अपडेट 60
मैं बहुत hi मायूस होकर अपने कमरे में पंहुचा भाभी अभी भी वही थी ..
वो मुझे देखकर थोड़ी घबरा सी गयी
“क्या हुआ सोनू , तू नंगा hi नेहा के पीछे भाग पड़ा था और तू इतना क्यों मायूस लग रहा है , मैंने महिमा को भी उसके कमरे की और जाते देखा , उसने कुछ कहा क्या ??“
इतने देर बाद अब मुझे अपनी शारीरिक अवस्था का बोध हो रहा था , मैं तब से नंगा hi था और मुझे पता भी नहीं चला :ो
जब मानसिक द्वन्द चल रहा हो तो लोग शारीरिक अवस्था को भूल जाया करते है , शायद यही मेरे साथ भी हो रहा था ..
“महिमा ने मुझे साफ कह दिया की अगर नेहा को पाना है तो अपनी भाभी और कोमल को मार डालो “
मैंने ये नज़ारे झुका कर कहा
भाभी मेरे पास आयी और मेरे हाथो को पकड़कर मुझे बिस्टेर में बिठा दिया .. वो प्यार से मेरे बालो को सहलाने लगी
“बीटा , नेहा ने हमें जिस अवस्था में देखा है एक लड़की के लिए ये कितना पीड़ादायक हो सकता है ये बात मैं समझ सकती हु , मुझे भी ऐसी hi तकलीफ हुई थी जब तेरे भैया ने किसी दूसरी ायरत के लिए मुझे अपने घर से निकाल दिया था ..
मुझे सम्हालने के लिए तो तू था , लेकिन नेहा ??
नेहा के पास तो कोई भी नहीं है , और महिमा ने जो भी बोलै है वो गुस्से में बोलै है , उसकी बात को दिल से मत लगा , हमारे रिश्ते को बस हम hi समझ सकते है , दुनिया में कोई भी इसे महज हवस की भूख hi समझेगा , हमारे दिल में एक दूसरे के लिए जो प्रेम है वो तो बस हमें hi पता है , और रही बात हमें मरने की तो तेरी ख़ुशी के लिए मैं मरने को भी तैयार हु “
मैंने सर उठाकर भाभी की और देखा , उनके मासूम से चेहरे में एक अजीब सी चमक थी ,और आँखों में आंसुओ की दो बुँदे नाच रही थी ..
मैंने भी अपने भावनाओ को सम्हाल नहीं पाया और उनसे जोरो से लिपट गया …..
“मुझे माफ़ कर दो भाभी , मैंने आपके प्यार पर शक किया “
वो बड़े hi प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी , उनके स्पर्श ने मुझे अभी तक बाईट हुए दिनों में भाभी के साथ बिताये हर लम्हे को जैसे फिर से उजागर कर दिया था , मुझे मेरी वो भाभी यद् आ गयी जिसने मेरे लिए अपने पति से झगड़ा किया और उसकी सजा को हसंते हसंते स्वीकार भी किया, ये मेरी वही भाभी थी जिसने समाज में अपनी बदनामी की फ़िक्र नहीं है , न hi जीवन में आने वाले किसी भी मुस्किलो की फ़िक्र की बस मेरे साथ रही ,मेरा सहारा बानी … मुझे मुसीबतो से बचते रही और मुझे पता भी चलने नहीं दिया, मुझे माँ का प्रेम और बहन का स्नेह दिया और पत्नी की तरह मेरे देह की अग्नि को भी शाट करने से नहीं हिचकिचाई ….
जब दिया बिना मांगे दिया और मैं पागल हर कमजोर मौको पर उनको शक की निगाहो से देखता रहा ..
उनके हर स्पर्श में हमेशा hi मेरे लिए प्रेम था , उनकी हर दवा मेरे लिए hi रही , उनकी गॉड मेरे लिए हमेशा से जन्नत hi रही , है हमारे बिच जिस्मानी सम्बन्ध बने हमने प्रेम की सीमाओं को पार कर हवस के दरिया में छलांग लगा दिया . लेकिन ये हवस क्यों था , क्या ये जिस्म की भूख के कारण उत्पन्न हुआ था , नहीं शायद नहीं ……
ये हवस भी तो उस प्रेम के चरम की निशानी थी जो हमारे दिलो में इतने दिनों तक था , और अगर ये महज जिस्मानी भूख hi थी तो भी उससे प्रेम की महक गायब नहीं हुई थी ..
जब मैंने पहली बार भाभी के जिस्म को महसूस किया था और मेरे अंदर हवस की आग आयी थी तब भी भाभी ने मुझे अपनी ममता के अंचल में सहारा दिया था मुझे मेरे जिस्म की भूख से परिचय करवाया था और मुझे लड़खड़ाने से सम्हाला था, अगर ये महज जिस्म की भूख थी तो जो हमारे बिच अब हो रहा था वो बहुत पहले hi हो जाना था ..
न जाने कितने कमजोर पालो में हमने अपने जिस्म की आग के चार्म पर भी खुद को रोक लिया था , वो प्रेम hi था जिसके कारण हम रुक पाए थे , लेकिन जब एक बार हमारे बिच की वो दिवार गिर गयी तो फिर खुद को रोकने का मतलब भी तो नहीं रह गया था ……
सब सोचकर मेरे आँखों में अनुस आने लगे थे , भाभी के जिस्म में अभी महज एक झीनी सी निघ्त्य hi थी लेकिन फिर भी मेरे मन में हवस की चिंगारी भी दूर दूर तक कही नहीं थी , उनके जिस्म से उठाने वाली खुसबू ने भी मुझे उसकी ममता का hi आभास दिलाया था …
“अरे पागल तू बच्चो जैसे रोने लगा …”
उन्होंने मेरे आंसुओ को अपने होठो से पिया
“भाभी मुझे लगता है की महिमा तिवारी से मिली हुई है “
उन्होंने मुझे बड़े hi प्यार से देखा
“इन सबसे हमें क्या मतलब है सोनू , हमें सब छोड़कर यंहा से निकल जाना चाहिए , बस तेरी नेहा तुझे मिल जाए “
मैं बस उनके उज्वल चेहरे को hi देखता रह गया
“भाभी अगर नेहा मुझे आपके बदले मिले तो मुझे नेहा नहीं चाहिए ,मेरे जीवन में नेहा के होने का कोई भी मूल्य नहीं रह जायेगा अगर आप मेरे जीवन में ना हो”
मेरी बात सुनकर वो हलके से मुस्कुराई
“अच्छा तो तुझे दोनों चाहिए , और साथ hi सस और रानी भी क्यों ??”
उनकी आवाज में थोड़ी शरारत थी जिससे मेरे होठो में भी फीकी hi सही लेकिन एक मुस्कान आ गयी
“भाभी सस केवल दोस्त है और रानी के रहने और न रहने से मुझे कोई भी फर्क नहीं पड़ता , असल में अब तो मैं फिर सस और रानी के पास जाना भी नहीं चाहता ..
और रही आपके मिलने की बात तो आप तो मुझे मिली हुई hi हो , हमेशा से आपका जीवन मेरे लिए hi तो रहा है .. और जिस्म के मिलान से मुझे कोई भी मतलब नहीं है मुझे तो केवल आप चाहिए आपका जिस्म नहीं …”
भाभी के चेहरे का भाव अचानक से hi बदल गया वो थोड़ी गंभीर हो गयी
“नेहा तुझे मिलेगी बीटा और मैं भी और हम दोनों का जिस्म भी ….और अगर हमारे बिच कोई आया तो मैं उसे हटा दूंगी ”
उनकी आवाज में एक संकल्प था एक ऐसा संकल्प जिसने मुझे डरा hi दिया , ये मेरी भाभी नहीं बल्कि उनके अंदर की वो ताकत बोल रही थी , उनकी आंखे लाल होने लगी जैसे भाभी अपने शरीर से अपना कण्ट्रोल खो रही हो , मैंने झट से उनके चेहरे को पकड़ लिया
“भाभी ..”
मैंने उनके झटका दिया , वो जैसे थोड़े होश में आयी और मेरे चेहरे को पकड़कर मेरे होठो में अपने होठो को दाल दिया …
मैं बेहद hi आश्चर्य में था की ये क्या हो रहा है , भाभी पुरे ताकत से मेरे होठो को चूसे जा रही थी उनकी सांसे तेज होने लगी थी ..
जब उन्होंने मुझे छोड़ा तो उनके आँखे भरी हुई थी ..और चेहरा मायूस
“सोनू शायद महिमा सही कह रही थी … नेहा को पाने के लिए तुझे मुझे मरना होगा “
उनकी बात सुनकर मैं बुरी तरह से चौक गया ..
मैं आंखे फाडे हुए उन्हें देखने लगा
“सोनू ये ताकत अजीब है , जब ये मेरे अंदर हावी होती है तो मुझे बस तुम्हे पाने की तीव्र िक्खा होने लगती है , मैं तुम पूरा पाना चाहती हु , तुम्हारे जीवन के किसी भी दुःख को किसी भी कीमत में दूर कर देना चाहती हु , मेरे मन में ख्याल आया की मैं महिमा को जान से मार दू .. क्योकि वो तेरे और नेहा के बिच में आ रही है …… लेकिन जब तुमने मुझे फिर से किश किया तो मुझे समझ में आया की मैं क्या सोच रही थी “
भाभी घबरा गयी थी , उनकी होटल अजीब सी हो गयी थी मैंने झट से उन्हें अपने बांहो में भर लिया था …….
अब मैं उनके बालो को सहला रहा था और वो किसी बच्चे की तरह मुझसे लिपट गयी थी …..
मैं जैसे किसी सोच में डूब गया था आखिर ये भाभी को क्या हो रहा है, वो मुझसे प्रेम तो करती थी हमेशा से करती थी , लेकिन अब इस प्रेम में एक आसक्ति जगाने लगी थी , एक गहरी आसक्ति जो भाभी और मेरे दोनों के समझ से बहार थी …….