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सेक्स का जमाना अपडेट 111
शाम हो चुकी थी. जेठालाल और तारक टहलते हुए सोसाइटी कंपाउंड के अंदर आ रहे थे. दोनों आपस में बातें कर रहे थे.
तारक: (मुस्कुराते हुए) जेठालाल, मेरे आईडिया के बारे में जरूर सोचना. एक तरय तोह बनता है यार. बहुत मज़ा आएगा.
जेठालाल: (हस्ते हुए, थोड़ा एक्ससिटेड) हाँ जरूर मेहता साहब! उसमे तोह बहुत मज़ा आएगा. लेकिन अभी थोड़ा ऊपर मज़े ले लू... फिर बाद में सोचेंगे आपके आईडिया के बारे में.
तारक ज़ोर से है पड़ा.
तारक: (टांग खींचते हुए) सही जा रहे हो भाई! चलो मैं चलता हूँ. लेकिन ध्यान देना... ये पोपटलाल बहुत पोपट आदमी है. वो करे तोह सही, और हम करें तोह गलत. बहुत ध्यान से काम करना.
जेठालाल: (बड़ी बेशर्मी से) अरे क्या आप भी मेहता साहब! पोपट से कौन डरेगा? अगर वो आया तोह बोल दूंगा “तू भी जा कर किसी और के साथ कर ले... आखिर रोका किसने है?”
तभी उनके पीछे से एक भारी आवाज़ आयी.
हाथी: (ज़ोर से) सही बात है जेठालाल भाई!
जेठालाल और तारक दोनों चौंक कर पीछे मुड़े. हाथी वहां खड़ा मुस्कुराता हुआ उन्हें देख रहा था.
दोनों एक दूसरे को देखते हुए ज़ोर से है पड़े.
जेठालाल: (हस्ते हुए) अरे हाथी भाई आप यहाँ? ठीक है... मैं अब चलता हूँ. काम है ऊपर.
तारक: (मुस्कुराते हुए) हाँ हाँ... “काम” बहुत इम्पोर्टेन्ट है. एन्जॉय करना!
जेठालाल ने तारक और हाथी को हाथ हिला कर Bye बोलै और सीधा स विंग की तरफ बढ़ गया. उसके हाथ में एक छोटा टूल बैग था और उसके पीछे एक वर्कर टीवी लेकर आ रहा था.
जेठालाल के चेहरे पर एक अलग Hi चमक थी. उसके दिमाग में श्रद्धा की वह प्यारी स्माइल और उसके शरीर का ख्याल घूम रहा था.
जेठालाल: (खुद से धीरे से) आज श्रद्धा भाभी के हाथ की चाय भी पीनी है और... और भी कुछ मज़े लेने हैं.
तारक और हाथी बातें करते हुए आगे बढ़ रहे थे.
तारक: हाथी भाई, आज कल सोसाइटी में हवा Hi कुछ अलग है लग रही है...
तभी उनकी नज़र जेठालाल के घर की सीढ़ियों से उतारते हुए िएर पर पड़ी. िएर ख़ुशी से मुस्कुराते हुए आ रहा था, चेहरा लाल और पूरा सटिस्फीएड दिखाई दे रहा था.
तारक: (िएर को रोक कर) अरे िएर साहब! रुको रुको... आज इतना खिल खिला क्यों रहे हो? क्या बात है? ऐसा क्या कर लिया?
िएर: (बड़ी मुस्कराहट के साथ) खिलूँगा Hi न मेहता साहब... एक के बाद एक छूट चखने को मिल गयी आज. दिल खुश हो गया!
तारक: (इंटरेस्टिंग होते हुए) अच्छा जी? किसकी किसकी?
िएर: (गर्व से) पहले माधवी भाभी की... बहुत टाइट और रसीली थी. उसके बाद सीधा दया भाभी की. और दया भाभी की लेने में तोह बहुत मज़ा आ गया यार... क्या चीज़ है!
हाथी: (हस्ते हुए) ये सही कहा िएर भाई! दया भाभी की लेने में बहुत मज़ा आता है. जेठा भाई ने उसको बहुत अच्छे से ट्रैन कर रखा है.
िएर: (सर हिलाते हुए) नहीं नहीं हाथी भाई, मुझे नहीं लगता जेठालाल ने ट्रैन किया है. दया भाभी खुद काफी एक्सपेरिएंस्ड लगती हैं. जैसे प्रोफेशनल हो...
तारक ने िएर के चेहरे का एक्सप्रेशन नोटिस किया और कुछ मैं में सोचने लगा.
तारक (मैं में): ाचा जी
हाथी : क्यों
िएर : क्यों क्या जेठालाल को देख कर आपको लगता है की उसको सेक्स के बारे में इतना कुछ पता होगा
हाथी : वो तो मई कह नहीं सकता लेकिन जब भी ग्रुप में देखता हु समझ जाता हु जेठा भाई में कुछ तो ख़ास है जो वो सब को पसंद आते है
िएर : लेकिन उसने अबतक रोशन भाभी को नहीं छोड़ा
हाथी : जो भी हो लेकिन सब मर्दो में वही टॉप पर है जो किसी दूसरी तरफ Hi इशारा कर रही है
िएर : जो भी हो हाथी भाई लेकिन ये कम्पटीशन में मई उसे जीतने नहीं दूंगा
तारक : पहले कम्पटीशन तो सुरु होने दो िएर बॉस चलो अब घर जाओ वैसे भी लगातार सेक्स कर के थक गए होंगे जाओ आराम कर लो
हाथी (मुस्कुराते हुए) : सही बात है जाओ िएर भाई रेस्ट करो और कुछ काम हो तो बताना
और िएर वह से चल देता है
हाथी : बाकी मेहता साहब मई सोच रहा था की आपने अबतक कोमल के साथ सेक्स नहीं किया तो क्यों न आज रात थोड़ा कोमल के मसालेदार खाने का लुत्फ़ उठा लो
तारक : अरे हाथी भाई नेकी और भूख भूख अभी जाता हु आपके घर
हाथी : अब आप मेरे घर जा Hi रहे हो तो क्यों न मई आपके घर चला जाओ
तारक : हां हां क्यों नहीं बस ध्यान से जाना
और हाथी तारक के हाथ में एक पुरिया डालते हुए कहते है "ये लो वो दवाई है देख रहहु कोमल के बारे में कुछ काम मेस्सगेस आ रहे है ग्रुप में तो ये दवाई उसके जूस में मिला देना कैसे भी और मज़े करो
और दोनों एक दुसरे की पीठ Thap-Thapa कर एक दुसरे के घर की तरफ चल देते है
सन कट होता है
सीढ़ियों पर जेठालाल टीवी इनस्टॉल करने के लिए टूल्स ले कर सीढ़ियां चढ़ रहा था. तभी नीचे से भिड़े उतरता हुआ मिला. भिड़े का चेहरा भी थोड़ा लाल और सटिस्फीएड था.
जेठालाल: अरे भिड़े! कहाँ से आ रहा है इतनी शाम को?
भिड़े: (थोड़ा शर्माते हुए लेकिन खुश) अरे जेठालाल... मैं तोह... िएर के घर गया था. वहां बबिता को... छोड़ आया हूँ भाई. बहुत मज़ा आया.
जेठालाल: (हस्ते हुए) वह वह! तू भी शुरू हो गया? मैं तोह अब पोपटलाल के घर जा रहा हूँ... श्रद्धा भाभी के पास. टीवी इनस्टॉल करने का बहाना है... और उसके साथ मज़े भी लेने हैं.
भिड़े: (शॉक हो कर) क्या?! श्रद्धा भाभी के पास?!
भिड़े ने जल्दी से अपना फ़ोन निकाला और ग्रुप चाट खोला. उसने जेठालाल को स्क्रीन दिखाया.
ग्रुप मैसेज बी िएर (अभी डाला हुआ):
" आज डबल माल चख लिया. पहले माधवी, फिर दया. दया की छूट स्वर्ग है भाई लोग
"
जेठालाल मैसेज पढ़ कर ज़ोर से है पड़ा.
जेठालाल: (खुश होते हुए) अरे वाह! सब लोग मज़े ले रहे हैं. यह सही है यार... सोसाइटी में रंग आ गया है!
भिड़े थोड़ा शॉक था. उसने फ़ोन वापस जेब में रखा और मुस्कुराने की कोशिश की.
भिड़े: हाँ... ठीक है. मैं चलता हूँ. तुम अपना काम करो.
भिड़े वहां से जल्दी से निकल गया, थोड़ा सोचता हुआ.
जेठालाल मुस्कुराता हुआ श्रद्धा के फ्लैट की तरफ सीढ़ियां चढ़ने लगा.
शाम - पोपटलाल के घर
जेठालाल टीवी का टूल बैग और एक छोटा बुके लेकर श्रद्धा के फ्लैट के दरवाज़े पर पहुंचा. जैसे Hi उसने दुर्बल बजायी, दरवाज़ा खुला.
श्रद्धा ने एक डीप रेड, Off-Shoulder ड्रेस पहना हुआ था. ड्रेस इतना टाइट और Low-Cut था की उसके दोनों बड़े, गोल बूब्स काम से काम 90% बहार दिखाई दे रहे थे. क्लीवेज बहुत गहरी और टेम्पटिंग थी.

जेठालाल की आँखें फैल गयी. उसके मुँह में पानी आ गया.
जेठालाल: (घूरते हुए) वहहह श्रद्धा भाभी... यह क्या पहन रखा है आज?
श्रद्धा ने शरमाते हुए मुस्कुराया और तुरंत उसके कुर्ते के कालर को पकड़ कर अंदर की तरफ खींच लिया. जैसे Hi जेठालाल अंदर आया, उसने दरवाज़ा बंद किया और उसको गेट से चिपका कर ज़ोर से किश करने लगी.
श्रद्धा: (उसके होंठों को चूसते हुए) मममहह...

जेठालाल: (किश के बीच) श्रद्धा भाभी, टीवी इनस्टॉल नहीं करवाएगी क्या?
श्रद्धा: (किश तोड़ कर, उसकी आँखों में देखते हुए, सेडक्टिव आवाज़ में) खुद को मेरे दिल में इनस्टॉल कर लिया... इतना काफी नहीं है क्या जेठालाल भाई?
जेठालाल का गाला बिलकुल सूख गया. उसके लुंड ने तुरंत खड़ा होने का सिग्नल दे दिया.
जेठालाल: (गरम सांस लेते हुए) हां... मैं तोह भूल Hi गया था. बाघा ने दोपहर में Hi टीवी इनस्टॉल कर दिया होगा न? मैं तोह कुछ और इनस्टॉल करने आया हूँ आज...
इतना कहकर जेठालाल ने श्रद्धा की कमर को दोनों हाथों से पकड़ा, उसको घुमा दिया और गेट से चिपका दिया. अब श्रद्धा की पीठ गेट से लगी हुई थी और जेठालाल उसके सामने खड़ा था.
उसने तुरंत श्रद्धा के होंठों को अपने मुँह में ले लिया और Zor-Zor से किश करने लगा. उसके नीचे वाले लिप को हलके से काटने लगा.
श्रद्धा: (थोड़ी सी सिहरती हुई) ुफ़्फ़ःह... जेठालाल भाई...

श्रद्धा ने धीरे धीरे अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाय और जेठालाल के पंत के ऊपर से उसके लुंड पर रख दिया.
जैसे Hi उसका हाथ लुंड को टच किया, श्रद्धा की आँखें बड़ी हो गयी. वो मैं में सोचने लगी
श्रद्धा (मैं में): कितना बड़ा और मोटा है ये... उफ़...
लुंड इतना सख्त और बड़ा था की उसका हाथ पूरा नहीं भर रहा था.
दोनों फिर से गहरे किश में लग गए. जेठालाल का एक हाथ श्रद्धा के बूब्स पर पहुँच गया. उसने ड्रेस के ऊपर से Hi उसके बड़े मुम्मे को Halke-Halke मसलने शुरू कर दिया. उँगलियों से उसके निप्पल को दबाने लगा.
श्रद्धा: (किश के बीच मोअन करते हुए) मममहह... अह्ह्ह... जेठालाल भाई... धीरे... उफ्फ्फ्फ़...
जेठालाल ने दूसरे हाथ से भी उसके दूसरे बूब को पकड़ लिया और दोनों मुम्मों को Zor-Zor से मसलने लगा. श्रद्धा की सांसें तेज़ हो गयी थी. वो अभी भी गेट से चिपकी हुई थी और जेठालाल के लुंड को पंत के ऊपर से सेहला रही थी.
जेठालाल: (उसके गले को चूसते हुए) श्रद्धा... तेरे यह बूब्स देख कर Hi मेरा लुंड फाड़ने को हो रहा है...
श्रद्धा: (सांस फूलते हुए, मोअन करती हुई) तो पहाड़ दो न... आज पूरा कण्ट्रोल आपके हाथ में है...
दोनों अभी भी गेट के पास Khade-Khade एक दुसरे को किश और टच कर रहे थे. माहौल गरम होता जा रहा था.
जेठालाल ने श्रद्धा को गेट से चिपके हुए Hi कमर से उठा लिया और सोफे की तरफ ले गया. उसने श्रद्धा को सोफे पर धीरे से लिटाते हुए उसके ऊपर झुक कर एक और गहरा किश किया.
जेठालाल: (उसकी आँखों में देखते हुए) अब रुक नहीं सकता मैं श्रद्धा...
उसने अपनी पंत और अंडरवियर को एक साथ नीचे उतर दिया. जैसे Hi उसने निकाला, उसका 14 इंच का मोटा, लाम्बा और काला लुंड बहार लटकने लगा बिलकुल खड़ा, मोटाई इतनी की श्रद्धा की आँखें फैल गयी.
श्रद्धा: (लुंड को देखते हुए, मैं में) ओह माय गॉड... इतना बड़ा...
उसके देखने भर से Hi श्रद्धा की छूट और ज़्यादा गीली होने लगी. उसमे से रास टपकने लगा.
जेठालाल सोफे पर घुटनो के बल बैठ गया, श्रद्धा की टाँगे चौड़ी करके उसके ड्रेस को ऊपर किया. उसने श्रद्धा की रेड पंतय साइड में की और सीधा मुँह लगा दिया उसकी छूट पर.
जेठालाल: (अपनी जीभ से छूट की लिप्स चाटते हुए) मममहह... कितनी रसीली है तुम्हारी छूट श्रद्धा...

उसने Zor-Zor से चाटना शुरू कर दिया. पहले ऊपर से नीचे तक लम्बी जीभ फेरी, फिर क्लीट को टारगेट किया और उसको चूसने लगा. कभी कभी अंदर जीभ दाल कर अंदर बहार करने लगा.
श्रद्धा: (पीठ को आर्च करते हुए, ज़ोर से सिसकती हुई) ओह्ह्ह फुकक... जेथाः जी... एस्सस... लिखक... चाटू मेरी छुटत... अह्ह्ह... बहुत अच्छा लग रहा है... हआ!!!
श्रद्धा ने अपने दोनों हाथ जेठालाल के सर पर रख कर उसको और ज़ोर से अपनी छूट पर दबाया. उसकी टाँगे काँप रही थी.
श्रद्धा: (मोअन करती हुई, पागल होते हुए) एस जेठा जी... ऐसे Hi... जीभ अंदर डालो... चाटो मेरी गीली छूट को... अह्ह्ह फुककक... कितना मज़ा आ रहा है... मैं तोह पागल हो जाउंगी...
जेठालाल ने स्पीड बढ़ा दी. उसने श्रद्धा की क्लीट को Zor-Zor से चूसना शुरू कर दिया और एक ऊँगली भी अंदर दाल दी. दोनों काम साथ में कर रहा था.
श्रद्धा: (सर पीछे फ़ेंक कर, ज़ोर ज़ोर से) अह्ह्ह... अह्ह्ह... जेथाः जी... और तेज़... चाटो... मैं झड़ने वाली हूँ... हआ... एस्सस... फुककक!!!
कुछ Hi सेकण्ड्स में श्रद्धा का पूरा शरीर एक ज़ोर के झटके के साथ काँप उठा. उसने जेठालाल का सर तिघ्टलय पकड़ लिया और अपनी छूट को उसके मुँह पर ज़ोर से रगड़ते हुए झाड़ गयी.

श्रद्धा: (झड़ते हुए, ख़ुशी से चिल्लाते हुए) आआह्ह्ह्हह... जेथाः जी... मैं आ गयी... अह्हह्ह्ह्ह!!!
उसकी छूट से गहरा रास निकला और जेठालाल के मुँह और दादी पर लग गया. श्रद्धा थोड़ी देर तक कांपती रही, आँखें बंद, मुँह खुला हुआ, पूरा शरीर थका हुआ लेकिन खुश था.
जेठालाल ने उठ कर अपने होंठों को छाता और मुस्कुराते हुए श्रद्धा की तरफ देखा. उसका 14 इंच का लुंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा और तैयार था.
जेठालाल: (लुंड पकड़ कर) अब बताओ भाभी... अगला क्या इनस्टॉल करूँ?
श्रद्धा अभी भी सोफे पर लेती हुई थी, सांस फूल रही थी. उसने आँखें खोली और जेठालाल के 14 इंच के खड़े लुंड को देखा जो अभी भी बिलकुल टाइट और मोटा खड़ा था.
श्रद्धा: (सांस लेते हुए, प्यारी आवाज़ में) आपने तोह मुझे बहुत खुश कर दिया जेठा जी... अब मेरी बारी है. आपकी बारी...
वो सोफे से उठी और जेठालाल के सामने घुटनो के बल बैठ गयी. उसने दोनों हाथों से उसके मोठे लुंड को पकड़ा और थोड़ा ऊपर से नीचे तक सहलाया.
श्रद्धा: (लुंड को देखते हुए, इम्प्रेस्सेड होते हुए) कितना बड़ा और मोटा है... बहुत देर तक खेलने वाला है यह.
उसने अपनी लाल लिप्स खोली और धीरे धीरे जेठालाल के लुंड के सुपडे को मुँह में ले लिया. पहले सिर्फ टोपी को चूसने लगी, फिर धीरे धीरे और गहराई में ले जाने लगी.

जेठालाल: (सांस लेते हुए) उफ्फ्फ्फ़ श्रद्धा भाभी... बहुत अच्छा लग रहा है...
श्रद्धा अब पूरी तरह से लग गयी थी. वो अपना सर Aage-Peeche करते हुए लुंड को चूस रही थी. कभी जीभ से निचे वाले हिस्से को चाट रही थी, कभी Zor-Zor से मुँह चला रही थी.
धीरे धीरे माहौल गरम होता गया. जेठालाल ने अपना हाथ श्रद्धा के बाल में दाल दिया और उसके सर को धीरे धीरे कण्ट्रोल करने लगा.
बिना नोटिस किये Hi ब्लोजॉब फासफूक में बदल गया.
जेठालाल: (सर पकड़ कर) हां... ऐसे Hi... और अंदर लो श्रद्धा भाभी...
श्रद्धा: (मुँह भरे हुए, आवाज़ निकलते हुए) Mmmppphh...glug...glug... Glug...axghh...xggh...coghh....gwakk...gwakk..gwakk...gwakk...axxgh...coxgh...
Gwakk...gwak....aggh...gghj....axgghh....gwak...

अब जेठालाल खड़ा हो गया था और श्रद्धा के मुँह में धक्के मार रहा था. श्रद्धा की आँखों में पानी आ गया था, उसके मुँह के कॉर्नर्स से थूक और प्रेकम की धार बाह रही थी, लेकिन वो रुक नहीं रही थी.
आधे घंटे तक लगातार फासफूक चलता रहा. जेठालाल कभी धीरे, कभी तेज़ धक्के मार रहा था. श्रद्धा का पूरा मुँह उसके लुंड से गीला हो चूका था. उसकी लार उसके चीन पर से टपक रही थी.
Agh...agagsg.....agh..gaha...gah...agh...agh....agh..ahgh...gwakk...xggh...
Vogghh...coghh..xggh...gwakk.agh...coggh...gulppp....aagghhbb....aagaghh....
Xxxghhh....uhhggh...aaaghhv....
Aaagghhb....xxgghh....ggullp....aagghh...guullppp...
Aagghhb....cogghh...coxxgghh...gulppp....gwaakkkhh....huugghh..
लेकिन जेठालाल का माल अभी तक नहीं निकला था. सिर्फ गहरा प्रेकम निकल रहा था जो श्रद्धा के गले तक जा रहा था.
श्रद्धा: (लुंड मुँह से निकाल कर, सांस फूलते हुए, लार के साथ) जेठा जी... आधा घंटा हो गया... इतना मोटा लुंड... इतना स्टैमिना... मेरी तोह गर्दन और मुँह दोनों थक गए हैं... लेकिन आपका अभी तक एक बूँद भी नहीं निकला...
जेठालाल का लुंड अभी भी रॉक हार्ड था और श्रद्धा के थूक और उसके प्रेकम से चमक रहा था. एक गहरी चमकदार लेयर उसके पूरे लुंड पर लगी हुई थी.
जेठालाल: (मुस्कुराते हुए, श्रद्धा के बाल सहलाते हुए) अभी तोह सिर्फ वार्मअप था श्रद्धा भाभी... मैं जल्दी नहीं झाड़ता. अब बताओ... अगला क्या करूँ आपके साथ?
श्रद्धा सांस लेते हुए उसके लुंड को हाथ में पकडे हुए थी, उसके चेहरे पर थकान और एक्ससिटेमेंट का मिश्रण था.
श्रद्धा अभी भी घुटनो के बल बैठी थी, मुँह से लार टपक रही थी. उसने ऊपर देखा, आँखों में पूरी बेचैनी और तड़प थी.
श्रद्धा: (सांस फूलते हुए, गरम आवाज़ में) जेठा जी... वही करो जो करने आये हो... छोड़ो मुझे... ऐसे छोड़ो जैसे कभी किसी ने नहीं छोड़ा... ऐसी चुदाई करो की मैं पोपट जी को बिलकुल भूल जाऊं... भर दो अपने इस बारे और सुडौल लुंड से मेरी छूट को... पूरी तरह भर दो...
यह सुनते Hi जेठालाल की आँखों में एक वाइल्ड चमक आ गयी. उसने तुरंत श्रद्धा को उठाया और सोफे पर लिटाते हुए उसकी टाँगे चौड़ी कर दी.
जेठालाल: (लुंड पकड़ कर उसकी छूट पर रगड़ते हुए) ठीक है श्रद्धा... आज आपकी छूट को मैं अपना बना लूंगा.
उसने अपना 14 इंच का मोटा लुंड श्रद्धा की गीली छूट के मुँह पर सेट किया और एक ज़ोर का धक्का मारा.
श्रद्धा: (ज़ोर से चीख उठते हुए) आआह्ह्हह्ह्ह्ह... जेताआअह जी...!
पूरा सूपड़ा अंदर चला गया. जेठालाल ने रुक कर थोड़ा सा और प्रेशर दिया और Dheere-Dheere अपना मोटा लुंड उसकी टाइट छूट में घुसेड़ने लगा.
श्रद्धा: (टाँगे कांपते हुए, ज़ोर ज़ोर से सिसकती हुई) उफ्फ्फ्फ़... बहुत मोटा है... धीरे... अह्ह्ह... पूरा अंदर जा रहा है... हआ... मर गयी मैं...
जेठालाल ने बिना एक शब्द बोले, सिर्फ गहरी सांस लेते हुए अपना लुंड अंदर धकेल दिया. आधा लुंड अंदर था, फिर एक और ज़ोर का धक्का — पूरा का पूरा 14 इंच श्रद्धा की छूट में उतर गया.

श्रद्धा: (आँखें फैल कर, मुँह खुल कर) आआह्ह्ह फुककक... जेठा जी... मेरी छूट पहात गयी... इतना गहरा... अह्ह्ह्हह!!!
जेठालाल अब बिना कुछ बोले बस धक्के मारने लगा. वह धीरे धीरे लेकिन बहुत गहरे और ज़ोर के धक्के दे रहा था. हर धक्के में उसका मोटा लुंड श्रद्धा की छूट की सबसे गहराई तक जा रहा था.
थप... थप... थप... थप...
श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से सिसकती हुई, हाथों से सोफे को पकड़ते हुए) अहह... अहह... अह्ह्ह... जेठा जी... बहुत मोटा... बहुत गहरा... हआ... छोड़ दो मुझे... और ज़ोर से... अह्ह्ह फुककक...
जेठालाल अभी भी चुप था. उसकी नज़रें श्रद्धा के मुम्मों और उसके चेहरे पर थी. वो सिर्फ अपने लुंड से उसकी छूट की गहराई नाप रहा था हर धक्के में पूरा लुंड अंदर बहार कर रहा था.
थप! थप! थप! थप! थप!
श्रद्धा की छूट अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. हर धक्के के साथ “पूछ पूछ पूछ” की आवाज़ आ रही थी. जेठालाल का मोटा लुंड उसकी छूट को स्ट्रेच किये जा रहा था.
श्रद्धा: (सर पीछे फ़ेंक कर, पागल होते हुए) जेथाः जी... और तेज़... पहाड़ दो मेरी छूट को... हआ... इतना बड़ा लुंड पहली बार फील कर रही हूँ... अह्ह्ह्ह... मत रुको... छोड़ते रहो... मैं आपकी हूँ आज... फुककक में जेठा जी...!!!

जेठालाल ने अब स्पीड थोड़ी बढ़ा दी लेकिन अभी भी वह गहरे और पावरफुल स्ट्रोक्स दे रहा था. उसका पूरा फोकस सिर्फ श्रद्धा की छूट को छोड़ने पर था.
जेठालाल ने श्रद्धा को सोफे पर लिटाये हुए Hi ज़ोर से उठा लिया. उसने सोफे पर बैठ कर श्रद्धा को अपने गॉड में बिठा लिया बिलकुल काउगर्ल पोजीशन में. श्रद्धा की टाँगे दोनों तरफ फैली हुई थी और उसकी छूट जेठालाल के मोठे लुंड के ऊपर थी.
जेठालाल: (लुंड पकड़ कर उसकी छूट में सेट करते हुए) अब खुद बैठ जाओ... पूरा अंदर ले लो.
श्रद्धा ने धीरे से नीचे बैठना शुरू किया. जैसे Hi उसका मोटा 14 इंच का लुंड उसकी छूट में घुसा, श्रद्धा का मुँह खुल गया.
श्रद्धा: (ज़ोर से सिसकती हुई) आआह्ह्हह्ह्ह्ह... जेथाः जी... बहुत गहरा जा रहा है... उफ्फ्फ्फ़!!!

पूरा लुंड अंदर उतर गया. श्रद्धा अब जेठालाल की गॉड में बैठ चुकी थी. उसने अपने दोनों हाथ जेठालाल के कन्धों पर रख कर उसको किश करना शुरू कर दिया.
जेठालाल ने श्रद्धा की कमर पकड़ी और नीचे से Zor-Zor से धक्के मरना शुरू कर दिया.
थप! थप! थप! थप!
श्रद्धा: (किश के बीच ज़ोर ज़ोर से मोअन करती हुई) अहह... अहह... ी लव आईटी जेठा जी... यू अरे ा बस्त्त... फूकिंग मशीन... जेठा जी पलासी फुकक में लिखे थिस अल्वेस... अह्ह्ह...
श्रद्धा: (सांस फूलते हुए, उसकी आँखों में देखते हुए) चम्पक चाचा ने मुझे यहाँ बुला के जो ट्रीट दिलवाई है... क्या Hi कहु मैं... आठ फुकक जेथाः जी... ी लोवी ित्त्त... ी लोवी योररर दिककक... शोवी ित्त्त िन्न्न...!!!
जेठालाल खुश हो गया. उसने श्रद्धा की मोती गांड पर ज़ोर से एक थप्पड़ मारा.

जेठालाल: (हस्ते हुए) लू मेरी श्रद्धा भाभी... आज आपकी छूट को मैं अपना बना देता हूँ!
श्रद्धा : कॉल में श्रद्धा ओनली जेताह जीह भाभी मत बोलूह आह्हः ऑर्डर जब हम ये कर रहे हो तब्ब्ब्ब तूह बिल्कुल भाभी नही I'mm योरर्स ोलीय रिघटत नऊव्व सू फुकक मई लिखी यू फुकककक दया भाभी ाःह हससष फुकक मीठ लिखी यू फुककक अंजली भाभी एष हहह हफहह
जेठालाल हस्ता है और श्रद्धा की गांड पर लगातार थप्पड़ मरने शुरू कर देता है और नीचे से बहुत Zor-Zor से धक्के मरने लगा. हर धक्के में उसका पूरा लुंड श्रद्धा की छूट के अंदर तक जा रहा था.
थप! थप! थप! थप! थप!

श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से सिसकती हुई, गांड हिलाते हुए) अह्ह्ह्ह... हआ... मारो... और थप्पड़ मारो... और ज़ोर से छोड़ो जेठा जी... मेरी छूट आपकी है... पहाड़ दो इसको... अह्ह्ह फुककक... बहुत मज़ा आ रहा है!!!
जेठालाल श्रद्धा को जैम कर छोड़ रहा था. उसकी गॉड में श्रद्धा ऊपर नीचे उछाल रही थी, उसके बड़े मुम्मे जेठालाल के मुँह के सामने हिल रहे थे. जेठालाल कभी उनको चूस रहा था, कभी गांड पर थप्पड़ मार रहा था.
जेठालाल: (तेज़ धक्के मरते हुए) लो... लूओ श्रद्धा... आज से तुममम मेरी पर्सनल छूट बन गयी... जब मैं करेगा, आऊंगा और छोडूंगा तुम्हे!
श्रद्धा: (पूरा पागल होते हुए, किश करते हुए) हां... हां... जब मर्ज़ी आओ... मेरी छूट हमेशा आपके लुंड के लिए खुली रहेगी... अह्ह्ह... और ज़ोर से... और ज़ोर से जेठा जी... फ़क में हर्डर!!!
दोनों का पेस बहुत तेज़ हो चूका था. रूम में सिर्फ Thap-Thap की आवाज़ें और श्रद्धा की सिसकियाँ गूज रही थी.
श्रद्धा जेठालाल की गॉड में ऊपर नीचे उछाल रही थी. उसकी छूट पूरी तरह से स्ट्रेच हो चुकी थी. उसका चेहरा लाल हो गया था और आँखें बंद थी.
श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से सिसकती हुई) जेथाः जी... मैं... मैं झड़ने वाली हूँ... अह्ह्ह... बहुत तेज़ आ रहा है... हआ!!!

लेकिन जेठालाल ने अपने धक्के बिलकुल नहीं रोके. वह और भी ज़ोर से नीचे से धक्के मरने लगा.
जेठालाल: (गरम आवाज़ में) झाड़ जाओ श्रद्धा... झाड़ जाओ... मैं नहीं रुकने वाला...
श्रद्धा का शरीर एक ज़ोर के झटके के साथ कांपने लगा. उसने जेठालाल के कंधे को तिघ्टलय पकड़ लिया और ज़ोर से चीख उत्तरी.
श्रद्धा: (झड़ते हुए) आआह्ह्हह्ह्ह्ह... जेताआअह जी... मैं आ गयी... अह्ह्ह्हह फुककक!!!
उसकी छूट से गहरा रास निकल कर जेठालाल के लुंड और बॉल्स पर बहने लगा. लेकिन जेठालाल ने उसको झड़ने का मौका भी पूरा नहीं दिया और तुरंत उसको घुमा दिया.
उसने श्रद्धा को उठा कर रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में बैठा दिया. अब श्रद्धा की पीठ जेठालाल की तरफ थी और उसकी गांड उसके सामने थी.
जेठालाल ने तुरंत अपना लुंड उसकी छूट में दोबारा घुसेड़ दिया और Zor-Zor से धक्के मरने लगा.
थप! थप! थप! थप! थप!
श्रद्धा: आआह्ह्ह... जेठा जी... अभी भी अंदर दाल रहे हो... मेरी छूट अभी भी कांपते जा रही है... अह्ह्ह्हह!!!

वो अपनी छूट को सहलाने लगी. एक हाथ से अपनी क्लीट को तेज़ तेज़ रगड़ने लगी जबकि जेठालाल नीचे से उसकी गांड पकड़ कर बहुत तेज़ धक्के मार रहा था.
श्रद्धा: (चीखते हुए, सर पीछे फ़ेंक कर) ओह्ह्ह फुककक... जेथाः जी... बहुत ज़ोर से... मेरी छूट पहात जाएगी... हआ... और तेज़... और तेज़ छोड़िये... अह्ह्ह... मैं फिर से झड़ने वाली हूँ...!!!
जेठालाल ने श्रद्धा की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और मशीन की तरह धक्के मरने लगा. हर धक्के में उसका पूरा 14 इंच का लुंड श्रद्धा की छूट के अंदर तक जा रहा था.
थप! थप! थप! थप!
श्रद्धा: (अपनी क्लीट रगड़ते हुए, बिलकुल पागल होते हुए) आआह्ह्ह... हआ... फ़क में जेठा जी... पहाड़ दो मेरी छूट को... और ज़ोर से... मैं तोह मर जाउंगी आज... अह्ह्ह्हह!!!
जेठालाल श्रद्धा की गांड पर थप्पड़ मार रहा था और Zor-Zor से छोड़ रहा था. श्रद्धा का शरीर काँप रहा था और वो लगातार चीख रही थी.
जेठालाल अब बिलकुल चुप हो चूका था. कोई बात नहीं, कोई आवाज़ नहीं — सिर्फ उसके गहरे और ज़ोर के धक्के. वो श्रद्धा को रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में पकडे हुए था और मशीन की तरह छोड़ रहा था.
थप! थप! थप! थप! थप! थप!
हर धक्का इतना ज़ोर का था की श्रद्धा की गांड Zor-Zor से उछाल रही थी. जेठालाल का 14 इंच का मोटा लुंड Baar-Baar उसकी छूट की सबसे गहराई तक जा रहा था.

श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से चीखते हुए) आआह्ह्ह... जेथाः जी... अह्ह्ह्हह... बहुत ज़ोर से... हआ... मर रही हूँ... अह्ह्ह फुककक!!!
वो अपनी छूट को एक हाथ से सहलाती रही, दूसरे हाथ से सोफे को पकडे हुए थी. उसकी आँखें बंद थी और मुँह से सिर्फ सिसकियाँ और चीखें निकल रही थी.
जेठालाल ने उसकी कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया और स्पीड बढ़ा दी. अब उसके धक्के और भी गहरे और तेज़ी से पड़ने लगे थे.
श्रद्धा: (पूरा कांपती हुई) आआह्ह्ह... फिर से... फिर से आ रहा है... जेथाः जी... मैं फिर से झड़ने वाली हूँ... अह्ह्ह्हह!!!
श्रद्धा का दूसरा ओर्गास्म इतना तेज़ आया की उसका पूरा शरीर एकदम से टाइट हो गया. उसने सर पीछे फेंका और ज़ोर से चीख मरी.
श्रद्धा: (झड़ते हुए, चीखते हुए) आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह... जेताआअह जी... मैं आ गयी... फिर से आ गयी... अह्ह्ह्हह फुककक... मेरी छूट पहात गयी... हआ!!!
उसकी छूट से फिर से गहरा रास निकल कर जेठालाल के लुंड पर बहने लगा. लेकिन जेठालाल ने अब भी अपने धक्के नहीं रोके. वो बिना एक शब्द बोले कन्टिन्यूसली छोड़ता रहा.
श्रद्धा: (थकान और मस्ती के साथ, Ruk-Ruk कर बोलते हुए) आपका... लुंड... मेरी छूट की गहरी खुदाई कर रहा है जेथाः जजीह... बस छोड़ते रहो... रुकनाः मट्ठ... प्लीज रुकना मत... अह्ह्ह... छोड़ते रहो मुझे... जितना मर्ज़ी छोड़ दो आज... हआ... मैं आपकी हूँ...!!!

जेठालाल ने जवाब में सिर्फ श्रद्धा की गांड पर एक और ज़ोर का थप्पड़ मारा और अपने धक्कों की रफ़्तार और बढ़ा दी. रूम में सिर्फ उनके शरीर के टकराने की “Thap-Thap-Thap” आवाज़ें और श्रद्धा की चीखें गूज रही थी.
श्रद्धा अब बिलकुल टूट चुकी थी, लेकिन उसके मुँह से बस सिसकियाँ निकल रही थी और छोड़ने की भीख.
जेठालाल श्रद्धा को जैम कर छोड़ रहा था. श्रद्धा की छूट एक बार फिर जेठालाल के मोठे लुंड के Ird-Gird कास कर घेर रही थी.
जेठालाल: (तेज़ धक्के मरते हुए) श्रद्धा... तेरी छूट मेरे लुंड को बहुत ज़ोर से जकड रही है... बहुत गरम है... मैं झाड़ जाऊँगा!
श्रद्धा: (चीखते हुए, तड़पते हुए) झाड़ो जेठआठ बेबी... झाडूह... मेरे फसे पीए झाडूह पलासी... येसशः... हहह... आह्ह्ह्ह!!!
घडी की सुई 10 बज चुकी थी.
इधर पोपटलाल अपना छाता हाथ में हिलाते हुए सोसाइटी कंपाउंड की तरफ बढ़ रहा था. तभी अब्दुल ने उसको रोक लिया और कुछ बातें करने लगा.
उधर जेठालाल श्रद्धा को घुमा कर Zor-Zor से छोड़ रहा था. उसने श्रद्धा की गांड को ऊपर उठा कर बहुत तेज़ धक्के दे रहा था.
श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से चीखते हुए) आआह्ह्ह... जेथाः जी... हआ... और ज़ोर से... अह्ह्ह्हह!!!
तभी पोपटलाल सीढ़ियां चढ़ रहा था. श्रद्धा जोरो से चीखते हुए फिर से झड़ने लगी. जेठालाल ने भी अपने माल की पिचकारी उसकी छूट में Hi छोड़ दी.

जेठालाल: (ज़ोर से गरजते हुए) ले श्रद्धा... आअह्ह्ह्हह!!!
वही पोपटलाल ने घर की चाभी निकाल ली और मैं गेट खोलने लगा. तभी उसको याद आया की उसकी एक खूबसूरत सी बीवी उसका इंतज़ार कर रही है.
पोपटलाल: (खुद से मुस्कुराते हुए) क्या यार पोपटलाल तुम भी न... कैसे भूल गए की अब तुम्हारी शादी हो चुकी है.
उसने चाभी पॉकेट में दाल दी और दुर्बल बजा दी. चेहरे पर ख़ुशी की लहार थी.
दरवाज़ा खुला.
पोपटलाल: (प्यार से) Hello मेरी जाने मैं... मैं घर आ गया!
सामने से जेठालाल बोलै —
जेठालाल: तो मैं क्या करूँ?
पोपटलाल: (शॉक हो कर) J..j..jethalal?! तुम यहाँ क्या कर रहे हो?!
तभी पीछे से श्रद्धा पूरे कपडे पेहेन कर आयी और मुस्कुराते हुए बोली.
श्रद्धा: आप आ गए? आइये अंदर आइये.
पोपटलाल अंदर आया और फिर से जेठालाल से पुछा.
पोपटलाल: तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
श्रद्धा: (जल्दी से उसका हाथ पकड़ कर टीवी के सामने ले जाते हुए) जेठा भाई इसके लिए यहाँ आये थे.
पोपटलाल ने नया बड़ा टीवी देखा और शॉक हो गया.
पोपटलाल: श्रद्धा ये टीवी?
श्रद्धा: तुम तोह पूरा दिन ऑफिस चले जाते हो और मैं घर पे अकेली बोर हो जाती हु. इसलिए मैंने सोचा क्यों न एक टीवी Hi खरीद लू एंटरटेनमेंट के लिए.
पोपटलाल: अच्छा किया श्रद्धा... लेकिन ये टीवी कितने का है?
जेठालाल: सिर्फ 55,000.
पोपटलाल: (आँखें पहाड़ कर) क्याआ?! कैंसिल भाई कैंसिल! इतना मेहेंगा टीवी? कैंसिल करो, बेचना!
श्रद्धा: ये टीवी मैंने अपने एंटरटेनमेंट के लिए नहीं बल्कि हमारे एंटरटेनमेंट के लिए लिया है. रात को इस्पे फिफ्टी शेड्स देखने में बहुत मज़ा आएगा.
यह सुनते Hi पोपटलाल के मुँह में निखार आ गया. उसने तुरंत श्रद्धा को हुग कर लिया.
जेठालाल: (शर्मा कर खासते हुए) ठीक है... तोह अब मैं चलता हु. चाय के लिए थैंक्यू श्रद्धा भाभी.
श्रद्धा: (मुस्कुराते हुए) कोई बात नहीं जेठा भाई... दुबारा आना.
जेठालाल वहां से निकल गया.
जैसे Hi दरवाज़ा बंद हुआ, पोपटलाल ने श्रद्धा को तिघ्टलय हुग कर लिया. श्रद्धा ने भी उसको गले लगाया. उसने अभी तक पंतय नहीं पहनी थी. जेठालाल का मोटा माल अभी भी उसकी छूट में भरा हुआ था और Dheere-Dheere उसकी जांघों के बीच से टपक रहा था.
और इसी के साथ हमारा ये अपडेट ख़तम हो जाता है उम्म्द करता हु आपको ये अपडेट पसंद आया होगा अगर हां तो जल्दी से लिखे और कमैंट्स कर दो यारो और अपना प्यार बरसाओ पलासी सुप्पोर्टट दिखाओ यारूओ
शाम हो चुकी थी. जेठालाल और तारक टहलते हुए सोसाइटी कंपाउंड के अंदर आ रहे थे. दोनों आपस में बातें कर रहे थे.
तारक: (मुस्कुराते हुए) जेठालाल, मेरे आईडिया के बारे में जरूर सोचना. एक तरय तोह बनता है यार. बहुत मज़ा आएगा.
जेठालाल: (हस्ते हुए, थोड़ा एक्ससिटेड) हाँ जरूर मेहता साहब! उसमे तोह बहुत मज़ा आएगा. लेकिन अभी थोड़ा ऊपर मज़े ले लू... फिर बाद में सोचेंगे आपके आईडिया के बारे में.
तारक ज़ोर से है पड़ा.
तारक: (टांग खींचते हुए) सही जा रहे हो भाई! चलो मैं चलता हूँ. लेकिन ध्यान देना... ये पोपटलाल बहुत पोपट आदमी है. वो करे तोह सही, और हम करें तोह गलत. बहुत ध्यान से काम करना.
जेठालाल: (बड़ी बेशर्मी से) अरे क्या आप भी मेहता साहब! पोपट से कौन डरेगा? अगर वो आया तोह बोल दूंगा “तू भी जा कर किसी और के साथ कर ले... आखिर रोका किसने है?”
तभी उनके पीछे से एक भारी आवाज़ आयी.
हाथी: (ज़ोर से) सही बात है जेठालाल भाई!
जेठालाल और तारक दोनों चौंक कर पीछे मुड़े. हाथी वहां खड़ा मुस्कुराता हुआ उन्हें देख रहा था.
दोनों एक दूसरे को देखते हुए ज़ोर से है पड़े.
जेठालाल: (हस्ते हुए) अरे हाथी भाई आप यहाँ? ठीक है... मैं अब चलता हूँ. काम है ऊपर.
तारक: (मुस्कुराते हुए) हाँ हाँ... “काम” बहुत इम्पोर्टेन्ट है. एन्जॉय करना!
जेठालाल ने तारक और हाथी को हाथ हिला कर Bye बोलै और सीधा स विंग की तरफ बढ़ गया. उसके हाथ में एक छोटा टूल बैग था और उसके पीछे एक वर्कर टीवी लेकर आ रहा था.
जेठालाल के चेहरे पर एक अलग Hi चमक थी. उसके दिमाग में श्रद्धा की वह प्यारी स्माइल और उसके शरीर का ख्याल घूम रहा था.
जेठालाल: (खुद से धीरे से) आज श्रद्धा भाभी के हाथ की चाय भी पीनी है और... और भी कुछ मज़े लेने हैं.
तारक और हाथी बातें करते हुए आगे बढ़ रहे थे.
तारक: हाथी भाई, आज कल सोसाइटी में हवा Hi कुछ अलग है लग रही है...
तभी उनकी नज़र जेठालाल के घर की सीढ़ियों से उतारते हुए िएर पर पड़ी. िएर ख़ुशी से मुस्कुराते हुए आ रहा था, चेहरा लाल और पूरा सटिस्फीएड दिखाई दे रहा था.
तारक: (िएर को रोक कर) अरे िएर साहब! रुको रुको... आज इतना खिल खिला क्यों रहे हो? क्या बात है? ऐसा क्या कर लिया?
िएर: (बड़ी मुस्कराहट के साथ) खिलूँगा Hi न मेहता साहब... एक के बाद एक छूट चखने को मिल गयी आज. दिल खुश हो गया!
तारक: (इंटरेस्टिंग होते हुए) अच्छा जी? किसकी किसकी?
िएर: (गर्व से) पहले माधवी भाभी की... बहुत टाइट और रसीली थी. उसके बाद सीधा दया भाभी की. और दया भाभी की लेने में तोह बहुत मज़ा आ गया यार... क्या चीज़ है!
हाथी: (हस्ते हुए) ये सही कहा िएर भाई! दया भाभी की लेने में बहुत मज़ा आता है. जेठा भाई ने उसको बहुत अच्छे से ट्रैन कर रखा है.
िएर: (सर हिलाते हुए) नहीं नहीं हाथी भाई, मुझे नहीं लगता जेठालाल ने ट्रैन किया है. दया भाभी खुद काफी एक्सपेरिएंस्ड लगती हैं. जैसे प्रोफेशनल हो...
तारक ने िएर के चेहरे का एक्सप्रेशन नोटिस किया और कुछ मैं में सोचने लगा.
तारक (मैं में): ाचा जी
हाथी : क्यों
िएर : क्यों क्या जेठालाल को देख कर आपको लगता है की उसको सेक्स के बारे में इतना कुछ पता होगा
हाथी : वो तो मई कह नहीं सकता लेकिन जब भी ग्रुप में देखता हु समझ जाता हु जेठा भाई में कुछ तो ख़ास है जो वो सब को पसंद आते है
िएर : लेकिन उसने अबतक रोशन भाभी को नहीं छोड़ा
हाथी : जो भी हो लेकिन सब मर्दो में वही टॉप पर है जो किसी दूसरी तरफ Hi इशारा कर रही है
िएर : जो भी हो हाथी भाई लेकिन ये कम्पटीशन में मई उसे जीतने नहीं दूंगा
तारक : पहले कम्पटीशन तो सुरु होने दो िएर बॉस चलो अब घर जाओ वैसे भी लगातार सेक्स कर के थक गए होंगे जाओ आराम कर लो
हाथी (मुस्कुराते हुए) : सही बात है जाओ िएर भाई रेस्ट करो और कुछ काम हो तो बताना
और िएर वह से चल देता है
हाथी : बाकी मेहता साहब मई सोच रहा था की आपने अबतक कोमल के साथ सेक्स नहीं किया तो क्यों न आज रात थोड़ा कोमल के मसालेदार खाने का लुत्फ़ उठा लो
तारक : अरे हाथी भाई नेकी और भूख भूख अभी जाता हु आपके घर
हाथी : अब आप मेरे घर जा Hi रहे हो तो क्यों न मई आपके घर चला जाओ
तारक : हां हां क्यों नहीं बस ध्यान से जाना
और हाथी तारक के हाथ में एक पुरिया डालते हुए कहते है "ये लो वो दवाई है देख रहहु कोमल के बारे में कुछ काम मेस्सगेस आ रहे है ग्रुप में तो ये दवाई उसके जूस में मिला देना कैसे भी और मज़े करो
और दोनों एक दुसरे की पीठ Thap-Thapa कर एक दुसरे के घर की तरफ चल देते है
सन कट होता है
सीढ़ियों पर जेठालाल टीवी इनस्टॉल करने के लिए टूल्स ले कर सीढ़ियां चढ़ रहा था. तभी नीचे से भिड़े उतरता हुआ मिला. भिड़े का चेहरा भी थोड़ा लाल और सटिस्फीएड था.
जेठालाल: अरे भिड़े! कहाँ से आ रहा है इतनी शाम को?
भिड़े: (थोड़ा शर्माते हुए लेकिन खुश) अरे जेठालाल... मैं तोह... िएर के घर गया था. वहां बबिता को... छोड़ आया हूँ भाई. बहुत मज़ा आया.
जेठालाल: (हस्ते हुए) वह वह! तू भी शुरू हो गया? मैं तोह अब पोपटलाल के घर जा रहा हूँ... श्रद्धा भाभी के पास. टीवी इनस्टॉल करने का बहाना है... और उसके साथ मज़े भी लेने हैं.
भिड़े: (शॉक हो कर) क्या?! श्रद्धा भाभी के पास?!
भिड़े ने जल्दी से अपना फ़ोन निकाला और ग्रुप चाट खोला. उसने जेठालाल को स्क्रीन दिखाया.
ग्रुप मैसेज बी िएर (अभी डाला हुआ):
" आज डबल माल चख लिया. पहले माधवी, फिर दया. दया की छूट स्वर्ग है भाई लोग
जेठालाल मैसेज पढ़ कर ज़ोर से है पड़ा.
जेठालाल: (खुश होते हुए) अरे वाह! सब लोग मज़े ले रहे हैं. यह सही है यार... सोसाइटी में रंग आ गया है!
भिड़े थोड़ा शॉक था. उसने फ़ोन वापस जेब में रखा और मुस्कुराने की कोशिश की.
भिड़े: हाँ... ठीक है. मैं चलता हूँ. तुम अपना काम करो.
भिड़े वहां से जल्दी से निकल गया, थोड़ा सोचता हुआ.
जेठालाल मुस्कुराता हुआ श्रद्धा के फ्लैट की तरफ सीढ़ियां चढ़ने लगा.
शाम - पोपटलाल के घर
जेठालाल टीवी का टूल बैग और एक छोटा बुके लेकर श्रद्धा के फ्लैट के दरवाज़े पर पहुंचा. जैसे Hi उसने दुर्बल बजायी, दरवाज़ा खुला.
श्रद्धा ने एक डीप रेड, Off-Shoulder ड्रेस पहना हुआ था. ड्रेस इतना टाइट और Low-Cut था की उसके दोनों बड़े, गोल बूब्स काम से काम 90% बहार दिखाई दे रहे थे. क्लीवेज बहुत गहरी और टेम्पटिंग थी.

जेठालाल की आँखें फैल गयी. उसके मुँह में पानी आ गया.
जेठालाल: (घूरते हुए) वहहह श्रद्धा भाभी... यह क्या पहन रखा है आज?
श्रद्धा ने शरमाते हुए मुस्कुराया और तुरंत उसके कुर्ते के कालर को पकड़ कर अंदर की तरफ खींच लिया. जैसे Hi जेठालाल अंदर आया, उसने दरवाज़ा बंद किया और उसको गेट से चिपका कर ज़ोर से किश करने लगी.
श्रद्धा: (उसके होंठों को चूसते हुए) मममहह...

जेठालाल: (किश के बीच) श्रद्धा भाभी, टीवी इनस्टॉल नहीं करवाएगी क्या?
श्रद्धा: (किश तोड़ कर, उसकी आँखों में देखते हुए, सेडक्टिव आवाज़ में) खुद को मेरे दिल में इनस्टॉल कर लिया... इतना काफी नहीं है क्या जेठालाल भाई?
जेठालाल का गाला बिलकुल सूख गया. उसके लुंड ने तुरंत खड़ा होने का सिग्नल दे दिया.
जेठालाल: (गरम सांस लेते हुए) हां... मैं तोह भूल Hi गया था. बाघा ने दोपहर में Hi टीवी इनस्टॉल कर दिया होगा न? मैं तोह कुछ और इनस्टॉल करने आया हूँ आज...
इतना कहकर जेठालाल ने श्रद्धा की कमर को दोनों हाथों से पकड़ा, उसको घुमा दिया और गेट से चिपका दिया. अब श्रद्धा की पीठ गेट से लगी हुई थी और जेठालाल उसके सामने खड़ा था.
उसने तुरंत श्रद्धा के होंठों को अपने मुँह में ले लिया और Zor-Zor से किश करने लगा. उसके नीचे वाले लिप को हलके से काटने लगा.
श्रद्धा: (थोड़ी सी सिहरती हुई) ुफ़्फ़ःह... जेठालाल भाई...

श्रद्धा ने धीरे धीरे अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाय और जेठालाल के पंत के ऊपर से उसके लुंड पर रख दिया.
जैसे Hi उसका हाथ लुंड को टच किया, श्रद्धा की आँखें बड़ी हो गयी. वो मैं में सोचने लगी
श्रद्धा (मैं में): कितना बड़ा और मोटा है ये... उफ़...
लुंड इतना सख्त और बड़ा था की उसका हाथ पूरा नहीं भर रहा था.
दोनों फिर से गहरे किश में लग गए. जेठालाल का एक हाथ श्रद्धा के बूब्स पर पहुँच गया. उसने ड्रेस के ऊपर से Hi उसके बड़े मुम्मे को Halke-Halke मसलने शुरू कर दिया. उँगलियों से उसके निप्पल को दबाने लगा.
श्रद्धा: (किश के बीच मोअन करते हुए) मममहह... अह्ह्ह... जेठालाल भाई... धीरे... उफ्फ्फ्फ़...
जेठालाल ने दूसरे हाथ से भी उसके दूसरे बूब को पकड़ लिया और दोनों मुम्मों को Zor-Zor से मसलने लगा. श्रद्धा की सांसें तेज़ हो गयी थी. वो अभी भी गेट से चिपकी हुई थी और जेठालाल के लुंड को पंत के ऊपर से सेहला रही थी.
जेठालाल: (उसके गले को चूसते हुए) श्रद्धा... तेरे यह बूब्स देख कर Hi मेरा लुंड फाड़ने को हो रहा है...
श्रद्धा: (सांस फूलते हुए, मोअन करती हुई) तो पहाड़ दो न... आज पूरा कण्ट्रोल आपके हाथ में है...
दोनों अभी भी गेट के पास Khade-Khade एक दुसरे को किश और टच कर रहे थे. माहौल गरम होता जा रहा था.
जेठालाल ने श्रद्धा को गेट से चिपके हुए Hi कमर से उठा लिया और सोफे की तरफ ले गया. उसने श्रद्धा को सोफे पर धीरे से लिटाते हुए उसके ऊपर झुक कर एक और गहरा किश किया.
जेठालाल: (उसकी आँखों में देखते हुए) अब रुक नहीं सकता मैं श्रद्धा...
उसने अपनी पंत और अंडरवियर को एक साथ नीचे उतर दिया. जैसे Hi उसने निकाला, उसका 14 इंच का मोटा, लाम्बा और काला लुंड बहार लटकने लगा बिलकुल खड़ा, मोटाई इतनी की श्रद्धा की आँखें फैल गयी.
श्रद्धा: (लुंड को देखते हुए, मैं में) ओह माय गॉड... इतना बड़ा...
उसके देखने भर से Hi श्रद्धा की छूट और ज़्यादा गीली होने लगी. उसमे से रास टपकने लगा.
जेठालाल सोफे पर घुटनो के बल बैठ गया, श्रद्धा की टाँगे चौड़ी करके उसके ड्रेस को ऊपर किया. उसने श्रद्धा की रेड पंतय साइड में की और सीधा मुँह लगा दिया उसकी छूट पर.
जेठालाल: (अपनी जीभ से छूट की लिप्स चाटते हुए) मममहह... कितनी रसीली है तुम्हारी छूट श्रद्धा...

उसने Zor-Zor से चाटना शुरू कर दिया. पहले ऊपर से नीचे तक लम्बी जीभ फेरी, फिर क्लीट को टारगेट किया और उसको चूसने लगा. कभी कभी अंदर जीभ दाल कर अंदर बहार करने लगा.
श्रद्धा: (पीठ को आर्च करते हुए, ज़ोर से सिसकती हुई) ओह्ह्ह फुकक... जेथाः जी... एस्सस... लिखक... चाटू मेरी छुटत... अह्ह्ह... बहुत अच्छा लग रहा है... हआ!!!
श्रद्धा ने अपने दोनों हाथ जेठालाल के सर पर रख कर उसको और ज़ोर से अपनी छूट पर दबाया. उसकी टाँगे काँप रही थी.
श्रद्धा: (मोअन करती हुई, पागल होते हुए) एस जेठा जी... ऐसे Hi... जीभ अंदर डालो... चाटो मेरी गीली छूट को... अह्ह्ह फुककक... कितना मज़ा आ रहा है... मैं तोह पागल हो जाउंगी...
जेठालाल ने स्पीड बढ़ा दी. उसने श्रद्धा की क्लीट को Zor-Zor से चूसना शुरू कर दिया और एक ऊँगली भी अंदर दाल दी. दोनों काम साथ में कर रहा था.
श्रद्धा: (सर पीछे फ़ेंक कर, ज़ोर ज़ोर से) अह्ह्ह... अह्ह्ह... जेथाः जी... और तेज़... चाटो... मैं झड़ने वाली हूँ... हआ... एस्सस... फुककक!!!
कुछ Hi सेकण्ड्स में श्रद्धा का पूरा शरीर एक ज़ोर के झटके के साथ काँप उठा. उसने जेठालाल का सर तिघ्टलय पकड़ लिया और अपनी छूट को उसके मुँह पर ज़ोर से रगड़ते हुए झाड़ गयी.

श्रद्धा: (झड़ते हुए, ख़ुशी से चिल्लाते हुए) आआह्ह्ह्हह... जेथाः जी... मैं आ गयी... अह्हह्ह्ह्ह!!!
उसकी छूट से गहरा रास निकला और जेठालाल के मुँह और दादी पर लग गया. श्रद्धा थोड़ी देर तक कांपती रही, आँखें बंद, मुँह खुला हुआ, पूरा शरीर थका हुआ लेकिन खुश था.
जेठालाल ने उठ कर अपने होंठों को छाता और मुस्कुराते हुए श्रद्धा की तरफ देखा. उसका 14 इंच का लुंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा और तैयार था.
जेठालाल: (लुंड पकड़ कर) अब बताओ भाभी... अगला क्या इनस्टॉल करूँ?
श्रद्धा अभी भी सोफे पर लेती हुई थी, सांस फूल रही थी. उसने आँखें खोली और जेठालाल के 14 इंच के खड़े लुंड को देखा जो अभी भी बिलकुल टाइट और मोटा खड़ा था.
श्रद्धा: (सांस लेते हुए, प्यारी आवाज़ में) आपने तोह मुझे बहुत खुश कर दिया जेठा जी... अब मेरी बारी है. आपकी बारी...
वो सोफे से उठी और जेठालाल के सामने घुटनो के बल बैठ गयी. उसने दोनों हाथों से उसके मोठे लुंड को पकड़ा और थोड़ा ऊपर से नीचे तक सहलाया.
श्रद्धा: (लुंड को देखते हुए, इम्प्रेस्सेड होते हुए) कितना बड़ा और मोटा है... बहुत देर तक खेलने वाला है यह.
उसने अपनी लाल लिप्स खोली और धीरे धीरे जेठालाल के लुंड के सुपडे को मुँह में ले लिया. पहले सिर्फ टोपी को चूसने लगी, फिर धीरे धीरे और गहराई में ले जाने लगी.

जेठालाल: (सांस लेते हुए) उफ्फ्फ्फ़ श्रद्धा भाभी... बहुत अच्छा लग रहा है...
श्रद्धा अब पूरी तरह से लग गयी थी. वो अपना सर Aage-Peeche करते हुए लुंड को चूस रही थी. कभी जीभ से निचे वाले हिस्से को चाट रही थी, कभी Zor-Zor से मुँह चला रही थी.
धीरे धीरे माहौल गरम होता गया. जेठालाल ने अपना हाथ श्रद्धा के बाल में दाल दिया और उसके सर को धीरे धीरे कण्ट्रोल करने लगा.
बिना नोटिस किये Hi ब्लोजॉब फासफूक में बदल गया.
जेठालाल: (सर पकड़ कर) हां... ऐसे Hi... और अंदर लो श्रद्धा भाभी...
श्रद्धा: (मुँह भरे हुए, आवाज़ निकलते हुए) Mmmppphh...glug...glug... Glug...axghh...xggh...coghh....gwakk...gwakk..gwakk...gwakk...axxgh...coxgh...
Gwakk...gwak....aggh...gghj....axgghh....gwak...

अब जेठालाल खड़ा हो गया था और श्रद्धा के मुँह में धक्के मार रहा था. श्रद्धा की आँखों में पानी आ गया था, उसके मुँह के कॉर्नर्स से थूक और प्रेकम की धार बाह रही थी, लेकिन वो रुक नहीं रही थी.
आधे घंटे तक लगातार फासफूक चलता रहा. जेठालाल कभी धीरे, कभी तेज़ धक्के मार रहा था. श्रद्धा का पूरा मुँह उसके लुंड से गीला हो चूका था. उसकी लार उसके चीन पर से टपक रही थी.
Agh...agagsg.....agh..gaha...gah...agh...agh....agh..ahgh...gwakk...xggh...
Vogghh...coghh..xggh...gwakk.agh...coggh...gulppp....aagghhbb....aagaghh....
Xxxghhh....uhhggh...aaaghhv....
Aaagghhb....xxgghh....ggullp....aagghh...guullppp...
Aagghhb....cogghh...coxxgghh...gulppp....gwaakkkhh....huugghh..
लेकिन जेठालाल का माल अभी तक नहीं निकला था. सिर्फ गहरा प्रेकम निकल रहा था जो श्रद्धा के गले तक जा रहा था.
श्रद्धा: (लुंड मुँह से निकाल कर, सांस फूलते हुए, लार के साथ) जेठा जी... आधा घंटा हो गया... इतना मोटा लुंड... इतना स्टैमिना... मेरी तोह गर्दन और मुँह दोनों थक गए हैं... लेकिन आपका अभी तक एक बूँद भी नहीं निकला...
जेठालाल का लुंड अभी भी रॉक हार्ड था और श्रद्धा के थूक और उसके प्रेकम से चमक रहा था. एक गहरी चमकदार लेयर उसके पूरे लुंड पर लगी हुई थी.
जेठालाल: (मुस्कुराते हुए, श्रद्धा के बाल सहलाते हुए) अभी तोह सिर्फ वार्मअप था श्रद्धा भाभी... मैं जल्दी नहीं झाड़ता. अब बताओ... अगला क्या करूँ आपके साथ?
श्रद्धा सांस लेते हुए उसके लुंड को हाथ में पकडे हुए थी, उसके चेहरे पर थकान और एक्ससिटेमेंट का मिश्रण था.
श्रद्धा अभी भी घुटनो के बल बैठी थी, मुँह से लार टपक रही थी. उसने ऊपर देखा, आँखों में पूरी बेचैनी और तड़प थी.
श्रद्धा: (सांस फूलते हुए, गरम आवाज़ में) जेठा जी... वही करो जो करने आये हो... छोड़ो मुझे... ऐसे छोड़ो जैसे कभी किसी ने नहीं छोड़ा... ऐसी चुदाई करो की मैं पोपट जी को बिलकुल भूल जाऊं... भर दो अपने इस बारे और सुडौल लुंड से मेरी छूट को... पूरी तरह भर दो...
यह सुनते Hi जेठालाल की आँखों में एक वाइल्ड चमक आ गयी. उसने तुरंत श्रद्धा को उठाया और सोफे पर लिटाते हुए उसकी टाँगे चौड़ी कर दी.
जेठालाल: (लुंड पकड़ कर उसकी छूट पर रगड़ते हुए) ठीक है श्रद्धा... आज आपकी छूट को मैं अपना बना लूंगा.
उसने अपना 14 इंच का मोटा लुंड श्रद्धा की गीली छूट के मुँह पर सेट किया और एक ज़ोर का धक्का मारा.
श्रद्धा: (ज़ोर से चीख उठते हुए) आआह्ह्हह्ह्ह्ह... जेताआअह जी...!
पूरा सूपड़ा अंदर चला गया. जेठालाल ने रुक कर थोड़ा सा और प्रेशर दिया और Dheere-Dheere अपना मोटा लुंड उसकी टाइट छूट में घुसेड़ने लगा.
श्रद्धा: (टाँगे कांपते हुए, ज़ोर ज़ोर से सिसकती हुई) उफ्फ्फ्फ़... बहुत मोटा है... धीरे... अह्ह्ह... पूरा अंदर जा रहा है... हआ... मर गयी मैं...
जेठालाल ने बिना एक शब्द बोले, सिर्फ गहरी सांस लेते हुए अपना लुंड अंदर धकेल दिया. आधा लुंड अंदर था, फिर एक और ज़ोर का धक्का — पूरा का पूरा 14 इंच श्रद्धा की छूट में उतर गया.

श्रद्धा: (आँखें फैल कर, मुँह खुल कर) आआह्ह्ह फुककक... जेठा जी... मेरी छूट पहात गयी... इतना गहरा... अह्ह्ह्हह!!!
जेठालाल अब बिना कुछ बोले बस धक्के मारने लगा. वह धीरे धीरे लेकिन बहुत गहरे और ज़ोर के धक्के दे रहा था. हर धक्के में उसका मोटा लुंड श्रद्धा की छूट की सबसे गहराई तक जा रहा था.
थप... थप... थप... थप...
श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से सिसकती हुई, हाथों से सोफे को पकड़ते हुए) अहह... अहह... अह्ह्ह... जेठा जी... बहुत मोटा... बहुत गहरा... हआ... छोड़ दो मुझे... और ज़ोर से... अह्ह्ह फुककक...
जेठालाल अभी भी चुप था. उसकी नज़रें श्रद्धा के मुम्मों और उसके चेहरे पर थी. वो सिर्फ अपने लुंड से उसकी छूट की गहराई नाप रहा था हर धक्के में पूरा लुंड अंदर बहार कर रहा था.
थप! थप! थप! थप! थप!
श्रद्धा की छूट अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. हर धक्के के साथ “पूछ पूछ पूछ” की आवाज़ आ रही थी. जेठालाल का मोटा लुंड उसकी छूट को स्ट्रेच किये जा रहा था.
श्रद्धा: (सर पीछे फ़ेंक कर, पागल होते हुए) जेथाः जी... और तेज़... पहाड़ दो मेरी छूट को... हआ... इतना बड़ा लुंड पहली बार फील कर रही हूँ... अह्ह्ह्ह... मत रुको... छोड़ते रहो... मैं आपकी हूँ आज... फुककक में जेठा जी...!!!

जेठालाल ने अब स्पीड थोड़ी बढ़ा दी लेकिन अभी भी वह गहरे और पावरफुल स्ट्रोक्स दे रहा था. उसका पूरा फोकस सिर्फ श्रद्धा की छूट को छोड़ने पर था.
जेठालाल ने श्रद्धा को सोफे पर लिटाये हुए Hi ज़ोर से उठा लिया. उसने सोफे पर बैठ कर श्रद्धा को अपने गॉड में बिठा लिया बिलकुल काउगर्ल पोजीशन में. श्रद्धा की टाँगे दोनों तरफ फैली हुई थी और उसकी छूट जेठालाल के मोठे लुंड के ऊपर थी.
जेठालाल: (लुंड पकड़ कर उसकी छूट में सेट करते हुए) अब खुद बैठ जाओ... पूरा अंदर ले लो.
श्रद्धा ने धीरे से नीचे बैठना शुरू किया. जैसे Hi उसका मोटा 14 इंच का लुंड उसकी छूट में घुसा, श्रद्धा का मुँह खुल गया.
श्रद्धा: (ज़ोर से सिसकती हुई) आआह्ह्हह्ह्ह्ह... जेथाः जी... बहुत गहरा जा रहा है... उफ्फ्फ्फ़!!!

पूरा लुंड अंदर उतर गया. श्रद्धा अब जेठालाल की गॉड में बैठ चुकी थी. उसने अपने दोनों हाथ जेठालाल के कन्धों पर रख कर उसको किश करना शुरू कर दिया.
जेठालाल ने श्रद्धा की कमर पकड़ी और नीचे से Zor-Zor से धक्के मरना शुरू कर दिया.
थप! थप! थप! थप!
श्रद्धा: (किश के बीच ज़ोर ज़ोर से मोअन करती हुई) अहह... अहह... ी लव आईटी जेठा जी... यू अरे ा बस्त्त... फूकिंग मशीन... जेठा जी पलासी फुकक में लिखे थिस अल्वेस... अह्ह्ह...
श्रद्धा: (सांस फूलते हुए, उसकी आँखों में देखते हुए) चम्पक चाचा ने मुझे यहाँ बुला के जो ट्रीट दिलवाई है... क्या Hi कहु मैं... आठ फुकक जेथाः जी... ी लोवी ित्त्त... ी लोवी योररर दिककक... शोवी ित्त्त िन्न्न...!!!
जेठालाल खुश हो गया. उसने श्रद्धा की मोती गांड पर ज़ोर से एक थप्पड़ मारा.

जेठालाल: (हस्ते हुए) लू मेरी श्रद्धा भाभी... आज आपकी छूट को मैं अपना बना देता हूँ!
श्रद्धा : कॉल में श्रद्धा ओनली जेताह जीह भाभी मत बोलूह आह्हः ऑर्डर जब हम ये कर रहे हो तब्ब्ब्ब तूह बिल्कुल भाभी नही I'mm योरर्स ोलीय रिघटत नऊव्व सू फुकक मई लिखी यू फुकककक दया भाभी ाःह हससष फुकक मीठ लिखी यू फुककक अंजली भाभी एष हहह हफहह
जेठालाल हस्ता है और श्रद्धा की गांड पर लगातार थप्पड़ मरने शुरू कर देता है और नीचे से बहुत Zor-Zor से धक्के मरने लगा. हर धक्के में उसका पूरा लुंड श्रद्धा की छूट के अंदर तक जा रहा था.
थप! थप! थप! थप! थप!

श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से सिसकती हुई, गांड हिलाते हुए) अह्ह्ह्ह... हआ... मारो... और थप्पड़ मारो... और ज़ोर से छोड़ो जेठा जी... मेरी छूट आपकी है... पहाड़ दो इसको... अह्ह्ह फुककक... बहुत मज़ा आ रहा है!!!
जेठालाल श्रद्धा को जैम कर छोड़ रहा था. उसकी गॉड में श्रद्धा ऊपर नीचे उछाल रही थी, उसके बड़े मुम्मे जेठालाल के मुँह के सामने हिल रहे थे. जेठालाल कभी उनको चूस रहा था, कभी गांड पर थप्पड़ मार रहा था.
जेठालाल: (तेज़ धक्के मरते हुए) लो... लूओ श्रद्धा... आज से तुममम मेरी पर्सनल छूट बन गयी... जब मैं करेगा, आऊंगा और छोडूंगा तुम्हे!
श्रद्धा: (पूरा पागल होते हुए, किश करते हुए) हां... हां... जब मर्ज़ी आओ... मेरी छूट हमेशा आपके लुंड के लिए खुली रहेगी... अह्ह्ह... और ज़ोर से... और ज़ोर से जेठा जी... फ़क में हर्डर!!!
दोनों का पेस बहुत तेज़ हो चूका था. रूम में सिर्फ Thap-Thap की आवाज़ें और श्रद्धा की सिसकियाँ गूज रही थी.
श्रद्धा जेठालाल की गॉड में ऊपर नीचे उछाल रही थी. उसकी छूट पूरी तरह से स्ट्रेच हो चुकी थी. उसका चेहरा लाल हो गया था और आँखें बंद थी.
श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से सिसकती हुई) जेथाः जी... मैं... मैं झड़ने वाली हूँ... अह्ह्ह... बहुत तेज़ आ रहा है... हआ!!!

लेकिन जेठालाल ने अपने धक्के बिलकुल नहीं रोके. वह और भी ज़ोर से नीचे से धक्के मरने लगा.
जेठालाल: (गरम आवाज़ में) झाड़ जाओ श्रद्धा... झाड़ जाओ... मैं नहीं रुकने वाला...
श्रद्धा का शरीर एक ज़ोर के झटके के साथ कांपने लगा. उसने जेठालाल के कंधे को तिघ्टलय पकड़ लिया और ज़ोर से चीख उत्तरी.
श्रद्धा: (झड़ते हुए) आआह्ह्हह्ह्ह्ह... जेताआअह जी... मैं आ गयी... अह्ह्ह्हह फुककक!!!
उसकी छूट से गहरा रास निकल कर जेठालाल के लुंड और बॉल्स पर बहने लगा. लेकिन जेठालाल ने उसको झड़ने का मौका भी पूरा नहीं दिया और तुरंत उसको घुमा दिया.
उसने श्रद्धा को उठा कर रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में बैठा दिया. अब श्रद्धा की पीठ जेठालाल की तरफ थी और उसकी गांड उसके सामने थी.
जेठालाल ने तुरंत अपना लुंड उसकी छूट में दोबारा घुसेड़ दिया और Zor-Zor से धक्के मरने लगा.
थप! थप! थप! थप! थप!
श्रद्धा: आआह्ह्ह... जेठा जी... अभी भी अंदर दाल रहे हो... मेरी छूट अभी भी कांपते जा रही है... अह्ह्ह्हह!!!

वो अपनी छूट को सहलाने लगी. एक हाथ से अपनी क्लीट को तेज़ तेज़ रगड़ने लगी जबकि जेठालाल नीचे से उसकी गांड पकड़ कर बहुत तेज़ धक्के मार रहा था.
श्रद्धा: (चीखते हुए, सर पीछे फ़ेंक कर) ओह्ह्ह फुककक... जेथाः जी... बहुत ज़ोर से... मेरी छूट पहात जाएगी... हआ... और तेज़... और तेज़ छोड़िये... अह्ह्ह... मैं फिर से झड़ने वाली हूँ...!!!
जेठालाल ने श्रद्धा की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और मशीन की तरह धक्के मरने लगा. हर धक्के में उसका पूरा 14 इंच का लुंड श्रद्धा की छूट के अंदर तक जा रहा था.
थप! थप! थप! थप!
श्रद्धा: (अपनी क्लीट रगड़ते हुए, बिलकुल पागल होते हुए) आआह्ह्ह... हआ... फ़क में जेठा जी... पहाड़ दो मेरी छूट को... और ज़ोर से... मैं तोह मर जाउंगी आज... अह्ह्ह्हह!!!
जेठालाल श्रद्धा की गांड पर थप्पड़ मार रहा था और Zor-Zor से छोड़ रहा था. श्रद्धा का शरीर काँप रहा था और वो लगातार चीख रही थी.
जेठालाल अब बिलकुल चुप हो चूका था. कोई बात नहीं, कोई आवाज़ नहीं — सिर्फ उसके गहरे और ज़ोर के धक्के. वो श्रद्धा को रिवर्स काउगर्ल पोजीशन में पकडे हुए था और मशीन की तरह छोड़ रहा था.
थप! थप! थप! थप! थप! थप!
हर धक्का इतना ज़ोर का था की श्रद्धा की गांड Zor-Zor से उछाल रही थी. जेठालाल का 14 इंच का मोटा लुंड Baar-Baar उसकी छूट की सबसे गहराई तक जा रहा था.

श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से चीखते हुए) आआह्ह्ह... जेथाः जी... अह्ह्ह्हह... बहुत ज़ोर से... हआ... मर रही हूँ... अह्ह्ह फुककक!!!
वो अपनी छूट को एक हाथ से सहलाती रही, दूसरे हाथ से सोफे को पकडे हुए थी. उसकी आँखें बंद थी और मुँह से सिर्फ सिसकियाँ और चीखें निकल रही थी.
जेठालाल ने उसकी कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया और स्पीड बढ़ा दी. अब उसके धक्के और भी गहरे और तेज़ी से पड़ने लगे थे.
श्रद्धा: (पूरा कांपती हुई) आआह्ह्ह... फिर से... फिर से आ रहा है... जेथाः जी... मैं फिर से झड़ने वाली हूँ... अह्ह्ह्हह!!!
श्रद्धा का दूसरा ओर्गास्म इतना तेज़ आया की उसका पूरा शरीर एकदम से टाइट हो गया. उसने सर पीछे फेंका और ज़ोर से चीख मरी.
श्रद्धा: (झड़ते हुए, चीखते हुए) आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह... जेताआअह जी... मैं आ गयी... फिर से आ गयी... अह्ह्ह्हह फुककक... मेरी छूट पहात गयी... हआ!!!
उसकी छूट से फिर से गहरा रास निकल कर जेठालाल के लुंड पर बहने लगा. लेकिन जेठालाल ने अब भी अपने धक्के नहीं रोके. वो बिना एक शब्द बोले कन्टिन्यूसली छोड़ता रहा.
श्रद्धा: (थकान और मस्ती के साथ, Ruk-Ruk कर बोलते हुए) आपका... लुंड... मेरी छूट की गहरी खुदाई कर रहा है जेथाः जजीह... बस छोड़ते रहो... रुकनाः मट्ठ... प्लीज रुकना मत... अह्ह्ह... छोड़ते रहो मुझे... जितना मर्ज़ी छोड़ दो आज... हआ... मैं आपकी हूँ...!!!

जेठालाल ने जवाब में सिर्फ श्रद्धा की गांड पर एक और ज़ोर का थप्पड़ मारा और अपने धक्कों की रफ़्तार और बढ़ा दी. रूम में सिर्फ उनके शरीर के टकराने की “Thap-Thap-Thap” आवाज़ें और श्रद्धा की चीखें गूज रही थी.
श्रद्धा अब बिलकुल टूट चुकी थी, लेकिन उसके मुँह से बस सिसकियाँ निकल रही थी और छोड़ने की भीख.
जेठालाल श्रद्धा को जैम कर छोड़ रहा था. श्रद्धा की छूट एक बार फिर जेठालाल के मोठे लुंड के Ird-Gird कास कर घेर रही थी.
जेठालाल: (तेज़ धक्के मरते हुए) श्रद्धा... तेरी छूट मेरे लुंड को बहुत ज़ोर से जकड रही है... बहुत गरम है... मैं झाड़ जाऊँगा!
श्रद्धा: (चीखते हुए, तड़पते हुए) झाड़ो जेठआठ बेबी... झाडूह... मेरे फसे पीए झाडूह पलासी... येसशः... हहह... आह्ह्ह्ह!!!
घडी की सुई 10 बज चुकी थी.
इधर पोपटलाल अपना छाता हाथ में हिलाते हुए सोसाइटी कंपाउंड की तरफ बढ़ रहा था. तभी अब्दुल ने उसको रोक लिया और कुछ बातें करने लगा.
उधर जेठालाल श्रद्धा को घुमा कर Zor-Zor से छोड़ रहा था. उसने श्रद्धा की गांड को ऊपर उठा कर बहुत तेज़ धक्के दे रहा था.
श्रद्धा: (ज़ोर ज़ोर से चीखते हुए) आआह्ह्ह... जेथाः जी... हआ... और ज़ोर से... अह्ह्ह्हह!!!
तभी पोपटलाल सीढ़ियां चढ़ रहा था. श्रद्धा जोरो से चीखते हुए फिर से झड़ने लगी. जेठालाल ने भी अपने माल की पिचकारी उसकी छूट में Hi छोड़ दी.

जेठालाल: (ज़ोर से गरजते हुए) ले श्रद्धा... आअह्ह्ह्हह!!!
वही पोपटलाल ने घर की चाभी निकाल ली और मैं गेट खोलने लगा. तभी उसको याद आया की उसकी एक खूबसूरत सी बीवी उसका इंतज़ार कर रही है.
पोपटलाल: (खुद से मुस्कुराते हुए) क्या यार पोपटलाल तुम भी न... कैसे भूल गए की अब तुम्हारी शादी हो चुकी है.
उसने चाभी पॉकेट में दाल दी और दुर्बल बजा दी. चेहरे पर ख़ुशी की लहार थी.
दरवाज़ा खुला.
पोपटलाल: (प्यार से) Hello मेरी जाने मैं... मैं घर आ गया!
सामने से जेठालाल बोलै —
जेठालाल: तो मैं क्या करूँ?
पोपटलाल: (शॉक हो कर) J..j..jethalal?! तुम यहाँ क्या कर रहे हो?!
तभी पीछे से श्रद्धा पूरे कपडे पेहेन कर आयी और मुस्कुराते हुए बोली.
श्रद्धा: आप आ गए? आइये अंदर आइये.
पोपटलाल अंदर आया और फिर से जेठालाल से पुछा.
पोपटलाल: तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
श्रद्धा: (जल्दी से उसका हाथ पकड़ कर टीवी के सामने ले जाते हुए) जेठा भाई इसके लिए यहाँ आये थे.
पोपटलाल ने नया बड़ा टीवी देखा और शॉक हो गया.
पोपटलाल: श्रद्धा ये टीवी?
श्रद्धा: तुम तोह पूरा दिन ऑफिस चले जाते हो और मैं घर पे अकेली बोर हो जाती हु. इसलिए मैंने सोचा क्यों न एक टीवी Hi खरीद लू एंटरटेनमेंट के लिए.
पोपटलाल: अच्छा किया श्रद्धा... लेकिन ये टीवी कितने का है?
जेठालाल: सिर्फ 55,000.
पोपटलाल: (आँखें पहाड़ कर) क्याआ?! कैंसिल भाई कैंसिल! इतना मेहेंगा टीवी? कैंसिल करो, बेचना!
श्रद्धा: ये टीवी मैंने अपने एंटरटेनमेंट के लिए नहीं बल्कि हमारे एंटरटेनमेंट के लिए लिया है. रात को इस्पे फिफ्टी शेड्स देखने में बहुत मज़ा आएगा.
यह सुनते Hi पोपटलाल के मुँह में निखार आ गया. उसने तुरंत श्रद्धा को हुग कर लिया.
जेठालाल: (शर्मा कर खासते हुए) ठीक है... तोह अब मैं चलता हु. चाय के लिए थैंक्यू श्रद्धा भाभी.
श्रद्धा: (मुस्कुराते हुए) कोई बात नहीं जेठा भाई... दुबारा आना.
जेठालाल वहां से निकल गया.
जैसे Hi दरवाज़ा बंद हुआ, पोपटलाल ने श्रद्धा को तिघ्टलय हुग कर लिया. श्रद्धा ने भी उसको गले लगाया. उसने अभी तक पंतय नहीं पहनी थी. जेठालाल का मोटा माल अभी भी उसकी छूट में भरा हुआ था और Dheere-Dheere उसकी जांघों के बीच से टपक रहा था.
और इसी के साथ हमारा ये अपडेट ख़तम हो जाता है उम्म्द करता हु आपको ये अपडेट पसंद आया होगा अगर हां तो जल्दी से लिखे और कमैंट्स कर दो यारो और अपना प्यार बरसाओ पलासी सुप्पोर्टट दिखाओ यारूओ








