Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running - Page 16 - SexBaba
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Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running

सुबह क करीब 10:15 हुए होंगे और अपने जवान बेटे को उठाने क बाद हर्षिता क जिस्म क अंदर काफी रंगीन तरंगे उठानी सुरु हो चुकी थी, वो मुस्कुराते हुए सीधा रसोईघर की और चल पड़ी थी.. जहा से उसे घर क पीछे वाले सालों से बंद कमरे की सफाई में मदद करने वाली शीला क लिए पीना का और नीचे की जमीन धुलने क लिए पानी लेके जाना था

पर अभी थोड़ी दिएर पहले अपनी बड़की भौजाई क साथ हुई कामुक वार्तालाप क कारन उसके दिन की कामुक सी सुरुवात हो चुकी थी.. और उन बातों क कारन उसके जिस्म क अंदर एक नयी कामुक खुजली सी उठ गयी थी, पर उस खुजली में अभी इतना दम नहीं था की वो उसकी योनि से कॉमर्स की धार बहा सकती

पर अगर आज सुबह हर्षिता क साथ सिर्फ इतना hi हुआ होता तोह बात अलग थी.. आज तोह जैसे इस घरघोर वर्षा क साथ साथ उसके कॉमर्स की वर्षा होनी भी तय थी, सायद इसीलिए जब हर्षिता अपनी बड़की भौजाई ‘सविता’ से हुई उस मस्तानी nauk-jhauk क बाद आगे बढ़ती है और छप्पर क नीचे सुबह क 10 बजने क बाद भी सोते हुए अपने जवान बेटे की रज़ाई खींचती है तोह जो चीज़ उसे सबसे पहले नज़र आती है वह था सोनू क पैरों क बीचे उसका फैन उठाये हुआ नाग..

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कुछ पलों क लिए तोह जैसे हर्षिता भूल hi गयी थी की आखिर वो यहाँ आयी क्यू थी.. वो तोह एक तुक बस अपने जवान बेटे की उठी हुई जवानी घूरे जा रही थी जिससे अनायास hi उसकी साड़ी क अंदर एक अजीब सी गर्मी का तापमान सा बढ़ने लगा था, मानो जैसे किसी भी पल उसकी साड़ी जो हलकी सी भीगी हुई थी उसमें आग की लपटे पकड़ लेंगी

हर्षिता न जाने ऐसे hi और कितनी दिएर अपने जवान बेटे का उठा हुआ फैन देखती रहती.. उसे न समय की परवा थी न सुरु हो चुकी उस घरघोर वर्षा की जो कभी धीमी होती तोह कभी अपनी पूर्ण ताकत क साथ वापस से बरसना सुरु हो जाती

वो तोह सुबह hi ठंडी हवा ने सोनू की नींद तोड़ने का कार्य कर दिया था.. और फिर उसके बाद किया हुआ ये तोह आप जानते hi है

अपने बेटे की जवानी को देखने क बाद हर्षिता सीधा रसोईघर में पहुंच चुकी थी जहा वो आते hi एक किनारे रखे हुए पानी क घड़े की और ऐसे लपकती है मानो ऐसी वर्षा ऋतू में भी उसके अंदर कही आग भड़क गयी हो, वो जल्दी से गिलास भर पानी नीलकलती है और वही खड़े खड़े गिलास उठा क पीना सुरु कर देती है

जहा एक और ठण्ड का प्रहार ऐसा था की लोगो की हटिया तक काँप जा रही थी, वही दूसरी और अपने जवान बेटे क जवान होने की निशानी देख क हर्षिता का मन मस्तिक उससे लड़ने पे उतारू होता जा रहा था.. जैसे जैसे ठंडा पानी हर्षिता क गले से होता हुआ उसके अंदर समां रहा था वैसे वैसे उसके अंदर की गर्मी भी हलकी सी भुजनि सुरु हो चुकी थी

पर आज का ये दिन इतनी आसानी से कहा पूर्ण होने वाला है.. जैसे की ये बात मैंने पहले भी कही है

हर्षिता इस समय घड़े क पास hi कड़ी हुई गिलास को ऊपर उठाये हुए पानी पिए जा रही थी, मानो न जाने कोनसी पियास थी जो भुज hi नहीं रही थी उस पानी से..

चलो कुछ पलों क लिए हर्षिता को यही पानी पाइक अपनी पियास भुजने की म्हणत करते हुए चोर क हम सविता की और चलते है.. और देखते है वह किया हो रहा है

अपनी छोटी देवरानी क साथ हुई कामुक nauk-jhauk क कारन सविता का दिल ख़ुशी से भरा हुआ था, वैसे भी उसका आज का दिन कुछ ज्यादा hi खास गुजर रहा था.. मानो जैसी आज की इस वर्षा में पानी नहीं अपितु सुंदरपुर गाओं में कामुकता का रास बरस रहा हो

सविता क दिन की सुरुवात स्नानघर क बहार आती हुई मालती की उन आवाज़ों से हुई जिसके कारन उसके अंदर एक आग उत्त्पन हो गयी.. जिसे उसने वह से सीधा बहार जेक छप्पर नीचे सोते हुए अपने जवान बेटे सत्यम क लुंड पे चढ़ क बुझाया वो भी अपने पति क समीप होते हुए

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पर जैसे की मैं बार बार कहता आ रहा हु.. आज का ये दिन काफी कुछ बदलने वाला है, वैसे ऊपर आपने पड़ा hi की कैसे रसोईघर से आते hi सविता की भेट उसकी देवरानी हर्षिता से होती है और कैसी बातें होती है.. आशा है वो आपको पसंद आया होगा

तोह चलिए अब आगे बढ़ते है और देखते है की जब हमारी भरी भरकम जिस्म वाली कामुक गदरायी भैंस जैसी सविता अंदर कमरे में प्रवेश करती है तोह आगे किया होता है..

हर्षिता से शरारती बातों क कारन सविता मुस्कुराते हुए अंदर कमरे में प्रव्रश करती है जहा उसके आगे बढ़ते हर एक कदम क साथ उसके उन्नत उरोज किसी मोठे ताज़े कबूतर जैसे कुछ ज्यादा hi हिलोरे खा रहे थे.. मानो जैसे किसी भी पल उसके ब्लाउज को पहाड़ क बहार आ जायेंगे और खुली हवा में उड़ना सुरु कर देंगे

सविता क लिए आज का ये दिन कुछ ज्यादा hi ाचा बीत रहा था

वैसे अगर अभी यहाँ मालती होती तोह सायद उसे अकेले इतना काम नहीं करने देती, पर इसमें भी उसकी hi गलती थी ककी उसने खुद hi शीला और हर्षिता को घर का पिछले कमरा जो सालों से बंद था उसे खोलने और साफ़ करने का आदेश दिया था.. और घर क बाकि बचे कामो को खुद अपने हिस्से में ले लिया

बाकि एक महिला hi ये जान सकती है की वर्षा ऋतू में उसका काम कितना ज्यादा बाद जाता है

सविता मुस्कुराते हुए अंदर प्रवेश करती जहा बारिश क कारन उसके हलके भीगे कपडे और खास करके उसका धीरे धीरे पारदर्शी होता हुआ ब्लाउज एक अलग hi कहानी कह रहा था.. जिसे कोई भी बड़े hi धियान से सुन्ना पसंद करेगा

सविता की बड़ी और भरी भरकम चूचिया जो आज भी मजबूती से उठान लिए हुई थी और पुरे गर्व से कड़ी थी वो इस समय बारिश की बूंदों क कारन हलकी सी नज़र आणि सुरु हो चुकी थी, वैसे उसके ब्लाउज क भीगने का एकलौता कारन बारिश का पानी नहीं अपितु बर्तन धुलते हुए पानी hi वो बंधे बी थी जो उसके जिस्म से खुद को अलग नहीं कर प् रही थी.. इन सभी करने की वजह से उसके हर एक कदम पे उसकी चूचियों उछलते हुए अपने गेहुआ रंग पे गर्व करने से खुद को रोक नहीं प् रही थी.. मानो जैसे उन्हें पता हो की वो किया क़यामत धने का दम रखती है

सविता की साड़ी अब भी उसकी कमर में पहले की hi भांति घुसी हुई थी, जिससे कारन उसका पल्लू पूरी तरह उसके एक मोठे उरोज को खासे हुए था, सीढ़ी सधी भाषा में कहु तोह सविता को देख क ऐसा लग रहा था मानो जैसे कोई देसी गर्दै भैंस बारिश की फुहार में मस्त आगे बाद रही हो.. सविता अब पूरी तरह उस कमरे में प्रवेश कर चुकी थी जहा वह क एकलौते बिस्तर पे हमारा जवान मोनू सुबह क 10 बजने क बाद भी आँखों को बंद किये हुए अपनी नींद पूरी कर रहा था

जहा एक तरफ बहार ठण्ड ने हड्डियों तक को हिला रखा था, ठंडी हवा क तेज़ झोंके बदन में सिरहन पैदा कर रहे थे.. वही दूसरी और यहाँ अंदर कमरे का वातावरण पूरी तरह अलग था.. बहार क ठाणे माहौल से बिलकुल विपरीत ठीक हमारी सविता की गरम योनि जैसा गरम


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और उसका कारन थी कमरे में खिड़की क पास राखी हुई वो अंगेठी, जिसे महेंद्र क आदेश पे सत्तू ने hi वह रखा था ताकि मोनू को किसी भी प्रकार की परेहनी न हो.. उस अंगेठी की गर्मी ने उस पूरे कमरे को एक मदहोश सी गर्माहट दे राखी थी, जिसके कारन वह पहुंचते hi सविता को ास्मीन रहत मिली, वैसे भी आप जानते hi है ठण्ड कैसी भी हो पर औरते मर्दो जैसे भरी भरकम कपडे पहनना पसंद नहीं करती

अंगेठी की लाल रौशनी पुरे कमरे में चाय हुई थी और ऐसा लग रहा था जैसे कमरे में कही से हलकी हलकी गरमाहट क साथ न मात्र की लाल रौशनी भी चाय हुई हो.. सविता एक लम्बी सी सांस लेती है और जब वो अपने मुंह से हवा को बहार करती है तोह उसके चेहरे क पास दुआ जैसे नज़र अत है, जिससे सविता क चेहरे पे ऐसी ख़ुशी खिल उठती है जैसे किसी बचे का हाल होता है अपने मुंह से पहली बार दुआ निकलते हुए देख क

सविता आगे बढ़ती है और ठीक अंगेठी क सामने कड़ी होती है.. जहा वो कुछ पलों तक उसकी गर्माहट में मानो खो सी जाती है, वैसे भी उसके हलके भीगे ब्लाउज और कपड़ों क कारन उसे कुछ ज्यादा hi ठण्ड महसूस हो रही थी.. पर उसने तय कर रखा था की सभी काम निपटने क बाद hi वो स्नान करेगी और कपडे बदलेगी

सविता झाड़ू को वही जमीन पे रखते हुए थोड़ा सा नीचे झुक क अपने दोनों हाथों को आगे करके उस अंगेठी क सामने करती है और उसकी गर्माहट महसूस करते हुए अपने दोनों हाथों को आपस में रैगर क मानो और गर्मी उत्पन्न करने का कार्य करती है..

फिर मुस्कुराते हुए बिस्तर की और उसका चेहरा घूमता है जहा उसे शांति से सोता हुए मोनू नज़र आता है, जिसके भोले चेहरे को देखते हुए सविता मानो कुछ पलों क लिए उसमें कही खो सी जाती है पर तभी हवा का एक झोंका अंगेठी क ऊपर वाली खिड़की को हिला क उसे वास्तविकता में वापस ले आता है

वैसे अगर में मोनू की बात करू तोह वो इस समय शांति से बिस्तर पे गहरी नींद में लीं था.. जहा वो भरी रज़ाई उसके चेहरे तक छड़ी हुई थी, वैसे तोह आपको याद hi होगा की दिन की सुरुवात मोनू क जागने से हुई थी पर अभी करीब 1 जानते पहले hi उसने नास्ता किया था और उसके उपरांत खुद शीला ने उसे त्यागी जी द्वारा दी हुई जड़ी बूटी से बना हुआ वो कड़वा काढ़ा पिलाया था.. जिसे पीते hi मोनू की आँखें भोजील सी होने लगी थी और अब इस समय वो पूर्ण गहरी नींद में सोया हुआ पड़ा है

सविता एक पल क लिए मोनू को एक माँ की ममता भरी नज़रों से देखती है और फिर मुस्कुरा क अपनी साड़ी क पल्लू को एक बार फिर से अपनी कमर में अचे से घुसा लेती है ताकि वो निकल क उसके बड़े गले से नज़र आती उसकी इज्जत को खुला न चोर दे.. बाकि तोह आप खुद hi जानते है की सविता की इज्जत कितनी बड़ी और भरी है


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और फिर किया था.. लग पड़ी सत्तू की माँ अपने कार्य में.. यानि उस कमरे सी साफ़ सफाई में

सविता कभी झुक क झाड़ू लगाती तोह कभी पूरी तरह बैठ जाती और सफाई करने लगती.. अंगेठी की तेज आग ने पुरे कमरे को कुछ ज्यादा hi गरम किया हुआ था, और सायद ऐसी कारन लगातार म्हणत करती हुई हमारी सविता क चेहरे पे अब धीरे धीरे पसीने की नन्ही मोती सामान बुँदे नज़र आणि सुरु हो चुकी थी.. पर ये बुँदे उसकी खूबसूरती को कई गुना बड़ा रही थी

सविता इस समय एक ग्रहणी क रूप में बड़ी की कामुक प्रतीत हो रही थी, वो जब झुक क झाड़ू लगाती तोह उसकी साड़ी उसकी गांड से ऐसे काश जाती की एक पल क लिए तोह दर लगता की कही वो साड़ी पीछे से पहात न जाये.. वैसे अगर ऐसा कुछ होता भी तोह इस समय वह जो देख सकता था वो गहरी नींद में खोया हुआ था

सविता क माथे पे आयी हुई नन्ही बंधे बेह्त्ते हुए जब उसके खूबसूरत चेहरे से बह कर आगे बढ़ती और उसके बड़े गले वाले ब्लाउज से पूरी तरह खुली हुई घाटी में सामने लगती तोह वो किया hi कामुक नज़ारा बनता.. ये मैं समझा भी नहीं सकता

जल्दी hi हमारी कामुक सविता की म्हणत रंग लाती है और जो कमरा उसके आने पे पूरी तरह ast-vyast और गन्दा था वो अब पूरी तरह खिल चूका था.. ये एक ऐसा जादू है तोह सिर्फ एक ग्रहणी hi जानती है

पर इन सब क कारन वो खासा थक भी गयी थी और अब बुरी तरह लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी, वैसे भी इस बारिश ने उसका काम कई गुना बड़ा रखा था

अंगेठी की गर्मी जहा पुरे कमरे को गरम बनाये हुए थी.. वही उसकी गरमाहट भरी रौशनी जब उसके चेहरे पे पड़ती तोह उसके चेहरे और माथे की पसीने की बंधे किसी मोती सामान चमक उठती.. वही इतनी दिएर से म्हणत और बहते पसीने क कारन उसका ब्लाउज अब पहले से ज्यादा गीला महसूस हो रहा था और खास करके उसकी चूचियों क बीच की घाटी पे तोह कुछ ज्यादा hi पसीने की बुँदे नज़र आ रही थी, मानो जैसे वो बंधे वह से आगे जाना hi न च रही हो

लगभग पूरा कमरा साफ़ हो चूका था, अब बस मोनू क बिस्तर क नीचे वाला हिस्से hi बचा था.. इसलिए सविता और समय नस्ट न करते हुए उसके लिए आगे बढ़ती है

सविता बिस्तर क ठीक पास पहुंच क घुटनो क बल बैठ जाती है और अपना हाथ आगे बड़ा क झाड़ू बिस्तर क नीचे जहा तक पहुंच प् रहा था वह तक की सफाई में मग्न सी हो जाती है, पर उसके ऐसे बैठने क कारन उसकी badi-badi दुधारू चूचियां उसके घुटनो से बार बार टकरा रही थी और ब्लाउज तोह पहले से hi इतना कैसा हुआ था, उसपे बार बार उसकी लगनी वाली ठोकर क कारन अब हाल कुछ ऐसा था की मानो किसी भी पल उसकी कोई एक चुकी बहार निकल पड़ेगी

और अभी तोह ऐसा हाल था मानो जैसे दोनों चूचियों में हौद लगी हो की कोण पहले बहार आएगी

सविता जब बिस्तर क और नीचे सफाई क लिए और ज्यादा झुकती है तोह उसके कैसा हुए ब्लाउज को देख क लगता जैसे किसी भी पल उसकी सिलाई खुल जाएगी, सविता क भरी भरकम दूध उसके इतना झुकने पे लगभग पुरे hi बहार नज़र आने लग रहे थे.. यहाँ तक कई बार तोह उसके घुटनो से उसकी बड़ी चुकी जब टकराती तोह उसकी कोई एक चुकी इतनी बहार नज़र आने लगती की उसकी काली घुंटी यानि जामुन जैसे निप्पल्स का आधा हिस्सा तक नज़र आना सुरु हो जाता

ये तोह खालिद क बाप की सिलाई का झाड़ू था, जो अब तक ऐसी भरी भरी चूचियों को आज़ाद होने से रोके हुए थे.. सविता पूरी तरह थक चुकी थी इसलिए काम पूरा होते hi वही उसी जगह अपने दोनों पैरों को फैला क बैठ जाती है और अंगेठी से आती हुई गर्माहट का आनंद लेने लगती है

वो अपने पल्लू से अपने चेहरे का पसीना पॉच hi रही की तभी उसे बिस्तर पे हलकी सी हरकत महसूस होती है और बिना समय गवाए जब वो अपना चेहरा ऊपर उठती है तोह उसे वह पहले से hi वो 2 आँखें एकटुक उसके यौवन पे तिकी हुई नज़र आती है

वैसे अब ये तोह जान hi गए होंगे की इन आँखों का मालिक कोण है.. वैसे मोनू तोह अपनी सी सुध में खोया हुआ गहरी नीड में पड़ा था की तभी उसे महसूस हुआ की बार बार उसका बिस्तर हिल रहा है.. असल में सविता बिस्तर क नीचे जादू लगते समय अपना एक हाथ बिस्तर पे जमाये हुए थी ताकि और गहराई तक झाड़ू पाउच सके और उसी कारन बार बार बिस्तर हिलने लगा था जिसने मेरी (मोनू) की नींद चीन ली थी

पर जैसे hi मेरी आँखें खुली है सामने था ये कामुक नज़ारा, बड़ी माँ ठीक मेरे बिस्तर क पास बैठी हुई एक हाथ बिस्तर पे जमाये हुए आधी से ज्यादा बिस्तर क नीचे घुसी हुई थी पर जो चीज़ बहार नज़र आ रही थी.. मेरी आँखें तोह वही अटक गयी थी, ककी उस समय तक वो पल्लू हैट चूका था जिसका काम उस यौवन को छुपाना था


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कंटिन्यू.. 👇
 
वापस सविता पे चलते है..



सविता अपना चेहरा उठती है तोह उसे एकटुक उसके ब्लाउज की घाटी से नज़र आती उसकी बड़ी बड़ी आधी से ज्यादा नंगी हो चुकी चूचियों पे उसके बेटे सामान भतीजे की नज़रें जमी हुई मिलती है.. एक गर्दै औरत को कोई जवान लड़का ऐसे देखेगा तोह उसकी योनि तोह भागवत का बिगुल बजाएगी hi न

सविता अब मोनू को देख रही थी, जहा वो अब भी किसी बचे सामान एकटुक अपनी बड़ी माँ की बड़ी बड़ी चूचियों को ऐसे देख रहा था मानो जैसे उसे उसका पसंदीदा खिलौना दिख गया हो.. जिससे वो पुरे जीवन भर खेलना पसंद करेगा

पसीने से चमकती हुई भरी और बड़ी बड़ी लगभग आधी से ज्यादा नज़र आती उन चूचियों ने मोनू क अस्तित्व को हिला दिया था, जिसका असर रज़ाई में एक बड़ा सा धीरे धीरे बनता हुआ वो तम्बू था जिसके बारे में पक्के तौर पे लिख सकता हु खुद मोनू भी नहीं जनता होगा

मोनू तोह एकटुक अपनी दोनों आँखों को फैलये हुए बस उस कामुक नज़रिये में खोया हुआ था.. उसका मुंह ऐसे खुला हुआ था मानो उसका बस चले तोह उन चूचियों को अपने मुंह में भर ले

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सविता क जिस्म में अजीब सी गर्मी भरने लगी थी मोनू की उस नज़रों क कारन.. उसे ऐसा महसूस होता है जैसे उसके बदन में चीटिया चलने लगी और उसे अजीब सी कस्मकस महसूस होती है.. पर वो अपना काबू बनाये रखती है और मुस्कुरा क कहती है

“उठ गया मेरा बचा..”

मोनू को तोह जैसे झटका लगा, वो छह तोह रहा था.. पर छह क भी उसकी आँखें उस नज़ारे को देखने से खुद को रोक नहीं प् रही थी.. और यही चीज़ सविता क दिल की धड़कन को तेज़ करने लगी थी

सविता- (न जाने क्यू उसका गाला सूखने लगा था) किया हुआ मोनू.. किया देख रहा है?

सविता ने ये देखने वाली बात बहुत hi धीमी आवाज़ में कही थी, मानो जैसे वो च hi नहीं रही थी की मोनू वो सुने.. पर मोनू जवाब देता है ककी इस बार उसे होश ात है..

“दूध…..”

सविता एक पल क लिए समझ नहीं पाती वो किया बोले, ककी कही न कही एक जवान लड़के से ये सब्द सुनकर उसे ाचा तोह लगा था

मोनू जल्दी से अपनी गलती को सुधरे की कोशिश करता है

“मेरा मतलब की दूध.. नहीं वो.. मैं कह रहा था की वो.. दूध.. नहीं नहीं नहीं वो.. दूध”

सविता मोनू को ऐसे हकलाते हुए देख क अपनी ख़ुशी और हसी छुपा नहीं पाती और है पड़ती है, वैसे भी एक जवान लड़का इस उम्र में भी अगर उसकी जवानी क चलते अपने सब्दो पे काबू न रख पाए तोह इसका तोह यही मतलब हुआ न.. की उसकी जवानी ढलने की जगह और निखार रही है

सविता- (हस्ते हुए) किया दूध.. दूध लगा रखा, कही पीना तोह नहीं है न

मोनू- (अब भी अपने पैरों क बीचे खड़े हो चुके उस भयंकर नाग क बारे में नहीं जनता था) जी… बड़ी.. मा… दूध पीना है.. आपका.. मेरा मतलब वो की..

सविता- (बीच में hi बोल पड़ती है) पर पीना किसे है.. तुझे या... ?

अपनी आँखों से इशारे करते हुए मोनू को उसके खड़े हतियार क बारे में बता hi देती, जिसका ज्ञान होते hi मोनू जल्दी से रज़ाई को ऐसे उस जगह पे खींचता है की वो बड़ा सा तम्बू नज़र आना बंद हो जाये.. पर न जाने कैसे आज कल उसका वो तम्बू पहले से शाक्त होता जा रहा था

सविता- (अपनी हसी छुपाते हुए आगे कहती है) ाचा फिर रुक मैं तेरे लिए हल्दी वाला दूध ले आती हु

मोनू- (उसे खुद नहीं पता चलता की कैसे वो सब्द उसके मुंह से निकल पड़े) किसका दूध होगा.. ?

पर जब तक उसे अपनी गलती का एहसास होता है, उसे सविता क सब्द अपने कानो में सुनाई पद जाते है

“अब मालती तोह है नहीं यहाँ.. तोह मेरा hi.. मेरा मतलब गाय का hi होगा न”

मोनू को सविता क शब्दों में एक रास सा नज़र आता है और अब तक वो खुद पे भी काबू प् चूका था.. इसलिए धीरे से मुस्कुरा क कहता है

“माँ नहीं है तोह किया हुआ.. आप भी तोह मेरी बड़ी माँ हो”

सविता क चेहरे पे मुस्कान खिल उठती है, और मुस्कुरा क कहती है

“है पर अब जैसे तेरी माँ पीला सकती है.. वैसे तोह नहीं पीला सकती न में

इसलिए जब तक मालती नहीं आ जाती, तुझी गाय क दूध से की काम चलना पड़ेगा”

मोनू 'सविता' की बिना पल्लू वाली चूचियों की घाटी को एकटुक देखते हुए मुस्कुरा क कहता है

“त्यागी चाचा ने कहा था.. मुझे ताक़त क लिए सुध चीज़े hi कहानी चाहिए, अब गाय वाले दूध में मिलावट निकली तोह

मुझे तोह ऐसी हालत में ताक़त वाला hi दूध चाहिए”

सविता, मोनू की अब भी जमी हुई नज़रों और उसके शब्दों को सुनकर मुस्कुरा क कहती है

“बस कर… खा hi जायेगा क्या?”

जिसे सुनकर मोनू क मुँह से अनायास hi निकल पड़ता है

“ये तोह पीने की चीज़ है…”

सविता ने मुस्कुराते हुए झूठा सा ग़ुस्सा दिखते हुए कहा

“क्या कहा?”

वैसे वो अब भी ठीक उसी अवस्था में बिस्तर क ठीक सामने नीचे जमीन पे बैठी हुई थी, और वो अपने गिर चुके पल्लू को वापस से सँभालने की तनिक भी चैस्ता नहीं कर रही थी

मोनू को एहसास होता है की कही वो कुछ ज्यादा hi तोह नहीं बोल गया है, वैसे ये सायद एक प्रकार से सम्मान hi था.. वर्ण ऐसे तोह सविता उसके ाँद तक चूस चुकी है

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रिफरेन्स - Part #01 👇

अपडेट #22 - पेज No. 154 - बड़ी माँ... मेरा निकलने वाला है
)

मोनू जल्दी से बिगड़ती हुई बात को सँभालते हुए

“दूध… दूध.. मेरा मतलब वो अगर दूध मिल जाता तोह सही होता न बड़ी माँ

मैंने सुना है दूध पीने से ताक़त आती है… बस वो बिना मालावत का होना चाहिए”

मोनू अपनी बात तोह सुधरता है पर उसके खड़े लुंड का किया जो उस रज़ाई में तम्बू बनाये हुए था, इसलिए उसके सब्द एक बार फिर से अपना रास्ता साड़ी क अंदर जाने वाले मूड पे मुद hi जाता है

सविता को भी इन बातों में पूर्ण रास मिलने लगा था, सायद इसीलिए उसकी साड़ी क अंदर कामुक नदी का बहाव दिखने लगा था

“ाचा बिना मिलावट का… चाहिए”

मोनू को यकीन हो गया था की उसकी बड़ी माँ उसकी बात का बुरा नहीं मान रही है, इसलिए वो पूर्ण शरारत से आगे कहता है

“हाँ… बिना मिलावट वाला होगा तोह ज़्यादा ाचा रहेगा…

वो किया है की.. अभी कमजोरी ज़्यादा है तोह..”

सविता मुस्कुराते हुए अपने दोनों हाथों को पीछे जमीन पे तीखाते हुए अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को और ऊपर की और उठाये हुए अपने पैरों को फैला देती है.. जिस कारन उसकी साड़ी उसके गेहुआ रंग क कामुक घुटनो तक ऊपर सरक जाती है, अब नज़ारा hi सामने का कुछ ऐसा था की बेचारे मोनू की रज़ाई में उसका हतियार जोरो से भूकंप लाने लगता है

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सविता की पारखी नज़रें भी उस तम्बू क होते हुए देख लेती है, इसलिए वो मुस्कुरा क अपनी नज़रों को वही टिकते हुए कहती है

“देख क तोह नहीं लग रहा है.. की कोई कमजोरी है?”

मोनू को समझते दिएर नहीं लगता की उसकी बड़ी माँ किया देख रही है.. और कोनसी कमजोरी की बात कर रही है, वो खुद hi अपने पैरों को और अचे से फैला देता है जिससे उसका वो तम्बू कुछ ज्यादा hi बड़ा नज़र आने लगता है, जिसे देख क एक पल क लिए तोह सविता को ऐसा लगता है की कही उसके पैरों क बीच उसकी काली घटाओं में वर्षा ऋतू का आगमन न हो जाये

मोनू भी वैसे अपने हतियार की इस नयी ताक़त से थोड़ा हैरान hi था, ककी आज से पहले वो कभी इतना परेशां नहीं करता था.. जितना की अब उसके होश में आने क बाद उसे कर रहा है

मोनू अपने ताऊ जी की पत्नी और अपनी बड़ी माँ की माशल जांघों की और ऐसे देखता है मानो प्राथना कर रहा हो की एक हवा का झोंका आये और वो साड़ी पूर्ण ऊपर तक उठ जाये

“आपके सामने तोह ache-ache कमज़ोर पद जाते है... बड़ी माँ… “

मोनू मुस्कुराते हुए आगे कहता है, और फिर अपनी बड़ी क उस अनोखे तरह से बैठने क कारन उसकी बड़ी बड़ी चूचिया जो मानो बस ब्लाउज को पहाड़ देना च रही हो उनकी और देखते हुए आगे कहता है

“इसलिए अगर बिना मिलावट वाला दूध पिऊंगा तोह कमजोरी जल्दी जाएगी, और अगर आपको मेरी जौरात पड़ी तोह मैं कमजोर भी नहीं पडूंगा”

सविता मुस्कुराते हुए अपने दोनों हाथों को जमीन पे टिकाये हुए अपने सीने को और ऊपर की और तान देती है और मुस्कुरा क कहती है

“तुझे देख क लग तोह नहीं रहा है.. की तू जरा भी कमजोर पड़ने वाला है”

मोनू- (मुस्कुराते हुए) है वो तोह है.. पर पहले से तैयारी जरुरी है न..”

सविता, मोनू की बात पे मुस्कुराये बिना नहीं रह पाती

“बातें तोह तेरी ठीक हैं वैसे…

पर अब गाओं में बिना मिलावट का दूध मिलना इतना आसान कहा……. बीटा”

सविता अपनी बात कहते हुए, बीटा सब्द पे ज्यादा hi जोर देती है और फिर आगे कहती है

“वैसे मालती जानती होगी.. की बिना मिलावट वाला दूध कहा मिल सकता है”

मोनू अपनी माँ का नाम आने पे भी पीछे नहीं रहता और मुस्कुरा क कहता है

“अब माँ को तोह समय लग जायेगा, मौसम भी तोह कितना गीला गीला hai..hai न.. बड़ी माँ”

मोनू क शब्दों में आया गीला सब्द सुनकर सविता को एक पल क लिए ऐसा लगता है जैसे वो सच में उसकी साड़ी क अंदर उसकी गीली होती हुई योनि को देख प् रहा हो

“बात तोह तेरी ठीक है.. और दूध भी तेरा पीना जरुरी है”

सविता हस्ते हुए कहती है, जिसपे मोनू टपक से बोल उठता है

“बिना मालावत वाला बड़ी माँ.. उसी में तोह ताक़त होती है"

सविता मोनू की बात सुनार एक अंगदी सी जेटी है जिससे के पल को तोह ब्लाउज इतना कास सा जाता है जैसे लगता है बस पहात hi जायेगा, पर मोनू की किस्मत इतनी अछि भी कहा.. पर वो नज़ारा ऐसा था की उस पल क लिए मालती का बीटा सांस लेना जरूर भूल गया था

सविता मुस्कुरा क मोनू को खुद क जिस्म पे यु नज़रें जमाये हुए देख क कहती है

“वैसे तुझे पता हो तोह मुझे बता दे.. तेरा ताक़त वाला दूध कहा मिलेगा, मैं वह से ले आउंगी”

मोनू की हिम्मत अब उसका साथ चोर्ने लगी थी, वैसे भी सविता जैसी औरत की गर्मी संभालना हर किसी क बस की बात नहीं है, पर वो भी मालती का दूध पाइक बड़ा हुआ है.. इसलिए इतनी आसानी से हार नहीं मान सकता था

“बिलकुल पता है बड़ी माँ… पर उसके लिए आपको यहाँ आना होगा मेरे पास, वो किया है की जोर से बोलूंगा तोह सबको पता लग जायेगा”

एक पल क लिए तोह सविता को लगा जैसे मोनू सीधा hi कह रहा है की यहाँ आओ मुझे आपका दूध पीना है, पर उसके खेलते हुए शब्दों को सुनकर उसका जिस्म भी कामुकता से मग्न हो रह था.. सविता मुस्कुराते हुए

“नहीं नहीं तुम रहने hi दो… वैसे भी अभी बड़े कमजोर हो तुम..”

सविता एक पल क लिए रूकती है और फिर आगे कहती है

“मुझे नहीं लगता तुम देसी दूध हजम कर पाओगे”

सविता इस बार मोनू को जवान देने का कोई मौका नहीं देती और अपनी बात कहते हुए मुस्कुरा क अपनी जगह पे कड़ी हो जाती है.. और साथ hi साथ अपना झाड़ू भी उठा लेती है

“तू थोड़ा आराम कर, मैं तेरे लिए हल्दी वाला देसी दूध लाती हु”

सविता मुस्कुरा क कमरे क बहार जाने लगती है पर दरवाजे पे पहुंच क वो एक बार फिर से रज़ाई में उस बड़े से तम्बू को देखने से खुद को रोक नहीं पाती

और meri(Monu) नज़रें भी इस समय सिर्फ और सिर्फ उस देसी दूध पे थी.. जिसे पी क सच में ताक़त आ जाएगी

♦️ ♦️


आशा करता हु यहाँ तक का अपडेट आप सभी को पसंद आया होगा..

जल्दी hi 'अपडेट #20' क अंतिम दृस्य क साथ वापस मिलते है.. साल क अंतिम दिन पे


🙏
 
नई अपडेट 👇

Post in thread 'मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running'

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भविष्य में कही... किसी अपडेट से..

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ठण्ड का हाल कुछ ऐसा था की उस कामुक स्त्री की उखड़ती हुई साँसों क साथ साथ उसके मुंह से भाप सी निकल रही थी और उसके दोनों हाथ, उसकी चूचियों को अपने मजबूत हाथों से मसलने वाले जवान लड़के क काले काले बालों में ऐसे चल रहे थे.. जैसे कोई माँ अपने बेटे क बालों में पूरी ममता से अपनी उंगलिया फिर रही हो

“Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh… मत्तट करो बीटा… ये Paaaaaaaaapppppppppp.. है……… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh”

उस कामुक स्त्री क वो कामुक सब्द उस शांत रात में जितना दूर तक सुने जा सकते थे.. सायद उससे भी दुरी तक फ़ैल गए थे

उसपे जब उस जवान लड़के ने गदरायी गाय जैसी स्त्री क काले कामुक निप्पल्स को अपनी उँगलियों क बीच लेके जोर से ऐसे मसल दिया मानो उन जामुन का रास निचोड़ लेना च रहा हो.. तोह वो कामुक स्त्री ऐसे मचल पड़ती है जैसे उसकी योनि से रास बहना सुरु हो गया हो


“Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh… **************… बीटा मत कर…………. मैं तेरी माँ सामान हु……………. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa..”
 
प्रीवियस अपडेट ों पेज No. 📃 410



अपडेट #20

सन 🖼️ #05


साहब.. जरा धीरे धीरे

अपकमिंग अपडेट..
 
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अपडेट #20

सन 🖼️ #05

साहब.. जरा धीरे धीरे

कामुकता की वर्षा से भरा हुआ ये दिन अभी भी समय क पहिये से चढ़ा हुआ आगे बाद रहा था

दिन क करीब 2 बजे, सुंदरपुर से कही दूर..

"Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh…. haiiiiiiiiiiiiiiii …………. Reeeeeeeeeeeeeeeeee….. Sahabbbbbbbbbbb.. धीरे … uffffffffff…. Ufffffffffffffffff…. धीरे… आप तोह जान ले loge…meri.. आआह्ह्ह्हह... साहब..... Haiiiiiiiiiiiiiiiiiii.. एक छोटी सी गलती किया हो गयी…. Uffffffffffffffffffffff.. हीी... रईईए.... साहब... जीई.... धीरे………… dhireeeeeeeeeeeeeee… साहब……….. Aaaaaaaaaaahhhhhhhh"

ये आवाज़ें उस जवान लड़की की थी जिसकी उम्र सायद 20-22 साल होगी, और इस समय उसके खूबसूरत और पसीने से भीगे हुए कामुक सरीर पे कपडे का एक रेशा तक नहीं नज़र आ रहा था

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"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh… Saaalllllllllllllliiiiiiiiiiiiiiiii… कहती है छोटी सी गल्तीइइइइ…. माँ की लोदी... अपने मालिक की काली कमाई छुपाने क लिए उसकी मदद करती थी और अब नाटक दिखा रही है... हरामजादी... saaallllllllllllliii..."

उस खूबसूरत लड़की की मासूम सी योनि क छेद को चीरता हुआ जिस आदमी का लुंड अंदर बहार घुस रहा था, ये सब्द उसके थे

"वैसे बड़ी कासी छूट है सआईईई तेरी……… लगता है तेरा मालिक अचे से ले नहीं पाटा था तेरी"

ऑफिस क मुख्या टेबल पे सीधी लेती हुई और अपनी दोनों टैंगो को फैलाये हुई उस जवान लड़की की बुर में लगातार जोरदार धक्के मरता हुआ वो करीब 45-46 साल का औसत सा दिखने वाला आदमी जिसके सरीर पे इस समय सिर्फ एक चस्मा था.. जिससे वो उस जवान लड़की की क़यामत सी नंगी जवानी को देख प् रहा था

“Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh... Haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…. Saahhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaabbbb… मैं किया करती.. मैं तोह उनके घर की नौकरानी हु बस… मालिक जो कहते थे वो करना होता था… नौकरी का सवाल था naaaaaaaaaaaaaa.. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhh… और आपने सही कहा साहब वो कभी मेरी छूट का इस्तिमाल नहीं करते थे… qkiiiiiiiiiiii…. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… jaaaannnnnnnnnnn.. Hiiiiiiiiiiiiii.. ले लोगे किया साहब… dhireeeeeeeeeeeeeee…. Dhireeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee…”

उस टेबल पे पूरी तरह लेती हुई वो जवाब लड़की अपनी दोनों टैंगो को पूरी तरह फैलाये हुए अपनी योनि की गहराई तक उस हलके तंदरुस्त आदमी का काला लुंड पूरी गहराई तक महसूस कर रही थी.. और अपनी उखड़ती हुई साँसों क साथ अपनी बात कहने की कोषसिंह भी करती है पर तभी वो चस्मा पहने हुआ 45-46 साल का आदमी अपनी कमर को पहले से भी ज्यादा गति क साथ चलना सुरु कर देता है, जिससे उसके मोठे मोठे ाँद अब पूरी गति से उस जवान लड़की योनि क निचले हिस्से पे लग रहे थे और कमरे में उसकी कामुक चीखों और मधुर सिसकारियों क साथ साथ उन मोठे ाँद क टकराव का स्वर भी एक साथ मिलने लगा था

... थाआप..... थाआप.... चट्ठाआआंआकककककककक..... Chaaaaaaaaaaaapppo...... थाआपअवयकककककककक....

"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhh… Saaaaaaaaaaalliiiii… वो पैसा उसके बाप का नहीं था, गरीबो की म्हणत थी जिसे उसने धोके से लुटा था और वो खास ज़हर बैच क कमाया था…

और तू सालिई उसकी मदद करती थी.. और अब नाटक कर रही है…. वैसे छूट तेरी बड़ी कासी है… लगता नहीं ज्यादा थुकि है.. मादरचोद कही की… Aaaaaaaaaaaaahhhhhhh"

उस जवान लड़की को अपने टेबल पे पूरी तरह नंगा लिटाये हुए आदमी जीसने इस समय आँखों पे एक मोटा सा चस्मा चढ़ा रखा था.. ककी बाकि तोह वो पूर्ण नंगा hi था

पूरी रफ़्तार से अपने काले लुंड को उसकी कासी योनि क अंतिम चोर तक घुसते हुए अपनी बात कहता है और साथ hi साथ अपने दोनों हाथों को उस लड़की की जवान चूचियों से हटा क उसकी दोनों टैंगो को पकड़ क और फैला देता है ताकि वो अपने मोठे काले लुंड क घुसने की रफ़्तार और गहराई का अनुमान लगा सके

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"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhh.. साहब मैं सच कह रही हु… मैं तोह घर में काम करने वाली बस एक नौकरानी हु… मालिक जो कहते थे करना होता था मुझे.. साहब मुझे इस Police-Wolice क चक्कर में नहीं पड़ना है… उसके बदले आप जितना चाहे मेरी ले लो… Aaaaaaaaaaaaaaahhhh… पर धीरे धीरे छोड़ो साहब… Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… बहुत मोटा है आपका लुंड साहब…….. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhh… सही मायने में मेरी बुर तोह आज आपने hi पहाड़ी है……. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhh… reeeeeeeeeeeeeeeee…… मा छोड़ डालीईई.. आपने तोह मेरी……….. Ufffffffffffffffffffff…. dhireeeeeeeeeeeeeeeeee… dhireeeeeeeeeeeeeeeee… साहब……… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh… haiiiiiiiiiiiiiiii"

उस हलके मोठे आदमी जिसकी हलकी सी तोंद भी निकली हुई थी, और अपने आँखों से नीचे सकते हुए अपने चश्मे को जल्दी से एक हाथ आगे करके सही करता है और वापस से दोनों टैंगो को मजबूती से जकड क उसकी पूरी फैली हुई छूट में जोरदार दकके मरने का कामुक कार्य करने लगता है.. इस समय उस ऑफिस में उस योनि में घुसते उसके लुंड की गति लगातार बढ़ती hi जा रही थी

"Aaaahhhhhhhhhhhhh Saaaliiiiiiiiiiiiiiiiii… रैंड कही की… बड़ी सरीफ बनती है.. 2 करोड़ का कॅश तोह बस तेरे झोपड़ पट्टी जैसे घर से मिला है हमे….. और कह रही है.. पुलिस का चक्कर नहीं चाहिए.. साली अपने घर में वो पैसा छुपाने से पहले सोचना चाहिए था न…. Aaaaaaaaaaaaahhhh… मादरचोद लगा नहीं था की तेरी इतनी कासी होगी.. बहनचोद तेरी छूट तोह मेरे लुंड का जूस निचोड़ देगी.. .Aaaaaaaaaaaaaaahhhh"

45-46 साल का आदमी अपने सेहत से कही ज्यादा ताक़त लगा रहा था उस जवान लड़की की योनि को सूजने में, और कही न कही वो पूर्ण रूप से सफल भी हो रहा था ककी उसका हर जोरदार दक्का योनि में घुसते hi उस लड़की क चेहरे पे दर्द की लखीरों का दिखना hi इस बात का सबसे बड़ा सबूत था

"Aaaaaaaaaaaaaaahhhh… मुझे Police-Wolice का चक्कर नहीं चाहिए साहब.. तभी तोह आपसे मरवा रही हु… Aaaaaaaaaaaaahhhhh… साहब आप जब कहोगे जहा कहोगे मरवाने आ जाउंगी… Aaaaaaaaaaahhhhh… साहब… बस मुझे बचा लो.. मैं सच में कुछ नहीं जानती हु… मैं तोह बस मालिक का हुकुम मान रही थी… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh…. फड़ड़ड़ड़ दोओओओ… साहब मेरी छूट… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhh…. बहुत दम है आपके इस लुंड में… Aaaaaaaaaaahhhh… पहाड़ daalooooooooooooo.. मेरी छूट को साहब.. देखो आपके मजबूत दक्कों क कारन कैसे मेरी मासूम सी चूचिया उछाल रही है… Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhh.. बस साहब मुझे बचा लो…. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaa”

वो आदमी जो अपनी ताक़त का पूरा दम दिखते हुए अपने लुंड का जोर उस जवान छूट की गहराई में दिखा रहा था, वो उस लड़की की बातों से काफी खुस हुआ था.. वैसे भी इस समय उस छोटे से ऑफिस में उस लड़की की कामुक सिसकारियों क साथ साथ उसके ाँद का उस योनि से टकराने पे वो phaatttttttttttttt…. Phaaatttttttttttttttt…. Saaaattttttttttttttt… chaaaattttttttttaaaaaaaaaaaaaakkkk... की मधुर आवाज़ भी गूंज रही थी जो इस बात का साक्षा था की उस लुंड में अब भी बहुत दम है

आदमी उस लड़की की एक नंगी जांघ को चोर देता है पर वो वैसे hi अपने टंगे हवा में उठाये रहती है.. भले hi उसे पीड़ा हो रही थी पर लुंड से मिलने वाली ये पीड़ा हर जवान लड़की की चाहत होती है

"वैसे तू ऐसे आदमी क यहाँ काम करती थी साली.. तोह कुछ ऐसी जानकारी दे… की मैं सोच सकू की तुझे जेल न हो… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhh… मादरचोद कितनी कासी छूट है.. बहनचोद कही की…

माँ की लोदी चूड़ी भी नहीं है सही से.. Aaaaaaaaaaaaaaaaa"

अपनी बात कहते हुए वो अपना एक हाथ आगे बड़ा क उसकी जवान और गोल चुकी पे रख क अपने लुंड क जोरदार दकके का दम दिखते हुए उसकी गोल गुदाज चुकी जो पूरी बेहरमी से मसलने लगता है.. जिससे उस लड़की को ास्मीन आनंद और दर्द एक साथ मिलने लगता है, और इस कामुकता क कारन उसकी आँखें इस प्रकार से चढ़ रही थी.. मानो जैसे उसे असली मोक्ष मिल रहा हो.. वो इस बात का साबुत था की वो अभी इस खेल में ज्यादा पुराणी नहीं है


कंटिन्यू... 👇
 
"Aaaaaaaaaaaahhhh…Sahab सही कहा… मैं बस 3-4 बार hi चूड़ी हु.. वो भी मेरे बड़े साहब जब यहाँ आते है तोह उनका एक आदमी मुझे छोड़ा करता था... उनके सामने.. Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhh…"

वो कामुक सी लड़की जिसकी एक चुकी बेहरमी से मसली और उसका मर्दन हो रहा था, उस असीम और असली आनंद को प्राप्त करते हुए अपनी बात कहती है.. जिसे सुनकर उस सिर्फ चश्मे पहने हुए आदमी की भौंए चढ़ जाती है

पूरा दम लगा क उसकी चुकी को मसलते और उसकी छूट का छेद फैलते हुए वो आदमी इस बार थोड़ा हैरान हो पड़ता है

"Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… Saaaliiiiiiiiiiiiiiii किया कहा 'बड़े साहब'… मतलब वो 'भुसन' तेरा मालिक नहीं था… वो पैसा उसका नहीं है…. बहनचोद ये बात कब बताने वाली थी.. जब तेरी छूट पहाड़ देता मैं तब… कोण है ये 'बड़े साहब' और फिर ये भुसन का किया काम था.. बोल.. मादरचोद रंडी… आआअह्हह्ह्ह्ह…. बोल मा की लोदी….”

ये नयी बात पता चलते hi उस आदमी का जोश जैसे कई गुना बाद गया था, जिसका साबुत उसकी कमर की गति क बढ़ने से पता लग रहा था.. साथ hi साथ वो अपनी बात पूरी करते hi उस जवान लड़की पे पूरी तरह झुक जाता है और उसकी दूसरी आज़ाद गोल मटोल चुकी को बिना समय नस्ट किये अपने मुंह में भर क किसी बचे क जैसे चूसने लगता है.. और इस दोहरे हमले ने उस लड़की को दिन में ख़ुशी और कामुकता क तारे दिखा दिए था

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"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhh… haiiiiiiiiiiiiiiiiii.. जोर से चुसो साहब… Aaaaaaaaaaahhhh… ufffffffffffff… और जोर से छोड़ो साहब… phadddddddddddddd daaaaaaaaaaaaloooooooooooooo…. मेरी छूट को…. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… Maaaaaaaaaaaaaa… ufffffffffffffffff… haiiiiiiiiiiiii… reeeeeeeeeeeeee…. कितना दुमदार लुंड है साहब आपका… ufffffffffffffffff…. Maaaaaaaaaaaaaaaaaa…. Essssssssssssssshhhhhhhh… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… साहब मेरी चुकी ऐसे hi चुसो… Aaaaaaaaaaaaaaaaaahhh… Haaaaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiii… haiiiiiiiiiii… kaaattttttttttttoooo.. न साहब… दायत्ततत्ततततत…. Kkkkkkkkkkk.. निशान बन जायेंगे…. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa… Maaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrrrrrrrrrrrr… साहब… kaatttttttttttttiiiiiiiiiiyyyyyyyyyyyeeeeeeeeeeeee… maaaaaaaaaaaaaattttttttttttt”

अपने नंगे जिस्म पे होते उस कामुक हमले क कारन वो जवान लड़की पूरी तरह तड़प उठी थी, और ये भूल hi गयी थी की उसे उन हम सवालों का जवाब भी देना है.. जिसके उत्तर में साहब क नाम से सम्भोधित किया जाने वाला वो आदमी जिस चुकी को अपने मुंह में लेके जोरो से चूसे जा रहा था उसके काले छोटे वाले जामुन जैसे निप्पल्स को अपने दाँतों क बीच जोर से काट लेता है

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"माँ की लोदी… आज तेरी बुर का भोषड़ा बना दूंगा.. पर पहले जो पूछा है वो बता… मादरचोद रंडी saaaliiiiiiiiiiiiii…”

आदमी जोश से उसके काले छोटे जामुन को दाँतों से काटने क बाद अपना चेहरा ऊपर करके उसकी दर्द से बंद आँखें और उसके पसीने से भीग चुके कामुक चेहरे को देखते हुए कहता है

“Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh… साहब…. मैंने कभी उन 'बड़े साहब' का चेहरा नहीं देखा है.. पर वो भुसन जी उनके नौकर है.. बल्कि आप समझो उनका कुत्ता है… सबको लगता है वो साडी दौलत भुसन जी की है.. पर उनका काम तोह उन बड़े साहब की दौलत की रखवाली कारण है… Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhh.. साहब… haiiiiiiiiiiiiiiii… dhirrrrrrrrrrrrrreeeeeeeeeeeeee…… dhireeeeeeeeeeeeeeee… साहब…. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh….. पैसा तोह सब उनका है….. उन बड़े साहब kaaaaaaaaaaaaaaaa…… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh”

वो आदमी जिसे अब सायद उम्मीद हो गयी थी की उसे कुछ बड़ा पता चलने वाला है पर फिर उस जवान चुदती हुई लड़की ने उसके अरमानो पे पानी फेर दिया, पर फिर भी वो उसकी छूट का कचूमर निकलने में कोई भी कमी नहीं रखता

उल्टा एक hi झटके में उस रास चोरटी छूट से अपना लुंड खींच लेता है पर इससे पहले की वो लड़की अपनी खली योनि का कारन जान पाती वो उसके जिस्म से अलग सा होता है और साथ hi उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ क उसे टेबल से मानो खींच सा लेता है.. पर वो ये भी पूर्ण धियान रखता है की उसे चोट न आये

जल्दी hi वो लड़की उस टेबल से पूरी तरह नीचे उतर चुकी थी और अब उसके पेअर ऑफिस की फर्श को चुने लगे थे, वो जवान लड़की हफ्ते हुए जिसकी योनि से उसका कॉमर्स बेहटा हुआ उसकी मसल जाँघों को भिगो रहा था..

वो उस आदमी की आँखों में देखते हुए मानो सवाल सा करती है जिसका उत्तर उसे तुरंत hi मिलता है

"साएलीई रैंड मुंह किया देख रही है.. जल्दी से कुटिया बन.."

ये वो सब्द थे जिसे सुनते hi उस जवान लड़की की योनि एक बार फिर से ख़ुशी से रो पड़ती थी, उसके दर्द से लाल पद चुके चेहरे पे भी अब ख़ुशी की निशानियां नज़र आने लगती है.. वो बिना अतिरिक्त समय नस्ट किये हुए तुरंत की घूम जाती है और अपने दोनों हाथों को उस टेबल पे जमा क लगभग उस टेबल पे लेत सी जाती है, और अपनी मासूम सी नरम चूतड़ों वाली गांड उस 45-46 साल क आदमी की और कर देती है, जिसके लोहे की गरम रोड जैसे तने हुए लुंड से अब भी उसकी योनि का कामुक गीलापन टपक रहा था

ऐसे मासूम से नरम चूतड़ों को देख क उस आदमी और उसके तने हुए लुंड में बर्दाश्त करने की क्षमता मानो खो सी जाती है और वो तुरंत hi उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ क हल्का सा पीछे करता है.. जिसपे वो जवान लड़की भी ऐसी बेहरहम चुदाई का पूरा आनंद लेते हुए अपनी गांड को इतना पीछे कर लेती है की उसके चूतड़ों क बीच की कामुक लकीर में उस आदमी का चिपचिपा लुंड जो उसी क कामुक रास में डूबा हुआ था सीधा उस लकीर की गहराई में अंदर तक घुसता चला जाता है जो जल्दी hi उसे अपनी गांड क मासूम से नरम छेद पे चुभता हुआ महसूस होता है और ऐसा लगता है जैसे उस लड़की क जिस्म क साथ साथ उसकी आत्मा भी काँप उठी हु

“Nahiiiiiiiiiiiiiiiii.. नहीं…………. साहब…. यहाँ नहीं…….. यहाँ nahiiiiiiiiiiiiiiii… nahiiiiiiiiiiiii”

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आदमी वैसे अभी कामुकता से भरा जरूर था पर साथ hi संजीदा भी था.. खासकरके जबसे उसने उस बड़े साहब क बारे में सुना था

पर उस लड़की क ऐसे काँप उठने पे उसे भी हसी आ जाती है

“किया हुआ रैंड की जनि… गांड का ताला नहीं खुला है किया तेरी… ?”

लड़की जल्दी से अपनी गांड को आगे करके वापस से हल्का उठा क उस मोठे काळा गीले लुंड को सही छेद पे ऐसे जमा लेती है मानो वो इस खेल की पुराणी खिलाडी है, पर जैसे उसकी कासी छूट का हाल था उससे तोह पक्का था की वो खेल में आज नहीं तोह कल जरूर माहिर हो जाएगी


“नहीं नहीं.. साहब… आज तक वह नहीं लिया… सुना है वह लेने पे जान hi हलक में आ जाती है…. बाकि आप मेरी बुर पहाड़ो न साहब… ये तोह अब आपकी hi है… बस मुझे इस पुलिस क लफड़े से निकल दो साहब… में तोह बस एक नौकरानी हु… ज्यादा कुछ नहीं जानती”

कंटिन्यू.. 👇
 
वैसे आदमी का मन तोह करने लगा था की वो उस गांड की गर्माहट का पूर्ण मज़ा ले, पर वो भी जनता था की अभी ऐसा संभव नहीं है.. अभी उसने ऐसा कुछ करने की सोची भी तोह ये लड़की चिल्ला चिल्ला क पुरे ऑफिस वालों को यही जमा कर लेगी



इसलिए वो मजबूती से उसकी गांड को दबोच क अपने लुंड को उसकी बुर क मुहाने पे रखता है और ऐसा बेहरहम सा दक्का जड़ देता है की उसका लुंड एक hi वार में अंदर की गहराई को नाप डालता है.. जिससे एक बार फिर से उस लड़की की कामुक सिसकारी फुट पड़ती है

“Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh… Haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii… Sahaaaaaaaaaaaaaaaaaaabbbbbbbbbbbbbbbb… jiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…… भोसड़ा बना दिया reeeeeeeeeeeeeee….. साहब jiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii”

ऐसी कामुक सिसकारी और चीख सुनकर वो आदमी और ज्यादा जोश से भर उठता है और दोनों हाथों से उसकी कमर को और मजबूती से पकड़ क किसी शेर की तरह अपना लुंड बुर क मुहाने तक बहार खींचता है और फिर उसी वेग से अंदर भर देता है और अपने लुंड को अंदर घुसाने क साथ साथ अपनी आगे की बात भी रखता है

“Aaaaaaaaaaaaahhhhh.. बड़ी कासी है… माँ की लोदी तेरी बुर… Aaaaaaaaaaaaaaaahhhh… बेहेचोद saaliiiiiiiiiiiiiiiii.. Kutiyaaaaaaaaaaaaaa… अब बता… अगर तू उस 'बड़े साहब' क सामने उसके नौकर से छुड़ा करती थी.. तोह उसका चेहरा कभी कैसे नहीं देखा… Saaaaaaaaaaaaaaaaaaliiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii… jhuttttttttttt.. बोल रही है मुझसे…. ज्यादा नाटक करेगी तोह ऑफिस का हर मर्द तब तक तेरी लेगा.. जब तक छूट पूरी पहात नहीं जाएगी… बोल हराम की लोदी… बोल… Aaaaaaaaaahhh”

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अपनी कोमल छूट में दनादन घुसते हुए मोठे लुंड की हुंकार को सँभालते हुए वो जवान सी लड़की अपनी छूट क फटने का दर्द सेहती हुई कामुक सिसकारियों क साथ अपनी बात समझती है

“Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh… haiiiiiiiiiiiiiiiiiiii… reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee…………. साहब………………. Dhirrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrreeeeeeeeeeeeeeeeee….. Ufffffffffffffffffffffffffffffffffffff…. Maaarrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr…. Gayyyyiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii… साहब…………. Haiiiiiiiiiiiiiiiiiiii… मोरी mayiaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa….. ये लुंड…. आपने तोह मुझे सस्ती वाली रैंड बना दिया Sahabbbbbbbbbbb… Aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh”

साहब कहकर सम्बोधित किया जाने वाला वो इन्शान अपने दोनों हाथों को उस कोमल लड़की की कमर से ऊपर की और सरकते हुए दोनों हाथों से एक hi बार में उसकी कोमल चूचियों को जोर से दबोच लेता है.. मानो जैसे उसका दूध निचोड़ क hi मानेगा

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"बकचोदी… बंद कर… रंडी……….. और जो पूछ रहा हु उसका जवाब दे…"

आदमी अपनी पूरी ताक़त उस छूट को चौड़ा करने में लगाने लगा.. मानो जैसे आज वो विजय होक hi मानेगा, पर छूट से जितने वाला पैदा कहा हुआ है आज तक

"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… साहब…. Ufffffffffffffffff…. ऐसे……….. Reeeeeeeeeeeeeee….. मेरी छोटी सी बुर का छोटा सा छेद…. Aaaaaaaaaaaaaaaaahhh.. Saahbbbbbbbbbbbb.. वो 'बड़े साहब'…. कमरे में ऐसी जगह… Aaaaaaaaaaaaahhh.. बैठते थे जहा अँधेरा होता था.. और फिर उनका एक खास आदमी मेरी बुर लेता था.. पता नहीं कैसे आदमी है.. वो… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhh….

कभी कभी तोह मुझे नंगी करके.. बस नाचने क लिए कहते थे.. Aaaaaaaaaaaaaahhhhhhh"

नीचे अपनी छूट में लगते दक्कों और ऊपर अपनी मासूम सी 32" की चूचियों का भरपूर मर्दन होने से पूरी तरह दर्द और आनंद क बीच झूलती हुई वो जवान सी लड़की अपनी बात कहती है

"Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh… मादरचोद रंडी… कुछ तोह खास.. सुना… देखा होगा न… कुछ तोह बता… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh…."

आदमी उस जवान लड़की पे झुकते हुए अपने दक्कों का दम दिखते हुए उसकी गर्दन पे चूमना सुरु कर देता है.. जिससे उसकी गरम साँसे उस लड़की क जिस्म में भरी आग को और बढ़ाने का कार्य करने लगती है

"Aaaaaaaaaaaaaaa… साहब… ज्यादा नहीं पता.. पर एक बार 'बड़े साहब' की जगह उनका कोई आदमी आया था… बिलकुल किसी पहलवान जैसे था… वो.. आआह्ह्ह... Aaaaaaaaaaahhhh.. और एक बार बड़े साहब क साथ एक औरत भी आयी थी.. उसका कुछ नाम भी tha...wooooo…. है.... आआअह्ह्ह्ह... किया था... वो... आआह्ह्ह्हह धीरे साहब... आआअह्ह्ह... वो.... 'सजनी' था.. सायद... है 'सजनी' hi... था.. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh.."

लड़की अपनी बुर क भोसड़ा बनने का आनंद लेती हुई अपनी साँसों को सँभालते हुए आगे कहती है

“Aaaaaaaaaahhhh.. Aaaaaaaaaaaaaaaaaahhh… haiiiiiiiiiiiii… reeeeeeeeeeeeee… Maaaaaaaaaaaaaaa…. और है... साहब वो… 'बड़े साहब'… सायद किसी गाओं क है…. ककी उनके साथ आने वाले नौकरों क मुंह से एक बार मैंने.. Aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhh…. धीरे छोड़ो न थोड़ा साहब... आअह्ह्ह्ह... किसी गाओं का नाम सुना था……….. Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhh… साहब………."

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आदमी का जोश और ज्यादा बढ़ता चला जाता है, उसके धक्के पहले से कई गुना ज्यादा दुमदार हो चुके थे.. साथ hi अब वो इस खेल की विजय रेखा क करीब आ चूका था

“किया……… नाम था उस गाओं का… बोल हराम की लोदी… बोल मरदारचोद.. Kutiyaaaaaaaaaa… बोलललललललल"

अपनी छूट में पड़ते जोरदार दक्कों का भरपूर आनंद और अपनी मासूम सी 32" की चूचियों पे उस मरदाना हाथों की मजबूत पकड़ से उत्पन्न होने वाले असीम आनंद का मज़ा लेते हुए वो जवान लड़की अपने दिमाग पे जोर डालती है तोह उसे वो नाम याद आता है….

“सुंदरपुर…. यही.. थाआ…… साहब.. सायद उस गाओं का नाम.. है….. सुंदरपुर hi था… साहब… सुंदरपुर… Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh… साहब.. मैं gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii…"

ये नाम कितना खास है ये तोह हम जानते है.. पर इस आदमी क लिए खास होगा ये नहीं पता था



ककी जैसे hi वो गाओं का नाम सुनता है.. बिना किसी देरी क गपक से उस लड़की की योनि से अपना लुंड खींच लेता है और बिना समय नस्ट किया उस जवान लड़की को अपनी और घुमा क अपने दोनों हाथ उस लड़की क कंधे पे जमा क उसे तुरंत hi नीचे बैठा देता है… वैसे जिस पल इस आदमी ने उसकी योनि से अपना लुंड खींचा था ठीक उसी पल उस मासूम लड़की की योनि से उसका कॉमर्स बरसना सुरु हो चूका था

कंटिन्यू.. 👇
 
"साहब…. Gllluuuuuuuuuuuuuuuuuuuppppppppppppppppprrrrrrrrrrrrrr…. Slllluuuuuuuuuuuuuuurrrrrrrrrrrrrrppppppppppppppp…. Sllluuuuuuuuuuuuuuuuuuppp….. Ummmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm…. Ummmmmmmmmmmmmmmmmmmm….. Gggrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrppppppppppppppppppp……… Grrrrrruuuuuuuuuuuuuuuppppppppppppppp…"



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इससे पहले की वो लड़की कुछ बोल पाती, वो आदमी बिना देरी क अपना गीला उसी क कामर्स में भीगा हुआ लुंड गपक से उस लड़की क मुंह में गहराई तक उतर देता है… जो सीधा उस लड़की क गले की नाली में जेक फास्ट है

पर अपने घुटनो पे बैठ चुकी और अपने मुंह की गहराई में उस गरम लोहे जैसे लुंड को अंदर तक घुसते हुए देख क अपनी उखड़ती साँसों को सँभालने की कोषसिंह तोह करती है पर वो ऐसा कर नहीं पाती ककी अब उसके मुंह में वो लुंड गप गप.. गपागप… सटासट.. सटासट.. करके मुंह की गहराई का नाप लेना सुरु कर चूका था

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"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh… सुंदरपुर… सुंदरपुर… सुंदरपुर.. साला ये गाओं है या किया… हर चीज़ जैसे यही पे आके ख़तम होती है… Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh………"

आदमी अपनी बात कह hi रहा था की उसका लुंड अपनी सफ़ेद चिपचिपी उलटी करना सुरु कर देता है, जो उसके मोठे फुले हुए टोपे क छोटे से छेद से निकल क गले क अंदर भरनी सुरु हो जाती है

आदमी भी जहा तक मुमकिन था वह तक अपना लुंड गले में उतर क पूरा लुंड वही रोक अपने रास की एक एक बंध उस लड़की क मुंह में भरने लगता है

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"Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh… Behenchoddddddddddddddddddddddddddddddddddddddddddddddddd……….. मज़ा आए गया……."

लुंड से इतना सारा रास निकल रहा था की उस लड़की क बिना लिपस्टिक वाले होंठों क किनारों से कुछ रास बहार आ जाता है.. पर वो इस अंतिम लड़ाई में भी तिकी रहती है और उस रास को जितना संभव था उतना गटकने की पूरी भरकस कोश्शि में लगी रहती है

“Ummmmmmmmmmmmmmm…. Glllllllllllllllluuuuuuuuuuuupp……………. Ggggggggghhhhhhhhhhhuuuuuuuuuuuuuuu…. Ggrrrrrrrrrrrrrrruuuuuuuuuuuuu.."

आदमी उसके मुंह में अपना लुंड घुसाए हुए उस टेबल से तब तक दबाये रहता है.. जब तक उसके रास की एक एक बून्द वो मासूम पि नहीं जाती.. और फिर बिना विलम्ब क उसके मुंह से अपना मुरझा चूका लुंड खींच लेता है, जिससे कुछ रास उस लड़की क चेहरे पे भी लग जाता है, पर लुंड बहार आते hi वो लम्बी लम्बी सांस भरने लगती है मानो अगर वो लुंड उसके मुंह से कुछ पलों तक और बहार न निकलता तोह कही वो किसी बिन पानी की मछली जैसी तड़पना सुरु न कर देती

आदमी अपना झूलता हुआ लुंड उस गरम और कामुक लड़की क मुंह से निकलते हुए सीधा उसी ऑफिस में एक और बने बाथरूम की और चल पड़ता है, जिससे उसका आगे निकला हुआ पेट उसके चलने पे हिलोरे खा रहा था.. और इस समय उसके सरीर पे सिर्फ वही एकलौता उसका मोठे सीसे वाला चस्मा hi था, पर इन सब से पहले वो फर्श की जमीन पे पड़े अपने कपडे उठाना नहीं भूलता

"वैसे… तेरा नाम किया था…. किया बताया था तूने.. ?"

लड़की की छूट का भरपूर मज़ा लेने क बाद वो बाथरूम क दरवाजे पे पंहुचा hi था की वही रुक फिर से उसे देखते हुए अपनी बात कहता है

"अंगूरी… अंगूरी… साहब…."

लड़की वही जमीन पे ऐसे फ़ैल गयी थी मानो उसके सरीर में ताक़त hi न बची हो.. या यु भी कह सकते है की उसकी समूची ताक़त तोह उसकी योनि से बह गयी थी

इसलिए वो मुश्किल से hi अपना चेहरा ऊपर उठा क जवाब दे प् रही थी

"हम्म्म… ाचा नाम है.. सुन तुझे कुछ दिनों क लिए लोगो की नज़रों से दूर रखा जायेगा, ताकि तेरी जान को खतरा न हो"

आदमी एक पल क लिए रुकता है और अपने नाक पे छाडे चश्मे को सही करने क बाद आगे कहता है

"तब तक.. तू अपने दिमाग पे जोर डालती रहना, कुछ और जरुरी याद आये तोह बताना

पता नहीं ये बहनचोद.. बड़े साहब.. कोण है ?

और इसका सुंदरपुर से किया कनेक्शन है.. हम्म"

हलकी तोंद वाला वो आदमी एक लम्बी सी सांस चोरते हुए, बाथरूम क अंदर प्रवेश कर जाता है और करीब 10 मं बाद जब बहार आता है तोह वो पूरी तरह एक सभ्य आदमी बना हुआ था.. आँखों पे मोटा चस्मा और सेरिर पे कपडे



पर उसे वो लड़की कही नहीं दिखती, उसकी जगह उसे अपनी मुख्या कुर्शी पे एक आदमी बैठा हुआ नज़र आता है

कंटिन्यू.. 👇
 
"खान सर आप…. मुझे लगा नहीं था, आप इतनी जल्दी यहाँ दिल्ली आ जायेंगे?"



कुर्सी पे बैठा हुआ खान (जिसके बारे में आपने पहले भी पड़ा है और आशा है याद भी होगा) अपनी कुर्शी को पूरी तरह उसकी और घूमते हुए मुस्कुरा क कहता है

"कैसे हो यादव… तुमने तोह बेचारी की जान hi निकल दी

वैसे अभी क लिए उसे बहार हॉल में बैठा दिया है ताकि हम बात कर सके.."

तोह लीजिये.. आप अब समझ गए होंगे की 'अंगूरी' की बेहरहम चुदाई करने वाला ये आदमी और कोई नहीं अपितु 'यादव' है.. वही यादव जिसके कहने पे रॉकी वह गाओं में गया हुआ है

यादव, खान क बगल आके खड़ा होता है और कुर्सी क ठीक बगल वाली दर्ज को खोलता है जिसमें एक सफ़ेद पाउडर से भरा हुआ छोटा सा पैकेट रखा हुआ था जिसपे एक खंजर की मोहर लगी हुई थी..

फिर उसे निकल क खान क सामने रख देता है और घूम क अपनी hi कुर्शी पे विराजमान खान क सामने वाली कुर्शी पे बैठे हुए कहता है

"आज हमने यहाँ दिल्ली में एक राइड डाली थी.. वही काली कमाई पकड़ने क लिए.. और वह हमे उन पैसों क साथ ये भी मिला, वो भी करीब 50 कग"

वो उस पैकेट की और देखते अपनी बात कहता है.. और अब दोनों hi पूरी तरह संजीदा हो चुके थे

जो छोटा सा ऑफिस कुछ दिएर पहले कामुकता की रणभूमि बना हुआ था वो अब पूरी तरह गंभीरता की काली परछाई से भर चूका था

खान पैकेट की और जैसे hi देखता है उसकी बॉँहे चढ़ जाती है और गहरी आवाज़ में कहता है, मानो जैसे उसके एक एक सब्द पे उसकी अपनी वास्तविकता तिकी हो

“ये तोह वही है… जिसके पीछे हम पिछले 20 सालों से लगे है”

यादव अपनी ख़ुर्शी पे थोड़ी आरामदायक मुद्रा में.. पर उसके चेहरे से भी साफ़ पता चल रहा था की बात कुछ घम्बिर hi है

"इसलिए तोह आपको यहाँ बुलाया सर.. ऐसे में आपके पास लेके आता तोह पेपर वर्क होता है और सायद हमारे hi बीच बैठे कुछ कुत्ते उसकी जानकारी वह तक पंहुचा सकते थे जहा अभी ये बात पहुचनी नहीं चाहिए.."

खान, यादव की बात से पूरी तरह सहमत था वो उस पैकेट को हाथ में लेता है और उसे हर तरह से देखते हुए अपनी एक लम्बी सांस चोरते हुए कहता है

"पक्का ये वही नसे का ज़हर है.. जिसके इस्तिमाल से पिछले साल 12 मासूम बच्चों की जान गयी थी, और उस नवजवान लड़के क साथ जो हुआ…."

खान अपनी बात भी आगे नहीं बोल पाटा, ककी एक पल क लिए उसके चेहरे क सामने खून से लथपथ उस जवान लड़के का चेहरा नाच उठता है

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यादव, खान को ऐसे कही खो जाने पे टोकते हुए..

"किया हुआ सर, कोई खास लड़का था.. वो.. आपका जानने वाला.. मेरा मतलब.."

यादव अपने हर सब क बाद रुकते हुए धीरे से अपनी बात पूरी करता है, जिसपे खान उस कुर्सी से उठता है ऑफिस की खिड़की क पास जेक खड़ा हो जाता है.. मानो जैसे वो उन विचारों को अपने से अलग करना च रहा हो और फिर अपनी जेब से सग्गेराते का पैकेट निकलते हुए उसे यादव की और बड़ा देता है.. जिस ऑफर को यादव पुरे सम्मान से मन कर देता है

खान एक सग्गेराते को निकल क उसे सग्गेराते क डिब्बे पे ऐसे मरने लगता है.. मानो जैसे अपने विचारों से आज़ाद होने की अब भी कोशिश में लगा हो और फिर एक शांत पर लम्बी सांस चोरते हुए आगे कहता है

"रौनक.. रौनक नाम था उस लड़के था, और पता है वो हमारी मदर क्यू कर रहा था.... !"

खान अपनी बात कहते हुए सिगरेट को जला क अपने होंठों से लगा लेता है.. और इस पुरे समय यादव पूरी बात को ऐसे सुन रहा था मानो वो बहुत hi महत्वपूर्ण बात हो

खान- (सिगरेट का एक लम्बा कास मरते हुए) उस लड़के का कहना था.. अगर इन सैतानो को रोका नहीं गया तोह किया पता कही उसके एकलौते दोस्त क साथ कुछ ऐसा न हो जाये, जैसे उन 12 बच्चों क साथ हुआ था

खान एक पल क लिए रुकता है और फिर आगे कहता है

"और पता है.. रौनक का वो दोस्त, नसे क नाम से भी परिचित नहीं था

पर रौनक को दर था की कही ये नासा कभी उसके दोस्त को अपनी चपेट में न इ ले..”

यादव, खान की बात सुनकर काफी हैरान था

“ये कैसा पागलपन था.. और इस रौनक को उसके घर वालों ने रोका नहीं ?”

खान इस बार मुस्कुरा पड़ता है और वापस से अपनी जगह बैठते हुए

"रौनक एक अनाथ था.. यही चंडी चावक की गलियों में पला बड़ा था

उसके लिए माँ.. बाप.. परिवार सब उसका वही दोस्त था..

इसलिए वो बेवकूफ एक ऐसी लड़ाई से जुड़ गया, जो उसकी थी hi नहीं..."

यादव क चेहरे पे इस पूरी बात से पहली बार मुस्कान नज़र आयी थी, पर इस मुस्कान में एक गर्व की निशानी थी

“लगता है.. दोनों बड़े अचे दोस्त था

पता नहीं रौनक जैसा दोस्त खोने क बाद उसके उस दोस्त का किया हाल हुआ होगा..”

खान- (सग्गेराते का धुआँ अपने मुंह से चोरते हुए) वैसे तोह मैं रौनक क उस दोस्त से कभी मिला नहीं.. पर जहा तक याद है वो किसी गाओं का था, यही ऐसी दिल्ली में अपने किसी रिश्तेदार क यहाँ रहकर पड़े करता था.. वैसे मुझे हमेशा से लगता है की रौनक क इस लड़ाई से जुड़ने क पीछे कही न कही कुछ तोह ऐसा था जो उसके उस दोस्त से जुड़ा था.. पर वो असल बात कुछ और थी..

खान एक लम्बा कास खींचता है और इस बार उसे अपनी नाक क छेद से चोरते हुए आगे कहता है

"पर.. रौनक क हिसाब से उसे बस इस बात का दर था की कही उसका दोस्त इस नसे से न जुड़ जाये.. पर मुझे कभी यकीन नहीं हुआ की बात सिर्फ इतनी थी, वर्ण रौनक खुद मुझे ढूंढ़ता हुआ मुझ तक मुंबई न आता.."

यादव, खान की बात को सुनने क बाद ऐसी निष्कर्ष पे पहुँचता है की.. हो न हो बात सच में कुछ और hi थी, वर्ण कोई जवान लड़का खुद ऐसी लड़ाई में नहीं पड़ेगा

यादव- (कुछ पल सोचने क बाद) आपने कभी कोशिश नहीं की उसके उस दोस्त से मिलने की.. ताकि असल बात का पता चल सके

खान- (सिग्रेटे का अंतिम कास खींचने क बाद उसे खुली खिड़की से बहार उछालते हुए) नहीं.. ककी मुझे पूरा यकीन था की वो बात कुछ भी हो, पर उसका वो दोस्त उसके बारे में नहीं जनता होगा.. वर्ण रौनक सबसे पहले उसकी सुरक्षा की बात करता न hi उसे इन सब से अलग रखने की

यादव अब पूरी तरह संतोष था.. खान की बातों से पर फिर भी उसके मन में एक सवाल आ hi जाता है

"वैसे आपको कभी लगा नहीं की रौनक की मौत क बाद.. उसके उस दोस्त की जान खतरे में हो सकती है"

खान कुर्शी पे थोड़ा पीछे होक बैठे हुए

"लास्ट जानकारी क हिसाब से कुछ महीने पहले hi वो अपने गाओं चला गया था.. अपने माँ बाप क पास

इसलिए उम्मीद कर सकते है की वो सुरक्षित hi होगा

और ये भी प्राथना है की.. वो कभी दुबारा यहाँ दिल्ली न लौटे"

खान एक पल क लिए रुकता है और फिर उस पैकेट को उठा क आगे कहता है

"वेल.. तोह इसके अलावा और कुछ मिला, या पता चला.. ?"

यादव- ज्यादा कुछ नहीं.. पर अंगूरी क हिसाब से भुसन बस एक मोहरा है, असली खिलाडी कोई और है.. अंगूरी क हिसाब से वो..

यादव अपनी बात भी पूरी नहीं कर पाटा की खान बोल उठता है

"बड़े साहब.."

यादव तुरंत hi अपनी जगह साध क बैठ जाता है

"आपको पता है.. कोण है ये.. बड़े साहब"

खान फिर से उस कुर्शी पे अपनी इस्तिहि को बदलते हुए

"नहीं.. पर सालों से उसे ढूंढ रहा हु, आज तक बस यही एक नाम हाथ लगा है

वैसे किया नाम बताया था.. है 'भुसन'.. उससे कुछ पता चला ?"

यादव इस बार शांत हो जाता पर फिर बोलता है

"नहीं.. उसे हम यहाँ लेके आ hi रहे थे की उसने बीच रस्ते में hi ज़हर खा लिया.. और.."

खान की हसी निकल पड़ती है

"यही होता है हर बार, न जाने कैसा दर है इस 'बड़े साहब' का.. उसके आदमियों को सच बोलने से ज्यादा आसान मौत चुन्नी लगती है"

"है.. यानि अभी हमारे पास एकलौता लिंक वही नौकरानी है.. अंगूरी"

यादव अँधेरे में रौशनी की हलकी रौशनी का नाम लेता है

खान- (मुस्कुराते हुए) वही जिसकी बुर का कचूमर बनाया है अभी अभी.. ? वही है अंगूरी..

यादव मुस्कुरा पड़ता है, पर अपना सर हिला क हामी जरूर भर देता है

खान- कोशिश करना.. ये मरे न, वैसे लगता नहीं ऐसे ज्यादा कुछ पता होगा ?

यादव- आपकी बात सही है सर, पर अभी क लिए यही एकलौता लिंक है हमारे पास.. हम बस उम्मीद कर सकते है की ऐसे कुछ ऐसा याद आ जाये जो हमारे काम आ सके

खान- (अपनी जगह से उठता है, पर तभी जैसे उसे कुछ याद आ जाता है) वैसे तुम्हारे उस आदमी.. रॉकी का किया हाल है ?, कुछ पता चला उसे.. ?

यादव- (रॉकी का नाम आने पे वो मुस्कुरा उठता है) है.. आज रात को वो जंगल में घुसने वाला है, उसका मन्ना है वह कुछ ऐसा मिल सकता है जिससे काफी कुछ क्लियर हो जायेगा

खान है में सर हिलाते हुए, यादव की और मुस्कुरा क देखता है और ऑफिस से बहार निकल जाता है.. जहा हॉल में वो लड़की अंगूरी अभी भी बैठी हुई थी, पर उसके चेहरे पे अब दर नहीं दिख रहा था, बल्कि एक मुस्कान थी

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खान एक पल क लिए उसपे सरसरी सी नज़र दौड़ता है, जहा उस समय उस लड़की ने एक पुराण सा सलवार सूट पहना हुआ था.. जो कई जगह से फटा हुआ था पर उसे काफी सावधानी से सिला गया था, ताकि उसकी इज्जत क सबूत किसी को खुले आम नज़र न आये.. पर फिर खान अपने कदमो को रफ़्तार देते हुए आगे निकल जाता है

यहाँ अंदर खान क जाते hi यादव अपनी जगह से उठता है और अपनी असली कुर्शी पे बैठे हुए सोचने लगता है की उसे पहले पक्का करना होगा की उस गाओं का सुंदरपुर hi था.. या अंगूरी से सुनने में कोई गलती हुई है

ककी अगर वो सही है तोह ये खेल उसकी और खान की सोच से कही ज्यादा बड़ा है और अब तोह उसमें 20 साल से नसे क नाम पे ज़हर बेचने वाले 'बड़े साहब' का नाम भी जुड़ चूका है.. सायद इसीलिए उसने खान को बस नाम बताया था पर गाओं की बात नहीं

इसके बाद कैसे ऐसी दिन क पूर्ण होते होते रात क अँधेरे में रॉकी जंगल में प्रवेश करता है.. और फिर किया कुछ हुआ ये तोह आप पहले hi पद चुके है

उम्मीद है कड़ी क कड़ी मिलने का ये खेल आपको पसंद आ रहा होगा

जल्दी hi वापस मिलूंगा..

आपका मित्र - मोनू

"हैप्पी नई ईयर 2026"

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