Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running - Page 7 - SexBaba
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Adultery मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas) Part #02 Running

वापस वर्तमान में लौट चलते है.. जहा सबसे पहले आपको घर की इस्तिथि क बारे में थोड़ा और विस्तार से बता देता हु

'फुलवा गाओं' क जंगल में बना हुआ एक छोटा सा घर कभी ठाकुर साहब क लिए उनकी रासलीला का अड्डा हुआ करता था, और बाद में ये उनके कच्चे माल को छुपा क रखने का अड्डा बना.. पर आज कल ये खली hi पड़ा था और अब इसमें हीरा पन्ना रह रहे है

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घर की इस्तिथि ऐसी है की यहाँ तक आने क लिए ाचा खासा जंगल पार करके आना होता है और ये जंगल भी सर्प नदी क किनारे hi बसा हुआ है.. वैसे ये जंगल अंदर hi अंदर सुंदरपुर गाओं क जंगल से भी जुड़ता है, पर वो रास्ता मौत से भरा हुआ है

पर यही खतरनाक रास्ता ठाकुर क कार्य क लिए उपयोग में आता है

वापस उस घर की बात करू जहा इस समय 'हीरा पन्ना' ठहरे हुए है तोह.. घर क ठीक पीछे घने जंगल क और अंदर जाने का पतला सा रास्ता भी बना हुआ है


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और अगर थोड़ा और आगे बड़ा जाये तोह एक जगह पे खूबसूरत सा नज़ारा देखने को मिलता है.. जहा पहाड़ी से रिस रिस क आता हुआ पानी एक पत्थर क पास इकट्ठा होते हुए आगे बढ़ता है

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इतने दिनों से इस जंगल क बीच रह रहे दोनों भाई.. अक्सर यही जंगल में घूमने निकल आते है, वैसे भी इन दोनों को जंगल से बहार जाने की इजाजत नहीं है

सुरु में पन्ना को नागराज की बात बस मज़ाक लगी थी.. पर जल्दी hi दोनों भाई समझ गए थे की ठाकुर सच में कोई बड़ी चीज़ है

पन्ना- भैया चलो जंगल में अंदर घूम क आते है

हीरा- (खिड़की क पास से हट्टे हुए वही बिस्तर पे लैट्टे हुए) तू जा.. मैं कबसे वही जंगल में टहल रहा था

पन्ना इसके बाद देरी नहीं करता है और जल्दी hi जंगल क अंदर घूमने निकल पड़ता है.. आखिर और कही जा भी नहीं सकता था

पन्ना टहलते हुए काफी अंदर निकल आता है जहा जंगल क बीच एक जगह अछि खासी ख़फ़ी जगह थी.. और उस जगह क बीच एक विशाल पेड खड़ा हुआ था


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पन्ना वही उस पेड क सहारे लग क बैठ जाता है और उसे पता hi नहीं चलता की कब उसकी आँख लग गयी.. न जाने कितनी hi दिएर तक वो उसी प्रकार सोता रहता है, पर उसकी नींद भागने क काम करती है वो सुरीली सी आवाज़

जल्दी hi पन्ना की आँख खुलती है तोह वो अपने सामने एक खूबसूरत हलके और खूब कैसे हुए जिस्म की औरत को पाटा है जिसने एक साड़ी पेहेन राखी थी और खूबसूरत तरह से सजी हुई थी

पन्ना- उफ्फ्फ्फ़.. मेरी जान किया माल लग रही हो.. आआह्ह्ह साललीई राआनंददददद

पन्ना इतना hi बोल पता है की वो खूबसूरत सी साड़ी में सजी हुई औरत उसकी धोती क ऊपर से उसके लुंड को पकड़ क दबा देती है और जब पन्ना की आअह्ह्ह निकलती है तोह हस्ते हुए कहती है

"तुम्हे पता है न.. मुझे तारीफ सुन्ना सिर्फ अपने पति से पसंद है.. क्यू है न जी"

पन्ना देखता है की वही उन दोनों से थोड़ा दूर उसका पति 'नागराज' खड़ा था यानि ये खूबसूरत हलके भरे जिस्म वाली औरत और कोई नहीं अपितु 'सजनी' है.. नागराज की पत्नी

पन्ना, नागराज को देख क हस्ते हुए कहता है

"और कैसे हो नागराज भईईई... आअह्ह्ह.. भाई तेरी बीवी बहुत बड़ी रआनंददद है कुटियाआ कही की"

पन्ना की बात को बीच में hi रोकने का कामुक कार्य नागराज की खूबसूरत पतली दुबली पर कैसे जिस्म वाली पत्नी बहुत अचे से पन्ना का लुंड फिर से उसकी धोती क ऊपर से दबा क करती है

नागराज- (अपनी पत्नी की कामुक हरकत देखते हुए.. अपने लुंड को मसलने पे मजबूर हो hi जाता है) मेरी पत्नी जैसी गरम औरत पुरे फुलवा गाओं में नहीं है

अपने पति से तारीफ पाना तोह हर औरत की कामना होती है.. ऐसे में सजनी कैसे पीछे रह सकती थी, वो जब देखती है की उसका पति इतनी ख़ुशी से उसकी हरकतों से खुस होक उसकी तारीफ कर रहा है तोह उसे बहुत hi ज्यादा ख़ुशी मिलती है और वो पन्ना की धोती क ऊपर से hi उसके लुंड को पकड़ क उसका उभर सा बनाते हुए उसकी झुकती चली जाती है

पर वो इतने में hi नहीं रूकती.. सजनी अब पूरी तरह पन्ना क लुंड पे झुक चुकी थी, फिर वो उसी इस्तिथि में पीछे मुद क अपने पति को देखते हुए धीरे से कहती है

"स्वामी.. आपकी आज्ञा हो तोह.."

नागराज जब ये सुनता है तोह जोर से अपना लुंड दबा लेता है

"आआआह्ह्ह्ह.. हां.. मेरी प्रिये पत्नी.. आगे बड़ो"

और नागराज क इतना कहते hi सजनी अपनी जीभ बहार निकल क पन्ना क लुंड को उसकी धोती क ऊपर से hi छत्त लेती है

"उम्मम्मम्मम... सललललूउपपप.... सललललूउपपप"

सजनी- आआह्ह्ह.. स्वादिष्ट है

नागराज अपना लुंड मसलते हुए

"उसे बहार निकल क पियर करो"

सजनी अपने पति परमेश्वर की बात को तनिक भी नहीं टलती और जल्दी hi वो धोती को आगे से खोल देती है.. जिसे पन्ना भी अपनी गांड उठा क अपने पैरों क नीचे से निकल देता है

पर अगला कामुक कार्य सजनी खुद कर देती है.. वो उस धोती को उठा क अपने पति की तरफ फेकते हुए

"देखिये जी.. आपकी आज्ञाकारी पत्नी ने आपके सामने एक मर्द को नंगा कर दिया है"

सजनी की बात सुनते hi नागराज का नाग फैन उठाने लगता है और वो ख़ुशी क मरे बिना किसी विलम्ब क अपने नाग को बहार निकल क उसे खुली हवा में सांस लेने का मौका दे देता है


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नागराज- (अपने नाग से खेलते हुए) उसे अचे से चाटो.. पियर करो सजनी.. खूब प्रेम दो उसे

अब भला एक आज्ञाकारी पत्नी अपने पति की आज्ञा की उलाहना कैसे कर सकती थी.. इसलिए सजनी भी नहीं करती और अपनी जीभ निकल क जैसे hi पन्ना क काले और भीमकाय लुंड को चाटने वाली होती है पन्ना थोड़ी सी बदमाशी कर देता है और जान क अपनी गांड को हल्का सा उठा देता है.. जिससे सजनी की जीभ उसके लुंड की जगह उसके गांड क गंदे छेद पे चल जाती है

"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp.... सललललूउपपप"

पर सजनी तब भी अपने कार्य से पीछे नहीं हटती बल्कि वो खुद पन्ना का रक्षक जैसे लुंड को मुठी में दबोच क और ऊपर उठा लेती है और पूरी म्हणत से अपनी जीभ को बहार निकल क उसकी गन्दी गांड की दरार में चलना सुरु कर देती है

"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp... सललललररररररपपपप..."


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पन्ना- आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. साललीई चिनाअररररररररर कुटिया.... Aaaaaaaaaaahhhhh

नागराज- आआह्ह्ह्ह.. उफ्फफ्फ्फ़.. और अचे से छतो

अब भला एक आज्ञाकारी पत्नी कैसे अपने पति की बात ताल सकती थी, इसलिए सजनी भी पूरी सिद्दत और म्हणत से अपने पति क कहने पे पन्ना की गन्दी गांड चाटने लगती है

"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp.... सललललूउपपप.... उम्मम्मम... सललललूउपपप.... उम्मम्मम्मम्म... गररररररललललपपप"

पन्ना- आह्ह्ह्हह्ह... साआल्लीई किया.. चट्टी है.. आआआहहह.. मादरचोद रंडी कही की.. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

पन्ना क मुंह से अपनी पत्नी क लिए ऐसी गन्दी गन्दी गलियां सुनकर नागराज का नाग और ज्यादा फुफकारने लगता है वो जोर से अपने लुंड को मुठी में भर क उसे मथना सुरु कर देता है

"आआआआह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... ऐसे hi सजनी आआअह्ह्ह.. अचे से छतो.. आआअह्ह्ह खा जाओ पन्ना की गांड को... आआआहहह.. शाब्बाश मेरी जान.. मैं बहुत किस्मत वाला हु तोह तुम्हारे जैसी पत्नी मिली है.. आआआह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ्फ़.. ऐसे hi... आआआअह्ह्ह"

सजनी की शानदार चटाई और उसके पति नागराज की ऐसी कहि बातें पन्ना को पूरा पागल बनाने लगती है वो जोर से सजनी का सर अपनी गांड क छेद पे दबा देता है

सजनी को ऐसा लगता है जैसे वो सांस नहीं ले प् रही हो और पन्ना की बदबूदार गन्दी गांड से बहुत hi गन्दी और ज़हरीली सी बदबू उसका सर चकराने पे मजबूर करने लगती है


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सजनी.. पन्ना की जाँघों पे जोर जोर से मरना सुरु कर देती है मानो वो किसी भी तरह उस चंगुल से बच क निकल जाना च रही हो, पन्ना उसे ऐसा करने नहीं दे रहा था

बल्कि ऐसी बीच सजनी को लगता है जैसे पन्ना की गांड से एक गरम हवा का झोंका निकला हो

"आआआअह्ह्ह्ह.... चहाअट्ट... साललीई... कुटियाआ... रंडी.. चाहात्त्त्त...."

वही अपनी पत्नी की ऐसी दुर्दशा देख क नागराज का नाग पागल होने लगा था.. जिसे वो जोर जोर से मसलते हुए उसका दम घोट रहा था

"आआआहहह... ईई.. हुई न बायतत्तत... हार मत मन्ना तुम मेरी पत्नी हो.. दिखा दो अपना दम.. आआआहहहहह"

पर सजनी की हालत सच में पूरी बिगड़ चुकी थी, वो पूरा दम लगा क आखिर पन्ना जैसे हैवान क चंगुल से बच hi जाती है और जल्दी से पीछे होते हुए लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है

"आआआआहहह... माआआ... माररररर... डोज... किया... आआआहहहहह.. पागल कही क... आआआअह्ह्ह्ह"

सजनी की हालत देख क पन्ना और नागराज दोनों की हसने लगते है.. वही सजनी अब भी थोड़ी दुरी पे होक वही जमीन पे बैठी हुई लम्बी लम्बी साँसें लिए जा रही थी

पन्ना नीचे से पूरा नंगा तोह था की अब वो ऊपर पहनी हुई गन्दी सी बनियान भी उतर क वही एक तरफ फेक देता है.. जिससे उसका रक्षक जैसा बदन पूरा का पूरा नंगा हो चूका था

"नागराज भाई.. ऐसे कैसे मज़ा आएगा, जरा सजनी से भी कहो न वो भी नंगी हो तोह मज़ा आये"

पन्ना की बात सुनकर नागराज है देता है पर अपनी पत्नी से कुछ कहने की जगह वो खुद आगे बढ़ता है और उसके पास जेक पियर से उसके सर पे हाथ फिरते हुए कहता है

"उठो मेरी जान"

सजनी जो अब भी बुरी तरह जोर जोर से सांस लेते हुए हाफ रही थी वो अपने पति की बात पे मुस्कुरा पड़ती है और अपनी जगह कड़ी हो जाती है

नागराज अपना एक हाथ अपनी खूबसूरत कसावट से भरे हुए जिस्म वाली पत्नी की गोल गोल चुकी पे अपना हाथ रखते हुए

"देखो पन्ना कितनी कासी चुकी है मेरी सजनी की.. देखो तोह"

नागराज ये कहते हुए अपनी गोरी दूध की मलाई जैसी पत्नी की उस चुकी को जोर से दबा देता है

"ेस्स्स्सह्ह्ह्ह... माआ... धीरीईईए...... जीईईईई"

सजनी की ऐसी धीरे से कामुक ाःह को सुनकर पन्ना का हतियार सजनी क नाम पे सलामी देने लगता है

"आआआह्ह्ह्ह.. माआल है साली.."

नागराज अपनी पत्नी की खूबसूरती की तारीफ सुनकर बहुत खुस होता है और फिर सजनी को घुमा क उसकी हलकी उभरी हुई पर मजबूत गांड पे अपना हाथ रखकर उसे गोल गोल घूमते हुए

"देखो पन्ना.. कितनी मस्त गांड है मेरी सजनी की, इसमें तुम्हारा लुंड जायेगा तोह कितना आनंद आएगा न.. बोलो न"

पन्ना बिना समय व्यर्थ किये जल्दी से अपने लुंड को पकड़ क मुठ सा मरने हुए

"आआअह्ह्ह.. सही कहा नागराज भाई, ये गांड तोह मेरे लुंड क लिए hi बानी है.. आआआह्ह्ह्हह्ह इसको तोह पहाड़ड़ड़ड़ डालूंगा आज में.. आआह्ह्ह साल्ल्लिई बड़ी खूबसूरत है तेरी पत्नी"

नागराज जैसे उसे पन्ना की बात अछि न लगी हो

"खूबसूरत नहीं.. ककी ऐसी प्रशंशा करने का अधिकार सिर्फ मुझे है"

पन्ना जिसे तुरंत hi अपनी गलती का एहसास हो चूका था

"माफ़ करना नागराज भाई.. ये खूबसूरत नहीं रंडी है.. रैंड सालीइइइइइइ... चुड़क्कड़ चिनाअररररररर... आआआअह्ह्ह्ह"

पन्ना की इस बात पे नागराज को बहुत ख़ुशी होती है और अब वो अपने अगले कार्य को पूरा करना सुरु कर देता है

नागराज बिना समय गंवाए एक एक करके अपनी पत्नी क जिस्म से उसके कपड़ों को अलग करना सुरु कर देता है

जिसकी शुरुवात वो अपनी खूबसूरत गोरी पत्नी क जिस्म से धीरे धीरे साड़ी को अलग करते हुए कर रहा था

"देखो पन्ना भाई.. मेरी पत्नी तुम्हारे लिए नंगी हो रही है"

पन्ना ये सुनता है तोह उसका लुंड और ज्यादा अकड़ जाता है और जोर जोर से अपने लुंड की मथानी चलते हुए

"आआआह्ह्ह्ह.. जल्दी करो नागराज भाई.. इस रैंड को छोड़ने क लिए मारा जा रहा हु"

ऐसे कामुक और अनोखे सब्द सुनकर नागराज का लुंड भी उसकी धोती क बहार हिलोरे मरना सुरु कर देता है.. इसलिए वो अगले hi पल अपनी पत्नी की साड़ी खींच देता है जिससे सजनी गोल गोल घूमते हुए अपने जिस्म से अपनी साड़ी को अलग होने देती है

और जल्दी hi सजनी सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में बची थी

सजनी- देखो पन्ना जी, मेरे पति आपके लिए मुझे नंगा कर रहे है.. ाचा लग रहा है न आपको


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सजनी क मुख से ऐसी बातें पन्ना को और पागल बना रही थी, पर नागराज अब और देरी नहीं करना चाहता था इसलिए वो सजनी क पीछे जेक उसके ब्लाउज क हक़ खोल देता है.. जिससे अगले hi पल ब्लाउज धीरे धीरे सरकते हुए नीचे जमीन पे आके गिर पड़ता है और अब एक खूबसूरत पत्नी ऊपर से पूरी तरह नंगी हो चुकी थी

पन्ना तोह जैसे पागल hi हो जाता है और जल्दी से अपनी जगह से खड़ा होक सजनी की तरफ लपकता है पर उन दोनों क बीच नागराज आते हुए

"नहीं नहीं.. पहले मेरी पत्नी को तुम्हारे लिए पूरी नंगी होने दो, फिर छोड़ना मेरी खूबसूरत पत्नी को किसी रंडी की तरह"

नागराज ये बात कहने क बाद अपनी खूबसूरत पत्नी की तरफ देखते हुए मानो उसकी स्वीकृति पूछता है

"क्यू.. सजनी है न.."

सजनी धीरे से शरमाते हुए ककी अब वो ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थी

"बिलकुल सही कहा जी..

पन्ना जी थोड़ा रुकिए अभी, पहले मेरे पति को मुझे नंगा करने दो आपके लिए

फिर आज पूरा दम लगा क छोड़ना मुझे.. है न जी"

सजनी ठीक अपने पति की hi तरह इस बार उसकी स्वीकृति पूछती है

सजनी को ऐसे पियर और भोलेपन से बोलते हुए देख क दोनों मर्दो क लुंड उछाल क खेल खुद करने को बेताब होने लगते है

नागराज अब अपने दोनों हाथों को अपनी खूबसूरत पत्नी क ऊपर से नंगे जिस्म पे चलते हुए उसकी पेटीकोट क नारे तक लाता है और कुछ hi पलों में सजनी का पेटीकोट भी जमीन की माटी चूमने लगता है

और ठीक ब्लाउज की hi तरह यहाँ भी था.. यहाँ भी सजनी ने पेटीकोट क नीचे कुछ नहीं पहना था, यानि नागराज की पत्नी अब पूरी तरह नंगी हो चुकी थी

नागराज अपनी पत्नी को आगे से देखते हुए अपना हाथ उसकी योनि पे रख क अपनी बीचे वाली ऊँगली उसकी छूट की गहराई में उतर देता है

"आआआआअह्हह्ह्ह्ह... ेस्स्स्सह्ह्ह.... Maaaaaaaaaaaaa"

सजनी तड़पते हुए अपने कामुक होंठों को काटने पे मजबूर हो जाती है

और ऐसा कामुकता से भरा हुआ नज़ारा देख क पन्ना का लुंड फटने को आतुर हो जाता है

"बहनचोद और कितना तरपओगे.. अब मुझसे रहा नहीं जाता, मुझे बस इस रंडी को छोड़ना है"

पन्ना की बेकरारी और आतुरता देख क सबसे ज्यादा ख़ुशी नागराज को hi होती है.. ककी उसका धोती से बहार निकला हुआ लुंड पूरी तरह तन क खड़ा हो जाता है


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नागराज अपनी खूबसूरत पत्नी की योनि से अपनी ऊँगली को बहार निकलता है.. जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसे बिना किसी विलम्ब क अपने मुंह में रख क उस चुतरस से सनी हुई ऊँगली को चूस लेता है

"Ummmmmmmmmmmm.... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp... Ummmmmmmmmmmmmm.. आआआह्ह्ह्ह किया स्वाद है... उम्मम्मम्मम"

पन्ना की हालत तोह ऐसी होने लगती है जैसे उसका लुंड बस पहात hi पड़ेगा

"मादरचोद बस कर.. अब छोड़ने दे अपनी पत्नी"

नागराज- ऐसी बात है तोह ये लो

नागराज मुस्कुराते हुए अपना एक हाथ अपनी पत्नी की पीट पे रखते हुए उसे पन्ना की तरफ दक्का दे देता है.. और सजनी भी सीधा पन्ना क हाथों में जेक संभालती है


नागराज- अब देरी किस बात की.. छोड़ डालो मेरी पत्नी

कंटिन्यू... 👇
 
वैसे मैंने अभी तक सजनी क बारे मैं ज्यादा कुछ बताया नहीं.. और वैसे भी आज वो पहली बार अब सभी से मिल रही है



सजनी यानि नागराज की धर्मपत्नी की उम्र इस समय 32 वर्ष है.. सजनी 18 की भी नहीं हो पायी थी और उसकी शादी नागराज क बड़े भाई 'नागराथ्ना" से हो गयी थी

नागराथ्ना एक बहुत hi सीधे सदा और मेहनती किशन था पर शादी क करीब 2 साल क अंदर hi अचानक उसकी सेहत गिरनी सुरु हो गयी और अचानक एक दिन घरवालों को उसकी ठंडी लाश मिली

जिस पीड़ा को 'नागराथ्ना' क माँ बाप सेह नहीं पाए और एक दिन सरे गाओं को आपस में जोड़ने वाली ऐसी सर्प नदी में उन दोनों की लाश मिली

पर सबसे आश्चर्य की बात तोह ये थी की घर में 3 मौत होने क बाद भी अगले 4 महीनो क अंदर hi सजनी अपने hi पति क छोटे भाई 'नागराज' से पुनः शादी कर लेती है

जिसके चलते पुरे गाओं में तरह तरह की बातें चलनी लगी पर किसी की भी इतनी हिम्मत नहीं हुई की वो 'सजनी या नागराज' क मुंह पे कुछ बोल सके.. और इसकी सबसे बड़ी वजह थी नागराज का 'ठाकुर साहब' का खास नौकर होना

और आज इस बात को 14 वर्ष बीत चुके है पर संसार का नियम देखो.. सजनी और नागराज की आज भी कोई संतान नहीं है

32 वर्ष की सजनी कैसी दिखती है.. अगर एसपी लिखना सुरु करू तोह यही कहूंगा की दूध में अगर हल्का सा केसर मिलाया जाये और फिर जो रंग आएगा, ठीक वही रंग सजनी क जिस्म का है

हल्का सा गुलाबी और बेहद खूबसूरत जिस्म है नागराज की पत्नी सजनी का

उसके उन्नत उरोज वैसे तोह खास बड़े नहीं है.. पर वो पूरी कसावट से भरे हुए और सुडोल है, जिस वजह से उनकी कामुकता अलग hi सिखर पे रहती है

उसपे उसके गुलाबी रंग क निप्पल्स ऐसे लगते है मानो किसी ने मलाई क ऊपर स्ट्रॉबेरी का छोटा सा टुकड़ा रख दिया हो


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वही अगर सजनी की गांड की बात करो तोह उसका कोई जवाब hi नहीं.. गुलाबी जिस्म की मलिका सजनी की गांड भी ठीक उसके जिस्म जैसी hi गुलाबी और खूबसूरत है

उसके कैसे हुए चूतड़ देख क उन्हें सीधा चाटने का दिल करता है.. वही गांड की गहराई को अगर थोड़ा फैलाया जाये तोह हमे 2 मासूम से गुलाबी छेद नज़र आएंगे जो बताने की जरुरत नहीं है की वो हमारी सजनी की छूट और उसके गांड का छेद होगा


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सजनी की काली आँखों में हर समय कामुकता क डोरे उमड़ते रहते है और उसकी आँखों में देखे से ऐसा लगता है जैसे वो चुदाई क लिए जन्मो से भूकी हो


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तोह ये थी हमारी सजनी.. बाकि नागराज क बारे में किया लिखू, परिवार में कोई बचा नहीं और अब बस वो और सजनी रह गए है

नागराज एक हत्ता कट्टा मजबूत मर्द है जिसे दारू और गंजे की गन्दी लत है.. और यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी है

नागराज का काम ठाकुर बलवंत क हक़ को पूरा करना है.. जिसके बदले उसके घर का चूल्हा जलता है और उसकी सरब और नसे की जरुरत पूरी होती है

उम्मीद है फुलवा गाओं क इस जोड़े को अब आप अचे से समझ चुके होंगे.. इसलिए वापस चलते है

नागराज- अब देरी किस बात की.. छोड़ डालो मेरी पत्नी...

सजनी इस समय पूरी तरह नंगी अवस्था में ठीक उसी की तरह नंगे पन्ना क काले जिस्म से चिपकी हुई थी और उसके काले मोठे लुंड को अपनी उँगलियों से सेहला रही थी.. पन्ना बिना समय गंवाए सजनी क होंठों से अपने होंठ मिला क उन्हें चूसने का कामुक कार्य करने लगता है

"उम्मम्मम्मम्मम... Ummmmmmmmmmm.... घ्हुउउउ.... Ummmmmmmmmm"

पन्ना को इस प्रकार जोर जोर से अपनी पत्नी क होंठों को चूसते हुए देख क नागराज का लुंड पूरी ताक़त से फुफकारने लगता है और वो उसे जोर जोर से मथना सुरु कर देता है

"आआआअह्हह्ह्ह्ह... मेरी खूबसूरत पत्नी क होंठों का पूरा रास चूस लो.. आआआह्ह्ह्ह चूस लो मेरी पत्नी को.. आआआह्ह्ह्ह"

सजनी भी अपने पति क सामने यु किसी पराये मर्द से अपने होंठों का रास चुसवाते हुए बहुत कामुक महसूस कर रही थी, उसकी योनि पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उससे हल्का हल्का गाड़ा नमकीन रास टपकना सुरु हो चूका था

वही पन्ना भी दोनों हाथों से सजनी का खूबसूरत चेहरा जेक हुए उसके होंठों का रसपान कर रहा था तोह सजनी भी अपने होंठों को चुसवाते हुए उसके काले भीमकाय सैतान जैसे लुंड को मसले जा रही थी

"उम्मम्मम्मम्म.... सललललूउपपप........ Ummmmmmmmmmmm.. उम्मम्मम्मम..."


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तीनो क तीनो कामुकता क इस खेल क आगे पूरी तरह अपनी हार मान चुके थे

नागराज अपने नाग को मसलते हुए

"बस चूसते hi रहोगे किया मेरी धर्मपत्नी को.. आआआह्ह्ह्ह"

नागराज की बात ने पन्ना क जोश को कई गुना बड़ा दिया था वो तुरंत hi उसकी पत्नी क होंठों को चूसना चोर देता है जिससे सजनी एक बार फिर से लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है.. और जब वो खुद को संभल लेती है तोह मुस्कुरा क अपने पति की तरफ देखते हुए

"आपकी आज्ञा हो तोह.."

नागराज अपने नाग को मसलते हुए

"आज्ञा है.. पन्ना भाई छोड़ डालो मेरी पत्नी"

अपने पति की स्वीकृति मिलने क बाद आगे बढ़ने का कार्य सजनी hi करती है.. नंगी तोह वो थी hi इसलिए मुस्कुराते हुए खुद hi उसी पेड क जड़ क पास जेक धीरे से अपनी गांड को हिलाते हुए जमीन पे अपने दोनों हाथों को रख क जल्दी hi वो एक कुटिया बन चुकी थी


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सजनी धीरे से अपना चेहरा पीछे घुमा क पन्ना क हिलोरे मरते सैतानी लुंड को देखते हुए मुस्कुरा क कहती है

"आओ लूट लो"

अपनी खूबसूरत जिस्म वाली पत्नी की ऐसी कामुकता देख क नागराज क नाग क मुंह से हल्का सा जगह निकल hi आता है

"आआआअह्ह्ह्ह... मेरी खूबसूरत पत्नी.. सजनईईईईई"

सजनी इस समय, पन्ना की आँखों मैं देखते हुए कुटिया बन चुकी थी और जमीन पे अपने दोनों हाथों को रख क अपनी खूबसूरत गुलाबी कासी गांड को पीछे की तरफ निकल क.. पन्ना को देख क आगे बढ़ने का आमंत्रण देने लगती है

"देखा पन्ना भाई.. तुमने बड़ी साड़ी गांड देखि होंगी, पर मेरी पत्नी जैसी खूबसूरत गांड नहीं देखि होगी"

नागराज की बात सुनकर पन्ना मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने hi वाला था की उससे पहले hi नागराज आगे आके बिना देरी क अपनी खूबसूरत पत्नी की कोमल उभरी हुई गांड को पियर से सहलाता है और फिर जोर से मरता है

'Chatttaaaaakkkkkkkkkkkkkkk"

सजनी- (दर्द से तिलमिला पड़ती है) आआआह्ह्ह्हह्ह... Maaaaaaaaaa... ेस्स्स्सह्ह्ह्ह माआररररर.... गईइइइइइ.. रईईईईई

नागराज ने इतनी जोर से अपनी खूबसूरत पत्नी की गांड पे मारा था की पूरा जंगल गूंज उठा था

सजनी- आआआह्ह्ह्ह... देखिये न पन्ना जी मेरे पति मेरे साथ किया कर रहे है

सजनी की बात सुनकर एक पल को तोह पन्ना भी सकते में रह जाता है.. ककी नागराज ने सच में उसे बहुत जोर से मारा था पर फिर भी वो मुस्कुरा रही थी

इसके उपरांत नागराज बिना किसी विलम्ब क अपनी खूबसूरत पत्नी की गांड को दोनों हाथों से जकड क पूरा फैला देता है.. और जबतक पन्ना कुछ समझ पता वो देखता है की नागराज का मुंह उसकी पत्नी की गांड में घुस चूका था

और अगले hi पल

"उम्मम्मम्मम्मम... सललललररररररपपपप..... उम्मम्मम्म... छाआआपपप.... सललललूउपपप..... गरररूपप... छाआपपप.."

सजनी- आह्ह्ह्हह्ह... माआआआ... उफ्फफ्फ्फ़... खा जाइए... हैईईई... रईईई.... मेरे पतिदेव.. आआआआअह्ह्ह्हह... ेस्स्स्सह्ह्ह.... माआआआ.... उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़... ेस्स्स्सह्ह्ह


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सजनी ये कहते हुए जोर जोर से अपनी गांड को हिलना सुरु कर देती है.. और उसकी आँखें कामुकता क मरे बंद होती चली जाती है पर चेहरे पे बहुत सी ज्यादा ख़ुशी और सुकून नज़र आने लगा था

वही उसका पति नागराज भी पूरी सिद्दत और परिश्रम से अपनी खूबसूरत पत्नी की गांड को छत्त रहा था

"सललललूउपपप... उम्मम्मम्म... गलल्लूऊऊऊप्प्प.... छाआपपप.. सललललूउपपप..... सरूउप्पपपप"

पन्ना बस खड़े खड़े देखता hi रह जाता है की कैसे नागराज अपनी पत्नी क दोनों चूतड़ फैला क उसके अंदर अपना मुंह घुसा क उसके छेद और उसकी गांड को कहते जा रहा है.. बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे वो छत्त नहीं बल्कि सजनी की गांड को खा रहा हो


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गांड चटाई का ये कामुक खेल पूरी रफ़्तार से आगे बाद रहा था

"उम्मम्मम्म... सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp.... गलल्लूऊऊऊप्प्प.... गरररूपप... उम्मम्मम्म... लाहालललपपपपपप... छाआपपप... उम्मम्मम्म"

पन्ना से अब रुका नहीं जा रहा था वो अपने लुंड का गाला दबाते हुए

"बहनचोद खा जायेगा किया उसकी गांड.. मुझे कुछ करने देगा की नहीं"

पन्ना क सवाल क जवाब उसे मिलता है पर नागराज से नहीं बल्कि उसकी खूबसूरत पत्नी से

'आआआअह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़... जीईई... माआआआ... हैईईईई... रईईई.... ेस्स्स्सह्ह्ह्ह... आआआह्ह्ह्ह ये सब आपके लिए hi हो रहा है पन्ना जी.. आआआअह्ह्ह्ह ये मुझे आपके लिए hi तैयार कर रहे है, आआअह्ह्ह टॉक्कीी आप मुझे अचे से भोग सको.. ताकि मैं आपको गरमा गरम मिलु खाने क लिए.. आआह्ह्ह्ह ेस्स्स्सह्ह्ह्ह"

सजनी ये कहते हुए कामुकता से अपने होंठों को धीरे से काट लेती है

"आआआअह्ह्ह्हह... ेस्स्स्सह्ह्ह... Maaaaaaaaaaaaaa"


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नागराज की जोरदार गांड चूसै की म्हणत का फल मिलने लगा था.. ककी अब सजनी की योनि से बेहटा रास और तेज़ी से बहने लगा था और साथ hi साथ उसका पूरा जिस्म कांपने लगता है उत्तेजना की आदिकता से.. उसके निप्पल्स तन चुके थे और छूट क अंदर भर भर क गर्मी का सैलाब उमड़ने लगा था

इसलिए वो खुद hi अपनी कमर को जोर जोर हिलाते हुए अपने पति क मुंह पे अपनी गांड दबाने लगती है

"आआआहहहहहहह... माआआआ... ेस्स्स्सह्ह्ह... माआआ... हैईईई... माआआ.... माअररररररररर... गईइइइइइ... रईईईई"

नागराज बिना रुके जोर जोर से अपनी पति की गांड में घुसा हुआ उसे छत्त और चूस रहा था

"सललललूउपपप... Ummmmmmmmmmm.... गलल्लूऊऊऊप्प्प.... Ummmmmmmmmmm.... सलुउपपपपप..."

सजनी पूरी तरह पागल होने लगी थी कामुकता क चलते उसकी आँखें खुल hi नहीं प् रही थी की तभी उसके इस आनंद को एक झटका लगता है.. जब उसका पति उसके चूतड़ों से अलग होते हुए उसकी गांड की चूसै बंद कर देता है

सजनी लालच भरी नज़रों से अपनी पति को देखती है मानो कह रही हो


'और चाटिये न...'

कंटिन्यू... 👇
 
पर नागराज मुस्कुरा क अपना मुंह अपने हाथ से पूछते हुए

"अब तुम्हारी गांड तैयार है.. पन्ना भाई का लुंड खाने क लिए"

पन्ना ये सुनता है तोह हैरान hi रह जाता है, ककी अब उसे समझ अत है की ये सब नागराज उसके लिए कर रहा था.. यानि अपनी पत्नी की गांड को चूसने क पीछे नागराज का सिर्फ इतना hi उद्देश्य था की वो उसे पन्ना क लुंड क लिए पूरी तरह तैयार कर सके

पन्ना- आआह्ह्ह्हह्ह... किया जोड़ी है बहनचोद तुम दोनों की... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

पन्ना से अब और रुका नहीं जाता और वो लपक क जमीन पे दोनों हाथ टिकाये कुटिया बानी सजनी क पीछे अपनी जगह पे अपना आसान बना लेता है.. और फिर पीछे मुड़कर नागराज को देख क

"छोड़ लू..."

नागराज मुस्कुराते हुए.. बस है में सर हिलता है

फिर किया था पन्ना और समय नस्ट किये बिना अपने लम्बे मोठे और सीधे खड़े लुंड का मोटा सूपड़ा खूबसूरत सजनी की गांड क उसी चेस पे टिकता है जिसे अभी अभी उसके पति ने खूब अचे से छत्त छत्त क गीला किया था

पन्ना खुद hi सजनी क दोनों चूतड़ अचे से फैला क उसकी गांड क गुलाबी छेद में अपना सूपड़ा अचे से फसा क अपने दोनों हाथों को उसकी नंगी कोमल गांड पे जमा लेता है.. वही अपनी गांड क मासूम छेद पे इतना भयंकर लुंड छूटे hi सजनी का पूरा जिस्म कामुकता की आग पकड़ लेता है

सजनी दोनों हाथों को और अचे से जमीन पे टिका लेती है और अपनी साँसों को काबू करने लगती है.. ककी उसे पता था किसी भी पल एक जोरदार दक्का आने वाला है

और उसे ज्यादा दिएर इन्तिज़ार नहीं करना पड़ता, ककी पन्ना दोनों हाथों से सजनी की कमर को जकड क एक जोरदार दक्का जड़ देता है.. जिससे उसका समूचा हैवान जैसा लुंड बिना किसी रोक टोक क एक hi बार में गांड को चीरता हुआ अंदर तक घुसता चला जाता है

सजनी- (अपनी गांड क छेद क फैलने और अंदर घुसते लुंड क कारन उसका पूरा जिस्म गंगना सा जाता है.. पर हैरानी इस बात की थी की उसे कोई बहुत ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता) ेस्स्स्सह्ह्ह्ह.... Maaaaaaaaaaa... उफ्फ्फफ्फ्फ़.... कितना गरम लुंड है.... आआआआह्ह्ह्ह

सजनी को ऐसे इतने जोरदार दकके क बाद भी मज़े से अपनी गांड में घुसते लुंड का आनंद लेते हुए देख क एक पल को पन्ना भी हैरान रह जाता है.. उसे लगता है कही उसकी मर्दानगी में कोई कमी तोह नहीं, इसलिए वो तुरंत hi अपना लुंड बहार खींच क इस बार और ज्यादा जोर से अंदर उतर देता है

"आआआआअह्ह्ह्हह..... ेस्स्स्सह्ह्ह.... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़... Haiiiiiiiiii...... किया सुकून मिलता है गांड में लुंड लेने पे.... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़"

पर सजनी उसी प्रकार आनंद लेते हुए

वही अपनी खूबसूरत पत्नी की गांड में इतना मोटा लुंड अंदर बहार होते हुए देख क नागराज को असली मज़ा और सुकून आने लगता है.. ककी वो अब और जोर जोर से अपने लुंड को मसलना सुरु कर चूका था

"आआआहहहहह... शाब्बाश पन्ना भी.. पहाड़ड़ड़ड़ डालूऊओ मेरी पत्नी की गांड को... आआआअह्ह्ह्ह"

नागराज की बात सुनकर पन्ना और जोश से भर जाता है और वो फिर से अपने लुंड को सुपडे तक बहार खींच क वापस से अंदर उतर देता है

"ये मादरचोद रनडीईईईई...."

वही सजनी उस जोरदार दकके का पूर्ण आनंद लेती हु

"Aaaaaaaaaahhhh... मायआ.... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.... ऐसे hi...aaaahhhh ऐसे hi... आआह्ह्ह पहाड़ड़ड़ड़ डालो आज मेरी गांड को... आआह्ह्ह्हह.. कचूमर निकल दो मेरी गांड का... आआआह्ह्ह्ह... मायआ..... उफ्फफ्फ्फ़... ऐसे hi... आआआअह्हह्ह्ह्ह"


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पन्ना को थोड़ी हैरानी भी हो रही थी की उसका इतना बड़ा लुंड लेने क बाद भी एक बार को भी सजनी चिल्लाई या रोई नहीं.. उल्टा वो तोह उसके पहले दकके से hi मज़े लेने लगी थी

सजनी- (खुद hi अपनी गांड को हल्का सा उठा लेती है.. ताकि लुंड और अंदर गहराई तक जाये) आआआह्ह्ह्ह... उफ्फफ्फ्फ़... ऐसे... हीई... आआआह्ह्ह्ह.. मायआ... हैईईई... ऐसे... ऐसे... Hi.... आआआह्ह्ह्ह... पहाड़ड दालुओ आअज नागराज की पत्नी की गांड... आआआह्ह्ह्ह


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सजनी अपने अंतिम सब्द पीछे खड़े अपना लुंड मसलते हुए अपनी पति को देख क कहती है.. जिसपे नागराज मुस्कुरा पड़ता है

वही पन्ना अपना पूरा दम लगा क सजनी की गांड को चौड़ा करने में लग चूका था

"आआआअह्ह्ह्ह... ये ले... आआअह्ह्ह... किया गरम गांड है तेरी.. आआअह्ह्ह्ह.. तेरी गांड मेरा लुंड निचोड़ रही है... आआह्ह्ह्हह साआआईई रंडी कही की... उफ्फफ्फ्फ़... किया मुलायम मुलायम गांड पायी है तूने.. आआआअह्ह्ह्हह"

गांड चुदाई का ये कामुक खेल पूरी गति से आगे बाद रहा था.. पुरे जंगल में बस वही एक कामुक आवाज़ दूर दूर तक जा रही थी, जो थी पन्ना क मोठे मोठे ाँद क सजनी की छूट स्टाल पे टकराने क.. जिससे वही पुराण पर सबसे मधुर संगीत उत्पन्न हो रहा था

"चत्तत्ताआआककककक.... पाततततततत.... पाहात्त्टटटट... चत्तत्ताआआककककक..... पाततततततत.... पाहात्त्त्तत्त... पट्टाककककक.... चत्तत्ताआआककककक"

सजनी- (अपनी गांड में घुसते मोठे लुंड का भरपूर आनंद लेती हुई) आआआअह्हह्ह्ह्ह... मायआ... उफ्फ्फफ्फ्फ़... ऐसे hi... आआआह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ्फ़... किया दुमदार लुंड है... आआआहहह मेरी गांड क अंदर उसके अंतिम चोर तक जा रहा है... आआआहहहहह... उफ्फ्फफ्फ्फ़... माआआआ.... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़

पन्ना अपने लुंड की ऐसी कामुक तारीफ सुनकर बहुत खुस हो जाता है और वो और अधिक जोरो से नागराज की पत्नी की गांड बजने लगता है

नागराज- आआह्ह्ह्हह्ह... ऐसे hi... आआआह्ह्ह्ह लाल कर दो.. मेरी पत्नी की गांड को... उफ्फफ्फ्फ़... पहाड़ड डालो मेरी खूबसूरत पत्नी की गांड को.. आआअह्हह्ह्ह्ह


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नागराज की बातें पन्ना क अंदर जोश भरने का काम कर रही थी जिससे वो और जोर जोर से उसकी पत्नी की गांड को फैला क चोदे जा रहा था

"आआआहहहहह... उफ्फ्फ्फ़... इतनी खूबसूरत गांड सायद hi कभी छोड़ी होगी मैंने... आआआह्ह्ह्ह.. किया गांड है... उफ्फ्फ्फ़.. मेरा पूरा लुंड निगल गयी... आआआअह्ह्ह्ह"

नागराज- (अपने काले नाग को जोर जोर से मसलते हुए) आआह्ह्ह्हह.. पन्ना भाई ऐसी गांड और कही मिलेगी भी नहीं.. ककी ऐसी गांड सिर्फ और सिर्फ मेरी खूबसूरत पत्नी क पास है.. है न... सजनी

सजनी- (अपनी गांड से पन्ना का मोटा लुंड कहते हुए) आआआह्ह्ह्ह... हआ... जी.... ऐसी खूबसूरत गांड सिर्फ आपकी इस पत्नी की है.. आआअह्ह्ह्हह... उफ्फफ्फ्फ़... देखिएगा न जी... आआआह्ह्ह्ह... कितनी जोर जोर से छोड़ रहे है ये आपकी पत्नी को... आआआह्ह्ह्हह्ह

नागराज- (अपनी खूबसूरत पत्नी की गांड में पन्ना का मोटा लुंड अंदर बहार होते हुए देख क) आआअह्ह्ह्हह.. सही कहा सजनी.. उफ्फफ्फ्फ़... पर तुम्हारी गांड ऐसी hi चुदाई मांगती है.. है न मेरी सजनी

सजनी- (पन्ना का लुंड और अंदर तक खाने क लिए खुद hi अपनी गांड को हिलने लगी थी और हल्का सा उठ भी गयी थी) आआह्ह्ह्हह.. सही कहा जी.. आपकी ये पत्नी बहुत बड़ी चुड़क्कड़ है.. आआह्ह्ह्ह.. ऐसे ऐसी hi चुदाई की जरुरत रहती है... आआआह्ह्ह्ह.. माआआ... उफ्फफ्फ्फ़ हीी... पणायआ.. किया लुंड है... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

पन्ना भी कोई कसार नहीं चोर रहा था खूबसूरत सजनी की छूट बजने में जिससे पूरा जंगल

"पाततततततत... पाहात्त्त्तत्त... Pattaaakkkkk...chatttatttttaaakkk"

की मधुर ध्वनि से गूंज रहा था.. और ये मधुर आवाज़ सुनते हुए नागराज अपने लुंड का जूस निकलने क लिए म्हणत किये जा रहा था

"आआआहहहहहहह... पहाड़ड डालूऊओ मेरी पत्नी की गांड... आआआह्ह्ह्ह उफ्फ्फ..... ऐसे hi... आआआह्ह्ह्हह्ह... आआआहहह पन्ना भाई.. उफ्फ्फ्फ़ किया गांड चुदाई करते हो... आआआह्ह्ह्ह"

ये नंगा खेल न जाने कितनी hi दिएर यही पूरी गति से चलता रहता है.. जिसका साक्षी सिर्फ और सिर्फ वो घाना जंगल था

सजनी- आआअह्हह्ह्ह्ह... मैं बहने वाली हु जी... आआआआह्ह्ह्ह... देखिये न पतिदेव आपकी पत्नी की छूट से पानी निकलने वाला है... उफ्फफ्फ्फ़ इस मोठे लुंड ने आपकी पत्नी को खुस कर दिया.. आआआह्ह्ह्ह


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अपने अंतिम उद्देश्य को पूर्ण करने क लिए पन्ना का लुंड भी अब किसी भी पल अपना लावा उगल सकता था

पन्ना- (जोर जोर से गांड मरते हुए) आआआहहहहहहह... माआआ..... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.... किया करू भाई.. भर दू इस रंडी की गांड अपने वीर्य से... आआआह्ह्ह्हह्ह

नागराज- (एक भी मं व्यर्थ किये बिना) है... भर दो.. पहाड़ड.. क रख दी तुमने मेरी खूबसूरत पत्नी की गांड... आआआह्ह्ह्हह्ह... भारररर दो.. मेरी पत्नी की गांड को... आआआआअह्हह्ह्ह्ह.. अपने गरम गरम वीर्य से मेरी पत्नी की गांड भर दो... आआआअह्ह्ह्ह

पन्ना का लुंड अब और देरी नहीं कर सकता था इसलिए अगले 6-7 मजबूत धक्कों क बाद उसका लुंड गरम गरम लावा चूर्ण सुरु कर देता है.. जो सजनी की खूबसूरत गुलाबी गांड क छेद क अंदर भरना सुरु हो जाता है

सजनी- (अपनी गांड में भरते हुए गरम वीर्य से प्राप्त होने वाले असीम आनंद को महसूस करती हुई) Aaaaaaaaaahhhhhh... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़... ये आनंद... हैईईई... कितना गरम गरम रास है तुम्हारा aaaaaaaaaaaahhhh.. देखिये जी.. आपकी पत्नी की गांड भर दी पन्ना जी ने.. आआआह्ह्ह्ह

नागराज भी सायद यही सुन्ना च रहा था ककी जैसे hi उसकी खूबसूरत पत्नी ने ये कहा उसका लुंड भी अपना गाड़ा वीर्य टपकने लगता है और उसकी आँखें बंद होती चली जाती है.. और वो भी वही जंगल की भूमि पे लेत जाता है


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आज 2 लुंड से एक साथ रास बह रहा था.. फर्क सिर्फ इतना था की एक सुखी जमीन पे गिर रहा था तोह दूसरा किसी की पत्नी की गांड को भर रहा था

अपनी गांड में भरते गरम रास क चलते सजनी वही जंगल की हरी जारी घास पे ढेर हो जाती है और पन्ना भी उसके ऊपर गिर क लम्बी लम्बी साँसें लेने लगता है

करीब 10 मं बाद पन्ना, सजनी क ऊपर से उठता है तोह उसका लुंड पूरी तरह मुरझा चूका था पर ये मुरझाया हुआ लुंड भी किसी हैवान क लुंड से काम नहीं था

पन्ना देखता है की नागराज भी वही जमीन पे लेता हुआ आराम कर रहा है.. वो उसे देख क हस्ते हुए कहता है

"भाई कुछ खाने क लिए लाये थे"

ककी इतनी दुमदार चुदाई करने क भूक तोह लगनी hi थी

नागराज, पन्ना की तरफ देखते हुए धीरे से है पड़ता है और बस है में अपना सर हिला देता है

पन्ना- फिर तोह मैं जा रहा हु.. बड़ी भूक लग रही है अब, तुम दोनों चलोगे

इस बार जवाब सजनी देती है

"नहीं पन्ना जी आप चलिए.. हम थोड़ी दिएर में आते है, आपने इतनी अचे से मेरी गांड मारी है की थोड़ा आराम तोह करना hi पड़ेगा"

पन्ना हस्ते हुए दोनों पति पत्नी को देखता है और फिर सीधा जंगल क बीच में बने उसी घर की तरफ चल देता है.. यहाँ जैसे hi पन्ना सजनी की आँखों से ओझल होता है उसके चेहरे पे मुस्कान खेल जाती है और वो अपने पति की तरफ देखता है जो उसे hi देख क मुस्कुरा रहा था


सजनी- (मुस्कुराते हुए) आइए न जी.. वर्ण सब सुख जायेगा

कंटिन्यू... 👇
 
सजनी की बात सुनते hi नागराज जल्दी से उठता है और अपनी पत्नी क करीब चल पड़ता है.. वही अपने पति को आता हुआ देख क सजनी एक बार फिर से गोदी बन जाती है



जिससे उसकी गांड से बेहटा हुआ पन्ना का गरम और गाड़ा रास जोरो से बहार टपकने लगता है


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नागराज जल्दी से आता है और अपनी खूबसूरत पत्नी क दोनों चूतड़ पकड़ क उन्हें थोड़ा और फैलता है और अगले hi पल वो एक बार फिर से अपनी पत्नी की गांड क बीच अपना मुंह घुसा देता है

पर इस बार बात अलग थी.. ककी इस बार उस गांड में पन्ना का गाड़ा रास भरा हुआ था

"आआआह्ह्ह्हह्ह... माआआ.... ेस्स्स्सह्ह्ह.... उफ्फ्फफ्फ्फ़... पूरा छत्त क साफ़ कर दीजियेगा... Aaaaaaaaaahhhhhhhhh"


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जैसे hi नागराज क होंठ उसकी खूबसूरत पत्नी की चूड़ी हुई गांड से लगते है.. सजनी आनंद की नयी परिभाषा लिकने लगती है

"आआआअह्हह्ह्ह्ह... अंदर तक छत्त क साफ़ करियेगा जी... Aaaaaaaaaahhhhhhh... पन्ना जी ने मेरी गांड का छेद चौड़ा कर दिया है.. आआअह्ह्ह.. अंदर तक जीभ दाल क साफ़ कर लीजियेगा... आआआह्ह्ह्ह ेस्स्स्सह्ह्ह्ह"

नागराज भी अपनी पत्नी क मुख से निकलने वाले एक एक सब्द का पूर्ण अनुसरण करते हुए उसके चूतड़ को अचे से फैला क अंदर तक छत्त रहा था

"सललललूउपपप.... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp..... गलल्लूऊऊऊप्प्प..... गररररररललललपपप.... सललललूउपपप.... Ummmmmmmmmmm..... Ummmmmmmmmmm... सललललूउपपप"

जैसे जैसे नागराज की खुरदुरी जीभ चल रही थी वैसे वैसे सजनी आनंद की दुनिया में खोटी जा रही थी

"आआआआह्ह्ह्ह... उफ्फफ्फ्फ़... पूरा अंदर तक चाटिये... ेस्शह्ह्हह्ह्ह्ह... आआह्ह्ह्ह... हैई जी... उफ्फ्फ्फ़... ऐसे hi... आआआहहहहह... ेस्स्स्सह्ह्ह... ऐसे hi... आआआह्ह्ह्ह"


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नागराज एक अचे पति की तरह अपनी खूबसूरत पत्नी की ीचा का पूरा सम्मान करते हुए उसकी गांड में भरे पन्ना क गरम गाड़े वीर्य को अचे से छत्त छत्त क साफ़ कर रहा था

"सललललूउपपप.... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp.... Ummmmmmmmmmm.... गलल्लूऊऊऊप्प्प.... सललललूउपपप...... Ummmmmmmmmmm"

सजनी- आआआअह्हह्ह्ह्हह... बुस्स्सस्स्स्सस्स... करिये जी.... Aaaaaaaaaaaahhhh... वर्ण में फिर से गरम हो जाउंगी.. aaaaaaaaaaaaahhhhhhhh

अपनी खूबसूरत पत्नी की बात सुनकर नागराज 1-2 बार और उसकी छूट को अचे से छत्त क साफ़ करता है और फिर वही उसी क पास hi लेत क लम्बी लम्बी साँसें भरने लगता है

सजनी भी पलट क उसी क सीने पे अपना सर रख क आराम करने लगती है

आशा करता हु ये जो कुछ नया और अलग लिखा है.. आपको पसंद आएगा



आपके विचार जानने का इंतज़ार रहेगा 🙏
 
नई अपडेट (चुदाई से भरा हुआ 🔥)

- पेज No. 258

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नई अपडेट

पेज No 258 👇

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Adultery - मालती का कामुक संसार (Adultery Upanyas)

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xforum.live

 
आज मैंने थोड़ा समय निकल क कुछ लिखा है, उसमें से कुछ आप सभी दोस्तों क लिए 👇

मैं ऐसे अनमोल वचन सुनते हुए उसकी बात मान लेती हु और अपनी गांड को पूरा ऊपर उठा देती हु.. जिससे अब मेरी गांड क साथ साथ मेरी छूट का छेड़ भी पूरी तरह नज़र आने लगा होगा


वैसे मैं थोड़ी उलझन में भी थी.. मुझे पता नहीं लग प् रहा था किया **** एक बार फिर से मेरी योनि से यौवन चूसेगा, या मेरी गांड का तरबूज फाड़ेगा
 
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