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- Dec 5, 2013
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सेक्स का जमाना अपडेट 38
सन सुरु होती है एक गांव के सिंपल रस्ते पर. जवान भिड़े, करीब 18 साल का, चलते हुए एक लड़की को देख रहा होता है. लड़की लाल साड़ी पहने हुए सीढ़ी चल रही है. भिड़े के दोस्तों ने उससे तैसे करने के लिए पुश किया होता है. निर्वसली, भिड़े उस लड़की को कुछ कहने की कोशिश करता है.
यंग भिड़े (हिचकिचाते हुए):
अरे... सुनो, तुम्हारे कान की बलि तोह बड़ी प्यारी लग रही है!
लड़की रुख जाती है, गुस्से में उसकी तरफ घूरती है.
गांव की लड़की (गुस्से से):
तुझे शर्म नहीं आती, बद्तमीज़!
तभी अचानक उसका बड़ा भाई, जो हाइट में लम्बा और काफी ताकतवर होता है, आके भिड़े को कालर से पकड़ लेता है.
लड़की का भाई (गुस्से से):
तूने मेरी बेहेन को छेड़ा?!
भिड़े कुछ बोल भी नहीं पाटा, उसके पहले उसका भाई उसके गाल पर एक ज़ोर का थप्पड़ मार देता है. भिड़े हिचक के पीछे गिरने वाला होता है.
यंग भिड़े (डरते हुए):
भैया, माफ़ करो! मैं तोह बस मज़ाक कर रहा था!
लड़की का भाई फिर हाथ उठाने Hi वाला होता है, तभी भिड़े के पिताजी, भिड़े सर., वहां पहुंच जाते हैं. एक गुस्से से भरी पर Shant-Insaan की तरह वो सिचुएशन को देखते हैं.
भिड़े सर. (तीखे अंदाज़ में):
यह क्या तमाशा है?
लड़की का भाई सिचुएशन समझाता है. भिड़े सर. ध्यान से सब सुनते हैं, लेकिन उनके चेहरे पर गुस्सा बढ़ता जाता है.
भिड़े सर. (गुस्से से भिड़े की तरफ मुड़ते हुए):
तुझे बिलकुल शर्म नहीं आती? गांव की इज़्ज़त को छेड़ता है? चल अभी घर चल, बताता हूँ तुझे!
वह भिड़े का कान पकड़ के Ghaseet-Te हुए उससे घर ले जाते हैं. भिड़े बेइज़्ज़ती महसूस करता है जब सारे गांव वाले तमाशा देखते हैं.
सन शिफ्ट होती है भिड़े के घर के अंदर, जहाँ भिड़े सर. एक चेयर पर बैठ कर अपने हाथ में एक छड़ी पकडे हुए होते हैं. भिड़े सामने सर झुका के खड़ा होता है.
भिड़े सर. (गुस्से में):
तुझे यह सीखा रहा हूँ मैं? बोल यही सिखाया था मैंने Tujheeh.....agar शिक्षक बनना है तोह पहले अपनी हरकतें सुधार. लड़कियों का इज़्ज़त करना सीख!
"Nahi...babuji"bhide सर झुकाये हुए जवाब देता है
बिना किसी वार्निंग के भिड़े सर. छड़ी से भिड़े के पैरों पर कुछ हाथ मारते हैं. भिड़े चीख भी नहीं पाटा, बस अपने पैरों को रगड़ने लगता है.
भिड़े सर. (थोड़ा नरम होते हुए):
यह मार तेरे भलाई के लिए है. याद रख, इज़्ज़त कमाने में सालों लगते हैं, और एक छोटी सी गलती सब कुछ ख़तम कर सकती है.
भिड़े अपने पेअर रगड़ते हुए समझने लगता है की उसके पिताजी का गुस्सा असल में उसे सुधारने के लिए था.
यंग भिड़े (शर्माते हुए):
जी, पिताजी... आगे से कभी गलती नहीं होगी.
भिड़े की आँखें खुल जाती है
उसके बगल में सोनू बिना कपड़ो के लेती थी
भिड़े का सर चकराने लगता है और वो खुद पर काबू नहीं कर पाटा
उसको उलटी हो जाती है
भिड़े का सर अभी भी घूमे जा रहा था
"ये कैसा इंसान बनता जा रहा है तू भिड़े, दुसरे की बीवी तक तो ठीक भी Tha....lekin खुद की बेटी...."
भिड़े खुद के गालो पर 3-4 छाते जार देता है
"हां कैसा बेटीचोद आदमी है रे आत्माराम तू कैसा आदमी है जो अपनी इच्छाओ को काबू नहीं कर Paaya...aisi भी क्या मजबूरी थी की तुझे अपनी बेटी के साथ ये सब करना Para.....dhikkar है Tujhpar....nahi नहीं नहीं सिर्फ मई Hi नहीं सभी ऐसा कर रहे Hai...jethalal ने भी दोस्त की बीवी के साथ ये सब किया सोढ़ी ने भी हाथी भाई ने भी मेहता साहब ने भी और अब तो पोपटलाल भी इस सब में शामिल हो जाएगा
तभी उसके फ़ोन पर नोटिफिकेशन आता है
वो मैसेज िएर का था उसी सीक्रेट ग्रुप में
"पोपटलाल के शादी वाले Din...maine दया भाभी के साथ Kiya.."(iyer का मैसेज)
भिड़े की बात कंटिन्यू होती है "अब तो िएर भी इसमें शामिल हो चूका है धीरे धीरे सभी महिलाये भी मणिपुलटे हो Jaayengi...."bhide अपने सर पर हाथ रख लेता है
"आखिर ये चल क्या रहा है हम सब के जिंदगी में सभी क्या सेक्स के Hi भूखे है
क्या किसी के भी दिमाग में एक पल के लिए भी ये ख्याल नहीं आया और अभी तो बोहोत कुछ बाकी है आगे सेक्स कम्पटीशन भी होना बाकी है"
मई इसमें क्या कर सकता हु...
तभी भिड़े का दिमाग घूमता है
" जब किसी और के दिमाग में ये बातें नहीं आ रही तो मई इन बातों को खुद के दिमाग में क्यों Rakhu...mujhe भी तो सेक्स मिलेगा Hi तो जो जैसा है वैसा Hi रहने देता Hu....haa यही सही रहेगा...."
भिड़े ने ये फैसला तो ले लिए था लेकिन ये फैसला एकलौता ऐसा फैसला है जो इन सब की जिंदगी बदलने की क्षमता रखता है
भिड़े के अलावा ये बातें जेठालाल ने भी सोची थी देखते है आगे ये कहानी कौन सा मोड़ लेती है और किस नए रास्ते पर चलती है
अपडेट 38 (रास्तों का फ़र्क़)
इधर जेठालाल के घर पर जेठालाल अभी भी सोया हुआ है वही उसके बेटे के कमरे में उसकी माँ की इज्जत खुली पारी है
दया अपनी साड़ी पेहेन रही है टापू नींद से सोया हुआ है
रात के 9 बज रहे है तभी दुर्बल बजता है
दया फैट से साड़ी चढ़ाते हुए गेट खोलती है
दरवाजे पर कटरीना और बापूजी खरे थे कटरीना की साड़ी हलकी बिखरी हुयी थी
दोनों घर के अंदर आते है
बापूजी : बहु जेठिया आ गया
दया : जी बापूजी
बापूजी : और टापू
दया : टापू भी अपने कमरे में आराम कर रहा है
बापूजी : ठीक है बहु तुम खाना लगा दो मई हाथ मुँह धो कर आता हु
कटरीना : दया जी मई भी चलती हु आपके साथ
दया और कटरीना किचन में चले जाते है
बापूजी टापू के कमरे में चले जाते है और तभी दुर्बल दुबारा बजता है
और इस बार दरवाजा बापूजी खोलते है
सामने अनन्य खरी थी जो शायद खाने के लिए Hi आयी थी
बापूजी : आओ बेटी बैठो
अनन्य : जी दादा जी
सन बदलता है और हमें सोढ़ी और रोशन दीखते है जो अपने दिंनिंग टेबल पर बैठे थे
प्रणाली और गोगी भी बैठ कर खा रहे थे
सोढ़ी तो अंजलि को देख कर ऐसे जोश में था की अभी रोशन को सब के सामने पटक के छोड़ दे
सोढ़ी अपनी टांग टेबल के नीचे से रोशन की टांगों के बीच घुसा देता है
रोशन को करेंट लग जाता है
रोशन सोढ़ी को इशारो से मन करती है
लेकिन अब कहा सोढ़ी रुकने वाला था
सभी खाना पीना कर रहे थे लेकिन इधर सोढ़ी तो चुदाई के मूड में था
उधर जेठालाल के घर पर
भी शामे सन चल रहा था
बापूजी का मूड भी चुदाई का था और वो तो अपनी दोनों टांगें उठा कर दो अलग औरतों के छूट को अपने पैरो के अंगूठे से सेहला रहे थे
दया और कटरीना
दया और कटरीना दोनों Hi गीली होने लगती है और बापूजी को फुल भाव देने लगती है
तभी अनन्य का स्पून नीचे गिरता है स्पून गिरते Hi बापूजी अपने पेअर नीचे कर लेते है और तभी अनन्य को टेबल के नीचे 3 दमदार रोड देखने को मिलते है
जेठालाल, Bapuji,tapu तीनो के लुंड पूरे तन कर खरे थे
अनन्य की छूट तो मानो पानी का फुवारा चोर देती है और वो वही जहर जाती है
और इसी के साथ हमारा ये अपडेट ख़तम हो जाता है उम्मीद करता हु आपको ये अपडेट पसंद आया होगा
बस यारो अब धीरे धीरे स्टोरी में आगे बढ़ते है क्यों सही कहा न
सन सुरु होती है एक गांव के सिंपल रस्ते पर. जवान भिड़े, करीब 18 साल का, चलते हुए एक लड़की को देख रहा होता है. लड़की लाल साड़ी पहने हुए सीढ़ी चल रही है. भिड़े के दोस्तों ने उससे तैसे करने के लिए पुश किया होता है. निर्वसली, भिड़े उस लड़की को कुछ कहने की कोशिश करता है.
यंग भिड़े (हिचकिचाते हुए):
अरे... सुनो, तुम्हारे कान की बलि तोह बड़ी प्यारी लग रही है!
लड़की रुख जाती है, गुस्से में उसकी तरफ घूरती है.
गांव की लड़की (गुस्से से):
तुझे शर्म नहीं आती, बद्तमीज़!
तभी अचानक उसका बड़ा भाई, जो हाइट में लम्बा और काफी ताकतवर होता है, आके भिड़े को कालर से पकड़ लेता है.
लड़की का भाई (गुस्से से):
तूने मेरी बेहेन को छेड़ा?!
भिड़े कुछ बोल भी नहीं पाटा, उसके पहले उसका भाई उसके गाल पर एक ज़ोर का थप्पड़ मार देता है. भिड़े हिचक के पीछे गिरने वाला होता है.
यंग भिड़े (डरते हुए):
भैया, माफ़ करो! मैं तोह बस मज़ाक कर रहा था!
लड़की का भाई फिर हाथ उठाने Hi वाला होता है, तभी भिड़े के पिताजी, भिड़े सर., वहां पहुंच जाते हैं. एक गुस्से से भरी पर Shant-Insaan की तरह वो सिचुएशन को देखते हैं.
भिड़े सर. (तीखे अंदाज़ में):
यह क्या तमाशा है?
लड़की का भाई सिचुएशन समझाता है. भिड़े सर. ध्यान से सब सुनते हैं, लेकिन उनके चेहरे पर गुस्सा बढ़ता जाता है.
भिड़े सर. (गुस्से से भिड़े की तरफ मुड़ते हुए):
तुझे बिलकुल शर्म नहीं आती? गांव की इज़्ज़त को छेड़ता है? चल अभी घर चल, बताता हूँ तुझे!
वह भिड़े का कान पकड़ के Ghaseet-Te हुए उससे घर ले जाते हैं. भिड़े बेइज़्ज़ती महसूस करता है जब सारे गांव वाले तमाशा देखते हैं.
सन शिफ्ट होती है भिड़े के घर के अंदर, जहाँ भिड़े सर. एक चेयर पर बैठ कर अपने हाथ में एक छड़ी पकडे हुए होते हैं. भिड़े सामने सर झुका के खड़ा होता है.
भिड़े सर. (गुस्से में):
तुझे यह सीखा रहा हूँ मैं? बोल यही सिखाया था मैंने Tujheeh.....agar शिक्षक बनना है तोह पहले अपनी हरकतें सुधार. लड़कियों का इज़्ज़त करना सीख!
"Nahi...babuji"bhide सर झुकाये हुए जवाब देता है
बिना किसी वार्निंग के भिड़े सर. छड़ी से भिड़े के पैरों पर कुछ हाथ मारते हैं. भिड़े चीख भी नहीं पाटा, बस अपने पैरों को रगड़ने लगता है.
भिड़े सर. (थोड़ा नरम होते हुए):
यह मार तेरे भलाई के लिए है. याद रख, इज़्ज़त कमाने में सालों लगते हैं, और एक छोटी सी गलती सब कुछ ख़तम कर सकती है.
भिड़े अपने पेअर रगड़ते हुए समझने लगता है की उसके पिताजी का गुस्सा असल में उसे सुधारने के लिए था.
यंग भिड़े (शर्माते हुए):
जी, पिताजी... आगे से कभी गलती नहीं होगी.
भिड़े की आँखें खुल जाती है
उसके बगल में सोनू बिना कपड़ो के लेती थी
भिड़े का सर चकराने लगता है और वो खुद पर काबू नहीं कर पाटा
उसको उलटी हो जाती है
भिड़े का सर अभी भी घूमे जा रहा था
"ये कैसा इंसान बनता जा रहा है तू भिड़े, दुसरे की बीवी तक तो ठीक भी Tha....lekin खुद की बेटी...."
भिड़े खुद के गालो पर 3-4 छाते जार देता है
"हां कैसा बेटीचोद आदमी है रे आत्माराम तू कैसा आदमी है जो अपनी इच्छाओ को काबू नहीं कर Paaya...aisi भी क्या मजबूरी थी की तुझे अपनी बेटी के साथ ये सब करना Para.....dhikkar है Tujhpar....nahi नहीं नहीं सिर्फ मई Hi नहीं सभी ऐसा कर रहे Hai...jethalal ने भी दोस्त की बीवी के साथ ये सब किया सोढ़ी ने भी हाथी भाई ने भी मेहता साहब ने भी और अब तो पोपटलाल भी इस सब में शामिल हो जाएगा
तभी उसके फ़ोन पर नोटिफिकेशन आता है
वो मैसेज िएर का था उसी सीक्रेट ग्रुप में
"पोपटलाल के शादी वाले Din...maine दया भाभी के साथ Kiya.."(iyer का मैसेज)
भिड़े की बात कंटिन्यू होती है "अब तो िएर भी इसमें शामिल हो चूका है धीरे धीरे सभी महिलाये भी मणिपुलटे हो Jaayengi...."bhide अपने सर पर हाथ रख लेता है
"आखिर ये चल क्या रहा है हम सब के जिंदगी में सभी क्या सेक्स के Hi भूखे है
क्या किसी के भी दिमाग में एक पल के लिए भी ये ख्याल नहीं आया और अभी तो बोहोत कुछ बाकी है आगे सेक्स कम्पटीशन भी होना बाकी है"
मई इसमें क्या कर सकता हु...
तभी भिड़े का दिमाग घूमता है
" जब किसी और के दिमाग में ये बातें नहीं आ रही तो मई इन बातों को खुद के दिमाग में क्यों Rakhu...mujhe भी तो सेक्स मिलेगा Hi तो जो जैसा है वैसा Hi रहने देता Hu....haa यही सही रहेगा...."
भिड़े ने ये फैसला तो ले लिए था लेकिन ये फैसला एकलौता ऐसा फैसला है जो इन सब की जिंदगी बदलने की क्षमता रखता है
भिड़े के अलावा ये बातें जेठालाल ने भी सोची थी देखते है आगे ये कहानी कौन सा मोड़ लेती है और किस नए रास्ते पर चलती है
अपडेट 38 (रास्तों का फ़र्क़)
इधर जेठालाल के घर पर जेठालाल अभी भी सोया हुआ है वही उसके बेटे के कमरे में उसकी माँ की इज्जत खुली पारी है
दया अपनी साड़ी पेहेन रही है टापू नींद से सोया हुआ है
रात के 9 बज रहे है तभी दुर्बल बजता है
दया फैट से साड़ी चढ़ाते हुए गेट खोलती है
दरवाजे पर कटरीना और बापूजी खरे थे कटरीना की साड़ी हलकी बिखरी हुयी थी
दोनों घर के अंदर आते है
बापूजी : बहु जेठिया आ गया
दया : जी बापूजी
बापूजी : और टापू
दया : टापू भी अपने कमरे में आराम कर रहा है
बापूजी : ठीक है बहु तुम खाना लगा दो मई हाथ मुँह धो कर आता हु
कटरीना : दया जी मई भी चलती हु आपके साथ
दया और कटरीना किचन में चले जाते है
बापूजी टापू के कमरे में चले जाते है और तभी दुर्बल दुबारा बजता है
और इस बार दरवाजा बापूजी खोलते है
सामने अनन्य खरी थी जो शायद खाने के लिए Hi आयी थी
बापूजी : आओ बेटी बैठो
अनन्य : जी दादा जी
सन बदलता है और हमें सोढ़ी और रोशन दीखते है जो अपने दिंनिंग टेबल पर बैठे थे
प्रणाली और गोगी भी बैठ कर खा रहे थे
सोढ़ी तो अंजलि को देख कर ऐसे जोश में था की अभी रोशन को सब के सामने पटक के छोड़ दे
सोढ़ी अपनी टांग टेबल के नीचे से रोशन की टांगों के बीच घुसा देता है
रोशन को करेंट लग जाता है
रोशन सोढ़ी को इशारो से मन करती है
लेकिन अब कहा सोढ़ी रुकने वाला था
सभी खाना पीना कर रहे थे लेकिन इधर सोढ़ी तो चुदाई के मूड में था
उधर जेठालाल के घर पर
भी शामे सन चल रहा था
बापूजी का मूड भी चुदाई का था और वो तो अपनी दोनों टांगें उठा कर दो अलग औरतों के छूट को अपने पैरो के अंगूठे से सेहला रहे थे
दया और कटरीना
दया और कटरीना दोनों Hi गीली होने लगती है और बापूजी को फुल भाव देने लगती है
तभी अनन्य का स्पून नीचे गिरता है स्पून गिरते Hi बापूजी अपने पेअर नीचे कर लेते है और तभी अनन्य को टेबल के नीचे 3 दमदार रोड देखने को मिलते है
जेठालाल, Bapuji,tapu तीनो के लुंड पूरे तन कर खरे थे
अनन्य की छूट तो मानो पानी का फुवारा चोर देती है और वो वही जहर जाती है
और इसी के साथ हमारा ये अपडेट ख़तम हो जाता है उम्मीद करता हु आपको ये अपडेट पसंद आया होगा
बस यारो अब धीरे धीरे स्टोरी में आगे बढ़ते है क्यों सही कहा न








































































