अपडेट 58
“तो अब हमें क्या करना चाहिए “
ये प्रश्न मेरे दिमाग में बहुत देर से घूम रहा था , हम सभी डॉ. के साथ उनके घर में थे ..
सभी चीजे तो साफ़ थी लेकिन मेरे और भाभी के सामने अभी भी ये साफ नहीं था की हमें अब क्या करना चाइये , जो भी हुआ था उसमे हमारा कुछ भी नहीं गया था, अभी तक हमारे पास ऐसी कोई भी वजह नहीं थी जो हमें जीवा या तिवारी का दुशमन बना देती ……..
“मुझे जीवा और तिवारी से अपने पिता की मौत का बदला लेना है “
नेहा ने एक रूखे हुए स्वर में कहा
“नहीं बेटी , ये तुम्हारा काम नहीं है जो हुआ उसके लिए अब अपना भविष्य दाव पर मत लगाओ .. वो काम तो मैं कर hi लुंगी , और अगर ना भी कर पायी तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है , सत्य के पराम् की निशानी मेरे पास है और मुझ कुछ नहीं चाहिए “ नेहा की माँ महिमा नेहा की बात से इमोशनल हो गयी थी
“है बेटी, महिमा सही कह रही है , तुम्हारे सामने पूरा जीवन पड़ा हुआ है , तुम्हे अपन करियर पर ध्यान देना चाहिए “
इस बार कोमल बोल उठी
(लोग इतने जयदा हो गए है की अब संवादों को नाटक के फरमाते में hi लिखता हु वरना फिर बोलोगे की समझ नहीं आया की कौन बोल रहा है )
नेहा : “लेकिन मेरे लिए ये जानकर भी की मेरे पिता को किसने और किस हालातो में मारा है , चुप चाप बैठे रहना नामुमकिन है , आप लोग मेरा साथ दो या न दो लेकिन मैं तो ये जंग लड़ूंगी “
नेहा की बात सुनकर सभी के मन में एक खटास सी पैदा हो गयी थी
डॉ. : “बीटा ये कोई जंग नहीं है , और तुम क्या करोगी तिवारी जीवा और सम्पत को मार डौगी ,… यही न .. लेकिन उसके बाद तुम्हारा क्या होगा तुम्हारी जिंदगी का क्या होगा , अब वो समय नहीं है जब कोमल तलवार लहराते हुए जाती थी और लोगो को काट डालती थी और कोई भी कुछ नहीं कर पता था , अब कानून और प्रशाशन बहुत hi स्ट्रिक्ट हो गया है, अब बाहुबलियों और ुंडेरवोर्ड के डांस का समय गया , अब या तो पैसा बोलता है या तो पावर , अब समय दिमाग वालो का है , बाहुबल से कुछ भी नहीं हो सकता , अगर तुम्हे जीवा और तिवारी को ख़त्म करना hi है तो सीधे लड़ने की बजाये कुछ ऐसा करो की वो लोग खुद hi बर्बाद हो जाये , ऐसे भी कोई तो है जो तिवारी के पास है और तिवारी को मरना चाहता है, जीवा तो ख़त्म हो hi चूका है , तिवारी के पास अभी पावर है उसे ख़त्म करने के लिए उस इंसान के बारे में जानना जरुरी हो जाता है जो तिवारी को उसके घर में रहकर hi उसे मरने का सडयंत्र बना रहा है , कोई उसके करीब का hi आदमी है …
और मेरे खेल से अंकित, आरती, कोमल , भुवन तुम दोनों को गांव चले जाना चाहिए , या फिर कही और इन सबसे दूर चले जाओ .. कोई मतलब नहीं है इन सब चोचलो में पड़ने से ..”
डॉ. की बात से वंहा एक सन्नाटा सा छ गया था
मैं : “ लेकिन ये कतल कोण कर रहा होगा “
डॉ. : “क्या फर्क पड़ता है की कौन कतल कर रहा होगा , तुम्हे इससे क्या मतलब हो सकता है … जो भी मार रहा हो जिसे भी मार रहा हो , तुम्हे इन सब में पड़ने की क्या जरुरत है “
आरती : “डॉ. हम तो ये सब छोड़कर यंहा से चले जायेंगे लेकिन क्या वो हमें छोड़ देंगे , जीवा और सम्पत ने हमें ढूंढने के लिए गांव में आदमी भेजे थे, तिवारी भी हमें ढूंढ hi रहा होगा , गांव जाना हमारे लिए सेफ नहीं है और हमारे पास जो कुछ भी अभी है वो गांव में hi तो है , चलो मान लिया की हम वो सब छोड़कर कही चले भी जाये तो क्या हम जीवन भर चैन से जी पाएंगे , क्या वो लोग हमें डूंडाहेंगे नहीं .. मेरे माता पिता को देखिये , जो लोग पढ़ लिख कर एक अच्छी जिंदगी जी सकते थे वो इन सबसे दूर जाने के चक्कर में hi किस तरह का जीवन जी रहे है , महलो का सुख भोगने की काबिलियत रखने के बावजूद एक छोटे से ठेले में काम काके अपनी पूरी जिंदगी निकाल दी इन्होने …”
भाभी का चेहरा उदास हो गया था
कोमल : “बीटा हमने ग़ुरबत में दिन जरूर गुजर लिए लेकिन हम दुखी नहीं है , हमारे पास वो सब है जो हमें चाहिए था , आपस में प्रेम है और तुम भी तो हो … और प्रेम और शांति से बढ़कर जीवन में क्या हो सकता है , बाहरी चीजे तो महज बाहरी सुख hi दे पति है , और बाहरी सुख छनभंगुर hi होता है , थोड़े देर के इन्द्रिय सुख के लिए लोग न जाने क्या क्या कर जाते है ..
लेकिन आंतरिक सुख तो स्थायी है ,और इसका महत्व भी इन्द्रिय सुख से कही ज्यादा है , प्रेम और शांति से बढ़कर कुछ भी नहीं है बेटी…”
कोमल ने बड़े hi प्यार से भाभी के चेहरे पर अपने हाथ फेरे, भाभी के चेहरे में एक मुस्कान आ गयी थी ..
मैं : “तो क्या डीडे किया की क्या करना चाहिए ??”
मेरी बात से भाभी हंस पड़ी
भाभी : “मेरे ख्याल से हमें यही रहना चाहिए और जीवन वैसे hi जीना चाहिए जैसे हम जी रहे थे … “
भाभी की बात सुनकर सभी चौक गए
डॉ. : “ वो लोग तुम्हारे पीछे आएंगे “
भाभी : “अब मैं वो पुराणी आरती नहीं रह गयी हु डॉ. मेरे पास अब ताकत है “
डॉ. : “उसी का तो दर है , अगर तुम अपने ताकत का इस्तमाल करोगी तो तुम कानून के नजरो में गुनहगार हो सकती हो “
भाभी : “किसने कहा की मैं उसका इस्तमाल करुँगी, लेकिन सकती तो कर सकती है न ..”
फिर से एक ख़ामोशी ने सब को जकड लिया था
कोमल : “ये सही नहीं रहेगा आरती फिर से वही सब नहीं , अब नहीं हम कल hi ये शहर छोड़कर दूर कही चले जायेंगे “
अपनी माँ की बात सुनकर भाभी ने भी एक गहरी साँस छोड़ी ..
भाभी : “हुम्म्म ठीक है , लेकिन बहुत देर हो चुकी है काम से काम अब तो सोने चलते ही “
वो बेफिक्री से उठाकर वंहा से चली गयी थी ………….
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रत का समां झूमे चन्द्रमा मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया रत का समां ……………
पास रखे रेडियो पर एक पुराण गण बज रहा था मैं लेता हुआ आपने भविष्य के बारे में सोच रहा था .. जो अंधकार में दिखाई देर रहा था , कुछ समझ नहीं आ रहा था की आगे क्या करना है..
तभी कमरे का दरवाजा खुला , सामने एक पारी कड़ी थी , काळा रंग की झीनी सी निघ्त्य में उसके गोर गदराये जिस्म का हर कटाव खिल कर सामने आ रहा है ..
मैं उस पारी को बस देखता hi रह गया
“रत का समां झूमे कहंदृमा , मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया ..”
वो रेडियो की धून में hi गुनगुनाते हुए मेरे करीब आ रही थी, उनके जिस्म से आती हुई एक मनोहर खुसबू नेरे नथुनों को भरने लगी थी ..
वो आकर मेरे साथ hi सो गयी , मैं लालच में बस लार टपका रहा था , मेरे हाथ उनके जांघो पर चले गए और हलके से ऊपर सार्क कर सीधे उनकी योनि में ,मने योनि को हलके से सहलाया , उन्होंने कोई भी अन्तः वस्त्र नहीं पहने थे ..
“आह भाभी यू अरे सो हॉट , कितनी गीली हो गयी हो “
“पता नहीं रे कल से क्या हो गया है , हर समय बस वही करने का मन करता है , ी ऍम फीलिंग सो हॉर्नी बाबू” उन्होंने मुँह बनते हुए कहा की मैं हंस पड़ा
“सच में बहुत हॉर्नी हो रही हो..” मैंने अपनी एक उंगली को उनके योनि की गहराइयों में घुसाया , वो सच में बहुत hi गीली थी , उनकी गर्म गर्म योनि में हलके हलके से उंगली करना भी मेरे लिए सुखद था , वो मेरे गॉड में आकर बैठ गयी थी
“रत का समां झूमे चन्द्रमा “
उन्होंने हसंते हुए कहा
“है भाभी .. मन मोरा ऐसे रे जैसे बिजुरिया “
मैंने उनके होठो में अपने होठो को घुसा दिया था , हम दोनों hi जिस्म के मजे में खोने लगे थे , एक दूसरे को चूमे जा रहे थे ..
उन्होंने तत्परता दिखते हुए मेरे कपड़ो को भी मेरे जिस्म से लग कर दिया, वो मेरे निचे अपनी टंगे फैलाये मकहल रही थी ..
‘मेरे पिया गए रंगून वंहा से किया था टेलीफोन ,, तुम्हारी यद् सताती है , जिया में आग लगाती है ‘ रेडियो में गण बदल गया था
“मेरे पिया गए Rangoooon…(maine अपना लिंग सरकारया ) आह सोऊ न्यू मेरे बेटे “
भाभी ने मेरे बालो को कास कर पकड़ लिया था , मेरा लिंग भाभी की योनि की गहराइयों में समां चूका था , आज वो इतनी गीली थी की मुझे उनके अंदर जाने के लिए कोई भी महेनत नहीं करनी पड़ी थी , उनकी योनि जैसे आग की भठ्ठी हो गर्म गर्म ..
“तुम्हारी यद् सताती है ,, जिया में आग लगाती है .. मेरी भाभी जी “
मैंने उनके होठो में अपने होठो को घुसेड़ दिया था , मेरे कमर हलके हलके से चल रहे थे , वो हलके हलके से कसमसा रही थी ..
आग की उस भट्ठी में अपने लिंग को सरकने में जो मजा आ रहा था उस अदंड को मैं बयां भी नहीं कर सकता ..
“मेरे पिया गए .. आह आह आह बीटा .. ाः रंगून … आह बीटा “
उन्होंने मेरे बालो को जोरो से खींच रखा था , और मैं भी जोरो से धक्के मार रहा था
“तुम्हारी यद् .. आह भाभी जी जिया में आग लगती है भाभी आह .. ोूह माय गॉड मजा आ गया “
मैं कुत्तो की तरह करने लगा था .. हांफ रहा था लेकिन मजे में डूबा हुआ था …
“व्हाट था फ़क .. तुम लोग नहीं सुधर सकते “
दरवाजे के खुलने और ये आवाज दोनों hi एक साथ hi आयी थी
हम दोनों hi हड़बड़ा गए थे , सामने जो थी उसे देखकर मेरी फैट के चार हो गयी थी
“नेहा मैं तुम जो सोच रही हो वैसा नहीं है “
मैंने कहा , लेकिन हम दोनों जानते थे की क्या है और क्या नहीं , मेरी कमर एक बार फिर जोरो से चली
“आह बीटा “
भाभी ने आह ली फिर उन्हने और मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ
“डिसगस्टिंग यार , मेरे सामने भी रुक नहीं सकते और बोलते हो की मैं गलत समझ रही हु .. छी और ये तुम्हे अपना बीटा बोलती और और …. छी छी छी कोई सी मनहूस घडी थी जब मैंने तुम जैसे इंसान से प्यार किया था छी.. मैंने तो सोचा था की तुम शे कल चले जाओगे तुमसे मिल लू लेकिन यंहा तो .. छी “
नेहा रट हुए वंहा से जाने लगी , मेरा लिंग अभी भी भाही के योनि में फंसा हुआ था , निकलने का मन भी नहीं कर रहा था लेकिन नेहा को ऐसे जाने भी तो नहीं दे सकता था .. मैंने एक बार भाभी को देखा
“क्या देख रहा है जा उसे मन “
ोकक भाभी मैंने अंतिम बार एक जोर का धक्का मारा और जल्दी से उठाकर नेहा के पीछे भगा ………..