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अपडेट 249..
चिंचि पो
सबसे पहले …रिजल्ट की टेंशन ह तोह सॉरी ..और रिव्यु बिलकुल छोटे देना क्योकि अगला अपडेट एक मेघा अपडेट होने वाला ह जिसे लिखने मई बहुत दिमाग लगेगा और मैं चाहता हु की तीन दिन मई अगला अपडेट दे दू …इसलिए बिलकुल शार्ट रिव्यु देना और न भी दो तोह कोई शिकायत nahi…kyoki हम दोस्त भाई ह…
प्रीती “ पत्नी मुझे आप पर पहले हे डाउट था …आपका नाम बहुत सुना था मैंने मम पर आप अपना काम निकलवाने के लिए इतना बड़ा झूट बोलेंगी ये नहीं पता था ..”
सोनाली हैरान होकर “ क्या मतलब”
नेहा “ मतलब ये की इतनी बड़ी पुलिस अफसर की शादी हुवी और किसी भी न्यूज़ पेपर या न्यूज़ चैनल मई कोई न्यूज़ तक नहीं ayi..main आपको बेवक़ूफ़ लगती हु”
सोनाली “मतलब तुम्हे यकीं नहीं हो रहा ह”
प्रीती “ मम देखिये …ऐसा नहीं ह की मैं आप पर ट्रस्ट नहीं करना चाहती हु पर क्या करू सिचुएशन हे ऐसी ह बहार अभी आप देख हे चुकी ह सब ….” फिर एक गहरी सांस छोड़कर “चलिए मैंने आपकी साडी बात मान ली मुझे मैरिज सर्टिफिकेट दिखा दीजिये आप दोनों का ये तोह कर हे सकती ह न आप”
सोनाली अब गुसाई मई आगयी और बोली “मैं आखिरी बार पूछूँगी राज कान्हा ह बता दो वर्ण तुम दोनों को जिंदगी भर अफसोस होगा की क्यों तुमने मुझसे छिपाया”
नेहा “आपकी पावर और आप क्या क्या कर सकती ह मैं अचे से जानती हु बूत आप अगर राज को सच मई जानती ह तोह आपको ये भी पता होना चाहिए की अगर कोई उसके अपनों को हाथ लगाए तोह वो उनका क्या करता ह …और हमें कुछ भी हुवा तोह उसे पता लगेगा की अपने क्या किया ह तोह वो आपको छोड़ेगा नहीं ये मैं आपको लिखित मई दे सकती हु ”
भीमा “ बची तुम हादसे आगे बढ़ रही हो और रही बात उसकी जिसके पीछे तुम इतनी बात कर रही हो उसे तोह मैं”
सोनाली जो अब तक गुसाई मई थी उसके चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और वो भीमा को रोकती हुवी बोली एक मिनट चाचा जी” फिर प्रीती से “वैसे तोह मैं तुम्हे और भी इमेजेज दिखा कर वो और मैं कितने करीब ह ये प्रूफ कर सकती थी पर मुझे तुमदोनो का आईडिया जायदा ाचा लगा …”
प्रीती “ मतलब ok तीख ह चलिए लास्ट चांस देती hu…ek सवाल उसके पापा और मम्मी का नाम और एड्रेस हे बता दो”
सोनाली “ एड्रेस राज का तोह उसके गाँव का नाम मंडावा ह जो राजस्थान मई ह पापा मम्मी का नाम नहीं बता सकती”
प्रीती के चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो बोली “ मतलब मेरा सक सही था आप हमसे झूट बोल रही थी अब तक …अब तोह मार भी डौगी तोह भी नहीं batayengi…kuch भी”
ये सून सोनाली चौंक गयी और हैरानी से प्रीती को देखा तभी उसके दिमाग मई कुछ आया और उसने प्रीती के लैपटॉप मई टीचर्स की डिटेल चेक करि और उसमे फोटो के इलावा राज की साडी डिटेल थी और उसकी डिटेल पढ़कर उसने प्रीती की तरफ देखा जो मुस्कुरा रही थी…
सोनाली “ ok मतलब अब तोह मैं कुछ भी तुम्हे दिखाउंगी या बताउंगी तोह तुम्हे मुझपर ट्रस्ट नहीं होगा सही कहा न”
प्रीती और नेहा दोना ने है मई सर हिला दिया…
सोनाली “डोंट वोर्री तुम्हारे लिए तोह आएगा हे न वो” और फिर भीमा से बोली “ अपने बम तोह सेट कर दिए थे न”
भीमा “ है”
सोनाली “ तोह बात ऐसी ह की तुम दोनों हमारे साथ चल रही हो अगर कुछ भी गड़बड़ करि तोह कॉलेज बिल्डिंग बम से उदा दूंगी समाज गयी …तोह सोच कर डिसिशन लेना कुछ भी करने से पहले”
प्रीती गुसाई से “ तुम एक पोलिकेर अफसर हो की तुम एक घटिया पुलिस अफसर हो”
सोनाली “ क्या करू ..तुम्हे मुझपर तुरस्त हे नहीं h..ab चले डार्लिंग बहुत बकवास कर्ली तुम दोनों ने और तुम क्या नाम ह तुम्हारा हां याद आया नेहा …अपनी जबान को कंट्रोल मई रखना वर्ण तुम जैसी बडबोलियो की जबान काट कर फेंक देती हु और रही बात तुम्हारे राज की तोह उसकी भी इतनी हीमत नहीं की वो हम दोनों के सामने बोल जाये “
भीमा गुसाई से “ उसकी तोह हड़िया तोड़ दूंगा मैं एक बार मिल जाये बड़ा aya…chaddi मई न घुमाया तोह भीमा नाम नहीं मेरा”
सोनाली “तीख ह तीख ह चाचाजी अब चले”
सोनाली दोनों को लेकर बहार आगयी और प्रीती स्टूडेंट्स से बोली की थोड़ा काम ह जल्द हे वापस ए गई जब तक मोबाइल पर टच मई rahengi…sonali ने होटल के मैनेजर को समझा कर ऊपर के फ्लोर के तीन रूम बुक कर लिए …और नेहा और प्रीती को एक रूम दे दिया …
इन रूम
सोनाली “ वैसे प्रिंसिपल साहिबा राज का आपसे ओह्ह सॉरी आपका उस से कुछ खास हे रिश्ता लग रहा ह क्या बात ह हमे नहीं बताएंगी”
प्रीती “ फ्रेंड्स ह”
सोनाली “ ओह्ह खूबसूरत प्रिंसिपल मैडम का एक ऐसा खास फ्रेंड जिसे ए गिने चुने दिन हुवे ह और वो खास हो गया …चलो मान लिया पर शादी शुदा प्रिंसिपल का एक नई टीचर फ्रेंड वो भी ऐसा फ्रेंड जिसके लिए तुम मरने को भी तैयार हो गयी .. वो ” फिर नेहा की तरफ देख कर “ और तुम तीखी मिर्ची तुम्हे बड़ा क्रश ह राज पर …ऐसा क्या कर दिया उसने इतने से दिनों मई मुझे भी तोह बताओ जरा …” सोनाली की बाते सुनकर दोनों मई से कोई कुछ नहीं बोली तोह वो आगे बोली “ तुम्हे पता ह मैं हर उस तितली के पंख काट देती हु जो राज के आसपास मंडराती ह… और तुम दोनों का अगर मुझे पता लगा कंही से भी उसके साथ कैसा भी कुछ ह तोह फिर ट्रस्ट में तुम्हे राज भी बचा नहीं पायेगा मेरे हाथो से …”
इतना कह सोनाली दोनों को रूम मई छोड़ आयी…
उसके जाने के बाद
प्रीती नेहा के कान मई फुसफुसाते हुवे बोली “कुछ भी हो जाये अपना रिस्ता इसे मत बताना …कुछ तोह गड़बड़ ह नेहा …राज जब आएगा तब सच पता लग जायेगा अगर राज का रियल मई इसके साथ रिलेशन हुवा तोह”
नेहा “ है दीदी ये बहुत खतरनाक ह इसके एनकाउंटर के बहुत किसी पढ़े ह मैंने …और अब तोह हमारे मोबाइल भी इसके पास हे ह”
प्रीती “ हमे वेट करना होगा और कुछ भी बोलने से पहले सोचना यंहा उसने हमारी बाटे सुनने के लिए डिवाइस लगा राखी होगी”
नेहा ने है मई सर हिला दिया…
इधर दूसरे रूम मई …
भीमा “एक एक थपड दोनों को मरदेति तोह बहु सब बता देती ”
सोनाली “ नहीं चाचा जी …दोनों कुछ नहीं बोलती …राज के साथ इनका कुछ तोह रिस्ता ह मुझे लगता ह उसने दोनों की मदद करि ह इसलिए दोनों उसे बहुत मानती ह और वो दोनों सही भी ह ..क्योकि हमारे पास मैरिज सर्टिफिकेट नहीं ह और तोह और माँ बाप का नाम नहीं बताया और एड्रेस भी गलत बताया मेरे दिमाग से निकल गया था की डाक्यूमेंट्स मई ाड्र्स जोगिन्दर अंकल के घर का ह ..पर उसने विद्या ग्रुप का नाम लिखवाया ह प्रीवियस जॉब मई …और यंहा से इन्होने वेरिफिकेशन भी करि होगी” तभी उसके दिमाग मई कुछ क्लिक हुवा और बोली ….. “ओह्ह्ह्हह मतलब …मतलब …मैं छोडूंगी नहीं ….”
भीमा “ क्या हुवा बहु”
सोनाली “दिव्या माँ अभी इसी मंथ हे ुअत्तरपर्देश से दिल्ली आयी ह मतलब उन्हें सब पता था सायद और ऋचा वो भी तोह 2 साल मई एक बार भी हम मई से किसी से भी मिलने नहीं ayi….itna बड़ा धोखा ….हमारे साथ …अगर मैं जो सोच रही हु वो सच ह तोह मैं छोडूंगी नहीं…”
भीमा “ क्या बोले रही हो बहु मुझे सम्झओगि”
सोनाली “ चाचाजी आप यही रहोगे …मुझे दिल्ली जानना ह “
भीमा “ नहीं मैं साथ चलूँगा”
सोनाली “ आपको राज की कसम कोई सवाल नहीं करेंगे बस मेरे आने का वेट करे फिर सब बताउंगी”
भीमा “ तीख ह”
सोनाली “ और उस कुत्ते को मरना मत वो हमे बहुत कुछ batayega…aisa कुछ ह जो हमसे छिपा हुवा ह और वडा ह जिसने जिसने ये किया ह उसे सजा मैं खुद अपने हाथो से दूंगी” इतना कह सोनाली ने ..दिल्ली की फ्लाइट बुक करि जो शाम की थी…
इधर 4 ऑवर बाद mandawa..rajeev जो मंडावा पहुंच गया था वो बोलै … “भीमा भाई नहीं दिख रहे ह क्या बात ह…”
दादाजी “ अरे कोई बात नहीं राजीव beta…wo तोह बहार गया ह..”
राजीव “ आपको छोड़कर बहार ओह्ह जयपुर गए ह कोई ारः ह क्या”
दादाजी “ वो जयपुर नहीं गया ह”
तभी मनीषा कॉफ़ी लेकर अति हुवी बोली … “अंकल वो तोह ंप गए ह … और सोनाली दी भी साथ गयी ह इसलिए वो आपको दिखाई नहीं दे रहे ह”
राजीव जो कॉफ़ी उठाकर एक सिप लेने वाला था की उसे खांसी आगयी …और उसकी हालत बिन पानी की तड़फड़ाती मछली की तरह हो गयी…
राजीव “ कब गयी थी बहु”
मनीषा “ 2 दिन हो गए ह उन्हें गए हुवे तोह आपके जाने के अगले दिन हे चली गयी थी कोई बात ह”
राजीव “ अरे नहीं नहीं बहु वो तोह अकेले गयी न इसलिए चिंता हुवी”
दादाजी “ अरे भाई भीमा ह न खीर छोड़ तुम ये बताओ की दिल्ली सब कैसा रहा तुम्हारी मीटिंग कैसी रही”
राजीव “ सब ाचा रहा बाबू जी आपके लिए गिफ्ट लाया हु अभी आया लेकर”
दादाजी “ बाद मई दे देना अभी बाते करते रहो”
राजीव “नहीं बाबूजी स्पेशलय आपके लिए लाया हु गिफ्ट तोह अभी देना होगा बस दस मिनट”
इतना कह वो तुरंत अपने रूम की तरफ भगा और जल्दी से रूम मई घुसते हे बोतल से पानी पिया और सुनील को कॉल मिलाया पर उसका कॉल नहीं लगा तोह परेशां हो गया …फिर माइक को मिलाया तोह उसका भी नहीं मिला तोह वो अब बुरी तरह टिल मिलाने लग गया .
राजीव “ क्या करू क्या karu….ye सुनील का भी नंबर नहीं मिल रहा ह अब क्या करू सब गड़बड़ हो जाएगी वो तोह बवाल खड़ा कर देंगी और गुसाई मई कोई भी कदम उठा लेंगी ओह्ह दिव्या …है दिव्या को कॉल लगता हु” ये सोच उसने तुरंत दिव्या को कॉल लगायी…
राजीव “ पिक करो पिक करो”
सामने रिंग जाती रही पर किसी ने कॉल नहीं उठाया ….
राजीव “ हे भगवन मौत की देवी तांडव कर रही ह और ये सभी पता नहीं कान्हा सो रहे ह कॉल उठाओ वर्ण वो बरसने लगी तोह मांहि के नहीं rahengi.hey भगवान् क्या करू कुछ समाज नहीं ारः ह”
तभी उसका मोबाइल रिंग हुवा और उसने कॉल उठाया …
दिव्या “ क्या बात ह राजीव भइया आज कैसे…”
Rajeev.bich मई हे “ मेरी बास्त सुनो पहले सोनाली और भीमा भाई ंप गए हुवे ह मुझे अभी पता लगा ह …अगर वो वंहा गयी ह तोह खतरे की घंटी ह …पहले आप दोनों दूर हो जाओ मतलब गायब हो जाओ मतलब chip.jao …जब तक मैं देखता हु कोई रास्ता और राज से कांटेक्ट करने की कोसिस करता हु”
दिव्या “ तीख ह मैं भी ऋचा को बोलती हु ”
राजीव ने कॉल कट करते हे राज को नंबर लगाया पर राज का नंबर नहीं लगा और लगता भी कैसे क्योकि वंहा तोह निर्वाण जगा हुवा बैठा था j…aur उसका दिमाग बेहद गरम था…
दिव्या तुरंत अपने ऑफिस से ऋचा को ढूंढने के लिए किसी को भेजा और इम्मेडिएटली आकर मिलने को कहा…
दिव्या ऑफिस मई घूमती हुवी “ सोनाली से छिपाना बहुत मुश्किल ह …और उसे सचाई पता लग गयी तोह वो मुझे तोह कुछ न कहे पर ऋचा को नहीं छोड़ेगी ….” तभी उसे कुछ .याद आया और वो खुद से हे बोली “हमे अभी निकलना होगा जब तक राज यंहा का काम ख़तम कर फ़िनलैंड के लिए नहीं निकल जाता h”ye कह वो रूम मई हे सीरियस होकर चक्कर काटने लगी …तभी ऋचा ऑफिस मई एंटर हुवी
दिव्या “ हमे कुछ दिन छिपना होगा मैं मीटिंग का कह देती हु की सेमीनार के लिए आउट ऑफ़ इंडिया जा रहे ह”
ऋचा “ पर अचानक क्या हुवा माँ”
दिव्या “ सोनाली ंप गयी ह और उसे सक होते दिएर नहीं लगेगी और मुझे डाउट ह हमारे पास कॉल कर मिलने आसक्ति ह या पूछतज कर सकती ह …और उसे सक हो गया गलती से भी हमारी बातो से तोह वो बाल की खाल निकल कर सब सचाई जांलेगी …इसलिए बेहतर यही की हम कुछ दिन दूर रहे समझी चलो”
ऋचा “ पर पैकिंग”
दिव्या “ इतने सरे पैसो को दहेज़ मई लेकर होगी क्या उन्हें खर्च करना और शॉपिंग कर lena..ab चलो जल्दीए”
ऋचा बस डीविया के साथ चलदी”
जंहा दिव्या ने डीन को जानकारी देकर अचे से समझा दिया की क्या बोलना ह …किसी के भी पूछने पर और अपना मोबाइल ऑफ कर लिया…
इधर दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट लेंड होते हे सोनाली बहार आयी
तोह सामने हे श्वेता और कविता कड़ी थी… जिनकी दर के मरे पहले हे हालत kharab..thi…
कविता “ आप अचानक”
सोनाली “ नहीं आसक्ति”
श्वेता “ ऐसी बात नहीं ह वो वो आपका मैसेज आया अचानक से और बाद मई आपका मोबाइल नहीं लग रहा था इसलिए”
सोनाली ने पॉकेट से अपना मोबाइल निकला और उसे ों किया तोह मनीषा की कई मिस कॉल ayii..phir उसने कविता की तरफ देखा और बोली “क्या हुवा ह”
कविता “ वो भाभी बचो की तबियत थोड़ी ख़राब थी तोह डॉ ने दिल्ली दिखने को कहा ह”
सोनाली जल्दी से “ क्या कैसे” और जल्दी कॉल मिलाने लगी तोह श्वेता बोली “ पूरी बात तोह सुनलीजिये”
सोनाली ने उसे घूरा तोह श्वेता आगे बोली “वो उनका रूटीन चेक उप भी होना ह इसलिए भेजा ह यंहा ”
सोनाली ने चैन की सांस ली और बोली “कब आरहे ह”
श्वेता “मनीषा भाभी लेकर आरही हौर सुभे वो जल्दी चलेंगी वंहा से”
सोनाली “ तीख ह घर चलो …बड़े पापा कान्हा ह”
श्वेता “ पापा मीटिंग मई ह बस आने वाले हे होंगे”
सोनाली “ तीख ह”
कुछ दिएर बाद जोगिन्दर सिंह की फोर्टनेर आकर घर मई रुकी …और वो बहार उतरे हे थे की उनका मोबाइल रिंग हुवा… वो मन मई बोले “ राजीव का कॉल इस वक़्त” फिर उठाकर “ क्या बात ह राजीव”
राजीव “ बात नहीं चिंचि पो ह”
जोगिन्दर सिंह घर की तरफ चलते हुवे “अब ये क्या होता ह”
राजीव “ सर चिंचि पो मतलब इमरजेंसी ह सर ”
जोगिन्दर हैरानी से “ क्या हुवा ह”
राजीव “ आपकी बहु अरे रे मैं क्या बोलने लगा हु दिमाग काम करना बंद कर चूका ह”
जोगिन्दर सिंह घर की दूर बॉल बजाते हुवे “ आराम से भाई आराम से बताओ”
राजीव “ मेरा मतलब ह की वो घर से बहार निकल कर मध्य प्रदेश गयी ह”
दूर ओपन..
राजीव “ और वो वंहा राज को dhundhegiii…aur आप अचे से जानते ह वो क्या कर saktii…h इसलिए कहा की चिंचि पो ह पता नहीं अब क्या कहर ध रही होंगी” राजीव की बात सुनकर जोगिन्दर सिंह बोले “ चिंचि पो चिंचि पो”
राजीव “ यही तोह सर …चिंचि पो ंप गयी हुवी ह और सब उलट पुलट देगी वंहा दिल घबरा रहा ह कुछ समाज नहीं ारः ह”
जोगिन्दर सिंह “वो चिंचि पो इस वक़्त मेरे सामने घर पर बैठी h…bye”
और कॉल कट होते हे जोगिन्दर सिंह ने अपने चेहरे पर ए पसीने को पौंछा ..तोह .
सोनाली जिसने सूट पहन लिया था अपने सर पर चुन्नी डालकर आकर आश्रीवाद लिया ..
जोगिन्दर सिंह “ सदा सुहागन रहो bahu”ye कहते हे उनके चेहरे के हाव भाव बदल गए की उन्होंने अनजाने मई हे क्या बोल दिया …और सोनाली ने ऊपर की तरफ देखा तब तक जोगिन्दर सिंह ने अपने चेहरे के हाव भाव डाल liye…aur मुस्करा कर बोले “ अब एक बाप अपनी बहु को यही तोह आश्रीवाद देगा na…aur हमारे पोते दिखाई नहीं दे रहे ह …सो गए क्या हम से मिले बिना हे”
सोनाली बैठने के बाद जोगिन्दर सिंह की तरफ देखते हुवे “ बड़े पापा अकेले मई बात करनी ह”
जोगिन्दर “तीख ह आरी भाग्यवान बहु आयी ह ाजटः स्पेशल बनाओ कुछ”
कविता “ बड़े पापा हम सब ले ए ह आप भाभी से बात करके ाजाईये फिर साथ खाना कहते ह”
सोनाली “ कविता तुम खालो बड़े पापा और हम लेट खाएंगे”
कविता “ पर भाभी”
सोनाली घूरकर “ सुना नहीं क्या कहा मैंने”
श्वेता “ जल्दी से सून लिया” और कविता को किचन की तरफ ले गयी..
कविता “ भाभी को क्या हुवा”
श्वेता “ हुवा क्या ये तोह नहीं पता पर है …आज दिल्ली के दबंग कमिश्नर अपनी हाफ बहु जो अभी पूरी भी नहीं हुवी ह उसकी रिमांड पर ह”
श्वेता माँ “जरूर बहु ने कोई काम बोलै होगा और इन्होने किया नहीं होगा ाचा h…bahu तोह अछि मिली ह मुझे कोई तोह सुधरे इन्हे”
रूम के अंदर …
सोनाली “आपके सब पता था”
जोगिन्दर “ और क्या सब पता था मुझे”
सोनाली “ की राज जिन्दा ह …”
जोगिन्दर सोफे से उठकर “ क्या राज जिन्दा ह कान्हा ह वो मुझे अभी मिलना ह”
सोनाली “ बड़े पापा आप मुझे मजबूर मत करो वर्ण आप जानते ह”
जोगिन्दर “ बहु कैसी बात कर रही हो मुझे पता होता तोह अपनी हे बहु को दुखी देखता …क्या बाबूजी को श्वेता कविता को नहीं batata…tumne सोच भी कैसे लिया ऐसा” और फिर एक्टिंग करने लगे दुखी होने की
सोनाली “मतलब आपको कुछ नहीं पता ह”
जोगिन्दर “ बहु सच मई नहीं पता ह मुझे कुछ भी बताओ न राज कान्हा ह”
सोनाली “ धुंध रही हु …पर जिसने भी मुझसे ये छिपाया ह छोडूंगी नहीं मैं उसे फिर चाहे आप हे क्यों न वो”
ये सून जोगिन्दर ने अपने गले से धीरे से थूक निगला और बोले “तुम यंहा अचानक ”
सोनाली “ बचो को दिखने आयी हु कल आएंगे वो चलिए हमे बहुत दिएर हो गयी ह खाना कहते ह”
जोगिन्दर सिंह ने मन हे मन लम्बी रहत की सांस ली …पर ब्लड प्रेशर उनका भी ऊँचे निचे हो गया था…
इधर सोनाली ने खाना खाया और वो अपने रूम मई agayiii…aur भीमा को कॉल लगाया ..
भीमा है बहु
सोनाली “ लगता ह उठा लाये आप उसे”
भीमा “ बस हाफ ऑवर हुवा ह हरामखोर अपने और हाथमियो का वेट कर रहा था दुबारा अटैक के लिए “
सोनाली “ क्या मतलब”
भीमा “ मतलब इन्हे राज पर सक ह वो इसके मालिक को ख़तम करने आया ह”
सोनाली “ इसका मालिक कौन ह”
भीमा “ वो अभी तक नहीं बताया इसने बहुत मार खली पर मू नहीं खोल रहा ह बस एक हे नाम लेता ह मालिक …कितना पीठ लिया कुत्ते को नाम पुछु तोह बोलता ह मालिक”
सोनाली “ आप कोसिस कीजिये …कुछ बताये तोह मुझे भी बताना …और बचो का दिल्ली डॉ से कल चेकउप ह तोह मुझे वक़्त लगेगा”
भीमा “ तीख ह”
इधर मालिक के पीछे खड़े शख्स को मुन्ना की खबर न मिलने पर वो समाज गया की मुन्ना के साथ जरूर कुछ हुवा ह…
वो मालिक से बोलै … “ मालिक खतरा बेहद करीब ह और वो स्कोर्पियन ट्राइब से आया शख्स भी दिख नहीं रहा ह हमे अब खुद तैयार रहना होगा …”
मालिक “ सही कहते हो इसलिए हवेली के पास के दस कम मई जो भी गाँव ह वंहा सिर्फ अपने आदमी रह रहे ह …चाहकर भी कोई परिंदा पंख नहीं मार सकता ह”
वफादार “ मुझे लगता ह अब आपको मिनिस्टर को भी काम पर लगाना चाहिए आखिर कब से हमरा खा रहा ह”
मालिक “ Nahiiii…wo जो भी ह अकेला ह और ये मेरा साम्राज्य ह …अगर वो मुझे मरना चाहता ह तोह उसे यंहा आना होगा मेरे अभेद किल्ले मई …यंहा की हर गली …हर मोड़ …उसे उसकी मौत हे कड़ी मिलेगीइ…” इतना कह उसने गुसाई से अपने पास पड़ा लैंडलाइन उठाया और सीधा मिनिस्टर को कॉल लगाकर कहा “ सुनो मिनिस्टर …अब कुछ दिन आंख नाक मू कान सब बंद करके बैठे रहना …अब होगा दंगल और किसी ने बिच मई अपनी चोंच घुसाई तोह उसकी मईया छोड़ देंगे हम …समझे …”
मिनिस्टर “ आपको जो करना ह कीजिये …हमने कब रोका ह apko.maalik बस कोसिस कीजिएगा की शोरशराबा काम हो क्योकि हमे खून खराबे की परवाह नहीं ह हमे बस सेण्टर तक धमको की गूंज पहुंच गयी तोह दिकत ह ”
मालिक “ चुप कर भोस्डिके सुना नहीं क्या kaha…phone रख”
वफादार “ हवाओ का रूख बदल रहा ह …आराम से ठन्डे दिमाग से काम लेना होगा हमे”
मालिक “ तुम खुद तैयारो करो ”
वफादार “ बहुत जल्द हमारे और आदमी यंहा पहुंच जायेंगे”
तभी वंहा एक शख्स चलता हुवा आया और एक सोफे पर बैठ गया ..
मालिक “ आपको कुछ मिला …”
शख्स जो डेथ हेलो हे था वो बोलै “नहीं वो सहदेव के परिवार से नहीं ह …”
मालिक “ असंभव ….अब तक की साडी घटनाये उसी और इशारा कर रही ह”
डेथ हेलो “ उम्र के साथ तुम्हारा दिमाग भी ढीला हो गया ह”
ये सुनते हे मालिक के पीछे खड़ा वफादार आगे गुसाई से बढ़ा toh…maalik ने रोक लिया…
और साइड मई बैठे डेथ हेलो की भोंहे सिकुड़ गयी और वो बोलै “लगता ह तुम्हे मदद की जरुरत नहीं ह ..जब इतना हे तुम्हारे कुत्तो मई हीमत ह तोह फ़ोन पर क्यों सहदेव का नाम ले रहा था…” फिर वफादार की तरफ देख कर बोलै “ और तू सून.. आंख निकल lunga…jo अबकी नार घूरा तोह”
मालिक “ वो बस अपने मालिक की वफादारी कर रहा ह”
डेथ हेलो “ ाचा एक बात बता तूने सहदेव को मारा नहीं तोह कोई तेरे पीछे क्यों आएगा”
मालिक “ ये तोह तुम्हे नहीं बता सकता हु पर है वो कुछ धुंध रहे ह”
डेथ हेलो “ बचो को”
मालिक “ बहुत से राज दफ़न ह अगर तुम्हे तुम्हारे लोगो ने हे नहीं बताया तोह मैं कैसे बता सकता हु ”
डेथ हेलो के चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो खड़ा हो गया और वापस चलकर जाने लगा…
मालिक “ जा रहे हो”
डठलों “ ये मामला सहदेव सिंह से जुड़ा ह या नहीं ये जानने मैं आया था पर ये अलग ह जैसे कोई सीक्रेट एजेंसी की नज़र ह तुम पर. पर है बहुत जल्द तुम्हारे लिए ये जो भी ह वो जरूर आएगा” इतना कह वो चला गया
पीछे उसको जाता देख अपने सिंघासन पर बैठा मालिक बोलै “ मेरा बाप कसाई था फिर मैं कुछ आगे बढ़ हत्यारा बना फिर पोलिटिकल मर्डर किये फिर ट्रांसपोर्ट के बिज़नेस मई aya…lasho की सिडिया दर सिडिया बना कर यंहा तक पंहुचा हु सिर्फ अपने बहु बल पर ….” फिर एक सिगार जला कर अपने वफादार से बोलै “ मैं खून करने से पहले सीकर का इंतज़ार करता फिर धीरे धीरे उसे अपने जाल मई फसने देता …जब वो करीब और करीब जाल के पास जाता मैं उसके फसने का इंतज़ार करता ह और जैसे हे वो जाल मई फंस जाता मैं उसके फड़फड़ाने तक इंतज़ार करता उसकी तड़प उसका दर्द मुझे सुकून देती फिर मैं आराम से उसको दर्द देकर तड़पता देखता और सुकून महसूस करता और अंत मई मौत के घात उतर deta…aur आज मुझे ऐसा सीकर मिला ह …जिसका मैं सीकर करूँगा… अब उसके तरीके से हे उसका सीकर करूँगा”
इन सब से अलग
असलम खान “अभी भी फाड् फाड़ा रहा ह ..हिल मत जितना हिलेगा उतना दर्द होगा bus…tum दोनों अकेले हे बचे हो …”
असलम खान ने निचे पड़े खबरि लाल और जब्र को देखा…
फिर आगे बोलै “ हिल मत बस हो गया अब तीख ह ….सॉरी मैं क्या करता जिसके भाई को तुम लोग ने मारा वो बहुत बेहरहम ह उसने हे तू हे जिन्दा रखा था वर्ण मैं तोह कबका मार देता खैर हो गया ..बस जायदा दर्द नहीं होगा ये धीरे धीरे तुम्हे खाएंगे और फिर तुम्हारी मौत हो जाएगी बस 24 घंटे या 48 घंटे या 72 घंटे भी लग सकते ह…”
अपने सामने कीड़े के जार को देख कर खबरि लाल और जब्र दर से थार थाने लगे..
असलम खान ने दोनों को बनायीं हुवी कब्र मई डाला और जार को खोलकर उनके कॉफिन मई दाल दिया …और ऊपर से धक् कर बोलै “ सोचा नहीं था ये सब करूँगा ….पर नेकी की रह पर ये कदम भी उठाना पड़ता हे ह…”
इतना कह वो वापस माकन के अंदर आया और भरी भरकम बैग घसीट ते हुवे बहार लेकर आने लगा “ इतने हथियार आखिर ये क्या करने वाले क्या ह एक वो 7 फुट का सैंड जो बेहद काम बोलता ह और एक ये राज गन उसे करता नहीं ह पर इस बार गन्स लेन को कहा ह”
फिर उसने अपना मिनी ट्रक स्टार्ट किया और निकल गया …
जुनागरघ से 50 कम दूर एक जंगल का इलाका ..झानः पहाड़ और वंहा से गिरता पानी का झरना और उसके पास बना वो विलेज और उसके बिच कड़ी वो सुन्दर हवेली जो किसी को भी अपनी तरफ मंत्र मुग्ध कर सकती ह वो आज भी वैसी हे थी जैसे 20 साल पहले कड़ी थी …और उसके ऊपर खड़ा था वो जल्लाद जिसका राज़ था… वो चिल्लाया… “आगये मेरे bacho”aur उसके ऐसा कहते हे वंहा ऐसा शोर गूंज गया जैसे हज़ारो की भीड़ वंहा जमा ho…tab वो आगे बोलै “एक आवारा कुत्ता हमरे जंगल मई घुस आया h…jo हमे चुनौती दे रहा ह… वो ये सोचता ह की वो अकेला हमे मार देगा ..पर वो ये गलत सोचता ह ये हमारा जंगल ह यंहा हमारा राज चलता ह …. हम यंहा उसका सीकर karenge…kyoki हम भेड़िये ह जो मरते दम तक अपनी शर्तो पर जीता ह अपना झुण्ड के लिए जीता ह अपने नेता के लिए जीता ह” और उसके ये कहते हे चारो तरफ शोर गूंज गया … हर तरफ उसके हे आदमी खड़े थे हथियारों से less…dhardhar हथियार , रोडस ,कन्फेस के साथ … …
ऊपर खड़ा वो जल्लाद पलटा और बोलै “ मालिक”
मालिक “ अब होगा सीकर सुरु”
वफादार जल्लाद ने पहली बार अपनी सकल दिखाई और उसके चेहरे पर सर से लेकर एक चीरे का निशान आँखों से होता हुवा निचे तक ारः रहा था …उसकी पीठ पर बड़ा धार धार हथियार था जो चीक चीक कर कह रहा था की वो कितना भयानक न.. वो निचे उतरा और बहार आया और अपनी ओपन जीप मई बैठकर निकला तोह उसके पीछे ुनगिनांनत गाड़िया निकल गयी वो काफिले के साथ जंगल के बिच एक वेयरहाउस के आगे पहुंचे …
वफादार “ जाओ जो हथियार चाहिए ले लो जो उसका सर काट कर देगा उसे मू माँगा इनाम मिलेगा”
ये सुनते हे सब वेयरहाउस की तरफ भागे और अपने सामने हथियारों का झाकिरा देख सब खुस होगये और अपने अपने पसंद के हाथॉयरो को उठा लिया…
तोह वंही कुछ वक़्त पहले शाम को
निर्वाण “तुम्हारा मतलब ये ह की वो यंहा विपिन की फॅमिली को बचने आया ह और यंहा से मुझे माँ की खबर मिल सकती ह…”
मित्युदूत अपना सर खुजला रहा tha…uski समाज से सब बहार हो रखा tha…aur उसे ऐसा देख निर्वाण बोलै “ये सब तुम्हारे मास्टर का किया धरा ह”
मित्युदूत फिर कन्फूसिओं सा फेस बनाकर देखता रहा
निर्वाण “ पहले वो जो करता था मुझे पता चल जाता था पर अब …जब भी वो गुसाई मई होता ह तब हे मुझे बहार आने का मौका और पता चलता ह की वो क्या कर रहा ह ..”
मित्युदूत “ मास्टर आप क्या कह रहे होकुछ समाज नहीं ारः ह पता चलता ह मौका मिलता ह …आप बीमार ह आपको ऋचा को दिखाना चाहिए ..” वो इतना हे बोलै था की निर्वाण उसे खा जाने वाली निघाओ से घूरने लगा और मित्युदूत की बोलती बंद हो गयी…
निर्वाण “ इतनी सी ह वो पर जबान” फिर होने हाथ के इशारे से “ऐसे गिरगिट की तरह लम्बी ह मन करता ह” पर आगे कुछ नहीं बोलै …फिर वापस मित्युदूत से “ खैर सब छोड़ो तुम नहीं समझोगे उसके साथ रहकर गोबर भर गया ह दिमाग मई तुम्हारे सुभे के लिए एक योग बताऊंगा वो करना उम्र bhadegi…aur पानी पिया करो ..बीमारियों से दूर रहोगे …”
अभी निर्वाण कुछ और कहता उसे ट्रक की आवाज आयी …
मित्युदूत “ मास्टर असलम आगया ह”
निर्वाण “ हम्म ये कमजोर ह पर वक़्त और काम के लिए भरोसेमंद इंसान ह”
तभी वंहा असलम खान ट्रक लेकर ए और उस साई निचे उतरे
निर्वाण “5 मिनट ह सोच लेना …सामने सिर्फ मौत ह …मैं बच जाऊंगा कैसे भी और वो भी फुल्ली त्रिनेड ह तोह बच हे जायेगा पर तुमने ये सब नहीं देखा h…tumhara परिवार ह …वैसे भी मुझे इस दुनिया मई किसी से फर्क नहीं पड़ता ह इसलिए तुम सोचलो”
निर्वाण पलटा हे था की …उसे असलम खननकी आवाज आयी … “पता ह मैं पुलिस मई भर्ती होने के बाद कभी अपनी फॅमिली को टाइम हे नहीं दे पाया …और न कभी उपरवाले की इबादद कर पाया… वजह सिर्फ एक thi…aur वो ये की मैं चाहता था की मेरे रहते किसी की खुसिया को कोई दूसरा उजाड़ नहीं सके फिर चाहे मेरी जान हे क्यों न चली जाये और आज भी जब उस दरिंदे को मरने जा रहे हो तोह मुझे कोई फरक नहीं पड़ता की मैं जिन्दा अउ या न अउ”
निर्वाण ने कुछ नहीं कहा और उसकी बात ख़तम होने के बाद ट्रक मई गया और हथियारों को देखने लगा…
असलम खान “ आपके लिए ये वाली लाया हु …जैसा अपने कहा की कल की रात आखिरी रास्त होगी ….”
निर्वाण मित्युदूत से “ तुम्हे पता ह क्या करना ह”
मित्युदूत तुरंत वंहा से निकल गया …
निर्वाण “ मेरे पीछे औ …”
करीब एक ऑवर बाद पहाड़ी के ऊपर … “ ये दूर तक जो एरिया देख रहे हो”
असलम खान “ है”
निर्वाण “ अब उसे देखो वो हवेली दिख रही ह वो ह हमारी मंजिल”
असलम खान ने निर्वाण के हाथ से दूरबीन ली और देखा तोह उसे दूर दिखाई दी हवेली
निर्वाण “ वो हमारी मंजिल ह और ये जो बिच मई जंगल और इसके आस पास जो गाँव देख रहो इसमे हर तरफ उसके लोग ह सायद 100 या 200 या हज़ार भी हो सकते ह …कुछ कह नहीं सकते ह “ फिर असलम खान की आँखों मई देख कर “ कह सकते ह तोह इतना की उसे पता ह की मुझे उसकी गर्दन तक पहुंचना ह तोह यही से आना होगा …और इसके लिए वो तैयार होगा”
पूरी बात सुनकर तोह असलम खान की रीद की हड्डी मई भी सिरहन दूध गयी ..
आलम खान “ इतने सरो के साथ लड़ना मुश्किल होगा”
ये सून निर्वाण के चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो बोलै “कल की रात उनकी आखिरी रात होगी कल आसमान bharsega….jameen थार tharayegi…aur निर्वाण का कहर उनपर टूटेगा मेरी माँ और मेरे बिच कोई नहीं आसक्त ह फिर चाहे सामने कितने हे क्यों न हो”
तोह अगले दिन सुभे 10 बजे मनीषा बचो को लेकर पहुंच गयी हॉस्पिटल मई मनीषा सोनाली को टेंशन मई देख कर बोली वो दोनों तीख ह आप टेंशन मत लीजिये “मैं हु न”
सोनाली ने मनीषा को गले लगा लिया
मनीषा “ आपको जो करना आप बेफिक्र होकर करिये”
सोनाली “ मुझे आज रात हे वापस जाना होगा”
मनीषा “ ok वैसे डॉ से मेरी बात हो गयी ह समोलेस लेने के बाद रिपोर्ट्स भी इवनिंग तक आजायेगी तोह मैं सुभे वापस चली जाउंगी ”
सोनाली “ ये तीख रहेगा”
तभी डॉ आगया और बचो का चेक उप ेट्स करने लगा …
श्वेता “ भाभी आप नहीं रूकेंगी”
सोनाली श्वेता के गाल पर हाथ फिरते हुवे “nahi…tum दोनों मनीषा और बचो का धयान रखना और दोनों ने हां मई गर्दन हिला दी
सोनाली ने अपने मोबाइल मई ए मैसेज को देखा तोह उसके चेहरे पर अलग हे एक्सप्रेशन आगये और उसने सीधा एक नंबर lagaya..sur स्क्रीन पर नांचल रहा था दिव्या maa…par जब स्विच ऑफ आया तोह …उसने अगला नंबर dial.kiya ऋचा का और उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ़ आया तोह उसने घडी मई टाइम देखा और बोली … “मैं खुद आजाऊंगी तुम्हारे पास …तब तोह सच बोलना हे होगा” और वो निकल पड़ी विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल की तरफ …जंहा उसे जो पता लगा …उसे सून वो कंफ्यूज और गुसा दोनों हो gayii…aur उसने एक मैसेज ऋचा को टाइप करके भेजा … “एक दिन तोह जवाब देना हे होगा उसे तोह मैं धुंध हे लुंगी”
आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का और बिंदास लाइक्स ठोकने का …
चिंचि पो
सबसे पहले …रिजल्ट की टेंशन ह तोह सॉरी ..और रिव्यु बिलकुल छोटे देना क्योकि अगला अपडेट एक मेघा अपडेट होने वाला ह जिसे लिखने मई बहुत दिमाग लगेगा और मैं चाहता हु की तीन दिन मई अगला अपडेट दे दू …इसलिए बिलकुल शार्ट रिव्यु देना और न भी दो तोह कोई शिकायत nahi…kyoki हम दोस्त भाई ह…
प्रीती “ पत्नी मुझे आप पर पहले हे डाउट था …आपका नाम बहुत सुना था मैंने मम पर आप अपना काम निकलवाने के लिए इतना बड़ा झूट बोलेंगी ये नहीं पता था ..”
सोनाली हैरान होकर “ क्या मतलब”
नेहा “ मतलब ये की इतनी बड़ी पुलिस अफसर की शादी हुवी और किसी भी न्यूज़ पेपर या न्यूज़ चैनल मई कोई न्यूज़ तक नहीं ayi..main आपको बेवक़ूफ़ लगती हु”
सोनाली “मतलब तुम्हे यकीं नहीं हो रहा ह”
प्रीती “ मम देखिये …ऐसा नहीं ह की मैं आप पर ट्रस्ट नहीं करना चाहती हु पर क्या करू सिचुएशन हे ऐसी ह बहार अभी आप देख हे चुकी ह सब ….” फिर एक गहरी सांस छोड़कर “चलिए मैंने आपकी साडी बात मान ली मुझे मैरिज सर्टिफिकेट दिखा दीजिये आप दोनों का ये तोह कर हे सकती ह न आप”
सोनाली अब गुसाई मई आगयी और बोली “मैं आखिरी बार पूछूँगी राज कान्हा ह बता दो वर्ण तुम दोनों को जिंदगी भर अफसोस होगा की क्यों तुमने मुझसे छिपाया”
नेहा “आपकी पावर और आप क्या क्या कर सकती ह मैं अचे से जानती हु बूत आप अगर राज को सच मई जानती ह तोह आपको ये भी पता होना चाहिए की अगर कोई उसके अपनों को हाथ लगाए तोह वो उनका क्या करता ह …और हमें कुछ भी हुवा तोह उसे पता लगेगा की अपने क्या किया ह तोह वो आपको छोड़ेगा नहीं ये मैं आपको लिखित मई दे सकती हु ”
भीमा “ बची तुम हादसे आगे बढ़ रही हो और रही बात उसकी जिसके पीछे तुम इतनी बात कर रही हो उसे तोह मैं”
सोनाली जो अब तक गुसाई मई थी उसके चेहरे पर मुस्कराहट आगयी और वो भीमा को रोकती हुवी बोली एक मिनट चाचा जी” फिर प्रीती से “वैसे तोह मैं तुम्हे और भी इमेजेज दिखा कर वो और मैं कितने करीब ह ये प्रूफ कर सकती थी पर मुझे तुमदोनो का आईडिया जायदा ाचा लगा …”
प्रीती “ मतलब ok तीख ह चलिए लास्ट चांस देती hu…ek सवाल उसके पापा और मम्मी का नाम और एड्रेस हे बता दो”
सोनाली “ एड्रेस राज का तोह उसके गाँव का नाम मंडावा ह जो राजस्थान मई ह पापा मम्मी का नाम नहीं बता सकती”
प्रीती के चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो बोली “ मतलब मेरा सक सही था आप हमसे झूट बोल रही थी अब तक …अब तोह मार भी डौगी तोह भी नहीं batayengi…kuch भी”
ये सून सोनाली चौंक गयी और हैरानी से प्रीती को देखा तभी उसके दिमाग मई कुछ आया और उसने प्रीती के लैपटॉप मई टीचर्स की डिटेल चेक करि और उसमे फोटो के इलावा राज की साडी डिटेल थी और उसकी डिटेल पढ़कर उसने प्रीती की तरफ देखा जो मुस्कुरा रही थी…
सोनाली “ ok मतलब अब तोह मैं कुछ भी तुम्हे दिखाउंगी या बताउंगी तोह तुम्हे मुझपर ट्रस्ट नहीं होगा सही कहा न”
प्रीती और नेहा दोना ने है मई सर हिला दिया…
सोनाली “डोंट वोर्री तुम्हारे लिए तोह आएगा हे न वो” और फिर भीमा से बोली “ अपने बम तोह सेट कर दिए थे न”
भीमा “ है”
सोनाली “ तोह बात ऐसी ह की तुम दोनों हमारे साथ चल रही हो अगर कुछ भी गड़बड़ करि तोह कॉलेज बिल्डिंग बम से उदा दूंगी समाज गयी …तोह सोच कर डिसिशन लेना कुछ भी करने से पहले”
प्रीती गुसाई से “ तुम एक पोलिकेर अफसर हो की तुम एक घटिया पुलिस अफसर हो”
सोनाली “ क्या करू ..तुम्हे मुझपर तुरस्त हे नहीं h..ab चले डार्लिंग बहुत बकवास कर्ली तुम दोनों ने और तुम क्या नाम ह तुम्हारा हां याद आया नेहा …अपनी जबान को कंट्रोल मई रखना वर्ण तुम जैसी बडबोलियो की जबान काट कर फेंक देती हु और रही बात तुम्हारे राज की तोह उसकी भी इतनी हीमत नहीं की वो हम दोनों के सामने बोल जाये “
भीमा गुसाई से “ उसकी तोह हड़िया तोड़ दूंगा मैं एक बार मिल जाये बड़ा aya…chaddi मई न घुमाया तोह भीमा नाम नहीं मेरा”
सोनाली “तीख ह तीख ह चाचाजी अब चले”
सोनाली दोनों को लेकर बहार आगयी और प्रीती स्टूडेंट्स से बोली की थोड़ा काम ह जल्द हे वापस ए गई जब तक मोबाइल पर टच मई rahengi…sonali ने होटल के मैनेजर को समझा कर ऊपर के फ्लोर के तीन रूम बुक कर लिए …और नेहा और प्रीती को एक रूम दे दिया …
इन रूम
सोनाली “ वैसे प्रिंसिपल साहिबा राज का आपसे ओह्ह सॉरी आपका उस से कुछ खास हे रिश्ता लग रहा ह क्या बात ह हमे नहीं बताएंगी”
प्रीती “ फ्रेंड्स ह”
सोनाली “ ओह्ह खूबसूरत प्रिंसिपल मैडम का एक ऐसा खास फ्रेंड जिसे ए गिने चुने दिन हुवे ह और वो खास हो गया …चलो मान लिया पर शादी शुदा प्रिंसिपल का एक नई टीचर फ्रेंड वो भी ऐसा फ्रेंड जिसके लिए तुम मरने को भी तैयार हो गयी .. वो ” फिर नेहा की तरफ देख कर “ और तुम तीखी मिर्ची तुम्हे बड़ा क्रश ह राज पर …ऐसा क्या कर दिया उसने इतने से दिनों मई मुझे भी तोह बताओ जरा …” सोनाली की बाते सुनकर दोनों मई से कोई कुछ नहीं बोली तोह वो आगे बोली “ तुम्हे पता ह मैं हर उस तितली के पंख काट देती हु जो राज के आसपास मंडराती ह… और तुम दोनों का अगर मुझे पता लगा कंही से भी उसके साथ कैसा भी कुछ ह तोह फिर ट्रस्ट में तुम्हे राज भी बचा नहीं पायेगा मेरे हाथो से …”
इतना कह सोनाली दोनों को रूम मई छोड़ आयी…
उसके जाने के बाद
प्रीती नेहा के कान मई फुसफुसाते हुवे बोली “कुछ भी हो जाये अपना रिस्ता इसे मत बताना …कुछ तोह गड़बड़ ह नेहा …राज जब आएगा तब सच पता लग जायेगा अगर राज का रियल मई इसके साथ रिलेशन हुवा तोह”
नेहा “ है दीदी ये बहुत खतरनाक ह इसके एनकाउंटर के बहुत किसी पढ़े ह मैंने …और अब तोह हमारे मोबाइल भी इसके पास हे ह”
प्रीती “ हमे वेट करना होगा और कुछ भी बोलने से पहले सोचना यंहा उसने हमारी बाटे सुनने के लिए डिवाइस लगा राखी होगी”
नेहा ने है मई सर हिला दिया…
इधर दूसरे रूम मई …
भीमा “एक एक थपड दोनों को मरदेति तोह बहु सब बता देती ”
सोनाली “ नहीं चाचा जी …दोनों कुछ नहीं बोलती …राज के साथ इनका कुछ तोह रिस्ता ह मुझे लगता ह उसने दोनों की मदद करि ह इसलिए दोनों उसे बहुत मानती ह और वो दोनों सही भी ह ..क्योकि हमारे पास मैरिज सर्टिफिकेट नहीं ह और तोह और माँ बाप का नाम नहीं बताया और एड्रेस भी गलत बताया मेरे दिमाग से निकल गया था की डाक्यूमेंट्स मई ाड्र्स जोगिन्दर अंकल के घर का ह ..पर उसने विद्या ग्रुप का नाम लिखवाया ह प्रीवियस जॉब मई …और यंहा से इन्होने वेरिफिकेशन भी करि होगी” तभी उसके दिमाग मई कुछ क्लिक हुवा और बोली ….. “ओह्ह्ह्हह मतलब …मतलब …मैं छोडूंगी नहीं ….”
भीमा “ क्या हुवा बहु”
सोनाली “दिव्या माँ अभी इसी मंथ हे ुअत्तरपर्देश से दिल्ली आयी ह मतलब उन्हें सब पता था सायद और ऋचा वो भी तोह 2 साल मई एक बार भी हम मई से किसी से भी मिलने नहीं ayi….itna बड़ा धोखा ….हमारे साथ …अगर मैं जो सोच रही हु वो सच ह तोह मैं छोडूंगी नहीं…”
भीमा “ क्या बोले रही हो बहु मुझे सम्झओगि”
सोनाली “ चाचाजी आप यही रहोगे …मुझे दिल्ली जानना ह “
भीमा “ नहीं मैं साथ चलूँगा”
सोनाली “ आपको राज की कसम कोई सवाल नहीं करेंगे बस मेरे आने का वेट करे फिर सब बताउंगी”
भीमा “ तीख ह”
सोनाली “ और उस कुत्ते को मरना मत वो हमे बहुत कुछ batayega…aisa कुछ ह जो हमसे छिपा हुवा ह और वडा ह जिसने जिसने ये किया ह उसे सजा मैं खुद अपने हाथो से दूंगी” इतना कह सोनाली ने ..दिल्ली की फ्लाइट बुक करि जो शाम की थी…
इधर 4 ऑवर बाद mandawa..rajeev जो मंडावा पहुंच गया था वो बोलै … “भीमा भाई नहीं दिख रहे ह क्या बात ह…”
दादाजी “ अरे कोई बात नहीं राजीव beta…wo तोह बहार गया ह..”
राजीव “ आपको छोड़कर बहार ओह्ह जयपुर गए ह कोई ारः ह क्या”
दादाजी “ वो जयपुर नहीं गया ह”
तभी मनीषा कॉफ़ी लेकर अति हुवी बोली … “अंकल वो तोह ंप गए ह … और सोनाली दी भी साथ गयी ह इसलिए वो आपको दिखाई नहीं दे रहे ह”
राजीव जो कॉफ़ी उठाकर एक सिप लेने वाला था की उसे खांसी आगयी …और उसकी हालत बिन पानी की तड़फड़ाती मछली की तरह हो गयी…
राजीव “ कब गयी थी बहु”
मनीषा “ 2 दिन हो गए ह उन्हें गए हुवे तोह आपके जाने के अगले दिन हे चली गयी थी कोई बात ह”
राजीव “ अरे नहीं नहीं बहु वो तोह अकेले गयी न इसलिए चिंता हुवी”
दादाजी “ अरे भाई भीमा ह न खीर छोड़ तुम ये बताओ की दिल्ली सब कैसा रहा तुम्हारी मीटिंग कैसी रही”
राजीव “ सब ाचा रहा बाबू जी आपके लिए गिफ्ट लाया हु अभी आया लेकर”
दादाजी “ बाद मई दे देना अभी बाते करते रहो”
राजीव “नहीं बाबूजी स्पेशलय आपके लिए लाया हु गिफ्ट तोह अभी देना होगा बस दस मिनट”
इतना कह वो तुरंत अपने रूम की तरफ भगा और जल्दी से रूम मई घुसते हे बोतल से पानी पिया और सुनील को कॉल मिलाया पर उसका कॉल नहीं लगा तोह परेशां हो गया …फिर माइक को मिलाया तोह उसका भी नहीं मिला तोह वो अब बुरी तरह टिल मिलाने लग गया .
राजीव “ क्या करू क्या karu….ye सुनील का भी नंबर नहीं मिल रहा ह अब क्या करू सब गड़बड़ हो जाएगी वो तोह बवाल खड़ा कर देंगी और गुसाई मई कोई भी कदम उठा लेंगी ओह्ह दिव्या …है दिव्या को कॉल लगता हु” ये सोच उसने तुरंत दिव्या को कॉल लगायी…
राजीव “ पिक करो पिक करो”
सामने रिंग जाती रही पर किसी ने कॉल नहीं उठाया ….
राजीव “ हे भगवन मौत की देवी तांडव कर रही ह और ये सभी पता नहीं कान्हा सो रहे ह कॉल उठाओ वर्ण वो बरसने लगी तोह मांहि के नहीं rahengi.hey भगवान् क्या करू कुछ समाज नहीं ारः ह”
तभी उसका मोबाइल रिंग हुवा और उसने कॉल उठाया …
दिव्या “ क्या बात ह राजीव भइया आज कैसे…”
Rajeev.bich मई हे “ मेरी बास्त सुनो पहले सोनाली और भीमा भाई ंप गए हुवे ह मुझे अभी पता लगा ह …अगर वो वंहा गयी ह तोह खतरे की घंटी ह …पहले आप दोनों दूर हो जाओ मतलब गायब हो जाओ मतलब chip.jao …जब तक मैं देखता हु कोई रास्ता और राज से कांटेक्ट करने की कोसिस करता हु”
दिव्या “ तीख ह मैं भी ऋचा को बोलती हु ”
राजीव ने कॉल कट करते हे राज को नंबर लगाया पर राज का नंबर नहीं लगा और लगता भी कैसे क्योकि वंहा तोह निर्वाण जगा हुवा बैठा था j…aur उसका दिमाग बेहद गरम था…
दिव्या तुरंत अपने ऑफिस से ऋचा को ढूंढने के लिए किसी को भेजा और इम्मेडिएटली आकर मिलने को कहा…
दिव्या ऑफिस मई घूमती हुवी “ सोनाली से छिपाना बहुत मुश्किल ह …और उसे सचाई पता लग गयी तोह वो मुझे तोह कुछ न कहे पर ऋचा को नहीं छोड़ेगी ….” तभी उसे कुछ .याद आया और वो खुद से हे बोली “हमे अभी निकलना होगा जब तक राज यंहा का काम ख़तम कर फ़िनलैंड के लिए नहीं निकल जाता h”ye कह वो रूम मई हे सीरियस होकर चक्कर काटने लगी …तभी ऋचा ऑफिस मई एंटर हुवी
दिव्या “ हमे कुछ दिन छिपना होगा मैं मीटिंग का कह देती हु की सेमीनार के लिए आउट ऑफ़ इंडिया जा रहे ह”
ऋचा “ पर अचानक क्या हुवा माँ”
दिव्या “ सोनाली ंप गयी ह और उसे सक होते दिएर नहीं लगेगी और मुझे डाउट ह हमारे पास कॉल कर मिलने आसक्ति ह या पूछतज कर सकती ह …और उसे सक हो गया गलती से भी हमारी बातो से तोह वो बाल की खाल निकल कर सब सचाई जांलेगी …इसलिए बेहतर यही की हम कुछ दिन दूर रहे समझी चलो”
ऋचा “ पर पैकिंग”
दिव्या “ इतने सरे पैसो को दहेज़ मई लेकर होगी क्या उन्हें खर्च करना और शॉपिंग कर lena..ab चलो जल्दीए”
ऋचा बस डीविया के साथ चलदी”
जंहा दिव्या ने डीन को जानकारी देकर अचे से समझा दिया की क्या बोलना ह …किसी के भी पूछने पर और अपना मोबाइल ऑफ कर लिया…
इधर दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट लेंड होते हे सोनाली बहार आयी
तोह सामने हे श्वेता और कविता कड़ी थी… जिनकी दर के मरे पहले हे हालत kharab..thi…
कविता “ आप अचानक”
सोनाली “ नहीं आसक्ति”
श्वेता “ ऐसी बात नहीं ह वो वो आपका मैसेज आया अचानक से और बाद मई आपका मोबाइल नहीं लग रहा था इसलिए”
सोनाली ने पॉकेट से अपना मोबाइल निकला और उसे ों किया तोह मनीषा की कई मिस कॉल ayii..phir उसने कविता की तरफ देखा और बोली “क्या हुवा ह”
कविता “ वो भाभी बचो की तबियत थोड़ी ख़राब थी तोह डॉ ने दिल्ली दिखने को कहा ह”
सोनाली जल्दी से “ क्या कैसे” और जल्दी कॉल मिलाने लगी तोह श्वेता बोली “ पूरी बात तोह सुनलीजिये”
सोनाली ने उसे घूरा तोह श्वेता आगे बोली “वो उनका रूटीन चेक उप भी होना ह इसलिए भेजा ह यंहा ”
सोनाली ने चैन की सांस ली और बोली “कब आरहे ह”
श्वेता “मनीषा भाभी लेकर आरही हौर सुभे वो जल्दी चलेंगी वंहा से”
सोनाली “ तीख ह घर चलो …बड़े पापा कान्हा ह”
श्वेता “ पापा मीटिंग मई ह बस आने वाले हे होंगे”
सोनाली “ तीख ह”
कुछ दिएर बाद जोगिन्दर सिंह की फोर्टनेर आकर घर मई रुकी …और वो बहार उतरे हे थे की उनका मोबाइल रिंग हुवा… वो मन मई बोले “ राजीव का कॉल इस वक़्त” फिर उठाकर “ क्या बात ह राजीव”
राजीव “ बात नहीं चिंचि पो ह”
जोगिन्दर सिंह घर की तरफ चलते हुवे “अब ये क्या होता ह”
राजीव “ सर चिंचि पो मतलब इमरजेंसी ह सर ”
जोगिन्दर हैरानी से “ क्या हुवा ह”
राजीव “ आपकी बहु अरे रे मैं क्या बोलने लगा हु दिमाग काम करना बंद कर चूका ह”
जोगिन्दर सिंह घर की दूर बॉल बजाते हुवे “ आराम से भाई आराम से बताओ”
राजीव “ मेरा मतलब ह की वो घर से बहार निकल कर मध्य प्रदेश गयी ह”
दूर ओपन..
राजीव “ और वो वंहा राज को dhundhegiii…aur आप अचे से जानते ह वो क्या कर saktii…h इसलिए कहा की चिंचि पो ह पता नहीं अब क्या कहर ध रही होंगी” राजीव की बात सुनकर जोगिन्दर सिंह बोले “ चिंचि पो चिंचि पो”
राजीव “ यही तोह सर …चिंचि पो ंप गयी हुवी ह और सब उलट पुलट देगी वंहा दिल घबरा रहा ह कुछ समाज नहीं ारः ह”
जोगिन्दर सिंह “वो चिंचि पो इस वक़्त मेरे सामने घर पर बैठी h…bye”
और कॉल कट होते हे जोगिन्दर सिंह ने अपने चेहरे पर ए पसीने को पौंछा ..तोह .
सोनाली जिसने सूट पहन लिया था अपने सर पर चुन्नी डालकर आकर आश्रीवाद लिया ..
जोगिन्दर सिंह “ सदा सुहागन रहो bahu”ye कहते हे उनके चेहरे के हाव भाव बदल गए की उन्होंने अनजाने मई हे क्या बोल दिया …और सोनाली ने ऊपर की तरफ देखा तब तक जोगिन्दर सिंह ने अपने चेहरे के हाव भाव डाल liye…aur मुस्करा कर बोले “ अब एक बाप अपनी बहु को यही तोह आश्रीवाद देगा na…aur हमारे पोते दिखाई नहीं दे रहे ह …सो गए क्या हम से मिले बिना हे”
सोनाली बैठने के बाद जोगिन्दर सिंह की तरफ देखते हुवे “ बड़े पापा अकेले मई बात करनी ह”
जोगिन्दर “तीख ह आरी भाग्यवान बहु आयी ह ाजटः स्पेशल बनाओ कुछ”
कविता “ बड़े पापा हम सब ले ए ह आप भाभी से बात करके ाजाईये फिर साथ खाना कहते ह”
सोनाली “ कविता तुम खालो बड़े पापा और हम लेट खाएंगे”
कविता “ पर भाभी”
सोनाली घूरकर “ सुना नहीं क्या कहा मैंने”
श्वेता “ जल्दी से सून लिया” और कविता को किचन की तरफ ले गयी..
कविता “ भाभी को क्या हुवा”
श्वेता “ हुवा क्या ये तोह नहीं पता पर है …आज दिल्ली के दबंग कमिश्नर अपनी हाफ बहु जो अभी पूरी भी नहीं हुवी ह उसकी रिमांड पर ह”
श्वेता माँ “जरूर बहु ने कोई काम बोलै होगा और इन्होने किया नहीं होगा ाचा h…bahu तोह अछि मिली ह मुझे कोई तोह सुधरे इन्हे”
रूम के अंदर …
सोनाली “आपके सब पता था”
जोगिन्दर “ और क्या सब पता था मुझे”
सोनाली “ की राज जिन्दा ह …”
जोगिन्दर सोफे से उठकर “ क्या राज जिन्दा ह कान्हा ह वो मुझे अभी मिलना ह”
सोनाली “ बड़े पापा आप मुझे मजबूर मत करो वर्ण आप जानते ह”
जोगिन्दर “ बहु कैसी बात कर रही हो मुझे पता होता तोह अपनी हे बहु को दुखी देखता …क्या बाबूजी को श्वेता कविता को नहीं batata…tumne सोच भी कैसे लिया ऐसा” और फिर एक्टिंग करने लगे दुखी होने की
सोनाली “मतलब आपको कुछ नहीं पता ह”
जोगिन्दर “ बहु सच मई नहीं पता ह मुझे कुछ भी बताओ न राज कान्हा ह”
सोनाली “ धुंध रही हु …पर जिसने भी मुझसे ये छिपाया ह छोडूंगी नहीं मैं उसे फिर चाहे आप हे क्यों न वो”
ये सून जोगिन्दर ने अपने गले से धीरे से थूक निगला और बोले “तुम यंहा अचानक ”
सोनाली “ बचो को दिखने आयी हु कल आएंगे वो चलिए हमे बहुत दिएर हो गयी ह खाना कहते ह”
जोगिन्दर सिंह ने मन हे मन लम्बी रहत की सांस ली …पर ब्लड प्रेशर उनका भी ऊँचे निचे हो गया था…
इधर सोनाली ने खाना खाया और वो अपने रूम मई agayiii…aur भीमा को कॉल लगाया ..
भीमा है बहु
सोनाली “ लगता ह उठा लाये आप उसे”
भीमा “ बस हाफ ऑवर हुवा ह हरामखोर अपने और हाथमियो का वेट कर रहा था दुबारा अटैक के लिए “
सोनाली “ क्या मतलब”
भीमा “ मतलब इन्हे राज पर सक ह वो इसके मालिक को ख़तम करने आया ह”
सोनाली “ इसका मालिक कौन ह”
भीमा “ वो अभी तक नहीं बताया इसने बहुत मार खली पर मू नहीं खोल रहा ह बस एक हे नाम लेता ह मालिक …कितना पीठ लिया कुत्ते को नाम पुछु तोह बोलता ह मालिक”
सोनाली “ आप कोसिस कीजिये …कुछ बताये तोह मुझे भी बताना …और बचो का दिल्ली डॉ से कल चेकउप ह तोह मुझे वक़्त लगेगा”
भीमा “ तीख ह”
इधर मालिक के पीछे खड़े शख्स को मुन्ना की खबर न मिलने पर वो समाज गया की मुन्ना के साथ जरूर कुछ हुवा ह…
वो मालिक से बोलै … “ मालिक खतरा बेहद करीब ह और वो स्कोर्पियन ट्राइब से आया शख्स भी दिख नहीं रहा ह हमे अब खुद तैयार रहना होगा …”
मालिक “ सही कहते हो इसलिए हवेली के पास के दस कम मई जो भी गाँव ह वंहा सिर्फ अपने आदमी रह रहे ह …चाहकर भी कोई परिंदा पंख नहीं मार सकता ह”
वफादार “ मुझे लगता ह अब आपको मिनिस्टर को भी काम पर लगाना चाहिए आखिर कब से हमरा खा रहा ह”
मालिक “ Nahiiii…wo जो भी ह अकेला ह और ये मेरा साम्राज्य ह …अगर वो मुझे मरना चाहता ह तोह उसे यंहा आना होगा मेरे अभेद किल्ले मई …यंहा की हर गली …हर मोड़ …उसे उसकी मौत हे कड़ी मिलेगीइ…” इतना कह उसने गुसाई से अपने पास पड़ा लैंडलाइन उठाया और सीधा मिनिस्टर को कॉल लगाकर कहा “ सुनो मिनिस्टर …अब कुछ दिन आंख नाक मू कान सब बंद करके बैठे रहना …अब होगा दंगल और किसी ने बिच मई अपनी चोंच घुसाई तोह उसकी मईया छोड़ देंगे हम …समझे …”
मिनिस्टर “ आपको जो करना ह कीजिये …हमने कब रोका ह apko.maalik बस कोसिस कीजिएगा की शोरशराबा काम हो क्योकि हमे खून खराबे की परवाह नहीं ह हमे बस सेण्टर तक धमको की गूंज पहुंच गयी तोह दिकत ह ”
मालिक “ चुप कर भोस्डिके सुना नहीं क्या kaha…phone रख”
वफादार “ हवाओ का रूख बदल रहा ह …आराम से ठन्डे दिमाग से काम लेना होगा हमे”
मालिक “ तुम खुद तैयारो करो ”
वफादार “ बहुत जल्द हमारे और आदमी यंहा पहुंच जायेंगे”
तभी वंहा एक शख्स चलता हुवा आया और एक सोफे पर बैठ गया ..
मालिक “ आपको कुछ मिला …”
शख्स जो डेथ हेलो हे था वो बोलै “नहीं वो सहदेव के परिवार से नहीं ह …”
मालिक “ असंभव ….अब तक की साडी घटनाये उसी और इशारा कर रही ह”
डेथ हेलो “ उम्र के साथ तुम्हारा दिमाग भी ढीला हो गया ह”
ये सुनते हे मालिक के पीछे खड़ा वफादार आगे गुसाई से बढ़ा toh…maalik ने रोक लिया…
और साइड मई बैठे डेथ हेलो की भोंहे सिकुड़ गयी और वो बोलै “लगता ह तुम्हे मदद की जरुरत नहीं ह ..जब इतना हे तुम्हारे कुत्तो मई हीमत ह तोह फ़ोन पर क्यों सहदेव का नाम ले रहा था…” फिर वफादार की तरफ देख कर बोलै “ और तू सून.. आंख निकल lunga…jo अबकी नार घूरा तोह”
मालिक “ वो बस अपने मालिक की वफादारी कर रहा ह”
डेथ हेलो “ ाचा एक बात बता तूने सहदेव को मारा नहीं तोह कोई तेरे पीछे क्यों आएगा”
मालिक “ ये तोह तुम्हे नहीं बता सकता हु पर है वो कुछ धुंध रहे ह”
डेथ हेलो “ बचो को”
मालिक “ बहुत से राज दफ़न ह अगर तुम्हे तुम्हारे लोगो ने हे नहीं बताया तोह मैं कैसे बता सकता हु ”
डेथ हेलो के चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो खड़ा हो गया और वापस चलकर जाने लगा…
मालिक “ जा रहे हो”
डठलों “ ये मामला सहदेव सिंह से जुड़ा ह या नहीं ये जानने मैं आया था पर ये अलग ह जैसे कोई सीक्रेट एजेंसी की नज़र ह तुम पर. पर है बहुत जल्द तुम्हारे लिए ये जो भी ह वो जरूर आएगा” इतना कह वो चला गया
पीछे उसको जाता देख अपने सिंघासन पर बैठा मालिक बोलै “ मेरा बाप कसाई था फिर मैं कुछ आगे बढ़ हत्यारा बना फिर पोलिटिकल मर्डर किये फिर ट्रांसपोर्ट के बिज़नेस मई aya…lasho की सिडिया दर सिडिया बना कर यंहा तक पंहुचा हु सिर्फ अपने बहु बल पर ….” फिर एक सिगार जला कर अपने वफादार से बोलै “ मैं खून करने से पहले सीकर का इंतज़ार करता फिर धीरे धीरे उसे अपने जाल मई फसने देता …जब वो करीब और करीब जाल के पास जाता मैं उसके फसने का इंतज़ार करता ह और जैसे हे वो जाल मई फंस जाता मैं उसके फड़फड़ाने तक इंतज़ार करता उसकी तड़प उसका दर्द मुझे सुकून देती फिर मैं आराम से उसको दर्द देकर तड़पता देखता और सुकून महसूस करता और अंत मई मौत के घात उतर deta…aur आज मुझे ऐसा सीकर मिला ह …जिसका मैं सीकर करूँगा… अब उसके तरीके से हे उसका सीकर करूँगा”
इन सब से अलग
असलम खान “अभी भी फाड् फाड़ा रहा ह ..हिल मत जितना हिलेगा उतना दर्द होगा bus…tum दोनों अकेले हे बचे हो …”
असलम खान ने निचे पड़े खबरि लाल और जब्र को देखा…
फिर आगे बोलै “ हिल मत बस हो गया अब तीख ह ….सॉरी मैं क्या करता जिसके भाई को तुम लोग ने मारा वो बहुत बेहरहम ह उसने हे तू हे जिन्दा रखा था वर्ण मैं तोह कबका मार देता खैर हो गया ..बस जायदा दर्द नहीं होगा ये धीरे धीरे तुम्हे खाएंगे और फिर तुम्हारी मौत हो जाएगी बस 24 घंटे या 48 घंटे या 72 घंटे भी लग सकते ह…”
अपने सामने कीड़े के जार को देख कर खबरि लाल और जब्र दर से थार थाने लगे..
असलम खान ने दोनों को बनायीं हुवी कब्र मई डाला और जार को खोलकर उनके कॉफिन मई दाल दिया …और ऊपर से धक् कर बोलै “ सोचा नहीं था ये सब करूँगा ….पर नेकी की रह पर ये कदम भी उठाना पड़ता हे ह…”
इतना कह वो वापस माकन के अंदर आया और भरी भरकम बैग घसीट ते हुवे बहार लेकर आने लगा “ इतने हथियार आखिर ये क्या करने वाले क्या ह एक वो 7 फुट का सैंड जो बेहद काम बोलता ह और एक ये राज गन उसे करता नहीं ह पर इस बार गन्स लेन को कहा ह”
फिर उसने अपना मिनी ट्रक स्टार्ट किया और निकल गया …
जुनागरघ से 50 कम दूर एक जंगल का इलाका ..झानः पहाड़ और वंहा से गिरता पानी का झरना और उसके पास बना वो विलेज और उसके बिच कड़ी वो सुन्दर हवेली जो किसी को भी अपनी तरफ मंत्र मुग्ध कर सकती ह वो आज भी वैसी हे थी जैसे 20 साल पहले कड़ी थी …और उसके ऊपर खड़ा था वो जल्लाद जिसका राज़ था… वो चिल्लाया… “आगये मेरे bacho”aur उसके ऐसा कहते हे वंहा ऐसा शोर गूंज गया जैसे हज़ारो की भीड़ वंहा जमा ho…tab वो आगे बोलै “एक आवारा कुत्ता हमरे जंगल मई घुस आया h…jo हमे चुनौती दे रहा ह… वो ये सोचता ह की वो अकेला हमे मार देगा ..पर वो ये गलत सोचता ह ये हमारा जंगल ह यंहा हमारा राज चलता ह …. हम यंहा उसका सीकर karenge…kyoki हम भेड़िये ह जो मरते दम तक अपनी शर्तो पर जीता ह अपना झुण्ड के लिए जीता ह अपने नेता के लिए जीता ह” और उसके ये कहते हे चारो तरफ शोर गूंज गया … हर तरफ उसके हे आदमी खड़े थे हथियारों से less…dhardhar हथियार , रोडस ,कन्फेस के साथ … …
ऊपर खड़ा वो जल्लाद पलटा और बोलै “ मालिक”
मालिक “ अब होगा सीकर सुरु”
वफादार जल्लाद ने पहली बार अपनी सकल दिखाई और उसके चेहरे पर सर से लेकर एक चीरे का निशान आँखों से होता हुवा निचे तक ारः रहा था …उसकी पीठ पर बड़ा धार धार हथियार था जो चीक चीक कर कह रहा था की वो कितना भयानक न.. वो निचे उतरा और बहार आया और अपनी ओपन जीप मई बैठकर निकला तोह उसके पीछे ुनगिनांनत गाड़िया निकल गयी वो काफिले के साथ जंगल के बिच एक वेयरहाउस के आगे पहुंचे …
वफादार “ जाओ जो हथियार चाहिए ले लो जो उसका सर काट कर देगा उसे मू माँगा इनाम मिलेगा”
ये सुनते हे सब वेयरहाउस की तरफ भागे और अपने सामने हथियारों का झाकिरा देख सब खुस होगये और अपने अपने पसंद के हाथॉयरो को उठा लिया…
तोह वंही कुछ वक़्त पहले शाम को
निर्वाण “तुम्हारा मतलब ये ह की वो यंहा विपिन की फॅमिली को बचने आया ह और यंहा से मुझे माँ की खबर मिल सकती ह…”
मित्युदूत अपना सर खुजला रहा tha…uski समाज से सब बहार हो रखा tha…aur उसे ऐसा देख निर्वाण बोलै “ये सब तुम्हारे मास्टर का किया धरा ह”
मित्युदूत फिर कन्फूसिओं सा फेस बनाकर देखता रहा
निर्वाण “ पहले वो जो करता था मुझे पता चल जाता था पर अब …जब भी वो गुसाई मई होता ह तब हे मुझे बहार आने का मौका और पता चलता ह की वो क्या कर रहा ह ..”
मित्युदूत “ मास्टर आप क्या कह रहे होकुछ समाज नहीं ारः ह पता चलता ह मौका मिलता ह …आप बीमार ह आपको ऋचा को दिखाना चाहिए ..” वो इतना हे बोलै था की निर्वाण उसे खा जाने वाली निघाओ से घूरने लगा और मित्युदूत की बोलती बंद हो गयी…
निर्वाण “ इतनी सी ह वो पर जबान” फिर होने हाथ के इशारे से “ऐसे गिरगिट की तरह लम्बी ह मन करता ह” पर आगे कुछ नहीं बोलै …फिर वापस मित्युदूत से “ खैर सब छोड़ो तुम नहीं समझोगे उसके साथ रहकर गोबर भर गया ह दिमाग मई तुम्हारे सुभे के लिए एक योग बताऊंगा वो करना उम्र bhadegi…aur पानी पिया करो ..बीमारियों से दूर रहोगे …”
अभी निर्वाण कुछ और कहता उसे ट्रक की आवाज आयी …
मित्युदूत “ मास्टर असलम आगया ह”
निर्वाण “ हम्म ये कमजोर ह पर वक़्त और काम के लिए भरोसेमंद इंसान ह”
तभी वंहा असलम खान ट्रक लेकर ए और उस साई निचे उतरे
निर्वाण “5 मिनट ह सोच लेना …सामने सिर्फ मौत ह …मैं बच जाऊंगा कैसे भी और वो भी फुल्ली त्रिनेड ह तोह बच हे जायेगा पर तुमने ये सब नहीं देखा h…tumhara परिवार ह …वैसे भी मुझे इस दुनिया मई किसी से फर्क नहीं पड़ता ह इसलिए तुम सोचलो”
निर्वाण पलटा हे था की …उसे असलम खननकी आवाज आयी … “पता ह मैं पुलिस मई भर्ती होने के बाद कभी अपनी फॅमिली को टाइम हे नहीं दे पाया …और न कभी उपरवाले की इबादद कर पाया… वजह सिर्फ एक thi…aur वो ये की मैं चाहता था की मेरे रहते किसी की खुसिया को कोई दूसरा उजाड़ नहीं सके फिर चाहे मेरी जान हे क्यों न चली जाये और आज भी जब उस दरिंदे को मरने जा रहे हो तोह मुझे कोई फरक नहीं पड़ता की मैं जिन्दा अउ या न अउ”
निर्वाण ने कुछ नहीं कहा और उसकी बात ख़तम होने के बाद ट्रक मई गया और हथियारों को देखने लगा…
असलम खान “ आपके लिए ये वाली लाया हु …जैसा अपने कहा की कल की रात आखिरी रास्त होगी ….”
निर्वाण मित्युदूत से “ तुम्हे पता ह क्या करना ह”
मित्युदूत तुरंत वंहा से निकल गया …
निर्वाण “ मेरे पीछे औ …”
करीब एक ऑवर बाद पहाड़ी के ऊपर … “ ये दूर तक जो एरिया देख रहे हो”
असलम खान “ है”
निर्वाण “ अब उसे देखो वो हवेली दिख रही ह वो ह हमारी मंजिल”
असलम खान ने निर्वाण के हाथ से दूरबीन ली और देखा तोह उसे दूर दिखाई दी हवेली
निर्वाण “ वो हमारी मंजिल ह और ये जो बिच मई जंगल और इसके आस पास जो गाँव देख रहो इसमे हर तरफ उसके लोग ह सायद 100 या 200 या हज़ार भी हो सकते ह …कुछ कह नहीं सकते ह “ फिर असलम खान की आँखों मई देख कर “ कह सकते ह तोह इतना की उसे पता ह की मुझे उसकी गर्दन तक पहुंचना ह तोह यही से आना होगा …और इसके लिए वो तैयार होगा”
पूरी बात सुनकर तोह असलम खान की रीद की हड्डी मई भी सिरहन दूध गयी ..
आलम खान “ इतने सरो के साथ लड़ना मुश्किल होगा”
ये सून निर्वाण के चेहरे पर मुस्कान आगयी और वो बोलै “कल की रात उनकी आखिरी रात होगी कल आसमान bharsega….jameen थार tharayegi…aur निर्वाण का कहर उनपर टूटेगा मेरी माँ और मेरे बिच कोई नहीं आसक्त ह फिर चाहे सामने कितने हे क्यों न हो”
तोह अगले दिन सुभे 10 बजे मनीषा बचो को लेकर पहुंच गयी हॉस्पिटल मई मनीषा सोनाली को टेंशन मई देख कर बोली वो दोनों तीख ह आप टेंशन मत लीजिये “मैं हु न”
सोनाली ने मनीषा को गले लगा लिया
मनीषा “ आपको जो करना आप बेफिक्र होकर करिये”
सोनाली “ मुझे आज रात हे वापस जाना होगा”
मनीषा “ ok वैसे डॉ से मेरी बात हो गयी ह समोलेस लेने के बाद रिपोर्ट्स भी इवनिंग तक आजायेगी तोह मैं सुभे वापस चली जाउंगी ”
सोनाली “ ये तीख रहेगा”
तभी डॉ आगया और बचो का चेक उप ेट्स करने लगा …
श्वेता “ भाभी आप नहीं रूकेंगी”
सोनाली श्वेता के गाल पर हाथ फिरते हुवे “nahi…tum दोनों मनीषा और बचो का धयान रखना और दोनों ने हां मई गर्दन हिला दी
सोनाली ने अपने मोबाइल मई ए मैसेज को देखा तोह उसके चेहरे पर अलग हे एक्सप्रेशन आगये और उसने सीधा एक नंबर lagaya..sur स्क्रीन पर नांचल रहा था दिव्या maa…par जब स्विच ऑफ आया तोह …उसने अगला नंबर dial.kiya ऋचा का और उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ़ आया तोह उसने घडी मई टाइम देखा और बोली … “मैं खुद आजाऊंगी तुम्हारे पास …तब तोह सच बोलना हे होगा” और वो निकल पड़ी विद्या ग्रुप ऑफ़ हॉस्पिटल की तरफ …जंहा उसे जो पता लगा …उसे सून वो कंफ्यूज और गुसा दोनों हो gayii…aur उसने एक मैसेज ऋचा को टाइप करके भेजा … “एक दिन तोह जवाब देना हे होगा उसे तोह मैं धुंध हे लुंगी”
आज के लिए इतना हे मस्ती मई पढ़ने का और बिंदास लाइक्स ठोकने का …

