अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड) - Page 61 - SexBaba
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अडुल्टेरी भाभी माँ (कम्प्लेटेड)

अरे डॉ साहब एकदम से वक़्त बदल दिए, जज़्बात बदल दिए, ज़िन्दगी बदल दी किरदारों की :डी

छम्मक चलो कोमल क तो पता नहीं

पर भाभी... नाह वह ऐसी नहीं हैं यार...

जिस तरीके से आपने इस किरदार को दर्शाया है उस हिशप से तोह यहाँ सुरु से hi भाभी hi वह किरदार थी जिसने कोई गलती नहीं की... सीरियसली उसने जोह भी किया दुसरो के बहकावे में आके किया... क्या सम्पत, क्या जीवा क्या उसका वह पति सभी ने उसे बस खिलोने की तरह खेलना चाहा.. .

यहाँ तक की भाभी ुष झिंगुल सोनू के पास नहीं गयी थी बल्कि वह भाभी के पीछे पारा था, ताकि इंटिमेट हो चके..

भाभी हवस में नहीं थी बल्कि झिंगुल सोनू हवस के हाथो मज़बूर हैं...

तोह भाभी कैसे दोषी हुयी.... दोष तो उनलोगो की है जिनलोगो ने उसे उसे करना चाहा

गड़बड़ी तोह ुष बुढ़िया महिमा में hi है... दाल बदलू कहीं की

खैर...

Let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट

ब्रिलियंट अपडेट विथ अवेसमे राइटिंग स्किल :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे:
 
पहले तो इस बुढ़िया महिमा ने अपनी कहानी सुनाने में पूरा अपडेट खा लिया और तब यह नहीं बताया की ये तिवारी की माशूका रही है और अब ये उस चूतिये शिवा को ये बात बता कर उस चूतिये को और चूतिया बना रही है कहानी क्या अब टीवी धारावाहिक बनेगी जिस में औरतें चाल पर चाल चल कर लड़ाई झगड़ें करवाती हैं क्या यही कसर बाकि रह गयी थी ?
 
नेहा की मां का .......... सॉरी, भावनाओ में इधर उधर भटक गए थे...

भाभी को तो आप शैतान की नानी ही बना दिए डॉ साहब...

मास्टर साहब का इस तरह उपयोग बिल्कुल नहीं सोच पाए थे...

सहवास के उस क्रिया में पत्थर से जख्म नहीं आया होगा....🪑

बिल्कुल आप पतंग की तरह कहानी को ले जा रहे है ढील देते जाते है कि एकाएक खीच लेते है धागा.... और दिमाग हिल हम सब का जाता है..

तिवारी .... इतनी आसानी से हारने वाला तो बिल्कुल नहीं मतलब महिमा को तैयार किया हो... लेकिन आप ये बोल चुके मतलब कोई और ही है....

ये बताईए डॉ चुतिया इंसान ही है या कुछ और, डाक्टरी छोड़ कर सारे काम कर देते है.... नेता, गुंडे, प्रशासन, जमींदार, संत और पता नहीं कितनों के संपर्क में है.....

वैसे सब सही लेकिन 'sus' को बहुत मिस कर रहे है...

आगे के इंतजार में बेसब्री से बैठे है डॉ साहब......
 
:सुपर्ब: :गुड: अमेजिंग अपडेट है डॉ साहब,

बेहद hi शानदार और लाजवाब अपडेट है भाई,

ये तो एक पल में कहानी hi पलट गयी,

मुझे तो लग रहा है की साड़ी फसाद की जड़ ये महिमा hi है और भाभी और कोमल को फंसने की कोशिश कर रही है,

बेचारा अंकित को कोई भी बेवक़ूफ़ बनाकर चला जाता है,

और उसकी मासूमियत का अब ये महिमा फायदा उठाना चाहती है,

अब देखते हैं की आगे क्या होता है,

वेटिंग फॉर नेक्स्ट अपडेट
 
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थैंक यू...

???
 
अब तक ज़बरदस्त अपडेट है. इस स्टोरी का इस वजह से नहीं की सेक्स सेन्स था बल्कि इस दरिदंगी के बीच में जो सेक्स का संगम. दिखाया है वह अपने. में hi अतुलनीय है. और दिखा दिया उनकी चाहत की शिदअत को की कितना प्रेम है उन दोनों में शायद ज़माने की दिवार छोड़ो ुन्बे तो मौत की दिवार का भी दर नहीं था शायद उस सीमा को भी तोड़ गया उनका प्रेम इस बार. हर बार कोई. न कोई बंदिश, कुछ समझिक बंधन उनको रोक. लेते था मगर आज जब प्यार में बारे हुए दोनों तो साडी सीमा लाँघ गए.
 
वाह क्या बात है, बहुत खूब डॉ साहब,,,, :क्लाप्स:

यहाँ से कहानी को नया मोड़ दे रहे हैं आप और इसके लिए क्या खूब जुगाड़ लगाया है आपने. वैसे महिमा के द्वारा hi सही मगर आप भी मान रहे हैं न की भाभी माँ और अंकित के बीच प्रेम जैसा कुछ नहीं है, अगर है तो सिर्फ हवस. या फिर आप एक बार फिर से हम सबको घूमने की सोच बैठे हैं. खैर जो भी ho...mahima की ये बात तो सही है की भाभी माँ के रहते उसकी बेटी नेहा की कोई अहमियत नहीं रहेगी. यानी अंकित को दोनों में से किसी एक को चुनना होगा. ये बढ़िया किया महिमा ने,,,, :अप्प्रोवे:

अंकित ने एक बार फिर से साबित कर दिया की वो या तो दिमाग से पैदल है या फिर एक ऐसी कठपुतली है जिसे जब चाहे कोई भी अपने इशारो पर नचा सकता hai...aisa मेरा मानना है. उसका खुद का कोई दिमाग नहीं चलता या ये कहे की वो खुद सिचुएशन के बारे में नहीं सोचता. दुरसी बात, ये कैसा प्रेम है जो नेहा से प्यार की गुहार लगता है और इधर भाभी से भी प्रेम की बात करता है.? भाभी और देवर के बीच प्रेम शुरू में hi दिखा था मगर अब सिर्फ दोनों के बीच हवस hi है,,, :डेड:

खैर देखते हैं आगे क्या होता है. महिमा की बाते भी अपनी जगह सही हैं. भला कौन ऐसी माँ होगी जो अपनी बेटी की शादी ऐसे लड़के से करना चाहेगी जो अपनी hi भाभी माँ से ऐसा रिश्ता रखता हो. उसने कोमल और आरती के सम्बन्ध में जो भी बाते बतायी वो tark-sangat हैं. आगे का इंतज़ार रहेगा डॉ साहब,,,, :वेटिंग:
 
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जीवा सम्पत एंड तिवारी ने मिल कर गेम खेला एंड कोमल को सच का पता भी चला. कोमल जो तिवारी को प्यार करने लगी थी उसे तिवारी की बातो से ये अहसास हुआ की वो उस प्यार नहीं करता एंड थें कोमल ने भुवन के प्यार को एक्सेप्ट किया. सच्चा प्यार मिला तो उसकी शक्ति जाग गयी एंड थें उसने कत्ले आम किया शक्ति के नाम से. :सोफिक:

इधर शामे सिचुएशन आरती एंड अंकित में हुआ. ी मैं आरती की शक्ति उसका प्यार मिल जाने से जाग गई बूत अंकित एंड आरती के मिलान से नेहा का दिल भी टूट गया एंड नाउ अंकित चाहता है की नेहा उसकी बास्त समझे और उससे दूर न जाये. थिस इस थे टोटली नॉनसेंस बूत अन्य्वयस नेहा की माँ ने अंकित के सामने जो कंडीशन राखी है वो दिलचस्प है. :सोफिक:

एंड नाउ जब की पता चल गया की पवन कातिल नहीं है तो कौन है वो. अन्य्वयस let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट. :सोफिक:

वेटिंग फॉर थे नेक्स्ट. :celebconf::celebconf::celebconf:

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अपडेट 60


मैं बहुत hi मायूस होकर अपने कमरे में पंहुचा भाभी अभी भी वही थी ..

वो मुझे देखकर थोड़ी घबरा सी गयी

“क्या हुआ सोनू , तू नंगा hi नेहा के पीछे भाग पड़ा था और तू इतना क्यों मायूस लग रहा है , मैंने महिमा को भी उसके कमरे की और जाते देखा , उसने कुछ कहा क्या ??“

इतने देर बाद अब मुझे अपनी शारीरिक अवस्था का बोध हो रहा था , मैं तब से नंगा hi था और मुझे पता भी नहीं चला :ो

जब मानसिक द्वन्द चल रहा हो तो लोग शारीरिक अवस्था को भूल जाया करते है , शायद यही मेरे साथ भी हो रहा था ..

“महिमा ने मुझे साफ कह दिया की अगर नेहा को पाना है तो अपनी भाभी और कोमल को मार डालो “

मैंने ये नज़ारे झुका कर कहा

भाभी मेरे पास आयी और मेरे हाथो को पकड़कर मुझे बिस्टेर में बिठा दिया .. वो प्यार से मेरे बालो को सहलाने लगी

“बीटा , नेहा ने हमें जिस अवस्था में देखा है एक लड़की के लिए ये कितना पीड़ादायक हो सकता है ये बात मैं समझ सकती हु , मुझे भी ऐसी hi तकलीफ हुई थी जब तेरे भैया ने किसी दूसरी ायरत के लिए मुझे अपने घर से निकाल दिया था ..

मुझे सम्हालने के लिए तो तू था , लेकिन नेहा ??

नेहा के पास तो कोई भी नहीं है , और महिमा ने जो भी बोलै है वो गुस्से में बोलै है , उसकी बात को दिल से मत लगा , हमारे रिश्ते को बस हम hi समझ सकते है , दुनिया में कोई भी इसे महज हवस की भूख hi समझेगा , हमारे दिल में एक दूसरे के लिए जो प्रेम है वो तो बस हमें hi पता है , और रही बात हमें मरने की तो तेरी ख़ुशी के लिए मैं मरने को भी तैयार हु “

मैंने सर उठाकर भाभी की और देखा , उनके मासूम से चेहरे में एक अजीब सी चमक थी ,और आँखों में आंसुओ की दो बुँदे नाच रही थी ..

मैंने भी अपने भावनाओ को सम्हाल नहीं पाया और उनसे जोरो से लिपट गया …..

“मुझे माफ़ कर दो भाभी , मैंने आपके प्यार पर शक किया “

वो बड़े hi प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी , उनके स्पर्श ने मुझे अभी तक बाईट हुए दिनों में भाभी के साथ बिताये हर लम्हे को जैसे फिर से उजागर कर दिया था , मुझे मेरी वो भाभी यद् आ गयी जिसने मेरे लिए अपने पति से झगड़ा किया और उसकी सजा को हसंते हसंते स्वीकार भी किया, ये मेरी वही भाभी थी जिसने समाज में अपनी बदनामी की फ़िक्र नहीं है , न hi जीवन में आने वाले किसी भी मुस्किलो की फ़िक्र की बस मेरे साथ रही ,मेरा सहारा बानी … मुझे मुसीबतो से बचते रही और मुझे पता भी चलने नहीं दिया, मुझे माँ का प्रेम और बहन का स्नेह दिया और पत्नी की तरह मेरे देह की अग्नि को भी शाट करने से नहीं हिचकिचाई ….

जब दिया बिना मांगे दिया और मैं पागल हर कमजोर मौको पर उनको शक की निगाहो से देखता रहा ..

उनके हर स्पर्श में हमेशा hi मेरे लिए प्रेम था , उनकी हर दवा मेरे लिए hi रही , उनकी गॉड मेरे लिए हमेशा से जन्नत hi रही , है हमारे बिच जिस्मानी सम्बन्ध बने हमने प्रेम की सीमाओं को पार कर हवस के दरिया में छलांग लगा दिया . लेकिन ये हवस क्यों था , क्या ये जिस्म की भूख के कारण उत्पन्न हुआ था , नहीं शायद नहीं ……

ये हवस भी तो उस प्रेम के चरम की निशानी थी जो हमारे दिलो में इतने दिनों तक था , और अगर ये महज जिस्मानी भूख hi थी तो भी उससे प्रेम की महक गायब नहीं हुई थी ..

जब मैंने पहली बार भाभी के जिस्म को महसूस किया था और मेरे अंदर हवस की आग आयी थी तब भी भाभी ने मुझे अपनी ममता के अंचल में सहारा दिया था मुझे मेरे जिस्म की भूख से परिचय करवाया था और मुझे लड़खड़ाने से सम्हाला था, अगर ये महज जिस्म की भूख थी तो जो हमारे बिच अब हो रहा था वो बहुत पहले hi हो जाना था ..

न जाने कितने कमजोर पालो में हमने अपने जिस्म की आग के चार्म पर भी खुद को रोक लिया था , वो प्रेम hi था जिसके कारण हम रुक पाए थे , लेकिन जब एक बार हमारे बिच की वो दिवार गिर गयी तो फिर खुद को रोकने का मतलब भी तो नहीं रह गया था ……

सब सोचकर मेरे आँखों में अनुस आने लगे थे , भाभी के जिस्म में अभी महज एक झीनी सी निघ्त्य hi थी लेकिन फिर भी मेरे मन में हवस की चिंगारी भी दूर दूर तक कही नहीं थी , उनके जिस्म से उठाने वाली खुसबू ने भी मुझे उसकी ममता का hi आभास दिलाया था …

“अरे पागल तू बच्चो जैसे रोने लगा …”

उन्होंने मेरे आंसुओ को अपने होठो से पिया

“भाभी मुझे लगता है की महिमा तिवारी से मिली हुई है “

उन्होंने मुझे बड़े hi प्यार से देखा

“इन सबसे हमें क्या मतलब है सोनू , हमें सब छोड़कर यंहा से निकल जाना चाहिए , बस तेरी नेहा तुझे मिल जाए “

मैं बस उनके उज्वल चेहरे को hi देखता रह गया

“भाभी अगर नेहा मुझे आपके बदले मिले तो मुझे नेहा नहीं चाहिए ,मेरे जीवन में नेहा के होने का कोई भी मूल्य नहीं रह जायेगा अगर आप मेरे जीवन में ना हो”

मेरी बात सुनकर वो हलके से मुस्कुराई

“अच्छा तो तुझे दोनों चाहिए , और साथ hi सस और रानी भी क्यों ??”

उनकी आवाज में थोड़ी शरारत थी जिससे मेरे होठो में भी फीकी hi सही लेकिन एक मुस्कान आ गयी

“भाभी सस केवल दोस्त है और रानी के रहने और न रहने से मुझे कोई भी फर्क नहीं पड़ता , असल में अब तो मैं फिर सस और रानी के पास जाना भी नहीं चाहता ..

और रही आपके मिलने की बात तो आप तो मुझे मिली हुई hi हो , हमेशा से आपका जीवन मेरे लिए hi तो रहा है .. और जिस्म के मिलान से मुझे कोई भी मतलब नहीं है मुझे तो केवल आप चाहिए आपका जिस्म नहीं …”

भाभी के चेहरे का भाव अचानक से hi बदल गया वो थोड़ी गंभीर हो गयी

“नेहा तुझे मिलेगी बीटा और मैं भी और हम दोनों का जिस्म भी ….और अगर हमारे बिच कोई आया तो मैं उसे हटा दूंगी ”

उनकी आवाज में एक संकल्प था एक ऐसा संकल्प जिसने मुझे डरा hi दिया , ये मेरी भाभी नहीं बल्कि उनके अंदर की वो ताकत बोल रही थी , उनकी आंखे लाल होने लगी जैसे भाभी अपने शरीर से अपना कण्ट्रोल खो रही हो , मैंने झट से उनके चेहरे को पकड़ लिया

“भाभी ..”

मैंने उनके झटका दिया , वो जैसे थोड़े होश में आयी और मेरे चेहरे को पकड़कर मेरे होठो में अपने होठो को दाल दिया …

मैं बेहद hi आश्चर्य में था की ये क्या हो रहा है , भाभी पुरे ताकत से मेरे होठो को चूसे जा रही थी उनकी सांसे तेज होने लगी थी ..

जब उन्होंने मुझे छोड़ा तो उनके आँखे भरी हुई थी ..और चेहरा मायूस

“सोनू शायद महिमा सही कह रही थी … नेहा को पाने के लिए तुझे मुझे मरना होगा “

उनकी बात सुनकर मैं बुरी तरह से चौक गया ..

मैं आंखे फाडे हुए उन्हें देखने लगा

“सोनू ये ताकत अजीब है , जब ये मेरे अंदर हावी होती है तो मुझे बस तुम्हे पाने की तीव्र िक्खा होने लगती है , मैं तुम पूरा पाना चाहती हु , तुम्हारे जीवन के किसी भी दुःख को किसी भी कीमत में दूर कर देना चाहती हु , मेरे मन में ख्याल आया की मैं महिमा को जान से मार दू .. क्योकि वो तेरे और नेहा के बिच में आ रही है …… लेकिन जब तुमने मुझे फिर से किश किया तो मुझे समझ में आया की मैं क्या सोच रही थी “

भाभी घबरा गयी थी , उनकी होटल अजीब सी हो गयी थी मैंने झट से उन्हें अपने बांहो में भर लिया था …….

अब मैं उनके बालो को सहला रहा था और वो किसी बच्चे की तरह मुझसे लिपट गयी थी …..

मैं जैसे किसी सोच में डूब गया था आखिर ये भाभी को क्या हो रहा है, वो मुझसे प्रेम तो करती थी हमेशा से करती थी , लेकिन अब इस प्रेम में एक आसक्ति जगाने लगी थी , एक गहरी आसक्ति जो भाभी और मेरे दोनों के समझ से बहार थी …….



 
सोनू इस ा कम्पलीट इडियट एंड वेंट नेकेड तो नेहा एंड महिमा आल्सो सॉ एवरीथिंग. ??? बूत व्हाट महिमा है साइड, थे मंद इस नॉट वर्किंग ात आल. ?भाभी डस नॉट लिए, ी हैवे फुल फेथ इन हेर.? सीइंग थे लव ऑफ़ बोथ ऑफ़ थम मेड माय हार्ट हैप्पी.? इन today's अपडेट, यू हैवे वैरी वेल प्रेसेंटेड थे फीलिंग्स बिफोर उस. ओनली सोनू कैन कण्ट्रोल थे पावर इनसाइड भाभी. व्हाट विल हैपन तो नेहा? ? ी वांट तो सी सोनू नेहा एंड भाभी टुगेदर. ?

अस ऑलवेज थे अपडेट वास् ग्रेट, यू अरे राइटिंग वैरी वेल, नाउ let's सी व्हाट हप्पेंस नेक्स्ट, टिल थें वेटिंग फॉर थे नेक्स्ट part ऑफ़ थे स्टोरी.

थैंक यू...

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