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अपडेट 208
प्लानिंग …
11 उपदटेस तू लेफ्ट फॉर डेड एन्ड
रजनी ….. “सच मई इतनी साडी shopping…tum लड़किया भी थका दिया मुझे तोह”
अनु “मम आप भी एक ब्लैक कलर मई और ब्लू साड़ी और साथ मई जीन्स और टॉप ले लीजिये ….क्या पता कोई आपको भी बेहद खास मिल जाये वैसे तोह कॉलेज का तोह हर लड़का आपके पीछे लार टपकाते ह कितने हे जवान दिलो की धड़कन हो आप”
अनु की बात सुनकर साडी एक साथ हंस पड़ी…
रजनी “आने दे राज को पहले उसे कहकर तेरे लिए हे धुंधवती ह बेहद खास बहुत बाते अति ह”
कविता “ाचा मुझे एक ब्लू जीन्स और टॉप परचेस करना ह और वंहा रात को पहनने के लिए एक लॉन्ग स्कर्ट और टॉप भी”
पूनम “कुटी कितना खरीदेगी “
मनीषा धीरे से पूनम के कान mai“Tu भी कोई अछि सी ड्रेस खरीदले वंहा रात को पास आने का क्या पता मौका मिल जाये मैं पूरी कोसिस करुँगी अपनी तरफ se….waise मेरा देवर थोड़ा शाक्त ह पर मैं तेरी साइड hu…is बार अपनी बांहो की गिरफ्त मई कास हे लेना”
पूनम मनीषा की बात सुनकर शर्माने लगी …तभी उसकी नज़र सामने padii….aur वो बोली “अरे ये तोह मर अपूर्व सिंह ह यंहा कैसे”
रजनी ने तुरंत सामने देखा और उसकी आंखे सिकुड़ गयी…
रजनी “रात को इस वक़्त माल मई …. हमारा पीछा तोह नहीं कर रहा ह”
कविता “मम आपके तोह जलवे ह”
रजनी ने घूर कर कविता को देखा..
पूनम “मैं अभी अति हु”
इतना कह वो सीधे अपूर्व सिंह के पास आगयी.. “हीई”
अपने पीछे से मीठी सी आवाज सुनकर अपूर्व जो फॉर्मल ट्राउज़र देख रहा था पलट गया … “ओह्ह्ह मिस पूनम आप यंहा “
पूनम “शामे क्वेश्चन मेरा ह आप इतने बिजी सचेडूले से फ्री होकर शॉपिंग कर रहे ह”
अपूर्व “ओह्ह no no …एक्चुअली फॉर्मल्स लेने आया था टूर के लिए बाद मई टाइम मिले या न mile…aur ी थिंक आप भी इसीलिए आयी ह यंहा पर अकेले ख़ूबसूरत लड़कियों को अकेले नहीं घूमना चाहिए ह”
पूनम “no अपूर्व सर वो देखिये सभी हे ह वैसे िफ़ यू डोंट मंद मई ी आस्क यू समथिंग”
अपूर्व “no फोर्मलटीएस आस्क फ्रीली“
पूनम “आपको कैसी लड़की पसंद ह ी मैं लड़का लड़की मई क्या देख कर इंटरैक्ट होता ह”
अपूर्व मुस्कराने लगा और सोचकर बोलै“ वैसे तोह बहुत सी बाते होती ह पर देपेंद करता ह पर्सन तो person…jaise अगर मैं मेरे बारे मई बास्त करू तोह मुझे गफ बनानी हो तोह थोड़ी मोर्डर्न थोड़ी स्टाइलिश ….educated…beautifull इन लुकिंग ये सब देखूंगा”
पूनम “और वाइफ चाहिए हो तोह”
अपूर्व “ तोह फिर जस्ट लिखे यू सिंपल मोर्डर्न काइंड hearted….cairing एंड वेल एडुकेटेड क्योकि जिंदगी मई साथ के लिए ये सब बहुत जरुरी होता h…har लड़का एक ऐसी लड़की चाहता ह जो बस उसे थोड़ा सा समझे जब उसे उसके सपोर्ट की जरुरत हो उसके साथ कड़ी रहे इसे जायदा दुनिया का कोई भी लड़का आदमी अपने पार्टनर से नहीं चाहता ह ी होप जो आप जानना च रही थी जान गयी होंगी”
पूनम अपूर्व की बात सुनकर मंद मंद मुस्कुराते हुवे शर्माने लगी …और फिर बोली…
पूनम “वैसे आप पर ब्लू कलर जायदा ाचा लगेगा एंड थैंक यू मुझे मेरा जवाब मिल गया”
दूर से चारो देखती हुवी सोच रही थी की ये क्या कर रही h….aur अपूर्व से इतना मुस्कुरा मुस्कुरा कर बात क्यों कर रही ह….
मनीषा मन मई “अब इसे क्या हो गया ह”
अनु “अकेले अकेले मज़े मार रही ह पूनम”
कविता “छोड़ न बेब ….चिल कर एक बार हंस दू तोह लाइन लग जाएगी हूउउउउ….
रजनी “कविता”
मनीषा “इसे छोड़ो वो देखो वो आरही ह वापस चलो चलते ह”
रजनी एते हे सवाल पूछ पड़ी “क्या बाते हो रही थी उसे हंस हंस कर”
पूनम “पूछ रही थी की मेरी मम सिंगल ह मिंगले मिंगले करोगे “
पूनम की बात सून सरे उसे देखने लगे ….
पूनम are“kuch नहीं ऐसे हे नार्मल बाते हुवी thi….”chalo मुझे कुछ ड्रेसेस परचेस करनी ह
कविता कान मई “भाभी ….क्या हो रहा ह ये sab…muje डाउट हो रहा ह”
पूनम उसके कान मरोड़ते हुवे काम दिमाग लगाया kar…kuch भी उल्टा पुल्टा सोचती रहती ह ….
मनीषा “है आज कल इसका दिमाग कुछ जायदा हे चलने लगा ह इधर उधर हुवी तोह टंगे तोड़ दूंगी “
पूनम “ाचा अब तोह houngi”itna कह उसने मनीषा को जइब दिखा दी
रजनी “छोड़ो वो देखो उसमे चलते ह उसमे कलेक्शन बहुत अचे मिलते ह”
सभी “ओह्ह्ह ho….matlb किसी पर बिजली गिरने वाली ह जल्दी हे मम को सब पता ह कान्हा क्या मिलता ह”
रजनी मन हे मन तोह खुस हुवी पर बहार से कुछ जाहिर नहीं होने दिया आखिर बिजली राज पर हे गिराने की कोसिस कर रही थी पर वो भी क्या करे राज ह जो पास रात को सोकर भी कुछ नहीं कर रहा था …उसने तोह कुछ दिन पहले हे दुल्हन का जोड़ा भी ले लिया था ताकि राज के साथ दुल्हन की तरह तैयार होकर वो अपना कौमार्य राज को देकर उसे अपनी रूह मई बसा लेगी….
पूनम “क्या सोच रही ह आप”
रजनी “नहहहिं कुउछ भी तोह नहीं …चलो chalo…phir डिनर भी करना ह “
मनीषा “वैसे पढ़ाई पूरी ह क्यों न थोड़ीई”
रजनी “तोह फिर खाना पैक करा कर घर हे चलते ह”
मनीषा पर कान्हा मेरे घर पापा ह …और पूनम के घर मेरे फ्यूचर ससुर पापा ह …
रजनी “मेरे घर पर राज ने किसी को भी लेन से मन किया ह अब क्या करे राज के फ्लैट पर चले..”
कविता “चिल करो मैं शिवानी मम को कॉल करती हु उनसे बेस्ट कौन ह उनके पास हर प्रॉब्लम का सलूशन होता ह और वैसे भी हम सब पूनम दी के पास रुकने वाले ह अब शिवानी मम के पास रूक जायेंगे”
पूनम “पर उनके साथ सोनाली दी होंगी न”
कविता “ अभी पता चल जायेगा कॉल लग गयी ह साइलेंट raho….Hello मम क्या कर रही हो क्या हिटलर भी ह क्या आपके पास “
शिवानी “कुटी किसी दिन पिटेगी अगर तेरी बाते उन्होंने सूली toh…kaam बोल अभी अभी घर आयी हु यार बहुत थकी हुवी हु ”
कविता “तोह फिर हम आरही ह खाना पैक करके आप बस रेड वाइन और वोडका मंगलो “
शिवानी “सब पड़ी ह यंहा तुम ाजाओ जब तक मैं कुछ स्नैक्स रेडी कर लेती हु”
कॉल डिसकनेक्ट होते हे..
कविता “बेब्स ओने ऑवर ह हमारे पास लेटस फिनिश थे वर्क”
वंही दूर से अपूर्व देखते हुवे “8 बॉडी गॉर्ड…..4 अंडरग्राउंड पार्किंग मई और साथ मई 2 स्निप्पेर bhi….aur ये मॉल मई ये घूम रहे अलग से लोग 100 परसेंट पोलिसवाले h….akhir इतनी सिक्योरिटी क्यों ह तुम्हारे साथ क्या राज़ छिपा रहे हो तुम सब मिलकर….. और वो लड़का क्यों नहीं दिख रहा ह तुम्हारे साथ कोई बात nahii….dheere धीरे तुम सब bataogi….ye साडी सिक्योरिटी भी तुम्हारी अधूरी रह जाएगी जिस दिन मेरा शक यकीन मई बदल gaya……par बहुत मज़ा आएगा मुझे सोच कर हे मज़ा रहा ह की किसी बचाएगा वो तुम्हे तुम्हे तुम्हे या तुम्हे….”
तभी अपूर्व के मोबाइल पर रिंग आयी…
अपूर्व “हां मां बोल”
सामने से “रंजन हे तीख ह”
अपूर्व “तू जनता ह न मैं कौन हु और किसका राइट हैंड हु फिर भी अकड़ “
रंजन “देखो मेरे कहने का मतलब ह वो मेरा अतीत ह …मैं नहीं चाहता हु की अतीत का कोई भी सच या शख्स मेरे सामने ए …तुम नहीं जानते हो वो बहुत खतरनाक लोग थे जिनके साथ मई था”
अपूर्व “किसलिए कॉल किया ये बताओ “
रंजन “मैं जब जब उस छोकरे को देखता हु मुझे अतीत के किसी शख्स की याद अति ह कैसे भी उसे ख़तम कार्डो ….वैसे भी उस छोकरे को मरने के चक्कर मई विक्टर निर्वाण से भीड़ गया था और फिर बेवजह मारा गया ….न वो निर्वाण को मार पाए न इस छोकरे राज ko…upar से ये मेरे दामाद सुनील सिंघानिया का मू बोलै भाई भी h…tumhe इस हर हाल मई मरना हे होगा”
अपूर्व सिंह मन मई “चुटिया समाज रहा ह क्या इसे नहीं पता ह की ये सभी लोग डेथ हेलो के भाई को मरने मई शामिल थे ….और ये सभी हे मरेंगे शादी के सपने हे देख तू” अपूर्व बोलै “रंजन जायदा सपने कभी कभी पुरे नहीं होते ह इसलिए काम सपने देखने चाहिए ह वैसे तेरी बेटी से पूछ जरा वो छोकरा कॉलेज क्यों नहीं ारः ह उसे कुछ भी पता चले तोह बता मुझे ….मतलब ऐसा जो मेरे काम का ho….thoda घर रूक उसकी निगरानी रख कुछ न कुछ जरूर मिलेगा काम का समझा …”
रंजन “पर तुम उसे आसानी से मार सकते हो”
अपूर्व “ठन्डे दिमाग से सोच रंजन जिस लड़के को अंडरवर्ल्ड के एक से बढ़कर एक खूंखार गुंडे नहीं मार पाए उसे तू ऐसे हे मार लेगा ….सोच सोच दिमाग चला तुझे समाज ayega….pahle मुझे तुजे कुछ समझने दे ….तुझे पता ह तेरी बेटी के पीछे 10 टॉप के बॉडी गॉर्ड घूमते ह और कई पुलिस वाले भी ….और एक बात तेरी बेटी जैसी दिखती ह वैसी वो ह nahi…thoda बाहरवालियो से जायदा घर पर धयान दे समाज आजाएगस”
रंजन कुछ बोल हे नहीं पाया अपूर्व के सामने उसका दिमाग इस सोच मई था दस बॉडी गॉर्ड पर उसे तोह कोई भी दिखाई नहीं दिए the….sivaye कुछ पुलिस वालो के जिसे शिवानी ने लगाया था …उसका दिमाग सोच मई पढ़ गया और उसने अपने कुछ खास आदमियों को इस काम पर lagaya…..taaki सच जान सके….
2 ऑवर बाद
सीक्रेट प्लेस…
एक काळा कपडे पहने शख्स… “यंग मास्टर डेथ हेलो …अपने जिन फाइटर को बुलाया था उनमे से 4 को अपूर्व सिंह के पास भेज दिया ह और 2ड्राइवर्स की जगह ले lenge…..baaki सब यही ह हमारे पास बस ये आखरी 10 किलर्स हे बचे ह यंहा बाकी सब अपने काम पर ह…
डेथ हेलो जो हमेशा की तरह मास्क पहन कर शांति से बैठा हुवा था उसने कोई जवाब नहीं diya…aisa लगा जैसे वो गहरी सोच मई था ….फिर कुछ दिएर बाद वो बोलै … “अपूर्व को कहना की इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिए ह अगर वो लड़का निर्वाण से जुड़ा ह तोह मुझे बताये वर्ण उसे जो तीख लगे वो करे …मुझे फिर ये सहर छोड़ आगे जाना ह जंहा मुझे स्कॉर्पियन ट्राइब ज्वाइन करके और पॉवरफुल बनकर मेरे मास्टर का सपना पूरा करना ह….”
काळा कपड़ो वाला “ मास्टर क्या हम भी आपके साथ जायेंगे “
डेथ हेलो “तुम्हारी ताकत उनके सामने कुछ नहीं ह ….इस दुनिया मई बहुत कुछ ऐसा ह जिसके बारे मई तुम सोच भी नहीं सकते हो उनका अस्तित्व दुनिया मई कई सालो से ह पर जिसने उन्हें देखा वो मरे gaye…..wo इस दुनिया मई होकर भी नहीं ह इसलिए भूल jao…ab तुम जा सकते हो …और उसके जाने के बाद वो खुद से हे bola…..ye तय ह अब और चूहे बिल्ली का खेल नहीं होगा बस बहुत हो गया ह जाने से पहले तेरी मौत की तारिक लिखता हुवा जाऊंगा”
Wanhi….same टाइम शिवानी के बंगलो पर….
शिवानी “सोनाली दी बिजी ह अभी “
पूनम “अगर मैं गलत नहीं हु तोह पक्का वो किसी को पिट रही होंगी या पीटने गयी होंगी”
शिवानी “है पूनम वो इस बार एक सीबीआई वाली की धुलाई करने गयी ह उन्हें उसके खिलाफ प्रूफ मिल गया ह जो अज्जू ने दिया ह बीच मुझे धमका रही thi….bitch भूल गयी की मेरे पास ग्रेनेड टैंक मिसाइल सब ह बस अभी ग्रांडे का हे उसे किया ह ….और ट्रस्ट में सोनाली दी का टार्चर बहुत बहुत भयानक होता ह”
कविता जल्दी से “मुझे पता ह श्वेता ने बताया था मुझे”
शिवानी “तोह मेरी कुटी दूर हे रहना खासकर तू और श्वेता क्योकि तुम दोनों हे उनसे पन्गा लेती हो”
कविता “डरे और हम श्वेता और कविता के आगे सब की बोलती बंद हो जाती ह यकीं न हो तोह अभी आइस क्रीम मँगवॉ उनसे अभी लेकर आजाएंगी”
मनीषा “कुटी चढ़ गयी ह तुझे अब मत पीना क्यों याद कर रही ह ….सबकी क्लास लगा देगी अगर आगयी तोह”
रजनी “इतनी खतरनाक ह वो “
पूनम “नहीं मम वो सबसे बड़ी ह इसलिए रेस्पोंसिबल ह वो नहीं चाहती ह की हम मई से कोई भी बिगड़े या गलत अडडे डाले …इसलिए दांत देती ह पर दिल से बहुत अछि ह “
कविता “ अरे अछि ह भयानक ह रक्षास भी उनका खूंखार रूप देखले तोह दर जाये अरे…… नंगा करके गरम आग पर पिछडे को भुन्ति ह ….कभी देखा ह पिछवाड़ा fry…..shweta ने देखा ह पिछडा फ्राई बबिता का”
कविता की बात सून सबके जिस्म मई झुरझुरी सी दौड़ गयीईइ…….
रजनी हे भगवन इतनी खतरनाक …
अनु और पूनम का मू भी खुला रह गया….
शिवानी “कविता शट उप वो बहुत अछि ह चलो मेरा तोह पेग खली हो गया ह एक नया बनाया जाये “
अनु पूनम तू नहीं पीयेगी …
मनीषा “ये पुरे सोल ह अनु ये टच भी नहीं करती ह बस हमारी ख़ुशी के लिए बैठी ह”
अनु “ाचा ह ाचा वर्ण सोनाली मम के नाम से रूह काँप रही थी अब माहौल हल्का होने दो यार क्यों डरा रही ho….kahte यमराज का नाम लो वो प्रकट हो जाता ह”
तभी शिवानी का मोबाइल जो सामने पड़ा था वो रिंग होने लगा और स्क्रीन की तरफ देख सब के चेहरे का रंग बदल gaya…aur सबकी आवाज सांस सब रूक सी गयी…….
कविता को सबसे जायदा दर लग रहा था …
शिवानी “स्स्स्सह्ह्हह्ह” इतना कह उसने कॉल उठाया तोह सामने से आवाज आयी…
“शिवनीय मेरा बैग पैक करदेना मैं आरही हु”
शिवानी “कितने दिन के लिए जा रही ह अपनीस बार”
सोनाली “एक मंथ के लिए दिल्ली जा रही हु चीफ सर ने बुलाया ह अर्जेंट ह मैं अति हु”
इतना कहकर कॉल कट कर दिया ….
वंही सबको सांप सूंग गया मनो …
शिवानी “अरे तुम सबको क्या हुवा ह ….वो बैग लेने आरही ह एक मंथ के लिए दिल्ली जा रही ह जरुरी काम ह “
कविता “मेरी बहन श्वेता तोह गयीईइ”
पूनम “आप बैठो मैं पैक करदेती हु”
शिवानी “अरे बैठ जा मैं कर दूंगी हमारी पैकिंग तुजे समाज नहीं आएगी और उन्हें क्या ले जाना ह साथ मई मुझे अचे से पता ह” इतना कह शिवानी ने हाथ मई लिया गिलास साथ लिया और पैकिंग के लिए चली गयी ….करीब 15 मिनट बाद हे दूर बेल्ल रिंग huvi….aur कविता जल्दी से मनीषा के पास चिपक गयीईइ …
पूनम “मैं दूर खोलती हु”
सबके सबकी निघाये दूर पर हे थी….
पूनम के दूर खोलते हे…
सोनाली “ अरे तुम यंहा तुम्हारे तोह एग्जाम चल रहे ह न”
पूनम साइड हैट ते हुवे “दी चल नहीं रहे ह परसो से सुरु होंगे इसलिए आज हम सभी यंहा आगयेनपार्टी करने”
सोनाली अंदर देखते हुवे सीरियस हुवी फिर नार्मल हो गयी ….और सबकी तरफ देखा और मनीषा के गले मिली और बाकी सबको प्यार से ही कहा सिवाए कविता को छोड़ कर….
सोनाली कविता se“ab आपको क्या हुवा ह ापकचहरा क्यों उतरा हुवा ह”
कविता के दिमाग मई तिकड़म आयी और वो boli“bhai ने मेरा कार्ड ब्लॉक करवा दिया ह माँ पैसे नहीं दे रही ह मुझे आपका डेबिट कार्ड दीजिये …..”
सोनाली पास बैठते हुवे “तोह अब अपने क्या सररत की ह जो कार्ड ब्लॉक कर दिया ह जबकि आपको जंहा तक मुझे पता ह मंथ की 1 लाख पॉकेट मनी मिलती ह जो की जायदा ह”
कविता “वो मैंने खर्च कर दिए अब आपका कार्ड चलिए मुझे दीजिये जल्दी से “
सोनाली ने पॉकेट से वॉलेट निकलकर एक डेबिट कार्ड उसे दे दिया और बोली “देख कतई हम लड़कियों की एक जिम्मेदारी बिरथ के साथ हे अति ह और वो हो घर मई पैसा को सही से उसे करना उन्हें भड़ाना bachana…..bus ये हमेशा याद रखना ……बस बेवजह मत खर्च करना और जरुरत ह तोह दस लाख खर्च करो पर बेवजह मत udana…aur है मेरे लिए भी कुछ एक लैपटॉप बैग ाचा सा ले लेना ….बाकी तुम एन्जॉय करो मुझे अभी फ्लाइट लेनी ह वर्ण साथ पार्टी करते पूनम देखना कोई जायदा नहीं piye…ap कुटी खासकर इधर उधर नहीं जाना ह ok..ab मैं चलती हु bye…enjoy पार्टी”
सोनाली चली गयी तब सबकी जान मई जान आयी…
रजनी “वो कितनी कैरिंग ह ये तोह और तुम कह रही थी हिटलर ह ….”
मनीषा “हम्म्म चलो डिनर करते ह”
शिवानी “अरे मेरी तोप्पेर्स आज पार्टी करलो यार वर्ण तुम आती कान्हा हो मुझे हे आना पड़ता ह मेरी परियो के पास टाइम कान्हा होता ह मेरे लिए तुम सबके पास”
पूनम “मेरी स्वीट सीस मैं आउंगी न पेपर ख़तम होते हे आपके pass…aur खूब दिन रहूंगी हम साथ हे मेरे गाँव चलेंगे खूब मजे करेंगे”
अनु कविता “हम भी चलेंगी”
पूनम है बिलकुल जरूर जरूर….
…
वंही ….शिमला ….
राज ….कप्तान सिंघानिया और उनकी वाइफ के पास बैठा हुवा था..
राज… “आप एक काम करेंगे मेरा..”
कप्तान “राज बीटा तुम बस बोलो”
राज “वो आश्रम से पीछे दूर एक झील ह उसके पास की जमीन चाहिए ह मुझे”
कप्तान “बीटा वो जमीन पहले हे बिक चुकी ह किसी ने बहुत ऊँचे पैसे देकर उस पूरी जमीन को खरीद लिया ह ाक्टुअलय मैंने वंहा होटल ओपन करने का प्लान किया था पर अब वो बिक चुकी ह किसी ने सर्कार को अचे पैसे दिए h….aur जिसने ये किया ह वो काफी पहुंच वाला लगता ह कोई रिकार्ड्स नहीं ह उसके हमरे पास पर तुम कहो तोह मैं पता करवौ”
राज ने एक गहरी सांस ली …उसके चेहरे पर मायूसी साफ़ देखि जा सकती thi…kyoki उसके अतीत के बहुत बेहतरीन पल वंहा बाईट थे आज भी दिन मई वो उसी जंगल मई बने झरने के किनारे अकेला काफी दिएर बैठा रहा था…
कप्तान “क्या हुवा राज”
राज “कुछ nahiiii….chodiye उस जमीन ko…..chaliye खाना कहते ह …कल मुझे भी मुम्बई के लिए निकलना ह”
कप्तान “मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी ह “
राज “है बोलिये न”
कप्तान “3 दिन पहले दीपिका के रिश्ते के लिए दिल्ली से होम मिनिस्टर ए थे….”
राज ने जब ये सुना तोह चौंक गया
कप्तान सिंघानिया आगे बोले “उनका लड़का राहुल तुम्हे सायद होगा ….वो ाचा लड़का ह और उन्हें दीपिका पसंद ह …”
राज “क्या दी को वो लड़का पसंद ह”
कप्तान “हां वो एक दूसरे को पसंद करते ह और दीपिका की भी हां ह तुम क्या सोचते ह”
राज की आँखों मई एक खली पैन सा आगया और उसने कुछ पल बाद कहा “सुनील को पता ह सब”
कप्तान “हां उसे पता ह”
राज “आप बड़ो को जैसा तीख lage….dii को पसंद ह तोह मुझे भी पसंद h….chaliye डिनर करते ह सुभे जल्दी जाना भी ह”
कप्तान “तीख ह चलो”
खाना कहते वक़्त राज ने कुछ नहीं कहा बस कप्तान और उनकी वाइफ के पूछने पर हे थोड़ा बहुत जवाब देता रहा ….थोड़ा सा खाना खा कर वो अपने रूम मई agaya….uske दिल मई क्या हलचल चल रही थी ये वो न जाता पा रहा था और न सह पा रहा tha….wo खिड़की के पास पड़ी चेयर पर बैठ गया और बहार की तरफ देखने लगा …..और कितनी हे दिएर वो बिना पालक झपकाए बहार देखता रहा उसे भी नहीं पता लगा फिर अपना मोबाइल निकल लिया और पुराणी पिक्स देखने लगा ……और ऐसे हे सोचते सोचते वंही वो गहरी नींद मई सो गया…..
नेक्स्ट डे ….पुणे….
दिव्या “यस हमारी टीम देहरादून नैनीताल ऑलमोस्ट साडी जगह कवर करेगी और अप्प्रोक्स 100 विल्लगेस को कवर करेगी”
मिनिस्टर “हमारी तरफ से आपको पूरा सपोर्ट रहेगा दिव्या ji…heemachal से चीफ मिनिस्टर साब का भी कॉल आगया था आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे”
दिव्या “थैंक यू सो मच”
मिनिस्टर “थैंक यू आपका ह जो विद्या ग्रुप्स का हॉस्पिटल हमारे स्टेट मई ारः ह ….आपको हम बेस्ट से बेस्ट लैंड प्रोवाइड करवाएंगे …..”
दिव्या “तीख ह ….हमारी टीम नेक्स्ट मंथ आरही ह आपके स्टेट लोकेशन फाइनल करके आपसे मीटिंग करेंगे….”
दोनों की औपचारिक बात होने के बाद …
विद्या “ऋचा एव्री थिंग दोने”
ऋचा “है माँ”
दिव्या के चेहरे पर मुस्कान आगयी फिर अचानक उसे कुछ याद आया और वो बोली “ये लो जो तुमने कहा था हो गया ह ह ये मेरी तरफ से तुम्हारा लिए gift”itna कह उसने एक डॉक्यूमेंट फाइल ऋचा को दे दी”
ऋचा हैरानी और कन्फूसिओं से दिव्या को देखने लगी तोह..
दिव्या “पहले देख तोह लो सब पता चल जायेगा…”
ऋचा ने जैसे हे वो फाइल ओपन करि और वो फाइल देखते हुवे आगे पेज पलट ते हूवर आगे बढ़ी तोह उसका चेहरा खुसी और आंसुओ से भीगता गया और वो तुरंत दिव्या के गले लग कर फुट फुट कर रो पड़ी…
दिव्या “क्या हुवा मेरी बची तुम्हे पसंद नहीं आया “
ऋचा “नहीं maa…muje बहुत पसंद aya…ye मेरा वो सपना ह जो मैं पूरा होते देखना चाहती हु ये मेरे सपनो का घर ह maa…thank थैंक यू सो मच माँ पर इस जगह को तोह पापा भी नहीं खरीद पाए थे तोह फिर आप”
दिव्या “क्योकि हम विद्या ग्रुप h….aur हमारा एक बार हे थोड़ा सा कहना सामने वाले के लिए अचीवमेंट के बराबर ह हमारा एक हॉस्पिटल वंहा भी खुलेगा इतना कहना था और बस मंत्री जी खुस हो गए “
ऋचा “थैंक यू सो मच”
दिव्या “अरे no इमोशनल …चलो अभी हमे सिक्योरिटी के लिए भी मीटिंग अटेंड करनी ह टाइम नहीं बिलकुल भी हमारे पास “
ऋचा मुस्कराकर “यस मम “
दिव्या को भी हंसी agayi….aur दोनों को किसी जवान माँ बेटी की तरह साथ साथ एक दूसरे को पकडे चलने लगी …….
वंही सुभे सुभे …मनीषा के घर घमासान मचा हुवा था…
रंजन “क्या मैंने तुम्हे रोका ह कभी भी सिर्फ इतना हे कहा ह की तुम्हे इन्फॉर्म करना चाहिए था”
मनीषा “मैं शिवानी मम के साथ थी न “
रंजन “तोह क्या तुम्हारी जवाबदारी नहीं ह”
मनीषा “आज ये जवाबदारी कैसे जग गयी इतने दिन कान्हा थी “
कविता “अंकल हम”
अभी उसने इतना हे कहा था की …रंजन गुसाई से बोलै “तुम चुप रहो मैनर्स नहीं ह tumhe…yahi सीखा ह तुमने “
मनीषा गुसाई से“ उसे दुबारा भूल कर भी कुछ कह मत देना आप”
मनीषा माँ “मनीषा चुप्प्प”
मनीषा “आप इन्हे कुछ क्यों नहीं कहती ह”
मनीषा माँ “क्योली वो सही ह और तुम गलत हो और ऊपर से तुम बहस कर रही हो सॉरी कहो “
मनीषा “मैं नहीं kahungi…itna कह वो कविता का हाथ पकड़कर ऊपर जाने लगी…”
रंजन “देखा तुमने आजकल ये सब सिख रही ह ye….juban लड़ना बिना बताये यंहा वंहा घूमना …रात को रुकना इसके पंख लग गए ह और दो आज़ादी देखली कैसे जाबांचालती ह अपनों से बड़ो के सामने”
मनीषा माँ “शांत हो जाईये मैं बात करुँगी उससे”
रंजन “अगर इसने यही रवईया रखा तोह मैं इसे टूर पर नहीं जाने दूंगा और कॉलेज भी ..पता नहीं कैसे अवरो की सांगत मई पद गयी ह” इतना कह वो वंहा से चला गया और पीछे दोनों बाप बेटी के बिच मई पीसी हुवी मनीषा की माँ अकेली रह गयी ….फिर कुछ सोच कर उसने दो कफ बनायीं और मनीषा के रूम की तरफ जाने लगी…
तोह मनीषा अपने रूम मई गुसाई से उबाल रही थी….
कविता मनीषा के साइड से हुग करती हुवी boli“hey भगवान् आपको इतना गुसा भी अत ह …मुझे तोह आज पता लगा”
मनीषा “सॉरी कुटी मेरी वजह से तुजे भी फालतू मई सुन्ना पद गया”
कविता “आप भी न ….उनका गुसा होना जायज ह न …हमने हे बताया नहीं था”
मनीषा “कुटी क्या हम कंही दूसरी जगह थे …बता मुझे ..क्या किसी लड़को के साथ थे hum….ya सड़को पर या और लड़कियों की तरह पब मई थे …….नहीं न …शिवानी दी रिश्ते से मेरी नानन्द लगती ह पूनम भी और तुम दोनों तोह हो हे मेरी …फिर इतना गुसा क्यों …”
कविता “तीख ह न हम उन्हें बता देंगे …अगर इसे वो खुस ह तोह यही सही …अब प्लीज प्लीज न हंस दीजिये न आप स्वीट सी हे अछि लगती हो फाइटर वाली सकल से मुझे भी दर लगता ह”
बहार से अति हुवी मनीषा की माँ “बिलकुल सही कहा कविता ne…hume फिक्र होती ह तुम्हारी बेटी ….और ये तुम दोनों के भले के लिए हे कहा था”
मनीषा “आपका समाज अत ह पर उन्हें आजकल क्यों दिलचस्पी होने लगी क्या इसलिए क्योकि उनका दामाद सिंह ग्रुप ऑफ़ ग्रुप का मालिक बन गया ह”
मनीषा माँ गुसाई से “manishaaa…behave योर सेल्फ”
मनीषा ये सुनकर धयान से अपनी माँ को देखने लगी…… और उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान आगयी और उसने अपना मू फेर लिया…
मनीषा की माँ को भी सडनली रीलीज़ हुवा और उन्होंने कुछ कहना चाहा तोह…
मनीषा “कुटी मैं नाहा लेती हु फिर कॉलेज जाना ह तुम भी रेडी हो jao”itna कह वो उठकर चली गयी पीछे मनीषा माँ और कविता रह गयी…
कविता “मैं बात करुँगी …आप परेशां मत होईये”
म माँ ने गर्दन है मई हिलायी और वापस दुखी मन से निचे चली गयी जंहा रंजन सोफे पर नेव्स्पपार पढ़ रहा था….
म माँ “आप थोड़ा अपना गुसा भी कब्बू रखा कीजिये जवान बेटी ह …यही उम्र ह उसके बिगड़ने और समझने की”
रंजन “मुझे नहीं उसे समझने की जरुरत ह ….वैसे आजकल वो राज नहीं नज़र अत ह इनके साथ”
मनीषा माँ “वो तोह पहले भी काम हे अत था…”
रंजन “जोगिन्दर का गोद लिया हुवा बीटा ह और सिंह ग्रुप का मालिक कुछ सही नहीं लग रहा ह ….वैसे ठाकुर साब …को वो दादाजी कह रहा था मैं आज तक कुछ समाज नहीं पाया हु”
मनीषा माँ “वो क्या वो जोगिन्दर के पिता ह और वो उनके साथ नहीं रहते ह …उनकी गाँव मई खानदानी जमीन ह वो वही सँभालते ह”
रंजन की आँखों मई शातिर चमक आगयी और बोलै “कौनसा गाँव”
मनीषा माँ “आप भी न वैसे भी शादी वो गाँव मई हे करेंगे तब देख लीजियेगा अचे से”
रंजन “अरे बताओ न आखिर बेटी ह हमारी थोड़ी खोजबीन तोह कर हे लेनी चाहिए हमे भी …पता लगा लोग कहेंगे की रंजन ने अपनी बेटी पैसो मई बछड़ी …”
म माँ “बताया तोह था मनीषा एक बार गाँव का नाम …maanva…manora….yaad नहीं ारः ह…”
रंजन पुरे फोकस से सून रहा था …जैसे उसकी लोटरी लगने वाली हो …वो बोलै “याद करो याद आजायेगा”
मनीषा माँ “म से स्टार्ट था है याद आया mandawa…ha यही नाम था पर जगह कौनसी ये मैंने पूछा नहीं था कहो तोह पुछु.”
रंजन “नहीं नहीं इसकी जरुरत नहीं बाकि मैं पता कर लूंगा”
और रंजन को वो मिल गया जो वो चाहता था….
म माँ “ाचा ये सब छोड़ो अब आप उसे कुछ मत कहना”
रंजन “बिलकुल भी नहीं कहूंगा वैसे भी कल मई कप्तान जी से मिलने जा रहा हु उन्होंने बुलाया ह अपनी बेटी के लिए रिश्ता देखा ह “
म माँ “ ये तोह बहुत अछि बात ह”
रंजन “बिलकुल ख़ुशी का मौका ह तीख ह मैं काम से बहार जा रहा हु ….रात को हे aunga…shamko ाचा सा बना लेना “
रंजन तैयार हुवा और अपने बॉडी गॉर्डस के साथ निकल gaya…..aur अपने बेस पर पहुंच कर …. “जल्दी से मंडावा नाम से नार्थ मई जितने भी गाँव ह उनको धुंध निकालो…”
सामने से “जी बॉस”
और कुछ हे पल मई बड़े से प्रोजेक्टर पर आया “मंडावा विलेज 29 कम अवे फ्रॉम झुंझुनूं”
रंजन “तोह तुम राजस्थान से हो फर्क सिर्फ इतना ह की वो उदयपुर से tha….muje लगा की तुम दिल्ली से होंगे अचानक उसके माथे पर साल पद गए और वो bola…kya ऐसा हो सकता ह”
रंजन बुरी तरह शॉक हो गया ….और उसके सर मई तेज़ दर्द उठ gaya…usne तुरंत गिलास उठाकर पानी पिया और कुढ़ से हे बोलै “नहीं ऐसा नहीं हो सकता ह …विद्या के सिवये सब मरे गए थे उस दिन ….और सहदेव का उन ताकतों से बचना नामुकिन tha…main ु हे दर रहा हु …ये तोह ाचा ह की मां के नाम से मुझे अब कोई नहीं जनता ह फिर मुझे इतनी बेचैनी क्यों हो रही h….muje और डिटेल जानी होगी ….पर कैसे कैसे…..” अचानक उसके चेहरे पर गहरी मुस्कान आगयीईइ “मिल गया कप्तान सिंह दिल्ली जायेंगे हे उनको हे कहूंगा आखिर मन वो कर नहीं पाएंगे है है है रंजन तू तोह अब और चालक हो गया ह ”इतना सोचते हुवे उसने अगले दिन की हिमाचल की फ्लाइट टिकट बुक करवा दी
वंही इन सब बातो से अनजान….
राज “डॉ आप अचे से चेक कर लीजिये क्योकि मुझे पता ह मेरे पास से जाने के बाद कई जगह पर आपको रिपोर्ट देनी h…aur है ओने थिंग मेरी बॉडी की राइट सिचुएशन मुझे बताईयेगा ….वो बिलकुल नहीं जो आपको मेरी माँ बताने को कहती ह”
डॉ के चेहरे पर शर्मिंदगी आगयी और बोलै “राज आप समाज सकते ह मेरे पास आपकी तबियत के लिए अलग लग जगह से 6,7 कॉल आते हिज जिसमे लगभग सरे फ्रेमलेस के हे होते ह …खैर 15 मिनिट रुकिए बस आपका सराय अजय बस…
15 मिनट बाद ..
डॉ “राज आपके घाव रिकवर हो चुके ह पर पसलिया अभी रिकवर हो रही ह उसे टाइम lagega…isliye एक मंथ बाद आप पूरी तरह फ़ीट होंगे …आपकी जितनी इंजरी थी उतने मई नार्मल पर्सन 8 मोनथस तक रिकवर करता रहता ह पर आप 2 मोनथस मई पूरी तरह खड़े हो और देखिये 75 परसेंट तक रिकवर भी हो चुके ह बस थोड़े समय और धयान रखियेगा”
राज “थैंक यू डॉ हमारी ये आखिरी विजिट ह मैं चलता हु “
इतना कह वो बहार निकल गया और बहार निकलते हे उसका चेहरा चेहरा जो अंदर नार्मल था वो बिलकुल इमोशन लेस्स हो गया …..
वंही …दिल्ली..
चीफ “अरे औ बेटी तुम तोह भूल गयी”
सोनाली “सर”
चीफ “फर्स्ट ऑफ़ आल बधाई हो अब तुम्हे माँ की चिंता नहीं रहेगी …आखिर वो तुम्हारे ससुराल जो पहुंच गयी ह…”
सोनाली “है सर दादाजी उन्हें अपने साथ ले ए ह मैं बहुत खुस हु”
चीफ “अब तोह यकीन हुवा ठाकुर साब तुम्हे अपनी बहु मान चुके ह”
सोनाली “जी सर”
चीफ “डोंट वोर्री राज भी एग्री हो जायेगा खैर ये सब छोड़ो …तुमने जो मुझसे कहा था मैंने वो साडी जानकारी कलेक्ट कर्ली h…meeting रूम मई चलो….” दोनों साथ मीटिंग रूम की तरफ जाने लगे और मीटिंग रूम मई पहुंचकर “ ये मां नाम का शख्स आज से 17 ,18 साल पहले के करीब एक तेज़ तरार आदमी था जिसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड तोह नहीं ह पर वो हर 2 नंबर के काम मई शामिल हुवा करता था …जैसे ..2 पार्टी को इनफार्मेशन देकर पैसा कामना …आदमी अर्रंगे करना …हथियार की डील करवाना ेट्स उस समय ये शख्स सहदेव सिंह के संपर्क मई आया tha….aur इसका रिकॉर्ड बंगलोरे के एक पुलिस स्टेशन मई मिला ह जंहा इसको छुड़वाने सहदेव और नरपत सिंह खुद गए थे …ये देखो रिकार्ड्स…”
सोनाली “सर इस मां की कोई फोटो नहीं ह क्या”
चीफ है ये रही ….
सोनाली ने फोटो की तरफ हाथ भदया और उसे अपनी बड़ी बड़ी आँखों से घर कर देखने लगी……
आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का…
प्लानिंग …
11 उपदटेस तू लेफ्ट फॉर डेड एन्ड
रजनी ….. “सच मई इतनी साडी shopping…tum लड़किया भी थका दिया मुझे तोह”
अनु “मम आप भी एक ब्लैक कलर मई और ब्लू साड़ी और साथ मई जीन्स और टॉप ले लीजिये ….क्या पता कोई आपको भी बेहद खास मिल जाये वैसे तोह कॉलेज का तोह हर लड़का आपके पीछे लार टपकाते ह कितने हे जवान दिलो की धड़कन हो आप”
अनु की बात सुनकर साडी एक साथ हंस पड़ी…
रजनी “आने दे राज को पहले उसे कहकर तेरे लिए हे धुंधवती ह बेहद खास बहुत बाते अति ह”
कविता “ाचा मुझे एक ब्लू जीन्स और टॉप परचेस करना ह और वंहा रात को पहनने के लिए एक लॉन्ग स्कर्ट और टॉप भी”
पूनम “कुटी कितना खरीदेगी “
मनीषा धीरे से पूनम के कान mai“Tu भी कोई अछि सी ड्रेस खरीदले वंहा रात को पास आने का क्या पता मौका मिल जाये मैं पूरी कोसिस करुँगी अपनी तरफ se….waise मेरा देवर थोड़ा शाक्त ह पर मैं तेरी साइड hu…is बार अपनी बांहो की गिरफ्त मई कास हे लेना”
पूनम मनीषा की बात सुनकर शर्माने लगी …तभी उसकी नज़र सामने padii….aur वो बोली “अरे ये तोह मर अपूर्व सिंह ह यंहा कैसे”
रजनी ने तुरंत सामने देखा और उसकी आंखे सिकुड़ गयी…
रजनी “रात को इस वक़्त माल मई …. हमारा पीछा तोह नहीं कर रहा ह”
कविता “मम आपके तोह जलवे ह”
रजनी ने घूर कर कविता को देखा..
पूनम “मैं अभी अति हु”
इतना कह वो सीधे अपूर्व सिंह के पास आगयी.. “हीई”
अपने पीछे से मीठी सी आवाज सुनकर अपूर्व जो फॉर्मल ट्राउज़र देख रहा था पलट गया … “ओह्ह्ह मिस पूनम आप यंहा “
पूनम “शामे क्वेश्चन मेरा ह आप इतने बिजी सचेडूले से फ्री होकर शॉपिंग कर रहे ह”
अपूर्व “ओह्ह no no …एक्चुअली फॉर्मल्स लेने आया था टूर के लिए बाद मई टाइम मिले या न mile…aur ी थिंक आप भी इसीलिए आयी ह यंहा पर अकेले ख़ूबसूरत लड़कियों को अकेले नहीं घूमना चाहिए ह”
पूनम “no अपूर्व सर वो देखिये सभी हे ह वैसे िफ़ यू डोंट मंद मई ी आस्क यू समथिंग”
अपूर्व “no फोर्मलटीएस आस्क फ्रीली“
पूनम “आपको कैसी लड़की पसंद ह ी मैं लड़का लड़की मई क्या देख कर इंटरैक्ट होता ह”
अपूर्व मुस्कराने लगा और सोचकर बोलै“ वैसे तोह बहुत सी बाते होती ह पर देपेंद करता ह पर्सन तो person…jaise अगर मैं मेरे बारे मई बास्त करू तोह मुझे गफ बनानी हो तोह थोड़ी मोर्डर्न थोड़ी स्टाइलिश ….educated…beautifull इन लुकिंग ये सब देखूंगा”
पूनम “और वाइफ चाहिए हो तोह”
अपूर्व “ तोह फिर जस्ट लिखे यू सिंपल मोर्डर्न काइंड hearted….cairing एंड वेल एडुकेटेड क्योकि जिंदगी मई साथ के लिए ये सब बहुत जरुरी होता h…har लड़का एक ऐसी लड़की चाहता ह जो बस उसे थोड़ा सा समझे जब उसे उसके सपोर्ट की जरुरत हो उसके साथ कड़ी रहे इसे जायदा दुनिया का कोई भी लड़का आदमी अपने पार्टनर से नहीं चाहता ह ी होप जो आप जानना च रही थी जान गयी होंगी”
पूनम अपूर्व की बात सुनकर मंद मंद मुस्कुराते हुवे शर्माने लगी …और फिर बोली…
पूनम “वैसे आप पर ब्लू कलर जायदा ाचा लगेगा एंड थैंक यू मुझे मेरा जवाब मिल गया”
दूर से चारो देखती हुवी सोच रही थी की ये क्या कर रही h….aur अपूर्व से इतना मुस्कुरा मुस्कुरा कर बात क्यों कर रही ह….
मनीषा मन मई “अब इसे क्या हो गया ह”
अनु “अकेले अकेले मज़े मार रही ह पूनम”
कविता “छोड़ न बेब ….चिल कर एक बार हंस दू तोह लाइन लग जाएगी हूउउउउ….
रजनी “कविता”
मनीषा “इसे छोड़ो वो देखो वो आरही ह वापस चलो चलते ह”
रजनी एते हे सवाल पूछ पड़ी “क्या बाते हो रही थी उसे हंस हंस कर”
पूनम “पूछ रही थी की मेरी मम सिंगल ह मिंगले मिंगले करोगे “
पूनम की बात सून सरे उसे देखने लगे ….
पूनम are“kuch नहीं ऐसे हे नार्मल बाते हुवी thi….”chalo मुझे कुछ ड्रेसेस परचेस करनी ह
कविता कान मई “भाभी ….क्या हो रहा ह ये sab…muje डाउट हो रहा ह”
पूनम उसके कान मरोड़ते हुवे काम दिमाग लगाया kar…kuch भी उल्टा पुल्टा सोचती रहती ह ….
मनीषा “है आज कल इसका दिमाग कुछ जायदा हे चलने लगा ह इधर उधर हुवी तोह टंगे तोड़ दूंगी “
पूनम “ाचा अब तोह houngi”itna कह उसने मनीषा को जइब दिखा दी
रजनी “छोड़ो वो देखो उसमे चलते ह उसमे कलेक्शन बहुत अचे मिलते ह”
सभी “ओह्ह्ह ho….matlb किसी पर बिजली गिरने वाली ह जल्दी हे मम को सब पता ह कान्हा क्या मिलता ह”
रजनी मन हे मन तोह खुस हुवी पर बहार से कुछ जाहिर नहीं होने दिया आखिर बिजली राज पर हे गिराने की कोसिस कर रही थी पर वो भी क्या करे राज ह जो पास रात को सोकर भी कुछ नहीं कर रहा था …उसने तोह कुछ दिन पहले हे दुल्हन का जोड़ा भी ले लिया था ताकि राज के साथ दुल्हन की तरह तैयार होकर वो अपना कौमार्य राज को देकर उसे अपनी रूह मई बसा लेगी….
पूनम “क्या सोच रही ह आप”
रजनी “नहहहिं कुउछ भी तोह नहीं …चलो chalo…phir डिनर भी करना ह “
मनीषा “वैसे पढ़ाई पूरी ह क्यों न थोड़ीई”
रजनी “तोह फिर खाना पैक करा कर घर हे चलते ह”
मनीषा पर कान्हा मेरे घर पापा ह …और पूनम के घर मेरे फ्यूचर ससुर पापा ह …
रजनी “मेरे घर पर राज ने किसी को भी लेन से मन किया ह अब क्या करे राज के फ्लैट पर चले..”
कविता “चिल करो मैं शिवानी मम को कॉल करती हु उनसे बेस्ट कौन ह उनके पास हर प्रॉब्लम का सलूशन होता ह और वैसे भी हम सब पूनम दी के पास रुकने वाले ह अब शिवानी मम के पास रूक जायेंगे”
पूनम “पर उनके साथ सोनाली दी होंगी न”
कविता “ अभी पता चल जायेगा कॉल लग गयी ह साइलेंट raho….Hello मम क्या कर रही हो क्या हिटलर भी ह क्या आपके पास “
शिवानी “कुटी किसी दिन पिटेगी अगर तेरी बाते उन्होंने सूली toh…kaam बोल अभी अभी घर आयी हु यार बहुत थकी हुवी हु ”
कविता “तोह फिर हम आरही ह खाना पैक करके आप बस रेड वाइन और वोडका मंगलो “
शिवानी “सब पड़ी ह यंहा तुम ाजाओ जब तक मैं कुछ स्नैक्स रेडी कर लेती हु”
कॉल डिसकनेक्ट होते हे..
कविता “बेब्स ओने ऑवर ह हमारे पास लेटस फिनिश थे वर्क”
वंही दूर से अपूर्व देखते हुवे “8 बॉडी गॉर्ड…..4 अंडरग्राउंड पार्किंग मई और साथ मई 2 स्निप्पेर bhi….aur ये मॉल मई ये घूम रहे अलग से लोग 100 परसेंट पोलिसवाले h….akhir इतनी सिक्योरिटी क्यों ह तुम्हारे साथ क्या राज़ छिपा रहे हो तुम सब मिलकर….. और वो लड़का क्यों नहीं दिख रहा ह तुम्हारे साथ कोई बात nahii….dheere धीरे तुम सब bataogi….ye साडी सिक्योरिटी भी तुम्हारी अधूरी रह जाएगी जिस दिन मेरा शक यकीन मई बदल gaya……par बहुत मज़ा आएगा मुझे सोच कर हे मज़ा रहा ह की किसी बचाएगा वो तुम्हे तुम्हे तुम्हे या तुम्हे….”
तभी अपूर्व के मोबाइल पर रिंग आयी…
अपूर्व “हां मां बोल”
सामने से “रंजन हे तीख ह”
अपूर्व “तू जनता ह न मैं कौन हु और किसका राइट हैंड हु फिर भी अकड़ “
रंजन “देखो मेरे कहने का मतलब ह वो मेरा अतीत ह …मैं नहीं चाहता हु की अतीत का कोई भी सच या शख्स मेरे सामने ए …तुम नहीं जानते हो वो बहुत खतरनाक लोग थे जिनके साथ मई था”
अपूर्व “किसलिए कॉल किया ये बताओ “
रंजन “मैं जब जब उस छोकरे को देखता हु मुझे अतीत के किसी शख्स की याद अति ह कैसे भी उसे ख़तम कार्डो ….वैसे भी उस छोकरे को मरने के चक्कर मई विक्टर निर्वाण से भीड़ गया था और फिर बेवजह मारा गया ….न वो निर्वाण को मार पाए न इस छोकरे राज ko…upar से ये मेरे दामाद सुनील सिंघानिया का मू बोलै भाई भी h…tumhe इस हर हाल मई मरना हे होगा”
अपूर्व सिंह मन मई “चुटिया समाज रहा ह क्या इसे नहीं पता ह की ये सभी लोग डेथ हेलो के भाई को मरने मई शामिल थे ….और ये सभी हे मरेंगे शादी के सपने हे देख तू” अपूर्व बोलै “रंजन जायदा सपने कभी कभी पुरे नहीं होते ह इसलिए काम सपने देखने चाहिए ह वैसे तेरी बेटी से पूछ जरा वो छोकरा कॉलेज क्यों नहीं ारः ह उसे कुछ भी पता चले तोह बता मुझे ….मतलब ऐसा जो मेरे काम का ho….thoda घर रूक उसकी निगरानी रख कुछ न कुछ जरूर मिलेगा काम का समझा …”
रंजन “पर तुम उसे आसानी से मार सकते हो”
अपूर्व “ठन्डे दिमाग से सोच रंजन जिस लड़के को अंडरवर्ल्ड के एक से बढ़कर एक खूंखार गुंडे नहीं मार पाए उसे तू ऐसे हे मार लेगा ….सोच सोच दिमाग चला तुझे समाज ayega….pahle मुझे तुजे कुछ समझने दे ….तुझे पता ह तेरी बेटी के पीछे 10 टॉप के बॉडी गॉर्ड घूमते ह और कई पुलिस वाले भी ….और एक बात तेरी बेटी जैसी दिखती ह वैसी वो ह nahi…thoda बाहरवालियो से जायदा घर पर धयान दे समाज आजाएगस”
रंजन कुछ बोल हे नहीं पाया अपूर्व के सामने उसका दिमाग इस सोच मई था दस बॉडी गॉर्ड पर उसे तोह कोई भी दिखाई नहीं दिए the….sivaye कुछ पुलिस वालो के जिसे शिवानी ने लगाया था …उसका दिमाग सोच मई पढ़ गया और उसने अपने कुछ खास आदमियों को इस काम पर lagaya…..taaki सच जान सके….
2 ऑवर बाद
सीक्रेट प्लेस…
एक काळा कपडे पहने शख्स… “यंग मास्टर डेथ हेलो …अपने जिन फाइटर को बुलाया था उनमे से 4 को अपूर्व सिंह के पास भेज दिया ह और 2ड्राइवर्स की जगह ले lenge…..baaki सब यही ह हमारे पास बस ये आखरी 10 किलर्स हे बचे ह यंहा बाकी सब अपने काम पर ह…
डेथ हेलो जो हमेशा की तरह मास्क पहन कर शांति से बैठा हुवा था उसने कोई जवाब नहीं diya…aisa लगा जैसे वो गहरी सोच मई था ….फिर कुछ दिएर बाद वो बोलै … “अपूर्व को कहना की इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिए ह अगर वो लड़का निर्वाण से जुड़ा ह तोह मुझे बताये वर्ण उसे जो तीख लगे वो करे …मुझे फिर ये सहर छोड़ आगे जाना ह जंहा मुझे स्कॉर्पियन ट्राइब ज्वाइन करके और पॉवरफुल बनकर मेरे मास्टर का सपना पूरा करना ह….”
काळा कपड़ो वाला “ मास्टर क्या हम भी आपके साथ जायेंगे “
डेथ हेलो “तुम्हारी ताकत उनके सामने कुछ नहीं ह ….इस दुनिया मई बहुत कुछ ऐसा ह जिसके बारे मई तुम सोच भी नहीं सकते हो उनका अस्तित्व दुनिया मई कई सालो से ह पर जिसने उन्हें देखा वो मरे gaye…..wo इस दुनिया मई होकर भी नहीं ह इसलिए भूल jao…ab तुम जा सकते हो …और उसके जाने के बाद वो खुद से हे bola…..ye तय ह अब और चूहे बिल्ली का खेल नहीं होगा बस बहुत हो गया ह जाने से पहले तेरी मौत की तारिक लिखता हुवा जाऊंगा”
Wanhi….same टाइम शिवानी के बंगलो पर….
शिवानी “सोनाली दी बिजी ह अभी “
पूनम “अगर मैं गलत नहीं हु तोह पक्का वो किसी को पिट रही होंगी या पीटने गयी होंगी”
शिवानी “है पूनम वो इस बार एक सीबीआई वाली की धुलाई करने गयी ह उन्हें उसके खिलाफ प्रूफ मिल गया ह जो अज्जू ने दिया ह बीच मुझे धमका रही thi….bitch भूल गयी की मेरे पास ग्रेनेड टैंक मिसाइल सब ह बस अभी ग्रांडे का हे उसे किया ह ….और ट्रस्ट में सोनाली दी का टार्चर बहुत बहुत भयानक होता ह”
कविता जल्दी से “मुझे पता ह श्वेता ने बताया था मुझे”
शिवानी “तोह मेरी कुटी दूर हे रहना खासकर तू और श्वेता क्योकि तुम दोनों हे उनसे पन्गा लेती हो”
कविता “डरे और हम श्वेता और कविता के आगे सब की बोलती बंद हो जाती ह यकीं न हो तोह अभी आइस क्रीम मँगवॉ उनसे अभी लेकर आजाएंगी”
मनीषा “कुटी चढ़ गयी ह तुझे अब मत पीना क्यों याद कर रही ह ….सबकी क्लास लगा देगी अगर आगयी तोह”
रजनी “इतनी खतरनाक ह वो “
पूनम “नहीं मम वो सबसे बड़ी ह इसलिए रेस्पोंसिबल ह वो नहीं चाहती ह की हम मई से कोई भी बिगड़े या गलत अडडे डाले …इसलिए दांत देती ह पर दिल से बहुत अछि ह “
कविता “ अरे अछि ह भयानक ह रक्षास भी उनका खूंखार रूप देखले तोह दर जाये अरे…… नंगा करके गरम आग पर पिछडे को भुन्ति ह ….कभी देखा ह पिछवाड़ा fry…..shweta ने देखा ह पिछडा फ्राई बबिता का”
कविता की बात सून सबके जिस्म मई झुरझुरी सी दौड़ गयीईइ…….
रजनी हे भगवन इतनी खतरनाक …
अनु और पूनम का मू भी खुला रह गया….
शिवानी “कविता शट उप वो बहुत अछि ह चलो मेरा तोह पेग खली हो गया ह एक नया बनाया जाये “
अनु पूनम तू नहीं पीयेगी …
मनीषा “ये पुरे सोल ह अनु ये टच भी नहीं करती ह बस हमारी ख़ुशी के लिए बैठी ह”
अनु “ाचा ह ाचा वर्ण सोनाली मम के नाम से रूह काँप रही थी अब माहौल हल्का होने दो यार क्यों डरा रही ho….kahte यमराज का नाम लो वो प्रकट हो जाता ह”
तभी शिवानी का मोबाइल जो सामने पड़ा था वो रिंग होने लगा और स्क्रीन की तरफ देख सब के चेहरे का रंग बदल gaya…aur सबकी आवाज सांस सब रूक सी गयी…….
कविता को सबसे जायदा दर लग रहा था …
शिवानी “स्स्स्सह्ह्हह्ह” इतना कह उसने कॉल उठाया तोह सामने से आवाज आयी…
“शिवनीय मेरा बैग पैक करदेना मैं आरही हु”
शिवानी “कितने दिन के लिए जा रही ह अपनीस बार”
सोनाली “एक मंथ के लिए दिल्ली जा रही हु चीफ सर ने बुलाया ह अर्जेंट ह मैं अति हु”
इतना कहकर कॉल कट कर दिया ….
वंही सबको सांप सूंग गया मनो …
शिवानी “अरे तुम सबको क्या हुवा ह ….वो बैग लेने आरही ह एक मंथ के लिए दिल्ली जा रही ह जरुरी काम ह “
कविता “मेरी बहन श्वेता तोह गयीईइ”
पूनम “आप बैठो मैं पैक करदेती हु”
शिवानी “अरे बैठ जा मैं कर दूंगी हमारी पैकिंग तुजे समाज नहीं आएगी और उन्हें क्या ले जाना ह साथ मई मुझे अचे से पता ह” इतना कह शिवानी ने हाथ मई लिया गिलास साथ लिया और पैकिंग के लिए चली गयी ….करीब 15 मिनट बाद हे दूर बेल्ल रिंग huvi….aur कविता जल्दी से मनीषा के पास चिपक गयीईइ …
पूनम “मैं दूर खोलती हु”
सबके सबकी निघाये दूर पर हे थी….
पूनम के दूर खोलते हे…
सोनाली “ अरे तुम यंहा तुम्हारे तोह एग्जाम चल रहे ह न”
पूनम साइड हैट ते हुवे “दी चल नहीं रहे ह परसो से सुरु होंगे इसलिए आज हम सभी यंहा आगयेनपार्टी करने”
सोनाली अंदर देखते हुवे सीरियस हुवी फिर नार्मल हो गयी ….और सबकी तरफ देखा और मनीषा के गले मिली और बाकी सबको प्यार से ही कहा सिवाए कविता को छोड़ कर….
सोनाली कविता se“ab आपको क्या हुवा ह ापकचहरा क्यों उतरा हुवा ह”
कविता के दिमाग मई तिकड़म आयी और वो boli“bhai ने मेरा कार्ड ब्लॉक करवा दिया ह माँ पैसे नहीं दे रही ह मुझे आपका डेबिट कार्ड दीजिये …..”
सोनाली पास बैठते हुवे “तोह अब अपने क्या सररत की ह जो कार्ड ब्लॉक कर दिया ह जबकि आपको जंहा तक मुझे पता ह मंथ की 1 लाख पॉकेट मनी मिलती ह जो की जायदा ह”
कविता “वो मैंने खर्च कर दिए अब आपका कार्ड चलिए मुझे दीजिये जल्दी से “
सोनाली ने पॉकेट से वॉलेट निकलकर एक डेबिट कार्ड उसे दे दिया और बोली “देख कतई हम लड़कियों की एक जिम्मेदारी बिरथ के साथ हे अति ह और वो हो घर मई पैसा को सही से उसे करना उन्हें भड़ाना bachana…..bus ये हमेशा याद रखना ……बस बेवजह मत खर्च करना और जरुरत ह तोह दस लाख खर्च करो पर बेवजह मत udana…aur है मेरे लिए भी कुछ एक लैपटॉप बैग ाचा सा ले लेना ….बाकी तुम एन्जॉय करो मुझे अभी फ्लाइट लेनी ह वर्ण साथ पार्टी करते पूनम देखना कोई जायदा नहीं piye…ap कुटी खासकर इधर उधर नहीं जाना ह ok..ab मैं चलती हु bye…enjoy पार्टी”
सोनाली चली गयी तब सबकी जान मई जान आयी…
रजनी “वो कितनी कैरिंग ह ये तोह और तुम कह रही थी हिटलर ह ….”
मनीषा “हम्म्म चलो डिनर करते ह”
शिवानी “अरे मेरी तोप्पेर्स आज पार्टी करलो यार वर्ण तुम आती कान्हा हो मुझे हे आना पड़ता ह मेरी परियो के पास टाइम कान्हा होता ह मेरे लिए तुम सबके पास”
पूनम “मेरी स्वीट सीस मैं आउंगी न पेपर ख़तम होते हे आपके pass…aur खूब दिन रहूंगी हम साथ हे मेरे गाँव चलेंगे खूब मजे करेंगे”
अनु कविता “हम भी चलेंगी”
पूनम है बिलकुल जरूर जरूर….
…
वंही ….शिमला ….
राज ….कप्तान सिंघानिया और उनकी वाइफ के पास बैठा हुवा था..
राज… “आप एक काम करेंगे मेरा..”
कप्तान “राज बीटा तुम बस बोलो”
राज “वो आश्रम से पीछे दूर एक झील ह उसके पास की जमीन चाहिए ह मुझे”
कप्तान “बीटा वो जमीन पहले हे बिक चुकी ह किसी ने बहुत ऊँचे पैसे देकर उस पूरी जमीन को खरीद लिया ह ाक्टुअलय मैंने वंहा होटल ओपन करने का प्लान किया था पर अब वो बिक चुकी ह किसी ने सर्कार को अचे पैसे दिए h….aur जिसने ये किया ह वो काफी पहुंच वाला लगता ह कोई रिकार्ड्स नहीं ह उसके हमरे पास पर तुम कहो तोह मैं पता करवौ”
राज ने एक गहरी सांस ली …उसके चेहरे पर मायूसी साफ़ देखि जा सकती thi…kyoki उसके अतीत के बहुत बेहतरीन पल वंहा बाईट थे आज भी दिन मई वो उसी जंगल मई बने झरने के किनारे अकेला काफी दिएर बैठा रहा था…
कप्तान “क्या हुवा राज”
राज “कुछ nahiiii….chodiye उस जमीन ko…..chaliye खाना कहते ह …कल मुझे भी मुम्बई के लिए निकलना ह”
कप्तान “मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी ह “
राज “है बोलिये न”
कप्तान “3 दिन पहले दीपिका के रिश्ते के लिए दिल्ली से होम मिनिस्टर ए थे….”
राज ने जब ये सुना तोह चौंक गया
कप्तान सिंघानिया आगे बोले “उनका लड़का राहुल तुम्हे सायद होगा ….वो ाचा लड़का ह और उन्हें दीपिका पसंद ह …”
राज “क्या दी को वो लड़का पसंद ह”
कप्तान “हां वो एक दूसरे को पसंद करते ह और दीपिका की भी हां ह तुम क्या सोचते ह”
राज की आँखों मई एक खली पैन सा आगया और उसने कुछ पल बाद कहा “सुनील को पता ह सब”
कप्तान “हां उसे पता ह”
राज “आप बड़ो को जैसा तीख lage….dii को पसंद ह तोह मुझे भी पसंद h….chaliye डिनर करते ह सुभे जल्दी जाना भी ह”
कप्तान “तीख ह चलो”
खाना कहते वक़्त राज ने कुछ नहीं कहा बस कप्तान और उनकी वाइफ के पूछने पर हे थोड़ा बहुत जवाब देता रहा ….थोड़ा सा खाना खा कर वो अपने रूम मई agaya….uske दिल मई क्या हलचल चल रही थी ये वो न जाता पा रहा था और न सह पा रहा tha….wo खिड़की के पास पड़ी चेयर पर बैठ गया और बहार की तरफ देखने लगा …..और कितनी हे दिएर वो बिना पालक झपकाए बहार देखता रहा उसे भी नहीं पता लगा फिर अपना मोबाइल निकल लिया और पुराणी पिक्स देखने लगा ……और ऐसे हे सोचते सोचते वंही वो गहरी नींद मई सो गया…..
नेक्स्ट डे ….पुणे….
दिव्या “यस हमारी टीम देहरादून नैनीताल ऑलमोस्ट साडी जगह कवर करेगी और अप्प्रोक्स 100 विल्लगेस को कवर करेगी”
मिनिस्टर “हमारी तरफ से आपको पूरा सपोर्ट रहेगा दिव्या ji…heemachal से चीफ मिनिस्टर साब का भी कॉल आगया था आपकी बहुत तारीफ कर रहे थे”
दिव्या “थैंक यू सो मच”
मिनिस्टर “थैंक यू आपका ह जो विद्या ग्रुप्स का हॉस्पिटल हमारे स्टेट मई ारः ह ….आपको हम बेस्ट से बेस्ट लैंड प्रोवाइड करवाएंगे …..”
दिव्या “तीख ह ….हमारी टीम नेक्स्ट मंथ आरही ह आपके स्टेट लोकेशन फाइनल करके आपसे मीटिंग करेंगे….”
दोनों की औपचारिक बात होने के बाद …
विद्या “ऋचा एव्री थिंग दोने”
ऋचा “है माँ”
दिव्या के चेहरे पर मुस्कान आगयी फिर अचानक उसे कुछ याद आया और वो बोली “ये लो जो तुमने कहा था हो गया ह ह ये मेरी तरफ से तुम्हारा लिए gift”itna कह उसने एक डॉक्यूमेंट फाइल ऋचा को दे दी”
ऋचा हैरानी और कन्फूसिओं से दिव्या को देखने लगी तोह..
दिव्या “पहले देख तोह लो सब पता चल जायेगा…”
ऋचा ने जैसे हे वो फाइल ओपन करि और वो फाइल देखते हुवे आगे पेज पलट ते हूवर आगे बढ़ी तोह उसका चेहरा खुसी और आंसुओ से भीगता गया और वो तुरंत दिव्या के गले लग कर फुट फुट कर रो पड़ी…
दिव्या “क्या हुवा मेरी बची तुम्हे पसंद नहीं आया “
ऋचा “नहीं maa…muje बहुत पसंद aya…ye मेरा वो सपना ह जो मैं पूरा होते देखना चाहती हु ये मेरे सपनो का घर ह maa…thank थैंक यू सो मच माँ पर इस जगह को तोह पापा भी नहीं खरीद पाए थे तोह फिर आप”
दिव्या “क्योकि हम विद्या ग्रुप h….aur हमारा एक बार हे थोड़ा सा कहना सामने वाले के लिए अचीवमेंट के बराबर ह हमारा एक हॉस्पिटल वंहा भी खुलेगा इतना कहना था और बस मंत्री जी खुस हो गए “
ऋचा “थैंक यू सो मच”
दिव्या “अरे no इमोशनल …चलो अभी हमे सिक्योरिटी के लिए भी मीटिंग अटेंड करनी ह टाइम नहीं बिलकुल भी हमारे पास “
ऋचा मुस्कराकर “यस मम “
दिव्या को भी हंसी agayi….aur दोनों को किसी जवान माँ बेटी की तरह साथ साथ एक दूसरे को पकडे चलने लगी …….
वंही सुभे सुभे …मनीषा के घर घमासान मचा हुवा था…
रंजन “क्या मैंने तुम्हे रोका ह कभी भी सिर्फ इतना हे कहा ह की तुम्हे इन्फॉर्म करना चाहिए था”
मनीषा “मैं शिवानी मम के साथ थी न “
रंजन “तोह क्या तुम्हारी जवाबदारी नहीं ह”
मनीषा “आज ये जवाबदारी कैसे जग गयी इतने दिन कान्हा थी “
कविता “अंकल हम”
अभी उसने इतना हे कहा था की …रंजन गुसाई से बोलै “तुम चुप रहो मैनर्स नहीं ह tumhe…yahi सीखा ह तुमने “
मनीषा गुसाई से“ उसे दुबारा भूल कर भी कुछ कह मत देना आप”
मनीषा माँ “मनीषा चुप्प्प”
मनीषा “आप इन्हे कुछ क्यों नहीं कहती ह”
मनीषा माँ “क्योली वो सही ह और तुम गलत हो और ऊपर से तुम बहस कर रही हो सॉरी कहो “
मनीषा “मैं नहीं kahungi…itna कह वो कविता का हाथ पकड़कर ऊपर जाने लगी…”
रंजन “देखा तुमने आजकल ये सब सिख रही ह ye….juban लड़ना बिना बताये यंहा वंहा घूमना …रात को रुकना इसके पंख लग गए ह और दो आज़ादी देखली कैसे जाबांचालती ह अपनों से बड़ो के सामने”
मनीषा माँ “शांत हो जाईये मैं बात करुँगी उससे”
रंजन “अगर इसने यही रवईया रखा तोह मैं इसे टूर पर नहीं जाने दूंगा और कॉलेज भी ..पता नहीं कैसे अवरो की सांगत मई पद गयी ह” इतना कह वो वंहा से चला गया और पीछे दोनों बाप बेटी के बिच मई पीसी हुवी मनीषा की माँ अकेली रह गयी ….फिर कुछ सोच कर उसने दो कफ बनायीं और मनीषा के रूम की तरफ जाने लगी…
तोह मनीषा अपने रूम मई गुसाई से उबाल रही थी….
कविता मनीषा के साइड से हुग करती हुवी boli“hey भगवान् आपको इतना गुसा भी अत ह …मुझे तोह आज पता लगा”
मनीषा “सॉरी कुटी मेरी वजह से तुजे भी फालतू मई सुन्ना पद गया”
कविता “आप भी न ….उनका गुसा होना जायज ह न …हमने हे बताया नहीं था”
मनीषा “कुटी क्या हम कंही दूसरी जगह थे …बता मुझे ..क्या किसी लड़को के साथ थे hum….ya सड़को पर या और लड़कियों की तरह पब मई थे …….नहीं न …शिवानी दी रिश्ते से मेरी नानन्द लगती ह पूनम भी और तुम दोनों तोह हो हे मेरी …फिर इतना गुसा क्यों …”
कविता “तीख ह न हम उन्हें बता देंगे …अगर इसे वो खुस ह तोह यही सही …अब प्लीज प्लीज न हंस दीजिये न आप स्वीट सी हे अछि लगती हो फाइटर वाली सकल से मुझे भी दर लगता ह”
बहार से अति हुवी मनीषा की माँ “बिलकुल सही कहा कविता ne…hume फिक्र होती ह तुम्हारी बेटी ….और ये तुम दोनों के भले के लिए हे कहा था”
मनीषा “आपका समाज अत ह पर उन्हें आजकल क्यों दिलचस्पी होने लगी क्या इसलिए क्योकि उनका दामाद सिंह ग्रुप ऑफ़ ग्रुप का मालिक बन गया ह”
मनीषा माँ गुसाई से “manishaaa…behave योर सेल्फ”
मनीषा ये सुनकर धयान से अपनी माँ को देखने लगी…… और उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान आगयी और उसने अपना मू फेर लिया…
मनीषा की माँ को भी सडनली रीलीज़ हुवा और उन्होंने कुछ कहना चाहा तोह…
मनीषा “कुटी मैं नाहा लेती हु फिर कॉलेज जाना ह तुम भी रेडी हो jao”itna कह वो उठकर चली गयी पीछे मनीषा माँ और कविता रह गयी…
कविता “मैं बात करुँगी …आप परेशां मत होईये”
म माँ ने गर्दन है मई हिलायी और वापस दुखी मन से निचे चली गयी जंहा रंजन सोफे पर नेव्स्पपार पढ़ रहा था….
म माँ “आप थोड़ा अपना गुसा भी कब्बू रखा कीजिये जवान बेटी ह …यही उम्र ह उसके बिगड़ने और समझने की”
रंजन “मुझे नहीं उसे समझने की जरुरत ह ….वैसे आजकल वो राज नहीं नज़र अत ह इनके साथ”
मनीषा माँ “वो तोह पहले भी काम हे अत था…”
रंजन “जोगिन्दर का गोद लिया हुवा बीटा ह और सिंह ग्रुप का मालिक कुछ सही नहीं लग रहा ह ….वैसे ठाकुर साब …को वो दादाजी कह रहा था मैं आज तक कुछ समाज नहीं पाया हु”
मनीषा माँ “वो क्या वो जोगिन्दर के पिता ह और वो उनके साथ नहीं रहते ह …उनकी गाँव मई खानदानी जमीन ह वो वही सँभालते ह”
रंजन की आँखों मई शातिर चमक आगयी और बोलै “कौनसा गाँव”
मनीषा माँ “आप भी न वैसे भी शादी वो गाँव मई हे करेंगे तब देख लीजियेगा अचे से”
रंजन “अरे बताओ न आखिर बेटी ह हमारी थोड़ी खोजबीन तोह कर हे लेनी चाहिए हमे भी …पता लगा लोग कहेंगे की रंजन ने अपनी बेटी पैसो मई बछड़ी …”
म माँ “बताया तोह था मनीषा एक बार गाँव का नाम …maanva…manora….yaad नहीं ारः ह…”
रंजन पुरे फोकस से सून रहा था …जैसे उसकी लोटरी लगने वाली हो …वो बोलै “याद करो याद आजायेगा”
मनीषा माँ “म से स्टार्ट था है याद आया mandawa…ha यही नाम था पर जगह कौनसी ये मैंने पूछा नहीं था कहो तोह पुछु.”
रंजन “नहीं नहीं इसकी जरुरत नहीं बाकि मैं पता कर लूंगा”
और रंजन को वो मिल गया जो वो चाहता था….
म माँ “ाचा ये सब छोड़ो अब आप उसे कुछ मत कहना”
रंजन “बिलकुल भी नहीं कहूंगा वैसे भी कल मई कप्तान जी से मिलने जा रहा हु उन्होंने बुलाया ह अपनी बेटी के लिए रिश्ता देखा ह “
म माँ “ ये तोह बहुत अछि बात ह”
रंजन “बिलकुल ख़ुशी का मौका ह तीख ह मैं काम से बहार जा रहा हु ….रात को हे aunga…shamko ाचा सा बना लेना “
रंजन तैयार हुवा और अपने बॉडी गॉर्डस के साथ निकल gaya…..aur अपने बेस पर पहुंच कर …. “जल्दी से मंडावा नाम से नार्थ मई जितने भी गाँव ह उनको धुंध निकालो…”
सामने से “जी बॉस”
और कुछ हे पल मई बड़े से प्रोजेक्टर पर आया “मंडावा विलेज 29 कम अवे फ्रॉम झुंझुनूं”
रंजन “तोह तुम राजस्थान से हो फर्क सिर्फ इतना ह की वो उदयपुर से tha….muje लगा की तुम दिल्ली से होंगे अचानक उसके माथे पर साल पद गए और वो bola…kya ऐसा हो सकता ह”
रंजन बुरी तरह शॉक हो गया ….और उसके सर मई तेज़ दर्द उठ gaya…usne तुरंत गिलास उठाकर पानी पिया और कुढ़ से हे बोलै “नहीं ऐसा नहीं हो सकता ह …विद्या के सिवये सब मरे गए थे उस दिन ….और सहदेव का उन ताकतों से बचना नामुकिन tha…main ु हे दर रहा हु …ये तोह ाचा ह की मां के नाम से मुझे अब कोई नहीं जनता ह फिर मुझे इतनी बेचैनी क्यों हो रही h….muje और डिटेल जानी होगी ….पर कैसे कैसे…..” अचानक उसके चेहरे पर गहरी मुस्कान आगयीईइ “मिल गया कप्तान सिंह दिल्ली जायेंगे हे उनको हे कहूंगा आखिर मन वो कर नहीं पाएंगे है है है रंजन तू तोह अब और चालक हो गया ह ”इतना सोचते हुवे उसने अगले दिन की हिमाचल की फ्लाइट टिकट बुक करवा दी
वंही इन सब बातो से अनजान….
राज “डॉ आप अचे से चेक कर लीजिये क्योकि मुझे पता ह मेरे पास से जाने के बाद कई जगह पर आपको रिपोर्ट देनी h…aur है ओने थिंग मेरी बॉडी की राइट सिचुएशन मुझे बताईयेगा ….वो बिलकुल नहीं जो आपको मेरी माँ बताने को कहती ह”
डॉ के चेहरे पर शर्मिंदगी आगयी और बोलै “राज आप समाज सकते ह मेरे पास आपकी तबियत के लिए अलग लग जगह से 6,7 कॉल आते हिज जिसमे लगभग सरे फ्रेमलेस के हे होते ह …खैर 15 मिनिट रुकिए बस आपका सराय अजय बस…
15 मिनट बाद ..
डॉ “राज आपके घाव रिकवर हो चुके ह पर पसलिया अभी रिकवर हो रही ह उसे टाइम lagega…isliye एक मंथ बाद आप पूरी तरह फ़ीट होंगे …आपकी जितनी इंजरी थी उतने मई नार्मल पर्सन 8 मोनथस तक रिकवर करता रहता ह पर आप 2 मोनथस मई पूरी तरह खड़े हो और देखिये 75 परसेंट तक रिकवर भी हो चुके ह बस थोड़े समय और धयान रखियेगा”
राज “थैंक यू डॉ हमारी ये आखिरी विजिट ह मैं चलता हु “
इतना कह वो बहार निकल गया और बहार निकलते हे उसका चेहरा चेहरा जो अंदर नार्मल था वो बिलकुल इमोशन लेस्स हो गया …..
वंही …दिल्ली..
चीफ “अरे औ बेटी तुम तोह भूल गयी”
सोनाली “सर”
चीफ “फर्स्ट ऑफ़ आल बधाई हो अब तुम्हे माँ की चिंता नहीं रहेगी …आखिर वो तुम्हारे ससुराल जो पहुंच गयी ह…”
सोनाली “है सर दादाजी उन्हें अपने साथ ले ए ह मैं बहुत खुस हु”
चीफ “अब तोह यकीन हुवा ठाकुर साब तुम्हे अपनी बहु मान चुके ह”
सोनाली “जी सर”
चीफ “डोंट वोर्री राज भी एग्री हो जायेगा खैर ये सब छोड़ो …तुमने जो मुझसे कहा था मैंने वो साडी जानकारी कलेक्ट कर्ली h…meeting रूम मई चलो….” दोनों साथ मीटिंग रूम की तरफ जाने लगे और मीटिंग रूम मई पहुंचकर “ ये मां नाम का शख्स आज से 17 ,18 साल पहले के करीब एक तेज़ तरार आदमी था जिसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड तोह नहीं ह पर वो हर 2 नंबर के काम मई शामिल हुवा करता था …जैसे ..2 पार्टी को इनफार्मेशन देकर पैसा कामना …आदमी अर्रंगे करना …हथियार की डील करवाना ेट्स उस समय ये शख्स सहदेव सिंह के संपर्क मई आया tha….aur इसका रिकॉर्ड बंगलोरे के एक पुलिस स्टेशन मई मिला ह जंहा इसको छुड़वाने सहदेव और नरपत सिंह खुद गए थे …ये देखो रिकार्ड्स…”
सोनाली “सर इस मां की कोई फोटो नहीं ह क्या”
चीफ है ये रही ….
सोनाली ने फोटो की तरफ हाथ भदया और उसे अपनी बड़ी बड़ी आँखों से घर कर देखने लगी……
आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का बिंदास लाइक्स और रेवोएस पेलने का…