Adultery BHABHI MAA - Page 2 - SexBaba
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Adultery BHABHI MAA

अपडेट 10


स्वर्गीय रतन चंदानी मेमोरियल आर्ट एंड साइंस कॉलेज ..

मेरे सामने एक बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था, आज मेरा यंहा पहला दिन था, सम्पत मां ने सब कुछ जुगाड़ लगा दिया था, मैंने बीएससी करने के लिए यंहा आया हुआ था, ये कॉलेज इस सिटी का जाना मन कॉलेज था और इसकी स्थापना यंहा के एक बड़े बिज़नेस मन राज चंदानी ने अपने पिता के यद् में बनवाया था..

मैंने एक गहरे साँस भरी , मैं थोड़ा नर्वस भी था क्योकि पढाई छोड़े बहुत दिन हो चुके थे , मैं कहा डॉन बनने के सपने देखने लगा था और कहा फिर से वही किताबो का बोझ धोना पड़ेगा , दूसरी तरफ यंहा मेरा कोई दोस्त भी नहीं था जिसके साथ मैं थोड़ी मस्ती कर सकता , खैर सब कुछ सही हो जायेगा यही सोचकर मैं अपने क्लास में गया और एक पीछे की सीट पर बैठ गया .. क्लास अभी खली hi थी ..

थोड़ी hi देर में कोई 50-60 बच्चे वंहा आ चुके थे ,लेकिन अभी भी लास्ट में राखी इस सीट में कोई नहीं बैठा था , मुझे लगा की शायद मुझे यंहा अकेले hi बैठना होगा , मैं अपने स्कूल के दोस्तों को मिस करने लगा था , यंहा सभी किसी न किसी के साथ था सिर्फ मैं hi अकेला था , सभी एक दूसरे से बात कर रहे थे ,ये सामान्य सी बात थी की यंहा अधिकतर यही के स्कूल्ज के बच्चे आते थे या आस पास के छोटे शहरो और गांवो से , और सभी ग्रुप्स में आते थे , मुझे लगा की मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गया हु , ये सभी लोग मुझसे बहुत अलग भी थे , अधिकतर तो इंग्लिश में बात करने वाले थे और मैं ठहरा शुद्ध देसी इंसान ..

सच बोलू तो मुझे शहर आये इतने दिन हो गया था लेकिन मुझे कभी नहीं लगा की मैं एक गांव से आया हुआ हु क्योकि मैं जंहा भी रहा वो लोग या तो बेहद hi गरीब थे या फिर बिना पढ़े लिखे गुंडे , लेकिन आज ये सब मुझसे बहुत hi अलग लग रहे थे , मैंने एक सस्ती सी जीन्स और शर्ट पहनी थी जो मुझे लगता था की ये मेरे गांव के सबसे अच्छे और रहिस या पढ़े लिखे लोगो के बच्चे पहनते थे, लेकिन इन लोगो के कपडा भी बड़े hi शानदार थे , लड़कियों को तो जीन्स पहने इतने करीब से मैंने आज hi देखा था कुछ तो स्कर्ट में भी थी ..

इन सब को देखकर मैं और भी नर्वस हो गया था मुझे समझ आ गया था की मुझे पूरा कॉलेज इस लास्ट की बेंच में बैठकर अकेले hi बितानी है मेरा कोई भी दोस्त यंहा नहीं बनने वाला सभी मेरे स्टैण्डर्ड के बहुत ऊपर के लोग है , और स्टैण्डर्ड आखिर मैं मेन्टेन भी कैसे करता , कॉलेज की फीस सम्पत मां दे रहे थे , मेरा और मेरी भाभी का पूरा खर्च तो वही उठा रहे थे अभी तक मैंने उनके लिए कोई काम भी तो नहीं किया था ..

“कहा फंसा दिया मां साला मैं गन चलते हुए hi ठीक था “

मैंने अपने मन में कहा ,

आखिर पहली क्लास शुरू हुई , ये केमिस्ट्री की क्लास थी एक सर अन्दर आये ..

“आज आप लोगो की पहली क्लास है बच्चो आप सभी का हमारे कॉलेज में वेलकम , मेरा नाम पवन है और मैं आप लोगो का केमिस्ट्री का टीचर हु .. क्योकि आज पहली क्लास है तो पढाई करने से अच्छा है क्यों न हम आप सभी का इंट्रोडक्शन ले ले ,आप सभी अपना नाम बोलिये, आपके 12तह स्टैण्डर्ड का परसेंट और साथ hi की आप जीवन ने आगे क्या बनना चाहते है “

परसेंट इसलिए भी पूछा जा रहा था क्योकि यंहा दो hi टाइप के लोगो का एडमिशन होता था या तो जिसने 95% से ऊपर लाये हो या फिर जिसने मैनेजमेंट को अच्छे खासे पैसे खिलाये हो

सर के बोलने के बाद एक एक करके लोग उठाने लगे और अपना अपना इंट्रोडक्शन देने लगे तभी कुछ लोग क्लास के बहार आये

“मई ी के इन सर “

उनमे से एक ने कहा सर ने पहले तो उन्हें घुरा

“पहली क्लास में hi लेट हो तुम लोग , ये कोई टाइम होता है क्या आने का “

“सॉरी सर “

सभी ने एक साथ कहा

“ठीक है अंदर आ जाओ लेकिन यद् रखना आज पहली और आखिरी बार है अब लेट आये तो अंदर आने नहीं दूंगा “

मैंने देखा की वो दो लड़कियों और दो लड़को का एक ग्रुप था ,वो देखने से hi बड़े hi जाहिं लोग लग रहे थे , दो लड़कियों में एक ने पिंक और दूसरे ने ब्लैक स्कर्ट पहनी थी दोनों hi चेहरे से अच्छे घर के लग रहे थे वही उनके चेहरे की चमक और खूबसूरती ऐसी थी की एक बार को क्लास में सभी की नजरे उनपर hi जाकर टिक गई थी , साथ hi दोनों लड़के भी बड़े hi ड्रेसिंग लग रहे थे , वो अंदर तो आ गए लेकिन फिर आंखे घुमाकर बैठने के लिए जगह देखने लगे , पूरा क्लास भरा हुआ था सिवाय मेरे और मेरे बाजु वाले टेबल के एक टेबल में दो लोग आराम से बैठ सकते थे और एडजस्ट करके 3 भी , लास्ट में खली टेबल को देखकर सभी की आंखे चमक गई ..वही मेरे दिल की धड़कने अचानक से hi बाद गई , मैंने तो सोचा था की मैं पुरे कॉलेज अकेले hi रहने वाला हु और ये सेल तो बड़े hi हाई क्लास लग रहे थे पता नहीं लेकिन मैं और भी नर्वस होने लगा था ,मैं ठहरा गांव का एक सीधा साधा आदमी पता नहीं क्यों मेरे दिगमग में अजीब तरह की बाटे आ रही थी, मुझे लगा जैसे मैं खुद को इन सबसे इन्फीरियर महसूस कर रहा था और यही कारण था की मेरे दिल की धड़कने भी तेज हो गयी थी ,

“बॉस क्या हम दोनों यंहा बैठ सकते है ?“

एक लड़के ने कहा, मैंने बस हां में सर हिला दिया

दोनों लड़के मेरे बाजु में बैठे वही दोनों लड़किया बाजु वाले टेबल में , बैठते hi उन्होंने एक दूसरे के साथ खुसुर फुसुर शुरू कर दी थी किसी ने अभी तक मुझसे कोई बात नहीं की थी वही लोग एक एक करके अपना इंट्रोडक्शन दे रहे थे , मुझे देख के आश्चर्य भी हुआ की सेल यंहा सभी के सभी 90% के ऊपर वाले hi है ,जब सम्पत मां ने मेरी मार्कशीट में 96% डलवाये थे मैंने उनसे कहा था की मां ये थोड़ा जयदा हो जायेगा ,लेकिन यंहा आने के बाद पता चला की लोग सच में इतना लाते भी है ..

अब आखिरी no. हम लोगो का था , लड़कियों ने शुरू किया ,पहले पिंक वाली कड़ी हुई

“होई माइसेल्फ नेहा , मेरा परसेंटेज 95.56 है और मैं आगे जाकर बॉटनी से पीएचडी करना चाहती हु क्योकि मुझे नेचर से बहुत प्यार है और खासकर प्लांट्स से “

वो बैठी और ब्लैक वाली खड़े हो गई

“ही माइसेल्फ मोनिका, मेरा परसेंटेज 92 , और मैं आगे चलकर मॉडलिंग करना चाहती हु ..”

उसकी बात सुनकर सभी का ध्यान उसपर चला गया वो थी भी बहुत खूबसूरत और साथ hi उसका ऐटिटूड और कॉन्फिडेंस भी कमाल का था , लड़को की नजर देख कर hi मैं समझ गया था की ये इस क्लास के सभी लड़को के दिल का धड़कन बनने वाली है

उसके बाद साइड वाला लड़का खड़ा हुआ

“ही मेरा नाम है अर्जित और मेरा परसेंटेज है 85% (सभी उसकी और देखने लगे क्यों की ये अब तक का सबसे काम था ,समझ में आता था की इसके बाप ने अच्छे पैसे दिए होंगे ) और मैं आगे चलकर राज चंदानी जैसा बिज़नेस मन बनना चाहता हु और इसके साथ hi साथ मैं मॉडलिंग भी करना चाहता हु “

क्लास की कुछ लड़किया उसे ऐसे देख रही थी की उनकी आँखों से hi पता चल रहा था की वो इस लड़के से कितना इम्प्रेस है ..

मैंने एक बार अर्जित की और देखा सच में उसकी पर्सनालिटी में कोई बात तो थी , lamba-chouda , gora-nara , hatta-katta लड़का था ,साथ hi दिखने में भी बहुत hi हैंडसम था

फिर मेरे बाजु में बैठा लड़का उठा

“ही दोस्तों मेरा नाम आकाश है आप मुझे प्यार से अक्की भी बोल सकते है , मेरा परसेंटेज 96 था और मैं आगे केमिस्ट्री से पीएचडी करना चाहता हु , मुझे चेमिकल्स और उसके कॉम्बिनेशंस बेहद hi पसंद है मैं उनही पर रिसर्च करना चाहता हु “

(दोस्तों यंहा पर आकाश अक अक्की का करैक्टर में मैंने हमारे प्यारे दोस्त भाई को पोर्ट्रेट करने की कोशिस की है , जितना मैं उन्हें समझ पाया हु ,उन्हें एक वडा किया था की मैं उनको अपनी स्टोरी में पोर्ट्रेट करूँगा , तो ये रहे हमारे अक्की भाई )

उसकी आवाज बहुत hi सॉफ्ट थी , एक छरहरे बदन का लड़का था मेरे hi जैसा था लेकिन उसके चेहरे , आवाज और आँखों में एक मासूमियत थी , साथ hi साथ एक चार्म भी था… मैंने इतने देर में पवन सर को पहली बार किसी का इंट्रो सुनकर खुस होते देखा था , शायद वो इसलिए भी क्योकि वो खुद भी केमिस्ट्री के टीचर थे ..

इन सबके बाद मेरी बरी आयी , मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा था , लोग इंट्रो सुन सुनकर ऐसे भी बोर हो चुके थे और मैं ईंटो देने वाला अंतिम शख्श था

“जी मेरा नाम अंकित है (मेरे मुँह से सोनू निकलने वाला था फिर एक बार शिवा यद् आया लेकिन फिर यद् आया की यंहा के लिए मेरा नाम अंकित है ) ..

जी मेरा परसेंटेज ..(मैं थोड़ी देर सोच में पद गया ) जी वो 96 है “

और मैं चुप हो गया , मेरी अजीब बातो ने सभी का ध्यान मेरी और खींच लिया था सभी मुझे अजीब निगाहो से घर रहे थे और साथ hi मेरे साथ बैठे लोग भी जो अभी तक मेरी तरफ कोई भी ध्यान नहीं दे रहे थे ..

“तुमने बताया नहीं की तुम आगे जाकर क्या करना चाहते हो “

पवन सर ने कहा और मैं थोड़ा सोच में पद गया की ये क्या मुसीबत है

“सर कुछ भी कर लूंगा बस मेरी भाभी माँ को वो पसंद आये, रोजी रोटी चलनी चाहिए ..ऐसे भी तो मजदूरी hi कर के गुजरा कर रहे है, पढ़ लेंगे तो शायद कुछ अच्छी कमाई कर ले ”

एक बार को ऐसा लगा जैसे सभी को सांप hi सूंघ गया हो..

लेकिन फिर पवन सर ना जाने क्यों ताली बजने लगे , मैं खुद भी शॉक में था की आखिर उन्हें क्या हुआ है

“बहुत बढ़िया , देखो बच्चो हमारे साथ एक ऐसा शख्स भी है जिसने अपनी विषम परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और 96% के साथ इस कॉलेज में हमारे साथ है , इसे कहते है स्पिरिट , इसे अपनी नहीं बल्कि अपने फॅमिली की चिंता है .. गुड बेटे तुम्हारी भाभी माँ को तुम्हारे ऊपर गर्व होगा और तुम उन्हें एक अच्छी जिंदगी दे पाओगे जैसा म्हणत तुमने 12तह में किया था वैसा hi यंहा भी करना और अच्छे ग्रेड से ग्रेजुएट होना हम तुम्हे स्कालरशिप दिलवेनेगे ताकि तुम आगे की पढाई कर सको… गरीबी में भी पढ़ने का हौसला इसे कहते है बच्चो इससे कुछ सीखो आप लोग भी ..”

पुरे क्लास में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी थी , मुझे खुद भी यकीं नहीं हो रहा था की लोग फेक मार्कशीट से मिले फेक नाम वाले इंसान के फेक ग्रेड के ऊपर तालिया बजा रहे थे … किसी ने सच hi कहा है की जो दीखता है वो बिकता है ….

क्लास मेरे इंट्रो के साथ hi ख़त्म हो गई , मैं अभी इन सबसे सम्हाल पता उससे पहले hi मेरे बाजु वाला शख्स बोल पड़ा ..

“ही ी ऍम अक्की , तुमने कोण से स्कूल से पढाई की है “

वो अपना हाथ मेरे और बढ़ाते हुए बोलने लगा उसके बाद hi अर्जित ने मुझसे हाथ मिलाया.. वही मोनिका और नेहा ने मुझे दूर से hi होई कहा , ये सब करते हुए मैं अपने दिमाग में उस स्कूल का नाम सोच रहा था जो की मेरे मार्कशीट में था ..

“गवर्नमेंट स्कूल “

मुझे बस इतना hi यद् आया था स्कूल का नाम भी मैं भूल गया था..

“वाओ गवर्नमेंट स्कूल से भी पढ़कर तुमने बहुत अच्छा मार्क लाया है , और वो भी काम करते हुए यू अरे ग्रेट मन”

पिंक ड्रेस वाली पारी बोल उठी जिसका नाम नेहा था , लेकिन इन सबमे मुझे समझ आ गया था की लोग मुझे इतना भाव क्यों दे रहे थे , मेरा परसेंट और साथ hi ये की मैंने मजदूरी करते हुए पढाई की है , अब हंसी तो मुझे भी आ रही थी लेकिन मैं उसे रोके हुए था , मेरे कपडा ऐसे भी गरीबो वाले hi थे और अभी के हालात में मैं था भी एक गरीब ग़ुरबत में पड़ा हुआ आदमी . और सम्पत मां की बनायीं मार्कशीट के मार्क ने उसमे चार चाँद लगा दिए थे. देखने से ऐसा लग रहा था की मैंने बहुत hi म्हणत और संघर्ष करके ये मार्क लाये है और इतने बड़े कॉलेज में एडमिशन के काबिल बन पाया हु ..

“थैंक्स …”

मैंने नम्रता के साथ कहा

“तो तुम क्या काम करते थे स्कूल के टाइम पर “

अर्जित ने पूछा, ये सेल आमिर लोगो को गरीबो के जीवन में थोड़ा जयदा hi इंटरेस्ट होता है

“वो मैं सामान ढुलाई का काम करता था , ट्रैक्स में सामान डालना और उतरने का काम था ..”

मैंने लाला के पास किये काम का बयां कर दिया था , वो लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैं कोई एलियन हु ..

“ओह माय गॉड ये तो बहुत hi म्हणत का काम होता है यार , तुम पढ़ते कब थे , टाइम मिल जाता था ??”

इस बार भी नेहा hi थी उसके आवाज में एक दर्द था , दर्द मेरे लिए , उसका मासूम सा चेहरा उसके दुःख को और भी खिल कर बहार निकाल रहा था ..जब इतना हो hi चूका था तो मैंने सोचा की क्यों न थोड़ा और मिर्च मसाला लगा दिया जाय..

“है काम से आता था उसके बाद खोली में बैठकर रत में पढ़ लेता था, अधिकतर वंहा लाइट नहीं होती थी तो स्ट्रीट लाइट के निचे बैठकर पढ़ा करता था “

मैंने ये सुन रखा था की कई महँ इंसानो ने स्ट्रीट लाइट के निचे पढ़कर काबिलियत हासिल की थी वही चीज मैंने यंहा चिपका दी थी ..

“ओह माय गॉड ..”

दोनों लड़किया एक साथ बोल उठी

“कोई नहीं दोस्त तू फ़िक्र मत कर अब हम तेरे साथ है , तुझे किसी भी चीज की जरुरत हो तो हमें बोल देना , और आज से तू अपना दोस्त है, आज से हमारा 4 का नहीं बल्कि 5 का ग्रुप होगा , क्यों दोस्तों “

अर्जित ने बहुत hi गर्मजोशी के साथ कहा, और सभी ने एक स्वर में है से है मिलाया ..

भगवन सच में दयालु है , कुछ झूठ से hi सही लेकिन मुझे ऐसे दोस्त मिल गए थे जो सच में गरीबो की और उनके म्हणत की इज्जत करते थे , उनके दर्द के लिए जिनके दिल में संवेदनाये थी, शायद अब मेरा कॉलेज अकेले इस लास्ट बेंच में बैठकर नहीं बीतेगा , ये लोग मुझे बड़े hi सच्चे लगे थे और मैं इनके साथ खुश भी था , ये मेरे साथ एक दोस्त की तरह hi वयवहार करने लगे थे शुरू में मैं hi थोड़ा नर्वस था लेकिन कुछ hi देर में मुझे लगा की ये भी मेरे पुराने दोस्तों की hi तरह है बस थोड़े अलग परिवेश में पीला बढे है ..

अब मेरे होठो में एक मुस्कान थी और साथ hi दिल में एक जोरो की इक्छा जाएगी की जल्दी से घर जाकर सब कुछ भाभी को बताऊ …

 
अपडेट 11


भाभी की हंसी से पूरा कमरा hi कुंदन जैसे चमक उठा था , मेरी बात सुनकर वो बहुत हंस रही थी …

तभी उन्होंने मुझे प्यार से देखा ..

पता नहीं उनके अंदर कितना प्रेम छिपा था की जब भी मुझे देखती थी उनकी आंखे प्रेम से पूरी तरह से तर होती थी , उनके स्पर्श में भी प्रेम hi प्रेम था वो प्रेम की एक जीती जगती मूरत थी …

“तूने वंहा भी मेरा जिक्र कर दिया न “

अब मैं इसका क्या जवाब देता , मेरे जीवन में उनके अलावा था hi कौन जिसका जिक्र करता ..

“भाभी आप भी न आपके सिवा और किसका जिक्र करूँगा ..”

वो मुस्कुराई

“अच्छा ये तो बता की आखिर तेरे दोस्त कैसे है “

“भाभी मुझे तो बहुत hi अच्छे लगे , नेक दिल लोग है “

“देख बीटा आमिर लोगो से थोड़ा दूर hi रहना चाहिए , मैंने उनके बारे में बहुत बुरा सुना है , सुना है की उन्हें दिल की कोई भी कदर नहीं होती , वो इंसानियत से जयदा पैसो को महत्व देते है , और जस्बातो और प्रेम की उन्हें कोई भी कदर नहीं होती …”

“अरे भाभी ये सब सुनी सुनाई बाटे है और अगर ऐसा होता तो क्या वो लोग मुझ जैसे फटीचर से बात भी करते , लेकिन उन्होंने न सिर्फ प्रेम से मुझसे बात की बल्कि उन्होंने मुझे अपना दोस्त भी बनाया और कौन है जिसे पैसे से प्रेम नहीं है , पैसे पर तो पूरी दुनिया hi वरि है…”

“वो सब ठीक है बीटा मैं बस इतना कह रही हु की कही दिल न लगा लेना उनसे “

मैं जोरो से हंस पड़ा

“अरे भाभी मैं उनसे मोहोब्बत नहीं कर रहा हु जो दिल लगाऊंगा बल्कि वो तो बस मेरे दोस्त है ..”

“अच्छा..?? बीटा दोस्ती में भी दिल लगता है वो रिश्ता तो ऐसा रिश्ता है जिसमे सबसे ज्यादा मोहोब्बत होती है , प्रेम होता है और भरोषा होता है …ऐसे उनमे दो लड़किया भी तो है न एक तो मॉडल बन रही है लेकिन वो दूसरी वाली क्या नाम है उसका ..??”

“नेहा “

“है नेहा मुझे लगता है वो ऐसी है जिससे मोहोब्बत हो जाए “

उनकी बात में एक शरारत भी थी , मैं भी उनके साथ मुस्कुरा उठा था ..

“वो तो है बड़ी hi प्यारी लड़की है लेकिन मैं यद् रखूँगा आपकी बात की उससे सिर्फ दोस्ती रहे और दोस्ती वाला प्रेम रहे न की आशिक़ी वाला, ऐसे भी मेरी तो आशिक़ी सिर्फ एक से hi है ……….आप से “

उन्होंने मेरे गलो पर हलकी सी चपत लगा दी ..

हम ऐसे hi घंटो बातो करते रहते थे दिन भर की बाटे करते थे वो मुझे अपने किस्से सुनाया करती तो मैं उन्हें अपने ..

अचानक वो बोली

“सोनू मुझे एक चीज आज भी थोड़ी खटकती है , यंहा कुछ तो अजीब है लोग हमारे ऊपर ऐसे प्रेम लुटाते है की मुझे समझ hi नहीं आता खासकर सम्पत की माँ मुझे खुद को नानी कहलवाती है जबकि वही सभी लोग उन्हें अम्मा कहते है …कुछ तो है यंहा ..”

मैं भी उनकी बात से सहमत था

“है भाभी मुझे भी ऐसा hi लगता है , खासकर सम्पत बाकियो के लिए तो बॉस है लेकिन मेरे लिए बेहद hi नरम रहता है ..”

“और ये जीवा कौन है ??”

“सभी तो कहते है की वो hi इस गैंग का असली बॉस है लेकिन वो कौन है , कहा रहता है , ये सिर्फ सम्पत को पता है… यंहा तक की जग्गा को भी उसके बारे में नहीं पता जो की पूरा धंधा सम्हालता है ..”

“अजीब बात है न जो मुखिया है उसी का पता नहीं है , और ये लोग कितने पावरफुल है जो तिवारी जैसा आदमी भी इनसे डरता है ..??”

“भाभी तिवारी मंत्री है वो डरता नहीं है बल्कि बस इन लोगो से छोटी मोती चीजों के लिए उलझता नहीं है , क्योकि मैंने सुना है की जीवा भाई की पहुंच गरीब बस्तियों में बहुत जयदा है और वही से तिवारी की पार्टी के भी मला और ंप है , तो उनका दबाव भी तिवारी पर रहता है और ये भी सुना है की पहले तिवारी, जीवा भाई का hi आदमी हुआ करता था फिर न जाने क्या हुआ की दोनों में दुश्मनी हो गई और तिवारी ने दूसरा गैंग ज्वाइन कर लिया, सुना है बहुत hi खून खराबा हुआ और फिर जीवा भाई खुद गायब हो गए और उनका पूरा गैंग इस हवेली में आ गया … उन्होंने पुराण शहर छोड़ दिया था , वही तिवारी भी इस शहर की और नहीं देखता था लेकिन जब से वो मंत्री बना है वो भी राजधानी में आता जाता रहता है , लेकिन ये भी सुना है की जीवा, तिवारी की गद्दारी को अभी भी नहीं भूला है ना hi तिवारी भूला है बस दोनों एक दूसरे से भिड़ने से बचते है ताकि दोनों का काम सही से चलता रहे ..”

मेरी बात सुनकर भाभी ने एक गहरी साँस ली

“यानि की जीवा गायब है ताकि तिवारी उसे दंड न सके और तिवारी यंहा सिर्फ सरकारी काम से आता जाता है ताकि जीवा से टकराव न हो ..??”

“है शायद ऐसा hi …..”

मैंने भी हां में सर हिलाया

“लेकिन बीटा तू इन सबमे न पड़ना ये उनकी पर्सनल दुश्मनी है , हमें इससे क्या … दोनों न hi भिड़े तो अच्छा है .. तू बस अपनी पढाई पर ध्यान दे तू पढ़ ले कही जॉब कर ले तो फिर हम ये शहर hi छोड़ कर चले जायेंगे “

मैंने हां में सर हिलाया और उन्होंने हमेशा की तरह प्यार से मेरा माथा चुम लिया …….

 
अपडेट 12


अभी हम कॉलेज कैंटीन में बैठे थे , मेरे पास तो पैसे होते नहीं थे और रोज इन लोगो से खर्च करवाना मुझे अच्छा भी नहीं लगता था इसलिए मैं यंहा आने से मन करता था और ये चीज शायद उन्हें भी समझ आ गयी थी , वो मुझे खींच कर कैंटीन ले आये थे ..

“देखो यार तुम्हारे हालात का हमें भी पता है हम सब दोस्त है इसमें हिसाब की क्या बात है “

मोनिका ने अपने बेहद hi आकर्षित करने वाले अंदाज में कहा

“वो बात नहीं है मुझे पता है की तुम लोगो इन चीजों को मंद नहीं करते लेकिन यार रोज रोज ऐसा अच्छा नहीं लगता न की मेरे कैंटीन का पूरा बिल तुम लोग hi देते हो ..”

मेरी बात सुनकर नेहा ने एक नाराजगी वाले अंदाज में मुझे देखा

“अब तू ये सब सोचने लगा है , हमारे दिमाग में ये कभी नहीं आया न आएगा तू अपने दिमाग से ये सब निकाल दे”

ये नेहा ने कहा था और उसका अंदाज बिलकुल मुझे धमकाने वाला था .. जिसे देखकर सभी मुँह हँसाने लगे थे .. वही मेरा चेहरा थोड़ा उतर गया था

“अरे तू पगलू है यार पूरा , इन सब छोटी छोटी चीजों को मंद मत किया कर , ऐसा कुछ नहीं है की हम तेरे ऊपर कोई अहसान कर रहे है या ऐसा कुछ और तू दोस्त है अपना , दोस्ती में लोग जान दे देते है और तू सेल बिल नहीं देने दे रहा है “

अक्की की बात पर मैंने सहमति में सर हिलाया ,

“लेकिन मैं भी तुम लोगो को ट्रीट देना चाहता हु, मैं तुम्हे कैंटीन में तो नहीं खिला सकता लेकिन मैं तुम लोगो के लिए भाभी के हाथो से बना हुआ खाना लाऊंगा , देखना यंहा के इस पिज़्ज़ा से कई गुना टेस्टी होगा ..”

“लगता है तुम अपनी भाभी से बहुत प्यार करते हो “

नेहा मेरे आँखों में hi देख रही थी

“बहुत … जान है वो मेरी , और उनके सिवा मेरा इस दुनिया में है की कौन ..”

जंहा भाभी का नाम लेने से मेरे चेहरे में एक ख़ुशी आयी थी वही ये यद् करके की मेरा दुनिया में भाभी के सिवा कोई भी नहीं है , मेरे चेहरे में एक उदासी सी छ गई ..

मैंने इन लोगो को अपनी स्टोरी बताई थी की कैसे और किन हालत में मैंने गांव छोड़ा था , और यंहा आकर मजदूरी करने लगा … है ये नहीं बताया था की मैंने तीन पुलिस वालो को भी मारा है , बाकि सब कुछ सच hi बोलै था , साथ hi ये भी की मैं मालिक के घर में hi रहता हु तो मैं तुम लोगो को अपने घर नहीं ले जा सकता ये मुझे इसलिए बोलना पड़ा क्योकि ये लोग भाभी की इतनी तारीफ़ सुनकर उनसे मिलने की जिद कर रहे थे …

ये मेरे हालात को समझते थे इसलिए मेरे दिल में भी इनके लिए एक प्रेम का जन्म हो चूका था , ये सच में अच्छे लोग थे …और मैं इनसे बोले गए झूठ को भी सच करना छह रहा था मैं पूरी म्हणत से पढाई करता था ताकि क्लास के टीचर्स और मेरे दोस्तों के बिच मुझे शर्मिंदा नहीं होना पड़े…

हम कैंटीन में बैठे हुए मस्ती कर रहे थे तभी एक और ग्रुप आया , उनमे एक लड़की जिसने बेहद hi छोटे कपडा पहने थे और जिसके होठो में एक सिगरेट थी ,

“होई हैंडसम… ही मोनिका “

उसने अर्जित की और देखकर कहा जिसे देखकर मोनिका के चेहरे में एक गुस्सा साफ साफ दिखने लगा था

“ही सस “

उस लड़की की आंखे नशीली थी , उसका स्कर्ट जांघो को साफ साफ दिखा रहा था शायद थोड़ा और ऊपर हो जाता तो उसकी पंतय भी दिखने लगती , अगर उसने पहनी हुई हो तो …

लग रहा था की अर्जित और मोनिका की उससे कुछ खास दोस्ती सी लग रही थी क्योकि उसके आने से दोनों के चेहरे का रंग थोड़ा उतरा हुआ लग रहा था, वही अक्की और नेहा चुप हो गए थे वो तो उससे आंखे भी नहीं मिला रहे थे , लग रहा था की कोई पुराण याराना हो इससे …

“बेबी तुमने अभी तक इन फ़टीचरो का साथ नहीं छोड़ा न “

वो मुझे नहीं बल्कि अक्की और नेहा को फटीचर बोल रही थी , इसकी माँ की ये उसके लिए फटीचर थे तो मैं क्या था :ो

“मैं कितनी बार बोल चूका हु की ये मेरे दोस्त है “

अर्जित की आवाज में गुस्सा आ गया था , लेकिन वो बस हंसी

“तुम्हारे दोस्तों का स्टैण्डर्ड दिन बा दिन गिरता hi जा रहा है अज्जू डार्लिंग , पहले ये मोनिका और फिर ये गरीब लोग और अब तो तुमने कॉलेज के सबसे बड़े फटीचर को भी अपना दोस्त बना लिया “

इस बार वो मुझे देख कर बोल रही थी, अजीब बात थी की कोई उसे कुछ बोल भी नहीं रहा था .. लेकिन मैं ठहरा गांव का ठस्स बुद्धि वाला आदमी मैंने उसकी और रुख किया

“ये मैडम सस …….. हम लोगो को फटीचर बोलने से पहले न जा के अपना नाम बदल, सुन कर सुसु वाली फीलिंग आ रही है, और अज्जू को मत सीखा की दोस्ती किसे बोलते है हमारा अज्जू भाई न इंसानो को पहचानता है, शायद इसलिए तेरा नहीं बल्कि हमारा दोस्त है समझ गई सुसु ..”

मेरी बात सुनकर वो hi नहीं बल्कि सभी बुरी तरह से चौक गए कोई थोड़ी देर तक तो कुछ भी नहीं बोलै फिर मोनिका जोरो से हंस पड़ी , वही सभी के चेहरे में मुस्कुराहट आ गई थी सिवाय अर्जित के , वही सस का चेहरा लाल हो गया था

“ये गवर मंद योर लैंग्वेज “

उसकी बात सुनकर उसके ग्रुप के लोग भी हमारी तरफ भेदने लगे थे …

“सस जाने दो इसे नया बाँदा है तुम्हे जनता नहीं अभी , न hi हमारे बारे में जनता है ..”

अर्जित ने तुरंत hi कहा , वो अर्जित को देखने लगी

“तो बताओ इसे पहली बार है, तुम्हारा दोस्त है इसलिए छोड़ रही हु वर्ण ……”

वो वंहा से निकल गई

“सही जवाब दिया साली को अब से हमारे पास आने से डरेगी “

उसके जाते hi मोनिका बोल पड़ी

“चुप रहो यार, जानती भी हो इसके कारण इसे कितनी परेशानी हो सकती थी … तुम्हारा क्या है तुम्हारा बाप तुम्हे बचा लेगा लेकिन इनका क्या “

अर्जित थोड़ा अपसेट हो गया था

“ये है कौन भाई जो अक्की और नेहा को भी गरीब बोल रही थी “

मेरी बात सुनकर अक्की हंस पड़ा

“भाई हम लोग भी इसके सामने गरीब लोग hi है , हमारे बाप के पास अरबो की दौलत नहीं है जैसा अज्जू और मोनिका के पास है हम लोग मिडिल क्लास फॅमिली के लोग है और ये साली सस तो हमें कीड़ा मकोड़ा समझती है ..”

अक्की की बात में एक दुःख मुझे साफ साफ महसूस हो रहा था , मुझे इन सभी चीजों का अंदाजा नहीं था क्योकि मैंने कभी इतना पैसा देखा hi नहीं था न hi मेरे गांव में ऐसा कुछ था ,

“स्टॉप यार अक्की , तू जनता है न की ये साली कैसी है”

अज्जू फिर से थोड़ा परेशां हो गया

“अबे तो वो तेरे दोस्तों की बेज्जती करके चली जाती है और तू चुप होक सुनता रहता है , आखिर है कौन वो ..”

मुझे अभी तक समझ नहीं आ रहा था की आखिर अज्जू चुप होकर सुन क्यों रहा था

“वो तुम्हारी होने वाली भाभी है अंकित मिया, हमारे अज्जू की फिऑन्सé स्मिता तिवारी उर्फ़ सस ..”

मोनिका ने हसते हुए अज्जू की खिचाई की

“व्हाट ??”

मेरे दिमाग का ब्लब hi फ्यूज हो गया था

“अबे तू पागल है की इस लड़की से शादी करेगा “

मुझे सच में अपने दोस्त के ऊपर दया आ रही थी

“मत पूछ यार , इसका बाप बहुत बड़ा मंत्री है दया संकर तिवारी नाम तो सुना होगा तुमने और मेरे बाप का अच्छा दोस्त , समझ ले ये रिश्ता हम दोनों के बापू ने हमारे ऊपर थोप दिया है , ना hi सस को ये पसंद है न hi मुझे , हमारी लाइफ स्टाइल भी बहुत hi अलग है यार लेकिन क्या करे दोनों अपने पिता के सामने कुछ नहीं बोल सकते बस जीवन भर ये झेलना होगा ..”

अज्जू का चेहरा hi उतर गया था, वही तिवारी का नाम सुनकर मेरे कान खड़े हो गए थे ..

मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा

“कोई नहीं हम तुड़वा देंगे तेरा रिश्ता “

सभी मुझे ऐसे देखने लगे थे जैसे कोई भूत देख लिया हो

“सेल मजाक समझ लिया है क्या, जनता भी है की इसका बाप कौन है और मेरा बाप कौन है, हमारी हिम्मत नहीं होती उनके सामने जाकर कुछ बोलने की और तू तुड़वायेगा रिश्ता ..”

अज्जू के चेहरे में गुस्सा आ गया था वही मेरे चेहरे में एक मुस्कान

“भाई तुझे दोस्त बोलै है तो तेरा जीवन बर्बाद होते तो नहीं देख सकता न ..”

अज्जू ने मुझे प्यार से देखा

“भाई तेरे प्यार को मैं समझता हु लेकिन ये गांव नहीं है की लड़के लड़की को किसी दूसरे के साथ देखा या शराब पिटे देखा तो रिश्ता तोड़ देते है…. ये सेल लोग तो इसे शान समझते है बे “

मैंने उसकी बात सुनकर एक गहरी साँस ली ..

“कोई बात नहीं भाई कोई न कोई रास्ता तो निकाल hi लेंगे , मैं गांव का बाँदा हु और मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है , मेरे दोस्त की जिंदगी बनाने के लिए अगर जान भी देनी पड़ी तो पीछे नहीं हटूंगा …”

मेरी बात सुनकर सभी के चेहरे में एक चमक सी आ गई थी , अज्जू ने भी मुझे गले से लगा लिया था , ये बात मैंने अपने दिल से कही थी , मैंने अपने गांव के दोस्तों से ये बात सीखी और समझी थी की दोस्त के हर मुसीबत में उसके साथ खड़ा होना hi असली दोस्ती है …

 
अपडेट 13


कॉलेज से वापस आकर मैं सीधा सम्पत मां से मिलने पहुंच गया था ..

मैंने उन्हें साडी बात बता दी की कैसे तिवारी की बेटी हमारे hi कॉलेज में है और मेरे hi दोस्त की फिऑन्सé है …

“अबे भल्ला साहब का बीटा तेरा दोस्त है ??”

मैंने कंधे उचकाए, मुझे नहीं पता था की अर्जित के पिता का नाम क्या था है उसका सुर्नामे भल्ला hi था ..

“अरे तिवारी की बेटी की शादी बहुत बड़े बिजनेसमैन भल्ला के बेटे से फिक्स हुई है ये तो मैंने भी सुना था, तू तो आमिर लोगो के साथ उठने बैठने लगा रे ..”

मां ने मेरी खिचाई की

“अरे नहीं मां वो बस मेरे दोस्त है , और साथ hi मुझे मेरी ावुकत का पता है ..”

“अरे बेटे तेरी ावुकत क्या है अभी तुझे नहीं पता , तू इन सब का बाप बनेगा एक दिन “

मां ने मेरे कंधे पर हाथ रखा

“अरे वो सब छोड़िये मां जी , ये बताइये की क्या कुछ ऐसा हो सकता है की मेरे दोस्त की भी मदद हो जाए और साथ hi हमारी भी, मतलब आपको तिवारी से खुन्नस है न ..”

मां ने मेरी और बड़े hi ध्यान से देखा

“बीटा दया संकर कोई आम इंसान नहीं है, उससे खेलना किसी आग से खेलने जैसा है, थोड़ी भी चूक हुई तो जल जायेगा …”

“लेकिन मैं सच में उसकी मदद करना चाहता हु “

मां के होठो में मुस्कान आ गयी

“ठीक है तू अपने दोस्त की मदद कर, अगर मेरी कोई जरूरत हो तो बताना, और रही हमारे गैंग से उसकी दुश्मनी की बात तो हमपर छोड़ दे, बस एक चीज यद् रखना की दया संकर को कभी भी इस बात का पता नहीं चलना चाहिए की तू मुझसे रिलेटेड है, अगर उसे ये पता चला न तो तुझे मरने में एक मिनट की देरी नहीं करेगा …”

आखिर क्या था इन दोनों के बिच अभी तक किसी ने मुझे ये बताया नहीं था,

मैंने बस उनकी बातो पर अपना सर हिलाया …….

रत मैं भाभी के पास बैठा हुआ कुछ सोच रहा था ,

“क्या हुआ सोनू कही खोया खोया लग रहा है “

मेरा ध्यान भाभी के ऊपर गया, वो एक झीनी सी साड़ी पहने हुए थी, ब्लाउज से उनका यौवन बहार झांक रहा था, ऐसे तो मेरे दिल में कभी भी उनके लिए कोई बुरा ख्याल नहीं आया था लेकिन नजरो का क्या करे वो तो पीछे चली hi जाती है न…….

मुझे उनके गले के पास एक हलके से खरोच के निशान दिखाई दिए ..

“भाभी ये क्या है “

मैंने उस निशान को ध्यान से देखा ऐसा लगा जैसे किसी के नाख़ून से लगे है ..

मेरी बात सुनकर भाभी के चेहरे का रंग जैसे उड़ गया था

“अरे कुछ नहीं बीटा बस ..”

मेरी भावे तन गई थी , मेरी भाभी मुझसे कभी झूठ नहीं बोलती थी ये उनका स्वभाव नहीं था …

“आप मुझसे अगर झूठ बोलने की कोशिस कर रही हो तो मत बोलना, नहीं बोल पाओगी…”

उनके होठो में एक मुस्कान सी आ गयी

“असल में मेरी लड़ाई हो गई थी “

“व्हाट किस्से ..??”

“वो यंहा काम करने वाली एक ायरत से “

“आखिर कैसे “ भाभी का स्वभाव बहुत hi शांत किस्म का था वो किसी से लड़ी होगी तो ये कोई न कोई बड़ी बात जरूर रही होगी …

“अरे कुछ नहीं बस कुछ बाटे हो गई थी, मैंने भी अच्छे से मजा चखा दिया उसे … वो सब छोड़ और तू बता की तू क्यों मुँह लटकाये बैठा है ..??”

मैंने भाभी को सभी बाटे बताई, तिवारी की बेटी का नाम सुनकर तो उनका भी चेहरा थोड़ा तन गया था ..

“तुझे तो उसकी मदद जरूर करनी चाहिए लेकिन ..”

“लेकिन क्या भाभी “

“वो लोग बड़े लोग है बीटा पैसे वाले लोग है , उनके पास न सिर्फ पैसा है बल्कि पावर भी है , और हमारी हालत तो तू जनता hi है , अगर कुछ हुआ तो उस अज्जू और सस का कुछ भी नहीं जायेगा, लेकिन तेरा ……तेरी तो जिंदगी को भी खतरा हो सकता है “

भाभी की बात ऐसे तो बिलकुल hi सही थी

“लेकिन भाभी अगर दोस्ती निभाने में अगर जान की परवाह की होती तो हरिया और सोहन ने दोस्ती नहीं निभाई होती, वो दोनों भी अपने जान की परवाह करते हुए हमें ऐसे hi छोड़ देते ..”

हरिया और सोहन मेरे गांव वाले दोस्त थे जिन्होंने हमें गांव से भागने में मदद की थी ..

मेरी बात सुनकर भाभी थोड़ी गंभीर हो गई थी

“तू सही कह रहा है सोनू लेकिन वो दोनों hi तेरे बचपन के दोस्त थे, हमारे परिवार की स्तिथि भी सामान थी, लेकिन ये लोग हमसे इतने अलग भी है और साथ hi साथ तू अभी अभी तो इनसे मिला है अभी से इतना भरोषा करना क्या ठीक होगा ..”

मेरे होठो में के मुस्कान आ गई

“भाभी हम इस शहर में दुसरो पर भरोषा करके hi तो रह रहे है, देखो न कलवा भाई पर भरोषा किया और अब सम्पत मां पर, अनजान लोगो ने hi तो हमारी मदद की है यंहा पर “

मेरी बात सुनकर वो मुस्कुरा उठी थी

“सही कहा सोनू, कौन कब मदद करता है पता hi नहीं चलता, एक वो थे जिसपर इतना भरोषा था की माँ की बात अनसुनी करके घर छोड़ कर चली आयी, और उस शख्स ने hi दिल तोड़ दिया और एक तू है जिसने मुझे इतना प्यार दिया “

फिर से भाभी की आंखे भर आयी थी, भाभी की यही बात मुझे सबसे जयदा नापसंद थी, वो बात बात में इमोशनल हो जाती थी..

मैंने उनके गले में अपनी बांहे दाल दी और उनके नाजुक और फुले हुए गलो में एक चुम्मन दे दिया ..

“फिर से रोना नहीं, जब देखो शुरू हो जाती हो “

उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरे कंधे पर हलकी सी चपत लगा दी

“क्या करू बीटा जो धोखा उस आदमी ने मेरे साथ किया और जो नाइंसाफी उनसे तेरे साथ किया है उसे भूल भी तो नहीं सकती न ..”

मैंने उनके गलो को प्यार से सहलाया

“भाभी वो तो खून के आंसू रोयेगा उसकी चिंता आप क्यों कर रही हो, आप जैसी देवी को छोड़कर उसने उस रंडी को अपने घर में रखा है न देखना वही उसे लात मार्कर घर से बहार निकलेगी, और जिस दिन मैं कुछ बन जाओ तो गांव जाकर उसे दुनिया के सामने जलील करूँगा, और रही हक़ की बात तो है सेल के गले से नहीं छिना तो मेरा नाम भी शिवा नहीं है “

मेरी आंखे गुस्से से लाल हो गई थी, मेरे मुँह से शिवा निकला था पता नहीं क्यों लेकिन मैं सच में वो बनना चाहता था जो मुझे सम्पत बनाना चाहता था …

भाभी ने बड़े hi प्यार से मेरे गलो पर अपना हाथ फेरा ..

“तू तो मेरा प्यारा सोनू है, मेरा बीटा है मैं नहीं चाहती की तू शिवा बने “

भाभी के प्यार भरे स्पर्श से मेरा गुस्सा थोड़ा शांत हो गया था

“आपके लिए तो मैं हमेशा hi सोनू रहूँगा भाभी लेकिन बुरे लोगो की दुनिया में मैं शिवा बनकर नाम कमाऊंगा और समाज में अंकित बनकर ..”

उन्होंने मेरे गलो में एक किश दिया

“तू जो भी करे मैं तेरे साथ हु सोनू”

उनका ये ममता से भरा हुआ स्पर्श मेरे दिल को बिलकुल hi शांत कर चूका था

“भाभी मेरे लिए एक काम करना “

“जो बोल “

“कल सुबह क्या आप मेरे और मेरे दोस्तों के लिए आलू के पराठा बना सकती हो, वो मुझे रोज hi कैंटीन में ट्रीट देते है मुझे अच्छा नहीं लगता कल मैं उन्हें कुछ खिलाना चाहता हु “

भाभी ने मुस्कुराते हुए हां में सर हिला दिया

“और भाभी आप कुछ सोचो न की अज्जू को उस सस के चंगुल से कैसे निकला जाए .”

वो थोड़ी सी हंसी

“बीटा जैसा तूने बताया सस कोई बुरी लड़की नहीं है, बस बेचारी है, वो भी नहीं चाहती की उसकी शादी अज्जू से हो जाए”

मैंने अपनी भाव चढ़ा ली थी

“वो बुरी लड़की नहीं है ??? भाभी तो गरीब लोगो से नफरत करती है “

भाभी के चेहरे में मुस्कान थी

“क्योकि अभी तक उसे तेरे जैसा अच्छा दोस्त नहीं मिला, उसे कल पराठा खिला और उससे दोस्ती कर ले, उसके बिना कुछ नहीं हो पायेगा, अगर वो तुम्हारे टीम में होगी तो मामला आसानी से निपट जायेगा … ऐसे भी कोई जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है अभी, तुम लोगो के पास पुरे 3 साल है कॉलेज पूरा हुए बिना तो तिवारी उनकी शादी नहीं करवाएगा “

मैंने सहमति में सर हिलाया

“है ये भी सही है “

“चल अब सो जा, सुबह जल्दी उठाना भी तो पड़ता है न ..”

“मैं आपके साथ सोऊंगा..”

मैं उनके बांहो में झूल गया था, जिसके कारण वो बिस्टेर में गिर गई , वो भी हँसाने लगी ..

“इतना बड़ा हो गया है लेकिन बचपना नहीं छोड़ता..”

“मैं तो बच्चा hi हु आपका “

मैंने पुरे ताकत से उनके गलो को अपने होठो में भर लिया था ,उन्होंने आंखे बंद कर ली और फिर मेरे गलो में एक प्यारा सा चुम्मन देकर मुझे अपने साइन से लगा लिया, उनके vaksho(boobs) की कोमलता को मैं अपने गलो में महसूस कर रहा था, मैंने उस गहराई में अपने सर को हलके से चलाया, पर्वतो के सामान उठे हुए वक्षो में मेरे बाल घिस रहे थे, उन्होंने भी मुझे अपने साइन में दबा लिया था, ये एक ऐसा अहसास था जिसे पाकर मैं अपने को दुनिया का सबसे खुशनशीब इंसान समझने लगता था, भाभी प्रेम से भरी हुई मेरे बालो पर अपने हाथ फिर रही थी, और मैं उनके urojo(boobs) को अपना तकिया बना नींद की आगोश में जाने लगा था…

उन प्रेम से उमड़ती हुई छतियो में खुद को किसी बच्चे के जैसे छिपाये हुए मुझे कब नींद ने जकड लिया मुझे पता hi नहीं चला ………

 
अपडेट 14


“वाह यार वाह, इतना शवद तो माँ के हाथ के खाने में hi आता सकता है “

अक्की ने अभी पराठा का पहला निवाला hi अंदर किया था, भाभी ने सभी के लिए पराठे बनाये थे और हम सभी कैंटीन में बैठे हुए उसे खा रहे थे ..

लेकिन अक्की की बात सुनकर जैसे अज्जू का चेहरा hi उतर गया जो की मैं समझ प् रहा था..

“ये तुम दोनों को क्या हुआ “

“यार माँ के हाथो का खाना क्या होता है मुझे नहीं पता, मेरी माँ तो बचपन में hi चल बसी थी अभी सौतेली माँ है जो दिन भर शराब और पार्टी में बिजी रहती है, उसने बस पैसे के लिए मेरे बाप को फंसा लिया साली रैंड ..और मेरा बाप भी चुतियो जैसे उसकी साडी बात मंटा है “

अज्जू ने चेहरा लटकाये हुए hi कहा, उसकी बात सुनकर सभी का चेहरा दुःख से भर गया था, अक्की ने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा,

“भाई क्या मेरी माँ तेरी माँ नहीं है “

अक्की ने उसके कंधे को दबाते हुए कहा, वो भी एक गहरी साँस छोड़कर मुस्कुरा उठा

“फ़िक्र मत कर तेरी उस सौतेली माँ का भी इलाज कर देंगे “

मैंने बेफिक्री से कहा था जिसे सुनकर सभी हंस पड़े

“सेल तू पूरी दुनिया का इलाज करेगा सस का तिवारी का और अब उस रैंड का, तू आदमी है या डॉ. “

सभी हसते हुए मुझे देख रहे थे

“भाई मेरे दोस्त को जो भी दुःख देगा हम उसका इलाज कर देंगे “

मेरी बात सुनकर अज्जू बड़े hi प्यार से मेरी और देखा, तभी सस कैंटीन में आते हुए दिखी, उसने एक बार हमारी और देखा

“कैसे हो भिखारियों”

उसकी बात सुनकर मोनिका का नाक hi लाल हो गया था

“वो सब छोड़ और ये खा के देख”

मैंने पराठे की और इशारा किया जिसे देखकर सभी की आंखे बड़ी हो गई

“मैं ऐसे फालतू चीज नहीं कहती”

उसने अपना नाक सिकोड़ा, मेरी बात सुनकर तो वो भी थोड़ी चौक गई थी

“मिलेगा तो खाओगी न मैडम सस उर्फ़ स्मिता तिवारी जी “

वो बुरी तरह से चौक गई थी साथ hi बाकि के लोग भी

“आलू का पराठा, मिडिल क्लास लोगो का खाना सेल ावुकत दिखा दी न तूने अपनी “

उसके आवाज में hi घृणा के भाव थे

“सस” अज्जू कुछ बोलता उससे पहले hi मैंने इशारे से उसे चुप करवा दिए

“मेरी भाभी ने एक पराठा तुम्हारे लिए भी बनाया है, तुम इसे किसी रेस्टोरेंट में भी खा सकती हो या अपने घर के कुक से भी बनवा सकती हो लेकिन …. लेकिन जो प्यार मेरी भाभी के हाथो में है वो तुम्हे कही नहीं मिलेगा, खाकर देखो शवद खाने का नहीं उसमे डेल हुए प्यार का भी होता है “

मेरी बात सुनकर मेरे दोस्त मुस्कुरा उठे वही सस की आंखे बड़ी हो गई थी शायद मैं उसके जीवन में वो पहला इंसान था जिसने उससे इस तरह से बात की थी, उसकी आंखे बता रही थी की मैंने कुछ ऐसे जगह को टच कर दिया है जो उसकी दुखती राग थी…

वो बिना कुछ बोले hi वंहा से चली गई थी, उसके साथ आये उसके ग्रुप के बाकि लोग उसे देखते hi रह गए वो तेजी से बहार निकली..

मेरे दोस्त भी मेरा चेहरा देखते रह गए थे..

“ये सब क्या था बे “

अज्जू ने अजीब सी आवाज में मुझसे कहा

“भाई मेरी भाभी ने कहा था की उससे दोस्ती कर लो वो बेचारी भी प्रेम की भूखी है “

“वो प्रेम की भूखी नहीं खून की प्यासी है ..”

मोनिका ने गुस्से से कहा

“दोस्तों मुझे गलत मत समझना लेकिन मुझे लगता है की वो बेचारी है, और उसे हमारे जैसे दोस्तों की जरुरत है, उसके दोस्तों को देखो किसी को उसकी नहीं पड़ी है, सभी उसके पैसे और स्टेटस के लिए उसके दोस्त बने हुए है, और दिल के किसी कोने में वो भी ये बात जानती है, शायद इसीलिए वो अक्की और नेहा से इतना जलती है क्योकि उसे पता है की उसके पास इन जैसे दोस्त नहीं है, एक बार मेरे लिए उसके सामने दोस्ती का हाथ बढ़ा लो “

मेरी बात सुनकर सभी दांग थे, शायद किसी ने सस के उस पक्ष को नहीं देखा था जिसे मैंने आज देख लिया था, अज्जू और मोनिका ने हां में सर हिलाया और मैं एक पराठा उठा कर उसके पीछे भगा..

कॉलेज के गार्डन में एक कोने में बैठी हुई सस मुझे दिखी, उसके आँखों में आंसू थे, मैं उसके बाजु में जाकर बैठ गया और अपने तीफेन को उसके सामने कर दिया ..

“तुम इसे यंहा खा सकती हो, यंहा कोई तुम्हे जज नहीं करेगा क्योकि कोई तुम्हे देख नहीं रहा है “

उसने आश्चर्य से मुझे देखा

“तुम खुद को समझते क्या हो “

“खुद का तो नहीं पता लेकिन मैं तुम्हे जरूर समझता हु, तुम बहार से जैसी भी दिखो लेकिन अंदर से तुम एक अच्छी लड़की हो, जिसके पास अच्छे दोस्त नहीं है “

“मुझे तुम जैसे फटीचर दोस्त नहीं चाहिए, मेरा कुछ स्टैण्डर्ड है ..”

“जिंदगी अपने हिसाब से जिनि चाहिए, न की किसी दूसरे को दिखने के लिए, चलो अब खाओ ..”

सस ने एक बार मुझे घुरा और फिर पराठा का एक टुकड़ा उठा कर अपने मुँह में दाल लिया

“हम्म्म्म्म “

उसके चेहरे में एक संतुष्टि का भाव आ गया था, उसने झट से दूसरा टुकड़ा भी उठा लिया ..

“टेस्टी है न ??”

“हम्म तुमने कहा था की तुम्हारी भाभी ने मेरे लिए भी एक पराठा बनाया था, क्या सच में ??”

“है बिलकुल जब मैंने उन्हें तुम्हारे और अज्जू के रिश्ते के बारे में बताया तो उन्होंने hi कहा था की तुम्हे पराठा खिलौ और तुमसे दोस्ती कर लू ..”

उसने फिर से मुझे आश्चर्यचकित होकर देखा

“उन्हें कैसे पता की मैं क्या चाहती हु ??“

“मुझे नहीं पता लेकिन उन्होंने hi कहा था की तुम कोई बुरी लड़की नहीं हो, बस तुम्हे प्यार नहीं मिला “

अब सस ने मेरे हाथो से वो टिफिन hi अपने हाथो में ले लिया था, वो पराठे को ऐसे खा रही थी जैसे आज पहली बार ऐसा खाना खाया हो, मैं उसे देखकर बस मुस्कुरा रहा था, आखिर में उसने खली टिफिन पकड़ा दिया..

“तो फ्रेंड्स “

मैंने हाथ बढ़ाया, वो अपने पार्स से पानी निकाल कर पि रही थी

“तुम अब भी मेरे लिए भिखारी hi हो “

उसने अपना नाक चढ़ाकर बोलै

“अरे भिखारी उसे बोलते है जो भीख मांगे, मैंने तुमसे क्या मांग लिया “

वो हंस पड़ी थी

“तू इतने जिद्दी कैसे हो, मेरी बात सुनकर तो किसी को भी गुस्सा आ जाए “

“क्योकि मुझे अब पता चल चूका है की तुम बुरी लड़की नहीं हो, है कल मुझे तुम्हारी बात सुनकर गुस्सा आया था “

“फ्रेंडशिप की बाद में सोचेंगे लेकिन अगली बार अपनी भाभी के हाथो से बना हुआ कुछ भी लाना तो मुझे जरूर बता देना “

वो मुस्कुराते हुए कड़ी हुई और बड़ी hi ऐटिटूड के साथ वंहा से चली गई, उसे देखकर मेरे भी होठो में के मुस्कान आ गई, भले hi अपने अंदर कितना hi ऐटिटूड भर लिया हो लेकिन थी वो एक टीनएज की लड़की hi जिसके अंदर संवेदनाये भरी हुई थी बस उसे किसी ने आजतक शायद कुरेदा नहीं था …

 
अपडेट 15


“ तो हो गयी दोस्ती “

नेहा ने अजीब से स्वर में कहा, मैं उसके hi बाजु में बैठा था वही दूसरे टेबल में अज्जू और मोनिका और अक्की बैठे थे,

लास्ट के वो टेबल जंहा हमारी मुलाकात हुई थी वो हमारी परमानेंट जगह बन गई थी ..

“हो जायेगी , ऐसे तुम गुस्सा क्यों हो ??”

“मुझे वो लड़की बिलकुल भी पसंद नहीं है “

“यार वो भी अच्छी है बस खुद की अच्छी को पहचान नहीं प् रही है “

“ओह्ह और तुम्हे बड़ा पहचान है उसकी ाच्चियो का “

मैंने एक बार नेहा को देखा उसके चेहरे में अलग hi भाव थे जो की सामन्यतः नहीं होते थे

“तुम क्यों जल रही हो “

मैंने उसके भाव को पहचानते हुए खा, और वो हड़बड़ा गई जिससे मुझे कन्फर्म हो गया था

“मैं क्यों जलूँगी उससे “

शायद उसे भी नहीं पता था की वो सस से क्यों जल रही थी लेकिन शायद मुझे थोड़ा अहसास हो गया था, और मेरे होठो में एक मुस्कुराहट आ गई थी …..

शायद जीवन में पहली बार किसी ने मुझे ऐसे देखा था, वो दोस्ती वाली जलन तो नहीं थी कुछ और hi था.. कुछ और जिसे लोग सामन्यतः प्यार कहा करते है …

नेहा को भी शायद अभी इस बात का पता नहीं था लेकिन उसकी आंखे चीख चीख कर कह रही थी की दाल में कुछ तो कला है बॉस …

“अरे जानते हो आज बॉटनी वाले सर की जगह कोई दूसरी फैकल्टी आ रहा है “

अक्की ने हमारा ध्यान भांग किया , वो मेरे बाजु में hi था दूसरे टेबल में

“यार वो तो अच्छे टीचर थे क्या हुआ उन्हें ??”

“पता नहीं शायद ..”

वो कुछ बोल hi पता उससे पहले एक सौंधी सी खुशबू हमारे नाक में आयी, अक्की की आंखे रूम के गेट में जा चिपकी थी, पिंक कलर की साड़ी में एक अप्सरा सी महिला के कदम अंदर आ रहे थे, अक्की का मुँह खुला का खुला hi रह गया था, मेरे साथ साथ hi नेहा भी उसे देख रही थी ..

“ये अक्की को क्या हो गया “

वो मेरे कानो में फुसफुसाई… मेरी नज़ारे भी गेट में गई, उस हसीं से मुखड़े वाली ायरत को देखकर पुरे क्लास के लड़को का रिएक्शन लगभग एक सा hi था ..

“गुड आफ्टरनून बच्चो ी ऍम स्नेहा , मैं आपलोगो की नयी बॉटनी टीचर हु “

जैसे सभी होश में आये और खड़े हो गए थे लेकिन अक्की अभी भी बैठा हुआ था, मनो किसी और hi दुनिया की शेर कर रहा हो..

अज्जू जो की उसके बाजु में बैठा था उसने उसे हाथो से हिलाया तब जाकर वो होश में आ पाया था ..

अक्की की हालत देखकर हम सभी के होठो में मुस्कान आ गई थी , हम सभी की जवानी अभी नयी नयी hi आयी थी , और जवानी में अगर प्यार नहीं हुआ तो क्या हुआ, किसी को अपने दोस्त से तो किसी को पड़ोस वाली से , और किसी को अपनी टीचर से ..

ये उम्र का दौर hi ऐसा होता है की प्यार आसानी से हो जाता है.. दिल में प्रेम के फूल खिल जाते है और उस bayar(hawa) में लोग बाह hi जाते है, यौवन के नए नए थपेड़ो में युवाओ का बहकना भी लाजमी hi होता है …

अक्की भी प्रेम के इस दरिया में डूबने वाला था , उसका चेहरा बता रहा था की इस मासूम दिल के इंसान के अंदर कुछ तो बदलाव होने लगे है ..

स्नेहा मैडम ने आज इंट्रोडक्शन क्लास ली सभी उठाकर अपना नाम बोलने लगे बरी अक्की की भी आयी

“मेरा नाम ..अक्की उफ़ मतलब आकाश है..”

उसके चारे में आये भाव को देखकर मैडम थोड़ी हंस पड़ी थी जिसे देखकर अक्की मनो किसी सपने में खो गया था , अज्जू के हिलने पर वो फिर से सपने से बहार आया..

आज का दिन भी बड़ा hi मजेदार था, आज मैंने अपने दो दोस्तों के आँखों में प्रेम की नयी नयी किरण देखि थी, पहली नेहा के आँखों में और अब अक्की की आँखों में ..

“क्या बात है आज बड़ा hi खुस लग रहा है “

भाभी अभी अभी कमरे में आयी थी और मुझे देखते hi समझ गई की कोई तो बात थी जिसने आज मुझे खुस किये हुए था ..

मैंने उन्हें खींचकर बिस्टेर में बैठा दिया था और उनके सामने बैठकर मैंने उन्हें आज की पूरी कहानी बताई, पहले सस और फिर नेहा और फिर अक्की के बारे में …

वो मुस्कुराते हुए सब कुछ सुनती रही

“वह तो नेहा और अक्की को प्यार होने लगा है, और तुझे लगता है की नेहा तुझसे प्यार करने लगी है ??”

‘भाभी नेहा अच्छी लड़की है लेकिन मैंने अभी तक उसके लिए कुछ भी नहीं सोचा है, लेकिन उसकी आँखों में कोई तो ऐसी बात थी जिससे मुझे ऐसा लगा और खासकर जब मैं सस के पीछे चला गया था उस बात को लेकर उसकी आँखों में मैंने जलन देखि ..”

“हो सकता है की वो सच में तुमसे प्यार करने लगी हो , मेरा बीटा है hi इतना अच्छा की कोई भी उससे प्यार करने लगे “

उन्होंने मुझे अपनी और खिंचा और मेरे माथे पर एक प्रेम भरा किश दे दिया ..

“लेकिन मैं किसी को अपनी गफ नहीं बना सकता न “

मेरी बात सुनकर वो मुझे अजीब नजरो से देखने लगी

“क्यों ??”

“क्योकि मेरी गफ तो मेरी भाभी माँ है “

मैंने मासूमियत से कहा और वो हँसाने लगी, उन्होंने फिर से मेरे गलो को अपने हाथो में भर लिया और इस बार मेरे गाल पर एक गिला चुम्मन दे दिया, उनके लार मेरे गलो को गिला कर गए थे जिसके कारण मैंने उन्हें झूठे गुस्से से देखा, और वो मुस्कुराते हुए अपने लार को मेरे गलो से पोछने लगी

“प्यार तो मैं भी तुझसे बहुत जयदा करती हु लेकिन ये गफ होना प्यार से थोड़ा अलग है बीटा “

“क्या अलग है “

मैं फिर मासूमियत से बोलै

“अरे.. इतना बड़ा हो गया है क्या इतना भी नहीं समझता “

‘नहीं “

“बदमाश सब समझता है तू “

“सच में भाभी, आप समझाओ न “

उन्होंने मेरी आँखों में सीधा hi देखा, शायद मेरी आँखों में वो शरारत नाच रही थी जो मेरे दिल में थी ….

“बहुत बदमाश हो गया है तू “

उन्होंने मेरे गाल में एक चपत लगा दी

“सच में भाभी समझाओ न”

वो मुझे गंभीर हो कर देखने लगी थी

“सोनू ये क्यों कर रहा है “

“इसलिए क्योकि मैं सच में आपसे बेहद प्यार करता हु और अगर मेरी कोई गफ होगी तो वो सिर्फ आप hi होगी “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ी गंभीर हो गयी थी

“ऐसा नहीं बोलते बीटा, मैं तो तेरी भाभी माँ हु न “

मैंने अपना सर उनके गॉड में रख दिया, वो भी मेरे बालो को प्रेम से सहलाने लगी थी

“लेकिन भाभी क्यों नहीं हो सकता , मैं आपसे प्यार करना चाहता हु , बहुत जयदा प्यार “

“बीटा प्यार और गफ होने में फर्क है न … तू समझता क्यों नहीं “

उनकी आवाज में एक शिकायत थी, मैं उनकी बातो को समझ कर भी नहीं समझ पा रहा था, मेरे दिल के किसी कोने में उन्हें पाने की तीव्र इक्छा थी, लेकिन उन्हें किस प्रकार पाया जायेगा ये मुझे भी नहीं पता था, मैं अभी उनके गॉड में सोया हुआ यही सोच रहा था की आखिर मुझे हुआ क्या है, मैं भाभी से ऐसे क्यों बात कर रहा हु , मैं उन्हें पाना चाहता हु लेकिन कैसे …

मैंने उनके जांघो पर अपना सर रखे हुए था मैंने उन्हें किश कर लिया , वो अब भी मेरे बालो पर अपने हाथो को चला रही थी ..

“तू अभी अभी जवान हो रहा है सोनू , तेरे अंदर बहुत सरे बदलाव हो रहे है लेकिन तेरा एक गलत फैसला पूरी जिंदगी का दुःख बन सकता है , अपने इमोशंस को सम्हाल बीटा, तेरी उम्र है अभी प्यार में पड़ने की और नेहा से अच्छी लड़की कौन हो सकती है …”

“आप…”

मेरी बात सुनकर उन्होंने फिर से मेरे गलो में एक हलकी चपत लगा दी

मैं उनके गॉड के स्वर्ग में लेता हुआ, अपनी आंखे बंद किये बस अपने अंदर उठाते हुए भावनाओ को समझने की कोशिस कर रहा था, और वो मेरे बालो में हाथ चलती हुई न जाने किस सोच में डूबी हुई थी, दोनों hi कुछ नहीं बोल रहे थे बस एक अहसास था हमारे बिच , उन्हें हाथो से मेरे ऊपर प्रेम की बारिश हो रही थी और इस प्रेम को मैं किसी भी कारन से खोना नहीं चाहता था ..

 
अपडेट 16


अभी हम सभी कैंटीन में भी बैठे थे, अभी तक किसी ने अक्की से कुछ पूछा नहीं था लेकिन उसकी हालत देख कर सभी बस मंद मंद मुस्कुरा जरूर रहे थे ..

“क्यों हीरो अभी भी मैडम का चेहरा नजरो में घूम रहा है क्या ??”

नेहा ने अक्की को छेड़ दिया ,मनो उसे अभी होश आया हो वो बुरी तरह से झेप गया था ..

“क्या बोल रही है तू ??”

मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा

“अरे यार हम तेरे दोस्त है अपनी फिल्लिंग्स हमसे छिपायेगा तो बताएगा किसको..”

मैंने बड़े hi प्यार भरे लहजे में उससे कहा

“नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं है “

“देख यार अक्की तेरा और मैडम का तो कुछ हो नहीं सकता लेकिन अगर अपने दिल की बात हमसे भी छिपा कर रखेगा तो तुझे खुद hi प्रॉब्लम होगी, और मुझे तो हमेशा से लगता था की तू नेहा को पसंद करता है लेकिन तू तो मैडम को देखते hi लट्टू हो गया …”

मोनिका ने उसकी खिचाई कर दी, जंहा हम सभी हंस पड़े वही नेहा और अक्की बुरी तरह से चौक गए..

“ये तू पागल है क्या नेहा मेरी बेस्ट फ्रेंड है तब से जब से हमने स्कूल जाना शुरू भी नहीं किया था ..”

“है तो अक्सर यही होता है न की बेस्ट फ्रेंड्स से प्यार हो जाता है, जैसे मुझे अज्जू इस है , ऐसे भी तुम दोनों एक दूसरे को कभी छोड़ते नहीं हो “

इस बात चौकाने की बरी मेरी थी

“व्हाट ?? तुम दोनों..”

मैंने चूकते हुए कहा

“क्यों तुझे अभी तक पता नहीं चला “

मोनिका ने मुझे आंख दिखाया

“यार लेकिन अज्जू तो सस के साथ ..”

“अरे भाई क्या करे वो तो घर वालो का फैसला है न, मेरा नहीं , ऐसे सस को भी ये बात पता है की मैं मोनिका से प्यार करता हु , इसलिए तो वो भी इस रिश्ते को लेकर कम्फर्टेबले नहीं है “

“तो ये बात तुम लोगो ने अपने घर में क्यों नहीं बताई “

मेरी बात सुनकर अज्जू जोरो से हंस पड़ा था , लेकिन उसकी हंसी में एक दर्द मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था

“मेरे और सस के परिवार वालो के लिए प्यार के कोई मायने hi नहीं है दोस्त, हम दोनों ने hi ये बात अपने अपने परिवार के लोगो को बताई लेकिन … उनका कहना है की जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक किसी के साथ भी रहो उन्हें कोई मतलब नहीं है , और शादी के बाद भी किसी के साथ भी रहो उसेस भी उन्हें कोई मतलब नहीं है लेकिन हमारी शादी से उन्हें जो प्रॉफिट होने वाला है उन्हें बस वही सब दीखता है , उनके ख्याल से जवानी में ये सब होता है ..साला मैंने जब अपने बाप को ये बताया तो वो तो अपने गफ और फ़क बॉडीज की लिस्ट गिनने लगा था बोलता है की उसके आज भी कई लड़कियों के साथ सम्बन्ध है और माँ के भी और मर्दो के साथ सम्बन्ध थे दोनों को hi एक दूसरे के बारे में पता है लेकिन फिर भी शादी को मेन्टेन किये हुए थे न ,अब माँ तो रही नहीं लेकिन बाप वैसे का वैसा है :नू: अब ऐसे लोगो के सामने प्यार की मैं क्या बात करू “

उसकी बात सुनकर मेरा मुँह तो खुला का खुला hi रह गया था, ये कैसे लोग है जिन्हे प्यार से कोई फर्क नहीं पड़ता न hi अपने बच्चो की ख़ुशी से उनके लिए बस पैसा hi सब कुछ है, यंहा बात सिर्फ पैसे की hi नहीं थी पैसा और पावर ये दोनों चीजों का मोह इंसान को अँधा बना देता है लेकिन इतना अँधा बना देता है ये तो मैंने भी नहीं सोचा था …

ये हंसी ख़ुशी का माहौल अचानक से hi गमगीन हो गया था..

“तू फ़िक्र मर कर मेरे भाई तेरी शादी होगी तो बस मोनिका से hi होगी “

मैंने कॉन्फिडेंस से कहा , जिसे देखकर अज्जू हंस पड़ा

“वह रे तेरा कॉन्फिडेंस साला हम तो उम्मीद hi छोड़ चुके है और तुझे अभी भी लगता है की ये सब हो सकता है, या तुझे ये लगता है की हमने कोई कोशिस नहीं की है, सब कर लिया लेकिन हाथ कुछ भी नहीं लगा, हम तो भाग भी नहीं सकते वर्ण दोनों के बाप मिलकर हमें धुंध कर मार देंगे सेल इतने पावरफुल है ..”

अज्जू की आवाज में उदासी साफ साफ दिख रही थी जो मुझे बेहद hi बुरा लग रहा था

“तुम लोगो ने अभी तक जो भी किया लेकिन अभी मैं नहीं आया था न दोस्तों, एक गांव वाले का दिमाग और हिम्मत तुमने अभी देखा नहीं है तू फ़िक्र मत कर मैं कोई न कोई जुगाड़ जरूर लगाऊंगा ,ऐसे भी मेरी तो पूरी जिंदगी hi जुगाड़ के सहारे में चल रही है , तेरे लिए भी लगा लूंगा और अपने अक्की के लिए भी “

सभी का ध्यान अचानक से फिर से अक्की की और चला गया, वो मुझे अजीब निगाहो से देख रहा था

“भाई क्या तू सच में मेरी सेटिंग मैडम से करवा देगा “

अक्की की मासूमियत उसके बातो और चेहरे से टपक रही थी ,

“बिलकुल कोशिस करने में क्या जाता है “

“तो क्या किया जाये ..?”

“सोचना पड़ेगा बस तू मैडम को देखकर घबराना बंद कर “

मेरी बात सुनकर उसने है में सर हिलाया वही अज्जू मुझे अजीब सी निगाहो से देख रहा था

“ऐसे क्या देख रहा है ??”

“यार तू बड़ा hi अजीब सा इंसान है तेरे साथ ऐसा लगता है की सब कुछ हो सकता है चाहे वो कितना भी इम्पॉसिबल क्यों न लगे, तुझसे एक पॉजिटिव वेव आती है पता नहीं हम जो चाहते है वो हो सकता है या फिर नहीं लेकिन सच में तूने हमें फिर से हिम्मत दे दी “

आजु ने मेरे हाथ में अपना हाथ रखा और मुस्कुराया

“ अरे तुम लोगो का अगर हो चूका हो तो कोई मेरे बारे में तो सोच लो यार “

अक्की फिर से बोलै, लेकिन इस बार वो कुछ छिपाने के मूड में नहीं लग रहा था

“ये कोई प्यार वयर नहीं है बस अट्रैक्शन है, जंहा सूंदर लड़की देखि नहीं वही बस तुम लोगो को प्यार हो जाता है “

नेहा ने नाक सिकोड़ा

“नहीं यार नेहा, तू मुझे बचपन से जानती है न, कभी तुझे लगा की मैं किसी लड़की पर लट्टू हो गया हु, या किसी के पीछे पड़ा नहीं न .. ये अलग है यार पता नहीं की ये प्यार है या फिर महज एक अट्रैक्शन लेकिन जब से उन्हें देखा हु साला बस उनका hi चेहरा मेरे दिमाग में छाया हुआ है, बस उनकी hi यद् आ रही है कितनी सूंदर है यार वो …”

अक्की ने एक गहरी साँस ली और वो फिर से किसी ख्वाबो की दुनिया में खो गया था, वही हम एक दूसरे को देखने लगे, असल में मुझे भी अभी तक लगा था की ये महज एक अट्रैक्शन होगा लेकिन अक्की को देखकर लगा की बात थोड़ी सीरियस जरूर है .. अक्की ने बोलना शुरू रखा

“यार उनकी वो बड़ी बड़ी आंखे, घने बाल, मुस्कुराता हुआ चेहरा, नरम गुलाबी होठ …”

“और पतली कमर..”

मोनिका बोली और हमें देखकर हँसाने लगी लेकिन हमारा अक्की तो खोया हुआ था

“है वो भी … क्या पतली कमर , तुम मेरा मजाक उदा रहे हो जाओ यार मैं नहीं बताता तुम लोगो को कुछ ..”

वो नाराजगी में अपना मुँह फुला कर बैठ गया उसे ऐसा करते हुए देखकर एक बार तो सभी हंस पड़े लेकिन फिर जब हमने देखा की वो नाराज है तो फिर उसे मानाने भी लगे, हम सब ने मिलकर फैसला किया की हमसे जो भी बन पड़ेगा वो करेंगे, और हमारा अक्की खुश भी हो गया , वो तो मनो मैडम के साथ एक ख्वाब भी बनाने लगा था …..

अक्की के जस्बातो की हमें क़द्र थी लेकिन हमें ये भी अंदेशा था की हो न हो इससे उसका दिल भी टूट सकता है.. खैर जो भी अभी उसे भी इस अहसास के मजे लेने दो ..

हवेली आने पर मुझे सम्पत मां मिल गए,

“क्यों शिवा तिवारी की लड़की का कुछ हुआ “

“है शायद दोस्ती हो जाए उससे :अप्प्रोवे:“

उनके होठो में एक मुस्कान आ गयी

“बीटा नागिन से दोस्ती नहीं करते, या तो उसका इस्तमाल करते है या फिर उसका सर कुचल देते है वर्ण वो खुद को hi देश लेती है “

उनकी बात सुनकर मैं अवाक रह गया था

“वो अच्छी लड़की है मां जी, और कमीना तो तिवारी है “

मेरी बात सुनकर उन्होंने बस एक गहरी साँस छोड़ी

“बीटा उस कमीने का hi तो खून है न वो लड़की भी, कोई भरोषा नहीं है की काम पीठ में चाकू मार दे “

उनकी आवाज में दर्द था, ऐसा दर्द जो मुझे अहसास दिला रहा था की कही न कही मां ने भी तिवारी से धोखा खाया होगा ..

“क्या बात हुई थी आपकी और दया संकर के बिच “

उन्होंने फिर से गहरी साँस छोड़ी

“जब तू तयारी हो जायेगा तब तुझे बता दूंगा , बस ये समझ ले की उस कमीने ने हमें बहुत बड़ा धोखा दिया था , उसे भी हमने अपना दोस्त मन था लेकिन वो ….. छोड़ ये सब बाटे जब समय आएगा तुझे पता चल जायेगा ..”

उन्होंने मेरे कंधे में हाथ रखा और वंहा से चल दिए , जैसा मुझे पहले लगता था की ये लोग गुंडे टाइप के लोग है और बहुत hi खतरनाक लोग है ऐसा कुछ भी नहीं था, ये तो बड़े hi सामान्य से लोग थे जो प्रेम की भाषा बोलते थे …लेकिन शायद दिल में कुछ गहरे दर्द दबाये हुए थे जो दर्द hi इन्हे गलत काम करने को मजबूर किया था

 
अपडेट 17


मैं अपने कमरे में गया और भाभी को देखकर बुरी तरह से चौक गया

“ये क्या हो गया है आपको “

उनके चेहरे में चोट के निशान थे वही वो बहुत hi थकी हुई लग रही थी

“अरे कुछ नहीं बीटा बस यु hi “

उन्होंने मुझसे सच छिपाने की बहुत कोशिस की थी, मैं जनता था की वो अपने दुखो को अपने अंदर hi दबा लेगी लेकिन मुझतक पहुंचने नहीं देगी , इसलिए मैंने उनका हाथ अपने सर में रख दिया

“आपको मेरी कसम है बताओ की क्या हुआ है “

उनके होठो में मुस्कान आ गयी

“मैं लड़ाई करना सिख रही हु “

“व्हाट ???”

“है यंहा महिलाओ को भी लड़ना सिखाया जाता है तो सोचा की क्यों न मैं भी सिख लू, क्या पता कभी काम आ जाए , अगर मुझे लड़ना आता तो वो इंस्पेक्टर मेरे साथ जबरदस्ती नहीं कर पाटा “

“तो ये तो अच्छी बात है न, मुझसे क्यों छिपा रही थी “

“अरे तू फालतू में दुखी हो जाता है न बात बात पर “

उन्होंने मेरे गलो को अपने हाथो से पकड़ लिया

“अरे इसमें दुखी होने वाली क्या बात है “

“मेरे चोट को देखकर तू कहा मानता “

मैंने अपना सर पकड़ लिया

“अरे भाभी आप मुझे अभी तक नहीं समझ पायी , मुझे इससे बेहद ख़ुशी है की आप भी लड़ना सिख रही हो , मेरी ट्रेनिंग भी अब पूरी होने वाली है , लेकिन मुझे एक चीज समझ नहीं आ रही है की आखिर मुझे करना क्या होगा, सब तो सीखा दिया इन लोगो ने लेकिन लड़ना किस्से है ये नहीं बताया , जंहा तक तिवारी की बात है तो मां कहते है की उससे दूर hi रह हम देख लेंगे , तो इतनी तयारी किसलिए “

“बीटा लड़ाई हो न हो लेकिन एक सिपाही को लड़ना तो आना hi चाहिए न , कभी भी इसकी तुझे जरुरत पद सकती है इसलिए उन्होंने तुझे ये सब सिखाया है , मैं तो बस इतना चाहती हु की तू अपना कॉलेज ख़त्म करे और इन सबसे दूर हो जाए “

मैंने भी उनके बात में हामी भर दी ..

“तो आज कॉलेज में क्या हुआ “

उन्होंने बात बदली और मेरे होठो में मुस्कुराहट आ गई

मैंने उन्हें अक्की के बारे में बताया की कैसे वो मैडम के सपनो में खोया हुआ रहता है

“और नेहा “ भाभी ने एक शरारती निगाह से मुझे देखा

“उसका क्या ??“

“उसने तुझसे कुछ नहीं कहा क्या “

“नहीं अभी तक तो नहीं और मुझे भी अभी तक उससे कोई प्यार वाली बात नहीं हुई है, वो अच्छी लड़की है, सूंदर भी है लेकिन प्यार …अभी तो नहीं , ऐसी भी मेरी गफ तो आप हो न “

उन्होंने मेरे गाल पर एक चपत लगा दी थी

“फिर से शुरू हो गया तू, मैं तुझसे 4 सालो की बड़ी हु मुझमे ऐसा क्या देख लिया जो मुझे अपनी गफ बनाना चाहता है “

उनकी बात सुनकर मैंने उनके शरीर को घुरा , भरा हुआ जिस्म मादकता की अंगड़ाई ले रहा था, भरे हुए स्तन साड़ी के पल्लू से झांकते हुए ब्लाउज को फाड़ने को तैयार लग रहे थे, गोर गोर जिस्म में फैला हुआ वो हल्का गुलाबी नूर उन्हें केशरी बना रहा था, और पतली कमर के निचे वो चौड़ा कमर एक सुराहीदार मटके जैसा लग रहा था, मेरे जवान जिस्म में जवानी की हलचल सी होने लगी थी, और मेरे कमर के निचे जांघो के बिच अभी तक मुरझाया हुआ मेरा लिंग उत्तेजित होने लगा था, अभी तक मैंने किसी भी स्त्री को इस निगाह से नहीं देखा था की मेरे लिंग को कोई भी हलचल हो, मैं जवानी से hi भाभी के प्रेम में डूबा हुआ था, मेरे गांव के दोस्त भी मेरी hi तरह संस्कारी थे किसी भी लड़की से वो प्रेम करते थे न की हवस की निगाहो से देखते थे, और यही कारण था की जवानी में दुबे हुए इतने दिन होने के बाद भी मुझे अपनी जवानी के इस पहलू का अहसास अभी तक अच्छे से नहीं हो पाया था, जिस्म की भूख ने अभी तक मुझे खुद में नहीं जकड़ा था, लेकिन इंसान भी तो एक जानवर hi होता है लेकिन जानवर अपने भूख को दबाते नहीं है है और ना hi जरुरत से जयदा भोगते है जब जरुरत होती है तब hi उनके जिस्म में ये आग उठती है, लेकिन इंसान का इसपर कण्ट्रोल है जो उसे जानवरो से बेहतर भी बनती है तो कभी कभी जानवरो से गिरा हुआ भी बना देती है …

ऐसा नहीं था की मुझे अपने जिस्म में उठाने वाली इस संवेदना का आभास नहीं था, मैं पहले भी कई दफा इसे महसूस कर चूका था लेकिन भाभी के जिस्म को देखने पर पता नहीं मैं खो सा गया था और इतनी तेजी से ये अहसास मेरे अंदर उतरता चला जा रहा था की मैं खुद के काबू से भी बहार होने लगा था …

लिंग ने अपना आकर बढ़ा दिया था , वो कड़ा हो चूका था और मेरी सांसे तेज हो गई थी, मुझे यद् नहीं की मैं कितनी देर तक भाभी के उन्नत urojo(boobs) को hi घर रहा था..

“सोनू ..”

भाभी की आवाज मेरे कानो में पड़ी, मेरी सांसे तेज थी , भाभी ने मुझे जैसे हलके से चिल्लाया था मनो मुझे किसी सपने से जगाया हो, मैं भी हड़बड़ाता हुआ उनके चेहरे को देखने लगा, उनका चेहरा शर्म से लाल हुआ जा रहा था शायद उन्होंने भी मेरे निगाहो को महसूस कर लिया था , उन्होंने भी पता चल गया था की मैं उनके शरीर के किस हिस्से को घर रहा था ..

इस बात से मेरे अंदर एक शर्मिंदगी का भाव आ गया

“सॉरी भाभी “

मैं अपने hi किये पर बुरी तरह से शर्मिंदा था असल में ये मेरे कण्ट्रोल में नहीं था, जिस्म की भूख जिसका मुझे अभी तक कुछ खास पता नहीं चला था आज अचानक से भड़क गया था, मेरी सांसे तेज हो चुकी थी और आंखे निचे जमीं को देखने लगी थी मैं तो भाभी से नजर भी नहीं मिला प् रहा था , वही मैंने भाभी की भी भरी आवाज को सुना , सांसे उनकी भी तेज थी पता नहीं क्यों शायद गुस्से से या …….

मैंने सर उठाया और उनके चेहरे को देखा

आंखे लाल थी, और पूरा चेहरा गुलाबी हो चूका था, आँखों में आंसू की कुछ बुँदे भी नाचने लगी थी, जख्मो के निशान चेहरे में अभी भी थे लेकिन वो उनकी रंगत को छिपा नहीं प् रहे थे, शर्म साफ साफ दिख रहा था लेकिन शर्म के साथ कुछ और भी उनके चेहरे से टपक रहा था , जैसे hi हमारी नज़ारे मिली उनकी नज़ारे भी नीची हो गई थी क्यों…??

क्या उनके जिस्म में भी वही संवेदनाये उभर गयी थी जो मेरे जिस्म में उभरी थी, शायद है… वो भी तो जवान थी और शायद उनके भी जिस्म में भूख होगी जिसे उन्होंने मेरे प्रेम और अपनी जिम्मेदारियों में कही छिपा लिया था..

हम दोनों hi चुप थे और माहौल में एक अजीब सी शांति छ गई थी, मैं अब उनसे और बात नहीं कर सकता था मैं मुदा और अपने कमरे में चला गया, इतने दिनों के बाद मैं आज अपने बिस्तर में अकेले सोया था, शायद ये मेरी मासूमियत का अंत था, जिस निगाहो ने भाभी को प्रेम किया था उन्हें माँ का स्थान दिया था उसने hi आज उन्हें हवस की भूख की नजर से देखा था , और इसी की वजह से उनमे पानी भी आ चुके थे…

कुछ hi देर हुआ था की मुझे किसी का हाथ अपने कंधे पर महसूस हुआ, मैं पलटा और भाभी को अपने कमरे में मेरे बाजु में बैठा हुआ पाया, उनकी आंखे भरी हुई थी लेकिन होठो में एक मुस्कान थी..

“तू आज भी उतना hi मासूम है रे, अपने को ऐसे दुखी मत कर, तू अब जवान हो चूका है और तुझसे कोई गलती नहीं हुई है, ये तो होता hi है, तेरे मुझे इस तरह देखने से हमारा रिश्ता तो नहीं बदल गया न, तेरे दिल में आज भी मेरे लिए वही प्रेम और सम्मान है इसका साबुत तेरी आँखों में आया हुआ ये आंसू है..”

भाभी की बात सुनकर मैं जैसे टूट hi गया था मैं उनसे लिपट कर रोने लगा था

“मुझे माफ़ कर दो भाभी, पता नहीं ये मुझसे कैसे हो गया, मैंने कभी आपको ऐसी निगाहो से नहीं देखा था मगर आज… पता नहीं मुझे क्या हो गया था, मुझे सजा दे दो भाभी बस मुझे छोड़ कर मत जाना “

उन्होंने मुझे अपने साइन में जोरो से खींच लिया, जिन छतियो को देखकर मैं थोड़ी देर पहले उत्तेजित हो रहा था अभी मेरा सर उसी में धंसा हुआ था लेकिन मैं उस प्रेम को महसूस कर रहा था जो उस उत्तेजना से कही जयदा मूलयवान था..

“बीटा मैंने कहा था न की तुझे अब किसी गफ की जरुरत है, तू अब बच्चा नहीं रह गया तेरे अंदर भी जवानी की वो आग बढ़ने लगी है, ये सभी के साथ होता है बीटा तू अकेला नहीं है “

वो मेरे बालो को सहला रही थी और मैंने उन्हें बहुत hi जोरो से जकड रखा था ..

हम थोड़ी देर तक ऐसे hi रहे फिर जब हम अलग हुए तो मैंने भाभी के होठो में मुस्कुराहट देखि वही आंसुओ से उनका चेहरा गिला हो चूका था, मैंने हाथो से उनका चेहरा पोंछ लिया..

“भाभी आप मुझसे गुस्सा तो नहीं हो न “

“मैं अपने सोनू से कभी गुस्सा हो सकती हु क्या “

“लेकिन आप रोई क्यों और आपका चेहरा ऐसे लाल क्यों हो रहा था “

मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराई लेकिन उनका चेहरा फिर से लाल होने लगा था वो शर्म की लाली थी जिसे मैं अब अच्छे से पहचानने लगा था

“चल अब सो जा “

उन्होंने धीरे से कहा

“मैं कभी अकेले सोता हु क्या “

मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराई और मेरे बाजु में सो गई , मैं उन्हें ऐसे जकड़ा हुआ था जैसे की मैं कभी उनसे अलग नहीं होना चाहता…… उनके vaksho(boobs) पर अपना सर रखे मैं बच्चो की तरह सो रहा था , मेरे लिए तो उनका स्पर्श hi किसी स्वर्ग से काम नहीं था, उनमे प्रेम था असीम प्रेम …..

 
अपडेट 18


आज गार्डन में मुझे सस मिल गई

“अज्जू बता रहा था की तुम हमारी शादी तोड़ने का प्लान कर रहे हो “

पहले की अपेक्षा उसके बातो में मेरे लिए एक दोस्ती का भाव था नफरत नहीं

“है “

“कैसे “

“पता नहीं “

“वह..” उसने सर हिलाया

“क्या हुआ ??”

“बाटे बड़ी बड़ी करने से कोई बड़ा नहीं बन जाता मर. ?”

“मर. अंकित “

मैंने मुस्कुराते हुए कहा

“है मर. अंकित “

वो मुस्कुराई

“यार हमारा काम है कोशिस करना, रिजल्ट तो ऊपर वाले के हाथो में है “

“फलसफा मत झाड़ो कोई प्लान हो तो बताओ “

“क्यों न मैं पहले तुम्हारे पिता जी को समझ लू, मतलब तुम मुझे अपने घर ले जा सकती हो “

उसने मुझे घुरा

“कैसे ..??”

“दोस्त बना कर .. या फिर बर्फ “

उसने मुझे मुस्कुराते हुए देखा, अजीब बात थी की उसके चेहरे में अभी भी कोई नफरत का भाव नहीं था

“अपनी ावुकत में रहो समझे “

ये भी उसने मुस्कुराते हुए hi कहा था, इतना परिवर्तन भाभी के एक पराठे से…? वाह

“और मेरी ावुकत क्या है “

“तुम एक गरीब आदमी हो “

“लेकिन आदमी तो हु न “

“अच्छा ??“

“यार तुम्हे गरीबो से प्रॉब्लम क्या है, क्या इंसान इंसान नहीं होते, और मुझे तो गरीब इंसानो में जयदा इंसानियत दिखाई देती है “

उसने बस एक गहरी साँस ली

“तुम समझ नहीं रहे हो मेरे पिता और भाई तुम्हारी पूरी हिस्ट्री निकाल लेंगे, मैंने उनके दर से कोई दोस्त नहीं बनती पता नहीं कब वो मेरे दोस्तों को hi मार दे “

सस की आँखों में आंसू की कुछ बुँदे आ गई थी, मैंने आगे बढ़कर उन्हें अपने हाथो से पोंछ दिया ..

“मैं अपने दोस्त के लिए मरने के लिए भी तैयार हु “

मेरी बात सुनकर उसने नजरे उठाकर मुझे घूरा

“यकीं नहीं होता ??”

उसने मुझे घूरते हुए खा

“क्या??”

“यही की तुम मुझे अच्छे लगने लगे हो “

उसकी बात सुनकर मैं जोरो से हंस पड़ा वही वो भी हँसाने लगी , ये उसकी मासूमियत से भरी हंसी थी न की किसी को जलील करने के बाद आयी हंसी , और इस हंसी की बात hi कुछ अलग थी , उसका चेहरा खिल गया था किसी बच्चे के जैसे वो स्वक्छंद्ता से खुलकर हंस रही थी ..

“सब भाभी के पराठे का कमल है “

मैंने हसते हुए कहा

“है सही है उसमे जादू था की एक फटीचर मुझे अपना दोस्त लगने लगा है “

मैंने भी उसे मुस्कुराते हुए देखा

लेकिन फिर मेरी निगाह मुझे दूर से देखती हुई नेहा पर पड़ी, मुझे सस के साथ हँसता हुआ देखकर उसका मुँह गुस्से से फूल गया था मैंने उसे वेव दिया :वेव: लेकिन वो मेरी तरफ न आकर दूसरे और चली गई ..

शायद मुझे समझ आ चूका था की क्यों ..

“चलो बाद में मिलता हु प्लान बनाने के लिए “

मैं नेहा के पास जाना चाहता था ..

“अरे रुको न कहा जा रहे हो “

“थोड़ा काम है “

मैंने सस से अलविदा लिया और नेहा की और भगा, वो एक पेड़ के निचे बैठी हुई थी

“ही नेहा तुम मुझे देख कर भी इग्नोर क्यों कर रही हो “

“तुम मेरे पास क्यों चले आये वो कामिनी कुट्टी छिनाल साली के पास hi रहते , साली रैंड “

नेहा जैसी सभ्य सुशिल लड़की के मुँह से ये सब सुनकर मेरा दिमाग hi चक्र गया, मैं मुँह फाडे उसे देख रहा था, उसने ये सब अपना चश्मा ठीक करते हुए कहा था, आँखों में लगे चश्मे से भी उसकी आँखों की लाली साफ साफ दिख रही थी , आज मैंने उसे पहली बार चश्मे में देखा था वो एक मोती सी बुक निकले हुए उसे पढ़ने का बहाना कर रही थी , इतना बोलकर शायद उसे भी अपनी गलती का अहसास हो गया था इसलिए वो चुप चाप अपने बुक की और देखने लगी थी ..

मैं भी चुप चाप वही बैठकर उसे देख रहा था

“ऐसे क्या घर रहे हो जाओ न उसी के पास “

“इतना गुस्सा .. आखिर क्यों ??:?: हमारी सीधी सधी पढ़ने वाली नेहा के मुँह में इतनी गली ?:?: बात क्या है “

“कोई बात नहीं है तुम जाओ न यार मुझे पढ़ना है “

ये शहर के लोग थोड़े अजीब होते है सेल अपने दिल की बात बोलने में भी इतना टाइम लगा देते है, और दिल ने बस नफरत भर कर रखते है ..

मैंने उसकी बुक उसके हाथ से छीनकर बाजु में रख दिया

“अरे ये क्या “ वो अपने बुक को पकड़ने की कोशिस करने लगी लेकिन मैंने उसके हाथ नहीं लगने दिया

“दो इसे इधर “

“बहुत हो गया इतना भी क्या जल रही हो तुम उससे, सिर्फ उससे बात hi तो किया है मैंने “

मेरी बात सुनकर वो जैसे जैम hi गयी, थोड़ी देर तक बस मुझे hi देखती रही

“सेल तेरे उससे बात करने पर मैं क्यों जलूँगी, खुद को समझता क्या है तू “

उसने जोरो से कहा लेकिन मैं उसके गुस्से से दमकते हुए चेहरे को देख रहा था वो और भी प्यारी लग रही थी ..

“तो फिर मुझे देखकर भाग क्यों गई और अब बात भी नहीं कर रही है, ऐसा तो मेरे गांव की ओउरते तब जलती है जब उनका पति किसी दूसरी ायरत से बात कर रहा हो “

उसका चेहरा लाल हो चूका था अब वो गुस्सा था या फिर शर्म था समझ नहीं आ रहा था, लेकिन मुझे लगा जैसे की ये दोनों का मिश्रण था..

“तुम पागल हो गए हो कुछ भी सोच रहे हो चलो मुझे मेरी बुक दो “

“पहले तुम बताओ की तुम्हे सस से कोई प्रॉब्लम है या मुझसे “

“तुम भाड़ में जाओ “

इतना बोलकर वो उठ गई और क्लास की तरफ जाने लगी, मुझे एक चीज तो समझ में आ चुकी थी की बात उतनी भी सिंपल नहीं है जितना की मैं सोच रहा था जरूर कोई बड़ी बात थी ……

मैं उसे जाते हुए देखता रहा थोड़ी देर में मैं भी क्लास पंहुचा तो सभी वही लास्ट बेंच में बैठे हुए थे..

“कहा थे तुम दोनों “

मेरे आते hi अक्की बोल उठा था

“एक चीज बता की इसे सस से क्या प्रॉब्लम है ??”

मैंने धीरे से अक्की से कहा वो एक छोर में बैठा हुआ था वही नेहा दूसरी छोर में, वही हमेशा की तरह अज्जू और मोनिका बिच में बैठे हुए थे

मेरी बात सुनकर अक्की थोड़ा गंभीर हो गया था, एक बार उसने मुझे देखा तो एक बार नेहा की और , नेहा का चेहरा अभी भी उतरा हुआ लग रहा था …

“बाद में बताता हु क्लास के बाद मिलना ”

उसने आहिस्ता से कहा

उसकी बात सुनकर hi मुझे समझ आ गया था की कोई तो बड़ी प्रॉब्लम है सस और नेहा के बिच में

पुरे समय मैं बस नेहा के चारे को देख रहा था उसका मासूम सा चेहरा आज उतरा हुआ लग रहा था, देखकर hi लग रहा था की आज उसे पढाई में कोई भी मन नहीं लग रहा है, ुदशी उसके चेहरे पर छै हुई थी …….

क्लास के बाद सभी कैंटीन चले गए वही मैं और अक्की थोड़ी देर में आने का बोलकर चले गए थे …

“क्या बात है अक्की कोई बड़ी बात है क्या “

अक्की के चेहरे पर एक गंभीर से भाव आये

“नेहा के पिता पुलिस के अधिकारी हुआ करते थे, नेहा उनकी एकलौती बेटी है, वो एक ईमानदार अधिकारी थे, उस समय तिवारी किसी जीवा नाम के गुंडे के साथ मिलकर काम करता था वो लोग बहुत सरे गलत काम किया करते थे और नेहा के पिता ने उन्हें पकड़ लिया था .. सुना है की जीवा और तिवारी ने मिलकर hi नेहा के पिता को मारा था, अब तुम hi सोचो की एक लड़की के दिल में अपने पिता के हत्त्यारे की बेटी के लिए कितनी नफरत होगी …”

अक्की की बात सुनकर मेरे दिल में एक दर्द उठ गया, बेचारी नेहा , उसके चेहरे से कभी मुझे उस गम का अहसास hi नहीं हुआ जो वो अपने दिल में लिए घूमती है, और साथ hi एक और दर्द मेरे दिल में फ़ैल गया कारण था की अब मैं खुद hi जीवा गैंग का एक मेंबर था ..

अगर नेहा को ये पता चल गया तो …

न जाने वो कैसा रियेक्ट करेगी…

“कोई नहीं उसे दुःख तो होगा लेकिन वो मान जायेगी, जब उसे पता चलेगा की तू अज्जू के काम से उससे बात कर रहा था …वो समझदार है और वक़्त ने उसे और भी जयदा समझदार बना दिया है “

अक्की ने मेरे कंधे में अपना हाथ रखते हुए खा, मैंने भी सहमति में अपना सर हिला दिया …..

*********

“सॉरी”

“क्यों”

“सुबह के लिए”

नेहा मेरे चेहरे को देखने लगी,

“इसमें सॉरी बोलने वाली क्या बात है”

“बस ऐसे hi “

“तुम पागल हो “

उसकी बात सुनकर मेरे होठो में मुस्कान आ गयी

“है वो तो हु, तो तुमने मुझे माफ़ कर दिया ?”

“माफ़ी शायद मुझे मांगनी चाहिए, मुझे ऐसा बेहवे नहीं करना चाहिए था “

“मुझे अक्की ने बताया की तुम सस से क्यों चिढ़ाती हो “

नेहा के चेहरे में आयी थोड़ी सी मुस्कान जैसे हवा में hi गायब हो गयी थी, मैंने उसके हाथो में अपना हाथ रख दिया

“नेहा तुम सच में बहुत hi बहाद्दुर लड़की हो, भगवन करे तुम्हे इन्साफ मिले, मैं तुम्हे कोई झूठा दिलाशा तो नहीं दूंगा लेकिन है ये जरूर कह सकता हु की अगर भगवन ने सब ठीक किया तो तिवारी को उसके किये की सजा जरूर मिलेगी “

वो मुझे बड़ी बड़ी आँखों से देखने लगी

“अंकित मुझे कोई बदला नहीं लेना है न hi मैं इस बात के लिए सस को दोष देती हु, लेकिन क्या करू जब वो सामने आती है तो मैं ये भूल भी तो नहीं सकती की उसके पिता मेरे पिता के कातिल है, पूरी दुनिया के सामने मेरे पिता की मौत को स्वाभाविक मौत बता दिया गया, सभी को पता था यंहा तक की पापा के दोस्तों को भी पता था की ये सब किसने किया है लेकिन सबने बस इसे एक एक्सीडेंट की तरह hi पेश किया, उस समय मैं पेट में hi थी सोचो की मेरी माँ पर क्या बीती होगी, सर्कार ने उन्हें पेंशन तो दे दिया लेकिन क्या उनके पति की जगह अब कोई पूरा कर पायेगा .. नहीं अंकित ..

मेरी माँ सिर्फ मेरे लिए जी रही है अगर मैं उनके पेट में ना होती तो शायद वो खुद जिन्दा नहीं रहती… मुझे मेरी माँ को अच्छी जिंदगी देनी है अंकित, मैं बदले की नहीं सोच सकती, अगर मुझे कुछ हुआ तो मेरी माँ का क्या होगा वो बेचारी तो जीते जी hi मर जायेगी … इसलिए कभी मैंने सस से भी लड़ाई नहीं की ..”

उसका मासूम सा चेहरा आंसुओ से भीग चूका था, मैंने उसे कास कर जकड लिया था, आज मुझे पता चला की ये भी एक जिंदगी है जिसमे लोग अपने गमो को भूलकर बस दुसरो के लिए जीते है , अपने पिता की मौत का गम तो नेहा को था लेकिन वो बदला नहीं लेना चाहती थी उसे अपनी माँ के लिए जीना था उसे ख़ुशी देनी थी , कुछ बनना था ताकि उसकी माँ को उसपर गर्व हो सके ..

मेरे दिल में आज नेहा के लिए एक प्रेम और एक सम्मान ने जन्म लिया था, मैं न जाने क्यों उसके हर राह में उसका साथ देना चाहता था उसके साथ चलना चाहता था ..

लेकिन ……..

लेकिन मेरी मंजिल कहा थी इसका तो पता मुझे भी नहीं था …

 
अपडेट 19


“हैल्लो सर मेरा नाम अंकित है मैं सस का बॉयफ्रेंड हु “

मेरे ऐसे बोलते hi सस जोरो से हंस पड़ी थी

मैं, सस, अज्जू और मोनिका के साथ एक माल में आया हुआ था, वो लोग मेरे लिए कपडे खरीद रहे थे ताकि मुझे तिवारी से इंट्रोडस करवाया जा सके ..

ऐसे मुझे भी पता नहीं था की मैं वंहा जा कर क्या करूँगा लेकिन फिर भी,

ऐसे वो भी नहीं जानते थे की मैं तिवारी के सामने जा कर क्या उखड लूंगा लेकिन वो भी मुझे उसके सामने भेजने को तैयार हो गए थे क्योकि उन्हें अपनी शादी तोड़ने का यही एकलौता अवसर दिख रहा था ..

“तुम तो पुरे कार्टून लग रहे हो यार “

सस ने हसते हुए कहा

“पापा या भाई लोग अगर तुम्हे देखेंगे तो तुम्हे छोडो मुझे न मार दे “

मैंने एक महँगी ब्रांडेड जीन्स पहनी थी लेकिन वो कमर से इतनी निचे थी की मुझे बड़ा hi उनकंफर्टबले लगा सो मैंने उसे उठा ऊँचा करके पहन लिया लगभग मेरे पेट पर, और शर्ट भी इन कर ली थी ..

“अरे भाई इसे कमर से थोड़ा निचे पहनते है और देख मैं दिखता हु “

लेकिन मुझे वो पसंद नहीं आया क्योकि फ्यूज़न अपनी जगह थी मुझे तो अपना कम्फर्टेबलेनेस्स चाहिए था..

लगभग पूरा दिन घूमने पर कुछ कपडे मुझे पसंद आये थे वही सस और मोनिका ने मुझसे दुगुना कपडे खुद के लिए ले लिए थे, और उनका शॉपिंग जारी hi था ..

“भाई ये लड़किया तो आज मरवाएँगी “

अज्जू ने तब कहा जब वो दोनों सेंडल लेने चले गए और हम कॉफ़ी शॉप में बैठे कॉफ़ी पि रहे थे

“भाई ये लोग पुरे साल का सामान आज hi लेंगी क्या ??”

मैं भी थक चूका था

“क्या पता यार जब शॉपिंग की बात आती है तो सभी लड़कियों का हाल एक जैसा hi हो जाता है, इन्हे कोई भी चीज जल्दी पसंद आता hi नहीं है फिर अलग अलग चीजों के लिए अलग अलग शॉप में जाती है हर शॉप में एक दो घंटा तो लगा hi देती है … अब देखो न कहने को तो मोनिका को सस बिलकुल भी पसंद नहीं है लेकिन आज देखो कैसे बेस्ट फ्रेंड बानी फिर रही है दोनों इनकी दोस्ती तो शॉपिंग ने hi करवा दी …”

हम दोनों hi हँसाने लगे थे

तभी मेरे दिमाग में भाभी का ख्याल आया, उनकी साड़ी पुराणी हो गयी थी , कोई दो साड़ी hi होंगी उनके पास वही बदल बदल कर पहनती है, शायद उन्हें भी शॉपिंग करना पसंद आये …

नहीं शॉपिंग का मजा लेना अमीरो का काम था न की गरीब लोगो का, सबसे पहली जरूरत तो रोटी और छत की होती है फिर कपड़ो का नंबर आता है, और इस तरह की शॉपिंग … भाभी तो सोच भी नहीं सकती ये सब ..

लेकिन फिर भी मेरे दिल में आया की क्यों न उनके लिए कुछ लिया जाए शायद एक साड़ी ..

“यार चल न एक साड़ी देखते है “

अज्जू जो की अभी अभी थोड़ा रिलैक्स हुआ था उसने मुझे खा जाने वाली नजर से देखा

“यार सोच रहा हु की भाभी के लिए एक साड़ी ले लू, मेरे लिए तो तुम लोगो ने ये कपडे ले दिए भाभी के लिए मैं एक साड़ी लेना चाहता हु “

अज्जू के होठो में मुस्कान आ गयी और वो उठ खड़ा हुआ

हम दोनों पास hi एक सेल्ल में चले गए जंहा 50% ऑफ चल रहा था..

मैंने अपनी जेब टटोली कोई 200रस थे जिसे खर्च करने के लिए भाभी ने hi दिया था, मुझे एक साड़ी पसंद आयी

“भैया ये कितने की है “

“500रस “

दुकानदार ने कहा

“ओह्ह सस्ती वाली दिखाओ न “

“रंग कितने का है “

“200रस “

दुकानदार ने मुझे घुरा

“अबे तू ले न मैं तो हु, पैसे की टेंशन क्यों ले रहा है “

अज्जू की बात सुनकर मुझे अच्छा तो लगा लेकिन मैं भाभी की साड़ी के लिए उससे पैसे नहीं ले सकता था

“नहीं भाई, भाभी की साड़ी के लिए तुझसे पैसे नहीं ले सकता, अगर उन्हें ये पता चलेगा तो बहुत नाराज होगी, और गिफ्ट की कीमत नहीं देखते दोस्त उसमे छिपा प्यार देखते है , जीतनी मेरी ावुकत है उसी हिसाब से मैं भाभी के लिए साड़ी ले जाऊंगा “

इसके बाद अज्जू कुछ भी नहीं बोलै क्योकि शायद वो मेरी भावनाओ को समझ चूका था

दुकानदार ने मुझे साड़ी दिखाई और एक पसंद भी आ गयी , सच में सरीयो का काम बड़ा hi अजीब होता है एक hi जैसे दिखने वाली साड़ी 3000 से 300 तक की मिल सकती है बस क्वालिटी का hi अंतर होता है , मैं ये साड़ी ले कर खुश था बहुत खुस ……

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“अरे इसकी क्या जरूरत थी रे, रानी (सम्पत की गफ, या रखैल भी बोल सकते है ) मुझे अपनी पुराणी साड़ी देने वाली थी “

भाभी ने मेरे हाथो में वो साड़ी देखकर कहा

“आपकी सभी साड़ी पुराणी हो गयी है, खुद तो कभी लोगी नहीं इसलिए मैं ले आया “

उन्होंने मुस्कुराकर उसे पकड़ लिया

साड़ी सस्ती थी लेकिन भाभी के नूर में तो दाग भी झिलमिलता उठता था,

उन्होंने मुझे उसे पहन कर दिखाया और मैं बस आंखे भर भर कर उन्हें देखता रहा , सच में कमाल की थी तो उनकी सुंदरता थी या मेरी नजरो में उनके लिए भरा प्रेम और सम्मान मुझे नहीं पता लेकिन उन्हें देख कर उनसे आंखे हटाने का दिल hi नहीं चाहता था..

थोड़ी देर के बाद मैं और भाभी दोनों बैठे बाटे कर रहे थे

“बीटा तिवारी के पास जाने से बहुत खतरा है “

“खतरा तो है भाभी लेकिन खतरा लेना hi पड़ेगा, और मेरे पास तो अब एक और मकशद हो गया है तिवारी के घर जाने का “

उन्होंने आंखे थोड़ी बड़ी कर ली

और मैंने नेहा वाली बात उन्हें बताई की कैसे तिवारी और जीवा ने मिलकर उसके पिता की हत्या कर दी

मेरी बात सुनकर भाभी का चेहरा hi उतर गया

“क्या हुआ भाभी ??”

“बीटा वो तिवारी तो है hi कमीना लेकिन जीवा..?? नहीं बीटा जीवा ऐसा नहीं कर सकता “

उनकी बात सुनकर मैं चौक गया

“ऐसा आप कैसे कह सकती हो भाभी , जीवा भी तो एक गुंडा था “

“है वो गुंडा था लेकिन तिवारी के जैसा नहीं, यंहा रहकर मैंने उसके बारे में बहुत कुछ जाना है सोनू, सभी उसे भगवन मानते है उसने हम जैसे न जाने कितनो की मदद की है “

“हम्म्म वो तो है लेकिन … वो था तो एक डॉन hi न और गलत काम करने वाला सही कैसे हो सकता है “

“है वो गलत काम करता था लेकिन इतना कमीना नहीं था की किसी को जान से मार दे, मैंने तो ये सुना है की वो असल में ईमानदार लोगो की बहुत इज्जत करता था , और लोग भी उसकी इज्जत करते थे …वो गलत काम भी सही तरीके से करता था, कोई ऐसा काम नहीं करता था जिससे लोगो को नुक्सान हो और इसलिए उसकी और तिवारी की लड़ाई हुई “

भाभी की बात सुनकर मुझे लगने लगा की शायद यंहा रहने के कारण भाभी का मंद वाश हो गया होगा , क्योकि यंहा रहने वाले सभी जीवा के hi आश्रित थे तो उसकी कोई बुराई कैसे कर सकते थे …

“भाभी यंहा के लोगो ने आपके दिमाग में काबू कर लिया है जो आप जीवा के गुणगान गए रही हो “

मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ी

“चल जाने दे वो सब, लेकिन मुझे एक चीज तो समझ आ गयी की तू नेहा को पसंद करने लगा है “

उनकी बात सुनकर मैं थोड़ा शरमाया

“है लेकिन वैसे नहीं ..”

“कैसे ???”

“अरे भाभी छोडो न ऐसे भी मेरी तो एक hi गफ है, जो अभी साड़ी पहने मेरे सामने कड़ी है”

भाभी के होठो में मेरी बात को सुनकर एक मुस्कान आ गयी, उन्होंने मेरे बाजु में बैठकर मेरे गाल में के चपत लगा दिया ..

“सुधर जा जब देखो तब यही बात करता है, अब के मार पड़ेगी “

मैं उनके सूंदर चेहरे को देखता रहा, उनके होठो हिल रहे थे जो थोड़े गीले थे, मन कर रहा था की उनके गुलाबी और रास से भरे हुए होठो को अपने होठो में ले लू, लेकिन मैंने अपने दिल को समझाया की ये तेरे प्यार जताने का तरीका नहीं है …

“क्या देख रहे हो “

भाभी की कोमल आवाज मेरे कानो में पड़ी ,

“कुछ नहीं बस आपके इस सूंदर से चेहरे को देख रहा था, आप सच में बहुत hi खूबसूरत हो “

अनायास hi मेरी निगाहे उनके चेहरे पर जैम सी गयी थी , मैं बस उस सूंदर मुखड़े को देखे जा रहा था और उनकी चंचल निगाहे मनो मेरी नजर को समझते हुए शर्म से झुक चुकी थी

ऐसा लगा जैसे मैं बस डूब रहा था हु किसी सागेर में उफनते हुए लहरों की तरह मेरे जस्बातो भी उफनने लगे थे ..मैं उनके करीब पहुंच गया था ..

“सोनू ..”

उनकी कोमल लेकिन कमजोर सी आवाज मेरे कानो में पड़ी वो मुझे सचेत करना चाहती थी की मैं जो सोच रहा हु वो सही नहीं है लेकिन फिर भी उनकी आवाज में वो बात नहीं थी की मुझे रोक सके , उनकी आवाज लहरा रही थी वो धीमी हो चुकी थी, उनके आवाज से जयदा शोर तो उनकी धड़कनो का था जो की किसी रेल की भाटी तेज चल रही थी, एक hi ले में , उच्ची निच्चि होती उनकी छतिया मुझे अपनी और खींचने लगी थी , जैसे जैसे वो ऊपर उठ कर निचे जाती भाभी की गर्म सांसे मेरे चेहरे से टकरा जाती…..

ये क्या हो रहा था क्या उस दिन जैसे आज भी वासना की आग ने हमें जकड लिया था, नहीं ऐसा नहीं था उस दिन मेरी नजरे भाभी के जिस्म में थी और उससे hi मेरे जिस्म में वासना की आग भडकानी शुरू हो गयी थी लेकिन आज नहीं आज तो मेरी नजरे भाभी के सूंदर चेहरे पर थी तो फिर आज क्या हुआ था..

मेरा ध्यान मेरे लिंग की और गया जो की बिलकुल भी तनाव की स्तिथि में नहीं था, मतलब साफ था की ये वासना नहीं थी कुछ और hi था ,लेकिन क्या था प्रेम??

प्रेम तो भाभी से हमेशा से hi था तो फिर क्या था कोई आकर्षण ??

उनका चेहरा मेरी नजरो के लिए किसी चुम्बक की तरह था, नजरे तो जाकर बस चिपक hi गयी थी ..

“अब हो गया न कितना घूरेगा मुझे “

भाभी वंहा से हैट गई और बिस्टेर में जाकर लेट गई , ये संकेत था की मैं भी अब सो जाओ , मैं अपने hi खयालो में खोया हुआ उनसे चिपक कर सो गया , लेकिन उनकी भी हालत मुझसे जुड़ा नहीं थी वो भी इसी सोच में थी जिस सोच में मैं था , उनके हाथ मेरे बालो में जरूर चल रहे थे लेकिन आंखे खुली हुई छत को देखे जा रही थी ……..

 
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