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पीर माय उठा और सुरभि को अपने गॉड में आने को कहा और वो शरमाते हुए अपनी टंगे मेरे डे बे करके मेरे खड़े मुसार के ऊपर अपनी छूट रखने लगी तो माय अपने खड़े लुंड को पकड़ के उसकी छूट की फैंको के बिच रखा तो सुरभि धीरे धीरे उसपे बैठने लगी और वो मेरे गले में अपना दोनों हांथो को दाल के बैठ रही थी और जैसे hi मेरा मुसार उसकी फूली हुई छूट के अंदर जाने लगा तो सुरभि को दर्द से मु खुलने लगा और अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मीयीय सुनिए न अभी भी दर्द हो रही है मुझे मैं, बस अब ज्यादा दर्द नहीं होगा मेरी जान अब धीरे धीरे करते हुए पूरा अंदर..
ले लो और अपनी छूट की फांके तित मत करो इससे तुम्हे और दर्द होगा पीर वो अपनी छूट की फांके ढीली कर दी और अब तक मेरा आधा से थोड़ा ज्यादा घुस चूका था और उसकी छूट अंदर से इतनी गरम थी की जैसे जलती हुई भट्टी और उसकी गरम छूट होने से मेरा मुसार की नसे फूलने लगी और माय उसकी बड़ी गांड को तितली पकड़ के एक hi झटके में ऊपर की और मारा जिससे मेरा पूरा 16 इंच लुम्बा और 5 से 6 इंच मोटा मुसार एनाकोंडा उसकी छूट से होते हुए सीधा बच्चे दानी में जा घुसा और सुरभि जोर से चिल्ला दी और इधर पूरा घुसने से सुरभि दर्द से उसकी मूत पीर से निकलने लगी और उसकी गरमा गरम मूत..
मेरा जांघ से होते हुए सीधा बीएड सीट पे गिरने लगी इससे सुरभि बहुत सर्मिन्दा हुई और अपने चेहरा मेरी गले में दाल के धीरे से बोली सॉरी समीर जी मेरी पीर से निकल गई तो मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए कोई बात नहीं मेरी जान वैसे तुम्हारी मूत मुझे और ज्यादा एक्सीटेंड कर कर रही है ये सुन के सुरभि खुस होते हुए मेरे होंठो को पे छोटा सा किश करके आप बहुत अच्छे है समीर आप के जैसा लड़का मुझे पहले मिला होते तो माय भाग के उससे शादी कर ली होती और वो ये बोल के मेरे अपनी दोनों हांथो को मेरी कमर से होते हुए कंधे पे रख के तितली पकड़ के में मेरे मुसार लुंड..
के ऊपर अपना गांड उठा उठा के अपनी फूली हुई छूट में लेने लगी उसके ऐसा करने से रूम का माहौल एक दम गरम हो चूका था हम दोनों की चुदाई की आवाज़ और हम दोनों की जिसम की भूख चरम पे थी और इधर उसकी छूट मेरे दम दर चुदाई से एक दम फूल के दुबले कचोरी की तरह हो चुकी थी उसके फांके पूरी तरह से खुल चुकी थी छूट तो ऐसी लग रही थी जैसे उसमे से अभी अभी कोई बच्चा निकला हो वैसे hi फ़ैल चुकी थी और अब उसे पहले जितना दर्द भी नहीं हो रहा था और वो अब थक चुकी थी मेरे मुसार पे धक्के मरते हुए पीर भी माय उससे पूछा मेरी जान अगर दर्द चला गया..
है तो अपनी गांड को थोड़ा तेज तेज ऊपर निचे करके मुझे छोड़ो क्युकी जितना तेज मुझे छोड़ोगी उतना जल्दी मेरा पानी तुम्हारी सुखी हुई कोख को भरेगा सुरभि ये सुन के शर्मा गई और बिना कुछ बोले अपनी गांड तूफानी रफ़्तार से ऊपर निचे करने लगी वो पहले से hi थक चुकी थी लेकिन मेरा आदेश पते hi वो जैसे पीर से जोश में आ गई थी और अब पहले से भी ज्यादा रूम में सोर होने लगा और कहा अब ठीक से चुदाई कर रही हो मेरी जान और तुम्हारा दर्द कैसा है तो सुरभि हकलाते हुए आआ अब तत्तत ठीक ह इधर माय अपने हाँथ को आगे बढ़ा के जहा तंत्र मन्त्र का सामान रखा था..
वह से एक कच्चे नारियल को उठा के एक लोहे के एक बड़ा चाकू भी वही रखा हुआ था उससे कच्चे नारियल को चील के उसका पानी सुरभि और खुद के ऊपर नारियल का सारा पानी दाल लिया जिससे हम दोनों एक दम भीग गए और कहा ये दो नारियल जो बची है इसका पानी हफ्ते एक दो दिन पीना समझ गई न वो है में जवाब दी और मैं, कहा इसके बाद जब तुम प्रेग्नेंट हो जाओगी तब hi अपने पति के साथ सम्बन्ध बनाना और प्रेग्नेंट होने के बाद अगर पति नहीं अत है तो अपने ससुराल वालो को मत बताना की तुम प्रेग्नेंट हो वर्ण वो समझ जायेंगे की ये हो न हो ये मेरा hi बच्चा है,
ले लो और अपनी छूट की फांके तित मत करो इससे तुम्हे और दर्द होगा पीर वो अपनी छूट की फांके ढीली कर दी और अब तक मेरा आधा से थोड़ा ज्यादा घुस चूका था और उसकी छूट अंदर से इतनी गरम थी की जैसे जलती हुई भट्टी और उसकी गरम छूट होने से मेरा मुसार की नसे फूलने लगी और माय उसकी बड़ी गांड को तितली पकड़ के एक hi झटके में ऊपर की और मारा जिससे मेरा पूरा 16 इंच लुम्बा और 5 से 6 इंच मोटा मुसार एनाकोंडा उसकी छूट से होते हुए सीधा बच्चे दानी में जा घुसा और सुरभि जोर से चिल्ला दी और इधर पूरा घुसने से सुरभि दर्द से उसकी मूत पीर से निकलने लगी और उसकी गरमा गरम मूत..
मेरा जांघ से होते हुए सीधा बीएड सीट पे गिरने लगी इससे सुरभि बहुत सर्मिन्दा हुई और अपने चेहरा मेरी गले में दाल के धीरे से बोली सॉरी समीर जी मेरी पीर से निकल गई तो मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए कोई बात नहीं मेरी जान वैसे तुम्हारी मूत मुझे और ज्यादा एक्सीटेंड कर कर रही है ये सुन के सुरभि खुस होते हुए मेरे होंठो को पे छोटा सा किश करके आप बहुत अच्छे है समीर आप के जैसा लड़का मुझे पहले मिला होते तो माय भाग के उससे शादी कर ली होती और वो ये बोल के मेरे अपनी दोनों हांथो को मेरी कमर से होते हुए कंधे पे रख के तितली पकड़ के में मेरे मुसार लुंड..
के ऊपर अपना गांड उठा उठा के अपनी फूली हुई छूट में लेने लगी उसके ऐसा करने से रूम का माहौल एक दम गरम हो चूका था हम दोनों की चुदाई की आवाज़ और हम दोनों की जिसम की भूख चरम पे थी और इधर उसकी छूट मेरे दम दर चुदाई से एक दम फूल के दुबले कचोरी की तरह हो चुकी थी उसके फांके पूरी तरह से खुल चुकी थी छूट तो ऐसी लग रही थी जैसे उसमे से अभी अभी कोई बच्चा निकला हो वैसे hi फ़ैल चुकी थी और अब उसे पहले जितना दर्द भी नहीं हो रहा था और वो अब थक चुकी थी मेरे मुसार पे धक्के मरते हुए पीर भी माय उससे पूछा मेरी जान अगर दर्द चला गया..
है तो अपनी गांड को थोड़ा तेज तेज ऊपर निचे करके मुझे छोड़ो क्युकी जितना तेज मुझे छोड़ोगी उतना जल्दी मेरा पानी तुम्हारी सुखी हुई कोख को भरेगा सुरभि ये सुन के शर्मा गई और बिना कुछ बोले अपनी गांड तूफानी रफ़्तार से ऊपर निचे करने लगी वो पहले से hi थक चुकी थी लेकिन मेरा आदेश पते hi वो जैसे पीर से जोश में आ गई थी और अब पहले से भी ज्यादा रूम में सोर होने लगा और कहा अब ठीक से चुदाई कर रही हो मेरी जान और तुम्हारा दर्द कैसा है तो सुरभि हकलाते हुए आआ अब तत्तत ठीक ह इधर माय अपने हाँथ को आगे बढ़ा के जहा तंत्र मन्त्र का सामान रखा था..
वह से एक कच्चे नारियल को उठा के एक लोहे के एक बड़ा चाकू भी वही रखा हुआ था उससे कच्चे नारियल को चील के उसका पानी सुरभि और खुद के ऊपर नारियल का सारा पानी दाल लिया जिससे हम दोनों एक दम भीग गए और कहा ये दो नारियल जो बची है इसका पानी हफ्ते एक दो दिन पीना समझ गई न वो है में जवाब दी और मैं, कहा इसके बाद जब तुम प्रेग्नेंट हो जाओगी तब hi अपने पति के साथ सम्बन्ध बनाना और प्रेग्नेंट होने के बाद अगर पति नहीं अत है तो अपने ससुराल वालो को मत बताना की तुम प्रेग्नेंट हो वर्ण वो समझ जायेंगे की ये हो न हो ये मेरा hi बच्चा है,