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ब्लॉक बी
3 दिन बाद इन इंडिया…
“अब हम बच नहीं पाएंगे”
एक लड़की बुरी तरह रोटी हुवे बोल रही थी… “वो वो लोग हमे मार देंगे …” ये कहते वक़्त उसके होठो के कांपने के साथ साथ उसकी आँखों से आंसू गिरते जा रहे थे “आखिर हमने इनका क्या बिगाड़ा ह ये हमे अकेला चौदह क्यों.. नाहीइ… dete…h”
उसके साथ खड़ा लड़का उसे गले से लगते हुवे बोलै “ कुछ नहीं होगा हमे हमने कुछ गलत नहीं किया ह …तू रो मत सब तीख हो जायेगा हम जरूर बच जायेंगे तू रो मत मेरी बहन”
वो दोनों लड़का लड़की आपस मई गले लगे हुवे एक दूसरे से बात कर हे रहे थे की उनके आगे खड़ा शख्स बोलै “ मेरे रहते वो तुम मई से किसी को छू भी नहीं सकते ह ये मेरा नरपत सिंह का वडा ह फिर पलट kar…rajeev जल्दी से तीसरे नंबर की बोतल निचे से ऊपर दूसरी लाइन मई उसे घुमाओ तीन बार राइट और फिर तीन बार लेफ्ट…”
राजीव ने है मई गर्दन हिलायी तभी बहार से आवाज आयी. … “ तू आज बच नहीं पायेगा मुझसे चूजे तू पहला शख्स ह जिस साई मैं इतनी नफरत करता हु बहुत परेशां किया ह tune…agar आसान मौत चाहता ह तोह उस लड़की को मेरे हवेली करदे और तेरी मौत को मैं आसान बना दूंगा”
नरपत सिंह की ये आवाज सुनकर चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और वो बोलै “मेरी मौत है है है मेरी मौत के सपने तोह तेरी तरह तेरे साथियो ने भी बहुत देखे थे पर सबको मार दिया मैंने…”
तभी बहार से बहुत जोर से आवाज आयी जैसे कोई भरी चीज से वार हुवा हो दीवार पर नरपत सिंह पीछे देख राजीव से बोलै “ पूनम और इन दोनों को साथ लेकर जल्दी से निकल जाओ और घुसते हे जो रेड बटन दिखेगा उसे दबा देना”
राजीव “तू भी चल”
नरपत “मैं खुदको बचा लूंगा तू बस जल्दी निकल अब दीवार टूटने हे वाली h…jaldi निकलो”
राजीव ने सबको उस सुरंग से लेकर जाने लगा और सुरंग का रेड बटन घुसते हे पुश कर दिया जिसे वंहा वापस वो फर्श की बड़ी सी टाइल वापस आगयी जो हैट गयी थी और एक तीख तीख की आवाज भी सुरु हो गयी नरपत ने उन सबको साफल्य जाते देख एक गहरी सांस ली हे थी की दुबारा से एक टकराने की आवाज आयी और दीवार के अंदर क्रैक आने लगे और भड़ते हे गए…
ुँक्रैक्स को देखते हे नरपत समाज गया की क्या होने वाला ह इसलिए उसने जल्दी से शेल्फ मई लगी एक और बोतल को घुमाया और फिर एक और फर्श की टाइल एक तरफ खिसक गयी और वो उसमे जम्प कर गया ..अभी उसने जम्प की हे थी की …साइड की दीवार पूरी ध गयी और स्कॉर्पियन ट्राइब का लीडर अंदर आया उसने इधर उधर देखा फिर उसकी नज़र फर्श मई दिख रही सुरंग पर गयी तोह उसने अपने पीछे खड़े आदमियों मई से एक को पकड़ा और उस सुरंग मई फेंकते हुवे बोलै लोकेशन भेज देना …और वो आदमी चीखा और सुरंग मई गिरता चला गया …
स्कॉर्पियन ट्राइब का मेंबर “ यंहा आसपास क्या क्या ह”
पीछे से रॉय ग्रुप का एक आदमी जो साथ आया था वो बोलै “ सर आसपास तोह समुन्द्र ह और एक बस स्टैंड ह उसके इलावा यंहा दूर तक सिर्फ डंपिंग यार्ड हे ह वो भी यंहा से बहुत दूर ह मतलब 20 कम के करीब”
स्कॉर्पियन ट्राइब लीडर “ सभी आदमियों को लगाओ और उन चारो को ढूंढो मुझे उस लड़की के सिवाए कोई जिन्दा नहीं चाहिए ह”
रॉय ग्रुप के उस आदमी ने अपने पीछे खड़े सभी आदमियों को आर्डर दिया और वो सभी वंहा से निकल गए …
रॉय ग्रुप का आदमी “ सर मैं अभी जो आदमी सुरंग मई गया ह उसकी लोकेशन ट्रेस कर रहा हु वो यंहा से नार्थ की तरफ सीधा जा रहा ह आप कहे तोह हम भी”
स्कॉर्पियन ट्राइब के लीडर ने मोबाइल हाथ मई लिया और तेज़ी से नार्थ की तरफ भागता हुवा जाने लगा …अगर उसकी स्पीड इस वक़्त कोई देख लेता तोह यही सोचता की ये इंसान नहीं रोबोट ह …इधर सुरंग के अंदर मुस्कान पूनम का हाथ पकडे हुवे आगे भड़ती जा रही थी…
मुस्कान “ हम सही रस्ते पर तोह ह न”
राजीव “क्या कोई और रास्ता तुम्हे यंहा दिख रहा ह”
डॉ “मुस्कान का मतलब था की हम सेफ तोह रहेंगे”
राजीव “ देखो अभी हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं ह और जितना मैं उसे जनता हु उसने हमे यंहा इस रस्ते से भेजा ह तोह यकीनन ये रास्ता सुरक्षित तोह होगा जे होगा ये तोह कन्फर्म ह ..पर जायेगा कान्हा ये मुझे भी नहीं पता ह”
पूनम उनके साथ चुप चाप चल रही थी उसे कोई फर्क नहीं पद रहा था की क्या हो रहा ह और क्या नहीं बस वो एक हे बात बोल रही थी धीरे धीरे “उसने वडा किया ह वो उसे लेकर आएगा”
मुस्कान आगे देखते हुवे बोली “वंहा आगे कुछ ह”
राजीव “ वंहा तोह लाइट नज़र आरही ह”
डॉ “ है सायद वही से रास्ता ह बहार जाने का”
वो सभी जल्दी जल्दी सुरंग मई दूर नज़र आरही रौशनी की तरफ बढ़ने लगे और जब सब उसके करीब पहुंचे तोह सब के चेहरे उतराये
मुस्कान “ ये तोह एक छोटा बेसमेंट ह”
डॉ “ मतलब हम फंस गए ह यंहा आकर और अब बचना नामुनकिन ह हमारा”
मुस्कान “ है यंहा चारो तरफ से सब कुछ बंद ह”
दोनों भाई को पैनिक होता देख राजीव बोलै “उसने हमे कुछ सोच कर हे यंहा भेजा ह पहले सबकुछ चेक करो”
मुस्कान चिल्लाते हुवे बोली “ क्या चेक करो हम बेसमेंट मई ह यंहा से न कोई दूर ह न कुछ यंहा बस ये खाने के पैक पैकेट्स और डिब्बे ह apko.dikh नहीं रहा ह”
डॉ ने भी एक डिब्बे को हाथ मई लिया और बोलै ये तोह अभी एक्सपिरे नहीं हुवे ह मतलब ये इमरजेंसी सिचुएशन के लिए रखे हुवे”
राजीव जो आसपास सब देख रहा था वो बोलै “उसने इमरजेंसी कंडीशन के अंदर भी इमरजेंसी प्लान बनाकर रख रखा था मतलब उसे पता था की कभी ऐसी सिचुएशन भी आसक्ति ह और अगर उसे पता था तोह बस हमे यंहा रूक कर उसका इंतज़ार करना …वो जरूर हमे लेने आएगा”
डॉ “ अगर वो मर गए या पकडे गए तोह हम तोह फंस जायेंगे यंहा हमेशा के लिए”
मुस्कान“ तब हम वापस इसी रस्ते चले जायेंगे हमेशा तोह वो यंहा नहीं बैठा रहेगा न” तभी उसकी नज़र राजीव पर गयी जो एक तरफ चुप चाप बैठा हुवा था और उसके चेहरे पर कन्फूसिओं और परेशानी के भाव आगये और वो राजीव के आगे आकर बोली “ हम वापस जा सकते ह न”
पर उसे राजीव का कोई रिप्लाई नहीं मिला और राजीव से खुदको रिप्लाई न मिलते देख डॉ भी घबरा गया और वो बोलै “आप कुछ बोलते क्यों नहीं ह”
राजीव ने एक गहरी साँस लेकर छोड़ी और बोलै “ तुम्हे वो आवाज याद ह न जो हमारे पीछे से आयी थी”
डॉ “हमारे पीछे तोह दो आवाज सुनाई दी थी …आप किस आवाज की नात कर रहे ह और आवाज का क्यों पूछ रहे ह”
राजीव “ इसलिए क्योकि उनमे से एक आवाज का मतलब था की अब वापस जाने का रास्ता बंद ह ..वंहा से भी यंहा न कोई आसक्त और न यंहा से वंहा जा सकता ह”
और राजीव की बात दुंकर डॉ का दिल घबरा उठा तोह मुस्कान ये सुनकर शॉक के मरे निचे हे बैठ गयी
राजीव “ तुम घबराओ मत हमे बस दिमाग लगाकर सोचना ह क्योकि वंहा ऊपर हमे सब किसी भूखे कुत्तो की तरह धुंध रहे honge..agar हम यंहा से निकलने का रास्ता धुंध भी ले तोह भी बहार निकलते हे मौत हमारे सामने होगी …उनकी पावर तुम देख हे चुकी हो …इसलिए खुद को शांत karo..maine इससे भी बुरी सिचुएशन देखि ह …और ऐसी सिचुएशन मई खास वो हमारे साथ अभी यंहा होता तोह सायद कोई हमे छू भी नहीं सकता था”
डॉ “तोह आपके पास मोबाइल ह न उसे बुला लीजिये”
राजीव के चेहरे पर एक ढक भरी मुस्कान आगयी डॉ की बात सुनकर..
मुस्कान “ आप मुस्करा क्यों रहे ह आप पूनम को बचाना चाहते ह न तोह बुलाइये उस शख्स को ..वो आगया तोह पूनम भी बच जाएगी और हम भी”
राजीव ने पूनम की तरफ देखा जो एक जगह आराम से घुटने मोड़कर बैठी हुवी थी फिर मुस्कान की तरफ देखकर बोलै “उसे बुला हे तोह नहीं सकता हु”
डॉ “क्यों नहीं बुला सकते ह”
राजीव कुछ नहीं बोलै
मुस्कान “ आप बोलते क्यों नहीं ह”
राजीव “ क्योकि वो हमसे बहुत दूर ह मैं चाकर भी उसे बुला नहीं सकता hu…aur इस वक़्त भी मुझे पूरा यकीं ह वो मौत से हे लड़ रहा होगा ताकि तुम्हारी दोस्त के पिता को वापस ला सके सिर्फ एक वेड के लिए वो इस वक़्त भूखे शेरो के झुण्ड के बिच मई होगा”
राजीव की बात सुनकर डॉ और मुस्कान दोनों की आवाज हे निकालनी बंद हो गयी
राजीव “ क्या हुवा समाज नहीं ारः ह की क्या बोलना चाहिए …तुम्हारी दोस्त बहुत खास ह उसका भाई सुनील …उसका देवर शेरदिल जिसका जिगर भी उसके नाम की तरह हे ह वो …और वो जिसका नाम तुम्हारी दोस्त के दिल की हर धड़कन के धधकने से उसके दिल मई धधकता ह वो तीनो अभी देश से बहार ह ..पर वो हमे बचने आएंगे ..हमे बस साबरा रखना ह और ये मेरा अंदाज़ा नहीं ह मेरा अटूट विस्वास ह जो maine.sach होते पहले भी देखा ह…”
राजीव की बात सुनकर मुस्कान जो दरी हुवी थी वो अब पूरी तरह शांत हो गयी और पूनम के पास बैठ gayiii…toh डॉ ने भी आसपास की साडी चीजों को देखने के बाद कहा..
“हमारे पास खाने की बहुत सी चीजे ह तोह मैं कहूंगा उतनी हे क्वांटिटी मैं हमे फ़ूड और वाटर को उसे करना ह ताकि हम जायदा से जायदा टाइम तक यंहा रुके रह सके…”
राजीव ने है मई सर हिलाया और फिर खुदसे हे बोलै “अब इन्हे कैसे कहु यंहा नेटवर्क नहीं ारः ह …अब तोह नरपत के बाद अज्जू से हे उम्मीद ह की वो हमे धुंध लेगा ….हे ऊपर वाले मदद करना …इन बचो ने तोह अपनी जिंदगी जीनी हे सुरु करि ह इनपर रहम करना”
राजीव चेहरे को नार्मल रख रहा था और साडी बाते मन मई बोल रहा था ताकि बाकि दर न जाये …पर वो ये नहीं देख पाया था की यंहा एक ऐसा डिवाइस भी था जिसकी रेंज पावर बहुत जायदा थी और वो मुश्किल से मुश्किल जगह से भी सिग्नल को भेज सकता था …और वो डिवाइस इस वक़्त पूनम के गले मई लॉकेट बनकर लटक रहा था ….और उसे ट्रैक डायरेक्टली अज्जू और श्रुति हर पल करते थे….
प्लेस उदयपुर…
ठाकुर जगमाल सिंह “गुरुदेव सब सही ह न”
गुरुदेव “है पुत्र सब सही और सस्त्रो के अनुसार हो रहा ह..” फिर पलटकर आश्रम वाले गुरु जी से “तुम्हे पता ह आगे क्या करना ह”
आश्रम गुरु “जी गुरुदेव जैसा अपने बताया था वैसे हे सभी शैडो वारियर की पूरी टीम यंहा मौजूद ह”
गुरुदेव “जगमाल सिंह कुछ दिन बाद पुत्र राज भी यंहा आजायेगा और उसी दिन हे दुश्मनो को सचाई का अंदाज़ा हो जायेगा …”
जगमाल सिंह “ गुरुदेव ये तोह दिकत हो जाएगी क्या फिर से वही सब होगा”
ये सुनकर गुरुदेव के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और वो बोलै “दिकत तोह ह पर इस बार दिकत हमे नहीं बल्कि उन्हें होने वाली ह क्योकि इस बार पुत्र राज का सुरक्षा चक्र उसके साथ होगा” ये कहते वक़्त गुरुदेव के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कराहट थी जिसका मतलब वंहा खड़े जानो मई से कोई नहीं समाज पाया था सिवाए खुद गुरुदेव के…
उदयपुर मई पूरी तयारी सुरु हो चुकी थी कप्तान सिंह ने पहले हे पूरी तयारी कर दी थी उन सबके रहने के liye…aur अब उदयपुर की वो हवेली जो जलकर दुबारा से होटल बन गयी थी एक बार फिर वो अपने अतीत को जिन्दा कर निर्वाण हवेली मई बदल गयी thi…aur ये बात धीरे धीरे उदयपुर के पुराने घरानो तक पहुंची तोह वो भी धीरे धीरे ठाकुर जगमाल सिंह से मिलने के लिए ख़ुशी ख़ुशी आरहे थे…
तोह यंहा से दूर….
राज तीन दिन और रातो से लटका लटका हुवा था …
कमांडर “क्या हुवा अब पैरो मई दम नहीं रहा जो घुटनो पर आगया”
ये सुनकर लगबघ दर्द से टूट चुके राज ने दुबारा से अपनी पूरी ताकत इखट्टी करि और अपने पैरो पर खड़ा हो गया….
कमांडर “ बहुत जिद्दी ह इतनी मार खखर भी फिर से खड़ा हो गया”
पीछे खड़े गॉर्ड ने हंटर को पेअर पर मरने के लिए दुबारा उठाया तोह कमांडर ने रोक दिया और बोलै “घोस्ट ये तोह सुरुवात ह मेरे रूल्स तोड़ोगे तोह छोटी सी सजा भी बहुत बड़ी लगने लगती ह” फिर कमांडर गॉर्डस से बोलै “ खोल दो इसे अभी उस कोरियाई कुत्ते को भी देखना ह”
राज को खोल फर्श पर हे नंगा पाटकर वो चले गए…
करीब 6 घंटे बाद सेल के दूर मई से एक रेक्टेंगल शाप की जगह उतनी हे स्लाइड हुवी जितने मई से थाली आसक्ति थी वो स्लाइड हुवी और एक थाली खाने की अंदर आयी …2 घंटे और बीत गए 8 घंटे बाद राज धीरे धीरे थाली के पास आया और दीवार के सहारे पीठ लगाकर बैठकर खाना खाने लगा …..
24 ऑवर बाद …
राज के सेल का दूर खुला और उसे गॉर्ड की आवाज आयी और एक रौशनी उसके सेल के अन्दरई तोह राज ने अपने आँखों के आगे हाथ रख liya…phir धीरे धीरे सेल से बहार आया और बहार आकर आसपास की जगह देखने लगा …फिर जिस तरफ एक कैदी जा रहा था उस तरफ जाने लगा और वो कैदी उसे लेकर आया एक खुली जगह जंहा सिर्फ 50 कैदी हे थे जिन्हे अलग अलग जालियो के पार्टीशन मई 10 ,10 के ग्रुप्स मई रखा गया tha……raj भी सबको देखता हुवा उस खुली जगह मई आया तोह वंहा खड़े गॉर्ड ने कहा “5 नंबर मई जाना ह वंहा का कैदी मर चूका ह ..अब तू देखते ह कितने दिन जिन्दा रहता ह”
राज पांच नंबर की तरफ जाते हुवे इधर उधर देख रहा था …और बाकि झलियो के बने हुवे पार्टीशन को समाज रहा था तोह दूसरे पार्टीशन मई खड़े कैदी उसे देख रहे थे तोह कुछ शोरे मचा रहे और कुछ बोल रहे थे … “चीखने तू तोह गया” पर राज की नज़रे तोह सिर्फ रविंदर सिंह को धुंध रही थी जो उसे कंही दिखाई नहीं दिया …वो पंच नंबर पार्टीशन मई घुसा और वंहा के बाकि कैदियों की तरफ देखते हुवे आगे बढ़ने लगा ..उसके पार्टीशन के कैदी उसकी तरफ हे घूरते हुवे देख रहे the…aur उन्हें ऐसे घूरते देख राज बोलै
राज “एक बात दिमाग मई बैठा लेना …मुझसे इतने दूर रहोगे उतना सुखी रहोगी और अगर ऊँगली करि किसी ने भी तोह मैं उसकी आगे की जिंदगी नरक बना दूंगा”
उसकी बातो का किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा और पड़ता भी कैसे …उन्हें नहीं पता था की उनके सामने कई देशो मई मोस्ट वांटेड की लिस्ट मई टॉप 25 मई नाम बनाने वाला घोस्ट खड़ा h…wo सब खुद बहुत डेडलिस्ट क्रिमिनल से थे और उनके लिए जान लेना मतलब पेपर को फाड़ने जैसा था…
उनमे से एक ने राज के गाल पर धीरे से आगे भड़ते हुवे थपथपाया और बोलै “बचे को गुसा आगया पापा ने गाल पर थपथपाया तोह पापा से ladega..ale लेले”
पर आगे जो होने वाला था उसे उसकी उम्मीद नहीं थी राज ने तेज़ी से उसके उस हाथ को कलाई से पकड़ा और कड़ाक …kadaak…kadaak…kadaak….kadaak…kadaak करके उसके हाथ की हर ऊँगली को तोड़ दिया और अंघूठे को तोह साइड से आधा हे फाड़ कर साइड से उखाड़ diya…wo कैदी बुरी तरह चीखा ..पर राज को कान्हा सुकून था …उसने उसके दूसरे हाथ को पकड़ा और फिर यही काम किया ….और बाकी कैदी पीछे हैट गए …और गॉर्डस तेज़ी से पंच नंबर सेल की तरफ आने लगे ..राज ने उस तड़फड़ा रहे कैदी के कान को पकड़ा और पूरी ताकत से पकड़कर उस कैदी को ऊपर उठाया और फिर घुमाकर एक तरफ एक झटका देकर फेंका और बस कान राज के हाथ मई था और वो कैदी साइड मई गिरा दर्द से बुरी तरह तड़फड़ाता हुवा चीक रहा tha…tabhi गॉर्डस अंदर गुसाई और राज को डाँडो से बुरी तरह मरने लगे
48 घंट baad…finlad मई एटर्निटी “तुझे जो कहा वो किया”
शेरदिल “है मैंने पता किया ह उस खायी की गहराई 3 कम ह मतलब मौत पाकी ह अगर कोई चढ़ेगा या उतरेगा तोह ऊपर से बहुत तेज़ हवाएं चलती ह ”
एटर्निटी “हमे बस वंहा से ऊपर तक डिवाइस पहुंचना ह कैसे भी ताकि राज जब वंहा से निकलने की कोसिस करे तोह हम उसकी हेल्प कर सके और साथ हे वी डिवाइस हमे एक मैप भी देगा”
शेरदिल “भाई एटर्निटी माइनस डिग्री मई जंहा हवा भी तेज़ रहती ह ऊपर गॉर्डस ह तोह कौन ऐसा होगा जो ये काम कर payega…main ये कर देते पर मैं पहाड़ पर चढ़ना नहीं जनता हु खासकर बर्फ के.”
एटर्निटी “तुझे चढ़ने को बोल कौन रहा ह …खतरों से खेलने के लिए जिगरे से बड़ा जिगरा चाहिए होता ह कोई ऐसा जिसकी किस्मत बहुत तेज़ हो और ऐसा banda…aisa बाँदा कौन ह”
शेरदिल “ तू कहानिया मत बना साफ़ बोल आखिर क्या कहना चाहता ह”
एटर्निटी ने इशारा किया तोह शेरदिल स्क्रीन पर देखने लगा जंहा एटर्निटी ने कुछ टाइप किया और एक डिटेल सामने आयी जिसे कुछ मिनट पढ़ने के बाद वो छोङकर बोलै “ इम्पॉसिबल ये कैसे मुमकिन ह मतलब माउंट एवेरेस्ट पर बिना ऑक्सीजन जे अकेला चढ़ गया एयर क्राफ्ट से बिना पैराशूट के जम्प करके दूसरे पैराशूट पर किलोमीटर्स मई तरवेल कर दूसरा परशुते लेकर निचे साफल्य लेंड हुवा ह …और तोह और डीप डाइविंग के record…akhir ये बाँदा ह क्या चीज इतना रिस्क”
एटर्निटी “ इसका रियल नाम अश्वनी ह क्रिकेटर बनना छठा था …क्रिकेट का दिए हार्ट लवर ह अभी भी अगर कंही क्रिकेट चल रहा ह तोह ये वंहा मिल जायेगा”
शेरदिल “ ये आएगा हमारी मदद करने”
एटर्निटी “जरूर आएगा क्योकि यंहा भी उसे मौत को चकमा देना ह सुर मौत का खेल खेलने मई इसे बहुत मज़ा अत ह इसलिए इसने अपना कोड नाम “ऐश” रख रखा ह” इतना कहते हुवे हुवे वो क्रिकेट का सचेडूले देखते हुवे लाइव मैच की ट्रैकिंग करने लगा पर करीब तीन घंटे बाद भी उसे कुछ नहीं मिला…
शेरदिल “मेंस का हे चेक कर रहा ह विमेंस का भी देख ले क्या पता वंहा मिल जाये”
एटर्निटी ने अजीब सी सकल बनाकर शेरदिल को देखा और फिर उसे सामने दिखाई दी विमेंस बिग बैश लीग का फाइनल मैच और उसने फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर से मैचिंग करनी सुरु करि तोह बहुत जल्द हे उसे दिखाई दिया अश्वनी जो पॉपकॉर्न कहते हुवे मैच देख रहा था …
शेरदिल “वो रहा बोलै था न”
एटर्निटी ने है मई कहा और वंहा के माइक को हैक करने लगा और फिर कुछ दिएर बाद उसने शेरदिल की तरफ देख कर बोलै “ अब आएगा मज़ा” और फिर माइक मई बोलै “क्रिकेट दिए हार्ट लवर “ऐश” मेरे पास तुम्हारे लिए डेडली चैलेंज ह लक्शन तुम्हे मिल जाएगी बस कक्तव की रीच मई रहना …मैच मई डिस्टर्बेंस के लिए सॉरी एन्जॉय करो” और माइक से आवाज बंद हो गयी और गेम काफी दिएर बाद दुबारा से सुरु हो गया …
रात के वक़्त
अश्वनी अपने मोबली मई साडी डिटेल्स देख रहा था जिसमे पॉसिबल खतरे बताये गए थे ..
अश्वनी ने मोबाइल को पॉकेट मई रखा और अपना छोटा सा बैग पैक करके फ्लाइट मई सवार हो गया
नेक्स्ट डे…
शेरदिल जो क्वींस ग्रुप की जिनशि की फ्रेंड के साथ बैठा हुवा था कार मई वो बोलै तुम्हे पता ह हमारे साथ ये जो शख्स बैठा ह इसे मौत भी चुने से डर्टी ह …और ये शख्स वर्ल्ड की सभी डेडलिस्ट जगह पर जा चूका ह …” फिर अश्वनी से “थैंक यू आने के लिए”
अश्वनी “ मुझे पता ह सच अभी भी अधूरा ह मेरा बस एक हे रूल ह …मैं जिनके साथ काम करता हु” शेरदिल बिच मई हे बात काट ते हुवे “पता ह पता ह उनका किलिंग कॉन्ट्रैक्ट तुमने पहले हे दे रखा ह अगर तुम्हारे साथ कुछ भी सस्पीशियस होता ह तोह हम भी मरे जायेगा यही कहना चाहते थे न डोंट वोर्री तुम्हे सब सच सच बताया जायेगा” और फिर शेरदिल उसे लेकर घर आगया जंहा एटर्निटी ने उसे देखते हे कहा “अश्वनी मैं घुमा फिरकर बात नहीं करूँगा मेरा नाम एटर्निटी ह अगर हैकर्स के बारे मई जानते हो तोह” इस बार अश्वनी बिच मई बोलै “तुम्हारा नाम सुना ह मैंने तुम आगे बता सकते हो”
एटर्निटी ने प्रोजेक्टर ों किया और लैपटॉप की डिस्प्ले से प्रिसिओं दीखता हुवा बोलै “ये प्रिसिओं वर्ल्ड की सेफेस्ट और डेडलिएस्ट प्रिसिओं मई से एक ह जंहा से आज तक सिर्फ एक जाना भाग पाया ह वो अब कान्हा ह कौन ह ये आज तक किसी को नहीं पता ह और दूसरा जो भागेगा वो हमरा दोस्त घोस्ट होगा”
अश्वनी कुछ दिएर चुप रहा और फिर खड़ा होकर बोलै “घोस्ट इस नाम के एक शख्स को मैं भी जनता हु क्या तुम दोनों इंडिया से हो घोस्ट को भी हिंदी अछि अति ह”
एटर्निटी “नहीं”
अश्वनी सांस छोड़कर “मुझे लगा भी था क्योकि मैं जिसे जनता हु वो तोह खुद चलती फिरती मौत ह और वो अकेला हे काम करता ह”
शेरदिल “तुमने कहा वो इंडिया से ह ..क्या कोई इमेज ह क्या उसकी तुम्हारे पास”
अश्वनी “ नहीं इमेज नहीं ह मेरे पास इंडिया मई माउंट एवेरेस्ट के क्लाइम्बिंग के टाइम कॉन्ट्रैक्ट किलर्स ने अटैक किया था मुझ पर तब मैंने खुदको बचने के लिए एनेर्जेन्सी मिशन दिया tha…wanha की गवर्नमेंट के लिए और इंडियन गोवेर्मेंट की एक एजेंसी से मुझे रिप्लाई मिला और तब मैंने उसे फाइट करते हुवे dekha…usne अकेले हे उन सभी फिघ्टर्स को हरा दिया वो भी सिर्फ अपने हाथो se…aur तब मैंने उसे कहा था ki..kabhi भी मेरी जरुरत हो तोह बस एक बार याद कर लेना …इसीलिए लगा सायद ये वही घोस्ट होगा”
शेरदिल “क्या पता वही हो ये तोह मिलने पर हे पता लगेगा”
एटर्निटी “अब ये देखो …” एटर्निटी ने प्रिसिओं का बैक व्यू सामने स्क्रीन पर दिखाया और आगे बताते हुवे बोलै “ प्रिसिओं के सामने बड़ी सी झील ह जो बर्फ से लगभग साल भर जमी हे रहती ह और वंहा से कुछ भी करना मतलब गेम सुरु होने से पहले हे ख़तम होना ह और प्रिसिओं के पीछे गहरी खायी ह तुम्हे इसी खायी से ऊपर चढ़ना होगा और प्रिसिओं के गॉर्डस से बचकर वंहा पर प्रिसिओं के आसपास कई जगह ये डिवाइस लगाने ह जिसकी वजह से हमे वंहा का 3डी मैप मिल जायेगा …और साथ हे पता लग जायेगा वंहा कितनी सिक्योरिटी ह और फिर हम प्लान बना सकते ह”
अस्वनी एक मिनी क्लैम्बर डिवाइस को देखते हुवे “ये किसलिए ह”
एटर्निटी “यही तोह हमारे एग्जिट प्लान का आखिरी रास्ता ह”
अश्वनी “ok”phir सामने की खायी से ऊपर के प्रिसिओं को देखते हुवे “विंड की स्पीड क्या रहती ह”
एटर्निटी “60 कम तक जाती ह पर तूफ़ान आया हो तोह विसिब्लिटी बिलकुल लौ रहती ह और विंड की स्पीड और तेज़ हो जाती ह”
अश्वनी के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और बोलै …अब कुछ ेक्सइटिंग मिला ह करने के लिए मुझे सामान चाहिए ह जिसकी लिस्ट तुम्हे मिल जाएगी पर पहले मुझे मैच देखना ह”
एटर्निटी ने कीपैड पर हाथ चलाये के सामने कई सरे मैच लाइव आने लगे…
अश्वनी “ग्रेट”
शेरदिल साइड मई लेजाकर एटर्निटी से “अबे ये कर तोह लेगा न वर्ण कसम से तुझे यंहा मुझसे बचने वाला कोई नहीं होगा यंहा”
एटर्निटी “ तू हमेशा सांड की तरह लाल कलर देखते हे भड़क क्यों हो जाता ह चिल रहा ..तू बस देखता ja…isne है कहा ह तोह यकीनन वो पूरी कोसिस करेगा बस उसका क्रिकेट का खेल अभी सुरु हुवा ह और जब ये मैच ख़तम होगा तब देखना तू …इसका यंहा होना हे हमारे लिए बहुत बड़ा सपोर्ट ह”
शेरदिल बस कभी अश्वनी को देखता तोह कभी मैच को की कब ख़तम होगा और तीन घंटे ऐसे हे बीत gaye…par शेरदिल और एटर्निटी की निघाये तोह बस अश्वनी पर हे तीखी हुवी थी और इसी चक्कर मई दोनों ने जूस के 5 गिलास भी पि लिए थे …और फिनॉय अश्वनी अणदायी लेता हुवा खड़ा हुवा और बोलै … “एटर्निटी एक हेल्प मिलेगी तेरी”
एटर्निटी “कैसी हेल्प”
ऐश “एक सॉफ्टवेयर चाहिए जंहा से मैं कंही से भी लाइव क्रकेट मैच देख सकू ”
ये सुनकर एटर्निटी ने बस हां मई इशारा किया …
और उसका इशारा सुनकर ऐश ने उन्हें लिस्ट दी और बोलै ये चीजे अर्रंगे कर दो क्वालिटी से कोई कोम्प्रोमाईज़ नहीं और फिर सुरु करते ह काम”
एटर्निटी और शेरदिल ने लिस्ट देखि और फिर शेरदिल ने अपनी फ़िनलैंड वाली तीसरे नंबर की मैनेजर फ्रेंड को बुलाया और उसके साथ चला गया इक्विपमेंट्स लेन ..पर वो जब वो वापस आया तब उसके चेहरे को देख कर एटर्निटी बोलै “होता होता ह तूने कुछ गलत नहीं किया मेरे dost…aur वैसे भी तुकब तक वर्जिन रहता ह ाचा हे ह न सील टूट गयी तेरी भी” शेरदिल ने उसके चेहरे की तरफ देखा जो सीरियस हे था ..पर अचानक हे एटर्निटी जोर जोर से हसने लगा ….और शेरदिल का चेहरा उतर गया …
ैश्वनी ने इक्विपमेंट्स को अचे से चेक किया और मुझे पहले उस खायी के बॉटम तक पहुंचना होगा तोह मैं पहले निचे उतरूंगा और तुम ड्रोन की हेल्प से फ़ूड और वाटर मुझ तक पहुचवाओगे बाकि मैं देख लूंगा नाईट मई चढ़ाई होगी तुम ये चेक करो की मौसम ख़राब किस दिन होगा ताकि मैं उनकी निगरानी से बचकर ऊपर चढ़ाई कर सकू”
एटर्निटी “ दो दिन बाद हे विसिब्लिटी सिर्फ 15 फ़ीट की होगी और नाईट मई तोह और भी काम हो जाएगी अब तुम्हे डीएड करना ह अब की तुम कब चढ़ाई करते हो पर याद रखना वंहा से गॉर्डस ने तुम्हे देख लिया तोह जीरो परसेंट चांस ह बचने के और गॉर्डस के साथ साथ चॉपर भी तुम्हारे पीछे आएगा तुम्हे मरने के लिए”
ऐश के चेहरे पर मुस्कुराकहत थी और वो बोलै “किंग ऑफ़ लक” ऐसे हे दुनिया मुझे नहीं बुलाती ह”
शेरदिल थोड़ा इमोशनल हो गया और उसके पास आकर बोलै “ अश्वनी भाई ये लड़ाई एक बेटे की उसके माँ बाप उसकी फॅमिली के लिए ह …मैं बस इतना हे कहूंगा की …बहुत से लोग ह जो उसके आने की आस मई जिन्दा ह और उसी आस को हमे बचाना ह वर्ण जो परिवार 20 साल पहले भिखरा था वो पूरी तरह भिखर जायेगा …मैं शेरदिल तुम्हे वचन देता हु बदले मई तुम जो भी मांगोगे या करने को कहोगे वो ख़ुशी ख़ुशी करूँगा बस तुम्हे कामयाब होना हे ह ”
अश्वनी “ मेरा तोह कोई अपना ह नहीं ..पर तेरी बातो मई सचाई मैं देख सकता हु …तुम टेंशन मत लो हम जरूर सक्सेस होंगे और क्या पता ये वही मेरा दोस्त घोस्ट हो”
तीनो अपने काम मई लग गए तोह मैच और माइक सभी और आग के साथ प्रिसिओं पर हे थे ताकि कोई गड़बड़ नहीं ho…ab तक उन्होंने सब सही से संभाला हुवा था
इधर prision.mai..
राज 24 घंटे और मार खाने के बाद राज अगले 24 घंटो बाद बहार आया …और अबकी बार उसे पार्टीशन नंबर 1 मई भेझा गया जंहा 9 कैदियों मई से किसी ने उसे परेशां नहीं किया …वो चुप चाप बैठा हुवा था की उसके साइड से आवाज आयी “किसका मर्डर किये जो तुम्हे यंहा भेज दिया”
राज “ सिर्फ तोडा हे था”
आदमी “ सेल उस जेलर के पिछवाड़े मई खुजली बहुत ह इससे ाचा तोह पिछले वाला था जो फालतू ऊँगली तोह नहीं करता था इसके चक्कर मई तोह कितने हे जाने निपट चुके ह”
राज “ ये तोह ह कोई बात नहीं ये भी मरेगा”
आदमी “उसे छूटै हे तुम मरे जाओगे …ये रूल ह और रूल्स की वजह से हे वो खुद किसी कैदी को मारता नहीं ह अब ऐसा क्यों ये मुझे भी नहीं पता ह वैसे मेरा नाम …ज़फर ह”
राज “ मिलकर ाचा लगा मेरा नाम घोस्ट ह …तुम यंहा क्यों हो”
ज़फर “ 1000 लोगो को मार दिया था …जिसमे कुछ अमेरिका के प्राइवेट कांट्रेक्टर थे मेरे देश को कर्रप्ट कर रहे थे इसलिए ऊपर से निचे तक सबको मार दिया और उन सेल अमेरिकन्स ने मुझे यंहा भेज diya…main कैसा भी हु पर देश से गद्दारी नहीं करता हु ..वैसे भी कुछ हे उम्र और बची ह मेरी मैं खुस हु”
राज “ ज़फर भाई मैंने सुना ह की यंहा एक लम्बी दादी और लम्बे वाला खूंखार क्रिमिनल ह क्या कहते उसे कुछ sin..sin..karke नाम था”
ज़फर “तुम सिंह ki.toh बात नहीं कर रहे हो …” फिर उसने इधर उधर देखा और बोलै धीरे बोल बचा ..शेर के मू मई हाथ नहीं डालते ह …खूंखार जंगली शेर ह कभी कभी हे अत ह पर जब भी अत ह तोह यंहा कोई नहीं होता ह”
राज मन मई बोलै “ ज़फर भाई उसे हे तोह लेने आया हु …”
ज़फर “ बचा कुछ भी करना पर उसे दूर रहना वर्ण इस पूरी जेल मई तुम्हे कोई नहीं बचा पायेगा उधर देखो वो जो तीन ग्रुप ह न ये लोग एक साथ उस पर अटैक करने वाले ह …उसे जान से मरने के लिए …”
राज ने उन तीन पार्टीशन वाले तीस लोगो की तरफ देखा और मन मई बोलै “मेरे रहते तीस क्या 100 भी अजय तोह भी उन्हें कुछ नहीं होने दूंगा”
अभी वो बात हे कर रहे थे की पुरे एरिया मई शांति चा गयी
राज “ सब चुप हो गए”
ज़फर ने भी सबको देखते हुवे कहा “ऐसा तोह तभी होता ह जब कमांडर अत ह सजा देने या फिर वो… मतलब सिंह बहार ारः ह आज कोई बहुत पंगे होने वाले ह”
और बाकि कैदी पीछे हटने लगे ..इधर ज़फर की दिल की धधकने भी तेज़ थी तोह राज की धधकने भी तेज़ थी क्योकि आज वो रविंदर सिंह को देखने वाला tha…aj तक उसने सिर्फ फोटो से हे अपनी इमेजिनेशन मई देखा था की वो कैसे दीखते होंगे…
इधर प्रिसिओं के ब्लॉक बी से लोहे के
घसीटने की आवाज आने लगी और पहले चार गॉर्ड आये …और फिर एक पेअर और फिर दूसरा पेअर बहार आया और राज को दिखाई दिया वो शख्स जिसके लिए वो इतनी तकलीफ सहकर यंहा तक पंहुचा tha…lambe बाल भूरी आंखे और बड़ी मूंछे और लम्बी धड़ी के साथ मई बुक लिए हुवे रविंदर सिंह बहार aya…gaurds भी उसे दुरी बनाकर हे चल रहे थे क्योकि रविंदर के पास जाना मतलब मौत को ऊँगली करने जैसा था…
रविंदर सिंह के लिए कोई पार्टीशन नहीं था वो जाकर एक बहार बानी हुवी पत्थर ki.bench पर बैठ गया और बुक पढ़ने लगा…
राज बस एक तक उन्हें हे देखा जा रहा था उसकी आँखों मई जो अहसास था वो न दिखा सकता था और न हे बता सकता था …पर उसका दिल जनता था की रविंदर सिंह उसकी आखिरी उम्मीद ह पास्ट की सचाई जानने की ..
इधर ऊपर बिल्डिंग मई बने अपने ऑफिस से कमांडर ने सिगार का कास लेते हुवे निचे रविंदर सिंह की तरफ देखा और धीरे से बोलै “तेरा वक़्त ख़तम हो गया ह सिंह इन केडीए ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई ह तुझे मरने के लिए और दुनिया मई पैसा हे सबकुछ ह जब तक तुझे जिन्दा रहने का पैसा मिल रहा था तू जिन्दा था क्या फर्क पड़ता ह एक साल बाद मरना था तोह एक साल पहले मर जाये तोह”
राज ने गॉर्डस को धयान से देखा तोह उसे समाज आगया की वो कुछ नहीं करने वाले ह ..एटलीस्ट तब तक तोह नहीं जब तक रविंदर सिंह मर न जाये…
ज़फर जो पीछे खड़ा था वो राज को रविंदर सिंह की तरफ बरी बरी देखता देखता देखकर बोलै “तुमको इतना मरने की जल्दी क्या ह”
पर राज ने उसे इग्नोर कर दिया और रविंदर सिंह के पार्टीशन की तरफ चल दिया … राज को ज़फर ने पीछे से कई आवाजे मरी तोह बाकि कैदी भी उसे हे देखने लगे…
ऊपर से कमांडर की नज़र भी राज पर गयी और उसे देखकर वो बोलै “अब ये क्या करना चाहता ह”
इधर राज अपने पार्टीशन से बहार जालियो पर चढ़कर बहा जाने लगा तोह गॉर्ड ने एक बार ऑफिस की तरफ देखा जंहा उसे कमांडर ने कुछ नहीं करने का इशारा kiya…raj उतारकर सीधा रविंदर सिंह के पास पंहुचा तोह गॉर्डस ने उसे वापस जाने को कहा …पर राज ने आगे बढ़ कर एक एक किक थोड़ी दूर खड़े दोनों गॉर्डस को मरी …बाकि गॉर्डस आगे बढे तोह उन्हें ऊपर से कमांडर ने इशारे से रोक दिया …पर 30 कैदी उसे खा जाने नज़रो से घूरे जा रहा थे..
गॉर्डस के गिरने की वजह से हुवी आवाज से रविंदर सिंह का धयान भटका तोह शांत सा दिखने वाला चेहरा अब अशांत सा दिखने लगा और माथे पर सिकन आगयी इधर ऊपर से कमांडर ने इशारा किया तोह गॉर्डस ने उन तीस जानो को भी इशारा कर दिया तोह वो भी वंहा उत्पात मचाते हुवे एक दूसरे को मरने लगे गॉर्डस ने पार्टीशन का दूर खोल उन्हें रोकने की कोसिस की तोह उन्होंने उन्हें मारा और सभी रविंदर सिंह को मरने भागे …इधर रविंदर राज को घूरते हुवे खड़ा होने laga…aur उसकी आंखे हे बताने के लिए काफी थी ki.woab गुसा हो हो गया और आगे क्या होने वाला ह…
तभी उसे जफ़र की आवाज सुनाई दी “वापस अजा बचा वो मेन्टल ह वो खुद नहीं जनता ह की वो कौन ह”
और बस राज एक पल के लिए हे ठिठका था की एक किक उसके मू पर पड़ी और जब दुबारा से उसके दिमाग ने काम करना सुरु किया तोह वो कई फ़ीट दूर जाकर गिरा हुवा tha….usne अपने जबड़े को हाथ से सहलाया और धीरे से वापस सेट करता हुवा बोलै “इतनी पावर मतलब गुरूजी ने कहा वो सच tha..phir ये यंहा कैसे ह” वो सोच हे नहीं पाया था की एक हाथ उसके गले पर आ कैसा ….और उसका दम घुटने लगा...
राज “ अंकल मैं आपको बचने आया हु” वो और बोलता उसे पहले हे रविंदर सिंह ने उसे अपनी तरफ खिंचा और फिर वापस पीछे की तरफ फेंक दिया और राज पीछे जाकर सीधा उन तीस कैदियों मई से कुछ से टकराया …
राज “ सांस भी मुश्किल से आरही ह” उसने देखा की वो तीस मई कुछ रविंदर सिंह पर अटैक करने जा पहुंचे ह तोह वो राउंड घुमा और एक जम्प के साथ खड़ा हुवा और सबसे पीछे वाले को अपनी तरफ खिंचा और एक साथ कई पंचेस उसके मू और पेट मई जड़कर उसे सुला दिया …और फिर बाकि दो से भीड़ गे
इधर …
रविंदर सिंह ने अपने पर सबसे आगे अटैक करने वाले को अपनी झांझीरो मई जकड़ा और एक झटके मई उसकी गर्दन तोड़ दी…
और फिर अपने दोनों हाथो को आपस मई जोड़कर एक वार सामने वाले के सर पर किया और वो वंही लेट gaya…phir एक पंच उनके मू पर लगा जिसका उनपर कोई असर नहीं हुवा और उन्होंने उसका गाला पकड़कर अपने पास खिंचा और अपने सर के लगातार तीन वार उसके मू पर करके उसका मू को फोड़ दिया तभी एक ने पीछे से आकर उनका गाला पकड़ा तोह उन्होंने उसके अंघूठे को पकड़कर पकड़ हटाई और फिर उसे अपने सामने लगाकर सिर्फ तीन पूछ मू पर मरे और तीसरे पंच मई वो अधमरा होकर निचे लेट गया …पर तभी उनकी नज़र राज पर गयी और वो उसकी तरफ तेज़ी से भाड़े इधर राज उन कैदियों से लड़ हे रहा था की उसे पीछे से किसी ने ऊपर उठा लिया और जोर से निचे पटक दिया…
राज की दर्द से आह निकल गयी उड़ने देखा की उसे किसने पटका ह तोह उसे अब गुस्सा होने laga…par तभी रविंदर सिंह की पेअर उसे उसकी चेस्ट पर उसे अत हुवा दिखाई दिया तोह वो साइड मई होकर बच गया और जब उसने पेअर के लेंडिंग की जगह देखि तोह बोलै “साडी हड्डिया टूट जाती सीने की” क्योकि रविंदर सिंह का पेअर जंहा निचे आया था वंहा जमीन धंस गयी थी.. राज ने भी अबकी बार हाथ जमीन पर टिकर कर हवा मई जम्प लेते हुवे रविंदर सिंह के सीने पर किक मर दी …पर अगले पल dhad…dhad..dhad…ki आवाज के साथ राज कई जाने से हवा मई घूमता हुवा टकराया और बाकि कैदियों के ऊपर जाकर गिरा ….राज जो कई दिनों से मार हे खा रहा था अबकी बार उसे अपने सरीर मई दर्द होने लगा …और तभी उसे एक कैदी ने पेट मई लात मरी .फिर दूसरे ने ऐसे हे कई जाने उसे मरने लगे …राज ने एक के पेअर को पकड़ कर खिंचा और उसे नव्हे गिरा दिया फिर दूसरे के और ऐसे हे चारो को निचे गिरा दिया …और खड़ा हो गया …पर अबकी बार उसकी आँखों मई गुसा बहुत तेज़ गुसा था… और उसी गुसाई से वो बोलै … आपको लगता ह अब दूसरे तरीके से हे समझाना पड़ेगा” ये कह वो तेज़ी से रविंदर सिंह की तरफ बढ़ा तोह रविंदर सिंह ने अपने सामने खड़े क्रिमिनल को किक मरी और राज की तरफ चल दिए …राज ने रविंदर सिंह के करीब एते हे झुक कर पेट पर वार किया जिसे रविंदर सिंह ने ब्लॉक करने के लिए हाथ आगे किये तोह राज ने लेफ्ट पंच से जल्दी से रविंदर सिंह के मू पर वॉर किया और लगातार कई पंच मू पर मरे …रविंदर सिंह का मुज सिर्फ दूसरी हल्का सा घूम गया बाकि वो तस से मास नहीं हुवे …फिर उन्होंने अपने एक हाथ से हाथपर ए खून को पौंछा
..और राज की तरफ हलकी से मुस्कान दी …राज ने हैरानी से देखा पर अगले हे पल रविंदर सिंह के पंचेस लगातार लेफ्ट राइट लेफ्ट राइट राज पर हुवे राज ने बड़ी मुश्किल से वरो को रोका पर उसके हाथ दर्द से कांपने लगे तभी रविंदर सिंह ने राज के कालर को पकड़ा और उठाकर निचे जमीन पर पटक दिया ..पर चौदह नहीं और घसीट ते हुवे पास मई बानी पत्थर की लम्बी सीटिंग बेंच पर पटक दिया …और फिर पलट कर बाकी कैदियों पर टूट पड़े..
इधर राज की सांस की आवाज भी धीरे धीरे से आरही थी “वो मन मई हे बोलै तू हे देख ले यार पूनम के पापा ह मुझसे नहीं होगा” और फिर उसकी आँखों मई से दर्द का नमो निशान गायब होता चला गया और उसकी जगह आयी चेहरे पर मुस्कान भयंकर मुस्कान जो बता रही थी की वो क्या करने वाला ह वो खड़ा हुवा और बोलै “बहुत खेल लिए तुम सब चलो अब दूर हैट जाओ वो मेरे सीकर ह …और तुम रविंदर सिंह बुज़दिल की जिंदगी जीते हुवे कैसा लग रहा ह …मेरी माँ को भाभी मंटा ह न तोह फिर तू इतना बुज़दिल कैसे निकला की यंहा छिपा हुवा ह बोल”
और निर्वाण ने अपने पास के कैदी की गर्दन को पकड़ा और मरोड़ कर उसे जान से मार दिया…
इधर रविंदर सिंह ने राज को देखा पर बोलै कुछ नहीं
राज “मुझे नहीं पहचाना मैं निर्वाण हु विद्या का बीटा क्या हुवा याद नहीं आया”
रविंदर सिंह ने विद्या का नाम सुना तोह वो थोड़ा चौंका फिर लगातार विद्या …vidhya..vidhya…naam बोलने लगा और उसका गुसा पल पल भड़ने लगा ..और आस पास मरने ए kaidi.bhi अब दोनों को देखकर पीछे हैट गए …रविंदर सिंह विद्या का नाम लेते हुवे राज की तरफ भड़ने लगा …उसके सर मई बहुत सी यादे घूमने lagi…aur हर पल उसके दिमाग मई गुसा और बदला हावी होने लगा और वो फिर चिकने लगा तूने मारा न तूने मैं तुझे आज छोडूंगा नहीं और इधर निर्वाण जिसे उसके बचपन की कुछ बाते याद थी वो भी गुसाई से बोलै तूने कसम तोड़ी h…tune नहीं बचाया मेरी माँ को तोह तुझे भी मरना हे चाहिए बुज़दिल और दोनों एक दूसरे से भीड़ गए और उन्दोनो की लड़ाई इतनी भयंकर होने लगी की जंहा भी उनके वार मिस होकर पड़े थे वंहा की ज़मीन धंस गयी या पथरो मई दरार agayiii…tabhi वंहा जोर जोर से साईरन बजने लगा ..और एक साथ हे बहुत सरे गॉर्ड भागकर उनकी तरफ agaye…par रविंदर सिंह और निर्वाण दोनों को काबू करना उनके लिए मुश्किल हो गया था वो दोनों लड़ते हुवे जो भी उनके पास आरहा था उससे पिट ते जा रहे थे … निर्वाण को बुरी तरह से मार पड़ी थी रविंदर सिंह से पर रविंदर सिंह को भी निर्वाण ने जगह जगह से लाल कर दिया अपने पंच और किक्स से मार मार kar…last मई आखिर गॉर्डस को बेहोशी की हइडोसी वाले इंजेक्शन दोनों को देने पड़े…
बाकि दूर से देख रहे क्रिमिनल्स के चेहरे साफ़ बता रहे थे की वो किसी भी कीमत पर उन दोनों से पन्गा नहीं लेना चाहेंगे इन फ्यूचर ab…kyoki भले हे वो सब मिलकर दोनों को मार लेंगे पर आधे तोह वो भी मरे जायेंगे और वो bhi.apni जान से इसलिए …कोई भी उनसे लड़ना नहीं चाहता था किसी भी वजह से…
इधर राज को जब होश आया तब वो अपने सेल मई निचे स पड़ा हुवा tha…usne सीधे होने की कोसिस की तोह हुवा उसी तेज़ दर्द … “अहह हाथ था या हथोड़ा ऐसा लग रहा ह जैसे बुलडोज़र से तकर हुवी हो…” उसकी हीमत हे नहीं हो रही थी हिलने की इसलिए वो अपने सेल मई हे पड़ा रहा पुरे एक दिन बाद मैडिटेशन से अपने आपको इम्यून करने लगा …और अगले दिन निकलकर सीधा ग्राउंड मई आकर रविंदर सिंह जंहा बैठ ते थे वंहा बैठ गया …और कुछ दिएर मई रविंदर सिंह भी हाथ मई बुक लिए आगये और राज को देखते हे बुक बंद करदी…
गॉर्डस अलर्ट हो गए और बोले “no मोरे फाइट मर सिंह”
रविंदर ने कुछ नहीं कहा और वो चुप चाप राज से कुछ दुरी पर बैठ गए इधर पुरे क्रिमिनल्स दोनों को हे देखे जा रहे थे की कब लड़ने वाले h.ye दोनों और हुवा भी वही राज ने जैसे हे विद्या का जिक्र किया रविंदर सिंह का दिमाग हिल गया और दोनों किसी पागल सांड की तरह भीड़ गए पर इस बार निर्वाण की जगह राज था तोह उसकी पिटाई जायदा हुवी…
कमांडर भी वंहा पहुंच गया और बोलै “ दोनों को एक साथ रखो और लटका कर रखो 72 घंटो तक कोई खाना नहीं और बिच बिच मई नमक का दोसे देते रहना ताकि सो न सके सेल”
पर कमांडर को भी हैरानी हुवी की घाव पर नमक लगने के बाद भी दोनों ने मू से आवाज तक नहीं निकली…
कमांडर “ पड़ा रहने दे दोनों को अकेले”
और गॉर्डस सेल को बंद करके बहार चले गए….
करीब दो घंटे बाद राज बोलै
राज “क्या आपको कुछ भी याद नहीं ह”
रविंदर सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया
तब राज आगे बोलै “मैं राज हु आपके दोस्त सहदेव और विद्या का बीटा”
रविंदर नाम सुनकर कुछ पल बाद पागलो की तरह करते हुवे बोले “सहदेव bhai…sahdev bhai…maar दिया …मार दिया …” ये कहते कहते अब रविंदर सिंह वापस अपने आप से बहार होने लगे थे और उन्हें ऐसा देख राज जल्दी से बोलै “ आप शांत हो जाईये सब तीख ह ..मुझे आपकी बेटी पूनम ने भेजा ह”
बेटी का नाम सुनकर रविंदर सिंह कुछ शांत हुवे और बोले “बेटी मेरी बेटी पूनम…”
राज “ है वो जिन्दा ह अब बड़ी होगयी ह आपको याद ह पूनम बचपन मई मुझे और पूनम को अनिरुद्ध अंकल की लड़की ऋचा के बर्थडे पार्टी मई साथ मसि सुलाया था बचपन mai…kuch याद h…dada जी ठाकुर जगमाल सिंह …और दिव्या याद ह आपको”
रविंदर सिंह के एक्सप्रेशन बदलने लगे वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे जैसे उनके दिमाग मई बहुत बड़ा तूफ़ान सा उठा हुवा हो ये देख राज बोलै “ आप दिमाग पर जोर मत dijiye…main आपको यंहा से निकलकर आपको बेटी से मिलना चाहता हु और धीरे धीरे apko.sab याद आजायेगा”
ये सुनते हे रविंदर को जैसे कुछ याद आगया हो और वो जल्दी से बोले “नहीं नहीं मैं जा नहीं सकता हु वो सबको मार देंगे अगर मैं यंहा से भगा तोह ..मुझे यही रहना होगा …मैंने वचन दिया ह मुझे यही रहना होगा जेल मई हमेशा के लिए तभी सब जिन्दा रहेंगे तभी सब जिन्दा रहेंगे ” और लगातार यही लाइन बार रिपीट करने lage….aur जब वो रुके तब राज ने आगे कहा … “अपने अपना वचन निभाया पर उन्होंने धोखा दिया आपके दोस्त और उनके परिवार आपके साथ काम करने वाले सबको मार दिया क्या अब भी आपको यही रहना ह जिनके लिए औ वचन निभा रहे ह वो तोह सब मर चुके ह उन्हें बेहरहमी से उन कुत्तो ने मार दिया”
रविंदर सिंह के चेहरे पर अब ऐसे एक्सप्रेशन आगये थे जिन्हे समझना बहुत मुश्किल था …उनके हाथ की मुठिया कस्ती गयी और उन्होंने अपनी ताकत से झांझीरो को हे उखड लिया और राज के गले को कसकर पकड़ लिया और दबाने लगे …
राज “मेरा नाम अपने हे रखा था भूल गए आप मेरी माँ से वडा किया था की मुझे कुछ नहीं होने देंगे और अब खुद हे मर कर वडा तोड़ रहे ह”
रविंदर सिंह ने एक हाथ से अपना सर पकड़ लिया और राज का गाला छोड़ कर पीछे हैट गए और दीवार पर सर मरने लगे…
राज “हमे बदला लेना ह …और उस बदले के लिए आपको जीना होगा …भले हे आज आपको सब याद नहीं पर अगर मैंयहस तक पहुंचकर आपके दोस्त और भाभी का जिक्र कर रहा हु तोह मेरी बातो मई कुछ तोह सचाई होगी हे और आपकी बेटी क्या उससे नहीं मिलना चाहेंगे आप वो बिन माँ बाप के मेरी तरह जी रही ह उसे कितनी ख़ुशी होगी आपसे मिलकर …”
रविंदर सिंह दीवार पर लगातार पंच मरने लगे…
राज “ये गुस्सा ये नफरत उनके लिए बचाकर रखिये”
रविंदर सिंह “ धोखा किया मेरे साथ जिनको बचने के लिए मैंने ये सहा उन्हें हे मार diya…main उन हरामजादो की नेसल को हे मिटा dunga….main दुश्मनी का दूसरा नाम रविंदर सिंह hu…jismai ऊपर वाले की दी हुवी असीम ताकत ह जो अपने दुश्मन को कभी जिन्दा नहीं छोड़ता ह” और अबकी बार दीवार पर उनका पंच लगा तोह दीवार मई दरारे आगयी….
राज मन mai“agar ऐसा पंच मुझे मार दिया होता toh..sochkar हे दर्द महसूस होने लगा ह अब मुझे यंहा से निकलने का प्लान बनाना होगा और मुझे यकीं ह जैसा मैं सोच रहा हु एटर्निटी ने भी वैसा हे सोचा होगा खायी से निकलने का प्लान किया होगा अब मुझे बस सिग्नल देना ह”
आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का
वर्ड काउंट 7.6 क
ब्लॉक बी
3 दिन बाद इन इंडिया…
“अब हम बच नहीं पाएंगे”
एक लड़की बुरी तरह रोटी हुवे बोल रही थी… “वो वो लोग हमे मार देंगे …” ये कहते वक़्त उसके होठो के कांपने के साथ साथ उसकी आँखों से आंसू गिरते जा रहे थे “आखिर हमने इनका क्या बिगाड़ा ह ये हमे अकेला चौदह क्यों.. नाहीइ… dete…h”
उसके साथ खड़ा लड़का उसे गले से लगते हुवे बोलै “ कुछ नहीं होगा हमे हमने कुछ गलत नहीं किया ह …तू रो मत सब तीख हो जायेगा हम जरूर बच जायेंगे तू रो मत मेरी बहन”
वो दोनों लड़का लड़की आपस मई गले लगे हुवे एक दूसरे से बात कर हे रहे थे की उनके आगे खड़ा शख्स बोलै “ मेरे रहते वो तुम मई से किसी को छू भी नहीं सकते ह ये मेरा नरपत सिंह का वडा ह फिर पलट kar…rajeev जल्दी से तीसरे नंबर की बोतल निचे से ऊपर दूसरी लाइन मई उसे घुमाओ तीन बार राइट और फिर तीन बार लेफ्ट…”
राजीव ने है मई गर्दन हिलायी तभी बहार से आवाज आयी. … “ तू आज बच नहीं पायेगा मुझसे चूजे तू पहला शख्स ह जिस साई मैं इतनी नफरत करता हु बहुत परेशां किया ह tune…agar आसान मौत चाहता ह तोह उस लड़की को मेरे हवेली करदे और तेरी मौत को मैं आसान बना दूंगा”
नरपत सिंह की ये आवाज सुनकर चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और वो बोलै “मेरी मौत है है है मेरी मौत के सपने तोह तेरी तरह तेरे साथियो ने भी बहुत देखे थे पर सबको मार दिया मैंने…”
तभी बहार से बहुत जोर से आवाज आयी जैसे कोई भरी चीज से वार हुवा हो दीवार पर नरपत सिंह पीछे देख राजीव से बोलै “ पूनम और इन दोनों को साथ लेकर जल्दी से निकल जाओ और घुसते हे जो रेड बटन दिखेगा उसे दबा देना”
राजीव “तू भी चल”
नरपत “मैं खुदको बचा लूंगा तू बस जल्दी निकल अब दीवार टूटने हे वाली h…jaldi निकलो”
राजीव ने सबको उस सुरंग से लेकर जाने लगा और सुरंग का रेड बटन घुसते हे पुश कर दिया जिसे वंहा वापस वो फर्श की बड़ी सी टाइल वापस आगयी जो हैट गयी थी और एक तीख तीख की आवाज भी सुरु हो गयी नरपत ने उन सबको साफल्य जाते देख एक गहरी सांस ली हे थी की दुबारा से एक टकराने की आवाज आयी और दीवार के अंदर क्रैक आने लगे और भड़ते हे गए…
ुँक्रैक्स को देखते हे नरपत समाज गया की क्या होने वाला ह इसलिए उसने जल्दी से शेल्फ मई लगी एक और बोतल को घुमाया और फिर एक और फर्श की टाइल एक तरफ खिसक गयी और वो उसमे जम्प कर गया ..अभी उसने जम्प की हे थी की …साइड की दीवार पूरी ध गयी और स्कॉर्पियन ट्राइब का लीडर अंदर आया उसने इधर उधर देखा फिर उसकी नज़र फर्श मई दिख रही सुरंग पर गयी तोह उसने अपने पीछे खड़े आदमियों मई से एक को पकड़ा और उस सुरंग मई फेंकते हुवे बोलै लोकेशन भेज देना …और वो आदमी चीखा और सुरंग मई गिरता चला गया …
स्कॉर्पियन ट्राइब का मेंबर “ यंहा आसपास क्या क्या ह”
पीछे से रॉय ग्रुप का एक आदमी जो साथ आया था वो बोलै “ सर आसपास तोह समुन्द्र ह और एक बस स्टैंड ह उसके इलावा यंहा दूर तक सिर्फ डंपिंग यार्ड हे ह वो भी यंहा से बहुत दूर ह मतलब 20 कम के करीब”
स्कॉर्पियन ट्राइब लीडर “ सभी आदमियों को लगाओ और उन चारो को ढूंढो मुझे उस लड़की के सिवाए कोई जिन्दा नहीं चाहिए ह”
रॉय ग्रुप के उस आदमी ने अपने पीछे खड़े सभी आदमियों को आर्डर दिया और वो सभी वंहा से निकल गए …
रॉय ग्रुप का आदमी “ सर मैं अभी जो आदमी सुरंग मई गया ह उसकी लोकेशन ट्रेस कर रहा हु वो यंहा से नार्थ की तरफ सीधा जा रहा ह आप कहे तोह हम भी”
स्कॉर्पियन ट्राइब के लीडर ने मोबाइल हाथ मई लिया और तेज़ी से नार्थ की तरफ भागता हुवा जाने लगा …अगर उसकी स्पीड इस वक़्त कोई देख लेता तोह यही सोचता की ये इंसान नहीं रोबोट ह …इधर सुरंग के अंदर मुस्कान पूनम का हाथ पकडे हुवे आगे भड़ती जा रही थी…
मुस्कान “ हम सही रस्ते पर तोह ह न”
राजीव “क्या कोई और रास्ता तुम्हे यंहा दिख रहा ह”
डॉ “मुस्कान का मतलब था की हम सेफ तोह रहेंगे”
राजीव “ देखो अभी हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं ह और जितना मैं उसे जनता हु उसने हमे यंहा इस रस्ते से भेजा ह तोह यकीनन ये रास्ता सुरक्षित तोह होगा जे होगा ये तोह कन्फर्म ह ..पर जायेगा कान्हा ये मुझे भी नहीं पता ह”
पूनम उनके साथ चुप चाप चल रही थी उसे कोई फर्क नहीं पद रहा था की क्या हो रहा ह और क्या नहीं बस वो एक हे बात बोल रही थी धीरे धीरे “उसने वडा किया ह वो उसे लेकर आएगा”
मुस्कान आगे देखते हुवे बोली “वंहा आगे कुछ ह”
राजीव “ वंहा तोह लाइट नज़र आरही ह”
डॉ “ है सायद वही से रास्ता ह बहार जाने का”
वो सभी जल्दी जल्दी सुरंग मई दूर नज़र आरही रौशनी की तरफ बढ़ने लगे और जब सब उसके करीब पहुंचे तोह सब के चेहरे उतराये
मुस्कान “ ये तोह एक छोटा बेसमेंट ह”
डॉ “ मतलब हम फंस गए ह यंहा आकर और अब बचना नामुनकिन ह हमारा”
मुस्कान “ है यंहा चारो तरफ से सब कुछ बंद ह”
दोनों भाई को पैनिक होता देख राजीव बोलै “उसने हमे कुछ सोच कर हे यंहा भेजा ह पहले सबकुछ चेक करो”
मुस्कान चिल्लाते हुवे बोली “ क्या चेक करो हम बेसमेंट मई ह यंहा से न कोई दूर ह न कुछ यंहा बस ये खाने के पैक पैकेट्स और डिब्बे ह apko.dikh नहीं रहा ह”
डॉ ने भी एक डिब्बे को हाथ मई लिया और बोलै ये तोह अभी एक्सपिरे नहीं हुवे ह मतलब ये इमरजेंसी सिचुएशन के लिए रखे हुवे”
राजीव जो आसपास सब देख रहा था वो बोलै “उसने इमरजेंसी कंडीशन के अंदर भी इमरजेंसी प्लान बनाकर रख रखा था मतलब उसे पता था की कभी ऐसी सिचुएशन भी आसक्ति ह और अगर उसे पता था तोह बस हमे यंहा रूक कर उसका इंतज़ार करना …वो जरूर हमे लेने आएगा”
डॉ “ अगर वो मर गए या पकडे गए तोह हम तोह फंस जायेंगे यंहा हमेशा के लिए”
मुस्कान“ तब हम वापस इसी रस्ते चले जायेंगे हमेशा तोह वो यंहा नहीं बैठा रहेगा न” तभी उसकी नज़र राजीव पर गयी जो एक तरफ चुप चाप बैठा हुवा था और उसके चेहरे पर कन्फूसिओं और परेशानी के भाव आगये और वो राजीव के आगे आकर बोली “ हम वापस जा सकते ह न”
पर उसे राजीव का कोई रिप्लाई नहीं मिला और राजीव से खुदको रिप्लाई न मिलते देख डॉ भी घबरा गया और वो बोलै “आप कुछ बोलते क्यों नहीं ह”
राजीव ने एक गहरी साँस लेकर छोड़ी और बोलै “ तुम्हे वो आवाज याद ह न जो हमारे पीछे से आयी थी”
डॉ “हमारे पीछे तोह दो आवाज सुनाई दी थी …आप किस आवाज की नात कर रहे ह और आवाज का क्यों पूछ रहे ह”
राजीव “ इसलिए क्योकि उनमे से एक आवाज का मतलब था की अब वापस जाने का रास्ता बंद ह ..वंहा से भी यंहा न कोई आसक्त और न यंहा से वंहा जा सकता ह”
और राजीव की बात दुंकर डॉ का दिल घबरा उठा तोह मुस्कान ये सुनकर शॉक के मरे निचे हे बैठ गयी
राजीव “ तुम घबराओ मत हमे बस दिमाग लगाकर सोचना ह क्योकि वंहा ऊपर हमे सब किसी भूखे कुत्तो की तरह धुंध रहे honge..agar हम यंहा से निकलने का रास्ता धुंध भी ले तोह भी बहार निकलते हे मौत हमारे सामने होगी …उनकी पावर तुम देख हे चुकी हो …इसलिए खुद को शांत karo..maine इससे भी बुरी सिचुएशन देखि ह …और ऐसी सिचुएशन मई खास वो हमारे साथ अभी यंहा होता तोह सायद कोई हमे छू भी नहीं सकता था”
डॉ “तोह आपके पास मोबाइल ह न उसे बुला लीजिये”
राजीव के चेहरे पर एक ढक भरी मुस्कान आगयी डॉ की बात सुनकर..
मुस्कान “ आप मुस्करा क्यों रहे ह आप पूनम को बचाना चाहते ह न तोह बुलाइये उस शख्स को ..वो आगया तोह पूनम भी बच जाएगी और हम भी”
राजीव ने पूनम की तरफ देखा जो एक जगह आराम से घुटने मोड़कर बैठी हुवी थी फिर मुस्कान की तरफ देखकर बोलै “उसे बुला हे तोह नहीं सकता हु”
डॉ “क्यों नहीं बुला सकते ह”
राजीव कुछ नहीं बोलै
मुस्कान “ आप बोलते क्यों नहीं ह”
राजीव “ क्योकि वो हमसे बहुत दूर ह मैं चाकर भी उसे बुला नहीं सकता hu…aur इस वक़्त भी मुझे पूरा यकीं ह वो मौत से हे लड़ रहा होगा ताकि तुम्हारी दोस्त के पिता को वापस ला सके सिर्फ एक वेड के लिए वो इस वक़्त भूखे शेरो के झुण्ड के बिच मई होगा”
राजीव की बात सुनकर डॉ और मुस्कान दोनों की आवाज हे निकालनी बंद हो गयी
राजीव “ क्या हुवा समाज नहीं ारः ह की क्या बोलना चाहिए …तुम्हारी दोस्त बहुत खास ह उसका भाई सुनील …उसका देवर शेरदिल जिसका जिगर भी उसके नाम की तरह हे ह वो …और वो जिसका नाम तुम्हारी दोस्त के दिल की हर धड़कन के धधकने से उसके दिल मई धधकता ह वो तीनो अभी देश से बहार ह ..पर वो हमे बचने आएंगे ..हमे बस साबरा रखना ह और ये मेरा अंदाज़ा नहीं ह मेरा अटूट विस्वास ह जो maine.sach होते पहले भी देखा ह…”
राजीव की बात सुनकर मुस्कान जो दरी हुवी थी वो अब पूरी तरह शांत हो गयी और पूनम के पास बैठ gayiii…toh डॉ ने भी आसपास की साडी चीजों को देखने के बाद कहा..
“हमारे पास खाने की बहुत सी चीजे ह तोह मैं कहूंगा उतनी हे क्वांटिटी मैं हमे फ़ूड और वाटर को उसे करना ह ताकि हम जायदा से जायदा टाइम तक यंहा रुके रह सके…”
राजीव ने है मई सर हिलाया और फिर खुदसे हे बोलै “अब इन्हे कैसे कहु यंहा नेटवर्क नहीं ारः ह …अब तोह नरपत के बाद अज्जू से हे उम्मीद ह की वो हमे धुंध लेगा ….हे ऊपर वाले मदद करना …इन बचो ने तोह अपनी जिंदगी जीनी हे सुरु करि ह इनपर रहम करना”
राजीव चेहरे को नार्मल रख रहा था और साडी बाते मन मई बोल रहा था ताकि बाकि दर न जाये …पर वो ये नहीं देख पाया था की यंहा एक ऐसा डिवाइस भी था जिसकी रेंज पावर बहुत जायदा थी और वो मुश्किल से मुश्किल जगह से भी सिग्नल को भेज सकता था …और वो डिवाइस इस वक़्त पूनम के गले मई लॉकेट बनकर लटक रहा था ….और उसे ट्रैक डायरेक्टली अज्जू और श्रुति हर पल करते थे….
प्लेस उदयपुर…
ठाकुर जगमाल सिंह “गुरुदेव सब सही ह न”
गुरुदेव “है पुत्र सब सही और सस्त्रो के अनुसार हो रहा ह..” फिर पलटकर आश्रम वाले गुरु जी से “तुम्हे पता ह आगे क्या करना ह”
आश्रम गुरु “जी गुरुदेव जैसा अपने बताया था वैसे हे सभी शैडो वारियर की पूरी टीम यंहा मौजूद ह”
गुरुदेव “जगमाल सिंह कुछ दिन बाद पुत्र राज भी यंहा आजायेगा और उसी दिन हे दुश्मनो को सचाई का अंदाज़ा हो जायेगा …”
जगमाल सिंह “ गुरुदेव ये तोह दिकत हो जाएगी क्या फिर से वही सब होगा”
ये सुनकर गुरुदेव के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और वो बोलै “दिकत तोह ह पर इस बार दिकत हमे नहीं बल्कि उन्हें होने वाली ह क्योकि इस बार पुत्र राज का सुरक्षा चक्र उसके साथ होगा” ये कहते वक़्त गुरुदेव के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कराहट थी जिसका मतलब वंहा खड़े जानो मई से कोई नहीं समाज पाया था सिवाए खुद गुरुदेव के…
उदयपुर मई पूरी तयारी सुरु हो चुकी थी कप्तान सिंह ने पहले हे पूरी तयारी कर दी थी उन सबके रहने के liye…aur अब उदयपुर की वो हवेली जो जलकर दुबारा से होटल बन गयी थी एक बार फिर वो अपने अतीत को जिन्दा कर निर्वाण हवेली मई बदल गयी thi…aur ये बात धीरे धीरे उदयपुर के पुराने घरानो तक पहुंची तोह वो भी धीरे धीरे ठाकुर जगमाल सिंह से मिलने के लिए ख़ुशी ख़ुशी आरहे थे…
तोह यंहा से दूर….
राज तीन दिन और रातो से लटका लटका हुवा था …
कमांडर “क्या हुवा अब पैरो मई दम नहीं रहा जो घुटनो पर आगया”
ये सुनकर लगबघ दर्द से टूट चुके राज ने दुबारा से अपनी पूरी ताकत इखट्टी करि और अपने पैरो पर खड़ा हो गया….
कमांडर “ बहुत जिद्दी ह इतनी मार खखर भी फिर से खड़ा हो गया”
पीछे खड़े गॉर्ड ने हंटर को पेअर पर मरने के लिए दुबारा उठाया तोह कमांडर ने रोक दिया और बोलै “घोस्ट ये तोह सुरुवात ह मेरे रूल्स तोड़ोगे तोह छोटी सी सजा भी बहुत बड़ी लगने लगती ह” फिर कमांडर गॉर्डस से बोलै “ खोल दो इसे अभी उस कोरियाई कुत्ते को भी देखना ह”
राज को खोल फर्श पर हे नंगा पाटकर वो चले गए…
करीब 6 घंटे बाद सेल के दूर मई से एक रेक्टेंगल शाप की जगह उतनी हे स्लाइड हुवी जितने मई से थाली आसक्ति थी वो स्लाइड हुवी और एक थाली खाने की अंदर आयी …2 घंटे और बीत गए 8 घंटे बाद राज धीरे धीरे थाली के पास आया और दीवार के सहारे पीठ लगाकर बैठकर खाना खाने लगा …..
24 ऑवर बाद …
राज के सेल का दूर खुला और उसे गॉर्ड की आवाज आयी और एक रौशनी उसके सेल के अन्दरई तोह राज ने अपने आँखों के आगे हाथ रख liya…phir धीरे धीरे सेल से बहार आया और बहार आकर आसपास की जगह देखने लगा …फिर जिस तरफ एक कैदी जा रहा था उस तरफ जाने लगा और वो कैदी उसे लेकर आया एक खुली जगह जंहा सिर्फ 50 कैदी हे थे जिन्हे अलग अलग जालियो के पार्टीशन मई 10 ,10 के ग्रुप्स मई रखा गया tha……raj भी सबको देखता हुवा उस खुली जगह मई आया तोह वंहा खड़े गॉर्ड ने कहा “5 नंबर मई जाना ह वंहा का कैदी मर चूका ह ..अब तू देखते ह कितने दिन जिन्दा रहता ह”
राज पांच नंबर की तरफ जाते हुवे इधर उधर देख रहा था …और बाकि झलियो के बने हुवे पार्टीशन को समाज रहा था तोह दूसरे पार्टीशन मई खड़े कैदी उसे देख रहे थे तोह कुछ शोरे मचा रहे और कुछ बोल रहे थे … “चीखने तू तोह गया” पर राज की नज़रे तोह सिर्फ रविंदर सिंह को धुंध रही थी जो उसे कंही दिखाई नहीं दिया …वो पंच नंबर पार्टीशन मई घुसा और वंहा के बाकि कैदियों की तरफ देखते हुवे आगे बढ़ने लगा ..उसके पार्टीशन के कैदी उसकी तरफ हे घूरते हुवे देख रहे the…aur उन्हें ऐसे घूरते देख राज बोलै
राज “एक बात दिमाग मई बैठा लेना …मुझसे इतने दूर रहोगे उतना सुखी रहोगी और अगर ऊँगली करि किसी ने भी तोह मैं उसकी आगे की जिंदगी नरक बना दूंगा”
उसकी बातो का किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा और पड़ता भी कैसे …उन्हें नहीं पता था की उनके सामने कई देशो मई मोस्ट वांटेड की लिस्ट मई टॉप 25 मई नाम बनाने वाला घोस्ट खड़ा h…wo सब खुद बहुत डेडलिस्ट क्रिमिनल से थे और उनके लिए जान लेना मतलब पेपर को फाड़ने जैसा था…
उनमे से एक ने राज के गाल पर धीरे से आगे भड़ते हुवे थपथपाया और बोलै “बचे को गुसा आगया पापा ने गाल पर थपथपाया तोह पापा से ladega..ale लेले”
पर आगे जो होने वाला था उसे उसकी उम्मीद नहीं थी राज ने तेज़ी से उसके उस हाथ को कलाई से पकड़ा और कड़ाक …kadaak…kadaak…kadaak….kadaak…kadaak करके उसके हाथ की हर ऊँगली को तोड़ दिया और अंघूठे को तोह साइड से आधा हे फाड़ कर साइड से उखाड़ diya…wo कैदी बुरी तरह चीखा ..पर राज को कान्हा सुकून था …उसने उसके दूसरे हाथ को पकड़ा और फिर यही काम किया ….और बाकी कैदी पीछे हैट गए …और गॉर्डस तेज़ी से पंच नंबर सेल की तरफ आने लगे ..राज ने उस तड़फड़ा रहे कैदी के कान को पकड़ा और पूरी ताकत से पकड़कर उस कैदी को ऊपर उठाया और फिर घुमाकर एक तरफ एक झटका देकर फेंका और बस कान राज के हाथ मई था और वो कैदी साइड मई गिरा दर्द से बुरी तरह तड़फड़ाता हुवा चीक रहा tha…tabhi गॉर्डस अंदर गुसाई और राज को डाँडो से बुरी तरह मरने लगे
48 घंट baad…finlad मई एटर्निटी “तुझे जो कहा वो किया”
शेरदिल “है मैंने पता किया ह उस खायी की गहराई 3 कम ह मतलब मौत पाकी ह अगर कोई चढ़ेगा या उतरेगा तोह ऊपर से बहुत तेज़ हवाएं चलती ह ”
एटर्निटी “हमे बस वंहा से ऊपर तक डिवाइस पहुंचना ह कैसे भी ताकि राज जब वंहा से निकलने की कोसिस करे तोह हम उसकी हेल्प कर सके और साथ हे वी डिवाइस हमे एक मैप भी देगा”
शेरदिल “भाई एटर्निटी माइनस डिग्री मई जंहा हवा भी तेज़ रहती ह ऊपर गॉर्डस ह तोह कौन ऐसा होगा जो ये काम कर payega…main ये कर देते पर मैं पहाड़ पर चढ़ना नहीं जनता हु खासकर बर्फ के.”
एटर्निटी “तुझे चढ़ने को बोल कौन रहा ह …खतरों से खेलने के लिए जिगरे से बड़ा जिगरा चाहिए होता ह कोई ऐसा जिसकी किस्मत बहुत तेज़ हो और ऐसा banda…aisa बाँदा कौन ह”
शेरदिल “ तू कहानिया मत बना साफ़ बोल आखिर क्या कहना चाहता ह”
एटर्निटी ने इशारा किया तोह शेरदिल स्क्रीन पर देखने लगा जंहा एटर्निटी ने कुछ टाइप किया और एक डिटेल सामने आयी जिसे कुछ मिनट पढ़ने के बाद वो छोङकर बोलै “ इम्पॉसिबल ये कैसे मुमकिन ह मतलब माउंट एवेरेस्ट पर बिना ऑक्सीजन जे अकेला चढ़ गया एयर क्राफ्ट से बिना पैराशूट के जम्प करके दूसरे पैराशूट पर किलोमीटर्स मई तरवेल कर दूसरा परशुते लेकर निचे साफल्य लेंड हुवा ह …और तोह और डीप डाइविंग के record…akhir ये बाँदा ह क्या चीज इतना रिस्क”
एटर्निटी “ इसका रियल नाम अश्वनी ह क्रिकेटर बनना छठा था …क्रिकेट का दिए हार्ट लवर ह अभी भी अगर कंही क्रिकेट चल रहा ह तोह ये वंहा मिल जायेगा”
शेरदिल “ ये आएगा हमारी मदद करने”
एटर्निटी “जरूर आएगा क्योकि यंहा भी उसे मौत को चकमा देना ह सुर मौत का खेल खेलने मई इसे बहुत मज़ा अत ह इसलिए इसने अपना कोड नाम “ऐश” रख रखा ह” इतना कहते हुवे हुवे वो क्रिकेट का सचेडूले देखते हुवे लाइव मैच की ट्रैकिंग करने लगा पर करीब तीन घंटे बाद भी उसे कुछ नहीं मिला…
शेरदिल “मेंस का हे चेक कर रहा ह विमेंस का भी देख ले क्या पता वंहा मिल जाये”
एटर्निटी ने अजीब सी सकल बनाकर शेरदिल को देखा और फिर उसे सामने दिखाई दी विमेंस बिग बैश लीग का फाइनल मैच और उसने फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर से मैचिंग करनी सुरु करि तोह बहुत जल्द हे उसे दिखाई दिया अश्वनी जो पॉपकॉर्न कहते हुवे मैच देख रहा था …
शेरदिल “वो रहा बोलै था न”
एटर्निटी ने है मई कहा और वंहा के माइक को हैक करने लगा और फिर कुछ दिएर बाद उसने शेरदिल की तरफ देख कर बोलै “ अब आएगा मज़ा” और फिर माइक मई बोलै “क्रिकेट दिए हार्ट लवर “ऐश” मेरे पास तुम्हारे लिए डेडली चैलेंज ह लक्शन तुम्हे मिल जाएगी बस कक्तव की रीच मई रहना …मैच मई डिस्टर्बेंस के लिए सॉरी एन्जॉय करो” और माइक से आवाज बंद हो गयी और गेम काफी दिएर बाद दुबारा से सुरु हो गया …
रात के वक़्त
अश्वनी अपने मोबली मई साडी डिटेल्स देख रहा था जिसमे पॉसिबल खतरे बताये गए थे ..
अश्वनी ने मोबाइल को पॉकेट मई रखा और अपना छोटा सा बैग पैक करके फ्लाइट मई सवार हो गया
नेक्स्ट डे…
शेरदिल जो क्वींस ग्रुप की जिनशि की फ्रेंड के साथ बैठा हुवा था कार मई वो बोलै तुम्हे पता ह हमारे साथ ये जो शख्स बैठा ह इसे मौत भी चुने से डर्टी ह …और ये शख्स वर्ल्ड की सभी डेडलिस्ट जगह पर जा चूका ह …” फिर अश्वनी से “थैंक यू आने के लिए”
अश्वनी “ मुझे पता ह सच अभी भी अधूरा ह मेरा बस एक हे रूल ह …मैं जिनके साथ काम करता हु” शेरदिल बिच मई हे बात काट ते हुवे “पता ह पता ह उनका किलिंग कॉन्ट्रैक्ट तुमने पहले हे दे रखा ह अगर तुम्हारे साथ कुछ भी सस्पीशियस होता ह तोह हम भी मरे जायेगा यही कहना चाहते थे न डोंट वोर्री तुम्हे सब सच सच बताया जायेगा” और फिर शेरदिल उसे लेकर घर आगया जंहा एटर्निटी ने उसे देखते हे कहा “अश्वनी मैं घुमा फिरकर बात नहीं करूँगा मेरा नाम एटर्निटी ह अगर हैकर्स के बारे मई जानते हो तोह” इस बार अश्वनी बिच मई बोलै “तुम्हारा नाम सुना ह मैंने तुम आगे बता सकते हो”
एटर्निटी ने प्रोजेक्टर ों किया और लैपटॉप की डिस्प्ले से प्रिसिओं दीखता हुवा बोलै “ये प्रिसिओं वर्ल्ड की सेफेस्ट और डेडलिएस्ट प्रिसिओं मई से एक ह जंहा से आज तक सिर्फ एक जाना भाग पाया ह वो अब कान्हा ह कौन ह ये आज तक किसी को नहीं पता ह और दूसरा जो भागेगा वो हमरा दोस्त घोस्ट होगा”
अश्वनी कुछ दिएर चुप रहा और फिर खड़ा होकर बोलै “घोस्ट इस नाम के एक शख्स को मैं भी जनता हु क्या तुम दोनों इंडिया से हो घोस्ट को भी हिंदी अछि अति ह”
एटर्निटी “नहीं”
अश्वनी सांस छोड़कर “मुझे लगा भी था क्योकि मैं जिसे जनता हु वो तोह खुद चलती फिरती मौत ह और वो अकेला हे काम करता ह”
शेरदिल “तुमने कहा वो इंडिया से ह ..क्या कोई इमेज ह क्या उसकी तुम्हारे पास”
अश्वनी “ नहीं इमेज नहीं ह मेरे पास इंडिया मई माउंट एवेरेस्ट के क्लाइम्बिंग के टाइम कॉन्ट्रैक्ट किलर्स ने अटैक किया था मुझ पर तब मैंने खुदको बचने के लिए एनेर्जेन्सी मिशन दिया tha…wanha की गवर्नमेंट के लिए और इंडियन गोवेर्मेंट की एक एजेंसी से मुझे रिप्लाई मिला और तब मैंने उसे फाइट करते हुवे dekha…usne अकेले हे उन सभी फिघ्टर्स को हरा दिया वो भी सिर्फ अपने हाथो se…aur तब मैंने उसे कहा था ki..kabhi भी मेरी जरुरत हो तोह बस एक बार याद कर लेना …इसीलिए लगा सायद ये वही घोस्ट होगा”
शेरदिल “क्या पता वही हो ये तोह मिलने पर हे पता लगेगा”
एटर्निटी “अब ये देखो …” एटर्निटी ने प्रिसिओं का बैक व्यू सामने स्क्रीन पर दिखाया और आगे बताते हुवे बोलै “ प्रिसिओं के सामने बड़ी सी झील ह जो बर्फ से लगभग साल भर जमी हे रहती ह और वंहा से कुछ भी करना मतलब गेम सुरु होने से पहले हे ख़तम होना ह और प्रिसिओं के पीछे गहरी खायी ह तुम्हे इसी खायी से ऊपर चढ़ना होगा और प्रिसिओं के गॉर्डस से बचकर वंहा पर प्रिसिओं के आसपास कई जगह ये डिवाइस लगाने ह जिसकी वजह से हमे वंहा का 3डी मैप मिल जायेगा …और साथ हे पता लग जायेगा वंहा कितनी सिक्योरिटी ह और फिर हम प्लान बना सकते ह”
अस्वनी एक मिनी क्लैम्बर डिवाइस को देखते हुवे “ये किसलिए ह”
एटर्निटी “यही तोह हमारे एग्जिट प्लान का आखिरी रास्ता ह”
अश्वनी “ok”phir सामने की खायी से ऊपर के प्रिसिओं को देखते हुवे “विंड की स्पीड क्या रहती ह”
एटर्निटी “60 कम तक जाती ह पर तूफ़ान आया हो तोह विसिब्लिटी बिलकुल लौ रहती ह और विंड की स्पीड और तेज़ हो जाती ह”
अश्वनी के चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और बोलै …अब कुछ ेक्सइटिंग मिला ह करने के लिए मुझे सामान चाहिए ह जिसकी लिस्ट तुम्हे मिल जाएगी पर पहले मुझे मैच देखना ह”
एटर्निटी ने कीपैड पर हाथ चलाये के सामने कई सरे मैच लाइव आने लगे…
अश्वनी “ग्रेट”
शेरदिल साइड मई लेजाकर एटर्निटी से “अबे ये कर तोह लेगा न वर्ण कसम से तुझे यंहा मुझसे बचने वाला कोई नहीं होगा यंहा”
एटर्निटी “ तू हमेशा सांड की तरह लाल कलर देखते हे भड़क क्यों हो जाता ह चिल रहा ..तू बस देखता ja…isne है कहा ह तोह यकीनन वो पूरी कोसिस करेगा बस उसका क्रिकेट का खेल अभी सुरु हुवा ह और जब ये मैच ख़तम होगा तब देखना तू …इसका यंहा होना हे हमारे लिए बहुत बड़ा सपोर्ट ह”
शेरदिल बस कभी अश्वनी को देखता तोह कभी मैच को की कब ख़तम होगा और तीन घंटे ऐसे हे बीत gaye…par शेरदिल और एटर्निटी की निघाये तोह बस अश्वनी पर हे तीखी हुवी थी और इसी चक्कर मई दोनों ने जूस के 5 गिलास भी पि लिए थे …और फिनॉय अश्वनी अणदायी लेता हुवा खड़ा हुवा और बोलै … “एटर्निटी एक हेल्प मिलेगी तेरी”
एटर्निटी “कैसी हेल्प”
ऐश “एक सॉफ्टवेयर चाहिए जंहा से मैं कंही से भी लाइव क्रकेट मैच देख सकू ”
ये सुनकर एटर्निटी ने बस हां मई इशारा किया …
और उसका इशारा सुनकर ऐश ने उन्हें लिस्ट दी और बोलै ये चीजे अर्रंगे कर दो क्वालिटी से कोई कोम्प्रोमाईज़ नहीं और फिर सुरु करते ह काम”
एटर्निटी और शेरदिल ने लिस्ट देखि और फिर शेरदिल ने अपनी फ़िनलैंड वाली तीसरे नंबर की मैनेजर फ्रेंड को बुलाया और उसके साथ चला गया इक्विपमेंट्स लेन ..पर वो जब वो वापस आया तब उसके चेहरे को देख कर एटर्निटी बोलै “होता होता ह तूने कुछ गलत नहीं किया मेरे dost…aur वैसे भी तुकब तक वर्जिन रहता ह ाचा हे ह न सील टूट गयी तेरी भी” शेरदिल ने उसके चेहरे की तरफ देखा जो सीरियस हे था ..पर अचानक हे एटर्निटी जोर जोर से हसने लगा ….और शेरदिल का चेहरा उतर गया …
ैश्वनी ने इक्विपमेंट्स को अचे से चेक किया और मुझे पहले उस खायी के बॉटम तक पहुंचना होगा तोह मैं पहले निचे उतरूंगा और तुम ड्रोन की हेल्प से फ़ूड और वाटर मुझ तक पहुचवाओगे बाकि मैं देख लूंगा नाईट मई चढ़ाई होगी तुम ये चेक करो की मौसम ख़राब किस दिन होगा ताकि मैं उनकी निगरानी से बचकर ऊपर चढ़ाई कर सकू”
एटर्निटी “ दो दिन बाद हे विसिब्लिटी सिर्फ 15 फ़ीट की होगी और नाईट मई तोह और भी काम हो जाएगी अब तुम्हे डीएड करना ह अब की तुम कब चढ़ाई करते हो पर याद रखना वंहा से गॉर्डस ने तुम्हे देख लिया तोह जीरो परसेंट चांस ह बचने के और गॉर्डस के साथ साथ चॉपर भी तुम्हारे पीछे आएगा तुम्हे मरने के लिए”
ऐश के चेहरे पर मुस्कुराकहत थी और वो बोलै “किंग ऑफ़ लक” ऐसे हे दुनिया मुझे नहीं बुलाती ह”
शेरदिल थोड़ा इमोशनल हो गया और उसके पास आकर बोलै “ अश्वनी भाई ये लड़ाई एक बेटे की उसके माँ बाप उसकी फॅमिली के लिए ह …मैं बस इतना हे कहूंगा की …बहुत से लोग ह जो उसके आने की आस मई जिन्दा ह और उसी आस को हमे बचाना ह वर्ण जो परिवार 20 साल पहले भिखरा था वो पूरी तरह भिखर जायेगा …मैं शेरदिल तुम्हे वचन देता हु बदले मई तुम जो भी मांगोगे या करने को कहोगे वो ख़ुशी ख़ुशी करूँगा बस तुम्हे कामयाब होना हे ह ”
अश्वनी “ मेरा तोह कोई अपना ह नहीं ..पर तेरी बातो मई सचाई मैं देख सकता हु …तुम टेंशन मत लो हम जरूर सक्सेस होंगे और क्या पता ये वही मेरा दोस्त घोस्ट हो”
तीनो अपने काम मई लग गए तोह मैच और माइक सभी और आग के साथ प्रिसिओं पर हे थे ताकि कोई गड़बड़ नहीं ho…ab तक उन्होंने सब सही से संभाला हुवा था
इधर prision.mai..
राज 24 घंटे और मार खाने के बाद राज अगले 24 घंटो बाद बहार आया …और अबकी बार उसे पार्टीशन नंबर 1 मई भेझा गया जंहा 9 कैदियों मई से किसी ने उसे परेशां नहीं किया …वो चुप चाप बैठा हुवा था की उसके साइड से आवाज आयी “किसका मर्डर किये जो तुम्हे यंहा भेज दिया”
राज “ सिर्फ तोडा हे था”
आदमी “ सेल उस जेलर के पिछवाड़े मई खुजली बहुत ह इससे ाचा तोह पिछले वाला था जो फालतू ऊँगली तोह नहीं करता था इसके चक्कर मई तोह कितने हे जाने निपट चुके ह”
राज “ ये तोह ह कोई बात नहीं ये भी मरेगा”
आदमी “उसे छूटै हे तुम मरे जाओगे …ये रूल ह और रूल्स की वजह से हे वो खुद किसी कैदी को मारता नहीं ह अब ऐसा क्यों ये मुझे भी नहीं पता ह वैसे मेरा नाम …ज़फर ह”
राज “ मिलकर ाचा लगा मेरा नाम घोस्ट ह …तुम यंहा क्यों हो”
ज़फर “ 1000 लोगो को मार दिया था …जिसमे कुछ अमेरिका के प्राइवेट कांट्रेक्टर थे मेरे देश को कर्रप्ट कर रहे थे इसलिए ऊपर से निचे तक सबको मार दिया और उन सेल अमेरिकन्स ने मुझे यंहा भेज diya…main कैसा भी हु पर देश से गद्दारी नहीं करता हु ..वैसे भी कुछ हे उम्र और बची ह मेरी मैं खुस हु”
राज “ ज़फर भाई मैंने सुना ह की यंहा एक लम्बी दादी और लम्बे वाला खूंखार क्रिमिनल ह क्या कहते उसे कुछ sin..sin..karke नाम था”
ज़फर “तुम सिंह ki.toh बात नहीं कर रहे हो …” फिर उसने इधर उधर देखा और बोलै धीरे बोल बचा ..शेर के मू मई हाथ नहीं डालते ह …खूंखार जंगली शेर ह कभी कभी हे अत ह पर जब भी अत ह तोह यंहा कोई नहीं होता ह”
राज मन मई बोलै “ ज़फर भाई उसे हे तोह लेने आया हु …”
ज़फर “ बचा कुछ भी करना पर उसे दूर रहना वर्ण इस पूरी जेल मई तुम्हे कोई नहीं बचा पायेगा उधर देखो वो जो तीन ग्रुप ह न ये लोग एक साथ उस पर अटैक करने वाले ह …उसे जान से मरने के लिए …”
राज ने उन तीन पार्टीशन वाले तीस लोगो की तरफ देखा और मन मई बोलै “मेरे रहते तीस क्या 100 भी अजय तोह भी उन्हें कुछ नहीं होने दूंगा”
अभी वो बात हे कर रहे थे की पुरे एरिया मई शांति चा गयी
राज “ सब चुप हो गए”
ज़फर ने भी सबको देखते हुवे कहा “ऐसा तोह तभी होता ह जब कमांडर अत ह सजा देने या फिर वो… मतलब सिंह बहार ारः ह आज कोई बहुत पंगे होने वाले ह”
और बाकि कैदी पीछे हटने लगे ..इधर ज़फर की दिल की धधकने भी तेज़ थी तोह राज की धधकने भी तेज़ थी क्योकि आज वो रविंदर सिंह को देखने वाला tha…aj तक उसने सिर्फ फोटो से हे अपनी इमेजिनेशन मई देखा था की वो कैसे दीखते होंगे…
इधर प्रिसिओं के ब्लॉक बी से लोहे के
घसीटने की आवाज आने लगी और पहले चार गॉर्ड आये …और फिर एक पेअर और फिर दूसरा पेअर बहार आया और राज को दिखाई दिया वो शख्स जिसके लिए वो इतनी तकलीफ सहकर यंहा तक पंहुचा tha…lambe बाल भूरी आंखे और बड़ी मूंछे और लम्बी धड़ी के साथ मई बुक लिए हुवे रविंदर सिंह बहार aya…gaurds भी उसे दुरी बनाकर हे चल रहे थे क्योकि रविंदर के पास जाना मतलब मौत को ऊँगली करने जैसा था…
रविंदर सिंह के लिए कोई पार्टीशन नहीं था वो जाकर एक बहार बानी हुवी पत्थर ki.bench पर बैठ गया और बुक पढ़ने लगा…
राज बस एक तक उन्हें हे देखा जा रहा था उसकी आँखों मई जो अहसास था वो न दिखा सकता था और न हे बता सकता था …पर उसका दिल जनता था की रविंदर सिंह उसकी आखिरी उम्मीद ह पास्ट की सचाई जानने की ..
इधर ऊपर बिल्डिंग मई बने अपने ऑफिस से कमांडर ने सिगार का कास लेते हुवे निचे रविंदर सिंह की तरफ देखा और धीरे से बोलै “तेरा वक़्त ख़तम हो गया ह सिंह इन केडीए ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई ह तुझे मरने के लिए और दुनिया मई पैसा हे सबकुछ ह जब तक तुझे जिन्दा रहने का पैसा मिल रहा था तू जिन्दा था क्या फर्क पड़ता ह एक साल बाद मरना था तोह एक साल पहले मर जाये तोह”
राज ने गॉर्डस को धयान से देखा तोह उसे समाज आगया की वो कुछ नहीं करने वाले ह ..एटलीस्ट तब तक तोह नहीं जब तक रविंदर सिंह मर न जाये…
ज़फर जो पीछे खड़ा था वो राज को रविंदर सिंह की तरफ बरी बरी देखता देखता देखकर बोलै “तुमको इतना मरने की जल्दी क्या ह”
पर राज ने उसे इग्नोर कर दिया और रविंदर सिंह के पार्टीशन की तरफ चल दिया … राज को ज़फर ने पीछे से कई आवाजे मरी तोह बाकि कैदी भी उसे हे देखने लगे…
ऊपर से कमांडर की नज़र भी राज पर गयी और उसे देखकर वो बोलै “अब ये क्या करना चाहता ह”
इधर राज अपने पार्टीशन से बहार जालियो पर चढ़कर बहा जाने लगा तोह गॉर्ड ने एक बार ऑफिस की तरफ देखा जंहा उसे कमांडर ने कुछ नहीं करने का इशारा kiya…raj उतारकर सीधा रविंदर सिंह के पास पंहुचा तोह गॉर्डस ने उसे वापस जाने को कहा …पर राज ने आगे बढ़ कर एक एक किक थोड़ी दूर खड़े दोनों गॉर्डस को मरी …बाकि गॉर्डस आगे बढे तोह उन्हें ऊपर से कमांडर ने इशारे से रोक दिया …पर 30 कैदी उसे खा जाने नज़रो से घूरे जा रहा थे..
गॉर्डस के गिरने की वजह से हुवी आवाज से रविंदर सिंह का धयान भटका तोह शांत सा दिखने वाला चेहरा अब अशांत सा दिखने लगा और माथे पर सिकन आगयी इधर ऊपर से कमांडर ने इशारा किया तोह गॉर्डस ने उन तीस जानो को भी इशारा कर दिया तोह वो भी वंहा उत्पात मचाते हुवे एक दूसरे को मरने लगे गॉर्डस ने पार्टीशन का दूर खोल उन्हें रोकने की कोसिस की तोह उन्होंने उन्हें मारा और सभी रविंदर सिंह को मरने भागे …इधर रविंदर राज को घूरते हुवे खड़ा होने laga…aur उसकी आंखे हे बताने के लिए काफी थी ki.woab गुसा हो हो गया और आगे क्या होने वाला ह…
तभी उसे जफ़र की आवाज सुनाई दी “वापस अजा बचा वो मेन्टल ह वो खुद नहीं जनता ह की वो कौन ह”
और बस राज एक पल के लिए हे ठिठका था की एक किक उसके मू पर पड़ी और जब दुबारा से उसके दिमाग ने काम करना सुरु किया तोह वो कई फ़ीट दूर जाकर गिरा हुवा tha….usne अपने जबड़े को हाथ से सहलाया और धीरे से वापस सेट करता हुवा बोलै “इतनी पावर मतलब गुरूजी ने कहा वो सच tha..phir ये यंहा कैसे ह” वो सोच हे नहीं पाया था की एक हाथ उसके गले पर आ कैसा ….और उसका दम घुटने लगा...
राज “ अंकल मैं आपको बचने आया हु” वो और बोलता उसे पहले हे रविंदर सिंह ने उसे अपनी तरफ खिंचा और फिर वापस पीछे की तरफ फेंक दिया और राज पीछे जाकर सीधा उन तीस कैदियों मई से कुछ से टकराया …
राज “ सांस भी मुश्किल से आरही ह” उसने देखा की वो तीस मई कुछ रविंदर सिंह पर अटैक करने जा पहुंचे ह तोह वो राउंड घुमा और एक जम्प के साथ खड़ा हुवा और सबसे पीछे वाले को अपनी तरफ खिंचा और एक साथ कई पंचेस उसके मू और पेट मई जड़कर उसे सुला दिया …और फिर बाकि दो से भीड़ गे
इधर …
रविंदर सिंह ने अपने पर सबसे आगे अटैक करने वाले को अपनी झांझीरो मई जकड़ा और एक झटके मई उसकी गर्दन तोड़ दी…
और फिर अपने दोनों हाथो को आपस मई जोड़कर एक वार सामने वाले के सर पर किया और वो वंही लेट gaya…phir एक पंच उनके मू पर लगा जिसका उनपर कोई असर नहीं हुवा और उन्होंने उसका गाला पकड़कर अपने पास खिंचा और अपने सर के लगातार तीन वार उसके मू पर करके उसका मू को फोड़ दिया तभी एक ने पीछे से आकर उनका गाला पकड़ा तोह उन्होंने उसके अंघूठे को पकड़कर पकड़ हटाई और फिर उसे अपने सामने लगाकर सिर्फ तीन पूछ मू पर मरे और तीसरे पंच मई वो अधमरा होकर निचे लेट गया …पर तभी उनकी नज़र राज पर गयी और वो उसकी तरफ तेज़ी से भाड़े इधर राज उन कैदियों से लड़ हे रहा था की उसे पीछे से किसी ने ऊपर उठा लिया और जोर से निचे पटक दिया…
राज की दर्द से आह निकल गयी उड़ने देखा की उसे किसने पटका ह तोह उसे अब गुस्सा होने laga…par तभी रविंदर सिंह की पेअर उसे उसकी चेस्ट पर उसे अत हुवा दिखाई दिया तोह वो साइड मई होकर बच गया और जब उसने पेअर के लेंडिंग की जगह देखि तोह बोलै “साडी हड्डिया टूट जाती सीने की” क्योकि रविंदर सिंह का पेअर जंहा निचे आया था वंहा जमीन धंस गयी थी.. राज ने भी अबकी बार हाथ जमीन पर टिकर कर हवा मई जम्प लेते हुवे रविंदर सिंह के सीने पर किक मर दी …पर अगले पल dhad…dhad..dhad…ki आवाज के साथ राज कई जाने से हवा मई घूमता हुवा टकराया और बाकि कैदियों के ऊपर जाकर गिरा ….राज जो कई दिनों से मार हे खा रहा था अबकी बार उसे अपने सरीर मई दर्द होने लगा …और तभी उसे एक कैदी ने पेट मई लात मरी .फिर दूसरे ने ऐसे हे कई जाने उसे मरने लगे …राज ने एक के पेअर को पकड़ कर खिंचा और उसे नव्हे गिरा दिया फिर दूसरे के और ऐसे हे चारो को निचे गिरा दिया …और खड़ा हो गया …पर अबकी बार उसकी आँखों मई गुसा बहुत तेज़ गुसा था… और उसी गुसाई से वो बोलै … आपको लगता ह अब दूसरे तरीके से हे समझाना पड़ेगा” ये कह वो तेज़ी से रविंदर सिंह की तरफ बढ़ा तोह रविंदर सिंह ने अपने सामने खड़े क्रिमिनल को किक मरी और राज की तरफ चल दिए …राज ने रविंदर सिंह के करीब एते हे झुक कर पेट पर वार किया जिसे रविंदर सिंह ने ब्लॉक करने के लिए हाथ आगे किये तोह राज ने लेफ्ट पंच से जल्दी से रविंदर सिंह के मू पर वॉर किया और लगातार कई पंच मू पर मरे …रविंदर सिंह का मुज सिर्फ दूसरी हल्का सा घूम गया बाकि वो तस से मास नहीं हुवे …फिर उन्होंने अपने एक हाथ से हाथपर ए खून को पौंछा
..और राज की तरफ हलकी से मुस्कान दी …राज ने हैरानी से देखा पर अगले हे पल रविंदर सिंह के पंचेस लगातार लेफ्ट राइट लेफ्ट राइट राज पर हुवे राज ने बड़ी मुश्किल से वरो को रोका पर उसके हाथ दर्द से कांपने लगे तभी रविंदर सिंह ने राज के कालर को पकड़ा और उठाकर निचे जमीन पर पटक दिया ..पर चौदह नहीं और घसीट ते हुवे पास मई बानी पत्थर की लम्बी सीटिंग बेंच पर पटक दिया …और फिर पलट कर बाकी कैदियों पर टूट पड़े..
इधर राज की सांस की आवाज भी धीरे धीरे से आरही थी “वो मन मई हे बोलै तू हे देख ले यार पूनम के पापा ह मुझसे नहीं होगा” और फिर उसकी आँखों मई से दर्द का नमो निशान गायब होता चला गया और उसकी जगह आयी चेहरे पर मुस्कान भयंकर मुस्कान जो बता रही थी की वो क्या करने वाला ह वो खड़ा हुवा और बोलै “बहुत खेल लिए तुम सब चलो अब दूर हैट जाओ वो मेरे सीकर ह …और तुम रविंदर सिंह बुज़दिल की जिंदगी जीते हुवे कैसा लग रहा ह …मेरी माँ को भाभी मंटा ह न तोह फिर तू इतना बुज़दिल कैसे निकला की यंहा छिपा हुवा ह बोल”
और निर्वाण ने अपने पास के कैदी की गर्दन को पकड़ा और मरोड़ कर उसे जान से मार दिया…
इधर रविंदर सिंह ने राज को देखा पर बोलै कुछ नहीं
राज “मुझे नहीं पहचाना मैं निर्वाण हु विद्या का बीटा क्या हुवा याद नहीं आया”
रविंदर सिंह ने विद्या का नाम सुना तोह वो थोड़ा चौंका फिर लगातार विद्या …vidhya..vidhya…naam बोलने लगा और उसका गुसा पल पल भड़ने लगा ..और आस पास मरने ए kaidi.bhi अब दोनों को देखकर पीछे हैट गए …रविंदर सिंह विद्या का नाम लेते हुवे राज की तरफ भड़ने लगा …उसके सर मई बहुत सी यादे घूमने lagi…aur हर पल उसके दिमाग मई गुसा और बदला हावी होने लगा और वो फिर चिकने लगा तूने मारा न तूने मैं तुझे आज छोडूंगा नहीं और इधर निर्वाण जिसे उसके बचपन की कुछ बाते याद थी वो भी गुसाई से बोलै तूने कसम तोड़ी h…tune नहीं बचाया मेरी माँ को तोह तुझे भी मरना हे चाहिए बुज़दिल और दोनों एक दूसरे से भीड़ गए और उन्दोनो की लड़ाई इतनी भयंकर होने लगी की जंहा भी उनके वार मिस होकर पड़े थे वंहा की ज़मीन धंस गयी या पथरो मई दरार agayiii…tabhi वंहा जोर जोर से साईरन बजने लगा ..और एक साथ हे बहुत सरे गॉर्ड भागकर उनकी तरफ agaye…par रविंदर सिंह और निर्वाण दोनों को काबू करना उनके लिए मुश्किल हो गया था वो दोनों लड़ते हुवे जो भी उनके पास आरहा था उससे पिट ते जा रहे थे … निर्वाण को बुरी तरह से मार पड़ी थी रविंदर सिंह से पर रविंदर सिंह को भी निर्वाण ने जगह जगह से लाल कर दिया अपने पंच और किक्स से मार मार kar…last मई आखिर गॉर्डस को बेहोशी की हइडोसी वाले इंजेक्शन दोनों को देने पड़े…
बाकि दूर से देख रहे क्रिमिनल्स के चेहरे साफ़ बता रहे थे की वो किसी भी कीमत पर उन दोनों से पन्गा नहीं लेना चाहेंगे इन फ्यूचर ab…kyoki भले हे वो सब मिलकर दोनों को मार लेंगे पर आधे तोह वो भी मरे जायेंगे और वो bhi.apni जान से इसलिए …कोई भी उनसे लड़ना नहीं चाहता था किसी भी वजह से…
इधर राज को जब होश आया तब वो अपने सेल मई निचे स पड़ा हुवा tha…usne सीधे होने की कोसिस की तोह हुवा उसी तेज़ दर्द … “अहह हाथ था या हथोड़ा ऐसा लग रहा ह जैसे बुलडोज़र से तकर हुवी हो…” उसकी हीमत हे नहीं हो रही थी हिलने की इसलिए वो अपने सेल मई हे पड़ा रहा पुरे एक दिन बाद मैडिटेशन से अपने आपको इम्यून करने लगा …और अगले दिन निकलकर सीधा ग्राउंड मई आकर रविंदर सिंह जंहा बैठ ते थे वंहा बैठ गया …और कुछ दिएर मई रविंदर सिंह भी हाथ मई बुक लिए आगये और राज को देखते हे बुक बंद करदी…
गॉर्डस अलर्ट हो गए और बोले “no मोरे फाइट मर सिंह”
रविंदर ने कुछ नहीं कहा और वो चुप चाप राज से कुछ दुरी पर बैठ गए इधर पुरे क्रिमिनल्स दोनों को हे देखे जा रहे थे की कब लड़ने वाले h.ye दोनों और हुवा भी वही राज ने जैसे हे विद्या का जिक्र किया रविंदर सिंह का दिमाग हिल गया और दोनों किसी पागल सांड की तरह भीड़ गए पर इस बार निर्वाण की जगह राज था तोह उसकी पिटाई जायदा हुवी…
कमांडर भी वंहा पहुंच गया और बोलै “ दोनों को एक साथ रखो और लटका कर रखो 72 घंटो तक कोई खाना नहीं और बिच बिच मई नमक का दोसे देते रहना ताकि सो न सके सेल”
पर कमांडर को भी हैरानी हुवी की घाव पर नमक लगने के बाद भी दोनों ने मू से आवाज तक नहीं निकली…
कमांडर “ पड़ा रहने दे दोनों को अकेले”
और गॉर्डस सेल को बंद करके बहार चले गए….
करीब दो घंटे बाद राज बोलै
राज “क्या आपको कुछ भी याद नहीं ह”
रविंदर सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया
तब राज आगे बोलै “मैं राज हु आपके दोस्त सहदेव और विद्या का बीटा”
रविंदर नाम सुनकर कुछ पल बाद पागलो की तरह करते हुवे बोले “सहदेव bhai…sahdev bhai…maar दिया …मार दिया …” ये कहते कहते अब रविंदर सिंह वापस अपने आप से बहार होने लगे थे और उन्हें ऐसा देख राज जल्दी से बोलै “ आप शांत हो जाईये सब तीख ह ..मुझे आपकी बेटी पूनम ने भेजा ह”
बेटी का नाम सुनकर रविंदर सिंह कुछ शांत हुवे और बोले “बेटी मेरी बेटी पूनम…”
राज “ है वो जिन्दा ह अब बड़ी होगयी ह आपको याद ह पूनम बचपन मई मुझे और पूनम को अनिरुद्ध अंकल की लड़की ऋचा के बर्थडे पार्टी मई साथ मसि सुलाया था बचपन mai…kuch याद h…dada जी ठाकुर जगमाल सिंह …और दिव्या याद ह आपको”
रविंदर सिंह के एक्सप्रेशन बदलने लगे वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे जैसे उनके दिमाग मई बहुत बड़ा तूफ़ान सा उठा हुवा हो ये देख राज बोलै “ आप दिमाग पर जोर मत dijiye…main आपको यंहा से निकलकर आपको बेटी से मिलना चाहता हु और धीरे धीरे apko.sab याद आजायेगा”
ये सुनते हे रविंदर को जैसे कुछ याद आगया हो और वो जल्दी से बोले “नहीं नहीं मैं जा नहीं सकता हु वो सबको मार देंगे अगर मैं यंहा से भगा तोह ..मुझे यही रहना होगा …मैंने वचन दिया ह मुझे यही रहना होगा जेल मई हमेशा के लिए तभी सब जिन्दा रहेंगे तभी सब जिन्दा रहेंगे ” और लगातार यही लाइन बार रिपीट करने lage….aur जब वो रुके तब राज ने आगे कहा … “अपने अपना वचन निभाया पर उन्होंने धोखा दिया आपके दोस्त और उनके परिवार आपके साथ काम करने वाले सबको मार दिया क्या अब भी आपको यही रहना ह जिनके लिए औ वचन निभा रहे ह वो तोह सब मर चुके ह उन्हें बेहरहमी से उन कुत्तो ने मार दिया”
रविंदर सिंह के चेहरे पर अब ऐसे एक्सप्रेशन आगये थे जिन्हे समझना बहुत मुश्किल था …उनके हाथ की मुठिया कस्ती गयी और उन्होंने अपनी ताकत से झांझीरो को हे उखड लिया और राज के गले को कसकर पकड़ लिया और दबाने लगे …
राज “मेरा नाम अपने हे रखा था भूल गए आप मेरी माँ से वडा किया था की मुझे कुछ नहीं होने देंगे और अब खुद हे मर कर वडा तोड़ रहे ह”
रविंदर सिंह ने एक हाथ से अपना सर पकड़ लिया और राज का गाला छोड़ कर पीछे हैट गए और दीवार पर सर मरने लगे…
राज “हमे बदला लेना ह …और उस बदले के लिए आपको जीना होगा …भले हे आज आपको सब याद नहीं पर अगर मैंयहस तक पहुंचकर आपके दोस्त और भाभी का जिक्र कर रहा हु तोह मेरी बातो मई कुछ तोह सचाई होगी हे और आपकी बेटी क्या उससे नहीं मिलना चाहेंगे आप वो बिन माँ बाप के मेरी तरह जी रही ह उसे कितनी ख़ुशी होगी आपसे मिलकर …”
रविंदर सिंह दीवार पर लगातार पंच मरने लगे…
राज “ये गुस्सा ये नफरत उनके लिए बचाकर रखिये”
रविंदर सिंह “ धोखा किया मेरे साथ जिनको बचने के लिए मैंने ये सहा उन्हें हे मार diya…main उन हरामजादो की नेसल को हे मिटा dunga….main दुश्मनी का दूसरा नाम रविंदर सिंह hu…jismai ऊपर वाले की दी हुवी असीम ताकत ह जो अपने दुश्मन को कभी जिन्दा नहीं छोड़ता ह” और अबकी बार दीवार पर उनका पंच लगा तोह दीवार मई दरारे आगयी….
राज मन mai“agar ऐसा पंच मुझे मार दिया होता toh..sochkar हे दर्द महसूस होने लगा ह अब मुझे यंहा से निकलने का प्लान बनाना होगा और मुझे यकीं ह जैसा मैं सोच रहा हु एटर्निटी ने भी वैसा हे सोचा होगा खायी से निकलने का प्लान किया होगा अब मुझे बस सिग्नल देना ह”
आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का
वर्ड काउंट 7.6 क
