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- Dec 5, 2013
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मैं बहार हॉल के सोफे पर बैठा था, मोबाइल हाथ में था, पर दिमाग पूरा ममी के लाल गाल और उनके उभरे हुए दूध पे अटका हुआ था. उफ्फ्फ्फ़… वो थप्पड़ तोह बहुत ज़ोर से पड़ा था, पर उसके बाद ममी का चेहरा… वो गुस्से में भी कितनी सेक्सी लग रही थी. उनकी मोती गांड बीएड पे दबते वक़्त हिल रही थी, सलवार टाइट चिपकी हुई… और वो bade-bade दूध हर सांस के साथ upar-neeche…
अचानक मेरा मोबाइल बजा. अब्बू का कॉल था.
**मैं:** “हाँ जी अब्बू… बोलो?”
**अब्बू (तेज़ आवाज़ में):** “असीम! सुन… तू वापस घर आ जा आज hi. शॉप पे बहुत काम बढ़ गया है. कल सुबह से तू भी मदद करेगा. बस पकड़ ले शाम की… समझ गया?”
**मैं:** “लेकिन अब्बू… यहाँ तोह…”
**अब्बू (गुस्से में):** “कोई लेकिन नहीं!… घर आ. ज़ैनब को भी बोल देना. समझ गया न बीटा?”
मैं हाँ बोलै और फ़ोन रख दिया. उफ्फ्फ्फ़… अब क्या होगा?
शाम को ज़ैनब आपि आयी. उसकी आँखों में थोड़ी सी मायूसी थी. मैं ने उनको सोफे पर बिठा के धीरे से बताया,
**मैं:** “आपि… अब्बू का कॉल आया था. आज hi घर वापस चलना है… शॉप पे काम है.”
ज़ैनब आपि का चेहरा एक सेकंड में उतर गया. वो मायूस हो गयी. उन्होंने अपना दुपट्टा सीने पे लपेटा और हलकी सी सिसकी ली,
**ज़ैनब आपि:** “आज hi? उफ्फ्फ्फ़… असीम… यहाँ इतना मज़ा आ रहा था… तू… तू और अहम… दोनों के साथ… अब सब ख़तम?”
मैं उनके पास बैठ गया. उनके bade-bade दूध अब भी सूट के ऊपर से उभरे हुए थे. मैंने उनके हाथ पकड़ लिया और बोलै,
**मैं:** “आपि… घर जाके भी मज़ा लेंगे न? वहां जाकर भी मज़े करेंगे… और तू तोह मेरी पर्सनल रंडी है अब…”
ज़ैनब आपि शर्मा कर मुस्कुरायी, पर आँखों में मायूसी अभी भी थी.
फिर मैं उठा और सीधा ममी के कमरे की तरफ चला गया. दरवाज़ा थोड़ा खुला था. अंदर ममी बीएड पे बैठी थी, दुपट्टा सीने पे लपेटे हुए. उनका चेहरा अभी भी थोड़ा लाल था.
ममी ने मुझे देखा. गुस्सा अभी भी आँखों में था. मैंने बीएड के पास बैठ गया और धीरे से बात शुरू की,
**मैं:** “ममी… प्लीज माफ़ कर दो… वो सब गलती से हो गया… मैं कभी नहीं करूँगा ऐसा…”
बात karte-karte मेरा हाथ धीरे से उनकी जांघ पे चला गया. उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम और मुलायम थी उनकी जांघ. सलवार के ऊपर से भी उनकी गर्मी फील हो रही थी. मैंने हलके से उनकी जांघ को सहलाने लगा…
और तभी…
**चटकककक!!!**
ममी ने एक ज़ोर का थप्पड़ मारा मेरे गाल पर. मेरा चेहरा पलट गया. उफ्फ्फ्फ़… कितना ज़ोर का था वो थप्पड़.
**ममी (तेज़ आवाज़ में, गुस्से से):** “असीम! तू पागल हो गया है क्या?! मैं तेरी ममी हूँ… बहार निकल यहाँ से… अभी निकल! वर्ण मैं तेरे अब्बू को सब बता दूंगी!”
मेरा गाल जलता हुआ था, पर अंदर से… उफ्फ्फ्फ़… ममी का ये गुस्सा देख कर मेरा लुंड पायजामा में और सख्त हो गया. उनके bade-bade दूध गुस्से में और उभर आये थे. उनकी मोती गांड बीएड पे डाब रही थी. वो रो रही थी… पर आँखों में वो तड़प भी थी जो मैं पहले भी महसूस कर चूका था.
मैं उठा और बहार निकल आया. पर दिमाग में सिर्फ एक hi ख्याल था…
**“ममी… तू इतना गुस्सा दिखती है… पर अंदर से तड़प रही है न? उफ्फ्फ्फ़… एक दिन तेरी मोती गांड… तेरे bade-bade दूध… सब मेरे हाथों में आएंगे… और तू खुद चीखेगी ‘असीम… और ज़ोर से…’”**
घर वापस जाने का टाइम आ गया था, पर मेरा दिल अभी भी यहीं अटक गया था. अब्बू का कॉल आने के बाद सब लोग तैयारी में लगे थे, पर मैं… मैं सिर्फ बुशरा को देख रहा था. उसकी वह टाइट पिंक कुर्ती और ब्लैक लेग्गिंग्स… उफ्फ्फ्फ़… कॉलेज से आती थी तोह हर बार उसकी पतली कमर और उभरी हुई गांड देख कर मेरा लुंड खड़ा हो जाता था. मैं चुपके से उसके दरवाज़े के पास खड़ा था.
रूम में सिर्फ बुशरा थी. अहम बहार था, बड़ी ममी किचन में, और बाकी सब apne-apne काम में. मैं धीरे से अंदर घुस गया. बुशरा बीएड पे बैठी थी, कुर्ती के ऊपर से उसके मध्यम साइज के दूध उभरे हुए थे – गोल, टाइट, ब्रा के बिना भी खड़े दीखते थे. जब वो झुक कर बैग में कपडे रख रही थी, उसके दूध आगे की तरफ लटक गए… क्लीवेज गहरा… उफ्फ्फ्फ़… मेरा लुंड पायजामा में एक झटका मार बैठा.
मैं पीछे से धीरे से उसके पास पहुँच गया. उसने मुझे महसूस नहीं किया. जैसे hi मैं उसके बिलकुल करीब आ गया, मैंने दोनों हाथों से उसके बड़े… गोल… टाइट दूध पकड़ लिए – कुर्ती के ऊपर से hi.
**बुशरा:** “अह्ह्ह्ह… असीम भाई… क्या कर रहे हो?! छोडो… छोडो मुझे!!”
वो ज़ोर से चिहुंक उठी. उसने दोनों हाथों से मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की, पर मैंने नहीं छोड़ा. उफ्फ्फ्फ़… कितने टाइट और गरम थे उसके दूध. कुर्ती के पतले कपडे के ऊपर से भी उनकी सॉफ्टनेस मेरे हाथों में आ रही थी. मैं zor-zor से मसलने लगा – ऊपर से नीचे, gol-gol घूमता… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के हलके से दबा रहा था.
**बुशरा (कांपती आवाज़ में):** “भाई… प्लीज… मत करो… ये गलत है… मैं आपकी बेहेन हूँ… छोडो… अह्ह्ह… दर्द हो रहा है…”
पर मैं नहीं छोड़ा. मैं उसके पीछे से और चिपक गया. मेरा खड़ा लुंड उसकी मोती गांड पे रगड़ खा रहा था. मैंने उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए धीरे से बोलै,
**मैं:** “बुशरा… चुप कर… मुझे सब मालुम है… तेरे और अहम का… सब कुछ…”
जैसे hi ये बात मेरे मुँह से निकली… बुशरा एकदम से सुन्न हो गयी. उसकी पूरा बदन काँप उठा. उसने मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश भी छोड़ दी. उसकी आँखें फैल गयी, चेहरा पूरा लाल पद गया. वो सिर्फ घूरती रही… जैसे बिजली गिर गयी हो.
**बुशरा (चौंक कर, कांपती आवाज़ में):** “क… क्या…?! अहम… और मैं?!”
मैं उसके दूध को और ज़ोर से मसलता हुआ हंस पड़ा. उफ्फ्फ्फ़… अब उसके दूध मेरे हाथों में और भी टाइट हो गए थे. मैं उसके कान में और धीरे से बोलै,
**मैं:** “मैं सब देख चूका हूँ बुशरा… जब अहम ने तेरी छूट में लुंड डाला था… उफ्फ्फ्फ़… कितनी टाइट थी तेरी छूट… और अब… अब तू मुझे भी छोड़ने देगी… वर्ण… मैं सबको बता दूंगा…… सबको…”
बुशरा का पूरा जिस्म thar-thar काँप रहा था. उसने आँखें बंद कर ली. उसके होंठ काँप रहे थे. पर उसके दूध अभी भी मेरे हाथों में थे… और मैं मसलता जा रहा था…
**बुशरा (रोटी सी आवाज़ में):** “असीम भाई… प्लीज… मत बताओ किसी को… मैं… मैं… उफ्फ्फ्फ़… बस छोड़ दो… अह्ह्ह…”
पर मैं नहीं छोड़ा. मेरा लुंड उसकी गांड पे और ज़ोर से रगड़ रहा था.
मैं उसके कान में और गरम सांस छोड़ते हुए बोलै,
**मैं:** “अब तू मेरी रंडी बनेगी बुशरा… अहम के बाद… अब मैं… और जब घर जायेंगे… वहां भी… तेरी छूट… तेरी गांड… सब मेरी होगी…”
बुशरा कुछ नहीं बोली… सिर्फ उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी… और उसके दूध मेरे हाथों में और भी गरम हो गए थे.
शाम के 7 बजे हॉल में सब लोग बैठे थे. नाश्ता लगा था – garam-garam पराठे, चाय और थोड़ी सी मिठाई. बड़े मां सोफे के एन्ड पे बैठे थे, उनका मोटा बदन कुशिओं में धंसा हुआ. बड़ी ममी उनके बगल में थी, दुपट्टा सीने पे लपेटे हुए. छोटे मां और छोटी ममी सना अपोजिट सोफे पे. यास्मीन आपि फ्लोर पे कुशिओं पे बैठी थी, इफ़्फ़त और बुशरा उसके दोनों तरफ. ज़ैनब आपि सबसे कार्नर में, बिलकुल चुप.
सब बातें कर रहे थे – पुराने दिनों की, Hansi-mazak चल रहा था, लेकिन ज़ैनब आपि का चेहरा बिलकुल उतरा हुआ था. वो सिर्फ haan-mein सर हिला रही थी, आँखें नीचे. दुपट्टा को baar-baar सीने पे ठीक कर रही थी. उसके bade-bade दूध भी आज थोड़े से दबके हुए लग रहे थे, जैसे वो jaan-bujh कर छुपाने की कोशिश कर रही हो.
बड़े मां ने एक बार उसकी तरफ देखा. फिर धीरे से अपना मोबाइल उठाया, कुछ टाइप किया और ज़ैनब आपि की तरफ भेज दिया. मोबाइल की हलकी सी वाइब्रेशन हुई. ज़ैनब आपि ने फ़ोन देखा… और उसका चेहरा एक सेकंड में लाल पद गया. उसने झट से फ़ोन साइड में रख दिया, आँखें नीचे कर ली. गाल इतने लाल हो गए की पसीना भी निकल आया.
बड़े मां हलके से मुस्कुराये, पर आवाज़ नार्मल रखते हुए बोले,
**बड़े मां:** “ज़ैनब बीटा, कल सुबह बस है न? रात भर तोह ठीक से सो लेना… सफर लम्बा है.”
ज़ैनब आपि सिर्फ “हाँ मां…” में सर हिला दिया. उसकी आवाज़ में थोड़ी सी काँप थी. उसने दुपट्टा को और टाइट सीने पे लपेट लिया, जैसे अपने दूध को छुपाने की कोशिश कर रही हो. पर बड़े मां की नज़र उसके उभरे हुए दूध पे hi अटकी रही. उन्होंने फिर से फ़ोन पे कुछ टाइप किया और भेज दिया.
ज़ैनब आपि ने दूसरा मैसेज पढ़ा… और इस बार उसने अपना हाथ अपनी जांघ पे रख liya.Uski सांस थोड़ी तेज़ हो गयी. वो baar-baar अपनी सलवार की नाडा को ठीक कर रही थी.
मैं सब देख रहा था. कार्नर में बैठा था, पर मेरी नज़र ज़ैनब आपि और बड़े मां के बीच के इशारे पे थी. बड़े मां का चेहरा बिलकुल नार्मल था, जैसे कुछ भी नहीं हो रहा हो, लेकिन उनकी आँखों में गन्दी चमक थी.
थोड़ी देर बाद बड़े मां उठ गए और बोले
**बड़े मां:** “मैं छत पर चला जाता हूँ… थोड़ी हवा खा लूँ. ज़ैनब, तू भी आ जा… .”
ज़ैनब आपि का चेहरा और लाल हो गया. उसने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा… फिर धीरे से उठ गयी. दुपट्टा को बहुत टाइट लपेट लिया और बड़े मां के peeche-peeche सीढ़ियों की तरफ चली गयी. उनकी मोती गांड सलवार में हिल रही थी, हर कदम पे दोनों नितम्ब alag-alag.
मैं चुपचाप बैठा रहा. सब लोग बातें कर रहे थे, पर मेरा दिमाग सिर्फ उन दोनों के पीछे था. बड़े मां का इशारा, ज़ैनब आपि का शरमाया चेहरा… और अब छत पर अकेली जा रही थी.
अंदर से एक करंट सा दौड़ गया.
हॉल में सब लोग बातें कर रहे थे, लेकिन मेरा दिमाग कहीं और था. यास्मीन आपि निचे फ्लोर पर बैठी थी, लाइट पिंक सलवार सूट में. दुपट्टा उसके सीने पे लूसेली लपेटा हुआ था, पर पसीने की वजह से कपडा थोड़ा चिपका हुआ था. जब वो झुक कर चाय का कप उठती, उसके bade-bade दूध थोड़ा सा आगे लटक जाते थे. उसकी मोती गांड कुशिओं पे डाब रही थी, सलवार के दोनों हिस्से alag-alag उभर आये थे.
मैं उसकी तरफ देखता रहा. जब उसकी नज़र मेरी तरफ पड़ी, मैंने धीरे से आँख से इशारा किया — ऊपर छत पर. यास्मीन आपि का चेहरा एक पल के लिए बदला. उसने आँखें नीचे कर ली, दुपट्टा सीने पे और टाइट लपेट लिया, पर मैंने देख लिया था — उसके गाल हलके से लाल हो गए थे.
थोड़ी देर बाद मैं उठा और सीधा छत की सीढ़ियों की तरफ चला गया. पीछे से छोटे मां की आवाज़ आयी — “कहाँ जा रहा है बीटा?” मैंने सिर्फ “हवा खाने” बोल दिया और चढ़ गया.
छत पर पहुँच कर मैं गेट के पास खड़ा हो गया और छत पर झाँका.
वहां कार्नर में बड़े मां और ज़ैनब आपि खड़े थे. मां ने ज़ैनब आपि को दीवार से सत्ता रखा था. उनका मोटा हाथ उसकी सलवार के अंदर घुसा हुआ था, zor-zor से उसकी छूट में उँगलियाँ चला रहे थे. ज़ैनब आपि की सांसें तेज़ थी, आँखें बंद, होंठ दबाये हुए. मां उसके कान में कुछ बोल रहे थे और उसकी गांड पे दूसरे हाथ से थप्पड़ मार रहे थे — halke-halke, पर आवाज़ आ रही थी.
मैं और थोड़ा झुक कर देखने लगा. तभी पीछे से हलकी सी सांस की आवाज़ आयी.
यास्मीन आपि सीढ़ियों से ऊपर आ गयी थी. जैसे hi उसने मुझे देखा, उसने रुकने की कोशिश की, पर मैंने झट से उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींच लिया. गेट के बिलकुल पास, अँधेरे में.
**मैं (उसके कान में धीरे से,):**
“चुप… देखो आपि… देखो आपके अब्बू क्या कर रहे हैं ज़ैनब आपि के साथ…”
यास्मीन आपि का पूरा बदन काँप उठा. उसने झाँका. बड़े मां अब ज़ैनब आपि की सलवार नीचे कर चुके थे. उनकी मोती गांड ऊपर उठी हुई थी और मां पीछे से उँगलियाँ andar-bahar कर रहे थे. ज़ैनब आपि सिसक रही थी — “मां… धीरे… कोई आ जायेगा…”
मैं यास्मीन आपि के पीछे बिलकुल चिपक गया. मेरा खड़ा लुंड उसकी मोती गांड पे रगड़ने लगा. उसके दोनों हाथों को पकड़ कर मैंने उनको गेट के दरवाज़े पे टिका दिया ताकि वो देख सके.
**मैं (उसके कान में गन्दी आवाज़ में):**
“देखो… आपके अब्बू ज़ैनब आपि की छूट में उँगलियाँ दाल रहे हैं… कितनी गीली हो गयी है वो रंडी… अह्ह्ह… आपकी गांड भी गरम हो रही है न आपि?”
यास्मीन आपि कुछ बोल नहीं प् रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी. मैं ने उसकी सलवार का नाडा पकड़ा और धीरे से नीचे खिसका दिया. उसकी पंतय भी साथ में. अब उसकी मोती, गोरी गांड बिलकुल नंगी थी मेरे सामने.
मैंने अपना लुंड बहार निकला — पसीने और पानी से चमक रहा था — और उसकी गीली छूट के मुँह पे रगड़ने लगा.
**मैं (उसके कान में):**
“ले मादरचोद रंडी साली …”
एक हल्का सा धक्का मारा और लुंड अंदर घुसा. यास्मीन आपि ने मुँह पे हाथ रख लिया ताकि आवाज़ न निकले. उसकी छूट बहुत गीली थी. मैं dheere-dheere andar-bahar करने लगा ताकि गेट के पास खड़े Mama-Zainab को आवाज़ न हो.
**मैं (उसके कान में ):**
“अह्ह्ह… आपि… देखो… आपके अब्बू ज़ैनब आपि को छोड़ रहे हैं…… उफ्फ्फ्फ़… कितनी टाइट है तेरी छूट…
मैं और थोड़ा अंदर घुसा और धीरे से बोलने लगा,
**मैं:**
“जाने के बाद… मेरे जाने के बाद… आप अपने अब्बू को फंसा लेना आपि… मां को… उनकी बेटी की छूट में लुंड डालने का मौका दे देना… बोलिये… करोगी न? बोलिये… आप भी अपने अब्बू से छोड़ना चाहती हैं न?”
यास्मीन आपि का पूरा बदन काँप उठा. उसने सिर्फ सिसकी ली, पर उसकी छूट ने मेरे लुंड को और ज़ोर से जकड लिया. मैं समझ गया — वो गरम हो गयी थी.
मैं उसके कान में और तेज़ बोलने लगा,
**मैं:**
“बोल आपि… हाँ बोल… मेरे जाने के बाद मां को अपनी छूट में लेने का प्लान बना लेना… उनके लुंड को अपनी मोती गांड में लेना… अह्ह्ह… बोल… रंडी बन जाएगी न अपने अब्बू की…?”
यास्मीन आपि अब सिर्फ सिसक रही थी. उसकी गांड मेरे धक्कों के साथ खुद पीछे हिल रही थी.
मां उधर ज़ैनब आपि के छूट में झाड़ गए और इधर मैं भी..
रात के खाने के बाद घर में बिलकुल सन्नाटा था. सब लोग apne-apne कमरों में सो चुके थे. मैं भी बिस्तर पे लेट गया था, पर नींद नहीं आ रही थी.
तभी मेरा मोबाइल हलके से विबरते हुआ. एक मैसेज आया — **छोटी ममी** का
“स्टोर रूम में आ जाओ. अभी.”
मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा. मैं उठा, पायजामा ठीक किया और धीरे से बहार निकला. घर पूरा अँधेरा था, सिर्फ किचन के पास वाली छोटी बल्ब जल रही थी. स्टोर रूम घर के पिछले हिस्से में था, जहाँ पुराण सामान रखा रहता था.
मैं धीरे से दरवाज़ा खोला. अंदर सिर्फ एक पुराणी टेबल लैंप जल रही थी. ममी वहां कड़ी थी — लाइट ग्रीन सलवार सूट में, दुपट्टा अभी भी शोल्डर्स पे लटका हुआ था. उनका चेहरा थोड़ा लाल था, आँखें नीचे की हुई.
जैसे hi मैं अंदर घुसा, उन्होंने दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया और लॉक लगा दिया.
**छोटी ममी (हलकी, लेकिन कांपती आवाज़ में):**
“असीम… सच बता… अहम सच में मेरे बारे में ऐसा सोचता है?”
मैं नीचे देखते हुए धीरे से बोलै,
“हाँ ममी… वो सच बोल रहा था. उसने मुझे सब बताया था… जब से उसने आपको नहाते हुए देखा था… तब से…”
ममी की सांस एक सेकंड के लिए रुक गयी. उनकी आँखें अजीब सी हो गयी — गुस्सा, शॉक और कुछ और मिला हुआ. उन्होंने गहरी सांस ली और धीरे से बोली,
**छोटी ममी:**
“ठीक है… तू अब जा के सो जा. और अहम को भेज दे मेरे पास… मुझे उससे कुछ बात करनी है.”
मैं तुरंत बोलै,
“ममी… प्लीज… उसको मत डांटना. वो बहुत डर गया है… गलती से हो गया सब…”
ममी ने सिर्फ हाथ से इशारा किया — “जा.”
मैं बहार निकला. दिल zor-zor से धड़क रहा था. मैं सीधा अहम के रूम में गया. वो बीएड पे बैठा था, मोबाइल हाथ में, उसका चेहरा बिलकुल सफ़ेद पद गया था जब मैंने उसे सब कुछ बताया.
**मैं:**
“अहम… ममी ने तुझे बुलाया है स्टोर रूम में. जा… और डर मत. बस जो भी पूछे, सच बता देना.”
अहम का चेहरा और भी उतर गया. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया,
“भाई… मुझे मत भेज… वो बहुत गुस्सा करेंगी… मैं नहीं जाऊंगा…”
मैं ने उसको ज़ोर से धक्का दिया,
“जा सेल… वर्ण और बड़ा सन हो जायेगा. जा अभी.”
अहम darte-darte उठा और बहार चला गया. मैं भी थोड़ी देर बाद उसके peeche-peeche गया. स्टोर रूम का दरवाज़ा बंद था, पर ऊपर वाला छोटा विंडो थोड़ा खुला था.
मैं धीरे से विंडो के पास पहुंचा और अंदर झाँका.
अंदर का नज़ारा देख कर मेरा पूरा बदन सुन्न पद गया.
पुराणी टूटी हुई बेंच पर अहम बैठा था. उसकी शर्ट के सारे बटन खुले हुए थे, शर्ट दोनों तरफ फैली हुई थी. छोटी ममी सना उसके गॉड में बैठ गयी थी — सिर्फ सलवार और काली ब्रा में. उनका दुपट्टा ज़मीन पर गिरा हुआ था.
ममी अहम को पागलो की तरह चुम रही थी.
पहले उसके होंठ पे zor-zor से किश कर रही थी, जीभ अंदर दाल रही थी. फिर उसके सीने पे मुँह ले जाती, निप्पल को मुँह में लेकर चूस रही थी. कभी उसके गले को चाट रही थी, कभी कान को काट रही थी. उनके bade-bade दूध काली ब्रा के अंदर से zor-zor से उभर रहे थे और अहम के सीने से रगड़ खा रहे थे.
अहम सिसक रहा था… बिलकुल छोटे बच्चे की तरह.
**अहम (सिसकती हुई, कांपती आवाज़ में):**
“अम्मी… उफ्फ्फ्फ़… अम्मी… क्या कर रही हो… अह्ह्ह… प्लीज… अम्मी…”
ममी ने उसके बाल पकड़ लिए, उसका चेहरा ऊपर किया और फिर से ज़ोर से होंठ पे चुम लिया. उनकी जीभ अहम के मुँह में घुस रही थी. लार टपक रही थी दोनों के होंठों से. ममी की सांसें बहुत तेज़ थी.
**छोटी ममी:**
“बीटा… तू सच में अम्मी के बारे में ऐसा सोचता है? नहाते हुए देख कर… मुठ मारता था? बोल न… अम्मी की चूचियां देख कर… अम्मी की गांड देख कर… तू पागल हो जाता था न? अब बोल… अम्मी को छोड़ना चाहता था न तू?”
अहम सिर्फ सिसक रहा था. उसके हाथ काँप रहे थे, पर वो ममी के सीने से चिपका हुआ था.
ममी ने अपनी ब्रा का हुक खोला और ब्रा नीचे सरक दी. उफ्फ्फ्फ़… उनके bade-bade, भरे हुए, गोरी चूचियां बहार आ गए. निप्पल बिलकुल टाइट और लाल थे. ममी ने अहम का सर पकड़ कर उसके मुँह में एक चुकी दाल दी.
**छोटी ममी (सिसकती हुई):**
“ले बीटा… चूस… जो तू सोचता था… वो अब सच हो रहा है… अम्मी की चूचियां चूस… ज़ोर से चूस… अह्ह्ह… अम्मी भी बहुत तड़प रही थी… उफ्फ्फ्फ़… और ज़ोर से… काटो थोड़ा… हाँ बीटा… ऐसे hi…”
अहम अब कण्ट्रोल खोने लगा था. उसने ममी की चुकी मुँह में ले ली और चूसने लगा. ममी की आँखें बंद हो गयी थी, मुँह खुला था, सांसें तेज़ चल रही थी.
मैं विंडो के पास खड़ा था… पूरा पागल हो गया था. मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो रहा था. ममी… जो हमेशा इतनी शरीफ, इतनी स्ट्रिक्ट दिखती थी… आज अपने बेटे के गॉड में बैठ कर उसको अपनी चूचियां चुसवा रही थी… और खुद सिसक रही थी.
मैं और देख नहीं प् रहा था. पर आँख हटा भी नहीं प् रहा था.
ममी ने अब अहम की पंत का नाडा खोल दिया. उसका लुंड बहार आ गया — खड़ा, पसीने से गीला. ममी ने उसको हाथ में पकड़ा और धीरे से हिलने लगी, साथ hi उसके मुँह में अपनी दूसरी चुकी दाल दी.
**छोटी ममी (गरम आवाज़ में):**
“बीटा… अम्मी को बता… तू कितने दिन से अम्मी की छूट के बारे में सोच रहा था? बोल… अम्मी अब तुझे सब दे देगी… जो तू चाहे… बस बोल न बीटा…”
अहम सिर्फ सिसक रहा था… “अम्मी… अम्मी…” bol-bol कर.
मैं वहां खड़ा… दरवाज़े के बहार… देख रहा था… और सोच रहा था — **ये सच में हो रहा है क्या? ममी… मेरी ममी… अपने बेटे के साथ…**
छोटी ममी सना अहम के गॉड में बैठी थी. उनकी लाइट ग्रीन सलवार अभी भी उनकी कमर तक थी, पंतय घुटनो तक नीचे. काली ब्रा का हुक खुला हुआ था, दोनों bade-bade चूचियां बहार निकले हुए थे — पसीने से चमक रहे थे, निप्पल टाइट और गहरे लाल.
ममी ने अहम के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ रखा था. वो dheere-dheere, बहुत धीरे उसके होंठ चूस रही थी. उनकी जीभ अहम के मुँह में घुसी हुई थी, उसके थूक को चाट रही थी. कभी वो अपना थूक अहम के मुँह में दाल देती, कभी अहम का थूक अपने मुँह में खींच लेती. दोनों के होंठों के बीच लार के तार बन रहे थे जो tut-te और फिर से बनते जा रहे थे.
अहम सिसक रहा था. उसकी आँखें बंद थी, हाथ काँप रहे थे, पर वो भी ममी के होंठ चूस रहा था. ममी ने अब उसके गले की तरफ मुँह ले जाय. उनकी जीभ उसके गले पे ऊपर से नीचे तक चाटने लगी — पसीने की बूँदें जो वहां जमा थी, उनको chaat-chaat के साफ़ कर रही थी. अहम के गले का पसीना ममी के होंठ और जीभ पे लग रहा था.
**छोटी ममी (गले को chaat-te हुए, सांस गरम करते हुए):**
“पसीना… अम्मी को तेरा पसीना बहुत अच्छा लगा बीटा… कितना नमकीन है… अह्ह्ह… …”
ममी ने अब अहम की शर्ट के बटन और खोल दिए. शर्ट दोनों तरफ फ़ैल गयी. उन्होंने अहम के सीने पे मुँह रख दिया और ज़ोर से चाटने लगी. उसके निप्पल्स को जीभ से घुमाया, फिर मुँह में ले कर चूसा. अहम के सीने का पसीना भी ममी चाट रही थी —
अहम अब कण्ट्रोल खोने लगा था. उसने धीरे से ममी की कमर पकड़ ली और सिसकते हुए बोलै,
**अहम:**
“अम्मी… उफ्फ्फ्फ़… अम्मी… … अह्ह्ह… अम्मी… बहुत अच्छा लग रहा है…”
ममी ने मुस्कुराते हुए अहम की तरफ देखा. उनकी आँखें अब बिलकुल हवस भरी थी. उन्होंने अपना मुँह अहम के सीने से हटाया, थोड़ा सा थूक उसके सीने पे छोड़ दिया और धीरे से उसको चाटने लगी.
फिर ममी ने खुद को थोड़ा ऊपर उठाया. उनकी सलवार और पंतय को पूरा नीचे कर दिया. अब वो बिलकुल नंगी छूट के साथ अहम के गॉड में बैठ गयी. उनकी गीली, पसीने और रास से भरी छूट अहम के खड़े लुंड पे रगड़ रही थी.
**छोटी ममी:**
“देख बीटा… अम्मी की छूट… कितनी गीली हो गयी है तेरे लिए… तू अम्मी को छोड़ना चाहता था न? अब बोल… अंदर डालेगा या अम्मी खुद ले ले?”
अहम सिर्फ सिसक रहा था. उसने ममी की मोती गांड पकड़ ली. ममी ने खुद अपनी छूट का मुँह फैलाया, अहम के लुंड का टोपा अपनी छूट के छेद पे सेट किया और बहुत dheere-dheere नीचे बैठ गयी.
लुंड dheere-dheere अंदर घुसा. ममी की आँखें बंद हो गयी, मुँह खुला रह गया. जब पूरा लुंड अंदर चला गया, ममी ने ज़ोर से सांस रोकी और अहम के गले से लिपट गयी.
**छोटी ममी :**
“आआह्ह्ह… बीटा… पूरा अंदर आ गया… अम्मी की छूट में तेरा लुंड… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मोटा है… अब… अब हिल… धीरे से… अम्मी को छोड़ बीटा… अपनी अम्मी को छोड़…”
ममी dheere-dheere upar-neeche होने लगी. हर बार जब वो नीचे बैठती, उनकी मोती गांड अहम की जाँघों पे डाब जाती. दोनों के बदन पसीने से tar-b-tar थे. ममी अब अहम के सीने पे अपने चूचियां रगड़ रही थी, निप्पल उसके सीने से चुभ रहे थे.
मैं बहार विंडो से देख रहा था. मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो रहा था. ममी अपने बेटे के गॉड में बैठ कर उसको छोड़ रही थी… और खुद उसके पसीने को, थूक को, बदन को चाट रही थी.
**छोटी ममी (तेज़ सांस लेते हुए, सिसकती हुई):**
“बीटा… अम्मी को और ज़ोर से… ahhh…Ammi तेरी है आज… पूरी तेरी…”
अहम अब सिर्फ “अम्मी… अम्मी…” बोल रहा था और ममी की गांड पकड़ कर उसके साथ हिल रहा था.
दोनों एक दूसरे के बदन से चिपके हुए थे
अचानक मेरा मोबाइल बजा. अब्बू का कॉल था.
**मैं:** “हाँ जी अब्बू… बोलो?”
**अब्बू (तेज़ आवाज़ में):** “असीम! सुन… तू वापस घर आ जा आज hi. शॉप पे बहुत काम बढ़ गया है. कल सुबह से तू भी मदद करेगा. बस पकड़ ले शाम की… समझ गया?”
**मैं:** “लेकिन अब्बू… यहाँ तोह…”
**अब्बू (गुस्से में):** “कोई लेकिन नहीं!… घर आ. ज़ैनब को भी बोल देना. समझ गया न बीटा?”
मैं हाँ बोलै और फ़ोन रख दिया. उफ्फ्फ्फ़… अब क्या होगा?
शाम को ज़ैनब आपि आयी. उसकी आँखों में थोड़ी सी मायूसी थी. मैं ने उनको सोफे पर बिठा के धीरे से बताया,
**मैं:** “आपि… अब्बू का कॉल आया था. आज hi घर वापस चलना है… शॉप पे काम है.”
ज़ैनब आपि का चेहरा एक सेकंड में उतर गया. वो मायूस हो गयी. उन्होंने अपना दुपट्टा सीने पे लपेटा और हलकी सी सिसकी ली,
**ज़ैनब आपि:** “आज hi? उफ्फ्फ्फ़… असीम… यहाँ इतना मज़ा आ रहा था… तू… तू और अहम… दोनों के साथ… अब सब ख़तम?”
मैं उनके पास बैठ गया. उनके bade-bade दूध अब भी सूट के ऊपर से उभरे हुए थे. मैंने उनके हाथ पकड़ लिया और बोलै,
**मैं:** “आपि… घर जाके भी मज़ा लेंगे न? वहां जाकर भी मज़े करेंगे… और तू तोह मेरी पर्सनल रंडी है अब…”
ज़ैनब आपि शर्मा कर मुस्कुरायी, पर आँखों में मायूसी अभी भी थी.
फिर मैं उठा और सीधा ममी के कमरे की तरफ चला गया. दरवाज़ा थोड़ा खुला था. अंदर ममी बीएड पे बैठी थी, दुपट्टा सीने पे लपेटे हुए. उनका चेहरा अभी भी थोड़ा लाल था.
ममी ने मुझे देखा. गुस्सा अभी भी आँखों में था. मैंने बीएड के पास बैठ गया और धीरे से बात शुरू की,
**मैं:** “ममी… प्लीज माफ़ कर दो… वो सब गलती से हो गया… मैं कभी नहीं करूँगा ऐसा…”
बात karte-karte मेरा हाथ धीरे से उनकी जांघ पे चला गया. उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम और मुलायम थी उनकी जांघ. सलवार के ऊपर से भी उनकी गर्मी फील हो रही थी. मैंने हलके से उनकी जांघ को सहलाने लगा…
और तभी…
**चटकककक!!!**
ममी ने एक ज़ोर का थप्पड़ मारा मेरे गाल पर. मेरा चेहरा पलट गया. उफ्फ्फ्फ़… कितना ज़ोर का था वो थप्पड़.
**ममी (तेज़ आवाज़ में, गुस्से से):** “असीम! तू पागल हो गया है क्या?! मैं तेरी ममी हूँ… बहार निकल यहाँ से… अभी निकल! वर्ण मैं तेरे अब्बू को सब बता दूंगी!”
मेरा गाल जलता हुआ था, पर अंदर से… उफ्फ्फ्फ़… ममी का ये गुस्सा देख कर मेरा लुंड पायजामा में और सख्त हो गया. उनके bade-bade दूध गुस्से में और उभर आये थे. उनकी मोती गांड बीएड पे डाब रही थी. वो रो रही थी… पर आँखों में वो तड़प भी थी जो मैं पहले भी महसूस कर चूका था.
मैं उठा और बहार निकल आया. पर दिमाग में सिर्फ एक hi ख्याल था…
**“ममी… तू इतना गुस्सा दिखती है… पर अंदर से तड़प रही है न? उफ्फ्फ्फ़… एक दिन तेरी मोती गांड… तेरे bade-bade दूध… सब मेरे हाथों में आएंगे… और तू खुद चीखेगी ‘असीम… और ज़ोर से…’”**
घर वापस जाने का टाइम आ गया था, पर मेरा दिल अभी भी यहीं अटक गया था. अब्बू का कॉल आने के बाद सब लोग तैयारी में लगे थे, पर मैं… मैं सिर्फ बुशरा को देख रहा था. उसकी वह टाइट पिंक कुर्ती और ब्लैक लेग्गिंग्स… उफ्फ्फ्फ़… कॉलेज से आती थी तोह हर बार उसकी पतली कमर और उभरी हुई गांड देख कर मेरा लुंड खड़ा हो जाता था. मैं चुपके से उसके दरवाज़े के पास खड़ा था.
रूम में सिर्फ बुशरा थी. अहम बहार था, बड़ी ममी किचन में, और बाकी सब apne-apne काम में. मैं धीरे से अंदर घुस गया. बुशरा बीएड पे बैठी थी, कुर्ती के ऊपर से उसके मध्यम साइज के दूध उभरे हुए थे – गोल, टाइट, ब्रा के बिना भी खड़े दीखते थे. जब वो झुक कर बैग में कपडे रख रही थी, उसके दूध आगे की तरफ लटक गए… क्लीवेज गहरा… उफ्फ्फ्फ़… मेरा लुंड पायजामा में एक झटका मार बैठा.
मैं पीछे से धीरे से उसके पास पहुँच गया. उसने मुझे महसूस नहीं किया. जैसे hi मैं उसके बिलकुल करीब आ गया, मैंने दोनों हाथों से उसके बड़े… गोल… टाइट दूध पकड़ लिए – कुर्ती के ऊपर से hi.
**बुशरा:** “अह्ह्ह्ह… असीम भाई… क्या कर रहे हो?! छोडो… छोडो मुझे!!”
वो ज़ोर से चिहुंक उठी. उसने दोनों हाथों से मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की, पर मैंने नहीं छोड़ा. उफ्फ्फ्फ़… कितने टाइट और गरम थे उसके दूध. कुर्ती के पतले कपडे के ऊपर से भी उनकी सॉफ्टनेस मेरे हाथों में आ रही थी. मैं zor-zor से मसलने लगा – ऊपर से नीचे, gol-gol घूमता… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के हलके से दबा रहा था.
**बुशरा (कांपती आवाज़ में):** “भाई… प्लीज… मत करो… ये गलत है… मैं आपकी बेहेन हूँ… छोडो… अह्ह्ह… दर्द हो रहा है…”
पर मैं नहीं छोड़ा. मैं उसके पीछे से और चिपक गया. मेरा खड़ा लुंड उसकी मोती गांड पे रगड़ खा रहा था. मैंने उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए धीरे से बोलै,
**मैं:** “बुशरा… चुप कर… मुझे सब मालुम है… तेरे और अहम का… सब कुछ…”
जैसे hi ये बात मेरे मुँह से निकली… बुशरा एकदम से सुन्न हो गयी. उसकी पूरा बदन काँप उठा. उसने मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश भी छोड़ दी. उसकी आँखें फैल गयी, चेहरा पूरा लाल पद गया. वो सिर्फ घूरती रही… जैसे बिजली गिर गयी हो.
**बुशरा (चौंक कर, कांपती आवाज़ में):** “क… क्या…?! अहम… और मैं?!”
मैं उसके दूध को और ज़ोर से मसलता हुआ हंस पड़ा. उफ्फ्फ्फ़… अब उसके दूध मेरे हाथों में और भी टाइट हो गए थे. मैं उसके कान में और धीरे से बोलै,
**मैं:** “मैं सब देख चूका हूँ बुशरा… जब अहम ने तेरी छूट में लुंड डाला था… उफ्फ्फ्फ़… कितनी टाइट थी तेरी छूट… और अब… अब तू मुझे भी छोड़ने देगी… वर्ण… मैं सबको बता दूंगा…… सबको…”
बुशरा का पूरा जिस्म thar-thar काँप रहा था. उसने आँखें बंद कर ली. उसके होंठ काँप रहे थे. पर उसके दूध अभी भी मेरे हाथों में थे… और मैं मसलता जा रहा था…
**बुशरा (रोटी सी आवाज़ में):** “असीम भाई… प्लीज… मत बताओ किसी को… मैं… मैं… उफ्फ्फ्फ़… बस छोड़ दो… अह्ह्ह…”
पर मैं नहीं छोड़ा. मेरा लुंड उसकी गांड पे और ज़ोर से रगड़ रहा था.
मैं उसके कान में और गरम सांस छोड़ते हुए बोलै,
**मैं:** “अब तू मेरी रंडी बनेगी बुशरा… अहम के बाद… अब मैं… और जब घर जायेंगे… वहां भी… तेरी छूट… तेरी गांड… सब मेरी होगी…”
बुशरा कुछ नहीं बोली… सिर्फ उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी… और उसके दूध मेरे हाथों में और भी गरम हो गए थे.
शाम के 7 बजे हॉल में सब लोग बैठे थे. नाश्ता लगा था – garam-garam पराठे, चाय और थोड़ी सी मिठाई. बड़े मां सोफे के एन्ड पे बैठे थे, उनका मोटा बदन कुशिओं में धंसा हुआ. बड़ी ममी उनके बगल में थी, दुपट्टा सीने पे लपेटे हुए. छोटे मां और छोटी ममी सना अपोजिट सोफे पे. यास्मीन आपि फ्लोर पे कुशिओं पे बैठी थी, इफ़्फ़त और बुशरा उसके दोनों तरफ. ज़ैनब आपि सबसे कार्नर में, बिलकुल चुप.
सब बातें कर रहे थे – पुराने दिनों की, Hansi-mazak चल रहा था, लेकिन ज़ैनब आपि का चेहरा बिलकुल उतरा हुआ था. वो सिर्फ haan-mein सर हिला रही थी, आँखें नीचे. दुपट्टा को baar-baar सीने पे ठीक कर रही थी. उसके bade-bade दूध भी आज थोड़े से दबके हुए लग रहे थे, जैसे वो jaan-bujh कर छुपाने की कोशिश कर रही हो.
बड़े मां ने एक बार उसकी तरफ देखा. फिर धीरे से अपना मोबाइल उठाया, कुछ टाइप किया और ज़ैनब आपि की तरफ भेज दिया. मोबाइल की हलकी सी वाइब्रेशन हुई. ज़ैनब आपि ने फ़ोन देखा… और उसका चेहरा एक सेकंड में लाल पद गया. उसने झट से फ़ोन साइड में रख दिया, आँखें नीचे कर ली. गाल इतने लाल हो गए की पसीना भी निकल आया.
बड़े मां हलके से मुस्कुराये, पर आवाज़ नार्मल रखते हुए बोले,
**बड़े मां:** “ज़ैनब बीटा, कल सुबह बस है न? रात भर तोह ठीक से सो लेना… सफर लम्बा है.”
ज़ैनब आपि सिर्फ “हाँ मां…” में सर हिला दिया. उसकी आवाज़ में थोड़ी सी काँप थी. उसने दुपट्टा को और टाइट सीने पे लपेट लिया, जैसे अपने दूध को छुपाने की कोशिश कर रही हो. पर बड़े मां की नज़र उसके उभरे हुए दूध पे hi अटकी रही. उन्होंने फिर से फ़ोन पे कुछ टाइप किया और भेज दिया.
ज़ैनब आपि ने दूसरा मैसेज पढ़ा… और इस बार उसने अपना हाथ अपनी जांघ पे रख liya.Uski सांस थोड़ी तेज़ हो गयी. वो baar-baar अपनी सलवार की नाडा को ठीक कर रही थी.
मैं सब देख रहा था. कार्नर में बैठा था, पर मेरी नज़र ज़ैनब आपि और बड़े मां के बीच के इशारे पे थी. बड़े मां का चेहरा बिलकुल नार्मल था, जैसे कुछ भी नहीं हो रहा हो, लेकिन उनकी आँखों में गन्दी चमक थी.
थोड़ी देर बाद बड़े मां उठ गए और बोले
**बड़े मां:** “मैं छत पर चला जाता हूँ… थोड़ी हवा खा लूँ. ज़ैनब, तू भी आ जा… .”
ज़ैनब आपि का चेहरा और लाल हो गया. उसने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा… फिर धीरे से उठ गयी. दुपट्टा को बहुत टाइट लपेट लिया और बड़े मां के peeche-peeche सीढ़ियों की तरफ चली गयी. उनकी मोती गांड सलवार में हिल रही थी, हर कदम पे दोनों नितम्ब alag-alag.
मैं चुपचाप बैठा रहा. सब लोग बातें कर रहे थे, पर मेरा दिमाग सिर्फ उन दोनों के पीछे था. बड़े मां का इशारा, ज़ैनब आपि का शरमाया चेहरा… और अब छत पर अकेली जा रही थी.
अंदर से एक करंट सा दौड़ गया.
हॉल में सब लोग बातें कर रहे थे, लेकिन मेरा दिमाग कहीं और था. यास्मीन आपि निचे फ्लोर पर बैठी थी, लाइट पिंक सलवार सूट में. दुपट्टा उसके सीने पे लूसेली लपेटा हुआ था, पर पसीने की वजह से कपडा थोड़ा चिपका हुआ था. जब वो झुक कर चाय का कप उठती, उसके bade-bade दूध थोड़ा सा आगे लटक जाते थे. उसकी मोती गांड कुशिओं पे डाब रही थी, सलवार के दोनों हिस्से alag-alag उभर आये थे.
मैं उसकी तरफ देखता रहा. जब उसकी नज़र मेरी तरफ पड़ी, मैंने धीरे से आँख से इशारा किया — ऊपर छत पर. यास्मीन आपि का चेहरा एक पल के लिए बदला. उसने आँखें नीचे कर ली, दुपट्टा सीने पे और टाइट लपेट लिया, पर मैंने देख लिया था — उसके गाल हलके से लाल हो गए थे.
थोड़ी देर बाद मैं उठा और सीधा छत की सीढ़ियों की तरफ चला गया. पीछे से छोटे मां की आवाज़ आयी — “कहाँ जा रहा है बीटा?” मैंने सिर्फ “हवा खाने” बोल दिया और चढ़ गया.
छत पर पहुँच कर मैं गेट के पास खड़ा हो गया और छत पर झाँका.
वहां कार्नर में बड़े मां और ज़ैनब आपि खड़े थे. मां ने ज़ैनब आपि को दीवार से सत्ता रखा था. उनका मोटा हाथ उसकी सलवार के अंदर घुसा हुआ था, zor-zor से उसकी छूट में उँगलियाँ चला रहे थे. ज़ैनब आपि की सांसें तेज़ थी, आँखें बंद, होंठ दबाये हुए. मां उसके कान में कुछ बोल रहे थे और उसकी गांड पे दूसरे हाथ से थप्पड़ मार रहे थे — halke-halke, पर आवाज़ आ रही थी.
मैं और थोड़ा झुक कर देखने लगा. तभी पीछे से हलकी सी सांस की आवाज़ आयी.
यास्मीन आपि सीढ़ियों से ऊपर आ गयी थी. जैसे hi उसने मुझे देखा, उसने रुकने की कोशिश की, पर मैंने झट से उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींच लिया. गेट के बिलकुल पास, अँधेरे में.
**मैं (उसके कान में धीरे से,):**
“चुप… देखो आपि… देखो आपके अब्बू क्या कर रहे हैं ज़ैनब आपि के साथ…”
यास्मीन आपि का पूरा बदन काँप उठा. उसने झाँका. बड़े मां अब ज़ैनब आपि की सलवार नीचे कर चुके थे. उनकी मोती गांड ऊपर उठी हुई थी और मां पीछे से उँगलियाँ andar-bahar कर रहे थे. ज़ैनब आपि सिसक रही थी — “मां… धीरे… कोई आ जायेगा…”
मैं यास्मीन आपि के पीछे बिलकुल चिपक गया. मेरा खड़ा लुंड उसकी मोती गांड पे रगड़ने लगा. उसके दोनों हाथों को पकड़ कर मैंने उनको गेट के दरवाज़े पे टिका दिया ताकि वो देख सके.
**मैं (उसके कान में गन्दी आवाज़ में):**
“देखो… आपके अब्बू ज़ैनब आपि की छूट में उँगलियाँ दाल रहे हैं… कितनी गीली हो गयी है वो रंडी… अह्ह्ह… आपकी गांड भी गरम हो रही है न आपि?”
यास्मीन आपि कुछ बोल नहीं प् रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी. मैं ने उसकी सलवार का नाडा पकड़ा और धीरे से नीचे खिसका दिया. उसकी पंतय भी साथ में. अब उसकी मोती, गोरी गांड बिलकुल नंगी थी मेरे सामने.
मैंने अपना लुंड बहार निकला — पसीने और पानी से चमक रहा था — और उसकी गीली छूट के मुँह पे रगड़ने लगा.
**मैं (उसके कान में):**
“ले मादरचोद रंडी साली …”
एक हल्का सा धक्का मारा और लुंड अंदर घुसा. यास्मीन आपि ने मुँह पे हाथ रख लिया ताकि आवाज़ न निकले. उसकी छूट बहुत गीली थी. मैं dheere-dheere andar-bahar करने लगा ताकि गेट के पास खड़े Mama-Zainab को आवाज़ न हो.
**मैं (उसके कान में ):**
“अह्ह्ह… आपि… देखो… आपके अब्बू ज़ैनब आपि को छोड़ रहे हैं…… उफ्फ्फ्फ़… कितनी टाइट है तेरी छूट…
मैं और थोड़ा अंदर घुसा और धीरे से बोलने लगा,
**मैं:**
“जाने के बाद… मेरे जाने के बाद… आप अपने अब्बू को फंसा लेना आपि… मां को… उनकी बेटी की छूट में लुंड डालने का मौका दे देना… बोलिये… करोगी न? बोलिये… आप भी अपने अब्बू से छोड़ना चाहती हैं न?”
यास्मीन आपि का पूरा बदन काँप उठा. उसने सिर्फ सिसकी ली, पर उसकी छूट ने मेरे लुंड को और ज़ोर से जकड लिया. मैं समझ गया — वो गरम हो गयी थी.
मैं उसके कान में और तेज़ बोलने लगा,
**मैं:**
“बोल आपि… हाँ बोल… मेरे जाने के बाद मां को अपनी छूट में लेने का प्लान बना लेना… उनके लुंड को अपनी मोती गांड में लेना… अह्ह्ह… बोल… रंडी बन जाएगी न अपने अब्बू की…?”
यास्मीन आपि अब सिर्फ सिसक रही थी. उसकी गांड मेरे धक्कों के साथ खुद पीछे हिल रही थी.
मां उधर ज़ैनब आपि के छूट में झाड़ गए और इधर मैं भी..
रात के खाने के बाद घर में बिलकुल सन्नाटा था. सब लोग apne-apne कमरों में सो चुके थे. मैं भी बिस्तर पे लेट गया था, पर नींद नहीं आ रही थी.
तभी मेरा मोबाइल हलके से विबरते हुआ. एक मैसेज आया — **छोटी ममी** का
“स्टोर रूम में आ जाओ. अभी.”
मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा. मैं उठा, पायजामा ठीक किया और धीरे से बहार निकला. घर पूरा अँधेरा था, सिर्फ किचन के पास वाली छोटी बल्ब जल रही थी. स्टोर रूम घर के पिछले हिस्से में था, जहाँ पुराण सामान रखा रहता था.
मैं धीरे से दरवाज़ा खोला. अंदर सिर्फ एक पुराणी टेबल लैंप जल रही थी. ममी वहां कड़ी थी — लाइट ग्रीन सलवार सूट में, दुपट्टा अभी भी शोल्डर्स पे लटका हुआ था. उनका चेहरा थोड़ा लाल था, आँखें नीचे की हुई.
जैसे hi मैं अंदर घुसा, उन्होंने दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया और लॉक लगा दिया.
**छोटी ममी (हलकी, लेकिन कांपती आवाज़ में):**
“असीम… सच बता… अहम सच में मेरे बारे में ऐसा सोचता है?”
मैं नीचे देखते हुए धीरे से बोलै,
“हाँ ममी… वो सच बोल रहा था. उसने मुझे सब बताया था… जब से उसने आपको नहाते हुए देखा था… तब से…”
ममी की सांस एक सेकंड के लिए रुक गयी. उनकी आँखें अजीब सी हो गयी — गुस्सा, शॉक और कुछ और मिला हुआ. उन्होंने गहरी सांस ली और धीरे से बोली,
**छोटी ममी:**
“ठीक है… तू अब जा के सो जा. और अहम को भेज दे मेरे पास… मुझे उससे कुछ बात करनी है.”
मैं तुरंत बोलै,
“ममी… प्लीज… उसको मत डांटना. वो बहुत डर गया है… गलती से हो गया सब…”
ममी ने सिर्फ हाथ से इशारा किया — “जा.”
मैं बहार निकला. दिल zor-zor से धड़क रहा था. मैं सीधा अहम के रूम में गया. वो बीएड पे बैठा था, मोबाइल हाथ में, उसका चेहरा बिलकुल सफ़ेद पद गया था जब मैंने उसे सब कुछ बताया.
**मैं:**
“अहम… ममी ने तुझे बुलाया है स्टोर रूम में. जा… और डर मत. बस जो भी पूछे, सच बता देना.”
अहम का चेहरा और भी उतर गया. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया,
“भाई… मुझे मत भेज… वो बहुत गुस्सा करेंगी… मैं नहीं जाऊंगा…”
मैं ने उसको ज़ोर से धक्का दिया,
“जा सेल… वर्ण और बड़ा सन हो जायेगा. जा अभी.”
अहम darte-darte उठा और बहार चला गया. मैं भी थोड़ी देर बाद उसके peeche-peeche गया. स्टोर रूम का दरवाज़ा बंद था, पर ऊपर वाला छोटा विंडो थोड़ा खुला था.
मैं धीरे से विंडो के पास पहुंचा और अंदर झाँका.
अंदर का नज़ारा देख कर मेरा पूरा बदन सुन्न पद गया.
पुराणी टूटी हुई बेंच पर अहम बैठा था. उसकी शर्ट के सारे बटन खुले हुए थे, शर्ट दोनों तरफ फैली हुई थी. छोटी ममी सना उसके गॉड में बैठ गयी थी — सिर्फ सलवार और काली ब्रा में. उनका दुपट्टा ज़मीन पर गिरा हुआ था.
ममी अहम को पागलो की तरह चुम रही थी.
पहले उसके होंठ पे zor-zor से किश कर रही थी, जीभ अंदर दाल रही थी. फिर उसके सीने पे मुँह ले जाती, निप्पल को मुँह में लेकर चूस रही थी. कभी उसके गले को चाट रही थी, कभी कान को काट रही थी. उनके bade-bade दूध काली ब्रा के अंदर से zor-zor से उभर रहे थे और अहम के सीने से रगड़ खा रहे थे.
अहम सिसक रहा था… बिलकुल छोटे बच्चे की तरह.
**अहम (सिसकती हुई, कांपती आवाज़ में):**
“अम्मी… उफ्फ्फ्फ़… अम्मी… क्या कर रही हो… अह्ह्ह… प्लीज… अम्मी…”
ममी ने उसके बाल पकड़ लिए, उसका चेहरा ऊपर किया और फिर से ज़ोर से होंठ पे चुम लिया. उनकी जीभ अहम के मुँह में घुस रही थी. लार टपक रही थी दोनों के होंठों से. ममी की सांसें बहुत तेज़ थी.
**छोटी ममी:**
“बीटा… तू सच में अम्मी के बारे में ऐसा सोचता है? नहाते हुए देख कर… मुठ मारता था? बोल न… अम्मी की चूचियां देख कर… अम्मी की गांड देख कर… तू पागल हो जाता था न? अब बोल… अम्मी को छोड़ना चाहता था न तू?”
अहम सिर्फ सिसक रहा था. उसके हाथ काँप रहे थे, पर वो ममी के सीने से चिपका हुआ था.
ममी ने अपनी ब्रा का हुक खोला और ब्रा नीचे सरक दी. उफ्फ्फ्फ़… उनके bade-bade, भरे हुए, गोरी चूचियां बहार आ गए. निप्पल बिलकुल टाइट और लाल थे. ममी ने अहम का सर पकड़ कर उसके मुँह में एक चुकी दाल दी.
**छोटी ममी (सिसकती हुई):**
“ले बीटा… चूस… जो तू सोचता था… वो अब सच हो रहा है… अम्मी की चूचियां चूस… ज़ोर से चूस… अह्ह्ह… अम्मी भी बहुत तड़प रही थी… उफ्फ्फ्फ़… और ज़ोर से… काटो थोड़ा… हाँ बीटा… ऐसे hi…”
अहम अब कण्ट्रोल खोने लगा था. उसने ममी की चुकी मुँह में ले ली और चूसने लगा. ममी की आँखें बंद हो गयी थी, मुँह खुला था, सांसें तेज़ चल रही थी.
मैं विंडो के पास खड़ा था… पूरा पागल हो गया था. मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो रहा था. ममी… जो हमेशा इतनी शरीफ, इतनी स्ट्रिक्ट दिखती थी… आज अपने बेटे के गॉड में बैठ कर उसको अपनी चूचियां चुसवा रही थी… और खुद सिसक रही थी.
मैं और देख नहीं प् रहा था. पर आँख हटा भी नहीं प् रहा था.
ममी ने अब अहम की पंत का नाडा खोल दिया. उसका लुंड बहार आ गया — खड़ा, पसीने से गीला. ममी ने उसको हाथ में पकड़ा और धीरे से हिलने लगी, साथ hi उसके मुँह में अपनी दूसरी चुकी दाल दी.
**छोटी ममी (गरम आवाज़ में):**
“बीटा… अम्मी को बता… तू कितने दिन से अम्मी की छूट के बारे में सोच रहा था? बोल… अम्मी अब तुझे सब दे देगी… जो तू चाहे… बस बोल न बीटा…”
अहम सिर्फ सिसक रहा था… “अम्मी… अम्मी…” bol-bol कर.
मैं वहां खड़ा… दरवाज़े के बहार… देख रहा था… और सोच रहा था — **ये सच में हो रहा है क्या? ममी… मेरी ममी… अपने बेटे के साथ…**
छोटी ममी सना अहम के गॉड में बैठी थी. उनकी लाइट ग्रीन सलवार अभी भी उनकी कमर तक थी, पंतय घुटनो तक नीचे. काली ब्रा का हुक खुला हुआ था, दोनों bade-bade चूचियां बहार निकले हुए थे — पसीने से चमक रहे थे, निप्पल टाइट और गहरे लाल.
ममी ने अहम के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ रखा था. वो dheere-dheere, बहुत धीरे उसके होंठ चूस रही थी. उनकी जीभ अहम के मुँह में घुसी हुई थी, उसके थूक को चाट रही थी. कभी वो अपना थूक अहम के मुँह में दाल देती, कभी अहम का थूक अपने मुँह में खींच लेती. दोनों के होंठों के बीच लार के तार बन रहे थे जो tut-te और फिर से बनते जा रहे थे.
अहम सिसक रहा था. उसकी आँखें बंद थी, हाथ काँप रहे थे, पर वो भी ममी के होंठ चूस रहा था. ममी ने अब उसके गले की तरफ मुँह ले जाय. उनकी जीभ उसके गले पे ऊपर से नीचे तक चाटने लगी — पसीने की बूँदें जो वहां जमा थी, उनको chaat-chaat के साफ़ कर रही थी. अहम के गले का पसीना ममी के होंठ और जीभ पे लग रहा था.
**छोटी ममी (गले को chaat-te हुए, सांस गरम करते हुए):**
“पसीना… अम्मी को तेरा पसीना बहुत अच्छा लगा बीटा… कितना नमकीन है… अह्ह्ह… …”
ममी ने अब अहम की शर्ट के बटन और खोल दिए. शर्ट दोनों तरफ फ़ैल गयी. उन्होंने अहम के सीने पे मुँह रख दिया और ज़ोर से चाटने लगी. उसके निप्पल्स को जीभ से घुमाया, फिर मुँह में ले कर चूसा. अहम के सीने का पसीना भी ममी चाट रही थी —
अहम अब कण्ट्रोल खोने लगा था. उसने धीरे से ममी की कमर पकड़ ली और सिसकते हुए बोलै,
**अहम:**
“अम्मी… उफ्फ्फ्फ़… अम्मी… … अह्ह्ह… अम्मी… बहुत अच्छा लग रहा है…”
ममी ने मुस्कुराते हुए अहम की तरफ देखा. उनकी आँखें अब बिलकुल हवस भरी थी. उन्होंने अपना मुँह अहम के सीने से हटाया, थोड़ा सा थूक उसके सीने पे छोड़ दिया और धीरे से उसको चाटने लगी.
फिर ममी ने खुद को थोड़ा ऊपर उठाया. उनकी सलवार और पंतय को पूरा नीचे कर दिया. अब वो बिलकुल नंगी छूट के साथ अहम के गॉड में बैठ गयी. उनकी गीली, पसीने और रास से भरी छूट अहम के खड़े लुंड पे रगड़ रही थी.
**छोटी ममी:**
“देख बीटा… अम्मी की छूट… कितनी गीली हो गयी है तेरे लिए… तू अम्मी को छोड़ना चाहता था न? अब बोल… अंदर डालेगा या अम्मी खुद ले ले?”
अहम सिर्फ सिसक रहा था. उसने ममी की मोती गांड पकड़ ली. ममी ने खुद अपनी छूट का मुँह फैलाया, अहम के लुंड का टोपा अपनी छूट के छेद पे सेट किया और बहुत dheere-dheere नीचे बैठ गयी.
लुंड dheere-dheere अंदर घुसा. ममी की आँखें बंद हो गयी, मुँह खुला रह गया. जब पूरा लुंड अंदर चला गया, ममी ने ज़ोर से सांस रोकी और अहम के गले से लिपट गयी.
**छोटी ममी :**
“आआह्ह्ह… बीटा… पूरा अंदर आ गया… अम्मी की छूट में तेरा लुंड… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मोटा है… अब… अब हिल… धीरे से… अम्मी को छोड़ बीटा… अपनी अम्मी को छोड़…”
ममी dheere-dheere upar-neeche होने लगी. हर बार जब वो नीचे बैठती, उनकी मोती गांड अहम की जाँघों पे डाब जाती. दोनों के बदन पसीने से tar-b-tar थे. ममी अब अहम के सीने पे अपने चूचियां रगड़ रही थी, निप्पल उसके सीने से चुभ रहे थे.
मैं बहार विंडो से देख रहा था. मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो रहा था. ममी अपने बेटे के गॉड में बैठ कर उसको छोड़ रही थी… और खुद उसके पसीने को, थूक को, बदन को चाट रही थी.
**छोटी ममी (तेज़ सांस लेते हुए, सिसकती हुई):**
“बीटा… अम्मी को और ज़ोर से… ahhh…Ammi तेरी है आज… पूरी तेरी…”
अहम अब सिर्फ “अम्मी… अम्मी…” बोल रहा था और ममी की गांड पकड़ कर उसके साथ हिल रहा था.
दोनों एक दूसरे के बदन से चिपके हुए थे