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थोड़ी देर के किश के बाद माय धयान में चला गया और धयान में जो भी आत्मा इस घर पे थी उसे याद करके अपने पास बुलाने लगा मेरा आवाज़ को सुन के एक आत्मा ै और मुझे सुरभि के साथ लिपट हुआ देख के वो आत्मा अपने भरी आवाज़ म तम कौन हो और इस घर में क्या कर रहे हो ये सुन के तू कौन है और इस घर पे क्यों मद्र रही है तुझे पता नहीं माय कौन हु मेरी आवाज़ भी बहरी थी और वो अपनी बहरी आवाज़ में मैं तुजे नहीं जानती तू कौन है माय, मुझे नहीं जानती तू सैतानी जीन लोक का राजकुमार समीर हु इतना काफी ह या और कुछ बताऊ ये सुन को वो आत्मा डरते हुए मुझे माफ़ करे मालिक लेकिन आप राजकुमार होक इस तूच्य..
लोगो की क्यों मदत कर रहे है आपको पता है इसलिगो ने मेरे साथ क्या किया है मैं उसकी बातो को सुन के है बोलो क्या किया है जब बताओगी नहीं तो माय निवारद कैसे करूँगा तो अपनी कहानी सुनाए लगी और जब उसकी कहानी सुना तो माय सोक में hi चला गया उसकी कहानी कुछ ऐसी थी ("मालिक ये कौसल बहुत हरामी ह इसने मुझे मारा और दुनिया वालो को कहा की मेरी मौत चाट से गिरने स हुई लेकिन य मुझे पीछे से धक्का दिया है और माय इसकी दूसरी बीवी टी और जो पहली बीवी टी वो मेरी hi बहन टी उसकी बी ये अपने जाल म फसा क मारा और जब उसकी खबर मुझे लगी तो माय सोची इसकी रिपोर्ट करुँगी लेकिन मेरे पास कोई साबुत नहीं था..
इसके खिलाफ जब साबुत जुटाने लगी और इसे पता चला की माय साबुत जुटने के लिए उससे शादी की हु तो वो मुझे चाट से धक्का देके मुझे मर दिया जिसकी वजह से मेरी आत्मा भटक रही है जब तक मेरा बतला पूरा नहीं हो जाता तब तक मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी अब आप hi कुछ निवारद निकले मालिक आप जो बोलोगे वो माय करुँगी, मैं, सबसे पहले अपना नाम तो बताओ वो मेरा नाम उर्वशी था जब तक जिन्दा थी और मेरे घर वाले बहुत गरीब ते ऊपर से हम तीन बहने थे शादी करने को लेकिन पैसे न होने के कारन हम सब की टाइम से शादी नहीं हो पाई लेकिन मेरी दीदी बहुत सुन्दर थी इस वजह से कौसल की नज़र उनपे पद गई और..
वो बिना कुछ किये दीदी से शादी कर लिया और माय घर में सबसे छोटी थी मेरी शादी भी कही नहीं हो रही थी और अचानक दीदी की मौत हो गई तब माय 25 साल की टी और जीजा जी न मेरी शादी क प्रस्ताव मेरे घर रखा की उर्वशी की शादी नहीं हो रही तो मेरे साथ hi कर दे वो मेरे घर बी सभालेगी और जो धन दौलत है वो भी इस लांच में मेरे घर वाले मेरी शादी 55 साल के अड़वड़ उम्र के जीजा जी से करा दिए और सुहागरात में मेरे साथ जबरदस्ती की मेरी निचे से बहुत खून निकला और जब उससे भी मान नहीं भरा मुझे दर्द देके तो वो अपने बेल्ट से मरने लगे और उस बेल्ट की मर से मेरे सरे बदन में उसके बेल्टों के नीसाण..
थे और सुबह जब उसकी बड़ी बेटी नैंसी से कही तो वो अपने पापा को बहुत धमकी की अपने ऐसा क्यों किया अगर दोबारा उर्वशी के साथ ऐसा किया तो आपको जेल में डलवा दूंगी उसके बाद उसका बाप दर गया और कभी मुझे नहीं मारा और मेरी दोस्ती नैंसी से बहुत जमने लगी और वो मुझे अपने बारे में सब कुछ बताने लगी और एक दिन उसका भाई मोहर गुप्ता बहुत सरब पि क आया और नैंसी को पकड़ लिया उसके कपडे खोलने लगा उसके साथ जबरदस्ती करने लगा तभी नैंसी चिल्लाई और जब उसकी आवाज़ मेरे कानो तक पहुंची तो माय दौड़ के उसके पास गई तो देखा वो अपने भाई के कैद से निकलना च रही है..
पीर माय एक डंडा ली और मोहर गुप्ता के सर पे मरी तब जेक वो नैंसी को छोड़ा और वो बेचारी डरते हुए बोली उर्वशी भैया मेरी इज्जत लूटना कहते थे ये बात जब उसके बाप से बताई तो वो अपने बेटे की खूब धुनाई की और उसे घर से निकल दिया लेकिन कुछ महीने के बाद जीजा जी ने पीर से ले आया और उसके लिए लड़की ढूंढने लगे और एक दो महीने क अंदर उसकी शादी सुरभि स तय हो गई और इसी बिच मेरी मौत हो गई य कहानी ह मेरी") मैं, उसकी कहानी सुन के थोड़ा साद हुआ और बोलै तुम देखि टी की कौन तुम्हे धक्का दिया तो उर्वशी बोली मुझे कुछ यद् hi नहीं की कौन मुझे धक्का दिया लेकिन मुझे पूरा यकीं है की हो न हो..
लोगो की क्यों मदत कर रहे है आपको पता है इसलिगो ने मेरे साथ क्या किया है मैं उसकी बातो को सुन के है बोलो क्या किया है जब बताओगी नहीं तो माय निवारद कैसे करूँगा तो अपनी कहानी सुनाए लगी और जब उसकी कहानी सुना तो माय सोक में hi चला गया उसकी कहानी कुछ ऐसी थी ("मालिक ये कौसल बहुत हरामी ह इसने मुझे मारा और दुनिया वालो को कहा की मेरी मौत चाट से गिरने स हुई लेकिन य मुझे पीछे से धक्का दिया है और माय इसकी दूसरी बीवी टी और जो पहली बीवी टी वो मेरी hi बहन टी उसकी बी ये अपने जाल म फसा क मारा और जब उसकी खबर मुझे लगी तो माय सोची इसकी रिपोर्ट करुँगी लेकिन मेरे पास कोई साबुत नहीं था..
इसके खिलाफ जब साबुत जुटाने लगी और इसे पता चला की माय साबुत जुटने के लिए उससे शादी की हु तो वो मुझे चाट से धक्का देके मुझे मर दिया जिसकी वजह से मेरी आत्मा भटक रही है जब तक मेरा बतला पूरा नहीं हो जाता तब तक मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी अब आप hi कुछ निवारद निकले मालिक आप जो बोलोगे वो माय करुँगी, मैं, सबसे पहले अपना नाम तो बताओ वो मेरा नाम उर्वशी था जब तक जिन्दा थी और मेरे घर वाले बहुत गरीब ते ऊपर से हम तीन बहने थे शादी करने को लेकिन पैसे न होने के कारन हम सब की टाइम से शादी नहीं हो पाई लेकिन मेरी दीदी बहुत सुन्दर थी इस वजह से कौसल की नज़र उनपे पद गई और..
वो बिना कुछ किये दीदी से शादी कर लिया और माय घर में सबसे छोटी थी मेरी शादी भी कही नहीं हो रही थी और अचानक दीदी की मौत हो गई तब माय 25 साल की टी और जीजा जी न मेरी शादी क प्रस्ताव मेरे घर रखा की उर्वशी की शादी नहीं हो रही तो मेरे साथ hi कर दे वो मेरे घर बी सभालेगी और जो धन दौलत है वो भी इस लांच में मेरे घर वाले मेरी शादी 55 साल के अड़वड़ उम्र के जीजा जी से करा दिए और सुहागरात में मेरे साथ जबरदस्ती की मेरी निचे से बहुत खून निकला और जब उससे भी मान नहीं भरा मुझे दर्द देके तो वो अपने बेल्ट से मरने लगे और उस बेल्ट की मर से मेरे सरे बदन में उसके बेल्टों के नीसाण..
थे और सुबह जब उसकी बड़ी बेटी नैंसी से कही तो वो अपने पापा को बहुत धमकी की अपने ऐसा क्यों किया अगर दोबारा उर्वशी के साथ ऐसा किया तो आपको जेल में डलवा दूंगी उसके बाद उसका बाप दर गया और कभी मुझे नहीं मारा और मेरी दोस्ती नैंसी से बहुत जमने लगी और वो मुझे अपने बारे में सब कुछ बताने लगी और एक दिन उसका भाई मोहर गुप्ता बहुत सरब पि क आया और नैंसी को पकड़ लिया उसके कपडे खोलने लगा उसके साथ जबरदस्ती करने लगा तभी नैंसी चिल्लाई और जब उसकी आवाज़ मेरे कानो तक पहुंची तो माय दौड़ के उसके पास गई तो देखा वो अपने भाई के कैद से निकलना च रही है..
पीर माय एक डंडा ली और मोहर गुप्ता के सर पे मरी तब जेक वो नैंसी को छोड़ा और वो बेचारी डरते हुए बोली उर्वशी भैया मेरी इज्जत लूटना कहते थे ये बात जब उसके बाप से बताई तो वो अपने बेटे की खूब धुनाई की और उसे घर से निकल दिया लेकिन कुछ महीने के बाद जीजा जी ने पीर से ले आया और उसके लिए लड़की ढूंढने लगे और एक दो महीने क अंदर उसकी शादी सुरभि स तय हो गई और इसी बिच मेरी मौत हो गई य कहानी ह मेरी") मैं, उसकी कहानी सुन के थोड़ा साद हुआ और बोलै तुम देखि टी की कौन तुम्हे धक्का दिया तो उर्वशी बोली मुझे कुछ यद् hi नहीं की कौन मुझे धक्का दिया लेकिन मुझे पूरा यकीं है की हो न हो..