Adultery BHABHI MAA - Page 3 - SexBaba
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Adultery BHABHI MAA

अपडेट 20

“भाई और कितना देर यंहा बैठना पड़ेगा ,5 कप चाय पि चूका हु मैं यंहा बैठकर “

शाम का समय था और अक्की ने मुझे अपने साथ जासूसी में लगा रखा था , जी है जासूसी..

मैडम की जासूसी स्नेहा मैडम की जासूसी ..

हम उनके घर के बहार खड़े हुए थे कुछ 2 घंटे हो गए थे और पास के hi चाय ठेले में मैं और अक्की बैठे हुए उनके घर को निहार रहे थे…

“चुप करके बैठे रह न भाई , अज्जू के लिए तू तिवारी के घर जाने के लिए राजी हो गया अपनी जान जोखिम में डालने के लिए भी तैयार है और सेल मेरे लिए तू कुछ घंटे बैठा भी नहीं रह सकता ..” अब अक्की की ऐसी धमकी से मैं फिर से चुप हो गया था ..

“लेकिन भाई तुझे ये आईडिया किसने दिया की मैडम के घर के बहार बैठे रहो “

“भाई ये आईडिया नेहा का था उसने कहा की पहले पता तो कर ले की वो मैरिड है या नहीं या उसका कोई बॉयफ्रेंड तो नहीं है , इसलिए आज से काम शुरू कर दिया हु ..”

“आज से ….?? सेल यानि तू रोज यंहा आकर बैठेगा”

“ है तेरे साथ .. और भाई इसी बहाने हम थोड़ा घूम भी लेंगे “

मैं उसकी बात से सिहर गया था ये तो सरासर टार्चर था, मैं रोज शाम को ऐसे घंटो बैठकर चाय नहीं पि सकता था ..

“मेरे भाई इसे घूमना नहीं कहते, ये मानसिक प्रताड़ना है , मैं तेरा दोस्त हु इसका मतलब ये नहीं है की तू मुझे ऐसे टार्चर करे “

मेरी बात सुनकर अक्की का चेहरा उदास हो गया ..

“ठीक है कल से तू मत आना मैं hi अकेले आ जाऊंगा चाहे इसके बाद मेरे साथ कुछ भी हो जाए तुझे क्या पड़ी है …”

अब ये साला मुझे इमोशनल ब्लैकमेल करने में उतारू हो गया था, जिसे सुनकर मेरे होठो में मुस्कान खिल गई..

“सेल इतना इमोशनल अगर मैडम के सामने हो जायेगा न तो वो सब कुछ दे देगी तुझे “

“भाई सब कुछ नहीं बस वो मुझे देख कर मुस्कुरा दे यही मेरे लिए बहुत है ,क्या मुस्कान है उनकी .. अनार के दानो जैसे दांतो की पंक्तिया , जब मुस्कुराती है तो लगता है जैसे कमल खिल गया हो “

“भाई कमल कीचड़ में खिलता है और उनका मुँह कीचड़ तो नहीं है “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा गुस्से से मुझे देखने लगा

“है सेल कमल नहीं तो गुलाब समझ ले न”

वो फिर से खो गया और उसके होठो में मुस्कान आ गयी

“और उनकी बात.. वह क्या आवाज है कोमल कोमल , मखमल मखमल , जन्नत जन्नत , वो हर है पारी है मेरे दिल की धड़कन है “

अक्की की बकवास शायरी शुरू हो चुकी थी और मेरी नजर मैडम के दरवाजे पर पड़ी और मैं बुरी तरह से चौक गया ..

“अबे उधर देख ..”

मैडम के घर का दरवाजा खुला और वंहा से एक आदमी बहार निकला, अक्की का चेहरा उतर गया था वही मेरी आंखे बड़ी हो चुकी थी क्योकि हम दोनों hi उस शख्स को जानते थे ..

“ये साला यंहा क्या कर रहा है “

मैंने अक्की को बोलै उसने मुझे ऐसे देखा जैसे मुझे बोल रहा हो की मुझे कैसे पता होगा और वो सही था उसे कैसे पता होगा लेकिन हम दोनों यंहा तीन घंटे से बैठे हुए थे और वो आदमी तीन घंटे से मैडम के साथ उनके घर के अंदर था …..

“मैडम उसके साथ 3 घंटे से अकेली थी “

मैंने अकेली में थोड़ा जोर दिया

“हुम्म्म”

“अबे क्या हम्म कर रहा है 3 घंटे से अकेली साथ थी मतलब समझ रहा है “

“क्या ??”

अक्की अभी भी जैसे अपनी आँखों पर भरोषा नहीं कर प् रहा था या फिर किसी सदमे में बैठा हुआ था ..

“मतलब की पवन सर hi मैडम के बर्फ है “

अक्की का चेहरा पूरी तरह से उतर गया

तभी ठेले के रेडियो में एक गण चला

‘क्या से क्या हो गया बेवफा ..तेरे प्यार में ..’

और अक्की मुझसे बिना कुछ बोले hi अपनी गाड़ी की और जाने लगा ..

स्कूल में माहौल थोड़ा गमगीन था हमारे ग्रुप में कोई भी किसी से बात नहीं कर रहा था और अक्की जैसे किसी सदमे में था, कैंटीन वाले ने भी जैसे उसको जलने की कसम खा ली थी जो सेल रोज डिस्को सांग या रोमांटिक लगा कर रखते थे आज दुखी मन वाले गीत चला रहे थे ..

‘ज़माने में बहला कैसे मोहोब्बत लोग करते है ,

वफ़ा के नाम की अब तो शिकायत लोग करते है ..

आंख है भरी भरी और तुम मुस्कुराने की बात करते हो ..’

ये सांग प्ले हो रहा था और न चाहते हुए भी हम सबके होठो में मुस्कान फ़ैल गयी , सुकर है की अक्की ने हमारे चेहरे नहीं देखे वर्ण बेचारी का दिल hi टूट जाता ..

“पहले मुझे एक चीज बता की तुम लोगो को किसने कहा था की उसके घर के बहार खड़ा रहो “

मोनिका थोड़े गुस्से में बोली

“यार नेहा ने “

अक्की ने भोलेपन से कहा

“हे मैंने ऐसा कब कहा था “

नेहा की आवाज थोड़ी तेज थी

“तुमने hi तो कहा था की उनके बारे में जानकारी जुटाओ “

“जानकारी जुटाने के लिए कहा था पागल, उनके घर के सामने खड़ा रहने के लिए नहीं, ये तो है hi पगलू तुम भी इसके बात में आ गए “

नेहा ने मेरी और देखा

“मैं नहीं तू पगलू .. तूने बोलै की जानकारी जुटाओ लेकिन ये नहीं बताया की कैसे तो मैं क्या करता, अब तो मैडम भी किसी गैर की हो गयी अच्छा hi हुआ की ये सब अपने आँखों से देख लिया “

अक्की का चेहरा फिर से उतर गया था

उसके गुस्से से हमारे होठो पर वैसी hi मुश्कान खिल गई जैसे किसी बच्चे के गुस्से पर खिल जाती है लेकिन फिर उसके दुखी चेहरे को देखकर हम सबका दिल उदास हो गया था, वो हमारे ग्रुप का सबसे प्यारा मेंबर था और उसके चेहरे में उदासी देखकर सभी का दुखी होना लाजमी hi था..

“तू फ़िक्र मत कर मेरे दोस्त सब ठीक हो जायेगा “

मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा

“अब क्या ठीक हो जायेगा, मेरे प्यार को तो वो पवन उदा कर ले गया “

“यार तुम लोग हो hi चूतिये, ऐसे कौन नजर रखता है :डेड: ,तुम लोग खुद को जासूस Dr.Chutiya समझते हो क्या, या फिर उनकी शागिर्द काजल समझते हो “

मोनिका अपने स्वभाव के अनुसार थोड़े गुस्से में चिल्लाई

“ये लोग कौन है ??”

मेरे मुँह से निकल गया

“उनकी बात अभी छोडो मैंने बस एक उदाहरण दिया था, बात ये है की तुम्हे अगर नजर रखनी hi है तो उसके और भी तरीके थे , और वो तुम्हारी टीचर है यार सबसे अच्छा तरीका तो ये था की तुम उनके पास ट्यूशन शुरू कर दो”

सबकी नजर मोनिका पर चली गयी , साला ये आईडिया हमारे दिमाग में क्यों नहीं आया था,

जैसे हमारे दिमाग की घंटी बज उठी :आईडिया:

“मैं आज hi उनसे बात करती हु “ नेहा ने तुरंत hi कहा ऐसे भी उसे बॉटनी पसंद थी

“लेकिन तेरे वंहा जाने से तो बात बिगड़ जायेगी यानि मेरा मन्ना है की अक्की को अकेले जाना चाहिए “

मैंने तुरंत hi कहा

लेकिन मेरी बात सुनकर नेहा मुस्कुरा उठी

“अरे पागल वो क्या एक लड़के को अकेले पढ़ाएगी मेरे ख्याल से नहीं काम से काम कुछ लोग तो होने चाहिए न “

“देखो भाई मैं तो नहीं जाने वाला, मुझे डैड के साथ बिज़नेस का काम देखना होता है और साथ hi मोनिका के साथ मॉडलिंग भी “

अज्जू ने साफ मन कर दिया

“और मैं भी, मुझसे अब ये पढाई होती नहीं यार “

ये मोनिका थी उसने भी मन कर दिया था

“यार मेरे पास ट्यूशन के पैसे नहीं है “

मैंने अपनी मजबूरी बताई

“अबे उसकी टेंशन क्यों ले रहा है वो मैं देख लूंगा, तू नेहा और अक्की जाकर मैडम से बात करो और कल से hi जाना शुरू कर दो “

अज्जू ने साफ साफ कह दिया था …

वही नेहा के होठो में एक अजीब सी स्माइल भी आ गयी थी , मैडम का इरादा कुछ नेक तो नहीं लग रहा था मुझे ……:अप्प्रोवे:

“क्या मैं क्लास में इतना बुरा पद्धति हु “

हम तीनो स्नेहा मेम के पास खड़े थे

“नहीं मेम लेकिन फिर भी हमें और डिटेल में पढ़ना है, मैं बॉटनी से hi पीएचडी करना चाहती हु “

“ोकक और ये दोनों, ये तुम्हारे बॉडीगार्ड है क्या “

मैडम ने मजाक किया नेहा भी हलके से हंसी

“मैडम असल में इनकी बॉटनी कमजोर है “

“उह ोकक तो मुझसे किस पर सबसे जयदा म्हणत करनी पड़ेगी “

स्नेहा मैडम ने मुझे और अक्की को देखते हुए कहा वही नेहा और मेरी उंगली अक्की के ऊपर थी और वो ..

वो बस मैडम के करीब होने के कारण पसीने से भीग चूका था , और उसकी घबराहट देख कर स्नेहा मेम के होठो पर एक मुस्कान आ गयी थी …….
 
अपडेट 21


पुलिस DG(Director जनरल ऑफ़ पुलिस) के कमरे में माहौल बहुत hi गर्म लग रहा था , डग के माथे पर चिंता की लकीर थी वही उसके सामने बैठा हुआ तिवारी गुस्से से जल रहा था , और पास hi कुछ और लोग हाथ बंधे खड़े थे ..

“क्या कर रही है तुम्हारी पुलिस अभी तक एक आदमी को पकड़ नहीं पाए तुम लोग , 1 इंस्पेक्टर का कतल कर दिया गया साथ hi दो पुलिस वाले और थे , और तुम्हारी निकम्मी पुलिस भी तक खुनी का पता नहीं लगा पायी है ..”

तिवारी चिल्ला रहा था

हाथ बंधे एक महिला के चेहरे में तिवारी की बात सुनकर गुस्सा आ गया

“मंत्री साहब माफ़ कीजियेगा लेकिन पाण्ड्य आपका खास आदमी था और सभी जानते है की उसे शराब और शबाब का कितना शौक था, सुना है की वो उस गोदाम में ओउरतो को किडनैप करके लाया करता था और उनका बलात्कार करता था ऐसे में कोई भी उसे मार सकता है जिसका उसने जीवन उजड़ा हो “

तिवारी ने उस बाला सी खूबसूरत लड़की की और घर कर देखा , वो एक सफ़ेद कलर की शर्ट पहने हुए थी जो की उसके बदन के हर एक कसाव को साफ साफ दिखा रहा था , साथ hi निचे एक ब्लू जीन्स थी..

“पूर्वी मंद योर लैंग्वेज..”

डग ने उसे डांटा

“सर मैंने गलत क्या कहा है , पाण्ड्य जैसे लोगो के कारण हमारे डिपार्टमेंट का नाम ख़राब हो रहा था और मंत्री जी ने उसके हर गलत काम में हमेशा से पर्दा डाला है , मैं तो कहती हु की अच्छा हुआ की उस सेल को किसी ने कुत्ते की मौत मार दिया “

पूर्वी की बात सुकर वंहा खड़े सभी लोग सकते में आ गए थे लेकिन सभी को पता था की वो सही बोल रही है ..

वही तिवारी गुस्से से उसे घुरा

“अपनी ावुकत में रहो लड़की “

उसकी बात सुनकर पूर्वी के होठो में एक मुस्कान आ गयी

“मानती साहब मैं गॉव. की मुलाजिम हु, अपनी म्हणत के डैम पर यंहा पहुंची हु, अपना जीवन ईमानदारी से बिताया है तो आप ये मत समझिये की आपसे दर जाउंगी.. और आप 5 साल के लिए मंत्री है कल पावर में रहे या न रहे पता नहीं लेकिन हमें तो 60 साल तक सर्विस में रहना है ..”

उसकी बात सुनकर तिवारी का दिमाग hi घूम गया आज तक किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी ने उससे ऐसी बात नहीं की थी ,

“मिश्रा..” वो डग हर्षित मिश्रा को देखते हुए बोलै

“अरे नेता जी आप शांत हो जाइये , और तुम सब बहार जाओ “

सभी लोग बहार चले गए

“ये क्या है मिश्रा ?? तुम्हारे डिपार्टमेंट की एक झांट भर की मुलाजिम हमें आंखे दिखा रही है, साली को अभी उठवा दूंगा समझा दो उसे “

तिवारी की बात सुनकर मिश्रा मुस्कुरा उठा था

“सर पहली बात तो ये कोई झांट भर की मुलाजिम नहीं है, इसका नाम है इंस्पेक्टर पूर्वी पाण्ड्य , सीक्रेट सर्विसेज की अधिकारी है, क्राइम ब्रांच से लेकर िब (इंटेलिजेंस ब्यूरो) में काम कर चुकी है ,इसकी टीम हमारे स्टेट की सबसे बेहतरीन टीम रही है , काजल का नाम तो आप जानते hi होंगे जिसने ठाकुर रणवीर मर्डर केस सुलझाया था, वो भी इसके टीम का हिस्सा रह चुकी है, क्राइम एंड डाटा एनालिस्ट मास्टर मंद विकाश , इंस्पेक्टर वेदांत जिसे अधिकारी उसके टीम मेंबर रह चुके है …आपको तो पता hi होगा “

तिवारी ने एक गहरी साँस ली

“ओह्ह तो ये है मिस पूर्वी पाण्ड्य, नाम तो सुना था और इसके तेवर के चर्चे भी सुने थे, लेकिन इसके तेवर मैं नहीं झेलने वाला “

“आप फ़िक्र मत कीजिये मंत्री जी ऐसे केस को अगर कोई अच्छे से सुलझा सकता है तो ये है, मैं इससे बात करता हु “

“कुछ भी करो लेकिन उस सेल को मेरे सामने खड़ा करो जिसने पाण्ड्य को मारा है “

इतना कहकर तिवारी तेजी से वंहा से निकल गया ,उसके जाने के बाद जो लोग अभी बहार गए थे वो फिर से अंदर आ गए

“पूर्वी तुम्हे उससे अच्छे से बात करनी चाहिए, मैं भी मंटा हु की वो एक भ्रष्ट इंसान है लेकिन क्या करे जनता ने उसे मंत्री बनाया है तो उसका सम्मान तो हमें करना hi होगा “

“है सर लेकिन इन सालो को जब अपने सामने देखती हु तो खून hi खोल जाता है मेरा “

उसकी बात सुनकर डग के चेहरे में मुस्कान आ गयी

“देखो खुद को सम्हाल लो क्योकि इस केस से तुम्हे बहुत फायदा मिलने वाला है तिवारी के काळा चित्ते भी निकलने का मौका मिल सकता है तुम्हे, सोचो ..”

पूर्वी ने सच में ये तो सोचा hi नहीं था ऐसे भी वो तिवारी को जेल के अंदर देखना चाहती थी लेकिन कोई ऐसा केस उसके पास नहीं था जिससे वो तिवारी तक पहुंच पाए इस केस से शायद वो तिवारी के करीब पहुंच पायेगी..

“ओह सर मैंने तो ये सोचा hi नहीं था अगर मेरे दिमाग में ये बात पहले से आयी होती तो अभी से hi तिवारी को अपने गियर में ले लेती “

उसकी बात सुनकर डग हँसाने लगा फिर गंभीर होकर बोलै

“तुम अपनी पुराणी टीम के साथ ये काम करो, यद् रहे हमारा मिशन पाण्ड्य के कातिल को पकड़ने के नाम पर तिवारी के काळा करतूतो का पता लगाना और उसके खिलाफ साबुत इकठ्ठा करना होगा “

लेकिन उसकी बात सुनकर पूर्वी का चेहरा उतर गया और वो अपने बाजु में खड़े दो और लोगो को देखने लगी जो अभी तक हाथ बंधे खड़े थे ..

वो भी सर उठाये उसे देख रहे थे

“यार तुम लोगो का प्रॉब्लम सालो पहले था अब तो साथ काम कर लो “

डग ने कहा

“सर मैं तो इसके साथ काम करने को तैयार हु लेकिन ये ..मेरे साथ काम करेगा या नहीं मुझे नहीं पता “

“विकाश तुम्हे क्या परेशानी है उस घटना को सालो बिट गए है “

पास hi खड़ा विकाश जो अभी हाथ बंधे hi खड़ा था उसने अपना सर हिलाया

“सर आप जानते है न की मेरे और पूर्वी के बिच क्या था, अब मैं शादी शुदा हु और अगर काजल को पता चला की मैं पूर्वी और वेदांत के साथ काम कर रहा हु तो..”

दूसरी और खड़े वेदांत के होठो में मुस्कान आ गयी , वही डग एक गहरी साँस लेकर बोल उठा

“देखो विकाश जो हुआ उसे अब भूल जाओ , मैं काजल से बात कर लूंगा और वो समझदार लड़की है , मुझे पता है की पूर्वी और वेदांत की वजह से काजल ने पुलिस डिपार्टमेंट छोड़कर डॉ. चुटिया के साथ मिलकर जासूसी एजेंसी शुरू कर दिया है लेकिन अब वो बात पुराणी हो गयी है, और तुम लोग अब बच्चे नहीं रह गए हो , ये केस हमारे लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट है तो प्लीज एक साथ मिलकर काम करो , मुझे इस टीम में काजल की कमी अभी भी खलेगी लेकिन क्या कर सकते है ..”

काजल का नाम सुनकर वेदांत और पूर्वी ने नाक सिकोड़ा जैसे उन्हें ये बात बिलकुल भी पसंद नहीं आयी हो ..

वही विकाश कुछ सोच में पद गया था

“ठीक है सर मैं पूर्वी और वेदांत के साथ काम करूँगा लेकिन ..काजल को मानाने की जिम्मेदारी आपकी “

विकाश की बात सुनकर सभी के चेहरे चमक उठे थे …वही पूर्वी के होठो में एक कामिनी सी मुस्कान भी खिल गयी थी ..

 
अपडेट 22


मैं अभी अभी कॉलेज की कैंटीन में पंहुचा था , मैं अज्जू और सस के द्वारा लिए गए कपडे hi पहने हुआ था , साथ hi सस मुझे एक दिन पहले hi एक ब्यूटी पार्लर ले गयी थी वंहा मेरे साथ ऐसी नाइंसाफी हुई की इंसानियत से मेरा विस्वाश hi उठ गया ..:?:

कई घंटो तक एक इंसान ने मेरे बालो पर कैची चलाई और कटा कुछ भी नहीं बस कुछ बालो को हलके हलके से छंट दिया गया था …

मेरे चेहरे पर न जाने क्या क्या लगाया गया, उंगलियों के नाखुनो को भी नहीं छोड़ा गया था, ऐसे वंहा से निकलने के बाद मैं किसी मॉडल की तरह दिख रहा था ..:)

मैं आज पूरी तरह से तैयार होकर कॉलेज आया था क्योकि मुझे आज सस के साथ उसके घर जाना था ..:अप्प्रोवे:

कैंटीन में अज्जू सभी को कुछ बता रहा था ,

“अरे क्या हो गया भाई,, बड़ी खुसुर फुसुर हो रही है “:?:

अज्जू ने मुझे बिना कुछ बोले hi अपना मोबाइल मेरे सामने कर दिया ..

उसमे एक मश्ग में आयी खबर थी और साथ hi कुछ फोटो भी ,

‘फिर शुरू हुआ खुनी खेल (ये हैडिंग थी )

शहर में सालो बाद फिर से गैंग वॉर की घटना सामने आ रही है,

पठान गैंग के कुख्यात शूटर भवानी की दिन दहाड़े हत्या कर दी गयी है , कहा जा रहा है की इस हत्या के पीछे फिर से सक्रीय हो रहे जीवा गैंग के एक नए शूटर का हाथ है …

शूटर ने ना सिर्फ भवानी को मारा बल्कि उसके खून से अपना नाम भी लिख दिया, ऐसी हत्या पहले सकती गैंग के मेंबर करते थे जब वो अपने दुशमनो को मार कर उनके खून से अपना नाम लिख देते थे …

लेकिन सकती गैंग बहुत पहले hi ख़त्म हो चुकी है लेकिन इस शिवा नाम के शूटर ने भवानी के खून से अपना नाम लिखकर सभी को सकते में दाल दिया है , कही सकती गैंग फिर से सक्रीय तो नहीं हो गया, या फिर सकती गैंग का कोई पुराण मेंबर जीवा के लिए काम कर रहा है ……???’

ये पढ़कर मेरे माथे में पसीना hi पसीना था, इसमें मैंने एक नाम पढ़ा था शिवा … वही फोटोज में वो लाश दिखाई दे रही थी जिसे बड़ी hi बेरहमी के साथ मारा गया था वही खून से दीवाल में शिवा लिखा गया था ..

शिवा.. ये तो मेरा नाम था , जीवा गैंग में एक hi इंसान का नाम शिवा था और वो मैं था लेकिन मैंने तो किसी को नहीं मारा था ?? मरना तो दूर मैं तो ऐसा सोच भी नहीं सकता था ..

तो ये क्या था….

“अबे तुझे क्या हो गया “

अज्जू ने मुझे हिलाते हुए पूछा

“कुछ नहीं यार .. ये साली अजीब सी खबर है लेकिन इसमें तू इतना एक्सीटेंड क्यों है भाई “

मैंने अज्जू को घर कर देखा ,

“अरे यार जिसका खून हुआ है न भवानी , उसे मैं अच्छे से जनता था , वो असल में तिवारी अंकल का खास आदमी था “

“ओह्ह लेकिन इसमें तो पठान गैंग लिखा हुआ है “

“अरे भाई ये सभी लोग एक hi है , पठान गैंग अब तिवारी गैंग बन गया है … जो दोनों पहले अलग अलग थे अब एक हो गए है , वही ये जो जीवा गैंग है वो पहले सकती गैंग हुआ करता था , ऐसा मैंने सुना है अपने पापा से , मुझे भी उतना नहीं पता “

“ओह्ह तो जीवा गैंग वालो ने तिवारी के खास आदमी को मार दिया है “

मैंने धीरे से कहा

“यही तो मजेदार बात है दोस्त … जीवा गैंग वालो ने नहीं बल्कि सकती गैंग वालो ने मारा है “

“लेकिन तूने तो कहा की दोनों एक hi है “

“है लेकिन फिर भी अलग है , दोनों गैंग के लोग भले hi एक होइ गए हो लेकिन ये स्टाइल शक्ति गैंग का था , तिवारी अंकल और मेरे पापा तो कल रात से hi बहुत बेचैन थे , ऐसे छोड़ न यार हमें क्या … ऐसे तू तो पूरा हीरो दिख रहा है बे, सस ने तो तुझे चमका hi दिया “

मुझे अचानक hi यद् आया की मैं कहा हु , अभी ये सब सोचने का समय नहीं था और सोच कर मुझे कुछ मिलने वाला भी नहीं था, ये सब बात का पता मुझे सम्पत मां से पता चल जाना था ..:अप्प्रोवे:

“है यार सस ने बोलै था की आज मुझे अपने घर ले जायेगी “

“है लेकिन आज तो मुझे लगता की वो तुझे नहीं ले जायेगी , उसके घर का माहौल तो आज बहुत hi गर्म होगा, भवानी उसके पिता का बेहद hi खास था “

“हम्म “

तभी मेरी नजर नेहा पर पड़ी जो मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी, मैंने आँखों से hi पूछ लिया की क्या हुआ और उसने आँखों से hi मुझे बता दिया की मैं अच्छा लग रहा हु ..उसकी इस ऐडा से मेरे मन में एक अजीब सी तीस सी उठ गयी ..:हैप्पी:

मेरे दिमाग में अभी भी भवानी की मौत की तस्वीरें घूम रही थी, कहने को मैं शांत था लेकिन मन में बहुत hi बेचैनी चल hi रही थी …

क्लास से छूटने के बाद हम फिर से कैंटीन में बैठे थे की मुझे सस आते हुए दिखाई दी ..

“ही गाइस “:वेव:

“ही सस “ आज मोनिका ने ये कहा था , उसने हमेशा की तरह सस को देखकर नाक कान नहीं सिकोड़े थे शायद इतने दिनों में उसके दिल से सस के लिए नफरत गायब हो गयी थी उसे भी समझ आ चूका था की ये वैसी लड़की नहीं है जैसे वो उसे समझते थे , लेकिन नेहा का चेहरा आज भी उसे देखकर मुरझा गया था और ये स्वाभाविक भी था ..

सिवाय नेहा के सभी ने उसे hi कहा :hi:

“तो अंकित चले, आज मेरे घर जाना है तुम्हे “

उसकी बात सुनकर सभी थोड़ा चौक गए

“लेकिन आज तो भवानी की मौत हुई है तुम्हारे घर जाना ठीक होगा “

अज्जू ने कहा

“अरे तो क्या हुआ , इससे हमें क्या लेना देना ये सब पापा का पर्सनल मटर है “

सस की बात सुनकर मैंने एक बार अज्जू को देखा , उसने मुझे सस के साथ जाने का इशारा किया , नेहा का चेहरा बुरी तरह से मुरझा गया था उसे ये सब बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहा था लेकिन वो बेचारी कर भी क्या सकती थी .. वो न तो मुझसे और सस से नजर भी नहीं मिला रही थी ..

********

“वाओ यार कितना बड़ा घर है तुम्हारा “

सच में सस का घर किसी महल से काम नहीं था , और साथ hi किसी किले से भी काम नहीं था , इतने बंदूख धरी इधर से उधर टहल रहे थे , ऐसे लग रहा था की मैं सच में किसी राजा के पास आ गया हु , चारो और बस बंदूख लिए लोगो की भरमार थी …

“ये घर है या फिर किला “

हम अभी भी उसके कार में बैठे हुए थे , साला मैं गेट से अंदर आने के बाद भी उसके घर के दरवाजे तक पहुंचने में हमें समय लग रहा था, इतनी बड़ी जमीं में उसका घर बना था कई एकर में फैला हुआ गार्डन था..

“यार कितने लोग रहते हो तुम लोग इतने बड़े घर में “

सस मेरी बार सुनकर बस हांसे जा रही थी ..

“क्या फर्क पड़ता है ?? कहने को तो मेरे परिवार में 5 लोग है , दो भाई है, माँ है बाप है लेकिन फिर भी बस अकेले इन नौकरो और बोडीगार्ड्स के साथ hi रहना पड़ता है , घर वालो को तो कभी मेरी चिंता हुई hi नहीं…”

वो थोड़ी उदास हो गयी जो की मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहा था

“अरे don’t वोर्री यार मूड ठीक रखो, अपने पिता के पास मुझे ऐसे hi ले जाओगी क्या ??”

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा सा हंसी और फिर गंभीर हो गयी

“अंकित मैं तुम्हे पापा से नहीं मिलवाने वाली हु”

“व्हाट ..??:व्हाट1: तो हम यंहा आये क्यों है “

इस बार सस के होठो में एक मुस्कान थी , और उसने गाड़ी रोक दी

“चलो बताती हु “

हम दोनों निचे उतरे , मैं अभी भी उस घर के विशाल सौंदर्य में थोड़ा खो गया था, अंदर जाते hi बड़ा सा कमरा था और जैसा मैंने सिर्फ फिल्मो में देखा था और घुमावदार दो सीढिया , जो की दूसरी मंजिल में जाती थी …

हम सीढ़ियों से ऊपर गए और दूसरी मंजिल के एक कमरे में पहुंचे ..

“वाओ यार क्या कमरा है ये “

मैं अभी भी उस कमरे की सुंदरता से मुग्ध था ,कमरा इतना बड़ा था की गांव का पूरा घर हो , खिड़की की जगह बड़े बड़े कांच लगाए गए थे जिसपर गोल्डन रंग के परदे थे , कमरे के बीचो बिच एक बड़ा सा गोलाकार बिस्टेर था जिसपर भी गोल्डन रंग की hi बेडशीट से लेकर सब कुछ गोल्डन hi था , दरवाजो के रंग से लेकर टेबल तक सब कुछ गोल्डन था और साथ hi सभी चीजों में बेहतरीन नक्कासी की गयी थी ..

मैं जंहा ये सब देखकर अपना मुँह फाड़ चूका था वही सस को मेरे इस एक्सप्रेशन से मनो कोई भी फर्क नहीं पढ़ रहा था

“कुछ खाओगे “

उसने पास hi रखे एक फ़ोन को पकड़ते हुए कहा

“नहीं अभी तो कैंटीन में नाश्ता किया था “

“ोकक आओ यंहा बैठो “

उसने अपने बिस्टेर की और इशारा किया , मैंने देखा की उसके कमरे में एक बड़ा सा सोफे भी रखा हुआ था लेकिन सस ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने बिस्टेर में बैठा दिया ..

“अंकित मैं तुम्हे पापा से नहीं मिलवाने वाली और न hi मैं चाहती हु की तुम मेरे बर्फ बैंकर मेरे परिवार वालो के सामने जाओ , मैं तुम्हे खामखा hi किसी भी मुसीबत में नहीं डालना चाहती , मेरे परिवार वालो को कोई भी प्रॉब्लम नहीं है की मैं किसी को भी अपना बर्फ बनाऊ , या फिर किसी के साथ भी कुछ भी करू लेकिन …. लेकिन आज तक मैंने कभी अपने किसी भी बर्फ कोई घर वालो से नहीं मिलवाया है , ऐसे भी किसी को कोई भी मतलब नहीं रहता अगर तुम्हे मिलवा दिया तो वो लोग शक करेंगे और फिर न जाने शायद तुम्हारे बारे में पता भी करे और अगर तुम्हे है मैंने उनसे झूठ बोलै हो तो फिर ……तो फिर बड़ी परेशानी हो सकती है ..”

“ओह्ह तो ये सब तुम मुझे पहले भी तो बोल सकती थी न , फिर यंहा क्यों ले आयी “

इस बार सस के होठो में एक मुस्कान तैर गयी थी

“क्योकि मैं तुमसे बात करना चाहती थी “

“बात तो वंहा भी हो सकती थी “

“लेकिन वंहा सब होते है , मैं तुमसे अकेले में बात करना चाहती थी “

“अकेले में क्यों..???:?: “

“बस ऐसे hi मुझे और किसी का डिस्टर्बेंस पसंद नहीं आता, ऐसे भी तुम मेरे दोस्त हो वो सब नहीं “

सस की ये बात सुनकर मैं हैरान हो गया था

“तुम उन्हें पहले से जानती हो न की मुझे और मैं तुम्हारा दोस्त कब से हो गया मैं तो एक फटीचर था न “

“है मुझे ये फटीचर hi पसंद आ गया तो मैं क्या करू “

वो खिलखिलाई साथ hi मैं भी हंसा :लाफ:

“तुम समझ से बहार हो सस “

वो चुप हो चुकी थी, जब मैंने उसे देखा तो पाया की वो मुझे hi घर रही थी , बस एकटक मेरे hi चेहरे को देख रही थी … उसकी आँखों में कुछ तो ऐसा था जिसे मैंने कभी नहीं देखा था ..

“क्या हुआ ऐसे क्या देख रही हो “

“ी लव यू अंकित “

उसने न सिर्फ ये कहा बल्कि मेरे बालो में अपनी उंगलिया फंसा कर मुझे अपनी और खींचने लगी और साथ hi मेरे होठो में अपने होठो को भी मिला दिया .. मैं बुरी तरह से हैरान हो चूका था, मुझे कैसा रियेक्ट करना चाहिए ये भी मुझे नहीं पता था , मैंने बस अपने होठो को कसकर बंद कर लिए थे लेकिन वो बड़ी hi बेसब्री से मेरे होठो को चूमे जा रही थी …

मैंने जोर देकर उसे खुद से अलग किया ..

“सस ये क्या कर रही हो, हम अभी तो मिले है और तुम ..”

उसने मेरे हाथो को जोरो से अपने हाथो में पकड़ लिया था उसके आँखों में आंसू थे जिसे देखकर मैं भी थोड़ा नरम हो चूका था ..उसने अपने शरीर को मुझसे चिपका दिया था ..

“अंकित ये आज से नहीं हुआ है ये उस दिन से हुआ जब हम पहली बार मिले थे, आजतक किसी ने भी मुझसे ऐसी बात नहीं की थी , तुमने मेरी आत्मा को झंझोर दिया था और उसके बाद जब तुमने भाभी के हाथो का पराठा मुझे खिलाया , तुम मुझे बहुत hi पसंद आने लगे थे , और जब जब तुम्हारे पास होती हु तो मुझे लगता है की मेरी दुनिया में कोई भी परेशानी नहीं है , तुमने मुझे वो हिम्मत दी है जो अभी तक किसी ने भी नहीं दी थी , मैं तुम्हे बहुत hi पसंद करती हुई अंकित “

“मैं भी तुम्हे पसंद करता हु सस लेकिन … ये दोस्ती है न की प्यार “

मेरी बार सुनकर सस थोड़ा सा हंसी और मुझसे दूर होकर मेरे सामने कड़ी हो गयी, अभी उसने के वाइट कलर की फ्रैंक पहनी थी , उसके कपडे उसके घुटने से ऊपर hi थे ..

“नहीं अंकित ये दोस्ती से कही जयदा है , ये पसंद से कही जयदा है , अगर तुम्हे यकीं न हो तो ये देखो की तुम मेरे जीवन में कितना महत्व रखते हो “

उसने अपने फ्रैंक को निचे से उठा दिया , मैं कुछ समझ पता उससे पहले hi मेरे सामने जो नजारा था उसे देखकर मनो मेरी सांसे hi रुक गयी थी ..

सस ने एक सफ़ेद रंग की hi पंतय पहन राखी टी और उसमे लाल रंग से मेरा नाम लिखा हुआ था , अंकित … ऐसा लग रहा था जैसे उसे लिपस्टिक से लिखा गया हो ..

मैं पहली बार किसी लड़की को इस हालत में देख रहा था , उसके मांसल जंघे मुझे साफ साफ दिख रही थी उसकी पंतय ऐसे भी उसके योनि को छिपाने में पूरी तरह से सफल नहीं हो प् रही थी , वो बहुत hi छोटी सी और पतली पंतय थी जिसपर यदि मेरा नाम नहीं लिखा होता तो शायद मुझे सस की योनि के दर्शन भी हो जाते , उसने बीचो बिच मेरा नाम लिखा था, जो की शायद उसकी योनि की दरार पर था ……..

मेरा गाला ये सब देख कर hi सुख गया, ये मेरे जीवन का पहला पल था जंहा मैं किसी लड़की को ऐसे हालत में देख रहा था लेकिन …….

लेकिन यही काफी नहीं था अभी तो सस की एक और हरकत ने मेरी सांसे hi रोक दी ..

सस ने अपनी वो पंतय अपने पैरो से होते हुए उतार दी और उसे मेरे चेहरे में फेक दिया ………

“ध्यान से देखो इसे अंकित ये मेरे प्यार का प्रूफ है, मैं तुम्हारा नाम उस जगह में लगा कर घूम रही हु जिसे लड़कियों का सबसे गुप्त अंग कहा जाता है , अब भी तुम ये hi कहोगे की प्यार नहीं है “

अब मैं क्या कहता ..??

जो हुआ उसने तो मेरा भी दिमाग घुमा दिया था , एक तरफ मेरी सांसे बेहद hi तेज हो गयी थी , दिल की धड़कने तेज थी , वही दूसरी और दिमाग पूरी तरह से चक्कर खा चूका था ..

लिंग ने भी उत्पात मचाना शुर कर दिया था ..

क्या सही क्या गलत कुछ भी समझ नहीं आ रहा था .. मैं बुरी तरह से घबराया हुआ वंहा से भगा .. लेकिन सस ने फिर से आवाज लगाई..

“रुको … मैं तुम पर कोई भी प्रेस्सेर नहीं दाल रही हु , मैंने तो बस अपने दिल की बात कही है … इस बारे में आराम से सोचना अंकित और ये तुम्हारे लिए है इसे तुम ले जाओ और तुम घर कैसे जाओगे रुको मैं ड्राइवर से बोलकर तुम्हे छुड़वा देती हु ..”

सस ने मुस्कुराते हुए अपनी पंतय, जो की जमीं में गिर चुकी थी उसे उठाकर मुझे मेरे हाथो में दे दिया ……

“मैं … मैं इसका क्या करूँगा “

मैंने घबराते हुए कहा, लेकिन वो मुस्कुराई

“जो मन में आये करना, लेकिन इसे अपने पास hi रखो “

और वो उसने पंतय को मेरे हाथो से लेकर मेरे जेब में दाल दिया ..

 
अपडेट 23


सस की हरकत से मेरे दिमाग का फ्यूज hi उड़ चूका था, उसने मुझे घर पहुंचने के लिए ड्राइवर का ऑफर दिया लेकिन मैंने उसे मन कर दिया, मैं वंहा से बहार निकला और तेजी के साथ पैदल चलने लगा था ..

मैं अपने खयालो में hi खोया हुआ था की मेरे कानो में सस की आवाज पड़ी

“नहीं …. अंकित ..”

वो जोरो से चिल्ला रही थी , मैं अचानक hi अपने ख्वाबो से बहार आया ..

और जैसे hi मुझे थोड़ा होश आया तो मैंने पाया की कोई डंडे जैसी चीज मेरे चेहरे के तरफ बढ़ रही थी ..

जैसे मेरे दिमाग के सरे तार अचानक से hi एक्टिव हो गए हो , मैं तुरंत hi झुक गया , किसी ने मुझ पर लकड़ी से वॉर किया था, मेरे झुकते hi वो वॉर बेकार हो गया और अचानक से hi जैसे अभी तक सीखी गयी सभी ट्रेनिंग मेरे अंदर से उबाल मर कर बहार आ गयी , मेरे हाथ अपने आप hi उस मरने वाले इंसान के पेट में जा लगे और मैंने खड़े होते hi अपनी नजर घुमाई तो देखा की कुछ 4 ब्लैक ड्रेस पहने लोग मेरी और बढ़ रहे है मैं तुरंत hi एक्शन मूड में आ गया था , उनके हाथो में डंडे थे लेकिन मैं बिना किसी हथियार के भी उनपर भरी पद रहा था , मैं सीधे निशाने पर फोकस करके वॉर कर रहा था , इतने दिनों से जो मुझे सिखाया गया था आज उसका उसे हो रहा था, एक बार तो मुझे यकीं नहीं आया की मेरी ट्रेनिंग इतनी असरदायक थी ……

तभी सस की आवाज और भी तेज हो गयी

“अरे रुक जाओ ये मेरा दोस्त है ..”

सस जोरो से चिल्ला कर भागते हुए मेरे पास आ रही थी ..

“रुको ..” एक भरी आवाज फिजाओ में गूंज उठी और सभी लोग जैसे थे वही जैम गए , मैं अब भी डिफेंसिव एक्शन में hi खड़ा था लेकिन सस तेजी से आकर मेरे पास कड़ी हो गयी और मैं भी रिलैक्स हो गया था ..

“पापा ये मेरा दोस्त है “

सस ने लगभग मुझे अपने पीछे छिपाते हुए कहा , मैं जो अभी भी कुछ समझ नहीं प् रहा था नजर उठा कर सामने देखा ..

सामने एक लम्बा चौड़ा रोबदार मूंछो वाला इंसान खड़ा हुआ मुझे घर रहा था , कई लोग उसे घेरे हुए थे , रंग गोरा था और काली काली मूंछे पुरे चेहरे में एक अजीब सी रंगत बिखेर रहे थे …

पापा … यानि यही शख्स था जिसे लोग तिवारी कहते है , कई गार्ड से घिरा हुआ उस शख्स की आंखे लाल थी..

“तुम्हारा दोस्त क्या अँधा और बहरा है?? जब गार्ड्स ने उसे आवाज लगाई तो उसने जवाब क्यों नहीं दिया, ये तो पापा की तरफ तेजी से बढे hi जा रहा था “

एक लड़के ने कहा , शायद ये सस का भाई होगा , वही सस मुझे घूरने लगी , उसकी आँखों में सवाल था लेकिन मेरी आंखे जब उससे मिली तो शायद उसे जवाब मिल गया और उसके होठो में मुस्कान आ गयी ..

“अरे पापा असल में मैंने इसे एक पजल पूछा था, और शर्त राखी थी की अगर ये उसे सोल्वे कर लेगा तो इसे मैं प्राइज दूंगी , शायद वो उसी सवाल को सोच रहा था और गम हो गया था क्यों अंकित “

अब उसकी बात तो सच थी मैं उसके hi सवालो में hi तो खोया हुआ था ..

“जी है मुझे तो पता hi नहीं था की कोई मुझे आवाज दे रहा है , जब सस की आवाज मेरे कानो में पड़ी तब मुझे होश आया “

असल में हुआ ये था की जब मैं घर से बहार निकला जो की एक बड़े से गार्डन के बिच में था, मैं एग्जिट की तरफ न जाकर गार्डन के अंदर की तरफ चलने लगा जंहा शायद तिवारी और उसके साथी मिलकर बात कर रहे थे, उन्हें देख कर लग रहा था की ये सब अभी अभी कही से आये है , गार्ड्स ने मुझे आवाज दी होगी और मैं खोया हुआ था इसलिए मेरे ऊपर अटैक कर दिया गया …..

तिवारी अभी भी मुझे खा जाने वाली निगाहो से देख रहा था , तभी एक दूसरे शख्स ने कहा जो की तिवारी से थोड़े काम उम्र का लग रहा था ..

“अच्छा तो ये तुम्हारा दोस्त है बेटी , लड़का तो बड़ा hi चुस्त है , और लड़ना भी जनता है ,कहा से सीखा ये सब “

मैं और सस एक दूसरे को देखने लगे , मैं कुछ बोलता उससे पहले hi सस बोल उठी

“भल्ला अंकल असल में ये गांव से है , यंहा हमारे hi कॉलेज में पढ़ता है, अज्जू का बेस्ट फ्रेंड है उसी ने मुझे इससे मिलवाया था, ये स्वस्तिक अपार्टमेंट में रूम लेकर रहता है , इसका परिवार गांव में है ..शायद वही इसने ये सब सीखा होगा “

अब ये सस ने कौन से अपार्टमेंट का नाम ले लिया ?? फिर भी सस की बातो में बहुत कुछ सच था तो मैंने भी कॉन्फिडेंस के साथ कहा

“जी वो गांव में अखाडा में कुश्ती लड़ा करता था और साथ में एक टीचर ने थोड़ी मार्शल आर्ट भी सिखाई थी तो बस वही है ..”

सस और मेरी बात सुनकर भल्ला खुश हो गया , अब मुझे यद् आया की असल में अज्जू के पिता को भी भल्ला hi कहा जाता है शायद यही अज्जू का पिता था ..

“ओह ये तो बढ़िया बात है , चलो तुम्हारी और अज्जू की दोस्ती तो हुई “

अब मुझे कन्फर्म हो गया था की यही भल्ला है, भल्ला तिवारी की तरफ मुदा

“ऐसे एक बात तो है मंत्री जी , लड़के में डैम है , ऐसे hi हमारे लोगो पर अटैक हो रहे है , आपके परिवार पर भी हमला हो सकता है क्यों न इस लड़के को hi सस का बॉडीगार्ड बना दिया जाए , साथ में रहेगा सस को भी कंपनी मिल जायेगी और ये अज्जू का दोस्त भी है तो कोई दिक्कत भी नहीं होगी , इससे आपकी भी चिंता सस की तरफ से ख़त्म हो जायेगी “

मैं कुछ बोलने hi वाला था उसेस पहले hi सस बोल उठी

“है अंकल ऐसे भी ये अपने घर वालो से झगड़ा कर के आया हुआ है , अपार्टमेंट इसके घर वालो से मिल गया लेकिन अभी इसे पैसे भी चाहिए तो कोई जॉब भी धुंध रहा था “

सस की बाटे मेरे दिमाग से बहार जा रही थी आखिर वो करना क्या चाहती थी ????:?:

“हम्म ठीक है , आज से इसके लिए भी एक कमरा साफ करवा दो ये यही रहेगा “

तिवारी ने अपनी भरी आवाज में बस इतना hi खा और वंहा से निकल गया ..

वही सस उछाल कर मेरे हाथो को अपने हाथो में दबा ली , और मैं मुँह फाडे ये सब सोचता hi रह गया की ये साला आखिर हुआ क्या ????

***********

“ये तुमने मुझे किस भसड़ में फंसा दिया है ?? “ :एंग्री:

मैं सस के ऊपर बुरी तरह से गुस्सा था, वो मुझे अपनी कार में बैठा कर न जाने कहा ले जा रही थी ..

“अरे तुम समझते नहीं , देखो इस तरह से हम दोनों एक दूसरे के पास रह पाएंगे और तुम्हे भी तो अज्जू की शादी तोड़नी है न “

“है लेकिन अब मुझे तुमसे दर लगने लगा है “

मेरी बात सस जोरो से हंसी

“इतने तगड़े मर्द हो, इतनी मस्त बॉडी है क्या फाइट करते हो और छोटी सी बात से दर गए “

उसके होठो में अभी भी शरारत भरी मुस्कान थी

“तुमने हरकत hi ऐसी की थी ये क्या है “

मैंने अपने जेब की और इशारा करके दिखाया जिसमे उसकी पंतय राखी हुई थी

“मेरा प्यार “

“तुम्हारे इसी बिहेवियर की वजह से तो मुझे दर लग रहा है पता नहीं तुम ये सब क्या क्या सोच रही हो “

सस ने मेरी बात का कोई भी जवाब नहीं दिया बल्कि वो बस गाड़ी चला रही थी, हम दोनों शांत hi थे , उसने गाड़ी एक कॉलोनी में घुसा दी ..

“ये हम कहा आ गए है “

“वही जंहा तुम रहते हो “

सस मुस्कुराई, जबकि मैंने उसे प्रश्नवाचक दृस्टि से देखा

“अरे पापा से बोलै था न की स्वस्तिक अपार्टमेंट में फ्लैट है तुम्हारा वही लायी हु ..”

“लेकिन मेरा तो यंहा कोई भी फ्लैट नहीं है , और इतने महंगे जगह में तो मैं सोच भी नहीं सकता “

सच में ये बड़ा hi पॉश इलाका लग रहा था , बड़ी बड़ी गाड़िया पार्किंग में पार्क की गयी थी , गगनचुम्बी इमारते थी ..

“है लेकिन मेरा तो है न अब से वो तुम्हारा होगा “

मैं बुरी तरह से चौक गया

“लेकिन ??”

उसने मेरे होठो में उंगली रख दी

“लेकिन वेकिन कुछ भी नहीं, ऐसे भी पापा को बोल चुकी हु की तुम यंहा रहते हो तो अब से तुम यंहा रहते हो समझ गए “

“लेकिन तुम्हारे पापा ने तो मुझे घर में रहने के लिए कहा है “

वो फिर से मुस्कुराई

“ तुम वंहा भी रहोगे “

“मैं यंहा भी रहूँगा मैं वंहा भी रहूँगा???

और मेरी भाभी माँ ..?? उनका क्या होगा मैं उन्हें अकेले नहीं छोड़ सकता बता देता हु ..

“अरे बाबा उन्हें कोण अकेले छोड़ने बोल रहा है, तुम उन्हें लेकर यंहा रह सकते हो , और फिर कभी कभी तुम्हे मेरे घर में भी आना होगा बस ..”

असल में मुझे सस की बात अच्छी लगी , ऐसे भी शायद भाभी माँ को जब मैं ये फ्लैट दिखता तो वो खुस होती..

हम कार से उतर कर लिफ्ट में गए , लिफ्ट बंद होने hi वाला था की एक लड़की ने दौड़ते हुए लिफ्ट का दरवाजा रोक लिया ..

“हे सस, वेट फॉर में “

“उह ही स्वाति ..”

“बहुत दिनों के बाद दिख रही हो “

“या.. यंहा आना hi नहीं होता , ऐसे इससे मिलो तुम्हारा नया पडोसी अंकित , ये इसी का अपार्टमेंट है , मैं तो बस यंहा आती जाती हु अब ये यही रहने वाला है “

“ओह्ह hi मैं स्वाति “

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया , वही मैं अपना मुँह खोले उस हुस्न की पारी को देख रहा था

“आपको कौन नहीं जनता “

मेरी बात सुनकर जंहा सस ने थोड़ी नाराजगी से मुझे देखा वही स्वाति के होठो में मुस्कान आ गयी ..

“थैंक्स .. आप मेरी फिल्म्स देखते हो “

“ऑफ़ कोर्स आपकी पिछली फिल्म तो मेरी फव थी क्या एक्टिंग की थी आपने “

मेरी बात सुनकर स्वाति खुस हो गयी

“थैंक्स “

तभी दरवाजा खुला और हमारा अपार्टमेंट आ गया

“ ोकक bye सस , bye अंकित , अब तो मिलना होता रहेगा “

वो हसते हुए हमें bye करने लगी जिसका सस ने कोई भी जवाब नहीं दिया , वही स्वाति ने जब मेरा नाम लिया था तो उसने नाम पर थोड़ा ज्यादा जोर दिया था , शायद यही सस के चिढ़ाने की वजह भी थी ..

“वाओ यार स्वाति कपूर तुम्हे जानती है “

फ्लैट में घुसते हुए मैं जैसे चीख पड़ा , वही सस ने मुँह बनाया

“कोण सी बड़ी बात है , बाजु में hi तो रहती है “

“तुम्हारे लिए नहीं होगा लेकिन मेरे गांव में अगर किसी को पता चल गया न की मैं स्वाति कपूर के साथ एक hi लिफ्ट में था तो … तो सोच भी नहीं सकती की वंहा के लड़के कभी इसे नहीं मानेंगे , वाओ स्वाति कपूर , तुमने उनका वो गण सुना है ..”

मैं गाने hi वाला था लेकिन सस ने मुझे गुस्से से घुरा

“तुम ये गरीबो वाली हरकत करना बंद नहीं कर सकते क्या ?? अब वो तुम्हारी पडोसी है , और ये एक्टर, मॉडल लोग हमारे सामने क्या है , जब मेरा पापा चाहे इनको नचा देते है , मेरे बर्थडे तक में ये लोग आ कर नाचते है , और तुम उसके साथ ऐसे बेहवे करके मेरी बेज्जती कर रहे थे , उस साली की ावुकत क्या है मेरे सामने , किराये के माकन में रहती है अभी एक कम्प्लेन कर दू तो उसका बोरिया बिस्टेर फेक देंगे कॉलोनी वाले “

सस का गुस्सा देख कर मैं चुप hi हो गया ..

“यार इतना गुस्सा क्यों हो रही हो , वो मेरी फव है तो बस ..”

“सेक्स करना चाहता है क्या उससे ?? बोल करवा दू क्या “

सस की बात सुनकर मैं एक बार उसके चेहरे को hi देखता रह गया ,

“छी तुझे बस इसके सिवा कुछ और नहीं सूझता न , जा रहा हु मैं और रख तू इसे अपने पास “

मैंने जेब से उसकी पंतय निकल कर उस पर फेक दिया और वंहा से जाने लगा , लेकिन तभी सस भाग कर मेरे पास आ गयी,

मुझपर जैसे खुद hi गयी , और मेरा गाला पकड़कर झूल गयी , मैं लड़खड़ाता हुआ पास hi रखे सोफे में जा गिरा ..

उसने अपने होठ मेरे होठो में दाल दिए , मैं छूटने की कोशिस कर रहा था लेकिन उसने मेरे चेहरे को बड़ी hi ताकत से जकड रखा था ..

सस ये क्या कर रही हो ..

“बहुत हो गया अब तो तेरा रपे hi करुँगी “

वो खिलखिलाते हुए बोली

“तेरी तो “

मैं भी भड़क गया था और मैंने उसे पलट दिया , अब वो मेरे निचे थी और चुप भी हो चुकी थी ..

हम दोनों hi एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे

“सस ये गलत है , मैं ये नहीं कर सकता “

“क्यों खड़ा नहीं होता क्या , जरा देखु तो “

उसने मेरे जीन्स के ऊपर से hi मेरे लिंग को पकड़ कर जोरो से दबा दिया ..

“आउच .. कामिनी कही की “

मैं खड़े होने वाला था लेकिन वो अभी भी मेरे गले में हाथ डेल हुए झूल रही थी ..

मेरा लिंग सच में पूरी ताकत से खड़ा हुआ था

“ये तो पूरा तना हुआ है फिर भी तू मुझे भाव नहीं दे रहा है , जनता है मुझसे सेक्स करने के लिए लड़को की लाइन लगी रहती है , सभी चोर निगाहो से मेरे जिस्म को देखते है लेकिन किसी की भी हिम्मत नहीं होती की मुझे कुछ बोल सके “

“अच्छा तो उनसे hi करवा लेना न , मुझे छोड़ “

मैं फिर से उठाने को हुआ लेकिन सस ने मुझे फिर से जोरो से अपने से लगा लिया

“सेल .. पता नहीं तुझ में ऐसा क्या देख लिया की तुझपर दिल आ गया .. और जिसपर सस का दिल आ जाये वो उसे प् कर hi रहती है “

“अच्छा मैं क्या कोई खिलौना हु जिसे तू प् कर रहेगी , प्यार न तो ख़रीदा जा सकता है न hi छिना जा सकता है समझी ..”

मेरी बात सुनकर सस ने मुझे थोड़ा ढीला छोड़ दिया , मैं उठ खड़ा हुआ लेकिन सस का चेहरा उदास था जिसे देखकर मैं फिर से उसके बाजु में जा बैठा

“मुझमे किस बात की कमी है अंकित जो तू मुझे पसंद नहीं कर रहा “

उसकी आवाज में एक रोना था , गाला जैसे भर गया था

“तू पागल है क्या रो क्यों रही है , अरे आज hi तो तूने प्रोपोज़ किया है और आज hi तुझे जवाब भी चाहिए , देख सस तेरे साथ इतने दिन रहकर मुझे इतना तो पता चल गया है की तू बड़ी hi अच्छी लड़की है , लेकिन थोड़ी पागल भी है , किसी को ऐसे कौन प्रोपोज़ करता है यार …. तूने मुझे प्रोपोज़ नहीं किया बल्कि मुझे डरा दिया , मैंने जीवन में कभी ऐसी चीजे नहीं देखि थी और तूने तो पूरा पिक्चर hi दिखा दिया “

मेरी बात सुनकर वो शर्मा गयी , जो मुझे और भी अजीब लगा

“वह क्या ऐडा है आपके क्या कहने , पहले मेरे सामने कपडे खोलने में भी कुछ नहीं लगा और अब सिर्फ उसकी बात सुनकर hi शर्मा रही हो वह “

वो खिलखिला कर हंस पड़ी

“तू लड़कियों को नहीं समझ पायेगा रे , जब वो किसी से प्यार करती है तो उसके लिए कुछ भी कर जाती है, मुझे लगा की हर लड़को को एक hi चीज चाहिए होती है और अगर मैं तुझे वो ऑफर कर दू तो शायद तू मान जायेगा , लेकिन तू तो अलग निकला “

“ोूहः तो ये बात है , देख सस मुझे थोड़ा सोचने का मौका तो दे “

“मैं समझ सकती हु , लेकिन एक चीज और “

“क्या ??”

“इस स्वाति से दूर रहना , ये साली जैसे तुझे देख रही थी मुझे पसंद नहीं आया “

अब साला मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं कोण सा रणबीर कपूर हु जो ये सब लड़किया मुझे देख रही थी ..:डेड:

“यार वो मुझे क्यों देखेगी “

“अरे तू इस साली रैंड को नहीं जनता , अगर तुझे इसकी लेनी हो तो मुझे बता देना मैं इसकी दिलवा दूंगी लेकिन इससे इम्प्रेस होकर कुछ चुतियापा नहीं करना “

मैं उसकी बात सुनकर बुरी तरह से चौका

“तू क्या दिलवाएगी “

“जो बोले वो साली हाई क्लास रैंड है , सब जानती हु इसके बारे में “

मैं बस मुँह फाडे उसे देख रहा था , परदे में एक संस्कारी लड़की का करैक्टर निभाने वाली स्वाति के बारे में तो मैं ऐसी बात सोच भी नहीं सकता था ..

“नहीं यार तुम्हे कोई गलत फहमी हुई होगी “

सस जोरो से हंस पड़ी ..

“मेरे पापा के फार्महाउस में ऐसी कई हेरोइनेस नंगी नाचती है .. समझ गए “

मैं उसकी बात सुनकर बिलकुल hi चुप था … चुप और शांत दोनों hi एक साथ था ..

मन में कोई भी विचार नहीं आ प् रहे थे , स्वाति का मासूम सा चेहरा मेरे दिमाग में घूम रहा था वही सस की बाटे भी …

इन सब के बिच मैं ये चीज बिलकुल hi भूल सा गया था की कोई मेरे नाम से क़त्ल किये जा रहा है , और मैं यंहा तिवारी की बेटी के साथ खड़ा हु , वो इंसान जिसे अगर इतना भी पता चला की मैं किसके साथ रहता हु तो शायद मुझे जान से मरने में जरा भी देरी न करे………

“अब शायद तुम्हे जाना चाहिए , तुम अपनी भाभी के साथ जल्दी से यंहा सिफत हो जाओ “

सस की बात से मैं फिर से वर्तमान में आया और फिर जल्दी से वंहा से निकल गया ……..

 
अपडेट 24


जब मैं हवेली पंहुचा तो वंहा बैठे हुए लोग मुझे देखते hi खड़े हो गए ..

“शिवा भैया की …. “

कोई एक आदमी जोरो से चिल्लाया

“जय जय जय “

सभी लोग जोरो से चिल्ला उठे ,लोग नंगाड़े बजा रहे थे और कुछ लोग मुझे अपने कंधे पर उठा कर नाचने लगे, कुछ लोगो ने तो मुझे फूलो की माला भी पहना दी ..

मैं कुछ समझ पता की ये सब साला आखिर हो काया रहा है तभी सम्पत मां आकर मुझे निचे उतर कर अपने ऑफिस में ले गए …..

“जब तुझे मैंने मन किया था की तू तिवारी और हमारे बिच नहीं पड़ेगा तो फिर तूने ये काण्ड क्यों कर दिया ..”

सम्पत मां की बात सुनकर मुझे समझ आया की ये हो क्या रहा है ..

“मां मैंने कुछ भी नहीं किया है ,”

“क्या ???” मां बुरी तरह से चौक गए थे …

“तो … तो ये सब किसने किया है ?”

“ मुझे क्या पता की किसने किया है, इतना बड़ा कदम मैं आप से बिना पूछे कैसे ले सकता हु “

सम्पत मां थोड़ी देर चुप hi रहे

“अच्छा……. स्टाइल तो सकती गैंग वाला है … लेकिन सकती गैंग के सभी लोग तो अब इनएक्टिव है और काम छोड़ चुके है तो फिर ये सब किसने किया होगा “

“आखिर ये माजरा क्या है , सकती गैंग और जीवा गैंग अलग कैसे है “

“कोई खास नहीं असल में जीवा गैंग की शुरुवात की थी जीवा ने , और उसकी एक बहन थी जिसका नाम था सकती उसने hi सकती गैंग की शुरुवात की थी इसलिए उसे सकती गैंग कहा गया ..”

“क्या ??? जीवा और सकती भाई बहन थे …तो उन्होंने अलग अलग गैंग क्यों शुरू किया “

मेरी बात सुन कर सम्पत ने एक गहरी साँस छोड़ी ..

“यार बहुत पुराणी कहानी है कभी आराम से सुनाऊंगा, अभी जा आरती तेरा इन्तजार कर रही है , तू कोई मोबाइल क्यों नहीं ले लेता , वो बेचारी जब से ये खबर सुनी है की शिवा ने कतल किया है तब से दरी हुई है , और तेरा कोई अत पता भी नहीं है ..”

“मोबाइल ??”

“ओह है चल मैं दिलवा दूंगा, अब जा .. मैं पता लगवाता हु की आखिर इसके पीछे है कोण “

**********

जब मैं अपने कमरे में गया तो भाभी ने दौड़कर मुझे जकड लिया ..

“कहा था तू इतना टाइम कैसे लगा दिया , जनता है यंहा क्या हो रहा है लोग कह रहे की शिवा ने अपना पहला शिकार कर लिया ……”

“अरे भाभी मैंने कोई भी शिकार नहीं किया है ये सब पता नहीं किसने किया है :डेड:”

“वो सब ठीक है लेकिन तू इतने देर से कहा था “

भाभी की बात सुनकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गयी ..

“वो सस मुझे अपने पिता से मिलवाने ले गयी थी “

भाभी और भी जोरो से चौकी

“हे भगवन ऐसे हालत में तू तिवारी के पास गया था “

“है गया तो था लेकिन असल में सस को अपने पिता से मिलवाना hi नहीं था , वो बस बहाना था , असल में वो तो ..”

मैं बोलते हुए रुक गया , मुझे यद् आया की आज सस ने क्या किया था , मेरे माथे पर पसीना आ गया जिसे देकर भाभी की आंखे बड़ी हो गयी

“क्या किया सस ने.. कोई गलत काम तो नहीं किया क्या “

मैं शर्म और अजीब से दर से पसीने से नाहा चूका था

“बीटा… क्या हुआ तुझे ??:?: इतना पसीना कैसे आ रहा है :व्हाट:”

“वो… वो भाभी .. वो ..”

“क्या वो वो लगा रखा है बोल तो सही “

“भाभी उसने मुझे प्रोपोज़ कर दिया “

“क्या ????”

भाभी पहले तो चौकी लेकिन फिर उनके होठो में एक मुस्कान सी आ गयी ये थोड़ी शरारती मुस्कान थी

“सिर्फ प्रोपोज़ किया :विंक: , मुझे तो नहीं लगता की सिर्फ इजहार किया होगा , वर्ण ऐसे पसीने से नहीं भीग जाता तू “

वो खिलखिलाकर हंसी

“भाभी आप भी न “

“तो आखिर क्या किया सस जी ने “

भाभी की उत्सुकता थोड़ी बढ़ रही थी

“भाभी छोडो न , जो उसने किया वो मैं आपको नहीं बता सकता “

भाभी का मुँह खुल गया था और उन्होंने अपने मुँह में हाथ रख लिया

“हे भगवन इतनी तेज निकली वो , मेरे मुन्ना के साथ ….”

“भाभी उसने कुछ अजीब सा किया , उसने मेरा नाम लिखा हुआ था .. “

मैं चुप हो गया , वही भाभी मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी

“उसने मेरा नाम … अपने यंहा पहनने वाले कपडे में लिखा था “

मैंने कमर के निचे इशारा करके उन्हें बता hi दिया

“क्या??” वो बुरी तरह से चौकी , वही थोड़ी hi देर में उनका हंस हंस कर बुरा हल हो गया था

“हे भगवन कैसी अजीब लड़की है ये सस , फिर तूने क्या किया ?”

“क्या करता मैं वो वंहा से भगा “

मेरी बात सुनकर भाभी और भी जोरो से हंसाने लगी , उनका गोरा रंग हंसाने के कारण गुलाबी हो गया था .. ऐसा लग रहा था जैसे खून उतर आया हो , दांतो की पंक्तिया निखार कर दिखने लगी थी , मैं उनके चेहरे में खोने लगा था

“ओह्ह मेरा प्यारा मुन्ना …” उन्होंने हसते हुए मेरे गलो पर प्यार से हाथ फेरा

“भाभी जानते हो फिर क्या हुआ “

“क्या??”

मैंने फिर तिवारी से मिलना, मुझे नौकरी और घर में रहने के लिए बोलना और उसके बाद सस का मुझे अपार्टमेंट में ले जाना और भाभी के साथ रहने की बात करना ये सब बताया .. साथ hi स्वाति के बारे में भी बताया ..

भाभी ने सभी बाटे ध्यान से सुनी और फिर एक गहरी साँस ली

“बीटा जिन लोगो ने हमें मुसीबत में सम्हाला था उन्हें छोड़कर हम कैसे चले जाए , और फिर ये मर्डर वाले केस से दिक्कते और भी बढ़ जायेगी , मैं तो बोलती हुई की तुम सस और तिवारी से दूर hi रहो “

“भाभी लेकिन आप hi चाहती थी की हम यंहा से दूर चले जाए , ये एक अच्छा मौका है , उस अपार्टमेंट में हम दोनों hi रहनेगे , वो बहुत बड़ा फ्लैट है भाभी , और कितने आमिर लोग रहते है वंहा पर “

भाभी बड़े hi प्रेम से मुझे देख रही थी

“बीटा गरीबी और अमीरी से लोगो के दिल को तो नहीं तौला जा सकता न ..”

“है भाभी वो तो ठीक है लेकिन .”

“अगर तुझे जाना है तो जा मैं तुझे नहीं रोकूंगी लेकिन … लेकिन मैं तुझे सस की गुलामी करते नहीं देख सकती ..”

भाभी इतना बोल कर वंहा से हैट गयी मैं बस उन्हें hi देखता रहा

“भाभी आपने ऐसा सोच भी कैसे लिया की मैं आपको छोड़ के चला जाऊंगा “

मेरी आवाज भर्रा गयी थी, उनकी बात से मुझे बहुत hi जयदा दर्द हुआ था , शायद वो भी इस बात को समझ गयी , उन्होंने जल्दी से मेरे सर को अपने साइन से लगा लिया

“नहीं बीटा मेरा वो मतलब नहीं था “

“अब बात को मत घुमाओ भाभी , मैं समझ गया की आप मेरे बारे में ऐसा hi सोचती है “

उन्होंने मुझे और भी जोरो से जकड लिया

“नहीं बीटा तू पागल है क्या …मैं कभी तुझसे दूर होने की सोच भी सकती हु क्या “

“तो अभी जो अपने बोलै वो क्या था..”

भाभी चुप हो गयी थी

“मुझे माफ़ कर दे बाबू “

“नहीं आपने ऐसा सोच भी कैसे लिया की मैं आपको छोड़ कर वंहा अकेले रह सकता हु “

“सॉरी बाबू वो मुँह से ऐसे hi निकल गया न “

वो मेरे बालो को सहलाने लगी थी , मेरा चेहरा अभी भी उनके उरोजों में दबा हुआ था

“लेकिन आपने मेरे बारे में ऐसा कैसे सोच लिया “

मैं अब तब बस रोने वाला था, मेरे गले से आवाज भी नहीं निकल रही थी , मेरी भाभी मेरे बारे में ऐसा कैसे सोच सकती है मुझे बिलकुल भी यकीं नहीं हो रहा था ..

“मुझे माफ़ कर दे बीटा, मैं ऐसा नहीं सोच सकती बस मेरे मुँह से निकल गया ये , माफ़ कर दे बाबू “

उन्होंने मुझे मानाने के एवज में मेरे चेहरे को चूमना शुरू कर दिया था , उनके लार से मेरे गाल गीले होने लगे थे ..

भाभी के प्यार से मेरा भी गुस्सा काफूर हो चूका था लेकिन अब गुस्से की एक्टिंग करने में भी मुझे मजा आ रहा था, भाभी मेरी बातो से थोड़ी घबरा गयी थी और मुझे मन रही थी ,मैंने रूठा रहना hi सही समझा ..

“आप मुझे अपना नहीं समझती वर्ण ऐसी बात नहीं करती “

मेरी बात से भाभी की आँखों में भी आंसू आ गए

“तेरे सिवा मेरा अपना कोण है बीटा , जब घर से निकली थी तो तूने hi तो साथ दिया मेरा , पूरी दुनिया ने मुझे ठुकरा दिया लेकिन तू मेरे साथ रहा.. मुझे माफ़ कर दे बीटा मुझे माफ़ कर दे “

वो रट हुए मेरे कंधे में झूल गयी , अब ये थोड़ा जयदा होने लगा था मैंने जल्दी से भाभी को उठाया और उसके चेहरे को देखने लगा ..

उनका चेहरा आंसुओ से पूरी तरह से भीग चूका था , मैंने अपने होठ से उसे साफ़ करना शुरू कर दिया, मैंने उनके आँखों पर अपने होठो को रख दिया, उन्होंने भी अपनी आंखे बंद कर ली थी , उनके आँखों से धुलते हुए आंसुओ को मैं अपने होठो में समां रहा था ..

मेरे होठ उनके गलो से होते हुए उनके होठ तक पहुंच गए और मैंने हलके से उन्हें चुम लिया ..वो भी सिहर गयी थी और मेरे अंदर भी कुछ हो गया था .. लेकिन हम दोनों hi एक दूसरे से अलग नहीं हुए , मैंने उन्हें चेहरे के निचे उनकी थोड़ी को भी चूमा और निचे उनके गले में अपने होठो को लगा दिया ..

“हुम्म्म्म” भाभी के मुँह से एक सिसकी सी निकल गयी

मैं भी उत्तेजित होने लगा था , मैं भाभी को बहुत प्यार करना चाहता था और मैंने उनके होठो को फिर से अपने होठो से लगा लिया , इस बार उन्होंने अपना चेहरा दूसरी और फेर दिया और आंखे खोलकर मुझे देखने लगी …

अब उनके आँखों से कोई आंसू नहीं बाह रहे थे लेकिन सूखे हुए आंसुओ की बुँदे अभी भी थोड़ी नमी का कारन बन रही थी ..

उनकी बड़ी बड़ी आंखे थोड़ी लाल थी और उसमे खेलती हुई वो काली पुतलिया मुझ पर hi गाड़ी हुई थी .. शायद भाभी भी समझने की कोशिस कर रही थी की मैं क्या चाहता हु लेकिन ये तो मुझे भी नहीं पता था , हम दोनों hi एक दूसरे के आँखों में देखते रहे और मैं फिर से झुका और इस बार भी भाभी के होठो के ऊपरी फांके को अपने होठो में भर लिया ..

मैं उसे हलके हलके चूसने लगा था , भाभी ने मुझे नहीं हटाया और मेरे होठ थोड़े से और भी शरारती हो गए , वो भाभी के निचले होठो में जा लगे … चुम्मन थोड़ा और भी मादक होने लगा था की मेरा जीभ सीधे hi भाभी के मुँह में चला गया और यही वो समय था जब अचानक hi जैसे भाभी को होश आया हो मुझसे अलग हो गयी ..

उनकी नजरे झुकी हुई थी लेकिन मैं उन्हें hi देख रहा था ,

“बीटा चलो सोते है “

उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और बिस्टेर में जाकर लेट गयी , वही मेरे आँखों से तो जैसे नींद hi गायब हो गयी थी , मैं भाभी से बात करना चाहता था , उन्हें अपनी बांहो में समां कर सोना चाहता था लेकिन जैसे भाभी मुझसे नजर छुपा रही थी मैं कुछ अजीब हरकत करके उन्हें खोना नहीं चाहता था ………….

 
अपडेट 25


कॉलेज पहुंचने के बाद मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं सस के बारे में कुछ बात करू या नहीं, आखिर अज्जू ने पूछ hi लिया

"तो सस तुझे अपने पिता से मिलवाने ले गयी थी न? क्या हुआ…"

अब मैं उसे क्या बताता

"हम्म उसके पापा से मिला … उनहोंने मुझे सस का बॉडीगार्ड बना दिया है और साथ hi उसके घर में भी रहने के लिए कहा है"

लेकिन मेरे चेहरे के भाव जैसे अज्जू से छिपे नहीं रह सके

"कोई और बात भी है क्या ?"

अज्जू मेरे चेहरे को घर रहा था जिससे मुझे थोड़ी असहजता का आभास हुआ

"नहीं यार"

अज्जू ने उस समय तो कुछ नहीं कहा और बात आयी गयी हो गयी…

"तो कल से स्नेहा मैडम के पास ट्यूशन शुरू करना है .."

नेहा बोल उठी थी ,वही अक्की का चेहरा लाला हो चूका था

हम सभी के होठो पर मुस्कान आ गयी..

"है भाई यद् है हमारे अक्की भाई की भी सेटिंग करवानी पड़ेगी"

और मैं भी हंस pada,lekin अक्की का चेहरा थोड़ा सा मुरझा गया था..

"यार लगता है उनका तो पहले से hi सर के साथ सेटिंग hai...lagtaa है मेरा प्यार तो बस एकतरफा hi रह जाएगा .."

अक्की के चेहरे में आयी ये उदासी मुझे अच्छी नहीं लगी..

"अबे अभी कैसे बोल सकता है की मैडम की सेटिंग होगी hi,ho सकता की वो महज दोस्त हो, जैसे तू और नेहा इतने अच्छे दोस्त हो अब कोई गलत समझ जाये तो क्या कर सकते है"

मेरी बात सुनकर जैसे अक्की की आँखों में एक चमक आ गयी

"है ये भी हो सकता है दोनों दोस्त hi होंगे "

अक्की की चहक देखकर नेहा ने उसके माथे पर एक हलकी सी चालत लगा दी..

"पगलू कही का "

हम सभी के चेहरे खिल चुके थे लेकिन अज्जू अभी भी मुझे अजीब निगाहो से देख रहा था…

***********

"बता बात क्या hai,kya बोलै सस ने तुझे, कुछ उल्टा सीधा किया होगा न तो उसकी खैर नहीं है"

कॉलेज ख़त्म होने के बाद अज्जू ने मुझे अकेले में बुला लिया था ,उसने अभी अभी एक सिगरेट जलाई और मेरे और बढ़ा दिया ..

मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं इसे कैसे बताऊ..

"अबे बोल न ,मुँह में टाला लगा कर क्यों रखा है अब"

"यार वो बड़ी अजीब सी बात हुई कल ,बस भाई इसे अपने तक hi रखना किसी से कहना मत.."

और मैं उसे सब सच सच बताते गया ,वो कभी चौकता तो कभी हंस पड़ता था ,तो कभी गंभीर हो जाता tha,maine उसे ये भी बताया की भाभी सस के दिए अपार्टमेंट में नहीं जाना चाहती…

"हम्म तो तूने क्या फैसला किया सस को लेकर.."

यार मेरे दिमाग में भी नहीं आया ये सब ,मुझे नहीं लगता की मुझे सस से प्यार हो सकता है

..

"अच्छा ...और नेहा से"

मैं नेहा का नाम सुनकर चौक गया

"अब नेहा बिच में कैसे आ गयी"

वो हलके से हंस पड़ा

"सेल तुझे क्या लगता है की हम लोग अंधे है, नेहा की आँखों में तेरे लिए प्यार साफ साफ दिखता है ,भाई नेहा बहुत अच्छी लड़की है ... अगर तुझे सस और नेहा के बिच चुनना पड़े तो मैं चाहूंगा की तू नेहा का साथ दे…"

नेहा और सस , जैसे एक रस्सी के दो किनारे थे एक दूसरे से बिलकुल hi अलग… जंहा नेहा हलकी बयार (ठंडी हवा) थी तो सस किसी तूफान की तरह .. नेहा किसी खिले हुए फूलो की खुसबू सी थी तो सस जैसे इत्र का तीखा पैन लिए..

नेहा का शर्माना उसकी जान थी तो सस की स्वक्छंदता उसका गौरव था…

मेरे चेहरे में टेंशन साफ साफ दिखने लगा था …

"अबे टेंशन छोड़ तुझे जिससे प्यार हो जाये उससे प्यार करना , प्यार कोई ऐसी चीज तो नहीं न जिसे जबरदस्ती करवाया जा सके ...बस एक चीज का ध्यान रखना रिलेशनशिप में कभी भी झूठ न बोलना ...किसी का दिल न तोड़ना ...दोनों hi अच्छी लड़किया है दोनों का hi दिल साफ है "

मैंने उसकी बात पर सहमति में सर हिलाया

"चल अब ये तरय कर "

उसने अपने जेब से एक दूसरा सिगरेट निकला जो की ऊपर से मुदा हुआ था..

"अबे ये क्या है"

वो हलके से मुस्कुराया..

"बेहतरीन मॉल है भाई बहार से मंगवाया है ,तरय कर"

उसकी खुसबू कुछ अजीब hi थी ये तम्बाखू तो नहीं था…

मैंने उसे जलाया और पहला काश लगाया …

ऐसा लगा जैसे पूरा गाला hi जल गया ho,uska धुआँ बड़ा hi तेज था ,मैं जोरो से खांसने लगा था ...मुझे देख कर अज्जू जोरो से हंस पड़ा ..

"अबे देख इसे ऐसे पिटे hai"usne गहरा कास लिया और धुवे को थोड़ी देर तक अंदर रहने दिया और फिर पूरा धुआँ छोड़ दिया ,धुवे के साथ साथ hi एक तीखी सी गंध पुरे माहौल में फ़ैल गयी थी…

उसने सिगरेट मुझे थमा दिया ..

मैंने भी एक गहरा कास लिया ,अब मैं तैयार था दो गहरे कास लगाने के बाद hi मेरा शरीर गर्म होने लगा था.. हम दोने ने मिलकर आखिर इसे ख़त्म कर दिया..

पूरा शरीर गर्म हो चूका था ऐसा लगा जैसे मैं किसी और hi दुनिया में खो गया hu,ek मदहोशी सी फ़ैल गयी थी, सब कुछ थोड़ा अजीब सा लग रहा था बहुत hi मजा आ रहा था ...सब कुछ रंगीन हो जाता कभी ऐसा लगता जैसे मई किसी कॉमिक्स की दुनिया में आ गया hu...Aise hi हालत में मैं कब घर पहुंच गया पता भी नहीं चला…

कमरे में जाते hi मैं धड़ाम से बिस्तर में गिर गया , सामने जैसा पूरा ब्रम्हांड hi नाच रहा हो , मैं जंहा भी ध्यान लगता मुझे ऐसा लगता जैसे मैं उसी में खो सा गया हु , पंखे की तक तक की आवाज मेरे कानो में आने लगी , पहले तो वो आवाज मुझे बहुत hi सुकून पहुंचने वाली थी ऐसे लग रहा था जैसे कोई बड़ी सी पावर hi मिल गयी हो , मैं पंखे की एक एक तक तक को सुन सकता था धीरे धीरे वो और भी धीमा होने लगा था , मैं अपनी hi इस सकती पर विस्वास नहीं कर प् रहा था की पंखा जो की इतना तेजी से घूम रहा था मैं उसके हर एक मूवमेंट को सुन सकता हु , लेकिन थोड़ी hi देर में ये तक तक इतना भरी हो गया जैसे कोई मेरे सर में कई किलो का हथोड़ा मर रहा हो, उसकी आवाज इतनी भरी थी की मुझे लगा कही मैं इस अवस्था में मर hi न जाऊ ,जैसे hi मेरे दिमाग में मरने का ख्याल आया मेरा सारा मजा जैसे चूर चूर हो गया , मैंने तुरंत hi अपनी आंखे खोल दी और फंखे की आवाज से कान को हटाने की कोशिस करने लगा लेकिन ये भी मेरे लिए बड़ा hi मुश्किल हो रहा था जैसे तैसे मैंने दूसरे चीज में ध्यान लगाया लेकिन हर जगह एक hi प्रॉब्लम ….

पहले तो मजा आता था लेकिन फिर वही दर की कही मैं इसी में खो न जाऊ…

मेरी हालत बड़ी hi अजीब सी हो गयी थी , गाला बार बार सूखता था ऐसा लगता था जैसे अंदर की त्वचा सुखकर चिपक जायेगी , मैं जल्दी से पानी पि लेता …

तभी मेरी नजर दरवाजे में गई तो जैसे मेरा दिल hi रुक गया सामने भाभी कड़ी हुई मुझे अजीब सी निगाहो से देख रही थी …

“तूने गांजा पिया है ??“

उन्होंने कुछ सूंघते हुए कहा , अब मेरी फटी , इस सेल अज्जू को मैं ढेरो गालिया दे रहा था उसने मुझे सिगरेट बोल कर न जाने क्या पीला दिया था ..

“नहीं भाभी पता नहीं क्या था वो अज्जू ने “

मेरी बात सुनकर वो हलके से हंसी ,मुझे समझ नहीं आया की वो क्यों हंस रही थी लेकिन उस समय दर के कारण मेरे दिल की धड़कने बढ़ी हुई थी और मैं खड़ा हुआ बिस्टेर का किनारा चबा रहा था ,

“चलो कोई बात नहीं मैं खाना यही ले आती हु खा कर सो जा “

मैंने बस है में सर हिलाया ..

आज ऐसा लगा जैसे मैं सदियों से भूखा था खाने का स्वाद क्या होता है जैसे मुझे आज hi पता चला था, खाने का एक निवाला मुँह में जाते hi मेरा ध्यान उसपर आ जाता था , मुँह के लार के मिलने से लेकर उसके चबाने तक सब कुछ मैं ध्यान से देख प् रहा था , लेकिन अंत ऐसा लगता जैसे मैं कहते कहते सो न जाऊ मेरी आंखे बंद हो गयी थी , इसलिए अपना दिमाग थोड़ा इधर उधर घूमने की कोशिस करता, मेरी निगाहे भाभी पर पड़ी जो की मुझे मुस्कुराते हुए देख रही थी ..

मुझे खुद की और देखता हुआ मैं थोड़ा दर गया, कही मैं कोई अजीब हरकत तो नहीं कर रहा था??:?:

मैं फिर खाने की और देखता और फिर पेट की भूख ऐसे लगती जैसे सदियों से कुछ नहीं खाया हो , मैं जल्दी से निवाला उठता था और फिर से वही सब …

जैसे जैसे मेरा पेट भरा मेरा नशा थोड़ा और भी गहरा गया था , भाभी ने मुझे हाथ पेअर धोकर सोने को कह दिया , मैंने इन 15-20 मिंट में hi जैसे कई जीवन जी लिए , नींद आ नहीं रही थी कमरे में मैं अकेला था , और आज पहली बार मुझे भूतो से दर लगने लगा था, अभी अभी तो भाभी थाली उठा कर बहार निकली थी और थोड़े देर में hi ये अकेलापन मुझे कटाने को दौड़ने लगा , हाथ पेअर जैसे तैसे धो लिया लेकिन कमरे में अकेले रहने के दर से मैं तुरंत hi कमरे से बहार चला गया …मुझे भाभी आती हुई दिखी उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर फिर से मुझे कमरे में ले जाकर बिठा दिया था ……..

“चल सो जा क्या बहकी बहकी हरकते कर रहा है “

उन्होंने हलके से मेरे गलो में एक चपत लगा दी …..

और ……..

और जैसे फूल खिल गए, कुछ हो गया, उनके बोलने पर मुझे उनके दांतो की साफ पंक्तिया साफ साफ दिखाई देने लगी थी , उनके गुलाबी होठ जैसे शराब के भरे हुए प्याले थे जो छलकने को बेताब लग रहे थे , मुझे ऐसा लगा जैसे वो स्वर्ग की कोई अप्सरा हो…

मेरी नज़ारे उनके चेहरे में hi खो गयी थी , मुझे ऐसा लगा जैस वो रंग सफ़ेद कपडे पहने हुए कोई पारी हो जो मेरे सामने कड़ी हुई मुस्कुरा रही थी …

मैं मुस्कुराता हुआ उनके चेहरे को hi देख रहा था ..

“सोनू…? बीटा..? सुन रह है मेरी बात “

भाभी मेरे आँखों के सामने आपने हाथ चला रही थी लेकिन मैं तो उनकी खूबसूरती में hi खोया हुआ था ..

“आप पारी हो … आप अप्सरा हो .. आप कितने सूंदर हो”

मैं उन्हें देखते हुए बोलता रहा , और उन्होंने अपना हाथ अपने माथे में दे मारा ..

“हे भगवन ये लड़का भी न गांजा मर के आ गया अब इसका नशा कैसे उतारू ..चल यंहा सो जा “

उन्होंने मुझे पकड़ कर बिस्टेर में बिठा दिया और मुझे वही लिटा भी दिया . वो खुद अपने कमरे में जाकर सामान ज़माने लगी थी , लेकिन मेरी निगाहे अभी भी उनपर hi थी , लेकिन फर्क ये था पहले जो निगाहे उनके चेहरे पर थी अब वो उनके जिस्म में चली गयी ..

उनके जिस्म के हर हिस्से को देखकर मेरे अंदर की चिंगारी जैसे जलने लगी थी , उनके साड़ी से झांकते हुए उनके गोर गोर पेट को देखकर मेरा गाला hi सुख गया , मेरा लिंग ऐसे अकड़ गया था जैसे की जीवन में कभी न हुआ हो , मेरे हाथ अपने hi आप उसपर चलने लगे थे , इतना मजा मुझे कभी नहीं आया था ,

उनके पेट से होते हुए मेरी नजर उनके घुमावदार और गोल मटोल पिछवाड़े में जा तिकी , जैसे मुझसे अब रहा नहीं गया, वो झुकी हुई कोई काम कर रही थी जिसके कारण उनका पिछवाड़ा और भी उभर कर सामने आ रहा था, मुझे ऐसा लगा जैसे ये कोई बड़ा सा आइस क्रीम हो , वैसे hi गोल गोल और उभरे हुए मैं उनके पास चला गया था , वो अपने काम में hi बिजी थी और मैं ललचाये बच्चे की तरह उनके पिछवाड़े को देखता हुआ उनके पास पहुंच गया , मैं अपने घुटनो पर बैठ कर आंखे बड़ी किये उसे देख रहा था इतने बड़ी आइस क्रीम …:व्हॅप्पी:

मैंने अपने हाथो से उसे पकड़ लिया कही वो दूर न हो जाये और फिर जीभ निकाल कर मैंने पूरी ताकत लगा कर उसे चाट लिया ..

“छी ये क्या कर रहा है , भाग “

भाभी को जैसे hi अहसास हुआ वो चौक कर सीधी हो गयी और मुझे बड़े hi आश्चर्य से देखने लगी

“ये क्या कर रहा था “

उन्होंने थोड़ा डाँटते हुए कहा

“मैं तो आइस क्रीम खा रहा था “

“क्या ..?”

उन्होंने आश्चर्य से कहा और फिर जोरो से हंस पड़ी ..

“इस अज्जू ने तुझ क्या पीला दिया है “

उनको हँसता हुआ देखकर मुझे तो समझ hi नहीं आ रह था की आखिर बात क्या हो गयी है, उन्होंने झुककर मेरे गलो में हलकी सी पप्पी दे दी ..

“आइस क्रीम सुबह खा लेना अभी जा के सो जा तू बहुत hi नशे में है “

लेकिन उनकी बात का मुझपर कोई भी असर नहीं पड़ा, जिसे वो मेरी और झुकी उनका पल्लू गिर गया था , उन्होंने भी सम्हालने की कोई कोसिस नहीं की क्योकि ये आम सी बात थी … लेकिन आज ..?? आज मेरे लिए नहीं … मैंने जैसे hi उनके ब्लाउज से झांकते हुए उनके वक्षो को देखा जिस्म की गर्मी फिर से बढ़ने लगी ..और लिंग में अकड़न सी होने लगी ..

लेकिन भाभी की नजर मेरी नजरो को पहचान गयी थी

‘अब क्या आम खाने का दिल कर रहा है “

वो जोरो से हंसी लेकिन उनके ऐसा बोलते hi मुझे दो मोठे ताजे आम दिखाई देने लगे …

“वाओ इतने ताजे और भरे हुए आम “

मेरे मुँह में तो पानी आ गया, और मैंने उन ामो को जोरो से दबा दिया ..

“हे भगवन , लड़के तू जा के सो जा “

उन्होंने मुझे आंखे दिखाई लेकिन मेरा ध्यान तो उन ामो पर hi था ,

“ये ामो को कपड़ो में कौन रखता है “

मैंने बड़े hi मासूमियत से पूछा , और भाभी की खिलखलाती हुई हंसी फिर से मेरे कानो में पड़ी ..

“तू पागल हो गया है जाकर सो जा “

मैं किसी बड़े hi आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपने बिस्तर में चला गया, कुछ देर पहले मेरा लिंग तन गया था लेकिन अभी मुझे यद् भी नहीं था की आखिर क्यों …मेरे दिमाग में आम आये और मैं जैसे आम को खाने किसी बगीचे में hi पहुंच गया …

तभी मुझे अहसास हुआ की मैं तो अकेला हु और अकेले में भूत वगैरह भी तो आ सकते है……….

मैं तुरंत hi खड़ा हो गया भाभी अब भी कुछ कर रही थी …

थोड़ी देर तक मैं आम के ख्वाब देखता हुआ सोया था इसलिए अब मुझे लग रहा था जैसे मेरा नशा थोड़ा काम हो गया है ..

“भाभी आओ न जल्दी “

भाभी ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और उठाकर अपने कमरे से मेरे बिस्तर तक आ गयी

“क्यों अकेले नींद नहीं आ रही है मेरे सोनू को “

उन्होंने बड़े hi प्रेम से मेरे बालो को सहलाया और मैं किसी बच्चे की तरह उनके साइन से जा लगा , वही आम अब मेरे गलो से टकरा रहे थे , मन में बहुत hi लालच जगा की इसे मुँह में भरकर चूस लू लेकिन भाभी का दर भी था, लेकिन साइन से लगे हुए लिंग में तनाव फिर से आने लगा ..

‘मेरे साथ सो जाओ न “

अब मैं थोड़े दिमाग लगा कर खेलने की सोची ,, क्यों न भाभी को यही सुला लिया जाये और फिर ………..?:ो

और फिर भाभी के ऊपर चढ़ जाऊंगा … वह क्या कोमल जिस्म है भाभी का पूरा मख्खन सा उसे चाटूँगा ..

मेरे दिमाग में आते hi मेरे लिंग में इतना तनाव आया की लगा जैसे वो फैट hi जायेगा और इसी मजे और उत्तेजना ने मुझे थोड़ा कमीना भी बना दिया था ..

“भाभी लेट जाओ न मेरे साथ “

वो बेचारी मेरे प्लान से अनजान प्यार से मेरे बाजु में लेट गयी और मुझे हमेशा की तरह hi अपने साइन से लगाए रखा ..

अब मेरी शैतानी शुरू हो गयी मैं लेते लेते hi उनके ामो को हलके हलके से चूसने लगा

“हे ये क्या कर रहा है??”

वो थोड़ी हड़बड़ाई

“भाभी चूसने दीजिये न आम को बहुत मन कर रहा है मन कर रहा hi की काट के खा जाओ “

“बीटा ये आम नहीं है “

भाभी की सांसे थोड़ी तेज हो गयी थी

“जनता हु की ये आपके बूब्स है , लेकिन मुझे इसे चूसना है जोरो से .. इस कपडे को उतरो …प्लस भाभी वर्ण मैं मर जाऊंगा …मेरा ये फैट जायेगा “

इस बार मैं झूठ नहीं बोल रहा था उत्तेजना में मेरे लिंग की हालत बहुत hi बुरी थी , नशो में खून ऐसे दौड़ रहा था की लगा जैसे तन कर वो फैट hi जायेगा ..

मुझे ऐसा लगा जैसे मैं सच में उत्तेजना में मर जाऊंगा और मैंने भाभी का हाथ पकड़ कर सीधे अपने लिंग में रख दिया , भाभी को जैसे एक करंट सा लगा होगा लेकिन साथ hi उन्हें ये भी पता था की मैं जो भी कर रहा हु वो महज मेरे नशे के कारण है ……

वो शादी शुदा थी उन्हें जिस्म के रिश्तो और कर्मो के बारे में पता था , पहले तो वो दर गई और उठ गयी लेकिन मैंने फिर से उन्हें जोरो से खींच लिया और इस बार मैं उनके ऊपर था और वो मेरे निचे ..

मैंने जीवन में पहली बार किसी पर ऐसे बल का प्रयोग किया था और वो मेरी प्यारी भाभी माँ थी … वो भाभी माँ जिन्होंने मुझे सबसे जयदा प्यार दिया था लेकिन मैं नशे और हवस का अँधा उनके आँखों के दर्द को नहीं देख पाया ..

उनकी आंखे बहने लगी थी लेकिन मेरे जिस्म में तो मनो हवस की आग अपने चार्म में बढ़ गयी थी ..

मैं उनके ऊपर चढ़ गया था, जल्दबाजी में मैंने उनके साड़ी को उनके घुटनो तक उठा दिया और उनका पेअर भी थोड़ा फैला दिया था जिसमे मेरी कमर सेट हो सके … और अपने कमर को उनके कमर के ऊपर ले जाकर अपने लिंग को उनके जांघो के बिच में रगड़ने लगा ..

हम दोनों hi अपने पुरे कपडे पहने हुए थे लेकिन फिर भी इस रगड़ का आनंद इतना जयदा था की मेरी आंखे बाद हो गयी और मेरे होठ अपने आप hi भाभी की उन उरोजों पर ठीक गए जिन्होंने मुझे ममता देकर बड़ा किया था ..

मैं ब्लाउज के ऊपर से hi उनके वक्षो को चूस रहा था कभी कभी मैं उन्हें काट भी लेता था , वही भाभी बुरी तरह से छटपटा रही थी , साड़ी का पल्लू खुला हुआ था और मैंने उनके दोनों हाथो को उनके सर के पास जकड रखा था , वो हिल नहीं प् रही थी और मुझे खुद को छोड़ने की रिक्वेस्ट कर रही थी , लेकिन मुझमे तो जैसे शैतान hi समां चूका था, लिंग के रगड़ाव और उरोजों को चूसने का मजा hi इतना था की मैं उनके आँखों से बहते हुए आंसुओ को नहीं देख प् रहा था …

तभी उन्होंने पूरा जोर लगाया और मुझे अपने ऊपर से हटा दिया , मैं और कुछ कर पता उससे पहले hi ..

‘चटाक ………..’ एक जोरदार थप्पड़ मेरे गलो में आ कर लगा , लेकिन लिंग के तनाव का जोर ऐसा था की मैं उनपर फिर से टूटने hi वाला था की उन्होंने मुझे एक लात मेरे पेट में लगा दी मैं पेट पकड़कर बैठ गया था …

उन्होंने तेजी दिखाई और अपने कमरे में घुस गयी वो जल्दी hi वापस आयी उनके हाथो में एक हरे रंग की छोटी सी पुदीने वाली बोतल थी , उन्होंने पूरी बोतल मेरे मुँह में घुसा दी ..

मेरा मुँह पुदीने की कड़वाहट से बुरी तरह से ख़राब हो चूका था उन्होंने पानी मेरी और बड़ा दिया , मैं बहुत सारा पानी पि गया था , लेकिन उसकी कड़वाहट अभी भी मेरे मुँह में थी साथ hi मेंथोल के कारण मुँह और पेट अजित तरीके से ठंडा hi लग रहा था ……….

“इसे तेरे गंजे का नशा काटने के लिए लायी थी , अब चुप चाप सो जा “

उन्होंने अपने आँखों के आंसू को पोछते हुए कहा और तेजी से अपने कमरे में चली गयी , आज पहली बार दोनों के कमरे के बिच का दरवाजा बंद किया गया था …..

मुझे भाभी के इस अजीब से वयवहार से गुस्सा आ रहा था , मैंने उनके साथ आखिर क्या ऐसा कर दिया था की वो इतना गुस्सा दिखा रही थी ……..

मुझे अभी भी इस चीज का अहसास hi नहीं था… मैं अपने मुँह की कड़वाहट से लड़ता हुआ पानी पिता और दिमाग को इधर उधर लगता हुआ सोने की कोशिस करने लगा था …………

 
अपडेट 26


सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरे सामने रत की सब बाटे चल गयी , दिल ग्लानि से भर उठा था मैं भाभी के पेअर पकड़कर रोना चाहता था, उनसे माफ़ी मांगना चाहता था …

लेकिन भाभी का कही अत पता hi नहीं था …

दोपहर का वक़्त हो चला था , आज मैं कॉलेज भी नहीं गया था मैंने पूरी हवेली hi छान मार दी लेकिन भाभी का कही पता नहीं चला…..

कही वो मेरे रत के गलत काम से बुरा तो नहीं मान गयी ???

कही वो मुझसे नाराज होकर कही चली तो नहीं गयी ??

दर …

ये दर मेरे अंदर भरने लगा था ..

भाभी को खोना मेरे लिए ऐसा था जैसे मेरा पूरा जंहा hi उजाड़ गया हो …

मैं पागलो की तरह हवेली में इधर से उधर भाग रहा था और सभी को भाभी के बारे में पूछ रहा था लेकिन कोई भी ये नहीं जनता था की आखिर भाभी है कहा …………

आखिर मैं सम्पत मां के कमरे में पंहुचा ..

कमरा अंदर से लगा हुआ था मैंने उसे जोरो से खटखटाया ..

“कोण है ..???”

अंदर से रानी की आवाज आयी जो की सम्पत की गफ थी ..

“मैं हु …सोनू ..”

कुछ hi देर में कमरे का दरवाजा खुल गया , मेरे सामने रानी कड़ी थी जिसका मदमस्त यौवन उसके गुलाबी रंग के झीनी सी निघ्त्य से झांक रहा था , ऐसा लगा जैसे वो गहरी नींद से जगी हो , बल बिखरे हुए थे , आँखों में नींद अभी भी छायी हुई थी और वो जैसे थी वैसे hi बहार आ गयी थी , उसने एक बहुत hi हलकी पारदर्शी सी निघ्त्य डाली हुई थी जिसमे से उसका पूरा जिस्म झांक रहा था , पूरा का मतलब पूरा क्योकि अंदर उसने कुछ भी नहीं पहन रखा था , वो मुझसे कोई 6-7 साल की बड़ी रही होगी और जिस्म पूरी तरह से भरा हुआ था लेकिन कही से जयदा फैला नहीं था …एक बार को मेरी भी नजर उसके जिस्म पर पड़ी …

लेकिन फिर मुझे यद् आया की भाभी को मैंने इसी हवस के कारण hi खो दिया .. मैंने अपनी आंखे जल्द hi उसके चेहरे में लगा दी ..

“भाभी कहा है ??”

“वो तो गयी “

मेरे दिल ने जैसे धड़कना hi बंद कर दिया ……..

आँखों से आंसू बस छलकने hi वाले था की मेरे दिमाग में एक दूसरा प्रश्न भी आ गया …..

“कहा ?????”

मैंने थोड़े जोरो से बोलै

“सम्पत के साथ गयी है कुछ काम से … तू क्यों इतना हड़बड़ा रहा है?? रुक फ़ोन लगाती मैं उसको …”

उसकी बात से मेरी सांसो में जैसे अचानक से जान आ गयी …मैंने एक गहरी साँस ली क्योकि थोड़े देर से मुझे ऐसा लगा था जैसे मेरी सांसे hi रुक गयी हो …

“हैल्लो सम्पत …ैला.. कहा रे तू …क्या झोल झपट कर रहे हो रे तुम दोनों …ाजी sapt.are उसका सोनू आया न इधर को … ले बात करवा रे इसको …अरे करि तानी की नहीं करि तानी …”

उसने फोन मुझे दे दिया ,(दोस्तों रानी की बात सुनकर आपको लगेगा की मेरी हिंदी को क्या हो गया … मेरी हिंदी ठीक है लेकिन रानी का टोन hi ऐसा है वो बात hi ऐसे करती है , थोड़ा हैदराबादी टच , तो कभी अचानक से भोजपुरी टच में आ जाती है तो कभी थोड़ा मराठी टच ..हो जाता है :lol1: )

“हैल्लो भाभी ??”

“क्या हुआ सोनू …”

“आप कहा हो ??”

“तुझे क्या करना है “

“भाभी मुझे माफ़ कर दो ..”

मेरा गाला भर गया था ..

“चल अभी फ़ोन रख मैं सम्पत मां के साथ हु, मिलकर बात करुँगी “

“भाभी आप मुझे छोड़कर तो नहीं जाओगी न ..”

मैं लगभग रोने hi वाला था

“आ के बात करेंगे ..”

इतना hi कहकर उन्होंने फ़ोन को रख दिया ..

भाभी सच में मुझसे गुस्सा थी मैं रो hi देता लेकिन मेरे सामने रानी कड़ी थी

“अरे क्या हुआ रे तेरे को … भौजी से झगड़ा हुआ क्या “

उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने बिस्तर में बिठा दिया …

मैं पहली बार सम्पत के कमरे में आ रहा था , ये कोई बड़ा कमरा नहीं था एक सामान्य कमरा hi था , एक कोने में बिस्तर था जिसमे अभी मैं और रानी बैठे हुए थे …लेकिन हमारे कमरों से थोड़ा बड़ा कमरा था और थोड़ा सुसज्जित भी था ..

“ममी मैंने भाभी का दिल दुख दिया ..”

मैं रो पड़ा था

“अरे बछुवा.. रट नहीं है न बबुआ ….. अरे लड़ाई झगड़ा तो होते hi रहता है न , और हम तुम्हारी ममी वामी नहीं है न , हम तो सम्पत की गर्ल फ़िरेन्द है … हम सम्पत से शादी थोड़ी न किये है , बस हमारा छोडन छड़ी का hi रिश्ता है बबुआ… सब लोगन तो हम सम्पत की रखेल भी कहते है लेकिन हम उसकी फ़िरेन्द जयदा है … “

वो हलके से हंस पड़ी , उसके चेहरे से hi लग रहा की वो अपने इस जीवन से खुस है ..

“तो क्या आप मां से प्यार नहीं करती “

“अरे पियर वियर तो सब फालतू का चक्कर है रे , एक चुद होती है एक लावड़ा होता है जब दोनों मिलते है तब प्यार होता है, तूने देखि है की नहीं किसी की देख ऐसी दिखती है “

उसने अपनी निघ्त्य को थोड़ा ऊपर किया , ऐसे तो उसका पूरा hi जिस्म दिखाई दे रहा था लेकिन थोड़ा धुंधला , निघ्त्य के निचे से उसने अपनी योनि मुझे थोड़ा फैलते हुए दिखा दी….

मेरी सांसे hi रुक गयी थी अभी तक जो मैं भाभी की बात सोच रहा था सब कुछ एक hi झटके में कफुट हो गया था , जैसे किसी ने एक चुटकी बजे हो और सब कुछ गायब हो गया हो …वैसे hi मेरे दिमाग से भी सब कुछ अचानक से hi गायब हो गया था …..

उसने मेरे हाथ को अपनी योनि की दिवार से टिका दिया .. योनि अभी गीली थी उसने मेरी एक उंगली खोल दी और अपने योनि में उसे घुसा दिया …

मैं जैसे किसी सम्मोहन में फंस गया था , रानी का जिस्म साफ साफ मेरे नजरो के सामने था , वो नंगी थी… है एक झीना सा कपडा उसके शरीर में डाला गया था लेकिन ये उसके भरे हुए मादक जिस्म को ढकने के लिए नाकाफी था …….

मेरी एक उंगली अंदर hi गयी थी की वो जैस पिघल सी गयी , उसने मुझे खुद से सत्ता लिया …

मैं थोड़ा दर भी गया था ..

“क्यों रे तूने आज तक किसी लड़की की चुदाई की है “

मैंने ना में सर हिलाया

“तब तो आज और भी मजा आएगा “

मैं समझ नहीं प् रहा था की इसका क्या उत्तर दू या फिर इसका क्या उत्तर हो सकता था ..

उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और और बिस्तर में लेट गयी ..

“बछुआ आज हमरी चुद hi फाड् दियो “

मैं एक अजीब सी अवस्था में फंसा हुआ था, दरवाजा अभी भी खुला हुआ था और ये इतनी बेताबी से मुझे अपने ऊपर लिटा ली थी ..

उसने मेरी असमंजस को देखा तो खड़े होकर तुरंत hi दरवाजा बंद कर दिया ..

“अरे क्यों दर रहा है तेरी भाभी और सम्पत अभी नहीं आएंगे “

इस बार उसने सही सही हिंदी बोली थी ..

“लेकिन ममी “

“ममी की माँ की चुद … सेल तेरे मां ने मुझसे शादी नहीं की है जो मैं तेरी ममी हो गयी , वो मेरा बर्फ है उससे जयदा कुछ नहीं समझे चल अब जल्दी बता छोड़ेगा की नहीं मुझे .”

कहते है न की एक फैसला बदल दे आपकी जिंदगी ………..

वैसा hi एक फैसला मुझे अभी करना था , मैं बुरी से असमंजस में फंसा हुआ था की आखिर करू तो क्या करू ..लिंग तो बोल रहा था की बीटा ऐसी माल मिल रही है और तेरी विर्जिनिटी भी टूट जाएगी कर ले मजे फिर ऐसा मौका नहीं मिलेगा ..

वही दिल कह रहा था की ये भाभी से धोखा होगा …

थोड़ी दोनों की बात hi सुन लेते है ..

लिंग: भाभी से धोखा ???? चूतिये भाभी तुझे देने वाली थोड़ी है जो उससे धोखा हो जायेगा

दिल : अरे हवस इंसान को बर्बाद कर देता है , कल सेल तेरे चक्कर में भाभी मुझसे नाराज हो गयी है

लिंग: अच्छा और तू जब उसे देखकर धड़कता है तब क्या , तू अपना काम कर और मुझे अपना काम करने दे , ऐसा माल है साली देख तो सही और कितनी गीली है … मैं तो सोच सोच कर hi बेताब हो जाता हु की जब मैं इसके अंदर जाऊंगा तो कितना मजा आएगा … आह है :हाइपर: :व्हॅप्पी:

दिल : अबे कमीने ममी है ये तेरी शर्म कर और उम्र देख इसकी और तेरी … तू इसके सामने बच्चा लग रहा है

लिंग: भोसड़ी वाले चुद सबकी एक सी hi होती है समझ गया

दिल : अच्छा तुझे बड़ा पता है … कितनो के अंदर गया है तू आज तक :lol1:

(जैसे लिंग का तो दिमाग hi ख़राब हो गया हो )

लिंग: मादरचोद तेरे कारण नहीं जा पता कही , वर्ण आज तक न जाने कितनी गुफाओ में उलटी करके आ गया होता

दिल : अबे मैं प्यार करता हु और प्रेम में जो मजा है वो कही नहीं है … न जाने कितने कवी है जिन्होंने मेरे बारे में शायरी की है , कहानिया लिखी है सब मेरी hi बाटे करते है ..:)

Ling::lol1: सेल वो सब इसलिए क्योकि मैं खड़ा हो जाता हु , सभी दिल दिल बोलकर आखिर में छोड़ने पर hi आ जाते है ..:lol1:

सुना नहीं है क्या की प्यार मोहोब्बत धोखा है और पटक के छोड़ो मौका है :lol1:

और अगर कवी शायरों को तुझसे इतना hi प्रेम है तो सेल सेक्स क्यों करते है … और मुझे हिलाते क्यों है

(लिंग की बात से दिल बुरी तरह से झल्ला गया )

दिल :अरे तू क्या जाने की प्रेम क्या है .. तेरे रगड़ने से तो बस कुछ देर का मजा hi मिलता है , लेकिन दिल लगाने से…

लिंग: जीवन भर की सजा :lol1:

दिल : सेल मेरे नहीं तेरे कारण लोग परेशां रहते है , तू उन्हें गलत काम करवा देता है जिससे जीवन भर दुःख में रखना पड़ता है , तेरे कारण कई लोगो को अपनी नौकरानी और रंडियो से शादी करनी पद गई :lol1:

“अबे चूतिये कहा हो गया तू “

रानी की आवाज मेरे कानो में पड़ी और लिंग और दिल की बातो से मैं बहार निकल आया ..

“वो वो …”

अपने hi दिमाग के दो हिस्सों की बात सुनकर मेरे चेहरे में एक मुस्कान आ गयी थी ..

“क्या मुस्कुरा रहा है , इतनी हॉट मॉल तेरे सामने है और तू खड़ा खड़ा हंस रहा है “

रानी ने आश्चर्य से मुझे देखा ..

“आज नहीं ममी फिर कभी “

मैं मुस्कुराते हुए उठा और बहार निकल गया, वही रानी मुझे आंखे फाडे हुए देखते रह गयी ………

 
अपडेट 27


“तुम चाहते क्या हो सोनू “

भाभी कमरे में आते hi बोल उठी

“मतलब …मैं .. मैं आपसे कल के लिए माफ़ी मांगना चाहता हु भाभी “

“माफ़ी …. तुमने क्या गलत किया जिसके लिए मुझसे माफ़ी मांग रहे हो , गलती तुम्हारी नहीं बल्कि उस नशे की थी जिसमे तुम थे …और तुमने रानी को क्यों मन किया ??”

जैसा मुझे लगा hi था ये सब भाभी का hi कारनामा था , भाभी ने hi रानी को ये सब करने को कहा हुआ था ..

मैं कुछ भी नहीं बोलै

“एक तरफ तुम्हे जिस्म की ाश है और दूसरी तरह तुम मिलते हुए जिस्म को भी ठुकरा देते हो”

उनकी आवाज में कुछ अजीब सी बात थी

“जिस्म नहीं भाभी मुझे बस प्यार चाहिए “

“प्यार ???” भाभी के होठो में एक व्यंगात्मक सी मुस्कान खिल गयी

“कल जो तुमने किया वो प्यार था ??”उन्होंने उसी मुस्कान के साथ कहा

“आप ने hi तो कहा की कल जो मैंने किया वो सब नशे के कारण था “

“है लेकिन नशे में इंसान के भीतर का सच बहार आ जाता है … और मैं ये नहीं बोल रही हु की ये गलत है … तुम्हारी उम्र ऐसी है की तुम्हे किसी महिला के जिस्म की जरुरत है …और इस उम्र में किसी के प्रति आकर्षण का हो जाना एक स्वभाभिक सी बात है…”

भाभी इतना बोल कर चुप हो गयी थी , समझ नहीं आ रहा था की आखिर वो बोलना क्या छह रही थी, एक तरफ तो वो मुझे खुद से दूर रखना चाहती थी फिर ये भी कहती थी की ये सब गलत नहीं है तो वो बोलना क्या चाहती है … ये सब सही है लेकिन उनके साथ नहीं …और एक मैं हु जो सब बस उनके साथ hi करना चाहता हु ..

मैंने सस के प्रपोजल को ठुकरा दिया था और अब रानी के खुलम खुला दिए गए निमंत्रण को भी ठुकरा दिया ..

“भाभी मैं तो बस एक से hi आकर्षित हु “

ये बोलते हुए पता नहीं क्यों मेरी आँखों में आंसू आने लगे थे , गाला भरी होने लगा और मेरी नजारे भी झुक गयी … मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं कोई बेहद hi गलत बात बोल दी हो..

भाभी की नजर मेरे चेहरे पर hi जैम सी गयी थी ..

मैं चुप हो चूका था और भाभी भी कुछ नहीं बोल रही थी , आखिर मैंने नजारे उठाई , भाभी मुझे प्यार से देख रही थी

“तू जो चाहता है वो नहीं हो सकता ये जानते हुए भी क्यों तू खुद को धोखा दे रहा है …मैं तुझे नहीं मिल सकती “

“भाभी मुझे आपको पाना भी नहीं है मुझे बस आपके सिवा दूसरा कोई पसंद hi नहीं आता… आप hi बताओ की मैं क्या करू ..”

भाभी अपना सर पकड़कर बैठ गयी थी

वो बहुत देर तक कुछ सोचती रही ..

फिर अचानक से उठ कड़ी हो गयी

“और अगर मैं तुझे मिल जाऊ तो …”

मैं कुछ न समझने वाली स्तिथि में था मुझे नहीं पता की भाभी आखिर बोल क्या रही थी ..

“मतलब???”

“मतलब अगर हम दोनों वो कर ले जो की पति पत्नी या प्रेमी एक दूसरे के साथ करते है तो ..??”

अब मैं क्या बोलता उनकी बात को मैं समझ तो गया था लेकिन मैं रिएक्शन क्या दू मुझे समझ भी नहीं आ रहा था , मेरे दिल में लड्डू फुट रहे थे लेकिन मेरी आंखे भी तो गीली हो रही थी … मुझे लग रहा था की भाभी ये सब मजबूरी में कर रही थी वही दूसरी और दिल में एक नयी तरंग भी फुट रही थी , शायद मेरे मन की गहराई में ये इक्छा बलवती होते जा रही थी की मैं भाभी को अपना बना लू..

जी है अपना बना लू जिस्म के लेवल में भी अपना बना लू …

हमारे जिस्म का मिलान हो जाए … हमारी आत्मा का मिलन हो जाये ..

लेकिन आखिरकार ये सभी कुछ सिर्फ बोलने की बाटे hi थी आखिर मुझे महसूस हुआ की मैं जिस्म में होने वाली एक संवेदना जो की शायद मेरे लिंग में होगी और मुझे थोड़ी देर के लिए सुख देगी उसके लिए अपने भाभी के सम्मान से खेल रहा हु , जिस्म का मिलना और आत्मा का मिलना बस एक बहाना hi था … आखिर करना तो सेक्स hi था ..

सेक्स और वो भी अपनी भाभी के साथ .. अपनी भाभी माँ के साथ … नहीं नहीं क्या ये पापा है ..???

मेरे मन में चल रहे विचार मेरे चेहरे में स्पस्ट दिखाई देने लगे थे ..

भाभी ने अपना सर ना में हिलाया जैसे कह रही हो की ये नहीं सुधरेगा ..

“तुझे खुद भी पता है की तू क्या चाहता है ??”

भाभी की आवाज में अब थोड़ा गुस्सा भी ा गया था ..

“भाभी मैं आपके सम्मान से नहीं खेलना चाहता “

उन्होंने एक गहरी साँस ली ..

“तुझे मेरे सम्मान की भी फिक्र है लेकिन फिर भी तू नशे में मेरी इज्जत के चिथड़े उतरने से भी पीछे नहीं रहता .. तुझे मैं भी चाहिए लेकिन तुझे जिस्म के मिलन से भी परहेज है ..

जब मैं सामने से तुझे ऑफर दे रही हु तो भी तुझे दिक्कत है ..

क्या तुझे अपनी भाभी का बलात्कार करके hi मजा आएगा “

कहते कहते भाभी का गाला hi भर गया था , अजीब सी दुविधा थी , कमरे की हवा में एक अजीब सी ख़ामोशी घुलने लगी थी ..

“भाभी मैं कैसे समझौ की आप मेरे लिए क्या हो …कल जो मुझसे हुआ वो मेरी नशे के आवेग में हुआ मैं आपसे वडा करता हु की मैं कभी ऐसे नशे नहीं करूँगा , जिसमे मैं सही और गलत का फर्क भी भूल जाऊ … रही बात जिस्म की तो है मैं आपको पाना चाहता हु , अपना बनाना चाहता हु , खुद में मिला लेना चाहता हु एक हो जाना चाहता हु लेकिन ……..लेकिन मैं आपके जिस्म का भोग करके ये सब नहीं करना चाहता , मैं प्रेम की गहराई में गोते लगा कर ये सब करना चाहता हु ..

शायद देखने से दोनों hi एक लगे लेकिन मेरे लिए दोनों में बहुत hi फर्क है … मैं आपको प्रेम करना चाहता हु आपको हवस की नजरो से नहीं देखना चाहता …

मेरी आंखे अब भी आपके जिस्म पर टिक जाती है लेकिन फिर भी मेरा यकीं मानिये की मैं आपसे hi प्रेम करता हु आपके रूप या जिस्म से नहीं .. आप मेरे लिए क्या हो मैं ये नहीं समझा सकता , बस समझ लो की मेरे लिए आप मेरी सब कुछ है …”

मेरी आंखे गीली थी , भाभी की आंखे गीली थी … एक अजीब सा रिश्ता जो न मैं समझ प् रहा था न hi भाभी लेकिन ये रिश्ता हमारे बिच बन गया था ..

प्रेम तो हमारे बिच हमेशा से hi था लेकिन ये प्रेम का कौन सा स्वरुप था इसी प्रश्न के उत्तर की तलाश हमें अभी भी थी , हम दोनों hi एक दूसरे के आँखों से बहते हुए नीर को अपने हाथो से साफ़ कर रहे थे, उन्होंने मुझे अपनी और खींच लिया और अपने साइन से लगा लिया , वो बार बार मेरे सर को पकड़ती और मेरे माथे को चुम लेती थी ..

कितनी अजीब सी बात होइ रही थी , वही छतिया थी कभी ये मेरे अंदर हवस जगती थी तो कभी प्रेम , कभी ये शुकुन देती थी तो कभी शुकुन hi छीन लेती थी , वही भाभी का जिस्म था जो कभी मेरे लिंग में अकड़ ला देता था तो कभी दिल में प्रेम की लहार पैदा कर देता था , कभी उसका स्पर्श hi उत्तेजना का कारन बन जाता था आज उससे लिपटे हुए भी उसमे सामने की कामना करते हुए भी कोई भी उत्तेजना नहीं थी , बस एक शांति थी …

वो मेरे बालो को सहला रही थी मैं उनके साइन से चिपका हुआ उस प्रेम को महसूस कर रहा था ..

वो अपना जिस्म मेरे लिए निछावर करने को तैयार थी , प्रेम तो वो पहले से मुझपर जी भर कर लुटा रही थी, और मैं अभागा अभी भी अंतःद्वन्द में फंसा हुआ था , अभी भी मेरा जिस्म और भावनाओ के बिच एक द्वन्द चल रहा था… मैं एक कदम उठाने को भी सोच रहा था .. खैर अभी मैं कुछ नहीं सोचना चाहता था अभी तो मैं बस उस नरम और ममता की गर्मी से गर्म जिस्म के स्पर्श को महसूस करना चाहता था बस उसमे खोये रहना चाहता था ………….

 
अपडेट 28




मेरा फ़ोन घनघनाने लगा था , देखा तो ये सस का कॉल था ..सस ने hi मुझे ये फ़ोन गिफ्ट किया था , no. भी उसी ने डलवाये था और ये no. मेरे खुछ खास दोस्तों के अलावा और किसी के पास नहीं था ..

“क्या हुआ ??”

“आज आये क्यों नहीं “

मैंने टाइम देखा अभी रत के 3 बज रहे थे

“इस समय ये पोछने के लिए फोन किया है तुमने ??”

मुझे सस की इस बात पर थोड़ा गुस्सा आया , तभी मुझे कमरे में किसी और की भी आवाज आयी

‘ोकक बेबी मैं चलता हु ‘ ये किसी लड़के की आवाज थी

‘ोकक bye ‘ सस ने जवाब दिया

थोड़ी देर तक कोई आवाज उधर से नहीं आयी

“सस ??”

“है .. वो तुम्हारी यद् आ गयी थी इसलिए तुमने कॉल कर लिया आज तुमने देखा नहीं है न “

उसकी आवाज में एक अजीब सी मदहोशी थी या फिर निराशा ??

“कोई तुम्हारे साथ है क्या ??”

“साथ है नहीं था .. अभी चला गया “

“कोण..?”

“कोई नहीं मेरा एक फ़क बडी है , आज क्लब में अकेले थी वही मिल गया , तुम तो थे नहीं तो सोचा की क्यों न थोड़ी मस्ती कर ली जाय , इसलिए उसे अपने फ्लैट में ले आयी “

सस की बात सुनकर पता नहीं मुझे एक अजीब सी जलन महसूस हुई

“तुम तो कह रही थी की तुम मुझसे प्यार करती हो ??”

“है तुमसे hi प्यार करती हु ..”

“तो ये क्या था ??”

इस बार मेरी आवाज में थोड़ा गुस्सा भी था , वही सस हलके से हंसी शायद उसे भी मेरी आवाज में बसी हुई नाराजगी का अंदाजा हो गया था ..

“बस सेक्स और क्या ??”

सस की बात सुनकर मैंने एक गहरी साँस ली

“प्यार मुझसे और सेक्स किसी और से .. ये कैसा प्यार है “

सस जोरो से हंसी

“ओह्ह जलन हो रही है , बढ़िया है , जलन भी प्यार की निशानी hi होती है …ऐसे प्यार और सेक्स में दूर दूर तक कोई समानता नहीं है .. है लोग प्यार में हो तो सेक्स कर सकते है लेकिन सेक्स करने के लिए प्यार में होना जरुरी नहीं है ..”

“हम्म तो मुझे कॉल क्यों किया “ मैंने गुस्से से कहा

“विजय से से सेक्स करते हुए तुम्हारा hi ख्याल आ रहा था ऐसा लग रहा था की तुम hi मेरे ऊपर छाये हुए हो “

मुझे उसकी बात सुनकर एक अजीब सी उत्तेजना हुई लेकिन साथ hi साथ एक जलन और गुस्सा भी मेरे मन में भरने लगा था

“ोकक मुझे नींद आ रही है bye “

“अरे सुनो न “ सस ने झट से कहा

“क्या है??”

“तुम मेरे साथ रत कब बिता रहे हो , मैंने कहा था न की मेरे फ्लैट में आ कर रहो ,, अगर तुम यंहा होते तो .. हर रत तुम्हारे साथ hi बिताती “

सस की आवाज में गजब की मदहोशी आ चुकी थी

“भाभी यंहा से नहीं जाना चाहती , और मैं उन्हें अकेले नहीं छोड़ सकता “

“ओह्ह अकेले मत छोडो लेकिन काम से काम मेरे साथ तो रहो “

“हम्म देखते है .. ोकक bye “

मैंने रुके पैन से कहा लेकिन सस ने इसका जवाब हलके से हंस कर दिया

“bye जणू, लव यू “

और मैंने बिना कुछ कहे hi फ़ोन रख दिया ……..

************

सुबह सुबह की टीवी में एक न्यूज़ देखकर मेरी आंखे hi फैट गई ..

‘मशहूर बिज़नेस मैं शशांक मल्होत्रा के बेटे विजय मल्होत्रा की हत्या …. कहा जा रहा है की विजय मल्होत्रा मंत्री दया संकर तिवारी की बेटी स्मिता तिवारी का बॉयफ्रेंड था , हत्या वैसे hi किया गया है जैसे पहले मंत्री तिवारी के खास भवानी को मारा गया था , वही नाम शिवा .. आखिर ये शिवा है कौन … बेरहमी से हत्या करने के बाद दीवाल पर खून से शिवा लिखा हुआ मिला , जैसा की हमें आपको पहले भी बताया है की ये सकती गैंग का स्टाइल है .. क्या सकती गैंग फिर से एक्टिव हो रहा है , या ये महज पुलिस कोई बहकाने की कोई चल है …विजय के पिता शशांक भी तिवारी के खास व्यक्ति थी और उनके बेटे पर हमला सीधे hi मंत्री तिवारी के अहंकार को चुनौती देने की तरह है , क्या हमें फिर से इस शहर में गैंग वॉर दिखाई देने वाला है ???

पुलिस और प्रसाशन दोनों hi खामोश है , आखिर जनता को जवाब कोण देगा ..’

टीवी रिपोर्टर की बातो से मेरे चेहरे का रंग hi उड़ गया था वही मेरे साथ बैठे हुए सम्पत मां भी मुझे घर रहे थे ..

“इसे मरने की क्या जरुरत थी “

सम्पत मुझे अजीब निगाहो से देख रहा था, मैं बुरी तरह से चौक गया

“ये क्या बोल रहे हो मां मैंने किसी को नहीं मारा है , ये आखिर कौन है जो मेरा नाम उसे कर रहा है ..”

“है मां कल तो ये मेरे साथ hi था “

हमें चाय देने आयी भाभी ने सफाई दी , वही सम्पत के चेहरे के भाव गंभीर हो गए , उन्होंने निचे बैठे अपने लोगो को देखा, टीवी पर ये न्यूज़ देखकर वो उछाल रहे थे , शायद उन्हें फिर से यही लग रहा था की ये कारनामा भी मैंने hi किया है ,

“देखो इन लोगो को तो यही लग रहा है की ये हमारे शिवा यानि की तुमने किया है तो मेरे खेल से इन्हे इस भ्रम में hi रहने देना चाहिए , काम से काम ये लोग खुश तो है और इसी बहाने इनमे थोड़ा जोश भी आएगा “

“लेकिन मां ये तो सोनू के लिए खतरा हो सकता है “

भाभी की चिंता भी स्वाभाविक थी

“है वो तो है लेकिन अभी असलियत तो हम भी नहीं जानते तो किसी से कुछ कहना सही नहीं होगा, पहले हमें इसकी जाँच पड़ताल करनी होगी “

मां की बात का हम दोनों ने समर्थन किया , तभी मेरा मोबाइल फिर से बज उठा इस बार no. अननोन था

“hello …”

“अंकित ..??”

सनमे से किसी लड़की की आवाज थी

“जी बोल रहा हु “

“तुम्हे अंकित बुलाऊ ..या सोनू ..??”

उसकी बात सुनकर मेरी गांड hi फैट गयी थी

“मतलब?? “ मैं बुरी तरह से हड़बड़ाया था

वो हलके से हंसी ,

“मेरा नाम है पूर्वी, इंस्पेक्टर पूर्वी .. क्राइम ब्रांच, तुम अभी पुलिस स्टेशन आ जाओ, मुझे तुमसे मिलना है “

“जी क्यों ??”

वो फिर से हंसी

“विजय मल्होत्रा मर्डर केस के बारे में बात करनी है “

“जी लेकिन उससे मेरा क्या तलूक ??”

अब तो मेरे माथे में भी पसीना आने लगा था , वही भाभी और सम्पत आंखे फाडे हुए मेरे चेहरे का एक्सप्रेशन देख रहे थे ..उन्होंने मुझे स्पीकर ों करने को कहा ताकि वो भी समझ सके की मेरी ये हालत आखिर ऐसी क्यों हो रही है

“तुम्हारा क्या तलूक है वो तो यंहा आकर hi पता चलेगा मिस्टर अंकित उर्फ़ शिवा उर्फ़ सोनू ..”

उसकी आवाज में एक धमकी थी जिसे सुनकर मैं पूरी तरह से सुन्न पद गया था

“देखो मैं चहु तो तुम्हे तुम्हारे ठिकाना से भी घसीट कर ला सकती हु लेकिन तुम्हारी और तुम्हारी भाभी की इज्जत के खातिर मैं तुम्हे ये मौका दे रही हु की तुम मुझे मेरे ऑफिस में आकर मिलो “

उसने थोड़े नरम होकर कहा

“जी आता हु “

“गुड “

और फ़ोन रख दिया गया ..

सम्पत और भाभी दोनों hi मुझे तो कभी एक दूसरे को घर रहे थे ,

“ये इंस्पेक्टर पूर्वी है , ये अपने पुरे टीम के साथ पाण्ड्य मर्डर केस में लगी हुई थी , मतलब इसने तुम्हारे बारे में बहुत कुछ जान लिया है “

सम्पत के चेहरे में भी पसीना आ गया था

“सोनू तू वंहा नहीं जायेगा “ भाभी की आवाज में एक कम्पन पैदा हो गयी थी

“नहीं आरती उसे जाने दे , वो कोई मामूली पुलिस वाले नहीं है बल्कि क्राइम ब्रांच वाले है वो भी स्पेशल सेल वाले , अगर उन्हें इसे गिरफ्तार करना होता तो कब का कर चुके होते लेकिन मुझे लगता है की उन्हें भी ये पता है की विवेक का खून इसने नहीं किया है ..”

“है लेकिन पाण्ड्य और उन पुलिस वालो का ..”

मैंने घबराते हुए मां से कहा

“जंहा तक मैं इनकी टीम को जनता हु इन लोगो ने पाण्ड्य वाला केस बस दिखावे के लिए hi लिया होगा , असल मकसद कुछ और hi होगा , सभी को पता था की पाण्ड्य कैसा आदमी है उसके मरने पर किसी को कोई भी दुःख होने वाला नहीं है.. देख तू बस उनके सामने सच बता देना , झूठ बोलेगा तो वो पकड़ लेंगे .. शायद वो हमारी मदद कर सके “



मां की बात सुनकर मैंने भाभी की और देखा उन्होंने भी हामी में सर हिला दिया …..
 
अपडेट 29
पुलिस स्टेशन से मुझे एक दूसरे ऑफिस ले जाया गया था, वो किसी आईटी कंपनी के ऑफिस की तरह दिखाई पद रहा था , एक बड़े से केबिन में मुझे ले जाया गया ..

“सीट डाउन सोनू “

एक महिला की ये तेज लेकिन लुभावनी सी आवाज मेरे कानो तक आयी और जब मैंने उसे देखा तो बस मनो देखता hi रह गया , कासी हुई शर्ट में उसके बड़े बड़े आम बिलकुल किसी पर्वत की तरह दिखाई दे रहे थे , बल खुले हुए थे लेकिन बहुत hi तरीके से सवेरे गए , और बस एक हेयर बेल्ट की सहायता से बंधे गए थे , सफ़ेद रंग की कमीज और नील रंग की जीन उसे बिलकुल hi एक रफ़ एंड टफ लुक दे रही थी लेकिन फिर भी बहुत hi प्रोफेशनल की तरह लग रही थी , मेरे साणे रखे टेबल के उस पर राखी एक चेयर में उसका ब्लेजर पड़ा हुआ था , वो टेबल में अपने कैसे हुए पिछवाड़े को जमाये मेरे बाजु में आकर कड़ी हो गयी थी ..

“हम तुम्हारे बारे में सब जानते है , तुम कहा रहते हो क्या करते हो , कहा से आये हो , क्यों आये हो , वगैरह वगैरह …”

“आपने मुझे यंहा क्यों बुलाया और आप अगर मेरे बारे में सब जानते हो तो मुझे अभी तक अरेस्ट क्यों नहीं किया “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा सा हंसी

“हम्म पॉइंट की बात तो यही है क्यों ..?? चलो शुरू से शुरू करते है.. मेरा नाम है इंस्पेक्टर पूर्वी , मैं क्राइम ब्रांच की एक अधिकारी हु , और ये मेरा ऑफिस है जो ेस्पेशलय पाण्ड्य मर्डर केस के लिए हमें दिया गया है , मैं और मेरी टीम तिवारी के काळा कारनामो को उजागर करने के लिए काफी समय से प्रयासरत थे , और तभी पाण्ड्य की हत्या .. हमें एक बहाना मिल गया तिवारी की काळा चिठ्ठो का पर्दा फंस करने के लिए .. लेकिन वो इतना कमीना और शातिर है और इतना पॉवरफुल भी है की ड्यूटी में रहते हुए हम उसका बल भी बांका नहीं कर सकते, तो हमें सोचा की क्यों न उसे ढूंढा जाये जिसने पाण्ड्य का मर्डर किया है , सिंपल पुलिस के लिए शायद ये कठिन काम होता लेकिन हमारे लिए ये बस चुटकी बजने जैसा काम था , हमें पता चल गया की पाण्ड्य की तुमसे पर्सनल दुश्मनी थी और फिर हमें कलवा का पता चला और फिर सम्पत का तुम्हारी भाभी का और फिर तुम्हारे कॉलेज का …

तुमने सही प्रश्न किया था की हमने तुम्हे अरेस्ट क्यों नहीं किया , क्योकि जंहा तक हमें पता चला तुम एक नार्मल से कॉलेज गोइंग लड़के हो जिसका अपराध की दुनिया से कोई भी तलूक नहीं है , तुमने तो ये भी नहीं पता की तुमने पाण्ड्य का मर्डर नहीं किया है “

पूर्वी की बात सुनकर मैं बुरी तरह से चौक गया साली पागल तो नहीं हो गयी थी ..

“ये आप क्यों बोल रही है “

उसके चेहरे में एक मुस्कान खिल गयी

“है अंकित .. तुमने अंकित बुलाऊ तो तुम्हे कोई एतराज तो नहीं “

मैंने जल्दी में ना में सर हिलाया

“तो है अंकित , तुमने पाण्ड्य का मर्डर किया नहीं है , बल्कि तुमसे ये करवाया गया है .. एक पुरे प्लान के द्वारा “

“व्हाट ..??”

मैं बुरी तरह से चौका था

“है “

“आखिर कौन ऐसा करवाना चाहेगा और वो भी मुझसे , मैं तो एक सामान्य सा लड़का हु “

मेरी बात सुनकर पूर्वी जोरो से हंस पड़ी ..

“है तुम एक समय से लड़के हो लेकिन बात तुम्हारी नहीं थी “

मैं उसे अब भी आश्चर्य से hi देख रहा था

“तो फिर ..”

“तुम भले hi एक सिंपल से लड़के हो लेकिन तुम्हारी भाभी ..”

भाभी का नाम सुनते hi जैसे मुझे कोई करंट का जोर वाला झटका लग गया था , मेरी नजर पूर्वी में hi टिक गयी

“मेरी भाभी ..???”

मेरे होठ सूखने लगे थे

“है तुम्हारी भाभी , तुम्हारी भाभी कोई सिंपल इंसान नहीं है “

मेरा सर चकराने लगा था

“आखिर आप ये क्या कह रहे हो मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा , मैं उन्हें हमेशा से जनता हु वो एक सीधी सधी सी घरेलु ायरत है …”

“है वो है ..”

“तो आपने ऐसा क्यों कहा “

पूर्वी ने एक गहरी साँस ली

“क्योकि वो जीवा की भांजी है “

“व्हाट ..?? जीवा ..?? अंडरवर्ल्ड का डॉन जीवा.. जीवा गैंग का हेड “

“हम्म वो जीवा की बहन कोमल की बेटी है , कलवा ने जब उसे पहली बार देखा था तब hi उसे पहचान लिया था , पहचानता भी क्यों न आखिर वो उसकी बहन कोमल की हु बा हु कॉपी जो है ..आखिर अपनी बहन का चेहरा कोई कैसे भूल सकता है “

पूर्वी की बात सुनकर मैं पूरी तरह से स्तब्ध हो गया था

“यानि कलवा hi ..”

“है कलवा hi जीवा है जो तिवारी के आदमियों से छिपने के लिए कलवा बन गया और सबको कह दिया गया की जीवा को अंडरग्राउंड हो गया है , उस बस्ती में ऐसे भी पहले से hi जीवा का hi राज था लेकिन सभी सम्पत को जानते थे न की जीवा को , उसकी कोई तस्वीर भी मौजूद नहीं थी , वो जीवा गैंग का हेड था और उसकी बहन कोमल सकती गैंग की हेड थी , दोनों भाई बहन एक दूसरे से बेहद hi प्यार करते थे लेकिन साथ hi साथ दोनों को hi एक दूसरे के काम करने का तरीका बिलकुल भी पसंद नहीं था , इसलिए दोनों hi अपना अपना गैंग चलते थे ..”

“लेकिन भाभी की maa-baap को तो सालो से जनता हु वो तो मेरे गांव के पास वाले कॉलेज के बहार चाय की छोटी सी टपीर चलती है “

“हम्म हमने पता किया था और वो कोमल hi है जो अपने पुराने प्यार भुवन के साथ ये सब छोड़कर शांति की जिंदगी बिताने के लिए गांव में जाकर बस गयी “

“ओह्ह्ह …”

मैं गहरे सदमे में था .. क्या भाभी को ये सब पता है ..??

“लेकिन ….. लेकिन इन सबसे पाण्ड्य का क्या नाता है ??”

पूर्वी ने गहरी साँस ली

“कलवा उर्फ़ जीवा आरती को देखते hi पहचान गया था की वो उसकी भांजी है , जैसा हमें पता लगा की उसने hi तुम लोगो को सबसे पहले पाण्ड्य से बचाया और फिर घर दिलवाया , लेकिन वो नहीं चाहता था की उसकी भांजी ऐसा जीवन जिए , लेकिन उसे ये भी दर था की आरती उसकी बात को नहीं मानेगी क्यों की इस बारे में उसे भी कुछ नहीं पता था, साथ hi साथ असलियत के बहार आने से तिवारी का भी खतरा तुम दोनों पर बढ़ जाता , अगर आरती तिवारी या उन लोगो के नजर में आ जाती जो की कोमल को जानते थे तो तुम दोनों की hi जान खतरे में पद जाती , और उसे पाण्ड्य से भी कई हिसाब चुकाने थे इसलिए उसने एक प्लान बनाया , पहले तो तुम्हे पैसो का लालच देकर अपने साथ यानि जीवा गैंग के लिए काम करवाने की कोशिस की लेकिन तुम नहीं मने तो उसने खुद hi पाण्ड्य को आरती की जानकारी भेजवा दी और फिर तुम्हने भी सही समय में वंहा पंहुचा दिया, तुम्हारे हाथो पाण्ड्य का खून करवा दिया और ऐसे तुम दोनों न चाहते हुए भी जीवा की हवेली में आ गए , अब तुम्हारी भाभी को जीवा की असलियत का पता है या नहीं ये तो मैं नहीं जानती लेकिन मुझे इतना जरूर लगता है की उसे ये पता होगा ..”

“क्यों ??”

“क्योकि हमें लगता है की शिवा के नाम से क़त्ल करने वाला कोई और नहीं बल्कि तुम्हारी भाभी आरती hi है “

“व्हाट ..?? आप पागल हो गयी हो क्या “

मैं गुस्से में बुरी तरह से चीखा , लेकिन पूर्वी के होठो में बस एक हलकी सी मुस्कान hi आयी

“है अंकित .. तुम्हे कॉलेज और दोस्तों में व्यस्त कर दिया गया , तुमने हवेली की कोई बात का नहीं पता है , जबकि तुम्हारी भाभी को लड़ने की ट्रेनिंग दी गयी , आखिर उसके रगो में कोमल उर्फ़ सकती का खून दौड़ रहा है , उसे भी तो तिवारी से बदला लेना होगा जिसने उसकी माँ और उसके मां को धोखा दिया था , जिसके कारण उसकी माँ दर दर की ठोकर खाने के लिए मजबूर हो गयी ..”

पूर्वी की ऐसी बात को सुनकर मैं बुरी तरह से परेशां हो गया था , उस फुल एक वाले कमरे में भी मेरे माथे में पसीना आ रहा था

“लेकिन आप ऐसा कैसे कह सकती है की वो खून भाभी ने किये है “

पूर्वी ने फिर से गहरी साँस छोड़ी

“असल में हमें नहीं पता की वो खून किसने किये है , लेकिन जिस पैटर्न से वो खून किया गया है वो दोनों hi सकती गैंग का पैटर्न हुआ करता था , पहले लोगो को मार कर मरने वाला उसके खून से सकती लिख देता था , और ये सब सकती गैंग की मुखिया सकती उर्फ़ कोमल hi किया करती थी , तो ये अंदाजा लगाना गलत नहीं होगा की आरती भी अपनी माँ के रस्ते में चल रही है और सकती गैंग का दबदबा फिर से बढ़ा रही है ..”

“लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कल तो वो मेरे साथ hi थी “

“वही चीज तो हमें परेशां कर रही है , हम भी आरती पर नजर बनाये हुए है , वो कल हवेली से बहार hi नहीं गयी थी , न hi कोई और hi बहार गया था , तो फिर आखिर ये खून किसने किया “

पूर्वी के चेहरे में भी चिंता की लकीरे घूमने लगी थी , कुछ देर तक हम दोनों hi शांत रहे , फिर अचानक से मेरे जेहन में एक सवाल उठ खड़ा हुआ

“लेकिन आप लोगो को जब सब पता चल गया है तो अपने मुझे अरेस्ट क्यों नहीं किया “

इस बार पूर्वी के होठो में एक मुस्कान आयी

“क्योकि इससे हमें कोई फायदा नहीं होने वाला था, पाण्ड्य को तुमने मारा है ये बस हमारी टीम को hi पता है , पुलिस डिपार्टमेंट तक हमें ये बार अभी भी पहुंचने नहीं दी है , क्योकि इससे कुछ खास होने वाला भी नहीं है , तुम्हारे खिलाफ कोई साबुत मिलेगा नहीं तो तुम्हे जेल तो होगी नहीं बल्कि उल्टा तिवारी का खतरा तुम्हारे ऊपर बढ़ जायेगा , इससे हमें तो कोई फायदा नहीं होगा बल्कि तुम्हारा नुसकान जरूर हो जायेगा “

पूर्वी की बात सुनकर मैंने एक गहरी साँस ली

“लेकिन मुझे बचने में आप लोगो का क्या फायदा है “

इस बार फिर पूर्वी के चेहरे में एक कुटिल मुस्कान आ गयी

“हमें तिवारी चाहिए , उस सेल ने कानून की धज्जिया उदा दी है लेकिन फिर भी कोई ुस्तक नहीं पहुंच प् रहा , तुम हमारे लिए एक उम्मीद हो सकते हो , आखिर तुम उसकी बेटी के दोस्त जो हो …और तुम्हारी बारे में न बताने के बदले तुम हमारी मदद कर सकते हो , हमारा मिशन भी तो एक hi है “

पूर्वी के होठो आयी मुस्कान और भी गाढ़ी हो गयी थी

“मेरा कोई मिशन नहीं है ..”

“तुम्हारा नहीं लेकिन तिवारी को खतम करना जीवा गैंग का मकसद तो है और तुम्हारी भाभी का भी “

भाभी का नाम सुनकर मैं थोड़ा सहम गया था मेरे दिमाग में कई बाटे चल रही थी

“देखो अंकित हमारा साथ दो , तुम्हारा hi फायदा होगा , जीवा गैंग अब ख़त्म हो चूका है उसके पास कोई भी पावर नहीं बची है , वो लोग तुम्हे और तुम्हारी भाभी दोनों को मुश्किल में दाल सकते है वही हमारे पास आधुनिक हथियार से लेकर पूरी टेक्नोलॉजी है , टैलेंटेड लोग है जो की इस तरह के कई मिशन को अंजाम दे चुके है , जीवा गैंग या सकती गैंग वाले बस खून खराबा करते रह जायेंगे उनसे कुछ नहीं होगा वो कभी तिवारी तक नहीं पहुंच पाएंगे … जबकि हमारे पास पूरा सिस्टम है , हम तुम्हे और तुम्हारी भाभी को बचा लेंगे बल्कि तिवारी को भी जेल की सलाखों के पीछे दाल देंगे , वही तुम्हारा भविष्य भी तो है आगे … और सोचो की उन लोगो के साथ तुम्हे क्या मिलेगा वो तुम्हारी भाभी को एक कातिल बना देंगे जो कानून की निगाहो में भी गुनहगार होगी “

पूर्वी की बात सुनकर मैं गहरे सोच में डूब गया था

आखिर मैंने एक गहरी साँस ली और बोल उठा

“मुझे क्या करना होगा “

पूर्वी मुस्कुराई …

“बस कुछ इनफार्मेशन तुम्हे हम तक पहुंचने होंगे बाकि का काम हम देख लेंगे “

तभी कमरे का दरवाजा खुला और एक हत्ता कट्टा नौजवान साक्ष अंदर आया

“ओह्ह इनसे मिलो ये है हमारे चीफ एनालिस्ट िब के विकाश “

“हैल्लो अंकित “ उस साक्ष ने बड़े hi प्यार से मुझसे हाथ मिलाया और पूर्वी की तरफ देखने लगा

“जरा खिड़खी से बहार देखो “

विकाश की बात सुनकर पूर्वी तुरत hi खिड़खी के पास पहुंच गयी और पर्दा हटाकर निचे देखने लगी , अचानक hi उसके चढ़े का भाव hi बदलने लगा था

“ये यंहा कैसे आयी , तुमने इसे कुछ बताया “

वो विकाश की और गुस्से से देखने लगी

“मैंने उससे कुछ नहीं कहा , पता नहीं वो यंहा क्यों आयी है “

विकाश ने अपनी सफाई दी , तभी पूर्वी ने एक गहरी साँस ली और मेरी और मुद गयी

“ठीक है अंकित तुम अब जा सकते हो , जब जरुरत होगी हम तुमसे कांटेक्ट कर लेंगे .. और है सुनो बहार ये जो ायरत कड़ी है वो तुमसे शायद कोई बात करे , उसकी बात मत सुन्ना वो एक no. की कामिनी है …”

मुझे पूर्वी की बात समझ नहीं आयी लेकिन उसकी बातो से जलने वाली बू जरूर आ रही थी , मैंने बस हां में सर हिलाया और वंहा से निकल गया ,

उस ऑफिस से निचे आते hi जैसा उन्होंने कहा था मुझे वो ायरत दिखाई दी , बाला की खूबसूरत एक टॉप और जेएस पहने हुए , आँखों में काळा रंग का गूगल पहना हुआ था, कपडे शरीर में ऐसे कैसे हुए थे की उसके यौवन का हर एक अंग साफ साफ झलक रहा था , न चाहते हुए भी उसके चेहरे की खूबसूरती और जिस्म की मादकता के इस अद्भुत मिश्रण में मैं खो सा गया था , वो होठो में एक सिगरेट लगाए हुए काळा रंग की ऑडी कार से तिकी हुई कड़ी थी ..

जैसे hi हमारी नज़ारे मिली उसने इशारे से मुझे अपने पास बुला लिया , मैंने एक बार ऊपर की और देखा ऊपर के मेल के कांच की खिड़खी से पूर्वी झक्ति हुई दिखाई दी ..

मैं उसके पास पंहुचा तो उसने अपना सिगरेट निचे फेक दिया और मेरी तरह अपना हाथ बढ़ाया ..



“ही अंकित ी ऍम काजल … क्या मैं तुम्हारा थोड़ा वक़्त ले सकती हुई “
 
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