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“क्या कोमल के साथ भी कुछ ऐसा होता था ??”
डॉ. ने ये प्रश्न भुवन से किया था , मैंने भाभी के बिहेवियर को देखकर परेशां हो गया था और ये बात डॉ. को बताई उन्होंने तुरंत hi भुवन और मुझे अकेले में बुलाया , हम अभी नदी के किनारे रेट पर बैठे हुए थे ..
भुवन ने भाभी के साथ हुई घटना को सुना तो उसका चेहरा भी गंभीर हो गया ..
“है लेकिन कोमल को पहले इस ताकत पर घमंड था बाद में धीरे धीरे उसने जीवा के कहने पर कुछ मासूमो को भी मार दिया और वंहा से उसे इस ताकत को लेकर ग्लानि के भाव आने शुरू हो गए ..
वो अपनी hi ताकत से डरने लगी थी क्योकि ताकत का होना और उसके कण्ट्रोल का होना दोनों hi अलग अलग बात होती है और कोमल की ताकत उसके कण्ट्रोल से बहार जाने लगी , तभी हम लोगो ने फैसला कर लिया था की हम ये सब छोड़कर दूर चले जायेंगे , केवल मेरे प्रेम के जरिये hi उसे शांत किया जा सकता था, लेकिन आरती के होने के बाद से वो जयदा शांत हो गयी और आरती के आने से हमारा जीवन hi बदल गया हम वो नहीं रह गए जो हम हुआ करते थे …”
“हुम्म्म “
डॉ. गहरे विचारो में गम हो गया था ..
“क्या बात है डॉ. क्या कोई परेशानी वाली बात है , देखिये हमें किसी से कोई बदला नहीं लेना मैं भाभी को लेकर कही दूर चला जाऊंगा , लेकिन मैं भाभी को इस तकलीफ में नहीं देख सकता “
डॉ. के चेहरे पर आ रहे भाव मुझे डरने लगे थे
“मैंने ये पहले क्यों नहीं सोचा .. ये कोई श्राप या कोई जादुई ताकत न होकर कोई मानसिक बीमारी भी तो हो सकती है जो की जेनेटिकली एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलती हो .. मेडिकल साइंस में ऐसे कई रोग है जो की माँ बाप से बच्चो को हो जाते है , ये कोई मानसिक बीमारी हो सकती है “
डॉ. की बात से न सिर्फ मैं बल्कि भुवन भी बुरी तरह से चौक गया था
“ऐसे कैसे हो सकता है डॉ. , मैंने खुद उस पुस्तक में पढ़ा था की ये ताकत एक श्राप है “
भुवन बेचैन होते हुए बोलै
“है जो चीजे समझ नहीं आती हम उसे जादू कहना शुरू कर देते है , ये तो हमेशा से होता आ रहा है, हो सकता है की जब किसी को ये विकृति जगी होगी तो उसे समझ न आया हो और उन्होंने इसे श्राप का नाम दे दिया हो .. सोचने वाली बात है की ऐसे कंडीशन के मरीज तो आज भी मौजूद है , वो अपना आप खो देते है और अद्भुत ताकत उनके अंदर आ जाती है , कई स्किज़ोफ्रेनिअ के मरीजों में ऐसी कंडीशन पायी जाती है , उनकी ताकत इतनी हो जाती है की कई लोग एक साथ भी उसे सम्हाल नहीं सकते .. “
“लेकिन ये भी तो कॉन्फिडेंस के साथ नहीं कहा जा सकता की ये कोई बीमारी hi होगी , और प्यार का मिलना और प्यार के द्वारा सम्हालना ये भी तो कोई इत्तेफाक नहीं है , और ये चीजे भी तो उस पुस्तक में थी “
मैंने अपनी दुविधा सामने राखी , डॉ. ने मुस्कुराते हुए बोलना शुरू किया
“है सही बोले तुम , लेकिन अगर इसका पैटर्न देखो तो चीजे जयदा क्लियर हो जाती है …. कोमल और आरती दोनों के साथ एक चीज हुई और पुस्तक के हिसाब से और भी कई लोगो के साथ , और वो था की उनका पहला प्यार सक्सेसफुल नहीं हुआ था , इसलिए वो ताकत नहीं जाएगी ..
अब मजेदार चीज तो ये है की भुवन कोमल के साथ बचपन से था और तिवारी से जयदा प्यार उससे करता था, भले hi कोमल तिवारी के साथ थी लेकिन उसके दिल में ये बात जरूर थी की भुवन उससे प्यार करता है और वो भी भुवन को एक दोस्त की तरह hi सही लेकिन बहुत प्यार करती थी , जस्ट वैसे hi अंकित भी आरती के साथ तब से था जब से उसने राजू से शादी की राजू ने बेवफाई की लेकिन अंकित उसके साथ हमेशा रहा और इसीलिए आरती के दिल में भी अंकित के लिए एक भरोषा और अनकंडीशनल प्रेम ने जन्म लिया ..
मतलब दोनों hi कंडीशन में सिचुएशन लगभग एक सी थी , पहले प्यार से धोखा और फिर दूसरा प्रेम जो की छिपा हुआ था उसका बहार आना ..
अब एक और मजेदार बात ये है की अगर हम मानसिक बीमारियों का पैटर्न देखे तो वो ऐसे hi नहीं हो जाते , वो तब hi बहार आते है जब किसी प्रकार का मानसिक दबाव हो , एक uddipan(stimulation) की जरुरत होती है , सभी इंसानो की ताकत अलग अलग होती है इसलिए स्टिमुलेशन भी अलग अलग होता है, अधिकतर किसी बहुत hi बुरी चीज या घटना के सामने आने से hi मानसिक विकार जाग जाते है …
तो क्या ये नहीं हो सकता की इस केस में पहले प्रेम का धोखा स्टिमुलेशन का काम करता हो और फिर दूसरा सच्चा प्रेम जो की उन्हें भी हमेशा से लगता है की यही सच्चा प्रेम है लेकिन वो इसे उजागर नहीं कर प् रहे होते .. तो इस सच्चे प्रेम के मिल जाने से वो ताकत अचानक से फुट जाती हो ..
और फिर जैसा उनका बिहेवियर हो जाता है अपने प्रेमी के प्रति वो किसी मानसिक रोगी के hi लक्षण है , जैसे बहुत hi जयदा प्रेम करना और साथ hi एक आसक्ति का भाव आना ..
क्योकि कोमल ने पुस्तक पढ़ी थी इसलिए उसने इसे जादू की तरह hi लिया और अपने ताकत को एन्जॉय करने लगी , ऐसे भी वो हमेशा से जीवा और सम्पत के साथ रही थी तो उसे मारपीट वाला माहौल hi मिला था , लेकिन आरती के केस में ऐसा नहीं था, उसे बचपन से बहुत hi प्रेम से पला गया, राजू को छोड़ दो तो सभी ने उसे सम्मान और प्रेम दिया है , वो मारपीट जैसी चीजों से भी बहुत दूर थी .. तो उसके मन में इस ताकत से उठाने वाले विचारो को लेकर ग्लानि के भाव जल्दी hi आने शुरू हो गए .. “
डॉ. की बात सुनकर भुवन और मैं दोनों hi सोच में पढ़ गए थे ..
अगर ये बीमारी थी तो इसका लीलाज क्या था , एक इलाज तो हमें पता था वो था प्रेम ..
डॉ. ने बोलना जारी रखा
“और जैसा की अधिकतर मानसिक रोगियों के साथ होता है प्रेम से hi ये रोग भी काबू में आ जाता है ….
इसका कारण भी सामान्य सा है की अगर कोई आपसे प्रेम दिखाए तो उस प्रेम के अहसास से अपने पर काबू करना आसान हो जाता है ..”
हम सभी चुप थे की मेरे दिमाग में एक प्रश्न आया
“तो क्या हमें भाभी को बता देना चाहिए की वो बीमार है ..”
“नहीं अंकित अभी नहीं .. इससे वो और भी परेशां हो जायेगी और उससे उसका खुद पर से कण्ट्रोल खोने लगेगा .. उसे तुम्हारे प्रेम की जरुरत है उसे बस इन सबसे दूर रखो तो hi ठीक होगा, अभी तो मैं भी अपनी इस थ्योरी पर कन्फर्म नहीं हु, मुझे भी थोड़ा रिसर्च का मौका दो .. अगर ऐसा है तो ऐसे केस या इससे मिलते जुलते केस और भी होंगे , और प्रेम से बड़ी कोई थेरेपी दुनिया में नहीं है .. हम भारतीयों में परिवार का बहुत मुलाय होता है ये भी एक तरह से थेरेपी का काम करती है , पहले जब संयुक्त परिवार होते थे लोग अपनी समस्या एक दूसरे से खुलकर बोल लेते थे और हलके हो जाते थे इसलिए मानसिक रोगी बहुत hi काम थे, जिन समाजो में अकेलेपन की समस्या है वंहा मानसिक रोग भी बहुत जयदा है क्योकि उनके पास प्रेम hi तो नहीं है .. न माँ बाप का प्यार मिल पता है न hi दोस्तों का न hi रिश्तेदारों का , मिलता है तो बस टेंशन … तो अभी तो बस प्यार से रखो बाकि की बाटे बाद में देखते है .. अगर आरती को जयदा मानसिक टेंशन नहीं दिया जाए तो हो सकता है की वो खुद से hi ठीक होने लगे , जैसे की कोमल हो गयी … अब कोमल का खुद पर बहुत hi कण्ट्रोल है और यद् रखना हर मानसिक बीमारी अपने आप में एक मानसिक ताकत भी होती है , बीमारी और ताकत में बस एक hi चीज का फर्क होता है वो है कण्ट्रोल का .. कण्ट्रोल कर लिया तो ताकत और अगर न कर पाए तो बीमारी … ( ये मैं ऐसे hi नहीं बोल रहा हु , असल में साइकोलॉजी में हर बीमारी के साथ एक चीज मैंने देखि है और वो है उनकंट्रोलबले, और साथ hi साथ कई मानसिक बीमारिया ऐसी भी है जिसे हम योग और ध्यान की सिद्धिया मानते है , ताकत और जादू मानते है लेकिन वही बात है कण्ट्रोल का फर्क होता है ) “
डॉ. की बात से मुझे बहुत hi शांति मिली , तभी थोड़ी hi दूर हमें किसी के होने का अहसास हुआ ..
हम सभी की नजर उस और गयी ..
वो नेहा थी , आँखों में आंसू लिए वो हमारी बातो को सुन रही थी ..
“तुम ..”
मैं कुछ और बोल पता उससे पहले hi डॉ. वंहा से उठ गए
“तुम दोनों बात करो हम चलते है “
डॉ. ने ये कहते हुए मुझे आँख मार दी थी …..
डॉ. और भुवन के जाने के बाद नेहा मुझसे आकर लिपट गयी ,मैं आश्चर्य में था की ये क्या हो रहा है ..
“मुझ माफ़ कर दो अंकित , मेरी माँ सच में तिवारी के साथ मिली हुई है , मुझे माफ़ कर दो की मैंने भाभी के बारे में बुरा सोचा .. भाभी बीमार है और मैं.. “
मैं नेहा के इस हृदयपरिवर्तन से चौक गया था
“तुम.. तुमने मुझे माफ़ कर दिया “
उसने सर उठाया उसके होठो में एक मुस्कान थी लेकिन गहरी नहीं बस हलकी सी
“है भी और नहीं भी “
“मतलब ??”
“मतलब की तुमने भाभी के साथ जो किया उसके लिए मैंने तुम्हे माफ़ किया लेकिन मैं तुमसे प्यार करती हु और तुम्हे किसी और के साथ नहीं देख सकती .. तुम भाभी से hi प्यार करते हो मुझसे नहीं , मुझसे प्यार करना शायद तुम्हारा भरम था “
“नहीं नेहा ऐसा नहीं है , मैं तुम दोनों से प्यार करता हु .. और रही साररिक सम्बन्धो की तो मेरे सम्बन्ध सस और एक रानी नाम की ायरत से भी रहे है “
मेरी बात सुनकर नेहा ने मुझे छोड़ दिया और बड़े hi गौर से मेरे चेहरे को देखने लगी
“तुमने समझाना मेरे बस का नहीं है अंकित , तुमने जो किया वो शायद तुम्हारे लिए ठीक हो लेकिन मेरे लिए नहीं .. मैं आज hi यंहा से जा रही हु अपने पुराने जीवन में लौट रही हु , तिवारी से हमें कोई दर नहीं है उसका संरक्षण माँ के साथ है , मैं एक सिंपल सी लड़की हु अंकित और तुम बहुत hi कॉम्प्लिकेटेड हो… हमारा अलग हो जाना hi सही रहेगा “
इससे पहले की मैं उससे कुछ कह पता वो वंहा से निकल गयी , मैं उसे रोकना चाहता था लेकिन मुझे भाभी का ख्याल आया, नेहा के रहते मैं भाभी पर ध्यान नहीं दे पता शायद वक़्त की भी यही नजाकत थी की मैं नेहा को जाने दू …
वो आँखों में आंसू भरे जाने लगी मैं बस नदी की रेट में खड़ा हुआ उसे जाते देखता रहा ……..
मैं उसे रोकना तो चाहता था लेकिन मेरे आँखों के सामने बस भाभी की तस्वीर आ रही थी ………..
“क्या कोमल के साथ भी कुछ ऐसा होता था ??”
डॉ. ने ये प्रश्न भुवन से किया था , मैंने भाभी के बिहेवियर को देखकर परेशां हो गया था और ये बात डॉ. को बताई उन्होंने तुरंत hi भुवन और मुझे अकेले में बुलाया , हम अभी नदी के किनारे रेट पर बैठे हुए थे ..
भुवन ने भाभी के साथ हुई घटना को सुना तो उसका चेहरा भी गंभीर हो गया ..
“है लेकिन कोमल को पहले इस ताकत पर घमंड था बाद में धीरे धीरे उसने जीवा के कहने पर कुछ मासूमो को भी मार दिया और वंहा से उसे इस ताकत को लेकर ग्लानि के भाव आने शुरू हो गए ..
वो अपनी hi ताकत से डरने लगी थी क्योकि ताकत का होना और उसके कण्ट्रोल का होना दोनों hi अलग अलग बात होती है और कोमल की ताकत उसके कण्ट्रोल से बहार जाने लगी , तभी हम लोगो ने फैसला कर लिया था की हम ये सब छोड़कर दूर चले जायेंगे , केवल मेरे प्रेम के जरिये hi उसे शांत किया जा सकता था, लेकिन आरती के होने के बाद से वो जयदा शांत हो गयी और आरती के आने से हमारा जीवन hi बदल गया हम वो नहीं रह गए जो हम हुआ करते थे …”
“हुम्म्म “
डॉ. गहरे विचारो में गम हो गया था ..
“क्या बात है डॉ. क्या कोई परेशानी वाली बात है , देखिये हमें किसी से कोई बदला नहीं लेना मैं भाभी को लेकर कही दूर चला जाऊंगा , लेकिन मैं भाभी को इस तकलीफ में नहीं देख सकता “
डॉ. के चेहरे पर आ रहे भाव मुझे डरने लगे थे
“मैंने ये पहले क्यों नहीं सोचा .. ये कोई श्राप या कोई जादुई ताकत न होकर कोई मानसिक बीमारी भी तो हो सकती है जो की जेनेटिकली एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलती हो .. मेडिकल साइंस में ऐसे कई रोग है जो की माँ बाप से बच्चो को हो जाते है , ये कोई मानसिक बीमारी हो सकती है “
डॉ. की बात से न सिर्फ मैं बल्कि भुवन भी बुरी तरह से चौक गया था
“ऐसे कैसे हो सकता है डॉ. , मैंने खुद उस पुस्तक में पढ़ा था की ये ताकत एक श्राप है “
भुवन बेचैन होते हुए बोलै
“है जो चीजे समझ नहीं आती हम उसे जादू कहना शुरू कर देते है , ये तो हमेशा से होता आ रहा है, हो सकता है की जब किसी को ये विकृति जगी होगी तो उसे समझ न आया हो और उन्होंने इसे श्राप का नाम दे दिया हो .. सोचने वाली बात है की ऐसे कंडीशन के मरीज तो आज भी मौजूद है , वो अपना आप खो देते है और अद्भुत ताकत उनके अंदर आ जाती है , कई स्किज़ोफ्रेनिअ के मरीजों में ऐसी कंडीशन पायी जाती है , उनकी ताकत इतनी हो जाती है की कई लोग एक साथ भी उसे सम्हाल नहीं सकते .. “
“लेकिन ये भी तो कॉन्फिडेंस के साथ नहीं कहा जा सकता की ये कोई बीमारी hi होगी , और प्यार का मिलना और प्यार के द्वारा सम्हालना ये भी तो कोई इत्तेफाक नहीं है , और ये चीजे भी तो उस पुस्तक में थी “
मैंने अपनी दुविधा सामने राखी , डॉ. ने मुस्कुराते हुए बोलना शुरू किया
“है सही बोले तुम , लेकिन अगर इसका पैटर्न देखो तो चीजे जयदा क्लियर हो जाती है …. कोमल और आरती दोनों के साथ एक चीज हुई और पुस्तक के हिसाब से और भी कई लोगो के साथ , और वो था की उनका पहला प्यार सक्सेसफुल नहीं हुआ था , इसलिए वो ताकत नहीं जाएगी ..
अब मजेदार चीज तो ये है की भुवन कोमल के साथ बचपन से था और तिवारी से जयदा प्यार उससे करता था, भले hi कोमल तिवारी के साथ थी लेकिन उसके दिल में ये बात जरूर थी की भुवन उससे प्यार करता है और वो भी भुवन को एक दोस्त की तरह hi सही लेकिन बहुत प्यार करती थी , जस्ट वैसे hi अंकित भी आरती के साथ तब से था जब से उसने राजू से शादी की राजू ने बेवफाई की लेकिन अंकित उसके साथ हमेशा रहा और इसीलिए आरती के दिल में भी अंकित के लिए एक भरोषा और अनकंडीशनल प्रेम ने जन्म लिया ..
मतलब दोनों hi कंडीशन में सिचुएशन लगभग एक सी थी , पहले प्यार से धोखा और फिर दूसरा प्रेम जो की छिपा हुआ था उसका बहार आना ..
अब एक और मजेदार बात ये है की अगर हम मानसिक बीमारियों का पैटर्न देखे तो वो ऐसे hi नहीं हो जाते , वो तब hi बहार आते है जब किसी प्रकार का मानसिक दबाव हो , एक uddipan(stimulation) की जरुरत होती है , सभी इंसानो की ताकत अलग अलग होती है इसलिए स्टिमुलेशन भी अलग अलग होता है, अधिकतर किसी बहुत hi बुरी चीज या घटना के सामने आने से hi मानसिक विकार जाग जाते है …
तो क्या ये नहीं हो सकता की इस केस में पहले प्रेम का धोखा स्टिमुलेशन का काम करता हो और फिर दूसरा सच्चा प्रेम जो की उन्हें भी हमेशा से लगता है की यही सच्चा प्रेम है लेकिन वो इसे उजागर नहीं कर प् रहे होते .. तो इस सच्चे प्रेम के मिल जाने से वो ताकत अचानक से फुट जाती हो ..
और फिर जैसा उनका बिहेवियर हो जाता है अपने प्रेमी के प्रति वो किसी मानसिक रोगी के hi लक्षण है , जैसे बहुत hi जयदा प्रेम करना और साथ hi एक आसक्ति का भाव आना ..
क्योकि कोमल ने पुस्तक पढ़ी थी इसलिए उसने इसे जादू की तरह hi लिया और अपने ताकत को एन्जॉय करने लगी , ऐसे भी वो हमेशा से जीवा और सम्पत के साथ रही थी तो उसे मारपीट वाला माहौल hi मिला था , लेकिन आरती के केस में ऐसा नहीं था, उसे बचपन से बहुत hi प्रेम से पला गया, राजू को छोड़ दो तो सभी ने उसे सम्मान और प्रेम दिया है , वो मारपीट जैसी चीजों से भी बहुत दूर थी .. तो उसके मन में इस ताकत से उठाने वाले विचारो को लेकर ग्लानि के भाव जल्दी hi आने शुरू हो गए .. “
डॉ. की बात सुनकर भुवन और मैं दोनों hi सोच में पढ़ गए थे ..
अगर ये बीमारी थी तो इसका लीलाज क्या था , एक इलाज तो हमें पता था वो था प्रेम ..
डॉ. ने बोलना जारी रखा
“और जैसा की अधिकतर मानसिक रोगियों के साथ होता है प्रेम से hi ये रोग भी काबू में आ जाता है ….
इसका कारण भी सामान्य सा है की अगर कोई आपसे प्रेम दिखाए तो उस प्रेम के अहसास से अपने पर काबू करना आसान हो जाता है ..”
हम सभी चुप थे की मेरे दिमाग में एक प्रश्न आया
“तो क्या हमें भाभी को बता देना चाहिए की वो बीमार है ..”
“नहीं अंकित अभी नहीं .. इससे वो और भी परेशां हो जायेगी और उससे उसका खुद पर से कण्ट्रोल खोने लगेगा .. उसे तुम्हारे प्रेम की जरुरत है उसे बस इन सबसे दूर रखो तो hi ठीक होगा, अभी तो मैं भी अपनी इस थ्योरी पर कन्फर्म नहीं हु, मुझे भी थोड़ा रिसर्च का मौका दो .. अगर ऐसा है तो ऐसे केस या इससे मिलते जुलते केस और भी होंगे , और प्रेम से बड़ी कोई थेरेपी दुनिया में नहीं है .. हम भारतीयों में परिवार का बहुत मुलाय होता है ये भी एक तरह से थेरेपी का काम करती है , पहले जब संयुक्त परिवार होते थे लोग अपनी समस्या एक दूसरे से खुलकर बोल लेते थे और हलके हो जाते थे इसलिए मानसिक रोगी बहुत hi काम थे, जिन समाजो में अकेलेपन की समस्या है वंहा मानसिक रोग भी बहुत जयदा है क्योकि उनके पास प्रेम hi तो नहीं है .. न माँ बाप का प्यार मिल पता है न hi दोस्तों का न hi रिश्तेदारों का , मिलता है तो बस टेंशन … तो अभी तो बस प्यार से रखो बाकि की बाटे बाद में देखते है .. अगर आरती को जयदा मानसिक टेंशन नहीं दिया जाए तो हो सकता है की वो खुद से hi ठीक होने लगे , जैसे की कोमल हो गयी … अब कोमल का खुद पर बहुत hi कण्ट्रोल है और यद् रखना हर मानसिक बीमारी अपने आप में एक मानसिक ताकत भी होती है , बीमारी और ताकत में बस एक hi चीज का फर्क होता है वो है कण्ट्रोल का .. कण्ट्रोल कर लिया तो ताकत और अगर न कर पाए तो बीमारी … ( ये मैं ऐसे hi नहीं बोल रहा हु , असल में साइकोलॉजी में हर बीमारी के साथ एक चीज मैंने देखि है और वो है उनकंट्रोलबले, और साथ hi साथ कई मानसिक बीमारिया ऐसी भी है जिसे हम योग और ध्यान की सिद्धिया मानते है , ताकत और जादू मानते है लेकिन वही बात है कण्ट्रोल का फर्क होता है ) “
डॉ. की बात से मुझे बहुत hi शांति मिली , तभी थोड़ी hi दूर हमें किसी के होने का अहसास हुआ ..
हम सभी की नजर उस और गयी ..
वो नेहा थी , आँखों में आंसू लिए वो हमारी बातो को सुन रही थी ..
“तुम ..”
मैं कुछ और बोल पता उससे पहले hi डॉ. वंहा से उठ गए
“तुम दोनों बात करो हम चलते है “
डॉ. ने ये कहते हुए मुझे आँख मार दी थी …..
डॉ. और भुवन के जाने के बाद नेहा मुझसे आकर लिपट गयी ,मैं आश्चर्य में था की ये क्या हो रहा है ..
“मुझ माफ़ कर दो अंकित , मेरी माँ सच में तिवारी के साथ मिली हुई है , मुझे माफ़ कर दो की मैंने भाभी के बारे में बुरा सोचा .. भाभी बीमार है और मैं.. “
मैं नेहा के इस हृदयपरिवर्तन से चौक गया था
“तुम.. तुमने मुझे माफ़ कर दिया “
उसने सर उठाया उसके होठो में एक मुस्कान थी लेकिन गहरी नहीं बस हलकी सी
“है भी और नहीं भी “
“मतलब ??”
“मतलब की तुमने भाभी के साथ जो किया उसके लिए मैंने तुम्हे माफ़ किया लेकिन मैं तुमसे प्यार करती हु और तुम्हे किसी और के साथ नहीं देख सकती .. तुम भाभी से hi प्यार करते हो मुझसे नहीं , मुझसे प्यार करना शायद तुम्हारा भरम था “
“नहीं नेहा ऐसा नहीं है , मैं तुम दोनों से प्यार करता हु .. और रही साररिक सम्बन्धो की तो मेरे सम्बन्ध सस और एक रानी नाम की ायरत से भी रहे है “
मेरी बात सुनकर नेहा ने मुझे छोड़ दिया और बड़े hi गौर से मेरे चेहरे को देखने लगी
“तुमने समझाना मेरे बस का नहीं है अंकित , तुमने जो किया वो शायद तुम्हारे लिए ठीक हो लेकिन मेरे लिए नहीं .. मैं आज hi यंहा से जा रही हु अपने पुराने जीवन में लौट रही हु , तिवारी से हमें कोई दर नहीं है उसका संरक्षण माँ के साथ है , मैं एक सिंपल सी लड़की हु अंकित और तुम बहुत hi कॉम्प्लिकेटेड हो… हमारा अलग हो जाना hi सही रहेगा “
इससे पहले की मैं उससे कुछ कह पता वो वंहा से निकल गयी , मैं उसे रोकना चाहता था लेकिन मुझे भाभी का ख्याल आया, नेहा के रहते मैं भाभी पर ध्यान नहीं दे पता शायद वक़्त की भी यही नजाकत थी की मैं नेहा को जाने दू …
वो आँखों में आंसू भरे जाने लगी मैं बस नदी की रेट में खड़ा हुआ उसे जाते देखता रहा ……..
मैं उसे रोकना तो चाहता था लेकिन मेरे आँखों के सामने बस भाभी की तस्वीर आ रही थी ………..