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मोनू से काबू नहीं होता वो जल्दी से अपना हाथ आगे बड़ा क सविता क कंधे पे रखने की कोशिश करता है ताकि उसकी चूचियों को और अपने लुंड का पूर्ण मिलान करवा सके.. पर समय रहते सविता पीछे हो जाती है, मानो मोनू की हालत का भरपूर आनंद उठा रही हो
"बढम्याश.."
सविता धीरे से अपने hi निप्पल्स को अपनी उँगलियों क बीच भरके उसे मोनू को दिखते हुए मसलते हुए ये बात कहती है
मोनू तोह किसी बचे क जैसे बस मुंह बना क रह जाता है, जिसपे सविता क अधरों पे मुस्कान खिल उठती है
"हैईईईई.. मेरा बचा.."
सविता मुस्कुराते हुए
"तैयार हो जा.. आज तुझे बहुत कुछ चूसना है.."
मोनू को एक पल क लिए तोह अपनी बड़ी माँ की बात समझ नहीं आयी थी, पर जैसे hi वो उनकी बात को समझता है उसका लुंड ख़ुशी से झूम उठता है.. मोनू का हाल इस समय ठीक वैसा hi था जैसे एक बचे का उसके पसंदीदा खिलौना मिलने पे होता है
सविता पूर्ण रूप से नंगी अवस्था में अपने जवान भतीजे क सामने कड़ी अपनी गीली छूट का रास बहते हुए मुस्कुरा रही थी और फिर उसी अवस्था मैं आगे बढ़ती है और एक बार फिर से मालती क बेटे क ऊपर झुक जाती है, पर इस बार वो ऐसे झुकी हुई थी की उसकी बड़ी बड़ी भरी भरकम चूचिया ठीक मोनू क मुंह क ऊपर लटक रही थी.. मानो एक मोती भैंस अपने थान दिखा रही हो
कुंदन जैसे जानवर का बीटा मोनू भला ऐसा मौका कैसे हाथ से जाने देता.. आखिर कुछ असर तोह हुआ hi होगा उसके ऊपर भी उसके बाप का.. वो तुरंत hi अपना मुंह ऊपर उठा क अपने दाँतों से 'बड़ी माँ' का एक मोटा थान यानि उनकी चुकी का निप्पल्स जकड लेता है और जोर से काट लेता है, जिससे सविता क पुरे जिस्म में तीव्र पीड़ा ुप्तां हो जाती है पर वो चिक्ति नहीं
"Aaaaaaaaaahhhhh...... कमीनाआआआ…. काटने की नहीं.. आआआअह्ह्ह्ह.. चूसने की चीज़ है.. ये…… आआआआहहह”
मोनू भी जनता था की अब उसे आगे किया करना है.. इसलिए वो वैसे hi लेते लेते अपना मुंह ऊपर करके अपनी बड़ी माँ की बड़ी चुकी को मुंह में पूरा भरने की भरकश कोशिश करता है, जिससे महेंद्र की पत्नी का एक दूध अब ाचा खासा मोनू क मुंह में भर चूका था और वो बिना समय नस्ट किये उसे ऐसे चूसने लगता है जैसे एक बचा अपनी माँ का स्तनपान कर रहा हो
"Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh… essssssssssssssssshhhhhhhhhhhh.. ऐसे hi………. Uffffffffffffffff…."
एक जवान लड़के से अपनी चुकी चुसवाने क कारन सविता का पुरे सरीर में एक अलग सी उत्तेजना सी भरने लगती है.. और उसकी सिसकारियां उसकी कामुकता का सबूत बनने लगती है
"Aaaaaaaaaahhh.. सब्ब्ब्बैस्सस्स्स्सह्ह्ह.. मेरे laaaaalllllllllll.. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh.. ऐसे hi………. Uffffffffffffff… जोर से चूस… पूरा दूध पि जा अपनी रखेल kaaaaaaaaaaaaaa… Aaaaaaaaaaaaaahhhh"
मोनू भी अब अपनी बड़ी माँ की आज्ञा का पूर्ण पालन करते हुए अपना मुंह ऊपर उठाये हुए जोर जोर से उनकी चुकी को ऐसे चूस रहा था, जैसे सच में एक बचा अपनी माँ का दूध निचोड़ रहा हो, पर साथ hi वो अब अपने हाथों पे भी काबू बनाये हुए था
सविता भी उसी प्रकार अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को मोनू क मुंह क ऊपर झुकाये हुए उसे स्तनपान करवा रही थी.. मोनू का अंदाज़ इतना अनोखा था की सविता खुद hi अपने एक हाथ से उसके बालों में उंगलिया फिरने लगती है और दूसरे हाथ से अपनी गीली योनि को मसलने लगती है, मोनू क जोर से चुकी चूसे जाने पे सविता क पुरे सरीर में अजीब सी गुदगुदी महसूस हो रही थी जिस कारन उसकी योनि से बहने वाला रास कई गुना ज्यादा गदा होता जा रहा था
"Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh…. Monuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu.. Uffffffffffffffffff… आईसीएएएएए.. Hiiiiiiiiiiiiiiiii… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhh… Maaaaaaaaaaaaaa"
तभी मोनू मस्ती में अपने दाँतों से अपनी बड़ी माँ क निप्पल्स को अपने दाँतों क बीच लेके इस बार पहले से भी जोर से काट लेता है.. जिससे एक बार फिर से सविता को जोर का झटका लगता था साथ hi पीड़ा का कामुक रूप भी महसूस होता है, पर इस कारन उसकी मोनू क बालों में चलने वाली ऊँगली ने जोर से उसके बाल को जकड लिया था और इस कारन मोनू का मुंह भी खुल गया था और सविता मौका पाके तुरंत hi पीछे हो जाती है.. और अपने निप्पल्स को सहलाते हुए
"बदमाश… पुरे जानवर है"
सविता की इस बात पे मोनू भी मुस्कुरा पड़ता है और हस्ते हुए कहता है
"दूसरा वाला भी दो न.. वो भी चूसना है"
सविता अपने निप्पल्स को सहलाते हुए जो काफी हद तक लाल हो चूका था
"बस अब नहीं मिलेगा.."
मोनू- (बुरा सा मुंह बना क) ऐसे थोड़ी होता है.. और आपने तोह कहा था आप मेरी..
सविता, मोनू की बात पे मुस्कुरा पड़ती है
"है मैं तेरी रखेल हु.. इसलिए तेरी ये रखेल अब तुझे दूध से ज्यादा अछि चीज़ चूसने को देगी.."
सविता की इस बात का पूरा असर मोनू क तने हुए लुंड पे नज़र आने लगता है
सविता अब पूरी सावधानी से अपना एक पेअर बिस्तर पे रखती है जिससे उसकी योनि की फाकें पूरी खुल जाती है और मोनू को एक गदराई औरत क अंदर की असली जवानी नज़र आती है, जो उम्र बढ़ने क साथ साथ और जवान होती जाती है.. फिर सविता धीरे से बिस्तर पे चढ़ जाती है और अब वो ऐसे कड़ी थी की उसके दोनों पेअर बिस्तर पे लेते हुए मोनू क दोनों और थे और उसकी गीली रास टपकती योनि ठीक मोनू क तने हुए लुंड क ऊपर अपनी इज्जत उठवाने को तैयार थी
अपनी गदराई 'बड़ी माँ' को ऐसे पूर्ण नंगी हालत में अपने ऊपर खड़ा देख मोनू का हाल किया था, ये में समझा भी नहीं सकता, पर उसका लुंड जैसे झटके खा रहा था उससे तोह यही लग रहा था की काश बड़ी माँ जोर से उछाल क उसके लुंड पे गिर पड़े
सविता धीरे से थोड़ा आगे की और सरकती है और फिर अपना संतुलन बनाए हुए धीरे धीरे मोनू क ऊपर बैठने लगती है पर अब उसकी गीली छूट मोनू क तने हुए लुंड क ऊपर नहीं उसकी नाभि क ऊपर थी.. और जल्दी hi सत्तू की गरम माँ अपनी जलती हुई गीली योनि को मोनू की नाभि पे रख क बैठ जाती है
"Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh… Badddddddiiiiiiiiiiiii… माआआआ"
मोनू की इस कामुक सिसकारी का कारन था, उसकी नाभि को महसूस होने वाली वो गर्माहट जो उसे पागल कर रही थी, उसे तोह ये भी लगता है जैसे उसकी गहरी नाभि में उसकी बड़ी माँ की योनि से बहने वाला कॉमर्स भर रहा हो.. और इसीलिए मोनू अपने दोनों हाथों को उठा क अपनी गदराई बड़ी माँ की बड़ी बड़ी चूचियों को जकड़ने की कोषसिंह करता है, पर सविता बीच में hi उसके हाथों को पकड़ लेती है और मुस्कुराते हुए कहती है
"कहा न.. आज सब कुछ तेरी ये रैंड करेगी.."
और ये कहते हुए अपनी कमर को धीरे से आगे पीछे करते हुए अपनी खुली योनि को अपने जवान भतीजे की नाभि पे रगड़ते हुए धीरे धीरे ऊपर की और सरक रही थी, और ऐसा करने क कारन उसे काफी ज्यादा झुकना पद रहा था जिस कारन उसकी बड़ी बड़ी चूचिया भी हलकी लटक क मोनू क पेट से रगड़ रही थी.. अब ये दोहरा हमला सहना हर किसी क बस की बात कहा और ऐसी कारणवस मोनू क लुंड से कॉमर्स की और ज्यादा हलकी बूंदें उसके मोठे लाल सुपडे पे नज़र आणि सुरु हो जाती है
"Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.. बड़ी Maaaaaaaaaaaaaaaaa…. आप सच में असली चिनार हो……… ufffffffffffff…."
अपने जवान भतीजे क मुंह से ऐसी कामुक तारीफ पाके सविता का जिस्म और ख़ुशी से झूम उठा था इसलिए वो अब दोनों हाथों को अपने भतीजे क सीने पे जमा लेती और पूरी तरह झुक क अपनी बड़ी बड़ी चूचियों क काले जामुन सामान निप्पल्स और अपनी गीली रास चोरटी योनि को मोनू क जिस्म पे रादगति हुई ऊपर की और बढ़ने लगती है
सविता- (अपनी कामुकता का परचम लहराती हुई) आआआअह्ह्ह्हह.. अब बता कैसी लगी तुझे तेरी ये रखेल.. आआआअह्ह
मोनू- (अपनी बड़ी माँ की बड़ी बड़ी चूचियों का छुवन और योनि की रगड़ से कामुकता की गहरी खाई में गिरते हुए अपनी आँखों को बंद कर चूक था) Aaaaaaaaaaaahhhh.. बहुत मस्त है मेरी रखेल…. हीी.. मेरी रैंड.. Uffffffffff…. कितना तड़पती हो अपपपप.. Aaaaaaaaaaaahhhh..
जहा कुछ दिएर पहले मोनू अपनी बड़ी माँ को रैंड, रखेल जैसे कामुक शब्दों से सम्बोधित करने से दर रहा था, वही अब धीरे धीरे ये सब सविता की दूसरी पहचान बनते जा रहे थे
सविता जोर जोर से अपनी योनि को मोनू क पेट और अब उसके सीने पे रगड़ते हुए इतना ऊपर आ चुकी थी की मोनू को उनकी योनि की कामुक खुसबू आणि सुरु हो चुकी थी.. इसलिए वो धीरे से अपनी आँखों को खोलता है तोह उसके सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ थी.. एक गदराई औरत की 'बुर'
"आआआआअह्ह्ह.. Saalliiiiiiiiiiiiii.. चिनार.. कितनी मस्त खुसबू आ रही है.. आपकी छूट सी……. Aaaaaaaaaaaaaahhhh"
मोनू अब धीरे धीरे खुलने लगा था, और नए नए शब्दों से अपनी बड़ी माँ को सम्भोधित करने लगा था
सविता- (आज कुछ अलग और नया करते हुए अपने जवान भतीजे क लुंड को बेताब करते हुए) आआआआअह्ह्ह.. यही तोह वो असली चीज़ है तोह तुझे अपनी इस रखेल.. अपनी रैंड.. अपनी कुटिया.. की चुसनी है.. Aaaaaaaaaahhhhh.. बता चूसेगा न.. आआआआअह्ह्ह
मोनू जो अब कामुकता क बहुपस में पूरी तरह बांध चूका था, और अब वो कुछ भी करने को पूरी तरह तैयार था.. और यहाँ बात तोह एक गदराई औरत की योनि चूसने की थी, कोई पागल hi होगा जो मन करेगा
"ऐसे.. तोह मैं पुरे जीवन भर चूस सकता हु.. आआआआअह्ह"
मोनू की इस बात ने सविता की योनि को और गीला कर दिया था पर वो कुछ कहती नहीं बस मुस्कुराते हुए इस बार पूरी तरह ऊपर की और हलकी सी उठ जाती है और मोनू क सीने से ऊपर की तरफ खिसकते हुए अपनी गीली गदराई छूट को कुंदन क जवान बेटे क मुंह क ऊपर रख देती है
"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh… Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa……………. Monuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu…."
जैसे hi सविता ये क्रिया करती है, उसे अपनी गीली योनि क होंठों पे उसके जवान भतीजे क होंठ महसूस होते है और असली स्वर्ग का द्वार नज़र आता है, ककी इस एक पल क लिए उसकी आँखें भी बंद हो जाती है
मोनू भी समय नस्ट नहीं करता और सत्यम की माँ की योनि से प्रेम करना सुरु कर देता है और जैसे hi पहेली बार उसकी जीभ सत्यम और सत्तू की जन्मभूमि को चुटी है सविता की आठ फिर से फुट पड़ती है
"Aaaaaaaaaahhhhh....... ेस्स्स्सह्ह्ह्ह.... माआआआ.... हैईईईई"
वही अपनी जीभ की शक्ति प्रदशन देख क मोनू का लुंड भी जोरो से हिलते हुए अपनी ख़ुशी की सुचना दे देता है.. मोनू अपने मुंह क ऊपर अपनी गीली छूट लेके बैठ चुकी अपनी बड़ी माँ की गहरी योनि की फाकों को फैलते हुए अपनी जीभ को उस कामुक गलियारे में घुसते हुए जोर से अपनी जीभ किसी कुत्ते की तरह चलना सुरु कर देता है
"Sssssssssslllllllllllllllllllllllllllluuuuuuuurrrrrrrrrrppppppppp……… Sssssssssllllllllllllllluuuuuuuuuuuppppppppppppp…….. Sssssssrrrrrrrrrrrrppppppppppp… Slllllllllllllluuuuuuuuuuuuppppppppppp…."
सविता ऐसे एक जवान लड़के की जीभ को अपनी योनि की गहराई तक घुसने से मिलने वाले आनंद से पूरी की पूरी पागल हो उठती है
"Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh.. Kamineeeeeeeeeeeeee… uffffffffffffffffff… Haiiiiiiiiiiiiiiiiiii…Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.. Aaaaaaaaaaaaahhh… haiiiiiiiiiiiii.. ऐसे……… ऐसईईईई…. ऐसे hi chussssssssss…. Aaaaaaaaaaahhhh… खा जा अपनी बड़ी माँ की योनि को……. Aaaaaaaaaahhhh…. Maaaaaaaaaaaaaaaa"
मोनू ऐसी हालत में तोह नहीं था की वो कुछ भी बोल पाटा ककी उसकी लम्बी लपलपाती हुई जीभ 'मुरली दस' की 'बड़ी बहु' की गहरी योनि में पूरी अंदर घुसी हुई अपना कामुक खेल दिखा रही थी.. वैसे यहाँ अंदर कमरे में अंगीठी की लाल रौशनी में सविता की हवस से भरी हुई कामुक सिसकारियां जितनी तेज़ हो रही थी.. बहार बारिश का शोर भी उतना hi बढ़ता जा रहा था, मानो सुंदरपुर की इस वर्षा ने भी तय कर लिया था की वो खेल का राज़ इस कमरे से बहार नहीं जाने देगी
देखते hi देखते अगले कुछ पलों क अंदर ये खेल इतना कामुक हो चूका था की 2 जवान बच्चों की माँ भी अपनी योनि क गाड़े रास को टपकने से खुद को रोक नहीं प् रही थी.. मानो आज सच में वो एक रैंड या रखेल बनने की अपनी बात को पूर्ण सत्य साबित करने पे उतारू हो चुकी थी..
"आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. कहाआआआ.. Jaaaaaaaaaa.. कुटटटटटटटटी…. Aaaaaaaaaahhhhhhh.. खा जा मेरी छूट को……… Aaaaaaaaaaaaaahhhhh… Maaaaaaaaaaaaaa…. आआआआअह्ह्ह… ufffffffffffffff… कितनी खुरदुरी जीभ है तेरी……. Aaaaaaaaaaaaahhh…….. Maaaaaaaaaaaaa… खा jaaaaaaaaaaaaa…. मेरी योनि को………. Aaaaaaaaaaaaahhh… ufffffffffffffffff…. कामिनी मालती ने बड़ा ताकतवाला दूध पिलाया है.. तुझे.. Aaaaaaaaaahhhh.. तू तोह सच में तेरी छूट खा hi जाएगाआआआआ…….. आआआआहहह……….. Maaaaaaaaaaaaaa…"
महेंद्र क घर क अंदर का ये गन्दा पर कामुक खेल ऐसा सुरु हो चूका था की.. सविता अपनी आअह्ह्ह्ह और कामुक सिसकारियों को रोक नहीं प् रही थी.. वैसे भी मोनू की जीभ कुछ ऐसे कार्य करते हुए अंदर तक प्रवेश करती की सविता आआअह्ह्ह भरते हुए कुछ इंच ऊपर उठ जा रही थी और उनके अंदर की हवस कामुक शब्दों का रूप लेके बहार आती
"आआआआअह्ह्ह्ह.... Maaaaaaaaaaaaaaa… कुटटटटटीईईई…. Aaaaaaaaaaaaahhhhhh… कमीनेईईईई… आआआआहहहहह… कितना अंदर तक घुसायेगा अपनी जीभ.. Aaaaaaaaaaaahhhhh… स्स्स्सस्शह्ह्ह... माआआआ.... हैईईई"
सविता, मोनू की कामुक हरकत से खुद को सँभालने की पूर्ण कोशिश करते हुए बीच बीच में अपनी गांड को जोर से मोनू क मुंह पे पूरी तरह दबा देती.. जिससे उसकी भरी भरकम गांड क दोनों पाटों क बीच मोनू का मुंह एक पल क लिए पूरी तरह चुप सा जाता.. पर वो उतने में hi नहीं रूकती, वो जोर जोर से अपनी गांड को मोनू क मुंह पे घूमते हुए रगड़ भी दे रही थी
"Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh… लेईईईई… कहाआआआ.. लीईईई… kutttteeeeeeeeeeeee…. खा ले……… मेरी छूट… गांड भी खा ले कुत्त्तीीी… पि जा मेरे मुठ…. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh"
मोनू भी अपनी बड़ी भरी भरकम गदराई भैंस जैसी बड़ी माँ की योनि को चूसते हुए जब जोर से अपनी जीभ को नुकीला करके अंदर घुसता तोह सविता कामुकता क चलते ऐसे उछाल पड़ती मानो जैसे एक पल क लिए वो हवा में उड़ने लगी हो.. पर वो भी एक गदराई गाओं की देसी औरत थी जिसके लिए न जाने मोनू जैसे कितने लड़कों ने मुठ मार मार क अपने लुंड को सुजय होगा.. इसलिए वो ऐसा होने पे तुरंत hi अपनी कमान वापस से संभालती और जोर से अपनी छूट को कुंदन क जवान बेटे क मुंह पे रख क कसके रगड़ना सुरु कर देती है.. और मुस्कुरा क कहती है
"छूट चाटेगा अपनी रखेल की.. ये ले.. .और ली… आआआह्ह्ह्ह… खा… खा ले… ये लिए… कुट्ट्टीीीे… खा जा अपनी बड़ी माँ की बड़ी छूट को… देख कितना रास भरा है तेरी इस चिनार बड़ी माँ की छूट में… Aaaaaaaaaaahhhhh…."
महेंद्र क घर में घनघोर वर्षा क बीच ये कामुक खेल धीरे धीरे और गहराता जा रहा था.. मानो असली वर्षा तोह आज 'सुरीली देवी' की बड़ी बहु की योनि से होनी हो
मोनू का मन तोह वैसे था की वो अपनी बड़ी माँ की हिलोरे कहती बड़ी बड़ी चूचियों को जोर से अपनी हथेली क बीच भर ले, और उन्हें ऐसे मसल दे की उनका दूध निकलना सुरु हो जाये.. पर वो अपनी इस नयी रखेल का आदेश मान रहा था की आज जो करेगी वो खुद करेगी
पर उसकी जवान खुरदुरी और नुकीली जीभ इस समय सत्यम की माँ की योनि की गहराई मैं घुस क अपना पूरा जादू दिखने से पीछे नहीं रह रही थी
"उम्मम्मम्मम... सललललररररररपपपप..... सररररलललपपपपप..... Srrrrrrrrrrrrrrrr......... सललललररररररपपपप.... उम्मम्मम्मम.... Laaaaalllpppppp...srrrrlllpp.. सररररलललपपपपप... आआआहहहहह"
सविता कामुकता की अधिकता क चलते हुए खुद hi अपनी दोनों बड़ी बड़ी दुधारू चूचियों को जोर से अपने hi हाथों से बेहरहमी से दबोच लेती है और ऐसे उनका मर्दन करने लगती है जैसे किसी भी पल उसके निप्पल्स से दूध की धरा बह उठाएगी
"आआअह्हह्ह्ह्ह..... Haiiiiiiiiiiiii.. reeeeeeeeeee… मोनू…………. kuttttttttttteeeeeeeeeee… Aaaaaaaaaaaaahhhh.. Aiseeeeeeeeeeeeee.. Hiiiiiiiiiiiiii… uffffffffffffff… Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… ेस्शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.... मेरी छूट का पूरा रास चूस ले कुट्टी…… चूस ले अपनी इस चिनार की छूट का गाड़ा कॉमर्स… आआअह्हह्ह्ह्ह… मेरी जैसी कुटिया चिनार तुझे पूरी दुनिया में नहीं मिलेगी… आआआआहहहहह… खा जा मेरी योनि को…… आआआहहह"
मोनू भी बड़ी बड़ी चूचियों वाली बड़ी माँ की ऐसी गन्दी पर कामुक बातों से और ज्यादा पागल होता जा रहा था.. इसलिए वो बिना समय व्यर्थ किये और ज्यादा बेहरमी से 'सत्तू की माँ' की छूट चूसे जा रहा था
"सललललररररररपपपप.... सरररर.... लाहालललपपपपपप... लाहालललपपपपपप..... सररररलललपपपपप.... उम्मम्मम.... आआअह्ह्ह.... उम्मम्मम्मम... सररररलललपपपपप"
इस नए अनुभव से अनभिग मोनू इस खेल में धीरे धीरे पूर्ण निपूर्ण होता जा रहा था.. और ऐसा होता भी कैसे नहीं
जीवन की पहली छूट का आनंद उसे सेहर की कामुक 'अनोखी' ने दिया और फिर अपनी hi सगी माँ ‘मालती’ की योनि का छेद बड़ा करके उसने इस खेल में और अधिक निपुन्डा हासिल की और आज उसे इस खेल में माहिर बनाने का कार्य 'स्वर्गवासी मुरली दस' क घर की सबसे अनुभवी औरत सविता खुद कर रही थी
सविता अपने जवान भतीजे क मुंह पे अपनी योनि को फैलाये हुए बैठी हुई उसी हालत में hi अपना चेहरा घुमा क जब देखती है तोह उसे मोनू क तगड़ा लुंड नज़र आता है जो जोरो से हिलोरे खा रहा था.. और उसे देख क जो आग सविता क अंदर अचानक से बाद गयी थी उसके लिए मेरे पास शब्दों की पूर्ण कमी है, और ऐसा जवान लुंड जब एक गदराई औरत देखती है तोह उससे रुक पाना संभव नहीं हो पता है.. इसलिए वो अब मोनू को इस चिनार की चिनपन्ति दिखने का तय कर लेती है..
सविता धीरे से अपनी रास चोरटी छूट को मोनू क मुंह से उठती है तोह मोनू ऐसे लम्बी लम्बी साँसे लेने लगता है जैसे मानो उस वातावरण की अंतिम वायु बची हो, पर तब भी उसके चेहरा की मुस्कान और होंठों और चेहरे पे नज़र आने वाला सविता की योनि का कॉमर्स बता रहा था की उसे इस खेल में कितना मज़ा आया
सविता अपनी मोनू द्वारा जैम क चूसी गयी योनि को उसके मुंह से हटती है और उसी अवस्था मैं हल्का उठते हुए पूरा संतुलन बनाये रखे एक गदराई औरत की कामुकता का पूरा परचम लहराते हुए मोनू क नंगे सरीर क ऊपर अपनी योनि लहराते हुए आगे की और बढ़ती है साथ hi साथ मोनू क सरीर क ऊपर उसकी बड़ी माँ की योनि से टपकते हुए रास की कुछ बुँदे जब गिरती है तोह ऐसा प्रतीत होता है मानो मोमबत्ती की गरम मोम उसके जिस्म पे गिरायी जा रही हो.. अब ये नज़ारा कितना कामुक होगा ये आप सोच hi सकते है
सविता जब मोनू क खड़े लुंड क ऊपर पूरी तरह हवा में पहुंच जाती है, तोह मुस्कुराते हुए अपनी कामुक हसी की छठा बिखेरते हुए अपनी योनि की गीली दीवारों को मोनू क तने हुए लुंड क टोपे पे लगाती हुई उसे तड़पना सुरु कर देती है और उसकी आँखों में देखते हुए कहती है
"बता छोड़ेगा न अपनी रखेल को…"
कंटिन्यू...
"बढम्याश.."
सविता धीरे से अपने hi निप्पल्स को अपनी उँगलियों क बीच भरके उसे मोनू को दिखते हुए मसलते हुए ये बात कहती है
मोनू तोह किसी बचे क जैसे बस मुंह बना क रह जाता है, जिसपे सविता क अधरों पे मुस्कान खिल उठती है
"हैईईईई.. मेरा बचा.."
सविता मुस्कुराते हुए
"तैयार हो जा.. आज तुझे बहुत कुछ चूसना है.."
मोनू को एक पल क लिए तोह अपनी बड़ी माँ की बात समझ नहीं आयी थी, पर जैसे hi वो उनकी बात को समझता है उसका लुंड ख़ुशी से झूम उठता है.. मोनू का हाल इस समय ठीक वैसा hi था जैसे एक बचे का उसके पसंदीदा खिलौना मिलने पे होता है
सविता पूर्ण रूप से नंगी अवस्था में अपने जवान भतीजे क सामने कड़ी अपनी गीली छूट का रास बहते हुए मुस्कुरा रही थी और फिर उसी अवस्था मैं आगे बढ़ती है और एक बार फिर से मालती क बेटे क ऊपर झुक जाती है, पर इस बार वो ऐसे झुकी हुई थी की उसकी बड़ी बड़ी भरी भरकम चूचिया ठीक मोनू क मुंह क ऊपर लटक रही थी.. मानो एक मोती भैंस अपने थान दिखा रही हो
कुंदन जैसे जानवर का बीटा मोनू भला ऐसा मौका कैसे हाथ से जाने देता.. आखिर कुछ असर तोह हुआ hi होगा उसके ऊपर भी उसके बाप का.. वो तुरंत hi अपना मुंह ऊपर उठा क अपने दाँतों से 'बड़ी माँ' का एक मोटा थान यानि उनकी चुकी का निप्पल्स जकड लेता है और जोर से काट लेता है, जिससे सविता क पुरे जिस्म में तीव्र पीड़ा ुप्तां हो जाती है पर वो चिक्ति नहीं
"Aaaaaaaaaahhhhh...... कमीनाआआआ…. काटने की नहीं.. आआआअह्ह्ह्ह.. चूसने की चीज़ है.. ये…… आआआआहहह”
मोनू भी जनता था की अब उसे आगे किया करना है.. इसलिए वो वैसे hi लेते लेते अपना मुंह ऊपर करके अपनी बड़ी माँ की बड़ी चुकी को मुंह में पूरा भरने की भरकश कोशिश करता है, जिससे महेंद्र की पत्नी का एक दूध अब ाचा खासा मोनू क मुंह में भर चूका था और वो बिना समय नस्ट किये उसे ऐसे चूसने लगता है जैसे एक बचा अपनी माँ का स्तनपान कर रहा हो
"Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh… essssssssssssssssshhhhhhhhhhhh.. ऐसे hi………. Uffffffffffffffff…."
एक जवान लड़के से अपनी चुकी चुसवाने क कारन सविता का पुरे सरीर में एक अलग सी उत्तेजना सी भरने लगती है.. और उसकी सिसकारियां उसकी कामुकता का सबूत बनने लगती है
"Aaaaaaaaaahhh.. सब्ब्ब्बैस्सस्स्स्सह्ह्ह.. मेरे laaaaalllllllllll.. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh.. ऐसे hi………. Uffffffffffffff… जोर से चूस… पूरा दूध पि जा अपनी रखेल kaaaaaaaaaaaaaa… Aaaaaaaaaaaaaahhhh"
मोनू भी अब अपनी बड़ी माँ की आज्ञा का पूर्ण पालन करते हुए अपना मुंह ऊपर उठाये हुए जोर जोर से उनकी चुकी को ऐसे चूस रहा था, जैसे सच में एक बचा अपनी माँ का दूध निचोड़ रहा हो, पर साथ hi वो अब अपने हाथों पे भी काबू बनाये हुए था
सविता भी उसी प्रकार अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को मोनू क मुंह क ऊपर झुकाये हुए उसे स्तनपान करवा रही थी.. मोनू का अंदाज़ इतना अनोखा था की सविता खुद hi अपने एक हाथ से उसके बालों में उंगलिया फिरने लगती है और दूसरे हाथ से अपनी गीली योनि को मसलने लगती है, मोनू क जोर से चुकी चूसे जाने पे सविता क पुरे सरीर में अजीब सी गुदगुदी महसूस हो रही थी जिस कारन उसकी योनि से बहने वाला रास कई गुना ज्यादा गदा होता जा रहा था
"Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh…. Monuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu.. Uffffffffffffffffff… आईसीएएएएए.. Hiiiiiiiiiiiiiiiii… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhh… Maaaaaaaaaaaaaa"
तभी मोनू मस्ती में अपने दाँतों से अपनी बड़ी माँ क निप्पल्स को अपने दाँतों क बीच लेके इस बार पहले से भी जोर से काट लेता है.. जिससे एक बार फिर से सविता को जोर का झटका लगता था साथ hi पीड़ा का कामुक रूप भी महसूस होता है, पर इस कारन उसकी मोनू क बालों में चलने वाली ऊँगली ने जोर से उसके बाल को जकड लिया था और इस कारन मोनू का मुंह भी खुल गया था और सविता मौका पाके तुरंत hi पीछे हो जाती है.. और अपने निप्पल्स को सहलाते हुए
"बदमाश… पुरे जानवर है"
सविता की इस बात पे मोनू भी मुस्कुरा पड़ता है और हस्ते हुए कहता है
"दूसरा वाला भी दो न.. वो भी चूसना है"
सविता अपने निप्पल्स को सहलाते हुए जो काफी हद तक लाल हो चूका था
"बस अब नहीं मिलेगा.."
मोनू- (बुरा सा मुंह बना क) ऐसे थोड़ी होता है.. और आपने तोह कहा था आप मेरी..
सविता, मोनू की बात पे मुस्कुरा पड़ती है
"है मैं तेरी रखेल हु.. इसलिए तेरी ये रखेल अब तुझे दूध से ज्यादा अछि चीज़ चूसने को देगी.."
सविता की इस बात का पूरा असर मोनू क तने हुए लुंड पे नज़र आने लगता है
सविता अब पूरी सावधानी से अपना एक पेअर बिस्तर पे रखती है जिससे उसकी योनि की फाकें पूरी खुल जाती है और मोनू को एक गदराई औरत क अंदर की असली जवानी नज़र आती है, जो उम्र बढ़ने क साथ साथ और जवान होती जाती है.. फिर सविता धीरे से बिस्तर पे चढ़ जाती है और अब वो ऐसे कड़ी थी की उसके दोनों पेअर बिस्तर पे लेते हुए मोनू क दोनों और थे और उसकी गीली रास टपकती योनि ठीक मोनू क तने हुए लुंड क ऊपर अपनी इज्जत उठवाने को तैयार थी
अपनी गदराई 'बड़ी माँ' को ऐसे पूर्ण नंगी हालत में अपने ऊपर खड़ा देख मोनू का हाल किया था, ये में समझा भी नहीं सकता, पर उसका लुंड जैसे झटके खा रहा था उससे तोह यही लग रहा था की काश बड़ी माँ जोर से उछाल क उसके लुंड पे गिर पड़े
सविता धीरे से थोड़ा आगे की और सरकती है और फिर अपना संतुलन बनाए हुए धीरे धीरे मोनू क ऊपर बैठने लगती है पर अब उसकी गीली छूट मोनू क तने हुए लुंड क ऊपर नहीं उसकी नाभि क ऊपर थी.. और जल्दी hi सत्तू की गरम माँ अपनी जलती हुई गीली योनि को मोनू की नाभि पे रख क बैठ जाती है
"Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh… Badddddddiiiiiiiiiiiii… माआआआ"
मोनू की इस कामुक सिसकारी का कारन था, उसकी नाभि को महसूस होने वाली वो गर्माहट जो उसे पागल कर रही थी, उसे तोह ये भी लगता है जैसे उसकी गहरी नाभि में उसकी बड़ी माँ की योनि से बहने वाला कॉमर्स भर रहा हो.. और इसीलिए मोनू अपने दोनों हाथों को उठा क अपनी गदराई बड़ी माँ की बड़ी बड़ी चूचियों को जकड़ने की कोषसिंह करता है, पर सविता बीच में hi उसके हाथों को पकड़ लेती है और मुस्कुराते हुए कहती है
"कहा न.. आज सब कुछ तेरी ये रैंड करेगी.."
और ये कहते हुए अपनी कमर को धीरे से आगे पीछे करते हुए अपनी खुली योनि को अपने जवान भतीजे की नाभि पे रगड़ते हुए धीरे धीरे ऊपर की और सरक रही थी, और ऐसा करने क कारन उसे काफी ज्यादा झुकना पद रहा था जिस कारन उसकी बड़ी बड़ी चूचिया भी हलकी लटक क मोनू क पेट से रगड़ रही थी.. अब ये दोहरा हमला सहना हर किसी क बस की बात कहा और ऐसी कारणवस मोनू क लुंड से कॉमर्स की और ज्यादा हलकी बूंदें उसके मोठे लाल सुपडे पे नज़र आणि सुरु हो जाती है
"Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh.. बड़ी Maaaaaaaaaaaaaaaaa…. आप सच में असली चिनार हो……… ufffffffffffff…."
अपने जवान भतीजे क मुंह से ऐसी कामुक तारीफ पाके सविता का जिस्म और ख़ुशी से झूम उठा था इसलिए वो अब दोनों हाथों को अपने भतीजे क सीने पे जमा लेती और पूरी तरह झुक क अपनी बड़ी बड़ी चूचियों क काले जामुन सामान निप्पल्स और अपनी गीली रास चोरटी योनि को मोनू क जिस्म पे रादगति हुई ऊपर की और बढ़ने लगती है
सविता- (अपनी कामुकता का परचम लहराती हुई) आआआअह्ह्ह्हह.. अब बता कैसी लगी तुझे तेरी ये रखेल.. आआआअह्ह
मोनू- (अपनी बड़ी माँ की बड़ी बड़ी चूचियों का छुवन और योनि की रगड़ से कामुकता की गहरी खाई में गिरते हुए अपनी आँखों को बंद कर चूक था) Aaaaaaaaaaaahhhh.. बहुत मस्त है मेरी रखेल…. हीी.. मेरी रैंड.. Uffffffffff…. कितना तड़पती हो अपपपप.. Aaaaaaaaaaaahhhh..
जहा कुछ दिएर पहले मोनू अपनी बड़ी माँ को रैंड, रखेल जैसे कामुक शब्दों से सम्बोधित करने से दर रहा था, वही अब धीरे धीरे ये सब सविता की दूसरी पहचान बनते जा रहे थे
सविता जोर जोर से अपनी योनि को मोनू क पेट और अब उसके सीने पे रगड़ते हुए इतना ऊपर आ चुकी थी की मोनू को उनकी योनि की कामुक खुसबू आणि सुरु हो चुकी थी.. इसलिए वो धीरे से अपनी आँखों को खोलता है तोह उसके सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ थी.. एक गदराई औरत की 'बुर'
"आआआआअह्ह्ह.. Saalliiiiiiiiiiiiii.. चिनार.. कितनी मस्त खुसबू आ रही है.. आपकी छूट सी……. Aaaaaaaaaaaaaahhhh"
मोनू अब धीरे धीरे खुलने लगा था, और नए नए शब्दों से अपनी बड़ी माँ को सम्भोधित करने लगा था
सविता- (आज कुछ अलग और नया करते हुए अपने जवान भतीजे क लुंड को बेताब करते हुए) आआआआअह्ह्ह.. यही तोह वो असली चीज़ है तोह तुझे अपनी इस रखेल.. अपनी रैंड.. अपनी कुटिया.. की चुसनी है.. Aaaaaaaaaahhhhh.. बता चूसेगा न.. आआआआअह्ह्ह
मोनू जो अब कामुकता क बहुपस में पूरी तरह बांध चूका था, और अब वो कुछ भी करने को पूरी तरह तैयार था.. और यहाँ बात तोह एक गदराई औरत की योनि चूसने की थी, कोई पागल hi होगा जो मन करेगा
"ऐसे.. तोह मैं पुरे जीवन भर चूस सकता हु.. आआआआअह्ह"
मोनू की इस बात ने सविता की योनि को और गीला कर दिया था पर वो कुछ कहती नहीं बस मुस्कुराते हुए इस बार पूरी तरह ऊपर की और हलकी सी उठ जाती है और मोनू क सीने से ऊपर की तरफ खिसकते हुए अपनी गीली गदराई छूट को कुंदन क जवान बेटे क मुंह क ऊपर रख देती है
"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh… Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa……………. Monuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu…."
जैसे hi सविता ये क्रिया करती है, उसे अपनी गीली योनि क होंठों पे उसके जवान भतीजे क होंठ महसूस होते है और असली स्वर्ग का द्वार नज़र आता है, ककी इस एक पल क लिए उसकी आँखें भी बंद हो जाती है
मोनू भी समय नस्ट नहीं करता और सत्यम की माँ की योनि से प्रेम करना सुरु कर देता है और जैसे hi पहेली बार उसकी जीभ सत्यम और सत्तू की जन्मभूमि को चुटी है सविता की आठ फिर से फुट पड़ती है
"Aaaaaaaaaahhhhh....... ेस्स्स्सह्ह्ह्ह.... माआआआ.... हैईईईई"
वही अपनी जीभ की शक्ति प्रदशन देख क मोनू का लुंड भी जोरो से हिलते हुए अपनी ख़ुशी की सुचना दे देता है.. मोनू अपने मुंह क ऊपर अपनी गीली छूट लेके बैठ चुकी अपनी बड़ी माँ की गहरी योनि की फाकों को फैलते हुए अपनी जीभ को उस कामुक गलियारे में घुसते हुए जोर से अपनी जीभ किसी कुत्ते की तरह चलना सुरु कर देता है
"Sssssssssslllllllllllllllllllllllllllluuuuuuuurrrrrrrrrrppppppppp……… Sssssssssllllllllllllllluuuuuuuuuuuppppppppppppp…….. Sssssssrrrrrrrrrrrrppppppppppp… Slllllllllllllluuuuuuuuuuuuppppppppppp…."
सविता ऐसे एक जवान लड़के की जीभ को अपनी योनि की गहराई तक घुसने से मिलने वाले आनंद से पूरी की पूरी पागल हो उठती है
"Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh.. Kamineeeeeeeeeeeeee… uffffffffffffffffff… Haiiiiiiiiiiiiiiiiiii…Maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.. Aaaaaaaaaaaaahhh… haiiiiiiiiiiiii.. ऐसे……… ऐसईईईई…. ऐसे hi chussssssssss…. Aaaaaaaaaaahhhh… खा जा अपनी बड़ी माँ की योनि को……. Aaaaaaaaaahhhh…. Maaaaaaaaaaaaaaaa"
मोनू ऐसी हालत में तोह नहीं था की वो कुछ भी बोल पाटा ककी उसकी लम्बी लपलपाती हुई जीभ 'मुरली दस' की 'बड़ी बहु' की गहरी योनि में पूरी अंदर घुसी हुई अपना कामुक खेल दिखा रही थी.. वैसे यहाँ अंदर कमरे में अंगीठी की लाल रौशनी में सविता की हवस से भरी हुई कामुक सिसकारियां जितनी तेज़ हो रही थी.. बहार बारिश का शोर भी उतना hi बढ़ता जा रहा था, मानो सुंदरपुर की इस वर्षा ने भी तय कर लिया था की वो खेल का राज़ इस कमरे से बहार नहीं जाने देगी
देखते hi देखते अगले कुछ पलों क अंदर ये खेल इतना कामुक हो चूका था की 2 जवान बच्चों की माँ भी अपनी योनि क गाड़े रास को टपकने से खुद को रोक नहीं प् रही थी.. मानो आज सच में वो एक रैंड या रखेल बनने की अपनी बात को पूर्ण सत्य साबित करने पे उतारू हो चुकी थी..
"आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. कहाआआआ.. Jaaaaaaaaaa.. कुटटटटटटटटी…. Aaaaaaaaaahhhhhhh.. खा जा मेरी छूट को……… Aaaaaaaaaaaaaahhhhh… Maaaaaaaaaaaaaa…. आआआआअह्ह्ह… ufffffffffffffff… कितनी खुरदुरी जीभ है तेरी……. Aaaaaaaaaaaaahhh…….. Maaaaaaaaaaaaa… खा jaaaaaaaaaaaaa…. मेरी योनि को………. Aaaaaaaaaaaaahhh… ufffffffffffffffff…. कामिनी मालती ने बड़ा ताकतवाला दूध पिलाया है.. तुझे.. Aaaaaaaaaahhhh.. तू तोह सच में तेरी छूट खा hi जाएगाआआआआ…….. आआआआहहह……….. Maaaaaaaaaaaaaa…"
महेंद्र क घर क अंदर का ये गन्दा पर कामुक खेल ऐसा सुरु हो चूका था की.. सविता अपनी आअह्ह्ह्ह और कामुक सिसकारियों को रोक नहीं प् रही थी.. वैसे भी मोनू की जीभ कुछ ऐसे कार्य करते हुए अंदर तक प्रवेश करती की सविता आआअह्ह्ह भरते हुए कुछ इंच ऊपर उठ जा रही थी और उनके अंदर की हवस कामुक शब्दों का रूप लेके बहार आती
"आआआआअह्ह्ह्ह.... Maaaaaaaaaaaaaaa… कुटटटटटीईईई…. Aaaaaaaaaaaaahhhhhh… कमीनेईईईई… आआआआहहहहह… कितना अंदर तक घुसायेगा अपनी जीभ.. Aaaaaaaaaaaahhhhh… स्स्स्सस्शह्ह्ह... माआआआ.... हैईईई"
सविता, मोनू की कामुक हरकत से खुद को सँभालने की पूर्ण कोशिश करते हुए बीच बीच में अपनी गांड को जोर से मोनू क मुंह पे पूरी तरह दबा देती.. जिससे उसकी भरी भरकम गांड क दोनों पाटों क बीच मोनू का मुंह एक पल क लिए पूरी तरह चुप सा जाता.. पर वो उतने में hi नहीं रूकती, वो जोर जोर से अपनी गांड को मोनू क मुंह पे घूमते हुए रगड़ भी दे रही थी
"Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh… लेईईईई… कहाआआआ.. लीईईई… kutttteeeeeeeeeeeee…. खा ले……… मेरी छूट… गांड भी खा ले कुत्त्तीीी… पि जा मेरे मुठ…. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh"
मोनू भी अपनी बड़ी भरी भरकम गदराई भैंस जैसी बड़ी माँ की योनि को चूसते हुए जब जोर से अपनी जीभ को नुकीला करके अंदर घुसता तोह सविता कामुकता क चलते ऐसे उछाल पड़ती मानो जैसे एक पल क लिए वो हवा में उड़ने लगी हो.. पर वो भी एक गदराई गाओं की देसी औरत थी जिसके लिए न जाने मोनू जैसे कितने लड़कों ने मुठ मार मार क अपने लुंड को सुजय होगा.. इसलिए वो ऐसा होने पे तुरंत hi अपनी कमान वापस से संभालती और जोर से अपनी छूट को कुंदन क जवान बेटे क मुंह पे रख क कसके रगड़ना सुरु कर देती है.. और मुस्कुरा क कहती है
"छूट चाटेगा अपनी रखेल की.. ये ले.. .और ली… आआआह्ह्ह्ह… खा… खा ले… ये लिए… कुट्ट्टीीीे… खा जा अपनी बड़ी माँ की बड़ी छूट को… देख कितना रास भरा है तेरी इस चिनार बड़ी माँ की छूट में… Aaaaaaaaaaahhhhh…."
महेंद्र क घर में घनघोर वर्षा क बीच ये कामुक खेल धीरे धीरे और गहराता जा रहा था.. मानो असली वर्षा तोह आज 'सुरीली देवी' की बड़ी बहु की योनि से होनी हो
मोनू का मन तोह वैसे था की वो अपनी बड़ी माँ की हिलोरे कहती बड़ी बड़ी चूचियों को जोर से अपनी हथेली क बीच भर ले, और उन्हें ऐसे मसल दे की उनका दूध निकलना सुरु हो जाये.. पर वो अपनी इस नयी रखेल का आदेश मान रहा था की आज जो करेगी वो खुद करेगी
पर उसकी जवान खुरदुरी और नुकीली जीभ इस समय सत्यम की माँ की योनि की गहराई मैं घुस क अपना पूरा जादू दिखने से पीछे नहीं रह रही थी
"उम्मम्मम्मम... सललललररररररपपपप..... सररररलललपपपपप..... Srrrrrrrrrrrrrrrr......... सललललररररररपपपप.... उम्मम्मम्मम.... Laaaaalllpppppp...srrrrlllpp.. सररररलललपपपपप... आआआहहहहह"
सविता कामुकता की अधिकता क चलते हुए खुद hi अपनी दोनों बड़ी बड़ी दुधारू चूचियों को जोर से अपने hi हाथों से बेहरहमी से दबोच लेती है और ऐसे उनका मर्दन करने लगती है जैसे किसी भी पल उसके निप्पल्स से दूध की धरा बह उठाएगी
"आआअह्हह्ह्ह्ह..... Haiiiiiiiiiiiii.. reeeeeeeeeee… मोनू…………. kuttttttttttteeeeeeeeeee… Aaaaaaaaaaaaahhhh.. Aiseeeeeeeeeeeeee.. Hiiiiiiiiiiiiii… uffffffffffffff… Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… ेस्शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.... मेरी छूट का पूरा रास चूस ले कुट्टी…… चूस ले अपनी इस चिनार की छूट का गाड़ा कॉमर्स… आआअह्हह्ह्ह्ह… मेरी जैसी कुटिया चिनार तुझे पूरी दुनिया में नहीं मिलेगी… आआआआहहहहह… खा जा मेरी योनि को…… आआआहहह"
मोनू भी बड़ी बड़ी चूचियों वाली बड़ी माँ की ऐसी गन्दी पर कामुक बातों से और ज्यादा पागल होता जा रहा था.. इसलिए वो बिना समय व्यर्थ किये और ज्यादा बेहरमी से 'सत्तू की माँ' की छूट चूसे जा रहा था
"सललललररररररपपपप.... सरररर.... लाहालललपपपपपप... लाहालललपपपपपप..... सररररलललपपपपप.... उम्मम्मम.... आआअह्ह्ह.... उम्मम्मम्मम... सररररलललपपपपप"
इस नए अनुभव से अनभिग मोनू इस खेल में धीरे धीरे पूर्ण निपूर्ण होता जा रहा था.. और ऐसा होता भी कैसे नहीं
जीवन की पहली छूट का आनंद उसे सेहर की कामुक 'अनोखी' ने दिया और फिर अपनी hi सगी माँ ‘मालती’ की योनि का छेद बड़ा करके उसने इस खेल में और अधिक निपुन्डा हासिल की और आज उसे इस खेल में माहिर बनाने का कार्य 'स्वर्गवासी मुरली दस' क घर की सबसे अनुभवी औरत सविता खुद कर रही थी
सविता अपने जवान भतीजे क मुंह पे अपनी योनि को फैलाये हुए बैठी हुई उसी हालत में hi अपना चेहरा घुमा क जब देखती है तोह उसे मोनू क तगड़ा लुंड नज़र आता है जो जोरो से हिलोरे खा रहा था.. और उसे देख क जो आग सविता क अंदर अचानक से बाद गयी थी उसके लिए मेरे पास शब्दों की पूर्ण कमी है, और ऐसा जवान लुंड जब एक गदराई औरत देखती है तोह उससे रुक पाना संभव नहीं हो पता है.. इसलिए वो अब मोनू को इस चिनार की चिनपन्ति दिखने का तय कर लेती है..
सविता धीरे से अपनी रास चोरटी छूट को मोनू क मुंह से उठती है तोह मोनू ऐसे लम्बी लम्बी साँसे लेने लगता है जैसे मानो उस वातावरण की अंतिम वायु बची हो, पर तब भी उसके चेहरा की मुस्कान और होंठों और चेहरे पे नज़र आने वाला सविता की योनि का कॉमर्स बता रहा था की उसे इस खेल में कितना मज़ा आया
सविता अपनी मोनू द्वारा जैम क चूसी गयी योनि को उसके मुंह से हटती है और उसी अवस्था मैं हल्का उठते हुए पूरा संतुलन बनाये रखे एक गदराई औरत की कामुकता का पूरा परचम लहराते हुए मोनू क नंगे सरीर क ऊपर अपनी योनि लहराते हुए आगे की और बढ़ती है साथ hi साथ मोनू क सरीर क ऊपर उसकी बड़ी माँ की योनि से टपकते हुए रास की कुछ बुँदे जब गिरती है तोह ऐसा प्रतीत होता है मानो मोमबत्ती की गरम मोम उसके जिस्म पे गिरायी जा रही हो.. अब ये नज़ारा कितना कामुक होगा ये आप सोच hi सकते है
सविता जब मोनू क खड़े लुंड क ऊपर पूरी तरह हवा में पहुंच जाती है, तोह मुस्कुराते हुए अपनी कामुक हसी की छठा बिखेरते हुए अपनी योनि की गीली दीवारों को मोनू क तने हुए लुंड क टोपे पे लगाती हुई उसे तड़पना सुरु कर देती है और उसकी आँखों में देखते हुए कहती है
"बता छोड़ेगा न अपनी रखेल को…"