Adultery Meri Shareef Family Ki Hawas - Page 3 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Meri Shareef Family Ki Hawas

मैं बहार हॉल के सोफे पर बैठा था, मोबाइल हाथ में था, पर दिमाग पूरा ममी के लाल गाल और उनके उभरे हुए दूध पे अटका हुआ था. उफ्फ्फ्फ़… वो थप्पड़ तोह बहुत ज़ोर से पड़ा था, पर उसके बाद ममी का चेहरा… वो गुस्से में भी कितनी सेक्सी लग रही थी. उनकी मोती गांड बीएड पे दबते वक़्त हिल रही थी, सलवार टाइट चिपकी हुई… और वो bade-bade दूध हर सांस के साथ upar-neeche…



अचानक मेरा मोबाइल बजा. अब्बू का कॉल था.

**मैं:** “हाँ जी अब्बू… बोलो?”

**अब्बू (तेज़ आवाज़ में):** “असीम! सुन… तू वापस घर आ जा आज hi. शॉप पे बहुत काम बढ़ गया है. कल सुबह से तू भी मदद करेगा. बस पकड़ ले शाम की… समझ गया?”

**मैं:** “लेकिन अब्बू… यहाँ तोह…”

**अब्बू (गुस्से में):** “कोई लेकिन नहीं!… घर आ. ज़ैनब को भी बोल देना. समझ गया न बीटा?”

मैं हाँ बोलै और फ़ोन रख दिया. उफ्फ्फ्फ़… अब क्या होगा?

शाम को ज़ैनब आपि आयी. उसकी आँखों में थोड़ी सी मायूसी थी. मैं ने उनको सोफे पर बिठा के धीरे से बताया,

**मैं:** “आपि… अब्बू का कॉल आया था. आज hi घर वापस चलना है… शॉप पे काम है.”

ज़ैनब आपि का चेहरा एक सेकंड में उतर गया. वो मायूस हो गयी. उन्होंने अपना दुपट्टा सीने पे लपेटा और हलकी सी सिसकी ली,

**ज़ैनब आपि:** “आज hi? उफ्फ्फ्फ़… असीम… यहाँ इतना मज़ा आ रहा था… तू… तू और अहम… दोनों के साथ… अब सब ख़तम?”

मैं उनके पास बैठ गया. उनके bade-bade दूध अब भी सूट के ऊपर से उभरे हुए थे. मैंने उनके हाथ पकड़ लिया और बोलै,

**मैं:** “आपि… घर जाके भी मज़ा लेंगे न? वहां जाकर भी मज़े करेंगे… और तू तोह मेरी पर्सनल रंडी है अब…”

ज़ैनब आपि शर्मा कर मुस्कुरायी, पर आँखों में मायूसी अभी भी थी.

फिर मैं उठा और सीधा ममी के कमरे की तरफ चला गया. दरवाज़ा थोड़ा खुला था. अंदर ममी बीएड पे बैठी थी, दुपट्टा सीने पे लपेटे हुए. उनका चेहरा अभी भी थोड़ा लाल था.

ममी ने मुझे देखा. गुस्सा अभी भी आँखों में था. मैंने बीएड के पास बैठ गया और धीरे से बात शुरू की,

**मैं:** “ममी… प्लीज माफ़ कर दो… वो सब गलती से हो गया… मैं कभी नहीं करूँगा ऐसा…”

बात karte-karte मेरा हाथ धीरे से उनकी जांघ पे चला गया. उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम और मुलायम थी उनकी जांघ. सलवार के ऊपर से भी उनकी गर्मी फील हो रही थी. मैंने हलके से उनकी जांघ को सहलाने लगा…

और तभी…

**चटकककक!!!**

ममी ने एक ज़ोर का थप्पड़ मारा मेरे गाल पर. मेरा चेहरा पलट गया. उफ्फ्फ्फ़… कितना ज़ोर का था वो थप्पड़.

**ममी (तेज़ आवाज़ में, गुस्से से):** “असीम! तू पागल हो गया है क्या?! मैं तेरी ममी हूँ… बहार निकल यहाँ से… अभी निकल! वर्ण मैं तेरे अब्बू को सब बता दूंगी!”

मेरा गाल जलता हुआ था, पर अंदर से… उफ्फ्फ्फ़… ममी का ये गुस्सा देख कर मेरा लुंड पायजामा में और सख्त हो गया. उनके bade-bade दूध गुस्से में और उभर आये थे. उनकी मोती गांड बीएड पे डाब रही थी. वो रो रही थी… पर आँखों में वो तड़प भी थी जो मैं पहले भी महसूस कर चूका था.

मैं उठा और बहार निकल आया. पर दिमाग में सिर्फ एक hi ख्याल था…

**“ममी… तू इतना गुस्सा दिखती है… पर अंदर से तड़प रही है न? उफ्फ्फ्फ़… एक दिन तेरी मोती गांड… तेरे bade-bade दूध… सब मेरे हाथों में आएंगे… और तू खुद चीखेगी ‘असीम… और ज़ोर से…’”**

घर वापस जाने का टाइम आ गया था, पर मेरा दिल अभी भी यहीं अटक गया था. अब्बू का कॉल आने के बाद सब लोग तैयारी में लगे थे, पर मैं… मैं सिर्फ बुशरा को देख रहा था. उसकी वह टाइट पिंक कुर्ती और ब्लैक लेग्गिंग्स… उफ्फ्फ्फ़… कॉलेज से आती थी तोह हर बार उसकी पतली कमर और उभरी हुई गांड देख कर मेरा लुंड खड़ा हो जाता था. मैं चुपके से उसके दरवाज़े के पास खड़ा था.

रूम में सिर्फ बुशरा थी. अहम बहार था, बड़ी ममी किचन में, और बाकी सब apne-apne काम में. मैं धीरे से अंदर घुस गया. बुशरा बीएड पे बैठी थी, कुर्ती के ऊपर से उसके मध्यम साइज के दूध उभरे हुए थे – गोल, टाइट, ब्रा के बिना भी खड़े दीखते थे. जब वो झुक कर बैग में कपडे रख रही थी, उसके दूध आगे की तरफ लटक गए… क्लीवेज गहरा… उफ्फ्फ्फ़… मेरा लुंड पायजामा में एक झटका मार बैठा.

मैं पीछे से धीरे से उसके पास पहुँच गया. उसने मुझे महसूस नहीं किया. जैसे hi मैं उसके बिलकुल करीब आ गया, मैंने दोनों हाथों से उसके बड़े… गोल… टाइट दूध पकड़ लिए – कुर्ती के ऊपर से hi.

**बुशरा:** “अह्ह्ह्ह… असीम भाई… क्या कर रहे हो?! छोडो… छोडो मुझे!!”

वो ज़ोर से चिहुंक उठी. उसने दोनों हाथों से मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की, पर मैंने नहीं छोड़ा. उफ्फ्फ्फ़… कितने टाइट और गरम थे उसके दूध. कुर्ती के पतले कपडे के ऊपर से भी उनकी सॉफ्टनेस मेरे हाथों में आ रही थी. मैं zor-zor से मसलने लगा – ऊपर से नीचे, gol-gol घूमता… निप्पल को उँगलियों से पकड़ के हलके से दबा रहा था.

**बुशरा (कांपती आवाज़ में):** “भाई… प्लीज… मत करो… ये गलत है… मैं आपकी बेहेन हूँ… छोडो… अह्ह्ह… दर्द हो रहा है…”

पर मैं नहीं छोड़ा. मैं उसके पीछे से और चिपक गया. मेरा खड़ा लुंड उसकी मोती गांड पे रगड़ खा रहा था. मैंने उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए धीरे से बोलै,

**मैं:** “बुशरा… चुप कर… मुझे सब मालुम है… तेरे और अहम का… सब कुछ…”

जैसे hi ये बात मेरे मुँह से निकली… बुशरा एकदम से सुन्न हो गयी. उसकी पूरा बदन काँप उठा. उसने मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश भी छोड़ दी. उसकी आँखें फैल गयी, चेहरा पूरा लाल पद गया. वो सिर्फ घूरती रही… जैसे बिजली गिर गयी हो.

**बुशरा (चौंक कर, कांपती आवाज़ में):** “क… क्या…?! अहम… और मैं?!”

मैं उसके दूध को और ज़ोर से मसलता हुआ हंस पड़ा. उफ्फ्फ्फ़… अब उसके दूध मेरे हाथों में और भी टाइट हो गए थे. मैं उसके कान में और धीरे से बोलै,

**मैं:** “मैं सब देख चूका हूँ बुशरा… जब अहम ने तेरी छूट में लुंड डाला था… उफ्फ्फ्फ़… कितनी टाइट थी तेरी छूट… और अब… अब तू मुझे भी छोड़ने देगी… वर्ण… मैं सबको बता दूंगा…… सबको…”

बुशरा का पूरा जिस्म thar-thar काँप रहा था. उसने आँखें बंद कर ली. उसके होंठ काँप रहे थे. पर उसके दूध अभी भी मेरे हाथों में थे… और मैं मसलता जा रहा था…

**बुशरा (रोटी सी आवाज़ में):** “असीम भाई… प्लीज… मत बताओ किसी को… मैं… मैं… उफ्फ्फ्फ़… बस छोड़ दो… अह्ह्ह…”

पर मैं नहीं छोड़ा. मेरा लुंड उसकी गांड पे और ज़ोर से रगड़ रहा था.

मैं उसके कान में और गरम सांस छोड़ते हुए बोलै,

**मैं:** “अब तू मेरी रंडी बनेगी बुशरा… अहम के बाद… अब मैं… और जब घर जायेंगे… वहां भी… तेरी छूट… तेरी गांड… सब मेरी होगी…”

बुशरा कुछ नहीं बोली… सिर्फ उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी… और उसके दूध मेरे हाथों में और भी गरम हो गए थे.

शाम के 7 बजे हॉल में सब लोग बैठे थे. नाश्ता लगा था – garam-garam पराठे, चाय और थोड़ी सी मिठाई. बड़े मां सोफे के एन्ड पे बैठे थे, उनका मोटा बदन कुशिओं में धंसा हुआ. बड़ी ममी उनके बगल में थी, दुपट्टा सीने पे लपेटे हुए. छोटे मां और छोटी ममी सना अपोजिट सोफे पे. यास्मीन आपि फ्लोर पे कुशिओं पे बैठी थी, इफ़्फ़त और बुशरा उसके दोनों तरफ. ज़ैनब आपि सबसे कार्नर में, बिलकुल चुप.

सब बातें कर रहे थे – पुराने दिनों की, Hansi-mazak चल रहा था, लेकिन ज़ैनब आपि का चेहरा बिलकुल उतरा हुआ था. वो सिर्फ haan-mein सर हिला रही थी, आँखें नीचे. दुपट्टा को baar-baar सीने पे ठीक कर रही थी. उसके bade-bade दूध भी आज थोड़े से दबके हुए लग रहे थे, जैसे वो jaan-bujh कर छुपाने की कोशिश कर रही हो.

बड़े मां ने एक बार उसकी तरफ देखा. फिर धीरे से अपना मोबाइल उठाया, कुछ टाइप किया और ज़ैनब आपि की तरफ भेज दिया. मोबाइल की हलकी सी वाइब्रेशन हुई. ज़ैनब आपि ने फ़ोन देखा… और उसका चेहरा एक सेकंड में लाल पद गया. उसने झट से फ़ोन साइड में रख दिया, आँखें नीचे कर ली. गाल इतने लाल हो गए की पसीना भी निकल आया.

बड़े मां हलके से मुस्कुराये, पर आवाज़ नार्मल रखते हुए बोले,

**बड़े मां:** “ज़ैनब बीटा, कल सुबह बस है न? रात भर तोह ठीक से सो लेना… सफर लम्बा है.”

ज़ैनब आपि सिर्फ “हाँ मां…” में सर हिला दिया. उसकी आवाज़ में थोड़ी सी काँप थी. उसने दुपट्टा को और टाइट सीने पे लपेट लिया, जैसे अपने दूध को छुपाने की कोशिश कर रही हो. पर बड़े मां की नज़र उसके उभरे हुए दूध पे hi अटकी रही. उन्होंने फिर से फ़ोन पे कुछ टाइप किया और भेज दिया.

ज़ैनब आपि ने दूसरा मैसेज पढ़ा… और इस बार उसने अपना हाथ अपनी जांघ पे रख liya.Uski सांस थोड़ी तेज़ हो गयी. वो baar-baar अपनी सलवार की नाडा को ठीक कर रही थी.

मैं सब देख रहा था. कार्नर में बैठा था, पर मेरी नज़र ज़ैनब आपि और बड़े मां के बीच के इशारे पे थी. बड़े मां का चेहरा बिलकुल नार्मल था, जैसे कुछ भी नहीं हो रहा हो, लेकिन उनकी आँखों में गन्दी चमक थी.

थोड़ी देर बाद बड़े मां उठ गए और बोले

**बड़े मां:** “मैं छत पर चला जाता हूँ… थोड़ी हवा खा लूँ. ज़ैनब, तू भी आ जा… .”

ज़ैनब आपि का चेहरा और लाल हो गया. उसने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा… फिर धीरे से उठ गयी. दुपट्टा को बहुत टाइट लपेट लिया और बड़े मां के peeche-peeche सीढ़ियों की तरफ चली गयी. उनकी मोती गांड सलवार में हिल रही थी, हर कदम पे दोनों नितम्ब alag-alag.

मैं चुपचाप बैठा रहा. सब लोग बातें कर रहे थे, पर मेरा दिमाग सिर्फ उन दोनों के पीछे था. बड़े मां का इशारा, ज़ैनब आपि का शरमाया चेहरा… और अब छत पर अकेली जा रही थी.

अंदर से एक करंट सा दौड़ गया.

हॉल में सब लोग बातें कर रहे थे, लेकिन मेरा दिमाग कहीं और था. यास्मीन आपि निचे फ्लोर पर बैठी थी, लाइट पिंक सलवार सूट में. दुपट्टा उसके सीने पे लूसेली लपेटा हुआ था, पर पसीने की वजह से कपडा थोड़ा चिपका हुआ था. जब वो झुक कर चाय का कप उठती, उसके bade-bade दूध थोड़ा सा आगे लटक जाते थे. उसकी मोती गांड कुशिओं पे डाब रही थी, सलवार के दोनों हिस्से alag-alag उभर आये थे.

मैं उसकी तरफ देखता रहा. जब उसकी नज़र मेरी तरफ पड़ी, मैंने धीरे से आँख से इशारा किया — ऊपर छत पर. यास्मीन आपि का चेहरा एक पल के लिए बदला. उसने आँखें नीचे कर ली, दुपट्टा सीने पे और टाइट लपेट लिया, पर मैंने देख लिया था — उसके गाल हलके से लाल हो गए थे.

थोड़ी देर बाद मैं उठा और सीधा छत की सीढ़ियों की तरफ चला गया. पीछे से छोटे मां की आवाज़ आयी — “कहाँ जा रहा है बीटा?” मैंने सिर्फ “हवा खाने” बोल दिया और चढ़ गया.

छत पर पहुँच कर मैं गेट के पास खड़ा हो गया और छत पर झाँका.

वहां कार्नर में बड़े मां और ज़ैनब आपि खड़े थे. मां ने ज़ैनब आपि को दीवार से सत्ता रखा था. उनका मोटा हाथ उसकी सलवार के अंदर घुसा हुआ था, zor-zor से उसकी छूट में उँगलियाँ चला रहे थे. ज़ैनब आपि की सांसें तेज़ थी, आँखें बंद, होंठ दबाये हुए. मां उसके कान में कुछ बोल रहे थे और उसकी गांड पे दूसरे हाथ से थप्पड़ मार रहे थे — halke-halke, पर आवाज़ आ रही थी.

मैं और थोड़ा झुक कर देखने लगा. तभी पीछे से हलकी सी सांस की आवाज़ आयी.

यास्मीन आपि सीढ़ियों से ऊपर आ गयी थी. जैसे hi उसने मुझे देखा, उसने रुकने की कोशिश की, पर मैंने झट से उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींच लिया. गेट के बिलकुल पास, अँधेरे में.

**मैं (उसके कान में धीरे से,):**

“चुप… देखो आपि… देखो आपके अब्बू क्या कर रहे हैं ज़ैनब आपि के साथ…”

यास्मीन आपि का पूरा बदन काँप उठा. उसने झाँका. बड़े मां अब ज़ैनब आपि की सलवार नीचे कर चुके थे. उनकी मोती गांड ऊपर उठी हुई थी और मां पीछे से उँगलियाँ andar-bahar कर रहे थे. ज़ैनब आपि सिसक रही थी — “मां… धीरे… कोई आ जायेगा…”

मैं यास्मीन आपि के पीछे बिलकुल चिपक गया. मेरा खड़ा लुंड उसकी मोती गांड पे रगड़ने लगा. उसके दोनों हाथों को पकड़ कर मैंने उनको गेट के दरवाज़े पे टिका दिया ताकि वो देख सके.

**मैं (उसके कान में गन्दी आवाज़ में):**

“देखो… आपके अब्बू ज़ैनब आपि की छूट में उँगलियाँ दाल रहे हैं… कितनी गीली हो गयी है वो रंडी… अह्ह्ह… आपकी गांड भी गरम हो रही है न आपि?”

यास्मीन आपि कुछ बोल नहीं प् रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी. मैं ने उसकी सलवार का नाडा पकड़ा और धीरे से नीचे खिसका दिया. उसकी पंतय भी साथ में. अब उसकी मोती, गोरी गांड बिलकुल नंगी थी मेरे सामने.

मैंने अपना लुंड बहार निकला — पसीने और पानी से चमक रहा था — और उसकी गीली छूट के मुँह पे रगड़ने लगा.

**मैं (उसके कान में):**

“ले मादरचोद रंडी साली …”

एक हल्का सा धक्का मारा और लुंड अंदर घुसा. यास्मीन आपि ने मुँह पे हाथ रख लिया ताकि आवाज़ न निकले. उसकी छूट बहुत गीली थी. मैं dheere-dheere andar-bahar करने लगा ताकि गेट के पास खड़े Mama-Zainab को आवाज़ न हो.

**मैं (उसके कान में ):**

“अह्ह्ह… आपि… देखो… आपके अब्बू ज़ैनब आपि को छोड़ रहे हैं…… उफ्फ्फ्फ़… कितनी टाइट है तेरी छूट…

मैं और थोड़ा अंदर घुसा और धीरे से बोलने लगा,

**मैं:**

“जाने के बाद… मेरे जाने के बाद… आप अपने अब्बू को फंसा लेना आपि… मां को… उनकी बेटी की छूट में लुंड डालने का मौका दे देना… बोलिये… करोगी न? बोलिये… आप भी अपने अब्बू से छोड़ना चाहती हैं न?”

यास्मीन आपि का पूरा बदन काँप उठा. उसने सिर्फ सिसकी ली, पर उसकी छूट ने मेरे लुंड को और ज़ोर से जकड लिया. मैं समझ गया — वो गरम हो गयी थी.

मैं उसके कान में और तेज़ बोलने लगा,

**मैं:**

“बोल आपि… हाँ बोल… मेरे जाने के बाद मां को अपनी छूट में लेने का प्लान बना लेना… उनके लुंड को अपनी मोती गांड में लेना… अह्ह्ह… बोल… रंडी बन जाएगी न अपने अब्बू की…?”

यास्मीन आपि अब सिर्फ सिसक रही थी. उसकी गांड मेरे धक्कों के साथ खुद पीछे हिल रही थी.

मां उधर ज़ैनब आपि के छूट में झाड़ गए और इधर मैं भी..

रात के खाने के बाद घर में बिलकुल सन्नाटा था. सब लोग apne-apne कमरों में सो चुके थे. मैं भी बिस्तर पे लेट गया था, पर नींद नहीं आ रही थी.

तभी मेरा मोबाइल हलके से विबरते हुआ. एक मैसेज आया — **छोटी ममी** का

“स्टोर रूम में आ जाओ. अभी.”

मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा. मैं उठा, पायजामा ठीक किया और धीरे से बहार निकला. घर पूरा अँधेरा था, सिर्फ किचन के पास वाली छोटी बल्ब जल रही थी. स्टोर रूम घर के पिछले हिस्से में था, जहाँ पुराण सामान रखा रहता था.

मैं धीरे से दरवाज़ा खोला. अंदर सिर्फ एक पुराणी टेबल लैंप जल रही थी. ममी वहां कड़ी थी — लाइट ग्रीन सलवार सूट में, दुपट्टा अभी भी शोल्डर्स पे लटका हुआ था. उनका चेहरा थोड़ा लाल था, आँखें नीचे की हुई.

जैसे hi मैं अंदर घुसा, उन्होंने दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया और लॉक लगा दिया.

**छोटी ममी (हलकी, लेकिन कांपती आवाज़ में):**

“असीम… सच बता… अहम सच में मेरे बारे में ऐसा सोचता है?”

मैं नीचे देखते हुए धीरे से बोलै,

“हाँ ममी… वो सच बोल रहा था. उसने मुझे सब बताया था… जब से उसने आपको नहाते हुए देखा था… तब से…”

ममी की सांस एक सेकंड के लिए रुक गयी. उनकी आँखें अजीब सी हो गयी — गुस्सा, शॉक और कुछ और मिला हुआ. उन्होंने गहरी सांस ली और धीरे से बोली,

**छोटी ममी:**

“ठीक है… तू अब जा के सो जा. और अहम को भेज दे मेरे पास… मुझे उससे कुछ बात करनी है.”

मैं तुरंत बोलै,

“ममी… प्लीज… उसको मत डांटना. वो बहुत डर गया है… गलती से हो गया सब…”

ममी ने सिर्फ हाथ से इशारा किया — “जा.”

मैं बहार निकला. दिल zor-zor से धड़क रहा था. मैं सीधा अहम के रूम में गया. वो बीएड पे बैठा था, मोबाइल हाथ में, उसका चेहरा बिलकुल सफ़ेद पद गया था जब मैंने उसे सब कुछ बताया.

**मैं:**

“अहम… ममी ने तुझे बुलाया है स्टोर रूम में. जा… और डर मत. बस जो भी पूछे, सच बता देना.”

अहम का चेहरा और भी उतर गया. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया,

“भाई… मुझे मत भेज… वो बहुत गुस्सा करेंगी… मैं नहीं जाऊंगा…”

मैं ने उसको ज़ोर से धक्का दिया,

“जा सेल… वर्ण और बड़ा सन हो जायेगा. जा अभी.”

अहम darte-darte उठा और बहार चला गया. मैं भी थोड़ी देर बाद उसके peeche-peeche गया. स्टोर रूम का दरवाज़ा बंद था, पर ऊपर वाला छोटा विंडो थोड़ा खुला था.

मैं धीरे से विंडो के पास पहुंचा और अंदर झाँका.

अंदर का नज़ारा देख कर मेरा पूरा बदन सुन्न पद गया.

पुराणी टूटी हुई बेंच पर अहम बैठा था. उसकी शर्ट के सारे बटन खुले हुए थे, शर्ट दोनों तरफ फैली हुई थी. छोटी ममी सना उसके गॉड में बैठ गयी थी — सिर्फ सलवार और काली ब्रा में. उनका दुपट्टा ज़मीन पर गिरा हुआ था.

ममी अहम को पागलो की तरह चुम रही थी.

पहले उसके होंठ पे zor-zor से किश कर रही थी, जीभ अंदर दाल रही थी. फिर उसके सीने पे मुँह ले जाती, निप्पल को मुँह में लेकर चूस रही थी. कभी उसके गले को चाट रही थी, कभी कान को काट रही थी. उनके bade-bade दूध काली ब्रा के अंदर से zor-zor से उभर रहे थे और अहम के सीने से रगड़ खा रहे थे.

अहम सिसक रहा था… बिलकुल छोटे बच्चे की तरह.

**अहम (सिसकती हुई, कांपती आवाज़ में):**

“अम्मी… उफ्फ्फ्फ़… अम्मी… क्या कर रही हो… अह्ह्ह… प्लीज… अम्मी…”

ममी ने उसके बाल पकड़ लिए, उसका चेहरा ऊपर किया और फिर से ज़ोर से होंठ पे चुम लिया. उनकी जीभ अहम के मुँह में घुस रही थी. लार टपक रही थी दोनों के होंठों से. ममी की सांसें बहुत तेज़ थी.

**छोटी ममी:**

“बीटा… तू सच में अम्मी के बारे में ऐसा सोचता है? नहाते हुए देख कर… मुठ मारता था? बोल न… अम्मी की चूचियां देख कर… अम्मी की गांड देख कर… तू पागल हो जाता था न? अब बोल… अम्मी को छोड़ना चाहता था न तू?”

अहम सिर्फ सिसक रहा था. उसके हाथ काँप रहे थे, पर वो ममी के सीने से चिपका हुआ था.

ममी ने अपनी ब्रा का हुक खोला और ब्रा नीचे सरक दी. उफ्फ्फ्फ़… उनके bade-bade, भरे हुए, गोरी चूचियां बहार आ गए. निप्पल बिलकुल टाइट और लाल थे. ममी ने अहम का सर पकड़ कर उसके मुँह में एक चुकी दाल दी.

**छोटी ममी (सिसकती हुई):**

“ले बीटा… चूस… जो तू सोचता था… वो अब सच हो रहा है… अम्मी की चूचियां चूस… ज़ोर से चूस… अह्ह्ह… अम्मी भी बहुत तड़प रही थी… उफ्फ्फ्फ़… और ज़ोर से… काटो थोड़ा… हाँ बीटा… ऐसे hi…”

अहम अब कण्ट्रोल खोने लगा था. उसने ममी की चुकी मुँह में ले ली और चूसने लगा. ममी की आँखें बंद हो गयी थी, मुँह खुला था, सांसें तेज़ चल रही थी.

मैं विंडो के पास खड़ा था… पूरा पागल हो गया था. मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो रहा था. ममी… जो हमेशा इतनी शरीफ, इतनी स्ट्रिक्ट दिखती थी… आज अपने बेटे के गॉड में बैठ कर उसको अपनी चूचियां चुसवा रही थी… और खुद सिसक रही थी.

मैं और देख नहीं प् रहा था. पर आँख हटा भी नहीं प् रहा था.

ममी ने अब अहम की पंत का नाडा खोल दिया. उसका लुंड बहार आ गया — खड़ा, पसीने से गीला. ममी ने उसको हाथ में पकड़ा और धीरे से हिलने लगी, साथ hi उसके मुँह में अपनी दूसरी चुकी दाल दी.

**छोटी ममी (गरम आवाज़ में):**

“बीटा… अम्मी को बता… तू कितने दिन से अम्मी की छूट के बारे में सोच रहा था? बोल… अम्मी अब तुझे सब दे देगी… जो तू चाहे… बस बोल न बीटा…”

अहम सिर्फ सिसक रहा था… “अम्मी… अम्मी…” bol-bol कर.

मैं वहां खड़ा… दरवाज़े के बहार… देख रहा था… और सोच रहा था — **ये सच में हो रहा है क्या? ममी… मेरी ममी… अपने बेटे के साथ…**

छोटी ममी सना अहम के गॉड में बैठी थी. उनकी लाइट ग्रीन सलवार अभी भी उनकी कमर तक थी, पंतय घुटनो तक नीचे. काली ब्रा का हुक खुला हुआ था, दोनों bade-bade चूचियां बहार निकले हुए थे — पसीने से चमक रहे थे, निप्पल टाइट और गहरे लाल.

ममी ने अहम के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ रखा था. वो dheere-dheere, बहुत धीरे उसके होंठ चूस रही थी. उनकी जीभ अहम के मुँह में घुसी हुई थी, उसके थूक को चाट रही थी. कभी वो अपना थूक अहम के मुँह में दाल देती, कभी अहम का थूक अपने मुँह में खींच लेती. दोनों के होंठों के बीच लार के तार बन रहे थे जो tut-te और फिर से बनते जा रहे थे.

अहम सिसक रहा था. उसकी आँखें बंद थी, हाथ काँप रहे थे, पर वो भी ममी के होंठ चूस रहा था. ममी ने अब उसके गले की तरफ मुँह ले जाय. उनकी जीभ उसके गले पे ऊपर से नीचे तक चाटने लगी — पसीने की बूँदें जो वहां जमा थी, उनको chaat-chaat के साफ़ कर रही थी. अहम के गले का पसीना ममी के होंठ और जीभ पे लग रहा था.

**छोटी ममी (गले को chaat-te हुए, सांस गरम करते हुए):**

“पसीना… अम्मी को तेरा पसीना बहुत अच्छा लगा बीटा… कितना नमकीन है… अह्ह्ह… …”

ममी ने अब अहम की शर्ट के बटन और खोल दिए. शर्ट दोनों तरफ फ़ैल गयी. उन्होंने अहम के सीने पे मुँह रख दिया और ज़ोर से चाटने लगी. उसके निप्पल्स को जीभ से घुमाया, फिर मुँह में ले कर चूसा. अहम के सीने का पसीना भी ममी चाट रही थी —

अहम अब कण्ट्रोल खोने लगा था. उसने धीरे से ममी की कमर पकड़ ली और सिसकते हुए बोलै,

**अहम:**

“अम्मी… उफ्फ्फ्फ़… अम्मी… … अह्ह्ह… अम्मी… बहुत अच्छा लग रहा है…”

ममी ने मुस्कुराते हुए अहम की तरफ देखा. उनकी आँखें अब बिलकुल हवस भरी थी. उन्होंने अपना मुँह अहम के सीने से हटाया, थोड़ा सा थूक उसके सीने पे छोड़ दिया और धीरे से उसको चाटने लगी.

फिर ममी ने खुद को थोड़ा ऊपर उठाया. उनकी सलवार और पंतय को पूरा नीचे कर दिया. अब वो बिलकुल नंगी छूट के साथ अहम के गॉड में बैठ गयी. उनकी गीली, पसीने और रास से भरी छूट अहम के खड़े लुंड पे रगड़ रही थी.

**छोटी ममी:**

“देख बीटा… अम्मी की छूट… कितनी गीली हो गयी है तेरे लिए… तू अम्मी को छोड़ना चाहता था न? अब बोल… अंदर डालेगा या अम्मी खुद ले ले?”

अहम सिर्फ सिसक रहा था. उसने ममी की मोती गांड पकड़ ली. ममी ने खुद अपनी छूट का मुँह फैलाया, अहम के लुंड का टोपा अपनी छूट के छेद पे सेट किया और बहुत dheere-dheere नीचे बैठ गयी.

लुंड dheere-dheere अंदर घुसा. ममी की आँखें बंद हो गयी, मुँह खुला रह गया. जब पूरा लुंड अंदर चला गया, ममी ने ज़ोर से सांस रोकी और अहम के गले से लिपट गयी.

**छोटी ममी :**

“आआह्ह्ह… बीटा… पूरा अंदर आ गया… अम्मी की छूट में तेरा लुंड… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मोटा है… अब… अब हिल… धीरे से… अम्मी को छोड़ बीटा… अपनी अम्मी को छोड़…”

ममी dheere-dheere upar-neeche होने लगी. हर बार जब वो नीचे बैठती, उनकी मोती गांड अहम की जाँघों पे डाब जाती. दोनों के बदन पसीने से tar-b-tar थे. ममी अब अहम के सीने पे अपने चूचियां रगड़ रही थी, निप्पल उसके सीने से चुभ रहे थे.

मैं बहार विंडो से देख रहा था. मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो रहा था. ममी अपने बेटे के गॉड में बैठ कर उसको छोड़ रही थी… और खुद उसके पसीने को, थूक को, बदन को चाट रही थी.

**छोटी ममी (तेज़ सांस लेते हुए, सिसकती हुई):**

“बीटा… अम्मी को और ज़ोर से… ahhh…Ammi तेरी है आज… पूरी तेरी…”

अहम अब सिर्फ “अम्मी… अम्मी…” बोल रहा था और ममी की गांड पकड़ कर उसके साथ हिल रहा था.



दोनों एक दूसरे के बदन से चिपके हुए थे
 
बहुत रात हो चुकी थी. मैं स्टोर रूम के बहार विंडो से सब देख चूका था — ममी का अहम के गॉड में बैठ कर उससे छुड़वाना.



मेरा दिमाग पूरा उड़ चूका था. लुंड अभी भी खड़ा था, पर थकान ने इतना ज़ोर मार दिया की मैं सीधा अपने रूम में आ कर बिस्तर पे गिर पड़ा. आँखें बंद करते hi नींद आ गयी. रात भर सपने में भी ममी और अहम की वह चुदाई घूमती रही.

सुबह 6 बजे hi घर में हरकत शुरू हो गयी. सब लोग हमारे जाने की तैयारी में लगे थे. बैग्स पैक हो गया था, नाश्ता बन रहा था, अब्बू का 2 बार कॉल आ चूका था..

मैं उठ कर मुँह धोने गया. हॉल में सब लोग थे. बड़े मां, बड़ी ममी, छोटे मां, छोटी ममी सना, यास्मीन आपि, इफ़्फ़त, बुशरा — ज़ैनब आपि का चेहरा थोड़ा उदास था, क्युकी अब लौटना पद रहा था.

मैं ने मौका देखा जब छोटी ममी अकेली किचन के साइड में पानी का गिलास ले रही थी. मैं धीरे से उनके बिलकुल पास पहुँच गया और उनके कान में बहुत हलकी आवाज़ में बोलै,

**मैं:**

“ममी… कल रात बहुत मज़ा आया न? आप तोह मुझसे कह रही थी ‘ये गलत है’… और खुद अपने बेटे के गॉड में बैठ कर… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम लग रही थी आप…”

जैसे hi ये बात मेरे मुँह से निकली, ममी का पूरा बदन एक झटके से काँप उठा. उनका चेहरा एक सेकंड में लाल पद गया — गाल, गर्दन, सब. उन्होंने गिलास को ज़ोर से काउंटर पे रख दिया, आँखें नीचे कर ली. उनकी सांस तेज़ हो गयी. वो कुछ बोल नहीं प् रही थी.

मैंने और थोड़ा पास होकर धीरे से बोलै,

“आपकी चूचियां अहम के मुँह mein…aap खुद उसको ‘बीटा… और ज़ोर से’...... सच बताइये ममी… मज़ा नहीं आया था?”

ममी ने सिर्फ गहरी सांस ली. उन्होंने मुझे गुस्से और शर्म से एक नज़र डाली, फिर झट से वहां से हैट गयी. उनकी मोती गांड सलवार में हिलती हुई किचन के अंदर चली गयी. मैं समझ गया — वो अभी कुछ नहीं बोल सकती थी, पर अंदर से बहुत गरम हो रही थी.

थोड़ी देर बाद सब लोग बहार निकलने लगे. बड़े मां ने कार निकाली और सबको बस स्टैंड छोड़ने के लिए रेडी हो गए. हम सब बैग्स लेकर बहार आ गए.

बस स्टैंड पहुँचते hi ज़ैनब आपि ने बड़े मां के गले लग गयी. मां ने भी उसको बाँहों में भर लिया. उनका एक हाथ ज़ैनब आपि की कमर पे था, दूसरा हाथ धीरे से नीचे की तरफ गया और उसकी मोती गांड पे ज़ोर से सहलाने लगा — ओपनली नहीं, पर इतना की मैं देख सकता था.

मां ने ज़ैनब आपि के कान में कुछ फुसफुसाया. आपि का चेहरा लाल हो गया. वो और टाइट चिपक गयी मां से. मां की उँगलियाँ उसकी गांड के दोनों हिस्सों को halke-halke दबा रही थी, सलवार के ऊपर से hi.

**बड़े मां (कानों में, हलकी आवाज़ में):**

“जल्दी वापस आना… और जो बताया था… वो याद रखना…”

ज़ैनब आपि ने सर हिलाया और मां के सीने में मुँह छुपा लिया. उनकी गांड अभी भी मां के हाथ में थी.

मैं दूर खड़ा देख रहा था. मेरा लुंड फिर से खड़ा होने लगा था. बस आने वाली थी, लेकिन यहाँ अभी भी हवस का सिलसिला चल रहा था.

बस स्टैंड से बस निकलते hi हम दोनों पिछले हिस्से की डबल सीट पर बैठ गए. ज़ैनब आपि विंडो साइड बैठ गयी. उसका चेहरा बहुत उदास था. वो baar-baar बहार देख रही थी, आँखें थोड़ी सी नाम थी.

मैं उसके बिलकुल साथ बैठ गया. थोड़ी देर चुप रहा, फिर धीरे से अपना हाथ उसकी राइट जांघ पे रख दिया. सलवार के ऊपर से hi उसकी गरम, मुलायम जांघ फील हो रही थी. मैं halke-halke सहलाने लगा.

**मैं (धीरे से, उसके कान के पास):**

“आपि… उदास क्यों हो? घर पहुँच कर बहुत मज़ा करेंगे… मैं तुम्हे बहार ले जाऊंगा… मेरे दोस्त लोग हैं…… तुम बस मज़े लेना.”

ज़ैनब आपि ने पहले कुछ नहीं बोलै. फिर धीरे से मेरी तरफ मुद कर देखा. उसकी आँखों में अब उदासी के साथ हवस भी आ गयी थी. वो मुझे देखती रही, कुछ बोल नहीं रही थी.

मैं उसकी जांघ को और ऊपर की तरफ सहलाने लगा, उँगलियाँ dheere-dheere अंदर की तरफ बढ़ा रहा था.

**ज़ैनब आपि (हलकी सी सिसकी के साथ):**

“तू तोह उस अनाम रंडी से hi चिपका रहेगा… मुझे क्या मिलेगा?”

मैं मुस्कुराया. अपना हाथ उसकी कमर के ऊपर ले गया और धीरे से उसके bade-bade चूचियों को कुर्ते के ऊपर से पकड़ लिया. ज़ोर से मसलने लगा — पूरा हाथ घुमा के, निप्पल को ऊँगली से पकड़ के हलके से मरोड़ते हुए.

**मैं (उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए):**

“मैं सबका ध्यान रखूँगा आपि… तुम्हारा भी… अनाम का भी… और अम्मी का भी…”

जैसे hi “अम्मी” का नाम मेरे मुँह से निकला, ज़ैनब आपि एकदम से हैरानी से मेरी तरफ घूम गयी. उसकी आँखें फैल गयी. चेहरा एक सेकंड में बदल गया.

**ज़ैनब आपि (शॉक में, हलकी आवाज़ में):**

“अम्मी…? तू… तू अम्मी के बारे में भी सोच रहा है?”

मैं ने उसके चूचियों को और ज़ोर से मसल दिया. दोनों हाथों से एक साथ दबा रहा था, ऊपर से नीचे, gol-gol घूमता हुआ. कुर्ते के कपडे के अंदर से उनकी गरम सॉफ्टनेस मेरे हाथों में आ रही थी.

**मैं (गन्दी आवाज़ में, उसके कान में):**

“हाँ रंडी… अम्मी के बारे में भी सोच रहा हूँ… उनके bade-bade दूध… मोती गांड… मैं सोच रहा हूँ एक दिन अम्मी को भी तेरे साथ hi छोडूं… साथ में… एक तरफ तू… दूसरी तरफ अम्मी… दोनों की छूट एक साथ फाडून…”

ज़ैनब आपि की सांसें तेज़ हो गयी. उसकी आँखें अब बिलकुल हवस से भरी हुई थी. वो शर्मा रही थी, पर उसकी बॉडी मेरे हाथ के साथ हिल रही थी.

मैं ने उसके चूचियों को और ज़ोर से मसलने लगा

**मैं:**

“साली कुटिया… तू बस मेरी पर्सनल रंडी बन के रह… मैं तुझे, अनाम को और अम्मी को… तीनो को एक साथ छोडूंगा… अह्ह्ह… सोच… तीनो की छूट एक साथ किसी बहरी आदमी के लुंड पर रहेगा…”

ज़ैनब आपि अब कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी. उसने अपनी कमर मेरे तरफ झुका दी ताकि मैं उसके चूचियों को और अच्छे से मसल सकू. उसकी सांस मेरे कान पे पद रही थी, garam-garam.

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई, बहुत हलकी आवाज़ में):**

“असीम… तू सच में पागल हो गया है… अम्मी को भी… उफ्फ्फ्फ़… बोल मत ऐसी बातें… मेरी छूट गीली हो रही है… अह्ह्ह…”

मैं ने उसके कान को हलके से काट लिया और धीरे से बोलै,

**मैं:**

“गीली हो रही है न रंडी? अच्छा है… घर जाके मैं तेरी छूट को और गीला करूँगा……”

दोपहर के 1:30 बजे हमें बस स्टेशन पर उतारते hi गर्मी का एक झटका लगा. धुप इतनी तेज़ थी की ज़मीन से भाप निकल रही थी. मैं और ज़ैनब आपि बस से उतरे. आपि का चेहरा थका हुआ था, पसीने से बिलकुल भीग चुकी थी. उसका लाइट ब्लू सलवार सूट पसीने से चिपक गया था — चूचियों का शेप साफ़ दिख रहा था, ब्रा के अंदर से भी निप्पल का हल्का उभार दिखाई दे रहा था. गांड पे सलवार इतनी टाइट चिपकी हुई थी की हर कदम पे दोनों नितम्ब alag-alag हिल रहे थे.

मैं ने उसका बैग अपने हाथ में ले लिया और सीधा स्टेशन के बहार निकल गया. आपि मेरे peeche-peeche आ रही थी.

**ज़ैनब आपि (थोड़ी सी सांस फूलते हुए):**

“असीम… यह किस रास्ते पर ले जा रहा है तू? घर तोह सीधा लेफ्ट साइड था न?”

मैं मुस्कुराया, कुछ नहीं बोलै. थोड़ा आगे बढ़ कर उसके पास आया और धीरे से बोलै,

**मैं:**

“आपि… दुपट्टा मुँह पर बांध लो… गर्मी बहुत है, धुल भी उड़ रही है.”

आपि ने थोड़ा कंफ्यूज होकर दुपट्टा मुँह पर लपेट लिया. अब सिर्फ उसकी आँखें दिख रही थी. हम दोनों एक छोटे, सुनसान गली में घुस गए — स्टेशन के पिछले तरफ वाला पुराण रास्ता.

पसीने की वजह से आपि का पूरा सूट अब और भी टाइट हो गया था. चूचियां पसीने से चमक रहे थे, सलवार की नाडा थोड़ी ढीली हो गयी थी. मैं उसके साथ चल रहा था, kabhi-kabhi उसकी गांड की तरफ देखता.

कुछ देर chalte-chalte हम अर्जुन के घर के गेट पर पहुँच गए. मैं ने गेट खटखटाया.

अर्जुन खुद hi दरवाज़ा खोलने आया. उसने मुझे देखा तोह ज़ोर से हंस पड़ा,

**अर्जुन:**

“सेल असीम! कहाँ मर गया था इतने दिन? फ़ोन भी नहीं उठा रहा था बस!”

फिर उसकी नज़र मेरे पीछे कड़ी ज़ैनब आपि पर पड़ी. आपि अभी भी दुपट्टा मुँह पर लपेटे हुए कड़ी थी, सिर्फ आँखें दिख रही थी. पर उसका पसीने से भीगा बदन, टाइट सलवार में उभरे हुए चूचियां और मोती गांड सब कुछ साफ़ दिख रहा था.

अर्जुन की आँखें रुक गयी. वो ऊपर से नीचे तक घूरता रहा.

**अर्जुन (मुझसे धीरे से):**

“ये कौन है भाई? नया माल लाया है आज?”

मैं मुस्कुराते हुए आगे बढ़ा. आपि के चेहरे से दुपट्टा धीरे से हटाया. उसकी गोरी, पसीने से चमकती सूरत सामने आ गयी

**मैं (अर्जुन की तरफ देखते हुए, हलके से हंस कर):**

“ये भी रंडी है… लेकिन इसका रेट थोड़ा महंगा है. एक शॉट का 30,000 लेती है.”

ज़ैनब आपि ये सुनते hi एकदम से हैरान हो गयी. उसकी आँखें फैल गयी, मुँह थोड़ा खुला रह गया. उसने मुझे शॉकेड नज़रों से देखा, जैसे अभी बिजली गिर गयी हो.

अर्जुन तोह पूरा खो गया था. उसकी आँखें ज़ैनब आपि के bade-bade चूचियों पर अटक गयी थी. वो एक कदम आगे बढ़ा, बिना एक शब्द बोले आपि को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपने बाँहों में खींच लिया.

**अर्जुन (पागलो की तरह, गरम सांस छोड़ते हुए):**

“उफ्फ्फ्फ़… क्या माल है बस…”

और तुरंत उसके गुलाबी होंठ पे टूट पड़ा. Zor-zor से चूसने लगा. उसकी मोती जीभ आपि के मुँह में घुसा दी, जीभ से जीभ लड़ने लगा. लार टपकने लगी दोनों के होंठों से. अर्जुन की एक हाथ आपि की कमर पे था, दूसरा हाथ उसके bade-bade चूचियों को कुर्ते के ऊपर से zor-zor से मसल रहा था.

ज़ैनब आपि पहले तोह शॉक में थी, हाथों से अर्जुन को धकेलने की कोशिश कर रही थी. पर 10-15 सेकंड बाद उसकी बॉडी dheere-dheere गरम होने लगी. उसने अपनी जीभ अर्जुन के मुँह में दाल दी और dheere-dheere जवाब देने लगी.

मैं साइड में खड़ा देख रहा था. मेरा लुंड पायजामा में तन गया था.

अर्जुन अब आपि को और टाइट पकड़ कर चूस रहा था. उसकी जीभ आपि के मुँह में zor-zor से andar-bahar हो रही थी. आपि की सांसें तेज़ हो गयी थी, उसके चूचियों को अर्जुन ज़ोर से दबा रहा था.

**अर्जुन (होंठ चूसते हुए, गरम आवाज़ में):**

“कितनी ज़बरदस्त रंडी है ये… चूचियां देख… कितने बड़े और भरे हुए हैं… आज इसको पूरी तरह छोडूंगा…”

आपि अभी भी शर्मा रही थी, पर उसकी बॉडी अर्जुन से चिपक रही थी. मैं उन दोनों को देखता हुआ मुस्कुराया.

अर्जुन ने ज़ैनब आपि को हॉल के बड़े सोफे पर धक्का देकर बैठा दिया. आपि का चेहरा अभी भी लाल था, सांसें तेज़ चल रही थी. अर्जुन उसके सामने खड़ा हो गया, अपनी पंत और अंडरवियर एक साथ नीचे कर दी. उसका मोटा, काला, 8-इंच लुंड बहार आ गया — नसें उभरी हुई, टोपा चमक रहा था, पसीने और पानी से गीला.

अर्जुन ने आपि के बाल पकड़ लिए और उसका चेहरा ऊपर किया.

**अर्जुन (गन्दी स्माइल के साथ):**

“अब देख ले रंडी… कितना मोटा लुंड है मेरा… मुँह खोल… पूरा अंदर ले…”

ज़ैनब आपि ने डरते हुए मुँह खोला. अर्जुन ने तुरंत अपना लुंड उसके गुलाबी होंठ पे रगड़ा और एक hi धक्के में अंदर पेल दिया.

**“ग्लुक… ग्लूयक… गललललूखकक!!!”**

लुंड सीधा आपि के हलक तक चला गया. आपि की आँखें फैल गयी, उसका गाला फूल गया. वो ज़ोर से गैग करने लगी — “गलल्लूऊक… गलल्लूऊक… ूरररग्ग्गहह…” की आवाज़ें निकल रही थी. लार के तार बन कर उसके होंठों से टपकने लगे, चीन पे बहने लगे.

अर्जुन ने आपि के बाल और टाइट पकड़ लिए और zor-zor से धक्के मरने लगा.

**अर्जुन (गालियां देते हुए, लुंड मुँह में पेलते हुए):**

“ले साली रंडी… पूरा ले… हलक तक ले मादरचोद… अह्ह्ह… कितनी टाइट मुँह है तेरी… … और अंदर ले… कुटिया……”

आपि का पूरा बदन काँप रहा था. उसके आँखों से आंसू निकल आये थे. हर धक्के पे उसका गाला फूल जा रहा था, “gluck-gluck-gluck” की तेज़ आवाज़ हॉल में गूँज रही थी. लार इतनी ज़्यादा निकल रही थी की उसके चूचियों तक टपक रही थी. वो zor-zor से साँसे ले रही थी, लेकिन अर्जुन नहीं रुक रहा था.

**अर्जुन (तेज़ धक्के मारते हुए, गन्दी आवाज़ में):**

“साली… कितनी अच्छी चूसती है… पूरा हलक छोड़ रहा हूँ… ले… ले मादरचोद……”

आपि अब बिलकुल कण्ट्रोल खोने लगी थी. उसने दोनों हाथों से अर्जुन की जांघें पकड़ ली, लेकिन धक्का नहीं दे प् रही थी. हर बार जब लुंड हलक तक जा रहा था, उसका पूरा बदन झटका खा रहा था. लार के गहरे तार बन रहे थे, जो उसके चीन से नीचे टपक कर उसके bade-bade चूचियों पे गिर रहे थे.

मैं सोफे के पास वाले चेयर पे बैठ कर सब देख रहा था. मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन चूका था. देख रहा था की मेरी सगी बड़ी आपि ज़ैनब को…

**अर्जुन (अभी भी धक्के मारते हुए):**

“ले कुटिया… अभी तोह शुरुआत है… आज तेरा मुँह, छूट और गांड… तीनो फाड़ दूंगा… ले… और अंदर ले… गलल्लूऊक… साली… अह्ह्ह…”

आपि सिर्फ “ुरररग्ग्गहह… ग्लुक… ग्लुक…” की आवाज़ें निकल प् रही थी. उसकी आँखें बंद हो गयी थी, पर उसने मुँह नहीं छोड़ा. लार अब उसके चूचियों तक पहुँच चुकी थी और सलवार पे भी टपक रही थी.

मैं चुपचाप बैठा देख रहा था… अंदर से बहुत गरम हो चूका था.

अर्जुन ने लुंड को थोड़ा बहार निकला, सिर्फ टोपा होंठों में रखा और ऊपर से नीचे तक लार से भरे लुंड को उसके चेहरे पे रगड़ने लगा.

**अर्जुन (गन्दी स्माइल के साथ, सांस फूलते हुए):**

“उफ्फ्फ्फ़ साली… कितनी अच्छी चूसती है तू… देख कितनी लार निकाल रही है… पूरी रंडी लग रही है… अभी तोह शुरुआत है रैंड… आज तेरा मुँह भर दूंगा… फिर छूट… फिर गांड… सब फाड़ दूंगा…”

उसने फिर से लुंड को उसके मुँह में पेल दिया और तेज़ धक्के मरने लगा. आपि अब zor-zor से गैग कर रही थी — “गलल्लूक… गलल्लूक… ुरररररग्ग्गहह…” की आवाज़ें हॉल में गूँज रही थी. उसके आँखों से आंसू बह रहे थे.

मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन चूका था. .

अर्जुन ने थोड़ी देर बाद लुंड बहार निकला. लम्बा लार का तार उसके लुंड और आपि के होंठों के बीच बना हुआ था. आपि सांस लेने के लिए हाफ रही थी, मुँह खुला, लार से भरा हुआ.

**अर्जुन (उसके गाल पे थप्पड़ मारते हुए, हंस कर):**

“कितनी मस्त चूसने वाली रैंड निकली तू… देख कितनी लार टपक रही है… अब उठ… कपडे उतार… पूरा नंगा कर अपने आप को…”

ज़ैनब आपि ने आँखें नीचे कर ली. उसके हाथ काँप रहे थे. फिर उसने धीरे से अपना कुरता ऊपर किया. पसीने से भीगा बदन सामने आ गया. ब्रा में bade-bade चूचियां उभरे हुए थे. उसने ब्रा का हुक खोला और ब्रा नीचे कर दी. उफ्फ्फ्फ़… उसके गोल, भरे हुए, गोरी चूचियां बहार आ गए — निप्पल लाल और सख्त.

अर्जुन ने उसको देखा और एक ज़ोर की ताली मारी.

**अर्जुन:**

“वह मादरचोद… क्या माल है बस! इतने बड़े और टाइट चूचियां… चल… अब सलवार भी उतार…”

आपि ने सलवार का नाडा खोला. सलवार और पंतय दोनों एक साथ नीचे सरक गए. अब वो बिलकुल नंगी कड़ी थी — moti-moti गोरी गांड, गीली छूट, पसीने से चमकती चूचियां.

अर्जुन ने उसको पकड़ा, घुमा दिया और सोफे के ऊपर घोड़ी बना दिया. आपि की मोती गांड ऊपर उठी हुई थी. अर्जुन ने पीछे से उसकी गांड के दोनों हिस्से फैलाये और अपना मोटा लुंड उसकी छूट के मुँह पे रगड़ने लगा.

मैं चुपचाप बैठा देख रहा था. अर्जुन को अभी भी यह नहीं पता था की ये मेरी सगी बड़ी बेहेन है. उसके लिए ये सिर्फ एक महंगी रंडी थी.

अर्जुन ने एक ज़ोर का धक्का मारा.

**धायआपपप!!!**

**ज़ैनब आपि:** “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… बहुत मोटा… पहात गयी… उफ्फ्फ्फ़… दर्द हो रहा है…”

अर्जुन ने उसकी कमर पकड़ ली और बेदर्दी से छोड़ने लगा — zor-zor से, जोरदार धक्के. हर धक्के पे आपि की मोती गांड हिल रही थी, चूचियां नीचे latak-latak के झूल रहे थे.

**अर्जुन (गालियां देते हुए):**

“ले साली रंडी… ले… तेरी छूट कितनी टाइट है… अह्ह्ह… कितने पैसे लेती है तू… 30,000? आज तेरे 30,000 के हिसाब से छोडूंगा…… ले मादरचोद… पूरी फाड़ दूंगा तेरी छूट…”

आपि सिर्फ सिसक रही थी — “अह्ह्ह… अह्ह्ह… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़…”

**धायआपपप!!!**

**ज़ैनब आपि:** “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… बहुत ज़ोर से… पहात गयी मेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़… दर्द हो रहा है…”

अर्जुन रुकने वाला नहीं था. उसने आपि की मोती गांड पे एक ज़ोर का थप्पड़ मारा.

**चटकककक!!!**

**अर्जुन (गन्दी गाली देते हुए):**

“ले साली रंडी… गांड ऊपर कर… और ज़ोर से उठा… मैं आज तेरी छूट फाड़ के रख दूंगा… मादरचोद… कितनी टाइट है तेरी छूट बस…”

आपि की गांड लाल पद गयी. उसने दर्द से सिसकी ली, पर अर्जुन ने उसकी कमर को और टाइट पकड़ कर तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए.

**धप… धप… धप… धप…**

हर धक्के पे आपि का पूरा बदन आगे की तरफ झटका खा रहा था. उसके bade-bade चूचियां नीचे latak-latak के zor-zor से हिल रहे थे. गांड पे थप्पड़ पड़ते जा रहे थे — एक के बाद एक.

**चटक्क… चटक्क… चटक्क!!!**

**अर्जुन (तेज़ धक्के मारते हुए, गुस्से और हवस में):**

“ले कुटिया… ले… तेरी गांड लाल कर दूंगा आज… साली… 30,000 लेती है न…… अह्ह्ह… कितनी गीली है तेरी छूट… … ले मादरचोद… और ज़ोर से गांड उठा… नहीं तोह और ज़ोर से थप्पड़ मारूंगा…”

अर्जुन ने एक हाथ से आपि के बाल पकड़ लिए और उसका सर पीछे की तरफ खिंच लिया. दूसरे हाथ से उसकी गांड पे लगातार थप्पड़ मार रहा था. हर थप्पड़ के साथ आपि की गांड और लाल होती जा रही थी.

**ज़ैनब आपि :**

“अह्ह्ह्हह… अर्जुन… बहुत ज़ोर से… मेरी गांड जल रही है… उफ्फ्फ्फ़… पर मत रुकना… और ज़ोर से छोड़… अह्ह्ह… फाड़ दो मेरी छूट… मैं तेरी रंडी हूँ… कुटिया हूँ… अह्ह्ह्हह…”

अर्जुन अब बिलकुल जानवर बन चूका था. उसने आपि को और जोरदार धक्का मारा और उसके गले के पास मुँह ले जाकर ज़ोर से काट लिया. साथ hi उसकी गांड पे थप्पड़ पड़ते जा रहे थे.

**अर्जुन (गन्दी गालियां देते हुए):**

“ले भोसड़ी के… रंडी की बच्ची… तेरी छूट अब मेरी… मैं आज इसको इतना छोडूंगा की कल उठने में भी दर्द होगा… अह्ह्ह… कितनी बड़ी रांड है तू… मादरचोद… पूरा लुंड अंदर तक… गांड उठा कुटिया… और ज़ोर से उठा…”

आपि की गांड अब बिलकुल लाल हो चुकी थी. हर थप्पड़ के साथ “चटक्क” की तेज़ आवाज़ आ रही थी. उसके चूचियों पे पसीना और लार मिल कर चमक रहा था. वो दर्द से सिसक रही थी, पर उसकी गांड खुद पीछे uth-uth कर अर्जुन के धक्कों का जवाब दे रही थी.

**ज़ैनब आपि (चीखते हुए, हवस में):**

“अह्ह्ह्हह… और ज़ोर से… थप्पड़ मार… गांड लाल कर दे… मेरी छूट फाड़ दे… उफ्फ्फ्फ़… मैं मर जाउंगी… पर मत रुकना… अह्ह्ह… और अंदर… पूरा अंदर तक… कुटिया बना दे मुझे आज…”

अर्जुन ने आपि के बाल और ज़ोर से खिंच लिए और उसके मुँह के पास मुँह ले जाकर थूक दिया. आपि ने अपने मुँह खोल कर उसका थूक पि लिया. अर्जुन हंस पड़ा और फिर से तेज़ धक्के मरने लगा.

मैं सोफे पर बैठा सब देख रहा था. मेरा लुंड पायजामा में फटने को हो रहा था. देख रहा था की मेरी सगी बड़ी आपि… अर्जुन के मोठे लुंड से बुरी तरह चुद रही है, थप्पड़ खा रही है, गालियां सुन रही है… और खुद मज़े से सिसक रही है.

अर्जुन अब और तेज़ हो गया था. उसने आपि की गांड को दोनों हाथों से फैला दिया और बेदर्दी से छोड़ने लगा. हर धक्के पे “धप धप धप” की तेज़ आवाज़ हॉल में गूँज रही थी. आपि की गांड laal-pad-laal हो चुकी थी, चूचियां हिल रहे थे, मुँह से लार टपक रही थी.

**अर्जुन (चीखते हुए):**

“ले साली… आ गया… तेरी छूट में भर रहा हूँ… मादरचोद… कुटिया… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!!!”

अर्जुन ने ज़ोर से धक्का मारा और अपना गरम माल आपि की छूट के अंदर hi छोड़ दिया. आपि भी उसी वक़्त काँप उठी और ज़ोर से सिसक कर झाड़ गयी.

दोनों थक कर सोफे पर लेट गए. आपि की गांड अभी भी लाल थी, छूट से अर्जुन का माल बहार टपक रहा था.

मैं चुपचाप बैठा देख रहा था… अंदर से बहुत गरम और पागल हो चूका था.

अर्जुन थक कर सोफे पर बैठ गया. उसका मोटा लुंड अभी भी half-khada था, ज़ैनब आपि के छूट के रास और उसके अपने माल से चमक रहा था. आपि सोफे के पास hi नंगी लेती हुई थी, सांसें तेज़ चल रही थी, गांड लाल, छूट से माल बहार टपक रहा था.

अर्जुन ने वॉलेट निकला और अंदर से 30,000 के नोट का बंडल निकाल कर मेरे तरफ फ़ेंक दिया.

**अर्जुन (मुस्कुराते हुए):**

“ले भाई… 30,000 पुरे… इस रंडी ने बहुत मज़ा दिया आज. सच बता… इतनी टाइट और गरम छूट पहले कभी नहीं मारी मैंने. कितने दिन से छोड़ रहा है इसको तू?”

मैं नोट उठाते हुए हलके से हंस पड़ा,

**मैं:**

“अभी कुछ दिन हुए हैं… पहले वाली रंडी अनाम थी न… उसको तोह तू अच्छे से जानता है. ये नया माल है… थोड़ा महंगा है लेकिन क्वालिटी बहुत ज़बरदस्त है.”

अर्जुन ने सिगरेट सुलगाई और एक लम्बा काश लिया. फिर मेरी तरफ देखते हुए बोलै,

**अर्जुन:**

“अनाम रंडी भी मस्त थी… लेकिन इसकी छूट और टाइट है. और गांड देख… कितनी मोती और सॉफ्ट है. अगली बार इसकी गांड भी फाड़ूंगा. बोल… इसका फुल नाईट रेट क्या है?”

मैं नोट गईं रहा था. अर्जुन ने फिर से पुछा,

**अर्जुन:**

“और बता… पढाई कैसी चल रही है तेरी? कॉलेज तोह जाता है न? या अब सिर्फ रंडियों के पीछे पड़ा रहता है?”

**मैं (हंस कर):**

“पढाई चल रही है भाई… लेकिन अब इन रंडियों ने इतना बिजी कर दिया है की टाइम hi नहीं मिलता. अनाम तोह अब रेगुलर हो गयी है… ये भी अब शुरू हो गयी.”

अर्जुन ने सिगरेट का काश लिया और ज़ैनब आपि की तरफ देखा, जो अभी भी सोफे पर नंगी लेती हुई थी, चेहरा शर्मा हुआ, गांड लाल.

**अर्जुन:**

“रैंड… उठ… इधर आ.”

ज़ैनब आपि ने धीरे से उठ कर उसके पास आ गयी. उसके चूचियों और गांड पे अभी भी लाल निशाँ थे. अर्जुन ने अपना अभी भी गीला लुंड पकड़ लिया और आपि के मुँह की तरफ इशारा किया.

**अर्जुन:**

“साफ़ कर… अपना मुँह लगा के… पूरा साफ़ कर… जो भी लगा है… सब चाट के साफ़ कर.”

ज़ैनब आपि ने आँखें नीचे कर ली. उसने धीरे से घुटनो पे बैठ गयी और अर्जुन के लुंड को हाथ में पकड़ लिया. फिर अपना मुँह खोल कर लुंड के टोपा को जीभ से चाटने लगी.

**“सलूरररप… चुऊस… पूछ पूछ…”**

अर्जुन ने उसके बाल पकड़ लिए और धीरे से धक्का दिया ताकि लुंड उसके मुँह में अंदर जाए.

**अर्जुन (गन्दी आवाज़ में):**

“हाँ ऐसे hi… पूरा मुँह में ले… जो भी लगा है सब चाट… अह्ह्ह… और अंदर ले… हलक तक…”

आपि ज़ोर से चूस रही थी. उसकी जीभ लुंड के नीचे से ऊपर तक घूम रही थी, लार और माल को चाट रही थी. हर चाटने पे “सलूरररप… पूछ पूछ” की आवाज़ आ रही थी. अर्जुन ने सिगरेट सुलगाते हुए मुझे देखा और मुस्कुराया.

**अर्जुन:**

“भाई… ये रंडी बहुत अच्छी है… अनाम से भी बेटर चूसती है. अगली बार दोनों को साथ लाना… एक साथ छोडूंगा दोनों को.”

मैं चुपचाप सोफे पर बैठा देख रहा था. देख रहा था की मेरी सगी बड़ी आपि ज़ैनब… अब अर्जुन के लुंड को मुँह से साफ़ कर रही है… जीभ से चाट रही है… अर्जुन को अभी भी यह नहीं पता की ये मेरी बेहेन है.

अंदर से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरा लुंड फिर से खड़ा हो चूका था.

अर्जुन ने सिगरेट को ऐशट्रे में दबाया और वॉलेट से और 10,000 निकाल कर आपि की तरफ फ़ेंक दिए.

**अर्जुन:**

“ये एक्स्ट्रा टिप है… रंडी ने बहुत मज़ा दिया आज. अगली बार दोनों को साथ लाना… अनाम और इसको… दोनों की छूट एक साथ फाड़ूंगा.”

**मैं:**

“ठीक है भाई… अगली बार ज़रूर लाऊंगा. अब हमे निकलना है… बहुत लेट हो गया.”

अर्जुन ने ज़ैनब आपि की तरफ देखा, जो अभी भी सोफे पर नंगी लेती हुई थी, गांड लाल, छूट से माल टपक रहा था. उसने हलके से हंस कर कहा,

**अर्जुन:**

“चल रंडी… कपडे पेहेन ले… और जल्दी से चली जा… वर्ण मैं तुझे यहीं रोक लूंगा.”

ज़ैनब आपि ने शर्मा कर जल्दी से अपना सलवार सूट पहना. दुपट्टा सीने पे लपेट लिया, पर पसीने और लार के निशाँ अभी भी कपड़ों पर दिख रहे थे. हम दोनों ने अर्जुन से विदा ली.

बहुत देर हो चुकी थी. हम दोनों बहार निकल कर रोड पर आ गए. रोड पूरा सुनसान था — दोपहर की गर्मी में कोई aata-jaata दिखाई नहीं दे रहा था.

जैसे hi हम थोड़ा आगे बढे, ज़ैनब आपि ने गुस्सा दिखते हुए मुझे रोक लिया.

**ज़ैनब आपि (तेज़ आवाज़ में, लेकिन हलके से):**

“असीम… तू पागल हो गया है क्या? 30,000? एक शॉट का 30,000? तू मुझे रंडी बना के बेच रहा है उसके सामने? पैसो के लिए… मेरी इज़्ज़त…?”

मैं रुक गया. उसके चेहरे को देखा — गुस्सा था, शर्म थी, और थोड़ी सी तड़प भी. मैं मुस्कुराया और धीरे से बोलै,

**मैं:**

“रंडी… अब गुस्सा दिखती है? अभी तोह अर्जुन के लुंड पे मुँह छोड़वा रही थी… लार टपका रही थी… … और अब इज़्ज़त की बात कर रही है? साली कुटिया… पैसा तोह तेरे लिए hi लिया था… घर के लिए… अब्बू के लिए… और तू मज़े ले रही थी न? बोल… छूट गीली नहीं हो रही थी तेरी?”

ज़ैनब आपि का चेहरा लाल पद गया. वो कुछ बोलने के लिए मुँह खोलती, पर मैं ने उसका हाथ पकड़ लिया और रोड के साइड वाली पुराणी दीवार की तरफ ले गया. रोड बिलकुल सुनसान था ..

मैं ने उसको दीवार से सत्ता दिया और ज़ोर से उसके होंठ पे मुँह रख दिया. Jor-jor से चूसने लगा. मेरी जीभ उसके मुँह में घुसा दी, उसके सॉफ्ट, गरम होंठ को चूस रहा था. आपि पहले तोह धकेलने की कोशिश कर रही थी,

**ज़ैनब आपि (होंठ चूसते हुए, हलकी सिसकी के साथ):**

“असीम… छोड़… कोई देख लेगा… अह्ह्ह… मत करो यहाँ…”

लेकिन मैं ने नहीं छोड़ा. उसके चूचियों को कुर्ते के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसलने लगा. आपि की सांसें तेज़ हो गयी. उसने मुझे धक्का दिया, हाथ पकड़ लिया और ज़ोर से बोली,

**ज़ैनब आपि (गुस्से में):**

“बस कर असीम… चल घर चलते हैं… बहुत लेट हो गया…”

उसने मेरा हाथ तिघ्टलय पकड़ लिया और मुझे घर की तरफ खींचती हुई चल पड़ी. उसकी मोती गांड सलवार में हिल रही थी, पसीने से भीगा बदन चमक रहा था. मैं उसके peeche-peeche चल पड़ा.

घर pahunchte-pahunchte दोपहर के 3 बज गए थे. बहार धुप बहुत तेज़ थी. मैं गेट खोल कर अंदर घुसा. घर में सन्नाटा tha..Noor कॉलेज गयी हुई थी शायद. अम्मी भी शायद अपने कमरे में सो रही थी, क्युकी उनका दरवाज़ा बंद था और अंदर से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी.

ज़ैनब आपि तुरंत अपने कमरे की तरफ चली गयी. उसने मुझे भी कुछ नहीं बोलै, जल्दी से अंदर घुस कर दरवाज़ा बंद कर लिया. मैं समझ गया — वो अभी थकी हुई थी.

मैं ने अपना बैग साइड में रख दिया और अनाम आपि को ढूंढने लगा. हॉल में नहीं थी, किचन में भी नहीं. मैं धीरे से घर के पिछले हिस्से की तरफ बढ़ा, जहाँ पुराण स्टोर रूम था.

जैसे hi स्टोर रूम के पास पहुंचा, अंदर से halki-halki आवाज़ आने लगी — जैसे कोई धीरे से बात कर रहा हो. मैं दरवाज़े के पास पहुंचा और धीरे से अंदर झाँका.

अंदर का नज़ारा देख कर मैं सच में हैरान रह गया.

अब्बू चेयर पर बैठे थे — बिलकुल सीधे, उनके पेअर आगे फैलाये हुए थे. और अनाम आपि उनके सामने ज़मीन पर बैठ कर उनके पेअर की मालिश कर रही थी.

सबसे बड़ी बात — अनाम आपि का दुपट्टा बिलकुल नहीं था.

उसका लाइट पिंक सलवार सूट का ऊपर वाला कुरता थोड़ा सा ढीला था और आगे की तरफ झुकने की वजह से उसके bade-bade, भरे हुए चूचियां आधे से ज़्यादा दिख रहे थे. ब्रा का वाइट लास भी साफ़ दिखाई दे रहा था. चूचियों का गहरा क्लीवेज और उनकी गोलाई बिलकुल सामने थी. अब्बू सीधे उन्ही चूचियों को गौर से देख रहे थे — आँखें थोड़ी सी टाइट, चेहरा नार्मल था, पर नज़र हैट नहीं रही थी.

अनाम आपि dheere-dheere उनके पेअर को मसल रही थी. उसके हाथ अब्बू के पेअर के पंजे से ऊपर की तरफ बढ़ रहे थे. जब वो झुकती थी, उसके चूचियों का उभार और भी ज़्यादा दिखने लगता था. वो jaan-bujh कर थोड़ा और झुक रही थी.

मैं दरवाज़े के बहार खड़ा था… दिमाग में एक hi बात घूम रही थी:

**“अब्बू… इतने सख्त मिज़ाज़ आदमी… जो घर की औरतों को भी मुँह दिखने नहीं देते… आज अनाम आपि को बिना दुपट्टा के, चूचियां आधे दिखते हुए देख रहे हैं… और अनाम aapi…kitni बड़ी चैनल बन चुकी है… अपने hi अब्बू पर डोरे दाल रही है…”**

अनाम आपि ने अब्बू के पेअर को थोड़ा ऊपर उठाया और उनकी पाऊँ की उँगलियों को धीरे से मसलने लगी. उसके चूचियों का उभार अब बिलकुल साफ़ था. अब्बू की नज़र वही अटक गयी थी.

अब्बू ने धीरे से आवाज़ दी,

**अब्बू:**

“अनाम… थोड़ा ऊपर की तरफ भी दबा… बहुत दर्द हो रहा है आज.”

अनाम आपि ने सर हिला दिया और हाथ ऊपर ले गयी. जैसे hi उसने झुक कर अब्बू के घुटने के ऊपर वाले हिस्से को मसलना शुरू किया, उसके दोनों bade-bade चूचियां और ज़्यादा आगे लटक गए. ब्रा के अंदर से उनकी शेप बिलकुल क्लियर थी.

मैं चुपचाप देख रहा था. अंदर से एक अजीब सी गरम फीलिंग आ रही थी. मेरी बड़ी आपि… अब अपने hi अब्बू के सामने बिना दुपट्टा के बैठ कर उनके पेअर दबा रही है और jaan-bujh कर अपने चूचियों को दिखला रही है.

अब्बू अभी भी चुपचाप देख रहे थे… पर उनकी आँखें अब नार्मल नहीं थी.
 
बहुत थकान थी सफर और दिन भर की गर्मी की वजह से. मैं अपने रूम में आ कर बिस्तर पर सीधा लेट गया. आँख लगते hi गहरी नींद आ गयी.



Kuch der baad neend khuli. Shaam ka halka-andhera room mein faila hua tha. Tabhi mujhe ehsaas hua — mere payjama ke andar kuch garam aur geela mehsoos ho raha tha.

Main ne aankhein kholi… aur dekha.

Anam aapi mere bed ke paas zameen par ghutno ke bal baithi hui thi. Uska dupatta abhi bhi nahi tha. Upar ka kurta thoda upar chadha hua tha. Usne mera payjama aur underwear dono neeche kar rakha tha aur mera lund muh mein liye hue dheere-dheere chus rahi thi.

Uski jeebh mere lund ke topa ko chaat rahi thi, kabhi poora lund muh mein le leti, kabhi bahar nikaal kar laar se bhare hont se upar-neeche ragadti. “Slurrrp… puch… slurrrp…” ki halki awaazein aa rahi thi.

Jaise hi meri aankh khuli, Anam aapi chaunk gayi. Uski aankhein badi ho gayi. Wo turant mera lund muh se nikaal kar mere bagal mein aa gayi aur mujhse chipak gayi. Uska pura badan thoda tharthara raha tha. Uski chuchiyan mere seene se ragad rahi thi.

**Anam aapi (sharma kar, bahut halki awaaz mein):**

“Beta… sorry… main… main bardasht nahi kar pa rahi thi… subah se mann kar raha tha…”

Main ne usko dekha. Uska chehra laal tha, saansein tez chal rahi thi. Main halke se muskuraya aur uske kaan mein dheere se bola,

**Main:**

“Kyun aapi… bardasht nahi ho raha tha kya? Itna tadap rahi thi ki mere soye hue lund ko muh mein le liya?”

Anam aapi ne kuch nahi bola. Usne sirf mujhe aur tight se pakad liya aur mere hont pe apne hont rakh diye. Kiss shuru kar diya dheere se, garam-garam. Uski jeebh mere muh mein ghus gayi.

Main ne Uske hont ko apne haathon mein le kar jor-jor se masalne laga. Unke soft, garam hont mere ungliyon ke beech dab rahe the.

**Main (uske hont masalte hue, halki awaaz mein):**

“Kuch der pehle maine dekha tha… tu abbu ke pair daba rahi thi… bina dupatta ke… tere bade-bade chuchiye aadhe dikh rahe the… aur abbu unko ghoor rahe the… bol… ab tu apne abbu par bhi dore daal rahi hai kya?”

Anam aapi hairani se meri taraf dekhi. Uski aankhein phail gayi. Chehra ek second mein aur laal ho gaya.

**Anam aapi (chaunk kar, halki si siski ke saath):**

“Tu… tu ne dekh liya tha?”

Main ne uske hont chhod kar apna haath neeche le jaaya aur uske bade-bade chuchiyon ko kurte ke upar se pakad liya. Zor se masalne laga — dono haathon se, upar se neeche, gol-gol ghumata hua.

**Main**

“Haan randi ki bacchi… maine sab dekh liya tha… tu jaan-bujh kar jhuk rahi thi taaki abbu tere chuchiyon ko achhe se dekh sake… kitni badi chinal ban gayi hai tu Anam… pehle Arjun… phir main… ab abbu par bhi nazar daal rahi hai? Saali randi… tere bade-bade chuchiye ab har mard ko dikhane ka mann kar raha hai kya?”

Anam aapi sharma kar mere seene mein muh chhupa liya, par uski saansein aur tez ho gayi thi. Main ne uske chuchiyon ko aur zor se masalta hua uske kaan mein bola,

**Main:**

“Bol… sach bol… abbu ke saamne chuchiyan dikhakar tera mann kya kar raha tha? Bol kutiya…”

Anam aapi sirf sisak rahi thi. Uski chuchiyan mere haathon mein garam ho rahi thi aur wo mere seene se aur chipak rahi thi.

Maine uske hont ko ek baar aur zor se masal diya aur dheere se uske kaan mein bola,

**Main:**

“Uth… bed par let ja…”

Aapi ne kuch nahi bola. Wo sharma kar mere bagal se hati aur bistar par let gayi. Uska kurta upar chadha hua tha, salwar abhi bhi dheeli thi. Maine jhat se apna payjama neeche kiya aur uske upar chadh gaya.

Mera lund uski geeli chut ke muh pe ragad raha tha. Aapi ne aankhein band kar li aur dheere se taange faila di.

Main ne ek halka sa dhakka maara aur lund andar ghusa.

**“Aaaahhh…”**

Aapi ki siski nikal gayi. Main dheere-dheere andar-bahar karne laga. Uski chut bahut geeli aur garam thi. Har dhakke pe uske bade-bade chuchiyan hil rahe the.

Thodi der baad maine speed badha di. Dhakke tez hone lage. Aapi neeche se apni gaand utha-utha kar mera lund andar le rahi thi.

Tab maine uske kaan ke paas muh le jaakar dheere se bola,

**Main:**

“Anam… beti… main tumhara abbu hun… phir bhi tumne apne bade-bade chuchiye mere saamne dikhaye… bina dupatta ke… pair daba rahi thi… jaan-bujh kar jhuk rahi thi… bol… teri yeh harkatein kya matlab rakhti hain?”

Anam aapi ka pura badan ek zor ke jhatke se kaanp utha. Uski aankhein khul gayi, saansein aur tez ho gayi. Uski chut ne mere lund ko aur zor se jakad liya.

**Anam aapi (garam, tadapti awaaz mein):**

“Asim… mat bol… uffff… ye… ye bahut gandi baat hai…”

Lekin uski body bilkul alag jawab de rahi thi. Wo ab mere dhakkon ke saath aur zor se hilne lagi thi. Maine speed badha di..

**Main:**

“Chup kar… main tera abbu hun… phir bhi tu mere saamne apni jawani dikha rahi thi… chuchiyan ubhar ke… gaand hilate hue… bol… tu apne abbu se chudwana chahti hai kya? Bol… teri chut abbu ke lund ke liye tadap rahi hai na?”

Anam aapi ab pagal si ho gayi thi. Uski aankhon mein ek aisi hawas aa gayi jo pehle nahi thi. Usne mujhe zor se dhakka diya aur mujhe neeche lita diya. Ab wo mere upar chadh gayi.

**Anam aapi:**

“Haan… haan… main chahti hun… main apne abbu ke lund ke liye tadap rahi hun… … chod mujhe… apni beti ki chut faad de…”

Wo mere upar baith kar zor-zor se uchalne lagi. Uski moti gaand mere thighs pe zor se takra rahi thi. Uske bade-bade chuchiyan mere muh ke paas latak rahe the. Maine unko pakad liya aur zor se masalne laga.

**Main **

“Le beti…… teri chut bahut tight hai… kitni gandi beti hai tu… apne abbu ke lund pe uchal rahi hai… bol… abbu ka lund pasand hai na teri chut ko?”

Usne mere seene pe haath tika diye aur zor-zor se uchalne lagi. Uski chut mere lund ko andar-bahar kar rahi thi. Uski saansein bahut tez thi, muh khula hua tha.

**Anam aapi (pagal hokar, cheekhte hue):**

“Haan abbu… aur zor se… faad do apni beti ki chut… ahhhhh… main teri gandi beti hun… chod mujhe… aur zor se… meri chut abbu ke lund ke liye bani hai… ahhh… uffff… aur andar … poora andar tak…”

Main neeche se dhakke maar raha tha aur gaaliyan de raha tha,

**Main:**

“haramzadi … le…… teri chuchiyan dekhi thi maine… jaan-bujh kar dikhati thi na… ab le… abbu ka lund teri chut mein… bol… abbu se chudna pasand hai na ?”

Anam aapi ab bilkul deewani ho gayi thi. Usne apni speed aur tez kar di. Uski gaand zor-zor se upar-neeche ho rahi thi. Uski chuchiyan mere muh ke paas hil rahe the. Wo mere seene pe jhuk kar mere hont ko chusne lagi aur beech-beech mein sisak rahi thi,

**Anam aapi (pagal hokar):**

“Haan abbu… bahut pasand hai… aur zor se chod… apni beti ko faad do… ahhhhh… main teri chudakkad beti hun… chod… chod mujhe… uffff…”

Dono ka badan paseene se bhig chuka tha. Room mein sirf “dhap-dhap-dhap” aur Anam aapi ki siskariyon ki awaaz goonj rahi thi.

Main neeche se aur tez dhakke marne laga

**Main:**

“Le beti… abbu tera maal nikaal raha hai… teri chut mein… le… le gandi beti… ahhhhh…”

Raat me Hall mein Sab log ek saath baith kar khana kha rahe the. Ammi garam rotiyan bana rahi thi aur plate mein serve kar rahi thi. Abbu table ke head pe baithe the, unka chehra jaise hamesha sakht tha. Zainab aapi mere bagal mein baithi thi, Anam aapi abbu ke bilkul saamne, Noor unke left side pe, aur main Zainab aapi ke right side.

Sab chup-chaap khana kha rahe the.

Main ne nazar utha kar dekha… aur andar se hairan reh gaya.

Abbu seedhe Anam aapi ke chuchiyon ko ghoor rahe the.

Anam aapi ne aaj light pink tight salwar suit pehna tha. Upar wala kurta paseene aur garmi ki wajah se thoda sa chipka hua tha. Jab wo jhuk kar roti todti thi, uske bade-bade, bhare hue chuchiye kurte ke andar se zor se ubhar aate the. Bra ka shape bhi halka sa dikh raha tha. Dupatta usne sirf shoulders pe rakha tha, seene pe nahi lapeta tha. Har saans ke saath uske chuchiyon ka ubhaar saaf dikhai de raha tha.

Aur abbu… jo hamesha ghar ki auraton ko muh dikhane tak nahi dete the… aaj unki nazar Anam aapi ke chuchiyon par atak gayi thi. Wo seedhe ghoor rahe the — aankhein thodi tight, chehra normal rakhne ki koshish kar rahe the, par nazar hat nahi rahi thi. Jab Anam aapi jhuk kar sabzi leti, abbu ki aankhein uske gehre cleavage par ruk jaati thi.

Main hairan tha. Abbu… itne sakht mizaz insaan… jo ghar mein ek chhoti si galti par bhi gussa kar dete the… aaj apni beti ki jawani ko aise ghoor rahe the. Unki aankhon mein ek ajib si chamak thi jo main pehle kabhi nahi dekha tha.

Anam aapi ko bhi ehsaas tha. Wo jaan-bujh kar thoda aur jhuk rahi thi. Jab wo roti todti, uske chuchiye aur zyada aage latak jaate the. Wo dheere se abbu ki taraf dekhti aur phir sharma kar nazar neeche kar leti. Par uske hont pe ek halki si muskurahat thi.

Zainab aapi ne bhi notice kar liya tha. Usne mujhe side se ek nazar daali aur halke se meri jaangh pe haath rakh diya — jaise keh rahi ho “dekh raha hai na?”

Noor apna phone dekhte hue khana kha rahi thi, usko kuch pata nahi tha.

Ammi kitchen aur table ke beech aa-ja rahi thi. Unhone ek baar Anam aapi ki taraf dekha aur thoda sa ruk gayi, par kuch nahi boli.

Abbu ne abhi bhi Anam aapi ke chuchiyon ko ghoorna nahi chhoda tha. Jab Anam aapi ne jhuk kar abbu ke plate mein sabzi daali, uske chuchiye bilkul abbu ke saamne aa gaye. Abbu ki nazar seedhe unke gehre cleavage mein thi.

Main andar se soch raha tha — **abbu… sach mein apni beti ke chuchiyon par phisal rahe hain… itne sakht aadmi… jo hamesha hukum chalate the… aaj unki aankhein beti ki jawani pe atak gayi hain… aur Anam aapi… wo jaan-bujh kar dikha rahi hai… kitni badi chinal ban chuki hai wo…**

Anam aapi ne ek baar dheere se abbu ki taraf dekha aur halke se muskurayi. Abbu ne nazar hata li, par unke haath ki ungliyan thoda kaanp rahi thi.

Khane ke kuch der baad sab log table se uthne lage. Ammi bartan utha rahi thi. Noor apna phone le kar apne room ki taraf chali gayi. Zainab aapi ne mujhe ek halki si nazar daali aur chupchaap apne kamre mein chali gayi.

Abbu ne chair pe peeth tika kar gehri saans li aur dheere se Ammi ki taraf dekha.

**Abbu:**

“Main chhat par ja raha hun… aaj bahut garmi rahi, thandi hawa chal rahi hai. Anam beta… upar aa ja. Mere pairon mein bahut dard ho raha hai… thoda tel malish kar dena.”

Anam aapi ka chehra ekdum se laal pad gaya. Wo roti ke tukde ko plate mein rakhte hue ruk gayi. Usne ek pal ke liye mujhe dekha — aankhein sharma hui, chehra gulaabi. Phir wo dheere se uthi, dupatta ko shoulders pe adjust kiya aur bina kuch bole seedhiyon ki taraf chali gayi.

Main chupchaap chai pi raha tha. Ammi kitchen mein bartan dho rahi thi. Maine 5 minute intezaar kiya, chai khatam ki aur dheere se utha.

Chhat par chandni raat thi. Halki thandi hawa chal rahi thi. Abbu purani wooden chair par seedhe baithe the. Unke pair aage failaye hue the. Anam aapi unke saamne zameen par baith kar unke pair ki maalish kar rahi thi.

Uska dupatta side mein gira hua tha.

Upar wala kurta thoda sa dhila ho gaya tha aur jhukne ki wajah se uske bade-bade, bhare hue chuchiye aadhe se zyada dikh rahe थे। Bra ka white lace saaf dikhai de raha tha। Jab wo pair ko masal rahi thi, uske chuchiyon ka ubhaar har movement ke saath hil raha tha.

Abbu usko bade pyaar se dekh rahe the। Unki aankhein uske chuchiyon par atak gayi thi। Chehra sakht tha, par nazar naram ho gayi thi.

**Abbu (dheere, pyaar bhari awaaz mein):**

“Anam… beta, teri shaadi ko ab kitne saal ho gaye? Ab toh koi achha rishta dekhna chahiye na… tu abhi bhi jawan hai… ghar sambhal rahi hai, lekin teri zindagi bhi toh hai…”

Anam aapi ka haath thoda sa ruk gaya। Usne nazar neeche kar li aur halke se bola,

**Anam aapi (thoda gussa karte hue):**

“Abbu… mujhe dusri shaadi nahi karni… main yahin aap logon ke saath rahungi……”

Abbu ne dheere se apna dusra pair aage badhaya। Unki ungliyan Anam aapi ke chuchiyon ke side se guzarte hue unke upar ragad gayi — bilkul halke se, jaise galti se ho gaya ho।

Anam aapi kuch nahi boli। Usne sirf haath ko thoda upar kiya aur abbu ke pair ko aur achhe se masalne lagi। Uske chuchiye ab aur bhi aage latak rahe the। Abbu ki nazar abhi bhi wahi thi — dheere-dheere, gaur se dekh rahe the।

Main chhat ke darwaze ke paas chupke se khada tha। Chandni mein sab kuch halka sa chamak raha tha।

Main wahan khada soch raha tha — **abbu sach mein phisal rahe hain… aur Anam aapi… wo jaan-bujh kar unhe aur paas la rahi hai… …**

Abbu ne dheere se apna right pair thoda upar uthaya. Unki ungliyan Anam aapi ke left chuchi ke side se guzri aur halke-halke uske ubhaar ko sahlaane lagi — bilkul dheere, jaise galti se ho raha ho, lekin jaan-bujh kar.

**Abbu (dheere, purane dinon ki yaad karte hue):**

“Anam… yaad hai jab tu chhoti thi… 5-6 saal ki… har shaam mujhe chocolate mangti thi… ‘Abbu ek chocolate… bas ek…’ bolti thi aur meri god mein baith jaati thi. Main tujhe god mein baitha kar chocolate khilata tha… tu khush ho jaati thi.”

Anam aapi ne nazar neeche rakhi, par uske hont pe halki si muskurahat aa gayi. Wo abhi bhi pair masal rahi thi, lekin uski saansein thodi tez ho gayi thi.

**Anam aapi (bachpan ki yaad karte hue, sharmate hue):**

“Haan… yaad hai Abbu… aap hamesha late aate the shop se… main darwaze par khadi rehti thi… aap aate hi mujhe utha lete the… aur chocolate dete the.”

Abbu ki ungliyan ab aur dheere se Anam aapi ke chuchi ke ubhaar par ghum rahi thi — upar se neeche, halke-halke sahlaate hue. Unki aankhein uske chuchiyon par hi atki hui thi.

**Abbu (pyaar bhari awaaz mein):**

“Tu ab bhi meri pyaari beti hi hai… bas ab bahut badi ho gayi hai… lekin abhi bhi chocolate pasand hai na?”

Anam aapi ne sharma kar sir hila diya aur halke se boli,

**Anam aapi:**

“Haan… ab bhi pasand hai… lekin aap late late aate ho na…kabhi yaad bhi nahi aata.”

Abbu halke se hans diye. Unhone apna pair neeche kiya aur dheere se uth kar Anam aapi ke peeche aa gaye. Unki ungliyan ab Anam aapi ke kandhon par aa gayi. Wo dheere-dheere uske kandhe dabane lage — bahut pyaar se..

**Abbu:**

“Tu bhi ghar ka kaam karke thak jaati hogi beta… din bhar kitchen, safai… sab karti hai… baith ja chair par… main tere kandhe daba deta hun.”

Anam aapi ne jhat se mana kar diya,

**Anam aapi (thoda ghabra kar):**

“Nahi Abbu… aap baithe rahiye… main theek hun… aap thak gaye honge…”

Lekin Abbu nahi ruke. Unhone Anam aapi ko dheere se uthaya aur usko apni chair par baitha diya. Phir khud uske peeche khade ho gaye. Unke haath Anam aapi ke kandhon par the aur dheere-dheere dabane lage.

Abbu ki nazar Anam aapi ke upar se neeche ki taraf giri. Uska kurta abhi bhi thoda dhila tha aur jhukne ki wajah se uske bade-bade chuchiye aadhe se zyada nikle hue the. Abbu unko bade pyaar se dekh rahe the — aankhein thodi der tak wahi atki rahi.

**Abbu (kandhe dabate hue, dheere se):**

“Beta… tu bahut mehnat karti hai… ghar sambhalti hai… main dekh raha hun sab… tu thak jaati hogi na?”

Anam aapi ne sir hila diya, par uski saansein ab thodi tez ho gayi thi. Abbu ke haath uske kandhon se thoda neeche ki taraf slide ho rahe the — abhi bhi kandhe hi daba rahe the, lekin ungliyan uske chuchiyon ke upar wale hisse ko halke-halke chhu rahi thi.

Main chhat ke darwaze ke paas chupke se khada tha. Chandni mein sab kuch saaf dikh raha tha.

Anam aapi chup thi, par uska badan thoda sa kaanp raha tha. Wo jaan-bujh kar thoda aur seedhi baith gayi thi, jisse uske chuchiye aur bhi ubhar aaye.

Chhat par hawa ab thodi aur thandi ho gayi thi, lekin dono ke badan mein garmi badh rahi thi. Anam aapi chair par seedhi baithi thi, uska kurta abhi bhi thoda dhila tha aur chuchiyon ka ubhaar saaf dikh raha tha.

Abbu ne dheere se apna right haath Anam aapi ke left kandhe se neeche ki taraf le jaaya. Unki ungliyan uske chuchi ke upar wale hisse par pahunch gayi. Pehle sirf halke se chhue, jaise galti se ho gaya ho. Anam aapi ne kuch nahi bola. Wo chup rahi.

Abbu ne himmat badhaai aur ab pura haath dheere se uske bade chuchi par rakh diya. Unhone halke-halke sahlaana shuru kar diya — ungliyan gol-gol ghumaate hue, bahut dheere se.

Anam aapi ki saansein ekdum se tez ho gayi. Uski gardan thodi si peeche jhuk gayi, aankhein adhi band ho gayi. Wo kuch nahi boli, sirf saans lene lagi..

Abbu ne ab left haath bhi uske dusre chuchi par rakh diya. Dono haathon se dheere-dheere sahlaane lage — upar se neeche, gol-gol ghumate hue, kabhi halke se dabaate hue. Unki ungliyan chuchiyon ke ubhaar ko feel kar rahi thi.

**Abbu (dheere se):**

“Anam… ghar mein sab theek chal raha hai na?”

Anam aapi sisak rahi thi. Uski saansein ab bahut tez ho gayi thi. Usne sirf halke se sir hila diya aur adhi band aankhon se bola,

**Anam aapi (sisakti hui, awaaz kaanpti hui):**

“Haan… Abbu… sab… theek… hai…”

Abbu ne ab chuchiyon ko thoda aur dabana shuru kar diya — dheere se, lekin poore haath se. Unki ungliyan nipple ke paas ghum rahi thi. Anam aapi ki saansein aur tez ho gayi. Uski gardan pe paseena nikal aaya tha.

**Abbu :**

“Noor ki padhai kaisi chal rahi hai? Aur Zainab… wo bhi theek hai na? Tu bahut mehnat karti hai beta… ghar sambhalti hai… main dekh raha hun sab…”

Anam aapi ab sirf “Haan… Haan Abbu…” mein jawab de rahi thi. Har baar jab Abbu chuchiyon ko dabate, uski siski halki si nikal jaati thi. Uski taange thar-thar kaanp rahi thi, par wo chair se nahi uthi. Wo jaan-bujh kar thodi aur seedhi baith gayi thi, jisse uske chuchiye Abbu ke haathon mein aur achhe se aa jaayein.

Abbu ne ab dono haathon se chuchiyon ko poora pakad liya aur dheere-dheere masalne lage — upar se neeche, gol-gol ghumate hue. Anam aapi ki saansein ab rukne lagi thi. Uski aankhein band ho gayi thi, hont halke se kaat rahi thi.

**Anam aapi:**

“Abbu… aap… thak gaye honge… baithiye… main… main theek hun…”

Lekin Abbu nahi baithe. Unke haath abhi bhi uske chuchiyon par the — dheere-dheere, pyaar se, par ab dabav badh gaya tha.Kucj der me aapi uthi aur aane lagi to Main bhi waha se nikal gaya.

Yeh raha bilkul natural aur realistic feel wala subah ka nashta wala scene:

Subah Hall mein nashta laga tha.Sab log table par baithe the — Ammi rotiyan serve kar rahi thi, Abbu table ke head par, main unke right side, Zainab aapi mere bagal mein, Anam aapi Abbu ke bilkul saamne, aur Noor unke left side par baithi thi.

Main chupchaap khana kha raha tha, par meri nazar baar-baar sab par ghum rahi thi

Ammi ne aaj light yellow salwar suit pehna tha। Jab wo jhuk kar paratha serve karti, uske bade-bade doodh kurte ke andar se zor se ubhar aate the। Bra ka shape saaf dikh raha tha। Unki moti gaand salwar mein tight chipki hui thi, har kadam pe halke se hil rahi thi।

Anam aapi ka chehra abhi bhi thoda laal tha। Uska pink salwar suit paseene se thoda chipka hua tha। Jab wo roti todti, uske bade-bade chuchiye aage latak jaate the। Wo baar-baar Abbu ki taraf dekhti aur sharma kar nazar neeche kar leti। Abbu bhi usko dheere-dheere dekh rahe the — aankhein normal rakhne ki koshish kar rahe the, par nazar uske chuchiyon par hi atak jaati thi।

Zainab aapi mere bagal mein baithi thi। Uska light blue suit abhi bhi kal raat ki chudai ke nishaan lekar tha — chuchiyon ke ubhaar zor se dikh rahe the। Wo kabhi mujhe side se dekhti, kabhi Anam aapi aur Abbu ko, aur halke se muskurati thi।

Noor wo apna phone dekhte hue paratha kha rahi thi، usko kuch khas pata nahi tha, par jab wo jhukti thi to uski tight kurti mein uske jawan chuchiye ubhar aate the।

**Ammi:**

“Anam, kal shop se jo kapda aaya tha, usme se suit banwa lena… bahut achha color hai.”

**Anam aapi (halki awaaz mein, Abbu ki taraf dekhte hue):**

“Haan Ammi… dekh lungi…”

Abbu ne Anam aapi ki taraf dekha। Unki nazar uske chuchiyon par thodi der atak gayi। Anam aapi ne us nazar ko mehsoos kiya aur sharma kar apni roti ke tukde ko aur chhota karne lagi। Uska chehra laal ho gaya tha।

**Abbu (normal awaaz mein, lekin Anam aapi ko dekhte hue):**

“Anam, dukaan par bahut rush hai aajkal… tu bhi kabhi madad kar liya kar… ghar ka kaam toh Ammi aur Zainab sambhal lengi.”

Anam aapi ne sir hila diya, par uski aankhein Abbu se mil nahi pa rahi thi। Wo sharma rahi thi, par uske hont pe ek halki si muskurahat bhi thi।

Main sab dekh raha tha। Meri nazar Ammi ke ubhre hue doodh par thi, Anam aapi ke latakte chuchiyon par, Zainab aapi ke tight salwar mein chipki gaand par, aur Noor ke jawan badan par। Andar se bahut garam ho raha tha।

Zainab aapi ne mere pair ko apne pair se halke se ragad diya aur dheere se meri taraf dekha — jaise keh rahi ho “dekh raha hai na sab?”

Anam aapi ek baar phir Abbu ki taraf dekhi। Abbu ne usko dekha aur halke se muskuraye। Anam aapi sharma kar nazar neeche kar li, par uske chuchiye aur bhi ubhar aaye the.

Nashte ke baad table se sab uthne lage। Noor apna bag utha kar school ke liye ready ho gayi। Ammi aur Zainab aapi kitchen mein bartan dho rahe the। Hall mein sirf main aur Anam aapi baaki the।

Abbu apne room ki taraf chale gaye। Thodi der baad unki awaaz aayi,

**Abbu:**

“Anam… idhar aa… mere moje nahi mil rahe hain।”

Anam aapi ka chehra ek second mein laal ho gaya। Wo sharma kar uthi, dupatta ko seene pe theek kiya aur dheere se Abbu ke room ki taraf chali gayi। Main samajh gaya tha। Maine uth kar dheere se unke room ke darwaze ke paas pahuncha aur andar jhaanka।

Andar Anam aapi almari ke saamne khadi thi, jhuk kar neeche wali shelf mein moje dhoondh rahi thi। Uska kurta aage ki taraf latak raha tha, chuchiyon ka ubhaar saaf dikh raha tha।

Abbu uske bilkul peeche khade the। Unka haath dheere se Anam aapi ki pith par tha aur halke-halke sahla rahe the।

**Abbu (dheere, pyaar bhari awaaz mein):**

“Anam… aaj main dukaan se chocolate laaunga… teri favourite wali… jo tu bachpan mein mangti thi… yaad hai na?”

Anam aapi ne sirf halke se “Haan…” bola, par uski saansein thodi tez ho gayi thi। Wo almari ki taraf jhuk gayi।

Abbu ne ab apna haath dheere se neeche le jaaya aur Anam aapi ki moti gaand par rakh diya। Unhone halke se dabaya — ek baar, phir dusri baar।

Anam aapi chaunk kar seedhi ho gayi। Uska chehra poora laal pad gaya।

**Anam aapi (thoda ghabra kar):**

“Abbu… aap…”

Abbu turant haath hata liya aur jaise kuch hua hi nahi ho, normal awaaz mein bole,

**Abbu:**

“Mil gaye moje?”

Anam aapi ne jaldi se ek jodi moje nikaal kar unki taraf badha diye। Abbu ne moje le liye aur jaise kuch nahi hua ho, room se bahar nikal gaye।

Main jaldi se wapas hall mein aa kar sofa par baith gaya। Dil zor-zor se dhadak raha tha।

Anam aapi thodi der baad bahar aayi। Uska chehra abhi bhi laal tha। Wo kitchen ki taraf chali gayi bina mujhe dekhe।
 
मैं अपने रूम में बैठा मोबाइल में कुछ देख रहा था. दिमाग में अनाम आपि और अब्बू सीन्स घूम रहे थे —

तभी मेरा फ़ोन बजा. अब्बू का कॉल था.

**अब्बू:**

“असीम, अनाम को लेकर तुरंत शॉप पर आ जा. इधर बहुत रश है आज, कस्टमर लाइन में खड़े हैं. जल्दी ले कर आओ.”

मैं हैरान रह गया. अब्बू को शॉप पर मदद की ज़रूरत कब से पड़ने लगी? और वह भी अनाम आपि को लेकर? जो हमेशा घर की औरतों को बहार निकलने तक नहीं देते थे.

मैं तुरंत उठा और अनाम आपि के रूम की तरफ गया. वो अपना सलवार सूट ठीक कर रही थी. जैसे hi मैंने दरवाज़ा खोला, उसने मेरी तरफ देखा. मैं ने बात बताई,

**मैं:**

“आपि, अब्बू का कॉल आया है. तुम्हे लेकर शॉप पर चलना है. बहुत रश है वहां.”

अनाम आपि का चेहरा एकदम से लाल पद गया. उसकी आँखें नीचे हो गयी. वो कुछ सेकण्ड्स तक चुप रही, फिर धीरे से बोली,

**अनाम आपि (हलकी आवाज़ में):**

“शॉप पर…? मैं… मैं क्या करुँगी वहां?”

मैं ने उसके चेहरे को घूरा. उसका दुपट्टा शोल्डर्स पर था, सलवार सूट थोड़ा टाइट था, चूचियों का उभार साफ़ दिख रहा था. अंदर से एक अजीब सी गर्मी महसूस होने लगी.

**मैं (मुस्कुराते हुए):**

“चलो आपि… अब्बू बुला रहे हैं. देखते हैं क्या सन है.”

मैं बाइक निकाल लिया. अनाम आपि पीछे बैठ गयी. जैसे hi बाइक स्टार्ट की, मैंने धीरे से उसके कान में बोलै,

**मैं:**

“साली रंडी… अब्बू ने तुम्हे शॉप पर बुलाया है… कल रात चूचियां दिखाई थी, सुबह गांड डब्वायी थी… अब शॉप पर क्या प्लान है तेरा? बोल… अब्बू के सामने फिर से अपनी जवानी दिखने का मैं कर रहा है क्या?”

अनाम आपि ने मुझे पीछे से तिघ्टलय पकड़ लिया. उसकी चूचियां मेरी पीठ से रगड़ रही थी. वो शर्मा कर हलकी सी सिसकी ली,

**अनाम आपि:**

“असीम… चुप कर… यह बहुत गन्दी बात है… मैं… मैं सिर्फ मदद करने जा रही हूँ…”

मैं ने स्पीड बढ़ा दी और गाली देते हुए बोलै,

**मैं:**

“मदद करने? साली चैनल… तुझे पता है अब्बू कितने स्ट्रिक्ट हैं… फिर भी तुझे बुला रहे हैं… तेरी मोती गांड और बड़े चूचिये देख कर hi उनका लुंड खड़ा हो रहा होगा… बोल कुटिया… शॉप पर जा कर क्या करोगी? अब्बू के सामने jhuk-jhuk कर कपडे फोल्ड करोगी ताकि वह तेरे चुके में घुस सके?”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ मुझे और तिघ्टलय पकड़ लिया. उसकी सांसें मेरी गर्दन पर गरम पद रही थी.

शॉप पहुँचते hi मैंने देखा — बहुत रश था.. अब्बू काउंटर पर खड़े थे, चेहरा थोड़ा सख्त था पर आँखों में एक अलग चमक थी.

जैसे hi हम दोनों अंदर घुसे, अब्बू ने अनाम आपि को देखा. उनकी नज़र सीधे उसके चूचियों पर गयी, फिर झट से हटा ली.

**अब्बू:**

“ठीक है असीम, तुम घर चलो. हम दोनों यहाँ देख लेंगे. अनाम मदद कर लेगी.”

मैं हैरान हो गया. अब्बू ने कभी घर की औरत को शॉप पर नहीं बुलाया था. मैंने पुछा,

**मैं:**

“अब्बू, वो दोनों लड़के कहाँ हैं? जो काम करते हैं… उनको बुला लो न.”

अब्बू ने नार्मल आवाज़ में बोलै,

**अब्बू:**

“वो दोनों गांव गए हैं अपने घर. आज उनकी छुट्टी है. तू जा, हम संभल लेंगे.”

मैं बहार निकल आया. लेकिन अंदर से शक हो रहा था. मैंने बाइक साइड में पार्क की और दूर से थोड़ा दूर जा कर उन दोनों लड़कों को कॉल कर दिया.

फ़ोन उठाया तो पहले लड़के ने बोलै,

**लड़का:**

“अरे असीम भाई… हम गांव नहीं गए. साहब ने हम दोनों को आज छुट्टी दे दी थी सुबह hi. बोलै था घर जाओ, आज ज़रूरत नहीं है.”

मैं फ़ोन काट कर हैरान रह गया.

**मैं (अपने आप से सोच रहा था):**

“अब्बू ने झूट बोलै… दोनों लड़कों को छुट्टी दे दी… और अनाम आपि को बुलाया… शॉप पर सिर्फ अब्बू और अनाम आपि… रश के बहाने… उफ्फ्फ्फ़… क्या प्लान है अब्बू का? अनाम आपि को अकेला प् कर क्या करने वाले हैं… साली रंडी… अब अब्बू के सामने और खुल कर अपनी हवस दिखाएगी क्या?”

मैं बाइक पर बैठ कर वापस घर की तरफ नहीं गया. थोड़ा दूर खड़े होकर शॉप को देखता रहा. अंदर अनाम आपि काउंटर के पास कड़ी थी. अब्बू उसके बिलकुल पास. जब वो झुक कर कपडा निकालती, उसके बड़े चूचिये ज़ोर से उभर रहे थे. अब्बू की नज़र baar-baar वही जा रही थी.

अंदर से मेरा लुंड half-khada हो गया था.

**मैं (सोच रहा था):**

“साली अनाम… कितनी बड़ी चुड़क्कड़ बन चुकी है तू…

मैं बाइक साइड में पार्क करके वही खड़ा रहा. 2 घंटे बीत गए. दोपहर की तेज़ गर्मी थी, पसीना मेरे बदन से बाह रहा था, लेकिन मैं वहां से हिल नहीं प् रहा था. दिमाग में सिर्फ एक hi बात घूम रही थी — अब्बू ने दोनों लड़कों को छुट्टी दे दी, अनाम आपि को बुलाया, और अब सिर्फ वह दोनों अकेला हैं शॉप में.

कुछ देर बाद रश ख़तम हो गया. बहार से hi दिखाई दे रहा था की कस्टमर काम हो गए हैं. फिर मैंने देखा — अब्बू ने शॉप का “क्लोज्ड” वाला बोर्ड बहार लगा दिया. गेट अंदर से बंद कर दिया.

मेरी धड़कन तेज़ हो गयी.

अब्बू ने अनाम आपि की तरफ इशारा किया और धीरे से बोलै कुछ. अनाम आपि का चेहरा लाल पद गया. वो शर्मा कर नज़र नीचे किये हुए अंदर के छोटे रूम की तरफ चली गयी — जहाँ पुराने कपडे और स्टॉक रखा रहता था.

मैं हिम्मत कर के बिना आवाज़ किये शॉप के अंदर घुस गया. दरवाज़ा धीरे से खोल कर अंदर आ गया. दिल zor-zor से धड़क रहा था. मैं चुपके से उस छोटे रूम के गेट के पास पहुंचा और थोड़ा सा दरवाज़ा धकेला, अंदर झाँकने लगा.

**उफ्फ्फ्फ़… क्या नज़ारा था!**

अनाम आपि सिर्फ सलवार में कड़ी थी. ऊपर का कुरता और ब्रा दोनों उतर कर साइड में रख दिया गया था. उसकी bade-bade, gol-gol चूचियां बिलकुल नंगी थी. गर्मी की वजह से उन पर पसीना चमक रहा था. निप्पल laal-laal और खड़े हुए थे.

और अब्बू… … जो घर में एक छोटी सी गलती पर भी गुस्सा कर देते थे… झुक कर बिलकुल बच्चे की तरह अनाम आपि के एक चुकी को मुँह में ले रखा था. उनके होंठ निप्पल को zor-zor से चूस रहे थे. “चुप… चुप… सलूरररप…” की हलकी आवाज़ें आ रही थी. दूसरी चुकी को उन्होंने हाथ से पकड़ रखा था और ज़ोर से मसल रहे थे.

अनाम आपि की सांसें बहुत तेज़ चल रही थी. उसकी आँखें बंद थी, चेहरा पूरा लाल. वो halki-halki सिसकारी ले रही थी और मन करने की कोशिश कर रही थी.

**अनाम आपि (सिसकती हुई, कांपती आवाज़ में):**

“अब्बू… नहीं… प्लीज… यह… यह गलत है… मैं… मैं आपकी बेटी हूँ… अह्ह्ह… मत… मत चुसो… उफ्फ्फ्फ़…”

लेकिन अब्बू रुक नहीं रहे थे. वो और ज़ोर से चूस रहे थे. निप्पल को मुँह में लेकर जीभ से चाट रहे थे, कभी हलके से काट भी रहे थे. उनका दूसरा हाथ अनाम आपि की मोती गांड पर था और उसको ज़ोर से दबा रहा था. सलवार के ऊपर से hi गांड के दोनों हिस्से को मसल रहे थे.

**अब्बू (मुंध में चुकी लिए हुए, गरम आवाज़ में):**

“चुप कर बेटी… कितने दिन से तड़प रहा था मैं… तेरी यह badi-badi आम dekh-dekh कर… आज तू अकेली मिली है… चूसने दे… बहुत सॉफ्ट हैं… दूध जैसी… उफ्फ्फ्फ़…”

अनाम आपि की टाँगे thar-thar काँप रही थी. वो एक हाथ से अब्बू के सर को धकेलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन ज़ोर नहीं लगा प् रही थी. उसकी सांसें और तेज़ हो गयी थी. उसकी छूट के पास सलवार थोड़ी गीली सी दिख रही थी.

मैं दरवाज़े के पास चुपके से खड़ा था. मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा खड़ा हो चूका था. अंदर से बहुत गर्मी आ रही थी.

अब्बू ने अब दूसरी चुकी मुँह में ले ली. Zor-zor से चूसने लगे. अनाम आपि की सिसकारी और तेज़ हो गयी.

**अनाम आपि (sisak-sisak कर):**

“अब्बू… अह्ह्ह… बहुत… बहुत ज़ोर से मत चुसो… उफ्फ्फ्फ़… मैं… मैं कण्ट्रोल नहीं कर प् रही… प्लीज… कोई आ जायेगा…”

लेकिन अब्बू ने एक हाथ नीचे ले जाकर अनाम आपि की सलवार के नाड़े पर रख दिया. धीरे से नाडा खोलने की कोशिश करने लगे.

मैं दरवाज़े के छेड़ से झाँक रहा था. मेरा दिल zor-zor से धड़क रहा था. अब्बू अभी भी अनाम आपि की badi-badi चूचियां चूस रहे थे, निप्पल को मुँह में लेकर zor-zor से चूस रहे थे. अनाम आपि सिसकारी ले रही थी और मन कर रही थी, लेकिन उसका बदन बिलकुल अलग जवाब दे रहा था.

फिर अब्बू ने अनाम आपि को धीरे से उठाया और रूम के कोने में रखे हुए एक छोटे से स्टूल पर बिठा दिया. अनाम आपि बैठ गयी. उसकी टाँगे थोड़ी फैली हुई थी. अब्बू उसके सामने घुटनो के बल बैठ गए.

**अनाम आपि (घबराते हुए, हलकी सिसकी के साथ):**

“अब्बू… नहीं… प्लीज… यह मत कीजिये… मैं आपकी बेटी हूँ… यह बहुत गन्दी बात है… कोई आ जायेगा… अह्ह्ह…”

लेकिन अब्बू ने कुछ नहीं सुना. उन्होंने अनाम आपि की सलवार का नाडा पकड़ा और एक झटके से नीचे खिंच दिया. सलवार उसकी टांगो तक सरक गयी. अंदर वो सिर्फ एक पतली सी ब्लैक पंतय पहनी हुई थी, जो अभी भी गीली दिख रही थी.

अब्बू ने पंतय को भी साइड में सरका दिया. अनाम आपि की छूट बिलकुल नंगी हो गयी — गुलाबी, गीली और थोड़ी पहली हुई. गर्मी और हवस की वजह से छूट के मुँह से पानी टपक रहा था.

**अनाम आपि (ज़ोर से मन करते हुए, टाँगे बंद करने की कोशिश करते हुए):**

“अब्बू… नहीं… मत… प्लीज… यह गलत है… मैं… मैं आपकी बेटी हूँ… रोकिजिये… अह्ह्ह… कोई देख लेगा…”

अब्बू ने उसकी टाँगे ज़ोर से फैला दी और अपना मुँह उसकी छूट पर लगा दिया. जैसे कोई भूखा कुत्ता हो, वैसे hi zor-zor से छूट चाटने लगे. उनकी जीभ छूट के मुँह से अंदर तक घुस रही थी. “चुप… चुप… सलूरररप… puch-puch…” की गन्दी आवाज़ें रूम में गूँज रही थी.

अब्बू बिलकुल दीवाने हो गए थे. कभी छूट के ऊपर वाले हिस्से को जीभ से चाट रहे थे, कभी पूरा मुँह लगा कर चूस रहे थे, कभी जीभ अंदर दाल कर andar-bahar कर रहे थे. उनके होंठ छूट के मुँह को पकड़ कर चूस रहे थे और लार से पूरा एरिया गीला कर दिया था.

अनाम आपि का पूरा बदन काँप रहा था. उसने दोनों हाथों से अब्बू के सर को धकेलने की कोशिश की, लेकिन ज़ोर नहीं लगा प् रही थी.

**अनाम आपि (sisak-sisak कर, तड़पती आवाज़ में):**

“अब्बू… उफ्फ्फ्फ़… नहीं… मत छतो… अह्ह्ह्ह… बहुत… बहुत गर्मी हो रही है… प्लीज रोक… मैं… मैं कण्ट्रोल नहीं कर प् रही… अह्ह्ह…… उफ्फ्फ्फ़… आप… आप क्या कर रहे हैं…”

लेकिन अब्बू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. वो और ज़ोर से छूट चाट रहे थे. कभी जीभ से क्लीट को टारगेट कर रहे थे, कभी पूरा मुँह लगा कर चूस रहे थे. अनाम आपि की सिसकारियां अब और तेज़ हो गयी थी. उसकी टाँगे अब्बू के कन्धों पर रख दी थी और वो खुद hi thodi-thodi ऊपर उठा रही थी ताकि अब्बू की जीभ और अंदर तक जा सके.

मैं दरवाज़े के पास खड़ा था, आँखें फटी हुई. मेरे अब्बू… जो घर में हमेशा हुकुम चलता था… अब घुटनो के बल बैठा अपनी बेटी की छूट को कुत्ते की तरह चाट रहा था. उसका मुँह पूरा गीला हो चूका था अनाम आपि के पानी से.

**मैं (अपने आप से सोच रहा था, लुंड पायजामा में तन कर खड़ा):**

“Uffff…Abbu… अपनी बेटी की छूट चाट रहे हैं… जैसे भूखे कुत्ते की तरह… साली अनाम आपि… पहले तो मन कर रही थी… अब खुद टाँगे फैला रही है… कितनी बड़ी रंडी बन चुकी है यह… पहले अर्जुन के लुंड पे उछलती थी… फिर मेरे साथ… अब अब्बू की जीभ पे तड़प रही है… ”

अनाम आपि अब कण्ट्रोल खोने लगी थी. उसकी सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी. वो halke-halke “अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अब्बू…” बोल रही थी और उसकी गांड स्टूल पर हिलने लगी थी.

अब्बू ने एक हाथ ऊपर ले जाकर अनाम आपि की बड़ी चुकी को पकड़ लिया और ज़ोर से मसलने लगे, दूसरे हाथ से उसकी टांग पकड़ राखी थी. उनकी जीभ अभी भी zor-zor से छूट के andar-bahar हो रही थी.

मैं हैरान था… सच में हैरान था… अब्बू का यह रूप मैंने कभी नहीं देखा था.

अचानक मेरे हाथ से जो सामान पकड़ा हुआ था, वो नीचे गिर गया. “थुड़” की आवाज़ हुई.

अंदर दोनों एकदम से चौंक गए. अनाम आपि ने झट से अपनी टाँगे बंद की और स्टूल से उठने की कोशिश की. अब्बू तुरंत खड़े हो गए, उनका मुँह अभी भी अनाम आपि के छूट के पानी से गीला था.

मैं कुछ सोच भी नहीं पाया. दर के मारे मैं तुरंत पीछे हटा और शॉप के बहार की तरफ भाग गया. दिल zor-zor से धड़क रहा था. बहार निकल कर बाइक के पास पहुंचा और बाइक स्टार्ट करके थोड़ा दूर चला गया. वहां रुक कर मैं पसीने से tar-bhar हो गया था.

अंदर से सोच रहा था — **“फ़क… उन्होंने सुन लिया… अब क्या होगा? **

करीब 20 मिनट बाद मैं वापस शॉप की तरफ आया. अब शॉप का गेट खुला था. “क्लोज्ड” बोर्ड अंदर रखा हुआ था. अनाम आपि और अब्बू दोनों बहार काउंटर के पास बैठ रहे थे. अनाम आपि ने अपना कुरता पेहेन लिया था, दुपट्टा शोल्डर्स पर था, लेकिन चेहरा अभी भी लाल था. अब्बू नार्मल बनने की कोशिश कर रहे थे, पर उनकी आँखें थोड़ी परेशां दिख रही थी.

मैं अंदर गया. दोनों ने मेरी तरफ देखा.

**मैं:**

“अब्बू… अनाम आपि को लेकर घर चलता हूँ. आप अकेला संभल लोगे न?”

अब्बू ने मुझे गुस्से भरी नज़र से देखा. उनकी आँखें टाइट हो गयी. थोड़ी देर चुप रहे, फिर सख्त आवाज़ में बोले,

**अब्बू:**

“ठीक है… ले जाओ.”

उनकी आवाज़ में वह पुराण गुस्सा था,

मैं ने अनाम आपि की तरफ देखा. वो नज़र नीचे किये हुए थी. हम दोनों बहार निकल कर बाइक पर बैठ गए. अनाम आपि पीछे बैठ गयी

रस्ते में बाइक चलते हुए मैं चुप नहीं रह सका. थोड़ा दूर निकलने के बाद मैंने धीरे से बोलै,

**मैं:**

“आपि… मैं सब देख रहा था.”

अनाम आपि का पूरा बदन एक झटके से काँप उठा. उसने मुझे पीछे से तिघ्टलय पकड़ लिया. उसकी सांसें तेज़ हो गयी.

**अनाम आपि (दर और शर्म से, हलकी सी सिसकी के साथ):**

“असीम… तू… तू ने… सब… देख लिया? उफ्फ्फ्फ़… बीटा… प्लीज… किसी को मत बताना… यह… यह बहुत बड़ी गलती हो गयी… मैं… मैं नहीं चाहती थी… अब्बू ने… उन्होंने ज़बरदस्ती…”

मैं ने बाइक की स्पीड थोड़ी काम की और उसके कान के पास धीरे से बोलै,

**मैं:**

“ज़बरदस्ती? साली रंडी… मैंने सब देखा था… तू स्टूल पर बैठी थी, सलवार नीचे थी, पंतय साइड में सरका दी थी… और अब्बू कुत्ते की तरह तेरी छूट चाट रहे थे… बोल… सच बोल… तुझे मज़ा आ रहा था न? अपने अब्बू की जीभ अपनी छूट में फील करके तेरी छूट पानी छोड़ रही थी न?”

अनाम आपि ने मेरे कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया. उसकी चूचियां मेरी पीठ से रगड़ रही थी. वो शर्मा कर मेरे पीछे मुँह छुपा रही थी.

**अनाम आपि (सिसकती हुई, बहुत हलकी आवाज़ में):**

“असीम… मत बोल… बहुत शर्म आ रही है… मैं… मैं पागल हो रही थी… अब्बू की जीभ… उफ्फ्फ्फ़… बहुत गरम थी… मेरी छूट… बहुत तड़प रही थी… लेकिन यह गलत है बीटा… अब्बू… मेरे अब्बू… मैं उनकी बेटी हूँ… प्लीज… तू किसी को मत बताना… मैं मर जाउंगी शर्म से…”

मैं ने मुस्कुराते हुए बोलै,

**मैं:**

“रंडी की बच्ची… पहले अर्जुन के साथ चूड़ी… फिर मेरे साथ… अब अब्बू तेरी छूट चाट रहे हैं… और तू अभी भी ‘गलत है’ बोल रही है… लेकिन तेरी छूट तोह अभी भी गीली होगी न? बोल… अब्बू की जीभ याद करके अभी भी पानी निकल रहा है क्या?”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ मुझे और चिपक गयी. उसकी सांसें मेरे गर्दन पर गरम पद रही थी.

घर pahunchte-pahunchte मेरा लुंड अभी भी half-khada था.

घर पहुँचते hi मैंने बाइक पार्किंग की. अनाम आपि जल्दी से उत्तरी और बिना कुछ बोले अंदर चली गयी. उसका चेहरा अभी भी लाल था और वो मेरी तरफ देखे भी नहीं. मैं धीरे से अंदर आया.

हॉल में अम्मी और नूर बैठ कर बात कर रही थी. ज़ैनब आपि किचन में थी.

मैं अपने रूम में जाने लगा, तभी ज़ैनब आपि किचन से बहार आयी. उसने लाइट ब्लू सलवार सूट पहना था. उसकी चूचियां ब्रा के बिना थोड़ी उभरी हुई दिखती थी और सलवार में उसकी गांड का शेप साफ़ था. वो मेरी तरफ देखि और हलके से मुस्कुरायी.

**ज़ैनब आपि (हलकी आवाज़ में):**

“असीम… थक गए होंगे न? चल, मैं तेरे लिए पानी लाती हूँ.”

मैं ने सर हिला दिया. वो पानी का गिलास ले आयी और मुझे दिया. जब वो झुक कर गिलास रख रही थी, उसके चूचियों का उभार साफ़ दिख रहा था. मेरी नज़र वहां अटक गयी.

थोड़ी देर बाद मैंने कहा,

**मैं:**

“आपि, मुझे नहाना है. बहुत पसीना हो गया है दोपहर की गर्मी में.”

ज़ैनब आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी. वो धीरे से बोली,

**ज़ैनब आपि:**

“मैं भी नहाउंगी. गर्मी बहुत है आज. साथ में चलते हैं?”

मैंने उसको देखा और धीरे से मुस्कुराया.

अंदर गरम पानी का शावर चल रहा था. ज़ैनब आपि पहले अपना दुपट्टा उतरी, फिर सलवार सूट का कुरता ऊपर से उतरने लगी. उसकी बड़ी चूचियां बहार आ गयी — गोल, भरी हुई, निप्पल हलके लाल. वो सलवार का नाडा खोल कर नीचे करने लगी. उसकी मोती गांड और गीली छूट साफ़ दिख रही थी.

मैं भी अपने कपडे उतर रहा था. जब मेरा लुंड बहार निकला, वो थोड़ा खड़ा था.

ज़ैनब आपि शावर के नीचे कड़ी हो गयी. पानी उसके बदन पर बह रहा था. उसके चूचियों पर पानी की बूँदें लटक रही थी. वो मुझे अपने पास बुलाया.

**ज़ैनब आपि (हलकी मुस्कराहट के साथ):**

“आ जा साथ में नहाते हैं.”

मैं उसके पास गया. शावर के नीचे हम दोनों एक साथ खड़े थे. मैंने उसके पीछे से उसको पकड़ लिया. मेरे हाथ उसकी कमर पर थे. धीरे से ऊपर ले जाकर उसके बड़े चूचियों को पकड़ लिया और halke-halke मसलने लगा.

**मैं (उसके कान में धीरे से):**

“आपि… आज बहुत गरम हो… तेरी चूचियां कितनी सॉफ्ट हैं…”

ज़ैनब आपि ने आँखें बंद कर ली और मेरे हाथों पर अपना हाथ रख दिया. वो धीरे से हिल रही थी.

**ज़ैनब आपि (सिसकती हुई):**

“असीम… धीरे… अम्मी और नूर बहार हैं… आवाज़ मत होने देना…”

मैं ने उसकी एक चुकी को ज़ोर से मसल दी और निप्पल को ऊँगली से रगड़ने लगा. दूसरा हाथ नीचे ले जाकर उसकी छूट पर रख दिया. उसकी छूट आलरेडी गीली थी. दो उँगलियाँ अंदर दाल दी और dheere-dheere andar-bahar करने लगा.

**मैं:**

“आपि… तेरी छूट तोह बहुत गीली है… क्या बात है?"

ज़ैनब आपि ने शर्मा कर सर हिला दिया. उसकी गांड मेरे खड़े लुंड से रगड़ रही थी.

**ज़ैनब आपि (हलकी सिसकी के साथ):**

“बस… गर्मी की वजह से… अह्ह्ह… और तेज़ मत कर… उफ्फ्फ्फ़…”

मैं ने उसको दीवार की तरफ घुमा दिया. अब वो दीवार के सामने कड़ी थी, मैं पीछे से. मैंने उसकी गांड को दोनों हाथों से फैलाया और अपना लुंड उसकी गीली छूट के मुँह पर रगड़ने लगा.

**मैं (उसके कान में):**

“आपि… आज मैं कर रहा है तुझे यहीं छोड़ने का… धीरे से… बिना आवाज़ किये…”

ज़ैनब आपि ने पीछे हाथ ले जाकर मेरा लुंड पकड़ लिया और अपनी छूट के मुँह पर रगड़ने लगी.

**ज़ैनब आपि (गरम सांस छोड़ते हुए):**

“दाल दे बीटा… लेकिन धीरे… बहुत धीरे… अह्ह्ह…”

मैं ने एक हल्का सा धक्का मारा. मेरा लुंड उसकी टाइट गीली छूट में अंदर घुस गया. “पूछ” की हलकी सी आवाज़ हुई. ज़ैनब आपि ने मुँह से हाथ रख लिया ताकि सिसकी न निकल जाये.

मैं dheere-dheere धक्के मारने लगा. हर धक्के के साथ उसकी गांड मेरे तइस से टकरा रही थी. शावर का पानी हम दोनों के बदन पर बह रहा था.

**मैं (उसके कान में गाली देते हुए):**

“साली… तेरी छूट बहुत टाइट और गरम है आज… बोल… क्या सोच रही थी जब मैं बहार था?”

ज़ैनब आपि सिर्फ सिसक रही थी. उसकी चूचियां दीवार से रगड़ रही थी. मैं ने स्पीड थोड़ी बढ़ा दी, लेकिन आवाज़ काम रखने की कोशिश कर रहा था.

**ज़ैनब आपि (बहुत हलकी आवाज़ में):**

“असीम… और अंदर… पूरा दाल… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है… लेकिन जल्दी मत… अम्मी सुन लेगी…”

हम दोनों बाथरूम में dheere-dheere चुदाई कर रहे थे. पानी की आवाज़ के साथ “puch-puch” की हलकी आवाज़ें मिक्स हो रही थी. ज़ैनब आपि अब खुद पीछे से अपनी गांड हिला रही थी.

मैं उसके कान में धीरे से बोलै,

**मैं:**

“आपि… बहुत मस्त है तू… एक दिन तुझे और अनाम दोनों को साथ में छोडूंगा…”

ज़ैनब आपि ने सिर्फ सिसक कर मेरा नाम लिया और अपनी छूट को और ज़ोर से मेरे लुंड पर दबाया.
 
रात के 1 बज चुके थे. पूरा घर सन्नाटा था. नूर और अम्मी अपने कमरों में सो चुकी थी. मैं भी अपने बीएड पर लेट कर आँखें बंद किये पड़ा था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी. दिमाग में दिन भर का नज़ारा घूम रहा था — अब्बू अनाम आपि की छूट चाट रहे थे, अनाम आपि की सिसकारियां..



तभी बहार से हलकी सी आवाज़ आयी.

मैं उठ कर धीरे से दरवाज़ा खोला और चुपके से बहार निकला. सीढ़ियों तक पहुंचा तोह ऊपर से हलकी आवाज़ आ रही थी. मैं बिना आवाज़ किये सीढ़ियों चढ़ गया और छत के दरवाज़े के पास चुपके से खड़ा हो गया.

चांदनी रात थी. हलकी ठंडी हवा चल रही थी. छत पर पुराणी वुडेन चेयर पर अब्बू बैठे थे. उनके पास hi अनाम आपि कड़ी थी. उसका दुपट्टा कंधे पर था, लाइट पिंक सलवार सूट पहने हुए. ऊपर का कुरता थोड़ा ढीला था.

अब्बू ने धीरे से अनाम आपि का हाथ पकड़ा और उसको अपने पास खिंच लिया.

**अब्बू (बहुत हलकी, प्यार भरी आवाज़ में):**

“अनाम… बीटा… आज दोपहर जो हुआ… उसके बाद से मेरा दिमाग कुछ और नहीं सोच प् रहा… तू मेरे पास आ.”

अनाम आपि शर्मा कर नज़र नीचे कर ली. उसका चेहरा चांदनी में भी लाल दिखाई दे रहा था.

**अनाम आपि (कांपते हुए):**

“अब्बू… यह गलत है… मैं आपकी बेटी हूँ… अगर कोई देख लिया तोह… प्लीज… …”

अब्बू ने उसको और पास खिंच लिया. उनका एक हाथ अनाम आपि की कमर पर था. धीरे से ऊपर ले जाकर उसके चूचियों के साइड को सहलाने लगे.

**अब्बू:**

“बीटा… तू अब बड़ी हो गयी है… और मैं भी इंसान हूँ… तेरी यह जवानी… यह bade-bade चूचिये… मैं कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा… आज दोपहर तेरी छूट… उफ्फ्फ्फ़… कितनी मीठी थी…”

अनाम आपि की सांसें तेज़ हो गयी. वो अब्बू के सीने से चिपक गयी.

**अनाम आपि (सिसकती हुई):**

“अब्बू… मत बोलिये ऐसी बातें… मुझे बहुत शर्म आ रही है… मैं… मैं आपकी बेटी हूँ… यह सब… बहुत गन्दा है…”

लेकिन अब्बू ने उसके होंठ पे अपना हाथ रख दिया. फिर धीरे से उसको अपनी गॉड में बैठा लिया —अनाम आपि अब अब्बू की गॉड में बैठी थी, उसकी टाँगे एक तरफ लती हुई.

अब्बू ने उसका दुपट्टा साइड में सरका दिया. ऊपर का कुरता थोड़ा ऊपर किया और दोनों हाथों से उसके bade-bade चूचियों को पकड़ लिया. Dheere-dheere मसलने लगे — ऊपर से नीचे, gol-gol घूमते हुए.

**अब्बू (गरम सांस छोड़ते हुए):**

“कितने बड़े हो गए हैं तेरे चूचिये… बचपन में तोह chhote-chhote थे… अब देख… कितने भरे हुए… कितने सॉफ्ट…”

अनाम आपि ने आँखें बंद कर ली. उसकी सांसें बहुत तेज़ चल रही थी. वो halki-halki सिसकारी ले रही थी.

**अनाम आपि:**

“अब्बू… अह्ह्ह… धीरे… कोई देख लेगा… उफ्फ्फ्फ़… आप… आप क्या कर रहे हैं…”

अब्बू ने एक हाथ नीचे ले जाकर अनाम आपि की सलवार के नाड़े पर रख दिया. धीरे से नाडा खोला और हाथ अंदर दाल दिया. उनकी उँगलियाँ उसकी छूट पर पहुँच गयी.

**अब्बू (हलकी आवाज़ में):**

“बीटा… तेरी छूट अभी भी गीली है… दोपहर की याद आ रही है क्या?”

अनाम आपि ने अब्बू के कंधे पकड़ लिए और उसके सीने में मुँह छुपा लिया. उसकी गांड अब्बू की गॉड में halke-halke हिल रही थी.

**अनाम आपि (sisak-sisak कर):**

“अब्बू… प्लीज… बस हाथ से hi… पूरा मत… अह्ह्ह…… लेकिन यह गलत है… बहुत गलत…”

अब्बू ने ऊँगली अंदर दाल दी और dheere-dheere andar-bahar करने लगे. दूसरे हाथ से उसकी चुकी मसल रहे थे. चांदनी में दोनों का बदन हल्का सा चमक रहा था.

मैं छत के दरवाज़े के पास चुपके से खड़ा था. मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा खड़ा हो चूका था.

अनाम आपि… साली रंडी… पहले मन कर रही थी… अब खुद अब्बू की गॉड में बैठ कर हिल रही है… कितनी बड़ी चुड़क्कड़ बन चुकी है यह…

अब्बू ने अनाम आपि को और तिघ्टलय पकड़ लिया. उनकी उँगलियाँ अब तेज़ हो गयी थी. अनाम आपि की सिसकारियां छत पर हलकी सी गूँज रही थी.

**अनाम आपि (बहुत हलकी आवाज़ में):**

“अब्बू… और अंदर… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है… … कोई उठ न जाये…”

अब्बू ने उसके होंठ पे हल्का सा किश किया और धीरे से बोलै,

**अब्बू:**

“बीटा… तू मेरी प्यारी बेटी है…

अब्बू ने अनाम आपि को गॉड से उठाया और उसको वही चेयर पर बैठा दिया. अनाम आपि बैठ गयी, टाँगे थोड़ी सी बंद किये हुए. अब्बू उसके सामने घुटनो के बल बैठ गए. बिलकुल जैसे दोपहर शॉप में बैठे थे.

**अनाम आपि (दर और शर्म से, हलकी सी सिसकी के साथ):**

“अब्बू… नहीं… प्लीज… यहाँ मत… कोई उठ गया तोह… अम्मी… या असीम… बहुत बड़ी मुसीबत हो जाएगी…… यह गलत है…”

लेकिन अब्बू ने उसकी बात नहीं सुनी. उन्होंने अनाम आपि की सलवार का नाडा पकड़ा और धीरे से नीचे खिंच दिया. सलवार उसकी घुटनो तक सरक गयी. अंदर सिर्फ एक पतली सी पंतय थी, जो अभी भी थोड़ी गीली दिखती थी.

अब्बू ने पंतय को भी साइड में सरका दिया. अनाम आपि की छूट बिलकुल नंगी हो गयी — गुलाबी, थोड़ी पहली हुई, और चांदनी में चमक रही थी.

**अनाम आपि (टाँगे बंद करने की कोशिश करते हुए, कांपती आवाज़ में):**

“अब्बू… रोकिजिये… प्लीज… मत कीजिये… मैं… मैं शर्म से मर जाउंगी… यह बहुत गन्दी बात है… अह्ह्ह…”

अब्बू ने उसकी दोनों टाँगे ज़ोर से फैला दी और अपना मुँह उसकी छूट पर लगा दिया. जैसे भूखा कुत्ता हो, वैसे hi zor-zor से चाटने लगे. उनकी जीभ छूट के मुँह से लेकर ऊपर तक चल रही थी. “चुप… चुप… सलूरररप… puch-puch…” की हलकी, गीली आवाज़ें छत पर गूँज रही थी.

अनाम आपि का पूरा बदन एक झटके से काँप उठा. उसने दोनों हाथों से अब्बू के सर को धकेलने की कोशिश की, लेकिन हाथ काँप रहे थे और ज़ोर नहीं लग प् रहा था.

**अनाम आपि (sisak-sisak कर, बहुत हलकी आवाज़ में):**

“अब्बू… उफ्फ्फ्फ़… नहीं… मत छतो… अह्ह्ह्ह… बहुत… बहुत गरम लग रहा है… प्लीज रोक… मैं… मैं आपकी बेटी हूँ… यह… यह गलत है… ससष्ठ… अह्ह्ह…”

लेकिन अब्बू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. वो और ज़ोर से चाट रहे थे. जीभ को अंदर दाल कर andar-bahar कर रहे थे, कभी क्लीट को जीभ के टिप से टारगेट कर रहे थे, कभी पूरा मुँह लगा कर चूस रहे थे. उनके होंठ छूट के मुँह को पकड़ कर लार से पूरी जगह गीला कर देते थे. उनका मुँह अनाम आपि के पानी और अपनी लार से चमक रहा था.

अनाम आपि की टाँगे अब्बू के कन्धों पर thar-thar काँप रही थी. वो baar-baar टाँगे बंद करने की कोशिश करती, लेकिन अब्बू उनको फैला देते थे. उसकी सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी और हर सिसकी के साथ उसका बदन हिल रहा था.

**अनाम आपि (सिसकती हुई, आँखें बंद किये, हलके से रोटी हुई सी आवाज़ में):**

“अब्बू… अह्ह्ह… मत… मत ऐसे… उफ्फ्फ्फ़… जीभ… … मैं… मैं कण्ट्रोल नहीं कर प् रही… प्लीज… बस हाथ से hi… अह्ह्ह्ह… कोई सुन लेगा… ससष्ठ… उफ्फ्फ्फ़…”

अब्बू ने एक हाथ ऊपर ले जाकर अनाम आपि की बड़ी चुकी को पकड़ लिया और ज़ोर से मसलने लगे. दूसरे हाथ से उसकी एक टांग पकड़ राखी थी ताकि वो न हिले. उनकी जीभ अभी भी कुत्ते की तरह zor-zor से चाट रही थी कभी लम्बी जीभ से पूरा छूट का हिस्सा चाट रहे थे, कभी अंदर घुसकर चूस रहे थे.

अनाम आपि अब सिर्फ सिसक रही थी. उसकी गांड चेयर पर halke-halke हिल रही थी. वो एक हाथ से अपना मुँह दबाये हुए थी ताकि आवाज़ न निकले.

मैं दरवाज़े के पास खड़ा था. मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन कर खड़ा था. दिल zor-zor से धड़क रहा था.

**मैं (अपने आप से सोच रहा था):**

“उफ्फ्फ्फ़… मेरे अब्बू… इतने सख्त और स्ट्रिक्ट आदमी… घुटनो के बल बैठ कर अपनी बेटी की छूट को कुत्ते की तरह चाट रहे हैं… और अनाम आपि… साली… मन तोह कर रही है… लेकिन उसकी गांड खुद हिल रही है… छूट से पानी टपक रहा होगा… कितनी बड़ी रंडी बन चुकी है यह…

अब्बू की जीभ की आवाज़ और अनाम आपि की हलकी सिसकारियां छत पर गूँज रही थी. हवा ठंडी थी, लेकिन दोनों के बदन पसीने से भीग रहे थे.

मैं वह से वापस निकल गया.

सुबह का नाश्ता ख़तम हो चूका था. टेबल पर अभी भी रोटियों के टुकड़े और चाय के खली कप पड़े थे. अम्मी बर्तन उठा रही थी. नूर अपना स्कूल बैग पैक कर रही थी. ज़ैनब आपि किचन में पानी भर रही थी. मैं chup-chaap बैठा था, पर मेरी नज़र baar-baar अनाम आपि पर जा रही थी.

अनाम आपि ने आज भी पिंक सलवार सूट पहना था. दुपट्टा कंधे पर था, सीने पर नहीं. उसका चेहरा अभी भी थोड़ा लाल था. वो रोटी तोड़ रही थी, पर हाथ thar-thar काँप रहे थे.

तभी अब्बू ने चाय का कप टेबल पर रख कर धीरे से अम्मी को बोलै,

**अब्बू:**

“सोफ़िया, आज मैं अनाम को शॉप पर ले जा रहा हूँ. बहुत रश है, दोनों लड़के कल से hi घर चले गए हैं. अकेला काम नहीं हो रहा.”

अम्मी रुक गयी. उन्होंने बर्तन साइड में रख कर अब्बू की तरफ देखा. उनके चेहरे पर साफ़ न था.

**अम्मी:**

“अनाम को शॉप पर? क्या ज़रूरत है? वो घर का काम संभालती है. लड़के कहाँ गए? उनको बुला लो न. औरत को दूकान पर बिठाने से क्या होगा? लोग क्या कहेंगे?”

अब्बू ने अम्मी की तरफ देखा. उनकी आँखें थोड़ी टाइट हो गयी, जैसे हमेशा होता था जब कोई उनकी बात का विरोध करता था.

**अब्बू:**

“लोग क्या कहेंगे? काम है तोह करना पड़ेगा. दोनों लड़के अपने गांव चले गए हैं, कल hi फ़ोन किया था. आज पूरा दिन रश रहेगा. अनाम थोड़ी मदद कर लेगी, कपडे फोल्ड करने में, कस्टमर को दिखने में. घर का काम ज़ैनब और तू संभल लेना. बस बात ख़तम.”

अम्मी ने मुँह खोला कुछ बोलने के लिए, लेकिन फिर चुप हो गयी. उन्होंने सिर्फ गहरी सांस ली और किचन की तरफ मुद गयी. उनकी पीठ से hi साफ़ दीखता था की उन्हें यह बात पसंद नहीं आयी.

मैं टेबल पर बैठा सब देख रहा था. अंदर से हैरानी हो रही थी — **अब्बू झूट बोल रहे हैं. कल मैंने खुद उन दोनों लड़कों से बात की थी. उन्होंने कहा था अब्बू ने उनको छुट्टी दे दी है. फिर भी अब्बू अम्मी से झूट बोल रहे हैं… सिर्फ अनाम आपि को अकेला ले जाने के लिए.**

मेरी नज़र अनाम आपि पर गयी. उसका चेहरा बिलकुल गुलाबी हो गया था. वो रोटी के टुकड़े को हाथ में पकडे हुए बैठी थी, नज़र नीचे. उसकी उँगलियाँ thar-thar काँप रही थी. दुपट्टा के नीचे उसके बड़े चूचियों का उभार सांस के साथ halka-halka हिल रहा था.

**अनाम आपि (बहुत हलकी आवाज़ में, सिर्फ अब्बू को सुनाई दे ऐसी):**

“अब्बू… मैं… मैं ठीक से काम नहीं जानती दूकान का…”

अब्बू ने उसकी तरफ देखा. उनकी आँखों में वही चमक थी जो कल रात छत पर देखि थी.

**अब्बू (थोड़ा मुस्कुराते हुए, लेकिन सख्त आवाज़ में):**

“सीख लेगी. बस चल. मैं वेट कर रहा हूँ. 10 मिनट में रेडी हो जा.”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. वो धीरे से उठी और अपने रूम की तरफ चली गयी. जाते वक़्त उसने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा. उसकी आँखें शर्म थी.

अम्मी किचन में बर्तन धो रही थी गुस्से में. ज़ैनब आपि ने मुझे साइड से एक नज़र डाली और हलके से मुस्कुरायी — जैसे उसको कुछ शक हो.

10 मिनट बाद अनाम आपि बहार आयी. सलवार सूट थोड़ा टाइट लग रहा था. वो अब्बू के साथ बहार निकल गयी. अब्बू ने बाइक स्टार्ट की और अनाम आपि पीछे बैठ गयी.

मैं दरवाज़े पर खड़ा देख रहा था. बाइक jaate-jaate अनाम आपि ने एक बार पीछे मुद कर देखा. उसका चेहरा अभी भी गुलाबी था.

मैं भी जल्दी से अपनी बाइक निकाली और उनके peeche-peeche चल दिया. दिल zor-zor से धड़क रहा था. अब्बू की बाइक आगे चल रही थी. मैं थोड़ा दूर से फॉलो कर रहा था ताकि वो नोटिस न करें.

कुछ देर बाद मैं हैरान रह गया. अब्बू की बाइक शॉप के आगे निकल गयी. वो सीधा मार्किट से बहार निकल रहे थे. मुझे समझ नहीं आ रहा था — ये कहाँ जा रहे हैं? शॉप तोह इधर था.

बाइक और आगे बढ़ी. थोड़ी दूर के बाद एक छोटे से पुराने मोहल्ले में पहुँच गए. वहां एक छोटा सा घर था — पुराण, बाउंड्री वाल थोड़ी टूटी हुई, दरवाज़ा पुराण सा. अब्बू ने बाइक उस घर के सामने रोक दी.

मैं थोड़ा दूर पर hi बाइक साइड में लगा कर चुपके से देखता रहा.

अब्बू ने फ़ोन निकला और किसी को कॉल किया. थोड़ी देर बाद घर का दरवाज़ा खुला. एक आदमी बहार निकला — उम्र अब्बू से थोड़ी ज़्यादा, करीब 58-60 साल, सफ़ेद kurta-pajama पहने हुए. अब्बू ने उससे कुछ बात की. वो आदमी ज़ोर से हंस पड़ा और अब्बू के कंधे पर हाथ रख कर कुछ बोलै. फिर उसने अपनी जेब से चाभी निकली और अब्बू को दे दी.

उस आदमी की नज़र सीधे अनाम आपि पर पद गयी. वो थोड़ी देर तक उसको घूरता रहा — उसके बड़े चूचियों पर, गांड पर. फिर मुस्कुराता हुआ रोड पर चला गया.

अब्बू चारो तरफ नज़र घूमते हुए — कोई देख तोह नहीं रहा — अनाम आपि का हाथ पकड़ कर जल्दी से अंदर ले गए. दरवाज़ा बंद हो गया.

मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा. **“ये क्या हो रहा है? ये घर किसका है? अब्बू ने इस आदमी से चाभी क्यों ली? शॉप नहीं… यहाँ क्यों लाये अनाम आपि को?”**

मैं जल्दी से बाइक साइड में और अच्छे से छुपकर वहां पहुंचा. पीछे की बाउंड्री वाल बहुत छोटी थी — सिर्फ चार फ़ीट की. दर लग रहा था, हाथ काँप रहे थे, लेकिन मैं ने वाल क्रॉस कर ली. अंदर घुस कर चुपके से कंपाउंड में खड़ा हो गया. दिल में डर था की कोई देख लेगा तोह क्या होगा.

मैं धीरे से उस कमरे के पास पहुंचा जहाँ वो दोनों घुसे थे. दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था. मैं उसके पीछे चुपके से खड़ा हो कर अंदर झाँका.

अंदर एक पुराण सोफे और एक चेयर थी. अनाम आपि उस चेयर पर बैठी थी. उसका चेहरा पूरा लाल, आँखें नीचे, हाथ गॉड में. अब्बू उसके सामने खड़े थे. उनका चेहरा गरम था.

**अनाम आपि (दर और शर्म से, कांपती आवाज़ में):**

“नहीं अब्बू… ये गलत है… प्लीज… मैं आपकी बेटी हूँ… यहाँ मत… घर चलते हैं… कोई आ जायेगा…”

**अब्बू (गरम, लेकिन प्यार भरी आवाज़ में, उसके पास आते हुए):**

“अनाम… मेरी प्यारी बेटी… तेरी यह जवानी… यह bade-bade चूचिये… यह मोती गांड… मुझे पागल बना दिया है बीटा. मैं कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा. दोपहर से रात भर तेरी छूट की याद आ रही थी… मत रोको मुझे… बस आज एक बार…”

अनाम आपि ने आँखें बंद कर ली. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. वो चेयर पर baithi-baithe थोड़ी पीछे हटी.

**अनाम आपि (सिसकती हुई):**

“अब्बू… बहुत डर लग रहा है… यह घर किसका है… अगर कोई आ गया तोह… मैं मर जाउंगी शर्म से… प्लीज… बस हाथ से hi…”

अब्बू ने उसके पास और आगे बढ़ कर उसका दुपट्टा साइड में सरका दिया. उनका हाथ अनाम आपि के कुर्ते पर गया और धीरे से ऊपर करने लगे.

मैं बहार चुपके से खड़ा था. हाथ काँप रहे थे. दर लग रहा था, लेकिन आँख हटा नहीं प् रहा था.

**मैं (अपने आप से सोच रहा था):**

“उफ्फ्फ्फ़… अब्बू ने अनाम आपि को शॉप के बहाने किसी और घर ले आये… चाभी किसी और से ली… ये सब प्लान करके लाये हैं… डर भी लग रहा था और लुंड भी खड़ा हो रहा था…”

अब्बू ने अनाम आपि के पास और करीब बढ़ कर उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ लिया. अनाम आपि की आँखें बड़ी हो गयी थी.

**अनाम आपि (बहुत हलकी, दर भरी आवाज़ में):**

“अब्बू… नहीं…”

लेकिन अब्बू ने उसके होंठ पे अपने होंठ रख diye.Abbu ज़ोर से उसके होंठ चूस रहे थे, जीभ उसके मुँह में दाल कर अंदर घुमा रहे थे. अनाम आपि पहले थोड़ी हिली, मन करने की कोशिश की, लेकिन dheere-dheere उसकी जीभ भी अब्बू की जीभ से मिलने लगी. “चुप… चुप…” की गीली आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

किश बहुत लम्बी और गहरी थी. अब्बू अनाम आपि के होंठ को चूस रहे थे, कभी नीचे का होंठ, कभी ऊपर वाला. अनाम आपि की सांसें रुक रही थी. उसकी गर्दन थोड़ी पीछे झुक गयी थी.

किश ख़तम होने के बाद अब्बू ने अनाम आपि को चेयर से उठाया और उसको khade-khade दीवार से सत्ता दिया. उनकी आँखों में अब सिर्फ हवस थी.

**अब्बू (गरम, भरी आवाज़ में):**

“अनाम… अब मत रोक… मैं बहुत तड़प रहा हूँ…”

उन्होंने अनाम आपि के कुर्ते के ऊपर से हाथ डाला और एक झटके से ऊपर की तरफ खिंच दिया. कुरता उतर गया. अंदर सिर्फ वाइट ब्रा था. अब्बू ने ब्रा का हुक भी खोल दिया. अनाम आपि की bade-bade, गोल, दूधिया चूचियां बहार आ गयी — निप्पल लाल और थोड़े खड़े हुए.

अनाम आपि ने दोनों हाथों से अपने चूचियों को छुपाने की कोशिश की.

**अनाम आपि (सिसकती हुई, रोटी हुई सी आवाज़ में):**

“अब्बू… नहीं… प्लीज… यह मत कीजिये…… बहुत शर्म आ रही है…”

लेकिन अब्बू ने उसके हाथ हटा दिए और सलवार का नाडा पकड़ लिया. एक झटके से सलवार नीचे कर दी. अनाम आपि अब सिर्फ पतली सी ब्लैक पंतय में कड़ी थी. अब्बू ने पंतय भी धीरे से नीचे सरक दी. अब अनाम आपि बिलकुल नंगी कड़ी थी — उसकी मोती गांड, गीली छूट, बड़े चूचिये सब कुछ साफ़ दिख रहा था.

अब्बू घुटनो के बल बैठ गए. पहले उन्होंने अनाम आपि का राइट पेअर उठाया और उसके पेअर की उँगलियों से लेकर घुटने तक चाटने लगे बिलकुल कुत्ते की tarah.kabhi उँगलियाँ मुँह में ले कर चूस रहे थे.

**अनाम आपि (टाँगे काँप रही थी, sisak-sisak कर):**

“अब्बू… उफ्फ्फ्फ़… मत… मत ऐसे… अह्ह्ह… पेअर मत छतो…… प्लीज… रोकिजिये…”

अब्बू ने कुछ नहीं सुना. वो पेअर छत्ते हुए ऊपर की तरफ बढे — घुटने के अंदर वाले हिस्से को, जांघ को, dheere-dheere ऊपर छत्ते हुए. उनकी जीभ अनाम आपि की थिगह पर zor-zor से चल रही थी. लार उसकी जांघ पर टपक रही थी.

फिर उन्होंने दूसरा पेअर भी उठाया और दोनों पैरों को एक साथ चाटने लगे. अनाम आपि की टाँगे thar-thar काँप रही थी. वो दीवार का सहारा ले कर कड़ी थी, हाथ से अपना मुँह दबाये हुए ताकि आवाज़ न निकले.

**अनाम आपि:**

“अब्बू… अह्ह्ह्ह… यह… यह बहुत गन्दा है… मैं… मैं आपकी बेटी हूँ… पेअर चाट रहे हो… उफ्फ्फ्फ़… मत… मेरी जांघ… ससष्ठ… अह्ह्ह…”

अब्बू अब ऊपर की तरफ बढे. उनकी जीभ अनाम आपि की मोती गांड के निचे से लेकर छूट के पास तक चाटने लगी. वो कुत्ते की तरह zor-zor से चाट रहे थे — पूरा छूट का हिस्सा, जीभ अंदर घुस रही थी, लार से पूरा एरिया गीला हो रहा था.

अनाम आपि की सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी. उसकी टाँगे कौम रही थी. वो baar-baar “अब्बू… नहीं… प्लीज…” बोल रही थी, लेकिन उसकी आवाज़ अब बहुत हलकी और तड़प भरी थी.

अब्बू ने अनाम आपि को दीवार से हटा कर उसको पुराने बीएड पर धकेल दिया. बीएड की पुराणी चादर थोड़ी सी सरसरायी. अनाम आपि नंगी लेट गयी, टाँगे थोड़ी बंद किये हुए, हाथों से अपने चूचियों को छुपाने की कोशिश कर रही थी.

**अनाम आपि (रोटी हुई सी, बहुत हलकी आवाज़ में):**

“अब्बू… प्लीज… मत कीजिये… मैं आपकी बेटी हूँ… यह बहुत गलत है… बहुत डर लग रहा है… कोई आ जायेगा… अह्ह्ह…”

अब्बू ने अपना कुरता उतरा. उनका बदन थोड़ा मोटा था, पेट निकला हुआ था, लेकिन लुंड खड़ा और मोटा था. वो बीएड पर चढ़ गए और अनाम आपि के ऊपर लेट गए. उनका मोटा लुंड अनाम आपि की गीली छूट के मुँह पर रगड़ रहा था.

**अब्बू (गरम सांस छोड़ते हुए, उसके कान में धीरे से):**

“बीटा… मेरी प्यारी बेटी… तू नहीं जानती कितने दिन से मैं तेरी यह छूट soch-soch कर तड़प रहा था… आज तू मेरी है… बस एक बार… बस आज एक बार …”

उन्होंने अनाम आपि की टाँगे धीरे से फैला दी. अनाम आपि ने आँखें बंद कर ली, मुँह से हाथ रख लिया. अब्बू ने अपना लुंड हाथ में पकड़ा और छूट के मुँह पर सेट किया. फिर धीरे से धक्का मारा.

**“आआह्ह्ह्ह…”**

अनाम आपि की सिसकी निकल गयी. अब्बू का मोटा लुंड उसकी टाइट छूट में dheere-dheere अंदर घुस रहा था. अनाम आपि की छूट गीली होने के बावजूद टाइट थी, इसलिए लुंड धीरे जा रहा था.

**अनाम आपि :**

“अब्बू… उफ्फ्फ्फ़… बहुत… बहुत मोटा है… धीरे… अह्ह्ह्ह… दर्द हो रहा है… निकल लो… प्लीज…… यह गलत है… ससष्ठ… अह्ह्ह…”

अब्बू ने पूरा लुंड अंदर दाल दिया. उनका पेट अनाम आपि के पेट से लग गया. वो थोड़ी देर रुक गए, अनाम आपि की छूट को फील करते हुए. फिर dheere-dheere धक्के मारने लगे.

हर धक्के के साथ बीएड की चादर सरसरा रही थी. “पूछ… पूछ… पूछ…” की हलकी गीली आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

**अब्बू :**

“उफ्फ्फ्फ़… मेरी प्यारी बेटी की छूट… कितनी टाइट और गरम है… बीटा… तेरी छूट ने मुझे पागल कर दिया… कितने साल से तेरी जवानी देख रहा था… आज छोड़ रहा हूँ अपनी बेटी को… अह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है…”

अनाम आपि नीचे लेती हुई सिसकारियां ले रही थी. हर धक्के के साथ उसकी बड़े चूचियां zor-zor से हिल रही थी. उसकी आँखें बंद थी, मुँह खुला था, और हर सांस के साथ हलकी सिसकी निकल रही थी.

**अनाम आपि:**

“अब्बू… अह्ह्ह्ह… और धीरे… उफ्फ्फ्फ़… बहुत अंदर जा रहा है… मैं… मैं मर जाउंगी… अह्ह्ह… यह गलत है… लेकिन… उफ्फ्फ्फ़… मज़ा भी आ रहा है… ससष्ठ… अह्ह्ह… और मत… प्लीज…”

अब्बू की स्पीड dheere-dheere बढ़ रही थी. वो अब zor-zor से धक्के मार रहे थे. उनका पेट अनाम आपि के पेट से टकरा रहा था. हर धक्के के साथ अनाम आपि की गांड बीएड पर डाब रही थी.

**अब्बू:**

“बेटी… ले अपने अब्बू का लुंड… तेरी छूट के लिए hi बना था यह… उफ्फ्फ्फ़… बहुत टाइट है तेरी छूट… मेरा लुंड पूरा अंदर तक ले ले…”

अनाम आपि अब कण्ट्रोल खोने लगी थी. उसकी टाँगे अब्बू की कमर के अराउंड लपेट गयी थी. वो नीचे से halke-halke अपनी गांड utha-utha कर धक्कों का जवाब दे रही थी.

**अनाम आपि:**

“अब्बू… अह्ह्ह्हह… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… मेरी छूट फाड़ दो… मैं… मैं आपकी बेटी हूँ… … बहुत मज़ा आ रहा है… ससष्ठ… अह्ह्ह… और अंदर… पूरा अंदर तक…”

अब्बू अब पूरा हवस में आ चुके थे. वो zor-zor से धक्के मार रहे थे. कमरे में सिर्फ बीएड की आवाज़, उनकी सांसें और अनाम आपि की सिसकारियां गूँज रही थी.

अनाम आपि अब सिर्फ सिसकारियां ले रही थी. हर धक्के के साथ उसके मुँह से “अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… अब्बू…” निकल रहा था. उसकी चूचियां zor-zor से हिल रही थी और पसीने से भीग रही थी.

मैं बहार से सब देख रहा था. मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन चूका था.

अब्बू का चेहरा गरम और लाल हो चूका था. उनका पेट अनाम आपि के पेट से टकरा रहा था. हर धक्के के साथ उनका मोटा लुंड पूरा अंदर तक जा रहा था और बहार निकल रहा था. उनकी सांसें बहुत तेज़ थी.

**अब्बू :**

“ले बेटी… ले अपने अब्बू का लुंड… तेरी छूट बहुत टाइट और गरम है… उफ्फ्फ्फ़… मेरी प्यारी बेटी… बहुत मज़ा आ रहा है बीटा… कितने दिन से तड़प रहा था… आज तेरी छूट में अपना माल भरूंगा…”

अनाम आपि ने अब्बू की कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया. उसकी टाँगे अब्बू की पीठ पर लपेट गयी थी. वो नीचे से अपनी गांड halke-halke utha-utha कर धक्कों का जवाब दे रही थी. हर धक्के के साथ उसके मुँह से हलकी चीख और सिसकी निकल रही थी.

**अनाम आपि :**

“अब्बू… अह्ह्ह्हह… और अंदर… पूरा अंदर तक… उफ्फ्फ्फ़… मेरी छूट फाड़ दो… अह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है… ससष्ठ… और ज़ोर से… प्लीज… मत रुकना…”

अब्बू की स्पीड अब और बढ़ गयी थी. वो पूरा ज़ोर लगा कर धक्के मार रहे थे. उनका लुंड अनाम आपि की छूट में zor-zor से andar-bahar हो रहा था. उनके बॉल्स अनाम आपि की गांड से टकरा रहे थे. कमरे में पसीने की खुशबु और चुदाई की गीली आवाज़ फ़ैल रही थी.

**अब्बू:**

“बीटा… तेरी छूट ने मुझे पागल कर दिया… ले… ले अपने अब्बू का माल… मैं अपनी बेटी की छूट में झड़ने वाला हूँ… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है… मेरी बेटी को छोड़ने में… अह्ह्ह… ले बेटी… ले…”

अनाम आपि की छूट अब्बू के लुंड को ज़ोर से जकड रही थी. उसकी टाँगे काँप रही थी. उसकी सिसकारियां अब और तेज़ हो गयी थी.

अब्बू ने एक ज़ोर का धक्का मारा और रुक गए. उनका पूरा लुंड अनाम आपि की छूट के अंदर तक घुसा हुआ था. उनका बदन काँप उठा.

**अब्बू (चीख के साथ):**

“ले बेटी… ले… अब्बू का माल… तेरी छूट में… अह्ह्ह्हह… ले मेरी प्यारी बेटी… पूरा अंदर तक…”

अब्बू के लुंड से garam-garam माल की धार अनाम आपि की छूट के अंदर छूटने लगी. एक के बाद एक zor-zor से शॉट्स निकल रहे थे. अनाम आपि की छूट इतनी भर गयी की माल बहार टपकने लगा.

अनाम आपि का पूरा बदन एक ज़ोर के झटके से काँप उठा. उसकी आँखें बंद हो गयी, मुँह खुला रह गया और वो ज़ोर से सिसक उठी.

**अनाम आपि (सिसकी के साथ, तड़प कर):**

“अब्बू… अह्ह्ह्हह… गरम… बहुत गरम है……”

अब्बू थोड़ी देर ऊपर hi लेट रहे. उनका लुंड अभी भी अनाम आपि की छूट के अंदर था. दोनों के बदन पसीने से tar-bhar थे. कमरे में सिर्फ उनकी तेज़ सांसें गूँज रही थी.

अब्बू ने धीरे से अनाम आपि के माथे पर किश किया और हलके से बोलै,

**अब्बू:**

“बीटा… तू सच में मेरी प्यारी बेटी है……”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ शर्मा कर अब्बू के सीने में मुँह छुपा लिया. उसकी छूट से अभी भी अब्बू का माल बहार टपक रहा था.



मैं बहार से सब देख रहा था. मेरा लुंड पायजामा में पूरा गीला हो चूका था.
 
दोनों ने कपडे ठीक किये. अनाम आपि ने jaldi-jaldi अपनी सलवार ऊपर की, कुरता पहना और दुपट्टा कंधे पर एडजस्ट किया. उसका चेहरा अभी भी लाल था और हाथ thar-thar काँप रहे थे. अब्बू ने अपना कुरता ठीक किया, पंत ऊपर की और बेल्ट बंधी. दोनों ने एक दूसरे को देखा — अनाम आपि ने नज़र झुका ली.



अब्बू ने धीरे से दरवाज़ा खोला और चारो तरफ देखा. कोई नहीं था. वो दोनों बहार निकल गए. अब्बू ने घर की चाभी उस आदमी को वापस दे दी (जो बहार वेट कर रहा था) और बाइक स्टार्ट की. अनाम आपि पीछे बैठ गयी. बाइक शॉप की तरफ चल पड़ी.

मैं बाउंड्री क्रॉस करके बहार आया. मैं जल्दी से अपनी बाइक पर बैठ कर उनके peeche-peeche शॉप की तरफ चला गया.

जब मैं शॉप पहुंचा तोह दोनों वहां थे. शॉप में ज्यादा भीड़ नहीं थी — सिर्फ 3-4 कस्टमर थे. अनाम आपि काउंटर के पास कड़ी थी, कपडे फोल्ड कर रही थी. उसका चेहरा थोड़ा लाल था. अब्बू काउंटर के अंदर बैठ कर बिल बना रहे थे.

मैं अंदर गया. अब्बू ने मेरी तरफ देखा.

**मैं (नार्मल बनने की कोशिश करते हुए):**

“अब्बू… अनाम आपि का बहुत सारा काम आ गया है जो उन्होंने कुछ दिन पहले स्टार्ट किया था. अब वो काम पूरा हो सकता है. बहुत अच्छे पैसे मिलेंगे इसमें.”

अब्बू पहले तोह रुक गए. उन्होंने मुझे घूरा. उनकी आँखें थोड़ी टाइट हो गयी.

**अब्बू:**

“काम? कौनसा काम? अभी तोह यहाँ दूकान पर hi बहुत काम है. अनाम को यहीं मदद करनी है.”

मैं ने धीरे से अब्बू के पास आकर हलकी आवाज़ में बोलै,

**मैं:**

“अब्बू… वो वाला काम… जो अनाम आपि ने स्टार्ट किया था… उसमे बहुत अच्छे पैसे मिल रहे hain.Paise बहुत हैं… घर के काम में काम आएंगे.”

अब्बू थोड़ी देर चुप रहे. उन्होंने अनाम आपि की तरफ देखा. अनाम आपि का चेहरा एकदम से गुलाबी हो गया था. वो कपडे फोल्ड कर रही थी पर उसके हाथ रुक गए थे. उसकी नज़र नीचे थी, उसको बिलकुल पता था मैं किस काम की बात कर रहा हूँ —जिसमे अनाम आपि को पैसे के बदले छुड़वाना पड़ता था.

अब्बू ने गहरी सांस ली. उन्होंने सोचा और फिर धीरे से बोलै,

**अब्बू:**

“ठीक है… लेकिन जल्दी करना. और अनाम को अकेले मत चूर्ण. तू साथ रहना.”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. उसका चेहरा अब और ज़्यादा लाल हो गया था. वो शर्मा कर कपडे फोल्ड करने लगी, पर उसकी उँगलियाँ काँप रही थी. उसको पता था की मैं “काम” के नाम पर उसको अर्जुन के पास भेजना चाहता हूँ — जहाँ वो पैसे के बदले छुड़ेगी.

शॉप से बहार निकलते hi मैंने अनाम आपि को बाइक पर बैठा लिया और तुरंत अर्जुन को कॉल कर दिया.

“कैसा है भाई, अनाम रंडी को लेकर आ रहा हूँ.”

अर्जुन ने जल्दी से बोलै,

“मैं अभी बहार हूँ काम से. तू एक काम कर, मैं तुझे एक एड्रेस भेजता हूँ. उस रंडी को लेकर सीधा वहां चला जा. वहां एक आदमी है, वो पैसे देगा. मैं थोड़ी देर में पहुँच जाऊंगा.”

कॉल कट होते hi अनाम आपि ने पीछे से मेरा कमर पकड़ लिया और हलकी सी सिसकी ली.

**अनाम आपि (दर के मारे):**

“असीम… नहीं बीटा… प्लीज… किसी अनजान आदमी के पास मत ले जाओ… मैं नहीं जाउंगी…”

मैं ने बाइक चलते हुए उसके कान में धीरे से गाली दी,

**मैं:**

“चुप कर साली रंडी. आज सुबह अब्बू ने तुझे पुराने घर में नंगा करके कुत्ते की तरह तेरी छूट चाट ली थी… फिर बीएड पर लेता कर zor-zor से छोड़ा था…. अब यहाँ आ कर मन कर रही है?”

अनाम आपि का पूरा बदन काँप उठा. उसका चेहरा मेरे कंधे पर गिर गया. वो कुछ नहीं बोली, सिर्फ शर्म से चुप हो गयी. उसका चेहरा बिलकुल झुक गया था.

फ़ोन में मैसेज आया. अर्जुन ने एड्रेस भेज दिया था —

मैं ने बाइक घुमाई और उसी एड्रेस की तरफ चल दिया.

अनाम आपि अभी भी chup-chaap मेरे पीछे बैठी थी. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी और हाथ मेरी कमर को तिघ्टलय पकडे हुए थे.

**मैं (अपने आप से सोच रहा था):**

“साली… अब किसी नए आदमी के पास जा रही है पैसे के लिए… और वो जानती है आज भी उसको छोड़ना पड़ेगा.”

हम उस एड्रेस पर पहुँच गए. एक पुराण छोटा सा घर था, बहार से hi थोड़ा अँधेरा और सुनसान लग रहा था. मैं बाइक साइड में लगा कर अनाम आपि को उतरा. उसका चेहरा अब भी लाल था और वो chup-chaap मेरे पीछे चली आ रही थी.

मैं ने गेट पर जाकर khat-khat खटखटाया.

थोड़ी देर बाद अंदर से कदम की आवाज़ आयी. गेट खुला और एक आदमी बहार निकला. करीब 40 साल का होगा. लंबा, मोटा, काला रंग, चेहरा सख्त और आँखें chhoti-chhoti. देखने में बिलकुल दानव जैसा लग रहा था — मोती गर्दन, badi-badi बाहें और गन्दी सी मुस्कराहट.

उसकी नज़र सीधे अनाम आपि पर पद गयी. वो उसको ऊपर से नीचे तक घूर रहा था. अनाम आपि ने नज़र नीचे कर ली और थोड़ा पीछे हैट गयी.

**मैं:**

“भाई, अर्जुन ने भेजा है.”

वो आदमी थोड़ा मुस्कुराया और गेट खोल कर बोलै,

**आदमी:**

“आ जाओ अंदर.”

हम दोनों अंदर चले गए. घर के अंदर पुराण सोफे था. वो आदमी ने सोफे की तरफ इशारा किया.

**आदमी:**

“बैठो यहाँ.”

फिर वो अंदर के कमरे की तरफ चला गया. उसकी मोती पीठ और भरी कदम की आवाज़ रूम में गूँज रही थी.

अनाम आपि मेरे बगल में बैठ गयी. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. उसने अपना दुपट्टा सीने पर तिघ्टलय लपेट लिया था. चेहरा बिलकुल नीचे था और हाथ गॉड में काँप रहे थे.

मैं chup-chaap बैठा था. अंदर से सोच रहा था — **ये आदमी तोह सच में दानव जैसा है… अनाम आपि को देख कर उसकी आँखों में हवस साफ़ दिख रहा था… **

थोड़ी देर बाद वो आदमी वापस आया और हमारे सामने सोफे पर बैठ गया. उसने अनाम आपि को एक बार फिर से घूरा, फिर सीधा मुझसे पूछा,

**आदमी:**

“क्या रेट है इसका?”

मैं ने तुरंत बोलै,

**मैं:**

“30,000.”

वो मुस्कुराया. उसके मोठे होंठ फैल गए. उसने धीरे से सर हिलाया और बोलै,

**आदमी:**

“50,000 दूंगा… लेकिन अपने तरीके से करूँगा. नखरे तो नहीं करेगी ये.”

मैं ने तुरंत हाँ कर दी,

**मैं:**

“हाँ भाई, बिलकुल. जो मर्ज़ी करो.”

वो आदमी ने अनाम आपि की तरफ देखा और हलके से हंस पड़ा,

**आदमी:**

“भाई दिखने में तोह बिलकुल शरीफ घर की औरत लगती है. कौन है ये?”

मैं ने उसकी तरफ देखा और सीधा बोलै,

**मैं:**

“आप बेफिक्र होकर मज़े लो. ये सिर्फ देखने में शरीफ है… अंदर से बिलकुल रांड है.”

अनाम आपि का चेहरा एकदम से लाल पद गया. उसकी नज़र ज़मीन पर थी. उसकी उँगलियाँ गॉड में इतनी टाइट पकड़ी हुई थी की उँगलियाँ सफ़ेद पद गयी थी. वो कुछ नहीं बोली, सिर्फ बैठी रही.

वो आदमी ज़ोर से हंस पड़ा. उसकी badi-badi आँखें अनाम आपि के चूचियों पर अटक गयी थी.

**आदमी:**

“अच्छा… तोह रांड है. ठीक है. पैसे अभी देता हूँ.”

उसने जेब से फ़ोन निकला और कुछ चेक किया. फिर अनाम आपि की तरफ देखते हुए बोलै,

**आदमी:**

“चल अंदर.”

अनाम आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखों में डर और शर्म थी. मैं ने सिर्फ हल्का सा सर हिला दिया.

वो धीरे से उठी और अंदर के कमरे की तरफ चली गयी. उसकी चलते वक़्त गांड हलके से हिल रही थी.

मैं वहां सोफे पर बैठा रहा. सोच रहा था — **50,000… और ये दानव जैसा आदमी अपने तरीके से ठोकेगा इस कुटिया को… साली सच में रांड बन चुकी है.**

थोड़ी देर बाद अंदर से उस आदमी की हंसी और अनाम आपि की हलकी सिसकी की आवाज़ आने लगी.

मैं धीरे से अंदर के कमरे के दरवाज़े के पास पहुंचा और चुपके से झाँका.

अंदर का नज़ारा देख कर मैं सुन्न हो गया.

वो मोटा आदमी अनाम आपि को दीवार से सत्ता कर खड़ा था. उसने अनाम आपि के बाल पकड़ रखे थे और उसके होंठ पे ज़ोर से किश कर रहा था. वो उसके होंठ को काट रहा था, जीभ उसके मुँह में घुसा कर zor-zor से चूस रहा था. अनाम आपि की सांसें रुक रही थी, वो हाथों से उसके सीने को धकेलने की कोशिश कर रही थी पर वो नहीं हैट रहा था.

आदमी ने किश तोड़ते hi एक ज़ोर का थप्पड़ अनाम आपि के गाल पर मारा.

**आदमी:**

“साली रंडी… मुँह खोल!”

अनाम आपि के मुँह से हलकी सिसकी निकली. उसका गाल लाल हो गया था. उसने दर के मारे मुँह खोल दिया.

आदमी ने अपनी पंत का ज़िप खोला और अपना मोटा, काला, लम्बा लुंड बहार निकाल लिया. वो सीधा अनाम आपि के मुँह के सामने ले आया और एक hi बार में पूरा लुंड उसके गले तक घुसा दिया.

**“ग्लुक… ग्लूयककक…”**

अनाम आपि की आँखें फैल गयी. उसका गाला फूल गया. वो ज़ोर से ुबकि मारने लगी पर आदमी ने उसके बाल और तिघ्टलय पकड़ लिए और लुंड को andar-baahar करने लगा.

**आदमी:**

“ले मादरचोद… पूरा ले… गले तक… साली सड़कछाप रंडी…”

उसकी आँखों में आंसू आ गए थे. वो हाथों से उसके तइस को पकड़ कर रुकने की कोशिश कर रही थी.

आदमी ने लुंड बहार निकला, अनाम आपि के मुँह में थूक दिया और फिर से ज़ोर से मुँह में घुसा दिया. उसके थूक की लार अनाम आपि के होंठ और चीन पर टपक रही थी.

फिर उसने एक और थप्पड़ मारा — इस बार दूसरे गाल पर.

**आदमी:**

“रंडियों जैसा मुँह बना… जीभ बहार निकाल!”

अनाम आपि ने आंसू बहते हुए जीभ बहार निकाली. आदमी ने अपना लुंड उसकी जीभ पर रगड़ना शुरू कर दिया. लुंड को उसके चेहरे पर, होंठों पर, गाल पर zor-zor से रगड़ रहा था. कभी थूक रहा था, कभी गाली दे रहा था.

**आदमी (hans-te हुए):**

“देख… कितनी सुन्दर शरीफ चेहरा है… मेरा लुंड इस पर रगड़ रहा हूँ… साली… तू सच में रांड है.”

अनाम आपि सिर्फ सिसक रही थी. उसका चेहरा थूक, लार और आंसू से गीला हो चूका था. वो कुछ बोल नहीं प् रही थी, सिर्फ हाथों से उसके पेअर पकडे हुए थी.

मैं दरवाज़े के पास खड़ा था. दिल ज़ोर से धड़क रहा था. डर भी लग रहा था और अंदर से गरम भी हो रहा था.

आदमी ने उसके बाल और तिघ्टलय पकड़ लिए और zor-zor से मुँह छोड़ने लगा — गले तक अंदर, बहार, अंदर.

हर धक्के के साथ अनाम आपि के मुँह से लार और थूक की धार टपक रही थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे.

आदमी ने लुंड बहार निकला, अनाम आपि के चेहरे पर ज़ोर से थूक दिया और फिर से पूरा लुंड गले तक घुसा दिया.

**आदमी (हंस कर):**

“ले मादरचोद… पूरा ले… … साली… कितना टाइट गाला है तेरा…”

उसने एक और थप्पड़ मारा — इस बार उसके दूसरे गाल पर. फिर उसने अनाम आपि के मुँह से लुंड निकाला और उसके चेहरे पर zor-zor से रगड़ने लगा. लुंड उसके होंठों पर, गालों पर, आँखों पर रगड़ रहा था. कभी थूक रहा था, कभी गाली दे रहा था.

थोड़ी देर बाद उसने अनाम आपि को बाल पकड़ कर बीएड पर धकेल दिया. अनाम आपि घुटनो के बल हो गयी. आदमी ने उसकी सलवार और पंतय एक साथ नीचे की और उसकी मोती गांड फैला दी.

**आदमी:**

“गांड ऊपर कर… कुटिया!”

अनाम आपि ने गांड ऊपर की. आदमी ने उसकी छूट पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा.

**ठप्प!**

अनाम आपि की सिसकी निकल गयी. उसकी छूट लाल हो गयी.

आदमी ने अपना मोटा लुंड उसकी छूट के मुँह पर सेट किया और एक hi ज़ोर के धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया.

**“आआह्ह्ह्हह्ह…!”**

अनाम आपि की चीख निकल गयी. उसकी छूट पहात सी गयी थी. आदमी ने उसके बाल पकड़ लिए और कुत्ते की तरह zor-zor से छोड़ने लगा.

हर धक्के के साथ बीएड हिल रहा था. “धप… धप… धप…” की तेज़ आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

**आदमी (ज़ोर से गालियां देते हुए):**

“ले साली रंडी… ले मेरा मोटा लुंड…?”

अनाम आपि सिर्फ सिसक रही थी. उसकी चूचियां नीचे लटक कर हिल रही थी. हर धक्के के साथ उसके मुँह से “अह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मोटा… अह्ह्ह्ह…” निकल रहा था.

आदमी ने उसके गांड पर do-teen ज़ोर के थप्पड़ मारे. फिर उसके बाल खिंच कर उसका सर पीछे किया और एक हाथ से उसकी चुकी को ज़ोर से मसलने लगा.

**आदमी:**

“छोडूंगी न आज पूरी रात… पैसे के हिसाब से मज़ा दूंगा… कुटिया… ले…”

अनाम आपि अब कण्ट्रोल खोने लगी थी. उसकी गांड खुद hi पीछे उठ रही थी. उसकी सिसकारियां तेज़ हो गयी थी.

**अनाम आपि (सिसकती हुई, तड़प कर):**

“अह्ह्ह्ह… और ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… फाड़ दो… बहुत मोटा है… अह्ह्ह…”

आदमी की स्पीड और बढ़ गयी. वो पूरा ज़ोर लगा कर धक्के मार रहा था. कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाज़ और अनाम आपि की सिसकारियां गूँज रही थी.

मैं बहार से देख रहा था. मेरा लुंड गीला हो चूका था.

आदमी ने एक ज़ोर का धक्का मारा और रुक गया. उसका पूरा बदन काँप उठा.

**आदमी (गरम सांस छोड़ते हुए):**

“ले… ले रंडी… पूरा माल… तेरी छूट में भर रहा हूँ…”

उसका मोटा लुंड अनाम आपि की छूट के अंदर zor-zor से फड़क रहा था. Garam-garam माल की धार उसकी छूट में भर रही थी. अनाम आपि की छूट इतनी भर गयी की माल बहार टपकने लगा.

अनाम आपि का पूरा बदन एक झटके से काँप उठा. उसकी टाँगे सीधी हो गयी, आँखें बंद हो गयी और मुँह से एक लम्बी सिसकी निकली.

**अनाम आपि (सिसकती हुई):**

“अह्ह्ह्हह… गरम… बहुत गरम है… उफ्फ्फ्फ़… भर गया… अह्ह्ह…”

आदमी थोड़ी देर ऊपर hi लेट रहा. फिर धीरे से लुंड बहार निकला. उसकी छूट से सफ़ेद माल की धार टपक रही थी.

वो बीएड पर लेट गया और अपना गीला, माल से भरा लुंड अनाम आपि की तरफ कर दिया.

**आदमी (थकी हुई आवाज़ में):**

“अब साफ़ कर… जीभ से.”

अनाम आपि अब बिलकुल थकी हुई थी. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. उसने धीरे से उठ कर उसके पैरों के बीच बैठ गयी. उसने आँखें नीचे किये हुए अपनी जीभ बहार निकाली और धीरे से उसके लुंड को चाटने लगी.

पहले उसने लुंड के टोपा को जीभ से साफ़ किया. फिर पूरा लुंड मुँह में ले कर upar-neeche चाटने लगी. उसकी जीभ हर इंच को साफ़ कर रही थी जिसपर माल, लार, छूट का पानी सब मिक्स था.

**आदमी (आँखें बंद किये हुए):**

“हाँ… ऐसे hi… पूरा साफ़ कर… अच्छी रंडी है तू…”

अनाम आपि अब chup-chaap जीभ चला रही थी. उसका चेहरा अब शर्म से काम, और हवस से ज़्यादा दिखाई दे रहा था.

थोड़ी देर बाद आदमी ने उसको अपनी बाँहों में खिंच लिया. अनाम आपि उसके सीने से लग कर लेट गयी. आदमी ने एक हाथ से उसकी बड़ी चुकी पकड़ ली और dheere-dheere मसलने लगा. निप्पल को उँगलियों से पकड़ कर हलके से मरोड़ रहा था.

**आदमी (उसके कान में धीरे से):**

“अब मेरा लुंड सहला… हाथ से…”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. उसकी सांसें अब नार्मल होने लगी थी. उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर उसके लुंड को पकड़ लिया और dheere-dheere upar-neeche हिलने लगी.

उसकी उँगलियाँ अभी भी गीली थी. वो chup-chaap लुंड सहलाती रही. आदमी उसकी चुकी मसलता रहा और कभी उसके होंठ पे हल्का किश कर देता.

अनाम आपि अब बिलकुल अपने छिनालपन में उतर चुकी थी. उसकी आँखों में शर्म काम और हवस ज़्यादा था. वो खुद hi धीरे से उसके लुंड को मसल रही थी.

मैं बहार से देख रहा था. अंदर से एक अजीब सी गर्मी आ रही थी.

थोड़ी देर बाद आदमी का लुंड अनाम आपि के हाथ में hi फिर से सख्त होने लगा. उसने अनाम आपि के बाल पकड़े और उसको बीएड पर घुटनो के बल कर दिया.

**आदमी (गरम आवाज़ में):**

“अब कुटिया बन… गांड ऊपर कर!”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. वो घुटनो के बल हो गयी और अपनी मोती गांड ऊपर कर दी. उसकी छूट अभी भी पिछले माल से गीली थी और थोड़ी खुली हुई दिखती थी.

आदमी ने उसके बाल एक हाथ में लपेट लिए और दूसरे हाथ से अपना मोटा लुंड उसकी छूट के मुँह पर सेट किया. फिर एक ज़ोर का धक्का मारा.

**“आआह्ह्हह्ह्ह्ह…!”**

अनाम आपि की चीख निकल गयी. आदमी का मोटा लुंड पूरा एक hi झटके में उसकी छूट के अंदर तक घुसा. उसकी छूट पहात सी गयी थी. आदमी ने तुरंत तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए —

**धप! धप! धप! धप!**

हर धक्के के साथ अनाम आपि का पूरा बदन आगे की तरफ धक्का खा रहा था. उसकी बड़ी चूचियां नीचे लटक कर zor-zor से हिल रही थी. उसकी गांड आदमी के पेट से टकरा रही थी.

**आदमी (बाल खिंच कर, ज़ोर से):**

“ले साली कुटिया… ले मेरा लुंड… बोल… पसंद है न?”

अनाम आपि का मुँह खुला था. उसकी सिसकारियां अब पागलपन भरी हो गयी थी.

**अनाम आपि (चीखते हुए, सिसकती हुई):**

“अह्ह्ह्हह… बहुत मोटा… उफ्फ्फ्फ़… … अह्ह्ह… और ज़ोर से… प्लीज… और अंदर… अह्ह्ह्हह… मैं पागल हो जाउंगी… उफ्फ्फ्फ़…”

आदमी ने उसके बाल और तिघ्टलय खिंच लिए और स्पीड बढ़ा दी. अब वो बिलकुल जानवर की तरह छोड़ रहा था. हर धक्का इतना ज़ोर का था की बीएड की चादर नीचे से उठ रही थी.

आदमी ने उसकी कमर पकड़ ली और अब मशीन की तरह धक्के मारने लगा. कमरे में सिर्फ “dhap-dhap-dhap” और अनाम आपि की पागल सिसकारियां गूँज रही थी.

अनाम आपि का पूरा बदन पसीने से तर था. उसकी छूट से हर धक्के के साथ “puch-puch” की तेज़ आवाज़ आ रही थी. उसकी आँखें उलट गयी थी और मुँह से लार टपक रही थी.

**अनाम आपि (बिलकुल पागल हो कर, चीखते हुए):**

“फाड़ दो… मेरी छूट फाड़ दो… अह्ह्ह्हह… मैं मर जाउंगी… लेकिन मत रुकना… और ज़ोर से… मैं आपकी रंडी हूँ… छोड़ दो मुझे… बहुत मज़ा आ रहा है… अह्ह्ह्हह… मैं आ गयी… आ गयी… uffffffffff…”

उसका पूरा बदन एक ज़ोर के झटके से काँप उठा. उसकी छूट आदमी के लुंड को ज़ोर से जकड ली और वो ज़ोर से झाड़ गयी. उसकी टाँगे सीधी हो गयी और वो बीएड पर गिरने लगी.

लेकिन आदमी ने उसको संभाला नहीं. उसने उसकी कमर पकड़ कर धक्के और तेज़ कर दिए.

**आदमी (हंस कर):**

“अभी तोह शुरू हुआ है रंडी… अब देख……”

उसने एक लास्ट ज़ोर का धक्का मारा और रुक गया. उसका लुंड अनाम आपि की छूट के सबसे अंदर तक फड़क रहा था. फिर उसने गरम माल की एक और धार उसकी छूट में भर दी.

अनाम आपि अब बिलकुल थक कर बीएड पर लेट गयी थी. उसकी छूट से दोनों का माल मिक्स होकर बहार टपक रहा था. उसकी सांसें बहुत तेज़ थी और चेहरा पूरा लाल था.

आदमी उसके ऊपर लेट गया और उसके कान में धीरे से बोलै,

**आदमी:**

“बहुत ज़बरदस्त है तू… पैसे के हिसाब से तोह बिलकुल फर्स्ट क्लास रांड है…”

अनाम आपि ने आँखें बंद किये हुए सिर्फ हलकी सी सिसकी ली. अब वो बिलकुल चुप थी… लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी सुकून था.

थोड़ी देर में दोनों बहार आये. अनाम आपि के पेअर thar-thar काँप रहे थे. उसका चेहरा लाल था, बाल बिगड़े हुए थे.

वो आदमी सोफे पर बैठ गया. उसने जेब से 50000 रुपये निकाले और सीधे मेरे हाथ में थमा दिए.

**आदमी:**

“ले भाई… 50000. ”

फिर उसने अनाम आपि का हाथ पकड़ा और उसको अपने पास सोफे पर बिठा लिया. जैसे hi वो बैठी, उसने उसके चेहरे को पकड़ कर ज़ोर से किश करना शुरू कर दिया. होंठ चूस रहा था, जीभ उसके मुँह में दाल कर अंदर घुमा रहा था.

साथ hi उसका दूसरा हाथ अनाम आपि के कुर्ते के अंदर घुस गया. उसने उसकी बड़ी चुकी को zor-zor से मसलने लगा — ऊपर से नीचे, gol-gol घूमता हुआ, निप्पल को उँगलियों से पकड़ कर मरोड़ रहा था.

अनाम आपि halki-halki सिसकारी ले रही थी, पर अब वो मन नहीं कर रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी.

किश तोड़ कर आदमी ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा,

**आदमी:**

“भाई सच में बहुत गरम रांड है ये… मज़ा आ गया. तू अपना फ़ोन नंबर दे. इसको फिर से लाना. अगर अच्छे पैसे कमाने हैं तोह मेरे बहुत bade-bade लोगों के साथ सम्बन्ध हैं. लाटरी लग जाएगी तेरी.”

मैं ने तुरंत अपना नंबर बता दिया. उसने सेव कर लिया.

फिर उसने अनाम आपि की चुकी को एक बार और ज़ोर से मसल कर छोड़ दिया और बोलै,

**आदमी:**

“जरूर आना फिर अगर मज़ा करना है तो.”

हम दोनों बहार निकल गए. अनाम आपि chup-chaap मेरे पीछे बाइक पर बैठ गयी. उसकी सांसें अभी भी तेज़ थी. उसका चेहरा मेरे कंधे पर झुका हुआ था.

मैं बाइक स्टार्ट करके घर की तरफ चल दिया.

मैं ये सोच रहा था — **“50000 मिल गए… और ये आदमी और बड़े लोगों का नाम ले रहा है… अनाम आपि अब बिलकुल खुल चुकी है… और वो खुद hi मज़े ले रही थी…”**



मैं आपि के छिनालपन इस छिनालपन से अंदर से बहुत खुश हो रहा था मज़े से.
 
हम दोनों बाइक से उतरे. अनाम आपि का चेहरा अभी भी थोड़ा लाल था. आते हुए उसने एक बार भी कुछ नहीं बोलै था. सिर्फ पीछे बैठ कर मेरा कमर पकडे रखा था. घर के गेट पर बाइक कड़ी करते hi मैंने देखा — हॉल का दरवाज़ा खुला हुआ था.



जैसे hi हम अंदर घुसे… नज़र हॉल में पड़ी.

**बड़े मां और बुशरा.**

बड़े मां सोफे पर बैठे थे, पेअर फैलाये हुए, एक हाथ में मोबाइल. बुशरा उनके बगल में बैठी थी — टाइट पिंक कुर्ती और ब्लैक लेग्गिंग्स में. उसकी मध्यम साइज की टाइट चूचियां कुर्ती के ऊपर से उभरी हुई थी और लेग्गिंग्स में उसकी पतली कमर और गोल गांड का शेप बिलकुल साफ़ दिख रहा था.

मैं हैरान रह गया.

**मैं (अपने आप से):**

“ये लोग यहाँ क्या कर रहे हैं इतनी रात को?”

बड़े मां ने हम दोनों को देखा. उनका चेहरा एकदम से खिल गया. वो झट से उठ कर आगे बढे और मुझे गले लगा लिया.

**बड़े मां:**

“अरे असीम बीटा! आ गया?.”

उन्होंने मुझे ज़ोर से गले लगाया. फिर अनाम आपि की तरफ नज़र घुमाई. उनकी आँखें एक सेकंड के लिए रुक गयी. अनाम आपि के bade-bade चूचियों पर उनकी नज़र थोड़ी देर अटक गयी. वो धीरे से मुस्कुराये और बोले,

**बड़े मां:**

“बुशरा की कॉलेज में छुट्टी पद गयी है एक हफ्ते की. घर में बोर हो रही थी तोह मैं सोचा इसको यहाँ ले आता हूँ. मज़े कर लेगी. सही है न?”

बुशरा ने मुस्कुराते हुए सर हिला दिया. उसकी आँखें मुझ पर थी, फिर अनाम आपि पर घूम गयी.

अनाम आपि का चेहरा एकदम से लाल हो गया. उसने झट से नज़र नीचे कर ली. उसकी उँगलियाँ दुपट्टा के किनारे को पकडे हुए थी. वो कुछ बोल नहीं प् रही थी. सिर्फ हलकी सी मुस्कराहट के साथ सर हिला दिया और तुरंत अपने रूम की तरफ चल पड़ी.

**अनाम आपि (बहुत हलकी आवाज़ में):**

“मैं… थक गयी हूँ… ”

उसने जल्दी से सीढ़ियों चढ़ी और अपने रूम का दरवाज़ा बंद कर लिया.

मैं वही खड़ा था. बड़े मां अभी भी अनाम आपि को देख रहे थे — उसकी हिलती हुई मोती गांड को. उनकी आँखों में वही चमक थी जो मैं पहले भी नोटिस कर चूका था.

**बड़े मां (मुस्कुराते हुए):**

“अनाम बहुत थक गयी लग रही है आज. काम ज्यादा था आज?”

मैं ने सिर्फ हाँ में सर हिला दिया. दिल zor-zor से धड़क रहा था.

बुशरा ने मुझे देखा और हलके से स्माइल की. उसकी टाइट कुर्ती में चूचियां थोड़ी सी हिल रही थी.

**बड़े मां:**

“बीटा, एक हफ्ते तक रुकना है बुशरा भी यही है. घर में कंपनी हो जाएगी. तू भी थोड़ा टाइम निकाल लेना इसके साथ.”

उनकी आँखें अभी भी सीढ़ियों की तरफ थी — जहाँ से अनाम आपि abhi-abhi गयी थी.

मैं सिर्फ मुस्कुराया… पर अंदर से समझ गया था — **अब घर में और एक नया खेल शुरू होने वाला है.**

तभी ज़ैनब आपि किचन से बहार आयी. उसका लाइट ब्लू सलवार सूट पसीने से थोड़ा चिपका हुआ था. ऊपर वाला कुरता उसके bade-bade चूचियों पर टाइट पद रहा था. उसने एक बार सीधे बड़े मां की तरफ देखा — आँखों में एक छुपी हुई चमक थी. मां ने भी उसकी तरफ देखा और हलके से सर हिला दिया.

ज़ैनब आपि ने कुछ नहीं बोलै. वो धीरे से स्टोर रूम की तरफ चली गयी. उसकी मोती गांड सलवार में हिल रही थी, हर कदम पे दोनों गांड alag-alag उभर रहे थे.

बुशरा भी उठी. उसने अपनी टाइट पिंक कुर्ती को थोड़ा सीने पर ठीक किया और नूर के कमरे की तरफ चली गयी. जाते वक़्त उसने मुझे एक हलकी सी स्माइल दी.

मैं सब देख रहा था. मां और ज़ैनब आपि की इशारेबाजी समझ गया था — आँखों से hi बात हो गयी थी. लेकिन मैंने अनजान बनने का नाटक किया.

**मैं:**

“मैं थक गया हूँ… .”

मैं सीधा अपने रूम की तरफ चला गया. दरवाज़ा बंद किया. थोड़ी देर बाद धीरे से बहार निकला. घर में सन्नाटा था. मैं चुपके से स्टोर रूम के पास पहुंचा.

दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था. मैं ने सांस रोक कर अंदर झाँका.

**उफ्फ्फ्फ़…**

ज़ैनब आपि मां से लिपट कर कड़ी थी. उसका दोनों हाथ मां के गले में थी और वो zor-zor से मां के होंठ चूस रही थी. मां की मोती जीभ उसके मुँह में घुसी हुई थी. दोनों के होंठों के बीच लार के तार बन रहे थे.

मां ने उसकी कमर को तिघ्टलय पकड़ रखा था. एक हाथ उसकी मोती गांड पर था और zor-zor से दबा रहा था. दूसरा हाथ उसके कुर्ते के अंदर घुस कर उसकी बड़ी चुकी को मसल रहा था.

**मां:**

“साली रंडी… कितनी भूखी है तू… अह्ह्ह… कितने दिन से तड़प रही थी मेरा लुंड लेने के लिए…”

ज़ैनब आपि ने जवाब में मां के होंठ और ज़ोर से चूसे. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी.

फिर मां ने उसके बाल पकड़ कर उसका चेहरा थोड़ा पीछे किया और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै,

**मां (गन्दी स्माइल के साथ):**

“अब बता… नूर का क्या हुआ? उससे भी ला यहाँ… तूने वडा किया था न की दोनों बहनों को साथ में लाएगी… बोल मादरचोद… ?”

ज़ैनब आपि का चेहरा एकदम से लाल पद गया. उसने मां के सीने से मुँह छुपाने की कोशिश की और मन करने लगी,

**ज़ैनब आपि (हलकी सिसकी के साथ):**

“मां… नहीं… प्लीज… नूर को मत… वो अभी बहुत छोटी है… मैं… मैं अकेली hi आपको सब दे दूंगी… प्लीज उसको इसमें मत घसीटिये…”

मां ने उसके बाल और ज़ोर से पकड़े और उसके होंठ पे एक और ज़ोर का किश किया. फिर उसके कान में धीरे से बोलै,

**मां:**

“तूने वडा किया था साली… दोनों बहनों को साथ में छोडूंगा… अब पीछे क्यों हैट रही है? बोल… … वर्ण मैं खुद उसको पकड़ लूंगा…”

**मैं (अंदर से सोच रहा था):**

“फ़क… नूर…? मां नूर के बारे में भी सोच रहा है? ज़ैनब आपि ने वडा किया था? साली… दोनों बहनों को साथ में छोड़वाने का प्लान बना रखा था… उफ्फ्फ्फ़……”

मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन चूका था.

ज़ैनब आपि मां से लिपटे हुए किश कर रही थी. तभी बहार गेट से बाइक की आवाज़ आयी.

**अब्बू आ गए.**

मैं झट से पीछे हटा और हॉल की तरफ बढ़ गया. ज़ैनब आपि भी अंदर से जल्दी से बहार निकल आयी. उसका चेहरा लाल था, बाल थोड़े बिगड़े हुए थे, दुपट्टा सीने पर ठीक से लपेटा नहीं था. मां भी तुरंत आ कर सोफे पर बैठ गए, जैसे कुछ हुआ hi नहीं.

मैं हॉल में पहुंचा hi था की गेट खुला और अब्बू अंदर आये. उनके हाथ में एक छोटा सा बैग था. उन्होंने हॉल में सबको देखा —

अब्बू का चेहरा एकदम से खिल गया.

**अब्बू (ज़ोर से हंस कर):**

“अरे वह! बड़े भाई साहब आ गए? बहुत दिन बाद दिखे हो!”

बड़े मां भी उठ कर आगे बढे. दोनों ने एक दूसरे को गले लगा लिया. अब्बू बहुत खुश दिख रहे थे.

**अब्बू:**

“कितने दिन बाद आये हो भाई? बुशरा को भी ले आये? बहुत अच्छा किया. घर में माहौल बन जायेगा.”

बड़े मां हंस कर बोले,

**बड़े मां:**

“हाँ भाई, उसकी छुट्टी पद गयी है एक हफ्ते की. घर में बोर हो रही थी तोह सोचा यहाँ ले आता हूँ. आप लोगों के साथ टाइम बिताएगी.”

अब्बू ने बुशरा की तरफ देखा जो की वह आ गयी थी और मुस्कुराते हुए बोलै,

**अब्बू:**

“बहुत दिन बाद आयी है बेटी. नूर के साथ मज़े करना. दोनों बहनें साथ में रहेंगी .”

बुशरा ने शर्मा कर सर हिला दिया.

ज़ैनब आपि chup-chaap कड़ी थी. उसका चेहरा अभी भी थोड़ा लाल था. वो baar-baar अपना दुपट्टा ठीक कर रही थी. अब्बू ने उसकी तरफ देखा और बोलै

**अब्बू:**

“ज़ैनब, क्या बात है? थक गयी लग रही है आज.”

ज़ैनब आपि ने झट से नज़र नीचे कर ली और हलके से बोली,

**ज़ैनब आपि:**

“नहीं अब्बू… बस थोड़ी सी थकान है.”

अब्बू ने फिर बड़े मां की तरफ मुद कर बात शुरू कर दी. दोनों पुराने दिनों की बातें करने लगे

लेकिन मैं सब देख रहा था.

ज़ैनब आपि मां के बिलकुल पास कड़ी थी. मां बात करते हुए kabhi-kabhi उसकी तरफ देखते और हलके से मुस्कुराते. ज़ैनब आपि की नज़र नीचे थी, पर उसके गाल अभी भी थोड़े लाल थे. उसकी सांसें अभी भी थोड़ी तेज़ चल रही थी.

मैं सोफे पर बैठ गया.

अब्बू ने बड़े मां से पुछा,

**अब्बू:**

“कितने दिन रुक रहे हो भाई?”

**बड़े मां (मुस्कुराते हुए):**

“एक हफ्ते तक… बुशरा को यहाँ रहना है. आप लोगों के साथ टाइम बिताएगी.”

अब्बू खुश हो कर बोले,

**अब्बू:**

“बहुत अच्छा… घर में माहौल बन जायेगा.”

रात का खाना टेबल पर सब लोग एक साथ बैठे थे. अम्मी गरम रोटियां सर्वे कर रही थी. नूर अपने फ़ोन में कुछ देख रही थी. ज़ैनब आपि मेरे बगल में बैठी थी. अनाम आपि अब्बू के बिलकुल सामने थी. बड़े मां अपोजिट साइड पर बैठे थे और बुशरा उनके बगल में.

सब baat-cheet कर रहे थे

मैं ने देखा… अब्बू chori-chori अनाम आपि की तरफ देख रहे थे.

अनाम आपि झुक कर रोटी तोड़ रही थी. उसका पिंक सलवार सूट का ऊपर वाला कुरता थोड़ा सा आगे की तरफ लटक गया था. उसके bade-bade, भरे हुए चूचिये कुर्ते के अंदर से ज़ोर से उभर आये थे. ब्रा का वाइट लास भी हल्का सा दिख रहा था. हर बार जब वो रोटी तोड़ती या सब्ज़ी लेती, उसके चूचिये halke-halke हिलते और क्लीवेज और गहरा हो जाता.

अब्बू की नज़र baar-baar वही अटक जा रही थी. वो बात करते हुए भी आँखें अनाम आपि के चूचियों पर घुमा रहे थे. चेहरा बिलकुल नार्मल रखने की कोशिश कर रहे थे, पर आँखें नरम और भूखी हो गयी थी. कभी वो जल्दी से नज़र हटा लेते, कभी फिर से वही देखने लगते.

बड़े मां ने यह सब नोटिस कर लिया.

उन्होंने धीरे से अनाम आपि की तरफ देखा, फिर अब्बू की तरफ. उनके होंठ पे एक हलकी सी मुस्कराहट आ गयी. वो chup-chaap रोटी खा रहे थे, पर उनकी आँखों में एक अलग सी चमक थी. जैसे उन्हें पूरा मामला समझ आ गया हो. वो कभी अब्बू को, कभी अनाम आपि के उभरे हुए चूचियों को देख रहे थे और dheere-dheere मुस्कुराते जा रहे थे.

अनाम आपि को कुछ एहसास था. वो baar-baar अपना दुपट्टा सीने पर ठीक कर रही थी, लेकिन कुरता इतना टाइट था की दुपट्टा भी ज़्यादा कवर नहीं कर प् रहा था. उसका चेहरा थोड़ा लाल था और वो jaldi-jaldi खाना खा रही थी.

मैं chup-chaap सब देख रहा था. टेबल के नीचे मेरा लुंड खड़ा हो चूका था.

अम्मी ने एक और रोटी प्लेट में रखते हुए पूछा,

**अम्मी:**

“अनाम, और सब्ज़ी ले ले बेटी.”

अनाम आपि ने झुक कर सब्ज़ी ली. इस बार उसके चूचिये और ज़्यादा आगे लटक गए. अब्बू की नज़र सीधे वही अटक गयी. बड़े मां ने फिर से धीरे से मुस्कुराते हुए अब्बू की तरफ देखा और अपनी रोटी में मुँह लगाया.

रात के 11:30 बजे घर में सबकी रूम की लाइट्स बंद हो चुकी thi.Main अपने रूम में लेट कर नींद की कोशिश कर रहा था, पर आँख नहीं लग रही थी. थोड़ी देर बाद मुझे ऊपर से हलकी baat-cheet की आवाज़ आने लगी.

मैं धीरे से उठा और चुपके से सीढ़ियों चढ़ गया. छत के दरवाज़े के पास खड़ा हो कर झाँका.

अब्बू और बड़े मां दोनों बैठे थे. दोनों के सामने एक छोटा स्टूल पर ऐशट्रे रखा था. अब्बू सिगरेट सुलगा रहे थे, मां भी अपनी सिगरेट पे काश ले रहे थे.

**बड़े मां (सिगरेट का काश लेते हुए):**

“भाई, अनाम की बात सोच रहा था… अब उसकी उम्र हो गयी है. तलाक़ हुए कितने साल हो गए? कोई अच्छा रिश्ता देख लो न उसके लिए.”

अब्बू ने गहरी सांस ली और सिगरेट को धुआं छोड़ते हुए बोलै,

**अब्बू:**

“वो फिर से शादी नहीं करना चाहती भाई… मैंने बहुत समझाया, लेकिन उसका मैं hi नहीं है. बोलती है घर में hi ठीक हूँ.”

बड़े मां ने हलके से मुस्कुराते हुए अब्बू की तरफ देखा. उनकी आँखों में एक अलग सी चमक थी.

**बड़े मां:**

“शादी नहीं करना चाहती… या फिर अब उसकी नज़र कहीं और है?”

अब्बू एकदम से सकपका गए. उनका हाथ सिगरेट के साथ थोड़ा सा काँप गया. उन्होंने जल्दी से नज़र हटा ली और कुछ बोलने की कोशिश की, पर आवाज़ नहीं निकली.

**बड़े मां (मुस्कुराते हुए, धीरे से):**

“अरे भाई… मैंने सब देखा hai.Aap अनाम को कैसे घूर रहे थे… उसके चूचियों को… गांड को… मैं सब देख रहा था.”

अब्बू का चेहरा पूरा लाल हो गया. वो शर्मा कर नज़र नीचे करने लगे. उनकी उँगलियाँ सिगरेट को इतनी ज़ोर से पकडे हुए थी की वो दबने लगी.

**बड़े मां :**

“वैसे अनाम बेटी बहुत खूबसूरत है भाई… … वह bade-bade चूचिये… मोती गांड… सच में किसी को भी पागल कर सकती है.”

अब्बू अब कुछ बोल नहीं प् रहे थे. उनका चेहरा शर्म से और लाल हो चूका था. वो सिर्फ सिगरेट पे काश ले रहे थे और नज़र ज़मीन पर टिकाये हुए थे.

बड़े मां ने थोड़ी देर चुप रह कर फिर से मुस्कुराते हुए बोले,

**बड़े मां:**

“अब बता भाई… अब तक क्या क्या किया है उसके साथ? सच बताओ … छुपाना मत.”

अब्बू ने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ गहरी सांस ली और नज़र और नीचे कर ली.

बड़े मां हलके से हंस दिए. उन्होंने अपना मोबाइल निकला और अनाम आपि को कॉल कर दिया.

**बड़े मां:**

“अनाम बीटा… छत पर आ जा…… जल्दी आ.”

कॉल कट करते hi उन्होंने अब्बू की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोलै,

**बड़े मां:**

“अब … अब जो मैं करे… कर लेना.”

अब्बू का चेहरा और शर्म से लाल पद गया. उन्होंने कुछ बोलने की कोशिश की, पर सिर्फ “भाई…” तक hi बोल पाए.

मैं दरवाज़े के पास चुपके से खड़ा था. दिल zor-zor से धड़क रहा था.

थोड़ी देर बाद सीढ़ियों से हलकी सी आवाज़ aayi.Main छत के दरवाज़े के बिलकुल पास, अँधेरे में चुपके से खड़ा था.

थोड़ी देर बाद सीढ़ियों से हलकी सी chap-chap की आवाज़ आयी. अनाम आपि ऊपर आ रही थी. उसका लाइट पिंक सलवार सूट थोड़ा ढीला था, दुपट्टा सिर्फ कंधे पर लटका हुआ था. चेहरा थोड़ा लाल और परेशां दिखाई दे रहा था. वो दरवाज़े के पास पहुंची, चारो तरफ देखा.

बड़े मां ने तुरंत इशारे से उसको अपने पास बुलाया.

अनाम आपि थोड़ी देर रुक गयी. उसकी आँखें अब्बू की तरफ गयी, फिर मां की तरफ. वो कुछ बोलना चाहती थी, पर मां ने फिर से इशारे से बुलाया..

अनाम आपि धीरे से उनके पास गयी.

मां ने उसका हाथ पकड़ा और उसको अपनी गॉड में बिठा लिया — अनाम आपि की टाँगे एक तरफ लती हुई, उसका पूरा बदन मां के सीने से लग गया. मां ने एक हाथ उसकी कमर पर रखा और दूसरा हाथ सीधा उसके कुर्ते के ऊपर से चूचियों पर ले गए.

**अनाम आपि :**

“मां… नहीं… प्लीज… यहाँ मत… अब्बू … अह्ह्ह…”

लेकिन मां नहीं रुके. उन्होंने धीरे से उसके दोनों bade-bade चूचियों को कुर्ते के ऊपर से पकड़ लिया और zor-zor से मसलने शुरू कर दिए — ऊपर से नीचे, gol-gol घूमते हुए, कभी हलके से दबाते हुए.

**बड़े मां (अब्बू की तरफ मुस्कुराते हुए, धीरे से):**

“देखो भाई… कितने bade-bade चूचिये हैं तेरी बेटी के… उफ्फ्फ्फ़… इतने भरे हुए… इतने सॉफ्ट… सच में किसी को भी पागल कर देंगे.”

अब्बू का चेहरा पूरा लाल पद गया. उन्होंने नज़र नीचे कर ली, पर उनकी आँखें baar-baar अनाम आपि के चूचियों पर जा रही थी. वो कुछ बोल नहीं प् रहे थे, सिर्फ सिगरेट को ज़ोर से पकडे हुए थे.

मां ने अनाम आपि के कुर्ते का ऊपर वाला हिस्सा थोड़ा और ऊपर किया. अब उसके चूचियों का गहरा उभार और साफ़ दिखने लगा. मां ने एक हाथ से उसकी एक चुकी को ज़ोर से मसल दी और अब्बू की तरफ देखते हुए बोलै,

**बड़े मां (मुस्कुराते हुए):**

“अरे भाई… शर्मा क्यों रहे हो? देखो न… कितनी खूबसूरत है अपनी बेटी… यह चूचिये… यह मोती गांड…

अनाम आपि मां के सीने में मुँह छुपा रही थी. उसकी सांसें बहुत तेज़ चल रही थी. वो halke-halke मन कर रही थी,

**अनाम आपि (कांपते हुए, बहुत हलकी आवाज़ में):**

“मां… प्लीज… रुक जाइये… अब्बू यहाँ हैं… यह गलत है… अह्ह्ह… मत दबाओ इतना ज़ोर से…”

लेकिन मां रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. उन्होंने दूसरी चुकी को भी पकड़ लिया और दोनों को एक साथ मसलने लगे. अनाम आपि की सिसकारी अब और तेज़ हो गयी थी, पर वो मां की गॉड से उठ नहीं प् रही थी.

अब्बू अभी भी चुप थे. उनका चेहरा शर्म से लाल था, लेकिन उनकी आँखें अनाम आपि के चूचियों पर अटक रही थी.

मैं दरवाज़े के बिलकुल पास, अँधेरे में चुपके से खड़ा था. सांस रोक कर देख रहा था.

बड़े मां ने अनाम आपि को इशारा किया. उन्होंने अपनी ऊँगली से अब्बू की तरफ पॉइंट किया और फिर अपने मुँह की तरफ इशारा किया — “अब्बू का लुंड चूस.”

अनाम आपि का चेहरा एकदम से सफ़ेद पद गया. उसकी आँखें फैल गयी. वो ज़ोर से सर हिला कर मन करने लगी.

**अनाम आपि:**

“नहीं मां… प्लीज… यह नहीं… मैं आपकी बेटी हूँ…… नहीं… मत बोलिये ऐसा…”

मां का चेहरा एक सेकंड में सख्त हो गया. उन्होंने अनाम आपि के बाल पकड़ लिए और एक ज़ोर का थप्पड़ उसके गाल पर लगा दिया.

**चटककक!!!**

**बड़े मां:**

“साली रंडी… कुटिया… नखरे दिखा रही है? मादरचोद… जल्दी से जा और अपने अब्बू का लुंड मुँह में ले… वर्ण और थप्पड़ पड़ेगा!”

अनाम आपि के गाल पर लाल निशाँ पद गया. उसके आँखों से आंसू निकल आये. वो कुछ सेकण्ड्स तक चुप रही, फिर धीरे से उठी. उसकी टाँगे काँप रही थी. वो अब्बू के पास गयी और उनके सामने बैठ गयी.

अब्बू का चेहरा बिलकुल लाल था. वो कुछ बोल नहीं प् रहे थे, सिर्फ शर्मा कर नज़र नीचे किये हुए थे.

अनाम आपि ने अब्बू की पंत का ज़िप खोला. उसकी उँगलियाँ काँप रही थी. उसने धीरे से अब्बू का लुंड बहार निकला — जो अभी भी half-khada था. उसकी आँखें बंद कर ली और अपनी जीभ बहार निकाल कर धीरे से लुंड के टोपा को चाटने लगी.

**सलूरररप… चुऊस…**

मां ने उसको देख कर ज़ोर से गालिया देने लगा

**बड़े मां:**

“हाँ साली… ऐसे hi… अपने अब्बू का लुंड चाट… कुटिया… तेरी माँ की छूट… कितनी बड़ी रंडी बन गयी है तू… मादरचोद… पूरा मुँह में ले… जीभ से चाट… अह्ह्ह… देखो भाई… तेरी बेटी कितनी अच्छे से चूस रही है…”

अनाम आपि chup-chaap अब्बू का लुंड चाट रही थी. उसकी जीभ टोपा से लेकर नीचे तक घूम रही थी. लार टपक रही थी उसके होंठों से.

**बड़े मां:**

“ज़ोर से चूस साली… गले तक ले… कुटिया… रंडी की बच्ची… बोल… अब्बू का लुंड पसंद है na?bol… मादरचोद…”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ आँखें बंद किये हुए अब्बू का लुंड चाट रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी. अब्बू अभी भी शर्मा रहे थे, पर उनका लुंड dheere-dheere सख्त होता जा रहा था.

मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन चूका था.

मां ने अनाम आपि के बाल पकड़ कर उसका मुँह थोड़ा ऊपर किया. अनाम आपि की आँखों में आंसू थे, गाल लाल, होंठ गीले. मां ने अपनी पंत का नाडा खोला और अपना मोटा लम्बे लुंड बहार निकाल लिया. लुंड पूरा खड़ा था, नसें उभरी हुई, टोपा चमक रहा था.

**बड़े मां :**

“ले साली रंडी… अब दोनों लुंड साथ में ले… चूस… कुटिया… दोनों मुँह में दाल…”

अनाम आपि ने एक पल के लिए आँखें बंद की. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी. वो कुछ बोल नहीं प् रही थी. मां ने उसके बाल और ज़ोर से खिंच लिए..

**बड़े मां (ज़ोर से):**

“चूस मादरचोद… दोनों को एक साथ… जीभ बहार निकाल…… साली… कितनी बड़ी रांड है तू…”

अनाम आपि ने धीरे से दोनों हाथों से दोनों लुंड पकड़ लिए. उसकी उँगलियाँ काँप रही थी. उसने आँखें बंद किये हुए पहले अब्बू के लुंड के टोपा को जीभ से छाता, फिर मां के लुंड को. फिर दोनों लुंड को एक साथ अपने मुँह के पास लाकर पागलो की तरह चूसने लगी.

**सलूरररप… ग्लुक… ग्लुक… puch-puch…**

उसकी जीभ दोनों लुंड के तोपों पर zor-zor से घूम रही थी. कभी दोनों के तोपों को एक साथ मुँह में ले लेती, कभी एक को अंदर ले कर दूसरे को जीभ से चाट टी. लार के गहरे तार बन रहे थे उसके होंठों से दोनों लुंड तक. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, पर वो रुक नहीं रही थी. उसकी गर्दन हिल रही थी, मुँह पूरा गीला हो चूका था.

**बड़े मां :**

“हाँ साली कुटिया… ऐसे hi… दोनों लुंड मुँह में ले… अह्ह्ह… कितनी बड़ी रांड है तेरी बेटी भाई… देखो… … गले तक ले… रंडी की बच्ची…… ले… ले और अंदर…”

अनाम आपि अब पागलो की तरह दोनों लुंड चूस रही थी. कभी अब्बू के लुंड को पूरा मुँह में ले लेती, कभी मां के मोठे लुंड को. दोनों लुंड उसके होंठों और चीन पर रगड़ रहे थे. लार उसके सीने तक टपक रही थी. उसकी चूचियां हिल रही थी हर धक्के के साथ.

अब्बू अब कुछ बोल नहीं प् रहे थे. उनका चेहरा शर्म से लाल था, लेकिन उनका लुंड अनाम आपि के मुँह में पूरा सख्त हो चूका था. उनकी सांसें तेज़ चल रही थी.

**बड़े मां:**

“साली हरामज़ादी… कितनी बड़ी चुड़क्कड़ निकली तू…… अह्ह्ह… तेरी माँ की छूट… रंडी… और ज़ोर से चूस… पूरा हलक तक ले…”

अनाम आपि सिर्फ सिसक रही थी. उसकी आँखें बंद थी, मुँह दोनों लुंड से भरा हुआ था. वो पागलो की तरह चूस रही थी लार, थूक मिक्स उसके होंठों से टपक रहा था.

मां ने अनाम आपि के बाल एक महती में पकड़ लिए और उसका सर ज़ोर से पीछे खिंच दिया. अनाम आपि की आँखें दर्द से फैल गयी.

**बड़े मां :**

“साली कुटिया… अभी भी नखरे दिखा रही है?”

उसने एक और ज़ोर का थप्पड़ उसके गाल पर मारा.

**चटककक!!!**

अनाम आपि की चीख निकल गयी. उसका गाल लाल पद गया. आंसू उसकी आँखों से बहने लगे.

**बड़े मां (बाल और ज़ोर से खींचते हुए):**

“रंडी… मुँह खोल! दोनों लुंड अंदर दाल… और चूस! अगर एक बार भी मुँह हटाया न… तोह आज तेरी गांड इतनी लाल कर दूंगा की कल उठने में भी दर्द होगा… समझी?”

अनाम आपि का पूरा बदन thar-thar काँप रहा था. उसने आंसू पोछते हुए हाँ में सर हिला दिया. मां ने उसके सर को नीचे धकेला.

अनाम आपि ने दोनों हाथों से अब्बू और मां के लुंड पकडे. उसकी उँगलियाँ काँप रही थी. उसने पहले अब्बू के लुंड का टोपा मुँह में लिया, फिर मां के मोठे लुंड को. दोनों लुंड उसके होंठों पर रगड़ रहे थे.

**सलूरररप… ग्लुक… ग्लुक… ग्लुक…**

वो पागलो की तरह दोनों लुंड चूसने लगी. उसकी जीभ tez-tez दोनों के तोपों पर घूम रही थी. कभी दोनों के तोपों को एक साथ मुँह में ले लेती, कभी एक को अंदर ले कर दूसरे को जीभ से चाट टी. लार के गहरे तार उसके चीन से नीचे टपक रहे थे, चूचियों तक पहुँच रहे थे.

**बड़े मां:**

“हाँ साली मादरचोद… ऐसे hi… दोनों लुंड गले तक ले… कुटिया… रंडी की बच्ची… ज़ोर से चूस… अह्ह्ह… कितनी बड़ी रांड है तू… बेटी होकर अपने अब्बू का लुंड मुँह में ले रही है… ले… और अंदर ले मादरचोद…”

अनाम आपि की आँखों से आंसू बह रहे थे. उसकी गर्दन हिल रही थी. हर धक्के के साथ उसके मुँह से “ग्लुक… ग्लुक… ुरररग्ग्गहह” की आवाज़ें निकल रही थी. लार उसके सीने पर टपक रही थी. वो रुकना चाहती थी, पर मां उसके बाल पकड़ कर zor-zor से धक्के दे रहा था.

**बड़े मां (और ज़ोर से गाली देते हुए):**

“रंडी… आँखें खोल… अपने अब्बू को देख… … बोल… अब्बू का लुंड पसंद है न रंडी तेरे ko?bol… साली हरामज़ादी… ज़ोर से चूस… दोनों को एक साथ निगल… वर्ण और थप्पड़ पड़ेगा!”

मां ने एक और ज़ोर का थप्पड़ उसके दूसरे गाल पर मारा.

**चटककक!!!**

अनाम आपि की सिसकी निकल गयी, पर वो रुक नहीं प् रही थी. उसने दोनों लुंड को और अंदर मुँह में लेने की कोशिश की. उसकी जीभ पागलो की तरह चल रही थी. उसकी चूचियां zor-zor से हिल रही थी. उसका पूरा बदन पसीने और लार से भीग चूका था.

अब्बू अभी भी चुप थे, लेकिन उनका लुंड अनाम आपि के मुँह में पूरा सख्त और फड़क रहा था.

मां ने उसके बाल और ज़ोर से पकड़े और उसको दोनों लुंड के बीच में रगड़ने लगा.

**बड़े मां:**

“ साली… अब यह तेरा असली काम है… अपने अब्बू और मां की रंडी बन के रह… समझी कुटिया?”

अनाम आपि सिर्फ सिसक रही थी. उसकी आँखें आंसू से भरी हुई थी, पर वो दोनों लुंड को पागलो की तरह चूस रही थी


मैं अँधेरे में खड़ा था. मेरा पूरा बदन गरम हो चूका था. यह सब देख कर अंदर से एक ज़बरदस्त मज़ा आ रहा था.
 
मां ने अनाम आपि के बाल और ज़ोर से पकड़ रखे थे. उसका चेहरा अभी भी दोनों लुंड के सामने था. उसने एक गहरी सांस ली और गुर्राते हुए बोलै,

**बड़े मां :**

“अनाम… मेरी प्यारी बेटी… अब आँखें खोल… देख, तेरा अब्बू और मैं दोनों तेरे चेहरे पर अपना माल भरने वाले हैं… तू मेरी रंडी है न?”

अनाम आपि ने आंसू भरी आँखों से सिर्फ हल्का सा सर हिला दिया. उसकी आवाज़ बहुत हलकी और टूटी हुई थी,

**अनाम आपि:**

“मां… प्लीज… यह… यह बहुत शर्म की बात है… मैं… मैं आपकी बेटी हूँ…”

मां ने उसके गाल पर एक थप्पड़ मारा, इस बार प्यार से

**बड़े मां:**

“बेटी हो तोह क्या हुआ? आज तू हमारी रंडी बन चुकी है… और अब्बू के सामने भी. अब मुँह खोल… दोनों लुंड को अपने चेहरे पर महसूस कर…”

दोनों ने अपने लुंड हाथों में पकड़ लिए और tez-tez हिलने लगे. पहले अब्बू गुर्राए,

**अब्बू:**

“अनाम… बीटा… ले… ले अपने अब्बू का…”

उनका लुंड फड़का और गरम माल की धार सीधा अनाम आपि के माथे पर गिरी, फिर आँख के ऊपर, नाक पर और होंठों पर. एक के बाद एक शॉट निकलते गए.

उसी वक़्त मां भी ज़ोर से गुर्राए,

**बड़े मां :**

“ले साली… ले मेरा माल… पूरा चेहरा भर दूंगा… अह्ह्ह्हह… कितनी खूबसूरत लग रही है तू अब… तेरी यह गोरी सूरत… अब मेरा और तेरे अब्बू का माल लिए हुए…”

उनका मोटा लुंड भी फड़का और zor-zor से माल की धार निकलने लगी — अनाम आपि के दूसरे गाल पर, होंठों पर और सीने पर तक टपक गया.

अनाम आपि का पूरा चेहरा दोनों के गरम, सफ़ेद माल से नहाया हुआ था. माल उसकी आँखों के नीचे से बह रहा था, होंठों पर चमक रहा था, गालों से टपक रहा था और उसके बड़े चूचियों पर भी गिर रहा था.

वो बिलकुल चुप थी. सिर्फ उसकी सांसें तेज़ चल रही थी और आँखों से आंसू बह रहे थे.

मां ने उसके बाल पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर किया और धीरे से, लेकिन बहुत शख्त आवाज़ में बोलै,

**बड़े मां:**

“देख… कितना माल लगा है तेरे चेहरे पर… अपने अब्बू और मां का… जीभ बहार निकाल… जो भी टपक रहा है… सब चाट के साफ़ कर… और मुझे देख कर बोल… ‘मां, मुझे यह पसंद आया’…”

अनाम आपि ने आंसू पोछते हुए धीरे से जीभ बहार निकाली. उसने अपने hi चेहरे पर टपकते माल को अपने हाथो से चाटना शुरू कर दिया — पहले होंठ, फिर गाल, फिर आँखों के नीचे. उसकी जीभ dheere-dheere चल रही थी.

मां ने उसके सर को थोड़ा और ऊपर किया और अब्बू की तरफ देखते हुए मुस्कुराया,

**बड़े मां:**

“देखो भाई… तेरी बेटी कितनी अच्छी रंडी बन चुकी है… खुद अपने चेहरे का माल चाट रही है… बोल अनाम… बोल… ‘मुझे यह पसंद आया’…”

अनाम आपि ने बहुत हलकी, टूटी हुई आवाज़ में बोलै,

**अनाम आपि:**

“मुझे… यह… पसंद… आया…”

मां ज़ोर से हंस पड़ा और उसके गाल पर एक और हल्का थप्पड़ मारा

**बड़े मां:**

“गुड गर्ल…

सुबह के नाश्ते के टाइम सब लोग एक साथ बैठे थे — अम्मी रोटियां garam-garam ला रही थी, नूर फ़ोन में कुछ देख रही थी, ज़ैनब आपि मेरे बगल में बैठी थी, अनाम आपि और बुशरा अब्बू के सामने, और बड़े मां सबसे एन्ड पर.

पहले कुछ मिनट तोह सब चुप थे. फिर बड़े मां ने एक पराठा तोड़ते हुए अब्बू की तरफ देखा और ज़ोर से हंस दिए.

**बड़े मां (हंसी के साथ):**

“भाई, कल रात अनाम बेटी ने बहुत म्हणत की थी न? कितनी देर तक ऊपर छत पर बात करते रहे थे हम लोग और ये बेचारी हमारे पाँव दबती रही… मैं तोह सोच रहा था की अनाम अब घर सँभालने में इतनी अच्छी हो गयी है.”

अब्बू ने चाय का कप उठाते हुए हलके से मुस्कुराये. उनकी आँखें अनाम आपि पर गयी. अनाम आपि ने नज़र नीचे कर ली, उसका चेहरा एक सेकंड में लाल हो गया.

**अब्बू :**

“हाँ भाई… अनाम अब बहुत समझदार हो गयी है. जो काम हाथ में लेती है… उसको अच्छे से निभा लेती है.”

बड़े मां ज़ोर से हंस पड़े. उन्होंने अनाम आपि की तरफ देखा और बोले.

**बड़े मां:**

“वह बेटी… सच में? जो काम हाथ में लेती है उसको अच्छे से निभा लेती है? बहुत अच्छी बात है. आगे भी ऐसे hi निभाना….”

अनाम आपि का चेहरा पूरा लाल पद गया. उसने रोटी के टुकड़े को हाथ में पकडे हुए तिघ्टलय दबाया. उसकी उँगलियाँ काँप रही थी. वो कुछ बोल नहीं प् रही थी, सिर्फ नज़र प्लेट पर टिकाये हुए बैठी थी.

ज़ैनब आपि ने साइड से मुझे देखा. उसकी आँखों में भी थोड़ी सी हैरानी थी.

**बड़े मां :**

“भाई, अनाम की उम्र हो गयी है… अब तोह उसको नए तरीके से काम सीखने पड़ेंगे. पुराने तरीके से काम नहीं चलेगा. Kabhi-kabhi ज़ोर से हाथ लगाना पड़ता है… … सही बोल रहा हूँ न?”

अब्बू हलके से हंस दिए, पर उनकी आँखें अनाम आपि के उभरे हुए चूचियों पर थोड़ी देर अटक गयी. उन्होंने चाय का सिप लिया और नार्मल बनने की कोशिश करते हुए बोलै,

**अब्बू:**

“हाँ… अब नयी जनरेशन है. पुराने तरीके से नहीं चलता.”

अनाम आपि अब बिलकुल शर्मा कर रोटी तोड़ने लगी. उसका दुपट्टा सीने पर तिघ्टलय लपेटा हुआ था, पर फिर भी उसके बड़े चूचियों का शेप साफ़ दिख रहा था. वो baar-baar अपना दुपट्टा ठीक कर रही थी, लेकिन हाथ काँप रहे थे.

मैं chup-chaap सब देख रहा था. अंदर से बहुत हैरानी हो रही थी.

**मैं :**

“पहले अब्बू इतने सख्त थे की घर की औरतों को मुँह दिखने तक नहीं देते the…Choot के चक्कर में बिलकुल बदल गए हैं. यह वही अब्बू हैं जो पहले एक छोटी सी बात पर गुस्सा कर देते थे… अब उनकी नज़र बेटी के चूचियों पर अटक रही है… सच में इंसान कितना बदल सकता है…”

नूर फ़ोन देखते हुए बोली,

**नूर:**

“आपि, आप आज बहुत चुप हो… क्या बात है?”

अनाम आपि ने सिर्फ हलके से सर हिला दिया और कुछ नहीं बोलै.

अनाम आपि ने रोटी मुँह में डाली और chup-chaap खाने लगी. उसका चेहरा अब इतना लाल हो चूका था की वो अम्मी की तरफ भी नहीं देख प् रही थी.

मैं सोच रहा था — **यह सब देख कर लग रहा है जैसे पूरा घर एक नए खेल में उतर चूका है… और सबसे बड़ी बात, अब्बू जो पहले सबसे सख्त थे… अब सबसे ज़्यादा बदल गए हैं.**

नाश्ता ख़तम होने के बाद सब लोग उठने लगे. अम्मी बर्तन उठा रही थी. अब्बू चेयर पे पीठ टिका कर बैठ गए और बड़े मां की तरफ देखते हुए धीरे से बोले,

**अब्बू:**

“भाई, तुम भी चलो न शॉप पर. आज बहुत रश है, दोनों लड़के नहीं हैं. थोड़ा हाथ बता डोज.”

बड़े मां ने चाय का कप टेबल पर रख दिया और हलके से मुस्कुराते हुए बोलै,

**बड़े मां:**

“हाँ चलते हैं… वैसे अनाम को भी ले चलो. घर में बोर हो जाएगी अकेली. वहां थोड़ा काम देख लेगी… कुछ मदद कर देगी.”

जैसे hi अनाम आपि का नाम आया, उसका चेहरा एकदम से लाल हो गया. वो रोटी के टुकड़े को प्लेट में रख कर chup-chaap बैठी rahi.Usne नज़र नीचे कर ली और दुपट्टा को सीने पर लपेट लिया.

अब्बू ने उसकी तरफ देखा और हलके से बोले,

**अब्बू:**

“अनाम… तू भी रेडी हो जा. 10 मिनट में निकलते हैं.”

अनाम आपि ने सिर्फ हाँ में सर हिला दिया. वो कुछ बोल नहीं प् रही थी. उसकी सांसें थोड़ी तेज़ हो गयी थी.

थोड़ी देर बाद जब अब्बू और बड़े मां बहार निकल गए और अनाम आपि भी उनके साथ चली गयी, तब मैं अम्मी के पास किचन में गया.

**मैं:**

“अम्मी, मैं और ज़ैनब आपि बहार जा रहे हैं… थोड़ा काम है.”

अम्मी बर्तन धो रही थी. उन्होंने हाथ रोक कर मेरी तरफ देखा. उनका चेहरा थोड़ा नाराज़ सा हो गया.

**अम्मी (थोड़ी सी गर्मी के साथ):**

“क्या हुआ बीटा? सबको घर की लड़कियों को इतना बहार क्यों घुमा रहे हो? पहले अनाम को, अब तुम ज़ैनब को… घर का काम कौन करेगा? क्या ज़रूरत है इतना बहार जाने की?”

मैं ने थोड़ा रुक कर नार्मल आवाज़ में जवाब दिया,

**मैं:**

“अम्मी… वही काम है जो अनाम आपि ने शुरू किया था. पैसे मिल रहे हैं… घर की हालत सुधर रही है. क्या दिक्कत है इसमें?”

अम्मी ने गहरी सांस ली. उन्होंने कुछ बोलने की कोशिश की, पर फिर चुप हो गयी. सिर्फ हलके से सर हिला दिया और बर्तन धो ने लगी. उनके चेहरे पर साफ़ नाराज़गी थी.

मैं वहां से निकल कर ज़ैनब आपि के पास गया. वो अपने रूम के दरवाज़े के पास कड़ी थी. मैं ने उसके कान में धीरे से बोलै,

**मैं:**

“चल मेरी रैंड… आज तुझे बहुत मज़ा करवाऊंगा.”

ज़ैनब आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखों में थोड़ी सी शर्म थी, थोड़ी सी नाराज़गी और थोड़ी सी हवस भी. उसने हलके से मुस्कुराते हुए, लेकिन हलकी आवाज़ में बोलै,

**ज़ैनब आपि:**

“हाँ… तू तोह अब पूरा दल्ला बन गया है… पहले अनाम को, अब मुझे… पैसे के लिए सबको बेच रहा है क्या?”

उसने यह लाइन बोलते हुए हलके से मेरी चेस्ट पर हाथ मारा, पर उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली नहीं. वो शर्मा रही थी.

मैं ने उसके कान में और धीरे से बोलै,

**मैं:**

“दल्ला hi सही… लेकिन तुझे तोह मज़ा आ रहा है न?”

ज़ैनब आपि ने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ हलके से मेरी तरफ देखा और फिर नज़र झुका ली.

मैं ज़ैनब आपि को लेकर बहार nikla.Ammi अभी भी बर्तन धो रही थी, उसने हम दोनों की तरफ देखा पर कुछ नहीं बोलै. मैं सीधा बाइक की तरफ गया.

बाइक निकलने से पहले मैंने पॉकेट से मोबाइल निकला और उस आदमी को कॉल किया जिसका नंबर अर्जुन ने दिया था. फ़ोन पहली hi रिंग में उठाया उसने.

**मैं:**

“नमस्ते भाई… मैं असीम बोल रहा हूँ.”

**आदमी (सीधा):**

“हाँ बोल… क्या बात है?”

**मैं:**

“आज एक लड़की ले कर आ रहा हूँ… दूसरी वाली. आपको पसंद आएगी.”

**आदमी (थोड़ा रुक कर):**

“दूसरी? पहले वाली कहाँ है… अनाम?”

**मैं:**

“वो आज नहीं आ पायेगी. लेकिन ये इससे भी मस्त है… फिगर बहुत ज़बरदस्त है. रेट थोड़ा हाई रहेगा इसका.”

**आदमी (हंस कर):**

“रेट की टेंशन मत ले… जितना बोलेगा उतना दूंगा. लेकिन हम दो लोग हैं आज… दोनों को अच्छे से खुश करना पड़ेगा. समझा?”

**मैं:**

“बिलकुल… आप टेंशन मत लो. मस्त रैंड है”

**आदमी:**

“ठीक है… जल्दी आ जा. पहले वाले अड्रेस पर hi मिलते हैं.”

कॉल कट करते hi मैंने बाइक स्टार्ट की. ज़ैनब आपि पीछे बैठ गयी. उसकी चूचियां मेरी पीठ से halke-halke रगड़ रही थी.

बाइक चलते हुए मैंने धीरे से बोलै,

**मैं:**

“आज तुझे बहुत मज़ा आएगा मेरी रैंड… दो मर्द तेरा इंतज़ार कर रहे हैं.”

ज़ैनब आपि ने पीछे से मेरी कमर को हल्का सा पिंच किया और हलकी सी तेज़ आवाज़ में बोली,

**ज़ैनब आपि:**

“तू सच में दल्ला बन गया है… पहले अनाम को, अब मुझे… पैसे के लिए सबको बेच रहा है क्या?”

मैं ने स्पीड थोड़ी बढ़ा दी और मुस्कुराते हुए बोलै,

**मैं:**

“बेच रहा हूँ तोह क्या… तुझे तोह मज़ा भी आ रहा है न? बोल… दो लुंड एक साथ लेने का मैं कर रहा है क्या?”

ज़ैनब आपि ने कुछ सेकण्ड्स चुप रह कर फिर हलके से बोलै,

**ज़ैनब आपि:**

“तू बहुत गन्दा हो गया है असीम…… मुझे क्या पता था की तू ऐसा निकलेगा.”

मैं ने बाइक को थोड़ा स्लो किया और धीरे से बोलै,

**मैं:**

“गन्दा नहीं… तेरा अच्छा भाई हो गया हूँ… और तू भी अंदर से बहुत अच्छी बहन हो चुकी है… बोल सच… आज दो मर्द तुझे छोड़ेंगे तोह कितना मज़ा आएगा?”

ज़ैनब आपि ने जवाब में सिर्फ मेरी कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया. उसने कुछ नहीं बोलै, पर उसकी सांस मेरी गर्दन पर गरम पद रही थी.

रस्ते भर मैं उससे dheere-dheere गन्दी बातें करता रहा — कभी उसकी छूट के बारे में, कभी दो लुंड एक साथ लेने के बारे में. वो कभी मन करती, कभी चुप रह जाती, कभी हलके से “चुप कर…” बोल देती.

लेकिन वो मेरी पीठ से चिपकी हुई थी… और बाइक के हर झटके के साथ उसकी चूचियां मेरी पीठ पर रगड़ रही थी.

वहां पहुँचते hi मैंने गेट खोला. अंदर हॉल में दोनों आदमी सोफे पर बैठे थे. पहला वाला (जो पहले भी मिला tha)kurta-pajama में था. दूसरा आदमी लगभग 40 साल का था — hatta-katta, गुंडा टाइप, मोती गर्दन, badi-badi बाहें, और चेहरे पर एक सख्त भाव. उसने ब्लैक t-shirt और जीन्स पहना था. दोनों ने हम दोनों को देखा और हलके से मुस्कुराया.

मैं ने ज़ैनब आपि का हाथ पकड़ कर अंदर ले गया. उसका चेहरा थोड़ा घबराया हुआ था.

पहला आदमी उठा और सीधा ज़ैनब आपि को ऊपर से नीचे तक घूरता रहा. उसने धीरे से मुस्कुराते हुए बोलै.

**पहला आदमी:**

“अरे… ये तोह और भी ज़बरदस्त माल है… पहले वाली से भी टाइट और फ्रेश लग रही है.”

दूसरा आदमी सोफे पर baitha-baitha hi बोलै, आवाज़ थोड़ी भरी और गरम थी,

**दूसरा आदमी:**

“बैठो यहाँ… ”

मैं ने ज़ैनब आपि को सोफे के पास ले गया. वो उनके साथ बैठ गयी. उसकी सांसें तेज़ हो रही थी.

दूसरा आदमी ने उसको देखते हुए धीरे से बोलै,

**दूसरा आदमी :**

“कितनी खूबसूरत है तू… नाम क्या है तेरा?”

**ज़ैनब आपि (बहुत हलकी आवाज़ में):**

“ज़ैनब…”

**दूसरा आदमी (मुस्कुराते हुए):**

“ज़ैनब… बहुत प्यारा नाम है… लेकिन आज तू हमारी रंडी है समझी? अभी से हम जो कहेंगे… वो करना पड़ेगा.”

उसने हाथ बढ़ाया और ज़ैनब आपि के गाल को धीरे से सहलाया. फिर उसी हाथ से उसके चीन को पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर किया.

**दूसरा आदमी (गरम आवाज़ में):**

“देख… कितनी गोरी स्किन है… आँखें भी कितनी बड़ी हैं… और यह चूचियां…”

उसने दूसरे हाथ से उसके कुर्ते के ऊपर से एक चुकी को पकड़ लिया और धीरे से मसलने लगा.

“बहुत भरी हुई है… सॉफ्ट भी… लेकिन आज इनको थोड़ा ज़ोर से मसलेँगे… समझी रंडी?”

ज़ैनब आपि ने शर्मा कर नज़र नीचे कर ली. उसकी सांस तेज़ हो गयी थी.

पहला आदमी भी अब पास आ गया. उसने ज़ैनब आपि के बाल को धीरे से पकड़ा और उसके कान में बोलै,

**पहला आदमी:**

“दर मत… हम दोनों बहुत प्यार से करेंगे… लेकिन थोड़ा सा कण्ट्रोल में रहना पड़ेगा… जैसे हम बोलेंगे… वैसे hi करना… ठीक है न मेरी जान?”

ज़ैनब आपि ने सिर्फ हल्का सा सर हिला दिया.

दूसरा आदमी ने अब उसके कुर्ते के बटन खोलने शुरू कर दिए. Ek-ek करके. जब तीसरा बटन खुला, उसने हाथ अंदर दाल कर उसकी चुकी को सीधा पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया.

**दूसरा आदमी :**

“उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम है… निप्पल भी सख्त हो गए हैं… बहुत दिन से तड़प रही थी न तू… बोल… सच बोल…”

ज़ैनब आपि ने सिर्फ सांस रोकी. उसने कुछ नहीं बोलै.

पहला आदमी ने उसके दूसरे तरफ से उसकी दूसरी चुकी पकड़ ली और दोनों ने एक साथ मसलना शुरू कर दिया

**पहला आदमी :**

“क्या कड़क माल है यार मज़ा आ गया… आज हम तुझे बहुत प्यार देंगे… लेकिन थोड़ा सा दर्द भी… समझी मेरी जान?”

ज़ैनब आपि की सांसें अब बहुत तेज़ हो गयी थी. उसकी आँखें आधी बंद थी. वो सिर्फ halke-halke “ममम…” की आवाज़ निकल रही थी.

दूसरा आदमी ने उसके निप्पल को उँगलियों के बीच पकड़ कर हल्का सा मरोड़ दिया और बोलै,

**दूसरा आदमी:**

“अब बोल… तेरा नाम क्या है आज से? रंडी? कुटिया? या हमारी पर्सनल माल?”

ज़ैनब आपि ने बहुत हलकी, टूटी आवाज़ में बोलै,

**ज़ैनब आपि:**

“…जो आप कहें…”

दोनों आदमी एक साथ हलके से हंस पड़े.

**दूसरा आदमी (उसके कान में):**

“गुड गर्ल… अब कपडे उतार… dheere-dheere… हम देखना चाहते हैं पूरी तरह से…”

ज़ैनब आपि ने हाथ उठाया और अपने कुर्ते के बटन खोलने लगी. उसकी उँगलियाँ काँप रही थी.

मैं साइड में बैठा सब देख रहा था. अंदर से एक ज़बरदस्त गरम और जोरदार फीलिंग आ रही थी.

दोनों आदमी ज़ैनब आपि को बीच में बैठा कर दोनों तरफ से चिपक गए थे.

पहला आदमी ने धीरे से ज़ैनब आपि के गाल को सहलाया और उसके कान में प्यार भरी आवाज़ में बोलै,

**पहला आदमी:**

“कितनी मस्त है तू… सच में… इतना गोरा चेहरा… और यह badi-badi आँखें… डर रही है न अभी भी?”

ज़ैनब आपि ने सिर्फ हल्का सा सर हिला दिया. उसकी सांस तेज़ चल रही थी.

दूसरा आदमी ने उसके दूसरे गाल को पकड़ा, थोड़ा ऊपर किया और धीरे से उसके होंठ पे किश किया. किश के बाद उसने उसके गाल पर जोर का थप्पड़ मारा.

**दूसरा आदमी:**

“दर मत… हम तुझे बहुत प्यार करेंगे… बस थोड़ा सा दर्द देंगे… समझी मेरी जान?”

उसने फिर से उसके होंठ चूसे, और किश के बीच में उसके मुँह में थूक दिया. ज़ैनब आपि ने थोड़ा सा ुबकि मारी, पर उसने थूक निगल लिया.

पहला आदमी ने उसके कुर्ते के बटन खोलने शुरू किये. जब तीसरा बटन खुला, उसने हाथ अंदर दाल कर उसकी एक बड़ी चुकी को पकड़ लिया और dheere-dheere मसलने लगा.

**पहला आदमी:**

“उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम और भरी है… निप्पल भी कितना टाइट हो गया है… बहुत दिन से तड़प रही थी न तू… बोल… सच बोल…”

ज़ैनब आपि ने आँखें बंद कर ली और हलकी सी सिसकी ली,

**ज़ैनब आपि (टूटी आवाज़ में):**

“…हाँ…”

दूसरा आदमी ने उसकी दूसरी चुकी पकड़ ली और ज़ोर से मसल दी. फिर उसने उसके निप्पल को उँगलियों के बीच पकड़ कर ज़ोर से मरोड़ दिया और उसके गाल पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा.

**दूसरा आदमी:**

“हम दोनों तेरे साथ हैं… बोल… कितना मज़ा आ रहा है अब?”

उसने फिर से उसके होंठ चूसे और मुँह में थूक दिया. ज़ैनब आपि ने सांस रोकते हुए थूक निगल लिया.

दोनों आदमी अब उसके चूचियों को एक साथ मसल रहे थे

पहला आदमी ने उसके कान में बोलै,

**पहला आदमी:**

“अब नीचे हाथ ले… अपनी छूट को सहलाना शुरू कर… हम देखना चाहते हैं… कितनी गीली हो चुकी है तू…”

ज़ैनब आपि ने शर्मा कर हाथ नीचे ले जाय. उसने अपनी सलवार के अंदर हाथ दाल कर अपनी छूट को सहलाना शुरू कर दिया. उसके हाथ काँप रहे थे.

दूसरा आदमी ने उसके हाथ को रोक कर खुद अपना हाथ उसकी सलवार के अंदर दाल दिया. उसने उसकी छूट पर धीरे से उँगलियाँ फेरते हुए बोलै,

**दूसरा आदमी :**

“बहुत गीली है… कितनी प्यासी है तू… अब बोल… हम दोनों तुझे छोड़ेंगे तोह क्या करेगी?”

उसने छूट पर एक थप्पड़ मारा.

**थप!**

ज़ैनब आपि की सिसकी निकल गयी. उसकी टाँगे thar-thar काँप उठी.

**ज़ैनब आपि (बहुत हलकी, गरम आवाज़ में):**

“…जो आप कहोगे… वही करुँगी…”

दोनों आदमी एक साथ हलके से हंस पड़े.

पहला आदमी ने उसके होंठ पे किश किया और मुँह में थूक दिया. दूसरा आदमी ने उसकी चुकी को ज़ोर से मसल कर निप्पल पर थप्पड़ मारा.

**दूसरा आदमी:**

“अच्छी लड़की… अब कपडे उतार… … मेरी प्यारी रैंड…”

ज़ैनब आपि अब बिलकुल गरम हो चुकी थी. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी, आँखें आधी बंद थी, और वो dheere-dheere अपना कुरता उतरने लगी.

मैं साइड में बैठा सब देख रहा tha.Zainab आपि को दो हवसी मर्दो के बिच देखकर मेरा लुंड पायजामा में पूरा गीला हो चूका था.

दोनों आदमी सोफे पर बैठ गए. पहला आदमी ज़ैनब आपि के बाल को धीरे से पकड़ कर उसको निचे घुटनो के बल बैठा दिया. दूसरा आदमी उसके राइट तरफ बैठा था.

**पहला आदमी:**

“बैठ जा यहाँ… मेरी प्यारी कुटिया … अब हम दोनों के लुंड को अच्छे से चूस… dheere-dheere… हम देखना चाहते हैं कितनी प्यार से करती है तू…”

ज़ैनब आपि घुटनो के बल बैठ गयी. उसका चेहरा लाल था, आँखें नीचे. उसने हाथों से दोनों के ज़िप खोले. दोनों के लुंड बहार आ गए — दोनों मोठे, एक थोड़ा लम्बे, दूसरा मोटा और काला.

दूसरा आदमी ने उसके बाल पकड़ कर उसका चेहरा अपने लुंड की तरफ खींच लिया और हलके से उसके गाल पर थप्पड़ मारा

**दूसरा आदमी (गरम आवाज़ में):**

“पहले मेरा ले… जीभ बहार निकाल… और प्यार से चाट… जैसे प्यार करती है… समझी?”

ज़ैनब आपि ने आँखें बंद किये हुए जीभ बहार निकाली और उसके मोठे लुंड के टोपा को धीरे से चाटने लगी. उसकी जीभ upar-neeche घूम रही थी.

पहला आदमी ने उसके दूसरे तरफ से उसके बाल पकड़े और अपना लुंड उसके गाल पर रगड़ने लगा.

**पहला आदमी:**

“और मेरा भी… दोनों को एक साथ प्यार दो… हम दोनों तेरे प्यार के भूखे हैं आज… अच्छी लड़की… जीभ से दोनों को साफ़ कर…”

ज़ैनब आपि ने दोनों हाथों से दोनों लुंड पकड़ लिए. उसने पहले दूसरे आदमी के लुंड को मुँह में लिया और ज़ोर से चूसने लगी. उसकी गर्दन upar-neeche हो रही थी. लार उसके होंठों से टपक रही थी.

दूसरा आदमी ने उसके बाल पकड़ कर उसको और गहरा धक्का दिया और जोरदार तरीके से उसके गाल पर दो थप्पड़ मारे.

**दूसरा आदमी :**

“हाँ… ऐसे hi… गले तक ले… बहुत अच्छी लग रही है तू… मेरी प्यारी रैंड… और ज़ोर से चूस… अह्ह्ह… कितना गरम मुँह है तेरा…”

उसने फिर से उसके मुँह में थूक दिया. ज़ैनब आपि ने थूक निगल लिया और और तेज़ चूसने लगी.

पहला आदमी ने उसके दूसरे तरफ से उसकी चुकी पकड़ ली और निप्पल को ऊँगली से मरोड़ दिया. फिर उसने उसके गाल पर एक थप्पड़ मारा और अपना लुंड उसके होंठ पर रगड़ने लगा.

**पहला आदमी:**

“अब मेरा भी ले… दोनों को एक साथ मुँह में दाल… देख कितना प्यार कर रहे हैं हम तुझे… … तू हमारी है न आज?”

ज़ैनब आपि ने दोनों लुंड को एक साथ अपने मुँह के पास लाया. उसकी जीभ दोनों के तोपों पर tez-tez घूम रही थी. कभी एक को मुँह में ले लेती, कभी दूसरे को. लार उसके चीन से टपक रही थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, पर वो रुक नहीं रही थी.

दूसरा आदमी ने उसके बाल पकड़ कर उसको ज़ोर से गले तक धक्का दिया. लुंड उसके गले तक चला गया.

**दूसरा आदमी (गुर्राते हुए):**

“ले… गले तक… बहुत अच्छी… मेरी प्यारी रैंड… और ज़ोर से… अह्ह्ह… कितनी टाइट मुँह है तेरा…”

उसने फिर से उसके गाल पर थप्पड़ मारा और मुँह में थूक दिया.

ज़ैनब आपि अब पागलो की तरह दोनों लुंड चूस रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी, मुँह पूरा गीला था, लार चूचियों तक टपक रही थी. उसका बदन गरम हो चूका था.

मैं पागल सा हो गया था ये सब देखकर

दोनों अब और नहीं रुक सके. दूसरे आदमी ने ज़ैनब आपि को सोफे पर सीधा लिटा दिया और झट से उसको उल्टा कर दिया — उसकी मोती गांड ऊपर, चेहरा नीचे सोफे के कुशिओं पर.

**दूसरा आदमी (गरम सांस छोड़ते हुए, उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए):**

“बहुत प्यारी गांड है तेरी… अब देख… कितना मज़ा दूंगा तुझे आज…”

उसने अपना मोटा, काला लुंड हाथ में पकड़ा और ज़ैनब आपि की गीली छूट के मुँह पर रगड़ने लगा. फिर एक ज़ोर का धक्का मारा.

**धायआपपप!!!**

ज़ैनब आपि की चीख निकल गयी.

**“आआह्ह्हह्ह्ह्ह…!”**

उसका पूरा बदन एक झटके से काँप उठा. उस आदमी का मोटा लुंड एक hi धक्के में उसकी छूट के अंदर तक घुसा था. उसकी छूट इतनी टाइट थी की लुंड को अंदर जाते हुए दर्द हो रहा था.

**ज़ैनब आपि (चीखते हुए):**

“अह्ह्ह… बहुत मोटा है… धीरे… प्लीज… पहात जाएगी… अह्ह्ह्हह…”

लेकिन दूसरा आदमी ने उसकी कमर पकड़ ली और ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए — zor-zor से, बेदर्दी से, पर उसके हाथ उसकी कमर पर प्यार से फेर रहे थे.

**धप… धप… धप… धप…**

हर धक्के के साथ ज़ैनब आपि की मोती गांड हिल रही थी और उसके मुँह से चीख निकल रही थी.

**ज़ैनब आपि (चीखते हुए):**

“अह्ह्ह… मर जाउंगी… बहुत ज़ोर से… उफ्फ्फ्फ़… धीरे… अह्ह्ह्हह…”

पहला आदमी ने तुरंत आगे बढ़ कर उसके बाल पकड़े और अपना मोटा लुंड उसके मुँह में दाल दिया. लुंड सीधा उसके गले तक चला गया.

**पहला आदमी:**

“चुप हो जा मेरी जान… मुँह में ले ले… हम दोनों तुझे बहुत प्यार कर रहे हैं… बस थोड़ा सा दर्द सहेगी न… अच्छी लड़की…”


दूसरा आदमी पीछे से उसकी छूट में zor-zor से धक्के मार रहा था, और पहला आदमी आगे से उसका मुँह छोड़ रहा था.

**धप… धप… धप…**

**ग्लुक… ग्लुक… ग्लुक…**

ज़ैनब आपि की चीखें अब मुँह में डाब रही थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, लार उसके चीन से टपक रही थी, गांड लाल पद रही थी हर धक्के के साथ.

**दूसरा आदमी (उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए):**

“ले मेरी प्यारी रैंड… कितनी टाइट छूट है तेरी… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से गांड हिला… … तू हमारी है आज…”

पहला आदमी ने उसके बाल पकड़ कर उसका सर ऊपर किया और उसके मुँह में जोर का धक्का मारा.

**पहला आदमी :**

“बहुत मस्त है तू मेरी रैंड… दोनों तरफ से ले रही है… थोड़ा सा और ले… हम तुझे बहुत प्यार देंगे… बस थोड़ा दर्द सहेगी न…”

ज़ैनब आपि अब बिलकुल गरम हो चुकी थी. उसकी चीखें अब सिसकारियों में बदल रही थी. उसकी गांड खुद hi पीछे उठ रही थी धक्कों के साथ. उसका मुँह दोनों तरफ से पेल रहे लुंड को निगल रहा था.

मैं साइड में बैठा देख रहा था.

अब उसने ज़ैनब आपि की कमर को तिघ्टलय पकड़ लिया और zor-zor से धक्के मरने लगा. हर धक्के के साथ उसकी मोती गांड हिल रही थी और उसके मुँह से सिसकारी निकल रही थी.

**दूसरा आदमी :**

“ले मेरी जान… ले… बहुत टाइट है तेरी छूट… ahhh…Madarchod रंडी की bachhi...bahut मज़ा आ रहा है… ले… ले पूरा अंदर…”

उसकी स्पीड और तेज़ हो गयी. कुछ hi धक्कों के बाद उसका पूरा बदन काँप उठा. उसने ज़ैनब आपि की कमर को और ज़ोर से पकड़ा और गुर्राते हुए बोलै,

**दूसरा आदमी :**

“ले साली… आ गया… तेरी छूट में भर रहा हूँ… मादरचोद… ले मेरा माल… अह्हह्ह्ह्ह!!!”

उसने ज़ोर से एक गहरा धक्का मारा और अपना गरम माल ज़ैनब आपि की छूट के अंदर छोड़ दिया. Dhaar-dhaar निकल रहा था. उसकी छूट इतनी भर गयी की माल बहार टपकने लगा.

ज़ैनब आपि का पूरा बदन काँप उठा. उसकी आँखें बंद हो गयी और वो सिर्फ सिसकती रही.

अब पहला आदमी आगे बढ़ा. उसने ज़ैनब आपि को सोफे पर सीधा लिटा दिया. उसकी टाँगे फैला कर उसके ऊपर चढ़ गया. उसका लुंड अभी भी खड़ा था.

**पहला आदमी:**

“अब मेरी बारी है मेरी प्यारी रंडी… धीरे से ? बहुत प्यार कर रहा हूँ तुझे आज…”

उसने अपना लुंड ज़ैनब आपि की गीली छूट के मुँह पर सेट किया और धीरे से अंदर धकेल दिया.

**ज़ैनब आपि (रट हुए):**

“अह्ह्ह… बहुत… बहुत अंदर जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… … धीरे… प्लीज…”

पहला आदमी ने उसके होंठ पे हल्का किश किया और dheere-dheere धक्के मरने लगा. हर धक्के के साथ ज़ैनब आपि की सिसकारी निकल रही थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे.

**पहला आदमी (उसके कान में प्यार से):**

“रो मत मेरी जान… हम तुझे बहुत प्यार कर रहे हैं… बस थोड़ा सा दर्द सहेगी… अच्छी लड़की… ले… ले पूरा…”

उसने उसके चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे से मसलने लगा. कभी निप्पल को ऊँगली से मरोड़ता, कभी पूरा हाथ घुमा कर दबाता.

ज़ैनब आपि की चीखें सिसकारियों में बदल रही थी.

दूसरा आदमी अब आगे आ गया. उसने ज़ैनब आपि के मुँह के पास बैठ कर अपना अभी भी गीला लुंड उसके होंठ पर रगड़ना शुरू कर दिया.

**दूसरा आदमी :**

“मेरी प्यारी कुटिया… अब मेरा भी ले… जीभ बहार निकाल… चाट…”

उसने उसके मुँह में अपना लुंड दाल दिया और dheere-dheere मुँह छोड़ने लगा.

अब ज़ैनब आपि दोनों तरफ से चुद रही थी — पहला आदमी नीचे से उसकी छूट में dheere-dheere लेकिन जोरदार धक्के मार रहा था, दूसरा आदमी ऊपर से उसका मुँह छोड़ रहा था.

ज़ैनब आपि अब बिलकुल रोने को हो गयी थी. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, मुँह में लुंड था, छूट में लुंड था. उसकी सिसकारियां अब रुक नहीं रही थी.

दिल zor-zor से धड़क रहा था.

दोनों आदमी ने zor-zor से धक्के मारे और एक के बाद एक झाड़ गए. पहला आदमी ज़ैनब आपि के मुँह में, दूसरा उसकी छूट में. दोनों के माल से उसका चेहरा, चूचियां और छूट सब भीग चुके थे.

वो दोनों थक कर सोफे पर बैठ गए. सांसें तेज़ चल रही थी. ज़ैनब आपि सोफे पर लेती हुई थी — नंगी, पसीने और माल से भीगी हुई, सांसें तेज़, आँखें आधी बंद, गाल लाल. उसकी छूट से दोनों का माल dheere-dheere बहार टपक रहा था.

मैं साइड में बैठा था. उसकी ऐसी हालत देख कर मेरा लुंड पायजामा के अंदर पूरा तन चूका था.

दूसरा आदमी ने थक कर पीठ टिका कर बोलै,

**दूसरा आदमी:**

“बहुत मज़ेदार रैंड है ये… बिलकुल टाइट थी… आज दिन भर यहीं रख लो इसको… .”

पहला आदमी हंस पड़ा और सिगरेट सुलगाते हुए बोलै,

**पहला आदमी:**

“हाँ… बिलकुल कड़क माल है. लग तोह शरीफ घर की लड़की जैसी रही थी… लेकिन अंदर से पूरी रंडी निकली.”

मैं ने हलके से मुस्कुराते हुए कहा,

**मैं:**

“ये शरीफ घर की hi है… इसलिए इतनी टाइट है. लेकिन रुक नहीं सकती यहाँ दिन भर… घर वालों को शक हो जायेगा.”

दोनों आदमी ज़ोर से हंस पड़े.

**दूसरा आदमी (hans-te हुए):**

“शरीफ घर की लग रही है… लेकिन है बिलकुल कड़क रैंड… देखा न कैसे दोनों लुंड ले रही थी… कितनी प्यासी थी.”

पहला आदमी ने ज़ैनब आपि की तरफ देखा, जो अभी भी लेती हुई थी

**पहला आदमी:**

“कितना लोगे इसके लिए?”

**मैं:**

“एक लाख.”

दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा. दूसरा आदमी ने वॉलेट निकला और सीधे एक लाख के नोट गईं कर मेरे हाथ में थमा दिए. फिर उसने और 50,000 अलग किये और ज़ैनब आपि की तरफ बढ़ाये.

**दूसरा आदमी:**

“ये इसके लिए टिप है… बहुत मज़ा दिया इसने आज.”

ज़ैनब आपि ने हाथ नहीं बढ़ाया. वो सिर्फ लेती हुई थी, सांसें अभी भी तेज़ चल रही थी.

दोनों आदमी अब थक कर बैठ गए थे, लेकिन उनकी नज़र अभी भी ज़ैनब आपि के शरीर पर थी. पहला आदमी ने हाथ बढ़ाया और उसकी एक चुकी को धीरे से मसलने लगा. दूसरा आदमी ने दूसरी चुकी पकड़ ली और halke-halke सहलाने लगा.

**पहला आदमी :**

“कितनी सॉफ्ट है… अभी भी गरम है… बहुत मज़ा आया आज.”

**दूसरा आदमी:**

“हाँ… अगली बार और टाइम ले कर आना… .”

वो दोनों थोड़ी देर और उसकी चूचियों को मसलते रहे — dheere-dheere, जैसे अब मज़ा ले रहे हों. ज़ैनब आपि chup-chaap लेती रही, सिर्फ सांसें तेज़ चल रही थी.

मैं वहां बैठा सब देख रहा था. अंदर से बहुत गरम हो चूका था.

वहां से बहार निकले तोह ज़ैनब आपि की हालत देख कर मेरा दिमाग गरम हो गया. उसका चेहरा माल से भरा हुआ था, बाल बिगड़े हुए, कपडे ast-vyast, चूचियों पर लाल निशाँ, और चलते वक़्त टाँगे thar-thar काँप रही थी.

मैं उसको पकड़ के दीवार से सत्ता दिया और ज़ोर से किश करने लगा. उसकी होंठ अभी भी गीले थे. मैंने उसके होंठ चूसे, जीभ उसके मुँह में दाल दी.

ज़ैनब आपि ने मुझे ज़ोर से धक्का दिया. उसकी सांस तेज़ थी.

**ज़ैनब आपि (थोड़ी गुस्से और शर्म के साथ):**

“बस कर असीम… यहाँ मत… लोग देख लेंगे… चल घर चलते हैं.”

वो जल्दी से रोड पर आ गयी. मैं मुस्कुराते हुए बाइक लेकर आया. उसने बिना कुछ बोले पीछे बैठ गयी. उसकी चूचियां मेरी पीठ से रगड़ रही थी.

बाइक स्टार्ट करते hi मैंने धीरे से बोलै,

**मैं:**

“आज कैसा लगा तुझे… दो मर्द ने मिलके… बोल… सच बोल… कितना मज़ा आया?”

ज़ैनब आपि ने पीछे से मेरी कमर को हल्का सा पिंच किया और हलकी सी तेज़ आवाज़ में बोली,

**ज़ैनब आपि:**

“तू बहुत गन्दा हो गया है….”

मैं ने स्पीड थोड़ी बढ़ा दी और मुस्कुराते हुए बोलै,

**मैं:**

“और तू रंडी की बच्ची… दोनों के लुंड एक साथ लेने में कितना मज़ा आया? सच बोल… तेरी छूट अभी भी गीली है न?”

ज़ैनब आपि ने थोड़ी देर चुप रह कर फिर हलके से बोलै,

**ज़ैनब आपि:**

“बहुत दर्द हुआ था… बहुत ज़ोर से छोड़ रहे थे… मैं रोने को हो गयी थी… लेकिन… लेकिन मज़ा भी आ रहा था… तू खुश है न? तेरी रैंड को दो मर्द ने छोड़ दिया… अब बोल… तेरा लुंड खड़ा हो गया था देख कर?”

मैं ने उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए बोलै,

**मैं:**

“बहुत खड़ा हो गया था… तू रोने को हो गयी थी… और मैं देख रहा था… कितनी प्यारी लग रही थी तू… दोनों के बीच में… बोल… अगले बार भी जायेगी न? या अभी भी शर्म आ रही है?”

ज़ैनब आपि ने मेरी कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया. उसकी आवाज़ अब थोड़ी गरम हो गयी थी,

**ज़ैनब आपि:**

“शर्म आ रही है… बहुत शर्म आ रही है… लेकिन… जब वो दोनों मुझे छोड़ रहे थे… मैं खुद नहीं रोक प् रही थी… तू ने मुझे रंडी बना दिया है असीम… अब बोल… अगले बार क्या प्लान है तेरा?”

मैं ने मुस्कुराते हुए बोलै,

**मैं:**

“अगली बार और भी मज़ा करवाऊंगा… तुझे… बोल… तेरा फवौरीते कौन था आज? वह मोटा वाला… या दूसरा वाला?”

ज़ैनब आपि ने हलके से हंस दिया और मेरा कन्धा हल्का सा काट लिया,

**ज़ैनब आपि:**

“दोनों ठीक थे… लेकिन तू सबसे बड़ा कमीना है… मुझे बेच रहा है… और खुद देख रहा है… अब घर पहुँच… मैं नहाउंगी… पूरा बदन दर्द कर रहा है…”

मैं ने धीरे से बोलै,

**मैं:**

“नहाने के बाद भी दर्द रहेगा… क्युकी मैं भी तुझे छोडूंगा आज रात… मेरी रैंड… मेरी प्यारी ज़ैनब…”

ज़ैनब आपि ने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ मेरी पीठ से और चिपक गयी. उसकी सांस मेरी गर्दन पर गरम पद रही थी.

हम दोनों घर पहुंचे तो हॉल बिलकुल खली था. ज़ैनब आपि ने कुछ नहीं बोलै. वो सीधा अपने रूम की तरफ चली गयी. उसकी चलते वक़्त टाँगे थोड़ी सी स्लो थी, जैसे अभी भी दर्द हो रहा हो.

मैं ने देखा अम्मी का कमरा बंद था. शायद सो रही थी.

मैं ऊपर अपने रूम की तरफ जा रहा था, तभी अनाम आपि के कमरे से halki-halki आवाज़ आने लगी — जैसे कोई धीरे से सांस ले रहा हो और “स्लुर्र्प… चुऊस…” जैसी गीली आवाज़.

मैं हैरान हो गया. मैं धीरे से उसके कमरे के दरवाज़े के पास पहुंचा और थोड़ा सा दरवाज़ा धकेला.

अंदर का नज़ारा देख कर मैं सच में हैरान रह गया.

बड़े मां बीएड पर नंगे बैठे थे. उनका मोटा लुंड बहार निकला हुआ था. बुशरा उनके सामने घुटनो के बल बैठी थी. उसकी पिंक कुर्ती ऊपर तक उठी हुई थी, ब्रा खुली हुई थी और उसके मध्यम साइज के टाइट चूचियां बहार थे. उसकी ब्लैक लेग्गिंग्स घुटनो तक नीचे थी.

बुशरा अपने अब्बू (बड़े मां) का मोटा लुंड मुँह में लिए हुए dheere-dheere चूस रही थी. उसकी जीभ टोपा पर घूम रही थी, कभी पूरा लुंड अंदर ले लेती, कभी बहार निकाल कर चाट टी. लार उसके होंठों से टपक रही थी.

बड़े मां ने उसके बाल को प्यार से सहलाते हुए धीरे से बोलै,

**बड़े मां:**

“हाँ बीटा… ऐसे hi… धीरे से… बहुत अच्छा लग रहा है… तेरी जीभ कितनी सॉफ्ट है… और थोड़ा अंदर ले… ”

बुशरा ने मुँह से लुंड निकाल कर हलकी सी सांस ली. उसकी आँखें शर्म से नीचे थी, पर उसने फिर से लुंड मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगी.

**बुशरा:**

“अब्बू… बहुत मोटा है… मुँह में नहीं आ रहा… धीरे… प्लीज…”

बड़े मां ने उसके बाल को प्यार से पकड़ा और हलके से उसके गाल पर थप्पड़ मारा

**बड़े मां:**

“अब्बू तुझे बहुत प्यार करते है… बस थोड़ा सा और अंदर ले… अच्छी लड़की… तेरी छूट भी इतनी टाइट है… मुँह से मज़ा दे…”

बुशरा ने आंसू भरी आँखों से सर हिला दिया और फिर से ज़ोर से चूसने लगी. उसकी जीभ tez-tez चल रही थी. लार उसके चीन से टपक रही थी और उसके चूचियों पर गिर रही थी.

बड़े मां ने उसके चूचियों को हाथ से पकड़ लिया और धीरे से मसलने लगा. निप्पल को ऊँगली से पिंच किया और हलके से बोलै,

**बड़े मां:**

“कितनी प्यारी चूचियां हैं तेरी… बहुत अच्छी लग रही है तू ऐसे… मेरी प्यारी बेटी…”

बुशरा ने मुँह से लुंड निकाल कर हलकी सी सिसकी ली,

**बुशरा:**

“अब्बू… बहुत शर्म आ रही है… लेकिन… आप जो कह रहे हो… मैं कर रही हूँ… धीरे… प्लीज…”

बड़े मां ने उसके बाल को प्यार से खिंचा और उसके मुँह में लुंड वापस दाल दिया.

**बड़े मां:**

“बस थोड़ा सा और… अब्बू झड़ने वाला है… तू पि लेगी न बीटा?… मेरी प्यारी बेटी… बहुत प्यार करता हूँ तुझे…”

मैं दरवाज़े के बहार खड़ा था. मेरा लुंड पायजामा में पूरा तन चूका था.

“उफ्फ्फ्फ़… मां कितने हरामी है… अपनी बेटी बुशरा को लुंड चुसवा रहा है… और बुशरा भी… पहले तोह मैं सोचता था सिर्फ अनाम और ज़ैनब… अब बुशरा भी… यह घर के लोग सच में पागल हो गए है…”

मैं तुरंत ज़ैनब आपि के रूम की तरफ गया. दरवाज़ा खुला था. वो नाहा कर फ्रेश हो कर बीएड पर बैठी थी — एक हल्का सा निघ्त्य पहनी हुई थी. बाल अभी भी थोड़े गीले थे.

मैं ने अंदर घुस कर उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे से खींचते हुए बोलै,

**मैं:**

“चल… जल्दी… कुछ दिखाना है तुझे.”

ज़ैनब आपि ने थोड़ा कंफ्यूज होकर मेरा हाथ छोड़ने की कोशिश की,

**ज़ैनब आपि:**

“क्या हुआ? कहाँ ले जा रहा है?”

मैं ने कुछ नहीं बोलै, सिर्फ उसका हाथ तिघ्टलय पकड़ कर अनाम आपि के रूम के पास ले गया. दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था. मैं ने उसको अपने साथ चिपका कर अंदर झाँकने को बोलै.

अंदर का नज़ारा देख कर ज़ैनब आपि का पूरा बदन काँप उठा. वो मेरे से और चिपक गयी, उसकी सांस तेज़ हो गयी.

बड़े मां बीएड पर थे. बुशरा उनके सामने लेती हुई थी — उसकी कुर्ती ऊपर तक उठी हुई थी, लेग्गिंग्स और पंतय घुटनो तक नीचे. उसकी टाँगे फैली हुई थी और मां उसके बीच में मुँह लगा कर बिलकुल वहशी तरीके से उसकी छूट चाट रहे थे.

मां की जीभ zor-zor से andar-bahar हो रही थी. वो कभी पूरा मुँह लगा कर छूट को चूस रहे थे, कभी जीभ को अंदर दाल कर अंदर घुमा रहे थे. “सलूरररप… puch-puch… चूऊउस…” की गन्दी, गीली आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी. बुशरा की छूट से पानी निकल रहा था और मां उसको chaat-chaat के पि रहे थे.

मां ने एक हाथ से बुशरा की गांड के दोनों हिस्से फैला रखे थे और जीभ से उसकी गांड के छेद को भी ज़ोर से चाट रहे थे — बिलकुल वहशी तरीके से. कभी छूट, कभी गांड, कभी दोनों एक साथ.

**बड़े मां:**

“बेटी… ऐसे hi… तेरी छूट बहुत मीठी है… कितनी गीली हो चुकी है… अब्बू को पूरा पीला दे अपना पानी… और यह छोटा सा छेद भी… बहुत टाइट है…… तू मेरी प्यारी बेटी है न… बोल… मज़ा आ रहा है?”

बुशरा नीचे लेती हुई सिसक रही थी. उसकी टाँगे काँप रही थी. उसकी आवाज़ tooti-tooti थी,

**बुशरा (सिसकते हुए):**

“अब्बू… अह्ह्ह… बहुत… बहुत गन्दा लग रहा है… लेकिन… मत रुकना… उफ्फ्फ्फ़… जीभ अंदर डालो… और ज़ोर से… अह्ह्ह्ह…”

मां ने और ज़ोर से मुँह लगा दिया. उनकी जीभ अब बुशरा की छूट के अंदर तक घूम रही थी और कभी ऊपर निकल कर उसकी गांड के छेद को भी चाट रहे थे. उसकी लार बुशरा की छूट और गांड पर टपक रही थी.

ज़ैनब आपि मेरे से और तिघ्टलय चिपक गयी. उसकी सांस मेरी गर्दन पर गरम पद रही थी. उसकी चूचियां मेरी पीठ से रगड़ रही थी.

**ज़ैनब आपि (बहुत हलकी, कांपती आवाज़ में):**

“असीम… यह… यह क्या हो रहा है… बुशरा… … उफ्फ्फ्फ़… बहुत गन्दा है… लेकिन… मैं देख नहीं प् रही…”

मैं ने उसको और चिपका कर धीरे से बोलै,

**मैं:**

“देख… देखती रह… मां कितने वहशी तरीके से चाट रहे हैं… छूट और गांड… बिलकुल कुत्ता बन कर…”

ज़ैनब आपि ने कुछ नहीं बोलै. सिर्फ मेरी कमर को तिघ्टलय पकड़ लिया और अंदर देखती रही. उसकी सांस अब और तेज़ हो गयी थी.

ज़ैनब आपि अब फिर से गरम हो चुकी थी. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी, आँखें आधी बंद, चेहरा लाल. मैं ने उसका हाथ पकड़ लिया और धीरे से खींचते हुए अपने रूम की तरफ ले गया. दरवाज़ा बंद करते hi मैंने उसको दीवार से सत्ता दिया और उसके होंठ पे अपने होंठ रख दिए.

मैं उसके होंटो को किसने लगा . उसकी जीभ मेरे मुँह में आ गयी, मैंने उसकी जीभ को अपनी जीभ से लपेटा और ज़ोर से चूसने लगा. दोनों के मुँह से हलकी “ममम… अहह…” की आवाज़ें निकल रही थी.

मैं ने उसके निघ्त्य के स्ट्राप को खिंच कर नीचे किया. निघ्त्य उसके कंधे से सरक कर नीचे गिर गयी. उसकी बड़ी चूचियां बहार आ गयी — गरम, भरी हुई, निप्पल सख्त. मैंने दोनों हाथों से उनको पकड़ लिया और धीरे से मसलने लगा.

**मैं :**

“बहुत गरम हो गयी है तू… अभी भी उन दोनों के लुंड की याद आ रही है क्या?”

ज़ैनब आपि ने मुझे ज़ोर से किश किया, फिर मेरे होंठ छोड़ कर मेरी गर्दन पर मुँह रख दिया और हलके से काट लिया.

**ज़ैनब आपि (सांस फूलते हुए, थोड़ी तेज़ आवाज़ में):**

“चुप कर… तू भी तोह देख रहा था… कितना गरम हो गया था तू… अब बोल… तुझे क्या चाहिए?”

मैंने उसको उठा कर बीएड पर लिटा दिया. उसकी निघ्त्य पूरी नीचे कर दी. वो अब बिलकुल नंगी लेती हुई थी. मैंने उसके ऊपर चढ़ गया और उसके दोनों हाथों को उसके सर के ऊपर पकड़ लिया.

**मैं (उसके होंठ चूसते हुए):**

“आज तू मेरी है… सिर्फ मेरी… जो मैं बोलूंगा… वो करना पड़ेगा… समझी मेरी रैंड?”

ज़ैनब आपि ने मुझे देखा. उसकी आँखों में शर्म thi.Usne अपनी टाँगे मेरे कमर के अराउंड लपेट ली और मुझे अपनी तरफ खींच लिया.

**ज़ैनब आपि:**

“तू मेरा दल्ला भाई बन गया है… और मैं तेरी रैंड बहन… …”

मैंने उसके होंठ को जोर से चूसने लगा और उसके चूचियों को मसलने लगा. निप्पल को उँगलियों के बीच पकड़ कर हल्का सा मरोड़ किया.

ज़ैनब आपि ने मुझे ज़ोर से धक्का दिया और मुझे नीचे लिटा दिया. अब वो मेरे ऊपर चढ़ गयी. उसकी चूचियां मेरे सीने पर डाब रही थी. उसने मेरा लुंड हाथ में पकड़ लिया और अपनी गीली छूट के मुँह पर रगड़ने लगी.

**ज़ैनब आपि:**

“तू बोलता है मैं तेरी रैंड हूँ… लेकिन आज मैं तुझे दिखाउंगी की रैंड कैसे चुदती है… बोल… तेरा लुंड कितना तड़प रहा है मेरी छूट के लिए?”

मैंने उसकी कमर पकड़ ली और उसको नीचे की तरफ दबाया. मेरा लुंड उसकी छूट में धीरे से घुसने लगा.

**मैं (उसके कान में):**

“ले… ले मेरी रैंड… पूरा अंदर ले……”

ज़ैनब आपि ने सांस रोकते हुए मेरा लुंड अंदर लिया. उसकी छूट बहुत गीली और गरम थी. वो मेरे ऊपर बैठ कर dheere-dheere उछलने लगी. उसकी चूचियां zor-zor से हिल रही थी.

**ज़ैनब आपि:**

“अह्ह्ह… बहुत अंदर जा रहा है… तू मेरा है असीम… …”

**मैं (उसके चूचियों को मसलते हुए):**

“साली… कितनी टाइट है तेरी छूट… आज मैं तुझे इतना छोडूंगा की तू कल भी मेरी याद करेगी… मेरी प्यारी रैंड…”

**ज़ैनब आपि (मेरी गर्दन को काट ते हुए):**

“तू भी मेरा है… dalla…aur अंदर दाल कुत्ते… और ज़ोर से… अह्ह्ह… मैं तेरी हूँ… …”

हम दोनों पागलो की तरह एक दूसरे से लिपट कर एक दूसरे को होंटो को चूमते हुए चुदाई में लग गए. रूम में सिर्फ हम दोनों की सांसें और हलकी सिसकारियां गूँज रही थी.
 
रात करीब 10:30 बजे थे. मैं हॉल में बैठा मोबाइल देख रहा था जब बहार गेट की आवाज़ आयी. अब्बू और अनाम आपि वापस आ गए थे.



अनाम आपि अंदर आते hi मैं समझ गया उसकी चल में थकान थी, बाल थोड़े बिगड़े हुए थे, दुपट्टा सीने पर लपेटा हुआ था फिर भी उसके चूचियों का साइज साफ़ दिख रहा था. चेहरा लाल था, आँखें थोड़ी सी सूझी हुई लग रही थी. लग रहा था जैसे किसी ने उसको सच में बहुत ज़ोर से ठोका हो.

अब्बू के चेहरे पर भी थकान थी, लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी.

बड़े मां सोफे पर बैठे थे, टीवी में क्रिकेट मैच देख रहे थे. दोनों को देख कर उन्होंने हलके से मुस्कुराते हुए रिमोट साइड में रख दिया.

**बड़े मां:**

“अरे वापस आ गए? कितनी देर लगा दिया आज… शॉप में इतना काम था क्या?”

अब्बू ने जूतें उतारते हुए थोड़ा सा मुस्कुराये और सोफे के पास आ कर बैठ गए.

**अब्बू:**

“हाँ भाई… आज बहुत रश था. Do-teen कस्टमर्स लेट तक बैठे रहे. अनाम ने भी थोड़ा हाथ बताया… इसलिए देर हो गयी.”

अनाम आपि ने कुछ नहीं बोलै. वो सीधा अंदर की तरफ जाने लगी. उसकी चल में हल्का सा दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था.

बड़े मां ने उसकी तरफ देखा और हलके से बोलै,

**बड़े मां:**

“अनाम बीटा… थक गयी लग रही है…?”

अनाम आपि ने नज़र नीचे किये हुए hi हलके से सर हिला दिया.

**अनाम आप:**

“नहीं मां… मैं जा रही हूँ… बहुत थक गयी हूँ.”

वो जल्दी से अपने रूम की तरफ चली गयी. जाते वक़्त उसने दरवाज़े को धीरे से बंद किया.

जैसे hi अनाम आपि अंदर चली गयी, बड़े मां ने अब्बू की तरफ देखा. उनके होंठों पर एक छोटी सी स्माइल थी.

**बड़े मां:**

“भाई… आज बहुत थकी हुई लग रही थी अनाम बेटी. क्या बात है? शॉप में इतना काम था की लड़की इतनी परेशां हो गयी?”

**अब्बू:**

“काम तोह था… लेकिन… थोड़ा और भी था.”

बड़े मां ने एएब्रो ऊपर किया और हलके से हंस दिए.

**बड़े मां:**

“थोड़ा और? मतलब?”

**अब्बू (धीरे से):**

“वहां… पुराने गोडाउन में ले गया था उसको. थोड़ा टाइम मिला था. बहुत… बहुत ज़ोर से हो गया आज. लड़की थक गयी सच में.”

बड़े मां ज़ोर से हंस पड़े. उन्होंने अब्बू के कंधे पर हाथ रखा.

रात मैं बीएड पर लेता हुआ था जब दरवाज़ा धीरे से खुला. ज़ैनब आपि अंदर आयी. उसकी आँखों में एक अजीब सी भूख थी. वो सीधा मेरे बीएड पर आ कर मेरे ऊपर चढ़ गयी.

हम दोनों एक दूसरे को देखते रहे कुछ सेकण्ड्स. फिर मैंने उसको खींच कर अपने सीने से लगा लिया. उसकी जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी, मैं उसके होंठ को चूस रहा था जैसे बहुत दिन से प्यासा हूँ.

**मैं:**

“तू आ गयी… मैं सोच रहा था आज रात तू नहीं आएगी…”

**ज़ैनब आपि (मेरी गर्दन को चूसते हुए, हलकी सी तेज़ आवाज़ में):**

“चुप कर… मैं खुद नहीं रोक प् रही… दिन भर जो हुआ… उसके बाद भी तेरी याद आ रही थी… तू ने मुझे इतना बिगाड़ दिया है असीम…”

मैंने उसकी निघ्त्य को ऊपर खींच कर उतार दिया. वो बिलकुल नंगी हो गयी मेरे ऊपर. उसकी बड़ी चूचियां मेरे सीने पर डाब रही थी. मैंने एक हाथ से उसकी कमर पकड़ ली और दूसरे से उसकी एक चुकी को ज़ोर से मसल दिया. निप्पल को उँगलियों के बीच पकड़ कर मरोड़ दिया.

**मैं:**

“आज तू मेरी है… पूरी तरह… बोल… तेरा दल्ला तुझे छोड़ना चाहता है… कितनी गीली है तू अभी?”

ज़ैनब आपि ने मुझे ज़ोर से धक्का दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर बैठ गयी. उसकी गीली छूट मेरे लुंड पर रगड़ रही थी.

**ज़ैनब आपि (मेरी आँखों में देखते हुए):**

“तू मेरा दल्ला है……”

उसने मेरा लुंड हाथ में पकड़ा और अपनी छूट के मुँह पर सेट किया. फिर धीरे से नीचे बैठ गयी. मेरा लुंड उसकी टाइट, गीली छूट में पूरा घुस गया

**ज़ैनब आपि (सिसकते हुए):**

“अह्ह्ह… … असीम… तू मेरा है ”

हम दोनों पागलो की तरह एक दूसरे से लिपट गए. मैं नीचे से zor-zor से धक्के मार रहा था, वो ऊपर से उछाल रही थी. उसकी चूचियां ज़ोर से हिल रही थी.

**मैं (उसके चूचियों को ज़ोर से मसलते हुए):**

“साली… कितनी टाइट है तेरी छूट… दिन भर दो मर्दों से छुड़वा के भी अभी भी तड़प रही है… मेरी प्यारी रैंड…”

**ज़ैनब आपि (मेरी पीठ पर नाख़ून गड़ाते हुए, गरम आवाज़ में):**

“हाँ… मैं तेरी रैंड हूँ… लेकिन तू भी मेरा दल्ला है… और ज़ोर से… छोड़ मुझे… अह्ह्ह… मैं तेरे बिना नहीं रह सकती अब…”

कुछ देर बाद मैंने उसको रोक कर बोलै,

**मैं (उसके होंठ चूसते हुए):**

“चल… अब कुछ दिखता हूँ तुझे…”

ज़ैनब आपि ने कंफ्यूज होकर मुझे देखा. मैंने उसको उठाया, उसके ऊपर सिर्फ एक चादर लपेट दी और उसका हाथ पकड़ कर छत के दरवाज़े की तरफ ले गया.

छत पर पहुँच कर मैंने दरवाज़ा थोड़ा सा खोला. ज़ैनब आपि ने अंदर झाँका और उसका मुँह खुला रह गया. उसकी आँखें फैल गयी.

चेयर पर बड़े मां और अब्बू दोनों बैठे थे. अनाम आपि बिलकुल नंगी उनके सामने घुटनो के बल बैठी थी. उसकी चूचियां बहार थे, गांड ऊपर थी. वो दोनों के लुंड एक साथ चूस रही थी एक हाथ में मां का मोटा लुंड, दूसरे हाथ में अब्बू का. उसकी जीभ दोनों के तोपों पर पागलो की तरह घूम रही थी. लार उसके चीन से टपक रही थी.

मां ने उसके बाल पकड़ कर उसको ज़ोर से गधक्का दिया

**बड़े मां*

“saali…aur ज़ोर से चूस मादरचोद…”

अनाम आपि ने “ग्लुक… ग्लुक” की आवाज़ के साथ दोनों लुंड को अंदर लिया. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे.

अब्बू ने उसके गाल पर हाथ फेरते हुए हलके से सिसकारी ली,

**अब्बू (मज़े में, थोड़ी शर्म के साथ):**

“अनाम… बीटा… बहुत अच्छा लग रहा है… अब्बू को बहुत प्यार दे रही है तू आज…”

मां ने उसके सर को और ज़ोर से धकेला और बोलै,

**बड़े मां:**

“… ले पूरा…… अच्छी बेटी… हमारी रंडी…”

ज़ैनब आपि मेरे से और चिपक गयी. उसकी सांस तेज़ हो गयी थी. उसकी उँगलियाँ मेरी कमर में गड रही थी.

**ज़ैनब आपि (बहुत हलकी, कांपती आवाज़ में):**

“असीम… यह… अनाम आपि… दोनों के साथ… उफ्फ्फ्फ़… मैं क्या देख रही हूँ…”

मैं ने उसके कान में धीरे से बोलै,

**मैं:**

“देख… तेरी बेहेन को"

मां और अब्बू ने अनाम आपि को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. अनाम आपि की टाँगे thar-thar काँप रही थी. उसकी सांसें बहुत तेज़ चल रही थी.

अब्बू नीचे बैठ गए और उसकी छूट के बिलकुल सामने मुँह ले गए. उन्होंने धीरे से उसकी टाँगे थोड़ी और फैलाई और जीभ से उसकी छूट को चाटना शुरू कर diya.Unki जीभ छूट के मुँह पर upar-neeche घूम रही थी, कभी अंदर दाल कर घुमा रहे थे.

**अब्बू:**

“बीटा… कितनी गीली हो चुकी है तू… बहुत मीठी है तेरी छूट… अब्बू को बहुत मज़ा आ रहा है…”

मां उठ कर पीछे चले गए. उन्होंने अनाम आपि की गांड के दोनों हिस्से हाथों से फैला दिए और मुँह लगा कर उसकी गांड के छेद को ज़ोर से चाटने लगे. उनकी जीभ टाइट छेद पर zor-zor से घूम रही थी, कभी अंदर डालने की कोशिश कर रहे थे.

**बड़े मां :**

“साली… तेरी यह टाइट गांड… अह्ह्ह…”

अनाम आपि दीवार का सहारा ले कर कड़ी थी. उसका पूरा बदन काँप रहा था. उसकी सिसकारियां अब रुक नहीं रही थी. उसकी टाँगे dheere-dheere हिल रही थी.

**अनाम आपि (पागल सी सिसकारी लेते हुए, टूटी आवाज़ में):**

“अह्ह्ह… अब्बू… मां… उफ्फ्फ्फ़… बहुत… बहुत गन्दा कर रहे हो… मैं पागल हो जाउंगी… अह्ह्ह… मत रुकना… प्लीज… और ज़ोर से…”

उसकी सिसकारियां तेज़ होती जा रही थी. कभी वो दीवार को ज़ोर से पकड़ लेती, कभी उसकी गांड खुद hi पीछे की तरफ हिलने लगती. उसकी छूट से पानी निकल रहा था और अब्बू उसको chaat-chaat के पि रहे थे. मां की जीभ उसकी गांड के छेद में घूम रही थी.

ज़ैनब आपि और मैं छत के दरवाज़े के पास खड़े थे. यह सब देख कर हम दोनों बहुत गरम हो गए थे. ज़ैनब आपि की सांसें तेज़ हो गयी थी. उसने जो चादर लपेटी हुई थी, वो धीरे से नीचे गिरा दी. अब वो बिलकुल नंगी कड़ी थी मेरे साथ.

मैं ने पीछे से उसको अपने सीने से चिपका लिया. मेरा एक हाथ उसकी चूचियों पर गया और दूसरा हाथ नीचे उसकी छूट पर. उसकी छूट बहुत गीली हो चुकी थी. मैंने उँगलियों से उसकी छूट को धीरे से मसलना शुरू कर दिया.

**मैं:**

“देख… रंडी की bacchi....teri बेहेन को दोनों चाट रहे हैं…”

ज़ैनब आपि ने मेरी उँगलियों पर अपनी छूट रगड़ते हुए हलकी सी सिसकी ली.

**ज़ैनब आपि:**

“असीम… यह देख कर… मैं खुद नहीं रोक प् rahi…uffff… और ज़ोर से मसल… प्लीज…”

मैं ने उसकी छूट को और अंदर तक मसलना शुरू कर दिया. मेरी ऊँगली उसकी छूट के अंदर जाने लगी. ज़ैनब आपि ने दीवार का सहारा ले लिया और अपनी गांड मेरी तरफ पीछे की तरफ कर दी.

हम दोनों chup-chaap, गरम सांस लेते हुए यह सब देख रहे the.Anam आपि की सिसकारियां अब और तेज़ हो गयी थी.

अब्बू धीरे से उठ कर अनाम आपि के बगल में खड़े हो गए. उन्होंने उसके बाल को प्यार से सहलाया और उसके गाल पर हाथ फेरते हुए हलके से बोलै,

**अब्बू (गरम सांस में):**

“बीटा.. आवाज़ मत निकलना…”

मां ने पीछे से अनाम आपि को जोर से पकड़ लिया. एक हाथ से उसका मुँह ज़ोर से बंद कर दिया उनकी बड़ी हाथ उसके होंठ और नाक को कवर कर रही थी. दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़ कर उसको थोड़ा झुका दिया.

**बड़े मां :**

“चुप… बिलकुल चुप… अगर आवाज़ निकली न… तोह बहुत बुरा होगा… समझी₹

अनाम आपि की आँखें फैल गयी. वो कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मां का हाथ उसके मुँह पर तिघ्टलय था. सिर्फ halki-halki “ममम… ममम…” की आवाज़ निकल रही थी आपि के मुँह से..

मां ने अपना मोटा लुंड उसकी छूट के मुँह पर सेट किया और बिना किसी धीरे से एक ज़ोर का धक्का मारा.

**धायआपपप!!!**

अनाम आपि का पूरा बदन एक झटके से हिल गया. मां का मोटा लुंड एक hi धक्के में उसकी छूट के अंदर तक घुसा था. उसकी चीख मां के हाथ में डाब गयी — सिर्फ एक डब्बड सी “मममममपहहहह!!!” की आवाज़ निकली.

**बड़े मां (उसके मुँह को और ज़ोर से बंद करते हुए, गुर्राते हुए):**

“हाँ… ऐसे hi… ले पूरा… तेरी छूट बहुत टाइट है आज भी… मादरचोद. चुप रह कुटिया…”

मां ने अब zor-zor से धक्के मरना शुरू कर दिया. हर धक्का बहुत बेदर्द था. उसकी गांड ज़ोर से हिल रही थी. मां का पेट उसकी गांड से टकरा रहा था — “धप… धप… धप… धप…” की तेज़ आवाज़ें हो रही थी.

अनाम आपि की आँखों से आंसू बह रहे थे. उसका पूरा बदन पसीने से भीग चूका था. मां का हाथ उसके मुँह पर अभी भी तिघ्टलय था, इसलिए वो सिर्फ सिसकारियां दबा रही थी.

**अनाम आपि:**

“मममममफ… अह्ह्ह्ह…… उफ्फ्फ्फ़… पहात जाएगी… मां… धीरे…”

लेकिन मां नहीं रुक रहे थे. उन्होंने उसकी कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया और स्पीड बढ़ा दी.

**बड़े मां :**

“साली… तेरी छूट मेरा लुंड निगल रही है… कितनी बड़ी रैंड है तू… बेटी होकर अपने मां से छुड़वा रही hai…i… बोल… मज़ा आ रहा है न? हाँ बोल… रंडी की बच्ची…”

अब्बू बगल में खड़े थे. उनका लुंड हाथ में था और वो dheere-dheere हिलाते हुए देख रहे थे. उनकी आँखें अनाम आपि के हिलते हुए चूचियों और हिलती हुई गांड पर थी.

**अब्बू:**

“अनाम… बीटा… बहुत अच्छा लग रहा है… तू बहुत प्यारी लग रही है ऐसे…”

अनाम आपि अब बिलकुल पागल सी हो चुकी थी. उसकी टाँगे काँप रही थी, आंसू बह रहे थे, लेकिन उसकी गांड खुद hi thoda-thoda पीछे की तरफ हिल रही थी मां के धक्कों के साथ.

मां ने उसके मुँह पर हाथ को थोड़ा सा ढीला किया ताकि वो सांस ले सके, लेकिन तुरंत फिर से तिघ्टलय पकड़ लिया और और ज़ोर से धक्के मरने लगे.

ज़ैनब आपि मेरे से चिपकी हुई थी. उसकी सांस बहुत तेज़ चल रही थी. मैं उसकी छूट को पीछे से मसल रहा था.

मां ने अनाम आपि की कमर को लास्ट टाइम ज़ोर से पकड़ा और धक्का मारा. उनका पूरा बदन काँप उठा.

**बड़े मां**

“आअह्ह्ह… ले बीटा… मेरा माल… अह्ह्ह्हह!!”

गरम माल अनाम आपि की छूट के अंदर भरने लगा. मां थक कर पीछे हैट गए, उनकी सांस तेज़ चल रही थी.

जैसे hi मां हेट, अब्बू तुरंत आगे बढे. उन्होंने अनाम आपि को दीवार के सहारे hi रखा और पीछे से उसकी कमर पकड़ ली. बिना कुछ बोले उन्होंने अपना लुंड उसकी माल से भरी छूट में दाल दिया और चुपचाप zor-zor से धक्के मरना शुरू कर दिया.

**धप… धप… धप… धप…**

हर धक्का तेज़ था. अनाम आपि की गांड ज़ोर से हिल रही थी.

**अनाम आपि (सिसकते हुए, दर्द और मज़ा के साथ):**

“अह्ह्ह… अब्बू… बहुत…… उफ्फ्फ्फ़… मैं… मैं नहीं सह पाउंगी…”

अब्बू ने एक हाथ से उसके बाल पकड़ लिए और दूसरे हाथ से उसकी कमर को तिघ्टलय पकड़ लिया. उनकी धक्के रुक नहीं रहे थे.

**अब्बू:**

“बीटा… अब्बू को माफ़ कर… आज बहुत मैं कर रहा था… तू बहुत प्यारी लग रही है… ले… ले पूरा… अब्बू तुझे बहुत प्यार करता है…”

अनाम आपि की आँखों से आंसू बह रहे थे. उसकी सिसकारियां तेज़ हो गयी थी. अब्बू ने उसके बाल को थोड़ा और खिंचा और उसके कान में धीरे से बोलै,

**अब्बू:**

“रो मत मेरी जान… अब्बू जानता है दर्द हो रहा है… लेकिन तू मेरी बेटी है न? मेरी प्यारी बेटी… थोड़ा सा और सहेगी… फिर बहुत अच्छा लगेगा…”

उसने एक हाथ से उसकी एक चुकी को पकड़ लिया और ज़ोर से मसलने लगे

**अनाम आपि **

“अब्बू… आप… अह्ह्ह्ह… मेरी चूचियां… बहुत दर्द हो रहा है… ”

अब्बू ने उसकी कमर को और तिघ्टलय पकड़ लिया और स्पीड बढ़ा दी. अब धक्के और भी तेज़ हो गए थे. हर धक्के के साथ उसकी गांड ज़ोर से टकरा रही थी अब्बू के पेट से.

अनाम आपि सिर्फ सिसक रही थी. उसकी टाँगे काँप रही थी. अब्बू ने उसके मुँह पर हाथ रख कर उसकी सिसकारी दबाने की कोशिश की और उसके कान में प्यार से बोलै,

**अब्बू:**

“चुप… चुप कर मेरी जान… कोई सुन लेगा… अब्बू तुझे बहुत प्यार करता है… … तू समझ रही है न?”

उन्होंने फिर से उसकी चूचियों पर थप्पड़ मारा

**अनाम आपि :**

“हाँ अब्बू… समझ रही हूँ… आप… आप जो कर रहे हो… मैं… मैं आपकी हूँ… अह्ह्ह्ह… और ज़ोर से… … प्लीज…”

अब्बू ने उसके बाल को छोड़ कर उसकी गर्दन को प्यार से सहलाया, फिर वही हाथ नीचे ले जाकर उसकी क्लीट पर ऊँगली फेरने लगे.

**अब्बू … मेरी प्यारी बेटी… अब्बू को बहुत मज़ा आ रहा है…

ज़ैनब आपि मेरे से चिपकी हुई थी. उसकी सांस बहुत तेज़ चल रही थी. मैं उसकी छूट को पीछे से मसल रहा था.

**ज़ैनब आपि (बहुत हलकी आवाज़ में):**

“असीम… देखो… अब्बू… अनाम आपि को…”

हम दोनों छत से निचे आये. ज़ैनब आपि का चेहरा अभी भी लाल था और सांसें तेज़ चल रही थी. मैं उसका हाथ पकड़ कर अपने रूम में ले गया और दरवाज़ा बंद कर दिया. दोनों बीएड पर बैठ गए..

उसकी आँखों में शर्म थी, लेकिन कुछ और भी था.

**ज़ैनब आपि (हलकी आवाज़ में):**

“असीम… यह सब देख कर… मैं बहुत गरम हो गयी थी ऊपर. तू बता… तुझे क्या लग रहा था जब अनाम आपि दोनों के साथ थी?”

मैं ने उसके हाथ को अपने हाथ में ले लिया और धीरे से उँगलियों को सहलाते हुए बोलै,

**मैं:**

“बहुत गरम लग रहा था… लेकिन सच बताऊँ? मुझे और भी चीज़ें सोचने लगी थी. तू बता पहले… तुझे आज सबसे ज़्यादा क्या पसंद आया? या क्या सोच रही थी जब हम देख रहे थे?”

ज़ैनब आपि ने थोड़ी देर चुप रह कर गहरी सांस ली. उसकी आवाज़ बहुत हलकी और शर्मीली थी,

**ज़ैनब आपि:**

“मैं… मैं सोच रही थी की… अगर मां और अब्बू मुझे भी ऐसे hi पकड़ लेते… दोनों तरफ से… एक मेरे मुँह में, दूसरा पीछे से… और मैं कुछ नहीं कर पाती… बहुत डर लगता है सोच कर… लेकिन… अंदर से गरम भी हो जाती हूँ. तू क्या सोचता है ऐसी बातों में?”

मैं ने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसको अपने पास खींच लिया. उसकी गर्दन पर हल्का सा किश किया और धीरे से बोलै,

**मैं:**

“मैं kabhi-kabhi सोचता हूँ की घर में सब लड़कियां… तू, अनाम आपि, नूर, अम्मी… सब एक साथ… और हम सब मर्द उनको शेयर कर रहे हैं. तू इमेजिन कर… तू और अनाम आपि एक साथ बीएड पर लेती हुई… मां, अब्बू और मैं… तीनो तुम दोनों को छोड़ रहे हैं.. तुझे कैसा लगेगा ऐसा?”

ज़ैनब आपि ने मेरी सीने पर सर रख दिया. उसकी उँगलियाँ मेरे शर्ट पर थी. उसकी आवाज़ अब थोड़ी गरम हो गयी थी,

**ज़ैनब आपि:**

“बहुत गन्दा लग रहा है सुन कर… लेकिन सच बोलूं? मुझे भी एक बार सोचा था… की अगर कोई बहार वाला आदमी घर आये और सबको ब्लैकमेल करे… फिर हम सबको उसके सामने खड़ा कर दे… और हम सब उसके लिए कुछ भी करने को मजबूर हो जाएँ. मैं सोचती हूँ… मैं सबसे पहले उसके सामने नंगी हो जॉन… और बाकी सब देख रहे हों. डर भी लगता है… लेकिन एक्ससिटेमेंट भी होती है. तू क्या सोचता है… अगर मैं सच में किसी और के सामने तेरी रैंड बन जॉन… तुझे कैसा फील होगा?”

मैं ने उसके बाल में हाथ फेरते हुए मुस्कुराते हुए बोलै,

**मैं:**

“मुझे… शायद बहुत गुस्सा आये… लेकिन साथ hi लुंड खड़ा हो जाए. सोच… तू किसी और के सामने घुटनो के बल बैठी हो… और वो तुझे गालियां दे रहा हो… मैं साइड में बैठा देख रहा हूँ. फिर वो तुझे छोड़ रहा हो और तू मेरी तरफ देखती हुई बोल रही हो की ‘असीम… देख… मैं तेरी रंडी हूँ…. बहुत डार्क है न? लेकिन यह सोच कर hi मेरा लुंड खड़ा हो जाता है.”

ज़ैनब आपि ने मेरी तरफ देखा. उसकी आँखों में शर्म थी, लेकिन आँखें चमक रही थी.

**ज़ैनब आपि:**

“तू बहुत गन्दा सोचता है… लेकिन मैं भी काम नहीं हूँ. एक फंतासी है मेरी… की घर में कोई फंक्शन हो… बहुत सारे लोग हों… और किसी तरह से हम सब लड़कियां अलग कमरे में चली जाएँ… और वहां कुछ मर्द हमें रोक लें. फिर हम सबको ek-ek करके… और हम मन नहीं कर पाएं. सब देख रहे हों… लेकिन कुछ बोल नहीं रहे हों. तू वहां होगा… देख रहा होगा… और मैं तुझे देखती रहूंगी.”

मैं ने उसको और पास खींच लिया और उसके होंठ पे हल्का सा किश किया.

**मैं:**

“बहुत मज़ा है यह सब… लेकिन यह फैंटसीज hi तोह हमें इतना गरम करती हैं. सच में अगर यह सब हुआ… तोह तू हैंडल कर पाएगी? या रो देगी?”

ज़ैनब आपि ने मेरी सीने पर सर रख दिया और धीरे से बोली,

**ज़ैनब आपि:**

“पता नहीं… शायद रो भी दूंगी… लेकिन अंदर से मज़ा भी आएगा. तू बता… अगर मैं सच में किसी और के सामने तेरी रैंड बन जॉन…

**मैं""

चुप मादरचोद चैनल रंडी



हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए
 
सुबह जब मेरी आँख खुली तोह घर में सन्नाटा था. अब्बू और बड़े मां दोनों शायद शॉप पर निकल चुके थे. अम्मी किचन में बर्तन धो रही थी, नूर कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी और ज़ैनब आपि अपने रूम में थी शायद.



मैं उठा, मुँह धोया और सीधा हॉल में आ गया. नाश्ता टेबल पर लगा हुआ था. अनाम आपि भी वहीँ थी. उसकी आँखें थोड़ी सूझी हुई थी, चेहरा हल्का लाल. कल रात की थकान अभी भी उसके चेहरे पर दिखाई दे रही थी. वो लाइट पिंक सलवार सूट में थी, दुपट्टा कंधे पर लटका हुआ था. जब वो झुक कर पराठा उठा रही थी, उसके bade-bade चूचिया कुर्ते के अंदर से हलके से हिल रहे थे.

मैंने टेबल पर बैठते हुए उसकी तरफ देखा. वो मेरी तरफ देखि और आँखें झुका ली. चेहरे पर एक थकी हुई सी मुस्कराहट थी.

नाश्ता ख़तम होने के बाद नूर जल्दी से बैग उठा कर कॉलेज चली गयी. अम्मी भी किचन में काम में लग गयी. हॉल में सिर्फ मैं और अनाम आपि रह गए.

मैं धीरे से उठा और उसके पास चला गया. उसने मुझे देखा तोह थोड़ा सा पीछे हैट गयी, लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.

**मैं (बहुत हलकी आवाज़ में):**

“आपि… कमरे में चलो… 2 मिनट के लिए.”

अनाम आपि ने idhar-udhar देखा. अम्मी किचन में थी, उसने धीरे से सर हिला दिया और मेरे peeche-peeche अपने रूम की तरफ चली गयी.

जैसे hi दरवाज़ा बंद हुआ, मैंने उसको दीवार से सत्ता दिया. उसकी सांसें तुरंत तेज़ हो गयी. मैंने उसके दोनों हाथों को ऊपर की तरफ पकड़ लिया और उसके होंठ पे अपने होंठ रख दिए.

मेरी जीभ उसके मुँह में घुस गयी, उसकी जीभ से टकराई. दोनों की जीभें एक दूसरे को चाटने लगी. लार की हलकी सी आवाज़ आ रही थी. मैं उसके होंठ को ज़ोर से चूस रहा था, काट रहा था. अनाम आपि भी अब कण्ट्रोल खो चुकी थी — उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में दाल दी और ज़ोर से चूसने लगी.

**अनाम आपि :**

“मममहह… असीम…… धीरे… कोई आ जायेगा…”

मैं ने उसके हाथ छोड़े नहीं. एक हाथ से उसके दोनों हाथ ऊपर पकडे रखे, दूसरे हाथ से उसके bade-bade चुके को कुर्ते के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसलने लगा. उसकी चूचियां मेरे हाथों में गरम और भरी हुई लग रही थी.

मैं उसके होंठ छोड़ कर उसकी गर्दन पर मुँह ले गया और zor-zor से चूसने लगा. अनाम आपि की गर्दन पे लाल निशाँ पड़ने लगे.

**मैं :**

“आपि… कल रात बहुत ज़ोर से चूड़ी… अब्बू और मां ने मिलके… बोल… मज़ा आया था?”

अनाम आपि ने आँखें बंद कर ली और सिर्फ सिसक रही थी. मैं ने उसके कुर्ते का पल्ला साइड किया और ब्रा के ऊपर से चूचियों को और ज़ोर से मसलने लगा. निप्पल को ऊँगली से पकड़ कर हलके से मरोड़ दिया.

फिर मैंने उसको घुमा दिया — अब उसकी पीठ मेरी तरफ थी. मैंने उसके बाल पकड़े और गर्दन पे फिर से चुम्मा लेने लगा. दूसरा हाथ नीचे ले जाकर उसकी सलवार के ऊपर से उसकी छूट को मसलने लगा.

**अनाम आपि (कांपते हुए):**

“अह्ह्ह… असीम… बहुत… बहुत थक गयी हूँ मैं……”

मैं ने उसकी सलवार का नाडा खोला और हाथ अंदर दाल दिया. उसकी पंतय आलरेडी गीली थी. मैंने ऊँगली से उसकी छूट के मुँह को रगड़ने लगा.

तब मैंने उसके कान में धीरे से पुछा,

**मैं:**

“आपि… अब तक कितने पैसे जमा हो गए हैं tere…sab से छुड़वाकर… सब मिलकर कितना बन गया?”

अनाम आपि ने शर्मा कर आँखें नीचे कर ली. उसकी सांस बहुत तेज़ चल रही थी. मैंने उसकी छूट में एक ऊँगली धीरे से अंदर डाली.

**अनाम आपि (सिसकती हुई):**

“अर्जुन से… पहले 50,000… फिर दो बार में और 40,000… राहुल के साथ 30,000…उस आअदमी के 50000 …..उफ्फर आराम से ”

मैं ने उसकी छूट में ऊँगली andar-bahar करते हुए बोलै,

**मैं:**

“मतलब अब तक तेरे छुड़वाकर लगभग 1 लाख 70 हज़ार बन गए हैं… सही है न?”

अनाम आपि ने सर हिला दिया. उसकी गांड मेरे लुंड पे रगड़ रही थी. मैं ने अपना पायजामा नीचे किया, लुंड बहार निकला और उसकी गांड के बीच में रगड़ने लगा.

**मैं:**

“अच्छा… और यह पैसे कहाँ रख रही है तू? घर के लिए या अपने पर्सनल खर्च के लिए?”

**अनाम आपि (शरमाते हुए):**

“अब्बू को दिए… थोड़ा… और… मेरा पर्सनल भी… असीम… अब मत पूछ… प्लीज…”

मैं ने उसके बाल खींचे और उसकी गर्दन पे ज़ोर से चुम्मा लिया. फिर उसको घुमा कर उसके मुँह के पास लुंड ले गया.

**मैं:**

“चूस… जल्दी… अम्मी बहार है.”

अनाम आपि ने आँखें नीचे करके मेरा लुंड मुँह में ले लिया. Dheere-dheere चूसने लगी. उसकी जीभ टोपा के राउंड घूम रही थी. “सलूरररप… सलूरररप…” हलकी आवाज़ें आ रही थी.

मैं उसके बाल पकड़ कर धीरे से मुँह में धक्के मरने लगा. उसकी आँखें ऊपर करके मुझे देख रही थी — शर्म, हवस से

**मैं:**

“बहुत अच्छा चूस रही है आज… लगता है कल रात के बाद और भूख बढ़ गयी है तेरी…”

अनाम आपि ने सिर्फ “मममहह…” किया और ज़ोर से चूसने लगी. लार उसके होंठों से टपक रही थी.

कुछ मिनट बाद मैंने उसको रोक दिया. उसके होंठ लाल और गीले हो गए थे. मैंने उसको उठाया और बीएड पर लिट्टे दिया.

लेकिन तभी बहार से अम्मी की आवाज़ आयी — “अनाम… बीटा… इधर आ… कपडे सूखने हैं.”

अनाम आपि झट से उठी, कुरता ठीक किया, दुपट्टा सीने पे लपेटा और दरवाज़ा खोल कर बहार चली गयी. जाते वक़्त उसने मुझे एक नज़र डाली

मैं बीएड पर लेट गया. मेरा लुंड अभी भी खड़ा था.

दोपहर के करीब 2:30 बजे मेरा मोबाइल बजा. बड़े मां का कॉल था.

**मैं:** “Hello मां…”

**बड़े मां :**

“असीम बीटा, सुन… बुशरा को आज घर भेजना है. उसकी अम्मी ने फ़ोन किया था, बहुत याद आ रही है उसे. मैं और तेरे अब्बू रात की ट्रैन की टिकट करवा रहे हैं. 10:45 की ट्रैन है. तुम लोग उसका बैग पैक कर दो”

**मैं:** “ठीक है मां… अभी बता देता हूँ सबको.”

मैं हॉल में आ गया. अम्मी किचन के पास बर्तन संभल रही थी. अनाम आपि और ज़ैनब आपि दोनों सोफे पर बैठी मोबाइल देख रही थी. बुशरा अपने रूम से निकल कर पानी पीने आयी थी.

**मैं:**

“मां का कॉल था. बुशरा को आज घर भेजना है. ममी ने बुलाया है. रात 10:45 की ट्रैन की टिकट बन गयी है.”

सबकी नज़रें मेरे तरफ मुद गयी.

अम्मी पहले बोल पड़ी,

**अम्मी:**

“अरे… इतनी जल्दी? मैं तोह सोच रही थी काम से काम 2-3 दिन और रुकेगी. बुशरा बीटा, तेरी अम्मी को क्या हो गया अचानक?”

**बुशरा :**

“Woh…ammi ने कहा था न की कजिन की शादी है अगले हफ्ते… शायद उसकी तैयारी में हेल्प चाहिए होगी. पर मैं तोह यहाँ बहुत मज़ा कर रही थी फूफी…”

**ज़ैनब आपि:**

“बुशरा, तू तोह अभी hi आयी थी? इतनी जल्दी वापस? थोड़ा रुक जाती तोह अच्छा था. हम लोगों ने भी इतना टाइम नहीं स्पेंड किया तेरे साथ.”

**अनाम आपि :**

“हाँ… मैं भी सोच रही थी की कल साथ में बाजार चलेंगे. अब टिकट बन गयी तोह क्या कर सकते हैं. बुशरा, तेरा बैग मैं पैक कर देती हूँ. कपडे और जो सामान लाया था सब देख लेना.”

बुशरा ने सर हिला दिया. उसकी आँखों में थोड़ी सी उदासी थी, लेकिन वह भी समझ रही थी.

**बुशरा:**

“ठीक है आपि… मैं अभी रूम से सामान निकालती हूँ. पर ट्रैन रात की है न? रात को स्टेशन तक जाना पड़ेगा…”

**ज़ैनब आपि (बुशरा के पास बैठते हुए):**

“बुशरा, अगले महीने ज़रूर आ जाना. और अम्मी से कह देना की यहाँ सब ठीक है. तू आयी थी तोह घर में मज़ा आ रहा था. नूर भी तेरे साथ बहुत खुश थी.”

**अनाम आपि :**

“पहले बैग पैक कर ले. जो भी नया सामान लिया था बाजार से, उसको अच्छे से फोल्ड कर. ट्रैन में भूख लगेगी तोह कुछ स्नैक्स ले लेना. मैं अभी पराठा और सब्ज़ी बना देती हूँ, रात के लिए पैक कर देंगे.”

**बुशरा (थोड़ा हंस कर):**

“आपि आप लोग इतना ख्याल रखते हो… मुझे तोह यहाँ रहने की आदत पद गयी थी. अब वापस जाने का मैं नहीं कर रहा.”

**अम्मी (हलकी सी हंसी के साथ):**

“बीटा, घर भी तोह घर होता है. अम्मी अकेली है वहां. तू जा, वह भी बहुत याद कर रही होगी. बस अगले महीने फिर आ जाना.”

**ज़ैनब आपि:**

“असीम, तू टिकट कन्फर्म कर ले फिर से . और ऑटो या कैब बुक कर लेना स्टेशन के लिए. रात को बहार निकलना सेफ रहे.”

**मैं:**

“हाँ, मैं अभी देख लेता हूँ. बुशरा, तेरा बैग कितना है? मैं हेल्प कर दूंगा.”

**अनाम आपि (उठते हुए):**

“मैं भी आ रही हूँ पैक करने में. बुशरा के कपडे बहुत हो गए हैं मेरे रूम में भी.”

सब लोग dheere-dheere उठने लगे. अम्मी किचन में पराठा बनाने चली गयी. अनाम आपि और बुशरा दोनों बुशरा के रूम की तरफ चली गयी.

हॉल में अब सिर्फ मैं और ज़ैनब आपि थे. उसने मुझे एक हलकी सी नज़र डाली और धीरे से मुस्कुराते हुए बोली,

**ज़ैनब आपि:**

“अब घर थोड़ा खली हो जायेगा… बुशरा के जाने के बाद.”

मैं ने कुछ नहीं बोलै, बस उसकी तरफ देखता रहा.

थोड़ी देर बाद बड़े मां आ गए थे. उनका चेहरा थका हुआ था, लेकिन आँखों में एक अलग सी चमक थी. वो सीधा हॉल में आये और सोफे पर बैठ गए.

**बड़े मां:**

“अरे सब ठीक हो? बुशरा को मैं घर भेज रहा हूँ. उसकी अम्मी ने बहुत ज़ोर दिया था. असीम के साथ भेज दूंगा. मैं यहीं रुकूंगा कुछ दिन… शॉप का काम भी है ज्यादा.”

अम्मी किचन से आती हुई बोली,

**अम्मी:**

“जी भाई साहब, ठीक है. बुशरा को तोह मैंने बोलै था थोड़ा रुक जाए, लेकिन इसकी अम्मी बुला रही हैं तोह जाना तोह पड़ेगा. असीम छोड़ आएगा न?”

**मैं:**

“हाँ अम्मी, मैं छोड़ दूंगा. रात की ट्रैन है.”

अनाम आपि और ज़ैनब आपि दोनों हॉल में बैठी थी. अनाम आपि ने दुपट्टा सीने पे लपेट रखा था, ज़ैनब आपि का दुपट्टा कंधे पर था.

बड़े मां ने अनाम आपि की तरफ देखा और हलके से मुस्कुराये. फिर नज़र ज़ैनब आपि पर गयी. उन्होंने धीरे से आँख मारी —

**बड़े मां (अनाम आपि):**

“अनाम बीटा, कल शॉप पर थोड़ा हाथ बताना पड़ेगा. बहुत रश है. तू ठीक है न? थकी हुई लग रही है.”

अनाम आपि का चेहरा थोड़ा लाल हो गया. उसने नज़र नीचे करके सर हिला दिया,

**अनाम आपि:**

“हाँ मां… मैं आ जाउंगी.”

बड़े मां ने अब ज़ैनब आपि की तरफ देखा. उनकी आँखें थोड़ी देर उसके टाइट सलवार सूट के उभरे हुए चूचियों पर रुक गयी. फिर हलके से मुस्कुराते हुए बोले,

**बड़े मां:**

“ज़ैनब, तू भी कल थोड़ा टाइम निकाल लेना. घर का काम हो जायेगा तोह शॉप पर आ जाना. मैं और तेरे अब्बू अकेला मैनेज नहीं कर प् रहे.”

ज़ैनब आपि ने शर्मा कर सर हिला दिया, लेकिन उसके गाल लाल हो गए थे. उसने धीरे से जवाब दिया,

**ज़ैनब आपि:**

“जी मां… देख लुंगी.”

थोड़ी देर बाद मैंने नोटिस किया — ज़ैनब आपि उठी और धीरे से स्टोर रूम की तरफ चली गयी. कुछ मिनट बाद बड़े मां भी उठ कर उसी तरफ बढे, जैसे कुछ सामान ढूंढने जा रहे हों.

मैं हॉल में बैठा था. मैंने 2-3 मिनट इंतज़ार किया और धीरे से उठ कर स्टोर रूम के पास पहुँच गया. दरवाज़ा थोड़ा सा खुला था. मैं चुपके से बहार खड़ा हो गया और अंदर झाँका.

अंदर हलकी सी बल्ब की रौशनी थी.

ज़ैनब आपि दीवार से सटी कड़ी थी. बड़े मां उसके बिलकुल सामने खड़े थे, सिर्फ एक कदम दूर. उनका एक हाथ ज़ैनब आपि की कमर पर था और दूसरा हाथ उसके बाल में. वो उसके बाल को धीरे से पकड़ कर उसकी गर्दन को थोड़ा पीछे खिंच रहे थे.

**बड़े मां (धीमी आवाज़ में):**

“कितनी गरम है तू मेरी रैंड?”

ज़ैनब आपि की सांसें तेज़ चल रही थी. उसने आँखें नीचे कर ली, लेकिन उसकी गर्दन मां के हाथ में थी.

**ज़ैनब आपि:**

“मां… यहाँ… कोई आ जायेगा…”

मां ने उसके बाल को और टाइट पकड़ा और उसकी गर्दन पर मुँह ले गए. पहले हलके से किश किया, फिर ज़ोर से चूसने लगे. गर्दन के नीचे दांत से हल्का सा काट लिया. ज़ैनब आपि की सिसकी निकल गयी.

**बड़े मां ( गरम सांस छोड़ते हुए):**

“चुप… बिलकुल चुप. रंडी की बच्ची, कितनी गरम तू अंदर से साली मादरचोद”

ज़ैनब आपि ने कुछ नहीं बोलै. उसने सिर्फ मां के सीने पर हाथ रख दिया. मां ने उसकी कमर को और टाइट पकड़ा और उसको अपने से बिलकुल चिपका लिया. उनका दूसरा हाथ उसके चूचियों के ऊपर से घूमने लगा.

मां ने उसके होंठ पे अपने होंठ रख दिए. मां उसके लोअर लिप को ज़ोर से चूस रहे थे, काट रहे थे. ज़ैनब आपि की जीभ भी उनके मुँह में चली गयी. दोनों के मुँह से हलकी “chup-chup” और लार की आवाज़ आ रही थी.

मां ने उसके बाल को और टाइट पकड़ा और किश के बीच में उसकी गर्दन पर फिर से दांत गदा दिए. ज़ैनब आपि की बॉडी काँप उठी. मां का हाथ अब उसके चूचियों को कुर्ते के ऊपर से ज़ोर से पकड़ रहा था — पूरा हाथ भर के, धीरे से मसल रहे थे, निप्पल को ऊँगली से हलके से खिंच रहे थे.

**बड़े मां:**

“ये bade-bade चूचिया … कितने भरी हैं तेरे… कल रात से सोच रहा था इनको हाथ में लेकर मसलन… बोल साली कुटिया कुछ तो बोल?”

ज़ैनब आपि सिर्फ सिसक रही थी. उसकी सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी. उसने मां की कमर को पकड़ लिया और अपनी बॉडी उनके सीने से और चिपका दी.

**बड़े मां:**

“आज रात जब सब सो जायेंगे… मैं तेरे रूम में आऊंगा. तब तुझे छोडूंगा मेरी रैंड समझी?”

ज़ैनब आपि ने सिर्फ कांपती हुई आवाज़ में “हाँ…” बोलै.

मां ने एक बार फिर उसके होंठ पे ज़ोर का किश किया, उसके चूचियों को जोर से मसला और धीरे से पीछे हैट गए. दोनों की सांसें तेज़ चल रही थी.

मैं बहार चुपके से हैट गया और अपने रूम की तरफ चला गया.

रात को घर के बहार गेट के पास सब लोग इकठ्ठा हो गए थे. बुशरा का बैग मैंने और ज़ैनब आपि ने मिल कर गाडी में रख दिया था.

अम्मी (बुशरा के सर पर हाथ फेरते hue):“Beta, घर पहुँच कर तुरंत फ़ोन कर देना. सफर में पानी पीती रहना. और अम्मी से कह देना की सब ठीक है यहाँ.”

बुशरा (थोड़ी उदास, लेकिन मुस्कुराते hue):“Haan फूफी… मैं फ़ोन करुँगी. आप सब अपना ख्याल रखना.”

अनाम आपि (बुशरा को गले लगते hue):“Jaldi वापस आ जाना. अगले महीने ज़रूर आना. हम सब वेट करेंगे.”

ज़ैनब aapi:“Haan, और अगले बार ज़्यादा दिन रुकना. इतनी जल्दी जा रही है, मैं नहीं भरा अभी.”

बड़े मां कार के पास खड़े थे. उन्होंने गाडी का बूट बंद किया और सबकी तरफ देखा.

बड़े मां (अनाम आपि की तरफ देखते hue):“Chalo, देर हो रही है. असीम

Abbu:“Main भी चलता हूँ. स्टेशन पर भीड़ होती है रात को.”

सब लोग गाडी में बैठ गए.

गाडी स्टार्ट हुई और मोहल्ले से बहार निकलने लगी.

Bushra:“Train में एक है न? बहुत गर्मी लग रही है आज.”

अनाम aapi:“Haan एक है. पर रात को ठण्ड भी पद सकती है.”

बड़े मां :“असीम अच्छे से जाना बीटा, कोई दिक्कत आये तो कॉल करना.”

रोड थोड़ा सुनसान था.

मैं आगे मिरर व्यू में देख रहा था.

बुशरा विंडो साइड में थी उसके बगल में अब्बू फिर अनाम आपि फिर मां.

बड़े मां ने अपना हाथ धीरे से अनाम आपि की कमर के पास रख दिया — बिलकुल नार्मल तरीके से, जैसे बात करते हुए हाथ रख दिया हो. अनाम आपि ने थोड़ा सा हिलने की कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं बोली.

कुछ देर बाद मां का हाथ अनाम आपि की कमर से थोड़ा नीचे फिसल गया और उसकी सलवार के ऊपर से उसकी गांड के साइड को halke-halke सहलाने लगा. बहुत धीरे धीरे

अनाम आपि की सांसें थोड़ी तेज़ हो गयी. वो अपना दुपट्टा सीने पर ठीक कर रही थी, लेकिन उसका चेहरा हल्का लाल पद गया था.

अब्बू भी दूसरी तरफ से बैठे थे. उन्होंने अपना हाथ धीरे से अनाम आपि की कमर पर रख दिया. दोनों तरफ से अनाम आपि को halke-halke दबाव दे रहे थे

बड़े मां :“अनाम, कल शॉप पर आ जाना… बहुत काम है.”

अनाम आपि ने सर हिला दिया, लेकिन उसकी आवाज़ थोड़ी कांपती हुई थी,

अनाम aapi:“Ji… मां…”

अब्बू ने भी हलके से उसकी कमर को दबाया और धीरे से बोले

Abbu:“Thak जाती है तू … ध्यान रखो अपना.”

अनाम आपि ने सिर्फ “हाँ…” बोलै. उसकी टाँगे थोड़ी सी टाइट हो गयी थी. दोनों तरफ से दोनों मर्दों के हाथ उसकी कमर और गांड के साइड पर थे — बहुत dheere-dheere सहला रहे थे, दबाव दे रहे थे, लेकिन इतना छुप कर की बुशरा को कुछ पता न चले.

मैं चुपचाप आगे बैठा था, लेकिन मिरर से सब देख रहा था. अंदर से मेरा लुंड हल्का सा खड़ा होने लगा tha.Back सीट में सिर्फ हलकी सांस की आवाज़ और कपड़ों की खुसखुसाहट सुनाई दे रही थी.

कुछ देर बाद बड़े मां ने अपना हाथ अनाम आपि की कमर से हटा लिया.

बड़े Mama:“Bushra, अम्मी से कह देना की मैं आ जाऊँगा… शादी में."

मैं समझ गया था स्टेशन से आते वक़्त ये दोनों अनाम आपि को बहुत अच्छे से रगड़ेंगे.

स्टेशन पहुँचते hi मां और अब्बू ने गाडी पार्क की. हम सब उतर गए. बड़े मां ने बुशरा के बैग उठाया और प्लेटफार्म तक छोड़ने के लिए अंदर गए. अनाम आपि भी साथ थी.

प्लेटफार्म पर ट्रैन अभी नहीं आयी थी. अनाउंसमेंट हो रहा था की ट्रैन 15-20 मिनट लेट है.

**बड़े मां** (बुशरा के सर पर हाथ फेरते हुए):

“बीटा, ध्यान रखना. घर पहुँच कर तुरंत कॉल कर देना. असीम के साथ hi रहना.”

**अब्बू** :

“हाँ, किसी से बात मत करना बिना मतलब के. ट्रैन में पानी और खाना संभल के खाना.”

अनाम आपि ने बुशरा को गले लगा लिया और धीरे से बोलै,

**अनाम आपि**:

“जल्दी वापस आ जाना… बहुत मिस करेंगे तुझे.”

फिर मां और अब्बू ने मुझे साइड में ले जाकर धीरे से कहा,

**बड़े मां**:

“असीम, अच्छे से जाना. हम लोग अब चलते है.”

अब्बू ने सिर्फ सर हिला दिया और अनाम आपि की तरफ देखा. अनाम आपि ने नज़र नीचे कर ली.

सब लोग वापस गाडी की तरफ चले गए. अनाम आपि ने पीछे मुद कर एक बार मुझे और बुशरा को देखा और फिर गाडी में बैठ गयी. गाडी वापस घर की तरफ निकल गयी.

अब प्लेटफार्म पर सिर्फ मैं और बुशरा रह गए थे.

बुशरा ने अपना बैग साइड में रख दिया और बेंच पर बैठ गयी. उफ़ उसकी वो स्लिम फिगर, फेयर रंग, लम्बे बाल, और आज वो लाइट ब्लू कुर्ती और ब्लैक लेग्गिंग्स में बहुत क्यूट और सेक्सी लग रही थी. कुर्ती थोड़ी टाइट थी, इसलिए उसके मध्यम साइज के टाइट चूचियां हलके से उभरे हुए थे. लेग्गिंग्स में उसकी पतली कमर और उभरी हुई गांड का शेप साफ़ दिख रहा था.

मैं उसके बगल में बैठ गया.

**मैं** (हलके से मुस्कुराते हुए):

“ट्रैन लेट है… बोर हो रही है क्या?”

**बुशरा** (थोड़ा उदास, लेकिन मुस्कुराते हुए):

“हाँ… थोड़ा सा. यहाँ इतना मज़ा आ रहा था… अब वापस जाना पद रहा है.”

मैं ने अपना बैग से कुछ स्नैक्स निकले — जो अम्मी ने दिए थे. एक पैकेट चिप्स और एक चॉकलेट.

**मैं**:

“ले… यह खा ले..”

बुशरा ने चिप्स का पैकेट लिया और खाने लगी. मैं भी उसके साथ खाने लगा.

थोड़ी देर बाद मैंने धीरे से अपना लेफ्ट हाथ उसके राइट हाथ के पास रख दिया. पहले सिर्फ उँगलियाँ टच की. बुशरा ने देखा, लेकिन कुछ नहीं बोली. वो चिप्स कहती रही और हलके से मुस्कुरायी.

मैं ने हिम्मत करके उसकी उँगलियों को अपनी उँगलियों से पकड़ लिया और halke-halke सहलाने लगा. बुशरा ने नज़र नीचे कर ली, लेकिन हाथ हटाया नहीं. उसकी उँगलियाँ थोड़ी गरम थी.

**मैं** (बहुत हलकी आवाज़ में):

“तू बहुत अच्छी लग रही है आज… यह ब्लू कुर्ती तेरे ऊपर बहुत सूट करती है.”

**बुशरा** (शर्मा कर, हलके से मुस्कुराते हुए):

“बस करो न भाई… कोई देख लेगा.”

लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया.

मैं ने और थोड़ा करीब होकर अपना राइट पेअर उसके लेफ्ट पेअर से हलके से रगड़ दिया. लेग्गिंग्स के ऊपर से उसकी जांघ की गर्माहट फील हो रही थी. वो थोड़ा सा हिल गयी, लेकिन बेंच पर बैठी रही.

मैंने उसकी उँगलियों को और प्यार से सहलाया और धीरे से उसकी ऊँगली के ऊपर से नीचे तक मस्सगे करने लगा. बुशरा ने चिप्स खाना छोड़ दिया और अपनी टांग थोड़ी सी मेरी तरफ कर ली.

**बुशरा** (बहुत हलकी आवाज़ में):

“भाई … यहाँ प्लेटफार्म पर… मत करो… लोग देख रहे होंगे…”

लेकिन उसकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था. बल्कि एक छोटी सी मुस्कराहट थी जो उसके होंठों पर आ गयी थी. वो बहुत सेक्सी लग रही थी इस वक़्त.

मैं ने उसके हाथ को छोड़ कर अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया — उसने टांग हटाई नहीं. मैं ने halke-halke से उसकी जांघ को सहलाना शुरू कर दिया — ऊपर से नीचे.

**मैं** (उसके कान के पास धीरे से):

“तू इतनी क्यूट लग रही है… यह लेग्गिंग्स तेरे ऊपर कितनी अच्छी लग रही है…”

बुशरा ने सिर्फ मुस्कुराया और नज़र नीचे कर ली. उसकी सांसें थोड़ी तेज़ हो गयी थी.

प्लेटफार्म पर लोग आ जा रहे थे, लेकिन हम दोनों बेंच पर बैठे थे. मैं उसके साथ dheere-dheere छेड़खानी कर रहा था — हाथ से जांघ सहलाना, पेअर से पेअर रगड़ना, कभी उँगलियों को पकड़ना. बुशरा हर बार थोड़ा शर्मा रही थी, मुस्कुराती थी, लेकिन रोक नहीं रही थी.

ट्रैन प्लेटफार्म पर आयी तोह बहुत देर हो चुकी थी. रात के 11:40 बज रहे थे. हम दोनों ने apna-apna बैग उठाया और कम्पार्टमेंट में घुस गए.

हमारी सीट्स लोअर और उप्पेर बिरथ थी — साइड लोअर और साइड उप्पेर. बुशरा ने लोअर बिरथ ली और मैंने उप्पेर.

पहले थोड़ी देर बातें हुई. बुशरा ने अम्मी के दिए पराठे और सब्ज़ी निकली. हम दोनों ने मिल कर खाया. वो थकी हुई लग रही थी, लेकिन खुश भी थी.

**बुशरा** (पराठा कहते हुए):

“भाई यहाँ इतना मज़ा आ रहा था… अब वापस जाने का मैं नहीं कर रहा.”

**मैं**:

“हाँ… मैं भी मिस करूँगा तुझे.”

खाना ख़तम होने के बाद लाइट्स डिम हो गयी. दूसरे पैसेंजर्स भी अपने बिर्थ्स पर लेट गए. रात के 12:30 बजे तक पूरा कम्पार्टमेंट सन्नाटा पद गया. सिर्फ ट्रैन की हलकी “chak-chak” आवाज़ आ रही थी.

मैं उप्पेर बिरथ पर लेता हुआ था. नीचे बुशरा लेती हुई थी. मैं नीचे झाँका — वो ब्लैंकेट में लिपटी हुई थी, आँखें बंद थी.

मैं धीरे से नीचे उतरा. केबिन में बिलकुल अँधेरा था, सिर्फ बहार से हलकी रौशनी आ रही थी.

**मैं** (बहुत हलकी आवाज़ में):

“बुशरा…”

वो चौंक कर आँखें खोल गयी. मैंने उसके बिरथ के पास बैठ कर उसका हाथ पकड़ लिया.

**मैं**:

“नींद नहीं आ रही क्या?”

**बुशरा** :

“हाँ… थोड़ी सी दर भी लग रहा है.”

मैं ने उसके हाथ को सहलाया और धीरे से बोलै,

**मैं**:

“चल… ऊपर आ जा. मैं तेरे साथ लेट जाऊंगा. ब्लैंकेट में दोनों फिट हो जायेंगे.”

बुशरा ने थोड़ी देर सोचा, idhar-udhar देखा, फिर धीरे से सर हिला दिया. मैं ने उसका हाथ पकड़ कर उसको उप्पेर बिरथ पर चढ़ने में हेल्प की.

दोनों उप्पेर बिरथ पर लेट गए. स्पेस टाइट था. मैं पीछे से उसको चिपक गया. एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया और ब्लैंकेट दोनों के ऊपर कर दिया.

बुशरा की सांसें तेज़ हो गयी थी. उसकी पीठ मेरी सीने से लग रही थी.

मैं ने धीरे से उसकी गर्दन के पीछे बाल हटाए और वहां हल्का सा किश किया. फिर उसके कान के पास मुँह ले गया.

**मैं** (गरम सांस छोड़ते हुए):

“दर मत… मैं हूँ न…”

बुशरा ने कुछ नहीं बोलै, सिर्फ थोड़ा सा सर हिला दिया.

मैं ने पीछे से उसको और टाइट चिपका लिया. मेरा लुंड उसकी गांड के ऊपर रगड़ने लगा — ब्लैंकेट के अंदर हाथ दाल कर मैंने उसकी कमर को सहलाना शुरू किया.

फिर मैंने उसके गले के पीछे चुम्मा लिया, गर्दन को halke-halke चूसने लगा. बुशरा की सांसें और तेज़ हो गयी. उसकी बॉडी थोड़ी सी काँप रही थी.

**मैं** (उसके कान में बहुत हलकी आवाज़ में):

“तू बहुत अच्छी लग रही है आज… यह कुर्ती तेरे ऊपर बहुत सेक्सी लग रही है…”

मैंने अपना हाथ उसकी कमर से ऊपर ले जाकर उसके पेट पर रख दिया और धीरे से सहलाने लगा. फिर हाथ और ऊपर बढ़ाया और उसके चूचियों के नीचे से टच किया — कपड़ों के ऊपर से hi, बहुत धीरे.

बुशरा ने हलकी सी सिसकी ली और अपनी गांड मेरे लुंड पे थोड़ी सी दबायी.

मैं ने उसकी गर्दन को चूसते हुए उसके एक चुकी को हाथ में ले लिया और बहुत dheere-dheere मसलने लगा —

**बुशरा** (बहुत हलकी, कांपती आवाज़ में):

“भाई.. कोई… देख लेगा… अह्ह्ह…”

**मैं** (उसके कान में):

“अँधेरा है… ब्लैंकेट है… कोई नहीं देख रहा… …”

मेरा लुंड अभी भी उसकी गांड पर रगड़ रहा था — कपड़ों के ऊपर से, dheere-dheere,Main उसकी दोनों चूचियों को baari-bari से हाथों में ले कर प्यार से मसल रहा था.

बुशरा अब खुद थोड़ी सी पीछे की तरफ डाब रही थी. उसकी सांसें गरम हो चुकी थी. मैं ने उसके कान को हलके से काटा और गर्दन पर चुम्मा लिया.

ब्लैंकेट के अंदर हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे. ट्रैन की हलकी हिचकी के साथ हम दोनों dheere-dheere हिल रहे थे

बुशरा की बॉडी गरम हो चुकी थी. वो अभी भी शर्मा रही थी.

उप्पेर बिरथ पर ब्लैंकेट के अंदर हम दोनों चिपके हुए थे. मेरा लुंड उसकी गांड पर कपड़ों के ऊपर से zor-zor से रगड़ रहा था. बुशरा की सांसें बहुत तेज़ हो चुकी थी और उसकी बॉडी thar-thar काँप रही थी.

मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ.

मैं ने अचानक उसको कमर से पकड़ लिया और ब्लैंकेट हटा दिया. बुशरा चौंक कर मेरी तरफ देखि, आँखें बड़ी हो गयी.

**बुशरा** (हलकी सी दरर्ति हुई आवाज़ में):

“भाई… क्या कर रहे हो… कोई देख लेगा…”

मैं ने कुछ नहीं बोलै. उसको झटके से उठाया और उप्पेर बिरथ से नीचे उतर लिया. उसका हाथ तिघ्टलय पकड़ कर मैं उसको कम्पार्टमेंट के बहार की तरफ ले जाने लगा. रात के टाइम सब ऑलमोस्ट खली था, सिर्फ ek-do लोग सो रहे थे.

मैं सीधा बाथरूम की तरफ बढ़ा. बुशरा मेरे peeche-peeche आ रही थी, हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर ज़ोर नहीं लगा प् रही थी.

बाथरूम के दरवाज़े के पास पहुँचते hi मैंने दरवाज़ा खोला और उसको अंदर धकेल दिया. दरवाज़ा बंद किया और लॉक लगा दिया.

बाथरूम बहुत छोटा था. सिर्फ एक वाशबेसिन और टॉयलेट. अँधेरा था, सिर्फ बहार से हलकी सी लाइट आ रही थी.

जैसे hi दरवाज़ा बंद हुआ, मैंने बुशरा को दीवार से सत्ता दिया. उसकी आँखें दर से फैल गयी थी.

**मैं**:

“बर्दाश्त नहीं हो रहा था मुझसे…”

पहले मैंने उसके होंठ पे टूट पड़ा. पागलो की तरह चूसने लगा. उसकी छोटी सी गुलाबी लिप्स को zor-zor से चूस रहा था, काट रहा था. मेरी जीभ उसके मुँह में घुस गयी और उसकी जीभ से टकराने लगी. लार की “chup-chup” आवाज़ बाथरूम में गूँज रही थी.

बुशरा पहले तोह धकेलने की कोशिश कर रही थी, हाथों से मेरा सीना दबा रही थी.

**बुशरा** :

“भाई… नहीं… यहाँ मत… कोई आ जायेगा… अह्ह्ह…”

लेकिन मैं नहीं रुका. मैं उसके होंठ को और ज़ोर से चूस रहा था, उसकी गर्दन को चूस रहा था, कान को काट रहा था. उसकी सांसें अब बिलकुल तेज़ हो चुकी थी.

फिर मैंने उसके बाल पकड़ लिए और उसका सर थोड़ा नीचे की तरफ झुका दिया.

**मैं** :

“मूह खोल…”

बुशरा ने डरते हुए आँखें बड़ी की. मैं ने अपना पायजामा नीचे किया. मेरा लुंड बहार आ गया — पूरा खड़ा.

मैं ने उसके छोटे से मुँह के सामने लुंड रख दिया और टोपा उसके गुलाबी होंठ पर रगड़ने लगा.

**मैं**:

“ले… मुँह खोल कुटिया… बर्दाश्त नहीं हो रहा … अब ले…”

बुशरा ने थोड़ा सा मुँह खोला. मैं ने लुंड उसके मुँह में दाल दिया. dheere-dheere अंदर धकेलने लगा.

उसका छोटा मुँह पूरा भर गया. उसकी आँखें आंसुओं से भर गयी. “ग्लुक… ग्लुक…” की हलकी आवाज़ आ रही थी.

मैं ने उसके बाल पकड़ कर dheere-dheere मुँह में धक्के मरने शुरू कर दिए.

**मैं** :

“अह्ह्ह… साली… कितना टाइट मुँह है तेरा… चूस… ज़ोर से चूस… बहुत दिन से तड़प रहा था मैं इस छोटे मुँह के लिए…”

उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे. हाथों से मेरी जाँघों को पकड़ रही थी, कभी धकेलने की कोशिश करती, कभी खुद अंदर ले लेती.

मैं ने स्पीड थोड़ी बढ़ा दी.

**मैं**:

“चुप… बिलकुल चुप… ट्रैन में सब सो रहे हैं… तू बस चूस… मेरी रैंड… अह्ह्ह… बहुत अच्छा चूस रही है…”

बुशरा की लार मेरे लुंड पर टपक रही थी. उसका छोटा मुँह पूरा गीला हो चूका था. मैंने उसके बाल पकड़ रखे थे.

मैं ने उसके मुँह से लुंड थोड़ा बहार निकला, उसके होंठ पर रगड़ा और फिर फिर से अंदर पेल दिया.

**मैं** :

“तू बहुत सेक्सी लग रही है ऐसे… ले… और अंदर ले…”

बाथरूम में सिर्फ “gluck-gluck” की आवाज़ और हम दोनों की तेज़ साँसों की आवाज़ थी.

बुशरा अब dheere-dheere कण्ट्रोल खो रही थी. उसकी जीभ मेरे लुंड के नीचे से घूमने लगी थी.

मैं ने उसके बाल पकड़ कर dheere-dheere मुँह में धक्के मरने शुरू कर दिए.

**मैं** (गाली देते हुए, लेकिन आवाज़ में प्यार था):

“अह्ह्ह… ले साली… कितना टाइट और गरम मुँह है तेरा… चूस ज़ोर से… मेरी प्यारी चुड़क्कड़… बहुत अच्छा चूस रही है तू… ले पूरा अंदर ले…”

उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे. लार उसके होंठों से बहार निकल कर उसके चीन पर टपक रही थी और नीचे कुर्ती पर गिर रही थी. उसकी कुर्ती लार से भीगती जा रही थी — चूचियों के उभार वाली जगह पर भी लार के धब्बे पद गए थे.

बुशरा अब zor-zor से चूस रही थी. उसकी जीभ मेरे लुंड के नीचे से घूम रही थी. लार इतनी ज़्यादा निकल रही थी की उसकी कुर्ती के ऊपर वाला हिस्सा पूरा गीला हो चूका था. चूचियों के उभार वाली जगह पर लार चमक रही थी.

मैं उसके मुँह में लुंड पेलते हुए उसके बाल से खेल रहा था और kabhi-kabhi उसके गाल को प्यार से थप्पड़ मार रहा था.

**मैं** :

“बहुत अच्छी लड़की है तू… मेरी प्यारी रैंड…

तभी बहार से दरवाज़े पर ज़ोर की khat-khat की आवाज़ आयी.

हम दोनों एकदम से फ्रीज हो गए.

मैं ने झट से लुंड बहार निकला. बुशरा की आँखें दर से फैल गयी थी. उसकी कुर्ती लार से पूरी तरह भीग चुकी थी — चूचियों के उभार वाली जगह बिलकुल गीली सी हो गयी थी.

हम दोनों jaldi-jaldi कपडे ठीक करने लगे. मैं ने पायजामा ऊपर किया, बुशरा ने अपनी कुर्ती को दुपट्टे से ढकने की कोशिश की (लेकिन लार के धब्बे साफ़ दिख रहे थे).

मैं ने दरवाज़ा खोला.

बहार तट खड़ा था — 45-50 साल का, मोटा सा आदमी, यूनिफार्म में.

वो हम दोनों को ऊपर से नीचे तक घूर रहा था. उसकी नज़र सबसे ज़्यादा बुशरा पर थी — उसकी गीली कुर्ती पर, लाल होंठ पर, आंसू भरी आँखों पर.

**तट** (सख्त आवाज़ में):

“क्या हो रहा है यहाँ? बाथरूम में दोनों एक साथ? टिकट दिखाओ.”

मैं ने जल्दी से टिकट निकला और उसको दिया.

**मैं** (थोड़ा घबरा कर):

“सर, ये मेरी गर्लफ्रेंड है… हम दोनों साथ ट्रेवल कर रहे हैं.”

तट ने टिकट चेक किया, फिर बुशरा को घूरता हुआ बोलै,

**तट** (बुशरा की तरफ देखते हुए):

“गर्लफ्रेंड? इतनी रात को बाथरूम में क्या कर रहे थे? देख इसकी हालत… साली रंडी जैसी लग रही है. ट्रैन में ऐसी हरकतें नहीं चलेंगी. पब्लिक प्लेस पर ये सब फाइन और केस भी हो सकता है.”

बुशरा का चेहरा पूरा लाल पद गया. वो शर्म से ज़मीन में घुसने लगी. उसने अपनी कुर्ती को हाथों से ढकने की कोशिश की, लेकिन लार के धब्बे अभी भी दिखाई दे रहे थे.

**तट** :

“छोटी उम्र की लड़कियां ऐसी हरकतें करती हैं तोह बाद में प्रॉब्लम होती है. साली, मुँह में लुंड लेके चूस रही थी क्या? देख तेरी कुर्ती कितनी गीली है… बिलकुल रैंड बन के घूम रही है ट्रैन में.”

मैं ने जल्दी से बात पकड़ी,

**मैं**:

“सर… सॉरी… हमने गलती कर दी. पैसे कितने लगेंगे? फाइन कितना है? हम सेटल कर देते हैं.”

तट ने मेरी तरफ देखा, लेकिन उसकी नज़र फिर से बुशरा पर hi अटक गयी थी. वो उसके गीले चूचियों और लाल होंठ को घूर रहा था.

**तट** (हलकी सी स्माइल के साथ, लेकिन सख्त आवाज़ में):

“पैसे? अब पैसे की बात कर रहे हो? पहले इस रंडी को सम्भालो… अगर मैं रिपोर्ट कर दूँ तोह दोनों की प्रॉब्लम हो जाएगी. टिकट तोह ठीक है, लेकिन यह बेहेवियर…”

उसकी आँखें अभी भी बुशरा के उप्पेर बॉडी पर थी — लार से भीगी कुर्ती पर, जो अब उसके टाइट चूचियों को और ज़्यादा दिखा रही थी.



मैं समझ गया था उसके इरादे...
 
Back
Top