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वापस वर्तमान में लौट चलते है.. जहा सबसे पहले आपको घर की इस्तिथि क बारे में थोड़ा और विस्तार से बता देता हु
'फुलवा गाओं' क जंगल में बना हुआ एक छोटा सा घर कभी ठाकुर साहब क लिए उनकी रासलीला का अड्डा हुआ करता था, और बाद में ये उनके कच्चे माल को छुपा क रखने का अड्डा बना.. पर आज कल ये खली hi पड़ा था और अब इसमें हीरा पन्ना रह रहे है
घर की इस्तिथि ऐसी है की यहाँ तक आने क लिए ाचा खासा जंगल पार करके आना होता है और ये जंगल भी सर्प नदी क किनारे hi बसा हुआ है.. वैसे ये जंगल अंदर hi अंदर सुंदरपुर गाओं क जंगल से भी जुड़ता है, पर वो रास्ता मौत से भरा हुआ है
पर यही खतरनाक रास्ता ठाकुर क कार्य क लिए उपयोग में आता है
वापस उस घर की बात करू जहा इस समय 'हीरा पन्ना' ठहरे हुए है तोह.. घर क ठीक पीछे घने जंगल क और अंदर जाने का पतला सा रास्ता भी बना हुआ है
और अगर थोड़ा और आगे बड़ा जाये तोह एक जगह पे खूबसूरत सा नज़ारा देखने को मिलता है.. जहा पहाड़ी से रिस रिस क आता हुआ पानी एक पत्थर क पास इकट्ठा होते हुए आगे बढ़ता है
इतने दिनों से इस जंगल क बीच रह रहे दोनों भाई.. अक्सर यही जंगल में घूमने निकल आते है, वैसे भी इन दोनों को जंगल से बहार जाने की इजाजत नहीं है
सुरु में पन्ना को नागराज की बात बस मज़ाक लगी थी.. पर जल्दी hi दोनों भाई समझ गए थे की ठाकुर सच में कोई बड़ी चीज़ है
पन्ना- भैया चलो जंगल में अंदर घूम क आते है
हीरा- (खिड़की क पास से हट्टे हुए वही बिस्तर पे लैट्टे हुए) तू जा.. मैं कबसे वही जंगल में टहल रहा था
पन्ना इसके बाद देरी नहीं करता है और जल्दी hi जंगल क अंदर घूमने निकल पड़ता है.. आखिर और कही जा भी नहीं सकता था
पन्ना टहलते हुए काफी अंदर निकल आता है जहा जंगल क बीच एक जगह अछि खासी ख़फ़ी जगह थी.. और उस जगह क बीच एक विशाल पेड खड़ा हुआ था
पन्ना वही उस पेड क सहारे लग क बैठ जाता है और उसे पता hi नहीं चलता की कब उसकी आँख लग गयी.. न जाने कितनी hi दिएर तक वो उसी प्रकार सोता रहता है, पर उसकी नींद भागने क काम करती है वो सुरीली सी आवाज़
जल्दी hi पन्ना की आँख खुलती है तोह वो अपने सामने एक खूबसूरत हलके और खूब कैसे हुए जिस्म की औरत को पाटा है जिसने एक साड़ी पेहेन राखी थी और खूबसूरत तरह से सजी हुई थी
पन्ना- उफ्फ्फ्फ़.. मेरी जान किया माल लग रही हो.. आआह्ह्ह साललीई राआनंददददद
पन्ना इतना hi बोल पता है की वो खूबसूरत सी साड़ी में सजी हुई औरत उसकी धोती क ऊपर से उसके लुंड को पकड़ क दबा देती है और जब पन्ना की आअह्ह्ह निकलती है तोह हस्ते हुए कहती है
"तुम्हे पता है न.. मुझे तारीफ सुन्ना सिर्फ अपने पति से पसंद है.. क्यू है न जी"
पन्ना देखता है की वही उन दोनों से थोड़ा दूर उसका पति 'नागराज' खड़ा था यानि ये खूबसूरत हलके भरे जिस्म वाली औरत और कोई नहीं अपितु 'सजनी' है.. नागराज की पत्नी
पन्ना, नागराज को देख क हस्ते हुए कहता है
"और कैसे हो नागराज भईईई... आअह्ह्ह.. भाई तेरी बीवी बहुत बड़ी रआनंददद है कुटियाआ कही की"
पन्ना की बात को बीच में hi रोकने का कामुक कार्य नागराज की खूबसूरत पतली दुबली पर कैसे जिस्म वाली पत्नी बहुत अचे से पन्ना का लुंड फिर से उसकी धोती क ऊपर से दबा क करती है
नागराज- (अपनी पत्नी की कामुक हरकत देखते हुए.. अपने लुंड को मसलने पे मजबूर हो hi जाता है) मेरी पत्नी जैसी गरम औरत पुरे फुलवा गाओं में नहीं है
अपने पति से तारीफ पाना तोह हर औरत की कामना होती है.. ऐसे में सजनी कैसे पीछे रह सकती थी, वो जब देखती है की उसका पति इतनी ख़ुशी से उसकी हरकतों से खुस होक उसकी तारीफ कर रहा है तोह उसे बहुत hi ज्यादा ख़ुशी मिलती है और वो पन्ना की धोती क ऊपर से hi उसके लुंड को पकड़ क उसका उभर सा बनाते हुए उसकी झुकती चली जाती है
पर वो इतने में hi नहीं रूकती.. सजनी अब पूरी तरह पन्ना क लुंड पे झुक चुकी थी, फिर वो उसी इस्तिथि में पीछे मुद क अपने पति को देखते हुए धीरे से कहती है
"स्वामी.. आपकी आज्ञा हो तोह.."
नागराज जब ये सुनता है तोह जोर से अपना लुंड दबा लेता है
"आआआह्ह्ह्ह.. हां.. मेरी प्रिये पत्नी.. आगे बड़ो"
और नागराज क इतना कहते hi सजनी अपनी जीभ बहार निकल क पन्ना क लुंड को उसकी धोती क ऊपर से hi छत्त लेती है
"उम्मम्मम्मम... सललललूउपपप.... सललललूउपपप"
सजनी- आआह्ह्ह.. स्वादिष्ट है
नागराज अपना लुंड मसलते हुए
"उसे बहार निकल क पियर करो"
सजनी अपने पति परमेश्वर की बात को तनिक भी नहीं टलती और जल्दी hi वो धोती को आगे से खोल देती है.. जिसे पन्ना भी अपनी गांड उठा क अपने पैरों क नीचे से निकल देता है
पर अगला कामुक कार्य सजनी खुद कर देती है.. वो उस धोती को उठा क अपने पति की तरफ फेकते हुए
"देखिये जी.. आपकी आज्ञाकारी पत्नी ने आपके सामने एक मर्द को नंगा कर दिया है"
सजनी की बात सुनते hi नागराज का नाग फैन उठाने लगता है और वो ख़ुशी क मरे बिना किसी विलम्ब क अपने नाग को बहार निकल क उसे खुली हवा में सांस लेने का मौका दे देता है
नागराज- (अपने नाग से खेलते हुए) उसे अचे से चाटो.. पियर करो सजनी.. खूब प्रेम दो उसे
अब भला एक आज्ञाकारी पत्नी अपने पति की आज्ञा की उलाहना कैसे कर सकती थी.. इसलिए सजनी भी नहीं करती और अपनी जीभ निकल क जैसे hi पन्ना क काले और भीमकाय लुंड को चाटने वाली होती है पन्ना थोड़ी सी बदमाशी कर देता है और जान क अपनी गांड को हल्का सा उठा देता है.. जिससे सजनी की जीभ उसके लुंड की जगह उसके गांड क गंदे छेद पे चल जाती है
"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp.... सललललूउपपप"
पर सजनी तब भी अपने कार्य से पीछे नहीं हटती बल्कि वो खुद पन्ना का रक्षक जैसे लुंड को मुठी में दबोच क और ऊपर उठा लेती है और पूरी म्हणत से अपनी जीभ को बहार निकल क उसकी गन्दी गांड की दरार में चलना सुरु कर देती है
"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp... सललललररररररपपपप..."
पन्ना- आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. साललीई चिनाअररररररररर कुटिया.... Aaaaaaaaaaahhhhh
नागराज- आआह्ह्ह्ह.. उफ्फफ्फ्फ़.. और अचे से छतो
अब भला एक आज्ञाकारी पत्नी कैसे अपने पति की बात ताल सकती थी, इसलिए सजनी भी पूरी सिद्दत और म्हणत से अपने पति क कहने पे पन्ना की गन्दी गांड चाटने लगती है
"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp.... सललललूउपपप.... उम्मम्मम... सललललूउपपप.... उम्मम्मम्मम्म... गररररररललललपपप"
पन्ना- आह्ह्ह्हह्ह... साआल्लीई किया.. चट्टी है.. आआआहहह.. मादरचोद रंडी कही की.. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह
पन्ना क मुंह से अपनी पत्नी क लिए ऐसी गन्दी गन्दी गलियां सुनकर नागराज का नाग और ज्यादा फुफकारने लगता है वो जोर से अपने लुंड को मुठी में भर क उसे मथना सुरु कर देता है
"आआआआह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... ऐसे hi सजनी आआअह्ह्ह.. अचे से छतो.. आआअह्ह्ह खा जाओ पन्ना की गांड को... आआआहहह.. शाब्बाश मेरी जान.. मैं बहुत किस्मत वाला हु तोह तुम्हारे जैसी पत्नी मिली है.. आआआह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ्फ़.. ऐसे hi... आआआअह्ह्ह"
सजनी की शानदार चटाई और उसके पति नागराज की ऐसी कहि बातें पन्ना को पूरा पागल बनाने लगती है वो जोर से सजनी का सर अपनी गांड क छेद पे दबा देता है
सजनी को ऐसा लगता है जैसे वो सांस नहीं ले प् रही हो और पन्ना की बदबूदार गन्दी गांड से बहुत hi गन्दी और ज़हरीली सी बदबू उसका सर चकराने पे मजबूर करने लगती है
सजनी.. पन्ना की जाँघों पे जोर जोर से मरना सुरु कर देती है मानो वो किसी भी तरह उस चंगुल से बच क निकल जाना च रही हो, पन्ना उसे ऐसा करने नहीं दे रहा था
बल्कि ऐसी बीच सजनी को लगता है जैसे पन्ना की गांड से एक गरम हवा का झोंका निकला हो
"आआआअह्ह्ह्ह.... चहाअट्ट... साललीई... कुटियाआ... रंडी.. चाहात्त्त्त...."
वही अपनी पत्नी की ऐसी दुर्दशा देख क नागराज का नाग पागल होने लगा था.. जिसे वो जोर जोर से मसलते हुए उसका दम घोट रहा था
"आआआहहह... ईई.. हुई न बायतत्तत... हार मत मन्ना तुम मेरी पत्नी हो.. दिखा दो अपना दम.. आआआहहहहह"
पर सजनी की हालत सच में पूरी बिगड़ चुकी थी, वो पूरा दम लगा क आखिर पन्ना जैसे हैवान क चंगुल से बच hi जाती है और जल्दी से पीछे होते हुए लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है
"आआआआहहह... माआआ... माररररर... डोज... किया... आआआहहहहह.. पागल कही क... आआआअह्ह्ह्ह"
सजनी की हालत देख क पन्ना और नागराज दोनों की हसने लगते है.. वही सजनी अब भी थोड़ी दुरी पे होक वही जमीन पे बैठी हुई लम्बी लम्बी साँसें लिए जा रही थी
पन्ना नीचे से पूरा नंगा तोह था की अब वो ऊपर पहनी हुई गन्दी सी बनियान भी उतर क वही एक तरफ फेक देता है.. जिससे उसका रक्षक जैसा बदन पूरा का पूरा नंगा हो चूका था
"नागराज भाई.. ऐसे कैसे मज़ा आएगा, जरा सजनी से भी कहो न वो भी नंगी हो तोह मज़ा आये"
पन्ना की बात सुनकर नागराज है देता है पर अपनी पत्नी से कुछ कहने की जगह वो खुद आगे बढ़ता है और उसके पास जेक पियर से उसके सर पे हाथ फिरते हुए कहता है
"उठो मेरी जान"
सजनी जो अब भी बुरी तरह जोर जोर से सांस लेते हुए हाफ रही थी वो अपने पति की बात पे मुस्कुरा पड़ती है और अपनी जगह कड़ी हो जाती है
नागराज अपना एक हाथ अपनी खूबसूरत कसावट से भरे हुए जिस्म वाली पत्नी की गोल गोल चुकी पे अपना हाथ रखते हुए
"देखो पन्ना कितनी कासी चुकी है मेरी सजनी की.. देखो तोह"
नागराज ये कहते हुए अपनी गोरी दूध की मलाई जैसी पत्नी की उस चुकी को जोर से दबा देता है
"ेस्स्स्सह्ह्ह्ह... माआ... धीरीईईए...... जीईईईई"
सजनी की ऐसी धीरे से कामुक ाःह को सुनकर पन्ना का हतियार सजनी क नाम पे सलामी देने लगता है
"आआआह्ह्ह्ह.. माआल है साली.."
नागराज अपनी पत्नी की खूबसूरती की तारीफ सुनकर बहुत खुस होता है और फिर सजनी को घुमा क उसकी हलकी उभरी हुई पर मजबूत गांड पे अपना हाथ रखकर उसे गोल गोल घूमते हुए
"देखो पन्ना.. कितनी मस्त गांड है मेरी सजनी की, इसमें तुम्हारा लुंड जायेगा तोह कितना आनंद आएगा न.. बोलो न"
पन्ना बिना समय व्यर्थ किये जल्दी से अपने लुंड को पकड़ क मुठ सा मरने हुए
"आआअह्ह्ह.. सही कहा नागराज भाई, ये गांड तोह मेरे लुंड क लिए hi बानी है.. आआआह्ह्ह्हह्ह इसको तोह पहाड़ड़ड़ड़ डालूंगा आज में.. आआह्ह्ह साल्ल्लिई बड़ी खूबसूरत है तेरी पत्नी"
नागराज जैसे उसे पन्ना की बात अछि न लगी हो
"खूबसूरत नहीं.. ककी ऐसी प्रशंशा करने का अधिकार सिर्फ मुझे है"
पन्ना जिसे तुरंत hi अपनी गलती का एहसास हो चूका था
"माफ़ करना नागराज भाई.. ये खूबसूरत नहीं रंडी है.. रैंड सालीइइइइइइ... चुड़क्कड़ चिनाअररररररर... आआआअह्ह्ह्ह"
पन्ना की इस बात पे नागराज को बहुत ख़ुशी होती है और अब वो अपने अगले कार्य को पूरा करना सुरु कर देता है
नागराज बिना समय गंवाए एक एक करके अपनी पत्नी क जिस्म से उसके कपड़ों को अलग करना सुरु कर देता है
जिसकी शुरुवात वो अपनी खूबसूरत गोरी पत्नी क जिस्म से धीरे धीरे साड़ी को अलग करते हुए कर रहा था
"देखो पन्ना भाई.. मेरी पत्नी तुम्हारे लिए नंगी हो रही है"
पन्ना ये सुनता है तोह उसका लुंड और ज्यादा अकड़ जाता है और जोर जोर से अपने लुंड की मथानी चलते हुए
"आआआह्ह्ह्ह.. जल्दी करो नागराज भाई.. इस रैंड को छोड़ने क लिए मारा जा रहा हु"
ऐसे कामुक और अनोखे सब्द सुनकर नागराज का लुंड भी उसकी धोती क बहार हिलोरे मरना सुरु कर देता है.. इसलिए वो अगले hi पल अपनी पत्नी की साड़ी खींच देता है जिससे सजनी गोल गोल घूमते हुए अपने जिस्म से अपनी साड़ी को अलग होने देती है
और जल्दी hi सजनी सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में बची थी
सजनी- देखो पन्ना जी, मेरे पति आपके लिए मुझे नंगा कर रहे है.. ाचा लग रहा है न आपको
सजनी क मुख से ऐसी बातें पन्ना को और पागल बना रही थी, पर नागराज अब और देरी नहीं करना चाहता था इसलिए वो सजनी क पीछे जेक उसके ब्लाउज क हक़ खोल देता है.. जिससे अगले hi पल ब्लाउज धीरे धीरे सरकते हुए नीचे जमीन पे आके गिर पड़ता है और अब एक खूबसूरत पत्नी ऊपर से पूरी तरह नंगी हो चुकी थी
पन्ना तोह जैसे पागल hi हो जाता है और जल्दी से अपनी जगह से खड़ा होक सजनी की तरफ लपकता है पर उन दोनों क बीच नागराज आते हुए
"नहीं नहीं.. पहले मेरी पत्नी को तुम्हारे लिए पूरी नंगी होने दो, फिर छोड़ना मेरी खूबसूरत पत्नी को किसी रंडी की तरह"
नागराज ये बात कहने क बाद अपनी खूबसूरत पत्नी की तरफ देखते हुए मानो उसकी स्वीकृति पूछता है
"क्यू.. सजनी है न.."
सजनी धीरे से शरमाते हुए ककी अब वो ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थी
"बिलकुल सही कहा जी..
पन्ना जी थोड़ा रुकिए अभी, पहले मेरे पति को मुझे नंगा करने दो आपके लिए
फिर आज पूरा दम लगा क छोड़ना मुझे.. है न जी"
सजनी ठीक अपने पति की hi तरह इस बार उसकी स्वीकृति पूछती है
सजनी को ऐसे पियर और भोलेपन से बोलते हुए देख क दोनों मर्दो क लुंड उछाल क खेल खुद करने को बेताब होने लगते है
नागराज अब अपने दोनों हाथों को अपनी खूबसूरत पत्नी क ऊपर से नंगे जिस्म पे चलते हुए उसकी पेटीकोट क नारे तक लाता है और कुछ hi पलों में सजनी का पेटीकोट भी जमीन की माटी चूमने लगता है
और ठीक ब्लाउज की hi तरह यहाँ भी था.. यहाँ भी सजनी ने पेटीकोट क नीचे कुछ नहीं पहना था, यानि नागराज की पत्नी अब पूरी तरह नंगी हो चुकी थी
नागराज अपनी पत्नी को आगे से देखते हुए अपना हाथ उसकी योनि पे रख क अपनी बीचे वाली ऊँगली उसकी छूट की गहराई में उतर देता है
"आआआआअह्हह्ह्ह्ह... ेस्स्स्सह्ह्ह.... Maaaaaaaaaaaaa"
सजनी तड़पते हुए अपने कामुक होंठों को काटने पे मजबूर हो जाती है
और ऐसा कामुकता से भरा हुआ नज़ारा देख क पन्ना का लुंड फटने को आतुर हो जाता है
"बहनचोद और कितना तरपओगे.. अब मुझसे रहा नहीं जाता, मुझे बस इस रंडी को छोड़ना है"
पन्ना की बेकरारी और आतुरता देख क सबसे ज्यादा ख़ुशी नागराज को hi होती है.. ककी उसका धोती से बहार निकला हुआ लुंड पूरी तरह तन क खड़ा हो जाता है
नागराज अपनी खूबसूरत पत्नी की योनि से अपनी ऊँगली को बहार निकलता है.. जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसे बिना किसी विलम्ब क अपने मुंह में रख क उस चुतरस से सनी हुई ऊँगली को चूस लेता है
"Ummmmmmmmmmmm.... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp... Ummmmmmmmmmmmmm.. आआआह्ह्ह्ह किया स्वाद है... उम्मम्मम्मम"
पन्ना की हालत तोह ऐसी होने लगती है जैसे उसका लुंड बस पहात hi पड़ेगा
"मादरचोद बस कर.. अब छोड़ने दे अपनी पत्नी"
नागराज- ऐसी बात है तोह ये लो
नागराज मुस्कुराते हुए अपना एक हाथ अपनी पत्नी की पीट पे रखते हुए उसे पन्ना की तरफ दक्का दे देता है.. और सजनी भी सीधा पन्ना क हाथों में जेक संभालती है
नागराज- अब देरी किस बात की.. छोड़ डालो मेरी पत्नी
कंटिन्यू...
'फुलवा गाओं' क जंगल में बना हुआ एक छोटा सा घर कभी ठाकुर साहब क लिए उनकी रासलीला का अड्डा हुआ करता था, और बाद में ये उनके कच्चे माल को छुपा क रखने का अड्डा बना.. पर आज कल ये खली hi पड़ा था और अब इसमें हीरा पन्ना रह रहे है
घर की इस्तिथि ऐसी है की यहाँ तक आने क लिए ाचा खासा जंगल पार करके आना होता है और ये जंगल भी सर्प नदी क किनारे hi बसा हुआ है.. वैसे ये जंगल अंदर hi अंदर सुंदरपुर गाओं क जंगल से भी जुड़ता है, पर वो रास्ता मौत से भरा हुआ है
पर यही खतरनाक रास्ता ठाकुर क कार्य क लिए उपयोग में आता है
वापस उस घर की बात करू जहा इस समय 'हीरा पन्ना' ठहरे हुए है तोह.. घर क ठीक पीछे घने जंगल क और अंदर जाने का पतला सा रास्ता भी बना हुआ है
और अगर थोड़ा और आगे बड़ा जाये तोह एक जगह पे खूबसूरत सा नज़ारा देखने को मिलता है.. जहा पहाड़ी से रिस रिस क आता हुआ पानी एक पत्थर क पास इकट्ठा होते हुए आगे बढ़ता है
इतने दिनों से इस जंगल क बीच रह रहे दोनों भाई.. अक्सर यही जंगल में घूमने निकल आते है, वैसे भी इन दोनों को जंगल से बहार जाने की इजाजत नहीं है
सुरु में पन्ना को नागराज की बात बस मज़ाक लगी थी.. पर जल्दी hi दोनों भाई समझ गए थे की ठाकुर सच में कोई बड़ी चीज़ है
पन्ना- भैया चलो जंगल में अंदर घूम क आते है
हीरा- (खिड़की क पास से हट्टे हुए वही बिस्तर पे लैट्टे हुए) तू जा.. मैं कबसे वही जंगल में टहल रहा था
पन्ना इसके बाद देरी नहीं करता है और जल्दी hi जंगल क अंदर घूमने निकल पड़ता है.. आखिर और कही जा भी नहीं सकता था
पन्ना टहलते हुए काफी अंदर निकल आता है जहा जंगल क बीच एक जगह अछि खासी ख़फ़ी जगह थी.. और उस जगह क बीच एक विशाल पेड खड़ा हुआ था
पन्ना वही उस पेड क सहारे लग क बैठ जाता है और उसे पता hi नहीं चलता की कब उसकी आँख लग गयी.. न जाने कितनी hi दिएर तक वो उसी प्रकार सोता रहता है, पर उसकी नींद भागने क काम करती है वो सुरीली सी आवाज़
जल्दी hi पन्ना की आँख खुलती है तोह वो अपने सामने एक खूबसूरत हलके और खूब कैसे हुए जिस्म की औरत को पाटा है जिसने एक साड़ी पेहेन राखी थी और खूबसूरत तरह से सजी हुई थी
पन्ना- उफ्फ्फ्फ़.. मेरी जान किया माल लग रही हो.. आआह्ह्ह साललीई राआनंददददद
पन्ना इतना hi बोल पता है की वो खूबसूरत सी साड़ी में सजी हुई औरत उसकी धोती क ऊपर से उसके लुंड को पकड़ क दबा देती है और जब पन्ना की आअह्ह्ह निकलती है तोह हस्ते हुए कहती है
"तुम्हे पता है न.. मुझे तारीफ सुन्ना सिर्फ अपने पति से पसंद है.. क्यू है न जी"
पन्ना देखता है की वही उन दोनों से थोड़ा दूर उसका पति 'नागराज' खड़ा था यानि ये खूबसूरत हलके भरे जिस्म वाली औरत और कोई नहीं अपितु 'सजनी' है.. नागराज की पत्नी
पन्ना, नागराज को देख क हस्ते हुए कहता है
"और कैसे हो नागराज भईईई... आअह्ह्ह.. भाई तेरी बीवी बहुत बड़ी रआनंददद है कुटियाआ कही की"
पन्ना की बात को बीच में hi रोकने का कामुक कार्य नागराज की खूबसूरत पतली दुबली पर कैसे जिस्म वाली पत्नी बहुत अचे से पन्ना का लुंड फिर से उसकी धोती क ऊपर से दबा क करती है
नागराज- (अपनी पत्नी की कामुक हरकत देखते हुए.. अपने लुंड को मसलने पे मजबूर हो hi जाता है) मेरी पत्नी जैसी गरम औरत पुरे फुलवा गाओं में नहीं है
अपने पति से तारीफ पाना तोह हर औरत की कामना होती है.. ऐसे में सजनी कैसे पीछे रह सकती थी, वो जब देखती है की उसका पति इतनी ख़ुशी से उसकी हरकतों से खुस होक उसकी तारीफ कर रहा है तोह उसे बहुत hi ज्यादा ख़ुशी मिलती है और वो पन्ना की धोती क ऊपर से hi उसके लुंड को पकड़ क उसका उभर सा बनाते हुए उसकी झुकती चली जाती है
पर वो इतने में hi नहीं रूकती.. सजनी अब पूरी तरह पन्ना क लुंड पे झुक चुकी थी, फिर वो उसी इस्तिथि में पीछे मुद क अपने पति को देखते हुए धीरे से कहती है
"स्वामी.. आपकी आज्ञा हो तोह.."
नागराज जब ये सुनता है तोह जोर से अपना लुंड दबा लेता है
"आआआह्ह्ह्ह.. हां.. मेरी प्रिये पत्नी.. आगे बड़ो"
और नागराज क इतना कहते hi सजनी अपनी जीभ बहार निकल क पन्ना क लुंड को उसकी धोती क ऊपर से hi छत्त लेती है
"उम्मम्मम्मम... सललललूउपपप.... सललललूउपपप"
सजनी- आआह्ह्ह.. स्वादिष्ट है
नागराज अपना लुंड मसलते हुए
"उसे बहार निकल क पियर करो"
सजनी अपने पति परमेश्वर की बात को तनिक भी नहीं टलती और जल्दी hi वो धोती को आगे से खोल देती है.. जिसे पन्ना भी अपनी गांड उठा क अपने पैरों क नीचे से निकल देता है
पर अगला कामुक कार्य सजनी खुद कर देती है.. वो उस धोती को उठा क अपने पति की तरफ फेकते हुए
"देखिये जी.. आपकी आज्ञाकारी पत्नी ने आपके सामने एक मर्द को नंगा कर दिया है"
सजनी की बात सुनते hi नागराज का नाग फैन उठाने लगता है और वो ख़ुशी क मरे बिना किसी विलम्ब क अपने नाग को बहार निकल क उसे खुली हवा में सांस लेने का मौका दे देता है
नागराज- (अपने नाग से खेलते हुए) उसे अचे से चाटो.. पियर करो सजनी.. खूब प्रेम दो उसे
अब भला एक आज्ञाकारी पत्नी अपने पति की आज्ञा की उलाहना कैसे कर सकती थी.. इसलिए सजनी भी नहीं करती और अपनी जीभ निकल क जैसे hi पन्ना क काले और भीमकाय लुंड को चाटने वाली होती है पन्ना थोड़ी सी बदमाशी कर देता है और जान क अपनी गांड को हल्का सा उठा देता है.. जिससे सजनी की जीभ उसके लुंड की जगह उसके गांड क गंदे छेद पे चल जाती है
"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp.... सललललूउपपप"
पर सजनी तब भी अपने कार्य से पीछे नहीं हटती बल्कि वो खुद पन्ना का रक्षक जैसे लुंड को मुठी में दबोच क और ऊपर उठा लेती है और पूरी म्हणत से अपनी जीभ को बहार निकल क उसकी गन्दी गांड की दरार में चलना सुरु कर देती है
"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp... सललललररररररपपपप..."
पन्ना- आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. साललीई चिनाअररररररररर कुटिया.... Aaaaaaaaaaahhhhh
नागराज- आआह्ह्ह्ह.. उफ्फफ्फ्फ़.. और अचे से छतो
अब भला एक आज्ञाकारी पत्नी कैसे अपने पति की बात ताल सकती थी, इसलिए सजनी भी पूरी सिद्दत और म्हणत से अपने पति क कहने पे पन्ना की गन्दी गांड चाटने लगती है
"सललललूउपपप... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp.... सललललूउपपप.... उम्मम्मम... सललललूउपपप.... उम्मम्मम्मम्म... गररररररललललपपप"
पन्ना- आह्ह्ह्हह्ह... साआल्लीई किया.. चट्टी है.. आआआहहह.. मादरचोद रंडी कही की.. आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह
पन्ना क मुंह से अपनी पत्नी क लिए ऐसी गन्दी गन्दी गलियां सुनकर नागराज का नाग और ज्यादा फुफकारने लगता है वो जोर से अपने लुंड को मुठी में भर क उसे मथना सुरु कर देता है
"आआआआह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ्फ़... ऐसे hi सजनी आआअह्ह्ह.. अचे से छतो.. आआअह्ह्ह खा जाओ पन्ना की गांड को... आआआहहह.. शाब्बाश मेरी जान.. मैं बहुत किस्मत वाला हु तोह तुम्हारे जैसी पत्नी मिली है.. आआआह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ्फ़.. ऐसे hi... आआआअह्ह्ह"
सजनी की शानदार चटाई और उसके पति नागराज की ऐसी कहि बातें पन्ना को पूरा पागल बनाने लगती है वो जोर से सजनी का सर अपनी गांड क छेद पे दबा देता है
सजनी को ऐसा लगता है जैसे वो सांस नहीं ले प् रही हो और पन्ना की बदबूदार गन्दी गांड से बहुत hi गन्दी और ज़हरीली सी बदबू उसका सर चकराने पे मजबूर करने लगती है
सजनी.. पन्ना की जाँघों पे जोर जोर से मरना सुरु कर देती है मानो वो किसी भी तरह उस चंगुल से बच क निकल जाना च रही हो, पन्ना उसे ऐसा करने नहीं दे रहा था
बल्कि ऐसी बीच सजनी को लगता है जैसे पन्ना की गांड से एक गरम हवा का झोंका निकला हो
"आआआअह्ह्ह्ह.... चहाअट्ट... साललीई... कुटियाआ... रंडी.. चाहात्त्त्त...."
वही अपनी पत्नी की ऐसी दुर्दशा देख क नागराज का नाग पागल होने लगा था.. जिसे वो जोर जोर से मसलते हुए उसका दम घोट रहा था
"आआआहहह... ईई.. हुई न बायतत्तत... हार मत मन्ना तुम मेरी पत्नी हो.. दिखा दो अपना दम.. आआआहहहहह"
पर सजनी की हालत सच में पूरी बिगड़ चुकी थी, वो पूरा दम लगा क आखिर पन्ना जैसे हैवान क चंगुल से बच hi जाती है और जल्दी से पीछे होते हुए लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है
"आआआआहहह... माआआ... माररररर... डोज... किया... आआआहहहहह.. पागल कही क... आआआअह्ह्ह्ह"
सजनी की हालत देख क पन्ना और नागराज दोनों की हसने लगते है.. वही सजनी अब भी थोड़ी दुरी पे होक वही जमीन पे बैठी हुई लम्बी लम्बी साँसें लिए जा रही थी
पन्ना नीचे से पूरा नंगा तोह था की अब वो ऊपर पहनी हुई गन्दी सी बनियान भी उतर क वही एक तरफ फेक देता है.. जिससे उसका रक्षक जैसा बदन पूरा का पूरा नंगा हो चूका था
"नागराज भाई.. ऐसे कैसे मज़ा आएगा, जरा सजनी से भी कहो न वो भी नंगी हो तोह मज़ा आये"
पन्ना की बात सुनकर नागराज है देता है पर अपनी पत्नी से कुछ कहने की जगह वो खुद आगे बढ़ता है और उसके पास जेक पियर से उसके सर पे हाथ फिरते हुए कहता है
"उठो मेरी जान"
सजनी जो अब भी बुरी तरह जोर जोर से सांस लेते हुए हाफ रही थी वो अपने पति की बात पे मुस्कुरा पड़ती है और अपनी जगह कड़ी हो जाती है
नागराज अपना एक हाथ अपनी खूबसूरत कसावट से भरे हुए जिस्म वाली पत्नी की गोल गोल चुकी पे अपना हाथ रखते हुए
"देखो पन्ना कितनी कासी चुकी है मेरी सजनी की.. देखो तोह"
नागराज ये कहते हुए अपनी गोरी दूध की मलाई जैसी पत्नी की उस चुकी को जोर से दबा देता है
"ेस्स्स्सह्ह्ह्ह... माआ... धीरीईईए...... जीईईईई"
सजनी की ऐसी धीरे से कामुक ाःह को सुनकर पन्ना का हतियार सजनी क नाम पे सलामी देने लगता है
"आआआह्ह्ह्ह.. माआल है साली.."
नागराज अपनी पत्नी की खूबसूरती की तारीफ सुनकर बहुत खुस होता है और फिर सजनी को घुमा क उसकी हलकी उभरी हुई पर मजबूत गांड पे अपना हाथ रखकर उसे गोल गोल घूमते हुए
"देखो पन्ना.. कितनी मस्त गांड है मेरी सजनी की, इसमें तुम्हारा लुंड जायेगा तोह कितना आनंद आएगा न.. बोलो न"
पन्ना बिना समय व्यर्थ किये जल्दी से अपने लुंड को पकड़ क मुठ सा मरने हुए
"आआअह्ह्ह.. सही कहा नागराज भाई, ये गांड तोह मेरे लुंड क लिए hi बानी है.. आआआह्ह्ह्हह्ह इसको तोह पहाड़ड़ड़ड़ डालूंगा आज में.. आआह्ह्ह साल्ल्लिई बड़ी खूबसूरत है तेरी पत्नी"
नागराज जैसे उसे पन्ना की बात अछि न लगी हो
"खूबसूरत नहीं.. ककी ऐसी प्रशंशा करने का अधिकार सिर्फ मुझे है"
पन्ना जिसे तुरंत hi अपनी गलती का एहसास हो चूका था
"माफ़ करना नागराज भाई.. ये खूबसूरत नहीं रंडी है.. रैंड सालीइइइइइइ... चुड़क्कड़ चिनाअररररररर... आआआअह्ह्ह्ह"
पन्ना की इस बात पे नागराज को बहुत ख़ुशी होती है और अब वो अपने अगले कार्य को पूरा करना सुरु कर देता है
नागराज बिना समय गंवाए एक एक करके अपनी पत्नी क जिस्म से उसके कपड़ों को अलग करना सुरु कर देता है
जिसकी शुरुवात वो अपनी खूबसूरत गोरी पत्नी क जिस्म से धीरे धीरे साड़ी को अलग करते हुए कर रहा था
"देखो पन्ना भाई.. मेरी पत्नी तुम्हारे लिए नंगी हो रही है"
पन्ना ये सुनता है तोह उसका लुंड और ज्यादा अकड़ जाता है और जोर जोर से अपने लुंड की मथानी चलते हुए
"आआआह्ह्ह्ह.. जल्दी करो नागराज भाई.. इस रैंड को छोड़ने क लिए मारा जा रहा हु"
ऐसे कामुक और अनोखे सब्द सुनकर नागराज का लुंड भी उसकी धोती क बहार हिलोरे मरना सुरु कर देता है.. इसलिए वो अगले hi पल अपनी पत्नी की साड़ी खींच देता है जिससे सजनी गोल गोल घूमते हुए अपने जिस्म से अपनी साड़ी को अलग होने देती है
और जल्दी hi सजनी सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में बची थी
सजनी- देखो पन्ना जी, मेरे पति आपके लिए मुझे नंगा कर रहे है.. ाचा लग रहा है न आपको
सजनी क मुख से ऐसी बातें पन्ना को और पागल बना रही थी, पर नागराज अब और देरी नहीं करना चाहता था इसलिए वो सजनी क पीछे जेक उसके ब्लाउज क हक़ खोल देता है.. जिससे अगले hi पल ब्लाउज धीरे धीरे सरकते हुए नीचे जमीन पे आके गिर पड़ता है और अब एक खूबसूरत पत्नी ऊपर से पूरी तरह नंगी हो चुकी थी
पन्ना तोह जैसे पागल hi हो जाता है और जल्दी से अपनी जगह से खड़ा होक सजनी की तरफ लपकता है पर उन दोनों क बीच नागराज आते हुए
"नहीं नहीं.. पहले मेरी पत्नी को तुम्हारे लिए पूरी नंगी होने दो, फिर छोड़ना मेरी खूबसूरत पत्नी को किसी रंडी की तरह"
नागराज ये बात कहने क बाद अपनी खूबसूरत पत्नी की तरफ देखते हुए मानो उसकी स्वीकृति पूछता है
"क्यू.. सजनी है न.."
सजनी धीरे से शरमाते हुए ककी अब वो ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थी
"बिलकुल सही कहा जी..
पन्ना जी थोड़ा रुकिए अभी, पहले मेरे पति को मुझे नंगा करने दो आपके लिए
फिर आज पूरा दम लगा क छोड़ना मुझे.. है न जी"
सजनी ठीक अपने पति की hi तरह इस बार उसकी स्वीकृति पूछती है
सजनी को ऐसे पियर और भोलेपन से बोलते हुए देख क दोनों मर्दो क लुंड उछाल क खेल खुद करने को बेताब होने लगते है
नागराज अब अपने दोनों हाथों को अपनी खूबसूरत पत्नी क ऊपर से नंगे जिस्म पे चलते हुए उसकी पेटीकोट क नारे तक लाता है और कुछ hi पलों में सजनी का पेटीकोट भी जमीन की माटी चूमने लगता है
और ठीक ब्लाउज की hi तरह यहाँ भी था.. यहाँ भी सजनी ने पेटीकोट क नीचे कुछ नहीं पहना था, यानि नागराज की पत्नी अब पूरी तरह नंगी हो चुकी थी
नागराज अपनी पत्नी को आगे से देखते हुए अपना हाथ उसकी योनि पे रख क अपनी बीचे वाली ऊँगली उसकी छूट की गहराई में उतर देता है
"आआआआअह्हह्ह्ह्ह... ेस्स्स्सह्ह्ह.... Maaaaaaaaaaaaa"
सजनी तड़पते हुए अपने कामुक होंठों को काटने पे मजबूर हो जाती है
और ऐसा कामुकता से भरा हुआ नज़ारा देख क पन्ना का लुंड फटने को आतुर हो जाता है
"बहनचोद और कितना तरपओगे.. अब मुझसे रहा नहीं जाता, मुझे बस इस रंडी को छोड़ना है"
पन्ना की बेकरारी और आतुरता देख क सबसे ज्यादा ख़ुशी नागराज को hi होती है.. ककी उसका धोती से बहार निकला हुआ लुंड पूरी तरह तन क खड़ा हो जाता है
नागराज अपनी खूबसूरत पत्नी की योनि से अपनी ऊँगली को बहार निकलता है.. जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसे बिना किसी विलम्ब क अपने मुंह में रख क उस चुतरस से सनी हुई ऊँगली को चूस लेता है
"Ummmmmmmmmmmm.... Srrrrrrrrrrrrrrrrlllllppppp... Ummmmmmmmmmmmmm.. आआआह्ह्ह्ह किया स्वाद है... उम्मम्मम्मम"
पन्ना की हालत तोह ऐसी होने लगती है जैसे उसका लुंड बस पहात hi पड़ेगा
"मादरचोद बस कर.. अब छोड़ने दे अपनी पत्नी"
नागराज- ऐसी बात है तोह ये लो
नागराज मुस्कुराते हुए अपना एक हाथ अपनी पत्नी की पीट पे रखते हुए उसे पन्ना की तरफ दक्का दे देता है.. और सजनी भी सीधा पन्ना क हाथों में जेक संभालती है
नागराज- अब देरी किस बात की.. छोड़ डालो मेरी पत्नी
कंटिन्यू...
