Zindagi : ek anjana safar - Page 7 - SexBaba
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Zindagi : ek anjana safar

अपडेट 54

तरुण रुचिका की बात मान कर चुप चाप बीएड पर लेट जाता है .... रुचिका भी उसके बगल में आकर लेट जाती है ... रुचिका शायद शावर लेकर hi यहाँ आती थी क्यूंकि उसके बालो से बहुत hi प्यारी भीनी भीनी खुसबू आ रही थी ...

रुचिका बड़े प्यार से तरुण के साथ कुड्लिंग करके सो जाती है .... दोनों भाई बहन जल्द hi एक प्यारी सी नींद में खो जाते हैं .....

आगे

अगले दिन सुबह को सभी लोग ब्रेकफास्ट के लिए एक साथ बैठे थे .... सुहानी अभी प्रियांशी और रुचिका के बीच में बैठी थी ... तभी सुहानी की नजर खुसबू पर पड़ती है जो की दूसरे टेबल पर बैठी ब्रेकफास्ट कर रही थी .... तरुण अभी वह नहीं था वो सुबह को hi अपने फूफा जी के साथ कही बहार गया हुआ था ....

सुहानी : रुचिका दीदी ये ब्लू साड़ी वाली आंटी कौन हैं ...

रुचिका : ये हमारी मंझली चची है पर क्यों ...

सुहानी : वो क्या है की मैंने इस आंटी को पहले भी बहुत बार अपने घर में देखा है ....

रुचिका : तुम्हे पक्का यकीं है ये वही हैं ...

सुहानी : हाँ दीदी मैं आपसे झूट क्यों बोलूंगी ...

रुचिका : ok ठीक है ... वैसे तुम्हे यहाँ मन तो लग रहा है न ...

सुहानी : हाँ दीदी आप लोगो से मिले हुए एक दिन hi हुआ है पर ऐसा कभी लगा hi नहीं हम पहली बार मिल रहे ....

ठीक ुशी वक्त राहुल अंदर आता है .... जब उसकी नजर सुहानी पर पड़ी तो उसकी नजर तो जैसे वही जैम गयी .... राहुल ने पहली बार उसको देखा था ...

राहुल को ऐसे खुद को घूरता प् कर सुहानी एक पल को घबरा जाती है .... जब रुचिका की नजर सुहानी को ऐसी हालत में देखती है तो उसकी नजर सामने उसको घूरते हुए राहुल पर पड़ती है तो उसका खून खौल उठता है वो पास में पड़े चाकू को जोर से टेबल पर मरती है जिससे राहुल का ध्यान टूट जाता है .... जब उसकी नजर रुचिका पर पड़ती है तो वो बिना कोई रिएक्शन दिए अपना पिछवाड़ा लेकर वह से भाग लेता है ...

ये सब देख प्रियांशी की तो हसी छूट पड़ती है वो जोर जोर से हसने लगती है ....

प्रियांशी : कुत्ते की दम है रूचि वो इतनी जल्दी सीधा नहीं होगा ... (धीरे से सुहानी के कण में) सुहानी इससे बच के रहना इस घर का दुशाशन है वो ....

उसके बाद सभी का ब्रेकफास्ट ख़त्म हो जाता है .... रुचिका सुहानी को अपने रूम में ले जाकर उससे और भी कुछ तहकीकात करती है ...

इवनिंग को तरुण छत पर खड़ा चलने वाली ठंडी हवा का लुत्फ़ ले रहा था .,.. आज काफी दिनों बाद वो अपने घर की छत पर आया था ....

वो इधर उधर चहलकदमी करता हुआ अपने रीसेंट पास्ट के बारे में सोच रहा था ....

"क्या हुआ हीरो क्या सोच रहा है ..."

ये आवाज़ तरुण की सबसे बड़ी सगी बहन ऋचा की थी ...

तरुण कुछ पल ऋचा को देखता है ...

तरुण : कुछ भी नहीं दीदी .... कैसी हो आप ... कल से नहीं दिखी आप ....

ऋचा : वो मेरी एक सहेली की शादी थी तो वही गयी हुयी थी ....

तरुण : ओह नीस तो हो गयी शादी ठीक से न ...

ऋचा : हाँ आज दोपहर को hi वो अपने ससुराल चली गयी तो मैं यहाँ आ गयी ... मुझे पता नहीं था की तुम आने वाले हो वर्ण मैं नहीं जाती ...

तरुण : कैसा है आपका चाहता भाई ...

ऋचा : कौन ... मेरे भाई तो तुम hi हो ...

तरुण : मैं तो बस ऐसे hi टाइम पास हु आपका रियल भाई तो वो है न राहुल ... वो भी कल से नहीं दिखा साथ hi गयी थी क्या ....

ऋचा समझ जाती है की तरुण उसको तना मार रहा है ...

ऋचा : नहीं वो कुत्ता मेरा भाई नहीं है वो भाई के नाम पर कलंक है ...

तरुण : 22 साल का प्यार इतनी जल्दी एक hi झटके में तो ख़तम नहीं हो सकता न ....

ऋचा : नहीं भाई इंसान को समझने में मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी .... मुझे अपने किये पर बहुत पछतावा है .... मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया है .... मैं अपनी गलती का पश्चाताप करना चाहती हु ....

तरुण : मुझे आपके ऊपर भरोषा नहीं ... वो क्या है न की आप लोगो ने मेरे इस नन्हे से दिल को इतनी बार तोडा है की आप लोगो पर भरोषा hi नहीं होता .... आप लोगो को पता नहीं होगा पर मेरी हालत इतनी ख़राब हो चुकी थी आप सब में मेन्टल टॉर्चर की वजह से की मैं दिमागी तौर पर बीमार हो गया था .... मल्टीप्ल पर्सनालिटी डिसऑर्डर नाम की बीमारी का नाम अपने सुना है क्या मुझे वही बीमारी हो गयी थी पता है क्यों बस आपलोगो की वजह से ..... वो तो भला हो मेरे दोस्त की दीदी का की उन्होंने न सिर्फ मेरा इलाज करवाया बल्कि मुझे मेन्टल सपोर्ट दिया .... कहने को तो मेरी कुछ नहीं लगती पर रिश्तो की अहमियत क्या होती है उनसे hi मुझे पता चला ....

तरुण की कड़वी मगर सच्ची बात सुन कर ऋचा की तो अंतरात्मा तक छलनी हो रही थी क्यूंकि तरुण के साथ जो कुछ भी हुआ था उसमे वो भी एक कड़ी थी .... बहने तो अपने छोटे भाई के लिए दुनिया से लड़ जाती है पर उसने तो खुद अपने भाई के साथ गैरो से भी बुरा बर्ताव किया .... ऋचा वही जमीन पर तरुण की कदमो में बैठ कर रोने लगती है ....

जब तरुण को अपने पाओ पर ठंडक का एहसास होता है तब उसको पता चलता है की ऋचा तो रो रही है वो तो बस अपनी धुन में अपने अतीत के पन्नो को खोल कर ऋचा को सुनाये जा रहा था ... उसको ऋचा के सिसकिया भी सुनाई दे रही थी .....

अपनी बड़ी बहन को ऐसे रट देख एक बार तो तरुण का दिल पिघल उठा पर तुरंत hi उसने अपना दिल कड़ा कर लिया ....

तरुण : ये क्या कर रही हो आप .... मैंने भी बचपन में बहुत बार आपके सामने रोया गिड़गिड़ाया था पर अपने मेरी तब सुनी थी क्या अपने ये घड़ियाली आंशू बचा कर रखो ....

ऋचा अब रट हुए हिचकिया लेने लगी थी ....

ऋचा : बताओ मेरे भाई अपना भरोषा जताने के लिए मुझे क्या करना होगा .... यहाँ छत से कूद जॉन तब तो तुम्हे यकीं होगा न की मैं बदल गयी हु ....

तरुण : ऐसे खुदखुशी करना तो कायरो का काम होता है ... आप कह रही थी न की उस दिन राहुल ने आपकी इज्जत पर हाथ डाला था ... तो अपने उसके साथ क्या किया ....

ऋचा : अब मैं उससे बात नहीं करती ... वो मेरे लिए मर चूका है मुझे उससे कोई मतलब नहीं .... अब सिर्फ तुम मेरे भाई हो ....

तरुण : मेरे कहने का मतलब है की अपने उससे बदला लिया अपना की नहीं ....

ऋचा : रूचि ने तो उसको इतना मारा था की वो अब सपनो में भी कुछ गलत करने की नहीं सोच सकता ....

तरुण : वो तो रूचि दीदी ने अपने बहन होने का फ़र्ज़ निभाया पर अपने क्या किया ...

ऋचा : मुझे कुछ करने की जरुरत hi नहीं पड़ी ...

तरुण : ऐसे नहीं होता गलत आपके साथ हुआ है तो बदला लेने का हक़ तो आपका भी बनता है ....

ऋचा : ठीक है बताओ मुझे क्या करना होगा ....

तरुण : आज रात को डिनर के वक्त सबके सामने आप उसको थप्पड़ मरोगी ....

ऋचा : पर सबके सामने कैसे मंझली चची मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगी ...

तरुण : देख लिया की आप कितनी बदल गयी हो ... पहले तो मुझे बेवजह थप्पड़ जड़ देती थी पर आज उसकी गलती होने पर भी उसको थप्पड़ नहीं मार सकती मुझे मेरा जवाब मिल गया ... आप मेरी बहन हो hi नहीं सकती .... मैं hi गलत था की बिना सोचे समझे आपको अपनी बहन मैंने लगा था पर सच्चाई तो ये है की आप अब भी ुशी राहुल की hi बहन हो ...

इतना बोल कर तरुण अब वह और नहीं रुकता और वह से नीचे आ जाता है ....

थोड़े देर रोने धोने के बाद ऋचा भी नीचे आ जाती है ...

तरुण को अभी रूम में आये हुए कुछ देर hi बीते थे की प्रियांशी तरुण को डिनर के लिए बुलाने आ गयी .... तरुण उसके साथ hi ग्राउंड फ्लोर पर आ जाता है ...

दिंनिंग टेबल पर सभी लोग मौजूद थे तरुण के dada,papa,manjhli Chachi,sumitra और सब भी ... राहुल अभी वह मौजूद नहीं था ... Richa,rani और राघव की बीवी शिवानी सबको खाना सर्वे कर रहे थे ....

तरुण और प्रियांशी भी जाकर अपनी जगह बैठ जाते हैं ...

तरुण के दादा : बहु राहुल नहीं दिख रहा ... वो खाना नहीं खायेगा क्या ....

खुसबू : बाबू जी मैंने उसको बोलै था आने को आ hi रहा होगा वो ....

तभी राहुल भी हिलते डुलते वह आ जाता है ... तरुण पर जैसे hi उसकी नजर पड़ती है वो हड़बड़ा जाता है और खाना सर्वे कर रही ऋचा से टकरा जाता है ...

ऋचा तो जैसे इसी पल का इंतजार कर रही थी उसने घूम कर राहुल के गालो पर खींच कर 2 - 3 थप्पड़ जड़ दिए ... सब कुछ इतना जल्दी हुआ की सब बिलकुल हैरान परेशान रह गए ...

राहुल खुद पर हुए इस अचानक हमले से बौखला गया ... वो ऋचा को खा जाने वाली नजरो से घूरता है ....

खुसबू : ऋचा ये क्या बेहूदगी है ... तुमने मेरे बेटे को मारा कैसे .... आज तो यहाँ वो प्रिय भी नहीं है आज तुमने कोई नहीं बचा सकता ....

राहुल : साली अंधी हो गयी है क्या ... एक तो मुझसे टकरा गयी और मुझे hi मरती है ... रुक अभी तुझे बताता हु ....

राहुल ने ऋचा पर हाथ उठाया hi था की उसके हाथ हवा में hi रुक गए ... ये तरुण hi था जिसने राहुल के हाथ को रोक लिया था ...

तरुण : बीटा अभी उसका भाई जिन्दा है ... मेरे रहते हुए कोई मेरी बहन को छू कर तो दिखाए .... इन्ही गंदे हाथो से तूने मेरी बहन को छुवा था न ....

तरुण ने राहुल के हाथ को घुमा का एक जोर का झटका दिया जिससे वो कड़क की आवाज़ के साथ टूट जाता है ...

राहुल दर्द से कराह उठता है जमीन पर बिन पानी मछली की तरह छटपटाने लगता है ....

तरुण के पापा अपनी जगह से खड़े हो जाते हैं और तरुण को एक थप्पड़ लगा देते हैं ....

तरुण जोर जोर से हसने लगता है ....

तरुण : वह क्या बात है आज कल आपका भी हाथ उठने लगा है ...

लक्समन : तू क्या समझता है मैं तुझसे डरता हु .... तुमने राहुल का हाथ तोडा क्यों तोडा .... यहाँ तेरी गुंडागर्दी नहीं चलेगी ...

रुचिका : कौन सी गुंडागर्दी पापा ... आज तक तरुण के साथ आप लोगो ने जो किया था वो क्या था ... अभी तो तरुण ने कुछ किया भी नहीं है .... आज इस किस्से का फुल एंड फाइनल hi कर देती हु ....

रुचिका चल कर खुसबू के पास जाती है और उसके बाल को पकड़ कर इतनी जोर से खींचती है की वो दर्द से कराहती हुयी फर्श पर गिर जाती है ....

रुचिका : बड़ी चची आपको पता है बड़े पापा या राघव भैया की ऐसी हालत का जिम्मेवार कौन है ....

बड़ी चची : रूचि बीटा बड़ो के साथ ऐसे बेहवे नहीं करते ....

रुचिका : बड़ी चची ये ऐसी जहरीली नागिन है जिसने अपने खुद के सुहाग तक को नहीं छोड़ा ... मंझले चाचा की मौत की जिम्मेवार एहि कुटिया है ... एहि नहीं बड़े chacha,raghav भैया की ऐसी हालत की जिम्मेवार भी एहि है ....

बड़ी चची : ये तुम क्या कह रही हो बेटी ....

खुसबू अब तक कड़ी hi चुकी थी और वो एक चाकू से रुचिका पर वार करती है ऐन वक्त पर रुचिका हैट जाती है जिससे उसका वॉर खली चला जाता है ....

खुसबू : साली रंडी की पैदाइश तेरे अनाप सनाप कहने से क्या होता है तेरे पास क्या सबूत है .... आज मैं तुझे जान से मार दूंगी ...

तभी पीछे से प्रियांशी खुसबू को जोर से धक्का दे देती है जिससे उसके हाथ से वो चाकू छूट जाता है ...

सुमित्रा : हाँ दीदी रूचि सही बोल रही है इस घर में आज तक जो भी बुरा हुआ है उसमे इसका hi हाथ है तरुण को मनहूस बताने वाली ये hi है ... हमारे कुलगुरु को ब्लैकमेल करके इसने hi उसकी गलत जन्म कुंडली बनवायी थी ... ये साडी बात खुद हमारे कुलगुरु ने hi मुझे बताया था ... इसका सबूत उनके द्वारा hi ीखि गयी उनकी डायरी के कुछ पन्नो की फोटो मेरे मोबाइल में ये रही ...

और फिर सुमित्रा अपने मोबाइल से वो फोटो निकल कर बड़ी चची के हाथो में दे देती है ...

खुसबू : ाचा तो ये तुम माँ बेटी का प्लान था ... अपने सांड जैसे बेटे पर इतना न उछाल मैं तुम लोगो को जेल की चक्की पिसवा कर रहूंगी ... मेरे बेटे का हाथ तोडा कैसे तेरे बेटे ने ....

रुचिका : ये ऐसे नहीं मानेगी ....

रुचिका और प्रियांशी ने ऋचा की हेल्प से खुसबू को चेयर से बांध दिया ... और फिर उन्होंने उसके मुँह में कपडा भी थिस दिया ताकि वो चिल्ला न सके ...

तरुण का दादा : तुम लोग अपने बड़ो से ऐसे बदतमीजी क्यों कर रही हो एहि संस्कार दिया था मैंने तुम लोगो को ... खोलो बहु रानी को ...

सुमित्रा : पापा जी आपको पता है क्या की माँ जी को इसने hi छत पर से धक्का दे दिया था और इल्जाम मेरे नन्हे से तरुण पर लगा दिया .... इसके द्वारा भरे गए ज़हर का hi परिणाम है की आज मेरे और मेरे बेटे के बीच इतनी गहरी खाई बन चुकी है की शायद hi हम कभी मिल पाए ... (अपने पति से) और आप अपने मेरे बेटे को थप्पड़ मारा कैसे ... वो भी इस राहुल के लिए ... आपकी बेटी के साथ उस दिन कितना गलत किया था राहुल ने पर आप तो अपनी भाभी के घड़ियाली आंशू में बह गए ... मैं तो अपने बेटे की माँ कहलाने के लायक नहीं हु पर आप तो बाप के नाम पर एक कलंक हैं ... मेरे बेटे की गलती क्या थी एहि न की उसने अपनी बहन के लिए स्टैंड लिया ... मुझे गर्व है अपने बेटे पर .... शायद आप लोगो को पता न हो पर इस घर में पीछे कुछ महीनो में गलत हुआ है उसका बदला मेरे बेटे ने hi लिया .... अब बताओ इस घर के लिए मनहूस कौन है मेरा बीटा या ये डायन जिसने अपने पति तक को खा लिया और डकार भी नहीं लिया ... मुझे गर्व है मेरे बेटे पर की मैं उसकी माँ हु ....

तरुण के दादा : बहु तुम्हारे पास कोई सबूत है क्या की ये सब मंझली बहु ने किया है ....

सुमित्रा : ये सब तो रानी बिटिया hi बताएगी ...

तरुण का दादा : बताओ रानी बीटा सच्चाई क्या है ....

रानी ने वो साडी बातें सुना डाली जो उसने उस दिन अपनी माँ को शेर सिंह से बात करते हुए सुना था ....

रुचिका : दादा जी अब तो आपको यकीं हुआ न .... या और भी सबूत चाहिए आपको ... अगर चाहिए तो बता देना ...

तरुण के दादा : पर इसका ये मतलब नहीं है न की तुम लोग इनके साथ ऐसे बेहवे करो .... तुम लोग अपने मेजोरिटी का फायदा उठा रहे हो ...

तरुण : हाहाहा दादा जी मेजोरिटी की बात आप न hi करो तो ाचा ... आप लोगो ने मेजोरिटी में एक छोटे से बच्चे पर जो जुल्म किया था वो क्या था ... एक बार अपनी हवस को दरकिनार कर सोचो की इस जाहिल और बदचलन औरत के साथ क्या करना चाहिए .... आपको क्या लगता है ये सिर्फ आपके साथ hi रातें रंगीन करती थी अरे इसके और भी ढेर सरे यार हैं ... और ये जो नमूना देख रहे हो न ये इस घर का खून नहीं है .... ये इसकी ऐयाशी का hi एक प्रोडक्ट है ... अगर अब भी आपको लगता है की मैं गलत हु तो फिर मैं इस घर से चला जाता हु ... (अपने बाप से) और मिस्टर आप भी सुन लीजिये सिर्फ बाप बन जाने से उसका फ़र्ज़ पूरा नहीं हो जाता ...

कुछ देर के लिए वह शान्ति छ जाती है ...

तरुण : लगता है आप लोगो ने मुझे hi गलत मन है .... जब मैं इस घर का कोई हु hi नहीं तो यहाँ की किसी चीज पर मेरा क्या अधिकार ... Ok चलता हु दुआओं में याद रखना ...

और फिर तरुण सबको नमस्ते करके मैं गेट की तरफ बढ़ने लगता है ....

तरुण के पीछे उसकी चारो बहने भी आ जाती है और उसके साथ hi चलने लगती है ....

तरुण : दीदी आप लोग मेरे साथ क्यों जा रही हो ....

ऋचा : तू जहा जायेगा हम भी वही चलेगी ... एक बार तुझे अकेला छोड़ कर देख चुकी हु पर अब और नहीं ....

रानी : हाँ भाई मैं अब इस घटिया औरत की शकल भी नहीं देखना चाहती जिसके वजह से मेरे फूल से भाई को इतने सालो तक दर्द सहना पड़ा ....

प्रियांशी : मेरा भाई मुझे जहा भी जिस हाल में भी रखेगा मैं रह लुंगी ... ी लव यू भाई अब मैं तुझसे एक पल भी दूर

नहीं रह सकती ....

तरुण : नहीं दीदी आप लोग लौट जाओ ... इस घर के लिए आपकी कुछ फ़र्ज़ हैं ... मैं तो पहले भी इस घर के लिए कोई मायने नहीं रखता था तो अब मेरे जाने से क्या hi फर्क पड़ेगा ....

रुचिका : फर्क कैसे नहीं पड़ेगा इतना प्यारा भाई अब मैं कहा से लाऊंगी जिसने हमारे हर जुर्म को ख़ुशी ख़ुशी सेह लिया और बदले में कभी हमारा बुरा नहीं चाहा ...

तरुण : दीदी क्या करे शायद हमारा साथ एहि तक था ... आप सबको मेरी कसम है आज मुझे न रोको ....

और फिर तरुण आगे जाने लगता है की तभी किसी ने उसको पीछे से जकड लिया ... ये तरुण की बड़ी चची थी ...

बड़ी चची : रुक जा लल्ला ... मेरा दिल हमेसा कहता था की मेरा लल्ला गलत नहीं है .... मैंने तेरी माँ को भी बहुत बार मन करने की कोसिस की थी पर ये उस वक्त उस चुड़ैल की अंधभक्त बानी हुयी थी ... तू भी बीटा किस इंसान से न्याय मांग रहा था जो खुद hi अपराधी है .... इस घर की बड़ी बहु होने के नाते मैं तुझे रोकती हु ... जिसने गलती की है वो सजा भुगते हर बार मेरे लल्ला को hi दुःख क्यों सहना पड़े ...

तरुण के दादा : बड़ी बहु सही कह रही है तरुण बीटा ... इस नागिन ने इस घर में ऐसा ज़हर भरा है की मैं भी अपराधी बन बैठा .... मैंने तो हमेसा से सोचा था की मैं ऐसा क्या करू की मेरे घर के सरे लोग एक hi छत के नीचे आ जाये ... इसी वजह से मैंने अपनी बेटी को भी खुद से दूर नहीं होने दिया .... पर इन् सब के बीच मैं कब हवस के दलदल में फंस गया पता hi न चला .... बड़ी बहु मुझे माफ़ करना मैंने तुम्हारा भी गुनेहगार हु ... पता नहीं मेरी गलती की कोई माफ़ी भी है या नहीं .... बेटे अब पता नहीं मैं कब तक जिन्दा राहु .... अपने बूढ़े दादा को ऐसे छोड़ कर मत जाओ बीटा वर्ण मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाउँगा ... कहने को तो मेरे तीन पोते हैं पर तुम सबसे अलग हो ... अब तुम जो चाहोगे वही होगा ...

बड़ी चची : अब तो मान जाओ न लल्ला ... इस चुड़ैल को इसके किये की सजा जरूर मिलेगी ... तुम्हे इस घर से बहुत दुःख मिले हैं अब जब ख़ुशी मिलने की बारी आयी तो कहा भागे जा रहे ....

चारो बहनो तरुण को अंदर ले आते हैं ...

तरुण पहले अपने दादा जी के पास जाता है जो तरुण को अपने सीने से लगा कर दिल से रो पड़ते हैं .... अपने दादा के गले लग कर तरुण को भी बहुत ाचा लगता है ....

दादा पोते का मिलान देख सुमित्रा भी बहुत खुस होती है वही तरुण के पापा एक चेयर पर अपना सर पकडे बैठे हुए थे ... सुमित्रा को लगता है शायद आज तरुण उसको गले लगा ले पर आज भी उसको निराशा hi हाथ लगती है ....

बड़ी चची : रूचि बीटा जाओ प्रिय और बाकियो को भी बुला लाओ .... आज हम सब साथ में अपने बेटे की घर वापसी का जश्न मनाएंगे ....

थोड़े hi देर में तरुण की बुआ वह आती है ... सुहानी भी उसके घर में hi थी तो वो भी उनके साथ वह आती है ... सबको साडी बातें बताई जाती है .... जिसे सुन कर सब बहुत खुस होते हैं ...

तरुण के अतीत को जान कर सुहानी के नजरो में तरुण के लिए इज्जत और भी बढ़ जाती है ....

प्रिय : चलो देर से hi सही मेरे बच्चे को इंसाफ तो मिला ... आजा बीटा अपनी बुआ के गले नहीं लगेगा ....

प्रिय तरुण को गले लगा कर उसका मुँह चुम लेती है ....

प्रिय : अब इस घर को बर्बाद करने वाली इस डायन को भी ऐसी सजा मिलनी चाहिए की वो मौत को टरशे पर मौत भी न मिले ....

सभी औरतें और लड़किया पहले तो खुसबू के ऊपर अपना हाथ साफ़ करती हैं .... सुमित्रा ने आज दिल खोल कर खुसबू पर अपने दिल की भड़ास निकली थी ... जो आग वो इतने दिनों से अपने सीने में दबा कर राखी थी उसका ट्रेलर आज उसने दिखा दिया था .... और फिर उसके बाद सब मिल कर उसके मुँह पर कालिख पॉट देती हैं ...

स्टोर रूम को खली करके उसमे बस एक चादर और उसके hi कुछ पुराने कपडे दे दिए जाते हैं और उसमे दोनों माँ बेटे को दाल दिया जाता है और खाने के नाम पर दिन की बची हुवा खाना दे दिया जाता है .... राहुल का बैंडेज तरुण ने पहले hi करवा दिया था ....

अब सभी लोगो ने साथ में डिनर किया क्यूंकि सबको बहुत जोरो की भूक लगी थी ....

डिनर के बाद काफी देर तक सभी लोगो ने तरुण की जीत का जश्न मनाया ....
 
अपडेट 55

अब सभी लोगो ने साथ में डिनर किया क्यूंकि सबको बहुत जोरो की भूक लगी थी ....

डिनर के बाद काफी देर तक सभी लोगो ने तरुण की जीत का जश्न मनाया ....

आगे

खुशिया मानते हुए काफी रात बीत जाती है इसलिए तरुण की बुआ की फॅमिली भी वही रुक जाती है .....

सुबह को तरुण की नींद ऋचा के जगाने से खुलती है .... वो ऋचा को भी खींच कर अपने साथ बीएड पर सुला लेता है ...

ऋचा : गुड मॉर्निंग भाई ये क्या बात हुयी मैं तुम्हे उठाने आयी थी पर तुम तो मुझे hi सुलाने के चक्कर में हो ....

तरुण : दीदी अभी सोने दो न ... कितने दिनों बाद ऐसी सुकून की नींद सो रहा हु ...

ऋचा : भाई अब तू मुझसे नाराज तो नहीं है न मैंने कल अपना काम कर दिया ...

तरुण : हाँ दीदी ... पूरी तरह से नाराज तो नहीं हु पर अभी आपको मुझे अचे से मानाने के लिए और भी म्हणत करनी होगी ...

ऋचा : हाँ भाई मैं कुछ भी करुँगी ... तेरी बात भी सच है इतने सालो की कड़वाहट यु एक झटके में ख़त्म तो नहीं हो सकती न .... बोलो अभी क्या करू जिससे तुम्हे ख़ुशी मिले ....

तरुण : फ़िलहाल तो मेरे साथ लेती रहो और मुझे मेरे हिस्से का प्यार देने की कोसिस करो ....

ऋचा जोर से तरुण को खुद से चिपका लेती है और उसके माथे को चुम लेती है और उसके बालो में अपनी उंगलिया फिरने लगती है ...

ऋचा के प्यार भरे टच से तरुण की आँखें बंद होने लगती हैं .... वो फिर से एक बार नींद की वादियों में खोने लगता है .....

आज पुरे दिन तरुण की साडी बहने उसके आस पास hi थी ... तरुण को आज फाइनली ऐसा लग रहा था की उसकी बहने दिल की बुरी नहीं थी वक्त और हालत ने उन्हें वैसा बना दिया था ....

रानी ... जिसने अपनी माँ और भाई के खिलाफ जा कर उसको सपोर्ट किया था उसके लिए भी अब तरुण के दिल में कोई कड़वाहट नहीं थी ... वैसे भी अब रानी कुछ दिनों के लिए hi इस घर की मेहमान थी नेक्स्ट मंथ उसकी शादी होने वाली थी और शादी के बाद तो लड़कियां ज्यादातर अपने ससुराल की होकर hi रह जाती हैं .... ऐसा नहीं था की रानी के दिल में तरुण के लिए कोई बैर की भावना थी .... जब से उसको पता चला था की तरुण उसके पापा की मौत का बदला लेने के लिए अकेले hi मिशन पर निकल गया है तब से hi उसके दिल में तरुण के लिए इज्जत और भी बढ़ गयी थी ... एहि वो वजह थी जिसके कारन उसने दिल खोल कर रात में तरुण का सपोर्ट किया था ....

जब श्रेया को अपने घर में हुए रेवोलुशन का पता चला उसने फ़ोन पर hi तरुण को बधाई दिया .... वैसे भी अब तरुण उसके बच्चे का ुनोफ़्फ़िसल बाप बनने वाला था तो उसको उसकी बहुत खास फिक्र थी ....

पुरे घर में सिर्फ दो लोग hi थे जिनसे तरुण का दिल अब तक न जुड़ा था वो और कोई नहीं उसको जन्म देने वाले पेरेंट्स थे .... जहा सुमित्रा अपने बेटे को खुस देख कर बहुत खुस थी वही लक्समन अपने बच्चो का सही वक्त पर सपोर्ट न कर पाने की वजह से बेहद शर्मिंदा था ... उसको समझ hi नहीं आ रहा था की वो उनसे कैसे माफ़ी मांगे या बात करे ...

इवनिंग को प्रियांशी तरुण के रूम में आती है ...

प्रियांशी : अरे तुम अभी भी रूम में hi पड़े हुए हो .... ऐसे नहीं चलेगा हीरो अभी तो तुम्हे अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी .... हमें तो पार्टी चाहिए ...

तरुण : वो किस ख़ुशी में भला ...

प्रियांशी : अरे बाबा इस घर में खुशिया लौट आयी हैं तो हमें भी ख़ुशी मानाने का कोई मौका तो मिलना hi चाहिए ....

तरुण : अगर मैं न कहु तो ....

प्रियांशी : तो फिर भूल जाओ सुहानी भाभी को ... की उनके साथ तुम्हारा कुछ होने देंगे हम ...

तरुण प्रियांशी को अपने पास खींच कर उसको अपनी बांहो में भर लेता है ...

तरुण : कोई न मैं अपनी गर्लफ्रेंड से काम चला लूंगा ...

और तरुण प्रियांशी के गर्दन को चुम लेता है ... प्रियांशी को भी बहुत ाचा फील होता है क्यूंकि उसके साथ पहली बार किसी ने ऐसा किया था .....

प्रियांशी : भाई ये गलत है ...

तरुण : इसमें क्या गलत है .... भला मैं अपनी गर्लफ्रेंड के गर्दन को भी नहीं चुम सकता क्या ....

प्रियांशी छह कर भी तरुण की पकड़ से आज़ाद नहीं हो प् रही थी ....

प्रियांशी : भाई छोड़ न कोई आ जायेगा ...

तरुण : तो आने दो न मैं कुछ गलत कहा कर रहा हु अपनी बहन छुम गर्लफ्रेंड से प्यार भी नहीं कर सकता क्या ... अगर आपका कोई बॉयफ्रेंड हो तो बता दो ...

प्रियांशी : नहीं भाई तेरी बहन इतनी भी गयी गुजरी नहीं है की वो घर की इज्जत को यु बदनाम करे ....

तरुण : ी लव यू दीदी एंड थैंक फॉर सपोर्टिंग में ...

और तरुण प्रियांशी को अपनी पकड़ से आज़ाद कर देता है पर इस बार प्रियांशी उसको अपने गले लगा लेती है ....

प्रियांशी : ी लव यू तू मेरे सोना भाई ... सही मायने में आज मुझे एहसास हो रहा है की क्यों पहले मैं तुमसे इतनी दूर रही .... तुम नफरत के नहीं प्यार के हक़दार जो मेरे कुटी पाई .... कैन ी किश यू ....

तरुण : ऑफ़ कोर्स दीदी आपका मुझ पर पूरा हल है .....

स्वीकृति मिलते hi प्रियांशी ने अपने तपते हुए होंठो को तरुण के होंठो पर चिपका दिए .... तरुण ने ऐसा तो बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया था पर वो प्रियांशी का दिल नहीं तोडना चाहता था इसलिए उसने खुल कर प्रियांशी का सपोर्ट किया ... दोनों की ये किसिंग या स्मूचिंग करीब 1 से डेढ़ मिनट तक चलती है पर दोनों की इसमें इतना मज़ा आया की उसको सह्ब्दों में बया नहीं किया जा सकता .... इस किसिंग में सिर्फ प्यार hi प्यार था ....

प्रियांशी : अब तो खुस हो न मेरे बॉयफ्रेंड ...

तरुण : बहुत खुस हु ... काश ऐसी खास ट्रीटमेंट रोज़ मिले तो क्या बात हो ....

उसके बाद प्रियांशी वह से चली जाती है ...

तरुण एक कार से रूचि को साथ लेकर मार्किट निकल जाता है और फिर ढेर साडी पार्टी और खाने पिने की चीजें कार में भर कर वापस घर लौट आता है ....

तरुण की साडी बहने बड़े हर्ष और उल्लास से घर को सजाने में जुट जाती हैं वही घर की साडी औरतें किचन के डिपार्टमेंट में भीड़ जाती हैं ...

आज काफी आरसे के बाद इस घर में ऐसे कोई पार्टी मनाई जा रही थी .... रसोई घर में पता नहीं महिलाये क्या क्या बनाये जा रही थी की आस पास के वातावरण में खुसबू hi खुसबू फैली थी .... वही स्टोर रूम में पड़े हुए दोनों माँ बेटे अपनी किस्मत को जोश रहे थे कहा तो कुछ दिनों पहले वो साडी सम्पति हड़पने के कगार पर थे पर आज उनकी हालत नौकरो से भी बदतर थी .... अपना उल्लू सीधा करने के लिए खुसबू ने क्या नहीं किया था पर हवा का एक ऐसा झोंका आया की उसका पूरा वजूद hi हिल गया ... कहते हैं न की बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो पर अंत में उसका हसरा एहि होता है ...

घर में hi एक छोटा सा स्टेज तैयार किया गया था ... प्रियांशी और रुचिका इस छोटे से फॅमिली गाथेरिंग की एंकर थी ....

सबसे पहले घर के सरे बड़े लोगो को बरी बरी से स्टेज पर बुलाया गया ताकि वो तरुण के बारे में दो शब्द कह सके .... तरुण के dada,badi Chachi,fufa,bua ने तरुण के बारे में इमोशनल बाते कही ... अपने फॅमिली वालो के प्यार को तरुण बचपन से hi तरशा था .... आज उसको सब का प्यार एक साथ नसीब हो रहा था इसलिए उसकी आँखें छलक आयी थी ....

तरुण के पापा और माँ ने भी स्टेज पर आकर तरुण के लिए दो सहानुभूति के शब्द कहे .... उसके बाद उसकी साडी बहनो ने तो समां hi बांध दिया ... बहनो में सबसे ज्यादा इमोशनल बातें रुचिका में कही .... सबसे आखिरी में तरुण का नंबर आया ....

तरुण : आप सभी मुझसे बड़े हैं इसलिए आप सबको मेरा चरण स्पर्श .... वैसे इस मौके पर क्या बोलू समझ नहीं आता .... अब अपने दर्दनाक अतीत को याद करके रो लू या फिर आप सभी का वर्तमान का प्यार देख कर खुस होऊं .. इस घर में मैंने वो सब सहा है जो की मैं उपरवाले से दुआ करूँगा की किसी मासूम को न सहना पड़े .... दुनिया की बात छोडो जब खुद के खून के सेज जब आपको इतना दुःख दे तो उसके बाद दिल के इतने टुकड़े हो जाते हैं की उसको सब्दो में बया नहीं किया जा सकता ... कहते हैं की माँ बाप भगवन का रूप होते हैं पर मुझ बदनसीब के केस में ऐसा भी नहीं था .... दुनिया में मुझे किसी ने अगर सबसे ज्यादा दुःख दिया है तो वो मेरे माँ बाप hi हैं ... अरे इंसान क्या जानवरो के भी माँ बाप अपने बच्चो से अथाह प्रेम करते हैं पर मेरी माँ ने तो शायद hi कभी प्यार की एक थपकी दी हो मुझे ... पर वो मेरे मंझले चाचा थे जिन्होंने न सिर्फ मुझे सहारा दिया बल्कि आज मैं अगर जिन्दा भी हु तो उनके hi बदौलत वर्ण पता नहीं कबका इस घर में जुल्म सहता हुआ शहीद हो जाता ... पर मैं यहाँ भी बदनसीब निकला की एक बार भी उनके किये गए उपकारों का बदला न चूका सका .... मैं अपनी सभी बहनो को कभी कसूरवार नहीं समझता क्यूंकि उन्हें उनके बड़ो ने जो सिखाया या समझाया उन्होंने वैसा hi मेरे साथ बेहवे किया .... श्रेया Didi,Diya दीदी और रुचिका दीदी ने मुझे जीना सिखाया वर्ण मैं तो कबका मर चूका था ..... अब मैं आपके इस ख़ुशी के मौके को और इमोशनल नहीं करना चाहता .... मैं अब अपने अतीत को भूल कर अपने वर्तमान पर फोकस करना चाहता हु क्यूंकि अतीत को याद करके रोने से कुछ हासिल नहीं होने वाला .... Ok थैंक्स तो आल ....

तरुण की सच्ची मगर कड़वी बातें सुन कर सुमित्रा की आँखों से तो न जाने कब से गंगा जमुना बहे जा रही थी .... उसका सबसे बड़ा दोष तो एहि था की उसको अपनी जेठानी की बात आँख मुंड कर बिस्वास नहीं करना चाहिए था .... और बिना सोचे समझे अपनी सगी औलाद के साथ इतना गन्दा बर्ताव नहीं करना चची ये था ....

तरुण के इमोशनल स्पीच के बाद सभी साथ बैठ कर डिनर करते हैं .... सभी लोगो को तरुण की बातो में उसका दर्द महसूस हुआ और उन्हें तरुण के लिए बहुत बुरा भी लगा पर उन्होंने अपने मन में hi डीडे किया की चाहे जो भी हो जाये वो तरुण को इतना प्यार देंगे की वो अपने बुरे अतीत को पूरी तरह से भूल जाये ...

अपने बेटे के दर्द को महसूस कर सुमित्रा को बहुत बुरा लगा ... उसको लगने लगा की तरुण के साथ जो कुछ भी पास्ट में बुरा हुआ उसकी सबसे बड़ी वजह वो खुद थी ... अगर उसने उस वक्त अपने मासूम बेटे की तरफदारी करि होती तो तरुण को इतना दुःख न उठाना पड़ता ... खैर अब जो बीत गया उसको वो बदल तो नहीं सकती .... उसकी सबसे बड़ी बदनसीबी तो ये थी की तरुण ने बाकियो को तो माफ़ी दे दी थी पर वो उसका चेहरा तक नहीं देखना चाहता था इसलिए वो अपनी रीसेंट फीलिंग उसके साथ शेयर भी नहीं कर सकती थी ....

वो तो डिनर भी नहीं करना चाहती थी पर आज कोई पार्टी तरुण के लिए मनाई जा रही थी ऐसे में उसका सबके साथ डिनर न करना तरुण के मन में उसकी बिगड़ी हुयी छवि को और भी बिगड़ सकता था ....

डिनर के बाद सभी अपने अपने रूम्स में सोने चले गए .... आज की धमाचौकड़ी की वजह से सभी को नींद तो आ गयी पर अगर किसी की नींद उडी हुयी थी तो वो सुमित्रा hi थी जिसकी आँखों में नींद तो नहीं थी और वो अपने बेटे के दर्द को महसूस कर लगातार रोये जा रही थी .... वही सोफे पर उसका पति जोर जोर से खर्राटे लिए जा रहा था ... जब से लक्समन ने उस दिन अपनी बेटियों का नहीं बल्कि राहुल का साथ दिया था तब से hi उसको अपने साथ सोने की इजाजत नहीं दी थी सुमित्रा ने ....

खैर काफी मसक्कत के बाद उसको नींद आ hi जाती है ....

अगली सुबह को तरुण की नींद उसके फ़ोन की वजह से खुल गयी जो लगातार शोर मचा रहा था ... फ़ोन दिया का था ...

तरुण : hello दीदी ... गुड मॉर्निंग .... आज बड़ी सुबह को hi मेरी याद आ गयी क्या बात है ....

दिया : गुड मॉर्निंग बाबू .... कैसा है तू ... मैंने तुम्हे डिस्टर्ब तो नहीं किया न ...

तरुण : मैं तो ठीक हु दीदी ी मैं बहुत खुस हु मैं ... यहाँ सब कुछ ठीक हो गया है ...

और फिर तरुण ने दिया को सब मच डिटेल में बताया जो कुछ पिछले कुछ दिनों में हुआ था ... दिया की आँखों में ख़ुशी के आंशू तैर आते हैं ...

दिया : ये बहुत ाचा हुआ मेरे भाई की तुम्हे अपने घर में वो प्यार वो रेस्पेक्ट मिल गया जिसके तुम हक़दार थे .... बहुत दुःख झेले हैं तुमने अब बस खुसियो की बरसात होनी है ...

तरुण : अब मेरी साडी बहने मेरे साथ हैं .... मुझे मेरा हक़ दिलाने के लिए साडी बहने और बड़ी चची भीड़ गयी थी ....

दिया : और तुम्हारे सेज माँ बाप उन्होंने तुम्हे सपोर्ट नहीं किया क्या ....

तरुण : मेरा उनसे कोई वास्ता नहीं दीदी .... मैंने उन्हें हमेसा हमेसा के लिए अपनी दुनिया से अलविदा कह दिया है .... उनका जिन्दा होने या न होने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है .... अरे वो मर भी जायेंगे तो मेरे आँखों से आंशू का एक कटरा तक नहीं निकलेगा ....

दिया : देखो हीरो मैं तुम्हारे दर्द को महसूस तो कर सकती हु पर जी नहीं सकती इसलिए मुझे नहीं पता की तुम उनके साथ सही कर रहे हो या गलत ...

तरुण : दीदी छोडो ये साडी बातें अपने मुझे कॉल क्यों किया था वो बताओ ...

दिया : वो मैंने ये पूछने को कॉल किया था की तुम कब आ रहे हो .... तुम्हे देखे हुए बहुत दिन हो गया है इसीलिए तुम्हे देखने का मन कर रहा है ....

तरुण : आऊंगा दीदी 5 - 6 दिन में ... अभी मैं इस ख़ुशी के पल को जी लेना चाहता हु .... इनके लिए बहुत तरशा हु मैं .....

उसके बाद दोनों में कुछ कासुअल बातें होती है फिर कॉल कट हो जाता है ....

पुरे दिन तरुण अपनी बहनो के साथ मस्ती करता रहता है उसको आज अपने घर में बहुत मज़ा आ रहा था .... वो जिस घर से हमेसा दूर बहगता रहता था वो आज उसको बहुत प्यारा लग रहा था ....

खुसबू और राहुल की जिंदगी वैसी hi चल रही थी वो दिन भर एक hi रूम में पड़े रहते थे .... टाइम तो टाइम उन्हें खाना मिल जाता था बस खाने की क्वालिटी थोड़ी डाउन रहती थी ....

तरुण के दादा का ज्यादातर वक्त अपने रूम में आध्यात्मिक प्रवचन सुनते हुए निकलता था .....

इवनिंग को तरुण रानी के रूम आता है जो की उसके hi फ्लोर पर था .... उस वक्त रानी अपने बीएड पर बैठी अपने लैपटॉप में कोई मूवी देख रही थी ....

तरुण को अपने रूम में आया देख वो अपने कान से ेअर्बुद निकल कर उसको बीएड पर बैठने का इशारा करती है ...

तरुण : कैसी हो दीदी क्या कर रही हो ...

रानी : कुछ नहीं यार अकेली बैठी बोर हो रही थी तो सोचा कोई मूवी देख लू .... ये लो तुम भी देखो न ...

तरुण : नहीं दीदी मेरी देखि हुयी मूवी है ... मैं तो यहाँ आपसे बात करने आया हु ....

रानी : हाँ बोलो न ...

तरुण : दीदी आपको बुरा तो नहीं लगा न की आपकी माँ और भाई के साथ वो सब ...

रानी : देख भाई मैं तो बस इतना जानती हु पहले उन्होंने तेरे साथ कितना बुरा बेहवे किया है तो उनको तो सजा मिलनी hi चाहिए .... रही बात बुरा लगने की तो मुझे बिलकुल भी बुरा नहीं लग रहा .... पहले मैं साडी बातो से अनजान थी और अनजाने में मैंने भी तुम्हारे साथ काफी गलत किया है जिसके लिए जिंदगी भर मुझे अफ़सोस रहेगा ... जब से मैं तुम्हे जानने पहचानने लगी तब मुझे पता चला की मेरी राइ तुम्हारे बारे में कितनी गलत थी .... तुमने मेरे मरे हुए पापा की खातिर अपनी जान की बाज़ी लगा दी वैसा तो शायद कोई सगी औलाद भी अपने माँ बाप के लिए न करती ...

तरुण : दीदी आप उनसे बिलकुल अलग हो ... आपके अंदर मंझले चाचा का खून दौड़ रहा है .... वैसे आपकी शादी अगले महीने है न ...

रानी (सरमते हुए) : हाँ अगले महीने 30 को ...

तरुण : तब तो रोज़ रात को अपने मिया से बात भी होती होगी ...

रानी : धत्त ... अपनी बड़ी बहन से ऐसे बात नहीं करते ....

तरुण : अब मुझसे क्या पर्दा दीदी मैंने तो आपकी साडी जियोग्राफी बायोलॉजी का जहां अध्ययन किया है ...

रानी : मैंने तो तुझे नेट प्रैक्टिस का भी ऑफर दिया था तुम hi शरीफ बन रहे तो मैं क्या करू ...

तरुण : वैसे ऑफर अब भी है या डेडलाइन ओवर हो गयी ....

रानी : तेरे लिए तो ऑफर hi ऑफर है ... जब मन हो तब दिल खोल कर शॉपिंग कर लेना ...

तरुण (रानी के कान में धीरे से) : दिल खोल कर या पंत खोल कर ...

रानी : वही ...

तरुण : वैसे कब फ़ोन करते हैं आपके स्पेशल ओने ....

रानी : डिनर के बाद 11 - 12 बजे के आस पास ....

तरुण : वीडियो कॉल भी करती हो क्या ....

रानी : नहीं जनाब जैसा आप समझ रहे वैसा कुछ नहीं हम बस नार्मल बातें hi करते हैं ...

तरुण : अरे तो मैंने कब कहा की आप छूट लैंड की बातें किया करती हो .....

रानी : आज लगता है फुल मूड में लग रहे हो ... आज रात में आ जाना .,..

तरुण : पक्का न पर कही आपके वाले रोने लगे की किसने मेरी रानी की मार ली तो ...

रानी : मेरा माल मैं जिसे चहु बेचू इससे उन्हें क्या ... वैसे भी अभी मैं उनकी हुयी hi कहा हु ...

तरुण : वाओ सो डेरिंग .... अपनी बबली की अचे से तेल मालिश करके रखना मेरा बुनती आपकी बबली को प्यार करने को मारा जा रहा है ...

रानी : जरूर ...

तरुण : वैसे आपके दोनों रस्ते सील पैक्ड hi हैं न ....

रानी : हाँ उसमे भी कोई शक है क्या .... राहुल के साथ तो बस ओरल hi हुआ है .... अगर अभी चेक करना हो तो गेट लॉक कर दो ....

तरुण : नहीं नहीं मेरी प्यारी क्वीन दीदी मुझे आपके ऊपर पूरा भरोषा है ... ठीक है अब मैं चलता हु कल रात में मिलते हैं ....

रानी : बेसब्री से इंतजार रहेगा ... पैन किलर और जो भी जरुरी चीजें हो ले लेना ... मेरा पहला बार होगा न तो दर्द तो बहुत होगा ...

तरुण : don't वोर्री दीदी ... मैं आपको ज्यादा तकलीफ होने नहीं दूंगा ...

उसके बाद तरुण रानी के रूम से निकल कर छत पर चला जाता है ...

छत पर एक कोने में शिवानी कड़ी थी जो की आसमान में अपनी चांदनी बिखेरते हुए चाँद को टकटकी लगाए देख रही थी ...

तरुण चुपके से जाकर उसकी आँखें बंद कर देता है ...

शिवानी उसके हाथ को छू कर उसको पहचानने की कोसिस करती है ...

शिवानी : ऋचा जी ये आप हो न ....

तरुण ने अपना हाथ नहीं हटाया जो इस बात का सबूत था की उसने गलत गेस किया है ....

शिवानी : तब जरूर आप मेरी नटखट सी प्रियांशी जी होंगी ....

तरुण ने अब भी अपना हाथ नहीं हटाया ... ऐसे hi शिवानी ने रानी और रुचिका का भी नाम ले लिया पर अब भी तरुण ने अपना हाथ नहीं हटाया ....

शिवानी : ok बाबा मैं हार गयी अब तो अपना हाथ हटा दो .... आप जरूर रआआह्ह्ह्ह....

इतना बोल कर शिवानी रुक गयी क्यूंकि उसको अचानक से याद आया की राहुल तो स्टोर रूम में है ...

तरुण ने एक झटके में शिवानी की आँखों से अपना हाथ हटा दिया ....

तरुण : क्या भाभी आपका गेस वर्क कितना बेकार है ... अपने अपनी साडी ननदो का नाम ले लिया पर मुझे आप भूल गयी .... मैं भी इसी घर का एक मेंबर हु ... लगता है अब भी आप मुझे अपना देवर नहीं मानती ....

और तरुण वह से चल कर छत के दूसरे कोने में आ गया ...

शिवानी भी जल्द hi उसके पास आ गयी ... और अपने कान पकड़ कर तरुण के सामने कड़ी हो गयी ...

शिवानी : सॉरी तरुण .... अपने पहले कभी मेरे साथ ऐसा किया नहीं तो ....

तरुण : पहले कभी अपने या किसी ने मौका भी तो नहीं दिया की इस घर में अपनी प्रजेंस फील करवा सकू .... लगता है राहुल आपके ज्यादा करीब था इसलिए आपको उसकी याद आ गयी ....

शिवानी : ऐसी बात नहीं है .... बस उन्हें इस घर में ज्यादा देखा है तो बस एक छोटी सी बॉन्डिंग बन गयी थी हमारी और कुछ खास नहीं है .... वैसे भी अब आपके भैया का पता नहीं की कभी वो अपने पैरो पर खड़े हो पाएंगे या नहीं ... इस लड़ाई में मैंने काफी कुछ खोया है तरुण ... भरी जवानी में एक विधवा सी जिंदगी जीने पर मजबूर हु ... कहने को पति तो जिन्दा जरूर है पर किसी काम का नहीं ... एक औरत की जिंदगी इतनी भी आसान नहीं होती .... कभी कभी तो लगता है खुदखुशी कर लू पर हिम्मत नहीं जूता पति ...

तरुण : लगता है आप इस घर में हुए परिवर्तन से खुस नहीं हो ....

शिवानी : सच कहु तो मुझे कोई खास फर्क नहीं पड़ा .... मेरे पति तीन दिन पहले भी हैंडीकैप था और आज भी हैंडीकैप है ....

तरुण : सॉरी भाभी मैं आपका दुःख तो दूर नहीं कर सकता पर एक सलाह जरूर दे सकता हु अगर आपको लगता है की आप यहाँ खुस नहीं हो तो आप दूसरी शादी कर सकती हो .... आप अभी जवान हो शायद hi कोई लड़का आपको मन करे ....

अभी तरुण ने इतना बोलै hi था की एक जोर का थप्पड़ उसको अपने गालो पर महसूस होता है ....

शिवानी : हाँ तुम तो एहि चाहोगे न एक भाई को तो कैद कर hi दिया है मेरे जाने के बाद राघव को भी निपटा डोज और इस जायदाद के एकलौते वारिस बन जाओगे ... मैं सब समझती हु तेरे मनसूबे को ....

तरुण : सॉरी भाभी आप मेरी बात का गलत मतलब निकल रही हो ... मैं सिर्फ प्यार का भूखा हु मुझे इस घर की जमीन जायदाद में कोई इंटरेस्ट नहीं ...

शिवानी : अपनी ये ढकोसलेबाजी अपनी बहनो को सुनना जो तेरी बातो पर आँख बंद करके भरोषा करती हैं ... तू बहुत बड़ा कमीना है मैं तुम्हारी सच्चाई को सबके सामने लेकर रहूंगी ....

अभी शिवानी ने इतना कहा hi था की किसी ने उसके गालो पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया ...

अभी शिवानी कुछ रियेक्ट करती इससे पहले hi उसके गालो पर दूसरा थप्पड़ भी पद चूका था .....

शिवानी को थप्पड़ मरने वाली ये शक्श कोई और नहीं उसकी सास यानि की तरुण की बड़ी चची थी ...

बड़ी चची : नागिन तूने अपने अंदर और कितना ज़हर भर रखा है बता दे .... तू इसको खुदगर्ज़ और लालची बता रही है .... पता है इस बच्चे के साथ सुरु से कितना गलत हुआ है.... वैसे इसने गलत क्या कहा अगर तू मेरे राघव बेटे से खुस नहीं है तो जा मैं तुझे आज़ाद करती हु की तू अपनी मर्ज़ी से जिसके साथ तेरा मन करे शादी कर ले ... आइंदा से मेरे तरुण बेटे से कुछ भला बुरा कहा तो ठीक नहीं होगा समझी .... इतनी मुश्किल से इसकी जिंदगी में ख़ुशी के दो पल आये हैं .... चल भाग यहाँ से .....

शिवानी जल्दी से वह से भाग जाती है ....

बड़ी चची : सॉरी बीटा इसकी तरफ से मैं तुमसे माफ़ी मांगती हु .... चलो नीचे तेरे चाचा तुझे याद में रहे थे .....

तरुण अपनी बड़ी चची के साथ नीचे आ जाता है ....
 
अपडेट 56

बड़ी चची : सॉरी बीटा इसकी तरफ से मैं तुमसे माफ़ी मांगती हु .... चलो नीचे तेरे चाचा तुझे याद में रहे थे .....

तरुण अपनी बड़ी चची के साथ नीचे आ जाता है ....

आगे

रात में और कुछ खास नहीं होता ... सब डिनर करके अपने अपने रूम्स में सोने चले जाते हैं ...

तरुण बीएड पर लेता सोने की बहुत कोसिस करता है पर उसको नींद नहीं आती .., इवनिंग को छत पर जो हादसा हुआ था उसके वजह से उसको नींद नहीं आ रही थी ....

जब उसके बर्दास्त के बहार हो गया तो वो छत पर चला जाता है .... पास hi कही बारिस हुयी थी जिसके वजह से चलने वाली हवा में थोड़ी ठंडक थी जो तरुण को बहुत सुकून दे रहे थे ...

छत के एक कोने में खड़े होकर वो शाम की हुयी घटना के बारे में सोचने लगा ....

तरुण : ये भाभी को अचानक से क्या हो गया था जो वो ऐसे बहकी बहकी बातें कर रही थी ... कहा तो वो पहले मेरे प्रति सिम्पथी रखती थी ... कही राहुल और मंझली चची ने उनको को पट्टी तो नहीं पढ़ा राखी है ... अगर ऐसा है तो ये हमारे परिवार के लिए अछि खबर नहीं है .... ये दोनों कुत्ते की दम है कभी नहीं सुधर सकते ...

थोड़े देर बाद तरुण को सीढ़ियों पर किसी के चलने की आहात होती है ... तरुण वही पास में hi टंकी के पीछे छुप जाता है ....

कदमो की आहात से पता चलता है की कोई छत पर आया हुआ है ..... छत पर आने के बाद वो आहात धीमी हो जाती है ....

कुछ देर के बाद फिर से किसी के सीढ़ियों पर चलने की आहात होती है पर इस बार की आहात और लास्ट टाइम के आहात में थोड़ा अंतर था .... लास्ट वाली आहात में बस कदमो की आहात थी पर इस बार वाली आहात में पायल की हलकी झंकार भी मिक्स्ड थी ...

वो आहात भी भी छत पर आने के बाद गायब हो जाती है ....

कुछ देर की शान्ति के बाद पूउछह पूउक्छ्ह की हलकी सी आवाज़ आती है जो की संभवतः किसिंग या स्मूचिंग की थी ....

तरुण (मन में) : ये मेरे घर में चल क्या रहा है .... और ये लोग इतनी रात को यहाँ छत पर क्या कर रहे हैं ..... इतनी hi ठरक थी तो रूम में hi कर लेते .... पर सबसे बड़ी बात ये लोग हैं कौन .... घर में टोटल 6 मर्द हैं जिनमे से दो तो ऊपर आने के लायक नहीं हैं .... 1 तो नीचे रूम में बंद है .... अब बचे 3 जिनमे से एक मैं खुद हु अब बचे दो ....

अभी तरुण ये सोच hi रहा था की चूडियो और पायल की झंकार एक लयबद्ध तरीके आने लगी और साथ hi किसी की मादक सिसकारियों की आवाज़ भी आ रही थी ....

अब तरुण को पक्का कन्फर्म हो चूका था की छत के दूसरे साइड क्या हो रहा है ..... तरुण ने एक दो बार छुप कर hi उधर देखा भी पर वो लोग ये सब जहा पर कर रहे थे वह लाइट अचे से नहीं आ रही थी जिसके वजह से वो उनका चेहरा नहीं देख पाया ....

ये खेल थोड़े देर hi चला उसके बाद दोनों के कदमो की आहात सीढ़ियों से होते हुए नीचे की तरफ चली जाती है ....

तरुण उनका चेहरा भी नहीं देख पाया

था ....

वो उस जगह पहुँच जाता है जहा वो लोग सेक्स कर रहे थे .... उस जगह पर उसको चूडियो के कुछ टुकड़े मिलते हैं जो शायद उसके hi थे जो यहाँ थोड़े देर पहले सेक्स करके गया होगा ....

तरुण : बस ये मेरे घर में चल क्या रहा है पहले मंझली चची और बड़ी चची को अपने ससुर के साथ रंगरेलिया मानते हुए देखा उसके बाद राहुल को रानी के साथ पकड़ा और खुद भी तो उसके साथ ओरल किया और शायद कल उसके साथ रियल सेक्स करने का भी मौका मिले ....

कुछ देर और छत पर बिताने के बाद तरुण अपने रूम आ जाता है .... इस बार उसको नींद आ जाती है ....

अगले दिन सुबह से hi रानी काफी खुस दिख रही थी .... सुबह को शावर लेने से पहले hi उसने अपने अपनी छूट को क्लीन शेव कर लिया था .... वो पुरे दिल से तरुण के साथ सेक्स सम्बन्ध स्थापित करने के लिए एक्ससिटेड थी ....

तरुण ने भी अपने लुंड के आस पास के जंगल की सफाई कर ली थी और इवनिंग को मार्किट से जरुरत की साडी चीजें ले आया था और रानी को अपने रूम में बुला कर साडी चीजें उसको hi दे देता है ...... वो भी रानी के साथ अपने घर की दूसरी और लाइफ की पहली कुंवारी छूट को खोलने के लिए बहुत एक्ससिटेड था .... वैसे तो रानी उसको पहले भी ये ऑफर दे चुकी थी पर शादी के जस्ट पहले उसके साथ ये सब करने का अपना एक अलग hi मज़ा है ...

ऐसा न था की श्रेया ने उसको मज़ा नहीं दिया था पर एक कुंवारी छूट की बात hi कुछ और होती है ...

रात में डिनर के बाद सभी अपने अपने रूम में सोने चले जाते हैं ....

तरुण भी 11 बजे के आस पास रानी के गेट पर नॉक करता है .... रानी तुरंत hi गेट खोल कर उसको अंदर कर लेती है और गेट लॉक कर देती है ... अभी रानी के रूम में अँधेरा था ....

तरुण कुछ बोलने वाला hi था की तभी रूम का लाइट ों हो जाता है ....

रानी ने रूम को बहुत अचे से सजा कर रखा था जैसे आज उसकी सुहागरात हो ...

तरुण आगे बढ़ने hi वाला होता है की रानी उसको वही रोक देती है और खुद जल्दी से जाकर अपने सर पर एक चुन्नी ले लेती है ... उसने पहले से hi एक रेड कलर की साड़ी पहन राखी थी जिसमे वो बिलकुल किसी दुल्हन की तरह लग रही थी ....

वो खुद आगे बढ़ कर तरुण के सामने झुक कर उसके पाओ छूती है ....

तरुण : दीदी ये क्या है ...

रानी : चुप कर पागल मेरे साथ पति वाला काम करने आया है तब तो काम से काम मुझे दीदी न बोल ....

तरुण : ok मेरी बीवी रानी ....

अभी रानी ने घूँघट डाला हुआ था .... तरुण उसको कंधो से पकड़ कर उसको बीएड पर बिठा देता है और खुद घुटनो के बल झुक कर उसका घूँघट हटाता है .... रानी घूँघट के अंदर बिलकुल किसी नयी नवेली दुल्हन की तरह सजी हुयी थी अगर किसी चीज की कमी थी तो बस गहनों की ... नयी नवेली दुल्हन गहनों से लड़ी होती है पर रानी के पास गहनों के नाम पर नाक में baali,kaan में झुमके और गले में एक गोल्ड की चैन hi थी ....

तरुण को यु घुटनो के बल बैठे देख उसने उसको आँखों के इशारे में hi सवाल किये .... तरुण अपने दाहिने हाथ को आगे लता है और एक छोटा सा गिफ्ट बॉक्स रानी के हाथो में रख देता है ...

रानी : ये क्या है बाबू ...

तरुण : बाबू नहीं पति हु आपका तो आपके लिए मुँह दिखाई लाया हु ... आप खुद खोल कर देख लो क्या है ....

रानी ने उत्सुकतावश वो गिफ्ट खोला तो उसमे एक सोने की अंगूठी थी जिसमे बहुत अछि नक्कासी की गयी थी जिसके वजह से वो बहुत खूबसूरत थी ...

रानी : इसकी क्या जरुरत थी .....

तरुण : जरुरत कैसे नहीं थी आप जब अपना सबसे कीमती खज़ाना मुझे सौंपने वाली हो उसके मुकाबले तो ये कुछ भी नहीं ... पहन लीजिये न ....

रानी : खुद hi पहना दो न मेरे राजा ...

तरुण : ये ाचा है रानी का राजा ... 😂😂

तरुण ने अंगूठी रानी की रिंग फिंगर में पहना दी ...

रानी : वाओ it's सो ब्यूटीफुल एंड ये मेरी ऊँगली में फिट भी हो गया ...

तरुण : पति हु आपका तो अपनी बीवी के बारे में जानकारी तो रखूँगा hi न ....

तरुण आगे बढ़ कर रानी के गालो को चुम लेता है और फिर उसके लरज़ते हुए होंठो को बड़े प्यार से चुम लेता है और फिर अपने होंठो को दूर कर लेता है .....

अब रानी तरुण को खींच कर बीएड पर सुला देती है और उसके ऊपर आकर उसके होंठो पर अपने होंठ चिपका कर जोर जोर से चूसने लगती है ..... रानी का ये एग्रेसिव अवतार देख तरुण भी जोश में आ जाता है और उसको रेस्पोंद करने लगता है .... दोनों हार मैंने को तैयार न थे ..... 5 - 6 मिनट की एग्रेसिव किसिंग के बाद दोनों अलग होते हैं और अपने सांसो को संयमित करने लगते हैं ...

दोनों धीरे धीरे एक दूसरे को कपड़ो की कैद से आज़ाद करने लगते हैं ....

कुछ hi देर में दोनों फुल नग्न अवस्था में आ चुके थे .... तरुण रानी की छूट को टच करता है ...

तरुण : वाओ मेरी बीवी तो पूरी तरह से साफ़ सफाई करके आयी है ... आपकी तो छूट पहले से hi गीली हो राखी है ....

रानी : ये सब मैंने आपके लिए hi किया है मेरे राजा ...

तरुण रानी की टांगो के बीच आ कर अपने जीभ से चाट लेता है जिससे वो सिसक पड़ती है ....

ठीक तभी रानी का मोबाइल बजने लगता है ... कॉल उसके होने वाले हस्बैंड का था .... दिया इशारे से तरुण से पूछती है की वो कॉल पिक करे या नहीं ....

तरुण हाँ में जवाब देता है पर वो अभी भी रानी की छूट को चूमने चाटने में लगा हुआ था ...

रानी ने कॉल पिक किया ...

रानी : hello .... आअह्ह्ह जी ...

बीच में hi तरुण ने रानी छूट की क्लिटोरिओउस को चाट लिया था जिससे उसके मुँह से आह निकल गयी ....

..... : hello ... क्या हुआ रानी जी आप ठीक तो हो ...

रानी : हाँ ठीक हु मुझे क्या होना है ... खाना हो गया आपका ....

....... : जी हाँ ... अब हमारी शादी में कुल 31 दिन बचे हैं उसके बाद हमें इस डब्बे की जरुरत नहीं होगी ....

रानी : हम्म उउउउम्मम्मग्गघहहह ... सही कहा अपने ...

तरुण ने इस बार रानी की छूट को फैला कर उसके पुरे छूट पर अपने जीभ फिर दिया था ....

रानी इशारे से तरुण को मन कर रही थी पर तरुण इस सिचुएशन का मज़ा लेने में लगा हुआ था ...

....... : मैं तो बहुत एक्ससिटेड हु फाइनली 31 दिनों बाद मैं भी एक खूबसूरत बीवी का पति बन जाऊंगा .....

रानी : जी हैं उउउउम्म्मममहहहहह आआह्ह्ह्ह ....

...... : क्या हुआ आप ऐसी आवाज़ें क्यों निकल रही हो .....

रानी : वो एक मच्छर था जो मेरे खून को चूसने में लगा हुआ था ....

...... : तो मॉस्क्वीटो नेट या गुड नाइट जला लेना चाहिए था ....

रानी : ये बहुत जिद्दी मच्छर है .....

....... : ाचा .... एक फोटो भेजो न आपको देखने का मन करता है ,.. आप वीडियो कॉल तो करती hi नहीं हो ....

रानी : वीडियो कॉल पर क्या करना है बात करके वो सब बस नई जनरेशन की चोंचलेबाजी है .... जब इतना दिन इंतजार किया है तो 31 दिन और कर लो उसके बाद फेस तप फेस देख लेना उसके बाद न मैं रोकूंगी न कोई और ....

...... : यार मैं तो न जाने कब से तरस रहा हु उस दिन के लिए ....

अब तरुण उठ कर रानी को खींच कर बिठा देता है और उसके मुँह के आगे अपना लुंड कर देता है ...

रानी भी तरुण के लुंड को गप्प से अपने मुँह में भर लेती है .....

...... : आप कुछ बोल क्यों नहीं रही न hi अपने कोई फोटो भेजा ....

रानी : अरे बाबा अभी मैं अपना फेवरेट लोल्लयपोप खा रही हु .... Ok गुड नाईट कल बात करते हैं अभी मुझे बहुत ज्यादा जरुरी काम करना है ....

और फिर रानी फ़ोन कट कर देती है ...

रानी : ये भी न मेरा फेवरेट लोल्लयपोप मेरे सामने है इसके सामने मुझे और मच ज्यादा जरुरी नहीं लगता ....

और रानी बड़े मज़े से तरुण के लुंड को चूसने लगती है .... जब तरुण का पूरा लुंड रानी के थूक से स्लिपरी हो जाता है तो वो ड्रावर से वो मेडिकल स्टोर से लाया हुआ प्लास्टिक निकल लेता है और उससे एक लुब्रीकेंट निकलता है रानी की छूट को अचे से स्लिपरी कर देता है और खुद के लुंड पर भी थोड़ा सा लुब्रीकेंट लगा लेता है ...

रानी बस बड़े प्यार से तरुण की तरफ देखे जा रही थी .....

तरुण : मेरी जान अब आपको थोड़ा दर्द होगा प्लीज उसको सेह लेना ... बस एक बार का hi दर्द है उसके बाद पूरी लाइफ आपको कभी दर्द नहीं सहना पड़ेगा ....

रानी : तुम्हारे लिए ये दर्द क्या कोई भी दर्द सेह लुंगी ....

तरुण रानी के होंठो को चुम लेता है और दोनों फिर से एक बात गहरे लिप लॉक किसिंग में लग जाते हैं ...

कुछ देर के बाद तरुण उसके होंठो को छोड़ वापस रानी को पकड़ कर उसको बीएड के किनारे ले आता है और उसके टांगो के बीच आ कर अपना लुंड रानी की छूट पर सेट करके एक जोर का धक्का मरता है तरुण का सूपड़ा रानी के छूट के संकरे छेड़ को खोल कर अंदर घुस चूका था .... रानी को हल्का दर्द तो हुआ था पर वो अपने दर्द को पि जाती है .... रानी को नार्मल देख तरुण फिर से एक करारा शॉट लगता है जिससे तरुण का दो तिहाई लुंड रानी के छूट में धंस चूका था ....

इस बार रानी को असीम दर्द का एहसास होता है ... उसके छूट से भी गरम गरम खून निकल चुकी थी जो इस बात का प्रमाण थी की उसका कौमार्य भांग हो चूका है ....

तरुण .इ धीरे धीरे अपना लुंड सुपडे तक बहार खींचा तो उसको अपना लुंड खून से सना हुआ दिखा एक बार तो वो घबरा गया पर रानी की हिम्मत को देखते हुए उसका भी हौसला बढ़ा क्यूंकि रानी दर्द के बावजूद उसका हौसला अफ़ज़ाई कर रही थी ...

रानी के आँखों के किनारे से आंशू निकल रहे थे पर होंठो पर मुस्कान थी ....

तरुण ने इस बार पूरी ताकत लगाए हुए धक्का लगाया ... इस बार तरुण का पूरा लुंड रानी की कोरी छूट में समां चूका था ....

इस बार जाकर रानी के मुँह से एक दर्द भरी सिसकी निकल जाती है जिसे वो कण्ट्रोल नहीं कर पति ....

अगर कोई उसके गेट के पास होता तो उसकी ये सिसकी जरूर सुनाई दे जाती .... अब तरुण का लुंड हिल भी नहीं प् रहा था क्यूंकि रानी की टाइट छूट ने उसको बिलकुल जकड रखा था ....

थोड़े देर कोसिस करने के बाद वो धीरे धीरे अपने लुंड को मूव करने में सफल हो जाता है .... रानी की छूट ने भी तरुण के लुंड को अपने अंदर महसूस कर पानी छोड़ दिया था ...

अब जाकर तरुण को भी थोड़ी आसानी हुयी .... अब तक रानी की छूट ने तरुण के लुंड के हिसाब से कमरा तैयार कर लिया था ....

रानी की कासी हुयी छूट के आगे तरुण ज्यादा देर टिक नहीं पता है और उसके छूट में hi उसकी पिचकारी निकल जाती है .... तरुण के गाढ़े और गरम वीर्य को अपने छूट की गहराइयो में महसूस कर रानी ने भी अपना पानी चूड दिया ....

तरुण वैसे hi अपना लुंड रानी की छूट में घुसाए hi उसके ऊपर लेट जाता है .... रानी भी उसके बालो को सहलाने लगती है ...

थोड़े देर के बाद तरुण अपने लुंड को रानी की छूट से निकल लेता है .... उसके लुंड पर उसका और रानी का मिश्रित पानी लगा हुआ था और साथ hi रानी की छूट से निकला हुआ खून भी था ....

तरुण : आप ठीक हो न ....

रानी : हाँ मैं ठीक हु बस नीचे थोड़ा सा पैन है .... इसमें इतना भी दर्द नहीं हुआ जितना मैं समझती थी ....

तरुण : जितना दर्द होना था हो गया ... अब आपको कभी दर्द नहीं होगा ...

रानी : तुमने भी बड़े प्यार से किया ...

तरुण : चलो आपको वाशरूम ले चलता हु ....

तरुण रानी को गॉड में उठा कर वाशरूम ले जाता है और कमोड पर बिठा देता है

... रानी की छूट से नमकीन पानी की धार बह निकलती है ... उसके बाद तरुण उसको अपनी बांहो में पकड़ कर शावर के नीचे करके शावर ों कर देता है और रानी की छूट को अपने हाथो से धोता है ...

रानी को अचे से साफ़ करने के बाद उसको फॉर से गॉड में उठा कर एक चेयर पर बिठा देता है और जल्दी से बेडशीट चेंज करके रानी को बीएड पर सुला देता है ...

और उस चादर को वाशरूम में एक बकेट में दाल कर साफ़ कर देता है ... खून के दाग नए थे तो जल्दी से छूट जाते हैं .... उसके बाद खुद को साफ़ करके वो रूम आता है और पहले रानी की छूट पर अचे से क्रीम लगा कर उसको पैन किलर खिला देता है और अपने कपडे पहन कर रानी को भी एक निघती पहना देता है ...

तरुण : थैंक्स फॉर एवरीथिंग जान .... अब आप आराम करो मैं अपने रूम जाता हु ... अब आप भी गेट लॉक करके सो जाओ .... सुबह तक आपका दर्द काफी हद्द तक काम हो जायेगा ...

रानी : ok माय लव .... गुड नाईट 😘

और एक बार फिर दोनों एक लिप लॉक किश में लग जाते हैं ....

तरुण रानी के रूम से निकल जाता है और रानी अपना गेट लॉक कर बीएड पर पसर कर सो जाती है ....

और इस तरह से तरुण को अपने घर में hi एक कुंवारी लड़की के साथ हमबिस्तर होने का मौका मिल गया ...

अपने रूम में आकर तरुण भी बीएड पर पसर जाता है .... उसको भी जल्द hi नींद आ जाती है क्यूंकि अभी रात के दो जो बज चुके थे .....
 
अपडेट 57

और इस तरह से तरुण को अपने घर में hi एक कुंवारी लड़की के साथ हमबिस्तर होने का मौका मिल गया ...

अपने रूम में आकर तरुण भी बीएड पर पसर जाता है .... उसको भी जल्द hi नींद आ जाती है क्यूंकि अभी रात के दो जो बज चुके थे .....

आगे

तरुण के अगले दिन की शुरुआत भी खास hi थी .... वो मस्त गहरी नींद में सो रहा था की अचानक से उठ कर भागने लगता है ....

"रूचि दीदी जल्दी भागो बाढ़ आ गया है .... "

उसको ऐसे भागता देख प्रियांशी जोर जोर से हसने लगती है .....

हुआ यो की रात में अपने जबरदस्त म्हणत की वजह से तरुण फुल नींद में खर्राटे ले रहा था की तभी उसके रूम में उसकी बहन प्रियांशी पहुँच जाती है और तरुण को ऐसे घोड़े बेच कर सोता देख उसके मंद में एक मस्त सा धमाकेदार आईडिया आता है .... वो फ्रीजर से कुछ आइस कुबेस ले आती है और तरुण के वाशरूम में जाकर एक बकेट पानी में आइस कुबेस को दाल देती है ... आइस कुबेस जल्द hi अपनी क़ुरबानी देकर पानी को ठंडा कर देते हैं .... प्रियांशी पानी से भरे बकेट को एक hi झटके में तरुण के ऊपर उड़ेल देती है ....

प्रियांशी को ऐसे हस्ता देख तरुण सारा माज़रा समझ जाता है .... वो उसके तरफ बढ़ता है पर तब तक वो उसके रूम से निकल चुकी थी उसको मुँह चिढ़ाते हुए ...

तरुण : है लो है लो मेरा भी मौका आएगा तब मैं आपको बताऊंगा .....

प्रियांशी : ऐसा मौका कभी नहीं आएगा बच्चू मैं सबसे पहले उठ जाती हु आज कल ...

तरुण का पूरा बीएड गीला हो चूका था ..... बीएड को वैसे hi छोड़ कपडे लेकर वाशरूम चला जाता है ..,

शावर लेने के बाद तरुण को रानी का ख्याल आता है तो वो जल्दी से रेडी हो कर उसके रूम पहुँचता है ...

रानी की हालत ज्यादा ख़राब न थी पर उसको अपने प्राइवेट part में हल्का दर्द जरूर था .... ये सुन कर तरुण की जान में जान आयी क्यूंकि उसने सुन रखा था की लड़की जब पहली बार सेक्स करती है तो अगले दिन उसकी हालत बहुत ज्यादा ख़राब हो जाती है ...

तरुण उसको रेस्ट करने का बोल बहार आ जाता है .... नीचे आ कर तरुण ऋचा की रानी के तबियत ख़राब होने की बात कहकर उसका खाना उसके hi रूम भिजवा देता है ...

दादा जी का खाना तो उनके रूम में hi पहुँच जाता था ....

बाकि घर के सभी लोग एक साथ ब्रेक फ़ास्ट कर रहे थे ... तरुण को दो दिन पहले वाली रात का किस्सा याद आ जाता है इसलिए वो सभी महिलाओ के हाथो को गौर से देखने लगता है ....

सबसे पहले उसकी नजर अपनी माँ के हाथो पर जाती है .... उसकी माँ ने किसी और रंग की चूड़ी पहनी हुयी थी ... ये देख उसको थोड़ा चैन मिला की चलो उसकी माँ तो इस मामले में काम से काम अछि तो है न ... फिर उसकी नजर बड़ी चची के हाथो पर गयी तो उनकी चिड़िया भी अलग थी ....

पर जैसे hi उसकी नजर उसकी भाभी के हाथो पर पड़ी तो उसके हाथो में शामे चूड़ी थिस जिसके टुकड़े उसको छत पर मिली थी ....

तरुण (मन में) : देखो तो उस दिन कैसे सटी सावित्री बन रही थी और खुद अपने बाप की उम्र के ससुर या दादा की उम्र के दादा ससुर के साथ चोदम पट्टी मचा रही थी रात को खुले छत पर किसी रंडी की तरह ...

तभी तरुण को उसकी बगल में बैठी रुचिका ने हिला कर होश में लाया ....

रुचिका : क्या हुआ भाई क्या सोच रहा है खाना ाचा नहीं लगा क्या ...

तरुण : n...nahi दीदी ाचा है ... बहुत ाचा है अपने बनाया है क्या ...

रुचिका : मैंने नहीं भाई मुम्मा ने बनाया है ....

तरुण : उतना भी ाचा नहीं है सब्जी में देखो कितना ज्यादा नमक लग रहा है ...

इतना कह कर तरुण अपना खाना छोड़ कर उठ जाता है ... और अपने बाइक के कीस लेकर बहार चला जाता है ...

सुमित्रा : रूचि बीटा तुम झूट नहीं कह सकती थी क्या की तुमने खाना बनाया है ... अब भूके पेट उठ गया न वो ... जब तुम जानती हो की वो मेरी शकल तक देखना पसंद नहीं करता तो तुमने मेरा नाम क्यों लिया .... इसमें उसका कोई दोष नहीं सरे के सरे फसाद की जड़ तो मैं hi हु ....

रुचिका : सॉरी मम्मी वो गलती से मुँह से निकल गया ...

बड़ी चची : उसने सबको लगभग माफ़ कर दिया है सिवाए अपने माँ बाप और उस चुड़ैल के ....

सुमित्रा : मैं एहि डेसेर्वे करती हु दीदी .... एक माँ होने का कोई भी फ़र्ज़ निभाया hi कहा मैंने ... सिर्फ जन्म दे देने से कोई माँ नहीं बन जाती ... मैंने तो उसके साथ सौतेली माँ से भी बदतर व्यवहार किया है ... क्या करू मुझे मौत भी तो नहीं आती ...

बड़ी चची : ऐसा मत सोचो सुमि ... ये जिंदगी बहुत मुश्किल से मिलती है .... हमारे द्वारा किये गए हर सही और गलत का परिणाम हमें इस दुनिया में hi भुगतना होता है .... गलती तो इंसान से होती hi है तुम उससे माफ़ी क्यों नहीं मांग लेती ... शायद उसका दिल पिघल जाये और वो तुम्हे माफ़ कर दे ... बहुत बड़ा दिल है मेरे बच्चे का ....

सुमित्रा : नहीं दीदी मैं बहुत बड़ी पापन हु .... मुझे तो कड़ी से काफी सजा मिलनी hi चाहिए .... अगर मुझे मेरी गलती का प्रायश्चित करने में जान भी गंवाना पड़े तो मुझे कोई ग़म न होगा .... बस मैं मरने से पहले एक बार अपने बच्चे को अपने सीने से लगा कर लाड लड़ना चाहती हु ... बस एक बार ...

इतना बोलते बोलते hi सुमित्रा वही दिंनिंग टेबल पर लुढ़क जाती है क्यूंकि वो बोलते बोलते hi बेहोश हो चुकी थी ....

तुरंत hi उसके मुँह पर पानी के छींटे मरे जाते हैं और उनके फॅमिली डॉक्टर को बुलाया जाता है ...

डॉक्टर आ कर सुमित्रा का चेक उप करती है ....

डॉक्टर उसको मच मेडिसिन्स देती है और फिर कुछ टेस्ट्स लिख कर जाने लगती है ... उसके साथ hi तरुण की बड़ी चची बहार तक उसको छोड़ने आती है ...

बी चची : डॉक्टर कैसी है वो ... वो अचानक से बेहोश कैसे हो गयी थी ...

डॉक्टर : देखिये अभी तो क्लेअर्ल्य नहीं कह सकती रिपोर्ट देखने के बाद hi सही जवाब दे सकती हु ... अभी तो बस इतना कहूँगी की शायद टेंशन की वजह से वो ऐसे अचानक से बेहोश हो गयी हैं .... उनका ख्याल रखिये और कोसिस कीजिये की वो ज्यादा टेंशन न ले ....

बी चची : ok डॉक्टर मैं कोसिस करुँगी ....

दोपहर को तरुण घर आता है तो रुचिका उसको साडी बात बताती है जो उसके जाने के बाद हुयी थी ....

रुचिका की बात सुनकर तरुण के फेस पर कोई भी भाव नहीं दिखे न तो गुस्सा होने के न hi दुःख के ... वो रुचिका से बिना कुछ बोले hi अपने रूम आ जाता है .... रुचिका को तरुण का ये रिएक्शन समझ नहीं आता क्यूंकि ये पहली बार थी जो तरुण ने उसकी कोई कही हुयी बात अनसुनी कर दी हो ...

लंच के वक्त भी तरुण नहीं आया खाना खाने को तब प्रियांशी एक प्लेट में खाना लेकर तरुण के रूम आती है .... तरुण उस वक्त आँखे बंद करके बीएड पर लेता हुआ था ....

प्रियांशी प्लेट को टेबल पर रखती है और बीएड पर बैठने लगती है जो की अब भी गीला हुआ पड़ा था पर तरुण ुशी बीएड पर लेता हुआ था ...

प्रियांशी तरुण का हाथ उसके आँखों पर से हटती है .... पर तरुण फिर से अपने आन्ह्को को अपने हाथ से कवर कर लेता है ....

प्रियांशी : अब मुझे सारा माजरा समझ आ गया की क्यों सुबह से तेरा मूड ऑफ है .... मैंने तेरा बीएड गीला कर दिया इसलिए तू नाराज़ है न ... अरे इसमें नाराजगी की क्या बात है आज रात तू मेरा रूम में सो जाना ... It's सो सिंपल इसमें नाराज होने की क्या बात है ...

तरुण फिर भी कोई जवाब नहीं देता ....

प्रियांशी : लगता है बच्चा काफी ज्यादा नाराज़ है ाचा चल तू भी मुझे भीगा ले मैं गुस्सा नहीं होउंगी .....

तरुण फिर से कोई रिस्पांस नहीं देता .... अबकी बार प्रियांशी उसके पेट में गुदगुदी करने लगती है .... वो जानती थी की तरुण को काफी गुदगुदी लगती है ....

प्रियांशी के गुदगुदी करने से तरुण इधर उधर हिलने डुलने लगता है और जोर जोर से हसने लगता है ...

गुदगुदी से बचने के लिए तरुण भी हाथ पाओ चलने लगता है .... जब उसको कोई उपाय नहीं समझ आता तो वो प्रियांशी को बीएड पर लिटा देता है और खुद उसके ऊपर आ जाता है ....

तरुण के भरी भरकम सरीर के नीचे नाजुक सी प्रियांशी डाब सी जाती है ..... तरुण ने उसके दोनों हाथो को पकड़ के रखा था ....

तरुण : अब बस भी करो दीदी ... वर्ण मैं आपको नहीं छोडूंगा ....

प्रियांशी : ok अब नहीं करुँगी .... अब हैट जाओ मेरे ऊपर से वर्ण मैं डाब कर चटनी बन जाउंगी .....

तरुण : इतनी आसानी से तो नहीं छोडूंगा आपको ... अपने सुबह मेरी नींद ख़राब की मेरा बीएड गीला किया उसकी सजा तो मिलेगी hi आपको ....

प्रियांशी : जल्दी बोलो मेरी सजा क्या है ....

तरुण : वो बाद में बताऊंगा ...

और तरुण प्रियांशी के ऊपर से उठ जाता है ....

प्रियांशी : अब चुप चाप खाना खा लो ....

तरुण : रानी दीदी को दिया अपने खाना ...

प्रियांशी : वो ऋचा दीदी ने दे दिया है .... चलो खाओ उसके बाद मैं भी खाने जाउंगी ....

तरुण : आप अपने हाथो से खिलाओगी तब खाऊंगा ....

प्रियांशी : ाचा चलो बैठो मैं खिला दूंगी ....

तरुण : ऐसे नहीं प्यार से ....

प्रियांशी : अले मेला लजा बाबू टालो थाना था लो ....

तरुण : ऐसे तो गर्लफ्रेंड अपने बॉयफ्रेंड को बोलती है ... मैं तो आपका छोटा भाई हु न ...

प्रियांशी : मेरे राजा भैया मेरा राज दुलारा भाई आ जा तुझे खाना खिला दू ...

तरुण : खाने के बाद मीठी पप्पी डौगी न तब खाऊंगा मैं ...

प्रियांशी : हाँ हाँ जरूर मेरे मुन्ना ....

अब प्रियांशी बीएड पर प्लेट रखती है और बड़े प्यार से तरुण को खाना खिलाती है ... अपनी बहन को ऐसे प्यार से खाना खिलाती देख तरुण की आंखें भर आती है जिसे वो प्रियांशी से छुपा कर पॉच लेता है पर प्रियांशी ये सब देख लेती है पर कुछ बोलती नहीं .... खाना ख़त्म होने के बाद वो तरुण के दोनों गाल पर किश करती है .... ऐसा नहीं है की ये सब उसने तरुण की बात मैंने को किया पर इसलिए भी किया क्यूंकि वो ये सब करना चाहती थी ...

प्रियांशी : अब तो खुस हो न भाई ...

तरुण जोर से प्रियांशी को हुग कर लेता है ...

प्रियांशी भी तरुण को खुद से चिपका लेती है .... प्रियांशी को गले लगाए हुए hi तरुण जोर जोर से सिसकने लगता है ....

प्रियांशी के आँखों में भी आंशू आ जाते हैं ... वो तरुण को रोकती नहीं उसको जी भर कर रो लेने देती है उसके बाद उसको खुद से अलग करके उसके आँखों को अपने दुपट्टे से साफ़ करती है ....

प्रियांशी : क्या हुआ बाबू तुम तो क्यों रहे हो ....

तरुण : आप भी तो तो रही हो .... दीदी क्या मैं बुरा हु ...

प्रियांशी : नहीं भाई तुम तो दुनिया के सबसे अचे भाई हो ....

तरुण : दीदी अपने मुझे इतने प्यार से खाना खिलाया की मैं इमोशनल हो गया था .... आप बहुत अछि हो दीदी ी लव यू ....

प्रियांशी : ी लव तू मेरा बच्चा ....

और प्रियांशी तरुण के गालो को चुम चुम कर गीला कर देती है ....

प्रियांशी : अब तो ठीक है न .... या और चाहिए ....

तरुण (स्माइल करते हुए) : अभी के लिए काफी है बाकि कल दे देना ... चलो आपको मैं खाना खिला दूंगा ....

प्रियांशी : रूचि ने भी नहीं खाया है ....

तरुण : वो भला क्यों ....

प्रियांशी : वो तू उसके रूम से ऐसे hi बिना कोई जवाब दिए चला आया और लंच के लिए भी नहीं गया तो उसको लगा की तू उसके वजह से नाराज है ....

तरुण : ओफ्फफ्ठ्ठुओ क्या करू मैं उनका ... चलो जल्दी से आपका और उनका खाना लेकर आते हैं और आप दोनों को अपने हाथो से खिलाऊंगा ...

प्रियांशी और तरुण दो प्लेट में खाना लेकर रुचिका के रूम पहुँचते हैं जो की बीएड पर लेती हुयी रो रही थी ....

प्रियांशी : रूचि खाना लायी हु खा ले ....

रुचिका : मुझे भूक नहीं है ... बाबू ने खा लिया क्या ....

तरुण : आपका बाबू hi तो आपके लिए खाना लाया है ... चलो जल्दी से उठ जाओ आज मैं आपको अपने हाथो से खाना खिलाऊंगा ...

तरुण की आवाज़ सुन रुचिका जल्दी से अपने आँखों को साफ़ कर बीएड पर बैठ जाती है ....

प्रियांशी : अब ऐसे रोंदू सो शकल बना कर hi खायेगी क्या .... जा जल्दी से मुँह धो कर आ ....

रुचिका पहले तो तरुण को गले लगा लेती है और उसके गालो को चुम लेती है ...

तरुण : आज कुछ ज्यादा hi मिठाई खा रहा हु कही डायबिटीज न हो जाये ....

प्रियांशी है देती है ....

तरुण अपनी दोनों दीदियो को बड़े प्यार से अपने हाथो से खिलता है ....

आज तीनो भाई बहनो का प्यार देखते hi बनता था ... अगर कोई बचा था तो वो थी ऋचा जो की कभी अपनी माँ की देखभाल में लगी पड़ी थी तो कभी रानी का हाल चल लेने पहुँच जाती ...

इवनिंग को वही फॅमिली डॉक्टर आती है सुमित्रा का चेक उप करने के लिए ... वो सुमित्रा का रिपोर्ट चेक करती है .... रिपोर्ट देख कर hi उसको थोड़ा पसीना आ जाता है ....

वो कुछ मेडिसिन लिख देती है और रूम से बहार आ जाती है ....

तरुण की बड़ी चची डॉक्टर को एकांत में ले जाती है .....

बी चची : डॉक्टर मैडम क्या हुआ क्या था रिपोर्ट में ....

डॉक्टर : मैं कैसे बोलू समझ नहीं आता .... आपकी देवरानी दिल की मरीज़ है .... ये उनका दूसरा अटैक था ....

ये सब सुन कर बड़ी चची सदमे में चली जाती है ....

बी चची : डॉक्टर प्लीज कह दो ये सब मज़ाक है ....

डॉक्टर : दीदी मैं झूट क्यों बोलूंगी .... अगर मेरे कहने से सब कुछ सही हो जाता तो बात hi क्या थी ...

बी चची : नहीं ऐसा नहीं हो सकता .... उसको पहले तो कभी हार्ट की प्रॉब्लम तो नहीं थी ...

डॉक्टर : ये सब तो मुझे नहीं पता पर ये दूसरा अटैक था ... टेस्ट के रिपोर्ट झूट तो नहीं बता सकते ....

बी चची याद करने लगती है की पहले कभी सुमित्रा को हार्ट अटैक आया था या नहीं पर उसको कोई ऐसा इंसिडेंट याद hi नहीं आ रहा था .... याद आता भी तो कैसे सुमित्रा को पहला अटैक उस वक्त आया था जब वो कुलगुरु के बुलावे पर उसके आश्रम गयी थी .... वह जब उसको पता चला था की वो अब तक तरुण को जैसा मानती आयी थी वो सब गलत था .... ुशी वक्त उसको पहला हार्ट अटैक आया था और वो वही बेहोश भी हो गयी थी ...

कुछ देर तक डॉक्टर तरुण की बड़ी चची को दवा के दोसे के बारे में समझती रहती है और चली जाती है ...

तरुण की बड़ी चची छह कर भी इस बात को छुपा नहीं पति और तरुण की तीनो बहनो को उसके माँ की बीमारी के बारे में बता देती है ... ये सब सुन कर तो तीनो लड़कियों के पाओ टेल जमीन hi खिसक गयी .... तरुण की बड़ी चची ने उन्हें ये भी हिदायत दे दी थी की सुमित्रा को इन् सब के बारे में कभी पता नहीं चलना चाहिए ....

रात में डिनर के बाद प्रियांशी तरुण को अपने रूम ले जाती है क्यूंकि उसका बीएड तो उसने hi सुबह को गीला किया था ...

रुचिका के रूम में बड़ा सा डबल साइज का बीएड था इसलिए वो तीनो आराम से उसके ऊपर सो सकते थे ....

सुमित्रा तो ऋचा के रूम में hi थी तो उसको उसकी देखभाल करने में कोई खास दिक्कत नहीं होती .....

तरुण के बाप को उसकी पत्नी के बारे में कुछ भी पता नहीं था इसलिए वो आराम से चौड़ा होकर बीएड पर पसर कर सोया हुआ था ....

रुचिका : भाई तुम्हे मैंने दोपहर को माँ की हालत के बारे में बताया था न ....

तरुण : प्लीज दीदी मैं उस घटिया औरत के बारे में और बात नहीं करना चाहता .... आपको अगर बात करनी hi है तो बेफिक्र हो कर करो ... मैं hi चला जाता हु ....

रुचिका : माँ है वो तुम्हारी उसने तुम्हे जन्म दिया है .... उसके बारे में जानना तुम्हारा हक़ है ....

तरुण : मैं नहीं सुन्ना चाहता दीदी ...

प्रियांशी : एक बार सुन तो ले भाई मेरी कसम ... मैं तुम्हे फाॅर्स नहीं कर रजिन्की तुम उन्हें माफ़ करो या न पर एक बार पूरी बात सुन तो लो मेरी खातिर ...

तरुण : ok बोलो ....

रुचिका : माँ आज बेहोश हुयी थी ये तो तुम जानते hi होंगे .... आज रात को डॉक्टर मैडम ने जब रिपोर्ट देखा तो उन्होंने बताया की माँ हार्ट की पेशेंट है और ये उनका दूसरा अटैक था .... डॉक्टर ने हमें अपनी माँ का खास ख्याल रखने को कहा है .,... हमें कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए की उनको कोई सदमा सा लगे ..,. वर्ण एक और अटैक और हमारी माँ हमें छोड़ कर हमेसा हमेसा के लिए हमसे दूर चली जाएगी ....

ये सब बोलते बोलते रुचिका की आँखें नाम हो जाती है ... कुछ ऐसा hi हाल प्रियांशी का भी था ...

दोनों बहने गौर से तरुण के चेहरे को देख रही थी मनो उसके मन के भाव को पढ़ने की कोसिस कर रही हो ...



हैप्पी रक्षा बंधन तो आल माय फ्रेंड्स ... भाई बहन के प्यार और रिश्तो पर आधारित पेश है ये अपडेट आपके लिए .... रीड आईटी एंड एन्जॉय 😊😊
 
अपडेट 58

ये सब बोलते बोलते रुचिका की आँखें नाम हो जाती है ... कुछ ऐसा hi हाल प्रियांशी का भी था ...




दोनों बहने गौर से तरुण के चेहरे को देख रही थी मनो उसके मन के भाव को पढ़ने की कोसिस कर रही हो ...

आगे

तरुण क्या बोले उसको कुछ समझ hi नहीं आ रहा था .... सच बात थी जब अगर उसकी माँ रहेगी hi नहीं तो वो किस्से नफरत करेगा .... डॉक्टर ने कहा था की किसी तरह की टेंशन सुमित्रा को नहीं होनी चाहिए पर तरुण के रहते हुए उसको उसकी टेंशन कैसे न होती ....

प्रियांशी : देख भाई हम तुम्हे फाॅर्स नहीं कर रहे ... तुम अपने हिसाब से देख लो पर कोई भी डिसिशन लेने से पहले एक बार दिल से जरूर सोच लेना ..... माँ मंझली चची की बातो में आ कर तुझे तुझे प्रताड़ित तो जरूर करती थी पर उसके लिए वो अकेली जिम्मेवार नहीं थी ,.. कही न कही इसमें हमारे पापा की भी बहुत बड़ी गलती है उन्होंने सुरु से घर के बड़े लोगो की बात और आज्ञा का पालन किया था बिना किसी सवाल के चाहे उनकी बात सही हो या गलत और ऐसा hi कुछ हमेसा वो माँ से भी एक्सपेक्ट करते थे .... अब तुम सोचोगे की मुझे कैसे पता तो मैंने ये सब उस रात को सुना था जिस दिन ऋचा दीदी के साथ वो वाला काण्ड हो गया था .... उस रात को मम्मी और पापा की बहुत लड़ाई हुयी थी .... रूचि और ऋचा दीदी तो बुआ के घर थी .... मैं मम्मी को एहि बात बताने को जा रही थी तो मम्मी का गेट अंदर से बंद था और बहार से मैंने ये सब सुना ....

तरुण : दीदी मैं क्या करू समझ नहीं आता .... एक बेटे का दिल कह रहा है की अपनी माँ को जाकर सीने से लगा लू पर वही मेरे अंदर का वो तरुण मुझे रोक रहा है जिसको माँ ने इतना बचपन से लेकर आज तक सिर्फ दर्द दिया है ...

रुचिका : अब माँ बदल गयी है भाई ... वो अपनी गलती का प्रायश्चित करना चाहती है .... क्या एक बार अपने नफरत को भूल कर तू उन्हें एक मौका नहीं दे सकता .... मैं जानती हु तुम्हारे साथ उन्होंने जो किया था वो बहुत गलत था भाई पर अब सिर्फ तुम hi हो जो उन्हें बचा सकता है .... वर्ण वो तो खुद भी अब जीना नहीं चाहती .... तुम्हे वक्त चाहिए सोचने का तो ले लो ...

तरुण : दीदी जरूर सोचूंगा इस बारे में पर अभी मुझे बहुत नींद आ रही है ....

प्रियांशी : तो आ जा न .. आज तुम्हे हम दोनों के बीच में सोना है ....

प्रियांशी और रुचिका बरी बरी से वाशरूम जाकर अपने ड्रेस चेंज करती हैं और और तरुण को बीच में सुला कर दोनों उसके साथ लिपट कर सो जाती है ....

दोनों बहने तो तरुण को अपने साथ फील करके जल्दी hi सो जाती है पर तरुण की आँखों से नींद hi गायब थी ... काफी कोसिस के बाद भी जब उसको नींद नहीं आती तो वो दोनों बहनो को सावधानी से हटते हुए बीच से निकल जाता है और बहार आ जाता है .... उसके पाओ स्वतः hi ऋचा के रूम की तरफ बढ़ जाते हैं जहा उसकी माँ को रखा गया था ....

किस्मत से ऋचा के रूम का गेट खुला हुआ hi था .... ऋचा के रूम की लाइट तो ों hi थी पर दोनों माँ बेटी गहरी नींद में सोई हुयी थी ....

अंदर आने से पहले उसने ऋचा के गेट को अचे से सत्ता दिया था ....

तरुण की नजर ऋचा के बगल में लेती हुयी अपनी माँ सुमित्रा पर पड़ती है .... नींद में उसकी माँ काफी मासूम लग रही थी .... आज शायद पहली बार था की तरुण अपनी माँ को इतने गौर से देख रहा था ...

वो धीरे धीरे चलता हुआ अपनी माँ के करीब जाता है और उसके पाओ को छू लेता है ....

तरुण (धीरे से) : माँ मैं हमेसा से तुम्हारे प्यार और सहानुभूति के लिए तरशा हु .... आपके द्वारा किये गए हर जुल्म हर सितम को मैं तो सह गया पर शायद तुम मेरी नफरत को नहीं सह पायी .... दीदी कह रही हैं आप बदल गयी हो अगर ऐसा है तो आपको मेरे लिए आपका प्यार दिखने का एक मौका तो मैं जरूर दूंगा ... आपकी नफरत देख लिया हु अब आपका प्यार देखना चाहता हु .... मेरा दिल कहता है की आपको कुछ नहीं होगा मैंने बहुत सरे अपनों को खोया है अब और किसी को खो पाने की हालत में नहीं हु मैं .... कल का दिन आपके लिए बहुत खास होगा माँ ... आप आराम करो मैं चलता हु ...

अभी तरुण ऋचा के रूम से निकलने वाला hi होता है की उसको बहार किसी के चलने की आहात सुनाई देती है .... वो गेट के पास hi रुक जाता है .... तभी उसको किसी के सीढ़ियों पर चढ़ने की आहात होती है ...

कुछ देर वेट करने के बाद वो ऋचा के रूम से बहार आता है .... बहार आने के बाद वो ऋचा के रूम के गेट को अचे से सत्ता देता है .... वो धीरे धीरे बिना कोई आहात किये .... सीढिया चढ़ने लगता है ... अपने फ्लोर पर पहुँचने के बाद वो अपने स्लिपर अपने रूम में hi खोल देता है और बिना कोई आहात किये सीढ़ियों से छत पर जाने लगता है ....

वो छत से पहले वाली सीढ़ी पर hi रुक जाता है .... तभी उसको छत से किसी की फुसफुसाते हुए बात करने की आवाज़ सुनाई देती है .... औरत की आवाज़ तो वो पहले से hi जनता था ... वो आवाज़ उसकी भाभी शिवानी की थी ....

शिवानी : हाँ पापा जी ऐसे hi दबाओ न बड़ा मज़ा आ रहा है .... आपके हाथो में तो जैसे जादू है ... आज तो आपकी बीवी भी अपने रूम में नहीं थी वही मज़े कर लेने चाहिए थे पर नहीं आपको तो खुले छत पर अपनी बहु को निचोड़ने में मज़ा आता है .... उफ़ ये मेरी गांड पर आपका लौड़ा कितने गुस्से में नजर आ रहा है ...

अब तक तो आप समझ hi चुके होंगे की शिवानी के साथ मस्ती करने वाला और कोई नहीं तरुण का बाप लक्समन hi था ...

लक्समन : ओह्ह मेरी चूड़ाकड बहु तेरे साथ लम्बी पारी खेलने के लिए hi तो मैंने अपना इलाज करवाया है और आज एक स्पेशल दोसे लेकर hi आया हु .... आज तेरी छूट में जमा पड़ा सारा पानी निकल दूंगा .... कितने मस्त चूचिया हैं तुम्हारी ....

शिवानी : आपकी बीवी के भी तो मस्त हैं ...

लक्समन : अब वो बूढी हो चुकी है ऊपर से मुझसे नाराज भी है ...

शिवानी : अब बस बहुत खेल लिया मेरे ामो से अपने अब जरा मेरी लाडो पर भी प्यार जाता दीजिये वो बिचारि कब से रोई जा रही ... आपके भतीजे में से तो अब कोई उम्मीद नहीं .... उस बहिन के टेक राहुल ने मेरी आग में घी तो दाल दिया पर अभी मेरी आग को अभी ठंडी करता उससे पहले hi आपके बेटे ने उसको घर में hi नजरबन्द कर दिया .... तब जाकर मुझे आपको लाइन देनी hi पड़ी .... आप भी तो काफी दिनों से मुझे पटाने में लगे पड़े थे तो मुझे आपके ऊपर तरस आ गया ...

लक्समन : यानि की मैं तुम्हारा सेकंड चॉइस हु .... तुम मुझे प्यार नहीं करती ....

शिवानी : आपके सामने अधनंगी हालत में पड़ी हु और आपके साथ 2 - 3 बार चुद भी ली हु ... पर प्यार तो नहीं है ...

लक्समन : जाने दो प्यार का क्या अचार डालूंगा तुम्हारे रूप में मुझे एक जवान और कमसीन छूट जो मिल गयी है मुझे और क्या चाहिए ....

शिवानी : वैसे आपको परमिशन देने की एक और वजह थी .... मैंने सोचा था की आपका हथियार भी आपके बेटे जैसा hi होगा पर इस मामले में वो आपका भी बाप है ...

लक्समन : साली रांड ... उसके साथ भी तू चुद चुकी है क्या ....

और लक्समन ने शिवानी की निघ्त्य को उठा कर उसकी छूट में अपनी दो ऊँगली एक साथ घुसा दी ....

शिवानी : आराम से ससुर जी .... जी नहीं उससे चूड़ी तो नहीं हु पर वो सब मैं आपको नहीं बता सकती ये एक टॉप सीक्रेट है ....

लक्समन : अपनी सीक्रेट अपनी गांड में डालो मुझे तो बस तुम्हारी छूट से मतलब है ....

और फिर लक्समन शिवानी को झुका देता है और उसकी छूट में अपना लुंड पेल कर धक्के लगाने लगता है ....

तभी शिवानी को उनकी काम क्रीड़ा की रिकॉर्डिंग करता हुआ तरुण दिख जाता है ...

शिवानी जल्दी से कड़ी होकर अपने कपडे ठीक करने लगती है ....

तरुण हस्ता हुआ दोनों के पास आता है और एक जबरदस्त थप्पड़ शिवानी को लगा देता है ... शिवानी का तो पूरा जबड़ा hi हिल गया था ....

तरुण : कुछ याद आया भाभी आपको ये थप्पड़ मैंने क्यों मारा .... (अपने बाप से) और आप आपकी बीवी जिंदगी और मौत के बीच लड़कर वापस लौटी है उस औरत के प्यार और रेस्पेक्ट का ये सिला दिया .. अपनी hi बहु के साथ .... एक बार भी तो उनकी सुध नहीं की होगी अपने ...

तरुण को वह देख लक्समन की तो सिटी पित्ती गम हो गयी ..... वो क्या बोले उसको समझ hi नहीं आ रहा था ....

तरुण : अब जाइये भी या अभी और करना है ..

लक्समन जल्दी से अपने कपडे समेत वह से भाग लेता है .... वो तरुण से नजर मिलाने से भी घबरा रहा था ....

तरुण : अब आप बताओ मैडम उस दिन तो बड़ा साडी सावित्री बन रही थी और अपने ससुर के साथ hi छियई ...

शिवानी : अब तुम सब जान hi गए हो तो तुमसे अब क्या छुपाना ...

तरुण : बड़ी आग लगी है न तेरी छूट में रुक कल तुझे कोठे पर बिठा देता हु ....

शिवानी : मैं हमेसा से ऐसी नहीं थी तरुण .... मैं तो तुम्हारे भैया के साथ हुए हादसे को hi अपनी नियति मान कर जिए जा रही थी .... मुझे तुम्हारी मंझली चची ने न सिर्फ बहकाया बल्कि अपने बेटे के साथ सुलाने तक की प्लानिंग कर ली .. अगर उस रात को राहुल के साथ तुमने वो सब नहीं किया होता तो ुशी रात को hi मैं उसके साथ हमबिस्तर हो चुकी होती ... उसको कैद करके तुमने मेरे अपने जिस्म की आग को ठंडा करने के मंसूबो पर पानी फेर दिया उसके बाद मैंने तुम्हारे पापा को पता लिया .... उस दिन इवनिंग को इसके वजह से hi तुम्हारे साथ बदसुलूकी हो गयी .... प्लीज ये बात किसी से मत कहना वर्ण मैं जीते जी मर जाउंगी .., आज से तुम्हे मेरी तरफ से शिकायत का मौका नहीं मिलेगा ... जब मेरे नसीब में वो सुख लिखा hi नहीं है तो क्यों किसी और के परेशानी का कारन बनु ... उस दिन के लिए मुझे माफ़ कर देना तरुण ... सॉरी वन्स अगेन ....

इतना कह कर बिना तरुण के जवाब का इंतजार किये शिवानी वह से जाने लगती है ...

तभी तरुण उसका हाथ पकड़ लेता है ....

तरुण : आपकी मैं प्रॉब्लम फिजिकल रिलेशन hi है न ...

शिवानी कुछ नहीं बोलती है बस गर्दन झुकाये कड़ी रहती है ....

तरुण : मैं आपको पापा के साथ ये सब मरने की परमिशन देता हु पर ये सब काम सबसे छुप कर किया करो किसी और ने देख लिया होता तो क्या होता .....

शिवानी : नहीं तरुण मुझे नहीं करना उनके साथ अब ....

तरुण : तो किसके साथ करना है राहुल के साथ ???

शिवानी : नहीं तुम्हारे साथ ...

तरुण : ये नहीं हो सकता .... आप मेरे भैया की अमानत हो मैं उन्हें धोखा नहीं दे सकता ....

शिवानी : तो ठीक है मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो ... Ok गुड नाईट ...

तरुण : ok गुड नाईट ...

और उसके बाद तरुण वापस प्रियांशी के रूम में आ जाता है और दोनों बहनो के बीच में सो जाता है ....

अगली सुबह को तरुण बिना ब्रेकफास्ट किये hi मार्किट निकल जाता है और करीब आधे घंटे बाद घर आता है उसके हाथ में एक प्लास्टिक का थैला था ... वो सबसे पहले अपने रूम आता है और थोड़े देर बाद प्लास्टिक बैग से एक गिफ्ट पैक निकलता है और ऋचा के रूम पहुँचता है उस वक्त रूम तरुण की माँ के अलावा सिर्फ प्रियांशी hi थी ...

प्रियांशी इशारे से तरुण से पूछती है तो तरुण उसको इग्नोर करता हुआ अपनी माँ के पास आ जाता है ... उसकी माँ बीएड पर लेती हुयी थी आँखें बंद करके .....

तरुण अपनी माँ के हाथो को हिलता है .... सुमित्रा अपनी आँख खोल कर सामने तरुण को देखती है तो उसको अपनी आँखों पर बिस्वास नहीं होती तो वो अपने हाथो से अपनी आँख को मींज कर फिर से देखती है तो तरुण को अपने पास खड़ा देख उसको तो जैसे बिस्वास hi नहीं हो रहा था ....

तरुण : गुड मॉर्निंग माँ .. कैसी हो आप ....

सुमित्रा की आँखों से आंशू बह निकले थे तरुण ने उसको माँ बोलै था .... तरुण के मुँह से अपने लिए ये शब्द सुनने को उसके कान तरस गए थे ....

सुमित्रा : m...m....main ठीक हु बीटा .....

तरुण घुटनो के बल बैठ जाता है और अपना लाया हुआ गिफ्ट पैक सुमित्रा के सामने कर देता है ....

तरुण : हैप्पी बर्थडे मम्मी ...

सुमित्रा जल्दी से उठ कर बैठ जाती है और तरुण के हाथो से वो गिफ्ट पैक ले लेती है और तरुण को खड़ा करके उसको गले लगा लेती है .... दोनों माँ बेटे बिलकुल शांत खड़े थे अगर कोई बोल रहा था तो वो थी दोनों की आँखें ... दोनों की आँखों से आंशू जहर जहर कर बह रहे थे .... दोनों बस एक दूसरे को महसूस कर रहे थे ....

वही बीएड के बगल में कड़ी प्रियांशी अपने मोबाइल के कैमरा में इस खास पल को रिकॉर्ड करने में लगी हुयी थी ... उसकी भी आँखें नाम थी दोनों माँ बेटे का दर्द वो महसूस कर रही थी ..

कुछ देर बाद दोनों अलग होते हैं ... सुमित्रा तरुण को अपने साथ बीएड पर बिठा लेती है और अपने साड़ी के पल्लू से उसकी आँखों से आंशू साफ़ करती है ....

तरुण : कैसी है तबियत आपकी माँ ...

सुमित्रा : मैं तो अब बहुत ाचा महसूस कर रही हु ... मुझे क्या होगा .... बेटे मुझे आज इतनी ख़ुशी हो रही है की मैं उसको शब्दों में बया नहीं कर सकती .... वैसे एक बात बताना बीटा तुम्हे मेरा बर्थडे कैसे याद है ....

तरुण : ये उस समय की बात है जब मुझे सोचने समझने की थोड़ी शक्ति आ गयी थी उस समय मैं शायद 5 साल का रहा होऊंगा ... अपने अपना बर्थडे मनाया था .. पुरे घर को अपने इस सेलिब्रेशन में शामिल किया था सिवा मेरे .... मैं वही खड़ा था जहा अपने केक कट किया था अपने घर के हर मेंबर को केक अपने हाथो से खिलाया था सिवा मेरे .... मंझली चची ने पार्टी के बाद मुझे केक तो दिया पर कुत्तो वाले प्लेट में .... उस समय मेरे छोटे से दिमाग में ये बात समझ नहीं आयी की अपने या आपलोगो ने ऐसा क्यों किया था बस ुशी दिन से आपके हर बर्थडे पर एक लेटर लिखा करता था और इस गिफ्ट बॉक्स में वही सरे लेटर्स हैं .... ी होप की आपको पसंद आये ....

सुमित्रा की आँखों से फिर से आंशू जहर जहर कर बहने लगते हैं ..,

सुमित्रा : बीटा मैं बहुत बुरी थी ... मुझे तो माँ कहलाने का भी हक़ नहीं है ....

तरुण : आज मुझे बुरा नहीं लग रहा माँ जो बीत गया उसको बदला तो नहीं जा सकता .... हमारे हाथ में सिर्फ हमारा प्रेजेंट है .... उम्मीद है की आप मुझे मेरे हिस्से का प्यार देंगी ... मुझे आपसे और कुछ नहीं चाहिए .....

सुमित्रा : हाँ मेरे बच्चे मैं तुम्हे वो सारा प्यार देना चाहती हु जो मैं तुम्हे न दे सकीय .... बीटा तुमने आज मुझे मेरे जन्मदिन पर वो ख़ुशी दी है जिसके बदले मैं अपनी जान भी हस्ते हस्ते तुझ पर कुर्बान कर सकती हु ....

सुमित्रा तरुण के चेहरे को अपने करीब लती है सर उसके पुरे चेहरे पर चीम्बङो की बरसात कर देती है .....

प्रियांशी : उऊंणह्ह्ह्हुउउउ उउउऊँणणह्ह्ह्हुउउ अरे हम भी हैं यहाँ अरे कोई इस अनाथ को भी एक दो मीठी पप्पी दे दो ....

सुमित्रा : तुम सब को तो बहुत मिल चूका अब बस मैं मेरे बेटे की माँ हु ....

तरुण इशारे से प्रियांशी को अपने पास बुलाता है और उसको गले लगा लेता है और उसके कान के पास अपना मुँह ले जाकर धीरे से कहता है ....

तरुण : अब तो खुस हो न आप ....

प्रियांशी उसके रिस्पांस में उसके गाल को चुम लेती है ...

प्रियांशी : तू सच में बाबू सिर्फ प्यार के लिए बना है .... उस डायन की वजह से तुम्हे कितना कुछ सहना पड़ा ....

सुमित्रा : बीटा अब तुम मुझे छोड़ कर कही नहीं न जाओगे ....

तरुण : नहीं माँ अभी आपसे शेर सारा प्यार पाना है सूद समेत .... अभी तो आपकी बर्थडे के लिए तयारी करनी है ... आप आराम करो ...

तरुण प्रियांशी के साथ वह से चला जाता है और सुमित्रा बीएड पर लेट जाती है ... वो बार बार तरुण के दिए हुए गिफ्ट को चुम रही थी ..... वो अभी बेहद खुस थी मनो उसको उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा मिल गया हो ....

प्रियांशी ने जाकर अपनी साडी बहनो और बड़ी चची को ये खुस खबरि दी सभी बे तरुण को उसके डिसिशन के लिए शेर सारा प्यार दिया और सुभकामनाये भी दी ....

तभी प्रियांशी को कुछ याद आता है .....

प्रियांशी : आज किसी ने उन् haramiyo(Rahul एंड खुसबू) को खाना नहीं दिया है न ....

ऋचा : अरे यार मैं तो भूल hi गयी थी ....

प्रियांशी : आज उन्हें शेरू के प्लेट में खाना मिलना चाहिए ... उन्होंने मेरे भाई को बचपन में ऐसे hi खाना दिया था ....

रानी : ऐसे नहीं वो इससे भी बुरा डेसेर्वे करते हैं ....

रुचिका शेरू के प्लेट में खाना निकल देती है .... उस खाने रानी ने थूक कर उसको अचे से मिला दिया ...

रानी : अब ये खाना शुद्ध हो गया है ... अब से हर रोज़ उन्हें ऐसे hi खाना मिलना चाहिए .... जो कुछ भी मेरे भाई ने सहा है उससे भी बुरा होना चाहिए उनके साथ ...

रुचिका ने गेट के नीचे से प्लेट सरका दिया .... दोनों माँ बेटे रात से hi भूखे थे तो जल्दी जल्दी उस खाने को किसी भुक्खड़ की तरह थुश लिया ....

रात में ऋचा और प्रियांशी अपनी माँ को रेडी करके नीचे ग्राउंड फ्लोर पर लती है .... सरे घर वाले वही मौजूद थे .... हॉल को फूलो और बैलून से काफी अचे से सजाया गया था और एक से हुए टेबल पर एक बड़ा सा केक रखा गया था ...

सभी लोगो में सुमित्रा की नज़रे किसी को ढूंढ रही थी ....

प्रियांशी : किसे ढूंढ रही हो माँ .... पापा को क्या ....

सुमित्रा : अरे नहीं मेरा बच्चा नहीं दिख रहा कही ....

ऋचा (स्माइल करते हुए) : वो देखो माँ उधर खड़ा है वो ....

तरुण को देख सुमित्रा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है ... आज से पहले हर बर्थडे को वो ऐसे राहुल को ढूंढा करती थी पर आज काफी कुछ बदल चूका था ...

सुमित्रा केक वाले टेबल के पास पहुँचती है ....

सुमित्रा (प्रियांशी से) : जाओ मेरे बेटे को मेरे पास लेकर आओ ...

प्रियांशी तरुण को सुमित्रा के पास ले आती है ....

सुमित्रा पहले कैंडल ब्लो करती है और तरुण का हाथ पकड़ कर केक कट करती है ....

सभी लोग हैप्पी बर्थडे तो यू का गाना गाने लगते हैं ... सुमित्रा केक का पहला टुकड़ा अपने बेटे तरुण को खिलाती है तरुण खुद थोड़ा सा केक का टुकड़ा अपने मुँह में काट कर बाकि अपनी माँ के मुँह के सामने कर देता है .... सुमित्रा भी तरुण के जूते केक को कोई अमृत समझ तुरंत खा लेती है .... दोनों माँ बेटे की आँखें भर आयी थी ....

प्रियांशी : कोई न माँ आप भाई के साथ साइड हो जाओ मैं बाकियो को केक दे देती हु ...

सुमित्रा और तरुण टेबल से थोड़ा साइड हो जाते हैं ....

तरुण अपने हैंडकरचीफ से अपनी माँ के आंशू साफ़ करता है ....

तरुण : आप बहुत खूबसूरत लग रही हो माँ .... ऐसे रो कर अपना चेहरा ख़राब मत करो .... आज आपके लिए बहुत खास दिन है ...

सुमित्रा : हाँ आज तू जो मुझे मिल गया है पहले मैं तुझसे दूर रहना चाहती थी फिर तू मुझसे नाराज़ हो गया पर फाइनली आज मुझे मेरा बीटा वापस मिल गया है तो ये मेरे लिए सबसे खास दिन है ...

तरुण : आपको अस ा बर्थडे प्रेजेंट क्या चाहिए माँ ...

सुमित्रा : मुझे और कुछ नहीं चाहिए ... अगर तुम कुछ देना hi चाहते हो तो मुझे ये प्रॉमिस करो की हमेसा मेरे पास रहोगे ....

तरुण : ok माँ वादा रहा पर फिर भी आपको क्या चाहिए अपने बेटे से ...

सुमित्रा : वो चूड़ी जो तूने 5 साल की उम्र में मेरे लिए ख़रीदा था ...

तरुण : आपको याद है माँ ...

सुमित्रा : भले hi उस वक्त मैं एक अलग जोन में थी पर अपने बच्चे को कैसे पूरी तरह भूल जाती आखिर तू मेरा hi तो अंश है न ...

तरुण जल्दी से भाग कर अपने रूम जाता है .... जब वो नीचे आता है तो सभी लोग सुमित्रा को उसका बर्थडे गिफ्ट दे रहे थे ....

तरुण भी आता है और अपनी माँ के हाथो में वो चुडिया रख देता है .... सुमित्रा बड़े प्यार से अपने बेटे के दिए हुए चूड़ी को पहन लेती है ....

और फिर अपने बेटे को गले लगा कर जोर जोर से रोने लगती है .... सुमित्रा को ऐसे रट देख सभी इमोशनल हो जाते हैं ... तरुण की बुआ वह आ जाती है और सुमित्रा को सांत्वना देने लगती है ....

प्रिय : रोवो मत भाभी .... शायद आपके किस्मत में अपने बेटे का साथ इतने सालो बाद hi लिखा था ... खुद को सम्भालो भाभी अभी आपको अपने बेटे को उसके हिस्से का प्यार भी तो देना है .... बहुत दुःख सहा है मेरे बच्चे ने अब उसकी दमन में खुसिया डालने की बरी है ...

तभी वह तरुण की बड़ी चची आ जाती है और तरुण के माथे को चुम लेती है और अपने पल्लू से उसके आँखों को साफ़ करती है ...

बड़ी चची : तुमने अपनी माँ को उसके बर्थडे का बेस्ट गिफ्ट दे दिया है बीटा ... बहुत बड़ा दिल है तुम्हारा बीटा .... मुझे नाज़ है तुम पर और तुम्हारे डिसिशन पर .... सुमि अब बस भी करो तुम्हारे बेटे को तुम्हारे प्यार की जरुरत है इसको इतना प्यार दो की इसके दमन में कभी कोई ग़म न आये ....

सुमित्रा : हाँ दीदी मेरे बच्चे ने बहुत दुःख सहा है अब मैं उसको अपनी पलकों में छुपा कर रखना चाहती हु ....

उसके बाद खाने पिने का दौर चलता है .... सुमित्रा ने घर के हर नौकरो को अपने बेटे के वापस मिलने की ख़ुशी में अपने हाथो से कपडे और मिठाईया दी ....

मौका देख तरुण का बाप भी अपनी बीवी से माफ़ी मांग लेता है ....

सुहानी भी तरुण और उसकी माँ का प्यार देख काफी खुस थी .... अपनी माँ को याद कर उसकी आँखें भी नाम हो गयी थी ....

डिनर के बाद सभी अपने अपने रूम्स में सोने चले जाते हैं ....

सुमित्रा भी अपने रूम आती है तो पति है उसका पति बीएड पर लेता हुआ था ... सुमित्रा को देख वो बीएड पर बैठ जाता है ....

लक्समन : थैंक्स सुमि की तुमने मुझे माफ़ कर दिया .... हैप्पी बर्थडे वन्स अगेन .... वैसे तुम आज बहुत खूबसूरत दिख रही हो .... चलो न साथ सोते हैं .... बहुत दिन हो गए हमें प्यार किये हुए आज तुम्हारी साडी कसार मैं दूर कर दूंगा ....

सुमित्रा : जयदा उच्छलने की जरुरत नहीं है ... मैं यहाँ अपना सामान लेने आयी ... मैं अपने बेटे के साथ रहूंगी अब से .... मैंने आपको माफ़ किया है इसका ये मतलब नहीं की अब हमारे बीच सब कुछ सही हो गया है ... मैंने आपको माफ़ी इसलिए दी है क्यूंकि आज मैं बहुत खुस थी ... इतने सालो से मेरे बेटे के साथ जो कुछ भी गलत हुआ उसमे आपकी भी बहुत बड़ी भागीदारी थी ....

और फिर अपना बैग लेकर सुमित्रा तरुण के रूम में आ जाती है .... तरुण ने इतना तो बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया था ....

तरुण : माँ आप यहाँ और ये बैग किसलिए ....

सुमित्रा : मैं अब तुम्हारे hi रूम में तुम्हारे साथ रहूंगी .... अगर तुम्हे कोई आपत्ति है तो मैं चली जाती हु ....

तरुण : अरे नहीं माँ मैं आपको मन नहीं कर रहा ... बस आपको ऐसे बेग के साथ देख थोड़ा कंफ्यूज हो गया था ...

सुमित्रा : रुको मैं चेंज करके आती हु ....

सुमित्रा अपने बैग से एक नाईट गाउन निकल कर वाशरूम चली जाती है ....



थोड़े देर बाद वो वापस आती है .... और बीएड पर अपने बेटे के बगल में लेट जाती है .... और तरुण की बालो में अपनी उंगलिया फिरने लगती है .... अपनी माँ के ममतामयी टच से तरुण को बड़ी जल्दी से नींद आ जाती है .... सुमित्रा भी तरुण के सोने के बाद उसको खुद से चिपका कर सो जाती है ..... दोनों माँ बेटो के चेहरे पर आज एक असीम शांति का एहसास था ...
 
अपडेट 59

थोड़े देर बाद वो वापस आती है .... और बीएड पर अपने बेटे के बगल में लेट जाती है .... और तरुण की बालो में अपनी उंगलिया फिरने लगती है .... अपनी माँ के ममतामयी टच से तरुण को बड़ी जल्दी से नींद आ जाती है .... सुमित्रा भी तरुण के सोने के बाद उसको खुद से चिपका कर सो जाती है ..... दोनों माँ बेटो के चेहरे पर आज एक असीम शांति का एहसास था ...




आगे

तरुण के सुबह की शुरुआत उसके मुँह पर पानी के बूंदो के गिरने से हुयी .... उसने जैसे hi अपनी आँखिन खोली उसके सामने उसकी माँ का मुस्कुराता हुआ चेहरा था ....

तरुण : गुड मॉर्निंग माँ .,. शावर लेकर आ रही हो क्या आप ....

सुमित्रा : हाँ बीटा ... मैंने सोचा जब मेरी सबसे बड़ी ख्वाहिस पूरी हो hi गयी है तो क्यों न मंदिर हो आऊं ....

तरुण : ok माँ आप जाओ ... तब तक मैं एक दो नींद की झपकियाँ और ले लू .., वैसे रात बहुत अछि नींद आयी है तो सोचता हु फिर से नींद की वादियों में चला जॉन ..,

सुमित्रा : उठ जा न बीटा .... ऐसे ज्यादा देर तक नहीं सोते .... पहले तो तू ऐसा नहीं था ,...

तरुण : पता नहीं अब जल्दी उठने का मन hi नहीं करता ...

सुमित्रा : आज भर सो ले कल से टांग तोड़ दूंगी अगर देर तक सोया तो ....

तरुण : कभी तो प्यार की बातें भी कर लिया करो ...

सुमित्रा : अरे वो तो मजाक कर रही थी ... चलो उठो न साथ में मंदिर चलते हैं ....

तरुण : आप प्रियांशी दीदी को ले जाओ न इस घर में सबसे बड़ी अष्ठावं वही हैं ....

सुमित्रा : बीटा मैं तुम्हे बता नहीं सकती की मैं तुम्हे कितना प्यार करती हु ...

तरुण : मुझे पता है .... ी लव यू माँ ...

सुमित्रा : ी लव यू तू मेरा बच्चा .... मैंने तुमसे तुम्हारा बचपन छिना है मैं वो सब तो तुम्हे नहीं लौटा सकती पर इतना जरूर वादा करती हु की कभी मेरे वजह से तेरी आँखों में आंशू नहीं आएंगे ..... क्या तुम मेरे नन्हे से तरुण नहीं बन सकते .... मैं तुम्हारे साथ वो पल फिर से जीना चाहती हु ....

तरुण : मैं तो आज भी आपका वही नन्हा सा तरुण हु ..... मेरी लाइफ में बाद पैच आ गे था जो अब जाकर ठीक हुआ है ये पल मेरे लिए बहुत खास है माँ .... मुझे भी आपके साथ वो खास पल जीना है जिसे मैंने मिस कर दिया ....

सुमित्रा तरुण को गले लगा लेती है और उसके चेहरे पर चुम्बनों की बारिस कर देती है ....

तरुण : माँ इतनी मीठी पुप्पीय एक साथ न दो वर्ण डायबिटीज हो जायेगा ....

सुमित्रा : अब इनकी आदत दाल लो बीटा जी .... तुमने इस माँ की नफरत तो खूब देखि है अब इसका प्यार देखने की बारी है ....

तरुण : मुझे इस पल का बचपन से hi बेसब्री से इंतजार था ...

तभी तरुण को गेट पर कड़ी रुचिका दिख जाती है जिसके आँखों में इन् माँ बेटे का प्यार देख कर आंशू आ चुके थे ....

तरुण : रूचि दीदी आप वह गेट पर क्यों कड़ी हो अंदर आओ न ... आज मेरी ज़िन्दगी में जो कुछ भी ाचा हो रहा है उसमे सबसे बड़ा योगदान आपका hi तो है .... आपके वजह से hi मेरी इस घर में पहचान बानी .... आज मैं गर्व से कह सकता हु की मेरा भी एक परिवार है जिसमे सभी मुझे प्यार करते हैं .... अगर आप न होती तो ये मुमकिन नहीं था .... थैंक्स दीदी एंड लव यू ...

रुचिका प्यार से तरुण के सर पर एक तपली मार देती है ....

रुचिका : पगलू दीदी को भी थैंक्स बोलते हैं क्या ... मैंने तो जो किया अपने प्यारे से भाई की मासूमियत और उसकी मुस्कान के लिए किया ... होश सँभालने के बाद जब तू पहली बार यहाँ आया था तो तुम कितने डरे हुए और घबराये हुए लग रहे थे .... बस मैंने ुशी पल अपने दिल में ये डीडे कर लिया था की तुम्हारे चेहरे पर ग़म लेन की चाहे जो वजह हो पर तुम्हारे चेहरे पर ख़ुशी लेन की वजह मैं बनूँगी ....

और फिर रुचिका भी तरुण के पुरे चेहरे पर चुम्बनों की बरसात कर देती है ....

सुमित्रा : मेरे बच्चो में ऐसा प्यार सदा बना रहे ....

और अपने आँखों के किनारे से काजल का टिका वो अपने दोनों बच्चो के कान के पीछे लगा देती है ....

उसके बाद सुमित्रा रुचिका के साथ वह से चली जाती है .....

इवनिंग के वक्त तरुण की बुआ प्रिय उसके घर आती है ... कुछ देर अपनी भाभी और बच्चियों से बात कर वो तरुण के रूम आ जाती है जो इस वक्त अपने मोबाइल पर मूवी देख रहा होता है ....

प्रिय : क्या कर रहा है बीटा ...

तरुण : मूवी देख रहा हु बुआ ...

प्रिय : अब तो तुम्हे अपनी माँ का प्यार मिल गया है तो अपनी इस माँ को भूल न जाना ...

तरुण : आप मेरी माँ थी और हमेसा मेरी माँ hi रहोगी ... आपको कैसे भूल सकता हु .... अपने उस वक्त मेरा साथ दिया जब कोई मुझे देखना तक पसंद नहीं करते थे .... यू अरे सो स्पेशल तो में ...

प्रिय : चल मैं तुझे आज अपने साथ घर ले जाने आयी हु .... आज मेरे घर hi रुकना है तुझे ....

तरुण : तो उसमे कौन सी बड़ी बात है ये घर हो चाहे वो घर सब मेरा hi तो है ...

प्रिय तरुण को साथ लेकर ग्राउंड फ्लोर पर आती है ...

प्रिय : छोटी भाभी आज मैं अपने बेटे को अपने घर ले जा रही हु ...

सुमित्रा को अभी अभी तो उसका बीटा वापस मिला था ऐसे में वो नहीं चाहती थी की वो प्रिय के साथ जाये पर तरुण का अपनी बस के साथ इतनी प्यारी बॉन्डिंग थी की वह छह कर भी उसको मन नहीं कर सकती थी ...

सुमित्रा : इसमें पूछने की क्या बात है दीदी ये आपका hi तो बीटा है ... जहा चाहे वह ले जाओ मुझसे ज्यादा इसके ऊपर आपका hi तो हक़ है ...

उसके बाद तरुण प्रिय के साथ उसके घर आ जाता है ..

तरुण को अपने घर देख रूबी बहुत खुस होती है ...

दोनों माँ बेटी तरुण की पसंद का खाना बनाने लगती है ..... खाना जब बन कर रेडी हो गया तो दोनों माँ बेटी वही आ गए जहा तरुण बैठा हुआ टीवी देख रहा था ...

तरुण : बुआ फूफा जी नहीं दिख रहे .. जब आएंगे ....

प्रिय : वो काम के सिलसिले में कही बहार गए हैं अब कल hi आएंगे ....

रूबी : वैसे भाई अब तो सब सही हो गया .,. तुम्हे छोटी ममी का प्यार भी मिल गया .... इस ख़ुशी में पार्टी लैब दे रहे हो .....

तरुण : कुछ दिनों में मेरा बर्थडे आ hi रहा है उसमे hi पार्टी कर लेना आप ...

रूबी : वो तो मिलनी hi है मैं स्पेशल पार्टी को कह रही .....

तरुण : शॉपिंग वाली पार्टी या खाने पिने वाली पार्टी चाहिए आपको ....

प्रिय : कोई जरुरत नहीं बीटा इनके ऊपर पैसे खर्चने की ... अभी घर बसा नहीं की पहले hi भिखारी आ गए ..... 😜😜😜

प्रिय और तरुण जोर जोर से हसने आगे इससे रूबी झेंप सी जाती है और मुँह पहला का दूसरी तरफ घूम कर बैठ जाती है ...

तरुण उठ कर रूबी के पास आता है ...

तरुण : बर्थडे के पहले वाले दिन आपको शॉपिंग करा दूंगा तैयार रहना ...

रूबी के फेस पर स्माइल आ जाती है .... वैसे तो उसके माँ बाप उसको कभी किसी चीज की कमी होने नहीं देते थे पर एक सेज भाई की कमी उसको हमेसा से खलती थी ...

कहने को तो उसके दो भाई और भी थे पर राघव बीवी के आ जाने के बाद से किसी भी बहन पर कोई खास ध्यान नहीं देता था वही राहुल मतलबी इंसान था और अव्वल दर्ज़े का कंजूस भी .... उसने आज तक शायद hi किसी बहन को ट्रीट दी हो ....

रूबी खुस होकर उछाल कर तरुण के गले लग जाती है ... तरुण भी उसको बच्चो की तरह उछालते देख खुस हो जाता है और उसको अपनी गॉड में उठा लेता है ... रूबी भी तरुण के गर्दन में अपनी बांहो का हार दाल लेती है ....

रूबी : यू अरे माय बेस्ट बरोथेर ...

प्रिय : ऐसी पहली बहन को देख रही हु जो अपने छोटे भाई की गॉड में चढ़ बैठी है ....

रूबी : तो आपको क्यों जलन होने लगी भला मेरा भाई आपके भाई की तरह सिंगल पसली का नहीं है .... 😂😂😂 वैसे भी आप थोड़ी मोती हो चुकी हैं आपको उठाने के चक्कर में आपके भाई की तो जो हस्सी पसली बानी है इतने सालो में वो भी शहीद हो जाएगी ...

तरुण : नहीं दीदी बुआ उतनी भी मोती नहीं हैं उनको तो मैं ैनवाय hi उठा लूंगा ....

रूबी : उनका वजन मेरे से 25 किलो ज्यादा है ... जोश में होश मत खोवो भाई ...

तरुण रूबी को नीचे उतर देता है और अपनी बुआ के पास पहुँच जाता है ....

तरुण : बुआ कड़ी हो जाओ मैं दीदी को दिखाना चाहता हु की आपके बेटे में कितना डैम है ....

प्रिय : नहीं बीटा जोर आज़माइश करने की कोई जरुरत नहीं ....

तरुण : आप कड़ी तो होवो न बुआ ....

तरुण की बात रखने को प्रिय कड़ी हो जाती है ..... प्रिय को मोती कहना सही नहीं होगा हाँ उसका जिस्म भरा हुआ जरूर था ..... प्रिय के बूब्स का साइज ाचा खासा था .... रूबी को शायद उन्होंने ज्यादा ब्रेस्टफीडिंग नहीं करि थी जिसके वजह से उसके बूब्स अब भी काफी सुडौल थे .... प्रिय के जिस्म में जो सबसे बड़ा आकर्षण था वो थी उसकी बड़ी सी गांड .... जो की काफी नरम और गद्देदार थी .....

तरुण ने बैलेंस बनाने के लिए अपना एक हाथ बुआ के गांड के नीचले हिस्से में रखा और दूसरा हाथ उसके गर्दन के पास और उठाने लगा .... थोड़ी मसक्कत के बाद hi उसको सफलता मिल गयी ....

रूबी : OMG तरुण मन्ना पड़ेगा तुझे .... तूने मुम्मा को सच में उठा लिया ...

प्रिय : आखिर बीटा किसका है ... अब बस बीटा उतर दो मुझे ....

तरुण प्रिय को उतर देता है क्यूंकि सच में उसके हाथ की नसों में हल्का खिंचाव आ गया था ...

प्रिय : चलो बीटा बहुत हुआ अब जल्दी खाना खा लेते हैं ...

थोड़े hi देर में टेबल सजा दिया गया ... सारा खाना तरुण की पसंद का hi बना था ...

डिनर के बाद तरुण को बुआ ने अपने बीएड रूम में hi सोने को कहा क्यूंकि उसके फूफा तो थे hi नहीं ...

तरुण रूम में जाकर वेट करने लगा ...

आधे घंटे में किचन का सारा काम निपटा कर प्रिय अपने रूम आ जाती है ....

प्रिय : अभी तक सोये नहीं बीटा ...

तरुण : आपका hi वेट कर रहा था बुआ ...

प्रिय : चलो जल्दी से कपडे उतर कर बीएड पर लेट जाओ ... काफी जोर आज़माइश की है तुमने तो मस्सगे की सख्त जरुरत है तुम्हे ....

तरुण : बुआ उसकी कोई जरुरत नहीं .....

प्रिय : चुपचाप जाते हो या पिटाई लगाऊं ....

तरुण : ok बुआ पर एक शर्त पर आपको भी मुझसे मस्सगे करवानी पड़ेगी ...

प्रिय : धत्त पागल भला कोई बीटा भी अपनी माँ की मस्सगे करता है क्या ...

तरुण : तो ठीक है मुझे भी नहीं करवाना ....

प्रिय : ाचा बाबा ... पर पहले तुम्हारा करुँगी उसके बाद तुम ....

तरुण : ok ...

उसके बाद तरुण ऊपर के सरे कपडे उतर कर बीएड पर लेट जाता है अभी उसने सिर्फ एक शॉर्ट्स पहना हुआ था .....

थोड़े देर में प्रिय भी ड्रेस चेंज करके आती है ....

प्रिय : गुड बॉय .... पहले पेट के बल लेट जाओ ...

अब प्रिय पहले तरुण के कमर के ऊपर के हिस्से की मस्सगे करती है .... उसके बाद वो उसके पाओ और जांघो की मस्सगे करती है ....

अब तरुण पीठ के बल लेट जाता है ..... उसके शॉर्ट्स के अंदर का टेम्परेचर बढ़ा हुआ था मस्सगे की वजह से पर फिर भी लास्ट टाइम के मुकाबले उसने इस बार ाचा कण्ट्रोल किया हुआ था .....

प्रिय ने अभी एक नाईट गाउन पहना हुआ था क्यूंकि वो जानती थी की थोड़े देर बाद मस्सगे hi तो करवाना है तो गाउन को उतरने में ज्यादा वक्त नहीं लगने वाला था ....

भले hi वो तरुण को अपना बीटा मानती थी पर तरुण के सॉलिड बॉडी पर मस्सगे करते हुए उसको भी थोड़ा एक्ससिटेमेंट फील हो रहा था ....

फाइनली उसके पैरो की मस्सगे करके प्रिय ने अपना टर्न फिनिश किया ....

तरुण : बुआ अब आप बीएड पर लेट जाओ अब मैं आपकी मस्सगे कर देता हु ...

प्रिय : रुको मैं वाशरूम से आती हु ....

थोड़े देर में प्रिय वापस आती है और अपने गाउन को उतर कर बीएड पर लेट जाती है ....

अभी प्रिय ने एक ब्लाउज और पेटीकोट पहना हुआ था .... उसके अंदर उसने कोई भी उन्देर्गर्मेन्ट्स नहीं पहने थे ....

तरुण ने प्रिय के हाथो की मस्सगे करना सुरु किया .... दोनों हाथ के बाद उसने बुआ की पीठ की मस्सगे करनी सुरु की .... ब्लाउज की वजह से तरुण बुआ के पीठ की मस्सगे ठीक से नहीं कर प् रहा था ....

तरुण : बुआ क्या आप ब्लाउज खोल सकती हो वर्ण उसमे तेल लग जाएगी और वो ख़राब हो जायेगा ....

प्रिय : रहने दो न हो गयी मस्सगे अब बस पाओ में थोड़ा कर दो इतना काफी है ...

तरुण : नहीं बुआ बस ब्लाउज खोलो न अंदर तो अपने कपडे पहने hi होंगे ....

प्रिय : नहीं रात को मैं वो काम hi पहनती हु टाइट होने की वजह से स्किन पर रशेस आ जाते हैं ....

तरुण : अगर आप खोल देती तो मस्सगे ज्यादा अचे से हो पति ....

प्रिय : चल खोल देती हु वैसे भी तुमसे क्या शर्म तू तो मेरा बच्चा है ...

और फिर प्रिय अपने ब्लाउज के हुक खोल देती है जिससे उसके बूब्स हवा में लहरा जाते हैं .... प्रिय के बूब्स में कोई ढीला पैन नहीं था ....

प्रिय : अब इन्हे ऐसे क्या देख रहा है बचपन में इनमे से दूध पिया है तुमने .... तेरी माँ तो तुझे दूध पिलाती नहीं थी तो मैंने hi तुम्हे दूध पिलाया है ....

तरुण : क्या अब भी इनमे से दूध आता है ...

प्रिय : नहीं बुद्धू .... औरत को दूध तब hi आता है जब वो माँ बनती है ....

और फिर प्रिय पेट के बल लेट जाती है ... तरुण अचे से प्रिय के पीठ की मस्सगे करने लगता है .... तरुण के मस्सगे से प्रिय को बहुत आराम मिलता है ...

अब प्रिय टर्न हो जाती है .... प्रिय अपने पेटीकोट को अपनी नाभि के नीचे बांधती थी इसलिए उसकी गहरी नाभि में तेल डालने के बाद वो प्रिय के पेट की मस्सगे करने लगता है ....

प्रिय : वाओ तरुण बीटा सच में तुम्हारे हाथो में तो जादू है ... अब बहुत ाचा लग रहा है ....

तरुण : बुआ (बूब्स की तरफ इशारा करके) इनकी भी मस्सगे कर दू क्या बुआ ...

प्रिय : हाँ खुले तो हैं कर दे ...

तरुण प्रिय के दोनों चूचियों पर तेल दाल देता है .... और हलके हाथो से मस्सगे करने लगता है .., कभी वो चूचियों के घुंडियो को सहलाता तो कभी चुटकी में भर कर पिंच कर देता ..... ऐसे दर्द और मज़े की वजह से प्रिय की लाडो रानी ने भी आंशू बहाना सुरु कर दिया था ....

तरुण को पता नहीं क्या सुझा उसने बुआ के एक निप्पल को मुँह में भर कर चूसना सुरु कर दिया ....

तरुण के द्वारा अचानक से किये गए इस हमले से प्रिय का पूरा जिस्म सिहर उठता है .... तरुण के द्वारा अपने निप्पल चूसे जाने से उसके जिस्म में मीठी मीठी तरंगे उठने लगी थी ....

कुछ देर बाद वो खुद hi अपने हाथो से तरुण के सर को अपने बूब्स पर दबाने लगती है ...

प्रिय : हम्म्म्म मेरे बच्चे ऐसे hi हाँ ऐसे मेरे दूधु को चूस लो ... आखिरी बार तूने hi चूसा था इन्हे .... अब तो इनमे दूध भी नहीं आता मेरे लाल ... हैं ऐसे hi चुसो बड़ा मज़ा आ रहा है ... दूसरे वाले को भी दबाते जाओ बीटा बड़ा मज़ा आ रहा है ....

तरुण दये निप्पल को चूसने लगता है और दूसरे बूब्स को अपने हाथो से दबाने लगता है ...

प्रिय के हाथ अपने आप उसके पेटीकोट तक पहुँच जाते हैं और वो पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी छूट को सहलाने लगती है जो पहले से hi गीली हुयी पड़ी थी ...

तरुण प्रिय का हाथ वह से हटा देता है ....

तरुण : नहीं बुआ आप बस आराम करो मस्सगे की जिम्मेवारी मेरी है ....

अब तरुण प्रिय के पाओ के तरफ आ जाता है ... प्रिय की पेटीकोट पहले से hi उसके घुटनो तक चढ़ी हुयी थी ...

तरुण प्रिय के पाओ की मालिस करते हुए धीरे धीरे ऊपर आने लगता है ... अब वो बुआ के पेटीकोट को उसके जांघो तक चढ़ा देता है और उसके पाओ को फैला कर उसके बीच में बैठ जाता है ...

बीच में बैठने की वजह से उसको बुआ के जिस्म का वो हिस्सा नजर आने लगता है जहा से उसकी रूबी दीदी इस दुनिया में आयी थी ....

बुआ के गोर गोर केले के तने के जैसे जांघो की मालिस करते हुए तरुण धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है ....

जैसे जैसे तरुण ऊपर की तरफ बढ़ रहा था वैसे वैसे प्रिय के दिल की धड़कन और उसका जोश दोनों बढ़ता जा रहा था ....

तभी प्रिय के जांघो की मस्सगे करते हुए तरुण के हाथ प्रिय की नंगी छूट से टच होती है प्रिय के जिस्म में एक झटका सा लगता है .....

अब प्रिय भी छह रही थी जल्दी से तरुण उसकी छूट को मसल कर उसका पानी निकल दे .... जब प्रिय से बर्दास्त नहीं होता तो वो बोलना सुरु कर देती है ...

प्रिय : हाँ बेटे ऐसे hi मेरी बूर को जोर जोर से मसल दे साली बड़ा तंग करती है ... अब बर्दास्त नहीं हो रहा बीटा ....

अपनी बुआ की स्वीकृति पाकर तरुण अपनी बुआ के झांटो के झुरमुट में छुपी छूट पर अपना हाथ रख देता है जैसे hi उसकी ऊँगली प्रिय की छूट के छेड़ के पास पहुँचती है तो उसको ऐसा फील होता है जैसे अंदर से आग निकल रही हो ....

तरुण पहले तो छूट पर तेल दाल कर अपनी उंगलिया उसके ऊपर चलने लगता है .... उसके बाद अपनी मिडिल फिंगर उसके छूट के सुराख़ में घुसा देता है धीरे धीरे अंदर बहार करने लगता है .... तरुण की उंगलियों के जादू से प्रिय के साबरा का बांध टूट जाता है और उसकी छूट से पानी किसी फव्वारे की तरह निकलती है 3 - 4 इंस्टॉलमेंट्स में निकल जाती है .... उसकी छूट के निशाने पर होने की वजह से तरुण के छाती और पेट का हिस्सा बुआ के छूट रास से गीला हो जाता है ....

पानी निकलते hi प्रिय आसमान से अचानक धरातल पर आ गिरती है और जल्दी से अपने कपडे उठा कर वाशरूम भाग जाती है ....

वो वाशरूम में कमोड पर बैठी जोर जोर से रोये जा रही थी .... उसने कभी सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था की अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द के सामने इस हाल में अपनी छूट में ऊँगली करवाएगी ... वो भी किस से उस इंसान से जिसे उसने हमेसा से अपना बीटा hi मन है ....

प्रिय : मैं इतनी बेवकूफ कैसे हो सकती हु .... आज के बाद मैं अपने पति से कैसे आँखें मिला सकुंगी ... ये पाप hi नहीं एक घोर पाप है .... न जाने तरुण मुझे कैसी घटिया औरत समझ रहा होगा .... उसके नजरो में मेरी क्या इज्जत रह गयी होगी .... छी मैं तो खुद की नजरो में गिर गयी हु .... तरुण मुझे भी अपनी मंझली चची की तरह एक बदचलन औरत समझ रहा होगा ... क्यों मैंने उसको मस्सगे करने की इजाजत दी क्यों उसको आगे बढ़ने से नहीं रोका ... छी घिन आ रही है मुझे अपने आप से ...

काफी देर तक प्रिय वाशरूम में बैठी रोटी रही और खुद को कोसती रही ...

तरुण ने काफी देर तक उसका इंतजार किया और उसके बाद उसको नींद आ गयी ....

प्रिय जब वापस रूम में आयी तब तक तरुण गहरी नींद में सो चूका था .... काफी देर तक सोचने विचरने के बाद वो सोफे पर सो जाती है ...

सुबह को जब तरुण की नींद खुलती है तो प्रिय वह नहीं थी ....

वाशरूम से फ्रेश होकर वो रूम से बहार आता है तो देखता है की रूबी अकेली बैठी टीवी देख रही थी ...

तरुण : दीदी बुआ कहा है ...

रूबी : वो मार्किट गयी है बड़ी ममी के साथ ... रुको मैं ब्रेकफास्ट लेकर आती हु .... वैसे आज बड़ी देर तक सोते रहे ...

तरुण : हाँ दीदी नींद नहीं खुली .... मैं घर जाता हु ब्रश बिना किये कैसे खाऊंगा ...

रूबी : रुक मैं भी चलती यहाँ बैठी बोर होने से ाचा सबके साथ बात चित कर लुंगी ...



तरुण रूबी के साथ अपने घर आ जाता है ... वो अपने रूम में hi था की दिया का कॉल आ जाता है वो उसको अपने पास बुला रही थी .... वो एक बैग पैक करता है और अपनी माँ और रुचिका को बता कर निकल पड़ता है दिया के घर की तरफ ....
 
अपडेट 60

रूबी : रुक मैं भी चलती यहाँ बैठी बोर होने से ाचा सबके साथ बात चित कर लुंगी ...




तरुण रूबी के साथ अपने घर आ जाता है ... वो अपने रूम में hi था की दिया का कॉल आ जाता है वो उसको अपने पास बुला रही थी .... वो एक बैग पैक करता है और अपनी माँ और रुचिका को बता कर निकल पड़ता है दिया के घर की तरफ ....

आगे

दिया के घर पहुँचते पहुँचते तरुण को रात हो जाती है ...

दिया के मम्मी पापा भी तरुण से मिल कर बहुत खुस होते हैं .... दिया की शादी के बाद वो पहली बार आया था ...

दिया और कारन उससे बड़े प्यार से मिले ....

कासुअल पूछ - टाच के बाद तरुण को कारन के रूम भेज दिया जाता है ताकि वो रस्ते धूल गर्मी से खुद को आज़ाद कर सके ....

डिनर के वक्त तरुण को उसको उसके घर के हालत के बारे में पूछा गया .... तरुण ने सब कुछ शॉर्टकट में बता दिया ...

दिया की माँ : चलो बीटा ाचा हुआ तुम्हे इंसाफ तो मिला .... वैसे अपनी माँ को माफ़ी दे कर तूने एक तरह से सही hi किया ....

कारन : तेरे लास्ट बर्थडे पर हम कॉलेज में थे .... एक साल में कितना कुछ बदल गया न ....

दिया के पापा : मुझे तो ऐसा नहीं लगता आज से 24 साल पहले मैं तुम्हारी माँ राधिका को शादी करके इस घर में लाया था पर ये आज भी बिलकुल वैसी की वैसी hi हसीं और खूबसूरत है ...

राधिका शर्मा जाती है और गुस्से से अपने पति की तरफ देखती है .... जवाब में सभी लोग जोर जोर से हसने लगते हैं ....

तरुण : वैसे अपने सही कहा अंकल आंटी आज की जवान लड़कियों को भी पानी भरने पर मजबूर कर देंगी .... सॉरी आंटी आपको अगर बुरा लगा हो तो पर मैंने वही कहा है जो सही है ....

राधिका : अब तुम भी सुरु हो गए बीटा इनके साथ .... ये तो हैं hi पागल जो मन में आये बक देते हैं ये भी नहीं देखते की कहा हैं और क्या बोल रहे हैं ... आपको तो मैं रूम में देखती हु ...

दिया : आये हाय मेरी मुम्मा सरमाती हुयी कितनी हॉट लगती है ...

कारन : अब बस करो आप लोग अब कोई मेरी मुम्मा के बारे में कुछ नहीं बोलेगा ... मुम्मा सच में आप बहुत खूबसूरत लग रही हो ....

ऐसे hi हसी ठिठोली करते हुए सबका डिनर फिनिश हो जाता है .... दिया तरुण को अपने साथ अपने रूम ले जाती है .... कारन भी उसके साथ hi आ जाता है ...

दिया (कारन से) : मेरे सोना भाई बुरा मत मन्ना पर आज तुम्हारे लिए इस रूम में no एंट्री है .... आज मैं तरुण के साथ ढेर साडी बात करना चाहती हु .... प्लीज न ...

कारन : ठीक है पर बस आज के लिए .... (तरुण से) जा सिमरन बीटा जी ले अपनी जिंदगी ....

और फिर कारन वह से चला जाता है .... दिया ने पहले अपना गेट बंद किया और तरुण को अपने बीएड पर बिठा दी ...

दिया : तुम बैठो भाई तब तक मैं नाईट ड्रेस पहन कर आती हु ...

और फिर थोड़े देर में दिया वाशरूम से एक गाउन पहन कर निकलती है जो की उसके घुटनो तक hi आ रहा था ....

दिया आ कर तरुण के बगल में लेट जाती है ....

दिया : हाँ अब तुम खुस हो न वह और उसके बाद से तुम्हे कोई मेन्टल प्रॉब्लम तो नहीं हुयी न ...

तरुण : नहीं दीदी अब कोई दिक्कत नहीं है और अब मैं बहुत खुस हु .... मेरे परिवार में अब सभी मुझे पसंद करते हैं .... आप चलोगी तो खुद देख लेना .... और आप सुनाओ आपकी मैरिड लाइफ कैसी चल रही है .... जीजू आपको प्यार तो करते हैं न ...

मैरिड लाइफ की बात सुन दिया का चेहरा अचानक से मुरझा जाता है .... पर फिर अपने एक्सप्रेशन को तुरंत चेंज कर लेती है ...

दिया : मैं तो बहुत खुस हु ....

तरुण : पर आपके चेहरे से वो मुस्कान गायब है जो आपकी पहचान थी ... पहले आपकी एक मुस्कराहट देख कर दिल खुस हो जाता था ...

दिया (स्माइल करते हुए) : सच में बाबू मैं खुस हु ....

तरुण : नहीं दीदी आप झूट बोल रही हो .... आप शायद नहीं जानती की आपको झूट बोलना नहीं आता .... अब खुद बताओगी या मुझे अपनी कसम देनी होगी ....

दिया : नहीं बाबू कसम देने की कोई जरुरत नहीं मैं खुद बताती हु ...

ये बोल कर दिया बीएड से नीचे उतर जाती है .... और धीरे धीरे करके अपने सरे कपडे उतर कर पूर्णतया नंगी हो जाती है ..... दिया के कमर के नीचे का हिस्सा अब पहले की तुलना में काफी फैल गया था .... उसके गांड की अब बड़ी हो चुकी थी जो की आम तौर पर शादी के बाद हो hi जाता है ... दिया के बूब्स भी पहले की तुलना में करीब डेढ़ गुना हो चुकी थी ....

तरुण : दीदी ये क्या कर रही हो आप ....

दिया : तुम्हारे सवालो के जवाब का ये भी एक अहम् हिस्सा है ....

दिया झुक कर अपनी बड़ी सी गांड तरुण की तरफ कर देती है .... तरुण ध्यान से देखता है तो उसको दिया की गांड पर बहुत सरे कट मार्क दिखाई देते हैं जो की उसके पति के द्वारा उसको सेक्स में दौरान किये गए ज्यादतियों का सबूत था ....

तरुण उन्हें देख कर बड़े प्यार से उन्हें सेहला देता है ....

तरुण : दीदी ये सब क्या है और कैसे ....

दिया : अभी तो और भी देखना बाकि है भाई ...

अब दिया तरुण के चेहरे के पास अपनी चूचिया ले जाती है .... दिया की चूचियों पर भी कुछ कट मार्क्स थे ....

तरुण उन्हें बड़े प्यार से चुम लेता है ....

तरुण : दीदी क्या जीजू ने आपको ये सब दर्द दिया है ...

तरुण की सहानुभूति पाकर दिया उससे लिपट कर रोने लगती है .... तरुण बड़े प्यार से दिया के बालो को सहलाते हुए उसके गाल चूमने लगता है ,...

तरुण : बताओ न दीदी ....

दिया : भाई वो पति के रूप में एक जल्लाद हैं .... वैसे तो दिन में सबके सामने शरीफ बने रहते हैं पर रात में पता नहीं उनके ऊपर कौन सा भूत समां जाता है की वो मेरे साथ जानवरो की तरह बर्ताव करते है ... कभी बेल्ट से मार कर अपनी हवस की आग मिटते हैं तो कभी जलते हुए कैंडल की गरम वैक्स मेरी गांड या मेरे चुचो पर दाल कर अपनी मर्दानगी दिखते हैं .... पहली रात से hi रोज़ मेरे साथ रोज़ बलात्कार कर रहे हैं ... वो सेक्स सिर्फ अपने मज़े के लिए करते हैं चाहे उनके द्वारा अपनाये गए तरीको से मुझे कितना भी दर्द हो उनको कोई परवाह नहीं ....

तरुण : पर दिखने में तो वो ऐसा नहीं लगता दीदी ... कितना घटिया इंसान है वो ... अपने ये सब अपने घर वालो को क्यों नहीं बताया .... ऐसे सेक्सुअली फ़्रस्ट्रेटेड और मेन्टल इंसान को मेन्टल एसाइलम में होना चाहिए ....

दिया : भाई मैं नहीं चाहती की मेरा घर टूटे और मेरे परिवार की बदनामी हो ...

तरुण : वह क्या प्यार है दीदी ... चाहे इसमें आपकी जान hi क्यों न चली जाये .... दीदी ऐसे मेन्टल इंसान को तो अपने आस पास भी नहीं भटकने देना चाहिए और आप तो उसके साथ जन्मो का साथ निभाने चली हैं ... डैड देना पड़ेगा आपकी हिम्मत को ... पर मैं आपको ऐसे घुट घुट कर मरने के लिए नहीं छोड़ सकता ....

दिया : नहीं भाई तुम इस सब के बीच में मत आ .... एहि मेरी जिंदगी है और अब मैंने अपने आप से समझौता कर लिया है .... चाहे जो हो जाये ....

तरुण : बिलकुल नहीं .... आपको याद है जब मैं बीमार हुआ था तो अपने न सिर्फ मेरा इलाज करवाया था बल्कि हर जगह मेरी ढल बन कर मुझे एक नयी जिंदगी दी ... आज अगर मैं जिन्दा खड़ा हु तो आपकी वजह से ... अपने मेरे लिए इतना कुछ किया तो मेरा भी आपके लिए कोई फ़र्ज़ बनता है ...

दिया : मैं नहीं चाहती की तुम पर कोई आंच आये मेरी वजह से ....

तरुण : जी नहीं मैं आपको और ऐसे तड़पते हुए नहीं देख सकता ... आपके पति का दो hi इलाज है एक उसको उसके hi तरीके से रिस्पांस मिले और दूसरा ये की आप उससे डाइवोर्स ले लो और उसके ऊपर केस कर दो .... किसी पागल के हाथो से रोज़ रोज़ जलील होकर मरने से ाचा है की हमेसा के लिए उसका हाथ छोड़ दो ... दुनिया का आखिरी मर्द थोड़े hi है वो जो उसके लिए अपनी जान देने चली थी आप ... मैं तो आपको बहादुर समझता था पर आप तो बिलकुल डरपोक निकली दीदी ... मुझे ज़माने से लड़ने का पथ पढ़ा कर खुद एक पशिचो से हार गयी ...

दिया : बहुत बोल लिया तूने अब एक और भी बात उनके खिलाफ मैं बर्दास्त नहीं करुँगी ....

तरुण : मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी ... आप एक घटिया साइको का साथ दे रही हो .... ऐसे इंसान को तो ज़िंदा गाड़ देना चाहिए जो इंसान अपनी बीवी के साथ ऐसे जानवरो के जैसा सुलूक करे उसको घर नहीं मेन्टल एसाइलम में होना चाहिए ....

तभी दिया तरुण के चेहरे पर एक तमाचा जड़ देती है .... ये पहली बार था की उसने तरुण या अपने भाई पर हाथ उठाया हो ....

तरुण : मुझे मेरा जवाब मिल गया दीदी ... सुक्रिया अब तक के साथ के लिए ... मैंने सोचा था की खैर छोडो अब क्या hi फर्क पड़ता है अपने मुझे पराया कर दिया ....

और तरुण एक चादर और तकिया ले कर दिया के रूम से जाने लगता है ... वो अभी गेट तक hi पहुंचा था की दिया उसको पीछे से जकड लेती है ...

दिया : सॉरी बाबू पता नहीं कैसे मेरा हाथ उठ गया मुझे पता भी न चला ....

तरुण : दीदी अपने मुझे मारा इस बात का दुःख नहीं है मुझे अपने मुझे उस इंसान के लिए मारा जिस इंसान में आपको दर्द के सिवा कुछ नहीं दिया इस बात का मुझे बहुत दुःख है .... ठीक है चलता हु ... आपसे और कारन से मिलने आया था मिल लिया अब मेरा यहाँ कोई काम नहीं ...

दिया तरुण के आगे कान पकड़ कर सॉरी बोलती है ....

दिया : सॉरी बाबू एक तो वैसे hi मेरी दुनिया में दर्द hi दर्द है अब तू भी मुझसे नाराज होकर जा रहा है तो मैं जी. कर hi क्या करुँगी ... ाचा तू जैसा कहेगा मैं वैसा hi करुँगी .... कल मेरा वो जल्लाद पति आ रहा है यहाँ एक दिन के लिए .... तुम चाहो तो उसको सजा दे सकते हो ...

तरुण अपना गुस्सा थूक दिया को गले लगा लेता है ....

तरुण के गले लगते hi दिया तरुण के गालो को चुम लेती है ....

दिया : अब चलो न सोते हैं ...

तरुण ( दिया के कान में) : अब ऐसे नंगी रहोगी तो भला नींद कैसे आएगी .... वैसे भी अब आप जबरदस्त माल बन गयी हो ...

दिया : चुप कर बेसरम मैं तुझे अपने जख्म दिखने को नंगी हुयी थी .... और तू मुझे माल बोलने लगा ..

तरुण मुँह बना कर बीएड पर एक किनारे में दूसरी तरफ मुँह करके सो जाता है ....

दिया पीछे से आकर तरुण को जकड लेती है ...

दिया : अले अले मेला बाबू नॉलेज हो गया क्या ... अरे पगलू आज मैं अपने और तुम्हारे बीच की साडी दीवारे तोड़ देना चाहती हु .... दर्द वाला सेक्स तो मैंने बहुत किया है मैं तुम्हारे साथ एक आत्मिक और प्यार भरा मिलान करना चाहती ... क्या तू अपनी दीदी को अपना प्यार फील नहीं करवा सकता ... प्लीज न बाबू ... मैं सच में तुमसे छोड़ना चाहती हु .... मैं तुम्हारे लुंड की अपनी छूट की गहराइयो में फील करना चाहती हु ...

तरुण : दीदी ओरल तक तो ठीक था पर ये रियल सेक्स कुछ गलत नहीं होगा क्या .....

दिया : जब मुझे कोई दिक्कत नहीं है तो किसी एयर को क्यों होगी ... वैसे भी मेरी तिजोरी खुली हुयी है आप मेरी मर्ज़ी जिससे चाहे लुटवाऊं क्या फर्क पड़ता है ...

तरुण : वह दीदी तो सुरु करे क्या अपना प्रोग्राम .... आप जैसी हूर के प्रपोजल को कोई पागल hi मन कर सकता है .... तो तैयार हो न आप मुझे अपना दूसरा पति बनाने के लिए ....

दिया : उस पति ने सिर्फ मेरा जिस्म भोगा था तुझसे तो मेरी रूह का रिश्ता है .... आओ समां जाओ मुझमे और बना लो अपनी ....

तरुण तुरंत hi अपने सरे कपडे उतर देता है और दिया के होंठो पर अपने होंठ चिपका देता है .... तरुण बड़े प्यार से दिया के होंठो का रास चूस रहा था एयर दिया भी पुरे समर्पित भाव के साथ उसका साथ दे रही थी .... दोनों काफी देर तक इस खास एहसास को अपने होंठो से फील करते रहे ....

जब सांस उखाड़ने लगी तब दोनों अलग हुए ....

जल्द hi अपनी सांस दुरुस्त कर तरुण दिया के ऊपर आ जाता है और उसके बड़े बड़े चूचियों की गुलाबी रंगत लिए हुए निप्पल को चूसने लगता है ... दिया बड़े प्यार से तरुण के बालो में अपनी उंगलिया फिर कर उसके सर को और जोर से अपने चुकी पर दबा कर स्तनपान करवा रही थी ....

बरी बरी से दोनों चूचियों को जी भर कर चूसने के बाद तरुण और नीचे सरकते हुए उसकी गहरी नाभि को अपने जीभ से कुरेदने लगता है ... तरुण के ऐसा करते hi दिया का पूरा जिस्म hi काँप उठता है और उसकी छूट ने भलभला कर अपना रास छोड़ दिया .... दिया की छूट ने इतना पानी छोड़ा था मनो उसने मूट दिया हो ...

तरुण : क्या दीदी थोड़ा सा तो कण्ट्रोल करती आपके झरने से निकलने वाला सारा सोमरस बर्बाद हो गया ...

दिया : मेरी नाभि बहुत hi सेंसिटिव है और तूने तो उसको अपनी जीभ से इतना कुरेदा मनो वह ड्रिलिंग करना चाहता हो ... फ़िक्र न कर तेरी दीदी के स्टॉक में ढेर सारा रास है .... जा अब अपनी दीदी की राजकुमारी से भी प्यार जाता ले ... तभी तो वो तुम्हारे राजकुमार के साथ ब्याह रचाने को राज़ी हो पायेगी ....

तरुण अब दिया के टांगो के बीच आ जाता है और दिया की पावरोटी के जैसी पहली हुयी छूट को खोल कर देखने लगता है ...

तरुण : दीदी आपकी राजकुमारी तो काफी फैल चुकी है ... आपके वाले का हथियार काफी दमदार है क्या ...

दिया : नहीं रे उसका हथियार तो तेरे मुकाबले कुछ भी नहीं है ... हरामी ने डिलडो दाल दाल कर उसको इतना चौड़ा कर दिया है ...

तरुण : साला नपुंसक कही का लुंड में डैम नहीं है तो रबर का डिलडो उसे करता है आने दो कल सेल की अछि खातिरदारी करनी है ...

दिया : उसको छोड़ तू मेरे पे कंसन्ट्रेट कर न ....

तरुण बड़े प्यार से दिया की छूट को चाटने लगता है ..... तरुण के जीभ और उंगलियों के जादू से दिया उसके मुँह में hi झाड़ जाती है ...

अब वो घुटनो के बल बैठ कर तरुण के लम्बे हलब्बी लुंड को चाटने चूसने लगती है ..... जल्द hi तरुण का पूरा लुंड दिया के थूक से सं कर चमकने लगता है ....

तरुण : अब बस करो दीदी अब मेरे राजकुमार को अपनी राजकुमारी से मुलाकात करने दो ....

दिया अपनी टांगें चौड़ी करके लेट जाती है और तरुण उसके बीच आकर अपने लुंड को दिया की धधकती छूट पर सेट करके एक जोर का धक्का लगता है ... तरुण का आधा लुंड बड़े आराम से दिया की छूट में चला गया ...

हलाकि दिया के मुँह से हलकी सिसकारी जरूर निकली थी पर उसमे दर्द और मस्ती का मिला जुला भाव था .... डिलडो से दिया का छूट काफी खुल गया था पर अभी भी तरुण का लुंड उसमे कैसा कैसा जा रहा था ....

तरुण एक बार फिर से जोर से धक्का मरता है .... इस बार उसका पूरा लुंड दिया की छूट में समां जाता है ...

इस बार दिया को काफी दर्द का एहसास हुआ पर उसने तरुण को कंटिन्यू रहने को कहा .... तरुण धीरे धीरे अपना लुंड दिया की छूट में पंप करने लगा ... जल्द hi दिया की छूट ने तरुण के लुंड के मुताबिक अपनी छूट को एडजस्ट कर लिया ....

अब आराम से तरुण का लुंड दिया की छूट में आने जाने लगा .... दिया ने शायद पानी छोड़ दिया था जिसके वजह से हर धक्के के साथ fach-fach की मधुर ध्वनि के साथ उसकी छूट से पानी निकलने लगा ....

दिया : हम्म्म्म मेरा राजा और जोर से और जोर से फाड़ डालो मेरी छूट को .... आअह्ह्ह्हह ह्म्म्मम्म ऐसे hi जोर जोर से कुतो मेरी छूट की ओखली में अपना मुसल ....

तरुण : हाँ मेरी लाडो बहना ये ले अपनी छूट में मेरा प्यार भरा लुंड .... आअह्ह्ह्हह काफी मस्त हो मेरी जान तू .... इतना मज़ा आज तक कभी नहीं आया ....

कुछ देर ऐसे hi करने के बाद तरुण दिया को मिशनरी पोजीशन से डोगग्य में झुका देता है और उसके पीछे आकर एक hi झटके में अपना पूरा लुंड पेल देता है .... और ताबड़तोड़ झटके मरने लगता है ....

आख़िरकार एक जबरदस्त धक्काम पेल के बाद तरुण अपना गधा रास दिया की छूट में छोड़ देता है और दिया भी चौथी बार अपना छूट रास छोड़ देती है ....

अब दोनों बीएड पर पसर जाते हैं ...

तरुण : दीदी मज़ा आया मेरे साथ करने में ....

दिया : हाँ भाई आज मुझे पता चला की सेक्स क्या होता है और क्यों लोग इस सुख को पाने के लिए हमेसा लालायित रहते हैं ...

तरुण : दीदी मुझे भी आपके साथ बहुत मज़ा आया .... वैसे आप मेरी तीसरी बहन हो जिसके साथ मैंने इस सुख को भोगा है ... उनमे से एक वर्जिन भी शामिल है ....

दिया : वह बीटा तू तो बहुत बड़ा छुपा रुस्तम निकला .... वैसे कौन कौन हैं वो ....

तरुण : दोनों मेरी कजिन हैं .... एक शादी सुदा दीदी हैं जिनका नाम श्रेया है तो दूसरी रानी दीदी की शादी होने hi वाली है कुछ दिनों में ....

दिया : वेल दोने ... आज तीसरी वाली का शिकार भी कर लिया तेरे राजकुमार ने ...

तरुण : हाँ दीदी ये तो सबका प्यार है मैंने किसी के साथ जबरदस्ती या ब्लैकमेलिंग नहीं करि सबने अपनी मर्जी से मेरे साथ किया है आपके जैसे hi ....

दिया : तू है hi इतना प्यारा की किसी का भी दिल आ जाये तुझ पर .... चलो अब सोते हैं कल जल्दी उठना भी है मुझे ...



दिया और तरुण अपने अपने कपडे पहन कर एक दूसरे से लिपट कर सो जाते हैं ....
 
अपडेट 61

तरुण : हाँ दीदी ये तो सबका प्यार है मैंने किसी के साथ जबरदस्ती या ब्लैकमेलिंग नहीं करि सबने अपनी मर्जी से मेरे साथ किया है आपके जैसे hi ....




दिया : तू है hi इतना प्यारा की किसी का भी दिल आ जाये तुझ पर .... चलो अब सोते हैं कल जल्दी उठना भी है मुझे ...

दिया और तरुण अपने अपने कपडे पहन कर एक दूसरे से लिपट कर सो जाते हैं ....

आगे

सुबह को जब तरुण की नींद खुलती है तो वो रूम में अकेले सोया हुआ था दिया उठ कर जा चुकी थी .... वो अभी उठ कर बैठा hi था की उसको दिया रूम में कॉफ़ी का कप हाथ में लिए रूम में एंटर करते हुए दिखती है ...

दिया : गुड मॉर्निंग भाई .... जाओ जल्दी से फ्रेश होकर आओ तुम्हारे लिए कॉफ़ी लायी हु ....

तरुण : गुड मॉर्निंग दीदी ... जस्ट अभी आया ....

तरुण जल्दी से वाशरूम घुस जाता है .....

दोपहर के करीब दिया के हस्बैंड की एंट्री घर में होती है .... तरुण को तो वो पहले से भी जनता था पर फिर भी दिया उसको इंट्रोडस करवाती है ....

तरुण बस सबसे नजरे छुपा कर दिया के हस्बैंड के हर एक्टिविटी को गौर से देख रहा था .... वैसे उसको वो कोई आम इंसान hi नजर आ रहा था जैसा की दिया ने भी बताया था की सबके सामने दिन में वो ाचा hi बना रहता था पर रात को एक हैवान की तरह पेश आता था ....

तरुण को भी आज की रात का बेसब्री से इंतजार था .... उसने दिया को भी अपना प्लान समझा दिया था ....

आज रात को एक अछि सास होने के नाते दिया की माँ ने सब कुछ अपने दामाद की पसंद का hi बनाया था .... डिनर के बाद सभी अपने अपने रूम में सोने को चले गए ....

दिन में hi तरुण ने अपना सारा सामान दिया के बगल वाले रूम में शिफ्ट कर दिया था .... उस रूम का एक गेट घर के अंदर की तरफ खुलता था तो दूसरा बालकनी की तरफ .... दोनों रूम्स की बालकनी कॉमन hi थी ....

दिया का पति रूम में बेसब्री से अपनी पत्नी यानि की दिया के आने की राह देख रहा था ....

जैसे hi दिया उसको रूम में ातीप हुयी दिखती है वो कड़ी खुस हो जाता है ....

डी. का पति : जल्दी से गेट लॉक करो .... इतने दिनों से तुमसे दूर रहा अब और बर्दास्त नहीं होता ..... जाओ जल्दी से गेट लॉक करो आज कुछ नया तरय करते हैं .....

दिया ने गेट लॉक कर दिया और अपने पति के पास आयी ....

दिया : आज तक सिर्फ आपकी मनमानी होती आयी है आज मैं इस खेल में एक छोटा सा ट्विस्ट लाना चाहती हु ....

दिया का पति उसके तरफ हेयर से देखता है ....

दिया : ऐसे चौंक के मत देखो .... चलो बीएड पर बैठ जाओ मैं आपकी आँखों पर काली पट्टी बांध देती हु ... आज मैं आपको मिस्ट्रेस बनती हु और आप मेरे गुलाम ....

दिया का पति आराम से बीएड पर बैठ जाता है पर उसके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान थी .. .

दिया अपने पति के बैग से काली पट्टी निकल उसके आँखों पर बांध देती है और उसके बाद उसके दोनों हाथ पीछे करके एक हैंडकफ लगा देती है ....

और फिर वो बालकनी में जाकर तरुण को अंदर आने का इशारा देती है ...

दिया के पति को ऐसे बंधा हुआ ब्लैंडफोल्ड देख तरुण अपना अगला स्टेप सोचने लगता है ....

दिया का पति : अब जो भी करना है जल्दी से करो उसके बाद असली खेल सुरु होगी .... आज तो सोचा था की बैग में जो जायंट साइज का बड़ा सा डिलडो है उससे तुम्हारी छूट और गांड के छेड़ को एक कर दूंगा और उसके बाद तुम्हे बेल्ट से मरने के बाद तुम्हारे गांड के छेड़ को जलती हुयी मोमबत्ती के माँ से भर दूंगा .... पर कोई नहीं पहले तुम hi खेल लो उसके बाद मेरी बारी आएगी .... कल तुम चलने की हालत में तो नहीं रहने वाली ....

दिया के जेहन में सुहागरात से बाद की साडी यादें ताज़ा हो जाती है जो इस जल्लाद ने अपनी फंतासी पूरा करने के लिए की थी ....

दिया उसके बैग से hi वो बेल्ट निकल लेती है जिससे उसका पति हमेसा उसको पिता करता था ....

अब वो जल्दी जल्दी से अपने पति के जिस्म से सरे कपडे निकल फेंकती है .... दिया के पति का लुंड करीब 5 इंच का था और मोटाई भी बिलकुल नार्मल सी hi थी ....

सायत्ततताआयककककककक की आवाज़ के साथ वो बेल्ट दिया के पति के सरीर पर चिपक जाता है जिससे वो दर्द से कराह उठता है क्यूंकि इस बेल्ट के जरिये दिया अपना सारा भड़ास निकलना चाहती थी .... जो कुछ उसने सहा था आज वो उसका बदला निकलना चाहती थी जिसके लिए तरुण उसका हौसला अफ़ज़ाई कर रहा था ...

दिया : मेरे गुलाम झुक कर खड़े हो जाओ वर्ण अभी और भी ऐसे करारे बेल्ट पड़ने वाली है ....

दिया का पति : कमीनी हरामजादी गंदे नाली की पैदाइश इतनी जोर से क्यों मारा .... मेरी बारी आने दे तेरे छूट गांड को एक न कर दिया तो कहना .....

दिया : अपनी मालकिन को गाली देता है सेल ...

दिया फाटक फाटक करके 2 - 3 बेल्ट मर देती है अपने पति को ..,. बेल्ट की मार जब उसके नेकेड स्किन पर पड़ती है तो वो दर्द से कराह उठता है .,.. और वो सॉरी सॉरी बोलने लगता है ....

दिया : चल सेल घुटनो के बल झुक जा आज मैं तुम्हारी गांड मरूंगी .....

मरता क्या न करता वो चुप चाप बिना आवाज़ किये घुटनो के बल झुक जाता है ..... दिया उसके गांड की सुराख़ को फैला कर देखती है .... वो पहले से hi हल्का खुला हुआ था ..... दिया ने उसके ऊपर अपना थूक गिराया और तरुण के हाथ में वो बड़ा सा डिलडो थमा दिया .... तरुण ने जोर से डिलडो को दिया के पति के होल में तेल दिया .... दिया का पति दर्द के मरे तिलमिला उठा .... वो तो दिया ने पहले hi उसके मुँह में उसकी hi चड्डी थुश दी थी वर्ण दिया के पडोसी भी वह आ जाते ....

कल तरुण ने दिया की जो हालत देखि थी उसको याद करते हुए तरुण ने एक बार और जोर लगा कर पुरे जोर दे डिडलो को और अंदर सरका दिया ... दिया के पति की तो ऐसी हालत हो गयी थी मनो किसी ने उसके गांड को दो हिस्सों में चिर डाला हो ....

दिया के पति के मुँह से निकल रही गुणं गुओंण की आवाज़ रूम में चल रहे पंखे से डाब जा रही थी ....

अपने जल्लाद पति को ऐसे दर्द में चीखते कराहते देख दिया को काफी सुकून मिल रहा था .... उसने तरुण को और आगे बढ़ने का इशारा किया ....

तरुण ने भी एक अचे भाई होने का फ़र्ज़ निभाते हुए डिलडो को थोड़ा बहार खींचा और जोर से पूरी ताकत से धकेल दिया ..... दिया के पति को तो ऐसा प्रतीत हो रहा था उसको बीचो बीच से चिर दिया गया हो ..,. आज सही मायने में उसको उसके मर्ज़ की दवा मिल रही थी ....

जब तरुण और दिया का मन भर गया तो तरुण ने पूरा डिलडो बहार खींच लिया .,... पुरे डिलडो पॉटी और खून से सना हुआ था ....

दिया ने अपने पति के मुँह से कपडा निकल दिया था ... वो इतने ज्यादा दर्द में था की उसके मुँह से आवाज़ hi नहीं निकल रही थी .... तरुण ने उस गंदे डिलडो को दिया के पति के मुँह में थुश दिया .....

दिया : अब बोल सेल मज़ा आ रहा है न .... अब तुझे पता चला की जब तुम मुझसे जबरदस्ती अपनी मनमानी करते थे तो मुझे कैसा महसूस होता था ...

दिया का पति : आअह्ह्ह्हह तू रुक साली तेरे गांड में हठी का लुंड नहीं डलवाया न तो मेरा नाम बदल देना .... अब तुझे hi नहीं तेरी माँ को कोठे पर बिठाऊंगा साली .... तूने बहुत गलत किया है अब तू नहीं बचेगी .... अपने बाप की औलाद है तो बस मेरी पट्टी खोल के दिखा .... तेरी गांड और छूट को फाड़ कर एक न कर दिया तो कहना ....

दिया उसके आँखों से पट्टी हटा देती है ..,.. अभी उसकी आँखें उजाले की अब्यस्त भी नहीं हुयी थी की ताबड़तोड़ उसके गालो पर 3 - 4 थप्पड़ चिपका दिए जाते हैं जो की तरुण ने hi मरे थे .....

तरुण : क्या बोलै बे सेल तूने मेरी बहन को .... तू सेल गटर की पैदाइश .... मुझे तो उस माँ पर तरस आ रहा है जिसने तुझ जैसे नामर्द को जन्म दिया है .... मेरी बहन अपना घर अपने सेज सम्बन्धियों को छोड़ तेरा हाथ थमी थी पर तूने क्या किया उसको हमेसा सिर्फ दर्द दिया ... अबे हरामी औरत प्यार के लिए बानी है .... तुम औरतो को बस अपने इस्तेमाल की चीज समझते हो तुम जैसे इंसान को जीने का कोई हक़ नहीं ... मैंने आज की तुम्हारी साडी करतूत रिकॉर्ड कर ली है ... अगर मैंने ये वीडियो इंटरनेट पर दाल दो तो तुम रातो रात फेमस हो जाओगे एक गे पोर्नस्टार के रूप में ... क्या कहते हो दालु क्या .....

दिया का पति : मैंने जो किया अपनी बीवी के साथ किया हमारे प्राइवेट मामलो में दखल देने वाला तू कौन होता है ....

दिया जोर से अपने पति के मुँह पर एक थप्पड़ लगाती है ....

दिया : ये मेरा भाई था है और हमेसा रहेगा ... पर तुम किसी समय में मेरे पति थे पर अब तुमने ये हक़ खो दिया है अब तुम मेरे कुछ नहीं लगते .... जल्दी से अपना फटा हुआ गांड समेटो और निकलो यहाँ से तुम्हारे घर डाइवोर्स लेटर पहुँच जायेगा ....

तरुण : और सुन बे हरामी आज के बाद तू अगर इस घर के आस पास भी दिखा तो तुझे बीचो बीच चिर दूंगा .....

दिया का पति : नहीं दिया तुमने मेरे साथ सात फेरे लिए हैं और साथ जीने मरने की कस्मे खाई है तुम मुझे नहीं छोड़ सकती .... मुझे माफ़ कर दो आज के बाद मैं एक ाचा पति बन कर दुखाऊंगा .... बस मुझे एक मौका दे दो ......

******************

इधर तरुण के जाने के बाद से उसकी माँ का बिलकुल भी मन नहीं लग रहा था .... वो अपना ज्यादातर वक्त और प्यार तरुण पर लूटना चाहती थी पर तरुण तो वह था hi नहीं .... पर फिर भी उसको अपने बेटे के रूम में रह कर एक अजीब सा सुकून महसूस होता था ......

तरुण की बुआ की हालत खस्ता थी .... तरुण के न होने की वजह से वो काफी हद्द तक कम्फर्टेबले थी वर्ण वो तरुण का कैसे सामना करती ये सोच कर hi उसकी हालत ख़राब हो जाती ..... ऐसा नहीं है की उस रात प्रिय को मज़ा नहीं आया था बल्कि उस रात उसको इतना जबरदस्त ओर्गास्म हुआ था जितना मज़ा उसको अपने पति के साथ सेक्स करते हुए भी आज तक नहीं आया था ....

सुहानी तरुण की बहनो के साथ अचे से घुल मिल गयी थी .... वो प्रियांशी और रूबी की इतनी पक्की सहेली हो गयी थी मनो वो बचपन से hi उनके साथ रही हो .....

उस दिन के बाद तरुण की भाभी ने उसके पापा के साथ कभी बात तक नहीं की सेक्स तो बहुत दूर की बात थी .... अपनी पत्नी की बेरुखी देख लक्समन की भी अपने किये पर बहुत पछतावा हो रहा था .....

राहुल और उसकी माँ घर के कैदखाने में पड़े रहते थे .... जहा उन्हें टाइम तो टाइम कभी फ्रेश तो कभी बसी खाना मिल hi जाता था .....

****************

दिया का पति अपनी बीवी की तरफ क़तर निगाहो से देख रहा था की वो मान जाये पर दिया उस गिरगिट को अचे से जानती थी की वो कभी भी रंग बदल सकता है .....

दिया : ऐसे बहलाने फुसलाने का कोई फायदा नहीं चुप चाप अपना सामान समेटो और निकलो यहाँ से मैंने आलरेडी तुम्हे ढेरो मौके दे कर देख लिए .... तुम कुत्ते की दम हो जो मरने के बाद hi शायद सुधर पाए .....

तरुण : सुन लिया न बे हरामी अब जल्दी से निकल वर्ण धक्के मार कर और जलील करके तुझे इस घर से निकला फेकूंगा ....

दिया के पति के गांड से खून निकल रहा था वो बड़े मुश्किल से एक ढीला ट्रॉउज़र पहनता है .... उसको बहुत दर्द हो रहा था ... जरा सा हिलने डुलने से भी उसकी जान निकल जाती ....

किसी तरह उसने अपना सामान समेटा और धीरे धीरे सीढ़ियों से उतरने लगा ....

जैसे hi वो गेट के बहार हुआ उसके मुँह पर hi दिया ने जोर से गेट लगा दिया .....

अगले दिन दिया ने अपनी एक लॉयर फ्रेंड से कांटेक्ट किया और उसको सब कुछ बता दिया उस रात वाली बात को छोड़ कर ..... दिया की सहेली में भी उसको डिवोर्स लेने की hi सलाह दी .... दिया के मम्मी पापा और कारन को जब अपनी बहन की दुखभरी कहानी पता चली तो उन्होंने अपना सर पकड़ लिया ....

राधिका : बीटा तुमने कितना कुछ सहा है तू एक मुझसे बोल कर तो देखती ... तेरी माँ एक ंगो की मेंबर होने के साथ साथ महिला संगठन की वाईस प्रेजिडेंट भी है ..... मैं पूरी दुनिया की महिलाओ को इंसाफ दिलाने का दवा करती थी जबकि मेरे घर में खुद मेरी बेटी के साथ इतनी बड़ी नाइंसाफी हो रही थी ...

दिया : सॉरी मुम्मा मैं नहीं चाहती. थी की मेरी वजह से इस घर में कोई कलेश हो ....

कारन : दीदी मैं उस दानव का आज वध कर दूंगा .... ऐसे इंसान को तो बीच सड़क पर नंगा करके गांड में गोली मार देनी चाहिए ..... दीदी मुझे आपसे बहुत शिकायत है अपने मुझे पराया कर दिया ... आप सच में मुझे अपना भाई नहीं मानती ,... आपको अपने भाई की मर्दानगी पर शक था ....

दिया : नहीं मेरे मुन्ने मुझे तुम्हारे ऊपर शक नहीं था .... बस मैं अपनी वजह से तुम्हे कोई कास्ट नहीं देना चाहती थी ...

उसके अगले दिन तरुण दिया को अपने बर्थडे के लिए अपने साथ अपने घर जाने लगा उसने कारन और बाकियो को भी साथ चलने को कहा .... दिया के मम्मी पापा में तो उसके शादी में आने का वादा किया और कारन ने उसके बर्थडे वाले दिन आने की बात कही ....

तरुण दिया के साथ अपने चल पड़ा .....

जब तरुण अपने घर 1 बजे रात को पहुंचा ...

तरुण ने प्रियांशी को कॉल करके गेट खोलने को कहा ..,.. प्रियांशी भी उस वक्त आधे नींद में थी ..., पर फिर भी उसने गेट खोला और साइड में हैट कर तरुण को अंदर आने का रास्ता दिया ....

तरुण दिया के बैग को अंदर करके उसको अंदर आने को कहता है और मैं गेट को लॉक कर देता है .....

तरुण : प्रियांशी दीदी ये हैं मेरे बेस्ट फ्रेंड कारन की दीदी और मेरी सबसे प्यारी दीदी .... दिया .... और दिया दीदी ये हैं मेरी सबसे चुलबुली और नटखट दीदी प्रियांशी ....

प्रियांशी दिया को नमस्ते करती है ....

प्रियांशी : दीदी इस उल्लू के मुँह से आपकी काफी तारीफ सुनी थी आज देख भी लिया ..... यू अरे सो क्यूट दीदी ....

दिया : तरुण सच कहता है तुम बहुत hi क्यूट और प्यारी हो ... लगता है हमारी खूब जमने वाली है ....

तरुण : चलो दीदी आपको आपका रूम दिखा देता हु ... आप चल कर आराम करो इनका बस चले तो रात भर आपको बातो में फसाये रखे .... इन्होने खुद तो अपनी नींद पूरी कर ली आपको ैनवाय hi डिस्टर्ब कर रही .....

प्रियांशी : ाचा बीटा बड़ी जल्दी पार्टी बदल ली ..... दिया दीदी मेरे hi फ्लोर पर रहेंगी ... इन्हे भाभी वाले कमरे में शिफ्ट कर देती हु .... क्या कहते हो ....

तरुण : पर उस रूम में तो राघव भैया भी होंगे ....

प्रियांशी : अरे मेरे मिटटी के माधव मैं उस भाभी की नहीं अपनी सगी वाली भाभी सुहानी भाभी की बात कर रही ....

तरुण प्रियांशी को पकड़ लेता है और उसके पेट में गुदगुदी करने लगता है जिसके रिस्पांस में वो जोर जोर से हसे जा रही थी ....

दिया : तरुण छोड़ दो क्यों तंग कर रहे हो मेरी बहन को ...

तरुण : वह अभी सही से मिली नहीं की अपने इनके लिए मुझे छोड़ दिया ...

प्रियांशी : it's कॉल्ड गर्ल्स पावर .... चलो मेरे कुली जल्दी से मेरी सेक्सी दीदी का सामान उठाओ वर्ण भाड़ा नहीं मिलेगा ....

तरुण हस्ते हुए दिया का सामान उठा कर उसको सुहानी के रूम में शिफ्ट कर देता है .... सुहानी अभी घोड़े बेच कर सो रही थी ... इसलिए तरुण ने दिया को बिना उससे मिलगे उसके बगल में सोने को कहा ... दिया अपना ड्रेस चेंज करने वाशरूम चली गयी और तरुण वह से अपने रूम आ जाता है ....

रूम में उसकी माँ एक तकिये को पकड़ कर गहरी नींद में सोई हुयी थी .... इस वक्त सुमित्रा बहुत मासूम लग रही थी .... तरुण ने आगे बढ़ कर अपनी माँ के माथे पर चुम लिया .... नींद में भी सुमित्रा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है ....



तरुण भी ड्रेस चेंज करके बीएड पर अपनी माँ के बगल में सो जाता है .... सफर की थकन की वजह से जल्द hi उसको नींद आ जाती है ....
 
अपडेट 62

रूम में उसकी माँ एक तकिये को पकड़ कर गहरी नींद में सोई हुयी थी .... इस वक्त सुमित्रा बहुत मासूम लग रही थी .... तरुण ने आगे बढ़ कर अपनी माँ के माथे पर चुम लिया .... नींद में भी सुमित्रा के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है ....

तरुण भी ड्रेस चेंज करके बीएड पर अपनी माँ के बगल में सो जाता है .... सफर की थकन की वजह से जल्द hi उसको नींद आ जाती है ....

आगे

सुबह जब सुमित्रा की नींद खुलती है तो उसकी नजर अपने बगल में सो रहे तरुण पर पड़ती है .... अपने बेटे को देख स्वतः hi उसके फेस पर स्माइल आ जाती है और वो अपने और तरुण के बीच आने वाले तकिये को हटा देती है और जोर से तरुण को जकड लेती है जैसे वो अपने बेटे को खुद में समां लेना चाहती हो .... इससे भी जब उसका मन नहीं भरता तो वो उसके चेहरे को बड़े प्यार से चूमने लगती है ....

खुद पर हो रहे लगातार आक्रमण से तरुण की नींद खुल जाती है ...

तरुण : गुड मॉर्निंग मुम्मा ..,

सुमित्रा : गुड मॉर्निंग बीटा जी ... तुम कब आये और मुझे जगाया क्यों नहीं ....

तरुण : मैं जब आया था तो आप गहरी नींद में थी .... मैंने सोचा क्यों आपकी नींद ख़राब करू इसलिए बिना आपको जगाये सो गया ....

सुमित्रा : तुम्हारे जाने के बाद के ये 4 - 5 दिन मैंने कैसे गुजरे हैं ये तो मैं hi जनता हु ..

तरुण : मुझे भी आपकी बड़ी याद आयी ....

सुमित्रा : चलो मैं फ्रेश हो कर आती हु ..,

तरुण : आप अकेले जाओ न मैं वह क्या करूँगा 😂😂

सुमित्रा : बदमाश मैं कह रही की मैं जाती हु फ्रेश होने ....

और सुमित्रा वाशरूम चली जाती है .... और तरुण भी चल देता है रानी के रूम की तरफ .....

रानी का रूम तो खुला हुआ था पर वो रूम में कही दिख नहीं रही थी .... वो उसके रूम से निकलने को hi होता है की उसके वाशरूम से पानी गिरने की आवाज़ होती है तो वो वही बीएड पर बैठ जाता है ....

कुछ देर में वाशरूम का गेट खुलता है और रानी बहार निकलती है .... तरुण को बीएड में देख वो बहुत खुस हो जाती है ...

तरुण : गुड मॉर्निंग मेरी जान कैसी हो और दर्द कैसा है आपका ... वो सॉरी आपको वैसे हाल में छोड़ कर अचानक से जाना पड़ा ....

रानी : गुड मॉर्निंग बाबू कोई बात नहीं अब मैं ठीक हु ....

तरुण : तो चलो वाशरूम में एक राउंड खेल कर आते हैं ....

रानी : आज तो नहीं पर जल्द hi तुमसे दोबारा छुडवाउंगी ...

तरुण : मुझे बेसब्री से इंतजार रहेगा ....

उसके बाद तरुण रानी के वाशरूम में घुस जाता है .....

ब्रेकफास्ट के टाइम पर तरुण अपने सभी फॅमिली मेंबर्स को दिया से मिलवाता है ..... तरुण की साडी बहने बरी बरी से दिया के पाओ छूती है ...

रुचिका : थैंक्स ा लोट दीदी बुरे दिनों में मेरे भाई का साथ देने के लिए आपका जितना भी सुक्रिया अदा करू काम hi है ....

दिया : ये तो मेरा फ़र्ज़ था छोटी बहना ... यु ऐसे मुझे थैंक्स कह कर पराया न करो .... ये मेरा भी भाई है ....

ऋचा : ये तो आपका बड़प्पन है दीदी .... हम उसकी सगी बड़ी बहन होकर भी उसको न पहचान सके पर अपने उसको कुछ hi दिनों में जान लिया ....

दिया : ये बस नजर का फेर है बहन ... उसके मासूम चेहरे को देख मैंने अपने भाई से उसका अतीत पता किया तो मेरे दिल में उसके लिए बहुत सारा प्यार उमड़ आया .... कितना तनहा था वो कहने को तो उसकी इतनी बड़ा परिवार है पर उस बिचारे के नसीब में उनका प्यार लिखा hi नहीं था .... तो मैंने सोचा अगर उसका थोड़ा सा दुःख बाँट कर उसके जिंदगी में खुशिया ला सकीय तो शायद मेरा इंसान के रूप में जन्म लेना सार्थक हो जायेगा ...

प्रियांशी : मैं कहती थी न की ये मेरी बेस्ट दीदी बनेंगी अब तुम लोग इनसे दूर hi रहो सबसे पहले मैंने इन्हे देखा है और रात में hi हमारी डील हुयी है .... ये जब तक यहाँ है मैं इनका ख्याल रखूंगी .... दिया दीदी आपको यहाँ कोई भी दिक्कत हो या किसी चीज की जरुरत हो मुझसे कहना ....

रानी : चमची कही की जहा फायदा देखती है तुरंत पार्टी बदल लेती है ....

प्रियांशी : मुझे कही से जाने की बू आ रही है .... जलती रहो जलकुकडियो ....

तरुण : दीदी इनके चक्कर में रही तो आपको भूके hi रहना पड़ेगा ... आ जाओ ब्रेकफास्ट करते हैं ....

दोपहर को तरुण के मोबाइल पर श्रेया का कॉल आता है जिसमे वो उसके बर्थडे में शरीक न हो पाने के लिए सॉरी कहती है क्यूंकि वो तरुण के बच्चे की माँ जो बनने वाली थी .....

इवनिंग को एक अछि मेजबान होने का फ़र्ज़ निभाते हुए प्रियांशी, दिया और सुहानी को अपने गाओं के बगल वाला सहर दिखती है ..... सुहानी काफी दिनों के बाद मार्किट घूम रही थी इसलिए उसको बहुत ाचा लगता है .... पहले तो वो जब भी अपने माँ या बाप के साथ मार्किट आती थी तो आज के जितना खुल कर नहीं घूम पति थी इसलिए वो आज खुल कर घूम फिर रही थी ....

दिया भी जल्दी hi सुहानी से घुल मिल गयी थी .... दिया को सुहानी तरुण के लिए बिलकुल परफेक्ट मैच लगती है ....

रात में डिनर के बाद सभी अपने अपने रूम्स में सोने चले गए ....

तरुण : माँ ... आप अब भी पापा से नाराज हो क्या ...

सुमित्रा : हाँ मैं उस इंसान को मरते डैम तक नहीं माफ़ करुँगी .....

तरुण : आप मेरे बर्थडे पर क्या गिफ्ट डौगी मुझे ....

सुमित्रा : ये एक सरप्राइज है बीटा .... वो तो तुम्हे उस दिन hi पता चलेगा ....

तरुण : माँ मैं अपना बचपन जीना चाहता हु ... क्या मैं आज आपका वो नन्हा सा तरुण बन सकता हु ... मैंने अपने पास्ट में जो चीज़ सबसे ज्यादा मिस किया वो था माँ का प्यार जो की हर बच्चे का हक़ होता है पर मुझ बदनसीब को वो प्यार भी न मिल सका था ....

सुमित्रा : हाँ मेरे बच्चे क्यों नहीं मैं भी तुम्हे वो प्यार देना चाहती हु जो तुझे कभी न दे सकीय .... काश उस वक्त मुझे समझ आ गया होता की जो कुछ भी हुआ वो सब बस एक सोची समझी चल थी मुझे मेरे बेटे से दूर करने के लिए ....

तरुण : जो बीत गया उसको बदला तो नहीं जा सकता है न माँ अब उस बात को सोच कर क्या फायदा ... हमारे हाथ में सिर्फ वर्तमान है जिसे हम जी सकते हैं ....

सुमित्रा पहले जा कर गेट लॉक करती है .....

सुमित्रा : बीटा आज यहाँ जो भी होगा वो किसी से शेयर न करना ये हम माँ बेटे का प्यार है जिसे दूसरे नहीं समझ सकते .... मैं तुम्हे सही मायने में अपना छोटा तरुण बनाना चाहती हु और वो सुख महसूस करना चाहती हु जो मुझे नसीब नहीं हुआ ...

तरुण : ok माँ ...

सुमित्रा पहले एक ड्रेस लेकर वाशरूम चली जाती है और फिर थोड़े देर बाद बहार आती है तो वो ब्लैक कलर की साड़ी में थी .... ब्लैक साड़ी सुमित्रा के गोर बदन पर बहुत hi अट्रैक्टिव लग रही थी ....

तरुण : मुम्मा आप बहुत खूबसूरत लग रही हो ....

सुमित्रा : धत्त बदमाश अब तो मैं बुद्धि हो गयी हु अब मैं तुम्हे कहा से खूबसूरत लग रही हु....

तरुण : सुच मुम्मा आपको ऐसे अवतार में देख तो सब लोग आपको hi ताड़ने लगेंगे ....

सुमित्रा : बस बस अब मुझे और झाड़ के पेड़ पर चढाने की जरुरत नहीं है ....

सुमित्रा अभी वाकई में बहुत खूबसूरत लग रही थी .... उसका जिस्म काफी सुडौल था पेट पर बस नाम मात्रा की चर्बी थी जो उसके जिस्म को और भी सेडक्टिव बनाया था ....

ब्लाउज में कैसे हुए उसके दुग्ध कलश में जरा सा भी लटकपन नहीं था क्यूंकि उसने अपने लास्ट बेबी यानि तरुण को एक अध् बार hi ब्रेस्टफीडिंग करवाती थी .... तो वही अपनी ट्विन्स के जन्म के वक्त उसके स्तन में दूध बहुत काम hi बनता था जिसके वजह से उनके टाइम भी उसने न के बराबर hi ब्रेस्टफीडिंग करवाती थी ....

कमर के नीचे का भी हिस्सा काफी मस्त था .... क्यूंकि वक्त के साथ उसके नितम्बो में ाचा खासा भराव आ गया था ... उसका पति उसके नितम्बो का दीवाना था पर उसने उसको एक बार भी उधर मुँह मरने का मौका नहीं दिया था ....

साड़ी में उसका रूप और भी खिल जाता था .... वो बहुत काम hi साड़ी पहना करती थी खास कर किसी पर्व त्यौहार या शादी के मौके पर ....

सुमित्रा : अब मेरा बच्चा छोटा सा है तो मुझे भी थोड़ा जवान तो लग्न hi चाहिए न ताकि मैं अपने बच्चे को अपना दूध पीला सकू ....

तरुण : क्या आप मुझे अपना दूध पिलाने वाली हैं ....

सुमित्रा : और नहीं तो क्या ऐसे hi मैंने गेट बंद किया है ...

तरुण : पर माँ अब तो इनमे से दूध कहा आता होगा ....

सुमित्रा : वो तो मुझे भी पता है पर अगर तू इन्हे चूसेगा तो मुझे लगेगा की सही मायने में मेरा माँ बनने का धर्म पूरा हुआ ....

सुमित्रा बीएड पर बैठ जाती है और तरुण का सर अपने गॉड में रख लेती है .... और पुचकारते हुए उसके गालो की पप्पी लेती है ....

सुमित्रा : मेले मुन्ने को भूक लगी है .... लुको बीटा मुम्मा अभी आपको दूध पिलाती है ....

और फिर एक एक करके सुमित्रा ने अपने ब्लाउज के सरे बटन खोल डेल .... ब्लाउज खुलते hi सुमित्रा की पिंक कलर की ब्रा दिखने लगी .... तरुण बड़े गौर से अपनी माँ के ब्रा को देख रहा था मनो अपनी नजरो से hi उन्हें स्कैन कर रहा हो .....

सुमित्रा : लगता है मेरे पुच्चु को बड़ी भूक लगी है तभी तो अपनी माँ के दुधु को टकटकी लगाए देख रहा है ...

तरुण : हाँ माँ मैं हमेसा से सोचा करता था की हर दूसरे बचो की तरह मेरी माँ क्यों मुझे प्यार नहीं करती और अपना दूध नहीं पिलाती ....

सुमित्रा : आज से डेली तुम्हे पिलाऊंगी मेरे लाल और तुम्हे इतना प्यार दूंगी की कभी तुम्हे प्यार की कमी महसूस न हो ....

तरुण : ी लव यू मुम्मा ....

सुमित्रा : ी लव यू तू मेरा बच्चा ....

और सुमित्रा अपने ब्लाउज को पूरा खोल देती है .... और फिर अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक भी खोल देती है ... जैसे hi उसके ब्रा का हुक खुलता ...

उसके दोनों बूब्स स्प्रिंग की तरह उछाल कर बहार निकल आते हैं ... अपनी माँ के बड़े बड़े मुम्मे को तरुण बड़े hi गौर से देखने लगता है .... ये वही दूध थे जिनके लिए वो हमेसा से तरशा था ....

सुमित्रा : सिर्फ देख के hi मन भरोगे या इन्हे चुसोगे भी ....

तरुण अपने हाथ बढ़ा कर सुमित्रा के राइट वाले चुके को टच करता .... अपने बेटे का हाथ अपने बूब्स पर महसूस करते hi सुमित्रा को बड़ा hi सुखद अनुभव होता है ....

तरुण सुमित्रा के बूब्स को छूटे हुए उसके अरेओला के पास आ पहुँचता है और बड़े hi जेंटली टच करने लगता है .....

तरुण के उंगलियों के छुवन से सुमित्रा के निप्पल्स में कठोरता आने लगती है .....

अब तरुण अपना सर माँ की गोदी में रख कर पहले अपने होंठो से माँ की चुकी को चुम लेता है और हौले हौले चूमते हुए उसके निप्पल की तरफ बढ़ने लगता है .....

सुमित्रा का निप्पल ज्यादा बड़ा भी नहीं था और उसका रंग डार्क पिंकिश था .... निप्पल के चारो तरफ हलके भूरे रंग का अरेओला था जो की बूब्स की खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था ...

तरुण पहले अपनी माँ के अरेओला पर अपनी जीभ राउंड राउंड घूमने लगता है .... और फिर जैसे hi उसके जीभ सुमित्रा के निप्पल पर टच होते हैं उसका पूरा जिस्म hi सिहर उठता है ..,

कुछ देर ऐसे hi खेलने के बाद तरुण सुमित्रा के निप्पल को अपने मुँह में भर लेता है और बड़े प्यार से चूसने लगता है ... उससे दूध तो नहीं निकलता पर दोनों माँ बेटे को असीम आनंद जरूर मिल रहा था ....

राइट वाली चुकी को जी भर के चूसने के बाद तरुण सुमित्रा के लेफ्ट वाले चुकी के साथ भी कुछ ऐसा hi करता है और साथ hi साथ वो अपने हाथ से सुमित्रा के राइट वाले चुकी को हौले हौले दबा भी रहा था ....

अपने बेटे को ब्रेस्टफीडिंग करवाते हुए सुमित्रा को इतना आनंद प्राप्त हो रहा था की उसके नीचे वाले नलके से अमृत बह णिअकालता है ..... सुमित्रा को इतना मस्त ओर्गास्म शायद hi लाइफ में पहले नसीब हुआ हो .....

जब तरुण का मन भर गया तो उसने अपना मुँह अपने माँ के दूध से हटा लिया .... सुमित्रा भी उसके बाद वाशरूम चली जाती है और अपनी गीली पंतय को उतर कर धो कर सूखने के लिए दाल देती है और अपने कपडे सही करके बहार आ जाती है ...

सुमित्रा : कैसा लगा बीटा अपनी मुम्मा के दूध पीकर ...

तरुण : आईटी वास् थे बेस्ट मोमेंट फॉर में माँ .... आपको कैसा लगा ...

सुमित्रा : मुझे भी बहुत सुकून मिला बीटा .... ऐसा लग रहा था की सही मायने में आज hi माँ बानी हु मैं .... चल अब बहुत रात हो चुकी अब सोते हैं ....

तरुण : मुम्मा अभी आया मैं वाशरूम से ....

तरुण भी वाशरूम से आकर अपनी माँ से लिपट कर सो जाता है .... दोनों माँ बेटे बहुत hi सुकून भरी गहरी नींद में खो जाते हैं .....

अगले दिन सुबह से hi तरुण के बर्थडे की तयारी जोरो शोरो से चालू थी ...

आज घर के डोरशंस का सारा जिम्मा तरुण की बहनो ने ले रखा था .... खाने पिने का डिपार्टमेंट Shivani,bua,badi चची और माँ ने संभल रखा था ... तरुण को आज कोई काम करने से सख्त मन किया गया था ....

इवनिंग को मार्किट से ब्यूटी पारलर की लड़कियों को बुलाया गया था सबको सजाने सँवारने के लिए ....

रात में करीब 8 बजे कारन भी तरुण के घर आ पहुँचता है .... कारन को देख तरुण काफी खुस हो जाता है .... आखिर वो तरुण का एकलौता दोस्त जो ठहरा .... तरुण ने कारन को अपनी पूरी फॅमिली से मिलवाया .... इतनी बड़ी फॅमिली देख कारन बहुत खुस हुआ .....

कारन के आने के थोड़े देर बाद सुहानी की बड़ी बहने करुणा और भैरवी आ जाती हैं जिन्हे देख सुहानी का चेहरा खिल जाता है ... काफी दिनों बाद वो अपने किसी फॅमिली वालो से मिल रही थी वर्ण वो तरुण के फॅमिली में घुल मिल कर अपनी असली फॅमिली को भूल hi चुकी थी ....

भैरवी का जिस्म अब पहले के मुकाबले थोड़ा भर गया था जो की अक्सर शादी के बाद होता है .... करुणा तो अब बिलकुल शेप एंड साइज में आ चुकी थी और काफी खूबसूरत भी हो गयी थी ....

सुहानी से मिलने के बाद करुणा तरुण को गले लगा लेती है और उसके गालो पर किश करके उसको बर्थडे विश करती है ....

उसके बाद भैरवी जोर से उछाल कर तरुण के गले लग जाती है ....

भैरवी : कैसा है मेरा हीरो ... हैप्पी बर्थडे तो यू ....

तरुण : मैं ठीक हु दीदी ... आप कैसी हो जीजू को नहीं लायी क्यों ..

भैरवी : उन्हें काम से फुर्सत कहा मिलती है अब तुझे वादा कर दिया था तो करुणा दीदी के साथ टपक पड़ी ... वैसे मेरी लाडो काफी खुस दिख रही है यहाँ ...

तरुण : हाँ दीदी मेरी दीदियो ने सुहानी को अपनी बहन की तरह रखा है ... मीरा आंटी को प्रॉमिस किया था तो इनका ख्याल रखना मेरी सबसे बड़ी जिम्मेवारी है ....

करुणा : जरा हमें भी अपनी दीदियो से मिलवाओ ...

तरुण भैरवी और करुणा को अपनी पूरी फॅमिली से मिलवाता है ....

तरुण ने ज्यादा गेस्ट्स को इन्विते नहीं किया था ....

सुहानी अपनी बहनो को अपने रूम में ले जाती है ताकि वो सफर की थकन को मिटा सके ....

कारन को राहुल का रूम दिया गया था और दिया ने भी अपना सामान रानी के रूम में शिफ्ट कर लिया था ताकि सुहानी अपनी बहनो के साथ एक रूम में आराम से रह सके .... करुणा तो सुहानी के साथ hi रहने वाली थी जबकि भैरवी ने ऋचा के साथ रहना पसंद किया ....

रत में करीब 10 बजे तरुण ने केक कट किया ... उसने सबसे पहले केक का टुकड़ा अपनी लाड़ली बहन रुचिका और प्रियांशी को खिलाया उसके बाद सुहानी, दिया और कारन का नंबर आया फिर अपनी माँ और ऋचा को अपने हाथो से खिलने के बाद बाकियो को प्लेट में केक कट करके दिया गया .....

उसके बाद सभी लोगो ने तरुण को गिफ्ट दिया ....

आज काफी दिनों के बाद तरुण की बुआ उसके ऐनी सामने हुयी थी .... उस रात की बातें भूल कर वो बड़े प्यार से तरुण को बर्थडे करती है .... जवाब में तरुण भी उसके पाओ छू लेता है ....

केक कटाई सेरेमनी के बाद फिर डांस के लिए ग्रुप बनाया गया ... शुरुआत में रुचिका और सुहानी की जोड़ी ने धमाकेदार डांस किया .... फिर रानी, प्रियांशी और रूबी की तिकड़ी ने धमाल मचाया .... उसके बाद तरुण के मम्मी पापा का एक कपल डांस हुआ .... हलाकि सुमित्रा अपने पति के साथ डांस करना नहीं चाहती थी पर अपनी बेटियों और तरुण का दिल रखने के लिए उसे ये करना पड़ा ....

दिया और कारन ने भी एक साथ डांस किया ... सबसे लास्ट में जब तरुण की बरी आयी तो उसकी साडी बहने भी स्टेज पर आ गयी और बरी बरी से तरुण के साथ डांस किया ...

नाचने गाने के बाद सभी बे साथ में फर्श पर बैठ कर सामूहिक भोजन किया ....

खाने खिलने के काफी देर बाद तक सभी आपस में बातें करते रहे .... भैरवी की ऋचा के साथ अछि बॉन्डिंग बनने लगी थी ... वही रानी और दिया भी अब काफी घुल मिल गए थे आपस में ....

वही तरुण और कारन छत पर जाकर अपने कॉलेज की यादें आपस में शेयर करने लगे ...

 
अपडेट 63

खाने खिलने के काफी देर बाद तक सभी आपस में बातें करते रहे .... भैरवी की ऋचा के साथ अछि बॉन्डिंग बनने लगी थी ... वही रानी और दिया भी अब काफी घुल मिल गए थे आपस में ....

वही तरुण और कारन छत पर जाकर अपने कॉलेज की यादें आपस में शेयर करने लगे ...

आगे

करीब 11:30 पं के करीब दोनों नीचे आ कर अपने अपने रूम में सोने चले जाते हैं ...

जब तरुण अपने रूम आया तो उसकी माँ बीएड पर बैठी मोबाइल देख रही थी ....

तरुण : क्या हुआ माँ आप अभी तक सोई नहीं ...

सुमित्रा : तेरा hi वेट कर रही थी ...

तरुण : क्यों माँ ... वैसे याद आया अपने मुझे कोई सरप्राइज गिफ्ट देने का वादा किया था ....

सुमित्रा : ऐसा कुछ नहीं है मैंने दिया न तुझे वो गिफ्ट में मोबाइल वही तो था गिफ्ट ... चलो अब काफी रात हो गयी गेट लगा कर सो जाओ ....

तरुण उल्लू सा मुँह बना कर गेट लॉक करके बीएड पर लेट जाता है दूसरी तरफ मुँह घुमा के ...

सुमित्रा तरुण को ऐसे नाराज देख मन hi मन हस्ती है .....

थोड़े देर तक सुमित्रा कोई रिस्पांस नहीं देती है .... जब उससे बर्दास्त नहीं होता तो वो जबरदस्ती तरुण का मुँह अपने तरफ मोड़ देती है ....

सुमित्रा : क्या हुआ लल्ला नाराज हो गया क्या मुझसे ....

तरुण : मुझे आपसे बात hi नहीं करनी .... आप बहुत बुरी हो खुद hi पहले कहती हो सरप्राइज गिफ्ट डौगी और जब देने की बरी आयी तो कहती हो कुछ था hi नहीं ....

सुमित्रा : ाचा चलो आँखें बंद करो और तब तक नहीं खोलना जब तक मैं न बोलू और हाँ चीटिंग नहीं बिलकुल भी ....

सुमित्रा वाशरूम चली जाती है और थोड़े देर बाद वापस आती है ....

सुमित्रा : बीटा अब तुम आंखें खोल सकते हो ....

तरुण आँखें खोलता है तो शॉक हो जाता है क्यूंकि उसकी माँ ने अभी एक ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी जिसमे वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी ... तरुण के शॉकेड होने की वजह ये थी की ये साड़ी तरुण ने hi उसके लिए खरीदी थी पर कभी दे नहीं पाया ... पहले तो उसकी माँ hi उससे काट कर रहती थी फिर वो उससे काट कर रहने लगा ....

तरुण : माँ ये साड़ी तो .....

सुमित्रा : हाँ मुझे पता है तूने hi ख़रीदा था मेरे लिए ....

तरुण : ये आपको कहा मिली ...

सुमित्रा : माँ हु तेरी अपने बेटे के सीक्रेट जान जाती हु .... तू ये मेरे लिए hi लाया था पर कभी दे नहीं पाया वैसे ये बहुत प्यारी है बीटा .... बताओ तो इस साड़ी में मैं कैसी लग रही हु ....

तरुण : माँ आज से पहले ये साड़ी अछि थी पर जब से अपने इसको पहना है इस साड़ी की खूबसूरती में चार चाँद लग गए हैं ...

सुमित्रा : ऊऊओह्ह्ह्हह मेरा बच्चा .... क्या सच में मैं इस साड़ी में अछि लग रही हु ....

तरुण : है माँ आपको भरोषा न हो तो दीदी लोग से पूछ लीजिये ....

सुमित्रा : जरुरत hi नहीं है जब मेरे बेटे ने ाचा कह दिया तो फिर अछि hi लग रही होउंगी ..... चल मेरे कुछ पिक्स तो क्लिक कर ले इस साड़ी में .... आखिर मेरे बेटे की पसंद जो है तो कुछ खास तो होनी hi चाचिये ....

तरुण ने सुमित्रा के कुछ फोटोज क्लिक किये अलग अलग पोज़ में .....

सुमित्रा : ok बीटा चलो अब सोते हैं काफी रात हो गयी है ...

तरुण : माँ आप कुछ भूल रही हो .... और आज तो मेरा बर्थडे भी है ....

सुमित्रा : ओह सॉरी मैं मेरे राजा बेटे को दुधु पिलाना तो भूल hi गयी ....

और फिर सुमित्रा अपनी साड़ी का पल्लू अपने छाती से हटा देती है .... ये ब्लाउज सुमित्रा को बहुत टाइट हो रहे थे उसने वाशरूम में कैसे करके अपने दोनों दुग्ध कलशो को इसमें भरा था ये तो वही जानती थी ....

सुमित्रा : बीटा मेरे से ये नहीं खुलेंगे इन्हे खोलने के लिए तुम्हे भी मेरी हेल्प करनी होगी ....

फिर क्या था तरुण भी अपने माँ के ब्लाउज को खोलने में जुट जाता है और फाइनली काफी मसक्कत के बाद दोनों ने मिल कर ब्लाउज को खोल hi दिया ...

सुमित्रा : अब बड़ा सुकून मिल रहा है वर्ण पूरा कैसा कैसा लग रहा था ....

सुमित्रा ने ब्लाउज बिना ब्रा के hi पहने थे इसलिए ब्लाउज के खुलते hi उसके दोनों अनमोल रतन बहार आ चुके थे ....

इशारा मिलते hi तरुण किसी छोटे बच्चे की तरह सुमित्रा के दूध को चूसने में लग जाता है और सुमित्रा बड़े प्यार से तरुण के बालो में उंगलिया फेर कर इस सुखद अनुभव को दिल से महसूस कर रही थी ....

तरुण भी अपने माँ के बूब्स को इतने प्यार से चूस रहा था मनो सच में उनसे दूध निकल रहा हो ...

बेटे से अपना दूध चुसवाते चुसवाते कब सुमित्रा का पानी निकल जाता है उसको भी पता नहीं चलता ....

जब तरुण का मन भर जाता है तो वो अपनी माँ को छोड़ देता है उसके बाद सुमित्रा खुद वाशरूम चली जाती है तो पिछली बार की तरह आज भी उसकी पंतय उसके पानी से भीगी हुयी मिलती है ...

सुमित्रा : ये मुझे रोज रोज अपने बेटे को स्तनपान करते करते क्या हो जाता है ... मैं कब डिस्चार्ज हो जाती हु पता hi नहीं चलता ....

सुमित्रा अपनी पंतय को उतर देती है और धो कर वही वाशरूम में दाल देती है और ऐसे hi बिना पंतय के आ कर सो जाती है .... वो ब्लाउज भी पहने बिना वैसे hi सो जाती है क्यूंकि इतनी टाइट ब्लाउज में तो नींद भी नहीं आणि थी उसको ....

तरुण तो पहले hi सो चूका था ....

रात में तरुण की नींद खुल जाती है क्यूंकि उसको बड़े जोरो की सुसु आयी हुयी थी ..... वो उठ कर वाशरूम चला जाता है और आने में बाद जैसे hi उसकी नजर बीएड पर पड़ती है उसकी आँखें हैरत से फैल जाती है ....

हैरानी की बात ये थी की उसकी माँ अभी पीठ के बल सो रही थी और उसके दोनों घुटने मुड़े हुए थे और साड़ी जांघो तक चढ़ी हुयी थी और दोनों पेअर फैले होने की वजह से उसके अंदर का सारा भूगोल दिख रहा था .... हलाकि वह हलकी झाडिया उगी हुयी थी पर फिर भी ये नजारा बहुत hi कामुक था .... एक तो पहले से hi सुमित्रा टॉपलेस थी और अब तो बोटॉलेस भी दिख रही थी ....

अपनी माँ को इस हाल में देख तरुण का दिमाग दो हिस्सों में बेबी गया ... एक हिस्सा कह रहा था की उसकी माँ अंदर से कितनी हसीं है और काफी सेक्सी भी ... वही उसके दिमाग का दूसरा हिस्सा कह रहा था की ये पाप है वो आखिर उसको जन्म देने वाली माँ है उसको इस हाल में देखना भी पाप है पर इस बीच में न जाने तरुण को क्या हुआ उसने अपने मोबाइल का फ़्लैश ों करके उसकी रौशनी अपनी माँ के जांघ के जोड़ो पर डाला .... अब वो सही मायने में सुमित्रा की छूट का दीदार कर रहा था वर्ण पहले तो बस हलकी हलकी रौशनी hi अंदर तक पहुँच रही थी ....

तरुण का तो मन कर रहा था की अपने हाथ को अंदर घुसा कर अपने जन्मस्थली को छू कर देख ले पर उसकी हिम्मत hi नहीं हुयी आगे बढ़ने की .... फाइनली आखिरी नजर दाल कर वो अपने मोबाइल का फ़्लैश बंद कर वापस बीएड पर लेट जाता है ....

उसका दिल उसको धिक्कार रहा था की उसने बहुत गलत किया है वो उसकी माँ है और वो उसके प्यार और बिस्वास का गलत फायदा उठा रहा है .... पर वो आँखें बंद करता तो उसकी आँखों के सामने अपनी माँ की खुली हुयी तिजोरी hi नजर आती .... काफी मसक्कत के बाद फाइनली उसको नींद आ जाती है ....

सुबह में देर से उसकी नींद खुलती है वो भी कारन के जगाने से ....

कारन : उठ बे बसड्क .... कितना सोयेगा ... चल जल्दी से फ्रेश हो जा आज कही घूमने चलते हैं ...

तरुण : बड़ी जल्दी उठ गया सेल ....

कारन : जल्दी कहा है बे देख 8 बज रहे हैं रात में भांग खा के सोया था क्या ... अबे चल न पहले कभी गाँव नहीं देखा ...

तरुण : तू रुक मैं अभी आता हु .....

तरुण जल्दी फ्रेश होकर और शावर लेकर रेडी होता है और कारन के साथ ग्राउंड फ्लोर पर आता है ....

दिया : कहा चल दी जय वीरू की जोड़ी सुबह सुबह ....

तरुण : कही नहीं दीदी बस घूमने जा रहे हैं गाओं में ,.. आप भी चलो न अगर चलना चाहो तो ...

प्रियांशी : वह वह गाओं घूमने वो जा रहा है जिसे खुद कोई नहीं जनता ... अरे तुम्हे कुछ पता भी है की कहा हमारा बगीचा है ... ऐसे hi मुँह उठा के चल दिए .....

कारन : तो आप hi हमारे साथ चलो न दीदी गाइड बन कर .... लगता है मैंने गलत इंसान से पूछ लिया था ...

तरुण : कमीने बस भी कर .... चलो न दीदी मैं तो आपको hi ढूंढ रहा था .....

प्रियांशी : चलो न दिया दीदी बहुत मज़ा आएगा ...

ऋचा : अरे पहले कुछ खा तो लो तुम दोनों .....

कारन : जल्दी लाओ दीदी वर्ण ये कमीना तो मुझे भूखे मरने के चक्कर में था .....

ऋचा जल्दी से दोनों का खाना निकल देती है .....

वो लोग निकलने hi वाले थे की करुणा और भैरवी वह आ जाती है और साथ चलने की जिद्द करती है तो फिर क्या था चल देते हैं वो सब तरुण के गाओं की सैर करने ,...

तरुण ने अपने बड़े पापा की जीप निकल ली थी उसमे hi सब बैठ जाते हैं ....

तरुण और प्रियांशी आगे बैठे थे और बाकि सब पीछे ....

थोड़े hi देर में वो बगीचे पहुँच गए .... वह के गार्ड अब तरुण को भी जानने लगे थे तो उन्होंने प्रियांशी के साथ साथ तरुण को भी सलाम किया ..... बगीचे के बीचो बिच में तरुण के दादा जी ने एक रेस्ट हाउस बनवाया हुआ था जहा वो कभी कभार रेस्ट भी कर लेते थे ....

तरुण ने रेस्ट हाउस के पास hi गाडी रोकी ....

प्रियांशी इस जगह से भली भांति परिचित थी तो वो hi सबको लीड कर रही थी और सब उसको फॉलो कर रहे थे .... बगीचे में एक साइड में तरह तरह के फूल लगे हुए थे .... दिया और कारन को ये सब बहुत ाचा लग रहा था क्यूंकि सहर की भागदौड़ वाली जिंदगी से गौण का हरियाली और शांत माहौल उन्हें बहुत रास आ रहा था .....

करुणा : यार मैं तो थक गयी .... घूम घूम कर तो कमर ने जवाब दे दिया ... अब मेरे से और नहीं चला जायेगा ....

प्रियांशी : दीदी बस थोड़ी दूर और चलो न वह अमरुद के बगीचे में रेस्ट करेंगे वह कुछ खाने पिने को भी मिलेगा .... यहाँ तो सिर्फ हवा मिलेगी ....

तरुण : मैं उठा लू क्या दीदी आपको ...

करुणा : न न उसकी जरुरत नहीं है चल लुंगी थोड़ा सा ....

थोड़े देर में वो अमरुद के बागान में पहुँच जाते हैं जहा बड़े बड़े अमरुद पेड़ो पर लगे हुए थे ....

कारन : तरुण तुझे पेड़ पर चढ़ना आता है क्या ....

तरुण : न भाई मेरे से न चढ़ा जायेगा .... प्रियांशी दीदी को आता है ....

भैरवी : मुझे भी आता है .. मैं और प्रियांशी नीचे गिरते जायेंगे और तुम लोग चुनते जाना फिर साथ मिल बैठ में खाएंगे ....

थोड़े hi देर में प्रियांशी और भैरवी ने ढेरो अमरुद तोड़ डेल .....

अब सभी लोग एक घने पेड़ की छांव में बैठ कर अमरुद का शिकार करने लगे ....

दिया : यार ये गाँव का माहौल कितना सुकून भरा होता है .... कभी कभी मेरा मन तो करता है की किसी गाँव में hi बस जॉन ....

तरुण : तो एहि रुक जाओ न दीदी ....

दिया : कब तक रखोगे मुझे ... बीवी आएगी तो मुझे डंडे से मार के भगा डोज ....

सभी लोग जोर जोर से हसने लगते हैं ....

प्रियांशी : हाँ दीदी मुझे तो गाँव से बहार जाने का मन hi नहीं करता ... हमेसा से गाँव से जुडी रही हु न तो अगर किसी सहरी बाबू से शादी हो गयी तो पता नहीं कैसे एडजस्ट करुँगी ....

भैरवी : अरे कोई नहीं तरुण है न वो किसी गाँव वाले लड़के से hi तेरी शादी करा देगा ....

करुणा : बहन कभी हमारे घर भी आओ वैसे सहर की जिंदगी उतनी भी बुरी नहीं होती ....

प्रियांशी : आप बुलाओगी तो क्यों नहीं आउंगी दीदी .... आप लोगो से कल hi मिली हु पर लगता है की आप लोगो को बहुत पहले से जानती हु ....

दिया : एहि जिंदगी है लाडो ... इसलिए जिंदगी के हर लम्हे को अचे से जियो .... क्या पता हम जिससे आज है खेल कर अपनी फीलिंग जाता रहे उससे दोबारा मुलाकात हो न हो ...

कुछ देर वही बैठ कर प्रकृति का नजारा लेने में बाद वो सभी कुछ बचे हुए अमरुद के साथ घर को लौट आये ....

अगले दिन करुणा, भैरवी और कारन अपने अपने घर को लौट गए ... दिया अभी कुछ दिन एहि रहने वाली थी ...

दिया और रानी की अब अछि खासी फ्रेंडशिप हो चुकी थी क्यूंकि दोनों एक रूम में रहती थी ऐसे hi एक रात डिनर के बाद दोनों रूम में बैठी बातें कर रही थी .... बातो बातो में hi दिया ने रानी से उसके होने वाले हस्बैंड का जिक्र कर दिया ... रानी ने भी सरमते हुए सब कुछ बताया ....

दिया : वैसे रानी मेरी बहन अब मैं तुमसे कुछ पर्सनल सवाल पूछने जा रही हु तो जरा सोच समझ के और सच जवाब देना ....

रानी : हाँ दीदी पूछो ...

दिया : आज तक कभी तुमने सेक्स किया है ....

रानी : मैंने आपको बताया न दीदी मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है ...

दिया : मैं सच जानती हु बहन ....

रानी कुछ देर तो बिलकुल शांत रहती है ....

रानी : हाँ दीदी मैंने अपने सेज भाई के साथ ओरल सेक्स किया है और तरुण के साथ एक बार रियल सेक्स किया है पर उसमे मेरी hi पहल थी उसकी कोई गलती नहीं थी .... आप उसको कुछ मत कहना ....

दिया : अरे पागल डर्टी क्यों हो ... तुम्हारा एक राज़ मैं जानती हु तो तुम मेरा भी एक राज़ जान लो ..,. सिर्फ तुम hi नहीं मैं भी उसके साथ एक बार सेक्स कर चुकी हु पर वो भी मैंने hi िनितीयते किया था और मुझे कोई अफ़सोस नहीं है बल्कि मैं तो खुस हु की मुझे उसके साथ ये सब करने का मौका मिला ....

अब चौकने की बरी रानी की थी ...

रानी : पर दीदी आप तो उसको अपने भाई से भी ज्यादा मानती हो तो उसके साथ ये सब ...

दिया : बहन उसमे कुछ खास तो है ... बहन बनते बनते कब उससे प्यार जो गया पता hi न चला .... शादी हुयी तो ऐसा पति मिला जिससे मुझे सेक्स तो मिला पर पर उसमे प्यार का एक अंश भी न था ... तरुण के साथ उस रात को पता चला की सेक्स क्या होता है ... दो जिस्मो का मिलान क्या होता है ....

रानी : मैं भी शादी के पहले एक बार उसके साथ ये सब करना चाहती थी ... उससे नफरत करते करते कब उससे प्यार हो गया पता न चला .... पर छह कर भी उससे शादी तो नहीं हो सकती मेरी तो उसका प्यार पाने का जो रास्ता मुझे सही लगा मैंने वो किया .... अब मुझे कोई अफ़सोस नहीं मेरी शादी जिससे भी हो मैं उसके रह लुंगी उस रात की यादो के सहारे .... पर आपका क्या दीदी आपका तो डाइवोर्स भी होने वाला है आप अब आगे क्या करने वाली हो ....

दिया : बस बहन अब इस शादी वादी से मेरा मन उचट गया है .... इतनी काबिल तो हु hi की अपने पैरो पर कड़ी हो सकू .... मैं अब साड़ी जिंदगी अपने माँ पापा और भाई पर बोझ भी नहीं बनूँगी ... मैं एक हैप्पी सिंगल वीमेन बन कर अपनी पूरी जिंदगी जीने वाली हु ....

रानी : चलो दीदी अब सोते हैं काफी रात हो चुकी है ....

दिया : अरे पगलू सीधे बोल न की तेरे उनके फ़ोन आने का टाइम हो गया है ... चल कोई न मैं डिस्टर्ब नहीं करुँगी बात कर ले ...

रानी शर्मा जाती है .. ठीक 5 मिनट बाद रानी का मोबाइल रिंग होने लगता है .... दिया के इसरा करने से वो कॉल पिक कर लेती है और बात करने लगती है .... दिया दूसरी तरफ मुँह कर लेती है ताकि रानी निश्चिंत होकर बात कर सके ....
 
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