Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम) - Page 10 - SexBaba
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Antarvasna kahani ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

Update 080 -

चूँकि मैंने कानपुर यूनिवर्सिटी में 1 महिने लेट बैच अटैण्ड किया था। इसलिए पूरे एक हफ्ते तक मैं अपना मिसिंग कोर्स रिकवर करने में ही बिजी रही। हाँलाकि मेरी स्पेशल पावर और मेरी कम्प्यूटर नॉलेज के चलते मुझे ज्यादा प्राब्लम नहीं हुई थी। अपना मिसिंग कोर्स रिकरवर करने के बाद मैं थोडा रिलेक्स हुई और फिर रेगुलर क्लासेस अटैण्ट करने के साथ साथ अपने सीक्रेट मिशन पर भी लग गई। जिसके लिए मैंने अपने क्लासमेट्स के अलावा दूसरे क्लासेस के लडके लडकियों से घुलना मिलना भी शुरू कर दिया था। ताकि मैं उस कॉलेज कैम्पस में चल रही टैरेरिस्ट एक्टिविटी का लिंक पता कर सकूँ। हाँलाकि इस काम के लिए मुझे काफी सावधानी और धैर्य की जरूरत थी।

क्योंकि मेरी एक छोटी सी गलती मेरा सारा प्लान चौपट कर सकती थी। इसलिए मैं पूरी तरह से एक नॉर्मल स्टूडेंट की तरह ही कॉलेज अटेंड कर रही थी। मैं एक बार फिर अपनी कॉलेज लाईफ इंजॉय करके काफी खुश थी। हमारे घर से कॉलेज कैंपस ज्यादा दूर नहीं था। जिस कारण हम लोग पैदल ही घर से कॉलेज और कॉलेज से घर आया जाया करते थे। पर आज मेरी किस्मत में शायद कुछ और ही लिखा था। मुझे नहीं पता था कि आज जब मैं कॉलेज पहुँचूंगी तो वहाँ पर एक तूफान मेरा इंतजार कर रहा होगा।

जो मेरी पूरी जिंदगी बदल कर रख देगा। मैं उस तूफान से पूरी तरह अंजान श्रेया और बाकी दोस्तों के साथ आपस में हंसी मजाकर करते हुए कॉलेज गेट के पास पहुंची, ठीक तभी एक लडका मुझसे टकरा गया। शायद वो अपने दोस्तों से हंसी मजाक करने में इतना बिजी था कि उसकी नजर हम लोगों पर पडी ही नहीं। उस लडके के टकराने से नैचुरल रिऐक्शन में मेरे मूँह से निकला

अमृता- यू स्टूपिड… अंधे हो क्या…

लेकिन जैसे ही अगले पल मेरी नजर उसके चेहरे पर पडी, तो मेरे चेहरे का रंग पूरी तरह से उड गया था। उस लडके को अपने सामने देखकर मेरे दिल की धडकन कुछ ज्यादा ही तेज हो गई थी और मेरे हाथ पैर भी बुरी तरह से काँपने लगे थे। एक पल को तो मुझे ऐसा लगा कि मेरी असली पहचान आज सारी दुनिया के सामने आ ही जाऐगा। वहीँ दूसरी तरफ वो लडका भी मुझे अपने सामने देखकर बुरी तरह से हैरान था और उसका चेहरा भी मेरी तरह ही पूरी तरह से सफेद पड चुका था। तभी मैं अपने होश में बापिस आई और मन ही मन सोचने लगी……..

“व्हाट आ फक…. ऐ यहाँ पर क्या कर रहा है……”

और फिर अचानक से मैं आसमन की तरफ देखकर भगवान से मन ही मन शिकायत करने लगी

“हे भगवान…. आखिर आप चाहते क्या हैं…. क्या मेरी खुशियाँ आपसे जरा सी भी बरदास्त नहीं होती…. अभी अपनी नई जिंदगी शुरू किए मुझे दिन ही कितने हुए थे… और आपने एक नई मुशीवत मेरे गले बाँध दी…..”

मैं यह सब मन ही मन सोच रही थी कि तभी मेरे कानों में श्रेया की आवास सुनाई दी

श्रेया- अमृता… तुम ठीक तो हो ना….

श्रेया की आवाज सुनकर मैं फिर से होश में आते हुए बोली

अमृता- हुम्म…

मेरा जबाब सुनकर श्रेया उस लडके को डाँटते हुए बोली

श्रेया- यू स्टूपिड…. तुम्हें दिखाई नहीं देता क्या…. अभी हमें चोट लग जाती तो….

श्रेया की बात सुनकर वो लडका भी अपने होश में बापिस आते हुए बोला

लडका- ओह आई एम सॉरी…..

इससे पहले श्रेया उससे कुछ और कहती, हमरी दोस्त पूजा अचानक से एक्साईटेड होते हुए बोली….

पूजा- एक मिनट…. तुम कबीर शर्मा हो ना….

पूजा की बात सुनकर वो लडका थोडा स्माईल करते हुए बोला

कबीर- हाँ…..

पूजा- अरे तुमने हमें पहचाना नहीं क्या… हम सेम क्लास में हैं…. लेकिन एडमीशन के बाद से तुम कॉलेज में दिखाई ही नहीं दिए…

पूजा का सबाल सुनकर कबीर मुझे हैरानी से घूरता हुआ बोला

कबीर- हाँ वो वो मेरे फादर की तबीयत थोडी खराब थी…. इसलिए मुझे कुछ दिनों के लिए घर जाना पडा….

इससे पहले पूजा कबीर से कोई और सबाल जबाब करती श्रेया उसे डांटते हुए बोली

श्रेया- पूजा…. अभी अभी इसने अमृता के साथ बदतमीजी की है, उसके बाद भी तुम इससे इतनी फ्रेंडली होकर कैसे बात कर सकती हो…

इतना बोलकर श्रेया ने मेरा हाथ पकडा और गुस्से में कॉलेज की तरफ बड गई, मैं अब भी कबीर को अपने सामने देखकर पूरी तरह से सॉक्ड थी। इसलिए जैसे ही श्रेया मुझे खींचकर कॉलेज की तरफ ले जाने लगी तो मैंने मन ही मन राहत की एक सांस ली। वहीं दूसरी तरफ कबीर अब भी उसी जगह पर खडा होकर मुझे कॉलेज के अंदर जाते हुए देख रहा था। कॉलेज के अंदर जाते वक्त पूजा श्रेया को सफाई देते हुए बोल रही थी

पूजा- अरे यार श्रेया कबीर अच्छा लडका है… शायद वो गलती से अमृता से टकरा गया होगा।

श्रेया- जो भी हो… पर फिलहाल मुझे उसके बारे में कोई बात नहीं करनी है….

पूजा- पर श्रेया वो काफी इँटेलीजेंट है… मैंने उसकी प्रोग्रामिंग स्किल देखी है…. वो पक्का अमृता और तुम्हें टक्टर दे सकता है। इसलिए मैं सोच रही थी कि क्यों ना हम उसे भी अपने ग्रुप में सामिल कर लें

श्रेया- बिल्कुल भी नहीं

पूजा- पर वो काफी हैंडसम है…..

पूजा की बात सुनकर श्रेया झल्लाते हुए बोली

श्रेया- ओह कम ऑन पूजा…. अगर वो तुम्हें पसंद है तो तुम उसके साथ अपना चक्कर चला सकती हो, लेकिन हम उसे अपने ग्रुप में सामिल नहीं कर रहे हैं। समझी….

श्रेया की बात खत्म होते ही हम लोग अपनी क्लास रूम में जा पहुंचे। इसलिए उन दोनों ने आपस में बातें करना बंद कर दिया था। इसके बाद हम लोग अपनी अपनी चेयर पर जाकर बैठ गए और क्लास टीचर के आने का इंतजार करने लगे। करीब 5 मिनट बाद ही कबीर भी क्लास रूम मेें आ गया था। उस पूरे दिन कबीर लगातार मुझे ही घूरे जा रहा था। यहाँ तक कि जब हम लोग लंच करने कैंटीन में गए तो वहाँ भी वो हमारा पीछा करते हुए आ गया और हमसे थोडा दूर बैठकर बस मुझे ही घूरे जा रहा था। कबीर के इस तरह मुझे घूरने से मैं काफी अन्कम्फर्टेवल फील कर रही थी और मेरे मन में बस एक ही सबाल चल रहा था

“ऐ कबीर मुझे ऐसे क्यों घूर रहा है, कहीं उसने मुझे पहचान तो नहीं लिया है…”

जैसे तैसे वो दिन गुजर गया, लेकिन अगले दिन मेरे साथ फिर वहीँ हुआ, पिछले दिन जहाँ मैं कबीर से टकराई थी, कबीर वहीँ खडा होकर हमारे आने का इंतजार कर रहा था। उसके बाद वो सारा दिन मेरे आस पास ही मंडराता रहा और लगातार मुझे ही घूरता रहा। अब कबीर की इस हरकत से मुझे चिढ होने लगी थी, उससे बात करने या उससे कुछ कहने की हिम्मत मेरे अंदर बिल्कुल भी नहीं थी। यहाँ तक की श्रेया और मेरी बाकी दोस्तों ने भी कबीर की यह हरकत नोटिस कर ली थी। लेकिन फिलहाल उन सभी ने भी मेरी ही तरह कबीर को इग्नोर करने का फैसला कर लिया था।

अगले कुछ दिनों तक यही सब चलता रहा। मैं जहाँ भी जाती कबीर भी वहाँ पहुंच ही जाता और दूर से ही मुझे घूरता रहता। लेकिन हद तो तब हो गई जब एक दिन कबीर मेरा पीछा करते हुए मेरे घर के पास तक आ गया। शाम का समय था, इसलिए मैं टैरेस पर घूमने के बहाने गर्लस हॉस्टल और बॉयज हॉस्टल पर नजर रख रही थी। तभी मेरी नजर मेरे घर के पास चाय की टपरी के पास खडे कबीर पर पडी जो मुझे ही घूरे जा रहा था कबीर को अपने घर के पास देखकर मैं मन ही मन सोचने लगी

“ऐ मेरा पीछा क्यों कर रहा है…. और आखिर यह मुझसे चाहता क्या है”

“कहीं इसने मुझे पहचान तो नहीं लिया है”

“अगर इसने सबको बता दिया कि मैं अमृता चौहान नहीं हूँ, बल्कि उसकी बडी बहन निशा गुप्ता हूँ…. तो”

यह ख्याल मन में आते ही मैंने ऊपर आसमान की तरफ देखकर भगवान से शिकायत की

“भगवान जी आखिर आप चाहते क्या हो…. क्यों बार बार मेरी इस तरह परीक्षा ले रहे हो। पहले अमृता के असली चाचा को मेरे सामने लाकर खडा कर दिया। वो तो अच्छा है कि विकाश अंकल ने आज तक कभी अमृता को देखा ही नहीं था। इसलिए मेरा भाण्डा फूटने से बच गया, और अब आपने मेरे यानि निशा के भाई को ही अमृता यानि फिर से मेरे सामने लाकर खडा कर दिया। विकाश अंकल से तो मैं बच गई पर कबीर से कैसे बचूँगी….. भगवान जी अगर आप मुझे नई जिंदगी देना ही नहीं चाहते थे, तो उस दिन खण्डहर में मुझे मरने क्योंं नहीं दिया।”

भगवान से अपने मन की भडास निकालने के बाद मैंने एक बार फिर चाय की टपरी पर खडे कबीर को देखा और मन ही मन सोचने लगी

“बेबकूफ… नालायक… कमीना कहीं का…. कोई भला अपनी ही बहन को ऐसे घूरता है क्या”

“इतना बडा सांड जैसा हो गया है पर अक्कल नहीं आई इसमें… अगर कोई भी इंशान इस डफर को यह सब करते हुए देखेगा तो पता नहीं क्या सोचेगा हमारे बारे में”

“अरे नालायक अगर तूने मुझे पहचान ही लिया है तो सामने से आकर बात कर ना मुझसे…. ऐसे लफंगों की तरह मुझे परेशान क्यों कर रहा है, ना खुद चैन से जी रहा है और ना मुझे जीने दे रहा है”

“नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता…. मेरे ख्याल से कबीर ने अभी तक मुझे पहचाना नहीं है अगर वो मुझे पहचान जाता तो पक्का वो सामने से आकर मुझसे इस बारे में बात जरूर करता”

“तो फिर वो इतने दिनों से मेरा पीछा क्यों कर रहा है और लगातार मुझे ही क्यों घूर रहा है… आखिर इसके मन में चल क्या रहा है”

“डफर कहीं का…. इस तरह मेरा पीछा करने और मुझे घूरने से दूसरे लोगों को तो यही लगेगा कि मेरे और उसके बीच में कोई चक्कर चल रहा है”

“अगर मैंने अभी अपनी पहचान ना बदली होती और अब भी उसकी बहन होती, तो पक्का मैं मार मार कर इसका पिछबाडा लाल कर देती…. लेकिन अब जब मैंने दुनिया की नजरों मे निशा को मार दिया है और अमृता बन चुकी हूँ, तो मैं इसके साथ वो सब नहीं कर सकती। बर्ना मेरा राज पूरी दुनिया के सामने खुल सकता है।”

“एक मिनट…. मैं यह सब क्यों सोच रही हूँ….. कहीं ऐसा तो नहीं है कि कबीर ने अब तक मुझे पहचाना ना हो और उसे बस मेरे निशा होने पर शक हो, या फिर मेरी असली पहचान को लेकर वो मन ही मन कन्फ्यूज हो”

“आखिर सच क्या है यह तो कबीर से बात करके ही पता चल सकता है…. लेकिन मैं अभी उससे बात करने का रिस्क नहीं ले सकती… बर्ना उसका शक यकीन में बदल जाऐगा कि मैं अमृता नहीं बल्कि उसकी बहन निशा हूँ।”

“नहीं यह तो बिल्कुल भी पॉसिबल नहीं है….. क्योंकि पिछले एक साल में मेरे चेहरे और फिगर में काफी अंतर आया है, ऊपर से मैंने अपनी हेयर स्टाईल और अपनी पर्सनेलिटी भी काफी हद तक चेंज कर ली है। साथ ही साथ मेरी आँखों का रंग भी तो पूरी तरह से बदल गया है। तो फिर मेरे पहचाने जाने का सबाल ही नहीं उठता है”

“अरे डफर वो तेरा छोटा भाई है…. तू चाहे अपने आपको कितना भी बदल ले…. लेकिन वो तुझे पहचान ही लेगा”

“हाँ शायद ऐसा ही है”

“तो फिर अब मुझे क्या करना चाहिए… क्या मुझे अपना मिशन बीच में ही छोडकर बापिस चले जाना जाहिए और राजीब सर से कहकर किसी दूसरे ऐजेंट को इस मिशन के लिए भेजना चाहिए”

“नहीं नहीं यह सही नहीं होगा……. यह मेरा पहला मिशन है…. मैं इससे पीछे नहीं हट सकती”

“तो फिर क्या करूँ मैं….”

“मेरे ख्याल से जो चल रहा है.. उसे बैसे ही चलने देना चाहिए…. कम से कम तब तक जब तक कि कबीर मुझे पूरी तरह से पहचान नहीं जाता”

“और अगर उसने मुझे पहचान लिया तो फिर मैं क्या करूँगी….”

“मुझे किसी भी तरह कबीर का कन्फ्यूजन दूर करके उसके मन में यह बात डालनी ही होगी कि मैं उसकी बडी बहन निशा गुप्ता नहीं हूँ, बल्कि मैं अमृता चौहान हूँ, जिसका बस चेहरा उसकी बहन से थोडा बहुत मिलता जुलता है। अगर एक बार कबीर को मेरी इस बात का यकीन हो जाऐ, तो फिर आगे चलकर मुझे कभी कोई प्राब्लम नहीं होगी और मैं आसानी से कबीर से अपना पीछा भी छुडा सकती हूँ।”

“पर मैं यह सब आखिर करूँगी कैसे…. ना तो वो खुद सामने से आकर मुझसे बात कर रहा है और ना मैं उसके पास जाकर कोई बात करना चाहती हूँ, क्योंकि अगर मैं खुद उसके पास गई तो पक्का उसका शक यकीन में बदल जाऐगा।”

“लेकिन जब तक उससे बात नहीं होगी तब तक मैं उसका कन्फ्यूजन दूर कैसे करूँगी, मुझे कोई ना कोई रास्ता तो निकालना ही होगा”

“क्यों ना इसके लिए श्रेया और पूजा की हेल्प ली जाऐ, बैसे भी पूजा तो कबीर पर पूरी तरह से लट्टू है, अगर मैं किसी तरह से पूजा को उक्साकर कबीर को अपने ग्रुप में सामिल करवा लूँ तो फिर मेरे पास उसके मन में चल रही बातों को जानने और उसे अपने अमृता होने का यकीन दिलाने के कई मौके होंगे।”

“हाँ यह सही रहेगा….”

कहानी जारी है.....
 
Update 081 -

मैं अभी कबीर के बारे में सोच ही रही थी कि तभी श्रेया अपने हाथों में दो कप कॉफी लेकर टैरेस पर आती हुई बोली

श्रेया- तो तुम यहाँ पर हो… और मैं तुम्हें पूरे घर में ढूंड रही थी…

इतना बोलकर श्रेया ने मेरे हाथों में कॉफी का कप पकडाते हुए मुझसे सबाल किया

श्रेया- यार अमृता आखिर तुझे हुआ क्या है…. पिछले कुछ दिनों से मैं नोटिस कर रही हूँ कि तुम चुप चाप अपने में ही कहीँ खोई हुई रहती हो….

मैंने कॉफी शिप करते हुए कहा

अमृता- नहीं कुछ नहीं… बस ऐसे ही…

श्रेया- कहीँ यह सब उस डफर कबीर शर्मा के कारण तो नहीं है ना….. सारा सारा दिन वो किसी पागल आशिक की तरह तुझे ही देखता रहा है… कहीँ तुझे भी तो उससे प्यार ब्यार नहीं हो गया है ना….

श्रेया की बात सुनकर मैं उससे चिढते हुए बोली

अमृता- तू पागल है क्या….. मेरे मन में ऐसा बैसा कुछ भी नहीं है…. बैसे भी तू अच्छी तरह से जानती है कि मैं इन सब लफडों में पडने बाली लडकी नहीं हूँ…..

श्रेया- हाँ यह बात तो है… वर्ना रवि कब का तुझे अपनी हॉफ गर्लफ्रेंड से फुल टाईम गर्लफ्रेंड बना चुका होता

अमृता- शटआप…. वो तो हमने बस रश्मि को चिढाने के लिए एक नाटक किया था। बैसे भी वो मेरे टाईप का लडका नहीं है….

श्रेया- पर रवि के मन में तुम्हारे लिए फीलिंग थीं…..

अमृता- हो सकता है…. पर आई डोंट केयर….. मुझे प्यार ब्यार जैसी बातों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है….. बैसे भी मैं सबसे ऊपर दोस्ती के रिस्ते को रखती हूँ….

श्रेया- हूम्म वो तो है….. बैसे क्या सच में तुम्हारे और रवि के बीच कुछ भी नहीं है

अमृता- नहीं यार…. कुछ भी नहीं है… पर तुम बार बार यह सबाल मुझसे क्यों पूछ रही हो…. कहीं तुम्हारे और रवि के बीच कुछ चल तो नहीं रहा है…

मेरी बात सुनकर श्रेया मुस्कुराते हुए बोली

श्रेया- नहीं.. फिलहाल तो ऐसा कुछ भी नहीं है….. पर वो मुझे पसंद है……

श्रेया की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली

अमृता- क्या बात कर रही हो….. यह तो बहुत खुशी की बात है…. तूने अभी तक उसे इस बारे में बताया या नहीं…. मुझे पूरा यकीन है कि वो तेरे जैसी सैक्सी लडकी को कभी ना कर ही नहीं सकता।

श्रेया- नहीं यार अभी तक तो नहीं बताया

श्रेया की बात सुनकर मैंने कुछ देर सोचा और फिर सीरियस होते हुए बोली

अमृता- कहीं रश्मि के कारण तो तुमने….

मेरी बात पूरी होने से पहले ही श्रेया मुझे बीच में टोकते हुए बोली

श्रेया- नहीं यार बो बात नहीं है….. उन दोनों के ब्रेकअप के बाद से वो दोनों बस अच्छे दोस्त हैं… बैसे भी रश्मि आज कल किसी और लडके में इंट्रेस्ट ले रही है

श्रेया की बात सुनकर मैं हैरान होते हुए बोली

अमृता- किसमें….

श्रेया- वो तुम्हारे इंदौर बाले मॉल का मैनेजर और तुम्हारा बिजिनेश पार्टनर राघवेन्द्र शर्मा है ना…. उसी में….

श्रेया की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली

अमृता- रघू….. क्या सच में रश्मि और रघू के बीच कुच चल रहा है…

श्रेया- पक्का तो नहीं कह सकती… पर मुझे ऐसा शक तो है… जब से तुमने हमारे सभी दोस्तों के साथ मिलकर अपनी कंपनी शुरू की है। तब से रश्मि और रघू का आपस में मिलना जुलना बड गया है और वो दोनों अक्सर रात के समय फोन पर घंटों बातें भी करते रहते हैं।

श्रेया की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोली

अमृता- मतलब रघू ने मुर्गी फंसा ही ली…. बैसे मैं उन दोनों के लिए बहुत खुश हूँ… रघू एक अच्छा और ईमानदार लडका है…. वो कभी भी रश्मि को धोखा नहीं देगा और गगन के साथ हुए हादशे के बाद रश्मि में भी काफी चेंजिस आऐ हैं। मेरे ख्याल से वो दोनों ही एक दूसरे के लिए परफेक्ट हैं।

श्रेया- हूम्म वो तो है…..

अमृता- तो फिर तूने अभी तक रवि से अपने दिल की बात क्यों नहीं बताई

श्रेया- यार मैं पूरी तरह से श्योर नहीं हूँ कि मैं उसे सच में पसंद करती हूँ या नहीं…. और फिर मुझे रवि के दिल की बात भी तो नहीं पता है… अगर मेरे अप्रोच करने के बाद भी उसने मना कर दिया तो…..

अमृता- ऐसा कुछ भी नहीं है…. अगर तू उसे अपने दिल की बात कहेगी तो वो पक्का कभी भी तुझे मना नहीं करेगा। लेकिन फिर भी अगर तेरे मन में कोई डाऊट हो तो मैं उससे तेरे बारे में बात कर लेती हूँ…. हाँ बो बात अलग है कि तेरे मन में रवि के पास्ट रिलेशन को लेकर या फिर मुझे लेकर कोई डाऊट हो तो……

एक बार फिर मेरी बात पूरी होने से पहले ही श्रेया ने मुझे बीच मेें टोकते हुए कहा

श्रेया- अरे नहीं यार… ऐसा कुछ भी नहीं है… अगर उसका पास्ट में कोई रिलेशनशिप था तो उससे क्या फर्क पडता है…. आखिर मेरा भी तो एक पास्ट रहा है ना… गगन के बारे में तो तुम पहले से ही जानती हो… उससे पहले भी मेरा एक एक्स रह चुका है।

अमृता- और अगर मेरे और रवि के बीच में कुछ रहा हो तो…..

श्रेया- तो भी कोई फर्क नहीं पडता है…. लेकिन अगर अब भी तुम दोनों के बीच ऐसा कुछ है तो मैं पीछे हट जाऊँगी… मैं प्यार के लिए अपनी दोस्त नहीं खोना चाहती

अमृता- अरे डफर हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है….. बल्कि सच कहूँ तो पिछले एक साल से हमारी बीच बस बिजिनेश को लेकर ही बातें हुईं हैं। इसलिए तेरी लाईन एकदम क्लीयर है….

श्रेया- तुम सच बोल रही हो ना… कहीं तुम मेरे कारण रवि से अपना रिलेशन टोडने के बारे में तो नहीं सोच रही हो ना….

अमृता- तू पागल है क्या… मैंने कहा ना कि हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है…. अगर होता तो मैं भला तुझसे क्यों छिपाती…. हाँ यह बात सही है कि जब मैं भोपाल में थी तो हम दोनों कुछ एक बार ड्रिंक करने के बाद एक दूसरे के थोडा बहुत करीब आ गए थे। पर मेरे दिल रवि के लिए कोई फीलिंगस् नहीं थी… इसलिए मैंने खुद ही उससे दूरी बना ली थी…. ताकि उसके मन में मुझे लेकर कोई गलत फहमी ना हो जाऐ। हमारे बीच थोडा बहुत जो कुछ भी हुआ था वो बस हीट ऑफ मूवमेंट में हुआ था। जिसे मैं अपनी गलती समझकर पूरी तरह से भुला चुकी हूँ। हम दोनों अब बस एक अच्छे दोस्त हैं। लेकिन अगर तुम्हारे मन में अब भी कोई डाऊट हो तो मैं पूरी तरह से उससे अपने कांटेक्ट खत्म कर लूँगी।

श्रेया- अरे पागल ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है….. मुझे तेरी बातों पर पूरा यकीन है…. तुम्हारे बीच क्या हुआ क्या नहीं इससे मुझे कोई फर्क नहीं पडता। हमारी उम्र ही ऐसी है कि यह सब होना नैचुरल है। बैसे भी मुझे तुझपर पूरा यकीन है, अगर तुम कह रही हो कि तुम दोनोें के बीच कुछ भी नहीं है, तो इतना ही मेरे लिए काफी है। इसलिए तुझे रवि से अपने वर्किंग रिलेशन और अपनी दोस्ती खत्म करने की कोई जरूरत नहीं है। बैसे भी अगर फ्यूचर में मैं और रवि साथ आऐ तो क्या तुम रवि की बजह से मुझसे भी दूरी बना लोगी।

अमृता- नहीं कभी नहीं… मैं तुमसे दूरी नहीं बना सकती

श्रेया- इसीलिए मेरी जान… जो हो गया सो हो गया…. उसे एक बार फिर भूल जाओ… आज के बाद हमारे बीच में इस बारे में कोई बात नहीं होगी।

अमृता- ठीक है….. तो फिर रवि से बात तुम करोगी या मैं….

श्रेया- उम्मम् देखते हैं… बैसे जनाब कुछ दिनों बाद यहाँ कानपुर आने बाले हैं। तो सोच रही हूँ कि तभी मैं उसे अपने दिल की बात भी बता दूँगी।

अमृता- वो कानपुर क्यों आ रहा है……

श्रेया- अरे भूल गई क्या…. तुम्हारी कम्पनी यहाँ कानपुर में अपना शॉपिंग मॉल शुरू करने बाली है।

श्रेया के याद दिलाने पर मुझे याद आया कि मेरी कम्पनी ने कानपुर में भी शॉपिग मॉल शुरू करने का प्लान किया था। पर पिछले कुछ समय से मैं अपने बिजिनेश पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाई थी। इसलिए मेरे बिजिनेश पार्टनर और मेरे दोस्त ही यह सब मैनेज कर रहे थे। इस बारे में याद आते ही मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- हाँ याद आया….. बैसे सच कहूँ तो मैंं इस बारे में भूल ही गई थी….

श्रेया- होता है… होता है…. बडे बडे बिजिनेश मैन इन छोटी मोटी बातों को याद नहीं रखते हैं।

अमृता- अरे यार ऐसा कुछ नहीं है…. बात बस इतनी सी है कि मुझे अपने दोस्तों पर पूरा भरोसा है।

श्रेया- हुम्म बो तो है….. बैसे तूमने मुझे बताया नहीं कि इतने दिनोें सेे तुम गुमसुम क्यों हो और बार बार तुम सामने की तरफ क्या देख रही हो…. एक मिनट…. क्या मैं सोच रही हूँ ऐ वही तो नहीं है…..

अचानक मुझसे बातें करते करते श्रेया की नजर चाय की टपरी के पास खडे कबीर पर पडी.. जो अब भी मुझे ही देखे जा रहा था। जैसे ही श्रेया ने कबीर को पहचाना तो वो गुस्से में भडकते हुए बोली

श्रेया- कबीर के बच्चे…. इसका यह नाटक अब कुछ ज्यादा ही हो गया है… साला हमारे घर तक आ गया…. आज मैं इसकी खबर लेकर ही रहूँगी…..

श्रेया को गुस्से से भडकता हुआ देखकर मैंने उसे रोकते हुए कहा

अमृता- अरे यार श्रेया रहने दे ना… .उसके ऐसे देखने से क्या फर्क पडता है… कौन सा हमें देखकर वो मोटा हो जाऐगा..

श्रेया- आखिर यह तुमसे चाहता क्या है….

अमृता- मुझे क्या पता…..

श्रेया- कहीं वो तुम्हारे प्यार ब्यार में तो नहीं पड गया…..

अमृता- पागल है क्या….

श्रेया- नहीं मैं सच कह रही हूँ… ऐसी हरकतें तो पागल आशिक ही करते हैं…. पक्का वो तुझे पटाने के चक्कर में है….

अमृता- जो भी हो मुझे उससे कोई मतलब नहीं है….

श्रेया- हुम्मममम…. वो तो दिख ही रहा है…. तुझे उससे कोई मतलब नहीं है, इसीलिए हम सब से छिपकर यहाँ टैरेस पर खडी हुई थी… ताकि वो तुझे निहार सके

श्रेया की बात सुनकर मैं चिढते हुए बोली

अमृता- श्रेया….. क्या बकवास कर रही हो…. तुम्हें तो पता ही है कि मैं उसे जानती तक नहीं और ना ही हमारे बीच आज तक कोई बात हुई है। बैसे भी मैं यहाँ टैरेस पर तो रोज ही आती हूँ। तो अब तू क्या चाहती है कि मैं इस कबीर के चक्कर में टैरेस पर आना भी बंद कर दूँ।

श्रेया- अरे नहीं बाबा नहीं… तू इतनी भडक क्यों रही है…. मैं तो बस तुझे ऐसे ही छेड रही थी। बैसे मैंने इस कबीर के बारे में थोडा बहुत पता किया है… वो एक अच्छा लडका है… अगर तू चाहे तो उसके साथ रिलेशनशिप में आगे बड सकती है। मुझे कबीर को अपना जीजू बोलने में कोई प्राब्लम नहीं होगी।

अमृता- शटआप…. ऐसा कभी नहीं होने बाला…. इनफेक्ट मैं कभी शादी ही नहीं करने बाली….. इसलिए तेरे दिमाग में किसी भी ऐसे गैरे को अपना जीजू बनाने की जो फैंटसी है ना…. उसे अपने दिमाग से बाहर निकाल दे……

श्रेया- पर कबीर में आखिर कमी क्या है… अच्छा खासा हैंडसम तो है… इन्फेक्ट वो तो पूरे कॉलेज का सबसे ज्यादा हैंडसम लडका है…. ऊपर से काफी इंटेलीजेंट भी है… मैंने उसकी प्रोग्रामिंग स्किल भी देखी है, वो पक्का तुम्हारी टक्कर का ही है। इसलिए तुझे कम से कम एक बार कबीर को अपना लाईफ पार्टनर बनाने के बारे में जरूर सोचना चाहिए….

अमृता- मैंने तुमसे पहले ही कहा है कि मैं अपनी जिंदगी में कोई भी लाईफ पार्टनर नहीं चाहती.. और अगर कभी मैंने अपना यह फैसला बदला भी तो कबीर वो लडका कभी नहीं होगा, जिसे मैं अपना लाईफ पार्टनर बनाऊँगी….

श्रेया- पर क्यों…

अमृता- इसका जबाब मेरे पास नहीं है……..

श्रेया- जबाब नहीं है… या देना नहीं चाहती…

अमृता- तुम्हें जो सही लगे वो सोच सकती हो……

श्रेया- यह तो कोई जबाब नहीं हुआ…. मैं सच जानना चाहती हूँ

श्रेया की बात सुनकर मैंने मन ही मन सोचा

“बेबकूफ लडकी तू क्यों भाई बहन के बीच अफेयर करवाने के पीछे पडी हुई है… मैं इससे अपना पीछा छुडवाना चाहती हूँ और तू मेरे ही भाई से मेरा गठबंधन करवाने के प्लान में है। अगर मैंने तुझे सच बता दिया ना तो तू शर्म के कारण खुद ही चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाऐगी।”

पर यह सब मैं बस मन में ही सोच सकती थी। इसलिए मैंने श्रेया को टालते हुए कहा

अमृता- अगर तुम सच ही सुनना चाहती हो तो सुनो… कबीर मेरे टाईप का लडका बिल्कुल भी नहीं है…. मुझे अपनी जिंदगी में सिंसियर और मैच्योर लडका चाहिए… कबीर की तरह लफंगा और लापरवाह लडका नहीं…

श्रेया- ओ ओ…. तो यह बात है…. और अगर कबीर किसी सिंसियर और मैच्योर लडके की तरह बिहेब करे, तो क्या तब भी तुम उसे पसंद नहीं करोगी….

अमृता- तुम पूजा और कबीर के बीच में ब्रोकर का काम क्यों नहीं करती…. जहाँ तक मुझे पता है, पूजा तो उसे अपने ग्रुप में सामिल करने के लिए मरी जा रही है। मेरे ख्याल से अब तक तो उसने अपने और कबीर के बच्चों के नाम भी सोच लिए होंगे।

श्रेया- बकवास…. उन दोनों का आपस में कोई मैच नहीं है…. बैसे भी कबीर जो इतने दिनों से तुम्हारे आस पास मंडरा रहा है। उसे देखकर पूजा का दिल पहले ही टूट चुका है। और फिर तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो, इसलिए तुम्हें लाईफ पार्टनर भी बेस्ट ही मिलना चाहिए ना…..

श्रेया की बात सुनकर फिर से चिढते हुए बोली

अमृता- श्रेया… बस बहुत हुआ…. अब मुझे इस टॉपिक पर कोई बात नहीं करनी है..

मुझे ऐसे चिढते हुए देख श्रेया खिलखिलाकर हंसते हुए बोली

श्रेया- हा हा हा अच्छा बाबा ठीक है ठीक है… छोडो यह सब…. मैं तो बस अपना मूढ फ्रेस कर रही थी।

अमृता- अपना मूढ फ्रेस करने के चक्कर में मेरा मूढ तो ऑफ कर दिया ना…. चल सुट्टा मार कर आते हैं….

मेरी बात सुनकर श्रेया हैरान होते हुए बोली

श्रेया- सुट्टा…. और तू…. अरे बाबा तुम कबसे सुट्टा मारने लगी… मैंने तो आज तक तुम्हें सिगरेट से हाथ लगाते हुए भी नहीं देखा है….

अमृता- हाँ पर आज तूने मेरा मूढ कुछ ज्यादा ही खराब कर दिया है…. इसलिए मुझे नहीं लगता की आज कॉफी से मेरा काम चलेगा….

श्रेया- अच्छा जी…. तो फिर ठीक है…. चलो चलते हैं सामने बाली टपरी पर…. वहाँ तूम सुट्टा के साथ साथ अपने आशिक पर नजर भी मार लियो।

श्रेया की बात सुनकर मैंने गुस्से में उसे देखा तो वो मुझसे दूर भागने लगी। यह देखकर मैं समझ गई कि उसने मुझे परेशान करने के लिए जानबूझकर वो सब कहा था। इसलिए मैं भी उसे गुस्से में डांटते हुए उसके पीछे भागी

अमृता- श्रेया की बच्ची रुक मैं अभी बाताती हूँ तुझे

इससे पहले मैं उसे पकडती श्रेया ने अपने कान पकडते हुए कहा

श्रेया- आच्छा बाबा सॉरी…… अब नहीं कहूँगी….

श्रेया के यूँ माफी मांगने पर मैं भी हंस पडी और फिर हम दोनों अपने घर से निकलकर चाय की टपरी की तरफ चल पडे।

कहानी जारी है..............
 
Update 082 -

असल में मेरे वहाँ जाने के दो कारण थे। पहला तो मैं जानना चाहती थी कि मेरे और श्रेया के वहाँ जाने पर क्या कबीर हमसे बात करने की कोशिश करेगा या नहीं और दूसका कारण यह था कि मैं कबीर के सामने स्मोक करके उसे यकीन दिलाना चाहती थी कि मैं उसकी बहन निशा नहीं हूँ। क्योंकि निशा यानि मुझे स्मोकिंग करने बाले लोगों से सख्त नफरत थी। इसलिए कबीर के सामने स्मोकिंग करने पर उसे पक्का यकीन हो जाऐगा कि मैं उसकी बहन निशा हो ही नहीं सकती।

जब मैं और श्रेया आपस में बातें करते हुए उस चाय की टपरी पर पहुँचे तो हमें वहाँ देखकर कबीर बुरी तरह से डर गया। जो उसके चेहरे पर साफ साफ दिखाई दे रहा था। शायद हमारे वहाँ जाने से उसे लगा हो कि हम लोग उसे डाँटने या फिर उससे झगडा करने आऐ हैं। पर जब हमने उसपर कोई ध्यान नहीं दिया तो वो थोडा रिलेक्स हो गया। लेकिन अगले ही पल जब हमने चाय की टपरी पर से दो सिगरेट और चाय ली तो वो बुरी तरह से हैरान रह गया। उसे उम्मीद नहीं थी कि हम लोग स्मोकिंग करते होंगे।

हाँलाकि मैंने कबीर के चेहरे पर आऐ एक्सप्रेशन साफ साफ देख लिए थे। पर मैंने उसे पूरी तरह से इग्नोर कर दिया था। उस छोटी सी टपरी बाले से चाय और सिगरेट लेकर मैं और श्रेया टपरी के पीछे की तरफ डली लकडी की ब्रेंच पर जाकर बैठ गए और चाय के साथ सिगरेट के कश लेने लगे। मैंने अपनी जिंदगी में पहले कभी भी स्मोकिंग नहीं की थी। इसलिए पहला कश लेते ही मुझे तेज खाँसी आने लगी। वो तो शुक्र है कि कबीर उस टपरी के बाहर बाले एरिया में खडा हुआ था और उसने मुझे ऐसे खांसते हुए नहीं देखा।

बर्ना उसके सामने आज मेरा भाँडा फूट सकता था। लेकिन एक दो कश लेने के बाद ही मैं पूरी तरह से नॉर्मल हो गई थी। तभी अचानकर से कबीर भी पीछे की साईड आकर हमारे पास बैठ गया। अब जब वो खुद ही हमारे पास हमसे बात करने आया था, तो फिर श्रेया कहाँ पीछे रहने बाली थी। इसलिए उसने आखिरकार कबीर से सबाल कर ही लिया

श्रेया- आखिर तुम चाहते क्या हो मिस्टर कबीर शर्मा… इस तरह हमारा पीछा करने का क्या मतलब है….

श्रेया का सबाल सुनकर कबीर कुछ हिचकिचाया और फिर बोला

कबीर- नहीं तो.. मैं तुम्हारा पीछा नहीं कर रहा हूँ… लगता है कि तुम्हें कुछ गलत फहमी हुई है।

कबीर का जबाब सुनकर श्रेया झल्लाते हुए बोली

श्रेया- ओह कम ऑन कबीर… तुम्हें क्या हम बेबकूफ नजर आ रहे हैं… हम लोग जहाँ भी जाते हैं, तुम भी वहाँ पहुँच ही जाते हो, कॉलेज में भी तुम सारा सारा दिन केवल अमृता को ही घूरते रहते हो, यहाँ तक कि तुम आज हमारे घर तक आ गए हो। तुम्हें क्या लगता है कि हम लडकियाँ हैं तो तुम्हारा कुछ बिगाड नहीं सकतीं… किसी लडकी को स्टॉक करना या उसे गलत तरीके से घूरने पर तुम्हें जेल भी हो सकती है…. तुम्हारी इन हरकतों की बजह से पिछले कुछ दिनोें से अमृता का घर से बाहर निकलना भी बंद हो गया है, हंसना और दोस्तों के साथ हंसी मजाक करना तो वो लगभग भूल ही गई है, यहाँ तक की वो हम लोगों से भी ठीक से बात नहीं कर रही है।

श्रेया की बात सुनकर कबीर बुरी तरह से शॉक्ड होते हुए बोला

कबीर- आई आई एम सॉरी…. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था….

श्रेया- तो फिर तुम अमृता को स्टॉक क्यों कर रहे हो….

कबीर- वो वो बात बस इतनी सी है कि मुझे अमृता पर थोडा शक था….

श्रेया- शक कैसा शक….

कबीर- वो वो असल में अमृता का चेहरा मुझे काफी जाना पहचाना लग रहा है… ऐसा लग रहा है जैसे मैं इसे पहले से ही जानता हूँ।

श्रेया- ओह कम ऑन कबीर… तुम्हें नहीं लगता कि यह डॉयलॉग कुछ ज्यादा ही पुराना हो गया है…. अक्सर लडके लडकियों पर लाईन मारने के लिए इस डॉयलॉग का यूज करते रहते हैं। पर हम लोगों पर तुम्हारी इन बातों का कोई असर नहीं होने बाला

कबीर- नहीं नहीं मैं सच कह रहा हूँ। अगर तुम्हें मेरी बातों पर यकीन नहीं है, तो मैं तुम्हें इसका सबूत दे सकता हूँ।

कबीर की बात सुनकर मेरे दिल की धडकन अचानक से बहुत तेज हो गई थीं… एक पल तो मुझे लगा कि मेरा भाण्डा अब बस फूटने ही बाला है। तभी कबीर ने अपने मोबाईल में हमारी फैमली पिक्चर निकाल कर श्रेया की तरफ अपना मोबाईल बडा दिया। यह सब देखकर मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग गया था और मेरे हाथ पैर डर के कारण बुरी तरह से काँप रहे थे। यहाँ तक की मेरे हाथों से सिगरेट भी नीचे जा गिरी थी। जैसे ही श्रेया ने उस फोटो को देखा, तो वो भी हैरान रह गई। असल में कबीर ने जो फोटो श्रेया को दिखाई थी, वो उस दिन की थी, जिस दिन मैं कबीर और पापा को मथुरा बृंदावन घुमाने ले गई थी। तभी कबीर ने एक साथ हम लोगों की सेल्फी ली थी।

हाँलाकि अपने मरने का नाटक करने से पहले ही मैंने अपनी सारी पुरानी पिक्चर्स अपने सभी जान पहचान बालों के मोबाईल से डिलीट कर दी थी, यहाँ तक की मैंने अपनी शादी की फोटो एलबम भी नष्ट कर दी थी। ताकि किसी को भी मेरी फोटो ना मिले। पर गलती से यह सेल्फी कबीर के मोबाईल में रह गई थी और यह गलती अब मेरे ऊपर बहुत भारी पडने बाली थी। मैं यह सब सोच ही रही थी कि तभी श्रेया बोली

श्रेया- कौन है यह लडकी… और इसका चेहरा अमृता से इतना मिलता जुलता क्यों है

श्रेया की बात सुनकर एक पल के लिए तो मेरे दिल ने धडकना ही बंद कर दिया था। पर अगले ही पल कबीर ने जो कुछ भी कहा उसे सुनकर मैंने राहत की एक सांस ली

कबीर- यह मेरी दीदी यानि मेरी बडी बहन निशा गुप्ता थी….

कबीर की बात सुनकर श्रेया चौंकते हुए बोली

श्रेया- थी से तुम्हारा क्या मतलब है..

कबीर- एक साल पहले कार एक्सीडेंट में दीदी की डेथ हो गई थी…. शायद उसे अब एक्सीडेंट कहना सही नहीं होगा… क्योंकि वो एक मर्डर था…. असल में दीदी के पति अमन गुप्ता ने वो एक्सीडेंट प्लान किया था।

कबीर की बात सुनकर श्रेया काफी शॉक्ड थी, साथ ही साथ उसे निशा के बारे में सच जानकर दुख भी हो रहा था। इसलिए वो बोली

श्रेया- ओह.. आई एम सॉरी…. मुझे इस बारे में पता नहीं था… पर तुम्हारी बहन का चेहरा अमृता से इतना मिलता जुलता क्यों है….

कबीर- मुझे नहीं पता… सच कहूँ तो मैं भी इस सबाल का जबाब जानना चाहता था… बस इसीलिए मैं अमृता का पीछा कर रहा था और उसपर नजर रख रहा था।

कबीर की बात सुनकर श्रेया खिलखिलाकर हंसते हुए बोली

श्रेया- कहीं तुम्हें ऐसा तो नहीं लग रहा है कि अमृता ही तुम्हारी बडी बहन है….

कबीर- नहीं ऐसा नहीं है… हाँलाकि यह बात सही है कि अमृता का चेहरा निशा दीदी से काफी मिलता जुलता है…. पर अगर तुम निशा दीदी के फोटो को और अमृता के चेहरे को ध्यान से देखोगी तो तुम्हें दोनों के चेहरे में काफी अंतर महसूस होगा, इसके अलावा निशा दीदी की आँखों का रंग काला था, जबकि अमृता की आंखों का रंग हरा है, साथ ही साथ दोनों की एज में भी अच्छा खासा अंतर है। अगर निशा दीदी जिंदा होत तो आज उनकी एज 28 साल होती… पर अमृता को देखकर कोई भी कह सकता है कि वो 19-20 साल से ज्यादा की नहीं है।

कबीर की बात सुनकर श्रेया एक गहरी सांस लेते हुए बोली

श्रेया- हुम्म तुम सही कह रहे हो… इस पिक्चर में तुम्हारी दीदी की एज काफी ज्यादा लग रही है, साथ ही साथ हम अगर उनके फेसियल फीचर्स और फिगर की तुलना अमृता से करें, तो उसमें भी काफी अंतर है। तो क्या तुम्हें अब भी शक है कि अमृता ही तुम्हारी निशा दीदी है….

श्रेया की बात सुनकर कबीर मुस्कुराते हुए बोला

कबीर- नहीं ऐसा नहीं है…. अमृता मेरी निशा दीदी नहीं हो सकती… अमृता की पर्सनेलिटी और निशा दीदी की पर्सनेलिटी में काफी अंतर है…. अमृता का बात करने का तरीका, चलने का तरीका, खाने पीने की आदतें सब कुछ निशा दीदी से काफी अलग है। सिबाय एक आदत के…

श्रेया- कौन सी

कबीर- कॉफी… निशा दीदी की तरह अमृता को भी कॉफी का एडिक्शन है…..

श्रेया- ओ ओ… तो तुमने अमृता के बारे में इतना बस कुछ पता कर लिया है…. पर एक बात मुझे समझ नहीं आ रही है। तुम्हारा सरनेम शर्मा है और तुम अपनी दीदी का सरनेम गुप्ता बता रहे हो। यह कैसे पॉशीवल है….

श्रेया का बेबकूफी भरा सबाल सुनकर मैंने उसे गुस्से से घूरते हुए मन ही मन सोचा

“डफर इतनी छोटी सी बात समझ में नहीं आई तुझे…. शादी के बाद लडकियाँ अपने पिता की जगह अपने पति का सरनेम यूज करती हैँ।”

मैं अभी यह सब सोच ही रही थी कि तभी कबीर ने श्रेया का डाऊट क्लीयर करते हुए कहा

कबीर- वो दरअसल निशा दीदी के पति का सरनेम गुप्ता था… इसलिए शादी के बाद वो निशा शर्मा से निशा गुप्ता बन गई…..

श्रेया- हाँ हाँ यह तो मैं पहले ही समझ गई थी… पर अभी अभी तुमने ही तो कहा है कि तुम्हारी दीदी के पति ने ही उनका मर्डर प्लान किया था। तो फिर तुम अपनी दीदी के नाम के साथ उनके पति का सरनेम आखिर कैसे यूज कर सकते हो। मेरे ख्याल से तुम्हें अपनी दीदी के नाम के साथ अपना सरनेम ही यूज करना चाहिए।

श्रेया की बात सुनकर मैं हैरानी से उसे देखा, असल में वो लॉजीकली सही बोल रही थी। इसलिए मैंने मन ही मन सोचा

“श्रेया की बातोंं में पाईंट तो है… शायद यह उतनी भी डफर नहीं है, जितना मैं सोच रही थी।….. सॉरी श्रेया तुम डफर बिल्कुल भी नहीं हो…”

वहीँ दूसरी तरफ कबीर भी श्रेया की बात सुनकर हैरान होते हुए बोला

कबीर- हाँ यार.. तुम सही कह रही हो… मैंने तो इस बारे में कभी सोचा ही नहीं… अगली बार से मैं दीदी को निशा गुप्ता की जगह निशा शर्मा कहरकर ही बुलाऊंगा

श्रेया- यह तो अच्छी बात है….. बैसे तुम्हें यह बात कब पता चली कि अमृता तुुम्हारी निशा दीदी नहीं है।

कबीर- यह तो मैं पहले दिन ही जान गया था। असल में जब पहली बार हम दोनों आपस में टकराऐ थे, तो अपनी निशा दीदी के चेहरे से मिलती जुलती लडकी देखकर मैं हैरान रह गया था। पर फिर मैंने ध्यान से अमृता का चेहरा देखा तो मुझे उसमें और अपनी निशा दीदी में काफी अंतर महसूस हुआ। तभी मैं समझ गया था कि अमृता और निशा दीदी दोनों अलग अलग इंशान है। इसके बाद एक दो दिन तक अमृता पर नजर रखने के बाद मेरे सारे डाऊट क्लीयर हो गए थे।

कबीर और श्रेया की बातें सुनकर मैंने राहत की एक लम्बी सांस ली थी…. असल में मुझे भी दिल ही दिल में यह यकीन था कि कबीर मुझे पहचान नहीं पाया होगा और उसे बस मेरे निशा होने पर शक होगा। लेकिन फिर भी अपना राज खुलने के डर के कारण मैं परेशान थी। पर अब जब मुझे पता चल गया था कि कबीर का शक दूर हो चुका है। तो मुझे अब डरने की कोई जरूरत नहीं थी, बैसे भी कबीर ने पुरानी निशा और अब की अमृता के बीच जो अंतर बताऐ थे, वो सब सच थे। पिछले एक साल से मैंने साक्षी और पूर्वी के साथ ट्रेनिंग के दौरान अपनी पर्सनेलिटी में काफी सुधार किया था। अब मैं किसी मैच्योर औरत की जगह किसी टीन ऐज लडकी की तरह ही विहेव करने लगी थी। जिस कराण मेरा कान्फि़डेंस अब बापिस आ चुका था। इसलिए मैंने कबीर से सबाल किया

अमृता- जब तुम सच जान ही गए थे, तो इस तरह मेरा पीछा करके मुझे परेशान क्यों कर रहे हो। अगर तुम सच में चाहते हो कि मैं तुम्हारे खिलाफ पुलिस कम्प्लेन ना करूँ तो मेरा पीछा करना और मुझे घूरना बंद कर दो…. तुम्हारी इन हरकतों से सभी लोग हमारे बारे में उल्टी सीधी बातें कर रहे है…..

मेरी बात सुनकर कबीर शर्मिंदा होते हुए बोला

कबीर- आई एम सॉरी अमृता, मेरा इरादा तुम्हें परेशान करने या तुम्हें डाराने का बिल्कुल भी नहीं था। मैं तो बस तुम्हारे आस पास इसलिए रहता हूँ ताकि अपनी निशा दीदी को याद कर सकूँ।

कबीर की इस बात का मेरे पास कोई जबाब नहीं था। इसलिए मैंने चुप रहना ही ठीक समझा। पर श्रेया कहाँ चुप रहने बाली थी। वो तुरंत बोली

श्रेया- अगर ऐसी बात थी तो तुमने डायरेक्ट हमारे पास आकर हमसे इस बारे में बात क्यों नहीं की। हो सकता है कि हम तुम्हें अपने फ्रेंडस ग्रुप में सामिल कर लेते…. उसके बाद तुम हमारे दोस्त के रूप में जब चाहे अमृता से मिल भी सकते थे और उससे बात भी कर सकते थे।

कबीर- वो वो तुम लोग हमेशा लडकियों के साथ ही रहती हो, तो मुझे लगा कि शायद तुम मुझे अपना दोस्त ना बनाओ….

श्रेया- अरे डफर… जब हम लडकियाँ हैं तो लडकियों के ग्रुप में ही तो रहेंगी ना…. पर ऐसा नहीं है कि हम केवल लडकियाँ को ही अपना फ्रेंड बनाऐंगे। हमारे कई मेल फ्रेंड भी हैं…. लेकिन वो लोग यहाँ कानपुर में नहीं रहते…. और फिर अभी हमें यहाँ कानपुर आऐ 1-2 महिने ही तो हुए हैं। हम ऐसे ही किसी भी लडके को अपना फ्रेंड तो बना नहीं सकते हैं ना। अगर तुम पूरी ईमानदारी के साथ हमारे पास आकर सब कुछ सच सच बता देते, तो हम लोग पक्का तुम्हें अपना फ्रेंड बना लेते।

श्रेया की बात सुनकर कबीर थोडा शर्मिंदा होते हुए बोला

कबीर- आई एम सॉरी…… मैं सच में डफर हूँ…. सच कहूँ तो मेरे ज्यादा दोस्त नहीं हैं और किसी लडकी से तो आज तक मेरी दोस्ती नहीं हुई है… इसलिए मेरी तुम लोगों से इस बारे में बात करने की हिम्मत ही नहीं हुई… और फिर मुझे डर था कि अगर मैं तुम्हारा दोस्त बन भी गया तो दूसरे लोग पता नहीं हमारे बारे में कैसी कैसी बातें करेंगे।

कबीर की बात सुनकर मैंने चिढते हुए कहा

अमृता- दोस्त बनकर रहने में कोई बुराई नहीं है…. पर तुम इतने दिनोें से मेरे साथ जो हकत करते आ रहे हो, उससे जरूर कई लोग हमारे बारे में उल्टी सीधी बातें कर रहे होंगे। तुमने तो पूजा का दिल भी तोड दिया है….

मैंने जानबूझकर पूजा का जिक्र कबीर के सामने किया था, ताकि कबीर का ध्यान पूजा की तरफ डायवर्ट हो जाऐ। उससे दो फायदे थे, एक तो कबीर का ध्यान मुझसे हटकर पूजा पर चला जाऐगा और दूसरा कॉलेज में मुझे और कबीर को लेकर जो रूमर चल रहे थे, वो पूरी तरह से बंद हो जाऐंगे।

कहानी जारी है.........
 
Update 083 -

मैंने भले ही सारी दुनिया के सामने मरने का नाटक करके अपनी पहचान बदल ली है और निशा से अमृता बन गई हूँ, पर सच तो यही था कि कबीर मेरा सगा छोटा भाई है। इसलिए अपने ही भाई के साथ लव अफेयर के रूमर सुनकर मुझे बहुत अजीब लग रहा था। लेकिन जब कबीर ने मेर मूंह से पूजा का नाम सुना तो वो बुरी तरह से चौंकते हुए बोला

कबीर- व्हॉट….. पूजा का दिल दोड दिया…. यह क्या बकवास है और ऐ पूजा बीच में कहाँ से आ गई…..

श्रेया- पूजा हमारी दोस्त है जो हमारे साथ ही रहती है

कबीर- हाँ हाँ मैं जानता हूँ उसे…. पर दिल तोडने बाली बात कहाँ से आ गई….

श्रेया- हमें ऐसा लगता है कि वो तुम्हें पसंद करती है…. इसलिए वो हर वक्त हमारे सामने तुम्हारी तारीफ करती रहती थी और तुम्हें अपने ग्रुप में सामिल करने के लिए हमें मनाती रहती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसने तुम्हारे बारे में बात करना बिल्कुल बंद कर दिया है। तो हमें लगा कि शायद तुम्हारे इस तरह अमृता को घूरने और उसका पीछा करने से उसका दिल टूट गया होगा।

श्रेया की बात सुनकर कबीर चिढते हुए बोला

कबीर- ओह गॉड यह सब क्या बकवास है…… तुम लोग जैसा सोच रहे हो वैसा हमारे बीच कुछ भी नहीं है…. असल में पूजा का बॉयफ्रेंड मनीष मेरा अच्छा दोस्त है और शायद तुम लोग भी उसे जानते होगे, हमारी क्लास में ही तो पढता है।

कबीर की बात सुनकर श्रेया हैरान होते हुए बोली

श्रेया- मतलब पूजा का पहले से ही मनीष के साथ चक्कर चल रहा है और उसने यह बात अब तक हमें बताई भी नहीं….. आज ही घर जाकर उसे सबक सिखाती हूँ…. दोस्तों से इतनी बडी बात छिपाने की सजा तो उसे मिलनी ही चाहिए…..

मैंने श्रेया की बातों को इग्नोर करते हुए कहा

अमृता- अगर यह बात सच है तो फिर वो हमसे तुम्हारी इतनी तारीफ क्यों करती थी।

मेरा सबाल सुनकर कबीर थोडा झेंपते हुए बोला

कबीर- वो वो असल में उस दिन जब हम टकराऐ थे तो मैं तुम्हें ही देखे जा रहा था। तो शायद उसे गलत फहमी हो गई होगी कि मैं तुम्हें पसंद करता हूँ। इसलिए वो बस हमारी आपस में सेटिंग करवाने के चक्कर में होगी। बैसे भी मुझे अपने ग्रुप में सामिल करने के बाद उसे भी तो फायदा था। मेरे साथ साथ मनीष भी तुम लोगों के ग्रुप में सामिल हो जाता। जिसके बाद वो दोनों खुलकर एक दूसरे के साथ टाईम स्पेंड कर पाते। लेकिन जब तुम लोगों ने उसकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया होगा, तो उसने मेरे बारे में तुमसे बात करना बंद कर दी होगी।

श्रेया- मतलब उसका कोई दिल बिल नहीं टूटा है…. वो तो पहले से ही कहीं दूसरी जगह अपनी चोंच लडा रही थी और यहाँ बेचारी अमृता उसके लिए गिल्टी फील कर रही थी।

श्रेया की बात सुनने के बाद कबीर ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा

कबीर- तो फिर अब जब सारी बातें साफ हो ही गईं हैं तो क्या अब हम लोग दोस्त बन सकते हैं।

श्रेया- अफकोर्स…. हम लोग दोस्त हैं…..

लेकिन तभी मैं श्रेया की बात को बीच में ही काटते हुए बोली

अमृता- बिल्कुल भी नहीं……

मेरी बात सुनकर कबीर के साथ साथ श्रेया ने भी हैरान होते हुए मुझे देखा और फिर कबीर ने सबाल किया

कबीर- पर क्यों…..

अमृता- क्योंकि हमारे बीच अभी तक कोई भी फ्रेंडशिप एग्रीमेंट नहीं हुआ है….

मेरी बात सुनकर एक बार फिर कबीर हैरान होते हुए बोला

कबीर- फ्रेंडशिप एग्रीमेंट….

अमृता- हाँ…. असल में हमारा दोस्त बनने से पहले तुम्हें मुझसे कुछ प्रॉमिस करने होंगे। तब जाकर हम तुम्हें अपना दोस्त बनाने के बारे में सोचेंगे और श्रेया हमारे इस फ्रेंडशिप एग्रीमेंट की बिटनेश होगी।

कबीर- कैसे प्रामिस

अमृता- यही कि आज के बाद तुम ना तो मेरा पीछा करोगे और ना ही हर वक्त मुझे घूरोगे। इसके अलावा मेरी पर्सनल लाईफ से हमेशा दूर रहोगे।

मेरी बात सुनकर कबीर तुरंत मुस्कुराता हुआ बोला

कबीर- ठीक है… मुझे तुम्हारी यह शर्त मंजूर है….

अमृता- मेरी नजर में दोस्ती का रिश्ता सबसे बडा होता है मिस्टर कबीर, और एक दोस्त कभी भी दूसरे दोस्त पर कोई एहसान नहीं करता है। इसलिए नो सॉरी और नो थैंक्स का फार्मूला हमेशा याद रखना।

इस बार भी कबीर मुस्कुराते हुए बोला

कबीर- मुझे यह भी मंजूर है

अमृता- अगर कभी हमारे बीच झगडा हुआ तो भी हमारी दोस्ती कभी खत्म नहीं होनी चाहिए और गलती चाहे जिसकी हो, पर बात पहले तुम्हें शुरू करनी पडेगी।

कबीर- उम्ममम ठीक है मुझे तुम्हारी यह शर्त भी मंजूर है

अमृता- और हाँ कालेज में तुम्हारी बजह से हमारे बारे में जो रूमर चल रहे हैं। उन्हें खत्म करने की सारी जिम्मेदारी तुम्हारी होगी

कबीर मेरी इस शर्त को सुनकर थोडा परेशान होते हुए बोला

कबीर- पर यह काम इम्पॉसिबल है….. मैं हर किसी के पास जाकर उसे समझा तो नहीं सकता ना… और ना ही सारा सच किसी को बता सकता हूँ….

अमृता- मैं कुछ नहीं जानती… यह सारे रूमर तुम्हारी बजह से शुरू हुए हैं, तो खत्म भी तुम्हें ही करने होंगे

मेरी बात सुनकर कबीर ने कुछ देर सोचा और फिर बोला

कबीर- मैं इसका तुमसे कोई वादा तो नहीं कर सकता, पर अपनी तरफ से मैं पूरी कोशिश करूँगा।

अमृता- ठीक है… अगर तुम कोशिश करोगे तो उससे भी काम चल जाऐगा।

कबीर- तो क्या अब हम लोग दोस्त हैं……

अमृता- नहीं अभी नहीं… तुमने हमारी सुट्टा पार्टी खराब कर दी है…. इसलिए पहले हमारे लिए चाय और सिगरेट लेकर आओ उसके बाद हम दोस्त बन सकते हैं।

मेरी बात सुनकर श्रेया खिलखिलाकर हंसते हुए बोली

श्रेया- ऐ सही है यार…. मैं भी यही सोच रही थी….

हमारी बात सुनकर कबीर मुस्कुराता हुआ तुरंत टपरी बाले के पास गया और तीन सिगरेट और चाय लेकर आ गया। जब मैंने कबीर को सिगरेट के कस लगाते हुए देखा तो एक पल के लिए मैंने गुस्से में उसे घूरा…. शायद उस एक पल में मेरे अंदर की बडी बहन जाग गई थी। पर अगले ही पल मैंने अपने आप को कंट्रोल कर लिया। अब चूँकि मेरा कबीर से कोई रिलेशन नहीं था और वो अब मेरा दोस्त भी बन चुका था, तो मैं उसे सिगरेट पीने से रोक नहीं सकती थी। बैसे भी मैं खुद भी तो उसके साथ बैठकर सिगरेट पी रही थी। सिगरेट के दो कस लगाने के बाद कबीर ने एक बार फिर अपना सबाल दोहराया।

कबीर- तो क्या अब हम लोग दोस्त हैं….

श्रेया- हाँ हाँ क्यों नहीं…. अब जब तुमने मेरे सामने अमृता की सारी शर्तें मान लीं हैं तो फिर हम मना कैसे कर सकते हैं। इसलिए आज से हम लोग पक्के दोस्त हैं…. तुम चाहो तो कल से क्लासरूम में हमारे साथ बाली चेयर पर भी बैठ सकते हो और कैंटीन में हमारे साथ लंच भी कर सकते हो।

श्रेया की बात सुनकर कबीर खुश होते हुए बोला

कबीर- ठीक है….. और मोबाईल नम्बर…..

कबीर की बात सुनकर हम लोगों ने एक दूसरे के कांटेक्ट नम्बर आपस में शेयर कर लिए। जिसके बाद हम लोग कुछ देर यूँ ही बैठकर आपस में बातें करते रहे। उसके बाद कबीर अपने हॉस्टल चला गया, जबकि मैं और श्रेया घर बापिस आ गए। अगले दिन से कबीर और मनीष भी हमारे ग्रुप में सामिल हो गऐ थे। शुरूआत में तो कबीर को अपने फ्रेंड ग्रुप में शामिल करने पर मैं थोडा अनकम्फर्टेबल फील कर रही थी। क्योंकि दोस्तों के बीच अक्सर बर्गल और एडल्ट बातें होती रहतीं हैं, जो भाई बहन एक दूसरे के साथ बिल्कुल भी नहीं कर सकते हैं।

लेकिन कुछ दिनों बाद मेरे लिए सब कुछ नार्मल हो गया था। क्योंकि मैंने अपने आपको यह समझा लिया था कि अब जब कबीर से मेरा कोई भी रिलेशन नहीं है, तो मुझे कबीर के सामने बर्गल और एडल्ट बातें करने में भी कोई प्राब्लम नहीं होनी चाहिए। इस दौरान मुझे कानपुर आऐ करीब दो महिने बीत गऐ थे, लेकिन अब तक मुझे फारूख उस्मान और उसके किसी भी साथी के बारे में कोई छोटी मोटी जानकारी भी नहीं मिली थी और ना ही कॉलेज में किसी भी प्रकार की कोई टैरेरिस्ट एक्टिविटी के बारे में कोई लिंक मिला था। वहीं दूसरी तरफ कबीर मेरे फ्रेंड ग्रुप में सामिल होने के बाद ज्यादातर मेरे साथ रही रहता था।

इसलिए हम दोनों बेस्ट फ्रेंड की तरह हो गए थे। इसका फायदा उठाते हुए मैंने अपने यानि अमृता के फैमली बैकग्राऊंड के बारे में भी कबीर को सब कुछ बता दिया था। ताकि कबीर के मन में मेरे लिए जो बचा कुचा शक था, वह भी दूर हो गया था। सब कुछ बहुत बडिया चल रहा था, इसी बीच एक दिन जब मैं और श्रेया अपने घर के पास चाय की टपरी पर स्मोकिंग कर रहे थे, तभी कबीर भी वहाँ आया। उसने अपने हाथों में एक रेड रोज पकडा हुआ था और वो काफी खुश लग रहा था। इससे पहले मैं और श्रेया उसके इरादे समझ पाते कबीर मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गया और रेड रोड मेरी तरफ बडाते हुए बोला

कबीर- आई लव यू अमृता…

कबीर की इस हरकत से मैं बुरी तरह से चौंकते हुए बोली

अमृता- व्हॉट आ फक कबीर… यह सब क्या मजाक है….

कबीर- मैं कोई मजाक नहीं कर रहा हूँ अमृता, मैं सच में तुमसे प्यार करने लगा हूँ।

अमृता- अभी जुम्मा जुम्मा चार दिन तो हुए नहीं हमारी दोस्ती को और तुम्हें मुझसे प्यार भी हो गया….

कबीर- प्यार तो काफी दिन पहले ही हो गया था…. पर तुमसे कहने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी। आज बडी मुस्किल से तुम्हें अपने दिल की बात बताने की हिम्मत जुटाई है।

अमृता- यह सब क्या बकवास है कबीर… अभी कुछ दिनों पहले ही तो तुम मुझे अपनी बहन की तरह मान रहे थे और अब तुम बहन भाई के रिश्ते से सीधे गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड के रिश्ते पर आ गए। मैंने कभी नहीं सोचा था कि तुम इतनी चीप माईंडसेट बाले लडके निकलोगे।

कबीर- नहीं यह सच नहीं है… मैंने तुम्हें कभी भी अपनी बहन नहीं माना है…..

तभी श्रेया हमारे बीच में बोल पडी

श्रेया- झूठ मत बोलो कबीर…. तुमने मेरे ही सामने ही कहा था कि अमृता तुम्हें अपनी बडी दीदी निशा की याद दिलाती है।

कबीर- हाँ यह बात सही है… क्योंकि अमृता का चेहरा मेरी दीदी से काफी मिलता जुलता है। पर मैंने कभी भी अमृता को अपनी बहन की नजर से नहीं देखा है।

अमृता- मैं कुछ नहीं जानती….. मैंने कभी भी तुम्हें उस नजर से नहीं देखा है…. बैसे भी मुझे इस प्यार ब्यार में कोई इंट्रेस्ट नहीं है… मेरे लाईफ के गोल अलग हैं… और मैं अपने गोल को पीछे नहीं छोड सकती…. इसलिए इस प्यार व्यार के चक्कर को छोडो और अपने कैरियर पर ध्यान दो।

कबीर- मैं कभी भी तुम्हारे गोल के बीच में नहीं आऊँगा अमृता… तुम जो चाहो अपने जीवन में कर सकती हो… बल्कि मैं तो मैं तुम्हें तुम्हारे गोल पूरे करने में पूरा सपोर्ट करूँगा।

अमृता- नहीं कर सकते… अभी तुम मेरे बारे में जानते ही क्या हो…. मेरी लाईफ में ऐसा बहुत कुछ है जो मैं अपने दोस्तों से भी शेयर नहीं कर सकती हूँ। हो सकता है कि फ्यूचर में मेरा पूरा सच जानने के बाद तुम मुझसे नफरत करने लगो… इसलिए हम दोनों के बीच कोई मैच नहीं है….. बैसे भी मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई फीलिंग भी नहीं है। तुम बस मेरे अच्छे दोस्त हो, उससे ज्यादा कुछ नहीं। इसलिए अपने दिमाग से यह सब बातें निकाल दो….

कबीर- नहीं निकाल सकता…. मुझे नहीं पता क्यों पर हर दिन हर पल मेरा तुम्हारे लिए अफेक्शन बडता ही जा रहा है। जब तुम मेरे आस पास होती हो तो मैं बहुत ज्यादा कंफर्टेबल होता हूँ। पर जब तुम मेरे आस पास नहीं होती तो दिल में अजीब से बेचैनी होने लगती है। ऐसा लगता है कि मेरे दिल का कोई हिस्सा कहीं खो गया है।

कबीर की बात सुनकर मैंने मन ही मन सोचा

“बेबकूफ लडके… कोई भला अपनी ही बहन को प्रपोज कैसे कर सकता है….”

यह सब मन ही मन सोचने के बाद मैंने कबीर से चिढते हुए कहा

अमृता- ऐ सब कैसी बचकानी बातें कर रहे हो तुम… ऐसा कुछ भी नहीं होता… यह बस तुम्हारा बहम है…. असल में इस ऐज में हार्मोनल चेंज की बजह से अपोजिट जैंडर के लिए अट्रेक्शन होना कॉमन बात है। जिसे आम तौर पर लडके लडकियाँ प्यार समझ लेते हैं। पर प्यार ब्यार जैसा कुछ भी नहीं होता… यह बस हमारे बॉडी में हो रहे कैमिकल रिऐक्शन का नतीजा होता है। जैसे आज तुम्हें मुझसे प्यार हो गया, आगे चलकर किसी दूसरी लडकी से हो जाऐगा।

मेरी बात सुनकर कबीर हैरानी से मुझे देखता हुआ बोला

कबीर- तुम कितनी पत्थर दिल हो अमृता

अमृता- मैं ऐसी ही हूँ… और मैंने तुमसे पहले ही कहा है कि मेरे बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो मैंने अपने दोस्तों को भी नहीं बताया है। मेरा इमोशनलैश होना भी उनमें से एक है।

कबीर- मुझे इससे कोई फर्क नहीं पडता… तुम जैसी भी हो पर मुझे पसंद हो….

कबीर की बात सुनकर मैंने एक बार फिर मन ही मन सोचा

“अरे यार यह तो पीछे ही पड गया…. अब मैं इसे कैसे समझाऊं कि मैं इसकी सगी बहन हूँ। ऊपर से हमारी एज में भी पूरे 8 साल का डिफरेंस है, तो भला मैं इसके साथ लव रिलेशन कैसे रख सकती हूँ। इस कॉलेज में इतना सारी खूबसूरत लडकियाँ हैं…. उन्हें जाकर प्रपोज करो ना यार… इसमें मैं भी तेरा साथ दे दूंगी…. पर मुझे प्रपोज क्यों कर रहे हो…… लगता है मैंने इसे दोस्त बनाकर ही गलती कर दी है…”

हाँलाकि मेरे मन में जो बातें चल रहीं थीं, वो मैं कबीर से नहीं कह सकती थी। इसलिए मैं उसे एकबार फिर टालते हुए बोली

अमृता- अरे बेबकूफ तुम्हें समझ में नहीं आ रहा क्या… मुझे तुम्मे कोई इंट्रेस्ट नहीं है। अगर तुम मेरे दोस्त बनकर रहना चाहते हो तो ठीक है, लेकिन अगर आज के बाद मेरे सामने प्यार ब्यार की बात की तो फिर हमारी दोस्ती भी खत्म हो जाऐगी समझे….

इतना बोलकर मैं उठ खडी हुई और श्रेया को देखते हुए बोली

अमृता- चलो श्रेया… अब मैं यहाँ एक पल भी नहीं रुकान चाहती… इस डफर ने मेरा पूरा मूढ खराब कर दिया है।

मेरी बात सुनकर श्रेया भी तुरंत उठकर खडी हो गई। हाँलाकि अभी अभी जो कुछ भी हुआ उसे देखकर वो बुरी तरह से शॉक्ड थी। पर फिलहाल उसके पास मेरे साथ वहाँ से जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था।

कहानी जारी है............
 
Update 084 -

उस दिन की घटना के बाद मैंने कबीर को इग्नोर करना शुरू कर दिया था। हाँलाकि जब सभी दोस्त साथ होते तो मैं कबीर से नॉमली बातें कर लिया करती थी। पर जब भी वो मुझसे अकेले में बाता करने की कोशिश करता तो मैं उसे पूरी तरह से इग्नोर कर देती थी। क्योंकि मैं उसे दोवारा खुद को प्रपोज करने का कोई मौका नहीं देना चाहती थी। मुझे लगा था कि मेरे उसे इग्नोर करने से कबीर मेरा पीछा छोड देगा। लेकिन कबीर पर शायद इसका उल्टा ही असर हो रहा था। वो मुझे पाने के लिए और भी ज्यादा डेस्पिरेट हो गया था। यहाँ तक कि उसने श्रेया और मेरे दूसरे कॉलेज फ्रेंड से भी अपनी सिफारिश लगवानी शुरू कर दी थी। ताकि मैं उसका लव प्रपोजल एक्सेप्ट कर लूँ।

कबीर की इन हरकतों से हमारे फ्रेंड ग्रुप में एक अजीब सा माहौल बन गया था। जिस कारण मुझे काफी चिढ हो रही थी। पर मैं किसी भी तरह से अपने गुस्से पर कंट्रोल किए हुए थी। लेकिन हद तो तब हो गई जब एक दिन हमारी क्लासेस खत्म होने के बाद मैं जैसे ही क्लास रूम से बाहर निकलने लगी ठीक तभी कबीर ने मेरा रास्ता रोक लिया। उस वक्त मेरी क्लास के ज्यादातर स्टूडेंट जा चुके थे और क्लास में बस मैं और मेरी फ्रेंड्स ही बचे हुए थे। कबीर को यूँ अपने सामने खडा देख मैंने उसे इग्नोर करके साईड से निकलने की कोशिश की, लेकिन तभी अचानक से कबीर ने पीछे से मेरा हाथ पकड लिया और एक झटके में अपनी तरफ खींचकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया। कबीर की इस हरकत पर मैं कसमसाते हुए गुस्से में उससे बोली

अमृता- कबीर… यह क्या बदतमीजी है… मैं कहती हूँ छोडो मुझे

पर कबीर ने तो जैसे मेरी बातों को सुना ही नहीं था। उसने मुझे दरवाजे के पास ही दीवार से सटा दिया और इससे पहले मैं कुछ समझ पाती उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर ऱखकर मुझे किस करना शुरू कर दिया था। कबीर की इस हरकत से मेरा माईंड पूरी तरह से ब्लैंक हो गया था और मैं किसी बेजान पुतले की तरह बिना हिले डुले अपनी जगह पर खडी रह गई थी। हाँलाकि मैंन अब तक कई लोगों के साथ सेक्स किया था और उन लोगों ने अनगिनत बार मुझे किस भी किया था। पर मैंने कभी सपने में भी इस बात की उम्मीद नहीं की थी कि मेरा सगा भाई ही मेरे साथ यह सब करेगा।

अचानक से मुझे अपने आप पर ही घिन आने लगी थी, ऐसा लग रहा था कि मेरा उस खण्डहर बाले हादशे में जिंदा बचना मेरे लिए कोई वरदान ना होकर एक अभिशाप है। जिस कारण आज भाई बहन का पवित्र रिश्ता भी चकनाचूर हो गया है। वहीं दूसरी तरफ कबीर का किस और भी ज्यादा पैसिनेट होता जा रहा था, मेरे कोई रिस्पोंस ना करने पर कबीर को लगा कि इस सब में मेरी पूरी मंजूरी है, इसलिए उनसे किस को और भी ज्यादा डीप करते हुए अपने एक हाथ से मेरी कमर थो थामा और दूसरे हाथ को मेरे बूब्स पर रखकर उसे सहलाने लगा।

कबीर की इस हरकत से मेरे पूरे बदन में एक अलग ही तरह का करेंट दौड गया था। पर मैं अब भी पूरी तरह से शॉक्ड होकर चुपचाप खडी हुई थी। वहीं दूसरी तरह मेरे सभी दोस्त जो अब तक क्लासरूम से बाहर नहीं गए थे, वो भी इस नजारे को देखकर बुरी तरह से हैरान थे। हाँलाकि कॉलेज में साथ साथ पढाई करने के दौरान लडके लडकियों के बीच अक्सर अफेयर होने के बाद ऐसे नजारे देखने के लिए मिल जाते हैं। ऊपर से कबीर हमारे फ्रेंड सर्किल में भी सामिल था। इसलिए मेरे दोस्तोंं को यही लगा कि हमारे बीच जरूर अफेयर शुरू हो गया है।

इसलिए कुछ देर शॉक्ड रहने के बाद वो लोग हमें इस हालत में देखकर हंसते हुए हमारी हूटिंग करने लगे। लेकिन मुझपर और कबीर पर उन लोगों की हूटिंग का कोई असर नहीं हो रहा था। कबीर की इस हरकत से एक पल के लिए तो मेरे मन में सुसाईड करने का ख्याल तक आ गया था। पर अगले ही पल मैंने अपने मन से यह ख्याल निकाल दिया, और अब मेरे मन में कबीर के लिए गुस्सा धीरे धीरे गुस्सा बडता ही जा रहा था। हाँलाकि मैं अपनी मार्सल आर्ट टैक्निक का यूज करके कबीर को अपने आप से आसानी से दूर कर सकती थी।

पर इसमें कबीर को गंंभीर चोट लगने का खतरा था, और मैं अपने ही भाई को चोट पहुँचाना नहीं चाहती थी। इसलिए मैंने अपने गुस्से को कंट्रोल करने के लिए अपनी पूरी ताकत से मुट्ठियों को कस लिया था। जिस कारण मेरे नाखून मेरी हथेली की स्किन को चीरते हुए अंदर धंस गए थे और उस जगह से खून रिसने लगा था। करीब 10 मिनट तक चले इस लॉग किस के बाद जैसे ही कबीर ने मेरे होंठों को छोडा, तो मैंने धीमी और बेजान आवाज में उससे कहा

अमृता- तुम्हारा हो गया हो तो अब मुझे छोडो कबीर

पर कबीर ने मेरी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और मेरी आंखों में देखते हुए प्यार से बोला

कबीर- आई लव यू अमृता

कबीर की बात सुनकर मेरा पूरा बदन गुस्से से जल उठा था, इसलिए मैं थोडा तेज आवाज में उसे डांटते हुए एक बार फिर बोली

अमृता- कबीर मुझे छोडो….

मेरी गुस्से भरी टोन को देखकर कबीर को लगा कि उसने मुझे सभी दोस्तों के सामने किस किया है। जिस कारण मैं शर्मिंदा होकर उसे अलग होने के लिए बोल रही हूँ। इसलिए वो हंसते हुए बोला

कबीर- ओह कम ऑन अमृता अब एडमिट भी कर लो कि तुम भी मुझे पसंद करती हो। तभी तो तुमने मुझे किस करने से रोका नहीं… बैसे भी यहाँ पर हमारे दोस्तों के अलावा और कोई भी नहीं है…. इसलिए तुम्हें शर्माने की जरूरत नहीं है।

कबीर की बात सुनकर मेरा गुस्सा अब पूरी तरह से आउट ऑफ कंट्रोल हो चुका था, इसलिए मैंने धक्का देकर उसे अपने से दूर किया और एक जोरदार थप्पड कबीर के गालों पर जड़ दिया, जिसकी आवाज पूरे क्लासरूम में गूंज गई थी….

“चचचटाटाटाटाटटाटाआआआआआआआआकककककक्……”

मेरे उस थप्पड से कबीर के साथ साथ मेरे सभी दोस्त भी बुरी तरह से हैरान रह गई थे। इससे पहले कोई कुछ रियेक्ट कर पाता, मैंने गुस्से में कबीर को डांटते हुए कहा

अमृता- जस्ट शट योर माऊथ मिस्टर कबीर…. मैं कुछ कह नहीं रही हूँ तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं तुम्हारी इन बदतमीजियों को बरदास्त करती रहूँगी…. मैंने तुमसे पहले भी कहा था कि मुझे इस प्यार ब्यार में कोई इंट्रेस्ट नहीं है और तुम केवल मेरे दोस्त हो…. पर आज तुमने अपनी दोस्ती की सारी सीमा लांघ दी है…. आज मुझे अपने उस फैसले पर रिग्रेट हो रहा है, जब मैंने तुम्हें अपना दोस्त बनाने का फैसला किया था। क्योंकि तुम जैसा इंशान दोस्ती के लायक ही नहीं है…. आज के बाद मुझे अपनी शक्ल भी मत दिखाना, बर्ना यह तुम्हारे लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होगा…..

इतना बोलकर मैं गुस्से में अकेले ही क्लासरूम से बाहर निकल गई। जबकी कबीर और मेरे बाकी दोस्त शॉक्ड होकर काफी देर तक वहीं खडे रहे और जब उन्हें इस बात का एहसास हुआ की मैं वहाँ से जा चुकी हूँ तो वो मेरा गुस्सा शांत करने के लिए मेरे पीछे पीछे भागे। मैं अभी कॉलेज कैंपस से बाहर ही निकली थी कि तभी श्रेया लगभग भागते हुए आई और पीछे से मेरा हाथ पकडकर मुझे रोकते हुए बोली

श्रेया- अमृता प्लीज सुनो तो सही…. इसमें कबीर की कोई गलती नहीं है…. यह सब हम लोगों का ही प्लान था। हम लोगों को ऐसा लगा था कि तुम भी दिल ही दिल में कबीर को पसंद करती हो पर यह एक्सेप्ट नहीं कर पा रही हो। इसलिए अगर कबीर तुम्हें सबके सामने किस करके प्रपोज करेगा तो हो सकता है कि तुम उसकी फीलिंग को समझो। बस इसीलिए कबीर ने वो सब किया था….

श्रेया की बात सुनकर मैंने गुस्से में उसे घूरते हुए कहा

अमृता- अच्छा तो यह सब तुम सब लोगों का प्लान था…. है ना…

श्रेया- हाँ….

अमृता- श्रेया क्या मैंने तुमसे यह नहीं कहा था कि मुझे कबीर में कोई इंट्रेस्ट नहीं है…

श्रेया- हाँ कहा था… पर तुम जिस तरह से प्यार भरी नजर से उसे देखती थी और जिस तरह से उसकी केयर भी करती थी, तो उसे देखकर हमें लगा कि तुम उसे सच में प्यार करने लगी हो, बस यह बात एडमिट नहीं कर पा रही हो…..

अब तक कबीर और मेरे बाकी दोस्त भी वहाँ आ चुके थेे, पर मैंने उनपर कोई ध्य़ान नहीं दिया, बल्कि श्रेया की बात सुनकर मन ही मन सोचने लगी

“ओबियसली वो मेरा छोटा भाई है तो मैं उसे प्यार से देखूंगी ही और उसकी केयर भी करूँगी, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं है कि मैं उसके साथ अफेयर करना चाहती हूँ। लगता है तुम लोगों का दिमाग पूरी तरह से खराब हो गया है और तुम लोग मुझे काफी हल्के में ले रहे हो, शायद तुम लोगों को लग रहा होगा कि मैं कोई आम सी छुई मुई लडकी हूँ, जो तुम लोगों की बदतमीजियों पर कोई रिऐक्ट नहीं करूँगी, इसलिए अब मुझे अपने तरीके से तुम सबके दिमाग को ठिकाने पर लाना ही होगा।”

यह सब सोचते ही मैंने श्रेया के साथ साथ अपने बाकी के दोस्तों को गुस्से से घूरते हुए सबाल किया

अमृता- तो तुम्हारे कहने का मतलब है कि मैं तुमसे और अपने बाकी दोस्तों से रूढ बिहेब करती हूँ और मैंने आज तक तुम लोगों की कभी केयर नहीं की…..

मेरी बात सुनकर श्रेया शर्मिंदा होते हुए बोली

श्रेया- नहीं नहीं वो बात नहीं है… तुम तो सभी लोगों से प्यार से पेस आती हो और सभी लोगों की केयर करती हो…..

अमृता- तो फिर तुम लोगों की केयर करने और कबीर की केयर करने में भला क्या फर्क है। क्या एक लडका और लडकी हमेशा अच्छे दोस्त बनकर नहीं रह सकते…. क्या यह जरूरी है कि एक लडकी किसी लडके की केयर करे तो उसके मन में लडके के लिए लव अट्रैक्शन हो.. तुम लोगों ने मेरी और कबीर की दोस्ती को बहन भाई के रिश्ते के रूप में क्यों नहीं देखा, क्या हमारी दोस्ती को अफेयर का नाम देना जरूरी था…. तुम लोगों को पता भी है कि तुमने क्या किया है… असल में तुम लोगों ने मेरे और कबीर के बीच अफेयर करवाने के चक्कर में हमारी दोस्ती को भी हमेशा हमेशा के लिए खत्म करवा दिया है।

मेरी बात सुनकर श्रेया शर्मिंदा होते हुए बोली

श्रेया- आई एम सॉरी अमृता…. हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं था

अमृता- जस्ट शटअप…. मुझे तुम लोगों की सॉरी में कोई इंट्रेस्ट नहीं है और ना ही मुझे इस बारे में कोई बात करनी है। वो तो शुक्र मनाओ कि मैं इस बारे में पुलिस कंप्लेन नहीं कर रही हूँ। बर्ना कबीर ने आजय जो मेरे साथ किया है ना, उसपर ईव टीजिंग और सैक्सुअल हैरासमेंट के जुर्म में कबीर को 3 साल तक की जेल हो सकती है और तुम लोगों को भी इस सब में उसका साथ देने जुर्म में 3 से 6 महिनों की जेल हो सकती है। मैं अगर चाहूँ तो एक ही झटके में अभी और इसी वक्त तुम सभी लोगों का कैरियर बर्बाद कर सकती हूँ। पर मैं तुम लोगों की तरह सेल्फिस और धोखेबाज नहीं हूँ। मैंने कभी तुम लोगों को अपना दोस्त माना था, इसलिए आज तो मैं तुम सबको जाने दे रही हूँ।

इतना बोलकर मैं गुस्से में वहाँ से चली गई, जबकि श्रेया के साथ साथ कबीर और मेरे बाकी दोस्त मेरी बात को सुनकर बुरी तरह से शॉक्ड हो गए थे। शायद उन्हें मेरी बात सुनकर इस बात का एहसास हो चुका था कि उन लोगों ने अनजाने में कितनी बडी गलती कर दी थी, और अगर बाकई में मैंने उन लोगों की पुलिस कम्प्लेन कर दी होती, तो सच में उन सभी लोगों का कैरियर बर्बाद हो सकता था। वहीं दूसरी तरफ मैं गुस्से में घर पहुँची और अपन रूम में जाकर अपने कपडे और अपना सामान पैक करने लगी।

अब चूँकि मैंने कबीर और श्रेया के साथ साथ अपने बाकी के दोस्तों को भी सबक सिखाने का फैसला कर ही लिया था, तो उसके लिए जरूरी था कि मैं कुछ दिनों के लिए उन सबसे दूरी बना लूँ, पर श्रेया के साथ एक ही घर में रहकर मैं यह सब नहीं कर सकती थी, बैसे भी वो घर श्रेया के पापा यानि हरीश अंकल ने श्रेया के लिए रेंट पर लिया था। एक तरह से मैं श्रेया के घर पर ही रह रही थी। इसलिए उसके घर में रहकर मैं उसे अपनी नाराजगी नहीं दिखा सकती थी। जब तक श्रेया और बाकी की लडकियाँ घऱ बापिस आईं, तब तक मैं अपना सारा सामान पैक करके वहाँ से जाने की पूरी तैयारी कर चुकी थी। जैसे ही श्रेया ने मुझे अपने सामान के साथ घर छोडकर जाते हुए देखा तो तुरंत मेरे पास आई और बोली

श्रेया- अमृता यह तुम क्या कर रही हो….

अमृता- आज जो कुछ भी हुआ है, उसके बाद मैं यहाँ तुम लोगों के साथ एक पल भी नहीं रहना चाहती। इसलिए मैं तुम्हारा यह घर छोडकर जा रही हूँ।

तभी पूजा मुझे समझाते हुए बोली

पूजा- पर क्यों अमृता…. हम लोगों ने तुमसे माफी तो माँग ली है…. और फिर यह इतनी बडी बात भी नहीं है…. कॉलेज लाईफ में तो यह सब होता रहता है….

पूजा की बात सुनकर मैं उसे गुस्से में घूरते हुए बोली

अमृता- तुम लोगों की इसी सोच के कारण ही आज कर लडकियों के साथ क्राईम लगातार बडता जा रहा है। तुम लोगों के कारण ही कबीर के मन में मेरे लिए सैक्सुअल डिजायर जागी है। क्या तुमने एक पल के लिए भी इस बारे में सोचा है कि आगे चलकर यह सब मेरे लिए कितना खतरनाक हो सकता है। तुम लोगों के उक्सावे में आगर आज कबीर ने मेरे साथ वो सब गलत हरकत की है, क्या पता कल को वो किसी और के बहकावे में आकर मेरे साथ रेप ही कर दे।

पूजा की बात सुनकर मैंने गुस्से में यह सब इसलिए कहा था क्योंकि जिस वक्त कबीर ने मुझे जबरदस्ती क्लासरूम में रोककर किस किया था, उस वक्त एक पल के लिए मेरी आंखों के सामने भोपाल के पास खण्डहर में मेरे साथ हुई घटना किसी बीडियो की तरह चलने लगी थी, जहाँ जफर और गनपत ने अपने साथियों के मिलकर मुझे टार्चर किया था और मेरे साथ रेप करने के बाद मुझे मरने के लिए छोड दिया था, उस घटना के याद आते ही मेरा दिमाग पूरी तरह से ब्लैंक हो गया था, जिस कारण मैं कबीर को कोई रिस्पोंस नहीं कर पाई थी और चाहकर भी कबीर को वो सब करने से रोक नहीं पाई थी।

कहानी जारी है...........
 
सॉरी दोस्तों न्यू इयर सेलिब्रेशन के लिए फैमली के साथ आऊट ऑफ सिटी गया हुआ था, इसलिए अपडेट पोस्ट नहीं कर पया.........
 
Update 085 -

मेरे घर छोडकर जाने से पहले मैंने अपने दोस्तों से जो कुछ भी कहा था। वो बस उनकी गलती का एहसास करवाने के लिए था। लेकिन मेरी बातों का पूजा पर अलग ही असर हुआ था, उसे लगा कि मैं कबीर के कैरेक्टर पर शक करने के साथ साथ अपने दोस्तों पर भी शक कर रही हूँ। इसलिए वो मेरी बातों को सुनकर गुस्से में झल्लाते हुए बोली

पूजा- तुम यह सब क्या बके जा रही हो अमृता… मैं कबीर को बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ, वो ऐसा बैसा लडका बिल्कुल भी नहीं है। हम सभी जानते हैं कि लडकियों की कितनी रिस्पेक्ट करता है।

पूजा की बात सुनकर मैं उसका मजाक उडाते हुए बोली

अमृता- जो लडका अपने दोस्तों के उक्सावे में आकर एक बार मुझे सैक्सुअली हैराश कर सकता है, आखिर वो दूसरी बार मेरे साथ रेप क्यों नहीं कर सकता। अगर कल को मेरे साथ कुछ भी गलत हो गया तो क्या उसकी सारी जिम्मेदारी तुम लेने के लिए तैयार हो….

मेरी बात सुनकर पूजा का चेहरा शर्म से झुक गया, तभी हमारे साथ रहने बाली एक दूसरी लडकी मधू ने कहा

मधू- हाँ हाँ मैं तुम्हारी बात मानती हूँ कि हमसे गलती हुई है और हमें इस बात का एहसास भी हो चुका है, तो क्या अब तुम हमें माफ नहीं कर सकती

अमृता- मैं तुम सभी लोगों को पहले ही माफ कर चुकी हूँ मधू, तभी तो मैंने इस बारे में पुलिस कम्प्लेन ना करने का फैसला किया है, इससे ज्यादा की उम्मीद मुझसे रखना बेकार है। क्योंकि मैं दिल की जितनी अच्छी हूँ, गुस्सा आने पर उतनी ही पत्थर दिल भी बन जाती हूँ और यह बात तुम्हें श्रेया अच्छी तरह से समझा देगी।

मधू- पर अमृता शाम होने को है, इस वक्त तुम आखिर जाओगी कहाँ…

अमृता- पता नहीं… हॉ्स्टल रूम तो मैं पहले ही छोड चुकी हूँ, इसलिए वहाँ तो मेरा बापिस जाना अब पॉसिबल नहीं है, बैसे भी आज कॉलेज में जो कुछ हुआ है, वो आज नहीं तो कल पूरे कॉलेज को पता चल ही जाऐगा, उसके बाद बैसे भी मेरा हॉस्टल में दूसरी लडकियों के साथ रहना मुश्किल हो जाऐगा। इसलिए आज रात मैं किसी होटल में स्टे करके शांति से यह सोचना चाहती हूँ कि अब मुझे अपनी आगे की पढाई यहाँ पर कन्टीन्यू करनी भी चाहिए या फिर ट्रापऑउट ले लेना चाहिए।

मेरी बात सुनकर श्रेया बुरी तरह से चौंकते हुए बोली

श्रेया- व्हॉट… क्या कहा तुमने….. तुम अपनी पढाई बीच में ही छोडने के बारे में सोच रही हो….

श्रेया की बात सुनकर मैं एक फीकी सी हंसी हंसते हुए बोली

अमृता- कबीर और तुम लोगों ने मेरे सामने कोई दूसरा रास्ता छोडा है क्या…..

इतना बोलकर मैं घर से बाहर निकल गई, जहाँ कबीर पहले से ही खडा हुआ था। शायद वो यहाँ पर मुझसे माफी मांगने आया था, लेकिन उसके चेहरे को देखकर मैं समक्ष गई थी कि घर के अंदर मेरे और मेरे दोस्तों के बीच हुई सारी बातें वो पहले ही सुन चुका है, हाँलाकि मुझे इस बात से कोई फर्क भी नहीं पडता था, शायद हमारी बातें सुनने के बाद अब कबीर में मुझसे बात करने की जरा सी भी हिम्मत नहीं बची थी, इसलिए मैं उसे पूरी तरह से इग्नोर करके सडक किनारे खडी हो गई। इससे पहले श्रेया और मेरे बाकी दोस्त मुझे रोकने के लिए घर से बाहर आते, मैं एक ऑटो में बैठकर वहां से चली गई।

कबीर, श्रेया और मेरे बाकी की फ्रेेंड मुझे वहाँ से जाते हुए देखने के अलावा कुछ भी नहीं कर सकते थे। हाँ यह बात सही थी कि कबीर ने मेरे साथ जो कुछ भी किया था, यह शायद उतनी बडी बात भी नहीं थी, जितना बडा इश्यू मैंने बना दिया था, इसके अलावा मुझे बडी बहन होने के नाते अपने छोटे भाई कबीर पर भी पूरा यकीन था कि वो किसी भी लडकी के साथ रेप जैसा कोई गलत काम नहीं करेगा। सच बत तो यह है कि अगर कबीर की जगह किसी दूसरे लडके ने मेरे साथ वो सब किया होता, तो शायद मुझे इस बात का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगता और हो सकता है कि मैं भी उस सब को इंजॉय करती।

और अगर कबीर ने मेरे साथ वो सब खुद अपनी मर्जी से ही किया होता, तो भी शायद मैं कुछ दिनों की नाराजगी के बाद उसे माफ कर देती, क्योंकि इस उम्र में हर्मोनल चेंजिस की बजह से कई बार लडके अपनी फीलिंग पर् कंट्रोल नहीं रख पाते हैं, लेकिन कबीर ने वो सब मेरे ही दोस्तों के साथ पूरी प्लानिंग के बाद किया था। जिस कारण मैं कुछ ज्यादा ही गुस्से में थी। ऊपर से श्रेया के वहाँ पर होने की बजह से पिछले कुछ दिनों से मैं पूरी तरह से केयरलैस भी हो गई थी, जो शायद मेरी ही गलती थी। अगर मैं अपने दोस्तों पर आँख बंद करके यकीन नहीं करती, तो शायद मेरे साथ वो सब होता ही नहीं।

पर जो हो गया सो हो गया, अब मैं उसे बदल तो नहीं सकती थी, लेकिन कबीर मेरा सगा भाई है…. इसलिए उसके किस करने और मुझे सैक्सुअली अब्यूज करने बाली बात मैं बिल्कुल भी बरदास्त नहीं कर पा रही थी। इसके अलावा मैं यह सच भी किसी को नहीं बता सकती हूँ कि मैं और कबीर सगे भाई बहन हैं, यहाँ तक की कबीर को भी नहीं। इसलिए मैं बस घर छोडकर और अपने दोस्तों को उनकी गलती का एहसास करवाकर ही अपना गुस्सा निकाल सकती थी, जो कि मैंने अभी अभी किया था। हाँलाकि मुझे इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि मेरे इस रिऐक्शन का कबीर और मेरे दोस्तों पर क्या असर होगा, क्योंकि मैं यहाँ पर दोस्त बनाने तो आई नहीं थी।

साथ ही साथ कबीर से मैं अपना रिश्ता काफी पहले ही खत्म करके अपनी नई जिंदगी की शुरूआत कर चुकी थी। इसलिए आगे चलकर अगर कबीर और बाकी दोस्त मेरे कान्टेक्ट में नहीं भी रहते तो भी मुझे कोई फर्क नहीं पडता। बल्कि यह तो मेरी आगे की लाईफ के लिए अच्छा ही होता। कम से कम कबीर से दूर रहकर मुझे अपनी पुरानी जिंदगी को याद नहीं रखना पडता और ना ही अपना राज खुलने का डर रहता। रही बात श्रेया की तो मैं जानती थी कि आज नहीं तो कल हमारे बीच सब कुछ फिर से नॉर्मल हो ही जाऐगा। क्योंकि उसके नेचर को मैं बहुत अच्छी तरह से जानती थी।

श्रेया के घर से निकलने के बाद मैं सीधे एक होटल में जा पहुँची। जहाँ अपने लिए रूम बुक करने के बाद मैंने नहाकर कपडे चेंज और रेस्ट करने लगी। आज कॉलेज में जो कुछ भी हुआ था, उसके बाद मेरा मन कुछ भी खाने पीने का नहीं था। लेकिन जब भी मैं सोने के लिए अपनी आंखें बंद करती तो मेरी आँखों के सामने कॉलेज का वहीं सीन चलने लगता, जब कबीर ने मुझे क्लास रूम में एक दीवार से सटाकर किस किया था। वो सब याद आते ही मैं बेचैन होन लगती और मेरी आंख खुल जाती, जब से कबीर ने मुझे किस करने के साथ साथ मेरे बूब्स को सहलाया था, तब से मुझे अपने होंठों पर और अपने बूब्स पर एक अजीब सी सनसनाहट महसूस हो रही थी।

मुझे कबीर की गर्म गर्म सांसें अपने चेहरे पर अब भी महसूस हो रही थी, मैंने कई बार अपनी आंख बंद करके सोने की कोशिश की, लेकिन हर बर मेरे साथ वहीं सब हुआ, ऐसा लग रहा था जैसे कबीर अब भी मेरे होंठों को चूम रहा है और अपने हाथों से मेरे बूब्स को सहला रहा है। मेरी अब तक की जिंदगी में कई मर्दों ने मेरे बदन के साथ खेला था, पता नहीं कितनी बार लोगों ने मेरे होंठों को चूमा होगा और कितनी बार मेरे बूब्स को सहलाया होगा, उन सब मर्दों में से कईयों का चेहरा तो मुझे अब याद भी नहीं है। लेकिन कबीर ने मेरे साथ जो कुछ भी किया था, वो मैं लाख कोशिशों के बाद भी भूल नहीं पा रही थी।

मुझे अपनी मौत का नाटक किए हुए 1 साल से भी ज्यादा का समय बीत गया है। इस दौरान मैंने किसी भी मर्द के सैथ सैक्सुअल रिलेशन नहीं बनाऐ थे। क्योंकि अपनी कॉपर-टी निकलवाने के बाद मेरी हाईपर सेक्सुअलिटी डिसआर्डर की प्राब्लम पूरी तरह से दूर हो गई थी और अब मैं पूरी तरह से एक नॉर्मल लडकी बन चुकी थी। इसके अलावा मैं हाइमेनोप्लास्टी सर्जरी करवाकर एक बार फिर से वर्जिन लडकी बन चुकी थी। लेकिन यह सब मैंने बस अपनी नई जिंदगी शुरू करने के बाद, अपने नए लाईफ पार्टनर को खुश करने के लिए किया था। ताकि जब भी वो मेरे साथ पहली बार सैक्स करे तो उसे इस बात पर पूरा यकीन हो जाऐ के मैं अब तक वर्जिन हूँ।

लेकिन मुझे क्या पता था कि यह सब करवाने के बाद मेरी सोच भी किसी वर्जिन लडकी की तरह ही हो जाऐगी। मैंने कई बार अपने दिमाग से कॉलेज बाली घटना को निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार मैं विस्तर से उठकर बैठ गई। मैंने मोबाईल में समय देखा तो रात के 10 बज चुके थे और अब मुझे थोडी बहुत भूख का एहसास भी हो रहा था। इसलिए मैंने मन ही मन सोचा कि

“क्यों ना किसी पव बगैरह में जाकर ड्रिंक की जाऐ और हल्का फुल्का खाना खाने के बाद सोने की कोशिश की जाऐ। हो सकता है कि ड्रिंक करने के बाद मुझे नींद आ जाऐ।”

यह ख्याल मन में आते ही मैं तुरंत बिस्तर से उठकर खडी हो गई और जल्दी से कपडे चेंज करने और हल्का फुल्का मेकअप करने के बाद होटल से बाहर निकल गई। मेरे होटल के पास ही बॉकिंग डिस्टेंस पर एक पव था, जहाँ अभी अच्छी खासी चहल पहल दिखाई दे रही थी। इसलिए मैं भी उसी पव के अंदर चली गई और अपने लिए कुछ स्नैक्स और बियर लेने के बाद एक कार्नर सीट पर जाकर बैठ गई। वहाँ बैठकर मैं एक के बाद एक 3 बीयर पी चुकी थी, लेकिन अब भी मुझे नशे का बिल्कुल भी एहसास नहीं हो रहा था। इस दौरान मैं मन ही मन फैसला कर चुकी थी कि कल ही मैं कानपुर छोडकर चली जाऊंगी।

बैसे भी पिछले दो महिने से मुझे फारूख उस्मान और उसके किसी भी साथी के बारे में कोई छोटी मोटी जानकारी भी नहीं मिली थी और ना ही कॉलेज में किसी भी प्रकार की कोई टैरेरिस्ट एक्टिविटी के बारे में कोई लिंक मिला था। जिसका बस एक ही मतलब था कि या तो वो आतंकवादी किसी और जगह जा चुके हैं या फिर हमारे इंटेलीजेंस को गलत जानकारी मिली है। अपनी बियर और स्नैक्स खत्म होने के बाद जब मैं अपने लिए फिर से बियर और स्नैक्स लेने गई, तो मुझे एक गुंडे की तरह दिखने बाले आदमी के साथ हमारे कॉलेज के कुछ लडके उस पव के अंदर आते हुए दिखाई दिए।

हाँलाकि पव के अंदर कॉलेज के लडके लडकियों का आना कॉफी नॉर्मल बात है। लेकिन जो लडके अभी अभी उस पव के अंदर आऐ थे, वो सभी कॉलेज के बॉयज हॉस्टल में रहते हैं और इतनी रात को बॉयज हॉस्टल से बाहर जाने की पर्मीशन नहीं है। इसके अलावा उनके साथ जो गुंडे की तरह दिखने बाला आदमी था, उसका चेहरा भी मुझे काफी जाना पहचाना लग रहा था। लेकिन कई बार याद करने के बाद भी मैं उसे पहचान नहीं पा रही थी। जिस कारण मुझे कुछ गडबड का एहसास होने लगा। किस्मत से वो लडके मेरे पास बाली चेयर पर जाकर ही बैठे थे। इसलिए मैंने अपनी बियर और स्नैक्स लिए और अपने बालों से चेहरे को ढंकते हुए बापिस अपनी चेयर पर जाकर बैठ गई।

वो सभी लडके आपस में बातें करने में इस कदर बिजी थे कि उन लोगों का अपने आस पास बैठे लोगों पर कोई ध्यान ही नहीं था। जिसका फायदा उठाकर मैंने चुपके से उन सभी लोगों की फोटो अपने मोबाईल में खींच ली और फिर मैं उन लोगों के एकदम पास उनकी तरफ अपनी पीठ करके बैठ गई। ताकि मैं उनके बीच चल रही बातों को सुन सकूँ। वो लोग आपस में सेंसलैस बातें कर रहे थे। पर जब मैंने उनकी बातों के पैटर्न पर ध्यान दिया तो मुझे समझ आया कि वो लोग कोडवर्ड में बार्तें कर रहे हैं। इसलिए मै ंध्यान से उनकी बातें सुनते हुए उसका मतलब निकालने की कोशिश करने लगी।

हाँलाकि मुझे ज्यादा कुछ तो समझ नहीं आया। पर वो लोग किसी काजी सहाब से मिलने के बारे में बात कर रहे था, साथ ही साथ अपने कुछ और साथियों को भी साथ लाने के बारे में भी बोल रहे थे। अब चूँकि मुझे उनकी अगली मीटिंग की लोकेशन के साथ साथ तारीख और समय का पता चल चुका था। तो मैंने मन ही मन उस लोकेशन पर जाकर उनके बारे में थोडी और छानबीन करने कै फैसला कर लिया था। अपनी छोटी सी मीटिंग करने के बाद वो लोग उस पव से बाहर निकल गए तो मैं भी अपना पेमेंट करके उनका पीछा करने लगी।

जब में उस पव से बाहर आई तो वो गुंडे टाईप का आदमी वहाँ से पहले ही जा चुका था। लेकिन मेरे कॉलेज में पढने बाले लडके अभी भी उस पव के बाहर खडे होकर ऑटो का इंतजार कर रहे थे। इसलिए मैं भी उन लडकों से थोडी दूर जाकर खडी हो गई। असल में मेरा इरादा उन लडकों का पीछा करके यह पता करना था कि वो लोग आखिर इतनी रात को बॉयज हॉस्टल से बाहर कैसे आऐ थे। करीब 5 मिनट के बाद मैं एक ऑटो में बैठकर उन लडकों का पीछा कर रही थी। वो लडके बॉयज हॉस्टल से थोडा पहले उतर गए थे। जिसके बाद उनका ऑटो बापिस चला गया। जब मैं वहाँ पहुँची तो मैंने उन लडको को पैदल ही बॉयज हॉस्टल के पीछे की तरफ जाते हुए देखा।

इसलिए मैंने अपने ऑटो ड्राईबर को बॉयस हॉस्टल से थोडी दूर मेरा इंतजार करने को कहा और उन लडकों का पीछा करने लगी। जब तक मैं बॉयज हॉस्टल के पीछे पहुँची, तब तक वो लडके गायब हो चुके थे। इसलिए मैं हॉस्टल के अंदर जाने का सीक्रेट रास्ता तलाश करने लगी। थोडी बहुत छानबीन करने के बाद मुझे बॉयज हॉस्टल के पीछे बाऊंड्री बॉल का एक टूटा हुआ हिस्सा दिखाई दे गया। जहाँ से सामान्य कद काठी का कोई भी लडका आसानी से अंदर बाहर आ जा सकता है। बाऊंड्री बॉल के उस टूटे हुए हिस्से को देखकर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई थी। अब मैं उन लडकों के हॉस्टल से अंदर बाहर आने जाने के रास्ते के बारे में जान चुकी थी। इसलिए मैं वहाँ से चुपचाप वापिस आ गई और ऑटो में बैठकर अपने होटल जा पहुँची।

कहानी जारी है........
 
Update 086 -

होटल रूम में पहुँचकर मैंने अपने कपडे चैंज किए और अपने मोबाईल में खींचे गए फोटो को ध्यान से देखने लगी। कुछ देर तक उन फोटो को ध्यान से देखने के बाद आखिरकार मैं उस गुंडे टाईप के आदमी को पहचान ही गई। उसका नाम इब्राहिम खान था, इब्राहिम उन विदेशी लोगों में सामिल था जो हमारे देश में मेडिकल बीजा लेकर आऐ थे और अचानक से कहीं गायब हो गए थे। उस आदमी को पहचानते ही मुझे यह कंफर्म हो गया कि उन आतंकवादियों का कानपुर और मेरे कॉलेज से जरूर कोई लिंक है। इसलिए फिलहार मैंने कानपुर छोडने का अपना प्लान कैंसिल कर दिया। अब चूंकि मुझे लीड मिल चुकी थी, इसलिए मैं यहीँ कानपुर में रहकर आतंकवादियों के पूरे नेटवर्क के बारे में पता करने बाली थी।

ताकि मैं उस नेटवर्क को उखाड कर फेंक सकूँ। कुछ देर तक इस बारे में सोचने के बाद आखिरकार मेरे दिमाग से कॉलेज बाली घटना निकल ही गई, ऊपर से मैंने अच्छी खासी ड्रिंक भी की हुई थी। इसलिए जल्द ही मुझे नींद भी आ गई। अगले दिन मैंने एक प्रापर्टी डीलर से मिलकर मेरे कॉलेज से थोडी दूर एक सुनसान इलाके में अपने लिए एक घर किराऐ पर ले लिया, जिसे मैं अपना सेफ हाऊस बनाने बाली थी। ताकि मैं बिना किसी की नजर में आऐ अपना काम आसानी से कर सकूँ। हाँलाकि मेरा यह घर श्रेया के मकान से अच्छी खासी दूरी पर था। जिस कारण श्रेया और मेरे दूसरे दोस्त उस घर की लोकेशन आसानी से पता नहीं कर सकते थे।

उस घऱ में पहले से ही जरूरत का हर सामान मौजूद था, इसलिए मुझे वहाँ रहने के लिए अलग से कुछ भी खरीदने की जरूरत नहीं थी। जिस कारण मैं उसी दिन उस घऱ में सिफ्ट हो गई। अपना सारा सामान सैट करने के बाद मैं एक कैब बुक करके मार्केट जा पहुँची और वहाँ से मैंने अपने लिए एक सेकेण्ड हैण्ड कार खऱीद ली। जो किसी और आदमी के नाम पर थी। असल में मेरा वह सेफ हाऊस सुनसान इलाके में होने के साथ साथ मेरे कॉलेज और मार्केट से भी अच्छी खासी दूरी था, जिस कारण मुझे कहीं भी आने जाने में प्राब्लम होने बाली थी, ऊपर से मुझे अब आतंवादियों और उनके साथियों पर नजर भी रखनी थी। जो मैं ऑटो या कैब से तो बिल्कुल भी नहीं कर सकती थी।

बस इसलिए मैंने अपने लिए वो सेकेण्ड हैण्ड कार खऱीदी थी। ताकि मैं आसानी से कहीं भी आ जा सकूँ। उस कार का एक फायदा यह भी था कि वो किसी दूसरे आदमी के नाम पर थी। जिस कारण अगर मेरी कार उन आतंकवादियों की नजरों में आती भी है। तो भी वो उस कार से मेरी असली पहचान के बारे में कुछ भी पता नहीं कर पाऐंगे। अपने लिए कार खरीदने के बाद मैंने मार्केट से खाने पीने के सामान अलावा कुछ दूसरे जरूरी सामान भी खरीद लिया। जिनकी जरूरत मुझे अपने मिशन में पडने बाली थी, यह काम काम खत्म करते करते शाम हो गई थी, इसलिए सारा जरूरी सामान खरीदने के बाद मैं अपने सेफ हाऊस बापिस आ गई और कपडे चेंज करके आगे की प्लानिंग करने लगी।

कुछ देर तक अपने प्लान के बारे में सोचने के बाद जब मैंने अपना मोबाईल देखा तो मैं हैरान रह गई। उसमें करीब 100 मिस्ड कॉल और इतने ही मैसेज पडे हुए थे। वो सारे मिस्ड कॉल और मैसेज मेरे दोस्तों के थे। कल शाम को जब मैं श्रेया का घर छोडकर आई थी, तो मैंने अपना मोबाईल साईलेंट कर दिया था। जिस कारण मुझे इन मिस्ड कॉल और मैसेज के बारे में पता ही नहीं चला। शायद मेरे यूँ अचानक घर छोडकर आने के बाद उन लोगों को अपनी गलती का एहसास हो चुका था। इसलिए शायद मुझसे माफी माँगने के लिए उन लोगों ने मुझे कॉल किए थे और शायद उन्हें मेरी सेफ्टी की चिंता भी रही होगी।

जो भी हो…. लेकिन यह अच्छा ही हुआ कि मैंने अपना फोन साईलेंट कर दिया था। वर्ना इतने सारे कॉल रिसीव करते करते मैं परेशान हो जाती। उनमें से कुछ मिस्ड कॉल और मैसेज कबीर के भी थे। हाँलाकि फिलहाल में उससे काफी ज्यादा नाराज थी। पर फिर भी मैंने उसके मैसेज खोलकर पडने शुरू कर दिए। उसने अपने हर मैसेज में मुझसे माफी माँगी थी और अगली बार ऐसी गलती दोबारा ना करने की बात भी कही थी। इसके अलावा उसने मुझसे कॉलेज से ड्रापआऊट ना करने की रिक्वेस्ट भी की थी। कबीर के सारे मैसेज पढने के बाद मैं श्रेया और दूसरे दोस्तों के मैसेज भी चैक करने लगी।

उन सभी मैसेज में भी वही सब कुछ था जो कबीर के मैसेज में था। सारे मैसेज चैक करने के बाद मैंने अपना मोबाईल एक साईड रख दिया और खाना खाकर सो गई। अगले दिन भी मैं कॉलेज नहीं गई और सारा दिन अपने सेफ हाऊस में ही रेस्ट करती रही। असल में आज रात को मेरे कॉलेज के स्टूडेंंट इब्राहिम खान और काजी से मिलने बाले थे। इसलिए मैं चाहती थी कि दिन में अच्छी तरह से रेस्ट कर लूँ, ताकि रात को मैं पूरी तरह से रीफ्रेश और अलर्ट रह सकूँ। रात करीब 9 बजे मैं बॉयज हॉस्टल के पास पूरी तैयारी के साथ अपनी कार में बैठकर इंतजार कर रही थी।

असल में उन लोगों कि मीटिंग शहर से काफी दूर जंगल के बीचों बीच एक सुनसान इलाके में होने बाली थी। वो ऐरिया अच्छा खासा बडा था, जिस कारण मीटिंग की सही लोकेशन पता करना बहुत मुश्किल था। इसलिए मैंने बॉयज हॉस्टल के बाहर से ही अपने कॉलेज स्टूडेंट का पीछा करने का फैसला किया था। ताकि मैं उन लोगों की मीटिंग लोकेशन के बारे में पता कर सकूँ। हाँलाकि मुझे ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पडा। करीब 15 मिनट बाद ही एक एक करके करीब 20 कॉलेज स्टूडेंट बॉयज हॉस्टल के पीछे से मैन रोड पर आऐ और ऑटो में बैठकर मीटिंग बाली लोकेशन की तरफ जाने लगे।

उन लोगों के वहाँ से जाने के बाद मैंने उन लोगों से थोडी दूरी बनाते हुए उनका पीछा शुरू कर दिया। करीब आधे घंटे तक उनका पीछा करने के बाद मैंने देखा कि वो सभी ऑटो मैन हाईवे से नीचे उतरकर कच्चे रास्ते से जंगल की तरफ जा रही हैँ। तो मैंने भी अपनी कार उस कच्चे रास्ते पर उतार दी। उस कच्चे रास्ते पर करीब 2 किलोमीटर अंदर जाने के बाद वो सभी लडके ऑटो से नीचे उतरकर पैदल की जंगल की तरफ आगे बड गए। तो मैंने भी अपनी कार झाडियों के पीछे छिपा दी और बिना किसी आवाज के अपने आपको झाडियों के पीछे छिपाते हुए चुपचाप उनका पीछा करने लगी।

मैंने इस वक्त ब्लैक कलर का जींस और कैमिसोल पहना हुआ था और ऊपर से ब्लैक जैकेट भी डाली हुई थी, साथ मैंने ब्लैक कलर का मास्क भी लगाया हुआ था, कुल मिलाकर मैं सिर से पाँव तक ब्लैक कलर के कपडों से ढंकी हुई था। जिस कारण उस घने जंगल और रात के अंधेरे में मुझे देख पाना लगभग नामुमकिन था। करीब 1 किलोमीटर तक पैदल चलने के बाद वो लोग जंगल के बीचों बीच एक खुले मैदान में जा पहुँचे। जहाँ पहले से ही करीब 30 लडके मौजूद थे। मैंने ध्यान से उन लडकों के चेहरे देखे, पर उनमें से कोई भी मुझे जाना पहचान नहीं लगा। जिसका एक ही मतलब था कि शायद वो लडके किसी दूसरे कॉलेज के स्टूडेंट थे।

अपने सामने करीब 50 कॉलेज स्टूडेंट को देखकर मैं समझ गई कि वो सभी लडके स्लीपर सेल्स हैं। जो आतंकवादियों की कठपुतलियाँ बने हुए हैं। अगर उन लोगों को अभी आतंकवादियों के चुंगुल नहीं छुडाया गया तो वो सभी लडके हमारे देश के बहुत खतरनाक हो सकते थे। चूँकि चांदनी रात थी, जिस कारण उन सभी लडकों के चेहरे मुझे साफ साफ दिखाई दे रही थे। इसलिए मैंने अपनी जैकेट में से एक नाईटविजन कैमरा निकाला और उसे जूम मोड में सेट करके वहाँ मौजूद सभी लडकों के फोटो निकालने लगी। ताकि मैं बाद में उन सभी लडकों को आईडेंटीफाई कर सकूँ। मेरा वह कैमरा नाईटविजन के साथ साथ हैईडेफिनेशन बाला भी था, जिसमें सभी लडकों की एकदम क्लीयर इमेज आई थी।

इसके बाद मैं उन लडकों के बीच चल रही बातों को सुनने पर अपना ध्यान देने लगी, ताकि मुझे उन लडकों के बारे में कुछ और जानकारी मिल सके। करीब आधे घंटे बाद उस सुनसान इलाके में एक ब्लैक कलर की एस.यू.वी. आई। जो उस खुले मैदान के एकदम अंदर तक आई थी। जिसे देखकर मैं समझ गई कि जरूर उस एस.यू.वी. के अंदर इब्राहिम खान और काजी होगा। क्योंकि वो लोग पैदल ही उस जगह तक आने का रिस्क नहीं ले सकते थे। मेरा अंदाजा एकदम सही निकला जैसे की एस.यू.वी. बंद हुई तो ड्राईबिंग सीट से इब्राहिम बाहर निकला, जिसे मैं तुरंत पहचान गई थी।

इब्राहिम ने बाहर निकलते ही एस.यू.वी. की पैसेंजर सीट के दोनों तरफ के दरवाजे खुले, और उनमें से दो आदमी बाहर आऐ। जिन्होंने अपने हाथ में ऑटोमैटिक रायफल थाम रखी थी। मैंने ध्यान से उन लगों का चेहरा देखा तो मुझे याद आया कि वो दोनों आदमी भी उन विदेशी आतंकवादियों की लिस्ट में सामिल हैं। जिनकी फाईल राजीव सर ने मुझे दी थी। उन दोनों आतंकवादियों के नीचे उतरने के बाद उस एस.यू.वी. में से सफेद कुर्ता पायजामा पहने एक आदमी बाहर आया। जिसकी अच्छी खासी लम्बी ढाडी थी। उस आदमी का चेहरा देखते ही मैं हैरान रह गई।

क्योंकि वो कोई और नहीं बल्कि फारूख उस्मान था। मैंन अंदाजा लगाया कि शायद फारूख उस्मान को ही वो लोग काजी सहाब के नाम से बुलाते होंगे। अब चूँकि मेरे सामने फारूख उस्मान और उसके साथी मौजूद थे और उनके बनाऐ स्लीपर सेल्स भी वहाँ मौजूद थे, तो एक पल के लिए मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना मैं यहीं पर उन सभी लोगों को नर्क पहुँचा दूँ। पर अगले ही पल मैंने अपने दिमाग से यह ख्याल निकाल दिया। क्योंकि मैं ऐसी किसी सिचुऐशन की तैयारी करके नहीं आई थी, इसके अलावा फारूख उस्मान और उसके साथियों को मारने के दौरान कुछ कॉलेज स्टूडेंट की जान भी जा सकती थी, जो मैं फिलहाल नहीं चाहती थी।

इसके अलावा मुझे उनके असली प्लान के बारे में भी जानना था। इसलिए मैंने इस वक्त उन लोगों को मारने का इरादा अपने दिमाग से निकाल दिया।ॉ और चुप चाप उन सभी लोगों की फोटो खींचने लगी। उन लोगों के फोटो लेने के बाद मैंने अपने कैमरे में वहां चल रही पूरी घटना की वीडियो रिकार्डिंग करनी शुरू कर दी। ताकि मैं फारूख उस्मान और उसके साथियों के यहाँ कानपुर में होने के सबूत इकट्ठे कर सकूँ। फारूख उस्मान ने वहां आते ही सभी लडकों को हमारे देश के खिलाफ भडकाना शुरू कर दिया था। जिसे सुनकर गुस्से से मेरा खून खौल रहा था।

एक अच्छा खासा नफरत भरा भाषण देने के बाद फारूख ने उन कॉलेज स्टूडेंट की भीड में से रैंडमली 5 लडकों को सिलेक्ट करके उन्हें मिशन पर जाने के लिए तैयार रहने के लिए कहा। फारूख की बात सुनकर वो पांचों लडके काफी खुश दिखाई दे रहे थे। लेकिन फारूख ने उन लोगों को मिशन के बारे में कुछ भी नहीं बताया और वहाँ से बापिस जाने की तैयारी करने लगा। यह सब देखकर मैं तुरंत झाडियों के पीछे छिपते हुए अपनी कार की तरफ भागी, ताकि मैं फारूख उस्मान के वहां से जाने से पहले ही अपनी कार तक पहुँच सकूँ और उसका पीछा कर सकूँ। मेरी स्पेशल पावर के कारण मेरे दौडने की स्पीड काफी ज्यादा बड गई थी। इसलिए मैं फारूख के वहाँ से जाने से पहले ही अपनी कार तक पहुंच गई थी।

जैसे ही वो एस.यू.वी. वहाँ से निकली तो मैं भी अपनी कार से उसका पीछा करने लगी। वो एस.यू.वी. बापिस कानपुर सिटी की तरफ जा रही थी। मैंने उस एस.यू.वी. से अच्छी खासी दूरी बनाकर रखी हुई थी, ताकि उन लोगों को कोई शक ना हो। वो एस.यू.वी. कानपुर सिटी की एक छोटी सी मस्जिद के बाहर जाकर रुक गई। इसलिए मैंने भी अपनी कार उस मस्जिद से थोडी दूरी पर खडी कर दी और उस एस.यू.वी. पर नजर रखने लगी। तभी फारूख और उसके साथी उस एस.यू.वी. से बाहर निकलकर मस्जिद के अंदर चले गए। उनके अंदर जाने के करीब 5 मिनट बाद एक दूसरा आदमी बाहर आया और मस्जिद को बाहर से लॉक करने के बाद उस एस.यू.वी. को अपने साथ लेकर चला गया।

यह सब देखकर मुझे पूरा यकीन हो गया था कि फारूख और उसके साथी इसी मस्जिद के अंदर छिपे हुए हैं। मैंने एक बार अपने मोबाईल पर समय देखा, जो रात के 12 बजने का इशारा कर रहा था। इसलिए मैंने एक पल से भी कम समय में उस मस्जिद के अंदर जाकर फारूख उस्मान को पकडने का फैसला कर लिया। असल में फारूख और उसके साथियों को मिलाकर कुल 4 आदमी उस मस्जिद के अंदर थे। जिन्हें मैं आसानी से संभाल सकती थी। बस एक ही प्राब्लम थी, अगर फारूख के कुछ और साथी भी मस्जिद के अंदर हुए तो मुझे थोडी प्राब्लम हो सकती थी। पर मैं यह रिस्क लेने के लिए पूरी तरह से तैयार थी।

कहानी जारी है..........
 
Update 087 -

जैसे ही वो एस.यू.वी. वहां से गई तो मैं अपनी कार से बाहर आई और अंधेरे का फायदा उठाते हुए उस मस्जिद की बाऊंड्री बॉल पर चढकर मस्जिद के अंदर दाखिल हो गई। वो मस्जिद अंदर से पूरी तरह से सुनसान थी। मैं बिना किसी आवाज के अपने आपको छिपाते हुए उस मस्जिद में बने हॉल के अंदर जा पहुंची, जो पूरी तरह से खाली था। हाँलाकि वहाँ अच्छा खासा अंधेरा था, लेकिन अपनी स्पेशल पावर के कारण मैं अंधेरे में भी साफ साफ देख सकती थी। उस खाली हॉल को देखकर मैं बुरी तरह से हैरान रह गई। क्योंकि उस मस्जिद ऐरिया में उस हॉल के अलावा कोई दूसरा कमरा नहीं था।

मैंने अपनी आँखों से फारुख और उसके साथियों को मस्जिद के अंदर जाते देखा था। लेकिन अब उनमें से कोई भी वहां मौजूद नहीं था। कुछ देर तक इस बारे में सोचने के बाद मैं उस पूरी जगह की अच्छी तरह से तलासी लेने लगी। पर मुझे वहाँ पर किसी भी इंशान के होने का कोई सबूत नहीं मिला। लेकिन जब मैं मस्जिद के पीछे की तरफ गई तो मुझे पूरा माजरा समझ में आ गया। असल में मस्जिद के पीछे की तरफ भी एक रास्ता था। फारूख और उसके साथी उस दूसरे रास्ते से किसी और जगह पहले ही जा चुके थे। इसका मतलब था कि या तो उन्हें पहले ही पता चल गया था कि मैं उनका पीछा कर रही हूँ।

या फिर वो लोग हमेशा से ही इसी तरह कहीं पर आते जाते रहते हैं। ताकि अगर कोई उनका पीछा करे, तो वो आसानी से बच सकें और उनके रहने की लोकेशन भी किसी को पता ना चल सके। कारण जो भी हो पर फारूख और उसके साथी फिलहाल मेरे हाथों से दूर जा चुके थे। इसलिए मैं निराश होकर मस्जिद से बाहर आ गई और अपनी कार में बैठकर अपने सेफ हाऊस बापिस लौट गई। फारूख को पकडने के लिए मुझे उसका दोबारा मेरे कॉलेज स्टूडेंट से मिलने का इंतजार करना था और उसके लिए मुझे दोबारा कॉलेज जाना शुरू करना था, ताकि मैं अपने कॉलेज के लडकों पर नजर रख सकूँ।

लेकिन उससे पहले मुझे उन सभी कॉलेज स्टूडेंट की डिटेल इकट्ठी करनी थी, जो जंगल में फारूख उस्मान से मिलने गए थे। हाँलाकि जो स्टूडेंट मेरे कॉलेज के थे, उनकी डिटेल तो मैं आसानी से कॉलेज के कम्प्यूटर लैव में बैठकर अपने कॉलेज का मैन सर्वर हैक करने के बाद निकाल सकती थी, लेकिन जो स्टूडेंट दूसरे कॉलेज के थे, उनके लिए मुझे अच्छी खासी मेहनत करनी थी। इसलिए मैंने तय किया कि दोबारा कॉलेज शुरू करने से पहले मैं दूसरे कॉलेज के स्टूडेंट की पूरी डिटले इकट्ठा करूँगी, उसके बाद ही मैं अपने कॉलेज बापिस जाऊंगी। अगले दिन सुबह सुबह ही मैंने रात में जंगल में खींचे सभी फोटो के प्रिंट निकाले और फिर अपने बैडरूम के बगल बाले कमरे में जा पहुँची।

वो करीब 15X15 फीट का एक छोटा सा कमरा था, जिसमें पहले से ही ढेर सारा सामान रखा हुआ था, जो मैंने कल ही खरीदा था। असल में मैने उस कमरे को अपने ऑफिस के रूप में यूज करने का फैसला किया था। कमरे के अंदर जाने के बाद मैंने सारे फोटो टेबिल पर संभालकर रख दिए और फिर सामान के ढेर में से एक ब़डा सा मैप निकाला, जो असल में कानपुर सिटी और उसके आस पास के ऐरिया का मैप था। सबसे पहले मैंने उस मैप को डबलसाईड टैप की हेल्प से एक खाली दिवाल पर चिपका दिया। उस मैप ने लगभग पूरी दीवार कवर कर ली थी।

उस मैप को दीवार पर लगाने के बाद मैंने बाकी की तीनों दीवार पर एक सफेद रंग की खाली प्लास्टिक सीट चिपका दी। जिनका यूज अब मैं बाईट बोर्ड के रूप में करने बाली थी प्लास्टिक सीट से दीवार को कबर करने के बाद मैंने एक दीवार पर कॉलेज स्टूडेंट के फोटो चिपका दिए और दूसरी दीवार पर आतंकवादियों के फोटो। इसके बाद मैंने रेड मार्कर से मैप पर अपने कॉलेज, पव, जंगल में मीटिंग वाली लोकेशन और मस्जिद को मार्क कर दिया। यह सारा काम खत्म करने के बाद मैं उस दीवार के पास गई, जिसपर मैंने कॉलेज स्टूडेंट की फोटो चिपकाई थी।

असल में उनमें से कुछ लडकों के नाम मैं पहले से ही जानती थी। इसलिए उनकी फोटो के नीचे मैंने उन लडकों के नाम भी लिख दिए और उसके बाद यही काम मैंने आतंकवादियों के फोटो के साथ भी किया। इसके अलावा फारूख उस्मान ने जिन पाँच लडकों को मिशन के लिए सिलेक्ट किया था, उनकी फोटो के चारों तरफ मैंने एक सर्कल भी बना दिया। ताकि मुझे याद रहे कि इन लडकों पर मुझे विशेष ध्यान देना है। यह सारा काम खत्म करने के बाद मैंने एक नजर उन तीनों भरी हुई दीवालों पर डाली और फिर आखिरी बची दीवाल पर अपने आगे के प्लान के बारे में इम्पोर्टेंट पाँईंट लिखने लगी।

अपना पूरा काम खत्म करने के बाद मैंने उस कमरे को बाहर से अच्छी तरह से लॉक किया और नहाने चली गई। नहाकर खाना खाने के बाद मैं अपना लैपटॉप लेकर दोबारा से उसी कमरे में जा पहुँचीं। उस कमरे में पहले से ही एक टेबिल और चेयर डली हुई थी। इसलिए मैंने अपना लैपटॉप टैबिल पर सेट किया और फिर मैन हॉल में रखा प्रिंटर भी उठाकर उसी कमरे में सेट कर लिया। ताकि मुझे बार बार प्रिंट निकालने के लिए मैन हॉल में ना जाना पडे। इसके बाद मैं चेयर पर बैठी और अपना लैपटॉप ऑन करके अपने कॉलेज के स्टूडेंट, जिन्हें मैं पहले से जानती थी, उनके सोशल मीडिया अकॉऊंटट को चैक करने लगी। कुछ देर मेहनत करने के बाद ही मुझे उन सभी 50 कॉलेज स्टूडेंट के नाम और उनकी सोशल मीडिया आई.डी. मिल गई थी।

हाँलाकि उन सभी लडकों का सोशल मीडिया अकॉऊंट एकदम क्लीन था। कोई भी इंशान उनके सोशल मीडिया अकाऊंट को देखकर यह नहीं कह सकता था कि वो किसी बडे आतंकवादी के हाथोें की कठपुतली बन चुके हैं। पर उन लोगों ने एक गलती कर दी थी, असल में उन सभी लडकों ने एक दूसरे को सोशल मीडिया पर पहले से ही एड कर रखा था। जिस कारण मुझे उनकी डिटेल पता करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पडी। मैं करीब 4-5 घंटों तक लगातार उन सभी कॉलेज स्टूडेंट के सोशल मीडिया अकाऊंट को खंगालती रही। अब तक मैं उन सभी ल़डकों के नाम और उनके कॉलेज के बारे में जान चुकी थी, इसके अलावा उनकी थोडी बहुत पर्सनल डिटेल भी मुझे मिल चुकी थी।

लेकिन मुझे उनकी और ज्यादा डिटेल चाहिए थी। ताकि मैं उनकी पूरी फाईल तैयार करके राजीव सर के पास भेज सकूँ और वो मेरा ऑपरेशन खत्म होने के बाद उन सभी लडकों पर नजर रख सकें। इसलिए मैंने उन लडकों की डिटेल निकालने के लिए उनके कॉलेज जाने का फैसला किया। असल में वो सभी लडके तीन अलग अलग कॉलेज से थे। मेरे कॉलेज से करीब 20 स्टूडेंट थी, इसके अलावा अन्य दो कॉलेज से करीब 15-15 स्टूडेंट थे। अपने कॉलेज के स्टूडेंट की डिटेल तो मैं आसानी से कभी भी निकाल सकती थी। प्राब्लम बस दूसरे कॉलेज के स्टूडेंट की थी।

अगर मैंने उनके कॉलेज में जाकर उन सभी स्टूडेंट कि डिटेल निकलवाई तो कॉलेज बालों को मुझ पर शक हो सकता था, इसके अलावा अगर उन स्टूडेंट्स को इस वारे में पता चला तो बहुत प्राब्लम हो सकती थी, क्योंकि वो स्टूडेंट यह बात जरूर फारूख उस्मान तक पहुँचा देंगे और उसके बाद हो सकता है कि फारूख लम्बे समय के लिए अंडरग्राऊंड हो जाऐ या फिर वो कानपुर छोडकर कहीं और सिफ्ट हो जाऐ। फिलहाल मैं यह रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इसलिए मैंने तय किया की आज रात को मैं चुपके से उन दोनों काॉलेज के अंदर चाऊँगी और उनके मैन सर्वर को हैक करके उन सभी स्टूडेंट की पूरी डिटेल निकाल लूँगी। अपना पूरा प्लान बनाने के बाद मैं उस कमरे से बाहर निकल आई।

कमरे को अच्छी तरह से लॉक करने के बाद सीधे किचिन में जा पहुँची। असल में शाम हो चुकी थी और मुझे थकान के कारण कॉफी की बहुत तेज तलब हो रही थी। अपने लिए कॉफी बनाने के बाद मैं मैनहॉल में आकर बैठ गई और टी.बी. पर न्यूज देखने लगी। रात करीब 12 बजे मैंने एक कालेज से थोडी दूरी पर सडक के किनारे अपनी कार खडी की, और पैदल ही उस कॉलेज के पीछे की तरफ जाने लगी। मैं इस वक्त सिर से पाँव तक ब्लैक कलर के कपडों में थी और मैंने अपनी पीठ पर एक बैकपैक भी टाँग रहा था। उस कॉलेज के पीछे की तरफ जाकर मैंने अपने बैगपैक में से एक रस्सी और हुक निकाला और फिर हुक को रस्सी पर बांधने के बाद मैंने उसे कॉलेज की बाऊंडी बॉल की तरफ फेंक दिया।

पहली ही कोशिश में वो हुक बाऊँडी बाल के ऊपर लगी लोहे की रॉड पर अटक गया। इसके बाद मैं बिना देर किए उस रस्सी के सहारे बाऊंडी बॉल पर चड गई और कुछ ही देरे में कॉलेज कंपाऊंड में दाखिल हो गई। कॉलेज कंपाऊंड इस वक्त अंधेरे में डूबा हुआ था और इस वक्त वहाँ पर कोई भी नहीं था। बस दो सिक्योरिटी गार्ड मैन गेट पर खडे होकर पहरा दे रहे थे। कॉलेज कंपाऊंड के अंदर पहुँचकर मैं अंधेरे का फायदा उठाते हुए बिना किसी आवाज के काऊंसलर ऑफिस ढूंडने लगी। अंधेरे में भी देखने की अपनी पावर के कारण मुझे काउंसलर ऑफिस ढूंडने में कोई प्राब्लम नहीं हुई।

लेकिन उस ऑफिस के बाहर एक बडा सा ताला लटका हुआ था। इसलिए मैंने अपने बैग में से एक पतला सा तार निकाला और उस ताले के की होल में तार डालकर उसे खोलने की कोशिश करने लगी। ट्रेनिंग के दौरान मुझे तार की हेल्प से ताला खोलना सिखाया गया था। इसलिए मुझे उस ताले को खोलने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पडी। करीब 5 मिनट बाद ही मैं उस काऊंसलर ऑफिस के अंदर थी। ऑफिस के अंदर पहुँचकर मैंने दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया और वहाँ पर रखे कम्प्यूटर सिस्टम के सामने बैठकर कम्प्युटर सिस्टम को ऑन कर लिया।

वो कम्प्यूटर पासवर्ड प्रोटेक्टेड था, जिसे अनलॉक करना मेरे लिए बच्चों का खेल था। कम्प्युटर सिस्टम में लॉगइन करने के बाद मैं स्टूडेंट डाटाबेस सर्च करने लगी। कुछ ही देर में उस कॉलेज में पढने बाले सभी स्टूडेंट का रिकार्ड मेरे सामने मौजूद था। फिलहाल मेरे पास उस पूरे रिकार्ड में से सिलेक्टेड स्टूडेंट का डाटा कॉपी करने का कोई समय नहीं था। इसलिए मैंने उस कम्प्यूटर सिस्टम के यू.एस.वी. पोर्ट में एक पैन ड्राईब लगाई और सारा स्टूडेंट डाटा कॉपी कर लिया। सारा जरूरी डाटा कॉपी करने के बाद मैंने कम्प्यूटर सिस्टम को बापिस से स्विच ऑफ कर दिया और अपना पैन ड्राईब निकालकर उस ऑफिस से बाहर निकल आई।

काऊंसलर ऑफिस से बाहर आने के बाद मैं जिस रास्ते उस कॉलेज के अंदर दाखिल हुई थी। उसी रास्ते कॉलेज से बाहर भी निकल गई। उस कॉलेज का पूरा काम करने के बाद मैं दूसरे कॉलेज में जा पहुँची और वहाँ से भी मैंने इसी तरह से सारा स्टूडेंट डाटा चोरी कर लिया। यह सारा काम खत्म करते करते सुबह के करीब 4 बज चुके थे। इसलिए मैं अपने सेफ हाऊस बापिस लौट आई। अगले दिन मैंने उन कॉलेज से लाऐ स्टूडेंट डाटा को एनालाईज करके उसमें से उन सभी स्टूडेंट का रिकार्ड निकाल लिया जो फारूख उस्मान के कांटेक्ट में थे। बाकी स्टूडेंट का डाटा मैंने डिलीट कर दिया। क्योंकि उसकी मुझे कोई जरूरत नहीं थी। अब बस मेरे कॉलेज में पढने बाले स्टूडेंट ही रह गए थे।

हाँलाकि मैं अपने कॉलेज में से भी इसी तरह से डाटा चोरी करके ला सकती थी। पर समस्या यह थी कि मेरा कॉलेज बाकी दो कॉलेज की अपेक्षा कहीं ज्यादा बडा और फेमस था। इसलिए वहां की सिक्योरिटी भी काफी ज्यादा टाईट थी। सबसे बडी बात तो यह थी हमारे कॉलेज कम्पाऊंड के पास ही गर्लस हॉस्टल और बॉयज हॉस्टल की बिल्डींग भी बनी हुईं थीं, जिस कारण कोई भी गडबड होने पर कॉलेज में कुछ ही देर में अच्छी खासी भीड इकट्ठी हो सकती थी, ऊपर से कॉलेज कम्पाऊंड में स्टॉफ के रहने के लिए कुछ एक्स्ट्रा बिल्डिंग भी बनी हुईं थीं। जिस कारण चोरी छिपे मेरे कॉलेज के अंदर जाना और वहाँ से डाटा चोरी करना बहुत मुश्किल था।

बैसे भी जब मैं अपने कॉलेज की कम्प्यूटर लैब से सर्वर हैक करके सारा डाटा बिना किसी रिस्क के आसानी से कॉपी कर सकती थी तो फिर मुझे चोरी करने का रिस्क लेने की कोई जरूरत नहीं थी। इसलिए मैंने अपने कॉलेज के स्टूडेंट का डाटा नॉर्मल तरीके से हासिल करने का फैसला किया था। बैसे अगर कॉलेज सर्वर इंटरनेट से कनेक्ट होता तो मुझे कहीं भी जाने की जरूरत ही नहीं होती। मैं घर बैठे ही अपने लैपटॉप की हैल्प से यह काम आसानी से कर सकती थी। लेकिन सभी कॉलेज के सर्वर प्राईवेट नेटवर्क से कनेक्ट थे। जिस कारण उन्हें कॉलेज कम्पाऊंड के बाहर से एक्सेस करना संभव नहीं था।

इसलिए अपने प्लान को पूरा करने के लिए मैंने अगले दिन से दोबारा कॉलेज जाने का फैसला किया। जब अगले दिन मैं अपने क्लासरूम पहुँची को मेरे सभी दोस्त मुझे बापिस कॉलेज में देखकर काफी खुश हुए। लेकिन इससे पहले वो लोग मेरे पास आकर मुझसे बात कर पाते, मैं उन्हें इग्नोर करते हुए उन लोगों से दूर सबसे पीछे बाली एक खाली चेयर पर जाकर बैठ गई। हाँलाकि अब तक मेरी क्लास के साथ साथ लगभग पूरे कॉलेज को मेरे और कबीर के बारे में पता चल चुका था। इसलिए सारा दिन मेरे सभी क्लासमेट्स मुढ-मुढ कर मुझे ही देख रहे थे। हाँलाकि मुझे यह सब काफी ज्यादा ऑक्वर्ड लग रहा था, लेकिन मैंने फिलहाल उन सभी को इग्नोर करने का फैसला किया।

कहानी जारी है...............
 
Update 088 -

जब क्लास खत्म होने के बाद मैं कैंटीन पहुंची तो वहाँ भी मुझे देखकर सभी लडके लडकियाँ आपस में खुसर फुसर करने लगे। पहले तो मेरे मन में ख्याल आया कि मैं आज का लंच स्किप कर देती हूँ। क्योंकि मुझे वहाँ बहुत अजीब सा लग रहा था, ऊपर से मेरे दोस्त भी उम्मीद भरी नजरों से मेरी तरफ ही देख रहे थे। मुझे पूरा यकीन था कि यदि मैं उन लोगों को इग्नोर करके उनसे दूर भी जाकर बैठूंगी, तो पक्का वो लोग मेरे पास आकर मुझसे बात करने की कोशिश जरूर करेंगे। पर अगले ही पल मेरे मन में ख्याल आया कि मैं ऐसे कब तक अपना लंच स्किप करती रहूँगी।

आज नहीं तो कल मुझे यह सब फेश तो करना ही है। इसलिए मैंने वहाँ से बापिस जाने का अपना इरादा अपने दिल से निकाल दिया, और अपने लिए खाना लेने काऊंटर की तरफ चल पडी। जब मैं कैंटीन काऊंटर पर से अपना आर्डर ले रही थी, ठीक तभी अचानक से एक लडके ने मेरी गाँड पर पीछे से थप्पड मारते हुए कहा

लडका- मिस चौहान… क्या बस कबीर को ही मजे देती रहोगी… अरे भई हम लोग भी तो लाईन में लगे हैं।

उस लडके की बात सुनकर उसके साथ आऐ दूसरे लडके जोर जोर से हंसने लगे। मेरा मूढ पहले से ही खराब था, ऊपर से उस लडके और उसके दोस्तों की इस हरकत को देखकर मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था। इसलिए मैं तुरंत पलट गई और उन लडकों को ध्यान से देखने लगी। वो कुल 4 लडके थे, जो मेरे सीनियर थे और उन लोगों में सामिल थे, जिन्होंने पहले दिन मेरी रैगिंग लेने की कोशिश की थी। उस दिन तो वो लोग किसी तरह मुझसे बच गए थे, पर आज मैं उन्हें इतनी आसानी से नहीं जाने दे सकती थी, इसलिए पीछे पलटकर मैंने बिल्कुल नार्मल टोन में उनसे सबाल किया

अमृता- अभी अभी मुझे किसने थप्पड मारा

मेरी बात सुनकर एक लडका आगे आते हुए बोला

लडका- मैंने… क्यों मजा नहीं आया क्या…. एक बार फिर से करके दिखाऊं….

इससे पहले वो लडका अपनी बात पूरी कर पाता मैंन एक जोरदार थप्पड उसके गालों पर जड दिया। जिसकी आवास उस पूरी कैंटीन में गूँज उठी थी

“चचचटटटटाटाटाटाटााटककककककक्क्कक्क्क्……..”

उस लडके को थप्पड मारने के बाद मैंने उससे कहा

अमृता- मुझे तो नहीं आया….. पर शायद तुम्हें मेरा थप्पड खाकर बडा मजा आया होगा

मेरी इस हरकत पर वो लडका गुस्से से बिफरते हुए बोला

लडका- साली राँड…. तु समझती क्या अपने आप को… तू जानती नहीं है कि मैं कौन हूँ…. लगता है तुझे सबक……… आआआआआआआआआआआहहहहहहहहहहहहहहहहहहह

मैं पहले से ही गुस्से में थी, ऊपर से उस लडके की हरकत और उसकी बातों ने मेरे गुस्से की आग में घी का काम किया। इसलिए उसकी बात पूरी होने से पहले ही मैंने अपने घुटने का एक जोरदार वॉर उसके पेट में किया। जिस कारण उसके मूँह से दर्द भरी चीख निकल गई। इससे पहले कोई कुछ समझ पाता मैंने लात घूँसों से उसकी पिटाई शुरू कर दी। तभी उसके साथी मुझे पकडने के लिए आगे बडे। इससे पहले वो लोग मेरे पास आते, मैंने कैंटीन के काऊंटर पर रखी कोल्डड्रिंक से भरी कांच की बॉटल उठाईँ और एक एक करके उस लडके के तीनों साथियों के सर पर दे मारी।

मेरे एक ही बार में वो बॉटल उन लडकों के सर पर चकनाचूर हो गईं थीं, जिससे वो तीनों लडके अपना अपना सिर पकडकर नीचे जमीन पर जा बैठे। इसके बाद तो मैंने उन चारों पर लात घूंसों की बरसात कर दी। जिस कारण कैंटीन में उन चारों लडकों की चीखें गूंजने लगी।

“आआआआहहहहहह”

“उउउईईईईई माँ…..”

“हाय मार डाला…”

“बचाओ बचाओ…”

“अरे भाई कोई तो बचाओ….. लगता है यह पागल हो गई है”

“आआआआआहहहहहहह”

“नहीं नहीं नहीं प्लीज छोड दो हमें जाने दो”

“दीदी दीदी प्लीज हमें माफ कर दो दीदी”

“आआआहहहहह दीदी आज के बाद हम फिर कभी ऐसा नहीं करेंगे”

“प्लीज दीदी छोड दो हमें”

मुझपर उन लडकों के चीखने चिल्लाने का कोई असर नहीं हो रहा था। जब उन लोगों को मारते मारते मेरा गुस्सा कम हो गया तो मैंने कहा

अमृता- अबे ओ हरामजादों मुझे क्या तुम लोगों ने चूतिया समझ रखा है। साला शराफत से यहाँ कॉलेज में आकर पढाई कर रही हूँ। तो वो भी तुम जैसे कमीनों से बरदास्त नहीं हो रहा… हरामखोरों तुम लोगों के घर पर माँ बहिन नहीं है क्या…. अगर इतनी ही जबानी उफान मार रही है तो अपनी माँ बहन के पिछबाडे पर हाथ मारो, फिर पता चलेगा कि किसे कितना मजा आता है। अगर मैं किसी से कुछ कह नहीं रही हूँ तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं तुम जैसे लफंगों से डरती हूँ…. कमीनों मैं तुम सब की अम्मा हूँ… अगर अगली बार किसी भी लडकी को छेडने की गलती की तो ऐसी जगह मारूँगी कि तुम लोगों की सारी मर्दानगी धरी की धरी रह जाऐगी। उसके बाद तुम लोगों के हाथ बस तालियाँ बजाने के काम आऐंगे।

इतना बोलकर मैंने अपने पर्स में से कुछ पैसे निकालकर कैंटीन बाले को देते हुए कहा

अमृता- भईया तुम्हारा जो नुकशान हुआ है…. उसके बदले में यह पैसे रखो और बात को यहीं रफा दफा करो….

इतना बोलकर मैं कैंटीन से बाहर की तरफ चल पडी। कैंटीन में जो कुछ भी हुआ था। उससे मेरी भूख पूरी तरह से खत्म हो गई थी। लेकिन जैसे ही मैं कैंटीन के बाहर पहुँची मेरे दोस्त लगभग भागते हुए मेरे पास आ गए और श्रेया ने अचानक से मेरे हाथ को पीछे से पकडकर मुझे रोकते हुए कहा

श्रेया- अमृता प्लीज रुको तो सही… क्या अब तक हमसे नाराज हो….

जब श्रेया की बात सुनकर मैंने कोई जबाब नहीं दिया तो श्रेया मेरे गले लगकर रोते हुए बोली

श्रेया- प्लीज अमृता मुझे माफ कर दो…. आई एम सॉरी मेरी जान…. मुझे नहीं पता था कि मेरी एक छोटी सी गलती का यह परिणाम होगा… और तुम मुझसे इतना ज्यादा नाराज हो जाओगी…. अगर मुझे इस बात का जरा भी अंदाजा होता तो मैं सपने में भी वो गलती नहीं करती…..

श्रेया के यूँ रोने से मेरा गुस्सा भी अब पूरी तरह से खत्म हो गया था। इसलिए मैंने उसकी पीठ को प्यार से सहलाते हुए कहा

अमृता- कोई बात नहीं…. जो हो गया सो गया…. अब उसे भूल जाओ…. बैसे भी मैंने तुम लोगों को पहले ही माफ कर दिया था। मैं बस तुम लोगों से गुस्सा थी, जो अब उन लफंगों को पीटने के बाद खत्म हो गया है।

मेरी बात सुनकर श्रेया ने खुश होते हुए अपने आंशू पोंछते हुए कहा

श्रेया- क्या तुम सच कह रही हो…. तुम अब हमसे नाराज नहीं हो

अमृता- हाँ बाबा नहीं हूँ…. अब छोड मुझे.. बर्ना कल कॉलेज में हम दोनों के लैस्बियन होने के रूमर भी फैल जाऐंगे।

मेरी बात सुनकर श्रेया ने तुरंत मुझे छोड दिया और थोडा पीछ हट गई। तभी पूजा ने भी मुझसे कहा

पूजा- अमृता प्लीज हम लोगों को भी माफ कर दो ना….

पूजा की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- अरे बाबा मैंने तुम सबको माफ कर दिया……

तभी कबीर भी उस भीड में से बाहर आते हुए बोला

कबीर- और मुझे.. क्या तुम मेरी वो गलती माफ नहीं कर सकती…..

कबीर की बात सुनकर मैं गुस्से में उसे घूरते हुए बोली

अमृता- नहीं…..

कबीर- प्लीज अमृता मैं अपनी उस हरकत पर बहुत शर्मिंदा हूँ…. मैं कसम खाता हूँ कि आज के बाद मैं तुम्हारे साथ ऐसी बैसी कोई हरकत नहीं करूँगा… कसम से मैं प्यार पाने के चक्कर में अपनी सबसे अच्छी दोस्त को नहीं खोना चाहता…. ट्रस्ट मी…….

कबीर की बात सुनकर मैंने कुछ देर इस बारे में सोचा और फिर बोली

अमृता- अच्छा ठीक है…. मैंने तुम्हें भी माफ किया… लेकिन याद रखना आज के बाद फिर कभी मेरे साथ ऐसी बैसी हरकत करने के बारे में सोचना भी मत। वर्ना तुम्हारा हाल भी मैं उन चारों लडकों की तरह होगा, एण्ड ट्रस्ट मी मैं हड्डियां तोडने में काफी ज्यादा एक्सपर्ड हूँ।

मेरी बात सुनकर कबीर ने तुरंत अपने कान पकडते हुए कहा

कबीर- माँ कसम मैं फिर कभी भी तुम्हारी मर्जी के बिना तुम्हें टच भी नहीं करूँगा। हम सभी ने देखा है कि तुमने कैंटीन के अंदर उन लडकों के साथ क्या किया। अब मैं तो क्या पूरे कॉलेज का कोई भी लडका तुम्हें छेडने की गलती नहीं करेगा। तुम तो पक्की झाँसी की रानी हो।

अमृता- बस बस अब ज्यादा मक्खन मत लगाओ मुझे….

तभी मनीष हमारी बातों के बीच में आते हुए बोला

मनीष- बैसे अमृता एक बात हमें समझ नहीं आई….

अमृता- क्या

मनीष- जब कैंटीन में उन लडकों ने तुम्हें छेडा तो तुमने उन सभी की मार मार कर हालत खराब करी दी। लेकिन उस दिन कबीर ने तुम्हारे साथ जो कुछ भी किया था, उसके बाद भी तुमने उसके साथ कुछ भी नहीं किया था….

मनीष की बात सुनकर मैंने बिना किसी एक्सप्रेशन के उसे घूरते हुए कहा

अमृता- तो तुम क्या चाहते हो कि मैं कबीर को भी उन लडकों की तरह पीटूँ

मेरी बात सुनकर कबीर बुरी तरह से डर गया और मनीष को गुस्से में घूरते हुए बोला

कबीर- अबे ओ मनीष के बच्चे…. तू मेरा दोस्त या या दुश्मन….. साले अब जब सब कुछ ठीक हो गया है तो फिर क्यों इस झाँसी की रानी को मेरे खिलाफ उक्सा रहा है…..

कबीर की बात सुनकर मनीष भी बुरी तरह से डर गया था, इसलिए वो तुरंत अपनी बात कि सफाई देते हुए बोला

मनीष- अरे नहीं नहीं… मेरा बो मतलब नहीं था……

अमृता- हाँ हाँ मैं सब समझती हूँ तुम्हारा मतलब… कबीर को मैंने बस एक थप्पड मारकर इसलिए छोड दिया था, क्योंकि वो मेरा दोस्त है….. और मैं अपने किसी भी दोस्त को फीजीकली हर्ट नहीं करना चाहती थी। अगर कबीर की जगह कोई दूसरा लडका होता तो वो अब भी किसी हॉस्पीटल में इपना इलाज करवा रहा होता। चाहो तो तुम खुद भी मुझे आजमा सकते हो.. बैसे भी तुम्हें हॉस्पीटल पहुँचाने के लिए मुझे कुछ भी करने की जरूरत नहीं पडेगी। पूजा खुद तुम्हें देख लेगी……

इतना बोलकर मैंने पूजा को देखते हुए आँख मार दी, मेरी इस हरकत पर सभी लोगों की हंसी छूट गई। कुछ देर हंसने के बाद पूजा ने कहा

पूजा- गाईज तो फिर चलें कैंटीन में चलकर कुछ खा लेते हैं…. मुझे तो बहुत जोरों से भूख लगी है।

पूजा का सबाल सुनकर जब मेरे सभी दोस्त सबालिया नजरों से मुझे देखने लगे, तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा

अमृता- अच्छा ठीक है बाबा चलो…. पर मेरे पास पैसे नहीं बचे हैं…. मैंने सारे पैसे कैंटीन बाले भइया को पहले ही दे दिए हैं।

श्रेया- अरे कोई बात नहीं…. हम लोग हैं ना…

अमृता- तो फिर ठीक है चलो……

इतना बोलकर मैं अपने दोस्तों के साथ कैंटीन की तरफ बापिस चली गई। कुछ ही देर बाद हम सभी दोस्त आपस में हंसी मजाक करते हुए लंच कर रहे थे। तभी श्रेया ने सबाल किया।

श्रेया- बैसे अमृता आज कल तुम कहाँ रुकी हुई हो

अमृता- मैंने कॉलेज से थोडी दूरी पर एक घर किराये पर लिया है। फिलहाल मैं वहीं रह रही हूँ।

श्रेया- पर क्यों….. मेरा मतलब है कि जब मेरा घर है ही तो फिर अलग से घर किराए पर लेने की क्या जरूरत है। क्या हम पहले की तरह एक साथ नहीं रह सकते।

श्रेया की बात सुनकर मैंने कुछ देर सोचते हुए कहा

अमृता- उम्मममम पता नही यार… फिलहाल मैंने इस बारे में कुछ सोचा नहीं है। बैसे भी मैंने पूरे 6 महिने का किराया एडवांस दे दिया है। इसलिए अगले 6 महिने तक तो तुम लोगों के पास आना पॉसिवल ही नहीं है, और फिर तुम्हें तो पता ही है कि कानपुर में मेरा बिजिनेश शुरू होते ही मेरा अपने बिजिनेश पार्टनर्स से मिलना जुलना और उनके साथ मीटिंग बगैरह करने का सिलसिला शुरू हो जाऐगा। इसलिए अगर मैं तुम लोगों के साथ रही तो फिर तुम लोगों को भी प्राब्लम होगी।

मेरी बात सुनकर श्रेया थोडा निराश होते हुए बोली

श्रेया- हुम्म बो तो है… मैं तो इस बारे में भूल ही गई थी… बैसे जिस दिन तुम फ्री हो उस दिन तो हम लोगों के साथ रुककर इंजॉय कर ही सकती हो…

अमृता- हाँ यह ठीक रहेगा…..

इसी तरह हम लोगों ने आपस में बातें करते हुए अपना लंच खत्म किया और फिर हम लोग कम्प्यूटर लैब की तरफ चल पडे। कम्प्यूटर लैब में पहुँचते ही मैंने तुरंत अपने कॉलेज का सर्वर हैक किया और फारूख उस्मान से कांटेक्ट रखने बाले सभी स्टूडेंट का डाटा कॉपी करके अपनी पेन ड्राईव में सेव कर लिया। अब चूंकि मेरे पास फारूख उस्मान के सभी स्लीपर सेल्स का पर्सनल डाटा था। इसलिए मैंने उनकी एक डिजीटल फाईल तैयार कर ली थी। ताकि मिशन पूरा होने के बाद मैं वो फाईल राजीव सर को सौंप सकूँ। अगले दिने से मैं नॉर्मल स्टूडेंट की तरह कॉलेज आने जाने लगी।

इस दौरान मेरे और मेरे दोस्तों के बीच सब कुछ नॉर्मल हो गया था, यहाँ तक की कबीर एक बार फिर मेरा अच्छा दोस्त बन गया था। पर अब वो अक्सर अकेले में मुझे प्रपोज करके अपनी गर्लफ्रेंड बनाने की कोशिश करता रहता था। अब जब मैं यह जान गई थी कि वो मेरे बारे में कैसी फीलिंग रखता है और मेरे बार बार मना करने के बाद भी वो मुझे कन्बिंस करने की कोशिश करता रहता है, तो मैंने भी उसकी बातों का बुरा मानना बंद कर दिया था और अब जब भी वो मुझे प्रपोज करता और अपनी गर्लफ्रेंड बनाने की कोशिश करता तो मैं हंसते हुए उसे टाल देती थी। इस दौरान मैं कॉलेज के अंदर उन लडकों पर भी पूरी नजर रखती थी, जो फारूख के कांटेक्ट में थे। अब तक मुझे उनकी कोई भी गलत एक्टिविटी दिखाई नहीं दी थी।

उस दिन जंगल में हुई मीटिंग के बाद से वो लोग ना तो दोबारा जंगल में मीटिंग करने गए थे और ना ही इब्राहिम खान से मिलने पव में गए। यहाँ तक की वो लोग कॉलेज में भी एक दूसरे से भी बात नहीं करते थे। जिस कारण मुझे ना तो फारूख और उसके साथियों के बारे में कुछ पता चल रहा था और ना ही उनके मिशन के बारे में।

कहानी जारी है...........
 
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