साथ देखता तो हमारे बारे में ही गॉसिप करने लगता था, मुझे इस सब में बहुत मजा आ रहा था।

देखते ही देखते कब हमारे फाईनल एग्जाम आ गए पता ही नहीं चला। अपना लास्ट एग्जाम देने के बाद मैं, कबीर, श्रेया, पूजा और मनीष चाय की टपरी पर बैठकर कॉफी के साथ सुट्टा मार रहे थे तभी पूजा ने कहा

पूजा- अरे यार हमारी डिग्री इतनी जल्दी खत्म कैसे हो गई…..

श्रेया- मैडम हमें कानपुर आऐ पूरा एक साल हो गया है और तुम बोल रही हो की हमारी डिग्री जल्दी खत्म हो गई है।

पूजा- हाँ वो तो है… लेकिन हमारी यह डिग्री एक साल की जगह दो साल की होनी चाहिए थी। यार कितना मजा आ रहा था यहां।

श्रेया- हाँ यार बो तो है… बैसे गाईज अब आगे का क्या प्लान है…

पूजा- मेरा और मनीष का तो तय है। हम लोगों ने अपने अपने घर पर पहले ही बात कर ली है। इसलिए कुछ ही दिनों में हमारी शादी और फिर हनीमून। उसके बाद किसी अच्छी सी आई.टी. कम्प्नी में जॉब सर्च करेंगे। बैसे तेरा क्या प्रोग्राम है

श्रेया- यार मेरा अभी कुछ भी तय नहीं है…. मैं तो अभी तक सिंगल ही हूँ….

अमृता- चल झूठी…. कल ही तो मेरी रवि से बात हुई थी… बोल रहा था कि तुम दोनों के बीच बहुत कुछ चल रहा है।

मेरी बात सुनकर श्रेया चौंकते हुए बोली

श्रेया- व्हॉट…. उस डफर ने तुम्हें इसके बारे में बता भी दिया

अमृता- और नहीं तो क्या… आखिर वो मेरा बेस्ट फ्रेंड और बिजिनेश पार्टनर है।

श्रेया- ओह शिट यार…. मैं बार बार यह बात क्यों भूल जाती हूँ…. रवि ने ही तो हमें एक दूसरे से मिलवाया था।

अमृता- हूम्म… तो अब बता आगे का क्या प्रोग्राम है तेरा

श्रेया- उम्म्म सच कहूँ तो मुझे नहीं पता, रवि ने अपने घर पर इस बारे में बात तो की है। लेकिन मेरी पापा से बात करने कि हिम्मत नहीं हो रही है। समझ नहीं आ रहा कि मैं उन्हें इस बारे में कैसे बताऊं।

अमृता- तू अगर कहे तो मैं उनसे बात कर सकती हूँ… लेकिन अगर तू खुद उनसे इस बारे में बात करेगी तो उन्हें ज्यादा अच्छा लगेगा, बैसे भी वो तुम्हें बहुत प्यार करते हैं और तुम्हें हमेशा खुश देखना चाहते हैं। रवि एक अच्छा लडका है, इसलिए मुझे पूरा यकीन है कि हरीश अंकल भी इस रिश्ते को एक्सेप्ट कर लेंगे।

श्रेया- हुम्म आई होप सो…. तू रहने दे, मैं खुद भोपाल जाकर उनसे बात करने की कोशिश करूँगी। बैसे तेरा और कबीर का क्या प्रोग्राम है।

श्रेया की बात का इस बार मेरी जगह कबीर ने जबाब देते हुए कहा

कबीर- हमारा तो सब कुछ पहले से ही सेट है। मैंने पापा को अमृता के बारे पहले ही बता दिया है और अमृता ने भी अपने अंकल को मेरे बारे में बता रखा है। जिस बजह से मेरे पापा अमृता से और अमृता के अंकल मुझसे मिलना चाहते हैं। इसलिए कल ही हम दोनों अमृता की कार से आगरा जाऐंगे, जहाँ मैं अपने पापा से अमृता को मिलवा दूँगा और उसके अगले दिन मैं अमृता के साथ दिल्ली जाऊँगा जहाँ अमृता के अंकल से मिलकर अमृता का हाथ माँग लूँगा। अगर सब कुछ सही रहा तो जल्द ही तुम लोग हमारी शादी में डांस कर रहे होगे।

कबीर की बात सुनकर श्रेया झल्लाते हुए बोली

श्रेया- व्हॉट अ फक गाईज…. अभी मैंने अपने और रवि के बारे में पापा को बताया भी नहीं और तुम लोग शादी तक के बारे में प्लान करने लगे। कम से कम मेरे लिए तो वोट कर ही सकते हो। एक बार मेरा मैटर सॉल्बड हो जाए तो हम तीनों कपल एक ही दिन शादी कर लेंगे और फिर साथ में ही हनीमून पर भी चले जाऐँगे।

श्रेया की बात सुनकर मनीष बोला

मनीष- आईडिया अच्छा है… इस बहाने हम लोग कुछ और समय साथ बिता सकेंगे

अमृता- मुझे भी कोई प्राब्लम नहीं है…. लेकिन हम तीनों कपल ही क्यों… मेरे दिल्ली में कुछ दोस्त हैं, वो भी जल्द ही शादी करने बाले हैं, तो क्यों ना हम उनको भी अपने ग्रुप में सामिल कर लें। आई होप तुम लोगों को इससे कोई प्राब्लम नहीं होगी।

श्रेया- अरे नहीं हमें कोई प्राब्लम नहीं है… तो फिर क्यों ना हम रघू और रश्मि से भी इस बारे में बात कर ही लें। वो भी तो शादी करने का प्लान कर रहे हैं।

अमृता- उम्ममम गुड आईडिया… एक काम करो तुम रघू और रश्मि के साथ साथ रवि से भी इस बारे में बात कर लो, तब तक मैं अपने दिल्ली बालेे दोस्तों से बात कर लेती हूँ।

श्रेया- ठीक है.. यही सही रहेगा…..

तभी पूजा ने कहा

पूजा- सीरियस ली गाईज… एक ही दिन एक ही बेन्यू पर छः छः शादियाँ… यह कुछ ज्यादा नहीं हो गया। अगर हम सभी कपल्स एक साथ शादि करेंगे तो एक दूसरे की शादि में इंजॉय भी नहीं कर पाऐंगे।

मनीष- हाँ यार….

कबीर- अरे तो एक दो दिन आगे पीछे करके शादि कर लेंगे। जैसे पहले दिन मैं और अमृता शादि कर लेंगे, अगले दिन तुम और पूजा कर लेना, उसके बाद श्रेया और रवि कर लेंगे। इस तरह से हमारी शादि का फंग्शन पूरे 6 दिनों तक चलेगा। जिससे हम सभी एक दूसरे की शादि भी अटेंड भी कर लेंगे और मिलकर खूब धमाल भी करेंगे।

श्रेया- हाँ यार यह भी सही है…..

मनीष- मुझे कोई प्राब्लम नहीं है।

कबीर- तो फिर ठीक है… ऐसा ही करेंगे

तभी पूजा चिढकर बोली

पूजा- गाईज आखिर यह सब हो क्या रहा है… आज ही हमारे एग्जाम खत्म हुए हैं और हम यहाँ पर शादी की बातें कर रहे हैं

श्रेया- शूरूआत तो तूने ही की थी ना…

पूजा- पर तूने ही तो सबाल किया था कि आगे का क्या प्रोग्राम है

श्रेया- अरे डफर मैं तो कैरियर के बारे में पूछ रही थी

पूजा- हाँ तो बताया ना कि शादि के बाद मेरा और मनीष का प्लान किसी अच्छी आई.टी. कम्पनी में जॉब करने का है। बैसे तुम लोगों का क्या प्लान है

श्रेया- यार मैंने तो अभी कुछ डिसाईड नहीं किया है। कुछ समझ ही नहीं आ रहा क्या करना चाहिए। असल में रवि और अमृता पहले से ही बिजिनेश पार्टनर है। अमृता ने अपना सारा बिजिनेश रवि और रघू को हैंडओबर कर रखा है। इसलिए जहाँ रवि रहेगा वहीं पर मैं भी अपने लिए किसी आई.टी. कम्पनी में जॉब सर्च कर लूंगी।

मनीष- व्हॉट… अमृता पहले से ही अपना बिजिनेश रन कर रही है। मतलब उसे और कबीर को तो अपने कैरियर के बारे में टेंशन लेने की कोई जरूरत भी नहीं है।

अमृता- नहीं ऐसा नहीं है… असल में रवि मेरे शॉपिंग मॉल बाले बिजिनेश में पार्टनर है। जिसमें मेरा कोई खास इंट्रेस्ट नहीं है। इसलिए मैं और कबीर अपनी खुद की एक आई.टी. कम्पनी शुरू करने के बारे में प्लान कर रहे हैं।

मेरी बात सुनकर पूजा और मनीष मुझे ऐसे देखने लगे जैसे मैं कोई सातवाँ अजूवा हूँ। इस बजह से मैं थोडा अनकम्फर्टेबल फील कर रही थी।

कहानी जारी है...........
 
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