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- Dec 5, 2013
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शालिनी झरने के बाद वही बिस्टेर पर नंगी लेते हुए हांफ रही thi.........or इधर अजय का लुंड अभी व् संतुष्ट नहीं हुआ था झरने के बाद v........Ajay अपने लुंड को दहकते हुए ऐसे हे खिड़की पर खड़े होकर अपनी माँ की गदरायी जवानी निहार रहा था.........

और फिर वो अपने रूम में चला gaya.....shalni उठ कर वाशरूम में खुद को साफ़ करते हुए सोचने लगती hai.....kya सच में सोसाइटी के बुड्ढे मर्द मेरे जिस्म को गन्दी नज़रो से देखते hai.......mujhe तो अजय की बातो पर ज़रा व् यकीं नहीं hai..........wo सिर्फ जोश में येसब कह रहा tha.......lekin एक दो बार मैंने व् नोटिस किया है मुझसे बात करते हुए हरिया जी धोती के अंदर अपना लुंड सहला रहे the.......lekin वो खुजली करते honge........or शर्मा जी तो इतने बुड्ढे है रिटायर्ड आर्मी है वो भला येसब गन्दी हरकत कैसे कर सकते hai..........ye सब सोचते हुए शालिनी फिर से गरम होने लगी thi...........wo वाशरूम से आकर सबसे पहले अपनी पंतय उठा कर देखती है जो उसके छूट रस से एकदम गीली हो चुकी thi....Shalini अपनी पंतय देख कर एकदम शर्मा जाती है.......... haaaaaaaaaaaaayyyyyyyykitna रस टपकाया है मेरी छूट ने ...........फिर वो अपनी ब्रा इधर उधर देखती है तो उसे यद् अत है वो जोश में कामुकता की वजह से ब्रा खोल कर अजय के तरफ फेकि thi.......wo मुद कर खिड़की के पास देखती hai....or उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी...

वो खिड़की के पास देखती है तो उसकी ब्रा वही गिरी हुयी thi......wo ब्रा के तरफ बढ़ जाती है और जैसे हे ब्रा उठती है उसमे अजय का विरए गिरा हुआ tha........shalni का जिस्म गंगना उठता है अजय का वीर्य अपने ब्रा पर देख kar.......Shalini अपनी गर्दन पर हाथ फेरते हुए लुस्टि होने लगती है .......

शालिनी विरए को अपने ऊँगली में लेकर उसका चिपचिपा पत्र महसूस करने लगती hai......or मैं में सोचती है...... ाआअह कितना चिपचिपा विरए है अजय का...... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़......

शालनी मदहोश होने लगती hai......or ब्रा को अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघने लगती hai.......virye को स्मेल से शालनी की छूट फिर से गीली होने लगती hai..........shalni जल्दी में खिड़की बंद कर देती है ताकि अजय फिर से न आ jaye.......or ब्रा में लगा हुआ वीर्य को हल्का हल्का ज़बान बहार करके चाटने लगती.........
शालनी - उम्मम्मम्मम्म ufffffffffffffffffffgfggffffffffff कितना नमकीन टेस्ट है इसके विरए का....... aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhaaaaaaahhhh मन तो कर रहा की अजय का लुंड चूस चूस कर उसका सारा विरए पि jaun......Shalini कामुकता में बेसुध हो गयी और ब्रा को पंतय के अंदर घुसा दी ....फिर अजय के वीर्य को अपनी छूट में रगड़ने lagi............jiski वजह से उसकी काम इच्छा बढ़ने लग गयी...............
शालनी अब अजय की बातो को सोच कर और ज्यादा गरम होने लगी......... haaaaaaaaaaaaayyyyyyyyy जब हरिया जी मेरे बूब्स को घूरते है तो क्या उनका व् लुंड खड़ा हो जाता hoga...........hariya जी देखने में कितने बदसूरत और कला है....... चहहीइ कितने गंदे दीखते hai......mai भला ऐसे गंदे आदमी के बारे में कैसे सोच सकती hu............mere जैसी खूबसूरत बाला को वो देख ले रहे यही उसके लिए भट बड़ी बात hai.........unko अपना जिस्म दिखा कर तड़पने में भट मज़ा aega.....soch कर शालनी के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान तैर जाती है..........

और वो शर्मा जी buddha.......unka तो ठीक से खड़ा व् नहीं होता hoga....hehehehehe........kyu न इन दोनों को अपना जिस्म दिखा कर तड़पाया jaye...........lekin अगर किसी ने देख लिया तो क्या sochega.........Shalini के मन में भट सरे विचार चल रहे the.....or एक हाथ से शालिनी अपनी छूट में विरए रगड़ रही thi..........itne में उसके हस्बैंड का कॉल आ जाता है..........
हस्बैंड - hello शालनी मई कुछ दिनों के लिए बिज़नेस टूर पर इंडिया से बहार जा रहा hu......ek हफ्ते बाद lautunga....ya काम ज्यादा होगा तो 20 25 दिन व् लग सकते hai......tum अपना ख्याल rakhna.....byee.....
शालनी - जी आप व् अपना ख्याल rakhna.......or जल्दी आने की कोशिश करना........
शालनी अब पूरी तरह फ्री हो चुकी थी उसके हुब्बी 2 25 दिनों के लिए बहार जा रहे the....shalni का मन मचलने laga..........ab तो मुझे किसी चीज़ का डर नहीं Raha.........ek बार इन दोनों बुद्धों को अपना जिस्म दिखा कर तड़पती hu...fir देखती हु क्या रिएक्शन होता hai........ye सोच कर शालनी का जिस्म गंगना उठा.........
इधर ज़ैद उसकी अम्मी अब्बू और उसकी खला मतलब उसकी maasi......ye चारो डाइनिंग टेबल खाना कहते हुए आपस में बातें कर रहे the...or ज़ैद अपनी अम्मी की जांघो को सहला रहा tha........jiski वजह से रुकसाना का दिल ज़ोरो से धड़क रहा tha.......ruksana एक बार ज़ैद के तरफ देख कर बनावटी गुस्से से आंख दिखती है और ना करने का इशारा करती है.......

जिस पर ज़ैद एक हरामी मुस्कान देते हुए अपना हाथ जांघो को सहलाते हुए ऊपर ले जाता है और अपनी अम्मी की छूट में रख देता hai....ruksana तो जैसे तड़प उठती hai.........lazzat की वजह से उसकी आंख खुल बंद होने लगती है........

वो अपने जांघो को आपस में चिपका लेती hai..........taki ज़ैद उसकी छूट से छेड़ चाट न कर sake.....lekin ज़ैद अपने हाथ को हटाता नहीं है और अपनी ऊँगली को दोनों जांघो के बिच घुसा कर छूट को छेर्ने लगता है....... रुकसाना का मन मचल जाता है.........

और उसके जांघ अपने आप खुल जाते hai.......zaid समझ जाता है उसकी अम्मी गरम हो चुकी hai........wo अब साड़ी के अंदर हाथ दाल कर पंतय के ऊपर से अपनी अम्मी की छूट को सहलाने लगता hai.....ruksana तड़प कर अपने पेअर खोल देती hai........zaid अब भट आराम से अपनी अम्मी की छूट पंतय के ऊपर से हे सहला रहा tha..........ruksana को इतना मज़ा आ रहा था की उसका मन तो कर रहा था की ज़ैद के हाथो को अपने छूट के अंदर घुसा ले........

अचानक ज़ैद पंतय को साइड करके अपनी अम्मी की छूट को पकड़ लेता hai......ruksana एकदम से सिहर उठती hai....uske मुँह से हलकी सिसकियाँ निकल जाती है........
शहला - क्या हुआ बजी......
रुकसाना हड़बड़ाते हुए बोली - का कुछ नहीं वो मिर्ची खा गयी मई.... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ भट तीखा tha.......ruksana अपने होंठो को गोल बना कर shiiiiiiiiiiiiiiiii shiiiiiiiiiiiiiiiii करने लगती hai.....jaise उसे तीखा लग रहा हो........

आआआ
शहला - पानी पि लो कुछ रहत मिलेगी........
रुकसाना बेमन से थोड़ा पानी पि लेती hai.............or ज़ैद को तरफ तिरछी नज़र से देख कर उसे आंख दिखती hai......or हलकी आवाज़ में कहती hai....tum मुझे मरवाओगे ........हटाओ वह से अपना hath..........zaid अपनी अम्मी का खूबसूरत लुस्टि चेहरा देख कर मुस्कुराने लगता hai...or अपना हाथ धीरे धीरे उसकी छूट में फेरने लगता hai.........ruksana कसमसाने लगती hai......uska जिस्म तड़प उठता है ज़ैद के कठोर हाथो से छूट रगड़ने से........... ज़ैद अपनी दो ऊँगली से अपनी अम्मी की रसीली छूट को पकड़ कर सहलाने laga.......ruksana अब लज़्ज़त की वजह से अपने हाथो को जांघो पर रख कर अपनी साड़ी पकड़ लेती है ज़ोरो से..........

इतने में शहला बोलती है .........बजी मई फ्रेश होकर अति हु ....हमलोग शॉपिंग पर chalenge...........waha मेरी एक दो दोस्त व् आने वाली hai...hum सब मिलकर शॉपिंग करेंगे.......
रुकसाना - नहीं नहीं मई कहा जाउंगी तुमलोगो के बिच में ......तुम ज़ैद को ले जाओ जैसे हे बोलती है.............
इतने में ज़ैद अपनी एक ऊँगली रुकसाना की छूट में घुसा देता hai.....ruksana एकदम से तड़प उठती hai.....or उसकी आवाज़ लड़खड़ाने लगती है........
Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhaaaaaaahhh लेटी jaoooooo......ruksana गुस्से में गर्दन घुमा कर ज़ैद को देखती hai.......or अपनी आंखें दिखते हुए मन करती है...........
शहला - अरे कॉमन बजी क्या आप व् na.....chalo न मज़ा aega.....apka पैसा खर्च होने नहीं दूंगी mai........waise व् मेरे शोहर के पास भट पैसे hai......Hehehehehehe........
ज़ैद के अब्बू - अरे बेग़म चली व् jao.....kyu बच्चो जैसे नखरे दिखा रही हो........
रुकसाना तो यहाँ छूट की आग में जला रही thi....ruksana मन में सोच रही thi......inlogo को क्या पता मई किस सिचुएशन में hu......ye ज़ैद मुझे पागल करके छोड़ेगा..... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ इसका हाथ व् कितना मज़ा दे रहा hai.....mai छह कर व् इसके हाथ को अपने छूट से हटा नहीं पा रही हु........... haaaaaaaaaaaaayyyyyyyyy maaaaaaaaaaaaaaaaa.......
शहला - तो फिर ठीक है मई तैयार होकर अति hu..........tumlog व् तैयार हो jao.......bolkar शहला उठ कर चली जाती है तैयार होने........
ज़ैद के अब्बू - बेग़म क्या सोच रही हो बैठे बैठे ....अब जाओ व् तैयार हो jao........ruksana भट प्यार से शोहर को देखती है.....

रुकसाना हड़बड़ा कर ज़ैद का हाथ एक झटके में हटा देती है अपने छूट se...or उठ कर कड़ी हो जाती hai........zaid को भट छुडास भरी नज़रो से देखते हुए


मुद कर अपने कमरे में चली जाती hai..........ruksana की हिलती चूतड़ देख कर ज़ैद अपना लुंड मसलने लगता है
.......
ज़ैद मन में - अम्मी जान आज तो तुझे मई शॉपिंग मॉल में हे छोडूंगा तेरी टांग उठा kar..........kya मस्त गांड है अम्मी जान तेरी..... haaaaaaaaaaaaayyyyyyyy

और फिर वो अपने रूम में चला gaya.....shalni उठ कर वाशरूम में खुद को साफ़ करते हुए सोचने लगती hai.....kya सच में सोसाइटी के बुड्ढे मर्द मेरे जिस्म को गन्दी नज़रो से देखते hai.......mujhe तो अजय की बातो पर ज़रा व् यकीं नहीं hai..........wo सिर्फ जोश में येसब कह रहा tha.......lekin एक दो बार मैंने व् नोटिस किया है मुझसे बात करते हुए हरिया जी धोती के अंदर अपना लुंड सहला रहे the.......lekin वो खुजली करते honge........or शर्मा जी तो इतने बुड्ढे है रिटायर्ड आर्मी है वो भला येसब गन्दी हरकत कैसे कर सकते hai..........ye सब सोचते हुए शालिनी फिर से गरम होने लगी thi...........wo वाशरूम से आकर सबसे पहले अपनी पंतय उठा कर देखती है जो उसके छूट रस से एकदम गीली हो चुकी thi....Shalini अपनी पंतय देख कर एकदम शर्मा जाती है.......... haaaaaaaaaaaaayyyyyyyykitna रस टपकाया है मेरी छूट ने ...........फिर वो अपनी ब्रा इधर उधर देखती है तो उसे यद् अत है वो जोश में कामुकता की वजह से ब्रा खोल कर अजय के तरफ फेकि thi.......wo मुद कर खिड़की के पास देखती hai....or उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी...

वो खिड़की के पास देखती है तो उसकी ब्रा वही गिरी हुयी thi......wo ब्रा के तरफ बढ़ जाती है और जैसे हे ब्रा उठती है उसमे अजय का विरए गिरा हुआ tha........shalni का जिस्म गंगना उठता है अजय का वीर्य अपने ब्रा पर देख kar.......Shalini अपनी गर्दन पर हाथ फेरते हुए लुस्टि होने लगती है .......

शालिनी विरए को अपने ऊँगली में लेकर उसका चिपचिपा पत्र महसूस करने लगती hai......or मैं में सोचती है...... ाआअह कितना चिपचिपा विरए है अजय का...... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़......

शालनी मदहोश होने लगती hai......or ब्रा को अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघने लगती hai.......virye को स्मेल से शालनी की छूट फिर से गीली होने लगती hai..........shalni जल्दी में खिड़की बंद कर देती है ताकि अजय फिर से न आ jaye.......or ब्रा में लगा हुआ वीर्य को हल्का हल्का ज़बान बहार करके चाटने लगती.........
शालनी - उम्मम्मम्मम्म ufffffffffffffffffffgfggffffffffff कितना नमकीन टेस्ट है इसके विरए का....... aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhaaaaaaahhhh मन तो कर रहा की अजय का लुंड चूस चूस कर उसका सारा विरए पि jaun......Shalini कामुकता में बेसुध हो गयी और ब्रा को पंतय के अंदर घुसा दी ....फिर अजय के वीर्य को अपनी छूट में रगड़ने lagi............jiski वजह से उसकी काम इच्छा बढ़ने लग गयी...............
शालनी अब अजय की बातो को सोच कर और ज्यादा गरम होने लगी......... haaaaaaaaaaaaayyyyyyyyy जब हरिया जी मेरे बूब्स को घूरते है तो क्या उनका व् लुंड खड़ा हो जाता hoga...........hariya जी देखने में कितने बदसूरत और कला है....... चहहीइ कितने गंदे दीखते hai......mai भला ऐसे गंदे आदमी के बारे में कैसे सोच सकती hu............mere जैसी खूबसूरत बाला को वो देख ले रहे यही उसके लिए भट बड़ी बात hai.........unko अपना जिस्म दिखा कर तड़पने में भट मज़ा aega.....soch कर शालनी के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान तैर जाती है..........

और वो शर्मा जी buddha.......unka तो ठीक से खड़ा व् नहीं होता hoga....hehehehehe........kyu न इन दोनों को अपना जिस्म दिखा कर तड़पाया jaye...........lekin अगर किसी ने देख लिया तो क्या sochega.........Shalini के मन में भट सरे विचार चल रहे the.....or एक हाथ से शालिनी अपनी छूट में विरए रगड़ रही thi..........itne में उसके हस्बैंड का कॉल आ जाता है..........
हस्बैंड - hello शालनी मई कुछ दिनों के लिए बिज़नेस टूर पर इंडिया से बहार जा रहा hu......ek हफ्ते बाद lautunga....ya काम ज्यादा होगा तो 20 25 दिन व् लग सकते hai......tum अपना ख्याल rakhna.....byee.....
शालनी - जी आप व् अपना ख्याल rakhna.......or जल्दी आने की कोशिश करना........
शालनी अब पूरी तरह फ्री हो चुकी थी उसके हुब्बी 2 25 दिनों के लिए बहार जा रहे the....shalni का मन मचलने laga..........ab तो मुझे किसी चीज़ का डर नहीं Raha.........ek बार इन दोनों बुद्धों को अपना जिस्म दिखा कर तड़पती hu...fir देखती हु क्या रिएक्शन होता hai........ye सोच कर शालनी का जिस्म गंगना उठा.........
इधर ज़ैद उसकी अम्मी अब्बू और उसकी खला मतलब उसकी maasi......ye चारो डाइनिंग टेबल खाना कहते हुए आपस में बातें कर रहे the...or ज़ैद अपनी अम्मी की जांघो को सहला रहा tha........jiski वजह से रुकसाना का दिल ज़ोरो से धड़क रहा tha.......ruksana एक बार ज़ैद के तरफ देख कर बनावटी गुस्से से आंख दिखती है और ना करने का इशारा करती है.......

जिस पर ज़ैद एक हरामी मुस्कान देते हुए अपना हाथ जांघो को सहलाते हुए ऊपर ले जाता है और अपनी अम्मी की छूट में रख देता hai....ruksana तो जैसे तड़प उठती hai.........lazzat की वजह से उसकी आंख खुल बंद होने लगती है........

वो अपने जांघो को आपस में चिपका लेती hai..........taki ज़ैद उसकी छूट से छेड़ चाट न कर sake.....lekin ज़ैद अपने हाथ को हटाता नहीं है और अपनी ऊँगली को दोनों जांघो के बिच घुसा कर छूट को छेर्ने लगता है....... रुकसाना का मन मचल जाता है.........

और उसके जांघ अपने आप खुल जाते hai.......zaid समझ जाता है उसकी अम्मी गरम हो चुकी hai........wo अब साड़ी के अंदर हाथ दाल कर पंतय के ऊपर से अपनी अम्मी की छूट को सहलाने लगता hai.....ruksana तड़प कर अपने पेअर खोल देती hai........zaid अब भट आराम से अपनी अम्मी की छूट पंतय के ऊपर से हे सहला रहा tha..........ruksana को इतना मज़ा आ रहा था की उसका मन तो कर रहा था की ज़ैद के हाथो को अपने छूट के अंदर घुसा ले........

अचानक ज़ैद पंतय को साइड करके अपनी अम्मी की छूट को पकड़ लेता hai......ruksana एकदम से सिहर उठती hai....uske मुँह से हलकी सिसकियाँ निकल जाती है........
शहला - क्या हुआ बजी......
रुकसाना हड़बड़ाते हुए बोली - का कुछ नहीं वो मिर्ची खा गयी मई.... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ भट तीखा tha.......ruksana अपने होंठो को गोल बना कर shiiiiiiiiiiiiiiiii shiiiiiiiiiiiiiiiii करने लगती hai.....jaise उसे तीखा लग रहा हो........

आआआ
शहला - पानी पि लो कुछ रहत मिलेगी........
रुकसाना बेमन से थोड़ा पानी पि लेती hai.............or ज़ैद को तरफ तिरछी नज़र से देख कर उसे आंख दिखती hai......or हलकी आवाज़ में कहती hai....tum मुझे मरवाओगे ........हटाओ वह से अपना hath..........zaid अपनी अम्मी का खूबसूरत लुस्टि चेहरा देख कर मुस्कुराने लगता hai...or अपना हाथ धीरे धीरे उसकी छूट में फेरने लगता hai.........ruksana कसमसाने लगती hai......uska जिस्म तड़प उठता है ज़ैद के कठोर हाथो से छूट रगड़ने से........... ज़ैद अपनी दो ऊँगली से अपनी अम्मी की रसीली छूट को पकड़ कर सहलाने laga.......ruksana अब लज़्ज़त की वजह से अपने हाथो को जांघो पर रख कर अपनी साड़ी पकड़ लेती है ज़ोरो से..........

इतने में शहला बोलती है .........बजी मई फ्रेश होकर अति हु ....हमलोग शॉपिंग पर chalenge...........waha मेरी एक दो दोस्त व् आने वाली hai...hum सब मिलकर शॉपिंग करेंगे.......
रुकसाना - नहीं नहीं मई कहा जाउंगी तुमलोगो के बिच में ......तुम ज़ैद को ले जाओ जैसे हे बोलती है.............
इतने में ज़ैद अपनी एक ऊँगली रुकसाना की छूट में घुसा देता hai.....ruksana एकदम से तड़प उठती hai.....or उसकी आवाज़ लड़खड़ाने लगती है........
Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhaaaaaaahhh लेटी jaoooooo......ruksana गुस्से में गर्दन घुमा कर ज़ैद को देखती hai.......or अपनी आंखें दिखते हुए मन करती है...........
शहला - अरे कॉमन बजी क्या आप व् na.....chalo न मज़ा aega.....apka पैसा खर्च होने नहीं दूंगी mai........waise व् मेरे शोहर के पास भट पैसे hai......Hehehehehehe........
ज़ैद के अब्बू - अरे बेग़म चली व् jao.....kyu बच्चो जैसे नखरे दिखा रही हो........
रुकसाना तो यहाँ छूट की आग में जला रही thi....ruksana मन में सोच रही thi......inlogo को क्या पता मई किस सिचुएशन में hu......ye ज़ैद मुझे पागल करके छोड़ेगा..... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ इसका हाथ व् कितना मज़ा दे रहा hai.....mai छह कर व् इसके हाथ को अपने छूट से हटा नहीं पा रही हु........... haaaaaaaaaaaaayyyyyyyyy maaaaaaaaaaaaaaaaa.......
शहला - तो फिर ठीक है मई तैयार होकर अति hu..........tumlog व् तैयार हो jao.......bolkar शहला उठ कर चली जाती है तैयार होने........
ज़ैद के अब्बू - बेग़म क्या सोच रही हो बैठे बैठे ....अब जाओ व् तैयार हो jao........ruksana भट प्यार से शोहर को देखती है.....

रुकसाना हड़बड़ा कर ज़ैद का हाथ एक झटके में हटा देती है अपने छूट se...or उठ कर कड़ी हो जाती hai........zaid को भट छुडास भरी नज़रो से देखते हुए


मुद कर अपने कमरे में चली जाती hai..........ruksana की हिलती चूतड़ देख कर ज़ैद अपना लुंड मसलने लगता है
.......
ज़ैद मन में - अम्मी जान आज तो तुझे मई शॉपिंग मॉल में हे छोडूंगा तेरी टांग उठा kar..........kya मस्त गांड है अम्मी जान तेरी..... haaaaaaaaaaaaayyyyyyyy

























































































































