Adultery Raj-- hero of the family - Page 65 - SexBaba
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Adultery Raj-- hero of the family

अपडेट 208

प्लानिंग …

11 उपदटेस तू लेफ्ट फॉर डेड एन्ड

रजनी ….. “सच मई इतनी साडी shopping…tum लड़किया भी थका दिया मुझे तोह”

अनु “मम आप भी एक ब्लैक कलर मई और ब्लू साड़ी और साथ मई जीन्स और टॉप ले लीजिये ….क्या पता कोई आपको भी बेहद खास मिल जाये वैसे तोह कॉलेज का तोह हर लड़का आपके पीछे लार टपकाते ह कितने हे जवान दिलो की धड़कन हो आप”

अनु की बात सुनकर साडी एक साथ हंस पड़ी…

रजनी “आने दे राज को पहले उसे कहकर तेरे लिए हे धुंधवती ह बेहद खास बहुत बाते अति ह”

कविता “ाचा मुझे एक ब्लू जीन्स और टॉप परचेस करना ह और वंहा रात को पहनने के लिए एक लॉन्ग स्कर्ट और टॉप भी”

पूनम “कुटी कितना खरीदेगी “

मनीषा धीरे से पूनम के कान mai“Tu भी कोई अछि सी ड्रेस खरीदले वंहा रात को पास आने का क्या पता मौका मिल जाये मैं पूरी कोसिस करुँगी अपनी तरफ se….waise मेरा देवर थोड़ा शाक्त ह पर मैं तेरी साइड hu…is बार अपनी बांहो की गिरफ्त मई कास हे लेना”

पूनम मनीषा की बात सुनकर शर्माने लगी …तभी उसकी नज़र सामने padii….aur वो बोली “अरे ये तोह मर अपूर्व सिंह ह यंहा कैसे”

रजनी ने तुरंत सामने देखा और उसकी आंखे सिकुड़ गयी…

रजनी “रात को इस वक़्त माल मई …. हमारा पीछा तोह नहीं कर रहा ह”

कविता “मम आपके तोह जलवे ह”

रजनी ने घूर कर कविता को देखा..

पूनम “मैं अभी अति हु”

इतना कह वो सीधे अपूर्व सिंह के पास आगयी.. “हीई”

अपने पीछे से मीठी सी आवाज सुनकर अपूर्व जो फॉर्मल ट्राउज़र देख रहा था पलट गया … “ओह्ह्ह मिस पूनम आप यंहा “

पूनम “शामे क्वेश्चन मेरा ह आप इतने बिजी सचेडूले से फ्री होकर शॉपिंग कर रहे ह”

अपूर्व “ओह्ह no no …एक्चुअली फॉर्मल्स लेने आया था टूर के लिए बाद मई टाइम मिले या न mile…aur ी थिंक आप भी इसीलिए आयी ह यंहा पर अकेले ख़ूबसूरत लड़कियों को अकेले नहीं घूमना चाहिए ह”

पूनम “no अपूर्व सर वो देखिये सभी हे ह वैसे िफ़ यू डोंट मंद मई ी आस्क यू समथिंग”

अपूर्व “no फोर्मलटीएस आस्क फ्रीली“

पूनम “आपको कैसी लड़की पसंद ह ी मैं लड़का लड़की मई क्या देख कर इंटरैक्ट होता ह”

अपूर्व मुस्कराने लगा और सोचकर बोलै“ वैसे तोह बहुत सी बाते होती ह पर देपेंद करता ह पर्सन तो person…jaise अगर मैं मेरे बारे मई बास्त करू तोह मुझे गफ बनानी हो तोह थोड़ी मोर्डर्न थोड़ी स्टाइलिश ….educated…beautifull इन लुकिंग ये सब देखूंगा”

पूनम “और वाइफ चाहिए हो तोह”

अपूर्व “ तोह फिर जस्ट लिखे यू सिंपल मोर्डर्न काइंड hearted….cairing एंड वेल एडुकेटेड क्योकि जिंदगी मई साथ के लिए ये सब बहुत जरुरी होता h…har लड़का एक ऐसी लड़की चाहता ह जो बस उसे थोड़ा सा समझे जब उसे उसके सपोर्ट की जरुरत हो उसके साथ कड़ी रहे इसे जायदा दुनिया का कोई भी लड़का आदमी अपने पार्टनर से नहीं चाहता ह ी होप जो आप जानना च रही थी जान गयी होंगी”

पूनम अपूर्व की बात सुनकर मंद मंद मुस्कुराते हुवे शर्माने लगी …और फिर बोली…

पूनम “वैसे आप पर ब्लू कलर जायदा ाचा लगेगा एंड थैंक यू मुझे मेरा जवाब मिल गया”

दूर से चारो देखती हुवी सोच रही थी की ये क्या कर रही h….aur अपूर्व से इतना मुस्कुरा मुस्कुरा कर बात क्यों कर रही ह….

मनीषा मन मई “अब इसे क्या हो गया ह”

अनु “अकेले अकेले मज़े मार रही ह पूनम”

कविता “छोड़ न बेब ….चिल कर एक बार हंस दू तोह लाइन लग जाएगी हूउउउउ….

रजनी “कविता”

मनीषा “इसे छोड़ो वो देखो वो आरही ह वापस चलो चलते ह”

रजनी एते हे सवाल पूछ पड़ी “क्या बाते हो रही थी उसे हंस हंस कर”

पूनम “पूछ रही थी की मेरी मम सिंगल ह मिंगले मिंगले करोगे “

पूनम की बात सून सरे उसे देखने लगे ….

पूनम are“kuch नहीं ऐसे हे नार्मल बाते हुवी thi….”chalo मुझे कुछ ड्रेसेस परचेस करनी ह

कविता कान मई “भाभी ….क्या हो रहा ह ये sab…muje डाउट हो रहा ह”

पूनम उसके कान मरोड़ते हुवे काम दिमाग लगाया kar…kuch भी उल्टा पुल्टा सोचती रहती ह ….

मनीषा “है आज कल इसका दिमाग कुछ जायदा हे चलने लगा ह इधर उधर हुवी तोह टंगे तोड़ दूंगी “

पूनम “ाचा अब तोह houngi”itna कह उसने मनीषा को जइब दिखा दी

रजनी “छोड़ो वो देखो उसमे चलते ह उसमे कलेक्शन बहुत अचे मिलते ह”

सभी “ओह्ह्ह ho….matlb किसी पर बिजली गिरने वाली ह जल्दी हे मम को सब पता ह कान्हा क्या मिलता ह”

रजनी मन हे मन तोह खुस हुवी पर बहार से कुछ जाहिर नहीं होने दिया आखिर बिजली राज पर हे गिराने की कोसिस कर रही थी पर वो भी क्या करे राज ह जो पास रात को सोकर भी कुछ नहीं कर रहा था …उसने तोह कुछ दिन पहले हे दुल्हन का जोड़ा भी ले लिया था ताकि राज के साथ दुल्हन की तरह तैयार होकर वो अपना कौमार्य राज को देकर उसे अपनी रूह मई बसा लेगी….

पूनम “क्या सोच रही ह आप”

रजनी “नहहहिं कुउछ भी तोह नहीं …चलो chalo…phir डिनर भी करना ह “

मनीषा “वैसे पढ़ाई पूरी ह क्यों न थोड़ीई”

रजनी “तोह फिर खाना पैक करा कर घर हे चलते ह”

मनीषा पर कान्हा मेरे घर पापा ह …और पूनम के घर मेरे फ्यूचर ससुर पापा ह …

रजनी “मेरे घर पर राज ने किसी को भी लेन से मन किया ह अब क्या करे राज के फ्लैट पर चले..”

कविता “चिल करो मैं शिवानी मम को कॉल करती हु उनसे बेस्ट कौन ह उनके पास हर प्रॉब्लम का सलूशन होता ह और वैसे भी हम सब पूनम दी के पास रुकने वाले ह अब शिवानी मम के पास रूक जायेंगे”

पूनम “पर उनके साथ सोनाली दी होंगी न”

कविता “ अभी पता चल जायेगा कॉल लग गयी ह साइलेंट raho….Hello मम क्या कर रही हो क्या हिटलर भी ह क्या आपके पास “

शिवानी “कुटी किसी दिन पिटेगी अगर तेरी बाते उन्होंने सूली toh…kaam बोल अभी अभी घर आयी हु यार बहुत थकी हुवी हु ”

कविता “तोह फिर हम आरही ह खाना पैक करके आप बस रेड वाइन और वोडका मंगलो “

शिवानी “सब पड़ी ह यंहा तुम ाजाओ जब तक मैं कुछ स्नैक्स रेडी कर लेती हु”

कॉल डिसकनेक्ट होते हे..

कविता “बेब्स ओने ऑवर ह हमारे पास लेटस फिनिश थे वर्क”

वंही दूर से अपूर्व देखते हुवे “8 बॉडी गॉर्ड…..4 अंडरग्राउंड पार्किंग मई और साथ मई 2 स्निप्पेर bhi….aur ये मॉल मई ये घूम रहे अलग से लोग 100 परसेंट पोलिसवाले h….akhir इतनी सिक्योरिटी क्यों ह तुम्हारे साथ क्या राज़ छिपा रहे हो तुम सब मिलकर….. और वो लड़का क्यों नहीं दिख रहा ह तुम्हारे साथ कोई बात nahii….dheere धीरे तुम सब bataogi….ye साडी सिक्योरिटी भी तुम्हारी अधूरी रह जाएगी जिस दिन मेरा शक यकीन मई बदल gaya……par बहुत मज़ा आएगा मुझे सोच कर हे मज़ा रहा ह की किसी बचाएगा वो तुम्हे तुम्हे तुम्हे या तुम्हे….”

तभी अपूर्व के मोबाइल पर रिंग आयी…

अपूर्व “हां मां बोल”

सामने से “रंजन हे तीख ह”

अपूर्व “तू जनता ह न मैं कौन हु और किसका राइट हैंड हु फिर भी अकड़ “

रंजन “देखो मेरे कहने का मतलब ह वो मेरा अतीत ह …मैं नहीं चाहता हु की अतीत का कोई भी सच या शख्स मेरे सामने ए …तुम नहीं जानते हो वो बहुत खतरनाक लोग थे जिनके साथ मई था”

अपूर्व “किसलिए कॉल किया ये बताओ “

रंजन “मैं जब जब उस छोकरे को देखता हु मुझे अतीत के किसी शख्स की याद अति ह कैसे भी उसे ख़तम कार्डो ….वैसे भी उस छोकरे को मरने के चक्कर मई विक्टर निर्वाण से भीड़ गया था और फिर बेवजह मारा गया ….न वो निर्वाण को मार पाए न इस छोकरे राज ko…upar से ये मेरे दामाद सुनील सिंघानिया का मू बोलै भाई भी h…tumhe इस हर हाल मई मरना हे होगा”

अपूर्व सिंह मन मई “चुटिया समाज रहा ह क्या इसे नहीं पता ह की ये सभी लोग डेथ हेलो के भाई को मरने मई शामिल थे ….और ये सभी हे मरेंगे शादी के सपने हे देख तू” अपूर्व बोलै “रंजन जायदा सपने कभी कभी पुरे नहीं होते ह इसलिए काम सपने देखने चाहिए ह वैसे तेरी बेटी से पूछ जरा वो छोकरा कॉलेज क्यों नहीं ारः ह उसे कुछ भी पता चले तोह बता मुझे ….मतलब ऐसा जो मेरे काम का ho….thoda घर रूक उसकी निगरानी रख कुछ न कुछ जरूर मिलेगा काम का समझा …”

रंजन “पर तुम उसे आसानी से मार सकते हो”

अपूर्व “ठन्डे दिमाग से सोच रंजन जिस लड़के को अंडरवर्ल्ड के एक से बढ़कर एक खूंखार गुंडे नहीं मार पाए उसे तू ऐसे हे मार लेगा ….सोच सोच दिमाग चला तुझे समाज ayega….pahle मुझे तुजे कुछ समझने दे ….तुझे पता ह तेरी बेटी के पीछे 10 टॉप के बॉडी गॉर्ड घूमते ह और कई पुलिस वाले भी ….और एक बात तेरी बेटी जैसी दिखती ह वैसी वो ह nahi…thoda बाहरवालियो से जायदा घर पर धयान दे समाज आजाएगस”

रंजन कुछ बोल हे नहीं पाया अपूर्व के सामने उसका दिमाग इस सोच मई था दस बॉडी गॉर्ड पर उसे तोह कोई भी दिखाई नहीं दिए the….sivaye कुछ पुलिस वालो के जिसे शिवानी ने लगाया था …उसका दिमाग सोच मई पढ़ गया और उसने अपने कुछ खास आदमियों को इस काम पर lagaya…..taaki सच जान सके….

2 ऑवर बाद

सीक्रेट प्लेस…

एक काळा कपडे पहने शख्स… “यंग मास्टर डेथ हेलो …अपने जिन फाइटर को बुलाया था उनमे से 4 को अपूर्व सिंह के पास भेज दिया ह और 2ड्राइवर्स की जगह ले lenge…..baaki सब यही ह हमारे पास बस ये आखरी 10 किलर्स हे बचे ह यंहा बाकी सब अपने काम पर ह…

डेथ हेलो जो हमेशा की तरह मास्क पहन कर शांति से बैठा हुवा था उसने कोई जवाब नहीं diya…aisa लगा जैसे वो गहरी सोच मई था ….फिर कुछ दिएर बाद वो बोलै … “अपूर्व को कहना की इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिए ह अगर वो लड़का निर्वाण से जुड़ा ह तोह मुझे बताये वर्ण उसे जो तीख लगे वो करे …मुझे फिर ये सहर छोड़ आगे जाना ह जंहा मुझे स्कॉर्पियन ट्राइब ज्वाइन करके और पॉवरफुल बनकर मेरे मास्टर का सपना पूरा करना ह….”

काळा कपड़ो वाला “ मास्टर क्या हम भी आपके साथ जायेंगे “

डेथ हेलो “तुम्हारी ताकत उनके सामने कुछ नहीं ह ….इस दुनिया मई बहुत कुछ ऐसा ह जिसके बारे मई तुम सोच भी नहीं सकते हो उनका अस्तित्व दुनिया मई कई सालो से ह पर जिसने उन्हें देखा वो मरे gaye…..wo इस दुनिया मई होकर भी नहीं ह इसलिए भूल jao…ab तुम जा सकते हो …और उसके जाने के बाद वो खुद से हे bola…..ye तय ह अब और चूहे बिल्ली का खेल नहीं होगा बस बहुत हो गया ह जाने से पहले तेरी मौत की तारिक लिखता हुवा जाऊंगा”

Wanhi….same टाइम शिवानी के बंगलो पर….

शिवानी “सोनाली दी बिजी ह अभी “

पूनम “अगर मैं गलत नहीं हु तोह पक्का वो किसी को पिट रही होंगी या पीटने गयी होंगी”

शिवानी “है पूनम वो इस बार एक सीबीआई वाली की धुलाई करने गयी ह उन्हें उसके खिलाफ प्रूफ मिल गया ह जो अज्जू ने दिया ह बीच मुझे धमका रही thi….bitch भूल गयी की मेरे पास ग्रेनेड टैंक मिसाइल सब ह बस अभी ग्रांडे का हे उसे किया ह ….और ट्रस्ट में सोनाली दी का टार्चर बहुत बहुत भयानक होता ह”

कविता जल्दी से “मुझे पता ह श्वेता ने बताया था मुझे”

शिवानी “तोह मेरी कुटी दूर हे रहना खासकर तू और श्वेता क्योकि तुम दोनों हे उनसे पन्गा लेती हो”

कविता “डरे और हम श्वेता और कविता के आगे सब की बोलती बंद हो जाती ह यकीं न हो तोह अभी आइस क्रीम मँगवॉ उनसे अभी लेकर आजाएंगी”

मनीषा “कुटी चढ़ गयी ह तुझे अब मत पीना क्यों याद कर रही ह ….सबकी क्लास लगा देगी अगर आगयी तोह”

रजनी “इतनी खतरनाक ह वो “

पूनम “नहीं मम वो सबसे बड़ी ह इसलिए रेस्पोंसिबल ह वो नहीं चाहती ह की हम मई से कोई भी बिगड़े या गलत अडडे डाले …इसलिए दांत देती ह पर दिल से बहुत अछि ह “

कविता “ अरे अछि ह भयानक ह रक्षास भी उनका खूंखार रूप देखले तोह दर जाये अरे…… नंगा करके गरम आग पर पिछडे को भुन्ति ह ….कभी देखा ह पिछवाड़ा fry…..shweta ने देखा ह पिछडा फ्राई बबिता का”

कविता की बात सून सबके जिस्म मई झुरझुरी सी दौड़ गयीईइ…….

रजनी हे भगवन इतनी खतरनाक …

अनु और पूनम का मू भी खुला रह गया….

शिवानी “कविता शट उप वो बहुत अछि ह चलो मेरा तोह पेग खली हो गया ह एक नया बनाया जाये “

अनु पूनम तू नहीं पीयेगी …

मनीषा “ये पुरे सोल ह अनु ये टच भी नहीं करती ह बस हमारी ख़ुशी के लिए बैठी ह”

अनु “ाचा ह ाचा वर्ण सोनाली मम के नाम से रूह काँप रही थी अब माहौल हल्का होने दो यार क्यों डरा रही ho….kahte यमराज का नाम लो वो प्रकट हो जाता ह”

तभी शिवानी का मोबाइल जो सामने पड़ा था वो रिंग होने लगा और स्क्रीन की तरफ देख सब के चेहरे का रंग बदल gaya…aur सबकी आवाज सांस सब रूक सी गयी…….

कविता को सबसे जायदा दर लग रहा था …

शिवानी “स्स्स्सह्ह्हह्ह” इतना कह उसने कॉल उठाया तोह सामने से आवाज आयी…

“शिवनीय मेरा बैग पैक करदेना मैं आरही हु”

शिवानी “कितने दिन के लिए जा रही ह अपनीस बार”

सोनाली “एक मंथ के लिए दिल्ली जा रही हु चीफ सर ने बुलाया ह अर्जेंट ह मैं अति हु”

इतना कहकर कॉल कट कर दिया ….

वंही सबको सांप सूंग गया मनो …

शिवानी “अरे तुम सबको क्या हुवा ह ….वो बैग लेने आरही ह एक मंथ के लिए दिल्ली जा रही ह जरुरी काम ह “

कविता “मेरी बहन श्वेता तोह गयीईइ”

पूनम “आप बैठो मैं पैक करदेती हु”

शिवानी “अरे बैठ जा मैं कर दूंगी हमारी पैकिंग तुजे समाज नहीं आएगी और उन्हें क्या ले जाना ह साथ मई मुझे अचे से पता ह” इतना कह शिवानी ने हाथ मई लिया गिलास साथ लिया और पैकिंग के लिए चली गयी ….करीब 15 मिनट बाद हे दूर बेल्ल रिंग huvi….aur कविता जल्दी से मनीषा के पास चिपक गयीईइ …

पूनम “मैं दूर खोलती हु”

सबके सबकी निघाये दूर पर हे थी….

पूनम के दूर खोलते हे…

सोनाली “ अरे तुम यंहा तुम्हारे तोह एग्जाम चल रहे ह न”

पूनम साइड हैट ते हुवे “दी चल नहीं रहे ह परसो से सुरु होंगे इसलिए आज हम सभी यंहा आगयेनपार्टी करने”

सोनाली अंदर देखते हुवे सीरियस हुवी फिर नार्मल हो गयी ….और सबकी तरफ देखा और मनीषा के गले मिली और बाकी सबको प्यार से ही कहा सिवाए कविता को छोड़ कर….

सोनाली कविता se“ab आपको क्या हुवा ह ापकचहरा क्यों उतरा हुवा ह”

कविता के दिमाग मई तिकड़म आयी और वो boli“bhai ने मेरा कार्ड ब्लॉक करवा दिया ह माँ पैसे नहीं दे रही ह मुझे आपका डेबिट कार्ड दीजिये …..”

सोनाली पास बैठते हुवे “तोह अब अपने क्या सररत की ह जो कार्ड ब्लॉक कर दिया ह जबकि आपको जंहा तक मुझे पता ह मंथ की 1 लाख पॉकेट मनी मिलती ह जो की जायदा ह”

कविता “वो मैंने खर्च कर दिए अब आपका कार्ड चलिए मुझे दीजिये जल्दी से “

सोनाली ने पॉकेट से वॉलेट निकलकर एक डेबिट कार्ड उसे दे दिया और बोली “देख कतई हम लड़कियों की एक जिम्मेदारी बिरथ के साथ हे अति ह और वो हो घर मई पैसा को सही से उसे करना उन्हें भड़ाना bachana…..bus ये हमेशा याद रखना ……बस बेवजह मत खर्च करना और जरुरत ह तोह दस लाख खर्च करो पर बेवजह मत udana…aur है मेरे लिए भी कुछ एक लैपटॉप बैग ाचा सा ले लेना ….बाकी तुम एन्जॉय करो मुझे अभी फ्लाइट लेनी ह वर्ण साथ पार्टी करते पूनम देखना कोई जायदा नहीं piye…ap कुटी खासकर इधर उधर नहीं जाना ह ok..ab मैं चलती हु bye…enjoy पार्टी”

सोनाली चली गयी तब सबकी जान मई जान आयी…

रजनी “वो कितनी कैरिंग ह ये तोह और तुम कह रही थी हिटलर ह ….”

मनीषा “हम्म्म चलो डिनर करते ह”

शिवानी “अरे मेरी तोप्पेर्स आज पार्टी करलो यार वर्ण तुम आती कान्हा हो मुझे हे आना पड़ता ह मेरी परियो के पास टाइम कान्हा होता ह मेरे लिए तुम सबके पास”

पूनम “मेरी स्वीट सीस मैं आउंगी न पेपर ख़तम होते हे आपके pass…aur खूब दिन रहूंगी हम साथ हे मेरे गाँव चलेंगे खूब मजे करेंगे”

अनु कविता “हम भी चलेंगी”

पूनम है बिलकुल जरूर जरूर….



वंही ….शिमला ….

राज ….कप्तान सिंघानिया और उनकी वाइफ के पास बैठा हुवा था..

राज… “आप एक काम करेंगे मेरा..”

कप्तान “राज बीटा तुम बस बोलो”

राज “वो आश्रम से पीछे दूर एक झील ह उसके पास की जमीन चाहिए ह मुझे”

कप्तान “बीटा वो जमीन पहले हे बिक चुकी ह किसी ने बहुत ऊँचे पैसे देकर उस पूरी जमीन को खरीद लिया ह ाक्टुअलय मैंने वंहा होटल ओपन करने का प्लान किया था पर अब वो बिक चुकी ह किसी ने सर्कार को अचे पैसे दिए h….aur जिसने ये किया ह वो काफी पहुंच वाला लगता ह कोई रिकार्ड्स नहीं ह उसके हमरे पास पर तुम कहो तोह मैं पता करवौ”

राज ने एक गहरी सांस ली …उसके चेहरे पर मायूसी साफ़ देखि जा सकती thi…kyoki उसके अतीत के बहुत बेहतरीन पल वंहा बाईट थे आज भी दिन मई वो उसी जंगल मई बने झरने के किनारे अकेला काफी दिएर बैठा रहा था…

कप्तान “क्या हुवा राज”

राज “कुछ nahiiii….chodiye उस जमीन ko…..chaliye खाना कहते ह …कल मुझे भी मुम्बई के लिए निकलना ह”

कप्तान “मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी ह “

राज “है बोलिये न”

कप्तान “3 दिन पहले दीपिका के रिश्ते के लिए दिल्ली से होम मिनिस्टर ए थे….”

राज ने जब ये सुना तोह चौंक गया

कप्तान सिंघानिया आगे बोले “उनका लड़का राहुल तुम्हे सायद होगा ….वो ाचा लड़का ह और उन्हें दीपिका पसंद ह …”

राज “क्या दी को वो लड़का पसंद ह”

कप्तान “हां वो एक दूसरे को पसंद करते ह और दीपिका की भी हां ह तुम क्या सोचते ह”

राज की आँखों मई एक खली पैन सा आगया और उसने कुछ पल बाद कहा “सुनील को पता ह सब”

कप्तान “हां उसे पता ह”

राज “आप बड़ो को जैसा तीख lage….dii को पसंद ह तोह मुझे भी पसंद h….chaliye डिनर करते ह सुभे जल्दी जाना भी ह”

कप्तान “तीख ह चलो”

खाना कहते वक़्त राज ने कुछ नहीं कहा बस कप्तान और उनकी वाइफ के पूछने पर हे थोड़ा बहुत जवाब देता रहा ….थोड़ा सा खाना खा कर वो अपने रूम मई agaya….uske दिल मई क्या हलचल चल रही थी ये वो न जाता पा रहा था और न सह पा रहा tha….wo खिड़की के पास पड़ी चेयर पर बैठ गया और बहार की तरफ देखने लगा …..और कितनी हे दिएर वो बिना पालक झपकाए बहार देखता रहा उसे भी नहीं पता लगा फिर अपना मोबाइल निकल लिया और पुराणी पिक्स देखने लगा ……और ऐसे हे सोचते सोचते वंही वो गहरी नींद मई सो गया…..

नेक्स्ट डे ….पुणे….

दिव्या “यस हमारी टीम देहरादून नैनीताल ऑलमोस्ट साडी जगह कवर करेगी और अप्प्रोक्स 100 विल्लगेस को कवर करेगी”

मिनिस्टर “हमारी तरफ से आपको पूरा सपोर्ट रहेगा दिव्या ji…heemachal से चीफ मिनिस्टर साब का भी कॉल आगया था आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे”

दिव्या “थैंक यू सो मच”

मिनिस्टर “थैंक यू आपका ह जो विद्या ग्रुप्स का हॉस्पिटल हमारे स्टेट मई ारः ह ….आपको हम बेस्ट से बेस्ट लैंड प्रोवाइड करवाएंगे …..”

दिव्या “तीख ह ….हमारी टीम नेक्स्ट मंथ आरही ह आपके स्टेट लोकेशन फाइनल करके आपसे मीटिंग करेंगे….”

दोनों की औपचारिक बात होने के बाद …

विद्या “ऋचा एव्री थिंग दोने”

ऋचा “है माँ”

दिव्या के चेहरे पर मुस्कान आगयी फिर अचानक उसे कुछ याद आया और वो बोली “ये लो जो तुमने कहा था हो गया ह ह ये मेरी तरफ से तुम्हारा लिए gift”itna कह उसने एक डॉक्यूमेंट फाइल ऋचा को दे दी”

ऋचा हैरानी और कन्फूसिओं से दिव्या को देखने लगी तोह..

दिव्या “पहले देख तोह लो सब पता चल जायेगा…”

ऋचा ने जैसे हे वो फाइल ओपन करि और वो फाइल देखते हुवे आगे पेज पलट ते हूवर आगे बढ़ी तोह उसका चेहरा खुसी और आंसुओ से भीगता गया और वो तुरंत दिव्या के गले लग कर फुट फुट कर रो पड़ी…

दिव्या “क्या हुवा मेरी बची तुम्हे पसंद नहीं आया “

ऋचा “नहीं maa…muje बहुत पसंद aya…ye मेरा वो सपना ह जो मैं पूरा होते देखना चाहती हु ये मेरे सपनो का घर ह maa…thank थैंक यू सो मच माँ पर इस जगह को तोह पापा भी नहीं खरीद पाए थे तोह फिर आप”

दिव्या “क्योकि हम विद्या ग्रुप h….aur हमारा एक बार हे थोड़ा सा कहना सामने वाले के लिए अचीवमेंट के बराबर ह हमारा एक हॉस्पिटल वंहा भी खुलेगा इतना कहना था और बस मंत्री जी खुस हो गए “

ऋचा “थैंक यू सो मच”

दिव्या “अरे no इमोशनल …चलो अभी हमे सिक्योरिटी के लिए भी मीटिंग अटेंड करनी ह टाइम नहीं बिलकुल भी हमारे पास “

ऋचा मुस्कराकर “यस मम “

दिव्या को भी हंसी agayi….aur दोनों को किसी जवान माँ बेटी की तरह साथ साथ एक दूसरे को पकडे चलने लगी …….

वंही सुभे सुभे …मनीषा के घर घमासान मचा हुवा था…

रंजन “क्या मैंने तुम्हे रोका ह कभी भी सिर्फ इतना हे कहा ह की तुम्हे इन्फॉर्म करना चाहिए था”

मनीषा “मैं शिवानी मम के साथ थी न “

रंजन “तोह क्या तुम्हारी जवाबदारी नहीं ह”

मनीषा “आज ये जवाबदारी कैसे जग गयी इतने दिन कान्हा थी “

कविता “अंकल हम”

अभी उसने इतना हे कहा था की …रंजन गुसाई से बोलै “तुम चुप रहो मैनर्स नहीं ह tumhe…yahi सीखा ह तुमने “

मनीषा गुसाई से“ उसे दुबारा भूल कर भी कुछ कह मत देना आप”

मनीषा माँ “मनीषा चुप्प्प”

मनीषा “आप इन्हे कुछ क्यों नहीं कहती ह”

मनीषा माँ “क्योली वो सही ह और तुम गलत हो और ऊपर से तुम बहस कर रही हो सॉरी कहो “

मनीषा “मैं नहीं kahungi…itna कह वो कविता का हाथ पकड़कर ऊपर जाने लगी…”

रंजन “देखा तुमने आजकल ये सब सिख रही ह ye….juban लड़ना बिना बताये यंहा वंहा घूमना …रात को रुकना इसके पंख लग गए ह और दो आज़ादी देखली कैसे जाबांचालती ह अपनों से बड़ो के सामने”

मनीषा माँ “शांत हो जाईये मैं बात करुँगी उससे”

रंजन “अगर इसने यही रवईया रखा तोह मैं इसे टूर पर नहीं जाने दूंगा और कॉलेज भी ..पता नहीं कैसे अवरो की सांगत मई पद गयी ह” इतना कह वो वंहा से चला गया और पीछे दोनों बाप बेटी के बिच मई पीसी हुवी मनीषा की माँ अकेली रह गयी ….फिर कुछ सोच कर उसने दो कफ बनायीं और मनीषा के रूम की तरफ जाने लगी…

तोह मनीषा अपने रूम मई गुसाई से उबाल रही थी….

कविता मनीषा के साइड से हुग करती हुवी boli“hey भगवान् आपको इतना गुसा भी अत ह …मुझे तोह आज पता लगा”

मनीषा “सॉरी कुटी मेरी वजह से तुजे भी फालतू मई सुन्ना पद गया”

कविता “आप भी न ….उनका गुसा होना जायज ह न …हमने हे बताया नहीं था”

मनीषा “कुटी क्या हम कंही दूसरी जगह थे …बता मुझे ..क्या किसी लड़को के साथ थे hum….ya सड़को पर या और लड़कियों की तरह पब मई थे …….नहीं न …शिवानी दी रिश्ते से मेरी नानन्द लगती ह पूनम भी और तुम दोनों तोह हो हे मेरी …फिर इतना गुसा क्यों …”

कविता “तीख ह न हम उन्हें बता देंगे …अगर इसे वो खुस ह तोह यही सही …अब प्लीज प्लीज न हंस दीजिये न आप स्वीट सी हे अछि लगती हो फाइटर वाली सकल से मुझे भी दर लगता ह”

बहार से अति हुवी मनीषा की माँ “बिलकुल सही कहा कविता ne…hume फिक्र होती ह तुम्हारी बेटी ….और ये तुम दोनों के भले के लिए हे कहा था”

मनीषा “आपका समाज अत ह पर उन्हें आजकल क्यों दिलचस्पी होने लगी क्या इसलिए क्योकि उनका दामाद सिंह ग्रुप ऑफ़ ग्रुप का मालिक बन गया ह”

मनीषा माँ गुसाई से “manishaaa…behave योर सेल्फ”

मनीषा ये सुनकर धयान से अपनी माँ को देखने लगी…… और उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान आगयी और उसने अपना मू फेर लिया…

मनीषा की माँ को भी सडनली रीलीज़ हुवा और उन्होंने कुछ कहना चाहा तोह…

मनीषा “कुटी मैं नाहा लेती हु फिर कॉलेज जाना ह तुम भी रेडी हो jao”itna कह वो उठकर चली गयी पीछे मनीषा माँ और कविता रह गयी…

कविता “मैं बात करुँगी …आप परेशां मत होईये”

म माँ ने गर्दन है मई हिलायी और वापस दुखी मन से निचे चली गयी जंहा रंजन सोफे पर नेव्स्पपार पढ़ रहा था….

म माँ “आप थोड़ा अपना गुसा भी कब्बू रखा कीजिये जवान बेटी ह …यही उम्र ह उसके बिगड़ने और समझने की”

रंजन “मुझे नहीं उसे समझने की जरुरत ह ….वैसे आजकल वो राज नहीं नज़र अत ह इनके साथ”

मनीषा माँ “वो तोह पहले भी काम हे अत था…”

रंजन “जोगिन्दर का गोद लिया हुवा बीटा ह और सिंह ग्रुप का मालिक कुछ सही नहीं लग रहा ह ….वैसे ठाकुर साब …को वो दादाजी कह रहा था मैं आज तक कुछ समाज नहीं पाया हु”

मनीषा माँ “वो क्या वो जोगिन्दर के पिता ह और वो उनके साथ नहीं रहते ह …उनकी गाँव मई खानदानी जमीन ह वो वही सँभालते ह”

रंजन की आँखों मई शातिर चमक आगयी और बोलै “कौनसा गाँव”

मनीषा माँ “आप भी न वैसे भी शादी वो गाँव मई हे करेंगे तब देख लीजियेगा अचे से”

रंजन “अरे बताओ न आखिर बेटी ह हमारी थोड़ी खोजबीन तोह कर हे लेनी चाहिए हमे भी …पता लगा लोग कहेंगे की रंजन ने अपनी बेटी पैसो मई बछड़ी …”

म माँ “बताया तोह था मनीषा एक बार गाँव का नाम …maanva…manora….yaad नहीं ारः ह…”

रंजन पुरे फोकस से सून रहा था …जैसे उसकी लोटरी लगने वाली हो …वो बोलै “याद करो याद आजायेगा”

मनीषा माँ “म से स्टार्ट था है याद आया mandawa…ha यही नाम था पर जगह कौनसी ये मैंने पूछा नहीं था कहो तोह पुछु.”

रंजन “नहीं नहीं इसकी जरुरत नहीं बाकि मैं पता कर लूंगा”

और रंजन को वो मिल गया जो वो चाहता था….

म माँ “ाचा ये सब छोड़ो अब आप उसे कुछ मत कहना”

रंजन “बिलकुल भी नहीं कहूंगा वैसे भी कल मई कप्तान जी से मिलने जा रहा हु उन्होंने बुलाया ह अपनी बेटी के लिए रिश्ता देखा ह “

म माँ “ ये तोह बहुत अछि बात ह”

रंजन “बिलकुल ख़ुशी का मौका ह तीख ह मैं काम से बहार जा रहा हु ….रात को हे aunga…shamko ाचा सा बना लेना “

रंजन तैयार हुवा और अपने बॉडी गॉर्डस के साथ निकल gaya…..aur अपने बेस पर पहुंच कर …. “जल्दी से मंडावा नाम से नार्थ मई जितने भी गाँव ह उनको धुंध निकालो…”

सामने से “जी बॉस”

और कुछ हे पल मई बड़े से प्रोजेक्टर पर आया “मंडावा विलेज 29 कम अवे फ्रॉम झुंझुनूं”

रंजन “तोह तुम राजस्थान से हो फर्क सिर्फ इतना ह की वो उदयपुर से tha….muje लगा की तुम दिल्ली से होंगे अचानक उसके माथे पर साल पद गए और वो bola…kya ऐसा हो सकता ह”

रंजन बुरी तरह शॉक हो गया ….और उसके सर मई तेज़ दर्द उठ gaya…usne तुरंत गिलास उठाकर पानी पिया और कुढ़ से हे बोलै “नहीं ऐसा नहीं हो सकता ह …विद्या के सिवये सब मरे गए थे उस दिन ….और सहदेव का उन ताकतों से बचना नामुकिन tha…main ु हे दर रहा हु …ये तोह ाचा ह की मां के नाम से मुझे अब कोई नहीं जनता ह फिर मुझे इतनी बेचैनी क्यों हो रही h….muje और डिटेल जानी होगी ….पर कैसे कैसे…..” अचानक उसके चेहरे पर गहरी मुस्कान आगयीईइ “मिल गया कप्तान सिंह दिल्ली जायेंगे हे उनको हे कहूंगा आखिर मन वो कर नहीं पाएंगे है है है रंजन तू तोह अब और चालक हो गया ह ”इतना सोचते हुवे उसने अगले दिन की हिमाचल की फ्लाइट टिकट बुक करवा दी

वंही इन सब बातो से अनजान….

राज “डॉ आप अचे से चेक कर लीजिये क्योकि मुझे पता ह मेरे पास से जाने के बाद कई जगह पर आपको रिपोर्ट देनी h…aur है ओने थिंग मेरी बॉडी की राइट सिचुएशन मुझे बताईयेगा ….वो बिलकुल नहीं जो आपको मेरी माँ बताने को कहती ह”

डॉ के चेहरे पर शर्मिंदगी आगयी और बोलै “राज आप समाज सकते ह मेरे पास आपकी तबियत के लिए अलग लग जगह से 6,7 कॉल आते हिज जिसमे लगभग सरे फ्रेमलेस के हे होते ह …खैर 15 मिनिट रुकिए बस आपका सराय अजय बस…

15 मिनट बाद ..

डॉ “राज आपके घाव रिकवर हो चुके ह पर पसलिया अभी रिकवर हो रही ह उसे टाइम lagega…isliye एक मंथ बाद आप पूरी तरह फ़ीट होंगे …आपकी जितनी इंजरी थी उतने मई नार्मल पर्सन 8 मोनथस तक रिकवर करता रहता ह पर आप 2 मोनथस मई पूरी तरह खड़े हो और देखिये 75 परसेंट तक रिकवर भी हो चुके ह बस थोड़े समय और धयान रखियेगा”

राज “थैंक यू डॉ हमारी ये आखिरी विजिट ह मैं चलता हु “

इतना कह वो बहार निकल गया और बहार निकलते हे उसका चेहरा चेहरा जो अंदर नार्मल था वो बिलकुल इमोशन लेस्स हो गया …..

वंही …दिल्ली..

चीफ “अरे औ बेटी तुम तोह भूल गयी”

सोनाली “सर”

चीफ “फर्स्ट ऑफ़ आल बधाई हो अब तुम्हे माँ की चिंता नहीं रहेगी …आखिर वो तुम्हारे ससुराल जो पहुंच गयी ह…”

सोनाली “है सर दादाजी उन्हें अपने साथ ले ए ह मैं बहुत खुस हु”

चीफ “अब तोह यकीन हुवा ठाकुर साब तुम्हे अपनी बहु मान चुके ह”

सोनाली “जी सर”

चीफ “डोंट वोर्री राज भी एग्री हो जायेगा खैर ये सब छोड़ो …तुमने जो मुझसे कहा था मैंने वो साडी जानकारी कलेक्ट कर्ली h…meeting रूम मई चलो….” दोनों साथ मीटिंग रूम की तरफ जाने लगे और मीटिंग रूम मई पहुंचकर “ ये मां नाम का शख्स आज से 17 ,18 साल पहले के करीब एक तेज़ तरार आदमी था जिसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड तोह नहीं ह पर वो हर 2 नंबर के काम मई शामिल हुवा करता था …जैसे ..2 पार्टी को इनफार्मेशन देकर पैसा कामना …आदमी अर्रंगे करना …हथियार की डील करवाना ेट्स उस समय ये शख्स सहदेव सिंह के संपर्क मई आया tha….aur इसका रिकॉर्ड बंगलोरे के एक पुलिस स्टेशन मई मिला ह जंहा इसको छुड़वाने सहदेव और नरपत सिंह खुद गए थे …ये देखो रिकार्ड्स…”

सोनाली “सर इस मां की कोई फोटो नहीं ह क्या”

चीफ है ये रही ….

सोनाली ने फोटो की तरफ हाथ भदया और उसे अपनी बड़ी बड़ी आँखों से घर कर देखने लगी……

आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का…
 
अपडेट लेट नाईट पोस्ट होगा गेस्ट ए हुवे ह पर हो जायेगा no तिमिंग्स...

किलोमीटर्स.....


11 उपदटेस तू लेफ्ट फॉर

डेड एन्ड
 
एडिटिंग एक्सपेक्टेड टाइम 11 पं
 
अपडेट 209

किलोमीटर्स…

एग्जाम डे….

चारो अपनी धुन कॉलेज मई जा रही थी बाते करते हुवे ..

मनीषा “राज नहीं आया ह क्या अभी तक न कोई कॉल न मैसेज”

पूनम “मैंने किया था कल कॉल पर उन्होंने न कॉल पिक किया और न उनका कोई रिप्लाई आया ….कुटी अनु तुम्हे कुछ पता ह “

कविता “मैंने कॉल किया था तब उनका रिप्लाई मैसेज आया था की वो कल हे मुम्बई पहुंच चुके ह और अनिरुद्ध अंकल के फ्लैट मई रुके हूवर ह बस इतना हे पता ह मुझे भी”

सभी ने अचे से बात सुनी पर कोई कुछ नहीं बोलै क्योकि बिना बताये फ्लैट मई चला गया किसी से कोई कांटेक्ट भी नहीं किया…

पूनम मन मई “राज जी तोह ऐसे नहीं ह फिर क्या हुवा जरूर कोई बात हुवी h..pepar देने के बाद मई बात करूंगीए “

मनीषा “चलो बेस्ट ऑफ़ लक गर्ल्स अचे से देना पेपर बाद मई बात करते ह राज से मिलकर “

इतना कह सब अपने अपने एग्जाम रूम की तरफ चली गयी …पर पूनम को एक सुप्रिसे मिला राज का उसी के क्लास मई एग्जाम का रोल नंबर आया था वो धीरे से चलती हुवी जानभूझकर नंबर ढूंढती हुवी राज के पास से गयी और बोली “गुड मॉर्निंग ji….best ऑफ़ लक जी …”

राज ने पलट कर देखा तोह पूनम एक ब्लू प्रिंटेड सूट मई जा रही thi…uske चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कान आगयी और जब पूनम अपनी सीट पर बैठी तोह राज ने गर्दन को वापस सीधी कर्ली जब की पूनम उसे हे देखती rahi…….par ये सब साइड मई बैठी एक लड़की भी धयान से देख रही थी …और वो एक लड़की होने की वजह से आसानी से पूनम जिस तरह राज को देख रही thi…uski वजह पहचान सकती thi…uske चेहरे पर भी एक गहरी मुस्कराहट thi…..jaise उसने कुछ खास पता कर लिया हो ..और उसे इसका बड़ा इनाम मिलने वाला हो ….

कुछ दिएर बाद पेपर सुरु हो गया…

वंही …हिमाचल…

कप्तान -आईये आईये रंजन जी….

दीपिका माँ “नमस्कार भाईसाब”

रंजन “ऐसे नहीं कप्तान जी गले मिल कर स्वागत करिये आखिर हम समधी ह…..” गले मिलने के बाद “नमस्कार भाभीजी”

कप्तान “अरे भाई समधी जी के लिए छाए नास्ता लेकर ao….pahli बार घर ए ह”

दीपिका माँ “है मैं अभी लाती hu…ap पहले इन्हे बैठाइये तोह सही या खड़े खड़े हे नास्ता करवाएंगे”

कप्तान “गलती होगयी भाग्यवान …आईये आईये baithiye…main भी मिलने की ख़ुशी मई भूल हे गया”

रंजन “है है है होता ह कप्तान जी और सुनाईये क्या हाल चाल ह वैसे मैंने सुना ह दामाद जी होटल इंडस्ट्री मई एंटर करने की सोच रहे ह”

कप्तान मुस्कुराकर “आपको कैसे पता लगा”

रंजन “दामाद जी यंग ceo's मैं इंडिया के टॉप मई एते ह कल हे परसो हे उनका इंटरव्यू पढ़ा था जो उन्होंने बिज़नेस टुडे मागज़ीने मई दिया था की वो होटल इंडस्ट्री मई इंट्रेस्टेड ह”

कप्तान “है है है आप कुढ़ एक बड़े बिज़नेस में ह आपसे क्या चिप सकता ह …है सुनील ने पहले हे उदयपुर मई एक हवेली थी जो काफी साल पहले जल गयी थी जिसका कोई मालिक नहीं था वो हमने परचेस कर ली ह और उसमे होटल चल भी रहा ह”

हवेली और उदयपुर का नाम सुनते हे रंजन के कान खड़े हो गए और वो धयान से सुनने लगा…

कप्तान “location..achi thi..toh इन्वेस्ट कर दिया …और ऊपर वाले की दया से वो बहुत ाचा भी चल रहा ह सिर्फ फोरेनर टूरिस्ट्स को हे अटेंड करते ह”

रंजन “ओह वैरी गुड ….पर उस हवेली का मालिक कौन ह क्योकि हवेली विंटेज प्लेस होता ह तोह उसकी कीमत भी बहुत बड़ी होगी और कोई भी आसानी से नहीं बेचता ह”

कप्तान “है थोड़ा मुश्किल रहा h…thakur साब की जान पहचान थी और ऊपर से हवेली खली पड़ी थी तोह सर्कार को मोटा पैसे देकर अपने नाम करवाली “

रंजन “मालिक “

कप्तान “अभी तक तोह आया नहीं ह सामने और गलती से आगया तब बिच का कोई रास्ता देखेंगे “

रंजन “ये भी सही ह …ाचा दिल्ली कब चलना ह”

कप्तान “आप भी न आज थोड़ा रेस्ट कीजिये कल दोपहर को चलेंगे आज हमे मेहमान नवाज़ी करने दीजिये”

रंजन “जैसा आप कहे …वैसे लड़का क्या कर रहा ह मेरा मतलब ह की पॉलिटिक्स मई जायेगा या बिज़नेस मई”

कप्तान “बचो को जो मर्जी ए जो समाज मई ए वो करे बस दोनों खुस रहने चाहिए ह पैसो की कोई कमी नहीं ह ….”

रंजन “जी सही कहा अपने और वैसे भी मेरा सबकुछ भी तोह अब आपका हे ह है है है”

कप्तान ठहाका मारकर हँसते हुवे “आप भी तोह हमारे हे ह है है है “

रंजन भी हसने लगा और बोलै “ठाकुर साब नहीं आएंगे कल दिल्ली

कप्तान “नहीं वो नहीं आएंगे वो 2 दिनपहले हे मिलके गए थे अपने पोते राज के साथ “

रंजन मन मई “तोह वो यंहा था इतने दिन पर क्यों …..पूछ के देखता हु …”

रंजन “यंहा क्यों क्या हुवा अचानक ए या ऐसे हे”

कप्तान “अरे दादा पोता और जोगिन्दर भाई तीनो आने वाले the…par जोगिन्दर भाई की मीटिंग थी इसलिए वो दोनों हे घूमने ए थे वो राज का एक्सीडेंट हो गया था न तोह परिवार के साथ मई घूमने आगये ”

रंजन “एक बात पुछू”

कप्तान “बिलकुल पूछिए”

रंजन “आज तक इस सिंह ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज के बारे मई किसी को नहीं पता ह इसका ओनर कभी सामने नहीं आया और अचानक राज इसका ओनर निकलता h…aur साडी प्रॉपर्टी मनीषा और दामादजी के नाम कर देता ह आखिर ये राज ह कौन क्योकि जंहा तक मुझे पता ह ये कमिश्नर साब का गोद लिया हुवा बीटा ह तोह फिर एक अनाथ इतनी बड़ी कंपनी का ओनर कैसे हो सकता”

कप्तान “रंजन भाई ..आप मनीषा बहु के पिता ह और राज मनीषा को अपनी भाभी माँ मान चूका ह और सुनील उसका दोस्त भाई सब ह ये राज़ बस आपको पता चला ह इसलिए आप इसे अपने तक हे rakhna……aur रही बात राज की तोह वो अनाथ नहीं ह वो तोह ठाकुर साब का सागा पोता ह बचन मई हे उसके माँ पापा एक्सीडेंट मई मरे गए the…aur फिर उसने पढ़ाई यही हिमाचल से करि तोह श्वेता उसकी बहन बन गयी और श्वेता की जिद और राज से प्यार की वजह से जोगिन्दर सिंह ने राज को गोद ले लिया दोनों मई सेज भाई बहन से बढ़कर प्यार h….bus यही वजह ह और सिंह ग्रुप ठाकुर साब का हे ह पर उन्हें दौलत से बिलकुल प्यार नहीं ह इसलिए उन्हें कोई फरक नहीं पड़ता ह न वो कभी जाते ह सिंह ग्रुप मई और न किसी को आने देते ह बस सीईओ संभालता ह …मुझे बस इतना हे पता ह”

अब रंजन के दिल मई और जिज्ञासा आगयी की राज के पिता का नाम क्या ह वो पूछने के लिए मू खोलने हे वाला था की

दीपिका माँ आगयी और उन्हें खाने के लिए बुलाने lagi…jiski वजह से रंजन की नाम पूछने की इच्छा अधूरी रह गयी….

वंही दिल्ली….

अंजना “ मुझे नहीं पता तेरे दिमाग मई क्या चल रहा ह जो तूने राज को नहीं बताया …पर गलत किया तूने बहुत गलत किया deepika..bhul गयी भाई के प्यार को अपने दो दिन के प्यार के agai…kaise उसने गोलिया खायी थी तेरे लिए उन राख्षसो से अकेले भीड़ गया था वो …और तू जुम्मा जुम्मा दो दिन के प्यार मई सब भूल गयी“

दीपिका गुसाई “अनजाना” फिर नार्मल होकर “यार तू भी गलत समाज रही ह …अरे वो राहुल ने कहा की वो खुद एग्जाम के बाद भाई के पास परमिशन लेने जायेगा …और उस गधे ने मुझे भी अपनी कसम देदी की तब तक कोई राज भाई को नहीं बताएगा इसलिए मैं बता नहीं प् रही हु वर्ण तुझे लगता ह की मैं राज को नहीं बताउंगी”

अंजना “बुरा मत मन्ना पर अगर राज को पहले पता लग गया तोह उसे बहुत ढक होगा और तू उसे एक्सप्लेन भी नहीं कर पायेगी उसने नाम से नहीं तुझे सच्चे दिल से बड़ी बहन मन ह और रिश्ता निभाया भी ह पर तू क्या कर रही ह राहुल की वजह से …एक बात याद करले मेरी आगे तेरे इस डिसिशन की वजह से अब तुम दोनों के बिच जो फैसला आएगा न वो तू जिंदगी भर चाहे जो करलेना कभी भर नहीं पायेगीइ…” वो आगे और कुछ बोलती तभी राहुल आज्ञा जिसे देख अनजाना गुसाई मई उठ कर चली गयी…

राहुल “इसे क्या हुवा”

दीपिका ने दुखी मन से एक सांस मई साडी बात बता डीई

राहुल “ऐसा कुछ नहीं होगा वो तुम्हे अपनी जान से जायदा चाहता ह भला वो अपनी दी से नाराज होगा और ट्रस्ट में मैं खुद जाकर परमिशन लूंगा तोह उन्हें ज्यादा ख़ुशी होगी और आप पर प्राउड भी होगा की अपने उनकी है के बिना रिश्ता नहीं joda…dont वोर्री मैं उन्हें मन लूंगा …”

दीपिका “पर”

राहुल “पर वर छोड़ो मैं हु न …ाचा ये बताओ एग्जाम कैसा हुवा”

दीपिका मुस्कुराते हुवे “ाचा हुवा “ दोनों आराम से बाते करने लग गए पर इन्हे क्या पता था की जिस बात के लिए वो दर रहे ह वो पहले हे हो चुकी ह और उसका इम्पैक्ट भी बहुत डीप हो चूका ह जिस भाई को वो बहुत मानती थी उसको वो बहुत गहरा ढक पंहुचा चुकी thi…aur ये दुख की गहराई अब मिटना बहुत मुश्किल होने वाली thi….aur यही नहीं इनदोनो ने सुनील को भी बेवजह इन इसमे शामिल कर लिया था जिसकी वजह से दो बचपन के भाई और दोस्त मई भी विस्वास की दरार डालने वाली thi…kyoki सुनील हे वो एक लौटा इंसान था जिसे वो परिवार की हर बात पूछता था और उम्मीद करता था की वो सच बताएगा चाहे जैसी भी ho…par यंहा उसने भी बात छिपा ली थी …भले हे ये अचे के लिए किया हो पर विस्वास ऐसा हे होता ह जो टूट गया तोह टूट gaya…phir जुड़ने मई वो ताकत नहीं रहती ह जो पहले होती h…aur परिवार के मामले मई राज बिलकुल ऐसा हे tha….Aj अंजना ने भले हे दीपिका को गुसाई मई कहा हो पर जो कहा वो सच कहा था और ये बात अंजना इसलिए कह प् रही थी क्योकि उसने राज के साथ जो राते टूर पर बितायी थी उसमे राज ने खुलकर कुछ बाटे उसे बताई thi….isliye अंजना सूरे थी आगे के लिए की क्या होने वाला ह और इसी वजह से श्वेता भी बुरी तरह दीपिका और सुनील से नाराज थी क्योकि वो भी कसम से बंधी हुवी थी पर उसे नतीजा अचे से पता था और इसलिए उसने कहा भी था की छिपाने से ाचा रहेगा बता दो भाई बहुत खुस होंगे पर दीपिका को अपने और राज के रिश्ते पर यकीन था …और वो भी अपने प्यार के आगे मजबूर थी………

Wanhi…delhi चीफ ऑफिस

सोनाली “सर फोटो को डेटाबेस मई क्रिमिनल्स की इमेजेज से मैच करवाया अपने”

चीफ “है मैंने चेक करवाया पर मज़े की बात कंही से भी कोई रिकॉर्ड नहीं ह …तुम्हारे ससुर सहदेव सिंह ने …अपने सरे रिकार्ड्स पुलिस स्टेशन से पहले हे साफ़ करवा दिए थे या ये कहु की किसी और ने जैसे इतिहास हे मिटा दिया हो सबका कंही भी कोई केस नहीं ये कैसे मुमकिन ह”

सोनाली “ मतलब सर “

चीफ “मैंने पता किया तोह ये पता चला की जितने भी केस मई सहदेव सिंह का और उनके दोस्तों का नाम शामिल था वो सरस रिकार्ड्स गायब हो गए h…aur जिन्होंने केस पर काम किया था वो भी गायब हो गए h…koyi था जो नहीं चाहता था की सहदेव सिंह के बारे मई कोई जाने “

सोनाली “सर इस मां की फोटो मिलना बताता ह की ये कुछ न कुछ जनता ह मुझे वंहा जाकर उस आदमी को ढूँढना होगा जो इस केस से जुड़ा हुवा था”

चीफ “तीख ह मैं आगे इन्फॉर्म कर देता हु कमिश्नर को तुम्हे कोई दिकत नहीं होगी और एक बात बहुत संभलकर जाना …कुछ दिनों से बड़ी शांति सी ह …और जो लोग भी शामिल ह वो यकीनन बहुत बहुत जायदा पॉवरफुल ह.”

सोनाली “है सर …मुझे भी अजीब सा महसूस होता ह क्योकि मुम्बई मई इतना बड़ा नरसंहार हुवा ह अंडरवर्ल्ड की नीव हिल गयी ह उसके भावजुद अभी तक अंडरवर्ल्ड के पीछे की ताकतों ने कोई एक्शन नहीं लिया ह ….जो की बहुत बड़ी बात h…wo कुछ तोह प्लान कर रहे ह”

चीफ “अब्सोलुतेल्य राइट यही तोह बात समाज नहीं आरही ह ….निर्वाण को ये लोग जानते नहीं ह राज के ऊपर इनको सक हे होगा सिर्फ …इसलिए वो उसपर एक्शन ले भी सकते ह और नहीं भी पर उस पर निगरानी जरूर रख रहे होंगे“

सोनाली “राज की सेफ्टी के लिए उसके दोनों बॉडी गॉर्ड ह …मिरतिदूत जिन्हे आप जानते हे हो और उसके सिवाए राज के आसपास पुलिस के नई रिक्रूट स्पेशल पुलिस अफसर भी रहते ह …इसलिए राज पर हमला करने की वो सपने मई भी नहीं सोचेंगे ऊपर से सुनील के लोग भी ह सेफ्टी के लिए”

चीफ “गुड ाचा किया तुमने और सुनील ne…ab बचे हो तुम दोनों और बाकि फॅमिली ….क्योकि डेथ हेलो अभी तक जिन्दा ह और जंहा तक मुझे पता ह चीफ एडिटर कुंदन को मार कर उसने मैसेज क्लियर कर दिया था की वो कुछ नहीं बुला ह और मैं यही सोच के हैरान हु की उसने अब तक तुम सब पर अटैक क्यों नहीं किया ह ऐसा कुछ तोह वो करना चाहता ह जिसे तुम सब तड़पो ….और ऐसा तभी हो सकता ह जब तुम्हारा कोई अपना मारा जाये जो तुम्हारा बेहद खास हो”

चीफ की बात सुनकर सोनाली भी गहरी सोच मई डूब गयी की किस पर अटैक हो सकता ho…Par वो कितना हे दिमाग लगाने के बाद भी किसी कन्क्लूसिओं पर पहुंच नहीं पायी…

चीफ “ तुम पहले इस मां नाम की पहली को सोल्वे करने की कोसिस करो ताकि राज की हेल्प हो सके अभी वो रिकवर हो रहा ह एग्जाम दे रहा ह तब तक तुम इस पहली को सुलझाने पर पूरा फोकस करो….”

सोनाली “सही कहा सर अपने …मैं तोह हर पल यही दवा करती हु की उसकी हर मुसीबत मुज पर आजाये उसे कोई आंच तक न ए …पर क्या करू …मेरे चाहने से क्या हो सकता ह”

चीफ “सोनाली बेटी …पता ह तुम्हे …तुम फुटरे मई एक बहुत अछि वाइफ banogi….isliye साडी टेंशन छोड़ो बस तुम से जो हो सकता ह वो karo…baki ऊपर वाला सब देख लेगा …अब चलो लंच करते ह”

Wanhi…Raj ….पेपर देकर बहार आया ….तोह पीछे पीछे पूनम भी आगयीईइ…

पूनम “तोह जनाब बड़े आदमी हो गए ह …फिर राज के दोनों हाथ की उंगलियों और हाथ को चेक करते huve…hmmm हाथ और उंगलिया भी तीख ह ….ओह्ह्ह फ़ोन को उठाने मई दिकत आरही होगी ह न भरी हो गया होगा”

राज जो अब तक अलग मूड मई था उसे हंसी आगयी और वो बोलै “ok no एक्सक्यूसेस …ी म सॉरी..”

पूनम “गुड …बूत नेक्स्ट टाइम no अपोलोग्य एक्सेप्टेड …ओनली पनिशमेंट”

राज “मंजूर ह”

पूनम अब सीरियस होकर “आपको झूट बोलना भी नहीं अत ह na….main आपको अचे से पहचानती हु राज जी …जब भी आपका दिल करे तब आप अपने दिल की बात कह सकते ह …मैं हमेशा आपके साथ हु …कोई देख पाए या नहीं पर मैं आपकी मुस्कान के पीछे का दर्द देख सकती hu…chaliye आपके लिए मैंने ब्रेकफास्ट बनाया ह अल्लू परांठे और चूरमा….”

पूनम और राज दोनों साथ मई चलने लगे राज का धयान हर बार पूनम की तरफ हे जा रहा tha….wo पूनम की तरफ देख कर उसे बहुत कुछ कहना चाहता था पर वो अपने ढक से पूनम को कभी दुखी नहीं करना चाहता था …इसलिए वो चुप हे रहा”

पूनम “मनीषा कविता अनु मैं कितनी परेशां हो गयी थी …बिना बताये बड़े पापा के फ्लैट पर शिफ्ट हो गए …मनीषा छोड़ेगी नहीं आपको देख लेना “

राज और पूनम जैसे हे कैंटीन पहुंचे तोह सामने उन्हें तीनो एक साथ बैठी दिखी ….और राज को देखती हे तीनो खुस हो गयी बस ओपनली रिश्ता नहीं जताया ….राज और पूनम भी टेबल पर बैठ गए …

मनीषा धीरे से “आप तोह मेरी भाभी माँ हो …उस दिन तोह बड़े इमोशनल होकर गले मिलकर वेड किये थे और इतनी जल्दी भूल गए बस भाभी का प्यार हवा मई उड़ गया इतनी जल्दीए”

राज धीरे से “ी म सॉरी …ी ल यू सोऊ मुछ्छःह दुबारा नहीं होगा ….आपको पता ह न सब”

मनीषा “मस्का लगवा लो तुमसे …बस …पता ह न की मैं नाराज नहीं हो सकती हु तुमसे ”

राज “और कभी होना भी मत ….चाहे मैं पास राहु या दूर बस हमरा रिस्ता ऐसे हे रहना चाहिए …क्योकि दूरिया रिस्तो की मिठास काम कर देती ह …ाचा ये सब छोड़िये मेरे आलू के परांठे बनाये अपने”

राज की बातो से मनीषा को एक हे पल मई बहुत कुछ समाज आगया tha…par उसने कोई रियेक्ट नहीं kiya….aur बोली “मुझे लगा तुम घर आओगे ….एक काम करती हु कल पूनम के घर मेरे हाथो से खिलौ तोह ाचा रहेगा न”

राज “तीख ह मुझे मंजूर ह लव यू…”

फिर अनु और कविता ने भी बात करनी सुरु करडीई और अपने हे अंदाज़ मई लड़ाई ladi…abhi वो सब कैंटीन से बहार निकलने वाले हे थे की राज की नज़र सामने से एते शख्स पर पड़ी जिसकी हिघ्त और बॉडी उससे काफी हद तक मैच हो रही thi…janha राज जीन्स और टी शर्ट मई था तोह सामने वाला फॉर्मल पेण्ट और शर्ट मई था दोनों की नज़ारे एक दूसरे से मिली ….और कुछ पल तक हटी हे nahi….wo शख्स पास आया …और बोलै “अरे आप सब यंहा हो ये आप सबकी तो दो लिस्ट तैयार ह इसे आज हे फिनिश करना ह जब तक मैं आगे के होटल बुक कर देता हु …”

पूनम “ok सर हम मैनेज कर लेंगे ….”

अपूर्व “बिलकुल मैनेज करना ह वर्ण कमी रह गयी तोह फिर सब हमसे हे शिकायत करेंगे और ये कौन ह ….फर्स्ट टाइम कोई फिजिकली इतना फिट देख रहा हु कॉलेज मई “

राज “Hello ी म राज ….बीकॉम फर्स्ट ईयर स्टूडेंट “

अपूर्व “हाथ मिलते हुवे मुस्कराने लगे और बोलै नीस तो मीट यू मर राज ….अब तोह रोज मिलते रहेंगे …फिर ok गर्ल्स आफ्टर कंप्लीशन ऑफ़ वर्क रिपोर्ट तो में अस सून अस पॉसिबल. Ok…”

सब ोककक…

अपूर्व के जाते हे “ये कौन ह”

मनीषा “नई पद टीचर ह ….”

राज “एग्जाम के पास मई पद टीचर “

पूनम “लेट ज्वाइन किया ह अपॉइंटमेंट पहले हे हो गया था ….दीं सर ने बताया था….”

राज “अपूर्व की पीठ को देखते हुवे हम्म्म…. Ok मई रजनी मम से मिलके अत हु कल मिलते ह एग्जाम मई”

अनु “हम भी जब तक काम ख़तम कर देते ह “

राज साइड मई निकलते हे …मोबाइल नंबर डायल करके … “ ही शिवानी मम”

शिवानी “माय हॅंडसमे हॉट जीजू …अकेले मई तोह साली बोल लिया करो”

राज “आप फिर सुरु हो गयी “

शिवानी “तुम सुरु हे कान्हा होने देते हो मैं तोह कबसे तैयार hu…ajao जीजा साली खेलेंगे”

राज “सीरियस हो जाईये एक डिटेल निकालनी ह कॉलेज मई पद टीचर आया ह अपूर्व सिंह सेक्रेटली खुद प्रायोरिटी पर लेकर अचे से बैकग्राउंड चेक करके मुझे बताये इसके बारे mai….”.shiwani “जो हुकुम मेरा अक पर साली को फीस देनी पड़ेगी…”

राज “आप खुद भी पिताजी मुझे भी पिटवाओगी मैं रखता हु …”

शिवानी “अरे सुनो पर ..उफ़ ये लड़का भी न हीई कुछ भी हो पर ह तोह मेरा हे कभी भी खा लुंगी…” फिर पलट कर ऑफिस टेबल पर पड़ी रिंग दबायी तोह एक कांस्टेबल सामने आया… “मात्रे को अंदर बूझना …” कुछ दिएर बाद मात्रे …तुम्हे इस क्सक्सक्स कॉलेज मई अपूर्व सिंह नाम के लेक्चरार की कम्पलीट डीटेल निकलवानी h…ye फोटो ह पहले इसे पूरे डाटा बेस मई चेक करो फिर खुद इसकी पूरी जनम कुंडली निकलना ….ok”

मात्रे “हो जायेगा मम”

शिवानी “मात्रे आप खुद देखना ….सीरियस मटर ह कोई चूक नहीं चाहिए कान्हा जाता ह किसी मिलता ह कान्हा रहता ह मोबाइल नंबर ेट्स सब”

मात्रे “ok मम जय हिन्द” इतना कह वो चला गया …

तभी शिवानी का मोबाइल रिंग होने लगा ….

शिवानी “माय हॉट सिस्टर कैसे याद किया”

सोनाली “एक फोटो भेजही ह ये मां नाम के शख्स की ह जिसका जिक्र राज ने किया था ….मुम्बई के हर ठाणे मई ओल्ड केसेस को चेक करवाओ और देखो इस शख्स को कोई और क्लू मिलता ह क्या धयान रहे सब सेक्रेटली होना चाहिए ह क्योकि ये शख्स अब जंहा भी होगा बहुत ऊँची जगह पर और पॉवरफुल होगा”

शिवानी “तीख ह मैं चेक करवाती hu…waise अभी जीजू का कॉल भी आया था किसी की कुंडली निकलवा रहे ह”

सोनाली “उनकी चोट तीख हुवी नहीं ह और लग गए काम पर”

शिवानी “Hmmm…ap भी धयान रखना आज कल शांति कुछ जायदा हे ह”

सोनाली “गन ह न तेरे पास”

शिवानी “राज की दी हुवी गन और म14 कार मई हमेश रहती ह …”

सोनाली “गुड …”

वंही अगले दिन ….राज …..पेपर के बाद पद क्लास के लिए गया जो की कपोलसरी थी लेनी ..क्लास के बाद…

अपूर्व “सो गर्ल्स 15 मिनट्स फॉर मीटिंग ….”

कविता अनु और दोनों “ok “

राज “15 मिनट्स फॉर मीटिंग …अभी “

मनीषा “क्रॉस चेक करते ह न की सब वेल अर्रंगे हो रहा ह या नहीं 5 नंबर एक्स्ट्रा मिलेंगे “

अपूर्व “कुटिल मुस्कान के साथ …तुम भी चल सकते हो साथ मई “ ये कहते हुवे वो पूनम और मनीषा के करीब agaya….aur राज की तरफ देखने लगा राज ने भी अपूर्व की तरफ देखा और उसे ये आंखे काफी जानी पहचानी लगी….

अपूर्व “ग्रेट लेटस जो सो मर राज आप कैसे पार्टिसिपेट करेंगे “

राज “No ी म नॉट इंटरेस्टेड …इन अन्य कंट्रीब्यूशन …ी म लज़ी पर्सन”

अपूर्व “बूत आपका फेस तोह मुझे बहुत पॉपुलर लग रहा ह जैसे मैंने पहले भी देखा हो……” फिर मुस्करा कर …. “वेल आप दीखते कुछ और हो और हो कुछ और ऐसी लगती ह आपकी personality…perfect बॉडी शेप से तोह कंही से भी लज़ी नज़र नहीं आते हो मैं पद की क्लास लेता हु इतना तोह देखते हे पहचान सकता हु”

राज और अपूर्व की नज़र एक बार फिर मिली ..फिर राज मुस्कुरा कर …. “मेरे फादर वो दिल्ली मई रोज सुबह उठा कर गयम करवाते थे इसलिए बॉडी बन गयी ह पर मुम्बई आया हे सिर्फ आराम करने हु”

अपूर्व “वेल क्या करते ह आपके फादर”

राज “दिल्ली कमिश्नर ह”

अपूर्व हॉल मई एंटर करते हुवे “ओह तभी ाचा ह ाचा ह good….ap चारो की डिटेल मैंने चेक कर्ली thi…bus….dress code…meenu जो हमे सेट करना ह गेम्स ेट्स आप अपनी लिब्लिटी के अकॉर्डिंग चेक कर लीजिये और मिस पूनम आईये जब तक तक हम होटल्स जो सेलेक्ट किये ह उनमे से फाइनल कर देते ह”

पूनम “ok”ye कहते हुवे उसने तिरछी नज़र से राज को देखा जब की राज बिना कुछ बोले मनीषा कविता के साथ दूसरी टेबल की तरफ जा रहा था”

अपूर्व पूनम से “आप राज को कैसे जानती ह…”

पूनम “सर मनीषा के क्लासमेट थे देहरादून मई और …10 मई सीबीएसई आल इंडिया टोपर रहे ह और मैं सेकंड थी तोह जान पहचान हुवी ह बस”

अपूर्व “बूत ऐसा लग रहा ह जैसे बात कुछ और ह सॉरी पर्सनल बात करदी बूत दीखता ह आपकी आईज मई”

पूनम “ऐसा कुछ नहीं ह बस हम नार्मल फ्रेंड्स ह हम….”

पूनम जब बोल रही थी तोह अपूर्व की नज़र राज की तरफ हे थी जो पूनम की तरफ हे देख रहा था…”

अपूर्व “ी थिंक हे आल्सो लाइक्स यू …उसकी नज़र आप पर हे ह”

पूनम ने भी राज की तरफ देखा और धीरे से मुस्कुरा दी…

अपूर्व “राज यंहा औ …”

राज उठकर आगया तोह

अपूर्व “लो पूनम की हेल्प करो होटल फाइनल करने मई जब तक मैं उनकी हेल्प करता हु” इतना कहा अपूर्व साइड मई आगया मनीषा और की टेबल के पास

पूनम लैपटॉप स्क्रीन की तरफ देखते हुवे हे “ऐसे क्या देख रहे थे धयान से”

राज “कुछ भी तोह nahi…ap बस इससे थोड़ा संभल कर रहिएगा”

पूनम गर्दन उठाकर राज को देखती हुवी “क्यों …क्या हुवा”

राज “कुछ नहीं “

पूनम “अगर आपको नहीं पसंद ह मेरा उसे बात करना तोह मैं नहीं करुँगी”

राज “तुरंत पूनम को एकटक देखने लगा फिर वापस स्क्रीन की तरफ देख कर बोलै …ऐसे तोह मैं सबसे बात करने को मन कर दूंगा तोह सबसे बात करना बंद कर डौगी”

पूनम “आप कहके देखो बस एक बार “

अब बरी थी राज की चौकने की वो कुछ बोल हे नहीं पाया …क्योकि एक तरफ दीपिका का ढक मन मई था तोह यंहा पूनम की बाते उसे और हिरणकर रही थी..

पूनम “आपकी ख़ुशी के लिए कुछ भी”

राज को अचानक दीपिका की बाते याद आगयी जब उसने भी टूर पर ऐसा हे कहा था की भाई तू सबसे पहले ह तेरी ख़ुशी से मेरी ख़ुशी ह ….और राज टेबल से खड़ा हो गया और बोलै “मुझे काम ह मैं मैं घर जा रहा हु”

राज के खड़े होने के साथ हे अपूर्व के मोबाइल पर वौइस् मैसेज आया जिसपर उसने क्लिक किया तोह कान मई लगे एअर पीेछे मई मैसेज वौइस् आने lagi…jisai सून वो एक बार पूनम को तोह एक बार जाते हुवे राज की पीठ की तरफ देखता और बहुत धीरे से बुधबुदाय “कुछ नहीं ह तोह यू हे तू सोर्ड के सामने नहीं अति ….बस अब कुछ और कन्फर्म हो जाये फिर तुम्हे मदारी का खेल दिखाऊंगा”

दिल्ली की एक बिल्डिंग मई….

शख्स “हरियाणा से आगये ह”

आदमी “है बॉस 50 जाने आगये ह “

शाखा “और हमारे आदमी एक एक करके सभी रास्तो पर सेट कार्डो समझे किसी को भी सक न हो “

आदमी “भाई डायरेक्ट थोक देते ह न “

शाखा “भोस्डिके अपूर्व सिंह को जनता ह न जिन्दा चीयर कर पोस्टमार्टम करदेगा तेरे पुरे खानदान का और साथ मसि मेरे भी इसलिए सिर्फ आदमी सेट कर बाकी अगले आर्डर आने तक शांत रहना ह जब तक बस निगरानी रख …”

आदमी “आदमी भाई मैंने बिखरी गैंग को लगा दिया रखा ह पुलिस ठाणे से लेकर कमिश्नर के बंगल तक अपने आदमी h…aur उस बुसिनेस्स्में सिंघानिया के रूट पर भी आसपास की हर बिल्डिंग पर अपने आदमी सेट हो रहे ह एक एक करके”

आदमी “ 10 कर एडवांस मिला ह इसका मतलब खेल बहुत बड़ा ह समझा तू …और ये अपूर्व सिंह बहुत तेज़ तरार ह ….पता ह तुझे अपूर्व सिंह 24 25 साल का हे पर वो अपने सीकर को पहले धीरे धीरे जाल मई फंसता ह फिर उसके करीब जाता h….uska विस्वास जीत ता ह और फिर पेट के अंदर के राज़ बहार निकलता ह …और फिर जैसे हे सीकर अचे से सब उगल देता ह …वो फटाक से उसकी गर्दन पकड़ लेता ह फिर धीरे धीरे उसकी गर्दन मरोड़ कर उसे दर्द देता ह तड़फड़ाता ह और फिर जब सीकर हीमत हारके छटपटाना छोड़ देता ह तब उसे जिन्दा हे काट ता ह …ताकि और दर्द दे सके ….”

आदमी “भाई मेरे तोह रौंगटे खड़े हो गए”

शख्स “तोह सोच ये सिंघानिया इसकी बहन इसकी फॅमिली …..और कमिश्नर की फॅमिली इन सबका क्या होगा “

आदमी “समाज गया भाई इसलिए हम सबकी हर बारीक़ से बारीक़ जानकारी निकल रहे ह”

शख्स “हआ …अब जा और सबको अचे से समझा देना “

आदमी जी भाई बोलकर निकल गया …

वंही रंजन भी इस वक़्त दिल्ली हे …सिंघानिया ग्रुप के मैं ऑफिस मई बैठा हुवा था ..

रंजन “आप नहीं चलेंगे बहन का रिस्ता पक्का करने”

सुनील “रिश्ता पक्का करने मतलब”

रंजन “लगता ह कप्तानजी ने आपको बताया नहीं”

सुनील “पापा क्या बात ह”

कप्तान “अरे भाई होम मिनिस्टर साब का पूरा परिवार लड़की को देखना चाहता ह और रिस्ता को फाइनल करना छठा ह इसलिए बुलाया ह तोह मैंने रंजनजी को भी बुला लिया”

सुनील “पर दादाजी और जोगिन्दर अंकल किसी को भी बताया नहीं अपने”

कप्तान “किया था मैंने कॉल पर ठाकुर साब काम मई फंसे ह और जोगिन्दर भाई भी जरुरी काम मई फंसे हुवे ह इसलिए वो नहीं आपये”

सुनील सीरियस होकर “पापा परिवार के बड़ो के बिना रिश्ते के लिए जाना मुझे तीख नहीं लग रहा ह जब हम सभी फ्री hote…ek साथ मौजूद होते…. तब मिल लेते रिस्ता पक्का कर lete…akhir इतनी भी क्या जल्दी ह”

कप्तान को भी सुनील की बात सही लगी …पर तभी रंजन बिच मई बोल गया ….

रंजन “अरे दामाद जी आपके पिता के भी सपने ह क्या आपकी जिमि दरी नहीं ह उन्हें पूराकरने ki….kya हमेशा वो सबकी ीचा से हे कुछ करेंगे …उनका खवाब ह अपने बीटा बेटी की शादी धूम धाम से अछि जगह करना और वो यही कर रहे h…bolo क्या कुछ गलत कर रहे h…aur वैसे भी क्या दीपिका बेटी के रिश्ते से जयदेकुछ जरुरी हो सकता ह बताओ आप”

सुनील चुप हो गया और फिर बोलै “तीख ह जैसा आप बड़ो को तीख lage…Dii भी आती हे होंगी…”

कप्तान “तुम नहीं चलोगे”

सुनील “बहन का रिश्ता हो भाई नहीं जाये ये भला हो सकता ह kya…ap बात करिये मैं अभी अत hu…jaruri इंस्ट्रँक्शन्स देकर जब तक दी आजायेगी फिर चलते ह”

कप्तान “तीख ह जब तक हम बास्त करते ह”

सुनील के जाने के बाद …

कप्तान “सुनील की बात बिलकुल सही थी हम जब सब होते तब रिश्ते की बात करते तोह जायदा ाचा होता जैसे सुनील के रिश्ते मई किया था”

रंजन “एक काम करेंगे आपकी तसल्ली के लिए कल हम मंडावा चलते ह मुझे भी बीकानेर आर्मी बेस मई छोटा सा काम ह तोह मिल लूंगा और ठाकुर साब से मिलके आप आगे की बात करलेना की शादी कब कैसे कान्हा करनी h…isai आपका मन भी हल्का हो जायेगा और उनकी अगर नाराजगी होगी तोह दूर हो जाएगी …और इसी बहाने ठाकुर साब की हवेली भी देख लेंगे…”

कप्तान ये अपने बिलकुल सही कहा हम बी कार हे चलते ह तीख रहेगा….

रंजन “जैसा आपको तीख लगे” रंजन मन के अंदर हे अंदर खुश हो रहा था की उसकी चली गयी दीपिका की मांगनी से लेकर मंडावा तक जाने की हर चल बिलकुल एक्यूरेट तरीके से पूरी होती जा रही thi…aur किसी को भी उस पर सक तक नहीं हुवा tha…….isliye उसने बाद मई हिमाचल मई हे ठाकुर साब का पूरा नाम नहीं पूछा था …क्योकि उसे पता था की जायदा सवाल सक के कीड़े को जनम देता ह …और चालाकी मई रंजन तोह था हे मां जो इस काम मई माहिर था इनफार्मेशन कलेक्ट करना और दुसरो को देने मई….

कप्तान “क्या सोचने लगे”

रंजन “कुछ नहीं गिफ्ट वैगरह सब मंगवा लिए थे न “

कप्तान “है गिफ्ट की कार चुकी ह पार्किंग मई तैयार ह बस दीपिका बेटी अजय फिर चलते ह”

रंजन “बिलकुल बिलकुल चलते ह” फिर मन मई …है है है बस कल की बात और ह फिर मैं वो सब जान लूंगा जो मुझे जानना था ….अगर मेरा सक सही ह तोह इन सबको मरना होगा …और ये कामबिल्कुल सफाई से करना होगा..

मतलब बन्दुक भी दूसरे की और कन्धा भी दूसरे का ….और इसके लिए सबसे ाचा अपूर्व सिंह हे h…ha है है रंजन एक बार फिर से तू मां बन गया ह…

आज के लिए इतना हे भाइयो गेस्ट आगये थे इसलिए लेट हो गया …मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने ka…jald मिलते ह
 
एडिटिंग एक्सपेक्टेड टाइम 40 मिनट्स
 
अपडेट 210

साज़िश और सर्चिंग….

बंगलोरे एयरपोर्ट …

ैप सुन्दर सलूट मरते हुवे जय हिन्द mam…welcome Mam…bahut नाम सुना ह आपका आज बहुत ख़ुशी आपसे मिलकर..

सोनाली “जय हिन्द सुन्दर”

सुन्दर “मम हमे पहले पुलिस स्टेशन चलना ह या कमिश्नर सर के ऑफिस “

सोनाली “नहीं सुन्दर हमे सीधे पुलिस स्टेशन चलना ह जो लीड तुम्हे मिली ह उनके डिटेल देखने“

सुन्दर “ok मम चलिए”

बहार कड़ी पुलिस बोलेरो मई दोनों बैठ कर रवाना हो gaye..bich रस्ते मई…

सोनाली “इस केस से जुड़े और क्या इनफार्मेशन मिली ह”

सुन्दर “ 2 कांस्टेबल मिले ह मम पर एक बहुत हे अजीब इत्तेफ़ाक़ हुवा ह …मुझे जो 2 कांस्टेबल इस केस से जुड़े हुवे मिले थे मैं सुभे तक उनके कांटेक्ट मई था पर अभी काफी दिएर से हे उन्दोनो से कांटेक्ट नहीं हो प् रहा ह”

सोनाली “सुन्दर इसे इत्तेफ़ाक़ नहीं कहते ह ….सीधा उन दोनों के पास ले चलो जल्दी इसे पहले की कुछ बहुत बुरा हो जाये“

सुन्दर ने तुरंत गाड़ी को मोड़ दिया और दूसरी तरफ ले जाने लगा .. “मम उनमे से एक का गाँव यंहा से 2 ऑवर की दुरी पर ह दोनों रिटायर्ड हो चुके ह पहले पास वाले के गाँव हे पहुंचते ह”

सोनाली “तुरंत दोनों पास के पास की चौकी पर इन्फॉर्म करो और उन्हें देखने के लिए भेजो “

सुन्दर ने भी तुरंत इन्फॉर्मकिया और बोलेरो को तेज़ी से चलने के लिए कहा…

वंही शिवानी भी मुम्बई के हर पुलिस स्टेशन मई सभी पुराणी फाइल छान रही thi…uske लगाए हुवे खास आदमी पुराणी फाइल अलग अलग स्टेशन से लाकर उसे दिखा रहे थे जो भी 19 से 22 साल पुराणी थी …शिवानी दो जिमि दरी बखूभी निभा रही थी…

Wanhi…dusri तरफ मात्रे ….सुभे से हे कॉलेज के बहार अपने आदमियों के साथ निगरानी कर रहा the…aur एक नई रिक्रूट लड़की को उसने कॉलेज के अंदर भी भेज दिया था ताकि जैसे हे अपूर्व बहार ए उसे इनफार्मेशन मिल jaye….is वक़्त अपूर्व कॉलेज मई अपने ऑफिस केबिन मई वौइस् कॉल पर था…

अपूर्व “याद रखना तेरी इनफार्मेशन सही निकालनी चाहिए ह ….वर्ण तेरी माशूका के साथ कितने लोग प्यार करेंगे न वो बता पायेगीइ और न तू गईं पायेगा”

प्रेजिडेंट “सच कह रहा हु भाई लड़की ने यही कहा की वो लड़की पूनम उसे पसंद करती ह मतलब उससे भी jayda….he ह भाई “

अपूर्व “और बाकि लड़कियों का”

प्रेजिडेंट “भाई उनका किसी के साथ अफेयर ेट्स नहीं ह बस वो पढ़ती ह वैसे कई लड़को ने कोसिस करि ह पर वो किसी को पास भी नहीं फटकने देती ह..”

अपूर्व “गुड तेरा काम ख़तम हो गया h…ab फ़ोन रख”

प्रेजिडेंट “भहा भाई गलती हो गयी तोह माफ़ी “

अपूर्व “भोस्डिके जितना बोलू उतना हे सुना कर और किया कर अब रख फ़ोन“

प्रेजिडेंट ने तुरंत दर के मारे फ़ोन काट दिया सुर सामने पड़ी बोतल से पागलो की तरह एक्सांस मई पानी पी गया

अपूर्व तुरंत चेहरे पर मुस्कान लिए अपने केबिन से बहार निकला जंहा और सामने कॉमन टेबल पर रजनी बैठी हुवी थी… “hello मिस रजनी टुडे यू अरे लुकिंग तू ब्यूटीफुल सॉरी तो से बूत ….तारीफ किये बिना दिल रह नहीं पाया “

रजनी ने एक फीकी मुस्कान अपूर्व को डीई..

अपूर्व मन मई “रंडी नखरे दिखा रही ह वक़्त नहीं ह वर्ण उतरता तेरे नखरे ….” फिर रजनी से बोलै “ऐटिटूड ऐटिटूड…”

और एक कुटिल मुस्कान दी और बहार चला gaya…aur पार्किंग मई कड़ी अपनी कार को स्टार्ट किया और बहार निकल गया …पर उसके बहार निकलते हे मात्रे जो बहार खड़ा था उसके पास फ़ोन आगया “सर वो अभी बहार निकला ह रेड कार से और नंबर मह पस क्सक्सक्सक्स ह”

मात्रे भी कॉल डिसकनेक्ट करते हे गेट से बहार की तरफ अति रेड कार को देख कर हेलमेट पहन लिया और कार का पीछा करने laga…..wanhi apoorav…ki कार 15 मिनट बाद एक 7 मंजिल बिल्डिंग के बेसमेंट मई घुस gayiii….maatre भी कुछ दिएर बाद पीछे पीछे चला गया …पर उसने गौर नहीं किया की एक ब्लैक ऑडी उसके पास से निकल gayi…us ब्लैक ऑडी मई बैठे शख्स के चेहरे पर भयानक मुस्कान आगयी …और वो मुस्कुराते हुवे चला gaya….us कार मई और कोई नहीं अपूर्व सिंह हे बैठा हुवा था जो मात्रे को देख मुस्कुरा रहा tha….jab की मात्रे वंही बेसमेंट मई हे छिपकर अपूर्व सिंह के आने का वेट करने laga….par वो वंहा होता तोह अत….

वंही पुणे …से 4 लुगरी बस दो दिन पहले हे टीम बना कर हिमाचल प्रदेश उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड और बिहार के लिए निकल गयी थी…..

वंही ऋचा इस वक़्त नैनीताल के एक गाँव मई अपनी टीम के साथ थी

ऋचा “माजी एक सुई हे तोह …आप इतने समय से बीमारी से कितना दुखी हुवी ह इसके आगे तोह सुई कुछ भी नहीं ह लगते हे तुरंत आराम आजायेगा और फिर आप बस ये दवाई लेती रहिएगा आप तीख हो jayegi…puri तरह…”

औरत “दर्द होगा “

ऋचा “मेरा हाथ पकड़िए पता भी नहीं लगेगा आपको बस चींटी कटेगी.. आप आंख बंद कर लीजिये बस तीन बार भगवन का नाम लीजिये ..” इतना कह उसने अपने पास कड़ी लड़की को इशारा किया उसने तुरंत इंजेक्शन लगाया और लगाकर निकल लिया”

ऋचा “लो हो गया …इतना सा हे था …अब ये लीजिये दवाई ये सुभे लेनी ह ये दोपहर को और ये रात ko…sab खाने के बाद हे लेनी ह …तीख ह “

औरत आश्रीवाद देती हुवी “खूब लम्बी उम्र हो …तेरे 4,5 बचे हो तेरा मरद खूब प्यार करे तुझे”

ऋचा को बात सुनकर हंसी और शर्म दोनों आगयी जबकि पास कड़ी 2 ंद ईयर और फर्स्ट ईयर की बाकि लड़किया हसने लगीई

…रात को ऋचा वंही रुकी वो दिनभर की भाग दौड़ से बुरी तरह टूट गयी थी ..गाँव वालो ने उनके लिए अपनी तरफ से अछि व्यवस्ता करि थी सरकारी स्कूल मई क्योकि वो वंही के आसपास के और गाँव को कवर करने वाले थे अगले दिन इसलिए वो मैं सिटी के लिए वापस नहीं गए और वंही रूक गए रात को ऋचा आराम से लेती हुवी अपने खयालो मई खोयी थी …फिर usne……apna मोबाइल निकल kar….poonam ko…call किया..

पूनम “क्या कर रही ह कितने दिनों बाद कॉल किया ह”

ऋचा झूठा गुसा जताते हुवे “बस बस रहने दे मैंने कॉल तोह किया तुजे पर तू तोह वो भी नहीं करती ह”

पूनम “अरे पेपर के चक्कर मई टाइम हे नहीं मिलता ह तू बता क्या चल रहा ह पुणे मई कब आएगी यंहा”

ऋचा “अरे अरे भूल गयी बताया था न कैंप के लिए जाना ह …और पता ह फिलहाल नैनीताल के पास एक गाँव मई रुके हुवे ह मस्त मौसम ह बिलकुल फ्रेश एयर ह यंहा मन रिलेक्स हो गया ह और दिन भर की थकावट दूर हो गयी ह”

पूनम “सॉरी भूल गयी थी yaar…aur क्या कहा नैनीताल मई ह अरे हम भी देहरादून आएंगे पेपर ख़तम होते he…forest रीसर्च और देवप्रयाग ..फिर हिमाचल जायेंगे हिमाचल मई मेडिकल फैक्ट्री विजिट और हाइड्रोपावर प्लांट्स की विजिट ह”

ऋचा “राज भी आएंगे”

पूनम “है राज भाभी cutee…anu हम सब आरहे ह … मिलना हो सकता ह”

ऋचा “पता नहीं यार ..सुभे से शाम तक गाँवों मई लगे रहते h…sach मई गाँवो मई बहुत जरुरत ह मेडिकल फैसिलिटी की”

पूनम “कोई बात नहीं मौका मिले तोह अजना न…. मिल लेना सबसे… वैसे भी तू आती नहीं ह”

ऋचा “ok माय स्वीट सिस्टर पॉसिबल हुवा तोह मिलूंगा अब सजा बड़ी मुश्किल से नेटवर्क मिला ह नेटवर्क के लिए भी पर्सनल सेटअप साथ लेके चलना पड़ता ह”

पूनम “गुड नाईट खुदका ख्याल रखना “

वंही ….

दिल्ली मई…

जोगिन्दर सिंह के बंगलो मई ..रंजन, कप्तान और जोगिन्दर ड्रिंक कर रहे थे …

जोगिन्दर “चलो ाचा हुवा सुनील की भी मांगनी हो गयी और लगे हाथ दीपिका बेटी का भी रिश्ता पक्का हो गया ह… इसे ाचा क्या होगा …एक श्वेता ह जो कहती ह की लड़का घर जमाई होना चाहिए h…kahti ह की भाई को छोड़ के नहीं जाएगी …और बात न मणि तोह …शादी नहीं करुँगी और जबरदस्ती करवादी तोह दिवस ले लुंगी…”

जोगिन्दर की बात सुनकर कप्तान का चेहरा उतर gaya…par रंजन बोलै … “कमिश्नर साब बचो की हर जिद भी पूरी नहीं करनी चाहिए ह वर्ण कई बार बचे हाथ से निकल जाते ह”

जोगिन्दर सिंह “जिद नहीं ह ये ….ये प्यार ह रंजन जी एक बहन का भाई के liye…muje गर्व होता ह मेरी बेटी पर जो उसने अपनी जिंदगी मई एक सही लड़के को अपना भाई बनाया और मुझे एक बीटा दिया ह … बस नज़र न लगे दोनों को किसी ko…aur रही बात उसकी शादी की …तोह मुझे यकीन ह उसके लिए लड़का भी उसका भाई हे देखेगा….”

रंजन “आप कह रहे ह तोह सही हे कह रहे होंगे वैसे …कल हम मंडावा जा रहे थे ठाकुर साब से मिलने आप फ्री हो तोह साथ हे चले तीनो“

जोगिन्दर “अरे नहीं नहीं पुलिस की नौकरी कान्हा जीने देती ह …वैसे भी आज कल अंडरवर्ल्ड कुछ जायदा हे ठंडा ह …जो की समाज नहीं अत ह इसलिए हम जायदा अलर्ट h…pata नहीं कब वार सुरु हो jaye..aur मंडावा जाने की बात तोह ठाकुर साब मुझे और डांटेंगे की काम छोड़कर आगया हु …क्या जरुरत थी मैं आजाता …इसलिए मुझे क्लास नहीं लगवानी ह उनसे”

रंजन “ये भी सही कहा अपने …वैसे क्या चल रहा ह ..आज कल हमारी तोह सेल भी काम हो गयी ह”

जोगिन्दर “कौनसी सेल काम हो गयी ह सर्कार वाली या दूसरी वाली है है है मज़ाक किया ह बुरा मत मानियेगा”

रंजन “है है है नहीं नहीं हमारा एआरएम सुपल्ली का बिज़नेस पूरा लीगल ह चाहे तोह इन्क्वायरी बिठवा लीजिये है है है”

जोगिन्दर “अरे नहीं नहीं …कप्तान भाई के हाथो से मरना नहीं ह”

कप्तान क्या बोलता वो तोह पहले हे तीख किया या नहीं रिश्ता करके इसी उधेड़ भून मई फंसे हुवे थे

कप्तान “वैसे अक्टूबर मई शादी करदेंगे सुनील और मनीषा की फिर बचे चाहे जैसे पढ़े और रहे सो क्या कहते ह.”

जोगिन्दर “ये भी ाचा ह हम तोह नाचने और गाने को तैयार ह हमारी तोह फुल मंजूरी ह”

कप्तान “बस कल ठाकुर साब और अपनी ीचा बता दे उसके बाद सब फाइनल कर देते ह”

जोगिन्दर “है मिल कर बात करने का सही निर्णय लिया तुमने कप्तान …वैसे शादी तोह वो हवेली मई हे करेंगी”

वंही

घर के अंदर …सुनील ,दीपिका श्वेता एक साथ बैठा हुवे थे …पर इनके बिच कोई बात नहीं हो रही thi….shweta सिर्फ नार्मल रहकर बात कर रही thi…kyoki वो भी दोनों को बहुत मानती थी इसलिए उसने बात नहीं की तोह बत्तमीज़ी भी नहीं की और नार्मल रहने की कोसिस करि …पर उसके मन मई गुसा भरा हुवा था….

वंही मुंबई…

राज “क्या पता लगा”

मित्युदूत “अभी तक अंडरवर्ल्ड मई कोई हालचाल नहीं h..maine पुराने से पुराने क्रिमिनल्स को मारा पिता पर सिर्फ एक ने हे मां नामके आदमी को पहचान पर उसका कहना ह की वो अचानक से गायब हो गया और कभी दिखाई नहीं दिया”

राज “तोह फिर कैसे पहचाने कान्हा ढूंढे मां को“

मिर्त्युदूत “आप चिंता न करे मैं धुंध रहा हु …कंही न कंही तोह उसका सुराग मिलेगा हे ….इतनी दूर ए ह तोह आगे भी रास्ता दिखाई देगा हे…

राज गुसाई से “पता नहीं कब फिखायी देगमेरे पास इतना वक़्त नहीं ह पिछले तीन साल मई हम इतना पैसा ताकत होने के बाद भी बस यही तक पहुंच पाए ह ….”

मिर्त्युदूत “मास्टर शांत रहिये …रास्ता जरूर मिलेगा”

वंही शामे टाइम बंगलोरे मई रात के 10 बज रहे थे

सोनाली ैप सुन्दर की टीम के साथ ….एक जंगल मई बने पुराने मकान की तरफ जा रही थी…

सुन्दर “यही लोकेशन ह मम …सामने जो माकन दिख रहा ह उसी मई उन्होंने कांस्टेबल को पकड़ रखा ह”

सोनाली “सुन्दर कांस्टेबल को कुछ नहीं होना चाहिए ह उसका जिन्दा रहना मेरे लिए बहुत जरुरी ह इसलिए जब तक जरुरी न हो तब गोलिया नहीं चलनी ह सिर्फ मेरे इशारे पर हे फायरिंग करनी ह”

सुन्दर “तीख ह मम”

सोनाली और सभी पुलिस वाले जंगल की झाड़ियों मई धीरे धीरे आगे बढ़ते रह …अब उन्हें माकन साफ़ साफ़ दिखाई देने लगा था…

सोनाली “सुन्दर तुम मेरे साथ औ बाकि को बोल दो की चारो तरफ से घर को घेर ले और हमारे इलावा जो भागता हुवा उनकी तरफ ए सीधा थोक दे…”

सुन्दर ने भी सबको समझा दिया …और पोलिस वाले 2 -2 की टीम बनाकर चारो तरफ से माकन को घेरने के लिए अलग हो gaye….ab सिर्फ सोनाली और सुन्दर धीरे धीरे झाडिया की आड़ मई आगे भड़ने लगे ….और फिर उन्हें घर के बहार 2 जाने बैठे दिखाई दिए …सोनाली सुन्दर से “मैं आगे बढ़ रही हु सेफ पोजीशन ले कर मुझसे थोड़ा पीछे रहना और जो बचे या साइड से ए थोक देना …”

सुनकर सुन्दर ने है मई गर्दन हिला डीई…

सोनाली ने अपनी गन बहार निकल ली और निचे झुकती हुवी पूरी निगरानी से तीनो तरफ देखते हूवर घर के करीब पहुंच gayii…janha उसे फ़िलहाल 2 हे जाने दिखाई diye…phir बहार बैठा हुवा एक शख्स लोकल लैंग्वेज मई हे कुछ बोलै …तोह घर के अंदर से एक आवाज आयी …जिसे सून सोनाली ने धीरे से कहा तीन jane…phir एक जाना बाथ रूम से बहार aya….sonali “4 जाने” उसने कुछ पल और वेट किया ताकि सही काउंटिंग की जा सके की कितने जाने मौजूद ह पर काफी दिएर बाद भी उसे कोई आवाज नहीं ayi…sonali अभी एक्शन लेती तभी उसे कच्चे रस्ते से एक व्हीकल की लाइट आती दिखाई diii…sonali तुरंत बिलकुल निचे घास मई लेट गयी ….कुछ हे पालो मई वो गाडी घर के आगे ाजर रुकी …और उसमे से 2 जाने खाना लेकर उतरे और सीधा अंदर चले गए …सोनाली ने अपने पीछे आरहे सुन्दर को आने का इशारा किया और आगे बढ़ गयी …उसने अपनी गन पर लगे सिकेंसर को और मागज़ीने को चेक किया और सीधी कड़ी होकर आगे भड़ती हुवी बहार बैठे दोनों के एक झटके मई भेझा उदा दिया और जल्दी से भागकर गेट के पास agyai….aur उसने वंही से सुन्दर को आगे आकर दोनों लाशो को ट्रेक्टर के पीछे छिपाने को कहा …सुन्दर ने भी जल्दी से दोनों को घसीटकर पास खड़े ट्रेक्टर की आड़ मई छिपा diya…phir सोनाली ने गेट पर निघाये रखने की जिमि दरी सुन्दर को देकर …खुद ने बंद किये हुवे दरवाजे को खाद खदया और थोड़ी पीछे होगयी तभी माकन से एक जाना भर आया पर उसे कोई दिखाई नहीं दिया तोह वो लोकल लैंग्वेज मई हे बड़बड़ाता हुवा दारू का गिलास लिए वापस अंदर चला gaya…par कुछ दिएर बाद हे उसे फिर से खटखटाने की आवाज सुनाई दी वो फिर से बहार आया और गालिया निकलता हुवा बहार आकर अपने साथी जो ट्रेक्टर के पास पहले बैठे हुवे थे उन्हें आवाज देता हुवा जाने laga…uske पीछे एक और जाना मूतने के लिए बहार ….सोनाली ने सुन्दर को 5 की काउंटिंग पर फायरिंग का आर्डर दिया और अपनी उंगलिया से 1’2’3 …काउंटिंग स्टार्ट कर दी और 5 के इशारे पर हे फायरिंग हुवी और दोनों एक साथ मरे गए ….अब सोनाली ने इशारे से कहा 2 अंदर ह तुम लेफ्ट को मैं राइट को एक साथ …सुन्दर ने भी गर्दन है मई हिलायी और दोनों एक साथ दरवाजे से अंदर घुसे और दोनों ने 2-2,फायर कर करके बचे हुवे गुंडों को भी उदा दिया पर अंदर का हाल देख सोनाली ने खिंच कर निचे पड़े हुवे गुंडे के मू पर mariii…kyoki जिस कांस्टेबल को वो बचने आयी थी उसकी हालत बहुत बुरी थी उसे बहुत मारा गया था …

सुन्दर “मम इधर एक लड़की भी मिली ह बोल रही ह वो यही गाँव की ह …इसे ये लोग जबरदस्ती उठा लाये थे ..पैसो के बदले…”

सोनाली “इसे छुड़वा दो और जल्दी से टीम को यंहा बुलाओ हमे इसे हॉस्पिटल लेकर जाना होगा “

करीब एक ऑवर बाद वो पास के हॉस्पिटल मई थे …और डॉ ट्रीटमेंट कर रहा था…

सोनाली “इसे क्यों उठाया जबकि मेरे आने का किसी को भी पता नहीं था”

सुन्दर अपनी साउथ हिंदी स्टाइल mai“main कांस्टेबल को भेजकर पता किया मम मटर कुछ और ह …ये ईमानदार होता और लोकल गुंडों से उलझ बैठा …इसलिए वो इसे उठाकर ले गए”

सोनाली “ओह्ह्ह…” तभी डॉ इमरजेंसी रूम से बहार आया….

सोनाली “कैसा ह डॉ ”

डॉ “देखिये वो खतरे से बहार ह पर उसको बहुत पिता गया ह सर पर भी गहरी चोट ह जिसकी वजह से उसे क्योंकिओस मई एते हुवे 3 दिन लग जायेंगे उसके बाद आप पूछ सकते ह”

सोनाली “इतना वात नहीं ह बहुत जरुरी ह मेरा उसे मिलना “

डॉ “मिल लीजिये फिर पेशेंट को कुछ हो जाये तोह हमे दोष मत dijiyega…phir कुछ पल रुक कर नार्मल होकर बोलै “देखिये आप अफसर ह इसलिए समझने की कोसिस कीजिये उसे बहुत टॉर्चर किया गया ह और साडी रिपोर्ट्स कल शाम तक आएंगी इसलिए प्लीज” इतना कह वो चला गया…

सुन्दर “मम बस दो दिनों की बात ह जब तक आप गेस्ट हाउस मई रूक जाईये….

सोनाली “यंहा 2 पुलिस वालो को 24 घंटे स्ट्रिक्ट इंस्ट्रक्शंस देखर लगाओ….”

सुन्दर “जी मम”

फिर दोनों वंहा से मैं सिटी के लिए वापस निकल गए …सरे काम करते हुवे रात के 2 बज गए the…par सोनाली की आँखों मई नींद नहीं थी वो जल्दी से जल्दी मां के बारे मई जानना चाहती थी ……ये सोचते हुवे उसने मोबाइल निकला और राज की फोटो निकली जिसमे राज नींद मई सोनाली की बांहो मई सो रहा था और सोनाली ने इसे चुपके से खिंच लिया था …उसने एक लम्भी किश करि और बोलो “ी मिस यू सुमुच” और एक ी मिस और ूउम्म्माह्ह्हआ खूब बार लिख कर सेंड कर दिया”

अगले दिन सुभे …सुनील ऑफिस मई बैठा हुवा tha…tab उसके मोबाइल पर कॉल आया..

सामने से “बॉस हिमचाल मई कुछ दिनों से घर के आसपास कुछ अजनबी लोगो को देखा गया जो टूरिस्ट के नाम पर लोकल विजिट करते हुवे घूम रहे ह पर उनकी हरकते संधिकहत ह …और दीपिका मैडम से भी 1कम की दुरी से कोई न कोई व्हीकल लास्ट तक उनका पीछा करता ह ….

सुनील “अभी कुछ मत करो ये मोहरे ह इनके पीछे के मास्टरमाइंड को ढूँढना ह hume…ek काम करो रहने दो ये मैं खुद karlunga…tum बस पीछे के मास्टर मंद को धुंध”

सामने से “यस बॉस”

इतना कह वो खड़ा हो गया और जल्दी से ऑफिस के केबिन से बहार निकल गया बहार उसकी सेकरट्री जो अपने ऑफिस मई बैठी थी वो भी पीछे भागी….

सुनील को सब गुड मॉर्निंग विश कर रहे थे पर आज सबको हंसकर रिप्लाई देने के बजाये वो सीरियस था और सीधा बहार निकल गया …लिफ्ट का दूर खुला और उसमे घुसा तब तक सेकरट्री भी पीछे agayiii..par सुनील ने उसे साथ आने से मन कर दिया ….सुनील का मूड देख सेक्रेटरी भी दर गयी क्योकि सुनील का सीरियस होना मतलब वो जानती थी की बहुत बुरा होने वाला ह …ऑफिस के सभी सर मैनेजर्स भी सेकेरेट्री से क्या हुवा पूछने के लिए आगये …पर वो क्या बताती जब उसे खुद हे समाज नहीं aya….wanhi सुनील अपने बॉडी गॉर्डस के साथ टाटा के शोरूम पहुंच गया और मैनेजर्स से बोलै मैंने 4 सुव का आर्डर दिया था …उसका क्या स्टेटस ह….

मंजर “सर आज रात वो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से आजाएंगी”

सुनील “जैसे मैंने कहा था वो सब ह”

मंजर बिलकुल सर…

सुनील “तीख ह फिर मोबाइल निकल कर करतार भाई आज रात आपके पास चारो सुव आजाएंगीए”

करतार “ोये सुनील वेरे करतार सिंह ने भाई कहा ह तुस्सी फ़िक्र चढ़ do…thoda काम हो जायेगा तुस्सी तोह िन्ना दसदो मैनु डिलीवरी किथे करनी ह…”

सुनील “एक दिल्ली मेरे pass,ek मंडावा और एक mumbayi….aur एक हिमचाल पहुचवानी ह”

करतार सिंह “तीख ह वीरे हो जायेगा ाचा वो स्पेशल वाली सुव वो”

सुनील “वो यही दिल्ली हे रखनी ह”

सरदार “ओह मस्त हो jao…ab सारा काम करतार सिंह संभल लेगा…”

फ़ोन कट होने के बाद सुनील ने बाकी की पेमेंट कंपनी मई पेड की और डिलीवरी एड्रेस करतार का देकर वो वापस आगया ….उसने बिच मई 2 तीन बार राज को कॉल भी किया उसे सिर्फ मशीन वौइस् आउटपुट हे मिला……

वंही …..मंडावा ..

जगमाल सिंह “अपने सभी आदमियों को छिपने के लिए कहदो”

भीमा “ जी बापूजी”

जगमाल सिंह घर के अंदर आकर …”बहु…..”

तभी सुप्रिया जल्दी से भगति हुवी आयी…

जगमाल “नौकरो से कहकर साडी फोटो हमारे परिवार की जिसमे …सहदेव विद्या और परबत की फोटो हो उन्हें स्टोर रूम मई रखवा do…aur याद रहे हम निर्वाण ह ये कभी नहीं बताना h…sabko बोल्दो”

सुप्रिया जी बाबूजी इतना कह वो तुरंत नौकरो और शेरदिल की माँ के साथ फोटो हटवाने लगी ….

शेरदिल “क्या हुवा ह नानाजी”

जगमाल सिंह “सुनील के ससुर रंजन जी आरहे ह”

शेरदिल “तोह फिर इतनी सिक्योरिटी चिपवाने और फोटो हटवाने की क्या जरुरत ह नानाजी “

जगमाल सिंह शेरदिल की तरफ मुड़े और सीरियसली देखते हुवे बोले “एक बात अचे से अपने दिमाग मई दाल लो बिना परखे ….किसी पर विस्वास मत karna….aur बिना सामने वाले को समझे उलझना मत समझे “

शेरदिल “जी नानाजी समाज गया”

जगमाल ने शेरदिल के कंधो पर अपना हाथ रखा और बोले.. “कौन कब वॉर करदे कुछ पता नहीं लागत h…aur हमारा पूरा परिवार इसी अपनों के धोखे के कारन हे तोह तीतर- भीतर हो गया ह ….इसलिए अपने सेज को भी परखो …और परखलो तोह भी …समय समय पर उसका धयान रखो वो कान्हा जाता ह क्या करता ह ….समझे …अगर ये नहीं किया तोह मौत कब तुम्हे और तुम्हारे अपनों को मौत के आगोश मई ले जायेगा तुम्हे पता भी नहीं लगेगा अब चलो जल्दी से लग जाओ मदद करने और निचे बेस मेन्ट के सभी दरवाज़े बंद कार्डो…”

शेरदिल के तोह दिल दिमाग सब हिल गया जगमाल सिंह की बात से और वो तुरंत काम मई लग गया….

वंही जगमाल सिंह ने दिवार पर लगी गाढ़ी मई टाइम देखा और सब से साथ मई स्वागत की तयारी के आदेश दे दिए क्योकि 1 ऑवर मई रंजन और कप्तान दोनों आने वाले the…….wanhi मुम्बई मई राज को शेरदिल ने ये सब बता दिया की वो आरहे …और राज ने भी तुरंत श्वेता को कॉल लगा दिया …और श्वेता अपने भाई से बात करते हुवे रो पड़ी और सबकुछ बताती गयी जो अब तक हुवा…

श्वेता “सूर्य भाई …मैं नहीं बदलूंगी कभी भी ….आप कितनी भी दूर जाये मैं हमेशा आपकी श्वेता हे रहूंगी और लड़ती रहूंगी …”

राज “तू रो क्यों रही ह पागलीई …मुझे पता ह तू पूरी जिंदगी मेरा खून पियेगीइ अब रो मत अचे से एग्जाम दे टूर से आने के बाद साथ पार्टी करेंगे ….देहरादून की तरह”

श्वेता के चेहरे पर भी हंसी आगयी और अपने आंसू पूछकर वो भी खुस gayiii……shweta के पीछे खड़े जोगिन्दर सिंह भी सब सून रहे थे उनके चेहरे पर भी हंसी आगयी thi….cal डिसकनेक्ट होते हे राज भी सोचने लग गया और उसने तुरंत अज्जू को कॉल लगाया…

अज्जू “जी भाई “

राज “श्रुतीय से बात करवाओ”

अज्जू ने श्रुति को कॉल दे दिया और सामने से श्रुती की आवाज ईई…

राज “अब आपके निकलने का टाइम आगया ह …”

षुरूती के चेहरे पर मुस्कान आगयी..

राज “मैंने अज्जू भाई के व्हाट्सप पर फोटो सेंड की ह किसी मतलब किसी को भी बिना बताये सब खोद nikalo…Naam रंजन शर्मा आर्म्स डीलर ह सुनील का ससुर ह …इसलिए धयान रखना ह”

श्रुती “और अज्जू”

राज “थोड़ा उन्हें भी चैन से रहने दो मुझे तोह कह रहे थे की जल्दी से लेकर जाओ इसे न खाने देती ह न पिने देती चुदाई की तरह चिपकी रहती ह ाचा अब मैं रखता हु”

राज ने तोह आग लगाकर फ़ोन रख दिया पर पीछे अज्जू के साथ पुरे दिन बहुत कुछ होने वाला था आज…

वंही रंजन भी स्वागत करवाकर हवेली के अंदर एंटर कर चूका था ..

रंजन “शानदार हवेली ह ठाकुर साब आपकी ….किसी राजामहाराजा की तरह सजा कर रखा हुवा ह खानदानी लगती ह”

जगमाल “है खानदानी ह मेरे पिताजी ने बनवायी थी तब यंहा डाकुओ का राज होता tha….par अकेले उन्होंने उन सब की गर्दन धड़ से अलग kardiii…unhe गरीबो को लूटने वाले और जुल्म करने वाले कतई पसंद नहीं थे …और जब इसकी नीव मई उस डाकुओ के सरदार का खून चढ़ाया गया”

रंजन ने धीरे से गले से थूक गतका और एक बार कप्तान को देखते हुवे ..बोलै “ ठाकुर साब …पिताजी का पूरा नाम क्या था” ये कहते वक़्त उसके दिमाग मई बहुत कुछ घूम रहा था और वो सच जाने के लिए इच्छुक था पर उसे क्या पता था उसके सामने बैठा शख्स वो था जो आंख से मिलकर हे इंसान को परख लेता ह…

जगमाल सिंह “,उनका नाम हम हमारी जबान से लेते हुवे अचे नहीं लगते ह …क्योकि वो हमारे पिता the…par आसपास के कई कोस तक उन्हें ….बाघ सिंह कहते थे क्योकि वो घर से बहार निकले तोह बाघ की तरह सीकर पक्का था unka…unhone हे मुझे सिखाया की कैसे आँखों मई आंखे डालकर इंसान की आँखों मई छुपी चलो को पहचानते ह”

रंजन एक पल के लिए घबरा gaya…par उसने अपना दर चेहरे पर बिलकुल नहीं आने दिया ….और बोलै “ठाकुर साब मेरा मतलब वो नहीं था मैं बस ऐसे महँ शख्स का नाम जाना चाहता tha…par कोई बात नाहीइ…”

कप्तान बात को सँभालते हुवे बोले “बेटी की शादी करने वाले ह तोह थोड़ी पूछताझ कर रहे ह ठाकुर साब बस …आखिर ये भी पिता ह तोह बेटी के भविष्य के लिए चिंतित ह”

जगमाल सिंह “हम समझते ह …परिवार के बारे मई बताने मई पूरी रात लग जाएगी इसीलिए अभी नहीं बताया कप्तान ये हमरे समधी ह हमरे अथिति ह ..और जल्द हे परिवार के सदस्य भी honge…aur ये खास इसलिए क्योकि राज ने खुद मनीषा बेटी को सुनील के लिए चुना ह और भविष्य की बात तोह …अरबो की कंपनी अपनी भाभी के नाम लिख दी एक पल मई वो दीवार क्या कर सकता ह अपनी भाभी के लिए ये कहने की भी जरुरत नहीं h…manisha बेटी …राज करेगी…”

जगमाल सिंह की दमदार आवाज और जवाब ने कप्तान और रंजन की बोलती बंद करडीई…

जगमाल आईये भोजन पर चर्चा करते ह वर्ण मनीषा बेटी कहेंगी पापा का अचे से ख्याल नहीं रखा …ये बात सुनकर कप्तान और रंजन दोनों मुस्कराने लगे…

जगमाल सिंह और तीनो ने साथ भोजन किया …और फिर जगमाल सिंह …कप्तान के साथ बहार कुछ दिएर के लिए चले गए तोह अंदर राज की दादी रंजन के पास आकर बोली “उनकी बातो का बुरा मत मन्ना वो हमेशा से हे ऐसे ह …”

रंजन “नहीं मैंने उनकी बातो का बुरा नहीं मन …वो तोह ऐसी हवेली देख मन मई ीचा हो गयी की इतना रुतबा किस खानदान का ह…”

राज की दादी “आप तोह समधी बनने वाले ह तोह आपको पता होना चाहिए क्योकि आपकी बेटी सिंघानिया और हमारे परिवार की बहु बनने वाली h…ek परिवार को तोह आप जानते हे ह” राज की दादी की बात सुनते सुनते रंजन के पुरे सरीर मई करंट दौड़ने laga…aur अपनी सरे छेद खोलकर धयान से सुनने लगा…

राज की दादी “ये निर्वाण खानदान ह”

और बस रंजन के सरे छेद से दर की लहार दौड़ गयी पर वो था तोह मां हे तेज़ चालाक …उसने चेहरे से कुछ भी छलकने नहीं diya….aur आगे बोलै …

“ ठाकुर साब के कितने बेटे ह “

दादी “3 बेटे ह एक विदेश मई ह और 2 की मौत हो गयी …”

रंजन का सक अब पुख्ता होता जा रहा tha….isliye वो आगे बोलै ओह्ह्ह माफ़ करना राज ाचा लड़का उसके माता भी बहुत अचे होंगे”

दादी “है वो दोनों बहुत अचे थे पर ये राज मनहूस बनकर खा गया उन्हें”

रंजन मन मई बोलै “बनछोड़ मनहूस छोकरा लगता ह बुढ़िया उस छोकरे के खिलाफ ह अब ये बकेगी सब चल रंजन दिखा तेरा जादू फिर रंजन बोलै “कप्तान भाई बोल रहे थे राज के माँ पापा को उदयपुर घूमना बहुत पसंद था” इतना कह वो चमकती आँखों से जवाब का इंतज़ार करने लगा…

दादी “घूमना अरे हम तोह”

वो आगे बोलती शेरदिल की आवाज आयी …nani…apko माँ बुला रही ह”

शेरदिल की आवाज सुनकर राज की दादी की वंहा से चली गयी पर पीछे रंजन की आंखे चमकने लगी …और रंजन मन हे मन प्लान बनने लगा और उसने मन मई हे बोलै “निर्वाण और निर्वाण से बना निर्वाण …है है है तोह तू हे ह निर्वाण ….अब आएगा मज़ा बस एक और क्लू मिल जाये फिर दिखता हु तुम्हे मां का खेल…

रंजन शांति से सोफे के ऊपर सर पीछे टिका कर बैठ gaya….aur अपना मां का जाल बिछाने लगा….

आज के लिए इतना he…masti मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का…
 
अपकमिंग अपडेट ...211

डिफरेंट वे.....

ों ट्यूसडे लेट नाईट
 
4क वर्ड्स दोने गुड नाईट
 
अपडेट 211



डिफरेंट वे….

आज की रात बहुत से जाने सोये नहीं the…har किसी के दिमाग मई प्यार का और याद का अहसास चल रही था तोह किसी के दिमाग मई प्लानिंग badla…Rajni बीएड पर ओने पीेछे मई लेती हुवी राज से मिलान के खवाब खुली आँखों से देख रही थी तोह वंही सोनाली राज की फोटो मोबाइल मई देखती हुवी उससे खूब साडी शिकायत कर रही thi..toh पूनम पेपर ख़तम हो जाने के बाद राज के साथ टूर पर घूमने के अहसास से हे रोमांचित हुवी हुवी thi….kavita पूनम और राज को एक करने की प्लानिंग कर रही थी की कैसे भी राज भाई पूनम के साथ हो जाये और उसे पूनम भाभी के रूप मई हमेशा के लिए मिल jaye….aur यही हाल मनीषा का भी था राज के लिए वो बस अपने होने वाले देवर की आँखों मई ख़ुशी देखना चाहती ह कैसे bhi……toh इनसे अलग शिवानी इस वक़्त भी केस की फाइल्स टटोल रही थी की कुछ जानकारी मिल जाये …पर इनसे अलग तीन शख्स जिनके इर्द गिर्द कहानी इस वक़्त घूम रही थी उनकी सोच अलग हे thi….unmai से एक मंडावा की हवेली के गेस्ट रूम मई लेता हुवा अपने मोहरे हकीकत मई बिछा रहा tha…aur वो शख्स बिलकुल सही सोचा आप सबने रंजन हे था …जो इस वक़्त गहरी सोच मई tha….toh अब देखते ह की रंजन किस और बढ़ रहा ह….

रंजन मन mai“Shamko छठ पर घूमने पर ये साफ़ दीखता ह की मंडावा मई आने की 2 मैं रोड ह एक जो झुंझुनू की तरफ से आती ह और दूसरी फतेहपुर की तरफ से …और आस पास 4 बड़े गाँव ह जो मंडावा को कवर किये huve…intresting इंट्रेस्टिंग …अगर यही वो निर्वाण परिवार ह तोह मुझे इसे किसी भी हाल मई जड़ से ख़तम करना hoga….taki इस बार कोई बच नहीं paye…aur इसके लिए सबसे जरुरी बात ह की राज हे निर्वाण ह तोह उसे मरना हथोड़े से पहाड़ तोड़ने जैसा hoga…pahle मुझे ये पता करना ह की उसके पिता कौन h…aur ये पता करने के लिए मुझे थोड़ा सा खेल खेलना hoga…kyoki अगर मेरा सक सही ह और अगर ये सहदेव सिंह का परिवार ह तोह इसकी सिक्योरिटी भी बहुत होगी …यंहा किसी का नहीं होना इस बात का सक पहले हे दे देता ह की जो दिख रहा ह सबकुछ उसके उल्टा ह इनकी सिक्योरिटी भी बहुत जायदा hogi……aur अगर जैसा मैंने कहा अगर उल्टा ह तोह मुझे भी अपने के सरे आदमी एक साथ लगाने honge…aur इंसबको माया जाल मई ऐसा फंसना होगा ताकि ये चाहकर भी उसमे से निकल नहीं पाए ….बस अब कल सुभे का इंतज़ार ह …एक चाल और फिर सरे सच बहार आजायेंगे….

तोह शामे टाइम अपूर्व सिंह अपनी सीटिंग चेयर पर ….बैठा हुवा उस पर आगे पीछे झूल रहा था ….और हाथ मई पकडे सिगार को पी रहा tha….uske सामने प्रोजेक्टर पर बहुत साडी इमेज इमेज डिस्प्ले हो रही थी …जिसमे …deepika..shweta..sunil…poonam …kavita…shiwani…sonali…kaptaan singhaniya…jogindar singh…anirudh goswami…abhay..ajju..…ki इमेज थी और सबसे निचे राज की बड़ी सी फोटो थी और सबसे ऊपर सर्किल बनाकर क्वेश्चन मार्क बना हुवा tha…aur इस इमेज को कई दिएर से वो देख रहा था फिर वो उठकर डिस्प्ले हो रही इमेजेज के पास गया और एक एक करके सबको देखने लगा और धीरे से बोलै …क्या लिंक हो सकता ह ….इन सबका निर्वाण से या सिर्फ महज इत्तेफ़ाक़ ह ..नहीं nahi….kuch तोह ह पर क्या ….उस दिन अंधेरा था वर्ण उस दिन उसका चेहरा जरूर दिखा होता जब उसने छोकरी को बचाया था …तोह क्या वो लड़की पूनम जानती ह उसे …कुछ तोह ह जो मैं जोड़ नहीं पा रहा hu…..Ab दूसरा pahlu…sabse पहले निर्वाण ने जो वीडियो दिखाया था वो देहरादून का tha….aur अगर मैं इस छोकरे राज को भी एक बार निर्वाण मान लू इसकी हिघ्त के हिसाब से तोह ये उस वक़्त हिमाचल मई पढ़ रहा tha……toh इसका निर्वाण होना नामुनकिन ह …और बाकी कोई लगता नहीं h…aur दूसरी बार निर्वाण जब दिखा देहरादून मई तब पहले इस लड़के राज ने फाइट करि थी …और इसके सामने हे निर्वाण आया था जो की इसको बचने नहीं बल्कि दुसरो को मरने आया था …और पुलिस ठाणे मई भी उसने इसे बचाया नहीं था बल्कि इसे जेल मई हे रहने दिया tha….isai तोह यही दीखता ह की दोनों का कोई रिलेशन नहीं h….ya हो सकता ह की ये सब एक दिखावा हो ..पर ये तोह कन्फर्म ह की ये निर्वाण नहीं हे ह पर एक सक इसलिए भी जाता ह की इस इंसिडेंट को छोड़ दू तोह जब जब निर्वाण दिखा ह ये लड़का कुछ दिन गायब हुवा ह कॉलेज से शामे टाइम यही डेल्ही मई भी इसका यही टाइम था गायब होने का …और मुम्बई मई पुलिस की नाकामी और उस वक़्त सोनाली का होना शिवानी का होना ये साफ़ बताता ह की पुलिस भी निर्वाण के साथ मिली हुवी h…aur ये दोनों पुलिस वाली और सरे जाने आपस मई जुड़े हुवे h…har किसी की डिटेल ह… ये दूसरी बार ह जब मैं किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहा” फिर राज की फोटो को ज़ूम करके “सिर्फ सिर्फ इसका इसका इसका रोले समाज नहीं अत ह की ये शख्स कान्हा फिट बैठता ह इस कहनी mai….akhir क्या मिस्ट्री ह इसकी क्योकि जब भी कोई तार खींचता हु उसकी कड़ी मई इसका लिंक जरूर अत h….bus कुछ वक़्त की बात और ह तेरा भी क्लियर हो जायेगा …फिर देखता हु तुझे भी पर पहले निर्वाण को मारना ह किलर आर्गेनाइजेशन की बर्बादी का बदला लेना ह और ट्रस्ट में राज मेरा बदला बहुत बहुत बुरा होगा इतना दर्द दूंगा की तू चैन से मर भी नहीं sakega….waise भी तू डेथ हेलो का सीकर h….bus कुछ पल और जी ले जब tak…jab तक मेरे पास फुख्ता इनफार्मेशन नहीं अति ह …इस बार मैं खुद सरे मिशन को लीड करूँगा …तेरे हर साथी को चुन चुन कर तड़पा तड़पा कर मरूंगा”

वंही सबसे बेखबहार अपार्टमेंट मई बहार देखता हु ा राज बेयर पि रहा था उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं the…par उसकी आँखों को देखकर कोई भी बता सकता था की आँखों मई जवालामुखी धहक रहा ह …उसने अपना मोबाइल निकला और Rajeev(Dehradun रिंकी father)ko फ़ोन milaya….kuch रिंग जाने के बाद कॉल अटेंड हुवा और सामने से राजीव की आवाज आयी…

राजीव “Hello …राज”

राज “नमस्ते सर “

राजीव आवाज से हे भांप गए की कुछ बहुत सीरियस बात ह इसलिए वो बिना वक़्त गंवाए हुवे बोले “तुम बस बोलो”

राज “मैंने आपको एटीएम और कॅश दिया था अब उसे उसे करिये और उसे उसे करके सबसे पहले आंटी को भी कुछ वक़्त फॉरेन मई रिंकी के पास दीजिये …और छुट्टी लीजिये या रिजाइन जो तीख लगे आपको वैसे kijiye….mere 2 आदमी जो फ़िनलैंड के ह वो अपनी एक टीम के साथ जल्द हे आपके पास आरहे ह उन्हें लेकर मंडावा के आसपास डेरा जमा लीजिये और ये बात सिर्फ आपके और मेरे बिच मई रहेगी अगर मैं किसी भी कारन से आपसे कांटेक्ट मई न राहु आगे…. तोह भी आप दादा जी …की सेफ्टी करेंगे हमेशा और अगर जरुरत पड़े तोह एमेजेन्सी मई तोह सोनाली मम से बाद मई कांटेक्ट कर सकते ह …इस अकाउंट मई 50 कर रस ह इसलिए आप बेफिक्र होकर हर जरुरत पूरी कर सकते ह बाकि कॅश ह हे आपके पास …”

राजीव पूछना तोह चाहते थे पर उन्होंने कुछ पूछा नहीं क्योकि वो राज को बखूभी जानते थे की वो कभी कोई बात बिना वजह नहीं कहता ह इसलिए वो बोले “मेरा वचन ह जब तक मैं जिन्दा हु ठाकुर साब पर कोई आंच नहीं आने दूंगा राज बीटा …मेरे और मेरे परिवार की जिंदगी तोह पहले हे ख़तम हो जाती अगर तुम उस वक़्त मदद नहीं करते तोह …मैंने उसी दिन कसम खली थी की इस जिंदगी मई तुम्हे जब भी तुम्हे मेरी जरुरत होगी मैं हमेशा तैयार rahunga…main आज हे रिजाइन दाल देता हु …और मंडावा के लिए निकल जाता हु…”

राज “थैंक यू सर…..”

राजीव “गुड नाईट सोन”

इतना कह राजीव ने कॉल कट कर दिया और अपनी पत्नी को समझने लगे उसकी पत्नी समझदार thi…aur उसने अपने पति के डिसिशन मई पूरी तरह उसका साथ दिया जबकि उसे पता था की …इस राह पर मौत कभी आ सकती ह …उसने उसी वक़्त अपने लिंक इस्तेमाल करके फॉरेन अपनी वाइफ को भेजने का इंतज़ाम कर दिया और उसे अभी के अभी हे एयरपोर्ट के पास हे होटल मई भेज दिया जंहा से वो कल रात विदेश जाने वाली thi…….aur खुद अपने घर के गर्दन की तरफ चला गया और गर्दन की साइड मई जाकर एक पत्थर को ताकत से गोल गोल घूमने लगा जिसकी वजह से गर्दन के बीचो बिच से जमीन एक तरफ खिसक गयी और निचे जाने के लिए सिडिया दिखने लगी …राजीव सीढ़ियों से उतारकर निचे आया और दूर के पास लटक रहे स्विच को ों किया और दूर के पास बने बॉक्स को ओपन किया तोह एक स्क्रीन दिखाई दी ….जो की किसी डिजिटल लॉक की तरह लग रही थी राजरेव ने उसमे पहले अपनी एस को स्कैन कराया और फिर पासवर्ड डाला जिसके बाद वो दूर स्लाइड होता हुवा खुलता चला gaya…..aur फिर सामने आयी राजरीव की वेपन गल्लारी …जिसमे गन्स स्निप्पेर बुलेट्स मागज़ीने ग्रांडे …बुलेट प्रूफ jacketss…aur बैग्स the….rajeev सभी को उन बैग्स मई भरने लगा ….औरफिर उसने एक कॉल लगाया…

राजीव “ट्रक रेडी करना ह”

फिर सामने से कुछ कहा गया…

राजीव “है हथियारों के लिए…”

फिर सामने से आवाज आयी…

राजीव “50 लाख मिलेंगे आदमी भी ह कार लोडिंग वेहिकल चाहिए ह उसी मई सभी जायेंगे किसी को भी पता नहीं लग्न चाहिए ह 1वीक का फ़ूड भी अर्रंगे कर देना उसी mai…unke एते हे तुझे मैं बता दूंगा फ़िलहाल एक कार चाहिए ह अभी मुझे निकलना h…samaj गया न”

सामने से कुछ कहा गया…

फिर कॉल डिसकनेक्ट होते हे राजीव ने सारा सामान एक एक करके ऊपर लाया और एक रूम मई रखने लगा …और अचे से सब पैक करने के बाद दो गन बहार खुदके लिए रखली और व्हीकल का वेट करने लगा और जब तक उसने एक रेसिग्नेशन लत्तेर और सर्विस रिवाल्वर सुभे कमिश्नर ऑफिस तक पहुंचने के लिए अपने भरोसेमंद जूनियर को बुला लिया …और निकल पड़ा अपने मिशन मंडावा की तरफ….

वंही …राज कॉल कट करने के बाद मित्युदूत से “दिव्या माँ और ऋचा के पास सिक्योरिटी कैसी ह “

मित्युदूत “दस बॉडी गॉर्डस हमेशा छिपकर उनकी सेफ्टी करते ह और 1 -1 बॉडी गॉर्ड दोनों के साथ रहता ह मास्टर ..”

राज “यंहा की भी सेफ्टी भवानी हो तोह भद्दा दो हलाकि मुझे यकीन ह खतरा होगा तोह मुझे हे होगा क्योकि अंडरवर्ल्ड राज को मरना चाहता था जबकि उनकी निर्वाण के इतने सरे रूपों ने कबर खोद दी ह पर राज पर हमला और उसी वक़्त निर्वाण का आना और निर्वाण का भी उन्ही जगहों पर दिखाना जंहा राज का होना कनेक्शन जोड़ सकता ह हलाकि यकीन नहीं होगा पर हमला करने के लिए इतनी वजह काफी h…aur अभी की ये शांति यही बताती ह की खतरा बहुत तेज़ी से हमारी तरफ ारः ह…”

मिरतिदूत “सुनील ने भी दिल्ली मई सिक्योरिटी भद्दा दी ह सबकी और अज्जू भाई भी अलर्ट ह “

राज “सुनील पर जिमेदारी बहुत ह उसे पूरा परिवार बिज़नेस सब संभालना ह अब मैं उसे इन सब मई और नहीं खींचना चाहता हु इसिलए ये ट्रैकर भी मॉडिफाइड करवा दिया ह ….ताकि वो मेरी लोकेशन न जान पाए और इन सबसे दूर रहे …उसका दूर रहना हे तीख ह सबके लिए”

मिर्त्युदूत “पर मास्टर वो तोह”

राज बिच मई हे “आप मुझसे बड़े ह अपने जायदा दुनिया देखि ह उसे परिवार मई रहने दो …उसके लिए वो सब हे तीख ह और आज के बाद मेरी कोई भी जानकारी नहीं देनी ह वैसे भी हम बस इस मां के मिलते हे गायब हो जायेंगे हमारा टारगेट माँ पापा के कातिलों को ढूंढना ह“

मिर्त्युदूत “जैसे आप चाहे मास्टर “

मिर्त्युदूत राज की आँखों मई उदासी साफ़ देख सकता था …वो बहुत कुछ बोलना चाहता था पर उसे ये वक़्त सही नहीं लगा बोलने के लिए इसलिए वो चला gaya….aur राज दुबारा से बेयर पिने लगा ….और पिने के बाद बिना खाना खहे उसी चेयर पर हे सो गया ….

नेक्स्ट डे उत्तरप्रदेश….

हवेली मई….

एक शख्स जिसे आधे फेस पर मास्क लगाए हुवे ….ठाकुर के सामने खड़ा था “ठाकुर तुझे उस सुमेर सिंह को हारने के लिए पूरी ताकत दी तेरे हर बड़े दुश्मन को मारा जिसे तू हारने मई नाकामयाब रहा था …और सहदेव को रस्ते से हटाने मई भी तुम सब की मदत की humne…par तू भी बाकी की तरह नाकारा हे निकला …इतने साल बाद भी तुम उसके परिवार के लोगो को खोज नहीं paye……yaad रखना ये ताकत मेरी दी हुवी ह तोह मुझे चीन ने मई वक़्त भी नहीं lagega…tum माहि तोह कोई और ये काम करेगा”

ये बात बलराम जो अभी अंदर आया था उसने सुनली और वो गुसाई से चिल्लाते हुवे बोलै tuuu…hota कौन ह ये बोलने वाला तुझे तोह मैं अभी मसल दूंगा …इतना कह वो सीधा उसकी तरफ भगा ठाकुर ने उसे रोकने का इशारा भी किया पर वो जब तक उस शख्स के पास पहुंच गया और अपना राइट हैंड के पंच को पूरी ताकत से उस शख्स के चेहरे की तरफ घुमाया ये सब देखने के बाद भी उस शख्स के चेहरे पर एक इंच भर भी सिकन नहीं ayi…balaram का वार उसपर पड़ता उसे पहले हे उस शख्स ने उसका गाला पकड़ लिया जिसकी वजह से बलराम के चेहरे का रंग बदल गया ..अब मसकमान ने उसे हवा मई उठा लिया और जैसे हे अपनी गृप उसके गले पर bhadayi….balaram का दम घुटने लगा और अब वो अपने दोनों हाथो से छूटने की कोसिस करने laga….mask मन ने उसे ऊपर हवा मई उठाये हुवे हे एक किक उसके सीने पर जड़ दी जिसके बाद बलराम कई फ़ीट दूर हवा मई उड़ता हुवा जाकर सोफों के ऊपर से निचे जाकर gira….sare सिक्योरिटी गॉर्डस जो दूर खड़े थे उन्होंने ये सन देखा तोह सोच मई पद गए की कैसे एक 6.5 फ़ीट के ताकतवार इंसान को एक किक से हे कई फ़ीट दूर उदा कर भेज दिया…

मसकमान “जब शेर दिखे तोह सांस भी नहीं लेनी चाहिए ह वर्ण वो तुम्हे जिन्दा हे फाड़ डालेगा समझे …अपने बाप के पीछे हे रहना …और ठाकुर जितनी जल्दी हो सके धुंध उसके परिवार को …”

ठाकुर “वो मर चुके ह तुम्हे पता ह न “

मास्क मन को ये सुनते हे बहुत गुस्सा आगया और वो गुसाई से फुंकार करता हुवा बोलै “मेरे साबरा का इम्तेहान मत ले तू वर्ण अबकी बार तुझे जान से मार डुंग धुंध समझा… और वो कुंडली वाले इंसान तैयार ह “

ठाकुर जो घबरा गया था “है सब तैयार ह”

मसकमान उन्हें लेकर चला गया तोह पीछे से ठाकुर ने अपने बेटे बलराम को एक खींचकर थपड मार दिया..

बलराम दर्द से तडफडता हुवा बोलै “पर पिताजी”

ठाकुर गुसाई से “खामोश दुबारा कभी भी बिना पूछे बिच मई मत बोलना और न हे कभी कुछ करना मेरे मामलो mai…inki ताकत के आगे कुछ नहीं हो तुम और न मैं समझे इसलिए बिना कुछ जाने समझे उलझा मत करो ….ये कौन ह कान्हा से अत ह मुझे आज तक नहीं पता लगा जाओ उन बड़े छोटे सभी को कंटेनर मई लोड कार्डो इनका आदमी अत हे होगा लेने अब जाओ…

बलराम के जाने के बाद ठाकुर ने अपने चेहरे पर आया पसीना पोंछा और अपने सोफे पर बैठ gaya..,.usai बखूभी पता था की वो आदमी क्या कर सकता ह ..आखिर आज से 18 साल पहले उसने उसकी पावर देखि thi…aur उसी की बदौलत वो आज इस मुकाम पर पंहुचा था जंहा उसने ठाकुर सुमेर सिंह की ताकत को मसल कर रख दिया था और आज उत्तरप्रदेश का बाहुबली बनकर बैठा हुवा था जिसके आगे पुरे राज्य मई कोई भी आंख उठाने की हीमत नहीं करता था …ठाकुर ने चैन की सांस ली और वापस नार्मल हो गया और अपने आगे की प्लानिंग करने लग गया…

अगली दिन की सुभे हुवी और मंडावा मई टेबल पर सब नास्ते के लिए बैठे हुवे थे ….

रंजन - कप्तान जी हम सोच रहे थे मनीषा बिटिया की शादी धूम धाम से जयपुर या उदयपुर की जाये …ठाकुर साब आप क्या सोचते ह…

कप्तान “जैसा ठाकुर साब कहेंगे वैसा हे होगा आखिर हमसे पहले वो इस घर की बड़ी बहु बनेगी”

जगमाल सिंह ने कुछ नहीं कहा और शांति से नास्ता करते हुवे सुनते रहे ..

रंजन ने एक नज़र जगमाल सिंह पर डाली और बोलै “बात तोह आपकी भी सही h…par ठाकुर साब हमे अपना कहा मानते ह हम तोह पराये जैसे हे ह ..कप्तान जी आपके बारे मई हमे सब पता h…aur मेरा जीवन तोह खुली किताब ह …पर जिस घर की बहु मनीषा बन रही ह उसके घर का मुझे कुछ पता हे नहीं ह …अब आप हे बताईये ये पराया जैसा व्यवहार नहीं ह तोह क्या ह ….एक बाप हु …बेटी की चिंता ह आप भी एकबेटी के पिता ह आप समाज sakte….phir एक पल रूक कर माफ़ कर दीजियेगा अगर मेरी बात बुरी लगी हो तोह apko…”itna कह रंजन ने अपना हथियार दाग दिया और वेट करने लगा असर का …

कप्तान “कैसी बाते करते ह रंजन जी आप …आपका हक़ ह सब जानना ….”

जगमाल सिंह ने नास्ते की प्लेट को साइड मई किया और रंजन की आँखों मई देखते हुवे बोले “आप हमारे अथिति ह …रिश्तेदार ह …आपका हक़ ह जानना पर एक बात मैं अभी हे बोल देता हु की …एक भी बात यंहा से वंहा हुवी तोह आपकी गर्दन धड़ से अलग करते हुवे वक़्त एक पल भी नहीं लगाऊंगा”

कप्तान “ठाकुर साबबबबब”

जगमाल सिंह ने हाथ के इशारे से बिच मई हे रोकते हुवे “बस बहुत हो गया कप्तान …तुम सायद भूल गए हो अब सब कुछ इसमे तुम्हारी गलती भी नहीं ह वक़्त होता हे ऐसा सब भुला देता ह”

कप्तान “मैं..”

जगमाल सिंह ने दुबारा से बिच मई हे कप्तान को रोक दिया और फिर रंजन की तरफ गर्दन घुमाकर बोले “अगर राज को ये रिश्ता पसंद नहीं होता तोह मैं कबका मन कर चूका होता ह पर आपको परिवार का जानना ह तोह मैं आपको सब बताता हु मेरी दो बेतिया और तीन बेटे ह या the…sabse बड़ा बीटा शैतान सिंह निर्वाण जो फॅमिली के साथ विदेश चला गया और हम एक दूसरे के लिए मर चुके ह न मुझे उनसे मतलब ह और न उन्हें मुझसे…

दूसरा बीटा सहदेव सिंह निर्वाण ….और मेरी बहु विद्या ह जो अब इस दुनिया मई नहीं ह और उनका बीटा ह राज सिंह निर्वाण जिनसे आप मिल चुके ho….aur तीसरा बीटा पर्वत सिंह निर्वाण जो ख़तम हो चूका ह वो जो कड़ी ह मेरी सबसे छोटी बहु सुप्रिया ह उनके तीन बचे ह सबसे बड़ी बेटी ममता ….और छोटी जो आपके घर ह कविता और सबसे छोटा अजय ह और मेरी दो बेटियों मई से बड़ी एक हादसे मई मेरी बहु के साथ मरी गयी और एक dr…aur ये ह अहसान जिसे मैं शेरदिल कहता हु ये मेरे दामाद अली का बीटा ह जिनका जन्नत मई वास हो गया ह ये उनकी बेटी रिफत ह ….बस यही परिवार h”phir टेबल से खड़े हो गए और शेरिल की तरफ देख कर आप मेहमानो का अचे से ख्याल रखे देखे उन्हें कोई तकलीफ नहीं हो मुझे काम ह मैं शाम तक लौटूंगा…

तभी दादी बोल पड़ी आप इतने गुसाई मई क्यों h….aur बस यही नहीं कहना चाहिए tha…dadi को इस वक़्त …जगमाल सिंह भड़क उठे …

“आपकी जबान पहले भी गलत वक़्त पर हे चलती थी और जब भी चली उसने ज़हर हे उगला पहले मेरे बेटे और बहु पर और फिर आपका मन नहीं भरा तोह उसकी एक लौटी संतान पर अब अगर आज के बाद आपकी जबान पूजा पथ के सिवाए कभी खुली तोह माँ भवानी की कसम हम अपने हाथो से उसे काट देंगे “

जगमाल सिंह का गुसा देख सबकी हालत ख़राब हो गयी थी खासकर दादी की उसे तोह मनो सांप सुंग गया हो वो तोह चुप चाप उलटे पाँव अपने कमरे की तरफ चली गयी…

वंही कप्तान कुछ बोलना चाहते थे पर ठाकुर जगमाल सिंह का गुसा देख वो भी चुप हो गए वंही दर तोह रंजन को भी बहुत लग रहा था पर उसका दिमाग किसी बुलेट ट्रैन की तरह से दौड़ रहा था …. उसे सपने मई भी उम्मीद नहीं थी की सहदेव का पूरा परिवार हे लग भाग बच गया ह पर कैसे कैसे क्योकि जंहा तक उसे पता था पूरी हवेली को आग से जला दिया गया था और वंहा कई लाशे भी मिली थी की पूरा परिवार जलकर मर gaya….phir कैसे बच गए ये सभी रंजन खुदके दर को बड़ी मुश्किल से हे काबू कर पा रहा था….

वंही जगमाल सिंह भीमा के साथ हवेली के बहार निकलते हे “भीमा कविता को तुरंत अनिरुद्ध के घर शिफ्ट करो और मेरी राज से बात करवाओ”

भीमा ने तुरंत मोबाइल निकलकर राज को मिला दिया और राज जो कॉलेज जा रहा था उसने ईरफ़ोन से कॉल अटेंड करके जवाब दिया “है चाचा”

भीमा “बाबूजी से बात करो”

जगमाल सिंह “हमे आपसे बहुत जरुरी बात करनी ह “

राज “मनीषा के पिता के बारे मई ह न दादाजी “

जगमाल सिंह “है “

राज “मैंने शूरती मम को उनके पीछे लगा दिया ह दादाजी मैं देखता हु की सब तीख ह या कोई साज़िश ह “

जगमाल सिंह “और अगर गलत निकला तोह क्या कर पाओगे तुम ये”

राज क्या बोलता वो चुप हो गया …क्योकि वो मनीषा को कभी दुखी नहीं देख सकता था तोह खुद कैसे ढक दे सकता था”

जगमाल भी राज के दिल की हालत समाज रहे थे इसलिए वो कुछ पल बाद बोले “ निवाना beta..kabhi कभी हमे बहुत मुश्किल वक़्त मई किसी एक को चुनना पड़ता ह और कठोर निर्णय लेने पड़ता ह …मुझे पता ह तुम ये कर सकते हो …इसलिए मैं तुम्हे जायदा नहीं समझाऊंगा और है कप्तान राश्तेदारी मई जायदा लगाव लगा बैठा ह इसलिए …ये लड़ाई तुम्हारी अकेले की थी और रहेगी कभी कमजोर मत पड़ना समझे “

राज सुनील और दीपिकी की पसंद और नहीं बताने वाली बास्त से पहले हे दुखी था इसलिए दादाजी की बात समाज रहा था …और कुछ पल रूक कर बोलै … “ बिल्किल दादाजी ये जुंग आपका पोता अपने बलबूते पर लड़ेगा और अंत तक लड़ेगा……”

जगमाल “ तीख ह अब हम रखते ह अपना धयान रखे “

राज “और आप भी अपना धयान रखे मई जल्दी हे अत हु मुम्बई का सारा काम निपटाकर फिर हम बचपन की तरह इस बसर खुलती का दॉंव लगाएंगे”

जगमाल सिंह “जल्दी आना बीटा हम इन्तेज़ाआर करेंगे “.

राज “अत हु दादाजी bye “

कॉल डिसकनेक्ट हुवा तोह ….

भीमा “ राज आपकी मेरी सोच से दो कदम आगे ह बाबूजी उसे धोखा देना आसान नहीं ह ुऔर मैंने तोह सुना ह वो अब सहदेव भाई से भी कंही जायदा खूंखार होता जा रहा ह “

जगमाल सिंह “सही कहा तुमने भीमा भीमा हम मंदिर जा रहे ह और पूरा दिन वंही बिताएंगे जब मेहमान चले जाये मुझे बता देना”

भीमा “बाबूजी अब गुसा थूक दीजिये वो अब हमारे समधी ह”

जगमाल सिंह एक पल के लिए रूक गए और भीमा की तरफ देखते हुवे बोले “पूछना गलत नहीं ह भीमा पर कोई इंसान जरुरत से जायदा जानने की ीचा रखता ह और उसके लिए कोसिस भी करता ह तब सोचना चाहिए और वही सब यंहा रंजन कर रहे थे बस इसलिए हमे गुस्सा आ गया”

भीमा “जी बाबूजी चलिए मैं आपको मंदिर तक छोड़ अत हु”

इतना जह उसने अपने आदमी लिए और जगमाल सिंह के साथ मंदिर चला गया …

वंही हवेली मई कप्तान सिंह सोच मई डूब गया था ….की आज क्या हुवा ..क्यों हुवा और जो हुवा हुवा वो बिलकुल नहीं होना चाहिए tha……par वो अब क्या कर सकता था जो होना था वो तोह चूका तभी उसके दूर पर नॉक huva…usne दूर खोला तोह सामने रंजन खड़ा था…

कप्तान “आईये अंदर आईये”

रंजन “अंदर आने के बाद माफ़ कीजियेगा आज मेरी वजह से इतना सब हो गया और ठाकुर साहब गुसा हो गए “ये कहते हुवे उसने हाथ जोड़ लिए

कप्तान ने रंजन के हाथ पकड़ लिए और बोले “नहीं नहीं आप पिता ह और पिता का हक़ होता ह वो अपनी बेटी की भलाई के लिए सवाल जवाब करे आखिर बेटी के फुटरे का सवाल होता ह कोई बाप बाद मई अपनी बेटी को कैसे दुखी देख सकता …और वैसे भी ठाकुर साहब बड़े ह उन्होंने जो कहा उसे दिल पे मत लीजियेगा ..वो बहुत अचे ह …और नेक दिल ह बस अपने पोते को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव ह ….वो कोई बात दिल मई नहीं रखते ह इसलिए आप भी नार्मल हो जाईये और सब कुछ दिमाग से निकल दीजिये”

रंजन मुस्कुराकर “ये सब कहकर तोह अपने मेरे दिल का सारा भोज हल्का कर दिया मैं तोह सोच रहा था की मेरी वजह से आपके और उनके बिच मई भी ुंबन न हो जाये”

कप्तान “है है है नहीं नहीं बिलकुल नहीं होगी अब कुछ दिएर अरमकर लीजिये जब तक मैं सबसे मिल लेता हु फिर हम पोखरण के लिए निकलेंगे बी एयर जाये चाहे बी रोड एक जितना हे टाइम लगेगा …इसलिए बी रोड चलते h…suna ह बीकानेर के भुजिया और रसगुल्ले वर्ल्ड फेमस ह …उनका भी स्वाद लिया जायेगा”

रंजन भी मुस्कुरा दिया पर उसका दिल तोह कुछ और हे कह रहा था …और वो बस इंतेज़्ज़र कर रहा था यंहा से निकलने का…

वंही निचे शेरदिल सुप्रिया से “मम्मी जी वो अभी जायेंगे उन्हें पोखरण जाना ह इसलिए थाली तैयार करलीजिये…

सुप्रिया “पर बाबूजी तोह यंहा ह हे नहीं”

शेरदिल “माँ ह न मैं हु और भीमा मां भी आरहे ह कुछ दिएर मई”

सुप्रिया “तीख ह “

इतना कह वो चली गयी तोह ऊपर वाले रूम मई दो जासूस लैपटॉप मई लगे हुवे थे…

अजय “दादाजी गुसा हो गए थे जरूर ये आदमी गड़बड़ लग रहा ह”

जानवी “यस कप्तान मैंने कक्तव से सब चेक किया वो आदमी मोबाइल से कुछ टाइप करने वाला था फिर रूम को चारो तरफ से देखते हुवे रूक गया “

अजय “चुटकी तू जासूस मत ban…jayda वैसे तुझे पता ह मैं उनका फ़ोन हैक नहीं कर प् रहा हु उनका प्रोटेक्शन सॉफ्टवेयर बहुत एडवांस ह”

जानवी अपने दिमाग पर एक ऊँगली तप तप करती हुवी “दाल मई कुछ कला ह भैया …हमे सीनियर कप्तान अज्जू अंकल तक बात पहुचानी होगी “

अजय “वो नहीं सुनेगे वो सिर्फ राज भैया की बात सुनते ह खैर ये देखे इतना कह उसने एक बटन पर क्लिक किया और पूरी हवेली के बहार अंदर हॉल पीछे अखाडा और मैं रोड तक के कमरे एक साथ लाइव आगये”

जानवी “वो भैया फिनॉय अपने कमरे का बेस्ट सेटअप कर हे दिया …”

अजय “है अब कोई आसानी से हमरी नज़रो से बच नहीं पायेगा”

वंही मुम्बई शामे टाइम …

अपूर्व “लेडीज एंड gentlemen…so ये ह हमरा कम्पलीट प्लान पहले हम सब पहले हरिदवार जायेंगे जंहा हम एक दिन रूकेंगे …और वंहा से नानीनताल नाईट स्टे करेंगे और घूमेंगे फिर देहरादून जायेंगे जंहा फारेस्ट रीसर्च इंस्टिट्यूट और आसपास घूमेंगे और फिर देवप्रयाग jayenge….then हिमाचल और फिर जम्मू कश्मीर …बहुत थकने वाला रूट ह …फिर राज की तरफ देखकर …पर यादगार बन जायेगा हमेशा के लिए ….क्यों राज क्या पता …जिंदगी का सबसे यादगार टूर बन जाये…..

पूनम “राज की तरफ देखने लगी …”

अनु “बिलकुल पूरे मज़े करेंगे”

अपूर्व “बिलकुल ऐसे मज़े करना जैसे हर दिन akhiri…ho क्योकि कल का किसी को नहीं पता होता ह की कब मौत आ जाये”

कविता “क्या मतलब”

अपूर्व “मतलब जी भर जियो क्यों राज “

राज “सही कहा अपने हर दिन जी भरकर जीना चाहिए…”

ये कहते वॉट जंहा अपूर्व मुस्करा रहा था तोह राज कहते वॉट अपूर्व को पढ़ने की कोसिस कर रहा था पर उसकी समाज मई कुछ नहीं ारः था …

रात के वक़्त कप्तान और रंजन आर्मी कैंट मई आर्मी ऑफिसर्स के साथ बैठे हुवे पार्टी कर रहे थे ….तब रंजन बोलै “एक कॉल करनी ह मैं अभी करके आया”

कमांडिंग अफसर “रंजन जी भाभी से इतना मत डरिये …”

रंजन “डरना पड़ता ह वर्ण क्या पता मेरे हथियार मुज पर हे टेस्टिंग सुरु हो जाएँगी“

रंजन की बात सून सब मुस्कुरा दिए रंजन भी हँसता हुवा एक तरफ आगया और उसने नंबर डायल किया….

सामने से आवाज आयी “क्या हुवा”

रंजन “मुझे निर्वाण मिल गया ह”

सामने से अपूर्व सिंह अपनी कम्फर्टेबले चेयर से ीथकर सीधा हो गया और बोलै “रंजन होश मई तोह ह तू”

रंजन “मैं पूरे होश मई hu…tumne सही कहा था साडी कहानी तोह मेरी बेटी के चारो तरफ हे घूम रही थी ..”

ापपूरव “तुम्हारी बेटी जानती ह”

रंजन “है पर उसकी हकीकत नहीं जानती ह …तुम आज तक उसका पता इसलिए नहीं लगा पाए क्योकि उसने बहुत अचे से गेम खेला उसने अपने हे डुब्बलिकाते निर्वाण बनाये और हमारे सामने रख दिए और खुद असली चेहरा लिए हमारे सामने घूमता रहा और हम उसे एक कॉलेज का छोकरा समाज के काम आंकते रहे….”

अपूर्व “ कौन ह वो जल्दी बताओ “

रंजन “वही जिसकी सुपारी मिली थी हमे 50 कर की वही जो हर वक़्त सामने होकर भी हमे बेवक़ूफ़ बनता रहा …”

अपूर्व समाज गया था पर वो रंजन के मू से नामसुन्ना चाहता था इसलिए बोलै “नाम”

रंजन “राज सिंह निर्वाण ….उर्फ़ निर्वाण “

और अपूर्व के दिमाग मई जो इनफार्मेशन का पजल अब तक बना हुवा था वो एक एक करके खुद बा खुद जुड़ते चला गया और अपूर्व का धुंधला पड़ा हुवा विज़न क्लियर होता चला गया …

तोह दूसरी तरफ से रंजन hello hello कर रहा था …

Apoorav”aur कुछ “

रंजन मेरे पास एक प्लान ह..

अपूर्व “मुम्बई आकर मिल फिर मैं समझाता हु कैसे क्या करना ..”

रंजन “डेथ हेलो खुद आएंगे “

अपूर्व के चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो बोलै “बिलकुल आएंगे ..और इस निर्वाण को दिखाएंगे की दर्द क्या होता ह कैसा लगता ह अपनों को खोने का अहसास…”

रंजन “और भी खास जानकारी मिली ह”

अपूर्व “मुम्बई आकर मिल फ़ोन पर नहीं”

रंजन “तीख ह” कहकर कॉल कट कर दिया …

तोह अपूर्व वापस चेयर पर बैठकर गहरी सोच मई दूप gaya….par अब उसके चेहरे पर एक भयानक और जानलेवा मुस्कान थी….

आज के लिए इतना हे दोस्तों ….

मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का
 
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