संस्कारी परिवार की बेशर्म कामुक रंडियां। अंदर छुपी हवस जब सामने आयी । - Page 5 - SexBaba
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संस्कारी परिवार की बेशर्म कामुक रंडियां। अंदर छुपी हवस जब सामने आयी ।

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update 2 parts me post ki gayi hai because itne jyada words allow nhi h ek post me ... To thoda dhyan se padhna...

aisa na ho jo bad me padhna hai vo pahle padh lo or jo pahle padhna h vo bad me
 
Update 26

दोस्तों अब कहानी को ले चलते हैं राकेश की ओर।

राकेश जो कि अभी जापान में था । वह दिन-रात यही सोचने लगा कि शालिनी ने उसे मारने की कोशिश क्यों की। वह अपनी बहन को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता था ।

फिर उसी की बहन ने उसे क्यों मारना चाहा तभी राकेश के दिमाग में एक विचार आया कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि मैंने शालिनी को चोदने की कोशिश की और इसी वजह से गुस्से में आकर उसने मारा हो , लेकिन अगले ही पल यह भ्रम उसका दूर हो गया जब उसे याद आया कि किस तरह शालिनी अपनी गांड मटका मटका कर चोदने का आमंत्रण दे रही थी।

शालिनी तो लोड़े के आगे फैल गई गई थी लेकिन फिर चुदी क्यों नहीं ,चुदने के बदले उसने मुझे मार क्यों दिया । कुछ ऐसे ही विचारों में गुमसुम रहता था।

राकेश उसे पता लगाना था कि यह सब चल क्या रहा है आखिर यह सब हो क्या रहा है।

तभी उसे दिमाग में एक आईडिया आया आया और उसने अपने सबसे वफादार दोस्त को फोन किया ।

यह दोस्त राकेश की कंपनी में ही काम करता था लेकिन दोनों का व्यवहार और स्वभाव एक तरह से दोस्ताना ही था ।

इसका नाम दीपक था ।

दोस्तों दीपक के बारे में थोड़ा सा आपको बता दूं कि दीपक एक 6 फुट लंबा और तंदुरुस्त शरीर का मालिक था। तगड़ा और तंदुरुस्त शरीर होने के साथ-साथ इसका दिमाग किसी चालाक लोमड़ी से कम नहीं था ।

अगर दिमाग के बारे में बात करूं तो दीपक का दिमाग रावण की टक्कर का था । इसमें हंसने वाली बात नहीं है दोस्तों बहुत ही दिमाग और शातिर इंसान था दीपक।

जो कि राकेश का पक्का दोस्त था।

कुछ देर रिंग बचने के बाद दीपक ने फोन उठाया ।

राकेश की आवाज आई - कैसा है दीपक ?

दीपक- कौन अबे भूल गया क्या अपने बाप को। तेरा भाई राकेश बोल रहा हूं मैं । जिसे मैंने अपना भाई समझा वह दोस्त आज मुझे भूल गया ।

दीपक ने जैसे ही यह सुना उसका मुंह खुला का खुला रह गया हकलाते हुए उसके मुंह से इतना ही निकल सका- कक-क कौन दीपक।तुम जी-जिंदा हो। अभी कहां हो तुम और क्या कर रहे हो ।

राकेश - इतना जोर से बोलने की जरूरत नहीं है बस मेरी बात ध्यान से सुनो। मेरे साथ धोखा हुआ है और यह बात मैं तुम्हें अभी फोन पर नहीं बता सकता । किसी को कानों कान खबर नहीं होना चाहिए कि मैंने तुम्हें फोन किया है या मैं जिंदा हूं बस । मेरा काम है जो तुम्हें करना है मेरे लिए एक फ्लैट खरीदो जो मेरे घर से 10 किलोमीटर के दायरे में ही हो, एक गाड़ी खरीदो । मैं 1 हफ्ते में इंडिया आ जाऊंगा तब तक यह सारा काम करके रखना और दोस्त बहुत विश्वास के साथ मैंने तुम्हें फोन किया है । मेरे और तुम्हारे अलावा किसी तीसरे को यह बातें कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए कि मैं जिंदा हूं । बाकी सारी कहानी में आकर बताऊंगा। अभी वक्त नहीं है चलो ठीक है रखता हूं फोन । बाय मेरी जान ।

ऐसा कहकर राकेश ने फोन रख दिया दूसरी तरफ दीपक अभी भी अपना फोन कान पर लगाए हुए बैठा था उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि यह कोई सपना है या सच में उसे राकेश का फोन आया है । कुछ देर सोचने के बाद जब उसे विश्वास नहीं हुआ तो उसने अपने फोन में जल्दी से कॉल रिकॉर्डिंग वाला फोल्डर खोला और दोबारा से उसी कॉल को सुनने लगा तब जाकर फिर विश्वास हुआ कि सच में राकेष उसे कॉल किया है।

झनझना गया था दीपक का दिमाग सोचने लगा कि यह क्या है कि राकेश ने मुझे कुछ बताया भी नहीं । क्या राकेश को किसी ने मारने की कोशिश की थी । क्या राकेश की हत्या के पीछे जापान मैं किसी का हाथ था। यह सोच ही रहा था लेकिन तभी उससे हिम्मत मिली कि राकेश ने कहा है आकर सब कुछ बताएगा और जो काम राकेश ने दिया है उसे पूरा कर ले

दीपक तुरंत ऑफिस से निकला और चल दिया राकेश का काम करने ।

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अब चलते हैं दोस्तों उपासना , धर्मवीर ,सोमनाथ और पूजा की तरफ ।

जैसा कि आप जानते हैं सोमनाथ और उपासना एक दूसरे के सामने अपने लंड और चूत को खुल चुके थे।

लेकिन दूसरी तरफ पूजा को धर्मवीर के कमरे में दूध लेकर जाना था। दूध लेकर क्या जाना था दोस्तों अपनी आग को ठंडी करवाने जाना था । अपनी गर्मी निकलवाने जाना था ।

पूजा ने जाते हुए सोचा की पेटिकोट और ब्लाउज में मैं कैसे अकेली अपनी बहन के ससुर के सामने जाऊंगी ।

हां दोस्तों यह सोचना भी सही था पूजा का क्योंकि पूजा उपासना के मुकाबले ज्यादा शर्मीली थी । उपासना को देखकर वह थोड़ी बेशर्म हो जाती थी लेकिन अकेले में उसके लिए यह मुमकिन नहीं था कि वह अपने चूतड़ों पर अपना पेटिकोट कसकर अपनी बहन के ससुर के सामने जाए ।

इसलिए उसने सूट सलवार पहनने का निर्णय लिया उसने कसी हुई ब्रा पेंटी पहनी , उसके ऊपर समीज पहनी और फिर उसने सूट सलवार पहने ।

सलवार को अगर तंग पजामी कहूं तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि यह चूड़ीदार पजामी थी जोकि उसकी जांघों से चिपकी हुई थी और उसकी गांड उस तंग पजामी ने इस तरह बाहर को निकली हुई थी जब वह चलती तो उसके चूतड़ों पर से सूट जो उसने पहना हुआ था वह हवा में लहरा जाता और उसकी मोटी मोटी जांघे चलते हुए साफ देखी जा सकती थी ।





पूजा का बदन बिल्कुल ऐसा था कि ना तो वह ज्यादा लंबी लगती थी और ना ही ज्यादा छोटी लगती थी मतलब मीडियम साइज की हाइट थी उसकी ऊपर से भरा हुआ बदन मतलब चलते हुए बिल्कुल चुदाई की मूरत लगती थी ।

ऐसा लगता था इस जैसी लौंडिया को तो सड़क पर पटक कर भी चोदो तो भी चुदाई में पीछे नहीं हटेगी।

दूसरी तरफ धर्मवीर अपने कमरे में बैठा हुआ पूजा का इंतजार कर रहा था



पूजा के मन में डर , शर्म और लाज के भाव थे ।

वह जाते हुए डर रही थी । वह धर्मवीर के कमरे में जाते हुए सोच रही थी की चूत की गर्मी भी क्या चीज होती है आज मैं खुद ही चुदने जा रही हूं वह भी अपनी बहन के ससुर से , आज अपनी चूत खुलवाने जा रही हूं पता नहीं आज मेरी क्या हालत होगी । मेरी इस हिलती हुई और मटकती हुई गांड में लंड जाएगा लेकिन कैसे । कैसे मैं अपनी बहन के ससुर के सामने अपनी चूत खोल कर लेटूंगी मैं तो शर्म से मर ही जाऊंगी ।

कैसे में नंगी होकर अपनी बहन के ससुर के लोड़े का स्वागत करूंगी हाय मैं तो मर ही जाऊंगी शर्म से ।





इन्हीं बातों को सोचते हुए और गर्म होते हुए पूजा धर्मवीर के कमरे में पहुंची।

धर्मवीर ने जैसे ही पूजा को गेट पर देखा तो सूट और सलवार पहने हुए देखकर धर्मवीर का माथा ठनक गया ।

सोचने लगा कि अभी तो दोनों घोड़ियां पेटीकोट और चोली में अपनी जवानी को दिखा रही थी, और अब यह बहन की लोड़ी सती सावित्री बन कर मेरे पास आई है। जबकि यह भी जानती है कि धर्मवीर के पास जाना मतलब लोड़ा खाना है ।

पूजा ने गले में दुपट्टा लिया हुआ था जो उसकी चूचे नहीं देख पा रहे थे, लेकिन चूतड़ों पर कोई दुपट्टा नहीं था गांड तो बिल्कुल बाहर ही दिख रही थी।

लंड मांगती हुई गांड को आखिर कैसे छुपा पाती पूजा ।

धीरे धीरे चलते हुए वह धर्मवीर के पास आकर बोली।

पूजा- लीजिए दूध पी लीजिए ।

धर्मवीर ने उसके हाथ से से दूध ले लिया और एक ही सांस में सारा दूध खत्म कर दिया और दूध पीने के बाद धर्मवीर ने गिलास वापस पूजा को दे दिया।

अब तो पूजा के लिए बहुत परेशानी वाली बात हो गई क्योंकि जो दूध लेकर वह धर्मवीर के पास आई थी उसे तो पी चुका था धर्मवीर ।

अब उसके पास रुकने का कोई बहाना नहीं था ।

अब वह कैसे कहती कि मुझे तुम्हारे साथ ही सोना है आज ।

एक तो शर्मीली थी पूजा ऊपर से उसे कोई बहाना भी नजर नहीं आ रहा था कि वह धर्मवीर के पास रुके क्योंकि धर्मवीर गिलास खाली करके उसके हाथ में पकड़ा चुका था ।

अब तो पूजा को वापस उपासना के पास ही जाना था यही सोच कर पूजा की शक्ल पर परेशानियों के भाव उभर आए , जिन्हें धर्मवीर ने पढ़ लिया ।

धर्मवीर के बारे में जैसा आप जानते हैं दोस्तों एक मंझा हुआ खिलाड़ी था धर्मवीर वह सोमनाथ की तरह चोदने के लिए तड़पता नहीं था वह तो चुदने के लिए तड़पाता था और इसी तरह खड़ी हुई चुदने के लिए तड़पती हुई पूजा को देख रहा था धर्मवीर।

अब जब पूजा को लगा कि अब तो कोई बहाना ही नहीं बचा है कि मैं यहां रुकूं और यह मैं कह नहीं सकती कि आप मुझे चोदो , नंगी करो , लंड दो मुझे तो मैं क्या करूं ।

फिर पूजा वापस जाने के लिए गेट की तरफ मुड़ी लेकिन मुड़कर वह धर्मवीर की तरफ अपनी गांड करके और अपने हाथ से गिलास फर्श पर छोड़ दिया। लेकिन गिलास को इस तरह से छोड़ा गया की धर्मवीर को लगे कि पूजा के हाथ से गिलास छूट गया है ।

जबकि पूजा ने गिलास को जान पूछ कर फर्श पर गिराया था।

अब गिरे हुए गिलास को फर्श पर से उठाने के लिए झुकना था पूजा को और झुकने के लिए ही उसने गिलास को गिराया था ।

एक बार उसने अपनी गर्दन पीछे की तरफ मोड़ कर कर धर्मवीर को देखा जोकि उसे ही देख रहा था ।

पूजा ने अपनी प्यासी नजरों से धर्मवीर को देखते हुए हल्की सी मुस्कुराहट दी और फिर गर्दन आगे करके गिलास उठाने लगी ।

झुक कर अपने पूरे पिछवाड़े को बाहर निकाल कर गिलास उठाने लगी पूजा।

पूजा की उफान मारती इस गांड को देखकर धर्मवीर का लोड़ा टाइट हो गया, लेकिन अपने ऊपर कंट्रोल किए हुआ था ।

पूजा ने गिलास हाथ में पकड़ा लेकिन उठी नहीं झुकी ही रही कुछ पलों तक और झुके झुके ही अपनी गांड को थोड़ा सा हिला दिया और फिर सीधी खड़ी हो गई ।





पूजा समझ गई थी कि उसके चौड़े चौड़े चूतड़ों ने क्या कहर बरपाया होगा धर्मवीर के लंड पर और कुछ पल ठहर कर गेट की तरफ बढ़ने लगी पूजा।

लेकिन तभी उसके कानों में आवाज गूंजी ।

धर्मवीर - पूजा नीचे जाकर क्या करोगी ।

पूजा मानो इसी का इंतजार कर रही थी कि धर्मवीर उसे रोके । कोई एक बात धर्मवीर के मुंह से निकले और पूजा रुक जाए धर्मवीर के कमरे में ।

यही तो चाह रही थी पूजा और ऐसा सुनते ही पूजा में कहा ।

पूजा - नीचे पापा जी और दीदी टीवी देख रहे हैं वहीं पर जाकर बैठूंगी। वैसे टीवी देखना तो मुझे पसंद नहीं है लेकिन क्या करूं बैठना तो पड़ेगा ही उनके पास ।

अभी तक पूजा धर्मवीर की तरफ नहीं मुड़ी थी अपनी गांड धर्मवीर की तरफ करके गेट की तरह अपना मुंह करके ही जवाब दे रही थी पूजा ।

धर्मवीर- जब तुम्हें टीवी देखना पसंद नहीं है तो फिर क्यों जा रही हो वैसे भी मेरा टीवी नहीं चल रहा है । मैं भी अकेला बोर हो रहा हूं चलो दोनों कुछ देर छत पर टहल कर आते हैं ।

ऐसा सुनकर पूजा मुस्कुराते हुए धर्मवीर की तरफ आने लगी ।

धर्मवीर समझ गया कि उसने उसका उसका निमंत्रण स्वीकार कर लिया है

पूजा ने गिलास को बेड के सिरहाने पर रखा और खड़ी हो गई धर्मवीर के सामने ।

अब बारी थी धर्मवीर की कि वह कुछ करे।

धर्मवीर भी खड़ा हुआ और बोला चलो ऊपर चलते हैं और दोनों घर की छत पर पहुंच गए ।

ठंडी ठंडी हवा चल हवा चल रही थी बड़ा ही रोमांचित मौसम था ।

बादल गरज रहे थे और बारिश शुरू ही होने वाली थी । बारिश की कोई कोई बूंद गिर भी रही थी जमीन रही थी जमीन भी रही थी जमीन भी रही थी जमीन । बादल ज्यादा घने थे जिन्हें देखकर लग रहा था कि आज रात मूसलाधार बारिश होने वाली है ।और धीरे-धीरे टपकती हुई कोई कोई बूंद दोनों के जिस्म पर गिर रही थी। लेकिन बारिश शुरू नहीं हुई थी जिससे वह दोनों भीग जाए कोई-कोई बूंद ही गिर रही थी।

दोनों छत पर टहलने लगे लेकिन एक दूसरे से कोई बातचीत नहीं हो रही थी।

धर्मवीर जब छत पर टहल रहा था तो पूजा जानपूछकर उसके सामने चलती और अपनी गांड को इस तरह से मटकाती कि मानो धर्मवीर के लंड पर चाकू चल रहे हो ।

इस तरह चल रही थी पूजा जैसे फैशन शो में कैटवॉक कर रही हो ।

अपने चूतड़ों की थिरकन में मादकता लाते हुए बड़ी ही मस्तानी चाल से उसके सामने चूतड़ों को मटका मटका कर चल रही थी पूजा ।





धर्मवीर समझ तो सब रहा था यह सब लंड की भूख है लेकिन पहल कैसे करें यही सोच रहा था ।

उधर पूजा कहर बरपाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी ।

उस चांदनी रात में किसी चूत की देवी या चूत की रानी की तरह मादकता बिखेरते हुए अपने भरे हुए और गदरआए हुए बदन को हिलाते हुए हिचकोले खाते हुए धर्मवीर की आंखों के सामने एक तरह से वासना से भरा नृत्य कर रही थी पूजा।

दोस्तों छत पर दोनों इस तरह से टहल रहे थे की पूजा आगे आगे चलती और धर्मवीर उसके पीछे पीछे पीछे चलती और धर्मवीर उसके पीछे पीछे पीछे उसके पीछे पीछे ।

वह दूसरी तरफ मुड़ती धर्मवीर भी उसकी गांड को निहारते हुए पूजा के पीछे पीछे मुड़ जाता।

मतलब देखकर कहा जा सकता था जैसे किसी चुदासी कुत्तिया के पीछे उसे भभोड़ने लिए कोई कुत्ता घूम रहा हो ।

तभी पूजा के पीछे चलते हुए धर्मवीर ने गाना गुनगुनाना शुरू किया धर्मवीर यह गाना कुछ तेज आवाज में जा रहा था जा रहा था जिसे पूजा साफ-साफ सुन सकती थी ।

धर्मवीर गाना गाने लगा -

एक भीगी हसीना क्या कहना,


यौवन का नगीना क्या कहना ।

सावन का महीना क्या कहना ,


बारिश में पसीना क्या कहना।।

इतना गाना गाकर धर्मवीर चुप हो गया दूसरी तरफ पूजा ने इस गाने को एक इशारा समझा और उसने देर ना करते हुए करते हुए यह गाना आगे शुरू किया ।

पूजा भी इतनी तेजी से गा रही थी कि धर्मवीर साफ सुन सके ।

बहुत ही तेज आवाज में गाना गाने लगी पूजा --

मेरे होठों पे यह अंगूर का जो पानी है,


मेरे महबूब तेरे प्यास की कहानी है ।

जब घटाओं से बूंद जोर से बरसती है,

तुझसे मिलने को तेरी जानेमन तरसती है ।


इतना गाना गाकर पूजा भी चुप हो गई ।

फिर कोई एक दो मिनट पूजा धर्मवीर के आगे आगे आगे आगे आगे चलती रही और धर्मवीर उसकी गांड को देख कर मजा लेता रहा रहा मजा लेता रहा रहा ।

जब कुछ देर तक दोनों के बीच फिर कोई बातचीत नहीं हुई तो धर्मवीर ने फिर से गाना स्टार्ट किया ।

इस बार धर्मवीर की आवाज पहले से भी ज्यादा तेज थी ।

धर्मवीर गाने लगा --

नजरों में छुपा ले देर न कर,


ये दूरी मिटा ले देर न कर ।

अब दिल में बसा ले देर ना कर ,


सीने से लगा ले देर ना कर ।

इतना गाना गाकर धर्मवीर फिर चुप हो गया अब तो पूजा को भी मजा आने लगा आने लगा आने लगा था ।

वह और तड़पाना चाहती थी धर्मवीर चाहती थी धर्मवीर को और ज्यादा अपनी गांड को मटका मटका कर उसके आगे चल रही थी ।

कभी-कभी दुपट्टा ठीक करने के बहाने से वह अपनी गांड के पीछे से दुपट्टा हाथ में पकड़ती और साथ में सूट को भी पकड़ कर कर एक तरफ खींच लेती जिससे उसकी तंग पजामी में मोटे मोटे गद्देदार गोलमोल चूतड़ों के दर्शन हो जाते थे धर्मवीर को ।

इस तरह सताना अच्छा लग रहा था पूजा को ।

आग लगाना चाहती थी धर्मवीर के लंड में तभी तो एक मस्त घोड़ी की तरह हथिनी की तरह मस्ती से चलती हुई अपनी गांड हिला रही थी धर्मवीर के आगे आगे चलते हुए ।

जब धर्मवीर ने इतना गाना गाकर बंद किया तो पूजा ने इस गाने को आगे बढ़ाते हुए गाना स्टार्ट किया। पूजा को इतना मजा आने लगा आने लगा आने लगा था इस खेल में कि उसने अब धर्मवीर से भी तेज आवाज में गाने का निर्णय लिया और लगभग बहुत ही तेज आवाज में पूजा ने गाना शुरू किया ।

उसकी आवाज इतनी तेज थी कि उसके घर से तीसरे या चौथे घर में भी आराम से सुनी जा सकती थी लेकिन धर्मवीर के घर के आस-पास कोई घर नहीं था पास में । जिस वजह से पूजा को कोई डर भी नहीं था ।

अपनी पूरी आवाज खोल कर कर तेज आवाज में गाने लगी पूजा।

पूजा गाने लगी --

बड़ी बेचैन हूं मैं मेरी जान मैं कल परसों से ,


था मुझे इंतजार इस दिन का बरसों से ।

अब जो रोकेगा तो मैं हद से गुजर जाऊंगी ,


और तड़पाएगा दिलदार तो मैं मर जाऊंगी ।।

इस गाने के बहाने से दोनों ने बड़ी ही आसानी से अपनी अपनी बात एकदूसरे के सामने रखदी। लेकिन अब भी कुछ बाकी था । पहल करने ही हिम्मत बाकी थी ।

उसके पीछे चलता हुआ धर्मवीर फिर गाना गाने लगा।

गाना कुछ इस तरह था -

जी करता है तेरी जुल्फों से खेलूं ,


जी करता है तेरी तुझे बाहों में ले लूं ।

जी करता है तेरे होठों को चूमूँ,


जी करता है तेरे इश्क में झूमुं ।

पूजा भी कुछ सोचने लगी और धर्मवीर के सामने चलते हुए कुछ सेकंड के लिए रुकी ।

धरमवीर भी उसके पीछे रुक गया पूजा ने वह किया जिसकी उम्मीद धर्मवीर को नहीं थी ।

पूजा ने रुक कर अपने दोनों हाथ अपने घुटनों पर रखें और अपने पिछवाड़े को पीछे की तरफ निकालकर अपनी गांड को कुछ इस तरह हिलाया जैसे जैसे पॉर्न मूवी में कोई पॉर्नस्टार अपनी गांड हिलाती है ।





पूजा के गद्देदार और भारी कूल्हों वाली गांड को इस तरह हिलता देखकर आसमान टूट पड़ा धर्मवीर के ऊपर ।

कुछ सेकंड के लिए इस तरह अपनी गांड हिला कर पूजा फिर धर्मवीर के आगे आगे चलने लगी । अब गाना गाने की बारी पूजा की थी ।

पूजा ने अपने दुपट्टे को अपने सर पर किया अपने चेहरे पर हल्का सा पर्दा किया और इस बार जो पूजा ने गाना गाया पूजा की आवाज कुछ तेज नहीं थी । बड़ी ही मादक आवाज में पूजा ने गाना गाया और उसने बस इतनी ही आवाज में गाना गाया कि धर्मवीर सुन सके ।

बड़े ही सेक्सी अंदाज में पूजा ने धर्मवीर के ही गाने को अलग अंदाज में गाने लगी ।

गाना कुछ इस तरह था ।

जी करता है तेरे लंड से खेलूं ,


जी करता है उसे अपनी चूत में ले लूं ।

जी करता है तेरे लंड को चूमूँ,


जी करता है तेरे लंड पर झुलूं ।

Hayee हाय की इस मादक आवाज के साथ गाना खत्म हुआ ।

यह पूजा का बेहद ही बेशर्मी भड़क कदम था जो बड़ी हिम्मत करके उठाया था पूजा ने ।

अब कुछ बचा था तो वह थी शुरुआत । एक पहल जो दोनों में से कोई भी कर सकता था ।

लेकिन पूजा को तो सती सावित्री बनना था ।

तड़पाना अच्छा लग रहा धर्मवीर को और अपना गाना खत्म करके वह सीधा छत की ग्रिल पर खड़ी हो गई ।

अपने दोनों हाथ उसने ग्रिल पर रख लिए ।

अब धर्मवीर क्या करता ऐसे ही टहलता रहता या कोई पहल करता ।

ऐसी ही कंडीशन थी छत पर ।

धर्मवीर ने टहलने का इरादा बदल दिया और पूजा के बिल्कुल पीछे जाकर खड़ा हो गया ।

पूजा को एहसास हो गया था कि धर्मवीर बिल्कुल इसके बिल्कुल इसके पीछे खड़ा है लेकिन उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा ।

तभी धरमवीर की सांसो उसे अपने कान पर महसूस हुई ।

पूजा का दिल धक-धक करने लगा शर्म और लज्जा की वजह से उसने अपनी आंखें बंद कर ली ।

धर्मवीर बोला - गाओ ना पूजा गाना क्यों बंद कर दिया ।

पूजा - मुझसे नहीं आता गाना वाना । वह तो बस ऐसे ही मुंह से निकल गया।

धर्मवीर अब आगे आगे का क्या इरादा है ।

इस सवाल से तो पूजा की सांसे ही थम गई ही थम गई लेकिन अपने आप पर कंट्रोल करते हुए अपनी मुट्ठियों को भींचते हुए पूजा ने जवाब दिया - आगे का इरादा ? मैं कुछ समझी नहीं ।

धर्मवीर उसके कान के पास अपने होंठ ले जाकर जाकर बड़े धीरे से मादक आवाज में बोला - तो तुम मेरे कमरे में क्या करने आई थी ।

पूजा अब कैसे कहती है कि वह चुदने आई थी । उसके नीचे नंगी लेटने आई थी ।

पूजा बोली - मैं तो आपको दूध देने आई थी ।

उसके कान में धर्मवीर फिर धीरे से बोला- मुझे तो नहीं लगता तुम दूध देने आई थी थी ।

पूजा भी अपनी आंखें बंद किए हुए मादक आवाज में में बोली - तो फिर मैं क्या करने आई थी । दूध ही तो देने आई थी थी तो देने आई थी थी आपको ।

धर्मवीर - मैं बताऊं तुमको क्या करने आई थी ।

पूजा समझ गई कि अब कुछ होने वाला है । अपनी सांसो पर कंट्रोल करते हुए धीरे-धीरे उसने अपनी आंखें खोली ।

उसकी आंखों के सामने शहर का नजारा था । लाइट से जगमग हो रहा था पूरा शहर और बारिश शुरू होने से पहले चलने वाली तेज ठंडी हवा पूजा के बालों को उड़ा रही थी जो उसके बाल कभी उसके चेहरे पर आ जाते तो कभी हवा की वजह से अपने आप ही हट जाते और इस ठंडी ठंडी ठंडी हवा में ठंडी ठंडी ठंडी हवा में कोई कोई बूंद बूंद उनके बदन पर गिर रही थी और ऐसी स्थिति में जब धर्मवीर की सांसें उसकी कानों से टकराती उसकी कानों से टकराती तो उसकी सांसे उसे बहुत ही गर्म लगती।

माहौल उत्तेजक हो चला था था चला था था धर्मवीर अपने होठों को उपासना के कान के पास रखकर धीरे धीरे सांस ले रहा था और पूजा के जवाब का इंतजार कर रहा था । इस तरह बिल्कुल पीछे खड़े होने की वजह से दोस्तों धर्मवीर का लंड पूजा की गांड से छू रहा था और आप पूजा की हालत समझ सकते हैं मुश्किल से नियंत्रण में रखी हुई थी वह अपने जज्बातों को , अपने हालातों को , अपनी सांसो को ।

पूजा में धीरे से - कहा धत्त बड़े आए । मैं दूध लेकर नहीं आई थी तो क्या करने आई थी चलिए बताइए । आपको जब आपको इतना पता है कि मैं दूध लेकर नहीं आई थी तो बताइए मैं भी तो सुनूं ।

धर्मवीर धीरे से उसके कान में बोला- पूजा सच कड़वा होता है कहीं ऐसा ना हो कि तुम बुरा मान जाओ ।

अब पूजा के सामने उसकी शर्म चुनौती बन के खड़ी हो गई खड़ी हो गई के खड़ी हो गई खड़ी चुनौती बन के खड़ी हो गई खड़ी हो गई के खड़ी हो गई खड़ी हो गई ।

पूजा धीरे से बोली - देखिए मैं सिर्फ आपको दूध देने आई थी यदि आपको लगता है कि मैं कुछ और करने आई थी तो बताइए मैं क्या करने आई थी।

धर्मवीर ने उसके कान में कहा कान में कहा - लो तो बता देते हैं क्या करने आए थे आप पूजा जी मेरे कमरे में ।

ऐसा कह कर धर्मवीर एक साथ पूजा के पीछे से साथ पूजा के पीछे से पूजा के पीछे से हट गया।

पूजा को एहसास हुआ कि जो जो हुआ कि जो धर्मवीर अभी उसकी गांड से चिपका हुआ था वह बिल्कुल उससे अलग अलग हट उससे अलग अलग हट गया है । आखिर वह क्या कर रहा है या उसका क्या करने का इरादा है । पूजा यह सब सोच ही रही थी लेकिन उसने पीछे गर्दन मोड़कर नहीं देखा ।वह शहर की तरफ अपना चेहरा सीधा करके बस जगमगाते शहर को देख रही थी और सोच रही थी कि अब क्या होने वाला है। धर्मवीर तो कह रहा था कि बता देते हैं लेकिन धर्मवीर ने तो कुछ नहीं बताया और पीछे से भी हट गया और दोस्तों अगले ही पल वह हुआ जिसकी उम्मीद या कल्पना भी पूजा ने नहीं की थी ।

हां दोस्तों धर्मवीर जैसे ही पूजा के पीछे से हटा। वह बिल्कुल पूजा के पीछे बैठ गया उसके पीछे बैठकर उसकी चौड़ी गांड गांड धर्मवीर के सामने थी ।

धर्मवीर ने आहिस्ते से धीरे से पूजा के सूट को को हाथ से पकड़ कर उठाया और उस तंग पजामी में में में तंग पजामी में में पजामी में में फंसी हुई पूजा की गांड को दो पल के लिए निहारा और फिर उसकी गांड की दरार में अपने दोनों हाथों से उसकी पजामी को पकड़कर विपरीत दिशाओं में अपनी पूरी जान से फाड़ दिया और यह सब इतना जल्दी हुआ की पूजा जब तक समझती समझती तब तक उसकी गांड पर से पजामी पजामी फट चुकी थी और उसकी पेंटी में फंसे हुए चूतड़ धर्मवीर के सामने थे

उसकी पैंटी की जो उसके चूतड़ों के बीचो बीच फंसी हुई थी दिख भी नहीं रही थी । गोल गोल सांवले भारी चूतड़ों को देखकर धर्मवीर ने अपना नियंत्रण खो दिया और एक हाथ से नहीं बल्कि अपने दोनों हाथों से दोनों चूतड़ों पर एक साथ थप्पड़ मारा थप्पड़ मारा ।

थप्पड़ भी जोरदार था पूरी गांड हिल हिल गई और पूजा के मुह से चीख निकली - आउच ।

धर्मवीर एक साथ थप्पड़ मारकर खड़ा हो गया उपासना की आंखें बंद हो चुकी थी उसे समझ नहीं आ रहा था कि इसका विरोध करूं इसका विरोध करूं या समर्थन ।

तभी धर्मवीर की आवाज उसके कानों में गूंजी जो पहले की तरह धीरे नहीं थी। इस आवाज में तो गुर्राहट और जंगलीपना था।

धर्मवीर - पता चला या अब बोलकर बताऊं कि तुम मेरे पास चुदने आई थी।

धरमवीर की बेशर्मी से हिल गई थी पूजा ।

पूजा ने हिम्मत करते हुए कहा- यह क्या बदतमीजी है ।आपको शर्म नहीं आती ।

धर्मवीर हंसते हुए- हाहाहा शर्म- शर्म की उम्मीद वह भी मुझसे ।

वैसे तुझे तो बहुत शर्म आती है अपनी गांड को फैलाकर झुक गई थी मेरे सामने। आधे घंटे से अपने चूतड़ों को मटका मटका कर मेरे आगे चल रही थी । तुझे तो बहुत शर्म आती है । मुझे तो हैरानी है कि लंड की भूकी लड़की को भी शर्म आती है ।

अब पूजा के पास इसका कोई जवाब नहीं था धर्मवीर ने उसकी गर्दन पकड़ी पकड़ी और उसका चेहरा अपनी तरफ किया पूजा की आंखों में आंखें डाल कर बोला बोला कर बोला 2 मिनट में नीचे आ जाना जाना तेरी चुदाई करनी है । सुन लिया ना चोदना है तुझे घोड़ी । यही करनी तो आई थी आई थी चुदाई ।

मैं तेरे बाप सोमनाथ की तरह नहीं हूं जो साला कभी लात खाता है, तो कभी धक्का खाता है । तुम दोनों बेटियों ने अभी धर्मवीर को सही से नहीं पहचाना है । अपना यह सावित्रीपना जाकर किसी और मादरचोद को दिखाना समझी। मैं बस तेरे जैसी चूतों में लंड उतारना जानता जानता हूं अब तुझे तय करना है की जबरदस्ती तेरे जैसी घोड़ी के ऊपर मैं चढूं या अपनी मर्जी से मेरे लंड के आगे अपनी चूत खोलेगी । तेरे जैसी लौंडिया मैंने बहुत नचाई है अपने लोड़े पर। तेरे जैसी घोड़ियों की नाक में नकेल डाली है मैंने । तेरी जैसी गदरआई हुई कुतिया के गले में पट्टा डालना सीखा है मैंने और तू धर्मवीर के सामने नखरे कर रही है ।





सीधी बात है प्यार से चुदना है तो प्यार से चोदूंगा वरना हलक में लौड़ा उतार के के तेरी गांड को गोदाम बना दूंगा। तू मुझे पागल समझती है जब पहले दिन तू अपनी गांड को मटका मटका कर सीढ़ियों पर पर चल रही थी मैं तभी समझ गया था कि तेरे जैसी घोड़ी जल्दबाजी में ठंडी नहीं होती । तुझे तो पूरी रात तेरे ऊपर चढ़कर चोदना पड़ेगा, तेरी चूत पर अपने लंड से हल चलाना हल चलाना पड़ेगा। तब जाकर ठंडी होगी तू ।





अब समझ गई ना रंडी अगर प्यार से चुदना है तो चुपचाप नीचे आ जाना । अगर 2 मिनट में नीचे नहीं आई नीचे नहीं आई तो तुझे अपने लोड़े पर बैठा कर कर तेरी गांड पर लात बजाता हुआ नीचे जाऊंगा। फैसला तेरे हाथ में ।

ऐसा कहकर धर्मवीर ने पूजा के मुंह पर थूक दिया तू कितना ज्यादा था कि उसके गाल से टपकता हुआ उसके होठों तक आ गया ।

ऐसा कहकर धर्मवीर पूजा की गांड पर एक और थप्पड़ लगाकर नीचे की तरफ चला गया गया गया ।

पूजा कुछ पलों के लिए खड़ी खड़ी सन्न रह रह रह गई ।

समझ नहीं आया कि धर्मवीर किस मिट्टी का बना है। किस तरह सोचता है धर्मवीर ।अपने चेहरे को साफ करती हुई और यही सब सोचो में गुम पूजा के पैर छत से नीचे की तरफ बढ़ गए।

नीचे आकर उसने धर्मवीर के कमरे में देखा तो कोई नहीं था लेकिन कमरे से बराबर में जो कमरा था उसका दरवाजा खुला हुआ था ।

पूजा ने देखा कि दरवाजा बिल्कुल खुला हुआ है उसने अंदर झांक कर देखा तो धर्मवीर बस चड्डी पहने हुए था और चटाई बिछाकर कमरे में बैठा हुआ था। और दरवाजे की तरफ धर्मवीर ने पीठ की हुई थी जिस वजह से उसका चेहरा उसे नहीं दिख रहा था लेकिन उससे हैरानी तब हुई जब उसके कानों में धर्मवीर की आवाज पड़ी ।

धर्मवीर- खड़ी खड़ी क्या देख रही है इसी कमरे में है तेरी चुदाई का प्रोग्राम। इसी कमरे में चुदेगी तू आज । मेरे लोड़े पर तेरी चूत का पानी लगेगा ।

पूजा को हैरानी हुई कि धर्मवीर ने उसकी तरफ चेहरा भी नहीं किया हुआ है फिर धर्मवीर को कैसे पता चला कि वह गेट पर खड़ी है वास्तव में बहुत शातिर है मेरी बहन का ससुर ।

पूजा यह आवाज़ सुनकर लगभग हिल सी गई।

सोफे पर बैठे बैठे अपने दुपट्टे को भी ठीक ठाक कर लिया ,अब अगले पल मे होने वाली घटना का सामना करने के लिए हिम्मत जुटा रही थी ।

तभी पूजा के कान मे एक आवाज़ आई और वह कांप सी गई।

धर्मवीर - आओ इधर ।

पूजा को लगा कि वह यह आवाज़ सुनकर बेहोश हो जाएगी ।

अगले पल पूजा सोफे पर से उठी और अंदर के हिस्से मे आ गयी ।

पूजा ने देखा कि धर्मवीर जी नीचे चटाई पर बैठे हैं और उसी की ओर देख रहे हैं ।

अगले पल धर्मवीर जी ने कहा - चटाई ला कर बिछा यहाँ और तैयार हो जा ।

पूजा समझ गयी कि धर्मवीर जी क्या करना चाहते हैं।

उसने चटाई ला कर धर्मवीर वाली जगह यानी चटाई के बगल मे बिछा दी।

अब धर्मवीर जी के कहे गये शब्द यानी तैयारी के बारे मे सोचने लगी । उसका मतलब पेशाब करने से था. उसे मालूम था कि धर्मवीर जी ने उसे तैयार यानी पेशाब कर के चटाई पर आने के लिए कहा है ।

लेकिन उनके सामने ही बाथरूम मे जाना काफ़ी शर्म वाला काम लग रहा था और यही सोच कर वह एक मूर्ति की तरह खड़ी थी ।

तभी धर्मवीर जी ने बोला - पेशाब तो कर ले, नही तो तेरी जैसी लौंडिया पर मेरे जैसा कोई चढ़ेगा तो मूत देगी तुरंत । वैसे भी तुझे आज मुता मुता कर चोदना है ।





यह सुनकर पूजा की आंखे जमीन में गढ़ गयीं ।

दूसरे पल पूजा बाथरूम की तरफ चल दी। बाथरूम मे अंदर आ कर जैसे अपनी सलवार के नाड़े पर हाथ लगाई कि मन मस्ती मे झूम उठा।

उसके कानो मे धर्मवीर जी की चढ़ने वाली बात गूँज उठी । पूजा का मन लहराने लगा ।

वह समझ गयी कि अगले पल मे उसे धर्मवीर जी अपने लंड से चोदेंगे।

नाड़े के खुलते ही फटी हुई सलवार को नीचे सरकई और फिर पैंटी को भी सरकाकर मूतने के लिए बैठ गयी।

पूजा का मन काफ़ी मस्त हो चुका था। उसकी साँसे तेज चल रही थी ।

वह अंदर ही अंदर बहुत खुश थी । फिर मूतने के लिए जोर लगाई तो मूत निकालने लगा। मूतने के बाद खड़ी हुई और पैंटी उपर सरकाने से पहले एक हाथ से अपनी चूत को सहलाया ।

फिर जब सलवार का नाड़ा बाँधने लगी तो पूजा को लगा कि उसके हाथ कांप से रहे थे ।

फिर गेट खोलकर बाहर आई तो देखी कि धर्मवीर जी अपना कोट निकाल कर केवल चड्डी मे ही चटाई पर बैठे उसी की ओर देख रहे थे।

अब पूजा का कलेजा तेज़ी से धक धक कर रहा था। वह काफ़ी हिम्मत करके धर्मवीर जी के तरफ बढ़ी लेकिन चटाई से कुछ दूर पर ही खड़ी हो गयी और अपनी आँखें लगभग बंद कर ली।

वह धर्मवीर जी को देख पाने की हिम्मत नही जुटा जा पा रही थी ।

तभी धर्मवीर जी चटाई पर से खड़े हुए और पूजा का एक हाथ पकड़ कर चटाई पर खींच कर ले गये ।

फिर चटाई के बीच मे बैठ कर पूजा का हाथ पकड़ कर अपनी गोद मे खींच कर बैठाने लगे ।

धर्मवीर जी के मजबूत हाथों के खिचाव से पूजा उनके गोद मे अपने बड़े बड़े चूतड़ों के साथ बैठ गयी।

अगले पल मानो एक बिजली सी उसके शरीर मे दौड़ उठी ।

अब पूजा की बड़ी बड़ी चुचियाँ समीज़ मे एक दम बाहर की ओर निकली हुई दीख रहीं थी ।

पूजा अपनी आँखें लगभग बंद कर रखी थी। लेकिन पूजा ने अपने हाथों से अपने चुचिओ को ढकने की कोई कोशिस नही की और दोनो चुचियाँ समीज़ मे एक दम से खड़ी खड़ी थी ।

मानो पूजा खुद ही दोनो गोल गोल कसे हुए चुचिओ को दिखाना चाहती हो। पूजा अब धर्मवीर की गोद मे बैठे ही बैठे मस्त होती जा रही थी ।

धर्मवीर जी ने पूजा के दोनो चुचिओ को गौर से देखते हुए उनपर हल्के से हाथ फेरा मानो चुचिओ की साइज़ और कसाव नाप रहे हों ।

पूजा को पंडित जी का हाथ फेरना और हल्का सा चुचिओ का नाप तौल करना बहुत ही अच्छा लग रहा था। इसी वजह से वह अपनी चुचिओ को छुपाने के बजाय कुछ उचका कर और बाहर की ओर निकाल दी जिससे धर्मवीर जी उसकी चुचिओ को अपने हाथों मे पूरी तरह से पकड़ ले.।

पूजा अब धर्मवीर जी की गोद मे एकदम मूर्ति की तरह बैठ कर मज़ा ले रही थी।

अगले पल वह खुद ही धर्मवीर के गोद मे आगे की ओर थोड़ी सी उचकी और अपने समीज़ को दोनो हाथों से खुद ही निकालने लगी। अब वह खुद ही आगे आगे चल रही थी।

पूजा को अब देर करना ठीक नही लग रहा था ।

आख़िर समीज़ को निकाल कर फर्श पर रख दी ।

धर्मवीर की गोद मे खुद ही काफ़ी ठीक से बैठ कर अपने सिर को कुछ झुका लिया पूजा ने लेकिन दोनो छातियो को ब्रा मे और उपर करके निकाल दी।

धर्मवीर पूजा के उतावलेपन को देख कर मस्त हो गये।

वह सोचने लगे कि पूजा लंड के लिए पगलाने लगी है। फिर भी धर्मवीर एक पुराने चोदु थे और अपने जीवन मे बहुत सी लड़कियो और औरतों को चोद चुके थे । इस वजह से वे कई किस्म की लड़कियो और औरतों के स्वाभाव से भली भाँति परिचित थे।

इस वजह से समझ गये की पूजा काफ़ी गर्म किस्म की लड़की है और अपने जीवन मे एक बड़ी छिनाल भी बन सकती है। बस ज़रूरत है उसको छिनाल बनाने वालों की।

धर्मवीर यही सब सोच रहे थे और ब्रा के उपर से दोनो चुचिओ को अपने हाथों से हल्के हल्के दबा रहे था।

पूजा अपने शरीर को काफ़ी अकड़ कर धर्मवीर के गोद मे बैठी थी जैसे लग रहा था कि वह खुद ही दबवाना चाहती हो।

धर्मवीर ने ब्रा के उपर से ही दोनो चुचिओ को मसलना सुरू कर दिया और थोड़ी देर बाद ब्रा की हुक को पीछे से खोल कर दोनो चुचिओ से जैसे ही हटाया की दोनो चुचियाँ एक झटके के साथ बाहर आ गयीं।





चुचियाँ जैसे ही बाहर आईं की पूजा की मस्ती और बढ़ गयी और वह सोचने लगी की जल्दी से धर्मवीर दोनो चुचिओ को कस कस कर मसले ।

धर्मवीर ने चुचिओ पर हाथ फिराना सुरू कर दिया। नंगी चुचिओ पर धर्मवीर जी हाथ फिरा कर चुचिओ के आकार और कसाव को देख रहे थे जबकि पूजा के इच्छा थी की धर्मवीर उसकी चुचिओ को अब ज़ोर ज़ोर से मीसे ।

आख़िर पूजा लाज़ के मारे कुछ कह नही सकती तो अपनी इस इच्छा को धर्मवीर के सामने रखने के लिए अपने छाति को बाहर की ओर उचकाते हुए एक मदहोशी भरे अंदाज़ मे धर्मवीर के गोद मे कसमासाई तो धर्मवीर समझ गये और बोले ।

धर्मवीर - थोड़ा धीरज रख रे छिनाल, अभी तुझे कस कस के चोदुन्गा ।

धीरे धीरे मज़ा ले अपनी जवानी का समझी, तू तो इस उम्र मे लंड के लिए इतना पगला गयी है आगे क्या करेगी कुतिया ।

धर्मवीर भी पूजा की गर्मी देख कर दंग रह गये। उन्हे भी ऐसी किसी औरत से कभी पाला ही नही पड़ा था जो उसके सामने ही रंडी की तरह व्यवहार करने लगे।

पूजा के कान मे धरमवीर की आवाज़ जाते ही डर के बजाय एक नई मस्ती फिर दौड़ गयी । तब धर्मवीर ने उसके दोनो चुचिओ को कस कस कर मीज़ना सुरू कर दिया ।

ऐसा देख कर पूजा अपनी छातियो को धर्मवीर के हाथ मे उचकाने लगी ।

रह रह कर धर्मवीर अब पूजा के चुचों की घुंडीओ को भी ऐंठने लगे फिर दोनो चुचिओ को मुँह मे लेकर खूब चुसाइ सुरू कर दी।

अब क्या था पूजा की आँखें ढपने लगी और उसकी जांघों के बीच अब सनसनाहट फैलने लगी ।

थोड़ी देर की चुसाइ के बाद चूत मे चुनचुनी उठने लगी मानो चींटियाँ रेंग रहीं हो ।

अब पूजा कुछ और मस्त हो गयी और लाज़ और शर्म मानो शरीर से गायब होता जा रहा था ।

धर्मवीर जो की काफ़ी गोरे रंग के थे और बस चड्डी मे चटाई के बीच मे बैठे और उनकी गोद मे पूजा साँवली रंग की थी और चुचियाँ भी साँवली थी और उसकी घुंडिया तो एकदम से काले अंगूर की तरह थी जो धर्मवीर के गोरे मुँह मे काले अंगूर की तरह खड़े थे जिसे वे चूस रहे थे।

धर्मवीर की गोद मे बैठी पूजा पंडित जी के काफ़ी गोरे होने के वजह से मानो पूजा एकदम काली नज़र आ रही थी. दोनो के रंग एक दूसरे के बिपरीत ही थे ।

जहाँ धर्मवीर का लंड भी गोरा था वहीं पूजा की चूत तो एकदम से काली थी। पूजा की चुचिओ की चुसाइ के बीच मे ही धर्मवीर ने पूजा के मुँह को अपने हाथ से ज़ोर से पकड़ कर अपने मुँह से सटाया फिर पूजा के निचले और उपरी होंठो को चूसने और चाटने लगे।

पूजा एकदम से पागल सी हो गयी। अब उसे लगा कि उसकी चूत में कुछ गीला पन हो रहा है।

पूजा अब धर्मवीर के गोद मे बैठे ही बैठे अपने होंठो को चूसा रही थी तभी धर्मवीर बोले।

धरमवीर - जीभ निकाल चुद्दो ।

पूजा को समझ नही आया की जीभ का क्या करेंगे । फिर भी मस्त होने की स्थिति मे उसने अपने जीभ को अपने मुँह से बाहर निकाली और धर्मवीर लपाक से अपने दोनो होंठो मे कस कर चूसने लगे ।

जीभ पर लगे पूजा के मुँह का थूक चाट गये ।

पूजा को जीभ का चटाना बहुत अच्छा लगा । फिर धर्मवीर अपने मुँह के होंठो को पूजा के मुँह के होंठो पर कुछ ऐसा कर के जमा दिए की दोनो लोंगो के मुँह एक दूसरे से एकदम सॅट गया और अगले ही पल धर्मवीर ने ढेर सारा थूक अपने मुँह मे से पूजा के मुँह मे धकेलना सुरू कर किया।

पूजा अपने मुँह मे धर्मवीर का थूक के आने से कुछ घबरा सी गयी और अपने मुँह हटाना चाही लेकिन पूजा के मुँह के जबड़े को धर्मवीर ने अपने हाथों से कस कर पकड़ लिए था। तभी धर्मवीर के मुँह मे से ढेर सारा थूक पूजा के मुँह मे आया ही था की पूजा को लगा की उसे उल्टी हो जाएगी और लगभग तड़फ़ड़ाते हुए अपने मुँह को धर्मवीर के मुँह से हटाने की जोर मारी ।

तब धर्मवीर ने उसके जबड़े पर से अपना हाथ हटा लिए और पूजा के मुँह मे जो भी धर्मवीर का थूक था वह उसे निगल गयी । लेकिन फिर धर्मवीर ने पूजा के जबड़े को पकड़ के ज़ोर से दबा कर मुँह को चौड़ा किए और मुँह के चौड़ा होते ही अपने मुँह मे बचे हुए थूक को पूजा के मुँह के अंदर बीचोबीच थूक दिया जो की सीधे पूजा के गले के कंठ मे गिरी और पूजा उसे भी निगल गयी ।

पूजा के मुँह मे धर्मवीर का थूक जाते ही उसके शरीर मे अश्लीलता और वासना का एक नया तेज नशा होना सुरू हो गया ।

मानो धर्मवीर ने पूजा के मुँह मे थूक नही बल्कि कोई नशीला चीज़ डाल दिया हो।

पूजा मदहोशी की हालत मे अपने सलवार के उपर से ही चूत को भींच लिया।

धर्मवीर पूजा की यह हरकत देखते समझ गये कि अब चूत की फाँकें फड़फड़ा रही हैं।

दूसरे पल धर्मवीर के हाथ पूजा के सलवार के नाड़े पर पहुँच कर नाड़े की गाँठ खोलने लगा ।

लेकिन धर्मवीर की गोद मे बैठी पूजा के सलवार की गाँठ कुछ कसा बँधे होने से खुल नही पा रहा था।

ऐसा देखते ही पूजा धर्मवीर की गोद मे बैठे ही बैठे अपने दोनो हाथ नाड़े पर लेजाकर धर्मवीर के हाथ की उंगलिओ को हटा कर खुद ही नाड़े की गाँठ खोलने लगीं।

ऐसा देख कर धर्मवीर ने अपने हाथ को नाड़े की गाँठ के थोड़ा दूर कर के पूजा के द्वारा नाड़े को खुल जाने का इंतजार करने लगे।

अगले पल नाड़े की गाँठ पूजा के दोनो हाथों ने खोल दी और फिर पूजा के दोनो हाथ अलग अलग हो गये।

यह देख कर धर्मवीर समझ गये की आगे का काम उनका है क्योंकि पूजा सलवार के नाड़े के गाँठ खुलते ही हाथ हटा लेने का मतलब था कि वह खुद सलवार नही निकलना चाहती थी ।शायद लाज़ के कारण, फिर पूजा का हाथ हटते ही धर्मवीर अपने हाथ को सलवार के नाड़े को उसके कमर मे से ढीला करने लगे ।

धर्मवीर के गोद मे बैठी पूजा के कमर मे सलवार के ढीले होते ही सलवार कमर के कुछ नीचे हुआ तो गोद मे बैठी पूजा की चड्डी का उपरी हिस्सा दिखने लगा ।

फिर धर्मवीर अगले पल ज्योन्हि पूजा की सलवार को निकालने की कोशिस करना सुरू किए की पूजा ने अपने चौड़े चूतड़ों को गोद मे से कुछ उपर की ओर हवा मे उठा दी और मौका देखते ही धर्मवीर सलवार को पूजा के चूतड़ों के नीचे से सरकाकर उसके पैरों से होते हुए निकाल कर फर्श पर फेंक दिया ।

अब केवल पैंटी मे पूजा अपने बड़े बड़े और काले चूतड़ों को लेकर धर्मवीर के गोद मे बैठ गयी।

पूजा के दोनो चूतड़ चौड़े होने के नाते काफ़ी बड़े बड़े लग रहे थे और फैल से गये थे । जिस अंदाज़ मे पूजा बैठी थी उससे उसकी लंड की भूख एकदम सॉफ दिख रही थी।

चेहरे पर जो भाव थे वह उसके बेशर्मी को बता रहे थे।

अब पूजा की साँसे और तेज चल रही थी ।सलवार हटते ही पूजा की मोटी मोटी जांघ भी नंगी हो गयी जिसपर धर्मवीर की नज़र और हाथ फिसलने लगे।

पूजा की जांघे काफ़ी मांसल और गोल गोल साँवले रंग की थी। लेकिन चूत के पास के जाँघ का हिस्सा कुछ ज़्यादा ही सांवला था।

धर्मवीर पूजा की नंगी और मांसल साँवले रंग की जांघों को अब काफ़ी ध्यान से देख रहे थे ।





पूजा जो की धर्मवीर के गोद मे ऐसे बैठी थी मानो अब धर्मवीर के गोद से उठना नही चाहती हो।

धर्मवीर का लंड भी चड्डी के अंदर खड़ा हो चुका था।

जिसका कडापन और चुभन केवल पैंटी मे बैठी पूजा अपने काले चूतड़ों मे आराम से महसूस कर रही थी ।

फिर भी बहुत ही आराम से एक चुदैल औरत की तरह अपने दोनो चूतड़ों को उनके गोद मे पसार कर बैठी थी।

धर्मवीर ने पुजा को गोद मे बैठाए हुए उसकी नंगी गोल गोल चुचिओ पर हाथ फेरते हुए काफ़ी धीरे से पूछा - मज़ा आ रहा है ना।

इस पर पूजा धीरे से बोली - जी ।

और अगले पल अपनी सिर कुछ नीचे झुका ली । साँसे कुछ तेज ले रही थी।

धर्मवीर - तेरे जैसे भरे शरीर की लौंडिया को ऐसे ही चोदना चाहिए पूरी जवानी ठंडी कर देनी चाहिए । वरना तेरे जैसी संस्कारी लड़की आवारा लड़को के लौड़ों के नीचे सोने लगती है । और उनके लंड का पानी यदि एकबार पी लिया तेरी इस भैंस जैसी चूत ने तो तुझे चुदक्कड़ कुतिया बनने से कोई नही रोक सकता ।

धर्मवीर पूजा के पैंटी के उपर से ही चूत को मीज़ते हुए यह सब बातें धीरे धीरे बोल रहे थे और पूजा सब चुप चाप सुन रही थी ।

वह गहरी गहरी साँसें ले रही थी और नज़रें झुकाए हुए थी।

धर्मवीर की बातें सुन रही पूजा खूब अच्छी तरह समझ रही थी कि धर्मवीर किन आवारों की बात कर रहें हैं । लेकिन वह नही समझ पा रही थी कि अवारों के लंड का पानी मे कौन सा नशा होता है जो औरत को छिनाल या चुदैल बना देता है।

पूजा को धर्मवीर की यह सब बातें केवल एक सलाह लग रही थी जबकि वास्तव मे धर्मवीर के मन मे यह डर था कि अब पूजा को लंड का स्वाद मिल चुका है और वह काफ़ी गर्म भी है।

ऐसे मे यदि शहर के आवारा लड़के मौका पा के पूजा की रगड़दार चुदाई कर देंगे तो पूजा केवल मुझसे चुद्ते रहना उतना पसंद नही करेगी और अपने शहर के आवारे लौड़ों के चक्कर मे इधर उधर घूमती फिरती रहेगी। जिससे हो सकता है कि धर्मवीर के यहां पर आना जाना भी बंद कर दे ।

चूत को पैंटी के उपर से सहलाते हुए जब भी चूत के छेद वाले हिस्से पर उंगली जाती तो पैंटी को छेद वाला हिस्सा चूत के रस से भीगे होने से धर्मवीर जी की उंगली भी भीग जा रही थी।

धर्मवीर जब यह देखे कि पूजा की चूत अब बह रही है तो उसकी पैंटी निकालने के लिए अपने हाथ को पूजा के कमर के पास पैंटी के अंदर उंगली डाल कर निकालने के लिए सरकाना सुरू करने वाले थे कि पूजा समझ गयी कि अब पैंटी निकालना है तो पैंटी काफ़ी कसी होने के नाते वह खुद ही निकालने के लिए उनकी गोद से ज्योन्हि उठना चाही धर्मवीर ने उसका कमर पकड़ कर वापस गोद मे बैठा लिए और गुर्राकर तेज आवाज में बोले ।

धरमवीर - रूक आज मैं तुम्हारी पैंटी निकालूँगा । थोड़ा मेरे से अपनी कसी हुई पैंटी निकलवाने का तो मज़ा लेले रंडी की बहन ।

पूजा धर्मवीर के गोद मे बैठने के बाद यह सोचने लगी कि कहीं आज पैंटी फट ना जाए।

फिर पूजा की पैंटी के किनारे मे अपनी उंगली फँसा कर धीरे धीरे कमर के नीचे सरकाने लगे । पैंटी काफ़ी कसी होने के वजह से थोड़ी थोड़ी सरक रही थी।

पूजा काफ़ी मदद कर रही थी कि उसकी पैंटी आराम से निकल जाए। फिर पूजा ने अपने चूतड़ों को हल्के सा गोद से उपर कर हवा मे उठाई लेकिन धर्मवीर जी चूतड़ की चौड़ाई और पैंटी का कसाव देख कर समझ गये कि ऐसे पैंटी निकल नही पाएगी, क्योंकि कमर का हिस्सा तो कुछ पतला था लेकिन नीचे चूतड़ काफ़ी चौड़े थे फिर उन्होने पूजा को अपने गोद मे से उठकर खड़ा होने के लिए कहा - चल खड़ी हो जा बहनकी लौड़ी तब निकालूँगा तेरी पैंटी , तेरे कूल्हे इतने चौड़े हैं कि लगता है किसी कम उम्र की भैंस के चूतड़ हों ।

इतना सुनते ही पूजा उठकर खड़ी हो गयी और फिर धर्मवीर उसकी पैंटी निकालने की कोशिस करने लगे। पैंटी इतनी कोशिस के बावजूद बस थोड़ी थोड़ी किसी तरह सरक रही थी ।

पूजा के गोल मटोल चूतड़ धर्मवीर के मुँह के ठीक सामने ही थे जिस पर पैंटी आ कर फँस गयी थी ।

जब धर्मवीर चड्डी को नीचे की ओर सरकाते तब आगे यानी पूजा के झांट और चूत के तरफ की पैंटी तो सरक जाती थी लेकिन जब पिछला यानी पूजा के चूतड़ों वाले हिस्से की पैंटी नीचे सरकाते तब चूतड़ों का निचला हिस्सा काफ़ी गोल और मांसल होकर बाहर निकले होने से चड्डी जैसे जैसे नीचे आती वैसे वैसे चूतड़ के उभार पर कस कर टाइट होती जा रही थी ।

आख़िर किसी तरह पैंटी नीचे की ओर आती गयी और ज्योन्हि चूतड़ों के मसल उभार के थोड़ा सा नीचे की ओर हुई कि तुरंत "फटत्त" की आवाज़ के साथ चड्डी दोनो बड़े उभारों से नीचे उतर कर जाँघ मे फँस गयी ।

पैंटी के नीचे होते ही पूजा के सांवले और काफ़ी बड़े दोनो चूतड़ों के गोलाइयाँ अपने पूरे आकार मे आज़ाद हो कर हिलने लगे।

मानो पैंटी ने इन दोनो चूतड़ों के गोलाईओं को कस कर बाँध रखा था।

चूतड़ों के दोनो गोल गोल और मांसल हिस्से को धर्मवीर काफ़ी ध्यान से देख रहे थे ।

पूजा तो साँवले रंग की थी लेकिन उसके दोनो चूतड़ भी सांवले रंग के थे।

चूतड़ काफ़ी कसे हुए थे । पैंटी के नीचे सरकते ही पूजा को राहत हुई कि अब पैंटी फटने के डर ख़त्म हो गया था ।

फिर धर्मवीर सावित्री के जांघों से पैंटी नीचे की ओर सरकाते हुए आख़िर दोनो पैरों से निकाल लिए । निकालने के बाद पैंटी के चूत के सामने वाले हिस्से को जो की कुछ भीग गया था उसे अपनी नाक के पास ले जा कर उसका गंध नाक से खींचे और उसकी मस्तानी चूत की गंध का आनंद लेने लगे ।

पैंटी को एक दो बार कस कर सूंघने के बाद उसे फर्श पर पड़े पूजा के कपड़ों के उपर फेंक दिया ।

अब पूजा एकदम नंगी होकर धर्मवीर के सामने अपना चूतड़ कर के खड़ी थी ।

फिर अगले पल धर्मवीर चटाई पर उठकर खड़े हुए और अपनी चड्डी निकाल कर चटाई पर रख दिए।

उनका लंड अब एकदम से खड़ा हो चुका था. धर्मवीर फिर चटाई पर बैठ गये और पूजा जो सामने अपने चूतड़ को धर्मवीर की ओर खड़ी थी , फिर से गोद मे बैठने के बारे मे सोच रही थी कि धर्मवीर ने उसे गोद के बजाय अपने बगल मे बैठा लिए ।

पूजा चटाई पर धर्मवीर के बगल मे बैठ कर अपनी नज़रों को झुकाए हुए थी।

फिर धर्मवीर ने पूजा के एक हाथ को अपने हाथ से पकड़ कर खड़े तननाए लंड से सटाते हुए पकड़ने के लिए कहा।

पूजा ने धर्मवीर के लंड को काफ़ी हल्के हाथ से पकड़ी क्योंकि उसे लाज़ लग रही थी। धर्मवीर का लंड एकदम गरम और कड़ा था। सुपाड़े पर चमड़ी चढ़ी हुई थी । लंड का रंग गोरा था और लंड के अगाल बगल काफ़ी झांटें उगी हुई थी ।

धर्मवीर ने देखा की पूजा लंड को काफ़ी हल्के तरीके से पकड़ी है और कुछ लज़ा रही है तब पूजा से बोले - अरे चूत की रानी कस के पकड़ , ये कोई साँप थोड़ी है कि तुझे काट लेगा, थोड़ा सुपाड़े की चमड़ी को आगे पीछे कर ।अब तो तेरो उमर हो गयी है ये सब करने की, लंड से खेलने की, लौड़ों के बीच रहने की । थोड़ा मन लगा के लंड का मज़ा लूट । पहले इस सुपाड़े के उपर वाली चमड़ी को पीछे की ओर सरका और थोड़ा सुपाड़े पर नाक लगा के लौड़े की गंध सूंघ ।

पूजा ये सब सुन कर भी चुपचाप वैसे ही बगल मे बैठी हुई लंड को एक हाथ से पकड़ी हुई थी और कुछ पल बाद कुछ सोचने के बाद सुपाड़े के उपर वाली चमड़ी को अपने हाथ से हल्का सा पीछे की ओर खींच कर सरकाना चाही और अपनी नज़रे उस लंड और सुपाड़े के उपर वाली चमड़ी पर गढ़ा दी थी । बहुत ध्यान से देख रही थी कि लंड एक दम साँप की तरह चमक रहा था और सुपाड़े के उपर वाली चमड़ी पूजा के हाथ की उंगलिओ से पीछे की ओर खींचाव पा कर कुछ पीछे की ओर सर्की और सुपाड़े के पिछले हिस्से पर से ज्योन्हि पीछे हुई की सुपाड़े के इस काफ़ी चौड़े हिस्से से तुरंत नीचे उतर कर सुपाड़े की चमड़ी लंड वाले हिस्से मे आ गयी और धर्मवीर के लंड का पूरा सुपाड़ा बाहर आ गया जैसे कोई फूल खिल गया हो और चमकने लगा ।

जैसे ही सुपाड़ा बाहर आया धर्मवीर पूजा से बोले - देख इसे सूपड़ा कहते हैं और औरत की चूत मे सबसे आगे यही घुसता है, अब अपनी नाक लगा कर सूँघो और देखा कैसी महक है इसकी । इसकी गंध सूँघोगी तो तुम्हारी मस्ती और बढ़ेगी चल सूंघ इसे ।

पूजा ने काफ़ी ध्यान से सुपादे को देखा लेकिन उसके पास इतनी हिम्मत नही थी कि वह सुपाड़े के पास अपनी नाक ले जाय। तब धर्मवीर ने पूजा के सिर के पीछे अपना हाथ लगा कर उसके नाक को अपने लंड के सुपाड़े के काफ़ी पास ला दिया लेकिन पूजा उसे सूंघ नही रही थी।

धर्मवीर ने कुछ देर तक उसके नाक को सुपाड़े से लगभग सटाये रखा तब पूजा ने जब साँस ली तब एक मस्तानी गंध जो की लौड़े की थी, उसके नाक मे घुसने लगी और पूजा कुछ मस्त हो गयी।

फिर वह खुद ही सुपादे की गंध सूंघने लगी। ऐसा देख कर धर्मवीर ने अपना हाथ पूजा के सिर से हटा लिया और उसे खुद ही सुपाड़ा सूंघने दिया और वह कुछ देर तक सूंघ कर मस्त हो गयी।

फिर धर्मवीर ने उससे कहा - अब सुपाड़े की चमड़ी को फिर आगे की ओर लेजा कर सुपाड़े पर चढ़ा दे ।

यह सुन कर पूजा ने अपने हाथ से लंड की चमड़ी को सुपाड़े के उपर चढ़ाने के लिए आगे की ओर खींची और कुछ ज़ोर लगाने पर चमड़ी सुपाड़े के उपर चढ़ गयी और सुपाड़े को पूरी तरीके से ढक दी मानो कोई नाप का कपड़ा हो जो लंड के सुपाड़े ने पहन लिया हो ।

धर्मवीर ने देखा की पूजा लंड को काफ़ी ध्यान से अपने हाथ मे लिए हुए देख रही थी । और उन्होने ने उसे दिखाने के लिए थोड़ी देर तक वैसे ही पड़े रहे और उसके साँवले हाथ मे पकड़ा गया गोरा लंड अब झटके भी ले रहा था।

धर्मवीर बोले - पूजा रानी चमड़ी को फिर पीछे और आगे कर के मेरे लंड की मस्ती बढ़ा कि बस ऐसे ही बैठी रहेगी । अब तू सयानी हो गयी है और तेरा बाप तेरी शादी भी जल्दी करेगा । तो लंड से कैसे खेला जाता है कब सीखेगी। और मायके से जब ये सब सिख कर ससुराल जाएगी तब समझ ले कि अपने ससुराल मे बढ़े मज़े लूटेगी और तुम्हे तो भगवान ने इतनी गदराई जवानी और शरीर दिया है कि तेरे ससुराल मे तेरे देवर और ससुर का तो भाग्य ही खूल जाएगा । बस तू ये सब सीख ले की किसी मर्द से ये गंदा काम कैसे करवाया जाता है और शेष तो भगवान तेरे पर बहुत मेरहबान है ।

धर्मवीर जी बोले और मुस्कुरा उठे । पूजा ये सब सुन कर कुछ लज़ा गयी लेकिन धर्मवीर के मुँह से शादी और अपने ससुराल की बात सुनकर काफ़ी गर्व महसूस की और थोड़ी देर के लिए अपनी नज़रें लंड पर से हटा कर लाज़ के मारे नीचे झुका ली लेकिन अपने एक हाथ से लंड को वैसे ही पकड़े रही।

धर्मवीर ने देखा की पूजा भी अन्य लड़कियो की तरह शादी के नाम पर काफ़ी खुश हो गयी और कुछ लज़ा भी रही थी ।

तभी पूजा के नंगे चौड़े मासल चूतड़ों पर हाथ फेरते वो आगे धीरे से बोले- अपनी शादी मे मुझे बुलाओगी की नही ।

पूजा ने जब धर्मवीर के मुँह से ऐसी बात सुनी तो उसे खुशी का ठिकाना ही नही रहा और नज़ारे झुकाए ही हल्की सी मुस्कुरा उठी लेकिन लाज़ के मारे कुछ बोल नही पाई और शादी के सपने मन मे आने लगे तभी धर्मवीर ने फिर बोला ।

धर्मवीर -बोलो बुलाओगी की नही ।

इस पर पूजा काफ़ी धीरे से बोली - जी बुलाऊंगी ।

एकदम से सनसना गयी. क्योंकि धर्मवीर का लंड उसके हाथ मे भी था और वह एकदम से नंगी धर्मवीर के बगल मे बैठी थी और उसके चूतड़ों पर धर्मवीर जी का हाथ मज़ा लूट रहा था।

ऐसे मे शादी की बात उठने पर उसके मन मे उसके होने वाले पति, देवर, ससुर, ननद, सास और ससुराल यानी ये सब बातों के सपने उभर गये इस वजह से पूजा लज़ा और सनसना गयी थी। धर्मवीर जी की इन बातों से सावित्री बहुत खुश हो गयी थी । किसी अन्य लड़की की तरह उसके मन मे शादी और ससुराल के सपने तो पहले से ही थे।

तभी धर्मवीर ने कहा - तेरा बाप बुलाए या नही तू मुझे ज़रूर बुलाना मैं ज़रूर आउन्गा । चलो लंड के चमड़ी को अब आगे पीछे करो और लंड से खेलना सीख लो ।

कुछ पल के लिए शादी के ख्वाबों मे डूबी पूजा वापस लंड पर अपनी नज़रे दौड़ाई और सुपाड़े की चमड़ी को फिर पीछे की ओर खींची और पहले की तरह सुपाड़ा से चमड़ी हटते ही खड़े लंड का चौड़ा सुपाड़ा एक दम बाहर आ गया।

पूजा की नज़रे लाल सुपाड़े पर पड़ी तो मस्त होने लगी। लंड पर पूजा का हाथ वैसे ही धीरे धीरे चल रहा था और खड़े लंड की चमड़ी सुपादे पर कभी चढ़ती तो कभी उतरती थी।

धर्मवीर के दोनो हाथों से चूतड़ और चुचि को कस कर मीज़ना सुरू किए और आगे बोले - मैं तेरे मर्द से भी मिल कर कह दूँगा कि तुम्हे ससुराल मे कोई तकलीफ़ नही होनी चाहिए । हमारी पूजा हर वक्त लंड के नीचे रहनी चाहिए । पूरी कसकर चुदनी चाहिए ।

पूजा के चुचिओ और चूतड़ों पर धर्मवीर के हाथ कहर बरपा रहे थे इस वजह से उसके हाथ मे लंड तो ज़रूर था लेकिन वह तेज़ी से सुपाड़े की चमड़ी को आगे पीछे नही कर पा रही थी।

वह यह सब सुन रही थी लेकिन अब उसकी आँखे कुछ दबदबाने जैसी लग रही थी।

धर्मवीर के सॉफ आश्वासन से कि वह खुश हो गयी। अब चूतड़ों और चुचिओ के मीसाव से मस्त होती जा रही थी पूजा ।

धर्मवीर बोले - और मेरे ही लंड से तुम खूब चुदोगी आज तो मेरे ही सामने शादी के मंडप तुम किसी की पत्नी बनोगी तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा क्योंकि मैं ये तो देख लूँगा के मैने जिसकी चूत का भोसड़ा बनाया है उसकी सुहागरात किसके साथ मनेगी , सही बात है कि नही ।

इतना कह कर धर्मवीर मुस्कुरा उठे और आगे बोले - लंड तो देख लिया, सूंघ लिया और अब इसे चाटना और चूसना रह गया है इसे भी सीख लो चलो। इस सुपादे को थोड़ा अपने जीभ से चाटो । आज तुम्हे इतमीनान से सब कुछ सीखा दूँगा ताकि ससुराल मे तुम एक गुणवती की तरह जाओ और अपने गुनो से सबको संतुष्ट कर दो ।

फिर आगे बोले - चलो जीभ निकाल कर इस सुपाड़े पर फिराओ ।

पूजा अगले पल अपने जीभ को सुपादे पर फिराने लगी। सुपाड़े के स्पर्श से ही पूजा की जीभ और मन दोनो मस्त हो उठे ।

पूजा की जीभ का थूक सुपाड़े पर लगने लगा और सुपाड़ा गीला होने लगा।

पूजा के नज़रें सुपाड़े की बनावट और लालपन पर टिकी थी।

पूजा अपने साँवले हाथों मे धर्मवीर के खड़े और गोरे लंड को कस के पकड़ कर अपने जीभ से धीरे धीरे चाट रही थी।

धर्मवीर जी सावित्री के चेहरे को देख रहे थे और लंड चूसने के तरीके से काफ़ी खुश थे।

पूजा के चेहरे पर एक रज़ामंदी और खुशी का भाव सॉफ दीख रहा था।

धर्मवीर की नज़रें चेहरे पर से हट कर पूजा के साँवले और नंगे शरीर पर फिसलने लगी ।

पंडित जी अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर उसके भैंस की तरह बड़े बड़े दोनो चूतड़ों पर फिराने लगे और चूतड़ों पर के मांसल गोलाईओं के उठान को पकड़ कर भींचना सुरू कर दिए।

ऐसा लग रहा था कि धर्मवीर के हाथ पूजा के चूतड़ों पर के माँस के ज़यादा होने का जयजा ले रहे हों । जिसका कसाव भी बहुत था और उनके गोरे हाथ के आगे पूजा के चूतड़ काफ़ी सांवले लग रहे थे ।





पूजा बगल मे बैठी हुई धर्मवीर के लंड और सुपादे पर जीभ फिरा रही थी। धर्मवीर से अपने चूतड़ों को मसलवाना बहुत अछा लग रहा था।

तभी धर्मवीर बोले - कब तक बस चाटती रहेगी । अब अपना मुँह खोल कर ऐसे चौड़ा करो जैसे औरतें मेला या बेज़ार मे ठेले के पास खड़ी होकर गोलगापा को मुँह चौड़ा कर के खाती हैं समझी ।

पूजा यह सुन कर सोच मे पड़ गयी और अपने जीवन मे कभी भी लंड को मुँह मे नही ली थी इस लिए उसे काफ़ी अजीब लग रहा था । वैसे तो अब गरम हो चुकी थी लेकिन मर्द के पेशाब करने के चीज़ यानी लंड को अपने मुँह के अंदर कैसे डाले यही सोच रही थी ।

वह जीभ फिराना बंद कर के लंड को देख रही थी फिर लंड को एक हाथ से थामे ही धर्मवीर की ओर कुछ बेचैन से होते हुए देखी ।

धर्मवीर ने पूछा - कभी गोलगापा खाई हो की नही?

इस पर पूजा कुछ डरे और बेचैन भाव से हाँ मे सिर हल्का सा हिलाया।

धर्मवीर बोले - गोलगप्पा जब खाती हो तो कैसे मुँह को चौड़ा करती हो । वैसे चौड़ा करो ज़रा मैं देखूं ।

धर्मवीर के मुँह से ऐसी बात पर पूजा एक दम लज़ा गयी क्योंकि गोलगप्पा खाते समय मुँह को बहुत ज़्यादा ही चौड़ा करना पड़ता हैं और तभी गोलगापा मुँह के अंदर जाता है । वह अपने मुँह को वैसे चौड़ा नही करना चाहती थी लेकिन धर्मवीर उसके मुँह के तरफ ही देख रहे थे।

पूजा समझ गयी की अब चौड़ा करना ही पड़ेगा। और अपनी नज़रें धर्मवीर जी के आँख से दूसरी ओर करते हुए अपने मुँह को धीरे धीरे चौड़ा करने लगी और धर्मवीर जी उसके मुँह को चौड़ा होते हुए देख रहे थे ।


जब पूजा अपने मुँह को कुछ चौड़ा करके रुक गयी और मुँह के अंदर सब कुछ सॉफ दिखने लगा तभी पंडित जी बोले - थोड़ा और चौड़ा करो और अपने जीभ को बाहर निकाल कर लटका कर आँखें बंद कर लो ।
 
इतना सुन कर पूजा जिसे ऐसा करने मे काफ़ी लाज़ लग रही थी उसने सबसे पहले अपनी आँखें ही बंद कर ली फिर मुँह को और चौड़ा किया और जीभ को बाहर कर ली जिससे उसके मुँह मे एक बड़ा सा रास्ता तैयार हो गया.

धर्मवीर ने एक नज़र से उसके मुँह के अंदर देखा तो पूजा के गले की कंठ एक दम सॉफ दीख रही थी। मुँह के अंदर जीभ, दाँत और मंसुड़ों मे थूक फैला भी सॉफ दीख रहा था ।





धरवीर- मुँह ऐसे ही चौड़ा रखना समझी ,बंद मत करना । अब तुम्हारे मुँह के अंदर की लाज़ मैं अपने लंड से ख़त्म कर दूँगा और तुम भी एक बेशर्म औरत की तरह गंदी बात अपने मुँह से निकाल सकती हो । यानी एक मुँहफट बन जाओगी । और बिना मुँह मे लंड लिए कोई औरत यदि गंदी बात बोलती है तो उसे पाप पड़ता है । गंदी बात बोलने या मुँहफट होने के लिए कम से कम एक बार लंड को मुँह मे लेना ज़रूरी होता है ।

अगले पल धर्मवीर ने बगल मे बैठी हुई पूजा के सर पर एक हाथ रखा और दूसरे हाथ से अपने लंड को पूजा के हाथ से ले कर लंड के उपर पूजा का चौड़ा किया हुआ मुँह लाया और खड़े और तननाए लंड को पूजा के चौड़े किए हुए मुँह के ठीक बीचोबीच निशाना लगाते हुए मुँह के अंदर तेज़ी से ठेल दिया और पूजा के सिर को भी दूसरे हाथ से ज़ोर से दबा कर पकड़े रहे।

लंड चौड़े मुँह मे एकदम अंदर घुस गया और लंड का सुपाड़ा पूजा के गले के कंठ से टकरा गया और पूजा घबरा गयी और लंड निकालने की कोशिस करने लगी लेकिन धर्मवीर उसके सिर को ज़ोर से पकड़े थे जिस वजह से वह कुछ कर नही पा रही थी।

धर्मवीर अगले पल अपने कमर को उछाल कर पूजा के गले मे लंड चाँप दिए और पूजा को ऐसा लगा कि उसकी साँस रुक गयी हो और मर जाएगी ।

इस तड़फ़ड़ाहट मे उसके आँखों मे आँसू आ गये और लगभग रोने लगी और लंड निकालने के लिए अपने एक हाथ से लंड को पकड़ना चाही लेकिन लंड का काफ़ी हिस्सा मुँह के अंदर घुस कर फँस गया था और उसके हाथ मे लंड की जड़ और झांटें और दोनो गोल गोल अंडे ही आए और पूजा के नाक तो मानो धर्मवीर के झांट मे दब गयी थी ।

पूजा की कोसिस बेकार हो जा रही थी क्योंकि धर्मवीर ने पूजा के सर के बॉल पकड़ कर उसे अपने लंड पर दबाए थे और अपनी कमर को उछाल कर लंड मुँह मे ठेल दे रहे थे ।

दूसरे पल पंडित जी पूजा के सिर पर के हाथ को हटा लिए और पूजा तुरंत अपने मुँह के अंदर से लंड को निकाल कर खांसने लगी और अपने दोनो हाथों से आँखों मे आए आँसुओं को पोंछने लगी ।

इधर लंड मुँह के अंदर से निकलते ही लहराने लगा। लंड पूजा के थूक और लार से पूरी तरह नहा चुका था ।

धर्मवीर खाँसते हुए सावित्री से बोले - चलो तुम्हारे गले के कंठ को अपने लौड़े से चोद दिया है अब तुम किसी भी असलील और गंदे शब्दों का उच्चारण कर सकती हो और एक बढ़िया मुहफट बन सकती हो ।

मुहफट औरतें बहुत मज़ा लेती हैं । आगे बोले - औरतों को जीवन मे कम से कम एक बार मर्द के लंड से अपने गले की कंठ को ज़रूर चुदवाना चाहिए . इसमे थोडा ज़ोर लगाना पड़ता है .ताकि लंड का सुपाड़ा गले के कंठ को छू सके और कंठ मे असलीलता और बेशर्मी का समावेश हो जाए।

पूजा अभी भी खांस रही थी और धर्मवीर की बातें चुपचाप सुन रही थी। धर्मवीर के गले मे लंड के ठोकर से कुछ दर्द हो रहा था ।फिर पूजा की नज़रें धर्मवीर के टंटनाये लंड पर पड़ी जो की थूक और लार से पूरा भीग चुका था।

धर्मवीर बोला - मैने जो अभी तेरे साथ किया है इसे कंठ चोदना कहते हैं । और जिस औरत की एक बार कंठ चोद दी जाती है वह एक काफ़ी रंगीन और बेशरम बात करने वाली हो जाती है। ऐसी औरतों को मर्द बहुत चाहतें हैं । ऐसी औरतें गंदी और अश्लील कहानियाँ भी खूब कहती हैं जिसे मर्द काफ़ी चाव से सुनते हैं । वैसे कंठ की चुदाई जवानी मे ही हो जानी चाहिए। आजकल कंठ की चुदाई बहुत कम औरतों की हो पाती है क्योंकि बहुत लोग तो यह जानते ही नही हैं समझी । अब तू मज़ा कर पूरी जिंदगी ।

पूजा के मन मे डर था कि फिर से कहीं लंड को गले मे ठूंस ना दें इस वजह से वह लौड़े के तरफ तो देख रही थी लेकिन चुपचाप बैठी थी ।

तभी धर्मवीर बोले - चलो मुँह फिर चौड़ा कर , घबरा मत इस बार केवल आधा ही लंड मुँह मे पेलुँगा । अब दर्द नही होगा । मुँह मे लंड को आगे पीछे कर के तुम्हारा मुँह चोदुन्गा जिसे मुँह मारना कहतें हैं । यह भी ज़रूरी है तुम्हारे लिए इससे तुम्हारी आवाज़ काफ़ी सुरीली होगी ।चलो मुँह खोलो ।

पूजा ने फिर अपना मुँह खोला लेकिन इस बार सजग थी की लंड कहीं फिर काफ़ी अंदर तक ना घूस जाए।

धर्मवीर ने पूजा के ख़ूले मुँह मे लंड बड़ी आसानी से घुसाया और लंड कुछ अंदर घुसने के बाद उसे आगे पीछे करने के लिए कमर को बैठे ही बैठे हिलाने लगे और पूजा के सिर को एक हाथ से पकड़ कर उपर नीचे करने लगे। उनका गोरे रंग का मोटा और तनतनाया हुआ लंड पूजा के मुँह मे घूस कर आगे पीछे होने लगा ।

पूजा के जीभ और मुँह के अंदर तालू से लंड का सुपाड़ा रगड़ाने लगा वहीं पूजा के मुँह के दोनो होंठ लंड की चमड़ी पर कस उठी थी मानो मुँह के होंठ नही बल्कि चूत की होंठ हों।

धर्मवीर एक संतुलन बनाते हुए एक लय मे मुँह को चोदने लगे।





धर्मवीर बोले - ऐसे ही रहना इधर उधर मत होना । बहुत अच्छे तरीके से तेरा मुँह मार रहा हूँ । साबाश ।

इसके साथ ही उनके कमर का हिलना और पूजा के मुँह मे लंड का आना जाना काफ़ी तेज होने लगा।

पूजा को भी ऐसा करवाना बहुत अच्छा लग रहा था. ।

उसकी चूत मे लिसलिसा सा पानी आने लगा ।

पूजा अपने मुँह के होंठो को धर्मवीर के पिस्टन की तरह आगे पीछे चल रहे लंड पर कस ली और मज़ा लेने लगी ।

अब पूरा का पूरा लंड और सुपाड़ा मुँह के अंदर आ जा रहा था ।

कुछ देर तक धर्मवीर ने पूजा के मुँह को ऐसे ही चोदते रहे और पूजा की चूत मे चुनचुनी उठने लगी ।

वह लाज के मारे कैसे कहे की चूत अब तेज़ी से चुनचुना रही है मानो चीटिया रेंग रही हों । अभी भी लंड किसी पिस्टन की तरह पूजा के मुँह मे घूस कर आगे पीछे हो रहा था, लेकिन चूत की चुनचुनाहट ज़्यादे हो गयी और पूजा के समझ मे नही आ रहा था कि धर्मवीर के सामने ही कैसे अपनी चुनचुना रही चूत को खुज़लाए ।

इधर मुँह मे लंड वैसे ही आ जा रहा था और चूत की चुनचुनाहट बढ़ती जा रही थी ।

आख़िर पूजा का धीरज टूटने लगा उसे लगा की अब चूत की चुनचुनाहट मिटाने के लिए हाथ लगाना ही पड़ेगा ।

और अगले पल ज्योन्हि अपने एक हाथ को चूत के तरफ ले जाने लगी और धर्मवीर की नज़र उस हाथ पर पड़ी और कमरे मे एक आवाज़ गूँजी।





धर्मवीर - रूक चूत पर हाथ मत लगाना । लंड मुँह से निकाल और चटाई पर लेट जा । तैयार हो गई है तू अब लंड है तू अब लंड खाने के लिए। हाथ से इस चूत की बेईजती मत कर इस चूत की रगड़ाई तो मैं अपने लंड से करूंगा । अपनी चूत के पानी को अपने हाथ पर खराब मत कर इससे तो मैं अपना लौड़ा नहलाऊंगा आज । तू क्या सोच रही है कि मैं बस तुझे ही ठंडा करूं कुतिया। मुझे ठंडा कौन करेगा मैं तेरी चूत के पानी से ही तो ठंडा होना चाहता हूं ।

इसे बेकार मत कर मुझे नहला अपनी चूत के पानी में । देखूं तो कि बहन की बहन भी रंडी ही है या कोई सती सावित्री है । सती सावित्री तो तू नहीं हो सकती क्योंकि तेरे लंड की भूख भूख तेरी आंखों में दिख रही है । तू तो वह गरम कुतिया है जिसकी गांड के नीचे तकिया लगा कर चूत में लंड भकाभक पेला जाए।

पूजा का हाथ तो वहीं रुक गया लेकिन चूत की चुनचुनाहट नही रुकी और बढ़ती गयी ।

धर्मवीर जी का आदेश पा कर पूजा ने मुँह से लंड निकाल कर तुरंत चटाई पर लेट गयी। और बर की चुनचुनाहट कैसे ख़त्म होगी यही सोचने लगी और एक तरह से तड़पने लगी।

धर्मवीर लपक कर पूजा के दोनो जांघों के बीच ज्योहीं आए की पूजा ने अपने दोनो मोटी और लगभग गदरायी जांघों को चौड़ा कर दी और दूसरे पल धर्मवीर ने अपने हाथ के बीच वाली उंगली को चूत के ठीक बीचोबीच लिसलिशसाई चूत मे गच्च.. की आवाज़ के साथ पेल दिया और धर्मवीर की गोरे रंग की बीच वाली लंबी उंगली जो मोटी भी थी पूजा के एकदम से काले और भैंस की तरह झांटों से भरी चूत मे आधा से अधिक घूस कर फँस सा गयी ।





पूजा लगभग चीख पड़ी और अपने बदन को मरोड़ने लगी ।

धर्मवीर अपनी उंगली को थोड़ा सा बाहर करके फिर चूत में घुसेड़ दिए और अब गोरे रंग की उंगली काली रंग की चूत मे पूरी की पूरी घूस गयी ।

धर्मवीर ने पूजा की काली चूत मे फँसी हुई उंगली को देखा और महसूस किया कि फूली हुई चूत जो काफ़ी लिसलिसा चुकी थी , अंदर काफ़ी गर्म थी और चूत के दोनो काले काले होंठ भी फड़फड़ा रहे थे ।

चटाई मे लेटी पूजा की साँसे काफ़ी तेज थी और वह हाँफ रही थी साथ साथ शरीर को मरोड़ रही थी ।

धर्मवीर चटाई मे सावित्री के दोनो जांघों के बीच मे बैठे बैठे अपनी उंगली को चूत में फँसा कर उसकी काली रंग की फूली हुई चूत की सुंदरता को निहार रहे थे कि चटाई मे लेटी और हाँफ रही पूजा ने एक हाथ से धर्मवीर की चूत मे फँसे हुए उंगली वाले हाथ को पकड़ ली ।

धर्मवीर की नज़र पूजा के चेहरे की ओर गयी तो देखे कि वह अपनी आँखें बंद करके मुँह दूसरे ओर की है एर हाँफ और कांप सी रही थी।

तभी पूजा के इस हाथ ने धर्मवीर के हाथ को चूत मे उंगली आगे पीछे करने के लिए इशारा किया ।

पूजा का यह कदम एक बेशर्मी से भरा था । वह अब लाज़ और शर्म से बाहर आ गयी थी।

धर्मवीर समझ गये की चूत काफ़ी चुनचुना रही है इसी लिए वह एकदम बेशर्म हो गयी है ।

और इतना देखते ही धर्मवीर ने अपनी उंगली को काली चूत मे कस कस कर आगे पीछे करना शुरू किया ।

पूजा ने कुछ पल के लिए अपने हाथ धर्मवीर के हाथ से हटा लिया ।

धर्मवीर पूजा की चूत अब अपने हाथ के बीच वाली उंगली से कस कस कर चोद रहे थे ।

अब पूजा ने अपने जाँघो को काफ़ी चौड़ा कर दीया ।पूजा की जांघे तो साँवली थी लेकिन जाँघ के चूत के पास वाला हिस्सा काला होता गया था और जाँघ के कटाव जहाँ से चूत की झांटें शुरू हुई थी, वह काला था और चूत की दोनो फांके तो एकदम से ही काली थी जिसमे धर्मवीर का गोरे रंग की उंगली गच्च गच्च जा रही थी ।

जब उंगली चूत मे घूस जाती तब केवल हाथ ही दिखाई पड़ता और जब उंगली बाहर आती तब चूत के काले होंठो के बीच मे कुछ गुलाबी रंग भी दीख जाती थी ।

धर्मवीर काली और फूली हुई झांटों से भरी चूत पर नज़रें गढ़ाए अपनी उंगली को चोद रहे थे कि पूजा ने फिर अपने एक हाथ से धर्मवीर के हाथ को पकड़ी और चूत मे तेज़ी से खूद ही चोदने के लिए जोर लगाने लगी ।

पूजा की यह हरकत काफ़ी गंदी और अश्लील थी लेकिन धर्मवीर समझ गये कि अब पूजा झड़ने वाली है और उसका हाथ धर्मवीर के हाथ को पकड़ कर तेज़ी से चूत मे चोदने की कोशिस करने लगी जिसको देखते धर्मवीर अपने उंगली को पूजा की काली चूत मे बहुत ही तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया।

पूजा धर्मवीर के हाथ को बड़ी ताक़त से चूत के अंदर थेल रही थी लेकिन केवल बीच वाली उंगली ही चूत मे घूस रही थी ।

अचानक पूजा तेज़ी से सिसकाते हुए अपने पीठ को चटाई मे एक धनुष की तरह तान दी और कमर का हिस्सा झटके लेने लगा ही था की पूजा चीख पड़ी - आररीए माई री माईए सी उउउ री माएई रे बाप रे ...आअहह ।

और धर्मवीर के उंगली को चूत ने मानो कस लिया । और गर्म गर्म रज चूत मे अंदर से निकलने लगा और धर्मवीर की उंगली भींग गयी ।

फिर धर्मवीर के हाथ पर से पूजा ने अपने हाथ हटा लिए और चटाई मे सीधी लेट कर आँखे बंद कर के हाँफने लगी।

धर्मवीर ने देखा की पूजा अब झाड़ कर शांत हो रही है ।

फिर चूत मे से अपने उंगली को बाहर निकाले जिसपर सफेद रंग का कमरस यानी रज लगा था और बीच वाली उंगली के साथ साथ बगल वाली उंगलियाँ भी चूत के लिसलिसा पानी से भीग गये थे।

धर्मवीर की नज़र जब पूजा की चूत पर पड़ी तो देखा की चूत की दोनो होंठ कुछ कांप से रहे थे , और चूत का मुँह, अगल बगल के झांट भी लिसलिस्से पानी से भीग गये थे ।

तभी बीच वाली उंगली के उपर लगे कमरस को धर्मवीर अपने मुँह मे ले कर चाटने लगे और पूजा की आँखें बंद थी लेकिन उसके कान मे जब उंगली चाटने की आआवाज़ आई तो समझ गयी की धर्मवीर फिर चूत वाली उंगली को चाट रहे होंगे ।

और यही सोच कर काफ़ी ताक़त लगाकर अपनी आँखे खोली तो देखी की धर्मवीर अपनी बीच वाली उंगली के साथ साथ अगल बगल की उंगलिओ को भी बड़े चाव से चाट रहे थे ।

उंगलिओ को चाटने के बाद पूजा ने देखा की धर्मवीर बीच वाली उंगली को सूंघ भी रहे थे ।

फिर पूजा की चूत की तरफ देखे और उंगली चुदाई का रस और चूत के अंदर से निकला रज कुछ चूत के मुँह पर भी लगा था।

पूजा अपने दोनो मोटी मोटी साँवले रंग के जांघों को जो को फैली हुई थी , आपस मे सटना चाहती थी लेकिन धर्मवीर उसकी चूत को काफ़ी ध्यान से देख रहे थे और दोनो जांघों के बीच मे ही बैठे थे और इन दोनो बातों को सोच कर पूजा वैसे ही जांघे फैलाए ही लेटी रही।

पूजा अब धर्मवीर के चेहरे की ओर देख रही थी ।झड़ जाने के वजह से हाँफ रही थी । तभी उसकी नज़र उसकी जांघों के बीच मे बैठे धर्मवीर के लंड पर पड़ी जो अभी भी एक दम तनतनाया हुआ था और उसकी छेद मे से एक पानी का लार टपाक रही थी ।

अचानक धर्मवीर एक हाथ से पूजा की चूत के झांटों को जो बहुत ही घनी थी उसपर हाथ फिराया और चूत पर लटकी झांटें कुछ उपर की ओर हो गयीं और चूत का मुँह अब सॉफ दिखाई देने लगा। फिर भी चूत के काले होंठो के बाहरी हिस्से पर भी कुछ झांट के बॉल उगे थे जिसे धर्मवीर ने अपनी उंगलिओ से दोनो तरफ फैलाया और अब चूत के मुँह पर से झांटें लगभग हट गयीं थी।

धर्मवीर ऐसा करते हुए पूजा की काली काली चूत के दोनो होंठो को बहुत ध्यान से देख रहे थे और पुजा चटाई मे लेटी हुई धर्मवीर के मुँह को देख रही थी और सोच रही थी की धर्मवीर कितने ध्यान से उसकी चूत के हर हिस्से को देख रहे हैं और झांट के बालों को भी काफ़ी तरीके से इधर उधर कर रहे है।

धर्मवीर का काफ़ी ध्यान से चूत को देखना पूजा को यह महसूस करा रहा था की उसकी जांघों के बीच के चूत की कितनी कीमत है और धर्मवीर जैसे लोंगों के लिए कितना महत्व रखती है ।

यह सोच कर उसे बहुत खुशी और संतुष्टि हो रही थी।

पूजा को अपने शरीर के इस हिस्से यानी चूत की कीमत समझ आते ही मन आत्मविश्वास से भर उठा।

धर्मवीर अभी भी उसकी चूत को वैसे ही निहार रहे थे और अपने हाथ की उंगलिओ से उसकी चूत के दोनो फांकों को थोड़ा सा फैलाया और अंदर की गुलाबी हिस्से को देखने लगे।

पूजा भी धर्मवीर की लालची नज़रों को देख कर मन ही मन बहुत खुश हो रही थी की उसकी चूत की कीमत कितनी ज़्यादा है और धर्मवीर ऐसे देख रहे हैं मानो किसी भगवान का दर्शन कर रहे हों ।

तभी अचानक धर्मवीर को चूत के अंदर गुलाबी दीवारों के बीच सफेद पानी यानी रज दिखाई दे गया जो की पूजा के झड़ने के वजह से था।

धर्मवीर ने अब अगले कदम जो उठाया की पूजा को मानो कोई सपना दिख रहा हो ।

पूजा तो उछल सी गयी और उसे विश्वास ही नही हो रहा था। क्योंकि धर्मवीर अपने मुँह पूजा के चूत के पास लाए और नाक को चूत के ठीक बेचोबीच लगाकर तेज़ी से सांस अंदर की ओर खींचे और अपनी आँखे बंद कर के मस्त हो गये ।

चूत की गंध नाक मे घुसते ही धर्मवीर के शरीर मे एक नयी जवानी की जोश दौड़ गया।

फिर अगला कदम तो मानो पूजा के उपर बिजली ही गिरा दी।

धर्मवीर पूजा की चूत के मुँह को चूम लिए और पूजा फिर से उछल गयी।

पूजा को यकीन नही हो रहा था की धर्मवीर जैसे लोग जो की जात पात और उँछ नीच मे विश्वास रखते हों और उसकी पेशाब वाले रास्ते यानी चूतों को सूंघ और चूम सकते हैं ।

वह एक दम से आश्चर्या चकित हो गयी थी. उसे धर्मवीर की ऐसी हरकत पर विश्वास नही हो रहा था ।लेकिन यह सच्चाई थी।

पूजा अपने सहेलिओं से यह सुनी थी की आदमी लोग औरतों की चूत को चूमते और चाटते भी हैं लेकिन वह यह नही सोचती थी की धर्मवीर जैसे लोग भी उसकी चूत पर अपनी मुँह को लगा सकता हैं ।

पूजा चटाई पर लेटी हुई धर्मवीर के इस हरकत को देख रही थी और एकदम से सनसना उठी थी ।

उसके मन मे यही सब बाते गूँज ही रही थी कि धर्मवीर ने अगला काम शुरू कर ही दिया पूजा जो केवल धर्मवीर के सिर को की देख पा रही थी क्योंकि चटाई मे लेटे लेटे केवल सिर ही दिखाई पड़ रहा था ।

उसे महसूस हुआ की धर्मवीर क़ी जीभ अब चूत के फांकों पर फिर रही है और जीभ मे लगा थूक चूत की फांको पर भी लग रहा था ।

धर्मवीर के इस कदम ने पूजा को हिला कर रख दिया ।पूजा कभी सोची नही थी की धर्मवीर उसकी चूत को इतना इज़्ज़त देंगे ।

उसका मन बहुत खुश हो गया । उसे लगा की आज उसे जीवन का सबसे ज़्यादा सम्मान या इज़्ज़त मिल रहा है। वह आज अपने को काफ़ी उँचा महसूस करने लगी थी। उसके रोवे रोवे मे खुशी, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भरने लगा । उसने अपने साँवले और मोटे मोटे जांघों को और फैला दी जिससे उसके पावरोटी जैसी फूली हुई चूत के काले काले दोनो होंठ और खूल गये और पंडित जी का जीभ दोनो फांकों के साथ साथ चूत की छेद मे भी घुसने लगा।

पूजा जो थोड़ी देर पहले ही झड़ गयी थी फिर से गर्म होने लगी और उसे बहुत मज़ा आने लगा ।

चुत पर जीभ का फिरना तेज होने लगा तो पूजा की गर्मी भी बढ़ने लगी।





उसे जहाँ बहुत मज़ा आ रहा था वहीं उसे अपने चूत और शरीर की कीमत भी समझ मे आने लगी जिस वजह से आज उसे धर्मवीर इतने इज़्ज़त दे रहे थे ।

जब धर्मवीर चूत पर जीभ फेरते हुए सांस छोड़ते । तब सांस उनकी नाक से निकल कर सीधे झांट के बालों मे जा कर टकराती और जब सांस खींचते तब झांटों के साथ चूत की गंध भी नाक मे घूस जाती और धर्मवीर मस्त हो जाते ।

फिर धर्मवीर ने अपने दोनो हाथों से काली चूत के दोनो फांकों को फैला कर अपने जीभ को बुर छेद मे घुसाना शुरू किया तो पूजा का पूरा बदन झंझणा उठा । वह एक बार कहर उठी । उसे बहुत मज़ा मिल रहा था।

आख़िर धर्मवीर की जीभ चूत की सांकारी छेद मे घुसने की कोशिस करने लगी और चूत के फांकों के बीच के गुलाबी हिस्से मे जीभ घुसते ही पूजा की चूत एक नये लहर से सनसनाने लगी। और अब जीभ चूत के गुलाबी हिस्से मे घुसने के लिए जगह बनाने लगी ।

जीभ का अगला हिस्सा हो काफ़ी नुकीला जैसा था वह चूत के अंदर के गुलाबी भाग को अब फैलाने और भी अंदर घुसने लगा था ।यह पूजा को बहुत सॉफ महसूस हो रहा था की धर्मवीर की जीभ अब उसकी चूत मे घूस रही है ।

पूजा बहुत खुस हो रही थी ।उसने अपने चूत को कुछ और उचकाने के कोशिस ज्योन्हि की धर्मवीर ने काफ़ी ज़ोर लगाकर जीभ को बुर के बहुत अंदर घुसेड दिया जी की चूत की गुलाबी दीवारों के बीच दब सा गया था । लेकिन जब जीभ आगे पीछे करते तब पूजा एकदम से मस्त हो जाती थी।

पूजा की मस्ती इतना बढ़ने लगी की वह सिसकारने लगी और चूत को धर्मवीर के मुँह की ओर ठेलने लगी थी। मानो अब कोई लाज़ शर्म पूजा के अंदर नही रह गई थी।

धर्मवीर समझ रहे थे की पूजा को बहुत मज़ा आ रहा है चूत को चटवाने मे. फिर पंडित जी ने अपने दोनो होंठो से चूत के दोनो फांकों को बारी बारी से चूसने लगे तो पूजा को लगा की तुरंत झड़ जाएगी ।

फिर धर्मवीर चूत की दोनो फांको को खूब चूसा जिसमे कभी कभी अगल बगल की झांटें भी धर्मवीर के मुँह मे आ जाती थी ।

दोनो फांकों को खूब चूसने के बाद जब पूजा की चूत के दरार के उपरी भाग मे दाना जो की किसी छोटे मटर के दाने की तरह था , मुँह मे लेकर चूसे तो पूजा एकदम से उछल पड़ी और धर्मवीर के सर को पकड़ कर हटाने लगी।

उसके शरीर मे मानो बिजली दौड़ गयी । पर धर्मवीर ने उसके दाने को तो अपने दोनो होंठो के बीच ले कर चूसते हुए चूत की दरार मे फिर से बीच वाली उंगली पेल दी और पूजा चिहूंक सी गयी और उंगली को पेलना जारी रखा।

दाने की चुसाई और उंगली की पेलाई से पूजा फिर से ऐंठने लगी और यह काम धर्मवीर तेज़ी से करते जा रहे थे नतीजा की पूजा ऐसे हमले को बर्दाश्त ना कर सकी और एक काफ़ी गंदी चीख के साथ झड़ने लगी । और धर्मवीर जी ने तुरंत उंगली को निकाल कर जीभ को फिर से चूत के गहराई मे थेल दिए और दाने को अपने एक हाथ की चुटकी से मसल दिया.

चूत से पानी निकल कर पंडित जी के जीभ पर आ गया और काँपति हुई पूजा के काली चूत मे घूसी धर्मवीर की जीभ चूत से निकल रहे रज को चाटने लगे और एक लंबी सांस लेकर मस्त हो गये ।

पूजा झाड़ कर फिर से हाँफ रही थी। आँखे बंद हो चुकी थी। मन संतुष्ट हो चुका था।

धर्मवीर अपना मुँह चूत के पास से हटाया और एक बार फिर चूत को देखा। वह भी आज बहुत खुस थे क्योंकि जवान और इस उम्र की काली चूत चाटना और रज पीना बहुत ही भाग्य वाली बात थी ।

पूजा भले ही सांवली थी लेकिन चूत काफ़ी मांसल और फूली हुई थी और ऐसी बुर बहुत कम मिलती है चाटने के लिए। ऐसी लड़कियो की चूत चाटने से मर्द की यौन ताक़त काफ़ी बढ़ती है । यही सब सोच कर फिर से चूत के फूलाव और काली फांकों को देख रहे थे ।

पूजा दो बार झाड़ चुकी थी इस लिए अब कुछ ज़्यादे ही हाँफ रही थी। लेकिन धर्मवीर जानते थे की पूजा का भरा हुआ गदराया शरीर इतना जल्दी थकने वाला नही है और इस तरह की गदराई और तन्दरूश्त लड़कियाँ तो एक साथ कई मर्दों को समहाल सकती हैं। फिर पूजा की जांघों के बीचोबीच आ गये और अपने खड़े और तननाए लंड को चूत की मुँह पर रख दिए।

लंड के सुपाड़े की गर्मी पाते ही पूजा की आँखे खूल गयी और कुछ घबरा सी गयी और धर्मवीर की ओर देखने लगी ।

दो बार झड़ने के बाद ही तुरंत लंड को चूत के मुँह पर भिड़ाकर धर्मवीर ने पूजा के मन को टटोलते हुए पूछा - चुदने का मन है ..या रहने दें...बोलो ?

पूजा जो की काफ़ी हाँफ सी रही थी और दो बार झाड़ जाने के वजह से बहुत संतुष्ट से हो गयी थी फिर भी चूत के मुँह पर दहकता हुआ लंड का सुपाड़ा पा कर बहुत ही धर्म संकट मे पड़ गयी ।

इस खेल मे उसे इतना मज़ा आ रहा था की उसे नही करने की हिम्मत नही हो रही थी। लेकिन कुछ पल पहले ही झड़ जाने की वजह से उसे लंड की ज़रूरत तुरंत तो नही थी लेकिन चुदाई का मज़ा इतना ज़्यादे होने के वजह से उसने धर्मवीर को मना करना यानी लंड का स्वाद ना मिलने के बराबर ही था ।

इस कारण वह ना करने के बजाय हा कहना चाहती थी यानी चुदना चाहती थी । लेकिन कुच्छ पल पहले ही झड़ने की वजह से शरीर की गर्मी निकल गयी थी और उसे हाँ कहने मे लाज़ लग रही थी । और वह चुदना भी चाहती थी।

पूजा ने देखा की धर्मवीर उसी की ओर देख रहे थे शायद जबाव के इंतजार मे।

पूजा के आँखें ज्योन्हि धर्मवीर की आँखों से टकराई की वह लज़ा गयी और अपने दोनो हाथों से अपनी आँखें मूंद ली और सिर को एक तरफ करके हल्का सा कुछ रज़ामंदी मे मुस्कुरई ही थी की धर्मवीर ने अपने लंड को अपने पूरे शरीर के वजन के साथ उसकी काली और कुच्छ गीली चूत मे ठेला ही था की पूजा का मुँह खुला - आरे बाअप रे माईए । और अपने एक हाथ से धर्मवीर का लंड और दूसरी हाथ से उनका कमर पकड़ने के लिए झपटी लेकिन तब तक धर्मवीर के भारी शरीर का वजन जो की अपने गोरे मोटे लंड पर रख कर काली रंग की फूली हुई चूत में घुसेड़ चुके थे और नतीज़ा की भारी वजन के वजह से आधा लंड पूजा की काली चूत मे घूस चुका था।





अब पूजा के बस की बात नही थी की घूसे हुए लंड को निकाले या आगे घूसने से रोक सके । लेकिन पूजा का जो हाथ धर्मवीर के लंड को पकड़ने की कोशिस की वह उनका आधा ही लंड पकड़ सकी और पूजा को लगा मानो लंड नही बल्कि कोई गरम लोहे की छड़ हो।

अगले पल धर्मवीर अपने शरीर के वजन जो की अपने लंड के उपर ही रख सा दिया था , कुछ कम करते हुए लंड को थोड़ा सा बाहर खींचा तो चूत से जितना हिस्सा बाहर आया उसपर बुर का लिसलिसा पानी लगा था।

अगले पल अपने शरीर का वजन फिर से लंड पर डालते हुए हुमच दिए और इसबार लंड और गहराई तक घूस तो गया लेकिन पुजा चटाई मे दर्द के मारे ऐंठने लगी.

धर्मवीर ने देखा की अब उनका गोरा और मोटा लंड झांटो से भरी चूत मे काफ़ी अंदर तक घूस कर फँस गया है तब अपने दोनो हाथों को चटाई मे दर्द से ऐंठ रही पूजा की दोनो गोल गोल साँवले रंग की चुचिओ पर रख कर कस के पकड़ लिया और मीज़ना शुरू कर दिया।

पूजा अपनी चुचिओ पर धर्मवीर के हाथ का मीसाव पा कर मस्त होने लगी और उसकी चूत मे का दर्द कम होने लेगा।

पूजा को बहुत ही मज़ा मिलने लगा। वैसे उसकी मांसल और बड़ी बड़ी गोल गोल चुचियाँ किसी बड़े अमरूद से भी बड़ी थी और किसी तरह धर्मवीर के पूरे हाथ मे समा नही पा रही थी।

धर्मवीर ने चुचिओ को ऐसे मीज़ना शुरू कर दिया जैसे आटा गूथ रहे हों। चटाई मे लेटी पूजा ऐसी चुचि मिसाई से बहुत ही मस्त हो गयी और उसे बहुत अच्छा लगने लगा था ।

उसका मन अब चूत मे धन्से हुए मोटे लंड को और अंदर लेने का करने लगा। लेकिन चटाई मे लेटी हुई आँख बंद करके मज़ा ले रही थी। कुछ देर तक ऐसे ही चुचिओ के मीसावट से मस्त हुई पूजा का मन अब लंड और अंदर लेने का करने लगा लेकिन धर्मवीर केवल लंड को फँसाए हुए बस चुचिओ को ही मीज़ रहे थे। चुचिओ की काली घुंडिया एक दम खड़ी और चुचियाँ लाल हो गयी थी।

पूजा की साँसे अब तेज चल रही थी। सावित्री को अब बर्दाश्त नही हो पा रहा था और उसे लंड को और अंदर लेने की इच्छा काफ़ी तेज हो गयी। और धीरज टूटते ही धर्मवीर के नीचे दबी हुई पूजा ने नीचे से ही अपने चूतड़ को उचकाया ।

धर्मवीर इस हरकत को समझ गये और अगले पल पूजा के इस बेशर्मी का जबाव देने के लिए अपने शरीर की पूरी ताक़त इकठ्ठा करके अपने पूरे शरीर को थोड़ा सा उपर की ओर उठाया तो लंड आधा से अधिक बाहर आ गया। और चुचिओ को वैसे ही पकड़े हुए एक हुंकार मारते हुए अपने लंड को चूत मे काफ़ी ताक़त से घुसेड़ दिया और नतीज़ा हुआ कि चूत जो चुचिओ की मीसावट से काफ़ी गीली हो गयी थी, लंड के इस जबर्दाश्त दबाव को रोक नही पाई और धर्मवीर के कसरती बदन की ताक़त से चांपा गया लंड चूत मे जड़ तक धँस कर काली चूत मे गोरा लंड एकदम से कस गया ।

चूत मे लंड की इस जबर्दाश्त घूसाव से पूजा मस्ती मे उछल पड़ी और चीख सी पड़ी "सी रे ....माई ... बहुत मज़ाअ एयेए राहाआ हाइईइ आअहह..."





फिर धर्मवीर ने अपने लंड की ओर देखा तो पाया कि लंड का कोई आता पता नही था और पूरा का पूरा पूजा की काली और झांटों से भरी हुई चूत जो अब बहुत गीली हो चुकी थी, उसमे समा गया था।

धर्मवीर यह देख कर हंस पड़े और एक लंबी साँस छोड़ते हुए बोले - तू बड़ी ही गदराई हुई घोड़ी है । तेरी चूत अपनी बहन की तरह बड़ी ही रसीली और गरम है..तुझे चोद्कर तो मेरा मन यही सोच रहा कि तेरी बहन की गांड का भी स्वाद किसी दिन दोबारा पेल कर ले लू.....क्यों ....कुच्छ बोल ...।

पूजा जो चटाई मे लेटी थी और पूरे लंड के घूस जाने से बहुत ही मस्ती मे थी कुच्छ नही बोली क्योंकि धर्मवीर का मोटा लंड उसकी चूत के दीवारों के रेशे रेशे को खींच कर चौड़ा कर चुका था , और उसे दर्द के बजाय बहुत मज़ा मिल रहा था ।

धर्मवीर के मुँह से अपनी बहन उपासना के बारे मे ऐसी बात सुनकर उसे अच्च्छा नही लगा लेकिन मस्ती मे वह कुछ भी बोलना नही पसंद कर रही थी ।

बस उसका यही मन कर रहा था की धर्मवीर उस घूसे हुए मोटे लंड को आगे पीछे करें।

जब धर्मवीर ने देखा की पूजा ने कोई जबाव नही दिया तब फिर बोले - खूद तो चूत मे मोटा लौड़ा लील कर मस्त हो गयी है, और तेरी बहन के बारे मे कुछ बोला तो तेरे को बुरा लग रहा है साली हराम्जादि कहीं की । वो बेचारी विधवा का भी तो मन करता होगा कि किसी मर्द के साथ अपना मन शांत कर ले । लेकिन लोक लाज़ से और शरीफ है इसलिए बेचारी अपना जीवन घूट घूट कर जी रही है । क्यों ...बोलो सही कहा की नहीं ।

इतना कहते ही अगले पल धर्मवीर ने पूजा की दोनो चोचिओ को दोनो हाथों से थाम कर ताच.. ताच्छ... पेलना शुरू कर दिया।

धर्मवीर का गोरा और मोटा लंड जो चूत के लिसलिस्से पानी से अब पूरी तरीके से भीग चुका था, पूजा के झांटों से भरी काली चूत के मुँह मे किसी मोटे पिस्टन की तरह आगे पीछे होने लगा।

चूत का कसाव लंड पर इतना ज़्यादा था कि जब भी लंड को बाहर की ओर खींचते तब लंड की उपरी हिस्से के साथ साथ चूत की मांसपेशियाँ भी बाहर की ओर खींच कर आ जाती थी । और जब वापस लंड को चूत मे चाम्पते तब चूत के मुँह का बाहरी हिस्सा भी लंड के साथ साथ कुच्छ अंदर की ओर चला जाता था । लंड मोटा होने की वजह से चूत के मुँह को एकदम से चौड़ा कर के मानो लंड अपने पूरे मोटाई के आकार का बना लिया था ।

पूजा ने धर्मवीर के दूसरी बात को भी सुनी लेकिन कुछ भी नही बोली। वह अब केवल चुदना चाह रही थी । लेकिन धर्मवीर कुच्छ धक्के मारते हुए फिर बोल पड़े - मेरी बात तुम्हे ज़रूर खराब लगी होगी , क्योंकि मैने गंदे काम के लिए बोला । लेकिन तेरी दोनो जांघों को चौड़ा करके आज तेरी चूत चोद रहा हूँ । ये तुम्हें खराब नही लग रहा है....तुम्हे मज़ा मिल रहा है..शायद ये मज़ा तेरी बहन को भी मिले यह तुम्हे पसंद नही । दुनिया बहुत मतलबी है ।और तू भी तो इसी दुनिया की है ।

और इतना बोलते ही धर्मवीर हुमच हुमच कर चोदने लगे और पूजा ने उनकी ये बात सुनी लेकिन उसे अपने चूत को चुदवाना बहुत ज़रूरी था इसलिए बहन के बारे मे धर्मवीर के कहे बात पर ध्यान नही देना ही सही समझी ।

और अगले पल चूत मे लगी आग को बुझाने के लिए हर धक्के पर अपने चौड़े और सांवले रंग के दोनो चूतड़ों को चटाई से उपर उठा देती थी क्योंकि धर्मवीर के मोटे लंड को पूरी गहराई मे घूस्वा कर चुदवाना चाह रही थी पूजा।





धर्मवीर के हर धक्के के साथ पूजा की चूत पूरी गहराई तक चुद रही थी । धर्मवीर का सुपाड़ा पूजा की चूत की दीवार को रगड़ रगड़ कर चोद रहा था।

पूजा जैसे सातवें आसमान पर उड़ रही हो ।धर्मवीर हर धाक्के को अब तेज करते जा रहे थे। लंड जब चूत मे पूरी तरह से अंदर धँस जाता तब धर्मवीर के दोनो टट्टे पूजा की गांड पर टकरा जाते थे ।

कुछ देर तक धर्मवीर पूजा को चटाई मे कस कस कर चोद्ते रहे । उनका लंड पूजा की कसी बुर मे काफ़ी रगड़ के साथ घूस्ता और निकलता था ।

मानो उस कसी हुई चूत को ढीला करने की कसम खायी हुई थी धर्मवीर ने ।

धर्मवीर को भी कसी हुई चूत का पूरा मज़ा मिल रहा था तो वहीं पूजा को भी धर्मवीर के कसरती शरीर और मोटे लंबे और तगड़े लंड का मज़ा खूब मिल रहा था। कमरे मे फच्च फच्च की आवाज़ भरने लगी।

पूजा के चूतड़ अब उपर की ओर उठने लगे और हर धक्के के साथ चटाई मे दब जाते थे । चूत से पानी भी निकलना काफ़ी तेज हो गया था इस वजह से चूत का निकला हुआ पानी पूजा की गांड की दरार से होता हुआ चटाई पर एक एक बूँद चूना शुरू हो गया ।

पूजा अब सिसकारने लगी थी ।

अचानक पूजा के शरीर मे एक ऐंठन शुरू होने लगी ही थी की धर्मवीर ने पूजा को कस कर जाकड़ लिया और उसकी गीली और चू रही काली चूत को काफ़ी तेज़ी से चोदने लगे । चुदाइ इतनी तेज होने लगी कि चूत से निकलने वाला पानी अब चूत के मुँह और लंड पर साबुन की तरह फैलने लगा।

जब लंड बाहर आता तब उसपर सफेद रंग के लिसलिसा पानी अब साबुन की झाग की तरह फैल जाता था ।

धर्मवीर पूजा को काफ़ी तेज़ी से चोद रहे थे लेकिन फिर पूजा गिड़गिडाना शुरू कर दी "...सीई....और....तेज...जी धर्मवीर जी ....जल्दी ...जल्दी........आह ।

धर्मवीर के कान मे ये शब्द पड़ते ही उनके शरीर मे झटके दार ऐंठन उठने लगी उनका कमर का हिस्सा अब झटका लेना शुरू कर दिया क्योंकि धर्मवीर जी के दोनो आंडों से वीर्य की एक तेज धारा चल पड़ी और धर्मवीर ने अपने पूरे शरीर की ताक़त लगाकर धक्के मारना शुरू कर दिया ।

अगले पल धर्मवीर पूजा के कमर को कस लिए और अपने लंड को चूत के एकदम गहराई मे चाँप कर लंड का अगला हिस्सा चूत की तलहटी मे पहुँचा दिया और लंड के छेद से एक गर्म वीर्य के धार तेज़ी से निकल कर ज्योन्हि चूत के गहराई मे गिरा कि पूजा वीर्य की गर्मी पाते ही चीख सी पड़ी " एयेए ही रे माइ रे बाप ...रे...बाप...आरी धर्मवीर बहुत मज़ा ....आ रा..हा ही रे मैया..." और पूजा की चूत से वीर्य निकल कर लंड पर पड़ने लगा ।

धर्मवीर का लंड काफ़ी देर तक झटके ले ले कर वीर्य को चूत मे उडेल रहा था । लगभग पूरी तरीके से झड़ जाने के बाद धर्मवीर ने लंड को थोड़ा सा बाहर खींचा और अगले पल वापस चूत मे घुसेड़कर वीर्य की आख़िरी बूँद भी उडेल दी ।

अब दोनो हाँफ रहे थे और धर्मवीर ने पूजा के उपर से हट कर लंड को चूत से बाहर खींचा और चुदाइ के रस से भीग कर सना हुए लंड के बाहर आते ही चूत की दोनो काली फाँकें फिर से सटने की कोशिस करने लगी लेकिन अब चूत का मुँह पहले से कहीं और खूल कर फैल सा गया था ।





चूत की सूरत पूरी बदल चुकी थी ।धर्मवीर चूत पर एक नज़र डाले और अगले पल पूजा की दोनो जांघों के बीच से हट कर खड़े हो गये ।

पूजा अपनी दोनो जांघों को आपस मे सटाते हुए अपनी नज़र धर्मवीर के अभी भी कुछ खड़े लंड पर डाली जो की चुदाई रस से पूरी तरह से सना था। धर्मवीर ने अगले पल पूजा की पैंटी को उठाया और अपने लंड के उपर लगे चुदाई रस को पोच्छने लगे ।

पूजा ऐसा देख कर एक दम से घबरा सी गयी । लंड पर काफ़ी ज़्यादे मात्रा मे चुदाई रस लगे होने से पैंटी लगभग भीग सी गयी ।

धर्मवीर लंड पोच्छने के बाद पूजा की ओर पैंटी फेंकते हुए बोला - ले अपनी चूत को पोंच्छ कर इसे पहन लेना और कल सुबह नहाते समय ही इसे धोना...समझी ।

पैंटी पर पूजा का हाथ पड़ते ही उसकी उंगलियाँ गीले पैंटी से भीग सी गयी । लेकिन धर्मवीर अब चटाई पर बैठ कर पूजा की ओर देख रहे थे और पूजा कई बार झाड़ जाने के वजह से इतनी थक गयी थी चटाई पर से उठने की हिम्मत नही हो रही थी ।

धर्मवीर के कहने के अनुसार पूजा ने पैंटी को हाथ मे लेकर चटाई मे उठ कर बैठ गयी और अपनी चूत और झांटों मे लगे चुदाई रस को पोछने लगी । लेकिन पैंटी मे धर्मवीर के लंड पर का लगा चुदाई रस पूजा के पोंछने के जगह पर लगने लगा ।

फिर पूजा उठी और चूत को धोने और मूतने के लिए जैसे ही बाथरूम तरफ बढ़ी की धर्मवीर ने चटाई पर लेटते हुए कहा - चूत को आज मत धोना और इस पैंटी को पहन ले ऐसे ही और कल ही इसे भी धोना । इसकी गंध का भी तो मज़ा लेले घोड़ी ।

पूजा के कान मे ऐसी अजीब सी बात पड़ते ही सन्न रह गयी लेकिन उसे पेशाब तो करना ही था इस वजह से वह बाथरूम के तरफ एकदम नंगी ही बढ़ी तो धर्मवीर की नज़र उसके चौड़े चौड़े दोनो चूतड़ों पर पड़ी और वे भी एकदम से नंगे चटाई पर लेटे हुए अपनी आँख से मज़ा लूट रहे थे।

पूजा जब एक एक कदम बढ़ाते हुए बाथरूम के ओर जा रही थी तब उसे महसूस हुआ की उसकी चूत मे हल्का मीठा मीठा दर्द हो रहा था ।

बाथरूम के अंदर जा कर जैसे ही पेशाब करने बैठी तभी उसकी दोनो जांघों और घुटनों मे भी दर्द महसूस हुआ। उसने सोचा कि शायद काफ़ी देर तब धर्मवीर ने चटाई मे चुदाई किया है इसी वजह से दर्द हो रहा है।

लेकिन अगले पल ज्योन्हि वीर्य की बात मन मे आई वह फिर घबरा गयी और पेशाब करने के लिए ज़ोर लगाई । पूजा ने देखा की वीर्य की हल्की सी लार चूत के छेद से चू कर रह गयी और अगले पल पेशाब की धार निकलने लगी ।

पेशाब करने के बाद पूजा ज़ोर लगाना बेकार समझी क्योंकि चूत से वीर्य बाहर नही आ पा रहा था। उसके मन मे धर्मवीर के वीर्य से गर्भ ठहरने की बात उठते ही फिर से डर गयी और पेशाब कर के उठी और ज्योन्हि बाहर आई तो उसकी नज़र धर्मवीर पर पड़ी जो की कमरे मे नंगे खड़े थे और पूजा के बाहर आते ही वो भी बाथरूम मे घूस गये और हल्की पेशाब करने के बाद अपने लंड को धो कर बाहर आए ।

तबतक पूजा अपनी गीली पैंटी को पहन ली जो की उसे ठंढी और धर्मवीर के वीर्य और चूत के रस की गंध से भरी हुई थी।

धर्मवीर ने एक टैबलेट के पत्ते को निकाला और अपनी सलवार को पहन रही पूजा से बोला - कपड़े पहन कर इस दवा के बारे मे जान लो ।

पूजा की नज़र उस दवा के पत्ते पर पड़ते ही उसकी सारी चिंता ख़त्म हो गयी थी ।उसने अपने ब्रा और समीज़ जो जल्दी से पहन कर दुपट्टे से अपनी दोनो हल्की हल्की दुख रही चुचिओ को ढक कर धर्मवीर के पास आ कर खड़ी हो गयी ।

धर्मवीर ने दवा को अपने हाथ मे लेकर पूजा को बताया - तुम्हारी उम्र अब मर्द से मज़ा लेने की हो गयी है इस लिए इन दवा और कुछ बातों को भी जानना ज़रूरी है....यदि इन बातों पर ध्यान नही दोगि तो लेने के देने पड़ जाएँगे । सबसे बहले इन गर्भ निरोधक गोलिओं के बारे मे जान लो....इसे क्यूँ खाना है और कैसें खाना है।

धर्मवीर - वैसे तुम्हारी जैसी लड़कियाँ बहुत दीनो तक मर्दों से बच नही पाती हैं और शादी से पहले ही कोई ना कोई पटक कर चोद ही देता है । और मैंने भी आख़िर तुमको मैने तो चोद ही दिया ।

फिर धर्मवीर दवा के पत्ते की ओर इशारा करते हुए पूजा को दवा कैसे कैसे खाना है बताने लगे और पूजा धर्मवीर की हर बात को ध्यान से सुन कर समझने लगी ।

बात खत्म करते हुए हुए धर्मवीर ने बगल मे खड़ी पूजा के चूतड़ पर एक चाटा मारा और एक चूतड़ को हाथ मे लेकर कस के मसल दिया।

पूजा पूरी तरीके से झनझणा और लज़ा सी गयी।

धर्मवीर - कुतिया सुबह के 4:00 बज गए हैं एक-दो घंटे सो ले अगर सोना है तो । बहन की लोहड़ी अभी भी शर्म आ रही है अभी लोड़े के नीचे गनगना कर चोदी है ।

पूजा ने धर्मवीर की हल्का सा मुक्का मारा और बोली बेशर्म ।

धर्मवीर को इतना बर्दाश्त कहां होना था । धर्मवीर का तो दोस्तों स्वैग ही अलग होता है । धर्मवीर की छाती में जैसे ही हल्का सा मुक्का मारा धर्मवीर ने एक जोरदार थप्पड़ पूजा के गाल पर मारा ।

धर्मवीर- मुझे बेशर्म बोलती है अपनी औकात भूल गई अभी मेरे लोड़े के नीचे रही है तू । तेरे ऊपर चढ़ा हूं मैं और तुम मुझे बेशर्म बोलती है ।

चल बहन की लोड़ी जा कर सो जा ।

ऐसा कहते हुए धर्मवीर ने पूजा की गांड पर लात मारी और पूजा सीधा बेडरूम में पहुंच गई ।

पूजा अभी भी सोच में गुम थी कि आखिर धर्मवीर किस तरह का आदमी है।

धर्मवीर को समझना मुश्किल है। चोदता है तो हड्डियों तक तोड़ देता है ।

किसी पागल सांड की तरह चढ़ता है ।

अब इतने नखरे तो धर्मवीर के झेलने ही पड़ेंगे। गांड पर लात भी खानी पड़ेगी और चूत में लौड़ा भी लेना पड़ेगा ।

इन्हीं ख्यालों में गुम उपासना बेड पर गिर पड़ी। उसकी चाल में अजीब टेढ़ापन था। बड़ी मुश्किल से एक एक कदम आगे बढ़ा पा रही थी।

पूजा लेटे-लेटे सोचने लगी कि क्या हो रहा होगा दीदी के साथ ।

क्या उपासना दीदी और पापा सो गए होंगे या अभी दीदी की चूत पर लौड़ा बज रहा होगा। आखिर दीदी भी पूरी चुदक्कड़ है।

एक साथ पूजा के दिल से आवाज आई तू कौन सा कम चुदक्कड़ है । पूरी सुहागरात मनाई है कुतिया तूने भी ।

यह विचार आते ही पूजा धीरे से अपने आपसे बोली हां हम दोनों बहन चुदक्कड़ हैं । क्या करें जब चूत पर कोई लंड रखता है तो हमारी चूत खा जाती है वो लोड़ा। तगड़ा से तगड़ा लंड हम दोनों बहने आराम से लील जाती है और इन्हीं ख्यालों में सो गई पूजा।





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दोस्तों आपका सुझाव जरूर दीजिएगा ।

आपके प्यार का प्यासा - रचित ।


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Update 27.

दोस्तों आज बड़े ही रोमांटिक मूड में लिखना शुरु कर रहा हूं ।

आशा करता हूं आप सब लोग भी खुश होंगे और इंतजार कर रहे होंगे मेरी अपडेट का तो चलिए शुरू करते हैं आगे की कहानी लेकिन इस romantic मूड में मेरी एक शायरी तो बनती है। तो चलिए इस शायरी के साथ शुरू करते हैं अपनी आगे की कहानी।





यह कहानी है मेरी चुदाई की भाषा ,


यह कहानी है मेरी चुदाई की भाषा,

लिखता हूँ मैं इसको रोज जरा सा।

XFORUM के इन कोरे कागजों पर,

लिखता हूँ मैं बेहिचक ये खुलासा ।।


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दोस्तों पूरी रात चुदकर पूजा सो गई ।

अब चलते हैं सोमनाथ और उपासना की तरफ तरफ

आपने पीछे पढ़ा - उस लज्जत भरी चीख के बाद उपासना ने दर्द को सहन करते हुए कहा - अपनी बेटी की चूत फाड़ कर रखने की कसम खाकर आए हो क्या पापा ।

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अब आगे ---

अब सोमनाथ और उपासना की आंखों का कनेक्शन भी टूट चुका था ।

जैसे ही उपासना के मुंह से चीख निकली सोमनाथ एक कुटिल मुस्कान के साथ मुस्कुराता हुआ उसकी आंखों में देख कर बोला ।

सोमनाथ - अभी तो तुमने मुंह खोला है इतनी देर से तुम्हारे इशारे की प्रतीक्षा कर रहा था । लेकिन तुमने कुछ बोला ही नहीं इसलिए मुझे डालना पड़ा ।

उपासना ने अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया और सारा दर्द भूल कर एक बहुत ही प्यारी मुस्कान के साथ बहुत धीरे से बोली।

उपासना- मैं तो देख रही थी कि अपनी बेटी की चूत के लिए कितने उतावले हो रहे हैं आप।

सोमनाथ - अगर दुनिया में हर किसी की बेटी की चूत तेरे जैसी होगी तो उतावला तो होगा ही । देख ले आधा लंड ही गया है तेरी चूत में अभी ।

उपासना ने अभी तक चेहरा सोमनाथ की तरफ नहीं किया था।

अपने चेहरे को दूसरी तरफ ऐसे ही मोड़े हुए हुए बोली ।

उपासना - मुझे नहीं देखना।

सोमनाथ - अगर नहीं देखोगी तो मैं आगे नहीं बढूंगा ऐसे ही रुका रहूंगा।

उपासना अभी भी कुछ नहीं बोली बस धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी ।

जब उपासना की तरफ से कोई आवाज नहीं आई तो सोमनाथ ने उसके ऊपर झुके हुए ही आधा लंड उसकी चूत में फंसाए रखा और अपना हाथ उसके कूल्हों पर ले जाकर उसकी गांड के छेद को कुरेदने लगा ।

अपनी गांड के छेद पर अपने बाप की उंगली महसूस करके गनगना उठी उपासना।

उसने एक साथ सोमनाथ की नजरों में देखा (बड़ी ही सवालिया दृष्टि से)।

उपासना के चेहरे पर हैरानी के भाव से देखकर अब सोमनाथ ने उसकी आंखों में देखते हुए अपना लोड़ा सुपाड़े तक बाहर खींचा और फिर धीरे से मुस्कुरा कर बोला- तैयार है क्या मेरी बेटी ।

उपासना उसकी आंखों में सवालिया नजरों से देखते हुए बोली- किसके लिए तैयार होना पड़ेगा मुझे ।

सोमनाथ- दूसरे झटके के लिए ।

उपासना - तैयार तो मैं पहले झटके के लिए भी नहीं थी लेकिन आपने वह भी लगाया ना, तो दूसरे के लिए क्यों पूछ रहे हैं ।

सोमनाथ- इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि पहले झटके में ही तुम कुत्तिया की तरह गला फाड़कर चिल्लाई हो ।

यह सुनकर उपासना बुरी तरह से शर्मा गई और अपना चेहरा सोमनाथ के चेहरे की तरफ से मोड़ लिया और शर्माते और मुस्कुराते हुए बोली- आप मेरी चिंता ना कीजिए, मैं कितनी भी चीखू या चिल्लाऊं लेकिन अब आप अपनी पूरी ताकत लगा दीजिए अपनी बेटी को चोदने में ।

यह कहकर शर्माती हुई उपासना ने अपनी आंखें बंद कर लीं ।

सोमनाथ ने उपासना से कहां अपना चेहरा मेरी तरफ करो।

उपासना फिर सवालिया नजरों से सोमनाथ को देखने लगी और अपना चेहरा सोमनाथ की तरफ कर दिया।





सोमनाथ - अब अपना मुंह खोलो ।

उपासना को कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि लंड का सुपाड़ा तो उसकी चूत में था फिर अब सोमनाथ मुंह क्यों खुलवा रहा है, लेकिन उसने सोचते हुए मुंह खोल दिया ।

सोमनाथ ने उपासना के खुले हुए होठों को अपने मुंह में भर लिया और सोमनाथ ने अपने चूतड़ों में अपनी जान इकट्ठी करके पूरी ताकत से एक जोरदार झटका मारा। झटका इतना तगड़ा था कि सोमनाथ की जांघें उपासना की जांघो से मिल गई ।सोमनाथ के लटके हुए टट्टे उपासना की गांड की लकीर से मिल गए ।

कहने का मतलब है दोस्तों सोमनाथ ने अपनी बेटी की चूत में अपना लंबा लौड़ा जड़ तक ठोक दिया था और जैसे ही यह झटका लगा उपासना का मुह जो अभी सोमनाथ के मुंह में था। उपासना के मुंह से इतनी तेज चीख निकली लेकिन उपासना के होंठ सोमनाथ के मुंह में होने की वजह से चीख सोमनाथ के मुंह में ही घुट कर रह गई ।

सोमनाथ को महसूस हो रहा था की उपासना कितनी जोर जोर से हांफ रही है और उसकी मुंह से निकलती हुई उसकी सांसें सोमनाथ के मुंह में भर रही हैं ।

ऐसे ही जड़ तक चूत में लंड को ठोके हुए सोमनाथ ने उपासना की आंखों में

झांका तो पाया की उपासना की आंखों से आंसू निकल रहे हैं .।

सोमनाथ ने अब देर करना उचित नहीं समझा और उपासना के मुंह को अपने मुंह में भरे हुए दो तीन झटके उपासना की चूत में चेंप दिए ।

अब दर्द तो उपासना को असहनीय हो रहा था लेकिन कर भी क्या सकती थी उपासना का मुंह तो सोमनाथ के मुंह में था चूत लोड़े के नीचे थी और उपासना को जकड़ा हुआ था सोमनाथ ने। ऐसे ही दबी दबी अपने हालातों से समझौता करने लगी उपासना।

उपासना के साथ कुछ ऐसा सीन हो गया था कि उसकी चौड़ी गांड बेड के गद्दे में धस गई थी और उसका बाप सोमनाथ उसके ऊपर चढ़ा हुआ था।

सोमनाथ का लंड उपासना की चूत में गहराई तक बैठा हुआ था और उपासना का मुंह सोमनाथ के मुंह में अगर आवाज आ रही थी तो गों गों गों और दोनों को एकदूसरे की सांसो की आवाज आ रही थी।





अब सोमनाथ ने अपने एक हाथ से उपासना की आंखों से बहते आंसुओं को पूछा और अपने मुंह से उपासना के होंठो को छोड़ते हुए अपना चेहरा अलग कर लिया ।

जब सोमनाथ ने अपने मुंह से उपासना का मुंह दूर किया तो उपासना और सोमनाथ के मुंह के बीच में दोनों के थूक की लार खिंचने लगी ।

सोमनाथ ने अपना मुंह बिना साफ किए ही अपने थूक लगे होठों से मुस्कुरा कर कहा - मेरी बेटी का मुंह तो बड़ा मीठा है ।

दूसरी तरफ उपासना ने भी अपने मुंह को साफ करने की कोई पहल नहीं की।

उपासना ने तो बस सोमनाथ के थूक में सने हुए मुंह को एक तरफ किया और बड़ी ही मादक आवाज में धीरे से मुस्कुरा कर बोली - चूत मीठी नहीं लगी क्या अपनी बेटी की ।

उपासना के इस अंदाज से भनभना गया सोमनाथ का लोड़ा और चुदास का पागलपन सोमनाथ के चेहरे पर ऐसा छाया कि उसने अपनी पूरी ताकत से 10 12 धक्के उपासना की चूत में पेल दिए ।

धक्के इतनी ताकत और स्पीड से मारे गए थे की उपासना इन धक्कों की वजह से सांस नहीं ले पाई उसका मुंह बस पूरा खुला हुआ था और अपने बाप के लंबे लोड़े के तगड़े तगड़े झटके अपना मुंह खोलो हुए ही अपनी चूत में लील गई ।

ऐसा नहीं है कि उपासना को दर्द नहीं हुआ था, दर्द तो उपासना को हुआ था लेकिन सोमनाथ की लौड़ा बजाने की स्पीड ने उपासना को दहाड़ने या गला फाड़ने का मौका का ही नहीं दिया । बस उसकी तो चूत में लंड सुपाड़े तक आता और जड़ तक बैठ जाता ।

धक्के लगाने के बाद सोमनाथ ने फिर अपना लौड़ा जड़ तक उपासना की चूत में बिठाकर रुक गया और फिर मुस्कुरा पड़ा उपासना के चेहरे को देखकर ।

अब उपासना ने अपना खुला हुआ मुंह बंद किया और उस लज्जत के एहसास से अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ा और मुस्कुरा कर धीरे से बोली- आज मौका है अपनी बेटी को इस बिस्तर में रगड़ लीजिए जितना मन करे। मैं पीछे नहीं हटूंगी।

फिर अपने होठों से मुस्कुरा पड़ी उपासना और फिर मुस्कुराते हुए बोली- काश मुझे पहले पता होता मेरा बाप इस तरह रौंदता है किसी को बिस्तर में , इस तरह की गांड से गांड मिला देता है झटके मारते हुए तो मैं तो पता नहीं अब तक कितनी बार अपने बाप के नीचे लेट जाती ।

सोमनाथ गर्म होने लगा था उपासना की इन बातों से क्योंकि वो बेहद ही गरम बातें उपासना कर रही थी और ऊपर से ऐसे शर्मा भी रही थी जैसे किसी को बहकाकर चोदा जा रहा हो जबकि उपासना चुद अपनी मर्जी से ही रही थी।

अपने चेहरे पर शर्मो हया और लज्जा का मुखौटा पहने हुए किसी सस्ती रांड से भी ज्यादा गरम बातें उपासना कर रही थी मुस्कुराते मुस्कुराते।

उपासना के इसी अंदाज पर तो मर मिटा था सोमनाथ ।

लोड़ा अपनी बेटी की चूत में उतारने का एहसास करके और लंबा होता जा रहा था । सोमनाथ का दिल अपनी गदरायी हुई बेटी के ऊपर चढ़कर स्वर्ग में महसूस कर रहा था मानो जैसे वही दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान है।

अब सोमनाथ ने उपासना की टांगों को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और झुक गया। फिर उपासना के चेहरे की तरफ देखने लगा ।

जब सोमनाथ अपने कंधे पर उपासना की टांगे रखकर उसके चेहरे पर झुका उसके चेहरे पर झुका तो उपासना की टांगे भी उसके चेहरे की तरफ मिलने लगी और नीचे से उपासना की गांड ऐसे खुल गई जैसे उसके कोई चूतड़ नहीं बल्कि तबले हो । मोटी और भारी भारी गांड बिल्कुल उभर कर आ गई थी लेकिन दबी हुई थी सोमनाथ के तगड़े तंदुरुस्त शरीर के नीचे और उपासना की चूत में भरा हुआ था सोमनाथ का लंबा सा लोड़ा ।

इस पोजीशन में करके जब सोमनाथ ने उपासना को जकड़ कर एक तगड़ा झटका मारा तो इस बार तो कुछ अनोखा हुआ।

हां दोस्तों अनोखा यह हुआ क्योंकि उपासना की गांड उठकर फैल गई थी जिस वजह से जैसे ही सोमनाथ ने झटका मारा तो एक फट्ट की आवाज बहुत तेज हुई। सोमनाथ को मजा आया उसने दो तीन झटके लगातार मारे आवाज तो बहुत तेज होती पट पट पट लेकिन अब उस आवाज में उपासना की लज्जत भरी चीखें थी ।

आज अपनी बेटी का मर्दन कर रहा था एक बाप उसकी जवानी के ऊपर चढ़कर । उसकी गांड से अपनी झांटों को मिलाकर ,जड़ तक उसकी चूत में लंड को चेंप रहा था ।

अब सोमनाथ ने तीन चार झटके लगाए तो उपासना की चूत ने चिकने चिकने पानी से सोमनाथ के लंड को नहलाना शुरू कर दिया । लोड़ा चमकने लगा उपासना की चूत के पानी से ।

बाहर आता तो चमकने लगता फच्च की आवाज से वापस चूत की गहराई में चला जाता और इस फच्च की आवाज के साथ साथ एक और आवाज होती जो सोमनाथ और उपासना की जांघों के मिलने से फट की आवाज होती थी ।

अपने बाप के नीचे आधे घंटे तक ऐसे ही चुदने के बाद जब उपासना दो बार झड़ गई पर अब भी उपासना अपनी गर्मी निकलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी । अभी कोई ऐसा भाव उसके चेहरे पर नहीं था जिससे पता लगे की उपासना अपने बाप को अपने ऊपर से हटाना चाहती है ।

उपासना के चुदाई भरे चेहरे को देखकर यही कहा जा सकता था कि ऐसी घोड़ी पर तो चढ़े रहो इतनी आसानी से ठंडी नहीं होती यह घोड़ी ।





इसी अंदाज में आधे घंटे तक चोदने के बाद अब सोमनाथ ने उपासना की चूत से अपना लौड़ा बाहर किया तो उपासना को अपनी चूत बिल्कुल खाली खाली लगने लगी । चूत का छेद अब पहले की तरह बंद नहीं हो रहा था खुला हुआ छेद अंदर तक दिख रहा था जिसमें ध्यान से देखने पर अंदर सिर्फ अंधेरा ही देख रहा था ।

अपनी चूत पर इस तरह बेरहमी से लंड बजवा कर भी उपासना अभी ठंडी नहीं हुई थी अब सोमनाथ बेड पर सीधा लेट गया उपासना शर्माते और मुस्कुराते हुए बराबर में बैठी हुई थी ।

उपासना को सोमनाथ ने इशारा किया कि आकर मेरे लंड पर बैठ।

सोमनाथ की तरफ से यह इशारा देखकर उपासना शर्मा दी और मुस्कुराती हुई बोली - अब मैं अपने बाप के ऊपर चढूं क्या ?

सोमनाथ - जब बाप बेटी के ऊपर चढ़ा हुआ था तब तो तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं थी । तो तुम क्यों नहीं चढ़ सकती।

इसका कोई जवाब उपासना के पास नहीं था लेकिन फिर भी बोली- वह तो आप चढ़े हुए थे मेरे ऊपर , मैं कैसे मना करती।

सोमनाथ- ऐसे ही तुम चढ़ जाओ, मैं भी अपनी बेटी को चढ़ने के लिए मना नहीं करूंगा ।

उपासना ने एक बार लंड पर नजर डाली उसके बाप का लंड खड़ा हुआ था।

उपासना को सबर नहीं हुआ और आव देखा न ताव सोमनाथ के ऊपर लेट गई और अपने होठों से सोमनाथ की गर्दन पर चूम लिया है।

लेकिन लोड़ा तो चूत में घुसा ही नहीं था जब सोमनाथ ने देखा उसकी बेटी उसके ऊपर चढ़ गई है लेकिन लंड चूत में अभी तक नहीं उतरा तो उसकी पानी छोड़ती हुई चूत पर लंड को ऐसे ही रगड़ा और अपने हाथ से अपने लंड को उपासना की खुली हुई चूत का रास्ता दिखा दिया।

आधा लंड तो बिना किसी मेहनत के आराम से उतर गया उपासना की चूत में।

अब सोमनाथ ने चौड़े चौड़े नितंबों पर अपना हाथ रखा और नीचे से अपनी गांड उठा दी । इस तरह से गांड उठी तो उपासना की चूत में लौड़ा पूरा सरक गया । एक दबी हुई सिसकारी उपासना के मुंह से निकली लेकिन शर्मा कर सिसकारी दबा ली उपासना ने ।

सोमनाथ कहां कम था बेशर्मी से बोला- ले गई पूरा लौड़ा अपनी चूत में।

उपासना- जब बेटी को अपने ऊपर चढ़ा कर उसकी चूत में लंड डाला जाएगा या बेटी के ऊपर चढ़कर उसकी चूत को अपने लंड से भरा जाएगा तो लंड चूत की जगह कहीं और तो जाएगा नहीं पापा । चूत में ही जाएगा ना।

सोमनाथ- समझदार हो गई है तो मेरी बेटी अब।

उपासना - समझदार नहीं, लंडो की दीवानी हो गई है , लंडो से ठंडी होना सीख लिया है आपकी बेटी ने ।

सोमनाथ- तो अब मैं आगे का क्या समझूं , ऐसे ही ठंडी करता रहूंगा क्या मैं अपनी बेटी को, क्या मेरी बेटी मुझसे ठंडी होना चाहेगी ।

उपासना - आपको पूरा हक है पापा । मैं आपकी ही तो बेटी हूं । जब भी आप देखो कि आपकी बेटी ज्यादा ठुमक ठुमक कर चूतड़ों को हिला हिला कर चल रही है तो पूछना मत पटक कर अपना लौड़ा उसकी चूत में पेल देना और उसकी चूत को ऐसे रगड़ना , ऐसे रगड़ना कि ठंडी हो जाए आपकी बेटी। और मटक कर चलने की जगह लंगड़ा कर चलने लगे आपकी बेटी ।

सोमनाथ - लगता है मेरी बेटी के अंदर लोड़े की भूख कुछ ज्यादा ही जग गई है ।

उपासना- आपने मेरी मां को चोद कर ऐसी बेटी पैदा की है कि जिसकी आग ठंडी करने के लिए रात भर दौड़ा-दौड़ा कर चोदा जाए तब कहीं जाकर ठंडी होती है आपकी बेटी ।

सोमनाथ- तो अब क्या कमी है । अब तो ससुर और बाप दोनों ही हैं अपनी प्यारी सी उपासना बेटी के लिए । हमारी बेटी जब चाहे चढ़ा सकती है अपने ऊपर ।

उपासना - इसमे चाहने वाली क्या बात है पापा आपकी बेटी तो चाहती है आप उसे नंगी करके लंड पर नचाते रहो और मैं नाचती रहूं । अपनी गांड को घुमा घुमा कर अपनी चूत को भींच भींचकर कर अपने होठों को चुसवा चुसवा कर ।

सोमनाथ को उपासना की बातों से इतनी इतनी गर्मी चढ़ी कि नीचे से लौड़ा चार पांच बार उसकी चूत में कसकर पेला।

अब उपासना को बेड पर एक साइड में धकेल दिया फिर उपासना को उसने कुतिया बनाया और खुद उसके पीछे खड़ा होकर अपने लंड को उसकी चूत से रगड़ने लगा ।

उपासना भी इतनी गरम हो चुकी थी कि मूतने को तैयार थी कुतिया बनकर, अपनी गांड को हिलाने लगी थी मस्ती से उपासना।





सोमनाथ ने उपासना की जांघों पर हाथ फेरते हुए उसकी चूत पर अपना पूरा हाथ रख दिया । उपासना की गीली चूत पर हाथ रखते ही सोमनाथ का हाथ भीग गया। दूसरी तरफ उपासना भी मद भरी सिसकारियां भरने लगी। सोमनाथ ने दो तीन बार उसकी चूत पर हाथ फेरा और फिर अपने लंड को उसकी चूत पर रखकर उपासना की कमर को पकड़ा और फिर क्या था---- मिला दी सोमनाथ ने अपनी जांघे अपनी बेटी की जांघों से और बिठा दिया पूरा लौड़ा उसकी चूत में ।

उपासना आगे को गिरने को हुई लेकिन सोमनाथ ने उसकी कमर पकड़ी हुई थी । इस पोजीसन में गचागच लंड अंदर बाहर करते हुए बोला।

सोमनाथ- बेटी जब किसी गाय के ऊपर कोई सांड चढ़ता है तो वह ऐसे ही चढ़ता है जैसे मैं तेरे ऊपर चढ़ा हुआ हूं।

उपासना - वैसे भी आपकी बेटी को सांड की ही जरूरत है पापा । मैं तो चाहती हूं आप जैसा कोई सांड मेरे ऊपर चढ़े और मुझे इतनी ठोके की मैं निखर जाऊं ।

अब सोमनाथ ने उपासना के बाल पकड़े और पीछे की तरफ खींचते हुए कुत्तिया बनी हुई उपासना की चूत में धक्के लगाने लगा ।

इस तरह की चुदाई को ज्यादा नहीं सह पाई उपासना और किसी घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी ।

जब सोमनाथ ने देखा की उपासना झड़ने के करीब आ गई है, पूरी मस्ती में चुदासी कुत्तिया की तरह टूट कर चुदवा रही है तो सोमनाथ ने उसके बालों को छोड़कर उपासना के मुंह में अपने दोनों हाथों की दो दो उंगलियां डाल दीं। और उपासना मुंह को चौड़ाते हुए पीछे से उपासना की चूत में लौड़ा पेलना शुरू कर दिया ।

नजारा कुछ ऐसा था की सोमनाथ ने उपासना का मुह अपने हाथों से खोला हुआ था और उपासना अपनी चूत पर मर्दानगी भरे झटके झेल रही थी।

चुदासी उपासना किसी कुत्तिया की तरह गला फाड़कर , हाफ हाफ कर चुद रही थी ।

सोमनाथ ने उसके मुंह को और खोलते हुए उपासना की चूत में अपने पूरे जोश से धक्के लगाने शुरू किये ।





उपासना का बदन अकड़ने लगा और अपने बाप के लौड़े के झटकों पर उपासना झड़ने लगी । जैसे-जैसे उपासना झड़ रही थी वैसे वैसे ही उसके खुले मुंह से उपासने की जीभ बाहर की तरफ लटकती जा रही थी। अपना मुंह फाड़े हुए और जीभ को बाहर निकालकर उपासना की चूत ने पानी को बाहर निकालकर उड़ेल दिया सोमनाथ के लंड पर ।





अपनी बेटी की चूत में पानी भरे होने का एहसास जब सोमनाथ को हुआ तो उसकी मस्ती और बढ़ गई और उसने और तेज धक्के लगाने शुरू किये।

नतीजा यह हुआ की उपासना की पानी भरी चूत में जब लंडो जा रहा था तो पच पच की आवाज बहुत तेज होने लगी और साथ में उपासना का पानी सोमनाथ के लंड पर लगकर झाग बनाने लगा ।





जब उपासना पूरी तरह से चुदकर ठंडी हो गई तो वह अपना मुंह इधर उधर करने लगी करने लगी तब सोमनाथ बोला।

सोमनाथ- अब तो मेरी जान तुझे चोदने में मजा ही आएगा इधर उधर मत भाग , चुप लौड़ा खाती रह मेरा ।

उपासना को बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था और दूसरी तरफ सोमनाथ ना आव देख रहा था ना ताव देख रहा था । सोमनाथ तो बस उपासना के मुंह में अपने दोनों हाथ की उंगलियां डालकर उसकी चूत पर लंड बजा रहा था





उपासना झटपटाने लगी , दर्द से कराहने लगी लेकिन सोमनाथ को कोई रहम नहीं आया उसने उसी बर्बरता से चूत का चबूतरा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी ।

अब सोमनाथ को लगने लगा कि वह भी झड़ने वाला है ।

सोमनाथ का बदन भी अकड़ने लगा। सोमनाथ ने अपनी जान इकट्ठे करके करके पूरी जान से उपासना की चूत में धक्का मारा और इस बार धक्का इतना जोरदार था कि उपासना के लिए संभलना मुश्किल हो गया और उपासना आगे को जा गिरी साथ में सोमनाथ भी उपासना के साथ ही उसके ऊपर गिर गया ।

जब उपासना जैसी घोड़ी के ऊपर सोमनाथ जैसा सांड गिरा चूत में लौड़ा फंसा होने की वजह से उपासना की चीख निकल गई ।





सोमनाथ इस तरह नीचे दबी हुई उपासना की चूत में झड़ने लगा ।

सोमनाथ के लोड़े ने अपना पानी एक पिचकारी के रूप में उपासना की चूत में छोड़ा तो सोमनाथ का वीर्य उपासना को उपासना को सीधा अपनी बच्चादानी बच्चादानी पर महसूस हुआ ।

पूरा झलझला कर झड़ा था सोमनाथ । कम से कम 1 मिनट तक तक तक कम 1 मिनट तक तक 1 मिनट तक तक सोमनाथ के लोड़े से सफेद गरम वीर्य उपासना की चूत में जाता रहा।

कहां तक भरती उपासना की चूत उस वीर्य को को, कैसे संभालती ।

जब सोमनाथ ने देखा की उपासना की चूत में पूरा वीर्य भर गया है तो उसने उसके ऊपर लेटे लेटे अपना लौड़ा चूत के बाहर के बाहर अपना लौड़ा चूत के बाहर के बाहर कर दिया।

लंड बाहर निकलते ही उपासना की चूत से वीर्य बह निकला ।

सोमनाथ- अब इस अनमोल वीर्य को को क्यों बहा रही है है पानी की तरह मेरी कुतिया।

उपासना - पापा आपने इतना वीर्य मेरी चूत में छोड़ा है मेरी चूत में छोड़ा है मेरी चूत संभाल नहीं पा रही ।

सोमनाथ बोला - ऐसी ही चुदाई की तो जरूरत थी तुझे बेटी , अब हुई है तू ठंडी ।

उपासना- हां पापा आपने तो मेरी चूत का भोसड़ा बना के रख दिया अपनी बेटी के अंदर उतर गए आज आप ,अपनी बेटी की चूत ले ली आपने आज, अपनी बेटी को अपने लंड पर खूब नचाया है आज आपने पापा ।

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दोस्तों फिर सोमनाथ और उपासना ने एक दूसरे के होठों को चूम कर गुड नाईट बोल कर सो गए सो गए कर सो गए सो गए बोल कर सो गए सो गए के होठों को चूम कर गुड नाईट बोल कर सो गए सो गए कर सो गए सो गए बोल कर सो गए सो गए बोल कर सो गए सो गए ।

सुबह 9:00 बजे सबकी आंखें खुली

सुबह उठकर सोमनाथ ने एक बार दोबारा से उपासना को चोदा और दूसरी तरफ धरमवीर भी भी कहां कम था । उसने भी उठते ही पूजा को रगड़ दिया।

और फिर सब हॉल में आने लगे।

उपासना और पूजा चुदाई की रंगत रंगत से खुश थी लेकिन उनका बदन बुरी तरह से दुख रहा था ।

उपासना ने जैसे ही बेड से नीचे कदम रखा तो उसके लिए चलना मुश्किल हो गया दूसरी तरफ पूजा का भी यही हाल था ।

धर्मवीर और पूजा ने सोचा की उपासना ने नीचे नाश्ता तैयार कर दिया होगा तो चलो नाश्ता ही कर लिया जाए।

लेकिन धर्मवीर को कहां पता था कि उसकी बहू उपासना उपासना पूरी रात लंड से खेली है जैसे पूजा की चूत को को रात भर रगड़ा है धर्मवीर ने वैसे ही सोमनाथ ने भी उपासना की चूत का बाजा पूरी रात बजाया है ।

सोमनाथ और पूजा हॉल में आए तो पूजा सीधा सीधा नहीं चल पा रही थी।

अपनी टांगों को थोड़ी फैलाकर धीरे धीरे चल रही थी ।

दूसरी तरफ से सोमनाथ और उपासना भी हॉल में आए तो उपासना भी सीधा नहीं चल पा रही थी , थोड़ा लंगड़ापन उसकी चाल में भी था ।

जैसे ही सोमनाथ और धर्मवीर की नजर एक दूसरे से मिली मिली से मिली दूसरे से मिली मिली एक दूसरे से मिली मिली से मिली दूसरे से मिली मिली से मिली दोनों एक कुटिल मुस्कान से मुस्कुरा पड़े लेकिन पूजा और उपासना ने अपने चेहरे झुका लिया लिया, शरमा गई दोनों ।





तभी धर्मवीर बोला- सोमनाथ जी बहू को क्या हुआ ऐसे क्यों चल रही है ? तुम ठीक तो हो बहू ?

धर्मवीर के सवाल से लाल पड़ गई उपासना उपासना उसके पास इसका कोई जवाब नहीं था। लेकिन सोमनाथ ने इसका जवाब देते हुए कहा जवाब देते हुए कहा ।

सोमनाथ - अभी बाहर आते हुए उपासना बेटी गिर गई थी जिस वजह से थोड़ा उसके पैर में दर्द हो रहा है लेकिन मैं देख रहा हूं समधी जी की पूजा भी सीधी नहीं चल पा रही है , पूजा को क्या हुआ ?

अब शर्माने की बारी थी पूजा की अपनी आंखें झुका कर बहुत ही धीमी मुस्कान के साथ अपना चेहरा उसने दूसरी तरफ मोड़ दिया ।

(दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं धर्मवीर का किरदार जो अपने किरदार के अनुसार ही धर्मवीर बोला )

धर्मवीर - मुझे क्या पता यह तो आपकी शरीफ और संस्कारी बेटी ही बता सकती है कि वह क्यों सीधी नहीं चल पा रही ।

अब तो पूजा की हालत ऐसी हो गई जैसे उसे सांप सूंघ गया हो। एक बार उसने अपना चेहरा घुमा कर धर्मवीर की तरफ सवालिया धर्मवीर की तरफ सवालिया की तरफ सवालिया नजरों से देखा लेकिन फिर अपनी नजरें झुका कर जमीन की तरफ देखने लगी ।

सोमनाथ - बोलो पूजा बेटी क्या बात है. तुम सीधी क्यों नहीं चल पा रही हो?

पूजा नीचे जमीन की तरफ देखते हुए बहुत धीरे से हकलाते हुए बोली - क-क-कुछ नहीं पापा जी रात से मेरे पैरों में दर्द हो रहा है इस वजह से मुझे चलने में तकलीफ हो रही है ।

धर्मवीर- छोड़ो इन बातों को सोमनाथ जी, बताइए रात कैसी नींद आई?

सोमनाथ - समधी जी एकदम मस्त नींद आए रात रात . मेरी तो आंखें अभी खुली है। आप बताइए आपको कैसी नींद आई ।

धर्मवीर - समधी जी मैं तो सो ही नहीं पाया पूरी रात । बस 1 घंटे घंटे के लिए ही सो पाया हूं ।

सोमनाथ - आपने क्या किया पूरी रात जो आप सोए नहीं ।

दोस्तों धर्मवीर और सोमनाथ को दोनों को पता था कि रात भर दोनों ने इन घोड़ियों को चोदा है है चोदा है लेकिन वह पूजा और उपासना को भी खोलना चाहते थे। इस वजह से ऐसी बातें कर रहे थे ।

धर्मवीर ने फिर पूजा पर बात डालते हुए कहा - हां मैं पूरी रात नहीं सो पाया और यह मुझसे क्या पूछते हो। अपनी पूजा बेटी से पूछो कि भी रात भर क्यों नहीं सो पाया।

अब तो पूजा के लिए हालत असामान्य हो गई ।

पूजा बुरी तरह से जीत पर वह क्या कहती है अपने बाप के सामने कि वह रात भर चुदी है । वह अपने बाप के सामने कैसे कहती है कि उसकी बहन के ससुर ने उसकी चूत में रात भर लौड़ा उतारा है है उतारा है है लौड़ा उतारा है है उतारा है है।

सोमनाथ - बताओ पूजा बेटी समधी जी रात भर क्यों नहीं सो पाए।

पूजा हकलाते हुए - ज-जी जी पापा वो । वो मुझे नहीं पता इतना ही कह सकी पूजा ।

उपासना ने बात को संभालते हुए कहा- रात उनका टीवी खराब हो गया था, हो सकता है दोनों ने बातें की हों ।

तभी पूजा एक साथ साथ बोली- हां हां हम दोनों बातें ही कर रहे थे, कब रात निकल गई पता ही नहीं चला पता ही नहीं चला ।

सोमनाथ - अच्छा यह बात है तो ।

धर्मवीर- सोमनाथ जी जरा अपनी बेटी से यह तो पूछो कि वह मुझसे कौन सी सी कौन सी सी बातें कर रही थी ।

पूजा को जलील जलील करने में धर्मवीर भी कोई कसर नहीं छोड़ रहा था था पर पूजा ने भी ऐसी शर्मिंदगी कभी महसूस नहीं की थी जितनी आज कर रही थी थी रही थी थी।

सोमनाथ - कौन सी बातें की थी बातें की थी पूजा बेटी हमें भी तो बताओ ।

पूजा - कु-कुछ नहीं पापा बस ऐसे ही ।

धर्मवीर - सोमनाथ जी वैसे आपकी पूजा बेटी में वजन बहुत है बहुत भारी है पूजा ।

सोमनाथ- आपको कैसे पता समधी जी।

धर्मवीर ने फिर कहा वही - पूजा से ही पूछ लो ।

पूजा को गुस्सा और शर्मिंदगी दोनों का सामना करना पड़ रहा था ।

सोमनाथ - पूजा बताओ बेटी ।

पूजा के पास इसका कोई जवाब नहीं था बस इतना ही कहीं सकी- जी वह मैं इनके इनके ऊपर गिर गई थी रात ।

सोमनाथ- अच्छा , धर्मवीर जी तो तो नहीं गिरे थे ना तुम्हारे ऊपर बेटी।

पूजा के लिए यह फिर एकदम यह फिर एकदम बम फूटा क्योंकि अब इसका क्या जवाब क्या जवाब इसका क्या जवाब देती। पूजा सोचने लगी यदि मैं मैं मना करती हूं तो धर्मवीर सब कुछ बता देगा उससे अच्छा है मैं हां कह दूं ।

पूजा- जी पापा , यह भी मेरे ऊपर मेरे ऊपर गिर गए थे ।

सोमनाथ - कैसे गिरे थे समधी जी, तुम उस वक्त सीधी लेटी थी या उल्टी लेटी थी थी या उल्टी लेटी थी थी या उल्टी लेटी थी थी थी या उल्टी लेटी थी थी पूजा ।

सोमनाथ की तरफ से होने वाले किसी भी सवाल का जवाब पूजा के पास नहीं था लेकिन वह फिर भी जवाब दे रही थी ।

पूजा - जी एक बार तब गिरे थे जब मैं सीधी लेटी थी , एक बार तब गिरे थे जब मैं उल्टी लेटी थी ।

धर्मवीर - वैसे कुछ भी हो सोमनाथ जी आपकी बेटी मेरा वजन आराम से संभाल लेती है ,अभी मर्दों के वजन संभालने लायक हो गई है आपकी बेटी ।

पूजा फिर से लजा कर रह गई ।

सोमनाथ सवालिया नजरों से पूजा की तरफ देखते हुए - तुमने रात कुछ और तो नहीं किया ना बेटी ।

पूजा के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था और धर्मवीर को भी ये खेल लंबा सा लगने लगा ।

पूजा कुछ बोलने की कोशिश ही कर रही थी रही थी कर रही थी कि तभी अपनी गांड पर धर्मवीर का एक तेज थप्पड़ उसे थप्पड़ उसे महसूस हुआ और पूरे कमरे में आवाज गूंजी गूंजी गूंजी धर्मवीर की ।

धर्मवीर - बता दे ना पूरी रात चुदी हूँ । क्यों शर्मा रही है ऐसे । बोल दे पूरी रात लौड़ा बजा है मेरी चूत पर ।

ऐसा कहकर धर्मवीर ने दूसरा थप्पड़ पूजा की गांड पर लगाया ।

बाप के सामने इतना जलील सामने इतना जलील पहले कभी नहीं हुई थी पूजा। वह बस जमीन की तरफ देखते हुए जमीन की तरफ देखते हुए देखते हुए दोनों बार आउच कर गई ।





धर्मवीर और जो मेरे सामने इतनी भोली बन रही है मेरी उपासना बहू यह भी तो रात भर लौड़ा खाकर लौड़ा खाकर खाकर बाहर निकली है ,और यहां देखो साली सीता बन रही है

चल बहन की लोड़ी घोड़ियों नाश्ता लगा दो हमारे लिए।

सोमनाथ ने भी उपासना की गांड पर एक थप्पड़ मार दिया और दोनों को किचन में भेज दिया ।

शर्माती हुई धीरे-धीरे चलती हुई जलील होकर दोनों बहने किचन में आकर नाश्ता बनाने लगीं ।

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दोस्तों कहानी कैसी चल रही है बताना जरूर।

आपका अपना प्यारा सा भाई और लड़कियों का शोना बाबू - रचित ।

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दोस्तों बड़ी धमाकेदार update तैयार की है लिखकर । पढ़कर दिमाग हिल जाएगा । साला सोचकर कुछ बैठता हूँ लिखने और लिख कुछ और ही देता हूँ ।

और हां तैयार रहना क्योंकि update आज ही पोस्ट होगा और ये एक मेगा update है ।
 
Update 28.

Hi दोस्तों माफी चाहता चाहता हूं बहुत इंतजार कराया अपडेट के लिए लेकिन तैयार है आपके लिए आगे की कहानी।


लौड़ों के राजाओं से और चूत की रानियों से निवेदन है कि यह कहानी पढ़ते हुए आनंद के सागर में गोते लगाए ।

कहानी को ले चलते हैं वहां पर जब बालवीर ने घूमने का प्लान बनाया था , शालिनी और आरती बलवीर के साथ घूमने को राजी हो गए थे-


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यह सुनते ही आरती खुश हो गई और एक साथ चहकते हुए बोली भैया आप चिंता क्यों करते हो मैं हूं ना । हम दोनों भाई बहन चलते हैं घूमने ।

तभी बलवीर ने शालीनी से भी पूछा शालीनी ने पता नही क्या सोचकर हां करदी ।

आरती , शालीनी और बलवीर का प्लान फिक्स हो चुका था ।

अगले दिन सुबह को बलवीर, शालीनी और आरती अपने 6 दिन के टूर के लिए रवाना हो चुके थे ।

ड्राइवर उनको सुबह 7 बजे एयरपोर्ट लेकर पहुंच चुका था ।

सबसे पहले बलवीर शालिनी और गोवा जाने का फैसला किया ।

सुबह के 11 बजे तीनो गोवा पहुंच चुके थे ।

बलवीर साइड में खड़ा होकर होटेल में रूम बुक करने लगा । उसने सोचा दोनों से पूछ लूं कि कितने दिन के लिए होटेल बुक करूँ ।

बलवीर (शालिनि और आरती की तरफ आते हुए) - आरती कितने दिन तक रुकने वाले है हम यहां ।

आरती - भइया जब तक आप घूमना चाहे। वैसे भी हम दोनों को तो घूमने में मजा आता है ।

बलवीर - ठीक है दो दिन तक हम लोग गोवा में घूम लेते है फिर 2 दिन के लिए कश्मीर चलेंगे ।

शालिनि - ग्रेट चाचाजी ।

बलवीर रूम बुक करने लगा । उसने 2 रूम बुक किये एक शालिनि और आरती के लिए, एक अपने लिए ।

तीनो होटेल पहुंचे जाकर देखा तो पता लगा कि जो रूम उसने बुक किया था वो तभी कैंसिल हो गया था ।

रिसेप्शनिस्ट- यस सर , how may I help you ?

Balbir - भाई अंग्रेजी से तो मैं परेशान हो गया हूं भारत मे तो कम से कम हिंदी बोलो ।

रिसेप्शनिस्ट- जी सर मैं आपकी क्या सहायता कर सकता हूं ?

बलवीर - मैंने अभी दो रूम बुक किए थे , लेकिन अभी होटल आकर मैंने देखा तो मुझे पता चला कि मेरे रूम कैंसिल हो गया ।

रिसेप्शनिस्ट - हां जी सर माफी चाहता हूं मैं उसके उसके लिए । मैं आपको बताना चाहता हूं कि अब एक रूम खाली है यदि आप चाहते हैं तो उसमें आप रुक सकते हैं ।

बलबीर - लेकिन हम तीन लोग हैं।

तभी आरती ने बोला हां भैया कोई बात नहीं हम कोई दूसरे होटल में रुक जाएंगे ।

तभी रिसेप्शनिस्ट ने बोला - माफ कीजिएगा । मैं यहां पर आसपास में कोई होटल अवेलेबल नहीं मिलेगा। इस मौसम में काफी लोग गोवा घूमने आते हैं जिस वजह से आसानी से नहीं मिल पाता है होटल ।

तभी आरती सवालिया नजरों से बलवीर की तरफ देखते हुए - तो फिर कैसे करेंगे भैया ।

बलवीर एक मिनट तक कुछ सोचा फिर बोला - आरती ऐसा करते हैं बेड पर तुम दोनों सो जाना मैं सोफे पर सो जाऊंगा।

शालिनी- हां चाचा जी यह ठीक रहेगा ।

तभी रिसेप्शनिस्ट ने एक वेटर को कहा- तुम जाकर साहब को कमरा दिखाओ ।

बलवीर आरती और शालिनि से बोला - कि हां तुम इस लड़के के साथ जाकर रूम में पहुंचो, मैं पेमेंट करके आता हूं ।

आरती और शालिनी उस लड़के के साथ रूम की तरफ चल दी ।

बलवीर ने पेमेंट किया लेकिन जैसे ही बलवीर ने रिसेप्शनिस्ट की तरफ देखा तो वह सामने की तरफ कुछ देख रहा था ।

उसकी नजरों का पीछा करते हुए बलवीर ने देखा तो पाया रिसेप्शनिस्ट आरती और शालिनी को जाते हुए घूर रहा था ।

यह पहला मौका था जब बालवीर ने आरती और शालिनी को पीछे से इस तरह चलते हुए देखा था ।

दोनों की गांड चलते हुए काफी हिल रही थी जिसे उनके पीछे चलने वाला लड़का देख रहा था । हालांकि सूट पहना हुआ था शालिनी और आरती ने लेकिन उसमें भी चलती हुई किसी बोंब की तरह लग रही थी दोनों ।





बलवीर ने पेमेंट किया और बलवीर भी उनकी उनकी तरफ चलने लगा।

लड़के ने रूम में पहुंचकर कहा- मैम यह है आपका कमरा । अगर किसी भी चीज की जरूरत हो तो आप कॉल कीजिएगा ।

ऐसा कहकर वह लड़का बाहर चला गया ।

आरती और शालिनी ने जाकर सामान रखा और सोफे पर बैठ गई ।

आरती- भैया भूख भी लग रही है पहले कुछ खा लेते हैं फिर थोड़ा आराम करने का भी मन है ।

शालिनी उसका साथ देते हुए- हां चाचा जी मुझे भूख लग रही है ।

बलवीर - अच्छा जब तुम दोनों को भूख लग रही है तो पहले चलो कुछ खा लेते हैं । मैं खाना ऑर्डर कर देता हूं ।

बलवीर खाना ऑर्डर करने लगा ।

शालिनी बोली- जी चाचाजी आप खाना ऑर्डर कीजिए तब तक मैं नहा लेती हूं ।

ऐसा कहकर शालिनी ने अपने कपड़े निकाले बैग में से और बाथरूम में घुस गई ।

अब कमरे में बलवीर और आरती थे ।

आरती को सलमान का मैसेज रिसीव हुआ तो आरती अपना फोन उठाकर बाहर गिरिल पर जाकर खड़ी हो गई और सलमान से बातें करने लगी ।

उधर शालिनी बाथरूम में नहाने के लिए गई हुई थी लेकिन उसका फोन वहीं सोफे पर रखा था ।

तभी उसके फोन पर उसकी बेस्ट फ्रेंड नाज़नीन (Najneen) का फोन आया।

नाज़नीन के बारे में आपको बता दें कि यह एक मुस्लिम शादीशुदा औरत है।

नाज़नीन की शादी को अभी 1 साल हुआ है । नाज़नीन पर्दे में रहने वाली औरत है यह मोहतरमा अगर घर से बाहर निकलती हैं तो अपने आप को बुर्के से ढककर ही घर से बाहर जाती हैं ।





इनकी आंखें बिल्कुल कटीली हैं लेकिन चुदाई के मामले में इन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह एक शरीफ पाकीजा मुस्लिम औरत है ।

अपने शौहर से चुदवाते समय यह दिखाती है कि मैं कितनी बड़ी लंडखोर औरत हूं।





हां दोस्तों जब यह मोहतरमा अपने शौहर के नीचे बिछती हैं तो कोई शरीफ पाक औरत नहीं बल्कि सस्ती और चुडक्कड़ रांड बन जाती हैं ।





बलवीर ने जैसे ही देखा कि किसी नाज़नीन नाम से फोन आ रहा है तो उसने सोचा शालिनी की सहेली होगी । बता देता हूँ कि वो नहा रही है।

यह सोचकर बलवीर ने फोन उठा लिया ।

जैसे ही बलवीर ने फोन अपने कान से लगाया दूसरी तरफ से आवाज आई।

नाजनीन- क्या हाल हैं मेरी चुदक्कड़ रानी के । अब तो अपने भैया को मार कर अपने चाचा को मारने का प्लान है क्या, लेकिन याद रखना वह तेरा भाई राकेश नहीं है। वह तेरा चाचा बलवीर है लाडो रानी कहीं ऐसा ना हो कि चाचा को रिझाने के चक्कर में अपनी चूत का चबूतरा बनवा लो । वह तो बेचारा सीधा साधा राकेश था जो तेरे जैसी घोड़ी को देखकर तुझ पर चढ़ने के लिए बेताब हो गया था। वैसे तुझे चुदने के बाद मारना चाहिए था राकेश को पर तूने बेचारे को तेरी चूत भी नहीं लेने दी और तूने पहले ही मार दिया उसको । अब बोलती क्यों नहीं कुछ मैं इतनी देर से बकबक किए जा रही हूं।

बलवीर को कुछ समझ नहीं आया ।

उसके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया ।

परेशान हो गया बलबीर ।

उसकी आंखों से गुस्सा और आंस दोनों साफ झलक रहे थे ।

बलवीर ने फोन डिस्कनेक्ट किया और सोफे पर गिर पड़ा।

सोफे पर बैठे बैठे उसके दिमाग में यह भूचाल चल ही रहा था कि शालिनी ने ने राकेश को क्यों मारा ?

क्या शालिनी ने ही राकेश को मारा है ?

क्या राकेश की हत्या की गई है ?

क्या राकेश शालिनी को चोदना चाहता था?

क्या शालिनी चुदक्कड़ है जो अपनी चूत अबसे पहले फड़वा चुकी है ।

यह सोचते हुए बलवीर काफी परेशान सोफे पर बैठा था कि तभी शालिनी नहा कर आगयी।

शालिनी ने जींस पहनी हुई थी और उसके ऊपर टॉप डाला हुआ था ।

अपनी उम्र के हिसाब से शालिनी का शरीर ज्यादा ही बड़ा लगता था ।

देखने से भी शालिनी कुंवारी नहीं लगती थी ऐसी लगती थी जैसे उसके रोम-रोम में वासना भरी हो ।

अपनी भतीजी की मोटी मोटी गदराई हुई जांघों को देखकर बलवीर समझ गया कि उसकी भतीजी अब बच्ची नहीं है । वह एक खेलीखाई लड़की है जो अपने भाई को मार चुकी है ।





शालिनी के भरे हुए बदन और खूबसूरती के साथ-साथ उसमें एक शातिर दिमाग भी है यह समझ चुका था बलवीर ।

तभी बलवीर के दिमाग में एक विचार कौंधा कि जिस सहेली का अभी फोन आया है वह दोबारा शालिनी को फोन करेगी और शालिनी को पता चल जाएगा की फोन पर मैंने उसकी सहेली की बात सुन ली है ।

इसका मतलब मेरी पोल खुल जाएगी । मेरी पोल खुले उससे पहले ही मुझे कुछ करना होगा ।

तभी रूम में वेटर की एंट्री होती है जो खाना लेकर आया था उसने खाना टेबल पर रखा और बाहर की तरफ निकल गया ।

बलवीर भी उस लड़के के पीछे चला गया ।

कमरे से बाहर जाकर बलवीर ने उसे रोका और कहां एक काम कर सकते हो ।

लड़के ने सवालिया नजरों से बलवीर की ओर देखा और पूछा- कैसा काम ?

बलवीर- यार वह क्या है ना मुझे थोड़ा प्राइवेसी चाहिए ।

अपनी गर्लफ्रेंड से मुझे मिलना है और वह देखो मेरी बहन मेरे साथ ही है।

आरती की तरफ इशारा करते हुए बलवीर ने कहा । तो मैं चाहता हूं कि तुम उसे बातों में लगा लो या कुछ ऐसा करो एक-दो घंटे के लिए वह कमरे में ना आ पाए ।

लड़का - बदले में मुझे क्या मिलेगा ।

बलवीर ने लड़के की तरफ़ पचास हजार का एक नोट बढ़ाते हुए कहा - यह लो उस काम की कीमत ।

लड़के की आंखों में 50000 का नोट देखकर चमक आ गई और उसने वह नोट जल्दी से अपनी जेब में रख लिया और बोला - आज आप चिंता मत कीजिए समझ लीजिए आपका काम हो गया। हमारे यहां पर आज एक बर्थडे पार्टी है तो मैम साहब को मैं वहां बुला लेता हूं ।

बलवीर को ये आईडिया जच गया और उसने कहा - ठीक है तुम मेरे रूम में इनविटेशन कार्ड लेकर आना मैं उसे तुम्हारे साथ भेज दूंगा ।

लड़का - ठीक है साहब में 10 मिनट में आता हूं।

ऐसा बोलकर लड़का चला गया ।

आरती को इस बारे में भनक तक नहीं की वह तो बस धर्मवीर यानी सलमान से चैटिंग कर रही थी ।

बलवीर वापस कमरे में आया और आके शालिनी से बोला- मुझे तुमसे कुछ बात करनी है शालिनी ।

सवालिया नजरों शालिनी बोली- बोलिये चाचा जी ।

बलवीर- अभी आरती बाहर एक बर्थडे पार्टी में जाएगी जो होटल वालों ने रखी है, तो तुम मत जाना उसके साथ।

शालिनी सवालिया नजरों से बलवीर को देखते हुए - हां चाचा जी वह तो ठीक है लेकिन यह तो बता दीजिए बात किस बारे में करनी है ।

बलबीर ने सोचा कि अभी मैं इसे कोई हिंट दूंगा तो कहानी खराब हो सकती है इसलिए उसने झट से कहा - मैं सोच रहा हूं गोवा में हम लोग अपनी कंपनी की एक नई ब्रांच खोलें तो उसी के बारे में बात करनी थी । लेकिन बात सिर्फ तुमसे ही करनी थी । तो सोच रहा हूं आरती चली जाएगी तब इस बारे में बात करते हैं ।

शालिनी यह सुनकर खुश हुई क्योंकि उसने सोचा कि हो सकता है बलवीर चाचा वह ब्रांच मेरे नाम से शुरू करें। ऐसा सोच कर वह चहकते हुए बोली - हां चाचा जी बिल्कुल जब आरती बुआ चली जाएंगी हम तब बात कर लेंगे।

लेकिन चाचा मुझे भूख लग रही है चलो खाना खा लेते हैं ।

तभी आरती अंदर आ गई आरती बोली- भैया मुझे भी भूख लग रही है।

बलवीर - तो चलो आ जाओ पहले खाना खाते हैं ।

तीनो लोग बैठे ही थे कि तभी वह लड़का अंदर आया जिससे बलवीर ने सारा प्लान फिक्स किया था ।

लड़का - सर हमारे होटल में आज एक छोटी सी पार्टी है आप से रिक्वेस्ट है की पार्टी में आकर पार्टी की शोभा बढ़ाएं ।

बलवीर - बहुत खुशी की बात है यह तो लेकिन मुझे बड़े दुख के साथ मना करना पड़ेगा क्योंकि मुझे अभी ऑफिस का काम है ।

एक काम करो शालिनी और आरती तुम दोनों चली जाओ ऐसा कहते हुए बलवीर अपने फोन को चलाने लगा ।

आरती - चलो कम से कम पार्टी तो मिलेगी। चलो हम दोनों चलते हैं शालिनि, भैया अपने ऑफिस का काम कर लेंगे ।

शालिनी मुंह बनाते हुए - लेकिन मेरे तो सर में दर्द हो गया है सफर की वजह से । मेरा थोड़ा आराम करने का मन है अगर आपको बुरा ना लगे तो मैं आराम कर लूं और आप पार्टी में चली जाओ बुआ।

आरती ने अपने मन में सोचा- चलो अच्छा है सलमान से चैटिंग करने का भी मौका मिलेगा और वैसे भी शालिनि के सर में दर्द है तो वह आराम कर लेगी



यह सोच कर आरती बोली - कोई बात नहीं मैं चली जाती हूं इनको भी बुरा नहीं लगेगा और मैं जल्दी आ जाऊंगी ।

बलवीर - हां आरती ये ठीक रहेगा तुम पार्टी में चली जाओ मैं और शालिनी यह खाना पेट भर कर खाएंगे hahaha हंसते हुए बलवीर बोला । वैसे भी तुम्हें डांस करने का बहुत शौक है तो आज तुम्हें डांस करने का मौका भी मिल जाएगा ।

शालिनी- हां चाचा जी डांस तो वाकई में बहुत अच्छा करती हैं बुआ।

आरती - तुम दोनों मेरी क्यों हंसी उड़ा रहे हो , ऐसा कुछ नहीं है ।

बलवीर - शालिनी देखो आज हमारी आरती इतना अच्छा डांस करेगी कि-


कर देगी फेल शकीरा को तोड़ेगी ये रिकॉर्ड माईकल के ,

कर देगी फेल शकीरा को तोड़ेगी ये रिकॉर्ड माईकल के ,

ऐसे कमर घुमाकर नाचेगी जैसे पैडल घूमते है साईकिल के ।



यह सुनकर शरमा गई आरती।

आरती - ओके भैया ।

ऐसा बोलकर आरती उस लड़के के साथ चली गई अब कमरे में शालिनी और बलबीर बचे थे ।

दोस्तों बलवीर और धर्मवीर दोनों भाइयों के स्वभाव में कोई ज्यादा बड़ा अंतर नहीं था जैसा शातिर दिमाग धर्मवीर का था वैसा ही शातिर दिमाग और भैंसे जैसा तगड़ा शरीर बलवीर का भी था ।

शालिनी को इस बात के बारे में कोई भनक नहीं थी कि बलवीर क्या सोच रहा है । वह तो बस अपनी मस्ती में मस्त थी ।

अब बलवीर ने उठकर गेट लॉक किया और सोफे पर बैठ गया ।

शालिनी अपने फोन में कुछ देख रही थी ।

बलवीर की आवाज तभी उसके कानों में पड़ी ।

बलवीर - शालिनी हम जो गोवा में नई कंपनी खोल रहे हैं मैं सोच रहा हूं कि उसे तुम्हारे नाम कर दूं ।

शालिनी खुश होते हुए - दिल से धन्यवाद चाचा जी। आज मुझे एहसास हुआ कि आप मुझे अपनी सगी बेटी की तरह ही प्यार करते हैं ।

बलवीर - हां बेटी तुम मेरी अपनी ही हो । लेकिन मैं सोच रहा हूं इसके बदले में तुम्हें भी कुछ मेरे लिए करना चाहिए ।

शालिनी - हां चाचा जी बिल्कुल । बोलिए क्या करे यह शालिनी आपके लिए। मैं तो अपनी फैमिली के लिए अपनी जान भी दे दूं ।

बलवीर अपने चेहरे पर पर कुटिल मुस्कान लाते हुए- मुझे तुम्हारी जान नहीं कुछ और चाहिए ।

शालिनी अभी भी खुशी में ही मग्न थी । उसे आने वाले समय के बारे में कोई भनक नहीं थी और ना ही वह बलवीर की बातों का सही अर्थ समझ पा रही थी ।

शालिनी ने चहकते हुए कहा - आप कहिए तो चाचा जी आपके मुंह से वह ख्वाहिश निकलने से पहले ही मैं उसे पूरी कर दूंगी ।

बलवीर - हां शालिनी यह तो मुझे भी लग रहा है तुम्हारा यह भरा हुआ जवान मदमस्त गदराया हुआ शरीर देखकर कि अब तुम मर्दों की ख्वाहिश पूरी करने लायक हो गई हो ।

बलवीर की यह बात शालिनी के कानों में पड़ते ही उसे झटका लगा ।

उसके चेहरे की खुशी और मुस्कान एक पल में गायब हो गई ।

उसकी आंखें बड़ी हो गई और माथे में एक साथ कई सिलवटें आगयीं।

शालिनी अपने इस चेहरे से हैरानी से बलवीर को देखते हुए बोली- क-क्या मतलब चाचा जी । मैं-मैं कुछ समझी नहीं ।

बलवीर - अरे बेटी तुम गलत समझ रही हो मेरा मतलब है कि मैं काफी दिनों से इंडिया नहीं आया हूं इसलिए मुझे लगता था कि तुम अभी छोटी ही होगी, लेकिन तुम तो बहुत बड़ी हो गई हो ।

बात को संभालते हुए बलवीर बोला

शालिनी- अच्छा वह तो ठीक है चाचा जी लेकिन आपने ऐसे वर्ड्स यूज़ किये हैं जिसे सुनकर मुझे अच्छा नहीं लगा ।

बलवीर हंसते हुए- सॉरी बेटी मेरे मुंह से निकल गया मेरा मतलब यही था कि तुम अब बड़ी हो गई हो ।

शालिनी- इट्स ओके चाचा जी। हां बताइए आपको क्या चाहिए उसके बदले में जो गिफ्ट आपने मुझे दिया है ।

बलवीर - मैं चाहता हूं मेरी बेटी मुझे गले से लगाकर प्यार से धन्यवाद बोले। कम से कम हमें भी तो लगना चाहिए कि शालिनी भी हमें अपना मानती है।

शालिनी खुश होते हुए - ओह चाचूजी जी आई लव माई फैमिली । लेकिन चाचा जी मैं आप को गले लगाकर धन्यवाद बोलूंगी तो आप भी मुझे गले से लगाकर मेरे कान में शुक्रिया बोलना, आखिर हम भी आपकी बेटी हैं । बदला तो ले ही लूंगी हा हा हा हा ।

बलवीर अपनी बाहों को फैलाते हुए- जैसा मेरी बेटी चाहे ।

शालिनी खुशी और प्यार से बलवीर के सीने से लग गई ।

अब बलवीर को उसके कान में शुक्रिया बोलना था ।

जैसे ही शालिनी खुशी से बलवीर के गले से लगी तो बलवीर ने अपने दोनों हाथ शालिनी के भारी कूल्हों पर रखकर उसके कान में कहा - यह एक बार मिल जाए तो मैं तो जीते जी स्वर्ग में पहुंच जाऊंगा , शुक्रिया बेटी ।





शालिनी में जब अपनी गांड पर बलवीर के हाथ महसूस करते हुए अपने कान में यह बात सुनी तो उसे दोबारा से झटका लगा और वह एक साथ उछल कर बलवीर के सीने से दूर हो गई ।

शालिनी हकलाते हुए - क-क-क्या मतलब है आपका ।

बलवीर- अरे बेटी मेरा मतलब है कि तुम्हारी या जादू की झप्पी मुझे एक बार मिल जाती है तो मैं जीते जी स्वर्ग में पहुंच जाता हूं । कितने प्यार से गले लगाती है मेरी प्यारी भतीजी , यह बोला मैंने तो शालिनी , तो बताओ क्या गलत बोला ।

शालिनी अब कंफ्यूज हो चुकी थी अपनी ही सोच से ।

शालिनी को समझ नहीं आ रहा था बलवीर सच में उसे बेटी की तरह बहुत प्यार करता है या बलवीर उससे कुछ और मांगना चाहता है क्योंकि बलवीर की बातें बिल्कुल नहीं लग रही थी कि वह अपनी भतीजी के बारे में गलत सोच सकता है लेकिन बलवीर की हरकतें शालिनी को सोचने पर मजबूर कर रही थी ।

शालिनी नॉर्मल होते हुए और चाची जी- आपने मेरे पीछे क्यों हाथ रखा था बैक पर।

बलवीर- अरे बेटी अपनी बेटी को हाथ लगाने में भी सोचना कैसा। लग गया होगा मेरा हाथ हो सकता है कहीं गलत जगह पर । माफ कीजिए उसके लिए।

बलवीर की इन बातों से शालिनी के दिल में बलवीर की एक इज्जतदार छवि दोबारा से बन गई । गलत बातें अपने दिमाग से निकालती हुई शालिनी बोली- अब तो खुश हो गए ना आपको जादू की झप्पी भी मिल गई ।

बलवीर - हां अब तो मैं खुश हूं बहुत । मैं चाहता हूं कि मेरी बेटी मुझे एक बार और जादू की झप्पी दे फिर हम आराम करते हैं ।

शालिनी - हां हां चाचा जी क्यों नहीं मैं तो थक भी गई हूं। मैं भी आराम करूंगी चलो एक और आपको जादू की झप्पी देती हूं।

बलवीर बोला - ठीक है मैं तुम्हारे कान में शुक्रिया कहूंगा ।

इस बार शालिनी ने नहीं कहा था बलबीर से कि तुम मुझे शुक्रिया बोलना कान में लेकिन फिर भी अब बलबीर ने अपनी तरफ से बोला , क्योंकि बलवीर के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था ।

शालिनी - ओके चाचा जी शालिनी दोबारा से खुश होते हुए और चहकते हुए प्यार से बलवीर के सीने से लगी ।

बलवीर ने इस बार शालिनी के चूतड़ों को अपने हाथों से हल्का सा दबाते हुए शालिनि के कान में कहा- यही तो कहा था मैंने पहले भी शालिनी कि इस गांड पर एक बार मुझे चढ़ा ले वादा करता हूं सुबह को ठीक से हग भी नहीं पाएगी । तेरी गांड मेरा लौड़ा संभालने के लायक हो गई है । इतनी भारी गांड ही टिक सकती है मेरे नीचे , शुक्रिया मेरी चुदक्कड़ बिटिया ।





दोस्तों जैसे ही शालिनी के कानों में यह शब्द पड़े शालिनी की हैरानी की सीमा न रही ।

ऐसा लगा जैसे 440 वोल्ट का झटका उसे लगा हो। उछलकर बलवीर से बहुत दूर खड़ी हो गई शालिनि और गुस्से से बलवीर को देखते हुए बोली

शालिनि - तो यह है तेरा असली रूप इतनी देर से मैं जिसे तेरा प्यार समझ रही थी वह प्यार नहीं अपनी बेटी जैसी भतीजी के लिए तेरी आँखों मे हवस थी। कुत्ते डूब के मर जाना चाहिए तेरे जैसे चाचा को जो अपनी ही बेटी जैसी भतीजी की इज्जत नहीं कर सका । तेरी मुझसे यह बोलने की हिम्मत कैसे हुई । तुझे क्या लगता है तू मेरे नाम एक कंपनी करेगा तो मैं तेरी हवस शांत करूंगी । छि कितना गिर गया है तू चाचा । मैं थूकती हूं तेरी कंपनी पर और थूकती हूं तुझ जैसे घटिया आदमी पर ।

ऐसा बोलते हुए शालिनी को पारा चढ़ गया । गुस्सा उसके चेहरे पर तांडव कर रहा था ।

शालिनी ने बोलते हुए आगे बढ़कर बलवीर के मुंह पर तमाचा मारा । तमाचा भी पूरी जान से मारा था शालिनी ने बलवीर को तो दिन में ही तारे दिख गए। बलवीर की आंखों के आगे अंधेरा सा छा गया था कुछ पल के लिए शालिनी का यह रूप देख कर ।

लेकिन बलवीर भी धर्मवीर की तरह सुलझा हुआ आदमी था ।

उसे पता था की बाजी उसके हाथ में हमेशा रहेगी ।

शालिनी ने फिर दूसरा थप्पड़ बलवीर के दूसरे गाल पर मारा ।

यह थप्पड़ भी पहले थप्पड़ जैसा ही तगड़ा था दोनों गालों पर थप्पड़ मार कर शालिनी ने बलवीर के मुंह पर थूक दिया और बाहर की तरफ जाते हुए बोली - अभी बोलती हूं धर्मवीर भैया को जाकर कि उन्होंने अपने घर में कैसा आस्तीन का सांप पाला है । घटिया इंसान हाट्ट । इस तरह से गुस्से से अपना हाथ झटककर शालिनी गेट पर पहुंची ही थी कि तभी उसके कानों में बलवीर की आवाज पड़ी । जो आवाज ज्यादा तेज नहीं थी बड़े ही धीमे से बोला था बलबीर ने ।

बलवीर - मैंने तो सिर्फ बोला ही है लेकिन अपने धर्मवीर भैया को जा कर यह भी बताना कि तुमने क्या किया है उन्हें जाकर बताना कि उनके बेटे का और अपने भाई की हत्या मैंने की है ।

दोस्तों कमरे का माहौल बदल गया ।

एक सन्नाटा सा कमरे में छा गया।

शालिनी जो अभी शेरनी जैसी फीलिंग ले रही थी अब उसकी फीलिंग कैसे बताऊं दोस्तों । अब तो यही कहना उचित होगा कि अब वह कोई फीलिंग ले ही नहीं रही थी, हा हा हा हा ।

शालिनी का दिमाग एकदम सुनना हो गया ।

उसे इतनी हैरानी और इतना तगड़ा दिमागी झटका जिंदगी में पहली बार लगा था ।

शालिनी अपनी आंखों को फैला कर देखते हुए बलवीर की तरफ मुड़ी और बोली हकलाते हुए - क-क्या मतलब है तुम्हारा। मैं कुछ समझी नहीं ।

बलवीर - सोफे पर बैठते हुए मतलब भी समझ गई है तू तो यह हकलाने का नाटक कैसा । इतना अनजान बनने का नाटक पसंद आया मुझे। लेकिन मतलब तो मेरा समझ ही गई है ना कि मैं जानता हूं । बल्कि मेरे पास वीडियो भी है जहां तू ने राकेश को मारा है ।

दोस्तों अब तो शालिनी की बिल्कुल फट गई

अब तो शालिनी की हालत क्या बताऊं बिल्कुल ऐसी हो गई जैसे उसका सब कुछ लुट गया हो।

शालिनि अपने मन में सोचने लगी कि हो सकता है उस होटल के मालिक ने हमारा वीडियो बना लिया । हो सकता है उसके कमरे में सीसीटीवी कैमरे लगे हो देखने के लिए कि कपल क्या कर रहे हैं और राकेश की हत्या भी उसमें रिकॉर्ड हो गई हो । और वह फिर बलवीर ने वीडियो हासिल कर ली हो।

शालिनी ये सोचते हुए बड़े असमंजस में बोली धीरे से- तो तुम बदले में क्या चाहते हो । अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें अपना बिजनेस पाटनर बना सकती हूं। जिसमें मैं तुम्हें 1500 करोड़ रुपए का हिस्सेदार बनाऊंगी ।

शालिनी के यह शब्द सुनकर तो बलवीर का दिमाग भी हिल गया।

बलवीर ने अपने मन में सोचा आखिर इस लड़की का प्लान क्या है ।

इतनी दौलत उसके पास कहां से आई और यह क्या करना चाहती हैं ।

यह सब क्या चल रहा है बलवीर ने शालिनी से पूछना चाहा लेकिन बलवीर ने अपने मन में सोचा अगर मैं अभी पूछता हूं तो बात खराब हो सकती है ।

अब तो चिड़िया जाल में फंस चुकी है धीरे-धीरे सब उगलवा लूंगा ।

पहले इसको देखू कि कितने पानी में है ।

जब यह इतनी शातिर है ,

अपने परिवार के लिए इतनी घातक है ,

इतनी खतरनाक है तो जाहिर सी बात है ये बेटी तो हो नहीं सकती ।

घर की बेटियां तो ऐसा काम नहीं करती।

तो मैं ही इसे बेटी क्यों समझूँ । पहले मैं भी उसकी जवानी का मजा लूं। उसके बाद देखते हैं क्या होता है ।

बलवीर- हां मुझे तुम्हारा सौदा मंजूर हैम मैं इस राज को राज ही रखूंगा और उस ओरिजिनल वीडियो को भी तुम्हें दे दूंगा । लेकिन इसका क्या जो अभी तुमने मेरे साथ किया है । तुमने मुझे थप्पड़ मारा है। तुमने मेरे मुंह पर थूका है । इसका बदला मैं अलग से लूंगा । मंजूर है तो बोलो ।

शालिनी अब ना करने की हालत में थी ही नहीं ।

उसके हालात ऐसे नहीं थे कि वह ना कर सके क्योंकि बलवीर सब कुछ जान चुका था ।

शालिनी- तो उसके लिए माफ तो कर सकते हैं। मैंने तुम्हें इतना बड़ा ऑफर दिया है सोचो 1500 करोड़ रुपए तुम्हें बैठे-बिठाए मिल गए । तो क्या यह छोटा सा गुस्सा माफ नहीं कर सकते ।

बलवीर - आज की दुनिया में दो ही चीजें ऐसी हैं जिन्हें इंसान भूल नहीं सकता। एक इज्जत और दूसरी बेइज्जती । तुमने मेरी बेइज्जती की है और इस बेइज्जती का बदला तो लेना चाहिए ।

शालिनी- तो क्या चाहते हो तुम ।

बलवीर अब समझ चुका था की बाजी पूरी तरह मेरे हाथ में है ।

अब मैं आगे बढ़ सकता हूं ।

बलवीर ने नाज़नीन की बातों को बातों को याद करते हुए कहना शुरू किया।

बलवीर- तुम यह मत सोचो कि मुझे सिर्फ राकेश की हत्या के बारे में ही पता है । अगर तुम यह सोचती हो तो यह तुम्हारी गलतफहमी है । फिर तुम बलवीर को नहीं समझी हो अच्छे से कि बलवीर क्या चीज है । शालिनी मुझे यह भी पता है कि तुम ने राकेश की हत्या की है और कैसे की है । मेरे पास उसका वीडियो भी है । मेरे पास तुम्हारे हर करतूत का सबूत है कि तुमने राकेश को कैसे रिझाया । तुमने पहले राकेश को हरी झंडी दी चोदने के लिए और फिर बिना चुदे ही उसे मार दिया ।

यह सुनकर तो शालिनी बिल्कुल बेहोश होने से बची। उसे सदमा से लगा क्योंकि यही तो किया था शालिनी ने । अब तो उसे पक्का यकीन हो गया कि उस कमरे में वीडियो बनी है और वह बलवीर के पास है । जबकि असलियत यह थी दोस्तों की बलवीर को नाज़नीन ने ऐसा ही बोला था फोन पर की बिचारा बिना चूत लिए ही मर गया और तूने मारा है उसे शालिनी ।

नाज़नीन कि इन बातों को याद करते हुए बलवीर बोला था ।

शालिनी- तो अब क्या चाहते हो तुम इस बात को राज रखने के लिए । मैं चाहती हूं यह बात राज ही रहे ।

बलवीर - कोई बात नहीं राज ही रहेगी यह बात मेरी जान लेकिन मैं चाहता हूं जिस काम को राकेश नहीं कर पाया मैं उसे करूं ।

शालिनी इन बातों का मतलब साफ समझ रही थी और बलवीर के इस तरह खुलेपन से बात करने से शालिनी समझ गई थी बलवीर उसे चोदने की प्लानिंग कर चुका है ।

लेकिन फिर भी हालात को समझते हुए शालिनि बोली - अगर मैं मना कर दूं तो ।

बलवीर - तो मैं कौन सा तुझसे विनती कर रहा हूं की तू हां ही कर । मत कर तेरी मर्जी है । लेकिन उस वक्त के बारे में सोच लेना कि जब मैं उस वीडियो को तेरे बाप धर्मवीर और पुलिस को सौंप दूंगा और तेरा बाप तुझे घर से बेदखल करके लात मारकर भगा देगा जेल में सड़ने के लिये।

अब तो शालिनी बुरी तरह से फंस चुकी थी अब उसे समझ नहीं आ रहा था वह क्या बोले और क्या सुने । अब तो उसे हर हालत में बलवीर की ही बात बात माननी थी ।

शालिनी - और अगर मैं हां करूं तो ?

बलवीर - हां करेगी तो उसमें तेरा ही फायदा है । तेरा बिजनेस पाटनर भी बन जाऊंगा । यह बात राज ही रखूंगा । तू जेल जाने से बचेगी और तू बेदखल होने से बचेगी अपने घर से ।

शालिनी - ओके लेकिन यह हमारे बीच सिर्फ एक बार ही होगा। उसके बाद तुम अपने रास्ते मैं अपने रास्ते ।

अभी भी बड़े एटीट्यूड में बोली थी शालिनी ।

बलवीर- नहीं फिर मुझे तुम्हारा सौदा मंजूर नहीं है तुम जा सकती हो।

शालिनी का सारा एटीट्यूड झड़ गया यह सुनकर ।

शालिनी - तो क्या चाहते हो तुम साफ-साफ बोलो ।



बलवीर अगर साफ-साफ ही सुनना है तो मुझे जो सौदा करना है उसमें चाहे तुम मुझे 1500 करोड़ दो या मत दो वह तुम्हारी मर्जी है क्योंकि पैसे की मेरे पास कमी नहीं है लेकिन मेरा जो सौदा है वह कुछ अलग किस्म का है । अगर तुम्हें मंजूर है तो हां करो वरना तैयार रहो जेल जाने के लिए ।
 
शालिनी- बोलो क्या सौदा है तुम्हारा ।

बलवीर- बताया तो था तुम्हारे कान में कि तुम्हारी गांड मारनी है क्योंकि चूत तो तुम पहले ही फ़ड़वा चुकी हो । मैं जब चाहूं तुम्हें अपने लंड के नीचे रख सकूं । मैं चाहता हूं कि जब मैं चाहूं तब तुम आकर अपनी मूतती हुई चूत को मेरे लंड पर रखो ।

बलवीर के मुंह से इतनी खुल्लम खुल्ला और गंदी जुबान सुनकर शालिनी शरमा गई और साथ में उसे गुस्सा भी आया ।

अपना चेहरा दूसरी तरफ करके गुस्से से अपनी मुट्ठियों को भींचते हुए बोली- तुम्हें अपने बेटी के साथ यह सब करते हुए अच्छा लगेगा क्या ।

बलवीर की आवाज में अब रोब पैदा होने लगा । अपनी रौबदार आवाज में बोला- जब बहन अपनी चूत के सपने दिखा कर अपने भाई को मारने में कोई बुराई महसूस नहीं करती तो फिर मैं ही क्यों बुराई महसूस करूँ। मुझे तो अच्छा ही लगेगा । अब तुम बताओ तुम हां कर रही हो या ना कर रही हो।

बलवीर की आवाज में कोई विनती नजर नहीं आ रही थी शालिनी को। बलवीर तो शौक से पूछ रहा पूछ रहा था कि हां करो या ना करो और शालिनी को ना करने की तो हिम्मत ही नहीं रह गई थी ।

शालिनी अपने दांतो को पीसते हुए गुस्से में बोली - ठीक है मंजूर है मुझे ।

बलवीर - इतना गुस्सा क्यों दिखा रही है मेरी जान । चुदना ही तो है और बदले में तुझे भी तो मेरा लौड़ा मिलेगा अपनी इस भारी भारी गांड में लेने के लिए ।

शालिनी गुस्से से अपनी आंखें लाल कर चुकी थी उसने पूरी जान से अपनी मुट्ठियाँ भींच रखी थी और गुस्से से दातों को पीसते हुए एटीट्यूड में बोली- मुझे इन बेहूदी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है जो करना है जल्दी कर लो।

बलवीर - मेरी जान यह बेहूदगी तो अब झेलनी पड़ेगी और इतनी जल्दी करने की भी क्या पड़ी है । आराम से चुदना। आज तो आरती है हमारे साथ

आने ही वाली होगी वह भी पार्टी से तो आज तो तुझे चोद नहीं पाऊंगा मैं लेकिन घर चल कर मेरे कमरे में आना और रात भर तुझे चोदूंगा मैं । बोल अगर सौदा मंजूर है तो ।

शालिनी अभी भी अपने एटीट्यूड में ही थी गुस्से से अपने हाथों को झटक ते हुए बोली - ठीक है घर चल कर आपका काम हो जाएगा लेकिन तब तक हमारे बीच कोई ऐसी बात नहीं है होगी ।

बलवीर को शालिनी की इस बात पर गुस्सा आ गया उसने सोचा कि उसका सारा चिट्ठा तो मैं खोल चुका हूं लेकिन फिर भी यह मुझे घमंड दिखा रही है। इसको अभी लाइन पर लाता हूं ।

ऐसा सोचते हुए राकेश अपना फोन हाथ में लेते हुए बोला - ठीक है शालिनी तुम अपने एटीट्यूड में ही रहो देखो मैं भी क्या करता हूं । मैं अभी भैया को फोन लगाता हूं और मैं सब कुछ बता रहा हूं । मुझे नहीं करना तुम्हारे साथ कोई सौदा ।

ऐसा कहकर धर्मवीर का नंबर मिलाने लगा बलवीर अपने मोबाइल में ।

यह देख कर तो शालिनी के पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गई ।

उसने जल्दी से बलबीर की तरफ देखकर बोला - नहीं नहीं ऐसा मत करना। मैं तैयार हूं मैंने कब मना किया है तुमको ।

बलवीर अपना मोबाइल सोफे पर रखते हुए- तो इतनी देर से किस चीज का एटीट्यूड दिखा रही है मुझे । जो तुझे बोल दिया कि तुझे चोदना है तो तुझे नहीं पता कैसे चोदा जाता है । तो इस तरह एटीट्यूट दिखाएगी तू तो मुझे तेरा यह सौदा नहीं मानना। मैं भैया को बता दूंगा और पुलिस को भी बता दूंगा। अगर तुझे मेरी बात मंजूर है तो बिना किसी घमंड के बोल ।

शालिनी अब मजबूर हो गई थी पूरी तरह से । उसके सामने कोई ऑप्शन ही नहीं बचा था। वह जमीन की तरफ देखते हुए बोली- मुझे आप का सौदा मंजूर है ।

बलवीर- ठीक है तो फिर मेरे पास आओ ।

शालिनी धीरे धीरे चलती हुई चलती बलवीर के पास आई ।

बलवीर सोफे पर बैठा था शालिनी बलवीर के सामने आकर खड़ी हो गई।

बलवीर - ऐसे क्या खड़ी है अपना चेहरा मेरे चेहरे के करीब ला ।

शालिनी ने झुक कर अपना चेहरा बलवीर के चेहरे के पास किया कि तभी अचानक बलबीर ने अपने भारी भरकम हाथ से शालिनी के दोनों गालों पर एक एक थप्पड़ मारा । थप्पड़ इतना तेज था कि शालिनी गिरने से बची । शालिनि के बाल जो खुले हुए थे वह उड़कर उसके चेहरे पर आ गए।

इतना तेज थप्पड़ मारा था बलवीर ने ।

थप्पड़ मारकर बलवीर बोला - अब बता कैसा लगा तूने भी मुझे ऐसे ही थप्पड़ मारा था ना । अब पता लगा ना जब थप्पड़ लगता है तो कैसा लगता है । मुझे भी ऐसा ही लगा था । अब जो तूने मेरे चेहरे पर थूका है उसे चाट कर साफ कर ।

शालिनी की हालत अब शब्दों में बयां नहीं की जा सकती दोस्तों ।

शालिनी बलवीर के चेहरे को देख ही रही थी ।

बलवीर के चेहरे पर शालिनी ने जो थूका था वह उसके गालों से होते हुए उसके होठों तक आ गया था और उसे चाट कर साफ़ करने को बोला था बलवीर ने।

शालिनी बलवीर के चेहरे को देख ही रही थी बलवीर फिर रौबदार आवाज में बोला - आवाज नहीं आई क्या तुझे । मैंने बोला है जो तूने मेरे मुंह पर थूका है उसे चाट कर साफ़ कर । और यह बातें मैं बार-बार नहीं कहूंगा याद रखना ।

मैं तेरा नौकर नहीं हूं अगर इस बार कोई भी बात मानने में देर की तो समझ लेना क्योंकि मैं तेरी एक नहीं सुनूंगा । चल चाटकर साफ कर मेरा मुंह ।

शालिनी ने जैसे ही यह सुना उसने देर करना उचित नहीं समझा और वह धर्मवीर के चेहरे पर झुक गयी । दोनों की सांसें एक दूसरों की सांसो से मिल गई । दोनों की आंखें मिल गई एक दूसरे की आंखों से ।

तभी शालिनी ने अपनी जीभ निकाली और अपनी आंखें बंद कर लीं।





अपनी आंखें बंद करके शालिनी ने अपनी जीभ से बलवीर के चेहरे को चाटना को चाटना शुरू किया।

शालिनी ने अपनी जीभ से चाटकर बलवीर के गाल को साफ कर दिया और बलवीर के होठों पर भी जीभ से चाटकर लगा थूक साफ कर दिया और फिर खड़ी हो गई ।





बलवीर - मैंने तुझे खड़ी होने को कहा जो तू खड़ी हो गई । साली तूने मेरे मुंह पर थूका था मैं भी तेरे मुंह पर थूकुंगा । चल अपना चेहरा मेरे चेहरे के पास ला।

शालिनि अब कुछ बोलने की हालत में नहीं थी शालिनी ने अपना मुंह बलवीर के मुंह पर झुका दिया ।

बलवीर ने अपने हाथों से शालिनी के चेहरे पर से बालों को हटाया और बालों को हाथ से पकड़के पीछे की तरफ पकड़ लिया ।

शालिनी ने अपनी आंखें बंद कर लीं ।

दोस्तों शालिनी बहुत खूबसूरत लड़की थी और इस तरह की खूबसूरत लड़की इस तरह जींस में अपने कूल्हों को फंसा कर अपना चेहरा पास लाकर आंखें बंद कर ले तो आपका भी ईमान डोल जाएगा ।

ऐसी हालत ही बलवीर की थी ।

एक फोन कॉल की वजह से शालिनी जैसी गदरायी हुई भतीजी अपने मुंह पर थूकवाने के लिए झुकी हुई थी ।

बलवीर बोला- मैं तभी थूकूंगा जब तू अपनी जुबान से बोलेगी कि चाचा जी अपनी बेटी के मुंह पर थूक दो ।





अब तो शालिनी की इतनी ज्यादा जलालत की थी बलवीर ने कि शालिनी को भी शर्म आने लगी थी ।

शालिनी अपनी आंखों को बंद किए हुए धीरे से बोली - अब थूक भी दीजिए ना अपनई भतीजी के मुंह पर ।

बलबीर ने अपने मुंह में थूक इकट्ठा किया और शालिनी के मुंह पर थूक दिया।

बलबीर ने ज्यादा थूका था इसलिए शालिनी के दोनों गालों पर होठों पर और आंखों पर बलवीर का थूक फैल गया।

थूक में सना हुआ शालिनी का चेहरा बड़ा ही मादक लग रहा था बलवीर को।





बलवीर बोला - अब बोल चाचा जी मेरे भी चेहरे को चाट कर साफ़ कर दीजिए ।

शालिनी ने अपनी आंखें अपनी आंखें बंद किए हुए बोला - चाचा जी अपनी बेटी के चेहरे से यह थूक तो साफ कीजिए जो आपने थूका है ।





बलबीर ने अपनी जीभ बाहर निकली और शालिनि के चेहरे को चाटना शुरू कर दिया। पूरे चेहरे पर से थूक को चाट कर शालिनि के होठों पर जीभ फिराने लगा बलवीर ।

बलवीर - अच्छा दिखा तो दे कैसी दिखती है अंदर से मेरी भतीजी ।

अपनी चूत किस तरह सजा कर रखी है । अपने इस मोटे पिछवाड़े को खोल कर तो दिखा । मैं भी तो देखूं कैसी दिखती है अंदर से ।

शालिनी ने जैसे ही यह सुना उसने सोचा अगर देर की तो बलवीर फोन कर देगा और मेरा सौदा ठुकरा देगा । शालिनी ने जल्दी से बलवीर की तरफ अपनी पीठ की और जींस का हुक खोलने लगी ।

शालिनी ने अपनी जींस का हुक खोल दिया और दोनों साइड में अपने अंगूठे को फंसाकर अपनी जींस उतारने लगी । इतनी टाइट थी जीन्स कि उसकी गांड से नीचे की तरफ सरक ही नहीं रही थी ।

शालिनी ने जान लगाकर अपनी जींस अपने चूतड़ों से नीचे की ।





जैसे ही जींस नीचे हुई शालिनी के चौड़े चौड़े चूतड़ उछल कर बाहर आ गए।

पेंटी तो दिखी ही नहीं रही थी चूतड़ों के बीच में गायब हो गई थी ।

बलवीर में अपने दोनों हाथ चूतड़ों पर रखें और हल्के हल्के दबाने लगा दबाने लगा फिर चूतड़ों पर पर एक थप्पड़ लगाया और बोला।

बलवीर - मेरी भतीजी ने गांड तो अच्छी खासी बना रखी है। शालिनी तुम्हारी गांड तो लड़कियों की तरह नहीं बल्कि औरतों की तरह चौड़ी है फिर बलवीर ने एक और थप्पड़ उसकी गांड पर लगाया ।





थप्पड़ लगते ही शालिनि के गोल गोल चूतड़ हिलने लगते और शालिनि के मुंह से आउच निकलता

अब बलवीर ने कहा- घूम मेरी तरफ ।

शालिनि के लिए यह बेहद शर्म वाली बात थी क्योंकि बलवीर उसे उसकी चूत देखने की बात कर रहा था लेकिन शालिनी ने अपनी आंखें बंद अपनी आंखें बंद बंद किए हुए बलवीर की तरफ घूम गई ।

बलवीर के तो होश ही उड़ गए शालिनी को देखकर देखकर क्योंकि चूत तो उसे दिख ही ही ही नहीं रही थी उसे तो काली काली झांटे दिख रही थी जिन्होंने चूत को छुपा रखा था। गोरी गोरी मोटी मोटी जांघों के बीच में काली झांटें शालिनी की मादकता में चार चांद लगा रही है ।





अब बलवीर ने शालिनी की जींस को को और नीचे घुटनों तक करना चाहा लेकिन जींस जांघों में बुरी तरह फंसी हुई थी ।

बलवीर ने थोड़ा सा जोर लगा कर थोड़ा सा जोर लगा कर जीन्स नीचे करदी ।

अब बलवीर शालिनि के बिल्कुल सामने सोफे पर बैठा था और शालिनी खड़ी थी खड़ी थी





बलवीर ने अपने दोनों हाथ शालिनी की गांड पर रखें पर रखें गांड पर रखें पर रखें और शालिनी को अपनी तरफ खींचा ।

जैसे ही बलवीर ने अपनी तरफ खींचा तो शालिनी की चूत बलवीर के बिल्कुल मुंह के सामने आ गई गई सामने आ गई गई के सामने आ गई गई सामने आ गई ।

बलवीर बोला- अपनी आंखें खोल खोल ।

शालिनी ने धीरे-धीरे अपनी आंखे खोलीं तो बलवीर बिल्कुल बिल्कुल उसके सामने बैठा था और उसकी आंखों में झांक रहा था ।

फिर बलवीर बोला बोला - अपनी आंखें खोल कर कर कर देख मुझे ।

शालिनी बलवीर के चेहरे को देखने लगी ।

अब बलवीर ने दोबारा से सालीनी की चूत को निहारा और उसके चूतड़ों को हाथों से मसलते हुए अपनी नाक शालिनी की चूत चूत पर लगा दी। बलवीर की पूरी नाक शालिनि की झांटों में घुस गई ।

शालिनि देख रही थी बलवीर का चेहरा अपनी चूत पर लगे हुए।

बलवीर ने अपनी नाक झांटों में घुसा कर एक लंबी सांस खींची और उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारते हुए बोला- चुदने लायक है बिल्कुल । तेरी चूत की खुशबू बता रही है कि तू मेरा लंड आराम से लील लेगी ।

चल बोल अब चाचा जी मेरी चूत को सूंघ लो ।

शालिनी गुस्से से बोली - चाचा जी मेरी चूत को सूंघ लो ।

बलवीर ने दोबारा से अपनी नाक शालिनि की चूत में घुसा दी और फिर लंबी लंबी सांसे लंबी सांसे खींचने लगा और गांड पर थप्पड़ मार कर बोला - तेरा यह गुस्सा लोड़े के नीचे आकर खत्म हो जाएगा खत्म हो जाएगा क्योंकि तेरी चूत की महक बता रही है की चोदने में तू बड़ा मजा देगी ।

बलवीर बोल ही रहा था कि तभी गेट पर दस्तक के साथ आरती की तेज आवाज आई- भैया सो गए क्या ।

बलवीर शालिनी के कूल्हों पर थप्पड़ मारता हुआ बोला- चल तुझे अब मैं मैं घर चल कर ही चोदूंगा। तब तक बचा ले अपनी चूत को फिर तो इसमें अपने लंड से बीज डाल दूंगा मैं । चल बहन-की-लौड़ी दरवाजा खोल और ऐसा बोल कर बलवीर ने शालिनि की गांड पर लात मारी ।

दरवाजे की तरफ चलदी शालिनी लात खा करम

दरवाजे के पास जाकर शालिनी ने जल्दी से अपनी जींस पहनी और गेट खोला ।

आरती अंदर आते हुए आते हुए- भैया आप अभी तक सोए नहीं । पार्टी में तो आज बहुत मजा आया।





बलवीर - चलो तुमने तो पार्टी कर ली । हम लोग भी कल मिलकर पार्टी करते हैं ।

आरती - हां हां भैया क्यों नहीं .. लेकिन भैया शालिनी क्यों चुप चुप लग रही है ।

शालिनी अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए- बुआ जी सर में दर्द हो रहा था इसलिए मैं आराम कर रही थी और भैया भी अपना अपना अपने लैपटॉप पर काम कर रहे थे। इस वजह से मैं लेटे लेटे बोर हो रही थी ।

आरती- अच्छा कोई बात नहीं अब मैं आ गयी अब हम लोग गपशप गपशप करेंगे।

दोस्तों रात के 11:00 बजे तक आरती और शालिनी ने टीवी टीवी देखा और फिर सोने लगे लेकिन शालिनी के लिए तो जैसे समय गुजर ही नहीं रहा था था।

शालिनी लेटे-लेटे सोचने लगी कि अब क्या होगा ? चाचा तो बड़ा शातिर है। मेरी वीडियो भी रख ली और अब यह जब मुझे चाहेगा तब चोदेगा । मैं क्या करूं कि मैं इसके इसके चंगुल से निकल सकूं।

ऐसा सोच ही रही थी शालिनी और सोचते-सोचते सो गई गई ।


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दोस्तों कहानी कैसी चल रही है मुझे बताना जरूर साथ देने देने के लिए दिल के लिए दिल देने के लिए दिल के लिए दिल से धन्यवाद ।

आपका अपना - रचित ।


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I know guys u r very disappointed due to no response from my side. I understand but how can I explain about the issue, I don't know..

मैं आपसे कोई झूट नही बोलूंगा की मेरा accident हो गया या मैं hospitalized हूं । ऐसा कुछ नही है । I'm well. Reality ये है कि मैंने अपनी job switch की है जिस वजह से मुझे time नही मिल पा रहा । new job है इस वजह से एक भी meeting miss नही कर सकता अभी । so it's first week . Don't worry as soon as possible I'll post mega update .
 
Update - 29.

Hi दोस्तों । माफी चाहता हूं काफी इंतजार कराया । छोटा भाई समझकर माफ करना और इस update का लुफ्त और आनंद लेना ।

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अगले दिन शालिनि , आरती और बलवीर दिन में खूब जगहों पर घूमे । ढेर सारी शॉपिंग की उन्होंने ।

बलवीर ने आरती के सामने ऐसी कोई भी प्रितिक्रिया नही दी जिससे आरती को शक हो कि बलवीर और उसकी भतीजी शालिनि के बीच कोई खिचड़ी पक रही है । लेकिन अंदर ही अंदर बलवीर सोच में डूबा था कि शालिनि ने आखिर अपने भाई को क्यों मारा , इसके पीछे क्या वजह है ।

उधर शालिनि भी सोचों में डूबी हुई थी लेकिन वो ये सोच रही थी कि आखिर बलवीर को कैसे रास्ते से हटाया जाए ।

हां दोस्तो शालिनि अपने चाचा बलवीर को भी अपने भाई राकेश की तरह भगवान को प्यारा करने की योजना पर मन ही मन मे मंथन करने लगी थी ।

डिनर करने के बाद सब सोने की तैयारी कर रहे थे ।

आरती अपने मोबाइल में घुसी पड़ी थी क्योंकि वो सलमान से चैटिंग कर रही थी मैसेज द्वारा ।

शालिनि लैपटॉप में कोई गेम खेल रही थी ।

बलवीर अपने लैपटॉप में कुछ ऑफिसियल वर्क कर रहा था ।

तकरीबन आधे घंटे बाद आरती वाशरूम जाने के लिए उठी तभी बलवीर की नजर आरती के चहरे पर पड़ी ।

बलवीर को कुछ अटपटा सा लगा क्योंकि आरती मुस्कुराती हुई मोबाइल हाथ मे लेकर उठी थी ।

बलवीर सोच रहा था कि आखिर ऐसी क्या बात हो सकती है जो आरती का चेहरा इतना खिला हुआ है । क्या आरती का कोई बॉयफ्रेंड है ।

--- नही नही आती ऐसी नही है । और वैसे भी मेरी आरती बहन विधवा है ।

अपने दिमाग को झटकते हुए बलवीर ने सोचा ।

------ वक्त था रात के 1 बजे --------

सब सो चुके थे । तभी बलवीर की आंखे खुली । दोस्तो बलवीर की आंखे कोई नींद से नही खुली थी बल्कि बलवीर ने आंखे बिल्कुल ऐसे खोली थी जैसे कोई आंख बंद करके सोने का बहाना कर रहा हो और फिर अचानक से अपनी आंखों को खोल ले । जैसे मूवी में जब विलेन मरने का नाटक करता है और फिर एकदम से आंखे खोल लेता है, बिल्कुल इसी तरह आंखे खोली थी बलवीर सिंह ने ।

बलवीर ने फिर एक नजर आरती और शालिनि पर डाली । दोनों सो रही थीं गहरी नींद में ।

बलवीर धीरे से आरती के पास आया और कुछ ढूंढने लगा । तभी उसने तकिया के नीचे हाथ डाला तो उसके हाथ मे आरती का मोबाइल आगया ।

बलवीर ने मोबाइल हाथ मे लिया और चुपके से वापस अपनी जगह पर लेट गया । बलवीर मोबाइल का लॉक खोलने की कोशिश करने लगा । कई पैटर्न डालने के बाद भी जब लॉक नही खुला तो हताश सा हो गया बलवीर । फिर अचानक उसके मन मे एक आईडिया आया और उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान फैल गयी ।

बलवीर धीरे से उठकर दोबारा आरती के पास गया । उसने धीरे से मोबाइल के फिंगरप्रिंट सेंसर को आरती की उंगली से लगाया ,

बलवीर फिर उदास हो गया क्योंकि मोबाइल नही खुला ।

बलवीर ने फिर से दूसरी उंगली से लगाया तब भी नही खुला ।

फिर बलवीर ने लास्ट वाली सबसे छोटी उंगली से लगाया अचानक से मोबाइल अनलॉक हो गया ।

बलवीर का चेहरा ख़ुसी और प्रसन्नता के भावों से भर गया ।

बलवीर फिर वापस अपनी जगह पर आकर लेट गया ।

बलवीर ने सबसे पहले गैलरी खोली उसे कुछ नही मिला, बस आरती के फोटोज और कुछ वीडियो पड़ी हुई थीं । फिर उसने कॉल लॉग खोला उसे तब भी कुछ नही मिला ।

फिर उसने व्हाट्सएप खोला उसे वहाँ भी कुछ नही मिला ।

फिर बलवीर के मन मे पता नही क्या आया उसने मोबाइल का इनबॉक्स यानी मैसेज एप्प खोल लिया ।

बलवीर की नजर एक नाम पर पड़ी जो था - सलमान ।

बलवीर ने मैसेज खोली तो उसकी आंखें खुली की खुली रह गयीं , क्योंकि सलमान के साथ एक लंबी कन्वर्सेशन थी उसमे ।

बलवीर आज की चैट पढ़ने लगा ।

सलमान - hi

आरती - hi

सलमान- कैसी हो आरती जी आप । लगता है कि आप हमें भूल गयी हो ।

आरती - ऐसा कुछ नही ह सल्लू मियां । मैंने बताया था ना आपको भईया के साथ घूमने आई हूँ ।

सलमान - हम्म बताया था तुमने । और बताओ वापस कब आरही हो ।

आरती - एक दो दिन और लगेंगे अभी । वैसे तुमको क्या करना है मुझे बुलाकर ।

सलमान - करना तो कुछ नही है बस मिलने का मन था आपसे ।

आरती - ना बाबा ना । मुझे नही मिलना आपसे ।

सलमान - क्यों ।

आरती - क्योंकि मुझे डर लगता है आपसे ।

सलमान- डर hahaha और वो भी तुम्हे ।

आरती - इसमे हसने वाली क्या बात है ?

सलमान- रहने दो ,अब नहीं बता रहा वरना तुम फिर बोलोगी की मैं बदतमीजी करता हूँ ।

आरती - बदतमीजी में तो आपने पीएचडी की हुई है , तो बदतमीजी करने से आप वैसे भी बाज नही आते । पर मैं ये जानना चाहती हूं कि मुझे तुमसे मिलने में डर क्यों नही लग सकता ।

सलमान - आरती जी वो इसलिए क्योंकि अगर तुम्हारे जैसे फिगर की औरत भी डरने लगी तो बाकी स्लिम लड़कियों का क्या होगा ।





आरती - अब डर से फिगर का क्या कनेक्शन सलमान जी ।

सलमान - कनेक्शन है तभी तो बोला है आरती जी । तुम क्या चाहती हो कि तुमसे कोई दुबला पतला इंसान मिले ।

आरती - नही ऐसा नही चाहती मैं ।

सलमान - तो बताओ फिर क्या चाहती हो ?

आरती की तरफ से फिर 3 मिनट तक कोई रिप्लाई नही किया गया । फिर कुछ देर बाद आरती ने रिप्लाई किया । शायद आरती हिम्मत जुटा रही होगी कुछ बोलने के लिए । लेकिन आरती तो अपनी भावनाएं अपने एक दोस्त सलमान के सामने रख रही थी । आरती को क्या पता था कि सलमान कोई और नही बल्कि उसका बड़ा भाई धर्मवीर ही सलमान बना बैठा है ।

आरती - दुबला पतला क्यों चाहूंगी मैं तो हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त दोस्त चाहती हूं ।

सलमान - क्यों चाहती हो हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त दोस्त।

आरती - ये भी कोई पूछने वाली बात है ।

सलमान - क्यों मुझसे पूछो की तुम क्यों चाहती हो हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त दोस्त । मैं बता सकता हूँ ।

आरती - अच्छा साहब । चलो तुम ही बताओ ।

सलमान - फिर ये मत कहना कि बदतमीजी पर उतर आए ।

आरती - अच्छा बाबा नही कहूंगी ।

सलमान - तो सुनो , तुम इसलिए चाहती हो हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त दोस्त ताकि वो तुम्हे अच्छे से संतुष्ट कर सके । दुबले पतले मर्द के बसकी बात नही है तुम जैसी घोड़ी की सवारी करना ।

आरती - shutup .... मैं तुम्हे घोड़ी नजर आती हूं क्या ?

सलमान - और नही तो क्या । तुम जैसी घोड़ी को लगाम डालने के लिए मेरे जैसे हट्टा-कट्टा तगड़ा तंदरुस्त मर्द की ही जरूरत पड़ेगी ।





आरती - अच्छा जी आपको तो बहुत पता है । और फिर तो तुम भी घोड़ा हो ।

सलमान - हां मैं तू हूं घोड़ा कब मना किया मैंने ।

आरती - अच्छा घोड़े जी ।

सलमान - हम्म घोड़ी जी । अब बताओ ना कब मिल रही हो ।

आरती - जब आप चाहो ।

सलमान - संडे को फ्री हो ।

आरती - ओके डन ।

सलमान - ठीक है तो मिलते है संडे दोपहर 12 बजे ।

आरती - दोपहर को नही शाम को । एक रात के लिए।

सलमान - ओह मेरी घोड़ी चाहती है कि रात भर मेरा बाजा बजे ।

आरती - छी कितने गंदे हो तुम ।

सलमान - तो रात में क्या पूजा पाठ करोगी ।

आरती - तुमसे कोई नही जीत सकता ।

सलमान - अच्छा बताओ क्या करोगी रात को ।

आरती - मुझे नही पता ।

सलमान - तुम्हे मेरी कसम है अगर तुमने अपने दिल की बात नही बोली तो ।

फिर आरती की तरफ से फिर 3 मिनट तक कोई रिप्लाई नही किया गया । फिर कुछ देर बाद आरती ने रिप्लाई किया । शायद आरती हिम्मत जुटा रही होगी कुछ बोलने के लिए ।

आरती - कसम मत दो मुझे ।

सलमान - बोला ना । अगर कुछ मानती ही तो दिल की बात बोलो । मेरी कसम है आपको ।

आरती - चुदने आऊंगी अपने घोड़े से रात भर के लिए ----- अब खुश ।

सलमान - haye तेरी चूत का भोसड़ा नही बनाया तो मैं भी सलमान नही ।

आरती - हट्ट गंदे इंसान । bye पगले ।

सलमान - bye मेरी चुदक्कड़ घोड़ी ।

आरती - ओके bye मेरे चोदू घोड़े ।

बलवीर की आंखे चौड़ी हो गयी यह कन्वर्सेशन पढ़कर । बलवीर ने जल्दी से सलमान का नंबर निकाला और अपने मोबाइल में सर्च मिशन के नाम से सेव कर लिया , और आरती का मोबाइल उसके तकिए के निचे रखकर वापस अपनी जगह पर आकर लेट गया ।

बलवीर की आंखों में नींद दूर दूर तक नही थी । वह सोच में डूबा हुआ था कि पहले तो उसकी भतीजी शालिनि एक शातिर और चालाक निकली और अब उसकी सगी बहन आरती जो एक विधवा है , वो भी no नो नो ---- ये क्या हो गया है मेरे परिवार को । अंदर ही अंदर क्या चल रहा है मेरे परिवार में । अगर आरती धर्मवीर भइया को बोलती तो क्या वो इसकी दूसरी शादी नही करा सकते थे । लेकिन आरती ने बोला क्यों नही । और अगर नही भी बोला तो ये किसी सलमान से इतनी गंदी बाते करने की क्या जरूरत है ।

मैं मानता हूं कि आरती की body की भी कुछ जरूरतें है लेकिन अगर वो बोलती तो क्या हम उसकी दूसरी शादी नही करते । इस तरह रंडपना करने की क्या जरूरत थी ।

क्या आरती जैसी संस्कारी विधवा के पीछे एक रंडी छुपी हुई है । नही ऐसा नही हो सकता । मैं अपनी बहन को किसी गैर इंसान के नीचे नही लेटने दूंगा ।

ये सब सोच ही रहा था बलवीर की तभी उसके दिमाग मे पता नही क्या आया बलवीर चुपचाप उठा और आरती के पास आकर आरती को देखने लगा ।

सुंदरता की मूरत लग रही थी बलवीर की छोटी बहन आरती इस वक्त ।

आंखे बंद थी चेहरे पर बालों की कुछ लटे बिखरी पड़ी थी ।

सीने पर सूट में फसे चूचे नीचे सपाट पेट । पेट से नीचे दोनों जांघो का फैलाव । बलवीर ने देखा कि आरती की जांघो का फैलाव कुछ ज्यादा ही है जिसका मतलब है कि उसकी बहन की जांघे खूब मोटी मोटी हैं । बलवीर का आरती को देखने का नजरिया बिल्कुल बदल गया । अब उसे आरती अपनी बहन नही बल्कि गदराई हुई एक प्यासी छिनाल नजर आरही थी ।





फिर बलवीर से जब रहा नही गया तो उसने आरती की जांघों पर से उसका सूट ऊपर की तरफ उठा दिया ।

सामने का नजारा देखकर तो बलवीर के लंड ने एक उछाल मारी और बलवीर का थूक उसके हलक में अटक गया । क्योंकि आरती ने नीचे तंग पजामी पहनी हुई थी और उसकी मोटी मोटी जांघे वास्तव में कितनी गदरायी हुई , कितनी मोटी लग रही थी । और दोनों जांघो के बीच मे चूत के पास कितना उठान था जैसे कोई वी शेप का पकोड़ा रखा हो । बलवीर से अब इन्जार करना मुश्किल हो रहा था ।





बलवीर ने दो मिनट तक इस दृश्य से अपनी आंखें सेकी । फिर अचानक से उसने आरती के हाथ को पकड़कर हिलाया ।

आरती हड़बड़ाकर उठी आरती ने देखा तो बलवीर खड़ा हुआ था । आरती को कुछ समझ नही आया उसने जल्दी से अपना सूट ठीक किया । नाईट बल्ब के अंधेरे में बलवीर का चेहरा भी साफ नही दिख रहा था आरती को ।

आरती ने सवालिया नजरों से बलवीर की तरफ देखा ।

बलवीर ने अपने होठों पर उंगली रखी और आरती के कान के पास अपना मुह लाकर धीरे से बोला - जरा एक मिनट के लिए बाहर आओ ।

आरती को अब तक कुछ समझ नही आया था । आरती चुपके से उठी और चली गयी बलवीर के पीछे पीछे ।

बलवीर बाहर गैलरी पर आकर रुक गया । आरती भी बाहर आकर रुक गयी ।

आरती (चहकती हुई आवाज में भोली सी सूरत बनाकर )- क्या हुआ भईया इतनी रात में सब ठीक तो है ना ।

बलवीर - आरती मैं सोच रहा हूँ तुम्हारी शादी कर देनी चाहिए ।

आरती ( इसबार गुस्से वाला मुह बनाकर ) - भइया आधी रात को अपने मुझे ये बात करने के लिये उठाया है । दिमाग तो ठीक है आपका । और मैंने पहले ही कहा है कि मुझे नही करनी शादी ।

बलवीर - तो चाहती क्या हो तुम आरती । जिंदगी भर बिना शादी के ही रहोगी क्या यूं विधवा बनकर ।

आरती - भईया ये क्या हो गया है आपको । क्यों ऐसी अटपटी बातें कर रहे हैं । और हां मैं अपनी बाकी की जिंदगी अपने पति की यादों में गुजरना चाहती हूं ।

बलवीर - अच्छा चली जैसी आपकी मर्जी ।

आरती ने सोचा हो सकता है किसी ने भईया को ज्यादा force किया हो या भईया को अभी कुछ पता चला हो । ऐसा सोचते हुए आरती बोली - वैसे कौन है वो जिससे आप मेरी शादी करना चाहते है ।

बलवीर - मैं खुद हूँ वो ।

ये सुनते ही आरती हैरान रह गयी । वो गुस्से से एकटक बलवीर को देखने लगी । तभी ऊंची आवाज में बोली ।

आरती - छी कितने गंदे इंसान हो आप । मैं सोच भी नही सकती थी । मैं अभी धर्मवीर भईया को फोन लगाती हूं देखना वो आपको जिंदा नही छोड़ेंगे । और वैसे भी कोई हक नही है इतनी गंदी नजर वालों को जीने का ।

आरती जैसे ही मुड़ी तुरंत बलवीर बोला ।

बलवीर - हां धर्मवीर भैया को ये भी बता देना कि मैं सलमान से चुदने का वादा कर चुकी हूं । यही है ना सलमान का नम्बर, अपने मोबाइल में सलमान का नम्बर दिखाते हुए बलवीर बोला ।

इतना सुनते ही आरती खड़ी की खड़ी रह गयी । उसे यह समझ नहीं आया की बलवीर को उसके और सलमान के बारे में कैसे पता चला , जबकि आरती का मोबाइल भी उसी जगह रखा था जहां वो रखकर सोई थी । आरती को कुछ भी समझ नही आरहा था । आरती भोलेपन का नाटक करते हुए बोली जैसे उसे कुछ पता ही ना हो ।

आरती - क-कौन सलमान । मैं किसी सलमान को नही जानती ।

अब बलवीर के लिए ये एक उल्टा पासा फेंका आरती ने ।

बलवीर ने मन ही मन सोचा यदि मैंने इसको ये बताया कि तेरा मोबाइल चेक किया है मैंने तो ये मुझे हल्के में लेगी ।

इसलिए बलवीर ने अपना दिमाग चलाते हुए कहा- वाह अब तुम किसी सलमान को जानती नहीं हो । तुम क्या समझती हो मैं पागल हूं । जिस दिन सलमान ने तुमसे पहली बार बात की थी मुझे उसी दिन से पता है, और अब यह बात मैं धर्मवीर भैया को बताऊंगा सबूत के साथ। तुम नहीं जानती हो ना किसी सलमान को, कोई बात नहीं । जाकर सो जाओ ।

इतना कहकर बलवीर ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और सिगरेट पीने लगा ।

आरती के लिए अब आगे कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति हो गई थी , क्योंकि आरती जानती थी अगर बलबीर ने धर्मवीर भैया को बताया तो धर्मवीर अपने गुस्से में कुछ भी कर सकता है । जो धर्मवीर उसकी इतनी इज्जत करता है वही धर्मवीर भैया उसे घर से निकाल देंगे। इतना सोचते ही कांप गई आरती ।

आरती को क्या पता था कि सलमान कोई और नहीं धर्मवीर ही है । वह तो बस फंस चुकी थी और बलवीर उसे ब्लैकमेल करने की पूरी कोशिश कर रहा था । आरती 1 मिनट तक वहीं चुपचाप चुपचाप खड़ी रही । 1 मिनट बाद उसके मुंह से निकला।

आरती - तुम क्या चाहते हो ।

बलवीर - मैं चाहता हूं यह जानना कि तुमने ऐसा क्यों किया ।

आरती - मुझे इस बारे में कुछ बात नहीं करनी। मुझे कुछ नहीं पता ।

बलवीर - तो मैंने कब कहा तुम्हें पता है । मैंने तो कह दिया पहले ही जाकर सो जाओ । धर्मवीर भैया जब पूछेंगे तब तुम्हें सब कुछ पता होगा। चलो जाओ सो जाओ ।

इतना बोल कर बलबीर फिर सिगरेट पीने में मगन हो गया ।

आरती - भैया मुझसे गलती हो गई मुझे माफ कर दो । प्लीज धर्मवीर भैया को इसबारे में कुछ मत बताना।

बलवीर - आ गई ना लाइन पर । तूने क्या सोचा था मैं तेरी खुशामद करूंगा। मैं क्यों करूं खुशामद । खुशामद तो तुझे करनी पड़ेगी मेरी। ठीक है नहीं बताऊंगा लेकिन बदले में मुझे कुछ चाहिए ।

आरती- बोलो क्या चाहिए तुम्हें ।

बलवीर - यहां से जाकर सीधे बाथरूम में चलो मैं वहीं आता हूं ।

आरती इतना सुनकर सवालिया नजरों से बलवीर की तरफ देखने लगी और बोली - बाथरूम में क्या बात करनी है आपको । यहीं पर कर लो ।

बलबीर - यहां पर बाहर से कोई हमें खड़े हुए देख सकता है और हर कोई यही सोचेगा यह लोग पता नहीं इस वक्त क्या बात कर रहे हैं । इसलिए बाथरूम में बात करनी है ।

अब आरती को बलवीर की बातें अटपटी लगने लगी थी । उसने फिर बलवीर की तरफ सवालिया नजरों से देखा और बोला ।

आरती - तो बाथरूम में अब बात ही क्या करनी है ।

बलवीर थोड़ा सा गुस्से में- अब तू मुझसे सुनना ही चाहती है तो सुन । तुझे चेक करना है , मैं भी तो देखूं मेरी जो बहन इतनी सीधी साधी और संस्कारी बनती है आखिर वह दिखती कैसी है। तेरी गांड की इस चौड़ाई को नाप कर देखना ही पड़ेगा ।





बलवीर के मुंह से ऐसी खुल्लम-खुल्ला बातें सुनकर आरती डर गई , साथ में शर्म से भी दोहरी हो गई ।

आरती - जरा तमीज से बात कीजिए ।

बलवीर - तमीज से और वह भी तुझसे जो दूसरों के नीचे लेटने के लिए मरी जा रही है । पता नहीं किस सलमान से अपनी चूत को ठंडा करना चाहती है। अब अगर एक भी शब्द फालतू बोली तो इसी वक्त अपना बैग उठाकर धर्मवीर भैया के पास चला जाऊंगा, फिर अपनी मां चुदाती रहना, इसलिए अगर चाहती है कि सब कुछ ठीक रहे तो चुपचाप बाथरूम में मिल । मैं सिगरेट खत्म करके आता हूं ।

अब आरती के पास कोई ऑप्शन नहीं बचा था। आरती 1 मिनट तक चुप खड़ी रही फिर गुस्से से कमरे में घुस गई ।

अपनी सिगरेट खत्म करने के बाद बलवीर कमरे में आया तो शालिनी सोई हुई थी और आरती बेड पर नहीं थी । बलवीर समझ गया की आरती बाथरूम में पहुंच गई है ।

बलवीर ने बाथरूम का दरवाजा देखा जो लॉक नहीं था । बलवीर बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर घुसा और दरवाजा लॉक कर दिया।

दोस्तों बाथरूम बहुत बड़ा था लेकिन उसमें अंधेरा ही अंधेरा था क्योंकि आरती ने लाइट ऑन नहीं की थी । बलवीर ने बाथरूम की लाइट ऑन की की तो आरती बाथरूम की दीवार के पास दरवाजे की तरफ पीठ करके खड़ी थी बिल्कुल चुपचाप ।

बलवीर धीरे से आरती के पास गया और उसकी गांड पर हाथ फेरने लगा आरती को जैसे झटका सा लगा ।

आरती कुछ नहीं बोली चुपचाप खड़ी रही लेकिन बलवीर कहां चुप रहने वाला था ।

बलवीर - गांड तो तूने अच्छी खासी रौंदने लायक बना रखी है। तुझ पर चढ़ना मामूली बात नहीं है। तू तो पूरा निचोड़ देगी ।





आरती ने अपनी आंखें खोली और तिरछी नजर से आंखों में गुस्सा भरते हुए बलवीर को घूरा । लेकिन बलवीर ने तभी बदले में बदले मुस्कुराते हुए आरती की गांड में पजामी के ऊपर से ही उंगली घुसा दी ।

जो आरती अभी गुस्से से बलवीर को घूर रही थी उसका मुंह हल्का सा खुला और हल्की सी सिसकारी निकल गई --- आह ,

अपने सगे भाई की उंगली अपने चूतड़ों के बीच से होते हुए अपनी गांड के छेद पर महसूस की आरती ने।

बलवीर- कितने गहरे चूतड़ हैं तेरे । कैसे बनाए हैं तूने इतने गहरे चूतड़। तेरी तो चूत भी गहरी खाई में होगी। तेरे जैसी को तो संतुष्ट करने के लिए दो-तीन दिन भी कम पड़ेंगे । चल अपने सूट को ऊपर उठा ।

आरती ने अपना सूट ऊपर नहीं उठाया चुपचाप खड़ी रही, तभी बलवीर का एक जोरदार चांटा उसकी गांड पर पड़ा ।

बलवीर - सुनाई नहीं दिया क्या या मुंह में लंड डालकर बताऊं कि सूट ऊपर कैसे उठाते हैं ।

अपनी भारी-भरकम गांड पर चांटा पड़ते ही आरती की गांड हिलने लगी ।शर्म से पानी पानी होकर होकर आरती ने अपनी हिलती हुई गांड पर अपने दोनों हाथ रख लिए, जिससे कि उसकी गांड हिलना बंद कर दे । चूतड़ तो हिलना बंद कर दिए लेकिन बलवीर कहां पीछे रहने वाला था ।

बलबीर ने आरती के बालों को पकड़ा और उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाते हुए उसकी आंखों में देखने लगा । आरती भी बलवीर को घूरे जा रही थी।

बलवीर- कब तक यह शर्म का चोला पहनकर रहेगी। उतार कर फेंक दे इस शर्म के चोले को । मुझे पता है तू लंड की बहुत प्यासी है और तू है कि शर्म ही नहीं छोड़ रही ।

आरती कुछ नहीं बोली बलवीर को घूरते रही ।

तभी बलवीर ने उसके चेहरे को अपनी तरफ को दबाते हुए अपने मोटे मोटे होठों से उसके होठों को भींच लिया ।

यह आरती के लिए बिल्कुल नया था । आरती और बलवीर दोनों की आंखें खुली हुई थी और दोनों एक दूसरे की आंखों में देखे जा रहे थे । तकरीबन 1 मिनट तक बलवीर ने अपने होठों में आरती के होठों को दबाए रखा और एक दूसरे को देखते रहे ।

जब आरती की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं मिला तो बलबीर ने अपने मुंह को और चौड़ा खोला और आरती के होठों को मुंह में भर कर चबाने लग गया । दोनों की सांसें एक दूसरे की सांसो से बुरी तरह टकरा रही थी ।

तकरीबन 1 मिनट तक आरती के होठों को चूसते हुए बलवीर आरती की आंखों में देखे जा रहा था ।

1 मिनट बाद आरती के बालों को पकड़े हुए बलवीर ने आरती के मुंह को पीछे की तरफ झटका जिससे कि बहुत ही तेजी से दोनों के मुंह एक दूसरे से अलग हो गए ।

दृश्य कुछ ऐसा हो गया था कमरे का की आरती बलवीर के सामने खड़ी हुई बलवीर की आंखों में घूरती हुई हांफ रही थी । दोनों की सांसें तेज चल रही थी । तभी बलवीर बोला ।

बलवीर - अब उठा अपने सूट को ऊपर चल ।

लेकिन आरती ने फिर भी कोई रिस्पांस नहीं दिया ना ही अपना सूट ऊपर उठाया ।

अब तो बलवीर को गुस्सा भी आने लगा बलवीर अपने मन में सोचने लगा कितनी ज्यादा हेकड़ी दिखा रही है । मेरे कहने का जैसे इस पर कुछ असर ही ना हो रहा हो । कितनी शरीफ बन रही है मेरे सामने। इसकी गांड की सारी मस्ती अभी झाड़ता हूं ।

बलवीर - तुझे सुनाई नहीं दे रहा ना। तू क्या समझती है कि तेरा सूट मैं ऊपर नहीं उठा सकता , जब मैं तेरे होठों को चूस सकता हूं , जब मैं तेरी गांड पर थप्पड़ मार सकता हूं, जब मैं तेरी गांड में उंगली कर सकता हूं , तो क्या मैं तेरा सूट नहीं उठा सकता । मैं तेरा सूट भी उठा सकता हूं लेकिन मैं नहीं उठाऊंगा क्योंकि अब मेरे सामने अपना सूट तू खुद उठाएगी और अगर तूने 1 मिनट के अंदर अपना सूट नहीं ऊपर किया , तो फिर दो काम होंगे या तो तुझे अभी कमरे में ले जाकर शालिनी के सामने ही नंगी करके पूरे कमरे में दौड़ा-दौड़ा कर चोदूंगा या फिर अपना बैग उठाकर सीधा धर्मवीर भैया के पास चला जाऊंगा । इनमें से जो मेरे मन में आया वह काम मैं करूँगा । अब फैसला तुझे करना है कि तुझे सूट ऊपर करना है या नहीं। ये ले मैं बैठ गया तेरे सामने ।

ऐसा कह कर बलवीर आरती के सामने घुटनों के बल बैठ गया और बलवीर का चेहरा आरती की जांघों के बिल्कुल सामने आ गया। बीच में था तो बस आरती का सूट । आरती अभी भी चुपचाप खड़ी थी तभी अपनी सोच से निकलकर आरती ने अपना चेहरा छत की तरफ उठा दिया और छत की तरफ देखते हुए अपनी आंखें बंद कर लीं जैसे भगवान से कोई गुहार लगा रही हो । 1 मिनट का समय होने वाला था कि तभी बलवीर की तरफ से कुछ हरकत महसूस हुई आरती समझ गई बलवीर अब अपना काम करने वाला है । तभी बिजली की फुर्ती से आरती ने गर्दन नीचे करके बलवीर की तरफ देखा और बोली ।

आरती - रुको क्या चाहते हो तुम कि तुम्हारी बहन तुम्हारे सामने अपना सूट ऊपर उठाये । जितनी गंदी जबान तुमने इस्तेमाल की है शायद ही दुनिया में कोई भाई अपनी बहन के सामने इतनी गंदी जुबान इस्तेमाल कर सकता है । लेकिन जब तुमने अपनी यह गंदी जबान इस्तेमाल कर ही दी है और तुम क्या समझते हो कि मुझे पता नहीं है कि तुम मेरा सूट ऊपर क्यों उठाना चाहते हो , तो यह तुम्हारी गलतफहमी है । मुझे पता है तुम मेरा सूट ऊपर इसलिए उठवाना चाहते हो ताकि तुम मेरी जांघों के बीच मेरी चूत को देख सको । अगर किस्मत को यही मंजूर है तो ले देख अपनी बहन की चूत ।





ऐसा कहकर आरती ने अपना सूट बिल्कुल अपना नाभि से ऊपर उठा दिया और बलवीर के आगे खड़ी हो गई ।

बलवीर को पहले तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन जैसे ही आरती ने सूट उठाया तो उसकी आंखें चुंधिया गई सामने का नजारा देखकर ।

पजामी में कसी हुई मोटी मोटी जांघें और उसके बीच चूत का हिस्सा जो कि काफी मोटा लग रहा था । और हल्का सा आरती का पेट के नीचे वाला पेड़ू भी उभरा हुआ था । बलबीर बहुत ही मंझा हुआ खिलाड़ी था । बलवीर समझ गया कि पेड़ू उन्हीं लड़कियों का उभरा हुआ होता है जिन की चूत बड़े और मोटे लोड़े की मांग करती है । बलवीर को आरती की मोटी मोटी जांघों को निहारते हुए जब 1 मिनट हो गई । तो उसने फुर्ती से अपने दोनों हाथों को आरती की गांड से लगाया और आरती को अपनी तरफ खींच लिया और अपना मुंह आरती की भारी भारी मोटी मोटी जांघो के बीच बिल्कुल चूत पर लगा दिया ।







कहानी आगे जारी रहेगी । दोस्तो बताना जरूर कहानी सही दिशा में जा रही है या नही ।

आपका अपना - Rachit
 
Update - 30

माफी चाहता हूं बहनों और भाइयों काफी समय बाद आया हूं पोस्ट करने । Im really sorry and i assure you , i will never repeat it again .

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पजामी में कसी हुई मोटी मोटी जांघें और उसके बीच चूत का हिस्सा जो कि काफी मोटा लग रहा था । और हल्का सा आरती का पेट के नीचे वाला पेड़ू भी उभरा हुआ था । बलबीर बहुत ही मंझा हुआ खिलाड़ी था । बलवीर समझ गया कि पेड़ू उन्हीं लड़कियों का उभरा हुआ होता है जिन की चूत बड़े और मोटे लोड़े की मांग करती है । बलवीर को आरती की मोटी मोटी जांघों को निहारते हुए जब 1 मिनट हो गई । तो उसने फुर्ती से अपने दोनों हाथों को आरती की गांड से लगाया और आरती को अपनी तरफ खींच लिया और अपना मुंह आरती की भारी भारी मोटी मोटी जांघो के बीच बिल्कुल चूत पर लगा दिया ।



******** अब आगे *******

चूत पर मुंह लगते ही आरती सिसिया उठी । उसका मुंह खुला का खुला रह गया । बलवीर अपनी नाक से आरती की चूत के दाने को सहलाने लगा जब आरती को बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसके मुंह से निकला।

आरती - भैया छोड़ दो मुझे, मैं आपके हाथ जोड़ती हूं ।

बलवीर बिना कुछ सुने उसकी चूत से खेले जा रहा था कभी वह अपनी नाक रगड़ता तो कभी होठों से उसकी चूत को चूम लेता ।

कुछ देर उसकी चूत से खेलने के बाद बलवीर खड़ा हुआ और आरती की आंखों में देखने लगा ।

आरती को बलवीर की लाल आंखों में वासना तैरती हुई साफ दिख रही थी । आरती तो बस बलवीर की आंखों में देख रही थी लेकिन तभी उसे एहसास हुआ कि बलवीर का हाथ उसकी चूत पर है और अपनी उंगलियों से आरती की चूत के दाने को टटोलना शुरू कर दिया।





बलवीर के इस तरह के हमले से आरती के अंदर एक जोश भर गया , लेकिन वो अपने बलवीर भैया के सामने शर्म से पानी पानी हो रही थी ।

तभी बलवीर ने आरती की चूत में अपनी उंगली उतार दी। बलवीर की उंगली गच्च से चूत में समा गई । बलवीर को ऐसा लगा जैसे उसकी उंगली चिकनी चूत में घुस गई हो।

उंगली को दो-तीन बार अंदर बाहर करने के बाद बलवीर उसकी पूरी चूत पर अपना हाथ घुमाने लगा और आरती सिसीया रही थी और ना ही कुछ बोल पा रही थी । आरती का तो बस मुंह खुला का खुला ही रह गया और यह देखकर बलवीर ने सीधा आरती के मुंह में थूक दिया। जैसे ही बलवीर का थूक आरती के मुंह में गया आरती ने तुरंत अपना मुंह बंद कर लिया ।





आरती ने शर्म से अपना मुंह बंद किया था लेकिन बलबीर ने इसका मतलब कुछ और ही निकाला।

बलबीर बोला- देखा कितनी गर्म है मेरी बहन। मेरा थूक मुंह में लेकर मुझे घूर रही है ।

आरती ने मुंह बंद किया हुआ था बलवीर उसे घूरे जा रहा था।

बलवीर ने भी आरती को घूरते हुए आरती की चूत में पूरी उंगली घुसा दी । जैसे ही आरती की चूत में उंगली घुसी आरती का मुंह फिर से खुल गया और जो बलवीर ने उसके में थूका था आरती ने उसे गटक लिया ।

जो बलवीर उसे घूरे जा रहा था जैसे ही उसने देखा कि उसकी बहन उसके थूक को बाहर भी थूक सकती थी लेकिन चूत में उंगली लेते ही मेरा थूक भी गटक लिया , यह तो बड़ी ही गर्म चीज है । बिस्तर की रांड बनने लायक है यह तो। साला वैसे किसी ने सही कहा है जो जितनी सीधी और संस्कारी दिखेगी वही लड़की या औरत से अंदर से भूखी कुतिया की तरह चुदासी रहेगी एक मोटे से लंड की जो उसे पटक पटक कर चोदे।





ऐसा सोचते हुए बालवीर आरती के पीछे आया और घुटने के बल बैठ गया । सामने थी तो आरती की मोटी गांड । चूतड़ों का फैलाव और उनका चौड़े होने के साथ गोल होना सच में कुदरत का कोई अनोखा ही करिश्मा था। अपनी विधवा बहन की गांड के पीछे बैठने का ख्याल दिमाग में आते ही बलवीर के लंड में आग सी लग गई । और उस आग में बलवीर का लंड ऐसे जलने लगा जैसे रॉकेट के उड़ने से पहले उसमें आग लगती है , ठीक वैसे ही बलवीर का लंड भी आग में जलकर अब रॉकेट की तरह उड़कर आरती की गांड में घुसने को तैयार था।

(( hahaha दोस्तों यह लाइन लिखते ही मुझे सच में हंसी आ गई । पता नहीं आप को हंसी आई होगी या नहीं आई होगी । शायद आप में से कुछ लोग कह रहे होंगे बड़ा ही चुतिया राइटर है । बात बिल्कुल कांटे की चल रही होती है और यह भोसड़ी का बीच में कॉमेडी कर देता है । चलो कोई नहीं sorry । हा हा हा हा अब क्या कह रहे हो भोसड़ी के बकचोदी मत कर आगे लिख दे । तो चलो पढ़ो आगे । मूड की चिंता ना करो दो मिनट में बना दूंगा ।))

आरती की गांड को देखते हुए बलवीर ने आरती के चूतड़ों को हाथों से फैला दिया ।आरती की तो सांसे ही रुक गई ।

बलवीर ने चूतड़ों को फैलाकर अपने मुंह से थूक दिया और बलवीर का थूक सीधा आरती की गांड के छेद पर पड़ा ।

आरती अपनी गांड के छेद पर थूक का एहसास होते ही अजीब सा सुख महसूस करते हुए शर्म से पानी पानी हो गई ।

सोचिए उस बहन की फीलिंग क्या होगी जिसका खुद का सगा भाई उसकी गांड के पीछे बैठकर अपने हाथों से उसकी गांड को फैला कर उस पर थूक रहा हो ।

गांड के छेद पर बलवीर का थूक पड़ते ही आरती के जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ गई । अब बलवीर खड़ा हुआ और अपनी एक उंगली से आरती की गांड के छेद को कुरेदते हुए बोला ।





बलवीर - सच मे तू तो बड़ी गर्म है ।

आरती - भईया शालिनी जाग जायेगी अब छोड़ दो ।

बलवीर - छोड़ दूंगा अभी तो तुझे चैक किया है बस । और चैक करके पता भी चल गया है की आरती उस घोड़ी का नाम है जो हिनहिनाते हुए चुदेगी ।

आरती - भईया आपको क्या हो गया है , ऐसी अश्लील बाते कर रहे है ।

जैसे ही आरती ने ऐसा कहा बलवीर ने अपनी उंगली आरती की गांड में घुसा दी । जो थूक के कारण आसानी से आरती की गांड में चली गई । उंगली घुसते ही आरती पंजों पर ही उचक गई ।

बलवीर - अश्लील बाते मै कर रहा हूं और तू जो लंड के लिए पागल कुतिया की इधर उधर मुंह मार रही है उसका क्या ।

आरती चुप रही क्युकी बलवीर की उंगली अब कमाल दिखाने लगी थी उसकी गांड में।





बलवीर - बोल ना अब चुप क्यों हो गई कुतिया लोड़े की जरूरत पड़ती है ना तुझको । लंड मांगती है ना तेरी चूत ।

ऐसा कहकर बलवीर ने आरती की गांड में से उंगली निकालकर और उसके चूतड़ों पर एक थप्पड़ मारा और बोला।

बलवीर - देख कुत्तिया अपनी गांड को। ऐसी चौड़ी गांड को लेकर तू घर में फिरती है लेकिन चुदेगी किसी सलमान से ही । इस पानी टपकाती हुई चूत को तू घर में लेकर बैठी रहती है लेकिन चुदेगी किसी सलमान से ही ।क्या कभी सोचा है तूने कि तेरे दो भाई हैं और दोनों ही भाई हटेकट्टे पहलवान जैसे हैं , और तू भी कम नहीं है घोड़ी की तरह हिनाहिनाती हुई चलती है , लेकिन फिर भी तुझे लंड बाहर का चाहिए । कभी सोचा तूने दुनिया क्या कहेगी ? दुनिया यह कहेगी कि या तो इसके भाइयों के लोड़े खड़े नहीं होते या फिर यह इतनी बड़ी रंडी है जो बाहर चुदने की भी जरूरत पड़ गई ।





बलवीर - क्या यह हम दोनों भाइयों की बेजती नहीं होगी लेकिन तेरे जैसी रंडी बहन हर किसी की होती है और हर किसी की बहन यही सोचती है कि बाहर किसी चूतिए से लड़के से चुद लूंगी लेकिन अपने भाई के नीचे नहीं लेटूंगी । बाहर किसी की जरा सी बाबू सोना करने से उसके आगे चूत फैला देती हैं लेकिन कभी यह नहीं सोचती कि उनका भाई उन्हें कितना प्यार करता है लेकिन बहनकीलोड़ी घर में लड़ती रहेंगी भाइयों से । घर में ये दिखा देंगी अपने भाई को तो बिलकुल कि उनकी बहन कितनी सुधरी हुई है , उनकी बहन को बस अपने काम से मतलब है । उनकी बहन किसी से फालतू बात करना पसंद नहीं करती । उनकी बहन के पास फालतू चीजों के लिए टाइम नहीं है । बोल सही कह रहा हूं ना मैंं।





ये सुनकर आरती ने गर्दन झुका ली ।

बलवीर - एक बात कहूं आरती तेरे जैसी रंडी बहनों को कुछ भाई समझ नहीं पाते या असली चेहरा नहीं देख पाते उनका । अगर उन्हें पता चल जाए कि यह मेरी बहन ऐसी है कि बाहर इसे कोई प्यार से बाबू सोना करे तो उससे मेरी बहन रात भर बात करेगी फोन पर और दिन में होटल में रूम लेकर उसके लोड़े की नीचे लेटकर घर आएगी और घर आकर बोल देगी मम्मी लेट हो गई थी फ्रेंड के साथ घूमने में टाइम निकल गया । और घर वाले यह कभी नहीं समझ पाते कि अभी यह बाहर चुदकर आई है । वह कभी यह नहीं सोचते कि उनकी बहन बेटी का पिछवाड़ा दिन प्रतिदिन कैसे भारी होता जा रहा है । कैसे उसके चूतड़ों ने मटकना शुरू कर दिया है। बिना लंड के तो ऐसा होता नहीं ।





बलवीर - अगर दुनिया का हर भाई या बाप इतना दिमाग पर जोर डाल ले तो तेरे जैसी गदरायी बहनों को घर में कपड़े पहनने की इजाजत ना दे , तेरे जैसी कुतियाओं को तेरे जैसी रंडी बहन बेटियों को जब दिल में आए तब पटक कर चोद दे । मिटा दे रंडियों की गर्मी अगर दुनिया का हर भाई यह सोच ले तो किसी की बहन तेरी तरह रात को किसी सलमान से लंड से चुदने के सपने नही देखेगी । लेकिन एक बात कहूं आरती तेरा भाई ऐसा नहीं है जो तेरे जैसी रंडियों की नस्ल ना पहचान सके ।

और तेरे जैसी गरम रंडी बहनों की वजह से आजकल के भाई बाहर मुंह मारते फिरते हैं क्योंकि उनके खुद के घर में तेरे जैसी घोड़ी होती है एक चुदक्कड़ गरम बहन होती है लेकिन वह बहन बाहर किसी और चूतिए से सैट होती है और उनके भाई अपने दोस्तों से यह कहते रहते हैं कि भाई किसी से सेटिंग करा देना ।

ऐसा कहकर बलवीर हंस पड़ा लेकिन आरती को हंसी नहीं आ रही थी आरती तो हैरान थी कि जिस बलवीर भाई के लिए उसके दिल में इतनी इज्जत थी आज वही भाई उसकी इज्जत की धज्जियां उड़ा रहा था ।

आरती को अब बलवीर का भाषण कहीं ना कहीं सही भी लग रहा था , क्योंकि वह किसी बाहर के सलमान से बात करके अपने परिवार को धोखा ही दे रही थी एक तरह से ।

आरती को यह बातें बलवीर की सही लगी लेकिन बलवीर का बात करने का लहजा और बलवीर के शब्द आरती को अच्छे नहीं लगे। इतनी गंदी भाषा उसने पहली बार सुनी थी । आरती ये सोच ही रही थी की तभी बाहर मोबाइल की रिंग बजी । रिंग बजते ही आरती और बलबीर दोनों जैसे हड़बड़ा गए ।

आरती और बालवीर दोनों का दिल धक धक करने लगा क्योंकि बाहर कमरे में शालिनी सो रही थी ।

तभी दोनों का दिल एक बार फिर से दहल गया क्योंकि अभी शालिनी के खांसने की आवाज उनके कानों में पड़ी जिसका मतलब था कि शालिनी जाग गई है । लेकिन कुछ देर कोई भी आवाज ना होने पर बलवीर ने आरती के कान के पास अपने होंठ ले जाकर कहा ।

बलवीर - शालिनी जाग गई तो बात खराब हो जाएगी तू धीरे से निकल जा । तुझे घर चल कर तेरे ही बिस्तर में चोदूंगा और मुझे पता है कि तू भी अपनी गांड उठा उठाकर मुझसे चुदेगी। चल जा सो जा अब ।





ऐसा कहकर बलवीर पीछे हट गया । आरती के तो मानो कानों को सुनाई नहीं दे रहा था और आंखों को दिखाई नहीं दे रहा था । वह बस मौन थी तभी बलवीर ने दोबारा कहा ।

बलवीर - तुझे घर चल कर आराम से चोदूंगा या अभी चूत में बिना लिए नहीं जाएगी। पता है तू लौड़े की भूखी है पर अभी इंतजार कर मेरी गरम बहन ।

आरती तो यह सुनकर शर्म से पानी पानी हो गई और चुपचाप अपने कपड़े ठीक कर के बाहर कमरे में चली गई ।

कुछ देर बाद बलवीर भी बाथरूम से निकलकर कमरे में आया और सोने के लिए अपने बेड पर बैठ गया ।

तभी उसकी नजर आरती और शालिनी पर पड़ी जिन्हें देखकर उसका लंड फिर से तंबू बन गया क्योंकि शालिनी तो सच में सो रही थी लेकिन आरती बस आंख बंद करके सोने का बहाना कर रही थी।

दोनों ही एक दूसरे के विपरीत करवट लेकर लेटी थी जिससे दोनों की गांड मानो आपस में बहस कर रही हो कि मैं ज्यादा गडरायी हुई हूं या तू ज्यादा गदराई हुई है । चुदने को बेताब अपनी बहन और भतीजी को लंड की प्यास में सोती देखकर बलवीर की आंखों में वासना के डोरे तैर गए।

फिर भी बलवीर ने कंट्रोल किया और मन ही मन बोला- तुम जैसी घोड़ियों को मेरा लंड ही ठंडा कर सकता है वरना हल्के मोटे आदमी को तो तुम अपनी जांघों में ही दबाकर झाड़ दोगी रंडियों ।तुम दोनों की ऐसी ताबड़तोड़ चुदाई करूंगा कि तुम्हारी चूतों को एक फटे हुए भोसड़े की उपाधि मिल जाएगी ।।।





कहानी आगे जारी रहेगी ---

साथ बने रहने के लिए धन्यवाद ।

आपका अपना प्यारा सा भाई ।

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